गोबर्धन: अब बरसेगा गोबर से धन

बाजार में आया गाय के गोबर से बना पेंट, किसानों को मिलेगा Gobar se Dhan

खादी और ग्रामोद्योग आयोग की जयपुर इकाई कुमारप्पा नेशनल हैंडमेड पेपर इंस्टीट्यूट ने तैयार किया गोबर पेंट

खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) की मदद से की जाएगी पेंट की बिक्री

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नई दिल्ली। अभी तक हम गोबर्धन को एक त्योहार के रूप में ही मनाते आ रहे हैं, लेकिन अब सच में ही गोबर से धन (Gobar se Dhan) बरसेगा। किसानों की आमदनी बढ़ाने में गोबर का अहम रोल होगा। अब किसान गोबर से आमदनी भी करेंगे।

गाय का दूध-घी, गोमूत्र से बने पेस्टीसाइट, गाय के गोबर के दीये के बाद अब गाय के गोबर से बना पेंट। जी हां, सही पढ़ा आपने, गाय के गोबर से बना पेंट, जिससे आप अपने घर, ऑफिस या दुकान रंगते हैं। इसे  वेदिक पेंट (Vedic Paint) नाम दिया गया है।

गाय के गोबर से बने पेंट की बिक्री खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) की मदद से की जाएगी। गोबर पेंट को खादी और ग्रामोद्योग आयोग की जयपुर की इकाई कुमारप्पा नेशनल हैंडमेड पेपर इंस्टीट्यूट (Kumarappa National Handmade Paper Institute) ने तैयार किया है। इस पेंट को बीआईएस (BIS) यानी भारतीय मानक ब्यूरो भी प्रमाणित कर चुका है। किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में गाय के गोबर से बना पेंट एक बड़ा कदम साबित होगा।

एंटीफंगल, एंटीबैक्टीरियल, इको फ्रेंडली पेंट (Cow dung Paint):

खादी और ग्रामोद्योग आयोग का कहना है कि गाय के गोबर से बना यह पेंट एंटीफंगल, एंटीबैक्टीरियल और इको फ्रेंडली है। दीवार पर पेंट करने के बाद यह सिर्फ चार घंटे में सूख जाएगा। इस पेंट में अपनी जरूरत के हिसाब से रंग भी मिलाया जा सकता है।

विभिन्न पैकिंग में तैयार:

खादी प्राकृतिक पेंट (Khadi Prakritik Paint) दो रूप में उपलब्ध होगा, डिस्टेंपर पेंट (distemper paint) और प्लास्टिक एम्युनेशन पेंट (plastic emulsion paint)। इस पेंट में हैवी मैटल (heavy metals) जैसे- सीसा (lead), पारा (mercury), क्रोमियम (chromium), आर्सेनिक, कैडमियम आदि का इस्तेमाल नहीं किया गया है। फिलहाल इसकी पैकिंग 2 लीटर से लेकर 30 लीटर तक तैयार की गई है।

30,000 रुपये की आमदनी:

खादी और ग्रामोद्योग आयोग का कहना है कि इस पेंट से स्थानीय निर्माताओं को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। पेंट की इस तकनीक से गाय के गोबर का इस्तेमाल बढ़ेगा। यह गो शालाओं की आमदनी बढ़ाने में भी अहम भूमिका अदा करेगा। इस पेंट के निर्माण से किसान या गोशाला को एक पशु से हर साल तकरीबन 30,000 रुपये की आमदनी होगी। ग्राहकों के लिए सस्ता, किसानों के लिए लाभदायक-वैदिक पेंट का मुख्य अवयव गोबर होने से यह आम पेंट के मुकाबले सस्ता पड़ेगा। इससे रंग-रोगन कराने पर ग्राहकों की जेब कम ढीली होगी। वहीं यह देश के किसानों की आय बढ़ाने वाला होगा। टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के माध्यम से इसकी स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जाएगा।

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