मूर्तिकार ने बनाई मुलायम सिंह यादव की प्रतिमा, देखने लोगों की उमड़ी भीड़

मूर्तिकार ने बनाई मुलायम सिंह यादव की प्रतिमा, देखने लोगों की उमड़ी भीड़


लखनऊ। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले से मुलायम सिंह यादव का गहरा नाता रहा है. प्रदेश के हर जिले की तरह यहां भी पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत मुलायम सिंह यादव के चाहने वाले हैं. इन्हीं चाहने वालों में एक कलाकार है, जोकि इन दिनों चर्चा में है.

दरअसल, लालगंज इलाके के राजमो गांव निवासी राजबली यादव पेशे से मूर्तिकार हैं. वो मुलायम सिंह यादव के प्रशंसक हैं और उनको आदर्श मानते हैं. उन्होंने दिवंगत मुलायम सिंह यादव को अपनी कलाकारी के जरिए सच्ची श्रद्धांजलि दी है. राजबली ने मुलायम सिंह की हूबहू प्रतिमा बनाई है, जोकि जिले के साथ ही यूपी में सुर्खियों में है. मूर्ति को देखने वाले लोगों का कहना है कि ऐसा लगता है कि नेताजी अभी बोलेंगे. राजबली यादव का कहना है, “मैं नेताजी की प्रतिमा को अपने पैतृक गांव रजमो में स्थापित करना चाहता हूं. चाहता हूं कि इस प्रतिमा का अनावरण समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव करें. इसके लिए उनसे निवेदन भी किया है. इस प्रतिमा को लोग अभी से देखने के लिए जुट रहे हैं”.

राजबली यादव कहते हैं, “नेताजी जो कहते थे वो करते थे. इसी वजह से जनता उनको आज भी प्रेम करती है. उत्तर प्रदेश ही नहीं देश भर में नेताजी के चाहने वाले हैं. नेताजी मेरे मन में बसे हुए हैं. उनके देहांत के बाद मैं बहुत दु:खी था. एक मूर्तिकार और उनका प्रशंसक होने के नाते मैंने प्रण किया कि मन में उनकी जो तस्वीर बसी है उसे प्रतिमा का रूप दिया जाए. मैं अपने इस काम में काफी सफल रहा. प्रतिमा तैयार है, जिसे देखकर लोग कह रहे हैं कि ये हूबहू नेताजी की तरह लग रही है”.

सोर्स न्यूज़ – आज तक

ट्रांसफर के आठ साल बाद आमद कराने थाने पहुंचा सिपाही

प्रतापगढ़: उत्तर प्रदेश के महोबा से प्रतापगढ़ पहुंचने में सिपाही को 8 साल लग गए. 2014 में महोबा में तैनात सिपाही का प्रतापगढ़ तबादला हुआ था, लेकिन वह प्रतापगढ़ पहुंचा 2022 में. आठ साल बाद पुलिस लाइन पहुंचे सिपाही ने जब पूरी कहानी बताई तो लोग हैरत में पड़ गए. फिलहाल सिपाही के 8 साल तक गायब रहने की जांच चल रही है.

दरअसल, बांदा जिले का रहने वाला प्रेम नारायण पाल जनवरी, 2014 में महोबा जनपद में बतौर आरक्षी तैनात था. यहां से उसका स्थानांतरण प्रतापगढ़ के लिए हुआ लेकिन वह प्रतापगढ़ पुलिस लाइन आमद कराने नहीं पहुंचा. ट्रांसफर के आठ साल बाद अक्टूबर 2022 में प्रेम नारायण पाल पुलिस लाइन पहुंचा. मामला संज्ञान में आने के बाद पुलिस अधीक्षक सतपाल अंतिल ने इस मामले की जांच सीओ लाइन प्रभात कुमार को सौंप दी. इसके बाद सीओ में बांदा से लेकर महोबा तक जांच पड़ताल की. इस मामले में पुलिस के सामने बड़ी चुनौती थी कि क्या आठ साल से गायब सिपाही प्रेम नारायण पाल ही ज्वाइनिंग के लिए पहुंचा है या कोई.

सिपाही प्रेम नारायण ने बताया कि उसका एक्सीडेंट हो गया था और घर मे कोई ऐसा नहीं था, जो इलाज के लिए कहीं ले जा सके, न ही उसके पास पैसा था, जिसके चलते उसकी पत्नी और बुजुर्ग पिता ने घर पर ही देशी इलाज कराया, इलाज के लिए उसके बुजुर्ग मां-बाप ने पहले जमीन बेचीं, फिर उसने खुद भी जमीन बेचकर इलाज कराया.

म्यूजिक इंडस्ट्री में किस्मत आजमाने~ प्रेम नारायण ने बताया कि वो विभिन्न गायकों की आवाज में गाना भी अच्छा गाता है, जिसके चलते वह मुंबई पहुंच गया. म्यूजिक इंडस्ट्री में किस्मत आजमाने के लिए तानपुरा लेकर पहुंचा और 10 हजार में कमरा लिया, लेकिन आगे किराया दे पाना सम्भव नहीं हुआ तो वापस लौट आया, इस दौरान सेहत में सुधार होता रहा और आठ साल बाद प्रतापगढ़ पहुंचा.

कब्जे से फरार हो गया था पाकिस्तानी ~ एसपी ने नौकरी के दौरान मिली सजा के बारे में पूछा तो सिपाही प्रेम नारायण ने बताया, ‘इलाहाबाद के लाल गोपालगंज इलाके में एक पाकिस्तानी उसके कब्जे से भाग गया था, इस मामले में साथ रहा दरोगा कई बार पीसीओ से उसकी बात कराता रहा और सुरक्षा में तैनात सिपाही विरोध करते रहे, इस घटना में मुझे व अन्य सिपाहियों को निलंबित किया गया था, जबकि दरोगा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था, दरोगा जांच में दोषी पाया गया, जिसके बाद उसे बर्खास्त कर दिया गया और मुझ समेत सिपाहियों को बहाल कर दिया गया.’ जब एसपी सतपाल अंतिल, सिपाही प्रेम नारायण के जवाब से संतुष्ट हो गए थे तो उसकी आमद करा ली, लेकिन मामले की जांच अभी भी जारी है.

साभार
https://jantaserishta.com/national/sp-sahib-was-shocked-the-reason-is-this-story-of-policeman-1715387

बैलगाड़ी पर निकली डॉक्टर की बारात

बैतूल (एजेंसी)। आमतौर पर शादी समारोह में लोग अपनी हैसियत और ताकत का प्रदर्शन करने से नहीं चूकते, मगर मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में एक चिकित्सक ने अपने विवाह समारोह में सादगी की मिसाल पेश की। उसने अपनी बारात बैलगाड़ी पर निकाली। लगभग तीन किलो मीटर का सफर बैलगाड़़ी पर ही तय किया।

बैतूल के चिचोली विकास खंड का आदिवासी बाहुल्य गांव असाढ़ी है। यहां के डॉ. राजा धुर्वे की शादी थी, उन्होंने आदिवासी समाज की परंपरा और शादी सादगी से करने का फैसला लिया और बारात बैलगाड़ी से निकाली। इसके लिए बैलगाड़ी को आकर्षक रुप दिया। इस बैलगाड़ी की चमक के आगे लग्जरी कार और बग्घियां भी फीकी दिखाई दीं। डॉ राजा पेशे से एमबीबीएस डॉक्टर, शिक्षक और मोटिवेशनल स्पीकर हैं।

इस मौके पर राजा धुर्वे का कहना था कि अपने सामाजिक, सांस्कृतिक मूल्यों को सहेजने और लोगों को महंगाई के दौर में सादा जीवन-उच्च विचार सिखाने का इससे अच्छा मौका नहीं हो सकता था। उनके मुताबिक महंगाई के इस दौर में बैलगाड़ी सबसे सस्ता सुलभ और प्रदूषणमुक्त साधन है। बैलगाड़ी ग्रामीण सभ्यता संस्कृति की पहचान है। इसलिए अपनी संस्कृति को पुनर्जीवित करने के लिए उन्होंने बैलगाड़ी पर बारात ले जाने का फैसला किया।

इस अनूठी बारात में बैलगाड़ी को खास जनजातीय, लोक-कलाओं से सजाया गया था। दूल्हे की बैलगाड़ी के पीछे चार बैलगाडियां में बच्चों और महिलाओं को बैठाया गया। बारात में जनजातीय लोक नृत्य और लोक वाद्य शामिल किए गए थे, जो आमतौर पर किसी शादी में देखने को नहीं मिलते। ग्राम असाढ़ी से बैलगाड़ी में निकले दूल्हे राजा जब तीन किलोमीटर दूर दूधिया गांव में अपनी दुल्हन को लेने पहुंचे तो लोग झूम उठे।

कुर्सी पर बैठने के स्‍टाइल से जानिए  अच्‍छाइयां-बुराइयां!

कुर्सी पर बैठने का स्‍टाइल बताता है आपकी अच्‍छाइयां-बुराइयां! ये है जानने का तरीका | [know your personality by your sitting posture or style of sitting on chair

कुर्सी पर बैठने का स्‍टाइल बताता है आपकी अच्‍छाइयां-बुराइयां! ये है जानने का तरीका

किसी भी व्‍यक्ति का स्‍वभाव और पर्सनालिटी के छिपे हुए राज उसके बैठने के अंदाज से भी जाने जा सकते हैं। व्‍यक्ति का कुर्सी या सोफे पर बैठने का तरीका उसके बारे में कई अहम बातें बताता है।

नई दिल्‍ली (एजेंसी)। कुंडली के ग्रह-नक्षत्र, हाथ की रेखाएं, जन्‍म तारीख, शरीर के तिल आदि के जरिए व्‍यक्ति की पर्सनालिटी-भविष्‍य के बारे में जाना जा सकता है। वैसे ही लोगों का उठने-बैठने, चलने का अंदाज भी बहुत कुछ बताता है। आज हम कुर्सी पर बैठने के अंदाज से व्‍यक्ति के स्‍वभाव-व्‍यवहार के बारे में जानने का तरीका बताते हैं। यह भी बॉडी लैंग्‍वेज का एक हिस्‍सा है।

बैठने के तरीके से जानें अपनी खासियतें 

– ऐसे लोग जो कुर्सी पर बैठते समय अपने घुटनों को तो पास रखते हैं, लेकिन नीचे अपने पैरों को दूर-दूर रखते हैं। ऐसे लोगों में जिम्‍मेदारी की भावना कम होती है। मुश्किल सामने आते ही ये लोग सबसे जल्‍दी भागते हैं। हालांकि ये लोग आकर्षक पर्सनालिटी वाले और बेबाक होते हैं।

– जो लोग क्रॉस लेग में बैठते हैं या एक के ऊपर एक पैर रखकर बैठते हैं वे क्रिएटिव, विनम्र और शर्मीले होते हैं। ये लोग जीवन का खुलकर आनंद लेते हैं, लेकिन कभी भी ऐसा काम नहीं करते हैं जिसे करना वे सही न समझें।

– जो लोग कुर्सी पर बैठते समय ऊपर पैरों को दूर करके रखते हैं लेकिन नीचे पैरों को पास-पास रखते हैं, ऐसे लोग आराम से जीवन जीना पसंद करते हैं। कह सकते हैं कि  मेहनत करना इनके वश की बात नहीं होती है। ये लोग अपना ध्‍यान केंद्रित नहीं कर पाते, इनका दिमाग भटकता रहता है।

– जो लोग कुर्सी पर बैठते समय अपने पैरों को घुटने से लेकर नीचे तक एक सीध में और पासपास रखते हैं, वे अनुशासित जीवन जीते हैं। ये लोग समय के पाबंद होते हैं और आत्‍मनिरीक्षण करते हैं। वे हमेशा अपने आपको बेहतर बनाने के लिए कोशिश करते रहते हैं। ये लोग गैर जिम्‍मेदार और अभद्र व्‍यवहार करने वालों को बर्दाश्‍त नहीं कर पाते हैं।  

– ऐसे लोग जो दोनों पैरों को चिपकाकर और तिरछा रखकर बैठते हैं, ये लोग जिद्दी लेकिन कूल होते हैं। वे खासे महत्वाकांक्षी होते हैं और जो फैसला ले लें उस पर अड़े रहते हैं।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है।

दुनिया का सबसे पहला प्रेम पत्र!

कृष्ण कुमार यादव; पोस्ट मास्टर जनरल वाराणसी परिक्षेत्र

हम में से हर किसी ने अपने जीवन में किसी न किसी रूप में प्रेम-पत्र लिखा होगा। प्रेम-पत्रों का अपना एक भरापूरा संसार है। प्रेम जैसी अनुपम भावना को व्यक्त करने के लिए शब्द सचमुच नाकाफी होते हैं। दुनिया की तमाम मशहूर शख्सियतों ने प्रेम-पत्र लिखे हैं- फिर चाहे वह नेपोलियन हों, अब्राहम लिंकन, क्रामवेल, बिस्मार्क या बर्नार्ड शॉ हों। आज ये पत्र एक धरोहर बन चुके हैं। ऐसे में यह जानना अचरज भरा लगेगा कि दुनिया का सबसे पुराना प्रेम पत्र बेबीलोन के खंडहरों से मिला था। बेबिलोन की किसी युवती का प्रेमी अपनी भावनाओं को समेटकर उससे जब अपने दिल की बात कहने वहां तक पहुंचा, तो वह युवती तब तक वहां से जा चुकी थी। वह प्रेमी युवक अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाया और उसने वहीं मिटटी के फर्श पर खोदते हुए लिखा- ‘मैं तुमसे मिलने आया था, तुम नहीं मिली।’ यह छोटा-सा संदेश विरह की जिस भावना से लिखा गया था, उसमें कितनी तड़प शामिल थी। इसका अंदाजा सिर्फ वह युवती ही लगा सकती थी, जिसके लिए इसे लिखा गया। भावनाओं से ओत-प्रोत यह पत्र ईसा से बहुत पहले का है और इसे ही दुनिया का प्रथम प्रेम पत्र माना जाता है।

16 लाख किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से आ रहा सौर तूफान, किसी भी समय धरती से टकराने का खतरा

वाशिंगटन (एजेंसी)। सूरज की सतह से पैदा हुआ शक्तिशाली सौर तूफान 1609344 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी की तरफ बढ़ रहा है। यह सौर तूफान रविवार या सोमवार को किसी भी समय पृथ्वी से टकरा सकता है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस तूफान के कारण सैटेलाइट सिग्नलों में बाधा आ सकती है। विमानों की उड़ान, रेडियो सिग्नल, कम्यूनिकेशन और मौसम पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।
ध्रुवों पर दिखेगी रात में तेज रोशनी
स्पेसवेदर डॉट कॉम वेबसाइट के अनुसार, सूरज के वायुमंडल से पैदा हुए इस सौर तूफान के कारण पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के प्रभुत्व वाले अंतरिक्ष का एक क्षेत्र में काफी प्रभाव देखने को मिल सकता है। उत्तरी या दक्षिणी अक्षांशों पर रहने वाले लोग रात में सुंदर आरोरा देखने की उम्मीद कर सकते हैं। ध्रुवों के नजदीक आसमान में रात के समय दिखने वाली चमकीली रोशनी को आरोरा कहते हैं।

16 लाख किमी की रफ्तार से बढ़ रहा तूफान
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का अनुमान है कि ये हवाएं 1609344 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि हो सकता है कि इसकी स्पीड और भी ज्यादा हो। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अंतरिक्ष से महातूफान आता है तो धरती के लगभगर हर शहर से बिजली गुल हो सकती है।
पृथ्वी पर क्या होगा असर?
सौर तूफान के कारण धरती का बाहरी वायुमंडल गरमा सकता है जिसका सीधा असर सैटलाइट्स पर हो सकता है। इससे जीपीएस नैविगेशन, मोबाइल फोन सिग्नल और सैटलाइट टीवी में रुकावट पैदा हो सकती है। पावर लाइन्स में करंट तेज हो सकता है जिससे ट्रांसफॉर्मर भी उड़ सकते हैं। हालांकि, आमतौर पर ऐसा कम ही होता है क्योंकि धरती का चुंबकीय क्षेत्र इसके खिलाफ सुरक्षा कवच का काम करता है।

22 वर्ष पहले भी हो चुका ऐसा
ये पहली बार नहीं है जब सौर तूफान धरती की ओर आ रहा है। करीब 22 वर्ष पहले 1989 में भी सौर तूफान की वजह से कनाडा के क्‍यूबेक शहर में 12 घंटे के लिए बिजली गुल हो गई थी। इसके साथ ही लाखों लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा था।

इससे पहले वर्ष 1859 में आए चर्चित सबसे शक्तिशाली जिओमैग्‍नेटिक तूफान ने यूरोप और अमरीका में टेलिग्राफ नेटवर्क को तबाह कर दिया था।कुछ ऑपरेटर्स को बिजली का झटका भी लगा था। उस दौरान रात में भी इतनी तेज रोशनी हुई थी कि नॉर्दन अमरीका में बगैर लाइट के भी लोग अखबार पढ़ पा रहे थे।

वैक्सीन लगवाने को BJP भेज रही पीले चावल

वैक्सीन लगवाने को लोगों को मना रही BJP, निकाला अनूठा तरीका, भेजे जा रहे पीले चावल वाले पोस्टकार्ड

नई दिल्ली। पूरे देश में लोगों की सुरक्षा हेतु वैक्सीन लगवाने का अभियान चलाया जा रहा है ताकि महामारी से जल्द से जल्द राहत पा सकें। केंद्र व राज्य अपने स्तर पर प्रयासरत हैं. हालांकि वैक्सीन की कमी की भी शिकायत आ रही है।

इस बीच मध्य प्रदेश में वैक्सीनेशन को बढ़ावा देने के लिए BJP ने एक विशेष और अनूठा तरीका निकाला है। भोपाल में लोगों के घरों पर पोस्टकार्ड के जरिये पीले चावल भेजकर कोरोना वैक्सीन लगवाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

दरअसल कई जगहों से लोगों के द्वारा वैक्सीन नहीं  लगवाने की खबर आ रही है। कोई डर रहा है तो कोई भ्रम के कारण ऐसा कर रहा है। इसलिए BJP कार्यकर्ताओ द्वारा इसका भी इलाज ढूँढा गया है इसलिए अब उन्होंने सबके घर पोस्टकार्ड भेजने का निर्णय लिया है। कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा क़ि कुछ भ्रम फैला रहे हैं, हम हक़ीकत फैलाएंगे। इसमें उन्होंने पीले चावल लगा लोगों से स्वयं और अपने, अपनों और मित्रों इत्यादि को भी प्रोत्साहित कर टीका लगवाने का आग्रह किया गया है।

मैं भगवान विष्णु का 10वां अवतार, नहीं आ सकता ड्यूटी!

ऑफिस न जाने का परफेक्ट बहाना! गुजरात के अफसर ने कहा- मैं विष्णु का 10वां अवतार, काम पर नहीं आ सकता

अहमदाबाद। गुजरात सरकार के एक अधिकारी ने दावा किया है कि वो भगवान विष्णु के दसवें अवतार कल्कि हैं और वो ऑफिस नहीं आ सकते क्योंकि वह ‘‘विश्व का अंत: करण’’ बदलने के लिए ‘‘तपस्या’’ कर रहे हैं। 

सरदार सरोवर पुनर्वास एजेंसी के इंजीनियर रमेश चंद्र फेफर ने कारण बताओ नोटिस का जवाब देते हुए कहा कि उनकी तपस्या को धन्यवाद कि देश में अच्छी बारिश हो रही है। फेफर को जारी किया गया नोटिस और उनका अजीबो गरीब जवाब वायरल हो गया है। फेपर ने अपने राजकोट स्थित घर पर मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि – आप विश्वास नहीं करेंगे, लेकिन मैं भगवान विष्णु का दसवां अवतार हूं और आने वाले दिनों में मैं इसे साबित कर दूंगा। मैं मार्च 2010 में ऑफिस में था तो मुझे महसूस हुआ कि मैं कल्कि अवतार हूं। तब से मेरे पास दिव्य शक्तियां हैं।

8 महीने से दफ्तर नहीं गया, नोटिस के जवाब में कहा- मैं विष्णु अवतार हूं, काम  नहीं कर सकता - A superintendent engineer in Gujarat claimed to be Kalki the  tenth incarnation

तीन दिन पहले एजेंसी की ओर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। 50 साल पूरे कर चुके फेफर ने नोटिस का जवाब देते हुए कहा है कि वो ऑफिस नहीं आ सकते हैं, क्योंकि तपस्या में लीन हैं। फेफर ने कहा कि वैश्विक अंत:करण के बदलाव के लिए अपने घर में तपस्या कर रहा हूं। मैं आफिस में बैठ कर इस तरह की तपस्या नहीं कर सकता हूं। उन्होंने दावा किया कि उनकी तपस्या की वजह से ही भारत में पिछले 19 साल से अच्छी बारिश हो रही है। अब यह एजेंसी को तय करना चाहिए कि मुझे ऑफिस में बैठाकर टाइम पास कराना ज्यादा महत्वपूर्ण है या फिर देश को सूखे से बचाने के लिए कुछ ठोस काम करना है। मैं कल्कि अवतार हूं, इसलिए भारत में अच्छी बारिश हो रही है।

नोटिस के मुताबिक, फेफर पिछले आठ महीने में वडोदरा स्थित अपने आफिस में सिर्फ 16 दिन गए। नोटिस में कहा गया है कि गजटेड ऑफिसर का इस तरह से अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहना शोभा नहीं देता है। आपकी अनुपस्थिति के चलते एजेंसी के काम रुकावट आ रही है। गौरतलब है कि सरदार सरोवर परियोजना से प्रभावित लोगों के पुनर्वास का काम SSPA देख रही है। (साभार)

कॉर्बेट नेशनल पार्क में मिला बेहद दुर्लभ प्रजाति का सांप

कॉर्बेट नेशनल पार्क अंतर्गत कालागढ़ स्थित वन्य जीव प्रशिक्षण केंद्र के परिसर में बेहद दुर्लभ प्रजाति का सांप मिला है।

कालागढ़। वन्य जीव प्रशिक्षण केंद्र के कर्मचारियों की नजर संस्थान के परिसर में मौजूद हरे रंग के लंबे व बेहद पतले सांप पर पडी, लोगों की आहट को भांप कर सांप देखते ही देखते पेड़ों में गायब हो गया। वहीं इससे पहले ही मौके पर मौजूद कर्मियों द्वारा सांप की तस्वीरें ले ली गईं। विभागीय रैस्क्यूअर दीपक ने फोटो देखने के बाद बताया कि उक्त सांप वाइन स्नैक प्रजाति का है। इसे लता सांप भी कहा जाता है। यह मध्यम जहरीला लेकिन बेहद पतला, लम्बा तथा हरे रंग का होता है। यह सांप पेड़ों के ऊपर ही रहकर शिकार करता है तथा पश्चिमी घाटी जैसे वर्षा वनों में पाया जाता है। इस प्रजाति के सांप की यहां मौजूदगी को आश्‍चर्यजनक मानी जा रही है। कालागढ़ के उपवनसंरक्षक केएस खाती ने मामले की पुष्टि की है। वहीं कार्बेट नेशनल पार्क प्रशासन इस प्रजाति के सांप की मौजूदगी पहली बार दर्ज होने से प्रफुल्लित है।

महिला को मारकर निकाला दिल, फिर आलू मिलाकर बनाई सब्जी

पहले महिला की हत्या कर दिल निकाला, फिर टुकड़े कर बनाई आलू और दिल की सब्जी

ओक्लाहोमा। दुनिया में ऐसे भी लोग रहते हैं जो कि इंसान को मारकर इंसान का ही मांस खाते हैं। इसी तरह की एक घटना अमेरिका के ओक्लाहोमा में सामने आई है। यहां एक व्यक्ति ने अपनी पड़ोसी महिला की हत्या कर दी। हत्या करने के बाद सीने को चीरा और दिल निकाल लिया।

नरभक्षी की तरह दिल निकालकर उसे पीस काटे और आलू के साथ पकाया। उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वह दिल और आलू की सब्जी खाना चाहता था। ओक्लाहोमा स्टेट ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन के एक एजेंट ने बताया कि आरोपी लॉरेंस पॉल एंडरसन ने ओक्लाहोमा सिटी के दक्षिण-पश्चिम में लगभग 40 मील की दूरी पर चिकशा में अपनी पड़ोसी एंड्रिया लिन ब्लैंकेनशिप की उसके ही घर में हत्या कर दी।
हत्या करने के बाद उसने एंड्रिया का दिल काटकर निकाल लिया, ताकि उसे आलू के साथ पकाकर अपने परिवार को खिलाकर राक्षसों को बाहर निकाल सके। केस दर्ज हो चुका है और अब शख्स को सजा दी जा रही है। जज भी यह मामला सुनकर सन्न रह गया है। हो सकता है आपका दिमाग भी यह खबर पढ़ने के बाद सन्न रह गया होगा।

अज्ञातवास को अभिशप्त है स्योहारा पालिका की एंबुलेंस


एक साल से अज्ञातवास में है स्योहारा पालिका की एंबुलेंस
जनता के धन को लगाया जा रहा पलीता
संचालन कब से होगा नहीं किसी के पास जवाब
बिजनौर। विकास के नाम पर जनता के पैसे की किस तरह बर्बादी की जाती है। इसका जीता जागता उदाहरण जनपद बिजनौर के स्योहारा नगर पालिका परिषद का है। यहां विकास के नाम पर स्योहारा की जनता की सेवा के लिए लाई गई एंबुलेंस का एक साल होने के बाद भी उसका संचालन नहीं किया जा सका है। इसका रजिस्ट्रेशन नंबर यूपी २०एटी६७४२है, परिवहन कार्यालय से भी जानकारी हासिल करने पर पता चल जाएगा कि यह कितनी पुरानी है।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक लगभग साढ़े सात लाख रुपए कीमत की एंबुलेंस को लगभग एक साल हो गया है। लोगों की जान बचाने के लिए लाई गई एंबुलेंस आज खुद अपने वजूद को नहीं बचा पा रही है। जनता की नजरों से छिपाकर एक ऐसे स्थान पर एंबुलेंस को खड़ा किया गया है, जहां उसका पुरसाहाल कोई नहीं है। जनवरी 2020 को नगर पालिका परिषद द्वारा द्वारा लाई गई इस एंबुलेंस की शक्ल-ओ-सूरत जनता तो छोडि़ए नगर पालिका परिषद के सभासदों ने भी नहीं देखी है। जनता से एम्बुलेंस के बारे पूछा जाता है तो उनका जवाब इंकार में होता है। पालिका प्रशासन से इस विषय में अगर सवाल पूछे जाते हैं कि एंबुलेंस कहां है तो कहा जाता है कि सुरक्षित स्थान पर खड़ी है,लेकिन वह सुरक्षित स्थान कहां है यह नहीं बताया जाता। एंबुलेंस की कीमत पूछें तो कहा जाता है कि जेम पोर्टल पर देख लीजिए। एंबुलेंस सेवा में क्यों नहीं है तो कोरोना काल का हवाला दिया जाता है। हालांकि नगर पालिका अधिशासी अधिकारी अरुणेंद्र पांडे इस बात को स्वीकारते हैं कि नगरपालिका में जनता की सेवा के लिए एक एंबुलेंस लाई गई है, परंतु यह कब तक चलेगी इसका कोई संतोषजनक जवाब वह नहीं दे पाए।
नगर पालिका के सभासद सीधे-सीधे नगर पालिका अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हैं। सवाल यह उठता है कि आखिर एक साल के अंतराल में नगर पालिका की बोर्ड मीटिंग में अभी तक एंबुलेंस के संचालन को लेकर सहमति क्यों नहीं बन पाई। क्या एंबुलेंस को लाने से पहले से पहले बोर्ड मीटिंग में इस पर चर्चा नहीं की गई थी? सवाल बहुत हैं जिनके जवाब नगर की जनता ढूंढ़ रही है। यदि एंबुलेंस के किराया निर्धारण करने देर की गई तो वह दिन दूर नहीं जब एंबुलेंस खड़े-खड़े मलबे के रूप में तब्दील हो जाएगी और उस समय उसकी कीमत ना के बराबर होगी।

घर पहुंचने के पहले आ गए शव में प्राण!

घर पहुंचने के पहले ही जीवित हो उठा मृत युवक
चिकित्सकों ने मृत कर दिया था घोषित
परिजन शव लेकर जा रहे थे घर

बिजनौर। इसे कुदरत का करिश्मा ही कहा जाएगा कि सड़क दुर्घटना में घायल जिस युवक को चिकित्सक मृत घोषित कर चुके थे, जीवित हो उठा। दरअसल सड़क दुर्घटना में घायल एक युवक को उचित उपचार के लिए हायर सेंटर रेफर किया गया था। वहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया गया। परिजन उसका शव लेकर घर वापस चले, लेकिन रास्ते में ही मृत युवक जीवित हो गया। यह चमत्कार देख रोते बिलखते परिजनों में खुशी की लहर दौड़ गई। मामला नगीना तहसील अंतर्गत बढ़ापुर के मोहल्ला नौमी का है।
जानकारी के अनुसार नगीना तहसील अंतर्गत बढ़ापुर नगर के मोहल्ला नौमी निवासी मंगल पुत्र जयपाल सिंह गत 13 फरवरी को बाइक से अपने एक साथी के साथ नगीना जा रहा था। ग्राम इस्लामाबाद चौराहे के समीप सड़क दुर्घटना में दोनों बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो गए थे। घायलों को उचित उपचार के लिए एंबुलेंस द्वारा जिला चिकित्सालय भेज दिया गया था। मंगल की हालत चिंताजनक देखते हुए चिकित्सकों ने उचित उपचार के लिए हायर सेंटर मेरठ रेफर कर दिया। वहीं परिजन मंगल को उत्तराखंड राज्य के ऋषिकेश स्थित एम्स अस्पताल ले गए। वहां पर बीते करीब 2 दिनों से मंगल का भाई राहुल उसकी तीमारदारी कर रहा था। बुधवार को चिकित्सकों द्वारा मंगल को मृत घोषित कर दिया गया।
मृतक मंगल के भाई राहुल ने बताया कि वह अपने भाई के मृत शरीर को लेकर ऋषिकेश से निकल चुका था। हरिद्वार पहुंचने पर उसने देखा कि उसके भाई के शरीर में एक बार फिर हलचल हो रही है। देखा तो पता चला कि मृत शरीर में जान पड़ चुकी थी। इसे कुदरत का करिश्मा कहते हुए बताया कि ऋषिकेश से हरिद्वार तक वह भाई के मरने का दु:ख मनाता चला आ रहा था। वहीं हरिद्वार से भाई के जीवित होने की खुशी मनाता आया। घर पहुंचने पर परिजनों में भी खुशी की लहर दौड़ गई। बढ़ापुर पहुंचकर परिजनों ने मंगल को नगर के चिकित्सकों को दिखाया। उचित उपचार की सलाह पर परिजन एक बार फिर मंगल को लेकर हायर सेंटर के लिए निकल गए।