संघी और भंगी से इतनी घृणा क्यों है भाई!

हमारे देश में “संघी” (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता को “संघी” कहा जाता है) और “भंगी” (महृषि वाल्मीकि के अनुयायी). ये दो शब्द ऐसे हैं, जिन्हें कुछ लोग बहुत घृणा से लेते हैं और उनके कार्य को घृणित समझते हैं। …जबकि सच्चाई यह है कि “संघी” और “भंगी” दोनों ही गंदगी को साफ़ करने का महान कार्य करते हैं। एक ओर जहां “संघी” देश और समाज में फैली गंदगी को दूर करने का राष्ट्रवादी कार्य करते हैं, वहीं दूसरी ओर भंगी (मेहतर, सफाई कर्मचारी) घरों और सड़कों की सफाई करने का महान कार्य करते हैं। अगर “संघी” सफाई का कार्य छोड़ दें तो लोग मानसिक बीमारियों से ग्रसित हो जाएंगे और यदि “भंगी” अपना कार्य छोड़ दें, तो लोग शारीरिक बीमारियों से ग्रसित हो जाएंगे और देशभर में महामारियां फैल जाएंगी। इसलिए दोनों ही का कार्य राष्ट्रहित, समाजहित और मानवता के हित में माना जायेगा। केवल शारीरिक सफ़ाई से ही आप स्वच्छ नहीं हो जाते बल्कि स्वच्छता के लिए मानसिक रूप से भी आपको स्वस्थ और स्वच्छ होना पड़ता है। मानसिक रूप से कुंठित और गन्दा व्यक्ति पूरे देश और समाज के लिए अभिशाप होता है। संघ का मुख्य कार्य जनमानस में घृणा, वैमनस्य, द्वेष, हीनभावना, राष्ट्रविरोधी विचारधाराओं, कुसंस्कार और कुप्रथाओं को दूर कर आपस में प्रेम, शांति और सद्भावना को स्थापित करना है। “संघी” सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को पुष्पित-पल्लवित करता है। भारतीय संस्कृति, संस्कार, परपंराओं, तीज-त्यौहार, प्रथाओं, महापुरुषों की विचारधाराओं और भाषा को जनमानस तक पहुंचाने का कार्य करता है। संघी और भंगी दोनों ही सच्चे राष्ट्रवाद का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। उनके कार्य सच्चे राष्ट्रवाद का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। शायद इसीलिए हमारे प्रिय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सफाई कर्मचारियों के पांव पखारे थे, यहां यह भी उल्लेखनीय है कि मोदी जी एक लंबे समय तक संघ से जुड़े रहे हैं। यह विडंबना ही है कि हम आज तक संघी और भंगी की महत्ता को नहीं समझ पाए और उन्हें अछूत समझते रहे। अब समय आ गया है कि प्रत्येक भारतीय को संघी और भंगी को गले लगाकर उनके महान कार्यों के लिए उनका हार्दिक आभार व्यक्त करना चाहिए। तभी हम एक स्वच्छ, सुंदर और स्वस्थ राष्ट्र की परिकल्पना को।साकार कर पाने में सक्षम हो पाएंगे।

विशेष- इस लेख का उद्देश्य किसी भी जाति/धर्म/सम्प्रदाय की भावनाओं को आहत करना कदापि नहीं है। न ही जातिसूचक शब्दों को अपमानित करना ही हमारा उद्देश्य है। यदि हमारे इस लेख से किसी व्यक्ति/समाज को ठेस पहुंची हो हम ह्रदय से क्षमाप्रार्थी हैं। 🖋️ मनोज चतुर्वेदी “शास्त्री” समाचार सम्पादक- उगता भारत हिंदी समाचार- (नोएडा से प्रकाशित एक राष्ट्रवादी समाचार-पत्र)

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