भारत से पहले कई देशों में भी लागू है सेना में “टूर ऑफ ड्यूटी” सिस्टम, अग्निवीरों के लिए CAPFs और असम राइफल्स में भर्ती के लिए आरक्षण

भारत से पहले निम्नलिखित देशों में भी लागू है – सेना में “टूर ऑफ ड्यूटी” सिस्टम, लेकिन इन देशों में अनिवार्य है, भारत में इसे स्वेच्छिक रखा गया है

अग्निवीरों के लिए CAPFs और असम राइफल्स में भर्ती के लिए आरक्षण

नई दिल्ली: अग्निपथ योजना (Agnipath Scheme) के तहत भर्ती होने वाले युवाओं की अधिकतम उम्र की सीमा को 21 साल से बढ़ाकर 23 वर्ष करने के फैसले के एक दिन बाद केंद्र सरकार ने शनिवार को एक और बड़ा एलान किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (HMO India) ने अपने नए आदेश में अग्निवीरों के लिए CAPFs और असम राइफल्स में भर्ती के लिए 10% रिक्तियों को आरक्षित करने का निर्णय लिया है। दो बलों में भर्ती के लिए अग्निवीरों को ऊपरी आयु सीमा से 3 वर्ष की छूट दी गई। अग्निवीर के पहले बैच के लिए आयु में अधिकतम आयु सीमा से 5 वर्ष की छूट होगी। गृह मंत्रालय ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी।

इजरायल : टूर ऑफ ड्यूटी के मामले में इजरायल सबसे सख्त देश है, यहां इजरायली रक्षा बल में पुरुषों को तीन साल और महिलाओं को दो साल अनिवार्य सेवा देनी होती है. कुछ धार्मिक और स्वास्थ्य के आधार पर तथा गर्भवती महिलाओं को इससे छूट दी जाती है. इसे सेवा और सम्मान का जरिया माना जाता है.

चीन : चीन में आम नागरिकों को जबरन सेना में भर्ती किया जाता है. चीन में हर नागरिक के लिए 18 से 22 वर्ष की आयु के बीच दो साल की सैन्य सेवाएं देना अनिवार्य हैं. यानी चीन का कोई युवा चाहता हो या ना चाहता हो, उसे सेना में भर्ती होना ही पड़ता है. चीन की सेना में करीब 35 प्रतिशत ऐसे युवा हैं, जिन्हें मजबूर करके सैनिक बनाया जाता है.

नार्वे : नार्वे में सभी पुरुषों और महिलाओं के लिए टूर ऑफ ड्यूटी अनिवार्य है. यहां 19 से 44 साल की उम्र के बीच कभी भी पंजीकरण कराया जा सकता है. महिलाओं के लिए ये नियम 2016 में अनिवार्य किया गया, ताकि उन्हें भी पुरुषों के बराबर हक मिल सके.

स्विटजरलैंड : यहां पर 18 से 34 साल तक युवाओं के लिए सेना में ड्यूटी देना अनिवार्य है, इसके लिए इन्हें 21 सप्ताह की बेसिक ट्रेनिंग दी जाती है. महिलाओं के लिए ये अनिवार्य नहीं है, यह उनकी स्वेच्छा पर निर्भर करता है.

तुर्की : यहां वे युवा जो 20 साल से ज्यादा उम्र के हैं उनके लिए मिलिट्री सर्विस अनिवार्य है. यहां उन लोगों को छूट मिल सकती है जो तीन साल या उससे अधिक समय से विदेश में हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें एक निश्चित राशि अदा करनी होती है. महिलाओं के लिए ये नियम अनिवार्य नहीं है.

ब्राज़ील : ब्राजील में 18 से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए टूर ऑफ ड्यूटी अनिवार्य है. इसकी समय सीमा 10 से 12 माह के लिए होती है. यहां थोड़े समय के लिए भी सेना ज्वाइन करने वालों का मेडिकल टेस्ट होता है, ताकि भविष्य में जरूरत पड़ने पर इन्हें परमानेंट किया जा सके.

उत्तर कोरिया : विश्व के लिए सनसनी बनने वाले उत्तर कोरिया में भी टूर ऑफ ड्यूटी अनिवार्य है, खास बात ये है कि यहां पर पुरुषों को तीनों सेनाओं में ड्यूटी करनी पड़ती है, इसके लिए 23 माह नेवी में, 24 माह वायुसेना में और 21 माह थल सेना में काम करना पड़ता है.

दक्षिण कोरिया : उत्तर कोरिया की तरह ही यहां पर भी तीनों सेनाओं में टूर ऑफ ड्यूटी करना अनिवार्य है, इसमें नौसेना में 23 माह, थल सेना में 21 माह और वायुसेना में 24 माह सर्विस देनी होती है.

रूस : रूस में 18 से 27 साल की उम्र के बीच में कभी भी टूर ऑफ ड्यूटी की जा सकती है, कम से कम 12 माह सैन्य सेवा करना अनिवार्य है.

यूक्रेन: यूक्रेन में भी युवाओं के लिए सैन्य सेवा अनिवार्य है, हालांकि इसके लिए कोई उम्र और न्यूनतम सीमा तय नहीं है, हालिया युद्ध में टूर ऑफ ड्यूटी के तहत कई लोगों ने हथियार उठाकर युद्ध में हिस्सा लिया और रूस जैसे ताकतवर देश को टक्कर देने में सफल रहे.

इसके अलावा ग्रीस में 19 वर्ष की उम्र वाले युवकों को कम से कम 9 माह, ईरान में 24 माह टूर ऑफ ड्यूटी करनी होती है. (एजेंसियां)

DRDO ने 45 दिन में खड़ी कर दी 7 मंजिला इमारत

बेंगलुरु (एजेंसी)। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान (DRDO) ने कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में 45 दिन में ही 7 मंजिला इमारत बनाकर खड़ी कर दी है। इसका उद्घाटन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया। इस मौके पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई और डीआरडीओ चीफ जी सतीश रेड्डी भी मौजूद रहे।

इस बिल्डिंग का इस्तेमाल 5वीं पीढ़ी के एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के रिसर्च एंड डेवेलपमेंट फैसिलिटी के तौर पर किया जाएगा। बेंगलुरु स्थित एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट इस बिल्डिंग में एयरक्राफ्ट फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम के लिए एवियोनिक्स का विकास करेगा। रक्षा मंत्री के सामने इससे जुड़े प्रोजेक्ट्स का एक प्रेजेंटेशन भी दिया गया। एक अधिकारी ने बताया कि डीआरडीओ ने एडीई, बेंगलुरु में हाइब्रिड टेक्नोलॉजी के जरिए एक बहु-मंजिली बिल्डिंग का निर्माण रिकॉर्ड 45 दिन में पूरा किया। इस बिल्डिंग में एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) प्रोजेक्ट के तहत फाइटर जेट्स और एयरक्राफ्ट फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम (एफसीएस) के लिए एवियोनिक्स डेवलमेंट की सुविधा होगी।

रूस ने लगाई सोशल मीडिया पर नकेल

सोशल मीडिया पर नकेल लगाई रूस ने। Facebook, Twitter के साथ Youtube पर बैन। ‘फर्जी खबर’ चलाई तो होगी जेल।

मोस्को (एजेंसी)। रूस-यूक्रेन जंग के बीच रूस की पुतिन सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। रूस ने फेसबुक के साथ-साथ ट्विटर और यूट्यूब को भी देश में ब्लॉक कर दिया है। रुस ने आरोप लगाया है कि ये सोशल साइट्स रूसी मीडिया कंपनियों के साथ भेदभाव कर रही हैं।

रूस सेंसरशिप एजेंसी रोसकोम्नाडजोर ने कहा है कि, साल 2020 के अक्टूबर महीने से फेसबुक की ओर से रूसी मीडिया के खिलाफ भेदभाव के 26 मामले सामने आए हैं। द कीव इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने सोशल साइट फेसबुक पर प्रतिबंध लगाते हुए कहा है कि, फेसबुक रूसी मीडिया समूहों के खिलाफ भेदभाव कर रहा है। इधर, बैन के बाद फेसबुक की ओर से कहा गया है कि, प्रतिबंध से लाखों लोगों को विश्वसनीय जानकारी नहीं मिल पाएगी।बिज़नेस :

Russia-Ukraine War: रूस ने फेसबुक और ट्विटर के साथ-साथ यूट्यूब को भी को बैन  किया, BBC ने भी उठाया बड़ा कदम - Russia-Ukraine War: Russia banned Facebook  and Twitter as well as

गौरतलब है कि यूक्रेन के साथ युद्ध की शुरुआत में रूसी सरकार ने फेसबुक पर आंशिक प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद पुतिन सरकार ने पूरे रूस में फेसबुक पर बैन लगा दिया। इसके साथ ही रूसी सरकार ने अन्य सोशल साइट ट्विटर और यूट्यूब पर भी बैन लगा दिया है। इस बीच रूस के राष्ट्रपति ने एक प्रावधान पर भी मुहर लगा दी है, जिसके तहत सेना के खिलाफ जानबूझकर ‘फर्जी खबर’ फैलाने पर 15 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान किया गया है।

गौरतलब है कि रूस यूक्रेन के बीच की जंग लगातार तेज होती जा रही है। लड़ाई के 10वें दिन रूस ने यूक्रेन पर हमले भी तेज कर दिए हैं। रूसी सेना लगातार आगे बढ़ रही है। यूक्रेन पर हमले के 9वें दिन शुक्रवार को रूस की सेना और आक्रामक हो गई। रूसी सेना ने यूक्रेन को समुद्र मार्ग से काटने की कोशिश में नीपर नदी पर बसे एनेर्होदर शहर पर जम कर बमबारी की। इसी दौरान जपोरिजिया न्यूक्लियर पावर प्लांट (परमाणु ऊर्जा संयंत्र) में आग लग गई। यूरोप के सबसे बड़े इस न्यूक्लियर पावर प्लांट में लगी आग पर दमकल कर्मियों ने काबू पा लिया।

यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद के विकल्प

यूक्रेन पर रूस के हमले की आशंका सही साबित हो गई।रूस ने गुरुवार सुबह पांच बजे यूक्रेन पर हमला बोल दिया। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने नेशनल टेलिविजन पर हमले का ऐलान किया। धमकाने वाले अंदाज में बोले कि रूस और यूक्रेन के बीच किसी ने भी दख्ल दिया तो अंजाम बहुत बुरा होगा। लड़ाई जारी है। यूक्रेन ने रूस के सात फाइटर प्लेन गिराने का दावा किया है। रूस की सेना ने यूक्रेन के सैन्य हवाई अड्डों को निशाना बनाया है। यूक्रेन के सैन्य हवाई अड्डों को रूस की सेना द्वारा तबाह कर दिया गया है।इस कार्रवाई के बाद यूक्रेन ने सख्ती दिखाते हुए कहा कि, वह हार नहीं मानेंगे।

युद्ध शुरू हो गया तो यह भी निश्चित हो गया कि इसके परिणाम रूस और यूक्रेन पर ही असर नही छोडेंगे, पूरी दुनिया को प्रभावित करेंगे। युद्ध कभी ठीक नहीं होता। युद्ध कभी नहीं होना चाहिए। इसमें प्राकृतिक संसाधनों का तो विनाश होता ही है, मानव जाति की भी भारी क्षति होती है।देश −दुनिया का विकास प्रभावित होता है। सदियों तक इसका प्रभाव रहता है। अभी तो तेल के दाम बढे है, आगे तो मंहगाई के और ज्यादा बढ़ने की उम्मीद है।

रूस के हमले से पहले ही नाटों देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाने शुरू कर दिए हैं। अमेरिका रूस को भारी परिणाम भुगतने की धमकी दे तो रहा है किंतु वह युद्ध में भी कूदा नहीं है। युद्ध में अमेरिका और नाटो देश उतरते हैं तो यह निश्चित है कि चीन रूस का साथ देगा और फिर शुरू होगा एक नया विश्व युद्ध।

अमेरिका अगर युद्ध में नही उतरता हैं तो उसकी साख को बहुत बड़ा धक्का लगेगा। पहले ही अफगानिस्तान से भागने पर उसकी बहुत इमेज खराब हुई थी। इस हमले में उसकी चुप्पी पर उसके मित्र देशों का उससे भरोसा खत्म हो जाएगा। यह उसके लिए अच्छा नहीं होगा।

वैसे 2014 में जब रूस ने क्रीमिया पर कब्जा जमा लिया था, तब भी सब देश शांत रहे थे। रूस कब्जा करने में कामयाब रहा था। पूरी दुनिया तमाशाबीन बनी देखती रही थी। इस बार अमेरिका और उसके मित्र देश युद्ध में कूदते हैं तो नए विश्वयुद्ध की शुरूआत होगी। महाविनाश होगा, क्योंकि अमेरिका और रूस परमाणु शक्ति सपन्न देश हैं।
ये देश युद्ध में नहीं उतरते तो चीन उनकी कमजोरी का फायदा उठाएगा । वह अभी भी कहता रहा है कि अमेरिका धोखेबाज है। अमेरिका की इसी चुप्पी का फायदा उठाकर वह वियतनाम पर कब्जा करने का प्रयास करेगा। दोनों हालात ठीक नहीं हैं। ऐसे में इस आग से हम जितना बच सकें, बचने का प्रयास होना चाहिए। लड़ाई भले ही हमसे दूर हो किंतु चीन से सदा सचेत रहने की जरूरत है। कहीं वह रूस तथा अमेरिका और उसके मित्र देशों की व्यस्तता का फायदा उठाकर हमें कुचलने की कोशिश न करे!

इस हमले से ये तय हो गया कि संयुक्त राष्ट्र संघ का कोई औचित्य नहीं है क्योंकि रूस को वीटो पावर मिली हुई है। वह इसमें किसी भी प्रस्ताव को पारित नहीं होने देगा। एक भी वीटो संपन्न देश किसी भी प्रस्ताव को गिरा सकता है। वीटो पावर देश के सामने पूरी दुनिया बेकार है। यह भी स्पष्ट हो गया कि पहले भी ताकतवर दूसरे देश, उसकी संपत्ति पर कब्जा कर सकता था, आज भी। इसलिए जरूरी यह है कि इस जंगल राज में अपने को जिंदा रखना है, तो शेर बन कर रहें। ताकतवर बनें, ताकि कोई आपसे आंख मिलाने की हिम्मत न कर सके। प्रसिद्ध कवि रामधारी सिंह दिनकर ने कहा भी है, जहां शस्त्रबल नहीं, शास्त्र पछताते रोते हैं, ऋषियों को भी सिद्धि तभी तप में मिलती है, जब पहरे पर स्वंय धनुर्धर राम खड़े होते हैं।

अशोक मधुप (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

सिर्फ ताले नहीं, हथियार के लिए भी जाना जायेगा अलीगढ़

अलीगढ़ (ANI)। प्रधानमंत्री मोदी ने राजा महेन्‍द्र प्रताप सिंह विश्‍वविद्यालय और डिफेंस कॉरिडोर का शिलान्‍यास किया। पीएम मोदी ने अपने बचपन की एक कहानी सुनाई, जिसका संबंध अलीगढ़ से था। उन्होंने बताया कि कैसे एक मुस्लिम कारोबारी की उनके पिता से दोस्ती थी और वह कारोबारी अलीगढ़ का ही था।

हथियारों से होगी देश की सीमाओं की रक्षा: पीएम मोदी ने कहा, ‘एक मुस्लिम शख्स थे, जो हर साल तीन महीने के लिए हमारे गांव में आते थे। वे हमारे क्षेत्र में ताले बेचने आते थे। मेरे पिता से उनकी अच्छी दोस्ती थी। वह दिन भर जो पैसे वसूल कर लाते थे, उसे पिता को सौंप देते थे। इसके बाद वह पिता जी से सारे पैसे लेकर वापस लौट जाते थे। हम बचपन से ही यूपी के दो शहरों से बहुत परिचित रहे हैं। आंख में कोई बीमारी होती थी तो सीतापुर जाने की बात होती थी। इसके अलावा मुस्लिम शख्स के जरिए अलीगढ़ का नाम सुनते थे। पर अब तालों के अलावा अब हम हथियारों के लिए भी इस शहर को जानेंगे। अब तालों से घर की रक्षा होती थी और हथियारों से देश की सीमाओं की रक्षा होगी।’

कल्याण सिंह होते तो खुश होते’
पीएम मोदी ने उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम दिवंगत कल्याण सिंह को भी याद किया। उन्होंने शिलान्यास के दौरान कहा, ‘आज मैं कल्याण सिंह जी की अनुपस्थिति महसूस कर रहा हूं। आज यदि वह हमारे साथ होते तो राजा महेंद्र प्रताप सिंह यूनिवर्सिटी के शिलान्यास और अलीगढ़ की डिफेंस सेक्टर में बन रही नई पहचान को देखकर खुश होते। …लेकिन उनकी आत्मा जहां भी होगी, वहां हमें आशीर्वाद दे रही होगी। ब्रज भूमि के तो कण-कण में राधा-राधा लिखा है।’

योगी जी और उनकी टीम को बधाई: पीएम ने कहा कि आज मुझे एक और स्वतंत्रता सेनानी और भारत के सपूत श्याजी कृष्ण वर्मा का स्मरण होता है। पहले विश्व युद्ध के समय राजा महेंद्र प्रताप सिंह उनसे और लाला हरदयाल से मिलने यूरोप गए थे। उन्होंने एएमयू के सपने को साकार करने के लिए अपनी जमीन दान दे दी थी। इस सपने को साकार करने के लिए योगी जी और उनकी टीम को बधाई। यह यूनिवर्सिटी आधुनिक शिक्षा का एक केंद्र तो बनेगा ही। इसके अलावा देश में डिफेंस से जुड़ी पढ़ाई और टेक्नोलॉजी तैयार करने के लिए मैनपावर बनाने वाला सेंटर भी बनेगा।

अफगानिस्तान में फंसे 1650 भारतीय, बड़े मिशन में जुटा भारत

Afghanistan Crisis: भारत आने के लिए करीब 1650 नागरिकों ने किया अनुरोध, दी जा रही है ई-विजा की सुविधा- India TV Hindi

काबुल: अफगानिस्तान में तालिबानी शासन की शुरुआत होने के बाद से भारतीय दूतावास के अधिकारियों, स्टाफ, सुरक्षाकर्मियों को वापस लाया गया है। अब अन्य भारतीयों को वापस लाने पर फोकस है। करीब 1650 भारतीयों ने काबुल स्थित भारतीय दूतावास में मदद की गुहार लगाई है। 

Afghanistan Crisis: भारत नहीं करेगा Kabul embassy बंद, 1650 लोगों ने वापसी  के लिए किया आवेदन | India Narrative Hindi

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, विदेश मंत्रालय द्वारा अफगानिस्तान में फंसे भारतीयों के लिए हेल्पलाइन नंबर, ई-मेल आईडी जारी किए गए थे। इसी बीच करीब 1650 भारतीयों ने वतन वापसी के लिए अप्लाई किया है। माना जा रहा है कि अब जब तालिबानी राज़ का आगाज़ हो गया है, तो ये संख्या बढ़ भी सकती है। भारत ने बीते दिन तक करीब 150 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। इनमें अधिकतर भारतीय दूतावास में काम करने वाले लोग ही हैं, लेकिन अन्य हिस्सों में फंसे भारतीय कर्मचारी और अन्य लोगों को निकालने पर भी ज़ोर दिया जा रहा है। 

Afghanistan में फंसे 1650 भारतीय, बड़े मिशन में जुटा भारत 

काबुल में फंसे कई फैक्ट्री वर्कर और अन्य लोगों द्वारा बीते दिन सरकार से गुहार लगाई गई थी कि उन्हें यहां से सुरक्षित निकाल लिया जाए। यूपी के गाजीपुर, गाजियाबाद, उत्तराखंड के देहरादून और दिल्ली समेत अन्य कई इलाकों से लोग अफगानिस्तान में काम के मकसद से वहां पर गए हुए थे। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में बीते दिन सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी की बैठक हुई थी। इसी में प्रधानमंत्री ने सभी भारतीयों की सुरक्षित वापसी की बात कही थी, साथ ही अफगानिस्तान में रहने वाले हिन्दू-सिख समुदाय के लोगों को हर संभव मदद पहुंचाने को कहा। इसके अलावा सरकार की ओर से अफगानी लोगों को भी मदद दी जाएगी। काबुल में मौजूद भारतीय दूतावास अभी भी काम कर रहा है और वहां पर स्थानीय स्टाफ मौजूद है, जो कि वहां फंसे भारतीयों को मदद पहुंचा रहा है। 

भारतीय दूतावास के कर्मचारियों ने इसे काबुल हवाई अड्डे तक कैसे बनाया, इसकी  अंदरूनी कहानी | DBP News Hindi :

काबुल एयरपोर्ट पर भगदड़ के बाद कुछ वक्त के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन बंद हुआ था, लेकिन अब वो फिर से शुरू हो गया है। अमेरिका और नाटो फोर्स की मदद से लोगों को बाहर निकाला जा रहा है। गौरतलब है कि तालिबान की ओर से बीते दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ये भरोसा दिया गया है कि वो किसी भी विदेशी या स्थानीय नागरिक को नुकसान नहीं पहुंचाएगा। अमेरिका की मानें तो तालिबान इस बात पर राज़ी हो गया है कि अगर कोई देश छोड़कर जाना चाहता है, तो उसे सेफ पैसेज दिया जाएगा।

स्कूल में पढ़ाया जाएगा कोरोना का पाठ

लखनऊ। घर पर रहकर छात्र-छात्राओं ने लॉकडाउन काल में केवल पढ़ाई की या फिर खेले हैं। उनको ये ताे जानकारी हुई कि कोविड-19 नाम का वायरस फैला हुआ है, जो लोगों को बीमार कर रहा है और घातक स्थिति में होने पर उनकी जान भी ले रहा है। मगर कोरोना के बारे में विस्तृत जानकारी करने में विद्यार्थियों ने रुचि नहीं दिखाई। अब जब माध्यमिक विद्यालय खुलेंगे तो उनको कोविड-19 के बारे में विस्तार से जानकारी कराई जाएगी। कोरोना वायरस के दुष्प्रभाव, इसके फैलने के तरीके, इससे बचने के उपाय, सावधानियां आदि के बारे में बताया जाएगा। वहीं इससे जुड़ी जानकारियां जैसे किस देश में कितना संक्रमण रहा, कितने लोगों की जान गई आदि के बारे में भी तथ्यात्मक ज्ञान कराया जाएगा।स्कूल में

स्‍कूल में उपलब्ध होंगे सैनिटाइजर व साबुन- विद्यालय खुलने पर विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सैनिटाइजर व साबुन भी उपलब्ध कराया जाएगा। विद्यालय की ओर से विद्यार्थी को साबुन उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए बजट की व्यवस्था विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को विद्यालय फंड से ही करनी होगी। माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों को कोरोना संक्रमण से बचाने को साबुन का वितरण किए जाने के निर्देश शासन स्तर से जारी किए गए हैं। विद्यार्थियों को हाथ धाेने व संक्रमण से बचने के लिए प्रेरित किया जाएगा। हालांकि साबुन वितरण का काम प्रशासनिक अधिकारियों के निर्देशन में कराया जाएगा। इसकी तैयारी भी कर ली गई है।

डीआइओएस के सूत्रों ने बताया कि, विद्यार्थियों को समय-समय पर हाथ धोने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से साबुन वितरण की योजना शासन की ओर से बनाई गई है। माध्यमिक विद्यालयों के लिए जितने साबुन वितरण करने के आदेश होंगे व साबुन उपलब्ध कराए जाएंगे, उनका वितरण कराया जाएगा। अभी नौवीं से 12वीं तक के विद्यार्थी स्कूल-कालेज आएंगे। उनको ही साबुन वितरण कराया जाएगा। प्रधानाचार्यों को निर्देशित किया गया है कि वो विद्यार्थियों व उनके अभिभावकों को सुरक्षा उपायों के पालन के लिए प्रेरित करने का प्रयास करें।

अब सॉफ्टवेयर से होगा जवानों का ट्रांसफर, पसंद की पोस्टिंग

सुरक्षा बलों के जवानों के लिए सरकार की सुविधा। अब सॉफ्टवेयर से होगा ट्रांसफर, मिलेगी पसंद की पोस्टिंग। तबादलों में रहेगी पारदर्शिता।

जवानों के लिए सरकार की सुविधा, अब सॉफ्टवेयर से होगा ट्रांसफर- मिलेगी पसंद की पोस्टिंग

नई दिल्ली। सुरक्षा बलों में जवानों का तबादला बड़ी समस्या है। बड़ी संख्या में तबादलों से जुड़े आवेदन हर साल खारिज किए जा रहे हैं। जवानों की बढ़ रही शिकायत के मद्देनजर गृह मंत्रालय ने सभी सुरक्षा बलों को कहा है कि वे हार्ड व सॉफ्ट पोस्टिंग के बीच रोटेशनल तबादला नीति का सख्ती से अनुपालन करते हुए सभी तबादले सॉफ्टवेयर के जरिए करें। इससे तबादलों में पारदर्शिता रहेगी।

गृह मंत्री के निर्देश का हवाला देते हुए सुरक्षा बलों को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि आईटीबीपी, सीआईएसएफ और एसएसबी ने बताया है कि उनका सॉफ्टवेयर तैयार है और उन्होंने उसका उपयोग करना भी शुरू कर दिया है। वहीं सीआरपीएफ, बीएसएफ और असम राइफल्स का सॉफ्टवेयर एडवांस चरण में है। मंत्रालय ने सभी सुरक्षाबलों से कहा है कि गृह मंत्री के निर्देश को काफी समय बीत चुका है इसलिए अब इसमे देरी नहीं होनी चाहिए।

bsf hands over boy to pakistan after he crosses over border inadvertently

आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2016 में करीब 30 फीसदी तबादलों से जुड़े आवेदन खारिज होते थे, लेकिन बाद में यह आंकड़ा 50 से 60 फीसदी तक पहुंच गया है। जवान अपनी पसंद की जगह तबादला न मिलने से परेशान होते हैं। कई बार जटिल तबादला नीति के चलते उचित तबादला आवेदन पर भी फैसले में काफी देर होती है। हालांकि सुरक्षा बल से जुड़े अधिकारी दावा करते हैं कि तबादलों को लेकर सभी सुरक्षा बलों में उचित तंत्र बनाया गया है। एक अधिकारी ने कहा कि बड़ी संख्या में ऐसे कर्मी आवेदन करते हैं जो तबादले के लिए अर्हता नहीं पूरी करते। ज्यादातर ऐसे आवेदन भी खारिज किए जाते हैं जो अपनी तैनाती का कार्यकाल पूरा किए बिना आवेदन करते हैं। 

अधिकारियों का दावा है कि अगर कोई मेडिकल आवश्यकता है या कोई अन्य आकस्मिक स्थिति है तो ऐसे मामलों में प्राथमिकता के आधार पर विचार किया जाता है। जबकि अर्ध सैन्य बल से जुड़े जवानों की कई शिकायतें ऐसी भी हैं, जिन्हें मेडिकल आधार पर भी तबादले के लिए काफी वक्त इंतजार करना पड़ा। उन्हें सक्षम अधिकारियों द्वारा बुलाकर बात भी नही की गई।

आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2016 में करीब 29.58 फीसदी ट्रांसफर से जुड़े आवेदन खारिज हुए थे। जबकि वर्ष 2018 में यह आंकड़ा 60 फीसदी पार कर गया। कोविड काल मे पहले तबादलों पर रोक लगा दी गई। बाद में सशर्त तबादले भी बहुत कठिनाई से हुए इसकी वजह से यह आंकड़ा और भी बढ़ गया।

बिजनौर के जबर शेर जम्मू कश्मीर में सुरक्षा सेवा पदक से सम्मानित

बिजनौर के जबर शेर जम्मू कश्मीर में सुरक्षा सेवा पदक से सम्मानित
संवेदनशील इलाकों में उत्कृष्ट कोटि की डयूटी करने के लिए डायरेक्टर जनरल सीमा सुरक्षा बल ने पदक से नवाजा।

बिजनौर (एकलव्य बाण समाचार)। जनपद के शेर ने जम्मू कश्मीर में बिजनौर का नाम रौशन किया है। बिजनौर निवासी जबर शेर हुसैन, अस्सिटेन्ट कमांडेन्ट सीमा सुरक्षा बल को जम्मू कश्मीर में उत्कृष्ट कोटि की डयूटी करने के लिए डायरेक्टर जनरल सीमा सुरक्षा बल ने आन्तरिक सुरक्षा सेवा पदक से सम्मानित किया गया। उनके इस सम्मान से उनके परिजनों व शुभचिंतकों में खुशी की लहर है।

जनपद मुख्यालय बिजनौर के मुकरपुरखेमा उर्फ बुखारा निवासी जबर शेर हुसैन सीमा सुरक्षा बल में 1998 में भर्ती हुए तथा वर्तमान समय में अस्सिटेंट कमांडेन्ट के पद पर 92 बटालियन अखनूर जम्मू और कश्मीर में पाक सीमा पर तैनात हैं। अस्सिटेन्ट कमांडेन्ट सीमा सुरक्षा बल जबर शेर हुसैन को वर्ष 2015 से लेकर वर्ष 2019 तक श्रीनगर के अति संवेदशील इलाके जैसे एयर फोर्स स्टेशन अवन्तिपुरा, पुलवामा, पन्थाचैक श्रीनगर में उत्कृष्ट कोटि की ड्यूटी करने के लिए डायरेक्टर जनरल सीमा सुरक्षा बल ने आन्तरिक सुरक्षा सेवा पदक देकर सम्मानित किया है।

उनके सम्मान से उनके परिजनों व शुभचिंतकों में खुशी की लहर है। शुभचिंतक उनके परिजनों को बधाई दे रहे हैं। एकलव्य बाण परिवार उनके उज्जवल भविष्य की कामना करता है।

अंडमान एवं निकोबार कमान के कमांडर इन चीफ ने एम्फिबियन ब्रिगेड का दौरा किया

पोर्ट ब्लेयर। अंडमान एंड निकोबार कमान के कमांडर-इन-चीफ (सीआईएनसीएएन) लेफ्टिनेंट जनरल अजय सिंह ने को बर्चगंज मिलिट्री स्टेशन पर एम्फिबियन ब्रिगेड का दौरा किया। उन्होंने जंगल सर्वाइवल स्कूल में अभियानों की समीक्षा की और वेव जेनरेशन ट्रेनिंग फैसिलिटी में लैंडिंग शिप रैंप सिम्युलेटर के माध्यम से एएलएस के संचालन समेत विभिन्न प्रशिक्षण गतिविधियों का निरीक्षण किया।

सैनिकों को संबोधित करते हुए अंडमान एंड निकोबार कमान के कमांडर-इन-चीफ ने सैन्य अभियानों के दृष्टिकोण से हर समय तैयार रहने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने सभी कर्मियों को कोविड-19 सुरक्षा उपायों का कड़ाई से पालन करने की सलाह भी दी। 

इस अवसर पर लेफ्टिनेंट जनरल अजय सिंह ने योग्य सैन्य कर्मियों को प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किए।

जम्मू एयरपोर्ट परिसर में दो ब्लास्ट, इलाका सील

जम्मू एयरपोर्ट परिसर में दो ब्लास्ट, इलाका सील

जम्मू (एकलव्य बाण समाचार) जम्मू एयरपोर्ट के टेक्निकल एरिया के पास धमाका होने से आसपास के इलाकों में अफरातफरी मच गई। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, यहां 5 मिनट के अंतराल पर दो ब्लास्ट हुए। पहला ब्लास्ट परिसर की बिल्डिंग की छत पर और दूसरा नीचे हुआ। पूरे इलाके को सील कर दिया गया है। मौके पर फोरेंसिक टीम पहुंच चुकी है। धमाके की आवाज काफी दूर तक सुनाई दी। घटना रात करीब 1.45 बजे की है। घटना स्थल के पास भारतीय वायुसेना का स्टेशन हेडक्वार्टर भी है। जम्मू का मुख्य एयरपोर्ट भी इसी कैंपस में आता है। वायुसेना, नौसेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं।

जम्मू से एक आतंकी गिरफ्तार- इस बीच जम्मू-कश्मीर पुलिस के हाथ बड़ी कामयाबी लगी है। पुलिस ने नरवाल इलाके से आतंकी को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 5 किलो IED बरामद हुआ है। जांच अभी जारी है।

आईएनएस डेगा में एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर शामिल

नई दिल्ली। वाइस एडमिरल अजेंद्र बहादुर सिंह, एवीएसएम, वीएसएम, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ, पूर्वी नौसेना कमान (ईएनसी) की उपस्थिति में ‘322 डेगा फ्लाइट’ का इंडक्शन समारोह नौसेना वायु स्टेशन, आईएनएस डेगा में आयोजित किया गया। इस दौरान तीन स्वदेश निर्मित उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर (एएलएच) एमके III शामिल किए गए।  इन समुद्र टोही और तटीय सुरक्षा (एमआरसीएस) हेलीकॉप्टरों को शामिल करने के साथ ही पूर्वी नौसेना कमान को देश के समुद्री हितों की राह में बल की क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा बढ़ावा मिला। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा निर्मित ये हेलीकॉप्टर उड़ान भरने वाली अत्याधुनिक मशीनें हैं और “आत्मनिर्भर भारत” की हमारी खोज की दिशा में एक बड़ा कदम हैं।

Ministry of Defence की ओर से बताया गया कि एएलएच एमके III हेलीकॉप्टरों में ऐसी अनेक कंप्यूटरीकृत प्रणालियां हैं जो पहले केवल भारतीय नौसेना के भारी, बहु-भूमिका वाले हेलीकॉप्टरों पर ही देखी जाती थी। इन हेलीकॉप्टरों में आधुनिक निगरानी रडार और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल उपकरण लगे हैं, जिससे वे दिन और रात दोनों समय लंबी दूरी का खोज और बचाव कार्य करने के अलावा समुद्री टोह की भूमिका भी निभा सकते हैं। विशेष अभियान क्षमताओं के अलावा, एएलएच एमके III में कॉन्स्टेबुलरी मिशन शुरू करने के दृष्टिकोण से भारी मशीनगन भी लगी हुई है। गंभीर रूप से बीमार मरीजों को एयरलिफ्ट करने के लिए एएलएच एमके III हेलीकॉप्टरों पर एक चिकित्सा गहन चिकित्सा इकाई (एमआईसीयू) भी लगी है जिसको हटाया भी जा सकता है । हेलीकॉप्टर में अनेक प्रकार के उन्नत एवियोनिक्स भी हैं, जिससे यह वास्तव में हर मौसमी परिस्थिति में काम करने वाला एयरक्राफ्ट बन गया है ।

उड़ान का नेतृत्व कमांडर एस एस दाश द्वारा फर्स्ट फ्लाइट कमांडर के तौर पर किया जा रहा है, जो सैन्य अभियानों के व्यापक अनुभव वाले एएलएच क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर (क्यूएफआई) हैं।

महिला सैन्य पुलिस का पहला बैच भारतीय सेना में शामिल

बेंगलुरु। कोर्स ऑफ मिलिट्री पुलिस सेंटर एंड स्कूल (सीएमपी सी एंड एस) ने दिनांक 8 मई, 2021 को द्रोणाचार्य परेड ग्राउंड में 83 महिला सैनिकों के पहले जत्थे की अनुप्रमाणन परेड का आयोजन किया । सभी कोविड संबंधी प्रोटोकॉल का पालन करते हुए इस परेड का आयोजन नियंत्रित ढंग से किया गया था ।

सीएमपी सेंटर एंड स्कूल के कमांडेंट ने परेड की समीक्षा करते हुए नवप्रमाणित महिला सैनिकों को उनकी त्रुटिहीन ड्रिल के लिए बधाई दी, साथ ही 61 सप्ताह के कड़े प्रशिक्षण- आधारभूत सैन्य प्रशिक्षण, प्रोवोस्ट ट्रेनिंग जिसमें सभी प्रकार की पुलिस संबंधी ड्यूटी एवं युद्धबंदियों का प्रबंधन शामिल है, वाहनों के रखरखाव एवं ड्राइविंग से जुड़ा कौशल विकास एवं सिग्नल संचार शामिल है- के पूरा होने पर शुभकामनाएं प्रेषित की । राष्ट्र के प्रति कर्तव्य, धार्मिकता और निस्वार्थ सेवा के प्रति समर्पण का गुणगान करते हुए उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उन्हें दिए गए प्रशिक्षण और प्राप्त मानकों से उन्हें बेहतर स्थिति में आने में सहायता मिलेगी एवं स्वयं को देश के विभिन्न भू-भाग और सामरिक परिस्थितियों में स्थित अपनी नई इकाइयों में एक फ़ोर्स मल्टीप्लायर साबित करने में मदद मिलेगी ।

कर्मयोगी पूर्णचंद्र आर्य: कर्तव्य बना अर्धसैनिक बलों के जवानों का उत्थान

अर्धसैनिक बलों के जवानों का उत्थान पूर्णचंद्र आर्य का कर्तव्य बन गया है

पिछले 20 वर्ष से जवानों के उत्थान के लिए तत्पर हैं हरियाणा के पूर्णचंद्र आर्य

नई दिल्ली। हरियाणा के सोनीपत निवासी पूर्णचंद आर्य ने अपने जज्बे से वह कर दिखाया जो लोगों के लिए मात्र सपना होता है। अपनी कर्म निष्ठा की मिसाल पेश करते हुए पूर्णचंद्र आर्य अर्ध सैनिक बल के लिए देश में 50 से अधिक कैंटीन संचालित कर रहे हैं। पूर्णचंद आर्य का मानना है भारत के जवानों को मूलभूत सुविधाएं प्रदान कर वो कर्मयोगी बने रहना चाहते हैं, जिसके लिए वो लगातार जी जान से लगे हुए हैं ।

सामान्य परिवार से होते हुए भी बड़े सपने को जी रहे हैं पूर्णचंद्र– पूर्णचंद्र आर्य किसी रसूखदार परिवार से ताल्लुक नहीं रखते। यह इनकी लगन और इच्छाशक्ति ही है, जो इन्हें शुरुआती दिनों के आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद भारत के जवान और अर्धसैनिक बलों के प्रति समर्पित करती रही। शैक्षिक योग्यता की बात करें तो पूर्णचंद्र आर्य मात्र दसवीं कक्षा तक नियमित शिक्षा प्राप्त कर सके। उसके बाद पत्राचार से कक्षा 12वीं और स्नातक करने के बाद उन्होंने सिक्किम मनिपाल यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री ली।

पूर्णचंद्र आर्य 11 साल वित्त मंत्रालय में सेटलमेंट और डायरेक्ट इंचार्ज के रूप में तैनात रहे और यहीं से जवानों के उत्थान का जज्बा मन में आया। लगभग 20 साल पहले जब सैनिक बल के जवानों के उत्थान के लिए वेलफेयर संगठन का गठन हुआ, तब सबसे ज्यादा खुशी पूर्णचंद्र आर्य को हुई। अर्धसैनिक बलों के जवानों की सुविधा के लिए पूर्ण चंद्र आर्य ने दो वेबसाइट भी बनवाई हैं जो http://www.ardhsainik.com और http://www.ardhsainikgroup.com नाम से संचालित हो रही हैं। इन पर पूरे प्रोडक्ट का अवलोकन किया जा सकता है।

पांच साल में 33 फीसदी कम हुआ भारत का हथियारों का आयात

पांच साल में 33 फीसदी कम हुआ भारत का हथियारों का आयात, रूस पर पड़ा सबसे ज्यादा असर: सिपरी रिपोर्ट

नई दिल्ली। भारत में २०११-१५ और २०१६-२० के बीच हथियारों के आयात में ३३ फीसदी की कमी आई है और इसका सबसे ज्यादा असर रूस पर पड़ा है। स्टॉकहोम के रक्षा थिंक टैंक सिपरी की सोमवार को जारी रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश की जटिल खरीद प्रक्रिया और रूसी हथियारों पर निर्भरता कम करने की कोशिशों के तहत भारतीय हथियार आयात में कमी आई है।

पिछले कुछ सालों में भारत ने घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कई उपाय किए हैं ताकि सैन्य साजो-सामान के आयात पर निर्भरता कम हो सके। राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में रक्षा राज्यमंत्री श्रीपद नाइक ने कहा कि घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए २०१८-१९ और २०२०-२१ के बीच करीब १.९९ लाख करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई।

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) की रिपोर्ट में कहा गया, ‘भारत में २०११-१५ और २०१६-२० के बीच हथियारों के आयात में ३३ फीसदी की कमी आई। रूस सर्वाधिक प्रभावित आपूर्तिकर्ता रहा, हालांकि अमेरिका से भी भारत में हथियारों के आयात में ४६ फीसदी की कमी आई।’

सरकार घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित कर रही है और २०२५ तक १.७५ लाख करोड़ रुपये के रक्षा कारोबार का लक्ष्य रखा है। सिपरी की रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस और चीन दोनों के हथियार निर्यात में कमी आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन द्वारा हथियारों के निर्यात में २०१६-२० के दौरान ७.८ फीसदी की कमी आई है। चीनी हथियारों के बड़े खरीदारों में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अल्जीरिया थे।

सिपरी ने कहा कि अमेरिका हथियारों का सबसे बड़ा निर्यातक है और २०११-१५ और २०१६-२० के दौरान उसका हथियारों का निर्यात ३२ फीसदी से बढ़कर ३७ फीसदी हो गया।

पुलिस नागरिकों की मित्र: इंस्पेक्टर सत्य प्रकाश


पुलिस नागरिकों की मित्र:सत्य प्रकाश

-कोतवाल ने सिद्धबली विहार कालोनी निवासियों के साथ की बैठक

-अपराधों की रोकथाम के लिए लोगों को जागरूक रहने का दिया संदेश

-संदिग्ध व्यक्ति को क्षेत्र में देखे जाने पर पुलिस को सूचना दें। पुलिस से डरकर दूरी बनाने की कोई आवश्यकता नहीं

बिजनौर। नजीबाबाद क्षेत्र में शांति बनाए रखने तथा अपराधों की रोकथाम को लेकर चलाए जा रहे अभियान के तहत कोतवाल ने सिद्धबली विहार कालोनी पहुंचकर नागरिकों के साथ बैठक की। उन्होंने क्षेत्र में शांति व्यवस्था कायम रखने तथा अपराधों के ग्राफ पर अंकुश लगाए जाने के लिए सभी लोगों को जागरूक रहने का आह्वान किया।
रविवार को नगर की सिद्धबली विहार कालोनी में पहुंचे थाना कोतवाली प्रभारी निरीक्षक सत्य प्रकाश सिंह ने कहा कि पुलिस नागरिकों की मित्र है। किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को क्षेत्र में देखे जाने पर पुलिस को सूचना दें। पुलिस से डरकर दूरी बनाने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि वाहन स्वामी अपने वाहनों में जीपीएस लगवाएं, जिससे वाहनों के चोरी होने की स्थिति में शीघ्र उसको खोजकर वाहन स्वामी को दिलाया जा सके और वाहन चोरो पर तत्काल कार्रवाई की जा सके। साथ ही उन्होंने कहा कि साधन संपन्न लोग अपने घरों व प्रतिष्ठानों पर सीसीटीवी कैमरे लगवाएं। इससे चोरी की घटनाओं पर बहुत हद तक अंकुश लग सकेगा और चोरी हो जाने की स्थिति में चोरों को खोजने में मदद मिल सकेगी। उन्होंने कालोनीवासियों से कहा कि उनकी ओर से थाना कोतवाली का प्रभार संभालने के बाद से ही नगर की कई कालोनियों व आसपास के गांवों में जनता के साथ बैठक की गयी हैं। काफी लोगों ने उनके सुझाव पर अमल करते हुए अपने घरों व प्रतिष्ठानों पर सीसीटीवी कैमरे लगवाए हैं। इसी के चलते एक व्यक्ति की बाइक चोरी होने पर चोर सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया और उसे पकड़ लिए जाने पर वाहन भी वापस मिल सका। उन्होंने अपना सुझाव दिया कि ताला लगाकर घर से बाहर जाने पर आसपास के लोगों को अवश्य बताकर जाएं।

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वीएल-एसआरएसएएम मिसाइल प्रणाली का सफल प्रक्षेपण

वीएल-एसआरएसएएम मिसाइल प्रणाली का सफल प्रक्षेपण

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने वर्टिकल लॉन्च शॉर्ट रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल (वीएल-एसआरएसएएम) के दो सफल प्रक्षेपण किए।


नई दिल्ली। ओडिशा तट के चांदीपुर एकीकृत परीक्षण रेंज (आईटीआर) से एक स्थिर ऊर्ध्वाधर लॉन्चर से आज वीएल-एसआरएसएएम मिसाइल प्रणाली का सफल प्रक्षेपण किया गया। वीएल-एसआरएसएएम को समुद्र-स्किमिंग लक्ष्यों सहित नजदीकी सीमाओं पर विभिन्न हवाई खतरों को बेअसर करने के लिए भारतीय नौसेना के लिए डीआरडीओ द्वारा स्वदेशी तौर पर डिजाइन और विकसित किया गया है। वर्तमान प्रक्षेपण इस मिसाइल के पहले प्रक्षेपण अभियान के तहत ऊर्ध्वाधर प्रक्षेपण क्षमता के प्रदर्शन के लिए किए गए हैं। दोनों प्रक्षेपण अवसर पर मिसाइल पिनपॉइंट सटीकता के साथ सिम्युलेटेड लक्ष्यों को भेदने में सफल रही। मिसाइलों का परीक्षण न्यूनतम और अधिकतम रेंज के लिए किया गया था। परीक्षण के दौरान वीएल-एसआरएसएएम के साथ हथियार नियंत्रण प्रणाली (डब्ल्यूसीएस) को तैनात किया गया था।

प्रक्षेपण की निगरानी इस प्रणाली के डिजाइन और विकास में शामिल डीआरडीएल, आरसीआई, हैदराबाद और आरएंडडी इंजीनियर्स, पुणे जैसी डीआरडीओ की विभिन्न प्रयोगशालाओं के वरिष्ठ वैज्ञानिकों द्वारा की गई।

परीक्षण प्रक्षेपण के दौरान आईटीआर, चांदीपुर द्वारा तैनात रडार, ईओटीएस और टेलीमेट्री सिस्टम जैसे विभिन्न रेंज उपकरणों द्वारा एकत्रित किए गए उड़ान डेटा का उपयोग करके उड़ान पथ और व्‍हीकल के प्रदर्शन मापदंडों की निगरानी की गई।

वर्तमान परीक्षण ने हथियार प्रणाली की प्रभावशीलता को साबित कर दिया है। हालांकि भारतीय नौसेना के जहाजों पर इसकी तैनाती से पहले कुछ और परीक्षण किए जाएंगे। तैनात होने के बाद वीएल-एसआरएसएएम प्रणाली भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने वाली साबित होगी।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ को इस सफल परीक्षण के लिए बधाई दी। डीआरडीओ के चेयरमैन और सचिव (डीडी आरएंडडी) डॉ. जी सतीश रेड्डी ने वीएल-एसआरएसएएम मिसाइल सिस्टम के सफल परीक्षण में शामिल सभी टीम को बधाई दी।
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Mosad! हम ना भूलते हैं, और ना ही माफ करते हैं…

इजराइली दूतावास के बाहर धमाके के बाद लोग जानना चाहते होंगे, आखिर क्या है मोसाद!

दिल्ली में इजराइली दूतावास के बाहर शुक्रवार शाम बम विस्फोट हुआ तो जांच भी शुरू हो गई। दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम और खुफिया एजेंसियां मामले की जांच में जुट गईं। कड़ी से कड़ी जोड़ी जा रही है। भारतीय एजेंसियों के साथ इजराइली जांच एजेंसी “मोसाद” भी शामिल हो गई। लोग जानना भी  चाहते होंगे mosad है और इस खुफिया एजेंसी के कारनामे!

कब हुई मोसाद की स्थापना-
13 दिसंबर, 1949 को इस्राइल के तत्कालीन प्रधानमंत्री डेविड बेन-गूरियन की सलाह पर मोसाद की स्थापना की गई थी। वे चाहते थे कि एक केंद्रीय इकाई बनाई जाए जो मौजूदा सुरक्षा सेवाओं- सेना के खुफिया विभाग, आंतरिक सुरक्षा सेवा और विदेश के राजनीति विभाग के साथ समन्वय और सहयोग को बढ़ाने का कार्य करे। 1951 में इसे प्रधानमंत्री के कार्यालय का हिस्सा बनाया गया इसके प्रति प्रधानमंत्री की जवाबदेही तय की गई।

मोसाद के बड़े ऑपरेशन-

20 साल लगे, लेकिन चुन-चुन कर मारा-
1972 में म्यूनिख ओलंपिक के दौरान इजरायल टीम के 11 खिलाड़ियों को उनके होटल में मार दिया गया। इसके बाद मोसाद ने संदिग्धों की हिट लिस्ट बनाई। फिल्मी स्टाइल में उड़ती हुई कारें, फोन बम, नकली पासपोर्ट, जहर की सुई सभी का इस्तेमाल किया। कई देशों का प्रोटोकॉल तोड़ कर अपराधियों को चुन-चुन कर मारा। 20 साल चले इस ऑपरेशन में एजेंसी टारगेट के परिवार को एक बुके भेजती थी। उस पर लिखा होता था- ‘ये याद दिलाने के लिए कि हम ना तो भूलते हैं, ना ही माफ करते हैं।’


21 साल बाद महमूद अल मबूह की हत्या-
मोसाद ने अल मबूह से 21 साल पुराना बदला लेते हुए उसकी 19 जनवरी 2010 को दुबई के होटल अल बुस्तान रोताना में हत्या कर दी थी। मबूह हमास के लिए हथियार की खरीद-बिक्री किया करता था। एजेंसी ने उसके पैरों में सक्सिनीकोलीन का इंजेक्शन दिया था, जिससे वह पैरालाइज्ड (लकवा) हो गया। इसके बाद उसके मुंह पर तकिया रखकर उसकी हत्या कर दी गई। अल मबूह फिलिस्तीनी ग्रुप हमास के मिलिट्री विंग का संस्थापक था। उस पर 1989 में दो इजराइली सैनिकों को मारने का आरोप था।


यासिर अराफात के सहयोगी को मारीं 70 गोलियां-
मोसाद की हिट लिस्ट में शामिल फिलिस्तीन के नेता यासिर अराफात का दाहिना हाथ माने जाने वाला खलील अल वजीर उर्फ अबू जिहाद ट्यूनीशिया में रह रहा था। उसके खात्मे के लिए 30 एजेंट काम पर लगे। वे पर्यटक बनकर ट्यूनीशिया पहुंचे। कुछ ट्यूनिशिया सेना की वर्दी में भी थे। इस दौरान शहर के ऊपर मंडराते इजरायल के जहाज बोइंग 707 ने वहां के संचार माध्यमों को ब्लॉक कर दिया। फिर एजेंटों ने अबू के घर में दाखिल होकर पहले नौकरों को मारा, फिर परिवार के सामने अबू को 70 गोलियां मार कर मौत के घाट उतार दिया।

चुरा लिया रूस का मिग-21 लड़ाकू विमान-
60 के दशक में सबसे उन्नत और तेज रूस के मिग-21 लड़ाकू विमान को पाने में अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA असफल रही। जिम्मेदारी मिलने पर पहली और दूसरी कोशिश नाकाम होने के बाद भी mosad ने हार नहीं मानी। आखिरकार 1964 में उसे सफलता मिली। महिला एजेंट ने एक इराकी पायलट को इस विमान के साथ इजरायल लाने के लिए मना लिया था।

महिला एजेंट की मदद से दबोचा मौर्डेखाई वनुनु
इजराइल के गुप्त परमाणु कार्यक्रम के बारे में दुनिया को बताने वाले शख्स का नाम था मौर्डेखाई वनुनु। इसके लिए गुप्त अभियान के तहत एक महिला जासूस को उसे प्रेम जाल में फंसाने के लिए भेजा गया। वह उसे लंदन से यॉट में बैठा कर इटली के समंदर में ले आई। वहां से मोसाद के एजेंटों ने वनुनु को अगवा कर लिया। फिर इजराइल में मुकदमा चला कर सजा दी गई।

ऑपरेशन थंडरबोल्ट-
27 जून 1976 को रात के 11 बजे एयर फ्रांस की एयरबस ए300 वी4-203 ने इजरायली शहर तेल अवीव से ग्रीस की राजधानी एथेंस के लिए उड़ान भरी। विमान में 246 यात्री और 12 क्रू मेंबर सवार थे। इसमें सवार ज्यादातर यात्री यहूदी और इजरायली नागरिक थे। अरब के आतंकी विमान को कब्जे में ले कर पेरिस की बजाय लीबिया के शहर बेंगहाजी ले गए और विमान में ईंधन भरा। इसके बाद वे विमान को लेकर युगांडा के एंतेबे हवाई अड्डे पहुंचे। तब मोसाद ने दुनिया को अपनी ताकत दिखाते हुए 94 नागरिकों को सुरक्षित वापस निकाल लिया। इस ऑपरेशन में वर्तमान में इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के भाई जोनाथन नेतन्याहू भी शामिल थे, हालांकि ऑपरेशन के दौरान गोली लगने से उनकी मौत हो गई थी।

हिटलर के खास आइकमैन को फांसी-जर्मनी के तानाशाह एडोल्फ हिटलर ने बड़ी तादाद में यहूदियों की हत्या की थी। इसके लिए हिटलर को जरूरी सामान एडोल्फ आइकमैन ने उपलब्ध करवाया था। मोसाद ने 1960 में अर्जेंटीना से आइकमैन का अपहरण किया और उसे लेकर इजराइल ले गए। 11 अप्रैल 1961 को उस पर 60 लाख यहूदियों की मौत की साजिश में शामिल होने को लेकर मुकदमा चलाया गया। आठ महीनों तक चले मुकदमे के बाद उसे दिसंबर 1961 में मौत की सजा सुनाई गई। मई 1962 में उसे फांसी पर लटका दिया गया और उसकी अस्थियों को समुद्र में फेंक दिया गया।

आकाश-एनजी मिसाइल का सफल परीक्षण

आकाश-एनजी मिसाइल का सफल परीक्षण नई दिल्ली। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने गणतंत्र दिवस से ठीक एक दिन पहले 25 जनवरी, 2021 को ओडिशा के तट से दूर एकीकृत परीक्षण रेंज से आकाश-एनजी (नई पीढ़ी) मिसाइल का सफल पहला प्रक्षेपण किया। आकाश-एनजी एक नई पीढ़ी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है, जिसका उद्देश्य भारतीय वायु सेना द्वारा उपयोग के लिए ऊंचाई से हमला करने वाले कम आरसीएस हवाई खतरों को रोकना है।

मिसाइल ने टेक्स्ट बुक सटीकता के साथ लक्ष्य पर निशाना साधा। मिसाइल ने प्रक्षेपवक्र के दौरान उच्च स्तरीय क्षमता का प्रदर्शन करके सभी परीक्षण उद्देश्यों को पूरा किया। परीक्षण के दौरान कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम, ऑनबोर्ड एवियोनिक्स और मिसाइल के एयरोडायनामिक विन्यास का प्रदर्शन सफलतापूर्वक सत्यापित हुआ। परीक्षण प्रक्षेपण के दौरान मिसाइल के पूरे उड़ान पथ पर नजर रखी गई और उड़ान के आंकड़ों को आईटीआर चांदीपुर द्वारा तैनात रडार, ईओटीओ और टेलीमेट्री सिस्टम जैसे विभिन्न रेंज उपकरणों द्वारा हासिल किया गया।

प्रणाली के साथ एकीकृत करके मल्टी फंक्शन रडार का उसकी क्षमता के लिए परीक्षण किया गया। आकाश-एनजी प्रणाली को कनस्तरीकृत लांचर और बहुत छोटे ग्राउंड सिस्टम फुटप्रिंट के साथ अन्य समान प्रणालियों की तुलना में बेहतर तैनाती के साथ विकसित किया गया है। यह परीक्षण भारतीय वायु सेना के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), बीडीएल और बीईएल की संयुक्त टीम द्वारा किया गया था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि के लिए डीआरडीओ, बीईएल और भारतीय वायु सेना की टीम के वैज्ञानिकों को बधाई दी । सचिव डीडी आरएंडडी और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ जी सतीश रेड्डी ने आकाश एनजी मिसाइल के सफल उड़ान परीक्षण के लिए टीम को बधाई दी। ****

946 पुलिस कर्मियों को वीरता/सेवा पदक

गणतंत्र दिवस, 2021 के अवसर पर वीरता पदक/सेवा पदक

नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस, 2021 के अवसर पर कुल 946 पुलिस कर्मियों को पदक से सम्मानित किया गया है। Ministry of Home Affairs की ओर से बताया गया कि वीरता (पीपीएमजी) के लिए राष्ट्रपति के पुलिस पदक 02, वीरता के लिए पुलिस पदक (पीएमजी) 205, विशिष्ट सेवा (पीपीएम) के लिए राष्ट्रपति के पुलिस पदक 89, सराहनीय सेवा के लिए पुलिस पदक (पीएम) 650, 207 वीरता पुरस्कार।

झारखंड को एक पीपीएमजी (मरणोपरांत) और एक पीपीएमजी सीआरपीएफ (मरणोपरांत) को सम्मानित किया जा रहा है। 137 सुरक्षा कर्मियों को जम्मू-कश्मीर में उनकी वीरता के लिए सम्मानित किया जा रहा है। 24 सुरक्षा कर्मियों को नक्सली उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में उनकी वीरतापूर्ण कार्रवाई के लिए और 10 सुरक्षा कर्मचारियों को पूर्वोत्तर क्षेत्र में उनकी वीरतापूर्ण कार्रवाई के लिए सम्मानित किया जा रहा है। वीरता पुरस्कार पाने वाले सुरक्षा कर्मियों में 68 सीआरपीएफ के हैं, 52 जम्मू-कश्मीर पुलिस के हैं, 20 बीएसएफ के हैं और 17 दिल्ली पुलिस के हैं, 13 महाराष्ट्र के हैं और 08 छत्तीसगढ़, 08 उत्तर प्रदेश तथा शेष अन्य राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों और सीएपीएफ के हैं। *** पूरी लिस्ट के लिए pdf 👇

अंडमान के समुद्र में संयुक्‍त सैनिक अभ्‍यास

अंडमान के समुद्र में “एमफैक्‍स-21” के साथ “कवच” संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण अभ्यास

नई दिल्ली। संयुक्त परिचालन तत्परता को बढ़ाने के लिए, भारतीय सशस्त्र बलों ने अंडमान के समुद्र और बंगाल की खाड़ी में बड़े पैमाने पर “एमफैक्‍स-21” के साथ “कवच” संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण अभ्यास किया। यह अभ्यास अंडमान और निकोबार कमान (एएनसी) के तत्वावधान में सेना, नौसेना, वायु सेना और तटरक्षक बल की पूर्वी नौसेना कमान (ईएनसी) और सेना की दक्षिणी कमान (एससी) की भागीदारी से आयोजित किया गया था।

अभ्यास में एएनसी के सभी बलों की भागीदारी और तैनाती, सेना की दक्षिणी कमान की जल थल चर ब्रिगेड के साथ-साथ नौसेना के पूर्वी बेड़े और मरीन कमांडो के लड़ाकू जलपोत, पनडुब्बी और जल थल चर अवतरण जहाज शामिल हैं। संयुक्‍त अभ्‍यास में जगुआर मैरीटाइम स्ट्राइक और भारतीय वायु सेना के परिवहन विमान और तटरक्षक बल की संपत्ति ने भी भाग लिया। संयुक्‍त अभ्‍यास की शुरूआत कार निकोबार में जगुआर विमान, पैरा कमांडो और समुद्री कमांडो के हमलों के साथ हुई जहां पैराट्रूपर ने ऊंचाई से जंप (कॉम्बैट फ्री फॉल) लगाए। इसका उद्देश्‍य हिन्‍द महासागर क्षेत्र (आईओआर) में सुविधा वाले क्षेत्र के भीतर हवाई प्रभुत्‍व और समुद्री हमले की क्षमता की पुष्टि करना है। जल थल चर परिचालन से पहले, सभी एजेंसियों के साथ निकट समन्वय में सेना, नौसेना और वायु सेना के सैनिकों को समुद्री और हवाई रास्‍ते से ले जाया गया। युद्ध के मैदान को आकार देने के हिस्से के रूप में, मार्कोस ने अपने कॉम्‍बेट लोड और एयर ड्रोपेबल रिजीड हल इन्‍फ्लेटेबल बोट्स (एडीआर) को अंडमान सागर पर गिरा दिया था, जिससे मरीन कमांडो चुपके से और गति के साथ लक्ष्य तक पहुंच सके।

एमआई-17 वी5 सशस्त्र हेलीकॉप्टरों ने समुद्र और जमीन पर दुश्मन की निर्दिष्‍ट संपत्ति पर सटीक निशाना साधा। प्रशिक्षण अभ्यास का समापन टैंकों पर 600 सैनिकों, ट्रूप कैरियर व्हीकल और अन्य भारी हथियारों के साथ आईएनएस जलश्वा, ऐरावत, गुलदार और एनसीयू एमके-4 श्रेणी के जहाजों की दक्षिणी कमान की जल थल चर ब्रिगेड द्वारा समुद्र तट लैंडिंग संचालन के साथ किया गया। लॉजिस्टिक टीम ने परिचालन स्थितियों और लड़ाकू मिशनों में संयुक्त लॉजिस्टिक प्रणाली और गतिशील परिवर्तनों का जवाब देने के लिए अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया। जिन क्षेत्रों में अभ्यास किया गया था, वे भारत के लिए रणनीतिक महत्व रखते हैं।

अभ्यास ने अंतरिक्ष, वायु, भूमि और समुद्र आधारित परिसंपत्तियों से खुफिया जानकारी एकत्र करने की संयुक्त क्षमताओं, इसके संश्लेषण, विश्लेषण और त्वरित निर्णय लेने के लिए युद्ध क्षेत्र की पारदर्शिता को प्राप्त करने के लिए वास्तविक समय साझा करने की भी पुष्टि की। संयुक्त बल ने अंडमान सागर और बंगाल की खाड़ी में मल्‍टी-डोमेन, उच्च तीव्रता वाले आक्रामक और रक्षात्मक युद्धाभ्यास को अंजाम दिया। तीनों सेवाओं में परिचालन तालमेल को बढ़ाने की दिशा में संयुक्त युद्ध लड़ने की क्षमताओं और मानक संचालन प्रक्रियाओं का अभ्यास किया जाता है। कमांडर-इन-चीफ अंडमान और निकोबार कमान ने अभ्यास की निगरानी के लिए दक्षिणी द्वीप समूह में अभ्यास क्षेत्र का दौरा किया और उच्च स्तर की परिचालन तैयारियों के लिए सभी रैंकों की सराहना की।

CRPF को मिली मोटर बाइक एम्बुलेंस ‘रक्षिता’

मोटर बाइक एम्बुलेंस ‘रक्षिता’

डीआरडीओ ने मोटर बाइक एम्बुलेंस ‘रक्षिता’ सीआरपीएफ को सौंपी

नई दिल्ली। भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन के दिल्ली स्थित नामिकीय औषिध तथा संबद्ध विज्ञान संस्थान (आईएनएमएएस) ने आज बाइक आधारित कैजुअल्टी ट्रांसपोर्ट इमरजेंसी वाहन, ‘रक्षिता’, को एक समारोह में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) को सौंपा। समारोह नई दिल्ली स्थित केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के मुख्यालय में आयोजित किया गया।

जीवन रक्षक सहायता प्रदान करेगी ‘रक्षिता’

डीआरडीओ के डीएस एवं डीजी (एलएस) डॉ. एके सिंह ने ‘रक्षिता’ के मॉडल को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के महानिदेशक एपी माहेश्वरी को सौंपा, जिसके बाद इस अवसर पर 21 बाइकों के एक दल को झंडी दिखाकर रवाना किया गया। यह बाइक एम्बुलेंस भारतीय सुरक्षा बलों और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के सामने आने वाली समस्याओं में तत्काल मदद करेगी। यह कम तीव्र संघर्ष वाले इलाकों से घायलों को निकालने के दौरान जीवन रक्षक सहायता प्रदान करेगी। यह संकीर्ण सड़कों और दूरदराज के इलाकों के लिए उपयुक्त होगी, जहां एम्बुलेंस के माध्यम से पहुंचना मुश्किल और अधिक समय लेने वाला है। यह बाइक एम्बुलेंस अपनी कार्यक्षमता और एकीकृत आपातकालीन चिकित्सा सहायता प्रणाली के चलते चार-पहिया एम्बुलेंस की तुलना में तेजी से रोगियों के लिए एक चिकित्सा आपातकालीन आवश्यकता उपलब्ध करा सकती है। बाइक एम्बुलेंस ‘रक्षिता’ में एक स्वनिर्धारित रिक्लाइनिंग कैजुअल्टी इवैक्यूएशन सीट (सीईएस) लगाई गई है, जिसे आवश्यकता के अनुसार उपयोग किया जा सकता है। ‘रक्षिता’ में हेड इम्मोबिलाइज़र, सुरक्षा हार्नेस जैकेट, हाथों और पैरों की सुरक्षा के लिए सुरक्षा पट्टियाँ, ड्राइवर के लिए वायरलेस मॉनिटरिंग क्षमता और ऑटो चेतावनी प्रणाली के साथ फ़िज़ियोलॉजिकल पैरामीटर मापने वाले उपकरण भी अन्य प्रमुख विशेषताओं में शामिल है। घायल साथी के हाल की रियल टाइम निगरानी डैशबोर्ड पर लगे एलसीडी पर की जा सकती है। बाइक एंबुलेंस मौके पर ही स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने के लिए एयर स्प्लिंट, मेडिकल और ऑक्सीजन किट से भी लैस है। यह बाइक एम्बुलेंस न केवल अर्धसैनिक और सैन्य बलों के लिए उपयोगी है, बल्कि नागरिकों के लिए भी इसका उपयोग किया जा सकता है। डॉ. जी. सतीश रेड्डी, अध्यक्ष डीआरडीओ और सचिव डीडी आरएंडडी ने हमारे सुरक्षा बलों के सामने आने वाली चुनौतियों के जवाब में इस स्वदेशी और लागत प्रभावी समाधान के लिए वैज्ञानिकों के प्रयासों की सराहना की।

DRDO ने बनाई पहली स्वदेशी 9 mm मशीन पिस्टल

DRDO की पहली स्वदेशी 9 mm मशीन पिस्टल नजदीकी लड़ाई में टूटेगी बनकर कहर

नई दिल्ली। भारत ने अपनी पहली 100 फीसदी स्वदेशी मशीन पिस्टल बना ली है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO), भारतीय सेना (Indian Army) और इन्फैंट्री स्कूल महू (MHOW) ने मिलकर इसे बनाया है। रक्षा मंत्रालय ने इस पिस्टल को मीडिया के समक्ष प्रस्तुत कर इसकी खासियतें बताईं। माना जा रहा है कि इस पिस्टल का उपयोग क्लोज कॉम्बैट, वीआईपी सिक्योरिटी और आतंकरोधी मिशन में किया जा सकता है। इस 9 मिमी मशीन पिस्टल (9 mm Machine Pistol) की डिजाइनिंग DRDO के आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट इस्टैबलिशमेंट और आर्मी इन्फैंट्री स्कूल, महू ने मिलकर की है। इसे बनाने में डीआरडीओ को सिर्फ 4 महीने लगे। इसके एक किलोग्राम एवं 1.80 किलोग्राम वजन के दो वैरिएंट हैं। 9 मिमी मशीन पिस्टल के ऊपर दुनिया के किसी भी तरह के माउंट लगाए जा सकते हैं। वह किसी भी तरह का टेलीस्कोप, बाइनोक्यूलर या लेजर बीम हो सकते हैं। गन का ऊपरी हिस्सा एयरक्राफ्ट ग्रेड के एल्यूमिनियम से बना है, जबकि निचला हिस्सा कार्बन फाइबर से बनाया गया है। इसको बनाने के लिए थ्रीडी प्रिटिंग डिजाइनिंग की भी मदद ली गई। एक पिस्टल की उत्पादन लागत 50 हजार रुपए से कम है। कोई भी देश इसे भारत से खरीद सकता है।

इस 9 mm Machine Pistol का नाम अस्मि (Asmi) रखा गया है… अर्थात गर्व, आत्मसम्मान और कड़ी मेहनत। 100 मीटर की रेंज तक यह पिस्टल सटीक निशाना लगा सकती है। इसकी मैगजीन में स्टील की लाइनिंग लगी है यानी यह गन में अटकेगी नहीं। इसकी मैगजीन को पूरा लोड करने पर 33 गोलियां आती हैं। इसका लोडिंग स्विच दोनों तरफ हैं। यानी दाहिने और बाएं हाथों से बंदूक चलाने वाले को कोई दिक्कत नहीं होगी। आगे की तरफ आर्म ग्रिप है जो सही निशाना लगाने के लिए मददगार साबित होता है। पिस्टल की बट फोल्डेबल है। यानी जरूरत पड़ने पर कंधे पर टिकाएं या फिर फोल्ड करके सीधे फायर करें।

जूते से मिलेगी दुश्मन की आहट, फौरन मार दो गोली!

बॉर्डर पर जूता देगा दुश्मन की आहट, मार दो गोली

काशी के युवा वैज्ञानिक ने बनाया इंटेलिजेंस जूता, बॉर्डर पर घुसपैठ रोकने में कारगर, गोलियां दागने में भी सक्षम

जूते में लगा विशेष प्रकार का सेंसर 20 किमी तक वाइब्रेट करके अलार्म से जवानों को करेगा अलर्ट। इसमें लगे 2 फोल्डिंग 9 एमएम के गन बैरल से की जा सकती है फायरिंग। रेडियो फ्रिक्वेंसी और मोबाइल नेटवर्क पर भी काम करने में सक्षम जूते का वजन मात्र 650 ग्राम। सोलर चार्जिंग सिस्टम से लैस जूते में लगा एक विशेष प्रकार का हीटर जवानों के पैरों को रखेगा गर्म।


वाराणसी (धारा न्यूज): बार्डर पर घुसपैठ रोकने के लिए बनारस के युवा वैज्ञानिक ने एक ऐसा जूता तैयार किया है जो 20 किलोमीटर तक की दूरी तक किसी दुश्मन की आहट को महसूस करेगा और घुसपैठ को रोक सकेगा। यह इंटेलिजेंस जूता गोलियां दागने में भी सक्षम है। इसका उपयोग दुश्मनों को रोकने के लिए किया जाएगा। इसको युवा वैज्ञानिक श्याम चौरसिया ने बनाया है।

प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के युवा वैज्ञानिक श्याम चौरसिया महिलाओं और सेना के लिए कई नए-नए इनोवेशन कर चुके हैं। श्याम चौरसिया ने एक न्यूज़ एजेंसी को बताया कि, “देश में घुसपैठिये चुपचाप बार्डर पर घुसने का प्रयास करते हैं। उन्हें रोकने के लिए इंटेलिजेंस जूता बनाया है। जो बार्डर पर घुसपैठ की घटना होते ही सचेत कर देगा। इस जूते में एक विशेष प्रकार का सेंसर लगाया गया है, जो कि 20 किमी तक की घटना के लिए यह जवानों को वाइब्रेट करके आलर्म के माध्यम से अलर्ट करेगा। इससे समय रहते जवान अपनी और बॉर्डर की सुरक्षा कर सकेंगे।” यह जूता महज कुछ सेकेंडों में जानकरी दे देगा। इसमें आपातकाल को देखते हुए 2 फोल्डिंग 9 एमएम के गन बैरल लगाए गए हैं, जो फायर भी कर सकते हैं। इससे जवान अपनी सुरक्षा भी कर सकते हैं। वैज्ञानिक श्याम चौरसिया बताते हैं कि, “यह दुश्मन की हर प्रकार की गतिविधियों पर नजर रख सकता है। यह रेडियो फ्रिक्वेंसी और मोबाइल नेटवर्क पर भी काम करता है। इसका वजन महज 650 ग्राम है। रबड़ और स्टील की प्लेट को मिलाकर इसे तैयार किया गया है। ठंड से जवानों को बचाने के लिए इसमें एक विशेष प्रकार का हीटर लगाया गया है, जो कि उनके पैरों को गर्म रखेगा। इसके अलावा इसमें सोलर चार्जिंग सिस्टम भी लगा है। इसमें स्टील की चादर, एलईडी लाइट, सोलर प्लेट रेडियो सर्किट, स्विच इलेक्ट्रॉनिक ट्रिगर के अलाव वाइब्रेशन मोटर का भी इस्तेमाल हुआ है। इसका लेजर सेंसर और ह्यूमन सेंसर बॉर्डर में रखा होगा। जैसे ही दुश्मन की हरकत होगी और वह इसकी रेंज में आएगा। इसके बाद यह तुरंत एक्टिव होकर जवान के जूते पर सिग्नल भेजेगा। जूते में लगा अलार्म जवान को सूचित कर देगा कि कोई अराजक तत्व बॉर्डर में दाखिल हुआ है। जवान सतर्क हो जाएंगे और समय रहते ही दुश्मन को रोकने में सक्षम हो सकते हैं। आपातकाल के समय जवान इसमें दुश्मन को टारगेट करके फायर भी कर सकते हैं। जूता आगे और पीछे दोनों तरफ रिमोट के माध्यम से फायर कर सकेगा। इस यंत्र के इस्तेमाल से बॉर्डर और जवान दोनों की आसानी से सुरक्षा होगी।

वहीं गोरखपुर नक्षत्रशाला के क्षेत्रीय वैज्ञानिक अधिकारी महादेव पांडेय कहते हैं कि, “इस इंटेलिजेंस जूते की तकनीक बहुत अच्छी है। इसमें जितना मजबूत सेंसर होगा, यह उतना ही कारगर होगा। यह घुसपैठ को राकेगा। जैपनीज गाड़ियों में देखने को मिला है कि अगर कहीं दूर कोई आवाज होती है तो 2 किलोमीटर पहले से इंडिकेटर बजने लगता है। यह बहुत अच्छी खोज है। इसमें सेंसर का बहुत बड़ा रोल होता है। इसलिए इसे और मजबूत करने की जरूरत है।”

अब रक्षा कर्मी ऑनलाइन खरीदें कार, बाइक, टीवी और फ्रिज

अब रक्षा कर्मी ऑनलाइन खरीदें कार, बाइक, टीवी और फ्रिज
रक्षा मंत्री ने किया सीएसडी के ऑनलाइन पोर्टल का उद्घाटन


नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कैंटीन स्टोर्स डिपार्टमेंट-सीएसडी से अगेंस्ट फर्म डिमांड (एएफडी) की वस्तुओं की खरीद के लिए ऑनलाइन पोर्टल https://afd.csdindia.gov.in/का उद्घाटन किया। इस ऑनलाइन पोर्टल की शुरुआत का उद्देश्य लगभग 45 लाख सीएसडी लाभार्थियों को ऑनलाइन खरीद के प्रोत्साहित करना है, जिसमें सशस्त्र बलों के सेवारत और सेवानिवृत्त व्यक्ति तथा सिविल डिफेंस कर्मचारी शामिल हैं। सभी लाभार्थी इस पोर्टल के ज़रिये ‘अगेंस्ट फर्म डिमांड’ की श्रेणी में आने वाले उत्पाद जैसे कार, मोटरसाइकिल, वाशिंग मशीन, टीवी और फ्रिज आदि की खरीद कर सकते हैं।

इस पोर्टल के शुभारंभ की सराहना करते हुए, रक्षा मंत्री ने सभी जवानों और सशस्त्र बलों के अधिकारियों तथा सेवानिवृत्त व्यक्तियों के कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को व्यक्त किया। उन्होंने इस परियोजना के सफल कार्यान्वयन के लिए पूरी टीम की सराहना की। उन्होंने कहा कि, यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण डिजिटल इंडिया की सोच के अनुरूप थी।

इस समारोह का आयोजन नई दिल्ली में किया गया था। कारों और मोटरसाइकिलों की डिलीवरी की लाइव स्ट्रीमिंग मुंबई, नई दिल्ली, अहमदाबाद और जयपुरसे उन लोगों के लिए की गई, जिन्होंने सीएसडी पोर्टल afd.csdindia.gov.in के ट्रायल रन के दौरान अपनी बुकिंग कराई थी। इस पोर्टल को अब औपचारिक रूप से शुरू कर दिया गया है और यह तेजी से खरीद की सुविधा उपलब्ध कराएगा। यह पोर्टल सभी लाभार्थियों को तेज और परेशानी मुक्त अनुभव प्रदान करेगा।

Ministry of Defense से मिली जानकारी के अनुसार समारोह में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत, चीफ ऑफ नेवल स्टाफ एडमिरल करमबीर सिंह, चीफ ऑफ द एयर स्टाफ एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया और रक्षा सचिव डॉ. अजय कुमार सहित अन्य गणमान्य लोग भी शामिल हुए।
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पैंगोंग झील में तैनात की जाएंगी 12 स्वदेशी नौकाएं

पैंगोंग झील में तैनात होंगी 12 स्वदेशी नौकाएं
चप्पे-चप्पे नजर रखेगी भारतीय सेना

नई दिल्ली (धारा न्यूज): भारतीय सेना हाई परफॉर्मेंस पेट्रोलिंग बोट्स खरीदने की तैयारी में है। पूरी तरह से सशस्त्र इन बोट्स को लद्दाख में पैंगोंग झील पर तैनात किया जाएगा। इसका इस्तेमाल उस क्षेत्र में और उसके आसपास गश्त व तेजी से सैनिकों की तैनाती के लिए किया जाएगा। इसके जरिये जवान चीन की हर हरकत पर नजर रखेंगे। भारत की सरकारी कंपनी गोवा शिपयार्ड से इन पेट्रोलिंग बोट्स को खरीदा जाएगा। वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत और चीन के बीच तनाव अभी भी जारी है। लद्दाख में पैंगोंग झील क्षेत्र में अपनी उपस्थिति और तैनाती को मजबूत करने के अपने प्रयासों के लिए भारतीय सेना ने 12 नौकाओं के अधिग्रहण का अनुबंध किया है। गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा ये नौकाएं बनाई जा रही हैं। इसमें आगे और पीछे दोनों तरफ बंदूकें होंगी और ये सैनिकों को ले जाने में सक्षम होगी। भारतीय सेना ने बड़े जल निकायों की निगरानी और गश्त के लिए 12 फास्ट पैट्रोल नावों के लिए मेसर्स गोवा शिपयार्ड लिमिटेड के साथ एक अनुबंध किया था, जिसमें उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में शामिल थे। इनकी डिलीवरी मई 2021 से शुरू होगी।
सेना के अधिकारियों ने कहा, “नावों का संचालन और रखरखाव इंजीनियर्स द्वारा किया जाएगा। ये नावें ऊंचाई वाले क्षेत्रों में विशाल जल निकायों में फैली सीमाओं / नियंत्रण रेखा पर सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण होंगी।” उन्होंने कहा उच्च गति और युद्धाभ्यास वाली नौकाएं अत्याधुनिक जहाज पर प्रणालियों से सुसज्जित होंगी।

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सेना दिवस परेड कवरेज को मीडिया के लिये दिशानिर्देश

सेना दिवस परेड कवरेज को मीडिया की व्यवस्था
नई दिल्ली (धारा न्यूज़): सेना दिवस परेड का आयोजन 15 जनवरी, 2021 को करियप्पा परेड ग्राउंड में किया जाएगा। इसके अलावा, गणतंत्र दिवस परेड और बीटिंग द रिट्रीट के लिए 23 जनवरी, 2021 को एक प्रेस वार्ता आयोजित की जाएगी। प्रेस वार्ता के लिए स्थान की जानकारी बाद में दी जाएगी।

Ministry of Defence की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार सभी इच्छुक मीडियाकर्मियों से अनुरोध किया गया है कि वे 05 जनवरी, 2021 तक सेना दिवस परेड पर आवश्यक सुरक्षा मंजूरी के लिए निम्नलिखित विवरणों को armydayparade2021@gmail.com पर भेजें: –

1. पूरा नाम
2. पीआईबी/आईडी कार्ड संख्या
3. आईडी कार्ड की स्कैन की गई फोटो
4. मीडिया एजेंसी का नाम
5. आवेदक की फोटो
6. …के लिए आवेदन: एडीपी/प्रेस वार्ता/ दोनों –किसी भी स्पष्टीकरण के लिए, कृपया 011-23019659 पर फोन करें। 05 जनवरी, 2021 के बाद प्राप्त मेल पर विचार नहीं किया जा सकता है।

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CRPF, BSF, CISF को राहत: सेवारत कर्मियों को सेवा के दौरान दिव्यांगता का शिकार होने पर “क्षतिपूर्ति”

सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ इत्यादि के जवानों को बड़ी राहत
सभी सेवारत कर्मियों को सेवा के दौरान दिव्यांगता का शिकार होने की स्थिति में “दिव्यांगता क्षतिपूर्ति” दी जाएगी- डॉ जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली (धारा न्यूज़): पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्यमंत्री डॉक्टर जितेंद्र सिंह ने नए वर्ष पर केंद्र सरकार के सभी कर्मचारियों के लिए “दिव्यांगता क्षतिपूर्ति” योजना की शुरुआत के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि यदि कोई कर्मचारी सेवा के दौरान दिव्यांगता का शिकार होता है और उसकी सेवाएँ दिव्यांग होने के बाद भी बरकरार रखी जाती हैं तो उन्हें “दिव्यांगता क्षतिपूर्ति” का लाभ दिया जाएगा।

आज का यह आदेश केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल सीएपीएफ के युवा जवानों जैसे सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ इत्यादि के जवानों को बड़ी राहत उपलब्ध कराएगा, जिनकी सेवा की प्रकृति के चलते अपना दायित्व निभाते हुए दिव्यांगता का शिकार होने की संभावना बनी रहती है।

यहां यह उल्लेख करना आवश्यक है कि नया आदेश सेवा नियमों की एक विसंगति को दूर करेगा जिसके चलते केंद्रीय कर्मचारियों को जटिलताओं का सामना करना पड़ता था। इस संबंध में 5 मई, 2009 को जारी किए गए आदेश के तहत 1 जनवरी, 2004 या उसके बाद सेवा में शामिल हुए सरकारी कर्मियों को केंद्रीय नागरिक सेवाओं (सीसीएस)ईओपी नियमों के अंतर्गत दिव्यांगता का लाभ नहीं मिलेगा और वह राष्ट्रीय पेंशन सिस्टम (एनपीएस) के अंतर्गत कवर होंगे। कार्मिक लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के पेंशन विभाग द्वारा जारी नए आदेश के अंतर्गत अब उन कर्मचारियों को भी अतिरिक्त असाधारण पेंशन (ईओपी) के नियम 9 के तहत लाभ प्राप्त होगा जो एनपीएस के दायरे में आते हैं।

अन्य शब्दों में यदि एक सरकारी कर्मचारी अपनी ड्यूटी के दौरान दिव्यांगता का शिकार होता है और यह दिव्यांगता उसकी सरकारी सेवा को प्रभावित करती है और उसकी सेवा बरकरार रखी जाती है तो उसे एकमुश्त राहत राशि उपलब्ध कराई जाएगी। इसकी गणना समय-समय पर जारी की जाने वाली परिवर्तित सारणी के आधार पर की जाएगी।

इस आदेश के जारी होने पर संतोष व्यक्त करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि मोदी सरकार नियमों के सरलीकरण के लिए और विभेदकारी नियमों को खत्म करने के लिए सभी आवश्यक उपाय कर रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह की सभी प्रकार की नई पहल का मुख्य उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों के जीवन को आसान बनाना है। इससे वह कर्मचारी भी लाभान्वित होंगे जो आज पेंशन भोगी हैं अथवा जिनके परिजन पेंशन प्राप्त कर रहे हैं।

सरकारी कर्मचारियों के हित में कार्मिक मंत्रालय ने हाल ही में एक और आदेश जारी किया था जिसके अंतर्गत पेंशन प्राप्त करने के लिए न्यूनतम 10 वर्ष की सेवा शर्त में छूट दी थी, यदि कोई सरकारी कर्मचारी शरीर से या चिकित्सकीय अक्षमता के कारण सरकारी सेवाओं से सेवानिवृत्त होता है तो। इस संदर्भ में सीसीएस (पेंशन) के नियम 38 में संशोधन कर आखिरी भुगतान के 50% पेंशन देने का नियम लागू किया गया, भले ही कर्मचारी 10 वर्ष की न्यूनतम आवश्यक सेवा शर्त को पूर्ण नहीं कर पाया हो।

पेंशन से जुड़े नियमों में एक और महत्वपूर्ण सुधार पेंशन से जुड़े नियमों में एक और महत्वपूर्ण सुधार किया गया और यह निर्णय किया गया कि सरकारी कर्मचारी के आश्रित को आखिरी भुगतान के 50% पेंशन का अधिकार प्राप्त करने के लिए 7 वर्ष की न्यूनतम सेवा की आवश्यक शर्त को भी खत्म किया गया। इसके तहत यदि किसी सरकारी कर्मचारी की 7 वर्ष की सेवा पूर्ण होने से पहले ही सेवा के दौरान मृत्यु हो जाती है तब भी कर्मचारी के परिवार को उसके आखिरी भुगतान के 50% राशि पेंशन के तौर पर निर्धारित की जाएगी।

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10 लिंक्स यू2 फायर नियंत्रण प्रणाली से लैस होगी नौसेना

10 लिंक्स यू2 फायर नियंत्रण प्रणाली से लैस होगी नौसेना
आपूर्ति के लिए रक्षा मंत्रालय ने किये बीईएल के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर

नई दिल्ली (धारा न्यूज़): रक्षा मंत्रालय (एमओडी) ने विक्रय (भारतीय) श्रेणी के तहत 1,355 करोड़ रुपये की लागत से भारतीय नौसेना के प्रमुख युद्धपोतों के लिए 10 लिंक्स यू2 फायर नियंत्रण प्रणाली की खरीद हेतु भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) के साथ नई दिल्ली में एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। लिंक्स प्रणाली को स्वदेश में डिजाइन और विकसित किया गया है और यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘आत्म-निर्भर’ भारत के दृष्टिकोण को बढ़ावा देगी।

लिंक्स यू2 जीएफसीएस एक नावल गन फायर नियंत्रण प्रणाली है, जिसे समुद्री हलचल के बीच निगरानी करने और लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए विकसित किया गया है। यह सटीक रूप से हवा/जमीन के लक्ष्यों पर नज़र रखने के साथ-साथ हथियार के लक्ष्य का अनुमान लगाने के लिए आवश्यक लक्ष्य डेटा बनाने में सक्षम है। इसे जहाज पर उपलब्ध मध्यम/छोटी रेंज की बंदूकों जैसे रूसी एके176, ए190, एके630 और एसआरजीएम के साथ संचालित किया जा सकता है।

गन फायर नियंत्रण प्रणाली को शानदार तरीके से डिजाइन दिया गया है और इसके माध्यम से सरल और लचीले तरीके से विभिन्न कार्यों को अंजाम दिया जा सकता है। यह प्रणाली भारतीय नौसेना के लिए विकसित और वितरित की गई है और पिछले दो दशकों से सेवा में है। इसके साथ-साथ यह विभिन्न श्रेणियों के विध्वंसकों, फ्रिगेट, मिसाइल बोट, कोरवेट, आदि भारतीय नौसेना के जहाजों की सामरिक आवश्यकताओं को संतोषजनक रूप से पूरा कर रही है।

पूर्णतया स्वदेशी तकनीक से विकसित प्रणाली-
इस प्रणाली को लगातार उन्नत किया गया है और प्रौद्योगिकी उन्नयन के साथ-साथ स्वदेशीकरण पर प्रमुख ध्यान रहा है। इस प्रणाली में उपयुक्त सामाग्री में स्वदेशी तकनीक में लगातार वृद्धि करते हुए विदेशी ओईएम पर पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही निर्भरता को खत्म किया जा रहा है। इस प्रणाली को एनओपीवी, तलवार और टीजी श्रेणी के जहाजों पर लगाया जाएगा। प्रणाली में शामिल निगरानी रडार, सर्वो और हथियार नियंत्रण मॉड्यूल सभी को पूरी तरह से बीईएल द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है। स्वदेशी तकनीक से विकसित यह प्रणाली अधिकतम समय तक कार्य करने के साथ-साथ इसके जीवनपर्यन्त उत्कृष्ट उत्पाद की गारंटी को सुनिश्चित करेगी। इन्हें अगले पांच वर्षों में बीईएल, बेंगलुरु द्वारा प्रदान किया जाएगा।

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आकाश मिसाइल प्रणाली का निर्यात करेगा भारत

आकाश मिसाइल प्रणाली के निर्यात को मंजूरी

निर्यातों की त्वरित मंजूरी के लिए समिति गठित

नई दिल्ली (धारा न्यूज़): आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत आकाश मिसाइल सिस्टम के निर्यात को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने आज मंजूरी दे दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के ट्वीट कर कहा कि निर्यात किया जाने वाला मिसाइल सिस्टम वर्तमान में भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे संस्करण से अलग होगा।

आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत, भारत विभिन्न प्रकार के रक्षा प्लेटफार्मों और मिसाइलों के निर्माण में अपनी क्षमताओं में वृद्धि कर रहा है। आकाश देश की महत्वपूर्ण मिसाइल है, जिसका 96 प्रतिशत से अधिक स्वदेशीकरण किया गया है। इसी क्रम में आकाश मिसाइल प्रणाली के निर्यात को मंजूरी केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दी है।

सतह से हवा में मार करने में सक्षम है आकाश

आकाश सतह से हवा में मार करने वाली एक मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता 25 किलोमीटर तक है। इस मिसाइल को 2014 में भारतीय वायु सेना तथा 2015 में भारतीय सेना में शामिल किया गया था। रक्षा सेवाओं में इसके शामिल होने के बाद अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों/रक्षा प्रदर्शनी/एयरो इंडिया के दौरान कई मित्र देशों ने आकाश मिसाइल में अपनी रुचि दिखाई। मंत्रिमंडल की मंजूरी से विभिन्न देशों द्वारा जारी आरएफआई/आरएफपीमें भाग लेने के लिए भारतीय निर्माताओं को सुविधा मिलेगी।
अब तक, भारतीय रक्षा निर्यातों में पुर्जे/घटक आदि शामिल थे। बड़े प्लेटफार्मों का निर्यात न्यूनतम था। मंत्रिमंडल की इस पहल से देश को अपने रक्षा उत्पादों को बेहतर बनाने और उन्हें विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिलेगी।

तैनात सिस्टम से भिन्न होगा निर्यात संस्करण

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के ट्वीट कर कहा कि आकाश का निर्यात संस्करण वर्तमान में भारतीय सशस्त्र बलों में तैनात सिस्टम से भिन्न होगा। आकाश के अलावा, अन्य प्रमुख प्लेटफार्मों जैसे तटीय निगरानी प्रणाली, रडार और एयर प्लेटफार्मों में भी रुचि दिखाई जा रही है। ऐसे प्लेटफार्मों के निर्यात के लिए तेजी से अनुमोदन प्रदान करने के लिए, रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की एक समिति गठित की गई है। यह समिति विभिन्न देशों के लिए प्रमुख स्वदेशी प्लेटफार्मों के निर्यात को अधिकृत करेगी। समिति एक सरकार से दूसरी सरकार द्वारा खरीद सहित विभिन्न उपलब्ध विकल्पों का भी पता लगाएगी।

भारत सरकार ने 5 बिलियन अमेरिकी डॉलर के रक्षा निर्यात के लक्ष्य को प्राप्त करने और मित्र देशों के साथ रणनीतिक संबंधों को बेहतर बनाने के लिए उच्च मूल्य वाले रक्षा प्लेटफार्मों के निर्यात पर ध्यान केंद्रित करने का विचार किया है।

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स्वदेशी मिसाइल MRSAM का सफल परीक्षण, सतह से हवा में मार करने में सक्षम

सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल एमआरएसएएम का सफल परीक्षण

नई दिल्ली। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने ओडिशा तट के चांदीपुर एकीकृत परीक्षण रेंज से सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (एमआरएसएएम) के सेना संस्‍करण का पहला सफल परीक्षण करते हुए एक उल्‍लेखनीय कामयाबी हासिल की। मिसाइल ने एक उच्च गति वाले मानव रहित हवाई लक्ष्य को पूरी तरह से नष्ट कर दिया। उसने लक्षित विमान का पीछा करते हुए सीधे तौर पर प्रहार किया।

भारत व इजराइल के संयुक्त सहयोग से विकसित

एमआरएसएएम का सेना संस्करण भारत के डीआरडीओ और इजराइल के आईएआई द्वारा भारतीय सेना के उपयोग के लिए संयुक्त रूप से विकसित सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है। एमआरएसएएम आर्मी हथियार प्रणाली में कमांड पोस्ट, मल्टी-फंक्शन रडार और मोबाइल लॉन्चर प्रणाली शामिल हैं। डिलिवरेबल कॉन्फिगरेशन में परीक्षण के दौरान पूरी फायर यूनिट का उपयोग किया गया है। उपयोगकर्ताओं यानी भारतीय सेना की एक टीम भी परीक्षण के दौरान मौजूद थी। इस दौरान तमाम रेंज उपकरण जैसे रडार, टेलीमेट्री और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम को तैनात किया गया था और लक्ष्य के विध्‍वंश के साथ-साथ हथियार प्रणाली के प्रदर्शन एवं संपूर्ण मिशन का डेटा एकत्रित किया गया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ और इस मिशन में शामिल टीम सदस्यों के प्रयासों की सराहना की। उन्‍होंने कहा कि भारत ने उन्नत हथियार प्रणालियों के स्वदेशी डिजाइन और विकास में उच्च स्तर की क्षमता हासिल की है।

रक्षा विभाग के सचिव (आरएंडडी) और डीआरडीओ के चेयरमैन डॉ. जी. सतीश रेड्डी ने पहले परीक्षण के दौरान लक्ष्य पर सीधा प्रहार करते हुए एमआरएसएएम सेना हथियार प्रणाली के सफल प्रदर्शन पर डीआरडीओ समुदाय को बधाई दी। उन्‍होंने रिकॉर्ड समय के भीतर इस हथियार प्रणाली को साकार करने और निर्धारित कार्यक्रम को पूरा करने में पूरी टीम के प्रयासों की सराहना की।

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