घास की चिता पर जली थी झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की निर्जीव देह

164वें बलिदान दिवस (18 जून) पर विशेष

1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम में जान की कुर्बानी देने वाले योद्धाओं की शौर्य गाथाएं खूब गाईं गईं। सैकड़ों लोकगीत, नाटक, उपन्यास और अनेक भाषाओं में शूरवीरों के जीवन चरित्र लिखे गए लेकिन ब्रिटिश हुकूमत के अत्याचारों के डर से लोकगीत दबी जुबान ही गाए जाते थे। खुलकर इन्हें गाने की हिम्मत अच्छे-अच्छों में नहीं थी। स्वाधीन भारत में अंग्रेजों के छक्के छुड़ाने वाली झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की वीरता-शूरता का इतिहास लिखना आसान था। महाश्वेता देवी से लेकर सैकड़ों लेखकों ने लेखनी चलाई लेकिन ‘सिपाही विद्रोह’ या ‘गदर’ कहे गए 1857 के भीषण संग्राम पर गुलामी के दौर में कलम उठाना उतना ही खतरे से खाली नहीं था, जितना सिपाही विद्रोह में कृपाण उठाना।


यह वह दौर था जब अंग्रेज लेखक अपने अत्याचारों पर पर्दा डालने के लिए गदर का मनमाना इतिहास लिखकर भारतीयों की हिंसात्मक कार्यवाही को बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर रहे थे। अप्रतिम वीर और भारतीय जनमानस पर अमिट छाप छोड़ने वाली झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के बारे में दुष्प्रचार किया जा रहा था कि विद्रोह के समय अंग्रेजों को सहायता देनी कबूल की। उनके चरित्र को इस तरह चित्रित किया गया कि मानो झांसी की रानी बिना चाहे ही अंग्रेजों से लड़कर वीर नारी बन गई हों।
ऐसे वक्त में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी गदर के संबंध में अंग्रेजी लेखकों द्वारा लिखे जा रहे/ लिखे गए ‘झूठे’ इतिहास को कैसे बर्दाश्त कर सकते थे? उन्हें सरस्वती का संपादन संभाले हुए एक साल ही बीता था। प्रेस मालिकों के नियम और अंग्रेजी कानूनों के डर के बीच अंग्रेज़ों के झूठ के पदार्फाश और झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की वीरता-शूरता को हिंदी भाषी समाज के सामने लाने की उत्कंठा अंदर से रोज-ब-रोज जोर मार ही रही थी। उसी बीच उन्हें झांसी की रानी पर मराठी लेखक दत्तात्रेय बलवंत‌ पारसनीस की मराठी में लिखी पुस्तक ने रास्ता दिखाया। पुस्तक पढ़ने के बाद झांसी की रानी की वीरता पर अंग्रेज हुकूमत द्वारा फैलाए गए भ्रम को दूर करने के लिए पारसनीस की नीति अपनाते हुए ही उन्होंने 1904 में सरस्वती के जनवरी और फरवरी अंक में पर क्रमश: दो लेख ‘झांसी की रानी लक्ष्मी बाई’ प्रकाशित किए।


द्विवेदी जी ने सरस्वती में लिखे गए अपने पहले लेख के साथ झांसी के किले और रानी के महल के दो चित्र भी लगाए। दूसरी किस्त के साथ झांसी के म्यूटिनी के स्मारक का चित्र और एक चित्र रानी के युद्ध का, जिसमें रानी एक हाथ में तलवार और दूसरे में भाला लिए अंग्रेजों पर वार करती हुई दिखाई गई हैं। चित्र के नीचे कैप्शन दिया गया कि ग्वालियर के एक पुराने चित्र से सरस्वती के लिए यह फोटोग्राफ उतारा गया है। इन लेखों को सुंदर ढंग से सजाकर छापने में द्विवेदी जी ने काफी परिश्रम भी किया।
उन्होंने पारसनीस की चार सौ पृष्ठ की पुस्तक के आधार पर लेखों में विद्रोही सिपाहियों को दुष्ट कहा। बच्चों की प्रचारित हत्या की निंदा की और झांसी की रानी की वीरता की प्रशंसा। द्विवेदी जी ने पारसनीस के प्रमाण संग्रह और इतिहास के अध्ययन की प्रशंसा करते हुए लेख की शुरूआत पारसनीस की पुस्तक के प्रभाव का महत्व स्वीकार करते हुए इस तरह की-‘इस पुस्तक को पढ़कर लक्ष्मीबाई का अतुल पराक्रम, उनका अतुल धैर्य और उनकी अतुल वीरता आंखों के सम्मुख आ जाती है। ऐसी वीर नारी इस देश में क्या और देशों में भी शायद ही हुई होगी।’ हालांकि, सर एडविन अर्नाल्ड ने लक्ष्मी बाई की उपमा फ्रांस की प्रसिद्ध बाला जोन आप आर्क से दी है। लक्ष्मीबाई को परास्त करने वाले सर ह्यूरोज ने भी रानी की वीरता की प्रशंसा की है। द्विवेदी जी लिखते हैं कि ऐसी पुस्तक लिख कर पारसनीस ने इस देश के साहित्य का बड़ा उपकार किया। वह पारसनीस की प्रशंसा करते हुए हिंदी पाठकों से सिफारिश करते हैं कि मराठी न आती हो तो इस एक ही पुस्तक को पढ़ने के लिए ही सही मराठी सीखें जरूर।
पारसनीस की किताब के हवाले से द्विवेदीजी ने झांसी की रानी की वीरता और संग्राम का बखान करते हुए झांसी की लड़ाई के बारे में लिखा-’23 मार्च 1818 को यह आरंभ हुआ झांसी को चारों ओर से अंग्रेजी सेना ने घेर लिया। 24 और 18 पौंडर्स नाम की तोपें शहर की दीवार पर चलने लगीं और दूसरी तोपों से बम के गोले शहर के भीतर फेंके जाने लगे। झांसी के चारों ओर जो दीवार है उसकी चौड़ाई कोई 16 फुट है। उस पर और किले के बुर्ज पर रानी साहब ने सब मिलाकर कोई 50 के ऊपर तोपें लगा दीं। उनमें से भवानी शंकर, कड़क बिजुली, घनगर्ज, नालदार आदि तोपे बड़ी ही भयंकर थीं। रानी साहब खुद युद्ध की देखभाल करने लगी और समय-समय पर अपने योद्धा और सेना नायकों को उत्साहित करने लगीं। उनके युद्ध कौशल का ही कमाल था कि अंग्रेजों ने झांसी की सेना की वीरता और युद्ध कौशल की प्रशंसा की। सर ह्यूरोज ने रानी की प्रशंसा करते हुए लिखा-‘स्त्रियां तक तोपखाने में काम करती थीं और गोला-बारूद लाने में सहायता देती थीं। अंग्रेज 11 दिन का झांसी का घेरा डाले रहे। विकट युद्ध हुआ तथापि रानी साहब के धैर्य और दृढ़ निश्चय के सामने दूसरे पक्ष की कुछ न चली।’
लेख के इस एक अंश से आपको उनके अंग्रेज हुकूमत के प्रति दृष्टिकोण का अंदाज करना आसान होगा–‘महाप्रबल और परम दयालु अंग्रेजी सरकार’ से शत्रुता करने का फल झांसी वालों को मिला। लड़ाई में जो सैनिक मारे गए, उनके अलावा अंग्रेजी फौज ने शहर में पहुंचकर प्रलय आरंभ कर दिया। एक और शहर में उसने आग लगा दी और दूसरी ओर से लड़के और स्त्रियों को छोड़कर बिजन बोल दिया। सात दिन तक लूटमार और फूंक-फांक होती रही। आठवें दिन प्रजा को अभय वचन दिया गया और जिनका कोई वारिस न था, ऐसे मृतकों के ढेर रास्ते में फूंक दिए गए। ये तमाम लोग जो मारे गए थे, निहत्थे थे और उन्होंने न तो किसी कत्लेआम में भाग लिया था न ले सकते थे।’
लेख में झांसी की रानी की वीरता का उल्लेख इस तरह है-‘उनके साथ उनकी दासी मुंदर भी एक घोड़े पर थी। उस पर एक गोरे ने प्राणहारक आघात किया। वह चिल्ला उठी। रानी साहब ने उसको मारने वाले के कंठ में एक निमिष मात्र अपनी तलवार रख दी। अंग्रेजी सेना के वीरों ने रानी साहब को कोई महाशूर सेनानायक समझकर चारों ओर से घेर लिया। इस पर भी वह जरा भयभीत नहीं हुईं। उनकी तलवार अपना काम बड़ी भी भीषणता से बराबर करती रही परंतु एक कोमल और अल्पवयस्क अबला अनेक वीरों के बीच कब तक सजीव रह सकती है? एक अंग्रेज योद्धा ने उनके सिर पर पीछे से तलवार का वार किया जिससे उनके सिर का दाहिना भाग छिल गया और एक आंख निकल आई। इस योद्धा ने रानी साहब की छाती पर किर्च का भी प्रहार किया परंतु धन्य रानी लक्ष्मीबाई की वीरता, धन्य उनका धैर्य और धन्य उनका साहस! इस दशा को प्राप्त होकर भी उन्होंने इस वीर से पूरा बदला लिया। उसे तत्काल ही उन्होंने धरा तीर्थ को भेजकर अपना जीवन सार्थक किया!! धन्य वह शौर्य और धन्य वह पराक्रम!!!
घायल रानी ने सरदार रामचंद्रराव के साथ एक झोपड़ी में प्रवेश किया। 18 जून 1858 को ग्वालियर के पास समरांगण में भारतवर्ष का महा शौर्यशाली दिव्य स्त्री रत्न खो गया। रानी साहब के सेवक और सरदारों ने एक घास की गंजी से घास लाकर उसकी चिता बनाई और उसी पर रानी साहब की निर्जीव देह रखकर उसे अग्निदेवता के अर्पण कर दिया।’ मुगल शासकों को लोहे के चने चबवाने वाले महाराणा प्रताप ने भले घास की रोटियां खाईं थीं लेकिन यह किताब प्रामाणिक रूप से बताती है कि अंग्रेजों से लड़ते-लड़ते वीरगति को प्राप्त करने वाली झांसी की रानी लक्ष्मी बाई की देह घास की चिता पर ही पंचतत्व में विलीन हुई थी। इतिहास में रुचि रखने वाले लोग भले ही इस तथ्य को जानते हों लेकिन नई पीढ़ी इस इतिहास से शायद ही परिचित होंगे।
पारसनीस से प्रभावित आचार्य द्विवेदी लिखते हैं कि यह बहुत अच्छा क्रांतिकारी साहित्य है। वैसा साहित्य है, जिसे पढ़कर भारत के नौजवान अंग्रेजी अंग्रेजी राज्य से नफरत करना सीखते थे और जिन्हें संवैधानिक तरीकों पर या अहिंसात्मक तरीकों पर विश्वास नहीं था वे लक्ष्मीबाई की तरह हथियार को उठाकर अंग्रेजों से लड़ने का प्रयत्न करते थे। आचार्य द्विवेदी झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के वास्तविक इतिहास को जानने- समझने के लिए हिंदी भाषी समाज को पारसनीस की मराठी पुस्तक पढ़ने का मंत्र दे रहे थे। वह भी भाषण या मौखिक नहीं बल्कि लेख में बाकायदा लिखकर। उस दौर में झांसी की रानी के वास्तविक इतिहास से हिंदी भाषी समाज को परिचित कराने के थोड़े से होने वाले प्रयासों में एक प्रयास आचार्य द्विवेदी का भी था। यह भारत के उन महान योद्धाओं के प्रति उनकी अपनी श्रद्धा का भी प्रमाण है। आइए! हम सब मिलकर शूरवीर झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित करें।

जय प्रथम स्वाधीनता संग्राम!!
जय झांसी की रानी लक्ष्मीबाई!!

∆ गौरव अवस्थी
रायबरेली

बेहतरीन उपलब्धि पर डीएम एसपी ने किया किसानों को सम्मानित

बेहतरीन उपलब्धि पर डीएम एसपी ने किया किसानों को सम्मानित

बिजनौर। विभिन्न प्रकार के फल, फूल व जड़ी बूटियों की खेती संबंधित कई क्षेत्र में जिले के किसानों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। उनकी इस उपलब्धि पर डीएम व एसपी ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। 

जानकारी के अनुसार नाहर सिंह ग्राम तिसोतरा, राहुल जवान ग्राम चौकपुरी, अखिलेश कुमार सिंह ग्राम अगरी एवं विपिन कुमार ग्राम मुबारक पुर तालन द्वारा क्रमशः हल्दी, केला, विभिन्न प्रकार के फूलों की खेती के अलावा शतावर व अन्य जड़ी बूटी की खेती करने के साथ ही उत्पादन, प्रसंस्करण, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग व मार्केटिंग करते हुए अपने को एक सफल उद्यमी के रूप मे स्थापित किया गया है। उनकी इस उपलब्धि पर जिलाधिकारी उमेश मिश्रा व पुलिस अधीक्षक डा धर्मवीर द्वारा सम्मानित करते हुए प्रशस्ति पत्र देकर पुरस्कृत किया गया। यह जानकारी जिला कृषि अधिकारी अवधेश कुमार मिश्रा ने दी।

आज भी राष्ट्रप्रेम जगा देती हैं अमरेश की कविताएं

पुण्यतिथि विशेष
-जनपद के कालजई साहित्यकार कवि अमर बहादुर सिंह ‘अमरेश’ की 43वीं पुण्यतिथि आज
-एक मार्च 1929 को पूरे रूप मजरे कंदरावा में हुआ था जन्म
-मलिक मोहम्मद जायसी राना बेनी माधव और महावीर प्रसाद द्विवेदी के जीवन को समाज के सामने रखा था

रायबरेली। साहित्यकार अमर बहादुर सिंह ‘अमरेश’ की आज 43वीं पुण्यतिथि है। आज ही के दिन उनका जीवन पूर्ण हुआ था। पेशे से नायब तहसीलदार रहे अमरेश जी की कविताएं आज भी राष्ट्रप्रेम जगा देती हैं। महात्मा गांधी की हत्या के बाद 13 दिन तक व्रत धारण करके 13 कविताएं लिखीं। उनमें एक रचना-‘दिल्ली तू कैसे देख सकी बापू की खून भरी छाती’ सुनकर सभाओं में लोग रोने लगते थे। विभिन्न विधाओं में कालजयी साहित्य लिखने वाले अमरेश जी को आज जनपद भुल सा चुका है।
1 मार्च 1929 को ऊंचाहार तहसील के पूरे रूप मजरे का निरहुआ में जन्म लेने वाले अमरेश जी बाल्यकाल से ही कविताएं लिखने लगे थे। पहली कविता “नागरिक कक्षा” उन्होंने कक्षा तीन में पढ़ते हुए लिखी थी। अपने जीवन के प्रारंभिक दौर में कालजई कविताएं लिखने वाले अमरेश जी उपन्यास और एकांकी, बालोपयोगी साहित्य लिखने के साथ-साथ संपादन कार्य से भी जुड़े रहे। हिंदी दैनिक स्वतंत्र भारत में उनका स्तंभ ‘गांव की चिट्ठी’ काफी लोकप्रिय रहा। जीवन के आखिरी वक्त तक वह स्वतंत्र भारत में इस कॉलम के लिए लिखते रहे।
बाद में उनका जीवन एक अनुसंधानकर्ता के रूप में भी सामने आया। उन्होंने जनपद की पहचान सूफी काव्य धारा के जनक माने जाने वाले मलिक मोहम्मद जायसी, स्वाधीनता संग्राम के महान शूरवीर राणा बेनी माधव और हिंदी के युग प्रवर्तक आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी पर भी लेखनी चलाई। एक अनुसंधानकर्ता के रूप में उनकी जायसी पर लिखी किताबें ‘कहरानामा’, ‘मसलानामा’, ‘राणा बेनी माधव’ और ‘आचार्य द्विवेदी गांव में’ काफी पसंद की गई।
जनपद के साहित्यिक आकाश के चमकते सितारे अमर बहादुर सिंह को आज जनपद भूल सा चुका है। उनकी यादें धुंधला गई हैं। कवि दुर्गाशंकर वर्मा दुर्गेश कहते हैं कि ऐसे कालजई साहित्यकार के साहित्य को पुर्नप्रकाशित कर समाज के सामने लाने की आवश्यकता है। शबिस्ता बृजेश ने कहा कि अमरेश जी की यादें जनपद के हिंदी साहित्य की धरोहर हैं। उनके पुत्र अशोक सिंह उनका साहित्य संजोए हुए हैं। वह किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश में है जो इस साहित्य की धरोहर को आगे बढ़ा सके।


कॉलोनी तो बस आई गई लेकिन यादें सुरक्षित नहीं

रायबरेली विकास प्राधिकरण ने अमर बहादुर सिंह अमरेश की स्मृति में शहर में कानपुर रोड पर वर्ष 1978 में अमरेश पुरी कॉलोनी बसाई। यह आज शहर की पॉश कॉलोनी मानी जाती है। ..लेकिन कॉलोनी का न तो अपना कोई भव्य गेट है और ना ही यहां अमरेश जी के जीवन वृत्त को प्रदर्शित करने वाला कोई शिलालेख। इससे अमरेश जी का नाम तो जीवित है लेकिन उनके जीवन वृत्त से नई पीढ़ी अपरिचित है।

आईएएस टॉपर श्रुति शर्मा को डीएम ने किया सम्मानित

बिजनौर पहुंचीं आईएएस टॉपर श्रुति शर्मा का कलक्ट्रेट में सम्मान

जिलाधिकारी ने आई0ए0एस0 टॉपर श्रुति शर्मा को किया सम्मानित

रुचि के अनुरूप ही तैयारी करें युवा: श्रुति शर्मा

बिजनौर। जनपद बिजनौर की गौरव संघ लोक सेवा आयोग (यू0पी0एस0सी0) में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली सुश्री श्रुति शर्मा को जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने कलक्ट्रेट स्थित अपने कार्यालय कक्ष मे बुके देकर व शॉल भेट कर सम्मानित किया व भगवान श्री कृष्ण जी की प्रतिमा भेंट की। जिलाधिकारी ने कहा कि आज युवतियां व महिलाएं हर क्षेत्र मे आगे बढ रही हैं तथा प्रदेश व देश का नाम रौशन कर रही हैं। उन्होंने सुश्री श्रुति शर्मा को उनकी उपलब्धि पर बधाई दी व उनके उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी। जिलाधिकारी ने उनके परिवारजनों को भी शॉल भेंट कर सम्मानित किया।

इस अवसर पर मीडिया से बातचीत में श्रुति शर्मा ने बताया कि उनका जन्म बिजनौर जिले के छोटे से गांव बास्टा में हुआ। हालांकि, वह पली-बढ़ीं दिल्ली में और पढ़ाई भी दिल्ली से ही पूरी की। उन्होंने बताया कि वह केवल होली-दीपावली आदि त्योहारों पर ही अपने घर पहुंच पाती हैं। आज भी बचपन की यादें बिजनौर से ही जुड़ी हैं।
श्रुति ने बताया कि आईएएस बनने के लिए उन्होंने सेल्फ स्टडी बहुत की है और जामिया से ही कोचिंग भी की थी।  आईएएस टॉप करने के सवाल पर श्रुति शर्मा ने बताया कि उन्हें यकीन नहीं था कि वह टॉपर बनेंगी, लेकिन एग्जाम पास कर लेंगी यह पूरा विश्वास था।

श्रुति ने युवाओं के साथ भी अपने अनुभव साझा करते हुए  कहा कि जो भी युवा आईएएस-आईपीएस की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें जिन विषयों में रुचि है, उसमें ही मन लगाकर पढ़ाई करनी होगी, आजकल युवा खेल में भी अपना भविष्य बना रहे हैं। महिलाओं के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार बहुत योजनाएं चला रही है। महिला उत्पीड़न संबंधी समस्याओं के विषय पर उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपनी सुरक्षा अपने आप भी करनी चाहिए। माता पिता को भी चाहिए कि वह लड़का लड़की को समान भाव से देखें और लड़कों को भी ये बात समझाएं। यूपी में बुलडोजर मामले में उन्होंने कहा कि इस विषय में उन्होंने ज्यादा कुछ पढ़ा नहीं है, इसलिए कुछ नहीं कहेंगी।

75 साहित्यकार एवं समाजसेवी कुमुद सम्मान से अलंकृत

साहित्यकार ज्ञान स्वरूप ‘कुमुद’ जी की जयंती पर कुमुद सम्मान से अलंकृत 75 साहित्यकार एवं समाजसेवी

बरेली। रोटरी क्लब भवन चौपुला में साहित्यकार ज्ञान स्वरूप ‘कुमुद’ जी की जयंती समारोह पूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर 75 साहित्यकार एवं समाजसेवी कुमुद सम्मान से अलंकृत किए गए।

हास्य कवि निर्मल सक्सेना ( कासगंज), वरिष्ठ शायर जीतेश राज नक़्श (पीलीभीत), मुख्य अतिथि आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ सत्येंद्र सिंह, विशिष्ट अतिथिगण बरेली बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अरविंद कुमार श्रीवास्तव, बरेली बार एसोसिएशन के सचिव वीपी ध्यानी, वरिष्ठ साहित्यकार एवं कार्यक्रम अध्यक्ष आचार्य देवेंद्र देव एवं कार्यक्रम संचालक कवि रोहित राकेश को संस्था के संस्थापक एवं कार्यक्रम आयोजक एडवोकेट उपमेंद्र सक्सेना एवं संस्था अध्यक्ष करुणा निधि गुप्ता ने उत्तरीय, प्रशस्ति पत्र एवं प्रतीक चिन्ह देकर कुमुद सम्मान से अलंकृत किया

इसके अलावा 75 कवियों एवं समाजसेवियों को भी समारोह में सम्मानित किया गया। आमंत्रित कवियों में निर्मल सक्सेना एवं जीतेश राज ‘नक़्श’ ने अपने काव्य पाठ से सभी का दिल जीत लिया और खूब वाहवाही लूटी।

खटीमा से पधारे सुप्रसिद्ध कवि प्रिय भाई रामरतन यादव द्वारा बहुत सुंदर सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई। साहित्यकार डॉ महेश मधुकर एवं साहित्यकार रणधीर प्रसाद गौड़ धीर ने ‘कुमुद’ जी के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए कार्यक्रम आयोजक एडवोकेट उपमेंद्र सक्सेना एवं संस्था अध्यक्ष  करुणा निधि गुप्ता ने सभी अतिथियों को हृदय से साधुवाद एवं आभार व्यक्त किया।

आचार्य द्विवेदी स्मृति अभियान के रजत जयंती समारोह में होगा देशभर के साहित्यकारों-पत्रकारों का जमावड़ा

आचार्य द्विवेदी स्मृति अभियान का 25वां वर्ष

रजत जयंती समारोह में होगा देशभर के साहित्यकारों-पत्रकारों का जमावड़ा

मुख्य आकर्षण
-दौलतपुर में महावीर चौरा पर सुंदरकांड पाठ से रजत जयंती समारोह की शुरुआत
-दो दिवसीय मुख्य वार्षिक समारोह 11-12 नवंबर को
-ऐतिहासिक दस्तावेजों और दुर्लभ फोटो वाली प्रदर्शनी का आयोजन
-रायबरेली शहर में आचार्य द्विवेदी स्मृति खेल महाकुंभ
-गीत-संगीत, नृत्य और नाटक के माध्यम से आचार्य द्विवेदी के जीवन वृत्त की प्रस्तुति
-“आचार्य पथ” स्मारिका/पत्रिका का विशेषांक

रायबरेली से शुरू हुआ आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति संरक्षण अभियान रजत जयंती वर्ष में प्रवेश कर गया है। अभियान की रजत जयंती धूमधाम से मनाई जाएगी। रजत जयंती वर्ष को यादगार बनाने की तैयारियां अभी से शुरू हो गई हैं। 11-12 नवंबर 2022 को आयोजित होने वाले रजत जयंती समारोह में देशभर के साहित्यकारों पत्रकारों को आमंत्रित किया जाएगा। लखनऊ और दिल्ली में भी कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प लिया गया। आचार्य पथ स्मारिका का विशेषांक भी निकालने की तैयारी है।
आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की रायबरेली के आशीर्वाद इन होटल में आयोजित बैठक में तय किया गया कि रजत जयंती वर्ष में आचार्य द्विवेदी की स्मृतियों को नए रूप में संजोया जाएगा। वर्ष पर्यंत कार्यक्रमों की श्रंखला चलेगी। इसकी शुरुआत आचार्य द्विवेदी के जन्म ग्राम दौलतपुर में सुंदरकांड के पाठ के साथ होगी। आचार्य द्विवेदी स्मृति खेल महाकुंभ के साथ ही जनपद के साहित्यिक स्वाधीनता संग्राम इतिहास को समेटने वाली प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। 12 नवंबर को वार्षिक आयोजन भी इस बार दो दिवसीय होगा। इसमें देशभर के पत्रकार-साहित्यकार शामिल होंगे। आचार्य द्विवेदी के जीवन वृत्त को गीत-संगीत, नाटक और नृत्य के माध्यम से भी प्रस्तुत करने की तैयारी की जा रही है।


अध्यक्ष विनोद शुक्ला ने बताया कि स्मृति संरक्षण अभियान 9 मई 1998 को समाज और सरकार को जगाने के लिए ध्यानाकर्षण धरने के माध्यम से प्रारंभ हुआ था। यह स्मृति अभियान 9 मई से रजत जयंती वर्ष में प्रवेश कर गया है। 25 वर्ष के सफर में कई सोपान तय किए गए। शहर से लेकर गांव तक तीन स्मृति द्वार बनाए गए। कई सरकारी और निजी संस्थाओं में सभागार आचार्य द्विवेदी के नाम पर रखे गए।
उन्होंने बताया कि आचार्य द्विवेदी की स्मृतियां सात समंदर पार अमेरिका तक पहुंच गई। अमेरिका इकाई की कमान श्रीमती मंजु मिश्रा एवं सदस्य श्रीमती रचना श्रीवास्तव, श्रीमती शुभ्रा ओझा, कुसुम नैपसिक, डॉक्टर ममता त्रिपाठी संभाले हुए हैं। अमेरिका इकाई साल में आचार्य द्विवेदी की स्मृति और हिंदी के प्रचार- प्रसार के लिए ऑनलाइन चार कार्यक्रम आयोजित कर रही है। इनमें बच्चों की प्रतियोगिताएं भी शामिल हैं।

कार्यक्रमों के लिए अलग-अलग प्रभारियों की नियुक्ति-
महामंत्री अनिल मिश्र ने बताया कि कार्यक्रमों के लिए अलग-अलग प्रभारियों की नियुक्ति की गई है। खेल प्रतियोगिताओं के लिए मुन्ना लाल साहू, स्मिता दुबे, अनुपमा रावत और हिमांशु तिवारी को प्रभारी बनाया गया है। नाटक-नृत्य आदि के लिए अमित सिंह, रवि प्रताप सिंह और क्षमता मिश्रा को जिम्मेदारी दी गई है। प्रदर्शनी का प्रभार अभिषेक द्विवेदी, नीलेश मिश्रा और अरुण पांडे को सौंपा गया है।
बैठक के अंत में डॉ सुशील चंद्र मिश्र ने सभी को रजत जयंती वर्ष की शुभकामनाएं दीं। बैठक में राजीव भार्गव, दिनेश शुक्ला, सुधीर द्विवेदी, स्वतंत्र पांडे, राजेश वर्मा, श्रीमती रजनी सक्सेना, रामेंद्र मिश्रा, अमर द्विवेदी, दीपक तिवारी, लंबू बाजपेई, शशिकांत अवस्थी, घनश्याम मिश्रा, राकेश मोहन मिश्रा, राजेश द्विवेदी, कृष्ण मनोहर मिश्रा, अभिषेक मिश्रा, रोहित मिश्रा, यशी अवस्थी, शिखर अवस्थी, हर्षित द्विवेदी आदि मौजूद रहे।

आचार्य द्विवेदी के नाम पर चौराहे का सुंदरीकरण करने का सुझाव

रजत जयंती वर्ष की तैयारियों के सिलसिले में आयोजित बैठक में कई सुझाव भी आए। समिति के सदस्य राजेश वर्मा ने सुझाव दिया कि आचार्य द्विवेदी स्मृति संरक्षण अभियान के रजत जयंती वर्ष को यादगार बनाने के लिए शहर के एक चौराहे को विकसित किया जाए। सदस्य चंद्रमणि बाजपेई ने छात्र-छात्राओं के लिए पुस्तकालय- वाचनालय स्थापित किए जाने पर जोर दिया।

आचार्य द्विवेदी के साहित्य का डिजिटलाइजेशन भी होगा

रजत जयंती वर्ष मनाने की तैयारियों से संबंधित बैठक में आचार्य द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की अमेरिका इकाई की अध्यक्ष श्रीमती मंजु मिश्रा भी ऑनलाइन शामिल हुईं। उन्होंने आचार्य द्विवेदी के साहित्य समेत अन्य विषयों पर लिखी गई पुस्तकों को डिजिटल फॉर्म पर उपलब्ध कराने का सुझाव दिया। अध्यक्ष विनोद शुक्ला ने आश्वस्त किया कि इस दिशा में भी काम तेज किया जाएगा।

भारत की मैंकल नामदेव व अमेरिका के ऋत्विक ने जीती अंतर्राष्ट्रीय निबंध प्रतियोगिता

पेंड्रा की मैंकल नामदेव और अमेरिका के ऋत्विक ने जीती निबंध प्रतियोगिता
-अमेरिका वर्ग से अयाति ओझा दूसरे स्थान पर रहीं
-भारत वर्ग से रायबरेली की आद्या गुप्ता दूसरे और फातिमा अंसारी तीसरे स्थान पर रहीं
-7 बच्चों के निबंध सांत्वना पुरस्कार के रुप में चुने गए
-अमेरिका में भारत के चांसरी प्रमुख रमाकांत कुमार ने की विजेता बच्चों के नामों की घोषणा
-मुख्य अतिथि अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के जनसंचार विभागाध्यक्ष डॉ कृपाशंकर चौबे ने समिति के प्रयासों की सराहना की

नई दिल्ली आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की भारत और अमेरिका इकाई द्वारा संयुक्त रूप से 12 से 18 वर्ष के बच्चों की आयोजित की गई अंतर्राष्ट्रीय निबंध प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ की मैंकल नामदेव और अमेरिका के ऋत्विक अग्रवाल विजेता रहे।

मैकल नामदेव को पुरस्कार में प्रमाणपत्र के साथ 21 सौ रुपए और ऋत्विक को 50 डालर दिए जाएंगे। इसी तरह दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे विजेता बच्चों को भी प्रमाण पत्र और नगद पुरस्कार से पुरस्कृत किया जाएगा। चयनित सभी निबंधों को ‘आचार्य पथ’ स्मारिका में भी स्थान देने का ऐलान किया गया।

विजेता बच्चों के नामों की घोषणा रविवार को आयोजित ऑनलाइन कार्यक्रम में अमेरिका में भारत के चांसरी प्रमुख रमाकांत कुमार ने की। करतल ध्वनि से सभी विजेता बच्चों को बधाई दी गई। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में अमेरिका वर्ग से ऋत्विक अग्रवाल प्रथम और अयाति ओझा दूसरे स्थान पर रही। भारत वर्ग से मैंकल नामदेव प्रथम, आद्या गुप्ता द्वितीय और फातिमा अंसारी तीसरे स्थान पर रहीं। तमिलनाडु की प्रतिभागी संजना एच, कात्यायनी त्रिवेदी, हिमांशी सिंह, गुनगुन मिश्रा, श्रवण कुमार मिश्रा, शान्तनु पांडेय और पंकज कुमार के निबंध भी सराहे गए। सभी को सांत्वना पुरस्कार देने की घोषणा की गई। विजेता बच्चों ने अपने-अपने निबंध भी पढ़कर सुनाए।

पुरस्कार वितरण समारोह के मुख्य अतिथि एवं अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग के अध्यक्ष डॉ. कृपा शंकर चौबे ने सभी विजेता बच्चों को बधाई देते हुए कहा कि जब हिंदी की विभिन्न विधाओं पर संकट गहरा रहा है ऐसे समय में आचार्य द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति द्वारा बच्चों के लिए निबंध प्रतियोगिता आयोजित करना बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य है। बच्चे के अंदर एक रचना छुपी होती है और उस रचना को निखारने एवं सामने लाने का अवसर देना निहायत जरूरी है।

समिति की अमेरिका इकाई की अध्यक्ष श्रीमती मंजु मिश्रा ने सभी प्रतिभागी बच्चों के साथ- साथ कार्यक्रम में उपस्थित निर्णायक मंडल की सदस्य प्रोफेसर नीलू गुप्ता (अमेरिका), डॉ. पद्मावती (चेन्नई), डॉ भारती सिंह (नोएडा), अनुपम परिहार (प्रयागराज), डॉ. सुमन फुलारा (उत्तराखंड) और बद्री दत्त मिश्र (रायबरेली) का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि हिंदी को बचाने और बढ़ाने के लिए भारत के साथ-साथ प्रवासी भारतीयों के बच्चों को मातृभाषा से जोड़े रखने के ही यह छोटे-छोटे प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारत से करीब 122 निबंध प्राप्त हुए।

भारत इकाई के अध्यक्ष विनोद शुक्ल ने कहा कि हिंदी को नया व्याकरण और भाषा देने वाले आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के योगदान को आज सभी स्वीकार कर रहे हैं। उनकी स्मृतियों को संरक्षित करने में समाज जागृत हो चुका है लेकिन सरकार का जागृत होना बाकी है।

आभार ज्ञापित करते हुए समिति के संयोजक गौरव अवस्थी ने कहा कि आचार्य द्विवेदी स्मृति संरक्षण अभियान का यह 25वां वर्ष है। सभी के प्रयासों और सहयोग से आचार्य द्विवेदी की स्मृतियां सात समंदर पार तक पहुंचने में सफल हुई हैं। भविष्य में भी ऐसा ही सहयोग बनाए रखने का अनुरोध किया।

कार्यक्रम का संचालन अमेरिकी इकाई की वरिष्ठ सदस्य श्रीमती रचना श्रीवास्तव ने किया और अमेरिका की शोनाली श्रीवास्तव ने सुमधुर स्वर में सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। कार्यक्रम में अमेरिकी इकाई की सदस्य डॉ कुसुम नैपसिक, श्रीमती ममता त्रिपाठी, गणेश दत्त, सुश्री नीलम सिंह, श्रीमती संगीता द्विवेदी, सुधीर द्विवेदी, करुणा शंकर मिश्रा, अभिषेक द्विवेदी आदि उपस्थित रहे।

आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति अंतर्राष्ट्रीय निबंध प्रतियोगिता का पुरस्कार वितरण एवं आशीर्वाद समारोह 22 मई रविवार को


आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति अंतर्राष्ट्रीय निबंध प्रतियोगिता का पुरस्कार वितरण एवं आशीर्वाद समारोह 22 मई 2022 रविवार को भारतीय समय के अनुसार सुबह 8:00 बजे ऑनलाइन आयोजित किया गया है।
समारोह में बतौर मुख्य अतिथि रमाकांत कुमार (चांसरी प्रमुख, भारतीय कौंसलावास सैनफ्रांसिस्को-अमेरिका) और डॉ. कृपा शंकर चौबे (अध्यक्ष-जनसंचार विभाग, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा-महाराष्ट्र) निबंध प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने वाले भारत और अमेरिका के बच्चों को आशीर्वाद एवं पुरस्कार प्रदान करेंगे।
पुरस्कार वितरण एवं आशीर्वाद समारोह का लाइव प्रसारण हमारी भाषा हिंदी फेसबुक पेज पर भी किया जाएगा। आपकी उपस्थिति हम सबका उत्साहवर्धन करेगी।
यह जानकारी आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की श्रीमती मंजु मिश्रा अध्यक्ष अमेरिका इकाई एवं विनोद शुक्ल अध्यक्ष भारत इकाई ने संयुक्त रूप से दी।

11 करोड़ की संपत्ति दान कर पत्नी, बेटे समेत ज्वैलर्स हुआ वैरागी

जयपुर (एजेंसी)। मध्यप्रदेश के बालाघाट नगर के ज्वेलर्स राकेश सुराना ने; न केवल करोड़ों रुपए की संपत्ति दान कर दी, बल्कि परिवार सहित भौतिक सुख-सुविधाओं का त्याग कर वैराग्य जीवन की राह चुन ली है। 22 मई को दीक्षार्थी परिवार राकेश सुराना (40), उनकी धर्मपत्नी लीना सुराना (36) और 11 वर्षीय पुत्र अमय सुराना जयपुर में दीक्षा लेंगे। 17 मई को जैन समाज द्वारा इस दीक्षार्थी परिवार को विदाई दी गई। वैराग्य जीवन की ओर जाने से पहले दीक्षार्थी सुराना परिवार ने करीब 11 करोड़ रुपए की संपत्ति गौशाला और धार्मिक संस्थाओं को दान कर दी है।
इस दीक्षार्थी परिवार के दीक्षा लेने के पूर्व 17 मई को जैन समाज ने शोभायात्रा निकालकर उन्हें विदाई दी। वैसे इस परिवार के अभिनंदन के लिए संयम शौर्य उत्सव का आयोजन 16 मई से ही प्रारंभ हो गया, जिसमें 16 मई को स्थानीय लॉन में उनका अभिनंदन किया गया। मंगलवार की सुबह करीब सवा सात से सवा आठ बजे तक श्री पार्श्वनाथ भवन में धार्मिक कार्यक्रम किया गया। काली पुतली चौक के समीप अहिंसा द्वार से वरघोड़ा निकाला गया। कृषि उपज मंडी इतजवारी गंज में दीक्षार्थी परिवार का साधर्मी वात्सल्य कराया गया। वहीं 18 मई को सुबह 9 बजे पार्श्वनाथ भवन में अष्टोत्तरी महापूजन होगा। वहीं 19 मई को सुबह 6 बजे संसार से संयम की ओर कदम बढ़ाने के लिए मुमुक्ष राकेश सुराना, मुमुक्ष लीना और मुमुझ अमय जयपुर के लिए रवाना हो जाएंगे। जो 22 मई को जयपुर में दीक्षा लेंगे।


वर्ष 2015 से परिवर्तित हुआ ह्रदय
सुराना ने संवाददाताओं से चर्चा के दौरान कहा कि उनका हृदय परिवर्तन महेंद्र सागर महाराज और मनीष सागर महाराज के प्रवचन से मिली प्रेरणा के कारण हुआ और उसके चलते ही उन्हें धर्म, अध्यात्म और आत्म स्वरूप को पहचानने की प्रेरणा मिली। बताया कि अध्यात्म योगी गुरुदेव महेन्द्र सागर महाराज का बालाघाट में चौमासा हुआ था। इस दौरान उनके विचारों, बातों को पूरी तन्मयता से सूना इसके बाद उसे आत्मसात करने का निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि संसार की भौतिक सुख-सुविधाएं नश्वर है। जो कमाया है उसे यहीं पर छोड़कर जान है। मानव जीवन बहुत दुर्लभता से मिलता है, पुण्य संचय किया तब मानव तन पाया। इस मानव तन का उपयोग केवल भौतिक सुख-सुविधाओं में न करते हुए मानव जीवन कल्याण और मोक्ष प्राप्ति के लिए करना चाहिए। राकेश सुराना की पत्नी लीना जो अमेरिका में पढ़ी है, उन्हें बचपन से ही संयम पथ पर जाने की इच्छा थी, इतना ही नहीं बेटा अमय जब 4 साल का था तभी वह संयम के पथ पर जाने की बात करता था, मगर बहुत कम उम्र होने के कारण उन्होंने सात साल तक इसके लिए इंतजार किया। सुराना ने बताया कि जीवन में सब कुछ मिलने के बाद भी शांति की कमी थी। इसे खोजने का प्रयास किया गया। तब पता चला की शांति कर्म करके या मोक्ष के मार्ग पर चलकर ही मिल सकती है। सुख अपने ही भीतर होता है, बशर्त उसने खोजने की जरुरत होती है। इसी सुख को प्राप्त करने के लिए संयम की ओर जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में आधुनिक शिक्षा की ओर बहुत भाग रहे हैं। बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ नैतिक शिक्षा भी देनी चाहिए।

कायस्थ चेतना मंच द्वारा दूसरा प्याऊ संचालित

बरेली। कायस्थ चेतना मंच के तत्वावधान में 17 मई 2022 दिन मंगलवार को प्याऊ का उद्घाटन संस्था के संरक्षक डॉक्टर पवन सक्सेना एवं संस्था के वरिष्ठ सदस्य पार्षद सतीश कातिब मम्मा जी द्वारा किया गया।

डॉक्टर पवन सक्सेना ने इसे संस्था का सराहनीय कार्य बताया। सतीश मम्मा ने कहा कि समय समय पर ऐसे कार्य कराने से संस्था की छवि और उज्जवल होगी। अध्यक्ष संजय सक्सेना ने बताया संस्था द्वारा एक प्याऊ बदायूं रोड स्थित पानी की टंकी के सामने 3 मई अक्षय तृतीया से संचालित हो रहा है, जिससे बदायूं रोड पर राहगीरों के लिए बहुत आराम मिलता है। चौपला पुल से लेकर करगैना तक और कोहरापीर पुलिस चौकी के आसपास भी पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। राहगीरों के लिए बहुत परेशानी होती है। यह विचार मन में आया था। इसीलिए प्याऊ संचालित किए गए हैं। अभी दो प्याऊ और संचालित करने का विचार है।

संस्था के वरिष्ठ उपाध्याय अखिलेश सक्सेना ने सभी का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया म। इस कार्यक्रम में महिला अध्यक्ष श्रीमती माया सक्सेना, श्रीमती प्रतिभा जौहरी, अविनाश सक्सेना, बीनू सिन्हा, महासचिव अमित सक्सेना बिंदु, निर्भय सक्सैना, पंकज सक्सेना पंछी आदि लोग उपस्थित रहे।

इससे पहले व्यंजन रेस्टोरेंट पर रेस्टोरेंट के मालिक गुप्ता के विशेष सहयोग से राहगीरों को भीषण गर्मी से राहत देने के लिए एक प्याऊ की व्यवस्था की गई। कायस्थ चेतना मंच संरक्षक डॉक्टर पवन सक्सेना वरिष्ठ पत्रकार के द्वारा नारियल फोड़कर प्याऊ का उद्घाटन किया गया।

अध्यक्ष संजय सक्सेना, महासचिव अमित सक्सेना बिंदु, वरिष्ठ उपाध्यक्ष अविनाश चंद्र सक्सेना, अखिलेश कुमार सक्सेना, सुरेंद्र बीनू सिन्हा, निर्भय सक्सैना वरिष्ठ पत्रकार, जिला महिला अध्यक्ष श्रीमती माया सक्सेना, पार्षद सतीश कातिब मम्मा, वरिष्ठ पार्षद एवं बीडीए सदस्य पंकज जौहरी पंछी, श्रीमती प्रतिमा जौहरी आदि ने कार्यक्रम में सहयोग किया अंत में अखिलेश कुमार ने सभी का आभार व्यक्त किया।

वीणा जी को याद कर हो गई आंखें नम

उरई (जालौन)। बुंदेलखंड कोकिला के नाम से संगीत की दुनिया में नवाजी जाती रहीं  सुर साम्राज्ञी स्वर्गीय वीणा श्रीवास्तव के जन्मदिन के उपलक्ष्य में उन्ही के द्वारा स्थापित रंगमंचीय सांस्कृतिक संस्था “वातायन” के तत्वावधान में शनिवार की रात राजमार्ग स्थित मणीन्द्रालय प्रेक्षागृह में मधुर यादें शीर्षक से संगीतमय भावभीना  कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में पुलिस अधीक्षक रवि कुमार और विशिष्ट अतिथि लोक कला मर्मग्य अयोध्या प्रसाद कुमुद उपस्थित रहे। इस अवसर पर वीणा जी से जुड़े खट्टे मीठे संस्मरणों को भी साझा किया गया, जिससे सभा में मौजूद उनके प्रशंसकों  की आँखे नम हो गईं।

इस अवसर पर नन्हें बाल कलाकारों की प्रस्तुतियों ने लोगों को मुग्ध कर दिया। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि उरई के लोगों के लिए यहाँ की सांस्कृतिक विरासत उनके गौरव को स्थापित करने वाली है, जिसमें वीणा जी जैसी शख्सियतों का महत्वपूर्ण योगदान है। इस तरह के लोगों की स्मृति होने वाले आयोजनों से यहाँ की समृद्ध सृजन धारा अविरल बनी रहेगी और पीढी दर पीढी इसकी मशाल थामने वाली प्रतिभाएं जन्म लेती रहेंगी।

वातायन के अध्यक्ष और वीणा जी के पति डॉ अरुण श्रीवास्तव ने जब वातायन संस्था के इतिहास पर प्रकाश डालने के साथ वीणा जी से जुडीं तमाम यादें ताजा की तो माहौल भावुक हो गया। कार्यक्रम का संचालन महेश अरोरा ने किया। संरक्षक डॉ आदित्य सक्सेना ने भी वीणा जी की बहुआयामी प्रतिभा के अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डाला तो लोग रोमांच और कौतूहल से भर उठे।

संगठन उपाध्यक्ष चौधरी जय करण सिंह और कार्यक्रम उपाध्यक्ष डॉ स्वयं प्रभा द्विवेदी ने मुख्य अतिथि और अन्य अतिथियों का स्वागत किया। वातायन के अन्य पदाधिकारियों में कार्यक्रम सचिव वर्षा राहुल सिंह, संगठन सचिव अमर सिंह, कोषाध्यक्ष गिरीश चन्द्र श्रीवास्तव, जनसंपर्क अधिकारी अरविंद नायक, कार्यक्रम निदेशक हेम प्रधान, कार्यक्रम उपनिदेशक डॉ विश्वप्रभा त्रिपाठी, कार्यकारिणी सदस्य श्रीमती पूर्णिमा सक्सेना, श्रीमती इंदु सक्सेना, सुधीर प्रकाश सिंह, श्रीमती शशि अरोड़ा, डॉ केएन सिंह निरंजन, श्रीमती रत्ना प्रधान, डॉ कुमारेन्द्र  सिंह ने भी कार्यक्रम को सफलता पूर्वक संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सौजन्य से जालौन टाइम्स उरई  

रजत जयंती वर्ष: हम हैं राही स्मृति अभियान के

रजत जयंती वर्ष: हम हैं राही स्मृति अभियान के

यही तारीख थी नौ मई। साल 1998। अपने ही गांव-घर, जनपद, प्रदेश और देश में भुला-बिसरा दिए गए हिंदी के प्रथम आचार्य हम सबको एक भाषा, एक बोली-बानी और नवीन व्याकरण देने वाले आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की स्मृतियों को संजोने से जुड़ा अभियान शुरू हुआ। शुरुआत 42 डिग्री सेल्सियस की भीषण गर्मी के बीच रायबरेली शहर के शहीद चौक से ध्यानाकर्षण धरने के माध्यम से हुई। यह एक शुरुआत भर थी। कोई खाका नहीं। कोई आका नहीं। कुल जमा 40-50 और पवित्र संकल्प इस अभियान की नींव में थे। प्रकृति या यूं कहें खुद आचार्य जी ने शहीद चौक पर जुटे अनुयायियों की परीक्षा ली। टेंट के नीचे बैठे लोग अपने इस पूर्वज और हिंदी के पुरोधा की यादों को जीवंत बनाने का संकल्प ले ही रहे थे कि तेज अंधड़ से 18×36 का टेंट उड़ गया। लोग बाल बाल बचे लेकिन कोई डिगा न हटा। ध्यानाकर्षण धरना अपने तय समय पर ही खत्म हुआ।

पहली परीक्षा में पास होने के बाद चल पड़ा स्मृति संरक्षण अभियान आप सब के सहयोग-स्नेह और संरक्षण से कई पड़ाव पार करते हुए आज यहां तक पहुंचा है। अभियान का यह 25वां वर्ष प्रारंभ हुआ है। किसी भी परंपरा के 25 वर्ष कम नहीं होते। इस दरमियान कुछ बदला, कुछ छूटा और बहुत कुछ नया शामिल भी हुआ। इस टूटे-फूटे ही सही अभियान के भवन में न जाने कितने लोगों का पैसा, पसीना और प्यारभाव ईंट-गारे के रूप में लगा है। सबके नाम गिनाने बैठे तो कागज नामों से ही भर जाए। मन की बहुत बातें मन में ही रखनी पड़ जाएं। इसलिए बात केवल उन पड़ावों की जो यादों में अंकित-टंकित हो चुकी हैं।
    अभियान का शुरुआती मुख्य मकसद साहित्यधाम दौलतपुर को राष्ट्रीय स्मारक के रूप में घोषित कराने से जुड़ा था। इसके प्रयास भी दिल्ली से लेकर लखनऊ तक हुए। खूब हुए लेकिन हिंदी के पुरोधा का जन्मस्थान राष्ट्रीय स्मारक नहीं बन पाया तो नहीं बन पाया। अब इसके लिए हम खुद को गुनाहगार ठहराएं या शासन सत्ता को? राष्ट्रीय स्मारक तो छोड़िए जन्मस्थान पर एक ऐसा स्थान तक नहीं बन पाया जहां बैठकर आज  हिंदी भाषा और अपने पुरोधाओं से प्रेम करने वाली पीढ़ी प्रेम से बैठ ही सके। बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी, इसलिए जरूरी है दूसरी तरफ चला जाए। अभियान से जुड़ी कुछ ऐसी तारीखें हैं, जो तवारीख बन गई।
   भला हो, कांग्रेस के सांसद रहे कैप्टन सतीश शर्मा का, जिन्होंने अभियान से प्रभावित होकर अपनी सांसद निधि से पुस्तकालय-वाचनालय का भवन जन्म स्थान के सामने आचार्य जी के सहन की भूमि पर ही निर्मित कराया। भला हिंदी के उन पुरोधा डॉ नामवर सिंह का भी हो जिन्होंने उस पुस्तकालय-वाचनालय भवन का लोकार्पण किया। यह अलग बात है कि तमाम मुश्किलों की वजह से पुस्तकालय वाचनालय संचालित नहीं हो पाया।
     साल वर्ष 2004 में एक नई शुरुआत आचार्य स्मृति दिवस के बहाने हुई। देश के शीर्षस्थ कवियों में शुमार रहे बालकवि बैरागी के एकल काव्य पाठ से शुरू हुई यह परंपरा आज भी जारी है। वर्ष-प्रतिवर्ष यह परंपरा नई होती गई। निखरती गई। आज ‘आचार्य स्मृति दिवस’ अभियान का मुख्य केंद्र है। इस दिवस के बहाने देश भर के न जाने कितने स्नावनामधन्य साहित्यकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और खिलाड़ियों को सुनने-गुनने, देखने-समझने के अवसर हम सबको मिल चुके हैं।
   

अभियान का एक असल पड़ाव तो ‘आचार्य पथ’ स्मारिका-पत्रिका भी है। प्रधान संपादक साहित्यकार -गीतकार आनंद स्वरूप श्रीवास्तव के कुशल संपादन में निरंतर 11 वर्षों से प्रकाशित हो रही इस स्मारिका ने आचार्य द्विवेदी की स्मृतियों को जीवंत बनाने में कम योगदान नहीं दिया है। देशभर के साहित्यकार आचार्य द्विवेदी पर केंद्रित लेख लिखते हैं। छपते हैं। प्रधान संपादक ने स्मारिका को ‘सरस्वती’ की तरह ही विविध ज्ञान की पत्रिका बनाने का उपक्रम भी लगातार किया है और कर रहे हैं।
    अभियान वर्ष 2015 कि वह तारीख भी नहीं भूल सकता जब ‘द्विवेदी अभिनंदन ग्रंथ’‌ का पुन: प्रकाशन नेशनल बुक ट्रस्ट-नई दिल्ली ने किया। इस काम में अभियान की भूमिका दुर्लभ ग्रंथों को उपलब्ध कराने भर की ही थी पर यह भूमिका भी कम नहीं थी। अभियान अपने अग्रज-बुजुर्ग रमाशंकर अग्निहोत्री को हमेशा याद करता है और रहेगा, जिन्होंने यह दुर्लभ ग्रंथ अभियान से जुड़ी आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति को खुशी-खुशी सौंपा और नेशनल बुक ट्रस्ट के सहायक संपादक हिंदी पंकज चतुर्वेदी के योगदान को भी हम नहीं भूल सकते। ग्रंथ का पुनः प्रकाशन उन्हीं की बदौलत हुआ।
    हम नहीं भूल सकते राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (निफ्ट रायबरेली) के निदेशक डॉ. भारत साह के उस योगदान को जो एक ऐसी किताब के रूप में दर्ज है, जिसका ऐतिहासिक महत्त्व है। इस किताब का नाम है विज्ञान वार्ता। आचार्य द्विवेदी द्वारा सरस्वती के संपादन के दौरान लिखे गए तकनीक, विज्ञान और नई नई खोजों से संबंधित लेखों को मुंशी प्रेमचंद ने अपने संपादन में संग्रहित कर वर्ष1930 में विज्ञान वार्ता नाम से पुस्तक प्रकाशित की थी। इस दुर्लभ पुस्तक को भी समिति ने निफ्ट रायबरेली के निदेशक को उपलब्ध और उन्होंने पुनः प्रकाशित कराया।
    तारीख तो नहीं भूलने वाली है,10 जनवरी 2021भी। ‘आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी युग प्रेरक सम्मान’ से सम्मानित प्रवासी भारतीय और कैलिफोर्निया अमेरिका में हिंदी के प्रचार-प्रसार में अपना योगदान देने वाली हिंदीसेवी श्रीमती मंजू मिश्रा ने आचार्य जी की स्मृतियों को सात समंदर पार जीवंत बनाने और इस बहाने प्रवासी भारतीयों की नई पीढ़ी को हिंदी से जोड़े रखने का बीड़ा अपनी प्रवासी साथी श्रीमती ममता कांडपाल त्रिपाठी, श्रीमती रचना श्रीवास्तव, श्रीमती शुभ्रा ओझा और श्रीमती कुसुम नैपसिक से प्राप्त नैतिक-भौतिक-साहित्यिक-सामाजिक सहयोग के बल पर इसी दिन उठाया था। आचार्य द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की अमेरिकी इकाई की शुरुआत इसी दिन हुई। एक छोटे से शहर की छोटी सी शुरुआत के दुनिया के सबसे संपन्न देश अमेरिका तक पहुंचना हम जैसे अकंचिनों के लिए स्वप्न सरीखा है। समिति शुक्रगुजार है अमेरिका इकाई की सभी सदस्यों की।
     हमें याद है, 21 दिसंबर 1998 को रायबरेली शहर के राही ब्लाक परिसर में तत्कालीन खंड विकास अधिकारी श्री विनोद सिंह और (अब दिवंगत) की अगुवाई में स्थापित की गई आचार्य श्री की आवक्ष प्रतिमा के अनावरण समारोह में पधारे अनेक साहित्यकार अपने संबोधन में महावीर प्रसाद द्विवेदी के नाम पर हजारी प्रसाद द्विवेदी का नाम गिना रहे थे लेकिन अनवरत 25 वर्षों के प्रयासों से अब लोगों के दिल-दिमाग में महावीर प्रसाद द्विवेदी पुनर्जीवित हो चुके हैं।
     एक साहित्यकार-संपादक की स्मृतियों को भूलने बिसराने वाले समाज के मन में पुनः स्थापित करने का काम बिना समाज के सहयोग के संभव कहां था? इस मामले में आचार्य द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति समाज के सभी वर्गों-धर्मो-जातियों के लोगों की हमेशा ऋणी थी, है और रहेगी। आचार्य द्विवेदी स्मृति संरक्षण अभियान समाज के सहयोग से आज अपने रजत जयंती वर्ष में प्रवेश कर चुका है। आचार्य द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति अभियान को सहयोग देने वाले ऐसे सभी गणमान्य, सामान्य और कार्यक्रमों की शोभा बढ़ाने वाले श्रोताओं-दर्शकों के प्रति हृदय से कृतज्ञता ज्ञापित करती है और आशा भी करती है कि अभियान की स्वर्ण जयंती पूर्ण कराने में भी आपका पूर्ण सहयोग-स्नेह-संरक्षण बना रहेगा।

गौरव अवस्थी
रायबरेली

मातृ दिवस पर साहित्यानुरागिनी एवं समाज सेविका मिथलेश गौड़ को किया सम्मानित

बरेली। कवि गोष्ठी आयोजन समिति के तत्वावधान में स्थानीय साहूकारा में मातृ दिवस पर कवि गोष्ठी एवं सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम श्री नत्थू लाल सदाचारी के संयोजन में हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता विनय सागर जायसवाल ने की। मुख्य अतिथि डॉ शिव शंकर यजुर्वेदी एवं विशिष्ट अतिथि डॉ रामशंकर ‘प्रेमी’ रहे।


कार्यक्रम का शुभारंभ माँ शारदे के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण कर हुआ। वंदना बृजेंद्र तिवारी “अकिंचन” ने प्रस्तुत की। कार्यक्रम में मातृ दिवस पर साहित्यानुरागिनी श्रीमती मिथलेश गौड़ को समाज सेवा एवं परिवार में सामंजस्य के साथ उत्कृष्ट योगदान के लिए संस्था के सचिव उपमेंद्र सक्सेना एडवोकेट द्वारा सम्मानित किया गया।


काव्य गोष्ठी में कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से माताओं की महिमा का गुणगान किया और जगत में उन्हें सबसे महान बताते हुए माताओं की सेवा का संकल्प लिया।


कार्यक्रम में संस्थाध्यक्ष रणधीर प्रसाद गौड़ ‘धीर’, सचिव उपमेंद्र सक्सेना एड., संयोजक नत्थू लाल सदाचारी, एस. ए. हुदा सोंटा, सत्यवती सिंह ‘सत्या’, ठा.राम प्रकाश ‘ओज’, अमित मनोज, पीयूष गोयल ‘बेदिल’, मिलन कुमार ‘मिलन’, जगदीश निमिष, उमेश त्रिगुणायत, रीतेश साहनी, रजत कुमार एवं व्यास नंदन शर्मा आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन राज शुक्ल ‘गजल राज’ने किया।

9 मई ही है आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की वास्तविक जन्मतिथि

महापुरुषों की जन्मतिथि को लेकर अक्सर मत-विमत और मतभेद होते आए हैं। ऐसा ही एक मतभेद हिंदी के युग प्रवर्तक आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की जन्मतिथि को लेकर भी हिंदी पट्टी में अरसे से चला आ रहा है। कुछ विद्वानों का मानना है कि आचार्य द्विवेदी की जन्म तिथि 6 मई है। कुछ विद्वान 5 मई या 15 मई को भी उनकी जन्मतिथि के रूप में मान्यता देते हैं। हालांकि अधिकतर विद्वान 9 मई को ही प्रामाणिक जन्मतिथि मानते-जानते हैं। यह अलग बात है कि आज के इंटरनेटिया ज्ञानी ‘गूगल बाबा’ और ‘विकीपीडिया’ ‘कुछ’ विद्वानों की मान्यता को बल देते हुए आचार्य द्विवेदी की जन्मतिथि 15 मई देश और दुनिया को बताते चले जा रहे हैं। वैसे भी, माना जाता है कि इन इंटरनेटिया ज्ञानियों को वास्तविक और प्रामाणिक तिथि से कोई लेना-देना नहीं होता। जिसने जो बता दिया वह हमेशा के लिए फीड कर दिया। हालांकि, बिना छानबीन और पुख्ता आधार के गलत जानकारी पाठकों तक पहुंचाना अक्षम्य अपराध है।
आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की जन्मतिथि को लेकर उठे विवाद के मूल में भारतीय पंचांग के अनुसार उनकी जन्मतिथि का हर जगह लिखा होना है। भारतीय पंचांग के अनुसार, आचार्य द्विवेदी का जन्म वैशाख शुक्ल चतुर्थी संवत 1921 को हुआ था। तिथि का उल्लेख स्वयं आचार्य द्विवेदी ने भी किया है। भारतीय पंचांग के अनुसार की तिथि को अंग्रेजी कैलेंडर से परिवर्तित करने को लेकर ही जन्मतिथि को लेकर भ्रम पैदा हुआ।
जन्मतिथि के विवाद के आधार के रूप में आचार्य द्विवेदी का 13 मई 1932 को प्रयागराज से प्रकाशित होने वाले पत्र ‘भारत’ में प्रकाशित आचार्य द्विवेदी का वह पत्र ही उपयोग किया जाता रहा है। यह पत्र आचार्य द्विवेदी ने “भारत” के संपादक पंडित ज्योति प्रसाद मिश्र ‘निर्मल’ को लिखा था। दरअसल, 1932 में काशी से नए निकलने वाले पाक्षिक ‘जागरण’ के प्रस्ताव पर आचार्य द्विवेदी की 68 वीं वर्षगांठ देश के कई नगरों में धूमधाम से मनाई गई थी। इस संबंध में ‘कृतज्ञता ज्ञापन’ के लिए आचार्य द्विवेदी ने स्वयं एक पत्र भारत के संपादक पंडित ज्योति प्रकाश मिश्र ‘निर्मल’ को लिखा। कहा जाता है कि इस पत्र को प्रकाशित करते समय मुद्रण की गलती से 9 मई की जगह 6 मई प्रकाशित हो गया। या बाद के वर्षों में आचार्य द्विवेदी का वह पत्र प्रकाशित करने में दूसरे पत्र या पत्रिकाओं में मुद्रण की गलती से 9 मई की जगह 6 मई टाइप हो गया। यह गलती ही आचार्य द्विवेदी की जन्मतिथि को लेकर भ्रम पैदा करने में सहायक सिद्ध हुई।
कुछ विद्वान मानते हैं कि अपने समय की महत्वपूर्ण मासिक पत्रिका सरस्वती का संपादन करते हुए 10 करोड़ हिंदी भाषा-भाषियों का साहित्यिक अनुशासन करने वाले आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की जन्मतिथि को लेकर हिंदी वालों में कई मतभेद और भ्रम जानबूझकर पैदा किए गए हैं। अपने समय के कुछ विद्वानों ने अपनी बात को मनवाने के लिए ही अपनी- अपनी अंग्रेजी तिथियों पर जोर देना शुरू किया। विद्वानों की इसी अखाड़ेबाजी से हिंदी भाषा भाषी समाज में आचार्य द्विवेदी की जन्मतिथि को लेकर भ्रम बढ़ता गया और इसे दूर करने की कोशिशें न के बराबर ही हुईं। आचार्य द्विवेदी के बाद सरस्वती का संपादन का भार संभालने वाले पंडित देवी दत्त शुक्ल के पौत्र और प्रयागराज निवासी पंडित वृतशील शर्मा भी 9 मई को ही मान्यता देते हैं। आचार्य द्विवेदी की जन्म तिथि को लेकर उठे विवाद से वह अपने को आज तक आहत महसूस करते हैं। उनका कहना है कि आचार्य जी की जन्म तिथि से जुड़ा यह विवाद निर्मूल और अकारण है।
वर्तमान में हिंदी समालोचना के सशक्त हस्ताक्षर एवं लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष आचार्य डॉ. सूर्य प्रसाद दीक्षित 9 मई को ही आचार्य द्विवेदी की वास्तविक और प्रामाणिक जन्मतिथि मानते हैं। इस लेखक से उन्होंने स्वयं यह बात अधिकार पूर्वक कहीं की सब लोग 9 मई को जन्मतिथि मानने की बात पर सहमत हैं। वह कहते हैं कि आचार्य द्विवेदी की जन्म तिथि से जुड़े विवाद के निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए उन्होंने स्वयं कई किताबों का अध्ययन किया और पाया कि 9 मई ही आचार्य द्विवेदी की प्रामाणिक जन्मतिथि है क्योंकि अपने कृतज्ञता ज्ञापन में भी उन्होंने 9 मई का ही उल्लेख किया है।
आचार्य द्विवेदी पर शोधपरक पुस्तक ‘आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी’ लिखने वाले रायबरेली के साहित्यकार केशव प्रसाद बाजपेई की मान्यता भी 9 मई पर ही केंद्रित है। आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति द्वारा पिछले 11 वर्षों से प्रकाशित की जा रही स्मारिका ‘आचार्य पथ-2021’ के अंक में प्रकाशित अपने लेख में श्री बाजपेई कहते हैं कि जन्मतिथि के विवाद के निराकरण के लिए सबसे उपयुक्त उपाय संवत 1921 के पंचांग को देखने से जुड़ा था। इस विषय में खोजबीन करने पर पता चला है कि सन 1864 में 10 मई को हिंदू पंचांग के अनुसार संवत 1921 के वैशाख मास की पंचमी तिथि थी और दिन मंगलवार था। इस दिन आदि गुरु शंकराचार्य जी की जयंती पड़ी थी। उसके अनुसार वैशाख शुक्ल चतुर्थी दिन सोमवार 9 मई 1864 को पड़ता है।
वह अपने इस लेख में लिखते हैं- ‘इस विवेचना में अंग्रेजी की तिथि 6 मई असंगत है तथा 9 मई ही संगत है। 6 मई या तो मुद्रण की भूल से पत्र में अंकित हुई है या आचार्य जी का ध्यान ही कभी इस ओर नहीं गया कि पंचांग से इसकी संगति नहीं बैठती मेरी समझ में मुद्रण की त्रुटि से ही यह भ्रम पैदा हुआ है इनसे इतर तिथियां विचारणीय ही नहीं है। अतः यह निर्णय हुआ कि आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की वास्तविक जन्मतिथि अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से 9 मई 1864 है, जो हिंदू पंचांग के संवत 1921 बैशाख शुक्ल चतुर्थी दिन सोमवार से पूरी तरह मेल खाती है। एक दिन गणितीय विधि के अनुसार 9 मई 1864 को सोमवार का दिन आता है और आचार्य जी का जन्मदिन सोमवार ही है। अतः इस से भी उनकी जन्मतिथि 9 मई 1864 होनी ही पुष्टि होती है।’

इन प्रमाणों के आधार पर हिंदी भाषा भाषी समाज को खड़ी बोली हिंदी का उपहार देने वाले आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की जन्म तिथि को लेकर जानबूझ कर पैदा किए गए विवाद से बचते हुए 9 मई को ही जन्मतिथि की मान्यता देकर अपने इस महापुरुष के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करनी चाहिए।
हालांकि, महापुरुष के प्रति कृतज्ञता ज्ञापन के लिए खास तिथि का कोई महत्व नहीं है। वर्ष पर्यंत हम उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते रह सकते हैं, लेकिन दिन विशेष की बात आने पर हमें अपने इस पूर्वज को 9 मई (जन्मतिथि) और 21 दिसंबर 1938 (निर्वाण तिथि) को ही याद रखना होगा।

∆ गौरव अवस्थी
रायबरेली/उन्नाव

कृषि राज्यमंत्री ने किया 100 आम उत्पादकों को मैनुअल हार्वेस्टर तथा प्लास्टिक क्रेट्स का वितरण

कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार तथा कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने किया 100 आम उत्पादकों को मैनुअल हार्वेस्टर तथा प्लास्टिक क्रेट्स का वितरण

उद्यान मंत्री ने मैंगों पैक हाउस मलिहाबाद तथा नवीन आधुनिक मण्डी स्थल का किया निरीक्षण

प्रदेश सरकार आम उत्पादकों की समस्याओं के प्रति सजग

  • लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार तथा कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह आज मलिहाबाद के रहमान खेड़ा स्थित उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान संस्थान में उत्तर प्रदेश राज्य औद्यानिक विपणन संघ (हाफेड) द्वारा आयोजित कार्यक्रम तथा मण्डी परिषद की वित्तीय सहायता से आम उत्पादकों को प्रोत्साहन हेतु लखनऊ क्षेत्र के चयनित 100 आम उत्पादकों को मैनुअल मैंगो हार्वेस्टर तथा प्लास्टिक क्रेट्स का वितरण किया।
  • इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आम उत्पादकों को मैंगो हार्वेस्टर एवं क्रेट्स के वितरण से जहाँ एक ओर आम की गुणवत्ता सुरक्षित होगी और आम उत्पादकों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य प्राप्त होगा। जिससे उनकी आय में बढ़ोत्तरी होगी।
  • उद्यान मंत्री ने कहा कि गुणवत्ता युक्त निर्यातनोमुखी आम की उपलब्धता सुनिश्चित कराये जाने के उद्देश्य से आम की तुड़ाई के बाद प्रबन्धन के लिए लखनऊ क्षेत्र के 100 आम उत्पादक का चयन जिला उद्यान अधिकारी द्वारा किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य कृषि उत्पादन मण्डी परिषद के वित्तीय सहयोग से निर्यात योग्य आम उत्पादन करने वाले किसानों को 75 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आम का निर्यात विदेशों में किया जा रहा है इसके लिए उन्होंने हाफेड द्वारा किये गये कार्यों की सराहना की।
    श्री सिंह ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा है कि किसानों और व्यापारियों की समस्या को गम्भीरता से लिया जाये तथा उनका निस्तारण प्राथमिकता पर किया जाये। उन्होंने आम उत्पादकों से उनकी समस्यायें एवं सुझाव मांगे हैं, ताकि उसका निस्तारण प्राथमिकता पर किया जाये। उन्होंने निदेशक उद्यान को निर्देश दिये हैं कि विभाग द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ हर किसान को मिले तथा उनको किसी भी प्रकार की समस्या न आने पाये।
    उद्यान मंत्री को मलिहाबाद के आम उत्पादकों द्वारा अपनी समस्याओं के बारे में अवगत कराया गया, जिसमें सरकारी ट्यूबेल, फल मण्डी में दुकान, मलिहाबाद में आम उत्पादकों के लिए उचित दरों की दवा की दुकानें, पैकिंग बाक्स में जी.एस.टी. कम करने, मलिहाबाद में प्रोसेसिंग युनिट लगाने के लिए अनुरोध किया। इस पर उद्यान मंत्री ने आम उत्पादकों को आश्वस्त किया कि उनकी हर समस्या को प्राथमिकता पर हल करने का प्रयास किया जायेगा।
  • इसके उपरांत उद्यान मंत्री ने मैंगों पैक हाउस, मलिहाबाद तथा आधुनिक मण्डी स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने किसानों एवं व्यापारियों की समस्या को सुना तथा विभागीय अधिकारियों को तत्काल निदान के निर्देश दिए।
    उत्तर प्रदेश कृषि उत्पादन मण्डी परिषद की अपर निदेशक श्रीमती निधि श्रीवास्तव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मण्डी परिषद किसानों के लिए विभिन्न प्रकार की योजनाएं चला रही है जिसका लाभ किसानों को मिल रहा है। आम उत्पादकों के लिए उनके उत्पाद के निर्यात के लिए मैंगो पैक हाउस तैयार किया जा रहा है। इस अवसर पर उद्यान निदेशक डा0 आर.के. तोमर ने कहा कि आम उत्पादक अपने उत्पादकों पैकिंग तथा ग्रेडिंग करके भेजे जिससे उनकों उचित मूल्य प्राप्त हो। उन्होंने कहा कि लाभार्थियों का चयन प्रथम आवक-प्रथम पावक के माध्यम से किया गया है।
    इस कार्यक्रम में विभागीय विशेषज्ञों तथा निर्यात योग्य आम के उत्पादन हेतु आम की पूर्व एवं तुडाई उपरान्त प्रबन्धन से संबधित तकनीकि जानकारी दी गयी। इसमें गुणवत्तायुक्त पैकेंजिंग हेतु पूर्व कोरूगेटेडट बाक्स की उपयोगिता, उपलब्धता, मानक आदि के सबंध में विस्तार से जानकारी दी गयी।
  • कार्यक्रम में हाफेड के सभापति नवलेश प्रताप सिंह, उपनिदेशक उद्यान डा0 वीरेन्द्र यादव, नोडल अधिकारी शैलेन्द्र कुमार सुमन, जिला उद्यान अधिकारी बैजनाथ सिंह सहित बड़ी संख्या में वैज्ञानिक तथा आम उत्पादक/किसान उपस्थित रहे।

आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति निबंध प्रतियोगिता

भारत व अमेरिका में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति – निबंध प्रतियोगिता का आयोजन। ज़ूम के माध्यम से किया जाएगा कार्यक्रम का आयोजन।


लखनऊ। हमारी भाषा हिंदी तथा आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की भारत एवं अमेरिका इकाई द्वारा आयोजित ‘आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति निबंध प्रतियोगिता’ में भाग लेने के लिए भारत एवं अमेरिका के 12 से 18 वर्ष की उम्र के सभी छात्रों का स्वागत है। यह जानकारी देते हुए आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी समिति अमेरिका की अध्यक्ष मंजू मिश्रा ने बताया कि कार्यक्रम का आयोजन ज़ूम के माध्यम से किया जाएगा तथा इसका लाइव प्रसारण हमारी भाषा हिंदी के फ़ेसबुक पेज से किया जाएगा।

Program Details / कार्यक्रम का समय :

21 मई, 2022 शाम 7.30 बजे PST (कैलिफ़ोर्निया समय)
22 मई, 2022 प्रात: 8.00 बजे IST (भारतीय समय)

इच्छुक प्रतिभागी इस गूगल फॅार्म में प्रतिभागिता आवेदन के साथ सूची में दिए गए विषयों में से किसी एक विषय पर 250 – 300 शब्दों का निबंध 15 मई, 2022 तक जमा कर दें। विजेताओं को पुरस्कार के साथ कार्यक्रम में अपने निबंध पढ़ कर सुनाने का अवसर भी प्रदान किया जाएगा। सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा ।पुरस्कृत निबंध आचार्य पथ स्मारिका में भी प्रकाशित किए जाएंगे।


https://forms.gle/qTcWbdb7o9jm9fMTA

कार्यक्रम का आयोजन ज़ूम के माध्यम से किया जाएगा तथा इसका लाइव प्रसारण हमारी भाषा हिंदी के फ़ेसबुक पेज से किया जाएगा। आवेदन करने वाले सभी प्रतिभागियों ज़ूम लिंक तथा अन्य आवश्यक सूचना ईमेल के द्वारा भेजी जाएगी।

Essay Topics / निबंध के विषय :

  1. वर्तमान समय में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के विचारों की प्रासंगिकता
  2. युवा वर्ग में हिंदी को कैसे लोकप्रिय बनाया जाए
  3. विदेशों मे हिंदी की गूंज

Competition Rules / प्रातिभागिता के नियम :

  1. निबंध भेजने की अंतिम तिथि – 15 मई, 2022
  2. आयु सीमा : 12 से 18 वर्ष
  3. शब्द सीमा 250 – 300 ( 300 शब्दों से अधिक होने पर निबंध पर विचार नहीं किया जाएगा)

आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी समिति अमेरिका की अध्यक्ष मंजू मिश्रा ने अनुरोध किया है कि यह संदेश ज्यादा से ज्यादा लोगों तक प्रसारित करने में अपना सहयोग प्रदान करें।

मलिहाबाद पहुंचे पूर्व उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा

मलिहाबाद,लखनऊ। भाजपा के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व उप मुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा सोमवार दोपहर एक निजी कार्यक्रम मुण्डन संस्कार मे शामिल होने देवम लॉन मलिहाबाद पहुंचे। उन्होंने क्षेत्र के भाजपा नेताओं से भेंट कर उनकी कुशलक्षेम जानी।

वह दोपहर पाठक गंज मे अपनी बहन संध्या पाठक के घर पहुंचे। यहां पर शांतनु पाठक,  कार्तिकेय पाठक, सुमित पाठक,अनादि पाठक, राजीव तिवारी, प्रमोद पाठक आदि परिजनों के साथ मिलकर कुल देवी की पूजा अर्चना के उपरांत कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे।


देवम लॉन के संचालक विकास पाठक ने दर्जनों भाजपा कार्यकर्ताओं एवं पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष धर्मेन्द्र प्रधान,  विधायक प्रतिनिधि विकास किशोर आशू ने जोरदार स्वागत किया। 

इस दौरान उन्होंने वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता सैय्यद खलील अहमद, पूर्व ब्लाक प्रमुख पति अनिल सिंह चौहान, उमाकांत गुप्ता, बबलू सिंह, विशाल पाठक, मारूफ अंसारी सहित दर्जनों कार्यकर्ताओं से मिलकर कुशल क्षेम जानी। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से संगठन मजबूत रखने की अपील की। फिर बच्चे को आशीर्वाद देकर उनका काफिला लखनऊ की तरफ निकल गया।

बैलगाड़ी पर निकली डॉक्टर की बारात

बैतूल (एजेंसी)। आमतौर पर शादी समारोह में लोग अपनी हैसियत और ताकत का प्रदर्शन करने से नहीं चूकते, मगर मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में एक चिकित्सक ने अपने विवाह समारोह में सादगी की मिसाल पेश की। उसने अपनी बारात बैलगाड़ी पर निकाली। लगभग तीन किलो मीटर का सफर बैलगाड़़ी पर ही तय किया।

बैतूल के चिचोली विकास खंड का आदिवासी बाहुल्य गांव असाढ़ी है। यहां के डॉ. राजा धुर्वे की शादी थी, उन्होंने आदिवासी समाज की परंपरा और शादी सादगी से करने का फैसला लिया और बारात बैलगाड़ी से निकाली। इसके लिए बैलगाड़ी को आकर्षक रुप दिया। इस बैलगाड़ी की चमक के आगे लग्जरी कार और बग्घियां भी फीकी दिखाई दीं। डॉ राजा पेशे से एमबीबीएस डॉक्टर, शिक्षक और मोटिवेशनल स्पीकर हैं।

इस मौके पर राजा धुर्वे का कहना था कि अपने सामाजिक, सांस्कृतिक मूल्यों को सहेजने और लोगों को महंगाई के दौर में सादा जीवन-उच्च विचार सिखाने का इससे अच्छा मौका नहीं हो सकता था। उनके मुताबिक महंगाई के इस दौर में बैलगाड़ी सबसे सस्ता सुलभ और प्रदूषणमुक्त साधन है। बैलगाड़ी ग्रामीण सभ्यता संस्कृति की पहचान है। इसलिए अपनी संस्कृति को पुनर्जीवित करने के लिए उन्होंने बैलगाड़ी पर बारात ले जाने का फैसला किया।

इस अनूठी बारात में बैलगाड़ी को खास जनजातीय, लोक-कलाओं से सजाया गया था। दूल्हे की बैलगाड़ी के पीछे चार बैलगाडियां में बच्चों और महिलाओं को बैठाया गया। बारात में जनजातीय लोक नृत्य और लोक वाद्य शामिल किए गए थे, जो आमतौर पर किसी शादी में देखने को नहीं मिलते। ग्राम असाढ़ी से बैलगाड़ी में निकले दूल्हे राजा जब तीन किलोमीटर दूर दूधिया गांव में अपनी दुल्हन को लेने पहुंचे तो लोग झूम उठे।

स्मार्ट सिटी की तर्ज पर होगा गांवों का कायाकल्प: योगी

लखनऊ। स्मार्ट सिटी की तरह स्मार्ट गांव बनाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संकल्पना को साकार रूप देने  के लिए प्रदेश सरकार जोरदार प्रयास करेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ग्राम पंचायतों को हाईटेक बनाने का अभियान युद्ध स्तर पर छेड दिया गया है। योगी आदित्यनाथ रविवार को जालौन जिले के डकोर ब्लाक की पंचायत ऐरी रम्पुरा में राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे थे।

प्रत्येक पंचायत में होगा नियमित सचिवालय

उन्होंने प्रदेश की चुनिंदा ग्राम पंचायतों के हाईटेक सुसज्जतिकरण का डिजिटल लोकार्पण भी किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा ग्राम पंचायतों को विकास की धुरी के रूप में सशक्त करने की है। प्रदेश सरकार ने इसके अनुरूप प्रत्येक ग्राम पंचायत में नियमित सचिवालय शुरू करने का खाका तैयार किया है। इसके लिए सभी पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर से आच्छादित किया जाएगा ताकि पंचायत सचिवालय में निर्बाध इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध हो सके। इससे ग्रामीणों को अपने सारे जरूरी प्रमाण पत्रों के लिए आवेदन और उन्हें प्राप्त करना संभव हो जाएगा।

प्रधानों को दिए मॉडल ग्राम पंचायत बनाने के टिप्स

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में ग्रामीणों को सप्ताह में एक दिन बैठक करके  महिला सुरक्षा और सभी सरकारी योजनाओं से अवगत कराया जाना चाहिए। उन्होंने गांव के स्कूल भवनों के सुंदरीकरण, जल संरक्षण हेतु अमृत सरोवर और नौनिहालों को खुशनुमा सुविधाओं की व्यवस्था आदि के बारे में मॉडल ग्राम पंचायत बनाने को ले कर टिप्स दिए। इसके पहले योगी ने पंडित दीन दयाल उपाध्याय  जिला पंचायत सशक्तिकरण सम्मान से जिला पंचायत को अलंकृत किया। ऐरी रम्पुरा के युवा प्रधान ओंकार पाल को बाल मित्र ग्राम पंचायत सम्मान व कुठौंद ब्लॉक अंतर्गत कुरेपुरा कनार के प्रधान शिवदास गुप्ता को पंडित दीन दयाल उपाध्याय  ग्राम पंचायत सशक्तिकरण सम्मान से नवाजा।

जूनियर से अपग्रेड होकर अब हाई स्कूल

ऐरी रमपुरा के प्रधान ओंकार पाल की मांग पर उन्होंने गांव के जूनियर हाई स्कूल को अपग्रेड करके हाई स्कूल की मान्यता देने की घोषणा की। कहा कि गांव में स्वास्थ्य व चिकित्सा की व्यवस्था के लिए प्रारंभिक तौर पर हेल्थ पोस्ट स्थापित की जाएगी, जिसे बाद में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के रूप  में तैयार  किया जाएगा। कार्यक्रम में प्रदेश के पंचायती राज मंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री भानु प्रताप वर्मा, जिले के सभी विधायक, एमएलसी रमा निरंजन  और जिला पंचायत अध्यक्ष मौजूद रहे।

गुरु तेग बहादुर जी के त्याग व बलिदान को नमन

गुरु तेग बहादुर अपने त्याग और बलिदान के लिए वह सही अर्थों में ‘हिन्द की चादर’ कहलाए। अपने धर्म, मानवीय मूल्यों, आदर्शों एवं सिद्धांत की रक्षा के लिए विश्व इतिहास में जिन लोगों ने प्राणों की आहुति दी, उनमें गुरु तेग बहादुर साहब का स्थान अग्रिम पंक्ति में हैं।  

बिजनौर। श्री गुरु गोविंद सिंह खालसा विद्यालय खासपुरा ऊमरी में हिंद की चादर गुरु तेग बहादर जी का 400वां  प्रकाश पर्व गुरबाणी पाठ उपरांत अरदास के द्वारा मनाया गया।

इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य सरदार अभिषेक सिंह कोमल ने गुरु जी के जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला। उन्होंने देश धर्म की रक्षा के लिए उनके बलिदान को नमन करते हुए अपना प्रेरणास्रोत बताया।

विदित हो कि देश भर में सिखों के नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी का 400वां प्रकाश पर्व मनाया जा रहा है। गुरु तेग बहादुर सिंह एक क्रांतिकारी युग पुरुष थे और उनका जन्म वैसाख कृष्ण पंचमी को पंजाब के अमृतसर में हुआ था। इस दिन को शहीदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन गुरु साहिब के इतिहास और शहादत के बारे में बताया जाता है।

गुरुद्वारा शीशगंज साहिब के अंदर का दृश्य (फाइल फोटो)

श्री गुरु तेग बहादुर जी
अमृतसर में जन्मे गुरु तेग बहादुर; गुरु हरगोविन्द जी के पांचवें पुत्र थे। 8वें गुरु हरिकृष्ण राय जी के निधन के बाद इन्हें 9वां गुरु बनाया गया था। इन्होंने आनन्दपुर साहिब का निर्माण कराया और ये वहीं रहने लगे थे। वे बचपन से ही बहादुर, निर्भीक स्वभाव के और आध्यात्मिक रुचि वाले थे। मात्र 14 वर्ष की आयु में अपने पिता के साथ मुगलों के हमले के खिलाफ हुए युद्ध में उन्होंने अपनी वीरता का परिचय दिया। इस वीरता से प्रभावित होकर उनके पिता ने उनका नाम तेग बहादुर यानी तलवार के धनी रख दिया।

उन्होंने मुगल शासक औरंगजेब की तमाम कोशिशों के बावजूद इस्लाम धारण नहीं किया और तमाम जुल्मों का पूरी दृढ़ता से सामना किया। औरंगजेब ने उन्हें इस्लाम कबूल करने को कहा तो गुरु साहब ने कहा शीश कटा सकते हैं केश नहीं। औरंगजेब ने गुरुजी पर अनेक अत्याचार किए, परंतु वे अविचलित रहे। वह लगातार हिन्दुओं, सिखों, कश्मीरी पंडितों और गैर मुस्लिमों का इस्लाम में जबरन धर्मांतरण का विरोध कर रहे थे, जिससे औरंगजेब खासा नाराज था। 

आठ दिनों की यातना के बाद गुरुजी को दिल्ली के चांदनी चौक में शीश काटकर शहीद कर दिया गया। उनके शहीदी स्थल पर गुरुद्वारा बनाया गया, जिसे गुरुद्वारा शीशगंज साहब नाम से जाना जाता है। विश्व इतिहास में धर्म एवं मानवीय मूल्यों, आदर्शों एवं सिद्धांत की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वालों में गुरु तेग बहादुर साहब का स्थान अद्वितीय है। उनकी शहादत ने मानवाधिकारों की सुरक्षा को सिख पहचान बनाने में मदद की”।”नौवें गुरु को बलपूर्वक धर्मान्तरित करने के प्रयास ने स्पष्ट रूप से शहीद के नौ वर्षीय बेटे, गोबिन्द पर एक अमिट छाप डाली, जिन्होंने धीरे-धीरे सिख समूहों को इकट्ठा करके इसका प्रतिकार किया और खालसा पहचान को जन्म दिया।”

होम्योपैथी सर्वसुलभ एवं दुष्प्रभाव रहित चिकित्सा पद्धति: डॉ. शूरवीर सिंह

विश्व होम्योपैथिक दिवस पर होम्योपैथी के जनक डॉ. हैनिमैन को किया याद। 267 वें जन्म दिवस पर हुआ कार्यक्रम का आयोजन। कोरोना महामारी के दौरान होम्योपैथिक दवाइयों के योगदान को सराहा। सर्वसम्मति से अगले सत्र के लिये चुने गए डॉ. स्नेह प्रताप अध्यक्ष व डॉ. अन्तरिक्ष छिल्लर सचिव।

बिजनौर। विश्व होम्योपैथिक दिवस पर होम्योपैथी के जनक डॉ. हैनिमैन के 267वें जन्म दिवस (10 अप्रैल) पर होम्योपैथिक मेंडिकल एसोसिएशन बिजनौर ने इम्प्रेशन रेस्टोरेन्ट में एक कार्यक्रम का आयोजन किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. शूरवीर सिंह व संचालन सचिव डॉ. नीरज कुमार ने किया। मुख्य अतिथि डॉ. रमेश तोमर ने दीप प्रज्ज्वलित करने के साथ ही डॉ. हैनिमैन के चित्र पर पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। इस दौरान सर्व सम्मति से अगले सत्र के लिये डॉ. स्नेह प्रताप को अध्यक्ष व डॉ. अन्तरिक्ष छिल्लर को सचिव चुना गया। मुख्य अतिथि डॉ. रमेश तोमर ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि चिकित्सक का धर्म है कि बिना भेदभाव के सभी के स्वास्थ्य तथा मानवता की भलाई के लिये कार्यरत रहे। कोरोना महामारी के दौरान चिकित्सकों ने अपना धर्म बखूबी निभाया।

अध्यक्ष डॉ. शूरवीर सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि होम्योपैथी एक सर्वसुलभ एवं दुष्प्रभाव रहित चिकित्सा पद्धति है। कोरोना महामारी के दौरान होम्योपेथिक दवाईयों ने बहुत ही अच्छा काम किया। होथोपैथिक दवाईयां बचाव व इम्युनिटी बूस्टर के रूप में अत्यधिक लाभदायक रही हैं।

सचिव डॉ. नीरज कुमार ने कहा कि होम्योपैथी द्वारा पुरानी एवं जटिल से जटिल बीमारियों का सफल इलाज संभव है। होम्योपैथिक दवाइयों के सेवन से पूर्ण लाभ प्राप्त होता है तथा इसका कोई दुष्प्रभाव भी नहीं पड़ता। कोरोना महामारी के दौरान होम्योपैथिक दवाइयों ने बहुत ही योगदान दिया है।

इस अवसर पर डॉ. अजवीर सिंह, डॉ. युवराज सिंह, डॉ. संजीव, डॉ. अमित राणा, डॉ. विनोद सिंह, डॉ. राहुल त्यामी, डॉ. सुमित विश्नोई, डॉ. धर्मेन्द्र सिंह, डॉ. ध्यान सिंह आदि उपस्थित रहे।

सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के नए शैक्षिक सत्र का शुभारंभ

बिजनौर। अफजलगढ़ स्थित सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज परिसर में विधिवत पूजा-अर्चना करके नए शैक्षिक सत्र का शुभारंभ किया गया।

विद्यालय परिसर में हवन एवं सरस्वती पूजन किया गया। अखिलेश सिंह ने सपत्नीक यज्ञमानी की तथा पंडित मुकेश जखमोला ने पूर्ण विधि-विधान पूर्वक सरस्वती पूजन संपन्न कराकर उपस्थित लोगों को हिंदू नव वर्ष की शुभकामनाएं दी। वहीं प्रधानाचार्य प्रवेन्द्र कुमार ने सभी छात्र-छात्राओं के उज्जवल भविष्य के लिए मां सरस्वती से प्रार्थना की। सभी अध्यापक गणों के साथ साथ कार्यक्रम में उपस्थित सभी छात्र- छात्राओं ने यज्ञ में आहुतियां दी। इस अवसर पर आनंद भूषण यादव, राजीव कुमार अग्रवाल, रमाकान्त तिवारी, शौकेन्द्र कुमार तथा अमरीश कुमार का योगदान रहा।

न्यू एरा अकैडमी में वार्षिकोत्सव व परीक्षा फल का वितरण

बिजनौर। नजीबाबाद के न्यू एरा अकैडमी में वार्षिकोत्सव मनाते हुए परीक्षा फल का वितरण किया गया। सभी सफलता प्राप्त विद्यार्थियों ने परीक्षा परिणाम प्राप्त कर खुशी मनाई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि वरिष्ठ भाजपा नेता चौधरी ईशम सिंह ने कहा कि समाज में शिक्षा का महत्वपूर्ण स्थान है।

न्यू एरा अकैडमी लाहक कला में विद्यालय का वार्षिकोत्सव एवं परीक्षा फल का वितरण किया गया। सभी सफलता प्राप्त विद्यार्थियों ने परीक्षा परिणाम प्राप्त कर खुशी मनाई।

विद्यालय के वार्षिकोत्सव में विद्यालय के नन्हे मुन्ने बच्चों ने कई सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। मुख्य अतिथि वरिष्ठ भाजपा नेता चौधरी ईशम सिंह ने मां सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने विद्यालय के छात्र छात्राओं सब स्टाफ एवं छात्र-छात्राओं के अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि समाज में शिक्षा का महत्वपूर्ण स्थान है। शिक्षित व्यक्ति अपने जीवन में जो कार्य भी करता है, उसकी अलग पहचान होती है। उन्होंने सभी अभिभावकों से अपने अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने की अपील की।

इस अवसर पर साबिर अहमद, शाहबपुरा उमराव से इरशाद अहमद ठेकेदार, डा शमशेर खान लाहक कला,
वीरेंदर सिंह, महिपाल सिंह चौहान, हामिद खान पूर्व प्रधान, उस्मान भाई,सुशील कुमार, सुधीर कुमार, राकेश कुमार, शिवम कुमार इत्यादि छात्र कक्षा 1 में मौ फ़ैज़, 2 में रफिया, कक्षा 3 आहिल, कक्षा 4 में कार्तिक कुमार, कक्षा 5 में अक्षित कुमार इत्यादि छात्रों ने अपनी अपनी कक्षाओं में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथि चौधरी इसम सिंह, नादिर हसन, अश्वनी कुमार आदि ने सभी छात्र छात्राओं को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर अज़हर हसन अध्यक्ष, अज़रा मैनेजर, स्टाफ श्रवण कुमार, प्रिंसिपल शालिनी चौहान, वाईस प्रिंसिपल हुमेरा, निशा, इरम, फ़िज़ा, आयशा, फरहाना
विनीता इत्यादि उपस्थित रहे।

वैभव अग्रवाल बने आईवीएफ के जिला महामंत्री


बिजनौर। अंतर्राष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन (उत्तर प्रदेश) के प्रदेश उपाध्यक्ष गौरव अग्रवाल एडवोकेट की संस्तुति पर अंतर्राष्ट्रीय वैश्य महा सम्मेलन (जनपद बिजनौर) के जिला अध्यक्ष अभिनव अग्रवाल एडवोकेट द्वारा स्थानीय वैभव अग्रवाल को जनपद बिजनौर का जिला महामंत्री मनोनीत किया गया है। उनसे आशा व्यक्त की गई है कि वह संगठन को एक नयी दिशा व मजबूती प्रदान करेंगे। आईवीएफ जिलाध्यक्ष अभिनव अग्रवाल एडवोकेट ने नव मनोनित जिला महामंत्री वैभव अग्रवाल से आशा की है कि वह वैश्य समाज की परम्परा को आगे बढाते हुए समाज में फैली कुरीतियों के उन्मूलन व रचनात्मक कार्यो के प्रति समर्पित रहेंगे।

नवरेह मनाने 2 अप्रैल को घाटी पहुंचेंगे कश्मीरी पंडित

नई दिल्ली। कश्मीरी पंडित नवरेह मनाने 2 अप्रैल को घाटी पहुंचेंगे। द कश्मीर फाइल्स में कश्मीरी पंडितों के विस्थापन का दर्द सामने आने के बाद इस बार नए साल यानी नवरेह पर घाटी में पंडितों की वापसी की आवाज बुलंद होगी। देशभर से कश्मीरी पंडित नवरेह मनाने 2 अप्रैल को घाटी पहुंचेंगे।
जम्मू से भी बस के जरिये कश्मीरी पंडित घाटी में जाकर हरि पर्वत पर मां शारिका मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ ही पंडितों की वापसी की कामना करेंगे। सार्वजनिक समारोह कर वापसी के लिए अनुकूल माहौल बनाने के प्रयास होंगे, जिसमें सभी धर्मों व संप्रदाय के लोग शामिल होंगे। भाजपा नेता डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी व शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी भी इस मौके की साक्षी होंगी।
जेके पीस फोरम की ओर से देशभर के कश्मीरी पंडितों को नवरेह पर दो अप्रैल को कश्मीर में जुटाने की तैयारियां की गई हैं। इसके तहत शारिका मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ ही शेर-ए कश्मीर पार्क में नवरेह मिलन कार्यक्रम होगा। घाटी में भाईचारे को बढ़ावा देने के साथ ही पंडितों की सम्मानजनक वापसी की आवाज बुलंद की जाएगी।
कार्यक्रम का उद्देश्य 30 साल के विस्थापन के बीच धार्मिक-सांस्कृतिक रीति-रिवाजों से नई पीढ़ी को अवगत कराना और दहशत में घर-बार छोड़ने के लिए मजबूर लोगों के लिए सुरक्षा व आत्म सम्मान की भावना जगाना है। फोरम के चेयरमैन सतीश महालदार ने बताया कि इस बार कोशिश है कि सभी धर्मों के लोगों को एक मंच पर लाकर पंडितों की वापसी का माहौल बनाया जाए। इसके लिए अंतर समुदाय सांस्कृतिक महोत्सव भी कराया जा रहा है। कोशिश होगी कि सभी लोग एक-दूसरे की भावनाओं को समझें व सभी के प्रति सम्मान का भाव जगे। विस्थापन का दर्द झेल रहे पंडितों को सम्मान मिले।
सर संघचालक डॉ. मोहन भागवत भी नवरेह पर इस बार ऑनलाइन संबोधित करेंगे। संजीवनी शारदा केंद्र जम्मू के माध्यम से इस कार्यक्रम का आयोजन तीन अप्रैल को होगा। सर संघचालक पिछले साल संबोधन करने वाले थे, लेकिन अस्वस्थ होने की वजह से यह संभव नहीं हो पाया था।

दूसरी बार UP के मुख्यमंत्री बने योगी आदित्यनाथ

केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक ने भी ली उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ

लखनऊ (एजेंसी)। योगी आदित्यनाथ ने दूसरी बार यूपी के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने योगी को पद व गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस मौके पर केशव प्रसाद और ब्रजेश पाठक ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

केशव प्रसाद मौर्य ने दोबारा सूबे के उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। विधानसभा चुनावों में हार के बावजूद भाजपा आलाकमान ने उन पर भरोसा बनाए रखा है। वहीं कानून मंत्री रहे ब्रजेश पाठक को उप-मुख्यमंत्री बनाया गया है। उन्होंने पद और गोपनीयता की शपथ ली है। पार्टी में ब्रजेश पाठक का कद बढ़ाया गया है। तय हो गया है कि भाजपा अब ब्राह्मणों की लीडरशिप में बदलाव कर रही है।

Yogi Adityanath takes oath as UP chief minister for second time | Latest  News India - Hindustan Times

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव 2022 में प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करने वाली भाजपा को योगी आदित्यनाथ के रूप में विधायक दल का नेता भी दोबारा मिला है। भाजपा का फोकस मिशन 2024 पर है, इसको देखते हुए योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल 2.0 में जातीय व क्षेत्रीय समीकरण के साथ पुरानी कैबिनेट में रहे कुछ विधायकों का सम्मान भी बरकरार रखा गया है।

उत्तराखंड की पूर्व राज्यपाल बेबी रानी मौर्य को मंत्रिमंडल में जगह मिली है। विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। स्वतंत्र देव सिंह को योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल में मंत्री बनाया गया है। वह यूपी भाजपा अध्यक्ष हैं।

शाहजहांपुर से विधायक सुरेश कुमार खन्ना को योगी कैबिनेट में जगह मिली है। इसके अलावा योगी सरकार में सूर्य प्रताप शाही ने भी शपथ ली है। शाही को भाजपा के कद्दावर नेताओं में गिना जाता है। नंद गोपाल नंदी को योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल में जगह मिली है। नंदी प्रयागराज दक्षिण सीट से विधायक चुने गए हैं। नंदी तीसरी बार विधायक बने हैं।

मैनपुरी विधानसभा से विधायक जयवीर सिंह को योगी सरकार में मंत्री बनाया गया है। जयवीर मुलायम और मायावती सरकार में भी मंत्री रहे हैं। मथुरा के लक्ष्मी नारायण चौधरी को योगी मंत्रिमंडल में जगह मिली है। वह छाता विधानसभा से पांच बार विधायक और मायावती सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं।

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इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृहमंत्री अमित शाह मंच पर मौजूद हैं। इसके अलावा केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केन्द्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, भाजपा संगठन महामंत्री सुनील बंसल, भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी मौजूद हैं।

कविता इंसान को सिर्फ जिंदा नहीं रखती, जवान भी रखती है: डॉ. पंकज भारद्वाज

ग्रीन लाइट सीनियर सेंकेडरी पब्लिक स्कूल में हुआ काव्य गोष्ठी का आयोजन। गोष्ठी में कवियों ने प्रस्तुत की रचनाएं। मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए सांध्य हिंदी दैनिक पब्लिक इमोशन के संपादक डॉ. पंकज भारद्वाज।

बिजनौर। साहित्य संगम के तत्वावधान में ग्रीन लाइट सीनियर सेकेंडरी पब्लिक स्कूल अभिभुरा मंडावली में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।

मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार डॉ. पंकज भारद्वाज ने कहा कि कविता इंसान को सिर्फ जिंदा नहीं रखती बल्कि जवान रखती है। उन्होंने कहा कि कविता के जरिए मौहब्बत एवं पीड़ा को व्यक्त किया जा सकता है किंतु नफरत बांटने का जरिया कविता को नहीं बनाया जा सकता। संयोजक रविंद्र कुमार और संरक्षक कर्मवीर सिंह के सानिध्य में हुई गोष्ठी की अध्यक्षता श्याम प्रकाश तिवारी व संचालन जितेंद्र सिंह कक्कड़ ने किया।

कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि द्वारा माता सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवल एवं माल्यार्पण से हुआ। इसके बाद संरक्षक कर्मवीर सिंह ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। तत्पश्चात काव्य गोष्ठी में कुमुद कुमार ने कहा- शौर्य के पन्नों पर लिखा हमनें इतिहास भारत का; शस्त्र और शास्त्र से सजाया हमनें इतिहास भारत का।

वरिष्ठ कवि प्रदीप डेजी ने कहा-अपने आंसू पीते पीते हम प्यास बुझाना भूल गए; थोड़े से बस क्या बड़े हुए हम वक्त पुराना भूल गए। जितेंद्र कक्कड़ ने कहा- दर्द जमाने का सह लेते तो सफर कैसा होता; हम तो पी लेते पर आशियाने का क्या होता। राजेंद्र त्यागी ने कहा नफरतों को मेरे दोस्त दिल से हटा; दु:ख को मैं तेरे तू मेरे दु:ख को बंटा। संत भगीरथ सिंह ने कहा- नफरतों की आग को दिल से बुझाने आ गया हूं। डा. प्रमोद शर्मा प्रेम ने कहा- सारी नफरत जहाँ से हटा दीजिये; कोई रूठे अगर फिर मना लीजिए। अशोक सविता ने कहा- भावनाओं को लहूलुहान करना पड़ता है। मनोज कुमार मानव ने कहा – लाया पुत्र विशेष था जाकर बसा विदेश; घर पर सेवा कर रहा नालायक अवशेष। बेगराज यादव ने कहा- मेरे अपने अपने से नहीं लगते; मिलते हैं होली लेकिन दिल से नहीं मिलते। जयपाल रसिक ने कहा- कौन कहता है चार दिन चांदनी फिर अंधेरी रात है। मैं मर कर भी मेरी जान तुझे चाहूंगा। गमगीन साबिर ने कहा- पहले नफरत की दीवार गिराई जाए फिर होली और ईद मनाई जाए। रंग बिरंगी बहुरंगी सतरंगी छटा सजाई है। यह कौन है तेरा जिसने सुंदर तस्वीर बनाई है।

गोष्ठी में कर्मवीर सिंह, रविंद्र काकरण आदि ने भी रचनाएं प्रस्तुत कर वाहवाही लूटी। बालक अंश प्रताप ने शिव तांडव सुनाकर सभी का अशीर्वाद प्राप्त किया। अशोक कुमार अग्रवाल ने सभी कवियों की रचनाओं पर समीक्षा की। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्याम प्रकाश तिवारी ने सभी कवियों के प्रति अपना आभार प्रकट किया। साथ ही सभी कवियों के काव्य पर अपना विचार प्रकट कर संबोधित किया। अंत में मुख्य अतिथि पंकज भारद्वाज, कार्यक्रम अध्यक्ष श्याम प्रकाश तिवारी व संचालन कर रहे जितेंद्र कक्कड़ को शाल और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता बने पीएम मोदी, बाइडन, जॉनसन को भी पछाड़ा

दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता बने पीएम मोदी, बाइडन, जॉनसन को भी पछाड़ा

नई दिल्ली (एजेंसी)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर से दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता चुने गए हैं। ग्लोबल लीडर अप्रूवल ट्रैकर मॉर्निंग कंसल्ट की ओर से जारी की गई नेताओं की सूची में पीएम मोदी को 77 फीसदी अप्रूवल रेटिंग मिली है। इस रेटिंग के साथ वह पहले स्थान पर हैं। मॉर्निंग कंसल्टेंट की ओर से डेटा जारी करने के साथ कहा गया कि, 13 देशो में सबसे ज्यादा अप्रूवल रेटिंग पीएम मोदी की है, जो दिखाता है कि वह कितने लोकप्रिय नेता हैं।

इस सूची में पीएम मोदी के बाद दूसरे स्थान पर मेक्सिको के मैनुअल लोपेज हैं, जिन्हें 63 प्रतिशत रेटिंग मिली है। वहीं इटली के मारिया द्राघी 54 फीसदी रेटिंग के बाद सूची में तीसरे स्थान पर आते हैं। जापान के फुमियो किशिदा को 42 प्रतिशत रेटिंग मिली है। इसमें एक बात और खास है कि पीएम मोदी की डिसअप्रूवल रेटिंग भी सबसे कम 17 प्रतिशत है। संस्था के मुताबिक, पीएम मोदी 2020 से 2022 तक के अधिकांश महीनों में सबसे लोकप्रिय नेता बने रहे।

पीएम मोदी ने इस सूची में अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन, ब्रिटेन के पीएम बोरिस जॉनसन और कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो को भी पीछे छोड़ दिया है। सूची में जो बाइडन को 42 प्रतिशत, ट्रूडो को 41 प्रतिशत रेटिंग मिली है। वहीं जॉनसन इस सूची में सबसे निचले पायदान पर हैं। उन्हें 33 प्रतिशत रेटिंग मिली है।

खुदा के यहां इन चार लोगों की नहीं होगी बख़्शीश: मुफ्ती रियाज क़ासमी


बिजनौर। अफजलगढ़ नगर में बस स्टैंड पर स्थित अबु बकर मस्जिद में शब ए बराअत की रात में मुफ्ती रियाज क़ासमी ने नमाजियों को उन चार लोगों के बारे में बताया, जिनकी शब ए बराअत को खुदा के यहां बख़्शीश नहीं होगी।

शुक्रवार को शब ए बराअत के मौके पर इशा की नमाज पढ़ने के बाद मुफ्ती रियाज साहब क़ासमी ने बयान करते हुए लोगों से कहा कि इस रात में उन चार लोगों की खुदा के यहां बख़्शीश नहीं होगी जो शराब पीकर लोगों सहित अपने परिवार के साथ मारपीट करते हुए और शराब पीने के आदी बन चुके हैं और जो लोग एक दूसरे की बुराई करने से बाज नहीं आते है और एक दूसरे को नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ते हो और जो लोग अपने मां बाप की इज्जत नहीं करते है और अपने मां बाप की ना फरमानी कर उनकी बातों को नहीं सुनते हैं और आखिरी उन लोगों की जो रिश्तेदारों में लड़ाई कराकर दूरी बनाने की कोशिश करते हैं उन लोगों की खुदा के यहां शब ए बराअत की रात में बख़्शीश नहीं होगी। इस मौके पर उन्होंने मुस्लिम समाज के लोगों से कहा कि अपने अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दो लेकिन दीनी तालीम पहले हासिल करानी चाहिए क्योंकि जब बच्चा अच्छा आदमी होगा तो वह अच्छा अधिकारी भी होगा अच्छा इंजीनियर भी होगा दीनी तालीम का इंतिज़ाम पहले किया जाये उसके साथ साथ दुनयावी तालीम जितना ज्यादा हो अपने बच्चों को दिलायें और अच्छे मां बाप बनकर अच्छी शिक्षा दिलाकर अपना फर्ज निभाने का काम करें। शबे बराअत ये समझें के अल्लाह की तरफ से बंदों को बख्शने का एक बहाना है और ये रमज़ान की तैयारी है ताके हम अभी से रमज़ान के लिए तैयार हो जाये। आखिर में पूरे मुल्क के अमनो अमान के लिये दुआ कराई गई। इस मौके पर पुलिस बल की तरफ़ से की गई तैयारी और इंतिज़ाम क़ाबिल ए तारीफ़ रहा और पूरे प्रदेश में दोनों त्योहारों को अमन शांति से गुज़र जाने पर पुलिस प्रशासन की सराहना करते हुए हिन्दुस्तान की गंगा जमुना तहज़ीब की जमकर सराहना की।

नगर कल्याण समिति ने बताया महिला दिवस का सार

बिजनौर। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर नगर कल्याण समिति की इकाई राष्ट्र सेवा समिति द्वारा एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता विद्यालय की उप प्रधानाचार्या श्रीमती रेखा ने की। कार्यक्रम का संचालन समिति की अध्यक्ष श्रीमती राजुल त्यागी ने किया।

कार्यक्रम की संयोजिका श्रीमती छवि कौशल ने, नारी शक्ति महान है; गीत प्रस्तुत कर के कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। उसके उपरान्त वक्ताओं ने नारी सशक्तिकरण पर विभिन्न प्रकार के सुविचार प्रस्तुत किये। डॉ. मंजुला कुमार ने महिला दिवस मनाए जाने के विषय में विस्तार से बताया। श्रीमती मंजू गुप्ता ने बताया कि घर परिवार में रहकर भी एक महिला समाज की  नींव मजबूत कर सकती है। रश्मि गुप्ता ने बताया कि अब महिलाओं को भी शिक्षा रूपी पंख लग चुके हैं। डा. रंजना राजपूत ने महिलाओं की शैक्षिक स्थिति में आए सुधार के विषय में बताया। रचना खन्ना ने बताया कि महिला के पूर्ण विकास में सबसे महत्वपूर्ण रोल महिला की माँ का ही होता है। मनुश्री अशोक निर्दोष ने महिला सशक्तिकरण पर कविता का सुन्दर का पाठ किया।

इस अवसर पर समिति की ओर से समाज सेविका श्रीमती ऊषा चौधरी, पुष्पा, अनीता चौधरी, नीरा अग्रवाल, डॉ.नीता सिंह, डा. मीना बक्शी व राजीव अग्रवाल उपस्थित रहे।

सेवा के संकल्प संग जुटे हुए हैं समाजसेवी विवेक सेन

बिजनौर। संकल्प सेवा समिति की स्थापना वर्ष 2018 में धामपुर के फूलबाग कॉलोनी निवासी समाजसेवी विवेक सेन ने की थी। उनके साथ इस संस्था में जावेद अंसारी, शिवम कुमार, विपुल चौधरी, वैभव चौहान, अर्जुन सिंह, सुखवीर सिंह सहित कुछ अन्य युवा हैं। इन सभी के माध्यम से करीब 70 अन्य युवा अप्रत्यक्ष रूप से इस संस्था से जुड़े हैं। विवेक बताते हैं कि वैसे तो उनकी संस्था का प्रमुख कार्य समाजसेवा करना है लेकिन उन्होंने फेसबुक पर एक पेज बनाया हुआ है। इस पेज से करीब 24 हजार लोग जुड़े हैं। जब किसी को खून की आवश्यकता होती है वे फेसबुक पर मैसेज लिख देते हैं और संस्था से जुड़ा कोई भी युवा खून देने पहुंच जाता है। विवेक बताते हैं कि उनकी संस्था से बिजनौर के अलावा मुरादाबाद में भी कई युवा जड़े हैं।

उनके साथ जुड़े युवा खाद्य सामग्री एकत्रित करने के लिए खुद ही पैसा एकत्रित करते हैं, लेकिन इस सब नेक कार्य में विवेक की मां उर्मिला देवी इस  बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। विवेक बताते हैं कि मां ने लॉक डाउन में जगह-जगह फंसे गरीबों और अन्य लोगों के लिए सुबह-शाम खाना तैयार करना शुरू कर दिया। करीब ढाई सौ लोगों का खाना हर रोज तैयार करने के बाद पैकेटों में भर कर बांटा गया। उर्मिला देवी ने बताया कि गरीबों की भूख के सामने उनकी ये मेहनत कुछ नहीं है। उनका हाथ बंटाने के लिए पड़ोस की ही महिला धर्मवती देवी के अलावा दीपक चौबे, सरिता आदि भी मदद करते हैं।

घुमंतू परिवारों के बने सहारा- कोरोना कॉल में सभी को भारी परेशानियों से जूझना पड़ा, लेकिन गरीबों को इसकी मार अधिक झेलनी पड़ी। धामपुर और आसपास के क्षेत्रों में बगदाद अंसार रोड और स्योहारा रोड पर कई ऐसे घुमंतू परिवारों को खाने तक के लाले पड़ गए थे। एक घुमंतू ने बताया कि जब वह एक-एक दाने के लिए तरस रहे थे, तब समाजसेवी विवेक सेन ने परिवार के बच्चों और अन्य लोगों को खाने के लिए भोजन के पैकेट बांटे।

धर्म नहीं जरूरी- संस्था में हिंदू और मुसलमान युवा जुड़े हैं। इनके लिए धर्म कभी आड़े नहीं आता। राम को खून की जरूरत पड़ती है तो रहीम तैयार रहता है और रहीम को खून की जरूरत होती है तो राम खून देने के लिए तैयार रहता है। संस्था सदस्यों का ये सांप्रदायिक सौहार्द भी क्षेत्र में चर्चा का विषय है।

आएदिन फेसबुक पर मदद के मैसेज आने और उनकी जरूरतों को पूरा करने का ये काम संकल्प सेवा समिति के सदस्य और पदाधिकारी कर रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय बेटी दिवस पर भी इस एनजीओ के सदस्य ने नहटौर की बिटिया अदीबा को खून दान किया।

किसी कार्य से बिजनौर गए भीम आर्मी जिला उपाध्यक्ष विवेक सेन ने लौटते समय रास्ते में देखा कि एक युवक पीछे बैठी वृद्धा को हाथ से पकड़ कर दूसरे हाथ से बाइक चला रहा है। ऐसा दृश्य देखकर विवेक सेन ने सहानुभूतिपूर्वक उनकी बाइक रुकवा कर पूरे मामले की जानकारी की, तो पता चला बाइक चला रहा युवक महिला का पुत्र है तथा वृद्ध महिला मुरादाबाद से दवाई लेकर लौट रही थी। रास्ते में तबीयत बिगड़ने पर कमजोरी की अवस्था में वह बाइक पर बैठने में भी लाचार थी। यह वाकया सुनकर विवेक सेन का दिल पसीज गया तथा उन्होंने अपनी आन-बान और शान नीला गमछा सड़क पर बिछा दिया तथा उस पर वृद्ध महिला को लेटा दिया। कुछ देर आराम करने के बाद जब महिला की स्थिति में सुधार हुआ, तो महिला को उन्होंने अपनी गाड़ी से अपने दोस्त सनी सिंह जाटव के द्वारा घर तक पहुंचा दिया। विवेक सेन की इस दरियादिली व कुशल व्यवहार पर वृद्ध महिला के परिजनों ने उनकी जमकर सराहना की।

वहीं स्योहारा थाना क्षेत्र के ग्राम महमूदपुर सानी में दामाद ने पत्नी के ससुराल न जाने पर सास-ससुर को चाकू गोद कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया था। बीच-बचाव में आए अपने साढू फहीमुद्दीन पर भी चाकू से कई वार कर उसे भी गंभीर रूप से घायल कर दिया था। परिजनों ने फहीमुद्दीन को घायल हालत में नहटौर तिराहा स्थित प्रयास हास्पिटल में भर्ती कराया था। फहीमुद्दीन को भर्ती कराने के बाद लगभग सभी परिजन सास, ससुर को सुपुर्देखाक के दौरान अपने घर लौट गए थे। अस्पताल में तीमारदारी में अस्पताल स्टाफ के अलावा चंद लोग ही मौजूद थे। देर रात करीब आठ बजे फहीमुद्दीन को उपचार के दौरान खून की जरूरत पड़ी, तो चिकित्सक ने मौजूद लोगों से तत्काल एबी प्लस ब्लड का इंतजाम करने को कहा। रात में जब कहीं से भी खून नहीं मिला, तो किसी परिचित ने विवेक सेन को फोन कर हास्पिटल में तत्काल खून की जरूरत की जानकारी दी। विवेक  सेन का ब्लड ग्रुप भी एबी प्लस है। विवेक गांव में आयोजित उस समय एक बैठक में व्यस्त थे। जैसे ही विवेक को इस बात की जानकारी हुई, तो वह बैठक को बीच में ही छोड़कर तत्काल प्रयास हास्पिटल पहुंचे तथा फहीमुद्दीन को खून देकर उसकी जान बचाई। देर रात फहीमुद्दीन के परिजनों के वापस लौटने पर जब उन्हें हिंदु युवक द्वारा खून देने की जानकारी हुई, तो उन्होंने विवेक सेन की मुक्त कंठ से सराहना की। विवेक सेन के इस दरियादिली की जानकारी मिलने पर देर रात तक घायल फहीमुद्दीन की मदद करने को विवेक सेन के समर्थक अस्पताल में ही मौजूद रहे।

इसी तरह एक बार स्योहारा मार्ग स्थित ग्राम हसनपुर पालकी में चिंगारी से कूड़ी में लगी आग तेज हवा के चलते कुछ ही समय में आसपास स्थित खेतों तक पहुंच गई। ग्रामीण जब तक कुछ समझ आग बुझाने का कोशिश करते आग ने कई घरों को भी अपनी चपेट में ले लिया। सूचना मिलने पर जिला पंचायत सदस्य पद के प्रत्याशी विवेक सेन अपने समर्थकों सहित मौके पर पहुंच गए। विवेक के साथ आए युवा अपने हाथों में बाल्टी व अन्य उपकरण लेकर आग बुझाने में जुट गए। काफी देर बाद फायर बिग्रेड की गाड़ी भी मौके पर पहुंच गई। बाद में कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका।

चंद्रशेखर आजाद और उनका फरारी जीवन

शहादत के 91वें साल (27 फरवरी) पर विशेष

शहादत के 91वें साल (27 फरवरी) पर विशेष

चंद्रशेखर आजाद और उनका फरारी जीवन

गुलाम भारत को आजाद कराने में अपने प्राणों का बलिदान देने वाले शहीद-ए-आजम चंद्रशेखर आजाद की शूरता-वीरता के किस्से आम हैं। काकोरी कांड के बाद आजाद; कभी हरिशंकर ब्रह्मचारी बने, कभी पंडित जी और कभी अंग्रेज सरकार के अफसर के ड्राइवर भी। क्रांतिकारी दल को मजबूत करने के लिए उन्होंने गाजीपुर के एक मठ के बीमार महंत से दीक्षा इसलिए ली कि उनके निधन के बाद मठ की संपत्ति क्रांति के काम आएगी। तीन-चार महीने महंत के मठ में समय बिताने के बाद जब संपत्ति प्राप्त करने के कोई आसार नजर नहीं आए तो वह पुनः क्रांति दल में सक्रिय हो गए। काकोरी कांड में फरारी के बाद आजाद के यह किस्से इतिहास में ही दफन होकर रह गए। आम लोगों के जेहन में उनके फरारी जीवन की जिंदगी घर नहीं कर पाई। आज उनकी शहादत का 91वां वर्ष है। आइए! आजाद के जीवन से जुड़े इन किस्सों से जुड़ा जाए..

सातार नदी का तट और हरिशंकर ब्रह्मचारी

काकोरी कांड में कई साथी तो अंग्रेज हुकूमत के हत्थे चढ़ गए लेकिन आजाद ‘आजाद’ ही रहे। हिंदुस्तानी विभीषण और अंग्रेजी सेना की खुफिया आजाद को पकड़ने के लिए पूरे देश में सक्रिय रही लेकिन आजाद पकड़े नहीं जा सके। फरार होने के बाद आजाद का अगला ठिकाना झांसी बना। खतरा देख आजाद ढिमरापुर में सातार नदी के तट पर कुटी बनाकर रहने लगे। यहां उन्होंने अपना नाम रखा ‘हरिशंकर ब्रह्मचारी’। इस बीच उनका झांसी आना-जाना भी बना रहा। ब्रह्मचारी के रूप में आजाद प्रवचन देते थे और बच्चों को पढ़ाते-लिखाते भी थे। एक दिन झांसी से साइकिल से लौटते समय इनाम के लालच में‌ दो सिपाहियों ने रोक कर उनसे थाने चलने को कहा।
सिपाहियों ने कहा-‘ क्यों तू आजाद है?’ आजाद ने उन्हें समझाते हुए कहा- आजाद जो है सो तो है। हम बाबा लोग होते ही आजाद हैं। हमें क्या बंधन? आजाद ने हर तरह से बचने की कोशिश की। सिपाहियों को हनुमान जी का डर भी दिखाया लेकिन वह मानने को तैयार नहीं हुए। सिपाहियों के साथ थोड़ी दूर चलकर आजाद बिगड़े और कहा कि तुम्हारे दरोगा से बड़े हमारे हनुमान जी हैं। हम तो हनुमान जी का ही हुक्म मानेंगे। हमें हनुमान जी का चोला चढ़ाना है। कहते हुए आजाद भाग खड़े हुए। बलिष्ठ शरीर देखकर सिपाही पकड़ने के लिए उनके पीछे भागने की हिम्मत नहीं जुटा पाए।

अचूक निशाने की अग्निपरीक्षा!

फरारी के दौरान झांसी के पास खनियाधाना के तत्कालीन नरेश खड़क सिंह जूदेव के यहां आजाद का आना-जाना हो गया। आजाद अपने साथी मास्टर रूद्र नारायण, सदाशिव मलकापुरकर और भगवानदास माहौर के साथ जूदेव के यहां अतिथि बनकर गए। वह राजा साहब के छोटे भाई बने हुए थे और उनके दरबार के अन्य लोगों के लिए ‘पंडित जी’। राजा साहब की कोठी के बगीचे में दरबार जमा हुआ था। बात निशानेबाजी की शुरू हुई। आजाद की बातें दरबार में उपस्थित ठाकुरों को पसंद नहीं आई। राजा के दरबारियों ने निशानेबाजी की परीक्षा लेनी चाही। बातों-बातों में आजाद के हाथों में बंदूक भी थमा दी गई। उनके साथी मास्टर रूद्र नारायण को आजाद की परीक्षा लेना उचित नहीं लगा। उन्हें डर था कि कहीं भेद खुल न जाए। उन्होंने बहाने से आजाद से बंदूक ले ली। भगवानदास माहौर ने बाल हठ करते हुए निशाना साधने की जिद की। बंदूक भगवानदास के हाथ में आ गई । एक पेड़ की सूखी टहनी पर सूखा अनार खोसा हुआ था। आजाद ने उन्हें अचूक निशानेबाजी की बारीक बातें बताई। भगवानदास माहौर के एक निशाने में सूखी टहनी पर खोसा हुआ अनार उड़ गया। इसके बाद माहौल सामान्य हुआ और आजाद अपने साथियों के साथ लौट आए।

बनारसी पितांबर और रेशमी कुर्ता-साफा

आजाद और उनके साथियों का क्रांतिकारी दल शुरुआती दौर में आर्थिक संकटों से गुजर रहा था। इसी बीच बनारस में क्रांति दल के साथियों को पता चला कि गाजीपुर में एक मठ के महंत बीमारी की अवस्था के चलते ऐसे लड़के की तलाश में थे, जिसको सन्यासी बनाकर मठ जिम्मेदारी सौंप दें। क्रांतिकारी दल की आर्थिक दिक्कतों को दूर करने के लिए आजाद ने अपने साथियों का वह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया, जिसमें उन्हें महंत का शिष्य बनना था। साथी लोग लेकर उन्हें गाजीपुर के मठ में पहुंचे। यहां आजाद का नाम चंद्रशेखर तिवारी बताया गया। ‘आजाद’ उपनाम की चर्चा ही नहीं की गई। पंडित लड़का पाकर महंत जी काफी खुश हुए और अगले ही दिन मठ में आजाद को दीक्षा देकर अपना शिष्य बना लिया। दीक्षा के पहले सिर मुंड़ाकर उन्हें रेशमी साफा पहनाया गया। शरीर पर कीमती बनारसी पीतांबर और रेशमी कुर्ता हल्के भगवा रंग का धारण कराया गया। माथे पर शुद्ध चंदन-केसर का लेप भी। इस सबमें मठ के हजार रुपए तक खर्च हुए होने का अनुमान भी क्रांतिकारी दल के सदस्यों ने लगाया था। आजाद मठ में करीब 4 महीने रहे। इस बीच महंत पूरी तरह स्वस्थ हो गए। आजाद को जब यह महसूस हुआ कि उनका क्रांतिकारी दल का संपत्ति प्राप्ति का सपना यहां पूरा नहीं होगा तो आजाद एक दिन चुपके से वहां से खिसक लिए।

मजदूर जीवन

छात्र जीवन में आजाद का पढ़ाई-लिखाई से ज्यादा मन युद्ध कौशल सीखने, तलवार आदि चलाने में लगता था। इसके बाद भी उन्हें तहसील में नौकरी मिल गई थी लेकिन आजाद ‘आजाद’ थे। उन्हें अंग्रेजों की नौकरी पसंद कैसे आती? एक दिन वह एक मोती बेचने वाले के साथ मुंबई चले गए। कुछ मजदूरों की सहायता से उन्हें जहाजों को रंगने वाले रंगसाज का काम भी मिल गया। मजदूरी से मिले पैसों से वह अपना जीवन चलाते थे। मजदूरों की मदद से लेटने भर की जगह भी एक कोठरी में मिली लेकिन उस घुटन भरे माहौल में आजाद का मन नहीं लगा। कभी-कभी तो वह रात भर सिनेमा हाल में बैठे रहते। नींद लगने पर ही अपने बिस्तर पर आते। मुंबई का यंत्रवत जीवन आजाद को रास नहीं आया लेकिन मजदूर जीवन का अनुभव लेकर एक दिन बनारस जाने वाली ट्रेन में बिना टिकट बैठ गए। यहां उन्नाव के शिव विनायक मिश्र से उनकी भेंट हुई। उनकी मदद से संस्कृत पाठशाला में उन्हें प्रवेश मिल गया। 1921 के असहयोग आंदोलन में संस्कृत कॉलेज बनारस पर धरना देते हुए ही वह पहली बार गिरफ्तार हुए थे और 15 बेंतों की सजा हुई थी। यहीं से बालक चंद्रशेखर तिवारी चंद्र शेखर आजाद बना और आजीवन आजाद ही रहा।

जब अंग्रेज सिपाही को पटक-पटक कर मारा

चंद्रशेखर आजाद बनारस रेलवे स्टेशन पर रामकृष्ण खत्री और बनवारी लाल (जो काकोरी केस में इकबाली मुलजिम बने और 4 वर्ष की सजा मिली थी) के साथ प्लेटफार्म पर टहल रहे थे। कुछ अंग्रेज सिपाही भी प्लेटफार्म पर थे। एक अंग्रेज सिपाही ने प्लेटफार्म पर जा रही हिंदुस्तानी नौजवान बहन के मुंह पर सिगरेट का धुआं फेंका। आजाद को अपनी हिंदुस्तानी बहन के साथ इस तरह की अभद्रता बर्दाश्त नहीं हुई और तुरंत अंग्रेज सिपाही पर झपट पड़े। लात, घूंसा थप्पड़ मारकर अंग्रेज सिपाही को गिरा दिया। अंग्रेज सिपाही इतना डर गया कि अपने दोनों हाथ ऊपर करके मार खाता रहा और कहता रहा-‘आई एम सॉरी, रियली आई एम वेरी सॉरी’। उसके अन्य साथी तो भाग ही खड़े हुए। आजाद ने तब अपने साथियों से कहा भी था कि इस साले अंग्रेज को सबक सिखाना जरूरी था ताकि आगे किसी हिंदुस्तानी बहन-बेटी के साथ छेड़खानी न कर सके।

ब्रह्मचारी का ‘ब्रम्हचर्य’ तोड़ने की वह कोशिशें

चंद्र शेखर आजाद ने देश को आजाद कराने की खातिर शादी न करने का वृत ले रखा था। आजीवन ब्रम्हचर्य भी उनका दृढ़ संकल्प था। उनके जीवन से जुड़े यह दो किस्से बड़े महत्वपूर्ण हैं। फरारी जीवन में ढिमरापुर में हरिशंकर ब्रह्मचारी के नाम से सातार नदी के किनारे रहते समय गांव की एक बाला उनके पीछे पड़ गई। किसी भी तरह उसके प्रभाव में न आने पर उस बाला ने अश्रु सरिता से मोहित-प्रभावित करने की भी कोशिश की लेकिन आजाद तो आजाद थे। गांव की बाला उनके पीछे लगाने में गांव के ही एक चतुर नंबरदार की साजिश थी। किसी भी तरह आजाद के बाला के प्रभाव में न आने पर वह नंबरदार आजाद का भक्त हो गया। उस नंबरदार ने आजाद को अपना पांचवा भाई मान लिया। उसे अपने सगे भाइयों से ज्यादा आजाद पर विश्वास हो चुका था। यहां तक कि उसने अपनी तिजोरी की चाबी भी आजाद को सौंप दी थी। बंदूकें भी उन्हीं की देखरेख में रहने लगीं। यह किस्सा स्वयं आजाद ने झांसी में अपने साथियों को सुनाया था।
दूसरा किस्सा, आजाद की एक जमींदार मित्र के घर का है। आजाद एक बार अपने धनी जमींदार मित्र के यहां रुके थे। मित्र को अचानक एक दिन के लिए बाहर जाना पड़ा। आजाद ने अन्यत्र रुकने का प्रस्ताव किया लेकिन जमींदार मित्र नहीं माने। आजाद उनके विशाल भवन के ऊपरी खंड में ठहरे थे। रात में कमरे में सो रहे थे। आधी रात के बाद जमींदार की विधवा बहन कमरे में आ गई। उसने कामेच्छा से धीरे से आजाद को जगाया। 24:00 अपने कमरे में विधवा बहन को देखकर आजाद को काटो तो खून नहीं। उन्होंने बहन को समझाया। बताया भी कि सांसारिक बंधन में बंधने का उनके पास अवसर ही नहीं है। विधवा बहन के न समझने पर आजाद बिजली की गति से बाहर निकले और तिमंजिले भवन की दीवार से नीचे कूद गए। कड़ाके की सर्दी वाली वह रात आजाद ने जंगल में एक पेड़ के नीचे गुजारी। कूदने के कारण चोट भी लगी लेकिन अपने ब्रह्मचर्य की रक्षा के लिए उन्होंने कभी कोई समझौता नहीं किया।

आजीवन आजाद रहे आजाद जी को बलिदान दिवस पर शत शत नमन!

∆ गौरव अवस्थी ‘आशीष’
रायबरेली/उन्नाव

विकास और गर्वित ने बढ़ाया जिले का मान

विकास यादव ने उत्तीर्ण की यूजीसी नेट परीक्षा। गर्वित चौधरी ने योग साइंस से पहले ही प्रयास में नेट परीक्षा की पास। दोनों परिवार में खुशी का माहौल



बिजनौर। नूरपुर कस्बे के मोहल्ला इस्लामनगर निवासी रामपाल सिंह यादव के पुत्र विकास यादव ने पहली बार में दिसंबर 2020 एवं जून 2021 यूजीसी की नेट यानी राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा मैनेजमेंट विषय में उत्तीर्ण कर परिवार और समाज का मान बढ़ाया है।

इससे पहले जून 2019 में शिक्षा शास्त्र विषय में पहली बार में ही नेट परीक्षा उत्तीर्ण की थी। विकास यादव वर्तमान में रानी भाग्यवती देवी महिला महाविद्यालय बिजनौर में सहायक प्रोफेसर के पद पर सेवारत हैं। वे अपनी सफलता का श्रेय ईश्वर के अलावा परिजनों को देते हैं। उनकी इस सफलता के लिए महाविद्यालय स्टाफ और प्रबंधतंत्र के अलावा समाज के प्रबुद्धजनों ने बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

गर्वित चौधरी ने योग साइंस से पहले ही प्रयास में नेट परीक्षा की पास


बिजनौर। कहा जाता है कि जीवन के किसी भी क्षेत्र में की गई मेहनत कभी जाया नहीं जाती है। व्यक्ति को मेहनत का फल हमेशा मिलता है। ऐसा ही कर दिखाया है ग्राम मानसापुर निवासी सुरेंद्र सिंह के होनहार पुत्र गर्वित चौधरी ने। गर्वित ने अपनी मेहनत, लगन व निष्ठा के बल पर अपने पहले ही प्रयास में योग साइंस में नेट परीक्षा उत्तीर्ण की है। गर्वित चौधरी की इस सफलता से उसके परिवार में जश्न का माहौल है। उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में यह सफलता हासिल कर ली है। यह सफलता हासिल कर उसने अपने परिवार गांव ही नहीं बल्कि जनपद का भी नाम रौशन किया है। गर्वित ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता पिता व गुरुजनों के साथ साथ अपने मामा बैंक मैनेजर महेंद्र सिंह को देते हुए कहा कि उनकी प्रेरणा से सफलता का मार्ग प्रशस्त हुआ है। गर्वित की इस सफलता को लेकर उसके साथियों, परिचितों व रिश्तेदारों द्वारा लगातार बधाई देने का सिलसिला जारी है।

मेधावी विद्यार्थियों की आर्थिक मदद करेगा हनुमत अलवर दैवीय स्थल ट्रस्ट

बिजनौर। हनुमत अलवर दैवीय स्थल ट्रस्ट हाई स्कूल और इंटरमीडिएट में 95 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को आगे पढ़ाई करने के लिए स्कूल और कॉलेज की फीस जमा कराएगा। मोहल्ला जाटान घेर रामबाग में ट्रस्ट के कार्यालय पर हुई मीटिंग में यह निर्णय लिया गया।

हनुमत अलवर दैवीय स्थल ट्रस्ट की मीटिंग में ट्रस्टी जिम्मी सिंह ने कहा कि मध्यम वर्ग के छात्र छात्राओं के भविष्य को अधिक से अधिक उज्जवल बनाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिस किसी छात्र या छात्रा के हाई स्कूल और इंटरमीडिएट में 95 प्रतिशत से अधिक अंक आते हैं तो उन छात्र-छात्राओं को ट्रस्ट की ओर से आगे पढ़ाई करने के लिए स्कूल और कॉलेज की फीस इत्यादि का खर्च हनुमत अलवर दैवीय स्थल ट्रस्ट की ओर से किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जो भी छात्र इंजीनियरिंग, टेक्निकल कोर्स या आईएएस, आईपीएस, पीसीएस व विभिन्न परीक्षाओं में सम्मिलित होना चाहते हैं और उनके अभिभावकों की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है तो ऐसे छात्रों के आगे बढ़ाने के लिए भी हनुमत अलवर दैवीय स्थल ट्रस्ट की ओर से बच्चों की पढ़ाई का शुल्क वहन किया जाएगा। मुख्य ट्रस्टी अशोक चौधरी ने बताया कि इससे मेधावी छात्रों को आगे बढ़ने के लिए एक नया मार्गदर्शन मिलेगा।

रविदास जयंती पर भव्य शोभायात्रा, अखाड़ा दल ने मोहा सबका मन

बिजनौर। नूरपुर में संत रविदास प्रेमसभा कमेटी के तत्वावधान में मोहल्ला रविदास नगर स्थित रविदास धर्मशाला पर हवन पूजन के उपरांत श्री गुरु ग्रंथ साहिब की हजूरी कीर्तन दरबार सजाया गया। पंथ के विद्वान प्रचारकों ने संत शिरोमणि रविदास जी के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए उनके आदर्शों पर चलने का आव्हान किया। इस दौरान सेवादारों को सम्मानित किया गया।


मंगलवार को पूर्वांह तीन बजे शोभायात्रा का शुभारंभ हुआ। श्री गुरु ग्रंथ साहिब की सवारी की अगुवाई में निकाली शोभायात्रा में संत रविदास, मीराबाई, डॉ. आंबेडकर, भारत माता आदि की झांकियां आकर्षण का केंद्र रही। इसके अलावा पंजाब का बीन बाजा, ढोल और अखाडा दल शामिल रहे। शोभायात्रा के साथ साथ महिलाओं का जत्था भजन कीर्तन गुणगान कर चल रहा था। नगर के सुप्रसिद्ध बैंड बाजों की थाप पर युवा थिरकते चल रहे थे। इस दौरान नगर में मुख्य मार्गों पर शोभायात्रा का जगह स्वागत किया गया। शोभायात्रा के आयोजन में कमेटी के राम सिंह,रिटायर्ड फौजी चेतराम सिंह, मास्टर बाबूराम, सचिव नितिन रवि, विपिन कुमार, कोषाध्यक्ष सुमित कुमार, राहुल कुमार के अलावा डा.गोपाल सिंह, लेखपाल ब्रहम सिंह, सभासद सुशील कुमार पप्पू, भाजपा नेता प्रेमपाल सिंह रवि, विनोद कुमार रवि आदि का योगदान रहा। सुरक्षा की दृष्टि से भारी पुलिस बल मुस्तैद रहा।

धूमधाम से मनाया शिवपाल सिंह यादव का 66 वां जन्मदिन

लखनऊ। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव का 66 वां जन्मदिन शनिवार को नगर कार्यालय इंसाफ नगर में केक काटकर बहुत धूमधाम से  मनाया गया।

इस मौके पर नगर अध्यक्ष जनाब मुर्तजा अली ने उनकी लंबी उम्र के लिए दुआएं की और भारी मतों से जीत की भी सबने दुआएं की। जन्मदिन के मौके पर बच्चों और तमाम लोगों को लड्डू वितरण किया गया।

कार्यक्रम के दौरान नगर और प्रदेश के तमाम पदाधिकारी गण उपस्थित रहे। मुख्य रुप से जिला अध्यक्ष रंजीत यादव,  हरिशंकर यादव,व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष रामबाबू, डीपी यादव, वरिष्ठ उपाध्यक्ष एडवोकेट दरुल हसन, खुर्शीद, शमीम सिद्दीकी, आशीष शर्मा, राणा रियाजुद्दीन, सद्दाम सिद्दीकी, पंकज श्रीवास्तव, मोहम्मद कैफ, नाजिया, मोहम्मद फिरोज, अमन मिश्रा, अभय मिश्रा, देवेंद्र शुक्ला, रमेश कुमार, मोहम्मद इमरान, विवेक सिंह, शाहिद सिद्दीकी, जावेद, राष्ट्रीय सलाहकार खालिद इस्लाम, शेख अफजाल,  बबलू श्रीवास्तव, सिद्दीकी आदि लोगों ने कार्यक्रम में शिरकत की ।

हिंदुस्तान सेवा संस्थान (वाहिद बिरयानी) ने हर्षोल्लास के साथ मनाया गणतंत्र दिवस

हिंदुस्तान सेवा संस्थान (वाहिद बिरयानी) ने हर्षोल्लास के साथ मनाया गणतंत्र दिवस

गरीबों को कंबल वितरण के साथ ही तमाम जरूरतमंदों को कराया भोज

लखनऊ । हिंदुस्तान सेवा संस्थान (वाहिद बिरयानी) ने आशियाना में गणतंत्र दिवस बड़े हर्सोउल्लास के साथ मनाया। मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने झन्डा रोहण किया। झंडारोहण के उपरांत निगहत खान ने देश भक्ति पर तराना पेश किया। इस मौके पर मुरलीधर आहूजा, मौलाना मुश्ताक, मौलाना सूफियान, अदनान, निगहत खान, वामिक़ खान, अब्दुल वहीद, जुबैर अहमद, मुर्तज़ा अली, एमआर नगरामी, एहमन, शह्ज़ादे कलीम, आबिद कुरैशी, वसी अहमद सिद्दीकी, आक़िब कुरैशी, आरिफ मक़ीम, विजय गुप्ता, अवधेश आदि मौजूद थे।


इस मौके पर आबिद अली कुरैशी ने बताया कि हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध आदि सभी धर्मो के लोग इस आयोजन में शामिल हुए। मुरलीधर आहूजा ने कहा कि गणतंत्र दिवस हमारे देश का सबसे बड़ा त्योहार होना चाहिए, बस इसी भावना के साथ गणतन्त्र दिवस हम सब जोर शोर से मनाते हैं।
झंडारोहण का आयोजन वर्तमान में कोरोना महामारी/ लॉकडाउन के कारण सोशल डिस्टेंसिंग और सरकारी गाइडलाइन के अनुसार किया गया। कार्यक्रम में सभी धर्मों के लोगों ने शामिल होकर एकता और अखंडता का संदेश दिया। साथ ही इस राष्ट्रीय पर्व पर मौलाना खालिद रशीद फारंगी महली ने देश की खुशहाली और अमन शांति की दुआ की। इस अवसर पर संस्थान द्वारा गरीबों को कंबल वितरण के साथ ही तमाम जरूरतमंदों को भोज भी कराया गया।

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विजयश्री के लिये जीत का मंत्र दे गए योगी

बिजनौर। जिले की आठों विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करने के लिए उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ बिजनौर पहुंचे। योगी आदित्यनाथ ने जिला अस्पताल का निरीक्षण करने के बाद काकरान वाटिका में एक चुनावी सभा को संबोधित किया। दोपहर करीब तीन बजे वह नजीबाबाद व धामपुर में कार्यकर्ताओं, प्रत्याशियों  से बातचीत करने रवाना हो गए।

इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को बिजनौर जिले में चुनावी दौरे पर पहुंचे। उनका हेलीकॉप्टर पुलिस लाइन में उतरा, जहां से वह निरीक्षण करने के लिए जिला अस्पताल पहुंचे। सीएम ने अस्पताल का निरीक्षण करते हुए ऑक्सीजन प्लांट का भी निरीक्षण किया। कुछ व्यवस्थाओं को लेकर उन्होंने डीएम और प्रशासनिक अधिकारी को दिशा निर्देश दिए। बाद में बिजनौर के काकरान वाटिका में सीएम ने बिजनौर की 8 विधानसभाओं के प्रत्याशियों व कार्यकर्ताओं के साथ बातचीत करके चुनाव में जीत हासिल करने के लिए उन्हें चुनावी मंत्र दिए।

वेक्सीनेशन से किया कोविड को नियंत्रित- बाद में सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रेस वार्ता में बताया कि बिजनौर जिले में कोविड-19 के 898 केस हैं, केवल एक मरीज ही अस्पताल में भर्ती है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा पूरे प्रदेश में कोविड-वैक्सीन लगाकर इस बीमारी को नियंत्रित किया गया है। बिजनौर जिले में लगभग 98 प्रतिशत लोगों को वैक्सीन लग चुकी है। सीएम ने यह भी कहा कि इस बीमारी से अबकी बार मौतों की संख्या बहुत ही कम है। साथ ही इस बीमारी से बचने के लिए मैं बुजुर्गों एवं बीमार लोगों से आग्रह करता हूं कि वह घर से कम निकले साथ ही मास्क लगाकर ही घर से निकले।

चप्पे-चप्पे पर निगरानी करती रही पुलिस- सीएम के कार्यक्रम को लेकर प्रशासन द्वारा कड़ी सुरक्षा व्यवस्था का प्रबंध किया गया। परिंदा भी पर न मार सके,  इसके लिए पुलिस द्वारा चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरे की मदद से निगरानी की जाती रही। सीएम की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस भी अलर्ट मोड पर नजर आई। वहीं निरीक्षण के दौरान डीएम और एसपी सहित जिले के आला अधिकारी मौजूद रहे। पुलिस लाइंस, जिला अस्पताल व काकरान वाटिका में पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं आदि ने उन्हें फूल भेंट किये।

आजादी का अमृत महोत्सव एवं चौरी-चौरा शताब्दी समारोह की थीम पर किया जाएगा: डीएम उमेश मिश्रा

बिजनौर। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने कहा कि उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशों के अनुपालन में 24 जनवरी, 2022 को “उत्तर प्रदेश दिवस” के रूप में मनाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 से प्रतिवर्ष 24 जनवरी को उत्तर प्रदेश राज्य की स्थापना दिवस के रूप में उत्तर प्रदेश दिवस का आयोजन किया जा रहा है। विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी आगामी 24 जनवरी को उत्तर प्रदेश दिवस का आयोजन सभी जिलों में वर्तमान समय में लागू आदर्श आचार संहिता तथा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष उत्तर प्रदेश दिवस का आयोजन आजादी का अमृत महोत्सव एवं चौरी-चौरा शताब्दी समारोह की थीम पर किया जाएगा। इस अवसर पर जिला स्तर पर विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इसके अंतर्गत राष्ट्रीय गीत का गायन, पुलिस बैंड द्वारा रामधुन का वादन आदि भी सम्मिलित होंगे। उन्होंने बताया कि जिले की स्थानीय बोली भाषा में आजादी से जुड़े लोगों के गीतों का गायन आजादी की कथाओं पर आधारित नाटक तथा नृत्य नाटिकाओं तथा जिले की समृद्ध संस्कृति को प्रदर्शित करने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों का जन सहभागिता के आधार पर आयोजन भी किया जाएगा।
उन्होंने निर्देश दिए कि कार्यक्रम स्थल पर जिले के गौरवशाली इतिहास, चौरी-चौरा गोरखपुर की घटना तथा स्वतंत्रता संग्राम में जिले के योगदान, शहीद स्मारकों एवं स्थानों पर आधारित अभिलेख एवं चित्र दृश्यों का आयोजन करना सुनिश्चित करें तथा कार्यक्रम के अंतर्गत जिले की शहीद स्मारकों, पर्यटन स्थलों पर आधारित ऑनलाइन फोटोग्राफी तथा पेंटिंग प्रतियोगिताओं का भी आयोजन कर युवा वर्ग को कार्यक्रम में भागीदार बनाएं। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि कार्यक्रम स्थल पर “एक जनपद एक उत्पाद” के अंतर्गत पारंपरिक विशिष्ट उत्पाद के शिल्पी/ कर्मकारों की कला का प्रदर्शन स्वयं सहायता समूह के माध्यम से तथा यूपी के स्टार्टअप पर आधारित प्रदर्शनियों का आयोजन सुनिश्चित किया जाए।


जिलाधिकारी श्री मिश्रा ने उक्त संबंध में आदेशित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश दिवस के आयोजन के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में कोविड-19 की परिस्थितियों के दृष्टिगत अनिवार्य रूप से कोविड हैल्थ डैस्क मुख्य चिकित्सा अधिकारी के पर्यवेक्षण में स्थापित कराई जाए तथा सोशल डिस्टेंसिंग का भी अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले में उत्तर प्रदेश दिवस कार्यक्रम का आयोजन उसकी मूल मंशा के अनुरूप कराना सुनिश्चित करें और कार्यक्रमों के फोटोग्राफ्स एवं विवरण ईमेल आईडी updivas1@gmail.com पर प्रेषित किया जाना सुनिश्चित करें।

’57 की क्रांति के गुमनाम योद्धा वीर हनुमान सिंह

शौर्य दिवस (18 जनवरी) पर विशेष

57 की क्रांति के गुमनाम योद्धा वीर हनुमान सिंह

पिछले दिनों पत्रकार-इतिहासकार सुधीर सक्सेना की पुस्तक ‘छत्तीसगढ़ में मुक्तिसंग्राम और आदिवासी’ पढ़ते हुए 57 की क्रांति में छत्तीसगढ़ में विद्रोह की ज्वाला भड़काने वाले वीर नारायण सिंह के साथ हनुमान सिंह की वीरगाथा सामने आई। गाथा में इस बात का जिक्र पढ़कर मन और गौरवान्वित हो गया कि अंग्रेजी सेना के शिविर में ही सार्जेंट कैप्टन सिडवेल की तलवार के वार से हत्या करने वाले 5 फीट 4 इंच लंबे बलिष्ठ वीर हनुमान सिंह बैसवारे ( उत्तर प्रदेश के रायबरेली-उन्नाव के विशेष भू-भाग को मिलाकर बना क्षेत्र) के ही रहने वाले थे। पुस्तक में संदर्भ के तौर पर इतिहासकार डॉ राम कुमार बेहार किताब ‘छत्तीसगढ़ का इतिहास’ को भी उद्धृत किया गया।
इतिहास कि इन किताबों में दर्ज संक्षिप्त कथा बताती है कि बैसवारे के इस गुमनाम योद्धा वीर हनुमान सिंह ने छत्तीसगढ़ में महाविद्रोह के समय रायपुर (छत्तीसगढ़ की राजधानी) में आज से 163 साल पहले 18 जनवरी 1858 को अंग्रेजी सेना के कैंप में कैप्टन सिडवेल को तलवार के वार करके मार डाला था। कैप्टन सिडवेल के नेतृत्व में नागपुर से 100 सैनिकों की अंग्रेजी पल्टन को छत्तीसगढ़ में विद्रोह दबाने के लिए रायपुर भेजा गया था। इसी पल्टन‌ में बैसवारे के वीर हनुमान सिंह मैगजीन लश्कर के रूप में शामिल थे। छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वाधीनता संग्राम के महानायक पहाड़ी अंचल सोनाखान के जमींदर वीर नारायण सिंह को 10 दिसंबर 1857 को खुलेआम रायपुर के प्रमुख चौराहे पर तोपों से उड़ा दिया गया। वीर नारायण सिंह को चौराहे पर तोपों से उड़ाकर छत्तीसगढ़ अंचल में महाविद्रोह को दबाने की चेष्टा अंग्रेज हुकूमत ने की थी। अंग्रेजों ने यह मान लिया था कि अब छत्तीसगढ़ अंचल में विद्रोह नहीं होगा लेकिन उन्हें यह अंदाज नहीं था कि क्रांति की ज्वाला उनके अपने सैन्य शिविर में ही धधक रही है। वीर नारायण सिंह की शहादत पर वीर हनुमान सिंह का खून खौल उठा और बदला लेने के लिए ही उन्होंने 18 जनवरी 1858 की रात अपने दो साथियों की मदद से कैप्टन सिडवेल को तलवार से 9 वार करके मौत की नींद सुला दिया था। सिडवेल को मारने के बाद वीर हनुमान सिंह ने सैन्य शिविर में घूम घूम कर बदला लेने का ऐलान किया और भारतीय सिपाहियों को विद्रोह में शामिल होने के लिए खुले रुप में साथ देने के लिए ललकारा लेकिन कोई दूसरा सिपाही उनकी जैसी हिम्मत नहीं जुटा पाया। सिडवेल की हत्या के बाद अंग्रेजी सेना के शिविर में हड़कंप मच गया। अंग्रेजी सेना ने हनुमान सिंह का साथ देने वाले दोनों सिपाहियों को पकड़ लिया लेकिन वीर हनुमान सिंह साथियों का साथ ना मिलने पर छत्तीसगढ़ अंचल के पहाड़ी जंगलों में छिप गए। सिडवेल की हत्या के बाद भी वीर हनुमान सिंह का अंग्रेजों से बदला लेने का जज्बा कम नहीं हुआ। 2 दिन बाद 20 जनवरी 1858 की आधी रात को वीर हनुमान सिंह तलवार लेकर अकेले ही शेर की मांद में शेर के शिकार का जज्बा रखते हुए रायपुर के डिप्टी कमिश्नर लेफ्टिनेंट चार्ल्स इलियट की हत्या के इरादे से उसके बंगले में घुसे और इलियट जिस कमरे में सो रहा था, उसका दरवाजा तोड़ने का प्रयास किया लेकिन दरवाजे के मजबूत होने से प्रयास असफल रहा। इसके बाद अपनी खून की प्यासी तलवार के साथ वीर हनुमान सिंह छत्तीसगढ़ के जंगलों और पहाड़ों में गुम हो गए। उसके बाद उनका कोई भी पता नहीं चला। चार्ल्स इलियट के आदेश पर ही वीर नारायण सिंह को रायपुर के चौराहे पर तोपों से उड़ा दिया गया था। इसीलिए वीर हनुमान सिंह इलियट को भी मार डालना चाहते थे लेकिन उनके मजबूत इरादों पर एलियट के बंगले के मजबूत दरवाजों ने पानी फेर दिया। अंग्रेज हुकूमत ने उनको पकड़ने के लिए हजारों जासूसों और गुप्तचरों का जाल बिछाया। ₹500 का इनाम भी घोषित किया (यह आज के 5‌ लाख रुपए से ज्यादा ही है) लेकिन अंग्रेज सेना वीर हनुमान सिंह को पकड़ने में कभी भी कामयाब नहीं हो सकी। बैसवारे के महानायक राना बेनी माधव बक्श सिंह की तरह ही वीर हनुमान सिंह भी अंग्रेजों के हत्थे नहीं चढ़े। राना बेनी माधव की तरह बाकी का जीवन उन्होंने जंगलों-पहाड़ों में ही गुजार कर जीवन लीला पूरी की। रायपुर के डिप्टी कमिश्नर लेफ्टिनेंट चार्ल्स इलियट के साथ उस रात बंगले में ही सोए हुए लेफ्टिनेंट स्मिथ ने उस रात के भयानक मंजर के बारे में लिखा भी-"यदि उस रात हम लोग जगाए ना गए होते तो लेफ्टिनेंट इलियट और मैं तो सोए सोए ही काट डाले गए होते और बंगले के अंदर अन्य निवासियों का भी यही हाल हुआ होता।"

सिडवेल की हत्या के तुरंत बाद अंग्रेज सेना ने वीर हनुमान सिंह के दो साथ ही सिपाहियों को कैद कर लिया था। डिप्टी कमिश्नर लेफ्टिनेंट चार्ल्स इलियट की अदालत में सुनवाई चली और 2 दिन बाद ही रायपुर के चौराहे पर सरेआम वीर हनुमान सिंह के नेतृत्व में अल्पकालिक विद्रोह में साथ देने वाले उनके 17 साथियों-गाजी खान (हवलदार), अब्दुल हयात, ठाकुर सिंह, पन्नालाल, मातादीन, ठाकुर सिंह, अकबर हुसैन, बुलेहू दुबे, लल्ला सिंह, बदलू, परमानंद, शोभाराम, दुर्गा प्रसाद, नजर मोहम्मद, देवीदीन और जय गोविंद (सभी गोलंदाज) को 22 जनवरी 1957 को खुलेआम फांसी पर चढ़ा कर सजा-ए-मौत दे दी गई। (रायपुर गजेटियर पेज 71)

वीर हनुमान सिंह छत्तीसगढ़ में सन’ 57 की क्रांति के अग्रणी नायकों में गिने-माने जाते हैं। हालांकि महाविद्रोह की चर्चा जब भी चलती है, तब छत्तीसगढ़ अंचल से वीर नारायण सिंह का ही नाम लिया जाता है, जबकि हनुमान सिंह का दुस्साहस और शौर्य वीर नारायण सिंह से ज्यादा बड़ा था। वीर नारायण सिंह ने अंग्रेजी हुकूमत द्वारा अपनी ज़मीदारी छीने जाने के विरोध में विद्रोह किया था लेकिन वीर हनुमान सिंह तो एक साधारण सिपाही थे। उनकी संपत्ति अंग्रेजों ने जब्त नहीं की थी। इतिहास में उन्हें वीर नारायण सिंह से ज्यादा नहीं तो कम भी आंका नहीं जाना चाहिए था लेकिन इतिहास ने वीर हनुमान सिंह के साथ न्याय नहीं किया। इतिहासकार मानते हैं कि अगर अंग्रेजी सेना के भारतीय सिपाहियों ने साथ दिया होता तो वीर हनुमान सिंह की बहादुरी से छत्तीसगढ़ अंचल में एक बार फिर क्रांति की ज्वाला भड़क उठती। अंग्रेजों को छत्तीसगढ़ छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ता। रायबरेली-उन्नाव के विशेष भू-भाग को मिलाकर बना बैसवारा अपने शौर्य और वीरता के लिए जाना जाता है। प्रथम स्वाधीनता संग्राम में राना बेनी माधव सिंह (शंकरपुर-रायबरेली) और राजा राव राम बक्श सिंह (बक्सर-उन्नाव) की शौर्य गाथा यहां जन-जन के मन में बसी है। 1857 के विद्रोह में बेगम हजरत महल का साथ देने वाले राना बेनी माधव बख्श सिंह के किले को अंग्रेजों ने तोपों से उड़ा दिया था। राना बेनी माधव बहराइच होते हुए हिमालय की वादियों में खो गए। अंग्रेज हुकूमत उनका कोई पता नहीं लगा पाई। राजा राव राम बक्स सिंह अंग्रेजों ने बक्सर में पेड़ पर सरेआम फांसी पर लटकाकर विद्रोह को कुचलने की हिमाकत की थी। '57 की क्रांति के इस गुमनाम योद्धा ने छत्तीसगढ़ अंचल में अकेले ही क्रांति की लौ जलाकर अपना और बैसवारे का नाम इतिहास में हमेशा-हमेशा के लिए अमर कर दिया। समय रहते समाज और सरकार की ओर से वीर हनुमान सिंह के इतिहास को ढूंढने का उद्यम किया जाता तो आज वह अपने बैसवारे में ही गुमनाम न होते। होना तो यह चाहिए था कि 18 जनवरी (अंग्रेजी सैन्य अफसर सिडवेल की हत्या की तारीख) को उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ अंचल में शौर्य दिवस के रूप में मनाया जाता। दुर्भाग्यवश अपने इस महान सपूत के बारे में बैसवारे के लोग भी डेढ़ सौ वर्ष से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद अपरिचित ही हैं जबकि जरूरत थी कि वीर हनुमान सिंह की गौरव गाथा का गान राना बेनी माधव सिंह एवं राजा राव राम बक्स सिंह की तरह ही इस अंचल में जन-जन के बीच गाया जाता। आजादी का अमृत महोत्सव चल रहा है। इस अमृत महोत्सव में भी आजादी का यह महानायक विस्मृत ही है। न छत्तीसगढ़ की सरकार ने वीर हनुमान सिंह को वह सम्मान दिया और न उत्तर प्रदेश सरकार ही सम्मान देने के बारे में सोच पाई है। समाज तो सोया हुआ है ही।

बैसवारे के इस गुमनाम योद्धा को शौर्य दिवस (18 जनवरी 1858) पर कोटि-कोटि नमन!!

∆ गौरव अवस्थी
रायबरेली/उन्नाव

मानव अधिकारों की रक्षा के लिएजागरुकता जरूरी

बिजनौर। मोहल्ला चाहशीरी बी 24 मोहम्मद मुस्तकीम के आवास पर विश्व मानवाधिकार परिषद की एक बैठक हुई।
जिला अध्यक्ष विश्व मानवधिकार परिषद नदीम अहमद ने बताया कि मानव अधिकारों की रक्षा के लिए जागरूकता जरूरी है। जब तक लोगों को अपने अधिकारों के बारे में जानकारी नहीं होगी तो वह ना अपने अधिकारों को ले सकते हैं और ना अपनी रक्षा कर सकते हैं। विश्व मानवाधिकार परिषद के कार्यकर्ता मानव अधिकारों की रक्षा के लिए जागरूकता अभियान चलाएंगे।

बैठक में विश्व मानव अधिकार परिषद के नवनियुक्त पदाधिकारी मोहम्मद अफजाल जिला उपाध्यक्ष,
मोहम्मद आसि जिला सचिव, डॉ अनवर अहमद जिला उपाध्यक्ष, राहुल कुमार गौतम सिटी अध्यक्ष को विश्व मानवधिकार परिषद का सर्टिफिकेट और आईडी कार्ड दे कर जनता के हित में काम करने का आह्वान किया गया।
इस अवसर पर मोहम्मद मुस्तकीम शमशेर आलम नाजिम सिद्दीकी मोहम्मद आरिफ आदि पदाधिकारी मौजूद रहे।

नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती से होगी गणतंत्र दिवस समारोह की शुरुआत

अब हर साल 23 जनवरी से शुरू होगा गणतंत्र दिवस, नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती भी समारोह में होगी शामिल

अब हर साल 23 जनवरी से शुरू होगा गणतंत्र दिवस, नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती भी समारोह में होगी शामिल

नई दिल्ली (एजेंसी)। गणतंत्र दिवस समारोह अब 24 जनवरी के बजाए हर साल 23 जनवरी से शुरू होगा। ऐसा सुभाष चंद्र बोस की जयंती को शामिल करने के लिए किया गया है। पहले गणतंत्र दिवस समारोह की शुरुआत 24 जनवरी से होती थी। अब मोदी सरकार ने इसमें बदलाव कर दिया है।  

जानकारी के अनुसार गणतंत्र दिवस का समारोह अब हर साल 23 जनवरी से शुरू होगा। नेताजी सुभाषचंद्र बोस के जन्मदिन को गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल करने के लिए ये बड़ा फैसला लिया गया है। मोदी सरकार ने इससे पहले सुभाष चंद्र बोस की जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत की थी। 

विदित हो कि मोदी सरकार आने के बाद हर साल कई और दिन भी मनाए जाने लगे हैं जो इस प्रकार हैः-

14 अगस्त – विभाजन भयावह स्मृति दिवस।
31 अक्टूबर- एकता दिवस-राष्ट्रीय एकता दिवस (सरदार पटेल की जयंती)।
15 नवंबर – जनजातीय गौरव दिवस (भगवान बिरसा मुंडा का जन्मदिन)।
26 नवंबर – संविधान दिवस।
26 दिसंबर- वीर बाल दिवस (4 साहिबजादों को श्रद्धांजलि)।

कोरोना काल में सराहनीय कार्य करने पर संगीता को मिला बैस्ट प्रेसीडेंट अवार्ड


बिजनौर। कोरोना काल में सराहनीय कार्य करने पर बिजनौर क्लब की पूर्व पदाधिकारी को बेस्ट प्रेसिडेंट का अवार्ड दिया गया। शहर के एक रेस्टोरेंट में आयोजित एक कार्यक्रम में  बिजनौर क्लब की पूर्व प्रेसिडेंट संगीता अग्रवाल को कोरोना का काल  में मास्क, सैनिटाइजर, खाद्य सामग्री वितरण तथा आर्थिक सहायता देने और ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध
कराने के लिए बेस्ट प्रेसिडेंट का सम्मान दिया गया इस अवसर पर वक्ताओं ने उनके द्वारा समय-समय पर किए गए कार्य को सराहा तथा कहा कि वास्तव में ऐसे कार्यों से ही भारतीय सामाजिक ताने-बाने की मजबूती स्पष्ट होती है, आपको बता दे कि संगीता अग्रवाल भाजपा की जिला उपाध्यक्ष पद पर है तथा पूर्व में वह  जिला जिलामहामंत्री भाजपा महिला मोर्चा, पूर्व सभासद, वैश्य महिला संगठन की  जिला अध्यक्ष एव पूर्व प्रेसिडेंट, समर्पण क्लब बिजनौर
एनजीओ प्रकोष्ठ की पूर्व जिला संयोजिका तथा भाजपा में चांदपुर की पूर्व विधानसभा प्रभारी आदि के पद पर रह चुकी हैं। कार्यक्रम का संचालन बिजनौर क्लब की प्रेसीडेंट पूजा ने किया। इस मौके पर क्लब की सचिव नीति सरीन, सीमा, खुशबू, सोनी, राखी, दीप्ति, विशाखा , कनक, अंजना आदि महिलाएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं।

लखनऊ में मनाई गई गुरु गोविंद सिंह जी महाराज जयंती

ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब यहीआ गंज लखनऊ में गुरु गोविंद सिंह जी महाराज मनाई गई जयंती

लखनऊ। गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब यहीआ गंज एक पावन पवित्र स्थान है। यहां पर महान बलिदानी सतगुरु श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी आकर 3 दिन रुके थे एवं नगर के आसपास की साध संगत को एक प्रभु परमात्मा के साथ जुड़कर मानव सेवा में अच्छे कार्य करने का उपदेश दिया। इसके पश्चात सन 1672 ईस्वी में बाल अवस्था में सतगुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज अपनी माता, माता गुजरी जी एवं मामा कृपाल चंद जी के साथ इस पवित्र स्थान पर 2 महीने रुके थे।

इस पवित्र स्थान से श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज का सदैव भावनात्मक संबंध रहा है। श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज ने वर्ष 1686 में पोटा साहिब से हस्तलिखित गुरु ग्रंथ साहिब अपने हस्ताक्षर करके इस स्थान पर भेजे थे। प्राप्त जानकारी के आधार पर इस प्रकार के हस्तलिखित श्री गुरु ग्रंथ साहिब के दर्शन भारत में बहुत दुर्लभ हैं और इसी स्थान पर मौजूद हैं ।

इसके पश्चात वर्ष 1693 ईस्वी में एवम् वर्ष 1701 ईसवी में गुरु गोविंद सिंह जी महाराज के दो हुक्मनामे (हस्तलिखित चिट्ठी) यहां की संगत को भेजे गए थे, जो भाग्यवश इस पवित्र स्थान पर मौजूद एवं सुरक्षित हैं, जिनके दर्शन करके संगत अपने आप को सौभाग्यशाली महसूस करती है ।

ऐसे महान तेजस्वी युगपुरुष 700 वर्ष से बना मुगलों का साम्राज्य समाप्त करने वाले श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज का प्रकाश पर्व मनाने के लिए 9 जनवरी दिन रविवार सुबह 4:00 बजे से ही संगत आने लगी थी। गुरुद्वारा याहिया गंज साहिब में जो कि शीश महल की तरह बहुत शोभनीय दिखाई दे रहा था, उस अति शोभनीय पावन दरबार हाल में सुबह 4:00 बजे से दीवान की आरंभ था। नितनेम की 5 बाणीयों को पढ़कर की गई। उसके उपरांत श्री सुखमणि साहिब का पाठ एवं संगत मुख्य ग्रंथी ज्ञानी परमजीत सिंह जी द्वारा किया गया। उसके उपरांत श्री अखंड पाठ साहिब की संपूर्णता की गई; फिर बंगला साहिब दिल्ली से आए भाई अमनदीप सिंह जी ने आसा की वार का कीर्तन किया, फिर ज्ञानी जगजीत सिंह जाचक जी ने गुरु गोविंद सिंह जी महाराज के बाल्यावस्था एवं उनके सामाजिक संघर्षों के बारे में कथा करके संगत को गुरु महाराज के सिद्धांतों से अवगत कराया। उसके उपरांत याहिया गंज के हजूरी रागी भाई वीर सिंह जी ने कीर्तन किया। लखनऊ की रहने वाली बीवी सिमरन कौर जी ने संगत को कीर्तन द्वारा निहाल किया उसके उपरांत गुरुद्वारा शीश गंज साहिब दिल्ली से आए ज्ञानी अंग्रेज सिंह जी ने संगत को गुरु महाराज के इतिहास से अवगत कराया। अमृतसर से आए भाई गुरकीरत सिंह जी ने संगत को कीर्तन श्रवण कराकर भावविभोर किया। इसके साथ ही जो गुरसिक्खी बड़ा मुकाबला रखा गया था, उसके तहत छोटे-छोटे बच्चे एवं नवयुवक सभी सिख धर्म की परंपरागत वेशभूषा में सज धज कर आए हुए थे, जिन्होंने अपने परंपरागत पोशाक का बहुत अच्छे से प्रदर्शन किया। उनको देखकर पुरातन समय की सीखी की याद आने लगी। सभी संगत के लोग उन बच्चों की परंपरागत पोशाक की सराहना कर रहे थे। गुरुद्वारा अध्यक्ष डॉ गुरमीत सिंह जी ने विजेताओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया। इसके साथ साथ 8 जनवरी शाम को जो प्रश्नोत्तरी जारी की गई थी, उसमें भी सैकड़ों पत्र जवाब लिखकर आए विजेताओं को गुरुद्वारा अध्यक्ष डॉक्टर गुरमीत सिंह, महासचिव सरदार परमजीत सिंह, कोषाध्यक्ष गुलशन जोहर, मनजीत सिंह तलवार, सतनाम सिंह सेठी, एस.पी.सेठी, हरमिंदर सिंह मिंदी सहित सभी सम्मानित महानुभाव ने बच्चों को पुरस्कृत कर उनका उत्साह बढ़ाया।

तत्पश्चात रात्रि के समय गुरु महाराज के प्रकाश के समय ज्ञानी अंग्रेज सिंह जी ने प्रकाश कथा की और भाई वीर सिंह जी ने नाम सिमरन वह जयकारों की गूंज से फूलों की वर्षा करते हुए गुरु महाराज का प्रकाश पर्व मनाया फूलों की वर्षा होते हुए ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे कि फूल गुरुद्वारा साहिब की बालकनी से नहीं मानो सीधे स्वर्ग से देवताओं द्वारा बरसाई जा रहे हो क्यों ना हो क्योंकि संगत में ही देवताओं का निवास रहता है बड़ी ही श्रद्धा भावना प्यार सम्मान सत्कार के साथ गुरुद्वारा यहीआ गंज में गुरु गोविंद सिंह जी का प्रकाश पर्व मनाया गया साथ ही जितने भी मीडिया कर्मी गुरुद्वारा साहिब में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया प्रिंट मीडिया जो कवरेज करने के लिए पहुंचे हुए थे एवम् प्रशासनिक अधिकारियों सहित सभी श्रद्धालु जनों सभी को डॉक्टर अमरजोत सिंह देवेंद्र सिंह गगनदीप सिंह सेठी गगन बग्गा ,जसप्रीत सिंह गुरजीत छाबड़ा सन्नी आनंद द्वारा सभी का स्वागत करते हुए उनको सम्मान भेंट किया सारा दिन गुरु का लंगर अटूट वितरित किया गया।

प्रधानमंत्री ने श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व पर दी बधाई

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर देशवासियों को बधाई दी है।

एक ट्वीट में, प्रधानमंत्री ने कहा;

“श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व पर बधाई। उनका जीवन और संदेश लाखों लोगों को शक्ति देता है। मैं हमेशा इस तथ्य को संजो कर रखूंगा कि हमारी सरकार को उनके 350वें प्रकाश उत्सव को मनाने का अवसर मिला है। उस समय की अपनी पटना यात्रा की कुछ झलकियां साझा कर रहा हूँ। https://t.co/1ANjFXI1UA

Greetings on the Parkash Purab of Sri Guru Gobind Singh Ji. His life and message give strength to millions of people. I will always cherish the fact that our Government got the opportunity to mark his 350th Parkash Utsav. Sharing some glimpses from my visit to Patna at that time. pic.twitter.com/1ANjFXI1UA— Narendra Modi (@narendramodi) January 9, 2022

“ਕਰਤਾਰ ਕੀ ਸੌਗੰਧ ਹੈ, ਨਾਨਕ ਕੀ ਕਸਮ ਹੈ।
ਜਿਤਨੀ ਭੀ ਹੋ ਗੋਬਿੰਦ ਕੀ ਤਾਰੀਫ਼, ਵੁਹ ਕਮ ਹੈ।”

ਸਰਬੰਸਦਾਨੀ, ਭਗਤੀ ਅਤੇ ਸ਼ਕਤੀ ਦੇ ਮੁਜੱਸਮੇ, ਸ਼ਸਤਰ ਅਤੇ ਸ਼ਾਸਤਰ ਦੇ ਧਨੀ, ਦੱਬੇ-ਕੁਚਲੇ ਹੋਏ ਸਮਾਜ ਨੂੰ ਸਸ਼ਕਤ ਬਣਾ ਕੇ ਨਵੀਂ ਪਛਾਣ ਦੇਣ ਵਾਲੇ ਦਸ਼ਮੇਸ਼ ਪਿਤਾ ਸ੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਗੋਬਿੰਦ ਸਿੰਘ ਜੀ ਦੇ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਪੁਰਬ ਦੀਆਂ ਲੱਖ-ਲੱਖ ਵਧਾਈਆਂ pic.twitter.com/knUqzfXaFB— Narendra Modi (@narendramodi) January 9, 2022

₹6 हजार तक बढ़कर मिलेगी रोडवेज कर्मियों को तनख्वाह

लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (रोडवेज) के कर्मचारियों को जनवरी माह के वेतन के साथ फरवरी में 17 प्रतिशत महंगाई भत्ता (डीए) मिलेगा। इसके लिए परिवहन निगम के वित्त नियंत्रक संजय सिंह ने शुक्रवार को आदेश जारी कर दिया है। इससे प्रदेश भर के हजारों रोडवेज कर्मियों को दो से छह हजार रुपए प्रति माह का फायदा मिलने की उम्मीद है।

पहली बार रोडवेज कर्मचारियों को 17 प्रतिशत महंगाई भत्ता जनवरी माह के वेतन के साथ फरवरी में एक मुश्त मिलने जा रहा है। परिवहन निगम के कर्मचारियों को अभी तक सात फीसदी महंगाई भत्ता मिल रहा था। अब दस प्रतिशत और बढ़कर कुल 17 फीसदी महंगाई भत्ता मिलेगा। फिलहाल रोडवेज कर्मचारियों को एक जुलाई 2021 से 17 प्रतिशत महंगाई भत्ता देने की मंजूरी उत्तर प्रदेश शासन से मिली है। इससे प्रदेश भर के हजारों रोडवेज कर्मियों को हर माह सैलरी दो हजार से छह हजार रुपए बढ़कर मिलेगी।

परिवहन निगम के वित्त नियंत्रक संजय सिंह ने जनवरी माह के वेतन के साथ फरवरी में 17 प्रतिशत महंगाई भत्ता नियमित कर्मचारियों को देने का आदेश जारी कर दिया है। परिवहन निगम की तरफ से पेंशन पाने वाले सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी 17 प्रतिशत महंगाई भत्ते का लाभ मिलेगा। दरअसल, 27 दिसंबर, 2021 को सार्वजनिक उद्यम विभाग की अध्यक्षता में गठित अधिकृत कमेटी ने डीए यानी महंगाई भत्ते के पेमेंट को मंजूरी दे दी थी।

रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष चंद्रशेखर पांडे व महामंत्री गिरीश मिश्र ने बताया कि प्रमुख सचिव परिवहन से बीते 14 दिसम्बर 2021 को हुई वार्ता में रोडवेज कर्मचारियों को 17 फीसदी महंगाई भत्ता देने का निर्णय लिया गया था। उसी निर्णय के क्रम में अब आदेश जारी करने के लिए प्रमुख सचिव परिवहन और प्रबंध निदेशक नवदीप रिणवा को धन्यवाद ज्ञापित करते हैं।

विदित हो कि यूपी रोडवेज और दूसरे सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारी संगठन अरसे से महंगाई भत्ते को लेकर लड़ाई लड़ रहे थे। रोडवेज के भी कर्मचारी संगठन महंगाई भत्ते को लेकर लगातार मांग कर रहे थे।

बसों में लोड फैक्टर 70 फीसदी लाने की अपील
उत्तर प्रदेश रोडवेज कर्मचारी संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राकेश कुमार सिंह, महामंत्री रमाकांत सचान और अवध यादव ने इसे कर्मचारियों की जीत बताया है। उन्होंने कर्मचारियों से निगम की आमदनी बढ़ाने के लिए 70 फीसदी यात्री लोड फैक्टर लाने की अपील की है।

इंटरनेशनल नेचुरोपैथी ऑर्गनाइजेशन के जिला अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र सिंह सम्मानित

बिजनौर। जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एसके बबली ने इंटरनेशनल नेचुरोपैथी ऑर्गनाइजेशन के जिला अध्यक्ष डॉक्टर नरेंद्र सिंह को उनके सामाजिक कार्यों के लिए सम्मान स्वरूप गुरु गोविंद सिंह जी का चित्र भेंट किया।

पूर्व अध्यक्ष एसके बबली ने डॉक्टर नरेंद्र सिंह को योग और प्राकृतिक चिकित्सा, एक्यूप्रेशर चिकित्सा, मसाज चिकित्सा, रंग चिकित्सा, जल चिकित्सा, बिना किसी दवाई के चिकित्सा आदि के जरिये समाज की नि:शुल्क सेवा करने के लिए सम्मानित किया। साथ ही उनसे आशा की, कि इसी प्रकार समाज की सेवा करते रहेंगे। इस अवसर पर साथ में बार एसोसिएशन के एडवोकेट भी उपस्थित रहे। विदित हो कि वरिष्ठ अधिवक्ता एसके बबली इंटरनेशनल नेचुरोपैथी ऑर्गनाइजेशन यूनिट बिजनौर के संरक्षक भी हैं।

रालोद शहर अध्यक्ष ने बांटे गरीबों को कंबल

बिजनौर। …कहते हैं कि नर सेवा ही नारायण सेवा। कुछ इसी तर्ज पर राष्ट्रीय लोक दल के शहर अध्यक्ष यादराम सिंह चंदेल चल पड़े हैं। सर्दियों के मौसम को देखते हुए उन्होंने अपने आवास पर गरीबों को कंबल वितरित किए।

कड़ाके की सर्दी ने जनजीवन अस्त व्यस्त कर दिया है। गरीबों, बेसहारा लोगों के लिए एक ओर जहां प्रशासनिक स्तर से विभिन्न स्थानों पर अलाव जलवाने की व्यवस्था की जा रही है। वहीं रैन बसेरों के जरिए उनके विश्राम का भी खासा खयाल रखा जा रहा है।

ऐसे में विभिन्न राजनैतिक दलों व सामाजिक संगठनों का भी कर्तव्य बनता है कि समाज हित में कुछ करें। इसी क्रम में वरिष्ठ समाजसेवी एवं राष्ट्रीय लोक दल के शहर अध्यक्ष यादराम सिंह चंदेल ने अपने आवास पर गरीबों को कंबल वितरित किए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सामाजिक हित के कार्य करने से उन्हें आत्मसंतुष्टि मिलती है। वह कभी भी गरीबों की सेवा करने से पीछे नहीं हटे और न ही हटेंगे। कंबल प्राप्त करने के बाद लाभान्वित लोगों ने उन्हें भरपूर आशीर्वाद दिया।

11 प्रकार की तुलसी नाम सहित 25 दिसम्बर तुलसी पूजन दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ

11 प्रकार की तुलसी नाम सहित 25 दिसम्बर तुलसी पूजन  दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ

|| तुलसी की महिमा ||

तुलसी की महिमा बताते हुए भगवान शिव नारद जी से कहते हैं….

पत्रं पुष्पं फलं मूलं शाखा त्वक् स्कन्धसंज्ञितम्। तुलसी संभवं सर्वं पावनं मृत्तिकादिकम् ।। अर्थात् ‘तुलसी का पत्ता, फूल, फल, मूल, शाखा, छाल, तना और मिट्टी आदि सभी पावन हैं।’

प्रचलित पौराणिक कथा के अनुसार देव और दानवों द्वारा किए गए समुद्र मंथन के समय जो अमृत धरती पर छलका, उसी से “तुलसी” की उत्पत्ति हुई। ब्रह्मदेव ने उसे भगवान विष्णु को सौंपा। लंका में विभीषण के घर तुलसी का पौधा देखकर हनुमान अति हर्षित हुये थे। इसकी महिमा के वर्णन में कहा गया है…

नामायुध अंकित गृह शोभा वरिन न जाई । नव तुलसिका वृन्द तहंदेखि हरषि कपिराई । तुलसी की आराधना करते हुए ग्रंथ लिखते हैं… महाप्रसाद जननी सर्व सौभाग्य वर्धिनी । आधिव्याधि हरिर्नित्यं तुलेसित्व नमोस्तुते ॥ हे तुलसी! आप सम्पूर्ण सौभाग्यों को बढ़ाने वाली हैं, सदा आधि-व्याधि को मिटाती हैं, आपको नमस्कार है। अकाल मृत्यु हरण सर्व व्याधि विनाशनम्॥ तुलसी को अकाल मृत्यु हरण करने वाली और सम्पूर्ण रोगों को दूर करने वाली माना गया है।

रोपनात् पालनान् सेकान् दर्शनात्स्पर्शनान्नृणाम् । तुलसी दह्यते पाप वाढुमतः काय सञ्चितम्॥

तुलसी को लगाने से, पालने से, सींचने से, दर्शन करने से, स्पर्श करने से, मनुष्यों के मन, वचन और काया से संचित पाप जल जाते हैं। वायु पुराण में तुलसी पत्र तोड़ने की कुछ नियम मर्यादाएँ बताते हुए लिखा है –

अस्नात्वा तुलसीं छित्वा यः पूजा कुरुते नरः। सोऽपराधी भवेत् सत्यं तत् सर्वनिष्फलं भवेत्॥

अर्थात् – बिना स्नान किए तुलसी को तोड़कर जो मनुष्य पूजा करता है, वह अपराधी है। उसकी की हुई पूजा निष्फल जाती है, इसमें कोई संशय नहीं ।

तुलसीदल एक उत्कृष्ट रसायन है। यह गर्म और त्रिदोषशामक है। रक्तविकार, ज्वर, वायु, खाँसी एवं कृमि निवारक है तथा हृदय के लिए हितकारी है। सफेद तुलसी के सेवन से त्वचा, मांस और हड्डियों के रोग दूर होते हैं। काली तुलसी के सेवन से सफेद दाग दूर होते हैं। तुलसी की जड़ और पत्ते ज्वर में उपयोगी हैं। वीर्यदोष में इसके बीज उत्तम हैं तुलसी की चाय पीने से ज्वर, आलस्य, सुस्ती तथा वातपित्त विकार दूर होते हैं, भूख बढ़ती है।

गले में तुलसी की माला पहनने से विद्युत की लहरें निकल कर रक्त संचार में रूकावट नहीं आने देतीं। प्रबल विद्युत शक्ति के कारण धारक के चारों ओर चुम्बकीय मंडल विद्यमान रहता है।

तुलसी की माला पहनने से आवाज सुरीली होती है, गले के रोग नहीं होते, मुखड़ा गोरा, गुलाबी रहता है। हृदय पर झूलने वाली तुलसी माला फेफड़े और हृदय के रोगों से बचाती है। इसे धारण करने वाले के स्वभाव में सात्त्विकता का संचार होता है।

तुलसी की माला धारक के व्यक्तित्व को आकर्षक बनाती है। कलाई में तुलसी का गजरा पहनने से नब्ज नहीं छूटती, हाथ सुन्न नहीं होता, भुजाओं का बल बढ़ता है। तुलसी की जड़ें कमर में बाँधने से स्त्रियों को विशेषतः गर्भवती स्त्रियों को लाभ होता है। प्रसव वेदना कम होती है और प्रसूति भी सरलता से हो जाती है। कमर में तुलसी की करधनी पहनने से पक्षाघात नहीं होता, कमर, जिगर, तिल्ली, आमाशय और यौनांग के विकार नहीं होते हैं।

तुलसी का पौधा हमारे लिए धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व का पौधा है। जिस घर में इसका वास होता है; वहां आध्यात्मिक उन्नति के साथ सुख-शांति एवं आर्थिक समृद्धता स्वतः आ जाती है। वातावारण में स्वच्छता एवं शुद्धता, प्रदूषण का शमन, घर परिवार में आरोग्य की जड़ें मज़बूत करने, श्रद्धा तत्व को जीवित करने जैसे अनेकों लाभ इसके हैं। तुलसी के नियमित सेवन से सौभाग्य शालिता के साथ ही सोच में पवित्रता, मन एकाग्रता आती है और क्रोध पर पूर्ण नियंत्रण हो जाता है। आलस्य दूर होकर शरीर में दिन भर फूर्ती बनी रहती है। तुलसी की सूक्ष्म व कारण शक्ति अद्वितीय है। यह आत्मोन्नति का पथ प्रशस्त करती है तथा गुणों की दृष्टि से संजीवनी बूटी है। तुलसी को प्रत्यक्ष देव मानने और मंदिरों एवं घरों में उसे लगाने, पूजा करने के पीछे संभवतः यही कारण है कि यह सर्व दोष निवारक औषधि सर्व सुलभ तथा सर्वोपयोगी है। धार्मिक धारणा है कि तुलसी की सेवापूजा व आराधना से व्यक्ति स्वस्थ एवं सुखी रहता है। अनेक भारतीय हर रोगमें तुलसीदल-ग्रहण करते हुए इसे दैवीय गुणों से युक्त सौ रोगों की एक दवा मानते हैं। गले में तुलसी काष्ठ की माला पहनते हैं।

तुलसी को दैवी गुणों से अभिपूरित मानते हुए इसके विषय में अध्यात्म ग्रंथों में काफ़ी कुछ लिखा गया है। तुलसी औषधियों का खान हैं। इस कारण तुलसी को अथर्ववेद में महा औषधि की संज्ञा दी गई हैं। इसे संस्कृत में हरिप्रिया कहते हैं। इस औषधि की उत्पत्ति से भगवान् विष्णु का मनः संताप दूर हुआ। इसी कारण यह नाम इसे दिया गया है। ऐसा विश्वास है कि तुलसी की जड़ में सभी तीर्थ, मध्य में सभी देवि-देवियाँ और ऊपरी शाखाओं में सभी वेद स्थित हैं।

तुलसी का प्रतिदिन दर्शन करना पाप नाशक समझा जाता है तथा पूजन करना मोक्षदायक। देवपूजा और श्राद्धकर्म में तुलसी आवश्यक है। तुलसी पत्र से पूजा करने से व्रत, यज्ञ, जप, होम, हवन करने का पुण्य प्राप्त होता है। ऐसा कहा जाता है, जिनके मृत शरीर का दहन तुलसी की लकड़ी की अग्नि से क्रिया जाता है, वे मोक्ष को प्राप्त होते हैं, उनका पुनर्जन्म नहीं होता। प्राणी के अंत समय में मृत शैया पर पड़े रोगी को तुलसी दलयुक्त जल सेवन कराये जाने के विधान में तुलसी की शुध्दता ही मानी जाती है और उस व्यक्ति को मोक्ष प्राप्त हो, ऐसा माना जाता है।

स्वच्छता अभियान के जनक व कर्मयोगी थे राष्ट्र संत गाडगे महाराज

लखनऊ। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कनौजिया समाज की तरफ से स्वच्छता अभियान के जनक व कर्मयोगी राष्ट्रसंत गाडगे महाराज का परिनिर्वाण दिवस मनाया गया। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता व समाजवादी व्यापार सभा के प्रदेश सचिव सोनू कनौजिया व मोनू कनौजिया द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में कांशीराम बहुजन मूल निवासी पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सांसद सावित्री बाई फुले बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुईं। वहीं, विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों की ओर से संत गाडगे की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित किए गए।

इस मौके पर सावित्री बाई फुले ने संत गाडगे की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए राष्ट्र हित में किए गए उनके कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि संविधान निर्माता बाबासाहेब अंबेडकर और संत गाडगे बाबा ने कंधे से कंधा मिलाकर समाज के उत्थान के लिए लगातार काम किया। बाबा साहेब भीम राव आंबेडकर व संत गाडगे की विचारधारा को अगर साथ लेकर नहीं चला गया तो संविधान पर बड़ा खतरा होगा।

आपको बता दें कि संत गाडगे ने महाराष्ट्र राज्य में अनेक धर्मशालाएं, चिकित्सालाएं, गौशालाएं और छात्रावासों का निर्माण कराया। यह सब कुछ उन्होंने भीख मांग-मांग कर बनवाया लेकिन अपने लिए एक कुटिया तक नहीं बनवाई। उन्होंने धर्मशालाओं के बरामदे या आसपास के वृक्ष के नीचे ही अपनी सारी जिंदगी बिता दी। उन्होंने अपनी सारी जिंदगी परिधान व पोशाक से ज्यादा शिक्षा को तवज्जो दी। उनका कथन था कि चाहे एक रोटी कम खाओ लेकिन अपने बच्चों को जरूर पढ़ाओ। स्वच्छता एवं शिक्षा के प्रतीक संत शिरोमणी संत गाडगे बाबा जी के परिनिर्वाण दिवस पर नमन।

कार्यक्रम में चाचा किशन कनौजिया, विक्रम कनौजिया, शंकर कनौजिया, सुमित कनौजिया, संजीव कनौजिया, कैलाश मौर्य, औसान कनौजिया, बबलू, अखिलेश रावत, पप्पू कनौजिया, संत लाल बौध, कैलाश नाथ मौर्य, रवि गौतम, किशन रावत, महेश पासी, सुनील बंगाली व महेश साजन मौजूद रहे।

किसी से कम नहीं हैं परिषदीय विद्यालय: विकास किशोर

लखनऊ। खण्ड शिक्षा अधिकारी के संयोजन में ब्लॉक संसाधन केंद्र पर ब्लॉक स्तरीय ग्राम प्रधान विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष प्रधानाध्यकों की संगोष्ठी एवं उन्मुखीकरण समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ विधायक प्रतिनिधि विकास किशोर ब्लाक ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि प्रधान संघ अध्यक्ष प्रतिनिधि अखिलेश सिंह अंजू की उपस्थिति में दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विकास किशोर ने बताया कि आज हमारे परिषदीय विद्यालय किसी से कम नहीं हैं। प्रधान और शिक्षक प्रबंध समिति के सहयोग से अब हमारे सरकारी विद्यालयों का कायाकल्प हुआ है। प्रदेश सरकार अभिभावकों के खाते में यूनिफार्म के लिए सीधे खाते में ग्यारह सौ रूपए दे रही है। एडी बेसिक लखनऊ पीएन सिंह ने शिक्षा की गुणवत्ता; किस प्रकार और बेहतर करने के विषय पर विस्तार से चर्चा की। खंड शिक्षा अधिकारी संतोष कुमार मिश्र ने बताया कि प्रधान और शिक्षकों के बेहतर समन्वय से विद्यालयों की स्तिथि बेहतर हो गई है। साथ ही ग्रामीण अपने बच्चों को परिषदीय विद्यालयों में एडमिशन करवा रहे हैं। कार्यक्रम में पूर्व माध्यमिक विद्यालय गढ़ी संजर खा की छात्रा आयुषि ने देश भक्ति का गीत गाकर उपस्थित जन को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। मुजासा विद्यालय की छात्राओं ने मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया। इस अवसर पर एडी बेसिक पीएन सिंह, बीइओ मुख्यालय राजेश सिंह, महामंत्री नवीन यादव, पूर्व प्रधान जितेंद्र शुक्ल, एआरपी सत्य प्रकाश पांडेय, शिक्षक संघ के अध्यक्ष अवधेश कुमार, मंत्री फहीम बेग, विमला चंद्रा, मंजू चौधरी, एआरपी संजय मौर्या सहित बड़ी संख्या में प्रधान विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष और विद्यालयों के प्रधानाध्यापक उपस्थित रहे।

जालौन की चेतना शर्मा राजनीतिक कद बढ़ा

लखनऊ। जनपद जालौन के माधौगढ कस्बे में जन्मी एवं विभिन्न प्रांतों में सामाजिक गतिविधियों में किरदार निभाने वाली श्रीमती चेतना शर्मा को उनके सामाजिक व सांगठनिक योगदान को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा सक्रिय सदस्यता प्रदान कराते हुए प्रदेश कार्यालय पर शामिल किया गया।

इस मौके पर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं वर्तमान में ज्वाइनिंग कमेटी के अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी, प्रदेश उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह, एमएलसी गण सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए ।
ज्वाइनिंग कमेटी के अध्यक्ष श्री बाजपेयी ने बताया कि श्रीमती चेतना का पार्टी की गतिविधियों में कई वर्षों से सराहनीय योगदान रहा है। वर्ष 2014 एवं 2019 के लोकसभा चुनावों में महिलाओं के साथ सहभागिता कर पार्टी हित में उन्होंने उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश में व्यापक प्रचार प्रसार किया है एवं अब निश्चित ही सक्रिय सदस्य के तौर पर वह जनपद जालौन, बुंदेलखंड सहित प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को मजबूत करेगी।


उल्लेखनीय है कि छत्रपति साहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर से जैव सूचना विज्ञान में परास्नातक करने के उपरांत उन्होंने भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान इलाहाबाद में शैक्षिक योगदान दिया है । 2007 से 2014 तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के कार्यक्रमों में सक्रिय रहते हुए दिल्ली एवं उत्तराखंड में कार्य किया । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सेविका समिति की सदस्य के तौर पर भूमिका निभाते हुए विद्या भारती के संगठन मंत्रियों के साथ महाकौशल प्रांत एवं प्रयागराज परिक्षेत्र में शैक्षणिक संस्थानों के उत्थान एवं भारतीय शिक्षा संस्कृति के प्रसार हेतु योगदान किया है।
श्रीमती चेतना शर्मा का जन्म माधौगढ के उदैनिया परिवार में हुआ है। आपके बाबा स्वर्गीय पंडित शारदा प्रसाद उदैनिया गांधी महाविद्यालय में प्रोफेसर रहे एवं पिता स्वर्गीय डा. शशि कुमार उदैनिया माधौगढ व विधूना में चिकित्सक रहे। श्रीमती चेतना शर्मा के पति राजेश कुमार शर्मा भारतीय सिविल सेवा 2011 बैच के रेलवे अधिकारी हैं एवं वर्तमान में मंडल रेल प्रबंधक कार्मिक प्रयागराज के पद पर पदस्थ हैं। श्री राजेश शर्मा रामपुरा कस्बे में जन्मे हैं एवं श्री आनंद प्रकाश दीवौलिया सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी वाणिज्य कर, उरई के पुत्र हैं। वह 2010 में उत्तर प्रदेश व बुंदेलखंड से राजस्थान राज्य प्रशासन में आर ए एस के पद पर चयनित होकर जनपद जालौन को गौरवान्वित कर चुके हैं एवं उपमहाप्रबंधक पश्चिम मध्य रेल सहित राज्य एवं केन्द्र के तेजतर्रार अधिकारियों में गिने जाते हैं ।
श्रीमती चेतना शर्मा द्वारा अनुभूति मानव सेवा एवं अन्य संगठनों के माध्यम से महिलाओं एवं बच्चियों को चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में बढावा देने के साथ आदिवासी बच्चों के हित में प्रशंसनीय कार्य किया गया है। साथ ही जनपद की समस्याओं का विशेषकर बंजर क्षेत्र पर ऊर्जा व कृषि एवं परिवहन संबंधी अध्ययन करते हुए प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय स्तर पर कई शीर्ष मंचो तक लाकर क्षेत्र के शैक्षणिक एवं तकनीकी विकास हेतु वह निरंतर प्रयासरत रही हैं ।
भारतीय जनता पार्टी द्वारा प्रदेश कार्यालय पर जनपद जालौन से सक्रिय तौर पर श्रीमती चेतना शर्मा को मिली जिम्मेदारी निश्चित ही पार्टी को मजबूत करेगी एवं क्षेत्र के विकास में सहायक सिद्ध होगी। इस अवसर पर जनपद से भारतीय जनता पार्टी के विभिन्न पदाधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उन्हें बधाई दी व क्षेत्र के विकास हेतु उनकी सक्रिय सदस्यता पर पार्टी के निर्णय का स्वागत किया। श्रीमती चेतना शर्मा के द्वारा प्रदेश कार्यालय पर मीडिया से बात करते अपने गृह जनपद जालौन के सभी कार्यकर्ताओं में विश्वास व्यक्त करते हुए उनका सहयोग व आशीर्वाद साथ लेते हुए क्षेत्र के विकास व पार्टी को मजबूत करने का संकल्प लिया एवं प्रदेश अध्यक्ष, सहित सभी वरिष्ठ नेताओं का आशीर्वाद लेते हुए आभार प्रकट किया।

समाजवादी युवजन सभा कार्यकारिणी का विस्तार

लखनऊ। समाजवादी पार्टी जिला कार्यालय 6 लाजपत राय कैसरबाग भवन लखनऊ पर समाजवादी पार्टी लखनऊ जिला अध्यक्ष जय सिंह जयंत की उपस्थिति में युवजन सभा जिला अध्यक्ष अखिलेश सक्सेना द्वारा शहजाद अहमद खान को जिला उपाध्यक्ष युवजन सभा, शिवाकांत यादव को जिला सचिव युवजन सभा मनोनीत किया गया!

इस दौरान अभिराज यादव जिला उपाध्यक्ष युवजन सभा, मनीष यादव जिला महासचिव, गुरविंदर यादव, रमेश वर्मा, छात्र नेता केकेसी, विनय यादव “मानु” समेत दर्जनों नेता एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

बेटियां स्वावलंबी होने के साथ ही सीखेंगी आत्मरक्षा का हुनर

लखनऊ। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय मलिहाबाद में तीन दिवसीय गाइड शिविर का आयोजन सोमवार को किया गया। 13 दिसंबर से 15 दिसंबर तक आयोजित किए जाने वाले शिविर का शुभारंभ खंड शिक्षा अधिकारी मलिहाबाद संतोष मिश्रा द्वारा किया गया।

मुख्य अतिथि संतोष मिश्रा ने बालिकाओं द्वारा लगाए गए शिविर का निरीक्षण किया। उनसे गाइड के संबंध में सवाल पूछे बालिकाओं द्वारा गाइड शिविर में बनाए गए पकवान भी देखे और चखे गए। शिविर के प्रथम दिवस के अंत में शिक्षा अधिकारी मलिहाबाद ने बालिकाओं से गाइड शिविर के बारे में विस्तार से चर्चा की तथा उनका उत्साहवर्धन किया। बालिकाओं द्वारा प्रेरणा गीत पिरामिड मार्च पास्ट के कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए जो अत्यधिक सराहनीय थे।

विद्यालय की वार्डन नीलिमा सिंह ने बताया कि इस तीन दिवसीय शिविर से बालिकाओ को काफी लाभ होगा। लड़कियां स्वावलंबी होने के साथ ही आत्मरक्षा के बारे में जानकारी हासिल कर सकेंगी। इस अवसर पर
वार्डन नीलिमा सिंह के अलावा गुंजन सक्सैना, पुष्पांजलि दुबे, सुमि श्रीवास्तव, सुनीता मौर्या, नसरीन जमाल तथा मिथिलेश उपस्थित रहे।

सिक्ख समाज ने किया सभासद राजीव जोशी को सम्मानित


नूरपुर/बिजनौर। नगर की मुरादाबाद रोड स्थित खालसा कालोनी में गुरुद्वारा स्थल के जीर्णोद्वार का कार्य पूर्ण होने के उपलक्ष्य में विशेष सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर मुख्य रुप से उपस्थित वार्ड के सभासद राजीव जोशी को गुरु की बख्शीश सरोंपा भेंट कर सम्मानित किया गया। इसके अलावा गुरुघर के जीर्णोद्वार में सेवादारों को भी सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह के आयोजन में अमरीक सिंह कापसे, सरदार ईश्वर सिंह कापसे, रेलवे से रिटायर्ड सरदार हरदत्त सिंह, सरदार संसार सिंह,सरदार जरनैल सिंह जेंटल, सरदार सुरजीत सिंह, उपकार सिंह, व्यापार मंडल के दीपक वर्मा, चौधरी तेजपाल सिंह, धीरेंद्र चौहान आदि का सराहनीय योगदान रहा।

नूरपुर के उभरते शायर नबील मिकरानी दिल्ली में सम्मानित

नूरपुर (बिजनौर)। राजधानी दिल्ली में आयोजित एक कवि सम्मेलन में नगर के उभरते हुए युवा शायर नबील मिकरानी को टाइम इण्डिया द्वारा शील्ड देकर सम्मानित किया गया। सोमवार को दिल्ली के डी ब्लॉक जनकपुरी इलाके में आयोजित कवि सम्मेलन व स्वागत समारोह में देश विदेश से पहुंचे मशहूर शायरों व कवियों के बीच उन्हें यह सम्मान मिलने से नगर का नाम रौशन हुआ है। उभरते शायर नबील मिकरानी ने ओजस्वी कलामों से खूब वाहवाही बटोरी। उनके कलाम दर्शकों के दिलों पर छा गये। मंगलवार को नगर पहुंचने पर उन्हें बधाई देने वालों का तांता लग गया। बधाई देने वालों में महमूद मिकरानी, वरिष्ठ पत्रकार गुणवंत सिंह राठौर, चौधरी शेर सिंह, सभासद असलम मलिक, व्यापारी नेता तसलीम अहमद,जाहिद अल्वी आदि शामिल रहे।

वरिष्ठ पत्रकार गुणवंत सिंह राठौर की कलम से

ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के जिला महामंत्री बने जितेंद्र सिंह


बिजनौर। ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन उत्तर प्रदेश इकाई जनपद बिजनौर की सोमवार को स्योहारा में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में कर्मठ सदस्य मास्टर जितेंद्र सिंह को सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करके जिला महामंत्री बनाया गया।


एसोसिएशन के मंडल अध्यक्ष नरेश भास्कर, जिला अध्यक्ष/ मंडल प्रभारी डॉ. भानु प्रकाश वर्मा, जिला उपाध्यक्ष डॉ. नरेश पाल सिंह, महेश चंद शर्मा, डॉ. राहुल चौधरी, पुनीत गोयल, डॉक्टर आलम फरीदी, चांदपुर तहसील प्रभारी यशपाल सिंह, धामपुर तहसील प्रभारी इंदर सिंह चौहान, जिला संगठन मंत्री सरदार गुणवंत सिंह राठौर, फिरोज आलम, पवन चौधरी, डॉ. धर्मेंद्र सिंह, धर्मेंद्र भुईयार, देवेंद्र चौधरी, शेर सिंह, ललित जोशी, कमल सिंह, विक्रांत त्यागी, पवन चौधरी आदि पत्रकारों ने मास्टर जितेंद्र सिंह को जिला महामंत्री बनाए जाने पर माला पहना कर बधाई दी। उन्होंने उनसे संगठन के प्रति पूर्व की तरह कर्मठता, सक्रियता व समर्पण भाव से कार्य करने की आशा जताई है।

इस्लाम छोड़कर हिन्दू बने शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी

इस्लाम छोड़कर हिन्दू बने शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी

गाजियाबाद (एजेंसी)।उत्तर प्रदेश के प्रमुख मुस्लिम चेहरों में शामिल रहे शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड वसीम रिजवी इस्लाम धर्म छोड़कर हिन्दू बन गए हैं। गाजियाबाद में यति नरसिंहानंद सरस्वती ने उन्हें सनातन धर्म में शामिल करवाया। इस दाैरान अनुष्ठान भी किया गया। रिजवी ने कहा कि उन्हें इस्लाम से बाहर कर दिया गया है और हर शुक्रवार को उनके सिर पर ईनाम रख दिया जाता है। वसीम रिजवी के सनातन धर्म में आने से राजनीति में हलचल मच गई है। इसे लोग घर वापसी बता रहे हैं।

Wasim Rizvi former chairman of Shia Central Waqf Board will adopt Hinduism today

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जन्मे वसीम रिजवी खुद एक शिया मुस्लिम हैं। वसीम रिजवी 2000 में पुराने लखनऊ के कश्मीरी मोहल्ला वॉर्ड से समाजवादी पार्टी (सपा) के नगरसेवक चुने गए। 2008 में शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के सदस्य बने। 2012 में शिया वक्फ बोर्ड की संपत्तियों में हेरफेर के आरोप में घिरने के बाद सपा ने उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया। उन्होंने कोर्ट में याचिका दायर की और वहां से उन्हें राहत मिल गई। हाल ही में वसीम रिजवी ने एक वीडियो जारी कर कहा था कि उनकी हत्या करने और गर्दन काटने की साजिश रची जा रही है। इस वीडियो संदेश में उन्होंने कहा था, ‘मेरा गुनाह सिर्फ इतना है कि मैंने कुरान की 26 आयतों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, मुसलमान मुझे मारना चाहते हैं और ऐलान किया है कि मुझे किसी कब्रिस्तान में जगह नहीं देंगे, इसलिए मरने के बार मेरा अंतिम संस्कार कर दिया जाए।

यशस्वी व्यक्तित्व के धनी उत्तमचंद इसराणी

5 दिसम्बर/पुण्य-तिथि
यशस्वी व्यक्तित्व के धनी उत्तमचंद इसराणी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक का काम ऐसे समर्पित लोगों के बल पर खड़ा है, जिन्होंने गृहस्थ होते हुए भी अपने जीवन में संघ कार्य को सदा प्राथमिकता दी। ऐसे ही एक यशस्वी अधिवक्ता थे श्री उत्तमचन्द इसराणी। श्री इसराणी का जन्म 10 नवम्बर, 1923 को सिन्ध प्रान्त में सक्खर जिले की लाड़काणा तहसील में स्थित गाँव ‘मियाँ जो गोठ’ (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था। बालपन में ही वे संघ के स्वयंसेवक बन गये थे।

उन दिनों सिन्ध में मुस्लिम गतिविधियाँ जोरों पर थीं। पाकिस्तान जिन्दाबाद के नारे लगाते हुए मजहबी गुंडे रात भर हिन्दू बस्तियों में घूमते थे। ऐसे में हिन्दू समाज का विश्वास केवल संघ पर ही था। शाखा पर सैकड़ों स्वयंसेवक आते थे। शायद ही कोई हिन्दू युवक ऐसा हो, जो उन दिनों शाखा न गया हो। …पर इसके बाद भी देश का विभाजन हो गया। कांग्रेसी नेताओं की सत्ता लिप्सा ने सिन्ध, पंजाब और बंगाल के करोड़ों हिन्दुओं को अपना घर, खेत, कारोबार और वह मिट्टी छोड़ने पर मजबूर कर दिया, जिसमें वे खेल कर बड़े हुए थे। लाखों हिन्दुओं को अपनी प्राणाहुति भी देनी पड़ी।

श्री इसराणी अपने परिवार सहित मध्य प्रदेश के भोपाल में आकर बस गये। भोपाल में उन्होंने अपना परिवार चलाने के लिए वकालत प्रारम्भ कर दी। इसी के साथ वे संघ कार्य में भी सक्रिय हो गये। बहुत वर्षों तक सिन्धी कालोनी वाला उनका मकान ही संघ का प्रान्तीय कार्यालय बना रहा। इस प्रकार उत्तमचन्द जी और भोपाल का संघ कार्य परस्पर एकरूप हो गयेे। प्रारम्भ में उन्हें संघ के भोपाल विभाग कार्यवाह का दायित्व दिया गया। इसके बाद प्रान्त कार्यवाह और फिर प्रान्त संघचालक की जिम्मेदारी उन्हें दी गयी। जब मध्य भारत, महाकौशल और छत्तीसगढ़ प्रान्तों को मिलाकर एक क्षेत्र की रचना की गयी, तो उन्हें क्षेत्र संघचालक का काम दिया गया।

1975 में जब देश में आपातकाल लगा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया, तो इसराणी जी पूरे समय जेल में रहे। वह अत्यन्त कठिन समय था। वकालत बन्द होने से घर की आय रुक गयी, फिर भी एक स्थितप्रज्ञ सन्त की भाँति उन्होंने धैर्य रखा और जेल में बन्द सभी साथियों को भी साहसपूर्वक इस परिस्थिति का सामना करने का सम्बल प्रदान किया। इसराणी जी को पूर्ण विश्वास था कि सत्य की जय होगी और यह स्थिति बदलेगी, चूँकि संघ ने कभी कोई गलत काम नहीं किया। 1977 में आपातकाल की समाप्ति और प्रतिबन्ध समाप्ति के बाद वे फिर संघ कार्य में सक्रिय हो गये। जब उनका स्वास्थ्य खराब रहने लगा, तो उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से आग्रह कर दायित्व से मुक्ति ले ली। इसके बाद भी ‘अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाते जो सम्भव हुआ, काम करते रहे।

एक बार जबलपुर प्रवास में उन्हें भीषण हृदयाघात हुआ। उसके बाद उन्हें भोपाल लाकर अस्पताल में भर्ती कराया गया; पर इसके बाद उनकी स्थिति में सुधार नहीं हो सका और 5 दिसम्बर, 2007 को उनका शरीरान्त हुआ। माननीय सुदर्शन जी ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा, ‘‘उत्तमचन्द जी ने राष्ट्र के हित में सर्वांग यशस्वी जीवन कैसे बिताया जा सकता है, इसका अनुकरणीय उदाहरण हमारे सम्मुख रखा है। यशस्वी गृहस्थ, यशस्वी अधिवक्ता, यशस्वी सामाजिक कार्यकर्ता, यशस्वी स्वयंसेवक, यशस्वी कार्यवाह और यशस्वी संघचालक जैसी भूमिकाओं को विभिन्न स्तरों पर निभाते हुए दैनन्दिन शाखा जाने के अपने आग्रह में उन्होंने कभी कमी नहीं आने दी।’’

आन बान व शान के साथ हुई तिरंगा दौड़

बिजनौर। स्वाधीनता के अमृत महोत्सव के अंतर्गत बिजनौर में तिरंगा दौड़ आयोजित की गई। तिरंगा दौड़ में 6 वर्ष के कृष्णा व 7 वर्ष की काव्या मुख्य आकर्षण रहे। 1000 से अधिक शहर वासियों ने दौड़ में प्रतिभाग किया।


स्वाधीनता के अमृत महोत्सव के अंतर्गत आरबीआईटी एवं क्रीड़ा भारती द्वारा संयुक्त रुप से बिजनौर शहर में तिरंगा दौड़ का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में 6 वर्ष से 70 वर्ष के धावकों द्वारा प्रतिभाग किया गया। तिरंगा दौड़ नेहरू स्टेडियम से प्रारंभ होकर नुमाइश ग्राउंड, निरीक्षण भवन, विकास भवन, रोडवेज, पोस्ट ऑफिस चौराहा, सिविल लाइन, महाराणा प्रताप चौक, जजी चौक होते हुए नेहरू स्टेडियम पर समाप्त हुई। तिरंगा दौड़ का शुभारंभ मुख्य विकास अधिकारी केपी सिंह, आरबीआईटी के प्रबंध निदेशक सनी देशवाल, जिला क्रीड़ा अधिकारी जय वीर सिंह व क्रीडा भारती के अध्यक्ष योगेंद्र पाल सिंह द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।


डॉ. राघव मेहरा व पंकज कुमार विश्नोई द्वारा देश भक्ति के गण गीत कराए गए। तिरंगा दौड़ का मुख्य आकर्षण ग्राम जमालपुर के 6 वर्षीय कृष्णा व 7 वर्षीय काव्या रहीं। इस दौरान भारत माता की जय व वंदे मातरम के नारे लगातार हवाओं में गूंजते रहे। तिरंगा दौड़ की शुरुआत पंडित विनोद गोस्वामी द्वारा वेद मंत्र के उच्चारण व शंख ध्वनि जे साथ की गई।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्य विकास अधिकारी केपी सिंह ने स्वाधीनता आंदोलन के महानायकों के बारे में बताते हुए कहा कि 1947 में प्राप्त स्वाधीनता हमारे पूर्वजों का बलिदान है। इसे हमें समाज में आपसी सौहार्द्र कायम करते हुए देश व समाज के उत्थान हेतु कार्य करने की आवश्यकता है। युवा इसमें एक बहुत बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार रहे।


क्रीड़ा भारती के जिला अध्यक्ष योगेंद्र पाल सिंह ने तिरंगा दौड़ के आयोजन के संबंध में बताते हुए कहा कि 1947 में देश को स्वतंत्रता यूं ही नहीं मिली; स्वतंत्रता की प्राप्ति के लिए लाखों युवाओं ने अपनी कुर्बानियां दी हैं। इन क्रांतिकारियों में न जाने कितने ऐसे क्रांतिकारी हैं, जिनके बारे में किताबों में नहीं पढ़ाया जाता है और न ही बताया जाता है। ऐसे सभी जाने अनजाने क्रांतिकारियों को नमन करने एवं उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए तिरंगा दौड़ का आयोजन शहर में किया गया है। देश को शक्तिशाली बनाने एवं विश्व गुरु बनाने हेतु युवाओं की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। युवाओं को देश की प्रगति एवं सुरक्षा के लिए अथक प्रयास करने होंगे।

आरबीआईटी के प्रबंध निदेशक सनी देशवाल ने कहा कि देशभक्ति से ओतप्रोत युवाओं की फिटनेस हेतु क्रीड़ा भारती जब भी सहयोग का अनुरोध करेगी, उनकी संस्था सहयोग हेतु तत्पर रहेगी तथा ऐसे आयोजनों में अग्रणी भूमिका निभाएगी। आरबीआईटी द्वारा 400 प्रतिभागियों को नि:शुल्क टी शर्ट व 50 प्रतिभागियों को रानी लक्ष्मीबाई, सरदार भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, सुभाष चंद्र बोस, महाराणा प्रताप, वीर शिवाजी, महात्मा गांधी, अशफाक उल्ला खान, वीर सावरकरआदि महापुरुषों के चित्र देकर सम्मानित किया गया।


दौड़ को सफल बनाने में क्रीड़ा भारती के जैनेंद्र सिंह, देशराज सिंह, विनय कुमार, अरविंद अहलावत, सुबोध कुमार, रोबिन चौधरी, डॉक्टर विकास कुमार, दीपक कुमार, राकेश शर्मा, करण सिंह आदि का सहयोग रहा।

आजादी का अमृत महोत्सव: नूरपुर में तिरंगा दौड़ 12 को


नूरपुर/बिजनौर। आजादी का अमृत महोत्सव के तहत आगामी 12 दिसंबर को नगर में तिरंगा दौड़ का आयोजन किया जाएगा। यह निर्णय गुरुवार को आर आर पब्लिक स्कूल में हुई बैठक में लिया गया।
प्रधानाचार्य प्रणय मनु गुप्ता ने बताया कि भारत सरकार द्वारा स्वतंत्रता की 75 वीं वर्षगांठ को आजादी के अमृत महोत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। इसी क्रम में स्कूल प्रबंधन द्वारा युवाओं एवं गणमान्य नागरिकों तक स्वतंत्रता की महत्ता, एकता व देश प्रेम का संदेश देने को तिरंगा दौड़ कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि दौड़ ब्लॉक मुख्यालय से सुबह 7 बजे प्रारंभ होकर नगर के प्रमुख चांदपुर तिराहा, पंजाब नेशनल बैंक, रोडवेज बस अड्डा व शिव मंदिर चौराहे से होते हुए स्योहारा रोड पर आर आर पब्लिक स्कूल पर सम्पन्न होगी। दौड़ में विजेताओं एवं प्रतिभागियों को सम्मानित किया जाएगा।

बैठक में क्रीड़ा भारती अध्यक्ष योगेंद्र पाल सिंह, टीकम सिंह, संजीव डबास, नवीन कुमार, राजेश कुमार, अतुल चौधरी, शेखर चौधरी, पंडित त्रिलोक शर्मा, अनिल कुमार, वीरेंद्र, चंचल कटारिया, नरेंद्र सिंह, नीरज त्यागी तथा अनुराग शर्मा आदि मौजूद रहे।

CMO बिजनौर को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मान

बिजनौर। अंतरराष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा दिवस के कार्यक्रम में योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के लिए उत्कृष्ट कार्य करने एवं सहयोग करने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी बिजनौर को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
योगी अनंत योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष योगेश कुमार इंटरनेशनल नेचुरोपैथी आर्गेनाइजेशन के जिला अध्यक्ष डॉक्टर नरेंद्र सिंह, उपाध्यक्ष डॉ. लीना तोमर, उपाध्यक्ष ओपी शर्मा, सचिव सोमदत्त शर्मा, संरक्षक पंडित विनोद गोस्वामी मेरठ से पधारे माया राम एक्यूप्रेशर स्पेशलिस्ट ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी बिजनौर डॉक्टर विजय कुमार गोयल को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य पर उत्कृष्ट कार्य करने के लिए संगठन का सहयोग करने के लिए उन्हें सम्मानित किया गया।

वक्ताओं ने बताया कि संस्था कोरोना वायरस जन जागरण अभियान, स्वच्छता अभियान, नमामि गंगे कार्यक्रम, सफाई अभियान, वृक्षारोपण आदि के साथ जनपद बिजनौर में नि:स्वार्थ भाव से कार्य कर रही है। लोगों को, समाज को बिना दवाई के यज्ञ योग और प्राकृतिक चिकित्सा, एक्यूप्रेशर चिकित्सा, मर्म चिकित्सा, मिट्टी चिकित्सा, जल चिकित्सा, रंग चिकित्सा के माध्यम से बिना दवाई के लोगों को स्वस्थ कर रहे हैं। यह अभियान प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाना है। सभी साधकों का उद्देश्य नि:स्वार्थ भाव से कार्य करना है। लोगों को जागरूक करना है, स्वस्थ रहने के उपाय बताने हैं, घर-घर तक प्राकृतिक चिकित्सा पहुंचाना है। यही सभी संगठन का उद्देश्य है। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने सभी पदाधिकारियों का उत्साहवर्धन किया और भरोसा दिलाया कि वह तन मन धन से सभी के साथ हैं। इस अवसर पर पंडित विनोद गोस्वामी ने भजन प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया। संगठन के सभी लोगों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी का धन्यवाद अदा किया।

सीडीओ ने किया एमईडीपी का विजिट व जीएलटीपी का शुभारंभ

वरिष्ठ पत्रकार गुणवंत सिंह राठौर की कलम से…

नूरपुर/बिजनौर। मुख्य विकास अधिकारी केपी सिंह ने ग्राम कन्हेरी में राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक नावार्ड द्वारा अनुमोदित संस्था शिवशक्ति ग्रामोधोग विकास संस्थान के तत्वाधान में आयोजित अचार व मसाला बनाने की ट्रेनिंग एमईडीपी का शुभारंभ शनिवार को विधिवत रुप से फीता काटकर किया।

इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी द्वारा समूह की महिला कुसुम देवी, निर्मला देवी, मधु शर्मा व प्रथमा सर्व यूपी ग्रामीण बैंक बिशनपुर बिडरा के शाखा प्रबंधक अनिल कुमार को श्रेष्ठ कार्य के लिए शाल ओढाकर सम्मानित किया गया।
विशेष अतिथि विरेश आर नायक डीडीएम (नाबार्ड) ने पंचसूत्रीय नियमों का पालन करने को कहा। Lकार्यक्रम में उपस्थित प्रथमा यूपी ग्रामीण बैंक के आरएम मुकेश गुप्ता द्वारा बैंकों की योजनाओं से अवगत कराते हुए बैंक शाखा से संबंधित सभी ऋण आसानी से उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया। संबोधन उपरांत अधिकारियों ने जागरूक रूलर मार्ट स्योहारा का फीता काटकर शुभारंभ किया। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए शिव शक्ति ग्रामोद्योग के सचिव गौरव कुमार द्वारा सभी अधिकारियों कर्मचारियों व नारीशक्ति को धन्यबाद दिया। कार्यक्रम में समूहों की लगभग 200 महिलाओं ने भाग लिया।राजीव कुमार सिसोदिया, राधेश्याम शर्मा, मोहसीन अहमद, रामलखन सिंह, रोजी कुमार, देवी , दीपा आदि मौजूद रहे।

राजीव देवरा चुने गए दिल्ली बार टैक्स एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष


नूरपुर/बिजनौर। दिल्ली बार टैक्स एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष पद पर गोहावर के राजीव देवरा को चुना गया है।
क्षेत्र के गांव गोहावर निवासी राजीव देवरा सुप्रीम कोर्ट दिल्ली में वकालत करते हैं। वहां हुए दिल्ली बार टैक्स एसोसिएशन 2021 के चुनाव में कोषाध्यक्ष पद पर 32 मतों से विजयी हुए हैं। इससे पहले 2014 के चुनाव में उन्हें निर्विरोध चुना गया था। वे लंबे से एसोसिएशन के सदस्य पद पर भी निर्विरोध चुनते आ रहे हैं। उनके निर्विरोध कोषाध्यक्ष बनने से गांव का नाम रौशन हुआ है। देश की राजधानी दिल्ली में रहकर इस मुकाम पर पहुंचकर गांव को गौरंवित किया है। श्री देवरा गांव में समाजसेवा में भी सदैब आगे रहते हैं। वह मुरादाबाद रोड पर मां कात्यायनी मंदिर के संस्थापक पद पर हैं। हर साल नवरात्र पर हवन यज्ञ का आयोजन करते हैं। उन्होंने दूरभाष पर बताया कि चुनाव में माता प्रसाद पाठक अध्यक्ष, कृष्ण गोपाल बंसल उपाध्यक्ष, जय प्रकाश यादव संयुक्त सचिव, चमन कुमार गुप्ता, विशाल सूद, नरेश कुमार शर्मा, एम के ठाकुर सदस्य चुने गये हैं।

ताजपुर में पंज प्यारों की अगुवाई में निकली भव्य शोभायात्रा

(वरिष्ठ पत्रकार गुणवंत सिंह राठौर की रिपोर्ट)

ताजपुर में पंज प्यारों की अगुवाई मे निकली भव्य शोभायात्रा


नूरपुर/बिजनौर। श्री गुरु नानक देव जी का 552वां प्रकाशोत्सव श्रद्धा पूर्वक मनाया गया।
इस अवसर पर शनिवार को श्री गुरु ग्रंथ साहिब की हजूरी में विशेष कीर्तन दरबार सजाया गया। इस अवसर पर बाहर से आये पंथ के विद्वान रागी भाई रंजीत सिंह, भाई सुरजीत सिंह, भाई निरबैर सिंह, ताजपुर के बाबा दीप सिंह एवं काकी कमलजीत कौर किटटू कीर्तन जत्थे द्वारा मधुर गुरुवाणी कीर्तन से संगत को निहाल किया गया।
कार्यक्रम के दौरान गुरुघर के सेवादारों के अलावा आभा फाउंडेशन की अध्यक्ष आभा सिंह, ब्लाक प्रमुख आकांक्षा चौहान, क्षेत्रीय सपा विधायक हाजी नईम उल हसन, सम्मान युवा चेतना नई सोच के संयोजक नेहरू युवा क्लब सचिव शुभम वालिया व युवा चेतना नई सोच के मीडिया प्रभारी डॉ० जितेंद्र कुमार तोमर, व्यापार मंडल के नगर अध्यक्ष मनोज अग्रवाल, भाजपा के जिला सामाजिक संपर्क प्रमुख विवेक सरोहा एडवोकेट, विरेंद्र शर्मा, योग गुरु प्रकाश चंद्र, डॉ अरुण अग्रवाल, होरी सिंह त्यागी, संजीव वालिया आदि को शाल ओढाकर व प्रतीक चिंह देकर सम्मानित किया गया। नगर कीर्तन का स्वागत चौक बाजार में सर्व समाज सेवा समिति, रविदास सभा द्वारा किया गया। पुराने कुएं पर वर्तमान जिला पंचायत सदस्य इमरान अहमद, भाजपा नेत्री अलीशा हुसैन सिद्दीकी द्वारा जलपान कराया गया। अरदास उपरांत नगर में पंज प्यारों की अगुवाई में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में धार्मिक झांकियां व अखाडा दल मुख्य आकर्षण रहे। शोभायात्रा का कई स्थानों पर पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। समूचे कार्यक्रम के आयोजन में कमेटी के प्रधान सतनाम सिंह पत्रकार, उपाध्यक्ष, सचिव हरभजन सिंह, उपसचिव गुरुदेव सिंह, हरभजन सिंह, जैकी, कोषाध्यक्ष सतवेंद्र सिंह गुजराल, ऑडिटर हरजीत सिंह सेवा सिंह गुरुदेव सिंह आदि का सराहनीय योगदान रहा।

भाजपा पंचायत प्रतिनिधि सम्मेलन


नूरपुर/बिजनौर। भाजपा हाईकमान
निर्देशानुसार शुक्रवार को ब्लॉक के डबाकरा हाल में भाजपा पंचायत प्रकोष्ठ द्वारा पंचायत प्रतिनिधि सम्मेलन का आयोजन किया गया। ब्लाक प्रमुख आकांक्षा चौहान के नेतृत्व में विधानसभा स्तर पर आयोजित सम्मेलन में स्थानीय ब्लॉक एवं बुढ़नपुर ब्लॉक के बीडीसी सदस्य एवं ग्राम प्रधानों एवं जिला पंचायत सदस्यों को आमंत्रित किया गया। सम्मेलन में मुख्य अतिथि एमएलसी बरेली स्नातक जयपाल सिंह व्यस्त, विशिष्ट अतिथि जिलाध्यक्ष और विधानसभा प्रभारी उदयगिरि गोस्वामी ने सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों के प्रचार और अधिक से अधिक वोट बनाने पर जोर दिया। सम्मेलन में जिला पंचायत सदस्य आयुष चौहान, मौहम्मद इमरान, अवनी सिंह, ब्लाक प्रमुख बुढ़नपुर उज्जवल चौहान आदि ने संबोधित किया। सम्मेलन में ग्राम प्रधान पीतम सिंह, दिलशाद अहमद, मंजू देवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य ज्योति रानी, राजू देवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य मोहित त्यागी, क्षेत्र पंचायत सदस्य राहुल, क्षेत्र पंचायत सदस्य राजेश सैनी मौजूद रहे। संचालन सतवीर सिंह जिला मंत्री भाजपा किसान मोर्चा ने किया।

बाल काव्य प्रतियोगिता में देश विदेश के 24 बच्चों ने दिखाई प्रतिभा

गाजियाबाद के शौर्य अभि ने भी दिखाया दमखम

नई दिल्ली। काव्य मंजरी साहित्यिक_मंच (रजि०) द्वारा बाल दिवस पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हुई बाल काव्य प्रतियोगिता में देश-विदेश से 24 बच्चों ने भाग लिया। प्रतियोगिता का उद्देश्य था बच्चों की प्रतिभा को निखारने का, उनके अंदर की योग्यता को सबके सामने लाने का और उनको एक ऐसा मंच देने का, जिससे उनको एक नया अनुभव व पहचान मिले।

कविता पाठ का विषय था “शिक्षाप्रद कविता” जिस पर विभिन्न कविताएं सुनने को मिलीं। अपने उत्साह और आत्मविश्वास का परिचय देते हुए बच्चों ने साबित कर दिया कि वर्तमान पीढ़ी आगे जाकर अपनी एक खास पहचान बनाने में कामयाब होगी।

आयोजक डॉ नीरजा मेहता ने सभी बच्चों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। साथ ही बताया कि *किसी भी प्रतियोगिता में प्रतिभागी की प्रस्तुति खास महत्व रखती है और इस प्रतियोगिता का आकलन हमारे निर्णायकों ने बखूबी किया। प्रबुद्ध निर्णायक प्रहलाद मराठा, सुश्रीइंदु सिंह, सुश्री मनीषा शर्मा ने निष्पक्ष निर्णय दिया और परिणाम इस प्रकार रहा –

पहली श्रेणी का परिणाम

(6 से 8 वर्ष)

प्रथम स्थान – अदिति नागर

द्वितीय स्थान – ध्वनि डुडेजा

तृतीय स्थान- अविका नागर

सराहनीय स्थान

अन्वी बैजल

लायरा डुडेजा

दूसरी श्रेणी का परिणाम –

(9 से 11 वर्ष)

प्रथम स्थान- प्रखर कानूनगो

द्वितीय स्थान – प्रकृति श्रीवास्तव

तृतीय स्थान – शौर्य अभि

सराहनीय स्थान कृतिका कानूनगो शाश्वत श्रीवास्तव

सभी बच्चों को सहभागिता प्रमाण पत्र दिया गया।आयोजन का संचालन डॉ अनीश गर्ग ने मनमोहक अंदाज़ में किया। संयोजिका नेहा शर्मा ‘नेह’, सहयोगिनी पदमा शर्मा ‘आँचल’, मार्गदर्शक डॉ आभा नागर और मंच के सभी रचनाकारों के सहयोग से आयोजन सफल हुआ।

आयोजक डॉ नीरजा मेहता ‘कमलिनी संस्थापिका एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष काव्य मंजरी साहित्यिक मंच (रजि) ने बताया कि अब समाचार, रचनाएँ और फोटो दिए गए प्रारूप के माध्यम से ही भेजना होगा तभी प्रकाशन होगा। प्रारूप के लिए हमारे मेनू सेक्शन पर रचना अपलोड करें का लिंक दिया गया हैं। देखें तथा उसमें ही पोस्ट करें। गौरतलब है कि ‘काव्य मञ्जरी’ चुने हुए रचनाकारों का एक साहित्यिक समूह है जो 29 जनवरी 2016 को स्थापित किया गया था। प्रतियोगिता रविवार, 14 नवंबर 2021 को गूगल मीट पर हुई।

गंज में शिविर लगा कर गृहण कराई भाजपा की सदस्यता

युवा भाजपा नेता प्रिन्स चौधरी का अभियान तेज। झालू मंडल के गंज में लगाया शिविर। लोगों को गृहण कराई भाजपा की सदस्यता।

बिजनौर। सदर विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के प्रबल युवा दावेदार प्रिन्स चौधरी ने सदस्यता अभियान के लिये जनसंपर्क तेज कर दिया है। इसी क्रम में झालू मंडल के अंतर्गत दारा नगर गंज में बूथ संख्या 401 ठाकुरद्वारा मंदिर पर भाजपा सदस्यता शिविर लगाया गया।

युवा भाजपा नेता प्रिन्स चौधरी की अगुवाई में लगाए गए शिविर में 7505 403 403 पर मिस्ड कॉल के माध्यम से लोगों को पार्टी का सदस्य बनाया गया। इसी के साथ सभी का भाजपा परिवार में स्वागत किया। इस दौरान पर साथ में मंडल उपाध्यक्ष कल्याण सैनी (पूर्व प्रधान), युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष पुष्प गुर्जर, मंडल महामंत्री राजू उपाध्याय, मंडल मंत्री दीपक सहित आदिजन उपस्थित रहे। इस अवसर पर मंदिर में प्रभु के दर्शन कर सभी के जीवन में सुख-समृद्धि व कल्याण की मंगल कामना की गई।

गुरु नानक देव के प्रकाशोत्सव पर रैनसबाई का आयोजन


नूरपुर (बिजनौर)। गुरुद्वारा श्री गुरु सिंघ सभा कमेटी द्वारा संगत के सहयोग से श्री गुरु नानक देव महाराज के प्रकाशोत्सव के उपलक्ष्य में सोमवार की शाम को गुरुद्वारा साहिब के लंगर हाल में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की हजूरी में रैनसबाई का आयोजन किया गया । ज्ञानी अरव़ेदर सिंह ने गुरुवाणी कीर्तन का शुभारंभ किया।

इसके उपरांत पंथ के विद्वान रागी बीबी संगत कौर दिल्ली, प्रेम सिंह बंटू,बंगला साहिब आदि प्रचारकों के अलावा जसमीत कौर, सिमरन कौर, सोनम कौर, रणजीत कौर, मंजीत सिंह आदि छोटे छोटे बच्चों ने गुरुवाणी कीर्तन से संगत को निहाल किया। कार्यक्रम का संचालन जनरल सेक्रेटरी देवेंद्र सिंह बेदी ने किया। कार्यक्रम के आयोजन में डा,गुरचरन सिंह, गुरमुख सिंह दीवान, बिरेन्द्र सिंह लोहिया, रणवीर सिंह, जिला गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के मीडिया प्रभारी वरिष्ठ पत्रकार गुणवंत सिंह राठौर सिंह मिक्की और रीनू सिंह, गुरमीत सिंह नीटू, हरपाल सिंह दुकानदार, परवेंद्र सिंह, जोगेन्द्र सिंह, विशाल सिंह, गौरी सिंह, विशाल सिंह, सुरजीत सिंह आदि का सराहनीय योगदान रहा। रैनसबाई में समाज के प्रमुख उद्योगपति सरदार गुलशरण.सिंह दिगवा परिवार की ओर से लंगर की सेवा की गई।

अस्पताल में चढ़ा लड्डू गोपाल के टूटे हाथ पर प्लास्टर

हिंदू धर्म में कहा गया है कि भगवान भाव के भूखे होते हैं। इसकी जीवंत उदाहरण यूपी के आगरा में देखने को मिला है। यहां एक कृष्ण मंदिर में 35 साल से पुजारी लेख सिंह से स्नान कराते समय लड्डू गोपाल का हाथ टूट गया।

इस पर पुजारी बैचेन हो उठे। वो लड्डू गोपाल को टोकरी में बैठाकर भागे-भागे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों से गुहार लगाई कि उनके लड्डू गोपाल का हाथ टूट गया है, जल्दी इलाज किया जाए, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। इस पर पुजारी जोर-जोर से रोन लगे। दीवार पर अपना सिर पटकने लगे। काफी मशक्कत के बाद इसके बाद पर्ची कटवाई गई और लड्डू गोपाल की मरहम पट्टी करवाई गई। इसके बाद ही पुजारी वहां से रवाना हुए।

लखनऊ। आगरा से कन्हैया की भक्ति में डूबने का अजब-गजब मामला सामने आया है। शुक्रवार सुबह लड्डू गोपाल को स्नान कराने के दौरान भगवान की प्रतिमा गिर गई और हाथ टूट गया। इस पर पुजारी इतने दुखी हुए कि फूट-फूटकर रोने लगे। खुद ही प्लास्टर चढ़ाने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हो सके। फिर लड्डू गोपाल को गोद में लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। उनकी जिद देख खुद सीएमएस ने लड्डू गोपाल का पर्चा बनवाकर अपने हाथों से प्लास्टर किया।

पुजारी लेख सिंह ने करीब 25-30 साल पहले शाहगंज के खासपुरा एरिया के पथवारी मंदिर में लड्डू गोपाल को विराजान किया था। पुजारी उनका अपने बालक की तरह ख्याल रखते। उन्होंने बताया कि सुबह 5 बजे स्नान कराते समय लड्डू गोपाल गिर गए और उनका हाथ टूट गया। उन्होंने खुद खपच्ची बांधी और दर्द का मरहम लगाकर 8 बजे तक भगवान को गोद मे बिठाकर इंतजार किया। इसके बाद 8 बजे ओपीडी खुलते ही वे लड्डू गोपाल को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। प्लास्टर करवाने के लिए पर्चा बनवाने गए पुजारी को गार्ड ने भी भगा दिया। रोते बिलखते पुजारी को देख स्टाफ ने प्रमुख अधीक्षक को बताया।

हिंदू संगठन के कुछ पदाधिकारी भी पहुंच गए। श्री कृष्ण निवासी आगरा के नाम से पर्चा बनवाया गया। इसके बाद सीएमएस अशोक कुमार अग्रवाल ने अपने केबिन को ऑपरेशन थिएटर बनाया और पुजारी के सामने लड्डू गोपाल का प्लास्टर किया और अपने हाथों से पुजारी को सौंपा। सीएमएस डॉ. एके अग्रवाल ने बताया कि ऐसा मामला उनके सामने पहली बार आया है। पुजारी ने लड्डू गोपाल का इलाज करने की अपील की थी। उन्होंने देखा तो अष्टधातु की प्रतिमा का हाथ टूट गया था। इतनी छोटी प्रतिमा को उन्होंने लकड़ी की खपच्ची की सपोर्ट से पट्‌टी कर दी।

डॉ. अशोक अग्रवाल ने पुजारी से कहा कि अब लड्डू गोपाल को फिर मंदिर ले जाइए और जो भी विधि-विधान होता हो, वह करिए। पुजारी ने भी कहा कि खंडित मूर्ति को मंदिर में नहीं रखा जा सकता है। अब मंदिर में नई मूर्ति लाई जाएगी और उसकी प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम होगा। यह खबर पूरे ब्रज में चर्चा का विषय बनी हुई है।

अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय जाट का कहना था कि जब यह जानकारी हुई तो संगठन के लोग वहां पहुंचे। पुजारी से वार्ता की और फिर लड्डू गोपाल के हाथ में प्लास्टर के बाद पुजारी को भेज दिया।

पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का सपाइयों ने जन्मदिन मनाया

सपाइयों ने मनाया पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का जन्मदिन। एक दूसरे को मिठाइयां बांटकर खुशियां मनाई तथा उनकी लंबी उम्र की कामना की।

नूरपुर (बिजनौर)। समाजवादी पार्टी के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने मिलकर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का जन्मदिन केक काटकर मनाया।
सोमवार को समाजवादी पार्टी के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मुरादाबाद रोड स्थित सपा नेता सलीम अंसारी के किसान कोल्हू वर्कशॉप स्थित कार्यालय पर एकत्र हुए। सपाइयों ने समाजवादी पार्टी के मुखिया प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं देश के पूर्व रक्षा मंत्री मुलायम सिंह यादव का जन्मदिन केक काटकर मनाया। एक दूसरे को मिठाइयां बांटकर खुशियां मनाई तथा उनकी लंबी उम्र की कामना की।

अखिलेश यादव को फिर से मुख्यमंत्री बनाने का संकल्प- इस अवसर पर सपा नेताओं ने मुलायम सिंह के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके आदर्शों पर चलकर हमें सीख लेनी चाहिए। समाजवाद में हमें ऐसा नेता नहीं मिलेगा। उनके नेतृत्व में प्रदेश का चंहुमुखी विकास हुआ है। उसी नक्शेकदम पर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव चल रहे हैं। संकल्प लिया कि आगामी 2022 के चुनाव में अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाना है। इस अवसर पर युवजन छात्र सभा के जिलाध्यक्ष विशाल यादव, सुहेल अंसारी, सपा के वरिष्ठ नेता पूर्व नगर अध्यक्ष जुल्फकार कुरैशी, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य गांव पीपला जागीर मोहम्मद आसिफ, मोहम्मद वसीम मकरानी, सलीम अंसारी, राहुल सिंह पाल, प्रमोद चौधरी, पूर्व सभासद साजिद कमाल जावेद अंसारी, वकार अहमद अंसारी, इशरत अली अंसारी आदि सपा कार्यकर्ता आदि मौजूद रहे।

खासपुरा में गुरु नानक देव जी के प्रकाशपर्व पर सजा महान कीर्तन दरबार

वरिष्ठ पत्रकार गुणवंत सिंह राठौर की रिपोर्ट

खासपुरा में गुरु नानक देव जी के प्रकाशपर्व पर सजा महान कीर्तन दरबार। भव्य शोभायात्रा व अखाड़ों का हैरतअंगेज प्रदर्शन।


नूरपुर (बिजनौर) गुरुद्वारा श्री गुरु सिंघ सभा गुरु नानक चौक खासपुरा के तत्वावधान में जगतगुरु श्री गुरु नानक देव जी के 552 वें प्रकाशोत्सव के उपलक्ष्य में 90 वां सालाना महान कीर्तन दरबार सजाया गया। नगर में पंथ की मनमोहक झांकियों के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई।
रविवार को नवनिर्मित गुरुद्वारा हाल में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की हजूरी में आयोजित अध्यात्मिक सत्संग समारोह में पंथ के विद्वान रागी भाई जसवेंदर सिंह अमृतसर, भाई बलबीर सिंह व जगजीत सिंह बबीहा चंडीगढ़ ने मधुर गुरुवाणी कीर्तन से संगत को निहाल किया। इसके अलावा कथावाचक रविंद्र सिंह अनमोल व दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के यूपी प्रचारक भाई बूटा सिंह ने श्री गुरुनानक देव जी जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए उनके उपदेशों पर अमल करने का संदेश दिया। समारोह में गुरुघर के सेवकों को सरोंपा देकर सम्मानित किया गया। संचालन स्टेज सेकेट्री पूर्व प्रधानाचार्य कोमल सिंह ने किया। अरदास उपरांत पंज प्यारो की अगुवाई में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में पंथ की मनमोहक झांकियां, अखाड़ा दल आकर्षण का केंद्र रहे। शोभायात्रा और समूचे समारोह के दौरान हल्दौर थानाध्यक्ष उदय प्रताप सिंह और पैजनिया चौकी इंचार्ज विनोद मिश्रा भारी पुलिस और पीएसी बल के साथ सुरक्षा व्यवस्था बनाने में तैनात रहे। समारोह में उपस्थित संगत ने गुरु का लंगर ग्रहण किया। समारोह के आयोजन में कमेटी के प्रधान सतपाल सिंह, सेक्रेटरी कुलदीप सिंह, खजांची रविंद्र सिंह रवि, आडीटर गुरमीत सिंह, अभिषेक सिंह, मा.जोगेंद्र सिंह आदि का सहयोग रहा।

समाज की प्रथम आईएएस अभिलाषा कौर को समाज रत्न से नवाजा
नूरपुर। समारोह में सिख समाज की प्रथम आईएएस चुनी गई अभिलाषा कौर को खालसा संगठन समिति सिख छावनी हैदराबाद के चेयरमैन भाग सिंह द्वारा समिति की ओर से शाल ओढाकर व शील्ड देकर सम्मानित करते हुए समाजरत्न की उपाधि से नवाजा गया। इसके अलावा गुरुद्वारा कमेटी की ओर से भी उन्हे सम्मानित किया गया। इस मौके पर अभिलाषा कौर ने उपस्थित संगत का उन्हें सम्मान देने के लिए आभार प्रकट करते हुए कहा कि उनकी मंशा समाज की बेटियों को देश सेवा मे आगे लाने की है। समाज को उनकी इस सफलता पर गर्व है। बता दें कि इससे पहले शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी अमृतसर की प्रधान बीबी जागीर कौर द्वारा प्रतिनिधि मंडल और गुरु की नगरी श्री पटना साहिब के जत्थेदार भाई रणजीत सिंह द्वारा भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। अभिलाषा कौर खासपुरा निवासी खालसा इंटर कालेज के पूर्व प्रधानाचार्य कोमल सिंह की सुपुत्री हैं।

हर हर गंगे के जयघोष से गूंज उठे गंगा घाट

हर हर गंगे के जयघोष से गूंज उठे गंगा घाट कार्तिक पूर्णिमा का पर्व शुरू होते ही श्रद्धालु लगाने लगे अर्ध रात्रि से ही गंगा में डुबकी। दिन निकलते ही शंख तथा मां गंगा के जयकारों के साथ गूंजने लगे मां भागीरथी के तट।

बिजनौर। कार्तिक पूर्णिमा पर जिले भर में गंगा स्नान मेला लगा। इस पावन अवसर पर  लगभग 9 लाख श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई। गंगा घाट हर हर गंगे के जयघोष से गूंज उठा। गंगा स्नान में श्रद्धालुओं ने अपने बच्चों का मुंडन संस्कार कराया और घी के साथ खिचड़ी का प्रसाद ग्रहण कर अपने घरों को लौटे।

विदुर कुटी में मुख्य घाट पर कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेले में उमड़े करीब साढ़े चार लाख श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई। इसके अलावा बैराज गंगा घाट, नांगल सोती, बालावाली, नारनौर, रामगंगा आदि घाटों पर भी लाखों श्रद्धालुओं ने पहुंचकर गंगा स्नान किया। रात्रि 12 बजे से ही श्रद्धालुओं ने गंगा में स्नान करना शुरू कर दिया। सुबह से शाम तक श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान किया। श्रद्धालुओं का जनसैलाब गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर अपने-अपने घरों को वापस लौटने लगा है। श्रद्धालुओं ने गंगा के पावन जल में डुबकी लगाकर मां गंगा का आशीर्वाद लिया। विदुर कुटी सहित गंज क्षेत्र में घंटों तक जाम की स्थिति बनी रही।

शुक्रवार को कार्तिक पूर्णिमा का पर्व शुरू होते ही श्रद्धालु अर्ध रात्रि से ही गंगा में डुबकी लगाने लगे। दिन निकलते निकलते मां भागीरथी का तट शंख तथा मां गंगा के जयकारों के साथ गूंजने लगा। गंगा के जल में लोग अपने परिवार के साथ समूह में स्नान करते हुए नजर आए। स्नान के दौरान युवाओं ने गंगा में अठखेलियां कर खूब मौज मस्ती की। इस दौरान लोगों में अपने अपने वाहनों को आगे निकालने की होड़ लगी रही। इस कारण विदुर कुटी तथा गंज क्षेत्र में कई बार जाम की स्थिति बन गई।

महिलाओं ने की मेले में जमकर खरीदारी- मीना बाजार में महिलाओं का जनसैलाब उमड पड़ा। बच्चों व महिलाओं ने जमकर खरीदारी की। झूले एवं सर्कस में भी लोगों ने खूब मनोरंजन किया।

मां गंगा को प्रशाद चढ़ाकर लिया आशीर्वाद– श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई और अनेक दंपतियों ने अपने नवजात शिशु का मुंडन संस्कार कराया। मुंडन संस्कार के बाद अपने बच्चों को मां गंगा में स्नान करा कर उनकी दीर्घायु की कामना की।

गंगा में फंस गए कई ट्रैक्टर- मेले में गंगा की धार में कई ट्रैक्टर पानी में फंस गए। उन्हें निकालने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। कई लोगों ने मिलकर ट्रैक्टर निकलवाए।

गंदगी का ढ़ेर छोड़ गए श्रद्धालु– विदुर कुटी में 4 दिन तक तम्बूओं का ही नजारा दिखा। लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान मेले में पहुंचकर स्नान कर मां गंगा का आशीर्वाद लिया। शुक्रवार को गंगा स्नान मेले से श्रद्धालुओं ने अपने घरों को जाना शुरू कर दिया, लेकिन अपने पीछे गंदगी का अम्बार छोड़ गए। हर तरफ गंदगी के ढे़र लगे हुए हैं। गंगा घाट के अलावा बीच मेले में गंदगी ही गंदगी पसरी पड़ी है। गंदगी को साफ कराने के लिए जिला प्रशासन अब कड़ी मशक्कत से जुटा हुआ है।

गंगा घाट पर खिचड़ी और घी का लिया आनंद– खिचड़ी और देसी घी की खुशबू से गंगा मेले महका रहा। लोगों ने खिचड़ी के साथ अचार, गुड़ और दही का भी आनंद लिया। वहीं गंगा स्नान मेले में चल रहे कई भंडारों में श्रद्धालुओं खिचड़ी का प्रशाद गृहण किया।

विदुर कुटी पर अभी भी हैं काफी श्रद्धालु– गंगा स्नान करने के बाद करीब 80 प्रतिशत श्रद्धालु तो अपना डेरा उखाड़कर अपने घर को लौट रहे है, लेकिन अभी भी काफी श्रद्धालु गंगा घाट पर जमे हुए हैं। इनकी घर वापसी आज होने की संभावना है।

गंगा बैराज पर लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी- बिजनौर। गंगा बैराज पर लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था की डूबकी लगाकर मां गंगा का आशीर्वाद लिया। मेले में सुबह से शाम तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। देवी मां के जागरण के चलते माहौल भक्तियम बना रहा। श्रद्धालुओं ने स्नान करने के बाद देशी घी के साथ खिचड़ी, चाट-पकौड़ी, जलेबी व अन्य व्यंजनों का भरपूर आनंद उठाया। 

नांगल खादर मेले में उमड़े हजारों श्रद्धालु- बिजनौर। कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले नांगल खादर मेले में हजारों लोगों ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई तथा जमकर खरीदारी करते हुए चाट पकोड़ी का लुत्फ उठाया। गुरुवार की शाम से नांगल सोती में गंगा किनारे लगने वाले मेले में हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा जल में डुबकी लगाई। इस दौरान लोगों ने पितृदान करके गंगा में दीपदान कर प्रसाद चढ़ाया। मेले में लोगों ने अपने बच्चों का मुंडन संस्कार भी कराया। खेल खिलौनों, मिट्टी के बर्तनों, श्रृंगार के सामान सहित अनेक घरेलू उपयोगी सामान की जमकर खरीदारी की गई। चाट पकौड़ी, जलेबी का जमकर लुत्फ उठाया गया। बच्चों ने झूले पर झूल कर और नवयुवकों ने नौका विहार कर खूब मनोरंजन और मस्ती की। मेले में मेला समिति, किसान यूनियन, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस विभाग, आर्य समाज पूर्ण सहयोग किया।

नगीना चौक पर लगा रहा जाम- धामपुर में गंगा स्नान के मौके पर नगीना चौक पर जाम की स्थिति रही। इस कारण लोग काफी परेशान रहे। जाम खुलवाने के लिए पुलिसकर्मी मुस्तैद रहे, लेकिन भीड़ अधिक होने के कारण जाम की स्थिति थोड़े समयंतराल पर बनी रही। वहीं शेरकोट में खो नदी में काफी पानी होने के बावजूद लोगों ने कुछ जगह स्नान किया। धामपुर शहर के अलावा आसपास के गांवों से लोग गंगा स्नान के लिए हरेवली, भूतपुरी आदि की ओर गए।

20 घंटे जाम में फंसा रहा दिल्ली-पौड़ी हाईवे- गंगा स्नान मेले के चलते दिल्ली-पौड़ी हाईवे पर करीब 20 घंटे जाम लगा रहा। हाईवे पर वाहन रेंगते रहे। दूर-दूर तक वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। मेला हल्का होने के बाद स्वयं ही जाम खुलना शुरू हो गया। यातायात पुलिस पूरे दिन जाम खुलवाने के प्रयास में लगी रही। श्रद्धालुओं ने अपने वाहनों व बैलबुग्गी को हाईवे किनारे व इधर-उधर लगा दिया था। इस कारण गुरुवार की शाम से लगना शुरू जाम शाम करीब साढ़े सात बजे तक बिजनौर से लेकर मीरापुर बाइपास तक लग गया। हाईवे पर दूर-दूर तक वाहन व उनकी लाइटें नजर आती रहीं। हाईवे पर वाहन रेंगते रहे। बीच-बीच में  थोड़ी देर खुलने के बाद भी जाम लगता रहा। शुक्रवार  तड़के से ही स्थानीय श्रद्धालुओं के भी गंगा स्नान मेले में पहुंचना शुरू होने से भयंकर जाम लग गया। दोपहर करीब दो से तीन बजे के बाद जब मेला हल्का हुआ और श्रद्धालु घरों को लौटना शुरू हुए, तो जाम से लोगों को राहत मिलनी शुरू हुई। ।

कालरात्रि के चाँद गुरु नानक देव

मित्रों, इस वर्ष के गुरु नानक दिवस के उपलक्ष्य में अपने सिख भाई व पड़ोसी के यहाँ प्रभात-फेरी कथा में जाने का मौका मिला। बड़े प्यार और आदर से निमंत्रण दिया था, इसलिए कुंडलिनी की प्रेरणा से सुबह के चार बजे से पहले ही आंख खुल गई। जैसे ही तैयार होकर कथा में पत्नी के साथ पहुंचा, वैसे ही गुरुद्वारा साहिब से ग्रन्थ साहिब भी पहुंच गए। ऐसा लगा कि जैसे मुझे ही सेवादारी के लिए विशेष निमंत्रण मिला था। बहुत ही भावपूर्ण व रोमांचक दृश्य था। सुबह साढ़े चार बजे से लेकर साढ़े पांच बजे तक मधुर संगीत के साथ शबद कीर्तन हुआ, अच्छा लगा। यह समय ब्रह्ममुहूर्त के समय के बीचोंबीच था, जो लगभग 4 बजे से 6 बजे तक रहता है। ऐसा लगा कि हम पूरी रात भर कीर्तन कर रहे हों। ऐसा ब्रह्ममुहूर्त की उच्च आध्यात्मिक ऊर्जा के कारण ही लगता है। इसीलिए आध्यात्मिक साधना के लिए यही समय सर्वोपरि निश्चित किया गया है। ब्रह्ममुहूर्त में आध्यात्मिक साधना से कुंडलिनी चरम के करीब पहुंच जाती है। मुझे भी कुछ ऐसा ही लगा। कथा-कीर्तन के अंत में हल्का जलपान भी हुआ। आदमी हर पल कुछ न कुछ सीखता है। सिख मतलब सीख। इससे सिद्ध हो जाता है कि यह धर्म अत्याधुनिक और वैज्ञानिक भी है, क्योंकि आजकल सीखने का ही तो युग है। इसी तरह से इसमें सेवादारी का भी बड़ा महत्त्व है। आजकल का उपभोक्तावाद, व्यावसायिक व प्रतिस्पर्धा का युग जनसेवा या पब्लिक सर्विस का ही तो युग है। आत्मसुरक्षा का भाव तो इस धर्म के मूल में है। यह भाव भी आजकल बहुत प्रासंगिक है, क्योंकि हर जगह झूठ-फरेब, और अत्याचार का बोलबाला दिखता है। ब्रह्ममुहूर्त के बारे में सुना तो बहुत था, पर खुद अच्छी तरह से अनुभव नहीं किया था। लोगों को जो इसकी शक्ति का पता नहीं चलता, उसका कारण यही है कि वे ढंग से साधना नहीं करते। शक्ति के पास बुद्धि नहीं होती। बुद्धि आत्मा या विवेक के पास होती है। यदि शक्ति के साथ विवेक-बुद्धि का दिशानिर्देशन है, तभी वह आत्मकल्याण करती है, नहीं तो उससे विध्वंस भी संभव है। उदाहरण के लिए पाकिस्तान को देख सकते हैं। सूत्रों के अनुसार पाकिस्तानी सेना निर्दोष व निहत्थी जनता को मारती है। कई बार यह देश कम, और दुष्प्रचार करने वाली मशीन ज्यादा लगता है। बन्दर के हाथ उस्तरा लग जाए, तो अंजाम कुछ भी हो सकता है। शक्ति तो एक धक्का है। यदि मन में पहले से ही कचरा है, तो शक्ति से उसीको धक्का मिलेगा, जिससे वह और ज्यादा फैल जाएगा। इससे तो आदमी ब्रह्ममुहूर्त में जागने से भी तौबा करेगा। यदि मन में कुंडलिनी है, तो विकास का धक्का कुंडलिनी को ही मिलेगा। मेरा जन्म से ही एक हिंदु परिवार से सम्बन्ध रहा है। मेरे दादाजी एक प्रख्यात हिंदु पुरोहित थे। मैंने कई वर्षों तक उनके साथ एक शिष्य की तरह काम किया है। लगता है कि वे अनजाने में ही मेरे गुरु बन गए थे। मुझे तो हिंदु धर्म और सिख धर्म एकजैसे ही लगे। दोनों में धर्मध्वज, ग्रन्थ और गुरु का पूजन या सम्मान समान रूप से किया जाता है। दरअसल, भीतर से सभी धर्म एकसमान हैं, कुछ लोग बाहर-2 से भेद करते हैं। तंत्र के अनुसार, कुंडलिनी ही गुरु है, और गुरु ही कुंडलिनी है। हाँ, क्योंकि सिक्ख धर्म धर्मयौद्धाओं से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसमें पारम्परिक हिंदु धर्म की अपेक्षा थोड़ी ज्यादा संक्षिप्तता, व्यावहारिकता और कट्टरता होना स्वाभाविक ही है। पर वह भी कुछ विशेष धर्मों के सामने तो नगण्यतुल्य ही है। हालांकि सिक्ख धर्म बचाव पक्ष को लेकर बना है, आक्रामक पक्ष को लेकर नहीं। यदि कभी आक्रामक हुआ भी है, तो अपने और हिंदु धर्म के बचाव के लिए ही हुआ है, अन्यथा नहीं। मैं यहाँ किसी धर्मविशेष का पक्ष नहीं ले रहा हूँ। हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं। केवल मानवीय सत्य को स्पष्ट कर रहा हूँ। युक्तिपूर्ण विचार व लेखन से सत्य ज्यादा स्पष्ट हो जाता है। कुछ न कुछ कट्टरता तो सभी धर्मों में है। कुछ सकारात्मक कट्टरता तो धर्म के लिए जरूरी भी है, पर यदि वह मानवता और सामाजिकता के दायरे में रहे, तो ज्यादा बेहतर है, जिसके लिए सिक्ख धर्म अक्सर जाना और माना जाता है। मध्ययुग में जिस समय जेहादी आक्रांताओं के कारण भारतीय उपमहाद्वीप अंधेरे में था, उस समय ईश्वर की प्रेरणा से पूर्णिमा के पूर्ण चन्द्रमा की तरह गुरु नानकदेव का अभ्युदय हुआ था, जिसने भयजनित अंधेरे को सुहानी चांदनी में तब्दील कर दिया था। (साभार)

सतनाम श्री वाहे गुरु, गुरु पर्व की ढेर सारी शुभकामनाएं.. आप सभी पर वाहे गुरु की मेहर हो! 552वें गुरुपर्व की लख-लख बधाईयां…

गुरु नानक देव के प्रकाशोत्सव पर निकली भव्य प्रभातफेरी

गुरु नानक देव के प्रकाशोत्सव पर निकली भव्य प्रभातफेरी


नूरपुर (बिजनौर)। विश्व शांति के संदेशवाहक, सिक्खों के प्रथम पातशाही जगतगुरु श्री गुरु नानक देव जी के 552 वें प्रकाशोत्सव पर भव्य प्रभातफेरी निकाली गई।
गुरुद्वारा श्री गुरु सिंघ सभा कमेटी द्वारा संगत के सहयोग से श्री गुरु नानक देव महाराज के प्रकाशोत्सव के उपलक्ष्य में छःह दिवसीय प्रभातफेरी का शुभारंभ किया गया। शुक्रवार को अंतिम प्रभातफेरी भव्यतापूर्ण निकाली गई।

सुबह छः बजे गुरुद्वारा साहिब से नितनेम पाठ व अरदास उपरांत श्री गुरुनानक देव जी की मनमोहक झांकी के साथ प्रारंभ हुई प्रभातफेरी में सबसे आगे चार साहिबजादे और पंज प्यारे के रूप में हाथों में तलवार लिए गुरुघर के बच्चे श्री निशान साहिब की अगुवाई में चल रहे थे। उनके पीछे गुरु का गुणगान करते सिख समाज के लोग और महिलाएं चल रही थीं। प्रभातफेरी में आधा दर्जन धर्म गुरुओं की झांकी और बैंडबाजे शामिल रहे। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं द्वारा फूलों की वर्षा कर स्वागत किया गया। शोभायात्रा में डीजे पर बजती गुरुवाणी एक अलग ही माहौल बना रही थी।

प्रभातफेरी के दौरान वरिष्ठ पत्रकार गुणवंत सिंह राठौर, संजीव जोशी, संदीप जोशी, रालोद नेता चौधरी अजयवीर सिंह आदि गुरुघर के सेवकों को सरोंपा देकर सम्मानित किया गया। नगर के मुख्य मार्गो से निकाली गई भव्य प्रभातफेरी का सफल संचालन जनरल सेकेट्री देवेंद्र सिंह बेदी, रविंद्र सिंह मिक्की और रीनू सिंह ने संयुक्त रुप से किया। प्रभातफेरी में डा.गुरचरण सिंह, गुरमुख सिंह दीवान, अमृत सिंह, डा.प्रेम सिंह राठौर, हरपाल सिंह दुकानदार, परवेंद्र सिंह, जोगेन्द्र सिंह, रिंकू सिंह, विशाल सिंह गौरी, सुरजीत सिंह सहित बड़ी संख्या में संगत शामिल रही। प्रभातफेरी के आयोजन में सिख समाज के लोगों का विशेष सहयोग रहा।
इसके अलावा गुरुद्वारा श्री गुरु नानक दरबार कमेटी के तत्वावधान में पंज प्यारों की अगुवाई मे भव्य प्रभातफेरी निकाली गई। प्रभातफेरी में सुरेंद्रपाल सिंह मंगत, परवेंद्र सिंह विक्की, जसवीर सिंह, सतनाम सिंह, जोगेन्द्र सिंह आदि संगत शामिल रही।

गंगा स्नान पर्व पर भाजपा युवा मोर्चा ने चलाया सदस्यता अभियान

बिजनौर। बालावाली घाट पर गंगा स्नान पर्व के उपलक्ष्य में भारतीय जनता युवा मोर्चा द्वारा सदस्यता अभियान चलाया गया। इस दौरान सैकड़ों लोगों को पार्टी की सदस्यता दिलाई गई।

सदस्यता अभियान में मुख्य अतिथि भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के जिला मंत्री संकित राठी, गंगा स्नान में सदस्यता कैंप के संयोजक मंडल महामंत्री आकाश कुमार रहे। सदस्यता कैंप में गंगा स्नान में आए श्रद्धालुओं ने बढ़ चढ़कर भाग लिया।

सदस्यता कैंप में भारतीय जनता पार्टी से सदस्य जिला कार्यकारिणी ओबीसी मोर्चा लाल बहादुर कर्णवाल, पिछड़ा मोर्चा के मंडल अध्यक्ष संदीप कश्यप, महिला मोर्चा से विनोद देवी, किसान मोर्चा मंडल अध्यक्ष विपिन कुमार, युवा मोर्चा मंडल कोषाध्यक्ष कुमरजीत सिंह, रोहित, मोहित कुमार, ओम कुमार, शुभम कुमार सहित काफी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

आकांक्षा चौहान ने बांटे 219 दिव्यांग बच्चों को उपकरण


नूरपुर (बिजनौर)। बीआरसी में समग्र शिक्षा अभियान व कानपुर एलिम्को के संयुक्त तत्वाधान में दिव्यांग उपकरण मापन शिविर का आयोजन गुरुवार को किया गया।
शिविर में मुख्यातिथि ब्लॉक प्रमुख आकांक्षा चौहान द्वारा 219 दिव्यांग छात्र छात्रों को व्हीलचेयर, ट्राई साईकिल, क्लीपर आदि उपकरणों का वितरण किया गया। इस अवसर पर ब्लॉक प्रमुख ने अपने संबोधन में दिव्यांगों को आत्मनिर्भर बनने का संदेश दिया। खंड शिक्षा अधिकारी प्रीति पाल की अध्यक्षता व लियाकत अली के संचालन में आयोजित शिविर में एलिम्को कानपुर से आए एक्पर्ट प्रामेश मिश्रा, ओमवीर सिंह, आनंद पाल के अलावा जूनियर हाईस्कूल के मुख्याध्यापक जाकिर हुसैन, कीर्ती जाहूल यादव,अंगजीत चौधरी आदि शामिल रहे।

श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाशोत्सव पर नगर में प्रभातफेरी निकालने का दौर जारी

श्री गुरु नानक देव जी की मनमोहक झांकी के साथ निकली प्रभातफेरी
गुरुवाणी शब्दों से गूंज उठा नगर


नूरपुर/बिजनौर। श्री गुरु नानक देव जी के 552वें प्रकाशोत्सव को समर्पित गुरुद्वारा श्री गुरु सिंघ सभा कमेटी द्वारा स़गत के सहयोग से नगर में  प्रभातफेरी निकालने का दौर जारी है। रोजाना सुबह 6 बजे प्रभातफेरी निकाली जा रही है। 

श्री गुरु नानक देव जी के 552वें प्रकाशोत्सव को समर्पित गुरुद्वारा श्री गुरु सिंघ सभा कमेटी द्वारा स़गत के सहयोग से नगर में प्रभातफेरी निकालने का दौर जारी है। रोजाना सुबह 6 बजे प्रभातफेरी निकाली जा रही है।
गुरुवार को श्री निशान साहिब की अगुवाई में श्री गुरु नानक देव जी की मनमोहक झांकी के साथ सुबह छः बजे प्रभातफेरी का शुभारंभ हुआ। नगर के मुख्य मार्गो से होते हुए आठ बजे गुरुद्वारा साहिब पहुचंकर प्रभातफेरी का समापन हुआ। प्रभातफेरी का जसपाल सिंह राठौर, बिरेंदर सिंह गुजराल, गुरमीत सिंह जौहरी, बिरेन्द्र सिंह,अजीत सिंह, अरमेंद्र सिंह सीनू परिवार की ओर अपने निवास पर पुष्पवर्षा कर जलपान से स्वागत किया गया। हजूरी रागी ज्ञानी अरवेंदर सिंह द्वारा गुरुघर के सेवकों को सरोंपा देकर सम्मानित किया गया। कमेटी के जनरल सेक्रेटरी देवेन्द्र सिंह बेदी श्री गुरु नानक देव जी के जीवन दर्शन पर प्रकाश डाल रहे थे। श्री सुखमनी साहिब दल की अध्यक्ष बीबी प्रीतम कौर,बीबी रिया कौर, बीबी त्रिवेंद्र कौर, बीबी राजेंद्र कौर के अलावा सुरजीत सिंह, जोगेन्द्र सिंह, हरदीप सिंह टंडन, श्रवण सिंह आदि गुरुवाणी शब्दों से नगर का वातावरण धर्ममय उत्पन्न कर रहे थे। प्रभातफेरी में जिला गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी एवं आल इंडिया सिक्ख प्रतिनिधि बोर्ड के प्रांत मीडिया प्रभारी गुणवंत सिंह राठौर, परवेंद्र सिंह बंटी, सभासद गुरमुख सिंह दीवान, दर्शन सिंह दीवान, रिंकू सिंह, हरपाल सिंह, अमन सिंह सहित बड़ी संख्या में सिक्ख संगत शामिल रही।

बधाई हो बधाई.. खुशी है छाई..

बधाई हो बधाई.. खुशी है छाई..

हिंदीसेवी मंजु मिश्रा को अमेरिकी राष्ट्रपति ने दिया लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड

आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी अनुयाई परिवार के लिए बहुत ही गर्व और खुशी का दिन है।
अमेरिका में हिंदी का प्रचार-प्रसार करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता एवं आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की अमेरिकी इकाई की अध्यक्ष श्रीमती मंजु मिश्रा को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने “लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड” से सम्मानित किया है।


लखनऊ निवासी श्रीमती मंजु मिश्रा अमेरिका के कैलिफोर्निया में प्रवास कर रही हैं। अमेरिका में आप हिंदी के प्रचार प्रसार के साथ-साथ जरूरतमंदों की हर तरह से मदद करने को हर वक्त तत्पर रहती हैं। अमेरिका में कुछ मित्रों के साथ मिलकर वर्ष 2011 में श्रीमती मंजु मिश्रा ने विश्व हिंदी ज्योति नामक संस्था की शुरुआत की। यह संस्था अमेरिका के प्रवासी भारतीयों के बच्चों के साथ साथ अमेरिकी नागरिकों को भी हिंदी सिखाने का काम करती है। दो दशक से भी अधिक समय से कैलिफोर्निया में रह रहीं श्रीमती मंजु मिश्रा अमेरिका में अब तक हजारों भारतीय मूल के तथा गैर भारतीयों को हिंदी भाषा सिखा चुकी हैं।
अपने काम से यह संस्था आज काफी लोकप्रिय हो चुकी है। प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले हिंदी संवर्धन के कार्यक्रमों में भारतीय काउंसलेट भी सहयोग करता है। हिंदी की उल्लेखनीय सेवा के लिए आपको वर्ष 2014 में विश्व हिंदी सेवा सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है। उनका सपना है कि अमेरिका के स्कूलों में भी छात्रों के लिए विदेशी भाषा के रूप में हिंदी एक विकल्प हो। अपने इस सपने को पूरा करने में भी वह लगातार प्रयासरत हैं।


मंजु मिश्रा का जीवन पूर्ण रूप से समाज सेवा एवं हिंदी की सेवा को समर्पित है। श्रीमती मंजु मिश्रा उत्तर प्रदेश मंडल ऑफ अमेरिका (उपमा) की बोर्ड मेम्बर हैं तथा भारत में चलने वाले संस्था के कार्यक्रमों का काम-काज देखती हैं। प्रवासी भारतीय नीलू गुप्ता द्वारा द्वारा गठित उपमा संस्था उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में बच्चों की पढ़ाई और जरूरतमंदों की आर्थिक मदद सुनिश्चित करती है। इस संस्था के प्रोजेक्ट बुंदेलखंड रीजन के चित्रकूट एवं निसवारा में संचालित हो रहे हैं। एक प्रोजेक्ट साईधाम (फ़रीदाबाद- हरियाणा) में भी चल रहा है। कोरोना संकट के दौरान भी उत्तर प्रदेश मंडल ऑफ अमेरिका (उपमा) ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में जरूरतमंदों के लिए 20 लाख से अधिक रुपए भेजें। इस आर्थिक मदद से विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से जरूरतमंदों को खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई गई। भोपाल की सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती माया विश्वकर्मा की संस्था सुकर्मा को भी श्रीमती मंजु मिश्रा ने आई.सी. सी ट्राई वैली के माध्यम से मास्क सेनीटाइजर और ऑक्सीजन कंसंट्रेटर के लिए आर्थिक मदद उपलब्ध कराई थी। कोरोना संकट के दौरान उपमा के किए गए प्रयासों की अभी हाल ही में गौरव अवस्थी द्वारा संकलित और संपादित कोरोना योद्धाओं के काम पर केंद्रित पुस्तक “ताकि सनद रहे” में भी प्रमुखता से चर्चा हुई है। नारिका नाम की संस्था जो सैन फ़्रैन्सिस्को बे एरिया में घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं के लिए काम करती है उसके साथ बोर्ड मेम्बर के रूप में जुड़ कर आप भारतीय महिलाओं की मदद करने का काम भी कई वर्षों से कर रही हैं ।
श्रीमती मंजु मिश्रा को हिंदी साहित्य में भी महारत हासिल है। उनका एक काव्य संग्रह “जिंदगी यूं तो”प्रकाशित हो चुका है। 50 से अधिक संग्रहों एवं विभिन्न ई-पत्रिकाओं में भी आपकी कविता और कहानियां प्रकाशित हो चुकी हैं।
आपकी मातृभाषा और सामाजिक सेवा को देखते हुए ही आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की ओर से वर्ष 2017 में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी युगप्रेरक सम्मान से रायबरेली के भव्य समारोह में सम्मानित किया गया था। तभी से आप मातृभाषा हिंदी के साथ-साथ आचार्य द्विवेदी स्मृति संरक्षण अभियान को भी अपना संरक्षण-सहयोग-स्नेह प्रदान कर रही हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन द्वारा लाइव टाइम अचीवमेंट अवार्ड प्राप्त होने पर श्रीमती मंजु मिश्रा को आचार्य द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की भारत इकाई एवं हिंदी प्रेमियों की तरफ से बहुत-बहुत बधाई। आप का सानिध्य पाकर हम सब गौरवान्वित हैं। आप ऐसे ही सामाजिक कार्य और सात समंदर पार मातृभाषा हिंदी को पुष्पित पल्लवित करती रहें, यही सच्ची राष्ट्र सेवा है। यही राष्ट्रीय धर्म है। यही भारतीय समाज का मर्म है।

हम सब हिंदी प्रेमी भी आपके स्वास्थ्य सार्थक और दीर्घ जीवन की कामना करते हैं।

गौरव अवस्थी “आशीष”
रायबरेली/उन्नाव

प्रवासी भारतीय मंजु मिश्रा को अमेरिका का लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड

प्रवासी भारतीय मंजु मिश्रा को अमेरिका का लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड

नई दिल्ली। अमेरिका में हिंदी का प्रचार-प्रसार करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता एवं आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की अमेरिकी इकाई की अध्यक्ष श्रीमती मंजु मिश्रा को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने “लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड” से सम्मानित किया है।


लखनऊ निवासी श्रीमती मंजु मिश्रा अमेरिका के कैलिफोर्निया में प्रवास कर रही हैं। अमेरिका में आप हिंदी के प्रचार प्रसार के साथ-साथ जरूरतमंदों की हर तरह से मदद करने को हर वक्त तत्पर रहती हैं। अमेरिका में कुछ मित्रों के साथ मिलकर वर्ष 2011 में श्रीमती मंजु मिश्रा ने विश्व हिंदी ज्योति नामक संस्था की शुरुआत की। यह संस्था अमेरिका के प्रवासी भारतीयों के बच्चों के साथ साथ अमेरिकी नागरिकों को भी हिंदी सिखाने का काम करती है। दो दशक से भी अधिक समय से कैलिफोर्निया में रह रहीं श्रीमती मंजु मिश्रा अमेरिका में अब तक हजारों भारतीय मूल के तथा गैर भारतीयों को हिंदी भाषा सिखा चुकी हैं।
अपने काम से यह संस्था आज काफी लोकप्रिय हो चुकी है। प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले हिंदी संवर्धन के कार्यक्रमों में भारतीय काउंसलेट भी सहयोग करता है। हिंदी की उल्लेखनीय सेवा के लिए आपको वर्ष 2014 में विश्व हिंदी सेवा सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है। उनका सपना है कि अमेरिका के स्कूलों में भी छात्रों के लिए विदेशी भाषा के रूप में हिंदी एक विकल्प हो। अपने इस सपने को पूरा करने में भी वह लगातार प्रयासरत हैं।


अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन द्वारा लाइव टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किए जाने पर समिति के संयोजक गौरव अवस्थी, अध्यक्ष विनोद शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार अरविंद कुमार सिंह, लेखक पत्रकार श्रीमती कुसुमलता सिंह, सप्रे संग्रहालय के संस्थापक पद्मश्री विजय दत्त श्रीधर, लखनऊ की साहित्यकार स्नेहलता, श्रीमती संध्या सिंह, श्रीमती कल्पना वार्ष्णेय, नई दिल्ली की पत्रकार शेफाली सुरभि ने श्रीमती मंजु मिश्रा को बधाई दी है।


कोरोना संकट में भी भारतीयों की मदद में सक्रिय रहीं मंजु मिश्रा
मंजु मिश्रा का जीवन पूर्ण रूप से समाज सेवा एवं हिंदी की सेवा को समर्पित है। श्रीमती मंजु मिश्रा उत्तर प्रदेश मंडल ऑफ अमेरिका (उपमा) की बोर्ड मेम्बर हैं तथा भारत में चलने वाले संस्था के कार्यक्रमों का काम-काज देखती हैं। प्रवासी भारतीय नीलू गुप्ता द्वारा द्वारा गठित उपमा संस्था उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में बच्चों की पढ़ाई और जरूरतमंदों की आर्थिक मदद सुनिश्चित करती है। इस संस्था के प्रोजेक्ट बुंदेलखंड रीजन के चित्रकूट एवं निसवारा में संचालित हो रहे हैं। एक प्रोजेक्ट साईधाम (फ़रीदाबाद- हरियाणा) में भी चल रहा है। कोरोना संकट के दौरान भी उत्तर प्रदेश मंडल ऑफ अमेरिका (उपमा) ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में जरूरतमंदों के लिए 20 लाख से अधिक रुपए भेजे। इस आर्थिक मदद से विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से जरूरतमंदों को खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई गई। भोपाल की सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती माया विश्वकर्मा की संस्था सुकर्मा को भी श्रीमती मंजु मिश्रा ने आई.सी. सी ट्राई वैली के माध्यम से मास्क सेनीटाइजर और ऑक्सीजन कंसंट्रेटर के लिए आर्थिक मदद उपलब्ध कराई थी। कोरोना संकट के दौरान उपमा के किए गए प्रयासों की अभी हाल ही में “गौरव अवस्थी” द्वारा संकलित और संपादित कोरोना योद्धाओं के काम पर केंद्रित पुस्तक “ताकि सनद रहे” में भी प्रमुखता से चर्चा हुई है। “नारिका” नाम की संस्था जो सैन फ़्रैन्सिस्को बे एरिया में घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं के लिए काम करती है, उसके साथ बोर्ड मेम्बर के रूप में जुड़ कर आप भारतीय महिलाओं की मदद करने का काम भी कई वर्षों से कर रही हैं।


आचार्य द्विवेदी युग प्रेरक सम्मान से हो चुकी है सम्मानित
सात समंदर पार अमेरिका में मातृभाषा और सामाजिक सेवा को देखते हुए ही आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की ओर से वर्ष 2017 में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी युगप्रेरक सम्मान से रायबरेली के भव्य समारोह में सम्मानित किया गया था। तभी से आप मातृभाषा हिंदी के साथ-साथ आचार्य द्विवेदी स्मृति संरक्षण अभियान को भी अपना संरक्षण-सहयोग-स्नेह प्रदान कर रही हैं। इसी वर्ष उन्होंने आचार्य द्विवेदी की स्मृतियों को जीवंत बनाने के लिए अमेरिकी इकाई की अध्यक्ष का परिवार भी ग्रह किया है।

श्री निशान साहिब की अगुवाई में निकली चौथी प्रभात फेरी,उमड़ी संगत

श्री निशान साहिब की अगुवाई मे निकली चौथी प्रभातफेरी, संगत उमड़ी


नूरपुर (बिजनौर)। गुरुद्वारा श्री गुरू सिंघ सभा कमेटी के तत्वाधान में सिक्ख धर्म के संस्थापक एवं जगतगुरु श्री गुरु नानक देव जी के 552 वें प्रकाशोत्सव के उपलक्ष्य में बुधवार को चौथी प्रभातफेरी श्रद्धा और धूमधाम से निकाली गई।
बुधवार को सुबह छःह बजे सिक्ख पंथ के प्रतीक श्री निशान साहिब की अगुवाई में एक विशेष वाहन में सुसज्जित श्री गुरु नानक देव जी की मनमोहक झांकी के साथ प्रभातफेरी गुरुद्वारा साहिब से प्रारंभ हुई। जो गुरु नानक मार्केट, रोडवेज़, शिव मंदिर चौक, हकुमतपुर रोड, रामनगर, गोविन्द नगर, शिवालय मंदिर, रविदास नगर, कबीर नगर, अकाली रोड होते हुए गुरुद्वारा पहुंचकर सम्पन्न हुई। प्रभातफेरी में हजूरी रागी अरविंदर सिंह, जोगिंदर सिंह, जनरल सेक्रेटरी देवेंद्र सिंह बेदी, रविंद्र सिंह मिक्की, सुरजीत सिंह, श्रवण सिंह, बीबी, प्रीतम कौर आदि गुरुवाणी कीर्तन करते चल रहे थे। कई स्थानों पर प्रभातफेरी का पुष्पवर्षा और आतिशबाजी छोडकर स्वागत किया गया। प्रभातफेरी में जिला गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के मीडिया प्रभारी गुणवंत सिंह राठौर, कमेटी के खजांची रणवीर सिंह, परवेंद्र सिंह बंटी, मास्टर सेवा सिंह, रिंकू सिंह सहित बडी में संगत शामिल रही।

प्रभातफेरी में गुरुवाणी सुनाती संगत


तीन दिवसीय श्री अखंड पाठ का शुभारंभ
नूरपुर। जगतगुरु श्री गुरु नानक देव जी के 552 वें प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में गुरुद्वारा साहिब में बुधवार को तीन दिवसीय श्री अखंड पाठ का शुभारंभ, जो बोले सोनिहाल सतश्री अकाल की गूंज के बीच किया गया। गुरुद्वारा कमेटी के जनरल सेक्रेटरी देवेन्द्र सिंह बेदी ने जानकारी देते हुए बताया कि कमेटी के तत्वावधान में संगत के सहयोग से सालाना अध्यात्मिक सत्संग समारोह एवं शोभायात्रा श्रद्धा व उत्साह के साथ दो दिवसीय कार्यक्रम के तहत मनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के तहत 22 नवंबर को रैन सबाई और 23 नवंबर को महान कीर्तन दरबार खालसा इंटर कालेज में सजाया जायेगा। इसमें पंथ के विद्वान रागी भाई प्रेम सिंह बंधु बंगला साहिब वाले और बीबी संगत कौर गुरुवाणी कीर्तन से संगत को निहाल करेगी। 23 नवंबर को दोपहर उपरांत हजूर साहिब से पधारे पंज प्यारों की अगुवाई में अलौकिक नगर कीर्तन मुख्य मार्गो से निकाला जायेगा, जिसमें पंथ की आकर्षक झांकियां, अखाड़ा दल, पंजाबी बैंड सहित अन्य मनमोहक गतकों का प्रदर्शन होगा।

लोग दीर्घायु होंगे, स्वस्थ होंगे तो राष्ट्र का धन विकास के कार्यों में लगेगा: राजेश सैनी

राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा दिवस पर गोष्ठी का आयोजन। मंडी धनौरा से आए चेयरमैन का फूल मालाओं से भव्य स्वागत 

बिजनौर। इंटरनेशनल नेचुरोपैथी ऑर्गनाइजेशन इकाई जनपद बिजनौर के जिला अध्यक्ष डॉक्टर नरेंद्र सिंह संरक्षक राजपाल सिंह योगी, अनंत योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा सेवा संस्थान के अध्यक्ष योगेश कुमार, सचिव अनंत कुमार, कोषाध्यक्ष श्रीमती सुनीता, सदस्य सोमदत्त शर्मा, उपाध्यक्ष राजवीर सिंह  एडवोकेट, मंडी धनौरा जिला अमरोहा से आए राजेश सैनी चेयरमैन भाजपा, उनकी पत्नी डॉली सैनी, संजीव सैनी, ललित सैनी, चंद्रप्रकाश, चंद्रभान,  जयप्रकाश, बिजनौर नहर कॉलोनी से डालचंद, भरत विहार से इंद्रपाल, मास्टर राजीव कुमार, रवि कुमार प्राकृतिक चिकित्सा गोष्ठी में उपस्थित रहे।

इस अवसर पर श्री सैनी ने कहा 18 नवंबर 2021 प्राकृतिक चिकित्सा के कार्यक्रम के लिए समाज को स्वस्थ करने की योजना बनाई जाए। समाज को बिना किसी औषधि के कैसे स्वस्थ करना है, इसके लिए गांव-गांव, शहर-शहर में प्राकृतिक चिकित्सा का प्रचार प्रसार आंदोलन के रूप में हो ताकि प्रत्येक व्यक्ति बिना किसी औषधि के दीर्घायु और स्वस्थ हो। इससे समाज का और राष्ट्र का दोनों प्रकार से लाभ होगा। लोग दीर्घायु होंगे, स्वस्थ होंगे तो राष्ट्र का धन विकास के कार्यों में लगेगा। इंटरनेशनल नेचरोपैथी ऑर्गेनाइजेशन यूनिट बिजनौर एवं योगी अनंत योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा सेवा ट्रस्ट के लिए पूरी मदद करने के लिए पूरा सहयोग करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि हम प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग के लिए तन मन धन से पूर्ण तरीके से सहायता करेंगे।

इस अवसर पर डॉक्टर नरेंद्र सिंह जिला अध्यक्ष इंटरनेशनल नेचरोपैथी ऑर्गेनाइजेशन यूनिट बिजनौर, योगी अनंत योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष योगेश कुमार ने चेयरमैन राजेश सैनी का फूल मालाओं से स्वागत किया और जनपद बिजनौर में आने के लिए उनका हृदय से धन्यवाद किया। बाद में सभी लोगों को जलपान कराया गया।