नगीना तहसील में 17 गावों की 60 हजार बीघा सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे

NGT व हाईकोर्ट के आदेशों को कमिश्नर ने किया दरकिनार? एनजीटी व हाईकोर्ट के आदेशों को दरकिनार कर कमिश्नर ने दिया स्थगन आदेश। योगी सरकार भूमाफियाओं पर कर रही कड़ी कार्रवाई, वहीं भाजपा नेता दे रहे हैं संरक्षण। कमिश्नर मुरादाबाद पर आदेश की अवहेलना का मामला हाईकोर्ट में है विचाराधीन।

बिजनौर। नगीना तहसील में 17 गावों की हजारों बीघा सरकारी जमीन पर चले आ रहे अवैध कब्जे के मामले में एसडीएम कोर्ट के फैसले के विरुद्ध कमिश्नर मुरादाबाद ने स्टे कर 3 अक्टूबर तक यथास्थिति बनाये रखने के आदेश दिए हैं।

60 हजार बीघा सरकारी भूमि पर है कब्जा: गौरतलब है कि एसडीएम नगीना ने उक्त जमीनों पर अवैध कब्जा मानते हुए एनजीटी व हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में खातेदारों के नाम निरस्त कर मूल श्रेणी जंगल, नदी आदि के नाम दर्ज करने के आदेश जारी किये थे।
महत्वपूर्ण तथ्य है कि लगभग 60 हजार बीघा भूमि पर, जो कि सरकारी है पर स्थानीय लोग वर्षों से काबिज हैं। ये प्रकरण एनजीटी व हाईकोर्ट में में जा चुका है, जहाँ इस भूमि को सरकारी मानते हुए अवैध कब्जे हटाये जाने के आदेश जारी हो चुके हैं। मजेदार तथ्य है कि हाईकोर्ट में कमिश्नर मुरादाबाद के विरुद्ध इस मामले में कोर्ट की अवहेलना का मामला भी विचाराधीन है, जिसमें मुख्य पार्टी कमिश्नर मुरादाबाद ही है, क्योंकि कोर्ट के आदेश अवैध कब्जे हटाए जाने व कब्जाने वालों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश का पालन नहीं किया गया है, उस के बावजूद कमिश्नर मुरादाबाद द्वारा कोढ़ में खाज कहावत चरितार्थ करते हुए एसडीएम नगीना के कब्जे हटाए जाने के आदेश को स्टे प्रदान कर हाईकोर्ट के आदेश को दरकिनार कर दिया गया है। यही नहीं स्टे की कार्यवाही कर मुरादाबाद कमिश्नर ने एनजीटी के आदेश को भी ताक पर रख दिया है।

नगीना एसडीएम इससे पूर्व ग्राम मुर्तजा बाद, हल्लोवाली, तथा शंकरपुर के तीन ग्रामों की लगभग 25 हजार बीघा जमीन अवैध कब्जे से हटाकर सरकारी भूमि में दर्ज भी करा चुके हैं। इन तीनों ग्रामों की जमीन जंगल, झाडी़, नदी राजस्व अभिलेखों में दर्ज होने के बावजूद एनजीटी देहली व  हाईकोर्ट इलाहाबाद के भूमि को मूल श्रेणी में दर्ज करते हुए दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों तथा हितपद व्यक्तियो के विरुद्ध क्रिमनल केस दर्ज करने के आदेशों के विपरीत कमिश्नर मुरादाबाद ने सरकारी भूमि व सरकार के विरुद्ध ही स्टे पारित कर दिया जबकि कमिश्नर को सरकारी सम्पति की रक्षा का मुख्य दायित्व होता है।

गौरतलब है कि जमींदारी उन्मूलन एक्ट लागू होने के पहले तत्कालीन राजस्व विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के चलते ग्राम तेलीवाडा़, राजपुर कोट, शंकरपुर, मुर्तजापुर, हल्लोवाली, कादरगंज, मदपुरी, चंपतपुर चकला व सुलेमान शिकोहपुर के जंगल में लगभग 24,050 बीघा में फैली नदियों, झाडि़यों एवं सार्वजनिक सरकारी भूमि को 1360 फसली में राजस्व रिकॉर्ड में लोगों के नाम दर्ज कर दिये गये थे।

बसपा सांसद की शिकायत पर नहीं सुनवाई: इस मामले में किशन चंद व बसपा सासंद गिरिशचंद ने अधिकारियों से शिकायत की थी पर कोई सुनवाई नहीं हुई। इस पर इस मामले में किशन चंद द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट के आदेश पर चकबंदी कमिश्नर की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने मामले की जांच कर तथ्यों को सही मानते हुए राजस्व अभिलेखों को सही करने की आख्या दी थी। इससे पहले तत्कालीन जिला प्रशासन ने भी इस मामले की जांच कराईं थी, जिसमें 17 गाँव की जंगल, रास्तों, नदी की लगभग 60 हजार बीघा सरकारी जमीन को वर्ष 1953 में कूट रचित प्रविष्टि के आधार पर खतौनी फसली वर्ष 1359 में एक लाइन का आदेश करके कुंवर चन्द्रभान सिंह के नाम करना पाया गया था। इसके बाद इन जमीनों के बैनामे होते रहे, तथा ये सरकारी भूमि अन्य लोगों के नाम पर की जाती रही।
एनजीटी देहली की पूर्ण पीठ ने 8 जून 2021 को याची किशन चंद बनाम राज्य सरकार में सुनवाई करते हुए जमीन पर काबिज लोगों को बेदखल कर उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिये थे। इस मामले में एसडीएम नगीना शैलेन्द्र कुमार की कोर्ट ने सुनवाई कर उक्त सरकारी भूमि पर काबिज लोगों को नोटिस जारी किये थे। भूमि से कब्जा हटाने की कार्यवाही शुरू होने पर क्षेत्रीय लोगों ने बढ़ापुर  विधानसभा के भाजपा विधायक सुशांत सिंह के दरबार में जाकर गुहार लगाई, जिसके बाद इस मामले में राजनीति शुरू हो गई। सत्तासीन सरकार के विधायक वोट बैंक को साधने के प्रयास में लगे दिखाई दिये तथा अवैध कब्जा धारियों की ऊपर तक पैरवी भी की जबकि मुख्यमंत्री अवैध कब्जे व भूमाफियाओं के विरुद्ध अभियान छेड़ अवैध कब्जे हटवाने में लगे हुए हैं।

सूत्रों की मानें तो इस अवैध कब्जों में बड़े बड़े नाम शामिल हैं, जो प्रभावशाली भूमिका में होने के कारण कई दशक से हजारों बीघा सरकारी भूमि पर काबिज हैं, वहीं करोड़ों अरबों की जमीन बेच भी चुके हैं, जो इन अवैध कब्जाधारियों की आड़ लेकर अपने को सुरक्षित करने तथा इस प्रक्रिया को आगे बढाने में लगे हुए हैं, देखना है कि योगी सरकार इन भू माफियाओं से सरकारी जमीन से कब्जा हटाने के लिए कार्यावाही करेगी या ये मामला राजनीति की भेंट चढे़गा?

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