जिले के किसान बेचेंगे डेढ़ सौ करोड़ रुपए का गुड़

डेढ़ सौ करोड़ रुपए का गुड़ बेचेंगे जिले के किसान।नगुड़ निर्यातक कम्पनियों व गुड निर्माता किसानों के बीच हुआ ₹ 150 करोड़ का एमओयू।नबिजनौर कृषि के उत्पाद का हब बनेगा-जिलाधिकारी। गुड़ सहित कृषि उत्पाद राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मार्किट में छा जायें यह प्रयास है-जिलाधिकारी।जैविक खेती को बढावा दिया जाये, आने वाला कल जैविक खेती का है-जिलाधिकारी।

बिजनौर। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने किसानों व गुड़ निर्माताओें से कहा कि हम आपके साथ मजबूती से खड़े हैं। आप अपना रास्ता स्वयं खोजें तथा संगठित होकर अपने कृषि उत्पाद बेचें। उन्होंने कहा कि जिला बिजनौर कृषि के उत्पाद का हब बनेगा। यहां के सभी कृषि उत्पाद सहित जिसमें गुड भी राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय बाजार में छा जायें, यह प्रयास है। उन्होंने कहा कि बिजनौर को कृषि हब बनाना उददेश्य है। इस अवसर पर मण्डावर की 02 गुड़  निर्यातक कम्पनियों व 40 से अधिक गुड़ निर्माता किसानों के बीच ₹ 150 करोड़ का एमओयू (मैमोरेडम ऑफ अण्डरस्टेडिंग) भी हुआ।

कलक्ट्रेट सभागार में जिले के गुड़ निर्माता किसानों तथा गुड़ व शक्कर निर्यातकों की बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने कहा कि जैविक खेती को बढावा दिया जाये। उन्होंने कहा कि आने वाला कल जैविक खेती का है। कृषि उत्पाद क्रेता व विक्रेता को एक मंच पर लाना है। उन्होंने कहा कि किसान खेती के साथ-साथ अपना व्यापार व उधोग लगाने की ओर बढें। आज बिजनौर के प्रगतिशील किसान अपने उत्पादों को एमेजोन आदि अन्य पोर्टल पर बिक्री कर रहे हैं।जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने कहा कि बिजनौर का गुड़ व कृषि उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ख्याति पाए यह प्रयास है। कृषि उत्पादोें का निर्यात बढे। किसानोें को सम्पन्न बनाना व उनकी आय दोगुनी करना सरकार व प्रशासन का उद्देश्य है।

इस अवसर पर मण्डावर की 02 गुड़ निर्यातक कम्पनी हिन्दुस्तान ऐग्रो लिमिटेड व हेल्थ मिस्त ऑयल एण्ड फूड प्राईवेट लिमिटेड तथा 40 से अधिक गुड़ निर्माता किसानों के बीच ₹150 करोड़ का एमओयू हुआ। इस अवसर पर उप कृषि निदेशक गिरीश चन्द्र, जिला कृषि अधिकारी अवधेश कुमार मिश्रा, जिला गन्ना अधिकारी सहित जिले के प्रगतिशील किसान तथा गुड़ व शक्कर निर्माता आदि मौजूद रहे।

दुबई के साथ हुए कश्मीर में विकास के समझाैते पर चुप्पी क्योंॽ

दुबई की सरकार ने जम्मू−कश्मीर में विकास का बड़ा ढांचा तैयार करने का बहुत बड़ा निर्णय लिया है। इसके लिए उसने जम्मू−कश्मीर सरकार से एमओयू (समझौता) किया है। पिछले हफ्ते हुआ यह समझौता देश और दुनिया के लिए बड़ी खबर था, पर देश की राजनीति और अखबारी दुनिया में ये समाचार दम तोड़ कर रह गया। हालत यह है कि इस बड़े कार्य के लिए देश की पीठ थपथपाने वाले भारत के अखबार− पत्रकार और नेता चुप हैं, जबकि इस समझौते को लेकर पाकिस्तान में हलचल है।

जम्मू −कश्मीर के विपक्षी नेताओं से इस समझौते पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं थी। उनके लिए तो ये खबर पेट में दर्द करने वाली ज्यादा है। हाल में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने जम्मू−कश्मीर में बाहरी व्यक्तियों की मौत पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने ये भी कहा था कि अनुच्छेद 370 हटाने का क्या लाभ हुआॽ जब लाभ हुआ तो उनकी बोलती बंद है।

दुनिया के अधिकांश देश जम्मू− कश्मीर को विवादास्पद क्षेत्र मानते रहे हैं। पाकिस्तान जम्मू− कश्मीर विवाद को प्रत्येक मंच पर उठाकार भारत को बदनाम करने की कोशिश करता रहा है। इस सबके बावजूद ये समझौता भारत सरकार की बड़ी उपलब्धि है।

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस बारे में बताया कि दुबई सरकार और जम्मू-कश्मीर सरकार ने एक समझौता किया है। दुबई से समझौते में औद्योगिक पार्क, आईटी टावर, बहुउद्देश्यीय टावर, रसद केंद्र, एक मेडिकल कॉलेज और एक स्पेशलिटी हॉस्पिटल सहित बुनियादी ढांचे का निर्माण होना शामिल है। दुबई और जम्मू-कश्मीर प्रशासन के साथ यह समझौता इस क्षेत्र में (केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद) किसी विदेशी सरकार की ओर से पहला निवेश समझौता है। यह समझौता आत्मानिर्भर जम्मू-कश्मीर बनाने की हमारी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।

केंद्रीय एवं वाणिज्य उद्योग मंत्रालय ने सोमवार को एक प्रेस रिलीज़ में बताया था कि इस समझौते के तहत दुबई की सरकार जम्मू-कश्मीर में रियल एस्टेट में निवेश करेगी, जिनमें इंडस्ट्रियल पार्क, आईटी टावर्स, मल्टीपर्पस टावर, लॉजिस्टिक्स, मेडिकल कॉलेज, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल शामिल हैं। ये तो नहीं बताया गया कि दुबई की सरकार कितना निवेश करेगी, पर यदि वह यहां एक भी रूपया लगाता है तो ये देश की बड़ी उपलब्धि है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद दुबई दुनिया का पहला देश है, जो जम्मू कश्मीर के विकास में निवेश करने जा रहा है। ये समझौता ऐसे समय में हुआ है जब घाटी में आतंकियों ने मासूम नागरिकों, खासतौर पर गैर-मुस्लिमों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।

भारत की मीडिया और नेता देश की उपलब्धि पर भले ही चुप हों, पर पाकिस्तान में हलचल है। इस मुद्दे पर पाकिस्‍तान के पूर्व राजनयिक अब्‍दुल बासित ने इसको भारत की बड़ी जीत बताया है। अब्‍दुल बासित पाकिस्‍तान के भारत में राजदूत रह चुके हैं। बासित ने यहां तक कहा है कि इस एमओयू के साइन होने के बाद ये बात साफ होने लगी है कि अब कश्‍मीर का मुद्दा पाकिस्‍तान के हाथों से निकलता जा रहा है। उन्‍होंने कश्‍मीर मुद्दे के फिसलने को मौजूदा इमरान सरकार की कमजोरी बताया है। उन्‍होंने ये भी कहा कि नवाज शरीफ सरकार में भी कश्‍मीर के मुद्दे को कमजोर ही किया गया। बासित के मुताबिक दुबई और भारत के बीच हुए इस सहयोग के बाद निश्‍चित तौर पर ये भारत की बड़ी जीत है।
पाकिस्‍तान के राजनयिक के मुताबिक दुबई की इस्‍लामिक सहयोग संगठन में काफी अहम भूमिका है। इस नाते भी ये करार काफी अहमियत रखता है।बासित ने कहा है कि अब ये हाल हो गया है कि एक मुस्लिम देश भारत के जम्मू−कश्मीर में निवेश के लिए एमओयू साइन कर रहा है। बासित ने ये भी कहा कि आने वाले दिनों में ये भी हो सकता है कि ईरान और यूएई जम्‍मू कश्‍मीर में अपने काउंसलेट खोल दें। उन्‍होंने कहा कि हाल के कुछ समय में पाकिस्‍तान को कश्‍मीर के मुद्दे पर मुंह की खानी पड़ी है। इस मुद्दे पर वो पूरी तरह से अलग-थलग पड़ चुका है।

छोटी−मोटी बात पर सरकार की आलोचना करने वाला देश का विपक्ष आज इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर चुप्पी साध जाए, मीडिया में खबर को जगह न मिले, इस पर संपादकीय न लिखे जाएं, तो यह आपकी सोच को बताता है। इतिहास सबके कारनामें नोट कर रहा है। वह किसी को माफ नहीं करता। किसी को माफ नहीं करेगा।

अशोक मधुप (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के 5 एमओयू साइन

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के 5 एमओयू साइन
नई दिल्ली। जनजातीय कार्य मंत्रालय, ट्राइफेड, आईसीएआर, एनएसएफडीसी, नेफेड और एनसीडीसी के साथ खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के 5 एमओयू साइन किये गए हैं।

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने जनजातीय मामले मंत्रालय, जनजातीय सहकारी विपणन विकास महासंघ लिमिटेड (ट्राइफेड), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसएफडीसी), राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ लिमिटेड (नेफेड) और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) के साथ पांच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने जनजातीय कार्य मंत्रालय के साथ एक संयुक्त पत्र भी हस्ताक्षर किया। इसके अलावा, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकरण (पीएमएफएमई) योजना के लिए नोडल बैंक के रूप में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के साथ एक समझौते पर भी हस्ताक्षर किए।

एमओयू साइन करने के मौके पर खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत, जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा व खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रामेश्वर तेली उपस्थित थे।

सर्वप्रमुख है- सबका साथ, सबका विकास

इस अवसर पर श्री तोमर ने कहा कि इन एमओयू के माध्यम से सरकार की प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने, जीवन स्तर में बदलाव लाने व सरकार की योजनाओं के माध्यम से हितग्राहियों का जीवन संवारने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकताएं तो बहुत है, लेकिन सर्वप्रमुख है- सबका साथ, सबका विकास। छोटे उद्यमी सरकार के सहकार के बिना आगे नहीं बढ़ सकते, इसलिए जरूरी है कि उन्हें सरकार का साथ मिले।

800 करोड़ रू. की उपलब्धता अनुसूचित जाति के लिये

श्री गहलोत ने कहा कि इस स्कीम में 800 करोड़ रू. की उपलब्धता अनुसूचित जाति के लोगों के लिए है, जिससे उन्हें काफी लाभ मिलेगा और वे स्वावलंबी एवं आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। श्री मुंडा ने कहा कि इन एमओयू से आत्मनिर्भर भारत की दृष्टि से पूरे देश को सबल बनाने का महत्वपूर्ण अवसर है। इनके माध्यम से लिंक बनने से विभिन्न क्षेत्रों में लोगों को लाभ पहुंचेगा। श्री तेली ने कहा कि पांच एमओयू नए अवसर और संभावनाएं लाएंगे। इससे टीम भावना और बढ़ेगी।

ट्राइफेड के साथ एमओयू, स्कीम से जुड़े आदिवासियों व अन्य उद्यमों द्वारा बनाए फूड प्रोडक्ट्स के लिए ब्रांड ‘ट्रायफूड’ के तहत ब्रांडिंग की सुविधा प्रदान करेगा। फूड प्रोडक्ट्स के लिए ब्रांडिंग,मार्केटिंगअच्छी पैकेजिंग आदि का विकास भी हो सकेगा।

आईसीएआर के साथ एमओयू से विभिन्न संस्थानों, विशेषकर फसल-विशिष्ट संस्थानों में विकसित खाद्य प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियों, पैकेजिंग व मशीनरी के विवरण साझा करने की सुविधा होगी, जो सूक्ष्म उद्यमों/एफपीओ/एसएचजी/सहकारिता के लिए उपयुक्त है ताकि प्रक्रियाओं/उत्पादों को प्राथमिकता के रूप में सुदृढ़ किया जा सके। आईसीएआर के संस्थान पीएमएफएमई योजना के अंतर्गत क्षमता निर्माण प्रयास का समर्थन करने के लिए डीपीआर, पठन सामग्री, श्रव्य-दृश्य प्रशिक्षण सामग्री और विशिष्ट उत्पादों/प्रक्रियाओं से संबंधित फिल्में तैयार करने में मदद करेंगे।

नैफेड के साथ एमओयू से एफपीओ/एसएचजी/को-ऑपरेटिव समूहों द्वारा बनाए कृषि खाद्य उत्पादों के विपणन व विकास से ‘नेफेड फूड’उत्पाद के लिए एक नए ब्रांड के विकास में आसानी होगी।

एनसीडीसी के साथ एमओयू, राज्यों में फूड प्रोसेसिंग में जुटी सहकारी समितियों और इनके सदस्यों को परियोजनाओं की तैयारी और उनकी विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट में सहायक होगा।

एक नोडल बैंक के रूप में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया केंद्र और राज्य सरकार से प्राप्त सब्सिडी राशि को ऋण बैंक खाते में हस्तांतरित करने में सुविधा प्रदान करेगा।

कार्यक्रम में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की सचिव श्रीमती पुष्पा सुब्रह्मण्यम, जनजातीय कार्य मंत्रालय के सचिव दीपक खांडेकर, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मनोज जोशी, आईसीएआर के महानिदेशक, एनएसएफडीसी के मुख्य प्रबंध निदेशक एस. के. नारायण, एनसीडीसी के कार्यकारी निदेशक एस.के.टी. चन्नेशप्पा, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया महाप्रबंधक विनोद कुमार पटनायक व ट्राइफेड के उप महाप्रबंधक अमित भटनागर उपस्थित थे।


पीएमएफएमई योजना-

आत्मनिर्भर भारत अभियान में प्रारंभ पीएमएफएमई केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के असंगठित क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रोत्सहित करना व क्षेत्र के औपचारिकता को बढ़ाना तथा एफपीओ, स्वयं सहायता समूहों और उत्पादक सहकारी समितियों को उनकी संपूर्ण मूल्य श्रृंखला के साथ सहायता प्रदान करना है। वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक 10,000 करोड़ रू. के खर्च के साथ, इस योजना में मौजूदा सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों के उन्नयन के लिए वित्तीय, तकनीकी और व्यावसायिक सहायता प्रदान करने के लिए 2,00,000 सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण यूनिटों को सीधे सहायता देने की परिकल्पना की गई है।

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