शुल्क जमा नहीं तो, भूगर्भ जल नहीं!

बिना पंजीकरण शुल्क नहीं किया जा सकेगा भूगर्भ जल का व्यवसायिक एवं सामूहिक प्रयोग: जिलाधिकारी

बिजनौर। जिलाधिकारी रमाकान्त पाण्डेय ने बताया कि वर्तमान में भूगर्भ जल के अनियंत्रित और तीव्र निष्कर्षण के फलस्वरूप भूगर्भ जल के स्तरों में आई गिरावट से भयप्रद स्थिति पैदा हो गई है, जिससे राज्य के अनेक भागों के ग्रामीण एवं शहरी भूगर्भ जल के स्रोतों में निरन्तर रूप से कमी आ रही है। उन्होंने बताया कि राज्य के विशेष रूप से संकटग्रस्त क्षेत्रों में परिमाणात्मक एवं गुणात्मक भूगर्भ जल का अविरत प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए भूगर्भ जल की सुरक्षा, सरंक्षा, नियंत्रण तथा विनियमन और उससे संसबंधित या आनुषंगिक विषयों का उपबंधन करने के लिए उत्तर प्रदेश भूगर्भ जल (प्रबंधन और विनिययम) अधिनियम-2019 लागू किया गया है। उन्होंने बताया कि उक्त अधिनियम के अंतर्गत औद्योगिक, व्यवसायिक एवं सामुहिक रूप से भूगर्भ जल का प्रयोग करने के लिए निर्धारित पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। उन्होंने बताया कि इस अधिनियम के अधीन किए गए शास्तिक उपबंध, भूगर्भ जल के घरेलू और कृषि उपयोगकर्ताओं पर प्रयोज्य नहीं होंगे।
जिलाधिकारी श्री पाण्डेय कलक्ट्रेट स्थित अपने कार्यालय कक्ष में आयोजित जिला भूगर्भ जल प्रबन्धन परिषद बैठक की अध्यक्षता करते हुए उपस्थित अधिकारियों को निर्देश दे रहे थे।
उन्होंने बताया कि भूगर्भ जल में निरन्तर रूप से आ रही गिरावट के दृष्टिगत उसका संरक्षण समय की बड़ी आवश्यकता है, इसलिए विशेष रूप से अतिदोहित तथा संकटग्रस्त क्षेत्रों में इसका प्रबंधन, नियंत्रण और विनियमन किया जाना इस बहुमूल्य संसाधन की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि उक्त अधिनियम के तहत भूगर्भ जल का व्यवसायिक प्रयोग करने वाले प्रतिष्ठानों के लिए निर्धारित शुल्क रू0 5,000/- जमा कराना और पंजीकरण कराना अनिवार्य है, जिसके उल्लघंन पर आर्थिक दण्ड का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि वाणिज्य उपयोक्ता का तात्पर्य विकास प्राधिकरण तथा ऐसी किसी संस्था या किसी अभिकरण या किसी अधिष्ठान जो उक्त प्रयोजनार्थ भूगर्भ जल का निष्कर्षण और उपयोग करता है, सहित ऐसे किसी व्यक्ति या व्यक्ति समूह से है जो वित्तीय उपलब्धि या लाभ के लिए अपने कारोबार या व्यापार के लिए प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से लाभ प्राप्त करता है आदि शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि इस अधिनियम के अंतर्गत शासस्तिक उपबंध, भूगर्भ जल के घरेलू तथा कृषि उपयोगकर्ता शामिल नहीं हैं।
श्री पाण्डेय ने यह भी बताया कि विद्यमान वाणिज्यिक, औद्योगिक, अवसंरचानात्मक और सामुहिक भूगर्भ जल उपयोक्ता का पंजीकरण अधिसूचित क्षेत्रों में अवस्थित प्रत्येक वाणिज्यिक, औद्यागिक, अवसंरचानात्मक और सामुहिक कुप उपयोक्ता को पंजीकरण प्रमाण पत्र स्वीकृत किए जाने के लिए संबंधित जिला भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद को आवेदन करना अनिवार्य है। उन्होंने सचेत करते हुए कहा कि यदि कोई वाणिज्यिक या सामूहिक उपयोक्ता पंजीकरण के बिना भूगर्भ जल निकालते हुए पाया जाता है, तो उसके विरूद्व अभिकरण अध्याय-8 के अधीन दंडित किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट करते हुए यह भी बताया कि भूगर्भ जल निकालने के लिए भूमि बेधन में पहले से ही लगे हुए प्रत्येक व्यक्ति, फर्म, अभिकरण या कम्पनी को जिला भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा, बिना पंजीकरण के बिना भूगर्भ जल निकालने का प्रयास दण्डनीय अपराध माना जाएगा।

इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी के0पी0सिंह, अपर जिलाधिकारी न्यायिक डा0 नितिन मदान, उप जिलाधिकारी सदर विक्रमादित्य सिंह मलिक, सहायक अभियन्ता लघु सिंचाई/नोडल अधिकारी राजकुमार वर्मा सहित परिषद के सदस्यगण मौजूद थे।

———-

Leave a Reply

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s