4 महीने राशन कार्ड धारकों को नहीं मिलेगा मुफ्त गेहूं

राशन कार्ड धारकों को जून से सितंबर तक मुफ्त गेहूं नहीं मिलेगा। गेहूं की खरीद न होने से भारत सरकार ने लिया निर्णय। कार्डधारकों को गेहूं के स्थान पर चावल देने का फैसला। अब उनको मिलेगा प्रति यूनिट पर सीधे पांच किलो चावल!

लखनऊ। राशन कार्ड धारकों के लिए खास खबर है। मुफ्त में राशन कार्ड पर प्रति माह दो बार मिलने वाला गेहूं चार माह तक नहीं मिलेगा। यानी जून से लेकर सितंबर माह तक राशन कार्ड पर लोग नि:शुल्‍क गेहूं नहीं ले सकेंगे। इसका कारण ये है कि इस बार क्रय केंद्रों पर गेहूं की खरीद धीमी हो रही है।

गौरतलब है कि शासन से महीने में दो बार में कार्डधारकों को राशन मिलता है। इसमें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत माह के पहले सप्ताह व प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना में माह के 15 तारीख के बाद राशन का वितरण होता है। लेकिन इस बार गेहूं की खरीद कम होने से शासन स्तर से इसके आवंटन पर रोक दिया गया है। गेहूं की खरीद न होने से भारत सरकार ने कार्डधारकों को गेहूं के स्थान पर चावल देने का फैसला लिया है। अब उनको प्रति यूनिट पर सीधे पांच किलो चावल मिलेगा। बाकी खाद्य सामग्री जैसे तेल आदि मिलेगा, यानी अब जून से लेकर सितंबर तक गेहूं नहीं मिलेगा। इसके बाद फिर से पीएमजीकेवाइ में गेहूं मिलने लगेगा।

नमक न आने से वितरण पर रोक : विपणन गोदामों में नमक न आने से राशन का वितरण कोटेदार नहीं कर रहे हैं। खासकर शहर की कई दुकानों पर कार्डधारक राशन लेने के लिए पहुंचते हैं, लेकिन कोटेदार नमक का उठान न किए जाने की बात कहकर उनको वापस कर दे रहे हैं। यह भी बता रहे हैं कि अभी तक राशन का उठान नहीं किया है। एक विभागीय अधिकारी ने बताया कि नमक आने के बाद ही कोटेदार वितरण करेंगे।

गेहूं आवंटन के कोटे में संशोधन के तहत बिहार, केरल और उत्तर प्रदेश को पीएमजीकेएवाई योजना के तहत गेहूं नहीं दिया गया है। इसकी भरपाई चावल से की जाएगी। यूपी में मौजूद गेहूं के स्टॉक को देखते हुए राज्य सरकार एक किलो गेहूं के साथ चार किलो चावल दे सकती है या फिर पूरा पांच किलो चावल ही दिया जाए, इस पर विचार चल रहा है।  

केंद्र सरकार की तरफ से सितम्बर महीने तक के लिए यह संशोधन किया गया है। प्रदेश के करीब 15 करोड़ से अधिक लाभार्थियों पर इसका असर पड़ेगा। वहीं राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के तहत दिए जाने वाले राशन पर अभी बातचीत चल रही है कि इसमें गेहूं की जगह चावल दिया जाए या फिर कोटे में थोड़ा संशोधन किया जाए। 

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