होटल मालिक की हसीन बीवी, लुटेरा नौकर और बेचारे IG साहब…

साभार…

ये वाकया 90 के दशक का है। उत्‍तर प्रदेश के पुलिस महकमे में उन दिनों कानपुर के एक आईजी साहब बड़े मशहूर थे। उनके कारनामे लोग खूब चटखारे लेकर सुनते और सुनाया करते थे। उन्‍हीं दिनों एक इंस्‍पेक्‍टर साहब भी अपनी ईमानदारी और तेज दिमाग के लिए बेहद चर्चित थे। नाम था एसएस लौर। एक बार तत्‍कालीन डीजीपी से इंस्‍पेक्‍टर लौर की मुलाकात हुई। इस दौरान डीजीपी ने कहा – ‘आईजी साहब तुम्‍हारी बड़ी तारीफ करते हैं। क्‍या तुम वाकई इतना अच्‍छा काम करते हो।’ यह सुनकर इंस्‍पेक्‍टर लौर हंसने लगे। उन्‍होंने कहा – ‘आईजी साहब मेरी तारीफ क्‍यों करते हैं, ये बात मैं आपको नहीं बता सकता।’ पर डीजीपी साहब तो पीछे ही पड़ गए। बोले – ‘तुम्‍हें बताना ही पड़ेगा। जब तक बताओगे नहीं यहां से जाने नहीं दूंगा।’ अब इंस्‍पेक्‍टर लौर की मजबूरी बन गई। उन्‍होंने जब पूरी बात बताई तो डीजीपी साहब हंसते-हंसते लोटपोट हो गए। जाते समय कहा – ‘मुझे तो बता दिया पर आगे किसी और को न बताना।’ हालांकि ये किस्‍सा कभी मीडिया की सुर्खी नहीं बनी पर धीरे-धीरे पूरे पुलिस महकमे में फैल गई। जो भी सुनता था, पेट पकड़कर हंसने लगता था। 78 साल के सुरेंद्र सिंह लौर अब डीएसपी के पद से रिटायर हो चुके हैं। अपनी 40 साल की नौकरी में वे जिस भी थाने में तैनात रहे, अपने काम से लोगों को कायल बना लेते थे। कई बार ऐसा भी हुआ जब उनका ट्रांसफर होने पर लोग सड़कों पर उतर आए। एक यूट्यूब चैनल चलाने वाले पत्रकार उस्‍मान सैफी ने कानपुर के आईजी (इंस्‍पेक्‍टर जनरल ऑफ पुलिस) के कारनामों को लेकर एसएस लौर से लंबी बातचीत की है। लौर साहब ने जो किस्‍सागोई की है, उसे पढ़कर आपके होठों पर भी मुस्‍कुराहट तैर जाएगी। आइए आपको बताते हैं वो कहानी… 

मंडी के दुकानदारों से वसूली करता था दबंग


कानपुर का एक थाना है जूही। बतौर इंस्‍पेक्‍टर यहां एसएस लौर की तैनाती होती है। उनके पास आसपास के लोग आकर एक ही शिकायत करते थे। उनकी शिकायत थी कि स्‍थानीय मंडी में एक दबंग शख्‍स के चलते वे काफी परेशान हैं। वे यह भी बताते थे कि दबंग कानपुर जोन के आईजी का बहुत खास आदमी है। वह उन लोगों से अवैध वसूली करता है। इंस्‍पेक्‍टर लौर इस उधेड़बुन में फंस जाते हैं कि इस समस्‍या से कैसे निजात पाया जाए। एक दिन इंस्‍पेक्‍टर साहब भेष बदलकर मंडी जाते हैं। वह कुर्ता-धोती पहन लेते हैं ताकि आम आदमी नजर आएं। उनके आसपास सादी वर्दी में कई पुलिसवाले रहते हैं। एसएस लौर उस दंबग शख्‍स के पास पहुंचते हैं और दुआ-सलाम करते हैं। कहते हैं- ‘मेरे पास कोई काम नहीं है। अगर कोई काम दिला सकें तो बड़ी मेहरबानी होगी।’ उस शख्‍स ने कहा- ‘तुम क्‍या कर सकते हो।’ लौर बोले- ‘आपके पास जो भी काम हो मुझे दे दीजिए।’ दबंग ने कहा- ‘इस समय सावन का महीना चल रहा है। बेलपत्रों की बड़ी मांग है। इसलिए तुम ये काम कर लो। इसके बदले तुम्‍हें हर रोज मुझे 20 रुपये देने पड़ेगे।’ जब लौर ने पूछा-‘ 20 रुपये किस बात के लिए।’ तो दबंग ने कहा- ‘इस मंडी में ऐसे ही वसूली होती है। ऐसा कोई आढ़ती, दुकानदार और फल विक्रेता नहीं जो हर रोज मुझे पैसा न देता हो।’

लोग हो गए इंस्‍पेक्‍टर लौर के तेज दिमाग के कायल


दबंग व्‍यक्ति का इतना कहना ही था कि इंस्‍पेक्‍टर लौर ने उसके हाथ पकड़ लिए। यह देखते ही आसपास सादी वर्दी में खड़े पुलिसकर्मी तुरंत दौड़कर आते हैं। पुलिसवाले उस दबंग के हाथ में हथकड़ी डालते हैं और भरी मंडी में उसे पैदल लेकर चलते हैं। कहते हैं कि कानपुर की ये मंडी उस जमाने में एशिया की सबसे बड़ी मंडी थी। पुलिस दबंग को जूही थाने लेकर आती है। इसी बीच, इंस्‍पेक्‍टर लौर के पास आईजी का फोन आ जाता है। वे कहते हैं- ‘अरे लौर साहब, आप किसको पकड़ कर ले आए हैं। ये हमारे बहुत खास आदमी हैं। इनको छोड़ दीजिए।’ इस पर लौर कहते हैं- ‘ये आपके खास आदमी तो हैं पर वहां भरी मंडी में सबके सामने चिल्‍लाकर बता रहे थे कि अभी हाल ही में आईजी साहब की बेटी की शादी हुई थी। उसमें उन्‍होंने ढेर सारी सब्जियां और फल भिजवाई थी।’ यह सुनकर आईजी साहब को गुस्‍सा आ गया। बोले- ‘उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करो और जेल भेज दो।’ तो देखा न आपने। इंस्‍पेक्‍टर एसएस लौर ने किस तरह एक चाल चली जिसमें वह पूरी तरह कामयाब हो गए। पूरी मंडी के लोग उस दबंग से परेशान थे। उसके जेल जाने से हर किसी ने राहत की सांस ली। अपने इस काम से इंस्‍पेक्‍टर लौर आम जनता में बेहद लोकप्रिय हो गए।

फिर कानपुर के होटल में हो जाता है कांड


कुछ दिनों बाद कानपुर में एक कांड हो जाता है। शहर के बड़े होटल में लूट की वारदात हो जाती है। होटल का मालिक जूही थाने में पहुंचा। उसने बताया कि चोर लाखों के जेवरात के साथ नकदी भी लूट ले गया है। इस पर इंस्‍पेक्‍टर एसएस लौर कहते हैं- आप लिखित में शिकायत दे दीजिए। हम पता लगाते हैं।’ शिकायत देने में होटल मालिक को तीन दिन का समय लग जाता है। जांच पड़ताल में पता चलता है कि इस लूट के पीछे होटल मालिक के घर में काम करने वाले एक नौकर का ही हाथ है। नौकर मौका पाकर लाखों रुपये और जेवर वगैरह बांधकर फरार हो गया था। अब पुलिस के सामने उस नौकर को पकड़ना बड़ी चुनौती बन गई। दिन बीतते गए पर नौकर का कुछ पता नहीं चल पा रहा था। लोगों का दबाव बढ़ता जा रहा था कि इतने बड़े होटल में चोरी हुई है और पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी हुई है।

होटल मालिक की बीवी के खूबसूरती के चर्चे थे आम


एसएस लौर बताते हैं कि उस होटल मालिक की बीवी बहुत सुंदर थी। उसकी खूबसूरती के चर्चे पूरे शहर में आम थे। एक दिन इंस्‍पेक्‍टर लौर के पास फिर आईजी साहब का फोन आ जाता है। कहते हैं- ‘जल्‍द से जल्‍द मेरे ऑफिस आइए।’ इंस्‍पेक्‍टर लौर ऑफिस पहुंचे। वहां उन्‍होंने देखा कि आईजी के साथ एक बेहद खूबसूरत महिला बैठी हुई है। वह कोई और नहीं बल्कि होटल मालिक की बीवी थी। इंस्‍पेक्‍टर लौर को समझते देर न लगी कि उन्‍हें क्‍यों तलब किया गया है। इंस्‍पेक्‍टर लौर के वहां पहुंचते ही आईजी साहब डांटना शुरू कर देते हैं। कहते हैं- ‘आप अपना काम ठीक से नहीं कर रहे हैं। इतने दिन हो गए पर अब तक चोरी करने वाले नौकर को नहीं पकड़ पाए हैं। जल्‍द से जल्‍द उसे अरेस्‍ट करिए, नहीं तो मैं आपका ट्रांसफर कर दूंगा।’ आईजी का रौद्र रूप देखकर इंस्‍पेक्‍टर लौर हर तरफ अपना जाल बिछा देते हैं। आखिरकार तीन-चार दिन बाद ही लुटेरा नौकर पुलिस के चंगुल में फंस जाता है। नौकर से पूछा जाता है कि आखिर उसने चोरी क्‍यों की। इस पर नौकर जो बताता है उसे सुनकर इंस्‍पेक्‍टर के कान खड़े हो जाते हैं।

नौकर को कमरे में बुलाती थी मालिक की बीवी


नौकर ने बताया कि वह होटल मालिक की बीवी से तंग आ चुका था। वह रोज रात को जब मालिक सो जाया करता था, उसे अपने कमरे में बुला लिया करती थी। एक दिन उसने इस बला से छुटकारा पाने का प्‍लान बनाया और लाखों रुपये और जेवरात समेटकर चंपत हो गया। इसी दौरान नौकर एक चौंकाने वाली बताता है। वह इंस्‍पेक्‍टर लौर से कहता है-‘साहब, आपने मेरा कसूर तो देख लिया पर आईजी साहब को कौन दंड देगा। वह भी तो आए दिन होटल मालिक की बीवी से मिलने आते हैं और उसके साथ रात बिताते हैं।’ यह सब सुनकर इंस्‍पेक्‍टर पसोपेश में पड़ जाते हैं कि अब करें तो क्‍या करें? इसी बीच, उनके पास आईजी का फोन आ जाता है। वह पूछते हैं- ‘आरोपी गिरफ्तार हुआ या नहीं।’ इंस्‍पेक्‍टर लौर कहते हैं- ‘हां, वह चोर को पकड़ने के बेहद करीब पहुंच चुके हैं।’ आईजी साहब कहते हैं- ‘मुझे इन सारी बातों से मतलब नहीं। मुझे वह चोर हर हाल में चाहिए।’ अब इंस्‍पेक्‍टर लौर नौकर को अपनी गाड़ी में बैठाते हैं और सीधे आईजी के ऑफिस धमक पड़ते हैं। इत्‍तेफाक से उस दिन वहां उनका बेटा भी मौजूद था। इंस्‍पेक्‍टर लौर कहते हैं- ‘मैं चोरी करने वाले नौकर को पकड़कर लाया हूं। वह आपके सामने बताएगा कि उसने चोरी कैसे और क्‍यों की। अगर आपको एतराज न हो तो बेटे को कमरे से बाहर भेज दीजिए।’ आईजी साहब अपने बेटे को विभागीय कामों का हवाला देते हुए बाहर भेज देते हैं।

नौकर की बात सुन कुर्सी से उछल पड़े आईजी
इंस्‍पेक्‍टर लौर नौकर को आईजी के कमरे में ले आते हैं। चोर बताता है कि उसके और होटल मालिक की बीवी के बीच अफेयर था। फिर वह आईजी की तरफ इशारा कर कहता है-‘आप भी तो उससे मिलने आया करते थे और रात बिताया करते थे। वह मुझसे भी शारीरिक संबंध बनाती थी और आपसे भी। इसी बात से नाराज होकर ही मैंने लाखों रुपये चुराए थे और भाग गया था।’ इतना सुनते ही आईजी साहब को काटो तो खून नहीं। वह स्प्रिंग की तरह अपनी कुर्सी से उछल पड़े। नौकर से बोले- ‘अब ये बात किसी को पता नहीं चलनी चाहिए। ये बात सिर्फ तुमको, मुझको और इंस्‍पेक्‍टर लौर तक ही सीमित रहनी चाहिए।’ आईजी साहब इंस्‍पेक्‍टर लौर से बड़ी मिन्‍नतें करते हैं। कहते हैं- ‘अगर ये बात बाहर किसी को पता चल गई तो बड़ी बदनामी हो जाएगी।’ इस पर इंस्‍पेक्‍टर बोलते हैं- ‘साहब, आजकल मीडिया वालों से कुछ भी छिपा पाना बहुत मुश्किल होता है पर मैं कोशिश करूंगा।’

और आईजी साहब जपने लगे इंस्‍पेक्‍टर लौर के नाम की माला


बस, अब क्‍या था। इस कांड के बाद आईजी साहब इंस्‍पेक्‍टर लौर के नाम की माला जपने लगे। वह अपने जोन में आने वाले जिलों चाहे इटावा या हो मैनपुरी, पुलिस अफसरों की हर छोटी-बड़ी मीटिंग में इंस्‍पेक्‍टर लौर की तारीफ करते नहीं थकते थे। कहते थे- ‘सुरेंद्र सिंह लौर जैसा इंसान मैंने अपनी जिंदगी में नहीं देखा। वह बहुत ईमानदारी से काम करते हैं। उनके काम करने का तरीका बहुत शानदार होता है।’ इंस्‍पेक्‍टर लौर की तारीफ करने के पीछे आईजी साहब का जो मकसद था, वह यही था कि कहीं वे उनकी पोल न खोल दें। इसलिए जब यूपी के डीजीपी ने यह किस्‍सा सुना तो उनके मुंह से भी बेसाख्‍ता हंसी फूट पड़ी। उन्‍होंने इंस्‍पेक्‍टर लौर से कहा- ‘भाई ये बात किसी और को मत बताना। नहीं तो आईजी साहब की बड़ी बदनामी हो जाएगी।’

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