अग्निपथ योजना: फेक न्यूज चलाने वाले 35 व्हाट्सएप ग्रुप पर बैन

अग्निपथ योजना को लेकर सोशल मीडिया पर फेक न्यूज चलाने वाले 35 व्हाट्सएप ग्रुप पर बैन।

नई दिल्ली। केंद्र की सैन्य भर्ती प्रक्रिया को लेकर नई योजना ‘अग्निपथ’ के बारे में कथित तौर पर फर्जी खबरें फैलाने वाले 35 व्हाट्सएप समूहों पर रविवार को सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। कुछ दिन पहले इस योजना की घोषणा के बाद से देश के विभिन्न हिस्सों में इसके खिलाफ हिंसक विरोध के बीच यह कदम उठाया गया है। सरकारी अधिकारियों ने कहा कि ‘अग्निपथ’ योजना के बारे में कथित रूप से फर्जी खबरें फैलाने के लिए सरकार द्वारा 35 व्हाट्सएप समूहों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

हालांकि, इन समूहों के बारे में या उनके एडमिनिस्ट्रेटर के खिलाफ कोई कार्रवाई शुरू की गई है या नहीं, इसकी तत्काल जानकारी नहीं मिल सकी है। व्यापक प्रदर्शन के बावजूद अग्निपथ भर्ती योजना वापस लेने से इनकार करते हुए सेना, नौसेना और वायुसेना ने नयी नीति के तहत भर्ती के लिए रविवार को विस्तृत कार्यक्रम प्रस्तुत किया और इस बात पर जोर दिया कि सशस्त्र बलों में उम्र संबंधी प्रोफाइल को घटाने के लिए इसे लागू किया जा रहा है।

गौरतलब है कि देश के कई हिस्सों में युवा विवादास्पद रक्षा भर्ती योजना का विरोध कर रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में, विभिन्न शहरों और कस्बों से प्रदर्शनकारियों द्वारा रेलवे स्टेशन पर तोड़फोड़ किए जाने, रेलगाड़ियों में आग लगाने और सड़कों तथा रेलवे पटरियों को अवरुद्ध करने की घटनाएं सामने आई हैं। गत शुक्रवार को विरोध प्रदर्शन के तहत तेलंगाना के सिकंदराबाद में पुलिस की गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। आक्रोशित युवाओं के प्रदर्शन के दौरान कई ट्रेनों में आग लगा दी गई थी, निजी, सार्वजनिक वाहनों, रेलवे स्टेशन में तोड़फोड़ की गई और राजमार्गों तथा रेलवे लाइन को अवरुद्ध कर दिया गया था।

विदित हो कि गत 14 जून को घोषित अग्निपथ योजना में साढ़े सत्रह साल से 21 वर्ष की आयु के युवाओं को केवल चार साल के लिए भर्ती करने का प्रावधान है, जिसमें से 25 प्रतिशत को 15 और वर्षों तक बनाए रखने का प्रावधान है। बाद में, सरकार ने 2022 में भर्ती के लिए ऊपरी आयु सीमा को 23 वर्ष तक बढ़ा दिया था। नई योजना के तहत भर्ती किए जाने वाले कर्मियों को अग्निवीर के रूप में जाना जाएगा। इस योजना का एक प्रमुख उद्देश्य सैन्य कर्मियों की औसत आयु को कम करना और बढ़ते वेतन एवं पेंशन भुगतान में कटौती करना है।

आम जवानों जैसी सहूलियत, एक करोड़ का बीमा

अग्निपथ पर चले अग्निवीरों को आम जवानों जैसी सहूलियत, एक करोड़ का बीमा

नई दिल्ली। अग्निपथ योजना के विरोध में चल रहे प्रदर्शन से निपटने के लिए बैठकों का दौर लगातार जारी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए तीनों सेनाओं के प्रमुख दृढ़ता से डटे हुए हैं। रविवार को रक्षा मंत्रालय ने एक अहम प्रेस कांफ्रेंस में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया कि अग्निपथ स्कीम रोलबैक नहीं होगी। यह भी बताया कि अग्निवीर के जरिए भारतीय सेना में किस तरह से जोश और होश का संतुलन बनाने की योजना है।

अब सभी रिक्रूटमेंट केवल अग्निवीर से- प्रेस कांफ्रेंस के दौरान मौजूद वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया कि सेना में अब सभी रिक्रूटमेंट केवल अग्निवीर के तहत ही होंगे। उन्होंने कहा कि जिन्होंने पहले अप्लाई किया था, उनके लिए एज लिमिट बढ़ा दी गई है। सभी को नए सिरे से अप्लाई करना होगा। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि वैकल्पिक भर्ती की कोई योजना नहीं है ।

सैन्य मामलों के विभाग के अतिरिक्त सचिव लेफ्टिनेंट जनरल अरुण पुरी ने कहा कि यह योजना काफी विचार-विमर्श करके लाई गई है। इस योजना का उद्देश्य युवाओं के जोश-होश के बीच तालमेल बनाना है। उन्होंने कहा कि अग्निपथ योजना युवाओं के लिए फायदेमंद है। सभी अग्निवीरों को आम जवानों की तरह फायदे मिलेंगे। उन्होंने कहा कि आज की तुलना में अग्निवीरों को ज्यादा अलाउंस मिलेगा। उन्होंने कहा कि दो साल से इस योजना पर चर्चा चल रही थी। अरुण पुरी ने कहा कि हर साल लगभग 17,600 लोग तीनों सेवाओं से समय से पहले सेवानिवृत्ति ले रहे हैं। किसी ने कभी उनसे यह पूछने की कोशिश नहीं की कि वे सेवानिवृत्ति के बाद क्या करेंगे? उन्होंने कहा कि यह योजना युवाओं के भविष्य के लिए सोच-समझकर उठाया गया कदम है। इन सब के बीच भारतीय वायुसेना ने अग्निपथ योजना के तहत भर्ती करने के लिए विवरण जारी किया है। इस विवरण में वायुसेना ने बताया है कि अग्निपथ सशस्त्र बलों के लिए एक नई मानव संसाधन प्रबंधन योजना है। इस योजना के माध्यम से शामिल किए गए उम्मीदवारों को अग्निवीर कहा जाएगा। इनकी भर्ती वायुसेना अधिनियम 1950 के तहत चार वर्षों के लिए की जाएगा।

अभी है योजना की शुरुआत

लेफ्टिनेंट जनरल पुरी ने कहा कि अभी योजना के शुरू में 46000 अग्निवीरों की भर्ती की जा रही है, यह क्षमता अभी और बढ़ेगी। अगले 4-5 सालों में यह संख्या 50,000-60,000 होगी और फिर इसे 90 हजार से बढ़ाकर एक लाख किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सेना की योजना में 1.25 लाख तक अग्निवीरों की भर्ती की जाएगी। इस प्रकार से यदि 25 फीसदी को परमानेंट रखा जाएगा तो ऑटोमैटिकली 46,000 अग्निवीर परमानेंट रूप से भर्ती होंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई अग्निवीर देशसेवा के दौरान शहीद होता है उसे एक करोड़ रुपए की आर्थिक मदद मिलेगी।

FIR है दर्ज तो नहीं बन सकेंगे अग्निवीर

केंद्र सरकार की ओर से तीनों सेनाओं में भर्ती के लिए लाई गई अग्निपथ योजना के विरोध के बीच सेना की ओर से उम्मीदवारों को साफतौर पर चेतावनी देते हुए कहा गया है कि अगर उनके खिलाफ FIR दर्ज होती है तो वह ‘अग्निवीर’ नहीं बन सकेंगे। सेना ने कहा कि भर्ती में शामिल होने वाले हर उम्मीदवार को लिखित में यह बताना होगा कि वो अग्निपथ योजना के विरोध के दौरान हिंसा और तोड़फोड़ करने वालों में शामिल नहीं थे। सैन्य मामलों के विभाग के अतिरिक्त सचिव लेफ्टिनेंट जनरल अनिल पुरी ने कहा कि उम्मीदवारों को एक लिखित प्रमाण पत्र देना होगा कि वे विरोध या तोड़फोड़ का हिस्सा नहीं थे। पुरी ने कहा कि भारतीय सेना की नींव में अनुशासन है। आगजनी या तोड़फोड़ के लिए कोई जगह नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति को एक प्रमाण पत्र देना होगा कि वे विरोध या तोड़फोड़ का हिस्सा नहीं थे। पुलिस सत्यापन अनिवार्य है, इसके बिना कोई भी शामिल नहीं हो सकता है।

सेना में अनुशासनहीनता के लिए कोई जगह नहीं

लेफ्टिनेंट जनरल पुरी ने आगे कहा अगर किसी उम्मीदवार के खिलाफ कोई प्राथमिकी दर्ज की जाती है तो वे सेना में शामिल नहीं हो सकते। सशस्त्र बलों में अनुशासनहीनता के लिए कोई जगह नहीं है। केंद्र सरकार की ओर से मंगलवार को योजना के ऐलान के बाद बुधवार को बिहार में अग्निपथ के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था।

वायुसेना में कब से शुरू होगी Agniveer भर्ती ?

एयर मार्शल एसके झा ने बताया कि पहले बैच के अग्निवीर भर्ती के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 24 जून 2022 से शुरू से होगी। इस बैच के लिए फेज-1 की ऑनलाइन परीक्षा 24 जुलाई से शुरू होगी। वहीं पहले बैच की ट्रेनिंग के लिए रजिस्ट्रेशन दिसंबर में शुरू होंगे और इस प्रक्रिया को 30 दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा।

नौसेना में Agniveer भर्ती के आवेदन 21 नवंबर से वाइस एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने बताया कि पहले नवल अग्निवीर 21 नवंबर 2022 से ओडिशा स्थिति आईएनएस चिल्का में ट्रेनिंग के लिए पहुंचना शुरू कर देंगे। नौसेना में महिला और पुरुष दोनों अग्निवीरों की भर्ती की जाएगी। उन्होंने बताया कि नौसेना में पहले से ही विभिन्न जहाजों में 30 महिला अधिकारी तैनात हैं। ऐसे में नौसेना ने अग्निपथ योजना के तहत भी महिला अग्निवीरों की भर्ती का फैसला किया है।

ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक भवन निर्माण संघर्ष समिति का गठन

बिजनौर। वर्ष 2011 से ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक भवन का निर्माण न होने से पूर्व सैनिकों में रोष है। इसी को लेकर शासन प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक भवन निर्माण संघर्ष समिति का गठन किया गया। अब समिति इस बेहद महत्वपूर्ण मामले में संबंधित अधिकारियों से वार्ता करेगी।

बताया गया है कि बिजनौर में ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक भवन का निर्माण किया जाना है। सेना मुख्यालय की ओर से प्रशासनिक विभाग स्टेशन हेड क्वार्टर मेरठ को भूमि का आवंटन नहीं हो पाया है। इसी मामले को लेकर काकरान वाटिका बिजनौर में पूर्व सैनिकों की एक बैठक हुई। बैठक में सर्वसम्मति से ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक भवन निर्माण संघर्ष समिति का गठन किया गया। बैठक की अध्यक्षता पूर्व सैनिक डीपीएस रावत ने की जबकि संचालन अजय फौजी ने किया। संघर्ष समिति के संरक्षक डीपीएस रावत होंगे। पांच सदस्यों में पूर्व सैनिक अजय सिंह, पूर्व सैनिक कंवरपाल सिंह, पूर्व सैनिक हरविंदर सिंह, पूर्व सैनिक कृष्ण वीर सिंह शर्मा व पूर्व सैनिक हेमेंद्र पाल सिंह होंगे।

पंजाब में मिले 282 भारतीय सैनिकों के कंकाल

अमृतसर (एजेंसी)। पंजाब में अमृतसर के पास अजनाला में एक कुएं के भीतर भारतीय सैनिकों के कंकाल बरामद हुए हैं। पंजाब यूनिवर्सिटी में एन्थ्रोपोलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर जेएस सहरावत का कहना है कि ये कंकाल 282 भारतीय सैनिकों के हैं, जिनकी अंग्रेजों के खिलाफ 1857 में भारत के पहले स्वतंत्रता संग्राम के समय हत्या कर दी गई थी। ये कुआं एक धार्मिक संरचना के नीचे पाया गया था। उन्होंने आगे कहा, अध्ययन में पता चला है कि इन सैनिकों ने सूअर और गाय की चर्बी से बने कारतूसों के इस्तेमाल के खिलाफ विद्रोह किया था।

डॉक्टर जेएस सहरावत ने आगे बताया कि सिक्के, पदक, डीएनए अध्ययन, विश्लेषण, मानव विज्ञान, रेडियो-कार्बन डेटिंग, सभी एक ही ओर इशारा करते हैं कि ये भारतीय सैनिकों के कंकाल हैं। सबसे पहले अजनाला में 2014 में नर कंकाल मिले थे। तब भी अध्ययन में बताया गया था कि ऐसा हो सकता है कि ये भारतीय सैनिकों के कंकाल हों। हालांकि मई की शुरुआत में आई रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि हो सकता है कंकाल 1947 में हुए विभाजन के समय के हों। 28 अप्रैल को फ्रंटियर्स इन जेनेटिक्स नामक पत्रिका में प्रकाशित हुए अध्ययन के अनुसार, पुरुष 26वीं मूल बंगाल इन्फैंट्री बटालियन का हिस्सा थे, जिसमें मुख्य रूप से बंगाल, ओडिशा, बिहार और उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्सों के सैनिक शामिल थे।

जॉइंट स्टडी?
इस जॉइंट स्टडी को पंजाब यूनिवर्सिटी के एंथ्रोपोलॉजी विभाग, लखनऊ के बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पैलियो साइंस, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के जूलॉजी विभाग की साइटोजेनेटिक लैबोरेटरी, हैदराबाद के सीएसआईआर-सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलीक्यूलर बायोलॉजी और हैदराबाद के सेंटर फॉर डीएनए फिंगरप्रिंटिंग एंड डायगनॉस्टिक ने किया है। रिसर्च का नेतृत्व पंजाब यूनिवर्सिटी के एंथ्रोपोलॉजिस्ट जेएस सहरावत ने किया।

क्या हुआ था 2014 में?
सहरावत ने कहा कि इन सबकी शुरुआत 2014 में एक म्यूजियम लाइब्रेरी से हुई है। भारतीय रिसर्च स्कॉलर को एक सिविल सेवक की एक किताब मिली, जो 1857 में अमृतसर में तैनात था। किताब में पंजाब को लेकर जानकारी दी गई थी। किताब में 10 मई से 1858 में एफएच कूपर द्वारा दिल्ली के पतन तक के बारे में बताया गया है। इसी में उस जगह का उल्लेख किया गया है, जहां सैनिकों को मारकर सामूहिक रूप से दफन किया गया था। किताब में लिखा है कि ये जगह अजनाला (अमृतसर में) एक धार्मिक संरचना के नीचे है। सहरावत ने बताया, रिसर्चर खुद भी अजनाला से ही थे। वो अपने घर आए और प्रशासन को इस बात की जानकारी दी। तब किसी ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। लेकिन स्थानीय लोगों ने खुद खुदाई का काम किया। उन्हें वाकई में धार्मिक ढांचे के नीचे कुंआ मिला, जिसमें मानव कंकाल, सिक्के और मेडल थे।
 

होली पर पाकिस्तान से नहीं हुआ मिष्ठान का आदान प्रदान

जैसलमेर। पिछले दिनों भारतीय मिसाइल के गलती से पाकिस्तानी हवाई सीमा में फायर होने से दोनों देशों के बीच रिश्तों में कड़वाहट का असर होली के त्योहार पर भी देखने को मिला। इस बार इस त्योहार पर दोनों देशों की तरफ से होली की मिठाई का आदान-प्रदान नहीं हुआ। हालांकि इसको लेकर अभी तक कोई भी आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है लेकिन सूत्रों ने बताया कि इस बार होली के त्योहार पर दोनों देशों में मिठाई का आदान-प्रदान नहीं हुआ जबकि इस बार 26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर रिश्तों में मिठास थी लेकिन मिसाइल वाली घटना के बाद रिश्तों में इस कड़वाहट को देखा जा रहा है।

रिश्तों की कड़वाहट नहीं हुई होली पर दूर- सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान द्वारा मिसाइल की घटना को गलत तरीके से पेश किए जाने से भारत भी नाराज है। भारत द्वारा गलती स्वीकार किए जाने के बाद भी उस ओर से गलत बयानबाजी से भारत नाराज है। बताया ये भी जा रहा है कि भारत ने पाकिस्तान से बधाई और मिठाई लेने से इनकार किया है। बदले में भारत द्वारा जो मिठाई दी जाती है वह भी नहीं दी गई। दरअसल पुलवामा हमले के बाद से रिश्तों में आई तल्खी धीरे धीरे कम हुई थी तथा दीवाली से रिश्तों में मिठास आनी शुरू हुई थी। मगर कुछ दिन पहले गलती से सीमा पार जा गिरी मिसाइल कीं वजह से पाकिस्तान में पैदा हुई रिश्तों की कड़वाहट को होली पर दूर किया जाना था। मगर इस बार होली पर ये सब नहीं हो पाया।

मिसाइल गिरी थी पाकिस्तान के इलाके में- उल्लेखनीय है कि नौ मार्च को रूटीन मेंटेनेंस के दौरान तकनीकी खराबी के चलते एक मिसाइल दुर्घटनावश फायर हो गई थी। भारत सरकार ने इसे गंभीरता से लिया और उच्चस्तरीय कोर्ट ऑफ इंक्वायरी का आदेश दे दिया है। ये जानने में आया है कि मिसाइल पाकिस्तान के इलाके में गिरी थी।

DRDO ने 45 दिन में खड़ी कर दी 7 मंजिला इमारत

बेंगलुरु (एजेंसी)। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान (DRDO) ने कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में 45 दिन में ही 7 मंजिला इमारत बनाकर खड़ी कर दी है। इसका उद्घाटन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया। इस मौके पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई और डीआरडीओ चीफ जी सतीश रेड्डी भी मौजूद रहे।

इस बिल्डिंग का इस्तेमाल 5वीं पीढ़ी के एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के रिसर्च एंड डेवेलपमेंट फैसिलिटी के तौर पर किया जाएगा। बेंगलुरु स्थित एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट इस बिल्डिंग में एयरक्राफ्ट फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम के लिए एवियोनिक्स का विकास करेगा। रक्षा मंत्री के सामने इससे जुड़े प्रोजेक्ट्स का एक प्रेजेंटेशन भी दिया गया। एक अधिकारी ने बताया कि डीआरडीओ ने एडीई, बेंगलुरु में हाइब्रिड टेक्नोलॉजी के जरिए एक बहु-मंजिली बिल्डिंग का निर्माण रिकॉर्ड 45 दिन में पूरा किया। इस बिल्डिंग में एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) प्रोजेक्ट के तहत फाइटर जेट्स और एयरक्राफ्ट फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम (एफसीएस) के लिए एवियोनिक्स डेवलमेंट की सुविधा होगी।

छात्राओं ने सीखे जूडो कराटे के दांवपेंच

जूडो कराटे का प्रशिक्षण लेती छात्राएं

बिजनौर। नहटौर डिग्री पीजी कॉलेज की राष्ट्रीय सेवा योजना छात्रा इकाई का सात दिवसीय विशेष शिविर का चौथा दिन बालिका सुरक्षा एवं बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ दिवस के रूप में मनाया गया। शिविर का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ संजीव गौड़, कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती सीमा शर्मा द्वारा संयुक्त रुप से मां सरस्वती के सम्मुख पुष्प अर्पित कर किया गया।

ग्राम महमूदपुर भिक्का में आयोजित शिविर में छात्र-छात्राओं द्वारा इतनी शक्ति हमें देना दाता, मन का विश्वास कमजोर हो ना; वंदना सामूहिक रूप से प्रस्तुत की गई। इस अवसर पर छात्राओं को अपनी आत्मरक्षा करने के लिए ताइक्वांडो प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

नहटौर ताइक्वांडो एकेडमी के कोच चमन सैनी ने छात्राओं को ताइक्वांडो के विभिन्न स्टेप सिखाएं ताकि वे समय पर इसका प्रयोग अपनी आत्म सुरक्षा के लिए कर सकें। उन्होंने कहा कि बालिकाओं को सुरक्षित रहने के लिए जूडो कराटे सीखना आवश्यक है ताकि किसी भी विपरीत परिस्थितियों में अपनी आत्म सुरक्षा कर सकें। ताइक्वांडो इस दिशा में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। इसके अतिरिक्त बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के अंतर्गत रैली निकाल कर छात्राओं ने विभिन्न स्लोगनों के माध्यम से ग्राम वासियों को जागरूक किया। वर्तमान समय में बच्चों की कम होती संख्या गंभीर चिंता का विषय है इसकी तरफ हम सभी को आत्ममंथन करने की आवश्यकता है। सर्वप्रथम आवश्यकता बेटी को बचाने की है तथा इसके साथ ही हमें अपनी बेटियों को बेटों के बराबर ही शिक्षा भी दिलानी होगी ताकि वर्तमान समय में वह कदम से कदम मिलाकर प्रत्येक परिस्थिति का सामना कर सकें। इसी का संदेश देते हुए छात्राओं ने ग्राम वासियों को रैली के माध्यम से समझाया। इस अवसर पर कुमारी स्वाति, लवी, शिवानी, शिल्पी, मुस्कान, आंचल, निशा, अंशु, लक्ष्मी, निकिता, अर्शी, पूर्णिमा, दुर्गा, सना, महक, रितु, कविता, सायमा, संजना, प्रियंका, काजल, प्रिया, आकांक्षा, शगुन, मेघा आदि छात्राएं उपस्थित रहीं।

रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध का कारण?

देवेश प्रताप सिंह राठौर (AMJA)

रूस और यूक्रेन का विवाद इतना तूल क्यों पकड़ा, युद्ध जैसी स्थिति बनी और युद्ध शुरू हो गया। अमेरिका का इतिहास रहा है देशों को लड़ाना और राज्य करना। उसी का एक हिस्सा यूक्रेन अमेरिका के बहकावे में आ गया और आज पूरा विश्व तीसरे विश्वयुद्ध के मुंह में जाने को खड़ा है। इस बार अगर तीसरा विश्व युद्ध हुआ उसकी कल्पना नहीं कर सकते कौन बचेगा, कौन नहीं!…क्योंकि अमेरिका ने जापान पर परमाणु बम डाले थे। हिरोशिमा और नागासाकी शहर पर क्या स्थिति बनी? उसके बाद परमाणु बम के कार्यक्रम को रोकने के लिए प्रावधान बनाया गया। वही स्थिति फिर बन रही है।

यूक्रेन और रूस के बीच का लड़ाई का मुख्य कारण क्या है संक्षेप में जानते हैं। यूक्रेन पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंधों को बेहतर बनाने की कोशिशों में जुटा है, रूस को यह बात पसंद नहीं है। वह नहीं चाहता कि यूक्रेन पश्चिमी देशों से अच्छे संबंध रखे या नाटो का सदस्य बने। अमेरिका और ब्रिटेन समेत दुनिया के 30 देश इस संगठन के सदस्य हैं। नाटो का सदस्य होने का मतलब है कि अगर सगंठन के किसी भी देश पर कोई तीसरा देश हमला करता है तो सभी सदस्य एकजुट होकर उसका मुकाबला करेंगे। रूस का कहना है कि अगर नाटो की तरफ से यूक्रेन को मदद मिली तो उसका अंजाम सबको भुगतना होगा। यूक्रेन की राजधानी पर लगातार मिसाइलें दागी गईं। इनमें से एक मिसाइल कीव के बाहरी इलाके स्थित एक आवासीय बहुमंजिला इमारत की 16वीं और 21वीं मंजिल के बीच से गुजर गई और इमारत की दो मंजिलें आग से घिर गईं। हमले में कम से कम छह नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गए जबकि 80 को बचाकर निकाला गया। एक अन्य मिसाइल कीव को पानी की आपूर्ति करने वाले बांध को निशाना बनाकर दागी गई लेकिन यूक्रेन ने इसे हवा में ही मार गिराया। देश के इंफ्रास्ट्रक्चर मंत्री ने बताया कि अगर यह मिसाइल निशाने पर गिरती तो कीव के उपनगरों में बाढ़ आ जाती। वहीं, रूस के रक्षा प्रवक्ता इगोर कोनाशेंकोव ने फिर दावा किया रूसी मिसाइलें सिर्फ यूक्रेन के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर दागी जा रही हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आखिर इस विवाद की जड़ क्या है

यूक्रेन की सीमा पश्चिम में यूरोप और पूर्व में रूस से जुड़ी है। 1991 तक यूक्रेन पूर्ववर्ती सोवियत संघ का हिस्सा था। रूस और यूक्रेन के बीच तनाव नवंबर 2013 में तब शुरू हुआ जब यूक्रेन के तत्कालीन राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच का कीव में विरोध शुरू हुआ, जबकि उन्हें रूस का समर्थन था।

यानुकोविच को अमेरिका-ब्रिटेन समर्थित प्रदर्शनकारियों के विरोध के कारण फरवरी 2014 में देश छोड़कर भागना पड़ा।इससे खफा होकर रूस ने दक्षिणी यूक्रेन के क्रीमिया पर कब्जा कर लिया। इसके बाद वहां के अलगाववादियों को समर्थन दिया। इन अलगाववादियों ने पूर्वी यूक्रेन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया। वर्ष 2014 के बाद से रूस समर्थक अलगाववादियों और यूक्रेन की सेना के बीच डोनबास प्रांत में संघर्ष चल रहा था। इससे पहले जब 1991 में यूक्रेन सोवियत संघ से अलग हुआ था तब भी कई बार क्रीमिया को लेकर दोनों देशों में टकराव हुआ। 2014 के बाद रूस व यूक्रेन में लगातार तनाव व टकराव को रोकने व शांति कायम कराने के लिए पश्चिमी देशों ने पहल की। फ्रांस और जर्मनी ने 2015 में बेलारूस की राजधानी मिन्स्क में दोनों के बीच शांति व संघर्ष विराम का समझौता कराया। 

हाल ही में यूक्रेन ने नाटो से करीबी व दोस्ती गांठना शुरू किया। यूक्रेन के नाटो से अच्छे रिश्ते हैं। 1949 में तत्कालीन सोवियत संघ से निपटने के लिए नाटो यानी ‘उत्तर अटलांटिक संधि संगठन’ बनाया गया था। यूक्रेन की नाटो से करीबी रूस को  नागवार गुजरने लगी। अमेरिका और ब्रिटेन समेत दुनिया के 30 देश नाटो के सदस्य हैं। यदि कोई देश किसी तीसरे देश पर हमला करता है तो नाटो के सभी सदस्य देश एकजुट होकर उसका मुकाबला करते हैं। रूस चाहता है कि नाटो अपना विस्तार न करे। राष्ट्रपति पुतिन इसी मांग को लेकर यूक्रेन व पश्चिमी देशों पर दबाव डाल रहे थे।आखिरकार रूस ने अमेरिका व अन्य देशों की पाबंदियों की परवाह किए बगैर यूक्रेन पर हमला बोल दिया। अब तक तो नाटो, अमेरिका व किसी अन्य देश ने यूक्रेन के समर्थन में जंग में कूदने का एलान नहीं किया है। वे यूक्रेन की अपरोक्ष मदद कर रहे हैं, ऐसे में  कहना मुश्किल है कि यह जंग क्या मोड़ लेगी। यदि यूरोप के देशों या अमेरिका ने रूस के खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई की तो समूची दुनिया के लिए मुसीबत पैदा हो सकती है। यूक्रेन को अमेरिका से दूरी बनानी होगी, नाटो के संगठन से हटना पड़ेगा; तभी रूस बातचीत करने में रुचि रखेगा ऐसा मेरा मानना है।

यूक्रेन पर हमले के विरूद्ध रूस में ही प्रदर्शन

यूक्रेन पर हमले के विरूद्ध रूस में ही प्रदर्शन प्रारंभ। यह कार्य रूस के साथ–साथ पूरी दुनिया में होना चाहिए। जनता को युद्ध का विरोध करना चाहिए।

अशोक मधुप

यूक्रेन पर हमला करने के लिए रूस की विश्व में आलोचना हो रही है। जगह−जगह प्रदर्शन हो रहे हैं। कहा जा रहा है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने अपने अहम के लिए दुनिया को युद्ध में धकेल दिया। यह भी खबर है कि रूस के राष्ट्रपति पुतिन हर हालात में यूक्रेन पर कब्जा चाहतें हैं। इसके लिए वह अपने 50 हजार सैनिक की बलि देने के लिए भी तैयार हैं। ऐसे हालात में रूस से ही अच्छी खबर आई है। वहां के नागरिक युद्ध का विरोध कर रहे हैं। यह कार्य रूस के साथ–साथ पूरी दुनिया में होना चाहिए। जनता को युद्ध का विरोध करना चाहिए।

यूक्रेन पर हमले के विरोध में रूस में लोगों का युद्ध के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। रूस की राजधानी मॉस्को, सेंट पीटर्सबर्ग और अन्य शहरों में शनिवार को लोग सड़क पर उतर आए और नारेबाजी की। पुलिस ने 460 लोगों को हिरासत में लिया। इसमें मॉस्को के 200 से अधिक लोग शामिल हैं।

रूस में यूक्रेन पर हमले की निंदा करने वाले ओपन लेटर भी जारी किए गए। इसमें 6,000 से अधिक मेडिकल स्टाफ, 3400 से अधिक इंजीनियरों और 500 टीचर्स ने साइन किए हैं। इसके अलावा पत्रकारों, लोकल बॉडी मेंबर्स और सेलिब्रिटिज ने भी ऐसे ही पिटीशन पर साइन किए हैं। यूक्रेन पर हमले को रोकने के लिए गुरुवार को एक ऑनलाइन पिटीशन शुरू की गई। इस पर शनिवार शाम तक 7,80,000 से अधिक लोगों ने साइन कर दिए हैं। माना जा रहा है कि यह बीते कुछ सालों में रूस में सबसे अधिक समर्थित ऑनलाइन याचिकाओं में से एक है।

रूस के अलावा जापान, हंगरी, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों में लोग यूक्रेन पर हमले की कड़ी निंदा कर रहे हैं। लोग ‘युद्ध नहीं चाहिए’ के नारे लिखे पोस्टर लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से इस युद्ध को रोकने की मांग कर रहे हैं। रूसी पुलिस ने दर्जनों शहरों में युद्ध के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले 1,700 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है।

ये भी सूचना है कि रूस की कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद युद्ध के खिलाफ हैं। कम्युनिस्ट पार्टी के दो सांसदों ने भी यूक्रेन पर हमले की निंदा की है। यह वही सांसद हैं, जिन्होंने कुछ दिन पहले पूर्वी यूक्रेन में दो अलगाववादी क्षेत्रों की स्वतंत्रता को मान्यता देने के लिए मतदान किया था। सांसद ओलेग स्मोलिन ने कहा कि जब हमला शुरू हुआ तो वह हैरान थे, क्योंकि राजनीति में सैन्य बल का इस्तेमाल अंतिम उपाय के रूप में किया जाना चाहिए। दूसरे सांसद मिखाइल मतवेव ने कहा कि युद्ध को तुरंत रोक दिया जाना चाहिए।

वरिष्ठ पत्रकार अशोक मधुप

उधर यूक्रेन से आ रही खबर अच्छी नहीं हैं। रूसी सेना सैनिक प्रतिष्ठान के अलावा सिविलियन पर भी हमले कर रही है। शहरों में घुसे रूसी सैनिक लूटपाट कर रहे हैं। खार्किव शहर पर कब्जा करने के बाद रूसी सैनिकों ने एक बैंक लूट लिया। एटीएम लूटे जा रहे हैं। सैनिक एक डिपार्टमेंटल स्टोर में घुसकर सामान भी उठाते नजर आए। यूक्रेन का दावा है कि अब तक रूसी हमले में 198 लोगों की जान जा चुकी है। इसमें 33 बच्चे भी शामिल हैं। इसके अलावा 1,115 लोग घायल हो गए हैं। यूक्रेन के हालात दिन पर दिन खराब हो रहे हैं। खाने− पीने का सामान कम पड़ गया है। रूसी हमले के बाद कीव, खार्किव, मेलिटोपोल जैसे बड़े शहरों में हर जगह तबाही दीख रही है। मिसाइल हमलों से इमारतें बर्बाद हो गई हैं। लोग खाने−पीने के सामान को तरस रहे हैं। कई जगह बच्चों से लेकर बड़े भी डर और दहशत की वजह से रोते देखे जा सकते हैं। लाखों लोग अपना शहर, देश छोड़कर बाहर जा रहे हैं। प्रत्येक व्यक्ति को अपने और अपने परिवार की चिंता है। वह जल्दी से जल्दी सुरक्षित स्थान पर पंहुच जाना चाहतें हैं। संयुक्त राष्ट्र के एक अधिकारी ने बताया कि अब तक 1.50 लाख से ज्यादा यूक्रेनी शरणार्थी पोलैंड, मोल्दोवा और रोमानिया पहुंच चुके हैं।

इस युद्ध के विरोध में रूस में जो हो रहा है, वह पूरी दुनिया में होना चाहिए। शांति स्थापना के लिए बनी एजेंसी और संगठन जब असफल हो जाएं तो जनता को इसके लिए उठना चाहिए। पिछले कुछ समय से लग रहा है कि दुनिया में अमन−शांति कायम रखने के लिए बना संयुक्त राष्ट्र संगठन अपनी महत्ता खो चुका है। वीटो पावर प्राप्त पांचों देश की दंबगई के आगे इसकी महत्ता खत्म हो गई है। ऐसे में पूरे विश्व को शांति स्थापना के लिए किसी नए संगठन को बनाने के बारे में सोचना होगा। इसके लिए आवाज बुलंद करनी होगी। आंदोलन करने होंगे। जनमत बनाना होगा।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

रूस के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय न्यायालय पहुंचा यूक्रेन

नई दिल्ली (एजेंसी)। यूक्रेन ने रूस के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) का दरवाजा खटखटाया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने रूस पर युद्ध के बहाने मासूम नागरिकों के नरसंहार का आरोप लगाया है। याचिका में रूस को सैन्य कार्रवाई रोकने का आदेश और सजा देने की मांग की गई है।

गौरतलब है कि यूक्रेन पर रूस के हमले बेकाबू होते जा रहे हैं। रूसी हमलों में अब तक सैकड़ों नागरिकों के मारे जाने की खबर है। उधर, रूस के सेंट्रल बैंक पर अमेरिका, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन ने प्रतिबंध लगा दिया है। जर्मनी समेत कई यूरोपीय देशों ने भी रूसी विमानों के लिए अपने एयरस्पेस बंद कर दिए हैं।

इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने बड़ा एलान करते हुए कहा कि उनकी तरफ से अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) में रूस के खिलाफ याचिका डाली गई है। यूक्रेन ने आरोप लगाया है कि रूस ने युद्ध के बहाने मासूम नागरिकों के खिलाफ नरसंहार किया है। यूक्रेन ने रूस को सैन्य कार्रवाई रोकने का आदेश और सजा देने की मांग उठाई है। बताया गया है कि रूस के खिलाफ इस याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई हो सकती है।

यूक्रेन के राष्ट्रपति ने दी मोदी को ताजा हालात की जानकारी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलडोमेर जेलेंस्‍की के साथ बात की और वहां मौजूद छात्रों सहित भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और संरक्षा के प्रति भारत की गहरी चिंता से भी अवगत कराया।

राष्ट्रपति जेलेंस्की ने प्रधानमंत्री को यूक्रेन में जारी संघर्ष की स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी दी। प्रधानमंत्री ने जारी संघर्ष के कारण लोगों की मौत और सम्पत्ति के नुकसान पर गहरा दु:ख व्यक्त किया। उन्होंने हिंसा की तत्काल समाप्ति और संवाद को फिर से शुरू करने के अपने आह्वान को दोहराया तथा शांति प्रयासों में किसी भी तरह का योगदान देने की भारत की इच्छा व्यक्त की।

प्रधानमंत्री ने यूक्रेन में मौजूद छात्रों सहित भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और संरक्षा के प्रति  भारत की गहरी चिंता से भी अवगत कराया। उन्होंने भारतीय नागरिकों को तेजी से और सुरक्षित रूप से निकालने के लिए यूक्रेनी अधिकारियों द्वारा सुविधा देने की मांग की।

पुलवामा कांड की बरसी: अर्धसैनिकों को शहीद का दर्जा दे सरकार

अटेवा nmops की मांग अर्धसैनिकों को शहीद का दर्जा दे एवं पुरानी पेंशन बहाली की जाए- विजय बन्धु

लखनऊ। आज 14 फरवरी को पुलवामा शहीदों की बरसी पर पूरा देश उन अमर शहीदों को नम आँखों से श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। ये हमारे ऐसे अर्द्धसैनिक बल के जवान हैं, जिनके बलिदान के बाद हम उन्हें शहीद कहते हैं लेकिन हमारी सरकार उन्हें शहीद का दर्जा नहीं देती है। पुरानी पेंशन बहाली मंच अटेवा/NMOPS के द्वारा पुलवामा शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित किया जा रहा है तथा आज 14 फरवरी को NMOPS के द्वारा ट्विटर, इंस्टाग्राम, फेसबुक, व्हाट्सएप के माध्यम से कैम्पेनिंग की जा रही है कि अर्द्धसैनिक बल के जवानों को शहीद का दर्जा मिले और उनकी पुरानी पेंशन बहाल की जाए। NMOPS के राष्ट्रीय अध्यक्ष व अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बन्धु ने पुलवामा शहीदों को नम आँखों से श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए देश के प्रधानमंत्री से मांग किया कि पुलवामा शहीदों को शहीद का दर्जा दिया जाए। साथ ही अर्द्धसैनिक बल के जवानों को पुरानी पेंशन देकर राष्ट्रवाद के राष्ट्रधर्म का पालन किया जाए। बंधुजी ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा कि जिन अर्द्धसैनिक बल के कारण हम और हमारा देश सुरक्षित रहते हैं यदि उन्हें हम शहीद का दर्जा न दे पायें और न उन्हें पुरानी पेंशन दे पायें तो ये कौन सा राष्ट्रवाद है?

अटेवा के प्रदेश महामंत्री नीरजपति त्रिपाठी ने कहा कि देश व प्रदेश की वर्तमान सरकार तानाशाह हो चुकी हैं। उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि जिन शिक्षक, कर्मचारी और अर्धसैनिक बल के सहारे पूरा देश विकास के रास्ते पर है और सुरक्षित है, उन्हीं के हक को छीनकर वर्तमान सरकार पूंजीपतियों के हाथ में सौंपने का कार्य कर रही है। अटेवा के प्रदेश मीडिया प्रभारी राजेश कुमार ने कहा कि आज अटेवा ने पुलवामा शहीदों एवं अर्द्धसैनिक बल के जवानों को न्याय दिलाने के लिए सोशल मीडिया ट्विटर, इंस्टाग्राम, फेसबुक, व्हाट्सएप पर एक अभियान के तहत कैम्पेनिंग किया और उनके हक के लिए आवाज उठाई।

सरकारी अधिकारियों के व्हाट्सएप, टेलीग्राम पर बैन

नई दिल्ली (एजेंसी)। राष्ट्रीय संचार सुरक्षा नीति के दिशा-निर्देशों और अधिकारियों द्वारा सरकार के निर्देशों का बड़े पैमाने पर उल्लंघन सूचनाओं के लीक होने के बाद खुफिया एजेंसियों ने संचार को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नए निर्देश में सभी सरकारी अधिकारियों को गोपनीय जानकारी साझा करने के लिए व्हाट्सएप, टेलीग्राम जैसे एप्स का इस्तेमाल करने से मना किया गया है।

whatsapp telegram and signal

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक खुफिया एजेंसियों के निर्देश में कहा गया है कि व्हाट्सएप-टेलीग्राम जैसे एप्स पर गोपनीय जानकारी शेयर करना खतरे से खाली नहीं है, क्योंकि निजी कंपनियां डाटा को अपने सर्वर पर स्टोर करती हैं, जो कि देश के बाहर स्थित हैं। इन डाटा का गलत इस्तेमाल भी किया जा सकता है। वीडियो कांफ्रेंसिंग पर मीटिंग करने और घर से काम करने वाले अधिकारियों के लिए भी निर्देश दिए गए हैं।

सभी मंत्रालयों को इस निर्देश को तत्काल प्रभाव से लागू करने के लिए कहा गया है। एजेंसियों ने कहा है कि मीटिंग में किसी भी तरह की स्मार्ट डिवाइस जैसे- एपल सिरी, अमेजन एलेक्सा, गूगल असिस्टेंट आदि का इस्तेमाल ना हो। रिपोर्ट में कहा गया है कि कई अधिकारी अपने फोन में जरूरी दस्तावेज को स्कैन करके रखते हैं और फिर उसे तमाम तरह के एप्स के जरिए दूसरों के साथ साझा करते हैं, जो कि सुरक्षित नहीं है।

सभी मंत्रालयों को भेजे गए नए निर्देश में कहा गया है कि मीटिंग के दौरान अधिकारी अपने स्मार्टफोन और स्मार्टवॉच को कमरे के बाहर रखें। इसके अलावा कार्यालयों में अमेजॉन इको, एपल होमपॉड, गूगल होम जैसे स्मार्ट डिवाइस के इस्तेमाल को लेकर भी मनाही की गई है। घर के नेटवर्क के जरिए किसी जरूरी दस्तावेज को भेजने से भी मना किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक नए निर्देश में किसी भी जगह वर्चुअल मीटिंग करने से मना किया गया है। निर्देश में कहा गया है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए थर्ड पार्टी एप के बजाय सभी अधिकारियों और मंत्रालयों को भारत सरकार के वर्चुअल सेटअप का इस्तेमाल करना चाहिए, जिसे सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस कंप्यूटिंग (सी-डैक), नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) ने तैयार किए हैं।

भारत रक्षा मंच ने की श्रद्धांजलि अर्पित

लखनऊ। भारत रक्षा मंच के पूर्णकालिक विस्तारक आशीष बाजपेई के द्वारा मंगलम ग्रांड महर्षि विद्या मंदिर आईआईएम रोड पर विनम्र श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत, उनकी धर्मपत्नी मधुलिका रावत एवं अन्य वीरगति को प्राप्त करने वाले वीर सैनिकों के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित किया गया।

श्रद्धांजलि सभा में समाज के विभिन्न वर्गों में कार्य करने वाले, हिंदुत्व राष्ट्र, सनातन धर्म के प्रति आस्था रखने वाले  राष्ट्र भक्तों ने वीरगति को प्राप्त समस्त आत्माओं को ईश्वर से अपने चरणों में जगह देने के साथ ही शोक संतृप्त परिजनों को दु:ख सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की। कार्यक्रम में वरिष्ठ समाजसेवी उत्तमा सिंह ठाकुर, हिंदुत्व पुरोधा भोपाल सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, भारत रक्षा मंच के वरिष्ठ कार्यकर्ता सहयोगी पहलाद शुक्ला, विनोद कुमार अवस्थी, नीरज उपाध्याय, कौशल कुमार सिंह, अनिल सिंह, संजय सिंह, अनिल मिश्रा, अनिल शुक्ला, आदित्य साहू, अरुण त्रिपाठी, दीपक सिंह व अन्य कार्यकर्ता,  पदाधिकारी बंधु एवं सहयोगी बंधु रहे मौजूद रहे।

हेलीकॉप्टर क्रैश के बाद जिंदा थे सीडीएस जनरल बिपिन रावत

नई दिल्ली (एजेंसी)। तमिलनाडु के कुन्नूर में हुए हेलीकॉप्टर क्रैश के बाद सीडीएस जनरल बिपिन रावत जिंदा थे और उन्होंने धीमी आवाज में अपना नाम बताया था। यह दावा चॉपर के बिखरे पड़े मलबे के पास सबसे पहले पहुंचे राहत और बचाव दल में शामिल एक शख्स ने किया है। टीम में शामिल एनसी मुरली नाम के इस बचावकर्मी ने बताया, ‘हमने 2 लोगों को जिंदा बचाया, जिनमें से एक सीडीएस बिपिन रावत थे। उनकी मौत अस्पताल जाते वक्त रास्ते में हुई। हम उस वक्त जिंदा बचाए गए दूसरे शख्स की पहचान नहीं कर सके।

बचावकर्मी के अनुसार सीडीएस जनरल रावत के शरीर के निचले हिस्से बुरी तरह जल गये थे। उन्हें एक बेडशीट में लपेट कर एंबुलेंस में ले जाया गया था। जलते विमान के मलबे को बुझाने के लिए फायर सर्विस इंजन को वहां तक ले जाने के लिए सड़क नहीं थी। वो आसपास के घरों और नदियों से पानी लाकर इस आग को बुझाने की कोशिश कर रहे थे। यह ऑपरेशन काफी मुश्किल था। दुर्घटनास्थल के पास पेड़ भी थे। मुश्किल परिस्थितियों की वजह से बचाव कार्यों में देरी हो रही थी। बचावकर्मियों को 12 लोगों की डेड बॉडी मिली, जबकि 2 लोगों को जिंदा बचाया गया था। जिंदा बचे दोनों लोग बुरी तरह झुलसे हुए थे। इनमें से दूसरे शख्स की पहचान ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह के तौर पर की गई। भारतीय वायुसेना बचाव दल को हेलिकॉप्टर के खंडित हो चुके हिस्सों के बारे में लगातार गाइड कर रही थी। हादसे के स्थान से करीब 100 मीटर की दूरी पर काटेरी गांव में रहने वाली पोथम पोन्नम ने चॉपर के क्रैश होने से पहले उसके गुजरने की आवाज सुनी थी। उन्होंने बताया कि कुछ ही समय बाद एक जोरदार धमाका हुआ और पता चला कि हेलिकॉप्टर क्रैश हो चुका है। कटेरी के रहने वाले लोगों ने जिले के अधिकारियों को खबर दी थी, जिसके बाद उनके इलाके की बिजली तुरंत काट दी गई थी। हालांकि, इन लोगों को घटनास्थल पर जाने से पुलिस ने रोक दिया था। 

झांसी में बनेंगे टैंक रोधी मिसाइल व हल्के हेलीकाप्टर

लखनऊ (एजेंसी)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज बुंदेलखंड में किसानों-जवानों को तमाम बेशकीमती सौगातें देंगे। इनकी कुल लागत करीब 6600 करोड़ है। महोबा में वह चार बांधों को जोड़ने वाली अर्जुन सहायक परियोजना के साथ करीब 3263 करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण करेंगे। उसके बाद झांसी में डिफेन्स कॉरीडोर के पहले प्रोजेक्ट की आधारशिला रखेंगे। यहां टैंक रोधी मिसाइल व हल्के हेलीकाप्टर बनेंगे। यहीं वह मेगा सोलर पार्क समेत सबसे हल्का स्वदेशी हेलीकॉप्टर, वारफेयर सूट समेत तमाम सैन्य आयुध व उपकरण देंगे। इनकी कुल लागत 3414 करोड़ है।

रानी का किले भी जाएंगे मोदी-
झांसी में प्रधानमंत्री रानी लक्ष्मीबाई के जन्मदिवस समारोह में शामिल होने से पहले रानी झांसी का किला देखेंगे। अंग्रेजों से युद्ध के दौरान रानी जिस स्थान से घोड़े पर सवार होकर कूदी थीं, वह भी देखेंगे। किले के सबसे ऊंचे बुर्ज से वह शहर का नजारा लेंगे। मोदी जो तोहफे देने वाले हैं, उनमें से डिफेंस कॉरीडोर को हटा दें तो ज्यादातर पानी से संबंधित हैं। बुंदेलखंड के सातों जिले दशकों से जलसंकट ग्रस्त रहे हैं। यह योजनाएं 500 से ज्यादा गांवों, 10 लाख से ज्यादा किसानों को लाभान्वित करेंगी। इनमें ललितपुर का भावनी बांध, महोबा की अर्जुन सहायक परियोजना मुख्य हैं।

इतिहास दोहराने की कोशिश
विधानसभा चुनाव की दहलीज पर खड़े यूपी में चुनावी शंखनाद पहले ही हो चुका है। अब 19 सीटों वाले बुंदेलखंड में मोदी के ताबड़तोड़ दो कार्यक्रम हो रहे हैं। 2017 के विस चुनाव में भाजपा ने यहां की सभी 19 सीटें जीत ली थीं। पार्टी पर इस बार भी वही इतिहास दोहराने का दबाव है। पिछले चुनाव में बुंदेलखंड की दो सीटें महरौनी और राठ भाजपा ने करीब एक लाख वोटों से जीती थीं। दो अन्य सीटें उरई और ललितपुर क्रमश: 80 और 58 हजार से जीती थीं। इस इलाके में भाजपा कोई भी सीट 16 हजार से कम अंतर से नहीं जीती। पानी यहां सबसे बड़ी जरूरत है। जल-संकट दूर करने वाली अरबों की योजनाएं इसीलिए बड़ी तेजी से पूरी की गईं, जिनका लोकार्पण मोदी कल करने वाले हैं।

2014 से लगातार जीत रही भाजपा
6 दिसंबर 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद समाजवादी पार्टी और बसपा जैसे क्षेत्रीय राजनीतिक खिलाड़ियों ने बुंदेलखंड के राजनीतिक परिदृश्य पर कब्जा करने के लिए भाजपा को पछ़ाड़ दिया था, लेकिन 2014 में पार्टी ने जोरदार वापसी की, तब से भाजपा लगातार जीत हासिल कर रही है। बुंदेलखंड में गैर यादव ओबीसी और गैर जाटव दलितों की एक बड़ी आबादी है, जिन्होंने इन चुनाव में भाजपा को वोट दिया था। बुंदेलखंड में दलितों की आबादी लगभग 30 प्रतिशत और मुसलमानों की सात प्रतिशत आबादी है। 

बुंदेलखंड को मिलने वाले तोहफे
महोबा में 3263 करोड़ की योजनाएं
अर्जुन सहायक परियोजना: 2655 करोड़
रतौली बांध परियोजना: 54 करोड़
मझगवां-चिल्ली सिंचाई परियोजना: 18 करोड़
भावनी बांध परियोजना: 512 करोड़
पांच अन्य परियोजनाएं:24 करोड़
झांसी में 3414 करोड़ की सौगात
600 मेगावाट अल्ट्रामेगा सोलर पार्क: 3013 करोड़
झांसी डिफेंस कॉरिडोर: 400 करोड़
एकता पार्क:  ₹1.30 करोड़

डेढ़ घंटे झांसी में… प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार को महोबा में एक घंटे और झांसी में डेढ़ घंटे रहेंगे। वह 2:35 बजे महोबा पहुंचेंगे और शाम को करीब साढ़े छह बजे झांसी से उनकी वापसी होगी। प्रधानमंत्री खजुराहो एयरपोर्ट में उतरकर हेलीकाप्टर से महोबा पहुंचेंगे। महोबा हेलीपैड से पौने तीन बजे रैली स्थल पुलिस लाइन पहुंचेंगे जहां पर एक घंटे रहेंगे। महोबा से वह करीब चार बजे झांसी के लिए रवाना होंगे। महोबा में उनके कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, जलशक्ति मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह के अलावा प्रदेश सरकार के कई मंत्री रहेंगे।  प्रधानमंत्री 4:50 बजे झांसी पहुंचेंगे और यहां करीब डेढ़ घंटे रहेंगे। मुख्य कार्यक्रम के अलावा वह 15 मिनट झांसी का किला भी देखेंगे। झांसी से साढ़े छह बजे पीएम मोदी वापस होंगे। 

मौजूद रहेंगे-
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा राज्यमंत्री अजय भट्ट, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के अलावा चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत, थल सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल विवेक राम चौधरी और नौ सेनाध्यक्ष एडमिरल कर्मवीर सिंह भी झांसी पहुंचेंगे। झांसी में किले के मैदान में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय एमएसएमई राज्यमंत्री भानुप्रताप वर्मा, विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह, जिले के प्रभारी मंत्री रामनरेश अग्निहोत्री, श्रम एवं सेवायोजन राज्यमंत्री मनोहर लाल पंथ समेत झांसी, ललितपुर और जालौन जिले के विधायक, सांसद, जिला पंचायत अध्यक्ष समेत 750 लोग मौजूद रहेंगे।

अब होंगे नए तरह के युद्ध: सीमा पर नहीं, शहरों में होगी जंग


दुनिया के देश आधुनिक युद्धास्त्र बनाने में लगे हैं।परमाणु बम, हाइड्रोजन बम के आगे के विनाशक बम पर काम चल रहा है। सुपर सोनिक मिसाइल बन रही हैं, किंतु लगता है कि आधुनिक युद्ध इन सबसे अलग तरह के अस्त्र−शस्त्रों के लड़ा जाएगा। अलग तरह के युद्ध होंगे। आने वाले युद्ध सीमा पर नहीं, शहरों में लड़े जाएगे। घरों में लड़े जाएगे। गली–मुहल्लों में लड़े जाएंगे। अभी से हमें इसके लिए सोचना और तैयार होना होगा।
पुणे इंटरनेशनल सेंटर द्वारा आयोजित ‘पुणे डॉयलॉग’ में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने कहा कि भविष्य में खतरनाक जैविक हथियार दुनिया के लिए गंभीर परिणाम साबित हो सकता है। दुनिया के लिए किसी भी जानलेवा वायरस को हथियार बनाकर इस्तेमाल करना गंभीर बात है। एनएसए डोभाल ने अपने बयान में कोरोना वायरस का उदाहरण देते हुए जैविक हथियारों का मुद्दा उठाया। ‘आपदा एवं महामारी के युग में राष्ट्रीय सुरक्षा की तैयारियों ’ पर बोलते हुए अजीत डोभाल ने कहा कि आपदा और महामारी का खतरा किसी सीमा के अंदर तक सीमित नहीं रहता और उससे अकेले नहीं निपटा जा सकता। इससे होने वाले नुकसान को घटाने की जरूरत है।
अभी तक पूरी दुनिया इस खतरे से जूझ रही है कि परमाणु बम किसी आतंकवादी संगठन के हाथ न लग जाए। उनके हाथ में जाने से इसे किस तरह रोका जाएॽ उधर आतंकवादी नए तरह के हथियार प्रयोग कर रहे हैं। शिक्षा बढ़ी है तो सबका सोच बढ़ा है। दुनिया के सुरक्षा संगठन समाज का सुरक्षित माहौल देने का प्रयास कर रहे हैं।आंतकवादी घटनाएं कैसे रोकी जाएं, ययोजनाएं बना रहे हैं। आंतकवादी इनमें से निकलने के रास्ते खोज रहे हैं। वे नए−नए हथियार बना रहे हैं। अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सैंटर पर हमले से पहले कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था कि विमान को भी घातक हथियार के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। इसमें विमानों को बम की तरह इस्तेमाल किया गया। माचिस की तिल्ली आग जलाने के लिए काम आती है। बिजनौर में कुछ आंतकवादी इन माचिस की तिल्लियों का मसाला उतार कर उसे गैस के सिलेंडर में भर कर बम बनाते विस्फोट हो जाने से घायल हुए थे।
हम विज्ञान और कम्यूटर की ओर गए। हमारे युद्धास्त्र कम्यूटरीकृत हो रहे हैं। उधर शत्रु इस सिस्टम को हैक करने के उपाए खोज रहा है। लेजर बम बन रहे हैं। हो सकता है कि हैकर शस्त्रों के सिस्टम हैक करके उनका प्रयोग मानवता के विनाश के लिए कर बैठें। बनाने वालों के निर्दे कोड से बने बनाए शस्त्र हैकर के इशारे पर चलने लगें।
रोगों के निदान के लिए वैज्ञानिक वायरस पर खोज रहे हैं। उनके टीके बना रहे हैं। दवा विकसित कर रहे हैं, तो कुछ वैज्ञानिक इस वायरस को शस्त्र के रूप में प्रयोग कर रहे हैं।
साल 1763 में ब्रिटिश सेना ने अमेरिकियों पर चेचक के वायरस का इस्तेमाल हथियार की तरह किया। 1940 में जापान की वायुसेना ने चीन के एक क्षेत्र में बम के जरिये प्लेग फैलाया था। 1942 में जापान के 10 हजार सैनिक अपने ही जैविक हथियारों का शिकार हो गए थे। हाल ही के दिनों में आतंकी गतिविधियों के लिए जैविक हथियार के इस्तेमाल की बात सामने आई है। इससे हमें सचेत रहना होगा। सीमाओं की सुरक्षा के साथ इन जैविक शास्त्रों से निपटने के उपाए खोजने होंगे। चीन की लैब में विकसित हो रहा कोरोना का वायरस अगर लीक न होता तो आने वाले समय में उसके किस विरोधी देश में फैलता यह नहीं समझा जा सकता, क्योंकि आज चीन की एक–दो देश छोड़ पूरी दुनिया से लड़ाई है।
लगता है कि आधुनिक युद्ध कोरोना की तरह शहरों में, गलियों में और भीड वाली जगह में लड़ा जाएगा। किसी विषाक्त वाररस से हमें कारोना के बचाव की तरह जूझना होगा।
बुजुर्ग कहते आए हैं कि ईश्वर जो करता है, अच्छा करता है। हर मुसीबत में कोई संदेश, कोई भविष्य के लिए तैयारी होती है। ऐसा ही शायद कोरोना महामारी के बारे में माना और समझा जा सकता है। जब यह महामारी फैली तो इसके लिए पूरा विश्व तैयार नहीं था। इसके फैलने पर सब आश्चर्यचकित से हो गए किसी की समझ नहीं आया। आज डेढ़ साल से ज्यादा हो गया, इसकी दुष्ट छाया से हमें मुक्ति नहीं मिली।आंकड़ों के अनुसार इस दौरान पूरी दुनिया में 50 लाख से ज्यादा मौत हुईं हैं।
जब यह महामारी आई तो किसी को न इसके बारे में पता था, न ही इसके लिए कोई तैयार था। आज डेढ़ साल के समय में दुनिया ने इसके अनुरूप अपने को तैयार कर लिया। वैक्सीन बनाई ही नहीं, तेजी से लगाई भी जा रही है। ये सब जानते हैं कि कोराना अभी गया नहीं, फिर भी अधिकतर लोग लापरवाह हो गए हैं। इसके प्रति बरते जाने वाले सुरक्षा उपाए करने छोड़ दिए। हमने इसके साथ जीना सीखा लिया।
आज पूरी दुनिया कोरोना वायरस की मार झेल रही है। भविष्य के जैविक हथियारों के खिलाफ सुरक्षा रणनीति को लेकर अजीत डोभाल ने कहा कि देश को अब नई रणनीति बनाने की जरूरत है। चीन का नाम लिए बिना अजीत डोभाल ने कहा कि बायोलॉजिकल रिसर्च करना बेहद जरूरी है। लेकिन इसकी आड़ में इसका दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि ऐसी रणनीति बनाई जाए जो हमारे मकसद को पूरा करे और हमारा नुकसान कम से कम हो।
कोरोना से युद्ध के बाद देश चिकित्सा सुविधा का विस्तार कर रहा है। कोरोना की दूसरी लहर में आक्सीजन की मारामारी मची। आज हम जिला स्तर पर सरकारी अस्पताल में अक्सीजन बनाने के संयंत्र लगा चुके हैं। जिला स्तर तक मेडिकल कॉलेज बनाना शायद इसी रणनीति का भाग है। जगह –जगह आधुनिक अस्पताल बन रहे हैं। वैक्सीन विकास का काम भी इसी की कड़ी का एक हिस्सा है। प्रकृति के दोहन के दुष्परिणाम से होने वाली आपदाएं हमें झेलनी होंगी। उसके लिए तैयार होना होगा और काम करना होगा। चिकित्सा सुविधाएं गांव−गांव तक पहुंचानी होंगी। स्वास्थ्य वर्कर गांव–गांव तक तैयार करने होंगे। आपदा नियंत्रण के लिए जन चेतना पैदा करने के लिए गांव−गांव तक वालियंटर बनाने और उन्हें प्रशिक्षित करना होगा। हमला किस तरह का होगा, उसका रूप क्या होगा, नहीं कहा जा सकता। बस नए हालात और परिस्थिति के लिए हम अपने और अपने समाज को तैयार कर सकतें हैं।


अशोक मधुप (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

नए एयर मार्शल बने वीआर चौधरी, 30 को संभालेंगे कार्यभार

एयर मार्शल वीआर चौधरी होंगे नए एयरफोर्स चीफ, RKS भदौरिया की लेंगे जगह 

एयर मार्शल वीआर चौधरी होंगे नए एयरफोर्स चीफ, RKS भदौरिया की लेंगे जगह 

नई दिल्ली (एजेंसी)। वायुसेना के अगले सेना अध्यक्ष एयर मार्शल वीआर चौधरी होंगे और वह 30 सितंबर को कार्यभार संभालेंगे। उस दिन वर्तमान एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया सेवानिवृत्त हो जाएंगे। यह जानकारी रक्षा मंत्रालय की तरफ से दी गई है। भारत सरकार ने एयर मार्शल वीआर चौधरी को अगला वायुसेना प्रमुख बनाने का फैसला किया है। वीआर चौधरी इस वक्त वायु सेना के उप प्रमुख हैं। एयर मार्शल विवेक चौधरी को सैन्य पुरस्कार ‘अति विशिष्ट सेवा मेडल’ देकर सम्मानित किया जा चुका है। यह पुरस्कार ‘उत्तम युद्ध सेवा मेडल’ के बराबर है।


वेस्टर्न एयर कमांड के चीफ के तौर पर एयर मार्शल विवेक चौधरी की पोस्टिंग ऐसे समय पर हुई थी, जब पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर भारत और चीन के बीच सीमा पर काफी विवाद बढ़ गया था, साथ ही पाकिस्तान लगातार बॉर्डर पर अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा था।

एयर मार्शल विवेक राम चौधरी की नियुक्ति के बारे में जानकारी देते हुए, भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के प्रधान प्रवक्ता, ए भारत भूषण बाबू ने आज अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर कहा कि सरकार ने एयर मार्शल वीआर चौधरी, पीवीएसएम, एवीएसएम, वीएम को वर्तमान में वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ के रूप में अगले वायुसेनाध्यक्ष के रूप में नियुक्त करने का निर्णय लिया है।

वीआर चौधरी 1 अगस्त, 2020 से पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख थे। उन्हें एक लड़ाकू पायलट के रूप में 29 दिसंबर, 1982 को भारतीय वायुसेना के फाइटर स्ट्रीम में शामिल किया गया था और उन्होंने लगभग 39 वर्षों की सेवा की है। वीआर चौधरी के पास 3800 घंटे से अधिक के उड़ान का अनुभव है और वे विभिन्न प्रकार के लड़ाकू और प्रशिक्षक विमान उड़ाए हैं। 

समुद्र से दुश्मन देशों की मिसाइल पर नजर रखेगा भारत का ‘ध्रुव’

अब पाक-चीन की खैर नहीं! समुद्र से दुश्मन देशों की मिसाइल पर नजर रखेगा भारत का ‘ध्रुव’, जानें इसकी खासियतें

नई दिल्ली (एजेंसी)। समुद्र में भारत की ताकत और बढ़ने वाली है। भारत 10 सितंबर को पहला मिसाइल ट्रैकिंग शिप ‘ध्रुव’ लॉन्च करेगा। न्यूक्लियर और बैलेस्टिक मिसाइल को ट्रैक करने वाला ये भारत का पहला जहाज है। ध्रुव की लॉन्चिंग के साथ ही भारत इस तकनीक से लैस दुनिया का 5वां देश बन जाएगा। फिलहाल केवल अमेरिका, फ्रांस, रूस और चीन के पास ही ये तकनीक है। सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल विशाखापट्टनम में ‘ध्रुव’ को लॉन्च करेंगे। 

मिसाइल को ट्रैक करने वाले ये जहाज रडार और एंटीना से लैस होते हैं। इनका काम दुश्मन की मिसाइल और रॉकेट को ट्रैक करना होता है। ट्रैकिंग शिप की शुरुआत अमेरिका से हुई, जिसने द्वितीय विश्व युद्ध के बचे हुए जहाजों को ट्रैकिंग शिप में बदल दिया।

10 सितंबर को कमीशन होने वाले इस जहाज के जरिए 2 हजार किमी पर चारों ओर से नजर रखी जा सकती है. कई सार रडार से लैस इस जहाज के जरिए एक से अधिक टार्गेट पर नजर गड़ाई जा सकती है. जहाजों से निकलने वाले इलेक्ट्रोमैग्नेनिट रेडिएशन के जरिए ध्रुव उनकी सटीक लोकेशन बता सकता है.

‘डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइनजेशन’ (DRDO), ‘नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन’ (NTRO) और भारतीय नौसेना ने मिलकर ‘ध्रुव’ को तैयार किया है। ध्रुव को तैयार करने का काम जून 2014 में शुरू हुआ जो 2018 में पूरा हुआ और फिर 2019 से इसका समुद्र में परीक्षण किया जाने लगा।

सबसे उन्नत तकनीक से लैस- ध्रुव जहाज रडार टेक्नोलॉजी की सबसे उन्नत तकनीक ‘इलेक्ट्रिॉनिक स्‍कैन्‍ड अरे रडार्स’ (AESA) से लैस है। इसके जरिए दुश्मन की सैटेलाइट्स, मिसाइल की क्षमता और टार्गेट से उसकी दूरी जैसी चीजों का पता लगाया जा सकता है। ध्रुव परमाणु मिसाइल, बैलेस्टिक मिसाइल और जमीन आधारित सैटेलाइट्स को भी आसानी से ट्रैक कर सकता है।

ध्रुव जहाज भारत के लिए बेहद अहमियत वाला जहाज है. इंटर कॉन्टीनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल को ट्रैक करने के लिए ध्रुव जहाज काफी मायने रखता है. सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को इस तरह के कई जहाज तैयार करने की जरूरत है.

2 हजार किमी तक निगहबानी- 10 सितंबर को कमीशन होने वाले इस जहाज के जरिए 2 हजार किमी पर चारों ओर नजर रखी जा सकती है। कई रडार से लैस इस जहाज के जरिए एक से अधिक टार्गेट पर नजर गड़ाई जा सकती है। जहाजों से निकलने वाले इलेक्ट्रोमैग्नेनिट रेडिएशन के जरिए ध्रुव उनकी सटीक लोकेशन बता सकता है। ध्रुव जहाज के रडार डोम में X- बैंड रडार लगाए गए हैं। लंबी दूरी तक नजर बनाए रखने के लिए इसमें S-बैंड रडार लगाए गए हैं। इनके जरिए हाई रेजॉल्यूशन पर टार्गेट को देखना, जैमिंग से बचना और लंबी दूरी तक स्कैन करना मुमकिन है। वहीं, जहाज से चेतक जैसे मल्टीरोल हेलिकॉप्टर का भी संचालन हो सकता है।

बेहद खुफिया रहा प्रोजेक्ट- भारत ने ध्रुव प्रोजेक्ट को बेहद खुफिया रखा और इसे दुनिया की नजरों से बचाए रखा। इसका कोडनेम पहले VC-11184 रखा गया। इस नाम को विशाखापट्टनम में यार्ड नंबर के तौर पर दिया गया। मेक इन इंडिया इनीशिएटिव के तहत विशाखापट्टनम के एक बंद डोकयार्ड में ध्रुव को तैयार किया गया। ध्रुव जहाज भारत के लिए बेहद अहमियत वाला जहाज है। इंटर कॉन्टीनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल को ट्रैक करने के लिए ध्रुव जहाज काफी मायने रखता है। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को इस तरह के कई जहाज तैयार करने की जरूरत है।