यूपी में साहूकारी अधिनियम समाप्त करने की तैयारी!

यूपी में साहूकारी अधिनियम को होने वाली है अलविदा!

लखनऊ। यूपी में साहूकारी अधिनियम समाप्त करने का खाका तैयार कर लिया गया है। राजस्व परिषद द्वारा जनपद स्तर पर साहूकारी लाइसेंस संबंध में रिपोर्ट मांगी गई है। इसी के साथ कई जिलों में उप्र सहकारी अधिनियम 1976 के तहत नए लाइसेंस जारी करने व नवीनीकरण पर रोक लगा दी गई है। वर्तमान समय में बैंकिंग व्यवस्था इतनी आसान हो गई है कि साहूकारों की जरूरत नहीं है। इसी कारण लाइसेंस निरस्त करने के साथ रिनिवल बंद कर दिया गया है।

दरअसल प्रदेश सरकार ने साहूकारी व्यवस्था खत्म करने की तैयारी तेज कर दी है। बैंकों से कर्ज लेने की प्रणाली आसान होने के बावजूद साहूकार ज्यादा ब्याज पर रकम देकर गरीबों का शोषण कर रहे हैं। ऐसे में राजस्व विभाग ने सभी जिलों से इस व्यवस्था की जरूरत पर रिपोर्ट मांगी। सूत्रों के अनुसार जिला प्रशासन ने इस व्यवस्था को समाप्त करने की रिपोर्ट भेजी है। अफसरों ने रिपोर्ट में कहा है कि जब बैंकों में जीरो बैलेंस पर अकाउंट खुल रहा है तो साहूकारी व्यवस्था की कोई आवश्यकता नहीं है।


2552 साहूकारों के लाइसेंस निरस्त-
साहूकारी अधिनियम के तहत राजधानी लखनऊ में करीब 2600 साहूकारों को लाइसेंस दिए गए थे। जिला प्रशासन ने पिछले डेढ़ साल में रिनिवल की प्रक्रिया रोकने के साथ 2552 लाइसेंस निरस्त कर दिए हैं। मौजूदा समय में सिर्फ 48 साहूकारों के पास लाइसेंस हैं, लेकिन इनमें ज्यादातर की रिनिवल की फाइल रोक दी गई है। ऐसे में महज 18 साहूकार ही लेन-देन करने की स्थिति में हैं।

साहूकार वसूलते हैं 17% तक ब्याज-
उत्तर प्रदेश साहूकारी अधिनियम 1976 के मुताबिक, साहूकारी के लिए लाइसेंस लेना जरूरी है। यह लाइसेंस एक साल के लिए मिलता है और हर साल इसका नवीनीकरण होता है। इसके तहत साहूकार प्रतिभूत ऋण यानी कोई वस्तु गिरवी रखकर लिए गए ऋण पर 14% वार्षिक ब्याज ले सकते हैं। वहीं, अप्रतिभूत पर 17 फीसदी वार्षिक ब्याज ले सकते हैं। वहीं, कृषि के अलावा किसी अन्य कार्य के लिए पांच हजार रुपये से अधिक के ऋण पर आपसी सहमति से ब्याज तय किया जा सकता है।

2 वर्ष तक की हो सकती है सजा-
लाइसेंस समाप्त होने और नवीनीकरण के बगैर अवैध रूप से साहूकारी करने वाले और गरीबों को शोषित करने वालों के विरुद्घ साहूकारी अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए न्यायालय में मुकदमा भी चलाया जा सकता है। इसमें अधिकतम दो वर्ष तक की सजा का प्रावधान भी है।

कई बार पुलिस चला चुकी अभियान-
साहूकारी प्रथा का मकड़जाल तोड़ने के लिए पुलिस भी कई बार अभियान चला चुकी है। पूर्व डीजीपी जावीद अहमद ने उत्पीड़न करने वाले साहूकारों के खिलाफ कार्रवाई के लिए अभियान चलाया था। वहीं, पूर्व एसएसपी आशुतोष पाण्डेय ने भी एक माफिया के करीबी साहूकार से हजरतगंज के एक दुकानदार समेत कई लोगों को बचाया था।

इसी प्रकार साहूकारी अधिनियम के तहत अलीगढ़ जिला प्रशासन ने पिछले करीब छह माह से नवीनीकरण की प्रक्रिया रोकने के साथ ही नए लाइसेंस जारी किए जाने पर रोक लगा रखी है। विधान जायसवाल, एडीएम वित्त एवं राजस्व कहते हैं कि सरकार की तमाम योजनाएं हैं चाहें वह मुद्रा लोन योजना हो या अन्य कोई। सब्सिडी पर लोन दिया जा रहा है। बैंकिंग व्यवस्था इतनी आसान हो गई है कि साहूकारों की जरूरत नहीं है। शासन को साहूकारी अधिनियम को समाप्त करने के संबंध में रिपोर्ट भेज दी गई है। जनपद में नए लाइसेंस व नवीनीकरण भी नहीं किया जा रहा है। जिले में साहूकारी अधिनियम के तहत करीब 100 लाइसेंस हैं।

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