सक्सेना जी ने तो कटा लिया चालान, लेकिन अब सो रही पुलिस!

गाड़ी पर जाति लिखवाने पर करनी थी कार्रवाई।
UP में ‘Saxena Ji’ के नाम दिसंबर 2020 में कटा था पहला चालान। पीएएमओ के निर्देश के बाद यूपी सरकार ने गाड़ियों पर जाति या धर्मसूचक स्टिकर लगाने पर लगाया था प्रतिबंध।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में गाड़ियों पर जातिसूचक शब्द लिखवाने पर कड़ी कार्रवाई ठंडे बस्ते में गई है। दिसंबर 2020 में किसी भी गाड़ी पर जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करने पर रोक लगा दी गई थी। इस नए आदेश के अनुपालन में प्रदेश का पहला चालान राजधानी में कानपुर के “सक्सेना जी” की गाड़ी का काटा गया था। पीएएमओ के निर्देश के बाद यूपी सरकार ने गाड़ियों पर जाति या धर्मसूचक स्टिकर लगाने पर प्रतिबंध लगा दिया था।

बताया गया है कि महाराष्ट्र के एक शिक्षक ने उत्तर प्रदेश में कार, बाइक, ट्रक, ट्रैक्टर और ई-रिक्शा पर जाति सूचक शब्द लिखे होने का मामला उठाते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायत की थी। उन्होंने इसे सामाजिक खतरा बताया था।शिकायत का संज्ञान लेते हुए पी.एम.ओ. ने उत्तर प्रदेश सरकार को कार्यवाही करने के आदेश दिए। आदेश का संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश के अपर परिवहन आयुक्त ने धारा 177 के तहत कार्यवाही करने के आदेश जारी किए। तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक सुजीत दुबे के मुताबिक थाना नाका हिन्डोला अंतर्गत दुर्गापुरी मेट्रो स्टेशन चेक पोस्ट पर वाहनों की चेकिंग कर रहे सब इंस्पेक्टर दीपक कुमार अशोक ने कार पर लिखे ‘जाति सूचक’ शब्द पर पहला चालान किया।

क्या कहा था पुलिस आयुक्त ने?
पुलिस आयुक्त डीके ठाकुर के अनुसार एक वैन नाका थाना क्षेत्र से होकर कानपुर की ओर जा थी। इस पर नंबर कानपुर का दर्ज होने के साथ ही पीछे शीशे पर “सक्सेना जी” लिखा था। इस दौरान एसआई दीपक कुमार ने वाहन चेकिंग अभियान के तहत गाड़ी को रोका और चालान कर दिया।

वीडियो भी हुआ था वायरल
लखनऊ में वाहनों पर जातिसूचक शब्द लिखे जाने पर कार्रवाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इस वीडियो में एक पुलिस कर्मी पहले नए आदेश को गाड़ी चालक को समझता है जिसकी गाड़ी पर ‘सक्सेना जी’ लिखा होता है, फिर कहता है कि वह उसकी गाड़ी का चालान कर रहा है। इसके बाद पुलिसकर्मी 500 रुपए का चालान काट देता है।

पूरे प्रदेश में नियमों की अनदेखी: फिलहाल पूरे उत्तर प्रदेश में यातायात के नियमों की अनदेखी की जा रही है। वाहन चालक खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ाते हुए घूम रहे हैं, लेकिन विभाग उदासीन है।

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