चार समूहों को लक्ष्मी-गणेश जी के मूर्ति सांचा वितरित


चार समूहों को लक्ष्मी-गणेश जी के मूर्ति सांचा वितरित

उ.प्र. सरकार द्वारा उ.प्र. माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष ओमप्रकाश गोला प्रजापति के द्वारा निःशुल्क प्रति समूह एक जो़ड़ी मास्टर मोल्ड्स/डाई (मूर्ति सांचा) लक्ष्मी-गणेश जी की चार समूहों को की गई वितरित

बिजनौर। जिला ग्रामोद्योग कार्यालय इण्डस्ट्रीयल स्टेट बिजनौर में प्रजापति कुम्हार जाति के उत्थान एवं उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा उ.प्र. माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष ओमप्रकाश गोला प्रजापति के द्वारा निःशुल्क प्रति समूह एक जो़ड़ी मास्टर मोल्ड्स/डाई (मूर्ति सांचा) लक्ष्मी-गणेश जी की चार समूहों को वितरित की गई।
जिला ग्रामोद्योग अधिकारी कुंवर सेन ने उक्त जानकारी देते हुए कहा कि अध्यक्ष द्वारा बताया गया कि यदि हमें कुपोषण, कैंसर एवं मधुमेह जैसी बीमारियों को समाप्त करना है तो मिट्टी के बर्तनों का प्रयोग करना होगा। साथ ही प्लास्टिक का उन्मूलन करने, चीन से आयातित उत्पादों को रोकने के लिये मिट्टी के कलात्मक उत्पादों को बढावा देना होगा। एल्युमीनियम आदि धातु के बर्तन में बने भोजन तथा मिट्टी के बर्तन में बने भोजन की गुणवत्ता तथा पौष्टिक तत्वों की विद्यमता के बारे में विस्तार से बताया कि मिट्टी के बर्तन में बने भोजन में किसी प्रकार का रासायनिक दुष्प्रभाव नहीं होता है एवं भोजन पौष्टिक तथा स्वास्थ्यवर्धक होता है।
अध्यक्ष द्वारा माटी कला से जुड़े शिल्पियों को माटी कला तकनीकी के विषय की जानकारी दी गई। उन्होंने माटी कला के परम्परागत कारीगर और शिल्पियों को मण्डलीय प्रशिक्षण केन्द्र अकबरपुर चौगांवा नजीबाबाद से प्रशिक्षण कराकर उनके उत्पादों को गुणवत्तापरक बनाने हेतु प्रोत्साहित किया।

खादी को ‘राष्ट्रीय वस्त्र’ के रूप में अपनाएं: उप राष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति ने देश के नागरिकों से खादी को ‘राष्ट्रीय वस्त्र’ के रूप में अपनाने की अपील की

खादी को व्यापक रूप से स्वीकार करना वर्तमान समय की मांग- उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति ने शैक्षणिक संस्थानों से यूनिफार्म के लिए खादी का इस्तेमाल करने का आग्रह किया

उपराष्ट्रपति ने ‘खादी इंडिया क्विज प्रतियोगिता’ का शुभारंभ किया

नई दिल्ली (PIB)। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने आज देश के नागरिकों से खादी को ‘राष्ट्रीय वस्त्र’ के रूप में अपनाने की अपील की और इसके इस्तेमाल को व्यापक रूप से बढ़ावा देने का आग्रह किया। श्री नायडू ने विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियों से इसके लिए आगे आने तथा खादी के उपयोग को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित करने का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति, खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) द्वारा मनाये जा रहे ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के तहत आयोजित ‘खादी इंडिया क्विज प्रतियोगिता’ के शुभारंभ अवसर पर संबोधित कर रहे थे।

खादी इंडिया क्विज प्रतियोगिता- श्री नायडू ने सभी से ‘खादी इंडिया क्विज प्रतियोगिता’ में भाग लेने का आग्रह करते हुए कहा कि यह प्रतियोगिता हमें अपनी जड़ों की ओर वापस ले जाने का एक रोचक माध्यम है, क्योंकि यह हमारे स्वतंत्रता संग्राम के ऐतिहासिक क्षणों और हमारे महान स्वतंत्रता सेनानियों के अद्वितीय योगदान का स्मरण कराती है।

‘आजादी का अमृत महोत्सव’- उपराष्ट्रपति ने ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के हिस्से के रूप में आयोजित अधिकृत ‘दांडी मार्च’ के समापन समारोह में भाग लेने के लिए इस वर्ष 6 अप्रैल को अपनी दांडी यात्रा को याद किया। उन्होंने कहा कि दांडी मार्च में भाग लेने वाले प्रतिभागियों के साथ बातचीत करते हुए उन्हें भारतीय इतिहास के गौरवमयी क्षणों को फिर से जीने का अवसर मिला और उन्होंने इसे “एक बहुत ही समृद्ध अनुभव” कहकर संदर्भित किया।

याद किया स्वतंत्रता सेनानियों का सर्वोच्च बलिदान- हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के सर्वोच्च बलिदान को याद करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि मातंगिनी हाजरा, भगत सिंह, प्रीतिलता वाद्देदार, राजगुरु, सुखदेव और हजारों अन्य स्वाधीनता सेनानियों ने एक स्वतंत्र राष्ट्र के सार्वलौकिक स्वप्न को साकार करने के लिए अपने जीवन का बलिदान करने से पहले दो बार नहीं सोचा। उन्होंने कहा, “इन वीर पुरुषों और महिलाओं ने यह जानते हुए भी सर्वोच्च बलिदान दिया कि वे अपने सपने को हकीकत में बदलता देखने के लिए जीवित नहीं होंगे।”

अभूतपूर्व बदलाव पर प्रसन्नता व्यक्त- श्री नायडू ने पिछले 7 वर्षों में खादी के अभूतपूर्व बदलाव पर प्रसन्नता व्यक्त की और इसके विकास में तेजी लाने के लिए सरकार, केवीआईसी तथा अन्य सभी हितधारकों की सराहना की। उपराष्ट्रपति ने कहा, “मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि केवीआईसी ने पूरे भारत में अपनी पहुंच स्थापित करने में सफलता प्राप्त की है और लोगों को देश के दूर-दराज के कोनों में भी स्थायी स्वरोजगार गतिविधियों से जोड़ा गया है।”

आय का एक स्रोत- उपराष्ट्रपति ने खादी की ऐतिहासिक प्रासंगिकता को याद किया और कहा कि यह स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जनता को जोड़ने के लिए एक बंधनकारी शक्ति थी। श्री नायडू ने कहा कि महात्मा गांधी ने वर्ष 1918 में गरीबी से पीड़ित जनता के लिए आय का एक स्रोत उत्पन्न करने के लिए खादी आंदोलन शुरू किया और बाद में उन्होंने इसे विदेशी शासन के खिलाफ एक शक्तिशाली प्रतीकात्मक उपकरण में बदल दिया।

खादी पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ- खादी के पर्यावरणीय लाभों का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि खादी में शून्य कार्बन फुटप्रिंट है क्योंकि इसके निर्माण के लिए बिजली या किसी भी प्रकार के ईंधन की आवश्यकता नहीं होती है। उन्होंने कहा, “ऐसे समय में जब दुनिया कपड़ों के क्षेत्र में स्थायी विकल्प तलाश रही है, तो हमें यह याद रखना चाहिए कि खादी पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ वस्त्र के रूप में निश्चित ही हमारी आवश्यकताओं को पूरा करती है।”

शैक्षणिक संस्थानों से यूनिफार्म के रुप में मनाने की अपील- उपराष्ट्रपति ने शैक्षणिक संस्थानों से यूनिफार्म के लिए खादी के रूप में इसके उपयोग का मार्ग तलाशने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह न केवल छात्रों को खादी के कई लाभों का अनुभव करने का अवसर देगा बल्कि उन्हें हमारे महान स्वतंत्रता सेनानियों और स्वाधीनता आंदोलन के इतिहास से जुड़ने में भी मदद करेगा। उन्होंने कहा, “अपनी विशिष्ट झिरझिरटी बनावट के कारण खादी हमारी स्थानीय जलवायु परिस्थितियों के लिए काफी उपयुक्त है।” श्री नायडू ने युवाओं से खादी को फैशन स्टेटमेंट बनाने और उत्साह के साथ सभी के द्वारा इसके उपयोग को प्रोत्साहन देने की अपील की।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री नारायण राणे, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्य मंत्री भानु प्रताप सिंह वर्मा, खादी और ग्रामोद्योग आयोग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम के सचिव बीबी स्वैन और अन्य व्यक्ति कार्यक्रम के दौरान मौजूद थे।

ऑनलाइन बिक्री पोर्टल से नई ऊंचाई पर खादी और ग्रामोद्योग आयोग

खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के ऑनलाइन बिक्री पोर्टल ने नई ऊंचाइयों को छुआ, स्वदेशी को अधिक बढ़ावा

नई दिल्ली। खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने ऑनलाइन विपणन खंड में प्रवेश कर बड़ी तेजी से देश लोगों के बीच अपनी पहुंच स्थापित की है। खादी के ई-पोर्टल http://www.khadiindia.gov.in ने अपनी शुरुआत के महज 8 महीनों में ही 1.12 करोड़ रुपये से अधिक का सकल कारोबार किया है।

7 जुलाई 2020 को लॉन्च होने के बाद खादी ई-पोर्टल ने अब तक इस पर आने वाले 65,000 लोगों में से 10,000 से अधिक ग्राहकों द्वारा ऑर्डर किया गया सामान पहुंचाया है। केवीआईसी ने इन ग्राहकों को 1 लाख से अधिक वस्तुएं / चीज़ें वितरित की हैं। इस अवधि के दौरान, औसत ऑनलाइन खरीद 11,000 रुपये प्रति ग्राहक दर्ज की गई है जो खादी की लगातार बढ़ती लोकप्रियता और खरीदारों के सभी वर्गों के लिए इसकी उत्पाद श्रृंखला की विविधता का संकेत है।



खादी ई-पोर्टल: मुख्य आकर्षण (26.02.2021 को आंकड़े)

खादी ई-पोर्टल का शुभारंभ

7 जुलाई 2020

8 महीने में सकल ऑनलाइन बिक्री

1.12 करोड़ रुपये

8 महीनों में मिले ऑर्डर्स की संख्या

10,100

ई-पोर्टल पर आगंतुकों की संख्या

65,000

प्रति ग्राहक औसत बिक्री

11,000 रुपये

ऑर्डर्स में भेजी गई कुल मात्रा

1,00,600

प्रति ऑर्डर औसत मात्रा

10

ऑनलाइन इन्वेंट्री में उत्पादों की संख्या

800

उच्चतम व्यक्तिगत बिक्री मूल्य

1.25 लाख रुपये

अधिकतम भेजे गए ऑर्डर्स

महाराष्ट्र (1785) दिल्ली (1584)

उत्तर प्रदेश (1281)

ऑनलाइन बेस्ट सेलर्स

खादी मास्क, शहद, हर्बल साबुन, किराना, मसाले, कपड़े, अगरबत्ती

केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने खादी के सफल ई-कॉमर्स उद्यम की सराहना करते हुए कहा कि इससे खादी और ग्रामीण उद्योग के उत्पादों की पहुंच एक बड़ी आबादी तक सुलभ कराने के लिए इसे एक व्यापक विपणन मंच प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा, खादी की ई-मार्केटिंग गेम-चेंजर साबित हो रही है। श्री गडकरी ने कहा, प्रति वर्ष 200 करोड़ रुपये के कारोबार तक पहुंचने का प्रयास किया जाना चाहिए।

केवीआईसी ने वेब-डेवलपमेंट पर एक भी रुपया खर्च किए बिना ही ई-पोर्टल को इन-हाउस विकसित किया है। यह एक अन्य कारक है जो खादी ई-पोर्टल को अन्य ई-कॉमर्स साइटों से अलग करता है – अन्य ऑनलाइन पोर्टलों के विपरीत केवीआईसी कैटलॉग, उत्पाद फोटोशूट जैसे सभी लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढांचे का विशेष ख्याल रखता है। साथ ही यह ऑनलाइन इन्वेंट्री बनाए रखता है और ग्राहकों के दरवाजे तक सामान की ढुलाई तथा परिवहन का विशेष ध्यान रखता है। यह खादी कारीगरों, संस्थानों और पीएमईजीपी इकाइयों को खादी उत्पादों को किसी भी वित्तीय बोझ से बचाता है।

केवीआईसी के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि, खादी ई-पोर्टल के संचालन पर होने वाले सभी खर्च केवीआईसी द्वारा वहन किए जाते हैं। अन्य ई-कॉमर्स साइटों के मामले में जहां उत्पाद सूचीकरण, पैकेजिंग और प्रेषण संबंधित विक्रेताओं की जिम्मेदारी है, वहीं केवीआईसी की एक नीति है कि खादी संस्थानों और पीएमईजीपी इकाइयों को ऐसे किसी भी वित्तीय और तार्किक बोझ से मुक्त किया जाता है। उन्होंने कहा, इससे उनके पास बहुत पैसा बचता है और इसलिए, खादी का ई-पोर्टल लाखों खादी कारीगरों के लिए एक अनूठा मंच है। श्री सक्सेना ने कहा कि खादी के ई-पोर्टल ने स्वदेशी को काफी बढ़ावा दिया है। उन्होंने कहा कि इसने कारीगरों को अपना माल बेचने के लिए एक अतिरिक्त मंच प्रदान किया है, केवीआईसी ने खादी के प्रति लोगों के प्रेम और भारत को आत्मनिर्भर बनाने के उनके संकल्प को भी प्रदर्शित किया है।

खादी की ऑनलाइन बिक्री केवल खादी के फेस मास्क बनाने के साथ शुरू हुई थी लेकिन इसने इतनी जल्दी ही पूरी तरह से विकसित ई-मार्केट मंच का रूप धारण कर लिया है। आज इस पर लगभग 800 उत्पाद मौजूद हैं और बहुत से उत्पाद इसमें शामिल होने की प्रक्रिया में हैं। उत्पादों की श्रृंखला में हाथ से कते और हाथ से बुने महीन कपड़े जैसे मलमल, सिल्क, डेनिम और सूती कपड़े, महिला – पुरुष विचार वस्त्र, खादी की सिग्नेचर कलाई घड़ी, अनेक प्रकार के शहद, हर्बल और ग्रीन टी, हर्बल दवाइयां और साबुन, पापड़, कच्ची घानी सरसों का तेल, गोबर / गोमूत्र साबुन एवं अन्य पदार्थों के साथ विविध प्रकार के हर्बल सौंदर्य प्रसाधन भी शामिल हैं।

खादी फैब्रिक फुटवियर, गाय के गोबर से बने अभिनव खादी प्राकृतिक पेंट और पुनर्जीवित विरासत मोनपा वाले हस्तनिर्मित कागज जैसे कई अनूठे उत्पाद भी ऑनलाइन बेचे जा रहे हैं। उत्पादों की कीमत 50 रुपये से 5000 रुपये तक है, जो खरीदारों के सभी वर्गों की पसंद और सामर्थ्य को ध्यान में रखते हुए तय की जाती है।

केवीआईसी को 31 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों से ऑनलाइन ऑर्डर्स प्राप्त हुए हैं, जिनमें दूर-दराज स्थित अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, अरुणाचल प्रदेश, केरल, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर भी शामिल हैं।

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ऑनलाइन बिक्री पोर्टल से नई ऊंचाई पर खादी और ग्रामोद्योग आयोग

खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के ऑनलाइन बिक्री पोर्टल ने नई ऊंचाइयों को छुआ, स्वदेशी को अधिक बढ़ावा

नई दिल्ली। खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने ऑनलाइन विपणन खंड में प्रवेश कर बड़ी तेजी से देश लोगों के बीच अपनी पहुंच स्थापित की है। खादी के ई-पोर्टल http://www.khadiindia.gov.in ने अपनी शुरुआत के महज 8 महीनों में ही 1.12 करोड़ रुपये से अधिक का सकल कारोबार किया है।

7 जुलाई 2020 को लॉन्च होने के बाद खादी ई-पोर्टल ने अब तक इस पर आने वाले 65,000 लोगों में से 10,000 से अधिक ग्राहकों द्वारा ऑर्डर किया गया सामान पहुंचाया है। केवीआईसी ने इन ग्राहकों को 1 लाख से अधिक वस्तुएं / चीज़ें वितरित की हैं। इस अवधि के दौरान, औसत ऑनलाइन खरीद 11,000 रुपये प्रति ग्राहक दर्ज की गई है जो खादी की लगातार बढ़ती लोकप्रियता और खरीदारों के सभी वर्गों के लिए इसकी उत्पाद श्रृंखला की विविधता का संकेत है।



खादी ई-पोर्टल: मुख्य आकर्षण (26.02.2021 को आंकड़े)

खादी ई-पोर्टल का शुभारंभ

7 जुलाई 2020

8 महीने में सकल ऑनलाइन बिक्री

1.12 करोड़ रुपये

8 महीनों में मिले ऑर्डर्स की संख्या

10,100

ई-पोर्टल पर आगंतुकों की संख्या

65,000

प्रति ग्राहक औसत बिक्री

11,000 रुपये

ऑर्डर्स में भेजी गई कुल मात्रा

1,00,600

प्रति ऑर्डर औसत मात्रा

10

ऑनलाइन इन्वेंट्री में उत्पादों की संख्या

800

उच्चतम व्यक्तिगत बिक्री मूल्य

1.25 लाख रुपये

अधिकतम भेजे गए ऑर्डर्स

महाराष्ट्र (1785) दिल्ली (1584)

उत्तर प्रदेश (1281)

ऑनलाइन बेस्ट सेलर्स

खादी मास्क, शहद, हर्बल साबुन, किराना, मसाले, कपड़े, अगरबत्ती

केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने खादी के सफल ई-कॉमर्स उद्यम की सराहना करते हुए कहा कि इससे खादी और ग्रामीण उद्योग के उत्पादों की पहुंच एक बड़ी आबादी तक सुलभ कराने के लिए इसे एक व्यापक विपणन मंच प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा, खादी की ई-मार्केटिंग गेम-चेंजर साबित हो रही है। श्री गडकरी ने कहा, प्रति वर्ष 200 करोड़ रुपये के कारोबार तक पहुंचने का प्रयास किया जाना चाहिए।

केवीआईसी ने वेब-डेवलपमेंट पर एक भी रुपया खर्च किए बिना ही ई-पोर्टल को इन-हाउस विकसित किया है। यह एक अन्य कारक है जो खादी ई-पोर्टल को अन्य ई-कॉमर्स साइटों से अलग करता है – अन्य ऑनलाइन पोर्टलों के विपरीत केवीआईसी कैटलॉग, उत्पाद फोटोशूट जैसे सभी लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढांचे का विशेष ख्याल रखता है। साथ ही यह ऑनलाइन इन्वेंट्री बनाए रखता है और ग्राहकों के दरवाजे तक सामान की ढुलाई तथा परिवहन का विशेष ध्यान रखता है। यह खादी कारीगरों, संस्थानों और पीएमईजीपी इकाइयों को खादी उत्पादों को किसी भी वित्तीय बोझ से बचाता है।

केवीआईसी के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि, खादी ई-पोर्टल के संचालन पर होने वाले सभी खर्च केवीआईसी द्वारा वहन किए जाते हैं। अन्य ई-कॉमर्स साइटों के मामले में जहां उत्पाद सूचीकरण, पैकेजिंग और प्रेषण संबंधित विक्रेताओं की जिम्मेदारी है, वहीं केवीआईसी की एक नीति है कि खादी संस्थानों और पीएमईजीपी इकाइयों को ऐसे किसी भी वित्तीय और तार्किक बोझ से मुक्त किया जाता है। उन्होंने कहा, इससे उनके पास बहुत पैसा बचता है और इसलिए, खादी का ई-पोर्टल लाखों खादी कारीगरों के लिए एक अनूठा मंच है। श्री सक्सेना ने कहा कि खादी के ई-पोर्टल ने स्वदेशी को काफी बढ़ावा दिया है। उन्होंने कहा कि इसने कारीगरों को अपना माल बेचने के लिए एक अतिरिक्त मंच प्रदान किया है, केवीआईसी ने खादी के प्रति लोगों के प्रेम और भारत को आत्मनिर्भर बनाने के उनके संकल्प को भी प्रदर्शित किया है।

खादी की ऑनलाइन बिक्री केवल खादी के फेस मास्क बनाने के साथ शुरू हुई थी लेकिन इसने इतनी जल्दी ही पूरी तरह से विकसित ई-मार्केट मंच का रूप धारण कर लिया है। आज इस पर लगभग 800 उत्पाद मौजूद हैं और बहुत से उत्पाद इसमें शामिल होने की प्रक्रिया में हैं। उत्पादों की श्रृंखला में हाथ से कते और हाथ से बुने महीन कपड़े जैसे मलमल, सिल्क, डेनिम और सूती कपड़े, महिला – पुरुष विचार वस्त्र, खादी की सिग्नेचर कलाई घड़ी, अनेक प्रकार के शहद, हर्बल और ग्रीन टी, हर्बल दवाइयां और साबुन, पापड़, कच्ची घानी सरसों का तेल, गोबर / गोमूत्र साबुन एवं अन्य पदार्थों के साथ विविध प्रकार के हर्बल सौंदर्य प्रसाधन भी शामिल हैं।

खादी फैब्रिक फुटवियर, गाय के गोबर से बने अभिनव खादी प्राकृतिक पेंट और पुनर्जीवित विरासत मोनपा वाले हस्तनिर्मित कागज जैसे कई अनूठे उत्पाद भी ऑनलाइन बेचे जा रहे हैं। उत्पादों की कीमत 50 रुपये से 5000 रुपये तक है, जो खरीदारों के सभी वर्गों की पसंद और सामर्थ्य को ध्यान में रखते हुए तय की जाती है।

केवीआईसी को 31 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों से ऑनलाइन ऑर्डर्स प्राप्त हुए हैं, जिनमें दूर-दराज स्थित अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, अरुणाचल प्रदेश, केरल, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर भी शामिल हैं।

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गोबर्धन: अब बरसेगा गोबर से धन

बाजार में आया गाय के गोबर से बना पेंट, किसानों को मिलेगा Gobar se Dhan

खादी और ग्रामोद्योग आयोग की जयपुर इकाई कुमारप्पा नेशनल हैंडमेड पेपर इंस्टीट्यूट ने तैयार किया गोबर पेंट

खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) की मदद से की जाएगी पेंट की बिक्री

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नई दिल्ली। अभी तक हम गोबर्धन को एक त्योहार के रूप में ही मनाते आ रहे हैं, लेकिन अब सच में ही गोबर से धन (Gobar se Dhan) बरसेगा। किसानों की आमदनी बढ़ाने में गोबर का अहम रोल होगा। अब किसान गोबर से आमदनी भी करेंगे।

गाय का दूध-घी, गोमूत्र से बने पेस्टीसाइट, गाय के गोबर के दीये के बाद अब गाय के गोबर से बना पेंट। जी हां, सही पढ़ा आपने, गाय के गोबर से बना पेंट, जिससे आप अपने घर, ऑफिस या दुकान रंगते हैं। इसे  वेदिक पेंट (Vedic Paint) नाम दिया गया है।

गाय के गोबर से बने पेंट की बिक्री खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) की मदद से की जाएगी। गोबर पेंट को खादी और ग्रामोद्योग आयोग की जयपुर की इकाई कुमारप्पा नेशनल हैंडमेड पेपर इंस्टीट्यूट (Kumarappa National Handmade Paper Institute) ने तैयार किया है। इस पेंट को बीआईएस (BIS) यानी भारतीय मानक ब्यूरो भी प्रमाणित कर चुका है। किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में गाय के गोबर से बना पेंट एक बड़ा कदम साबित होगा।

एंटीफंगल, एंटीबैक्टीरियल, इको फ्रेंडली पेंट (Cow dung Paint):

खादी और ग्रामोद्योग आयोग का कहना है कि गाय के गोबर से बना यह पेंट एंटीफंगल, एंटीबैक्टीरियल और इको फ्रेंडली है। दीवार पर पेंट करने के बाद यह सिर्फ चार घंटे में सूख जाएगा। इस पेंट में अपनी जरूरत के हिसाब से रंग भी मिलाया जा सकता है।

विभिन्न पैकिंग में तैयार:

खादी प्राकृतिक पेंट (Khadi Prakritik Paint) दो रूप में उपलब्ध होगा, डिस्टेंपर पेंट (distemper paint) और प्लास्टिक एम्युनेशन पेंट (plastic emulsion paint)। इस पेंट में हैवी मैटल (heavy metals) जैसे- सीसा (lead), पारा (mercury), क्रोमियम (chromium), आर्सेनिक, कैडमियम आदि का इस्तेमाल नहीं किया गया है। फिलहाल इसकी पैकिंग 2 लीटर से लेकर 30 लीटर तक तैयार की गई है।

30,000 रुपये की आमदनी:

खादी और ग्रामोद्योग आयोग का कहना है कि इस पेंट से स्थानीय निर्माताओं को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। पेंट की इस तकनीक से गाय के गोबर का इस्तेमाल बढ़ेगा। यह गो शालाओं की आमदनी बढ़ाने में भी अहम भूमिका अदा करेगा। इस पेंट के निर्माण से किसान या गोशाला को एक पशु से हर साल तकरीबन 30,000 रुपये की आमदनी होगी। ग्राहकों के लिए सस्ता, किसानों के लिए लाभदायक-वैदिक पेंट का मुख्य अवयव गोबर होने से यह आम पेंट के मुकाबले सस्ता पड़ेगा। इससे रंग-रोगन कराने पर ग्राहकों की जेब कम ढीली होगी। वहीं यह देश के किसानों की आय बढ़ाने वाला होगा। टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के माध्यम से इसकी स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जाएगा।

“हुनर हाट” रामपुर (यूपी) में आज से 27 दिसंबर, 2020 तक

“हुनर हाट”, सरकार का “कौशल को काम” और “हुनर को सम्मान” का सशक्त अभियान है: नकवी

“वोकल फॉर लोकल”, साकार करने के साथ ही “स्वदेशी मिशन” को मजबूत करने में निभा रहा महत्वपूर्ण भूमिका

लखनऊ। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि “हुनर हाट”, सरकार का “कौशल को काम” और “हुनर को सम्मान” का सशक्त अभियान है।
रामपुर के नुमाइश ग्राउंड, पनवड़िया में 18 से 27 दिसंबर 2020 तक आयोजित हो रहे “हुनर हाट” की पूर्व संध्या पर प्रेस वार्ता में नकवी ने कहा कि “हुनर हाट”, “आत्मनिर्भर भारत” के संकल्प को पूरा करने और देश के कोने-कोने के हुनरमंद कारीगरों, दस्तकारों, शिल्पकारों को बड़े पैमाने पर रोजगार और रोजगार के अवसरों से जोड़ने का मजबूत अभियान साबित हुआ है।

श्री नकवी ने कहा कि रामपुर में “हुनर हाट” का उद्घाटन केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग और लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योग मंत्री नितिन गडकरी करेंगे। मुख्य अतिथि के रूप में खादी और ग्रामोद्योग आयोग के चेयरमैन विनय कुमार सक्सेना, उत्तर प्रदेश के खादी एवं ग्रामोद्योग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह एवं उत्तर प्रदेश के जल शक्ति राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख रहेंगे।

श्री नकवी ने कहा कि “हुनर हाट”, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “वोकल फॉर लोकल” के आह्वान को साकार करने के साथ ही “स्वदेशी मिशन” को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।श्री नकवी ने कहा कि देश के अलग-अलग भागों में आयोजित हुए “हुनर हाट” में रामपुर के दस्तकारों-शिल्पकारों को भी मौका मुहैया कराया गया था, आज खुद “हुनर हाट”, रामपुर के दरवाजे पर है, जहां देश भर के दस्तकार अपने नायाब स्वदेशी हस्तनिर्मित उत्पादनों के साथ मौजूद हैं।

देश भर के स्वदेशी दुर्लभ उत्पाद और लजीज़ पकवान उपलब्ध

रामपुर में आयोजित हो रहे “हुनर हाट” में देश के कोने-कोने के स्वदेशी दुर्लभ उत्पाद और देश के हर हिस्से से लजीज़ पकवान उपलब्ध हैं। इसके अलावा देश के प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा हर रोज प्रस्तुत किये जाने वाले पारम्परिक सांस्कृतिक कार्यक्रम यहाँ आने वाले लोगों के लिए प्रमुख आकर्षण होंगे। इस “हुनर हाट” में “अनेकता में एकता की संस्कृति” का जीता-जागता एहसास लोग कर सकेंगे।

लकड़ी, ब्रास, बांस, शीशे, कपडे, कागज़, मिटटी आदि के शानदार उत्पाद

“हुनर हाट” में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, नागालैंड, मध्य प्रदेश, मणिपुर, बिहार, आँध्रप्रदेश, झारखण्ड, गोवा, पंजाब, उत्तराखंड, लद्दाख, कर्नाटक, गुजरात, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, केरल एवं अन्य क्षेत्रों से हुनर के उस्ताद कारीगर अपने साथ लकड़ी, ब्रास, बांस, शीशे, कपडे, कागज़, मिटटी आदि के शानदार उत्पाद लेकर आये हैं। वुड आयरन के उत्पाद, लकड़ी एवं मिट्टी के खिलौने, हैण्डलूम के उत्पाद, पारम्परिक जड़ी-बूटियां, हर्बल उत्पाद, रामपुरी चाकू, रामपुरी वायलिन, खादी के उत्पाद, ब्लैक पॉटरी, बांस-बेंत के सामान, ड्राई फ्लावर्स, ऑइल पेंटिंग, बाघ प्रिंट आदि के शानदार-जानदार उत्पाद रामपुर के “हुनर हाट” में उपलब्ध हैं।

सांस्कृतिक कार्यक्रम व “कवि सम्मेलन”

“हुनर हाट”, रामपुर में 18 और 19 दिसंबर को सुशील जी महाराज द्वारा “श्री राम राज्य” पर आधारित मंत्रमुग्ध कर देने वाली रामलीला लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र होगी। इसके अलावा जाने-माने गीत-संगीत के क्षेत्र के नाम रेखा राज; प्रेम भाटिया (20 दिसंबर); भूपेंद्र सिंह भूप्पी (20 दिसंबर); स्मिता राव (21 दिसंबर); असलम साबरी (22 दिसंबर); शिबानी कश्यप (23 दिसंबर); राजू श्रीवास्तव (24 दिसंबर); एहसान कुरैशी (25 दिसंबर); हमसर हयात निज़ामी (26 दिसंबर) जैसे प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किये जाएंगे। 27 दिसंबर को “कवि सम्मेलन” का आयोजन किया जायेगा जहाँ देश के प्रसिद्द कवि-शायर डा. अनामिका अंबर, पॉपुलर मेरठी, डा. सुनील जोगी, डा. सुरेश अवस्थी, निकहत अमरोहवी, शम्भू शिखर, मनवीर मधुर, डा. सरिता शर्मा, मंजर भोपाली, सुदीप भोला, गजेंद्र सोलंकी अपनी कविता-शायरी से लोगों को रूबरू करेंगे।

श्री नकवी ने कहा कि रामपुर का “हुनर हाट” ई प्लेटफार्म http://hunarhaat.org पर भी देश-विदेश के लोगों के लिए उपलब्ध रहेगा जहाँ लोग सीधे दस्तकारों, शिल्पकारों, कारीगरों के स्वदेशी सामानों को देख एवं खरीद सकेंगे। श्री नकवी ने कहा कि पिछले लगभग 5 वर्षों में 5 लाख से ज्यादा भारतीय दस्तकारों, शिल्पकारों को रोजगार-रोजगार के अवसर प्रदान करने वाले “हुनर हाट” के दुर्लभ हस्तनिर्मित स्वदेशी सामान लोगों में काफी लोकप्रिय हुए हैं।

अगला “हुनर हाट” लखनऊ में 22 से 31 जनवरी 2021 को

अगला “हुनर हाट”, “वोकल फॉर लोकल” थीम के साथ शिल्प ग्राम, लखनऊ में 22 से 31 जनवरी 2021 को आयोजित होगा। आने वाले दिनों में “हुनर हाट” का आयोजन जयपुर, चंडीगढ़, इंदौर, मुंबई, हैदराबाद, नई दिल्ली (इंडिया गेट), रांची, कोटा, सूरत/अहमदाबाद, कोच्चि आदि स्थानों पर होगा।

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दिल्ली पुलिस की महिला कार्यकारी पहनेंगी खादी सिल्क साड़ियां

25 लाख की 836 साड़ियों का आर्डर

खादी पर जोर:
दिल्ली पुलिस की महिला कार्यकारी
पहनेंगी खादी सिल्क साड़ियां

नई दिल्ली। विभिन्न सरकारी कार्यालयों में तेजी से खादी को स्वीकार किया जा रहा है। दिल्ली पुलिस अपनी महिला फ्रंट डेस्क कार्यकारियों के लिए सुंदर खादी सिल्क की साड़ियां खरीद रही है।

खादी और ग्रामीण आयोग उद्योग (केवीआईसी) को दिल्ली पुलिस से 25 लाख रुपये मूल्य की 836 खादी सिल्क की साड़ियां खरीदने का आदेश प्राप्त हुआ है। दोहरे रंग की साड़ियां तसर – कटिया सिल्क से बनाई जाएंगी। साड़ियों के नमूने दिल्ली पुलिस द्वारा उपलब्ध कराए गए, जिसके अनुसार केवीआईसी द्वारा साड़ियां बनाई जा रही हैं और दिल्ली पुलिस द्वारा स्वीकृत है। साड़ियां नेचूरल कलर सिल्क तथा गुलाबी रंग में कटिया सिल्क की मिश्रित होंगी।

केवीआईसी के अध्यक्ष श्री विनय कुमार सक्सेना ने कहा है कि दिल्ली पुलिस से मिले नवीनतम खरीद आदेश से खादी की बढ़ती लोकप्रियता जाहिर होती है। इससे खादी दस्तकारों को मजबूती मिलेगी। श्री सक्सेना ने कहा कि काफी वर्षों से खादी का ट्रेंड हो गया है। खादी कारीगरी है, इसलिए यह सबसे आरामदायक कपड़ा है। उन्होंने कहा कि सामान्यजन ही नहीं विशेषकर युवाओं और सरकारी निकायों द्वारा खादी को अपनाया जा रहा है। यह दूरदराज के कताई और बुनाई करने वाले दस्तकारों को बहुत बड़ा प्रोत्साहन है।

पश्चिम बंगाल में कारीगर कर रहे तैयार

दिल्ली पुलिस के लिए तसर – कटिया सिल्क की साड़ियां पश्चिम बंगाल में परम्परागत दस्तकारों द्वारा तैयार की जा रही हैं। तसर – कटिया सिल्क दो रंगों में उपलब्ध कपड़ा है जो तसर तथा कटिया सिल्क के मिश्रण से बनता है। इसकी बुनाई परम्परागत दस्तकार करते हैं और इसकी पहचान गहरी और भारी बुनावट से होती है। इसकी बुनावट तसर और कटिया की दो अलग – अलग धागों से की जाती है। यह खुरदरा होता है और देखने में सादा लगता है लेकिन सुराखदार बुनाई इस कपड़े को सभी मौसम में पहनने योग्य बना देती है।

Air India, Railway, Health व postal विभाग को भी सप्लाई

इससे पहले केवीआईसी ने चादरों और वर्दियों सहित खादी उत्पाद आपूर्ति के लिए भारतीय रेल, स्वास्थ्य मंत्रालय, भारतीय डाक विभाग, एयर इंडिया तथा अन्य सरकारी एजेंसियों से समझौता किया। केवीआईसी एयर इंडिया के क्रू सदस्यों तथा स्टाफ के लिए यूनिफॉर्म बना रहा है। आयोग 90 हजार से अधिक डाक बंधुओं/डाक बहनों के लिए यूनिफॉर्म बना रहा है।यूनिफॉर्म ऑनलाइन भी उपलब्ध हैं।

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