भारत की मैंकल नामदेव व अमेरिका के ऋत्विक ने जीती अंतर्राष्ट्रीय निबंध प्रतियोगिता

पेंड्रा की मैंकल नामदेव और अमेरिका के ऋत्विक ने जीती निबंध प्रतियोगिता
-अमेरिका वर्ग से अयाति ओझा दूसरे स्थान पर रहीं
-भारत वर्ग से रायबरेली की आद्या गुप्ता दूसरे और फातिमा अंसारी तीसरे स्थान पर रहीं
-7 बच्चों के निबंध सांत्वना पुरस्कार के रुप में चुने गए
-अमेरिका में भारत के चांसरी प्रमुख रमाकांत कुमार ने की विजेता बच्चों के नामों की घोषणा
-मुख्य अतिथि अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के जनसंचार विभागाध्यक्ष डॉ कृपाशंकर चौबे ने समिति के प्रयासों की सराहना की

नई दिल्ली आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की भारत और अमेरिका इकाई द्वारा संयुक्त रूप से 12 से 18 वर्ष के बच्चों की आयोजित की गई अंतर्राष्ट्रीय निबंध प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ की मैंकल नामदेव और अमेरिका के ऋत्विक अग्रवाल विजेता रहे।

मैकल नामदेव को पुरस्कार में प्रमाणपत्र के साथ 21 सौ रुपए और ऋत्विक को 50 डालर दिए जाएंगे। इसी तरह दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे विजेता बच्चों को भी प्रमाण पत्र और नगद पुरस्कार से पुरस्कृत किया जाएगा। चयनित सभी निबंधों को ‘आचार्य पथ’ स्मारिका में भी स्थान देने का ऐलान किया गया।

विजेता बच्चों के नामों की घोषणा रविवार को आयोजित ऑनलाइन कार्यक्रम में अमेरिका में भारत के चांसरी प्रमुख रमाकांत कुमार ने की। करतल ध्वनि से सभी विजेता बच्चों को बधाई दी गई। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में अमेरिका वर्ग से ऋत्विक अग्रवाल प्रथम और अयाति ओझा दूसरे स्थान पर रही। भारत वर्ग से मैंकल नामदेव प्रथम, आद्या गुप्ता द्वितीय और फातिमा अंसारी तीसरे स्थान पर रहीं। तमिलनाडु की प्रतिभागी संजना एच, कात्यायनी त्रिवेदी, हिमांशी सिंह, गुनगुन मिश्रा, श्रवण कुमार मिश्रा, शान्तनु पांडेय और पंकज कुमार के निबंध भी सराहे गए। सभी को सांत्वना पुरस्कार देने की घोषणा की गई। विजेता बच्चों ने अपने-अपने निबंध भी पढ़कर सुनाए।

पुरस्कार वितरण समारोह के मुख्य अतिथि एवं अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग के अध्यक्ष डॉ. कृपा शंकर चौबे ने सभी विजेता बच्चों को बधाई देते हुए कहा कि जब हिंदी की विभिन्न विधाओं पर संकट गहरा रहा है ऐसे समय में आचार्य द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति द्वारा बच्चों के लिए निबंध प्रतियोगिता आयोजित करना बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य है। बच्चे के अंदर एक रचना छुपी होती है और उस रचना को निखारने एवं सामने लाने का अवसर देना निहायत जरूरी है।

समिति की अमेरिका इकाई की अध्यक्ष श्रीमती मंजु मिश्रा ने सभी प्रतिभागी बच्चों के साथ- साथ कार्यक्रम में उपस्थित निर्णायक मंडल की सदस्य प्रोफेसर नीलू गुप्ता (अमेरिका), डॉ. पद्मावती (चेन्नई), डॉ भारती सिंह (नोएडा), अनुपम परिहार (प्रयागराज), डॉ. सुमन फुलारा (उत्तराखंड) और बद्री दत्त मिश्र (रायबरेली) का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि हिंदी को बचाने और बढ़ाने के लिए भारत के साथ-साथ प्रवासी भारतीयों के बच्चों को मातृभाषा से जोड़े रखने के ही यह छोटे-छोटे प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारत से करीब 122 निबंध प्राप्त हुए।

भारत इकाई के अध्यक्ष विनोद शुक्ल ने कहा कि हिंदी को नया व्याकरण और भाषा देने वाले आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के योगदान को आज सभी स्वीकार कर रहे हैं। उनकी स्मृतियों को संरक्षित करने में समाज जागृत हो चुका है लेकिन सरकार का जागृत होना बाकी है।

आभार ज्ञापित करते हुए समिति के संयोजक गौरव अवस्थी ने कहा कि आचार्य द्विवेदी स्मृति संरक्षण अभियान का यह 25वां वर्ष है। सभी के प्रयासों और सहयोग से आचार्य द्विवेदी की स्मृतियां सात समंदर पार तक पहुंचने में सफल हुई हैं। भविष्य में भी ऐसा ही सहयोग बनाए रखने का अनुरोध किया।

कार्यक्रम का संचालन अमेरिकी इकाई की वरिष्ठ सदस्य श्रीमती रचना श्रीवास्तव ने किया और अमेरिका की शोनाली श्रीवास्तव ने सुमधुर स्वर में सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। कार्यक्रम में अमेरिकी इकाई की सदस्य डॉ कुसुम नैपसिक, श्रीमती ममता त्रिपाठी, गणेश दत्त, सुश्री नीलम सिंह, श्रीमती संगीता द्विवेदी, सुधीर द्विवेदी, करुणा शंकर मिश्रा, अभिषेक द्विवेदी आदि उपस्थित रहे।

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