घायल को अस्पताल पहुंचाओ, 5000 रुपए ले जाओ

पुलिस के डर से लोग नहीं करते पीड़ितों की सहायता। इसी कारण केंद्र सरकार ने की है इसके लिए एक अनूठी पहल। राष्ट्रीय स्तर पर 10 सबसे नेक मददगारों को दिया जाएगा एक-एक लाख रुपए का पुरस्कार

नई दिल्ली (PTI)। पुलिस के चक्कर में कौन पड़ेगा? कहीं हम ही न फंस जाएं! अस्पताल और पुलिसवाले हमें ही परेशान करेंगे! ये कुछ ऐसे वाक्य हैं, जो सड़क पर एक्सीडेंट के बाद घायल अवस्था में पड़े दर्द से कराह रहे व्यक्ति की मदद करने से हम सभी को रोकते हैं. पुलिस और सरकारें बार-बार कहती हैं कि एक्सीडेंट में घायल व्यक्ति की मदद करना मानवता की सेवा है और ऐसा करने पर आपको पुलिस परेशान नहीं करेगी. इसके बावजूद आम लोग डर के मारे घायल को अस्पताल पहुंचाने में कतराते हैं. अब केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने इसके लिए एक अनूठी पहल की है.

सड़क मंत्रालय ने बताया कि उसने सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को गंभीर चोट लगने के एक घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचाने वाले मददगारों के लिए एक खास योजना शुरू की है. मंत्रालय ने बताया कि सड़क हादसे में घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति को 5000 रुपए का नकद पुरस्कार दिया जाएगा.

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रधान सचिवों और परिवहन सचिवों को लिखे पत्र में कहा कि यह योजना 15 अक्टूबर 2021 से 31 मार्च 2026 तक प्रभावी होगी. मंत्रालय ने नेक मददगार को पुरस्कार देने की योजना’ के लिए दिशानिर्देश जारी किए.

मंत्रालय ने कहा कि इस योजना का मकसद आपात स्थिति में सड़क दुर्घटना पीड़ितों की मदद करने के लिए आम जनता को प्रेरित करना है. नकद पुरस्कार के साथ एक प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा. मंत्रालय ने कहा कि इस पुरस्कार के अलावा राष्ट्रीय स्तर पर 10 सबसे नेक मददगारों को एक-एक लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा.

क्या होता है गोल्डन आवर?
स्वर्ण घंटे (गोल्डन आवर) पर बताया गया है कि मोटर वाहन अधिनियम के धारा 2 (12ए) के अनुसार स्वर्ण घंटे का मतलब वह एक घंटे का समय है, जो व्यक्ति को दर्दनाक चोट लगने के बाद का एक घंटा होता है. इस एक घंटे के दौरान घायल या घायलों को शीघ्र अस्पताल पहुंचाया जाता है ताकि उसकी जान बच सके या बचने की संभावना होती है.

वहीं बिजनौर के पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह ने गुड सेमरिटन योजना की जानकारी देते हुए बताया कि योजना के तहत घायलों को निकटतम अस्पताल में पहुंचाने पर किसी भी नागरिक को 5000 रुपए का पुरस्कार दिया जाता है। सभी थाना क्षेत्रों में योजना का प्रचार-प्रसार किया गया है। बताया कि अभी तक कोई भी इसके लिये आगे नहीं आया है।

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