दशहरा पर चमत्कारी शमी के कुछ आसान टोटकों से हो जाएंगे मालामाल

शैली सक्सेना, लखनऊ


दशहरा पर चमत्कारी शमी के कुछ आसान टोटकों से हो जाएंगे मालामाल। मालामाल होने के लिए दशहरा के दिन करें चमत्कारी शमी के पौधे के कुछ आसान टोटके। दशहरा के दिन शमी के पौधे के कुछ विशेष उपाय आजमाए तो आपके घर में कभी भी नहीं होगी धन की कमी।

ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ डॉ आरती दहिया से जानिए शमी के कुछ अचूक उपाय

दशहरा का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। जहां एक तरफ इस पर्व का इतिहास रावण के संहार से जुड़ा है, वहीं इस दिन को समस्याओं के निवारण के रूप में भी जाना जाता है।

ज्योतिष के अनुसार यदि आपके जीवन में बहुत दुःख तकलीफ है, विरोधियों से परेशान हैं, तो इन सभी समस्याओं के निवारण के लिए कुछ उपाय आजमाऐं।

व्यापार की समस्या दूर करने का टोटका

यदि व्यापार से संबंधित कोई समस्या है तो दशहरा के दिन दोपहर के समय ईशान कोण में कुमकुम और फूलों से अष्टदल कमल की एक आकृति बनाएं। इसके बाद देवी जया और विजया का स्मरण करके पूरे विधि विधान से पूजन करें। पूजा के बाद शमी के पौधे के पास एक घी का दीपक जलाएं। फिर पौधे के पास से थोड़ी मिट्टी उठाकर घर के किसी कोने में रख दें। ऐसी मान्यता है कि इस टोटके से आपको व्यापार में लाभ मिलने के साथ नौकरी में प्रमोशन के योग भी बनेंगे। वहीं कारोबार में उन्नति के लिए एक नारियल को सवा मीटर पीले कपड़े में लपेट कर एक जोड़ा जनेऊ, सवा पान और शमी के पेड़ की मिट्टी के साथ सारी सामग्री को राम मंदिर में चढ़ा दें। इससे आपको धन लाभ होगा और आर्थिक समस्याओं से मुक्ति मिलेगी।

धन लाभ के लिए….
दशहरा के दिन शमी के पौधे के नीचे घी का दीपक जलाएं और इसकी मिट्टी को अपने वर्कप्लेस में रखें। शमी के पेड़ का दशहरा के पर्व में विशेष महत्व बताया गया है और पूजा में शमी के पेड़ की मिट्टी रखने से नकारात्मक शक्तियों से छुटकारा मिलता है।

शमी के इस उपाय से दूर होंगी सभी समस्याएं

दशहरे की शाम को शमी के पौधे के पास खड़े होकर अपनी सारी समस्या बताएं। एक लाल धागा शमी को नमन करने के बाद तने से चारों तरफ बांधें। कुछ ही दिनों में आपको लाभ मिलना शुरू हो जायेगा।

दशहरे वाले दिन हनुमान जी की पूजा करना सबसे लाभकारी माना जाता है। इस दिन आपको हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए, जिससे आपको विशेष लाभ की प्राप्ति होगी।

सभी समस्याओं का निवारण इस एक अद्भुत पौधे से हो सकता है। इसलिए दशहरा के दिन ये विशेष उपाय आजमा कर घर की समृद्धि बनाए रखी जा सकती है।

छत पर लगाते समय दिशा का ध्यान जरूर रखें। शमी के पौधे को दक्षिण दिशा, पूर्व दिशा और ईशान कोण में लगाना शुभ माना गया है। अगर शमी का पौधा आप लगाते हैं तो कुछ विशेष बातों का ख्याल रखना बेहद जरूरी है। हर शाम को शमी पौधे के नीचे दीपक जरूर जलाएं और कोशिश करें की विधि विधान से पूजा अर्चना भी रोज करें।

शमी का पौधा कब और कहां लगाएं?

  1. शमी का पौधा शनिवार के दिन लगा सकते हैं। इसे आप गमले में या भूमि पर घर के मुख्य द्वार के निकट लगाएं।
  2. इसे घर के अंदर नहीं लगाना चाहिए
  3. आप शमी का पौधा विजयादशमी के दिन भी लगा सकते हैं। विजयदशमी के दिन लगाना सबसे उत्तम होता है।

शनि की खराब स्थिति का संकेत: आपने शमी का पेड़ लगाया है और यह सूख गया है या मुरझा गया है तो यह शनि की खराब स्थिति का संकेत है। इससे धन हानि होती है। साथ ही कार्य संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। अगर यह सूख गया है तो इसे हटाकर दूसरा पौधा रोप देना चाहिए।

शमी की देखभाल: सूरज की रोशनी: शमी के पेड़ को ठीक से बढ़ने के लिए 6-8 घंटे धूप की जरूरत होती है। कम से कम 12-14 इंच का गमला लें, गमले में ड्रेनेज होल हो इस बात का ध्यान रखें। पानी इस तरह दें कि गमले के ड्रेनेज होल में बाहर निकल जाए।

शमी पूजन का महत्व: नवरात्रि के नौ दिनों तक देवी भगवती के नौ स्वरूपों की आराधना के बाद दशमी तिथि को विजयादशमी पर समस्त सिद्धियां प्राप्त करने के लिए पवित्र माने जाने वाले शमी और देवी अपराजिता के अलावा अस्त्र-शस्त्रों का पूजन भी किया जाता है। इस दिन नीलकंठ पक्षी का दर्शन करना भी अति शुभ माना गया है।

एक छोटी सी लौंग खत्म कर सकती है जिंदगी की उथल-पुथल

एक छोटी सी लौंग खत्म कर सकती है आपकी जिंदगी की उथल-पुथल, जानें चमत्कारिक उपाय…

ग्रह-नक्षत्रों की दशा और दिशा का प्रभाव हर व्यक्ति पर पड़ता है. ज्योतिष शास्त्र में कई ऐसे उपाय बताए गए हैं, जिनके इस्तेमाल से ग्रहों को शांत किया जा सकता है. छोटी सी लौंग ना सिर्फ सेहत के लिए फायदेमंद है बल्कि इससे जुड़े ज्योतिष उपाय भी विशेष लाभ दिलाते हैं. धन लाभ, संकटों से छुटकारा पाने और भाग्य को मजबूत करने के लिए लौंग के टोटके बहुत उपयोगी माने जाते हैं. जानिए लौंग से जुड़े कुछ खास टोटके और उपायों के बारे में-

लौंग के टोटके से राहु-केतु का बुरा प्रभाव कम किया जा सकता है. कुंडली में राहु-केतु दोष है तो आपको हर शनिवार को लौंग का दान करना चाहिए


शिवलिंग पर भी अर्पित कर सकते लौंग~

आप शिवलिंग पर भी लौंग अर्पित कर सकते हैं. 40 दिनों तक लगातार ऐसा करने से सारे बुरे प्रभाव खत्म होते हैं.


घर से बाहर निकलते वक्त मुंह में रखें दो लौंग~

काम से बाहर जा रहे हैं तो घर से बाहर निकलते वक्त मुंह में दो लौंग रखकर निकलें. अपने इष्टदेव का ध्यान करते हुए उस कार्य में सफलता के लिए प्रार्थना करें. ऐसा करने से आपको उस कार्य में सफलता मिल सकती है.
हनुमान दीपक में डालें लौंग


हनुमान दीपक में डालें लौंग~

सफलता नहीं मिले तो मंगलवार को हनुमानजी की मूर्ति पर चमेली के तेल का दीपक जलाएं. दीपक में दो लौंग डाल दें और इसके बाद हनुमान चालीसा का पाठ और आरती करें. ऐसा लगातार 21 मंगलवार तक करने से आपको मेहनत का फल मिलेगा.

आर्थिक तंगी होगी दूर~
घर में आर्थिक तंगी रहती है तो माता लक्ष्मी को गुलाब के फूलों के साथ दो लौंग भी पूजा में अर्पित करें. इसके अलावा एक लाल रंग के कपड़े में 5 लौंग और 5 कौड़ियों बांधकर तिजोरी या फिर अलमारी में रख दें. ऐसा करने से मां लक्ष्मी की कृपा होती है और घर में धन का आगमन होता है.

उधार पैसे वापस लाने के लिए~
अगर कोई व्यक्ति आपके द्वारा दिए गए पैसे वापस करने में आनाकानी कर रहा है तो अमावस्या या फिर पूर्णिमा के दिन रात के समय 21 लौंग कपूर में रखकर जला दें और मां लक्ष्मी का ध्यान करते हुए हवन कर लें. ऐसा करने से राहु केतु का दुष्प्रभाव कम हो जाएगा.

गणेश चतुर्थी पर स्थापित करें मिट्टी के गणेश जी

बुधवार से हो रहा है गणेशोत्सव का प्रारंभगणेश प्रतिमा की स्थापना के साथ 10 दिन तक मनेगा गणेशोत्सव का पर्व।

बिजनौर। गणेश पुराण के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर भगवान गणेश का जन्म हुआ था। चतुर्थी तिथि पर गणेश प्रतिमा की स्थापना के साथ 10 दिन तक गणेशोत्सव का पर्व मनाया जाता है। अनंत चतुर्दशी के दिन प्रतिमा का विसर्जन करते हुए गणेश उत्सव का यह पर्व संपन्न होता है।

सिविल लाइन स्थित धार्मिक संस्थान विष्णु लोक के ज्योतिषविद पंडित ललित शर्मा ने बताया कि भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि का आरंभ 30 अगस्त 2022 को दोपहर 3:00 बजकर 34 मिनट से हो रहा है। चतुर्थी तिथि का समापन 31 अगस्त को दोपहर 3:00 बज कर 23 मिनट पर होगा। इस बार गणेशोत्सव का प्रारंभ बुधवार के दिन से हो रहा है। शास्त्रों में बुधवार को भगवान गणेश का वार माना गया है। बुधवार के दिन भगवान गणेश की पूजा आराधना करने पर सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है। गणेश चतुर्थी के दिन चार प्रमुख ग्रह स्वराशि में रहेंगे। गुरु अपनी स्वराशि मीन में, शनि मकर में, बुध कन्या राशि में, और सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में उपस्थित रहेंगे। यह बहुत शुभ संयोग माना जा रहा है।
गणेश चतुर्थी पर मिट्टी के गणेश जी स्थापित करें। मिट्टी की गणेश प्रतिमा के पूजन से नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है। मिट्टी में पवित्रता होती है। मिट्टी की गणेश प्रतिमा प्रकृति के पांच मुख्य तत्व में से एक भूमि की बनी होती है। इसीलिए इसमें भगवान का आह्वान करने से कार्य सिद्धि होती है। प्लास्टर ऑफ पेरिस और अन्य केमिकल्स से बनी गणेश प्रतिमा में भगवान का अंश नहीं आ पाता और इससे नदियां अपवित्र होती हैं। ब्रह्म पुराण के अनुसार नदियों को प्रदूषित करने से दोष लगता है। गणेश स्थापना के लिए भगवान गणपति की मूर्ति मिट्टी से बनी हुई होनी चाहिए। मूर्ति खंडित अवस्था में नहीं होनी चाहिए।
पुराणों में भगवान श्री गणेश की जन्म की कथा में बताया गया है कि माता पार्वती ने पुत्र की कामना से मिट्टी का पुतला बनाया था, फिर शिव जी ने उस में प्राण संचार किए वहीं भगवान गणेश थे।

गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश का आह्व करते हुए, ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का उच्चारण करें। हल्दी, चावल, चंदन, हरी दूर्वा, मिठाई, मोदक, फूल, फल कलावा, जनेऊ आदि वस्तुएं अर्पित करें। भगवान शिव और माता पार्वती की भी पूजा करें। धूप दीप से भगवान की आरती करें। लड्डू का भोग लगाकर सभी को वितरित करें।

आज से प्रारंभ हुआ चातुर्मास; मांगलिक कार्य निषेध

बिजनौर। आज रविवार से चातुर्मास प्रारंभ हो गए हैं। ज्योतिषविदों के अनुसार आज देवशयनी एकादशी से चार माह के लिए मांगलिक कार्य निषेध रहेंगे। इस अवधि में मुंडन संस्कार, विवाह, तिलक, यज्ञोपवीत, गृह प्रवेश आदि शुभ कार्य वर्जित होते हैं। चार माह बाद देवोत्थान एकादशी को श्री हरि विष्णु के योग निंद्रा से बाहर आने के साथ ही चातुर्मास का समापन होगा।

सिविल लाइन्स स्थित धार्मिक संस्थान विष्णुलोक के ज्योतिषविद पंडित ललित शर्मा ने बताया, कि चातुर्मास 10 जुलाई रविवार से शुरू हो कर कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी चार नवंबर शुक्रवार को समाप्त होगा। चातुर्मास में मांगलिक कार्य नहीं किए जाते, क्योंकि भगवान श्री हरि विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा के लिए पाताल में चले जाते हैं।

व्रत और तपस्या का माहभगवान विष्णु के आशीर्वाद के बिना मांगलिक कार्य शुभ नहीं माने जाते। इस अवधि में मांगलिक कार्य भले ही शुभ नहीं माने जाते, लेकिन पूजा पाठ, जप-तप, साधना के लिए ये चार महीने श्रेष्ठ होते हैं। चातुर्मास को व्रत और तपस्या का माह कहा जाता है। इन चार महीनों में साधु संत यात्राएं बंद करके मंदिर या अपने मूल स्थान पर रहकर ही उपवास और साधना करते हैं। संपूर्ण वर्षा ऋतु में संयमित जीवनशैली अपनाने और आत्ममंथन की प्रक्रिया ही चातुर्मास कहलाती है। इस अवधि में भगवान शिव और श्रीहरि विष्णु की पूजा करनी चाहिए।

खानपान का रखें ध्यान- चातुर्मास के अंतर्गत श्रावण मास में पालक या पत्तेदार सब्जियों से परहेज करना चाहिए। इसके बाद भाद्रपद में दही, आश्विन में दूध और कार्तिक मास में लहसुन-प्याज का त्याग करना उचित माना जाता है। चातुर्मास मास में हमारा भोजन पूर्ण रूप से सात्विक होना चाहिए।

न करें ये गलतियां- चातुर्मास में शहद, मूली, परवल और बैंगन खाना भी निषेध है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस दौरान पलंग पर शयन करने से देवी-देवता नाराज हो जाते हैं, अतः भूमि पर शयन उचित माना गया है।

अबूझ मुहूर्त में हो सकते हैं मांगलिक कार्य- चातुर्मास के दौरान भगवान श्री हरि विष्णु पाताल में योग निंद्रा के लिए चले जाते हैं। चार माह बाद पाताल से फिर भूलोक में आएंगे और कार्तिक मास में तुलसी के साथ उनका विवाह संपन्न होगा। इन चार महीनों में कोई शुभ कार्य नहीं होता, लेकिन अबूझ मुहूर्त में मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं।

जानिए कपूर से जुड़े टोटके

कपूर से जुड़े कुछ टोटके ऐसे हैं, जिनको करने से ग्रह दोष, वास्तु दोष दूर होते हैं। जानते हैं कपूर से जुड़े कुछ उपाय, जिनका उपयोग करके लाभ प्राप्त किया जा सकता है।

पूजा पाठ में कपूर का उपयोग किया जाता है। कपूर से आरती करते हैं और हवन में उपयोग भी। जिस प्रकार से इसके कुछ औषधीय गुण है, वैसे ही धार्मिक महत्व भी है। कपूर से जुड़े कुछ टोटके ऐसे हैं, जिनको करने से ग्रह दोष, वास्तु दोष दूर होते हैं। पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र से जानते हैं कपूर से जुड़े कुछ उपायों के बारे में, जिनका उपयोग करके लाभ प्राप्त किया जा सकता है।

कपूर के टोटके
1. यदि आप अपने घर में सुबह और शाम को कपूर जलाते हैं, तो अंदर का वातावरण शुद्ध रहता है, सकारात्मकता का संचार होता है और नकारात्मक शक्तियों के दूर होने से परिवार में सुख एवं शांति रहती है।

2. यदि आपके घर में किसी स्थान पर वास्तु दोष है, तो उससे दूर करने का सबसे आसान तरीका यह है कि एक कटोरी में कपूर के कुछ टुकड़े लेकर उस स्थान पर रख दें। जब कुछ दिन में वह कपूर खत्म हो जाए, तो वहां कपूर के नए टुकड़े रख दें। ऐसा करने से वास्तु दोष धीरे-धीरे दूर होने लगेगा।

3. लोगों को आपने कहते हुए सुना होगा कि उनको पितृ दोष है या कालसर्प दोष है, जिसके कारण उनकी उन्नति नहीं हो रही है। कालसर्प दोष राहु और केतु ग्रह के कारण होता है। इन दोषों से मुक्ति के लिए आप अपने घर में तीन समय सुबह, शाम और रात को कपूर जलाएं।

4. शनिवार के दिन नहाने के पानी में कपूर का तेल और चमेली के तेल की कुछ बूंदें डाल दें, फिर उससे स्नान करें। ऐसा करने से शनि दोष दूर होगा। राहु-केतु भी परेशान नहीं करेंगे।

5. धार्मिक मान्यता है कि दांपत्य जीवन में जीवनसाथी के बीच तालमेल सही नहीं चल रहा है, तो अपने शयनकक्ष में कपूर रखें और उसे कुछ दिन के बाद बदलते रहें। ऐसा करने से पति और पत्नी के बीच रिश्ते सही होने लगते हैं।

6. यदि आप सोने में बुरे सपने देखते हैं या सोते वक्त डर जाते हैं, तो आपको अपने शयन कक्ष में कपूर जलाना चाहिए. इससे नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती हैं।

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. newsdaily24 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

शराब छुड़वाने के 5 अचूक टोटके और मंत्र, मात्र 10 दिन में छूट जाएगी शराब की लत

भोपाल (पत्रिका)। ये बात तो सभी जानते हैं कि शराब सेहत के लिए हानिकारक होती है। ये इंसान को अन्दर से खोखला कर देती है। वहीं यह एक तरीके से सामाजिक बुराई भी है। शराब की बुरी लत न सिर्फ इंसान को बुरा बनाती है बल्कि उसके पूरे परिवार को भी नष्ट कर देती है। शहर के ज्योतिषाचार्य पंडित जगदीश शर्मा बताते हैं कि अगर आपके घर में भी कोई ऐसा है, जो शराब की लत का लती है तो कुछ टोटकों को अपनाकर आप इस लत को दूर कर सकते हैं। तंत्र शास्त्र के अतंर्गत ऐसे कई टोटके हैं, जिनसे शराब की लत को छुड़वाया जा सकता है। कई ऐसे उपाय बताए गए हैं, जो बिल्कुल ही साधारण हैं परन्तु जिनका असर तुरंत और बेहद प्रभावशाली होता है। जानिए क्या हैं वे उपाय…

-शराब को छुड़ाने के लिए सवा मीटर काला कपड़ा और सवा मीटर नीला कपड़ा लेकर इन दोनों को एक-दूसरे के ऊपर रख दें। इस पर 800 ग्राम कच्चे कोयले, 800 ग्राम काली साबूत उड़द, 800 ग्राम जौ एवं काले तिल, 8 बड़ी कीलें तथा 8 सिक्के रखकर एक पोटली बांध लें। फिर जिस व्यक्ति की शराब छुड़वाना हो, उसकी लंबाई से आठ गुना अधिक काला धागा लेकर एक जटा वाले नारियल पर लपेट दें। इस नारियल को काजल का तिलक लगाकर धूप-दीप अर्पित करके शराब पीने की आदत छुड़ाने का निवेदन करें। फिर यह सारी सामग्री किसी नदी में प्रवाहित कर दें। जब सामग्री दूर चली जाए तो घर वापस आ जाएं। इस दौरान पीछे मुड़कर न देखें। घर में प्रवेश करने से पहले हाथ-पैर धोएं। शाम को किसी पीपल के वृक्ष के नीचे जाकर तिल के तेल का दीपक लगाएं। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि इस टोटके के बारे में किसी को कुछ न बताएं। कुछ ही समय में आप देखेंगे कि जो व्यक्ति शराब का आदी था, वह शराब छोड़ देगा।।

-आप कहीं से जंगली कौवे के पंख मंगवाए, फिर इन पंख को एक गिलास पानी में अच्छे से हिलाकर उस पानी को जो व्यक्ति शराब पीता है उसे पिला दें। यह छोटा सा टोटका शराब की लत छुड़ा देता है। 

-अगर आपका पति शराब का लती है तो एक शराब की बोतल लाए, ध्यान रहे कि यह बोतल उसी ब्रांड की होनी चाहिए, जिसका आपके पति प्रयोग करते हैं। इस बोतल को रविवार के ही दिन अपने निकट के किसी भी भैरव बाबा के मंदिर में चढ़ा दें और पुजारी को कुछ रुपए देकर उससे वह बोतल वापिस खरीद लें। पति के सोते समय अथवा जब वह नशे में हो, उस पूरी बोतल को उनके ऊपर 21 बार उसारते हुए “ॐ नमः भैरवाय” मंत्र का जाप करें। इसके बाद शाम को उस बोतल को किसी भी पीपल के पेड़ के नीचे छोड़ आएं। इस उपाय से कुछ ही दिनों में शराबी की शराब पूरी तरह से छूट जाएगी। 

-शराब छुड़ाने के लिए एक शराब की बोतल खरीद कर लाएं और शराब के लती परिजन को सोते समय उन पर से 21 बार उसार लें। इसके बाद एक अन्य बोतल में आठ सौ ग्राम सरसों का तेल लें और दोनों को आपस में मिला लें। दोनों बोतलों के ढक्कन बंद कर किसी ऐसे स्थान पर उल्टा गाढ़ दें जहां से पानी बहता हो ताकि दोनों बोतलों के ऊपर से जल लगातार बहता रहे। इस उपाय को करने के कुछ ही दिनों में व्यक्ति को शराब से घृणा हो जाती है और वह शराब पीना छोड़ देता है।

18 महीने बाद अप्रैल में राहू-केतु का राशि परिवर्तन

राहु-केतु का राशि परिवर्तन 2022 : राहु वृषभ राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे वहीं केतु वृश्चिक राशि से निकलकर तुला राशि में प्रवेश करेंगे।

Rahu Transit 2022 Effects: वैदिक ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों का राशि परिवर्तन बहुत ही मायने रखते है,क्योंकि इसका प्रभाव सभी राशियों के जातकों पर होता है। साल 2022 कई ग्रहों के राशि परिवर्तन का वर्ष होगा। इस वर्ष अप्रैल का महीना ग्रहों के राशि परिवर्तन के हिसाब से खास रहने वाला है। अप्रैल के महीने में शनि,गुरु और राहु-केतु काफी अंतराल के बाद राशि बदलेंगे। अप्रैल के महीने में राहु-केतु करीब 18 महीनों के बाद राशि बदलने वाले हैं। राहु-केतु का राशि परिवर्तन 11 अप्रैल को होगा। राहु-केतु दोनों ही छाया ग्रह माने गए हैं और ये हमेशा वक्री यानी उल्टी चाल से चलते हैं। 11 अप्रैल को राहु मेष में और केतु तुला राशि में प्रवेश करेंगे। मौजूदा समय में राहु वृषभ और केतु वृ्श्चिक राशि में मौजूद हैं। 

राहु-केतु राशि परिवर्तन 2022

ज्योतिष गणना के अनुसार शनिदेव के बाद राहु-केतु सबसे ज्यादा दिनों तक किसी एक राशि में विराजमान रहते हैं। शनि जहां ढाई साल के बाद राशि परिवर्तन करते हैं तो वहीं राहु-केतु डेढ़ साल के बाद उल्टी चाल से चलते हुए राशि बदलते हैं। 18 साल बाद दोबारा से राहु-केतु मेष और तुला राशि में प्रवेश करने वाले हैं। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मेष राशि के स्वामी ग्रह मंगल हैं और तुला राशि के स्वामी ग्रह शुक्र ग्रह है। मंगल और राहु एक-दूसरे के प्रति शत्रुता का भाव रखते हैं। वहीं केतु और शुक्र ग्रह एक दूसरे के प्रति समान भाव के माने गए हैं। राहु-केतु के बारे में पौराणिक कथा काफी प्रचलित है कथा के अनुसार जब समुद्र मंथन हो रहा था तो राहु-केतु चुपके से मंथन के दौरान निकला अमृत पी लिया था। तब भगवान विष्णु मोहनी का रूप धारण करके सभी देवताओं को अमृतपान करा रहे थे जैसे ही उन्हें इस बात का आभास हुआ फौरन ही अपने सुदर्शन चक्र से राहु का सिर धड़ से अलग कर दिया था। हालांकि इस दौरान राहु ने अमृत पान कर लिया जिसके कारण उसकी मृत्यु नहीं हुई। तभी से राहु को सिर और केतु को धड़ के रूप में है।

rahu ketu

देश दुनिया पर राहु-केतु का असर
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब भी राहु-केतु का राशि परिवर्तन होता है। तब इस प्रभाव न सिर्फ सभी जातकों के ऊपर होता बल्कि देश-दुनिया पर भी इसका प्रभाव देखने को मिलता है। राहु-केतु के गोचर से कई तरह के प्राकृतिक उथल-पुथल होने की संभावना रहती है। पृथ्वी पर गर्मी का प्रकोप बढ़ जाता है और वर्षा भी कम होती है। देश-दुनिया में राजनीति अपने चरम पर होती है। एक-दूसरे देशों में तनाव काफी बढ़ जाता है। रोग बढ़ जाते है जिससे जनता का हाल बुरा हो जाता है। 

rahu gochar 2022

12 राशियों पर असर
राहु-केतु के गोचर से सभी राशि के जातकों पर इसका विशेष प्रभाव पड़ता है। ज्योतिष गणना के अनुसार कुंडली में मौजूद राहु-केतु की दशा के आधार पर शुभ-अशुभ प्रभाव पड़ता है। राहु-केतु के 18 महीनों के बाद राशि बदलने के कारण मेष, वृषभ, कर्क, कन्या और मकर राशि वालों को सावधानी बरतनी पड़ेगी। आप सभी के लिए राहु-केतु का प्रभाव अच्छा नहीं रहेगा। वहीं सिंह, तुला, वृश्चिक, धनु  और कुंभ राशि वालों के लिए यह गोचर शुभ और लाभ दिलाने वाला साबित होगा। धन लाभ और मान-सम्मान में बढ़ोतरी होगी वहीं मिथुन और मीन राशि वालों पर इस राशि परिवर्तन का कोई भी प्रभाव देखने को नहीं मिलेगा।

सिंह, तुला, वृश्चिक, धनु  और कुंभ राशि-

इन राशि के जातकों को करियर और नौकरी में अच्छी तरक्की मिलने के योग बन रहे हैं। पिछले समय में किए गए प्रयासों का फल इस दौरान मिल सकता है। अचानक से धन की प्राप्ति होने के आसार रहेंगे। कार्यक्षेत्र में कोई बड़ी उपलब्धि मिल सकती है। आर्थिक स्थिति कुल मिलाकर अच्छी रहेगी। अगर इस दौरान आप कोई नया व्यापार शुरू करने की सोच रहे हैं तो यह समय निवेश के लिए अनुकूल है। आपके मान-सम्मान में बढ़ोतरी होगी। इस दौरान संपत्ति की खरीदारी भी कर सकते हैं। नौकरीपेशा जातकों के लिए ये समय काफी अनुकूल दिखाई दे रहा है। जो लोग राजनीति में हैं उन्हें भी ये गोचर लाभकारी सिद्ध हो सकता है, उन्हें कोई बड़ा पद मिल सकता है।

उपाय
जिन जातकों की कुंडली में राहु-केतु अशुभ प्रभाव रखते हैं उनको इससे बचने के लिए शनिदेव और भैरव भगवान की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। हनुमान चालीसा का पाठ करने से राहु-केतु का प्रभाव नहीं रहता। राहु-केतु के प्रभाव को कम करने के लिए काले कंबल और जूते का दान करना शुभ रहता है। (साभार)