डीएम शामली जसजीत कौर को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मान

जन चेतना दिव्यांग सोसाइटी ने डीएम जसजीत कौर को प्रतीक चिन्ह देकर किया सम्मानित

सोसाइटी सचिव विकास कौशिक ने अन्य अधिकारियों को भी किया सम्मानित

शामली। जनपद शामली मे दिव्यांगजनों को समर्पित संस्था NGO जनचेतना दिव्यांग सोसायटी रजि. द्वारा सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सोसायटी संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष नन्द किशोर मित्तल के निर्देश पर जिला सचिव विकास कौशिक ने जिलाधिकारी जसजीत कौर को‌ उनके कार्यालय में स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित करते हुए अभिनंदन किया।
जनपद के तमाम अधिकारी जनचेतना दिव्यांग सोसायटी रजि. की कार्यशैली दिव्यांग सेवा कार्य से प्रभावित होकर मन से सहयोगी रूप में साथ हैं। सम्मान क्रम के तहत अपर जिलाधिकारी संतोष कुमार सिंह, उपजिलाधिकारी विशु राजा का भी विकास कौशिक ने उनके कार्यालय जाकर स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित करने का कर्तव्यपालन किया। सम्मान कार्यक्रम नन्द किशोर मित्तल संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा तैयार कर टीम को कार्यालयो में उच्च अधिकारियों का सम्मान हेतु भेजा गया।

परमवीर देशभक्त भगत सिंह की जयन्ती पर नमन

भूपेंद्र निरंकारी पत्रकार

बिजनौर। परम देशभक्त, महान स्वतन्त्रता सेनानी, भारत माँ के अमर वीर सपूत शहीद भगत सिंह की जयन्ती पर करणी फाउण्डेशन आकाश, प्लाजा बिजनौर द्वारा पुष्प अर्पित कर नमन किया गया। इस अवसर पर कुलदीप सिंह भारती, रत्नेश पूषण पत्रकार, राजेश कुमार, डॉ० योगेंद्र सिंह, डॉ नितिन कोठारी, डॉ० नवनेश कोठारी, पी0के0 सिंह एड. विकुल कुमार, सचिन त्यागी, डा० नरेन्द्र कुमार, सन्दीप कुमार, नितिन गौतम, जय सिंह, अमित कुमार, मुनेश्वर, डा० अजय, नितिन, समाजसेवी लाल बहादुर मलिक, भूपेंद्र निरंकारी पत्रकार, पुष्प राज कमल, कल्पना देवी, दीपिका, रामवती पूषण, नीतिका सिंह, नवीन राजवंशी, महापदमानंद पूषण, अंकुर राजपूत, राजन भारद्वाज, मनमोहन सिंह नागिया, सौरभ सिंह,विनय कुमार आदि द्वारा पुर्ष्यापण किया गया।

युवा पत्रकार भूपेंद्र निरंकारी के बड़े पुत्र वैभव कुमार का सम्मान

बिजनौर। नागरिक अधिकार एवं विकास समिति बिजनौर के तत्वाधान में वीरा इंजीनियरिंग कॉलेज में स्वर्गीय श्री आत्म प्रकाश गुप्ता जी की स्मृति में हुए मेधावी छात्र सम्मान समारोह सन 2022 का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर युवा पत्रकार भूपेंद्र निरंकारी के बड़े पुत्र वैभव कुमार को इसी वर्ष हुई कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा में डीएवी इंटर कॉलेज विदुर कुटी रोड बिजनौर में कॉलेज टॉप करने पर प्रशस्ति पत्र व शील्ड देकर सम्मानित किया गया। मालूम हो कि वैभव कुमार ने कक्षा 10 डीएवी इंटर कॉलेज से टॉप की थी और विद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त किया था।

कमजोर लोगों को नीचा दिखाना और उनके साथ बदसलूकी…!!

कुछ बड़े लोग कमजोर लोगों को नीचा दिखाते और उनके साथ करते बदसलूकी…!!

जो दूसरों के घर का सहारा बनते उनकी इज्जत और मान सम्मान से नहीं होना चाहिए खिलवाड़

काम के एवज में मिलना चाहिए उन्हें सम्मान और मेहनताना..!

समानता और बराबरी की बात अब सिर्फ कागजी..!!

तस्लीम बेनकाब, मुजफ्फरनगर

कभी गार्ड को थप्पड़ मारना, कभी घर मे काम करने वाली महिला व बच्ची के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट, कभी गंदी मानसिकता का ओछापन दिखाते हुए काम करने वाली महिलाओं के साथ छेड़छाड़ करना…ऐसी ही कुछ घटनाएं लगातार हमारे कथित सभ्य समाज पर प्रश्नचिह्न खड़े करती हैं! हमें यह सोचने की जरूरत है कि क्या एक गरीब व्यक्ति का मान सम्मान नहीं होता। काम के एवज में चंद पैसे देने वाले कुछ बड़े घरों के लोग कमजोर लोगों को नीचा दिखाने और उनके साथ बदसलूकी करने में तनिक देर नहीं लगाते, जबकि उन्हें पता होता है कि घर की सुरक्षा से लेकर साफ सफाई तक सब यही कामगार करते हैं। क्या यह एक आभिजात्य अहं की वजह से होता है? क्या इस तरह कुंठाओं के रहते कोई खुद के सभ्य होने का दावा कर सकता है? देखा जाए तो यह सामंती मानसिकता का परिचायक है!आज कल बहुत सारे घरों में नौकर रखने का चलन तो बढ़ रहा है लेकिन बिना किसी सुविधा के कम वेतन पर काम कराया जाता है। यहां तक कि कई बार बंधुआ मजदूर बना कर लोगों को रखा जाता है। घरेलू कामकाज को आज भी अन्य कामों की तरह नहीं समझा जाता। यहां तक कि समाज में भी इस काम को कोई इज्जत नहीं दी जाती और इस काम की आड़ में सबसे ज्यादा किसी का शोषण होता है तो वे महिला मासूम बच्चे कामगार हैं। उनका आर्थिक और कई बार शारीरिक, दोनों तरह से शोषण किया जाता है।

भले ही सरकार ने घरेलू कामगार महिलाओं के अधिकारों के लिए कानून बना रखा हो पर इसे व्यवहार में आज तक लागू नहीं किया गया। आज भी समाज में घरेलू कामगारों की दयनीय स्थिति बनी हुई है, जबकि अगर ये कामगार घरों में काम करना बंद कर दें तो बड़े बड़े घरों और कोठियों में रहने वालों की सहज जिंदगी में आफत आ जाए। इन बड़े घरों के बच्चे समय से न स्कूल पहुंचेंगे और न नौकरी पेशा वाले लोग काम पर। जिस काम से तकरीबन कई करोड़ महिलाएं, बच्चे और जवान जुड़े हुए हों और वह दलित वंचित तबके से आते हों, उनके साथ उच्च-कुलीन वर्ग के लोग ऐसा व्यवहार करते हैं। यह सब उस संवैधानिक ढांचे वाले देश की स्थिति है, जहां बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने समानता और बराबरी की बात कही थी। चलिए एक दफा बराबरी के सपने अलग देखते हैं लेकिन किसी का हक मारना और उससे काम करवाने के बाद उसे ही प्रताड़ित करना कहां का न्याय है और ऐसे बर्ताव का स्रोत क्या है? कहते हैं कि मानव सेवा ही माधव सेवा है। ऐसे में सेवा करते नहीं बनता तो कोई बात नहीं लेकिन जो दूसरों के घर का सहारा बनते हैं उनकी इज्जत और मान-सम्मान से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए और उनके काम के एवज में सम्मान और मेहनताना मिलना चाहिए। इसे सुनिश्चित करने का काम सरकार और सभ्य समाज दोनों का है।

जयंती विशेष (24 सितंबर): जपो निरन्तर एक ज़बान, हिंदी, हिंदू, हिंदुस्तान…

जयंती विशेष (24 सितंबर)

जपो निरन्तर एक ज़बान, हिंदी, हिंदू, हिंदुस्तान..

भारतेंदु युग के प्रमुख स्तंभ पंडित प्रताप नारायण मिश्र की अल्प आयु में पिता की मृत्यु के चलते औपचारिक पढ़ाई तो बहुत नहीं हो पाई लेकिन स्वाध्याय के बल पर वह पत्रकारिता और साहित्य के प्रकांड पंडित बने। परवर्ती साहित्यकारों और संपादकों में तो उनके प्रति सम्मान का भाव था ही पूर्ववर्ती साहित्यकार भी उनके पांडित्य से प्रभावित रहा करते थे।
24 सितंबर 1856 को जन्मे पंडित प्रताप नारायण मिश्र के जन्म स्थान को लेकर साहित्यकारों में कुछ मतभेद हैं। आचार्य रामचंद्र शुक्ल और डॉ सुरेश चंद्र शुक्ल ने उनके जन्म स्थान के रूप में कानपुर को मान्यता दी है। इनका मत है कि पंडित प्रताप नारायण के पिता पंडित संकटा प्रसाद मिश्र को परिवार पालन के लिए 14 वर्ष की अल्पायु में कानपुर आना पड़ा। इसलिए उनका (प्रताप नारायण) जन्म कानपुर में ही हुआ होगा लेकिन अपने संपादन में ‘प्रताप नारायण मिश्र कवितावली’ प्रकाशित करने वाले नरेश चंद्र चतुर्वेदी और डॉ शांति प्रकाश वर्मा उनका जन्म उन्नाव जनपद के बैजेगांव (अब बेथर) ही मानते हैं। ‘भारतीय साहित्य के निर्माता प्रताप नारायण मिश्र’ पुस्तक में रामचंद्र तिवारी लिखते हैं-‘मिश्रा जी का जन्म बैजेगांव में हुआ हो या ना हुआ हो उनकी रचनाओं में गांव का अंश कुछ अधिक ही है।’

मासिक पत्र ब्राह्मण का प्रकाशन :
भारतेंदु हरिश्चंद्र की परंपरा जारी रखने के लिए आर्थिक कठिनाइयों के बाद भी पंडित प्रताप नारायण मिश्र ने मार्च 1883 में ब्राह्मण नाम से मासिक पत्र प्रकाशित करना शुरू किया। ब्राह्मण के प्रथम अंक में अपना उद्देश्य स्पष्ट करते हुए उन्होंने लिखा था-‘अंतः करण से वास्तविक भलाई चाहते हुए सदा अपने यजमानों (ग्राहकों) का कल्याण करना ही हमारा मुख्य कर्म होगा’। 550 रुपए का घाटा सहकर वह 7 वर्षों तक ब्राम्हण का निरंतर प्रकाशन करते रहे। इसके बाद प्रकाशन का दायित्व खड्गविलास प्रेस बांकीपुर के मालिक बाबू रामदीन सिंह को सौंप दिया।

हिंदी के लिए पूर्णत: समर्पित:
पंडित प्रताप नारायण मिश्र हिंदी के बहुत बड़े हिमायती थे। अपने मासिक पत्र ब्राह्मण में हिंदी को लेकर वह जब का लेख लिखते रहते थे। एक बार समकालीन प्रकाशन ‘फतेहगढ़ पंच’ ने उनकी हिंदी पक्षधरता के खिलाफ लेख प्रकाशित किया। इस पर उनका गुस्सा बढ़ गया। उन्होंने फतेहगढ़ पंच के लेख के जवाब में ब्राह्मण में कई महीने तक लिखा। दोनों के बीच कई महीने विवाद चलता रहा। उसी बीच उन्होंने हिंदी पर एक कविता लिखी, जो काफी चर्चित हुई-

चहहु जो सांचे निज कल्यान, तो सब मिलि भारत संतान
जपो निरंतर एक ज़बान -हिंदी, हिंदू, हिंदुस्तान
तबहि सुधरिहे जन्म-निदान; तबहिं भलो करिहे भगवान

मसखरी की मिसालें :
प्रताप नारायण मिश्र स्वभाव से मस्त मौला थे। मसखरे थे। नाटकों में अभिनय भी करते थे। कानपुर की सड़कों पर वह लावनी गाते हुए कभी रिक्शे पर कभी पैदल निकलते थे। फागुन में इकतारा लेकर वह उपदेशपूर्ण, हास्य, होली, कबीर और पद आदि भी गाते थे। वह सांस बंद कर के घंटों तक मुर्दा से पड़े रहते थे। अपने कान एक या दोनों उन्हें हिलाते या फड़काते थे। तब उनके दूसरे अंग स्थिर रहते थे। उनकी मसखरी की मिसालें भी खूब चर्चित हैं।
एक बार नाटक में उनको स्त्री का रूप लेना था। मूछों का मुंड़ाना जरूरी था। भक्ति भाव से अपने पिता के सामने हाजिर हुए और बोले यदि आप आज्ञा दीजिए तो इनको (मूंछों) मुड़वा डालूं। मैं अनाज्ञाकारी नहीं बनना चाहता।’ पिता ने हंसकर आज्ञा दे दी। इसी तरह एक बार कानपुर म्युनिसिपिलटी में इस बात पर विचार हो रहा था कि भैरव घाट में मुर्दे बहाए जाएं या नहीं। चर्चा के बीच किसी ने कहा कि जले हुए मुर्दे की पिंडी यदि इतने इंच से अधिक न हो तो बहाई जाए। दर्शकों में प्रताप नारायण भी मौजूद थे। वह तत्क्षण खड़े होकर बोले- ‘अरे दैया रे दैया! मरेउ पर छाती नापी जाई!’ इस पर खूब जोर के ठहाके लगे।
ऐसा ही एक किस्सा पादरी से बातचीत का है। पादरी ने व्यंग्य पूर्ण लहजे में कहा-आप गाय को माता कहते हैं। उन्होंने कहा- हां। पादरी बोला तो बैल को आप चाचा कहेंगे। इस पर उनका जवाब था- बेशक रिश्ते से क्या इंकार है? पादरी ने तंज कसते हुए कहा-हमने तो 1 दिन अपनी आंखों से एक बार को महिला खाते देखा था। मिश्र जी ने कहा- अजी साहब, वह इसाई हो गया होगा! हिंदू समाज में ऐसे भी बैल होते हैं।’ पादरी मुंह लटका कर चला गया।

लावनी सुनकर कन्नौज के कसाइयों ने छोड़ दी थी गोहत्या:

पंडित प्रताप नारायण मिश्र गोरक्षा के बहुत बड़े हिमायती थे। कई कविताओं में उन्होंने गोरक्षा पर जोर दिया। अपने निबंध में महावीर प्रसाद द्विवेदी लिखते हैं-‘सुनते हैं कानपुर में जो इस समय गौशाला है उसकी स्थापना के लिए प्रयत्न करने वालों में प्रताप नारायण भी थे। एक बार स्वामी भास्कर आनंद के साथ वह कन्नौज गए और गौ रक्षा पर व्याख्यान दिया। व्याख्यान में एक लावनी कही-

बां-बां करि तृण दाबि दांत सों, दुखित पुकारत गाई है

आचार्य द्विवेदी अपने निबंध में लिखते हैं- मिश्र जी की इस लावनी में करुण रस का इतना अतिरेक था कि मुसलमानों तक पर इसका असर हुआ और एक आध कसाइयों ने गौ हत्या से तौबा कर ली थी।

38 बरस में पूरी हो गई जीवन यात्रा:
अपने दैनंदिन जीवन में सदैव अस्त व्यस्त रहने वाले पंडित प्रताप नारायण मिश्र अक्सर बीमार रहा करते थे। इसी के चलते 38 वर्ष की कम उम्र में 1894 में उन्होंने अपनी जीवन यात्रा पूरी की। अपने इस छोटे से जीवन में उन्होंने साहित्य की हर विधा में लिखा। रामचंद्र तिवारी के अनुसार, प्रताप नारायण ग्रंथावली में उनके 190 निबंध और प्रताप नारायण मिश्र कवितावली में छोटी बड़ी 197 कविताएं संग्रहीत हैं। उन्होंने हिंदी गद्य को समृद्ध किया। उनके गद्य में लोक प्रचलित मुहावरे और कहावतें की भरमार है। डॉ शांति प्रकाश वर्मा ने उनके गद्य से छांटकर मुहावरे और कहावतों का पूरा कोष ही तैयार कर दिया। मुहावरा कोष लगभग 110 प्रश्न का है और कहावतें कुल 16 पृष्ठों में। मिश्रा जी ने अपने लेखों में संस्कृत की जिन सूक्तियों और श्लोकों का उदाहरण दिया है, उनकी संख्या 220 है। उर्दू और फारसी की सूक्तियां कुल 66 हैं। (‘भारतीय साहित्य के निर्माता प्रताप नारायण मिश्र’ लेखक-रामचंद्र तिवारी, पृष्ठ-68)
उनके निधन पर पूर्ववर्ती साहित्यकार बालकृष्ण भट्ट ने असमय निधन पर प्रताप नारायण मिश्र के प्रताप का उल्लेख कुछ यूं किया था-‘प्रातः स्मरणीय बाबू हरिश्चंद्र को जो हिंदी का जन्मदाता कहे तो प्रताप मिश्र को नि:संदेह उस स्तन अधन्या दूध मोहि बालिका का पालन पोषण करता कहना पड़ेगा क्योंकि हरिश्चंद्र के उपरांत उसे अनेक रोग दोष से सर्वथा नष्ट न हो जाने से बचा रखने वाले यही देख पड़े’।
आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी ने 1906 की सरस्वती में एक निबंध ‘पंडित प्रताप नारायण मिश्र’ लिखा था। वह लिखते हैं-‘मैं कोई संदेह नहीं कि प्रताप नारायण में प्रतिभा थी और थोड़ी नहीं बहुत थी। विधता होने से कविता शक्ति में कोई विशेषता नहीं आ सकती उल्टे हानि चाहे उससे कुछ हो जाए। प्रताप नारायण की कविता में प्रतिभा का प्रमाण अनेक जगह मिलता है। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने भारतेंदु युग के प्रमुख निबंधकार प्रताप नारायण मिश्र और बालकृष्ण भट्ट जी की एक साथ चर्चा करते हुए लिखा है-‘पंडित प्रताप नारायण मिश्र और पंडित बालकृष्ण भट्ट ने हिंदी गद्य साहित्य में वही काम किया है जो अंग्रेजी गद्य साहित्य में एडिसन और स्टील ने किया था’। (हिंदी साहित्य का इतिहास- पृष्ठ 467)

∆ गौरव अवस्थी
रायबरेली/ उन्नाव

PM के जन्मदिन पर गौ माताओं को खिलाया गुड़ चना

बिजनौर। बिजनौर लोकसभा क्षेत्र की मीरापुर विधानसभा के अंतर्गत अखिल भारतीय विकलांग एवं अनाथ आश्रम, शुक्रताल में पीएम नरेंद्र मोदी के जन्म दिवस पर केक काटकर व मिठाई बाँट कर खुशी मनाई गई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री की दीर्घायु व उत्तम स्वास्थ्य की कामना की गई। साथ ही ‘सेवा पखवाड़ा’ के अंतर्गत अनाथ बच्चों सहित समस्त आश्रम परिवार को भोजन कराया तथा पूज्य गौ माताओं को चारा व गुड़ खिलाया।

इस अवसर पर प्रबंधक अखिल भारतीय विकलांग एवं अनाथ आश्रम शुक्रताल वीरेंद्र राणा, प्रधान नीरज शास्त्री, संजीव कुमार आर्य भोकरहेड़ी, ब्रजपाल सिंह आर्य भोकरहेड़ी, कृष्णपाल आर्य, महिपाल सिंह महामंत्री आदमपुर, कुलदीप चौधरी, मदनपाल, विक्रांत चौधरी, अनुज कुमार, अमरजीत सिंह, सूरज सिंह, प्रिंस चौधरी आदि उपस्थित रहे।

ईश्वर की प्राप्ति में बाधक हैं माया मोह: महात्मा महेश कुमार पाहुजा

ईश्वर की प्राप्ति में बाधक हैं माया मोह: महात्मा महेश कुमार पाहुजा। संत निरंकारी मंडल ब्रांच बिजनौर के तत्वाधान में सत्संग भवन पर हुआ सत्संग का आयोजन।

मीडिया प्रभारी भूपेंद्र कुमार पत्रकार

बिजनौर। संत निरंकारी मंडल ब्रांच बिजनौर के तत्वाधान में सत्संग भवन पर सत्संग का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में फरीदाबाद हरियाणा से पधारे महात्मा महेश कुमार पाहुजा ने गुरु गद्दी से साध संगत को संबोधित करते हुए कहा कि यह समाज मकड़ी का जाल है।

उन्होंने कहा कि मनुष्य इस संसार के मकड़जाल में फंसकर उलझ जाता है। इंसान माया,बमोह व लालच में फंसकर अपने वास्तविक उद्देश्य से भटक जाता है। माया मोह ईश्वर की प्राप्ति में बाधक हैं। हमें इनसे बचना चाहिए हमें निराकार प्रभु की भक्ति करनी चाहिए। निराकार का साकार रूप सद्गुरु होते हैं जो हमारा सदैव कल्याण करते हैं। बिना गुरु के मुक्ति नहीं है। गुरु ही हमें 84 के बंधन से मुक्ति दिलाते हैं और भवसागर से हमारा बेड़ा पार करते हैं और हमें मोक्ष प्राप्ति का सुगम मार्ग बताते हैं, जिससे मनुष्य का कल्याण होता है। मनुष्य दौलत की चकाचौंध में कितना खो गया है कि वह अपने मूल उद्देश्य को भूल बैठा है, जो हमारा वास्तविक उद्देश्य है कि हमारा मनुष्य जन्म किसलिए हुआ है।

उन्होंने कहा कि हमारे मुक्ति केवल मानव योनि में ही है। अन्य योनि में नहीं। मुक्ति के लिए देवी देवता भी तरसते हैं। मनुष्य अपने स्वार्थ के वशीभूत होकर सब कुछ भूल जाता है। जब हम सद्गुरु की शरण में आते हैं और अपने आप को पूरी तरह सद्गुरु को समर्पित कर देते हैं तो वह हमारा बेड़ा पार कर देते हैं। मनुष्य अपने अहंकार के कारण सब कुछ गंवा देता है क्योंकि अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन है और ईश्वर प्राप्ति में बाधक है। जब हम केवल सद्गुरु को समर्पित हो जाते हैं तो हमारे जीवन में सारे सुख आते हैं और हमें खुशियां ही खुशियां मिलने लगती हैं। ब्रह्म ज्ञान के द्वारा लोक सुखी और परलोक सुहेला हो जाता है, जो संतों के दर्शन दुर्लभ बताए गए हैं। सद्गुरु की कृपा से वह सुलभ हो जाते हैं जो भी ब्रह्म ज्ञान प्राप्त करता है वह ब्रह्म ज्ञानी महात्मा हो जाता है। ब्रह्म ज्ञान बड़े ही नसीब वाले को प्राप्त होता है। आज समय की सद्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज हमें ब्रह्म ज्ञान प्रदान कर रहे हैं। वह बहुत ही उच्च कोटि का है और सदैव हमारा कल्याण करने वाला है। सद्गुरु के बिना ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो सकती।

नीरज गौतम के संचालन में हुई साध संगत में संयोजक महात्मा बाबूराम निरंकारी, संचालक विनोद सिंह एडवोकेट, राजवीर सिंह, नौबहार सिंह, मीडिया प्रभारी भूपेंद्र कुमार पत्रकार, सुरेंद्र पाल लकी, मनोज सिंह, रूपल सिंह, मोहित कुमार, निर्दोष कुमार, दीपक, अरुण त्यागी,वमनजीत,बडीके सागर, अक्षय सागर, श्रीमती विमल पाहुजा फरीदाबाद, सुशीला, वंदना त्यागी, अश्विंदर कौर, आशु, कलावती, संध्या, प्रियांशी, अंजलि, गीता, पारुल, कल्पना, किरण, दीपा, सिमरन, नेहा, खुशी, रितिका, मानवी, जहान्वी, सरिता श्रीवास्तव, राजू जमालपुर, वैभव कुमार, कार्तिक कुमार आदि सहित निरंकारी मिशन के अनेक अनुयाई उपस्थित रहे।

साउथ कोरिया में PHD को चयनित वैशाली के माता पिता का सम्मान

बिजनौर। साउथ कोरिया में पीएचडी प्रोग्राम के लिए चयनित अभ्यर्थी वैशाली के माता पिता को क्षेत्रीय सांसद द्वारा सम्मानित किया गया।
प्रबंधक कमेटी श्री रविदास मंदिर बालावाली तथा रविदास सभा बिजनौर के तत्वाधान में नजीबाबाद के आदर्श नगर की गली एक-बी में एक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सांसद गिरीश चंद रहे। सम्मान समारोह की अध्यक्षता रविदास सभा कमेटी के अध्यक्ष राजेंद्र एडवोकेट ने की। सभा में उपस्थित कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट राजेंद्र, सचिव भूपेंद्र रंजन, सांसद गिरीश चंद ने वैशाली के माता-पिता को शॉल एवं प्रतीक चिन्ह से सम्मानित किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने उपस्थित लोगों से बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।

मुख्य रूप से भूपेंद्र कुमार प्रधानाचार्य एवं पूर्व मंडल कोऑर्डिनेटर बसपा, इंजीनियर मनोहर लाल पूर्व मंडल कोऑर्डिनेटर बसपा, दिलीप कुमार उर्फ पिंटू जिला महासचिव, विजय पाल सिंह पूर्व मंडल कोऑर्डिनेटर, इफ्तेखार भूरे भाई जिला संयोजक बसपा, अमर सिंह जिला पंचायत सदस्य एवं जिला सचिव बसपा, आदिल चौधरी वरिष्ठ बसपा नेता, जगत सिंह जिला संयोजक बीवीएफ, राम कुमार एडवोकेट, गोविंद सिंह सेक्टर अध्यक्ष बसपा, पवन कुमार क्षेत्र पंचायत जिला अध्यक्ष वीडीसी, अवनीश कुमार एडवोकेट, अवधेश कुमार एडवोकेट, अनुज कुमार विधानसभा सचिव, राहुल कुमार प्रत्याशी पूर्व जिला पंचायत सदस्य, दीपक कुमार मंडल कोऑर्डिनेटर, रतिराम पूर्व प्रधान सिकरोड़ा, जग्गू सिंह, दयाराम, विनोद, नीरज, क्षेत्र पंचायत सदस्य धीरज सिंह, रोहित, सोनू आदि सभा में मौजूद रहे।

महान शिक्षाविद, सफल राजनीतिज्ञ तथा महान दार्शनिक थे सर्वपल्ली राधाकृष्णन

महान शिक्षाविद, सफल राजनीतिज्ञ तथा महान दार्शनिक थे डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन। आरजेपी में हुआ शिक्षक दिवस का आयोजन। वक्ताओं ने की महान शिक्षाविद को श्रद्धांजलि अर्पित। चंद्रहास सिंह को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मान


बिजनौर। आरजेपी इंटर कॉलेज बिजनौर में राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी का जन्मदिवस शिक्षक दिवस के रूप में उत्साह पूर्वक मनाया गया। प्रार्थना स्थल पर डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के चित्र पर प्रधानाचार्य सहित सभी शिक्षकों शिक्षणेत्तर कर्मचारियों स्काउट एनसीसी तथा एनएसएस के छात्रों ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की। शिक्षकों ने अपने पूर्व राष्ट्रपति तथा महान शिक्षाविद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए देश, शिक्षा तथा शिक्षकों के लिए उनके समर्पण पर अपने विचार प्रकट किए।

प्रधानाचार्य कैप्टन बिशनलाल ने कहा कि डॉ राधाकृष्णन जी भारत के ऐसे रत्न थे जिन्होंने भारतीय संस्कृति भारतीय दर्शनशास्त्र का विदेशों में भी जाकर शिक्षण किया। वह न केवल एक महान शिक्षाविद थे बल्कि एक सफल राजनीतिज्ञ तथा महान दार्शनिक भी थे। उनकी महिमा उनकी सादगी उनकी विद्वता हम सबको प्रेरित करती है कि हम भी अपने देश को आगे ले जाने के लिए विश्व गुरु बनाने के लिए निरंतर प्रयास करते रहें। इस अवसर पर उप प्रधानाचार्य गयूर आसिफ, वीएस चौहान, बालेश कुमार, एसपी गंगवार, सुधीर कुमार, बृजेश राजपूत, सुभाष बाबू, सुधांशु कुमार वत्स, सुभाष बाबू, अतुल रस्तोगी, मनोज कुमार यादव, मीना सिंह, रश्मि, डीओसी स्काउट चंद्रहास सिंह चौहान, अलका अग्रवाल, रेशु शर्मा, मोहम्मद अनस, वाजिद हुसैन, वीरेंद्र कुमार, राजेंद्र कुमार, अभय सिंह, लक्षेश कुमार, पीके सिंह, भूपेंद्र पाल सिंह, नरेश कुमार, भोला नाथ आदि शिक्षकों ने भी पुष्प अर्पित कर डॉक्टर राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा भारतीय संस्कृति एवं दर्शन को विदेशों तक पहुंचाने में उनके महत्व योगदान पर विचार प्रकट किए।

चंद्रहास सिंह को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मान

बिजनौर। शिक्षक दिवस के पावन पर्व पर रोटरी क्लब बिजनौर द्वारा मंडलाध्यक्ष डी0के0 शर्मा, जिलाध्यक्ष कमल मित्तल, कार्यक्रम प्रमुख गौरव भारद्वाज, सचिव सौरव राजवंशी द्वारा राजा ज्वाला प्रसाद आर्य इंटर कॉलेज बिजनौर में कार्यरत शिक्षक एवं स्काउट डीओसी बिजनौर व अटेवा प्रांतीय उपाध्यक्ष चंद्रहास सिंह को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर चंद्रहास सिंह ने कहा कि कहा शिक्षक एक मोमबत्ती है जो स्वयं जलकर सबको प्रकाश देने का कार्य करता है साथ ही अपने शिष्यों को दुनिया के श्रेष्ठ से श्रेष्ठ पदों पर आसीन कर समाज का अच्छा नागरिक बनने का प्रयास करता है। प्रधानाचार्य कैप्टन बिशन लाल ने रोटरी क्लब द्वारा चंद्रहास सिंह को सम्मानित करने पर आभार व्यक्त करते हुए बधाई दी और उनके उज्जवल भविष्य की ईश्वर से कामना की। इस मौके पर उपप्रधानाचार्य गयूर आसिफ, सुधांशु वत्स, कौशल, एकता, भूपेंद्र चौधरी, मनोज कुमार यादव, बालेश कुमार, डॉक्टर सुनील आदि मौजूद रहे

सब सुखों की खान है सत्संग: सत्संगी एसएल गर्ग

बिजनौर। सत्संग बड़े भाग्य से मिलता है। यह विचार संत निरंकारी मंडल दिल्ली के कन्वीनर केंद्रीय प्लानिंग एंड एडवाइजरी बोर्ड एसएल गर्ग ने गुरु गद्दी से प्रकट किये।

संत निरंकारी मंडल ब्रांच बिजनौर के तत्वाधान में स्थानीय संत निरंकारी सत्संग भवन पर एक विशेष सत्संग का आयोजन किया गया। 8स अवसर पर संत निरंकारी मंडल दिल्ली के कन्वीनर केंद्रीय प्लानिंग एंड एडवाइजरी बोर्ड एसएल गर्ग ने गुरु गद्दी से विचार प्रकट करते हुए कहा कि सत्संग बड़े भाग्य से मिलता है। सत्संग वह ज्ञान सरोवर है इसमें जो नहीं आएगा वह हीरे और जवाहर के मोती नहीं पाएगा सत्संग सब सुखों की खान है। सत्संग से ही हमें सब सुख प्राप्त होते हैं। सत्संग के लिए देवी देवता भी तरसते हैं क्योंकि बिना सत्संग के बेड़ा पार नहीं है और सत्संग से ही हमें मुक्ति प्राप्त होती है, जो हमारा एकमात्र उद्देश्य है। सत्संग से ही हम भवसागर से पार हो जाते हैं। जो गुरु के दर पर सेवा करता है वह जन बड़े ही भाग्य वाला होता है। जो भी सेवा सत्संग व सुमिरन करता है उनके रास्ते में वह भी रुकावट नहीं आती है। जो सद्गुरु का कार्य करते हैं सदा उनका कार्य करते है। गुरुजी उनकी झोलियां खुशियों से भर देते हैं। आपका सच्चा मित्र कौन है जो आपको सत्संग में अर्थात सच के संग जोड़ता है जो आपको सत्संग में लेकर आता है और आपको सत्संग की प्रेरणा देता है भक्तों का हित करने के लिए सद्गुरु स्वयं आते हैं और सतगुरु किसी के घट से भी अपनी बात प्रकट कर देते हैं तीन लोक नौ खंड में गुरु से बड़ा न कोई कर्ता करे न कर सके मेरा गुरु करे सो होय सतगुरु एक पल के भीतर आकर अपने भक्तों की रक्षा स्वयं करते हैं जो गुरु की बात मानते हैं गुरु उनकी बात मानते हैं।

महात्मा अरुण त्यागी के संचालन में हुए कार्यक्रम में संयोजक महात्मा बाबूराम निरंकारी संचालक, विनोद सिंह एडवोकेट, मीडिया प्रभारी भूपेंद्र कुमार निरंकारी पत्रकार, गीतकार महात्मा खेमराज दिल्ली, महात्मा हरविंदर कुमार हरीश निरंकारी दिल्ली, सुरेंद्र कुमार मुखी नगीना, हुकुम सिंह मुखी कपूर, डीके सागर, रूपल सिंह, राजवीर सिंह, शंकर,  रणबीर, सुरेंद्र पाल, लक्की, अजय कुमार, आशु, बृजेश सागर, अक्सर सागर, दीपक शर्मा, दीपक, वैभव कुमार, सुशीला, बंदना त्यागी, प्रियांशी, खुशी, नेहा, संध्या, ममता, गीता, पारुल, अंजलि, गीतकार श्रवण कुमार, अश्विंदर कौर, आशु, रत्नेश, कुलदीप भारती,आशीष गोलू, मनोज सिंह आदि सहित निरंकारी मिशन के अनेक अनुयाई उपस्थित रहे सत्संग के बाद विशाल लंगर का आयोजन भी किया गया। 

बिजनौर के हीरो लवी चौधरी का भव्य स्वागत

बिजनौर पहुंचने पर लवी चौधरी का हुआ भव्य स्वागत। डीएम ने लवी को बताया बिजनौर का हीरो। युवाओं से किया प्रेरणा लेने का आह्वान।

बिजनौर। जूनियर एशियाई वालीबॉल चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय टीम के सदस्य लवी चौधरी का बिजनौर पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। लवी चौधरी हरियाणा से सोमवार को बिजनौर लौटे।

ईरान के शहर तेहरान में आयोजित हुई जूनियर एशियाई वॉलीबॉल चैंपियनशिप में भारतीय टीम ने कांस्य पदक प्राप्त किया है। भारतीय टीम के सदस्य रहे ग्राम रहमापुर निवासी लवी चौधरी सोमवार को हरियाणा से बिजनौर पहुंचे। गंगा बैराज पर लवी चौधरी का भव्य स्वागत किया गया। वहां से ढ़ोल नगाड़ों की थाप पर भारत माता की जय और वन्दे मातरम के उद्घोष लगाते हुए नेहरु स्टेडियम पहुंचे। स्टेडियम में वालीबाल संघ की ओर से कार्यक्रम आयोजित किया गया। नेहरु स्टेडियम में डीएम उमेश मिश्रा और एसपी दिनेश सिंह और एएसपी सिटी डा. प्रवीन रंजन सिंह ने लवी चौधरी का जोरदार स्वागत किया। नेहरू स्टेडियम में युवा खिलाड़ियों ने अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी लवी चौधरी और उनके कोच अजित चौधरी को कंधों पर उठा लिया और मैदान में लेकर पहुंचे। वहां सैकड़ों की संख्या में खिलाड़ी लवी चौधरी का इंतजार कर रहे थे। डीएम उमेश मिश्रा, एसपी दिनेश सिंह, एसडीएम रीतु चौधरी ने लवी चौधरी को फूलों की माला पहनाकर स्वागत किया। डीएम उमेश मिश्रा ने खिलाड़ियों से कहा कि लवी चौधरी से प्रेरणा लेकर जिले का नाम रौशन करें। डीएम ने खिलाड़ियों से लवी चौधरी को बिजनौर का हीरो बताते हुए जिले का नाम रौशन करने का आह्वान किया। डीएम ने कहा कि शिक्षा के साथ खेल जरुरी है। जिले में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। जिले के युवा अगर ठान लें तो हर क्षेत्र में नाम रौशन कर सकते हैं। युवा अपनी प्रतिभा को पहचानें और जिले के साथ देश का नाम रौशन करें। डीएम ने जिला क्रीड़ा अधिकारी जयवीर सिंह से खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत करने को कहा।

इस अवसर पर जिला क्रीड़ा अधिकारी जयवीर सिंह, बीएसए जयकरन यादव, वॉलीबाल कोच अजित तोमर, योगेन्द्र पाल सिंह योगी, मानव सचेदवा, निपेन्द्र देशवाल, विकास अग्रवाल, विकास सेतिया, पवन कुमार कृष्णा कालेज, चित्रा चौहान, अरविंद देशवाल आदि मौजूद रहे। बाद में गांव पहुंचने पर लोगों ने अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी लवी चौधरी को फूल मालाओं से लाद दिया। उनकी उपलब्धि पर गांव में खुशी का माहौल है और उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। वहीं बताया गया है कि मंगलवार को कोतवाली देहात में लवी चौधरी का भव्य स्वागत किया जाएगा।

ईरान में बिजनौर के “लवी” ने बिखेरा जलवा

साथियों के साथ कांस्य पदक की जीत का जश्न मानते हुए 8 नंबर जर्सी में लवी चौधरी

ईरान में छाया बिजनौर का छोरा लवी29 को बिजनौर के नेहरू स्टेडियम में स्वागत की तैयारियां।

नई दिल्ली। ईरान के तेहरान में आयोजित हुई जूनियर एशियन वॉलीबॉल चैंपियनशिप 2022 में भारतीय टीम ने कांस्य पदक प्राप्त किया। सोमवार को खेले गए मुकाबले में भारत ने दक्षिण कोरिया को हराया। यह जीत इसलिए महत्वपूर्ण हैछोटा भाई लवी चौधरी ऐसे ही एक दिन वालीबॉल की  दुनिया का सिरमौर बने; यही कामना है। 29 अगस्त को बिजनौर के नेहरू स्टेडियम में स्वागत की तैयारियां की जा रही हैं।

पत्रकार साथी का छोटा भाई- बिजनौर के पत्रकार साथियों के लिए यह जीत इसलिए महत्तवपूर्ण है, क्यूंकि इस जीत में अहम भूमिका निभाने वाले लवी चौधरी, न केवल जिले के रहने वाले हैं, बल्कि पूर्व में हिन्दुस्तान और वर्तमान में अमर उजाला में कार्यरत अचल चौधरी के छोटे भाई हैं।

गौरतलब है कि ईरान में खेली गई अंडर-18 एशियन चैंपियनशिप में भारत की टीम ने कांस्य पदक जीता है। टीम में मुजफ्फरनगर जिले के सिसौली कस्बे के आर्यन बालियान, सहारनपुर के देवबंद के आदित्य राणा और बिजनौर के लवी चौधरी भी शामिल थे।

16 अगस्त को दी थी थाईलैंड को मात
16 अगस्त को भारतीय टीम ने रोचक मुकाबले में थाईलैंड को मात दी थी। उसके बाद 18 अगस्त को भारत की टीम ने कोरिया के साथ मुकाबले में भी एकतरफा जीत हासिल की। वहीं 20 अगस्त की शाम को चीनी ताइपे की टीम को हराकर सेमीफाइनल क्वालीफाई किया। सोमवार को सेमीफाइनल मुकाबले में ईरान की टीम ने भारतीय टीम को हरा दिया। सोमवार देर शाम चैंपियनशिप में भारत की टीम ने कोरिया को हराकर कांस्य पदक पर अपना कब्जा किया।

2003 में जीता था भारत ने अंडर-18 खिताब
भारत ने 2003 में एशियाई अंडर-18 लड़कों की वॉलीबॉल चैंपियनशिप का खिताब जीता था। उसके बाद भारतीय टीम 2005, 2008 में कांस्य पदक जीतने के अलावा 2007 में उपविजेता रही। अब 2010 के बाद पहली बार भारत की टीम ने चीनी ताइपे को हराकर सेमीफाइनल में क्वालीफाई किया। फाइनल में भारतीय टीम ने दक्षिण कोरिया को 3-2 से हराकर तीसरा स्थान प्राप्त किया। टीम ने कांस्य पदक हासिल कर उत्तर प्रदेश का नाम रोशन किया है। भारतीय टीम की इस जीत से 2023 में अंडर-19 वॉलीबॉल विश्व चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई करने में मदद मिलेगी।

साहित्य की ‘सरस्वती’ के इतिहास में 20 अगस्त

20 अगस्त : तारीख जो तवारीख बन गई

साहित्य की ‘सरस्वती’ के इतिहास में 20 अगस्त का अपना अलग ही महत्व है। साहित्य की इस ‘सरस्वती’ का उद्गम 20 अगस्त 1899 को ही हुआ था। वैसे, उद्गम का अर्थ स्थान से जोड़ा जाता है लेकिन साहित्य की ‘सरस्वती’ के उद्गम का अर्थ यहां तारीख से है। यह वही तारीख है जो आधुनिक हिंदी साहित्य की तवारीख बन गई। इसी दिन इंडियन प्रेस (प्रयागराज) के संस्थापक-स्वामी बाबू चिंतामणि घोष ने काशी नागरी प्रचारिणी सभा को सचित्र मासिक पत्रिका के प्रकाशन संबंधी पत्र भेजकर संपादन का भार संभालने का प्रस्ताव दिया था। इस पत्र में पत्रिका के शीर्षक का कोई उल्लेख नहीं था। मासिक पत्रिका का नाम ‘सरस्वती’ कैसे पड़ा? यह अब तक रहस्य ही है।
1893 में स्थापित नागरी प्रचारिणी सभा हिंदी के प्रचार- प्रसार में सक्रिय में सक्रिय थी। 7 वर्षों में वह हिंदी को स्थापित करने में कई सफलताएं भी अर्जित कर चुकी थी। दस्तावेज देखने से पता चलता है कि इंडियन प्रेस के सचित्र मासिक पत्रिका के प्रकाशन संबंधी प्रस्ताव को नागरी प्रचारिणी सभा ने पहले- पहल बहुत गंभीरता से नहीं लिया। श्री गोविंददास जी के सभापतित्व में 21 अगस्त 1899 को संपन्न हुए सभा के साधारण अधिवेशन के कुल 25 विचारणीय विषयों में इंडियन प्रेस के सचित्र मासिक पत्रिका के प्रकाशन का विषय 23वें नंबर पर था। 24वें नंबर पर चार पुस्तकों के प्रकाशन संबंधी सूचना और अंतिम विषय के रूप में सभापति का धन्यवाद प्रस्ताव। इसी से स्पष्ट है कि मासिक पत्रिका के प्रकाशन का प्रकरण सभा के लिए कितना महत्वपूर्ण था? नागरी प्रचारिणी सभा के साधारण अधिवेशन में इंडियन प्रेस का यह पत्र विचारार्थ प्रस्तुत तो किया गया लेकिन कार्य अधिक होने के कारण उस दिन उस पत्र पर कोई विचार नहीं किया जा सका। सभा की कार्यवाही में लिखा गया-“(23) इंडियन प्रेस का 20 अगस्त का सचित्र मासिक पत्र संबंधी पत्र सभा में उपस्थित किया गया। आज्ञा हुई कि आगामी अधिवेशन में विचारार्थ उपस्थित किया जाए।”
11 सितंबर 1899 को श्री गोविंददास जी की ही अध्यक्षता में ही संपन्न हुए अधिवेशन में इंडियन प्रेस के पत्रिका प्रकाशन संबंधी प्रस्ताव पर निर्णय लिया गया- ‘इंडियन प्रेस के 20 अगस्त के मासिक सचित्र पत्र संबंधी पत्र पर निश्चय हुआ कि सभा उस पत्र के संपादन करने का वा उसके संबंध में और किसी कार्य का भार अपने ऊपर नहीं ले सकती है परंतु इंडियन प्रेस को सम्मति देती है कि वह उस पत्र को अवश्य निकालें क्योंकि उससे भाषा के उपकार की संभावना है और यदि इंडियन प्रेस के स्वामी चाहे तो सभा उन्हें ऐसे कुछ लोगों के नाम बता सकती है जो संपादक का कार्य करने के उपयुक्त हों। वे उनसे सब बातें स्वयं निश्चय कर लें’। सभा ने मासिक पत्र के प्रकाशन पर अपनी सम्मति तो दी लेकिन संपादन संबंधी कार्यभार स्वीकार नहीं किया लेकिन इंडियन प्रेस के संस्थापक बाबू चिंतामणि घोष ने हार नहीं मानी। वह जानते थे कि प्रस्तावित पत्रिका की सफलता के लिए सभा का सहयोग नितांत आवश्यक है। उन्होंने अपना प्रयत्न जारी रखा और 14 अक्टूबर को पुनः एक मासिक पत्र प्रकाशन संबंधी प्रस्ताव नागरी प्रचारिणी सभा के समक्ष प्रस्तुत किया।
इस नए प्रस्ताव पर 13 नवंबर 1899 को पंडित सुदर्शनदास जी के सभापतित्व में संपन्न हुए नागरी प्रचारिणी सभा के साधारण अधिवेशन में प्रस्तावित मासिक पत्र के लिए संपादक समिति बनाने पर निर्णय लिया गया। सभा की साधारण सभा ने क्रमशः बाबू श्यामसुंदर दास, बाबू राधा कृष्ण दास, बाबू जगन्नाथ दास, बाबू कार्तिक प्रसाद खत्री और पंडित किशोरी लाल गोस्वामी के नाम संपादक समिति के लिए प्रस्तावित किए। अपने प्रयासों की शुरुआती सफलता से उत्साहित बाबू चिंतामणि घोष ने डेढ़ माह में ही सचित्र मासिक पत्रिका के प्रकाशन की व्यवस्था सुनिश्चित की। इस तरह 1 जनवरी 1900 को सरस्वती का जन्म हुआ। उद्गम के साथ ही ‘सरस्वती’ के मुख्य पृष्ठ पर संपादक समिति के सदस्यों के नाम इस क्रम से प्रकाशित किए गए-
बाबू कार्तिक प्रसाद खत्री
पंडित किशोरी लाल गोस्वामी
बाबू जगन्नाथदास बीए
बाबू राधा कृष्ण दास
बाबू श्यामसुंदर दास बीए
सरस्वती के मुख्य पृष्ठ पर संपादक समिति के इन सदस्यों के नाम के ठीक ऊपर ‘काशी नागरी प्रचारिणी सभा के अनुमोदन से प्रतिष्ठित’ भी बड़े- बड़े अक्षरों में छापा गया। सरस्वती के 1 वर्ष पूर्ण होने पर 12वें अंक में बाबू चिंतामणि घोष का प्रकाशकीय वक्तव्य (पृष्ठ 399) पर ‘प्रकाशक का निवेदन’ शीर्षक से प्रकाशित हुआ। प्रकाशक का यह निवेदन बताता है कि उस समय हिंदी की मासिक पत्रिका निकालना कितने जोखिम का काम था। वह लिखते हैं-‘इसे नष्ट करने के लिए उतारू इतने ही लोगों के कटाक्षों की वज्रवर्षा भी होती रही।’
सरस्वती के दूसरे वर्ष के प्रथम अंक से संपादन संबंधी दायित्व संपादक समिति के स्थान पर अकेले बाबू श्यामसुंदरदास जी ने संभाला। दो वर्ष तक अकेले सरस्वती का संपादन करने के बाद बाबू श्यामसुंदर दास ने व्यस्तता के चलते अपने को संपादन कार्य से अलग कर लिया। दिसंबर 1902 के अंतिम अंक के आरंभ में उन्होंने अपना वक्तव्य ‘विविध वार्ता’ शीर्षक से प्रकाशित किया। उन्होंने लिखा- ‘इस मास की संख्या के साथ सरस्वती का तीसरा वर्ष पूरा होता है। पहले वर्ष से लेकर आज तक मेरा संबंध इस पत्रिका से घनिष्ट बना रहा। पहले वर्ष में एक समिति इस पत्रिका का संपादन करती रही और मैं भी उस समिति का सभासद रहा। दूसरे और तीसरे वर्ष में इसके संपादन का भार पूरा-पूरा मेरे ऊपर रहा परंतु चौथे वर्ष के प्रारंभ से यह कार्य हिंदी के प्रसिद्ध लेखक पंडित महावीर प्रसाद द्विवेदी के अधीन रहेगा। इस परिवर्तन का मुख्य कारण यह हुआ कि मैं समय के अभाव से सरस्वती के संपादन में इतना दत्त चित्त न रह सका जितना कि मुझे होना उचित था। इसलिए केवल नाम के लिए संपादक बना रहना मैंने उचित नहीं समझा परंतु मैं अपने पाठकों और पत्रिका के लिए को विश्वास दिलाता हूं कि यद्यपि आगामी संख्या से मैं इसका संपादक न रहूंगा पर इस पत्रिका के साथ मेरी वैसी ही सहानुभूति बनी रहेगी जैसी अब तक रही और मैं सदा इसकी उन्नति से पसंद होऊंगा। अंत में मुझे अपने उन मित्रों से प्रार्थना करनी है जो लेखों के द्वारा 3 वर्ष तक मेरी सहायता करते रहे। आशा है कि वह अगले वर्ष में भी इसी प्रकार सहायता करते रहेंगे। अब भविष्य में सरस्वती में प्रकाशनार्थ सब लेख परिवर्तन के संवाद पत्र तथा समालोचनार्थ पुस्तक आदि निम्नलिखित पते से भेजे जाने चाहिए-
पंडित महावीर प्रसाद द्विवेदी
संपादक सरस्वती,
झांसी।
पत्रिका का प्रबंध तथा मूल्य संबंधी पत्र व्यवहार पूर्ववत प्रयाग के इंडियन प्रेस से ही रहेगा।’
आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के संपादकत्व में निकलने वाली सरस्वती से वर्ष 1903 से लेकर 1905 तक अर्थात 3 वर्ष तक सभा का अनुमोदन संबंध यथावत रहा लेकिन कुछ अपरिहार्य कारणों से सभा को सरस्वती पत्रिका पर से अपना अनुमोदन हटाना पड़ा। वर्ष 1905 में प्रकाशित सभा के वार्षिक विवरण पत्र में इस संबंध में दर्ज है-
‘मासिक पत्रों में अब सबसे श्रेष्ठ सरस्वती है। यद्यपि कई कारणों से अब इस पत्रिका के साथ सभा का कोई संबंध नहीं है पर यह सभा इस पत्रिका की उन्नति देखकर प्रसन्न होती है। सरस्वती में सब प्रकार के लोगों की रूचि के अनुसार सरल भाषा में लेखों के रहने से इसका आदर दिनोंदिन बढ़ता जाता है। सभा को दुख है कि सरस्वती के प्रकाशक ने उसमें अपवादपूर्ण लेखों का रोकना उचित न जानकर सभा से अपना संबंध तोड़ना उचित समझा परंतु सभा को विश्वास है कि इस पत्रिका द्वारा हिंदी का हित निरंतर साधन होता रहेगा।’

काशी नागरी प्रचारिणी सभा का 5 वर्षों तक ‘सरस्वती’ के उत्थान में निरंतर सहयोग और साथ आधुनिक हिंदी साहित्य में एक महत्वपूर्ण परिघटना के रूप में देखी जाती है। माना भी जाता है कि अगर ‘सरस्वती’ प्रकट न हुई होती तो हिंदी और हिंदी साहित्य इस रूप में हम सबके सामने तो और न ही होता।

सरस्वती के पूर्व संपादक
बाबू श्यामसुंदर दास
किशोरी लाल गोस्वामी
बाबू कार्तिक प्रसाद खत्री
जगन्नाथदास रत्नाकर
बाबू राधा कृष्ण दास
आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी
पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी
पंडित देवी दत्त शुक्ल
पंडित उमेश चंद्र मिश्र
पंडित देवी दयाल चतुर्वेदी मस्त
पंडित देवी प्रसाद शुक्ल
पंडित श्री नारायण चतुर्वेदी ‘भैया साहब’
नितीश कुमार राय

प्रोफेसर देवेंद्र कुमार शुक्ला

पूर्व संयुक्त संपादक
ठाकुर श्री नाथ सिंह
श्रीमती शीला शर्मा

पंडित बलभद्र प्रसाद मिश्र

∆ गौरव अवस्थी
रायबरेली/उन्नाव

गुरू गोविन्द सिंह राष्ट्रीय एकता पुरस्कार के लिए आवेदन 31 अगस्त तक

गुरू गोविन्द सिंह राष्ट्रीय एकता पुरस्कार के लिए 31 अगस्त तक मांगे आवेदन मानवाधिकारों की रक्षा एवं राष्ट्रीय एकीकरण के क्षेत्र में सर्वाेत्कृष्ट कार्य करने वालों को मिलेगा गुरू गोविन्द सिंह राष्ट्रीय एकता पुरस्कार, 31 अगस्त तक करें आवेदन

बिजनौर। मुख्य विकास अधिकारी पूर्ण बोरा ने बताया कि जनपद में निवासरत व्यक्तियों में से कोई व्यक्ति, जिसने मानवाधिकारों की रक्षा, सामाजिक न्याय एवं राष्ट्रीय एकीकरण के क्षेत्र में सर्वाेत्कृष्ट कार्य किया हो तथा इस हेतु पूर्णतः समर्पित रहे हों, को सार्वजनिक रूप से सम्मानित करने के उददेश्य से गुरु गोविन्द सिंह जी के जन्म दिवस (05 जनवरी) पर वर्ष 2022-23 के लिए गुरू गोविन्द सिंह राष्ट्रीय एकता पुरस्कार प्रदान किये जाने व रुपए एक लाख का नगद पुरस्कार तथा प्रशस्ति पत्र दिया जायेगा।

सीडीओ ने कहा कि इस हेतु महानुभावों के प्रस्ताव उनके द्वारा किये गये महत्वपूर्ण कार्याे का तथ्यात्मक विवरण एवं अभिलेखीय साक्ष्यों के साथ दिनांक 30 सितम्बर 2022 तक शासन स्तर पर अनिवार्य अर्हताओं के साथ चाहे गये हैं। उन्होंने बताया कि अर्हताओं में आवेदक भारत का मूल नागरिक हो, उत्तर प्रदेश राज्य की सीमा के भीतर पुरस्कार पर विचार किये जाने के वर्ष में सामान्यतया निवास करता रहा हो, मानवाधिकार, सामाजिक न्याय व राष्ट्रीय एकीकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान रहा हो, गुरू गोविन्द सिंह राष्ट्रीय एकता पुरस्कार योजना के अधीन पूर्व में इस राज्य सरकार द्वारा पुरस्कार न दिया जा चुका हो। उन्होंने जनपद के समस्त उप जिलाधिकारियों व समस्त पुलिस क्षेत्राधिकारियों को पत्र प्रेषित कर कहा कि आप उक्त पुरस्कार का व्यापक प्रचार प्रसार कराकर प्राप्त प्रस्ताव का उक्त मानकों के अनुरूप परीक्षण कर लें तथा यह भी सुनिश्चित कर लें कि पात्र महानुभाव के विरूद्ध कोई अपराधिक मामला प्रचलित/लम्बित नहीं है और किसी भी अपराधिक मामले में किसी न्यायालय द्वारा उन्हें दण्डित नहीं किया गया है। प्रस्ताव का भली प्रकार परीक्षण कर 4 प्रतियों में जिलाधिकारी कार्यालय में 31 अगस्त 2022 के भीतर उपलब्ध करा दें।

सैनी प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन 28 को

बिजनौर। महात्मा ज्योतिबा फुले वेलफेयर सोसाइटी जनपद बिजनौर के तत्वावधान में आगामी 28 अगस्त दिन रविवार प्रात: 10:00 बजे शहनाई वेंकट हाल बिजनौर में सैनी प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन किया जा रहा है।

उक्त जानकारी देते हुए सोसायटी के अध्यक्ष प्रधान कल्याण सिंह सैनी ने बताया कि महात्मा ज्योतिबा फुले वेलफेयर सोसाइटी पिछले 22 वर्षों से प्रतिभा सम्मान समारोह आयोजित करती आ रही है। इस वर्ष यह कार्यक्रम 28 अगस्त रविवार को शहनाई बैंकट हाल में होगा। कार्यक्रम में सैनी समाज के प्रतिभाशाली छात्र छात्राएं, जिन्होंने किसी भी फाइनल परीक्षा में 70% अंक प्राप्त किए हो, उन्हें सम्मानित किया जाएगा।

कल्याण सिंह सैनी ने बताया कि समारोह में डॉ कल्पना सैनी सदस्य राज्यसभा, राम अवतार सैनी, विधायक नूरपुर कमलेश सैनी, निवर्तमान विधायक चांदपुर वीके मौर्य, कुलसचिव मां शाकुंभरी यूनिवर्सिटी सहारनपुर डॉ कमल सैनी प्रतियोगिता एक्सपर्ट जयपुर अतिथि होंगे। उन्होंने सैनी समाज से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में प्रतिभा सम्मान समारोह में शामिल होकर कार्यक्रम सफल बनाएं।

हर्षोल्लास के साथ मनाई गई जन्माष्टमी

बिजनौर। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार जनपद में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। लोगों ने अपने घरों में लड्डू गोपाल को नई पोशाक व नए श्रृंगार के साथ विराजमान किया। काफी श्रद्धालुओं ने गुरुवार 18 अगस्त को जन्माष्टमी का त्योहार मनाया। वहीं बहुत से गृहस्थों ने शुक्रवार को व्रत रखकर जन्माष्टमी मनाई। मंदिरों को दुल्हन की तरह से सजाने के साथ ही रामडोल सजाए गये हैं। इन पर कान्हा को विराजमान किया गया है।

सर्वविदित है कि जन्माष्टमी का पावन पर्व भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। सिविल लाइन स्थित धार्मिक संस्थान विष्णु लोक के ज्योतिषविद पंडित ललित शर्मा ने बताया कि शास्त्रानुसार मथुरा में भगवान श्री कृष्ण का जन्म अर्ध रात्रि व्यापिनी अष्टमी तिथि को हुआ था। 18 अगस्त 2022 को अष्टमी तिथि अर्धरात्रि व्यापिनी होने के चलते गृहस्थ जीवन जीने वाले ( स्मार्त ) लोगों को गुरुवार 18 अगस्त को जन्माष्टमी का त्योहार मनाना श्रेष्ठ माना गया। वृद्धि और ध्रुव योग का निर्माण भी गुरुवार को शुभ रहा।

वहीं 19 को साधु संत (वैष्णव) लोग जन्माष्टमी मनाएंगे। उन्होंने बताया कि धार्मिक दृष्टि से देखा जाए तो भगवान श्री कृष्ण का जन्म रात्रि में 12:00 बजे हुआ था। 18 अगस्त 2022 को रात्रि में 12:00 बजे अष्टमी तिथि रही।

नहटौर पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री कॉलेज में हुआ टैबलेट वितरण

बिजनौर। नहटौर पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री कॉलेज नहटौर जनपद बिजनौर में परा स्नातक छात्र छात्राओं को टैबलेट वितरण किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की फ्री टैबलेट मोबाइल योजना के अंतर्गत विधायक ओम कुमार ने टैबलेट वितरण किया।

इस अवसर पर महाविद्यालय के अध्यक्ष इंजीनियर आशीष सिंघल, प्राचार्य डॉक्टर संजीव गौर, डॉक्टर कैलाश सिंह, डॉक्टर सीमा, डॉक्टर दीपशिखा, अश्वनी, जावेद अली, विपिन सैनी, आबिद हुसैन, चमन सैनी, मनोज हिटलर आदि उपस्थित रहे।

डायल 112 की तिरंगा यात्रा देख लोग हुए रोमांचित

बिजनौर। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश भर में 11 अगस्त से 17 अगस्त तक आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है।

उसी क्रम में आज एसपी की अगुवाई में डायल 112 की गाड़ियों पर सवार होकर पुलिसकर्मियों ने तिरंगा रैली निकाली। इस दौरान 112 में सवार पुलिसकर्मियों हाथों में तिरंगा झंडा लिए हुए नजर आए। इस यात्रा को देखकर लोग रोमांच से भर उठे।

पुलिस अधीक्षक दिनेश सिंह की अगुवाई में डायल 112 की गाड़ियों के साथ पुलिसकर्मियों ने कोतवाली शहर क्षेत्र में डायल 112 की गाड़ियों के साथ तिरंगा रैली निकाली।

सारथी बने एसपी सिटी, ध्वजा पताका एसपी के हाथ में- एसपी दिनेश सिंह और एसपी सिटी डॉक्टर प्रवीन रंजन सिंह 112 की गाड़ी पर सवार हुए। कार को एसपी सिटी डॉक्टर प्रवीन रंजन सिंह ने ड्राइव किया जबकि उनके बराबर में फ्रंट सीट पर जिले के कप्तान हाथ में तिरंगा लेकर लहराते हुए नजर आए। तिरंगा रैली में डायल 112 की जिलेभर की गाड़ियां और बाइक शामिल रहीं।

इसमें 112 के पुलिसकर्मी तिरंगा लहराते हुए चल रहे थे।  साथ में देशभक्ति के गीत बज रहे थे। इस मौके पर एसपी पूर्वी ओमवीर सिंह, एसपी सिटी व नोडल 112 डॉक्टर प्रवीन रंजन सिंह, एसपी ग्रामीण श्री राम अर्ज, डायल 112 के इंस्पेक्टर रजा अहमद सहित पुलिस अधिकारी व कर्मचारी शामिल रहे।

संशय: भारत का स्वतंत्रता दिवस 75वां या 76वां?

देश की स्वतंत्रता के 75 साल पूरे होने पर कई कार्यक्रमों का आयोजन तो किया ही जा रहा है, साथ ही 75वीं वर्षगांठ की चर्चा भी हो रही है। इस दौरान लोगों के दिमाग में यह कन्फ्यूजन आ गया है कि यह आजादी की 75वीं वर्षगांठ है तो 76वां स्वतंत्रता दिवस कैसे?

दरअसल लाखों-करोड़ों लोगों के बलिदान के बाद 15 अगस्त 1947 को भारत अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हुआ। अब वर्ष 2022 में जब देश स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ पर ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ मना रहा है तो लोगों के मन में एक संशय उत्पन्न हो गया है। लोग जानना चाहते हैं कि आखिर यह कौन सा स्वतंत्रता दिवस है, 75वां या 76वां?

पूरा मामला इस तरह समझें
देश ने 15 अगस्त 1947 को पहला स्वतंत्रता दिवस मनाया,अर्थात 15 अगस्त 1948 को आजादी का एक साल पूरा हुआ तो देश ने दूसरा स्वतंत्रता दिवस मनाया। इसी तरह से 1956 में 10वां, 1966 में 20वां, 1996 में 50वां, 2016 में 70वां और 2021 में 75वां स्वतंत्रता दिवस मनाया गया। इस कारण 2022 में देश अपना 76वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है।

पुलिस कर्मियों को पुलिस महानिदेशक प्रशंसा चिन्ह गोल्ड व सिल्वर मैडल

लखनऊ। आजादी का अमृत महोत्सव स्वतंत्रता दिवस के पावन पर्व पर पुलिस आयुक्त लखनऊ एसबी शिरडकर द्वारा रिजर्व पुलिस लाइन्स में ध्वजारोहण किया गया।

ध्वजारोहण कार्यक्रम में पुलिस आयुक्त लखनऊ ने उपस्थित सभी पुलिसकर्मियों को भारतवर्ष के गौरवशाली इतिहास से अवगत कराते हुए शपथ दिलाई। सभी पुलिसकर्मियों को अपने-अपने कार्यों का पूरे मनोयोग व ईमानदारी से निर्वहन करते हुए देश की एकता व अखण्डता को बनाये रखने तथा देश के प्रगति में अपना योगदान देने की शपथ दिलाई गई। ध्वजारोहण के बाद पुलिस आयुक्त द्वारा पुलिस कर्मियों को मिष्ठान वितरण किया गया। इसी के साथ  पुलिस विभाग में रहते हुए अपनी मेहनत व लगन से कर्तव्यों का पालन करते हुए, उत्कृष्ट व सराहनीय कार्य करने वाले पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों को पुलिस महानिदेशक प्रशंसा चिन्ह, गोल्ड व सिल्वर मैडल प्रदान कर सम्मानित किया गया। 

जनता संघर्ष मोर्चा की तिरंगा यात्रा में उमड़ा जनसैलाब

लखनऊ। आजादी के अमृत महोत्सव का जश्न पूरा देश मना रहा है, हर घर तिरंगा अभियान के तहत लोग बड़े गर्व के साथ अपने अपने घरों पर तिरंगा लगा रहे हैं और तिरंगा यात्रा भी निकाल रहे हैं।

इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जनता संघर्ष मोर्चा के बैनर तले बड़े पैमाने पर लखनऊ उत्तर विधानसभा के लोगों ने तिरंगा यात्रा निकाली। इस मौके पर जनसैलाब उमड़ पड़ा।

यह तिरंगा यात्रा जनता संघर्ष मोर्चा के कैंप कार्यालय से शुरू होकर यश नगर जगलाल पेट्रोल पंप, दाउदनगर, अन्नपूर्णा नगर, केशव नगर, फैजुल्लागंज होते हुए पुरनिया चौराहे पर समाप्त हुई।

इस तिरंगा यात्रा में बड़े पैमाने पर लोगों ने शिरकत करके आजादी के रंग में खुद को रंगा हुआ महसूस किया एवं भारत माता की जयकारों के नारे भी लगाए।

तिरंगा यात्रा के दौरान जनता संघर्ष मोर्चा के संस्थापक सुभाष चंद यादव भी मौजूद रहे।

1941 में जन्मे शर्मा जी का शॉल ओढ़ाकर सम्मान

कृषकों को भेंट किया तिरंगा झंडा व कागजी नींबू की पौध 1941 में जन्मे शर्मा जी का शॉल ओढ़ाकर सम्मान तिरंगा रैली में किसान भाइयों ने लिया बढ़-चढ़कर हिस्सा कृषि भवन के सभागार में हुआ कार्यक्रम

बिजनौर। कृषि भवन बिजनौर के सभागार में आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में जनपद के प्रगतिशील व अग्रणी किसान, कृषक उत्पादक संगठन के सदस्यों व नमामि गंगे परियोजना के लाभार्थी कृषकों को मुख्य विकास अधिकारी पूर्ण बोरा द्वारा उप कृषि निदेशक गिरीश चंद्र, जिला कृषि अधिकारी डॉ अवधेश मिश्र, जिला कृषि रक्षा अधिकारी/उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी मनोज रावत, जिला उद्यान अधिकारी जीतेंद्र कुमार एवं कृषि विभाग के कार्मिकों की उपस्थिति में तिरंगा झंडा एवं कागजी नींबू की पौध भेंट किया गया।

इस अवसर पर 15 अगस्त 1947 से पूर्व जन्मे श्री रमेश चंद शर्मा पुत्र श्री टोडीराम शर्मा, निवासी ग्राम तिमरपुर विकासखंड मोहम्मदपुर देवमल को मुख्य विकास अधिकारी द्वारा शाल ओढ़ाकर सम्मानित भी किया गया। शर्मा जी का जन्म 15 जुलाई सन् 1941 में हुआ था। इस अवसर पर

मुख्य विकास अधिकारी द्वारा अपने संबोधन में समस्त किसान भाइयों से आह्वान किया गया कि दिनांक 15 अगस्त 2022 को हम सभी लोग हर्षोल्लास के साथ झंडारोहण कर स्वतंत्रता दिवस मनाएंगे और इस विशेष दिवस पर हम सभी लोग वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम के तहत अधिक से अधिक संख्या में अपने घरों, खेतों एवं सार्वजनिक स्थानों पर पौधरोपण का कार्य करें और उसको धरोहर के रूप में संरक्षित भी करें।

उप कृषि निदेशक गिरीश चंद ने स्वतंत्रता के 75 वर्ष के उपलक्ष्य में आजादी के अमृत महोत्सव के संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए इसके इतिहास व महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इस शुभ अवसर पर हम सभी लोगों को अपने अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा व कर्मठता के साथ निर्वहन करना है और जनपद को कृषि के क्षेत्र में अग्रणी बनाना है।

जिला कृषि अधिकारी डॉ अवधेश मिश्र ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए उपस्थित सभी कृषकों एवं कृषि विभाग के कर्मचारियों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई और शुभकामनाएं दीं।

इसके पश्चात उप कृषि निदेशक के नेतृत्व में सभी अधिकारियों, कर्मचारियों एवं कृषकों के साथ तिरंगा रैली निकाली गई, जिसमें सभी किसान भाइयों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में जनपद के प्रगतिशील कृषक ब्रह्मपाल सिंह, शूरवीर सिंह, मुकेश कुमार, सतीश कुमार, सुरेश कुमार, शिव कुमार, पुनीत कोहली आदि 75 कृषकों द्वारा प्रतिभाग किया गया। अंत में सूक्ष्म जलपान के साथ तिरंगा रैली का समापन किया गया।

संत निरंकारी सत्संग भवन पर 15 अगस्त को मनाएंगे मुक्ति पर्व

बाबा बूटा सिंह जी शहंशाह, अवतार सिंह जी महाराज व बाबा गुरबचन सिंह के तप और त्याग की याद में मनाया जाता है मुक्ति पर्व। सत्संग के बाद किया जाएगा लंगर का आयोजन।

बिजनौर। संत निरंकारी सत्संग भवन पर 15 अगस्त दिन सोमवार को मुक्ति पर्व मनाया जाएगा। यह जानकारी संत निरंकारी मंडल ब्रांच बिजनौर के संयोजक महात्मा बाबूराम निरंकारी व मीडिया प्रभारी पत्रकार भूपेंद्र कुमार निरंकारी ने संयुक्त रूप से दी।

संत निरंकारी मंडल ब्रांच बिजनौर के मीडिया प्रभारी पत्रकार भूपेंद्र कुमार निरंकारी

उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि दिनांक 15 अगस्त दिन सोमवार को प्रातः 11 बजे संत निरंकारी सत्संग भवन पर मुक्ति पर्व मनाया जाएगा। साथ ही एक विशेष सत्संग का आयोजन भी होगा। मीडिया प्रभारी पत्रकार भूपेंद्र कुमार निरंकारी ने बताया कि मुक्ति पर्व; बाबा बूटा सिंह जी शहंशाह, अवतार सिंह जी महाराज व बाबा गुरबचन सिंह के तप और त्याग की याद में मनाया जाता है।

संत निरंकारी मंडल ब्रांच बिजनौर के संयोजक महात्मा बाबूराम निरंकारी

कार्यक्रम संयोजक महात्मा बागोड़ा निरंकारी ने सेवा दल के पदाधिकारियों व समस्त सदस्यों से सोमवार को प्रातः 6:00 बजे पहुंचकर कार्यक्रम को सफल बनाने की विनती की है। इसके अलावा संत निरंकारी मिशन के अनुयायियों से 11 बजे से पूर्व पहुंचने की विनती की है। सत्संग के बाद लंगर का आयोजन किया जाएगा

तिरंगा रैली के साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत

कलक्ट्रेट से विकास भवन तक निकाली तिरंगा रैली 15 अगस्त तक जनपद में होंगे विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम

बिजनौर। तिरंगा रैली का उद्देश्य अमृत महोत्सव कार्यक्रम के अंतर्गत जनसामान्य में तिरंगे के प्रति जागरूकता, सम्मान एवं प्रेम की भावना को और अधिक बलवती तथा संवेदनशील बनाना है। यह विचार जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने तिरंगा झंडा रैली का नेतृत्व करते हुए व्यक्त किए गए। रैली का आयोजन स्थानीय नगर पालिका परिषद बिजनौर द्वारा कलक्ट्रेट परिसर से विकास भवन तक किया गया था।

जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने बताया कि आज प्रत्येक नगर निकाय एवं ग्राम पंचायतों में भी तिरंगा रैली कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश शासन, संस्कृति अनुभाग, लखनऊ के पत्र संख्या -1585 / चार -2022 दिनॉक 06 अगस्त, 2022 के अनुक्रम में दिनांक 11 से 15 अगस्त 2022 तक जनपद में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। अमृत महोत्सव के अंतर्गत आयोजित होने वाली कार्यक्रमों के अंतर्गत जिला स्तर पर सफलतापूर्वक आयोजन के लिए नोडल अधिकारी जिला पंचायत राज अधिकारी, बिजनौर को बनाया गया है। इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी प्रशासन विनय कुमार सिंह, वित्त एवं राजस्व अरविंद कुमार सिंह, उप जिलाधिकारी सदर मोहित कुमार, नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी विकास कुमार, लेखा अधिकारी शमीम अहमद सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद थे।

वरिष्ठ युवा पत्रकार भूपेंद्र कुमार निरंकारी के छोटे पुत्र कार्तिक का मंडल स्तर पर चयन

बिजनौर। वरिष्ठ युवा पत्रकार भूपेंद्र कुमार निरंकारी के छोटे पुत्र एवं डीएवी इंटर कॉलेज बिजनौर के छात्र कार्तिक कुमार का चयन मंडल स्तर पर किया गया है।

जिला युवा कल्याण एवं प्रादेशिक विकास दल अधिकारी की ओर से सांस्कृतिक विधाओं पर आधारित एक दिवसीय प्रतियोगिताओं का आयोजन विकास भवन में हुआ। इस दौरान विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। एकांकी प्रतियोगिता में डीएवी इंटर कॉलेज की टीम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसमें रचित राठी, कार्तिक कुमार, दशरथ कुमार, उदय राज, दीपक गोसाई ने भाग लिया। श्रीमती राजबाला देवी व अरुण गर्ग के दिशा निर्देशन में प्रतियोगिता की तैयारी की गई थी। डीएवी इंटर कॉलेज के कार्यवाहक प्रधानाचार्य चंदू सिंह ने विजयी छात्रों की टीम को सम्मानित किया और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। अभी यह टीम मंडल स्तर पर प्रतिभाग करने के लिए चयनित की गई है। इस अवसर पर प्रधानाचार्य चंदू सिंह, राजेंद्र सिंह, डॉ मंजू रानी, लोकेश सिंह, लवलेश कुमार शर्मा, विशाल वत्स, दिनेश शर्मा, राजवीर सिंह उपस्थित रहे।

9 से 15 अगस्त तक हर घर फहराएं तिरंगा: अखिलेश यादव

राष्ट्रध्वज हमारे राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक। अपना राष्ट्रीय कर्तव्य समझकर इस अभियान में शामिल हो प्रत्येक नागरिक। 9 अगस्त 1942 को देश की जनता ने की थी आजादी की इच्छा की अभिव्यक्ति।

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने नागरिकों से 9 अगस्त से 15 अगस्त 2022 तक राज्य में हर घर पर तिरंगा ध्वज फहराने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि राष्ट्रध्वज को पूरे सम्मान के साथ फहराया जाना चाहिए। राष्ट्रध्वज की पवित्रता एवं गरिमा कायम रहनी चाहिए। समाजवादी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने यह जानकारी दी।


सपा मुखिया एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि स्वेच्छा से प्रत्येक नागरिक अपने आवास पर राष्ट्रध्वज फहराएं। यह खादी का बना हो। राष्ट्रध्वज हमारे राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। उस पर हर भारतीय गर्व करता है। उन्होंने कहा कि 9 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी जी ने अंग्रेजों को भारत छोड़ने की चेतावनी दे दी थी। गांधी जी ने अपने भाषण में देश को ‘‘करो या मरो‘‘ का मंत्र दिया था।
‘‘अंग्रेजों भारत छोड़ो‘‘ प्रस्ताव 8 अगस्त 1942 की रात को पारित होते ही अंग्रेज सरकार का दमन चक्र शुरू हो गया था। सभी नेता तड़के सुबह से गिरफ्तार कर लिए गए। तब जेपी, लोहिया, अरूणा आसिफ अली, ऊषा मेहता आदि समाजवादियों ने आंदोलन का नेतृत्व किया। 9 अगस्त 1942 को चारों तरफ कड़ी सुरक्षा के बावजूद अरूणा आसिफ अली ने अधिवेशन स्थल ग्वालियर टैंक मैदान बम्बई में तिरंगा ध्वज फहरा दिया। डॉ0 लोहिया ने ऊषा मेहता के साथ नेपाल से ‘आजाद रेडियों‘ के माध्यम से आजादी के आंदोलन को पूरी ताकत से जारी रखने का आह्वान करते रहे। जयप्रकाश नारायण हजारीबाग जेल तोड़कर आंदोलन को गति दी।


इस जनांदोलन के फलस्वरूप ही 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ था। इस राष्ट्रीय आंदोलन की पावन स्मृति को बनाए रखने के लिए यह राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया।
भारत की आजादी की आखिरी लड़ाई की याद में 9 अगस्त क्रांति दिवस के रूप में तो मनाया ही जाता है इस वर्ष तो 15 अगस्त को आजादी का 75वां वर्ष भी होगा। डॉ0 राममनोहर लोहिया का मानना था कि 15 अगस्त 1942 राज्य की महान घटना जरूर है, जिस दिन हमें आजादी मिली थी, लेकिन 9 अगस्त 1942 देश की जनता की उस इच्छा की अभिव्यक्ति थी, जिसने ठान लिया था कि हमें आजादी चाहिए और हम आजादी लेकर ही रहेंगे। यह आंदोलन राष्ट्रव्यापी था, जिसमें बड़े पैमाने पर जनता ने हिस्सेदारी की और अभूतपूर्व साहस प्रदर्शित किया।

श्री अखिलेश यादव ने कहा शहर-गांव, अमीर-गरीब, किसान-श्रमिक, व्यापारी- दुकानदार- सरकारी एवं प्राइवेट संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों, सभी को इस आयोजन में स्वेच्छा से सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए। इस अभियान में किसी को भी जुड़ने से बचना नहीं चाहिए। प्रत्येक नागरिक अपना राष्ट्रीय कर्तव्य समझकर इस अभियान में शामिल हो। राष्ट्रध्वज के दिन-रात फहराए जाने पर भी अब कोई प्रतिबंध नहीं है।
श्री यादव ने समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं का अपने-अपने क्षेत्र में घर-घर जाकर 9 से 15 अगस्त 2022 के बीच नित्य अपने आवास पर राष्ट्रध्वज को ससम्मान फहराये जाने में सहयोग करने का आह्वान किया।

जश्न-ए-आजादी ट्रस्ट भारी उत्साह और उमंग के साथ मनाएगा आजादी का उत्सव

जश्न ए आजादी ट्रस्ट भारी उत्साह और उमंग के साथ मनाएगा आजादी का जश्न

महापुरुषों की प्रतिमाओं की साफ सफाई, पौधरोपण के साथ ही एक सप्ताह तक विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से आजादी का जश्न मनाएगा ट्रस्ट

ट्रस्ट के आयोजनों में बड़े पैमाने पर सभी धर्मों के लोग होंगे शामिल

जश्न ए आज़ादी ट्रस्ट ने सरकार से पुराने लखनऊ की ऐतिहासिक इमारतों के आसपास यूपी के सबसे ऊंचे (राष्ट्रीय ध्वज) को लगाने की मांग की

लखनऊ। जश्न ए आजादी ट्रस्ट हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी (15 अगस्त) को आजादी का महा उत्सव मनाएगी। आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर ट्रस्ट द्वारा 7 से 15 अगस्त तक देश भक्ति पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

इस मौके पर जश्न ए आजादी ट्रस्ट के संरक्षक मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा कि यूं तो तमाम संस्थानों में 15 अगस्त के प्रोग्राम आयोजित होते हैं लेकिन आवामी तौर पर कोई बड़ा प्रोग्राम आयोजित नहीं होता था लेकिन जश्न ए आजादी ट्रस्ट ने पिछले कई वर्षों से इस कमी को दूर करने की कोशिश की है। जश्न ए आजादी के कार्यक्रमों में तमाम धर्म के लोग शरीक होकर देश की आजादी का जश्न मनाते हैं और एक दूसरे को मुबारकबाद देते हैं। जश्न ए आज़ादी ट्रस्ट की ओर से मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली, राजेंद्र सिंह बग्गा, स्वामी सारंग महाराज ने सरकार से पुराने लखनऊ की ऐतिहासिक इमारतों इमामबाड़ा, घंटाघर, रूमी गेट के आसपास यूपी का सबसे ऊंचा (राष्ट्रीय ध्वज) लगाने की मांग की।

इस बारे में ट्रस्ट के अध्यक्ष मुरलीधर आहूजा और सचिव निगहत खान ने बताया कि देश का सबसे बड़ा त्योहार 15 अगस्त बहुत ही जोशो-खरोश के साथ मनाया जाएगा। हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध,आदि सभी धर्मो के लोग एक साथ मिलकर 15 अगस्त के इस जश्न में शामिल होंगे। साथ ही आयोजन में सभी धर्मों के धर्म-गुरु शामिल होकर एकता और अखंडता का संदेश भी देंगे तथा राष्ट्रीय पर्व पर देश की खुशहाली और अमन शांति की दुआ करेंगे। निगहत खान और मुरलीधर आहूजा ने बताया कि ट्रस्ट के इस आयोजन में विभिन्न सामाजिक संस्थानों का भी योगदान रहता है। इस बार भी ट्रस्ट के साथ टीम केयर इंडिया एंड रिसर्च फाउंडेशन, शराबबंदी संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश आर्टिस्ट एकेडमी, उ. प्र. जिला मान्यता प्राप्त पत्रकार एसोसिएशन, इंसानियत वेलफेयर सोसाइटी आदि का सहयोग रहेगा।
जश्न -ए- अजादी ट्रस्ट के संस्थापक सदस्य वामिक खान, अब्दुल वहीद,जुबैर अहमद ने बताया कि भारत पर्व की शुरुआत 7 अगस्त से होगी। इस दिन लखनऊ में विभिन्न स्थानों पर लगी महापुरुषों की प्रतिमाओं की सफाई के साथ ही जनेश्वर मिश्रा पार्क में योगा और प्रभात फेरी होगी जिसका संचालन योग गुरु केडी मिश्रा द्वारा किया जायेगा। लोहिया अस्पताल में प्रसादम के माध्यम से 8 अगस्त को 775 लोगों को खाने का वितरण किया जाएगा।
9 अगस्त को शहर के विभिन्न स्थानों पर पौधरोपण किया जायेगा। 10 अगस्त को गंभीर रूप से बीमार जरुरतमंदों के लिए स्वास्थ शिविर और रक्त दान शिविर का आयोजन किया जाएगा। 11 अगस्त को शहीद स्मारक पर 75 कैंडिल जलाकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाएगी तथा देश भक्ति पर कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का आयोजन होगा। 12 अगस्त को 75 बच्चों को खिलौनों का वितरण किया जाएगा। 13 अगस्त को देश भक्ति पर पोस्टर प्रतियोगिता और झण्डे का वितरण किया जाएगा। 14 अगस्त को देश भक्ति पर संगीत की बेहतरीन शाम का आयोजन होने के साथ ही शहर में सराहनीय कार्य करने वालों का सम्मान भी किया जाएगा।
15 अगस्त को हजरतगंज में तिरंगा ध्वज फहरा कर झंडारोहण किया जाएगा और 75 किलो के लड्डू का वितरण भी होगा। 16 अगस्त को प्रातः ट्रस्ट का एक विशेष दल लखनऊ शहर के हर क्षेत्रों में जाकर कागज व झंडों को एकत्रित करेगा तथा उनको सम्मान के साथ यथा स्थान पर रक्खा जायेगा।

कोरोना महामारी को देखते हुए एहितयात के पूरे प्रबंध होंगे। सभी आयोजन कोरोना गाइड लाइन के मुताबिक ही किए जाएगें। इस मौके पर समाजसेवी राजिया नवाज, संजय सिंह, शाहिद सिद्दीकी, सतीश अजवानी, महेश दीक्षित, नजम अहसन, तनवीर सिद्दीकी, एमएम मोहसिन, आफाक मंसूरी, इस्लाम खान आदि प्रमुख रूप से मौजूद थे।

खास उपलब्धियों पर एसपी सिटी का सम्मान

बिजनौर। एसपी सिटी डॉ प्रवीण रंजन सिंह को पुलिस व्यवस्था दुरुस्त बनाए रखने तथा उनके नेतृत्व में यूपी 112 के प्रदेश में आठवां स्थान प्राप्त करने पर मानव अधिकार वेलफेयर संगठन द्वारा सम्मानित किया गया।

मानव अधिकार वेलफेयर संगठन के जिला अध्यक्ष (युवा प्रकोष्ठ) मौ. शाकिर के नेतृत्व में सभी पदाधिकारी मंगलवार को एसपी कार्यालय पहुंचे। उन्होंने एसपी सिटी डॉ प्रवीण रंजन सिंह से उनके कार्यालय में मुलाकात करते हुए कहा कि जनपद के शहरी क्षेत्र में उनके नेतृत्व में पुलिस व्यवस्था चाक-चौबंद बनी हुई है। अपराधियों के खिलाफ पुलिस कड़ी कार्रवाई कर रही है। ऐसे में जनता को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने में उनका योगदान बेहद सराहनीय है। इसके साथ ही उनके नेतृत्व में यूपी 112 ने अपने फर्ज को बेहतरीन तरह से अंजाम देते हुए पूरे प्रदेश में आठवां स्थान हासिल किया है। यूपी 112 के नोडल अधिकारी के रूप में वह भी शामिल थे। यह उनकी शानदार उपलब्धि है।

इस अवसर पर एसपी सिटी ने संगठन के सभी पदाधिकारियों का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस प्रशासन लगातार सहयोग देते हैं। एसपी को सम्मानित करने वालों में उत्तर प्रदेश मानव अधिकार वेलफेयर संगठन जिला अध्यक्ष नदीम अहमद, सलीम अहमद, मौ.आसिफ, ऋषभ भाटिया, सचिव अफजाल अहमद, जिला उपाध्यक्ष मुस्तकीम अहमद आदि शामिल रहे।

मंजुल मयंक ने संभाला राजकीय आईटीआई बिजनौर के प्रधानाचार्य का पद

34 वर्ष की सेवा के बाद सेवानिवृत्त मुकेश कुमार शर्मा को भावभीनी विदाई

बुलंदशहर से स्थानांतरित मंजुल मयंक होंगे राजकीय आईटीआई बिजनौर के नए प्रधानाचार्य

बिजनौर। लगभग 34 वर्ष की शासकीय सेवा एवं सेवानिवृत्ति की आयु पूर्ण कर 31 जुलाई 2022 को राजकीय आईटीआई बिजनौर के प्रधानाचार्य मुकेश कुमार शर्मा सकुशल सेवानिवृत्त हो गए। शासन द्वारा राजकीय आईटीआई बिजनौर प्रधानाचार्य के पद पर राजकीय आईटीआई बुलंदशहर के प्रधानाचार्य मंजुल मयंक का स्थानांतरण किया गया है।

31 जुलाई को राजकीय आईटीआई बिजनौर के हॉल में आयोजित एक सादे समारोह में प्रधानाचार्य मुकेश कुमार शर्मा को उपस्थित समस्त स्टाफ द्वारा भावभीनी विदाई दी। इसी दौरान मंजुल मयंक ने प्रधानाचार्य के पद पर कार्यभार ग्रहण किया। इस अवसर पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए नवागंतुक प्रधानाचार्य मंजुल मयंक ने कहा शासन की मंशा के अनुरूप व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग द्वारा दिए गए लक्ष्यों को शत प्रतिशत पूर्ण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आईटीआई कर चुके सभी अभ्यर्थियों के लिए अप्रेंटिस एवं रोजगार की व्यवस्था कराए जाने हेतु अप्रेंटिस एवं रोजगार मेले अधिक से अधिक संख्या में लगाकर रोजगार के अवसरों को और बढ़ाया जाएगा। इस अवसर पर संजय किशोर, उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ के जिला अध्यक्ष राकेश शर्मा, सनी तोमर, प्रहलाद सिंह, मोहम्मद फुरकान, श्रीमती ज्योत्सना, श्रीमती आसमा जमील, इकबाल हसन, अनुज यादव, अमित कुमार शर्मा, प्रकाश सिंह, दीपक चौधरी, हरीश चंद्र गुप्ता, कमल वीर सिंह, श्रवण कुमार गुप्ता, बृजेश कुमार खरवार, श्याम सिंह, मोहम्मद रियाज, सोनू मारकंडेय चौरसिया, चौधरी महेंद्र सिंह, सुरेश पाल सिंह, चारुदत्त आर्य, अरविंद कुमार, धर्मेंद्र कुमार आदि की उपस्थिति महत्वपूर्ण रही।

बिजनौर में चार थानाध्यक्ष समेत 16 दरोगा बने इंस्पेक्टर

चार थानाध्यक्ष समेत बिजनौर में तैनात 16 दरोगा बने इंस्पेक्टर। एसपी ने स्टार लगा कर दी बधाई।

बिजनौर। जिले में तैनात 16 दरोगा एक साथ इंस्पेक्टर बन गए हैं। पुलिस लाइन में एसपी दिनेश सिंह ने सभी को स्टार लगाकर उनके उज्ववल भविष्य की कामना की। जिले में एक साथ 16 दरोगा के इंस्पेक्टर बनने से पुलिस विभाग में खुशी का माहौल है।

कंधे पर स्टार लगा कर एसपी ने दी बधाई-
बुधवार को पुलिस लाइन में जिले में अलग-अलग जगह तैनात 16 उप निरीक्षक को इंस्पेक्टर के पद पर प्रोन्नत होने पर एसपी दिनेश सिंह ने सभी को बधाई दी। पुलिस लाइन में मौजूद सभी 16 दरोगा के कंधे पर एक-एक स्टार लगाकर उन्हें बधाई दी। उनके उज्ववल भविष्य की कामना की।

दरोगा जो बने इंस्पेक्टरथानाध्यक्ष बढ़ापुर अनुज तोमर, मंडावली नरेंद्र गौड़, मंडावर संजय कुमार, स्योहारा राजीव चौधरी, एसएसआई बिजनौर सुनील कुमार, एसएसआई स्योहार संजीव कुमार, ओमवीर सिंह, सत्येंद्र सरोहा, प्रेमपाल सिंह, बाबूराम, किरनपाल सिंह, नरेंद्र कुमार, राजेश कुमार, वीरेंद्र, राजेंद्र कुमार व विनोद कुमार मिश्रा प्रोन्नति के बाद इंस्पेक्टर बन गये हैं। इस मौके पर एसपी सिटी डॉक्टर प्रवीन रंजन सिंह, सीओ ट्रेनिंग व अन्य पुलिस स्टाफ मौजूद रहा।

विधानसभा अध्यक्ष ने किया वरिष्ठ सदस्यों को सम्मानित

लखनऊ (पंचदेव यादव)। उत्तर प्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने मंगलवार को विधान सभा के वरिष्ठ सदस्यों को सम्मानित करते हुए एक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम में 5 बार या उससे अधिक चुनाव जीत कर आये वरिष्ठ सदस्यों से विधान सभा की गरिमा को और बढ़ाये जाने पर विचार विमर्श किया। इस अवसर पर उन्होनें कहा कि मेरा प्रयास होगा विधानसभा की गरिमा बनी रहे। जनता अगर हमे सदन भेज रही है उस सम्मान को बनाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।


विधान सभा अध्यक्ष ने कहा कि राजनीतिक विचारधारा अलग हो सकती है पर वरिष्ठों का सम्मान बना रहना चाहिए। मेरा प्रयास होगा कि सभी सदस्यों से सीधा संवाद हो, जिससे विधान सभा को और अच्छा किया जाय सके। इसलिए इस तरह का संवाद कार्यक्रम शुरू किया है। हम चाहते हैं कि समाज में जनप्रतिनिधियों के प्रति सकारात्मक भाव पैदा हो क्योंकि इस विधानसभा में हर तरह की मेधा के लोग है। विधान सभा अध्यक्ष ने कहा कि हम चाहते हैं कि विधायकों की गरिमा और बढ़े, हमारे सदस्यों को राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों में अवसर मिले जिससे उत्तर प्रदेश की पहचान बने।

संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने महाना जी को हार्दिक बधाई देत हुए कहा कि आपने कई नई परम्पराएं डाली हैं। एक भी दिन विधानसभा स्थगित नहीं हुई और कोई भी सदस्य वेल में नहीं आया। इसके साथ ही सत्र के दौरान सदस्यों के जन्म दिन के मनाने की भी नई परम्परा की शुरूआत की। श्री खन्ना ने कहा कि ग्रुप बनाकर विधायकों के साथ शुरू किया गया संवाद का कार्यक्रम एक बहुत ही सुखद संकेत है। राजनीतिक व्यक्ति की छवि का समाज पर बहुत असर पड़ता है। हम सभी वरिष्ठों को नए सदस्यों को रास्ता दिखाना है। संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि विधायिका के प्रति हमे जनता की सोच को बदलना है। विधानसभा सबसे बड़ा चर्चा व परिचर्चा तथा विचार का मंच है। इसी से हम सभी जनता के प्रति अपने सेवा भाव के उद्देश्य को प्राप्त कर सकते हैं।

संवाद कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए विधान सभा के पूर्व अध्यक्ष माता प्रसाद पाण्डेय ने कहा कि यह खुशी की बात है कि श्री महाना ने नयी परिपाटी की शुरूआत की है। इस तरह के कार्यक्रम से सदन को लाभ मिलेगा। हम सभी सदस्यों को मिलकर विधान सभा अध्यक्ष को और ताकतवर बनाना है, जिससे उनका सम्मान बना रहे। श्री पाण्डेय ने कहा कि सत्तापक्ष और विपक्ष में मतभेद हो सकता है लेकिन सदन और अध्यक्ष का सम्मान बनाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। आज जिस तरह से वरिष्ठ सदस्यों का सम्मान किया गया उसके लिए विधान सभा अध्यक्ष धन्यवाद के पात्र है। पूर्व विधान सभा के अध्यक्ष ने कहा कि श्री महाना ने बहुत अच्छी तरह से सदन को चलाया और सभी सदस्यों को बोलने का मौका दिया। यह एक अच्छी परम्परा है।

इस क्रम में वरिष्ठ सदस्य अवधेश प्रसाद ने अपने अनुभव साझा किये और कहा कि महाना जी ने जो शुरुआत की है। उसे भविष्य में इतिहासकार लिखेंगे। 1977 जब पहली बार चुनकर आया था, तब से अब तक कई विधानसभा अध्यक्ष देखें हैं पर श्री महाना की कार्यशैली अनूठी है। पहली बार सदन स्थगित नहीं हुआ और लगभग सभी सदस्यों को बोलने का मौका मिला जिससे प्रदेश में एक अच्छा संदेश गया। श्री प्रसाद ने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सुखद संयोग से रचनात्मक सुझाव सामने आए, जिससे प्रदेश के विकास के रास्ते खुल रहे हैं। लोकतंत्र की जड़े और मजबूत हो रही हैं। यह एक बहुत अच्छी पहल है। इसी तरह सत्ता पक्ष विपक्ष मिलकर काम करते रहें, यही प्रदेश की जनता को अपेक्षा है।

इस दौरान रघुराज प्रताप सिंह राजा राजा भैया ने कहा कि आज जितने सदस्य यहां मौजूद हैं, उन सभी ने विधान सभा अध्यक्ष के इस कार्य को सराहा है। उत्तर प्रदेश की विधानसभा अपना पुराना गौरव प्राप्त करे। ये तभी संभव होगा जब अधिक से अधिक सदन चले। उन्होंने कहा कि जितना अधिक सदन चलेगा। उतना ही इस सदन के सदस्यों की गरिमा बढ़ेगी। विधानसभा में जो बदलाव हो रहा है वह सब अध्यक्ष की विलक्षण प्रतिभा का परिचायक है।
वहीं शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि आप बधाई के पात्र हैं, जो आपने वरिष्ठों को सम्मानित करने का काम किया है। यह पहली बार हुआ है। श्री यादव ने कहा कि यदि जनता बार बार जिताकर भेज रही है तो ऐसे लोगों का जनता के बीच कहीं न कहीं सम्मान है। ऐसे लोगों ने जरूर जनता से अपना वादा पूरा किया है। यू0पी0 विधानसभा को फिर से गौरव मिल सके इसके लिए हम सबको मिलकर काम करना पडेगा। यू0पी0 विधानसभा की मिसाल पूरे देश में दी जाती रही है।


श्री लालजी वर्मा ने कहा कि वरिष्ठ सदस्यों को जो आज सम्मान दिया गया इसके लिए हम सभी अध्यक्ष के आभारी हैं। इस नई शुरुआत के लिए बधाई। श्री वर्मा ने कहा कि आपसी विचार विमर्श से संसदीय परंपराएं मजबूत होंती हैं और नए सदस्यों को संसदीय परंपराओं की जानकारी देना हम सब वरिष्ठों की जिम्मेदारी है। हम सबको संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करना चाहिए। ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि अध्यक्ष जी के व्यवहार और स्वभाव से हम सब प्रभावित हैं। उन्होंने लीक से हटकर जो नई परंपरा शुरू की है, वह अपने आप में अनूठी है। लोकतंत्र में लोक और लाज का महत्व होता है। संसदीय व्यवस्था में संवाद बहुत आवश्यक है। उत्तर प्रदेश देश का हृदय है। इसलिए इसे मजबूत रखने की जरूरत है। ये परपरा बनी रहनी चाहिए। ये हमारा सम्मान नहीं, आपका भी सम्मान है। जय प्रताप सिंह ने कहा कि इस कार्यक्रम से एक अच्छा संदेश जाएगा। सत्र के दौरान जनता की समस्याओं को कैसे उठाया जाए, नए सदस्यों को और सीखने की जरूरत है। इस तरह के कार्यक्रम से नये सदस्यों को प्रेरणा मिलेगी। आपसी बहस से नया रास्ता निकलता है।
सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि विधान सभा में सबको बोलने का अवसर देकर अनुशासन बनाए रखना लोकतंत्र की पहचान रही है। पहली बार  विपक्ष शालीन तरीके से अपनी भूमिका निभा रहा है। वरिष्ठों सदस्यों को सम्मान दिया जा रहा है, जिससे एक नया इतिहास बन रहा है। विधानसभा परिसर के सुन्दरीकरण से लेकर सदन को डिजिटल बनाने तक किया गया कार्य सरहनीय है।। महबूब अली ने कहा कि महाना जी ने सदन को पहली बार में ही सुचारू रूप से चलाने का काम किया है। रमापति शास्त्री ने कहा कि यह हमारा सम्मान नहीं, देवतुल्य कार्यकर्ताओं का सम्मान है जिसे उन तक पहुंचाऊंगा।


इस मौके पर विधान सभा अध्यक्ष श्री महाना ने कार्यक्रम में उपस्थित अरविन्द गिरि, पूरन प्रकाश, श्रीराम चौहान, बावन सिंह, फरीद महफूज किदवई, धर्मपाल सिंह, मयंकेश्वर शरण सिंह, राम चन्द्र यादव व कार्यालय कक्ष में चौधरी लक्ष्मी नारायण, राम कृष्ण भार्गव सहित सभी वरिष्ठ सदस्यों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर विधान सभा के प्रमुख सचिव प्रदीप कुमार दुबे व अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

अब दिन रात कभी भी फहरा सकेंगे राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने “भारतीय झंडा संहिता” में संशोधन किया है। जिसके अंतर्गत अब राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा को दिन में और रात में फहरा सकते हैं। नये नियम के अनुसार अब पोलिस्टर एवं मशीन के द्वारा बनाए गए तिरंगे का भी उपयोग किया जा सकेगा।

इस बार सरकार आजादी के पर्व को एक अलग ही अंदाज में मनाने जा रही है। आपको बता दें कि इस बार आजादी के अमृत महोत्सव’ के तहत सरकार 13 से 15 अगस्त तक ‘हर घर तिरंगा’ कार्यक्रम की शुरुआत करने जा रही है। इस कार्यक्रम की सफलता के लिए शासन प्रशासन पूरी लगन के साथ जुटा है।

सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के सचिवों को लिखे एक पत्र में केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का प्रदर्शन, फहराना और उपयोग भारतीय झंडा संहिता, 2002 और राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के तहत आता है। जिसके अनुसार भारतीय झंडा संहिता, 2002 में 20 जुलाई, 2022 के एक आदेश के जरिए संशोधन किया गया है।

अब भारतीय झंडा संहिता, 2002 के भाग-दो के पैरा 2.2 के खंड (11) को अब इस तरह पढ़ा जाएगा- ‘जहां झंडा खुले में प्रदर्शित किया जाता है या किसी नागरिक के घर पर प्रदर्शित किया जाता है, इसे दिन-रात फहराया जा सकता है। इससे पहले, तिरंगे को केवल सूर्योदय से सूर्यास्त तक फहराने की अनुमति थी। झंडा संहिता के बदले गए प्रावधान में अब  ‘राष्ट्रीय ध्वज हाथ से काता और हाथ से बुना हुआ या मशीन से बना हुआ/कपास/पॉलिएस्टर/ऊन/ रेशमी खादी से बना होगा। इससे पहले, मशीन से बने और पॉलिएस्टर से बने राष्ट्रीय ध्वज के उपयोग की अनुमति नहीं थी।

एसीसीए यूनाइटेड किंगडम की परीक्षा उत्तीर्ण कर प्रिया सिंह ने बढ़ाया बिजनौर का मान

बिजनौर। कोतवाली देहात क्षेत्र के ग्राम शादीपुर निवासी प्रिया सिंह ने एसीसीए यूनाइटेड किंगडम की परीक्षा उत्तीर्ण की है। प्रिया सिंह की उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में हर्ष व्याप्त है।

ग्राम शादीपुर निवासी इंजीनियर युवराज सिंह की पत्नी प्रिया सिंह ने सन 2017 में चार्टर्ड अकाउंटेंट की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इसके बाद वह एसीसीए यूनाइटेड किंगडम की परीक्षा की तैयारी कर रही थीं। प्रिया सिंह ने बताया कि ऑनलाइन संपन्न हुई इस परीक्षा को देश भर के चुनिंदा सीए ही उत्तीर्ण कर पाए हैं। यह परीक्षा चार्टर्ड अकाउंटेंट की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद दी जाती है। प्रिया सिंह की उपलब्धि से क्षेत्र में हर्ष व्याप्त है। वह जिला सहकारी बैंक के पूर्व चेयरमैन  स्वर्गीय राजेंद्र पाल सिंह की पुत्रवधू हैं। प्रिया सिंह के परीक्षा उत्तीर्ण करने की खबर सुनते ही क्षेत्र वासियों एवं ग्रामवासियों का उनके निवास शादीपुर पर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा।

पैतृक गांव में भी हर्ष का माहौल-  प्रिया सिंह के पैतृक गांव नारायणपुर में उनके पिता बिजेंद्र सिंह को भी उनकी पुत्री की इस उपलब्धि पर क्षेत्रवासियों ने बधाई दी। प्रिया सिंह की इस उपलब्धि पर बिजनौर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. बीरबल सिंह ने भी उनके उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी। इस उपलब्धि पर वीरबाला देवी पत्नी स्व. राजेन्द्र पाल सिंह ने बताया कि प्रिया; हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत है। उन्होंने घर पर बधाई देने आए सभी मेहमानों का स्वागत करते हुए मिठाई वितरित की।

गौरतलब है कि1904 में स्थापित, चार्टर्ड सर्टिफाइड अकाउंटेंट एसोसिएशन (ACCA) एक वैश्विक पेशेवर लेखा निकाय है। एसीसीए का मुख्यालय लंदन में है और मुख्य प्रशासनिक कार्यालय ग्लास्गो में है। एसीसीए 52 देशों में 104 से अधिक कार्यालयों और केंद्रों के नेटवर्क के माध्यम से काम करता है – 323 स्वीकृत लर्निंग पार्टनर्स (एएलपी) और दुनिया भर में 7,300 से अधिक स्वीकृत नियोक्ता हैं।

सौजन्य से- प्रशांत कुमार

जनपद बिजनौर में समाचार, विज्ञापन एवं एजेंसी के लिए संपर्क करें, ब्यूरो चीफ सतेंद्र सिंह 8433047794

निडरता से करें समस्याओं का सामना, शासन प्रशासन महिलाओं के साथ- अवनी सिंह

राज्य महिला आयोग सदस्या की अध्यक्षता में मिशन शक्ति अभियान अन्तर्गत आयोजित हुआ महिला जनसुनवाई कार्यक्रम

महिलाएं हर समस्या का मुकाबला निडरता से करें, सरकार व प्रशासन उनके साथ खड़ा है- राज्य महिला आयोग सदस्या श्रीमती अवनी सिंह

राज्य महिला आयोग सदस्या ने मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के 04 लाभार्थियों को वितरीत किये लैपटॉप

राज्य महिला आयोग ने महिलाओं की समस्याओं के निस्तारण के लिए जारी किया मोबाईल नम्बर-सदस्या श्रीमती अवनी सिंह

बिजनौर। राज्य महिला आयोग सदस्या श्रीमती अवनी सिंह की अध्यक्षता में आयोजित मिशन शक्ति अभियान अन्तर्गत महिलाओं की समस्याओं के निराकरण के लिए विकास भवन सभागार में महिला जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित किया गया। श्रीमती अवनी सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं को सुरक्षित, सम्मानित एवं स्वावलम्बी बनाने के लिए विभिन्न प्रकार की योजनाओं का संचालन किया जा रहा है ताकि वह सशक्त व स्वावलम्बी होकर अपना आर्थिक व सामाजिक उत्थान कर सकें। इस अवसर पर 36 शिकायती व प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए। सदस्या ने मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के 04 लाभार्थियों को लैपटॉप भी वितरीत किये।

राज्य महिला आयोग सदस्या श्रीमती अवनी सिंह ने कहा कि महिलाएं हर समस्या का मुकाबला निडरता से करें। सरकार व प्रशासन उनके साथ खडा है। उन्होंने पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देशित किया कि वह महिलाओं की समस्याओं का निस्तारण सर्वोच्च प्राथमिकता पर गुणवत्तापरक ढंग से करें। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपना योगदान दे कर देश एवं समाज की सेवा कर रही हैं और अपने आत्म विश्वास एवं मेहनत से अपना उत्कृष्ट स्थान बना रही हैं।

श्रीमती अवनी सिंह ने बताया कि महिलाओं की समस्याओं के निस्तारण के लिए आयोग ने मो0 नम्बर जारी किया है। उन्होंने कहा कि महिलाएं राज्य महिला आयोग के मो0 नम्बर 6306511708 पर अपनी शिकायतें भेज सकती हैं, जिनका निस्तारण सुनिश्चित कराया जाएगा।

जिला प्रोबेशन अधिकारी संजय कुमार ने बताया कि सरकार द्वारा महिलाओं के सामाजिक व आर्थिक उत्थान तथा उनको स्वावलम्बी व सशक्त बनाने के लिए विभिन्न कल्याणकारी व लाभार्थीपरक योजनाए संचालित की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि निराश्रित महिला पेशन दी जा रही है तथा 181 हेल्पलाईन नम्बर व वन स्टॉप सेन्टर के माध्यम से भी महिलाओं की समस्याओं का निस्तारण कराया जा रहा है।

जिला प्रोबेशन अधिकारी संजय कुमार ने बताया कि महिला जनसुनवाई के दौरान प्राप्त शिकायती व प्रार्थना पत्रों में 08 घरेलु हिंसा, 11 आवास संबंधी, 02 पेंशन के संबंध में व 15 अन्य प्रकरण प्राप्त हुए सभी के गुणवत्तापरक निस्तारण के निर्देश सदस्या राज्य महिला आयोग द्वारा पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को दिये गये। सदस्या ने कोविड से अनाथ हुए बच्चों के सहायतार्थ चलायी जा रही मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के कक्ष 9 व उससे आगे की कक्षाओं में अध्यनरत 04 बच्चों को लैपटॉप का वितरण भी किया।

इस अवसर पर सचिव विधिक सेवा प्राधिकरण प्रतिनिधि वन स्टॉप सेन्टर, जिला प्रोबेशन अधिकारी संजय कुमार सहित अन्य प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।

वर्दी के पीछे धड़कता मासूम सा दिल

मानवता की बेहतरीन मिसाल कायम कर रहे आजमगढ़ के एएसपी सिटी

दीपक कुमार की विशेष रिपोर्ट 

लखनऊ। कहते हैं मानवता की सेवा करने के लिए दिल में  जज्बातों की जरूरत होती है। इसके लिए समय और धन जरूरी तो हैं लेकिन प्राथमिक नहीं माने जा सकते। आज के आपाधापी भरे दौर में जब इंसान अपने सगे संबंधियों तक से दूरी बनाए रहता है, ऐसे में एएसपी सिटी के पद पर आजमगढ़ में तैनात शैलेन्द्र लाल मानवता की बेहतरीन मिसाल कायम कर रहे हैं।


एक विशेष बातचीत में उन्होंने बताया कि उन्हें हमेशा से ही पशु पक्षी और प्रकृति से लगाव रहा है। मेरे यहां बगीचा है, साग सब्जी होती है। बंदर उनका कुछ भी नुकसान नहीं करते। एक फूल भी नहीं तोड़ते। जो साग सब्जी होती है, हम और बंदर के लिए काफी हो जाती है; दोनों खुश…।

जनपद लखीमपुर खीरी में तैनाती के दौरान उनके घर के बाहर कई गाय व कुत्ते आदि आते थे, इसलिए उनके लिए वे घर के बाहर चारा / खाना और पानी रखने लगे। यही नहीं चिड़ियों के लिए भी दाना और पानी की भरपूर व्यवस्था रहती।
उन्हें हमेशा से ही पशु पक्षियों के प्रति बेहद लगाव रहा है।  सहारनपुर में तैनाती के दौरान उन्होंने अलग-अलग किस्म के चार कुत्ते भी पाल रखे थे।


जब पोस्टिंग नोएडा में हुई, तब भी कई जानवर उनके घर आते थे। इस दौरान एक बंदर ने दोस्ती कर ली। वह घर आता था और जब पत्नी सब्जी लेने जाती थी तो कांधे पर आके बैठा जाता था।

यहां यह बताना भी समीचीन होगा कि इनकी गिनती एक तेज तर्रार पुलिस अधिकारी के तौर पर होती है। जनपद मुख्यालय बिजनौर के मोहल्ला जाटान में वर्ष 2014 में हुए बम विस्फोट कांड के दौरान सीओ सिटी रहे शैलेन्द्र लाल को एक तेज तर्रार पुलिस अफसर के तौर पर जाना पहचाना जाता है। सूचना मिलते ही घटनास्थल पर तत्काल वह न केवल खुद पहुंचे, बल्कि घटना के संबंध में पूरी जानकारी भी जुटाई। मामला बेहद ही खूंखार आतंकवादी संगठन सिमी से जुड़ा हुआ था।

अब फोटोज देखकर उनके पशु एवं प्रकृति प्रेम के प्रति कुछ भी कहना, लिखना बेमानी ही होगा। किस कदर अकेले एक बंदर हो या झुंड में परिवार सहित…बड़े प्रेम से खाते पीते हैं और चले जाते हैं। किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं करते।

परिचयमूल रूप से जनपद उरई जालौन निवासी इनके पिता यूपी कैडर 1971 बैच के आईपीएस अफसर थे, लिहाजा इनकी अधिकांश पढ़ाई हॉस्टल में रहकर ही हुई। सेंट जोसेफ कॉलेज नैनीताल से कक्षा 10 तक पढ़ने के बाद उन्होंने डीपीएस आरकेपुरम नई दिल्ली से इंटरमीडिएट किया। दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। बिजनौर में तैनाती के दौरान विवेक कॉलेज में एडमिशन लेकर रुहेलखंड विश्वविद्यालय से एलएलबी कंप्लीट किया। पत्नी दिल्ली हाईकोर्ट में वकालत करती हैं जबकि पुत्री जर्मनी में जॉब कर रही है। इनके बेटे का सेलेक्शन आईबी में असिस्टेंट इंटेलिजेंस ऑफिसर के तौर पर हुआ है। परिवार प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रहता है।

कमिश्नर व डीएम ने देखी केले की विशेष फसल

बिजनौर। मंडल आयुक्त आंजनेय कुमार सिंह एवं जिलाधिकारी उमेश मिश्रा द्वारा किसान पाठशाला के फाउंडर मेंबर एवं प्रगतिशील किसान राहुल चौधरी के केला प्रक्षेत्र का भ्रमण किया गया।

इस अवसर पर राहुल चौधरी द्वारा अवगत कराया गया कि वह रेजिडू फ्री केला का उत्पादन करते हैं। इस प्रकार के केला उत्पादन के लिए सर्वप्रथम आवश्यक पोषक तत्वों की आपूर्ति हेतु रासायनिक उर्वरकों को गोबर की खाद में मिलाकर 8 से 10 दिन ढक कर रखना पड़ता है, जिससे रासायनिक उर्वरकों की बॉन्डिंग टूट जाए और उपलब्ध पोषक तत्व पौधों के लिए सुलभ एवं उपयोगी हो सके। इस प्रक्रिया से रासायनिक उर्वरकों में हानिकारक तत्वों का प्रभाव कम हो जाता है तथा उर्वरकों की आधी मात्रा ही देनी पड़ती है। साथ ही मिट्टी के घोल का छिड़काव फसल पर करने से कीट और रोग का प्रकोप नहीं होता है और इससे पौधों को पोषक तत्व भी उपलब्ध होता है।

गुणवत्ता व अधिक उत्पादन के लिए बंच प्रबंधन जरूरी- आयुक्त एवं जिलाधिकारी द्वारा खेत में जाकर केले की फसल देखी गई और प्रत्येक पौधे पर स्वस्थ एवं पर्याप्त फलियों वाली घेर पाई गई। कृषक राहुल चौधरी द्वारा अवगत कराया गया कि केले की गुणवत्ता एवं अधिक उत्पादन सुनिश्चित करने हेतु बंच प्रबंधन बहुत ही आवश्यक है, इस प्रक्रिया में केले के नीचे के तने की गोलाई के एक चौथाई के बराबर केले के पंजे को रखना चाहिए और शेष को नीचे के फूल सहित तोड़ देना चाहिए।

इस प्रक्रिया से नीचे से ऊपर तक की फलियां एक समान लंबाई और मोटाई की होंगी और हमें गुणवत्ता के साथ-साथ केले का अधिक उत्पादन भी प्राप्त होगा। आयुक्त द्वारा केले के उत्पादन से संबंधित संपूर्ण प्रक्रिया की विस्तार से जानकारी प्राप्त की गई और सड़क के किनारे प्रक्षेत्र चयन को सराहा गया और अवगत कराया गया कि सड़क के किनारे स्थित खेतों में हमें नगदी फसलों का उत्पादन करना चाहिए क्योंकि इससे परिवहन में काफी सुविधा होती है साथ ही ड्रिप और स्प्रिंकलर इरिगेशन को भी प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए गए।

अच्छे कार्य के लिए किसानों का सम्मान- आयुक्त एवं जिलाधिकारी द्वारा केले के प्रक्षेत्र पर ही लखनऊ में आयोजित उत्तर प्रदेश आम महोत्सव 2022 में प्रदेश स्तर पर प्रथम पुरस्कार प्राप्त करने वाले डीके शर्मा बिजनौर, मौन पालन एवं शहद उत्पादन में उल्लेखनीय कार्य करने पर उदित प्रकाश ग्राम पीपला जागीर, नूरपुर तथा जैविक कृषि एवं मृदा परीक्षण प्रयोगशाला की स्थापना करने वाले ब्रह्मपाल सिंह ग्राम अगरी हल्दौर को शाल ओढ़ाकर एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। केला उत्पादन एवं प्रदेश स्तर पर केले के उत्पादन को प्रोत्साहित करने वाले राहुल चौधरी को भी शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।

आयुक्त द्वारा यह भी अवगत कराया गया कि क़ृषि क्षेत्र में नवोन्मेशी एवं विशिष्ट कार्य कर रहे किसानों को सम्मानित करने से किसानों को और अच्छा कार्य करने का प्रोत्साहन मिलता है। अच्छे कार्य करने वाले किसानों का सम्मान होना ही चाहिए। जिलाधिकारी द्वारा इस अवसर पर जनपद में उल्लेखनीय एवं विशिष्ट कार्य करने वाले किसानों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई तथा अवगत कराया गया कि विगत 3 माह से जनपद में नवोन्मेशी व विशिष्ट कार्य करने वाले कृषकों व उद्यमियों को सम्मानित करने की एक श्रृंखला चलाई जा रही है, जिससे जनपद में अच्छे कार्य करने वाले कृषक स्वतः आगे आ रहे हैं और नवीन कृषि पद्धतियों को अपनाने हेतु कृषकों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

इस अवसर पर गिरीश चंद उप कृषि निदेशक, डॉ अवधेश मिश्रा जिला कृषि अधिकारी, जितेंद्र कुमार जिला उद्यान अधिकारी, मनोज कुमार उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी बिजनौर, उप जिलाधिकारी मोहित कुमार, खंड विकास अधिकारी वीरेंद्र सिंह यादव, सुनील कुमार व सचिन कुमार विषय वस्तु विशेषज्ञ तथा ग्राम प्रधान श्रीमती सहित 65 दर्शक उपस्थित रहे।

आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति संरक्षण अभियान; वरिष्ठ कथाकार चित्रा मुद्गल जी के विचार

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आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति संरक्षण अभियान के संदर्भ में वरिष्ठ कथाकार चित्रा मुद्गल जी के विचार। उनकी फेसबुक वॉल से…

गांधी शांति प्रतिष्ठान की 9 जुलाई 2022 की सांझ समर्पित थी हिंदी को गढने, स॔वारने और उसे विषय गत वैविध्य से समृद्ध करने, सरस्वती पत्रिका के माध्यम से उसे निरंतर सृजनात्मक नया उन्मेष प्रदान करने वाले युग प्रवर्तक साहित्यकार, संपादक आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के नाम।
महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मारक समिति ने अपने अनेक समर्पित गणमान्य सदस्यों और वरिष्ठ साहित्यकार और पत्रकार गौरव अवस्थी के दायित्वपूर्ण देखरेख और संचालन में, अपने 25 वर्षों का सार्थक और सक्रिय सफर पूरा किया है। इस स्वागत योग्य संकल्प के साथ कि यह वर्ष महावीर प्रसाद द्विवेदी के जयंती वर्ष के रूप में मनाया जाएगा देश के कोने कोने में और उसकी पहली कड़ी का आरंभ हो रहा है, देश की राजधानी दिल्ली से।
अचानक अस्वस्थ होने के चलते गौरव अवस्थी जी की अनुपस्थिति में, मीडिया विशेषज्ञ, पत्रकार श्री अरविंद सिंह जी ने पूरे समय उनकी अनुपस्थिति को अपनी सरस उपस्थिति के चलते महसूस नहीं होने दिया।

बैसवाड़ा के साहित्य प्रेमियों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश और विश्व भर में फैले हिंदी प्रेमियों के लिए यह सूचना हर्ष और गौरव का विषय है।
महावीर प्रसाद जयंती वर्ष के शुभारंभ के साथ ही 9 जुलाई की यह सांझ साक्षी बनी देश के प्रतिष्ठित जाने-माने पत्रकार त्रिलोक दीप जी के सम्मान के साथ, वरिष्ठ पत्रकार रहे साहित्य तक के प्रस्तोता श्री जय प्रकाश पांडे जी के साथ देश के कोने-कोने से आए अपने-अपने क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान देने वालों विशिष्ट जनों को आदर पूर्वक सम्मानित करने का भी।…

एसपी डॉ धर्मवीर सिंह को भावभीनी विदाई

बिजनौर। एसपी डॉ धर्मवीर सिंह का स्थानांतरण मेरठ पीएसी के लिए होने के बाद पुलिस लाइंस में आयोजित एक कार्यक्रम में अधिकारियों ने भावभीनी विदाई दी।

आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय पुरस्कार 9 जुलाई को

लखनऊ। आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति संरक्षण अभियान के रजत जयंती वर्ष पर समारोह की श्रंखला नई दिल्ली के गांधी शांति प्रतिष्ठान के सभागार में 9 जुलाई 2022 दिन शनिवार को प्रारंभ होने जा रही है।
राष्ट्रीय आयोजन समिति के संयोजक वरिष्ठ पत्रकार गौरव अवस्थी ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि समारोह की मुख्य अतिथि प्रसिद्ध कथाकार श्रीमती चित्रा मुद्गल जी हैं।

समारोह में बुजुर्ग पत्रकार आदरणीय श्री त्रिलोकदीप जी को आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय पुरस्कार से पुरस्कृत किया जाएगा। उनके अतिरिक्त अन्य दिग्गज पत्रकार-साहित्यकार विभिन्न पुरस्कारों से पुरस्कृत किए जाएंगे (विस्तार से विवरण आमंत्रण पत्र में उल्लिखित है)। उन्होंने कहा कि अपने पूर्वज की स्मृतियों से जुड़ने का यह सुनहरा मौका हाथ से जाने न दें।

बिलारी मेल साप्ताहिक समाचार पत्र के संपादक आदरणीय सुरेश रस्तोगी जी को शुभकामनाएं

बिलारी मेल साप्ताहिक समाचार पत्र के संपादक आदरणीय सुरेश रस्तोगी जी वरिष्ठ पत्रकार (30-बिलारी विधानसभा क्षेत्र) मुरादाबाद मंदिर पूर्णा खेड़ा पर एक धार्मिक आयोजन में अपनी सेवाएं देते हुए….

वरिष्ठ पत्रकार सुरेश रस्तोगी जी

कर्तव्यनिष्ठ और पूर्ण लगन के साथ आपने श्री खाटू श्याम जी के कार्यक्रम में सेवादारी की।  सेवा का ये जज्बा अपने आप में काबिले तारीफ है। आप वरिष्ठ पत्रकार होने के साथ-साथ धर्म प्रेमी और समाजसेवी भी हैं। जय हिंद जय भारत।

मैं संजय सक्सेना जिला अध्यक्ष ऑल मीडिया & जर्नलिस्ट एसोसिएशन बिजनौर आपके उज्जवल भविष्य और दीर्घायु होने की कामना करता हूं।

संजय सक्सेना जिला अध्यक्ष ऑल मीडिया & जर्नलिस्ट एसोसिएशन बिजनौर

घास की चिता पर जली थी झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की निर्जीव देह

164वें बलिदान दिवस (18 जून) पर विशेष

1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम में जान की कुर्बानी देने वाले योद्धाओं की शौर्य गाथाएं खूब गाईं गईं। सैकड़ों लोकगीत, नाटक, उपन्यास और अनेक भाषाओं में शूरवीरों के जीवन चरित्र लिखे गए लेकिन ब्रिटिश हुकूमत के अत्याचारों के डर से लोकगीत दबी जुबान ही गाए जाते थे। खुलकर इन्हें गाने की हिम्मत अच्छे-अच्छों में नहीं थी। स्वाधीन भारत में अंग्रेजों के छक्के छुड़ाने वाली झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की वीरता-शूरता का इतिहास लिखना आसान था। महाश्वेता देवी से लेकर सैकड़ों लेखकों ने लेखनी चलाई लेकिन ‘सिपाही विद्रोह’ या ‘गदर’ कहे गए 1857 के भीषण संग्राम पर गुलामी के दौर में कलम उठाना उतना ही खतरे से खाली नहीं था, जितना सिपाही विद्रोह में कृपाण उठाना।


यह वह दौर था जब अंग्रेज लेखक अपने अत्याचारों पर पर्दा डालने के लिए गदर का मनमाना इतिहास लिखकर भारतीयों की हिंसात्मक कार्यवाही को बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर रहे थे। अप्रतिम वीर और भारतीय जनमानस पर अमिट छाप छोड़ने वाली झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के बारे में दुष्प्रचार किया जा रहा था कि विद्रोह के समय अंग्रेजों को सहायता देनी कबूल की। उनके चरित्र को इस तरह चित्रित किया गया कि मानो झांसी की रानी बिना चाहे ही अंग्रेजों से लड़कर वीर नारी बन गई हों।
ऐसे वक्त में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी गदर के संबंध में अंग्रेजी लेखकों द्वारा लिखे जा रहे/ लिखे गए ‘झूठे’ इतिहास को कैसे बर्दाश्त कर सकते थे? उन्हें सरस्वती का संपादन संभाले हुए एक साल ही बीता था। प्रेस मालिकों के नियम और अंग्रेजी कानूनों के डर के बीच अंग्रेज़ों के झूठ के पदार्फाश और झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की वीरता-शूरता को हिंदी भाषी समाज के सामने लाने की उत्कंठा अंदर से रोज-ब-रोज जोर मार ही रही थी। उसी बीच उन्हें झांसी की रानी पर मराठी लेखक दत्तात्रेय बलवंत‌ पारसनीस की मराठी में लिखी पुस्तक ने रास्ता दिखाया। पुस्तक पढ़ने के बाद झांसी की रानी की वीरता पर अंग्रेज हुकूमत द्वारा फैलाए गए भ्रम को दूर करने के लिए पारसनीस की नीति अपनाते हुए ही उन्होंने 1904 में सरस्वती के जनवरी और फरवरी अंक में पर क्रमश: दो लेख ‘झांसी की रानी लक्ष्मी बाई’ प्रकाशित किए।


द्विवेदी जी ने सरस्वती में लिखे गए अपने पहले लेख के साथ झांसी के किले और रानी के महल के दो चित्र भी लगाए। दूसरी किस्त के साथ झांसी के म्यूटिनी के स्मारक का चित्र और एक चित्र रानी के युद्ध का, जिसमें रानी एक हाथ में तलवार और दूसरे में भाला लिए अंग्रेजों पर वार करती हुई दिखाई गई हैं। चित्र के नीचे कैप्शन दिया गया कि ग्वालियर के एक पुराने चित्र से सरस्वती के लिए यह फोटोग्राफ उतारा गया है। इन लेखों को सुंदर ढंग से सजाकर छापने में द्विवेदी जी ने काफी परिश्रम भी किया।
उन्होंने पारसनीस की चार सौ पृष्ठ की पुस्तक के आधार पर लेखों में विद्रोही सिपाहियों को दुष्ट कहा। बच्चों की प्रचारित हत्या की निंदा की और झांसी की रानी की वीरता की प्रशंसा। द्विवेदी जी ने पारसनीस के प्रमाण संग्रह और इतिहास के अध्ययन की प्रशंसा करते हुए लेख की शुरूआत पारसनीस की पुस्तक के प्रभाव का महत्व स्वीकार करते हुए इस तरह की-‘इस पुस्तक को पढ़कर लक्ष्मीबाई का अतुल पराक्रम, उनका अतुल धैर्य और उनकी अतुल वीरता आंखों के सम्मुख आ जाती है। ऐसी वीर नारी इस देश में क्या और देशों में भी शायद ही हुई होगी।’ हालांकि, सर एडविन अर्नाल्ड ने लक्ष्मी बाई की उपमा फ्रांस की प्रसिद्ध बाला जोन आप आर्क से दी है। लक्ष्मीबाई को परास्त करने वाले सर ह्यूरोज ने भी रानी की वीरता की प्रशंसा की है। द्विवेदी जी लिखते हैं कि ऐसी पुस्तक लिख कर पारसनीस ने इस देश के साहित्य का बड़ा उपकार किया। वह पारसनीस की प्रशंसा करते हुए हिंदी पाठकों से सिफारिश करते हैं कि मराठी न आती हो तो इस एक ही पुस्तक को पढ़ने के लिए ही सही मराठी सीखें जरूर।
पारसनीस की किताब के हवाले से द्विवेदीजी ने झांसी की रानी की वीरता और संग्राम का बखान करते हुए झांसी की लड़ाई के बारे में लिखा-’23 मार्च 1818 को यह आरंभ हुआ झांसी को चारों ओर से अंग्रेजी सेना ने घेर लिया। 24 और 18 पौंडर्स नाम की तोपें शहर की दीवार पर चलने लगीं और दूसरी तोपों से बम के गोले शहर के भीतर फेंके जाने लगे। झांसी के चारों ओर जो दीवार है उसकी चौड़ाई कोई 16 फुट है। उस पर और किले के बुर्ज पर रानी साहब ने सब मिलाकर कोई 50 के ऊपर तोपें लगा दीं। उनमें से भवानी शंकर, कड़क बिजुली, घनगर्ज, नालदार आदि तोपे बड़ी ही भयंकर थीं। रानी साहब खुद युद्ध की देखभाल करने लगी और समय-समय पर अपने योद्धा और सेना नायकों को उत्साहित करने लगीं। उनके युद्ध कौशल का ही कमाल था कि अंग्रेजों ने झांसी की सेना की वीरता और युद्ध कौशल की प्रशंसा की। सर ह्यूरोज ने रानी की प्रशंसा करते हुए लिखा-‘स्त्रियां तक तोपखाने में काम करती थीं और गोला-बारूद लाने में सहायता देती थीं। अंग्रेज 11 दिन का झांसी का घेरा डाले रहे। विकट युद्ध हुआ तथापि रानी साहब के धैर्य और दृढ़ निश्चय के सामने दूसरे पक्ष की कुछ न चली।’
लेख के इस एक अंश से आपको उनके अंग्रेज हुकूमत के प्रति दृष्टिकोण का अंदाज करना आसान होगा–‘महाप्रबल और परम दयालु अंग्रेजी सरकार’ से शत्रुता करने का फल झांसी वालों को मिला। लड़ाई में जो सैनिक मारे गए, उनके अलावा अंग्रेजी फौज ने शहर में पहुंचकर प्रलय आरंभ कर दिया। एक और शहर में उसने आग लगा दी और दूसरी ओर से लड़के और स्त्रियों को छोड़कर बिजन बोल दिया। सात दिन तक लूटमार और फूंक-फांक होती रही। आठवें दिन प्रजा को अभय वचन दिया गया और जिनका कोई वारिस न था, ऐसे मृतकों के ढेर रास्ते में फूंक दिए गए। ये तमाम लोग जो मारे गए थे, निहत्थे थे और उन्होंने न तो किसी कत्लेआम में भाग लिया था न ले सकते थे।’
लेख में झांसी की रानी की वीरता का उल्लेख इस तरह है-‘उनके साथ उनकी दासी मुंदर भी एक घोड़े पर थी। उस पर एक गोरे ने प्राणहारक आघात किया। वह चिल्ला उठी। रानी साहब ने उसको मारने वाले के कंठ में एक निमिष मात्र अपनी तलवार रख दी। अंग्रेजी सेना के वीरों ने रानी साहब को कोई महाशूर सेनानायक समझकर चारों ओर से घेर लिया। इस पर भी वह जरा भयभीत नहीं हुईं। उनकी तलवार अपना काम बड़ी भी भीषणता से बराबर करती रही परंतु एक कोमल और अल्पवयस्क अबला अनेक वीरों के बीच कब तक सजीव रह सकती है? एक अंग्रेज योद्धा ने उनके सिर पर पीछे से तलवार का वार किया जिससे उनके सिर का दाहिना भाग छिल गया और एक आंख निकल आई। इस योद्धा ने रानी साहब की छाती पर किर्च का भी प्रहार किया परंतु धन्य रानी लक्ष्मीबाई की वीरता, धन्य उनका धैर्य और धन्य उनका साहस! इस दशा को प्राप्त होकर भी उन्होंने इस वीर से पूरा बदला लिया। उसे तत्काल ही उन्होंने धरा तीर्थ को भेजकर अपना जीवन सार्थक किया!! धन्य वह शौर्य और धन्य वह पराक्रम!!!
घायल रानी ने सरदार रामचंद्रराव के साथ एक झोपड़ी में प्रवेश किया। 18 जून 1858 को ग्वालियर के पास समरांगण में भारतवर्ष का महा शौर्यशाली दिव्य स्त्री रत्न खो गया। रानी साहब के सेवक और सरदारों ने एक घास की गंजी से घास लाकर उसकी चिता बनाई और उसी पर रानी साहब की निर्जीव देह रखकर उसे अग्निदेवता के अर्पण कर दिया।’ मुगल शासकों को लोहे के चने चबवाने वाले महाराणा प्रताप ने भले घास की रोटियां खाईं थीं लेकिन यह किताब प्रामाणिक रूप से बताती है कि अंग्रेजों से लड़ते-लड़ते वीरगति को प्राप्त करने वाली झांसी की रानी लक्ष्मी बाई की देह घास की चिता पर ही पंचतत्व में विलीन हुई थी। इतिहास में रुचि रखने वाले लोग भले ही इस तथ्य को जानते हों लेकिन नई पीढ़ी इस इतिहास से शायद ही परिचित होंगे।
पारसनीस से प्रभावित आचार्य द्विवेदी लिखते हैं कि यह बहुत अच्छा क्रांतिकारी साहित्य है। वैसा साहित्य है, जिसे पढ़कर भारत के नौजवान अंग्रेजी अंग्रेजी राज्य से नफरत करना सीखते थे और जिन्हें संवैधानिक तरीकों पर या अहिंसात्मक तरीकों पर विश्वास नहीं था वे लक्ष्मीबाई की तरह हथियार को उठाकर अंग्रेजों से लड़ने का प्रयत्न करते थे। आचार्य द्विवेदी झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के वास्तविक इतिहास को जानने- समझने के लिए हिंदी भाषी समाज को पारसनीस की मराठी पुस्तक पढ़ने का मंत्र दे रहे थे। वह भी भाषण या मौखिक नहीं बल्कि लेख में बाकायदा लिखकर। उस दौर में झांसी की रानी के वास्तविक इतिहास से हिंदी भाषी समाज को परिचित कराने के थोड़े से होने वाले प्रयासों में एक प्रयास आचार्य द्विवेदी का भी था। यह भारत के उन महान योद्धाओं के प्रति उनकी अपनी श्रद्धा का भी प्रमाण है। आइए! हम सब मिलकर शूरवीर झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित करें।

जय प्रथम स्वाधीनता संग्राम!!
जय झांसी की रानी लक्ष्मीबाई!!

∆ गौरव अवस्थी
रायबरेली

बेहतरीन उपलब्धि पर डीएम एसपी ने किया किसानों को सम्मानित

बेहतरीन उपलब्धि पर डीएम एसपी ने किया किसानों को सम्मानित

बिजनौर। विभिन्न प्रकार के फल, फूल व जड़ी बूटियों की खेती संबंधित कई क्षेत्र में जिले के किसानों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। उनकी इस उपलब्धि पर डीएम व एसपी ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। 

जानकारी के अनुसार नाहर सिंह ग्राम तिसोतरा, राहुल जवान ग्राम चौकपुरी, अखिलेश कुमार सिंह ग्राम अगरी एवं विपिन कुमार ग्राम मुबारक पुर तालन द्वारा क्रमशः हल्दी, केला, विभिन्न प्रकार के फूलों की खेती के अलावा शतावर व अन्य जड़ी बूटी की खेती करने के साथ ही उत्पादन, प्रसंस्करण, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग व मार्केटिंग करते हुए अपने को एक सफल उद्यमी के रूप मे स्थापित किया गया है। उनकी इस उपलब्धि पर जिलाधिकारी उमेश मिश्रा व पुलिस अधीक्षक डा धर्मवीर द्वारा सम्मानित करते हुए प्रशस्ति पत्र देकर पुरस्कृत किया गया। यह जानकारी जिला कृषि अधिकारी अवधेश कुमार मिश्रा ने दी।

आज भी राष्ट्रप्रेम जगा देती हैं अमरेश की कविताएं

पुण्यतिथि विशेष
-जनपद के कालजई साहित्यकार कवि अमर बहादुर सिंह ‘अमरेश’ की 43वीं पुण्यतिथि आज
-एक मार्च 1929 को पूरे रूप मजरे कंदरावा में हुआ था जन्म
-मलिक मोहम्मद जायसी राना बेनी माधव और महावीर प्रसाद द्विवेदी के जीवन को समाज के सामने रखा था

रायबरेली। साहित्यकार अमर बहादुर सिंह ‘अमरेश’ की आज 43वीं पुण्यतिथि है। आज ही के दिन उनका जीवन पूर्ण हुआ था। पेशे से नायब तहसीलदार रहे अमरेश जी की कविताएं आज भी राष्ट्रप्रेम जगा देती हैं। महात्मा गांधी की हत्या के बाद 13 दिन तक व्रत धारण करके 13 कविताएं लिखीं। उनमें एक रचना-‘दिल्ली तू कैसे देख सकी बापू की खून भरी छाती’ सुनकर सभाओं में लोग रोने लगते थे। विभिन्न विधाओं में कालजयी साहित्य लिखने वाले अमरेश जी को आज जनपद भुल सा चुका है।
1 मार्च 1929 को ऊंचाहार तहसील के पूरे रूप मजरे का निरहुआ में जन्म लेने वाले अमरेश जी बाल्यकाल से ही कविताएं लिखने लगे थे। पहली कविता “नागरिक कक्षा” उन्होंने कक्षा तीन में पढ़ते हुए लिखी थी। अपने जीवन के प्रारंभिक दौर में कालजई कविताएं लिखने वाले अमरेश जी उपन्यास और एकांकी, बालोपयोगी साहित्य लिखने के साथ-साथ संपादन कार्य से भी जुड़े रहे। हिंदी दैनिक स्वतंत्र भारत में उनका स्तंभ ‘गांव की चिट्ठी’ काफी लोकप्रिय रहा। जीवन के आखिरी वक्त तक वह स्वतंत्र भारत में इस कॉलम के लिए लिखते रहे।
बाद में उनका जीवन एक अनुसंधानकर्ता के रूप में भी सामने आया। उन्होंने जनपद की पहचान सूफी काव्य धारा के जनक माने जाने वाले मलिक मोहम्मद जायसी, स्वाधीनता संग्राम के महान शूरवीर राणा बेनी माधव और हिंदी के युग प्रवर्तक आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी पर भी लेखनी चलाई। एक अनुसंधानकर्ता के रूप में उनकी जायसी पर लिखी किताबें ‘कहरानामा’, ‘मसलानामा’, ‘राणा बेनी माधव’ और ‘आचार्य द्विवेदी गांव में’ काफी पसंद की गई।
जनपद के साहित्यिक आकाश के चमकते सितारे अमर बहादुर सिंह को आज जनपद भूल सा चुका है। उनकी यादें धुंधला गई हैं। कवि दुर्गाशंकर वर्मा दुर्गेश कहते हैं कि ऐसे कालजई साहित्यकार के साहित्य को पुर्नप्रकाशित कर समाज के सामने लाने की आवश्यकता है। शबिस्ता बृजेश ने कहा कि अमरेश जी की यादें जनपद के हिंदी साहित्य की धरोहर हैं। उनके पुत्र अशोक सिंह उनका साहित्य संजोए हुए हैं। वह किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश में है जो इस साहित्य की धरोहर को आगे बढ़ा सके।


कॉलोनी तो बस आई गई लेकिन यादें सुरक्षित नहीं

रायबरेली विकास प्राधिकरण ने अमर बहादुर सिंह अमरेश की स्मृति में शहर में कानपुर रोड पर वर्ष 1978 में अमरेश पुरी कॉलोनी बसाई। यह आज शहर की पॉश कॉलोनी मानी जाती है। ..लेकिन कॉलोनी का न तो अपना कोई भव्य गेट है और ना ही यहां अमरेश जी के जीवन वृत्त को प्रदर्शित करने वाला कोई शिलालेख। इससे अमरेश जी का नाम तो जीवित है लेकिन उनके जीवन वृत्त से नई पीढ़ी अपरिचित है।

आईएएस टॉपर श्रुति शर्मा को डीएम ने किया सम्मानित

बिजनौर पहुंचीं आईएएस टॉपर श्रुति शर्मा का कलक्ट्रेट में सम्मान

जिलाधिकारी ने आई0ए0एस0 टॉपर श्रुति शर्मा को किया सम्मानित

रुचि के अनुरूप ही तैयारी करें युवा: श्रुति शर्मा

बिजनौर। जनपद बिजनौर की गौरव संघ लोक सेवा आयोग (यू0पी0एस0सी0) में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली सुश्री श्रुति शर्मा को जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने कलक्ट्रेट स्थित अपने कार्यालय कक्ष मे बुके देकर व शॉल भेट कर सम्मानित किया व भगवान श्री कृष्ण जी की प्रतिमा भेंट की। जिलाधिकारी ने कहा कि आज युवतियां व महिलाएं हर क्षेत्र मे आगे बढ रही हैं तथा प्रदेश व देश का नाम रौशन कर रही हैं। उन्होंने सुश्री श्रुति शर्मा को उनकी उपलब्धि पर बधाई दी व उनके उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी। जिलाधिकारी ने उनके परिवारजनों को भी शॉल भेंट कर सम्मानित किया।

इस अवसर पर मीडिया से बातचीत में श्रुति शर्मा ने बताया कि उनका जन्म बिजनौर जिले के छोटे से गांव बास्टा में हुआ। हालांकि, वह पली-बढ़ीं दिल्ली में और पढ़ाई भी दिल्ली से ही पूरी की। उन्होंने बताया कि वह केवल होली-दीपावली आदि त्योहारों पर ही अपने घर पहुंच पाती हैं। आज भी बचपन की यादें बिजनौर से ही जुड़ी हैं।
श्रुति ने बताया कि आईएएस बनने के लिए उन्होंने सेल्फ स्टडी बहुत की है और जामिया से ही कोचिंग भी की थी।  आईएएस टॉप करने के सवाल पर श्रुति शर्मा ने बताया कि उन्हें यकीन नहीं था कि वह टॉपर बनेंगी, लेकिन एग्जाम पास कर लेंगी यह पूरा विश्वास था।

श्रुति ने युवाओं के साथ भी अपने अनुभव साझा करते हुए  कहा कि जो भी युवा आईएएस-आईपीएस की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें जिन विषयों में रुचि है, उसमें ही मन लगाकर पढ़ाई करनी होगी, आजकल युवा खेल में भी अपना भविष्य बना रहे हैं। महिलाओं के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार बहुत योजनाएं चला रही है। महिला उत्पीड़न संबंधी समस्याओं के विषय पर उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपनी सुरक्षा अपने आप भी करनी चाहिए। माता पिता को भी चाहिए कि वह लड़का लड़की को समान भाव से देखें और लड़कों को भी ये बात समझाएं। यूपी में बुलडोजर मामले में उन्होंने कहा कि इस विषय में उन्होंने ज्यादा कुछ पढ़ा नहीं है, इसलिए कुछ नहीं कहेंगी।

75 साहित्यकार एवं समाजसेवी कुमुद सम्मान से अलंकृत

साहित्यकार ज्ञान स्वरूप ‘कुमुद’ जी की जयंती पर कुमुद सम्मान से अलंकृत 75 साहित्यकार एवं समाजसेवी

बरेली। रोटरी क्लब भवन चौपुला में साहित्यकार ज्ञान स्वरूप ‘कुमुद’ जी की जयंती समारोह पूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर 75 साहित्यकार एवं समाजसेवी कुमुद सम्मान से अलंकृत किए गए।

हास्य कवि निर्मल सक्सेना ( कासगंज), वरिष्ठ शायर जीतेश राज नक़्श (पीलीभीत), मुख्य अतिथि आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ सत्येंद्र सिंह, विशिष्ट अतिथिगण बरेली बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अरविंद कुमार श्रीवास्तव, बरेली बार एसोसिएशन के सचिव वीपी ध्यानी, वरिष्ठ साहित्यकार एवं कार्यक्रम अध्यक्ष आचार्य देवेंद्र देव एवं कार्यक्रम संचालक कवि रोहित राकेश को संस्था के संस्थापक एवं कार्यक्रम आयोजक एडवोकेट उपमेंद्र सक्सेना एवं संस्था अध्यक्ष करुणा निधि गुप्ता ने उत्तरीय, प्रशस्ति पत्र एवं प्रतीक चिन्ह देकर कुमुद सम्मान से अलंकृत किया

इसके अलावा 75 कवियों एवं समाजसेवियों को भी समारोह में सम्मानित किया गया। आमंत्रित कवियों में निर्मल सक्सेना एवं जीतेश राज ‘नक़्श’ ने अपने काव्य पाठ से सभी का दिल जीत लिया और खूब वाहवाही लूटी।

खटीमा से पधारे सुप्रसिद्ध कवि प्रिय भाई रामरतन यादव द्वारा बहुत सुंदर सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई। साहित्यकार डॉ महेश मधुकर एवं साहित्यकार रणधीर प्रसाद गौड़ धीर ने ‘कुमुद’ जी के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए कार्यक्रम आयोजक एडवोकेट उपमेंद्र सक्सेना एवं संस्था अध्यक्ष  करुणा निधि गुप्ता ने सभी अतिथियों को हृदय से साधुवाद एवं आभार व्यक्त किया।

आचार्य द्विवेदी स्मृति अभियान के रजत जयंती समारोह में होगा देशभर के साहित्यकारों-पत्रकारों का जमावड़ा

आचार्य द्विवेदी स्मृति अभियान का 25वां वर्ष

रजत जयंती समारोह में होगा देशभर के साहित्यकारों-पत्रकारों का जमावड़ा

मुख्य आकर्षण
-दौलतपुर में महावीर चौरा पर सुंदरकांड पाठ से रजत जयंती समारोह की शुरुआत
-दो दिवसीय मुख्य वार्षिक समारोह 11-12 नवंबर को
-ऐतिहासिक दस्तावेजों और दुर्लभ फोटो वाली प्रदर्शनी का आयोजन
-रायबरेली शहर में आचार्य द्विवेदी स्मृति खेल महाकुंभ
-गीत-संगीत, नृत्य और नाटक के माध्यम से आचार्य द्विवेदी के जीवन वृत्त की प्रस्तुति
-“आचार्य पथ” स्मारिका/पत्रिका का विशेषांक

रायबरेली से शुरू हुआ आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति संरक्षण अभियान रजत जयंती वर्ष में प्रवेश कर गया है। अभियान की रजत जयंती धूमधाम से मनाई जाएगी। रजत जयंती वर्ष को यादगार बनाने की तैयारियां अभी से शुरू हो गई हैं। 11-12 नवंबर 2022 को आयोजित होने वाले रजत जयंती समारोह में देशभर के साहित्यकारों पत्रकारों को आमंत्रित किया जाएगा। लखनऊ और दिल्ली में भी कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प लिया गया। आचार्य पथ स्मारिका का विशेषांक भी निकालने की तैयारी है।
आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की रायबरेली के आशीर्वाद इन होटल में आयोजित बैठक में तय किया गया कि रजत जयंती वर्ष में आचार्य द्विवेदी की स्मृतियों को नए रूप में संजोया जाएगा। वर्ष पर्यंत कार्यक्रमों की श्रंखला चलेगी। इसकी शुरुआत आचार्य द्विवेदी के जन्म ग्राम दौलतपुर में सुंदरकांड के पाठ के साथ होगी। आचार्य द्विवेदी स्मृति खेल महाकुंभ के साथ ही जनपद के साहित्यिक स्वाधीनता संग्राम इतिहास को समेटने वाली प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। 12 नवंबर को वार्षिक आयोजन भी इस बार दो दिवसीय होगा। इसमें देशभर के पत्रकार-साहित्यकार शामिल होंगे। आचार्य द्विवेदी के जीवन वृत्त को गीत-संगीत, नाटक और नृत्य के माध्यम से भी प्रस्तुत करने की तैयारी की जा रही है।


अध्यक्ष विनोद शुक्ला ने बताया कि स्मृति संरक्षण अभियान 9 मई 1998 को समाज और सरकार को जगाने के लिए ध्यानाकर्षण धरने के माध्यम से प्रारंभ हुआ था। यह स्मृति अभियान 9 मई से रजत जयंती वर्ष में प्रवेश कर गया है। 25 वर्ष के सफर में कई सोपान तय किए गए। शहर से लेकर गांव तक तीन स्मृति द्वार बनाए गए। कई सरकारी और निजी संस्थाओं में सभागार आचार्य द्विवेदी के नाम पर रखे गए।
उन्होंने बताया कि आचार्य द्विवेदी की स्मृतियां सात समंदर पार अमेरिका तक पहुंच गई। अमेरिका इकाई की कमान श्रीमती मंजु मिश्रा एवं सदस्य श्रीमती रचना श्रीवास्तव, श्रीमती शुभ्रा ओझा, कुसुम नैपसिक, डॉक्टर ममता त्रिपाठी संभाले हुए हैं। अमेरिका इकाई साल में आचार्य द्विवेदी की स्मृति और हिंदी के प्रचार- प्रसार के लिए ऑनलाइन चार कार्यक्रम आयोजित कर रही है। इनमें बच्चों की प्रतियोगिताएं भी शामिल हैं।

कार्यक्रमों के लिए अलग-अलग प्रभारियों की नियुक्ति-
महामंत्री अनिल मिश्र ने बताया कि कार्यक्रमों के लिए अलग-अलग प्रभारियों की नियुक्ति की गई है। खेल प्रतियोगिताओं के लिए मुन्ना लाल साहू, स्मिता दुबे, अनुपमा रावत और हिमांशु तिवारी को प्रभारी बनाया गया है। नाटक-नृत्य आदि के लिए अमित सिंह, रवि प्रताप सिंह और क्षमता मिश्रा को जिम्मेदारी दी गई है। प्रदर्शनी का प्रभार अभिषेक द्विवेदी, नीलेश मिश्रा और अरुण पांडे को सौंपा गया है।
बैठक के अंत में डॉ सुशील चंद्र मिश्र ने सभी को रजत जयंती वर्ष की शुभकामनाएं दीं। बैठक में राजीव भार्गव, दिनेश शुक्ला, सुधीर द्विवेदी, स्वतंत्र पांडे, राजेश वर्मा, श्रीमती रजनी सक्सेना, रामेंद्र मिश्रा, अमर द्विवेदी, दीपक तिवारी, लंबू बाजपेई, शशिकांत अवस्थी, घनश्याम मिश्रा, राकेश मोहन मिश्रा, राजेश द्विवेदी, कृष्ण मनोहर मिश्रा, अभिषेक मिश्रा, रोहित मिश्रा, यशी अवस्थी, शिखर अवस्थी, हर्षित द्विवेदी आदि मौजूद रहे।

आचार्य द्विवेदी के नाम पर चौराहे का सुंदरीकरण करने का सुझाव

रजत जयंती वर्ष की तैयारियों के सिलसिले में आयोजित बैठक में कई सुझाव भी आए। समिति के सदस्य राजेश वर्मा ने सुझाव दिया कि आचार्य द्विवेदी स्मृति संरक्षण अभियान के रजत जयंती वर्ष को यादगार बनाने के लिए शहर के एक चौराहे को विकसित किया जाए। सदस्य चंद्रमणि बाजपेई ने छात्र-छात्राओं के लिए पुस्तकालय- वाचनालय स्थापित किए जाने पर जोर दिया।

आचार्य द्विवेदी के साहित्य का डिजिटलाइजेशन भी होगा

रजत जयंती वर्ष मनाने की तैयारियों से संबंधित बैठक में आचार्य द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की अमेरिका इकाई की अध्यक्ष श्रीमती मंजु मिश्रा भी ऑनलाइन शामिल हुईं। उन्होंने आचार्य द्विवेदी के साहित्य समेत अन्य विषयों पर लिखी गई पुस्तकों को डिजिटल फॉर्म पर उपलब्ध कराने का सुझाव दिया। अध्यक्ष विनोद शुक्ला ने आश्वस्त किया कि इस दिशा में भी काम तेज किया जाएगा।

भारत की मैंकल नामदेव व अमेरिका के ऋत्विक ने जीती अंतर्राष्ट्रीय निबंध प्रतियोगिता

पेंड्रा की मैंकल नामदेव और अमेरिका के ऋत्विक ने जीती निबंध प्रतियोगिता
-अमेरिका वर्ग से अयाति ओझा दूसरे स्थान पर रहीं
-भारत वर्ग से रायबरेली की आद्या गुप्ता दूसरे और फातिमा अंसारी तीसरे स्थान पर रहीं
-7 बच्चों के निबंध सांत्वना पुरस्कार के रुप में चुने गए
-अमेरिका में भारत के चांसरी प्रमुख रमाकांत कुमार ने की विजेता बच्चों के नामों की घोषणा
-मुख्य अतिथि अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के जनसंचार विभागाध्यक्ष डॉ कृपाशंकर चौबे ने समिति के प्रयासों की सराहना की

नई दिल्ली आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की भारत और अमेरिका इकाई द्वारा संयुक्त रूप से 12 से 18 वर्ष के बच्चों की आयोजित की गई अंतर्राष्ट्रीय निबंध प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ की मैंकल नामदेव और अमेरिका के ऋत्विक अग्रवाल विजेता रहे।

मैकल नामदेव को पुरस्कार में प्रमाणपत्र के साथ 21 सौ रुपए और ऋत्विक को 50 डालर दिए जाएंगे। इसी तरह दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे विजेता बच्चों को भी प्रमाण पत्र और नगद पुरस्कार से पुरस्कृत किया जाएगा। चयनित सभी निबंधों को ‘आचार्य पथ’ स्मारिका में भी स्थान देने का ऐलान किया गया।

विजेता बच्चों के नामों की घोषणा रविवार को आयोजित ऑनलाइन कार्यक्रम में अमेरिका में भारत के चांसरी प्रमुख रमाकांत कुमार ने की। करतल ध्वनि से सभी विजेता बच्चों को बधाई दी गई। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में अमेरिका वर्ग से ऋत्विक अग्रवाल प्रथम और अयाति ओझा दूसरे स्थान पर रही। भारत वर्ग से मैंकल नामदेव प्रथम, आद्या गुप्ता द्वितीय और फातिमा अंसारी तीसरे स्थान पर रहीं। तमिलनाडु की प्रतिभागी संजना एच, कात्यायनी त्रिवेदी, हिमांशी सिंह, गुनगुन मिश्रा, श्रवण कुमार मिश्रा, शान्तनु पांडेय और पंकज कुमार के निबंध भी सराहे गए। सभी को सांत्वना पुरस्कार देने की घोषणा की गई। विजेता बच्चों ने अपने-अपने निबंध भी पढ़कर सुनाए।

पुरस्कार वितरण समारोह के मुख्य अतिथि एवं अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग के अध्यक्ष डॉ. कृपा शंकर चौबे ने सभी विजेता बच्चों को बधाई देते हुए कहा कि जब हिंदी की विभिन्न विधाओं पर संकट गहरा रहा है ऐसे समय में आचार्य द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति द्वारा बच्चों के लिए निबंध प्रतियोगिता आयोजित करना बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य है। बच्चे के अंदर एक रचना छुपी होती है और उस रचना को निखारने एवं सामने लाने का अवसर देना निहायत जरूरी है।

समिति की अमेरिका इकाई की अध्यक्ष श्रीमती मंजु मिश्रा ने सभी प्रतिभागी बच्चों के साथ- साथ कार्यक्रम में उपस्थित निर्णायक मंडल की सदस्य प्रोफेसर नीलू गुप्ता (अमेरिका), डॉ. पद्मावती (चेन्नई), डॉ भारती सिंह (नोएडा), अनुपम परिहार (प्रयागराज), डॉ. सुमन फुलारा (उत्तराखंड) और बद्री दत्त मिश्र (रायबरेली) का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि हिंदी को बचाने और बढ़ाने के लिए भारत के साथ-साथ प्रवासी भारतीयों के बच्चों को मातृभाषा से जोड़े रखने के ही यह छोटे-छोटे प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारत से करीब 122 निबंध प्राप्त हुए।

भारत इकाई के अध्यक्ष विनोद शुक्ल ने कहा कि हिंदी को नया व्याकरण और भाषा देने वाले आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के योगदान को आज सभी स्वीकार कर रहे हैं। उनकी स्मृतियों को संरक्षित करने में समाज जागृत हो चुका है लेकिन सरकार का जागृत होना बाकी है।

आभार ज्ञापित करते हुए समिति के संयोजक गौरव अवस्थी ने कहा कि आचार्य द्विवेदी स्मृति संरक्षण अभियान का यह 25वां वर्ष है। सभी के प्रयासों और सहयोग से आचार्य द्विवेदी की स्मृतियां सात समंदर पार तक पहुंचने में सफल हुई हैं। भविष्य में भी ऐसा ही सहयोग बनाए रखने का अनुरोध किया।

कार्यक्रम का संचालन अमेरिकी इकाई की वरिष्ठ सदस्य श्रीमती रचना श्रीवास्तव ने किया और अमेरिका की शोनाली श्रीवास्तव ने सुमधुर स्वर में सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। कार्यक्रम में अमेरिकी इकाई की सदस्य डॉ कुसुम नैपसिक, श्रीमती ममता त्रिपाठी, गणेश दत्त, सुश्री नीलम सिंह, श्रीमती संगीता द्विवेदी, सुधीर द्विवेदी, करुणा शंकर मिश्रा, अभिषेक द्विवेदी आदि उपस्थित रहे।

आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति अंतर्राष्ट्रीय निबंध प्रतियोगिता का पुरस्कार वितरण एवं आशीर्वाद समारोह 22 मई रविवार को


आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति अंतर्राष्ट्रीय निबंध प्रतियोगिता का पुरस्कार वितरण एवं आशीर्वाद समारोह 22 मई 2022 रविवार को भारतीय समय के अनुसार सुबह 8:00 बजे ऑनलाइन आयोजित किया गया है।
समारोह में बतौर मुख्य अतिथि रमाकांत कुमार (चांसरी प्रमुख, भारतीय कौंसलावास सैनफ्रांसिस्को-अमेरिका) और डॉ. कृपा शंकर चौबे (अध्यक्ष-जनसंचार विभाग, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा-महाराष्ट्र) निबंध प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने वाले भारत और अमेरिका के बच्चों को आशीर्वाद एवं पुरस्कार प्रदान करेंगे।
पुरस्कार वितरण एवं आशीर्वाद समारोह का लाइव प्रसारण हमारी भाषा हिंदी फेसबुक पेज पर भी किया जाएगा। आपकी उपस्थिति हम सबका उत्साहवर्धन करेगी।
यह जानकारी आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की श्रीमती मंजु मिश्रा अध्यक्ष अमेरिका इकाई एवं विनोद शुक्ल अध्यक्ष भारत इकाई ने संयुक्त रूप से दी।

11 करोड़ की संपत्ति दान कर पत्नी, बेटे समेत ज्वैलर्स हुआ वैरागी

जयपुर (एजेंसी)। मध्यप्रदेश के बालाघाट नगर के ज्वेलर्स राकेश सुराना ने; न केवल करोड़ों रुपए की संपत्ति दान कर दी, बल्कि परिवार सहित भौतिक सुख-सुविधाओं का त्याग कर वैराग्य जीवन की राह चुन ली है। 22 मई को दीक्षार्थी परिवार राकेश सुराना (40), उनकी धर्मपत्नी लीना सुराना (36) और 11 वर्षीय पुत्र अमय सुराना जयपुर में दीक्षा लेंगे। 17 मई को जैन समाज द्वारा इस दीक्षार्थी परिवार को विदाई दी गई। वैराग्य जीवन की ओर जाने से पहले दीक्षार्थी सुराना परिवार ने करीब 11 करोड़ रुपए की संपत्ति गौशाला और धार्मिक संस्थाओं को दान कर दी है।
इस दीक्षार्थी परिवार के दीक्षा लेने के पूर्व 17 मई को जैन समाज ने शोभायात्रा निकालकर उन्हें विदाई दी। वैसे इस परिवार के अभिनंदन के लिए संयम शौर्य उत्सव का आयोजन 16 मई से ही प्रारंभ हो गया, जिसमें 16 मई को स्थानीय लॉन में उनका अभिनंदन किया गया। मंगलवार की सुबह करीब सवा सात से सवा आठ बजे तक श्री पार्श्वनाथ भवन में धार्मिक कार्यक्रम किया गया। काली पुतली चौक के समीप अहिंसा द्वार से वरघोड़ा निकाला गया। कृषि उपज मंडी इतजवारी गंज में दीक्षार्थी परिवार का साधर्मी वात्सल्य कराया गया। वहीं 18 मई को सुबह 9 बजे पार्श्वनाथ भवन में अष्टोत्तरी महापूजन होगा। वहीं 19 मई को सुबह 6 बजे संसार से संयम की ओर कदम बढ़ाने के लिए मुमुक्ष राकेश सुराना, मुमुक्ष लीना और मुमुझ अमय जयपुर के लिए रवाना हो जाएंगे। जो 22 मई को जयपुर में दीक्षा लेंगे।


वर्ष 2015 से परिवर्तित हुआ ह्रदय
सुराना ने संवाददाताओं से चर्चा के दौरान कहा कि उनका हृदय परिवर्तन महेंद्र सागर महाराज और मनीष सागर महाराज के प्रवचन से मिली प्रेरणा के कारण हुआ और उसके चलते ही उन्हें धर्म, अध्यात्म और आत्म स्वरूप को पहचानने की प्रेरणा मिली। बताया कि अध्यात्म योगी गुरुदेव महेन्द्र सागर महाराज का बालाघाट में चौमासा हुआ था। इस दौरान उनके विचारों, बातों को पूरी तन्मयता से सूना इसके बाद उसे आत्मसात करने का निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि संसार की भौतिक सुख-सुविधाएं नश्वर है। जो कमाया है उसे यहीं पर छोड़कर जान है। मानव जीवन बहुत दुर्लभता से मिलता है, पुण्य संचय किया तब मानव तन पाया। इस मानव तन का उपयोग केवल भौतिक सुख-सुविधाओं में न करते हुए मानव जीवन कल्याण और मोक्ष प्राप्ति के लिए करना चाहिए। राकेश सुराना की पत्नी लीना जो अमेरिका में पढ़ी है, उन्हें बचपन से ही संयम पथ पर जाने की इच्छा थी, इतना ही नहीं बेटा अमय जब 4 साल का था तभी वह संयम के पथ पर जाने की बात करता था, मगर बहुत कम उम्र होने के कारण उन्होंने सात साल तक इसके लिए इंतजार किया। सुराना ने बताया कि जीवन में सब कुछ मिलने के बाद भी शांति की कमी थी। इसे खोजने का प्रयास किया गया। तब पता चला की शांति कर्म करके या मोक्ष के मार्ग पर चलकर ही मिल सकती है। सुख अपने ही भीतर होता है, बशर्त उसने खोजने की जरुरत होती है। इसी सुख को प्राप्त करने के लिए संयम की ओर जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में आधुनिक शिक्षा की ओर बहुत भाग रहे हैं। बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ नैतिक शिक्षा भी देनी चाहिए।

कायस्थ चेतना मंच द्वारा दूसरा प्याऊ संचालित

बरेली। कायस्थ चेतना मंच के तत्वावधान में 17 मई 2022 दिन मंगलवार को प्याऊ का उद्घाटन संस्था के संरक्षक डॉक्टर पवन सक्सेना एवं संस्था के वरिष्ठ सदस्य पार्षद सतीश कातिब मम्मा जी द्वारा किया गया।

डॉक्टर पवन सक्सेना ने इसे संस्था का सराहनीय कार्य बताया। सतीश मम्मा ने कहा कि समय समय पर ऐसे कार्य कराने से संस्था की छवि और उज्जवल होगी। अध्यक्ष संजय सक्सेना ने बताया संस्था द्वारा एक प्याऊ बदायूं रोड स्थित पानी की टंकी के सामने 3 मई अक्षय तृतीया से संचालित हो रहा है, जिससे बदायूं रोड पर राहगीरों के लिए बहुत आराम मिलता है। चौपला पुल से लेकर करगैना तक और कोहरापीर पुलिस चौकी के आसपास भी पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। राहगीरों के लिए बहुत परेशानी होती है। यह विचार मन में आया था। इसीलिए प्याऊ संचालित किए गए हैं। अभी दो प्याऊ और संचालित करने का विचार है।

संस्था के वरिष्ठ उपाध्याय अखिलेश सक्सेना ने सभी का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया म। इस कार्यक्रम में महिला अध्यक्ष श्रीमती माया सक्सेना, श्रीमती प्रतिभा जौहरी, अविनाश सक्सेना, बीनू सिन्हा, महासचिव अमित सक्सेना बिंदु, निर्भय सक्सैना, पंकज सक्सेना पंछी आदि लोग उपस्थित रहे।

इससे पहले व्यंजन रेस्टोरेंट पर रेस्टोरेंट के मालिक गुप्ता के विशेष सहयोग से राहगीरों को भीषण गर्मी से राहत देने के लिए एक प्याऊ की व्यवस्था की गई। कायस्थ चेतना मंच संरक्षक डॉक्टर पवन सक्सेना वरिष्ठ पत्रकार के द्वारा नारियल फोड़कर प्याऊ का उद्घाटन किया गया।

अध्यक्ष संजय सक्सेना, महासचिव अमित सक्सेना बिंदु, वरिष्ठ उपाध्यक्ष अविनाश चंद्र सक्सेना, अखिलेश कुमार सक्सेना, सुरेंद्र बीनू सिन्हा, निर्भय सक्सैना वरिष्ठ पत्रकार, जिला महिला अध्यक्ष श्रीमती माया सक्सेना, पार्षद सतीश कातिब मम्मा, वरिष्ठ पार्षद एवं बीडीए सदस्य पंकज जौहरी पंछी, श्रीमती प्रतिमा जौहरी आदि ने कार्यक्रम में सहयोग किया अंत में अखिलेश कुमार ने सभी का आभार व्यक्त किया।

वीणा जी को याद कर हो गई आंखें नम

उरई (जालौन)। बुंदेलखंड कोकिला के नाम से संगीत की दुनिया में नवाजी जाती रहीं  सुर साम्राज्ञी स्वर्गीय वीणा श्रीवास्तव के जन्मदिन के उपलक्ष्य में उन्ही के द्वारा स्थापित रंगमंचीय सांस्कृतिक संस्था “वातायन” के तत्वावधान में शनिवार की रात राजमार्ग स्थित मणीन्द्रालय प्रेक्षागृह में मधुर यादें शीर्षक से संगीतमय भावभीना  कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में पुलिस अधीक्षक रवि कुमार और विशिष्ट अतिथि लोक कला मर्मग्य अयोध्या प्रसाद कुमुद उपस्थित रहे। इस अवसर पर वीणा जी से जुड़े खट्टे मीठे संस्मरणों को भी साझा किया गया, जिससे सभा में मौजूद उनके प्रशंसकों  की आँखे नम हो गईं।

इस अवसर पर नन्हें बाल कलाकारों की प्रस्तुतियों ने लोगों को मुग्ध कर दिया। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि उरई के लोगों के लिए यहाँ की सांस्कृतिक विरासत उनके गौरव को स्थापित करने वाली है, जिसमें वीणा जी जैसी शख्सियतों का महत्वपूर्ण योगदान है। इस तरह के लोगों की स्मृति होने वाले आयोजनों से यहाँ की समृद्ध सृजन धारा अविरल बनी रहेगी और पीढी दर पीढी इसकी मशाल थामने वाली प्रतिभाएं जन्म लेती रहेंगी।

वातायन के अध्यक्ष और वीणा जी के पति डॉ अरुण श्रीवास्तव ने जब वातायन संस्था के इतिहास पर प्रकाश डालने के साथ वीणा जी से जुडीं तमाम यादें ताजा की तो माहौल भावुक हो गया। कार्यक्रम का संचालन महेश अरोरा ने किया। संरक्षक डॉ आदित्य सक्सेना ने भी वीणा जी की बहुआयामी प्रतिभा के अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डाला तो लोग रोमांच और कौतूहल से भर उठे।

संगठन उपाध्यक्ष चौधरी जय करण सिंह और कार्यक्रम उपाध्यक्ष डॉ स्वयं प्रभा द्विवेदी ने मुख्य अतिथि और अन्य अतिथियों का स्वागत किया। वातायन के अन्य पदाधिकारियों में कार्यक्रम सचिव वर्षा राहुल सिंह, संगठन सचिव अमर सिंह, कोषाध्यक्ष गिरीश चन्द्र श्रीवास्तव, जनसंपर्क अधिकारी अरविंद नायक, कार्यक्रम निदेशक हेम प्रधान, कार्यक्रम उपनिदेशक डॉ विश्वप्रभा त्रिपाठी, कार्यकारिणी सदस्य श्रीमती पूर्णिमा सक्सेना, श्रीमती इंदु सक्सेना, सुधीर प्रकाश सिंह, श्रीमती शशि अरोड़ा, डॉ केएन सिंह निरंजन, श्रीमती रत्ना प्रधान, डॉ कुमारेन्द्र  सिंह ने भी कार्यक्रम को सफलता पूर्वक संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सौजन्य से जालौन टाइम्स उरई  

रजत जयंती वर्ष: हम हैं राही स्मृति अभियान के

रजत जयंती वर्ष: हम हैं राही स्मृति अभियान के

यही तारीख थी नौ मई। साल 1998। अपने ही गांव-घर, जनपद, प्रदेश और देश में भुला-बिसरा दिए गए हिंदी के प्रथम आचार्य हम सबको एक भाषा, एक बोली-बानी और नवीन व्याकरण देने वाले आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की स्मृतियों को संजोने से जुड़ा अभियान शुरू हुआ। शुरुआत 42 डिग्री सेल्सियस की भीषण गर्मी के बीच रायबरेली शहर के शहीद चौक से ध्यानाकर्षण धरने के माध्यम से हुई। यह एक शुरुआत भर थी। कोई खाका नहीं। कोई आका नहीं। कुल जमा 40-50 और पवित्र संकल्प इस अभियान की नींव में थे। प्रकृति या यूं कहें खुद आचार्य जी ने शहीद चौक पर जुटे अनुयायियों की परीक्षा ली। टेंट के नीचे बैठे लोग अपने इस पूर्वज और हिंदी के पुरोधा की यादों को जीवंत बनाने का संकल्प ले ही रहे थे कि तेज अंधड़ से 18×36 का टेंट उड़ गया। लोग बाल बाल बचे लेकिन कोई डिगा न हटा। ध्यानाकर्षण धरना अपने तय समय पर ही खत्म हुआ।

पहली परीक्षा में पास होने के बाद चल पड़ा स्मृति संरक्षण अभियान आप सब के सहयोग-स्नेह और संरक्षण से कई पड़ाव पार करते हुए आज यहां तक पहुंचा है। अभियान का यह 25वां वर्ष प्रारंभ हुआ है। किसी भी परंपरा के 25 वर्ष कम नहीं होते। इस दरमियान कुछ बदला, कुछ छूटा और बहुत कुछ नया शामिल भी हुआ। इस टूटे-फूटे ही सही अभियान के भवन में न जाने कितने लोगों का पैसा, पसीना और प्यारभाव ईंट-गारे के रूप में लगा है। सबके नाम गिनाने बैठे तो कागज नामों से ही भर जाए। मन की बहुत बातें मन में ही रखनी पड़ जाएं। इसलिए बात केवल उन पड़ावों की जो यादों में अंकित-टंकित हो चुकी हैं।
    अभियान का शुरुआती मुख्य मकसद साहित्यधाम दौलतपुर को राष्ट्रीय स्मारक के रूप में घोषित कराने से जुड़ा था। इसके प्रयास भी दिल्ली से लेकर लखनऊ तक हुए। खूब हुए लेकिन हिंदी के पुरोधा का जन्मस्थान राष्ट्रीय स्मारक नहीं बन पाया तो नहीं बन पाया। अब इसके लिए हम खुद को गुनाहगार ठहराएं या शासन सत्ता को? राष्ट्रीय स्मारक तो छोड़िए जन्मस्थान पर एक ऐसा स्थान तक नहीं बन पाया जहां बैठकर आज  हिंदी भाषा और अपने पुरोधाओं से प्रेम करने वाली पीढ़ी प्रेम से बैठ ही सके। बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी, इसलिए जरूरी है दूसरी तरफ चला जाए। अभियान से जुड़ी कुछ ऐसी तारीखें हैं, जो तवारीख बन गई।
   भला हो, कांग्रेस के सांसद रहे कैप्टन सतीश शर्मा का, जिन्होंने अभियान से प्रभावित होकर अपनी सांसद निधि से पुस्तकालय-वाचनालय का भवन जन्म स्थान के सामने आचार्य जी के सहन की भूमि पर ही निर्मित कराया। भला हिंदी के उन पुरोधा डॉ नामवर सिंह का भी हो जिन्होंने उस पुस्तकालय-वाचनालय भवन का लोकार्पण किया। यह अलग बात है कि तमाम मुश्किलों की वजह से पुस्तकालय वाचनालय संचालित नहीं हो पाया।
     साल वर्ष 2004 में एक नई शुरुआत आचार्य स्मृति दिवस के बहाने हुई। देश के शीर्षस्थ कवियों में शुमार रहे बालकवि बैरागी के एकल काव्य पाठ से शुरू हुई यह परंपरा आज भी जारी है। वर्ष-प्रतिवर्ष यह परंपरा नई होती गई। निखरती गई। आज ‘आचार्य स्मृति दिवस’ अभियान का मुख्य केंद्र है। इस दिवस के बहाने देश भर के न जाने कितने स्नावनामधन्य साहित्यकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और खिलाड़ियों को सुनने-गुनने, देखने-समझने के अवसर हम सबको मिल चुके हैं।
   

अभियान का एक असल पड़ाव तो ‘आचार्य पथ’ स्मारिका-पत्रिका भी है। प्रधान संपादक साहित्यकार -गीतकार आनंद स्वरूप श्रीवास्तव के कुशल संपादन में निरंतर 11 वर्षों से प्रकाशित हो रही इस स्मारिका ने आचार्य द्विवेदी की स्मृतियों को जीवंत बनाने में कम योगदान नहीं दिया है। देशभर के साहित्यकार आचार्य द्विवेदी पर केंद्रित लेख लिखते हैं। छपते हैं। प्रधान संपादक ने स्मारिका को ‘सरस्वती’ की तरह ही विविध ज्ञान की पत्रिका बनाने का उपक्रम भी लगातार किया है और कर रहे हैं।
    अभियान वर्ष 2015 कि वह तारीख भी नहीं भूल सकता जब ‘द्विवेदी अभिनंदन ग्रंथ’‌ का पुन: प्रकाशन नेशनल बुक ट्रस्ट-नई दिल्ली ने किया। इस काम में अभियान की भूमिका दुर्लभ ग्रंथों को उपलब्ध कराने भर की ही थी पर यह भूमिका भी कम नहीं थी। अभियान अपने अग्रज-बुजुर्ग रमाशंकर अग्निहोत्री को हमेशा याद करता है और रहेगा, जिन्होंने यह दुर्लभ ग्रंथ अभियान से जुड़ी आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति को खुशी-खुशी सौंपा और नेशनल बुक ट्रस्ट के सहायक संपादक हिंदी पंकज चतुर्वेदी के योगदान को भी हम नहीं भूल सकते। ग्रंथ का पुनः प्रकाशन उन्हीं की बदौलत हुआ।
    हम नहीं भूल सकते राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (निफ्ट रायबरेली) के निदेशक डॉ. भारत साह के उस योगदान को जो एक ऐसी किताब के रूप में दर्ज है, जिसका ऐतिहासिक महत्त्व है। इस किताब का नाम है विज्ञान वार्ता। आचार्य द्विवेदी द्वारा सरस्वती के संपादन के दौरान लिखे गए तकनीक, विज्ञान और नई नई खोजों से संबंधित लेखों को मुंशी प्रेमचंद ने अपने संपादन में संग्रहित कर वर्ष1930 में विज्ञान वार्ता नाम से पुस्तक प्रकाशित की थी। इस दुर्लभ पुस्तक को भी समिति ने निफ्ट रायबरेली के निदेशक को उपलब्ध और उन्होंने पुनः प्रकाशित कराया।
    तारीख तो नहीं भूलने वाली है,10 जनवरी 2021भी। ‘आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी युग प्रेरक सम्मान’ से सम्मानित प्रवासी भारतीय और कैलिफोर्निया अमेरिका में हिंदी के प्रचार-प्रसार में अपना योगदान देने वाली हिंदीसेवी श्रीमती मंजू मिश्रा ने आचार्य जी की स्मृतियों को सात समंदर पार जीवंत बनाने और इस बहाने प्रवासी भारतीयों की नई पीढ़ी को हिंदी से जोड़े रखने का बीड़ा अपनी प्रवासी साथी श्रीमती ममता कांडपाल त्रिपाठी, श्रीमती रचना श्रीवास्तव, श्रीमती शुभ्रा ओझा और श्रीमती कुसुम नैपसिक से प्राप्त नैतिक-भौतिक-साहित्यिक-सामाजिक सहयोग के बल पर इसी दिन उठाया था। आचार्य द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की अमेरिकी इकाई की शुरुआत इसी दिन हुई। एक छोटे से शहर की छोटी सी शुरुआत के दुनिया के सबसे संपन्न देश अमेरिका तक पहुंचना हम जैसे अकंचिनों के लिए स्वप्न सरीखा है। समिति शुक्रगुजार है अमेरिका इकाई की सभी सदस्यों की।
     हमें याद है, 21 दिसंबर 1998 को रायबरेली शहर के राही ब्लाक परिसर में तत्कालीन खंड विकास अधिकारी श्री विनोद सिंह और (अब दिवंगत) की अगुवाई में स्थापित की गई आचार्य श्री की आवक्ष प्रतिमा के अनावरण समारोह में पधारे अनेक साहित्यकार अपने संबोधन में महावीर प्रसाद द्विवेदी के नाम पर हजारी प्रसाद द्विवेदी का नाम गिना रहे थे लेकिन अनवरत 25 वर्षों के प्रयासों से अब लोगों के दिल-दिमाग में महावीर प्रसाद द्विवेदी पुनर्जीवित हो चुके हैं।
     एक साहित्यकार-संपादक की स्मृतियों को भूलने बिसराने वाले समाज के मन में पुनः स्थापित करने का काम बिना समाज के सहयोग के संभव कहां था? इस मामले में आचार्य द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति समाज के सभी वर्गों-धर्मो-जातियों के लोगों की हमेशा ऋणी थी, है और रहेगी। आचार्य द्विवेदी स्मृति संरक्षण अभियान समाज के सहयोग से आज अपने रजत जयंती वर्ष में प्रवेश कर चुका है। आचार्य द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति अभियान को सहयोग देने वाले ऐसे सभी गणमान्य, सामान्य और कार्यक्रमों की शोभा बढ़ाने वाले श्रोताओं-दर्शकों के प्रति हृदय से कृतज्ञता ज्ञापित करती है और आशा भी करती है कि अभियान की स्वर्ण जयंती पूर्ण कराने में भी आपका पूर्ण सहयोग-स्नेह-संरक्षण बना रहेगा।

गौरव अवस्थी
रायबरेली

मातृ दिवस पर साहित्यानुरागिनी एवं समाज सेविका मिथलेश गौड़ को किया सम्मानित

बरेली। कवि गोष्ठी आयोजन समिति के तत्वावधान में स्थानीय साहूकारा में मातृ दिवस पर कवि गोष्ठी एवं सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम श्री नत्थू लाल सदाचारी के संयोजन में हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता विनय सागर जायसवाल ने की। मुख्य अतिथि डॉ शिव शंकर यजुर्वेदी एवं विशिष्ट अतिथि डॉ रामशंकर ‘प्रेमी’ रहे।


कार्यक्रम का शुभारंभ माँ शारदे के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण कर हुआ। वंदना बृजेंद्र तिवारी “अकिंचन” ने प्रस्तुत की। कार्यक्रम में मातृ दिवस पर साहित्यानुरागिनी श्रीमती मिथलेश गौड़ को समाज सेवा एवं परिवार में सामंजस्य के साथ उत्कृष्ट योगदान के लिए संस्था के सचिव उपमेंद्र सक्सेना एडवोकेट द्वारा सम्मानित किया गया।


काव्य गोष्ठी में कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से माताओं की महिमा का गुणगान किया और जगत में उन्हें सबसे महान बताते हुए माताओं की सेवा का संकल्प लिया।


कार्यक्रम में संस्थाध्यक्ष रणधीर प्रसाद गौड़ ‘धीर’, सचिव उपमेंद्र सक्सेना एड., संयोजक नत्थू लाल सदाचारी, एस. ए. हुदा सोंटा, सत्यवती सिंह ‘सत्या’, ठा.राम प्रकाश ‘ओज’, अमित मनोज, पीयूष गोयल ‘बेदिल’, मिलन कुमार ‘मिलन’, जगदीश निमिष, उमेश त्रिगुणायत, रीतेश साहनी, रजत कुमार एवं व्यास नंदन शर्मा आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन राज शुक्ल ‘गजल राज’ने किया।

9 मई ही है आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की वास्तविक जन्मतिथि

महापुरुषों की जन्मतिथि को लेकर अक्सर मत-विमत और मतभेद होते आए हैं। ऐसा ही एक मतभेद हिंदी के युग प्रवर्तक आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की जन्मतिथि को लेकर भी हिंदी पट्टी में अरसे से चला आ रहा है। कुछ विद्वानों का मानना है कि आचार्य द्विवेदी की जन्म तिथि 6 मई है। कुछ विद्वान 5 मई या 15 मई को भी उनकी जन्मतिथि के रूप में मान्यता देते हैं। हालांकि अधिकतर विद्वान 9 मई को ही प्रामाणिक जन्मतिथि मानते-जानते हैं। यह अलग बात है कि आज के इंटरनेटिया ज्ञानी ‘गूगल बाबा’ और ‘विकीपीडिया’ ‘कुछ’ विद्वानों की मान्यता को बल देते हुए आचार्य द्विवेदी की जन्मतिथि 15 मई देश और दुनिया को बताते चले जा रहे हैं। वैसे भी, माना जाता है कि इन इंटरनेटिया ज्ञानियों को वास्तविक और प्रामाणिक तिथि से कोई लेना-देना नहीं होता। जिसने जो बता दिया वह हमेशा के लिए फीड कर दिया। हालांकि, बिना छानबीन और पुख्ता आधार के गलत जानकारी पाठकों तक पहुंचाना अक्षम्य अपराध है।
आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की जन्मतिथि को लेकर उठे विवाद के मूल में भारतीय पंचांग के अनुसार उनकी जन्मतिथि का हर जगह लिखा होना है। भारतीय पंचांग के अनुसार, आचार्य द्विवेदी का जन्म वैशाख शुक्ल चतुर्थी संवत 1921 को हुआ था। तिथि का उल्लेख स्वयं आचार्य द्विवेदी ने भी किया है। भारतीय पंचांग के अनुसार की तिथि को अंग्रेजी कैलेंडर से परिवर्तित करने को लेकर ही जन्मतिथि को लेकर भ्रम पैदा हुआ।
जन्मतिथि के विवाद के आधार के रूप में आचार्य द्विवेदी का 13 मई 1932 को प्रयागराज से प्रकाशित होने वाले पत्र ‘भारत’ में प्रकाशित आचार्य द्विवेदी का वह पत्र ही उपयोग किया जाता रहा है। यह पत्र आचार्य द्विवेदी ने “भारत” के संपादक पंडित ज्योति प्रसाद मिश्र ‘निर्मल’ को लिखा था। दरअसल, 1932 में काशी से नए निकलने वाले पाक्षिक ‘जागरण’ के प्रस्ताव पर आचार्य द्विवेदी की 68 वीं वर्षगांठ देश के कई नगरों में धूमधाम से मनाई गई थी। इस संबंध में ‘कृतज्ञता ज्ञापन’ के लिए आचार्य द्विवेदी ने स्वयं एक पत्र भारत के संपादक पंडित ज्योति प्रकाश मिश्र ‘निर्मल’ को लिखा। कहा जाता है कि इस पत्र को प्रकाशित करते समय मुद्रण की गलती से 9 मई की जगह 6 मई प्रकाशित हो गया। या बाद के वर्षों में आचार्य द्विवेदी का वह पत्र प्रकाशित करने में दूसरे पत्र या पत्रिकाओं में मुद्रण की गलती से 9 मई की जगह 6 मई टाइप हो गया। यह गलती ही आचार्य द्विवेदी की जन्मतिथि को लेकर भ्रम पैदा करने में सहायक सिद्ध हुई।
कुछ विद्वान मानते हैं कि अपने समय की महत्वपूर्ण मासिक पत्रिका सरस्वती का संपादन करते हुए 10 करोड़ हिंदी भाषा-भाषियों का साहित्यिक अनुशासन करने वाले आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की जन्मतिथि को लेकर हिंदी वालों में कई मतभेद और भ्रम जानबूझकर पैदा किए गए हैं। अपने समय के कुछ विद्वानों ने अपनी बात को मनवाने के लिए ही अपनी- अपनी अंग्रेजी तिथियों पर जोर देना शुरू किया। विद्वानों की इसी अखाड़ेबाजी से हिंदी भाषा भाषी समाज में आचार्य द्विवेदी की जन्मतिथि को लेकर भ्रम बढ़ता गया और इसे दूर करने की कोशिशें न के बराबर ही हुईं। आचार्य द्विवेदी के बाद सरस्वती का संपादन का भार संभालने वाले पंडित देवी दत्त शुक्ल के पौत्र और प्रयागराज निवासी पंडित वृतशील शर्मा भी 9 मई को ही मान्यता देते हैं। आचार्य द्विवेदी की जन्म तिथि को लेकर उठे विवाद से वह अपने को आज तक आहत महसूस करते हैं। उनका कहना है कि आचार्य जी की जन्म तिथि से जुड़ा यह विवाद निर्मूल और अकारण है।
वर्तमान में हिंदी समालोचना के सशक्त हस्ताक्षर एवं लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष आचार्य डॉ. सूर्य प्रसाद दीक्षित 9 मई को ही आचार्य द्विवेदी की वास्तविक और प्रामाणिक जन्मतिथि मानते हैं। इस लेखक से उन्होंने स्वयं यह बात अधिकार पूर्वक कहीं की सब लोग 9 मई को जन्मतिथि मानने की बात पर सहमत हैं। वह कहते हैं कि आचार्य द्विवेदी की जन्म तिथि से जुड़े विवाद के निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए उन्होंने स्वयं कई किताबों का अध्ययन किया और पाया कि 9 मई ही आचार्य द्विवेदी की प्रामाणिक जन्मतिथि है क्योंकि अपने कृतज्ञता ज्ञापन में भी उन्होंने 9 मई का ही उल्लेख किया है।
आचार्य द्विवेदी पर शोधपरक पुस्तक ‘आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी’ लिखने वाले रायबरेली के साहित्यकार केशव प्रसाद बाजपेई की मान्यता भी 9 मई पर ही केंद्रित है। आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति द्वारा पिछले 11 वर्षों से प्रकाशित की जा रही स्मारिका ‘आचार्य पथ-2021’ के अंक में प्रकाशित अपने लेख में श्री बाजपेई कहते हैं कि जन्मतिथि के विवाद के निराकरण के लिए सबसे उपयुक्त उपाय संवत 1921 के पंचांग को देखने से जुड़ा था। इस विषय में खोजबीन करने पर पता चला है कि सन 1864 में 10 मई को हिंदू पंचांग के अनुसार संवत 1921 के वैशाख मास की पंचमी तिथि थी और दिन मंगलवार था। इस दिन आदि गुरु शंकराचार्य जी की जयंती पड़ी थी। उसके अनुसार वैशाख शुक्ल चतुर्थी दिन सोमवार 9 मई 1864 को पड़ता है।
वह अपने इस लेख में लिखते हैं- ‘इस विवेचना में अंग्रेजी की तिथि 6 मई असंगत है तथा 9 मई ही संगत है। 6 मई या तो मुद्रण की भूल से पत्र में अंकित हुई है या आचार्य जी का ध्यान ही कभी इस ओर नहीं गया कि पंचांग से इसकी संगति नहीं बैठती मेरी समझ में मुद्रण की त्रुटि से ही यह भ्रम पैदा हुआ है इनसे इतर तिथियां विचारणीय ही नहीं है। अतः यह निर्णय हुआ कि आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की वास्तविक जन्मतिथि अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से 9 मई 1864 है, जो हिंदू पंचांग के संवत 1921 बैशाख शुक्ल चतुर्थी दिन सोमवार से पूरी तरह मेल खाती है। एक दिन गणितीय विधि के अनुसार 9 मई 1864 को सोमवार का दिन आता है और आचार्य जी का जन्मदिन सोमवार ही है। अतः इस से भी उनकी जन्मतिथि 9 मई 1864 होनी ही पुष्टि होती है।’

इन प्रमाणों के आधार पर हिंदी भाषा भाषी समाज को खड़ी बोली हिंदी का उपहार देने वाले आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की जन्म तिथि को लेकर जानबूझ कर पैदा किए गए विवाद से बचते हुए 9 मई को ही जन्मतिथि की मान्यता देकर अपने इस महापुरुष के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करनी चाहिए।
हालांकि, महापुरुष के प्रति कृतज्ञता ज्ञापन के लिए खास तिथि का कोई महत्व नहीं है। वर्ष पर्यंत हम उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते रह सकते हैं, लेकिन दिन विशेष की बात आने पर हमें अपने इस पूर्वज को 9 मई (जन्मतिथि) और 21 दिसंबर 1938 (निर्वाण तिथि) को ही याद रखना होगा।

∆ गौरव अवस्थी
रायबरेली/उन्नाव

कृषि राज्यमंत्री ने किया 100 आम उत्पादकों को मैनुअल हार्वेस्टर तथा प्लास्टिक क्रेट्स का वितरण

कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार तथा कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने किया 100 आम उत्पादकों को मैनुअल हार्वेस्टर तथा प्लास्टिक क्रेट्स का वितरण

उद्यान मंत्री ने मैंगों पैक हाउस मलिहाबाद तथा नवीन आधुनिक मण्डी स्थल का किया निरीक्षण

प्रदेश सरकार आम उत्पादकों की समस्याओं के प्रति सजग

  • लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार तथा कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह आज मलिहाबाद के रहमान खेड़ा स्थित उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान संस्थान में उत्तर प्रदेश राज्य औद्यानिक विपणन संघ (हाफेड) द्वारा आयोजित कार्यक्रम तथा मण्डी परिषद की वित्तीय सहायता से आम उत्पादकों को प्रोत्साहन हेतु लखनऊ क्षेत्र के चयनित 100 आम उत्पादकों को मैनुअल मैंगो हार्वेस्टर तथा प्लास्टिक क्रेट्स का वितरण किया।
  • इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आम उत्पादकों को मैंगो हार्वेस्टर एवं क्रेट्स के वितरण से जहाँ एक ओर आम की गुणवत्ता सुरक्षित होगी और आम उत्पादकों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य प्राप्त होगा। जिससे उनकी आय में बढ़ोत्तरी होगी।
  • उद्यान मंत्री ने कहा कि गुणवत्ता युक्त निर्यातनोमुखी आम की उपलब्धता सुनिश्चित कराये जाने के उद्देश्य से आम की तुड़ाई के बाद प्रबन्धन के लिए लखनऊ क्षेत्र के 100 आम उत्पादक का चयन जिला उद्यान अधिकारी द्वारा किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य कृषि उत्पादन मण्डी परिषद के वित्तीय सहयोग से निर्यात योग्य आम उत्पादन करने वाले किसानों को 75 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आम का निर्यात विदेशों में किया जा रहा है इसके लिए उन्होंने हाफेड द्वारा किये गये कार्यों की सराहना की।
    श्री सिंह ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा है कि किसानों और व्यापारियों की समस्या को गम्भीरता से लिया जाये तथा उनका निस्तारण प्राथमिकता पर किया जाये। उन्होंने आम उत्पादकों से उनकी समस्यायें एवं सुझाव मांगे हैं, ताकि उसका निस्तारण प्राथमिकता पर किया जाये। उन्होंने निदेशक उद्यान को निर्देश दिये हैं कि विभाग द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ हर किसान को मिले तथा उनको किसी भी प्रकार की समस्या न आने पाये।
    उद्यान मंत्री को मलिहाबाद के आम उत्पादकों द्वारा अपनी समस्याओं के बारे में अवगत कराया गया, जिसमें सरकारी ट्यूबेल, फल मण्डी में दुकान, मलिहाबाद में आम उत्पादकों के लिए उचित दरों की दवा की दुकानें, पैकिंग बाक्स में जी.एस.टी. कम करने, मलिहाबाद में प्रोसेसिंग युनिट लगाने के लिए अनुरोध किया। इस पर उद्यान मंत्री ने आम उत्पादकों को आश्वस्त किया कि उनकी हर समस्या को प्राथमिकता पर हल करने का प्रयास किया जायेगा।
  • इसके उपरांत उद्यान मंत्री ने मैंगों पैक हाउस, मलिहाबाद तथा आधुनिक मण्डी स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने किसानों एवं व्यापारियों की समस्या को सुना तथा विभागीय अधिकारियों को तत्काल निदान के निर्देश दिए।
    उत्तर प्रदेश कृषि उत्पादन मण्डी परिषद की अपर निदेशक श्रीमती निधि श्रीवास्तव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मण्डी परिषद किसानों के लिए विभिन्न प्रकार की योजनाएं चला रही है जिसका लाभ किसानों को मिल रहा है। आम उत्पादकों के लिए उनके उत्पाद के निर्यात के लिए मैंगो पैक हाउस तैयार किया जा रहा है। इस अवसर पर उद्यान निदेशक डा0 आर.के. तोमर ने कहा कि आम उत्पादक अपने उत्पादकों पैकिंग तथा ग्रेडिंग करके भेजे जिससे उनकों उचित मूल्य प्राप्त हो। उन्होंने कहा कि लाभार्थियों का चयन प्रथम आवक-प्रथम पावक के माध्यम से किया गया है।
    इस कार्यक्रम में विभागीय विशेषज्ञों तथा निर्यात योग्य आम के उत्पादन हेतु आम की पूर्व एवं तुडाई उपरान्त प्रबन्धन से संबधित तकनीकि जानकारी दी गयी। इसमें गुणवत्तायुक्त पैकेंजिंग हेतु पूर्व कोरूगेटेडट बाक्स की उपयोगिता, उपलब्धता, मानक आदि के सबंध में विस्तार से जानकारी दी गयी।
  • कार्यक्रम में हाफेड के सभापति नवलेश प्रताप सिंह, उपनिदेशक उद्यान डा0 वीरेन्द्र यादव, नोडल अधिकारी शैलेन्द्र कुमार सुमन, जिला उद्यान अधिकारी बैजनाथ सिंह सहित बड़ी संख्या में वैज्ञानिक तथा आम उत्पादक/किसान उपस्थित रहे।

आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति निबंध प्रतियोगिता

भारत व अमेरिका में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति – निबंध प्रतियोगिता का आयोजन। ज़ूम के माध्यम से किया जाएगा कार्यक्रम का आयोजन।


लखनऊ। हमारी भाषा हिंदी तथा आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की भारत एवं अमेरिका इकाई द्वारा आयोजित ‘आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति निबंध प्रतियोगिता’ में भाग लेने के लिए भारत एवं अमेरिका के 12 से 18 वर्ष की उम्र के सभी छात्रों का स्वागत है। यह जानकारी देते हुए आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी समिति अमेरिका की अध्यक्ष मंजू मिश्रा ने बताया कि कार्यक्रम का आयोजन ज़ूम के माध्यम से किया जाएगा तथा इसका लाइव प्रसारण हमारी भाषा हिंदी के फ़ेसबुक पेज से किया जाएगा।

Program Details / कार्यक्रम का समय :

21 मई, 2022 शाम 7.30 बजे PST (कैलिफ़ोर्निया समय)
22 मई, 2022 प्रात: 8.00 बजे IST (भारतीय समय)

इच्छुक प्रतिभागी इस गूगल फॅार्म में प्रतिभागिता आवेदन के साथ सूची में दिए गए विषयों में से किसी एक विषय पर 250 – 300 शब्दों का निबंध 15 मई, 2022 तक जमा कर दें। विजेताओं को पुरस्कार के साथ कार्यक्रम में अपने निबंध पढ़ कर सुनाने का अवसर भी प्रदान किया जाएगा। सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा ।पुरस्कृत निबंध आचार्य पथ स्मारिका में भी प्रकाशित किए जाएंगे।


https://forms.gle/qTcWbdb7o9jm9fMTA

कार्यक्रम का आयोजन ज़ूम के माध्यम से किया जाएगा तथा इसका लाइव प्रसारण हमारी भाषा हिंदी के फ़ेसबुक पेज से किया जाएगा। आवेदन करने वाले सभी प्रतिभागियों ज़ूम लिंक तथा अन्य आवश्यक सूचना ईमेल के द्वारा भेजी जाएगी।

Essay Topics / निबंध के विषय :

  1. वर्तमान समय में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के विचारों की प्रासंगिकता
  2. युवा वर्ग में हिंदी को कैसे लोकप्रिय बनाया जाए
  3. विदेशों मे हिंदी की गूंज

Competition Rules / प्रातिभागिता के नियम :

  1. निबंध भेजने की अंतिम तिथि – 15 मई, 2022
  2. आयु सीमा : 12 से 18 वर्ष
  3. शब्द सीमा 250 – 300 ( 300 शब्दों से अधिक होने पर निबंध पर विचार नहीं किया जाएगा)

आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी समिति अमेरिका की अध्यक्ष मंजू मिश्रा ने अनुरोध किया है कि यह संदेश ज्यादा से ज्यादा लोगों तक प्रसारित करने में अपना सहयोग प्रदान करें।

मलिहाबाद पहुंचे पूर्व उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा

मलिहाबाद,लखनऊ। भाजपा के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व उप मुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा सोमवार दोपहर एक निजी कार्यक्रम मुण्डन संस्कार मे शामिल होने देवम लॉन मलिहाबाद पहुंचे। उन्होंने क्षेत्र के भाजपा नेताओं से भेंट कर उनकी कुशलक्षेम जानी।

वह दोपहर पाठक गंज मे अपनी बहन संध्या पाठक के घर पहुंचे। यहां पर शांतनु पाठक,  कार्तिकेय पाठक, सुमित पाठक,अनादि पाठक, राजीव तिवारी, प्रमोद पाठक आदि परिजनों के साथ मिलकर कुल देवी की पूजा अर्चना के उपरांत कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे।


देवम लॉन के संचालक विकास पाठक ने दर्जनों भाजपा कार्यकर्ताओं एवं पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष धर्मेन्द्र प्रधान,  विधायक प्रतिनिधि विकास किशोर आशू ने जोरदार स्वागत किया। 

इस दौरान उन्होंने वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता सैय्यद खलील अहमद, पूर्व ब्लाक प्रमुख पति अनिल सिंह चौहान, उमाकांत गुप्ता, बबलू सिंह, विशाल पाठक, मारूफ अंसारी सहित दर्जनों कार्यकर्ताओं से मिलकर कुशल क्षेम जानी। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से संगठन मजबूत रखने की अपील की। फिर बच्चे को आशीर्वाद देकर उनका काफिला लखनऊ की तरफ निकल गया।

बैलगाड़ी पर निकली डॉक्टर की बारात

बैतूल (एजेंसी)। आमतौर पर शादी समारोह में लोग अपनी हैसियत और ताकत का प्रदर्शन करने से नहीं चूकते, मगर मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में एक चिकित्सक ने अपने विवाह समारोह में सादगी की मिसाल पेश की। उसने अपनी बारात बैलगाड़ी पर निकाली। लगभग तीन किलो मीटर का सफर बैलगाड़़ी पर ही तय किया।

बैतूल के चिचोली विकास खंड का आदिवासी बाहुल्य गांव असाढ़ी है। यहां के डॉ. राजा धुर्वे की शादी थी, उन्होंने आदिवासी समाज की परंपरा और शादी सादगी से करने का फैसला लिया और बारात बैलगाड़ी से निकाली। इसके लिए बैलगाड़ी को आकर्षक रुप दिया। इस बैलगाड़ी की चमक के आगे लग्जरी कार और बग्घियां भी फीकी दिखाई दीं। डॉ राजा पेशे से एमबीबीएस डॉक्टर, शिक्षक और मोटिवेशनल स्पीकर हैं।

इस मौके पर राजा धुर्वे का कहना था कि अपने सामाजिक, सांस्कृतिक मूल्यों को सहेजने और लोगों को महंगाई के दौर में सादा जीवन-उच्च विचार सिखाने का इससे अच्छा मौका नहीं हो सकता था। उनके मुताबिक महंगाई के इस दौर में बैलगाड़ी सबसे सस्ता सुलभ और प्रदूषणमुक्त साधन है। बैलगाड़ी ग्रामीण सभ्यता संस्कृति की पहचान है। इसलिए अपनी संस्कृति को पुनर्जीवित करने के लिए उन्होंने बैलगाड़ी पर बारात ले जाने का फैसला किया।

इस अनूठी बारात में बैलगाड़ी को खास जनजातीय, लोक-कलाओं से सजाया गया था। दूल्हे की बैलगाड़ी के पीछे चार बैलगाडियां में बच्चों और महिलाओं को बैठाया गया। बारात में जनजातीय लोक नृत्य और लोक वाद्य शामिल किए गए थे, जो आमतौर पर किसी शादी में देखने को नहीं मिलते। ग्राम असाढ़ी से बैलगाड़ी में निकले दूल्हे राजा जब तीन किलोमीटर दूर दूधिया गांव में अपनी दुल्हन को लेने पहुंचे तो लोग झूम उठे।

स्मार्ट सिटी की तर्ज पर होगा गांवों का कायाकल्प: योगी

लखनऊ। स्मार्ट सिटी की तरह स्मार्ट गांव बनाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संकल्पना को साकार रूप देने  के लिए प्रदेश सरकार जोरदार प्रयास करेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ग्राम पंचायतों को हाईटेक बनाने का अभियान युद्ध स्तर पर छेड दिया गया है। योगी आदित्यनाथ रविवार को जालौन जिले के डकोर ब्लाक की पंचायत ऐरी रम्पुरा में राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे थे।

प्रत्येक पंचायत में होगा नियमित सचिवालय

उन्होंने प्रदेश की चुनिंदा ग्राम पंचायतों के हाईटेक सुसज्जतिकरण का डिजिटल लोकार्पण भी किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा ग्राम पंचायतों को विकास की धुरी के रूप में सशक्त करने की है। प्रदेश सरकार ने इसके अनुरूप प्रत्येक ग्राम पंचायत में नियमित सचिवालय शुरू करने का खाका तैयार किया है। इसके लिए सभी पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर से आच्छादित किया जाएगा ताकि पंचायत सचिवालय में निर्बाध इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध हो सके। इससे ग्रामीणों को अपने सारे जरूरी प्रमाण पत्रों के लिए आवेदन और उन्हें प्राप्त करना संभव हो जाएगा।

प्रधानों को दिए मॉडल ग्राम पंचायत बनाने के टिप्स

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में ग्रामीणों को सप्ताह में एक दिन बैठक करके  महिला सुरक्षा और सभी सरकारी योजनाओं से अवगत कराया जाना चाहिए। उन्होंने गांव के स्कूल भवनों के सुंदरीकरण, जल संरक्षण हेतु अमृत सरोवर और नौनिहालों को खुशनुमा सुविधाओं की व्यवस्था आदि के बारे में मॉडल ग्राम पंचायत बनाने को ले कर टिप्स दिए। इसके पहले योगी ने पंडित दीन दयाल उपाध्याय  जिला पंचायत सशक्तिकरण सम्मान से जिला पंचायत को अलंकृत किया। ऐरी रम्पुरा के युवा प्रधान ओंकार पाल को बाल मित्र ग्राम पंचायत सम्मान व कुठौंद ब्लॉक अंतर्गत कुरेपुरा कनार के प्रधान शिवदास गुप्ता को पंडित दीन दयाल उपाध्याय  ग्राम पंचायत सशक्तिकरण सम्मान से नवाजा।

जूनियर से अपग्रेड होकर अब हाई स्कूल

ऐरी रमपुरा के प्रधान ओंकार पाल की मांग पर उन्होंने गांव के जूनियर हाई स्कूल को अपग्रेड करके हाई स्कूल की मान्यता देने की घोषणा की। कहा कि गांव में स्वास्थ्य व चिकित्सा की व्यवस्था के लिए प्रारंभिक तौर पर हेल्थ पोस्ट स्थापित की जाएगी, जिसे बाद में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के रूप  में तैयार  किया जाएगा। कार्यक्रम में प्रदेश के पंचायती राज मंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री भानु प्रताप वर्मा, जिले के सभी विधायक, एमएलसी रमा निरंजन  और जिला पंचायत अध्यक्ष मौजूद रहे।

गुरु तेग बहादुर जी के त्याग व बलिदान को नमन

गुरु तेग बहादुर अपने त्याग और बलिदान के लिए वह सही अर्थों में ‘हिन्द की चादर’ कहलाए। अपने धर्म, मानवीय मूल्यों, आदर्शों एवं सिद्धांत की रक्षा के लिए विश्व इतिहास में जिन लोगों ने प्राणों की आहुति दी, उनमें गुरु तेग बहादुर साहब का स्थान अग्रिम पंक्ति में हैं।  

बिजनौर। श्री गुरु गोविंद सिंह खालसा विद्यालय खासपुरा ऊमरी में हिंद की चादर गुरु तेग बहादर जी का 400वां  प्रकाश पर्व गुरबाणी पाठ उपरांत अरदास के द्वारा मनाया गया।

इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य सरदार अभिषेक सिंह कोमल ने गुरु जी के जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला। उन्होंने देश धर्म की रक्षा के लिए उनके बलिदान को नमन करते हुए अपना प्रेरणास्रोत बताया।

विदित हो कि देश भर में सिखों के नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी का 400वां प्रकाश पर्व मनाया जा रहा है। गुरु तेग बहादुर सिंह एक क्रांतिकारी युग पुरुष थे और उनका जन्म वैसाख कृष्ण पंचमी को पंजाब के अमृतसर में हुआ था। इस दिन को शहीदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन गुरु साहिब के इतिहास और शहादत के बारे में बताया जाता है।

गुरुद्वारा शीशगंज साहिब के अंदर का दृश्य (फाइल फोटो)

श्री गुरु तेग बहादुर जी
अमृतसर में जन्मे गुरु तेग बहादुर; गुरु हरगोविन्द जी के पांचवें पुत्र थे। 8वें गुरु हरिकृष्ण राय जी के निधन के बाद इन्हें 9वां गुरु बनाया गया था। इन्होंने आनन्दपुर साहिब का निर्माण कराया और ये वहीं रहने लगे थे। वे बचपन से ही बहादुर, निर्भीक स्वभाव के और आध्यात्मिक रुचि वाले थे। मात्र 14 वर्ष की आयु में अपने पिता के साथ मुगलों के हमले के खिलाफ हुए युद्ध में उन्होंने अपनी वीरता का परिचय दिया। इस वीरता से प्रभावित होकर उनके पिता ने उनका नाम तेग बहादुर यानी तलवार के धनी रख दिया।

उन्होंने मुगल शासक औरंगजेब की तमाम कोशिशों के बावजूद इस्लाम धारण नहीं किया और तमाम जुल्मों का पूरी दृढ़ता से सामना किया। औरंगजेब ने उन्हें इस्लाम कबूल करने को कहा तो गुरु साहब ने कहा शीश कटा सकते हैं केश नहीं। औरंगजेब ने गुरुजी पर अनेक अत्याचार किए, परंतु वे अविचलित रहे। वह लगातार हिन्दुओं, सिखों, कश्मीरी पंडितों और गैर मुस्लिमों का इस्लाम में जबरन धर्मांतरण का विरोध कर रहे थे, जिससे औरंगजेब खासा नाराज था। 

आठ दिनों की यातना के बाद गुरुजी को दिल्ली के चांदनी चौक में शीश काटकर शहीद कर दिया गया। उनके शहीदी स्थल पर गुरुद्वारा बनाया गया, जिसे गुरुद्वारा शीशगंज साहब नाम से जाना जाता है। विश्व इतिहास में धर्म एवं मानवीय मूल्यों, आदर्शों एवं सिद्धांत की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वालों में गुरु तेग बहादुर साहब का स्थान अद्वितीय है। उनकी शहादत ने मानवाधिकारों की सुरक्षा को सिख पहचान बनाने में मदद की”।”नौवें गुरु को बलपूर्वक धर्मान्तरित करने के प्रयास ने स्पष्ट रूप से शहीद के नौ वर्षीय बेटे, गोबिन्द पर एक अमिट छाप डाली, जिन्होंने धीरे-धीरे सिख समूहों को इकट्ठा करके इसका प्रतिकार किया और खालसा पहचान को जन्म दिया।”

होम्योपैथी सर्वसुलभ एवं दुष्प्रभाव रहित चिकित्सा पद्धति: डॉ. शूरवीर सिंह

विश्व होम्योपैथिक दिवस पर होम्योपैथी के जनक डॉ. हैनिमैन को किया याद। 267 वें जन्म दिवस पर हुआ कार्यक्रम का आयोजन। कोरोना महामारी के दौरान होम्योपैथिक दवाइयों के योगदान को सराहा। सर्वसम्मति से अगले सत्र के लिये चुने गए डॉ. स्नेह प्रताप अध्यक्ष व डॉ. अन्तरिक्ष छिल्लर सचिव।

बिजनौर। विश्व होम्योपैथिक दिवस पर होम्योपैथी के जनक डॉ. हैनिमैन के 267वें जन्म दिवस (10 अप्रैल) पर होम्योपैथिक मेंडिकल एसोसिएशन बिजनौर ने इम्प्रेशन रेस्टोरेन्ट में एक कार्यक्रम का आयोजन किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. शूरवीर सिंह व संचालन सचिव डॉ. नीरज कुमार ने किया। मुख्य अतिथि डॉ. रमेश तोमर ने दीप प्रज्ज्वलित करने के साथ ही डॉ. हैनिमैन के चित्र पर पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। इस दौरान सर्व सम्मति से अगले सत्र के लिये डॉ. स्नेह प्रताप को अध्यक्ष व डॉ. अन्तरिक्ष छिल्लर को सचिव चुना गया। मुख्य अतिथि डॉ. रमेश तोमर ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि चिकित्सक का धर्म है कि बिना भेदभाव के सभी के स्वास्थ्य तथा मानवता की भलाई के लिये कार्यरत रहे। कोरोना महामारी के दौरान चिकित्सकों ने अपना धर्म बखूबी निभाया।

अध्यक्ष डॉ. शूरवीर सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि होम्योपैथी एक सर्वसुलभ एवं दुष्प्रभाव रहित चिकित्सा पद्धति है। कोरोना महामारी के दौरान होम्योपेथिक दवाईयों ने बहुत ही अच्छा काम किया। होथोपैथिक दवाईयां बचाव व इम्युनिटी बूस्टर के रूप में अत्यधिक लाभदायक रही हैं।

सचिव डॉ. नीरज कुमार ने कहा कि होम्योपैथी द्वारा पुरानी एवं जटिल से जटिल बीमारियों का सफल इलाज संभव है। होम्योपैथिक दवाइयों के सेवन से पूर्ण लाभ प्राप्त होता है तथा इसका कोई दुष्प्रभाव भी नहीं पड़ता। कोरोना महामारी के दौरान होम्योपैथिक दवाइयों ने बहुत ही योगदान दिया है।

इस अवसर पर डॉ. अजवीर सिंह, डॉ. युवराज सिंह, डॉ. संजीव, डॉ. अमित राणा, डॉ. विनोद सिंह, डॉ. राहुल त्यामी, डॉ. सुमित विश्नोई, डॉ. धर्मेन्द्र सिंह, डॉ. ध्यान सिंह आदि उपस्थित रहे।

सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के नए शैक्षिक सत्र का शुभारंभ

बिजनौर। अफजलगढ़ स्थित सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज परिसर में विधिवत पूजा-अर्चना करके नए शैक्षिक सत्र का शुभारंभ किया गया।

विद्यालय परिसर में हवन एवं सरस्वती पूजन किया गया। अखिलेश सिंह ने सपत्नीक यज्ञमानी की तथा पंडित मुकेश जखमोला ने पूर्ण विधि-विधान पूर्वक सरस्वती पूजन संपन्न कराकर उपस्थित लोगों को हिंदू नव वर्ष की शुभकामनाएं दी। वहीं प्रधानाचार्य प्रवेन्द्र कुमार ने सभी छात्र-छात्राओं के उज्जवल भविष्य के लिए मां सरस्वती से प्रार्थना की। सभी अध्यापक गणों के साथ साथ कार्यक्रम में उपस्थित सभी छात्र- छात्राओं ने यज्ञ में आहुतियां दी। इस अवसर पर आनंद भूषण यादव, राजीव कुमार अग्रवाल, रमाकान्त तिवारी, शौकेन्द्र कुमार तथा अमरीश कुमार का योगदान रहा।

न्यू एरा अकैडमी में वार्षिकोत्सव व परीक्षा फल का वितरण

बिजनौर। नजीबाबाद के न्यू एरा अकैडमी में वार्षिकोत्सव मनाते हुए परीक्षा फल का वितरण किया गया। सभी सफलता प्राप्त विद्यार्थियों ने परीक्षा परिणाम प्राप्त कर खुशी मनाई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि वरिष्ठ भाजपा नेता चौधरी ईशम सिंह ने कहा कि समाज में शिक्षा का महत्वपूर्ण स्थान है।

न्यू एरा अकैडमी लाहक कला में विद्यालय का वार्षिकोत्सव एवं परीक्षा फल का वितरण किया गया। सभी सफलता प्राप्त विद्यार्थियों ने परीक्षा परिणाम प्राप्त कर खुशी मनाई।

विद्यालय के वार्षिकोत्सव में विद्यालय के नन्हे मुन्ने बच्चों ने कई सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। मुख्य अतिथि वरिष्ठ भाजपा नेता चौधरी ईशम सिंह ने मां सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने विद्यालय के छात्र छात्राओं सब स्टाफ एवं छात्र-छात्राओं के अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि समाज में शिक्षा का महत्वपूर्ण स्थान है। शिक्षित व्यक्ति अपने जीवन में जो कार्य भी करता है, उसकी अलग पहचान होती है। उन्होंने सभी अभिभावकों से अपने अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने की अपील की।

इस अवसर पर साबिर अहमद, शाहबपुरा उमराव से इरशाद अहमद ठेकेदार, डा शमशेर खान लाहक कला,
वीरेंदर सिंह, महिपाल सिंह चौहान, हामिद खान पूर्व प्रधान, उस्मान भाई,सुशील कुमार, सुधीर कुमार, राकेश कुमार, शिवम कुमार इत्यादि छात्र कक्षा 1 में मौ फ़ैज़, 2 में रफिया, कक्षा 3 आहिल, कक्षा 4 में कार्तिक कुमार, कक्षा 5 में अक्षित कुमार इत्यादि छात्रों ने अपनी अपनी कक्षाओं में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथि चौधरी इसम सिंह, नादिर हसन, अश्वनी कुमार आदि ने सभी छात्र छात्राओं को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर अज़हर हसन अध्यक्ष, अज़रा मैनेजर, स्टाफ श्रवण कुमार, प्रिंसिपल शालिनी चौहान, वाईस प्रिंसिपल हुमेरा, निशा, इरम, फ़िज़ा, आयशा, फरहाना
विनीता इत्यादि उपस्थित रहे।

वैभव अग्रवाल बने आईवीएफ के जिला महामंत्री


बिजनौर। अंतर्राष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन (उत्तर प्रदेश) के प्रदेश उपाध्यक्ष गौरव अग्रवाल एडवोकेट की संस्तुति पर अंतर्राष्ट्रीय वैश्य महा सम्मेलन (जनपद बिजनौर) के जिला अध्यक्ष अभिनव अग्रवाल एडवोकेट द्वारा स्थानीय वैभव अग्रवाल को जनपद बिजनौर का जिला महामंत्री मनोनीत किया गया है। उनसे आशा व्यक्त की गई है कि वह संगठन को एक नयी दिशा व मजबूती प्रदान करेंगे। आईवीएफ जिलाध्यक्ष अभिनव अग्रवाल एडवोकेट ने नव मनोनित जिला महामंत्री वैभव अग्रवाल से आशा की है कि वह वैश्य समाज की परम्परा को आगे बढाते हुए समाज में फैली कुरीतियों के उन्मूलन व रचनात्मक कार्यो के प्रति समर्पित रहेंगे।

नवरेह मनाने 2 अप्रैल को घाटी पहुंचेंगे कश्मीरी पंडित

नई दिल्ली। कश्मीरी पंडित नवरेह मनाने 2 अप्रैल को घाटी पहुंचेंगे। द कश्मीर फाइल्स में कश्मीरी पंडितों के विस्थापन का दर्द सामने आने के बाद इस बार नए साल यानी नवरेह पर घाटी में पंडितों की वापसी की आवाज बुलंद होगी। देशभर से कश्मीरी पंडित नवरेह मनाने 2 अप्रैल को घाटी पहुंचेंगे।
जम्मू से भी बस के जरिये कश्मीरी पंडित घाटी में जाकर हरि पर्वत पर मां शारिका मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ ही पंडितों की वापसी की कामना करेंगे। सार्वजनिक समारोह कर वापसी के लिए अनुकूल माहौल बनाने के प्रयास होंगे, जिसमें सभी धर्मों व संप्रदाय के लोग शामिल होंगे। भाजपा नेता डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी व शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी भी इस मौके की साक्षी होंगी।
जेके पीस फोरम की ओर से देशभर के कश्मीरी पंडितों को नवरेह पर दो अप्रैल को कश्मीर में जुटाने की तैयारियां की गई हैं। इसके तहत शारिका मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ ही शेर-ए कश्मीर पार्क में नवरेह मिलन कार्यक्रम होगा। घाटी में भाईचारे को बढ़ावा देने के साथ ही पंडितों की सम्मानजनक वापसी की आवाज बुलंद की जाएगी।
कार्यक्रम का उद्देश्य 30 साल के विस्थापन के बीच धार्मिक-सांस्कृतिक रीति-रिवाजों से नई पीढ़ी को अवगत कराना और दहशत में घर-बार छोड़ने के लिए मजबूर लोगों के लिए सुरक्षा व आत्म सम्मान की भावना जगाना है। फोरम के चेयरमैन सतीश महालदार ने बताया कि इस बार कोशिश है कि सभी धर्मों के लोगों को एक मंच पर लाकर पंडितों की वापसी का माहौल बनाया जाए। इसके लिए अंतर समुदाय सांस्कृतिक महोत्सव भी कराया जा रहा है। कोशिश होगी कि सभी लोग एक-दूसरे की भावनाओं को समझें व सभी के प्रति सम्मान का भाव जगे। विस्थापन का दर्द झेल रहे पंडितों को सम्मान मिले।
सर संघचालक डॉ. मोहन भागवत भी नवरेह पर इस बार ऑनलाइन संबोधित करेंगे। संजीवनी शारदा केंद्र जम्मू के माध्यम से इस कार्यक्रम का आयोजन तीन अप्रैल को होगा। सर संघचालक पिछले साल संबोधन करने वाले थे, लेकिन अस्वस्थ होने की वजह से यह संभव नहीं हो पाया था।

दूसरी बार UP के मुख्यमंत्री बने योगी आदित्यनाथ

केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक ने भी ली उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ

लखनऊ (एजेंसी)। योगी आदित्यनाथ ने दूसरी बार यूपी के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने योगी को पद व गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस मौके पर केशव प्रसाद और ब्रजेश पाठक ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

केशव प्रसाद मौर्य ने दोबारा सूबे के उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। विधानसभा चुनावों में हार के बावजूद भाजपा आलाकमान ने उन पर भरोसा बनाए रखा है। वहीं कानून मंत्री रहे ब्रजेश पाठक को उप-मुख्यमंत्री बनाया गया है। उन्होंने पद और गोपनीयता की शपथ ली है। पार्टी में ब्रजेश पाठक का कद बढ़ाया गया है। तय हो गया है कि भाजपा अब ब्राह्मणों की लीडरशिप में बदलाव कर रही है।

Yogi Adityanath takes oath as UP chief minister for second time | Latest  News India - Hindustan Times

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव 2022 में प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करने वाली भाजपा को योगी आदित्यनाथ के रूप में विधायक दल का नेता भी दोबारा मिला है। भाजपा का फोकस मिशन 2024 पर है, इसको देखते हुए योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल 2.0 में जातीय व क्षेत्रीय समीकरण के साथ पुरानी कैबिनेट में रहे कुछ विधायकों का सम्मान भी बरकरार रखा गया है।

उत्तराखंड की पूर्व राज्यपाल बेबी रानी मौर्य को मंत्रिमंडल में जगह मिली है। विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। स्वतंत्र देव सिंह को योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल में मंत्री बनाया गया है। वह यूपी भाजपा अध्यक्ष हैं।

शाहजहांपुर से विधायक सुरेश कुमार खन्ना को योगी कैबिनेट में जगह मिली है। इसके अलावा योगी सरकार में सूर्य प्रताप शाही ने भी शपथ ली है। शाही को भाजपा के कद्दावर नेताओं में गिना जाता है। नंद गोपाल नंदी को योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल में जगह मिली है। नंदी प्रयागराज दक्षिण सीट से विधायक चुने गए हैं। नंदी तीसरी बार विधायक बने हैं।

मैनपुरी विधानसभा से विधायक जयवीर सिंह को योगी सरकार में मंत्री बनाया गया है। जयवीर मुलायम और मायावती सरकार में भी मंत्री रहे हैं। मथुरा के लक्ष्मी नारायण चौधरी को योगी मंत्रिमंडल में जगह मिली है। वह छाता विधानसभा से पांच बार विधायक और मायावती सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं।

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इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृहमंत्री अमित शाह मंच पर मौजूद हैं। इसके अलावा केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केन्द्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, भाजपा संगठन महामंत्री सुनील बंसल, भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी मौजूद हैं।

कविता इंसान को सिर्फ जिंदा नहीं रखती, जवान भी रखती है: डॉ. पंकज भारद्वाज

ग्रीन लाइट सीनियर सेंकेडरी पब्लिक स्कूल में हुआ काव्य गोष्ठी का आयोजन। गोष्ठी में कवियों ने प्रस्तुत की रचनाएं। मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए सांध्य हिंदी दैनिक पब्लिक इमोशन के संपादक डॉ. पंकज भारद्वाज।

बिजनौर। साहित्य संगम के तत्वावधान में ग्रीन लाइट सीनियर सेकेंडरी पब्लिक स्कूल अभिभुरा मंडावली में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।

मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार डॉ. पंकज भारद्वाज ने कहा कि कविता इंसान को सिर्फ जिंदा नहीं रखती बल्कि जवान रखती है। उन्होंने कहा कि कविता के जरिए मौहब्बत एवं पीड़ा को व्यक्त किया जा सकता है किंतु नफरत बांटने का जरिया कविता को नहीं बनाया जा सकता। संयोजक रविंद्र कुमार और संरक्षक कर्मवीर सिंह के सानिध्य में हुई गोष्ठी की अध्यक्षता श्याम प्रकाश तिवारी व संचालन जितेंद्र सिंह कक्कड़ ने किया।

कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि द्वारा माता सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवल एवं माल्यार्पण से हुआ। इसके बाद संरक्षक कर्मवीर सिंह ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। तत्पश्चात काव्य गोष्ठी में कुमुद कुमार ने कहा- शौर्य के पन्नों पर लिखा हमनें इतिहास भारत का; शस्त्र और शास्त्र से सजाया हमनें इतिहास भारत का।

वरिष्ठ कवि प्रदीप डेजी ने कहा-अपने आंसू पीते पीते हम प्यास बुझाना भूल गए; थोड़े से बस क्या बड़े हुए हम वक्त पुराना भूल गए। जितेंद्र कक्कड़ ने कहा- दर्द जमाने का सह लेते तो सफर कैसा होता; हम तो पी लेते पर आशियाने का क्या होता। राजेंद्र त्यागी ने कहा नफरतों को मेरे दोस्त दिल से हटा; दु:ख को मैं तेरे तू मेरे दु:ख को बंटा। संत भगीरथ सिंह ने कहा- नफरतों की आग को दिल से बुझाने आ गया हूं। डा. प्रमोद शर्मा प्रेम ने कहा- सारी नफरत जहाँ से हटा दीजिये; कोई रूठे अगर फिर मना लीजिए। अशोक सविता ने कहा- भावनाओं को लहूलुहान करना पड़ता है। मनोज कुमार मानव ने कहा – लाया पुत्र विशेष था जाकर बसा विदेश; घर पर सेवा कर रहा नालायक अवशेष। बेगराज यादव ने कहा- मेरे अपने अपने से नहीं लगते; मिलते हैं होली लेकिन दिल से नहीं मिलते। जयपाल रसिक ने कहा- कौन कहता है चार दिन चांदनी फिर अंधेरी रात है। मैं मर कर भी मेरी जान तुझे चाहूंगा। गमगीन साबिर ने कहा- पहले नफरत की दीवार गिराई जाए फिर होली और ईद मनाई जाए। रंग बिरंगी बहुरंगी सतरंगी छटा सजाई है। यह कौन है तेरा जिसने सुंदर तस्वीर बनाई है।

गोष्ठी में कर्मवीर सिंह, रविंद्र काकरण आदि ने भी रचनाएं प्रस्तुत कर वाहवाही लूटी। बालक अंश प्रताप ने शिव तांडव सुनाकर सभी का अशीर्वाद प्राप्त किया। अशोक कुमार अग्रवाल ने सभी कवियों की रचनाओं पर समीक्षा की। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्याम प्रकाश तिवारी ने सभी कवियों के प्रति अपना आभार प्रकट किया। साथ ही सभी कवियों के काव्य पर अपना विचार प्रकट कर संबोधित किया। अंत में मुख्य अतिथि पंकज भारद्वाज, कार्यक्रम अध्यक्ष श्याम प्रकाश तिवारी व संचालन कर रहे जितेंद्र कक्कड़ को शाल और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता बने पीएम मोदी, बाइडन, जॉनसन को भी पछाड़ा

दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता बने पीएम मोदी, बाइडन, जॉनसन को भी पछाड़ा

नई दिल्ली (एजेंसी)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर से दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता चुने गए हैं। ग्लोबल लीडर अप्रूवल ट्रैकर मॉर्निंग कंसल्ट की ओर से जारी की गई नेताओं की सूची में पीएम मोदी को 77 फीसदी अप्रूवल रेटिंग मिली है। इस रेटिंग के साथ वह पहले स्थान पर हैं। मॉर्निंग कंसल्टेंट की ओर से डेटा जारी करने के साथ कहा गया कि, 13 देशो में सबसे ज्यादा अप्रूवल रेटिंग पीएम मोदी की है, जो दिखाता है कि वह कितने लोकप्रिय नेता हैं।

इस सूची में पीएम मोदी के बाद दूसरे स्थान पर मेक्सिको के मैनुअल लोपेज हैं, जिन्हें 63 प्रतिशत रेटिंग मिली है। वहीं इटली के मारिया द्राघी 54 फीसदी रेटिंग के बाद सूची में तीसरे स्थान पर आते हैं। जापान के फुमियो किशिदा को 42 प्रतिशत रेटिंग मिली है। इसमें एक बात और खास है कि पीएम मोदी की डिसअप्रूवल रेटिंग भी सबसे कम 17 प्रतिशत है। संस्था के मुताबिक, पीएम मोदी 2020 से 2022 तक के अधिकांश महीनों में सबसे लोकप्रिय नेता बने रहे।

पीएम मोदी ने इस सूची में अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन, ब्रिटेन के पीएम बोरिस जॉनसन और कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो को भी पीछे छोड़ दिया है। सूची में जो बाइडन को 42 प्रतिशत, ट्रूडो को 41 प्रतिशत रेटिंग मिली है। वहीं जॉनसन इस सूची में सबसे निचले पायदान पर हैं। उन्हें 33 प्रतिशत रेटिंग मिली है।

खुदा के यहां इन चार लोगों की नहीं होगी बख़्शीश: मुफ्ती रियाज क़ासमी


बिजनौर। अफजलगढ़ नगर में बस स्टैंड पर स्थित अबु बकर मस्जिद में शब ए बराअत की रात में मुफ्ती रियाज क़ासमी ने नमाजियों को उन चार लोगों के बारे में बताया, जिनकी शब ए बराअत को खुदा के यहां बख़्शीश नहीं होगी।

शुक्रवार को शब ए बराअत के मौके पर इशा की नमाज पढ़ने के बाद मुफ्ती रियाज साहब क़ासमी ने बयान करते हुए लोगों से कहा कि इस रात में उन चार लोगों की खुदा के यहां बख़्शीश नहीं होगी जो शराब पीकर लोगों सहित अपने परिवार के साथ मारपीट करते हुए और शराब पीने के आदी बन चुके हैं और जो लोग एक दूसरे की बुराई करने से बाज नहीं आते है और एक दूसरे को नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ते हो और जो लोग अपने मां बाप की इज्जत नहीं करते है और अपने मां बाप की ना फरमानी कर उनकी बातों को नहीं सुनते हैं और आखिरी उन लोगों की जो रिश्तेदारों में लड़ाई कराकर दूरी बनाने की कोशिश करते हैं उन लोगों की खुदा के यहां शब ए बराअत की रात में बख़्शीश नहीं होगी। इस मौके पर उन्होंने मुस्लिम समाज के लोगों से कहा कि अपने अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दो लेकिन दीनी तालीम पहले हासिल करानी चाहिए क्योंकि जब बच्चा अच्छा आदमी होगा तो वह अच्छा अधिकारी भी होगा अच्छा इंजीनियर भी होगा दीनी तालीम का इंतिज़ाम पहले किया जाये उसके साथ साथ दुनयावी तालीम जितना ज्यादा हो अपने बच्चों को दिलायें और अच्छे मां बाप बनकर अच्छी शिक्षा दिलाकर अपना फर्ज निभाने का काम करें। शबे बराअत ये समझें के अल्लाह की तरफ से बंदों को बख्शने का एक बहाना है और ये रमज़ान की तैयारी है ताके हम अभी से रमज़ान के लिए तैयार हो जाये। आखिर में पूरे मुल्क के अमनो अमान के लिये दुआ कराई गई। इस मौके पर पुलिस बल की तरफ़ से की गई तैयारी और इंतिज़ाम क़ाबिल ए तारीफ़ रहा और पूरे प्रदेश में दोनों त्योहारों को अमन शांति से गुज़र जाने पर पुलिस प्रशासन की सराहना करते हुए हिन्दुस्तान की गंगा जमुना तहज़ीब की जमकर सराहना की।

नगर कल्याण समिति ने बताया महिला दिवस का सार

बिजनौर। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर नगर कल्याण समिति की इकाई राष्ट्र सेवा समिति द्वारा एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता विद्यालय की उप प्रधानाचार्या श्रीमती रेखा ने की। कार्यक्रम का संचालन समिति की अध्यक्ष श्रीमती राजुल त्यागी ने किया।

कार्यक्रम की संयोजिका श्रीमती छवि कौशल ने, नारी शक्ति महान है; गीत प्रस्तुत कर के कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। उसके उपरान्त वक्ताओं ने नारी सशक्तिकरण पर विभिन्न प्रकार के सुविचार प्रस्तुत किये। डॉ. मंजुला कुमार ने महिला दिवस मनाए जाने के विषय में विस्तार से बताया। श्रीमती मंजू गुप्ता ने बताया कि घर परिवार में रहकर भी एक महिला समाज की  नींव मजबूत कर सकती है। रश्मि गुप्ता ने बताया कि अब महिलाओं को भी शिक्षा रूपी पंख लग चुके हैं। डा. रंजना राजपूत ने महिलाओं की शैक्षिक स्थिति में आए सुधार के विषय में बताया। रचना खन्ना ने बताया कि महिला के पूर्ण विकास में सबसे महत्वपूर्ण रोल महिला की माँ का ही होता है। मनुश्री अशोक निर्दोष ने महिला सशक्तिकरण पर कविता का सुन्दर का पाठ किया।

इस अवसर पर समिति की ओर से समाज सेविका श्रीमती ऊषा चौधरी, पुष्पा, अनीता चौधरी, नीरा अग्रवाल, डॉ.नीता सिंह, डा. मीना बक्शी व राजीव अग्रवाल उपस्थित रहे।

सेवा के संकल्प संग जुटे हुए हैं समाजसेवी विवेक सेन

बिजनौर। संकल्प सेवा समिति की स्थापना वर्ष 2018 में धामपुर के फूलबाग कॉलोनी निवासी समाजसेवी विवेक सेन ने की थी। उनके साथ इस संस्था में जावेद अंसारी, शिवम कुमार, विपुल चौधरी, वैभव चौहान, अर्जुन सिंह, सुखवीर सिंह सहित कुछ अन्य युवा हैं। इन सभी के माध्यम से करीब 70 अन्य युवा अप्रत्यक्ष रूप से इस संस्था से जुड़े हैं। विवेक बताते हैं कि वैसे तो उनकी संस्था का प्रमुख कार्य समाजसेवा करना है लेकिन उन्होंने फेसबुक पर एक पेज बनाया हुआ है। इस पेज से करीब 24 हजार लोग जुड़े हैं। जब किसी को खून की आवश्यकता होती है वे फेसबुक पर मैसेज लिख देते हैं और संस्था से जुड़ा कोई भी युवा खून देने पहुंच जाता है। विवेक बताते हैं कि उनकी संस्था से बिजनौर के अलावा मुरादाबाद में भी कई युवा जड़े हैं।

उनके साथ जुड़े युवा खाद्य सामग्री एकत्रित करने के लिए खुद ही पैसा एकत्रित करते हैं, लेकिन इस सब नेक कार्य में विवेक की मां उर्मिला देवी इस  बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। विवेक बताते हैं कि मां ने लॉक डाउन में जगह-जगह फंसे गरीबों और अन्य लोगों के लिए सुबह-शाम खाना तैयार करना शुरू कर दिया। करीब ढाई सौ लोगों का खाना हर रोज तैयार करने के बाद पैकेटों में भर कर बांटा गया। उर्मिला देवी ने बताया कि गरीबों की भूख के सामने उनकी ये मेहनत कुछ नहीं है। उनका हाथ बंटाने के लिए पड़ोस की ही महिला धर्मवती देवी के अलावा दीपक चौबे, सरिता आदि भी मदद करते हैं।

घुमंतू परिवारों के बने सहारा- कोरोना कॉल में सभी को भारी परेशानियों से जूझना पड़ा, लेकिन गरीबों को इसकी मार अधिक झेलनी पड़ी। धामपुर और आसपास के क्षेत्रों में बगदाद अंसार रोड और स्योहारा रोड पर कई ऐसे घुमंतू परिवारों को खाने तक के लाले पड़ गए थे। एक घुमंतू ने बताया कि जब वह एक-एक दाने के लिए तरस रहे थे, तब समाजसेवी विवेक सेन ने परिवार के बच्चों और अन्य लोगों को खाने के लिए भोजन के पैकेट बांटे।

धर्म नहीं जरूरी- संस्था में हिंदू और मुसलमान युवा जुड़े हैं। इनके लिए धर्म कभी आड़े नहीं आता। राम को खून की जरूरत पड़ती है तो रहीम तैयार रहता है और रहीम को खून की जरूरत होती है तो राम खून देने के लिए तैयार रहता है। संस्था सदस्यों का ये सांप्रदायिक सौहार्द भी क्षेत्र में चर्चा का विषय है।

आएदिन फेसबुक पर मदद के मैसेज आने और उनकी जरूरतों को पूरा करने का ये काम संकल्प सेवा समिति के सदस्य और पदाधिकारी कर रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय बेटी दिवस पर भी इस एनजीओ के सदस्य ने नहटौर की बिटिया अदीबा को खून दान किया।

किसी कार्य से बिजनौर गए भीम आर्मी जिला उपाध्यक्ष विवेक सेन ने लौटते समय रास्ते में देखा कि एक युवक पीछे बैठी वृद्धा को हाथ से पकड़ कर दूसरे हाथ से बाइक चला रहा है। ऐसा दृश्य देखकर विवेक सेन ने सहानुभूतिपूर्वक उनकी बाइक रुकवा कर पूरे मामले की जानकारी की, तो पता चला बाइक चला रहा युवक महिला का पुत्र है तथा वृद्ध महिला मुरादाबाद से दवाई लेकर लौट रही थी। रास्ते में तबीयत बिगड़ने पर कमजोरी की अवस्था में वह बाइक पर बैठने में भी लाचार थी। यह वाकया सुनकर विवेक सेन का दिल पसीज गया तथा उन्होंने अपनी आन-बान और शान नीला गमछा सड़क पर बिछा दिया तथा उस पर वृद्ध महिला को लेटा दिया। कुछ देर आराम करने के बाद जब महिला की स्थिति में सुधार हुआ, तो महिला को उन्होंने अपनी गाड़ी से अपने दोस्त सनी सिंह जाटव के द्वारा घर तक पहुंचा दिया। विवेक सेन की इस दरियादिली व कुशल व्यवहार पर वृद्ध महिला के परिजनों ने उनकी जमकर सराहना की।

वहीं स्योहारा थाना क्षेत्र के ग्राम महमूदपुर सानी में दामाद ने पत्नी के ससुराल न जाने पर सास-ससुर को चाकू गोद कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया था। बीच-बचाव में आए अपने साढू फहीमुद्दीन पर भी चाकू से कई वार कर उसे भी गंभीर रूप से घायल कर दिया था। परिजनों ने फहीमुद्दीन को घायल हालत में नहटौर तिराहा स्थित प्रयास हास्पिटल में भर्ती कराया था। फहीमुद्दीन को भर्ती कराने के बाद लगभग सभी परिजन सास, ससुर को सुपुर्देखाक के दौरान अपने घर लौट गए थे। अस्पताल में तीमारदारी में अस्पताल स्टाफ के अलावा चंद लोग ही मौजूद थे। देर रात करीब आठ बजे फहीमुद्दीन को उपचार के दौरान खून की जरूरत पड़ी, तो चिकित्सक ने मौजूद लोगों से तत्काल एबी प्लस ब्लड का इंतजाम करने को कहा। रात में जब कहीं से भी खून नहीं मिला, तो किसी परिचित ने विवेक सेन को फोन कर हास्पिटल में तत्काल खून की जरूरत की जानकारी दी। विवेक  सेन का ब्लड ग्रुप भी एबी प्लस है। विवेक गांव में आयोजित उस समय एक बैठक में व्यस्त थे। जैसे ही विवेक को इस बात की जानकारी हुई, तो वह बैठक को बीच में ही छोड़कर तत्काल प्रयास हास्पिटल पहुंचे तथा फहीमुद्दीन को खून देकर उसकी जान बचाई। देर रात फहीमुद्दीन के परिजनों के वापस लौटने पर जब उन्हें हिंदु युवक द्वारा खून देने की जानकारी हुई, तो उन्होंने विवेक सेन की मुक्त कंठ से सराहना की। विवेक सेन के इस दरियादिली की जानकारी मिलने पर देर रात तक घायल फहीमुद्दीन की मदद करने को विवेक सेन के समर्थक अस्पताल में ही मौजूद रहे।

इसी तरह एक बार स्योहारा मार्ग स्थित ग्राम हसनपुर पालकी में चिंगारी से कूड़ी में लगी आग तेज हवा के चलते कुछ ही समय में आसपास स्थित खेतों तक पहुंच गई। ग्रामीण जब तक कुछ समझ आग बुझाने का कोशिश करते आग ने कई घरों को भी अपनी चपेट में ले लिया। सूचना मिलने पर जिला पंचायत सदस्य पद के प्रत्याशी विवेक सेन अपने समर्थकों सहित मौके पर पहुंच गए। विवेक के साथ आए युवा अपने हाथों में बाल्टी व अन्य उपकरण लेकर आग बुझाने में जुट गए। काफी देर बाद फायर बिग्रेड की गाड़ी भी मौके पर पहुंच गई। बाद में कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका।

चंद्रशेखर आजाद और उनका फरारी जीवन

शहादत के 91वें साल (27 फरवरी) पर विशेष

शहादत के 91वें साल (27 फरवरी) पर विशेष

चंद्रशेखर आजाद और उनका फरारी जीवन

गुलाम भारत को आजाद कराने में अपने प्राणों का बलिदान देने वाले शहीद-ए-आजम चंद्रशेखर आजाद की शूरता-वीरता के किस्से आम हैं। काकोरी कांड के बाद आजाद; कभी हरिशंकर ब्रह्मचारी बने, कभी पंडित जी और कभी अंग्रेज सरकार के अफसर के ड्राइवर भी। क्रांतिकारी दल को मजबूत करने के लिए उन्होंने गाजीपुर के एक मठ के बीमार महंत से दीक्षा इसलिए ली कि उनके निधन के बाद मठ की संपत्ति क्रांति के काम आएगी। तीन-चार महीने महंत के मठ में समय बिताने के बाद जब संपत्ति प्राप्त करने के कोई आसार नजर नहीं आए तो वह पुनः क्रांति दल में सक्रिय हो गए। काकोरी कांड में फरारी के बाद आजाद के यह किस्से इतिहास में ही दफन होकर रह गए। आम लोगों के जेहन में उनके फरारी जीवन की जिंदगी घर नहीं कर पाई। आज उनकी शहादत का 91वां वर्ष है। आइए! आजाद के जीवन से जुड़े इन किस्सों से जुड़ा जाए..

सातार नदी का तट और हरिशंकर ब्रह्मचारी

काकोरी कांड में कई साथी तो अंग्रेज हुकूमत के हत्थे चढ़ गए लेकिन आजाद ‘आजाद’ ही रहे। हिंदुस्तानी विभीषण और अंग्रेजी सेना की खुफिया आजाद को पकड़ने के लिए पूरे देश में सक्रिय रही लेकिन आजाद पकड़े नहीं जा सके। फरार होने के बाद आजाद का अगला ठिकाना झांसी बना। खतरा देख आजाद ढिमरापुर में सातार नदी के तट पर कुटी बनाकर रहने लगे। यहां उन्होंने अपना नाम रखा ‘हरिशंकर ब्रह्मचारी’। इस बीच उनका झांसी आना-जाना भी बना रहा। ब्रह्मचारी के रूप में आजाद प्रवचन देते थे और बच्चों को पढ़ाते-लिखाते भी थे। एक दिन झांसी से साइकिल से लौटते समय इनाम के लालच में‌ दो सिपाहियों ने रोक कर उनसे थाने चलने को कहा।
सिपाहियों ने कहा-‘ क्यों तू आजाद है?’ आजाद ने उन्हें समझाते हुए कहा- आजाद जो है सो तो है। हम बाबा लोग होते ही आजाद हैं। हमें क्या बंधन? आजाद ने हर तरह से बचने की कोशिश की। सिपाहियों को हनुमान जी का डर भी दिखाया लेकिन वह मानने को तैयार नहीं हुए। सिपाहियों के साथ थोड़ी दूर चलकर आजाद बिगड़े और कहा कि तुम्हारे दरोगा से बड़े हमारे हनुमान जी हैं। हम तो हनुमान जी का ही हुक्म मानेंगे। हमें हनुमान जी का चोला चढ़ाना है। कहते हुए आजाद भाग खड़े हुए। बलिष्ठ शरीर देखकर सिपाही पकड़ने के लिए उनके पीछे भागने की हिम्मत नहीं जुटा पाए।

अचूक निशाने की अग्निपरीक्षा!

फरारी के दौरान झांसी के पास खनियाधाना के तत्कालीन नरेश खड़क सिंह जूदेव के यहां आजाद का आना-जाना हो गया। आजाद अपने साथी मास्टर रूद्र नारायण, सदाशिव मलकापुरकर और भगवानदास माहौर के साथ जूदेव के यहां अतिथि बनकर गए। वह राजा साहब के छोटे भाई बने हुए थे और उनके दरबार के अन्य लोगों के लिए ‘पंडित जी’। राजा साहब की कोठी के बगीचे में दरबार जमा हुआ था। बात निशानेबाजी की शुरू हुई। आजाद की बातें दरबार में उपस्थित ठाकुरों को पसंद नहीं आई। राजा के दरबारियों ने निशानेबाजी की परीक्षा लेनी चाही। बातों-बातों में आजाद के हाथों में बंदूक भी थमा दी गई। उनके साथी मास्टर रूद्र नारायण को आजाद की परीक्षा लेना उचित नहीं लगा। उन्हें डर था कि कहीं भेद खुल न जाए। उन्होंने बहाने से आजाद से बंदूक ले ली। भगवानदास माहौर ने बाल हठ करते हुए निशाना साधने की जिद की। बंदूक भगवानदास के हाथ में आ गई । एक पेड़ की सूखी टहनी पर सूखा अनार खोसा हुआ था। आजाद ने उन्हें अचूक निशानेबाजी की बारीक बातें बताई। भगवानदास माहौर के एक निशाने में सूखी टहनी पर खोसा हुआ अनार उड़ गया। इसके बाद माहौल सामान्य हुआ और आजाद अपने साथियों के साथ लौट आए।

बनारसी पितांबर और रेशमी कुर्ता-साफा

आजाद और उनके साथियों का क्रांतिकारी दल शुरुआती दौर में आर्थिक संकटों से गुजर रहा था। इसी बीच बनारस में क्रांति दल के साथियों को पता चला कि गाजीपुर में एक मठ के महंत बीमारी की अवस्था के चलते ऐसे लड़के की तलाश में थे, जिसको सन्यासी बनाकर मठ जिम्मेदारी सौंप दें। क्रांतिकारी दल की आर्थिक दिक्कतों को दूर करने के लिए आजाद ने अपने साथियों का वह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया, जिसमें उन्हें महंत का शिष्य बनना था। साथी लोग लेकर उन्हें गाजीपुर के मठ में पहुंचे। यहां आजाद का नाम चंद्रशेखर तिवारी बताया गया। ‘आजाद’ उपनाम की चर्चा ही नहीं की गई। पंडित लड़का पाकर महंत जी काफी खुश हुए और अगले ही दिन मठ में आजाद को दीक्षा देकर अपना शिष्य बना लिया। दीक्षा के पहले सिर मुंड़ाकर उन्हें रेशमी साफा पहनाया गया। शरीर पर कीमती बनारसी पीतांबर और रेशमी कुर्ता हल्के भगवा रंग का धारण कराया गया। माथे पर शुद्ध चंदन-केसर का लेप भी। इस सबमें मठ के हजार रुपए तक खर्च हुए होने का अनुमान भी क्रांतिकारी दल के सदस्यों ने लगाया था। आजाद मठ में करीब 4 महीने रहे। इस बीच महंत पूरी तरह स्वस्थ हो गए। आजाद को जब यह महसूस हुआ कि उनका क्रांतिकारी दल का संपत्ति प्राप्ति का सपना यहां पूरा नहीं होगा तो आजाद एक दिन चुपके से वहां से खिसक लिए।

मजदूर जीवन

छात्र जीवन में आजाद का पढ़ाई-लिखाई से ज्यादा मन युद्ध कौशल सीखने, तलवार आदि चलाने में लगता था। इसके बाद भी उन्हें तहसील में नौकरी मिल गई थी लेकिन आजाद ‘आजाद’ थे। उन्हें अंग्रेजों की नौकरी पसंद कैसे आती? एक दिन वह एक मोती बेचने वाले के साथ मुंबई चले गए। कुछ मजदूरों की सहायता से उन्हें जहाजों को रंगने वाले रंगसाज का काम भी मिल गया। मजदूरी से मिले पैसों से वह अपना जीवन चलाते थे। मजदूरों की मदद से लेटने भर की जगह भी एक कोठरी में मिली लेकिन उस घुटन भरे माहौल में आजाद का मन नहीं लगा। कभी-कभी तो वह रात भर सिनेमा हाल में बैठे रहते। नींद लगने पर ही अपने बिस्तर पर आते। मुंबई का यंत्रवत जीवन आजाद को रास नहीं आया लेकिन मजदूर जीवन का अनुभव लेकर एक दिन बनारस जाने वाली ट्रेन में बिना टिकट बैठ गए। यहां उन्नाव के शिव विनायक मिश्र से उनकी भेंट हुई। उनकी मदद से संस्कृत पाठशाला में उन्हें प्रवेश मिल गया। 1921 के असहयोग आंदोलन में संस्कृत कॉलेज बनारस पर धरना देते हुए ही वह पहली बार गिरफ्तार हुए थे और 15 बेंतों की सजा हुई थी। यहीं से बालक चंद्रशेखर तिवारी चंद्र शेखर आजाद बना और आजीवन आजाद ही रहा।

जब अंग्रेज सिपाही को पटक-पटक कर मारा

चंद्रशेखर आजाद बनारस रेलवे स्टेशन पर रामकृष्ण खत्री और बनवारी लाल (जो काकोरी केस में इकबाली मुलजिम बने और 4 वर्ष की सजा मिली थी) के साथ प्लेटफार्म पर टहल रहे थे। कुछ अंग्रेज सिपाही भी प्लेटफार्म पर थे। एक अंग्रेज सिपाही ने प्लेटफार्म पर जा रही हिंदुस्तानी नौजवान बहन के मुंह पर सिगरेट का धुआं फेंका। आजाद को अपनी हिंदुस्तानी बहन के साथ इस तरह की अभद्रता बर्दाश्त नहीं हुई और तुरंत अंग्रेज सिपाही पर झपट पड़े। लात, घूंसा थप्पड़ मारकर अंग्रेज सिपाही को गिरा दिया। अंग्रेज सिपाही इतना डर गया कि अपने दोनों हाथ ऊपर करके मार खाता रहा और कहता रहा-‘आई एम सॉरी, रियली आई एम वेरी सॉरी’। उसके अन्य साथी तो भाग ही खड़े हुए। आजाद ने तब अपने साथियों से कहा भी था कि इस साले अंग्रेज को सबक सिखाना जरूरी था ताकि आगे किसी हिंदुस्तानी बहन-बेटी के साथ छेड़खानी न कर सके।

ब्रह्मचारी का ‘ब्रम्हचर्य’ तोड़ने की वह कोशिशें

चंद्र शेखर आजाद ने देश को आजाद कराने की खातिर शादी न करने का वृत ले रखा था। आजीवन ब्रम्हचर्य भी उनका दृढ़ संकल्प था। उनके जीवन से जुड़े यह दो किस्से बड़े महत्वपूर्ण हैं। फरारी जीवन में ढिमरापुर में हरिशंकर ब्रह्मचारी के नाम से सातार नदी के किनारे रहते समय गांव की एक बाला उनके पीछे पड़ गई। किसी भी तरह उसके प्रभाव में न आने पर उस बाला ने अश्रु सरिता से मोहित-प्रभावित करने की भी कोशिश की लेकिन आजाद तो आजाद थे। गांव की बाला उनके पीछे लगाने में गांव के ही एक चतुर नंबरदार की साजिश थी। किसी भी तरह आजाद के बाला के प्रभाव में न आने पर वह नंबरदार आजाद का भक्त हो गया। उस नंबरदार ने आजाद को अपना पांचवा भाई मान लिया। उसे अपने सगे भाइयों से ज्यादा आजाद पर विश्वास हो चुका था। यहां तक कि उसने अपनी तिजोरी की चाबी भी आजाद को सौंप दी थी। बंदूकें भी उन्हीं की देखरेख में रहने लगीं। यह किस्सा स्वयं आजाद ने झांसी में अपने साथियों को सुनाया था।
दूसरा किस्सा, आजाद की एक जमींदार मित्र के घर का है। आजाद एक बार अपने धनी जमींदार मित्र के यहां रुके थे। मित्र को अचानक एक दिन के लिए बाहर जाना पड़ा। आजाद ने अन्यत्र रुकने का प्रस्ताव किया लेकिन जमींदार मित्र नहीं माने। आजाद उनके विशाल भवन के ऊपरी खंड में ठहरे थे। रात में कमरे में सो रहे थे। आधी रात के बाद जमींदार की विधवा बहन कमरे में आ गई। उसने कामेच्छा से धीरे से आजाद को जगाया। 24:00 अपने कमरे में विधवा बहन को देखकर आजाद को काटो तो खून नहीं। उन्होंने बहन को समझाया। बताया भी कि सांसारिक बंधन में बंधने का उनके पास अवसर ही नहीं है। विधवा बहन के न समझने पर आजाद बिजली की गति से बाहर निकले और तिमंजिले भवन की दीवार से नीचे कूद गए। कड़ाके की सर्दी वाली वह रात आजाद ने जंगल में एक पेड़ के नीचे गुजारी। कूदने के कारण चोट भी लगी लेकिन अपने ब्रह्मचर्य की रक्षा के लिए उन्होंने कभी कोई समझौता नहीं किया।

आजीवन आजाद रहे आजाद जी को बलिदान दिवस पर शत शत नमन!

∆ गौरव अवस्थी ‘आशीष’
रायबरेली/उन्नाव

विकास और गर्वित ने बढ़ाया जिले का मान

विकास यादव ने उत्तीर्ण की यूजीसी नेट परीक्षा। गर्वित चौधरी ने योग साइंस से पहले ही प्रयास में नेट परीक्षा की पास। दोनों परिवार में खुशी का माहौल



बिजनौर। नूरपुर कस्बे के मोहल्ला इस्लामनगर निवासी रामपाल सिंह यादव के पुत्र विकास यादव ने पहली बार में दिसंबर 2020 एवं जून 2021 यूजीसी की नेट यानी राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा मैनेजमेंट विषय में उत्तीर्ण कर परिवार और समाज का मान बढ़ाया है।

इससे पहले जून 2019 में शिक्षा शास्त्र विषय में पहली बार में ही नेट परीक्षा उत्तीर्ण की थी। विकास यादव वर्तमान में रानी भाग्यवती देवी महिला महाविद्यालय बिजनौर में सहायक प्रोफेसर के पद पर सेवारत हैं। वे अपनी सफलता का श्रेय ईश्वर के अलावा परिजनों को देते हैं। उनकी इस सफलता के लिए महाविद्यालय स्टाफ और प्रबंधतंत्र के अलावा समाज के प्रबुद्धजनों ने बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

गर्वित चौधरी ने योग साइंस से पहले ही प्रयास में नेट परीक्षा की पास


बिजनौर। कहा जाता है कि जीवन के किसी भी क्षेत्र में की गई मेहनत कभी जाया नहीं जाती है। व्यक्ति को मेहनत का फल हमेशा मिलता है। ऐसा ही कर दिखाया है ग्राम मानसापुर निवासी सुरेंद्र सिंह के होनहार पुत्र गर्वित चौधरी ने। गर्वित ने अपनी मेहनत, लगन व निष्ठा के बल पर अपने पहले ही प्रयास में योग साइंस में नेट परीक्षा उत्तीर्ण की है। गर्वित चौधरी की इस सफलता से उसके परिवार में जश्न का माहौल है। उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में यह सफलता हासिल कर ली है। यह सफलता हासिल कर उसने अपने परिवार गांव ही नहीं बल्कि जनपद का भी नाम रौशन किया है। गर्वित ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता पिता व गुरुजनों के साथ साथ अपने मामा बैंक मैनेजर महेंद्र सिंह को देते हुए कहा कि उनकी प्रेरणा से सफलता का मार्ग प्रशस्त हुआ है। गर्वित की इस सफलता को लेकर उसके साथियों, परिचितों व रिश्तेदारों द्वारा लगातार बधाई देने का सिलसिला जारी है।

मेधावी विद्यार्थियों की आर्थिक मदद करेगा हनुमत अलवर दैवीय स्थल ट्रस्ट

बिजनौर। हनुमत अलवर दैवीय स्थल ट्रस्ट हाई स्कूल और इंटरमीडिएट में 95 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को आगे पढ़ाई करने के लिए स्कूल और कॉलेज की फीस जमा कराएगा। मोहल्ला जाटान घेर रामबाग में ट्रस्ट के कार्यालय पर हुई मीटिंग में यह निर्णय लिया गया।

हनुमत अलवर दैवीय स्थल ट्रस्ट की मीटिंग में ट्रस्टी जिम्मी सिंह ने कहा कि मध्यम वर्ग के छात्र छात्राओं के भविष्य को अधिक से अधिक उज्जवल बनाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिस किसी छात्र या छात्रा के हाई स्कूल और इंटरमीडिएट में 95 प्रतिशत से अधिक अंक आते हैं तो उन छात्र-छात्राओं को ट्रस्ट की ओर से आगे पढ़ाई करने के लिए स्कूल और कॉलेज की फीस इत्यादि का खर्च हनुमत अलवर दैवीय स्थल ट्रस्ट की ओर से किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जो भी छात्र इंजीनियरिंग, टेक्निकल कोर्स या आईएएस, आईपीएस, पीसीएस व विभिन्न परीक्षाओं में सम्मिलित होना चाहते हैं और उनके अभिभावकों की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है तो ऐसे छात्रों के आगे बढ़ाने के लिए भी हनुमत अलवर दैवीय स्थल ट्रस्ट की ओर से बच्चों की पढ़ाई का शुल्क वहन किया जाएगा। मुख्य ट्रस्टी अशोक चौधरी ने बताया कि इससे मेधावी छात्रों को आगे बढ़ने के लिए एक नया मार्गदर्शन मिलेगा।

रविदास जयंती पर भव्य शोभायात्रा, अखाड़ा दल ने मोहा सबका मन

बिजनौर। नूरपुर में संत रविदास प्रेमसभा कमेटी के तत्वावधान में मोहल्ला रविदास नगर स्थित रविदास धर्मशाला पर हवन पूजन के उपरांत श्री गुरु ग्रंथ साहिब की हजूरी कीर्तन दरबार सजाया गया। पंथ के विद्वान प्रचारकों ने संत शिरोमणि रविदास जी के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए उनके आदर्शों पर चलने का आव्हान किया। इस दौरान सेवादारों को सम्मानित किया गया।


मंगलवार को पूर्वांह तीन बजे शोभायात्रा का शुभारंभ हुआ। श्री गुरु ग्रंथ साहिब की सवारी की अगुवाई में निकाली शोभायात्रा में संत रविदास, मीराबाई, डॉ. आंबेडकर, भारत माता आदि की झांकियां आकर्षण का केंद्र रही। इसके अलावा पंजाब का बीन बाजा, ढोल और अखाडा दल शामिल रहे। शोभायात्रा के साथ साथ महिलाओं का जत्था भजन कीर्तन गुणगान कर चल रहा था। नगर के सुप्रसिद्ध बैंड बाजों की थाप पर युवा थिरकते चल रहे थे। इस दौरान नगर में मुख्य मार्गों पर शोभायात्रा का जगह स्वागत किया गया। शोभायात्रा के आयोजन में कमेटी के राम सिंह,रिटायर्ड फौजी चेतराम सिंह, मास्टर बाबूराम, सचिव नितिन रवि, विपिन कुमार, कोषाध्यक्ष सुमित कुमार, राहुल कुमार के अलावा डा.गोपाल सिंह, लेखपाल ब्रहम सिंह, सभासद सुशील कुमार पप्पू, भाजपा नेता प्रेमपाल सिंह रवि, विनोद कुमार रवि आदि का योगदान रहा। सुरक्षा की दृष्टि से भारी पुलिस बल मुस्तैद रहा।

धूमधाम से मनाया शिवपाल सिंह यादव का 66 वां जन्मदिन

लखनऊ। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव का 66 वां जन्मदिन शनिवार को नगर कार्यालय इंसाफ नगर में केक काटकर बहुत धूमधाम से  मनाया गया।

इस मौके पर नगर अध्यक्ष जनाब मुर्तजा अली ने उनकी लंबी उम्र के लिए दुआएं की और भारी मतों से जीत की भी सबने दुआएं की। जन्मदिन के मौके पर बच्चों और तमाम लोगों को लड्डू वितरण किया गया।

कार्यक्रम के दौरान नगर और प्रदेश के तमाम पदाधिकारी गण उपस्थित रहे। मुख्य रुप से जिला अध्यक्ष रंजीत यादव,  हरिशंकर यादव,व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष रामबाबू, डीपी यादव, वरिष्ठ उपाध्यक्ष एडवोकेट दरुल हसन, खुर्शीद, शमीम सिद्दीकी, आशीष शर्मा, राणा रियाजुद्दीन, सद्दाम सिद्दीकी, पंकज श्रीवास्तव, मोहम्मद कैफ, नाजिया, मोहम्मद फिरोज, अमन मिश्रा, अभय मिश्रा, देवेंद्र शुक्ला, रमेश कुमार, मोहम्मद इमरान, विवेक सिंह, शाहिद सिद्दीकी, जावेद, राष्ट्रीय सलाहकार खालिद इस्लाम, शेख अफजाल,  बबलू श्रीवास्तव, सिद्दीकी आदि लोगों ने कार्यक्रम में शिरकत की ।

हिंदुस्तान सेवा संस्थान (वाहिद बिरयानी) ने हर्षोल्लास के साथ मनाया गणतंत्र दिवस

हिंदुस्तान सेवा संस्थान (वाहिद बिरयानी) ने हर्षोल्लास के साथ मनाया गणतंत्र दिवस

गरीबों को कंबल वितरण के साथ ही तमाम जरूरतमंदों को कराया भोज

लखनऊ । हिंदुस्तान सेवा संस्थान (वाहिद बिरयानी) ने आशियाना में गणतंत्र दिवस बड़े हर्सोउल्लास के साथ मनाया। मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने झन्डा रोहण किया। झंडारोहण के उपरांत निगहत खान ने देश भक्ति पर तराना पेश किया। इस मौके पर मुरलीधर आहूजा, मौलाना मुश्ताक, मौलाना सूफियान, अदनान, निगहत खान, वामिक़ खान, अब्दुल वहीद, जुबैर अहमद, मुर्तज़ा अली, एमआर नगरामी, एहमन, शह्ज़ादे कलीम, आबिद कुरैशी, वसी अहमद सिद्दीकी, आक़िब कुरैशी, आरिफ मक़ीम, विजय गुप्ता, अवधेश आदि मौजूद थे।


इस मौके पर आबिद अली कुरैशी ने बताया कि हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध आदि सभी धर्मो के लोग इस आयोजन में शामिल हुए। मुरलीधर आहूजा ने कहा कि गणतंत्र दिवस हमारे देश का सबसे बड़ा त्योहार होना चाहिए, बस इसी भावना के साथ गणतन्त्र दिवस हम सब जोर शोर से मनाते हैं।
झंडारोहण का आयोजन वर्तमान में कोरोना महामारी/ लॉकडाउन के कारण सोशल डिस्टेंसिंग और सरकारी गाइडलाइन के अनुसार किया गया। कार्यक्रम में सभी धर्मों के लोगों ने शामिल होकर एकता और अखंडता का संदेश दिया। साथ ही इस राष्ट्रीय पर्व पर मौलाना खालिद रशीद फारंगी महली ने देश की खुशहाली और अमन शांति की दुआ की। इस अवसर पर संस्थान द्वारा गरीबों को कंबल वितरण के साथ ही तमाम जरूरतमंदों को भोज भी कराया गया।

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विजयश्री के लिये जीत का मंत्र दे गए योगी

बिजनौर। जिले की आठों विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करने के लिए उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ बिजनौर पहुंचे। योगी आदित्यनाथ ने जिला अस्पताल का निरीक्षण करने के बाद काकरान वाटिका में एक चुनावी सभा को संबोधित किया। दोपहर करीब तीन बजे वह नजीबाबाद व धामपुर में कार्यकर्ताओं, प्रत्याशियों  से बातचीत करने रवाना हो गए।

इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को बिजनौर जिले में चुनावी दौरे पर पहुंचे। उनका हेलीकॉप्टर पुलिस लाइन में उतरा, जहां से वह निरीक्षण करने के लिए जिला अस्पताल पहुंचे। सीएम ने अस्पताल का निरीक्षण करते हुए ऑक्सीजन प्लांट का भी निरीक्षण किया। कुछ व्यवस्थाओं को लेकर उन्होंने डीएम और प्रशासनिक अधिकारी को दिशा निर्देश दिए। बाद में बिजनौर के काकरान वाटिका में सीएम ने बिजनौर की 8 विधानसभाओं के प्रत्याशियों व कार्यकर्ताओं के साथ बातचीत करके चुनाव में जीत हासिल करने के लिए उन्हें चुनावी मंत्र दिए।

वेक्सीनेशन से किया कोविड को नियंत्रित- बाद में सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रेस वार्ता में बताया कि बिजनौर जिले में कोविड-19 के 898 केस हैं, केवल एक मरीज ही अस्पताल में भर्ती है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा पूरे प्रदेश में कोविड-वैक्सीन लगाकर इस बीमारी को नियंत्रित किया गया है। बिजनौर जिले में लगभग 98 प्रतिशत लोगों को वैक्सीन लग चुकी है। सीएम ने यह भी कहा कि इस बीमारी से अबकी बार मौतों की संख्या बहुत ही कम है। साथ ही इस बीमारी से बचने के लिए मैं बुजुर्गों एवं बीमार लोगों से आग्रह करता हूं कि वह घर से कम निकले साथ ही मास्क लगाकर ही घर से निकले।

चप्पे-चप्पे पर निगरानी करती रही पुलिस- सीएम के कार्यक्रम को लेकर प्रशासन द्वारा कड़ी सुरक्षा व्यवस्था का प्रबंध किया गया। परिंदा भी पर न मार सके,  इसके लिए पुलिस द्वारा चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरे की मदद से निगरानी की जाती रही। सीएम की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस भी अलर्ट मोड पर नजर आई। वहीं निरीक्षण के दौरान डीएम और एसपी सहित जिले के आला अधिकारी मौजूद रहे। पुलिस लाइंस, जिला अस्पताल व काकरान वाटिका में पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं आदि ने उन्हें फूल भेंट किये।

आजादी का अमृत महोत्सव एवं चौरी-चौरा शताब्दी समारोह की थीम पर किया जाएगा: डीएम उमेश मिश्रा

बिजनौर। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने कहा कि उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशों के अनुपालन में 24 जनवरी, 2022 को “उत्तर प्रदेश दिवस” के रूप में मनाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 से प्रतिवर्ष 24 जनवरी को उत्तर प्रदेश राज्य की स्थापना दिवस के रूप में उत्तर प्रदेश दिवस का आयोजन किया जा रहा है। विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी आगामी 24 जनवरी को उत्तर प्रदेश दिवस का आयोजन सभी जिलों में वर्तमान समय में लागू आदर्श आचार संहिता तथा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष उत्तर प्रदेश दिवस का आयोजन आजादी का अमृत महोत्सव एवं चौरी-चौरा शताब्दी समारोह की थीम पर किया जाएगा। इस अवसर पर जिला स्तर पर विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इसके अंतर्गत राष्ट्रीय गीत का गायन, पुलिस बैंड द्वारा रामधुन का वादन आदि भी सम्मिलित होंगे। उन्होंने बताया कि जिले की स्थानीय बोली भाषा में आजादी से जुड़े लोगों के गीतों का गायन आजादी की कथाओं पर आधारित नाटक तथा नृत्य नाटिकाओं तथा जिले की समृद्ध संस्कृति को प्रदर्शित करने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों का जन सहभागिता के आधार पर आयोजन भी किया जाएगा।
उन्होंने निर्देश दिए कि कार्यक्रम स्थल पर जिले के गौरवशाली इतिहास, चौरी-चौरा गोरखपुर की घटना तथा स्वतंत्रता संग्राम में जिले के योगदान, शहीद स्मारकों एवं स्थानों पर आधारित अभिलेख एवं चित्र दृश्यों का आयोजन करना सुनिश्चित करें तथा कार्यक्रम के अंतर्गत जिले की शहीद स्मारकों, पर्यटन स्थलों पर आधारित ऑनलाइन फोटोग्राफी तथा पेंटिंग प्रतियोगिताओं का भी आयोजन कर युवा वर्ग को कार्यक्रम में भागीदार बनाएं। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि कार्यक्रम स्थल पर “एक जनपद एक उत्पाद” के अंतर्गत पारंपरिक विशिष्ट उत्पाद के शिल्पी/ कर्मकारों की कला का प्रदर्शन स्वयं सहायता समूह के माध्यम से तथा यूपी के स्टार्टअप पर आधारित प्रदर्शनियों का आयोजन सुनिश्चित किया जाए।


जिलाधिकारी श्री मिश्रा ने उक्त संबंध में आदेशित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश दिवस के आयोजन के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में कोविड-19 की परिस्थितियों के दृष्टिगत अनिवार्य रूप से कोविड हैल्थ डैस्क मुख्य चिकित्सा अधिकारी के पर्यवेक्षण में स्थापित कराई जाए तथा सोशल डिस्टेंसिंग का भी अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले में उत्तर प्रदेश दिवस कार्यक्रम का आयोजन उसकी मूल मंशा के अनुरूप कराना सुनिश्चित करें और कार्यक्रमों के फोटोग्राफ्स एवं व