कायस्थ 24 घंटे के लिए क्यों नहीं करते कलम का उपयोग?

जब भगवान राम के राजतिलक में निमंत्रण छूट जाने से नाराज भगवान् चित्रगुप्त ने रख दी थी कलम !! उस समय शुरू हो चुका था परेवा काल।

लखनऊ (शैली सक्सेना)। परेवा के दिन कायस्थ समाज के लोग कलम का प्रयोग नहीं करते हैं। यानी किसी भी तरह का का हिसाब – किताब नहीं करते हैं। आखिर ऐसा क्यूँ है कि पूरी दुनिया में कायस्थ समाज के लोग दीपावली के दिन पूजन के बाद कलम रख देते हैं और फिर यम द्वितीया के दिन कलम-दवात के पूजन के बाद ही उसे उठाते हैं?

इसको लेकर सर्व समाज में कई सवाल अक्सर लोग कायस्थों से करते हैं। ऐसे में अपने ही इतिहास से अनभिग्य कायस्थ युवा पीढ़ी इसका कोई समुचित उत्तर नहीं दे पाती है। जब इसकी खोज की गई तो इससे सम्बंधित एक बहुत रोचक घटना का संदर्भ किवदंतियों में मिला….

…कहते हैं कि जब भगवान राम दशानन रावण का वध कर अयोध्या लौट रहे थे, तब उनके खडाऊं को राज सिंहासन पर रख कर राज्य चला रहे राजा भरत ने गुरु वशिष्ठ को भगवान राम के राजतिलक के लिए सभी देवी देवताओं को सन्देश भेजने की व्यवस्था करने को कहा। गुरु वशिष्ठ ने ये काम अपने शिष्यों को सौंप कर राज्यतिलक की तैयारी शुरू कर दीं।

भगवान राम ने पूछा- ऐसे में जब राज्यतिलक में सभी देवी देवता आ गए तब भगवान राम ने अपने अनुज भरत से पूछा भगवान चित्रगुप्त नहीं दिखाई दे रहे हैं। इस पर जब खोजबीन हुई तो पता चला कि गुरु वशिष्ठ के शिष्यों ने भगवान चित्रगुप्त को निमंत्रण पहुंचाया ही नहीं था। इसके चलते भगवान चित्रगुप्त नहीं आये। इधर भगवान चित्रगुप्त सब जान चुके थे और इसे प्रभु राम की महिमा समझ रहे थे। फलस्वरूप उन्होंने गुरु वशिष्ठ की इस भूल को अक्षम्य मानते हुए यमलोक में सभी प्राणियों का लेखा जोखा लिखने वाली कलम को उठा कर एक किनारे रख दिया।

रुके स्वर्ग और नरक के सारे काम- सभी देवी देवता जैसे ही राजतिलक से लौटे तो पाया कि स्वर्ग और नरक के सारे काम रुक गये थे, प्राणियों का लेखा-जोखा न लिखे जाने के चलते ये तय कर पाना मुश्किल हो रहा था कि किसको कहां भेजें?
तब गुरु वशिष्ठ की इस गलती को समझते हुए भगवान राम ने अयोध्या में भगवान विष्णु द्वारा स्थापित भगवान चित्रगुप्त के मंदिर (श्री अयोध्या महात्मय में भी इसे श्री धर्म हरि मंदिर कहा गया है। धार्मिक मान्यता है कि अयोध्या आने वाले सभी तीर्थयात्रियों को अनिवार्यत: श्री धर्म-हरि जी के दर्शन करना चाहिये, अन्यथा उसे इस तीर्थ यात्रा का पुण्यफल प्राप्त नहीं होता।) में गुरु वशिष्ठ के साथ जाकर भगवान चित्रगुप्त की स्तुति की और गुरु वशिष्ठ की गलती के लिए क्षमा याचना की। इसके बाद भगवान राम का आग्रह मानकर भगवान चित्रगुप्त ने लगभग ४ पहर (२४ घंटे बाद ) पुन: कलम दवात की पूजा करने के पश्चात उसको उठाया और प्राणियों का लेखा-जोखा लिखने का कार्य आरम्भ किया।

कायस्थ, ब्राह्मणों के लिए भी पूजनीय- कहते हैं कि तभी से कायस्थ दीपावली की पूजा के पश्चात कलम को रख देते हैं और यम द्वितीया के दिन भगवान चित्रगुप्त का विधिवत कलम दवात पूजन करके ही कलम को धारण करते हैं। तभी से कायस्थ, ब्राह्मणों के लिए भी पूजनीय हुए और इस घटना के पश्चात मिले वरदान के फलस्वरूप सबसे दान लेने वाले ब्राह्मणों से दान लेने का हक़ सिर्फ कायस्थों को ही है।
श्री चित्रगुप्त भगवान की जय

राम मंदिर: तिरुपति देवस्थानम की तर्ज पर होगी दर्शन व्यवस्था

अयोध्या (एजेंसी)। रामजन्मभूमि में निर्माणाधीन भगवान राम मंदिर में कई तरह की विशिष्टताएं शामिल होंगी। मंदिर के वैज्ञानिक पद्धति से निर्माण के अलावा तिरुपति देवस्थानम की तर्ज पर ही दर्शन व्यवस्था लागू की जाएगी। हर आम और खास एक साथ दर्शन कर सकेंगे। सुरक्षा के कारणों से आम दर्शनार्थियों को रोकने के बजाय गैलरियां अलग-अलग कर दी जाएंगी। इसके अतिरिक्त दर्शन की ऐसी व्यवस्था रहेगी कि रामलला की परिक्रमा करते हुए श्रद्धालु 24 घंटे परिसर में व्यतीत कर सकेंगे।

रोपी जाएंगी रामायणकालीन वनस्पतियों की पांच सौ प्रजातियां- रामजन्मभूमि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का कहना है कि परिसर का अधिकांश भाग खुला होगा। पर्यावरण को स्वच्छ और हरियाली से भरपूर रखने के लिए यहां मौजूदा वृक्षों को काटा नहीं जाएगा बल्कि उन्हें जड़ों के साथ निर्धारित स्थान पर शिफ्ट कर दिया जाएगा। इसके साथ रामायणकालीन वनस्पतियों की पांच सौ प्रजातियों को रोपित किया जाएगा। बताया गया कि रामजन्मभूमि परिसर में कूड़ा निस्तारण के लिए सालिड वेस्ट मैनेजमेंट, शुद्ध पेयजल की उपलब्धता के लिए वाटर प्लांट एवं सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी स्थापित किया जाएगा।

वाहन पार्किंग व यात्री सुविधाओं के लिए व्यवस्था

रामजन्मभूमि ट्रस्ट महासचिव के अनुसार राम मंदिर का निर्माण भले ही तीन एकड़ में होगा लेकिन इसका परिसर दस एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में होगा। उन्होंने बताया कि राम मंदिर के बाहर साढ़े छह एकड़ की परिधि में परकोटे का निर्माण होगा। यह परकोटा जोधपुर के पत्थरों से निर्मित होगा। इसके बाहर रिटेनिंग वॉल का निर्माण किया जाएगा। रिटेनिंग वॉल का निर्माण सुपर स्ट्रक्चर के तीन तरफ अर्थात पश्चिम दिशा के अलावा उत्तर व दक्षिण में भी होगा। पूरे राम मंदिर के स्ट्रक्चर में अकेले रिटेनिंग वॉल में ही लोहे का उपयोग किया जाएगा। लोहे का जाल बनाकर कांक्रीटिंग की जाएगी।

राम मंदिर के पहले चरण का काम पूरा

अयोध्या। राम मंदिर के पहले चरण का काम पूरा हो गया है। दूसरा चरण बारिश के बाद शुरू होगा। मंदिर निर्माण ट्रस्ट के सचिव चंपत राय ने बताया कि 11,000 क्यूबिक मीटर की चट्टान ढाली गई है। यह जमीन के अंदर चली जाएगी। यह अपने आप में एक अनौखा ढांचा है। यह नींव का प्रथम चरण है। बारिश का मौसम खत्म होने के बाद इसके ऊपर दूसरा चरण प्रारंभ हो जाएगा। विदित हो कि राम मंदिर का डिजाइन मशहूर आर्किटेक्ट चंद्रकांत सोमपुरा ने तैयार किया है। मंदिर का काम क़रीब एक साल पहले शुरू हुआ था। सर्वे से पता चला कि जहां मंदिर बनना था वहां नीचे ठोस ज़मीन ही नहीं थी। चंपत राय ने बताया कि सर्वे में सामने आया कि नीचे मिट्टी नहीं है। उन्होंने कहा कि नीचे मलबा मिला था, मलबे के अंदर तो कोई स्ट्रक्चर नहीं हो सकता। उसकी ग्रिप नहीं बनती, पकड़ नहीं बनती। इसीलिए मलबा हटाते-हटाते नीचे चले गए।

आज जहां मंदिर का गर्भ गृह बन रहा है, पहले कभी यहां सरयू नदी बहती थी या इसके नीचे से नदी की कोई धारा गुज़रती थी। क्योंकि खुदाई में 40 फ़ीट के नीचे भी सिर्फ बालू ही मिल रहा था। इसलिए मंदिर की बुनियाद के लिए साढ़े 15 मीटर मोटी कंक्रीट की यह चट्टान बनानी पड़ी। चंपत राय ने बताया कि 40 फ़ीट के बाद भी मिट्टी नहीं थी। केवल नदी का बालू था। कभी नदी बहती रही होगी, यही कारण है कि यह और गहरा होता गया। समुद्र तल से 91 मीटर के लेवल पर हमने चट्टान को भरना प्रारंभ कर दिया।

बता दें कि मंदिर के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश से 67 एकड़ जमीन मिली है। ट्रस्ट अपनी ज़रूरत के मुताबिक आसपास और समपत्तियां खरीद रहा है। जिनकी जमीनें खरीदी जा रही हैं, उन्हें बदले में दूसरी जगह जमीनें दी जा रही हैं। इस खरीद में घोटालों के भी आरोप लगे हैं। (सौजन्य से-इंडेविन टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क)

धूमधाम से मनाया गया विश्व हिंदू परिषद का स्थापना दिवस

विहिप मना रहा 57वां स्थापना दिवस, हिंदू जीवन मूल्यों व परंपराओं के प्रति लोगों को कर रहा जागरूक

धूमधाम से मनाया गया विश्व हिंदू परिषद का स्थापना दिवस

लखनऊ। विश्व हिंदू परिषद 57वां स्थापना दिवस मना रही है। परिषद की ओर से पूरे देश में जगह-जगह कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस बार देश के सभी जिला,प्रखंड से लेकर बस्तियां स्तर पर स्थापना दिवस मनाने की तैयारी की गई है। विहिप लखनऊ पूरब के कार्यकर्ताओं ने स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया।

गोमती नगर स्थित शिक्षण संस्थान एसकेडी एकेडमी के सभागार में विश्व हिंदू परिषद के स्थापना दिवस का कार्यक्रम विहिप के लखनऊ पूरब के कार्यकर्ताओं ने आयोजित किया। विहिप एवं बजरंग दल के जिला, प्रखंड, खंड एवं बस्तियों से सैकड़ों कार्यकर्ता जोश खरोश के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान श्री राम, श्री कृष्ण एवं भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित किया गया। कार्यक्रम का संचालन अलोपी शंकर मौर्य, अध्यक्षता पूर्व डीजीपी न्यायाधीश रेरा भानु प्रताप सिंह ने की। मुख्य रूप से मुख्य वक्ता विहिप के प्रांत संगठन मंत्री श्रीराजेश रहे। मुख्य अतिथि के रूप में स्वामी चैतन्य जी महाराज ने अपने आशीर्वचनों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।

विहिप के अवध प्रांत संगठन मंत्री श्री राजेश के वक्तव्य:-
जन्माष्टमी के दिन ही 1964 में मुंबई स्थित चिन्मय मिशन के संस्थापक चिन्मयानंद महाराज के संदीपनी साधनालय में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के द्वितीय सरसंघचालक माधव राव सदाशिव राव गोलवलकर उर्फ श्रीगुरुजी की प्रेरणा तथा संघ के वरिष्ठ प्रचारक परिषद के प्रथम महामंत्री शिवराम शंकर आप्टे के कुशल संयोजन से इसकी स्थापना हुई थी। स्थापना के मौके पर अकाली दल के मास्टर तारासिंह, राष्ट्रसंत तूकड़ो जी महाराज, जैन संत सुशील मुनि, कन्हैैयालाल माणिकाल मुंशी, गीताप्रेस के संस्थापक हनुमान दास पोद्दार जैसे देश के अनेक संत उपस्थित थे। उसके बाद से अब तक विहिप हिंदू जीवन मूल्यों, परंपराओं व मानबिंदुओं की रक्षा, संवर्द्धन प्रचार तथा विश्व के कल्याणार्थ कार्य कर रही है। हिंदुओं को जागरूक करने का काम लगातार जारी है। इसके लिए समय-समय पर समाज के सहयोग से आंदोलन भी चलाए जाते हैं। 57 वर्षों में विश्व हिंदू परिषद श्रीराम जन्मभूमि निधि समर्पण अभियान के माध्यम से देश के 5.25 लाख गांवों तक पहुंचने का काम किया है।

सात अक्टूबर 1984 को अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का संतों ने लिया था संकल्प
सात अक्टूबर,1984 अयोध्या में सरयू नदीं के तट पर रामभक्तों ने महंत अवैद्यनाथ, रामचंद्र दास, नृत्यगोपाल दास व अशोक सिंघल आदि प्रमुख लोगों की उपस्थिति में संकल्प लिया कि जहां राम का जन्म हुआ है वहां भव्य मंदिर बनाएंगे। उसके बाद सबसे बड़ा अहिंसक जनआंदोलन प्रारंभ किया गया। श्री राम जन्मभूमि आंदोलन के अंतर्गत देश के साढ़े तीन लाख गांवों में श्रीरामशिला पूजन हुआ। 9 नवंबर 1989 को कामेश्वर चौपाल के हाथों राम मंदिर का शिलान्यास हुआ। अंतत: पांच अगस्त, 2020 को भव्य मंदिर का भूमिपूजन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों किया गया। आज हम सभी भव्य मंदिर बनते हुए देख रहे हैं।अपने स्थापना काल से ही विहिप मतांतरण के खिलाफ लोगों को जागरूक कर रही है। जो लोग मतांतरित हो चुके हैं उनकी वापसी के लिए भी प्रयासरत है। एक लाख से अधिक एकल विद्यालय के माध्यम से भी विहिप ग्रामीण इलाकों में बच्चों को शिक्षित करने का काम कर रही है। इसके साथ ही मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। विहिप ने दलित समाज के लोगों को पूजारी का प्रशिक्षण दिलाकर मंदिरों में रखवाने का काम किया है। आज तेजी से अस्पृश्यता उन्मूलन के लिए काम किया जा रहा है। समाज को तोडऩे वाली शक्तियों के प्रति लोगों को जागरूक करने का काम जारी है। अगले दो वर्षों में पूरे देश में पहुंचने की योजना है।

इस अवसर पर विहिप के विभाग मंत्री विजय प्रकाश शुक्ला, संगठन मंत्री लव कुश, प्रचार प्रमुख नृपेंद्र विक्रम सिंह, वरिष्ठ पत्रकार जिला मंत्री धर्मेंद्र सिंह गौर, कार्याध्यक्ष वीरेंद्र प्रताप, सह मंत्री दिग्विजय नाथ तिवारी एवं अन्य प्रमुख लोग मौजूद रहे।

जहर पिया कल्याण ने बीजेपी ने अमृत

लखनऊ। जब ढांचा टूट रहा था तब कल्याण सिंह 5 कालिदास मार्ग… मुख्यमंत्री आवास की छत पर आराम से जाड़े की धूप सेंक रहे थे… अगर तब कल्याण सिंह नहीं होते तो आज भूमिपूजन भी नहीं होता।

  • एक छोटे कद का आदमी… जो दिखने में बहुत सुंदर नहीं था… काला रंग…चेहरे पर दाग… लेकिन संघर्षों में तपा हुआ व्यक्तित्व… ऐसी पर्सनेलिटी की जहां वो पहुंच जाए वहां बड़े से बड़े नेता का कद छोटा हो जाए । व्यक्तित्व की धमक ऐसी बड़े बड़े किरदार बौने दिखने लगें… ऐसे थे कल्याण सिंह
  • कल्याण सिंह ऐसे इसलिए थे क्योंकि उनकी कथनी और करनी में कोई फर्क नहीं था… उनके दिल और दिमाग में कोई अंतर नहीं था… उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा उसूल था… भगवान राम की भक्ति… भगवान राम के प्रति के समर्पण को लेकर उन्होंने कभी कोई समझौता नहीं किया
  • 1990 में लाल कृष्ण आडवाणी ने राम मंदिर निर्माण के लिए जनसमर्थन इकट्ठा करने का लक्ष्य लेकर राम रथयात्रा निकाली । बिहार में तब लालू यादव मुख्यमंत्री थे और उन्होंने आडवाणी को गिरफ्तार कर लिया । जिसके बाद राम राथ यात्रा को भारी मात्रा में जनसमर्थन मिल गया और उत्तर प्रदेश में पहली बार बीजेपी की सरकार चुन ली गई जिसके मुख्यमंत्री कल्याण सिंह चुने गए
  • जून 1991 में कल्याण सिंह मुख्यमंत्री बने और इसके बाद राम मंदिर आंदोलन का नेतृत्व कर रहे विश्व हिंदू परिषद में उत्साह की लहर दौड़ गई और उसने ये घोषणा कर दी कि 6 दिसंबर 1992 को राम मंदिर का निर्माण आरंभ किया जाएगा
  • वीएचपी की घोषणा के वक्त मुख्यमंत्री के पद पर कल्याण सिंह थे और प्रदेश की कानून व्यवस्था को संभालने का पूरा जिम्मा कल्याण सिंह पर था । वीएचपी की घोषणा के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री पी वी नरसिम्हा राव के कान खड़े हो गए और उन्होंने बातचीत के लिए कल्याण सिंह को दिल्ली बुलाया
  • कल्याण सिंह से पी वी नरसिम्हा राव ने कहा कि इस मामले को सुप्रीम कोर्ट पर छोड़ दीजिए लेकिन कल्याण सिंह ने साफ जवाब दिया कि विवाद का एक ही हल है और वो ये कि बाबरी मस्जिद की जमीन हिंदुओं को सौंप दी जाए । इस तरह बात नहीं बनी और केंद्र – राज्य के बीच टकराव तय हो गया

-नरसिम्हा राव ने ऐहतियात बरतते हुए पहले ही केंद्रीय सुरक्षा बल अयोध्या रवाना कर दिए… केंद्रीय सुरक्षा बल अयोध्या के चारों तरफ फैला दिए गए

  • 6 दिसंबर तक अयोध्या में राम जन्मभूमि के आस पास 3 लाख कारसेवक इकट्ठे हो गए थे… ऐसे में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन के पास पूरी ताकत थी कि वो कारसेवकों पर गोली चला सकती थी… इससे पहले भी जब मुलायम सिंह यादव की सरकार थी तब मुलायम सिंह यादव ने कारसेवकों पर गोली चलवाई थी
  • कल्याण सिंह को इस बात का अंदेशा लग गया था कि 6 दिसंबर को कारसेवकों को कंट्रोल करने के लिए उनपर फायरिंग का आदेश कोई भी अधिकारी दे सकता है । इसलिए कल्याण सिंह ने 5 दिसंबर की शाम को ही समस्त अधिकारियों को एक लिखित आदेश जारी किया था और वो ये था कि कोई भी कारसेवकों पर गोली नहीं चलाएगा ।
  • ये फैसला लेना… संवैधानिक पद पर बैठे हुए किसी व्यक्ति के लिए आसान नहीं था । कल्याण सिंह इस बात को जानते थे कि जब वो ये फैसला ले रहे हैं तो अगर अयोध्या में कुछ हो जाता है तो इससे उनकी कुर्सी चली जाएगी… सारी दुनिया उन पर आरोप लगाएगी… ये कहा जाएगा कि कल्याण सिंह एक अराजक मुख्यमंत्री हैं… ये आरोप ही मंदिर आंदोलन का वो विष था… जिसे कल्याण सिंह ने अमृत मानकर पी लिया ।

-आखिर वही हुआ 6 दिसंबर 1992 को दोपहर साढ़े 11 बजे कारसेवक ढांचे को तोड़ने लगे… कल्याण सिंह को पल पल की खबर मिल रही थी…. लेकिन वो आराम से अपने मुख्यमंत्री आवास पर जाड़े की धूप सेंक रहे थे… दिल्ली से फोन घनघना रहे थे लेकिन कल्याण सिंह ने राम भक्ति को प्राथमिकता दी और किसी की कोई बात नहीं सुनी

  • केंद्र से गृहमंत्री चव्हाण का फोन आया और उन्होंने कहा कि कल्याण जी मैंने ये सुना है कि कारसेवक ढांचे पर चढ गए हैं तब कल्याण सिंह ने जवाब दिया कि मेरे पास आगे की खबर है और वो ये है कि कारसेवकों ने ढांचा तोड़ना शुरू भी कर दिया है लेकिन ये जान लो कि मैं गोली नहीं चलाऊंगा गोली नहीं चलाऊंगा गोली नहीं चलाऊंगा
  • कल्याण सिंह के पूरे व्यक्तित्व और महानता का दर्शन सिर्फ इसी एक लाइन से हो जाता है… कि मैं गोली नहीं चलाऊंगा… मैं गोली नहीं चलाऊँगा… मैं गोली नहीं चलाऊंगा । ढांचा टूट रहा था और केंद्रीय सुरक्षा बल विवादित स्थल पर आने की कोशिश कर रहे थे लेकिन कल्याण सिंह ने ऐसी व्यवस्था करवा दी कि केंद्रीय सुरक्षा बल भी ढांचे तक नहीं पहुंच सके और आखिरकार ढांचा टूट गया… वो कलंक… वो छाती का शूल… वो बलात्कार अनाचार का दुर्दम्य प्रतीक भारत मां की छाती से हटा दिया गया… चारों तरफ हर्ष फैल गया… जन्मभूमि मुक्त हो गई
  • नरसिम्हा राव अब कल्याण सिंह की सरकार को बर्खास्त करने का फैसला लेने जा रहे थे लेकिन उससे पहले ही शाम साढे 5 बजे कल्याण सिंह राजभवन गए राज्यपाल से मिले और अपना इस्तीफा सौंप दिया… यानी कुर्सी छोड़ दी लेकिन गोली नहीं चलाई… सिंहासन को लात मार दिया और श्री राम की गोद में बैठ गए… श्रीराम के प्यारे भक्त बन गए । ऐसे थे हमारे कल्याण सिंह
  • अगर कल्याण सिंह नहीं होते तो शायद किसी और मुख्यमंत्री में ये फैसला लेने की ताकत नहीं होती । कल्याण सिंह ने इसलिए भी गोली ना चलाने का लिखित आदेश दिया ताकि कल को कोई अफसरों को जिम्मेदार नहीं ठहराए । कल्याण सिंह ने कहा कि सारी जिम्मेदारी मेरी है जो करना है वो मेरे साथ करो । सजा मुझे दो ।
  • अगर कल्याण सिंह नहीं होते तो बाबरी नहीं गिरती… अगर बाबरी की दीवारें नहीं गिरतीं तो पुरातत्विक सर्वेक्षण नहीं होता… बाबरी की दीवार के नीचे मौजूद मंदिर की दीवार नहीं मिलती… कोर्ट में ये साबित नहीं हो पाता कि यही रामजन्मभूमि है ।
  • उस कलंक के मिटने का जो शुभ कार्य हुआ…. उसका श्रेय स्वर्गीय कल्याण सिंह जी को है… 6 दिसंबर कल्याण सिंह के पॉलिटिकल करियर को कालसर्प की तरह डस गया लेकिन कल्याण सिंह का यश दिग दिगंत में फैल गया ।
  • सबसे जरूरी बात अगर कल्याण सिंह ने गोली चलवा दी होती तो बीजेपी और एसपी में कोई फर्क नहीं रह जाता और आज मोदी प्रधानमंत्री भी नहीं होते इसीलिए ये सत्य है कि जहर पिया कल्याण ने अमृत पिया बीजेपी ने ।

मैं उस पुण्य आत्मा को अपने हृदय और आत्मा में मौजूद समस्त ऊर्जा के साथ नमन करता हूं… प्रणाम करता हूं… ईश्वर आपको मोक्ष दे

ये लेख अपने बच्चों को पढ़ाना… हर ग्रुप में शेयर कर देना, जय श्री राम

(नोट- मेरे कई मित्र ऐसे हैं जिन्होंने मेरा नंबर 7011795136 को दिलीप नाम से सेव तो कर लिया है लेकिन मिस्ड कॉल नहीं की है… जो मित्र मुझे मिस्ड कॉल भी करेंगे और मेरा नंबर भी सेव करेंगे… यानी ये दोनों काम करेंगे सिर्फ उनको ही मेरे लेख सीधे व्हाट्सएप पर मिल पाएंगे… व्हाट्सएप स्टेटस पर भी आर्टिकल के लिंक होते हैं) साभार

श्रीराम एयरपोर्ट के लिए मोदी सरकार ने दिए ₹250 करोड़

श्रीराम एयरपोर्ट के लिए मोदी सरकार ने भी खोला खजाना, दिए ₹250 करोड़।
उत्तर प्रदेश का पांचवां अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट होगा. यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर की सारी सुविधाएं होंगी. एयरपोर्ट बनते ही कमर्शियल ऑपरेशन शुरू कर दिया जाएगा।

लखनऊ। राम नगरी अयोध्या में निर्माणाधीन मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम एयरपोर्ट के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने 250 करोड़ रुपये दिए हैं. इस पहल के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीएम मोदी का आभार जताया है. सीएम योगी ने ट्वीट कर कहा, भगवान राम की पावन नगरी अयोध्या में निर्माणाधीन मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम एयरपोर्ट के निर्माण हेतु केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की गई 250 करोड़ रुपये की धनराशि हेतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हार्दिक आभार एवं केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी का धन्यवाद।

इससे पहले योगी सरकार ने अपने कार्यकाल का अंतिम पूर्ण बजट पेश क‍िया था। जनपद अयोध्या में निर्माणाधीन एयरपोर्ट का नाम मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम हवाईअड्डा होगा. इसके लिए 101 करोड़ रुपये की व्‍यवस्‍था की गई है. इस प्रकार राज्य में शीघ्र ही 4 अन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट लखनऊ, वाराणसी, कुशीनगर व गौतमबुद्धनगर में होंगे. अलीगढ़, आजमगढ़, मुरादाबाद और श्रावस्ती एयरपोर्ट का विकास लगभग पूर्ण हो गया है. चित्रकूट और सोनभद्र में एयरपोर्ट का निर्माण कार्य मार्च तक पूरा होने की बात कही गई है।

अयोध्या के जिलाधिकारी अनुज झा ने जानकारी देते हुए बताया कि नागरिक उड्डयन सचिव प्रदीप सिंह करोला ने डेलिगेशन भी नामित कर दिया है. यह दल समय-समय पर एयरपोर्ट का निरीक्षण करेगा. बताते चलें कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम एयरपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ड्रीम प्रोजेक्ट है. यह उत्तर प्रदेश का पांचवां अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट होगा. यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर की सारी सुविधाएं होंगी. एयरपोर्ट बनते ही कमर्शियल ऑपरेशन शुरू कर दिया जाएगा।

सौजन्य से- Kridha’s icecream parlour Neelkamal Road civil lines Bijnor

राम मंदिर निर्माण के लिए बीबीडी ग्रुप ने दिये 20 लाख रु

राम मंदिर निर्माण के लिए बीबीडी ग्रुप ने दिये 20 लाख रु.
लखनऊ। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए इस समय लोग खुले मन से दान दे रहे हैं। इनमें राजनेताओं से लेकर समाजसेवी और आम जन तक शामिल हैं। भले ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने मंदिर निर्माण के लिए दान लेने का अभियान छेड़ा है, परंतु वास्तविकता यह है कि लोग स्वयं श्रद्धा भाव से दान देने के लिए आगे आ रहे हैं। इसी कड़ी में बीबीडी ग्रुप की चेयरपर्सन श्रीमती अलका दास गुप्ता और बीबीडी ग्रुप के प्रेसीडेंट विराज सागर दास ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले को मंदिर निर्माण के लिए 20 लाख रुपये का चेक सौंपा। इस अवसर पर संघ के प्रांत प्रचारक कौशल किशोर तथा प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य प्रशांत भाटिया भी मौजूद थे।

इस अवसर पर श्रीमती अलका दास ने कहा कि हम सबकी कामना है कि अयोध्या में श्रीराम जन्मस्थली पर ऐसे भव्य मंदिर का निर्माण हो, जो समूचे विश्व को चकित कर दे। इससे भारत की अस्मिता और गौरव पूरी दुनिया में नये सिरे से प्रतिष्ठित होंगे। उन्होंने कहा कि पूरा देश भव्य मंदिर निर्माण की आकांक्षा रखता है और लोग चाहते हैं कि रामलला शीघ्र से शीघ्र अपने वास्तविक आसन पर विराजमान हों। श्रीमती अलका दास और विराज सागर दास ने इस मौके पर पदाधिकारियों को शुभकामनाएं भी दीं।

गांव-गांव घुमाई जाएगी राम मंदिर की झांकी

26 जनवरी पर राजपथ की परेड में मिला है पहला स्थान
पहली बार उत्तर प्रदेश के खाते में आया प्रथम पुरस्कार

लखनऊ। गणतंत्र दिवस पर देश की राजधानी दिल्ली में पहला स्थान पाने वाली यूपी की राम मंदिर की झांकी की प्रतिकृति को प्रदेश में गांव-गांव में घुमाया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सर्वश्रेष्ठ झांकी का पुरस्कार मिलने को गर्व का क्षण बताया है। उन्होंने खुशी जताते हुए कहा कि यह प्रदेश के लिए प्रसन्नता और गर्व का अवसर है। झांकी के इस प्रतिरूप को प्रदेश में भी दिखाया जाएगा। जहां-जहां से यह झांकी गुजरेगी, वहां जनता इसका स्वागत करेगी और पुष्पवर्षा की जाएगी।

अब सरकार श्रीराम मंदिर मॉडल की झांकी की प्रतिकृति का भ्रमण प्रदेश के गांव-गांव तक में कराएगी। उत्तर प्रदेश सरकार की श्रीराम मंदिर मॉडल की झांकी देश में सर्वोत्तम रही। राजपथ में झांकी में प्रथम पुरस्कार पहली बार प्रदेश के खाते में आया है। इसे गौरव का क्षण बताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अब प्रदेश भर में इस झांकी का भ्रमण कराने का निर्देश दिया। उत्तर प्रदेश प्रदेश सरकार के सूचना विभाग ने इस बार अयोध्या में निमार्णाधीन श्रीराम मंदिर मॉडल की झांकी निकाली।


झांकी में प्रदेश की बेहद संपन्न विरासत और संस्कृति की झलक- अपर मुख्य सचिव

दिल्ली में गुरुवार को केंद्रीय युवा कल्याण और खेल मंत्री किरेन रिजूजू ने उत्तर प्रदेश के सूचना विभाग को पुरस्कार सौंपा। लखनऊ लौटकर मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पर अपर मुख्य सचिव सूचना डॉ. नवनीत सहगल और सूचना निदेशक शिशिर ने मुख्यमंत्री को पुरस्कार सौंपा। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि झांकी में प्रदेश की बेहद संपन्न विरासत और संस्कृति की झलक दिखाई गई है। अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर मॉडल के अलावा रामायण के प्रमुख दृश्य और रामायण की रचना करते हुए महर्षि वाल्मीकि भी आकर्षण का केंद्र रहे।  शबरी के झूठे बेर खाते हुए प्रभु श्रीराम के साथ अन्य दृश्यों और संगीत के जरिए सामाजिक समरसता का संदेश देने की कोशिश की गई है। सूचना निदेशक ने इस उपलब्धि को टीमवर्क का नतीजा बताया।

UP की श्रीराम मंदिर झांकी को प्रथम पुरस्कार

गणतंत्र दिवस परेडः उत्तर प्रदेश की झांकी श्रीराम मंदिर को प्रथम पुरस्कार
नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस को राजपथ पर हुई परेड में इस साल उत्तर प्रदेश की ‘अयोध्या में श्रीराम मंदिर’ झांकी को प्रथम स्थान मिला है। दूसरे स्थान पर त्रिपुरा और तीसरे स्थान पर उत्तराखंड की झांकी रही।

केंद्रीय खेल एवं युवा कल्याण मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को रविंद्र रंगशाला में आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में उत्तर प्रदेश की झांकी को प्रथम स्थान प्राप्त होने पर राज्य के अपर मुख्य सचिव (सूचना) नवनीत सहगल एवं निदेशक (सूचना) शिशिर को ट्राफी प्रदान की। परेड में 17 राज्यों ने झांकी प्रस्तुत की थी। त्रिपुरा की ‘पर्यावरण हितैषी आत्म निर्भर’ झांकी को दूसरा स्थान मिला है। उत्तराखंड की झांकी ‘केदारखंड’ को तीसरा स्थान मिला है। इस झांकी में केदारनाथ के परिसर को पुननिर्माण को दर्शाया गया। उत्तराखंड की झांकी को पहली बार पुरस्कृत किया गया है।

उत्तर प्रदेश की झांकी के प्रथम भाग में महर्षि वाल्मीकि को रामायण की रचना करते हुए दर्शाया गया। मध्य भाग में जनभावनाओं एवं भक्ति से जुड़े अयोध्या की सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक श्रीराम मन्दिर की प्रतिकृति प्रदर्शित की। इसके अलावा झांकी में भगवान राम का निषादराज को गले लगाना, शबरी के बेर खाना, अहिल्या उद्धार, केवट संवाद, भगवान हनुमान द्वारा संजीवनी बूटी लाना, जटायू राम संवाद, अशोक वाटिका आदि के दृश्य भी थे। झांकी में अयोध्या के दीपोत्सव को भी दिखाया गया। इस उत्सव में लाखों दीप जलाये जाते हैं। वर्ष 2017 से लगातार भव्य दीपोत्सव के आयोजन को ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड’ में लगातार तीन बार रिकार्ड दर्ज कराया है। झांकी के दोनों ओर साध्वी एवं संतों को दिखाया, जो प्रभु राम के प्रति भक्ति भावना एवं अनन्य प्रेम को प्रदर्शित करते रहे। अयोध्या के राजा ब्रह्मा के पुत्र मनु के पुत्र इक्ष्वाकु की बसायी गयी अयोध्या उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक नगरी कहलाती है। इसे अष्टचक्र नवद्वार से युक्त अयोध्या कहा गया है, जिसका वर्णन अथर्ववेद में है।

श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए गोरक्षपीठ ने दिया 1 करोड़ 1 लाख रुपए का चंदा

गोरक्षपीठ ने दिया श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए 1 करोड़ 1 लाख रुपए का चंदा

गोरखपुर। अयोध्या में भव्य श्री राम मंदिर निर्माण का सपना गोरखपुर के पीठाधीश्वर ने कई दशक पहले देखा था। महंत दिग्विजय नाथ, महंत अवैद्यनाथ और मौजूदा पीठाधीश्वर महंत योगी आदित्यनाथ ने भी लंबी लड़ाई राम मंदिर के लिए लड़ी। आज जब श्री राम मंदिर निर्माण का यह सपना पूरा होने जा रहा है, तब गोरक्षपीठ ने भी दिल खोलकर भगवान श्री राम के मंदिर निर्माण के लिए दान दिया। गोरक्ष पीठ की तरफ से 1 करोड़ 1 लाख रुपए चंदा दिया गया। इस दौरान खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वहां मौजूद थे। सीएम योगी की उपस्थिति में गोरखपुर के उद्योगपतियों एवं व्यापारियों ने दिल खोलकर करीब पांच करोड़ रुपए दान दिया।

इस मौके पर श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि पूरे देश में लोग दिल खोलकर दान कर रहे हैं और देश की 50% से अधिक आबादी दान दे रही है। राय ने कहा, महंत अवैद्यनाथ और महंत दिग्विजय नाथ इस आंदोलन से जुड़े रहे हैं। महंत अवैद्यनाथ के चरणों में श्रद्धा सुमन अर्पित करने के लिए मैं गोरखपुर आया था। वह 1984 से जीवन उपरांत तक राम मंदिर निर्माण आंदोलन से जुड़े थे।

15 जनवरी से शुरू हुआ अभियान 27 फरवरी तक चलेगा-
श्रीराम जन्मभूमि पर राम मंदिर निर्माण के लिए 15 जनवरी से ‘निधि समर्पण अभियान’ की शुरुआत की गई। इसमें सबसे पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 5 लाख 1 सौ रुपये की धनराशि दान में दी। यह अभियान 27 फरवरी तक चलेगा। इसके तहत पांच लाख से अधिक गांवों में रहने वाले 12 करोड़ से अधिक परिवारों से संपर्क किया जाएगा।

बैंक अकाउंट नंबर-
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और पंजाब नेशनल बैंक ने टोल फ्री नंबर जारी किए हैं, जिन पर फोन कर के आप राम मंदिर निर्माण के लिए समर्पण निधि संबंधित जानकारी नि:शुल्क ले सकते हैं। सहयोग राशि कैसे और कहां देनी है, जैसे कई सवालों के जवाब आपको इन नंबर पर कॉल करके मिल जाएंगे। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ऑफिशियल वेबसाइट पर बैंक अकाउंट की सारी डिटेल दी गई है। वेबसाइट पर ट्रस्ट से जुड़े सभी बैंक अकाउंट की लिस्ट अपलोड की जा चुकी है। आप वहीं से बैंक अकाउंट डिटेल देखकर पैसे जमा कर सकते हैं। ट्रस्ट ने तीन बैंक अकाउंट डिटेल जारी की हैं। यह 3 अकाउंट स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा में हैं।

Fact Check: शिरडी साईं ट्रस्ट ने राम मंदिर डोनेशन को लेकर नहीं किया कोई बयान जारी, वायरल किया जा रहा दावा फ़र्ज़ी

Fact Check: शिरडी साईं ट्रस्ट ने राम मंदिर डोनेशन को लेकर नहीं किया कोई बयान जारी, वायरल किया जा रहा दावा फ़र्ज़ी है
(साभार-By Vishvas News Updated: December 13, 2019)

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज़)। अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ का फैसला आने के बाद से राम मंदिर से जुडी हुई कई पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हुईं। कभी अफ़ग़ानिस्तान और तुर्की की तस्वीरों को बाबरी मस्जिद की बता कर वायरल किया गया तो कभी अक्षय कुमार के नाम से राम मंदिर निर्माण के लिए पैसे देने की बात फैलाई गयी। अब इसी तरह सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रही है जिसमें यह दावा किया जा रहा है की शिरडी साईं ट्रस्ट ने राम मंदिर के निर्माण के लिए पैसे देने से इनकार कर दिया है।

विश्वास टीम ने वायरल दावे की पड़ताल की तो पाया की ऐसा कोई बयान ट्रस्ट की तरफ से जारी नहीं किया गया है। इस मामले की पुष्टि के लिए हमने शिरडी साईं ट्रस्ट के सीईओ (चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर) दीपक मदुलकर मुगलिकार से बात की और उन्होंने बताया कि वायरल किया जा रहा दावा पूरी तरह से फ़र्ज़ी है।

क्या है वायरल पोस्ट में?
फेसबुक ग्रुप Total ”Support Modi-Yogi” की तरफ से 11 दिसंबर को एक पोस्ट शेयर की गयी है जिसमे लिखा है, ”शिरडी साईं ट्रस्ट ने कहा की राम मंदिर दूसरे धर्म का मामला है….. हम वह कुछ भी नहीं दे सकते। हिन्दुओं आँखे खोलो। ”

इस पोस्ट को सोशल मीडिया पर मिलते-जुलते फ़र्ज़ी दावे के साथ बहुत-से यूजर शेयर कर रहे हैं।
पड़ताल-
सबसे पहले हमने गूगल पर shirdi sai trust on ram mandir कीवर्ड डाल कर न्यूज़ सर्च किया। तमाम जद्दोजहद के बाद भी हमें ऐसी कोई खबर नहीं मिली, जिसमें ऐसा कुछ कहा गया हो।

अब हमने ट्विटर पर शिरडी साईं ट्रस्ट के वेरिफाइड अकाउंट को तलाशना शुरू किया, लेकिन हमें इस नाम से कोई अकाउंट वेरिफाइड यानी ब्लू टिक वाला नज़र नहीं आया।

तमाम जगह दावे के तथ्यों को तलाश करने के बाद भी हमारे हाथ कोई सबूत नहीं लगा तो हम सीधे शिरडी साईं ट्रस्ट की ऑफिशियल वेबसाइट sai.org.in पर गए और वहां हमने इस मामले की पुष्टि के लिए शिरडी साईं ट्रस्ट के सीईओ (चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर) दीपक मदुलकर मुगलिकार से बात की। उन्होंने बताया, “ट्रस्ट की तरफ से राम मंदिर निर्माण के लिए पैसा देने या ना देने को लेकर ऐसा कोई भी ऑफिशियल बयान जारी नहीं किया गया है, वायरल किया जा रहा दावा पूरी तरह से फ़र्ज़ी है”।

अब बारी थी इस पोस्ट को फ़र्ज़ी हवाले के साथ वायरल करने वाले फेसबुक ग्रुप ”Total Support Modi-Yogi” की सोशल स्कैनिंग करने की। हमने पाया की इस पेज से एक ख़ास विचारधारा की पोस्ट शेयर की जाती हैं। इस ग्रुप के 74,852 मेंबर्स हैं।

निष्कर्ष: विश्वास टीम ने अपनी पड़ताल में पाया की शिरडी साईं ट्रस्ट के नाम से वायरल किया जा रहा बयान फ़र्ज़ी है। ट्रस्ट ने राम मंदिर निर्माण के लिए डोनेशन से जुडी कोई बयान जारी नहीं किया है।

राम मंदिर के लिए धन संग्रह अभियान

घर-घर जाकर सहयोग राशि एकत्र

नजीबाबाद (बिजनौर): मंडावली के समीपवर्ती ग्राम मुस्सेपुर में श्री राम जन्मभूमि अयोध्या में भव्य मंदिर निर्माण हेतु घर-घर जाकर सहयोग रूप में धनराशि एकत्र की गई। इस कार्य में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भारतीय जनता पार्टी, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद एवं गांव के गणमान्य नागरिकों की भागीदारी रही।
इस अवसर पर सहयोग समर्पण निधि अभियान में मुख्य रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मोहन सिंह, ऋषि पाल सिंह, वरिष्ठ भाजपा नेता चौधरी ईशम सिंह, राशन डीलर संघ के अध्यक्ष मनोज राठी, आचार्य रामेंद्र सिंह, पहल सिंह गुर्जर,भाजपा युवा मोर्चा से सुमित गुर्जर, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के तहसील संयोजक आशीष त्यागी, तुषार देशवाल, मोहित कुमार चौहान, प्रेम कुमार, छत्रपाल सिंह, पहल सिंह गुर्जर, खूब सिंह प्रजापति, मलखान सिंह, अमित कुमार, अवनीश राठी, हरपाल सिंह, रणबीर सिंह, अनिल कुमार, अनूप कुमार गुर्जर, रोशन सिंह, भीम सिंह प्रजापति, मामचंद कश्यप आदि ने घर-घर जाकर राम मंदिर निर्माण में सहयोग हेतु धनराशि एकत्र की।

मातृ मंडल सेवा भारती ने दी श्रीराम मंदिर के लिए 25000 की धनराशि

श्रीराम मंदिर के लिए मातृ मंडल सेवा भारती ने दिया ₹25 हजार

बिजनौर (मुरादाबाद): मातृ मंडल सेवा भारती चांदपुर की कार्यकत्रियों ने श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए 21000 की धनराशि जिला अध्यक्ष को सौंपी। उन्होंने भविष्य में अपने स्तर से और अधिक सहयोग करने के साथ ही अन्य लोगों से भी राम मंदिर में धन संग्रह कराने का भरोसा दिया।

मातृ मंडल सेवा भारती की नगर कार्यकारिणी की बैठक चांदपुर की शिवलोक कालोनी में जिला उपाध्यक्ष रचना त्यागी के आवास पर आयोजित की गई। बैठक में मुख्य अतिथि मातृ मंडल सेवा भारती के प्रांत संयोजिका देवी नंदा तथा विशिष्ट अतिथि जिला अध्यक्ष शोभा शर्मा रहीं। बैठक में चांदपुर कार्यकारिणी की पदाधिकारियों ने अपनी ओर से श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए 25000 रूपए की धनराशि जिलाध्यक्ष को सौंपी। इस अवसर पर प्रांत संयोजिका देवी नंदा ने कहा कि श्री राम मंदिर हिंदू समाज के लिए एक सपने के समान था। आज यह सपना पूरा हो रहा है तो प्रत्येक हिंदू को अपना फर्ज निभाने के लिए आगे आना चाहिए। कार्यकत्रियों को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष शोभा शर्मा ने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि हम हिंदू समाज की आस्था और प्रतिष्ठा श्रीराम मंदिर का निर्माण होते देख रहे हैं। सैकड़ों बरसों की लड़ाई लड़ने और अनगिनत श्री राम भक्तों के बलिदान के बाद आए इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनना हिंदू समाज के प्रत्येक व्यक्ति के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने भव्य श्री राम मंदिर निर्माण के लिए अधिक से अधिक सहयोग करने की अपील करते हुए कहा कि तन, मन या धन, जिस भी तरह अपनी भागीदारी निभा सकते हैं निभाएं। कार्यकत्रियों ने भरोसा दिलाया कि श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए भविष्य में भी आपस में मिलजुल कर और अधिक सहयोग करेंगी तथा अन्य लोगों से भी धन संग्रह कराने में अपनी भागीदारी निभाएंगी। बैठक में चांदपुर नगर अध्यक्ष प्रिंसा बस्सी, नगर उपाध्यक्ष सीमा शर्मा, नगर मीडिया प्रभारी नीलिमा त्यागी, नगर मंत्री संतोष सन्नाढय, सदस्य अभय सिंह, बीना मिश्रा, मेघा वर्मा व प्रिया तेवतिया आदि मौजूद रहीं।

राम मंदिर: विश्व हिंदू परिषद ने निकाली बाइक रैली

बिजनौर (मुरादाबाद): अयोध्या में भगवान श्री राम के भव्य मंदिर निर्माण के लिए प्रत्येक परिवार के सहयोग की अपेक्षा से विश्व हिंदू परिषद द्वारा नजीबाबाद के नांगल सोती क्षेत्र में विशाल बाइक रैली का आयोजन किया गया। इस दौरान गांव-गांव जाकर भगवान राम में आस्था रखने वाले सभी क्षेत्रवासियों से आग्रह किया गया कि वे राम मंदिर रूपी महायज्ञ में अपना सहयोग करके अपनी अपनी आहुति देने की कृपा करें।

बाइक रैली का नेतृत्व विश्व हिंदू परिषद के जिला प्रचार प्रमुख सिंधु राज सिंह, हिंदू जागरण मंच के जिला महामंत्री गौरव चिकारा, नांगल खंड के संघचालक सत्यपाल सिंह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बिजनौर धर्म जागरण के विभाग संयोजक शिवध्यान सिंह, जिला सह कार्यवाह गगन कंडवाल ने किया। बाइक रैली गांव चंदोक के जीतमल देवता से प्रारंभ होकर सुंगरपुर बेहड़ा, लालपुर सौजीमल, गौसपुर, तिसोतरा, अलीपुरद्वारका, पूंडरी खुर्द, बरकातपुर, दिनौड़ी, मानपुर, महनमशापुर, सौफतपुर, हरचंदपुर, मायापुरी, चमरौला, अभिपुरा, जयपुर, मंडावली, मूसेपुर, मीरमपुर बेगा, करौली, काशीरामपुर, आलम सराय, शहजादपुर, नांगल आदि गांव में भ्रमण कर जोशीले अंदाज में भगवान श्रीराम के नारे लगाते हुए निकाली गई। इस दौरान ग्राम वासियों से मंदिर निर्माण में सहयोग की अपील की गई। बाइक रैली में मुख्य रूप से भाजपा नांगल मंडल के अध्यक्ष आर्य वीरेंद्र शर्मा, वरिष्ठ भाजपा नेता चौधरी ईशम सिंह, महामंत्री अंकित शर्मा, अरविंद विश्वकर्मा, अवनीश जोशी, सतपाल सिंह पाल, मनोज जाट, हेमन्त, केशव कुमार, रजनीश कुमार, ओंकार आजाद, पंकज पाल, मोहन सिंह, सुमित, आशू, वंश, हनी, सत्यम चौधरी, शोभित चौधरी, सूर्यांश उपाध्याय, अमित त्यागी, महामंत्री एडवोकेट अंकित शर्मा, नरेश कुमार, संदीप राजपूत, रामकुमार सिंह प्रधान आदि ने भाग लिया।