गुमशुदगी के बाद जागे बिजनौर सांसद मलूक नागर!

गुमशुदा की तलाश के बाद जागे बिजनौर सांसद मलूक नागर।

बिजनौर की स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को लेकर स्वास्थ्य मंत्री और जिलाधिकारी को भेजे पत्र।

सोशल मीडिया पर वायरल मैसेज के बाद याद आया अपना संसदीय क्षेत्र।

सूचना गुमशुदा की तलाश, आदरणीय मलूक नागर जी बिजनौर लोकसभा सांसद वापस आ जाएं। हम आपसे कोई सवाल नहीं करेंगे, ना ही ऑक्सीजन का और सोशल मीडिया, ना ही किसी भी अन्य मदद का। मलूक जी आप बिजनौर का रास्ता भूल गए पर रास्ता बताना मेरा फर्ज़ है। नोएडा से आते टाइम पहले गाजियाबाद आएगा, उसके बाद मेरठ आएगा, फिर उसके बाद आपका अपना बिजनौर लोकसभा क्षेत्र आ जाएगा। “मैसेज के अंत में लिखा है…
खास बात-कोई समर्थक ज्यादा ज्ञान ना दें, आपकी अति कृपा होगी।”

बिजनौर। गुमशुदा की तलाश शीर्षक से सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट के बाद जनपद की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सांसद मलूक नागर अचानक जाग गए हैं। वहीं बताया गया है कि कोरोना संक्रमण के दौर में सांसद व्यक्तिगत रूप से व्यस्त होने के कारण अपने संसदीय क्षेत्र का ध्यान नहीं दे पा रहे हैं।

बिजनौर सांसद मलूक नागर ने जनपद की स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रश्रचिन्ह लगा दिया है। सांसद के लिए वायरल मैसेज को उनके संज्ञान में लाए जाने पर वह सक्रिय हो गए। आनन-फानन में उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री और जिलाधिकारी को भेजे पत्र में कहा कि सीएमओ बिजनौर का व्यवहार जनता के खराब है। सीएमओ कार्यालय में कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी भी कोरोना संक्रमितों के स्वजनों से बदसलूकी कर रहे हैं। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री से सीएमओ के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। सांसद ने क्षेत्र से मिल रही लगातार शिकायतों पर स्वास्थ्य मंत्री और डीएम को पत्र भेजकर व्यवस्था में सुधार लाए जाने को कहा है। उनका आरोप है कि सीएमओ एवं अन्य अधिकारी क्षेत्र के प्रधानों, बीडीसी सदस्यों, पालिका सभासदों, जिला पंचायत सदस्यों एवं सभी राजनीतिक पार्टियों के लोगों से बात करना मुनासिब नहीं समझते। उनका कहना है कि एल-टू अस्पतालों में रखे वेंटीलेटर अभी तक शुरू नहीं हुए हैं। इस कारण गंभीर रूप से संक्रमितों को पर्याप्त इलाज नहीं मिल पा रहा। उन्होंने कहा कि सीएमओ के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए, ताकि अन्य अन्य अधिकारियों के लिए नजीर बन सके। सांसद ने कहा कि गरीब दलित, अकलियत समाज के लोगों और असरदार लोगों में कोरोना के इलाज के बीच भेदभाव न किया जाए। सांसद ने डीएम से अपने संसदीय क्षेत्र की सभी विधानसभा क्षेत्रों में अब तक कोरोना से हुई मौतों की जानकारी मांगी है, ताकि वह निजी स्तर से असहाय परिवारों की मदद कर सकें।

गौरतलब है कि वायरल मैसेज मे व्यंग्य के तौर पर सांसद मलूक नागर के लापता होने की बात लिखी जा रही है। कहते हैं कि कि जनता अपने चुने हुए जनप्रतिनिधियों से मुश्किल समय में मदद की उम्मीद रखती है, लेकिन बाहरी नेता चुनाव जीतते ही जनता से बहुत दूर हो जाते हैं। इसका जीता जागता प्रमाण यह है कि चुनाव जीतने के बाद सांसद जी ने अपने लोकसभा क्षेत्र की सुध भी नहीं ली। उन्हें वोट देने वाले समस्याओंं के समाधान को परेशान हाल घूमते रहे, संपर्क की कोशिश में लगे रहे, वहीं खास बात यह रही कि सांसद जी किसी के हाथ नहीं आए।

बिल्ली के भाग्य से छींका फूटा!
यह बात अलग है कि बुधवार को प्रदेश शासन ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की तैनाती में फेरबदल करते हुए सीएमओ डा. विजय कुमार यादव को वरिष्ठ परामर्शदाता जिला चिकित्सालय सोनभद्र व सीएमएस डा. ज्ञान चंद्र को वरिष्ठ परामर्शदाता जिला चिकित्सालय बांदा के पद पर स्थानांतरित कर दिया। साथ ही अन्य जिलों में भी फेरबदल हुआ है। अब इन तबादलों का श्रेय लेने की होड़ मच गई है। कई नेता, पत्रकार आदि अपनी पीठ थप-थपाने लगे हैं।

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