राकेश टिकैत को हिरासत में लेने पर कार्यकर्ताओं ने किया थाने का घेराव

बिजनौर। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत की दिल्ली गाजीपुर बॉर्डर पर गिरफ्तारी के विरोध में बिजनौर में भी उबाल है। इसी क्रम में चौधरी गजेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व स्योहारा थाने का घेराव किया गया।

गौरतलब है कि भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता किसी प्रोग्राम में शामिल होने के लिए दिल्ली जा रहे थे। गाजीपुर बॉर्डर पर दिल्ली पुलिस ने किसान नेता राकेश टिकैत को हिरासत में लेकर थाने में बैठाया लिया, जिससे देशभर के किसानों में उबाल आ गया। सभी जनपदों में भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने थाने का घेराव किया।

ब्लॉक स्योहारा में चौधरी गजेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ता इकट्ठे हुए और थाने का घेराव किया। दिल्ली पुलिस 10 मिनट राकेश टिकैत को थाने में नहीं बैठा पाई। उन्हें दिल्ली प्रोग्राम में जाने दिया गया, जिसके बाद स्योहारा थाने का घेराव कर रहे भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ता घेराव स्थगित कर अपने अपने घर चले गए। इस अवसर पर अरविंद चौहान, हरिओम सिंह यादव, गज राम सिंह, सत्यवीर सिंह, अवनीश कुमार, महेश यादव, विकास कुमार, इस्लामुद्दीन, अजीम खान, दिनेश कुमार आदि मौजूद रहे।

13 अगस्त की महापंचायत के लिए भाकियू ने झोंकी ताकत

13 अगस्त की महापंचायत के लिए भाकियू ने तैयार की रणनीति। बर्दाश्त नहीं किया जायेगा किसान, मजदूर व युवाओं का शोषण। महापंचायत की सफलता के लिए पंचायतवर जिम्मेदारियां बांटी

बिजनौर। भाकियू पदाधिकारियों की आपात पंचायत में  किसान, मजदूरों और युवाओं पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ 13 अगस्त को किसान महापंचायत की सफलता के लिए रणनीति बनाई गई। इसके लिए न्याय पंचायतवर जिम्मेदारियां बांटी गई।
जिला मुख्यालय स्थित राज मिलन बैंक्वेट हॉल में शनिवार को भाकियू जिला अध्यक्ष चौधरी कुलदीप सिंह ने ब्लॉक, तहसील व जिले के मंडल से राष्ट्रीय स्तर के सभी पदाधिकारियों की आपात पंचायत बुलाई। इस दौरान 13 अगस्त को बिजनौर में होने वाली भाकियू की किसान महापंचायत की सफलता के लिए रणनीति तैयार की गई। संगठन में न्याय पंचायत अध्यक्ष से ग्राम पंचायत अध्यक्ष तक को सक्रिय रूप से महापंचायत में किसानों को आने के लिए किसान मजदूर के साथ देश के नौजवान के साथ किए अनेक तरीके से किए जा रहे शोषण के तरीकों को समझाने की ज़िम्मेदारी सौपी गई।

जिले के सभी वरिष्ठ भाकियू पदाधिकारियों की पंचायत को संबोधित करते हुए मंडल अध्यक्ष बाबूराम तोमर ने कहा कि भाकियू के राष्ट्रीय आह्वान के तहत देश के युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाली सरकार की अग्निपथ योजना के विरोध में 7 अगस्त से 14 अगस्त तक अग्निपथ विरोध सप्ताह के रूप में मनाया जा रहा हैं, जिसमे युवाओं के लिए सेना में भर्ती की पुरानी प्रक्रिया को सुचारू करने व पुलिस के जवानों के साथ देश की सेवा व रक्षा करने में लगे सभी जवानों को पेंशन दिए जाने के पक्ष में आंदोलन चलाया जायेगा। बाबूराम तोमर ने कहा कि देश में किसानों की बिना राय मशविरे के तीन काले कृषि कानून तथा नया बिजली संशोधन बिल 2022 लाया जा रहा है। अगर किसान हित के विपरीत बिल आया तो टिकैत साहब के नेतृत्व में इस बिल के खिलाफ भी आंदोलन चलाया जायेगा। इसके साथ जिले के किसानों का अभी तक गन्ना भुगतान न कराने, मुख्यमंत्री की घोषणा के 6 साल बाद भी नजीबाबाद मिल की क्षमता वृद्धि न किए जाने और जिले में बन रही नूरपुर मिल में अड़चन लगा रहे लोगों के खिलाफ़ लड़ाई लड़ने के लिए 13 अगस्त को बिजनौर कलक्ट्रेट में किसान महापंचायत कर सरकार व प्रशासन को मुंह तोड़ जवाब दिया जायेगा।
जिला अध्यक्ष चौधरी कुलदीप सिंह ने कहा कि बिजनौर जिले के किसान हजारों ट्रैक्टरों के साथ महापंचायत में पहुंचकर सरकार को किसान की ताकत दिखाएंगे। किसान महापंचायत में मुख्य अतिथि के रूप में भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत आयेंगे और किसान और मजदूर के साथ युवाओं के भविष्य के लिए रणनीति तैयार करेंगे।  उन्होंने कहा कि जिले में प्रशासन अगर गुंडे माफियाओं का राज चलाना चाहता हैं तो इसे भाकियू बर्दाश्त नहीं करेगी।

पूर्व डिप्टी एसपी एमपी सिंह की अध्यक्षता व वीरेंद्र सिंह के संचालन में आयोजित पंचायत में प्रदेश उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह, जिला संरक्षक मास्टर महेंद्र प्रधान, विजयपाल सिंह, युवा जिला अध्यक्ष सरदार वरिंदर सिंह बाठ, जितेंद्र पहलवान, विकास कुमार, वीर सिंह डबास, मदन राणा, बलजीत सिंह, अवनीश कुमार, वीरेश राणा, गजेंद्र टिकैत, महावीर सिंह आदि उपस्थित रहे।

तमाम बैरिकेटिंग पार कर किसानों ने घेर ही लिया कलक्ट्रेट

चौधरी दिगंबर सिंह का एलान, मांगें नहीं मानी तो अफसरों को चैन से नहीं बैठने देंगे।

बिजनौर। कलक्ट्रेट जाने की कोशिश कर रहे भाकियू कार्यकर्ताओं की पुलिस से तीखी नोकझोंक हो गई। पुलिस ने बेरिकेटिंग लगाकर किसानों को रोकने की कोशिश की। इसके बावजूद कलक्ट्रेट पहुंचे भाकियू कार्यकर्ताओं ने अपना दमखम दिखा ही डाला।

भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के युवा प्रदेश अध्यक्ष चौधरी दिगंबर सिंह ने चेतावनी दी है कि यदि  किसानों की मांगे नहीं मानी गई तो जिले के अंदर अफसरों को चैन से नहीं बैठने दिया जाएगा। किसानों की समस्याओं का समाधान न होने पर भाकियू ने मंगलवार दोपहर कलक्ट्रेट का घेराव किया। युवा प्रदेश अध्यक्ष चौधरी दिगंबर सिंह ने कहा कि जनपद की चीनी मिलें नहीं चाहती कि कोई नई मिल बने। इसी के चलते नूरपुर में प्रस्तावित चीनी मिल का विरोध किया जा रहा है। किसानों के 24:00 पर मीटर लगा दिए गए और अधिकारियों के आश्वासन के बावजूद मनमाना बिजली का बिल वसूला जा रहा है। विद्युत विभाग के अधिकारी किसानों के ट्रायल पर जाते हैं और वीडियो बनाकर किसानों को डराते और धमकाते हैं। नमामि गंगे अभियान की शुरुआत बिजनौर से की गई इसके बावजूद गंगा वे एक्सप्रेस मेरठ से निकाला जा रहा है और बिजनौर को इससे अछूता रखा जा रहा है। जब अभियानों की शुरुआत बिजनौर से की जाती है तो जिन योजनाओं से जनपद वासियों को लाभ मिले उन योजनाओं को भी बिजनौर से अछूता नहीं रखना चाहिए। बिलाई शुगर मिल के बारे में हर किसी को पता है लेकिन तीन अन्य और भी मिले हैं, जो किसानों का भुगतान नहीं कर रही हैं।  किसानों का लगातार शोषण किया जा रहा है और बार-बार फरियाद लगाने के बावजूद अधिकारी सुनने को तैयार नहीं है। सभा में कई अन्य वक्ताओं ने भी किसानों की समस्याओं को उठाया और समस्याओं का समाधान ना करने पर अफसरों को चेतावनी दी। इस मौके पर धर्मेंद्र मलिक, दीपक कुमार, राकेश प्रधान, जितेंद्र सिंह, अंकित, तेजवीर, धर्मेंद्र,  राजवीर सिंह, मांगेराम त्यागी, राजेश सिंह मलिक संरक्षक, अरविंद राजपूत, वीर सिंह, तेजवीर सिंह, अंकित ग्रेवाल, कुलबीर सिंह, समर पाल सिंह, सरदार इकबाल सिंह
आदि मौजूद रहे।

इससे पहले कलक्ट्रेट जाने की कोशिश कर रहे भाकियू कार्यकर्ताओं की पुलिस से तीखी नोकझोंक हो गई। पुलिस ने बेरिकेटिंग लगाकर किसानों को पुलिस ने रोकने की कोशिश की। इसके बावजूद किसानों ने कलेक्ट्रेट पहुंच कर ही दम लिया।

बताया गया है कि सीओ सिटी अनिल चौधरी ने विद्युत विभाग के अधिकारियों से इस संबंध में वार्ता की। अधीक्षण अभियंता विद्युत निरंजन कुमार सिंह ने दावा किया कि नलकूपों की बिलिंग अनमीटर्ड निजी नलकूप संयोजनों के लिए निर्धारित दर पर ही की जायेगी, बिल द्वारा जमा की गई धनराशि समायोजित की जायेगी।

सम्मान बचाओ महापंचायत के लिए अड़े किसान

हर हाल में होगी किसान सम्मान बचाओ महापंचायत

पुलिस प्रशासन पर किसानों को डराने का आरोप 

बिजनौर। जिले में बिजली और पुलिस व राजस्व अधिकारियों द्वारा किसानों के साथ किए जा रहे उत्पीड़न व तानाशाही के साथ किसान के साथ की गई मारपीट के खिलाफ भाकियू 28 जून को ग्राम जीतपुरा खरख में किसान सम्मान बचाओ महापंचायत का बिगुल फूंक दिया हैं तो वहीं  पुलिस प्रशासन ने जिले के किसानों पर भाकियू का साथ छोड़ने का दवाब बनाकर पीड़ित किसान से ही पंचायत में होने संबंधित लिखित में ले लिया फिर भी भाकियू ने निश्चित समय व निश्चित स्थान पर ही किसान सम्मान बचाओ महापंचायत करने की घोषणा करते हुए मैदान में मंच और टेंट लगवाने के लिए जायजा लिया।

बनाई महापंचायत की रणनीति-
रविवार को भाकियू ने किसानों पर महापंचायत न कराने के लिए पीड़ित किसानों पर पुलिस के बढ़ रहे उत्पीड़न को देखते हुए गन्ना समिति में प्रातः 11 बजे पूरे जिले से भाकियू की जिला, मंडल, व प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के सभी पदाधिकारियों ने महापंचायत की रणनीति बनाई उसके बाद सभी भाकियू पदाधिकारियों ने महापंचायत स्थल पर पहुंचकर मैदान का जायजा लिया और ग्राम जीतपुरा खरख में ग्रामवासियों की मीटिंग ली, ग्रामवासियों ने भाकियू को महापंचायत में पूर्ण समर्थन देने का ऐलान किया। भाकियू जिला अध्यक्ष चौधरी कुलदीप सिंह ने कहा कि बाबा टिकैत की भाकियू ने पंचायत करने के लिए कभी परमिशन नहीं ली है  और न ही कभी परमिशन ली जाएगी।

इमरजेंसी लगा रही पुलिस: कुलदीप सिंह –
जिला अध्यक्ष चौधरी कुलदीप सिंह ने जिले के किसानों से महापंचायत में पहुंचने का आह्वान करते हुए कहा कि पुलिस जिले में इमरजेंसी लगाकर किसानों की पंचायत को रोकने की बात करते हुए मुकदमे लिखने को डरा रही है। पुलिस को इसका जवाब जिले का किसान 28 जून को ग्राम जीतपुरा खरख में होने वाली किसान सम्मान बचाओ महापंचायत में हजारों की संख्या में किसान आयेगा तो पुलिस सभी पर मुकदमा लिख लेगी। उन्होंने कहा कि किसानों के मसीहा भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत की पंचायत को रोकने की कोई ताकत नहीं बनी है।

पहले ही दे दी थी चेतावनी-
ज्ञात हो कि ग्राम जीतपुरा खरख में विद्युत कर्मियों के आधी रात किसानों के घरों में घुसने को लेके हुई मारपीट में पुलिस के 3 किसानों को एक तरफा कार्यवाही कर जेल भेजने से भाकियू पिछले एक सप्ताह से आंदोलनरत हैं और भाकियू के इस संबंध में 28 जून को किसान सम्मान बचाओ महापंचायत करने की घोषणा करने से मामला तूल पकड़ गया है। रही सही कसर ग्राम हंसना जट के एक किसान को एक लाख का कर्ज़ जमा न करने पर अमीन द्वारा कर्जदार किसान की भतीजी की शादी के समारोह में ही मारपीट कर बेइज्जती करने से क्षुब्ध किसान की जहर खाकर मौत हो जाने व तहसीलदार सदर द्वारा एक किसान को अपने ऑफिस में बुलाकर की गई मारपीट की सूचना मिली तो भाकियू पदाधिकारियों ने कलक्ट्रेट में प्रदर्शन शुरू कर दिया था।  डीएम व एसपी की मौजूदगी में किसानों से हुए समझौते पर भाकियू ने 3 दिन मे किसानों की सभी समस्याओं के समाधान करने व पुलिस द्वारा झूठे मुकदमो की जांच न होने पर 28 जून को होने वाली किसान सम्मान बचाओ महापंचायत में भाकियू सुप्रीमो की अध्यक्षता में कठोर निर्णय लेने की चेतावनी देकर शाम धरना खत्म किया था। भाकियू जिला अध्यक्ष चौधरी कुलदीप सिंह ने जिला प्रशासन पर किसानों को डराने का आरोप लगाते हुए कहा कि किसानों के सम्मान से कोई समझौता नहीं होगा। महापंचायत निश्चित टाइम और निश्चित स्थान पर ही होगी और प्रशासन अपनी नाकामी छिपाने के लिए भाकियू की महापंचायत को कमजोर करना चाहता हैं जिसका खुद जवाब देने के लिए जिले का किसान तैयार बैठा है और भाकियू द्वारा जिले में 100 गाड़ियों पर माइक लगाकर प्रचार करने की पदाधिकारियों को जिमीदारी दी गई और 200 भाकियू कार्यकर्ताओं की महापंचायत के लिए मंच और टेंट लगवाने की जिम्मेदारी भी दी।
इस अवसर पर प्रदेश महासचिव ठाकुर रामौतार सिंह, प्रांतीय नेता बाबूराम तोमर, प्रदेश उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह, होशियार सिंह, डालचंद प्रधान, ब्लॉक अध्यक्ष मोहम्मदपुर देवमल डॉ विजय चौधरी, ब्लॉक महासचिव पंकज सहरावत, तहसील अध्यक्ष कोमन सिंह, युवा तहसील अध्यक्ष सरदार मनप्रीत सिंह, जितेंद्र पहलवान, सतपाल चौधरी, छतर सिंह सिकेट्री, दिनेश कुमार, नरदेव सिंह, धर्मेंद्र कुमार, मुनिदेव सिंह, रविशेखर तोमर, नीटू मौर्य आदि ने महापंचायत की सफलता के लिए जिले के किसानों का एक दुसरे से खुद प्रचार करके आने का आह्वान किया।

आकांक्षा चौहान के नेतृत्व में सौ ट्रैक्टरों का काफिला बिजनौर रवाना

आकांक्षा चौहान ने कराया ताकत का अहसास। उनके नेतृत्व में सौ ट्रैक्टरों का काफिला बिजनौर रवाना।


नूरपुर/बिजनौर। सोमवार को बिजनौर में आयोजित भाजपा किसान रैली में ब्लॉक प्रमुख आकांक्षा चौहान ने सौ ट्रैक्टरों के काफिले के साथ रवाना होकर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया।


नूरपुर क्षेत्र पंचायत प्रमुख निर्विरोध चुने जाने के बाद भाजपा नेत्री आकांक्षा चौहान ने 24 नूरपुर विधान सभा सीट से ताल ठोक दी है। सोमवार को बिजनौर के प्रदर्शनी मैदान में प्रस्तावित भाजपा किसान रैली में आकांक्षा चौहान ने सौ ट्रैक्टरों के काफिले के साथ रवाना होकर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। उनका काफिला ब्लॉक कार्यालय से रवाना हुआ। सबसे बडी बात ये है कि आकांक्षा चौहान स्वयं ट्रैक्टर चलाकर बिजनौर रवाना हुई। काफिले में भाजपा किसान मोर्चा के जिला मंत्री सतवीर चौहान, मोरना प्रधान उमेश शेखावत, पूर्व प्रधान गौरव त्यागी, बब्लू चौधरी, दिग्विजय सिंह, अनुज चौधरी,रामपाल सिंह,शाहनवाज हुसैन सहित सैकडो कार्यकर्ता रवाना हुए।

कृषि कानून: जीता कोई भी हो, हारा तो किसान ही है!

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के तीनों कृषि कानून वापिस लेने की घोषणा पर आंदोलनरत किसान नेता इसे अपनी जीत मान रहे हैं। कुछ कह रहे हैं कि इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार की छवि खराब हुई है। भाजपाई खुश हैं कि इससे उन्हें किसानों का विरोध नहीं झेलना होगा। इस राजनैतिक शतरंज की बाजी में चाहे किसी दल को लाभ मिले या न मिले पर सबसे बड़ा नुकसान किसान का हुआ है। अब कोई भी राजनैतिक दल, कोई भी सरकार किसान हित के कानून बनाते डरेगी। किसान हित की बात करते कई बार सोचेगी। इस लड़ाई में जीता कोई भी हो पर वास्तव में हारा तो किसान है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कानून वापस लेने की घोषणा से कांग्रेस सहित देश का विपक्ष परेशान है कि उसके हाथ से एक बड़ा मुद्दा छिन गया। तीनों कृषि कानून काफी समय से लंबित थे। भाजपा से पूर्ववर्ती सरकार इन पर चिंतन और मनन कर रही थीं। उनकी इच्छा शक्ति नहीं थी। इसलिए वह लागू नहीं कर पाई।भाजपा ने यह सोचकर ये कृषि कानून बनाए कि इनका किसानों के साथ उन्हें लाभ मिलेगा, पर हुआ उल्टा। उन्हें ये कानून वापिस लेने पड़े। बकौल कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर; हम आंदोलनकारी किसान नेताओं को अपनी बात सही से नहीं समझा पाए। एक बात और क्या तीनों कृषि कानून में सब गलत थाॽ क्या कुछ भी किसान हित में नही थाॽ क्या कोई सरकार ऐसा कर सकती हैॽ इस पर सोचना किसी ने गंवारा नहीं किया।

किसी ने कहा है कि एक झूठ को इतनी बार बोलो, इस तरह बोलो कि वह सच लगने लगे; सच बन जाए। इस मामले में ऐसा ही हुआ भी। किसानों के लाभ के लिए बने कृषि कानून लगातार बोले जा रहे झूठ के कारण किसान विरोधी लगने लगे।

कानून लागू करने के बाद किसान आंदोलन को देखते हुए सरकार ने बार− बार किसान नेताओं से कहा कि वे कानूनों की कमियां बताए, सरकार संशोधन करेगी। सुधार करेगी। किसान नेता ने कभी कमी नहीं बताई। उनकी एक ही रट रही कि सरकार तीनों कानून वापिस ले।

आंदोलनकारी बजिद थे कि सरकार कानून वापिस ले। आंदोलनकारियों के बीच कुछ ऐसे लोग आ गए कि वह इस मामले को निपटने देना नहीं चाहते थे। एक तरह से हालात यह बनते जा रहे थे कि सरकार बल प्रयोग करे। गोली चलाए। किसान नेता चाहते थे कि आंदोलन वापिस हो या सरकार लाठी −गोली चलाए। सरकार इससे बचना चाहती थी। जो हालत 26 जनवरी पर किसान प्रदर्शन के दौरान थे, वैसे ही अब थे । इसीलिए ये सब टलता रहा। आ रही सूचनाओं , सूचना तंत्र की मिल रही खबरों के आधार पर सरकार पीछे हट गई। उसने किसान कानून वापिस लेने की घोषणा कर दी।

प्रधानमंत्री मोदी तथा भाजपा के नेतृत्व को लगा कि इससे मामला टल जाएगा। …लेकिन ऐसा होने वाला लगता नहीं। विपक्ष और आंदोलनकारी नेता इसे चुनाव तक गरमाए रखना चाहतें हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती ने मांग की है कि सरकार किसान आंदोलन में मरने वाले सात सौ किसानों के परिवार को मुआवजा और परिवार के एक – एक सदस्य को सरकारी नौकरी दे। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने आंदोलन के दौरान शहीद हुए प्रत्येक किसानों के परिजनों को 25-25 लाख रुपए का मुआवजा देने की । यही बात कई अन्य विपक्षी नेता कह रहे हैं।

किसान नेता राकेश टिकैत और किसान संयुक्त मोर्चा के सदस्य शिवकुमार शर्मा कक्काजी का कहना है कि कानून वापिस होने के बाद ही वह आंदोलन खत्म करेंगे। वे किसान की उपज का न्यूनतम मूल्य निर्धारित करने के लिए कानून बनाने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं। राकेश टिकैत ने मांग की है कि सरकार एमएसपी पर उनसे बात करे। इस पर बात होगी तो और कुछ मामला उठ जाएगा। किसान नेता एसपी सिंह का कहना है कि सरकार ने बहुत देर से फैसला लिया। हमारे 700 से अधिक किसान आंदोलन की भेंट चढ़ चुके हैं। उनकी शहादत हुई है। हमने बहुत कुछ खोया है। इसलिए सरकार के लिए तीनों कृषि कानूनों को वापस लेना भर काफी नहीं है। उसे इस आंदोलन में अपनी जान गंवाने वाले किसानों को मुआवजा देने की घोषणा भी करनी होगी। कुछ बिजली बिल माफ करने की मांग कर रहे हैं। हालत यह हो गई है कि जितने मुंह हैं, उससे ज्यादा नई मांग हो रही हैं। किसान नेताओं की इस प्रतिक्रिया से लग रहा है कि अभी बहुत आसानी से सबकुछ पटरी पर आने वाला नहीं है। कांग्रेस और विपक्ष भी अभी इस मुद़दे को खत्म नहीं होने देगा। एक बात और पश्चिम उत्तर प्रदेश का किसान विशेषकर जाटों का बड़ा मुद्दा अभी नहीं उठा। पिछले चुलाव में जाट आरक्षण की मांग उठी थी। तब भी कहा गया था कि भाजपा जाटों को आरक्षण दे, नहीं तो उसका बाँयकाट किया जाएगा। अब फिर चुनाव आने को है, जाट समाज इसे फिर गरमाएगा। अभी वह किसान आंदोलन की वजह से चुप है।

इस पूरे आंदोलन की खास बात ये है कि किसान नेता सक्रिय हैं, विपक्ष सक्रिय है, सक्रिय नहीं है तो किसान। खमोश है तो किसान। उसकी ये खामोशी, उसकी ये चुप्पी उसे अब लंबे समय तक नुकसान पहुंचाएगी। उसके हित की; कल्याण की योजनाएं बनाते आने वाली सरकारें डरेंगी।

अशोक मधुप (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

कृषि कानूनों को वापस लेकर मोदी ने फेंका ट्रंप कार्ड

नई दिल्ली (एजेंसी)। कृषि कानूनों में बदलाव को लेकर करीब एक दर्जन बार केंद्र सरकार और किसान नेताओं के बीच बातचीत हुई थी। किसान नेताओं के कानूनों की पूरी तरह वापसी पर ही अड़ जाने के बाद केंद्र सरकार ने बातचीत ही बंद कर दी और यह आंदोलन एक साल तक जारी रहा। अब प्रकाश पर्व के मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी ने अचानक देश के नाम संबोधन में तीन नए कृषि कानूनों की वापसी का ऐलान कर दिया। भले ही इसका श्रेय किसान आंदोलन के नेता और विपक्ष लेने की कोशिश कर रहा है, लेकिन असर में पीएम नरेंद्र मोदी ने खुद ही सरप्राइज देकर उनसे यह मौका छीन लिया है। राकेश टिकैत समेत कई नेता अकसर यह बात दोहरा रहे थे कि बातचीत एक ही शर्त होगी कि तीनों कानूनों को वापस लिया जाए। 

एकतरफा ऐलान कर किसान नेताओं को श्रेय लेने से रोका 

यदि सरकार बातचीत के बाद किसान नेताओं के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ऐसा कोई ऐलान करती तो उन्हें भी इसका श्रेय मिलता और फिर चुनावी राजनीति में भी इसका असर दिख सकता था। ऐसा कुछ करने की बजाय पीएम नरेंद्र मोदी ने कानूनों की वापसी का एकतरफा ऐलान कर दिया और देशवासियों से क्षमा भी मांगी। सभी किसानों से घरों की वापसी की अपील करते हुए पीएम मोदी ने संकेत दिया कि वह नेताओं से नहीं बल्कि सीधे किसानों से ही संवाद करना चाहते हैं। इसके साथ ही उन्होंने अब गेंद किसान नेताओं के पाले में ही डाल दी है।

घर वापसी कब? सवाल पर घिर सकते हैं राकेश टिकैत

कृषि कानूनों की वापसी तक दिल्ली की सीमाओं पर डटे रहने के किसान नेताओं के ऐलान को लेकर अब सवाल पूछा जा रहा कि आंदोलन खत्म कब होगा। राकेश टिकैत ने अब एमएसपी और बिजली कानून जैसे मुद्दों की बात की है। इसके अलावा कानूनों के संसद से वापस लिए जाने तक डटे रहने की बात कही है। पीएम नरेंद्र मोदी के कानून वापसी के ऐलान और किसानों से घर वापसी की अपील के बाद भी टिकैत यह रवैया किसान नेताओं के बीच मतभेद पैदा कर सकता है। खुद ही तीन कानूनों की वापसी तक डटे रहने की बात करने वाले टिकैत से अब यह सवाल पूछा जा सकता है कि आखिर वे क्यों नहीं लौटना चाह रहे? पीएम मोदी के इस दांव से राकेश टिकैत समेत तमाम किसान नेता चुनाव में भाजपा विरोध के नारे के साथ नहीं जा सकेंगे।

खुलकर भाजपा का विरोध अब नहीं कर पाएंगे किसान नेता

हरियाणा, पंजाब और पश्चिम यूपी के कई इलाकों में किसान आंदोलनकारी खुले तौर पर भाजपा के खिलाफ उतर आए थे और नेताओं को बंधक तक बनाए जाने की घटनाएं सामने आई थीं। अब किसान नेता भाजपा के खिलाफ यूं खुलकर प्रचार नहीं कर सकेंगे और विपक्षी दलों के हाथ से भी बड़ा मुद्दा छिन गया है। चुनाव से ठीक पहले यह ऐलान कर पीएम नरेंद्र मोदी ने भाजपा की समावेशी और सब की सुनने वाली पार्टी की छवि बनाने की कोशिश की है। ऐसे में विपक्ष के लिए अब इस मुद्दे पर हवा बांधना आसान नहीं होगा और दूसरा कोई अहम मुद्दा सरकार के खिलाफ फिलहाल नजर नहीं आता है।

अब किसान आंदोलन में लालकिले पर हंगामा करने वालों की मदद!

अब किसान आंदोलन में लालकिले पर हंगामा करने वालों की मदद। मदद के लिए दिया जाने वाला धन किसी मुख्यमंत्री की निजी संपत्ति नहीं होती। पंजाब सरकार अपराधी को मदद करती है तो प्रदेश की सारी जनता को दो−दो लाख क्यों नहीं देतीॽ

लगता है वोट की राजनीति देश को बर्बाद करके छोड़ेगी। इसने तो अपराधी और कानून के मानने वालों में फर्क करना ही बंद कर दिया। अपराधियों और कुपात्र की मदद के नाम पर सरकारी धन के दुरूपयोग को रोकने के लिए देश की दूसरी संस्थाओं को आगे आना होगा।

ये क्या हो रहा हैॽ मदद के लिए दिया जाने वाला धन किसी मुख्यमंत्री की निजी संपत्ति नहीं होती। राजकीय कोष होता है। प्रदेश और देश के जिम्मेदार नागरिकों द्वारा दिए गए टैक्स से संग्रह हुआ धन है, इसको इस तरह से लुटाने की अधिकार किसी को नहीं दिया जा सकता। मुख्यमंत्री या किसी मंत्री के निर्णय को उचित −अनुचित बताने वाली कार्य पालिका है। संबधित अधिकारी हैं। उन्हें इसे रोकना चाहिए। क्योंकि जिम्मेदारी उनकी बनती है, किसी मंत्री या मुख्यमंत्री की नहीं। केंद्र द्वारा प्रदेश में राज्यपाल इसीलिए बैठाए जातें हैं कि वह सरकार के गलत और सही निर्णय पर विचार करें। गलत निर्णय पर रोक लगाए। इसके ऊपर संसद और राष्ट्रपति हैं। न्यायपालिका गलत और सही निर्णय को परीक्षण करने के लिए हैं।

पंजाब की चरण सिंह चन्नी सरकार ने निर्णय लिया है कि किसान आंदोलन के दौरान 26 जनवरी को लालकिले पर हुए उपद्रव में गिरफ्तार 83 लोगों को वह दो−दो लाख रुपए की मदद करेगी। केंद्र द्वारा संसद में पारित तीनों कृषि कानून को उसने लागू न करने का भी निर्णय लिया है। पंजाब सरकार इस उपद्रव में मरने वाले दो लोगों को पहले ही पांच −पांच लाख रुपया दे चुकी है।

मुझे याद आता है कि उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव जब पहली बार मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने मुख्यमंत्री के विवेकाधीन कोष से प्रदेश के पत्रकारों को उपकृत किया था। मायावती मुख्यमंत्री बनी तो उन्होंने इस कोष से अपनी पार्टी कार्यकर्ताओं को ही पैसा बांटा। इसे लेकर शोर भी मचा था, पर सारे नेता एक ही थैली के चट्टे −बट्टे हैं। इसलिए ये मामला आगे नहीं बढ़ा। न कार्यपालिका ने जिम्मेदारी निभाई। न अन्य संस्थाओं ने।

लखीमपुर खीरी में किसानों के प्रदर्शन के दौरान हुई मौत में उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रत्येक मरने वाले के परिवार को 45−45 लाख रुपया दिया। फिर इनको पंजाब और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने कैसे 50−50 लाख रुपया अपने प्रदेश के कोष से दियाॽ पंजाब और छत्तीसगढ़ के प्रदेश का धन दूसरे प्रदेश में लुटाने का अधिकार इन प्रदेश के मुख्यमंत्रियों को किसने दियाॽ स्वतः संज्ञान लेने वाली न्याय पालिका को इस पर विचार करना चाहिए। देखना चाहिए कि क्या कोई सरकार किसी अपराधी की इस तरह मदद कर सकती हैॽ आज किसान प्रदर्शन के नाम पर उपद्रव करने वालों की मदद की गई है, कल चोर, डकैत, देशद्रोही और आतंकवादियों की मदद की जाएगी!

उधर पंजाब सरकार अपराधी को मदद करती है तो प्रदेश की सारी जनता को दो−दो लाख क्यों नहीं देतीॽ पंजाब समेत पांच प्रदेश में चुनाव होने वाले हैं। इन प्रदेश की जनता को इन मुख्यमंत्री से पूछना चाहिए कि अपराधी की, सरकारी खजाने से मदद क्यों की गईॽ मदद करनी है तो अपनी जेब से करो। अपने निजी पैसे से करो। अपराधी की मदद की है तो प्रदेश के प्रत्येक व्यक्ति, आम नागरिक को इनसे दुगनी राशि दो। नहीं देते तो इनका बहिष्कार किया जाना चाहिए।इन गलत निर्णय का विरोध करने के लिए प्रदेश और जिम्मदार देशवासियों को आगे आना होगा। किसी को तो पहल करनी पड़ेगी ही।

अशोक मधुप (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

विकास कार्य के लिए आयुष चौहान को मुख्यमंत्री ने किया आश्वस्त

लखनऊ। मुरादाबाद मंडल के नूरपुर विधानसभा क्षेत्र से युवा भाजपा नेता आयुष चौहान न सिर्फ गांव-गांव पहुंच कर जन समस्याओं का निस्तारण कर रहे हैं, बल्कि प्रदेश स्तर पर भी सक्रिय हैं। इसी क्रम में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट कर विधान सभा क्षेत्र नूरपुर के लिए महत्वपूर्ण विकास कार्यों संबंधी मांग पत्र सौंपा।

विधानसभा नूरपुर क्षेत्र के युवा भाजपा नेता आयुष चौहान ने राजधानी पहुंच कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके आवास पर भेंट की। उन्होंने विधानसभा नूरपुर के महत्वपूर्ण विकास कार्यों संबंधी मांग पत्र सौंपा। मुख्यमंत्री द्वारा शीघ्र ही विकास कार्यों को पूर्ण कराने के लिए आश्वस्त किया गया।
आयुष चौहान ने मुख्यमंत्री से जनपद बिजनौर में एक सरकारी विश्वविद्यालय की स्थापना व युवा खिलाड़ियों के लिए एक बड़ा स्टेडियम बनवाने की माँग की। श्री योगी ने इस संबंध में उन्हें पूर्णतः आश्वस्त किया।

गन्ना ब्याज हुंकार रैली से सरकार पर बनेगा दबाव: सरदार वीएम सिंह

लोहा गरम है, किसान चोट कर दे। बढ़े हुए 25 रुपए वापस ले ले सरकार। डीजल आदि हर चीज का दाम पांच साल पहले जैसा कर दे।

बिजनौर। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सरदार वीएम सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 27 अक्तूबर तक ब्याज सहित गन्ना भुगतान के निर्देश दिए हैं। सरकार पर कोर्ट का दबाव है। मिल मालिकों से एक बार ब्याज ले लिया तो फिर कभी किसान को भुगतान के लिए धरना नहीं देना होगा।

अमरोहा में आयोजित गन्ना ब्याज हुंकार रैली में जाने से पहले बिजनौर पहुंचे वीएम सिंह ने गन्ना समिति में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि किसान को लागत का डेढ़ गुना वादा करने वाली सरकार अब गन्ने में चार साल बाद केवल 25 रुपए बढ़ा रही है। सरकार ये बढ़ी रकम वापस ले ले और डीजल आदि हर चीज का दाम पांच साल पहले जैसा कर दे। गन्ना दाम कम से कम 450 रुपए प्रति क्विंटल होना चाहिए था।

उन्होंने कहा कि 25 साल हम लड़े। पिछली सरकार ने ब्याज माफ कर दिया। लोहा गरम है, किसान चोट कर दे। चुनाव आ गए हैं, योगी जी को पता चल जाएगा। ब्याज मिल जाए तो हर एकड़ पर किसान के घर मे 25-25 हजार रुपए ब्याज आ जाएगा, उसके त्योहार अच्छे मन जाएंगे। कई मिल ग्रुप ऐसे भी हैं जो किसानों को विलंब भुगतान का ब्याज देने के नाम पर नुकसान दिखा रहे थे और अब कई कई चीनी मिल खोल चुके हैं। उन्होंने कहा कि भुगतान न मिलने पर किसान को गन्ना समिति को ब्याज देना पड़ता है तो किसान को भी सरकार से ब्याज लेने का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने ब्याज सहित भुगतान देने को कहा है। सरकार पर कोर्ट का दबाव है।

लखीमपुर खीरी प्रकरण में राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि गृह राज्यमंत्री अजय शर्मा के गलत बयान की वजह से किसान भड़के और ये हादसा हुआ। मंत्री पर एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। उनके साथ वेस्ट यूपी महासचिव कैलाश लांबा, जिलाध्यक्ष विनोद कुमार आदि रहे।

अभूतपूर्व रहा किसानों का चक्का जाम

बिजनौर। कृषि कानून, किसानों की समस्याओं को लेकर भारतीय किसान यूनियन ने जनपद में करीब 33 स्थानों पर चक्का जाम किया। इस दौरान किसानों ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया।

भारतीय किसान यूनियन की ओर से 27 सितंबर को भारत बंद के आह्वान के तहत जनपद बिजनौर में करीब 33 स्थानों पर चक्का जाम किया गया। इस दौरान उन्होंने एंबुलेंस, अंतिम संस्कार के वाहन व स्कूली वाहनों को जाने दिया। किसानों के द्वारा किए गए चक्का जाम से पूरे जिले भर में वाहनों की लंबी-लंबी कतारें सड़कों पर दिखाई दी। किसानों ने बिजनौर के बैराज मार्ग पर कुलदीप सिंह, चांदपुर धनौरा मार्ग बागढपुर में रोहताश सिंह, जलीलपुर चौराहा पर हुकुम सिंह, चांदपुर बास्टा मार्ग पर ग्राम कौशल्या में महिपाल सिंह, स्याऊ छाछरी लदुपुरा में कल्याण सिंह, बिजनौर चांदपुर मार्ग पर रौनिया में अशोक कुमार, चांदपुर थाना चौराहे पर अशोक कुमार, बालकिशन पुर चौराहे पर उदयवीर सिंह, गोलबाग चौराहा पर नितेन्द्र सिंह प्रधान, दारानगर गँज में डालचंद प्रधान, नगीना बढापुर मार्ग पर धर्मवीर सिंह, नहटौर नूरपुर मार्ग पर बालापुर में देवेन्द्र सिंह, नहटौर धामपुर मार्ग पर गागन नदी पर विजयपाल सिह, फुलसदा खाकम में सदीप कुमार, नहटौर चादपुर मार्ग पर सदरूद्दीन नगर में सजीव कुमार, बिजनौर कोतवाली मार्ग पर पीली चौकी में मौन्टी कुमार, मण्डावर में पीतमद्वार पर विजयपाल सिंह, बिजनौर चंदक मार्ग पर दौलतपुर में डा. विजयपाल सिंह, स्योहारा थाना चौक पर गजेन्द्र सिंह, अफजलगढ़ चौराहा पर दर्शनपाल सिंह फौजी, धामपुर नहटौर मार्ग पर गजुपुरा में दुष्यंत राणा, धामपुर नूरपुर मार्ग पर नीदडू में राजेन्द्र सिंह, पुरैनी चौराहा पर डा योगेन्द्र सिंह, अकबराबाद चौराहा पर बलजीत सिंह, कोतवाली नहटौर मार्ग पर साहबपुरा में मुनेश कुमार, बिजनौर कोतवाली मार्ग पर बान के पुल पर समरपाल सिंह, बिजनौर किरतपुर मार्ग पर हुसैनपुर में भोपाल राठी, मण्डावली चौराहा पर अवनीश चौहान, नागलसोती चौराहा पर राजवीर सिंह काकरान, नजीबाबाद बूंदकी मार्ग पर लालपुर में महेन्द्र सिंह, नूरपुर शहीद चौक पर लक्ष्मीनारायण शर्मा, फीना नौगांव मार्ग पर मुराहट में मलूक, किरतपुर में नगीना चौराहे पर अरविन्द राजपूत, नगीना रायपुर मार्ग तिराहे पर वीरसिह डबास के नेतृत्व में किसानों ने चक्का जाम किया।

गंज। संयुक्त किसान मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने हल्दौर चौराहे पर जाम लगाया, जिससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी-लंबी लाइनें लग गईं। भारत बंद का गंज में मिलाजुला असर देखने को मिला। धरना प्रदर्शन की अगुवाई शंकर सिंह रवि, शेखर तोमर, परविंदर सिंह उर्फ नीटू, सरदार बूटा सिंह, चौधरी दिनेश कुमार, लवली सिंह, हरि सिंह, कबीर सिंह, परम सिंह, जयराम सिंह, सरदार सरदार मलकीत सिंह, सरदार अजीत सिंह, सरदार लाडी सिंह, अमर सिंह, उपेंद्र कुमार, नरेंद्र उर्फ कलवा आदि ने की।

स्योहारा। थाना चौराहे पर भाकियू ब्लाक अध्यक्ष चौधरी गजेंद्र सिंह टिकैत की अगुवाई में चक्का जाम किया गया। इस दौरान थानाध्यक्ष आशीष कुमार तोमर के नेतृव में सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद रही। इस रास्ते से गुजरने वाले ट्रैफिक को भी डायवर्ट किया गया। इस मौके पर सेकड़ो किसानों की भारी भीड़ मौजूद रही।

रोड जाम कोई हल नहीं: नरेश प्रधान

कोतवाली देहात। बंद का असर ग्रामीण क्षेत्र में देखने को नहीं मिला। रोज की तरह ही सामान्य तौर पर दुकानें खुली रही। लोग सामान्य दिनों की तरह ही अपने दुकानें व प्रतिष्ठान खोले रहे। सड़कों पर भी लोगों की आवाजाही सामान्य दिनों की तरह ही दिखाई दी। भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने नेशनल हाईवे 74 पर अकबराबाद पेट्रोल पंप के सामने रोड जाम किया। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस रोड पर गश्त करती रही। भारतीय किसान यूनियन (भानु) के जिला अध्यक्ष चौधरी नरेश प्रधान का कहना है कि रोड जाम करना किसी समस्या का हल नहीं है। समस्या का हल निकालने के लिए दोनों पक्षों को आपस में बातचीत करनी चाहिए। रोड जाम करने से केवल जनता को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

अराजकता का शिकार हो गया बंद: रामनिवास यादव

लखनऊ। सोमवार को राष्ट्रीय अन्नदात यूनियन के अध्यक्ष रामनिवास यादव ने वक्तव्य जारी कर कहा कि किसान हितैषी कृषि बिलों के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा एवं विपक्ष की राजनैतिक पार्टियों द्वारा बुलाया गया भारत बंद पूरी तरह अराजकता का शिकार हो गया।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से संयुक्त किसान मोर्चा के नेता एवं विपक्षी पार्टी मिलकर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, झारखण्ड, केरल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में सड़क जाम करके आम जनता से अभद्रता कर रहे हैं वो पूरी तरह से गलत है। ये वही प्रदेश हैं जहां विपक्ष की सरकार है। इसी प्रकार बिहार में राष्ट्रीय जनता दल एवं वामपंथी संगठनों ने अराजकता फैलाई। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता एवं नेताओं ने उत्तर प्रदेश में भी दो तीन जगहों पर अराजक आंदोलन किये। जिस प्रकार पूरे देश में संयुक्त किसान मोर्चा कथित अंदोलन, विपक्ष के कुछ राजनैतिक दलों के साथ सांठ गांठ करके किसानों को मोहरा बनाकर कर रहे हैं। वह अपनी राजनैतिक रोटियां सेक रहे हैं। यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है एवं देश के किसानों को बदनाम करने की बहुत बड़ी साजिश है। अब यह कथित किसान आंदोलन संयुक्त किसान मोर्चा का न होकर विपक्ष की राजनैतिक पार्टियों का आंदोलन हो गया है। कथित किसान आंदोलन के नाम पर पूरे देश में अराजकता फैलाने का काम किया जा रहा है। इससे एक बात साफ़ होती जा रही है कि कथित अंदोलन की आड़ में राजनैतिक पार्टियां
अपना एजेंडा चलाने में सफल हो गयी हैं, जिसमें संयुक्त किसान मोर्चा सिर्फ मोहरा बना है। इस कथित किसान आंदोलन में वही सब शामिल हो रहे हैं, जिन्होंने जम्मू-कश्मीर में धारा 370 हटने, देश में CAA, NRC लागू करने पर अराजकता फैला कर देश की राजधानी दिल्ली को आग लगाकर, दंगा फैलाकर कई लोगो की जाने ले ली थी। आज वही संगठन कथित किसान आंदोलन में शामिल होकर अराजकता फैलाने का काम कर रहे हैं। यह बात साफ़ हो गई है कि किसान हितैषी कृषि बिल तो बहाना है, असली काम दंगे कराकर अराजकता फैलाना है। इनके इस अराजक कृत्य को राष्ट्रीय अन्नदात यूनियन कभी सफल नहीं होने देगी। इस कथित किसान आंदोलन को बेनकाब करके रहेगी।

आज रात 12 बजे तक Internet, SMS सेवा पर रहेगा प्रतिबंध

आज रात 12 बजे तक बंद रहेगा Internet, SMS सेवा पर भी रहेगा प्रतिबंध। करनाल में किसान आंदोलन जारी।

आज रात 12 बजे तक बंद रहेगा Internet, SMS सेवा पर भी रहेगा प्रतिबंध- जानिए वजह

करनाल (एजेंसी)। आईएएस अधिकारी आयुष सिन्हा के निलंबन और मृतक किसान के परिवार को 25 लाख रुपए मुआवजे की मांग को लेकर करनाल में किसानों का प्रदर्शन जारी है। किसानों को डटे देख कर प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए आज रात 12 बजे तक मोबाइल इंटरनेट और एसमएस सेवा पर बैन लगा दिया है। बुधवार को किसान नेताओं व जिला प्रशासन के बीच वार्ता विफल हो गई थी। किसानों ने करनाल लघु सचिवालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने का ऐलान कर दिया।

हरियाणा के गृह विभाग की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, करनाल में किसानों के आंदोलन के मद्देनजर हरियाणा सरकार ने “गलत सूचना के प्रसार को रोकने के लिए” जिले में मोबाइल इंटरनेट और एसएमएस सेवाओं को निलंबित कर दिया है। यह आदेश आज रात 11:59 बजे तक प्रभावी रहेगा।

Karnal Farmer Protest:  करनाल मिनी सचिवालय पर किसानों का धरना जारी, इंटरनेट और SMS सेवाएं आज भी बंद

अपनी मांगों के समर्थन में करनाल में आंदोलन कर रहे किसानों ने बुधवार को प्रशासन के साथ वार्ता विफल होने के बाद से सचिवालय के बाहर पक्का मोर्चा लगा दिया है। वहीं इसी बीच गुरुवार को भी करनाल में इंटरनेट सेवाएं ठप रहेंगी। अफवाहों को रोकने के लिए सरकार ने यह आदेश दिया है। बुधवार शाम को बैठक बेनतीजा रहने के बाद किसानों के अधिकतर बड़े नेता भी बेमियादी धरने का एलान कर दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर पहले से चल रहे धरनों की ओर कूच गए। करनाल में धरने की जिम्मेदारी पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उतर प्रदेश के किसानों को दी गई है।  

वहीं किसानों और सरकार का यह अड़ियल रवैया स्थानीय लोगों के लिए जरूर परेशानी का सबब बन गया है, क्योंकि लघु सचिवालय के बाहर किसानों ने तंबू गाड़ लिया है और इस ओर आने वाले तमाम रास्ते पहले ही प्रशासन ने सील कर रखे हैं। इस कारण आवाजाही खासी प्रभावित रही और लोग वैकल्पिक रास्तों पर भटकते नजर आए।

सरकार को झुकाने के लिए वोट की चोट जरूरी: टिकैत

मुजफ्फरनगर में किसानों की महापंचायत, 27 सितंबर को भारत बंद का ऐलान

मुजफ्फरनगर में किसानों की महापंचायत, 27 सितंबर को भारत बंद का ऐलान; टिकैत बोले- सरकार को झुकाने के लिए वोट की चोट जरूरी

लखनऊ (एजेंसी)। भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि अब “महापंचायत पूरे देश में होगी। वह तीन कृषि कानूनों के खिलाफ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के जीआईसी मैदान में किसान महापंचायत में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने कहा, “हमें देश बिकने से बचाना है। हमारी मांग रहेगी कि देश, किसान, व्यापार और युवा बचे।”

LIVE Kisan Mahapanchayat in Muzaffarnagar: Now India will be closed on September  27, not 25, Kisan Morcha announced

महापंचायत के मंच से लाखों की भीड़ के बीच राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार बात करने के लिए तैयार नहीं है, बात करनी बंद कर दी है। सिर्फ मिशन यूपी नहीं, देश बचाना है। हम सिर्फ किसानों के मुद्दे नहीं उठा रहे हैं, देश में जहां-जहां गलत हो रहा है, उन्हें सामने रख रहे हैं। देश में संस्थाएं बेची जा रही हैं। सरकारी कर्मचारियों की पेंशन खत्म कर दी गई। बड़े लोग पैसे लेकर भाग रहे हैं। बिजली को प्राइवेट किया जा रहा है। सरकार एलआईसी को बेच रही है। देश का संविधान खतरे में है, इसे बचाना है। टिकैत ने कहा कि सरकार को झुकाने के लिए वोट की चोट जरूरी है।

25 नहीं, 27 सितंबर को भारत बंद-
किसान मोर्चा ने ऐलान किया है कि अब 25 नहीं बल्कि 27 सितंबर को भारत बंद होगा। इस दौरान सबकुछ बंद रहेगा। पहले 25 को भारत बंद का आह्वान किया गया था। अब यूपी संयुक्त किसान मोर्चे का गठन होगा।

महापंचायत को लेकर सुरक्षा व्यवस्था सख्त- जीआईसी मैदान के मंच से लेकर पार्किंग तक की व्यवस्था एसकेएम और बीकेयू के वालंटियर के जिम्मे रही। पहचान के लिए वालंटियर्स को आईडी कार्ड दिए गए। वहीं पुलिसबल किसानों की जिले और शहर में सुरक्षित एंट्री और उनके सकुशल प्रस्थान तक पूरी व्यवस्था पर नजर रखे है।

किसान मोर्चा ने किया 25 सितंबर को भारत बंद का ऐलान, कहा- ईंट का जवाब पत्थर  से देंगे - kisan andolan protest preparations for bharat bandh on september  25 rakesh tikait ntc - AajTak

300 से ज्यादा सक्रिय संगठन शामिल-
उधर किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि यूपी पुलिस मुजफ्फरनगर की ओर जाने वाली बसों को रोक रही है। महापंचायत में देशभर के 300 से ज्यादा सक्रिय संगठन शामिल हुए हैं। महापंचायत के मंच पर कई बड़े किसान नेता मौजूद रहे। ये सभी वे नेता हैं जो पिछले 10 महीनों से किसान आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं।

किसान देश का गौरव: प्रियंका- किसानों की महापंचायत को लेकर यूपी कांग्रेस प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा ने ट्विट कर कहा, ‘किसान इस देश की आवाज हैं। किसान देश का गौरव हैं। किसानों की हुंकार के सामने किसी भी सत्ता का अहंकार नहीं चलता। खेती-किसानी को बचाने और अपनी मेहनत का हक मांगने की लड़ाई में पूरा देश किसानों के साथ है।’

खतौली विधायक विक्रम सिंह ने फिर दिया विवादित बयान

मुजफ्फरनगर (एकलव्य बाण समाचार)। खतौली विधायक विक्रम सिंह विवादित बयान देकर फिर से चर्चा में आ गए हैं। शनिवार को सफेदा रोड पर मान्या फार्म हाउस में एक अभिनंदन कार्यक्रम में उन्होंने खुले मंच से किसान आंदोलन पर बैठे लोगों को नकली किसान ठहरा दिया। ब्लाक प्रमुख संजो देवी ने ग्राम प्रधानों व बीडीसी सदस्यों के अभिनन्दन कार्यक्रम का आयोजन किया था। खतौली विधायक विक्रम सैनी कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे थे।

बताया गया है कि विधायक विक्रम सैनी ने कहा कि बॉर्डर पर अगर असली किसान होते तो गत 26 जनवरी को लालकिले पर उपद्रव नहीं करते। इस दौरान उन्होंने उग्र शब्दों का भी प्रयोग किया। लखनऊ में धरने को लेकर विधायक का कहना है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं और उनके राज्य में अगर किसी ने फन उठाने का प्रयास किया तो उसको कुचल दिया गया। कार्यक्रम का संचालन ग्राम सचिव विजय शेखर ने किया। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सुधीर सैनी, गौतम सिंह, यशपाल प्रधान,अनिल पुण्डीर आदि उपस्थित रहे।

हक के लिए चीनी मिल पर दहाड़े किसान

समस्याओं को लेकर गरजे किसानों ने जिलाधिकारी के नाम सौंपा ज्ञापन।
तहसीलदार को सौंपे ज्ञापन में गन्ना मूल्य भुगतान समेत कई समस्याएं उठाई।

बिजनौर। भारतीय किसान यूनियन ने समस्याओं को लेकर किसान सहकारी चीनी मिल स्नेह रोड परिसर में पंचायत कर किसानों की विभिन्न समस्याओं को उठाया। किसानों ने जिलाधिकारी के नाम संबोधित ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा।
मंगलवार को भारतीय किसान यूनियन ने समस्याओं को लेकर किसान सहकारी चीनी मिल स्नेह रोड नजीबाबाद परिसर में पंचायत कर सिंचाई के लिए पानी छोडऩे, अनियमितताओं की जांच कराने व सभी चीनी मिलों का बकाया गन्ना भुगतान शीघ्र कराए जाने आदि की मांग उठायी। पंचायत में वक्ताओं ने कहा कि नहरों में सिंचाई के लिए समय पर पानी नहीं छोड़े जाने और अचानक गंगा में चार लाख क्यूसेक पानी छोडऩे से क्षेत्र के किसानों की फसलों को भारी नुकसान हुआ है। इसका मुआवजा दिलाया जाना चाहिए।

किसानों ने जिला पंचायत राज विभाग में चुनाव के दौरान विकास के नाम पर धन की अनियमितता किए जाने की बात कहते हुए मामले की जांच कराने की मांग उठायी। भाकियू की ओर से जनपद में सभी चीनी मिलों का बकाया भुगतान किसानों को शीघ्र कराया जाने की मांग को लेकर एक ज्ञापन जिलाधिकारी को संबोधित तहसीलदार राधेश्याम शर्मा को सौंपा । पंचायत की अध्यक्षता सरदार सरदूल सिंह एवं संचालन अवनीश कुमार ने किया। पंचायत में बलराम सिंह, ठाकुर गजेंद्र सिंह, जिला अध्यक्ष कुलदीप सिंह, महेंद्र सिंह, इकबाल सिंह, मदन चौहान, नरदेव सिंह, दिनेश, वीर सिंह डबास, हुकुम सिंह, प्रमोद, महेंद्र सिंह, विजेंद्र, प्रमोद शर्मा, सुनील प्रधान, राकेश प्रधान आदि मौजूद रहे।

किसानों ने मनाया काला दिवस, फूंके सरकार के पुतले 

बिजनौर। तीन कृषि कानूनों के विरोध में पिछले 6 माह से दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शन के चलते संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने जिले भर में काला दिवस मनाया और केंद्र सरकार का जगह-जगह पुतला फूंका।

काले कपड़े, हाथ में भी, घर के बाहर भी काले झंडे-भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने तीन कृषि कानूनों के विरोध में काला दिवस मनाते हुए नगीना तहसील क्षेत्र के ग्राम तेलीपुरा, शेखपुरा तुर्क, राजपुरा और गढ़ी, नियामतपुर सहित बढ़ापुर क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांव में काले झंडे लेकर, काले कपड़े पहन कर और घरों पर काले झंडे लगाकर कृषि कानूनों का विरोध किया। भारतीय किसान यूनियन युवा के जिला अध्यक्ष नितिन सिरोही ने बताया कि सभी किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने शांति पूर्वक काला दिवस मनाया क्योंकि आज बुद्ध पूर्णिमा है इसलिए हमें बुद्ध के आदर्शों का अनुसरण करना चाहिए। वह शांति के प्रतीक थे इसलिए सभी कार्यकर्ताओं ने अपने अपने गांव में काला दिवस मनाया। इस मौके पर यूनियन के कार्यकर्ता अपने अपने गांव में काला दिवस मनाते हुए केंद्र सरकार का पुतला भी फूंका।

हल्दौर क्षेत्र में भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश महासचिव ठाकुर रामौतार सिंह की अगुवाई में नगर के मोहल्ला तोल्हावाला में काले झंडे लेकर काला दिवस मनाया गया। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन को करीब छह माह पूरे हो गए हैं, लेकिन अभी तक केन्द्र सरकार ने किसान विरोधी तीनों कृषि कानूनो को वापस नहीं लिया है। इस अवसर पर नगर अध्यक्ष टीकम सिंह, इंदर सिंह, कृष्ण कुमार, पीताबंर सिंह, हुकुम सिंह, सोनू, करन सिंह, बब्लू, नाजिम, सागेन्द्र सिंह व विपिन कुमार आदि मौजूद रहे।

नजीबाबाद क्षेत्र में पुलिस की चांकचौबंद व्यवस्था के बावजूद किसानों ने नांगलसोती थाना क्षेत्र में खानपुर तिराहे पर एकत्रित होकर नारेबाजी करते हुए केन्द्र सरकार का पुतला फूंका। किसानों ने कहा कि किसान आंदोलन तीनों कृषि कानूनों को वापस लिए जाने पर ही समाप्त होगा। इस अवसर पर भारतीय किसान यूनियन के राजवीर सिंह, कुलवीर सिंह, भोपाल सिंह, राजीव कुमार, नीटू सिंह, गार्विन देव, मुकेश कुमार आदि मौजूद रहे।

Watch “बिजनौर:किसान आंदोलन के 6 माह पूरे होने पर किसानों ने घरों पर काला झंडा लगाया, प्रदर्शन कर पुतला फूंका” on YouTube। https://youtu.be/iY92ylyQjG8

राष्ट्रीय अन्नदाता यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राम निवास यादव ने गिनाए कृषि बिल के फ़ायदे

राष्ट्रीय अन्नदाता यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राम निवास यादव ने गिनाए कृषि बिल के फ़ायदे। गांव गांव जाकर किसानों को बता रहे हैं कृषि बिल के फायदे।
नए कृषि बिल से किसानों की आय दोगुनी होगी।

लखनऊ। राष्ट्रीय अन्नदाता यूनियन ने केन्द्र सरकार द्वारा लागू तीनों कृषि बिलों के समर्थन में लखनऊ की विधानसभा मलिहाबाद के ग्रामखंडसरा, गोपालपुर, गोड़वा बरौकी सहित दर्जनों गांवों में चौपाल लगाकर कृषि कानूनों बिलों के विषय में किसानों को समझा कर जागरूक किया।

बताते चलें कि राष्ट्रीय अन्नदाता यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामनिवास यादव ने केंद्र सरकार द्वारा लागू तीनों कृषि बिलों के फायदे की जानकारी गांव गांव जाकर किसान चौपाल के माध्यम से बता रहे हैं।

चौपाल को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अन्नदाता यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राम निवास यादव ने कहा कि अराजकतावादी तथाकथित किसान संगठन व उनके नेता किसानों के नाम पर कृषि बिलों के खिलाफ लगातार दुष्प्रचार कर देश में अराजकता फैलाने का काम कर रहे है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर किसानों के नाम पर दलालों ने जबरन कब्जा कर रखा है, जिससे देश का अन्नदाता बदनाम हो रहा है। किसानों के नाम पर राजनीति चमकाने वालों के खिलाफ देश का अन्नदाता एवं असली किसान उठ खड़ा हुआ है।

उन्होंने कृषि सुधार कानून बिलों से मिलने वाले फायदों से किसानों को अवगत कराया। राष्ट्रीय अध्यक्ष कहा कि मोदी सरकार ने इन तीनों कृषि सुधार कानून (बिलों) को खेत, खिलहान, किसान को केन्द्र बिन्दु मान कर लागू किया है। कुछ किसान संगठन के दलालों द्वारा कृषि बिल का विरोध कर किसानों को भ्रमित किया जा रहा है। दुर्भाग्य से देश के कुछ विपक्षी राजनेता और दल भी इस तथाकथित किसान आंदोलन की आड़ में देश के किसानों के खिलाफ षडयंत्र रचने का काम कर रहे है, जो भारी चिंता का विषय है। राष्ट्रीय अन्नदाता यूनियन इन नकली किसान संगठनों एवं इनके नेताओं के खिलाफ लगातार आंदोलन जारी रखेगी एवं इनके द्वारा किये जा रहे किसानों के खिलाफ षडयंत्र को बेनकाब करेगी। कार्यक्रम में मुख्य रूप से राजकुमार लोधी, मूलचंद यादव,भैया लाल यादव,बिजय शर्मा,रामकुमार शुक्ला सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।

कृषि कानून: गुस्साए किसान ने जोत डाली अपनी 10 बीघा फसल

कृषि कानूनों का विरोध: किसान ने अपनी १० बीघा फसल जोतकर की बर्बाद
विरोध में महिला किसान भी उतरीं, घर घर जाकर चला रहीं जागरुकता अभियान

बिजनौर। हल्दौर ब्लाक क्षेत्र के ग्राम कुण्डा तहारपुर में भारतीय किसान यूनियन के एक वरिष्ठ नेता चौ. पुष्पेंद्र पुत्र बृजपाल ने कृषि कानूनों के विरोध में अपनी दस बीघा खड़ी गेहूं और सरसों की मिश्रित फसल ट्रैक्टर और हैरो से जोतकर बर्बाद कर दी। उधर गांव की किसान महिलाओं ने भी तीनों कृषि विधेयक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। महिलाएं घर घर जाकर अन्य महिलाओं को कृषि कानूनों को वापस कराए जाने के विरोध में प्रदर्शन करने के लिए जागरूक करने में लगी हैं।

ब्लॉक हल्दौर क्षेत्र के ग्राम कुण्डा तहारपुर में रविवार सुबह करीब 11 बजे भारतीय किसान यूनियन के एक वरिष्ठ नेता भाकियू के जिला संगठन मंत्री चौधरी राजेंद्र सिंह फतेहउल्लाहपुर (पौटा) निवासी के नेतृत्व में कृषि कानून के विरोध में चौ. पुष्पेंद्र पुत्र बृजपाल ने अपने खेत में खड़ी दस बीघा गेहूं और सरसों की मिश्रित फसल को ट्रैक्टर और हैरो से जोत कर बर्बाद कर दिया। किसान का आरोप है कि सरकार अपने मनमाने तरीके से तीनों कृषि विधेयकों को किसानों के ऊपर थोपना चाहती है, जबकि किसान इन के पुरजोर विरोध में हैं। इस बार भी किसानों के गन्ने का मूल्य नहीं बढ़ाया गया। चीनी मिलों ने किसानों के गन्ने का समस्त बकाया भुगतान नहीं किया है। किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। खाद्यान्न के दलालों और बिचौलियों की जमकर मौज आ रही है। सरकार किसानों की समस्याओं को लगातार अनदेखा करने में लगी है। सरकार के तीनों विधेयक किसानों के कतई भी हित में नहीं है। ऐसे में मजबूर किसान के पास अपनी फसल बर्बाद करने के अलावा और कोई चारा नहीं है। उक्त किसान ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक सरकार किसान विरोधी बिलों को वापस नहीं लेती तब तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
मौके पर मौजूद अन्य किसानों ने भी तीनों कृषि बिलों के विरोध में समस्त किसानों के हित की लड़ाई लडऩे के लिए उक्त किसान का पूरी तरह साथ देने का आश्वासन दिया। मौके पर भाकियू के जिला संगठन मंत्री राजेंद्र चौधरी, हल्दौर ब्लॉक उपाध्यक्ष धर्मेंद्र चौधरी, पूर्व ग्राम प्रधान गजय चौधरी, समर पाल, तारा सिंह, मलखान, दिलावर प्रधान, राजपाल समेत अनेक किसान मौजूद रहे।

किसान महिलाओं ने भी खोला कृषि बिलों के खिलाफ मोर्चा
क्षेत्रीय किसान महिलाओं ने भी कृषि बिलों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। महिलाओं ने कृषि कानूनों को वापस कराए जाने को लेकर रविवार को गांव में घर-घर जाकर अन्य किसान महिलाओं को इसका विरोध प्रदर्शन करने के लिए जागरूक किया। ऐसी महिलाएं अपने पड़ोसी गांवों की अन्य महिलाओं को उनके घर घर जाकर कृषि कानूनों के विरोध के प्रति जागरूक करेंगी। उनका कहना है कि सरकार शायद महिला किसानों की ताकत से पूरी तरह वाकिफ नहीं है। उक्त महिलाओं का कहना है कि सरकार द्वारा जारी तीनों कृषि विधेयकों के विरोध में वे अन्य किसानों के साथ मिलकर समस्त किसानों के हित में आरपार की लड़ाई लडऩे के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

सौजन्य से-Kridha’s icecream parlour Neelkamal Road civil lines Bijnor

राजधानी लखनऊ में होने वाली है लख्खी किसान रैली

कृषि कानूनों के समर्थन में राजधानी लखनऊ में होगी लख्खी रैली। एक लाख किसान करेंगे तीनों कृषि कानूनों का समर्थन। किसान सम्मान एवं कृषि यंत्र पूजन कार्यक्रम सपन्न। ट्रैक्टर पर तिलक, अक्षत लगाकर पुष्प वर्षा। प्रगतिशील कृषकों का फटका पहनाकर तिलक लगाकर सम्मान।

लखनऊ। केन्द्र सरकार द्वारा लागू तीनों कृषि सुधार कानूनों (बिलों) के समर्थन में प्रदेश की राजधानी लखनऊ के ब्लाक गोसाईगंज के ग्राम लक्ष्मणपुर में किसान सम्मान एवं कृषि यंत्र पूजन कार्यक्रम का आयोजन शनिवार को किया गया। राष्ट्रीय अन्नदाता यूनियन के राष्ट्र व्यापी महासम्पर्क अभियान के अन्तर्गत सातवें दिन यह आयोजन हुआ।

कृषि यंत्र पूजन के अन्तर्गत राष्ट्रीय अन्नदाता यूनियन के पदाधिकारियों ने ट्रैक्टर पर तिलक, अक्षत लगाकर पुष्प वर्षा की। तत्पश्चात प्रगतिशील कृषकों का फटका पहनाकर तिलक लगाकर सम्मान किया। कार्यक्रम में उपस्थित अन्नदाता किसानों को संबोधित करते हुए यूनियन के अध्यक्ष राम निवास यादव ने कहा कि कृषि बिल से संबंधित किसानों के मन में योजना पूर्वक किसान विरोधी तत्वों ने तथाकथित किसान आन्दोलन की आड़ में भ्रांतियों के बीज बो दिये हैं। किसान को भ्रम में उल्झाकर किसानों के नाम पर राजनैतिक रोटियां सेकने का काम किया जा रहा है। राम निवास यादव ने कहा कि जल्द ही इस तथाकथित किसान आन्दोलन की आड़ में किये जा रहे भ्रामक दुष्प्रचार के खिलाफ तीनों कृषि कानूनों के समर्थन में राजधानी लखनऊ में लख्खी रैली आयोजित कर एक लाख किसानों को बुलाकर तीनों कृषि कानूनों का समर्थन किया जायेगा।

राष्ट्रीय अन्नदाता यूनियन के अध्यक्ष राम निवास यादव ने तीनो बिलों के समर्थन में बोलते हुए कहा कि यह तीनों बिल केवल कानून नहीं हैं, बल्कि यह अन्नदाता की वास्तिवक आजादी का प्रतीक हैं। किसी को भी किसान, खेत, खलिहान के हितकारी इन बिलों से खेलने की अनुमति नही दी जायेगी, किसानों के नाम पर राजनीति करने वालों के खिलाफ देश का अन्नादाता उठकर खड़ा हो गया है। फर्जी किसान नेता बेनकाब हो रहे हैं। दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ राजनीतिक दल जगह-जगह पर किसान रैलियों के नाम पर गन्दी राजनीति करने का काम कर रहे हैं।

कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय महामंत्री वीरेन्द्र कुमार रावत ने किया, क्षेत्र पंचायत सदस्य एवं वरिष्ठ किसान नेता जागेश्वर मौर्या, राम जियावन यादव, कार्यक्रम संयोजक एवं यूनियन के गोसाईगंज ब्लाक अध्यक्ष शिव कुमार यादव ने भी संबोधित किया। यूनियन के उपाध्यक्ष राज कुमार लोधी, मंत्री विमल यादव, ब्लाक प्रमुख गोसाईगंज डा0 नरेन्द्र रावत, यूनियन के मंत्री संतोष शर्मा, शिव कुमार रावत, मुराद अली, मातादीन रावत, ललित साहू सहित अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

कृषि बिल के समर्थन में जुलूस निकालेगी राष्ट्रीय अन्नदाता यूनियन

लखनऊ। राष्ट्रीय अन्नदाता यूनियन ने केन्द्र सरकार द्वारा लागू तीनों कृषि सुधार कानूनों (बिलों) का समर्थन करते हुए कृषि बिलों को यथावत रखने की मांग की है।

राजधानी लखनऊ के होटल चरण में आयोजित प्रेसवार्ता में राष्ट्रीय अन्नदाता यूनियन के नेताओं ने एक स्वर में कृषि कानूनों को लेकर भ्रामक विवाद की कड़े शब्दो में निंदा की एवं केन्द्र सरकार से तथाकथित किसान संगठनों एवं उनके नेताओं पर प्रतिबन्ध लगाने की मांग की। प्रेसवार्ता के दौरान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राम निवास यादव ने कहा कि तथाकथित किसान संगठन व उनके नेता किसानों के नाम पर कृषि बिलों के खिलाफ लगातार दुष्प्रचार कर देश में अराजकता फैलाने का काम कर रहे है, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर जबरन कब्जा कर, 26जनवरी गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रध्वज तिरंगे का अपमान कर, सुरक्षाबलों पर हिंसक हमले कर, चक्का जाम कर ये हिंसक अराजकतावादी किन किसानों का भला करना चाहते है, समझ से परे है। किसान के नाम पर राजनीति चमकाने वालों के खिलाफ देश का अन्नदाता उठ खड़ा हुआ है। कृषि सुधार कानूनों (बिलों) से मिलने वाले फायदों को लेकर देश का अन्नदाता उत्साहित है। अन्नदाता इन तीनों कृषि सुधार कानूनों (बिलों) की अपनी वास्तविक आजादी का प्रतीक मान रहा है। आजादी के 70वर्षों में पहली बार यदि केन्द्र की किसी सरकार ने खेत, खिलहान, किसान को केन्द्र बिन्दु मान कर योजनाएं बनाई है, तो केवल नरेन्द्र मोदी सरकार ने बनाई। दुर्भाग्य से देश के कुछ विपक्षी राजनेता और दल भी इस तथाकथित किसान आंदोलन के बहाने खोई राजनैतिक जमीन को तलाशने में लगे हैं और अराजकतावादियों के मनोबल को बढाने का काम कर रहे हैं। इस तथाकथित किसान आंदोलन की आड़ में भारत के खिलाफ देश के दुश्मनों द्वारा षडयंत्र रचे जा रहे हैं, जो भारी चिंता का विषय है। सच्चा किसान कभी इस प्रकार के राष्ट्रद्रोह को स्वीकार नहीं कर सकता। राष्ट्रीय अन्नदाता यूनियन इन नकली किसान संगठनों एवं इनके नेताओं के खिलाफ लगातार रचनात्मक आंदोलन जारी रखेगी।

प्रेसवार्ता में राष्ट्रीय अन्नदाता यूनियन द्वारा राट्रव्यापी पोस्टर अभियान का प्रारम्भ करने हेतु पोस्टर जारी किया गया। पोस्टर में केन्द्र सरकार से 5 बिन्दुओं को लेकर मांग की गयी है कि 1-संसद द्वारा पारित तीनों कृषि सुधार कानूनों (बिलों) को यथावत रखा जाए। 2-गणतंत्र दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर पर लगे राष्ट्रध्वज तिरंगे को अपमानित करने वालों की सम्पत्ति जब्त की जाए एवं सरकारी सम्पत्ति नष्ट करने से हुए नुकसान की भरपायी उक्त अराजकतावादियों से की जाए। साथ ही पुलिस एवं सुरक्षाबलों पर हमला करने वालों से घायल सुरक्षाबलों का चिकित्सा खर्च वसूल किया जाए। 3-अराजकतावादी तथाकथित किसान संगठनों पर प्रतिबंध लगा कर उनके नेताओं को जेल को भेजा जाए। 4-संसद द्वारा पारित कृषि सुधार कानूनों से कृषि और किसान को होने वाले क्रांतिकारी लाभों से परिचित कराने के लिए देश भर से प्राख्यात कृषि विशेषज्ञों को लेकर उनकी उच्च स्तरीय कमेटी बनाकर रिपोर्ट जारी करवायी जाए। 5-राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के विभिन्न बॉर्डर पर जबरन कब्जा जमाये बैठे तथाकथित किसान संगठनों एवं नेताओं से स्थान खाली करवाकर आवागमन सुचारू किया जाए।

कल राष्ट्रीय अन्नदाता यूनियन के नेता रोहित जायसवाल एवं आचार्य पुष्पेन्द्र के नेतृत्व में प्रयागराज के माघ मेला स्थित मछली बन्दर मठ में संतों का आशीर्वाद लेकर राष्ट्रीय अन्नदाता यूनियन एवं अखिल भारतीय संयुक्त धर्माचार्य मंच द्वारा कृषि बिल के समर्थन में जुलूस निकाल कर धन्यवाद प्रस्ताव प्रधानमंत्री को भेजा जायेगा।

प्रेसवार्ता में महामंत्री अवधेश प्रताप सिंह, वीरेन्द्र कुमार रावत, उपाध्यक्ष राज कुमार लोधी, बलीराम वर्मा, मोहम्मद खलील अहमद, अनिल जायसवाल, डा0 अनूप सिंह, मूलचन्द्र यादव, लवकुश यादव, अजीत सिंह यादव गाजीपुर, यशवंत यादव बाराबंकी, राम नरेश वर्मा सीतापुर, आलोक बाजपेयी हरदोई, विमल यादव उपस्थित रहे।

UP, उत्तराखंड, दिल्ली में नहीं होगा चक्का जाम!

राकेश टिकैत ने कहा, UP, उत्तराखंड और दिल्ली छोड़कर पूरे देश में होगा चक्का जाम

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड में कल चक्का जाम नहीं होगा! शनिवार को होने वाले चक्का जाम की तैयारियों के बीच किसान नेता राकेश टिकैत और बलबीर सिंह राजेवाल ने यह ऐलान किया है!

भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि ‘कल उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली को छोड़कर पूरे देश में चक्का जाम होगा। इन दोनों राज्यों में जिला मुख्यालय पर किसान कृषि कानूनों के विरोध में केवल ज्ञापन दिए जाएंगे। उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड में चक्का जाम टालने को लेकर राकेश टिकैत ने कहा कि इन दोनों जगहों को लोगों को स्टैंडबाय पर रखा गया है और उन्हें कभी भी दिल्ली बुलाया जा सकता है। इसलिए यूपी-उत्तराखंड के लोग अपने ट्रैक्टरों में तेल-पानी डालकर तैयार रहें। उन्होंने कहा कि अन्य सभी जगहों पर तय योजना के अनुसार शांतिपूर्ण ढंग से काम होगा।

उधर, किसान नेता दर्शनपाल सिंह ने कहा कि हम कल दिल्ली में चक्का जाम नहीं कर रहे हैं। हम सभी बार्डरों पर शांतिपूर्ण तरह से बैठेंगे। दोपहर 12 से 3 बजे तक ही चक्का जाम रहेगा। वहीं दिल्ली पुलिस के PRO चिन्मय बिस्वाल ने बताया कि प्रदर्शनकारी किसानों ने चक्का जाम का प्रस्ताव रखा है। इस दौरान 26 जनवरी जैसे हालात न हो जाएं, इसलिए दिल्ली पुलिस ने पुख्ता इंतजाम किए हैं, ताकि दिल्ली की सीमाओं से कोई भी असमाजिक तत्व राजधानी के भीतर न घुस सके। वहीं किसानों के चक्का जाम को लेकर पुलिस कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव की बैठक में दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने कल होने वाले किसानों के चक्का जाम को लेकर चर्चा की।

America ने किया कृषि कानूनों का समर्थन, इससे भारत का बाजार सुधरेगा

वाशिंगटन। अमेरिका ने भारत के नए कृषि कानूनों का समर्थन किया है। कहा कि वह ऐसे कदमों का स्वागत करता है जो भारतीय बाजारों की ‘निपुणता में सुधार’ करेंगे और निजी क्षेत्र के अधिक निवेश को आकर्षित करेंगे। भारत में चल रहे किसान आंदोलन पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका यह मानता है कि शांतिपूर्ण विरोध किसी भी संपन्न लोकतंत्र की पहचान है। मतभेदों को बातचीत के माध्यम से हल किया जाना चाहिए। प्रवक्ता ने कहा, ‘हमारा मानना है कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किसी भी संपन्न लोकतंत्र की पहचान है और यहां ध्यान देने वाली बात है कि भारतीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी यही कहा है।’ प्रवक्ता ने कहा कि हम प्रोत्साहित करते हैं कि पार्टियों के बीच किसी भी तरह के मतभेदों को बातचीत के माध्यम से हल किया जाएगा। सामान्‍य तौर पर अमेरिका भारतीय बाजारों की कार्यकुशलता को सुधारने और बड़े पैमाने पर निजी सेक्‍टर के निवेश को आकर्षित करने के लिए उठाए गए कदमों का स्‍वागत करता है।

विदित हो कि कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर पिछले 26 नवंबर से किसान प्रदर्शऩ कर रहे हैं। 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के अवसर पर किसान ट्रैक्टर रैली के दौरान दिल्ली में हिंसा भी हुई। कृषि कानून पर सहमति को लेकर किसानों और सरकार के बीच 11 दौर की वार्ता हो चुकी है, मगर सभी बेनतीजा रहे। 22 जनवरी को प्रदर्शनकारी किसानों के साथ 11वें दौर की वार्ता के दौरान सरकार ने नए कानूनों को डेढ़ साल के लिए निलंबित करने का प्रस्ताव रखा और अधिनियमों पर चर्चा के लिए एक संयुक्त समिति गठित करने का भी प्रस्ताव रखा, लेकिन किसान तब भी नहीं माने।

महापंचायत में कृषि कानून के खिलाफ लामबंद रहने का आह्वान


बिजनौर। जिला मुख्यालय के आईटीआई में भारतीय किसान यूनियन की सम्मान बचाओ महापंचायत में भारी भीड़ उमड़ी। चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के पौत्र गौरव टिकैत व पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के पौत्र जयंत चौधरी ने किसानों से एकजुट रहने और कृषि कानून के खिलाफ लामबंद रहने का आह्वान किया।

सोमवार को नगर के आईटीआई मैदान में भारतीय किसान यूनियन के तत्वाधान में आयोजित किसान सम्मान बचाओ महापंचायत का आयोजन किया गया। किसान नेताओं ने किसान विरोधी कृषि कानून के प्रति लामबंद होकर एकजुट रहने और सरकार से बिल्कुल ना डरने का आह्वान किया।

मुख्य अतिथि भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत के युवा पुत्र गौरव टिकैत ने किसानों से सरकार को अपनी ताकत का अहसास कराने को कहा। उन्होंने कहा कि गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों के साथ गद्दारी करने वालों को कभी माफ नहीं किया जाएगा। किसानों से एकता बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि सरकार को काले कानून हर हाल में वापस लेने होंगे।

राष्ट्रीय लोकदल के युवा नेता एवं पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के पौत्र चौधरी जयंत सिंह ने अपने भाषण में मोदी और योगी सरकार पर जमकर प्रहार किये। उन्होंने कहा कि सरकारें किसानों को बहरूपिया बनकर ठग रही हैं। किसान जाग चुका है और अब वक्त आ गया है कि इन सरकारों को जड़ से उखाड़ कर फेंका जाए। उन्होंने चौधरी राकेश टिकैत के आंसुओं का जिक्र करते हुए कहा कि आंसू सैलाब बन गये हैं, जो अब रुकने वाले नहीं है या तो सरकार कृषि कानून वापस लेगी या फिर सरकार के नुमाइंदे गद्दी छोड़ कर भागेंगे। महापंचायत को भाकियू के राष्ट्रीय सचिव चौधरी युद्धवीर सिंह, कर्नाटक से आए किसान नेता केडी गंगाधर, केरल से आए करनैल सिंह, जिला अध्यक्ष कुलदीप सिंह ने संबोधित किया। अध्यक्षता शमशाद हुसैन ने तथा संचालन जितेंद्र सिंह ने किया।

चौधरी दिगंबर सिंह का कद बढ़ा-
पंचायत में उमड़ा किसानों का जनसैलाब भारतीय किसान यूनियन के युवा प्रदेश अध्यक्ष चौधरी दिगंबर सिंह का कद बढ़ाने वाला साबित हुआ। चौधरी दिगंबर सिंह ने कहा कि कृषि कानूनों के विरुद्ध जो लड़ाई लड़ी जा रही है, अब किसानों की अस्मिता की लड़ाई बन गई है। किसान इसे जीत कर ही दम लेंगे। महापंचायत में विभिन्न सियासी दलों के कार्यकर्ता और पदाधिकारी भी शामिल हुए। विशेषकर समाजवादी पार्टी व राष्ट्रीय लोक दल के कार्यकर्ता और पदाधिकारी भारी संख्या में नजर आए।

पुलिस प्रशासन की रही पैनी नजर- महापंचायत में जुटी किसानों की भीड़ के सामने आईटीआई का मैदान भी छोटा पड़ गया। सैकड़ों की संख्या में ट्रैक्टरों में बैठकर हजारों किसान सुबह नौ बजे से ही कार्यक्रम स्थल पर पहुंचना शुरू हो गए थे। इस दौरान पुलिस की भी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। जगह-जगह भारी पुलिस बल लगाया गया था। 4 कंपनी पीएससी, 4 अपर पुलिस अधीक्षक, 8 डीएसपी, 22 थाना प्रभारी और 600 सिपाही तैनात रहे। साथ ही ड्रोन कैमरे से  महापंचायत पर पैनी नजर रखी गई। आईजी रमेश कुमार, पुलिस अधीक्षक डॉ. धर्मवीर सिंह, एसपी देहात संजय कुमार तथा एसपी नगर प्रवीण रंजन सिंह मौजूद रहे।

किसान महापंचायत में शामिल हुए समाजवादी पार्टी के दिग्गज

बिजनौर। किसान महापंचायत में समाजवादी पार्टी के नजीबाबाद विधायक हाजी तसलीम अहमद किसान के रूप में अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ शामिल हुए। इस मौके पर पूर्व मंत्री व विधायक नगीना मनोज पारस, नूरपुर विधायक नईम उल हसन, पूर्व मंत्री स्वामी ओमवेश, पूर्व मंत्री ठाकुर मूलचंद चौहान, जिलाध्यक्ष राशिद हुसैन अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ महापंचायत में किसानों के रूप में शामिल हुए।

कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष महिला सभा प्रभा चौधरी, जिला महासचिव आदित्य वीर, डॉ रमेश तोमर, जिला पंचायत सदस्य राधा सैनी, चेयरपर्सन पति बिजनौर शमशाद अंसारी, पूर्व जिला अध्यक्ष महिला सभा श्लोक पंवार, चौधरी नसीम राणा, डॉक्टर राजपाल विश्वकर्मा, शुजात हुसैन, विमलेश चौधरी, शिव कुमार गोस्वामी, असलम कुरेशी, मौलाना अतीक, उदल सिंह चौहान, राशिद मलिक, ओमप्रकाश सिंह, जिला सचिव जाहिद अंसारी, विधानसभा अध्यक्ष नजीबाबाद नईम मकरानी, नगर अध्यक्ष नजीबाबाद शाहिद मलिक, जिला कार्यकारिणी सदस्य एजाज अंसारी, नगर अध्यक्ष साहनपुर शेख अंजार अहमद, जगजीत सिंह जीत आदि कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

सिंघु बॉर्डर: जनता व किसानों में झड़प, लाठीचार्ज

सिंघु बार्डर खाली करवाने की मांग को लेकर स्थानीय लोगों और किसानों में झड़प। पुलिस ने किया लाठीचार्ज। तलवार के हमले में SHO घायल। कई गांवों के किसानों ने प्रदर्शन कर कहा कि 2 महीने से भी अधिक समय से प्रदर्शन करने के चलते न केवल कारोबार प्रभावित हुआ है, बल्कि सैकड़ों लोग बेरोजगार तक हो चुके हैं।


नई दिल्ली। सिंघु बार्डर पर किसान आंदोलन के दाैरान आज उस समय माहाैल हिंसक हो गया जब स्थानीय लोगों और किसान संगठनों के सदस्यों के बीच झड़प हो गई। दोपहर करीब 1 बजे नरेला की तरफ से आए लोग धरनास्थल पर पहुंचे और नारेबाजी करते हुए किसानों से बॉर्डर खाली करने की मांग करने लगे।

इनका कहना था कि किसान आंदोलन के चलते लोगों के कारोबार ठप हो रहे हैं। करीब 1.45 बजे ये लोग किसानों के टेंट तक पहुंच गए और उनकी जरूरत के सामान तोड़ दिए। इसके बाद किसानों और लोगों के बीच झड़प शुरू हो गई। दोनों ओर से पथराव भी हुआ। पुलिस ने बीच-बचाव की कोशिश की, लेकिन स्थिति बिगड़ते देख लाठीचार्ज कर दिया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े।

इस झड़प में कई लोगों को चोटें आई हैं। कुछ पुलिसकर्मियों को भी गंभीर चोटें लगी हैं। अलीपुर थाने के SHO तलवार के हमले में घायल हो गए। पुलिस ने कथित तौर पर स्थानीय होने का दावा करने वालों और किसानों पर बल प्रयोग किया। लोग विरोध स्थल खाली करने के लिए प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान किसानों से उनकी झड़प हो गई। प्रदर्शन स्थल पर अराजक तत्वों ने एक पंडाल से लेकर वाशिंग मशीन तक तोड़ दिया।

भड़काने वाले TV कार्यक्रमों पर लगाम क्यों नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने निष्पक्ष और सत्यपरक रिपोर्टिंग की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि समस्या तब आती है, जब इसका इस्तेमाल दूसरों के खिलाफ किया जाता है। कुछ ऐसे कार्यक्रम हैं, जिनके प्रभाव भड़काने वाले हैं और आप सरकार होने के नाते इस पर कुछ नहीं कर रहे हैं।

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने केन्द्र सरकार को उन टीवी कार्यक्रमों पर लगाम लगाने के लिए कुछ नहीं करने पर फटकार लगाई, जिनके असर भड़काने वाले होते हैं। साथ ही कहा कि ऐसी खबरों पर नियंत्रण उसी प्रकार से जरूरी हैं, जैसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिये एहतियाती उपाय। उच्चतम न्यायालय ने गणतंत्र दिवस पर किसानों की ट्रैक्टर पेरड के हिंसक होने के बाद दिल्ली के कुछ इलाकों में इंटरनेट सेवा को बंद किए जाने का जिक्र किया और निष्पक्ष और सत्यपरक रिपोर्टिंग की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि समस्या तब आती है, जब इसका इस्तेमाल दूसरों के खिलाफ किया जाता है।

प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे की अगुवाई वाली पीठ ने गुरुवार को केंद्र की तरफ से पेश हुए सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता से कहा, तथ्य यह है कि कुछ ऐसे कार्यक्रम हैं, जिनके प्रभाव भड़काने वाले हैं और आप सरकार होने के नाते इस पर कुछ नहीं कर रहे हैं। पीठ में न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमण्यम भी शामिल हैं। पीठ ने यह बात उन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कही, जिनमें पिछले वर्ष कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के दौरान तबलीगी जमात के कार्यक्रम पर मीडिया रिपोर्टिंग का मुद्दा उठाया गया था। पीठ ने कहा, ऐसे कार्यक्रम हैं जो भड़काने वाले होते हैं या एक समुदाय को प्रभावित करते हैं, लेकिन एक सरकार के नाते, आप कुछ नहीं करते। न्यायमूर्ति बोबड़े ने कहा, कल आपने किसानों के दिल्ली यात्रा पर आने के कारण इंटरनेट और मोबाइल सेवा बंद कर दी। मैं गैर विवादास्पद शब्दावली का इस्तेमाल कर रहा हूं। आपने मोबाइल इंटरनेट बंद कर दिया। ये ऐसी समस्याएं हैं जो कहीं भी पैदा हो सकती हैं। मुझे नहीं पता कि कल टेलीविजन में क्या हुआ। शीर्ष अदालत ने कहा कि टीवी पर लोगों द्वारा कही जा रही बातों में उसकी कोई दिलचस्पी नहीं है लेकिन उसे उन कार्यक्रमों को लेकर चिंता है जिनका असर भड़काने वाला होता है।

यूपी गेट पर राेते हुए बोले टिकैत, आत्महत्या कर लूंगा

यूपी गेट पर आंदोलन खत्म करने के आसार, भारी संख्या में फोर्स तैनात-राेते हुए बोले टिकैत, आत्महत्या कर लूंगा
गाजीपुर। भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के नेता राकेश टिकैत गुरुवार को दिल्ली-उत्तर प्रदेश सीमा पर स्थित गाजीपुर में किसानों के प्रदर्शन स्थल पर भावुक हो गए और आरोप लगाया कि प्रशासन उनके आंदोलन को कुचलने की कोशिश कर रहा है।

इधर गणतंत्र दिवस में हुई हिंसा के बाद अब पुलिस प्रशासत सख्त हो गया है। धरनास्थलों में पुलिस की गश्त तेज हो गई है। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने किसान आंदोलन को खत्म कराने के आदेश दे दिए हैं। इसके बाद गाजियाबाद प्रशासन ने नोटिस जारी कर आंदोलनकारियों को गुरुवार रात यूपी गेट खाली करने का अल्टीमेटम दिया है। नोटिस में कहा गया है कि तुरंत यूपी गेट खाली कर दो, वरना बल प्रयोग किया जाएगा। इसी प्रकार सिंघु बार्डर पर पुलिस फोर्स बढ़ा दी गई है। यहां किसानों की संख्या भी काफी कम हो गई है।

गाजीपुर बॉर्डर पर रोते हुए बोले राकेश टिकैत, कानून वापस नहीं हुए तो कर लूंगा आत्महत्या-
गणतंत्र दिवस पर ‘किसान गणतंत्र परेड’ के दौरान शहर के कई हिस्सों में हुई हिंसा के सिलसिले में दिल्ली पुलिस की एफआईआर में नामित राकेश टिकैत ने दो दिन बाद विरोध स्थल पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने कहा, “हम तैयार थे शांतिपूर्वक आत्मसमर्पण करने के लिए, लेकिन प्रदर्शनकारी किसानों को पीटने के लिए भाजपा के स्थानीय विधायकों को बुलाया गया।” उन्होंने कहा, “यह हमारे खिलाफ एक साजिश है। अगर पुलिस ने हम पर गोलियां भी चलाईं, तो भी मैं आत्मसमर्पण नहीं करूंगा।” टिकैत ने रोते हुए यह भी कहा कि वह आत्महत्या कर लेंगे, लेकिन वह अब आत्मसमर्पण नहीं करेंगे।
मीडिया से बात करते हुए, भावुक टिकैत ने कहा कि प्रशासन उनके शांतिपूर्ण आंदोलन को समाप्त करने के लिए किसानों के खिलाफ षड्यंत्र करने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने कहा, “हम यहां तीन कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन करने आए थे और उन्हें वापस लेने की मांग कर रहे थे।” उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के लोग किसानों को मारने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “यह देश के किसानों के साथ अन्याय है। तीन कानूनों को निरस्त किया जाना चाहिए और हमारा आंदोलन तब तक चलता रहेगा, जब तक तीनों कानूनों को वापस नहीं लिया जाता है।” उन्होंने कहा, “मैं किसानों के हक के लिए लड़ता रहूंगा।” गाजियाबाद प्रशासन ने किसानों को प्रदर्शन स्थल खाली करने के लिए नोटिस दिया है। इससे पहले दिन में, गाजीपुर विरोध स्थल पर पुलिस कर्मियों और सुरक्षा बलों की भारी तैनाती देखी गई, जहां किसान पिछले साल 26 नवंबर से डेरा डाले हुए हैं।

राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार करेंगे कांग्रेस समेत 16 राजनीतिक दल

बजट सत्रः राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार करेंगे कांग्रेस समेत 16 राजनीतिक दल
नई दिल्ली। तीन कृषि कानूनों के विरोध में विपक्षी दल संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार करेंगे। इस बारे में कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा, “हम 16 राजनीतिक दलों से बयान जारी कर रहे हैं कि हम राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार कर रहे हैं जो कल संसद में दिया जाएगा। इसके पीछे प्रमुख कारण है कि कृषि बिलों को विपक्ष के बिना सदन में जबरन पारित किया गया।”
बता दें कि संसद का बजट सत्र कल से शुरू हो रहा है।

बहिष्कार करने वाले दलों में कांग्रेस, एनसीपी, जेकेएनसी, डीएमके, एआईटीसी, शिवसेना, समाजवादी पार्टी, आरजेडी, सीपीआईएमएल, सीपीआई, आईयूएमएल, आरएसपी, पीडीपी, MDMK, केरल कॉंग्रेस और AIUDF शामिल हैं।

आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने कहा, ”हम लोग तीन कृषि कानूनों का विरोध करते रहे हैं और करते रहेंगे। इसलिए आम आदमी पार्टी राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार करेगी और हमारे लोकसभा के सांसद भगवंत मान और राज्य सभा के हम तीन सांसद 29 जनवरी को  राष्ट्रपति के अभिभाषण कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे।”

राष्ट्रीय अन्नदाता यूनियन अध्यक्ष ने लिखा पीएम व गृह मंत्री को पत्र

राष्ट्रीय अन्नदाता यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राम निवास यादव ने दिल्ली में अराजकता फैलाने वालों पर कठोर कार्यवाही की मांग करते हुए प्रधानमंत्री व गृह मंत्री को लिखा पत्र

लखनऊ। राष्ट्रीय अन्नदाता यूनियन के अध्यक्ष राम निवास यादव ने 72वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर देश की राजधानी दिल्ली में किसान नेताओं द्वारा किये गये राष्ट्र विरोधी कृत्य से दुखी एवं आक्रोशित होकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं गृहमंत्री अमित शाह को एक पत्र लिखा है।

राष्ट्रीय अन्नदाता यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राम निवास यादव ने गुरुवार को बताया कि उन्होंने पत्र में फर्जी किसान नेताओं द्वारा देश की आन-बान-शान लालकिला से राष्ट्रीय ध्वज उतारने, दिल्ली में दंगा कराने वालों, सरकारी सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों की सम्पत्तियों को जब्त करने एवं देश विरोधी कार्य करने वालों को गिरफ्तार कर जेल भेजने के साथ ही अलगाववादियों से सम्बन्ध होने की जांच कर सभी किसान संगठनों पर प्रतिबन्ध लगाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि किसानों के नाम से कृषि बिल के विरोध में धरना प्रदर्शन से जनता का किसान पर से विश्वास उठ गया है। सरकार किसान संगठनों के साथ मिलकर कृषि बिल में कुछ बिन्दुओं पर लिखित गारंटी भी देने को तैयार थी, फिर भी कुछ किसान संगठन विपक्ष के साथ मिलकर कृषि बिल का विरोध कर देश में अराजकता का माहौल बना रहे हैं। विपक्ष की साजिशों में शामिल होकर ट्रैक्टर रैली निकालने की आड़ में दंगा करवाया गया। इसमें शामिल किसान नेता राकेश टिकैत, योगेन्द्र यादव, हन्ना मौला, शिव कुमार कक्का, दीप सिद्धू, लक्खा सिधाना, हरमीत सिंह कड़िया के साथ-साथ फर्जी किसानों पर सख्त कार्यवाही की जाए। इनकी चल-अचल सम्पत्ति जब्त कर सरकारी सम्पत्ति के नुकसान की भरपाई की जाए। इनके इस घिनौने राष्ट्र विरोधी कृत्य से समस्त किसान भाई बहुत दु:खी एवं आक्रोशित हैं। देश की किसान यूनियनों का नाम बदनाम हुआ है, देश में किसानों के ख़िलाफ़ माहौल बन रहा है। राष्ट्रीय संयोजक राम निवास यादव ने कहा कि नया कृषि बिल पूर्ण रूप से किसान हितैषी है, जिस पर कोई संदेह नहीं है, लेकिन फर्जी किसान नेता अपनी नेतागिरी एवं बिचौलियों के चक्कर में साधारण किसानों को भ्रमित कर रहे हैं, जो ठीक नहीं है।

सभी धरना स्थलों पर पुलिस की तैनाती बढ़ी

नई दिल्ली। सिंघु बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर समेत किसानों के सभी धरना स्थलों पर पुलिस की तैनाती बढ़ा दी गई है। सिंघु बॉर्डर पर RAF के जवानों की तैनाती भी कर दी गई है। पुलिस ने क्रेन से बैरिकेड हटाने शुरू कर दिए हैं।

गाजीपुर बॉर्डर पर पुलिस फ्लैग मार्च कर रही है। गाजियाबाद नगर निगम के सूत्रों के मुताबिक गाजीपुर बॉर्डर पर नगर निगम द्वारा दी गई सुविधाओं, जैसे सफाई कर्मचारी, पानी की सुविधा और टॉयलेट को हटा लिया गया है। सिर्फ दो टॉयलेट रखा गया है।

दिल्ली पुलिस कमिश्नर का संदेश-
दिल्ली पुलिस के कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव ने अधीनस्थ स्टाफ के नाम संदेश जारी किया है।  उन्होंने कहा, ‘आने वाले कुछ दिन हमारे लिए काफी चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं इसलिए हमें सचेत रहने की आवश्यकता है। किसान आंदोलन में हुई हिंसा में हमारे 394 साथी घायल हुए हैं, कुछ का इलाज अभी चल रहा है। आपके सूझबूझ से हम चुनौती का सामना कर पाए, हमें धैर्य और अनुशासन बनाए रखना है।’

टिकैत से मांगा 3 दिन में जवाब
गणतंत्र दिवस के मौके पर हुई हिंसा के लिए दिल्ली पुलिस ने 20 किसान नेताओं को नोटिस भेजा है। FIR में दर्ज नेताओं के खिलाफ भी लुक आउट नोटिस जारी की गई है। गाजीपुर बॉर्डर पर किसान नेता राकेश टिकैत के टेंट पर नोटिस चिपकाया गया है। पुलिस ने उनसे 3 दिन में जवाब मांगा है।

सिंघु बार्डर खाली कराने को अब जनता सड़क पर उतरी

सिंघु बार्डर पर किसान आंदोलन के खिलाफ स्थानीय लोगों का प्रदर्शन, बोले-तिरंगे का अपमान सहन नहीं, हाईवे खाली करो

किसान आंदोलन के खिलाफ सिंघु बार्डर पर स्थानीय लोगों का प्रदर्शन

नई दिल्ली। लाल किले पर हुई हिंसा और तिरंगे की जगह दूसरा झंडा लगाने के खिलाफ जनता सड़क पर उतर आई है। सिंघु बार्डर खाली कराने के लिये स्थानीय लोगों ने आवाज मुखर करते हुए जल्द से जल्द इस हाईवे को खाली कराने की मांग की। कहा कि लाल किले पर हुए तिरंगे का अपमान सहन नहीं किया जाएगा। सिंघु बॉर्डर के आसपास के 40 गांवों के लोगों ने किसानों को बॉर्डर खाली करने का अल्टीमेटम दे दिया है।

राकेश टिकैत ने किसानों की भीड़ को उकसाया- दिल्ली पुलिस की इंस्पेक्टर पुष्पलता ने दावा किया है कि भारतीय किसान यूनियन (BKU) के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने गाजीपुर अंडरपास पर किसानों की भीड़ को उकसाया था। उधर टिकैत ने भी ऐसा बयान दे दिया है, जिससे दिल्ली पुलिस की आशंका और गहरी हो जाती है। कथित रूप से राकेश टिकैत ने कहा कि लालकिले पर पुलिस ने गोली क्यों नहीं चलाई? उन्होंने यह बात संयुक्त किसान मोर्चा की मीटिंग में कही!

टोल प्लाजा प्रबंधन पहुंचा कोर्ट- जीएमआर अंबाला-चंडीगढ़ एक्‍सप्रेस वे कंपनी ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दप्पर (लालडू ) टोल प्लाजा आंदोलनकारियों से खाली करवा कर टोल एकत्र करने व सुरक्षा देने की मांग की है। हाई कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र व पंजाब सरकार को 24 फरवरी के लिए नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। टोल प्लाजा प्रबंधन ने नुकसान की भरपाई करने के निर्देश देने की मांग करते हुए दावा किया कि 9 अक्टूबर से अपेक्षित टोल फीस जमा न करने पर करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ है।

सपा नेताओं की गिरफ्तारी को पुलिस की ताबड़तोड़ दबिश


बिजनौर। थाना कोतवाली शहर में समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष राशिद हुसैन समेत 10 सपा नेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने बीती रात इन नेताओं की गिरफ्तारी के लिए कई स्थानों पर ताबड़तोड़ दबिश डाली लेकिन एक भी सपा नेता पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सका।

गणतंत्र दिवस के मौके पर किसान ट्रैक्टर रैली निकाले जाने को लेकर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं तथा पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक व झड़पें हुई थी। इसको लेकर बुधवार को समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष राशिद हुसैन, चेयरपर्सन पति शमशाद अंसारी, जिला प्रवक्ता अहमद खिजर खान, पप्पू अखलाक, जावेद राइन, डॉ. रमेश तोमर, मदन लाल सैनी, सिकंदर कस्सार और सभासद वसीम समेत 10 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने 200-250 ज्ञात-अज्ञात सपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने, बिना अनुमति के रैली निकालने, कोविड-19 महामारी उल्लंघन और धारा 144 का उल्लंघन किए जाने के आरोप में मुकदमा दायर किया। मुकदमा दर्ज करने के बाद बीती रात पुलिस ने कई सपा नेताओं व कार्यकर्ताओं के घर पर ताबड़तोड़ दबिश डाली लेकिन कोई भी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा। बताया जाता है कि पुलिस ने मोहल्ला चाहशीरी B-16 निवासी सपा के जिला प्रवक्ता अहमद खिजर, मोहल्ला चाहशीरी B-24 निवासी पप्पू अखलाक और हाजी जावेद राइन के घर पर दबिश दी लेकिन पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर पाई। नहटौर विधानसभा अध्यक्ष सिकंदर कस्सार के थाना हल्दौर क्षेत्र स्थित घर पर भी पुलिस ने दबिश दी। वहां से भी पुलिस को खाली हाथ लौटना पड़ा। वहीं पुलिस की इस कार्रवाई को लेकर समाजवादी पार्टी नेताओं में जबरदस्तत रोष व्याप्त है।

इटली में खालिस्तान समर्थकों के उत्पात पर भारत ने जताई चिंता

रोम में खालिस्तानी समर्थकों का उत्पात, भारतीय दूतावास में तोड़फोड़, भारत ने जताई दोषियों पर कार्रवाई की उम्मीद
नई दिल्ली। किसानों की आड़ में भारत विरोधी एजेंडा चला रहे खालिस्तानी समर्थकों ने 26 जनवरी को देश की राजधानी में ही नहीं, इटली के रोम में भी भारतीय दूतावास में जमकर उत्पात मचाया। भारत के दूतावास की इमारत में खालिस्‍तान समर्थकों तोड़फोड़ की, भारत विरोधी नारे लगाए और झंडे लहराए। इसे भारत ने इटली की सरकार के सामने चिंता व्यक्त की है।

सूत्रों ने बताया कि भारत की ओर से कहा गया है कि वहां राजनयिकों की सुरक्षा का जिम्मा इटली का है। उम्मीद है कि तोड़फोड़ करने वालों पर कार्रवाई होगी और ऐसी घटनाएं आगे नहीं होंगी। गौरतलब है कि भारत में किसान आंदोलन के नाम पर खालिस्तानी अपने लिए जमीन तलाश रहे हैं।

केवल भारत में ही नहीं, खालिस्तानी अमेरिका में भी एक्टिव हैं। वॉशिंगटन डीसी में कृषि कानून के विरोध की आड़ में उन्होंने भारतीय दूतावास के बाहर प्रदर्शन किया और खालिस्तानी झंडे लहराए। दूसरी ओर खालिस्तानी समर्थकों ने किसान आंदोलन के नाम पर रोम में भारतीय दूतावास पर भी प्रदर्शन किया। समर्थकों ने दूतावास की दीवारों पर ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के स्लोगन लिखे। दूतावास पर खालिस्तानी झंडा भी लहराया और तोड़फोड़ की। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, जब विदेश में भारतीय दूतावासों के बाहर खालिस्तानी समर्थक जमा हुए हों। इसके पहले भी कई बार इस तरह के प्रदर्शन वो कर चुके हैं।

किसी भी कीमत पर वापस न हो कृषि बिल: राम निवास यादव

लखनऊ। राष्ट्रीय अन्नदाता यूनियन के राष्ट्रीय संयोजक राम निवास यादव ने उन्नाव जिले के सोहरमउ ग्राम में किसानों के कार्यक्रम में शामिल होते हुए कृषि बिल का समर्थन किया।

उन्होंने कहा कि किसी भी क़ीमत पर बिल वापस नहीं होना चाहिए। ये किसानों के हित में है। देश की राजधानी में गणतंत्र  दिवस के अवसर पर फ़र्ज़ी किसानों एवं देश के दलाल किसान नेताओं द्वारा देश को शर्मसार किया गया, अब ऐसे लोगों पर सख्त कार्यवाही की आवश्कता है।

अपनी टैक्टर रैली की विफलता को छुपाने एवं पैसे लेकर दिल्ली में दंगा कराने के लिये तलवार, भाला जैसे औजारों, हथियारों को लेकर लाल किले पर उत्पात मचाया और देश को शर्मसार किया, वो माफ़ी लायक़ नहीं है। इन नकली किसानों ने राष्ट्रीय झंडे को लाल किले से उतारकर फेंक दिया और वहां पर खालिस्तानी झण्डा फहराया। इससे देश शर्मसार हुआ, देश विदेश में साख को चोट पहुंची।

उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि ऐसे लोगों पर NSA लगाया जाए। कार्यक्रम में पूर्व विधायक चंद्रा रावत, महामन्त्री वीरेन्द्र रावत, मो. आरिफ, शिवकुमार रावत सहित हज़ारों लोग शामिल रहे।

किसानों के समर्थन में सपाईयों ने निकाली ट्रैक्टर रैली, पुलिस से झड़पें, गिरफ्तारियां

किसानों के समर्थन में ट्रैक्टर रैली निकलते सपाईयों की पुलिस से कई जगह झड़प।

समाजवादी व्यापार सभा के प्रदेश सचिव सोनू कनौजिया किसानों के समर्थन में अपने काफिले के साथ रवाना ही हुए थे कि उन्हें काकोरी कमिश्नरेट पुलिस ने दुर्गा गंज चौराहे पर हिरासत में ले लिया।

रैली के समर्थन में सपा जिला अध्यक्ष जय सिंह जयंत, पूर्व सांसद सुशीला सरोज, पूर्व विधायक इंदल रावत, पूर्व विधायक प्रत्याशी राजबाला रावत, पूर्व लोकसभा प्रत्याशी सीएल वर्मा सहित बड़े नेता शामिल रहे।

लखनऊ। गणतंत्र दिवस पर किसानों की ट्रैक्टर रैली के समर्थन में सपा के कार्यकर्ताओं ने ट्रैक्टर पर झंडा लगाकर रैली निकाली। इस दौरान सपा नेताओं की पुलिस वालों से झड़प भी हुई।

केंद्र सरकार द्वारा नए किसान बिल लागू होने के बाद से देशभर में किसान इसका विरोध कर रहे हैं कि यह बिल वापस लिए जाएं, जिसके तहत किसानों के आह्वान पर गणतंत्र दिवस के दिन किसानों की ट्रैक्टर रैली के समर्थन में समाजवादी पार्टी के नेताओं ने भी जगह-जगह रैली निकाल कर विरोध-प्रदर्शन किया।

लखनऊ की मलिहाबाद तहसील में समाजवादी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता ट्रैक्टर पर सवार होकर प्रदर्शन के लिए निकले तो पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। वहीं समाजवादी व्यापार सभा के प्रदेश सचिव सोनू कनौजिया किसानों के समर्थन में अपने काफिले के साथ रवाना ही हुए थे कि उन्हें काकोरी कमिश्नररेट पुलिस ने दुर्गा गंज चौराहे पर हिरासत में ले लिया।

राजधानी लखनऊ में सपा के जिला अध्यक्ष जय सिंह जयंत के नेतृत्व में सपा कार्यालय मुजासा तिराहा से इंदल कुमार तथा बड़ी संख्या में सपा कार्यकर्ताओं ने ट्रैक्टर लेकर निकले। पूर्व सांसद सुशीला सरोज ट्रैक्टर को स्वयं चलाकर मलिहाबाद के लिए रवाना हुई, वहीं वरिष्ठ सपा नेता मोहनलाल पासी अपने कार्यकर्ताओं के साथ काकोरी मोड़ से पुलिस से लुकते छुपते किसानों की ट्रैक्टर रैली के समर्थन में मलिहाबाद के लिए रवाना हुए, जिन्हें मलिहाबाद पुलिस ने मोहान तिराहे पर बैरिकेटिग कर रोक दिया।

उस दौरान सपा नेता ट्रैक्टरों में राष्ट्रीय ध्वज लगाकर, किसान विरोधी बिल को वापस लो वापस लो, को लेकर किसानों के समर्थन में नारे लगा रहे थे। इस दौरान कार्यकर्ताओं की पुलिस से झड़प भी देखने को मिली। मलिहाबाद में ट्रैक्टर रैली को रोकने के लिए भारी पुलिस फोर्स बल तैनात रहा।

समर्थन रैली में विधानसभा अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार सिंह, सरोज यादव, नागेंद्र सिंह यादव,संजय पाठक, अजय सिंह चौहान, राम गोपाल यादव, मोहनलाल पासी, एडवोकेट संतोष यादव, एडवोकेट राम सिंह यादव, सम्राट सिंह,सोनिष मौर्या, इब्राहिम मंसूरी, संदीप यादव,अनुराग यादव, बादल यादव,अखिलेश सक्सेना,गुरुवेंद्र प्रताप यादव (बब्बन), मनीष यादव सहित सैकड़ों सपा नेता व कार्यकर्ता मौजूद रहे।

किसान आंदोलन: लखनऊ-दिल्ली रूट की बसें बंद होने से यात्री परेशान

किसान आंदोलन ने बंद करा दीं लखनऊ-दिल्ली रूट की बसें, यात्री रहे परेशान

लखनऊ। किसान आंदोलन के कारण मंगलवार को दिल्ली से लखनऊ रूट पर रोडवेज बसों का संचालन रोक दिया गया। कौशांबी बस अड्डे से लेकर, आनंद विहार टर्मिनल से लखनऊ के बीच चलने वाली बसों का संचालन ठप रहा। इस दौरान कैसरबाग समेत कई बस अड्डे से दिल्ली रूट पर चलने वाली बसें डिपो में खड़ी रहीं। आलमबाग बस टर्मिनल पर दिल्ली की बसें नदारद रहीं। बस पकड़ने बस अड्डे पहुंचे यात्री बसों के चलने के इंतजार में परेशान दिखे।

स्थिति सामान्य होने का इंतजार- क्षेत्रीय प्रबंधक एके सिंह ने बताया कि कुछ समय के लिए बसों का आवागमन रोक दिया गया है। स्थिति सामान्य होने पर बसें चलाई जाएंगी। इस आंदोलन से सबसे अधिक साधारण बसों पर असर किया है। उन्होंने ऐसे में लखनऊ, दिल्ली की बसों को धीरे-धीरे भेजने का आश्वासन दिया। 

सैकड़ों किसान दिल्ली रवाना

सैकड़ों किसान दिल्ली रवाना बागड़पुर

बिजनौर (चांदपुर): भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष कुलदीप सिंह सैकड़ों समर्थकों के साथ ट्रैक्टरों के काफिले के रूप में दिल्ली रवाना हो गए। उनके साथ तहसील अध्यक्ष अशोक चौधरी, तहसील सचिव मोहम्मद याकूब, जिला उपाध्यक्ष राकेश प्रधान, जब्बार खान पाडला ग्राम पंचायत अध्यक्ष, जिला संरक्षक मुखिया रामपाल सिंह, भावी जिला पंचायत सदस्य वरुण गुर्जर, तहसील मीडिया प्रभारी मोहम्मद हनीफ व कालू टिकैत व भारतीय किसान यूनियन के समस्त पदाधिकारी अपने ट्रैक्टरों से दिल्ली रवाना हुए। इससे पहले भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष चौधरी कुलदीप सिंह के गांव भागलपुर गजरौला रोड पर एसपी सिटी बिजनौर, सीओ चांदपुर, एसडीएम चांदपुर ने रवानगी स्थान पर पहुंच कर जायजा लिया। गौरतलब है कि कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन दिल्ली में अनवरत जारी है।

सरकार ने देश का संवैधानिक ढांचा खत्म करके रख दिया:वेद प्रकाश त्रिपाठी

किसानों को जागरूक करने के लिए कांग्रेस ने की बैठक
लखनऊ। संगठन सृजन और किसान जागरुक अभियान के तहत जिला कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में न्याय पंचायत जोरिया के चाइना चौराहे पर बैठक हुई। बैठक में लोगों से कांग्रेस से जुड़ने की अपील की गई।

संगठन सृजन और किसान जागरुक अभियान के तहत जिला कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में मलिहाबाद ब्लॉक की न्याय पंचायत जोरिया के अंतर्गत चाइना चौराहे पर एक बैठक हुई। बैठक में कांग्रेस के जिला अध्यक्ष वेद प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि पिछले 6 साल से देश की सत्ता पर काबिज भाजपा सरकार जनता में विश्वास खो चुकी है। जिस उम्मीदों के साथ देश की जनता ने भाजपा को सत्ता सौंपी थी, वह पूर्णतया विफल हो चुकी है। सरकार ने देश का संवैधानिक ढांचा खत्म करके रख दिया। सरकार ने किसान विरोधी बिल के रूप में जो काला बिल पारित किया है, वह किसान के हित में कतई नहीं है। आगे चलकर यह बिल पूंजीपतियों के अनुकूल होगा। इसको लेकर किसान 2 महीने से दिल्ली बॉर्डर पर बिल वापस करने को सरकार से संघर्ष कर रहे हैं। लगभग 60 किसानों की मौत भी हो चुकी है, लेकिन यह अंधी बहरी सरकार किसानों की सुनने वाली नहीं है।

उक्त बैठक में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हबीबुर्रहमान, छोटे मियां, विधानसभा प्रभारी गौरी पांडेय, कपिल द्विवेदी, संतोष मौर्य, जिला उपाध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव, ब्लॉक उपाध्यक्ष जितेंद्र सिंह कथा न्याय पंचायत अध्यक्ष सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।

डेढ़ वर्ष तक स्थगित हो सकता है कृषि सुधार कानूनों का क्रियान्वयन!

सरकार-किसान संगठनों के बीच हुई 10वें दौर की बैठक। अब 22 को अगले चरण की बातचीत। संगठनों को कानूनों पर एतराज हो या देना चाहते हैं कुछ सुझाव तो सरकार चर्चा करने के लिए सदैव तैयार।

नई दिल्ली। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसानों से पुन: आग्रह करते हुए कहा कि कानूनों को रिपील करने के अलावा इन प्रावधानों पर बिन्दुवार चर्चा करके समाधान किया जा सकता है। पिछली बैठकों में अन्य विकल्पों पर चर्चा न होने की वजह से कोई सार्थक परिणाम नहीं निकल पाया था।

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री सोम प्रकाश ने आज 20 जनवरी, 2021 को विज्ञान भवन, नई दिल्‍ली में आयोजित 10वीं बैठक में किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से अगले दौर की वार्ता की। दसवें गुरु गोविन्द सिंह जी के 354वें प्रकाश पर्व पर सभी को बधाई देने के बाद उन्होंने किसान संगठनों को आंदोलन के दौरान अनुशासन बनाए रखने के लिए धन्यवाद दिया और आंदोलन समाप्त करने के लिए पुन: आग्रह किया। सरकार द्वारा कहा गया कि अब तक कृषि सुधार से संबंधित तीनों कानूनों तथा एमएसपी के सारे आयामों पर बिन्दुवार सकारात्मक चर्चा नहीं हुई है। सरकार ने यह भी कहा कि हमें किसान आंदोलन को संवेदनशीलता से देखना चाहिए तथा किसानों व देशहित में समग्रता की दृष्टि से उसे समाप्त करने के लिए ठोस प्रयास करना चाहिए। संगठनों को इन कानूनों पर एतराज है या कुछ सुझाव देना चाहते हैं तो हम उन बिंदुओं पर आपसे चर्चा करने के लिए सदैव तैयार हैं। कृषि मंत्री ने पुन: आग्रह करते हुए कहा कि कानूनों को रिपील करने के अलावा इन प्रावधानों पर बिन्दुवार चर्चा करके समाधान किया जा सकता है। पिछली बैठकों में अन्य विकल्पों पर चर्चा न होने की वजह से कोई सार्थक परिणाम नहीं निकल पाया था, अत: हम आज की चर्चा को सार्थक बनाने का आग्रह करते हैं। प्रारम्भ से ही सरकार विकल्पों के माध्यम से किसान प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करने के लिए खुले मन से प्रयास कर रही है। सरकार कृषि क्षेत्र को उन्नत और किसानों को समृद्ध बनाने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है।

किसानों की जमीन हड़पने की ताकत किसी में नहीं

किसानों की जमीन हड़पी जाने संबंधी भ्रांति दूर करते हुए श्री तोमर ने साफ-तौर पर कहा कि इन कानूनों के रहते कोई भी व्यक्ति देश में किसानों की जमीन हड़पने की ताकत नहीं रखता। हम खेती को आगे बढ़ाने और किसानों को समृद्ध बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। ये कानून किसानों के जीवन में क्रान्तिकारी बदलाव लाएंगे, जिससे किसानों की दशा-दिशा बदलेगी और उनके जीवन स्तर में सुधार होगा। परम श्रद्धेय सर्वंशदानी श्री गुरु गोविन्द सिंह जी के प्रकाश पर्व के पावन अवसर पर, कड़कड़ाती सर्दी में चल रहे किसान आन्दोलन की समाप्ति को दृष्टिगत रखते हुए, सरकार की तरफ से यह प्रस्ताव दिया गया कि कृषि सुधार कानूनों के क्रियान्वयन को एक से डेढ़ वर्ष तक स्थगित किया जा सकता है।

इस दौरान किसान संगठन और सरकार के प्रतिनिधि किसान आन्दोलन के मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श करके उचित समाधान पर पहुंच जा सकते हैं। इस पर किसान यूनियनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि वह सरकार के प्रस्ताव पर 21 जनवरी को विस्तारपूर्वक चर्चा करेंगे और 22 जनवरी 2021 को दोपहर 12 बजे विज्ञान भवन में संपन्न होने वाली बैठक में सरकार को अवगत करायेंगे। वार्ता सौहार्द्रपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुई। ****

अब मोदी सरकार की सहयोगी RLP भी आई किसानों के पक्ष में

RLP प्रमुख बेनीवाल ने दिया संसद की तीन समितियों से इस्तीफा

26 दिसंबर को दो लाख समर्थकों के साथ राजस्थान से दिल्ली कूच

नई दिल्ली। कृषि कानूनों के खिलाफ 25वें दिन भी जारी किसानों के आंदोलन को मोदी सरकार के सहयोगी दल है RLP ने भी समर्थन दे दिया है। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने शनिवार को संसद की तीन समितियों से इस्तीफा देने के बाद 26 दिसंबर को दो लाख समर्थकों के साथ राजस्थान से दिल्ली के लिए कूच करने की घोषणा की है।

एक तरफ भारतीय जनता पार्टी (BJP) किसानों को कानूनों के फायदे समझाने में लगी है, लेकिन दूसरी तरफ पार्टी की मुश्किलें उसके ही सहयोगी दल बढ़ा रहे हैं। अब एनडीए (NDA) के सहयोगी हनुमान बेनीवाल ने मोर्चा खोल दिया है। कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों का समर्थन करते हुए राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने शनिवार को संसद की तीन समितियों से इस्तीफा दे दिया। लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला को भेजे पत्र में हनुमान बेनीवाल ने उद्योग संबंधी स्थायी समिति, याचिका समिति और पेट्रोलियम व गैस मंत्रालय की परामर्श समिति से इस्तीफा दिया। इसके बाद उन्होंने 26 दिसंबर को दो लाख समर्थकों के साथ राजस्थान से दिल्ली के लिए कूच करने की तैयारी कर ली है।

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UP: जबरन दुकान बंद कराने पर होगी कार्रवाई

http://sanjaysaxenanews.blogspot.com/2020/12/up_7.html


DGP ने प्रदेश के सभी कप्तानों को लिखा पत्र

लखनऊ। केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों का 8 दिसंबर को भारत बंद है। इसको लेकर उत्तर प्रदेश में योगी सरकार अलर्ट मोड पर है। सोमवार को गृह विभाग ने DGP को पत्र लिखकर दुकानें जबरन बंद कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। कहा गया है कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे किसी की भी जबरन दुकान बंद ना हो, किसी के साथ मारपीट न की जाए। DGP ने प्रदेश के सभी ADG जोन, IG रेंज, SP/SSP को पत्र लिखकर अलर्ट रहने के साथ अराजक तत्वों से सख्ती से निपटने के लिए कहा है।

किसानों से हो संवाद, चार से पांच जगह सड़क पर की जाए बैरिकेटिंग

DGP ने एडवायजरी में कहा है कि किसान एवं किसान संगठनों से संवाद बनाकर रखें। कोई अप्रिय घटना होने से रोका जाए। नोएडा और दिल्ली बॉर्डर से पहले 6 से 10 किलोमीटर के बीच में कम से कम 5 स्थानों पर चेक पोस्ट लगाकर ऐसे ट्रैक्टर ट्राली को वाहनों और किसान तत्वों को चिन्हित किया जाए, जिससे बॉर्डर पर जाकर अव्यवस्था फैलाने की कोशिश ना की जा सके। सभी धरना स्थल के स्थानों पर उपस्थित लोगों का विवरण रखा जाए।

प्रतिबंधित संगठनों का ना हो प्रवेश, उन पर की जाए कार्रवाई

गृह विभाग ने प्रतिबंधित संगठनों और असामाजिक तत्वों द्वारा धरना स्थल पर न पाया जाए। ऐसे लोगों के खिलाफ समुचित कार्रवाई की जाए, माहौल खराब करने वाले लोगों पर सख्ती की जाए। ऐसे लोगों को चिन्हित कर कर पहले ही उन को पाबंद किया जाए।

राज्य के बॉर्डर पर बढ़ाई जाए सख्ती

उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान से सटे उत्तर प्रदेश के सभी जनपदों में एंट्री पॉइंट पर भी चेकिंग की जाए। पुलिस प्रबंधन के साथ-साथ उनका सुपरविजन वरिष्ठ पुलिस अधिकारी द्वारा किया जाए। जिससे अन्य प्रदेशों में से ऐसे संगठन तक ना आ पाएं जो उत्तर प्रदेश में अव्यवस्था फैलाने का कार्य करें। कोविड-19 गाइडलाइन का सख्ती से पालन कराया जाए। कहीं भी लोग इकट्ठा ना हो सकें।

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किसान आंदोलन: activ mode में उत्तराखंड पुलिस


उत्तराखंड के DGP ने की समीक्षा, दिये निर्देश

वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये अधिकारियों से हुए रूबरू

देहरादून। पुलिस महानिदेशक उत्तराखण्ड अशोक कुमार ने दोनों परिक्षेत्र प्रभारियों एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, ऊधमसिंहनगर, पौड़ी गढ़वाल के साथ पुलिस मुख्यालय स्थित सभागार में वीडियो कान्फ्रेसिंग के माध्यम से अपराध एवं अपराधियों के विरूद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान एवं 08 दिसम्बर को किसानों द्वारा प्रस्तावित भारत बन्द के सम्बन्ध में शान्ति एवं कानून व्यवस्था की तैयारियों की समीक्षा की।

वीडियो कान्फ्रेसिंग के दौरान पुलिस महानिदेशक उत्तराखण्ड अशोक कुमार द्वारा निम्न बिंदुओं पर दिशा-निर्देश दिये गये-

1. प्रस्तावित भारत बन्द के दृष्टिगत सभी जनपद प्रभारी लोगों से सम्पर्क व मीटिंग कर उनसे बन्द को शान्तिपूर्वक करने का आह्वान करें। यह भी सुनिश्चित कर लें कि जबरदस्ती बन्द नहीं कराया जाए और हिंसा किसी भी रूप में बर्दाशत नहीं की जाएगी।

2. जनपद प्रभारी जिलाधिकारी के साथ समन्वय स्थापित कर जोन एवं सेक्टर में पुलिस अधिकारियों के साथ सम्बन्धित मजिस्ट्रेटों की नियुक्ति सुनिश्चित कर लें।
3. स्थानीय अभिसूचना तंत्र को सर्तक रखते हुये सूचना संकलित करने के निर्देश दिये गये।

4. अफवाहों को किसी भी दशा में फैलने न दिया जाये, सोशल मीडिया पर निरन्तर निगरानी रखी जाये। यदि कोई भ्रामक सूचना फैलायी जाती है, तो तुरन्त उसका प्रतिरोध किया जाये तथा भ्रामक सूचना फैलाने वाले के विरुद्ध कार्यवाही की जाये।

5. अपराध एवं अपराधियों के विरूद्ध चलाया जा रहा विशेष अभियान एक ऑपरेशनल अभियान है। इसे मेहनत करके सभी ने सफल बनाना है। ईनामी एवं वांछित अपराधियों की गिरफ्तारी युद्धस्तर पर सुनिश्चित की जाए।
6. बड़े अपराधी जिन पर रूपए 5000/- से अधिक का ईनाम है, इनकी गिरफ्तारी में एसओजी एवं राज्य स्तर पर एसटीएफ की जिम्मेदारी भी होगी। यदि कोई कार्य में निष्क्रियता या लापरवाही करता है, तो उस पर कार्यवाही की जाए।

7. हिस्ट्रीशीटरों पर फोकस बढ़ाएं और उनका सत्यापन व निगरानी सुनिश्चित करें।

8. पांच साला सक्रिय अपराधियों को चिन्हित कर उनके विरूद्ध कार्यवाही सुनिश्चित करें। साथ ही जनपद स्तर पर टॉप 10 एवं टॉप 05 अपराधियों का भी चिन्हीकरण करते हुए उनपर कार्यवाही सुनिश्चित करें।

इस अवसर पर पुलिस महानिरीक्षक पी/एम वी. मुरूगेशन, पुलिस महानिरीक्षक अपराध एवं कानून व्यवस्था उत्तराखण्ड ए.पी. अंशुमान, पुलिस उपमहानिरीक्षक/निदेशक यातायात केवल खुराना, पुलिस उपमहानिरीक्षक एसटीएफ रिधिम अग्रवाल, पुलिस उपमहानिरीक्षकअपराध एवं कानून व्यवस्था उत्तराखण्ड नीलेश आनन्द भरणे सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।

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