इंडिया ग्लोबल अवार्ड 2022 पुरस्कार से बिजनौर का सम्मान

इंडिया ग्लोबल अवार्ड 2022 पुरस्कार से बिजनौर का सम्मान। पूसा नई दिल्ली में हुआ कार्यक्रम।

बिजनौर। भारतीय कृषि एवं खाद्य परिषद द्वारा ए.पी. शिंधे सिमपोजीयम हॉल, एन.ए.एस.सी. काम्प्लेक्स, पूसा, नई दिल्ली में दिनांक 09-11-2022 को आयोजित पांचवे इंडिया एग्री बिज़नेस समिति 2022 में जनपद बिजनौर को उत्कृष्ट जनपद की श्रेणी में इंडिया ग्लोबल अवार्ड 2022 पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

यह पुरस्कार भारत सरकार के केंद्रीय राज्यमंत्री मत्स्य पालन पशुपालन एवं डेयरी भारत सरकार डॉ संजीव बालियान, कृषि मंत्री हरियाणा सरकार जेपी दलाल, सदस्य नीति आयोग रमेश चंद्र, डॉक्टर एमजे खान चेयरमैन एवं डॉक्टर एनके दलानी एडवाइजर भारतीय कृषि एवं खाद्य परिषद द्वारा प्रदान किया गया। जनपद की ओर से यह पुरस्कार डॉ. अवधेश मिश्र जिला कृषि अधिकारी बिजनौर द्वारा प्राप्त किया गया।

इस संबंध में जानकारी देते हुए डॉ. अवधेश मिश्र जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि यह सम्मान जिला प्रशासन व कृषि विभाग द्वारा जनपद के किसानों को उदाहरणात्मक सहयोग, निर्यात को बढ़ावा देने एवं सुव्यवस्थित व लाभकारी मूल्य पर विपणन की सुविधा प्रदान करने हेतु, किसानों व विपणन संस्थाओं को एक मंच पर लाने, जैविक खेती एवं नवोन्मेशी कार्यों को बढ़ावा देने, कृषि क्षेत्र मे स्टार्ट-अप के माध्यम से युवाओं को आकर्षक अवसर प्रदान कराने, रोजगार के नये अवसर का सृजन करने तथा कृषक हित में संचालित विभिन्न विभागीय योजनाओं से समन्वय स्थापित कर आर्थिक सहयोग मे उल्लेखनीय कार्य करने हेतु प्रदान किया गया है।

साथ ही नमामि गंगे परियोजना के लाभार्थी कृषकों एवं जैविक कृषि कर रहे अन्य कृषकों की आय में 30 से 40% तक वृद्धि करने और तैयार उत्पादों के प्रसंस्करण, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग एवं विपणन को भी संज्ञानित किया गया है। उप कृषि निदेशक गिरीश चंद्र ने कहा कि जनपद को प्राप्त इस सम्मान से कृषि विभाग व कृषि से संबंधित अन्य विभागों के अधिकारी व कार्मिक अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं और भविष्य में और अधिक मेहनत एवं लगन से कार्य करने हेतु प्रेरित होंगे।

बिजनौर में 24 क्रय केंद्र पर होगी धान खरीद

बिजनौर। प्रदेश में धान खरीद के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है। शनिवार से धान की खरीद शुरू होगी। धान खरीद के लिए बिजनौर जनपद में 24 क्रय केन्द्र बनाए गए हैं।

01 अक्तूबर से प्रदेश में धान की खरीद शुरू होगी। बिजनौर जनपद में धान का रकबा करीब 55 हजार हेक्टेयर है। धान खरीद शनिवार यानी 1 अक्तूबर से शुरु होगी। अधिकारियों ने धान खरीदने के लिए पूरी तैयारी कर ली है। 24 क्रय केन्द्र स्थापित कर दिए गए हैं। जिले में पिछले साल धान खरीद का लक्ष्य 50,300 मीट्रिक टन था। लक्ष्य के सापेक्ष 40,328 मीट्रिक टन धान की खरीद हुई थी। इस बार लक्ष्य को पूरा करने के लिए अफसरों ने कमर कस ली है। धान बेचने के लिए पंजीकरण कराने में मुरादाबाद मंडल में बिजनौर चौथे स्थान पर है। पहले स्थान पर रामपुर में 6443 किसानों ने, दूसरे स्थान पर मुरादाबाद में 1292 किसानों ने, तीसरे स्थान पर संभल में 756 किसानों ने, चौथे स्थान पर बिजनौर में 548 किसानों ने तथा पांचवे स्थान पर अमरोहा में 100 किसानों ने पंजीकरण कराया है। एडीएम प्रशासन विनय कुमार सिंह ने बताया कि धान खरीदने के लिए क्रय केन्द्रों पर पूरी तैयारी है। 01 अक्टूबर से जिले में धान की खरीदारी होगी।

उत्पादों की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग एवं विपणन पर ध्यान दें किसान- डीएम

डीएम ने की किसानों से उत्पादों की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग एवं विपणन पर चर्चा। किसानों ने भी दिये महत्वपूर्ण सुझाव। कृषि विकास में पीएनबी अपनी भागीदारी अवश्य सुनिश्चित करेगासर्किल हेड संजीव मक्कड़

बिजनौर। जनपद के अग्रणी/प्रगतिशील एवं नवोन्मेशी कार्य कर रहे कृषकों एवं कृषक उत्पादक संगठनों के साथ परिचर्चा कार्यक्रम का आयोजन जिलाधकारी उमेश मिश्रा की अध्यक्षता में किया गया। परिचर्चा कार्यक्रम में विभिन्न किसानों द्वारा किए जा रहे नवोन्मेशी कार्य के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई, साथ ही यह भी अवगत कराया गया कि हमारे द्वारा तैयार उत्पादों के विपणन में समस्याएं आ रही है और व्यक्तिगत रूप से उत्पादक किसान उत्पादों की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग एवं विपणन करने में सक्षम नहीं है।

कार्यक्रम के दौरान किसानों द्वारा सुझाव दिया गया कि सभी नवोन्मेशी कार्य किसान एक प्लेटफार्म पर आकर आपसी सहयोग एवं समन्वय से तैयार उत्पादों की वैल्यू एडिशन प्रोसेसिंग ग्रेडिंग पैकेजिंग ब्रांडिंग आदि तकनीक को अपनाकर एक दूसरे के उत्पादों का प्रचार प्रसार करते हुए मांग जनरेट करें तथा आपूर्ति एवं विपणन में भी एक दूसरे का सहयोग करें। जिलाधिकारी ने समस्त उपस्थित किसान भाइयों से आह्वान किया कि उपरोक्त समस्या का समाधान क्लस्टर अथवा सामूहिक खेती है और जब हमारे पास कोई भी उत्पाद अधिक मात्रा में होगा तो खरीददार स्वयं हमारे पास आएंगे और दर निर्धारण की हमारी शक्ति भी बढ़ेगी। आप यदि अपने उत्पादों को सीधे ना भेज कर उसकी प्रोसेसिंग व वैल्यू एडिशन करें और साथ ही उसकी अच्छी पैकेजिंग व ब्रांडिंग विपणन करेंगे तो निश्चित रूप से हमें अच्छी व लाभकारी कीमत प्राप्त होगी, परंतु इसके लिए आवश्यक है कि किसानों को एकत्रित होकर क्लस्टर अप्रोच के माध्यम से बड़े क्षेत्र में उत्पाद विशेष का उत्पादन करते हुए इसकी प्रोसेसिंग एवं वैल्यू एडिशन की आधारभूत सुविधाओं को विकसित करने की आवश्यकता है। इसके लिए जो भी आर्थिक मदद अथवा ऋण उपलब्ध कराने की आवश्यकता होगी उसके लिए जिला प्रशासन संबंधित विभाग हमेशा तैयार एवं तत्पर है।

परिचर्चा के दौरान यह भी निर्णय लिया गया कि जनपद में यहां की जलवायु मृदा एवं भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कृषि विकास हेतु क्लस्टर एवं फार्मिंग सिस्टम अप्रोच के आधार पर मॉडल तैयार करने हेतु नवोंमेशी कार्य कर रहे कृषकों की एक कोर कमेटी बनाई जाए, जिनके द्वारा नवोंमेशी कार्य कर रहे कृषकों का डाटा एकत्रित कर तदनुसार जनपद के लिए उपयुक्त मॉडल एवं आवश्यक सुविधाओं की रूपरेखा तैयार कर प्रस्तुत करेंगे।

परिचर्चा कार्यक्रम में पंजाब नेशनल बैंक के सर्किल हेड संजीव मक्कड़ द्वारा भी प्रतिभाग किया गया और आश्वस्त किया गया कि जनपद के कृषि विकास में बैंक अपनी भागीदारी अवश्य सुनिश्चित करेगा और किसानों की हर संभव मदद करने की कोशिश करेगा। कार्यक्रम में जिलाधिकारी द्वारा 30 किसानों को तोरिया बीज के मिनीकिट का नि:शुल्क वितरण भी किया गया।

कार्यक्रम में उप कृषि निदेशक गिरीश चंद, जिला कृषि अधिकारी डॉ अवधेश मिश्र, जिला उद्यान अधिकारी जितेंद्र कुमार, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ विजेंद्र सिंह, जिला गन्ना अधिकारी पीएन सिंह, जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक वीके बंसल, जिला विकास प्रबंधक नाबार्ड, जिला परियोजना समन्वयक डास्प डॉ. कर्मवीर सिंह, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ पिंटू कुमार, विषय वस्तु विशेषज्ञ योगेंद्र पाल सिंह योगी सहित जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 200 प्रगतिशील कृषक व कृषक उत्पादक संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

किसान खेत जाते समय मोबाइल पर सुनें फिल्मी स्टोरी या कव्वाली

खेत पर जाते समय मोबाइल पर फिल्मी स्टोरी या कव्वाली सुनें किसान गुलदार के हमले से बचने का अचूक उपाय। शोर सुनकर भीड़ समझ कर नहीं करेगा हमला। गुलदार को पकड़ने के लिए ग्राम फलौदी में लगाया पिंजड़ा। प्रभावित क्षेत्र में ड्रोन कैमरा से कराई जा रही मॉनिटरिंग। 

बिजनौर। खेत पर जाते समय मोबाइल पर फिल्मी स्टोरी सुनें किसान, यह महत्वपूर्ण राय दी है डीएफओ अनिल पटेल ने। दरअसल खेतों, जंगलों में इस समय गुलदारों की आवाजाही बढ़ी हुई है। रास्ते, खेत आदि में छिपा हुआ गुलदार किसी भी व्यक्ति को अकेला जानकर हमला कर सकता है। भयभीत किसान अपने खेतों पर आने जाने से कतराते हैं। इस कारण उनकी फसल का भारी नुकसान होता है। डीएफओ ने बताया कि किसान अपने खेतों पर झुंड में जाए, ऐसा संभव नहीं है।

आजकल मोबाइल फोन हर किसी के लिए सुलभ है।  इसलिए खेत, जंगल जाते हुए किसान अपने मोबाइल फोन पर किसी भी फ़िल्म को चला ले, या फिर कव्वाली चला ले। कुल मिला कर एक ऐसे शोर का वातावरण होना चाहिए कि लगे कि कई लोग हैं। ऐसे में कहीं भी छिपा हुआ गुलदार हमला नहीं करेगा।

उन्होंने बताया कि गुलदार की उपस्थिति की सूचना मिलने पर प्रभावित क्षेत्रों में ड्रोन कैमरा एवं स्टॉफ से लगातार मॉनिटरिंग कराई जा रही है। बुधवार को धामपुर रेंज के ग्राम फलौदी, जरीफपुर चतर और मुक्रमपुर के प्रभावित क्षेत्र में ड्रोन कैमरा से मॉनिटरिंग कराई गई।

इस दौरान फलौदी ग्राम में गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजड़ा भी लगाया गया। डीएफओ अनिल पटेल ने किसान भाइयों से अपील है कि अपने खेतों में सावधानी पूर्वक ग्रुप में ही जाएं तथा किसी वन्य जीव की उपस्थिति होने पर इसकी सूचना वन विभाग को अवश्य दें।

11 प्लाईवुड फैक्ट्रियों में ताबड़तोड़ विशेष छापामारी

जिले में 11 प्लाईवुड फैक्ट्रियों में चला विशेष छापामार अभियान। सब जगह all is well, लेकिन फिर भी अनुदानित यूरिया का प्रयोग अथवा भंडारण न करने की हिदायत।

बिजनौर। जिलाधिकारी के आदेश के क्रम में जनपद में संचालित प्लाईवुड फैक्ट्रियों में अनुदानित यूरिया के प्रयोग की शिकायत प्राप्त होने पर विशेष छापामार अभियान चलाया गया। आकस्मिक निरीक्षण एवं जांच के समय किसी भी निरीक्षित औद्योगिक इकाइयों में अनुदानित यूरिया का प्रयोग अथवा भंडारण नहीं पाया गया।

तहसील नजीबाबाद क्षेत्र में 07 जगह छापा- तहसील नजीबाबाद में प्लाईवुड की संचालित 7 फैक्ट्रियों यथा मै. शेजवुड प्राइवेट लिमिटेड, शिवा औद्योगिक संस्थान, रुचि इंटरप्राइजेज, सेठी बोर्ड इंडस्ट्री, ताज प्लाईवुड, नाज प्लाईवुड व अंबिका बोर्ड इंडस्ट्री की गहन जांच उप जिलाधिकारी नजीबाबाद विजयवर्धन तोमर एवं उप कृषि निदेशक गिरीश चंद्र ने की।

तहसील चांदपुर क्षेत्र में 02 जगह दबिश– तहसील चांदपुर में  संचालित मै. जगदंबा प्लाईवुड इंडस्ट्रीज व ईशा प्लाईवुड मैटेरियल सेलर्स की उप जिलाधिकारी चांदपुर मांगेराम चौहान एवं जिला कृषि अधिकारी डॉ अवधेश मिश्र द्वारा जांच की गई।

बिजनौर तहसील क्षेत्र में दो रहे ठिकाने- तहसील बिजनौर में संचालित मै. मंगला प्लाईवुड प्राइवेट लिमिटेड व सुपर बोर्ड इंडस्ट्रीज की उप जिलाधिकारी बिजनौर मोहित कुमार एवं जिला कृषि रक्षा अधिकारी मनोज रावत के द्वारा गहन जांच की गई।

शासन के हैं कड़े निर्देश- उत्तर प्रदेश शासन द्वारा प्लाईवुड की इंडस्ट्री के साथ-साथ कैटल फीड, वार्निश, पेंट, वार्निश, बोर्ड आदि बनाने में अनुदानित यूरिया के प्रयोग को पूर्णतया प्रतिबंधित किया गया है। जाँच के समय समस्त फैक्ट्री के संचालकों को अनुदानित यूरिया के प्रयोग ना किए जाने के संबंध में सचेत करते हुए निर्देशित किया गया कि यदि भविष्य में इसका उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश-1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 की धारा 3/7 के अंतर्गत विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

आकस्मिक निरीक्षण एवं जांच के समय किसी भी निरीक्षित औद्योगिक इकाइयों में अनुदानित यूरिया का प्रयोग अथवा भंडारण नहीं पाया गया, बल्कि 06 औद्योगिक इकाइयों में  टेक्निकल ग्रेड यूरिया का प्रयोग एवं भंडारण पाया गया तथा शेष औद्योगिक इकाई में फॉर्मलडिहाइड का प्रयोग होता हुआ पाया गया। यह जानकारी जिला कृषि अधिकारी डॉ अवधेश मिश्र ने दी।

सोलर पम्प स्थापना को धनराशि जमा कराने हेतु नहीं किया जाता कोई फोन- उप कृषि निदेशक

उप कृषि निदेशक ने चेताया जालसाजों से बचे किसान। सोलर पम्प स्थापना हेतु धनराशि जमा कराने हेतु नहीं किया जाता कोई फोन

बिजनौर। उप कृषि निदेशक गिरीश चन्द्र ने जनपद के समस्त किसान भाइयों को सचेत व सूचित करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पी०एम०-कुसुम) योजनान्तर्गत कृषि विभाग से सोलर पम्प स्थापना हेतु अभिलेख धनराशि बैंक में जमा कराने के सम्बन्ध में कोई फोन नहीं किया जाता है। प्रकाश में आया है कि कुछ जालसाज संस्था/व्यक्तियों द्वारा कृषकों को फोन करके सोलर पम्प स्थापना के सम्बन्ध में कृषक के अभिलेख/धनराशि अपने बैंक खाते में जमा कराने के सम्बन्ध में फर्जी कॉल की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि धनराशि जमा कराने या अभिलेख लेने के संबंध में किसी किसान भाई के पास कोई फोन आता है, तो वह उसके द्वारा बताये गये बैंक खाता सं० में कोई धनराशि जमा न करें और न ही अपना कोई अभिलेख दें। यदि कोई किसान भाई किसी फर्जी कॉल पर सोलर पम्प के सम्बन्ध में अपने अभिलेख या धनाशि जमा करते हैं, तो उनको आर्थिक हानि हो सकती है, जिसके लिए वह स्वयं जिम्मेदार होंगे। कृषि विभाग की इसमें कोई जिम्मेदारी नहीं होगी।

खरीफ उत्पादकता गोष्ठी में लाभान्वित हुए सैकड़ों किसान

सफलतापूर्वक आयोजित हुई खरीफ उत्पादकता गोष्ठी, अनेक किसान हुए लाभान्वित

मेले में कृषि योजनओं, निवेशों, फसल बचाव व कृषि की दी गई नवीनतम जानकारी 

बिजनौर। मुख्य विकास अधिकारी पूर्ण बोरा की अध्यक्षता में जनपद स्तरीय खरीफ उत्पादकता गोष्ठी 2022 एवं नेशनल मिशन ऑन एडिविल ऑयल (ऑयल सीड्स) योजनान्तर्गत खरीफ तिलहन किसान मेले का आयोजन कॉकरान वाटिका, नजीबाबाद रोड, बिजनौर में किया गया।

कार्यक्रम में उप कृषि निदेशक गिरीश चन्द्र सहित कृषि व अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी व लगभग 800 कृषकों द्वारा प्रतिभाग किया गया। गोष्ठी का संचालन अपर जिला कृषि अधिकारी हरज्ञान सिंह द्वारा किया गया।
मुख्य विकास अधिकारी द्वारा किसान मेला/गोष्ठी का फीता काटकर शुभारम्भ एवं दीप प्रज्जवलित किया गया। मुख्य विकास अधिकारी ने कृषि एवं कृषि से सम्बन्धित विभागों द्वारा लगाए गए स्टालों का निरीक्षण किया। निरिक्षण के समय कृषि विभाग द्वारा लगाये गये स्टाल पर देय अनुदान के सम्बन्ध में उन्होंने जानकारी भी प्राप्त की।

इस अवसर पर उन्होंने निर्देश दिये कि जिन कृषकों द्वारा जैविक विधि से अचार एवं अन्य उत्पाद तैयार किये जा रहे हैं, उन उत्पादों को एफएसएसएआई से प्रमाणित कराया जाये ताकि उत्पाद की गुणवत्ता निर्धारित हो सके। इसके साथ ही महिला समूह द्वारा तैयार किये जा रहे उत्पादों की पैकेजिंग की गुणवत्ता सुनिश्चित कराने हेतु निर्देशित किया। निरीक्षण के समय उपस्थित अधिकारियों को निर्देश दिये कि महिला समूह/एफपीओ एवं डास्प द्वारा तैयार किये जा रहे उत्पादकों के व्यापक प्रचार प्रसार कराने हेतु जनपद में स्थित शॉपिंग मॉल एवं साप्ताहिक बाजारों में जैविक उत्पादकों को रखवाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाये।

मुख्य विकास अधिकारी बिजनौर द्वारा अपने सम्बोधन में जैविक खेती पर जोर देते हुए गोष्ठी में उपस्थित कृषकों से अपेक्षा की गई कि किसान अधिक से अधिक जैविक खेती कर अपनी आय में उत्तरोतर वृद्धि कर सकते हैं। साथ ही फसल अवशेष के सम्बन्ध में उपस्थित कृषकों को सलाह दी गई कि आप अपनी फसल से प्राप्त भूसे को सुरक्षित रखें ताकि गोशालाओं में पर्याप्त मात्रा में भूसे की उपलब्धता हो सके तथा फसल अवशेष को न जलाकर इकट्ठा कर डी-कम्पोज कर जैविक खाद का उत्पादन करें। इनके द्वारा गोष्ठी में उपस्थित कृषकों को निःशुल्क उर्द बीज मिनीकिट का वितरण किया गया।

जिला कृषि अधिकारी बिजनौर डा0 अवधेश मि़श्र द्वारा कृषि विभाग में संचालित योजनाओं में देय अनुदान के विषय में विस्तृत रूप से अवगत कराया गया। जिला कृषि अधिकारी द्वारा कृषकों को कृषि निवेशों की उपलब्धता के विषय में विस्तृत जानकारी दी गई। जिला कृषि रक्षा अधिकारी मनोज रावत ने मुरादाबाद में स्थापित आईपीएम लैब द्वारा तैयार किये जा रहे ट्राइकोडर्मा हारजियेनम एवं ब्यूवेरिया बेसियाना के विषय में बताया गया कि जैविक खेती के उत्पादन बढ़ाने हेतु कृषकों को अनुदान पर उपलब्ध कराये जाते हैं तथा 75 प्रतिशत देय अनुदान की धनराशि का भुगतान सीधे कृषक के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाती है। उनके द्वारा फसलों में लगने वाले कीट-रोग से बचाव एवं उपचार के विषय में कृषकों को जानकारी दी गई।
कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों द्वारा गोष्ठी में उपस्थित कृषकों को कृषि की नवीनतम जानकारी यथा मशरूम की खेती, खरीफ फसलों में लगने वाले कीट एवं रोग से बचाव आदि के विषय में विस्तृत रूप से जानकारी दी गयी तथा कृषकों को कृषि वैज्ञानिकों द्वारा अपने मोबाइल नं0 नोट कराये गये। कृषकों का आश्वस्त किया गया कि किसी भी जानकारी के लिए आप हमसे सीधे सम्पर्क कर समस्या का समाधान पा सकते हैं। कृषि वैज्ञानिकों द्वारा कृषि संवाद के माध्यम से किसान मेले/गोष्ठी में उठाई गयी समस्याओं का निराकरण मौके पर ही किया गया।

मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा0 विजेन्द्र पाल सिंह द्वारा पशुओं में फैल रही बीमारी के रोकथाम एवं उपचार के विषय में कृषकों को विस्तृत रूप से जानकारी दी गयी। उप कृषि निदेशक गिरीश चन्द द्वारा विभाग में चल रही योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गयी। पी0एम0 किसान सम्मान निधि योजनार्न्तत कृषकों को अवगत कराया गया कि जिन कृषकों द्वारा ई0-के0वाई0सी0 नहीं कराई गयी, वह तत्काल जनसेवा केन्द्र के माध्यम से ई-के0वाई0सी0 करायें।
अन्त में जिला कृषि अधिकारी डा0 अवधेश मिश्र द्वारा गोष्ठी में आये हुए अधिकारियों एवं कर्मचारियों/कृषकों का धन्यवाद देते हुए किसान मेला/गोष्ठी का समापन किया गया।

इस अवसर पर डा0 अवधेश मिश्र जिला कृषि अधिकारी, मनोज रावत जिला कृषि रक्षा अधिकारी, डा0 कर्मवीर सिंह यादव जिला परियोेजना समन्वयक डास्प, जितेन्द्र कुमार  जिला उद्यान अधिकारी, डा0 विजेन्द्र सिंह मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, हरज्ञान सिंह अपर जिला कृषि अधिकारी, डा0 के0के0 सिंह कृषि वैज्ञानिक, डा0 शिवांगी कृषि वैज्ञानिक, डा0 शकुन्तला गुप्ता प्रभारी अधिकारी कृषि विज्ञान केन्द्र नगीना, डा0 प्रदीप कुमार सिंह सहायक आयुक्त एवं सहायक निबन्धक बिजनौर, जिला गन्ना अधिकारी  मायापति यादव, एस0सी0डी0आई0 नजीबाबाद सहित अन्य अधिकारी व बडी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

तमाम बैरिकेटिंग पार कर किसानों ने कलक्ट्रेट घेर कर ही लिया दम

चौधरी दिगंबर सिंह का एलान, मांगें नहीं मानी तो अफसरों को चैन से नहीं बैठने देंगे।

बिजनौर। कलक्ट्रेट जाने की कोशिश कर रहे भाकियू कार्यकर्ताओं की पुलिस से तीखी नोकझोंक हो गई। पुलिस ने बेरिकेटिंग लगाकर किसानों को रोकने की कोशिश की। इसके बावजूद कलक्ट्रेट पहुंचे भाकियू कार्यकर्ताओं ने अपना दमखम दिखा ही डाला।

भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के युवा प्रदेश अध्यक्ष चौधरी दिगंबर सिंह ने चेतावनी दी है कि यदि  किसानों की मांगे नहीं मानी गई तो जिले के अंदर अफसरों को चैन से नहीं बैठने दिया जाएगा। किसानों की समस्याओं का समाधान न होने पर भाकियू ने मंगलवार दोपहर कलक्ट्रेट का घेराव किया। युवा प्रदेश अध्यक्ष चौधरी दिगंबर सिंह ने कहा कि जनपद की चीनी मिलें नहीं चाहती कि कोई नई मिल बने। इसी के चलते नूरपुर में प्रस्तावित चीनी मिल का विरोध किया जा रहा है। अधिकारियों के आश्वासन के बावजूद मनमाना बिजली का बिल वसूला जा रहा है। विद्युत विभाग के अधिकारी वीडियो बनाकर किसानों को डराते और धमकाते हैं। नमामि गंगे अभियान की शुरुआत बिजनौर से की गई इसके बावजूद गंगा वे एक्सप्रेस मेरठ से निकाला जा रहा है और बिजनौर को इससे अछूता रखा जा रहा है। जब अभियानों की शुरुआत बिजनौर से की जाती है तो जिन योजनाओं से जनपद वासियों को लाभ मिले उन योजनाओं को भी बिजनौर से अछूता नहीं रखना चाहिए। बिलाई शुगर मिल के बारे में हर किसी को पता है लेकिन तीन अन्य और भी मिले हैं, जो किसानों का भुगतान नहीं कर रही हैं।  किसानों का लगातार शोषण किया जा रहा है और बार-बार फरियाद लगाने के बावजूद अधिकारी सुनने को तैयार नहीं है। सभा में कई अन्य वक्ताओं ने भी किसानों की समस्याओं को उठाया और समस्याओं का समाधान ना करने पर अफसरों को चेतावनी दी।

इस मौके पर धर्मेंद्र मलिक, दीपक कुमार, राकेश प्रधान, जितेंद्र सिंह, अंकित, तेजवीर, धर्मेंद्र,  राजवीर सिंह, मांगेराम त्यागी, राजेश सिंह मलिक संरक्षक, अरविंद राजपूत, वीर सिंह, तेजवीर सिंह, अंकित ग्रेवाल, कुलबीर सिंह, समर पाल सिंह, सरदार इकबाल सिंह आदि मौजूद रहे।

इससे पहले कलक्ट्रेट जाने की कोशिश कर रहे भाकियू कार्यकर्ताओं की पुलिस से तीखी नोकझोंक हो गई। पुलिस ने बेरिकेटिंग लगाकर किसानों को रोकने की भरपूर कोशिश की। इसके बावजूद किसानों ने कलेक्ट्रेट पहुंच कर ही दम लिया।

रंग लाई सीओ सिटी की कोशिश! बताया गया है कि सीओ सिटी अनिल चौधरी ने विद्युत विभाग के अधिकारियों से इस संबंध में वार्ता की। अधीक्षण अभियंता विद्युत निरंजन कुमार सिंह ने दावा किया कि नलकूपों की बिलिंग अनमीटर्ड निजी नलकूप संयोजनों के लिए निर्धारित दर पर ही की जायेगी, बिल द्वारा जमा की गई धनराशि समायोजित की जायेगी।

कमिश्नर व डीएम ने देखी केले की विशेष फसल

बिजनौर। मंडल आयुक्त आंजनेय कुमार सिंह एवं जिलाधिकारी उमेश मिश्रा द्वारा किसान पाठशाला के फाउंडर मेंबर एवं प्रगतिशील किसान राहुल चौधरी के केला प्रक्षेत्र का भ्रमण किया गया।

इस अवसर पर राहुल चौधरी द्वारा अवगत कराया गया कि वह रेजिडू फ्री केला का उत्पादन करते हैं। इस प्रकार के केला उत्पादन के लिए सर्वप्रथम आवश्यक पोषक तत्वों की आपूर्ति हेतु रासायनिक उर्वरकों को गोबर की खाद में मिलाकर 8 से 10 दिन ढक कर रखना पड़ता है, जिससे रासायनिक उर्वरकों की बॉन्डिंग टूट जाए और उपलब्ध पोषक तत्व पौधों के लिए सुलभ एवं उपयोगी हो सके। इस प्रक्रिया से रासायनिक उर्वरकों में हानिकारक तत्वों का प्रभाव कम हो जाता है तथा उर्वरकों की आधी मात्रा ही देनी पड़ती है। साथ ही मिट्टी के घोल का छिड़काव फसल पर करने से कीट और रोग का प्रकोप नहीं होता है और इससे पौधों को पोषक तत्व भी उपलब्ध होता है।

गुणवत्ता व अधिक उत्पादन के लिए बंच प्रबंधन जरूरी- आयुक्त एवं जिलाधिकारी द्वारा खेत में जाकर केले की फसल देखी गई और प्रत्येक पौधे पर स्वस्थ एवं पर्याप्त फलियों वाली घेर पाई गई। कृषक राहुल चौधरी द्वारा अवगत कराया गया कि केले की गुणवत्ता एवं अधिक उत्पादन सुनिश्चित करने हेतु बंच प्रबंधन बहुत ही आवश्यक है, इस प्रक्रिया में केले के नीचे के तने की गोलाई के एक चौथाई के बराबर केले के पंजे को रखना चाहिए और शेष को नीचे के फूल सहित तोड़ देना चाहिए।

इस प्रक्रिया से नीचे से ऊपर तक की फलियां एक समान लंबाई और मोटाई की होंगी और हमें गुणवत्ता के साथ-साथ केले का अधिक उत्पादन भी प्राप्त होगा। आयुक्त द्वारा केले के उत्पादन से संबंधित संपूर्ण प्रक्रिया की विस्तार से जानकारी प्राप्त की गई और सड़क के किनारे प्रक्षेत्र चयन को सराहा गया और अवगत कराया गया कि सड़क के किनारे स्थित खेतों में हमें नगदी फसलों का उत्पादन करना चाहिए क्योंकि इससे परिवहन में काफी सुविधा होती है साथ ही ड्रिप और स्प्रिंकलर इरिगेशन को भी प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए गए।

अच्छे कार्य के लिए किसानों का सम्मान- आयुक्त एवं जिलाधिकारी द्वारा केले के प्रक्षेत्र पर ही लखनऊ में आयोजित उत्तर प्रदेश आम महोत्सव 2022 में प्रदेश स्तर पर प्रथम पुरस्कार प्राप्त करने वाले डीके शर्मा बिजनौर, मौन पालन एवं शहद उत्पादन में उल्लेखनीय कार्य करने पर उदित प्रकाश ग्राम पीपला जागीर, नूरपुर तथा जैविक कृषि एवं मृदा परीक्षण प्रयोगशाला की स्थापना करने वाले ब्रह्मपाल सिंह ग्राम अगरी हल्दौर को शाल ओढ़ाकर एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। केला उत्पादन एवं प्रदेश स्तर पर केले के उत्पादन को प्रोत्साहित करने वाले राहुल चौधरी को भी शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।

आयुक्त द्वारा यह भी अवगत कराया गया कि क़ृषि क्षेत्र में नवोन्मेशी एवं विशिष्ट कार्य कर रहे किसानों को सम्मानित करने से किसानों को और अच्छा कार्य करने का प्रोत्साहन मिलता है। अच्छे कार्य करने वाले किसानों का सम्मान होना ही चाहिए। जिलाधिकारी द्वारा इस अवसर पर जनपद में उल्लेखनीय एवं विशिष्ट कार्य करने वाले किसानों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई तथा अवगत कराया गया कि विगत 3 माह से जनपद में नवोन्मेशी व विशिष्ट कार्य करने वाले कृषकों व उद्यमियों को सम्मानित करने की एक श्रृंखला चलाई जा रही है, जिससे जनपद में अच्छे कार्य करने वाले कृषक स्वतः आगे आ रहे हैं और नवीन कृषि पद्धतियों को अपनाने हेतु कृषकों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

इस अवसर पर गिरीश चंद उप कृषि निदेशक, डॉ अवधेश मिश्रा जिला कृषि अधिकारी, जितेंद्र कुमार जिला उद्यान अधिकारी, मनोज कुमार उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी बिजनौर, उप जिलाधिकारी मोहित कुमार, खंड विकास अधिकारी वीरेंद्र सिंह यादव, सुनील कुमार व सचिन कुमार विषय वस्तु विशेषज्ञ तथा ग्राम प्रधान श्रीमती सहित 65 दर्शक उपस्थित रहे।

एफपीओ द्वारा ग्राम अगरी में मृदा परीक्षण की अभिनव पहल

एफ.पी.ओ. द्वारा ग्राम अगरी में मृदा परीक्षण की अभिनव पहल

बिजनौर। ग्राम अगरी में कृषक उत्पादक संगठन “हल्दौर फेड फारमर्स प्रोड्यूसर कम्पनी लिमिटेड” द्वारा एक मृदा परीक्षण लैब स्थापित की जा रही है।

एफ.पी.ओ. के सीईओ विकास कुमार ने बताया कि इस प्रयोगशाला में कृषक नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, पीएच, ईसी,सल्फर, जिंक, बोरोन, कापर, जीवांश कार्बन आदि की जांच करा सकते हैं। एक मृदा नमूना के सभी तत्वों की टेस्टिंग की फीस 400 रूपये निर्धारित की गयी है। इसके साथ ही यदि कोई कृषक कुछ चुनिंदा तत्वों की जांच कराना चाहता है तो इसकी फीस तुलनात्मक रूप से उसी तरह से कम हो जाएगी। नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश में से किसी एक तत्व की जांच के लिए ₹28 देने होंगे। पीएच मान की जांच के लिए ₹48 तथा ऑर्गेनिक कार्बन के लिए 65 रुपए का शुल्क देय होगा। एक मृदा नमूने के संपूर्ण तत्वों की जांच के लिए लगभग 1 घंटे का समय लगता है। कृषक उत्पादक संगठन के चेयरमैन ब्रह्मपाल सिंह द्वारा बताया गया कि जनपद बिजनौर में किसी भी एफपीओ द्वारा यह अनूठी पहल है तथा संतुलित उर्वरक प्रयोग हेतु यह प्रयोगशाला मील का पत्थर साबित होगी।
स्थापित की जाने वाली प्रयोगशाला का निरीक्षण उप कृषि निदेशक गिरीश चन्द्र द्वारा किया गया। मौके पर उपस्थित कृषकों को उप कृषि निदेशक द्वारा जानकारी दी गई कि मृदा परीक्षण से भूमि में उपलब्ध पोषक तत्वों के स्तर की जानकारी होगी तथा आगामी मौसम में बोई जाने वाली फसल के लिए पोषक तत्वों की सही आवश्यकता की जानकारी से संतुलित उर्वरकों का प्रयोग कर सकेंगे, जिससे उत्पादन लागत में कमी आएगी। इस अवसर पर उनके साथ उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी बिजनौर व आत्मा प्रभारी योगेन्द्र पाल सिंह योगी उपस्थित रहे। आत्मा प्रभारी द्वारा उपस्थित कृषकों से परिचर्चा में जैविक कृषि अपनाए जाने पर बल दिया गया।

फसलों के बीच में उगे खरपतवार पहचाना हुआ बेहद आसान

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से पहचाने जाएंगे फसलों के बीच में उगे खरपतवार

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से पहचाने जाएंगे फसलों के बीच में उगे खरपतवार, जानें प्रोजेक्ट के बारे में पूरी जानकारी

नई दिल्ली (एजेंसी)। छत्तीसगढ़ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का हर क्षेत्र में तेजी से इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है। यह इंसानी जिंदगी का एक तरह से पहिया बनता जा रहा है। यही वजह है कि AI का कारोबार तेजी से विस्तार ले रहा है। भारत में भी इसकी उपयोगिता बढ़ती जा रही है। भारत सरकार का इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बढ़ावा दे रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से छत्तीसगढ़ के दो युवा वैभव देवांगन और धीरज यादव ने एक प्रोजेक्ट तैयार किया है, जिससे फसलों के बीच में उगे खरपतवारों को पहचानने में मदद मिलेगी। 

इस बारे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कू पर डिजिटल इंडिया ने एक वीडियो के साथ पोस्ट शेयर किया है। डिजिटल इंडिया ने लिखा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस- द फ्यूचर ऑफ द नेशन, दो युवाओं ने एआई संचालित तकनीक की मदद से एक प्रोजेक्ट तैयार किया है। ‘एआई के लिए वीड डिटेक्टर सिस्टम’, जो आसानी से खेतों में विभिन्न प्रकार के खरपतवारों की पहचान करता है और उन्हें हटाने में सहायता करता है।

बता दें कि छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के शासकीय कुलदीप निगम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, नर्रा के छात्र वैभव देवांगन और धीरज यादव द्वारा एआई तकनीक से तैयार किया गया यह प्रोजेक्ट किसानों के लिए मददगार साबित हो सकता है। 

अब गांवों के चारागाह से मिलेगी जीवनदायिनी ऑक्सीजन

चारागाहों में लगेंगे ऑक्सीजन प्लांट। रोपे जाएंगे पीपल के पौधे। ब्लॉक मोहम्मदपुर देवमल की छह ग्राम पंचायत चयनित। 205 बीघा भूमि पर मनरेगा के तहत होगा कार्य

बिजनौर। अब ग्राम पंचायतों में खाली पड़ी चारागाह की भूमि जीवनदायिनी ऑक्सीजन का मुख्य स्रोत बनेगी। दरअसल पंचायत में कार्यों के प्राक्कलन में समतलीकरण, मेढबन्दी तथा वृक्षारोपण को सम्मिलित करते हुए योजना तैयार कर कार्य प्रारम्भ कराने के निर्देश दिये गए हैं। कार्य पूर्ण होते ही यहां पीपल के पौधे रोपे जाएंगे। ब्लॉक मोहम्मदपुर देवमल की छह ग्राम पंचायत अंतर्गत पड़ने वाली 205 बीघा चारागाहों की भूमि निकट भविष्य में नवजीवन का रूप लेने वाली है।

जीवनदायिनी ऑक्सीजन को प्रचुरता से प्राप्त करने के उपायों के तहत उपायुक्त (श्रम रोजगार) संयुक्त जिला कार्यक्रम समन्वयक बिजनौर ने 07 अक्टूबर 2021 को आदेश जारी किया। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजनान्तर्गत कार्य कराने के सम्बंध में उन्होंने कार्यक्रम अधिकारी/खंड विकास अधिकारी मोहम्मदपुर देवमल को निर्देश दिये हैं कि उक्त पंचायत में कार्यों के प्राक्कलन में समतलीकरण, मेढबन्दी तथा वृक्षारोपण को सम्मिलित करते हुए योजना तैयार कर एक सप्ताह में कार्य प्रारम्भ कराएं। उक्त कार्य के पूरा होने के बाद यहां पीपल की पौध लगा दी जाएगी। बीडीओ को निर्देश हैं कि तकनीकी सहायकों द्वारा प्राक्कलन दिनेश कुमार अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी (जनपद स्तर) के पर्यवेक्षण में तैयार किये जाने हेतु निर्देशित करना सुनिश्चित करें।
कार्यक्रम अधिकारी/खंड विकास अधिकारी मोहम्मदपुर देवमल को विकास खण्ड के अंतर्गत ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजनान्तर्गत कराये जाने वाले कार्यों का विवरण भी दिया गया है। बताया गया है कि शासन की ओर से 1500 मानव दिवस एवं 1500 से अधिक मानव दिवस सृजन करने वाले कार्यों को कराये जाने के निर्देश दिये गये है।

कोरोना के काल में सभी लोग ऑक्सीजन का महत्व समझ चुके हैं। यह भी सर्वविदित है कि पीपल का वृक्ष हमें 24 घंटे ऑक्सीजन देता है। इसका धार्मिक महत्व भी है। पर्यावरण को शुद्ध रखने के साथ स्वच्छ हवा की जरूरत को पूरा करने के लिए पीपल के पौधों के रोपण की जरूरत बताई गई है। पीपल के पेड़ को अश्वत्ता का पेड़ भी कहते हैं। भारतीय धर्मशास्त्रों में पीपल में भगवान विष्णु का वास माना गया है। बौद्ध और जैन धर्म में भी इसका खासा महत्व है। ये ऑक्सीजन का बड़ा अच्छा स्रोत है। इसके अलवा अस्थमा, डायबिटीज और डायरिया जैसी बीमारियों में भी पीपल काफी लाभकारी है।

प्रधानमंत्री ने विशेष गुणों वाली फसलों की 35 किस्में कीं राष्ट्र को समर्पित


राष्ट्रीय जैविक तनाव प्रबंधन संस्थान, रायपुर का नवनिर्मित परिसर राष्ट्र को समर्पित।

कृषि विश्वविद्यालयों को ग्रीन कैंपस अवार्ड भी वितरित।

“जब भी किसानों और कृषि को सुरक्षा कवच मिलता है, उनका तेजी से विकास होता है”- मोदी

“हमारी प्राचीन कृषि परंपराओं के साथ-साथ भविष्य की ओर आगे बढ़ना भी समान रूप से महत्वपूर्ण है”

नई दिल्ली (PMO)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से विशेष गुणों वाली फसलों की 35 किस्में राष्ट्र को समर्पित कीं। उन्होंने राष्ट्रीय जैविक तनाव प्रबंधन संस्थान, रायपुर का नवनिर्मित परिसर भी राष्ट्र को समर्पित किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कृषि विश्वविद्यालयों को ग्रीन कैंपस अवार्ड वितरित किये। उन्होंने उन किसानों के साथ बातचीत की, जो नवोन्मेषी तरीकों का उपयोग करते हैं तथा सभा को भी संबोधित किया।  

प्रधानमंत्री ने जम्मू और कश्मीर के गांदरबल की श्रीमती जैतून बेगम, बुलंदशहर उत्तर प्रदेश के किसान और बीज उत्पादक श्री कुलवंत सिंह, बारदेज, गोवा की रहने वाली श्रीमती दर्शना पेडनेकर, मणिपुर के श्री थोइबा सिंह व उधम सिंह नगर, उत्तराखंड के निवासी श्री सुरेश राणा से उनके क्षेत्र व कार्य से संबंधित बातचीत की।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले छह-सात वर्षों में कृषि से संबंधित चुनौतियों के समाधान के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी का प्राथमिकता के आधार पर उपयोग किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा, “हमारा सबसे ज्यादा ध्यान अधिक पौष्टिक बीजों पर है, जो खासकर बदलते मौसम में, नई परिस्थितियों के अनुकूल हैं।”

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि जब भी किसानों और कृषि को सुरक्षा कवच मिलता है तो उनका विकास तेजी से होता है। उन्होंने बताया कि भूमि के संरक्षण के लिए 11 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए गए हैं। प्रधानमंत्री ने सरकार की किसान-हितैषी पहलों के बारे में बताया, जैसे – किसानों को जल सुरक्षा प्रदान करने के लिए लगभग 100 लंबित सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने के लिए अभियान, फसलों को बीमारियों से बचाने के लिए किसानों को नई किस्मों के बीज उपलब्ध कराना और इस प्रकार अधिक उपज प्राप्त करना। उन्होंने कहा कि एमएसपी बढ़ाने के साथ-साथ खरीद प्रक्रिया में भी सुधार किया गया ताकि अधिक से अधिक किसानों को इसका लाभ मिल सके। रबी सीजन में 430 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की खरीद की गई है और किसानों को 85 हजार करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है। महामारी के दौरान गेहूं खरीद केंद्रों की संख्‍या को तीन गुना से अधिक बढ़ाया गया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि किसानों को तकनीक से जोड़कर हमने उनके लिए बैंकों से मदद लेना आसान बना दिया है। आज किसानों को मौसम की जानकारी बेहतर तरीके से मिल रही है। हाल ही में 2 करोड़ से अधिक किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्‍ध कराए गए हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण जो नए प्रकार के कीट, नई बीमारियां, महामारियां आ रही हैं, इससे इंसान और पशुधन के स्वास्थ्य पर भी बहुत बड़ा संकट आ रहा है और फसलें भी प्रभावित हो रही है। इन पहलुओं पर गहन रिसर्च निरंतर जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब साइंस, सरकार और सोसायटी मिलकर काम करेंगे तो उसके नतीजे और बेहतर आएंगे। किसानों और वैज्ञानिकों का ऐसा गठजोड़, नई चुनौतियों से निपटने में देश की ताकत बढ़ाएगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि किसान को सिर्फ फसल आधारित इनकम सिस्टम से बाहर निकालकर, उन्हें वैल्यू एडिशन और खेती के अन्य विकल्पों के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। उन्‍होंने कहा कि साइंस और रिसर्च के समाधानों से अब मोटे अनाजों सहित अन्य अनाजों को और विकसित करना ज़रूरी है। उन्‍होंने कहा इसका मकसद ये कि देश के अलग-अलग हिस्सों में, अलग-अलग ज़रूरतों के हिसाब से इन्हें उगाया जा सके। उन्होंने लोगों से कहा कि वे संयुक्त राष्ट्र द्वारा आगामी वर्ष को मिलेट वर्ष घोषित किए जाने के फलस्‍वरूप उपलब्‍ध होने वाले अवसरों का उपयोग करने के लिए तैयार रहें।

बीते 6-7 सालों में साइंस और टेक्नॉलॉजी को खेती से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए प्राथमिकता के आधार पर उपयोग किया जा रहा है।

विशेष रूप से बदलते हुए मौसम में, नई परिस्थितियों के अनुकूल, अधिक पोषण युक्त बीजों पर हमारा फोकस बहुत अधिक है: PM @narendramodi— PMO India (@PMOIndia) September 28, 2021

पिछले वर्ष ही कोरोना से लड़ाई के बीच में हमने देखा है कि कैसे टिड्डी दल ने भी अनेक राज्यों में बड़ा हमला कर दिया था।

भारत ने बहुत प्रयास करके तब इस हमले को रोका था, किसानों का ज्यादा नुकसान होने से बचाया था: PM @narendramodi— PMO India (@PMOIndia) September 28, 2021

किसानों को पानी की सुरक्षा देने के लिए, हमने सिंचाई परियोजनाएं शुरू कीं, दशकों से लटकी करीब-करीब 100 सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने का अभियान चलाया।

फसलों को रोगों से बचाने के लिए, ज्यादा उपज के लिए किसानों को नई वैरायटी के बीज दिए गए: PM @narendramodi— PMO India (@PMOIndia) September 28, 2021

MSP में बढ़ोत्तरी के साथ-साथ हमने खरीद प्रक्रिया में भी सुधार किया ताकि अधिक-से-अधिक किसानों को इसका लाभ मिल सके।

रबी सीजन में 430 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा गेंहूं खरीदा गया है।

इसके लिए किसानों को 85 हजार से अधिक का भुगतान किया गया है: PM @narendramodi— PMO India (@PMOIndia) September 28, 2021

किसानों को टेक्नोलॉजी से जोड़ने के लिए हमने उन्हें बैंकों से मदद को और आसान बनाया गया है।

आज किसानों को और बेहतर तरीके से मौसम की जानकारी मिल रही है।

हाल ही में अभियान चलाकर 2 करोड़ से ज्यादा किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड दिए गए हैं: PM @narendramodi— PMO India (@PMOIndia) September 28, 2021

जलवायु परिवर्तन के कारण जो नए प्रकार के कीट, नई बीमारियां, महामारियां आ रही हैं, इससे इंसान और पशुधन के स्वास्थ्य पर भी बहुत बड़ा संकट आ रहा है और फसलें भी प्रभावित हो रही है।

इन पहलुओं पर गहन रिसर्च निरंतर ज़रूरी है: PM @narendramodi— PMO India (@PMOIndia) September 28, 2021

जब साइंस, सरकार और सोसायटी मिलकर काम करेंगे तो उसके नतीजे और बेहतर आएंगे।

किसानों और वैज्ञानिकों का ऐसा गठजोड़, नई चुनौतियों से निपटने में देश की ताकत बढ़ाएगा: PM @narendramodi— PMO India (@PMOIndia) September 28, 2021

किसान को सिर्फ फसल आधारित इनकम सिस्टम से बाहर निकालकर, उन्हें वैल्यू एडिशन और खेती के अन्य विकल्पों के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है: PM @narendramodi— PMO India (@PMOIndia) September 28, 2021

साइंस और रिसर्च के समाधानों से अब मिलेट्स और अन्य अनाजों को और विकसित करना ज़रूरी है।

मकसद ये कि देश के अलग-अलग हिस्सों में, अलग-अलग ज़रूरतों के हिसाब से इन्हें उगाया जा सके: PM @narendramodi— PMO India (@PMOIndia) September 28, 2021

Cafe D, शॉपर्स प्राइड मॉल, बिजनौर

किसान पाठशालाओं में फसल अवशेष न जलाने की शपथ दिलाई


बिजनौर। कृषकों को किसान पाठशालाओं में फसल अवशेष न जलाने की शपथ दिलाई गई।
द मिलियन फारमर्स स्कूल के अंतर्गत द्वितीय चरण में जनपद की 130 न्याय पंचायतों में किसान पाठशाला का आयोजन किया गया। विकास खण्ड स्योहारा के ग्राम दौलतपुर में मण्डलीय संयुक्त कृषि निदेशक जेपी चौधरी द्वारा कृषकों को फसल अवशेष न जलाने की शपथ दिलाई गई। जेपी चौधरी द्वारा फसल अवशेष जलाने से पर्यावरण व भूमि की भौतिक व जैविक दशा पर पड़ने वाले हानिकारक प्रभावों के संबंध में जानकारी दी गई। इन किसान पाठशाला के माध्यम से कृषकों को फसल अवशेष प्रबंधन, खरीफ फसलों के प्रबंधन व रवि फसलों की बुवाई के संबंध में जानकारी दी गई।
नोडल अधिकारी बनाये गए आत्मा प्रभारी योगेंद्र पाल सिंह योगी द्वारा विकासखंड नहटौर के ग्राम विलासपुर व विकास खण्ड नूरपुर के कुण्डा खुर्द ग्राम में कृषकों को खरीफ फसल प्रबंधन व फसल अवशेष प्रबंधन व विभागीय योजनाओं की जानकारी दी गई। सत्य प्रकाश सहायक अधिकारी कृषि रक्षा द्वारा खरीफ फसल खरीफ फसलों में कीट रोग नियंत्रण के संबंध में अवगत कराया गया।

Cafe D, शॉपर्स प्राइड मॉल, बिजनौर

“मैनेज” डिप्लोमा के प्रमाण पत्र वितरित

बिजनौर। नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ एग्रीकल्चरल एक्सटेंशन मैनेजमेंट “मैनेज” हैदराबाद के तत्वाधान में आयोजित एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन का 15 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम कृषि भवन बिजनौर में उप कृषि निदेशक गिरीश चन्द्र द्वारा दीप प्रज्वलन कर प्रारंभ किया गया।

इससे पूर्व एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन का डिप्लोमा पूर्ण कर चुके प्रथम बैच के इनपुट डीलर्स को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। धामपुर के विवेक अग्रवाल ने इस डिप्लोमा कार्यक्रम में 87% अंक लेकर प्रथम स्थान हासिल किया। अफज़लगढ़ के शुभम तोमर 77 प्रतिशत के साथ द्वितीय, बिजनौर के संजय राजपूत 75 प्रतिशत के साथ तृतीय व बास्टा के नितीन तयाल 74 प्रतिशत अंक प्राप्त कर चतुर्थ स्थान पर रहे। सभी इनपुट डीलर्स को उप कृषि निदेशक गिरीश चंद जिला कृषि अधिकारी डॉ. अवधेश मिश्र उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी मनोज रावत, विषय वस्तु विशेषज्ञ व आत्मा प्रभारी योगेंद्र पाल सिंह योगी द्वारा संयुक्त रूप से प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इनपुट डीलर्स का यह विशेष डिप्लोमा उन उर्वरक विक्रेताओं के लिए चलाया जाता है, जिनके पास लाइसेंस उर्वरक प्राधिकार प्राप्त करने की न्यूनतम योग्यता नहीं है। जनपद में 30 इनपुट डीलर्स का प्रथम बैच 15 मार्च 2021 से 31 मार्च 2021 तक चलाया गया था। परिणाम जून माह में मैनेज द्वारा घोषित किए गए। इनपुट डीलर्स को प्रमाण पत्र कोरोना महामारी के चलते वितरित नहीं किए गए जा सके थे। आज के कार्यक्रम को सफल बनाने में रजत चौधरी व फैसिलेटर चेतन स्वरूप का सहयोग रहा।

सरकार ने देश का संवैधानिक ढांचा खत्म करके रख दिया:वेद प्रकाश त्रिपाठी

किसानों को जागरूक करने के लिए कांग्रेस ने की बैठक
लखनऊ। संगठन सृजन और किसान जागरुक अभियान के तहत जिला कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में न्याय पंचायत जोरिया के चाइना चौराहे पर बैठक हुई। बैठक में लोगों से कांग्रेस से जुड़ने की अपील की गई।

संगठन सृजन और किसान जागरुक अभियान के तहत जिला कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में मलिहाबाद ब्लॉक की न्याय पंचायत जोरिया के अंतर्गत चाइना चौराहे पर एक बैठक हुई। बैठक में कांग्रेस के जिला अध्यक्ष वेद प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि पिछले 6 साल से देश की सत्ता पर काबिज भाजपा सरकार जनता में विश्वास खो चुकी है। जिस उम्मीदों के साथ देश की जनता ने भाजपा को सत्ता सौंपी थी, वह पूर्णतया विफल हो चुकी है। सरकार ने देश का संवैधानिक ढांचा खत्म करके रख दिया। सरकार ने किसान विरोधी बिल के रूप में जो काला बिल पारित किया है, वह किसान के हित में कतई नहीं है। आगे चलकर यह बिल पूंजीपतियों के अनुकूल होगा। इसको लेकर किसान 2 महीने से दिल्ली बॉर्डर पर बिल वापस करने को सरकार से संघर्ष कर रहे हैं। लगभग 60 किसानों की मौत भी हो चुकी है, लेकिन यह अंधी बहरी सरकार किसानों की सुनने वाली नहीं है।

उक्त बैठक में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हबीबुर्रहमान, छोटे मियां, विधानसभा प्रभारी गौरी पांडेय, कपिल द्विवेदी, संतोष मौर्य, जिला उपाध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव, ब्लॉक उपाध्यक्ष जितेंद्र सिंह कथा न्याय पंचायत अध्यक्ष सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।

डेढ़ वर्ष तक स्थगित हो सकता है कृषि सुधार कानूनों का क्रियान्वयन!

सरकार-किसान संगठनों के बीच हुई 10वें दौर की बैठक। अब 22 को अगले चरण की बातचीत। संगठनों को कानूनों पर एतराज हो या देना चाहते हैं कुछ सुझाव तो सरकार चर्चा करने के लिए सदैव तैयार।

नई दिल्ली। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसानों से पुन: आग्रह करते हुए कहा कि कानूनों को रिपील करने के अलावा इन प्रावधानों पर बिन्दुवार चर्चा करके समाधान किया जा सकता है। पिछली बैठकों में अन्य विकल्पों पर चर्चा न होने की वजह से कोई सार्थक परिणाम नहीं निकल पाया था।

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री सोम प्रकाश ने आज 20 जनवरी, 2021 को विज्ञान भवन, नई दिल्‍ली में आयोजित 10वीं बैठक में किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से अगले दौर की वार्ता की। दसवें गुरु गोविन्द सिंह जी के 354वें प्रकाश पर्व पर सभी को बधाई देने के बाद उन्होंने किसान संगठनों को आंदोलन के दौरान अनुशासन बनाए रखने के लिए धन्यवाद दिया और आंदोलन समाप्त करने के लिए पुन: आग्रह किया। सरकार द्वारा कहा गया कि अब तक कृषि सुधार से संबंधित तीनों कानूनों तथा एमएसपी के सारे आयामों पर बिन्दुवार सकारात्मक चर्चा नहीं हुई है। सरकार ने यह भी कहा कि हमें किसान आंदोलन को संवेदनशीलता से देखना चाहिए तथा किसानों व देशहित में समग्रता की दृष्टि से उसे समाप्त करने के लिए ठोस प्रयास करना चाहिए। संगठनों को इन कानूनों पर एतराज है या कुछ सुझाव देना चाहते हैं तो हम उन बिंदुओं पर आपसे चर्चा करने के लिए सदैव तैयार हैं। कृषि मंत्री ने पुन: आग्रह करते हुए कहा कि कानूनों को रिपील करने के अलावा इन प्रावधानों पर बिन्दुवार चर्चा करके समाधान किया जा सकता है। पिछली बैठकों में अन्य विकल्पों पर चर्चा न होने की वजह से कोई सार्थक परिणाम नहीं निकल पाया था, अत: हम आज की चर्चा को सार्थक बनाने का आग्रह करते हैं। प्रारम्भ से ही सरकार विकल्पों के माध्यम से किसान प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करने के लिए खुले मन से प्रयास कर रही है। सरकार कृषि क्षेत्र को उन्नत और किसानों को समृद्ध बनाने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है।

किसानों की जमीन हड़पने की ताकत किसी में नहीं

किसानों की जमीन हड़पी जाने संबंधी भ्रांति दूर करते हुए श्री तोमर ने साफ-तौर पर कहा कि इन कानूनों के रहते कोई भी व्यक्ति देश में किसानों की जमीन हड़पने की ताकत नहीं रखता। हम खेती को आगे बढ़ाने और किसानों को समृद्ध बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। ये कानून किसानों के जीवन में क्रान्तिकारी बदलाव लाएंगे, जिससे किसानों की दशा-दिशा बदलेगी और उनके जीवन स्तर में सुधार होगा। परम श्रद्धेय सर्वंशदानी श्री गुरु गोविन्द सिंह जी के प्रकाश पर्व के पावन अवसर पर, कड़कड़ाती सर्दी में चल रहे किसान आन्दोलन की समाप्ति को दृष्टिगत रखते हुए, सरकार की तरफ से यह प्रस्ताव दिया गया कि कृषि सुधार कानूनों के क्रियान्वयन को एक से डेढ़ वर्ष तक स्थगित किया जा सकता है।

इस दौरान किसान संगठन और सरकार के प्रतिनिधि किसान आन्दोलन के मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श करके उचित समाधान पर पहुंच जा सकते हैं। इस पर किसान यूनियनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि वह सरकार के प्रस्ताव पर 21 जनवरी को विस्तारपूर्वक चर्चा करेंगे और 22 जनवरी 2021 को दोपहर 12 बजे विज्ञान भवन में संपन्न होने वाली बैठक में सरकार को अवगत करायेंगे। वार्ता सौहार्द्रपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुई। ****

गोबर्धन: अब बरसेगा गोबर से धन

बाजार में आया गाय के गोबर से बना पेंट, किसानों को मिलेगा Gobar se Dhan

खादी और ग्रामोद्योग आयोग की जयपुर इकाई कुमारप्पा नेशनल हैंडमेड पेपर इंस्टीट्यूट ने तैयार किया गोबर पेंट

खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) की मदद से की जाएगी पेंट की बिक्री

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नई दिल्ली। अभी तक हम गोबर्धन को एक त्योहार के रूप में ही मनाते आ रहे हैं, लेकिन अब सच में ही गोबर से धन (Gobar se Dhan) बरसेगा। किसानों की आमदनी बढ़ाने में गोबर का अहम रोल होगा। अब किसान गोबर से आमदनी भी करेंगे।

गाय का दूध-घी, गोमूत्र से बने पेस्टीसाइट, गाय के गोबर के दीये के बाद अब गाय के गोबर से बना पेंट। जी हां, सही पढ़ा आपने, गाय के गोबर से बना पेंट, जिससे आप अपने घर, ऑफिस या दुकान रंगते हैं। इसे  वेदिक पेंट (Vedic Paint) नाम दिया गया है।

गाय के गोबर से बने पेंट की बिक्री खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) की मदद से की जाएगी। गोबर पेंट को खादी और ग्रामोद्योग आयोग की जयपुर की इकाई कुमारप्पा नेशनल हैंडमेड पेपर इंस्टीट्यूट (Kumarappa National Handmade Paper Institute) ने तैयार किया है। इस पेंट को बीआईएस (BIS) यानी भारतीय मानक ब्यूरो भी प्रमाणित कर चुका है। किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में गाय के गोबर से बना पेंट एक बड़ा कदम साबित होगा।

एंटीफंगल, एंटीबैक्टीरियल, इको फ्रेंडली पेंट (Cow dung Paint):

खादी और ग्रामोद्योग आयोग का कहना है कि गाय के गोबर से बना यह पेंट एंटीफंगल, एंटीबैक्टीरियल और इको फ्रेंडली है। दीवार पर पेंट करने के बाद यह सिर्फ चार घंटे में सूख जाएगा। इस पेंट में अपनी जरूरत के हिसाब से रंग भी मिलाया जा सकता है।

विभिन्न पैकिंग में तैयार:

खादी प्राकृतिक पेंट (Khadi Prakritik Paint) दो रूप में उपलब्ध होगा, डिस्टेंपर पेंट (distemper paint) और प्लास्टिक एम्युनेशन पेंट (plastic emulsion paint)। इस पेंट में हैवी मैटल (heavy metals) जैसे- सीसा (lead), पारा (mercury), क्रोमियम (chromium), आर्सेनिक, कैडमियम आदि का इस्तेमाल नहीं किया गया है। फिलहाल इसकी पैकिंग 2 लीटर से लेकर 30 लीटर तक तैयार की गई है।

30,000 रुपये की आमदनी:

खादी और ग्रामोद्योग आयोग का कहना है कि इस पेंट से स्थानीय निर्माताओं को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। पेंट की इस तकनीक से गाय के गोबर का इस्तेमाल बढ़ेगा। यह गो शालाओं की आमदनी बढ़ाने में भी अहम भूमिका अदा करेगा। इस पेंट के निर्माण से किसान या गोशाला को एक पशु से हर साल तकरीबन 30,000 रुपये की आमदनी होगी। ग्राहकों के लिए सस्ता, किसानों के लिए लाभदायक-वैदिक पेंट का मुख्य अवयव गोबर होने से यह आम पेंट के मुकाबले सस्ता पड़ेगा। इससे रंग-रोगन कराने पर ग्राहकों की जेब कम ढीली होगी। वहीं यह देश के किसानों की आय बढ़ाने वाला होगा। टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के माध्यम से इसकी स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जाएगा।

फर्जी वेबसाइट दे रहीं जनता को धोखा

MNRE ने की पीएम-कुसुम योजना के तहत पंजीकरण का दावा करने वाले फर्जी वेबसाइटों के खिलाफ नई चेतावनी जारी

सतर्क रहें धोखाधड़ी से बचें!

नई दिल्ली। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा प्रधान मंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (प्रधानमंत्री-कुसुम) योजना लागू किया गया है जिसके तहत कृषि पंपों के सौरीकरण के लिए 60 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है। इस योजना को राज्य सरकार के विभागों द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है, जिसमें किसानों को केवल बाकी का 40 प्रतिशत ही विभाग को जमा करवाना होता है। इन विभागों का विवरण MNRE की वेबसाइट http://www.mnre.gov.in पर उपलब्ध है।

मंत्रालय के अनुसार योजना के शुभारंभ के बाद, यह देखा गया कि कुछ वेबसाइटों ने पीएम-कुसुम योजना के लिए पंजीकरण पोर्टल होने का दावा किया है। ऐसी वेबसाइटें आम जनता को धोखा दे रही हैं और फर्जी पंजीकरण पोर्टल के माध्यम से उनसे रुपये तथा जानकारी एकत्रित कर रही हैं। आम जनता को किसी भी नुकसान से बचने के लिए, MNRE ने इसके पहले दिनांक 18.03.2019, 03.06.2020, 10.07.2020 व पुनः दिनांक 25.10.2020 को विज्ञप्ति जारी करके लाभार्थियों और आम जनता को ऐसी किसी भी वेबसाइटों पर पंजीकरण शुल्क नहीं जमा करने और अपनी जानकारी साझा करने से सतर्क रहने की सलाह दी थी।

ऐसी वेबसाइटों की जानकारी मिलने पर MNRE द्वारा उनके विरुद्ध कार्यवाही की जाती है। हाल ही में देखा गया है कि कुछ नई वेबसाइटों (जिसमें http://www.kusumyojanaonline.in.net भी शामिल है) ने अवैध रूप से पीएम-कुसुम योजना के लिए पंजीकरण पोर्टल का दावा किया है। साथ ही WhatsApp व अन्य माध्यमों के द्वारा भी संभावित लाभार्थियों को भ्रमित कर धन हानि पहुँचाने की कोशिश की जा सकती है। अतः फिर से सभी संभावित लाभार्थियों और आम जनता को सलाह दी जाती है कि ऐसी वेबसाइटों पर रुपया या जानकारी जमा करने से बचें। साथ ही किसी भी असत्यापित अथवा संदेहास्पद लिंक जो पीएम-कुसुम योजना में पंजीयन का दवा करती हो पर क्लिक न करें।

समाचार पत्रों को भी डिजिटल या प्रिंट प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित करने से पहले सरकारी योजनाओं के लिए पंजीकरण पोर्टल होने का दावा करने वाली वेबसाइटों की प्रामाणिकता की जांच करने की सलाह दी जाती है।

MNRE अपनी किसी भी वेबसाइट के माध्यम से योजना के तहत लाभार्थियों को पंजीकृत नहीं करता है और इसलिए योजना के लिए MNRE की पंजीकरण वेबसाइट होने का दावा करने वाली कोई भी वेबसाइट भ्रामक और धोखाधड़ी है। किसी भी संदिग्ध धोखाधड़ी वाली वेबसाइट, यदि किसी के द्वारा देखी गई हो, तो उसे MNRE को तुरंत सूचित करने का कष्ट करें।

योजना में भागीदारी के लिए पात्रता और कार्यान्वयन प्रक्रिया से संबंधित जानकारी MNRE की वेबसाइट http://www.mnre.gov.in पर उपलब्ध है। इच्छुक लोग MNRE की वेबसाइट पर जा सकते हैं या टोल फ्री हेल्प लाइन नंबर 1800-180-3333 पर कॉल कर सकते हैं।


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धान खरीद में पिछले वर्ष की अपेक्षा 26.18 % की वृद्धि दर्ज

खरीफ विपणन सीजन 2020-21 के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का क्रियान्वयन

अकेले पंजाब का 202.77 लाख मीट्रिक टन (कुल खरीद का 39.51%) योगदान

23169.86 करोड़ रुपये मूल्य की 7918696 कपास की गांठें खरीदी, 1537034 किसान हुए लाभान्वित

नई दिल्ली: वर्तमान खरीफ विपणन सीजन (केएमएस) 2020-21 के दौरान, सरकार ने अपनी मौजूदा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) योजनाओं के अनुसार किसानों से एमएसपी पर खरीफ 2020-21 फसलों की खरीद जारी रखी है, जैसा कि पिछले सत्रों में किया गया था।

खरीफ 2020-21 के लिए धान की खरीद पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, उत्तराखंड, तमिलनाडु, चंडीगढ़, जम्मू और कश्मीर, केरल, गुजरात, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों/ केंद्र-शासित प्रदेशों में सुचारु रूप से चल रही है। पिछले वर्ष के 406.70 लाख मीट्रिक टन की तुलना में इस वर्ष (05.01.2021तक) 513.19 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीद की जा चुकी है, जिसमें पिछले वर्ष की अवधि की तुलना में 26.18% की वृद्धि दर्ज की गई। 513.19 लाख मीट्रिक टन की कुल खरीद में से अकेले पंजाब ने 202.77 लाख मीट्रिक टन का योगदान दिया है, जो कुल खरीद का 39.51% है। वर्तमान में जारी केएमएस खरीद संचालन के तहत 96891.46 करोड़ रुपये मूल्य के धान की खरीद की गयी है और इससे लगभग 66.48 लाख किसान लाभान्वित हुए हैं।

इसके अलावा, राज्यों से प्रस्ताव के आधार पर खरीफ विपणन सीजन 2020 के लिए तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तेलंगाना, गुजरात, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, ओडिशा, राजस्थान और आंध्र प्रदेश राज्यों से मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत 51.66 लाख मीट्रिक टन दलहन और तिलहन की खरीद के लिए मंजूरी दी गई थी। इसके अलावा, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल राज्यों के लिए कोपरा (बारहमासी फसल) की 1.23 लाख मीट्रिक टन की खरीद को भी मंजूरी दी गई। पीएसएस के तहत अन्य राज्य/केन्द्र शासित प्रदेशों से खरीद के प्रस्तावों की प्राप्ति पर दलहन, तिलहन और कोपरा के लिए भी मंजूरी दी जाएगी ताकि अधिसूचित फसल अवधि के दौरान बाजार दर एमएसपी से कम होने की स्थिति में वर्ष 2020-21 के लिए अधिसूचित एमएसपी के आधार पर इन फसलों के एफएक्यू ग्रेड की खरीद, राज्य की ओर से नामित खरीद एजेंसियों के माध्यम से केंद्रीय नोडल एजेंसियों द्वारा संबंधित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में सीधे पंजीकृत किसानों से की जा सके।

05.01.2021 तक सरकार ने अपनी नोडल एजेंसियों के माध्यम से 1466.64 करोड़ रुपये की एमएसपी मूल्य वाली मूंग, उड़द, मूंगफली की फली और सोयाबीन की 274149.62 मीट्रिक टन की खरीद की है, जिससे तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा और राजस्थान के 146765 किसान लाभान्वित हुए हैं।

इसी तरह, 05.01.2021 तक 52.40 करोड़ रुपये के एमएसपी मूल्य पर 5089 मीट्रिक टन कोपरा (बारहमासी फसल) की खरीद की गई है, जिससे कर्नाटक और तमिलनाडु के 3961 किसान लाभान्वित हुए हैं जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान 293.34 मीट्रिक टन कोपरा खरीदा गया था। कोपरा और उड़द के संदर्भ में, अधिकांश प्रमुख उत्पादक राज्यों में दरें एमएसपी से अधिक हैं। संबंधित राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश की सरकारें खरीफ की फसल दलहन और तिलहन के संबंध में आवक के आधार पर संबंधित राज्यों द्वारा तय की गई तारीख से खरीद शुरू करने के लिए आवश्यक व्यवस्था कर रही है।

पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और कर्नाटक राज्यों में एमएसपी के तहत बीज कपास (कपास) की खरीद प्रक्रिया सुचारु रूप से चल रही है। 5 जनवरी, 2021 तक 7918696 कपास की गांठें खरीदी गईं, जिनका मूल्य 23169.86 करोड़ रुपये हैं, जिससे 1537034 किसान लाभान्वित हुए हैं।


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मेघालय में पूर्वोत्तर का पहला अदरक प्रसंस्करण प्लांट होगा पुनर्जीवित

मेघालय में पूर्वोत्तर का पहला अदरक प्रसंस्करण प्लांट होगा पुनर्जीवित
नई दिल्ली (धारा न्यूज़): मेघालय के जिला री भोई में पूर्वोत्तर के पहले विशेषीकृत अदरक प्रसंस्करण प्लांट को पुनर्जीवित किया जा रहा है और 2021 की शुरुआत में इसके शुरू होने की उम्मीद है।

यह जानकारी केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय डॉ. जितेंद्र सिंह ने मंत्रालय के अधीन कार्य कर रहे पीएसयू उत्तर पूर्वी क्षेत्रीय कृषि विपणन निगम के कामकाज की समीक्षा के बाद दी।

प्रधानमंत्री कार्यलय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे मंत्रालयों के भी राज्यमंत्री डॉ. सिंह ने कहा कि पूर्वोत्तर भारत का यह एकमात्र अदरक प्रसंस्करण संयंत्र साल 2004 के आसपास स्थापित किया गया था, लेकिन लंबे समय से यह बंद पड़ा था। भारत सरकार के उपक्रम उत्तर पूर्वी क्षेत्रीय कृषि विपणन निगम ने अब इसे पुनर्जीवित करने की जिम्मेदारी ले ली है और सार्वजनिक-निजी साझेदारी (पीपीपी मोड) के तहत इस बंद प्लांट के संचालन के लिए कदम उठाए हैं।

तैयार होंगे अदरक के विभिन्न उत्पाद

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि एक्सपोर्ट प्रमोशन इंडस्ट्रियल पार्क (ईपीआईपी), राजा भागन, ब्यरनीहाट स्थित यह प्लांट न केवल अदरक को प्रोसेस करेगा, बल्कि वैक्स्ड अदरक, अदरक पेस्ट, अदरक पाउडर, अदरक फ्लेक्स, अदरक ऑयल आदि जैसे उत्पादों को भी तैयार करने में मदद करेगा। डॉ. सिंह ने कहा कि बीते कुछ वक्त से कोरोना महामारी के चलते अदरक की उपयोगिता काफी बढ़ गई है। ये इस वायरस के खिलाफ प्रतिरक्षा बढाने के लिए बेहद जरूरी औषधि है, जिसका जिक्र प्रधानमंत्री ने भी हाल ही में किया था।

“वोकल फॉर लोकल” को पूरा करेगा प्लांट

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस प्लांट से तैयार किए जा रहे अदरक उत्पाद न सिर्फ घरेलू खपत के लिए उपलब्ध होंगे, बल्कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के “वोकल फॉर लोकल” के नारे को भी पूरा करते हुए एक व्यापक मांग को ये प्लांट पूरा करेगा। सरकारी और निजी साझेदारी के मॉडल पर चल रहे इस प्लांट के संचालन और रखरखाव के लिए ऑपरेटर को निविदा प्रक्रिया के माध्यम से चुना गया था और संयंत्र को स्थापित करने और पुनर्जीवित करने पर काम चल रहा है। उत्तर पूर्वी क्षेत्रीय कृषि विपणन निगम के प्रबंध निदेशक, मनोज कुमार दास द्वारा प्रदान की गई संक्षिप्त जानकारी से पता चला है कि भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में हर साल लगभग 450,000 मीट्रिक टन उच्च-गुणवत्ता वाली अदरक का उत्पादन होता है, लेकिन प्रसंस्करण और कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं की कमी के कारण इसे कम कीमत पर बेचा जाता है। मेघालय में यह प्लांट अदरक उत्पादकों को अति आवश्यक सुविधा प्रदान देगा और वे अपनी क्षमताओं का उपयोग करने में सक्षम होंगे और साथ ही साथ प्राकृतिक संसाधनों का भी बेहतर उपयोग करेंगे।

इसके अलावा केंद्रीय मंत्री को पूर्वोत्तर में 100 नए खुदरा केंद्र स्थापित करने और गुवाहटी समेत कई बड़े शहरों में फल बिक्री केंद्र स्थापित करने की जानकारी से अवगत कराया गया। इनमें से भी ज्यादातर सरकारी-निजी साझेदारी के मॉडल पर काम करेंगे। उत्तर पूर्वी क्षेत्रीय कृषि विपणन निगम ने अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ विपणन परिसरों को विकसित करने की जिम्मेदारी भी निभाई है।

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अटल जयंती पर 9 करोड़ किसानों के खाते में पहुंचेंगे ₹

9 करोड़ किसानों के खाते में 2 दिन बाद सरकार डालेगी पैसे

नई दिल्ली। देश के करोड़ों किसानों के खाते में 25 दिसंबर को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 7वीं किस्त आएगी। कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली में हो रहे प्रदर्शन के बीच पीएम नरेंद्र मोदी 25 दिसंबर यानी शुक्रवार को पीएम किसान योजना की 7वीं किस्त किसानों के खाते में ट्रांसफर करेंगे। इस दौरान 6 अलग-अलग राज्यों के किसानों के साथ पीएम मोदी की बातचीत भी होगी। कुल 9 करोड़ से अधिक लाभार्थी किसान परिवारों के खाते में 2-2 हजार रुपए आएंगे। फिलहाल, PM-KISAN के तहत किसानों के खातों में जो पैसे भेजे जाने हैं, उसके लिए अब सिर्फ 2 दिन बाकी हैं। इस बार 25 दिसंबर को पैसे ट्रांसफर किए जाएंगे, इसी दिन पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती भी है।

पीएम किसान योजना के तहत, देश भर के सभी पंजीकृत किसानों को हर चार महीने में 2,000 रुपये की तीन समान किस्तों में 6,000 रुपये प्रति वर्ष की आय सहायता प्रदान की जाती है। पहली किस्त 1 दिसंबर से 31 मार्च के बीच आती है। दूसरी किस्त 1 अप्रैल से 31 जुलाई के बीच और तीसरी किस्त 1 अगस्त से 30 नवंबर के बीच में किसानों के खातों में ट्रांसफर कर दी जाती है। इस बार 25 दिसंबर को, प्रधानमंत्री दिसंबर और मार्च के बीच की तिमाही के लिए चालू वित्त वर्ष की अंतिम किस्त जमा करेंगे।

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खरीफ विपणन सीजन 2020-21 के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का क्रियान्वयन

धान की खरीद में पिछले वर्ष की तुलना में 23.22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज

77608.01 करोड़ के MSP मूल्य के साथ KMS खरीद प्रक्रिया से लगभग 48.28 लाख किसान हुए लाभान्वित

नई दिल्ली। वर्तमान खरीफ विपणन सीजन (केएमएस) 2020-21 के दौरान, सरकार ने अपनी मौजूदा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) योजनाओं के अनुसार किसानों से एमएसपी पर खरीफ 2020-21 फसलों की खरीद जारी रखी है। खरीफ 2020-21 के लिए धान की खरीद, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, उत्तराखंड, तमिलनाडु, चंडीगढ़, जम्मू एवं कश्मीर, केरल, गुजरात, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और झारखंड जैसे राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों में सुचारु रूप से चल रही है। पिछले वर्ष के 333.59 लाख मीट्रिक टन की तुलना में इस वर्ष 18 दिसंबर 2020 तक 411.05 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीद की जा चुकी है और इस प्रकार पिछले वर्ष के मुकाबले धान की खरीद में 23.22 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। कुल 411.05 लाख मीट्रिक टन की खरीद में से अकेले पंजाब ने इस वर्ष 30 नवंबर 2020 को खरीद सीजन के समाप्त होने तक 202.77 लाख मीट्रिक टन की खरीद की जो कि देश में कुल खरीद का 49.33 प्रतिशत है। कुल 77608.01 करोड़ रुपये के एमएसपी मूल्य के साथ वर्तमान में जारी केएमएस खरीद प्रक्रिया से लगभग 48.28 लाख किसान अभी तक लाभान्वित हो चुके हैं। इसके अलावा, राज्यों से प्रस्ताव के आधार पर खरीफ विपणन सीजन 2020 के लिए तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तेलंगाना, गुजरात, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान और आंध्र प्रदेश राज्यों से मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत 51.00 लाख मीट्रिक टन दलहन और तिलहन की खरीद के लिए मंजूरी दी गई थी।

इसके अलावा, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल राज्यों के लिए कोपरा (बारहमासी फसल) की 1.23 लाख मीट्रिक टन की खरीद को भी मंजूरी दी गई। पीएसएस के तहत अन्य राज्य/केन्द्र शासित प्रदेशों से खरीद के प्रस्तावों की प्राप्ति पर दलहन, तिलहन और कोपरा के लिए भी मंजूरी दी जाएगी ताकि अधिसूचित फसल अवधि के दौरान बाजार दर एमएसपी से कम होने की स्थिति में वर्ष 2020-21 के लिए अधिसूचित एमएसपी के आधार पर इन फसलों के एफएक्यू ग्रेड की खरीद, राज्य की ओर से नामित खरीद एजेंसियों के माध्यम से केंद्रीय नोडल एजेंसियों द्वारा संबंधित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में सीधे पंजीकृत किसानों से की जा सके।

18 दिसंबर 2020 तक सरकार ने अपनी नोडल एजेंसियों के माध्यम से 1027.76 करोड़ रुपये की एमएसपी मूल्य वाली मूंग, उड़द, मूंगफली की फली और सोयाबीन की 191669.08 मीट्रिक टन की खरीद की है जिससे तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा और राजस्थान के 1,05,987 किसान लाभान्वित हुए हैं। इसी तरह, 18 दिसंबर 2020 तक 52.40 करोड़ रुपये के एमएसपी मूल्य पर 5089 मीट्रिक टन कोपरा (बारहमासी फसल) की खरीद की गई है, जिससे कर्नाटक और तमिलनाडु के 3,961 किसान लाभान्वित हुए हैं जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान 293.34 मीट्रिक टन कोपरा खरीदा गया था। कोपरा और उड़द के संदर्भ में, अधिकांश प्रमुख उत्पादक राज्यों में दरें एमएसपी से अधिक हैं। संबंधित राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश की सरकारें खरीफ की फसल दलहन और तिलहन के संबंध में आवक के आधार पर संबंधित राज्यों द्वारा तय की गई तारीख से खरीद शुरू करने के लिए आवश्यक व्यवस्था कर रही है। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और कर्नाटक राज्यों में एमएसपी के तहत बीज कपास (कपास) की खरीद प्रक्रिया सुचारु रूप से चल रही है। 18 दिसंबर 2020 तक 5761122 कपास की गांठें खरीदी गईं जिनका मूल्य 16,799.87 करोड़ रुपये हैं जिससे 11,20,868 किसान लाभान्वित हुए हैं।

देश भर के राज्यों में कृषि अधिनियमों का किया गया स्वागत-नरेंद्र सिंह तोमर

उत्तर प्रदेश की भारतीय किसान यूनियन (किसान) ने कृषि अधिनियमों का किया स्वागत

सरकार वास्तविक किसान संगठनों के साथ निरंतर संवाद के लिए तैयार

केन्द्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात करते भारतीय किसान यूनियन (किसान) का प्रतिनिधिमंडल

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश से भारतीय किसान यूनियन (किसान) के सदस्यों ने कृषि भवन में केन्द्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात की। यूनियन के नेताओं ने कृषि अधिनियमों का स्वागत किया और कहा कि अधिनियम किसानों के लिए फायदेमंद हैं। हालांकि, उन्होंने केन्द्रीय मंत्री को कृषि अधिनियमों और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के संबंध में सुझावों का एक ज्ञापन भी सौंपा।

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कृषि अधिनियमों के समर्थन में आगे आने के लिए यूनियन के नेताओं का आभार प्रकट किया। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि कृषि अधिनियमों का देश के विभिन्न राज्यों में स्वागत किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार वास्तविक किसान संगठनों के साथ संवाद जारी रखने के लिए उत्सुक है और खुले दिमाग के साथ समाधान खोजने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि एमएसपी एक प्रशासनिक फैसला है और वह उसी तरह से जारी रहेगा।

भारतीय किसान यूनियन (किसान) के नेताओं ने सुझाव दिया कि किसानों को विवाद की स्थिति में दीवानी न्यायालय जाने का विकल्प दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह सुझाव भी दिया कि छोटे कस्बों और गांवों के किसानों के हितों की रक्षा के लिए पंचायत प्रमुख को मंडी प्रमुख के समान महत्व दिया जाना चाहिए। आवश्यक वस्तु अधिनियम के मामले में, उन्हें सुझाव दिया गया है कि इससे जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगनी चाहिए।

यूनियन के नेताओं ने यह सुझाव भी दिया कि उत्तर प्रदेश में सिंचाई के लिए बिजली की दरें घटाई जानी चाहिए और ज्यादा घंटों के लिए बिजली उपलब्ध करानी चाहिए। उन्होंने यह प्रस्ताव भी दिया कि फसलों के मानकों पर खरीद केन्द्रों पर ही फैसला होना चाहिए, जिससे किसानों को अपनी उपज की बिक्री में कोई समस्या न आए।

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UP: फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर मुख्य सचिव नाराज

फसल अवशेष जलाने की घटनाओं में वृद्धि पर UP के मुख्य सचिव नाराज

जिलाधिकारी ने दियेे दायित्वों का निर्वहन न करने में अक्षम क्षेत्रीय कार्मिकों तथा अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही के निर्देश

बिजनौर। शासन के निर्देश एवं उच्चतम न्यायालय और हरित न्यायाधिकरण के आदेश के क्रम में जिले में फसल अवशेष तथा गन्ने की पत्तियों आदि को जलाने की घटनाओं को शत-प्रतिशत रोकने के निर्देश दिए गए हैं।

जिलाधिकारी रमाकांत पांडे ने बताया कि जिला गन्ना अधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि इस प्रकार की घटनाओं को पूरी तरह रोकने के लिए कृषकों को क्षेत्रीय कार्मिकों एवं गन्ना मिल के माध्यम से जागरूक करने तथा फसल अवशेष प्रबंधन की विभिन्न विधाओं का प्रयोग करते हुए फसल अवशेष का इन सीटू प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने बताया कि इन्हीं निर्देशों को दृष्टिगत रखते हुए प्रदेश सरकार द्वारा गन्ना समितियों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कृषि यंत्र भी उपलब्ध कराए गए, जिससे फसल अवशेष को खेत में आसानी से मिलाया जा सके तथा इसके अलावा वेस्ट डी कंपोजर आदि की मदद से फसल अवशेष को खेत में ही सड़ा कर उसकी खाद बनाई जा सके ताकि खेत की उर्वरा शक्ति को भी बढ़ाया जा सके। उन्होंने कहा कि इसके अलावा गन्ने की पत्तियों को निराश्रित गौवंश आश्रय स्थलों को भी दान करने के निर्देश दिए गए थे। उन्होंने बताया कि गन्ने की फसल की कटाई शुरू होने के बाद जिले में फसल अवशेष जलाने की घटनाओं में वृद्धि हुई है, जिस पर अपर मुख्य सचिव कृषि एवं मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन द्वारा गहरा रोष व्यक्त करते हुए संबंधित क्षेत्रीय कार्मिक/अधिकारी के विरुद्ध कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं।


DCO को सचेत करने के साथ ही कड़े निर्देश

श्री पांडे ने संबंध में जिला गन्ना अधिकारी को सचेत करते हुए कहा कि फसल अवशेष जलाने की घटनाओं की निगरानी एवं समीक्षा प्रदेश के उच्च अधिकारियों सहित उच्चतम न्यायालय एवं हरित न्यायाधिकरण द्वारा की जा रही है, जिसके दृष्टिगत उनके द्वारा इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कृषकों को जागरूक करने हेतु जन जागरण अभियान चलाने, क्षेत्र एक गन्ना मिल गन्ना समिति के कार्मिकों अधिकारियों के द्वारा प्रतिदिन सघन निगरानी एवं विजिलेंट रहने तथा घटित घटना होने पर संबंधित कृषक के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे, परंतु घटनाओं में अप्रत्याशित वृद्धि होने से यह स्पष्ट होता है कि आपके स्तर से इस संबंध में अभी तक कोई कार्यवाही अमल में नहीं लाई गई है, जो अत्यंत ही खेदजनक है। उन्होंने उक्त क्रम में जिला गन्ना अधिकारी को कड़ाई के साथ निर्देशित किया कि फसल अवशेष प्रबंधन के लिए सुझाए गए सभी उपायों का प्रयोग कराना सुनिश्चित कराएं तथा फसल अवशेष में इन सीटू मैनेजमेंट के लिए उपलब्ध कराए गए कृषि यंत्रों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित कराते हुए फसल अवशेष तथा गन्ने की पत्तियों को जलाने की घटनाओं को शत प्रतिशत रोकना सुनिश्चित करें। उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि फसल अवशेष जलाए जाने की घटना होने पर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध प्रतिकूल कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। उन्होंने जिला गन्ना अधिकारी को निर्देश दिए कि फसल अवशेष प्रबंधन के लिए गन्ना समितियों को उपलब्ध कराए गए कृषि यंत्रों का प्रयोग कर किए गए फसल अवशेष प्रबंधन की गन्ना समिति वार सूचना अलग से उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए और किसी भी प्रकार की इस में लापरवाही अथवा शिथिलता न बरती जाए।

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