वजीर-ए-आजम पाकिस्तान भी हुए मोदी के मुरीद!

इस्लामाबाद (एजेंसी)। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मुरीद हो गए हैं। अपनी गद्दी पर मंडरा रहे खतरे के बीच उन्होंने रविवार को भारत सरकार की विदेश नीति की तारीफ में कसीदे पढ़े। खैबर पख्तूनख्वा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए खान ने कहा कि हमारे पड़ोसी की विदेश नीति अपने लोगों के लिए है। भारत क्वाड का सदस्य है लेकिन प्रतिबंधों के बावजूद वह रूस से तेल खरीद रहा है।

खैबर पख्तूनख्वा के मलकंद जिले की दरगई तहसील में एक रैली को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के वजीर-ए-आजम इमरान खान ने कहा कि विपक्ष उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर जनता के साथ धोखा कर रहा है। वह माफ करने और अपनी पार्टी के बागी सांसदों को वापस लाने के लिए तैयार हैं। गौरतलब है कि विपक्ष लगातार दावा करता रहा है कि पीटीआई (इमरान खान की पार्टी) गठबंधन के कई दल उनके साथ संपर्क में हैं, जो अविश्वास प्रस्ताव में इमरान सरकार के खिलाफ वोट देंगे। पाकिस्तानी लोगों को संबोधित करते हुए इमरान खान ने अपने राजदूतों पर राजनयिक प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने का आरोप लगाया और कहा कि वे भारत को यह बताने से डरते हैं कि उन्होंने पाकिस्तान से क्या कहा, जैसे यूक्रेन पर रूसी हमले की आलोचना करना। इस जनसभा में चौंकाने वाली बात यह रही कि इमरान खान ने खुले मंच से भारत की तारीफों के पुल बांधे।

भारत को करता हूं सलाम: इमरान
इमरान खान ने कहा, ‘मैं आज भारत को सलाम करता हूं। उन्होंने हमेशा एक स्वतंत्र विदेश नीति का पालन किया है। आज भारत का अमेरिका के साथ गठबंधन है और वह रूस से तेल भी खरीद रहा है जबकि प्रतिबंध लागू हैं क्योंकि भारत की नीति अपने लोगों के लिए है। इमरान खान ने इस जनसभा में पीटीआई के बागी सांसदों को संबोधित करते हुए कहा कि पूरा देश समझ जाएगा कि सांसदों ने चोरों के पक्ष में वोट देकर अपना विवेक बेच दिया है।

इमरान रचेंगे इतिहास?
आगामी 2023 को पाकिस्तान में आम चुनाव होने हैं, लेकिन अभी से ही इमरान खान की कुर्सी खतरे में है। पाकिस्तान में विपक्ष एकजुट है, साथ ही इमरान की पार्टी के कई सांसद भी उनके खिलाफ हैं और इन सबके बीच आगामी 25 मार्च को नेशनल असेंबली में उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा। अगर यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाता है तो मतदान होगा। सांसदों के गणित में अभी इमरान सरकार अल्पमत में नजर आ रही है। पाकिस्तान के 75 साल के इतिहास में पाकिस्तान के एक भी प्रधानमंत्री ने अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं किया है। इमरान खान से पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को पनामा मामले में दोषी ठहराते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अयोग्य घोषित कर दिया था और उसके बाद नवाज शरीफ को इस्तीफा देना पड़ा था।

बाजवा ने कहा पद छोड़ें इमरान– यह भी ध्यान योग्य है कि पाकिस्‍तान में अब राजनीतिक संकट अपने चरम पर पहुंचता दिख रहा है। एकजुट विपक्ष अब इमरान खान सरकार के खिलाफ अपने अविश्‍वास प्रस्‍ताव को सोमवार को नैशनल असेंबली के अध्‍यक्ष के पास ले जाएगा। नैशनल असेंबली के अध्‍यक्ष अगर इस प्रस्‍ताव को स्‍वीकार कर लेते हैं तो पाकिस्‍तानी संसद में अविश्‍वास प्रस्‍ताव पर मतदान 28 मार्च होगा। इस बीच खुफिया सूत्रों से जानकारी मिली है कि इमरान खान पर इस्‍तीफे के लिए दबाव बन रहा है और आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा और आईएसआई चीफ नदीम अंजुम ने उन्‍हें इस्‍लामिक देशों के संगठन (OIC) की बैठक के बाद पद छोड़ने के लिए कह दिया है।

सेना के लाडले रह चुके इमरान खान को दोबारा मौका नहीं- हिंदुस्‍तान टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक इससे पहले इमरान खान की पार्टी ने सरकार बचाने के लिए पूर्व सेना प्रमुख जनरल राहिल शरीफ को मध्‍यस्‍थता के लिए सऊदी अरब से बुलाया था जो संभवत: फेल हो गया है। जनरल राहिल शरीफ ने इमरान खान की ओर से जनरल बाजवा से मुलाकात की लेकिन वह उन्‍हें मना नहीं पाए। जनरल बाजवा और अन्‍य वरिष्‍ठ जनरलों ने कहा कि सेना के लाडले रह चुके इमरान खान को दोबारा मौका नहीं दिया जाए। नई दिल्‍ली के सूत्रों ने बताया कि पाकिस्‍तानी सेना का आंकलन है कि इमरान खान का इस्‍तीफा दे देना ही ठीक रहेगा क्‍योंकि आर्थिक संकट के बीच वर्तमान राजनीतिक संकट देश के हित में नहीं है।

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