राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं ने की माँ गंगा की आरती

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं ने की माँ गंगा की आरती

(संदीप जोशी )

बिजनौर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गंगा समग्र इकाई के जिला संयोजक ओमप्रकाश द्वारा साप्ताहिक गंगा आरती का आयोजन विदुर कुटी के गंगा घाट पर किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत हर्ष चौधरी ने गंगा गीत के द्वारा की। जिला संयोजक ओमप्रकाश ने भारतीय संस्कृति की पांच मुख्य स्तंभों में से एक गंगा मां के महत्व को सभी गंगा भक्तों को बताया। उन्होंने गंगा समुद्र के सभी 15 आयाम किस प्रकार से गंगा को स्वच्छ निर्मल अविरल बनाने के लिए प्रयासरत हैं उसके बारे में विस्तृत चर्चा की। गंगा आरती में मुख्य अतिथि डॉ मंजू चौधरी ने भारतीय संस्कृति में गंगा की सामाजिक आर्थिक धार्मिक महत्व के साथ साथ उसकी वैज्ञानिक पहलू की भी चर्चा की। डॉ मंजू ने बताया कि गंगा की धारा सिर्फ जलधारा नहीं है बल्कि यह भारत की संस्कृति, सभ्यता, दर्शन और जीवन की धारा है। गंगा का जल शुद्ध रखने के लिए गंगा में किसी भी प्रकार की मूर्ति का विसर्जन फूलों व अन्य सामग्री का विसर्जन बिल्कुल ना किया जाए और जो भी धार्मिक अनुष्ठान होते हैं उनमें घरों में मिट्टी की या गोमय से बनी हुई छोटी मूर्ति रखें, जिसको अपने घर के गमलों में ही विसर्जित कर लें। पूजा के फूलों को किसी भी गमले में, बाग बगीचे या सड़क के किनारे मिट्टी में रोपित करें, जिससे वातावरण हरा भरा व शुद्ध रहे और गंगा पवित्र और निर्मल रहे। गंगा में जो मछलियां और जलीय जीव हैं उनका भी हमें विशेष ध्यान रखना है क्योंकि उनके द्वारा ही गंगा की जल को स्वच्छ निर्मल रखा जाता है। गंगा की विदुर कुटी घाट को आरती से पहले सभी गौ भक्तों स्वयं सफाई करेंगे और वहां वृक्षारोपण का कार्यक्रम करेंगे। इस तरह का संकल्प गंगा आरती में लिया गया। गंगा भक्तों ने गंगा को स्वच्छ और निर्मल बनाने के लिए अपने हर संभव प्रयास करने का संकल्प लिया और अधिक से अधिक संख्या में इस साप्ताहिक गंगा आरती में सम्मिलित होने का आह्वान करते हुए डॉ मंजू चौधरी ने विदुर कुटी की घाट के पास गंगा की धारा को लाने के लिए प्रशासन से मांग की।

जल जीवन मिशन: सुस्त इंजीनियर किए जाएंगे बाहर

लखनऊ। ‘हर घर नल योजना’ में सुस्त रफ्तार से काम करने वाले इंजीनियर अब बाहर किए जाएंगे। जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने जल जीवन मिशन के तहत प्रदेश की ‘हर घर नल योजना’ की गहन समीक्षा करते हुए ये संकेत दिए। उन्होंने साफ कहा कि ऐसे इंजीनियरों की योजना में कोई जगह नहीं है। उन्होंने अधिकारियों को नल कनेक्शन संख्या के आधार पर इंजीनियरों की रफ्तार तय करने के निर्देश देते हुए कहा जिन इंजीनियरों की रफ्तार धीमी है उन्हें तत्काल विभाग से बाहर करें।

मुख्य और अधीक्षण अभियंताओं की लगाई क्लासराज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के गोमती नगर स्थित सभागार में बुधवार रात्रि समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने मुख्य और अधीक्षण अभियंताओं की जमकर क्लास लगाते हुए कहा कि ‘हर घर नल योजना’ की प्रगति की लगातार निगरानी की जिम्मेदारी मुख्य अभियंताओं की है। साथ ही चेतावनी दी कि जिन जिलों में काम गति नहीं पकड़ेगा वहां के इंजीनियरों को हटाया जाएगा।

मत रोइए समस्या का रोना- उन्होंने कहा कि गांव-गांव में काम को गति देने के लिए फील्ड में उतरना पड़ेगा। निगरानी करने के साथ, जिला प्रशासन का सहयोग और ग्राम प्रधानों के साथ बैठकें करनी होंगी। उन्होंने इंजीनियरों से एक-एक कर प्रदेश में महिलाओं को दी जा रही पानी जांच की ट्रेनिंग और नल कनेक्शनों के बारे में सवाल पूछे। जलशक्ति मंत्री ने अधिशासी अभियंताओं को टाइम मैनेजमेंट कर काम करने की सलाह देते हुए कहा कि अगर आप लोग समस्या को रोते रहेंगे तो समस्या का समाधान कभी नहीं हो पाएगा। बैठक में प्रमुख रूप से राज्य मंत्री रामकेश निषाद, नमामि गंगे व ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के प्रमुख सचिव अनुराग श्रीवास्तव, जल निगम के एमडी बलकार सिंह   मौजूद रहे।

…तो एजेंसियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई-

जल जीवन मिशन के तहत रेट्रोफिटिंग योजना से जुड़े गांवों में योजना पूरी होने के बाद भी यदि सभी घरों में नल कनेक्शन नहीं मिले तो एजेंसियों को बड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। ऐसी एजेंसियों के खिलाफ विभाग मुकदमा भी दर्ज कराएगा। जांच और कार्रवाई में लापरवाही बरतने वाले इंजीनियरों के खिलाफ भी बड़े एक्शन की तैयारी है। समीक्षा बैठक के दौरान प्रमुख सचिव अनुराग श्रीवास्तव ने रेट्रोफिटिंग योजना से जुड़े गांव की चर्चा करते हुए यह चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि योजना से अंतर्गत आने वाले गांव में हर हाल में सौ फीसदी कनेक्शन होना चाहिए. दोषी एजेंसियों पर कार्रवाई करने में देरी करने वाले इंजीनियरों के खिलाफ भी सख्त एक्शन लिया जाएगा।

यूपी जल निगम बंद! 5327 फील्ड कर्मचारियों का बदला विभाग

यूपी में जल निगम होगा बंद, 5327 फील्ड कर्मचारियों का बदला विभाग

यूपी के सबसे पुराने कॉर्पोरेशन जल निगम को बंद करने की तैयारी अंतिम चरण में है। इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जल निगम के प्रबंध निदेशक अनिल कुमार ने औपचारिक पत्र भेज कर नियमित कर्माचारियों को पंचायती राज विभाग और नगर निकायों में समाहित करने के निर्देश दिए हैं। जल निगम के 5 हजार से ज्यादा कर्मचारियों का मर्जर किया जा रहा है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सबसे पुराने कॉर्पोरेशन जल निगम को बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल निगम के प्रबंध निदेशक अनिल कुमार ने औपचारिक पत्र भेजा है, जिसमें नियमित कर्माचारियों को पंचायती राज विभाग और नगर निकायों में समाहित किया जाएगा।

“यूपी जल निगम के प्रबंध निदेशक अनिल कुमार ने आदेश दिए हैं कि इस विभाग के नियमित 5327 फील्ड कर्मचारियों को पंचायती राज विभाग तथा नगर निकायों में समायोजित कर दिया है। साथ ही प्रदेश जल निगम के बंद किया जाता है।”

वेतन को तरसे कर्मचारी-
जल निगम के कर्मचारी पिछले 15 दिन से वेतन के लिए धरना प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। 8वां महीना लग चुका है लेकिन कर्मचारियों को न वेतन दिया गया है और न ही कोई पेंशन दी जा रही है। उत्तर प्रदेश जल निगम संस्थान मजदूर यूनियन के अध्यक्ष राम सनेही यादव का कहना है कि 12 फरवरी को सभी जिलों में एक दिन का धरना दिया था और इस बाबत मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी सौंपा था।

उधारी चुकाने में ही उड़ जाएगी सितंबर की तनख्वाह -16 फरवरी से जल निगम मुख्यालय पर लगातार धरना-प्रदर्शन चल रहा है। सभी जिलों में भी भोजनावकाश के समय 1 घंटे का धरना-प्रदर्शन किया जा रहा है। एमडी से साथ हुई बैठक राम सनेही यादव ने कहा कि जल निगम के एमडी से बैठक के बाद 1 मार्च को सितंबर, 2020 की सैलरी आई है। अभी अक्टूबर, नवंबर, दिसंबर, जनवरी, फरवरी महीने की सैलरी बाकी है। जितनी सैलरी आई है, वो तो उधारी चुकाने में ही उड़ जाएगी।

योगी का तोहफा: बिजनौर में खो नदी किनारे बसे गांवों के बहुरेंगे दिन

बिजनौर में खो नदी किनारे बसे गांवों के मजरों को बाढ़ से बचाव के लिए कटाव निरोधक कार्य का लोकार्पण व शिलान्यास

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा आज प्रदेश के विभिन्न जिलों में निर्मित होने वाली 1800 करोड़ से अधिक लागत की बाढ़ नियंत्रण 146 परियोजनाओं का लोकार्पण तथा 170 परियोजनाओं का वर्चुअल रूप से किया गया शिलान्यास, बाढ़ की विभीषिका से प्रदेश के नागरिकों की जान-माल को सुरक्षित रखने के लिए 15 मई से पूर्व पूर्ण समयबद्वता और गुणवत्ता के साथ कार्य पूरा करने के दिए निर्देश

बिजनौर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग उत्तर प्रदेश के तत्वाधान में बाढ़ सुरक्षित परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री आज दोपहर 12:00 बजे प्रदेश को बाढ़ से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से वर्चुअल रूप से 146 परियोजनाओं का लोकार्पण और 170 परियोजनाओं का शिलान्यास करने के बाद अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इनमें जिला बिजनौर में खो नदी के दाएं किनारे पर स्थित ग्राम इब्राहीपुर, हसनपुर पालकी, सरकथल सानी एवं उनके मजरों को बाढ़ से बचाव के लिए कटाव निरोधक कार्य लागत ₹9.31 करोड़ का लोकार्पण तथा खो नदी के दाएं किनारे पर स्थित ग्राम मुकरपुरी, सिपाही वाला एवं मुकरपुरी बन्ध को बाढ़ से बचाव के लिए क्यूनेट बनाने का कार्य लागत ₹1.11 करोड़, खो नदी के बाएं किनारे स्थित ग्राम नन्दगांव, नाथाडोई एवं नयागांव को बाढ़ से बचाने के लिए कटाव निरोधक कार्य लागत ₹1.25 करोड़ तथा खो नदी के बाएं किनारे पर स्थित गांव तिपरजोत, उमरपुर आशा एवं तिपरजोत बन्ध लागत ₹2.88 करोड़ की परियोजनाओं का शिलान्यास शामिल है।
एनआईसी के माध्यम से प्रसारित होने वाले इस वर्चुअल कार्यक्रम में जिलाधिकारी रमाकांत पाण्डेय, अपर जिलाधिकारी वि/रा अवधेश कुमार मिश्र, अधिशासी अभियंता सिंचाई रामबाबू के अलावा अन्य अधिकारी मौजूद थे।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार प्रदेश में बाढ़ की विभीषिका से जनसामान्य की जान व माल की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्व है, जिसके लिए धरातल पर प्रयास किए गए हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ से समुचित सुरक्षा के लिए आज उनके द्वारा जिन 146 परियोजनाओं का लोकार्पण और 170 परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया है, प्रदेश में बाढ़ की विभीषिका को समाप्त करने में सहायक सिद्व होंगी। उन्होंने कहा कि 1800 करोड़ से अधिक लागत से तैयार होने वाली उक्त सभी परियोजनाओं को 15 मई,21 से पूर्व समयबद्व रूप से तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बरसात से पूर्व समस्त प्रदेश बाढ़ के संकट से सुरक्षित रहे और आमजन के धन-जन की हानि न हो पाए।

उन्होंने कहा कि इससे पूर्व बरसात के मौसम में बाढ़ सुरक्षा के लिए कार्य योजनाएं बनाई जाती थीं और आननफानन उनका क्रियान्वयन किया जाता था, जिसके कारण जन सामान्य को उसका लाभ नहीं मिल पाता था। उन्होंने कहा कि उक्त स्थिति को मद्देनजर रखते हुए शासन द्वारा माह जनवरी में ही बाढ़ से सुरक्षा के लिए परियोजनाओं का संचालन किया गया। इसमें 146 का लोकार्पण उनके द्वारा किया गया, जबकि 170 परियोजनाएं, जिनका आज शिलान्यास किया गया है, उन्हें समयबद्वता और पूर्ण गुणवत्ता के साथ 15 मई तक पूरा करने के निर्देश संबंधित विभागीय अधिकारियों को दिए गए हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि कार्य की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने और समयबद्वता के साथ कार्य पूरा करने के लिए जिलाधिकारी एवं जन प्रतिनिधियों द्वारा समय समय पर सत्यापन किया जाना सुनिश्चित किया जाए और कार्य पूर्ण होने के बाद जन प्रतिनिधियों द्वारा परियोजना का उद्घाटन कराएं।

1800 करोड़ से अधिक की 146 बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं का लोकार्पण

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा आज प्रदेश के विभिन्न जिलों में निर्मित होने वाली 1800 करोड़ से अधिक लागत की बाढ़ नियंत्रण 146 परियोजनाओं का लोकार्पण तथा 170 परियोजनाओं का वर्चुअल रूप से किया गया शिलान्यास, बाढ़ की विभीषिका से प्रदेश के नागरिकों की जान-माल को सुरक्षित रखने के लिए 15 मई से पूर्व पूर्ण समयबद्वता और गुणवत्ता के साथ कार्य पूरा करने के दिए निर्देश

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार प्रदेश में बाढ़ की विभीषिका से जनसामान्य की जान व माल की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्व है, जिसके लिए धरातल पर प्रयास किए गए हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ से समुचित सुरक्षा के लिए आज उनके द्वारा जिन 146 परियोजनाओं का लोकार्पण और 170 परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया है, प्रदेश में बाढ़ की विभीषिका को समाप्त करने में सहायक सिद्व होंगी। उन्होंने कहा कि 1800 करोड़ से अधिक लागत से तैयार होने वाली उक्त सभी परियोजनाओं को 15 मई,21 से पूर्व समयबद्व रूप से तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बरसात से पूर्व समस्त प्रदेश बाढ़ के संकट से सुरक्षित रहे और आमजन के धन-जन की हानि न हो पाए।
मुख्यमंत्री आज दोपहर 12:00 बजे प्रदेश को बाढ़ से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से वर्चुअल रूप से 146 परियोजनाओं का लोकार्पण और 170 परियोजनाओं का शिलान्यास करने के बाद अपने विचार व्यक्त कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि इससे पूर्व बरसात के मौसम में बाढ़ सुरक्षा के लिए कार्य योजनाएं बनाई जाती थीं और आननफानन उनका क्रियान्वयन किया जाता था, जिसके कारण जन सामान्य को उसका लाभ नहीं मिल पाता था। उन्होंने कहा कि उक्त स्थिति को मद्देनजर रखते हुए शासन द्वारा माह जनवरी में ही बाढ़ से सुरक्षा के लिए परियोजनाओं का संचालन किया गया। इसमें 146 का लोकार्पण उनके द्वारा किया गया, जबकि 170 परियोजनाएं, जिनका आज शिलान्यास किया गया है, उन्हें समयबद्वता और पूर्ण गुणवत्ता के साथ 15 मई तक पूरा करने के निर्देश संबंधित विभागीय अधिकारियों को दिए गए हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि कार्य की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने और समयबद्वता के साथ कार्य पूरा करने के लिए जिलाधिकारी एवं जन प्रतिनिधियों द्वारा समय समय पर सत्यापन किया जाना सुनिश्चित किया जाए और कार्य पूर्ण होने के बाद जन प्रतिनिधियों द्वारा परियोजना का उद्घाटन कराएं।

बिजनौर में खो नदी किनारे बसे गांवों के बहुरेंगे दिन

मुख्यमंत्री द्वारा सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग उत्तर प्रदेश के तत्वाधान में बाढ़ सुरक्षित परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया गया। उनमें जिला बिजनौर में खो नदी के दाएं किनारे पर स्थित ग्राम इब्राहीपुर, हसनपुर पालकी, सरकथल सानी एवं उनके मजरों को बाढ़ से बचाव के लिए कटाव निरोधक कार्य लागत ₹9.31 करोड़ का लोकार्पण तथा खो नदी के दाएं किनारे पर स्थित ग्राम मुकरपुरी, सिपाही वाला एवं मुकरपुरी बन्ध को बाढ़ से बचाव के लिए क्यूनेट बनाने का कार्य लागत ₹1.11 करोड़, खो नदी के बाएं किनारे स्थित ग्राम नन्दगांव, नाथाडोई एवं नयागांव को बाढ़ से बचाने के लिए कटाव निरोधक कार्य लागत ₹1.25 करोड़ तथा खो नदी के बाएं किनारे पर स्थित गांव तिपरजोत, उमरपुर आशा एवं तिपरजोत बन्ध लागत ₹2.88 करोड़ की परियोजनाओं का शिलान्यास शामिल है।
एनआईसी के माध्यम से प्रसारित होने वाले इस वर्चुअल कार्यक्रम में जिलाधिकारी रमाकांत पाण्डेय, अपर जिलाधिकारी वि/रा अवधेश कुमार मिश्र, अधिशासी अभियंता सिंचाई रामबाबू के अलावा अन्य अधिकारी मौजूद थे।

…..तो पानी लेकर लखनऊ जाएंगे, मुख्यमंत्री जी को दिखाएंगे!

…..तो पानी लेकर लखनऊ जाएंगे, मुख्यमंत्री जी को दिखाएंगे!

स्वच्छ पानी को लेकर मिनी छपरौली के ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

4 साल से अधूरी पड़ी खानपुर खादर में पानी की टंकी

बिजनौर (मुरादाबाद)। मिनी छपरौली के नाम से विख्यात चांदपुर की जनता परेशान है। जल निगम के अधिकारियों की लापरवाही के चलते ब्लाक जलीलपुर की ग्राम पंचायत खानपुर खादर में पानी की टंकी का निर्माण अधूरा पड़ा हुआ है। जल संकट से जूझती करीब 15 हजार की आबादी में इसे लेकर गुस्सा है। ब्लाक जलीलपुर की ग्राम पंचायत खानपुर खादर में अधूरी पड़ी पानी की टंकी का बोर लगभग 4 साल पहले हुआ था। इस टंकी से करीब 15 हजार आबादी को जल संकट से बचाया जा सकता है। यहां के कई गांव का पानी दूषित पाया गया है और इस्तेमाल योग्य नहीं है। जल निगम के अधिकारियों ने भी जांच की थी। आरोप है कि विभाग कि लापरवाही के चलते इस टंकी का कार्य पूरा नहीं किया जा सका। कई बार विभागीय अधिकारीयो को पत्र लिखकर ग्राम प्रधान ने भी अवगत कराया, परन्तु कोई सुनवाई नहीं हुई। इस मामले को लेकर ग्रामीणों ने धरना प्रदर्शन, भूख हड़ताल कर शासन प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराने का प्रयास भी किया था। तब पूर्व विधायक बिजनौर रूचिवीरा  व पूर्व मंत्री स्वामी ओमवेश ने मौके पर पहुंच कर समस्या के समाधान का आश्वासन दिया था। मौके पर पहुंचे जल निगम के अधिकारियों के पेयजल टंकी बनाने का भरोसा दिलाया, तब जा कर आंदोलन समाप्त किया गया था। आंदोलन ग्रामवासी राजपाल सिंह, रहीस खान, डा० खुर्शीद, हरि सिंह, चरन सिंह, मो. अनस, कालू टिकैत, मोहम्मद हनीफ, रामफल सिंह, गजनफर अली, छोटे पंडित आदि ने जिले के आला अधिकारियों से इस ओर ध्यान देने की मांग की है।

…..तो पानी लेकर लखनऊ जाएंगे, मुख्यमंत्री जी को दिखाएंगे! आक्रोशित ग्रामीणों का कहना है कि अब अखबार के माध्यम से इन अधिकारियों तक संदेश पहुचा रहे हैं। विभाग टंकी का कार्य पूरा कराए, ताकि लोगों को शुद्ध पानी मिल सके। अब भी सुनवाई नहीं हुई तो पानी लेकर लखनऊ जाएंगे और मुख्यमंत्री को दिखाएंगे।

4 साल से अधूरी पड़ी खानपुर खादर में पानी की टंकी

4 साल से अधूरी पड़ी खानपुर खादर में पानी की टंकी

बिजनौर (चांदपुर): जल निगम के अधिकारियों की लापरवाही के चलते ब्लाक जलीलपुर की ग्राम पंचायत खानपुर खादर में पानी की टंकी का निर्माण अधूरा पड़ा हुआ है। जल संकट से जूझती करीब 15 हजार की आबादी में इसे लेकर गुस्सा है। ब्लाक जलीलपुर की ग्राम पंचायत खानपुर खादर में अधूरी पड़ी पानी की टंकी का बोर लगभग 4 साल पहले हुआ था। इस टंकी से करीब 15 हजार आबादी को जल संकट से बचाया जा सकता है। यहां के कई गांव का पानी दूषित पाया गया है और इस्तेमाल योग्य नहीं है। जल निगम के अधिकारियों ने भी जांच की थी। आरोप है कि विभाग कि लापरवाही के चलते इस टंकी का कार्य पूरा नहीं किया जा सका। कई बार विभागीय अधिकारीयो को पत्र लिखकर ग्राम प्रधान ने भी अवगत कराया, परन्तु कोई सुनवाई नहीं हुई। ग्रामवासी राजपाल सिंह, रहीस खान, डा० खुर्शीद, हरि सिंह, चरन सिंह, मो. अनस आदि ने जिले के आला अधिकारियों से इस ओर ध्यान देने की मांग की है।

राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के अंतर्गत दिए गए 3.04 करोड़ नए कनेक्शन

राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के अंतर्गत दिए गए 3.04 करोड़ नए कनेक्शन

27 जिलों, 458 ब्‍लॉकों, 33,516 ग्राम पंचायतों, 66,210 गांवों में “हर घर जल” लक्ष्य हासिल



नई दिल्ली। जल जीवन मिशन ने ‘कोई व्यक्ति न छूटे’ का दृष्टिकोण अपनाते हुए प्रत्येक ग्रामीण परिवारों को पाइप जल कनेक्शन देने का महत्वकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। एक वर्ष की कम अवधि में इस मिशन के अंतर्गत ग्रामीण परिवारों को 3.04 करोड़ नए कनेक्शन दिये जा चुके हैं।

जल शक्ति राज्य मंत्री रतनलाल कटारिया ने सरकार के प्रमुख कार्यक्रम– जल जीवन मिशन की प्रगति की समीक्षा की। पेय जल तथा स्वच्छता विभाग के अपर सचिव श्री भरत लाल द्वारा मिशन की प्रगति के बारे में एक प्रजेंटेंशन दिया गया। श्री कटारिया ने बताया कि स्वतंत्रता के बाद से अगस्त, 2019 तक कुल 3.23 करोड़ ग्रामीण परिवारों (कुल 18.93 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से) नल के पानी के कनेक्शन थे, लेकिन एक वर्ष की कम अवधि में इस मिशन के अंतर्गत ग्रामीण परिवारों को 3.04 करोड़ नए कनेक्शन दिये जा चुके हैं।
गोवा में 100% लक्ष्य हासिल:
उन्होंने बताया कि गोवा 100 प्रतिशत पाइप कनेक्शन प्रदान करने वाला पहला राज्य है। अभी तक 27 जिलों, 458 ब्‍लॉकों, 33,516 ग्राम पंचायतों, 66,210 गांवों को “हर घर जल” लक्ष्य हासिल करने की घोषणा की गई है। हाल में इस लक्ष्य को प्राप्त करने वाला कुरुक्षेत्र देश का 27वां और हरियाणा का तीसरा जिला हो गया है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय इन गांवों, ग्राम पंचायतों के लोगों, पानी समितियों से जुड़े लोगों, सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों तथा अन्य हितधारकों को दिया। तेलंगाना, गुजरात, हरियाणा, केंद्र शासित पुद्दुचेरी 100 प्रतिशत कवरेज हासिल करने के निकट हैं। कवरेज बढ़ाने में प्रगति करने वाले राज्य हैं – हिमाचल प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, मणिपुर, मिजोरम और केंद्र शासित अंडमान तथा निकोबार।

भविष्य के रोडमैप के लिए दो राज्य (बिहार, तेलंगाना) तथा दो केंद्र शासित प्रदेश (पुद्दुचेरी तथा अंडमान तथा निकोबार) द्वारा 2021 में 100 प्रतिशत कवरेज हासिल किये जाने का अनुमान है। मंत्रालय वेबपोर्टल तथा मोबाइल एप के जरिये इस योजना की प्रगति के बारे में सार्वजनिक रूप से नवीनतम और प्रासंगिक सूचना देने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का लाभ उठा रहा है।

मूक क्रांति का रूप ले रही परियोजना: श्री कटारिया ने बताया कि यह परियोजना मूक क्रांति का रूप ले रही है क्योंकि जाति, समुदाय, धर्म, नस्ल या रंग के आधार पर भेदभाव किये बिना सभी ग्रामीण परिवारों को पानी का कनेक्शन प्रदान किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पानी जीवन का अमृत है और यह दु:ख की बात है कि स्वतंत्रता के 7 दशक बाद भी गांवों में महिलाओं को अपने परिवार की घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पीने योग्य पानी लाने के लिए कुछ दूरी तय करनी पड़ती है। इससे उनकी सुरक्षा और सम्मान को खतरा होता है। जल जीवन मिशन एक समावेशी दृष्टिकोण अपना रहा है और गांव जल तथा स्वच्छता समिति/पानी समितियों में ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी का प्रावधान करता है ताकि ग्रामीण कार्य योजनाओं (वीएपी) के समग्र नियोजन और तैयारी में उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो सके। इस मिशन के अंतर्गत प्रत्येक गांव में 5 महिलाओं को फील्ड टेंस्टिंग किट (एफटीके) के उपयोग से पानी की गुणवत्ता की जांच के लिए प्रशिक्षित किया जाता है ताकि इन कनेक्शनों से पीने के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

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दिल्ली हरियाणा वाले बढ़ा रहे यमुना में अमोनिया नाइट्रोजन!

यमुना नदी में क्यों बार-बार बढ़ जाता है अमोनिया नाइट्रोजन ?

CPCB ने जानी असली वजह हरियाणा व दिल्ली वाले !

संयुक्त अध्ययन समूह और निगरानी दल का गठन

नई दिल्ली (धारा न्यूज़): केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने यमुना नदी में बार-बार अमोनिया नाइट्रोजन में बढ़ोतरी के मुद्दे और अल्पकालिक व दीर्घकालिक सुधारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता पर चर्चा करने के लिए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी), हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी), दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी), सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, हरियाणा और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग, दिल्ली के अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की।

इस मुद्दे पर लंबे विचार विमर्श के बाद पहचान की गई और इस बात पर सहमति बनी कि हरियाणा के नदी किनारे के शहरों से बिना शोधित किए दूषित जल का उत्सर्जन, औद्योगिक इकाइयों, सामान्य अपशिष्ट शोधन संयंत्रों (सीईटीपी) और सीवेज शोधन संयंत्रों (एसटीपी) से उत्सर्जन, बाहरी दिल्ली में टैंकरों के माध्यम से बिना सीवर वाली कॉलोनियों से सीवेज का अवैध उत्सर्जन, यमुना नदी के प्रवाह में कमी और नदी के तल पर जमा कीचड़ का अवायवीय अपघटन इसकी प्रमुख संभावित वजह हो सकती हैं।

अध्ययन करने वाले समूह में दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी), हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, हरियाणा, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग, दिल्ली को शामिल किया गया है। यह समूह निगरानी व्यवस्था की एक समान समीक्षा और निगरानी तंत्र को मजबूत बनाने की आवश्यकता, पुराने आंकड़ों के विश्लेषण और प्रमुख स्थलों के साथ साथ ज्यादा अमोनिया के स्तर की अवधि की पहचान के लिए क्षेत्रीय सर्वेक्षण का काम करेगा। समूह से टिकाऊ समाधान के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक उपाय सुझाने और एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट जमा करने के लिए भी कहा गया है।

इसके अलावा, डेजेबी, डीपीसीसी, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग, दिल्ली, एचएसपीसीबी और सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, हरियाणा की भागीदारी वाले एक संयुक्त निगरानी समूह के गठन पर भी सहमति बन गई है।

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कम जलस्तर वाले क्षेत्रों में कॉमर्शियल प्रयोग को जल दोहन की अनुमति नहीं

लघु सिंचाई विभाग की बैठक लेते जिलाधिकारी रमाकांत पाण्डेय

कम जलस्तर वाले क्षेत्रों में कॉमर्शियल प्रयोग को जल दोहन की अनुमति नहीं

बिजनौर (धारा न्यूज़): जल दोहन का कार्मशियल प्रयोग करने की अनुमति प्राप्त करने वाले व्यापारिक प्रतिष्ठानों के स्वामियों अथवा संचालकों को प्रतिष्ठान स्थल पर जल का स्तर और दैनिक रूप से दोहन किए जाने वाले जल का पूरा विवरण संकलित करने के पश्चात ही अनुज्ञापत्र जारी करें। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि मानक से कम जल स्तर पाए जाने वाले क्षेत्रों में कार्मशियल प्रयोग के लिए जल दोहन की अनुमति भी न प्रदान की जाए। जिलाधिकारी रमाकांत पाण्डेय ने लघु सिंचाई विभाग के अधिकारी को यह निर्देश देते हुए कहा कि निरन्तर रूप से भूजल के गिरते स्तर के दृष्टिगत शासन द्वारा निर्गत दिशा-निर्देशों का गंभीरता के साथ अनुपालन कराना सुनिश्चित कराएं।

जिलाधिकारी श्री पाण्डेय कलक्ट्रेट स्थित अपने कार्यालय कक्ष में लघु सिंचाई विभाग के तत्वाधान में आयोजित वाटर हार्वेस्टिंग एवं भूगर्भ जल स्तर से संबंधित बैठक की अध्यक्षता करते हुए उपस्थित अधिकारियों को निर्देश दे रहे थे।
उन्होंने कहा कि यदि भूगर्भ जल का अनावश्यक रूप से दोहन न रोका गया और वर्षा जल का संरक्षण न किया गया तो भविष्य में जल संकट की स्थिति भयानक त्रासदी का कारण बनेगा। लघु सिंचाई विभाग द्वारा जल का वाणिज्यिक प्रयोग करने के लिए बनाई गई उप समिति किसी भी प्रतिष्ठान को तब तक जल दोहन की अनुमति न प्रदान करे जब तक प्रस्तावित प्रतिष्ठान के भूगर्भ का कम से कम और ज्यादा से ज्यादा जल स्तर और उसकी प्रतिदिन की खपत से संबंधित सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त न कर ले।

उत्कृष्ट कार्य करने वाले एनजीओ, किसानों, विद्यार्थियों के नामों का करें चयन

शासन द्वारा भूगर्भ जल स्तर बढ़ाने, जल संरक्षण एवं जल स्वच्छता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले एनजीओ, किसानों, विद्यार्थियों के नामों का चयन कर उनके नाम शासन को प्रेषित करना सुनिश्चित करें ताकि उन्हें शासन स्तर से पुरस्कृत किया जा सके। उन्होंने भूगर्भ जल स्तर बढ़ाने, जल संरक्षण एवं जल स्वच्छता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले एनजीओ, किसानों, शोध कर रहे विद्यार्थियों का आव्हान किया कि वे अपने नाम एवं आवश्यक विवरण कार्यालय लघु सिंचाई विभाग कार्यालय, बिजनौर में तत्काल उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें तथा अधिक जानकारी के लिए सहायक अभियन्ता राजेश कुमार वर्मा के मोबाईल नम्बर-8840607635 पर सम्पर्क स्थापित करें।

इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी के0पी0 सिंह, अपर जिलाधिकारी प्रशासन विनोद कुमार गौड़, उप जिलाधिकारी परमानंद झा, सहायक अभियन्ता, लघु सिंचाई राजेश कुमार वर्मा सहित अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद थे।

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शुल्क जमा नहीं तो, भूगर्भ जल नहीं!

बिना पंजीकरण शुल्क नहीं किया जा सकेगा भूगर्भ जल का व्यवसायिक एवं सामूहिक प्रयोग: जिलाधिकारी

बिजनौर। जिलाधिकारी रमाकान्त पाण्डेय ने बताया कि वर्तमान में भूगर्भ जल के अनियंत्रित और तीव्र निष्कर्षण के फलस्वरूप भूगर्भ जल के स्तरों में आई गिरावट से भयप्रद स्थिति पैदा हो गई है, जिससे राज्य के अनेक भागों के ग्रामीण एवं शहरी भूगर्भ जल के स्रोतों में निरन्तर रूप से कमी आ रही है। उन्होंने बताया कि राज्य के विशेष रूप से संकटग्रस्त क्षेत्रों में परिमाणात्मक एवं गुणात्मक भूगर्भ जल का अविरत प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए भूगर्भ जल की सुरक्षा, सरंक्षा, नियंत्रण तथा विनियमन और उससे संसबंधित या आनुषंगिक विषयों का उपबंधन करने के लिए उत्तर प्रदेश भूगर्भ जल (प्रबंधन और विनिययम) अधिनियम-2019 लागू किया गया है। उन्होंने बताया कि उक्त अधिनियम के अंतर्गत औद्योगिक, व्यवसायिक एवं सामुहिक रूप से भूगर्भ जल का प्रयोग करने के लिए निर्धारित पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। उन्होंने बताया कि इस अधिनियम के अधीन किए गए शास्तिक उपबंध, भूगर्भ जल के घरेलू और कृषि उपयोगकर्ताओं पर प्रयोज्य नहीं होंगे।
जिलाधिकारी श्री पाण्डेय कलक्ट्रेट स्थित अपने कार्यालय कक्ष में आयोजित जिला भूगर्भ जल प्रबन्धन परिषद बैठक की अध्यक्षता करते हुए उपस्थित अधिकारियों को निर्देश दे रहे थे।
उन्होंने बताया कि भूगर्भ जल में निरन्तर रूप से आ रही गिरावट के दृष्टिगत उसका संरक्षण समय की बड़ी आवश्यकता है, इसलिए विशेष रूप से अतिदोहित तथा संकटग्रस्त क्षेत्रों में इसका प्रबंधन, नियंत्रण और विनियमन किया जाना इस बहुमूल्य संसाधन की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि उक्त अधिनियम के तहत भूगर्भ जल का व्यवसायिक प्रयोग करने वाले प्रतिष्ठानों के लिए निर्धारित शुल्क रू0 5,000/- जमा कराना और पंजीकरण कराना अनिवार्य है, जिसके उल्लघंन पर आर्थिक दण्ड का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि वाणिज्य उपयोक्ता का तात्पर्य विकास प्राधिकरण तथा ऐसी किसी संस्था या किसी अभिकरण या किसी अधिष्ठान जो उक्त प्रयोजनार्थ भूगर्भ जल का निष्कर्षण और उपयोग करता है, सहित ऐसे किसी व्यक्ति या व्यक्ति समूह से है जो वित्तीय उपलब्धि या लाभ के लिए अपने कारोबार या व्यापार के लिए प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से लाभ प्राप्त करता है आदि शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि इस अधिनियम के अंतर्गत शासस्तिक उपबंध, भूगर्भ जल के घरेलू तथा कृषि उपयोगकर्ता शामिल नहीं हैं।
श्री पाण्डेय ने यह भी बताया कि विद्यमान वाणिज्यिक, औद्योगिक, अवसंरचानात्मक और सामुहिक भूगर्भ जल उपयोक्ता का पंजीकरण अधिसूचित क्षेत्रों में अवस्थित प्रत्येक वाणिज्यिक, औद्यागिक, अवसंरचानात्मक और सामुहिक कुप उपयोक्ता को पंजीकरण प्रमाण पत्र स्वीकृत किए जाने के लिए संबंधित जिला भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद को आवेदन करना अनिवार्य है। उन्होंने सचेत करते हुए कहा कि यदि कोई वाणिज्यिक या सामूहिक उपयोक्ता पंजीकरण के बिना भूगर्भ जल निकालते हुए पाया जाता है, तो उसके विरूद्व अभिकरण अध्याय-8 के अधीन दंडित किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट करते हुए यह भी बताया कि भूगर्भ जल निकालने के लिए भूमि बेधन में पहले से ही लगे हुए प्रत्येक व्यक्ति, फर्म, अभिकरण या कम्पनी को जिला भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा, बिना पंजीकरण के बिना भूगर्भ जल निकालने का प्रयास दण्डनीय अपराध माना जाएगा।

इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी के0पी0सिंह, अपर जिलाधिकारी न्यायिक डा0 नितिन मदान, उप जिलाधिकारी सदर विक्रमादित्य सिंह मलिक, सहायक अभियन्ता लघु सिंचाई/नोडल अधिकारी राजकुमार वर्मा सहित परिषद के सदस्यगण मौजूद थे।

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