किसानों को 6 हजार सालाना देने के खिलाफ उतरे ताकतवर देश

किसानों को 6 हजार सालाना देने के खिलाफ उतरे ताकतवर देश, भारत ने दिया मुंहतोड़ जवाब

नई दिल्ली (एजेंसी)। वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन यानी WTO की बैठक जेनेवा में हुई। इसमें अमेरिका और यूरोपीय देशों ने मोदी सरकार द्वारा भारतीय किसानों को दी जाने वाली एग्रीकल्चरल सब्सिडी का विरोध किया। किसानों को सालाना दिये जाने वाले रुपए 6000 रुपए भी एग्रीकल्चरल सब्सिडी में शामिल है। ऐसे में इसे रोकने के लिए अमेरिका और यूरोप ने पूरी ताकत झोंक दी है। भारत ने भी इस मुद्दे पर ताकतवर देशों के आगे झुकने से इनकार कर दिया है।

12 जून से 15 जून 2022 तक जेनेवा में WTO की बैठक का आयोजन हुआ। बैठक में 164 सदस्य देशों वाले WTO के G-33 ग्रुप के 47 देशों के मंत्रियों ने हिस्सा लिया। भारत की ओर से केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल शामिल हुए। इस साल होने वाली WTO की बैठक में इन 3 अहम मुद्दों पर प्रस्ताव लाने की तैयारी की गई…1. कृषि सब्सिडी को खत्म करने के लिए. 2. मछली पकड़ने पर अंतरराष्ट्रीय कानून बनाने के लिए 3. कोविड वैक्सीन पेटेंट पर नए नियम लाने के लिए। अमेरिका, यूरोप और दूसरे ताकतवर देश इन तीनों ही मुद्दों पर लाए जाने वाले प्रस्ताव के समर्थन में थे, जबकि भारत ने इन तीनों ही प्रस्ताव पर ताकतवर देशों का जमकर विरोध किया। भारत ने ताकतवर देशों के दबाव के बावजूद एग्रीकल्चरल सब्सिडी को खत्म करने से इनकार कर दिया है। वहीं अब इस मामले में भारत को WTO के 80 देशों का साथ मिला है।

अमेरिका और यूरोप चाहते हैं कि भारत अपने यहां किसानों को दी जाने वाली हर तरह की एग्रीकल्चरल सब्सिडी को खत्म करे. इसमें ये सारे एग्रीकल्चरल सब्सिडी में शामिल हैं- PM किसान सम्मान निधि के तहत दिए जाने वाले सालाना 6 हजार रुपए, यूरिया, खाद और बिजली पर दी जाने वाली सब्सिडी। अनाज पर MSP के रूप में दी जाने वाली सब्सिडी। अमेरिका जैसे ताकतवर देशों का मानना है कि सब्सिडी की वजह से भारतीय किसान चावल और गेहूं का भरपूर उत्पादन करते हैं।बइसकी वजह से भारत का अनाज दुनिया भर के बाजार में कम कीमत में मिल जाता है। अमेरिका और यूरोपीय देशों के अनाज की कीमत ज्यादा होने की वजह से विकासशील देशों में इसकी बिक्री कम होती है। यही वजह है कि दुनिया के अनाज बाजार में दबदबा कायम करने के लिए ताकतवर देश भारत को एग्रीकल्चरल सब्सिडी देने से रोकना चाहते हैं। भारत इसे मानने के लिए तैयार नहीं है। WTO में भले ही अमेरिका और दूसरे ताकतवर देश विकासशील देशों के किसानों को सब्सिडी देने से मना करते हों, लेकिन खुद अमेरिका अपने देश के समृद्ध किसानों को सब्सिडी देने में दूसरे देशों से कहीं आगे है, वो भी तब, जब अमेरिकी किसानों की सालाना आय भारतीय किसानों से 52 गुना ज्यादा है।

कोरोना में अनाथ हुए बच्चों को शासन से सहायता


कोविड काल में अपने माता-पिता खो चुके अनाथ बच्चों की हर संभव सहायता के लिए अभिभावक के रूप में वे स्वयं हर समय तत्पर हैं, उनकी किसी भी समस्या को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित किया जाएगा, जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने बच्चों को किया आश्वस्त

बिजनौर। जिलाधिकरी उमेश मिश्रा ने कोविड काल में अपने माता-पिता खो चुके अनाथ बच्चों को आश्वस्त करते हुए कहा कि उनकी हर सहायता के लिए अभिभावक के रूप में वे स्वयं हर समय तत्पर हैं, उनकी किसी भी समस्या को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित किया जाएगा तथा उनकी हर संभव सहायता की जाएगी। उन्होंने कहा कि उनके भविष्य को उज्जवल और उनके जीवन को सफल बनाने के लिए पूरा देश उनके साथ खड़ा है। उन्होंने बताया कि कोविड काल में अनाथ बच्चों के लिए केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य और पालन-पोषण के लिए न केवल उनकी आर्थिक मदद की बल्कि उनके मनोबल को बढ़ाने और उन्हें मजबूत बनाने के लिए उनकी काउन्सिलिंग की व्यवस्था भी की गई है, ताकि वे बिना किसी मानिसक एवं शारीरिक बाधा के जीवन में सफलता की उॅंचाई पर पहुंच सकें।
इस अवसर पर पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना के अंतर्गत एनआईसी बिजनौर में प्रधानमंत्री भारत सरकार के द्वारा ऐसे सभी बच्चे जिनके माता-पिता अर्थात एक की मृत्यू पूर्व में हो गई हो तथा दूसरे की मृत्यू 11 मार्च,20 से 31 दिसम्बर,21 के बीच कोविड से ग्रस्त होने के कारण हुई हो या कानूनी अभिभावक/दत्तक माता-पिता/एकल दत्तक माता-पिता 11 मार्च,20 से 31 दिसम्बर,21 के बीच कोविड-19 से हुई हो, ऐसे बच्चों को सभी आवश्यक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से विगत 29 मई,21 को लांच की गई योजनातंर्गत जिले के 09 बच्चों को दस्तावेज प्रदान की गईं।
उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत उक्त योजना के लाभ के हकदार बच्चों के माता-पिता दोनों या जीवित माता/पिता या कानूनी अभिभावक/दत्तक माता-पिता/एकल दत्तक माता-पिता जैसी भी स्थिति हो, की मृत्यु के दिनांक को बच्चे की आयु 18 वर्ष पूरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि पी० एम० केयर्स फॉर चिल्ड्रेन योजना के अन्तर्गत अनाथ बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ, बीमा आदि हेतु रू0 10 लाख (दस लाख) की कार्पस फण्ड के रूप में सहायता प्रदान किये जाने का प्रावधान किया गया है। पी० एम० केयर्स फॉर चिल्ड्रेन योजना के अन्तर्गत जिले में कुल 09 अनाथ बच्चों को पात्रता के आधार पर लाभान्वित किया है।
जिलाधिकारी श्री मिश्रा द्वारा उक्त योजना के तहत अनाथ बच्चों को आयुष्मान भारत- प्रधान मंत्री जन आरोग्य योजना(आयुष्मान कार्ड) के द्वारा लाभान्वित जिसके अन्तर्गत रू० 05 लाख का स्वास्थ्य बीमा वार्षिक से लाभान्वित कराये जाने संबंधी प्रपत्र, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के अन्तर्गत रू० 4 हजार प्रति माह की दर से लाभान्वित होने, रू0 10 लाख कार्पस फण्ड के रूप में पी० एम० केयर्स योजना के अन्तर्गत बच्चों के खातों में पी0 एफ0 एम० एस० के माध्यम से अन्तरित किए जाने तथा पी० एम० केयर्स योजना के अन्तर्गत कक्षा 01 से कक्षा 12 तक स्कूल जाने वाले लाभार्थी बच्चों को रू० 20000 की वार्षिक छात्रवत्ति (स्कॉलरशिप फॉर पी० एम० केयर्स फॉर चिल्ड्रेन) से प्रदान किये जाने की व्यवस्था है, जिसमें रू0 1000/प्रति माह एक वर्ष तक कुल रू0 12000/- तथा रू0 8000/- बच्चे की किताबें, वर्दी, जूते एवं शिक्षा से सम्बन्धित अन्य सामग्री दिये जाने का प्रावधान है, सम्बन्धित दस्तावेज उपलब्ध कराए गए।
दस्तावेज वितरण से पहले प्रधानमंत्री का संम्बोधन किया गया, जिसमें बच्चों को प्रोत्साहित करते हुए कहा गया कि हर बड़े व्यक्ति जिसका नाम इतिहास में दर्ज है, का जीवन संघर्षपूर्ण और विभिन्न कठिनाईयों से झूझते हुए गुजरा है, परन्तु उन्होंने हार नहीं मानी और जीवन में सफलता की चरम सीमा पर पहुंचे और आमलोगों के मार्गदर्शक बने। उन्होंने बच्चों को आश्वस्त करते हुए कहा कि आप लोग संघर्ष करें पूरा देश आपको सहयोग, सहायता और मार्गदर्शन करने के लिए तत्पर है।
इस अवसर पर पूर्व सांसद भारतेन्द्र सिंह, जिला प्रोवेशन अधिकारी के अलावा अन्य अधिकारीगण मौजूद थे।

कोविड-19 अपडेट

कोविड-19 अपडेट

नई दिल्ली। राष्ट्रव्यापी कोविड टीकाकरण के तहत अब तक 187.46  करोड़ से अधिक टीके लगाए जा चुके हैं। Ministry of Health and Family Welfare की ओर से उक्त जानकारी देते हुए बताया गया है कि वर्तमान में भारत में सक्रिय मरीजों की संख्या 15,079  है। सक्रिय मामलों की दर 0.04 प्रतिशत है, जबकि स्वस्थ होने की वर्तमान दर 98.75 प्रतिशत है। बीते चौबीस घंटों में 1,656 लोग स्वस्थ हुए,अब तक स्वस्थ हुए कुल लोगों की संख्या 4,25,17,724 है। पिछले 24 घंटों में 2,527 नए मामले सामने आए। दैनिक सक्रिय मामलों की दर 0.56 प्रतिशत है। साप्ताहिक सक्रिय मामलों की दर 0.50 प्रतिशत है। अब तक 83.42 करोड़ जांच की जा चुकी हैं,बीते चौबीस घंटों में 4,55,179 जांच की गई

कोरोना की चौथी लहर को लेकर संभावना?

नई दिल्ली(एजेंसी)। देश के कई राज्यों में कोरोना वायरस के मामले फिर से बढ़ने शुरू हो गए है। इसके बाद कोरोना की चौथी लहर को लेकर संभावना जताई जा रही है। वहीं चौथी लहर आएगी या नहीं इसके बारे में वैज्ञानिकों ने खुलासे किए है। 

आईसीएमआर के पूर्व मुख्य वैज्ञानिक डॉ. आर गंगाखेड़कर ने कहा कि भारत में कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट के सब वैरिएंट हैं लेकिन अभी तक कोई नया वैरिएंट सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि यह किसी भी तरह से चौथी लहर है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया बीए 2 वैरिएंट से प्रभावित हो रही है, जो लोगों को रोज संक्रमित कर रहा है। इसका मतलब यह नहीं है कि यह कोरोना की चौथी लहर है।’ उन्होंने आगे कहा कि स्कूल-कॉलेजों के खुलने की वजह से लोग सामाजिक रूप से सक्रिय हुए हैं जिसके परिणामस्वरूप मामले बढ़ रहे हैं। मास्क पहनने की अनिवार्यता को समाप्त करना भी मामलों में तेजी आने का एक अहम कारण है।

उन्होंने आगे कहा कि लॉकडाउन में ढील देने पर मामलों में तेजी देखने को मिलेगी। जिनकी आयु अधिक है, जिन्होंने टीका नहीं लगवाया है, जो संक्रमित हो चुके हैं, उन्हें यह ध्यान रखने की जरूरत है कि वह सार्वजनिक स्थानों पर अगर जाते है तो मास्क का इस्तेमाल जरूर करें।

राष्ट्रव्यापी कोविड टीकाकरण के तहत अब तक लगाए गए 185.70 करोड़ से अधिक टीके

राष्ट्रव्यापी कोविड टीकाकरण के तहत अब तक 185.70 करोड़ से अधिक टीके लगाए जा चुके हैं


12-14 आयु वर्ग में 2.21 करोड़ से अधिक खुराकें लगाई गई

भारत में कोरोना के सक्रिय मामले 11,132 हैं

पिछले 24 घंटों में 1,054 नए मामले सामने आए

स्वस्थ होने की वर्तमान दर 98.76 प्रतिशत

साप्ताहिक सक्रिय मामलों की दर 0.23 प्रतिशत है।

नई दिल्ली (PIB)। भारत का कोविड-19  टीकाकरण  कवरेज  आज सुबह 7 बजे तक  अंतिम रिपोर्ट के  अनुसार 185.70 करोड़ (1,85,70,71,655) से अधिक हो गया।इस उपलब्धि को 2,24,70,964 टीकाकरण  सत्रों के जरिये प्राप्त किया गया है।

12-14 आयु वर्ग के लिए कोविड-19 टीकाकरण 16 मार्च,2022 को प्रारंभ हुआ था। अब तक 2.21 करोड़ (2,21,97,507) से अधिक किशोरों को कोविड-19 टीके की पहली खुराक लगाई गई है।

लगातार गिरावट दर्ज करते हुए भारत में सक्रिय मामले आज कम होकर 11,132 रह गए। सक्रिय मामले कुल मामलों के 0.03 प्रतिशत हैं।

नतीजतन, भारत में स्वस्थ होने की दर 98.76 प्रतिशत है।पिछले 24 घंटों में 1258 रोगियों के ठीक होने के साथ  ही स्वस्थ होने वाले मरीजों (महामारी की शुरुआत के बाद से) की कुल संख्या बढ़कर 4,25,02,454हो गई है।

बीते 24 घंटे में कोरोना के 1,054 नए मामले सामने आए।पिछले 24 घंटों में कुल 4,18,345 जांच की गई हैं। भारत ने अब तक कुल 79.38 करोड़ से अधिक  (79,38,47,740) जांच की गई हैं।

साप्ताहिक और दैनिक पुष्टि वाले मामलों की दर में भी लगातार गिरावट दर्ज की गई है। देश में साप्ताहिक पुष्टि वाले मामलों की दर 0.23।प्रतिशत है और दैनिक रूप से पुष्टि वाले मामलों की दर भी 0.25 प्रतिशत है।

कोरोना से मौत: मुआवजे के फर्जी दावों पर सुप्रीम कोर्ट चिंतित

नई दिल्ली (एजेंसी)। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कोविड से हुई मौत के संबंध में मुआवजे के फर्जी दावों पर अपनी चिंता जताई और कहा कि वह इस मामले में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) को जांच का निर्देश दे सकता है। शीर्ष अदालत ने सुझाव दिया कि कथित फर्जी मौत के दावों की जांच महालेखा परीक्षक कार्यालय को सौंपी जा सकती है।

न्यायमूर्ति एम.आर. शाह और न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना की पीठ ने कहा: हमने कभी नहीं सोचा था कि इस तरह के फर्जी दावे आ सकते हैं। हमने कभी नहीं सोचा था कि इस योजना का दुरुपयोग किया जा सकता है। पीठ ने कहा कि अगर इसमें कुछ अधिकारी भी शामिल हैं तो यह बहुत गंभीर है। अधिवक्ता गौरव कुमार बंसल ने आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 52 की ओर इशारा किया, जो इस तरह की चिंताओं को दूर करता है। न्यायमूर्ति शाह ने कहा, हमें शिकायत दर्ज करने के लिए किसी की आवश्यकता है।

एक वकील ने राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरणों द्वारा मुआवजे के दावों की रैंडम जांच करने का सुझाव दिया। बच्चों को मुआवजे के पहलू पर, शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि उसके द्वारा आदेशित 50,000 रुपये का अनुग्रह भुगतान, कोविड -19 के कारण प्रत्येक मृत्यु के लिए किया जाना है, न कि प्रभावित परिवार के प्रत्येक बच्चे को। 7 मार्च को, सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों द्वारा कोविड की मौतों के लिए अनुग्रह मुआवजे का दावा करने के लिए लोगों को नकली चिकित्सा प्रमाण पत्र जारी करने पर चिंता व्यक्त की, और कहा कि वह इस मामले की जांच का आदेश दे सकता है।

कोरोनाकाल की त्रासदी पर मरहम लगाती 51 सच्चाई- हेमंत पाल 

तीसरी समीक्षा- किताब : ताकि सनद रहे  (51 कोरोना योद्धाओं की सच्ची कहानियों का संग्रहणीय दस्तावेज़) संकलन-संपादन : गौरव अवस्थी समीक्षक: श्री हेमंत पाल, स्थानीय संपादक, सुबह सवेरे, इंदौर (म.प्र.)     

कोरोना त्रासदी की पीड़ा अंतहीन है। जीवन का ये वो दौर था, जो अनसोचा और अनसमझा था। इस महामारी के सामने सारी सरकारी व्यवस्थाएं ध्वस्त हो गई, जो स्वाभाविक भी था। किसी भी शहर, गांव या कस्बे में आबादी के अनुमान से ही स्वास्थ्य सुविधाएं जुटाई जाती  है, पर कोरोना ने उन सारे अनुमानों को गलत साबित कर दिया। प्रशासन भी समझ नहीं पा रहा था कि वो कैसे व्यवस्थाएं जुटाए, दवाइयों का इंतजाम करें, मरीजों और उनके परिजनों के लिए खाने-पीने की जिम्मेदारी पूरी करे और सबसे बड़ा काम ये था कि महामारी से संक्रमित शवों का अंतिम संस्कार करना।     लेकिन, ये सब हुआ, जिससे जितना हो सकता था, उसने वो सब किया। जो करने वाले थे, वे दुनिया के अलग ही लोग थे। कहते हैं कि इस धरती पर कहीं तो कोई है, जो सबकुछ संचालित कर रहा है। ईश्वर तो हर जगह प्रकट नहीं हो सकता, तो वह अपने ऐसे प्रतिरूपों को भेज देता है, जो ऐसी जिम्मेदारियां वहन कर लेते हैं, जो मनुष्य के बस से बाहर निकल जाती है। कोरोना काल में हर शहर, हर कस्बे और हर गांव में ऐसे कोरोना योद्धा अवतार की तरह सामने आए, जिन्होंने मानव धर्म का पालन किया। 

इस किताब की 51 सच्चाइयां ऐसे ही ईश्वर अवतारों का संकलन है, जिन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए संक्रमित और परेशान लोगों के लिए दवाइयां भी जुटाई, स्वास्थ्य सुविधाएं भी और उनके परिजनों के लिए खाने-पीने के इंतजाम में भी कमी नहीं आने दी। उनका ये कर्म पूरी तरह नि:स्वार्थ और सेवा का चरमोत्कर्ष था। ऐसे लोगों को उनकी सेवा भावनाओं के लिए सिर्फ धन्यवाद नहीं दिया जा सकता। उन्होंने कोरोना काल में जो किया, वो बरसों नहीं, सदियों तक याद किया जाएगा। 

गौरव अवस्थी का ये किताब निकालने का प्रयास अतुलनीय है। ये अपनी तरह का अनोखा प्रयास है, जो वंदनीय है। किताब की 51 कथाओं में कोरोना योद्धाओं के योगदान को जिस तरह शब्दों में बांधा है, वो बेजोड़ है। नि:स्वार्थ भाव से किया गया उनका ये योगदान भी किसी कोरोना योद्धा से कम नहीं है। जाने-अनजाने इन कोरोना योद्धाओं के साथ गौरव अवस्थी का प्रयास तारीफ के शब्दों से कहीं बहुत विशाल है।

दुनियाभर में जब महामारी चरम पर थी, तब हम और आप घरों में बैठे थे! ऐसे में कई ऐसे लोग भी थे, जो जान की परवाह न करके दूसरों की जान बचाने, उनके लिए दवाइयों का इंतजाम करने, ऑक्सीजन का इंतजाम करने और जो सारी कोशिशों के बाद भी बच नहीं सके उनके अंतिम क्रिया कर्म में लगे थे। इन्हें किसी ने कहा नहीं था और इसके पीछे उनका कोई स्वार्थ था! जो कुछ था, वो इंसानियत और मानवीयता थी। ऐसे भी लोग थे, जिन्होंने अपने वाहनों को एम्बुलेंस बना दिया था। सिर्फ युवा ही नहीं, महिलाएं और बुजुर्ग भी जान की परवाह न करते हुए महीनों लगे रहे।      किसी ने अपनी शादी को आगे बढ़ा दिया और वो सारा पैसा मरीजों की मदद में खर्च कर दिया। कहीं सरकारी अफसरों ने अपनी सीमा से आगे जाकर जनसेवा की ताकि टूटती सांसों में जान फूंकी जा सके। उन्हें टूटते बोल्ट के कारण खत्म होती ऑक्सीजन के पीछे लोगों की जान दिखाई दे रही थी। ये सिर्फ 51 सच्चे अनुभव ही नहीं, परोपकार के 51 शिखर हैं। जब एक-एक सांस की आस टूट रही थी, तब यही लोग थे, जिन्होंने उम्मीद जगाई कि हम हैं न! ये दुनिया उतनी बुरी नहीं है, जितना समझा जाता है, वास्तव में ऐसे ही लोगों से इस दुनिया में जीवन के रंग भी हैं।

5 साल तक के बच्चों को टीके की अनुमति मांगी

नई दिल्ली। फाइजर ने बुधवार को अमेरिका से पांच साल तक की आयु वाले बच्चों के लिए उसके टीके को स्वीकृति देने के लिए कहा है। वाशिंगटन में फाइजर ने कहा कि इससे बेहद कम उम्र के अमेरिकी बच्चों को भी मार्च तक टीके लगाने की शुरुआत हो सकती है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने अप्रत्याशित कदम उठाते हुए फाइजर तथा उसके सहयोगी बायोएनटेक से पूर्व नियोजित कार्यक्रम से पहले ही और वह सभी आवेदन करने के लिए कहा था।

आयुर्वेदिक धूपबत्ती के धुएं से भागेगा कोरोना

कोरोना से बचाएगा एयर वैद्य। धूप चिकित्सा पद्धति पर भारत में हुआ पहला अध्ययन। बीएचयू और एमिल फार्मास्युटिकल्स ने मिलकर किया है अध्ययन। 19 तरह की जड़ी बूटियों का अहम रोल।

नई दिल्ली (एजेंसी)। कोरोना वायरस से बचाव में धूपबत्ती अहम भूमिका निभाएगी। आयुर्वेद में वर्षों से चली आ रही धूप चिकित्सा पद्धति पर भारत में हुए दुनिया के पहले वैज्ञानिक अध्ययन के बाद वैज्ञानिकों ने यह दावा किया है। वैज्ञानिकों ने “एयर वैद्य” की खोज की है, जो संक्रमण से बचाव के अलावा उसे प्रसारित भी नहीं होने देता।

अब कोरोना से बचाएगा एयर वैद्य, धूप चिकित्सा पद्धति पर भारत में हुआ पहला अध्ययन

एयर वैद्य एक धूप है, जिसकी सुगंध के जरिये 19 तरह की जड़ी बूटियों का सेवन दिन में दो बार कर कोरोना संक्रमण से बचा जा सकता है। इतना ही नहीं एक पारदर्शी केबिन में बंद मक्खियों पर भी इसका परीक्षण हुआ है,, जिसमें किसी भी तरह के हानिकारक तत्व की पहचान नहीं हुई। यानी कि इंसानों के लिए एयर वैद्य को पूरी तरह से सुरक्षित पाया गया है। इस अध्ययन को बनारस हिंदू विवि (बीएचयू) और एमिल फार्मास्युटिकल्स ने मिलकर किया है। नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद की क्लीनिकल रजिस्ट्री ऑफ इंडिया में भी पंजीयन के बाद यह अध्ययन दो समूह में किया गया।

बीएचयू के वरिष्ठ डॉ. केआरसी रेड्डी ने बताया कि 19 जड़ी-बूटियों से खोजा गया एयर वैद्य एक हर्बल धूप (एवीएचडी) के रुप में है। हाल ही में इस पर दूसरे चरण का क्लीनिकल ट्रायल पूरा हुआ है। दो अलग अलग समूह में हुए इस अध्ययन में पता चला है कि दिन में दो बार इसके इस्तेमाल करने पर कोरोना संक्रमण से बचाव किया जा सकता है।

एक सवाल पर डॉ. रेड्डी ने बताया कि एक समूह में 100 और दूसरे समूह में 150 यानी 250 लोगों को इस अध्ययन में शामिल किया गया। एक समूह को एयर वैद्य की धूप चिकित्सा सुबह-शाम दी गई। दूसरे समूह के लोगों को यह चिकित्सा नहीं दी गई। 30 दिन तक यह प्रक्रिया अपनाने के बाद जब कोविड जांच हुई तो पता चला कि जिन्होंने एयर वैद्य का इस्तेमाल नहीं किया उनमें 37 फीसदी लोग संक्रमित मिले। जबकि जिन्होंने इसका इस्तेमाल किया उनमें महज चार फीसदी संक्रमित मिले। एयर वैद्य की वजह से इनमें से किसी भी रोगी में लक्षण विकसित नहीं हुआ।

एमिल फार्मास्युटिकल के कार्यकारी निदेशक डॉ. संचित शर्मा ने बताया कि राल, नीम, वासा, अजवाइन, हल्दी, लेमन ग्रास और वच सहित 19 जड़ी बूटियों पर अध्ययन हुआ है। इस दौरान एयर वैद्य में चार किस्म के औषधीय गुण वायरस रोधी होना, सूजनरोधी होना, सूक्ष्मजीव रोधी और प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत करना शामिल हैं। डॉ. रेड्डी का कहना है कि यही चारों गुण कोरोना वायरस के खिलाफ बचाव में कार्य करते हैं।

शमशुद्दीन राइन समेत 125 पर रिपोर्ट

बिजनौर। धामपुर पुलिस ने सांसद गिरीश चंद के आवास के निकट कोविड प्रोटोकॉल उल्लंघन और आचार संहिता उल्लंघन मामले में 6 नामजद और 125 अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। प्रभारी मजिस्ट्रेट की ओर से यह मुकदमा दर्ज धामपुर कोतवाली में दर्ज कराया गया है।

विदित हो कि बुधवार सुबह स्योहारा रोड स्थित सांसद गिरीश चंद के आवास के निकट बसपा के टिकट को लेकर हंगामा हुआ था। बसपा प्रत्याशी हाजी कमाल और उनके समर्थकों ने टिकट को लेकर बसपा के वरिष्ठ नेता पश्चिम उत्तर प्रदेश प्रभारी शमशुद्दीन राइन का घेराव किया था। सूचना पर पुलिस प्रशासन मौके पर मुस्तैद हो गया। देर शाम विधानसभा धामपुर के प्रभारी मजिस्ट्रेट धर्मेंद्र कुमार की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई। कोतवाली धामपुर में बसपा के पश्चिम में उत्तर प्रदेश प्रभारी शमशुद्दीन राइन, धामपुर के सभासद फरीद, शेरकोट के सभासद कमरुद्दीन, बसपा प्रत्याशी हाजी कमाल के भाई सोहेल, अशरफ कबाड़ी को नामजद करते हुए 125 अज्ञात लोगों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

सरकारी कर्मचारियों का वर्क फ्रॉम होम खत्म, जाना होगा ऑफिस

लखनऊ। यूपी सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए नई कोरोना गाइडलाइन के निर्देश दिए हैं। अब सूबे के सभी कर्मचारियों को दफ्तर आना होगा। इनमें से सिर्फ गर्भवती महिलाओं व दिव्यांग कर्मचारियों को ही दफ्तर आने से छूट मिलेगी।

मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा की ओर से आदेश जारी कर वर्क फ्राम होम की व्यवस्था खत्म कर दी गई। उत्तर प्रदेश शासन ने मंगलवार को सूबे में कोरोना वायरस के आंकड़े जारी किए हैं। अब प्रदेश में कोरोना के 86563 एक्टिव केस हैं। प्रदेश में सोमवार को एक लाख 99,290 सैंपल की टेस्टिंग में 11,583 नए संक्रमित मिले हैं।

आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि सरकारी दफ्तरों में कोरोना संक्रमण का प्रसार रोकने के लिये दिव्यांग कर्मचारियों एवं गर्भवती महिला कर्मियों को वर्क फ्राम होम और फोन अथवा इलेक्ट्रानिक माध्यम से अपने आफिस के संपर्क में रहने के इंतजाम किये गये हैं। उन्होंने बताया कि सभी सरकारी कार्यालयों में समूह ‘ख’, समूह ‘ग’ और समूह ‘घ’ के कर्मचारियों की 50 फीसदी उपस्थिति के लिए 13 जनवरी को जारी आदेश फिलहाल यथावत रखा गया है।

14 फरवरी तक बंद रहेंगे स्कूल!

बोर्ड के अलावा दूसरी परीक्षाओं पर संशय, केस घटे तो तीसरे सप्ताह तक दोबारा खुल सकते हैं स्कूल

लखनऊ। कोरोना संक्रमण के कारण प्रदेश में 30 जनवरी तक शहरी इलाकों में स्कूल बंद हैं। इधर, प्रदेश में लगातार कोरोना के केस और मौतों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। ऐसे में 31 जनवरी के बाद स्कूलों के खुलने की उम्मीद कम नजर आ रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि 14 फरवरी के बाद केस कम हुए तो स्कूल खुलने की संभावना बन सकती है। हालांकि शिक्षा विभाग ने स्कूल खोलने या नहीं खोलने को लेकर राज्य सरकार को किसी तरह का प्रस्ताव फिलहाल नहीं भेजा है। लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि स्कूल खुलने का निर्णय लेने में समय लगेगा। इस बीच परीक्षाओं को लेकर संशय बना हुआ है। दरअसल, स्कूल खोलने या नहीं खोलने का फैसला शिक्षा विभाग के बजाय हेल्थ डिपार्टमेंट करेगा। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद ही स्कूल खुल सकते हैं। आज की स्थिति में उम्मीद नहीं है कि हेल्थ डिपार्टमेंट ऐसी कोई स्वीकृति देगा। बुधवार को ही राज्य के 33 में से सिर्फ छह जिलों में कोविड पॉजिटिव की संख्या सौ से कम है। बाकी 27 जिलों में कोरोना पॉजिटिव केस का प्रतिदिन का आंकड़ा सौ से ज्यादा है। तीन जिलों में तो यह हजार से ज्यादा है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि फरवरी के दूसरे या तीसरे सप्ताह तक ही स्कूल खुलने की संभावना बन सकती है।

परीक्षा को लेकर भी संशय
कोविड के चलते फरवरी में भी स्कूल नहीं खुले तो गैर बोर्ड कक्षाओं की परीक्षाएं भी खतरे में पड़ सकती हैं। शिक्षा विभाग इन विकल्पों पर विचार कर रहा है कि किस तरह स्टूडेंट्स की मार्किंग की जा सकती है। हाफ इयरली एग्जाम तक के मार्क्स स्कूल के पास हैं। इसी के आधार पर रिजल्ट दिया जा सकता है। शिक्षा विभाग ने पिछले दिनों तीन महीने का शेड्यूल जारी कर दिया था। दरअसल, ये शेड्यूल भी इसी आधार पर निकाला गया है कि स्कूल मार्च तक नहीं खुले तो कैसे पढ़ाई करानी है। बोर्ड परीक्षाएं होना तय
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर की दसवीं और बारहवीं के साथ बोर्ड पैटर्न पर होने वाली आठवीं की परीक्षाएं होना तय माना जा रहा है। आठवीं बोर्ड के फॉर्म तीस जनवरी तक ही भरे जा रहे हैं। इसकी तारीख में बढ़ोतरी हो सकती है। दरअसल, कोरोना की पहली लहर में भी बोर्ड परीक्षाएं हुई थी। तब से इस बार रोगियों की संख्या कम है और अस्पताल में भर्ती रोगियों की संख्या भी बहुत कम है।

दोनों टीके लगवाए बिना ट्रेन में एंट्री नहीं

नई दिल्ली (एजेंसी)। कोरोना के मामले में तेजी से जारी वृद्धि को देखते हुए भारतीय रेलवे ने नई गाइडलाइंस जारी की है। बीते दो वर्षों में कोरोना वायरस के चलते रेलवे ने अपने कई नियमों में बदलाव किए थे, जिसे धीरे-धीरे वापस सामान्य किया जाने लगा था। वहीं कोरोना की तीसरी लहर के चलते रेलवे ने एक बार फिर नई गाइडलाइंस जारी की है।
  
दरअसल, दक्षिण रेलवे ने लोकल ट्रेन में सफर करने वाले लोगों के लिए नया नियम निर्धारित किया है। इस नियम के तहत रेल में ऐसे लोगों को एंट्री नहीं दी जाएगी, जिन्होंने कोरोना का टीका नहीं लगाया है। लोकल ट्रेन में नो वैक्सीन नो एंट्री पॉलिसी लागू की गई है। इतना ही नहीं, यदि किसी व्यक्ति ने कोरोना की केवल पहली डोज ली है, तब भी उन्हें ट्रेन में यात्रा करने की अनुमति नहीं मिलेगी। दोनो डोज अनिवार्य है।

अब यात्रा टिकट या मासिक सीजन टिकट जारी करने के दौरान यात्रियों को वैक्सीनेशन का सर्टिफिकेट दिखाना होगा, जिनके पास वैक्सीनेशन का सर्टिफिकेट नहीं होगा उनको टिकट नहीं दी जाएगी। माना जा रहा है कि दक्षिण रेलवे के इस कदम को देखते हुए अन्य जगहों पर भी यह नियम लागू किया जा सकता है।

कोरोना काल में सराहनीय कार्य करने पर संगीता को मिला बैस्ट प्रेसीडेंट अवार्ड


बिजनौर। कोरोना काल में सराहनीय कार्य करने पर बिजनौर क्लब की पूर्व पदाधिकारी को बेस्ट प्रेसिडेंट का अवार्ड दिया गया। शहर के एक रेस्टोरेंट में आयोजित एक कार्यक्रम में  बिजनौर क्लब की पूर्व प्रेसिडेंट संगीता अग्रवाल को कोरोना का काल  में मास्क, सैनिटाइजर, खाद्य सामग्री वितरण तथा आर्थिक सहायता देने और ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध
कराने के लिए बेस्ट प्रेसिडेंट का सम्मान दिया गया इस अवसर पर वक्ताओं ने उनके द्वारा समय-समय पर किए गए कार्य को सराहा तथा कहा कि वास्तव में ऐसे कार्यों से ही भारतीय सामाजिक ताने-बाने की मजबूती स्पष्ट होती है, आपको बता दे कि संगीता अग्रवाल भाजपा की जिला उपाध्यक्ष पद पर है तथा पूर्व में वह  जिला जिलामहामंत्री भाजपा महिला मोर्चा, पूर्व सभासद, वैश्य महिला संगठन की  जिला अध्यक्ष एव पूर्व प्रेसिडेंट, समर्पण क्लब बिजनौर
एनजीओ प्रकोष्ठ की पूर्व जिला संयोजिका तथा भाजपा में चांदपुर की पूर्व विधानसभा प्रभारी आदि के पद पर रह चुकी हैं। कार्यक्रम का संचालन बिजनौर क्लब की प्रेसीडेंट पूजा ने किया। इस मौके पर क्लब की सचिव नीति सरीन, सीमा, खुशबू, सोनी, राखी, दीप्ति, विशाखा , कनक, अंजना आदि महिलाएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं।

वायरस का मन पर प्रभाव और उसका उपचार

कोरोना वायरस का प्रकोप फिर से बढ़ने लगा है। सारे विश्व में तनाव व्याप्त है। पिछले वर्ष अज्ञानी व्यक्तियों की अपेक्षा ज्ञानी लोगों की मृत्यु दर अधिक रही। उसका कारण मानसिक विकार (साइकोलॉजीकल डिसऑर्डर) रहा। दिमाग ने सोचा, कानों ने सुना, मानसिक चिंता से पेट गड़बड़ाया और लीवर; लीवर से फेफड़े और फेफड़ों से हृदय और ह्रदय से नर्वस सिस्टम। नर्वस सिस्टम कमजोर होने से उसकी जीवनी शक्ति कमजोर गई तथा मन की स्थिति तथा तन की स्तिथि दोनों खराब हो गई, जिसके कारण श्वास लेने में दिक्कत और भूख की स्तिथि खराब हो गई और लोगों को असाध्य बीमारी ने घेर लिया। सोचने मात्र से सर चकराना, उल्टी आना, जी घबराना, घबराहट, दिल की धड़कन बढ़ जाना, रक्तचाप कम हो जाना, सांस लेने में कमी होना, सांस लेने की शक्ति न होना; जैसे लक्षण पैदा हो जाते हैं। आप विचार करें कि ज्ञानियों की अपेक्षा अज्ञानी लोग कम बीमार हुए; इसका कारण जैसा कि उसे मानसिक रोग हुआ ही नहीं।
असाध्य रोग का कारण क्या है? बहुत ज्यादा सोचना, ऐसे समाचार देखना, सोचने मात्र से तन की स्तिथि एवं मन की स्तिथि दोनों खराब हो जाती है, जिसके कारण जीवनी शक्ति कमजोर पड़ जाती है और शरीर के आंतरिक अंग काम करना बंद कर देते हैं।

समाधान
सरकारी नियमों का पालन करें
अफवाएं न फैलाएं
गुनगुना पानी का प्रयोग करें
हरी सब्जियों, फलों का प्रयोग करें
कोल्ड कंमप्रेस करे
जीवनी शक्ति का विकास करें


डॉ नरेंद्र सिंह
प्रांत प्रमुख
आरोग्य भारती

UP: 24 घंटों में आए 7695 नए कोरोना पॉजिविट

लखनऊ। यूपी में कोरोना संक्रमण ने तेज रफ्तार पकड़ ली है। 24 घंटों में 7695 नए कोरोना पॉजिविट पाए गए। इसी अवधि में 253 लोग कोरोना से ठीक भी हुए। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संबंधित अधिकारियों को सख्ती बरतने का निर्देश दिया है। अधिकारियों से कहा गया है कि संक्रमण की रोकथाम के दृष्टिगत सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं। मास्क के प्रयोग, सोशल डिस्टेंसिंग, सैनिटाइजेशन इत्यादि से इस संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है।

सीएम योगी ने कहा कि निगरानी समितियां और इंटीग्रेटेड कोविड कमांड सेंटर्स को पूर्णतः सक्रिय किया जाए। होम आइसोलेशन, निगरानी समितियों से संवाद, एम्बुलेंस की जरूरत और टेलिकन्सल्टेशन के लिए अलग- अलग नम्बर जारी किए जाएं। जनपदीय आईसीसीसी में डॉक्टरों का पैनल तैनात करते हुए लोगों को टेलीकन्सल्टेशन की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। जरूरत के मुताबिक लोगों को मेडिसिन किट उपलब्ध कराई जाए। कोविड के उपचार में उपयोगी जीवनरक्षक दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कर ली जाए।

UP: 24 घंटे में मिले 4228 नए कोरोना केस

लखनऊ। यूपी में नए कोरोना मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हालांकि अभी भी कई राज्यों की तुलना में यहां केसों की संख्या कम है। पिछले 24 घंटे में हुई दो लाख 19 हजार 256 कोविड सैंपलों की जांच में नोएडा में 721, गाजियाबाद में 607 केस, लखनऊ में 577, मेरठ में 411, वाराणसी में 224 सहित कुल 4228 नए केस मिले हैं। महाराजगंज में कोरोना से एक मौत भी हुई है। इसी अवधि में 119 मरीज स्वस्थ होकर डिस्चार्ज भी हुए। वर्तमान में एक्टिव कोविड केसों की संख्या बढ़कर 12,327 पर पहुंच गई है। 

आगरा में 169 मुरादाबाद में 157 और प्रयागराज में 104, कानपुर नगर और मुजफ्फरनगर में 91-91, अलीगढ़ में 85, सहारनपुर में 80, गोरखपुर में 71, शामली में 62, बुलंदशहर में 58, बरेली में 53, झांसी में 51, बागपत में 43, मथुरा में 42, संभल में 26, बाराबंकी व उन्नाव में 24, बिजनौर में 22, हापुड़ और चंदौली में 20-20, अमरोहा और रामपुर में 19-19, मैनपुरी में 18, रायबरेली में 16, जौनपुर, अयोध्या और देवरिया में 15-15, गाजीपुर में 14, सोनभद्र और लखीमपुर खीरी में 13-13, आजमगढ़, सीतापुर और एटा में 12-12, बदायूं, फिरोजाबाद, बस्ती, शाहजहांपुर में 11-11, हरदोई, मिर्जापुर, महाराजगंज और हाथरस में 10-10, औरैया में 09, फर्रुखाबाद में 08, बलिया, सिद्धार्थनगर, सुल्तानपुर, इटावा, अंबेडकर नगर में 07-07, बहराइच, मऊ और कन्नौज में 06-06, बांदा, कुशीनगर, ललितपुर, गोंडा में 05-05, महोबा, फतेहपुर और कासगंज में 04-04, कानपुर देहात में 03, हमीरपुर, संतकबीर नगर, कौशांबी, चित्रकूट में 02-02, जालौन, प्रतापगढ़, पीलीभीत, अमेठी, बलरामपुर में 01-01 कोरोना केस मिले हैं। 

रिकवरी रेट में गिरावट

कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने के साथ ही रिकवरी रेट भी कम होने लगा है। शुक्रवार को पॉजिटिविटी रेट जहां बढ़कर 1.93 फीसदी पहुंच गया। वहीं रिकवरी रेट घट कर अब 98 फीसदी पर आ गया है। गुरुवार को यह 98.2 प्रतिशत था। 

भारत का कुल टीकाकरण कवरेज 149.57 करोड़ के पार पहुंचा

कोविड-19 टीकाकरण अपडेट – 356वां दिन

गुरुवार शाम 7 बजे तक लगाई गईं 85 लाख से अधिक वैक्सीन की खुराक।

नई दिल्ली (PIB)। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार  भारत का कोविड-19 टीकाकरण कवरेज गुरुवार शाम 149.57 करोड़ के पार (1,49,57,01,483) पहुंच गया। शाम 7 बजे तक टीके की 85 लाख से ज्यादा  (85,32,595) खुराक लगाई गईं। देर रात तक दिन की   अंतिम रिपोर्ट तैयार होने के साथ दैनिक टीकाकरण का  आंकड़ा और बढ़ने की उम्मीद है। गौरतलब है कि देश में कोविड टीकाकरण का 356वां दिन था।

कोरोना: एहतियात बरतने के लिए 5 राज्यों को केंद्र ने लिखी चिट्ठी

नई दिल्ली (एजेंसी)। देश में कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार ने पांच राज्यों को चिट्ठी लिखकर कोरोना वायरस के बढ़ते केस की रोकथाम और साप्ताहिक पॉजिटिविटी रेट पर लगाम लगाने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने शनिवार को इस मामले में कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, ओडिशा और मिजोरम के साथ ही केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर को भी आगाह किया है।

भूषण ने कहा, इन पांच राज्यों में टेस्टिंग, ट्रैकिंग और वैक्सीनेशन को लेकर आगे की रणनीति बनाने की जरूरत है। साथ ही कोरोना के प्रसार और इससे जुड़ी मौतों को रोकने के लिए कोविड के उचित नियमों का पालन भी किया जाए। भूषण ने चिट्ठी में कहा है कि कोरोना से जुड़ी मौतों और इसके नए मामलों को रोकने के लिए मौजूद टेस्ट-ट्रैक-ट्रीट-वैक्सीनेट-कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर स्ट्रैटजी के तहत कदम उठाए जाने की जरूरत है।

भूषण ने इन पांच राज्यों से उस चिट्ठी पर भी ध्यान देने को कहा है जो उन्होंने ओमिक्रॉन के बढ़ते खतरे के बीच 27 नवंबर को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लिखी थी। उन्होंने उस समय सभी राज्यों को अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की जांच और सर्विलांस में तेजी लाने, उभरते हॉटस्पॉट की निगरानी और संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों को तत्काल ट्रैक करने जैसे कुछ सुझाव दिए थे।

केरल
राजेश भूषण ने बताया कि केरल में दिसंबर 3 तक के मुताबिक, एक महीने के अंदर 1 लाख 71 हजार 521 मामले आए। बीते एक महीने में देशभर में आए कोरोना के नए केसों में से 55.8 फीसदी केरल से हैं। उन्होंने बताया कि केरल में 26 नवंबर तक के हफ्ते की तुलना में 3 दिसंबर को खत्म हुए हफ्ते के दौरान मौतें भी कुछ बढ़ी हैं। पहले हफ्ते में जहां 1890 मौतें हुईं तो वहीं, दूसरे हफ्ते में 2118। थिरुसुर, मलप्पुरम, कोझिकोड और कोल्लम ऐसे जिले हैं, जहां एक सप्ताह में सबसे ज्यादा मौतें दर्ज की गईं।

तमिलनाडु
तमिलनाडु में 3 दिसंबर तक के एक माह में 23 हजार 764 नए केस दर्ज किए गए। वेल्लोर और चेन्नई में बीते हफ्ते साप्ताहिक नए मामलों में भी इजाफा देखा गया है।

मिजोरम
4 दिसंबर तक के आंकड़ों में एक माह के अंदर राज्य में कोरोना के 12 हजार 562 नए केस आए। एक महीने में भारत के अंदर आए कुल कोरोना केसों में से 4.1 फीसदी मिजोरम से थे। आइजॉल जिला सबसे ज्यादा प्रभावित रहा। 

कर्नाटक
भूषण ने कर्नाटक के प्रिंसिपल हेल्थ सेक्रटरी को लिखी चिट्ठी में राज्य में कोरोना के बढ़ते नए केस के बारे में जिक्र किया है। 16 नवंबर को खत्म हुए सप्ताह में जहां यह संख्या 1 हजार 664 थी, तो वहीं 3 दिसंबर को खत्म हुए हफ्ते में यह आंकड़ा 2 हजार 272 हो गया है। वहीं, इस दौरान मौतें भी 22 से बढ़कर 29 हो गईं। 

ओडिशा
राज्य में एक माह के अंदर में 7 हजार 445 नए केस दर्ज किए गए और देश में आने वाले कुल मामलों में से 2.5 फीसदी ओडिशा से ही थे। राज्य के खोर्द्धा जिले में सबसे ज्यादा साप्ताहिक मामले (900 नए केस) दर्ज किए गए। वहीं, 30 में से 6 जिले- ढेनकनाल, कंधमाल, नबरंगपुर, केंदुझार, अनुगुल और बालांगीर में 26 नवंबर को खत्म हुए सप्ताह की तुलना में 3 दिसंबर को खत्म होने वाले सप्ताह में एक्टिव केसलोड भी बढ़ा है।

जम्मू और कश्मीर
भूषण के मुताबिक, 3 दिसंबर को खत्म हुए महीने में केंद्र शासित प्रदेश के अंदर कुल 4 हजार 806 नए कोरोना मामले आए हैं। कठुआ, जम्मू, गंदेरबाल और बारामूला जैसे कुछ जिले ऐसे हैं, जहां पिछले हफ्ते की तुलना में नए मामले बढ़े हैं।

दिल्ली में मिला ओमीक्रॉन का पहला मरीज, देश में संख्या हुई पांच

दिल्ली में मिले इस नए केस के साथ ही देश में ओमीक्रॉन के मरीज़ों की तादाद बढ़ कर पांच हो गई है। इससे पहले पिछले दिन मुंबई में ओमीक्रॉन का चौथा मामला दर्ज किया गया था।

दिल्ली में मिला Omicron का पहला केस, तंजानिया से लौटे शख्स में वैरिएंट की तसदीक

नई दिल्ली। दुनिया भर में कोरोना के नए वैरिएंट ओमीक्रॉन के बढ़ते मामलों के बीच भारत में भी इसके केस धीरे-धीरे बढ़ने लगे हैं। अब राजधानी दिल्ली में पहला ओमीक्रॉन पॉजिटिव मरीज मिला है। यह यात्री तंजानिया से आया था। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के अनुसार 12 संक्रमित मरीजों के सैंपल जिनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजे गए थे, जिनमें से एक मरीज़ की रिपोर्ट में ओमीक्रॉन वैरिएंट पाया गया है। दिल्ली में मिले इस नए केस के साथ ही भारत में ओमीक्रॉन के मरीज़ों की संख्या बढ़ कर पांच हो गई है। इससे एक दिन पहले ही मुंबई में ओमीक्रॉन का चौथा मामला दर्ज किया गया था।

दिल्ली के हेल्थ मिनिस्टर सत्येंद्र जैन ने बयान जारी कर कहा कि दिल्ली में पहला ओमीक्रॉन केस मिला है। एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती मरीज तंजानिया से लौटा था।

पहले की तरह चलेंगी सभी ट्रेन, स्पेशल किराया खत्म

अब ट्रेन वैसे ही चलेंगी, जैसे चलती थीं कोरोनाकाल से पहले। स्पेशल किराया खत्म। नहीं होगी बगैर आरक्षण के सफर करने की इजाजत। सफर के दौरान नहीं दिए जाएंगे कंबल व चादर।

नई दिल्‍ली (एजेंसी)। रेलवे ने ट्रेनों को कोरोना के पूर्व की स्थिति में बहाल करने का फैसला लिया है। दो-चार दिन में सभी ट्रेन सामान्‍य नंबरों से चलने लगेंगी, यानी नंबरों से जीरो हट जाएगा। इसके अलावा कुछ ट्रेनों में स्‍पेशल श्रेणी होने के बाद किराया बढ़ गया था, वो भी पहले की तरह हो जाएगा। रेलवे बोर्ड ने स्‍पष्‍ट किया है कि ट्रेनों में कोविड प्रोटोकाल का पालन किया जाएगा। यानी बगैर आरक्षण के सफर करने की इजाजत नहीं होगी। इसके अलावा सफर के दौरान कंबल, चादर नहीं दिए जाएंगे।

ट्रेनों को कोरोना से पहले की स्थितियों में बहाल करने के लिए रेलवे बोर्ड द्वारा जारी आदेश

रेलवे बोर्ड ने शुक्रवार रात इस संबंध में आदेश जारी किया गया है। मौजूदा शताब्‍दी, राजधानी, दूरंतो, मेल और एक्‍सप्रेस सभी मिलाकर 1744 ट्रेनों का संचालन हो रहा है। ये सभी ट्रेन, स्‍पेशन ट्रेनों के रूप में चल रही हैं। यानी नंबर के पहले जीरो लगा हुआ है, लेकिन जल्‍द ही ये ट्रेनें सामान्‍य नंबरों से चलने लगेंगी। इसके अलावा कुछ ट्रेनों के स्‍पेशल बनने के बाद किराया भी बढ़ गया था, रेलवे मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार यह किराया भी कोरोना से पूर्व जितना ही हो जाएगा। यानी सभी ट्रेनें कोरोना से पहले की स्थितियों में बहाल हो जाएंगी। बोर्ड के अनुसार साफ्टवेयर अपडेट करने में दो से चार दिन का समय लग सकता है। इसके बाद कोरोना से पहले की स्थितियों में ट्रेनें बहाल हो जाएंगी।

रेलवे बोर्ड द्वारा जारी आदेश में स्‍पष्‍ट किया गया है कि कोविड प्रोटोकाल का पूरी तरह से पालन किया जाएगा। यानी सेकेंड क्‍लास में बगैर आरक्षण चलने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा ट्रेनों में सफर के दौरान कंबल,चादर, तकिया अभी नहीं दिया जाएगा। हालांकि रेलवे बोर्ड द्वारा कई श्रेणियों को दिए जाने वाले कंसेशन के संबंध में स्‍पष्‍ट नहीं किया गया है।

रायबरेली में सम्मानित हुए कोरोना योद्धा, आंसू भी छलके

सम्मान समारोह
आचार्य स्मृति दिवस पर फिरोज गांधी कालेज सभागार में हुआ भव्य कार्यक्रम
खचाखच भरा रहा सभागार। आचार्य द्विवेदी को सभी ने किया याद


रायबरेली। आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की स्मृति में आयोजित सम्मान समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से आए कोरोना योद्धाओं को खचाखच भरे सभागार में सम्मानित किया गया। योद्धाओं की गाथा सुनकर लोगों की आंखों में आंसू आ गए। योद्धा भी भाव विह्वल हो गए।

रायबरेली ने किया असली सम्मान-
आचार्य स्मृति दिवस के उपलक्ष्य में फिरोज गांधी कालेज सभागार में आचार्य द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की ओर से आयोजित कार्यक्रम में समाजसेवी मुकेश बहादुर सिंह ने सभी का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि कोरोना के दौरान लोगों की जान बचाने वाले यह योद्धा देश के प्रेरणा स्रोत हैं। नई दिल्ली से आए वरिष्ठ पत्रकार संजीव कुमार ने योद्धाओं के सम्मान में उमड़े जनसमूह का उल्लेख करते हुए कहा कि रायबरेली ने इन्हें योद्धाओं के प्रति असली सम्मान प्रकट किया है।


महाराष्ट्र से आए कोरोना योद्धा राहुल तिवरेकर ने कहा कि कोरोना संक्रमण के दौरान आदिवासियों की सेवा का संकल्प एक कठिन काम था, लेकिन दिगंत स्वराज फाउंडेशन के स्वयंसेवकों ने आदिवासियों के बच्चों की पढ़ाई जारी रखने की चुनौती स्वीकार की और 70 गांवों के करीब 2000 आदिवासी बच्चों की पढ़ाई स्पीकर के माध्यम से कराई गई।

गुजरात के सूरत शहर से आए कोरोना योद्धा अजय राय पलायन करने वाले मजदूरों की सेवा के बीच ही छोटे भाई के हुए निधन की बात कहते हुए रो पड़े। उनकी गाथा सुनकर लोग भी भाव विह्वल हो गए।
मणिपुर के कोरोना योद्धा मथनमी हुंग्यो ने बताया कि पहाड़ों में लॉकडाउन के दौरान भूखे लोगों को राशन पहुंचाना कितना कठिन था? उन्होंने कहा कि लोगों के सहयोग से राशन एकत्र कर गांवों में फंसे लोगों को जीवन दिया गया। पंजाब के कोरोना योद्धा हरजीत सिंह गिल ने उस वाकये का भावपूर्ण वर्णन किया, जब तलवार से लैस निहंगों ने हमला कर हाथ की कलाई काट दी थी। इस गाथा को सुनकर सब के रोंगटे खड़े हो गए।


लखनऊ की कोरोना योद्धा श्रीमती वर्षा वर्मा ने कहा कि लॉकडाउन संक्रमित शवों का अंतिम संस्कार करा कर सम्मान से अंतिम विदाई के लिए “एक कोशिश ऐसी भी अभियान..” चलाया गया। एक साधन संपन्न दोस्त की मौत के बाद एंबुलेंस मिलने में आई कठिनाई ने इस काम के लिए प्रेरित किया। उनको एंबुलेंस की मुफ्त सेवा भी उपलब्ध कराई गई।


समिति के अध्यक्ष विनोद शुक्ला ने रूपरेखा प्रस्तुत की और कोषाध्यक्ष विनय द्विवेदी ने अभियान पर प्रकाश डाला। महामंत्री अनिल मिश्रा ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। इस मौके पर डॉ आर. एस. मालवीय, पीएनबी के सर्किल हेड रोहिताश्व इंद्रायण, डॉ ज्ञानेंद्र चतुर्वेदी, डॉक्टर अमिता खुबेले, राजीव भार्गव, मुक्ता भार्गव, निर्मल सिंह, राजेश वर्मा, डॉ रुचि सिंह, महेश प्रताप सिंह, वीरेंद्र विक्रम सिंह भाजपा नेता अजय त्रिपाठी, डॉ मनीष चौहान राकेश भदौरिया, सभासद एसपी सिंह, डॉक्टर बृजेश सिंह, सुनील ओझा, अमर द्विवेदी, सुधीर द्विवेदी, राकेश मोहन मिश्रा, स्वतंत्र पांडे, राजेश द्विवेदी, घनश्याम मिश्रा, अभिषेक मिश्रा आदि उपस्थित रहे।

हरजीत सिंह को मिला प्रभाष जोशी स्मृति सम्मान

रायबरेली। आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की ओर से पटियाला पंजाब से आए हरजीत सिंह गिल को प्रभाष जोशी स्मृति सम्मान प्रदान किया गया। महाराष्ट्र के कोरोना योद्धा राहुल तिवरेकर को डॉक्टर राम मनोहर त्रिपाठी लोक सेवा सम्मान, मथनमी हुंग्यो को शिवानंद मिश्र लाले सम्मान और अजय राय को सरिता द्विवेदी स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया।
पद्मश्री पुरस्कार मिलने की वजह से नई दिल्ली के कोरोना योद्धा जितेंद्र सिंह शंटी नहीं आ पाए। उन्हें ऑनलाइन आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी युग प्रेरक सम्मान दिया गया। उनका वीडियो मैसेज सभागार में सुनाया गया।

स्मारिका “आचार्य पथ” का विमोचन-
रायबरेली। आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की ओर से प्रति वर्ष प्रकाशित की जाने वाली स्मारिका “आचार्य पथ” का विमोचन कोरोना योद्धाओं और समाजसेवी मुकेश बहादुर सिंह ने किया। संपादक आनंद स्वरूप श्रीवास्तव ने स्मारिका के विषय में विस्तार से बताया। इस मौके पर अरुण कुमार सिंह भी मौजूद रहे।

शोभा यात्रा में उमड़ जन समूह, शहीद चौक पर दीपदान
रायबरेली। कोरोना योद्धाओं के सम्मान समारोह के पहले शहर के सुपर मार्केट से शोभा यात्रा निकाली गई। कोरोना योद्धाओं के सम्मान में पूरा शहर उमड़ पड़ा। योद्धाओं को फूल मालाओं से लाद दिया गया। पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार ने देश भर से आए कोरोना योद्धाओं के काम की तारीफ करते हुए कहा कि संकट से उबारने में इनकी अहम भूमिका रही। शोभायात्रा शुरू होने के पहले पीएससी बैंड ने राष्ट्रीय धुन बजाई। एनसीसी और स्काउट गाइड ने योद्धाओं को सलामी दी। गुरु तेग बहादुर मार्केट व्यापार मंडल, व्यापारी नेता बसंत सिंह बग्गा, मनोज गुप्ता, रोटरी क्लब की ओर से उमेश सिकरिया, विभिन्न खेल संघों की ओर से मुन्ना लाल साहू, हिमांशु तिवारी, ममता पांडे, अनुपमा रावत आदि ने पुष्प वर्षा कर योद्धाओं का स्वागत किया।
सुपर मार्केट से सभागार तक योद्धाओं का जगह-जगह फूल मालाओं से स्वागत किया गया। योद्धाओं पर पुष्प वर्षा हुई। योद्धाओं ने शहीद चौक पर शहीदों की याद में दीपदान किया। शहीद चौक पर क्षमता मिश्रा अपनी महिला साथियों के साथ उपस्थित रहीं। इस मौके पर अभिषेक द्विवेदी करुणा शंकर मिश्रा नीलेश मिश्रा अभिषेक मिश्रा पीयूष द्विवेदी अजय दीक्षित शिखर द्विवेदी शिखर अवस्थी, यशी अवस्थी, कल्याणी मिश्रा, जागृति मिश्रा, तान्या सिंह आदि ने कोरोना योद्धाओं का स्वागत किया। संचालन सर्वेश पांडे ने किया।


विजेता बच्चों को किया गया पुरस्कृत
रायबरेली। आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की अमेरिकी इकाई की ओर से हिंदी दिवस के उपलक्ष में आयोजित की गई अंतरष्ट्रीय काव्य पाठ प्रतियोगिता में प्रथम द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले रजत द्विवेदी उन्नाव, अचिंत्य शाही लखनऊ और कात्यायनी त्रिवेदी रायबरेली को पुरस्कृत किया गया। समिति की ओर से उन्हें प्रमाण पत्र और नकद पुरस्कार दिए गए। समिति की अमेरिकी इकाई की अध्यक्ष श्रीमती मंजु मिश्रा और श्रीमती रचना श्रीवास्तव ने सभी विजेता बच्चों को बधाई दी।

विक्रांत चौधरी ने किया चिकित्सकों का अभिनंदन

बिजनौर। भारत सरकार द्वारा 100 करोड़ कोविड वैक्सीन का आँकड़ा सबसे कम समय में सफलता पूर्वक पूरा करने के उपलक्ष्य में नजीबाबाद स्थित लाला भोजराम नेत्र चिकित्सालय में अभिनंदन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर भाजपा जिला सह मीडिया प्रभारी विक्रांत चौधरी ने वैक्सीनेशन टीम का अभिनंदन किया। साथ ही अस्पताल में मौजूद सभी चिकित्सकों  और स्टाफ़ का धन्यवाद किया। सभी ने देशवासियों की कोरोना काल में समय हर सुविधा मुहैया कराने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा कि हमारे पीएम वास्तव में जननायक हैं, जो बिना भेदभाव किए हमेशा देशवासियों की चिंता में लगे रहते हैं।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ फ़ैज़ हैदर, ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर निपेंद्र चौधरी, अखिलेश वर्मा, वैशाली कुमारी, अभिषेक त्यागी, संदीप पांडे फार्मेसिस्ट, बृजेश कुमार फार्मेसिस्ट, कौशिक, विशाल कुमार, राजवीर कुशवाहा बाला देवी  आदि उपस्थित रहे।

जिला अस्पताल में वैक्सीनेशन टीम का अभिनंदन

बिजनौर। भारत सरकार द्वारा 100 करोड़ कोविड वैक्सीन लगाने का आँकड़ा सबसे कम समय में सफलतापूर्वक पूरा करने के उपलक्ष्य में जिला अस्पताल में वैक्सीनेशन टीम का अभिनंदन किया गया।

भारतीय जनता पार्टी की ओर से कोविड वैक्सीनेशन टीम के अभिनंदन के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जिला अस्पताल में मौजूद सभी चिकित्सक और स्टाफ़ का धन्यवाद ज्ञापित करने के साथ ही मिष्ठान वितरण किया गया। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष, जिला महामंत्री विनय राणा, भूपेंद्र चौहान बॉबी, मुकेन्द्र त्यागी, भीष्म सिंह राजपूत, आईटी विभाग संयोजक विपुल शर्मा, नगर अध्यक्ष के साथ नगर टीम के पदाधिकारी आदि उपस्थित रहे।

बच्चों पर कोरोना वैक्सीन का परीक्षण पूरा, कंपनी DCGI को सौंपेगी रिपोर्ट

COVID-19 Vaccine | DCGI Approves Phase II/III Clinical Trial Of Covaxin On  2-18 Year-olds

नई दिल्ली (एजेंसी)। भारत बायोटेक ने अठारह वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर कोवाक्सिन टीके के दूसरे और तीसरे चरण का परीक्षण पूरा कर लिया है। कंपनी परीक्षण से जुड़े आंकड़े अगले सप्ताह ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) को सौंप सकती है।

परीक्षण में शामिल थे एक हजार बच्चे- भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक डॉ. कृष्णा एला ने ये जानकारी देते हुए बताया कि पीडियाट्रिक कोवाक्सिन के दूसरे और तीसरे चरण का परीक्षण पूरा हो गया है। डाटा का अध्ययन जारी है। अगले सप्ताह हम परीक्षण के जुड़े आंकड़े को दवा नियंत्रक को सौंप सकते हैं। परीक्षण में करीब एक हजार बच्चों को शामिल किया गया था।

Bharat Biotech's Covaxin gets DCGI nod to conduct clinical trials on  children - Coronavirus Outbreak News

नाक के जरिये टीका– डॉ. कृष्णा एला ने बताया कि इंट्रानेजल वैक्सीन का भी परीक्षण दूसरे चरण में हैं। उम्मीद है कि अगले माह इसका परीक्षण पूरा हो जाएगा। टीके से नाक के भीतर वायरस के खिलाफ इम्युन रिसपॉन्स बनता है। वायरस जब नाक के जरिए प्रवेश करता है तो ये वायरस को वहीं पर नष्ट कर सकती है। इस टीके का परीक्षण 650 लोगों पर किया गया है।

देश के बाद विदेश- भारत बायोटेक ने ये भी स्पष्ट किया है कि कंपनी दूसरे देशों को भी टीका निर्यात करने को तैयार है। डॉ. एला ने कहा कि अभी हमारी कोशिश देश में टीके की जरूरत को पूरा करना है। देश में टीकाकरण लगभग पूरा हो जाएगा तब आगे इस पर विचार किया जा सकता है।

Cafe D, शॉपर्स प्राइड मॉल, बिजनौर

राज्‍यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों के पास कोविड-19 टीके की उपलब्‍धता

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 64.36 करोड़ से अधिक टीके प्रदान किये गए। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के पास अभी भी 5.42 करोड़ से अधिक शेष व अप्रयुक्त टीके उपलब्ध हैं, जबकि 15 लाख टीके अभी भेजे जाने के लिए पाइपलाइन में हैं।

नई दिल्ली (PIB)। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा बताया गया है कि केंद्र सरकार देशभर में कोविड-19 टीकाकरण का दायरा विस्तृत करने और लोगों को टीके लगाने की गति को तेज करने के लिये प्रतिबद्ध है। कोविड-19 के टीकों को सभी के लिए उपलब्ध कराने के लिए नया चरण 21 जून 2021 से शुरू किया गया था। टीकाकरण अभियान की रफ्तार को अधिक से अधिक टीके की उपलब्धता के जरिये बढ़ाया गया है। इसके तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वैक्सीन की उपलब्धता के बारे में पूर्व सूचना प्रदान की जाती है, ताकि वे बेहतर योजना के साथ टीके लगाने का बंदोबस्त कर सकें और टीके की आपूर्ति श्रृंखला को दुरुस्त किया जा सके।

देशव्यापी टीकाकरण अभियान के हिस्से के रूप में केंद्र सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नि:शुल्क कोविड वैक्सीन प्रदान करके उन्हें पूर्ण सहयोग दे रही है। टीकों की सर्व-उपलब्धता के नये चरण में, केंद्र सरकार वैक्सीन निर्माताओं से 75 प्रतिशत टीके खरीदकर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नि:शुल्क प्रदान करेगी।

वैक्सीन की खुराकें (31 अगस्त, 2021 तक)

अब तक हुई आपूर्ति 64,36,13,160

भेजे जाने को तैयार टीके 14,94,040

शेष वैक्सीन 5,42,30,546

केंद्र सरकार द्वारा अब तक निःशुल्क और अन्य माध्यमों से वैक्सीन की 64.36 करोड़ से अधिक (64,36,13,160) खुराकें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को उपलब्ध कराई गई हैं। इसके अलावा 15लाख (14,94,040) टीके भेजे जाने की तैयारी है। अभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पास कोविड-19 टीके की 5.42करोड़ से अधिक (5,42,30,546) अतिरिक्त और बिना इस्तेमाल हुई खुराकें उपलब्‍ध है, जिन्हें लगाया जाना है।

Release, Ministry of Health and Family Welfare

बुधेश्वर विकास महासभा ने किया कोविड योद्धाओं का सम्मान

बुधेश्वर विकास महासभा उत्तर प्रदेश द्वारा किया गया सम्मान समारोह का आयोजनमुख्य अतिथि रहीं सपा संरक्षक पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की बहू श्रीमती अपर्णा। विशिष्ट अतिथि महंत श्री गोविंद आचार्य प्रवासी नैमिष धाम सीतापुर की गौरवशाली उपस्थिति।

लखनऊ। बुद्धेश्वर विकास महासभा द्वारा सम्मान समारोह श्री बुद्धेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में आयोजित किया गया। इस अवसर पर कोरोना काल खंड के दौरान सावन माह में बुद्धेश्वर धाम पधारे श्रद्धालुओं को दर्शन पूजन में कोविड-19 का पालन करते हुए समुचित व्यवस्थाओं को संचालित करने वाले शासन प्रशासन एवं संस्था से जुड़े समाज सेवियों, पदाधिकारियों, सेवादारों एवं मीडिया बंधुओं को सम्मानित कर उत्साहवर्धन किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में लखनऊ कैन्ट विधानसभा से समाजवादी पार्टी की पूर्व प्रत्याशी एवं सपा संरक्षक पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की बहू समाजसेवी श्रीमती अपर्णा यादव बिष्ट एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में महंत श्री गोविंद आचार्य जी प्रवासी नैमिष धाम सीतापुर की गौरवशाली उपस्थिति रही।

बुद्धेश्वर धाम पौराणिक उल्लेखित धाम- कोरोना कालखंड के दौरान कोविड-19 के मद्देनजर सरकार द्वारा जारी निर्देशानुसार सदियों से निरंतर बाबा बुद्धेश्वर धाम पर आयोजित होने वाला मेला नहीं लग सका था। जैसा कि सर्वविदित है बुद्धेश्वर धाम पौराणिक उल्लेखित धाम है। हिंदू समाज सहित अन्य श्रद्धालुओं की इस धाम में अपार आस्था है। इसका वर्णन रामायण काल में भी मिलता है। एक प्रसंग के अनुसार माता सीता को वन गमन हेतु प्रस्थान करते समय अल्प समय के लिए यहां पर विश्राम करना पड़ा था। इस प्राचीन एवं पौराणिक धाम के संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण हेतु बुद्धेश्वर विकास महासभा निरंतर क्रियाशील है। अथक प्रयासों से बाबा बुद्धेश्वर धाम एक नए कलेवर में अपनी प्राचीन भव्यता के साथ यथाशीघ्र पूर्ण विकसित होकर भक्तों में अपार आस्था एवं उत्साह का संचार करेगा। तमाम श्रद्धालु जनों को यहां की भव्यता एवं उपलब्ध सुविधाओं से आत्मिक शांति प्राप्त होगी।

सम्मानित किए गए लोगों में पुलिस प्रशासन से सहायक पुलिस आयुक्त काकोरी आशुतोष कुमार, नगर निगम प्रशासन जोन 6 की बिन्नो रिजवी सहित सफाई कार्यो में लगी हुई टीम, मध्यांचल विद्युत प्रशासन अधिशासी अभियन्ता अजय वर्धन, सरोसा उप केंद्र से संबंधित कर्मचारी अधिकारी गण, अवर अभियंता चंद्रेश कुमार, प्रमुख सेवादारों में क्षेत्रीय पार्षद तारा चन्द्र रावत, रामशंकर राजपूत, राजेश कुमार शुक्ला, शिवप्रसाद पांडे, रामाधार यादव, ज्योति सिंह, वन्दना सिंह, अर्चना साहू, सूर्य कुमार गुड्डू सहित तमाम पदाधिकारी रहे। पत्रकार बंधुओं में ग्रामीण पत्रकार कल्याण समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष केशरी राव धारा सिंह यादव, सुखपाल सिंह, अविनाश पांडे, अभिषेक कुमार, विपिन यादव आदि शामिल थे।

कोरोना: केरल में नाइट कर्फ्यू की तैयारी

रोजाना 30 हजार से ज्यादा नए केस दर्ज। 5 दिन में आए कोरोना के करीब डेढ़ लाख केस।

नई दिल्ली (एजेंसी)। केरल में कोरोना के बढ़ते मामलों ने देश की चिंता बढ़ा दी है। राज्य में पिछले चार दिन से रोजाना 30 हजार से ज्यादा नए केस दर्ज किए जा रहे हैं। महज 5 दिन में केरल में कोरोना के करीब डेढ़ लाख केस आ चुके हैं। दूसरी तरफ देश में भी केरल के आंकड़ों के कारण नए मामलों की संख्या  रोजाना 45 हजार से अधिक आ रही है। वहीं स्थिति खराब होते देख केरल के मुख्यमंत्री पी. विजयन ने अगले हफ्ते से राज्य में नाइट कर्फ्यू लगाने का ऐलान किया है। 

शनिवार को देश में कोरोना के 45 हजार से ज्यादा केस दर्ज किए गए और इनमें से 31 हजार से ज्यादा मामले केरल से थे, जो कि कुल मामलों का करीब 70 फीसदी है। शुक्रवार को जहां राज्य में संक्रमण दर 19.22 फीसदी तक पहुंच गया था वहीं, शनिवार को यह 18.67 फीसदी रहा।

लगातार बढ़ रहे एक्टिव केस
केरल में शनिवार तक 2 लाख से ज्यादा उपचाराधीन मरीज थे। देशभर में कोरोना के कुल 3.7 लाख एक्टिव मरीज हैं और अकेले केरल में ही इसके 55 फीसदी मामले हैं। बीते पांच दिन में राज्य में एक लाख 49 हजार 814 नए मामले आए हैं।

केरल के अलावा महाराष्ट्र में शनिवार को कोरोना के 4 हजार 831 नए मामले दर्ज किए गए। मिजोरम में भी लगातार दो दिन से कोरोना के एक हजार के करीब मामले पहुंच रहे हैं। 

मौतों में भी केरल अव्वल
भारत में शनिवार को कोरोना से कुल 444 मौतें दर्ज की गईं, जिनमें से 153 अकेले केरल से थीं। इसके अलावा 126 महाराष्ट्र, 68 ओडिशा, 21 तमिलनाडु और 19 मौतें आंध्र प्रदेश में दर्ज की गईं। 

अब नाइट कर्फ्यू का ऐलान
केरल सरकार ने राज्य में कोविड-19 महामारी के प्रसार को रोकने के लिए अगले हफ्ते से रात में कर्फ्यू लागू करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की अध्यक्षता में एक समीक्षा बैठक में अगले सप्ताह से राज्य में रात 10 बजे से सुबह छह बजे तक कर्फ्यू लगाने का निर्णय लिया गया है।

यूपी में रविवार की साप्ताहिक बंदी खत्म

उत्तर प्रदेश में अभी जारी रहेगा नाइट कर्फ्यू। रात 10 बजे से सुबह छह बजे तक लागू रहेगा रात्रिकालीन कर्फ्यू।

यूपी में अभी जारी रहेगा नाइट कर्फ्यू, जानिए सोमवार से रविवार तक क्या रहेगी टाइमिंग 

लखनऊ (एजेंसी)। उत्तर प्रदेश में कोविड-19 की स्थिति में सुधार के 22 अगस्त से रविवार की बंदी समाप्त करने का आदेश जारी किया गया है। अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी ने शुक्रवार को प्रदेश के सभी जिलों के जिलाधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों तथा अन्य मंडलीय अधिकारियों को भेजे गये पत्र में कहा है कि सरकार के निर्देशानुसार 22 अगस्त से रविवार की साप्ताहिक बंदी खत्म की जाती है और अब प्रत्येक सोमवार से रविवार तक प्रात: छह बजे से रात्रि 10 बजे तक मास्क, दो गज की दूरी व सेनिटाइजर के प्रयोग जरूरी करने के साथ गतिविधियां शुरू किए जाने की अनुमति होगी। रात्रिकालीन कर्फ्यू रात 10 बजे से सुबह छह बजे तक लागू रहेगा।

अब पूर्व में निर्धारित साप्ताहिक बंदी यथावत: उन्होंने कहा कि प्रत्येक बाजार की पूर्व में निर्धारित साप्ताहिक बंदी यथावत लागू रहेगी। इससे पहले प्रदेश में कोरोना की स्थिति में सुधार के मद्देनजर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों से रविवार की साप्ताहिक बंदी समाप्त करने पर विचार करने को कहा था। वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री आदित्यनाथ की बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया था, प्रदेश में कोविड की बेहतर होती स्थिति के दृष्टिगत रविवार की प्रदेशव्यापी साप्ताहिक बंदी की व्यवस्था को समाप्त किया जा सकता है। अब से सभी शहरों/बाजारों/उद्योगों/कारखानों में, कोविड काल से पूर्व में प्रभावी रही साप्ताहिक बंदी की तिथि पर अवकाश लागू किया जाए। इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिया जाए। इससे पहले 11 अगस्त को शनिवार की बंदी खत्म करने का निर्देश जारी किया गया था।

15 जिलों में कोविड का एक भी मरीज नहीं- गौरतलब है कि जुलाई में, राज्य सरकार ने कोविड प्रोटोकॉल जारी किया था जिसके तहत सोमवार से शुक्रवार तक बाजार, दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक काम करने की अनुमति दी गई थी, जबकि शनिवार और रविवार साप्ताहिक बंदी रखा गया था। बयान में कहा गया कि सतत प्रयासों से कोरोना की दूसरी लहर पर बने प्रभावी नियंत्रण के साथ-साथ जनजीवन तेजी से सामान्य हो रहा है। आज प्रदेश के 15 जनपदों (अलीगढ़, अमेठी, बदायूं, बस्ती, देवरिया फर्रुखाबाद, हमीरपुर, हरदोई, हाथरस, कासगंज, महोबा, मिर्जापुर, संतकबीर नगर, श्रावस्ती और शामली) में फिलहाल कोविड का एक भी मरीज नहीं है।

सितंबर तक देश को मिल जायेगी सिंगल डोज वैक्सीन

भारत को सितंबर तक मिलेगी सिंगल डोज वैक्सीन। अब तक हो रहा आयात की हुई स्पुतनिक वी का इस्तेमाल। स्पुतनिक लाइट की कीमत 750 रुपए।

Good News: भारत को सितंबर तक मिलेगी सिंगल डोज वैक्सीन, महज इतने रुपए होगी कीमत

नई दिल्ली (एजेंसी) कोरोना वायरस के खिलाफ देश में तैयार हो रही रूसी वैक्सीन स्पुतनिक लाइट सितंबर तक भारत को मिल सकती है। बताया जा रहा है कि सिंगल डोज वाली ये वैक्सीन शुरुआत में सीमित संख्या में उपलब्ध होगी और इसकी कीमत 750 रुपए होगी। कंपनी ने इसके इमरजेंसी यूज के लिए भी आवेदन दे दिया है। भारत में अब तक आयात की हुई स्पुतनिक वी का इस्तेमाल हो रहा है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पैनेशिया ने इमरजेसी यूज की मंजूरी के लिए डोजियर जमा कर दिया है। स्पुतनिक लाइट को रूस की गमालेया इंस्टीट्यूट ने RDIF के समर्थन के साथ तैयार किया है। जुलाई में पेनेशिया बायोटेक ने स्पुतनिक वी वैक्सीन के निर्माण के लिए लाइसेंस लेने का ऐलान किया था।

वहीं रूस ने 6 मई को कोरोना वायरस के खिलाफ वैक्सीन स्पुतनिक लाइट को मंजूरी दी थी और कहा था कि इससे सामूहिक प्रतिरक्षा प्राप्त करने की प्रक्रिया में तेजी आ सकती है। रूस ने जनवरी में स्पुतनिक लाइट का मानव परीक्षण शुरू किया था और अध्ययन अभी भी जारी हैं। स्पुतनिक लाइट रूस में चौथी घरेलू विकसित कोविड वैक्सीन है, जिसे देश में मंजूरी दी गई है।

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वहीं कोरोना वायरस के खिलाफ स्पुतनिक-V की प्रभावी क्षमता 90 फीसदी से अधिक बताई गई है। भारत ने पहली विदेशी वैक्सीन के रूप में इसे 12 अप्रैल को इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दी थी। डॉ रेड्डीज लैबोरेटरी ने स्पुतनिक-V वैक्सीन के लिए रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड (RDIF) के साथ समझौता किया था।

हाल ही में रूस ने अपनी स्पुतनिक वी कोरोना वैक्सीन के असर को लेकर जानकारी दी थी। रूस के स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराश्को ने कहा था कि स्पुतनिक वी कोरोना वैक्सीन 83 फीसदी डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ प्रभावी है। ये कोरोनावायरस के सभी नए स्ट्रेन के खिलाफ प्रभावी है।

स्कूल में पढ़ाया जाएगा कोरोना का पाठ

लखनऊ। घर पर रहकर छात्र-छात्राओं ने लॉकडाउन काल में केवल पढ़ाई की या फिर खेले हैं। उनको ये ताे जानकारी हुई कि कोविड-19 नाम का वायरस फैला हुआ है, जो लोगों को बीमार कर रहा है और घातक स्थिति में होने पर उनकी जान भी ले रहा है। मगर कोरोना के बारे में विस्तृत जानकारी करने में विद्यार्थियों ने रुचि नहीं दिखाई। अब जब माध्यमिक विद्यालय खुलेंगे तो उनको कोविड-19 के बारे में विस्तार से जानकारी कराई जाएगी। कोरोना वायरस के दुष्प्रभाव, इसके फैलने के तरीके, इससे बचने के उपाय, सावधानियां आदि के बारे में बताया जाएगा। वहीं इससे जुड़ी जानकारियां जैसे किस देश में कितना संक्रमण रहा, कितने लोगों की जान गई आदि के बारे में भी तथ्यात्मक ज्ञान कराया जाएगा।स्कूल में

स्‍कूल में उपलब्ध होंगे सैनिटाइजर व साबुन- विद्यालय खुलने पर विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सैनिटाइजर व साबुन भी उपलब्ध कराया जाएगा। विद्यालय की ओर से विद्यार्थी को साबुन उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए बजट की व्यवस्था विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को विद्यालय फंड से ही करनी होगी। माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों को कोरोना संक्रमण से बचाने को साबुन का वितरण किए जाने के निर्देश शासन स्तर से जारी किए गए हैं। विद्यार्थियों को हाथ धाेने व संक्रमण से बचने के लिए प्रेरित किया जाएगा। हालांकि साबुन वितरण का काम प्रशासनिक अधिकारियों के निर्देशन में कराया जाएगा। इसकी तैयारी भी कर ली गई है।

डीआइओएस के सूत्रों ने बताया कि, विद्यार्थियों को समय-समय पर हाथ धोने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से साबुन वितरण की योजना शासन की ओर से बनाई गई है। माध्यमिक विद्यालयों के लिए जितने साबुन वितरण करने के आदेश होंगे व साबुन उपलब्ध कराए जाएंगे, उनका वितरण कराया जाएगा। अभी नौवीं से 12वीं तक के विद्यार्थी स्कूल-कालेज आएंगे। उनको ही साबुन वितरण कराया जाएगा। प्रधानाचार्यों को निर्देशित किया गया है कि वो विद्यार्थियों व उनके अभिभावकों को सुरक्षा उपायों के पालन के लिए प्रेरित करने का प्रयास करें।

टीके की दोनों खुराक नहीं, तो तनख्वाह भी नहीं

कोरोना वैक्सीन की दोनों खुराक न लेने वालों को नहीं मिलेगी सैलेरी, निर्देश जारी

कोरोना वैक्सीन की दोनों खुराक न लेने वालों को नहीं मिलेगी सैलेरी, निर्देश जारी 

चंडीगढ़। तीसरी लहर की आशंका और टीकाकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हरियाणा सरकार ने सख्त फैसला लिया है। अब कोरोनारोधी टीके की दोनों डोज नहीं लगवाने वाले फ्रंटलाइन कर्मचारियों का वेतन रोकने का निर्देश दिया गया है। साथ ही फैसला लिया गया है कि अब दूसरी डोज लगवाने वालों को प्राथमिकता दें, ताकि अधिक से अधिक आबादी सुरक्षित हो सके।

प्रदेश में 18 साल से ऊपर के करीब 1.80 करोड़ लोगों में से 4.50 लाख फ्रंटलाइन कर्मचारी हैं। इनमें स्वास्थ्य, पुलिस, सफाईकर्मी, बिजली, पंचायती विभाग के लोग शामिल हैं।

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सरकारी आंकड़ों के अनुसार कुल 60 हजार पुलिस कर्मचारियों में से 58 हजार ने पहली और 49 हजार ने दोनों डोज ली है। इसके अलावा, सफाई कर्मचारियों समेत अन्य कर्मी पहली के बाद दूसरी डोज लेने नहीं आ रहे हैं। पहली और दूसरी लहर में प्रदेश में कोरोना से छह डॉक्टरों समेत 50 स्वास्थ्य कर्मियों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा, 45 पुलिसकर्मी और 43 बिजली कर्मी कोरोना से जान गंवा चुके हैं, इसलिए सरकार ने इसे गंभीरता से लिया है। 

हरियाणा में 16 जनवरी से शुरू हुए टीकाकरण के बाद अब तक कुल 1 करोड़ 23 लाख 86741 लोग खुराक ले चुके हैं। इनमें से 68,53,966 पुरुष हैं और 55,30,494 महिलाएं हैं। 96,90, 776 ने पहली और 26, 95,965 ने दोनों डोज ली हैं। केंद्र से कम वैक्सीन मिलने के कारण कम लोगों को वैक्सीन मिल पाई है। 

आयु वर्ग की बात करें तो सबसे अधिक टीका लगवाने वालों में युवा शामिल हैं। 18 से 44 साल के बीच के 59,06652 युवाओं ने टीका लगवाया है, जबकि 45 से 60 साल के 3467165 ने टीका लगवाया है। सबसे कम 60 साल से अधिक आयु वाले 30,12924 लोग हैं। 

मिनी थर्ड वेव की दस्तक, हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों ने बढ़ाई चिंता

देश में मिनी थर्ड वेव की दस्तक, हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों ने बढ़ाई केंद्र सरकार की चिंता

नई दिल्ली (एजेंसी)। केरल के साथ ही उसके पड़ोसी राज्यों में भी पिछले कुछ दिनों से कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। बीते हफ्ते देश के 13 राज्यों में कोरोना संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। सिर्फ तमिलनाडु ऐसा राज्य है जहां संक्रमण के मामलों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। 

उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में भी 26 जुलाई से 1 अगस्त तक के हफ्ते के बीच पिछले सप्ताह की तुलना में नए मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश में यह बढ़ोतरी 64 प्रतिशत है, जो कि पूरे देश में सबसे ज्यादा है। यहां नए मामले प्रतिदिन 670 से बढ़कर 1100 तक पहुंच गए हैं। उत्तराखंड में भी नए मामले 61 फीसदी तक बढ़ गए हैं। हालांकि, यहां मामले 272 से बढ़कर 437 हुए हैं। 

केरल में कोरोना विस्फोट! लगातार पांचवें दिन 20 हजार से अधिक केस आए सामने

तिरुवनंतपुरम (एजेंसियां)। केरल में कोरोना वायरस के बेतहाशा मामले सामने से देश में तीसरी लहर आने के संकेत मिल रहे हैं। शनिवार को यहां लगातार पांचवे दिन कोविड-19 से संक्रमण के 20 हजार से अधिक नए मामले सामने आए। हालांकि मृतकों की संख्या में कमी आई है। संक्रमण दर भी गिर कर 12.31 प्रतिशत हो गई है।

केरल में शुक्रवार को 100 संक्रमितों की मौत हुई थी जबकि संक्रमण दर (जांचे गए कुल नमूनों के अनुपात में संक्रमित) भी 13.61 प्रतिशत दर्ज हुए। देश में भी बीते चार दिनों से लगातार चालीस हजार से अधिक कोरोना केस आ रहे हैं। भारत के कोरोना केसों में 50 फीसदी योगदान केरल का बताया गया है। 

केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज के अनुसार शनिवार को राज्य में कोरोना वायरस से संक्रमण के 20,624 नए मामले आए। इन्हें मिलाकर राज्य में अब तक संक्रमित हुए मरीजों की संख्या 33,90,761 हो गई है। वहीं, पिछले 24 घंटों में 80 मरीजों की मौत के साथ राज्य में महामारी से जान गंवाने वालों की संख्या 16,781 तक पहुंच गई है।

मंत्री ने बताया कि गत 24 घंटे के दौरान 16,865 मरीज संक्रमण मुक्त हुए जिन्हें मिलाकर अब तक 32,08,969 मरीज इस महामारी को मात दे चुके हैं। वहीं 1,64,500 मरीज उपचाराधीन हैं। राज्य सरकार की विज्ञप्ति के अनुसार सबसे अधिक 3474 नए मरीज मिलने के साथ ही मलप्पुरम सबसे अधिक प्रभावित है। इसके अलावा त्रिशूर में 2693, पलक्कड में 2209, कोझिकोड में 2113, एर्णाकुलम में 2072, कोल्लम में 1371, कन्नूर में 1243, अलाप्पुझा में 1120, कोट्टयम में 1111 और तिरुवनंतपुरमें में 969 और लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। 

नए मरीजों में 98 स्वास्थ्य कर्मी और 112 राज्य के बाहर से आने वाले लोग शामिल हैं। गत 24 घंटे के दौरान 1,67,579 नमूनों की जांच की गई। इस समय राज्य के विभिन्न जिलों में 4,55, 078 लोगों को निगरानी में रखा गया है, जिनमें से 28,438 संदिग्ध मरीज संस्थागत पृथकवास या अस्पताल में भर्ती हैं। सरकार की विज्ञप्ति के अनुसार राज्य के 678 इलाकों में संक्रमण दर 10 प्रतिशत से अधिक है। केरल में आज यानी 1 अगस्त को भी कंप्लीट लॉकडाउन है।

लॉक डाउन again? 10 राज्यों को पाबंदियों पर विचार की सलाह

नई दिल्ली। कई राज्यों में कोरोना वायरस के नए मामलों और पॉजिटिविटी रेट में बढ़ोतरी के बाद नई रणनीति तैयार हो रही है। केंद्र सरकार ने संबंधित राज्यों से प्रतिबंधों को फिर से लागू करने पर विचार करने के लिए कहा है। कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने शनिवार को 10 राज्यों के साथ एक हाई लेवल बैठक की। स्वास्थ्य सचिव ने केरल, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, ओडिशा, असम, मिजोरम, मेघालय, आंध्र प्रदेश और मणिपुर के प्रतिनिधियों से कहा कि पिछले कुछ हफ्तों में 10 प्रतिशत से अधिक की पॉजिटिविटी रेट रिपोर्ट करने वाले सभी जिलों को सख्त प्रतिबंधों पर विचार करने की आवश्यकता है।मंत्रालय ने कहा कि इस स्तर पर किसी भी तरह की ढिलाई से इन जिलों में स्थिति बिगड़ सकती है।

46 जिलों में 10 प्रतिशत से अधिक पॉजिटिविटी रेट– बैठक में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के महानिदेशक डॉ.बलराम भार्गव ने कहा कि प्रतिदिन 40000 नए मामले के साथ समझौते करने की जरूरत नहीं है। भारत में लगभग 46 जिले 10 प्रतिशत से अधिक पॉजिटिविटी रेट रिपोर्ट कर रहे हैं और 53 जिले ऐसे हैं जो कि खतरे की ओर बढ़ रहे हैं। यहां पॉजिटिविटी रेट 5 से 10 प्रतिशत के बीच है। कोरोना के नए मामलों में बढ़ोतरी को देखते हुए मंत्रालय की ओर से इन राज्यों को 4 प्वाइंट में दिशा-निर्देश दिए गए हैं। 

4 प्वाइंट में दिशा-निर्देश- पहला यह है कि जहां ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं, वहां काबू करने के प्रयास और निगरानी रखी जाए। दूसरा, मामलों की मैपिंग, संपर्कियों का पता लगाना और नियंत्रण क्षेत्रों को परिभाषित करना है। तीसरा निर्देश ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को बढ़ाना और बाल चिकित्सा देखभाल पर ध्यान देना है। चौथा निर्देश है कि मौत पर नजर रखने के साथ ही गणना करना।

10 राज्यों में 80 प्रतिशत से अधिक सक्रिय मामले होम आइसोलेशन में- मंत्रालय ने कहा कि इन 10 राज्यों में 80 प्रतिशत से अधिक सक्रिय मामले होम आइसोलेशन में हैं। इन लोगों पर नजर रखने की जरूरत पर जोर देते हुए मंत्रालय ने कहा कि इन मरीजों की निगरानी के लिए समुदाय, गांव मोहल्ला, वार्ड आदि के स्तर पर स्थानीय निगरानी होनी चाहिए ताकि यह पता लग सके कि कहीं उनको अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत तो नहीं है। 

कोविड से निपटने को केंद्र से केरल जाएगा उच्चस्तरीय दल

कोविड-19 मामलों में आई तेजी को देखते हुए केंद्र केरल रवाना करेगा एक उच्चस्तरीय दल। कोविड-19 से निपटने के लिये केंद्रीय दल राज्य के जन स्वास्थ्य कार्यों को कारगर बनाने में मदद करेगा।

नई दिल्ली (एकलव्य बाण समाचार)। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने तय किया है कि एक उच्चस्तरीय दल को फौरन केरल रवाना किया जाये। दल में कई विषयों के माहिर शामिल हैं। यह दल केरल के स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ सहयोग करेगा, ताकि वहां कोविड-19 से कारगर तरीके से निपटा जा सके। उल्लेखनीय है कि केरल में कोविड मामले रोज तेजी से बढ़ रहे हैं।

Ministry of Health and Family Welfare के प्रवक्ता ने बताया कि केरल रवाना होने वाले केंद्रीय दल में छह सदस्यों को रखा गया है। इनका नेतृत्व राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) के निदेशक डॉ. एसके सिंह कर रहे हैं। दल 30 जुलाई, 2021 को केरल पहुंचेगा और कुछ जिलों का दौरा करेगा।

यह दल राज्य स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर काम करेगा, मैदानी हालात का जायजा लेगा और राज्य में कोविड के तेजी से बढ़ते मामलों पर अंकुश लगाने के लिये जन-स्वास्थ्य सम्बंधी जरूरी सुझाव देगा।

केरल में कोविड के सक्रिय मामले 1.54 लाख हैं, जो देश के कुल सक्रिय मामलों का 31.7 प्रतिशत हैं। पिछले सात दिनों में मामले 1.41 प्रतिशत की दर से बढ़े हैं। राज्य में रोज औसतन 17,443 से अधिक मामले सामने आ रहे हैं। राज्य में पॉजीटिविटी दर भी आमूल रूप से 12.93 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है और साप्ताहिक पॉजीटिविटी दर 11.97 प्रतिशत है। वहां ऐसे छह जिले हैं, जिनकी साप्ताहिक पॉजीटिविटी दर 10 प्रतिशत से ऊपर है। 

कोरोना: केरल में 2 दिन के कंप्लीट लॉकडाउन का ऐलान

मचा हाहाकार, फिर लौटे पाबंदियों के दिन, केरल में 31 जुलाई व 1 अगस्त को कंप्लीट लॉकडाउन

नई दिल्ली (एकलव्य बाण समाचार)। केरल में कोरोना वायरस के मामलों ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। केरल सरकार ने राज्य में 31 जुलाई और 1 अगस्त को कंप्लीट लॉकडाउन की घोषणा की है।

Complete lockdown in Kerala on July 31, August 1 over Covid-19

केरल में देश के 50 प्रतिशत केस- बताया गया है कि देश में सामने आ रहे कुल कोरोना केस संख्या में केरल का योगदान करीब 50 फीसदी है। केरल में बुधवार को कोविड-19 के 22,056 नए मामले सामने आए, जिससे संक्रमण के मामलों की कुल संख्या बढ़कर 33,27,301 हो गई, जबकि 131 और लोगों की मौत होने के साथ वायरस से मरने वालों की संख्या बढ़कर 16,457 हो गई।

राज्य सरकार की एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि 17,761 लोग संक्रमण से ठीक हुए, जिससे अब तक कुल ठीक होने वालों की संख्या बढ़कर 31,60,804 हो गई है। राज्य में अब उपचाराधीन मरीजों की संख्या 1,49,534 हो गई है। पिछले 24 घंटों में, 1,96,902 नमूनों की जांच की गई और संक्रमण दर 11.2 प्रतिशत दर्ज की गई। राज्य भर में अब तक, 2,67,33,694 नमूनों की जांच की जा चुकी है।

100 स्वास्थ्य कर्मी भी चपेट में- राज्य में सबसे अधिक प्रभावित जिलों में मलप्पुरम में 3931, त्रिशूर में 3005, कोझिकोड में 2400, एर्नाकुलम में 2397, पलक्कड़ में 1649, कोल्लम में 1462, अलाप्पुझा में 1461, कन्नूर में 1179, तिरुवनंतपुरम में 1101 और कोट्टायम में 1067 मामले आए हैं। राज्य के विभिन्न जिलों में फिलहाल 4,46,211 लोग निगरानी में हैं। सरकार की विज्ञप्ति में कहा गया कि नए मामलों में 100 स्वास्थ्य कर्मी शामिल हैं।

उत्तराखंड में 60 और मिले corona संक्रमित, संख्या बढ़कर हुई 341934, ब्लैक फंगस का आंकड़ा पहुंचा 555

देहरादून (एकलव्य बाण समाचार)। कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर स्वास्थ्य विभाग से जारी हेल्थ बुलेटिन के अनुसार उत्तरखंड राज्य में 60 लोग कोरोना संक्रमित मिले है। इसके बाद राज्य में कोरोना संक्रमित लोगो की संख्या 341934 हो गयी है। प्रदेश में किसी की मौत की सूचना नहीं है। उत्तराखंड में एक्टिव केस की संख्या 672 है तो आज 46 लोग रिकवर भी हुए हैं। अभी तक उत्तराखंड राज्य के जनपद अल्मोड़ा में 07, बागेश्वर 00, चमोली 00, चम्पावत 05, देहरादून 10, हरिद्वार 04, नैनीताल 08, पौड़ी 01, पिथौरागढ़ 06, रुद्रप्रयाग 02, टिहरी 01, उधमसिंहनगर 13 और उत्तरकाशी में 03 मरीज मिले हैं। वहीं प्रदेश में आज 04 ब्लैक फंगस (म्यूकोर माइकोसिस) के मामले सामने आये हैं। अब तक प्रदेश में कुल 555 ब्लैक फंगस के मामले सामने आ चुके हैं। इनमे से 124 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 212 लोग डिस्चार्ज हो चुके हैं।

वैक्सीन: भागूवाला क्षेत्र को बाद में कवर कर लेंगे!

बिजनौर (एकलव्य बाण समाचार)। कोविड-19 वैक्सीनेशन ना होने से नजीबाबाद तहसील क्षेत्र के ग्रामीणों में रोष व्याप्त हो गया है। दर्जनों गांव के ग्रामीणों ने वैक्सीनेशन कराने की मांग उठाई है। बताया गया है कि काफी संख्या में ग्रामीणों को पहली खुराक भी नहीं मिली, वहीं चिकित्सा प्रभारी नजीबाबाद का कहना है कि भागूवाला क्षेत्र को बाद में कवर कर लेंगे।

ग्रामीण कोविड-19 का टीका लगवाने को परेशान-
नजीबाबाद तहसील क्षेत्र अंतर्गत भागूवाला क्षेत्र के राजगढ़, जसपुर, रामपुर चाठा, रामदासवाली, सबलगढ़, श्यामीवाला, काशीरामपुर, मिर्जापुर, कोटसराय, कोटावाली इत्यादि गांव के ग्रामीण कोविड-19 का टीका लगवाने को परेशान हैं। काफी संख्या में ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्हें कोविड-19 की पहली खुराक भी प्राप्त नहीं हुई है। कुछ ग्रामीण ऐसे हैं जिन्हें दूसरी डोज को लगभग 65-70 दिन हो गए हैं। ग्रामीण शाहनवाज, मुकेश, शरीफ, वीरेंद्र, मुकेश आर्य, अब्दुला, अब्दुल हनीफ, अनीश, सलीम, खालिक, मुकेश, विरेंदर, जमीर, शौकत, जाकिर इत्यादि का कहना है की टीवी में, अखबारों पर तीसरी लहर का खतरा सिर पर मंडराता दिखाया, बताया रहा है। हमारे क्षेत्र में हम लोगों को अभी कोरोना की पहली खुराक भी नहीं मिल पाई है। ऐसे में हमारी जान माल की सुरक्षा कैसे होगी? ग्रामीणों ने मांग की है कि भागूवाला में कैंप लगाकर ग्रामीणों को टीके लगवाए जाएं, जिससे कोविड-19 की तीसरी लहर से बचा जा सके।
वहीं प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजीत सिंह का कहना है कि अभी तक  वैक्सीन की कमी थी पहले मंडावली और नांगल सोती में वैक्सीनेशन कराया जा रहा है, बाद में भागूवाला क्षेत्र को कवर कर लेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने ममता सरकार को लताड़ा

नई दिल्ली (एकलव्य बाण समाचार)। सुप्रीम कोर्ट ने एनसीपीसीआर पोर्टल पर मार्च-2020 से कोविड-19 के कारण अनाथ हुए बच्चों का पूरा डाटा अपलोड नहीं करने पर पश्चिम बंगाल सरकार को जमकर लताड़ लगाई है। केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि पंजाब, जम्मू-कश्मीर और पश्चिम बंगाल के आंकड़े विश्वसनीय नहीं है। अदालत ने बंगाल सरकार से पूछा कि क्या आपके राज्य में सिर्फ 24 बच्चे ही अनाथ हुए हैं। इस पर राज्य सरकार के वकील ने कहा कि केंद्र सरकार का बयान गलत है।

न्यायमूर्ति नागेश्वर राव ने कहा, ‘यह क्या बात हुई, आप इसे राजनीतिक मत बनाएं, यह बच्चों के कल्याण का मामला है। क्या इतने बड़े राज्य में सिर्फ 24 बच्चे ही अनाथ हुए हैं। यह स्वीकार नहीं किया जा सकता। आपके अनुसार यदि यह सही है तो हम इसे रिकॉर्ड पर लेते हैं और अलग से जांच करवाते हैं। साथ ही आपके मुख्य सचिव को भी तलब करते हैं। आप ऐसा बयान नहीं दे सकते।’ इस पर राज्य सरकार के वकील ने कहा कि वह नए आंकड़े अदालत में पेश करेंगे।

अदालत कोविड से अनाथ हुए बच्चों के कल्याण के लिए पीएम केयर्स फंड से राशि देने की याचिका पर विचार कर रहा है। अदालत ने कहा कि पीएम केयर्स फंड के तहत घोषित कल्याण योजना में उन सभी बच्चों को शामिल किया जाना चाहिए जो कोविड-19 के दौरान अनाथ हो गए थे, न कि सिर्फ उन्हें जो कोविड के कारण अनाथ हुए हैं।

ऑक्सीजन की कमी से मौत: साबित करने का देश में कोई तरीका ही नहीं!

ऑक्सीजन की कमी से मौत: अगर हुई है तो साबित करने का देश में कोई तरीका ही नहीं है। जब अस्पतालों के बाहर हो रही थीं मौतें, तब केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक ने नहीं रखी जानकारी। स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी ने संसद में दी जानकारी को महज ब्यूरोक्रेटिक आंसर बताया। विशेषज्ञों ने कहा, चिकित्सीय तौर पर ऑक्सीजन की कमी को नहीं किया जा सकता साबित।

ऑक्सीजन या फिर स्वास्थ्य सेवाओं की कमी से एक भी मौत न होने के बाद हर कोई अलग अलग तर्क दे रहा है, जबकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे लेकर हैरान नहीं हैं क्योंकि इन्हें पहले से ऐसे जवाब की उम्मीद थी। केंद्र और राज्य सरकारों के पास सिस्टम ही नहीं है, जिसके आधार पर बताएं कि दूसरी लहर में कितने लोगों की मौत ऑक्सीजन न मिलने अथवा भर्ती नहीं होने से हुईं?

उस वक्त इसे बनाने की जरूरत थी लेकिन तब किसी भी राज्य सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया, न ही केंद्र ने कोई पहल की। सरकारों के पास अस्पतालों का ब्यौरा मौजूद है जिसे ऑडिट करवाया जा सकता है लेकिन बहुत से लोगों की मौत अस्पतालों के बाहर व घरों में भी हुई है? जिसे इन कागजों तक लाना काफी मुश्किल है। गंभीर बात यह है कि बीते तीन माह से न तो केंद्र ने इस बारे में सरकार से पूछा है और न ही राज्य सरकारों को जानकारी जुटाने की कोई जरूरत महसूस हुई।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. चंद्रकांत लहरिया ने एक प्रिंट मीडिया ग्रुप से बातचीत में कहा कि किसी भी बीमारी की मृत्यु दर एक स्वास्थ्य सूचकांक (हेल्थ इंडिकेटर) होती है जिसके आधार पर उक्त जिला या राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं का आकलन किया जा सकता है। यह एक बड़ा कारण है, जिसके आधार पर कहा जा सकता है कि कोई भी राज्य अपने खराब प्रदर्शन को जगजाहिर नहीं करना चाहेगी। उन्होंने कहा, केंद्र सरकार का जवाब तकनीकी तौर पर ठीक है, क्योंकि स्वास्थ्य राज्य का विषय है और वहां से जानकारी के आधार पर ही केंद्र सरकार रिपोर्ट तैयार करती है।  

वहीं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. राजीव जयदेवन ने कहा, मुझे लगता है कि अभी सरकार की इस टिप्पणी पर और अधिक स्पष्टता की जरूरत है। हम सभी ने उन दिनों का सामना किया है। चिकित्सीय तौर पर ऑक्सीजन की कमी से मौत की पुष्टि करना जटिल है। वहीं अस्पतालों से बाहर की स्थिति जानना और भी मुश्किल है। 

स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़े- स्वास्थ्य मंत्रालय की बात करें तो इस साल देश भर में कोरोना संक्रमण की वजह से 2,62,670 लोगों की मौत हुई है। जबकि दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन व स्वास्थ्य सेवाओं का भारी संकट 12 अप्रैल से 10 मई के बीच देखने को मिला। इस दौरान अलग अलग राज्यों के अस्पतालों से सामने आईं तस्वीरें और कब्रिस्तान-श्मशान घाट की स्थिति काफी भयावह थी।

मृत्यु प्रमाण पत्र पर नहीं लिख सकते ऑक्सीजन की कमी

स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. चंद्रकांत लहरिया ने कहा, उन दिनों अस्पतालों के अंदर, बाहर और घरों में मौतें हुईं। अस्पतालों में भर्ती मरीजों का पूरा रिकॉर्ड होता है लेकिन जो लोग बाहर मर गए या फिर जिनकी घरों में मौत हो गई, उनकी जानकारी किसी के पास नहीं है। ऑक्सीजन एक थैरेपी है। इसकी कमी के चलते किसी मरीज में ऑर्गन फेलियर हो सकता है और उसकी मौत हो सकती है। जब इस मरीज के मृत्यु प्रमाण पत्र की बात आएगी तो उस पर ऑर्गन फेलियर ही मौत का कारण होगा, न कि ऑक्सीजन। हालांकि हर अस्पताल के पास ऑक्सीजन आपूर्ति को लेकर पूरा रिकार्ड रहता है। उस मरीज की केस फाइल का ऑडिट करेंगे तो पता चलेगा कि उस दौरान अस्पताल में ऑक्सीजन बंद हुई थी अथवा नहीं? ऐसे मामलों के बारे में सरकार पता कर सकती हैं।

25 मई को भेजे थे निर्देश, अलग से नहीं- केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सदन में दी गई जानकारी पर कहा कि राज्यों को अलग से कोई निर्देश नहीं दिए गए थे। कोविड-19 संक्रमण से मरने वालों की रिपोर्टिंग कैसे करनी है, इस बारे में बीते 25 मई को दिशा निर्देश जारी किए थे जिसमें राज्यों से होम आइसोलेशन में मरने वालों को भी कुल संख्या में शामिल करने के लिए कहा गया। इस पर अभी तक हर राज्य से पर्याप्त जानकारी नहीं आई है।

बाहर वाले का केवल रजिस्ट्रेशन होता है- विशेषज्ञों के मुताबिक किसी व्यक्ति की मौत होने के बाद उसकी रिपोर्टिंग दो तरीके से होती है। पहली मृत्यु प्रमाण पत्र के जरिए, जिसे निगम/नगर पालिका जारी करती है। इसके लिए अस्पताल से मौत का कारण सहित तमाम जानकारी वाली एक पर्ची दी जाती है। दूसरा विकल्प किसी की मौत होने के बाद नजदीकी अस्पताल में रजिस्ट्रेशन का होता है। इसके अलावा अन्य कोई काम नहीं होता और यहां मौत के कारण की जानकारी भी नहीं होती। इस रजिस्ट्रेशन का इस्तेमाल इंश्योरेंस क्लेम या जमीन-संपत्ति इत्यादि के लिए इस्तेमाल होता है। यही वजह है कि देश में मरने वालों के रजिस्ट्रेशन सबसे ज्यादा होते हैं और मृत्यु प्रमाण पत्र कम जारी होते हैं। अगर साल 2019 के आंकड़े देखें तो स्वास्थ्य मंत्रालय के ही अनुसार 76,41,076 मौत के रजिस्ट्रेशन हुए हैं लेकिन 15,71,540 ही मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए गए।

अंतिम विकल्प: घर-घर सर्वे, मौखिक ऑटोप्सी जरूरी- विशेषज्ञों ने बताया कि अभी भी सरकार के पास दो अहम विकल्प मौजूद हैं। हाल ही में झारखंड में घर-घर सर्वे किया था जिसके आधार पर यह पता चल सके कि कितने लोगों की महामारी में मौत हुई है या फिर मरने वाले संदिग्ध थे। इसी तरह एक विकल्प मौखिक ऑटोप्सी का है जिसे अभी तक देश में एक बार इस्तेमाल किया जा चुका है। इसके तहत स्वास्थ्य कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जाता है और वह पीड़ित या संदिग्ध परिवारों में जाकर जानकारी जुटाते हैं जिसकी जांच मेडिकल ऑफिसर करता है। इन दोनों विकल्प के जरिए सरकारें अपने अपने राज्य में ऑक्सीजन संकट और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी से हुई मौतों की जानकारी एकत्रित कर सकते हैं। 

कोरोना: तीसरी लहर की शुरुआत! 13 राज्यों में बजी खतरे की घंटी

सावधान! देश में कोरोना की तीसरी लहर की शुरुआत, 13 राज्यों में बजी खतरे की घंटी

नई दिल्ली। ब्रिटेन, रूस समेत कई देशों में टीकाकरण के बावजूद कोरोना के बढ़ते संक्रमण से भारत की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। फिलहाल भारत में करीब 68 फीसदी लोग सीरो पॉजिटिव पाए गए हैं। इसके बावजूद कोरोना संक्रमण के दैनिक औसत मामले एक महीने से 40 हजार पर स्थिर बने हुए हैं। विशेषज्ञ चिंता जता रहे हैं कि इनमें बढ़ोत्तरी हो सकती है।

आंकड़े स्थिर, तीसरी लहर की आहट- कोरोना की दूसरी लहर के बाद हुए सीरो सर्वे में करीब 68 फीसदी लोगों में एंटीबॉडी पाई गई है। इसमें टीका लगा चुके लोग भी शामिल हैं। इसके बावजूद देश के 13 राज्यों में कोरोना के सक्रिय रोगियों की संख्या में बढ़ोत्तरी का रुझान है। केरल, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड, ओडिशा के अलावा पूर्वोत्तर के तमाम राज्यों में कोरोना के दैनिक मामलों की दर ऊंची बनी हुई है। वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के निदेशक प्रोफेसर जुगल किशोर का कहना है कि बड़े पैमाने पर लोगों में एंटीबॉडी मिलने से यह स्पष्ट है कि कोरोना की तीसरी लहर पहले जैसी भयावह नहीं होगी। लेकिन जिस प्रकार तेजी से मामले घट रहे थे और वह 40 हजार पर स्थिर हो गए हैं, यह तीसरी लहर की आहट हो सकती है। कई देशों में ऐसा ही हुआ है। वह अब तक कई लहर का सामना कर चुके हैं। कई प्रदेशों में भी दो से अधिक लहर आ चुकी हैं।

लापरवाही पड़ेगी भारी- अभी देश में कोरोना की तीसरी लहर के आने के संकेत मिल रहे हैं। ऐसे में लोगों की लापरवाही इस लहर को भी दूसरी लहर की तरह ही खतरनाक बना सकती है। ज्‍यादा भीड़भाड़ कोरोना को और भी ज्‍यादा बढ़ा सकती है। अगर लोग कुछ दिन और कोरोना गाइडलाइन का पालन करें तो कोरोना की तीसरी लहर से बचा जा सकता है। सीरो सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक देश में 40 करोड़ लोग कोरोना संक्रमण से बचे हुए हैं और उन्‍होंने अभी तक टीका भी नहीं लगवाया है।

कांवड मेले पर प्रतिबंध से कांवड़ बनाने वालों में रोष

कांवड़ यात्रा का फाइल फोटो


बिजनौर/हरिद्वार (एकलव्य बाण समाचार)। उत्तराखंड सरकार के बाद अब उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा भी कांवड़ यात्रा को प्रतिबंधित कर दिया गया है। इस कारण न सिर्फ़ हरिद्वार के व्यापारियों में आक्रोश है बल्कि उत्तर प्रदेश के जनपद बिजनौर अंतर्गत नजीबाबाद थाना क्षेत्र में कांवड़ बनाने वाले लोगों में भी रोष व्याप्त है।

कांवड़ यात्रा का फाइल फोटो

कांवड़ बनाने के कार्य से जुड़े लोगों का कहना है कि कोरोना के चलते हमारे रोजगार बर्बादी के कगार पर खड़े हैं। हम लोग परेशान और बेरोजगार हो रहे हैं। हमारी ओर देखने वाला कोई नहीं है। हम ऐसी मुसीबत में अपने परिवार का लालन पालन कैसे करें। जीवन बहुत दूभर होने लगा है। गौरतलब है कि हरिद्वार क्षेत्र में भी अनेक व्यापारियों में कावड़ यात्रा को प्रतिबंधित करने के कारण रोष व्याप्त है। एक दिन पहले ही व्यापारियों ने प्रदर्शन करते हुए कहा था कि हमें जहर दे दो।

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों की बॉर्डर मीटिंग

विदित हो कि उत्तराखंड राज्य सरकार द्वारा कांवड मेला वर्ष 2021 प्रतिबन्धित किये जाने पर एसएसपी हरिद्वार के दिशा-निर्देशन में 16.07.21 को थाना श्यामपुर क्षेत्रान्तर्गत एक बॉर्डर पुलिस मीटिंग आयोजित की गई थी। मीटिंग में उत्तराखंड से सीओ श्यामपुर, एसओ श्यामपुर, चौकी इंचार्ज चंडीघाट, चौकी इंचार्ज लालढांग, नायब तहसीलदार हरिद्वार व उत्तर प्रदेश से सीओ नजीबाबाद, एसओ मंडावली, एसडीएम नजीबाबाद परमानंद झा एवं अन्य अधिकारियों द्वारा प्रतिभाग कर “कांवड़ मेला 2021 प्रतिबंधित” को लेकर विचार विमर्श करते हुए उच्चाधिकारीगण के आदेशों निर्देशों को साझा किया गया तथा यह भी तय किया गया कि अपने अपने क्षेत्र में इस हेतु भरपूर प्रचार एवं प्रसार करते हुए अन्य सभी राज्यों में भी लोगों को जागरूक करें ताकि प्रतिबंध को देखते हुए कोई भी कांवड़िया उत्तराखंड में न आ सके तथा अनावश्यक रूप से परेशान न हो। इसके अतिरिक्त अपराध की दृष्टि से भी इस मीटिंग में वार्ता हुई, जिसमें किसी भी प्रकार के अपराध से संबंधित घटना में जनपदों में आपसी समन्वय करते हुए एक दूसरे की मदद की जा सके तथा उक्त वार्ता में महत्वपूर्ण मोबाइल नंबर भी साझा किए गए।

कांवड़ियों को रोकने के लिए उत्तराखंड पुलिस ने बनाई रणनीति

पुलिस लाइन रोशनाबाद के सभागार में एसएसपी ने कांवड मेला वर्ष 2021 स्थगित किये जाने के सम्बन्ध में पुलिस अधिकारियों के साथ की बैठक।

हरिद्वार (एकलव्य बाण समाचार)। कांवड मेला वर्ष 2021 स्थगित किये जाने के सम्बन्ध में एसएसपी सेंथिल अवूदई कृष्णराज एस ने जनपद के पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर आवश्यक दिशा निर्देश दिये।

पुलिस लाइन्स रोशनाबाद हरिद्वार स्थित सभागार में एसएसपी हरिद्वार की अध्यक्षता में राज्य सरकार द्वारा कांवड मेला 2021 स्थगित किये जाने के आदेश निर्गत किए जाने के उपरान्त हरिद्वार पुलिस की बार्डर पर आने वाले कांवडियों को रोकने की रणनीति के सम्बन्ध में बैठक आयोजित की गयी।

हरिद्वार पुलिस के सभी अधिकारियों की मौजूदगी में एसएसपी ने सभी क्षेत्राधिकारी, कोतवाली प्रभारी एवं थानाध्यक्षों को निर्देश दिए कि वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के संक्रमण (तीसरी लहर) से आम जनता की जान की सुरक्षा के दृष्टिगत उत्तराखण्ड सरकार द्वारा कांवड मेला 2021 स्थगित करने का निर्णय लिया गया है। कांवड मेला में देश के कोने कोने से शिव भक्तों का हरिद्वार आवागमन रहता है।

सरकार के निर्णय के पालन हेतु प्रशासन से समन्वय स्थापित कर समस्त आवश्यक तैयारियां कर बार्डर पर पर्याप्त मात्रा में पुलिस बल नियुक्त करेंगे तथा शासन द्वारा निर्गत आदेशों के अनुरुप कार्यवाही करना सुनिश्चित करेंगें।

साथ ही सोशल मीडिया के माध्यम से उक्त स्थगन आदेश के सम्बन्ध में व्यापक प्रचार प्रसार करें। एसपी क्राइम, एसपी ग्रामीण व एसपी सिटी को निर्देशित किया कि वह समय से उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जनपदों से बार्डर मीटिंग आयोजित करते हुए सूचनाओं का आदान-प्रदान करें।

कोविड नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों को सीज करने की कार्यवाही के लिये पार्किंग स्थलों का समय से चयन करते हुए आवश्यक कार्यवाही कर उक्त स्थलों पर पहले से ही पर्याप्त मात्रा में पुलिस बल नियुक्त किया जाए। साथ ही बार्डर प्वाइंट्स पर अनुभवी पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को नियुक्त किया जाए।

एकलव्य बाण समाचार

कैंपटी फाॅल में अब एक बार में नहा पाएंगे अधिकतम 50 पर्यटक

हर आधा घंटे बाद बजने लगेगा हूटर। पर्यटकों की निगरानी करने के लिए जांच चौकी स्थापित। चौकियों पर कोविड-19 नियमों के तहत पर्यटकों की जांच।

 कैंपटी फाॅल में अब अधिकतम 50 पर्यटक ही एक बार में नहा पाएंगे, हर आधा घंटे बाद बजने लगेगा हूटर

देहरादून (एकलव्य बाण समाचार)। कोरोना वायरस का खतरा अभी कम नहीं हुआ है, लेकिन देवभूमि उत्तराखंड में पर्यटकों का आना शुरू हो गया है। पर्यटकों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए अब टिहरी डीएम ने आदेश जारी कर कैंपटी फाॅल में नहाने के कुछ नियम बना दिए हैं। यहां एक बार में अब अधिकतम 50 पर्यटक ही नहा पाएंगे और इसके लिए भी उन्हें केवल आधे घंटे का ही समय मिलेगा। हर आधा घंटे बाद हूटर बजाकर सचेत किया जाएगा।

कोरोना खतरे के बीच झरना- कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है, लेकिन उससे पहले ही पर्यटन स्थल कैंपटी फाॅल में पर्यटकों का भारी जमावड़ा लगना शुरू हो गया था। इसको लेकर जहां लगातार खबरें छपी, वहीं, हाईकोर्ट ने भी मामले का संज्ञान लिया था। यही कारण रहा कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए टिहरी जिला प्रशासन उक्त निर्णय लेना पड़ा। आधा घंटे की अवधि पूरी होते ही वहां लगे हूटर बजने लगेंगे और पर्यटकों को तत्काल उसमें से बाहर निकलकर वापस लौटना होगा। लॉकडाउन में मिली छूट के बाद कैंपटी फॉल में घूमने और नहाने के लिए हर दिन उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि बाहरी प्रदेशों के भी सैकड़ों पर्यटक पहुंच रहे हैं। प्रशासन को शिकायत मिली है कि कैंपटी फॉल के झरने में नहाने के दौरान पर्यटक कोविड-19 संबंधी नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा है।

पर्यटकों की निगरानी करने के लिए जांच चौकी- टिहरी की जिलाधिकारी इवा आशीष श्रीवास्तव ने यह आदेश जारी किया। उन्होंने टिहरी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और धनौल्टी के उपजिलाधिकारी को कैंपटी फॉल आने वाले पर्यटकों की निगरानी करने के लिए जांच चौकी स्थापित करने को भी कहा। आदेश में कहा गया है कि इन चौकियों पर कोविड-19 नियमों के तहत पर्यटकों की जांच की जाए तथा कैंपटी फॉल झरने में एक बार में 50 से अधिक पर्यटकों को जाने की अनुमति न दी जाए। आधे घंटे में पर्यटकों के झरने से वापस लौटने के पश्चात बारी-बारी से 50 पर्यटकों को प्रवेश करने की अनुमति दी जाए।

मान नहीं रहे लोग, राजधानी के 3 मार्केट बंद

नई दिल्ली (एकलव्य बाण समाचार) कोरोना की भयावहता का मंजर देखने और तीसरी लहर के संभावित खतरे के बावजूद लोग मान नहीं रहे। बाजारों में इस कदर भीड़ उमड़ रही है जैसे हालिया त्रासदी कोई फिल्मी सीन था। लोगों की इसी लापरवाही को देखते हुए केजरीवाल सरकार ने शुक्रवार को दिल्ली में मोबाइल के सबसे बड़े बाजार गफ्फार मार्केट और नाईवाला मार्केट को 11 जुलाई की रात 10 बजे तक बंद कर दिया है। इसके अलावा रोहिणी सेक्टर 13 स्थित डीडीए मार्केट को 12 जुलाई तक के लिए बंद किया गया है।

दिल्ली में कोरोना की तीसरी लहर को रोकने के हर संभव प्रयासों के बीच दूसरी लहर के दौरान हुई गलतियों को सुधारने की कवायद की जा रही है। इसी कड़ी में दिल्ली की केजरीवाल सरकार लगातार सख्त फैसले ले रही है और कोरोना प्रोटोकॉल तोड़ने वाले तमाम लोगों के खिलाफ सख्त एक्शन हो रहा है। इसी कारण दिल्ली की गफ्फार और नाईवाला मार्केट को बंद कर दिया गया है।

गफ्फार और नाईवाला मार्केट बंद

इन बाजारों में कुछ दिनों से लगातार लोगों का हुजूम देखने को मिल रहा था। सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं और कोरोना नियमों का कहीं पर भी पालन होता नहीं दिख रहा था। इस कारण गफ्फार और नाईवाला मार्केट को 11 जुलाई की रात 10 बजे तक बंद कर दिया गया है। वहीं रोहिणी सेक्टर-13 की डीडीए मार्केट को भी अब 12 जुलाई तक बंद करने का आदेश दे दिया गया है। एसडीएम द्वारा जारी आदेश के अनुसार बाजार में अत्यधिक भीड़, पब्लिक और दुकानदारों द्वारा कोविड नियमों का उल्लंघन करने की वजह से बाजार को बन्द रखने का फैसला लिया गया है, हालांकि आवश्यक सेवाओं से जुड़ी दुकानें खुली रहेंगी। इससे पहले अनलॉक प्रक्रिया के दौरान भी दिल्ली सरकार ने बाजार बंद करा दिये थे। लोगों की लापरवाही को देखते हुए ये सख्त फैसला लिया गया था। इस बार भी फिर वही सख्ती दिखाते हुए दो बड़े बाजारों को बंद करने का फैसला किया गया।

तीसरी लहर को रोकने की तैयारी

इस समय दिल्ली सरकार कोरोना की तीसरी लहर से निपटने की तैयारी कर रही है। बैठकों का दौर भी जारी है और हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को और बेहतर करने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में शुक्रवार को दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण विभाग (डीडीएमए) की बैठक में कोरोना की संभावित तीसरी लहर की तैयारियों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि डीडीएमए की बैठक में ‘ग्रेडेड रिस्पाॅस एक्शन प्लान’ को पास किया गया। दिल्ली में कब लॉकडाउन लगेगा और कब क्या खुलेगा? इसे लेकर अब संशय की स्थिति नहीं रहेगी।

उत्तराखंड में ब्लैक फंगस का आंकड़ा 502 पहुंचा

उत्तराखंड में मिले 109 कोरोना संक्रमित, संख्या बढ़कर हुई 340488

देहरादून (एकलव्य बाण समाचार)। उत्तरखंड में 109 कोरोना संक्रमित मिलने के बाद राज्य में यह संख्या 340488 हो गयी है। प्रदेश में शुक्रवार को 02 लोगों की मौत हुई तो एक्टिव केस की संख्या 1864 है। वहीं 108 लोग रिकवर भी हुए हैं।

कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर स्वास्थ्य विभाग से जारी हेल्थ बुलेटिन के अनुसार अभी तक उत्तराखंड राज्य के जनपद अल्मोड़ा में 02, बागेश्वर 01, चमोली 04, चम्पावत 01, देहरादून 49, हरिद्वार 09, नैनीताल 13, पौड़ी 03, पिथौरागढ़ 12, रुद्रप्रयाग 02, टिहरी 02, उधमसिंहनगर 05 और उत्तरकाशी में 06 मरीज मिले हैं। वहीं प्रदेश में आज 03 ब्लैक फंगस (म्यूकोर माइकोसिस) के मामले सामने आये हैं। अब तक प्रदेश में कुल 502 ब्लैक फंगस के मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से 99 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 103 लोग डिस्चार्ज हो चुके हैं।

ताजपुर में कोरोना वैक्सीन लगवाने को दिखा लोगों में जोश

राजा का ताजपुर में कोरोना वैक्सीन लगवाने को दिखा लोगों में जोश। सुबह से ही लग गई लंबी लंबी कतारें।

बिजनौर। कोरोना वायरस को देखते हुए सरकार ने सभी गांव कस्बों में कोविड-19 वैक्सीन के कैंप लगाने के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में ताजपुर के पुराना सरकारी अस्पताल, अतिरिक्त प्राथमिक अस्पताल, धर्मशाला प्रथम प्राइमरी स्कूल, गौरी शंकर गुरुद्वारा, सैनी धर्मशाला आदि जगहों पर कैंप लगाकर आम जनता के वैक्सीन लगाए गए। वैक्सीन लगवाने वालों की सुबह से ही लंबी कतार लगी रही। वैक्सीन लगवाने के लिए महिलाएं, युवक, युवतियों, छात्र छात्राओं में जोश दिखाई दिया। वह सुबह से ही लाइन में लगे हुए वैक्सीन लगवाने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। ताजपुर में लगभग एक हजार से ज्यादा लोगों ने वैक्सीन लगवाई। ग्राम प्रधान फरहाना परवीन, उनके पति सपा नेता हाजी शमशाद अहमद फरीदी ने अलग-अलग कैम्पों का निरीक्षण किया। बाहर से आई टीम के लिए ग्राम प्रधान पति ने अपनी तरफ से खाने पीने की व्यवस्था करवाई।

गौरतलब है कि ग्राम प्रधान फरहाना परवीन, उनके पति सपा नेता हाजी शमशाद अहमद फरीदी लगातार आम जनता से कोविड-19 वैक्सीन लगवाने के लिए डोर टू डोर जाकर लोगों को प्रेरित करते हुए नजर आये। उन्होंने बताया कि वैक्सीन लगवाने से कोरोना वायरस से बचा जा सकता है।  इसलिए सभी लोग वैक्सीन जरूर लगवाएं। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार जनता से वैक्सीन लगवाने के लिए सभी धर्मों के लोगों से सहयोग की अपील कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस बीमारी से बचने के लिए वैक्सीन लगवाना बहुत जरूरी है, तभी इससे लड़ा जा सकता है। डॉक्टरों की टीम का सहयोग करने वालों में ग्राम प्रधान फरहाना परवीन, सपा नेता हाजी शमशाद अहमद, समाजसेवी सुलेमान फरीदी, मास्टर सलीम अहमद आदि मौजूद थे।

कोरोना से लड़ाई लड़ने में योगा एक सबसे मजबूत शस्त्र है: वीरेन्द्र प्रताप सिंह

कोरोना से लड़ाई लड़ने में योगा एक सबसे मजबूत शस्त्र है:वीरेन्द्र प्रताप सिंह

लखनऊ। सोमवार को सातवां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। योग दिवस के मौके पर अलग-अलग हिस्सों में कई कार्यक्रमों का आयोजन किया। इसी कड़ी में शीतला मंदिर प्रांगण काकोरी, महादेवन मंदिर प्रांगण काकोरी, नगर पंचायत कार्यालय काकोरी सहित कई जगह योग शिविर आयोजित किए गए।महादेवन मंदिर काकोरी प्रांगण में भाजपा काकोरी मण्डल यूनिट द्वारा आयोजित शिविर में बतौर मुख्यातिथि प्रदेश कार्यसमिति सदस्य पूर्व जिलाध्यक्ष लखनऊ एवं काकोरी मण्डल प्रभारी वीरेन्द्र प्रताप सिंह उपस्थित रहे। बाद में कार्यकर्ताओं के साथ वार्ड हाता गुलाम सफदर के बूथ अध्यक्ष सूरज धीमान व मंडल मंत्री प्रतिभा वर्मा के घर पहुंच कर जनसंपर्क कर उनका हालचाल लिया और जलपान किया। इसके बाद वैक्सिनेसन सेंटर सामुदायिक स्वास्थ केन्द्र काकोरी पर पहुंच कर चल रहे वैक्सिन लगाने के कार्यक्रम के विषय में अधीक्षक डॉ. दीपक भार्गव से जानकारी प्राप्त की व लोगों से बातचीत कर टीकाकरन के लिये प्रेरित किया। अधीक्षक से 18 वर्ष व 45 वर्ष से अधिक के अलग-अलग केन्द्र निर्धारित करने को कहा और मंडल अध्यक्ष सहित टीम का अस्पताल के डाक्टर व स्टाफ से परिचय कराया।

मण्डल अध्यक्ष रविराज लोधी को निर्देशित किया कि वैक्सिनेशन कराने वाले लोगों की हेल्प के लिए एक भाजपा की तरफ से हेल्पडेस्क सीएचसी पर लगाएं।शीतला मंदिर प्रांगण में स्वयं सेवक संघ एवं हिन्दू जन सेवा समिति द्वारा योग शिविर आयोजित किया गया।नगर पंचायत काकोरी प्रांगण में नगर पंचायत अध्यक्ष असमी खान व अधिशासी अधिकारी दिनेश प्रताप सिंह के द्वारा आयोजित किया गया।
भाजपा पूर्व जिलाध्यक्ष वीरेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि कोरोना के खिलाफ जंग में योग एक मजबूर हथियार साबित हुआ है। विभिन्न अध्ययनों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने से लेकर तनाव घटाने तक में इसकी अहम भूमिका पाई गई है। वहीं कोविड-19 देखभाल केंद्रों में भी संक्रमण से कमजोर पड़े फेफड़ों को मजबूत बनाने के लिए योग का सहारा लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कोरोना के डेढ़ वर्षों में सभी ने बड़े संकट का सामना किया। इस मुश्किल समय में इतनी परेशानी में लोग इसे आसानी से भूल सकते थे, लेकिन लोगों में योग का उत्साह और बढ़ा है। उन्होंने कहा कि इस योग दिवस पर यह कामना करता हूं कि हर देश, हर समाज और हर व्यक्ति स्वस्थ हो। सब एकसाथ मिलकर एक दूसरे की ताकत बनें। इस अवसर पर जिला महामंत्री विजय मौर्य, मण्डल अध्यक्ष रविराज लोधी, उपाध्यक्ष नीलम श्रीवास्तव, कौशिक राजपूत, महामंत्री विपिन राजपूत, दयाराम, गुड़िया भारतीय, दिनेश श्रीवास्तव, पूर्व चेयरमैन सुशील कुमार लोधी, सभासद शिवहरि द्विवेदी, मनीष गुप्ता, सहकारी संघ लिमिटेड सभापति केशरी राव धारा सिंह यादव, रमाकांत गुप्ता, प्रज्ज्वल गुप्ता, राजन पाण्डेय, अमित गुप्ता, लवकुश यादव, कमलेश कुमार लोधी आदि उपस्थित रहे।

जनपद में सभी 298 बेड खाली, आईसीयू एवं आक्सीजन बेड शामिल

जनपद में सभी 298 बेड खाली, जिसमें आईसीयू बेड एवं आक्सीजन बेड शामिल है। रिकवरी रेट बढकर हुआ 99.1 प्रतिशत -जिलाधिकारी उमेश मिश्रा।

बिजनौर। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि जिले में कोविड इन्फेक्शन का रिकवरी रेट में लगातार वृद्वि हो रही है। उन्होंने बताया कि निगरानी समिति द्वारा सर्वे किए गए घरों की संख्या 33439, बुखार, खांसी, जुकाम आदि जैसे लक्षण दिखने वाले व्यक्तियों को की गईं 1041 किट्स वितरित, 47 ग्राम पंचायतों में सेनेटाईजेशन तथा 408 ग्राम पंचायत में हुआ आज लार्वा स्प्रे एवं स्वच्छता का कायकराया गया है। उन्होंने बताया कि आज तक कुल सक्रिय केस 14690, जिसके सापेक्ष अब तक 14555 लोगों को डिस्चार्ज किया जा चुका है। इस प्रकार आज तक कुल सक्रिय केस 30 हैं। प्राप्त कुल 2687 कोविड टेस्ट रिपोर्ट के सापेक्ष निगेटिव 2685 तथा पाॅजेटिव केस 02 चिन्हित हुए। इस प्रकार निरन्तर सक्रिय केसों की संख्या में कमी आ रही है। उन्होंने बताया कि एल-2 स्तर के आठ अस्पतालों में कुल उपलब्ध 298 बेड में 298 बेड खाली, इस प्रकार कोई बेड भरा नहीं, जिसमें आईसीयू बेड एवं आक्सीजन बेड शामिल है।

वैक्सीनेशन योजना की सफलता को समीक्षा

बिजनौर। नजीबाबाद के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में वैक्सीन योजना को सफल बनाने के लिए उपजिलाधिकारी ने चिकित्सा प्रभारी, स्वास्थ्य कर्मियो, समिति सदस्यों की बैठक लेकर समीक्षा की।

बुधवार को तहसील परिसर स्थित उपजिलाधिकारी कक्ष में पीएचसी प्रभारी डा. अजीत सिंह व स्वास्थ्य कर्मियों की बैठक में एसडीएम परमानन्द झा ने  ग्रामीण क्षेत्रों में वैक्सीन सेंटरों पर कम संख्या में लोगों के पहुंचने पर जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। चिकित्सा प्रभारी व नोडल डा. अजीत सिंह ने बताया कि युवाओं को वैक्सीन के लिए रजिस्ट्रेशन कराए जाने को टीमे लगा कर प्रोत्साहित किया जा रहा है। साथ ही पंजीकरण कराने वाले युवाओं का नम्बर आने पर फोन कर उन्हें वैक्सीन लगवाने के लिए सूचना भी दी जा रही है। ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में कैम्प लगाकर भी वेक्सीनेशन किया जाएगा। दरअसल ग्रामीण क्षेत्रों में वक्सीनेशन के प्रति लोगों में कम उत्साह देखने को मिल रहा है, जिसको लेकर स्वास्थ्य विभाग के साथ उपजिलाधिकारी ने खुद कमान संभाल ली है। उन्होंने 18 प्लस के नागरिकों को शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में वैक्सीन लगवाने के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया।

बैठक में तहसीलदार राधे श्याम शर्मा, नोडल डा. अजीत सिंह, स्वास्थ्यकर्मी निर्पेन्द्र सिंह, अधिशासी अधिकारी जलालाबाद हरिनारायण सिंह, मोहम्मद सादिक आदि उपस्थित रहे।

आरटीपीसीआर जांच लैब निर्माण में देरी पर सीएमओ व सीएमएस से नाराज हुए डीएम

सीएमओ व सीएमएस से नाराज हुए डीएम लेटलतीफी पर कार्यदायी संस्था को ब्लैक लिस्ट में डालने के निर्देश। अवर अभियन्ता की चरित्र पंजिका में प्रतिकूल प्रविष्टि का अंकन करने के निर्देश। आरटीपीसीआर जांच लैब निर्माण में विलंब का मामला।

बिजनौर। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने जिले को पूर्णतय: कोरोना वायरस मुक्त बनाने और सम्भावित तीसरी लहर का निपुणता एवं सफलतापूर्वक मुकाबला करने के लिए प्रयासों के दृष्टिगत जिला अस्पताल परिसर में कोविड-19 वायरस की आरटीपीसीआर जांच के लिए निर्मित होने वाली लैब का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अनावश्यक रूप से विलम्ब होने के कारण अभी तक कार्य अपूर्ण पाए जाने पर उन्होंने विभागीय अवर अभियन्ता की चरित्र पंजिका में प्रतिकूल प्रविष्टि का अंकन करने तथा मुख्य चिकित्साधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के प्रति नाराजग़ी व्यक्त की। उन्होंने निर्देश दिए कि यदि कार्यदायी संस्था द्वारा निर्धारित समय में कार्य पूरा नहीं किया जाता है तो उसको ब्लैक लिस्ट में डाला जाए और भविष्य में कोई शासकीय कार्य उनसे न कराया जाए।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में कोविड-19 वायरस की जांच के नमूने जिले से बाहर भेजे जाते हैं, जिसकी वजह से जांच परिणाम देरी से उपलब्ध होते हैं। उन्होंने कहा कि उक्त समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित करने के लिए जिला अस्पताल परिसर में शासन द्वारा कोविड-19 वायरस टेस्टिंग लैब बनाने की स्वीकृति प्रदान करते हुए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई गई थी ताकि समयपूर्वक जिलावसियों को स्थानीय स्तर पर कोविड जांच की सुविधा उपलब्ध हो सके।

उन्होंने इस महत्वपूर्ण कार्य में अनावश्यक रूप से किए जा रहे विलम्ब पर अपनी कड़ी आपत्ति व्यक्त करते हुए मुख्य चिकित्साधिकारी को यथाशीघ्र पूर्ण गुणवत्ता के साथ लेब के निर्माण का कार्य पूरा कराने के निर्देश दिए।इस अवसर पर अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डा. एसके निगम, मुख्य चिकित्साधीक्षक सहित अन्य स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद थे।

बिजनौर में बाल सेवा योजना का शुभारम्भ 

जनपद में बाल सेवा योजना का शुभारम्भ 
बिजनौर। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव  शिवा नन्द गुप्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशों के अनुपालन में कोविड-19 की विश्वव्यापी महामारी से पीडि़त, ऐसे बच्चे जिन्होंने अपने माता-पिता एवं अभिभावक खो दिए हैं और उनकी देखरेख एवं पालन पोषण करने वाला कोई नहीं है, ऐसे बच्चों के पालन पोषण एवं शिक्षा-दीक्षा के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना का शुभारम्भ किया गया है। उन्होंने बताया कि उक्त सम्बन्ध में शासन द्वारा लाभार्थियों को प्रदान किए जाने वाले लाभ एवं उनकी पात्रता, अर्हता तथा आवेदन पत्र का प्रारूप एवं प्रक्रिया का अंकन किया गया हैै। इसके अलावा बच्चों को मैत्रीपूर्ण विधिक सेवाएं और उनके संरक्षण के लिए विधिक सेवाएं, योजना 2015 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की वेबसाईट पर भी उपलबध है। उन्होंने आह्वान किया कि पात्र बच्चों को उक्त योजना का लाभ प्रदान कराए जाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप आवेदन कर लाभ अर्जित करें।

कोरोना के 14 नये केस आए सामने, कोविड रिकवरी रेट 98.8

बिजनौर में कोरोना के 14 नये केस सामने आए।

2343 कोविड टेस्ट रिपोर्ट के सापेक्ष निगेटिव 2333 तथा पाॅजेटिव केस 14, जिले में कोविड रिकवरी रेट 98.8 तथा कुल सक्रिय केसों की संख्या घटकर हुई 77, एल-2 स्तर के 08 अस्पतालों में कुल उपलब्ध 298 बेड में 293 बेड खाली, जबकि 05 बेड भेरे हैं, जिसमें आईसीयू बेड एवं आक्सीजन बेड शामिल-जिलाधिकारी उमेश मिश्रा।

बिजनौर। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि जिले में कोविड इन्फेक्शन का रिकवरी रेट में लगातार वृद्वि हो रही है। उन्होंने बताया कि आज जिले में कोरोना संक्रमण रिकवरी रेट 98.8 हो गया है। उन्होंने बताया कि निगरानी समिति द्वारा सर्वे किए गए घरों की संख्या 28700, बुखार, खांसी, जुकाम आदि जैसे लक्षण दिखने वाले व्यक्तियों को आज की गईं 282 किट्स वितरित, 40 ग्राम पंचायतों में सेनेटाईजेशन तथा 492 ग्राम पंचायत में हुआ आज लार्वा स्प्रे एवं स्वच्छता का कायकराया गया है। उन्होंने बताया कि कुल सक्रिय केस 14676 जिसमें से आज तक 14496 लोगों को डिस्चार्ज किया जा चुका है। इस प्रकार आज तक कुल सक्रिय केस 77 है। आज प्राप्त कुल 2343 कोविड टेस्ट रिपोर्ट के सापेक्ष निगेटिव 2333 तथा पाॅजेटिव केस 14 चिन्हित हुए। इस प्रकार निरन्तर सक्रिय केसों की संख्या में कमी आ रही है। उन्होंने बताया कि एल-2 स्तर के आठ अस्पतालों में कुल उपलब्ध 298 बेड में 293 बेड खाली, जबकि 05 बेड भेरे हैं, जिसमें आईसीयू बेड एवं आक्सीजन बेड शामिल है।

INFORMATION DEPTT. BIJNOR

टीकाकरण सबसे सशक्त हथियार:डीएम

टीकाकरण सबसे सशक्त हथियार:डीएम बिजनौर। डीएम उमेश मिश्रा ने कहां कोविड से बचाव के लिए टीकाकरण सबसे सशक्त हथियार है। वैक्सीन कोरोना वायरस से लडऩे में एक अस्त्र का काम करता है। उन्होंने जनपद वासियों से आह्वान करते हुए कहा कि वैक्सीन को लेकर किसी तरह का भ्रम न पाले, सभी लोग अपने टीकाकरण केंद्र पर जायें और टीका लगवाकर अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं।

डीएम उमेश मिश्र ने बताया कि शासन के निर्देश पर टीकाकरण को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के साथ सरकारी कार्यालयों में टीकाकरण किया जा रहा है। अभिभावक स्पेशल बूथ भी बनाए गए हैं। इस बूथ पर 12 वर्ष से कम आयु के बच्चों के अभिभावक टीका लगवाएंगे। जनपद में 18 से 44 एवं 45 साल से ज्यादा आयु के लोगों का टीकाकरण हो रहा है। टीकाकरण को लेकर बहुत जगहों पर युवाओं में उत्साह देखा जा रहा है। जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश देते हुए कहा कि कोरोना से जंग में कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, टेस्टिंग और वैक्सीनेशन अत्यंत महत्वपूर्ण है। इन कार्यों में तेजी लाई जाए। कहा कि इस बात का विशेष ध्यान दिया जाए कि गांव में अधिक से अधिक वैक्सीनेशन हो और जिन लोगों ने अभी तक टीकाकरण नहीं करवाया है, उन्हें चिन्हित कर उनका शत-प्रतिशत टीकाकरण कराना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने टीकाकरण के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि निगरानी समितियां गांव में टेस्टिंग करते समय लोगों को टीकाकरण के प्रति जागरूक एवं प्रेरित भी करें। उन्होंने कहा कि वैक्सीन पूरी तरह से सुरक्षित है और कोरोना महामारी को समाप्त करने में यह सबसे प्रभावी हथियार है। इसलिए सभी लोगों से अपील है कि वैक्सीन अवश्य लगवाए। इसके साथ कोविड प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन करें। मास्क अवश्य लगाये , सोशल डिस्टेंसिंग बनाकर रखें। अनावश्यक बाहर ना निकलें।

प्रतिदिन दो हजार वैक्सीनेशन कराने का लक्ष्य

बिजनौर। कोरोना संक्रमण पर अंकुश लगाने एवं वैक्सीनेशन के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से टास्क फोर्स की बैठक लेकर एसडीएम नजीबाबाद ने आवश्यक दिशा निर्देश दिए।

तहसील में प्रतिदिन दो हजार लोगों का वैक्सीनेशन कराने का लक्ष्य दिया गया है। बुधवार को एसडीएम परमानंद झा ने टास्क फोर्स की बैठक ली। चिकित्सा विभाग सहित विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में एसडीएम ने स्वास्थ्य विभाग किरतपुर तथा क्षेत्रीय प्रशासनिक अधिकारियों को वैक्सीनेशन का प्रतिशत बढ़ाने के निर्देश दिए। एसडीएम ने संक्रमण रोकने के लिए समाज को जागरुक करने, समय-समय पर कोविड की जांच करवाने, 45 वर्ष से अधिक के लोगों को शत-प्रतिशत वैक्सीनेशन कराने के लिए टास्क फोर्स प्रतिनिधियों को निर्देश दिए। एसडीएम ने चिकित्सा विभाग को प्रतिदिन दो हजार लोगों का वैक्सीनेशन लक्ष्य प्राप्त करने और आवश्यक वैक्सीनेशन की उपलब्धता बनाए रखने के निर्देश दिए। टास्क फोर्स की बैठक में चिकित्सा प्रभारी डॉ. अजीत सिंह, बीईओ इशकलाल, ईओ विजयपाल सिंह, हरिनारायण सिंह, एचएल पटेल, पूर्ति अधिकारी अमित कुमार, बाल विकास विभाग की रेखा अंबेडकर, सुमन प्रजापति, ईश्वर आनंद, अमित कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। 

अब स्पीड पोस्ट से अस्थि विसर्जन

वाराणसी, प्रयागराज, हरिद्वार एवं गया में अस्थि विसर्जन हेतु डाक विभाग से भेज सकेंगे स्पीड पोस्ट, ओम दिव्य दर्शन संस्था द्वारा कराया जायेगा अस्थि विसर्जन व श्राद्ध कर्मकांड – पोस्टमास्टर जनरल केके यादव

कोरोना संक्रमण के बीच मृतक के परिवार वालों हेतु विशेष सहूलियत, वाराणसी, प्रयागराज, हरिद्वार एवं गया में अस्थि विसर्जन हेतु डाक विभाग से भेज सकेंगे स्पीड पोस्ट -पोस्टमास्टर जनरल केके यादव

वाराणसी। कोरोना संक्रमण के दौर में तमाम लोगों ने अपने प्रियजनों को खो दिया, पर विधिवत उनका अंतिम संस्कार नहीं कर पाए। हिन्दू धर्म में पवित्र गंगा नदी में अस्थि विसर्जन की परम्परा है और लोग वाराणसी, प्रयागराज, हरिद्वार एवं गया में अस्थि विसर्जन और श्राद्ध कर्मकांड करके मृतात्माओं को शांति दिलाते हैं।कोविड महामारी के इस दौर में अब डाक विभाग ने ओम दिव्य दर्शन नामक सामाजिक-धार्मिक संस्था से मिलकर ऐसे लोगों हेतु पहल की है। देश के किसी भी कोने से अब अस्थियाँ डाकघरों से स्पीड पोस्ट के माध्यम से इन जगहों पर भेजी जा सकेंगीं, जिनका विधिवत कर्मकांड ओम दिव्य दर्शन संस्था द्वारा संपन्न किया जायेगा। उक्त जानकारी वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने दी।

वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि, इस सुविधा को प्राप्त करने हेतु इच्छित व्यक्ति को ओम दिव्य दर्शन संस्था के पोर्टल htpp://omdivysdarshan.org पर अपना रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। रजिस्ट्रेशन के बाद उक्त व्यक्ति द्वारा डाकघर के माध्यम से अस्थियों का पैकेट स्पीड पोस्ट से वाराणसी, प्रयागराज, हरिद्वार एवं गया भेजा जा सकेगा। अस्थि पैकेट को अच्छी तरह से पैक कर इस पर मोटे अक्षरों में ‘ओम दिव्य दर्शन’ अंकित करना होगा, ताकि इसे अलग से पहचाना जा सके। पैकेट पर प्रेषक अपना पूर्ण नाम, पता, मोबाइल नंबर इत्यादि लिखेगा। स्पीड पोस्ट का चार्ज प्रेषक द्वारा ही वहन किया जाएगा। श्री यादव ने बताया कि स्पीड पोस्ट बुक करने के बाद प्रेषक को ओम दिव्य दर्शन संस्था के पोर्टल पर स्पीड पोस्ट बार कोड नंबर सहित बुकिंग डिटेल्स अपडेट करना होगा। डाकघर में पैकेट प्राप्त होने के बाद इसे ओम दिव्य दर्शन के पते पर वितरित कर दिया जायेगा। तत्पश्चात, ओम दिव्य दर्शन संस्था द्वारा इसे पंडितों के माध्यम से इसका विधिवत अस्थि विसर्जन एवं श्राद्ध संस्कार पूर्व निर्धारित समय के अनुसार किया जायेगा, जिसे वेबकास्ट के माध्यम से मृतक के परिवार वाले भी देख सकेंगे। सारे संस्कारों के बाद संस्था द्वारा मृतक के परिवार को डाकघर द्वारा एक बोतल गंगा जल भी भेजा जायेगा।

वैक्सीन लगवाने को BJP भेज रही पीले चावल

वैक्सीन लगवाने को लोगों को मना रही BJP, निकाला अनूठा तरीका, भेजे जा रहे पीले चावल वाले पोस्टकार्ड

नई दिल्ली। पूरे देश में लोगों की सुरक्षा हेतु वैक्सीन लगवाने का अभियान चलाया जा रहा है ताकि महामारी से जल्द से जल्द राहत पा सकें। केंद्र व राज्य अपने स्तर पर प्रयासरत हैं. हालांकि वैक्सीन की कमी की भी शिकायत आ रही है।

इस बीच मध्य प्रदेश में वैक्सीनेशन को बढ़ावा देने के लिए BJP ने एक विशेष और अनूठा तरीका निकाला है। भोपाल में लोगों के घरों पर पोस्टकार्ड के जरिये पीले चावल भेजकर कोरोना वैक्सीन लगवाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

दरअसल कई जगहों से लोगों के द्वारा वैक्सीन नहीं  लगवाने की खबर आ रही है। कोई डर रहा है तो कोई भ्रम के कारण ऐसा कर रहा है। इसलिए BJP कार्यकर्ताओ द्वारा इसका भी इलाज ढूँढा गया है इसलिए अब उन्होंने सबके घर पोस्टकार्ड भेजने का निर्णय लिया है। कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा क़ि कुछ भ्रम फैला रहे हैं, हम हक़ीकत फैलाएंगे। इसमें उन्होंने पीले चावल लगा लोगों से स्वयं और अपने, अपनों और मित्रों इत्यादि को भी प्रोत्साहित कर टीका लगवाने का आग्रह किया गया है।

5G टेक्नोलॉजी: जूही चावला पर जुर्माना ₹20 लाख

जूही चावला
जूही चावला

नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेत्री जूही चावला की 5G नेटवर्किंग के खिलाफ याचिका हाई कोर्ट ने खारिज कर दी है। अभिनेत्री पर 20 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

याचिका में दावा किया गया था कि 5G वायरलेस तकनीक योजनाओं से इंसानों, पशु पक्षियों और वातावरण को नुकसान पहुंचने का खतरा है। कोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने कानूनी प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल किया है और उन पर जुर्माना लगाया जाता है। कोर्ट ने कहा कि इससे प्रतीत होता है कि इस मुकदमे को सिर्फ पब्लिसिटी के लिए दायर किया गया था। विदित हो कि जूही चावला ने सुनवाई का लिंक भी सोशल मीडिया पर साझा किया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि याचिका में सिर्फ कुछ ही ऐसी जानकारी है जो सही है बाकी सिर्फ कयास लगाए गए हैं और संशय जाहिर किया गया है। कोर्ट ने जूही चावला से कहा कि वो इस मामले में नियमों के साथ जो कोर्ट की फीस बनती है वो भी जमा करें। इससे पहले सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जेआर मिधा की पीठ ने 2 जून को मामले की सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। पीठ ने कहा था कि जूही चावला दोषपूर्ण हैं और ये याचिका सिर्फ मीडिया पब्लिसिटी के लिए दायर की गई। पीठ ने जूही ये भी पूछा कि उन्होंने इस मामले में पहले सरकार के पास जाने के बजाय अदालत में याचिका दायर क्यों की? कोर्ट ने जूही चावला के सरकार को प्रतिवेदन दिए बिना 5जी वायरलेस नेटवर्क तकनीक को चुनौती देने के लिए सीधे अदालत आने पर सवाल उठाए। कहा कि जूही चावला और दो अन्य लोगों को पहले अपने अधिकारों के लिए सरकार से संपर्क करने की आवश्यकता थी और अगर वहां से इंकार होता तब उन्हें अदालत आना चाहिए था।

लाला भोजाराम नेत्र चिकित्सालय में भी हुआ वैक्सीनेशन

बिजनौर। सरकार की ओर से 18 से 44 वर्ष के नागरिकों को भी कोरोनारोधी वैक्सीन लगवाए जाने के लिए शुरु किए गए अभियान के तहत नजीबाबाद के लाला भोजाराम राजकीय नेत्र चिकित्सालय में भी टीकाकरण शिविर लगाया गया।

उपजिलाधिकारी परमानंद झा और तहसीलदार राधेश्याम शर्मा के निर्देशन में लाला भोजाराम राजकीय नेत्र चिकित्सालय में 18 वर्ष से अधिक के लोगों को कोरोना रोधी वैक्सीन का टीका लगाया गया। इस अवसर पर लगाए गए टीकाकरण शिविर का उद्घाटन सबसे पहले टीकाकरण कराने पहुंची इंजीनियर रिचा भारती पत्नी संचित मित्तल ने फीता काटकर किया। नगर के साहू जैन डिग्री कालेज के प्राचार्य डा. एके मित्तल के पुत्र संचित मित्तल अमेजन कंपनी तथा पुत्र वधू रिचा भारती फ्लिपकार्ट कंपनी में बंगलौर में सेवारत हैं। कोरोनाकाल के दौरान दोनों ही घर पर रहकर कार्य कर रहे हैं। 18 वर्ष से 44 वर्ष आयु वाले नागरिकों के टीकाकरण को नगर में लाला भोजाराम राजकीय नेत्र चिकित्सालय तथा 12 वर्ष से कम आयु के बच्चों के अभिभावकों को वैक्सीन लगाए जाने के लिए राजकीय इंटर कालेज में टीकाकरण केन्द्र बनाए गए। नागरिकों को लगाने के लिए दोनों केन्द्रों पर सौ-सौ वैक्सीन स्वास्थ्य विभाग की ओर से उपलब्ध करायी गयी थी। लाला भोजाराम राजकीय नेत्र चिकित्सालय पर 90 लोगों को वैक्सीन लगायी गयी। राजकीय इंटर कालेज पर 40 लोगों को वैक्सीन लगायी गयी। जबकि  45 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को वैक्सीनेशन किए जाने को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र समीपुर तथा लाला भोजाराम राजकीय नेत्र चिकित्सालय पर चार केन्द्र बनाए गए हैं। वहां भी कोरोनारोधी वैक्सीन का टीका लगाया गया।

लाला भोजाराम राजकीय नेत्र चिकित्सालय पर टीकाकरण के ब्लाक मैनेजर नृपेंद्र कुमार और एएनएम रिंकी की उपस्थिति में 18 वर्ष से अधिक आयु के पहले दिन पंजीकृत 100 लोगों में युवाओं सहित 90 ने वैक्सीनेशन कराया। उधर राजकीय इंटर कॉलेज वैक्सीनेशन केंद्र पर 12 वर्ष आयु से कम बच्चों के मात्र 30 अभिभावकों ने वैक्सीनेशन कराया। कई अभिभावक बच्चों के वैक्सीनेशन पंजीकरण से सम्बन्धित आधार कार्ड के बिना वैक्सीनेशन के लिए पहुंचे। जिससे एएनएम अंजू यादव और अभिभावकों को असुविधा का सामना करना पड़ा। उपजिलाधिकारी परमानंद झा ने नगर क्षेत्र में आयोजित विशेष पंजीकरण शिविर के साथ 45 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के लिए पीएचसी और ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित शिविर का निरीक्षण किया। 45 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में वैक्सीनेशन के प्रति रूचि जागृत करने के लिए प्रशासन जागरुकता और विशेष टीकाकरण अभियान चला रहा है।

यूपी में आज से 3 और जिले अनलॉक, नोएडा-गाजियाबाद समेत 11 में कोरोना कर्फ्यू

लखनऊ

यूपी में कोरोना संक्रमण के मामलों में कमी को देखते हुए प्रदेश सरकार ने को नई गाइडलाइंस जारी करते हुए प्रदेश के 55 जिलों में साप्ताहिक बंदी जारी रखने के साथ सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक बाजारों को खोलने की अनुमति दे दी थी। लेकिन सोमवार को कोरोना के नए आंकड़े आने के बाद प्रयागराज, देवरिया समेत 6 अन्य जिलों को कोरोना कर्फ्यू से मुक्त कर दिया गया। वहीं मंगलवार को तीन जिले और जुड़ जाने से अब लिस्ट में 64 जिले शामिल हो गए हैं। 

इन 3 और जिलों को किया गया मुक्त

गाजीपुर, जौनपुर और लखीमपुर खीरी को कोरोना कर्फ्यू से मुक्त कर दिया गया है। इन तीनों जिलों में 2 जून से अनलॉक की प्रक्रिया शुरू होगी। रविवार को जारी हुई नई गाइडलाइंस में उन शहरों में लॉकडाउन जारी रखने के निर्देश दिए गए थे, जहां ऐक्टिव केस 600 से ज्यादा हैं। गाजीपुर, जौनपुर और लखीमपुर खीरी में कोरोना के सक्रिय मामले 600 के अंदर आने के बाद यहां भी बुधवार सुबह 7 बजे से छूट दी जाएगी। कोविड प्रोटोकॉल के तहत दुकानें शाम 7 बजे तक खुल सकेंगी। इससे पहले सोमवार को सामने आए आंकड़ों के बाद सोनभद्र, देवरिया, बागपत, प्रयागराज, बिजनौर और मुरादाबाद को भी कोरोना कर्फ्यू से मुक्त कर दिया गया। 

अभी इन 11 जिलों में जारी रहेगी पाबंदी 

लखनऊ, मेरठ, सहारनपुर, वाराणसी, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर, बरेली, गोरखपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, झांसी। 

नोएडा-गाजियाबाद में कब मिल सकती है छूट

31 मई की रिपोर्ट के मुताबिक गौतम बुद्ध नगर में कोरोना के 68 नए मामले सामने आए। वहीं 181 लोगों को डिस्चार्ज किया गया। यानी संक्रमित लोगों के मुकाबले तीन गुना लोग ठीक हुए। आंकड़ों के हिसाब से नोएडा में ऐक्टिव केस 1073 हैं। ठीक होने की यही रफ्तार रही तो अगले हफ्ते तक नोएडा में कोरोना कर्फ्यू खुलने की उम्मीद है। वहीं गाजियाबाद की बात करें तो यहां अभी 1688 ऐक्टिव केस हैं। 31 मई के आंकड़ों के मुताबिक यहां 47 नए केस सामने आए और 123 मरीज ठीक हो गए। इस लिहाज से यहां लॉकडाउन हटने में अभी एक हफ्ते से ज्यादा वक्त लग सकता है।

कहीं घातक न हो जाए कोरोना कर्फ्यू से निजात!

बिजनौर। (संचित कुमार, एकलव्य बाण समाचार) उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कोरोना कर्फ्यू से जिला बिजनौर को छूट देने का कदम घातक ना हो जाए। लोगों को अपने स्वास्थ्य की चिंता ना होकर सरकारी नियम तोड़ने की इच्छा ज्यादा दिखाई दे रही है।

सरकार द्वारा लॉकडाउन हटा कर बाजार खुलने के लिए सुबह 7:00 से शाम 7:00 तक की छूट प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त सप्ताह में केवल 5 दिन ही कार्य होगा। शनिवार एवं रविवार को कोरोना कर्फ्यू जारी रहेगा, परंतु शायद यह गाइडलाइन लोग पढ़ नहीं पाए अथवा पढ़ कर उसको नजरअंदाज कर रहे हैं। पहले दिन जिले में अधिकतर प्रत्येक स्थान पर ज्यादातर बाजार सुबह 7:00 से पहले खुले और रात्रि 8:00 बजे तक खुले रहे। शायद सभी में कोरोना का भय समाप्त हो गया है। आर्थिक गतिविधियां सुचारू रूप से चलती रहने के मद्देनजर सरकार द्वारा बाजारों को खोलने का फैसला किया गया, परंतु उसके लिए भी एक समय सीमा निर्धारित की गई। इसका पालन हमें स्वयं करना होगा। इसकी उम्मीद कम ही नजर आ रही है, क्योंकि प्रशासन द्वारा इस संबंध में कठोरता ना बरतने के कारण लोग भयमुक्त हो रहे हैं, जो कि बहुत खतरनाक है।

प्रशासन करे सख्ती, तो बनेगी बात- प्रशासन को संज्ञान लेकर जल्द से जल्द इस संबंध में उचित कार्यवाही करनी चाहिए। लोगों को जागरूक करना चाहिए कि अभी कोरोना से लंबी लड़ाई लड़नी है, जब तक वैक्सीनेशन कार्य पूर्ण ना हो जाए, तब तक कोरोना का खतरा बरकरार है। अस्पतालों में एड़ियां रगड़ने से बेहतर है कि कोरोना से बचाव सुनिश्चित किया जाए।

खुद करें नियम का पालन- अभी की परिस्थितियों को देखते हुए लोगों को कोविड-19 की गाइडलाइन के सरकारी नियमों का पालन सुनिश्चित करना होगा। लोगों को चाहिए कि अति आवश्यक कार्य होने पर ही घर से निकलें एवं कुछ समय के लिए आर्थिक गतिविधियां आवश्यकतानुसार करें क्योंकि जान है तो जहान है।

कोविड टीकाकरण के लिये ग्रामीण क्षेत्रों में पोस्ट ऑफिस भी करेंगे रजिस्ट्रेशन व एप्वाइनमेंट – पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव

कोविड टीकाकरण के लिये ग्रामीण क्षेत्रों में पोस्ट ऑफिस भी करेंगे रजिस्ट्रेशन व एप्वाइनमेंट – पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव

प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के गोराईं शाखा डाकघर में आरम्भ हुई सेवा, शीघ्र ही 300 अन्य शाखा डाकघरों में भी होगी शुरुआत

लखनऊ। कोरोना महामारी के प्रकोप से बचाव हेतु टीकाकरण बेहद जरुरी है। पर ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी लोगों के पास स्मार्ट फोन न होने के कारण वे टीकाकरण के लिए रजिस्ट्रेशन व अप्वाइंटमेंट नहीं करा पा रहे हैं। ऐसे में डाक विभाग अब ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित शाखा डाकघरों के माध्यम से लोगों का टीकाकरण के लिए रजिस्ट्रेशन करेगा, जहाँ पर पोस्ट ऑफिस कॉमन सर्विस सेंटर खोले जायेंगे। इसके लिए डाकघरों का चयन और उनके प्रशिक्षण की प्रक्रिया आरम्भ हो गई है। उक्त जानकारी वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने दी।

वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि शाखा डाकघरों में टीकाकरण के लिए पोस्ट ऑफिस कॉमन सर्विस सेंटर खोलने की कवायद आरम्भ हो गई है। ये मोबाइल एप के माध्यम से वैक्सीनेशन के लिए रजिस्ट्रेशन और एप्वाइनमेंट का कार्य को-विन एप्लिकेशन के माध्यम से करेंगे, जिसके लिए कोई भी शुल्क नहीं लिया जायेगा। लोगों को निर्धारित फोटो आईडी और मोबाइल के साथ शाखा डाकघर पहुँचना होगा, जहाँ पर ओटीपी के माध्यम से यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में मॉडल ब्लॉक के तौर पर विकसित किये जा रहे सेवापुरी ब्लॉक में मिर्जामुराद उप डाकघर के अधीन गोराईं शाखा डाकघर में वैक्सीनेशन रजिस्ट्रेशन व एप्वाइनमेंट का शुभारम्भ कर दिया गया है, जहाँ 25 से ज्यादा लोगों ने टीकाकरण के लिए रजिस्ट्रेशन करा भी लिया है।

पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव यादव ने बताया कि शीघ्र ही वाराणसी परिक्षेत्र के 300 अन्य शाखा डाकघरों में भी इसे आरम्भ किया जायेगा। इसमें वाराणसी के 73, चंदौली के 26, भदोही के 21, जौनपुर के 60, गाजीपुर के 60 और बलिया के 60 शाखा डाकघर शामिल हैं। इसके बाद अगले फेज में 475 और भी शाखा डाकघरों में इसे आरम्भ करने की योजना है।

जनेश्वर मिश्रा ट्रस्ट समाजवादी पार्टी भर रहा भूखों का पेट

लखनऊ में जनेश्वर मिश्रा ट्रस्ट समाजवादी पार्टी के नेतृत्व में मेडिकल कॉलेज व ट्रामा सेंटर में दूरदराज से आए मरीज व तीमारदारों को भोजन वितरण कर उनका पेट भरने का कार्य लगातार किया जा रहा है।

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देशन में मनीष यादव सदस्य जनेश्वर मिश्रा ट्रस्ट समाजवादी पार्टी के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी नेता व कार्यकर्ता वैश्विक महामारी के दृष्टिगत देखते हुए लखनऊ के मेडिकल कॉलेज व ट्रामा सेंटर में दूर दराज से आए हुए मरीज व तीमारदारों को भोजन वितरण कर उनका पेट भरने का कार्य लगातार कर रहे हैं।

मनीष यादव ने बताया कि प्रदेश भर में वैश्विक कोरोना बीमारी महामारी जैसी से हाहाकार मचा हुआ है। लोगों को बहुत ही बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर दूरदराज से आए लोगों भी खाने जैसी मूलभूत परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

विदित हो कि इलाज कराने वालों को खाली पेट सोना न पड़े, इसलिए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देशन में मनीष यादव के साथ समाजवादी पार्टी की टीम लोगों को भोजन के पैकेट उपलब्ध करा रही है।

समाजवादी नेता मनीष यादव ने बताया कि मेडिकल कॉलेज ट्रामा सेंटर, साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर तथा उसके आसपास इलाकों में गरीब रिक्शा वालों को कोनेश्वर चौराहा का रूमी गेट,चौक चौराहा पर जरूरतमंद लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

कई सप्ताह से लगातार चल रहा है अभियान
लोगों को भोजन उपलब्ध कराने का अभियान पिछले कई सप्ताह से लगातार चलाया जा रहा है। मनीष यादव ने बताया कि जब तक वैश्विक महामारी से हमारा देश शांत नहीं हो जाता, तब तक हम लोग यह अभियान लगातार जारी रखेंगे।

इस अभियान में विक्की यादव, अमित कुमार, रिंकू कश्यप, रितेश कनौजिया, गोलू यादव, ऋषभ यादव, पंकज सैनी, विशाल सैनी इत्यादि लोग बढ़चढ़ कर अपना योगदान दे रहे हैं।

कोविड इंफेक्शन का रिकवरी रेट बढ़कर हुआ 93.9 प्रतिशत

कोविड इन्फेक्शन का रिकवरी रेट बढकर हो गया 93.9 प्रतिशत, जिसमें लगातार वृद्वि जारी तथा सक्रिय केसों में कमी। कोरोना चेन को तोडने के लिये निगरानी समिति द्वारा निरन्तर परिवारों का किया जा रहा है सर्वे तथा मेडिकल किट का वितरण -जिलाधिकारी रमाकांत पाण्डेय

बिजनौर। जिले में 24X7 सक्रिय इण्टीग्रेटेड कोविड कमांड एंव कन्ट्रोल सेन्टर के माध्यम से कोविड वायरस से संक्रमित रोगियों के समुचित चिकित्सीय सुविधा, उनकी देखभाल एवं निगरानी का कार्य पूर्ण सजगता और गंभीरता के साथ नियमित रूप से किया जा रहा है, जिसके परिणाम स्वरूप कोविड इन्फेक्शन का रिकवरी रेट बढकर 93.9 हो गया है, जिसमें लगातार वृद्वि हो रही है। जिलाधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि कोविड कमांड सेंटर में तैनात चिकित्सकों की टीम के द्वारा टैलीकाउंसलिंग एवं मेडिकल से संबंधित सभी प्रकार की समस्याओं का अनुश्रवण करते हुए मरीजों को परामर्श दे रहे हैं और निगरानी समितियों के माध्यम से मेडिसिन किट्स उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कोविड कमांड सेंटर के माध्यम से जरूरतमंदों को बेड, ऑक्सीजन, टीकाकरण संबंधी सभी जानकारी भी उपलब्ध कराई जा रही हैं और होम आइसोलेशन में भर्ती मरीजों की चिकित्सकों की टीम के द्वारा निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है तथा स्वास्थ्य विभाग की टीम के द्वारा दवाइयां होम आइसोलेशन में भर्ती मरीजों के घरों तक पहुंचाई जा रही है एवं उनकी हर प्रकार की समस्या का निराकरण कोविड कमांड सेंटर के माध्यम से कराया जा रहा है।
श्री पाण्डेय ने बताया कि कोरोना संक्रमण के चेन तोड़ने हेतु प्रत्येक दिन समीक्षा बैठक, ग्रामों सहित अस्पतालों में लगातार दौरा कर नियंत्रण हेतु प्रभावी कार्यवाही, साफ सफाई, सेनेटाइजेसन, ऑक्सीजन की व्यवस्था, बेड की सही जानकारी उपलब्ध कराना, ऑक्सीजन प्लांट, कोविड हेल्थ डेस्क के माध्यम से आमजन को जागरूक किये जाने, आईसीसी तथा शिकायत, कण्ट्रोल रूम के माध्यम से शिकायतों का निस्तारण कराया जाना शामिल है। उन्होंने यह भी जानकारी देते हुए बताया कि इस समय रिकवरी रेट बढकर 93.9 हो गया है जो कि निरन्तर बढ रहा है इसके अतिरिक्त जनपद में कुल सक्रिय केसों की संख्या में निरन्तर कमी देखी जा रही है। उन्होंने बताया कि कुल सक्रिय केस 14374 जिसमें से आज तक 13492 लोगों को डिस्चार्ज किया जा चुका है। इस प्रकार आज तक कुल सक्रिय केस 783 है। आज प्राप्त कुल कोविड टेस्ट रिपोर्ट 5228 लोगों की प्राप्त हुई, जिसमें से 5198 की टेस्ट रिपोर्ट नेगटिव जबकि कोविड पोजिटिव केसों की संख्या कुल 30 हैं तथा आज की पाॅजीटीविटी रेट 0.57 है इस प्रकार निरन्तर सक्रिय केसों की संख्या में कमी आ रही है। निगरानी समितियों की सदस्यो द्वारा 14091 परिवारों का सर्वे किया गया। जुखाम, बुखार और खासी जैसे लक्षण दिखने वाले व्यक्तियों को 546 मेडिकल किट वितरीत की गयी। आज सेनेटाइजेशन 190 ग्राम पंचायतों का किया गया, इसके साथ-साथ एंटी लारवा स्प्रे व फागिग 337 ग्राम पंचायतों में की गयी। उन्होंने बताया कि एल-2 स्तर के आठ अस्पतालों में कुल उपलब्ध 298 बेड में 242 बेड खाली है जिसमें आईसीयू बेड एवं आक्सीजन बेड शामिल है।

Black Fungus संक्रमण के पीछे सामने आया नया कारण, Zinc हो सकता है बड़ी वजह

Black Fungus संक्रमण के पीछे सामने आया नया कारण, Zinc हो सकता है बड़ी वजह

ब्‍लैक फंगस के संक्रमण को लेकर विशेषज्ञों ने जिंक सप्‍लीमेंट्स और आयरन टेबलेट्स के बेजा इस्‍तेमाल को भी कारण बताया है. साथ ही इस पर जल्‍द रिसर्च कराने की अपील की है.

नई दिल्‍ली: पिछले कुछ दिनों से कहर बरपा रहे म्यूकोर मायकोसिस (Mucormycosis) या ब्लैक फंगस (Black Fungus)  संक्रमण को लेकर एक नई बात सामने आई है. अब तक कहा जा रहा था कि यह बीमारी उन लोगों में ज्‍यादा सामने आ रही है जिन्‍हें डायबिटीज है और साथ ही उन्‍होंने लंबे समय तक स्‍टेरॉइड्स लिया है. अब डॉक्‍टरों ने आशंका जताई है कि इसके पीछे इम्‍यूनिटी बढ़ाने वाले जिंक सप्लीमेंट्स (Zinc supplements) और आयरन टैबलेट्स (Iron Talets) भी जिम्‍मेदार हो सकते हैं. 

इम्यूनिटी बूस्टर्स को लेकर हो रही रिसर्च 

ब्‍लैक फंगस फैलाने में इम्‍यूनिटी बूस्‍टर्स (Immunity Booster) का कितना हाथ है इस पर बांद्रा स्थित लीलावती अस्पताल के सीनियर एंडोक्राइनोलॉजिस्ट शशांक जोशी शोध पत्र तैयार कर रहे हैं. टाइम्‍स टॉफ इंडिया की वेबसाइट में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक उनका कहना है, ‘इस बीमारी के पीछे प्राथमिक कारण तो स्टेरॉइड्स का इस्तेमाल और डाइबिटीज ही है लेकिन बीते 2 दिनों से मेडिकल कम्यूनिटी में भारतीयों द्वारा जिंक सप्‍लीमेंट और आयरन टैबलेट्स के खासे इस्‍तेमाल पर जमकर चर्चा हो रही है.’ 

बिना जिंक के जिंदा नहीं रह सकते फंगस- जिंक और फंगस के संबंध को लेकर कई सालों से रिसर्च होते रहे हैं, जिनमें सामने आया है कि जिंक के बिना फंगस जिंदा नहीं रह सकते. यहां तक कि वे फंगस को बढ़ावा देने के लिए भी जिम्‍मेदार हैं. चूंकि पिछले साल हुई महामारी की शुरुआत के बाद से ही भारतीय लोग जमकर जिंक खा रहे हैं. ऐसे में पुराने शोध का हवाला देते हुए डॉक्‍टरों ने इस मसले पर रिसर्च करने की जरूरत जताई है. डॉक्टरों ने भारतीय आर्युविज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) से माइक्रोमाइकोसिस के आउटब्रेक के कारणों का अध्ययन करवाने का आग्रह किया है जो गंभीर फंगल इन्फेक्शन है. यह संक्रमण म्यूकरमाइसीट्स (Mucormycetes) मॉल्ड्स के कारण हो रहा है.

दुनिया में सबसे ज्‍यादा मामले भारत में- म्‍यू‍कोर के मामले दुनिया में सबसे ज्‍यादा भारत में ही पाए जाते रहे हैं. कोरोना प्रकोप होने से भी पहले यहां दुनियाभर से करीब 70 गुना ज्यादा केस थे, लेकिन पिछले करीब डेढ़ महीने में यहां 8,000 केस आने से हड़कंप मचा हुआ है. चूंकि यह संक्रमण बहुत खतरनाक है, लिहाजा इस पर तेजी से रिसर्च करने की जरूरत है. 

क्‍या ज्‍यादा दवाइयां हैं वजह? पश्चिमी देशों में कोविड मरीजों के बुखार को नियंत्रित रखने के लिए आम तौर पर पैरासिटामोल का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन भारत में हल्के लक्षणों वाले कोविड मरीज को भी 5 से 7 तरह की दवाइयां दी जा रही हैं, जिसमें विटामिन सप्‍लीमेंट्स, एंटीबायोटिक आदि शामित हैं. इसे लेकर कोच्ची के डॉक्टर राजीव जयदेवन कहते हैं कि कोरोना की पहली लहर में हमें इस वायरस के बारे में कम जानकारी थी, लिहाजा दवाइयों के कई तरह कॉम्‍बीनेशन मरीजों को दिए गए. लेकिन ब्‍लैक फंगस की समस्‍या केवल भारत में ही हुई. इससे साफ है कि ऐसी कोई गुप्‍त वजह है जो भारत में यह संक्रमण फैला रही है.

समाजवादी पार्टी लखनऊ की महानगर इकाई ने अस्पताल में तीमारदारों व गरीबों को वितरित किया खाना

समाजवादी पार्टी लखनऊ की महानगर इकाई ने अस्पताल में तीमारदारों व गरीबों को वितरित किया खाना

लखनऊ। लॉकडाउन में गरीब लोगों को खाने-पीने की दिक्कत को देखते हुए समाजवादी पार्टी लखनऊ की महानगर इकाई ने अस्पताल में मरीजों तीमारदारों व गरीबों को खाना वितरित किया।

महानगर उपाध्यक्ष नवीन धवन बण्टी ने बताया कि मेडिकल कॉलेज की ट्रॉमा सेंटर और लोहिया अस्पताल में 300 पैकेट भोजन का वितरण किया गया।

साथ ही सभी लोगो को वैक्सीनेशन के प्रति जागरूक किया गया। भोजन वितरण के कार्यक्रम में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए लंच पैकेट पैक करके विभिन्न जगहों पर जरूरतमंदों को बांटा गया।

भोजन वितरण के दौरान धीरज राजपूत, निशान्त यादव, ऐजाज अहमद और केसरी खेड़ा वार्ड के पार्षद देवेन्द्र सिंह जीतू मौजूद रहे।

सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को रेमडेसिविर की अतिरिक्त वॉयल आवंटित

सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को 23 से 30 मई की अवधि के लिए रेमडेसिविर की अतिरिक्त शीशियां आवंटित: सदानंद गौड़ा

नई दिल्ली। केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने कहा है कि 23 से 30 मई की अवधि के लिए सभी राज्यों / संघ राज्य क्षेत्रों को रेमडेसिविर की अतिरिक्त 22.17 लाख शीशियां आवंटित की गई हैं।

उन्होंने आगे कहा कि इससे पहले 23 मई तक सभी राज्यों को रेमडेसिविर की 76.70 लाख शीशियां उपलब्ध कराई गईं थीं। इस प्रकार अब तक कुल 98.87 लाख वॉयल देश भर में आवंटित की जा चुकी हैं।

Additional 22.17 lac vials of #Remdesivir have been allocated to all states/UTs for the period 23rd to 30th May.

Earlier, 76.70 lacs vials of the drug were made to all states till May 23, thus total 98.87 lacs vials of #Remdesivir have been allocated across the country so far. pic.twitter.com/zWUA3RRJ9E— Sadananda Gowda (@DVSadanandGowda) May 23, 2021

अभियान चलाकर की जा रही गांवों की साफ सफाई

अभियान चलाकर की जा रही गांवों की साफ सफाई

मलिहाबाद,लखनऊ। वैश्विक माहमारी कोरोना के अंतर्गत विकास खंड मलिहाबाद में अभियान चलाकर गांवों की साफ सफाई सुनिश्चित करने की कार्यवाही की जा रही है। साथ ही निगरानी समिति की देखरेख में लोगों को जागरूक करने का कार्य किया जा रहा है।

शनिवार को गांवों में सेक्टर मजिस्ट्रेटों के नेतृत्व में गठित निगरानी समितियों की बैठक की गई। ग्रामीणों को कोरोना के प्रति जागरूक करते हुए कोविड मरीजों को चिन्हित करना और टेस्टिंग करवाने के साथ ही दवाइयों का वितरण किया गया। विकासखंड के दर्जनों गांव में सैकड़ों टेस्ट किए गए। वहीं ग्राम पंचायत महदोईया, बेलगढा, कहला, दिलवार नगर, कसमण्डी खुर्द, अल्लुपुर, तरौना, खड़ौहा, कटौली सहित दर्जनों गांवो में अभियान चलाकर साफ सफाई की गई। खड़ौहा गांव के पंचायत सचिव दिनेश कुमार शर्मा लगातार गांव की निगरानी समिति के साथ जागरूकता अभियान चलाए हुए हैं। साथ ही गरीब असहाय निराश्रित लोगों के भोजन व्यवस्था का जिम्मा संभाले हुए हैं। बीडीओ डॉ संस्कृता मिश्रा ने बताया क्रमवार पूरे विकासखंड की ग्राम पंचायतों की साफ-सफाई और सैनिटाइजेशन निरंतर जारी है। निगरानी समितियों के माध्यम से कोविड प्रोटोकॉल का अनुपालन और वैक्सीनेशन के लिए ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है।

वाह क्या खेल है: अपने लिए नहीं, दूसरों के लिए है नसीहत

अखबारों में चेहरा छपवाने के चक्कर में कई लोग नहीं लगा रहे मास्क

दूसरों को नसीहत देने वाले खुद नहीं कर रहे गाइडलाइन का पालन

कपिल कुमार गोयल

नजीबाबाद। देश भर में व्याप्त वैश्विक महामारी कोरोना के संक्रमण काल में भी लोग खुद की समाज में पहचान बनाए रखने की जुगत में लगे दिखायी दे रहे हैं। दूसरो को कोरोना से सचेत रहते हुए सरकार की गाइडलाइन का पालन करने की नसीहत देने वाले क्षेत्र व समाज में लोकप्रियता पाने के लिए उक्त लोग फोटो छपवाने की होड़ में चेहरे पर मास्क लगाने से गुरेज करते हैं।देश में व्याप्त वैश्विक महामारी कोरोना के बढ़ते संक्रमण को लेकर सरकारें अपनी ओर से विभिन्न प्रयास कर रही हैं। सरकार की ओर से कोरोना संक्रमण की कड़ी को तोड़ने के लिए विभिन्न गाइडलाइन पेश करते हुए लोगों से इस पर अमल करने की पुरजोर अपील भी की गई है। प्रशासन के अधिकारी व कर्मचारी भी लोगों से सरकार की ओर से कोरोना को लेकर जारी की गयी गाइडलाइन का सख्ती से पालन करने की अपील करते नजर आ रहे हैं। साथ ही पुलिस भी लोगों से महामारी के इस दौर में मुंह पर मास्क लगाने, घरों से बेवजह बाहर न निकलने, एक-दूसरे से दो गज की सामाजिक दूरी बनाए रखने आदि के सरकार के कोरोना को लेकर जारी किए गए दिशा-निर्देशों का पालन कराने के लिए विभिन्न स्थानों पर लोगों के चालान भी काट रही है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि देश में कोरोना के दस्तक देने के समय से ही काफी संख्या मेें सामाजिक संस्थाएं, राजनैतिक दलों से जुड़े लोग और सामाजिक कार्यकर्ता लोगों की मदद के लिए आगे आकर हाथ बढ़ाते दिखे। हालांकि इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पहले कोरोन काल में लोगों की मदद के लिए अखबारों की सुर्खियों में जुटे बड़ी संख्या में लोग अब मानो थक-हारकर अपने घरों पर बैठ गए हैं। इससे यह भी संदेश मिला कि कुछ लोग शायद त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों से पूर्व चर्चा में बने रहकर लोकप्रियता प्राप्त कर चुनावों में इस लोकप्रियता को भुनाने के चक्कर में ही योजनाबद्ध तरीके से जुटे हुए थे। ऐसे लोग कोरोना महामारी की दूसरी लहर में चर्चा से बाहर हो चले हैं। उधर इन दिनों कोरोना महामारी के तेजी से बढ़ते संक्रमण के दौर में भी कुछ सामाजिक संस्थाओं और राजनैतिक दलों के पदाधिकारी एवं सदस्य   लोगों को सामग्री वितरित करने में जुटे हुए हैं। साथ ही ऐसे व्यक्ति लोगों से सरकार की ओर से जारी मास्क है जरूरी, रखें दो गज की दूरी आदि गाइडलाइन का पालन करने की अपील करते नजर आ रहे हैं। यह कोई बुरी बात नहीं है कि कोरोना महामारी की इस भयावह दूसरी लहर मेें उन्होंने लोगों की मदद को हाथ बढ़ाया है। हालांकि ऐसे लोगों को समझना चाहिए कि वह जितनी मशक्कत कर लोगों को मास्क, काढ़ा, सैनिटाइजर आदि बांट रहे हैं और लोगों से सरकार की गाइडलाइन का पालन करने की अपील कर रहे हैं, उसके साथ ही उन्हें स्वयं भी सरकार की गाइडलाइन का कड़ाई से पालन करना चाहिए। अखबारों की सुर्खियों में रहकर फोटो छपवाने की होड़ में जुटे इस प्रकार के लोग मास्क व काढ़ा आदि का वितरण करने के दौरान बिना मास्क लगाए फोटो खिंचवाते समय शायद यह भूल जाते हैं कि जब वह स्वयं ही सरकार की ओर से जारी गाइडलाइन का पालन नहीं कर रहे हैं, ऐसे में क्या उनकी अपील का लोगों पर कोई असर होगा? इसके अलावा कुछ क्षेत्रीय नेतागण एवं जनप्रतिनिधि अपने प्रयासों से होने वाले विकास कार्यों को दर्शाने के लिए भी फोटो खिंचवाने के दौरान मास्क को चेहरे पर लगाने से गुरेज करते दिखायी दे रहे हैं।

ऐसे लोगों को समझने की जरूरत है कि कहीं लोकप्रियता बटोरने के चक्कर में वे स्वयं ही इस कोरोना महामारी के संक्रमण के फेर में न आ जाएं। उन्हें भी अच्छी तरह समझने की आवश्यकता है कि कोविड-19 वायरस का स्ट्रेन यह देखकर किसी को संक्रमित नहीं करता है कि उसके सामने आम व्यक्ति है अथवा समाज की सेवा में जुटा विशेष व्यक्ति। साथ ही ये भी समझना होगा कि ये कोरोना वायरस है जनाब, जो यह नहीं समझता कि सिर्फ अखबारों में छपवाने को फोटो खिचवाने के लिए ही आपने लोगों के बीच में मास्क उतारा है! मेरी ऐसे सामाजिक कार्यकर्ताओं, राजनैतिक दलों के पदाधिकारियों व सदस्यों तथा जन सेवा के कार्य  में जुटे लोगों से पुरजोर अपील है कि वे दूसरों को सरकार की गाइड लाइन का पालन करने की सलाह देने के साथ ही स्वयं भी कोरोना के संक्रमण से बचाव के लिए मास्क को अच्छी तरह से पहनें, जिससे उनका मुंह व नाक दोनों ढकें रहें और उन पर कोरोना महामारी के वायरस का असर न हो सके। यह भी समझना होगा कि सरकार की गाइडलाइन का अच्छी तरह से पालन कर ही हम स्वस्थ और सुरक्षित रह सकते हैं। सभी को चाहिए कि वह यह समझें कि यह विश्व व्यापी कोरोना महामारी है और इससे सतर्क रहकर ही सुरक्षित रहा जा सकता है। अंत में कहना चाहूंगा कि मूल मंत्र जान है तो जहान है को ही समझें।     

मैं भगवान विष्णु का 10वां अवतार, नहीं आ सकता ड्यूटी!

ऑफिस न जाने का परफेक्ट बहाना! गुजरात के अफसर ने कहा- मैं विष्णु का 10वां अवतार, काम पर नहीं आ सकता

अहमदाबाद। गुजरात सरकार के एक अधिकारी ने दावा किया है कि वो भगवान विष्णु के दसवें अवतार कल्कि हैं और वो ऑफिस नहीं आ सकते क्योंकि वह ‘‘विश्व का अंत: करण’’ बदलने के लिए ‘‘तपस्या’’ कर रहे हैं। 

सरदार सरोवर पुनर्वास एजेंसी के इंजीनियर रमेश चंद्र फेफर ने कारण बताओ नोटिस का जवाब देते हुए कहा कि उनकी तपस्या को धन्यवाद कि देश में अच्छी बारिश हो रही है। फेफर को जारी किया गया नोटिस और उनका अजीबो गरीब जवाब वायरल हो गया है। फेपर ने अपने राजकोट स्थित घर पर मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि – आप विश्वास नहीं करेंगे, लेकिन मैं भगवान विष्णु का दसवां अवतार हूं और आने वाले दिनों में मैं इसे साबित कर दूंगा। मैं मार्च 2010 में ऑफिस में था तो मुझे महसूस हुआ कि मैं कल्कि अवतार हूं। तब से मेरे पास दिव्य शक्तियां हैं।

8 महीने से दफ्तर नहीं गया, नोटिस के जवाब में कहा- मैं विष्णु अवतार हूं, काम  नहीं कर सकता - A superintendent engineer in Gujarat claimed to be Kalki the  tenth incarnation

तीन दिन पहले एजेंसी की ओर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। 50 साल पूरे कर चुके फेफर ने नोटिस का जवाब देते हुए कहा है कि वो ऑफिस नहीं आ सकते हैं, क्योंकि तपस्या में लीन हैं। फेफर ने कहा कि वैश्विक अंत:करण के बदलाव के लिए अपने घर में तपस्या कर रहा हूं। मैं आफिस में बैठ कर इस तरह की तपस्या नहीं कर सकता हूं। उन्होंने दावा किया कि उनकी तपस्या की वजह से ही भारत में पिछले 19 साल से अच्छी बारिश हो रही है। अब यह एजेंसी को तय करना चाहिए कि मुझे ऑफिस में बैठाकर टाइम पास कराना ज्यादा महत्वपूर्ण है या फिर देश को सूखे से बचाने के लिए कुछ ठोस काम करना है। मैं कल्कि अवतार हूं, इसलिए भारत में अच्छी बारिश हो रही है।

नोटिस के मुताबिक, फेफर पिछले आठ महीने में वडोदरा स्थित अपने आफिस में सिर्फ 16 दिन गए। नोटिस में कहा गया है कि गजटेड ऑफिसर का इस तरह से अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहना शोभा नहीं देता है। आपकी अनुपस्थिति के चलते एजेंसी के काम रुकावट आ रही है। गौरतलब है कि सरदार सरोवर परियोजना से प्रभावित लोगों के पुनर्वास का काम SSPA देख रही है। (साभार)

कोरोना: देश में 300 से ज्यादा मीडियाकर्मी गंवा चुके अपनी जान

पत्रकारों पर काल बनकर टूटा कोरोना का कहर, पूरे देश में 300 से ज्यादा मीडियाकर्मी गंवा चुके अपनी जान

नई दिल्ली। पूरे देश में कोरोना की दूसरी लहर ने अपना रौद्र रूप धारण कर रखा है, हालांकि पिछले तीन दिनों में कोरोना के नए मामलों में कमी देखने को मिली है, लेकिन मौत के आंकड़ों में कोई गिरावट दर्ज नहीं हो रही है। इस बीच पहली लहर के बाद इस संक्रमण का सबसे ज्यादा बुरा असर पत्रकारों पर पड़ा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक कई जाने-माने पत्रकारों सहित 300 से अधिक मीडियाकर्मियों ने अपनी जिंदगी खोई हैं।

पिछले साल कोरोना की पहली लहर के दौरान बड़ी संख्या में फ्रंटलाइन वर्कर्स जैसे डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मी और पुलिस कर्मियों की जान गई थी, जिसके बाद देश में शुरू हुए वैक्सीनेशन अभियान में सबसे पहले उन्हें प्राथमिकता देते हुए टीका लगाया गया था। वहीं अब दूसरी लहर में अपनी फ्रंटलाइन वर्कर्स का ग्राफ पहले की तुलना में काफी कम है, लेकिन इस बार की दूसरी लहर ने पत्रकारों पर जमकर अपना कहर बरपाया है।

कोरोना की दूसरी लहर से कई वरिष्ठ पत्रकारों के साथ-साथ भारत के कई जिलों, कस्बों और गांवों में काम करने वाले पत्रकारों ने भी अपनी जिंदगी खोई है। दिल्ली में इंस्टीट्यूट ऑफ परसेप्शन स्टडीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2020 से 16 मई 2021 तक कुल 238 पत्रकारों की मौत हुई है, ये ऐसे मामले हैं जिनकी पुष्टि हो चुकी है। इसके अलावा संस्थान में 82 अन्य नाम हैं, जिनका सत्यापन होना बाकी है।

रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल से दिसंबर 2020 तक महामारी की पहली लहर ने 56 पत्रकारों की जान ले ली थी। इसकी तुलना में दूसरी लहर ने 1 अप्रैल 2021 से 16 मई 2021 के बीच 171 पत्रकारों की जान ले ली है। बाकी 11 पत्रकारों की मौत जनवरी से अप्रैल के बीच में हुई हैं। इंस्टिट्यूट ऑफ परसेप्शन स्टडीज ने उन सभी पत्रकारों को इस लिस्ट में शामिल किया है, जो फील्ड में न्यूज कवर करने या ऑफिस में काम करने के दौरान संक्रमित होने के बाद मौत के मुंह में गए हैं। इनमें मीडिया संस्थानों के पत्रकार, स्ट्रिंगर, फ्रीलांसर, फोटो जर्नलिस्ट और सिटीजन जर्नलिस्ट शामिल हैं।

वहीं एक अन्य नेटवर्क ऑफ वीमेन इन मीडिया, इंडिया ने भी कहा है कि कोविड -19 के कारण लगभग 300 पत्रकारों की मौत हुई हैं। आंकड़ों के मुताबिक तेलंगाना में 39 पत्रकारों की मौत हुई है, जो राज्यों में सबसे ज्यादा है। उत्तर भारत में सबसे अधिक संख्या 37 पत्रकारों की संक्रमण से मृत्यु हो गई है। इसके बाद दिल्ली में 30, महाराष्ट्र में 24, ओडिशा में 26, मध्य प्रदेश में 19 पत्रकारों की मौत हुई है। इनमें वे 82 मौतें शामिल नहीं हैं, जिनकी पुष्टि होनी बाकी है। कोरोना से मरने वाले पत्रकारों में से लगभग 55 प्रतिशत पत्रकार प्रिंट मीडिया से, 25 प्रतिशत टीवी और डिजिटल मीडिया से और 19 प्रतिशत स्वतंत्र पत्रकार हैं।

Coronavirus के खात्मे को इन्हेलर, ट्रायल जारी

Coronavirus को शरीर से खत्म करेगा ये इनहेलर, ट्रायल के बाद जल्द होगी उपलब्ध

नई दिल्ली। कोरोना महामारी से निपटने के लिए पूरे विश्व में खोज जारी है, इसके सटीक इलाज की भी तलाश हो रही है। अब इसके इलाज को लेकर एक बड़ी उम्मीद बंधी है। वैज्ञानिकों ने ऐसा इनहेलर विकसित किया है जो किलर कोरोना के पहले लक्षण का मजबूती से सामना कर सकता है। वैज्ञानिक अब इस इनहेलर की फाइनल टेस्टिंग में जुट गए हैं।

ट्रायल में 220 मरीज शामिल

कोविड-19 के मरीजों के लिए ब्रिटिश कंपनी सिनायर्जन द्वारा बनाए गई इस खास तकनीक का नाम SNG001 इनहेलर है। SG016 नाम के इस ट्रायल में 220 मरीज शामिल हैं, जिन्हें उनके लक्षण दिखने के बाद तीन दिन के भीतर इनहेलर दिया जाएगा।

फेफड़ों में पड़ने वाले प्रभाव से होगा बचाव

सिनायर्जन के सीईओ रिचर्ड मार्डसन ने कहा है कि SG016 ट्रायल के विस्तार से वे बेहद खुश हैं। इससे हम काफी जल्दी घरेलू एनवायरोमेंट में ही ड्रग को टेस्ट करने में कामयाब हो सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘हमें इस ट्रायल से बड़ी उम्मीद है। यदि इस ट्रायल में सफलता मिली तो हम बीमारी के कारण फेफड़ों और रेस्पिरेटरी सिस्टम पर पड़ने वाले प्रभाव से शरीर को बचा पाएंगे।’ इस दौरान 98 रोगियों को इसका डोज दिया गया। अब इसका टॉप लाइन डेटा जुलाई में जारी किया जाएगा।

एंटी-वायरल प्रतिक्रियाओं को करता है टारगेट

इनहेलर में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले प्रोटीन (इंटरफेरॉन बीटा,आईएफएन-बीटा) को सीधे फेफड़ों में उतारता है। यह शरीर की एंटी-वायरल प्रतिक्रियाओं को टारगेट करता है। ये न सिर्फ सेल्स डैमेज होने से बचाता है, बल्कि वायरस को नकल करने से भी रोकता है। कंपनी का दावा है कि दुनिया भर में फैलती इस महामारी के बीच SNG001 इनहेलर एक बड़ा रोल अदा कर सकता है। उन्होंने कहा कि ट्रायल की कामयाबी के बाद ये इनहेलर पूरे ब्रिटेन में लोगों के लिए उपलब्ध करा दिया जाएगा।

ऑक्सीजन प्लांट के लिए बसपा सांसद ने दिये ₹पांच करोड़

अमरोहा। बहुजन समाज पार्टी के अमरोहा सांसद कुंवर दानिश अली ने आज दिनांक 8 मई 2021 को अपनी सांसद निधि से कोरोना से लड़ने के लिए ऑक्सीजन प्लांट लगाने व अन्य आवश्यक उपकरण आदि की खरीद के लिए ₹ 5.00.00.000 (पांच करोड़) देने की संस्तुति की है।

इस संबंध में उन्होंने 04 मई को प्रधानमंत्री को लिखा था। सांसद ने जिलाधिकारी को पत्र लिख कर ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए स्थान चिन्हित करने, इस्टीमेट आदि पूरी तैयारी करने का अनुरोध किया है।बसपा सांसद के इस सहयोग के लिए उनकी प्रशंसा की जा रही है।

विदित हो कि पिछले हफ्ते बीजेपी के पूर्व सांसद चौधरी कंवर सिंह तंवर ने अमरोहा में ऑक्सीजन प्लांट लगावाने के लिए डीएम उमेश मिश्र को 50 लाख रुपए दिए थे। इसके साथ ही उन्होंने करीब एक करोड़ की तीन मोबाइल एंबुलेंस भी डीएम को सौंपी हैं, ताकि कोरोना संक्रमितों की गांव-गांव में जांच के साथ दवा बांटी जा सकें। बताया जा रहा है कि पूर्व सांसद की धनराशि से जोया रोड स्थित जिला संयुक्त अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट लगाया जाएगा। इसको लेकर डीएम के निर्देश पर अफसरों ने प्लांट स्थापित करने की कवायद शुरू कर दी है।

कोरोना के खिलाफ जंग में इस दवा को मिली मंजूरी

drdo

नई दिल्ली। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से निपटने के लिए भारत तेजी से प्रभावी कदम उठा रहा है। डीआरडीओ की एक लैब इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड साइंसेज द्वारा डॉक्टर रेड्डी की लैब के साथ मिलकर बनाई गई कोरोना की ओरल दवा- 2- डिऑक्सी-डी-ग्लूकोज को भारत में आपात इस्तेमाल की मंजूरी दे दी गई है। दवा के क्लिनिकल ट्रायल के नतीजे बताते हैं कि यह दवा अस्पताल में मौजूद कोरोना के मरीजों की जल्दी रिकवरी में सहायक है और इसी के साथ ही यह दवा मरीजों की ऑक्सीजन की जरूरत को भी कम करती है।

बताया गया है कि इस दवाई को लेने वाले कोरोना मरीजों की रिपोर्ट आरटी-पीसीआर टेस्ट में निगेटिव आई है। इस महामारी मे कोरोना वायरस से जूझ रहे लोगों के लिए यह दवाई काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। पीएम मोदी की कोरोना महामारी के खिलाफ तैयार होकर रहने की बात पर अमल करते हुए डीआरडीओ ने कोरोना की दवा- 2-डीजी बनाने का कदम उठाया। 

अप्रैल 2020 में, महामारी की पहली लहर के दौरान INMAS-DRDO वैज्ञानिकों ने हैदराबाद के सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CCMB) की मदद से प्रयोगशाला में प्रयोग किए गए और पाया कि यह अणु SARS-CoV-2 वायरस के खिलाफ प्रभावी ढंग से काम करता है और वायरस की वृद्धि को रोकता है। इन परिणाणों के आधार पर DCGI ने मई,2020 में इस दवा के दूसरे चरण के ट्रायल करने की मंजूरी दी थी।

DRDO ने अपने उद्योग भागीदार डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज (DRL, हैदराबाद) के साथ मिलकर COVID-19 रोगियों में दवा की सुरक्षा और प्रभावकारिता का परीक्षण  परीक्षण शुरू किया। मई से अक्टूबर 2020 के दौरान किए गए चरण- II के परीक्षणों में, दवा COVID-19 रोगियों में सुरक्षित पाई गई, और उनकी रिकवरी में महत्वपूर्ण सुधार हुआ।

चरण 2A 6 अस्पतालों में आयोजित किया गया था और चरण 2B (खुराक लेकर) ks नैदानिक परीक्षण पूरे देश के 11 अस्पतालों में आयोजित किए गए थे। चरण- II का परीक्षण 110 रोगियों पर किया गया। प्रभावकारिता के रुझानों में,जिन रोगियों का इलाज 2-डीजी के साथ किया गया था। उन रोगियों ने विभिन्न बिंदुओं पर मानक देखभाल (SoC) की तुलना में तेजी से सुधार देखा गया।

करो योग-रहो निरोग कोरोना-साध्य या असाध्य

करो योग-रहो निरोग
विषय- कोरोना-साध्य या असाध्य

वी. प्रकाश तनोट
वैदिक योग चिकित्सक
(पूर्व वैदिक चिकित्सक एमजेबीवाईएस, महाराष्ट्र)
संपर्क-6395575501

कोरोना साध्य है या असाध्य! इस पर चर्चा से पहले मैं थोड़ा योग शब्द पर चर्चा करूंगा। आज के युग में योग अपना परिचय देने के लिए विश्व में किसी सहारे का मोहताज नहीं। योग क्या है? इसका जन्म स्थान क्या है? जन्मदाता कौन है? इसका जन्म कब, क्यों कैसे हुआ? यहां संक्षेप में इतना ही कहा जा सकता है कि योग सदियों पुराना एक ऐसा दिव्य ज्ञान है जिसको अपना कर संपूर्ण मानव जाति, मानव समाज ने स्वयं को शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक, सामाजिक एवं आर्थिक रूप से स्वस्थ रहते हुए जीवन के हर क्षेत्र में तरक्की की है। यह हमें ईश्वर द्वारा प्रदान किया एक ऐसा दिव्य मंत्र है, जिसमें मनुष्य ने योग की विभिन्न क्रियाओं को करते हुए स्वयं की सुप्त शक्तियों और ऊर्जाओं को जागृत करके अपना अकथनीय विकास किया है। देवों के देव महादेव भी एक महान योगी थे।
महर्षि पतंजलि और न जाने कितने ऋषि-मुनियों साधु-संतों ने योग रूपी अमृत को जनसामान्य के बीच में बांटते हुए संसार को इसकी दिव्य शक्तियों से परिचित कराया। वर्तमान समय में योग गुरु माननीय स्वामी रामदेव जी ने अपने अथक प्रयासों द्वारा भारत ही नहीं संपूर्ण जगत में इसका व्यापक प्रचार प्रसार किया है, जिसका फल यह हुआ कि विश्व के एक विशाल मानव समाज ने अपने जीवन में योग को आत्मसात करते हुए स्वयं को शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ बनाते हुए अपने देश की उन्नति में योगदान दिया। विषय व्यापक है, समय का अभाव है इसलिए अपने मुख्य बिंदु कोरोना व्याधि की तरफ चलते हैं, जिसने आज संपूर्ण विश्व में हाहाकार मचा रखा है। विश्व में करोड़ों की आबादी इस व्याधि से त्रस्त है। लाखों लोग काल के गाल में समा चुके हैं। लाखों व्यक्ति अभी भी बीमारी के संक्रमण से जूझ रहे हैं। मानव जीवन को बचाने के लिए सभी देशों की सरकारें अस्पतालों, कोविड वैक्सीन विभिन्न दवाइयों (एलोपैथिक, होम्योपैथिक व आयुर्वेदिक) द्वारा अपने हर संभव प्रयासों द्वारा कोरोना महामारी से पार पाने के लिए युद्ध स्तर पर कोशिशें कर रही हैं। समाज सेवा से जुड़े व्यक्तियों के अनेक समूह भी अपने तन, मन, धन से इसमें भागीदारी कर रहे हैं। एक योगाचार्य व आयुर्वेद का ज्ञाता होने के नाते मैं भी भारत देश की जनता की सेवा के लिए अपना एक छोटा सा योगदान दे रहा हूं। मुझे पूर्ण विश्वास है कि देश की जनता भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन करते हुए मेरे द्वारा बताए गए योग के विभिन्न प्राणायामों, आसनों और विभिन्न आयुर्वेदिक प्राकृतिक चीजों का सेवन करके स्वयं को कोरोना संक्रमण से बचा सकते हैं और संक्रमित रोगी अपने चिकित्सक की सलाह से मेरे द्वारा बताए नुस्खों योग क्रियाओं को करके जल्दी ठीक हो सकते हैं।

ये तीन प्राणायाम हमारे फेफड़ों को संक्रमण से बचाने में व इम्युनिटी बढ़ाने में विशेष कारगर हैं-

१. भस्त्रिका: किसी भी ध्यान वाले आसन में जैसे सुखासन, पद्मासन या सिद्धासन में किसी मैट, दरी या चादर पर सीधे बैठ जाएं। कमर, गर्दन सीधा रखते हुए दोनों हाथों को घुटनों पर ध्यान मुद्रा में रखें। श्वांस को धीरे-धीरे दोनों नासिका रंध्रों से फेफड़ों भरें व छोडं़े। ध्यान रहे श्वांस लेने और छोडऩे का अनुपात समान हो। आंखें बंद करके पूरा ध्यान श्वांस प्रश्वांस पर रखें। दो से 3 मिनट अभ्यास करें। उच्च रक्तचाप व हृदय रोगी इस को तीव्र गति से ना करें।

कपाल भांति प्राणायाम

२.कपाल भांति: किसी भी ध्यानात्मक आसन से पूर्व की भांति सीधे बैठ जाएं। श्वांस को सामान्य करें फिर थोड़ा प्रेशर के साथ नासिका से श्वास को बाहर फेंकें। उसी समय पेट को अधिकतम पीछे की तरफ खींचे। बार-बार इस क्रिया को दोहराएं। 5 मिनट करें।

अनुलोम विलोम प्राणायाम

३.अनुलोम विलोम: पूर्व की भांति बैठ जाएं। पहले श्वांस को सामान्य करें। फिर अपने दाएं हाथ को उठाकर मुंह के सामने लाते हुए अंगूठे से दाहिने नासिका रंध्र को बंद करते हुए बाएं नासिका रंध्र से श्वांस भरें और दाएं हाथ की मध्यमा और अनामिका उंगलियों से बाएं रंध्र को बंद करते हुए अंगूठे को हटाते हुए दाएं रंध्र से निकाल दें। फिर दाहिने रंध्र से भर कर बाएं से निकाल दें। इस क्रिया को 5 मिनट तक करें।

विशेष आयुर्वेदिक सुझाव
१. गर्म पानी में थोड़ा-सा सेंधा नमक डालकर रोज दो से तीन बार गरारे करने से गला संक्रमण से मुक्त रहता है।
२. दो कप पानी में पांच तुलसी पत्र दो लौंग, एक पिप्पली व एक चुटकी दालचीनी पाउडर डालकर हल्की आंच पर इतना पकाएं कि एक कप पानी रह जाए। सुबह-शाम पीने से इम्युनिटी बढ़ती है।
३. रात में सोते समय एक गिलास गर्म दूध में 5 ग्राम शुद्ध हल्दी पाउडर डालकर रोज पिएं।

नोट-पाठकगण अपनी किसी भी जीर्ण/ पुरानी बीमारी से संबंधित किसी भी समस्या के लिए गुरुजी से व्हाट्सएप नंबर पर मैसेज करें।
प्रस्तुति-
वी. प्रकाश तनोट
वैदिक योग चिकित्सक
(पूर्व वैदिक चिकित्सक एमजेबीवाईएस, महाराष्ट्र)
संपर्क-6395575501

आधी कीमत में बनाया वेंटिलेटर, वजन मात्र किलो


डॉक्टर दंपती की तकनीक और रिटायर्ड वैज्ञानिक की मदद से इंदौर के उद्योगपति ने आधी कीमत में बनाया वेंटिलेटर। 10 महीने की मेहनत से 50 हजार में किया तैयार। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दी मंजूरी।
सिलेंडर खत्म होने पर वातावरण से ऑक्सीजन लेकर मरीज को देगा।

इंदौर। (एजेंसी) कोरोना के गंभीर मरीजों को आ रही वेंटिलेटर की समस्या को देखते हुए शहर के एक उद्योगपति ने आधी कीमत में देसी वेंटिलेटर बना लिया है। विदेश से लौटे डॉक्टर दंपती की तकनीक और कैट के रिटायर्ड सांइटिस्ट की मदद से यह हो सका है। उनके वेंटिलेटर को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है। पोलोग्राउंड में साईं प्रसाद उद्योग के संचालक संजय पटवर्धन ने बताया कि नान इन्वेजिव टाइप का वेंटिलेटर 10 माह में तैयार हुआ है। इसकी कीमत करीब 50 हजार है, जबकि विदेशी वेंटिलेटर एक-डेढ़ से 10 लाख में मिलते हैं। यह कम ऑक्सीजन फ्लो में भी सपोर्ट करता है। सिलेंडर में ऑक्सीजन खत्म होने पर तीन-चार घंटे वातावरण से ऑक्सीजन लेकर मरीज को दे सकेगा। मरीज को कहीं शिफ्ट करना हो या फिर छोटी जगहों पर मरीज गंभीर हो जाए और संक्रमण 50-60 फीसदी हो तो ऐसी स्थिति में यह जिंदगी बचा सकता है। इसका वजन दो किलो है, जिससे इसे आसानी से कहीं भी ले जा सकते हैं।

बना है यूरोपीय मानकों के अनुसार-पटवर्धन बताते हैं कि डॉ. एसके भंडारी और उनकी पत्नी डॉ. पूर्णिमा के पास इसकी तकनीक थी। कैट के रिटायर्ड वैज्ञानिक अनिल थिप्से ने मदद की। मेडिकल उपकरण के लिए जरूरी लाइसेंस लेने, यूरोप के मानक के अनुसार बनाने के लिए पार्ट्स अमेरिका, मुंबई आदि जगह से मंगाए। टेस्टिंग, रजिस्ट्रेशन आदि में भी काफी समय लगा।

इसलिए पड़ती है वेंटिलेटर की जरूरतवेंटिलेटर तब उपयोग में आता है, जब मरीज खुद सांस नहीं ले पाता। वेंटिलेटर दो तरह के होते हैं। पहला – इन्वेजिव, जिसमें लंग्स तक पाइपलाइन जाती है। दूसरा- नाॅन इन्वेजिव, जिसमें नाक में पाइपलाइन जाती है। मरीज के लंग्स चलते हैं। (दै.भा.)

ऑक्सीजन और दवाओं की कालाबाजारी पर सीएम योगी सख्त

ऑक्सीजन और दवाओं की कालाबाजारी पर सीएम योगी सख्त, अधिक वसूली करने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रत्येक सीएचसी में 20-20 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर उपलब्ध कराए जाएं। सभी जिलों में 4,370 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर उपलब्ध कराए गए हैं। सभी जिलों को वेंटिलेटर भी उपलब्ध कराए गए हैं। सभी जिलों में इन जीवनरक्षक उपकरणों का क्रियाशील होना सुनिश्चित कराएं। मुख्य सचिव स्तर से इसकी निगरानी की जाए। कतिपय जिलों में एनेस्थेटिक नहीं हैं, वहां अगले 24 घंटे में एनेस्थेटिक और तकनीशियन उपलब्ध कराए जाएं। सीएम ने बुधवार टीम-9 की बैठक में यह निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सीएसआर के माध्यम से भी कंसंट्रेटर प्राप्त हुए हैं। मरीजों को ऑक्सीजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सतत प्रयास किए जा रहे हैं।

अधिक वसूली करने वालों पर की जाए सख्त कार्रवाई

सीएम ने कहा कि कुछ अस्पतालों में बेड व ऑक्सीजन आदि की उपलब्धता होने के बाद भी अनावश्यक अभाव दर्शा कर मरीजों और उनके परिजनों के इलाज में आनाकानी करने की शिकायतें मिली हैं। कुछ जगहों पर नियत शुल्क की दर से अधिक की वसूली की बात भी सामने आई है। ऐसी सभी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई के निर्देश अफसरों को दिए हैं।

एकीकृत पोर्टल पर दी जाए जानकारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड मरीजों के संबंध में दैनिक रिपोर्ट एकीकृत पोर्टल पर हर दिन जरूर अपलोड की जाए। ऑक्सीजन प्लांट के सम्बंध में केंद्र सरकार, राज्य सरकार अथवा निजी क्षेत्र द्वारा किए जा रहे सभी प्रयासों का प्रभावी मानीटिरिंग की जाए। मुख्य सचिव इनकी दैनिक समीक्षा करें। ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाने के साथ-साथ वितरण व्यवस्था को और बेहतर किये जाने की जरूरत है। हर जिले के संबंध में पृथक कार्ययोजना तैयार हो। ऑक्सिजन ऑडिट की प्रारंभिक रिपोर्ट को दृष्टिगत रखते हुए ऑक्सीजन के वितरण व्यवस्था लागू करें। केंद्र सरकार से 14 नए टैंकर मिले हैं। टैंकरों की संख्या और बढ़ाने की दिशा में प्रयास किये जाएं। 108 एम्बुलेंस सेवा की 75 फीसदी एम्बुलेंस कोविड डेडिकेटेड की जाएं, शेष 25 फीसदी को नॉन कोविड मरीजों के उपयोगार्थ आरक्षित रखा जाए। आइसीसीसी, कोविड प्रबंधन की रीढ़ है। डीएम व सीएमओ हर दिन यहां भ्रमण कर निरीक्षण जरूर करें। दैनिक बैठक यहीं होनी चाहिए।

“आयुष-64” :-प्रायः पूछे जाने वाले सवालों के जवाब


कई जड़ी-बूटियों से बनी दवा आयुष – 64 को कोविड 19 के हल्के और कम गंभीर मामलों के उपचार के लिये क्लीनिकल परीक्षण में कारगर पाया गया।

नई दिल्ली। कई जड़ी-बूटियों को मिलाकर बनाई गई आयुष–64 दवा को इस महामारी के समय में विशेषज्ञों ने उम्मीद की किरण बताया है। इस दवा को मूलरूप से मलेरिया के उपचार के लिये 1980 में विकसित किया गया था। अब उसे कोविड 19 के उपचार के लिये भी उपयुक्त पाया गया है। केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) आयुष मंत्रालय के अधीन आयुर्वेद में शोध करने वाला एक अग्रणी संस्थान है। उसने वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के सहयोग से हाल में इस दवा का विस्तृत और गहन परीक्षण किया है। इसमें देश के अन्य अनुसंधान संगठनों और मेडिकल कॉलेजों का भी सहयोग लिया गया। देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों ने आयुष 64 का जो क्लीनिकल परीक्षण किया, उसमें पता लगा कि इस दवा में वाइरस के खिलाफ लड़ने, शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और बुखार उतारने के गुण हैं। इसे लक्षण-रहित, हल्के और कम गंभीर कोविड 19 संक्रमण के उपचार के लिये भी कारगर पाया गया। परिणामस्वरूप, इस दवा को कोविड 19 के उपचार के लिये उपयुक्त मान लिया गया है।

आयुष मंत्रालय ने क्लीनिकल परीक्षण के नतीजों की घोषणा 29 अप्रैल, 2021 को एक प्रेस-कांफ्रेंस में की थी। उसके बाद आम जनता और चिकित्सा कार्य से जुड़े लोगों में आयुष – 64 के प्रति दिलचस्पी बढ़ी है। इस विषय में कई जिज्ञासाएं मिली हैं। मंत्रालय ने अब प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्नों के रूप में जवाब जारी किये हैं, जिन्हें नीचे दिया जा रहा हैः

  1. आयुष क्या है?

आयुष एक आयुर्वेदिक नुस्खा है, जिसे केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद ने विकसित किया है, जो आयुष मंत्रालय के अधीन आयुर्वेद अनुसंधान की प्रमुख संस्था है। मूल रूप से इसे 1980 में मलेरिया के उपचार के लिये विकसित किया गया था। अब इस दवा को कोविड 19 के उपचार के लिये भी उपयोगी माना गया है, क्योंकि इसमें वाइरस से लड़ने, शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और बुखार उतारने के गुण हैं। आयुष 64 के वैज्ञानिक अध्ययन में पाया गया है कि इसके 36 घटकों में से 35 घटक ऐसे हैं, जो कोविड 19 के वाइरस के खिलाफ एक-जुट होकर उसका मुकाबला कर सकते हैं। इस नुस्खे में ऐसे भी घटक मौजूद हैं, जो फ्लू जैसी बीमारियों से भी लड़ सकते हैं। देश भर में 64 क्लीनिकल परीक्षण हुये हैं। इन परीक्षणों से जो सबूत मिले हैं, उनसे साबित होता है कि लक्षण-रहित, हल्के और कम गंभीर कोविड 19 के इलाज में यह दवा बहुत कारगर है और इससे मरीज जल्द ठीक हो सकता है।

  1. आयुष–64 कौन ले सकता है?

कोविड 19 के किसी भी स्तर का मरीज इसे ले सकता है। बहरहाल, वैज्ञानिक परीक्षणों से पता चला है कि यह दवा लक्षण-रहित, हल्के और कम गंभीर मालमों में ज्यादा कारगर है। इसके विपरीत नतीजे निकलने का कोई खतरा नहीं है। इसके अलावा जिन मरीजों को आपात चिकित्सकीय मदद या अस्पताल की जरूरत नहीं है, वे मरीज आयुष–64 ले सकते हैं। कोविड 10 के हल्के और कम गंभीर लक्षणों वाले जिन मरीजों में शुरूआत में बुखार, शरीर दर्द, नाक बंद होना, अस्वस्थ महसूस करना, नाक से पानी बहना, सिरदर्द, खांसी आदि शिकायतें होती हैं, वे दवा ले सकते हैं। साथ में, जिन मरीजों में कोई लक्षण नहीं होता, वे आरटी-पीसीआर जांच के सात दिन के अंदर आयुष–64 दवा ले सकते हैं। इससे बेहतर नतीजे मिलेंगे।

  1. मैं आयुष–64 क्यों लूं?

रोग के निदान और गंभीरता के मद्देनजर आयुष–64 को बीमारी से उबरने में बहुत कारगर पाया गया है। इससे बीमारी से जल्दी ठीक हो सकते हैं। यह दवा आम सेहत, थकान, चिंता, तनाव, भूख न लगना, आरोग्य और नींद के लिये भी उपयोगी है।

  1. क्या इसकी उपयोगिता कोविड 19 के संदर्भ में वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित है?

आयुष–64 कई जड़ी-बूटियों को मिलाकर बनाई गई दवा है। इसे हर चिकित्सकीय तकाजों के तहत बनाया गया है। आयुष मंत्रालय के अधीन आयुष अनुसंधान सम्बंधी केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद द्वारा तय चिकित्सा मानकों के हवाले से इसकी गुणवत्ता और औषधीय गुणों का पूरा ध्यान रखा गया है। वैज्ञानिक रूप से यह साबित हो चुका है कि यह लक्षण-रहित, हल्के और कम गंभीर कोविड 19 संक्रमण के उपचार में कारगर है। देश में इस दवा पर गहन क्लीनिकल परीक्षण किये गये हैं, जिसमें इसे उपयोगी पाया गया है।

  1. मरीजों के लिये कोविड 19 की आदर्श खराक क्या है?

लक्षण-रहित कोविड 19 के मामलों में इसकी खुराक के तहत खाना खाने के एक घंटे बाद 500 एमजी की दो गोली दो बार लेनी है। गर्म पानी के साथ दवा खानी है। चौदह दिनों तक गोलियां खानी हैं। हल्के और कम गंभीर मामलों में खुराक के तहत 500 एमजी की दो-दो गोलियां दिन में तीन बार लेनी हैं। गोलियां गर्म पानी के साथ खाना खाने के एक घंटे बाद लेनी हैं।

  1. क्या आयुष-64 के साइड-इफेक्ट्स हैं?

कुछ मरीजों को पेचिश की शिकायत हो सकती है, जो अपने आप ठीक हो जायेगा। उसके लिये कोई दवा खाने की जरूरत नहीं है।

  1. क्या आयुष-64 को बुखार उतारने वाली दवा के रूप में भी लिया जा सकता है?

इसे बुखार की दवा के रूप में लिया जा सकता है। इसके लिये 500 एमजी की दो गोली दिन में दो बार लेनी है। लेकिन बुखार की दवा के रूप में क्लीनिकल परीक्षण में इसके प्रभाव को नहीं जांचा गया था। अगर मरीज को कोविड 19 है, तो लक्षण दिखते ही इसे दिया जा सकता है। ऐसे मामलों में व्यक्ति की आरटी-पीसीआर या रैपिड एंटीजन जांच जरूरी है। मरीज को चिकित्सकीय देखरेख में रहना चाहिये।

  1. क्या हल्के लक्षणों में सिर्फ आयुष-64 से काम चल जायेगा?

आयुर्वेदिक चिक्तिसक की देखरेख में हल्के लक्षणों वाले कोविड 19 के इलाज में आयुष-64 को अकेले लिया जा सकता है, बशर्ते कि आगे उचित इलाज की सुविधा मौजूद हो। बहरहाल, सलाह दी जाती है कि आयुष-64 को हल्के और कम गंभीर मामलों में चिकित्सकीय देखरेख के तहत लिया जाये, जब मरीज होम आईसोलेशन में हो। आयुष-64 को आयुष चिकित्सक की सलाह पर ही लिया जाये।

  1. आयुष-64 को कितने दिनों तक लेना चाहिये?

आयुष-64 को कम से कम 14 दिनों तक लिया जा सकता है। बहरहाल, अगर जरूरत पड़े, तो योग्य आयुष चिकित्सक की सलाह पर उसे 12 हफ्तों तक भी लिया जा सकता है। क्लीनिकल परीक्षण में वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हो चुका है कि इसे 12 हफ्तों तक लेना बिलकुल सुरक्षित है।

  1. आयुष-64 को कैसे लिया जाये?

इसे गर्म पानी से ले सकते हैं। अच्छा होगा अगर खाना खाने के एक घंटे बाद लिया जाये।

  1. जिन कोविड 19 मरीजों को अन्य बीमारियां (कोमॉर्बीटीज) भी हैं, क्या वे भी आयुष-64 ले सकते हैं?

जिन मरीजों को उच्च रक्तचाप, मधुमेह आदि अन्य बीमारियां हैं, वे भी लक्षण-रहित, हल्के और कम गंभीर कोविड मामलों में भी आयुष-64 ले सकते हैं। उन्हें सलाह दी जाती है कि वे इन बीमारियों की दवा बंद न करें।

  1. टीकाकरण के बाद क्या आयुष-64 लेना सुरक्षित है?

हां। अगर व्यक्ति टीका लगवाने के बाद भी संक्रमित हो जाता है, तो वह आरटी-पीसीआर पॉजीटिव रहने पर आयुष चिकित्सक की सलाह से आयुष-64 ले सकता है। बहरहाल, वैज्ञानिक अध्ययन में इस विषय में कोई प्रमाण नहीं मिला है।

  1. क्या गर्भवती और दुग्धपान कराने वाली माताओं के लिये यह सुरक्षित है?

वैज्ञानिक अध्ययन में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है कि आयुष-64 गर्भवती और दुग्धपान कराने वाली माताओं के लिये सुरक्षित है।

  1. क्या आयुष-64 बाजार में उपलब्ध है?

यह बाजार में उपलब्ध है और आयुर्वेदिक फार्मेसी से इसे खरीदा जा सकता है। बहरहाल, यह सुनिश्चित कर लिया जाये कि इसे बिना चिकित्सक के पर्चे के न बेचा जाये और आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख में ही इसका इस्तेमाल किया जाये।

  1. आयुष-64 लेने के बारे में किन मार्गदर्शनों का पालन किया जाना चाहिये?

आयुष-64 के इस्तेमाल के सम्बंध में किसी विशेष सावधानी की जरूरत नहीं है। बहरहाल, व्यक्ति को कोविड 19 के बारे में आयुष मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिये।

कोरोना से एक और सिंचाई कर्मी की मौत

चुनाव ड्यूटी से लौटे एक और सिंचाई कर्मी ने तोड़ा दम। एक सप्ताह में मृतकों की संख्या हुई तीन।

कालागढ़। पंचायत चुनाव ड्यूटी से लौटे एक और सिंचाईकर्मी ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। इसके बाद पंचायत चुनाव ड्यूटी से लौटकर मरने वाले सिंचाईकर्मियों की संख्या तीन हो गई है। एक सप्ताह के भीतर पंचायत चुनाव ड्यूटी से लौटे 3 सिंचाईकर्मियों की मौत से हडक़ंप मच गया।

पंचायत चुनाव की मतदान ड्यूटी से लौटने के बाद तबियत खराब होने पर सिंचाई विभाग में कार्यरत राकेश कुमार विद्युतकार (40 वर्ष) का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। वहीं कोरोना संक्रमित पाए जाने की पुष्टि के बाद उपचार के लिए बिजनौर भर्ती करा दिया गया, जहां शनिवार को उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। इससे पहले पंचायत चुनाव ड्यूटी से लौटी सिंचाई विभाग द्वारा संचालित जूनियर हाई स्कूल की सहायक अध्यापिका मोरीस गोयल की गुरुवार को रात कोटद्वार स्थित सरकारी अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई थी। वहीं एक सप्ताह पहले बीते रविवार को युवा सिंचाईकर्मी उपेन्द्र सिंह चौहान ने काशीपुर के निजी अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड दिया था। सप्ताहभर के भीतर साथी कर्मियों की मौत हो जाने से माहौल पूरी तरह गमगीन है तथा लोग खौफजदा हैं। 

दिवंगत साथियों को श्रद्धांजलि अर्पित 

कालागढ़। सिंचाईकर्मियों ने शोकसभा आयोजित कर मृतक कर्मचारियों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित कर ईश्वर से मृतात्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की। शनिवार को नई कॉलोनी स्थित विभागीय कार्यालय परिसर में आयोजित शोकसभा में शिक्षिका मोरिस गोयल के अलावा उपेन्द्र चौहान तथा राकेश कुमार के आकस्मिक निधन पर गहरा दु:ख व्यक्त किया गया। इसके बाद 2 मिनट का मौन धारण कर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वर से मृतात्माओं को शांति के लिए प्रार्थना की गई। शोकसभा में मनोज कुमार लिखवार, एमडी जोशी, मुस्तकीम अहमद, विजय सिंह, सुरेश देवान्तक, कमल विश्नोई, एसएस बिष्ट तथा कोमल सिंह सहित अन्य विभागीय कर्मचारी मौजूद रहे।

कोरोना: सिल्ट सफाई कार्य स्थगित करने की मांग 

कालागढ़। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि मतदान के दौरान संक्रमण की चपेट में आये 3 कर्मी अपनी जान गवां चुके हैं, जबकि अनेक अन्य कर्मचारी बीमार हैं। बीमारी से ग्रस्त कर्मियों की मतगणना में दोबारा ड्यूटी लगा दी गई है। संक्रमण ग्रस्त कर्मियों की मतगणना में ड्यूटी लगाकर उनकी जान से खिलवाड़ किये जाने का आरोप लगाते हुए कर्मचारी नेताओं ने मतदान ड्यूटी कर चुके कर्मचारियों की मतगणना ड्यूटी निरस्त किये जाने की मांग की। वहीं सिविल डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ के मण्डल अध्यक्ष कविराज सिंह ने कोराना संक्रमण के फैलने की आशंका का हवाला देते हुए अधिकारियों तथा कर्मचारियों को नहरों की सिल्ट सफाई के काम में लगाये जाने का अमानवीय करार देते हुये सिल्ट सफाई का कार्य स्थगित कर खरीफ फसली के बाद कराने की मांग की है।

मौत का अगला पड़ाव हो सकता है आपका अपना ही घर!

अगले मातम का मुकाम हो सकता है अपना ही घर!
सरकारी आदेश ठेंगे पर, सड़क पर लोग घूम रहे छुट्टा
सोशल डिस्टेंसिंग दरकिनार, मास्क पहनना शान के खिलाफ

बिजनौर। एक ओर कोरोना संक्रमण ने देश व प्रदेश के साथ ही जिले में भी भयावह रुप अख्तियार कर रखा है। इसके बावजूद पब्लिक है कि मानती नहीं। कोरोना संक्रमण से बचाव को दो गज दूरी, मास्क है जरूरी, चेहरे पर मास्क का इस्तेमाल करना लोग अपनी शान के खिलाफ समझ रहे हैं। मीडिया में कोरोना के कारण होने वाली मौत की खबरों पर प्रशासन व सरकारों को दोष देने वाले यह समझने को तैयार नहीं कि अगले मातम का मुकाम उनका अपना घर भी हो सकता है।

कोरोना संक्रमण देश व प्रदेश के साथ ही जिले में भी भयावह रुप अख्तियार करता जा रहा है। रोजाना संक्रमित होने वालों और इस वैश्विक आपदा से जान गंवाने वालों की संख्या में बढ़ोत्तरी होती जा रही है। इसके बावजूद पब्लिक मानने को तैयार नहीं है। कोरोना संक्रमण से बचाव को दो गज दूरी, मास्क है जरूरी, चेहरे पर मास्क लगाने की सरकारी सलाह अधिकांश लोगों को रास नहीं आ रही। यही कारण है कि घर से निकलते समय चेहरे पर मास्क पहनना लोग अपनी शान के खिलाफ समझ रहे हैं। बाजारों में उमड़ी भीड़ को देखकर साफ समझा जा सकता है कि किसी तरह से सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। मीडिया में कोरोना के कारण होने वाली मौत की खबरों पर प्रशासन व सरकारों को दोष देने वाले लोग यह समझने को तैयार नहीं कि अगले मातम का मुकाम उनका अपना घर भी हो सकता है।
पुलिस करे सख्ती तो उत्पीडऩ
ऐसा नहीं है कि पुलिस सख्ती नहीं करती। करती है, लेकिन पहले समझाया जाता है, जिले का पुलिस व प्रशासनिक अमला रोजाना लोगों को आगाह कर रहा है कि जब तक अति आवश्यक न हो, घर से बाहर न निकलें। निकलना जरुरी हो तो चेहरे पर मास्क लगा कर रखें, दो गज की दूरी नियम को अपने रोजमर्रा के जीवन में उतार लें और सैनिटाइजेशन का ख्याल रखें। यह सब जनता की भलाई के लिए ही बताया जाता है। ऐसे में इनका पालन न करने वालों के साथ यदि पुलिस सख्ती करे तो उसे उत्पीडऩ करार दिया जाता है।
नेता भी नहीं करते अपील
बात बात पर सरकार व प्रशासन के खिलाफ टिप्पणी करने वाले और सभी प्रयासों का नाकाफी होने का रोना रोने वाले नेता भी चुप हैं। यह बात अलग है कि यदि कोरोना से बचाव को वैक्सीन लगवा ली, तो फोटो जरुर सोशल मीडिया पर शेयर करना है। किसी को कुछ समझाना नहीं, आम जनता मरती है तो मरे, कोई चिंता नहीं।

312 का चालान, वसूला जुर्माना 2 लाख 42 हजार:-बिजनौर। कोरोना संक्रमण की रोकथाम हेतु पुलिस अधीक्षक बिजनौर के निर्देशन में बिना मास्क घूमने वालो के विरूद्ध अभियान चलाया जा रहा है। बुधवार दिनांक 28.04.2021 को जनपदीय पुलिस द्वारा बिना मास्क घूम रहे 312 व्यक्तियो का चालान कर 2,42,000/ रूपये का जुर्माना वसूला गया।

बुधवार को पॉजिटिव मिले 354 केस

बिजनौर। जनपद में बुधवार को प्राप्त 3423 टैस्ट रिपोर्ट में 354 नए संक्रमितों की पुष्टि हुई है। वहीं ठीक होकर घर जाने वालों की संख्या 5930 हो गई। इसके अलावा टीएमयू में अलग-अलग तारीखों को हुई तीन मौत के साथ ही संख्या 75 पर पहुंच गयी है।

बुधवार को 3423 टेस्ट रिपोर्ट प्राप्त हुई, इनमें 354 को कोविड-19 संक्रमण की पुष्टि हुई है। इनमें बिजनौर शहरी समेत जिले की सभी तहसीलों के विभिन्न इलाकों के मामले शामिल हैं। वहीं मुख्य चिकित्साधिकारी डा. विजय कुमार यादव के अनुसार पोर्टल पर तीन मौत की जानकारी मिली है। बिलाई निवासी 71 वर्षीय महिला की शुक्रवार की सुबह टीएमयू मुरादाबाद में मौत हो गयी। वह चार साल से हाइपरटेंशन की मरीज थी। खांसी और सांस में दिक्कत होने पर वह हल्दौर में हुई जांच में 18 अप्रैल को पॉजिटिव पाई गयी थी। 24 अप्रैल को टीएमयू में ही एक अन्य संक्रमित 58 वर्षीय ढक्का कर्मचंद निवासी व्यक्ति की मौत हुई है। वह डायबिटीज का पुराना रोगी था। इसके अलावा 21 अप्रैल को चांदपुर में तैनात मूलत: बरेली निवासी पुलिसकर्मी की भी मृत्यु की पुष्टि हुई है। उक्त पुलिसकर्मी भी सात वर्षों से डायबिटीज से पीड़ित था। अब जनपद में कुल केस की संख्या 9124 होने के साथ ही सक्रिय केस 3119 हो गए हैं। कुल मौत की संख्या 75 है जबकि 5930 लोग ठीक होकर घर जा चुके हैं।

नेबुलाइजर मशीन के इस्‍तेमाल की सलाह देने वाले डॉक्टर ने मांगी माफी

देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर में संक्रमण के नए मामले रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं। अस्‍पतालों में बेड, जरूरी दवाइयों और ऑक्सीजन की किल्लत हो गई है। ऑक्सीजन की कमी के कारण मरीजों की जान तक जा रही है। ऐसे समय में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक डॉक्टर कोरोना मरीजों को ऑक्‍सीजन सिलिंडर की जगह नेबुलाइजर मशीन के इस्‍तेमाल की सलाह दे जा रहा है। चूंकि, यह दावा एक डॉक्टर ने किया है, तो लोग इसे सच मानते हुए जमकर शेयर कर रहे हैं।

वायरल वीडियो में क्या है- सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में फरीदाबाद के सर्वोदय अस्पताल के डॉक्टर आलोक कोरोना मरीजों को ऑक्सीजन सिलेंडर के पीछे भागने के बजाय नेबुलाइजर मशीन का इस्तेमाल करने की सलाह देते नजर आ रहे हैं। उनका दावा है कि हमारे वातावरण में पर्याप्त मात्रा में ऑक्‍सीजन है, जो हमें नेबुलाइजर मशीन की मदद से मिल सकता है। वह सर्वोदय अस्पताल फरीदाबाद से डॉ. आलोक हैं। उन्होंने रक्त ऑक्सीजन के स्तर में सुधार के लिए ‘नेबुलाइज़र’ का उपयोग करते हुए एक उत्कृष्ट तकनीक दिखाई है। ऑक्सीजन संकट के आज के परिदृश्य में यह कई लोगों की जान बचा सकता है। सभी से अनुरोध है कि इसे एक बार जरूर देखें।

क्या है सच्चाई- वीडियो वायरल होने के बाद सर्वोदय अस्पताल ने ट्वीट कर इस दावे को खारिज किया है। अस्पताल ने लिखा कि ‘यह वीडियो किसी भी तरह के वैज्ञानिक अध्ययन पर आधारित नहीं है। सर्वोदय अस्पताल इस दावे का समर्थन नहीं करता है। साथ ही, अस्पताल ने लोगों से अपील की कि इस तरह का प्रयोग अपने डॉक्‍टर की सलाह के बगैर न करें। इससे आपकी तबियत बिगड़ सकती है।’ वहीं, अब डॉ. आलोक ने सफाई देते हुए एक और वीडियो जारी किया है, जिसमें उन्होंने कहा कि उनसे गलत मैसेज चला गया है। नेबुलाइजर मशीन, ऑक्सीजन सिलेंडर का विकल्प बिलकुल भी नहीं है।

सोमवार को बिजनौर में मिले 457 नए संक्रमित

बिजनौर में मिले 457 नए संक्रमित

बिजनौर। सोमवार को जिले में 457 नए कोरोना संक्रमितों की पुष्टि हुई है। संक्रमितों मेंं कई स्वास्थ्यकर्मियों के अलावा बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। सक्रिय केस की संख्या 3110 पर पहुंच गई है। जनपद में सोमवार को 2530 टेस्ट रिपोर्ट प्राप्त हुई हैं। इनमें 457 को कोविड-19 संक्रमण की पुष्टि हुई है। इनमें सीएमओ कार्यालय के एक लिपिक समेत कईं स्वास्थ्यकर्मी भी शामिल हैं। सोमवार की रिपोर्ट में कईं पुलिसकर्मी भी संक्रमित पाए गए हैं। पुलिस लाइन में भी टेस्टिंग कराई जा रही है। संक्रमितों में 77 बिजनौर, 62 धामपुर, 92 नजीबाबाद, 33 किरतपुर, 10 अफजलगढ़, 33 जलीलपुर चांदपुर, 25 हल्दौर, नगीना आदि शहरों के विभिन्न मोहल्लों में कोरोना पॉजिटिव मिले। वहीं सभी तहसीलों के विभिन्न गांवों में भी संक्रमित पाए गए। इससे एक दिन पहले मिली रिपोर्ट में एक एसीएमओ भी कोरोना पॉजिटिव आ चुके हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. विजय कुमार यादव ने बताया कि सभी को नियमानुसार आइसोलेशन के निर्देश दिए गए हैं। जनपद में कुल केस की संख्या 8617 हो गई है। वहीं कुल ठीक होने वालों की संख्या 5435 है। कुल ७२ लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सक्रिय केस की संख्या 3110 है। 

उत्तराखंड में राजधानी समेत कईं स्थानों पर आज शाम से एक सप्ताह का कर्फ्यू

देहरादून। राजधानी में कोविड संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए डीएम डॉ0 आशीष कुमार श्रीवास्तव ने सोमवार 26 अप्रैल शाम 7 बजे से 3 मई सोमवार सुबह 5 बजे तक कर्फ्यू लगाने के आदेश दिए हैं। जनपद देहरादून के नगर निगम ऋषिकेश, देहरादून एवं छावनी परिषद गढी कैन्ट और क्लेमनटाऊन के क्षेत्र पर ये लागू होंगे।

दिनांक 26 अप्रैल 2021 (सोमवार) की सायं 07 बजे से दिनांक 03 मई 2021 (सोमवार) प्रातः 05 बजे तक जनपद देहरादून के नगर निगम ऋषिकेश, देहरादून एवं छावनी परिषद गढी कैन्ट और क्लेमनटाऊन के पूर्णतः कोरोना कर्फ्यू रहेगा। इस दौरान निजी वाहनों का आवागमन भी पूर्णतयाः प्रतिबन्धित रहेगा।
पेट्रोल पम्प व गैस आपूर्ति तथा दवा की दुकानें पूरे समय खुली रहेगी।
आवश्यक सेवा से जुड़े वाहनों तथा सरकारी वाहनों को केवल ड्यूटी हेतु आवागमन में छूट होगी। हवाई जहाज, ट्रेन तथा बस से यात्रा करने वाले व्यक्तियों को आवागमन में छूट होगी।

शादी और संबन्धित समारोहों में प्रवेश करने के लिए बैंकेट हॉल / सामुदायिक हॉल और विवाह समारोहों से संबंधित व्यक्तियों / वाहनों की आवाजाही हेतु प्रतिबन्धों के साथ छूट रहेगी। समारोह स्थल पर 50 से अधिक व्यक्ति एकत्रित नहीं हो सकेंगे। सार्वजनिक हित के निर्माण कार्य चलते रहेगे तथा इनसे जुड़े हुए कार्मिक एवं मजदूरों तथा निर्माण सामग्री के वाहनों को आवागमन में छूट रहेगी। औद्योगिक इकाईयों तथा इनके वाहन व कार्मिकों को आने-जाने की छूट होगी।

→ रेस्टोरेन्ट तथा मिठाई की दुकानों से होम डिलवरी में छूट रहेगी।
→ शव यात्रा से संबंधित वाहनों को छूट रहेगी तथा अंतिम संस्कार में 20 से अधिक व्यक्ति सम्मलित नहीं  हो सकेंगे।
→ केन्द्र सरकार तथा राज्य सरकार के अधीन समस्त शासकीय तथा अशासकीय कार्यालय (आवश्यक सेवा के कार्यालयों को छोड़कर) बन्द रहेंगे।

→ मालवाहक वाहनों के आवागमन में छूट रहेगी।  → वास्तविक रूप से चिकित्सालय उपचार हेतु जाने वाले व्यक्तियों के वाहनों को आवागमन में छूट होगी।

कोविड 19 जांच एवं टीकाकरण हेतु निकटवर्ती केन्द्र तक आवागमन की छूट होगी। पोस्ट ऑफिस तथा बैंक यथा समय खुले रहेंगे। दिनांक 26.04.2021 को बाजार सायं 05 बजे तक खुले रहेंगे तथा सायं 07 बजे से पूर्व की भाँति रात्रि कर्फ्यू लागू रहेगा। जनपद देहरादून के अन्य स्थानों  पर पूर्व आदेश संख्या: 3391 / सीपीओ- डीएम 2021 दिनांक 21.04.2021 यथावत लागू रहेगा।

उक्त कोरोना कर्फ्यू अवधि में निम्न सेवाओं से जुड़े दुकानों व वाहनों को सशर्त छूट इस प्रकार से रहेगी: फल, सब्जी की दुकानें, डेरी, बेकरी, मीट-मछली (वैध लाईसेंसधारी) की दुकानें, राशन की दुकानें, सरकारी सस्ता गल्ला की दुकाने तथा पशुचारा की दुकानें अपरान्ह 04 बजे तक ही खुली रह सकेगी।

तथ्य की जांच: COVID-19 के लिए उपचार के रूप में नानावती अस्पताल वायरल में संलग्न फर्जी पर्चे

लॉजिकल इंडियन फैक्ट चेक टीम ने इस दावे की जांच पिछले साल जुलाई में की थी, कि नानावती अस्पताल ने सीओवीआईडी -19 के इलाज के लिए क्या कदम उठाए हैं।

अदिति चट्टोपाध्याय  (तथ्य परीक्षक) अपडेट: 2020-07-28 12:20 जीएमटी संपादक: भारत नायक  | रचनाकार:  अभिषेक एम

तथ्य की जांच: COVID-19 के लिए उपचार के रूप में नानावती अस्पताल वायरल में संलग्न फर्जी पर्चे

एक व्हाट्सएप फॉरवर्ड का दावा है कि मुंबई के नानावती अस्पताल में अभिनेता अमिताभ बच्चन का इलाज कर रहे डॉक्टरों ने कई ऐसे कदम उठाए हैं कि अगर वे कोरोनावायरस से संक्रमित हो जाते हैं, तो उन्हें क्या लेना चाहिए। कथित नुस्खे में नींबू, अदरक और गुड़ के साथ गर्म पानी का सेवन करना, घी के साथ गर्म दूध, हल्दी के साथ दिन में एक बार भाप लेना शामिल है।

व्हाट्सएप फॉरवर्ड दो रूपों में आता है: एक अंग्रेजी में और एक हिंदी में। नीचे दो फॉरवर्ड हैं:

लॉजिकल इंडियन को फैक्ट चेक के दावों का अनुरोध मिला।

दावा: नानावती अस्पताल ने सीओवीआईडी -19 से अमिताभ बच्चन के इलाज के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले नुस्खे को सार्वजनिक किया है। 

तथ्यों की जांच: दावा झूठा है!

लॉजिकल इंडियन वायरल मैसेज को लेकर नानावती अस्पताल पहुंचा। “विटामिन सी से भरपूर खाद्य पदार्थ और अन्य किसी भी संक्रमण और बीमारियों के खिलाफ प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने में मदद करते हैं। हालांकि, ये अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा COVID -19 संक्रमण के इलाज के लिए अनुशंसित नहीं हैं। ऐसे किसी भी उपचार प्रोटोकॉल का पालन करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।” नानावती सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के प्रवक्ता ने कहा।

वायरल व्हाट्सएप में जिन डॉक्टरों का जिक्र किया गया है, वे वास्तव में नानावती अस्पताल के हैं । डॉ. अंसारी क्रिटिकल केयर सर्विसेज के निदेशक हैं और डॉ. लिमये सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन हैं।

क्या कोरोनो वायरस के खिलाफ उपचार का कोई प्रभाव हो सकता है? अतिरिक्त विटामिन-सी सामान्य सर्दी की अवधि को कम कर सकता है। विटामिन सी मानव शरीर में आवश्यक भूमिका निभाता है और सामान्य प्रतिरक्षा समारोह का समर्थन करता है। एंटीऑक्सिडेंट के रूप में, विटामिन मुक्त कणों को चार्ज कणों को बेअसर करता है जो शरीर में ऊतकों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। यह शरीर को हार्मोन को संश्लेषित करने, कोलेजन के निर्माण और रोगजनकों के खिलाफ कमजोर संयोजी ऊतक को सील करने में भी मदद करता है। स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली को बनाए रखने के लिए विटामिन सी को दैनिक आहार में बिल्कुल शामिल किया जाना चाहिए, लेकिन पूरक पर मेगाडोजिंग COVID-19 को पकड़ने के जोखिम को कम करने की संभावना नहीं है।

ऐसा कोई सबूत नहीं है जो बताता है कि अन्य तथाकथित प्रतिरक्षा-बढ़ाने वाले पूरक – जैसे कि जस्ता, ग्रीन टी या इचिनेशिया – COVID-19 को रोकने में मदद करते हैं।

डब्ल्यूएचओ का परिप्रेक्ष्य: कुछ पश्चिमी, पारंपरिक या घरेलू उपचार COVID-19 के आराम और लक्षणों को कम कर सकते हैं, इस बात का कोई सबूत नहीं है कि वर्तमान दवा रोग को रोक या ठीक कर सकती है।

संगठन COVID-19 की रोकथाम या इलाज के रूप में एंटीबायोटिक दवाओं सहित किसी भी दवा के साथ स्व-दवा की सिफारिश नहीं करता है। हालांकि, पश्चिमी और पारंपरिक दोनों दवाओं के कई नैदानिक परीक्षण चल रहे हैं।

WHO का कहना है कि COVID-19 के खिलाफ खुद को और दूसरों को बचाने के लिए सबसे प्रभावी तरीके निम्न हैं:

(१) अपने हाथों को बार-बार साफ करें। (२) अपनी आँखों, मुँह और नाक को छूने से बचें (3) अपनी खांसी को कोहनी या ऊतक के मोड़ से ढकें। यदि एक ऊतक का उपयोग किया जाता है, तो इसे तुरंत त्याग दें और अपने हाथ धो लें। (४) दूसरों से कम से कम १ मीटर की दूरी बनाए रखें।

दावा समीक्षा: नानावती अस्पताल ने COVID-19 के इलाज के लिए कदम उठाए। दावा किया गया: व्हाट्सएप फॉरवर्ड तथ्य की जाँच करें: झूठी

घर पर योगा करके ठीक हो सकते हैं  कोरोना मरीज, रेमडेसिविर की जरूरत नहीं

नई दिल्ली। कोरोना से संबंधित मामलों पर AIIMS के डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया, मेदांता के डॉ. नरेश त्रेहान और DG हेल्थ डॉ. सुनील कुमार ने कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं-

AIIMS के डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया का कहना है कि कोरोना ज्यादातर सामान्य बीमारी है। ज्यादातर आप घर से योगा करके ही ठीक हो सकते हैं। यह माइल्ड बीमारी है। केवल 10-15 फीसदी ही सेवर हो सकती है। अगर सांस के रिलेटिड दिक्कत हो रही है तो तुरंत आक्सीजन लगाने की जरूरत नहीं है। आप पेट के बल लेट सकते हैं। ब्रीथिंग एक्सरसाइज करें, पेनिक न करें।’ कोरोना वायरस की मौजूदा स्थिति से जनता में पैनिक है, लोगों ने घर में इंजेक्शन, सिलेंडर रखने शुरू कर दिए हैं, जिससे इनकी कमी हो रही है। कोरोना आम संक्रमण है, 85-90 फीसदी लोगों में ये आम बुखार, जुकाम होता है। इसमें ऑक्सीजन, रेमडेसिविर की जरूरत नहीं पड़ती। जो मरीज घर हैं और जिनका ऑक्सीजन सेचुरेशन 94 से ज्यादा है उन्हें रेमडेसिविर की कोई जरूरत नहीं है और अगर आम रेमडेसिविर लेते हैं तो उससे आपको नुकसान ज्यादा हो सकता है, फायदा कम होगा।

मेदांता हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ. नरेश त्रेहान ने कहा कि RT-PCR टेस्ट आते ही आप अपने लोकल डॉ. से संपर्क करें। 90 फीसदी से ज्यादा लोग घर में ही ठीक हो जाएंगे। अनुलोम-विलोम योगा से लंग्स को बेनिफिट मिलता है। अस्पताल तभी जाना है जब ऑक्सीजन बहुत ज्यादा गिर रही है। मास्किंग, हैंड सेनेटाइजिंग, सोशल डिस्टेंसिंग को विकसित करें। शादियों पार्टियों में न जाएं। गैदरिंग से दूर रहें, बाहर से आने वाले युवा पहले मास्क को दूर करें और कपड़े चेंज कर फिर अपने घरवालों से मुलाकात करें।

डायरेक्टर जनरल हेल्थ सर्विस डॉ. सुनील कुमार ने कहा, ‘हम सब आपके सामने आ रहे हैं कि तथ्यों पर ध्यान दें। पैनिक न हों।

पंचरत्न: फेफड़ों को मजबूत बनाने के लिए रोज करें सेवन


फेफड़ों को मजबूत बनाने के लिए रोजाना इन चीजों का सेवन करें।
फेफड़ों से फिल्टर होने के बाद ही ऑक्सीजन आपके पूरे शरीर में पहुंचती हैं। ऐसे में लंग्स का खास ख्याल रखना बहुत ही ज्यादा जरूरी है।


स्वस्थ फेफड़ों से ही शरीर को हमेशा हेल्दी रखा जा सकता है। फेफड़ों से फिल्टर होने के बाद ही ऑक्सीजन पूरे शरीर में पहुंचती हैं। इसलिए इनका खास ख्याल रखना बहुत ही ज्यादा जरूरी है। फेफड़े ठीक ढंग से काम नहीं करेंगे तो अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, निमोनिया, टीबी, कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है। कोरोना वायरस जैसी महामारी से बचने के लिए फेफड़ों का मजबूत होना बहुत ही जरूरी हैं क्योंकि यह सीधे लंग्स पर ही अटैक करता है। इस कारण सांस लेने में अधिक समस्या होती है।

कोरोना की दूसरी लहर में इस बार 60 से 65 फीसदी मरीजों को सांस लेने में काफी दिक्कत आ रही है। उनका ऑक्सीजन लेवल तेजी से घट कर 2 से 3 दिन के अंदर 80 से नीचे पहुंच जाता है। ऐसे में तुरंत ऑक्सीजन की जरूरत होती है। इस दौरान ऑक्सीजन ना मिले तो हालात बहुत गंभीर हो जाते हैं। इसलिए जरूरी है कि फेफड़ों का पहले ही ध्यान रखें। कुछ फूड्स के प्रयोग से आपके फेफड़े तेजी से मजबूत हो जाएंगे और ऑक्सीजन लेवल भी बढ़ेगा।

फेफड़ों को मजबूत बनाने के लिए रोजाना करें इन चीजों का सेवन, ऑक्सीजन लेवल भी बढ़ेगा

हल्दी
हल्दी में भरपूर मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लामेट्री गुण पाए जाते हैं जो आपको हर तरह के संक्रमण से बचाते हैं। रोजाना सोने से पहले दूध में हल्दी डालकर इसका सेवन करें। इसके साथ-साथ आप हल्दी, गिलोय, दालचीनी, लौंग, अदरक और तुलसी का काढ़ा बनाकर पिएं। इससे लंग्स मजबूत रहने के साथ इम्यूनिटी मजबूत होगी।

शहद
आयुर्वेद में शहद का बहुत अधिक महत्व बताया गया है, क्योंकि एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं। इसका सेवन करने से आपके फेफड़े मजबूत होते हैं। इसके अलावा फेफड़ों से विषाक्त तत्वों को बाहर निकालने के लिए सुबह गर्म नींबू पानी में शहद डालकर पिएं। काढ़ा में भी शहद डाल कर पी सकते हैं।

तुलसी
तुलसी के पत्ते में अधिक मात्रा में पोटैशियम, आयरन, क्लोरोफिल मैग्नीशियम, कैरीटीन और विटामिन-सी पाया जाता है। यह फेफड़ों को हेल्दी रखने में मदद करता है। रोजाना सुबह 4-5 पत्तियों को चबा लें। इसके आप गिलोय और तुलसी का आयुर्वेदिक काढ़ा बनाकर पी सकते हैं।

अंजीर
अंजीर में बहुत सारे चमत्कारी तत्व पाए जाते हैं। इसमें विटामिन ए, विटामिन-सी, विटामिन-के, पोटेशियम, मैग्नीशियम, कॉपर और आयरन जैसे जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसके सेवन करने से लंग्स मजबूत होगे। इसके साथ ही दिल हेल्दी रहेगा।

लहसुन
लहसुन में भरपूर मात्रा में एंटीबायोटिक, एंटीफंगल, एंटीवायरल गुणों के साथ-साथ कैल्शियम, फॉस्फोरस, लौह तत्व, विटामिन जैसे तत्व पाए जाते है। जो फेफड़ों को मजबूत रखने में मदद करते हैं। रोजाना सुबह खाली पेट 2-3 लहसुन की कली का सेवन कर सकते हैं। इसके अलावा अगर आपको ज्यादा गर्मी लगती है तो रात को लहसुन एक कली भिगो दें और सुबह इनका सेवन कर लें।

जिला बिजनौर में मिले 425 नए केस

425 नए केस जनपद बिजनौर में मिले, शहर में संख्या 135

बिजनौर। जनपद में रविवार को 425 नए संक्रमितों की पुष्टि हुई है, इनमें बिजनौर शहर में संख्या 135 है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार सक्रिय केस की संख्या 2859 बताई गई है। रविवार को 2202 टेस्ट रिपोर्ट प्राप्त हुई। इनमें 425 को कोविड-19 संक्रमण की पुष्टि हुई है। निगेटिव 1777 पाए गए। इसी के साथ जनपद में कुल केस की संख्या 8160 पहुंच गई है। कुल 5229 लोग ठीक हो कर घर जा चुके हैं, जबकि कुल मौत की संख्या 72 है।

पेट के बल सोने के भी हैं आश्चर्यजनक लाभ

गर्भवती महिलाएं, हृदय एवं स्पाइन रोगी पेट के बल सोने से करें परहेज

कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच उपचार के दौरान शरीर में ऑक्सीजन की कमी की समस्या सबसे अधिक देखी जा रही है।ऑक्सीजन की कमी होने के कारण कई कोरोना पॉजिटिव को अस्पताल जाने की जरूरत भी पड़ रही है। होम आइसोलेशन में रह रहे मरीज अपने सोने के पोजीशन में थोड़ा बदलाव कर ऑक्सीजन की कमी को दूर कर सकते हैं । स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने इस संबंध में पोस्टर के माध्यम से विस्तार से जानकारी दी है ।   

यदि किसी कोरोना पाजिटिव को सांस लेने में दिक्कत हो रही हो एवं ऑक्सीजन लेवल 94 से घट गया हो तो ऐसे लोगों को पेट के बल सोने की सलाह दी गयी है । इसके लिए सबसे पहले वह पेट के बल  लेटें, एक तकिया अपने गर्दन के नीचे रखें,  एक या दो तकिया छाती के नीचे रख लें एवं दो तकिया पैर के टखने के नीचे रखें। इस तरह से 30 मिनट से दो घंटे तक सो सकते हैं। इसके साथ ही स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने इस बात पर भी विशेष जोर दिया है कि होम आईसोलेशन में रह रहे मरीजों की तापमान की जाँच, ऑक्सीमीटर से ऑक्सीजन के स्तर की जाँच, ब्लड प्रेशर एवं शुगर की नियमित जाँच होनी चाहिए। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने कोरोना पॉजिटिव मरीजों के लिए सोने की चार पोजीशन को महत्वपूर्ण बताया है। 30 मिनट से दो घन्टे तक पेट के बल सोने, 30 मिनट से दो घन्टे तक बाएं करवट, 30 मिनट से दो घन्टे तक दाएं करवट एवं 30 मिनट से दो घन्टे तक दोनों पैर सीधा कर पीठ को किसी जगह टिकाकर बैठने की सलाह दी गयी है। यद्यपि, मंत्रालय ने प्रत्येक पोजीशन में 30 मिनट से अधिक समय तक नहीं रहने की भी सलाह दी है। खाने के एक घन्टे तक पेट के बल सोने से परहेज करें, पेट के बल जितना देर आसानी से सो सकते हैं, उतना ही सोने का प्रयास करें। गर्भावस्था के दौरान, वेनस थ्रोम्बोसिस (नसों में खून के बहाव को लेकर कोई समस्या), गंभीर हृदय रोग में स्पाइन, फीवर एवं पेल्विक फ्रैक्चर की स्थिति में पेट के बल सोने से बचें।

ग्राहकों के न आने से जमीन पर आए सब्जियों के दाम

लॉक डाउन के कारण सब्जी मंडी में रही ग्राहकों की कमी

बिजनौर। दो दिन के लिए जारी लॉक डाउन के पहले दिन शनिवार को ग्राहकों के पहुंचने की वजह से कृषि उत्पादन मंडी समिति नजीबाबाद में ग्राहकों का टोटा रहा। मंडी में सब्जियों के ढेर लगे रहे। खरीददार न होने के कारण कारोबारियों को सब्जियां आधे दामों पर बेचने को मजबूर होना पड़ा।

दो दिवसीय लॉक डाउन के पहले दिन का असर कृषि उत्पादन मंडी समिति में फल व सब्जी के आढ़तियों पर दिखाई दिया। अनवार अहमद ने बताया कि मंडी में सब्जियों के ढ़ेर लगे हुए हैं लेकिन सुबह से ही खरीददारों के इंतजार में बैठे हैं। सब्जी व फलों के लिए खरीददारों का टोटा होने के कारण आधे से भी कम दामों पर न रूक पाने वाली हरी सब्जियों को निपटाना पड़ रहा है। हालात ये हैं कि पहाड़ पर सब्जियों की सप्लाई किए जाने को वाहन भी लोड नहीं हो पाए। पहाड़ पर प्रतिदिन सैकड़ों गाडियां सब्जी जाती हैं, जो लॉक डाउन के चलते नहीं जा सकीं। वहीं सडक़ों पर ठेले लगाने वाले सब्जी व फल विक्रेताओं की भी मंडी में आमद कम रही। सब्जी का उठान नहीं होने के कारण मंडी के कारोबारी सब्जी आधे दामों पर बेचने को मजबूर हैं लेकिन इसके बावजूद खरीददार नहीं है। आढ़ती मकसूद ने बताया कि रेहड़ी ठेली लगाने वाले पहले दिन ही डेढ़ गुना माल खरीदकर ले जा चुके हैं। जिनका माल बिकने से बचा हुआ है, उन्हीं लोगों ने फेरी की है।

काफी गिर गए सब्जियों के दाम: शनिवार को सब्जियों के थोक भाव पहले के मुकाबले बहुत गिर गए। मुकर्रम बताते हैं कि शुक्रवार को 35 रुपए प्रति किलो बिकी रही भिण्डी 20 रूपये पहुंच गयी। खीरा आठ रुपए से तीन-चार रुपए प्रति किलो के भाव पर बिका। मिर्ची 150 रुपए प्रति पांच किलो से गिर कर 60 रुपए पहुंच गयी। लौकी  के दाम आठ रुपए प्रति किलो से घटकर पांच रुपए प्रति किलो करने पर भी बिक्री नहीं है। बैंगन पांच रुपए किलो तक बिक गया। टमाटर के दाम 10 रुपए प्रति किलो के मुकाबले पांच रुपए प्रति किलो कर दिए जाने पर भी बिकवाली नहीं है। करीब-करीब यही हाल और सब्जियों का भी हो रहा है।

बिना चिकित्सक के प्रिस्क्रिप्शन के नहीं मिलेगी फेवीपिराविर साल्ट की कोई भी दवा

बिना चिकित्सक के प्रिस्क्रिप्शन के नहीं मिलेगी फेवीपिराविर साल्ट की कोई भी दवा
बिजनौर। जिला औषधि निरीक्षक आशुतोष मिश्रा ने जिले के सभी फुटकर दवा विक्रेताओं को सूचित किया  है, कि फेवीपिराविर साल्ट की कोई भी दवा बिना चिकित्सक के प्रिस्क्रिप्शन के किसी को न दें। प्रिस्क्रिप्शन पर भी जिस व्यक्ति को दी जाए, उसका आधार संख्या, मोबाइल नंबर व पता अपने पास रिकॉर्ड में रखें।

कोरोना ने लील लिया बॉलीवुड फिल्मकार

Veteran Actor Lalit Behl Passes Away: वेटरन एक्टर और फिल्मकार ललित बहल का कोविड-19 के चलते हुआ निधन
ललित बहल

मुंबई। वेटरन एक्टर और फिल्मकार ललित बहल का निधन हो गया है। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार वो कोविड-19 संबंधित समस्याओं से जूझ रहे थे। 71 वर्षीय ललित बहल को पिछले हफ्ते कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद इलाज के लिए अपोलो हॉस्पिटल ले जाया गया था। उन्हें फेफड़ों में इन्फेक्शन हो गया था, जो तेजी से बढ़ता चला गया। इसी के साथ उनकी पुरानी बीमारियों का भी उनकी सेहत पर काफी असर पड़ा। वो ह्रदय संबंधित रोगों से परेशान थे और उसके बाद उन्हें कोविड-19 संक्रमण भी हुआ।

रंगमंच के एक जाने माने कलाकार, ललित ने बतौर निर्देशक और प्रोड्यूसर अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने दूरदर्शन टेलेफिल्म्स के लिए तपिश, आतिश, सुनहरी जिल्द जैसी शोज बनाए। इसी के साथ उन्होंने टीवी शो ‘अफसाने’ में बतौर एक्टर काम किया। ‘मुक्ति भवन’ में उनके साथ काम करने वाले आदिल हुसैन ने ट्विटर पर उनके प्रति अपनी श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए लिखा, “मेरे को-एक्टर और सम्मानीय कलाकार के निधन की खबर से बेहद दु:खी हूं। मुक्ति भवन में उन्होंने पिता का किरदार शानदार तरीके से निभाया था! मैं इस नुकसान के लिए बेहद व्यथित हूं।”

कोरोना काल में विशेष सावधानी बरतें पत्रकार

सभी पत्रकार बरतें विशेष सावधानी क्यूंकि आप स्वयं भी आसानी से संक्रमित हो सकते हैं और संक्रमण को तेजी से फैला भी सकते हैं!

ये पोस्ट एक ग्रुप में पढ़ने को मिली, वर्तमान परिवेश में कटु सत्य भी है, इसलिए सभी पत्रकार बंधुओं को समर्पित….

मित्रों, मैंने अपने पत्रकारिता अनुभव में ऐसा नजारा कभी नहीं देखा, जहां एक महामारी इतनी तेजी से फैल रही है। सभी को ये ज्ञात है कि कोरोना बीमारी के कारण एक से दूसरा व्यक्ति आसानी से संक्रमित हो सकता है। पत्रकारिता धर्म हमें हर छोटी से बड़ी खबर हर सूरत में जनता तक पहुंचाने की जिम्मेदारी देता है और हमारे सारे पत्रकार बंधु हर सूरत में अपना ये धर्म बख़ूबी निभाते हैं, फिर चाहे वो दंगे हों, युद्ध हो, कोई हिंसक प्रदर्शन हो या फिर कुछ और!

लेकिन, इस बार परिदृश्य बेहद गंभीर है क्योंकि संक्रमण फैलाने वाली बीमारी से यदि कोई भी व्यक्ति संक्रमित हो तो वो वही संक्रमण कई जगह पहुंचा सकता है। एक पत्रकार दिन भर में कई जगह जाता है, आम जनता से लेकर अफसरों, राजनीतिज्ञों, स्वास्थ्य कर्मियों इत्यादि से मिलता है। ऐसे में उसके संक्रमित होने का ख़तरा कई गुना बढ़ जाता है और यदि वो संक्रमित हो जाए तो उससे ज्यादा तेजी से संक्रमण फैलाने वाला माध्यम और कोई नहीं हो सकता। इसीलिए पत्रकार बंधुओं को सबसे ज्यादा सावधानी रखने की आवश्यकता है। हमेशा मास्क पहने रहना, हर थोड़ी देर में हाथ धोना, sanitize करना, अस्पताल और ऑब्जर्वेशन व क्वारांटीन क्षेत्र से दूरी बनाने के अलावा निम्न सुझाव अमल में लाने योग्य हैं –

1) इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के बंधु पत्रकार अति आवश्यक होने पर ही बाइट लें, और यदि लें तो बूम माइक को टेली मोड पर रख एक मीटर की दूरी बनाएं, मास्क पहने रखें और यदि हो सके तो बूम माइक स्पोंज को हर बाइट के बाद सैनिटाइजर से sanetize करें। साथ ही दिन में कम से कम दो से तीन बार माइक यूनिट व कैमरों को भी एक sanetizer में भीगी हुई गौज़ से डिस इंफेक्ट करें।

2) प्रिंट मीडिया के बंधु फील्ड में खबर लिखते वक्त यदि डायरी पेन के इस्तेमाल की जगह अपने मोबाइल में सॉफ्ट नोट लिख कर डेस्क पर भेजें तो अधिक सावधानी रहेगी। साथ ही यदि फील्ड पर किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस या कार्यक्रम में कलम लाना भूल गए हों तो किसी दूसरे की कलम लेने से बचें और यदि किसी परिस्थिति में इस्तेमाल कर भी लिया हो, तो तुरंत बाद हाथ धोएं या sanitize करें।

3) सभी फील्ड के पत्रकार बंधु डेस्क ऑफिस आने जाने से बचे, उपलब्ध सॉफ्टवेयर या whatsapp के माध्यम से डेस्क तक खबरें पहुंचाएं।

4) किसी भी एयरपोर्ट, बस अड्डे या रेलवे स्टेशन पर चल रही स्क्रीनिंग का कवरेज या इन जगहों पर किसी संदिग्ध मरीज के मिलने का न्यूज़ प्वाइंट यदि बहुत आवश्यक हो तो ही कवर करने जाएं और उचित दूरी ज़रूर बनाए रखें। अब अत्याधुनिक मोबाइल फोन कैमरे भी काफी दूरी तक के विजुअल साफ ले लेते हैं, टेक्नोलॉजी का उपयोग कीजिए।

5) वैसे सभी प्रदेशों में प्रेस कॉन्फ्रेंस, गोष्ठी या अन्य कार्यक्रम स्थगित या रोक दिए गए हैं, फिर भी यदि अति आवश्यक हो तो पूरी सावधानी से अच्छी गुणवत्ता का मास्क लगा के जाएं, खत्म होते ही तुरंत निकल कर अपने इक्विपमेंट व हाथ sanitize करें।

6) अंतिम, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण! रोज के अपने मूवमेंट का रिकॉर्ड या लॉग अवश्य रखें, जैसे कि सुबह घर से निकल कर और वापस काम ख़त्म करके जब आप घर लौटे तो कहां-कहां गए। इसका दिनांक समेत रिकॉर्ड रखें और जरा सी भी तबीयत ख़राब होने पर तुरंत मेडिकल सहायता लें।

इस परीक्षा की घड़ी में सभी पत्रकार बंधु अपने पत्रकारिता धर्म को निभाने के साथ अपने स्वास्थ्य का व अपने नागरिक धर्म का भी बहुत खयाल रखें।

यदि आपको सुझाव ठीक लगें हो तो अधिक से अधिक पत्रकार बंधुओं तक पहुंचा कर सभी को सजग व सावधान रखने में सहायता करें।

लॉकडाउन में हर गली मोहल्ले में होगा सैनिटाइजेशन: नगर विकास मंत्री

प्रदेश भर में शनिवार व रविवार के लॉकडाउन में हर गली मोहल्ले में होगा सैनिटाइजेशन: नगर विकास मंत्री

प्रदेश भर में कंटेनमेंट जोन में सैनिटाइजेशन व कूड़ा निस्तारण की बनाएं विशेष रणनीति: नगर विकास मंत्री

प्रदेश भर में नगर पालिकाएं कोविड हेल्प डेस्क बनाएं : नगर विकास मंत्री

नगर विकास मंत्री आशुतोष टंडन ने शुक्रवार को बड़ी नगर पालिकाओं के अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारियों के साथ वर्चुअल समीक्षा बैठक की।

लखनऊ। नगर विकास मंत्री आशुतोष टंडन ने कोविड 19 के परिप्रेक्ष्य में शुक्रवार को बड़ी नगर पालिकाओं के अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारियों के साथ वर्चुअल समीक्षा बैठक की। बैठक में 43 नगर पालिकाओं के अध्यक्ष, अधिशासी अधिकारी व प्रदेश के सभी नगर पालिकाओं के अध्यक्ष जुड़े। वर्चुअल बैठक में नगर विकास मंत्री आशुतोष टंडन ने निर्देशित किया कि प्रदेश के सभी जिलों में शनिवार व रविवार को लॉकडाउन के दिन हर गली और मोहल्ले में विशेष सैनिटाइजेशन अभियान चलाया जाएगा। वहीं कूड़ा उठाने वाले वाहनों के माध्यम से कोरोना संक्रमण को लेकर जन जागरूकता की जाएगी। कूड़ा उठाने वाले वाहनों में स्पीकर के माध्यम से लोगों को कोविड 19 के प्रति जागरुक किया जाएगा। उन्होंने नगर पालिकाओं में हर जगह कंट्रोल रूम बनाने को कहा, जिससे जहां से सैनिटाइजेशन, सफाई व अन्य व्यवस्थाओं के लिए शिकायत आए, उनका शीघ्र निस्तारण किया जाए।

फ्रंट लाइन वर्कर्स के सभी ड्यूज क्लीयर हों : श्री टंडन ने प्रदेश भर के निकायों में कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम को लेकर चल रहे विभागीय कार्यों का जायजा लिया। कहा कि हमारे फ्रंट लाइन वर्कर्स की सुरक्षा का भी पूर्णतया ध्यान रखा जाए। उन्हें पर्याप्त मात्रा में हैंड सैनिटाइजर, ग्लब्ज और मास्क उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। साथ ही उन्होंने फ्रंट लाइन वर्कर्स के वेतन को समय पर दिये जाने को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मंत्री ने कहा कि जिन सफाई कर्मियों ड्यूज बाकी है, उन्हें जल्द से जल्द क्लीयर किये जाये। कंटेनमेंट जोन में सुबह शाम सैनिटाइजेशन अभियान चलाया जाए, कंटेनमेंट जोन से निकलने वाले कूड़ों का उचित निस्तारण करने व सभी फ्रंट लाइन वर्कर्स का वैक्सीनेशन व सुरक्षा के लिए मास्क, ग्लब्ज व पीपीई किट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए व समय पर वेतन व बकाया भुगतान करने के निर्देश। इसके अलावा सैनिटाइजेशन में सोडियम हाइड्रोक्लोलाइड की अनुमन्य मात्रा रखने के निर्देश दिए।

नगर पालिकाओं की हेल्प डेस्क बने
मंत्री ने आगामी वर्षा ऋतु को देखते हुए भी सभी नगर निगमों को टाइम लाइन बनाकर नालों की सफाई करने के निर्देश दिए। साथ ही जलभराव वाले स्थलों को लेकर एक्शन प्लान तैयार करने को कहा। सभी नगर पालिकाओं में हेल्प डेस्क बनाई जाए। प्रदेश कार्यालय में थर्मल स्कैनर लगाए जाए, जो भी कार्यालय में आए उसकी थर्मल स्कैनिंग की जाए, जिससे कोविड संक्रमण से बचाव हो सके। इसके अलावा सफाई वाहन व अन्य कार्यों में प्रयुक्त वाहनों पर साउंड सिस्टम लगाया जाए, जिससे कोविड 19 से बचाव को लेकर व्यपाक प्रचार प्रसार किया जाए। हर जगह सैनिटाइजेशन व फागिंग की जाए। इसके अलावा मानक के अनुसार शुद्ध पेयजल व्यवस्था की जाए। वर्चुअल बैठक के दौरान नगर विकास मंत्री ने सभी नगर पालिकाओं के अध्यक्ष से शासन की ओर से मिल रही सुविधाओं के बारे में पूछा। उन्होंने एक-एक करके सभी से उनकी समस्या के बारे में चर्चा की। बैठक में कहां कितने कंटेनमेंट जोन हैं, उसे लेकर क्या-क्या तैयारियां हैं, कितने फ्रंटलाइन वर्कर्स का वैक्सीनेशन हुआ है, आदि को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।

मंत्री द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों के मुख्य बिंदु
• दो दिवसीय शनिवार और रविवार लॉक डाउन के दिन, विशेष सैनीटाइजेशन अभियान चलाया जाए।
• कूड़ा उठाने वाले वाहनों के माध्यम से कोरोना संक्रमण को लेकर जन जागरूकता की जाए।
⦁ सैनिटाइजेशन में सोडियम हाइपोक्लोराइट की मात्रा का ध्यान रखें।
⦁ संक्रमित इलाकों से निकलने वाले कूड़ों का कोविड-19 प्रोटोकॉल के मुताबिक उचित निस्तारण होना चाहिए।
⦁ वॉर्डों में गली-गली सैनिटाइजेशन करवाया जाए, बाजारों में विशेष तौर पर सैनिटाइजेशन अभियान चलाया जाए।
⦁ फ्रंटलाइन वर्कर्स व सफाई कर्मियों को समय पर वेतन मिले, आउट सोर्स में तैनात सभी कर्मचारियों को वेतन को लेकर किसी प्रकार की कोई दिक्कत ना आए।
⦁ निगरानी समितियों को पर्याप्त उपकरण मुहैया करवाएं जाये, जिससे समिति के सदस्यों को किसी भी प्रकार की दिक्कतों का सामना न करना पड़े।
⦁ सभी लोग निगरानी समितियों के साथ समन्वय बनाकर रखें। मोहल्ला निगरानी समितियों की क्रियाशीलता एवं कार्यों का पालन करें।
⦁ सभी वार्डों में निगरानी समितियां सक्रिय हो, किसी भी प्रकार की सूचना तेजी के साथ पहुंचे, इस पर विशेष ध्यान दिया जाए।
⦁ पेयजल की व्यवस्थाएं दुरुस्त की जाये, नालों की डीसिलटिंग की जाये और जलभराव की समस्या दूर किया जाये।
वर्चुअल बैठक में सचिव नगर विकास विभाग अनिल कुमार एवं अनुराग यादव, नगरीय निकाय निदेशालय की निदेशक श्रीमती शकुन्तला गौतम, विशेष सचिव नगर विकास विभाग इंद्रमणि त्रिपाठी समेत 43 नगर पालिकाओं के चेयरमैन व ईओ जुड़े रहे।

कोरोना: बिजनौर व नजीबाबाद तहसील 2 दिन के लिए सील

दो दिन के लिए बिजनौर व नजीबाबाद तहसील की गई सील। नजीबाबाद में न्यायालय परिसर भी हुआ सील। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने चलाया पीएचसी के अलावा कई स्थानों पर सैंपलिंग अभियान

बिजनौर। जिला मुख्यालय पर तहसील सदर में 4 कर्मचारी कोरोना पॉजिटव पाए जाने के बाद परिसर को 2 दिन के लिए पूरी तरह सील कर दिया गया है। उक्त परिधि क्षेत्र में आम जनमानस का अवागमन पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा। वहीं नजीबाबाद क्षेत्र में कोरोना के लगातार  बढ़ते हुए संक्रमण को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम ने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के अलावा कई क्षेत्रों में सैंपल लिए। इसके अलावा तहसील व न्यायालय परिसर में कोरोना संक्रमित मरीज पाए जाने पर तहसील प्रशासन ने दो दिन के लिए तहसील व न्यायालय परिसर को सील कर दिया। 

एक डॉक्टर व एक कर्मी भी संक्रमित: नजीबाबाद में गुरुवार को पीएचसी प्रभारी व नोडल अधिकारी कोरोना डाक्टर फैज हैदर के निर्देशन में डा. गौरव गुप्ता व अभिषेक त्यागी की टीम ने किसान सहकारी चीनी मिल व तहसील परिसर में सैंपलिंग अभियान चलाया। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र प्रभारी डा. फैज हैदर ने बताया कि पीएचसी पर एक चिकित्सक तथा सीएचसी पर एक स्वास्थ्यकर्मी के कोरोना पाजिटिव आने पर दोनों को आइसोलेशन में भेज दिया गया है। सभी अस्पतालों को पूरी तरह सैनिटाइज कराया गया है। पीएचसी में  128 लोगों की आरटीपीसीआर तथा 180 एंटीजन टैस्ट किए गए हैं। इसके अलावा किसान सहकारी चीनी मिल में एक सौ आरटीपीसीआर तथा 160 एंटीजन टैस्ट किए गए हैं। तहसील नजीबाबाद में 30 आरटी पीसीआर व 60 एंटीजन टेस्ट किए गए।पीएचसी पर भी वैक्सीनेशन किया जा रहा है। गुरुवार को करीब दो सौ लोगों को वैक्सीन का टीकाकरण किया गया है। विभाग से वैक्सीनेशन का दैनिक लक्ष्य तीन सौ निर्धारित किया गया है। वैक्सीनेशन कराने अस्पताल आने वाले लोगों को मास्क लगाने और सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन करने का विशेष ध्यान रखना चाहिए। लोग वैक्सीन लगवाएं और इसका लाभ लें परंतु अस्पताल तक आने के दौरान लापरवाही के चलते कोरोना अपने साथ न ले जाएं।

बिजनौर तहसील में आम जनमानस का आवागमन पूर्णतया बंद 

बिजनौर। सदर तहसील में 04 कोराना पॉजिटिव व्यक्ति (कर्मचारी) पाये गए हैं। इस कारण कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के निमित्त प्राप्त सूचनानुसार तहसील सदर बिजनौर को कन्टेनमेंट जोन घोषित करते हुए 02 दिन (48 घंटे के लिए) तक पूरी तरह सील कर दिया गया है। उक्त परिधि क्षेत्र में आम जन मानस का आवगमन पूरी तरह से प्रतिबन्धित रहेगा। उक्त परिधि में किसी भी तरह की दुकानें खोलना अथवा आवागमन (एम्बुलेंस, मजिस्ट्रेटगण के राजकीय वाहन अथवा पुलिस विभाग से संबंधित अधिकारियों के वाहन कोरोना वारियर्स को छोडक़र) को पूरी तरह से प्रतिनिन्धत किया गया है।ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/उप जिला मजिस्ट्रेट (सदर), बिजनौर के अनुसार उक्त कन्टेनमेंट जोन के लिए ईश्वर कुमार गुप्ता प्रशासनिक अधिकारी तहसील बिजनौर को इंसीडेन्ट ऑफिसर के रूप में नियुक्त किया गया है।

411 के साथ बिजनौर में कोरोना के एक्टिव केस हुए 1980

जनपद बिजनौर में लगातार बढ़ रहा है कोरोना वायरस। जनपद में गुरुवार को कोरोना संक्रमण के आए 411 नए मामले। जनपद में 1980 हुए कोरोना संक्रमण के एक्टिव केस।

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Fact Check: क्या गर्म पानी की भाप लेने से खत्म हो जाएगा कोरोना? जानिए वायरल दावे का पूरा सच

Webdunia शुक्रवार, 4 सितम्बर 2020 (13:18 IST) सोशल मीडिया पर एक पोस्ट जमकर वायरल हो रहा है, जो दावा करती है कि गर्म पानी का भाप लेने से कोरोना को खत्म किया जा सकता है। वायरल पोस्ट में लिखा गया है- ‘डॉक्टरों के अनुसार, COVID-19 को नाक-मुंह से भाप के जरिए मारा जाता है, तो कोरोना को खत्म किया जा सकता है। अगर सभी लोगों ने एक सप्ताह के लिए भाप लेने का अभियान शुरू किया तो करोना का समापन हो सकता है।’

देखें वायरल पोस्ट-

यह पोस्ट ट्विटर पर भी काफी शेयर किया जा रहा है।

क्या है सच-

वायरल दावे की पड़ताल शुरू करते हुए हमने इंटरनेट पर अलग-अलग कीवर्ड्स की मदद से सर्च किया। सर्च रिजल्ट में हमें न्यूज एजेंसी रॉयटर का एक फैक्ट चेक मिला, ‍जिसमें बताया गया है कि स्टीम थेरेपी से कोरोनावायरस को खत्म करने का दावा गलत है। रॉयटर ने अपने फैक्ट चेक में बताया है कि भाप लेना कोरोनावायरस के लक्षण को कम कर सकता है, लेकिन कोरोनावायरस को खत्म नहीं कर सकता है।

वेबदुनिया ने अपनी पड़ताल में पाया कि गर्म पानी का भाप लेने से कोरोनावायरस को खत्म नहीं किया जा सकता है, वायरल दावा फेक है।