क्या बिना कर्मचारी और  मतदाता होंगे चुनावॽ

पांच राज्य उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा में चुनाव की घोषणा होने के साथ ही तेजी से बढ़ते कोरोना के केस चिंता बढ़ा रहे हैं। मन में भय पैदाकर रहे हैं।सरकार और चिकित्सक कह रहे हैं कि नया वायरस ज्यादा गंभीर नहीं हैं। इस सबके बावजूद कोई इन पर यकीन करने को तैयार नहीं। महाराष्ट्र और दिल्ली में तेजी से बढ़े केस के बाद सरकार द्वारा लागू  की गई सख्ती, दिल्ली में लगे वीकेंड  लाँक डाउन से जनता में भय व्याप्त है। श्रमिक पलायन कर रहे हैं। सब डरे सहमें हैं, जिस तेजी से केस बढ़ रहे हैं, ऐसे में लगता है कि हो सकता है। मतदान के दिन चुनाव डयूटी पर तैनात अधिकाशं कर्मी कोरोना पोजिटिव होकर क्वार्टीन हों।मतदाता बूथ से गायब हों। राजनैतिक दल,चुनाव आयोग  और सरकार ही बूथ की निगहबानी करती नजर आए। आम जनता चाहती है कि पांच राज्यों में होने वाले चुनाव न हों। कोरोना के बढ़ते केस को लेकर अधिकतर लोग चिंतित हैं, किंतु राजनैतिक दल नहीं चाहते कि चुनाव हटें। सरकार भी इस पर चुप्पी साधे हैं। ऐसे मे आयोग ने चुनाव कराने की घोषणा कर दी। कोरोना महामारी के काल में आयोग को मतदाता प्रदेश में मतदान में लगे कर्मियों की राय लेनी चाहिए थी। क्या वह भी इसके लिए तैयार है। जिन्हें वोट डालने  हैं, उनसे पूछा नहीं गया और तय कर दिया कि चुनाव तो  होंगे ही। कोरोना की हालत यह है कि देश में 24 घंटे में एक लाख 93 हजार नए कोरोना संक्रमित पाए गए। 24 घंटे में 15.8 फीसदी अधिक नए मरीज मिले। तीन दिन में मौत का आंकड़ा 900 के करीब पहुंच गया। एक्टिव केस यानी इलाज करा रहे मरीजों की संख्या में 1 लाख 33 हजार 318 की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस वक्त 9.48 लाख कोरोना संक्रमितों का इलाज चल रहा है।सिर्फ 11 दिन पहले यह आंकड़ा एक लाख था। कोराना केस बढने की ये ही हालत रही तो मतदान के दिन तक देश में कोरोना के केस की संख्या करोडों में होगी। अस्पताल में बैड नहीं होंगे। दूसरे फेज की तरह दवा और बैड को लेकर मारामारी होगी। दिल्ली में मंगलवार को फिर से नए मामले बढ़ गए। पिछले 24 घंटे के दौरान राजधानी में 21,259 नए कोरोना मामले सामने आए हैं। सोमवार को यहां 19,166 नए केस मिले थे। इस दौरान 23 लोगों की मौत हुई है, जो 25 दिसंबर से शुरू हुई तीसरी लहर के दौरान किसी एक राज्य में एक दिन में सबसे ज्यादा मौत हैं। अब तक राजधानी में 25,200 लोगों की मौत हो चुकी है! यूपी में सात दिन में 1985 से बढ़कर 11 हजार हो गए। यूपी में पांच जनवरी को 1985 नए संक्रमित मिले थे, जबकि मंगलवार को देश के सबसे ज्यादा आबादी वाले इस राज्य में 11,089 मामले सामने आए। पंजाब में मंगलवार को 4,552 लोग संक्रमित पाए गए। 687 लोग ठीक हुए और 9 मरीजों की मौत हो गई। अब तक राज्य में 6.29 लाख से ज्यादा लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इनमें 5.89 लाख लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि  16,692 लोगों की मौत हो गई। कुल 22,235 मरीजों का अभी इलाज चल रहा है। हालत यह है कि बॉलीवुड सिंगर लता मंगेशकर कोरोना संक्रमित हो गई हैं। फिल्म बाहुबली में कटप्पा के नाम से फेमस हुए साउथ के दिग्गज एक्टर सत्यराज पिछले दिनों कोरोना संक्रमित पाए गए थे। तबियत बिगड़ने की वजह से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह भी कोरोना हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा कोरोना संक्रमण की चपेट में हैं। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई की कोविड रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी कोरोना संक्रमित हो गए हैं। तीन दिन पहले मुख्यमंत्री आवास के 27 कर्मचारी भी पॉजिटिव मिले थे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविद केजरीवाल और कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी पहले ही कोरोना पोजिटिव हो चुकी हैं। दिल्ली एम्स के डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया आइसोलेट हो गए हैं। उनका ड्राइवर कोरोना पॉजिटिव मिला है। दिल्ली पुलिस के जनसंपर्क अधिकारी चिन्मय बिस्वाल समेत 1000 सिपाही कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। इससे पहले संसद के 400 कर्मचारी  कोरोना के संक्रमण के शिकार हो चुकें हैं। दिल्ली पुलिस के एक हजार जवान कोरोना  संक्रमित बताए गए है। उत्तर प्रदेश में पिछले पंचायत चुनाव में तैनात 1600 के आसपास कर्मचारी डयूटी के दौरान कोरोना से मरे थे। इस चुनाव के बाद उत्तरप्रदेश में कोराना बुरी तरह फैला था।  सबसे ज्यादा खराब हालत गांव की थी। एक एक−गांव में एक –एक दिन में कई− कई मौत हो रहीं थी। सरकार असहाय बनी देख रही थी। शहरों के मरीजों को ही अस्पताल में बेड और दवाई उपलब्ध नहीं थीं। गांव की सोचने की किसे पड़ी थी। चुनाव आयोग से रैली, सभा और बाइक रैली आदि निकालने पर रोक लगाई। काफी बंदिश रखीं हैं। इन सबके बावजूद चुनाव सरकारी कर्मचारी, पुलिस, पैरा मिलेट्री फोर्स को कराना है। वोट प्रदेश के मतदाता को डालना है। चुनाव की घोषणा के बाद से सबसे ज्यादा चिंतित सरकारी कर्मचारी और उनके परिवारजन हैं। डरे हैं। वैसे ही कर्मचारी स्वेच्छा से चुनाव डयूटी नहीं करना चाहता। अब तो कोरोना की आफत सिर पर मौजूद है। सब सकते में हैं। पहले ही वह ऐन−केन प्रकरेण डयूटी कटवाना चाहता था। अब तो कोरोना जैसी महामारी में कोई बिरला ही डयूटी करना चाहेगा। जो करना चाहेगा, उसे  उसके परिवारजन रोकेंगे। कहेंगे पहले परिवार की सोचो। इन कर्मचारियों को चुनाव तक लंबी प्रक्रिया से गुजरना है। चुनाव सामग्री,चुनाव बाक्स व्यवस्था में ही बड़ा स्टाफ लगता है। इस दौरान बहुतों के संपर्क में आना होता है। मतदान और मतगणना तो बहुत बाद की बात है। लोकतंत्र में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण मतदाता बताया गया है। कहा गया है कि वह सरकार बनाता और बिगाड़ता है। कोराना महामारी के दौरान वह मतदान करेगा या नहीं, उससे नही पूछा गया। कहा जा रहा है कि कोरोना से बचना है तो घर में रहो। अनावश्यक रूप से बाहर न निकलो। अब यह इन पांच प्रदेश के मतदाता को सोचना है कि उसे जान प्यारी है या मतदान। क्या उसे जान की सुरक्षा की कीमत पर मतदान करने घर से निकलना है?

अशोक मधुप (लेखक  वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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