स्नान, दान के लिए 16 को माघी पूर्णिमा स्नान

माघ मास की  पूर्णिमा तिथि को माघी पूर्णिमा कहते हैं। इस वर्ष माघी पूर्णिमा 16 फरवरी को है। माघ पूर्णिमा को स्नान, दान एवं यज्ञ का बड़ा महत्व है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन देवतागण गंगा स्नान के लिए तीर्थराज प्रयाग की धरा पर आते हैं। इसी दिन माघ स्नान का अन्तिम स्नान होता है और इसी के साथ कल्पवास समाप्त होता है। पूर्णिमा तिथि 15 फरवरी की रात्रि 9:42 से प्रारंभ होकर 16 फरवरी की रात्रि 10:25 पर समाप्त होगी। पदम् पुराण में माघ स्नान का महत्व बताते हुए महादेव ने कहा है कि चक्र तीर्थ में श्री हरि का और मथुरा में श्री कृष्ण का दर्शन करने से मनुष्य का जो फल मिलता है वहीं माघ मास में स्नान करने से फल मिलता है।

माघ पूर्णिमा के दिन गंगा तट या किसी तीर्थ स्नान के सरोवर या नदी तट पर स्नान करने का विशेष महत्व है। इस दिन गाय, तिल, गुड़, कपास, घी, लडडू , फल, अन्न एवं कम्बल के दान करने से पापों से मुक्ति मिल जाती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करनी चाहिए। पितरों का श्राद्ध भी करना चाहिए। मान्यता के अनुसार माघ पूर्णिमा पर प्रातःकाल स्नान करने से रोगों का नाश होता है। दान करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाली तमाम बाधाएं दूर होती हैं। देवताओं का विशेष आर्शीवाद प्राप्त होता है। माघी पूर्णिमा पर स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

 – ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल, स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र, अलीगंज, लखनऊ

‘जटाकुंड’ में मनाया गया भव्य दीपोत्सव

2 दिसंबर को स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव की पुण्यतिथि। इस अवसर पर सुंदरकांड पाठ व विशाल भंडारे का आयोजन।

लखनऊ। अयोध्या जिला अंतर्गत सोहावल तहसील की नंदीग्राम ग्राम सभा में स्थित जटाकुंड पर स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव स्मृति ट्रस्ट द्वारा भव्य दीपोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

ज्ञात हो कि जटा कुंड वही पौराणिक स्थल है, जहां वनवास से अयोध्या आगमन पर प्रभु श्रीराम व लक्ष्मण जी ने जटाएं बनवाने के लिए उपरांत स्नान किया था। इस अवसर पर जटा कुंड की साफ सफाई करके ट्रस्ट के सदस्यों एवं स्थानीय लोगों ने कुंड के चारों तरफ दिए जलाए। जटाकुंड पर स्थित हनुमान मंदिर पर पूजा अर्चना कर दीपावली मनाई गई। ट्रस्ट के सूत्रों द्वारा जानकारी दी गई कि आगामी 2 दिसंबर को स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव की पुण्यतिथि के अवसर पर सुंदरकांड पाठ व विशाल भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा

…तो ओवैसी को अयोध्या में घुसने नहीं देंगे संत

ओवैसी के पोस्टरों में अयोध्या की जगह फैजाबाद लिखा देख संतों में नाराजगी। पोस्टर न बदले तो होने नहीं देंगे सभा। ओवैसी को अयोध्या में घुसने न देने की चेतावनी

लखनऊ। अयोध्या में सात सितंबर को होने वाली एआईएमआईएम की सभा को लेकर लगाए गए पोस्टरों में अयोध्या की जगह फैजाबाद लिखे जाने पर संतों ने नाराजगी जताई है। संतों ने चेतावनी दी है कि पोस्टर से जल्द नाम न बदला गया तो वह ओवैसी की सभा नहीं होने देंगे।

अयोध्या से 40 किलोमीटर दूर रुदौली क्षेत्र में सात सितंबर को एआईएमआईएम की सभा का आयोजन होने जा रहा है। इसे शोषित वंचित समाज सम्मेलन नाम दिया गया है। सभा को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष असद्दुदीन ओवैसी संबोधित करेंगे। इस कार्यक्रम को लेकर छपवाए गए पोस्टर में अयोध्या जिले की जगह फैजाबाद लिखा गया है। इस पर अयोध्या के संतो ने कड़ी नाराजगी जताई है। तपस्वी छावनी के महंत जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने चेतावनी देते हुए कहा कि ओवैसी ने मुख्यमंत्री योगी व अयोध्यावासियों का अपमान किया है। यदि फैजाबाद को अयोध्या नहीं किया गया तो वह ओवैसी के अयोध्या प्रवेश और रैली, सभा पर रोक लगा देंगे। अयोध्या हनुमानगाढ़ी के पुजारी राजूदास ने भी ओवैसी के पोस्टर पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि आपको अयोध्या से चिढ़ क्यों है। फैजाबाद का नाम सरकारी अभिलेख में अयोध्या हो गया तो पोस्टर पर फैजाबाद नाम क्यों। इस विचारधारा का संत समाज निंदा करता है। ओवैसी इस पोस्टर को डिलीट करें अन्यथा अच्छा नहीं होगा। उन्होंने ओवैसी पर निशाना साधते हुए कहा, ओवैसी चुनाव के वक्त शोषित वंचित समाज के नाम पर दुकान चला रहे हैं।

ओवैसी से सावधान रहे मुस्लिम समाज : इकबाल अंसारी

ओवैसी के दौरे को लेकर अयोध्या बाबरी मस्जिद के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने भी विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज के लोग ओवैसी से सावधान रहें। ओवैसी को यूपी नहीं आना चाहिए, वह हैदराबाद के हैं, अपना हैदराबाद देखें, यूपी में मुसलमानों के साथ खिलवाड़ न करें।  

जहर पिया कल्याण ने बीजेपी ने अमृत

लखनऊ। जब ढांचा टूट रहा था तब कल्याण सिंह 5 कालिदास मार्ग… मुख्यमंत्री आवास की छत पर आराम से जाड़े की धूप सेंक रहे थे… अगर तब कल्याण सिंह नहीं होते तो आज भूमिपूजन भी नहीं होता।

  • एक छोटे कद का आदमी… जो दिखने में बहुत सुंदर नहीं था… काला रंग…चेहरे पर दाग… लेकिन संघर्षों में तपा हुआ व्यक्तित्व… ऐसी पर्सनेलिटी की जहां वो पहुंच जाए वहां बड़े से बड़े नेता का कद छोटा हो जाए । व्यक्तित्व की धमक ऐसी बड़े बड़े किरदार बौने दिखने लगें… ऐसे थे कल्याण सिंह
  • कल्याण सिंह ऐसे इसलिए थे क्योंकि उनकी कथनी और करनी में कोई फर्क नहीं था… उनके दिल और दिमाग में कोई अंतर नहीं था… उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा उसूल था… भगवान राम की भक्ति… भगवान राम के प्रति के समर्पण को लेकर उन्होंने कभी कोई समझौता नहीं किया
  • 1990 में लाल कृष्ण आडवाणी ने राम मंदिर निर्माण के लिए जनसमर्थन इकट्ठा करने का लक्ष्य लेकर राम रथयात्रा निकाली । बिहार में तब लालू यादव मुख्यमंत्री थे और उन्होंने आडवाणी को गिरफ्तार कर लिया । जिसके बाद राम राथ यात्रा को भारी मात्रा में जनसमर्थन मिल गया और उत्तर प्रदेश में पहली बार बीजेपी की सरकार चुन ली गई जिसके मुख्यमंत्री कल्याण सिंह चुने गए
  • जून 1991 में कल्याण सिंह मुख्यमंत्री बने और इसके बाद राम मंदिर आंदोलन का नेतृत्व कर रहे विश्व हिंदू परिषद में उत्साह की लहर दौड़ गई और उसने ये घोषणा कर दी कि 6 दिसंबर 1992 को राम मंदिर का निर्माण आरंभ किया जाएगा
  • वीएचपी की घोषणा के वक्त मुख्यमंत्री के पद पर कल्याण सिंह थे और प्रदेश की कानून व्यवस्था को संभालने का पूरा जिम्मा कल्याण सिंह पर था । वीएचपी की घोषणा के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री पी वी नरसिम्हा राव के कान खड़े हो गए और उन्होंने बातचीत के लिए कल्याण सिंह को दिल्ली बुलाया
  • कल्याण सिंह से पी वी नरसिम्हा राव ने कहा कि इस मामले को सुप्रीम कोर्ट पर छोड़ दीजिए लेकिन कल्याण सिंह ने साफ जवाब दिया कि विवाद का एक ही हल है और वो ये कि बाबरी मस्जिद की जमीन हिंदुओं को सौंप दी जाए । इस तरह बात नहीं बनी और केंद्र – राज्य के बीच टकराव तय हो गया

-नरसिम्हा राव ने ऐहतियात बरतते हुए पहले ही केंद्रीय सुरक्षा बल अयोध्या रवाना कर दिए… केंद्रीय सुरक्षा बल अयोध्या के चारों तरफ फैला दिए गए

  • 6 दिसंबर तक अयोध्या में राम जन्मभूमि के आस पास 3 लाख कारसेवक इकट्ठे हो गए थे… ऐसे में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन के पास पूरी ताकत थी कि वो कारसेवकों पर गोली चला सकती थी… इससे पहले भी जब मुलायम सिंह यादव की सरकार थी तब मुलायम सिंह यादव ने कारसेवकों पर गोली चलवाई थी
  • कल्याण सिंह को इस बात का अंदेशा लग गया था कि 6 दिसंबर को कारसेवकों को कंट्रोल करने के लिए उनपर फायरिंग का आदेश कोई भी अधिकारी दे सकता है । इसलिए कल्याण सिंह ने 5 दिसंबर की शाम को ही समस्त अधिकारियों को एक लिखित आदेश जारी किया था और वो ये था कि कोई भी कारसेवकों पर गोली नहीं चलाएगा ।
  • ये फैसला लेना… संवैधानिक पद पर बैठे हुए किसी व्यक्ति के लिए आसान नहीं था । कल्याण सिंह इस बात को जानते थे कि जब वो ये फैसला ले रहे हैं तो अगर अयोध्या में कुछ हो जाता है तो इससे उनकी कुर्सी चली जाएगी… सारी दुनिया उन पर आरोप लगाएगी… ये कहा जाएगा कि कल्याण सिंह एक अराजक मुख्यमंत्री हैं… ये आरोप ही मंदिर आंदोलन का वो विष था… जिसे कल्याण सिंह ने अमृत मानकर पी लिया ।

-आखिर वही हुआ 6 दिसंबर 1992 को दोपहर साढ़े 11 बजे कारसेवक ढांचे को तोड़ने लगे… कल्याण सिंह को पल पल की खबर मिल रही थी…. लेकिन वो आराम से अपने मुख्यमंत्री आवास पर जाड़े की धूप सेंक रहे थे… दिल्ली से फोन घनघना रहे थे लेकिन कल्याण सिंह ने राम भक्ति को प्राथमिकता दी और किसी की कोई बात नहीं सुनी

  • केंद्र से गृहमंत्री चव्हाण का फोन आया और उन्होंने कहा कि कल्याण जी मैंने ये सुना है कि कारसेवक ढांचे पर चढ गए हैं तब कल्याण सिंह ने जवाब दिया कि मेरे पास आगे की खबर है और वो ये है कि कारसेवकों ने ढांचा तोड़ना शुरू भी कर दिया है लेकिन ये जान लो कि मैं गोली नहीं चलाऊंगा गोली नहीं चलाऊंगा गोली नहीं चलाऊंगा
  • कल्याण सिंह के पूरे व्यक्तित्व और महानता का दर्शन सिर्फ इसी एक लाइन से हो जाता है… कि मैं गोली नहीं चलाऊंगा… मैं गोली नहीं चलाऊँगा… मैं गोली नहीं चलाऊंगा । ढांचा टूट रहा था और केंद्रीय सुरक्षा बल विवादित स्थल पर आने की कोशिश कर रहे थे लेकिन कल्याण सिंह ने ऐसी व्यवस्था करवा दी कि केंद्रीय सुरक्षा बल भी ढांचे तक नहीं पहुंच सके और आखिरकार ढांचा टूट गया… वो कलंक… वो छाती का शूल… वो बलात्कार अनाचार का दुर्दम्य प्रतीक भारत मां की छाती से हटा दिया गया… चारों तरफ हर्ष फैल गया… जन्मभूमि मुक्त हो गई
  • नरसिम्हा राव अब कल्याण सिंह की सरकार को बर्खास्त करने का फैसला लेने जा रहे थे लेकिन उससे पहले ही शाम साढे 5 बजे कल्याण सिंह राजभवन गए राज्यपाल से मिले और अपना इस्तीफा सौंप दिया… यानी कुर्सी छोड़ दी लेकिन गोली नहीं चलाई… सिंहासन को लात मार दिया और श्री राम की गोद में बैठ गए… श्रीराम के प्यारे भक्त बन गए । ऐसे थे हमारे कल्याण सिंह
  • अगर कल्याण सिंह नहीं होते तो शायद किसी और मुख्यमंत्री में ये फैसला लेने की ताकत नहीं होती । कल्याण सिंह ने इसलिए भी गोली ना चलाने का लिखित आदेश दिया ताकि कल को कोई अफसरों को जिम्मेदार नहीं ठहराए । कल्याण सिंह ने कहा कि सारी जिम्मेदारी मेरी है जो करना है वो मेरे साथ करो । सजा मुझे दो ।
  • अगर कल्याण सिंह नहीं होते तो बाबरी नहीं गिरती… अगर बाबरी की दीवारें नहीं गिरतीं तो पुरातत्विक सर्वेक्षण नहीं होता… बाबरी की दीवार के नीचे मौजूद मंदिर की दीवार नहीं मिलती… कोर्ट में ये साबित नहीं हो पाता कि यही रामजन्मभूमि है ।
  • उस कलंक के मिटने का जो शुभ कार्य हुआ…. उसका श्रेय स्वर्गीय कल्याण सिंह जी को है… 6 दिसंबर कल्याण सिंह के पॉलिटिकल करियर को कालसर्प की तरह डस गया लेकिन कल्याण सिंह का यश दिग दिगंत में फैल गया ।
  • सबसे जरूरी बात अगर कल्याण सिंह ने गोली चलवा दी होती तो बीजेपी और एसपी में कोई फर्क नहीं रह जाता और आज मोदी प्रधानमंत्री भी नहीं होते इसीलिए ये सत्य है कि जहर पिया कल्याण ने अमृत पिया बीजेपी ने ।

मैं उस पुण्य आत्मा को अपने हृदय और आत्मा में मौजूद समस्त ऊर्जा के साथ नमन करता हूं… प्रणाम करता हूं… ईश्वर आपको मोक्ष दे

ये लेख अपने बच्चों को पढ़ाना… हर ग्रुप में शेयर कर देना, जय श्री राम

(नोट- मेरे कई मित्र ऐसे हैं जिन्होंने मेरा नंबर 7011795136 को दिलीप नाम से सेव तो कर लिया है लेकिन मिस्ड कॉल नहीं की है… जो मित्र मुझे मिस्ड कॉल भी करेंगे और मेरा नंबर भी सेव करेंगे… यानी ये दोनों काम करेंगे सिर्फ उनको ही मेरे लेख सीधे व्हाट्सएप पर मिल पाएंगे… व्हाट्सएप स्टेटस पर भी आर्टिकल के लिंक होते हैं) साभार

गांव-गांव घुमाई जाएगी राम मंदिर की झांकी

26 जनवरी पर राजपथ की परेड में मिला है पहला स्थान
पहली बार उत्तर प्रदेश के खाते में आया प्रथम पुरस्कार

लखनऊ। गणतंत्र दिवस पर देश की राजधानी दिल्ली में पहला स्थान पाने वाली यूपी की राम मंदिर की झांकी की प्रतिकृति को प्रदेश में गांव-गांव में घुमाया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सर्वश्रेष्ठ झांकी का पुरस्कार मिलने को गर्व का क्षण बताया है। उन्होंने खुशी जताते हुए कहा कि यह प्रदेश के लिए प्रसन्नता और गर्व का अवसर है। झांकी के इस प्रतिरूप को प्रदेश में भी दिखाया जाएगा। जहां-जहां से यह झांकी गुजरेगी, वहां जनता इसका स्वागत करेगी और पुष्पवर्षा की जाएगी।

अब सरकार श्रीराम मंदिर मॉडल की झांकी की प्रतिकृति का भ्रमण प्रदेश के गांव-गांव तक में कराएगी। उत्तर प्रदेश सरकार की श्रीराम मंदिर मॉडल की झांकी देश में सर्वोत्तम रही। राजपथ में झांकी में प्रथम पुरस्कार पहली बार प्रदेश के खाते में आया है। इसे गौरव का क्षण बताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अब प्रदेश भर में इस झांकी का भ्रमण कराने का निर्देश दिया। उत्तर प्रदेश प्रदेश सरकार के सूचना विभाग ने इस बार अयोध्या में निमार्णाधीन श्रीराम मंदिर मॉडल की झांकी निकाली।


झांकी में प्रदेश की बेहद संपन्न विरासत और संस्कृति की झलक- अपर मुख्य सचिव

दिल्ली में गुरुवार को केंद्रीय युवा कल्याण और खेल मंत्री किरेन रिजूजू ने उत्तर प्रदेश के सूचना विभाग को पुरस्कार सौंपा। लखनऊ लौटकर मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पर अपर मुख्य सचिव सूचना डॉ. नवनीत सहगल और सूचना निदेशक शिशिर ने मुख्यमंत्री को पुरस्कार सौंपा। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि झांकी में प्रदेश की बेहद संपन्न विरासत और संस्कृति की झलक दिखाई गई है। अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर मॉडल के अलावा रामायण के प्रमुख दृश्य और रामायण की रचना करते हुए महर्षि वाल्मीकि भी आकर्षण का केंद्र रहे।  शबरी के झूठे बेर खाते हुए प्रभु श्रीराम के साथ अन्य दृश्यों और संगीत के जरिए सामाजिक समरसता का संदेश देने की कोशिश की गई है। सूचना निदेशक ने इस उपलब्धि को टीमवर्क का नतीजा बताया।

UP की श्रीराम मंदिर झांकी को प्रथम पुरस्कार

गणतंत्र दिवस परेडः उत्तर प्रदेश की झांकी श्रीराम मंदिर को प्रथम पुरस्कार
नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस को राजपथ पर हुई परेड में इस साल उत्तर प्रदेश की ‘अयोध्या में श्रीराम मंदिर’ झांकी को प्रथम स्थान मिला है। दूसरे स्थान पर त्रिपुरा और तीसरे स्थान पर उत्तराखंड की झांकी रही।

केंद्रीय खेल एवं युवा कल्याण मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को रविंद्र रंगशाला में आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में उत्तर प्रदेश की झांकी को प्रथम स्थान प्राप्त होने पर राज्य के अपर मुख्य सचिव (सूचना) नवनीत सहगल एवं निदेशक (सूचना) शिशिर को ट्राफी प्रदान की। परेड में 17 राज्यों ने झांकी प्रस्तुत की थी। त्रिपुरा की ‘पर्यावरण हितैषी आत्म निर्भर’ झांकी को दूसरा स्थान मिला है। उत्तराखंड की झांकी ‘केदारखंड’ को तीसरा स्थान मिला है। इस झांकी में केदारनाथ के परिसर को पुननिर्माण को दर्शाया गया। उत्तराखंड की झांकी को पहली बार पुरस्कृत किया गया है।

उत्तर प्रदेश की झांकी के प्रथम भाग में महर्षि वाल्मीकि को रामायण की रचना करते हुए दर्शाया गया। मध्य भाग में जनभावनाओं एवं भक्ति से जुड़े अयोध्या की सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक श्रीराम मन्दिर की प्रतिकृति प्रदर्शित की। इसके अलावा झांकी में भगवान राम का निषादराज को गले लगाना, शबरी के बेर खाना, अहिल्या उद्धार, केवट संवाद, भगवान हनुमान द्वारा संजीवनी बूटी लाना, जटायू राम संवाद, अशोक वाटिका आदि के दृश्य भी थे। झांकी में अयोध्या के दीपोत्सव को भी दिखाया गया। इस उत्सव में लाखों दीप जलाये जाते हैं। वर्ष 2017 से लगातार भव्य दीपोत्सव के आयोजन को ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड’ में लगातार तीन बार रिकार्ड दर्ज कराया है। झांकी के दोनों ओर साध्वी एवं संतों को दिखाया, जो प्रभु राम के प्रति भक्ति भावना एवं अनन्य प्रेम को प्रदर्शित करते रहे। अयोध्या के राजा ब्रह्मा के पुत्र मनु के पुत्र इक्ष्वाकु की बसायी गयी अयोध्या उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक नगरी कहलाती है। इसे अष्टचक्र नवद्वार से युक्त अयोध्या कहा गया है, जिसका वर्णन अथर्ववेद में है।

श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए गोरक्षपीठ ने दिया 1 करोड़ 1 लाख रुपए का चंदा

गोरक्षपीठ ने दिया श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए 1 करोड़ 1 लाख रुपए का चंदा

गोरखपुर। अयोध्या में भव्य श्री राम मंदिर निर्माण का सपना गोरखपुर के पीठाधीश्वर ने कई दशक पहले देखा था। महंत दिग्विजय नाथ, महंत अवैद्यनाथ और मौजूदा पीठाधीश्वर महंत योगी आदित्यनाथ ने भी लंबी लड़ाई राम मंदिर के लिए लड़ी। आज जब श्री राम मंदिर निर्माण का यह सपना पूरा होने जा रहा है, तब गोरक्षपीठ ने भी दिल खोलकर भगवान श्री राम के मंदिर निर्माण के लिए दान दिया। गोरक्ष पीठ की तरफ से 1 करोड़ 1 लाख रुपए चंदा दिया गया। इस दौरान खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वहां मौजूद थे। सीएम योगी की उपस्थिति में गोरखपुर के उद्योगपतियों एवं व्यापारियों ने दिल खोलकर करीब पांच करोड़ रुपए दान दिया।

इस मौके पर श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि पूरे देश में लोग दिल खोलकर दान कर रहे हैं और देश की 50% से अधिक आबादी दान दे रही है। राय ने कहा, महंत अवैद्यनाथ और महंत दिग्विजय नाथ इस आंदोलन से जुड़े रहे हैं। महंत अवैद्यनाथ के चरणों में श्रद्धा सुमन अर्पित करने के लिए मैं गोरखपुर आया था। वह 1984 से जीवन उपरांत तक राम मंदिर निर्माण आंदोलन से जुड़े थे।

15 जनवरी से शुरू हुआ अभियान 27 फरवरी तक चलेगा-
श्रीराम जन्मभूमि पर राम मंदिर निर्माण के लिए 15 जनवरी से ‘निधि समर्पण अभियान’ की शुरुआत की गई। इसमें सबसे पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 5 लाख 1 सौ रुपये की धनराशि दान में दी। यह अभियान 27 फरवरी तक चलेगा। इसके तहत पांच लाख से अधिक गांवों में रहने वाले 12 करोड़ से अधिक परिवारों से संपर्क किया जाएगा।

बैंक अकाउंट नंबर-
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और पंजाब नेशनल बैंक ने टोल फ्री नंबर जारी किए हैं, जिन पर फोन कर के आप राम मंदिर निर्माण के लिए समर्पण निधि संबंधित जानकारी नि:शुल्क ले सकते हैं। सहयोग राशि कैसे और कहां देनी है, जैसे कई सवालों के जवाब आपको इन नंबर पर कॉल करके मिल जाएंगे। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ऑफिशियल वेबसाइट पर बैंक अकाउंट की सारी डिटेल दी गई है। वेबसाइट पर ट्रस्ट से जुड़े सभी बैंक अकाउंट की लिस्ट अपलोड की जा चुकी है। आप वहीं से बैंक अकाउंट डिटेल देखकर पैसे जमा कर सकते हैं। ट्रस्ट ने तीन बैंक अकाउंट डिटेल जारी की हैं। यह 3 अकाउंट स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा में हैं।

राम मंदिर नींव निर्माण कार्य में आई बाधा!

राम मंदिर के नीचे मिली सरयू की धारा, नींव निर्माण कार्य में आई बाधा
IT से मांगी मदद

लखनऊ (धारा न्यूज): अयोध्या में राम मंदिर निर्माण कार्य में अब एक नई बाधा सामने आ गई है। मंदिर की नींव के नीचे सरयू नदी की धार मिलने के कारण निर्माण कार्य में अब मुश्किलें आ सकती हैं। इस मामले में मंदिर ट्रस्ट ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से मदद मांगी है। कुछ दिन पहले भी खंभों से जुड़े काम में दिक्कतों का सामना करना पड़ा था।

अयोध्या में राम मंदिर बनाए जाने के लिए 1200 खंभों की ड्राइंग तैयार की गई थी। यह डिजाइन प्लान के अनुसार, सफल होती नहीं दिख रही।मंदिर की बुनियाद के लिए खंभों की टेस्टिंग की गई थी। इस दौरान कुछ खंभों को 125 फीट गहराई में डाला। इनकी जांच करने के लिए करीब 30 दिनों तक छोड़ा गया। बाद में इस पर 700 टन का वजन डाला गया और भूकंप के झटके दिए गए, तो ये खंभे अपनी जगह से हिल गए और मुड़ भी गए।

इस बीच प्रधानमंत्री के पूर्व मुख्य सचिव नृपेंद्र मिश्रा की अगुआई में बनी निर्माण समिति की बैठक में तय किया गया है कि नींव के नीचे सरयू नदी की धारा मिलने के कारण मंदिर के लिए पहले से तैयार मॉडल सही नहीं है। सूत्रों ने बताया कि आईआईटी से मदद की अपील की गई है।

विदित है कि मंदिर का निर्माण 2023 में पूरा होना है। सूत्रों ने बताया कि फिलहाल, समिति दो तरीकों पर गौर कर रही है। पहला राफ्ट को सहायता देने के लिए वाइब्रो पत्थर का इस्तेमाल और दूसरा इंजीनियरिंग मिश्रण मिलाकर मिट्टी की क्वालिटी और पकड़ को बेहतर बनाया जाए।

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अयोध्या में जल्दी ही शुरू होगा मस्जिद का निर्माण

अयोध्या में मस्जिद का जल्द शुरू होगा निर्माण

लखनऊ। इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ने अयोध्या में बनने वाली मस्जिद का डिजाइन आर्किटेक्ट शनिवार को लॉन्च कर दिया। इस मौके पर ट्रस्ट के अध्यक्ष मौलाना जुफर फारुकी व अतहर हुसैन सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे। पांच एकड़ की जमीन पर मस्जिद और अस्पताल की दो इमारतें बनेंगी। मस्जिद का डिजाइन एस एम अख्तर ने तैयार किया है। परिसर में अस्पताल के साथ लाइब्रेरी, म्यूजियम और कम्युनिटी किचन भी बनाया जाएगा।

पूरी मस्जिद परिसर में होगा सोलर एनर्जी का इस्तेमाल

मस्जिद में एक साथ दो हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था होगी, जबकि अस्पताल मल्टीस्पेशलिटी होगा। पूरी मस्जिद परिसर में सोलर एनर्जी का इस्तेमाल होगा। नक्शा पास होने के बाद मस्जिद बनने का काम शुरू होगा। बताया जा रहा है कि दो साल में निर्माण पूरा हो जाएगा। मस्जिद में गुंबद नहीं होगा। इसका आकार खाड़ी देशों की मस्जिदों की तरह होगा।

कब रखेंगे मस्जिद की नींव!

धन्नीपुर गांव में बनने वाली मस्जिद की नींव गणतंत्र दिवस या फिर स्वतंत्रता दिवस के मौके पर रखी जा सकती। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। पिछले दिनों ट्रस्ट के सचिव व प्रवक्ता अतहर हुसैन ने कहा था कि निर्माण शुरू करने के लिए पहली ईंट तो रखनी ही होगी तो इसके लिये 26 जनवरी या 15 अगस्त से बेहतर दिन दूसरा नहीं हो सकता है, क्योंकि 26 जनवरी को देश के संविधान की नींव रखी गई थी, जबकि 15 अगस्त को देश आजाद हुआ और आजाद भारत की नींव रखी गई थी।

मस्जिद में नहीं होगा बाबर या उससे जुड़ा कोई जिक्र

अतहर हुसैन ने कहा कि बनने वाली मस्जिद में बाबर या उससे जुड़ा कोई जिक्र नहीं होगा और न ही किसी भाषा या राजा के नाम पर मस्जिद का नाम होगा। सुन्नी वक्फ बोर्ड ने मस्जिद के निर्माण के लिए छह महीने पहले आईआईसीएफ का गठन किया था। परियोजना के मुख्य वास्तुकार प्रोफेसर एसएम अख्तर ने डिजाइन अंतिम रूप दिया है। अख्तर ने बताया कि मस्जिद में एक समय में 2,000 लोग नमाज अदा कर सकेंगे और इसका ढांचा गोलाकार होगा। नई मस्जिद बाबरी मस्जिद से बड़ी होगी, लेकिन उसी तरह का ढांचा नहीं होगा। परिसर के मध्य में अस्पताल होगा। पैगंबर ने 1400 साल पहले जो सीख दी थी, उसी भावना के अनुरूप मानवता की सेवा की जाएगी।

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अयोध्या में जल्दी ही शुरू होगा मस्जिद का निर्माण

अयोध्या में मस्जिद का जल्द शुरू होगा निर्माण

लखनऊ। इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ने अयोध्या में बनने वाली मस्जिद का डिजाइन आर्किटेक्ट शनिवार को लॉन्च कर दिया। इस मौके पर ट्रस्ट के अध्यक्ष मौलाना जुफर फारुकी व अतहर हुसैन सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे। पांच एकड़ की जमीन पर मस्जिद और अस्पताल की दो इमारतें बनेंगी। मस्जिद का डिजाइन एस एम अख्तर ने तैयार किया है। परिसर में अस्पताल के साथ लाइब्रेरी, म्यूजियम और कम्युनिटी किचन भी बनाया जाएगा।

पूरी मस्जिद परिसर में होगा सोलर एनर्जी का इस्तेमाल

मस्जिद में एक साथ दो हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था होगी, जबकि अस्पताल मल्टीस्पेशलिटी होगा। पूरी मस्जिद परिसर में सोलर एनर्जी का इस्तेमाल होगा। नक्शा पास होने के बाद मस्जिद बनने का काम शुरू होगा। बताया जा रहा है कि दो साल में निर्माण पूरा हो जाएगा। मस्जिद में गुंबद नहीं होगा। इसका आकार खाड़ी देशों की मस्जिदों की तरह होगा।

कब रखेंगे मस्जिद की नींव!

धन्नीपुर गांव में बनने वाली मस्जिद की नींव गणतंत्र दिवस या फिर स्वतंत्रता दिवस के मौके पर रखी जा सकती। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। पिछले दिनों ट्रस्ट के सचिव व प्रवक्ता अतहर हुसैन ने कहा था कि निर्माण शुरू करने के लिए पहली ईंट तो रखनी ही होगी तो इसके लिये 26 जनवरी या 15 अगस्त से बेहतर दिन दूसरा नहीं हो सकता है, क्योंकि 26 जनवरी को देश के संविधान की नींव रखी गई थी, जबकि 15 अगस्त को देश आजाद हुआ और आजाद भारत की नींव रखी गई थी।

मस्जिद में नहीं होगा बाबर या उससे जुड़ा कोई जिक्र

अतहर हुसैन ने कहा कि बनने वाली मस्जिद में बाबर या उससे जुड़ा कोई जिक्र नहीं होगा और न ही किसी भाषा या राजा के नाम पर मस्जिद का नाम होगा। सुन्नी वक्फ बोर्ड ने मस्जिद के निर्माण के लिए छह महीने पहले आईआईसीएफ का गठन किया था। परियोजना के मुख्य वास्तुकार प्रोफेसर एसएम अख्तर ने डिजाइन अंतिम रूप दिया है। अख्तर ने बताया कि मस्जिद में एक समय में 2,000 लोग नमाज अदा कर सकेंगे और इसका ढांचा गोलाकार होगा। नई मस्जिद बाबरी मस्जिद से बड़ी होगी, लेकिन उसी तरह का ढांचा नहीं होगा। परिसर के मध्य में अस्पताल होगा। पैगंबर ने 1400 साल पहले जो सीख दी थी, उसी भावना के अनुरूप मानवता की सेवा की जाएगी।

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