गाने जो हिट थे हिट रहेंगे ! बिनाका गीतमाला और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल !!

गाने जो हिट थे हिट रहेंगे  ! बिनाका गीतमाला और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल !! साभार-अजय पौंडरिक

एक संगीत प्रेमी के रूप में हम बीनका गीतमाला में श्री अमीन सयानी द्वारा मापे गए गीतों की लोकप्रियता पर विश्वास करते हैं…।

साल 1953 में…

बिनाका गीतमाला हिंदी सिनेमा के शीर्ष फिल्मी गीतों का एक साप्ताहिक रेडियो काउंटडाउन शो था, जिसे लाखों हिंदी संगीत प्रेमियों ने सुना, जिसे 1953 से 1988 तक रेडियो सीलोन पर प्रसारित किया गया और फिर 1989 में ऑल इंडिया रेडियो नेटवर्क की विविध भारती सेवा में स्थानांतरित कर दिया गया। 1994 तक चला। यह भारतीय फिल्मी गीतों का पहला रेडियो काउंटडाउन शो था और इसके चलने के दौरान इसे भारत में सबसे लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम के रूप में उद्धृत किया गया है। इसे बिनाका द्वारा प्रायोजित किया गया था, जहां से इसे इसका नाम मिला। बिनाका गीतमाला, और इसके बाद के अवतारों का नाम सिबाका, सिबाका संगीतमाला, सिबाका गीतमाला, और कोलगेट सिबाका संगीतमाला के नाम पर रेडियो सीलोन पर और फिर विविध भारती पर 1954 से 1994 तक चला, जिसमें वार्षिक वर्ष के अंत की सूची 1954 से 1993 तक प्रसारित हुई।

बिनाका गीतमाला के वार्षिक प्रोग्राम में बजनेवाले  “फाइनल गीतों” की गिनती करें, तो 1953 से 1993 तक “फाइनल  गीतों ” की संख्या 40 वर्षों में 1259 हो जाती है

लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल          २४५  गाने 

शंकर-जयकिशन               १४४  गाने     

राहुल देव बर्मन                  १३३  गाने 

कल्याणजी-आनंदजी            ७५ गाने   

सचिन देव बर्मन                   ५५ गाने     

रवि                                  ४६ गाने  

बप्पी लाहिरी                       ४४ गाने 

नौशाद                             ३४  गाने                           

ओ  पी  नय्यर                    ३३  गाने 

राजेश रोशन                      २८  गाने

मदन मोहन                        २४ गाने 

रोशन                              १७ गाने 

सलिल  चौधरी                  १५  गाने 

AMIN SAYANI & PYARELAL (Laxmikant-Pyarelal)

बिनाका गीतमाला में लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के २४५”फाइनल गीतों” की वर्षवार सूची / स्थिति।

1963

लक्ष्मीकांत प्यारेलाल, जिन्होंने कुछ “पारसमणि” फिल्म के अविस्मरणीय संगीत के साथ धमाकेदार शुरुआत की. इस फिल्म से उनकी चार रचनाओं को बिनाका गीतमाला साप्ताहिक और दो गाने फाइनल में शामिल किया गया जो पायदान नंबर १५ और  पायदान नम्बर ६ पर बजे. बहोत ही बढियाँ शरुआत,लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के लिए.. 

नंबर 15   वो जब याद आया लता – रफ़ी.. “पारसमणि”

नंबर 06  हसता  हुआ नूरानी चेहरा, लता – कमल बारोट “पारसमणि”

1964

बिनाका गीतमाला में  वर्ष के अंत में 32 “फाइनल गीत” हैं। लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के  “हरिश्चंद्र तारामती” के कुछ बेहतरीन  गीत हैं. “दोस्ती” से लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल – मोहम्मद रफ़ी (३७९ गाने ) और  “मिस्टर एक्स इन बॉम्बे” से लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल – किशोर कुमार (४०२ गाने ) का लम्बा दौर चला.  “मिस्टर एक्स इन बॉम्बे” से लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल और आनंद बक्शी की रिकॉर्ड ब्रेकिंग पार्टनरशिप शुरू (३०२ फिल्म्स और १६८० गाने )

नंबर 30  मैं एक नन्हा सा .. लता .. “हरिश्चंद्र तारामती”

नंबर 26  राही मनावा .. रफ़ी ..”दोस्ती”

नंबर 21  चाहुंगा मैं तुझे..रफ़ी..”दोस्ती”

नंबर 06  मेरे महबूब क़यामत ..किशोर .. “मिस्टर एक्स इन बॉम्बे”

1965

बिनाका गीतमाला 1965 भले ही बॉलीवुड संगीत निर्देशकों के बीच धीरे-धीरे लेकिन लगातार बदलाव देख रहा हो, क्योंकि इस बार शीर्ष स्लॉट सहित अधिकांश स्लॉट पर कल्याणजी आनंदजी, लक्ष्मीकांत प्यारेलाल,       आर डी बर्मन जैसे नवागंतुकों का कब्जा था।

जैसा कि पहले के वर्षों में हुआ था, इस वर्ष भी भारत में एक फिल्मी गीत को पंथ का दर्जा ( cult status) प्राप्त हुआ। यह गीत था- संत ज्ञानेश्वर का “ज्योत से ज्योत जगाते ते चलो”।

नंबर 29  खुदा मुहब्बत ना होती..रफ़ी…”बॉक्सर”

नंबर 25  कोई जब रहा ना पाये..रफी..दोस्ती’

नंबर 24  नींद निगाहो की .. लता .. “लुटेरा”

नंबर 18  अजनबी तुम जाने…किशोर..हम सब उस्ताद है”

नंबर 04  ज्योत से ज्योत जगाते चलो … लता-मुकेश “संत ज्ञानेश्वर”

नंबर 02  चाहुंगा मैं तुझे … रफ़ी “दोस्ती”

1966

नंबर 26  दिन जवानी की चार यार ..किशोर .. “प्यार किए जा”

नंबर 24  गोर हाथों पर ना जुल्म..रफ़ी.”प्यार किए जा”

नंबर 20   पायल की झंकार रस्ते .. लता .. “मेरे लाल”

नंबर 14   ये आज कल के लडके..उषा “दिल्लगी”

1967

लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के संगीत निर्देशन में मिलन के गीतों ने 1967 में पूरे देश में धूम मचा दी और बिनाका गीतमाला कोई अपवाद नहीं था। एक और नवागंतुक, आर डी बर्मन, जिनका संगीत निर्देशक के रूप में करियर 1961 के बाद रुका हुआ था, ने अचानक अपने करियर को बड़े पैमाने पर आगे बढ़ते हुए पाया- “तीसरी मंजिल” में उनके संगीत के लिए धन्यवाद।

नंबर  33 ये कली जब त क..लता – महेंद्र “आए दिन बहार के”

नंबर  24 माँ मुझे अपने आँचल .. लता .. “छोटा भाई”

नंबर  23 मैं देखु  जिस और..लता..”अनीता”

नंबर  21 मेरा यार बड़ा शर्मिला .. रफी .. “मिलन की रात”

नंबर  17 मुबारक हो सबको..मुकेश..’मिलन’

नंबर 13 मेरे दुश्मन तू .. रफ़ी ..” आए दिन बहार के “

नंबर  07 ना बाबा ना बाबा..लता..अनीता”

नंबर  06 हम तुम युग युग .. लता-मुकेश .. “मिलन”

नंबर  01 सावन का महीना  ..लता-मुकेश .. “मिलन”

1968

नंबर  32 मस्त बहारों का मैं..रफ़ी..”फ़र्ज”

नंबर  24 छलकाए  जाम..रफ़ी..”मेरे हमदम मेरे दोस्त’

नंबर  22 बड़े मियां दीवाने..’शागिर्द’

नंबर  20 महबूब मेरे..लता-मुकेश..”पत्थर के सनम”

नंबर  16 मेरा नाम है चमेली .. लता .. “राजा और रैंक”

नंबर  14 चलो सजना .. लता .. “मेरे हमदम मेरे दोस्त”

नंबर  11 बड़दु क्या लाना..लता…”पत्थर के सनम”

नंबर  01 दिल बिल प्यार व्यार .. लता .. “शागिर्द”

1969

नंबर  31 वो कौन है .. लता-मुकेश … “अंजना”

नंबर  25 महबूबा महबूबा .. रफ़ी .. “साधु और शैतान”

नंबर  23 रेशम की डोरी..लता-रफ़ी..”साजन”

नंबर  22 रुक जा जरा … लता .. “इज्जत”

नंबर 19 आया सावन झूम के..लता-रफी..”आया सावन झूम के’

नंबर 18 बड़ी मस्तानी है..रफ़ी..”जीने की राह”

नंबर 16 दिल में क्या है..लता-रफ़ी. “जिगरी दोस्त”

नंबर 12 एक तेरा साथ.लता-रफ़ी.. “वापस”

नंबर 09 जे हम तुम चोरी से..लता-मुकेश.. “धरती कहे पुकार के”

नंबर 06 आ मेरे हमजोली आ..लता-रफी..’ जीने की राह’

नंबर 01 कैसे रहूँ चुप , .. लता .. “इन्तेकाम

1970

लगातार चौथे वर्ष, लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की रचना वर्ष के शीर्ष गीत के रूप में उभरी।

नंबर  28 हाय रे हाय निंद नहीं .. लता-रफी .. “हमजोली”

नंबर  18 झिल मिल सितारोंका .. लता-रफी .. “जीवन मृत्यु”

नंबर  16 है शुक्र के तू है लडका..रफ़ी..’हिम्मत’

नंबर  14 वो कौन है। लता-मुकेश .. “अंजना”

नंबर  12 छुप गए सारे..लता-रफ़ी..’दो रास्ते’

नंबर  11 शादी के लिए..रफ़ी..’देवी’

नंबर  09 शराफत छोड दी..लता, “शराफत”

नंबर  08 सा रे गा मा पा..लता-किशोर .. “अभिनेत्री”

नंबर  05 खिलोना जान कर..रफ़ी..खिलोना”

नंबर  01 बिंदिया चमकेगी..लता…”दो रास्ते

1971

नंबर  32 सोना लाई जा रे .. लता .. “मेरा गांव मेरा देश”

नंबर  31 जवानी ओ दीवानी तू ..किशोर .. “आन मिलो सजना”

नंबर  26 तारों ने सज के..मुकेश..जल बिन मछली नृत्य बिन बिजली”

नंबर  22 ओ मितवा ओ मितवा … लता .. “जल बिन मछलील नृत्य बिन बिजली”

नंबर  14 तुमको भी तो ..लता-किशोर .. “आप आए बहार आई”

नंबर  06 चल चल चल मेरे साथी..किशोर..’हाथी मेरे साथी’

नंबर  02 अच्छा तो हम चलते हैं..लता-किशोर .. “आन मिलो सजना”

1972

नंबर  33  मैंने देखा तूने देखा..लता.”दुश्मन’

नंबर  34 ना तू ज़मीन के लिए..रफ़ी..”दास्तान”

नंबर  29 एक प्यार का नगमा है, लता-मुकेश “शोर”

नंबर  28 रेशमा जवान हो गई..रफ़ी..’मॉम की गुड़िया’

नंबर  24 राम ओ राम ..मुकेश .. “एक बेचारा”

नंबर  23 दिल की बात दिल ही जाने..किशोर-लता..’रूप तेरा मस्ताना’

नंबर  20 शीश भारी गुलाब की … लता .. “जीत”

नंबर  16 मैं एक राजा हूं..रफी..उपहार’

नंबर  08 ये जीवन है..किशोर .. “पिया का घर”

नंबर  04 वादा तेरा वादा..किशोर..दुश्मन”

1973

नंबर  34 जरा सा उसे छुआ तो..लता..”शोर”

नंबर  32 झूठ बोले कौवा कटे..लता-शैलेंद्र सिंह..’बॉबी’

नंबर  29 आज मौसम बड़ा..रफ़ी..’लोफ़र’

नंबर  20 मेरे दिल में आज क्या है..किशोर..’दाग’

नंबर 16 धीरे धीरे बोल कोई .. लता-मुकेश .. “गोरा और काला”

नंबर 12 एबीसीडी छोडो .. लता .. “राजा जानी”

नंबर  07 अब चाहे मा रूठे .. लता-किशोर .. “दाग”

नंबर  02 और चाबी खो जाए .. लता-शैलेंद्र सिंह, “बॉबी”

1974

नंबर  32 बैठ जा बैठ गई..किशोर-लता..”अमीर गरीब”

नंबर  26 दाल रोटी खाओ ..किशोर-लता .. “ज्वार भाटा”

नंबर  25 गम का फसाना..किशोर..’मनचली”

नंबर  24 ओ मनचली कहां चली…किशोर..”मनचली”

नंबर  23 तू रु तू रु तेरा मेरा..किशोर..”ज्वर भाटा’

नंबर  22 शोर मच गया शोर..किशोर.. “बदला”

नंबर  12 मैं शायर तो नहीं..शैलेंद्र सिंह..”बॉबी”

नंबर  04 गड़ी बुला रही है..किशोर…”दोस्त”

नंबर  03 झूठ बोले कौवा कटे .. लता-शैलेंद्र सिंह। “बॉबी”

1975

नंबर  26 मैं जाट यमला पगला..रफ़ी..”प्रतिज्ञा”

नंबर  23 फौजी गया जब गांव मैं..किशोर..”आक्रमण’

नंबर  21 आएगी जरूर चिट्ठी..लता…”दुल्हन”

नंबर  20 जीजाजी जीजाजी..आशा-किशोर..”पोंगा पंडित”

नंबर 15 ये जो पब्लिक है..किशोर…”रोटी”

नंबर 13 कभी खोले ना ..किशोर ..”बिदाई”

नंबर 10 चल दरिया मैं डुब जाए..किशोर-लता.. “प्रेम कहानी”

नंबर 02 हाय ये मजबूरी .. लता .. “रोटी कपड़ा और मकान”

नंबर  01 महंगाई  मार गई .. लता-मुकेश-चंचल-जानीबाबू .. “रोटी कपड़ा और मकान”

1976

1963 के बाद पहली बार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के गाने पहली १० में नहीं आ रहे हैं..

नंबर  33 की गल है कोई नहीं .. लता-किशोर .. “जेन मैन”

नंबर  28 जीजाजी जीजाजी मेरी ने किया ..किशोर-आशा ..”पोंगा पंडित”

नंबर  26 कल की हसीन मुलकात .. लता-किशोर .. “चरस”

नंबर  25 आजा तेरी याद आई..लता-आनंद बक्सी-रफी..’चरस’

नंबर  24 मुझे दर्द रहता है..लता-मुकेश..दस नंबरी’

नंबर  22 जेन मैन जेन मैन..किशोर ..”जेन मैन”

नंबर 10 कहत कबीर सुनो..मुकेश..दस नंबरी’

1977

लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने पीक पीरियड के अपने दूसरे चरण में वापसी की।

नंबर  41 तैयब अली प्यार का दुश्मन..रफ़ी-मुकरी..’अमर अकबर एंथनी’

नंबर  34 आते जाते खूबसूरत..किशोर..अनुरोध’

नंबर  29 मेरी दिलरुबा ..किशोर ..”आस पास”

नंबर  24 ड्रीम गर्ल ड्रीम गर्ल किशोर ..’ड्रीम गर्ल’

नंबर  21 बुरे काम का बुरा..रफ़ी-शैलेंद्र सिंह, “चाचा भतीजा”

नंबर 18 यार दिलदार तुझे कैसा..आशा-किशोर..’छैला बाबू”

नंबर 17 तेरी मेरी शादी पंडित ना..आशा-किशोर..”दिलदार”

नंबर 11 अनहोनी को होनी  कर दे..महेंद्र-किशोर-शैलेंद्र.. “अमर अकबर एंथनी”

नंबर 06 सत्यम शिवम सुंदरम .. लता .. “सत्यं शिवम सुंदरम”

नंबर 05 आप के अनुरोध पे … किशोर ..”अनुरोध”

नंबर 03 ओ मेरी महबूबा .. रफ़ी .. “धर्मवीर”

नंबर 02 पर्दा है परदा .. रफी .. “अमर अकबर एंथनी”

1978

नंबर  33 अजी ठहरो जरा सोचो..किशोर, रफी, शैलेंद्र सिंह “परवरिश”

नंबर  28 सोमवार को हम मिले … किशोर, सुलक्षणा पंडित .. “अपनापन”

नंबर  26 हम प्रेमी प्रेम कराना  जाने..किशोर, रफी, शैलेंद्र सिंह “परवरिश”

नंबर  25 ये खिडकी जो बंद रहती है… रफ़ी..”मैं तुलसी तेरे आंगन की”

नंबर  24 चंचल शीतल निर्मल कोमल .. मुकेश .. “सत्यम शिवम सुंदरम”

नंबर  23 मैं तुलसी तेरे आंगन की .. लता .. “मैं तुलसी तेरे आंगन की”

नंबर  19 जब आती होगी याद मेरी..रफ़ी-सुलक्षणा पंडित..’फंसी’

नंबर  07 यशोमती मैय्या से .. लता, मननाडे .. “सत्यं शिवम सुंदरम”

नंबर 02 आदमी मुसाफिर है .. लता-रफी .. “अपनापन”

1979

नंबर  36 मन्नूभाई मोटर चली ..किशोर .. “फूल खिले है गुलशन गुलशन”

नंबर  32 डफ़लीवाले डफ़ली बजा ..लता-रफ़ी, “सरगम”

नंबर  26 चलो रे डोली उठाओ .. रफ़ी .. “जानी दुश्मन”

नंबर  20 मेरी दुश्मन है ये … रफी .. “मैं तुलसी तेरे आंगन की”

नंबर 16 मैं तेरे प्यार मैं पागल..किशोर, लता.. “प्रेम बंधन”

नंबर 15 ओ मेरी जान ..किशोर, अनुराधा .. “जानी दुश्मन”

नंबर 10 तेरे हाथो मैं पहचान के..आशा-रफ़ी..”जानी दुश्मन”

नंबर 06 मैं तुलसी तेरे आंगन की .. लट्टा .. “मैं तुलसी तेरे आंगन की”

नंबर 04 ना जाने कैसे..किशोर, रफ़ी, सुमन.. “बदलते रिश्ते”

1980

लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के ऊपर के तीन गाने शीर्ष स्थान पर. 

नंबर  32 बने चाहे  दुश्मन..किशोर-रफ़ी..’दोस्ताना’

नंबर  30 मार गई मुजे…किशोर-आशा..”जुदाई”

नंबर  23  परबत के हम पर..लता-रफ़ी..”सरगम”

नंबर  22 हम तो चले परदेस..रफ़ी..’सरगम’

नंबर  16 मैं तो बेघर हौं..आशा..”सुहाग”

नंबर 15 मैं सोला बार्स की ..लता-किशोर .. “कर्ज़”

नंबर 11 तेरी रब ने बना दी..रफ़ी, आशा, शैलेंद्र..’सुहाग’

नंबर 09 ऐ यार सुन यारी तेरी..रफ़ी-शैलेंद्र सिंग-आशा..’सुहाग’

नंबर 07 कोयल बोली..लता-रफ़ी..”सरगम”

नंबर 03 शीशा हो या दिल..लता। “आशा”

नंबर 02 ओम शांति ओम..किशोर .. “कर्ज़”

नंबर 01 डफलीवाले डफली बजा .. लता-रफी .. “सरगम”

1981

नंबर  32 हम बने तुम बने..लता-एसपीबी..’एक दूजे के लिए’

नंबर  30 मेरे नसीब मैं .. लता “नसीब”

नंबर  27 मेरे दोस्त किस्सा..रफ़ी..’दोस्ताना’

नंबर  26 लुई शमशा उई .. लता-नितिन मुकेश .. “क्रांति”

नंबर 16 चल चमेली .. लता-सुरेश वाडकर .. “क्रोधी”

नंबर 12 एक रास्ता दो रही..रफ़ी-किशोर..’राम बलराम’

नंबर 10 जॉन जॉनी जनार्दन..रफी, “नसीब”

नंबर  08 मेरे जीवन साथी ..एसपीबी-अनुर्धा .. “एक दूजे के लिए”

नंबर  07 मार्च गई मुजे..किशोर-आशा..’जुदाई’

नंबर  06 चना ज़ोर गरम..किशोर, रफ़ी, किशोर, एन मुकेश .. “क्रांति”

नंबर  05 तेरे मेरे बीच मैं..लता/एसपीबी..’एक दूजे के लिए’

नंबर  03 चल चल मेरे भाई .. रफ़ी, अमिताभ .. “नसीब”

नंबर  02 जिंदगी की ना टूटी लादी..लता-एन मुकेश..’क्रांति’

1982

नंबर  31 मेघा रे मेघा रे..लता-सुरेश वाडकर..”प्यासा सावन”

नंबर  29 मेरी किस्मत में तू नहीं शायद .. लता-सुरेश वाडकर “प्रेम रोग”

नंबर  28 मेरे दिलदार का बकपन..रफ़ी-किशोर..”दीदार-ए-यार’

नंबर  25 सारा दिन सत्ते हो..किशोर-आशा..’रास्ते प्यार के’

नंबर  21 मेरे महबूब तुझे सलाम..रफ़ी-आशा। ”बगावत”

नंबर  20 अपने अपने मियां पे..आशा..”अपना बना लो’

नंबर  18 खातून की खिदमत मैं…किशोर…”देश प्रेमी”

नंबर  13 छोड मजा हाट ..किशोर-आशा .. “फिफ्टी फिफ्टी”

नंबर  12 मैं तुम मैं समां…एसपीबी-आशा..”रास्ते प्यार के”

नंबर  10 मोहब्बत है क्या चीज़..लता-सुरेश..”प्रेम रोग”

नंबर  09 प्यार का वादा फिफ्टी फिफ्टी ..आशा-किशोर ..”फिफ्टी फिफ्टी”

नबर  07 है राजू है डैडी..राजेश्वरी-एसपीबी .. “एक ही भूल”

नंबर 05 मैं हूं प्रेम रोगी .. सुरेश वाडकर .. “प्रेम रोग”

1983

1963 के बाद से दूसरी बार, यह पाया गया कि पहले TEN में LP गाने गायब हैं।

नंबर 29 ये अंधा कानून है ..किशोर कुमार .. “अंधा कंतों”

नंबर 25 ज़िंदगी मौज उड़ने का नाम ..महेंद्र कपूर “अवतार”

नंबर 19 लिखानेवाले ने लिख डाले .. लता-सुरेश वाडकर .. “अर्पण”

नंबर 12 मेरी किस्मत मैं तू नहीं शायद। लता-सुरेश वाडकर “प्रेम रोग”

1984

नंबर 26 लंबी जुदाई .. रेशमा … “हीरो”

नंबर 21 बिच्छू बालक गया ..किशोर-आशा “इंकलाब”

नंबर 17 मुझे पीने का शंख नहीं .. शब्बीर-अनुराधा “कुली”

नंबर 11 डिंग डोंग ओ बेबी एक गाना गाओ .. मनहर उधास-अनुराधा पंडवाल .. “हीरो”

नंबर 10 प्यार करनेवाले कभी ..मनहर उधास- लता “हीरो”

नंबर  08 ऊई मार्गई डॉ बाबू..अलका दग्निक – शैलेंद्र सिंह “घर एक मंदिर”

नंबर  05 दोनो जवानी के मस्ती मैं .. शब्बीर – आशा .. “कुली”

नंबर 01 तू मेरा जानू है। अनुराधा-मन्हार … “हीरो”

1985

नंबर  32 मन क्यों बेहका .. लता-आशा .. “उत्सव”

नंबर  26 दिल बेकरार था दिल बेकरार है..अनुराधा-शब्बीर..’तेरी मेहरबानियां’

नंबर  18 तेरी मेहरबानियां..शब्बीर कुमार..’तेरी मेहरबानियां’

नंबर  15 जिंदगी हर कदम .. लता-शब्बीर ..”मेरी जंग”

नंबर  14 ज़िहाल-ए-मुश्किल .. लता-शब्बीर … “गुलाम”

नंबर  10 श्री देवी तू नहीं .किशोर कुमार… “सीराफोरश”

नंबर  09 तुम याद न आया करो..शब्बीर-लता..’ जीने नहीं दूंगा’

नंबर  05 चाह लाख तूफान आए..लता-शब्बीर..प्यार झुकता नहीं’

नंबर  02 तुमसे मिल के ना जाने क्यों .. शब्बीर-कविता “प्यार झुकता नहीं”

1986

एक बार फिर टॉप थ्री गाने लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के हैं

नंबर  38 ओ मिस दे दे किस ..सुरेश वाडेकर-शैलेंद्र सिघ … “लव 86”

नंबर  35 तू कल चला जाएगा…मोहम्मद अजीज-मन्हर..”नाम”

नंबर  34 बोल बेबी बोल रॉक-एन-रोल ..किशोर-एस जानकी .. “मेरी जंग”

नंबर  29 भला है बुरा है… अनुराधा..”नसीब अपना अपना”

नंबर  27 एक लड़की जिस्का नाम..मोहम्मद अजीज-कविता…”आग और शोला”

नंबर  26 अमीरों के शाम ..मोहम्मद अजीज…’नाम’..

नंबर  23 मायका पिया बुलावे .. सुरेश वाडकर-लता .. “सुर संगम”

नंबर  17 मन क्यों बेहका .. लता-आशा ..”उत्सव”

नंबर  15 प्यार किया है .. शब्बीर-कविता “प्यार किता है प्यार करें”

नंबर  12 चिचि आई है.. पंकज उहदेस “नाम”

नंबर  11 बहरों की रंगिनीयों ..शब्बीर .. “नसीब अपना अपाना”

नंबर  07 गोरी का साजन..एस जानकी-मोहम्मद अजीज..आखिरी रास्ता”

नंबर  05 जिंदगी हर कदम..लता-शब्बीर..’मेरी जंग’

नंबर  03 हर करम अपना करेंगे .. कविता-मोहम्मद अजीज .. “कर्म”

नंबर  02 दुनिया मैं कितना घुम है..मोहम्मद अजीज..’अमृत’

नंबर  01 यशोदा का नंदलाला … लता मंगेशकर … “संजोग”

1987

नंबर  26 ना तुमने किया ना मैंने किया … लता … “नचे मयूरी”

नंबर  24 राम राम बोल..शब्बीर-अलका-कविता..”हुकुमत”

नंबर  19 नाम सारे..मोहम्मद अजीज-लता… ”सिंदूर”

नंबर  14 हवा हवाई .. कविता .. “मिस्टर इंडिया”

नंबर  13 डी डी डीड फुटबॉल..कविता..मिस्टर इंडिया”

नंबर  11 कराटे है हम प्यार..किशोर-कविता..’मिस्टर इंडिया’

नंबर  08 अमीरों की शाम..मोहम्मद अजीज..’नाम’

नंबर  05 तूने बैचैन इतना किया..मोहम्मद अजीज..”नगीना”

नंबर  04 मैं तेरी दुशमन… लता….”नगीना”

नंबर  03 न जयो परदेश..कविता.”कर्मा”

नंबर  01 चिट्ठी  आई है .. पंकज उधास .. “नाम”

1988

नंबर  27 लोग जहां पर रहते हैं..सुरेश-मोहम्मद अजीज-कविता..प्यार का मंदिर’

नंबर  25 फूल गुलाब का … अनुराधा-मोहम्मद अजीज .. “कीवी हो तो ऐसी”

नंबर  22 मैंने ही एक गीत लिखा है… शब्बीर कुमार..”हमारा खांडन”

नंबर  17 पतज़ड़ सावन बसंत बहार..सुरेश वाडकर-लता, “सिंदूर”

नंबर  13 कह दो की तुम मेरी हो .. अनुराधा-अमित कुमार .. “तेज़ाब”

नंबर  12 जब प्यार किया..मोहम्मद अजीज-अनुराधा..’वतन के रखवाले’

नंबर  11 आज फिर तुम से प्यार आया है..अनुराधा-पंकज उहदेस “दयावान”

नंबर  09 एक दो तीन चार..अलका याज्ञनिक/अमित कुमार…”तेज़ाब”

नंबर  07 ऊँगली  मैं अंगुठी .. मोहम्मद अजीज-लता, “राम अवतार”

नंबर  02 तुझे इतना प्यार करेन..लता-शब्बीर,। ” ”कुदरत का कानून”

1989

नंबर 19 चाहे तू मेरी जान ले ले..जॉली मुखर्जी..”दयावान”

नंबर 18 दिल तेरा किसने तोड़ा..मोहम्मद अजीज..”दयावान”

नंबर 10 मुझसे तुमसे है बिल्ली का बच्चा … मनहर उधास-अनुराधा “राम लखन”

नंबर 08 सो गया ये जहान..नितिन मुकेश, अलका, शब्बीर “तेज़ाब”

नंबर 07 तेरे लखन ने बड़ा दुख..लता मंगेशकर..’राम लखन’

नंबर 06 कहदो के तुम हो .. अनुराधा-अमित कुमार .. “तेज़ाब”

नंबर 04 हम तुम्हारे इतन प्यार करेंगे .. अनुराधा-मोहम्मद अजीज … “बीस साल बाद”

नंबर 01 एक दो का चार..मोहम्मद अजीज.. “राम लखन”

1990

नंबर  25 तेरा बीमार  मेरा दिल..मोहम्मद अजीज-कविता।” चालबाज़ “

नंबर  21 कहना ना तुम ये किस से..सलमा आगा-मोहम्मद अजीज..”पति पत्नी और तवायफ”

नंबर 19 ना जाने कहां से आई है..अमित-कविता- “चलबाज़”

नंबर  05 जुम्मा चुम्मा दे दे… सुदेश भोंसले..”हम”

1991

नंबर 19 इमली का बूटा .. सुदेश भोंसले-मोहम्मद अजीज ..”सौदागर”

नंबर 15 कागज़ कलाम दावत .. मोहम्मद अजीज-शोआ जोशी .. “हम”

नंबर 11 जां तुम चाहो जहां ..अमित कुमार-अलका याज्ञनिक “नरसिंह”

नंबर 09 इलु इलु क्या है..मनहर-कविता.. “सौदागर”

नंबर 05 सौदागर सौदा कर..कविता-मन्हार-सुखविंदर सिंह। “सौदागर”

1992

नंबर  22 तू रूप की रानी ..अमित कुमार-कविता .. “कमरे की रानी चोरों का राजा”

नंबर  13 पी पी पिया .. अलका-उदित नारायण .. “प्रेम दीवाने”

नंबर  03 तू मेज़ कुबुल मैं तुझे कुबुल ..मोहम्मद अजीज-कविथा.. “खुदा गवाह”

1993

नंबर  23 मैं तेरा आशिक हूं .. रूप कुमार राठौड़  “गुमराह”

नंबर 16 नायक नहीं कहलनायक हूं मैं…विनोद राठौड़-कविता..”खलनायक”

नंबर  01 चोली के पिछे  क्या है … अलका याग्निक -इला अरुण “खलनायक”

1993 से 1998 के बाद कई गाने आए लेकिन फिर बिनाका गीतमाला बंद हो गई।

बिनाका गीतमाला के इतिहास में लक्ष्मीकांत प्यारेलाल सबसे सफल संगीत निर्देशक हैं

सोनम कपूर के घर से 1.41 करोड़ के गहने और नकदी चोरी

बॉलीवुड अभिनेत्री सोनम कपूर के घर हुई चोरी, 1.41 करोड़ के गहने और नकदी लेकर चोर फरार

नई दिल्ली (एजेंसी)। बॉलीवुड अभिनेत्री सोनम कपूर के घर से 1.41 करोड़ रुपए की ज्वेलरी व नकदी चोरी हो गए। सोनम कपूर की सास की तहरीर पर तुगलक रोड थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामला बेहद हाईप्रोफाइल होने की वजह से वरिष्ठ अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लेते हुए कई टीमों का गठन कर दिया है। घर में 25 नौकर, 9 केयर टेकर के अलावा चालक और माली व अन्य कर्मचारी भी काम करते हैं। सभी से पुलिस पूछताछ कर रही है।  

सोनम कपूर के घर चोरी: दो साल पहले चेक किए गए थे 1.41 करोड़ के गहने, अब 34  नौकरों पर शक की सुई

मामला हाइप्रोफाइल होने के कारण पुलिस ने अब तक इसे दबा रखा था। अभी यह संज्ञान में आया है। वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार सोनम कपूर की ससुराल 22 अमृता शेरगिल मार्ग पर है, लेकिन सोनम अपने पति आनंद आहुजा के साथ लंदन में रहती हैं। अमृता शेरगिल मार्ग पर बने इस घर में सोनम के ससुर हरीश आहूजा, सास प्रिया आहूजा और आनंद की दादी सरला आहूजा रहती हैं। क्राइम ब्रांच की टीम के अलावा एफएसएल की टीम को भी मामले में जोड़ा गया है। दिल्ली पुलिस के अनुसार पिछले दो साल में कई लोग काम छोड़ कर गए, और कई नए आए। कई सीसीटीवी फुटेज भी देखे गए हैं। उन लोगों की डिटेल भी जांची जा रही है, जो पिछले दिनों काम छोड़ कर चले गए।

ये है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार दरअसल चोरी की उक्त घटना पुरानी है। इस मामले में 23 फरवरी को दिल्ली के तुगलक रोड थाने में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। इससे पहले 22 फरवरी को सरला आहूजा ने अपने कैश और जूलरी के बैग को चैक किया, तो वह खाली था। अनुमान के मुताबिक, उसमें एक करोड़ 41 लाख रुपए मूल्य की जूलरी और कैश था। यह बैग करीब दो साल के बाद सरला आहूजा ने देखा था। घर में काफी ढूंढने के बाद भी जब बैग नहीं मिला तो पुलिस से शिकायत की गई।

द कश्मीर फाइल्स के बाद दूसरा धमाका लाल बहादुर शास्त्री; देखने के लिए हो जाएं तैयार…

कश्मीर फाइल्स के बाद दूसरा धमाका देखने के लिए हो जाओ तैयार…

लालबहादुर शास्त्री https://youtu.be/yq9TOW43TYs

लालबहादुर शास्त्री (जन्म: 2 अक्टूबर 1904 मुगलसराय (वाराणसी) : मृत्यु: 11 जनवरी 1966 ताशकन्द, सोवियत संघ रूस), भारत के दूसरे प्रधानमन्त्री थे। वह 9 जून 1964 से 11 जनवरी 1966 को अपनी मृत्यु तक लगभग अठारह महीने भारत के प्रधानमन्त्री रहे। इस प्रमुख पद पर उनका कार्यकाल अद्वितीय रहा। शास्त्री जी ने काशी विद्यापीठ से शास्त्री की उपाधि प्राप्त की भारत  की  स्वतन्त्रता के पश्चात शास्त्रीजी को उत्तर प्रदेश के संसदीय सचिव के रूप में नियुक्त किया गया था। गोविंद बल्लभ पंत के मन्त्रिमण्डल में उन्हें पुलिस एवं परिवहन मन्त्रालय सौंपा गया। परिवहन मन्त्री के कार्यकाल में उन्होंने प्रथम बार महिला संवाहकों (कण्डक्टर्स) की नियुक्ति की थी। पुलिस मंत्री होने के बाद उन्होंने भीड़ को नियन्त्रण में रखने के लिये लाठी की जगह पानी की बौछार का प्रयोग प्रारम्भ कराया। 1951 में, जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में वह अखिल भारत कांग्रेस कमेटी के महासचिव नियुक्त किये गये। उन्होंने 1952, 1957 व 1962 के चुनावों में कांग्रेस पार्टी को भारी बहुमत से जिताने के लिये बहुत परिश्रम किया।

साफ सुथरी छवि- जवाहरलाल नेहरू का उनके प्रधानमन्त्री के कार्यकाल के दौरान 27 मई, 1964 को देहावसान हो जाने के बाद साफ सुथरी छवि के कारण शास्त्रीजी को 1964 में देश का प्रधानमन्त्री बनाया गया। उन्होंने 9 जून 1964 को भारत के प्रधानमंत्री का पद भार ग्रहण किया। उनके शासनकाल में 1965 का भारत पाक युद्ध शुरू हो गया। इससे तीन वर्ष पूर्व चीन का युद्ध भारत हार चुका था। शास्त्रीजी ने अप्रत्याशित रूप से हुए इस युद्ध में नेहरू के मुकाबले राष्ट्र को उत्तम नेतृत्व प्रदान किया और पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी। इसकी कल्पना पाकिस्तान ने कभी सपने में भी नहीं की थी। ताशकंद में पाकिस्तान के प्रधानमन्त्री अयूब खान के साथ युद्ध समाप्त करने के समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद 11 जनवरी 1966 की रात में ही रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गयी। उनकी सादगीदेशभक्ति और ईमानदारी के लिये मरणोपरान्त भारत रत्‍न से सम्मानित किया गया।

लाल बहादुर शास्त्री जी के जन्मदिवस पर 2 अक्टूबर को शास्त्री जयन्ती व उनके देहावसान वाले दिन 11 जनवरी को लालबहादुर शास्त्री स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है।

श्रीवास्तव से बने शास्त्री– लालबहादुर शास्त्री का जन्म 1904 में मुगलसराय (उत्तर प्रदेश) में एक कायस्थ परिवार में मुंशी शारदा प्रसाद श्रीवास्तव के यहाँ हुआ था। उनके पिता प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक थे अत: सब उन्हें मुंशीजी ही कहते थे। बाद में उन्होंने राजस्व विभाग में लिपिक (क्लर्क) की नौकरी कर ली थी। लालबहादुर की माँ का नाम रामदुलारी था। परिवार में सबसे छोटे होने के कारण बालक लालबहादुर को परिवार वाले प्यार में नन्हें कहकर ही बुलाया करते थे। जब नन्हें अठारह महीने के हुए तो दुर्भाग्य से पिता का निधन हो गया। उनकी माँ रामदुलारी अपने पिता हजारीलाल के घर मिर्जापुर चली गयीं। कुछ समय बाद उसके नाना भी नहीं रहे। बिना पिता के बालक नन्हें की परवरिश करने में उनके मौसा रघुनाथ प्रसाद ने उसकी माँ का बहुत सहयोग किया। ननिहाल में रहते हुए उन्होंने प्राथमिक शिक्षा ग्रहण की। उसके बाद की शिक्षा हरिश्चन्द्र हाई स्कूल और काशी विद्यापीठ में हुई। काशी विद्यापीठ से शास्त्री की उपाधि मिलने के बाद उन्होंने जन्म से चला आ रहा जातिसूचक शब्द श्रीवास्तव हमेशा हमेशा के लिये हटा दिया और अपने नाम के आगे ‘शास्त्री’ लगा लिया। इसके पश्चात् शास्त्री शब्द लालबहादुर के नाम का पर्याय ही बन गया।

1928 में उनका विवाह मिर्जापुर निवासी गणेशप्रसाद की पुत्री ललिता से हुआ। ललिता और शास्त्रीजी की छ: सन्तानें हुईं, दो पुत्रियाँ-कुसुम व सुमन और चार पुत्र – हरिकृष्ण, अनिल, सुनील व अशोक। उनके चार पुत्रों में से दो दिवंगत हो चुके हैं। अनिल कांग्रेस पार्टी के एक वरिष्ठ नेता हैं जबकि सुनील शास्त्री भाजपा के नेता हैं।

देशसेवा का व्रत- संस्कृत भाषा में स्नातक स्तर तक की शिक्षा समाप्त करने के पश्चात् वे भारत सेवक संघ से जुड़ गये और देशसेवा का व्रत लेते हुए यहीं से अपने राजनैतिक जीवन की शुरुआत की। शास्त्रीजी सच्चे गांधीवादी, थे जिन्होंने अपना सारा जीवन सादगी से बिताया और उसे गरीबों की सेवा में लगाया। भारतीय स्वाधीनता संग्राम के सभी महत्वपूर्ण कार्यक्रमों व आन्दोलनों में उनकी सक्रिय भागीदारी रही और उसके परिणामस्वरूप उन्हें कई बार जेलों में भी रहना पड़ा। स्वाधीनता संग्राम के जिन आन्दोलनों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही उनमें 1921 का असहयोग आंदोलन, दांडी मार्च तथा 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन उल्लेखनीय हैं।

“मरो नहीं, मारो!”किया बुलंद- दूसरे विश्व युद्ध में इंग्लैण्ड को बुरी तरह उलझता देख जैसे ही नेताजी ने आजाद हिन्द फौज को “दिल्ली चलो” का नारा दिया, गान्धी जी ने मौके की नजाकत को भाँपते हुए 8 अगस्त 1942 की रात में ही बम्बई से अँग्रेजों को “भारत छोड़ो” व भारतीयों को “करो या मरो” का आदेश जारी किया और सरकारी सुरक्षा में यरवदा पुणे स्थित आगा खान पैलेस में चले गये। 9 अगस्त 1942 के दिन शास्त्रीजी ने इलाहाबाद पहुँचकर इस आन्दोलन के गान्धीवादी नारे को चतुराई पूर्वक “मरो नहीं, मारो!” में बदल दिया और अप्रत्याशित रूप से क्रान्ति की दावानल को पूरे देश में प्रचण्ड रूप दे दिया। पूरे ग्यारह दिन तक भूमिगत रहते हुए यह आन्दोलन चलाने के बाद 19 अगस्त 1942 को शास्त्रीजी गिरफ्तार हो गये।

गृहमन्त्री के बाद प्रधानमंत्री- शास्त्रीजी के राजनीतिक दिग्दर्शकों में पुरुषोत्तमदास टंडन और पण्डित गोविंद बल्लभ पंत के अतिरिक्त जवाहरलाल नेहरू भी शामिल थे। सबसे पहले 1929 में इलाहाबाद आने के बाद उन्होंने टण्डन जी के साथ भारत सेवक संघ की इलाहाबाद इकाई के सचिव के रूप में काम करना शुरू किया। इलाहाबाद में रहते हुए ही नेहरूजी के साथ उनकी निकटता बढ़ी। इसके बाद तो शास्त्रीजी का कद निरन्तर बढ़ता ही चला गया और एक के बाद एक सफलता की सीढियाँ चढ़ते हुए वे नेहरूजी के मंत्रिमण्डल में गृहमन्त्री के प्रमुख पद तक जा पहुँचे। और इतना ही नहीं, नेहरू के निधन के पश्चात भारत वर्ष के प्रधान मन्त्री भी बने।

जय जवान-जय किसान का नारा- उन्होंने अपने प्रथम संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि उनकी शीर्ष प्राथमिकता खाद्यान्न मूल्यों को बढ़ने से रोकना है और वे ऐसा करने में सफल भी रहे। उनके क्रियाकलाप सैद्धान्तिक न होकर पूर्णत: व्यावहारिक और जनता की आवश्यकताओं के अनुरूप थे। निष्पक्ष रूप से यदि देखा जाये तो शास्त्रीजी का शासन काल बेहद कठिन रहा। पूँजीपति देश पर हावी होना चाहते थे और दुश्मन देश हम पर आक्रमण करने की फिराक में थे। 1965 में अचानक पाकिस्तान ने भारत पर सायं 7.30 बजे हवाई हमला कर दिया। परम्परानुसार राष्ट्रपति ने आपात बैठक बुला ली जिसमें तीनों रक्षा अंगों के प्रमुख व मन्त्रिमण्डल के सदस्य शामिल थे। संयोग से प्रधानमन्त्री उस बैठक में कुछ देर से पहुँचे। उनके आते ही विचार-विमर्श प्रारम्भ हुआ। तीनों प्रमुखों ने उनसे सारी वस्तुस्थिति समझाते हुए पूछा: “सर! क्या हुक्म है?” शास्त्रीजी ने एक वाक्य में तत्काल उत्तर दिया: “आप देश की रक्षा कीजिये और मुझे बताइये कि हमें क्या करना है?” शास्त्रीजी ने इस युद्ध में नेहरू के मुकाबले राष्ट्र को उत्तम नेतृत्व प्रदान किया और जय जवान-जय किसान का नारा दिया। इससे भारत की जनता का मनोबल बढ़ा और सारा देश एकजुट हो गया। इसकी कल्पना पाकिस्तान ने कभी सपने में भी नहीं की थी।

अमेरिका ने की युद्धविराम की अपील- भारत पाक युद्ध के दौरान 6 सितम्बर को भारत की 15वीं पैदल सैन्य इकाई ने द्वितीय विश्व युद्ध के अनुभवी मेजर जनरल प्रसाद के नेत्तृत्व में इच्छोगिल नहर के पश्चिमी किनारे पर पाकिस्तान के बहुत बड़े हमले का डटकर मुकाबला किया। इच्छोगिल नहर भारत और पाकिस्तान की वास्तविक सीमा थी। इस हमले में खुद मेजर जनरल प्रसाद के काफिले पर भी भीषण हमला हुआ और उन्हें अपना वाहन छोड़ कर पीछे हटना पड़ा। भारतीय थलसेना ने दूनी शक्ति से प्रत्याक्रमण करके बरकी गाँव के समीप नहर को पार करने में सफलता अर्जित की। इससे भारतीय सेना लाहौर के हवाई अड्डे पर हमला करने की सीमा के भीतर पहुँच गयी। इस अप्रत्याशित आक्रमण से घबराकर अमेरिका ने अपने नागरिकों को लाहौर से निकालने के लिये कुछ समय के लिये युद्धविराम की अपील की।

रूस और अमरिका की मिलीभगत? आखिरकार रूस और अमरिका की मिलीभगत से शास्त्रीजी पर जोर डाला गया। उन्हें एक सोची समझी साजिश के तहत रूस बुलवाया गया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। हमेशा उनके साथ जाने वाली उनकी पत्नी ललिता शास्त्री को बहला फुसलाकर इस बात के लिये मनाया गया कि वे शास्त्रीजी के साथ रूस की राजधानी ताशकंद न जायें और वे भी मान गयीं। अपनी इस भूल का श्रीमती ललिता शास्त्री को मृत्युपर्यन्त पछतावा रहा। जब समझौता वार्ता चली तो शास्त्रीजी की एक ही जिद थी कि उन्हें बाकी सब शर्तें मंजूर हैं परन्तु जीती हुई जमीन पाकिस्तान को लौटाना हरगिज़ मंजूर नहीं। काफी जद्दोजहेद के बाद शास्त्रीजी पर अन्तर्राष्ट्रीय दबाव बनाकर ताशकन्द समझौते के दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करा लिये गये। उन्होंने यह कहते हुए हस्ताक्षर किये थे कि वे हस्ताक्षर जरूर कर रहे हैं पर यह जमीन कोई दूसरा प्रधान मन्त्री ही लौटायेगा, वे नहीं। पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के साथ युद्धविराम के समझौते पर हस्ताक्षर करने के कुछ घण्टे बाद 11 जनवरी 1966 की रात में ही उनकी मृत्यु हो गयी। यह आज तक रहस्य बना हुआ है कि क्या वाकई शास्त्रीजी की मौत हृदयाघात के कारण हुई थी? कई लोग उनकी मौत की वजह जहर को ही मानते हैं।

शास्त्रीजी को उनकी सादगी, देशभक्ति और ईमानदारी के लिये आज भी पूरा भारत श्रद्धापूर्वक याद करता है। उन्हें मरणोपरान्त वर्ष 1966 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

शास्त्रीजी की अंत्येष्टि पूरे राजकीय सम्मान के साथ शान्तिवन (नेहरू जी की समाधि) के आगे यमुना किनारे की गयी और उस स्थल को विजय घाट नाम दिया गया। जब तक कांग्रेस संसदीय दल ने इंदिरा गांधी को शास्त्री का विधिवत उत्तराधिकारी नहीं चुन लिया, गुलजारी लाल नंदा कार्यवाहक प्रधानमन्त्री रहे।

पोस्टमार्टम क्यों नहीं कराया? शास्त्रीजी की मृत्यु को लेकर तरह-तरह के कयास लगाये जाते रहे। बहुतेरे लोगों का, जिनमें उनके परिवार के लोग भी शामिल हैं, मानते है कि शास्त्रीजी की मृत्यु हार्ट अटैक से नहीं बल्कि जहर देने से ही हुई। पहली इन्क्वायरी राज नारायण ने करवायी थी, जो बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गयी ऐसा बताया गया। मजे की बात यह कि इण्डियन पार्लियामेण्ट्री लाइब्रेरी में आज उसका कोई रिकार्ड ही मौजूद नहीं है। यह भी आरोप लगाया गया कि शास्त्रीजी का पोस्ट मार्टम भी नहीं हुआ। 2009 में जब यह सवाल उठाया गया तो भारत सरकार की ओर से यह जबाव दिया गया कि शास्त्रीजी के प्राइवेट डॉक्टर आर०एन०चुघ और कुछ रूस के कुछ डॉक्टरों ने मिलकर उनकी मौत की जाँच तो की थी परन्तु सरकार के पास उसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। बाद में प्रधानमन्त्री कार्यालय से जब इसकी जानकारी माँगी गयी तो उसने भी अपनी मजबूरी जतायी।

आउटलुक पत्रिका ने खोली पोल- शास्त्रीजी की मौत में संभावित साजिश की पूरी पोल आउटलुक नाम की एक पत्रिका ने खोली। 2009 में, जब साउथ एशिया पर सीआईए की नज़र (अंग्रेजी CIA’s Eye on South Asia) नामक पुस्तक के लेखक अनुज धर ने सूचना के अधिकार के तहत माँगी गयी जानकारी पर प्रधानमन्त्री कार्यालय की ओर से यह कहना कि “शास्त्रीजी की मृत्यु के दस्तावेज़ सार्वजनिक करने से हमारे देश के अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्ध खराब हो सकते हैं तथा इस रहस्य पर से पर्दा उठते ही देश में उथल-पुथल मचने के अलावा संसदीय विशेषधिकारों को ठेस भी पहुँच सकती है। ये तमाम कारण हैं जिससे इस सवाल का जबाव नहीं दिया जा सकता।”।

ललिता के आँसू- सबसे पहले सन् 1978  में प्रकाशित एक हिन्दी पुस्तक ललिता के आँसू में शास्त्रीजी की मृत्यु की करुण कथा को स्वाभाविक ढँग से उनकी धर्मपत्नी ललिता शास्त्री के माध्यम से कहलवाया गया था। उस समय (सन् उन्निस सौ अठहत्तर में) ललिताजी जीवित थीं। यही नहीं, कुछ समय पूर्व प्रकाशित एक अन्य अंग्रेजी पुस्तक में लेखक पत्रकार कुलदीप नैयर ने भी, जो उस समय ताशकन्द में शास्त्रीजी के साथ गये थे, इस घटना चक्र पर विस्तार से प्रकाश डाला है। जुलाई 2012 में शास्त्रीजी के तीसरे पुत्र सुनील शास्त्री ने भी भारत सरकार से इस रहस्य पर से पर्दा हटाने की माँग की थी। मित्रोखोन आर्काइव नामक पुस्तक में भारत से संबन्धित अध्याय को पढ़ने पर ताशकंद समझौते के बारे में एवं उस समय की राजनीतिक गतिविधियों के बारे में विस्तरित जानकारी मिलती है।

भारतीय राजनीति को बदलकर रख देगी द कश्मीर फाइल्स!

द कश्मीर फाइल्स! विवेक की ये चिंगारी जो है न! भारतीय राजनीति को बदलकर रख देगी। खासकर युवा वर्ग को सुन्न कर जाएगी। मन और दिमाग सिहर जाना है। भले बी-टाउन के बड़े मॉन्स्टर ने इसे स्क्रीन काउंट नहीं जाने दिए । महज 500 स्क्रीन काउंट मिली है।

लेकिन…लेकिन! इसका जो वर्ड ऑफ माउथ है न! इसे कहाँ तक ले जाने वाला है ट्रेड पंडितों को भी नहीं मालूम है। दर्शक घरों से निकल रहे है और एक बार नहीं, बल्कि रिपीट वैल्यू है। पहले दिन कश्मीर फाइल्स ने साढ़े तीन करोड़ का बिज़नेस किया है। जो अब बढ़ता ही जाएगा। ग्राफ नीचे न आना। कल्ट, क्लासिक, मास्टरपीस कोई भी स्टेटस इसे न माप पाएंगे।

स्टीवन स्पीलबर्ग की ‘द शिंडलर लिस्ट’ के बाद ‘द कश्मीर फाइल्स’ ने सनक के होलोकॉस्ट में इंसानियत को शर्मसार होते देखा है। स्टीवन अपनी फिल्म से यहूदियों के दर्द में डूब कर निकले थे। उसी प्रकार विवेक ने कश्मीरी पंडितों की डल में तैरकर उनतक पहुँचे है और उन्हें धैर्य से सुना है। इस फाइल्स को ज्यादा से ज्यादा दर्शक मिलने चाहिए। ताकि देखें की सत्ता की पॉवर में आने पर क्या कर जाते है। राष्ट्र को सुरक्षित रखने के किये कैसा नेतृत्व आवश्यक है। इससे पहले किसी फिल्म मेकर को कश्मीर जाने की हिम्मत न होती थी। जाते भी तो सिर्फ़ बाहर से झाँकर निकल आते। दिल तक उतरने में डर लगता था ।

विवेक की कहानी व विज़ुअल्स देखकर दिमाग डिस्टर्ब है । वे दृश्य आँखें की स्क्रीन से हटने का नाम न ले रहे है। वे कहते है मास्टर का बेटा था। भटका हुआ मासूम नौजवान था। फौज के अत्याचारों से तंग आकर भटक गया। तो भैया ऐसा है अगर यूँ रहता तो कश्मीरी पंडित क्यों न भटके। काहे जुल्म सहते रहे। उनके दर्द पर झूठ के नैरेटिव रचे गए। इस काम में ख़ूब फंड व सारा तंत्र लगा बैठा। अब सच जूते भी पहन चुका है और दुनिया की सैर को भी निकल चुका है। भले सच को जूते पहनने में देर लगी। लेकिन बाहर निकला अवश्य ।

विवेक ने कश्मीर के बारे में जो मोनोलॉग लिखा है न! उसे बेहतरी से दर्शन कुमार ने कृष्णा पंडित के साथ मिलकर दर्शकों के बीच फेंका है। कश्मीर फाइल्स फिल्मी कंटेंट नहीं है बल्कि इमोशन है। बॉलीवुडिये रहनुमाओं ने तो आतताई खलनायकों को नायक के तौर पर पेश किया है और आगे भी करेगा। विवेक की मेहनत को समर्थन देकर आगे अनछुए विषयों को उठाने का हौसला दे। इस फाइल्स को आर्थिक तौर पर बड़ी सफलता देवे। इंटरनेशनल मूवी डेटा बेस यानी आईएमडीबी पर जाकर रेट अवश्य दे। इसे वहाँ भी अव्वल बनाएं।

साभार फेसबुक

21 साल की हरनाज़ संधू बनी मिस यूनिवर्स 2021

फहीम अख्तर (बिजनौर)

मिस यूनिवर्स 2021 का खिताब चंडीगढ़ के सिख परिवार में जन्मी हरनाज संधू को मिला है। हरनाज संधू इससे पहले भी कई ब्यूटी पेजेंट में हिस्सा ले चुकी हैं। फिटनेस और योग की शौकीन हरनाज ने छोटी उम्र से ही ब्यूटी कॉम्पिटीशन में भाग लेना शुरू कर दिया था। उन्होंने साल 2017 में मिस चंडीगढ़ का खिताब भी जीता था। इसके एक साल बाद हरनाज को मिस मैक्स इमर्जिंग स्टार इंडिया 2018 का ताज भी मिल चुका है। इन दो प्रतिष्ठित खिताब को अपने नाम करने के बाद हरनाज ने मिस इंडिया 2019 में हिस्सा लिया, जिसमें वह टॉप 12 तक जगह बनाने में कामयाब रही थीं। साल 2018 में हरनाज ने मिस इंडिया पंजाब का खिताब हासिल करने के बाद द लैंडर्स म्यूजिक वीडियो तेराताली (Tarthalli) में भी काम किया। इसके बाद इसी साल उन्होंने सितंबर में मिस डीवा यूनिवर्स इंडिया 2021 का खिताब अपने नाम किया।

हरनाज को यह ताज खुद अभिनेत्री कृति सेनन ने पहनाया था। मिस यूनिवर्स 2021 का हिस्सा बनने से पहले ही हरनाज फिल्मों में अपनी जगह पक्का कर चुकी हैं। वह अगले साल रिलीज होने वाली दो पंजाबी फिल्में ‘Bai Ji Kuttange’ और ‘Yaara Diyan Poo Baran’ में नजर आएंगी। अपनी फिटनेस से बेहद प्यार करने वालीं हरनाज प्रकृति से भी बेशुमार प्यार करती हैं। ग्लोबल वार्मिंग और प्रकृति संरक्षण को लेकर उनके विचार ने ही मिस डीवा पेजेंट में जज पैनल को प्रभावित किया था।

उनका मानना है कि पृथ्वी को बचाने के लिए हमारे पास अभी भी समय है, इसलिए जितना हो सके प्रकृति का संरक्षण किया जाए।
मिस यूनिवर्स 2021 के दौरान हरनाज ने स्विमसूट से लेकर नेशनल कॉस्ट्यूम सेशन तक में अपनी खूबसूरती से भी को प्रभावित किया। उन्होंने नेशनल कॉस्ट्यूम सेशन में पिंक कलर का लहंगा पहना था। इसके साथ ही वह हाथों में मैचिंग छतरी लिए भी नजर आईं। उनका यह पारंपरिक आउटफिट भारतीय महारानी के शाही लुक को दर्शा रहा था।
भारत दो बार मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता जीत चुका है। इससे पहले साल 1994 में सुष्मिता सेन और 2000 में लारा दत्ता ने यह ताज अपने नाम किया था। ऐसे में अब हरनाज ने भारत को तीसरी बार मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता जीता के भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया है।

प्रधानमंत्री ने लता मंगेशकर को उनके जन्मदिवस पर दी बधाई

प्रधानमंत्री ने सुश्री लता मंगेशकर को उनके जन्मदिवस पर बधाई दी

नई दिल्ली (PIB)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लता मंगेशकर को उनके जन्मदिवस पर बधाई दी है और उनके दुर्घायु होने तथा स्वस्थ जीवन की कामना की है।

अपने ट्वीट में प्रधानमंत्री ने कहा है….

 “आदरणीय लता दीदी को जन्मदिवस की बधाई। उनकी मधुर वाणी पूरे विश्व में गूंजती है। अपनी विनम्रता और भारतीय संस्कृति के प्रति लगाव के लिये उनका आदर किया जाता है। निजी तौर पर उनका आशीर्वाद मेरे लिये शक्ति का स्रोत है। मैं लता दीदी की दीर्घायु और उनके स्वस्थ जीवन के लिये प्रार्थना करता हूं।”

Birthday greetings to respected Lata Didi. Her melodious voice reverberates across the world. She is respected for her humility & passion towards Indian culture. Personally, her blessings are a source of great strength. I pray for Lata Didi’s long & healthy life. @mangeshkarlata— Narendra Modi (@narendramodi) September 28, 2021

छोटे पर्दे के “ठाकुर सज्जन सिंह” का निधन

मुंबई। बॉलीवुड और टीवी इंडस्ट्री के एक और एक्टर ने दुनिया को अलविदा कह दिया है। ‘प्रतिज्ञा’ टीवी सीरियल में ठाकुर सज्जन सिंह का रोल प्ले करने वाले एक्टर अनुपम श्याम ने दुनिया को अलविदा कह दिया है। उनकी उम्र 63 साल थी, वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। वे ‘स्लमडॉग मिलेनियर’ और ‘बैंडिट क्वीन’ जैसी फिल्मों में काम कर चुके हैं। एक्टर पिछले साल मुंबई के लाइफलाइन अस्पताल में भर्ती कराए गए थे।

मनोज कुमार के जन्मदिन पर विशेष

एकलव्य बाण समाचार

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मनोज कुमार एक हिन्दी फिल्म अभिनेता हैं। भारतीय सिनेमा के प्रसिद्ध अभिनेताफिल्म निर्माता व निर्देशक हैं। अपनी फ़िल्मों के जरिए मनोज कुमार ने लोगों को देशभक्ति की भावना का गहराई से एहसास कराया। मनोज कुमार शहीद-ए-आजम भगत सिंह से बेहद प्रभावित हैं और उन्होंने शहीद जैसी देशभक्ति फ़िल्म में अभिनय किया तो कई लोगों की प्रेरणा बने। हिन्दी सिनेमा में मनोज कुमार ने देशभक्ति की बहुत सी फिल्में बनाईं। उन्हें एक देशभक्त अभिनेता के रूप में भी जाना जाता है।

मनोज कुमार

मनोज कुमार का जन्म 24 जुलाई 1937 को पाकिस्तान के अबोटाबाद में हुआ था। उनका असली नाम हरिकिशन गिरि गोस्वामी है। देश के बंटवारे के बाद उनका परिवार राजस्थान के हनुमानगढ़ ज़िले में बस गया था। मनोज ने अपने करियर में शहीद, उपकार, पूरब और पश्चिम व ‘क्रांति‘ जैसी देशभक्ति पर आधारित अनेक बेजोड़ फ़िल्मों को बनाया और उनमें काम भी किया। इसी वजह से उन्हें भारत कुमार भी कहा जाता है। मनोज कुमार की पहली फिल्म फैशन (1957) थी। उसके बाद शहीद (1965) से उन्हें लोकप्रियता मिलनी प्रारम्भ हो गई। उन्होंने भूतपूर्व भारतीय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के कहने पर उपकार बनाईं, जो शास्त्री जी के दिए हुए नारे “जय जवान जय किसान” पर आधारित थी। मनोज कुमार की फिल्मों में ‘हरियाली और रास्ता‘ (1962), ‘वो कौन थी‘ (1964), ‘शहीद’ (1965), ‘हिमालय की गोद में‘ (1965), ‘गुमनाम‘ (1965), ‘पत्थर के सनम‘ (1967), ‘उपकार’ (1967), ‘पूरब और पश्चिम’ (1969), ‘रोटी कपड़ा और मकान‘ (1974), ‘क्रांति प्रमुख हैं। फिल्म ‘उपकार’ के लिए मनोज कुमार को नेशनल अवॉर्ड से नवाजा गया था।

Birthday Special: दिलीप कुमार की वजह से मनोज कुमार ने बदला था अपना नाम, फिर फिल्मों में बनाई थी अलग पहचान

दिलीप कुमार की फिल्म शबनम से हुए प्रभावित

मनोज कुमार दिलीप कुमार की एक्टिंग के दीवाने थे। जब वह 11 साल के थे, तब उन्होंने फिल्म शबनम देखी थी। इस फिल्म में उन्हें दिलीप कुमार की एक्टिंग बहुत पसंद आई। इसके बाद जब उन्होंने फिल्मों में एंट्री करने का फैसला लिया तो उन्होंने अपना नाम बदल कर मनोज कुमार रख लिया, जो फिल्म शबनम में दिलीप कुमार के किरदार का नाम था।

दिलीप कुमार के साथ किया काम- जिस एक्टर से प्रेरित होकर मनोज कुमार ने अपना नाम बदलने का फैसला लिया था उन्होंने उनके साथ काम भी किया था। मनोज कुमार और दिलीप कुमार ने साथ में फिल्म शहीद, आदमी में काम किया था। इतना ही नहीं उन्हें दिलीप साहब को डायरेक्ट करने का मौका भी मिला। दोनों ने एक बार फिर फिल्म क्रांति में काम किया था। इस फिल्म में मनोज कुमार और दिलीप साहब के साथ शशि कपूर, हेमा मालिनी और शत्रुघ्न सिन्हा अहम भूमिका निभाते नजर आए थे। इस फिल्म को मनोज कुमार ने डायरेक्ट करने के साथ प्रोड्यूस भी किया था।

पूरा नाम-हरिकिशन गिरि गोस्वामी

प्रसिद्ध नाम- मनोज कुमार

अन्य नाम-भारत कुमार

जन्म-24 जुलाई1937

जन्म भूमि-अबोटाबाद (अब पाकिस्तान)

पत्नी-शशी गोस्वामी

कर्म भूमि-मुम्बई

कर्म क्षेत्र-फ़िल्म अभिनेता, निर्माता व निर्देशक

मुख्य फ़िल्में-शहीद, उपकार, पूरब और पश्चिम, क्रांति, रोटी कपड़ा और मकान, हिमालय की गोद में, हरियाली और रास्ता, पत्थर के सनम, नीलकमल आदि।

शिक्षा-स्नातक, हिन्दू कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय

पुरस्कार/उपाधि-2015 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार, 1992 में पद्मश्री, फालके रत्न पुरस्कार, लाइफ़ टाइम अचीवमेंट फ़िल्मफेयर पुरस्कार (सौजन्य से-विकिपीडिया)

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