वोट काटने पर फंसे एसडीएम और तहसीलदार, कोर्ट ने दिये एफआइआर के आदेश

एसडीएम, तहसीलदार समेत 5 के खिलाफ एफआइआर के आदेश। अनुसूचित जाति के व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटाने का मामला। कोर्ट की शरण मे पहुंचा पीड़ित। थाना बढ़ापुर पुलिस को एससी/एसटी एक्ट में मुकदमा पंजीकृत करने के आदेश। प्रशासन में मचा हड़कम्प।

बिजनौर। एससी/एसटी एक्ट के विशेष न्यायाधीश ने धामपुर के तत्कालीन उपजिलाधिकारी विजय वर्धन तोमर एवं तहसीलदार रमेश चौहान के विरूद्ध अनुसूचित जाति के व्यक्ति पवन कुमार का विधान सभा चुनाव 2022 में वोट काटने के मामले में थाना बढ़ापुर के प्रभारी निरीक्षक को एससी/एसटी एक्ट में मुकदमा पंजीकृत कर विवेचना कराने का आदेश दिया है। न्यायालय द्वारा तहसीलदार एवं उपजिलाधिकारी के विरूद्ध मुकदमा पंजीकृत करने के आदेश से प्रशासन में हड़कम्प मच गया है।

जानकारी के अनुसार धामपुर विधान सभा क्षेत्र के आलमपुर गांवमण्डी निवासी पवन पुत्र कृपाल सिंह ने अपने एडवोकेट शमशाद अहमद के माध्यम से विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी न्यायालय, जनपद बिजनौर में 156 (3) द०प्र०सं० में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। प्रार्थना पत्र में न्यायालय को अवगत कराया कि प्रार्थी अनुसूचित जाति का व्यक्ति है, विपक्षी गैर अनुसूचित जाति के हैं। विधान सभा चुनाव 2017, लोक सभा चुनाव 2019 एवं ग्राम पंचायत चुनाव 2021 में मतदाता सूची में प्रार्थी का नाम दर्ज था। प्रार्थी गांव का स्थायी निवासी है। तत्कालीन उपजिलाधिकारी विजय वर्धन तोमर एवं तहसीलदार रमेश चौहान ने अपने पद का दुरूपयोग कर उसका नाम मतदाता सूची से जानबूझ कर काट दिया। इस कारण प्रार्थी मतदान के संवैधानिक अधिकार से वंचित रह गया। संविधान के अनुच्छेद 324 में मतदाता सूची बनाना एवं स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव कराना भारत निर्वाचन आयोग की संवैधानिक ड्यूटी है। आयोग के नियमों के अनुरूप मृतक, डुप्लीकेट एवं टेम्प्रेरी रेजिडेंट, जो निवास स्थान छोड़ कर चले गये हैं, का नाम ही मतदाता सूची से डिलीट किया जा सकता है और इनका नाम भी डिलीट करने से पूर्व पंजीकृत डाक से सूचना देनी अनिवार्य है। अपने प्रार्थना पत्र में पवन ने यह भी उल्लेख किया है कि तत्कालीन उपजिलाधिकारी एवं तहसीलदार, जो निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी एवं सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी थे, उन्होने आयोग के दिशा निर्देशों का उल्लंघन करके कुटरचित मतदाता सूची बनाकर उसका चुनाव में उपयोग किया और प्रार्थी को मतदान से वंचित करा दिया। इस संबंध में पहले थाना अफजलगढ एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, बिजनौर को दोषियों के विरूद्ध मुकदमा पंजीकृत कराने का प्रार्थना पत्र दिया था, जिस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। मजबूर होकर पवन ने विशेष न्यायाधीश एससी / एसटी के न्यायालय में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया, जिस पर विशेष न्यायाधीश ने 30.07.2022 को उक्त प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए उपजिलाधिकारी, तहसीलदार एवं 05 अन्य अज्ञात के विरूद्व एससी / एसटी एक्त के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर 03 दिन के अंदर आख्या न्यायालय को प्रेषित किये जाने के आदेश पारित किये हैं। न्यायालय के आदेश के बाद प्रशासन में हड़कम्प मचा हुआ है।

पवन के एडवोकेट शमशाद अहमद का कहना है कि न्यायालय में 420,467,468,471,120बी,166,167 भा0द०सं० व लोक प्रतिनिधि अधिनियम व 3 (2) 5 एससी/एसटी एक्ट में विवेचना कराये जाने की मांग की गई। उनका कहना था कि जिस प्रकार प्रशासनिक अफसरों ने कमजोर वर्ग के लोगों का वोट काटकर उन्हें मतदान से वंचित किया है, इसकी जिम्मेदारी जिला निर्वाचन अधिकारी, मुख्य निर्वाचन अधिकारी और भारत निर्वाचन आयोग की भी है।

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