नेताओं के लिए सेवानिवृत्ति की कोई उम्र नहीं..?

साभार

साठ साल में किसी कामगार को नियमित काम करने लायक मानने से इनकार, लेकिन राजनीति में बड़े-बुजुर्ग नेता अपने पद से रिटायर ही नहीं होना चाहते..!!

नेताओं के लिए सेवानिवृत्ति की कोई उम्र नहीं..?

जिसे एक बार सत्ता का चस्का लग जाता है वह जीते जी उस पद को छोड़ना नहीं चाहता..!!

पुरानी पीढ़ी की नई पीढ़ी की लड़ाई है! जिसे एक बार सत्ता का चस्का लग जाता है वह जीते जी उस पद को छोड़ना नहीं चाहता और नई पीढ़ी के लिए मार्ग प्रशस्त नहीं करना चाहता! छोटे से संगठन से लेकर बड़ी-बड़ी संस्थाओं और राजनीतिक पार्टियों का यही हाल है। बड़े-बुजुर्ग लोग अपने पद से रिटायर ही नहीं होना चाहते! व नई पीढ़ी को अपरिपक्व समझते हैं! जब तक नई पीढ़ी आगे नहीं आएगी दायित्व नहीं संभालेगी, जिम्मेदारी नहीं संभालेगी तब तक उन्हें अनुभव कैसे प्राप्त होगा! आज नेताओं के लिए सेवानिवृत्ति की कोई उम्र नहीं है! वह रिटायर होना ही नहीं चाहते और युवा पीढ़ी को आगे आने नहीं देना चाहते तो कैसा चलेगा? आज जरूरत है नेताओं और मंत्रियों के लिए एक उम्र सीमा निर्धारित की जानी चाहिए! अगर कोई ज्यादा बुद्धिमान और जरूरी है तो उन्हें पार्टी में मार्गदर्शक मंडल में लिया जा सकता है! जीवन के चौथेपन में प्रवेश कर चुके नेताओं को भी राजनीति का मोह त्यागने की आदत डाल लेनी चाहिए! हालत यह है कि जीवन के अंतिम दौर में पहुंचे नेता भी देश के संचालन का निर्देशन करते रहते हैं और दूसरी ओर अट्ठावन या साठ साल में किसी कामगार को नियमित काम करने लायक मानने से इनकार कर दिया जाता है।

BJP प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने किया यूपी की 80 सीट जीतने का दावा

ब्रेकिंग न्यूज़, दिव्य विश्वास

बिजनौरभाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी पहुंचे बिजनौर।
PWD गेस्ट हाऊस में प्रदेश अध्यक्ष ने की प्रेस वार्ता।
2024 लोकसभा चुनाव में यूपी की 80 सीट जीतने का किया दावा।


MLC व नगर निकाय चुनाव में हर वार्ड में भाजपा उतारेगी कैंडीडेट-भूपेंद्र चौधरी।
जन~जन तक सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को दी जाएगी जानकारी-भूपेंद्र चौधरी।

कमजोर लोगों को नीचा दिखाना और उनके साथ बदसलूकी…!!

कुछ बड़े लोग कमजोर लोगों को नीचा दिखाते और उनके साथ करते बदसलूकी…!!

जो दूसरों के घर का सहारा बनते उनकी इज्जत और मान सम्मान से नहीं होना चाहिए खिलवाड़

काम के एवज में मिलना चाहिए उन्हें सम्मान और मेहनताना..!

समानता और बराबरी की बात अब सिर्फ कागजी..!!

तस्लीम बेनकाब, मुजफ्फरनगर

कभी गार्ड को थप्पड़ मारना, कभी घर मे काम करने वाली महिला व बच्ची के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट, कभी गंदी मानसिकता का ओछापन दिखाते हुए काम करने वाली महिलाओं के साथ छेड़छाड़ करना…ऐसी ही कुछ घटनाएं लगातार हमारे कथित सभ्य समाज पर प्रश्नचिह्न खड़े करती हैं! हमें यह सोचने की जरूरत है कि क्या एक गरीब व्यक्ति का मान सम्मान नहीं होता। काम के एवज में चंद पैसे देने वाले कुछ बड़े घरों के लोग कमजोर लोगों को नीचा दिखाने और उनके साथ बदसलूकी करने में तनिक देर नहीं लगाते, जबकि उन्हें पता होता है कि घर की सुरक्षा से लेकर साफ सफाई तक सब यही कामगार करते हैं। क्या यह एक आभिजात्य अहं की वजह से होता है? क्या इस तरह कुंठाओं के रहते कोई खुद के सभ्य होने का दावा कर सकता है? देखा जाए तो यह सामंती मानसिकता का परिचायक है!आज कल बहुत सारे घरों में नौकर रखने का चलन तो बढ़ रहा है लेकिन बिना किसी सुविधा के कम वेतन पर काम कराया जाता है। यहां तक कि कई बार बंधुआ मजदूर बना कर लोगों को रखा जाता है। घरेलू कामकाज को आज भी अन्य कामों की तरह नहीं समझा जाता। यहां तक कि समाज में भी इस काम को कोई इज्जत नहीं दी जाती और इस काम की आड़ में सबसे ज्यादा किसी का शोषण होता है तो वे महिला मासूम बच्चे कामगार हैं। उनका आर्थिक और कई बार शारीरिक, दोनों तरह से शोषण किया जाता है।

भले ही सरकार ने घरेलू कामगार महिलाओं के अधिकारों के लिए कानून बना रखा हो पर इसे व्यवहार में आज तक लागू नहीं किया गया। आज भी समाज में घरेलू कामगारों की दयनीय स्थिति बनी हुई है, जबकि अगर ये कामगार घरों में काम करना बंद कर दें तो बड़े बड़े घरों और कोठियों में रहने वालों की सहज जिंदगी में आफत आ जाए। इन बड़े घरों के बच्चे समय से न स्कूल पहुंचेंगे और न नौकरी पेशा वाले लोग काम पर। जिस काम से तकरीबन कई करोड़ महिलाएं, बच्चे और जवान जुड़े हुए हों और वह दलित वंचित तबके से आते हों, उनके साथ उच्च-कुलीन वर्ग के लोग ऐसा व्यवहार करते हैं। यह सब उस संवैधानिक ढांचे वाले देश की स्थिति है, जहां बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने समानता और बराबरी की बात कही थी। चलिए एक दफा बराबरी के सपने अलग देखते हैं लेकिन किसी का हक मारना और उससे काम करवाने के बाद उसे ही प्रताड़ित करना कहां का न्याय है और ऐसे बर्ताव का स्रोत क्या है? कहते हैं कि मानव सेवा ही माधव सेवा है। ऐसे में सेवा करते नहीं बनता तो कोई बात नहीं लेकिन जो दूसरों के घर का सहारा बनते हैं उनकी इज्जत और मान-सम्मान से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए और उनके काम के एवज में सम्मान और मेहनताना मिलना चाहिए। इसे सुनिश्चित करने का काम सरकार और सभ्य समाज दोनों का है।

जयंती विशेष (24 सितंबर): जपो निरन्तर एक ज़बान, हिंदी, हिंदू, हिंदुस्तान…

जयंती विशेष (24 सितंबर)

जपो निरन्तर एक ज़बान, हिंदी, हिंदू, हिंदुस्तान..

भारतेंदु युग के प्रमुख स्तंभ पंडित प्रताप नारायण मिश्र की अल्प आयु में पिता की मृत्यु के चलते औपचारिक पढ़ाई तो बहुत नहीं हो पाई लेकिन स्वाध्याय के बल पर वह पत्रकारिता और साहित्य के प्रकांड पंडित बने। परवर्ती साहित्यकारों और संपादकों में तो उनके प्रति सम्मान का भाव था ही पूर्ववर्ती साहित्यकार भी उनके पांडित्य से प्रभावित रहा करते थे।
24 सितंबर 1856 को जन्मे पंडित प्रताप नारायण मिश्र के जन्म स्थान को लेकर साहित्यकारों में कुछ मतभेद हैं। आचार्य रामचंद्र शुक्ल और डॉ सुरेश चंद्र शुक्ल ने उनके जन्म स्थान के रूप में कानपुर को मान्यता दी है। इनका मत है कि पंडित प्रताप नारायण के पिता पंडित संकटा प्रसाद मिश्र को परिवार पालन के लिए 14 वर्ष की अल्पायु में कानपुर आना पड़ा। इसलिए उनका (प्रताप नारायण) जन्म कानपुर में ही हुआ होगा लेकिन अपने संपादन में ‘प्रताप नारायण मिश्र कवितावली’ प्रकाशित करने वाले नरेश चंद्र चतुर्वेदी और डॉ शांति प्रकाश वर्मा उनका जन्म उन्नाव जनपद के बैजेगांव (अब बेथर) ही मानते हैं। ‘भारतीय साहित्य के निर्माता प्रताप नारायण मिश्र’ पुस्तक में रामचंद्र तिवारी लिखते हैं-‘मिश्रा जी का जन्म बैजेगांव में हुआ हो या ना हुआ हो उनकी रचनाओं में गांव का अंश कुछ अधिक ही है।’

मासिक पत्र ब्राह्मण का प्रकाशन :
भारतेंदु हरिश्चंद्र की परंपरा जारी रखने के लिए आर्थिक कठिनाइयों के बाद भी पंडित प्रताप नारायण मिश्र ने मार्च 1883 में ब्राह्मण नाम से मासिक पत्र प्रकाशित करना शुरू किया। ब्राह्मण के प्रथम अंक में अपना उद्देश्य स्पष्ट करते हुए उन्होंने लिखा था-‘अंतः करण से वास्तविक भलाई चाहते हुए सदा अपने यजमानों (ग्राहकों) का कल्याण करना ही हमारा मुख्य कर्म होगा’। 550 रुपए का घाटा सहकर वह 7 वर्षों तक ब्राम्हण का निरंतर प्रकाशन करते रहे। इसके बाद प्रकाशन का दायित्व खड्गविलास प्रेस बांकीपुर के मालिक बाबू रामदीन सिंह को सौंप दिया।

हिंदी के लिए पूर्णत: समर्पित:
पंडित प्रताप नारायण मिश्र हिंदी के बहुत बड़े हिमायती थे। अपने मासिक पत्र ब्राह्मण में हिंदी को लेकर वह जब का लेख लिखते रहते थे। एक बार समकालीन प्रकाशन ‘फतेहगढ़ पंच’ ने उनकी हिंदी पक्षधरता के खिलाफ लेख प्रकाशित किया। इस पर उनका गुस्सा बढ़ गया। उन्होंने फतेहगढ़ पंच के लेख के जवाब में ब्राह्मण में कई महीने तक लिखा। दोनों के बीच कई महीने विवाद चलता रहा। उसी बीच उन्होंने हिंदी पर एक कविता लिखी, जो काफी चर्चित हुई-

चहहु जो सांचे निज कल्यान, तो सब मिलि भारत संतान
जपो निरंतर एक ज़बान -हिंदी, हिंदू, हिंदुस्तान
तबहि सुधरिहे जन्म-निदान; तबहिं भलो करिहे भगवान

मसखरी की मिसालें :
प्रताप नारायण मिश्र स्वभाव से मस्त मौला थे। मसखरे थे। नाटकों में अभिनय भी करते थे। कानपुर की सड़कों पर वह लावनी गाते हुए कभी रिक्शे पर कभी पैदल निकलते थे। फागुन में इकतारा लेकर वह उपदेशपूर्ण, हास्य, होली, कबीर और पद आदि भी गाते थे। वह सांस बंद कर के घंटों तक मुर्दा से पड़े रहते थे। अपने कान एक या दोनों उन्हें हिलाते या फड़काते थे। तब उनके दूसरे अंग स्थिर रहते थे। उनकी मसखरी की मिसालें भी खूब चर्चित हैं।
एक बार नाटक में उनको स्त्री का रूप लेना था। मूछों का मुंड़ाना जरूरी था। भक्ति भाव से अपने पिता के सामने हाजिर हुए और बोले यदि आप आज्ञा दीजिए तो इनको (मूंछों) मुड़वा डालूं। मैं अनाज्ञाकारी नहीं बनना चाहता।’ पिता ने हंसकर आज्ञा दे दी। इसी तरह एक बार कानपुर म्युनिसिपिलटी में इस बात पर विचार हो रहा था कि भैरव घाट में मुर्दे बहाए जाएं या नहीं। चर्चा के बीच किसी ने कहा कि जले हुए मुर्दे की पिंडी यदि इतने इंच से अधिक न हो तो बहाई जाए। दर्शकों में प्रताप नारायण भी मौजूद थे। वह तत्क्षण खड़े होकर बोले- ‘अरे दैया रे दैया! मरेउ पर छाती नापी जाई!’ इस पर खूब जोर के ठहाके लगे।
ऐसा ही एक किस्सा पादरी से बातचीत का है। पादरी ने व्यंग्य पूर्ण लहजे में कहा-आप गाय को माता कहते हैं। उन्होंने कहा- हां। पादरी बोला तो बैल को आप चाचा कहेंगे। इस पर उनका जवाब था- बेशक रिश्ते से क्या इंकार है? पादरी ने तंज कसते हुए कहा-हमने तो 1 दिन अपनी आंखों से एक बार को महिला खाते देखा था। मिश्र जी ने कहा- अजी साहब, वह इसाई हो गया होगा! हिंदू समाज में ऐसे भी बैल होते हैं।’ पादरी मुंह लटका कर चला गया।

लावनी सुनकर कन्नौज के कसाइयों ने छोड़ दी थी गोहत्या:

पंडित प्रताप नारायण मिश्र गोरक्षा के बहुत बड़े हिमायती थे। कई कविताओं में उन्होंने गोरक्षा पर जोर दिया। अपने निबंध में महावीर प्रसाद द्विवेदी लिखते हैं-‘सुनते हैं कानपुर में जो इस समय गौशाला है उसकी स्थापना के लिए प्रयत्न करने वालों में प्रताप नारायण भी थे। एक बार स्वामी भास्कर आनंद के साथ वह कन्नौज गए और गौ रक्षा पर व्याख्यान दिया। व्याख्यान में एक लावनी कही-

बां-बां करि तृण दाबि दांत सों, दुखित पुकारत गाई है

आचार्य द्विवेदी अपने निबंध में लिखते हैं- मिश्र जी की इस लावनी में करुण रस का इतना अतिरेक था कि मुसलमानों तक पर इसका असर हुआ और एक आध कसाइयों ने गौ हत्या से तौबा कर ली थी।

38 बरस में पूरी हो गई जीवन यात्रा:
अपने दैनंदिन जीवन में सदैव अस्त व्यस्त रहने वाले पंडित प्रताप नारायण मिश्र अक्सर बीमार रहा करते थे। इसी के चलते 38 वर्ष की कम उम्र में 1894 में उन्होंने अपनी जीवन यात्रा पूरी की। अपने इस छोटे से जीवन में उन्होंने साहित्य की हर विधा में लिखा। रामचंद्र तिवारी के अनुसार, प्रताप नारायण ग्रंथावली में उनके 190 निबंध और प्रताप नारायण मिश्र कवितावली में छोटी बड़ी 197 कविताएं संग्रहीत हैं। उन्होंने हिंदी गद्य को समृद्ध किया। उनके गद्य में लोक प्रचलित मुहावरे और कहावतें की भरमार है। डॉ शांति प्रकाश वर्मा ने उनके गद्य से छांटकर मुहावरे और कहावतों का पूरा कोष ही तैयार कर दिया। मुहावरा कोष लगभग 110 प्रश्न का है और कहावतें कुल 16 पृष्ठों में। मिश्रा जी ने अपने लेखों में संस्कृत की जिन सूक्तियों और श्लोकों का उदाहरण दिया है, उनकी संख्या 220 है। उर्दू और फारसी की सूक्तियां कुल 66 हैं। (‘भारतीय साहित्य के निर्माता प्रताप नारायण मिश्र’ लेखक-रामचंद्र तिवारी, पृष्ठ-68)
उनके निधन पर पूर्ववर्ती साहित्यकार बालकृष्ण भट्ट ने असमय निधन पर प्रताप नारायण मिश्र के प्रताप का उल्लेख कुछ यूं किया था-‘प्रातः स्मरणीय बाबू हरिश्चंद्र को जो हिंदी का जन्मदाता कहे तो प्रताप मिश्र को नि:संदेह उस स्तन अधन्या दूध मोहि बालिका का पालन पोषण करता कहना पड़ेगा क्योंकि हरिश्चंद्र के उपरांत उसे अनेक रोग दोष से सर्वथा नष्ट न हो जाने से बचा रखने वाले यही देख पड़े’।
आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी ने 1906 की सरस्वती में एक निबंध ‘पंडित प्रताप नारायण मिश्र’ लिखा था। वह लिखते हैं-‘मैं कोई संदेह नहीं कि प्रताप नारायण में प्रतिभा थी और थोड़ी नहीं बहुत थी। विधता होने से कविता शक्ति में कोई विशेषता नहीं आ सकती उल्टे हानि चाहे उससे कुछ हो जाए। प्रताप नारायण की कविता में प्रतिभा का प्रमाण अनेक जगह मिलता है। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने भारतेंदु युग के प्रमुख निबंधकार प्रताप नारायण मिश्र और बालकृष्ण भट्ट जी की एक साथ चर्चा करते हुए लिखा है-‘पंडित प्रताप नारायण मिश्र और पंडित बालकृष्ण भट्ट ने हिंदी गद्य साहित्य में वही काम किया है जो अंग्रेजी गद्य साहित्य में एडिसन और स्टील ने किया था’। (हिंदी साहित्य का इतिहास- पृष्ठ 467)

∆ गौरव अवस्थी
रायबरेली/ उन्नाव

चप्पल पहनकर बाइक चलाई तो कटेगा चालान

कुछ यातायात नियम ऐसे हैं, जिनके बारे में ज्यादातर लोगों को जानकारी नहीं है। वाहन चालक को लगता है कि वह सभी नियमों का पालन करते हुए सफर कर रहे हैं। उन्हें पता नहीं होता कि वह यातायात नियम का उल्लंघन कर रहे हैं।

नई दिल्ली। मोटर वाहन चलाने वालों को यातायात से जुड़े सभी जरूरी नियमों का पालन करना चाहिए। इससे दो फायदे होंगे, पहला यह कि सुरक्षित यातायात का माहौल बन सकेगा और दूसरा यह कि पुलिस आपका चालान नहीं काटेगी। यातायात से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने पर पुलिस द्वारा चालान काटा जाता है, जुर्माना काफी ज्यादा भी हो सकता है। इसके अलावा कुछ मामलों में जेल भी जाना पड़ सकता है। ऐसे में अगर आप चाहते हैं कि आपका चालान ना कटे तो यातायात नियमों का पालन करें।

चप्पल पहनकर नहीं चला सकते टू-व्हीलर

मौजूदा यातायात नियमों के अनुसार, स्लीपर्स या ‘चप्पल’ पहनकर टू-व्हीलर चलाने की इजाजत नहीं है। इस बारे में शायद बहुत ही कम लोगों को पता है। इसके पीछे कारण यह है कि इस तरह के फुटवियर की वजह पकड़ कमजोर होती है और पैर फिसल सकते हैं। इसके अलावा मोटरसाइकिल पर गियर शिफ्ट करते समय, इस बात की पूरी संभावना है कि इस तरह के फुटवियर से पैर फिसल सकता है और दुर्घटना हो सकती है। इसलिए टू-व्हीलर चलाते समय पूरी तरह से बंद जूते पहनने जरूरी हैं। ऐसा नहीं करने पर 1000 रुपए का जुर्माना लग सकता है।

टू व्हीलर चलाते समय पर ड्रेस कोड
टू व्हीलर चलाते समय ड्राइवर को प्रॉपर ड्रेस कोड का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। जैसे मोटरसाइकिल चलाते वक्त पैंट, शर्ट या टीशर्ट पहनना चाहिए। ये शरीर को पूरी तरह से कवर कर देते हैं। किसी भी हादसे की स्थिति में ये कपड़े शरीर को कुछ हद सुरक्षित रख सकते हैं। अगर आप इस नियम की अनदेखी करते हैं तो आपका 2000 रुपए तक चालान कट सकता है। इसलिए बाइक चलाते वक्त इस नियम का पालन जरूर करें। इसके अलावा, अगर सामान्य नियमों की बात करें तो बाइक पर हेलमेट न पहनने को लेकर 1000 रुपए का जुर्माना लगता है। वहीं, बाइक से जुड़े दस्तावेज नहीं होने पर भी हजारों रुपए का जुर्माना लग सकता है।

डाक विभाग की 12वीं राज्य स्तरीय डाक टिकट प्रदर्शनी ‘यूफिलेक्स–2022’ की तैयारियां

डाक विभाग द्वारा 12वीं राज्य स्तरीय डाक टिकट प्रदर्शनी ‘यूफिलेक्स–2022’ का 15 से 17 अक्टूबर, 2022 तक आयोजन

डाक टिकट प्रदर्शनी ‘यूफिलेक्स–2022’ के संबंध में चीफ पोस्टमास्टर जनरल के.के सिन्हा ने जारी की विशेष बुकलेट

आजादी के अमृत काल में डाक टिकटों के माध्यम से भारत की समृद्धि, संस्कृति एवं विरासत में उत्तर प्रदेश के योगदान को प्रदर्शित करेगा ‘यूफिलेक्स–2022’

लखनऊ। आजादी के अमृत महोत्सव के क्रम में उत्तर प्रदेश डाक परिमण्डल द्वारा 12वीं राज्य स्तरीय डाक टिकट प्रदर्शनी ‘यूफिलेक्स–2022’ का आयोजन 15 अक्टूबर से 17 अक्टूबर, 2022 तक ललित कला अकादमी, अलीगंज, लखनऊ में किया जाएगा। उत्तर प्रदेश परिमण्डल के चीफ पोस्टमास्टर जनरल कौशलेन्द्र कुमार सिन्हा ने इस प्रदर्शनी के आयोजन के संबंध में विशेष बुकलेट जारी करते हुए बताया कि इस प्रदर्शनी में उत्तर प्रदेश के तमाम डाक टिकट संग्रहकर्ताओं द्वारा भारत एवं विश्व के विभिन्न अनूठे व मूल्यवान डाक टिकटों का प्रदर्शन किया जाएगा। गौरतलब है कि पिछली राज्य स्तरीय डाक टिकट प्रदर्शनी आठ वर्ष पूर्व वर्ष 2014 में आयोजित की गयी थी।

चीफ पोस्टमास्टर जनरल श्री कौशलेन्द्र कुमार सिन्हा ने कहा कि डाक टिकट किसी भी देश के सांस्कृतिक एवं सामाजिक जीवन की वास्तविक झांकी प्रस्तुत करते हैं। ‘यूफिलेक्स–2022’ में आजादी के अमृत काल में डाक टिकटों के माध्यम से भारत की समृद्धि, संस्कृति एवं विरासत में उत्तर प्रदेश के योगदान को भी प्रदर्शित किया जायेगा। प्रदर्शनी के तीनों दिवसों पर उत्तर प्रदेश के विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों, स्मारकों, विरासतों, साहित्य, कला, संस्कृति इत्यादि पर विशेष आवरण और विरूपण भी जारी किये जायेंगे। श्री सिन्हा ने कहा कि प्रदर्शनी में युवाओं और स्कूली बच्चों के अंदर एक अभिरुचि के रूप में फिलेटली को विकसित करने हेतु फिलेटलिक वर्कशॉप, पेन्टिंग, क़्विज और अन्य तमाम गतिविधियों का आयोजन किया जायेगा। डाक टिकटों पर अपनी और अपने प्रियजनों की फोटो छपवाने की सुविधा हेतु हेतु ‘माई स्टैम्प’ का विशेष काउंटर भी लगाया जायेगा।

चीफ पोस्टमास्टर जनरल श्री सिन्हा ने बताया कि ‘यूफिलेक्स–2022’ के आयोजन हेतु विभिन्न कमेटियाँ गठित की गई हैं। चीफ पोस्टमास्टर जनरल जहां आयोजन समिति के अध्यक्ष होंगे, वहीं पोस्टमास्टर जनरल कानपुर कर्नल एस. एफ. एच. रिजवी स्टीयरिंग और ज्यूरी/अवार्ड कमेटी, महाप्रबंधक (वित्त) राजेंद्र प्रसाद ट्रेड और वालंटियर कमेटी, पोस्टमास्टर जनरल वाराणसी कृष्ण कुमार यादव पब्लिकेशन, पब्लिसिटी व डिजाइनिंग कमेटी, पोस्टमास्टर जनरल आगरा राजीव उमराव यूथ प्रोग्राम और एलॉटमेंट, प्रदर्शनी, तकनीकी व सुरक्षा कमेटी, पोस्टमास्टर जनरल लखनऊ विवेक कुमार दक्ष रिसेप्शन, हॉस्पिटलिटी, सेरेमोनियल व प्रोग्राम कमेटी के अध्यक्ष होंगे।

देश में 4G सिम के साथ फिर से आई यूनिनॉर

भारत में फिर से आई यूनिनॉर 4G सिम के साथ। मात्र ₹10 रिचार्ज में लाइफ टाइम इनकमिंग सुविधा।

नई दिल्ली (एजेंसियां)। देश में टेलीकॉम कंपनियों के छक्के छुड़ाने के लिए यूनिनॉर (टेलीनॉर) कंपनी फिर से वापस आ रही है। कंपनी 4G सिम के साथ वापस लौट रही है। इसमें बेहद कम दाम में लाइफ टाइम फ्री इनकमिंग की सुविधा मिलेगी। वैसे इस बात की पुष्टि हम नहीं करते हैं, वायरल न्यूज़ के अनुसार इस न्यूज़ को बनाया गया है।

देश में मोबाइल कंपनियों की सेवाएं काफी महंगी हो गई हैं। खबर है कि कंपनियां आने वाले समय में रिचार्ज प्लान को और भी महंगा बनाने जा रही हैं। …लेकिन अब टेलीकॉम कंपनियों को एक बार फिर झटका लगने वाला है। यूनिनॉर कंपनी फिर से वापसी के लिए तैयार है। इस बार कंपनी 4जी के साथ वापसी कर रही है। इसके आने से एयरटेल, वोडाफोन आइडिया और बीएसएनएल समेत जियो को बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा। पहले यह कंपनी यूनिनॉर के नाम से चलती रही। बाद में यह बदलकर टेलीनॉर हो गई। कंपनी को घाटे की वजह से एयरटेल ने खरीद लिया। इसके बाद टेलीनॉर का नाम खत्म हो गया, लेकिन एक बार फिर इसकी वापसी की खबर आ रही है।

यूनिनॉर का खास ऑफर

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल आंध्र प्रदेश के इंदौर में एक सितंबर से स्पेशल ऑफर चल रहा है। कुछ खास यूजर्स पहले से ही यूनिनॉर सिम इस्तेमाल कर रहे हैं। यदि आप यूनिनॉर का सिम कार्ड लेते हैं या पुराने यूजर हैं तो एक शानदार पेशकश की जा रही है। अब यूनिनॉर के ₹10 का रिचार्ज करने पर ₹10 का टॉकटाइम दिया जा रहा है। इसी तरह ₹20 के रिचार्ज पर ₹20 का टॉकटाइम, ₹30 के रिचार्ज पर ₹30 का टॉकटाइम दिया जा रहा है।

इनकमिंग कॉल सुविधा नहीं होगी बंद

सभी टेलीकॉम कंपनियां में रिचार्ज खत्म हो जाने के कुछ समय बाद इनकमिंग कॉल को बंद कर दिया जाता है लेकिन इसमें रिचार्ज नहीं करवाने पर इनकमिंग कॉल बंद नहीं होगी, यह चालू रहेगी। जब चाहे तब इसमें रिचार्ज करवा सकते हैं।

अब बच्चों से दूर ही रखें जॉनसन बेबी पाउडर!

जॉनसन बेबी पाउडर का लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द

मुंबई। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के माध्यम से बहुराष्ट्रीय कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निर्मित ‘जॉनसन बेबी पाउडर’ कॉस्मेटिक्स का लाइसेंस 15 सितंबर, 2022 से स्थायी रूप से रद्द कर दिया गया है।


जानकारी के अनुसार खाद्य एवं औषधि प्रशासन के नासिक और पुणे के औषधि निरीक्षकों ने परीक्षण के लिए नमूने लिए थे। सरकारी विश्लेषक, ड्रग कंट्रोल लेबोरेटरी, मुंबई द्वारा बेबी पाउडर उत्पाद को घटिया घोषित किए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई।


नवजात शिशुओं और बच्चों की त्वचा को नुकसान पहुंचने की संभावना: ‘जॉनसन बेबी पाउडर’ मुख्य रूप से नवजात शिशुओं के लिए प्रयोग किया जाता है। उपरोक्त निर्माण विधि में दोषों के कारण उक्त उत्पाद का पीएच प्रमाणित मानक के अनुसार नहीं है। इसके इस्तेमाल से नवजात शिशुओं और बच्चों की त्वचा को नुकसान पहुंचने की संभावना रहती है, इसलिए जनहित में इस उत्पादन को जारी रखना उचित नहीं होगा, इसलिए मुलुंड, मुंबई में विनिर्माण संयंत्र का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है।


कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था कि उपरोक्त असत्यापित घोषित पैटर्न के अनुसार संगठन का लाइसेंस रद्द क्यों नहीं किया जाना चाहिए? या उक्त लाइसेंस के तहत स्वीकृत सौंदर्य प्रसाधनों के निर्माण लाइसेंस को निलंबित क्यों नहीं करते? इस संबंध में संगठन को इस उत्पाद के स्टॉक को बाजार से वापस बुलाने का भी निर्देश दिया गया था। चूंकि उपरोक्त नमूने के लिए प्राप्त सरकारी विश्लेषक की रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया गया था, संस्थान ने दवा प्रयोगशाला द्वारा पुन: परीक्षण के लिए नासिक और पुणे की अदालतों में आवेदन किया था।


…और तब की गई कार्रवाई: खाद्य एवं औषधि प्रशासन, मुंबई के संयुक्त आयुक्त गौरी शंकर ब्याले के अनुसार, केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला, कोलकाता के निदेशक ने केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला से उक्त पुन: जांच के नमूनों का परीक्षण करने के बाद रिपोर्ट को असत्यापित घोषित करने के बाद लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई की गई।

प्रधानमंत्री के जन्म दिवस पर जीवन और व्यक्तित्व पर आधारित प्रदर्शनी

प्रधानमंत्री के जन्म दिवस पर जीवन और व्यक्तित्व पर आधारित प्रदर्शनी का सीडीओ पूर्ण बोरा ने किया उद्घाटन। लगाई गई चित्र प्रदर्शनी कहानी भारत के सच्चे सपूत की 02 अक्टूबर 2022 तक मनाया जा रहा सेवा पखवाड़ा।

बिजनौर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 72वें जन्मदिन के अवसर पर छाया चित्र प्रदर्शनी कहानी भारत माँ के सच्चे सपूत की चित्र प्रदर्शनी कलक्ट्रेट सभागार में आयोजित की गई। शुभारंभ जिलाधिकारी उमेश मिश्रा के निर्देशों के अनुपालन में मुख्य विकास अधिकारी पूर्ण बोरा द्वारा विधिवत रूप से फीता काटकर किया गया।

उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए  प्रधानमंत्री के जीवन चरित्र पर आधारित संकलित प्रस्तुतियों की प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के जीवन व्यक्तित्व एवं सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं तथा नीतियों पर आधारित प्रदर्शनी कलक्ट्रेट सभागार में आम जनमानस के दर्शन के लिए 17 सितंबर से 23 सितंबर तक लगी रहेगी। प्रधानमंत्री के जन्म दिवस को सेवा पखवाड़ा के रूप में 17 सितंबर 2022 से 02 अक्टूबर 2022 तक मनाया जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन की 72वीं वर्षगांठ के अवसर पर उनके जीवन के विविध पहलुओं से परिचय कराती छाया चित्र प्रदर्शनी कहानी भारत के सच्चे सपूत की का अवलोकन करते हुए अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) अरविंद कुमार सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन की 72वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित होने वाली प्रदर्शनी जन सामान्य को उनके जीवन चरित्र के संबंध में बहुमूल्य जानकारी उपलब्ध कराने में सक्षम एवं प्रेरणा स्रोत सिद्ध होगी।

उन्होंने कहा कि विभिन्न प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों, छात्र-छात्राओं को प्रदर्शनी का अवलोकन करना चाहिए। यह प्रदर्शनी प्रधानमंत्री के जीवन परिचय के साथ साथ केन्द्र सरकार की विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं, नीतियों एवं उपलब्धियों की जानकारी उपलब्ध कराती है। उन्होंने जिला विद्यालय निरीक्षण एवं जिला बेसिक शिक्षाधिकारी को निर्देश दिए कि वे सभी बोर्ड के प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों व छात्र-छात्राओं को प्रदर्शनी का अवलोकन कराने के लिए विद्यालयों से सम्पर्क कर उन्हें पत्र प्रेषित भी करें।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दिग्गजों ने दीं जन्मदिन की शुभकामनाएँ


नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 72 साल के हो गए हैं। भारतीय जनता पार्टी उन के जन्मदिन को खास बनाने के लिए विविध आयोजन कर रही है। पीएम मोदी के जन्मदिन पर सुबह से ही बधाई संदेशों का तांता लग गया है। गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत विपक्ष के कई दिग्गजों ने भी ट्वीट कर पीएम मोदी को जन्मदिन की बधाई दी है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक के बाद एक ट्वीट कर जन्मदिन की शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने कहा कि देश के सर्वप्रिय नेता व हम सभी के प्रेरणास्त्रोत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को जन्मदिवस की शुभकामनाएं देता हूँ और ईश्वर से उनके उत्तम स्वास्थ्य व सुदीर्घ जीवन की कामना करता हूँ। मोदी जी ने अपनी भारत प्रथम की सोच व गरीब कल्याण के संकल्प से असंभव कार्यों को संभव करके दिखाया है। गरीब कल्याण, सुशासन, विकास, राष्ट्र सुरक्षा व ऐतिहासिक सुधारों के समांतर समन्वय से मोदी जी ने माँ भारती को पुन: सर्वोच्च स्थान पर आसीन करने के अपने संकल्प को धरातल पर चरितार्थ किया है। यह एक निर्णयक नेतृत्व और उस नेतृत्व में जनता के अटूट विश्वास के कारण ही सम्भव हो पाया है। एक सुरक्षित, सशक्त व आत्मनिर्भर नए भारत के निर्माता मोदी जी का जीवन सेवा और समर्पण का प्रतीक है। आजादी के बाद पहली बार करोड़ों गरीबों को उनका अधिकार देकर मोदी जी ने उनमें आशा और विश्वास का भाव जगाया है, आज देश का हर वर्ग चट्टान की तरह मोदी जी के साथ खड़ा है। भारतीय संस्कृति के संवाहक मोदी जी ने देश को अपनी मूल जड़ों से जोड़कर विकास के हर क्षेत्र में आगे ले जाने का काम किया है। मोदी जी की दूरदर्शीता व नेतृत्व में आज का यह नया भारत एक विश्वशक्ति बनकर उभरा है, मोदी जी ने वैश्विक नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई है, जिसका पूरी दुनिया सम्मान करती है।

देश के सर्वप्रिय नेता व हम सभी के प्रेरणास्त्रोत प्रधानमंत्री @narendramodi जी को जन्मदिवस की शुभकामनाएं देता हूँ और ईश्वर से उनके उत्तम स्वास्थ्य व सुदीर्घ जीवन की कामना करता हूँ।
मोदी जी ने अपनी भारत प्रथम की सोच व गरीब कल्याण के संकल्प से असंभव कार्यों को संभव करके दिखाया है।— Amit Shah (@AmitShah) September 17, 2022

गरीब कल्याण, सुशासन, विकास, राष्ट्रसुरक्षा व ऐतिहासिक सुधारों के समांतर समन्वय से @narendramodi जी ने माँ भारती को पुन: सर्वोच्च स्थान पर आसीन करने के अपने संकल्प को धरातल पर चरितार्थ किया है।
यह निर्णायक नेतृत्व और उस नेतृत्व में जनता के अटूट विश्वास के कारण ही सम्भव हो पाया है।— Amit Shah (@AmitShah) September 17, 2022

एक सुरक्षित, सशक्त व आत्मनिर्भर नए भारत के निर्माता @narendramodi जी का जीवन सेवा और समर्पण का प्रतीक है।
आजादी के बाद पहली बार करोड़ों गरीबों को उनका अधिकार देकर मोदी जी ने उनमें आशा और विश्वास का भाव जगाया है।
आज देश का हर वर्ग चट्टान की तरह मोदी जी के साथ खड़ा है।— Amit Shah (@AmitShah) September 17, 2022

भारतीय संस्कृति के संवाहक @narendramodi जी ने देश को अपनी मूल जड़ों से जोड़ हर क्षेत्र में आगे ले जाने का काम किया है।
मोदीजी की दूरदर्शिता व नेतृत्व में नया भारत एक विश्वशक्ति बनकर उभरा है। मोदी जी ने वैश्विक नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई है, जिसका पूरी दुनिया सम्मान करती है।— Amit Shah (@AmitShah) September 17, 2022

आज मिला था हिन्दी को राजभाषा का दर्जा

सतेंद्र चौधरी कम्भौर, बिजनौर (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

देश में राजभाषा हिन्दी को बढ़ावा देने के लिए हर साल 14 सिंतबर को हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है. इस दिन को मनाने का मकसद लोगों में हिन्दी भाषा के प्रति जागरूकता लाना है. वैसे तो हमारे देश में कई भाषाएं व बोलियां बोली जाती हैं, लेकिन देश में 77 फीसदी से ज्यादा लोग बोलचाल के लिए सिर्फ हिन्दी का ही इस्तेमाल करते हैं. इसके साथ ही हिन्दी को विश्व में सबसे ज्यादा बोले जाने वाली चौथी भाषा का खिताब भी हासिल है. 

वर्ष 1949 में 14 सिंतबर के दिन ही संविधान सभा द्वारा हिन्दी को राज भाषा का दर्जा दिया गया था. इसके बाद  1953 में राष्ट्रभाषा प्रचार समिति की सलाह पर देश में पहली बार हिन्दी दिवस के मौके पर कार्यक्रमों का आयोजन शुरू किया गया. तभी से हर साल 14 सितंबर को स्कूल, कॉलेज, शिक्षण संस्थानों में हिन्दी दिवस के अवसर पर निबंध प्रतियोगिता, वाद-विवाद प्रतियोगता, कविता पाठ, नाटक समेत अन्य लेखन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है, साथ ही सरकारी दफ्तरों में हिंदी पखवाड़े का भी आयोजन किया जाता है.

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343 के तहत हिंदी को आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता दी गई है. सबसे पहले हिंदी को राज भाषा बनाये जाने का प्रस्ताव साल 1918 में हिन्दी साहित्य सम्मेलन के दौरान महात्मा गांधी द्वारा रखा गया था. 

फारसी भाषा का शब्द है हिन्दी

बहुत ही कम लोगों को ये पता होगा कि हिन्दी खुद एक फासरी शब्द है. जी हां, आप ने सही पढ़ा है हिन्दी शब्द मूलत फासरी भाषा का शब्द है, यह फारसी लोगों द्वारा सिन्धी की जगह पर बोला जाता था. फारसी में ‘स’ वर्ण होता ही नहीं है, वो लोग ‘स’ के जगह पर ‘ह’ का इस्तेमाल करते थे, जिसकी वजह से सिंध-हिन्द हो गया. सिन्धू के क्षेत्र में रहने वाले लोगों को हिन्दू और उनके द्वारा बोली जाने वाली भाषा को हिन्दी कहा जाने लगा.

1900 में हुई थी आज की हिंदी की शुरुआत

भाषाविदों की मानें तो हिन्दी के वर्तमान स्वरूप, जिसमें आज हम पढ़ व लिख रहे हैं; की शुरूआत 1900 ईसवी में हुई थी. खड़ी बोली यानी हिंदी में लिखी गई पहली कहानी इंदुमती थी. इसे किशोरीलाल गोस्वामी ने लिखा था. इसकी हिंदी भाषा काफी हद तक वैसी ही है जैसी आज लिखी और बोली जाती है.

हिन्दी की अनेक बोलियाँ (उपभाषाएँ ) हैं, जिनमें अवधी, ब्रजभाषा, कन्नौजी, बुंदेली, बघेली, हड़ौती, भोजपुरी, हरयाणवी, राजस्थानी, छत्तीसगढ़ी, मालवी, नागपुरी, खोरठा, पंचपरगनिया, कुमाउँनी, मगही, मेवाती आदि प्रमुख हैं. इनमें से कुछ में अत्यन्त उच्च श्रेणी के साहित्य की रचना हुई है. ऐसी बोलियों में ब्रजभाषा और अवधी प्रमुख हैं. यह बोलियाँ हिन्दी की विविधता हैं और उसकी शक्ति भी. वे हिन्दी की जड़ों को गहरा बनाती हैं. हिन्दी की बोलियाँ और उन बोलियों की उप बोलियाँ हैं जो न केवल अपने में एक बड़ी परंपरा, इतिहास, सभ्यता को समेटे हुए हैं वरन स्वतंत्रता संग्राम, जनसंघर्ष, वर्तमान के बाजारवाद के खिलाफ भी उसका रचना संसार सचेत है.

पश्चिमी हिन्दी का विकास शौरसेनी अपभ्रंश से हुआ है. इसके अंतर्गत पाँच बोलियाँ हैं खड़ी बोली, हरियाणवी,  ब्रजभाषा, कन्नौजी और बुंदेली. खड़ी बोली अपने मूल रूप में मेरठ, रामपुर, मुरादाबाद, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, बागपत के आसपास बोली जाती है. इसी के आधार पर आधुनिक हिंदी और उर्दू का रूप खड़ा हुआ. बांगरू को जाटू या हरियाणवी भी कहते हैं. यह पंजाब के दक्षिण पूर्व में बोली जाती है. कुछ विद्वानों के अनुसार बांगरू खड़ी बोली का ही एक रूप है, जिसमें पंजाबी और राजस्थानी का मिश्रण है. ब्रजभाषा मथुरा के आसपास ब्रजमंडल में बोली जाती है. हिंदी साहित्य के मध्ययुग में ब्रजभाषा में उच्च कोटि का काव्य निर्मित हुआ. इसलिए इसे बोली न कहकर आदरपूर्वक भाषा कहा गया. मध्यकाल में यह बोली संपूर्ण हिंदी प्रदेश की साहित्यिक भाषा के रूप में मान्य हो गई थी, पर साहित्यिक ब्रजभाषा में ब्रज के ठेठ शब्दों के साथ अन्य प्रांतों के शब्दों और प्रयोगों का भी ग्रहण है. कन्नौजी गंगा के मध्य दोआब की बोली है. इसके एक ओर ब्रजमंडल है और दूसरी ओर अवधी का क्षेत्र. यह ब्रजभाषा से इतनी मिलती जुलती है कि इसमें रचा गया जो थोड़ा बहुत साहित्य है, वह ब्रजभाषा का ही माना जाता है. बुंदेली बुंदेलखंड की उपभाषा है. बुंदेलखंड में ब्रजभाषा के अच्छे कवि हुए हैं, जिनकी काव्यभाषा पर बुंदेली का प्रभाव है.

लव जेहाद का शिकार कायस्थ युवती ने लगाई इच्छा मृत्यु की गुहार

लव जेहाद का शिकार कायस्थ युवती ने लगाई इच्छा मृत्यु की गुहार। एसपी को सौंपा प्रार्थना पत्र। राहुल सैनी बनकर दिल्ली में रह रहा था गुलशाद। बेनीपुर कोपा का ग्राम प्रधान भी देता है धौंस। कभी भी कोई भी आकर उसका करता है शारीरिक शोषण।

बिजनौर। एक और युवती लव जेहाद का शिकार हो गई। लाचार होकर उसने पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर इच्छा मृत्यु की गुहार लगाई है।

सुल्तानपुरी अमन विहार दिल्ली निवासी कायस्थ बिरादरी की एक युवती ने पुलिस अधीक्षक दिनेश सिंह को प्रार्थना पत्र देकर अवगत कराया कि उस के घर के सामने गुलशाद नाम का युवक राहुल बनकर रह रहा था। युवती की गुलशाद उर्फ राहुल से 2018 में मुलाकात हुई। राहुल ने कहा कि उसका कारोबार है और वह कई चीजों की सप्लाई करता है। इसके बाद वह उससे मिलता जुलता रहा। राहुल ने युवती को बताया कि वह सैनी जाति से है तथा उससे शादी करना चाहता है। उसने यह भी बताया कि वह जिला बिजनौर के तहसील नगीना अंतर्गत गाम बेनीपुर कोपा थाना बढ़ापुर का रहने वाला है। युवती का आरोप है कि वह गुलशाद उर्फ राहुल की बातों में आ गई। इसके बाद युवक ने उससे शारीरिक सम्बन्ध बना लिए। नगीना में एक मुस्लिम वकील के यहां दिनांक 14 जनवरी 2020 को स्टाम्प पेपर पर हस्ताक्षर करा लिए। स्टाम्प पेपर उसने कोर्ट मैरिज के कागजात बताकर अपने पास ही रख लिए।

दो साल पहले खुला भेद- युवती ने बताया कि उसे नवंबर 2020 में पता लगा कि उक्त राहुल मुस्लिम है। और उसका सही नाम गुलशाद ताहिर है। यह पता लगते ही युवती ने एक प्रार्थना पत्र थाना बढ़ापुर में दिया, परन्तु कोई सुनवाई नहीं हुई। गुलशाद व उसके भाई अरशद, आरिफ व शाहनवाज को जैसे ही पता लगा कि वह पुलिस को उनकी असलियत बताने गयी है तो उन्होंने उसके साथ मारपीट की।  गुलशाद की मां साहिरा व उसके चाचा के लड़के जावेद व कासिफ भी आ गये और मारपीट व गालियां देते हुए कहा कि तुझे इस्लाम धर्म कबूल करना पड़ेगा व नमाज भी पढ़नी पड़ेगी। मना करने पर अरशद व आरिफ ने उसके कपड़े फाड़कर जबरदस्ती की। युवती के माता पिता भी इस कृत्य से नाराज हैं और वह अकेली पड़ गयी है उसका कोई सहारा नहीं है। जावेद व असिफ ने दिनांक 11 सितंबर 2022 को शाम लगभग 4 बजे उसे आकर पकड़ लिया और गालियां देते हुए कहा कि उसे पुलिस में रिपोर्ट करनी हम सिखाएंगे। युवती ने कहा कि वह बड़ी मुश्किल में है, कभी भी कोई भी आकर उसका शोषण कर लेता है। बेनीपुर कोपा का प्रधान रईस अहमद भी धौंस देता है कि 2000/-रुपये ले और यहां  से दिल्ली चली जा। पीड़ित युवती ने पुलिस अधीक्षक से इच्छा मृत्यु की गुहार लगाते हुए कहा कि हिन्दू बनकर मुस्लिम युवक ने उसका शोषण व धोखाधड़ी की है। उसे न्याय दिलाया जाए और उक्त लोगों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत करके कानूनी कार्यवाही की कृपा जाए। पुलिस अधीक्षक से युवती के साथ मिलने वालों में अशोक कुमार सैनी जिलाध्यक्ष भागीरथ सेना, मनोज कुमार सैनी जिलाध्यक्ष, मोहित राजपूत, रविन्दर आदि शामिल हैं।

युवक गायब, ससुरालियों ने निकाला- डेढ़ महीने पहले गुलशाद उर्फ राहुल अचानक घर से कहीं चला गया। मुस्लिम ससुरालियों ने उसे यह कह कर धक्के देकर निकाल दिया कि अपने लड़के को उन्होंने अपनी जायदाद से बेदखल कर दिया है। युवती को एक स्थानीय भाजपा नेत्री ने सहारा दिया है।

हिंदू राष्ट्र सेना ने की भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने की मांग

भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने की हिन्दू राष्ट्र सेना ने की मांग

-बिजनौर में हुआ एक दिवसीय कार्यकर्ता परिचय सम्मेलन

बिजनौर। हिन्दू राष्ट्र सेना जिला बिजनौर का भव्य व विशाल एक दिवसीय कार्यकर्ता परिचय सम्मेलन जिला अध्यक्ष बिजनौर अवधेश शर्मा की अध्यक्षता व अमरपाल शर्मा, हरिप्रसाद शर्मा के संयुक्त संचालन में हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि हिन्दू राष्ट्र सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि महाराज द्वारा मां भारती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से राष्ट्रीय संगठन महामंत्री जितेंद्र बालियान राष्ट्रीय संगठन मंत्री, विश्वेंद्र, राष्ट्रीय मंत्री प्रीतम कुमार प्रेम, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामेंद्र चौधरी, प्रदेश उपाध्यक्ष उत्तर प्रदेश सचिन सक्सेना, मंडल अध्यक्ष मेरठ विवेक अत्रे, मंडल अध्यक्ष मुरादाबाद, अनुज कुमार व सीताराम राणा, हिन्दू राष्ट्र सेना महिला प्रकोष्ठ से प्रदेश प्रभारी उत्तर प्रदेश श्रीमती भावना पंडित प्रदेश अध्यक्ष उत्तर प्रदेश श्रीमती मीनाक्षी चौहान आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। सभी वक्ताओं का एकमात्र उद्देश्य भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाये जाने पर रहा। जिला संगठन महामंत्री हंस राम राणा, जिला उपाध्यक्ष रविंद्र सैनी, रामनाथ कश्यप, जिला प्रवक्ता कोशिक गोडीयाल, जिला मंत्री गंभीर, चांदपुर तहसील अध्यक्ष निपेन्द्र चौधरी, जलीलपुर ब्लॉक अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान, धर्मेंद्र प्रजापति, बिजनौर तहसील अध्यक्ष विशाल त्यागी, तहसील संगठन महामंत्री कार्तिक शर्मा, नगर अध्यक्ष किरतपुर राहुल कुमार, नगर संगठन महामंत्री रमन, तहसील संयोजक धामपुर महिपाल चौधरी, सतीश कुमार, हिमांशु, सुमित, किरतपुर ब्लॉक अध्यक्ष राकेश कुमार, ब्लॉक संगठन महामंत्री राजू पवार, गगन शर्मा ब्लॉक उपाध्यक्ष ऋषि पाल, रतिराम, डॉक्टर पप्पू सिंह व जिला बिजनौर के समस्त पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित रहे। महिला प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष श्रीमती अनीता शर्मा, जिला संगठन महामंत्री श्रीमती रश्मि राजपूत, जिला प्रभारी श्रीमती अंजू मारवाड़ी, जिला संयोजक श्रीमती वंदना चौधरी, मीडिया प्रभारी श्रीमती ललिता राजपूत, नमीता वर्मा, जिला मंत्री मंजू चौहान, जिला मंत्री सुरेखा राणा, किरतपुर ब्लॉक से श्रीमती बीना, मोहम्मदपुर देवमल ब्लॉक अध्यक्ष श्रीमती प्रमिला आदि बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं। इस अवसर पर मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़, मुरादाबाद, नौएडा आदि स्थानों से भी आये पदाधिकारियों ने सहभागिता की।

साहित्य; समाज में संस्कारों और संस्कृति का संवाहक – पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव

साहित्य समाज में संस्कारों और संस्कृति का संवाहक – पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव

पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने पूर्व शिक्षा अधिकारी राम बचन सिंह यादव की तीन पुस्तकों का किया विमोचन

आजमगढ़ में साहित्य की समृद्ध परम्परा रही है – पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव

आजमगढ़। साहित्य समाज में संस्कारों व संस्कृति का संवाहक है। ऐसे में साहित्यकारों का दायित्व है कि ऐसा लेखन करें जो साहित्य के माध्यम से भारतीय संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाए। उक्त उद्गार चर्चित साहित्यकार एवं वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने सेवानिवृत्त उप बेसिक शिक्षा अधिकारी राम बचन सिंह यादव ‘बेराही’ की तीन पुस्तकों – नायाब नायक कर्ण (खंड काव्य), अंतर्बोध (काव्य संग्रह) और असुरवंश बनाम राजवंश (खंड काव्य) का विमोचन करते हुए व्यक्त किया। लाइफ लाइन हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, आजमगढ़ के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में चंद्रजीत सिंह यादव, उप शिक्षा निदेशक, मिर्जापुर मंडल, प्रसिद्ध न्यूरोसर्जन डॉ. अनूप कुमार सिंह, डॉ. गायत्री सिंह, गीता सिंह भी मंचासीन रहे।

पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि एक तरफ रामायण काल की घटनाओं को सहेजे खंड-काव्य ‘असुरवंश बनाम राजवंश’ तो दूसरी तरफ महाभारत काल के ‘नायाब नायक कर्ण’ के जीवन के अंतर्द्वंदों को सहेजे खंड-काव्य की रचना, वहीं जीवन की तमाम अनुभूतियों व संवेदनाओं को सहेजता काव्य संग्रह ‘अंतर्बोध’ एक कवि के रूप में राम बचन सिंह यादव की आध्यात्मिक व दार्शनिक प्रवृत्ति, सांस्कृतिक विरासत से जुड़ाव, इतिहास बोध का भरपूर ज्ञान और महापुरुषों से युवा पीढ़ी को जोड़ने का सत्साहस दिखाता है। परिस्थिति और ऐतिहासिक चेतना के द्वंद से उबरते हुए उन्होंने लोग-मंगल से जुड़कर युगीन सत्य को भेदकर मानवीयता को खोजने का प्रयत्न किया। श्री यादव ने कहा कि रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्यों ने ज्ञान, भक्ति और कर्म की त्रिवेणी प्रवाहित कर भारतीय जनमानस को जागृत किया। इनमें जिन प्रगतिशील मूल्यों व समानता के भावों पर बल दिया है, उसे आज बार- बार उद्धृत करने की जरूरत है।

ऋषियों-मुनियों, क्रांतिकारियों व साहित्यकारों की पावन धरा- आजमगढ़ से जुड़े अपने अनुभवों को साझा करते हुए श्री यादव ने कहा कि तमाम ऋषियों-मुनियों, क्रांतिकारियों व साहित्यकारों की पावन धरा रहे आजमगढ़ में साहित्य की समृद्ध परंपरा रही है। राहुल सांकृत्यायन, अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’, आचार्य चंद्रबली, श्याम नारायण पांडेय,अल्लामा शिब्ली नोमानी, कैफी आजमी जैसे यहाँ के साहित्यकारों ने देश-दुनिया में ख्याति अर्जित की है। आज भी आजमगढ़ के तमाम साहित्यकार न सिर्फ उत्कृष्ट रच रहे हैं बल्कि समाज को एक नई राह दिखा रहे हैं।

पोस्टमास्टर जनरल श्री यादव ने कहा कि सरकारी सेवाओं में रहते हुए भी साहित्य सृजन का कार्य व्यक्ति की दृष्टि को और भी व्यापक बनाता है। शिक्षा व्यक्ति में ज्ञान उत्पन्न करती है तो साहित्य संवेदना की संपोषक है। इसी कड़ी में राम बचन सिंह यादव न केवल एक शिक्षक एवं पथ प्रदर्शक के रूप में रहे, बल्कि साहित्य के विकास एवम उन्नयन में भी महती भूमिका निभाने को तैयार हैं।

उप शिक्षा निदेशक, मिर्जापुर मंडल चंद्रजीत सिंह यादव ने कहा कि राम बचन सिंह यादव की कविताएं पाठक को खुद अपना अंतर्बोध कराती प्रतीत होती हैं। मानवीय मूल्यों के पतन और समाज की वर्तमान स्थिति को उन्होंने अपनी कविताओं में अक्षरक्ष: उतार दिया है।

न्यूरोसर्जन डॉ. अनूप कुमार सिंह ने कहा कि अच्छी पुस्तकें जीवन के लिए टॉनिक का कार्य करती हैं। इनके अध्ययन-मनन से एकाकीपन, निराशा और अवसाद से भी बचा जा सकता है। युवाओं में पुस्तकें पढ़ने की आदत विकसित करनी होगी।

अपनी रचना प्रक्रिया पर राम बचन सिंह यादव ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम और नायक कर्ण का व्यक्तित्व सदैव से प्रभावित करता रहा है, जिन्होंने तमाम संघर्षों और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भी जीवन में मूल्यों का साथ नहीं छोड़ा। इन पर खंड-काव्य लिखकर अपने को बेहद सौभाग्यशाली समझता हूँ। पिताजी के अंतिम दिनों की अवस्था देखकर भी मुझे जीवन का अंतर्बोध हुआ, जिसे काव्य संग्रह के रूप में परिणित किया।

इस अवसर पर प्रो.आरके यादव, सरोज, ऋषि मुनि राय, मिथिलेश तिवारी, घनश्याम यादव, संजय यादव, आलोक त्रिपाठी, सूर्य प्रकाश सहित तमाम साहित्यकार और गणमान्य जन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन आरके फार्मेसी सठियांव आजमगढ़ के प्राचार्य डॉ. अभय प्रताप यादव ने तथा आभार ज्ञापन प्रेम प्रकाश यादव ने किया।

हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के पैरोकार एकमात्र अहिंदी भाषी लक्ष्मी नारायण साहू

संदर्भ हिंदी दिवस-13 सितंबर

हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के पैरोकार एकमात्र अहिंदी भाषी लक्ष्मी नारायण साहू

हिंदी को राजभाषा या राष्ट्रभाषा बनाए जाने के प्रश्न पर संविधान सभा की तीन दिन तक चली गर्मागर्म बहस में 13 सितंबर की तारीख भी अहम थी। इस प्रश्न पर बहस दो धुरियों पर ही टिकी रही। हिंदी या रोमन अंकों के उपयोग पर पक्ष-विपक्ष में लंबी बहसें हुईं। अलग-अलग प्रांतों के प्रतिनिधियों ने उम्मीद के मुताबिक ही अपने-अपने तर्क और विचार प्रस्तुत किए। पंडित जवाहरलाल नेहरू, सभापति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, पंडित रविशंकर शुक्ल सरीखे सदस्यों ने जरूर बीच का रास्ता अपनाया। अधिकतर अहिंदी भाषी प्रतिनिधियों ने भारी मन से हिंदी को राजभाषा स्वीकार करते हुए सभा में आए संशोधन प्रस्तावों पर अन्य भारतीय भाषाओं को लेकर संदेह प्रकट किए लेकिन संविधान परिषद में उड़ीसा प्रांत के प्रतिनिधि लक्ष्मी नारायण साहू एकमात्र अहिंदी भाषी थे जिन्होंने बहुत किंतु-परंतु लगाए बिना हिंदी को राजभाषा के बजाय राष्ट्रभाषा माने जाने की वकालत की। संविधान सभा के वाद-विवाद की सरकारी रिपोर्ट के पृष्ठ संख्या 2144-46 में बहस में भाग लेते हुए लक्ष्मी नारायण साहू के संशोधन और वक्तव्य दर्ज हैं।

उड़ीसा प्रांत के बालासोर में 3 अक्टूबर 1890 को जन्मे लक्ष्मी नारायण साहू ने पांच-पांच विषयों में परास्नातक की परीक्षा पास की। उन्होंने उड़ीसा राज्य के गठन के पहले 1936 में ‘उत्कल यूनियन कॉन्फ्रेंस’ की स्थापना के साथ सहकार, वैतरणी और स्टार आफ उत्कल पत्रों का संपादन भी किया। 1947 में उड़ीसा विधानसभा और संविधान परिषद के सदस्य चुने गए। छुआछूत और महिलाओं की स्थिति में सुधार आंदोलन में भी अपनी अहम भूमिका निभाई। आजादी के बाद उन्हें भारत सरकार ने पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया। 18 जनवरी 1963 को उन्होंने अंतिम सांस ली।

संशोधन प्रस्तावों पर चर्चा के दौरान लक्ष्मी नारायण साहू ने कहा- ‘ कोई सज्जन संशोधन लाए हैं कि बांग्ला भाषा राष्ट्रीय भाषा हो सकती है। तब मैं कहता हूं कि मेरी उड़िया भाषा बंगाली के मुकाबले प्राचीन है। जब उड़िया भाषा, भाषा के रूप में दिखाई दे चुकी थी तब बांग्ला भाषा का जन्म भी नहीं हुआ था। इस तरह दक्षिण के भाई कहेंगे कि उनकी भाषा बहुत प्राचीन है। यह सब ठीक नहीं है। जब भारत को एक राष्ट्र समझते हैं या बनाने की कोशिश करते हैं तो ऑफिशियल लैंग्वेज क्यों? इस (हिंदी) को नेशनल लैंग्वेज भी बना लेना चाहिए। हिंदी भाषा-भाषी देश में ज्यादा तादाद में हैं। इसलिए हिंदी को राष्ट्रभाषा होना ही चाहिए। कुछ लोग कहते हैं कि हिंदी में शब्द भंडार पूर्ण नहीं है तो दूसरी भाषाओं के शब्दों को लेकर हिंदी भाषा की समृद्धि की जानी चाहिए। हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने पर दूसरी प्रांतीय भाषाओं के रास्ते में रुकावट पैदा न हो। सब प्रांतीय भाषाएं अपनी-अपनी जगह उन्नति कर सकें, उनकी प्रगति रुके नहीं इसका भी ख्याल करना चाहिए। जब एक प्रांत और प्रांतीय भाषा दृढ़ हो जाएगी तो राष्ट्रभाषा भी दृढ़ होगी ही।’

राजभाषा के प्रश्न पर संविधान सभा में हुई बहस में कुछ प्रतिनिधियों ने अपना अंग्रेजी का मोह भी प्रकट किया था। ऐसे लोगों को भी आईना दिखाते हुए हिंदी भाषी लक्ष्मी नारायण साहू ने कहा था कि कुछ लोग समझते हैं कि अंग्रेजी नहीं होगी तो हम मर जाएंगे। यह तो ऐसा ही हुआ कि शराब पीना बंद हो जाए तो कुछ लोग मर जाएंगे अगर अंग्रेजी जाने से कुछ थोड़े आदमी मर जाते हैं तो क्या हुआ? हमें तो सारे राष्ट्र और देश हित को ध्यान में रखकर कदम उठाना चाहिए। रोमन में हिंदी लिखे जाने की वकालत करने वाले लोगों को जवाब देते हुए लक्ष्मी नारायण साहू ने कहा था कि ऐसे लोग यह नहीं समझते हैं कि स्क्रिप्ट कैसे बनती है। स्क्रिप्ट तो बनती है भाषा के स्वर से। रोमन कैरेक्टर में हिंदी भाषा को लिखने से वह समझ में नहीं आती और उसमें ठीक-ठीक उच्चारण नहीं कर पाते। इसलिए रोमान स्क्रिप्ट एकदम अग्रहणीय है। वह बहुत भद्दी और उसका साइंटिफिक बेसिस भी नहीं है। देवनागरी से लिखी जाने वाली हिंदी साइंटिफिक है और उसे ग्रहण कर लेना चाहिए।अहिंदी भाषी लक्ष्मी नारायण साहू की इन बातों पर संविधान परिषद के सदस्यों ने अगर गौर किया होता तो आज देश में ‘अंग्रेजी राज’ के बजाय हिंदी और भारतीय भाषाओं का बोलबाला ही होता।

∆ गौरव अवस्थी
रायबरेली

मलिहाबाद में शिविर लगा कर 112 पशुओं की चिकित्सा

लखनऊ। एस्कैड योजना के अंतर्गत सोमवार को मलिहाबाद के ग्राम टिकरी खुर्द में पशु चिकित्सा शिविर आयोजन किया गया। इस अवसर पर 112 पशुओं की चिकित्सा की गई। शिविर के आयोजन में डॉ. आरएस मिश्र ने पशुपालकों को पशुओं का बीमा करने एवं किसान क्रेडिट कार्ड बनाने हेतु प्रोत्साहित किया गया। शिविर में योगेन्द्र, अनुराग, अतुल कुमार एवं सूरज आदि मौजूद रहे।

संविधान सभा में आज ही शुरू हुई थी हिंदी राजभाषा के प्रश्न पर बहस

संदर्भ हिंदी दिवस-1

संविधान सभा में आज ही शुरू हुई थी हिंदी राजभाषा के प्रश्न पर बहस

आज 12 सितंबर है। संविधान सभा में हिंदी को राजभाषा बनाए जाने के तैयार किए गए मसौदे पर आए 300 से अधिक संशोधनों पर दिलचस्प बहस आज ही शुरू हुई थी। हिंदी और अहिंदी भाषी राज्यों के प्रतिनिधियों के बीच गरमागरम यह बहस लोकसभा सचिवालय द्वारा 1994 में प्रकाशित की गई ‘भारतीय संविधान सभा के वाद विवाद की सरकारी रिपोर्ट’ का अहम दस्तावेज है। हिंदी को राज या राष्ट्रभाषा बनाए जाने से जुड़े संशोधनों पर संविधान सभा में हुई बहस में पंडित जवाहरलाल नेहरू, राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन, मौलाना अबुल कलाम आजाद, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, सेठ गोविंद दास, एन गोपालस्वामी आयंगर, अलगू राय शास्त्री, आरबी धुलेकर, मौलाना हसरत मोहानी, वीएन गाडगिल, नजीरउद्दीन अहमद, मौलाना हिफजुररहमान, श्रीमती जी. दुर्गाबाई, डॉ रघुवीर, मोहम्मद इस्माइल, शंकरराव देव, पंडित रविशंकर शुक्ल, रामसहाय, बीएम गुप्ते, रेवरेंड जिरोम डिसूजा, कुलधार चालिया, टीटी कृष्णमाचारी, आरके सिधवा, डॉ. पी सुब्बरायन, बी. दास, डॉ पीए चक्को, काजी सैयद करीमुद्दीन, पंडित गोविंद मालवीय, पंडित लक्ष्मीकांत मैत्र द्वारा पक्ष विपक्ष में प्रस्तुत किए गए तर्क-वितर्क और बहस पृष्ठ संख्या 2055 से 2332 (277 पृष्ठ) में दर्ज है। तमाम सहमति-असहमति के बीच सभा के कुछ सदस्यों ने बीच का रास्ता भी अपनाया था। इनमें पंडित जवाहरलाल नेहरू और संविधान सभा के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद प्रमुख थे।
हिंदी को राजभाषा के प्रश्न पर हिंदी और अहिंदी भाषी तो लगभग तमाम वाद-विवाद के बाद सहमत हो गए थे लेकिन विवाद के केंद्र में हिंदी और रोमन अंकों के उपयोग का मसला ही था। अंत में अंग्रेजी अंकों के उपयोग पर सभी की सहमति के साथ राजभाषा का यह मसला 12 सितंबर से शुरू होकर 14 सितंबर 1949 की शाम को समाप्त हुआ था। 3 दिनों में करीब 24 घंटे तक बहस चली। कई संशोधन प्रस्ताव एक से होने की वजह से कुछ लोगों को ही बात रखने का अवसर मिला। कुछ संशोधन प्रस्ताव वापस ले लिए गए और हाथ उठाकर मतों के जरिए हिंदी को राजभाषा, देवनागरी लिपि और रोमन अंकों के उपयोग पर सहमति बनी।

आखिर अंक हैं क्या? संविधान सभा में भाषा के प्रश्न पर हुई इस बहस का समापन करते हुए अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद ने कहा-‘मैं आश्चर्य कर रहा था कि हमें छोटे से मामले (रोमन अंकों के उपयोग) पर इतनी बहस करने की, इतना समय बर्बाद करने की क्या आवश्यकता है? आखिर अंक हैं क्या? वैसे दस ही तो हैं। इन दस में मुझे याद पड़ता है कि तीन तो ऐसे हैं जो अंग्रेजी और हिंदी में एक से हैं–२, ३ और ०। मेरे ख्याल से चार और है जो रूप में एक से है किंतु उनमें अलग-अलग अर्थ निकलते हैं। उदाहरण के लिए हिंदी का ४ अंग्रेजी के 8 से बहुत मिलता जुलता है। मैं अपने हिंदी के मित्रों से कहूंगा कि वह इसे (दक्षिण भारतीयों की रोमन अंकों के उपयोग के प्रस्ताव) उस भावना से स्वीकार करें। इसलिए स्वीकार करें कि हम उनसे हिंदी भाषा और देवनागरी लिपि स्वीकार करवाना चाहते हैं। मुझे प्रसन्नता है कि सदन ने बहुमत से सुझाव को स्वीकार कर लिया है।

अंकों के उपयोग पर चले वाद विवाद का समापन करते हुए डॉ राजेंद्र प्रसाद ने एक छोटा सा मनोरंजक दृष्टांत भी अपने वक्तव्य में सुनाया-‘हम चाहते हैं कि कुछ मित्र हमें निमंत्रण दें। वे निमंत्रण दे देते हैं। वह कहते हैं, आप आकर हमारे घर में ठहर सकते हैं। उसके लिए आपका स्वागत है, किंतु जब आप हमारे घर आएं तो कृपया अंग्रेजी चलन के जूते पहनिए। भारतीय चप्पल मत पहनिए, जैसे कि आप अपने घर में पहनते हैं। इस निमंत्रण को केवल इस आधार पर ठुकराना मेरे लिए बुद्धिमत्ता नहीं होगी कि मैं चप्पल को नहीं छोड़ना चाहता। मैं अंग्रेजी जूते पहन लूंगा और निमंत्रण को स्वीकार कर लूंगा और इसी सहिष्णुता की भावना से राष्ट्रीय समस्याएं हल हो सकती हैं’

उन्होंने इस बात के साथ अपने वक्तव्य का समापन किया-‘हमारी परंपराएं एक ही हैं। हमारी संस्कृति एक ही है और हमारी सभ्यता में सब बातें एक ही हैं। अतएव यदि हम इस सूत्र (अंग्रेजी अंकों के उपयोग) को स्वीकार नहीं करते तो परिणाम यह होता कि या तो इस देश में बहुत सी भाषाओं का प्रयोग होता या वे प्रांत पृथक हो जाते जो बाध्य होकर किसी भाषा विशेष को स्वीकार करना नहीं चाहते। हमने यथासंभव बुद्धिमानी का कार्य किया है। मुझे हर्ष है। मुझे प्रसन्नता है और मुझे आशा है कि भावी संतति इसके लिए हमारी सराहना करेगी।

∆ गौरव अवस्थी
रायबरेली

12 सितंबर: संविधान सभा में आज ही शुरू हुई थी हिंदी राजभाषा के प्रश्न पर बहस

संदर्भ हिंदी दिवस-12 सितंबर। संविधान सभा में आज ही शुरू हुई थी हिंदी राजभाषा के प्रश्न पर बहस। संविधान सभा में आज ही शुरू हुई थी हिंदी राजभाषा के प्रश्न पर बहस।

लखनऊ। आज 12 सितंबर है। संविधान सभा में हिंदी को राजभाषा बनाए जाने के तैयार किए गए मसौदे पर आए 300 से अधिक संशोधनों पर दिलचस्प बहस आज ही शुरू हुई थी। हिंदी और अहिंदी भाषी राज्यों के प्रतिनिधियों के बीच गरमागरम यह बहस लोकसभा सचिवालय द्वारा 1994 में प्रकाशित की गई ‘भारतीय संविधान सभा के वाद विवाद की सरकारी रिपोर्ट’ का अहम दस्तावेज है। हिंदी को राज या राष्ट्रभाषा बनाए जाने से जुड़े संशोधनों पर संविधान सभा में हुई बहस में पंडित जवाहरलाल नेहरू, राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन, मौलाना अबुल कलाम आजाद, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, सेठ गोविंद दास, एन गोपालस्वामी आयंगर, अलगू राय शास्त्री, आरबी धुलेकर, मौलाना हसरत मोहानी, वीएन गाडगिल, नजीरउद्दीन अहमद, मौलाना हिफजुररहमान, श्रीमती जी. दुर्गाबाई , डॉ रघुवीर, मोहम्मद इस्माइल, शंकरराव देव, पंडित रविशंकर शुक्ल, रामसहाय, बीएम गुप्ते, रेवरेंड जिरोम डिसूजा, कुलधार चालिया, टीटी कृष्णमाचारी, आरके सिधवा, डॉ. पी सुब्बरायन, बी. दास, डॉ पीए चक्को, काजी सैयद करीमुद्दीन, पंडित गोविंद मालवीय, पंडित लक्ष्मीकांत मैत्र द्वारा पक्ष विपक्ष में प्रस्तुत किए गए तर्क-वितर्क और बहस पृष्ठ संख्या 2055 से 2332 (277 पृष्ठ) में दर्ज है। तमाम सहमति-असहमति के बीच सभा के कुछ सदस्यों ने बीच का रास्ता भी अपनाया था। इनमें पंडित जवाहरलाल नेहरू और संविधान सभा के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद प्रमुख थे।
हिंदी को राजभाषा के प्रश्न पर हिंदी और अहिंदी भाषी तो लगभग तमाम वाद-विवाद के बाद सहमत हो गए थे लेकिन विवाद के केंद्र में हिंदी और रोमन अंकों के उपयोग का मसला ही था। अंत में अंग्रेजी अंकों के उपयोग पर सभी की सहमति के साथ राजभाषा का यह मसला 12 सितंबर से शुरू होकर 14 सितंबर 1949 की शाम को समाप्त हुआ था। 3 दिनों में करीब 24 घंटे तक बहस चली। कई संशोधन प्रस्ताव एक से होने की वजह से कुछ लोगों को ही बात रखने का अवसर मिला। कुछ संशोधन प्रस्ताव वापस ले लिए गए और हाथ उठाकर मतों के जरिए हिंदी को राजभाषा, देवनागरी लिपि और रोमन अंकों के उपयोग पर सहमति बनी।

संविधान सभा में भाषा के प्रश्न पर हुई इस बहस का समापन करते हुए अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद ने कहा-‘मैं आश्चर्य कर रहा था कि हमें छोटे से मामले (रोमन अंकों के उपयोग) पर इतनी बहस करने की, इतना समय बर्बाद करने की क्या आवश्यकता है? आखिर अंक हैं क्या? वैसे दस ही तो हैं। इन दस में मुझे याद पड़ता है कि तीन तो ऐसे हैं जो अंग्रेजी और हिंदी में एक से हैं–२, ३ और ०। मेरे ख्याल से चार और है जो रूप में एक से है किंतु उनमें अलग-अलग अर्थ निकलते हैं। उदाहरण के लिए हिंदी का ४ अंग्रेजी के 8 से बहुत मिलता जुलता है। मैं अपने हिंदी के मित्रों से कहूंगा कि वह इसे (दक्षिण भारतीयों की रोमन अंकों के उपयोग के प्रस्ताव) उस भावना से स्वीकार करें। इसलिए स्वीकार करें कि हम उनसे हिंदी भाषा और देवनागरी लिपि स्वीकार करवाना चाहते हैं। मुझे प्रसन्नता है कि सदन ने बहुमत से सुझाव को स्वीकार कर लिया है।

अंकों के उपयोग पर चले वाद विवाद का समापन करते हुए डॉ राजेंद्र प्रसाद ने एक छोटा सा मनोरंजक दृष्टांत भी अपने वक्तव्य में सुनाया-‘हम चाहते हैं कि कुछ मित्र हमें निमंत्रण दें। वे निमंत्रण दे देते हैं। वह कहते हैं, आप आकर हमारे घर में ठहर सकते हैं। उसके लिए आपका स्वागत है, किंतु जब आप हमारे घर आएं तो कृपया अंग्रेजी चलन के जूते पहनिए। भारतीय चप्पल मत पहनिए, जैसे कि आप अपने घर में पहनते हैं। इस निमंत्रण को केवल इस आधार पर ठुकराना मेरे लिए बुद्धिमत्ता नहीं होगी कि मैं चप्पल को नहीं छोड़ना चाहता। मैं अंग्रेजी जूते पहन लूंगा और निमंत्रण को स्वीकार कर लूंगा और इसी सहिष्णुता की भावना से राष्ट्रीय समस्याएं हल हो सकती हैं’

उन्होंने इस बात के साथ अपने वक्तव्य का समापन किया-‘हमारी परंपराएं एक ही हैं। हमारी संस्कृति एक ही है और हमारी सभ्यता में सब बातें एक ही हैं। अतएव यदि हम इस सूत्र (अंग्रेजी अंकों के उपयोग) को स्वीकार नहीं करते तो परिणाम यह होता कि या तो इस देश में बहुत सी भाषाओं का प्रयोग होता या वे प्रांत पृथक हो जाते जो बाध्य होकर किसी भाषा विशेष को स्वीकार करना नहीं चाहते। हमने यथासंभव बुद्धिमानी का कार्य किया है। मुझे हर्ष है। मुझे प्रसन्नता है और मुझे आशा है कि भावी संतति इसके लिए हमारी सराहना करेगी।

गौरव अवस्थी
रायबरेली

पीएम अजय योजना से दलितों का होगा आर्थिक सशक्तिकरण – डा. निर्मल

अनुसूचित जाति का दलित दंश समाप्त करने की दिशा में सरकार ने उठाया बड़ा कदम – पी0एम0 अजय योजना से दलितों का होगा आर्थिक सशक्तिकरण – डा0 निर्मल।

लखनऊ। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अनुसूचित जातियों का दलित दंश समाप्त करने के लिए महत्वाकांक्षी योजनाओं को जमीनी स्तर पर पहुँचाकर दलितों के आर्थिक सशक्तिकरण हेतु बड़ा कदम उठाया है। उक्त बातें अति विशिष्ट अतिथि गृह लखनऊ में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में उ0प्र0 अनुसचित जाति वित्त एवं विकास निगम के चेयरमैन डा0 लालजी प्रसाद निर्मल ने कही।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से स्वच्छ भारत मिशन की घर-घर शौचालय योजना ने सदियों से चली आ रही हांथ से मैला उठाने की प्रथा पर पूर्ण विराम लगा दिया उसी प्रकार प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पी0एम0-अजय) दलितों का सामूहिक आर्थिक सशक्तिकरण करके सदियों से चले आ रहे दलित त्रासदी(दंश) को समाप्त करेगा। उन्होंने कहा कि अब उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम की योजनाएं प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना के नाम से जानी जायेंगी। इस योजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति बाहुल्य गावों में प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना संचालित होगी। दलित बाहुल्य क्षेत्रों में समूहों/क्लस्टर के रूप में अनुसूचित जाति के उद्यमी बनाने हेतु आय-सृजक योजनाएं चलायी जायेंगी तथा उक्त गावों में आय-सृजन हेतु आवश्यक निर्माण भी कराये जायेंगे। पी0एम0-अजय योजना के तहत अनुसूचित जाति के छात्रों हेतु नये छात्रावासों का निर्माण होगा तथा पुराने छात्रावासों का नवीकरण/सुदृढ़ीकरण कराया जायेगा।

आय व अनुदान सीमा बढ़ी- डा0 निर्मल ने कहा कि उ0प्र0अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम की योजनाओं में पात्रता हेतु अभी तक ग्रामीण क्षेत्रों में वार्षिक आय सीमा रू0 47080 तथा शहरी क्षेत्रों में रू0 56460 तथा अनुदान की धनराशि रू0 10 हजार निर्धारित थी। जुलाई 2018 में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आय सीमा एवं अनुदान सीमा में वृद्धि करने हेतु भारत सरकार से अनुरोध किया था। केन्द्र सरकार ने व्यापक मंथन करके अब पात्रता हेतु आय सीमा और अनुदान में बड़ा बदलाव किया है। इन योजनाओं में अब वार्षिक आय सीमा को सीमामुक्त (सभी के लिए) करते हुए रू0 2.50 लाख रूपये से कम वार्षिक आय के लोगों को योजनाओं में प्राथमिकता देने की व्यवस्था की गयी है। अनुदान राशि रू0 10 हजार के स्थान पर अब सहायता राशि रू0 50 हजार प्रति लाभार्थी दी जायेगी।

उद्यम स्थापित करने के लिए सहायता- अनुसूचित जाति के व्यक्तियों को उद्यम स्थापित करने के लिए लाभपरक परियोजनाओं के माध्यम से उनका आर्थिक सशक्तिकरण किया जायेगा और इस हेतु अनुसूचित जाति के व्यक्तियों के क्लस्टर/समूहों/समितियों का चयन किया जायेगा। इन समूहों द्वारा प्रस्तुत परियोजनाओं के सफल संचालन के लिए उनकी समयबद्ध प्रशिक्षण की व्यवस्था की गयी है। व्यक्तिपरक परियोजनाओं की जगह दलितों के समूहों को उद्यमी बनाया जायेगा। लाभार्थियों के प्रोजेक्ट बनाने के लिए प्रशिक्षण दिलाने तथा उनके उद्यम पर निगरानी रखने के लिए PIU (Project Implementation Unit) की व्यवस्था राज्य और जनपद स्तर पर की गयी है जिसमें प्रोजेक्ट आफिसर, प्रोजेक्ट टेक्निकल असिस्टेंट, प्रोजेक्ट कम्प्यूटर असिस्टेंट तथा राज्य स्तर पर स्टेट को-आर्डीनेटी एवं स्टाफ की व्यवस्था की गयी है। इन लाभार्थियों के उत्पादों को बाजार प्रदान करने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गयी है। इस हेतु बड़े-बड़े उद्यमी समूहों से संवाद भी किया जा रहा है।

6171 अनुसूचित जाति बाहुल्य गावों को विकसित करेंगे आदर्श ग्राम के रूप में- प्रदेश में 6171 अनुसूचित जाति बाहुल्य गावों को आदर्श ग्राम के रूप में विकसित किये जाने की व्यवस्था की गयी है, जिसमें सारी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। सरकार द्वारा प्रत्येक चयनित गांव में 20 लाख रूपये की राशि से विकास कार्य कराये जायेंगे और अवशेष कार्य विभिन्न विभागों के माध्यम से कराये जायेंगे। इन गावों में क्लस्टर के रूप में चिन्हित लाभार्थियों को उद्यम लगाने हेतु आवश्यक निर्माण भी कराया जायेगा।

6 नये बाबू जगजीवनराम छात्रावासों का निर्माण- डा0 निर्मल ने बताया कि प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना के अंतर्गत प्रदेश में 6 नये बाबू जगजीवनराम छात्रावासों का निर्माण कराया जायेगा तथा वर्तमान में निर्मित/संचालित 261 बाबू जगजीवनराम छात्रावासों में से मरम्मत योग्य छात्रावासों के मरम्मत का कार्य कराया जायेगा। छात्रावासों के निर्माण हेतु प्रति अंतःवासी रू0 3 लाख का व्यय सरकार द्वारा वहन किया जायेगा। फर्नीचर हेतु 5 हजार रूपये प्रति अंतःवासी की दर से धनराशि उपलब्ध करायी जायेगी। बालिका छात्रावासों के निर्माण हेतु उन क्षेत्रों का प्राथमिकता दी जायेगी जहां बालिकाओं की साक्षरता दर कम है। बालिका छात्रावासों में महिला सुरक्षा गार्ड और महिला छात्रावास अधीक्षिका की नियुक्ति की जायेगी। पुराने छात्रावासों की मरम्मत हेतु 50 अंतःवासी छात्रों की क्षमता वाले छात्रावासों के लिए 5 लाख रूपये, 100 अंतःवासी छात्रों की क्षमता वाले छात्रावासों के लिए 10 लाख रूपये तथा 150 अंतःवासी छात्रों की क्षमता वाले छात्रावासों के लिए 15 लाख रूपये खर्च किये जायेंगे।
डा0 निर्मल ने बताया कि अनुसूचित जाति के लिए आजादी के बाद पहली बार दलित आर्थिक एजेण्डा के रूप में स्टैंड-अप इण्डिया योजना के बाद प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना लागू की गयी है जो दलितों को आर्थिक रूप से सशक्त करेगी और आजादी के 100 वर्ष पूरे होने के पहले ही अनुसूचित जातियों का दलित दंश इस योजना के माध्यम से समाप्त हो जायेगा।

बिजनौर के दीप अंजुम का लिखा गीत, अध्यात्म है; मचा रहा है धूम

बिजनौर के दीप अंजुम का लिखा गीत, अध्यात्म है, मचा रहा है धूम

बिजनौर। हस्ताक्षर प्रा. लि. की आने वाली फिल्म ‘अध्यात्म है’ का टाइटल इन दिनों खासा लोकप्रिय हो रहा है। भारतीय संस्कृति को रेखांकित करता यह गीत जिले के जाने पहचाने शायर, लेखक निर्देशक दीप अंजुम ने लिखा है। एक मुलाकात में दीप अन्जुम ने बताया कि यह गीत पिछले दिनों जियो सावन, अमेजन म्यूजिक, स्पोर्टी, हंगामा म्यूजिक, विन्क, यूटयूब, इस्टाग्राम आदि सभी आनलॉइन म्यूजिक साइट पर एक साथ रीलीज किया गया है। इसे कम समय में ही लाखों लोगों ने सुना है और पसंद किया है। इस गीत के बोल जहां एक ओर भारतीय संस्कृति की श्रेष्ठता को रेखांकित करते हैं वहीं इस गाने का संगीत और गायकी युवाओं को पसंद आ रही है।

गाने का संगीत प्रसिद्ध संगीतकार व गायक अरिन्दम चक्रवर्ती ने तैयार किया है और उन्होंने ही इस गाने को आवाज दी है। अधात्म् है, फिल्म प्रोडयूसर जाने माने कलाकार राजा गुरू हैं। दीप अजुंम ने बताया कि जल्द ही फिल्म के दूसरे गाने भी रिकार्ड किये जायेंगे। गाने की रिंगटोन भी सभी मोबाइल सर्विस पर उपलब्ध है जिसे युवा काफी पसंद कर रहे हैं। जिले के कई प्रबुद्ध लोगों ने दीप अंजुम को उनकी सफलता के लिए बधाई दी है।

ईश्वर की प्राप्ति में बाधक हैं माया मोह: महात्मा महेश कुमार पाहुजा

ईश्वर की प्राप्ति में बाधक हैं माया मोह: महात्मा महेश कुमार पाहुजा। संत निरंकारी मंडल ब्रांच बिजनौर के तत्वाधान में सत्संग भवन पर हुआ सत्संग का आयोजन।

मीडिया प्रभारी भूपेंद्र कुमार पत्रकार

बिजनौर। संत निरंकारी मंडल ब्रांच बिजनौर के तत्वाधान में सत्संग भवन पर सत्संग का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में फरीदाबाद हरियाणा से पधारे महात्मा महेश कुमार पाहुजा ने गुरु गद्दी से साध संगत को संबोधित करते हुए कहा कि यह समाज मकड़ी का जाल है।

उन्होंने कहा कि मनुष्य इस संसार के मकड़जाल में फंसकर उलझ जाता है। इंसान माया,बमोह व लालच में फंसकर अपने वास्तविक उद्देश्य से भटक जाता है। माया मोह ईश्वर की प्राप्ति में बाधक हैं। हमें इनसे बचना चाहिए हमें निराकार प्रभु की भक्ति करनी चाहिए। निराकार का साकार रूप सद्गुरु होते हैं जो हमारा सदैव कल्याण करते हैं। बिना गुरु के मुक्ति नहीं है। गुरु ही हमें 84 के बंधन से मुक्ति दिलाते हैं और भवसागर से हमारा बेड़ा पार करते हैं और हमें मोक्ष प्राप्ति का सुगम मार्ग बताते हैं, जिससे मनुष्य का कल्याण होता है। मनुष्य दौलत की चकाचौंध में कितना खो गया है कि वह अपने मूल उद्देश्य को भूल बैठा है, जो हमारा वास्तविक उद्देश्य है कि हमारा मनुष्य जन्म किसलिए हुआ है।

उन्होंने कहा कि हमारे मुक्ति केवल मानव योनि में ही है। अन्य योनि में नहीं। मुक्ति के लिए देवी देवता भी तरसते हैं। मनुष्य अपने स्वार्थ के वशीभूत होकर सब कुछ भूल जाता है। जब हम सद्गुरु की शरण में आते हैं और अपने आप को पूरी तरह सद्गुरु को समर्पित कर देते हैं तो वह हमारा बेड़ा पार कर देते हैं। मनुष्य अपने अहंकार के कारण सब कुछ गंवा देता है क्योंकि अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन है और ईश्वर प्राप्ति में बाधक है। जब हम केवल सद्गुरु को समर्पित हो जाते हैं तो हमारे जीवन में सारे सुख आते हैं और हमें खुशियां ही खुशियां मिलने लगती हैं। ब्रह्म ज्ञान के द्वारा लोक सुखी और परलोक सुहेला हो जाता है, जो संतों के दर्शन दुर्लभ बताए गए हैं। सद्गुरु की कृपा से वह सुलभ हो जाते हैं जो भी ब्रह्म ज्ञान प्राप्त करता है वह ब्रह्म ज्ञानी महात्मा हो जाता है। ब्रह्म ज्ञान बड़े ही नसीब वाले को प्राप्त होता है। आज समय की सद्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज हमें ब्रह्म ज्ञान प्रदान कर रहे हैं। वह बहुत ही उच्च कोटि का है और सदैव हमारा कल्याण करने वाला है। सद्गुरु के बिना ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो सकती।

नीरज गौतम के संचालन में हुई साध संगत में संयोजक महात्मा बाबूराम निरंकारी, संचालक विनोद सिंह एडवोकेट, राजवीर सिंह, नौबहार सिंह, मीडिया प्रभारी भूपेंद्र कुमार पत्रकार, सुरेंद्र पाल लकी, मनोज सिंह, रूपल सिंह, मोहित कुमार, निर्दोष कुमार, दीपक, अरुण त्यागी,वमनजीत,बडीके सागर, अक्षय सागर, श्रीमती विमल पाहुजा फरीदाबाद, सुशीला, वंदना त्यागी, अश्विंदर कौर, आशु, कलावती, संध्या, प्रियांशी, अंजलि, गीता, पारुल, कल्पना, किरण, दीपा, सिमरन, नेहा, खुशी, रितिका, मानवी, जहान्वी, सरिता श्रीवास्तव, राजू जमालपुर, वैभव कुमार, कार्तिक कुमार आदि सहित निरंकारी मिशन के अनेक अनुयाई उपस्थित रहे।

खेल के मैदान में पढ़ी नमाज, वीडियो वायरल

बिजनौर में खेल के मैदान में पढ़ी गई सामूहिक नमाज, हिंदू संगठनों ने जताया विरोध। पुलिस से कार्रवाई की मांग।

Bijnor Mass prayers were read playground Hindu organizations protested and demanded action from police

खेल के मैदान में नमाज पढ़ने का वीडियो वायरल। हिंदू संगठनों ने जताया विरोध। शिकायत पर जांच में जुटी पुलिस। बिजनौर के नगीना नगर क्षेत्र अंतर्गत खेल के मैदान में मुस्लिम समाज के कुछ लोगों द्वारा सामूहिक रूप से नमाज पढ़ने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। हिंदू संगठनों ने मामला संज्ञान में आने पर विरोध जताते हुए पुलिस से कार्रवाई की मांग की है। वीडियो फुटेज के आधार पर पुलिस जांच में जुट गई है।

बिजनौर। जनपद के नगीना नगर क्षेत्र में एक खेल मैदान में नमाज पढ़े जाने का वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें मुस्लिम समाज के कुछ लोगों के सामूहिक रूप से नमाज पढ़ने की फुटेज है। इसके बाद हिंदू संगठनों में नाराजगी व्याप्त हो गई है। इस मामले में पुलिस से कार्रवाई की मांग की गई है। वहीं पुलिस वीडियो के आधार पर जांच में जुट गई है। मामला गांधी मूर्ति झंडा चौक के पास खेल के मैदान का बताया जा रहा है। वीडियो में इसी मैदान के पास एक मंदिर भी दिखाई दे रहा है।

पढ़ी जा रही नमाज, खेल रहे बच्चे
नगीना थाना नगर क्षेत्र के अंतर्गत गांधी मूर्ति झंडा चौक के पास खेल का मैदान है। यहां बच्चों से लेकर बुजुर्ग मॉर्निंग वॉक करते हैं और शाम के समय युवा कई तरह के गेम खेलते हैं। वायरल हो रहे वीडियो को लेकर बताया गया है कि बुधवार की शाम को करीब 15 मुस्लिम युवकों ने इसी मैदान में सामूहिक रूप से नमाज पढ़ी। इस दौरान बच्चे मैदान में खेलते हुए भी नजर आ रहे हैं। नमाज पढ़ने के समय किसी राहगीर ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। उसके बाद हिंदू संगठनों ने इसको लेकर विरोध शुरू कर दिया। वीडियो में मैदान के पास एक मंदिर भी दिखाई दे रहा है। यहां लोग पूजा-पाठ करने आते हैं। इसलिए खेल मैदान में नमाज पढ़ने का हिंदू संगठनों के लोगों ने विरोध जताया है। उन्होंने इस वीडियो के आधार पर पुलिस से कार्रवाई की मांग की है।

सीओ को सौंपी है जांच- एसपी देहात रामअर्ज
इस मामले में एसपी देहात राम अर्ज का कहना है कि मामले की जांच सीओ नगीना को सौंपी गई है। सीओ वायरल हो रहे वीडियो की जांच कर रहे हैं। जांच के बाद विधिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि मैदान में नमाज पढ़ने वालों की पहचान की जा रही है। यह भी जांच के दायरे में है कि वीडियो कब का है?

पर्यावरण की रक्षा के लिए जन सहयोग बेहद जरूरी-DFO

बिजनौर। पर्यावरण की रक्षा के लिए जन सहयोग बेहद जरूरी है। बिना जन आंदोलन के यह कार्य बेहद मुश्किल है। यह बात डीएफओ डा. अनिल कुमार पटेल ने सोमवार सुबह शहर के नूरपुर मार्ग स्थित चक्कर रोड चौराहे पर वृक्षारोपण करते हुए कही।

व्यापारी सुरक्षा फोरम एवं डिसेंट पब्लिक स्कूल के संयुक्त तत्वावधान में डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की स्मृति में शिक्षक दिवस पर पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि श्री पटेल ने कहा कि वर्तमान में तापमान काफी बढ़ रहा है। अगर यही स्थिति रही, तो भविष्य में इसके भयंकर परिणाम होंगे। आने वाली पीढ़ी को शुद्ध हवा व ऑक्सीजन देने के लिए प्रत्येक नागरिक को समय-समय पर वृक्षारोपण करना चाहिए। इसके लिए हमें निरंतर प्रयास करने होंगे, क्योंकि एक पौधे को वृक्ष बनने में सात से आठ वर्ष लगते हैं।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार अवनीश गौड़ ने कहा कि वृक्ष न केवल मनुष्य जाति के लिए बल्कि जीव-जंतुओं एवं प्राकृतिक संतुलन के लिहाज से अति आवश्यक हैं। बिना प्राकृति के धरती पर जीवन संभव ही नहीं है। अगर सरल शब्दों में कहा जाए तो सम्पूर्ण धरती को जीवित रखने के लिए पर्यावरण संरक्षण जरूरी है। किन्तु आज इंसान आधुनिकता की दौड़ में प्राकृतिक संसाधनों का बेहिसाब दोहन कर रहा है। बड़ी-बड़ी इमारतें बनाने के लिए वृक्षों का कटान किया जा रहा है जिसके परिणाम हाल ही के दिनों में हमें देखने को मिले हैं। बिना बारिश के पूरी बरसात निकल गई। तापमान 40 डिग्री से बढ़कर 45 डिग्री तक पहुंच गया है। अगर आने वाले दिनों में यह हाल रहा, तो इसे 50 डिग्री होने में ज्यादा देर नहीं लेगी। व्यापारी सुरक्षा फोरम के जिलाध्यक्ष राजकुमार गोयल ने कहा कि हमारे द्वारा लगाए गए पौधे कल वृक्ष बनकर आने वाली पीढ़ी को जीवन दान देंगे। डिसेंट पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्या मेघना शर्मा ने कहा कि हर नागरिक की जिम्मेदारी बनती है कि वह प्राकृतिक संतुलन एवं नई पीढ़ी को शुद्धि ऑक्सीन देने के लिए वृक्ष अवश्य लगाए।

इस मौके पर जिला मंत्री राहुल वर्मा, जिला संगठन मंत्री प्रदीप कुमार अग्रवाल, नगर अध्यक्ष नवीन अग्रवाल, नगर मंत्री खगेश शर्मा, इकाई अध्यक्ष बह्मपाल सिंह, इकाई मंत्री सुनील अग्निहोत्री, इकाई उपाध्यक्ष वासुदेव, इकाई उपाध्यक्ष संजू शर्मा, राहुल राणा राजपूत, प्रशांत चौधरी आदि उपस्थित रहे।

योगी ने किया महात्मा विदुर राजकीय मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किया गया महात्मा विदुर राजकीय मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण, मेडिकल कॉलेज में महात्मा विदुर की प्रतिमा लगाने तथा निर्माण कार्य पूर्ण गुणवत्ता व समयबद्वता के साथ पूरा करने के दिए निर्देश।

बिजनौर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्माणाधीन महात्मा विदुर राजकीय मेडिकल कॉलेज स्वाहेडी का निरीक्षण किया गया। मुख्यमंत्री ने अगले सत्र से वहां कक्षाएं प्रारम्भ करने की बात कही। उन्होंने महात्मा विदुर की प्रतिमा लगाने की व्यवस्था करने के लिये कहा। उन्होंने कहा कि जो भी निर्माण कार्य किये जा रहे हैं, वह पूर्ण गुणवत्ता व समयबद्वता के साथ पूर्ण हों। उन्होंने कॉलेज का ले-आउट प्लान, साइट प्लान व डिजाइन को भी देखा। उन्होंने मेडिकल कॉलेज आगमन पर सर्वप्रथम भगवान श्री गणेश की पूजा अर्चना की।
मुख्यमंत्री ने उपस्थित स्वास्थय विभाग के अधिकारियों से निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज की बिजनौर से दूरी की जानकारी ली। उन्होंने पूछा कि निर्माणाधीन कार्य का थर्ड पार्टी इन्सपेक्शन (निरीक्षण) कराया गया है। इस पर अधिशासी अभियन्ता लो0नि0वि0 द्वारा अवगत कराया गया कि आईआईटी रूडकी द्वारा इन्सपेक्शन किया गया है।
मुख्यमंत्री द्वारा एनएमसी के निरीक्षण की भी जानकारी ली गयी, जिस पर सीएमएस द्वारा अवगत कराया गया कि दो बार इन्सपेक्शन हुआ है अगला इन्सपेक्शन जनवरी में होगा। मुख्यमंत्री द्वारा निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज के गर्ल्स हास्टल, बॉयज हास्टल आदि कक्षों का निरीक्षण किया गया। उन्होंने कहा कि यहां आकर अच्छा लगा।
अधिशासी अभियन्ता लो0नि0वि0 चन्द्रशेखर सिंह ने बताया कि निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज 20.71 एकड में बनाया जा रहा है। इसकी लागत रू0 281.52 करोड है। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल बिजनौर में 17.52 एकड में 200 बेड का अस्पताल बनाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त 48 बेड की धर्मशाला भी बनायी जा रही है। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल में पूर्व से ही 300 बेड का अस्पताल संचालित है। नया अस्पताल बन जाने से वह 500 बेड का हो जायेगा।
इस अवसर पर विधायक ओम कुमार, विधायक सुचि चौधरी, विधायक अशोक राणा, विधायक सुशांत सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष साकेन्द्र प्रताप सिंह, पूर्व परिवहन मंत्री अशोक कटारिया, क्षेत्रीय अध्यक्ष मोहित बेनीवाल, पूर्व विधायक कमलेश सैनी, जिलाध्यक्ष सुभाष वाल्मीकि, जिलाधिकारी उमेश मिश्रा, पुलिस अधीक्षक दिनेश सिंह, मुख्य विकास अधिकारी पूर्ण बोरा, अपर जिलाधिकारी प्रशासन विनय कुमार सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा0 विजय कुमार गोयल, सीएमएस डा0 अरूण कुमार पाण्डेय, अधिशासी अभियन्ता लो0नि0वि0 चन्द्रशेखर सिंह आदि उपस्थित रहे।

सीएम की नजरों में खास साबित हुआ कृषि विभाग

बिजनौर। जिला कृषि अधिकारी अवधेश मिश्रा बहुत ही तन्मयता के साथ कृषि से संबंधित शोधों, खोजो, नई नई तकनीक को आम किसान तक पहुँचाने के लिए कृत संकल्पित रहते हैं। सरकार की जनहितकारी कृषि संबंधी सुविधाओं को प्रचार प्रसार तंत्र के माध्यम से सुविधा दिलाने के लिए बड़े ही ईमानदारी और निष्ठा के साथ जरूरतमंद किसान तक पहुंचाने के लिए जनपद के कोने-कोने के अंतिम व्यक्ति तक, जिसका कोई भी सिफारिशी नहीं है, वहां तक पहुंचने का प्रयास करते हैं। मुख्यमंत्री के बिजनौर भ्रमण के दौरान कृषि विभाग जनपद का पहला ऐसा विभाग बन गया है जिसका उन्होंने अवलोकन किया और पूरी तरह से प्रभावित भी हुए। जिला कृषि अधिकारी अवधेश मिश्रा के करीबियों और अधीनस्थ स्टाफ का कहना है कि वह जहां भी रहते हैं वहां पर कुछ नया करने के लिए प्रयास करते हैं। कुछ पाने की नहीं आमजन को कुछ देने की इनके अंदर ललक रहती है।

संघ को बौना साबित करने पर उतारू मोदी और शाह?


केन्द्र सरकार के सबसे बेहतर नतीजों में शीर्षस्थ केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी को भाजपा के संसदीय बोर्ड से अलग किये जाने का मुद्दा राजनीतिक हलकों में आजकल बहुत गरमाया हुआ है और इसे लेकर अलग-अलग तरह की धारणायें प्रतिपादित की जा रही हैं। हालांकि प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह द्वारा इस मामले में लागू किये गये निश्चय ने रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के लिए खुश किस्मती का काम किया है क्योंकि संतुलन साधने की गरज के कारण भाजपा के इन भाग्य विधाताओं को संसदीय बोर्ड में उन्हें बरकरार रखना पड़ा वरना उनका पोस्टमार्टम पहले हो जाता।
नितिन गडकरी की छवि खरी-खरी बोलने वाले नेता के बतौर बन गई है जिसे लोग बहुत पसंद कर रहे हैं। भाजपा के फायदे के आंकलन से देखें तो नितिन गडकरी के बारे में यह अंदाजा लगाने वाले कि उनके कारण मोदी की बखिया जाने अनजाने में उधड़ जाती है जिससे भाजपा को नुकसान हो रहा है, नादान हैं। असलियत यह है कि मोदी के कारण भाजपा के विरोध का जो स्पेस है गडकरी के सहारे उसे भी भाजपा की झोली में रखने में मदद मिलती है। जिन्हें देश के राजनीतिक इतिहास की जानकारी है वे अवगत होंगे कि एक जमाने में सोशलिस्टों ने इस रणनीति का बखूबी इस्तेमाल किया। वे शाश्वत विरोध की मुद्रा तब भी ओढ़े रहते थे जब उनके लोग सत्ता में होते थे और एक दूसरे को बेनकाब करने का मौका भी नहीं चूकते थे। लोगों को सोशलिस्टों की यह अदा बहुत पसंद आती थी और आंतरिक लोकतंत्र की अपनी इसी शैली की वजह से कांग्रेस का सत्ता में मजबूती खंभा हिलाने का श्रेय बहुत कुछ सोशलिस्टों को मिला। भले ही बाद में सत्ता सुन्दरी के आलिंगन पाश में पतित होकर बाद के समय में उन्होंने अपयश भी खूब कमाया।
नितिन गडकरी नागपुर से चुनकर आते हैं और संघ के बेहद नजदीकी हैं। हर सप्ताह संघ प्रमुख के दरबार में हाजिरी बजाना उनके लिए अनिवार्य कर्तव्य जैसा है। अगर यह बात सही है कि सामाजिक न्याय के ज्वार को थामने की मजबूरी के चलते संघ ने आपाद धर्म के तौर पर एक शूद्र को सत्ता के सिंहासन पर बैठाने का समझौता अंतरिम व्यवस्था के तौर पर स्वीकार कर लिया हो लेकिन उसका अल्टीमेट लक्ष्य वर्ण व्यवस्था की बहाली है। इसलिए मौका आने पर आडवाणी के संघर्ष और तपस्या को दर किनार कर उसने प्रधानमंत्री की कुर्सी अटल बिहारी वाजपेयी के हवाले कर दी थी जबकि वाजपेयी राम जन्म भूमि आंदोलन से लेकर कई अन्य बातों में न केवल संघ से अलग चलते थे बल्कि अगर संघ की फजीहत हो जाये तो भी उन्हें गम नहीं होता था। जनता पार्टी के समय मोरार जी की कैबिनेट में जन संघ घटक के लिए चार का कोटा आवंटित किया गया था जिनमें अटल जी ने दो चेहरे मुसलमान चुनवा दिये थे। खुद और लालकृष्ण आडवाणी के साथ मोरार जी की कैबिनेट में जनसंघ घटक के मंत्रियों में सिकंडर बख्त और आरिफ बेग थे। अटल जी के पास विदेश विभाग था लेकिन विदेश नीति में संघ का मार्गदर्शन स्वीकार करने की बजाय उन्होंने कांग्रेस की अरब देशों को वरीयता देने की नीति को बरकरार रखा था। जब अटल जी प्रधानमंत्री थे और रायपुर में भाजपा का राष्ट्रीय अधिवेशन होने वाला था अशोक सिंहल उस समय जिंदा थे और विश्व हिन्दू परिषद के अतरराष्ट्रीय अध्यक्ष की बागडौर संभाले हुए थे। वे साधु संतों का प्रतिनिधि मंडल लेकर अटल जी से मिलने प्रधानमंत्री आवास पहुंचे तो अटल जी ने उनका पानी उतारने के लिए आधा घंटे का इंतजार करा दिया। इसके बाद जब मुलाकात शुरू हुई तो अशोक सिंहल ने उन्हें निर्देशित करने के अंदाज में कहा कि आप रायपुर अधिवेशन में अयोध्या में विवादित स्थल पर ही राम मंदिर बनाने का प्रस्ताव पेश करें भले ही इसके कारण राजग के सहयोगी दल उनसे छिटक जायें और उनकी सरकार चली जाये लेकिन मध्यावधि चुनाव हुए तो उन्हें इस पैंतरे से भारी बहुमत से वापिसी का अवसर मिल जायेगा। पर अटल जी ने उनके मशविरे को सिरे से नकार दिया यह कहकर कि रणनीतिक दृष्टि से यह कदम भले ही कितना भी अचूक हो लेकिन उनके सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने संविधान की शपथ ली है जिसमें धर्मनिरपेक्षता के लिए प्रतिबद्धता की बात कही गई है। इस कारण उनके लिए इस शपथ से मुकरना संभव नहीं है। सिंहल और साधु संत इससे इतने बिफर गये कि उन्होंने शीघ्र ही होने वाले तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा के खिलाफ बिगुल फूंकने की घोषणा कर डाली। यह दूसरी बात है कि सिंहल के कोप के बावजूद उक्त राज्यों में भाजपा को बजाय नुकसान के आशातीत सफलता मिली।
तब संघ को लगता था कि अटल जी उसके लिए शक्ति बाण हैं क्योंकि उनकी सभी समाजों में स्वीकार्यता के कारण ही संघ को सत्ता के पायदान में आगे बढ़ने का मौका मिल रहा है। पर बहुत जल्द ही अटल जी की सीमायें सामने आने लगी। कल्याण सिंह ने उनसे विवाद के कारण पार्टी छोड़ी। हालांकि बाद में वे भाजपा में वापस आ गये थे लेकिन पिछड़ों में अटल जी की छवि दरकाने में वे बहुत बड़ा रोल अदा कर चुके थे। उनके बाद अटल जी ने उत्तर प्रदेश में किसी पिछड़े नेता को मौका देने की बजाय पहले रामप्रकाश गुप्ता और इसके बाद राजनाथ सिंह को आजमाया। जाहिर है कि सवर्ण राज की वापिसी के उनके इस प्रयास से भाजपा का बेड़ा गर्क हो गया। अपनी तमाम उपलब्धियों के बावजूद अटल जी 2004 के लोकसभा चुनाव में विदेशी महिला सोनिया गांधी के मुकाबले सत्ता की पिच पर आउट हो गये। ध्यान रखने वाली बात है कि 2004 का चुनाव अटल जी बनाम सोनिया गांधी का चुनाव था भले ही बाद में सोनिया गांधी ने स्वयं प्रधानमंत्री न बनकर डा0 मनमोहन सिंह का राजतिलक करा दिया।
इसके बाद संघ को अपने उतावलेपन को लेकर पुनर्विचार के लिए मजबूर होना पड़ा। इसके चलते 2014 में संघ ने सवर्ण मोह छोड़कर शूद्र समाज की ओर कौटिल्य नीति की अग्रसरता दिखायी और यह पत्ता कामयाब रहा क्योंकि नरेन्द्र मोदी ने बार-बार कांग्रेस के उस समय थिंक टैंके में अग्रणी मणिशंकर अययर के अंग्रेजी में दिये गये इंटरव्यू का अपने तरीके से अनुवाद करके स्वयं की कथित नीची जाति की इतनी दुहाई दी कि पूरा बहुजन समाज उनकी इस हिलोर से आप्लावित हो गया और कांग्रेस को चारों खाने चित हो जाना पड़ा।

मोदी साम्राज्य का चक्रवर्ती विस्तार-
मोदी की प्रत्युत्पन्न मति और वाक पटुता का कोई जबाव नहीं है। इस कारण एक बार वे सत्ता में पहुंच गये तो उन्होंने केन्द्र में भी गुजरात जैसा रिकार्ड दोहराने की स्थिति पैदा कर दी और सत्ता के आंगन में अपने अंगद पांव जमाकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की वह हालत कर दी है कि अगले चुनाव में अगर वह दहाई के नीचे ही सिमटकर रह जाये तो आश्चर्य न होगा। हालांकि इस विश्लेषण से अधिकांश राजनीतिक पंडित सहमत नहीं होंगे क्योंकि वे कांग्रेस के लिए अभी बेहतर संभावनायें देख रहे हैं कि वे कांग्रेस के चरम सत्यानाश को देख नहीं पा रहे हैं। मोदी साम्राज्य के चक्रवर्ती विस्तार का श्रेय अभी तक संघ को मिलता रहा इसलिए संघ गाहे बगाहे सरकार को निर्देशित करते रहता था और मोदी व शाह विनीत होकर उनका अनुपालन करते थे। पर अब स्थितियां बदल चुकी हैं। मोदी और शाह को किसी का निर्देश मंजूर नहीं है। वे संघ को उत्सव मूर्ति की हद तक समेटने पर आमादा हो चुके हैं। संघ नितिन गडकरी को जो ब्राह्मण हैं मोदी के उत्तराधिकारी के रूप में तराशने में लगा था ताकि उसका अभीष्ट सिद्ध हो सके। पर इसके पहले ही मोदी शाह ने नितिन गडकरी को ठिकाने लगाने का दुस्साहस कर डाला, संघ की नाराजगी की परवाह के बगैर। हालांकि दूसरे कुछ लोगों का मत यह भी है कि गडकरी की बेसुरी बयानबाजी से संघ की भ्रकुटियां भी उनके प्रति तन गई थी और मोदी ने संघ की सहमति लेकर ही संसदीय बोर्ड में उनका मान मर्दन किया है। पर यह सही नहीं है। संघ के पास दूसरा सवर्ण पद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं लेकिन उनका भी क्या हश्र हो इसकी चर्चायें शुरू हो गई हैं। हाल में उत्तर प्रदेश में शीर्ष प्रशासन में फेरबदल हुए जिसमें साफ दिखायी देता है कि योगी के पंख ऊपर के निर्देश से कतरे गये हैं। विधानसभा चुनाव के पहले ही उन पर केन्द्र ने सीधे अपने मुख्य सचिव को उत्तर प्रदेश में थोपा था। मिश्रा जी रिटायर हो गये थे पर उन्हें एक साल का सेवा विस्तार देकर दिल्ली से लखनऊ भेज दिया गया और योगी कोई प्रतिवाद नहीं कर पाये। फिर योगी के प्रतिद्वंदियों केशव मौर्य और बृजेश पाठक को केन्द्र ने डिप्टी चीफ मिनिस्टर बनवा दिया जबकि मौर्य चुनाव हार चुके थे। उधर शपथ ग्रहण के दिन बृजेश पाठक ने उन्हें मिले पद के लिए सिर्फ मोदी और शाह का आभार जताया और योगी की अवहेलना कर डाली जिससे योगी को खून का घूंट पीकर रह जाना पड़ा। इतना ही नहीं दोनों उप मुख्यमंत्रियों को योगी के समकक्ष जाहिर करने के लिए सीएम सहित प्रत्येक को 25-25 जिले आवंटित करने का हुकुमनामा भी केन्द्र का ही बताया जाता है।

योगी को गिरफ्तार करने वाले को भी मलाईदार पोस्ट!
अब उत्तर प्रदेश में नौकरशाही में हुए ताजा फेरबदल की चर्चा। योगी चाहते थे कि उनके सबसे प्रिय अधिकारी एसीएस होम अवनीश अवस्थी को सेवा विस्तार मिले पर योगी के आग्रह को झटक दिया गया। उन्होंने कथित तौर पर अपना कमीशन रिटायरमेंट के पहले वसूल लेने के लिए जुलाई में ही बुन्देलखण्ड एक्सप्रेसवे का उदघाटन करा दिया जिसमें स्वयं नरेन्द्र मोदी आये थे पर यह एक्सप्रेसवे उदघाटन के एक सप्ताह बाद ही जगह-जगह टूट गया और कई हादसे हो गये जिसमें जाने भी चली गई। मीडिया में यह मामला जमकर उछला जिससे मोदी को अपनी फजीयत महसूस हुई। इसके बाद उनसे अवनीश अवस्थी के प्रति रहम की गुंजाइश की ही नहीं जानी चाहिए थी। योगी बृजेश पाठक को परेशान रखने के लिए एसीएस हेल्थ अमित मोहन प्रसाद को भी नहीं हटाना चाह रहे थे जबकि वे अत्यंत विवादित हो चुके थे पर केन्द्र ने उनको भी हटवा दिया। डा0 हरिओम जिन्होंने गोरखपुर में रहते हुए योगी को गिरफ्तार किया था उन्हें लूप लाइन से निकालकर समाज कल्याण का महत्वपूर्ण चार्ज भी केन्द्र ने दिलाया। इससे अनुमान होता है कि योगी को हैसियत में रहने का संदेश सम्प्रेषित करने की प्रक्रिया भी गतिमान कर दी गई है।

भाजपा नेताओं को दिया जा रहा लूटने का अवसर-
संघ को इससे छटपटाहट तो बहुत है लेकिन वह बौनेपन के एहसास से घिर जाने के कारण मोदी और अमित शाह को टोकने की जुर्रत नहीं कर पा रहा है। दरअसल मोदी की जीत संघ के कारण नहीं अकूत चुनावी खर्चों और मार्केटिंग के लोगों की टीम के वितंडावाद से हो रही है और इसका एहसास मोदी शाह ने उनको करा दिया है। मोदी जब तक कुर्सी पर हैं तभी तक राजनीतिक हथकंडों के लिए भाजपा को अनाप शनाप संसाधनों की व्यवस्था संभव है और यह व्यवस्था खतम हो जाये तो सरकार को ढ़हते देर नहीं लगेगी।
संघ को जहां मोदी से इस बात की प्रसन्नता है कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा का मोर्चा इन्दिरा गांधी से भी आगे बढ़कर संभाल रहे हैं साथ ही साथ संघ को उनके कारण हिन्दुओं की देश में सर्वोच्च प्रतिष्ठा का सपना साकार करने का अवसर मिल रहा है वहीं संघ कई बातों में उनसे बहुत दुखी भी है। दरअसल जो लोग संघ के विरोधी है वे भी मानते हैं कि संघ सौम्य है, लोकलाज को लेकर उसमें छुईमुईपन है और नैतिक मूल्यों की बहाली की तड़प भी। संघ की प्रेरणा से ही अटल आडवाणी की जोड़ी ने पार्टी विथ ए डिफरेंस का नारा लगाया था लेकिन आज क्या हो रहा है। ईडी व इन्कम टैक्स विभाग जनरल छापेमारी छोड़कर केवल राजनीतिक विरोधियों पर निशाना लगा रहे हैं यह संघ की शील धर्मिता के खिलाफ नीति है जिसे संघ को हजम करना कितना मुश्किल हो रहा होगा। प्रधानमंत्री जिस तरह से अपने कुछ उद्योगपति मित्रों को फायदा पहुंचाने के लिए सरकार उपक्रमों को बेचने से लेकर सारी बैंकों को उन्हें कर्जा देने के लिए लुटाने में लगे हैं यह भी संघ के लिए असहजकर स्थिति है। संघ स्वदेशी का नारा लगाती थी लेकिन मोदी के मित्र उद्योगपति भारत के शत्रु चीन के माल की असेम्बलिंग कर बेचने का काम मात्र कर रहे हैं जिससे आस्तीन में सांप पालने की कहावत चरितार्थ हो रही है। भारत के पैसे से ही भारत की जड़ें खोदने का अवसर चीन को मिल रहा है। उत्तर प्रदेश में जब भाजपा की सरकार आयी थी तो वृंदावन में संघ और सरकार की समन्वय बैठक हुई थी जिसमें नये नवेले विधायकों की तृष्णा को लेकर संघ ने काफी नाराजगी प्रकट की थी। पर संघ का नैतिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने का सपना आज कहां चला गया है। ऊपर से ही भाजपा नेताओं को लूटने का अवसर दिया जा रहा है तो उत्तर प्रदेश में उन्हें रोककर योगी अपनी आफत क्यों करायें। वैसे भी योगी के पिछले कार्यकाल में उनके खिलाफ विधायकों को विद्रोह सामने आ चुका है।
जाहिर है कि संघ इसे लेकर बड़ी कशमकश में है। उसे समझ में नहीं आ रहा कि मोदी शाह की उपयोगिता को ज्यादा मानें या यह स्वीकार कर लें कि वे अपनी भूमिका पूरी कर चुके हैं इसके आगे उन्हें प्रोत्साहित रखने से कहीं बेड़ा गर्क की स्थिति न आ जाये। आगे का घटनाक्रम इस कशमकश के चलते क्या रूप लेगा यह देखने वाली बात होगी।

केपी सिंह (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

हाथ में लगा हो सैनिटाइजर, तो आरती की थाली से बना कर रखें दूरी

चिकित्सकों का कहना हाथ में लगा हो सैनिटाइजर, तो दूरी बना कर रखें आरती की थाली से

लखनऊ (शैली सक्सेना)। भगवान गणपति बप्पा का उत्सव पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ बुधवार को प्रारंभ हो गया है। हर हिन्दू के हृदय में प्रथम पूज्य श्री गणेशजी के प्रति अगाध श्रद्धा और प्रेम भी है। वहीं कोरोना काल के दौरान जारी कुछ दिशा निर्देश पर आज भी बहुत से लोगों द्वारा पालन किया जा रहा है। बदलते मौसम में आज संक्रामक बीमारियों से बचाव में उक्त सावधानियां बेहद जरूरी भी हैं।ऐसे में हर व्यक्ति को इस बेहद खास बात का ध्यान रखना आवश्यक है कि यदि हाथ में सैनिटाइजर लगा हो, तो आरती की थाली से दूरी बना कर रखें। पूजन की समाप्ति पर आरती की थाली घुमाने की परंपरा है। चिकित्सकों का कहना है कि सैनिटाइजर अत्यधिक ज्वलनशील तरल पदार्थों में से एक है। इसलिए आरती करने या लेने से पहले भले ही अपने हाथों को साबुन से अच्छी तरह से धो लें, लेकिन सैनिटाइजर से दूरी ही बनाए रखना ही समझदारी है। इस छोटी सी बात पर ध्यान नहीं दिया तो कोई बड़ी अनहोनी भी हो सकती है। …और हां कोरोना गाइडलाइंस का पालन करना आप, समाज व देश हित में आवश्यक है।

20 सेकेंड साबुन से धोएं हाथ- यूं तो 20 सेकेंड तक साबुन से हाथ धोने की सलाह डॉक्‍टर्स ने दी है। इसके बावजूद सैनिटाइजर का यूज खूब होता है। इससे हाथ को डिसइंफेक्‍ट करना आसान तो हो जाता है मगर सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, लोगों को अल्‍कोहल-बेस्‍ड हैंड सैनिटाइजर यूज करने चाहिए। इनमें कम से कम 60% अल्‍कोहल होना चाहिए।

सैनिटाइजर से खतरा?
कम से कम 60 पर्सेंट अल्‍कोहल होने के कारण हैंड सैनिटाइजर्स बेहद ज्‍वलनशील होते हैं, अर्थात उनमें बड़ी तेजी से आग लगती है। डॉक्‍टर्स सलाह देते हैं कि सैनिटाइजर्स को ऐसी जगह के पास इस्‍तेमाल ना करें जहां आग लगने की संभावना हो जैसे- रसोई गैस, लाइटर, माचिस आदि। सैनिटाइजर्स को पर्याप्‍त मात्रा में इस्‍तेमाल करें और फिर उसे सूख जाने दें।

इस्‍तेमाल का तरीका-
अगर आपके हाथ गंदे हों तो पहले साबुन और पानी से हाथ धो लें। हैंड सैनिटाइजर में मौजूद अल्‍कोहल तभी काम करता है जब आपके हाथ सूखे हों। ऐसे में सैनिटाइजर की दो-तीन बूंद लेकर अपने हाथों पर रगड़ें। उंगलियों के बीच में सफाई करने के साथ ही हथेलियों के पीछे भी लगाएं। सूखने से पहले सैनिटाजर को ना पोछें, ना ही धोएं।

साबुन है सैनिटाइजर से बेहतर– 
जहां साबुन और पानी न हो सैनिटाइजर का इस्तेमाल वहीं करें। घर पर रहने के दौरान चार से पांच बार साबुन से 20 सेकंड तक हाथ धोना चाहिए। घर से बाहर निकलने पर सैनिटाइजर का इस्तेमाल करना चाहिए। जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च बताती है कि सैनिटाइजर कोरोना वायरस से लड़ने में साबुन जितना कारगर नहीं है। कोरोना वायरस से लड़ने के लिए वही सैनिटाइजर असरदार होगा जिसमें अल्कोहल की मात्रा अधिक होगी। घरों में इस्तेमाल होने वाला साबुन सैनिटाइजर के मुकाबले ज्यादा असरदार है।

पुलिस की पकड़ से अब भी दूर है आदित्य राणा

आदित्य फरारी प्रकरण ۔۔۔۔
आदित्य की तलाश में एसओजी ने डाला डेरा। आदित्य के सम्बन्धियों को थाने लाकर की घंटों पूछताछ। फरारी के छठे दिन भी राणा नंगला में पुलिस बल तैनात।

बिजनौर। एक लाख के ईनामी बदमाश आदित्य राणा की तलाश में एसओजी टीम ने स्योहारा थाना क्षेत्र के गांव राणा नंगला पहुँच कर आदित्य के सम्बन्धियों से घंटों पूछताछ की। आदित्य की फरारी के पांचवे दिन भी गाँव राणा नंगला में पुलिस बल तैनात है।

तमाम टीम हैं खाली हाथ-
थाना शिवाला कला के एक मुक़दमे में मंगलवार को बिजनौर कोर्ट में पेशी के लिए आया कुख्यात आदित्य राणा वापसी में शाहजहांपुर के ढाबे से पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था। तब से लेकर जिले भर की कई पुलिस टीम व कई एजेंसियां आदित्य की तलाश में लगी हैं। आदित्य की फरारी के छह दिन बीत जाने के बाद भी गांव गली खेत व जंगलों में ख़ाक छानने के बाद पुलिस आदित्य की परछाई से कोसों दूर नजर आ रही है।

SOG ने की रिश्तेदारों से पूछताछ- रविवार को एसओजी की टीम आदित्य के पैतृक गांव राणा नंगला पहुंची और कई अलग अलग बिंदुओं पर जाँच की। इस दौरान एसओजी की टीम ने आदित्य के बड़े भाई ग्राम प्रधान बिट्टू व तहेरे भाई रोबिन व जयवीर को थाने लाकर आदित्य के सम्बन्ध में घंटो पूछताछ की। आदित्य की फरारी के पीछे क्या मकसद छिपा है, पुलिस इस बिंदु की भी गहराई से पड़ताल में जुटी है। पुलिस को अंदेशा है कि आदित्य पुनः कोई बड़ी घटना को अंजाम देने के लिए गाँव राणा नंगला भी आ सकता है। पुलिस ने मृतक मुकेश व राकेश के घर को सुरक्षा घेरे में ले रखा है। थानाध्यक्ष राजीव चौधरी का कहना है कि गाँव में 24 घंटे पुलिस का पहरा लगा हुआ है। आदित्य की तलाश में कई टीम लगातार काम कर रही हैं।

विधिक प्राधिकरण के एडीआर केन्द्र में होगी लीगल एड डिफेंस काउन्सिल की नियुक्ति

विधिक प्राधिकरण के एडीआर केन्द्र में होगी लीगल एड डिफेंस काउन्सिल की नियुक्ति। 05 सितम्बर तक विधिक प्राधिकरण में लीगल एड डिफेंस काउन्सिल के लिये करें आवेदन

बिजनौर। सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बिजनौर पप्पू कुमार सिंह द्वारा अवगत कराया गया कि उ0 प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा जारी निर्देशों के अनुपालन में एडीआर केन्द्र, बिजनौर में स्थापित नवीन प्रोजेक्ट-लीगल एड डिफेंस काउन्सिल सिस्टम हेतु 01 चीफ लीगल एड डिफेंस काउन्सिल, 01 डिप्टी चीफ लीगल एड डिफेंस काउन्सिल व 02 सहायक लीगल एड डिफेंस काउन्सिल की नियुक्ति 02 वर्ष के लिए की जानी है। इस हेतु आवेदन पत्र दिनांक 05 सितम्बर 2022 की सांय 5 बजे तक आमन्त्रित किये जाने हैं।
उन्होंने बताया कि उक्त पदों पर नियुक्ति हेतु आवश्यक योग्यता, नियम-शर्तें व आवदेन पत्र का प्रारूप कार्यालय जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बिजनौर से किसी भी कार्य दिवस में प्रातः 10 बजे से सांय 05 बजे तक के मध्य प्राप्त किया जा सकता है अथवा उक्त सूचना उच्च न्यायालय, इलाहाबाद की आधिकारिक वेबसाईट https://www.allahabadhighcourt.in तथा जनपद न्यायालय, बिजनौर की वेबसाईट https://districts.ecourts.gov.in/bijnor से भी डाउनलोड की जा सकती है।

बिजनौर के हीरो लवी चौधरी का भव्य स्वागत

बिजनौर पहुंचने पर लवी चौधरी का हुआ भव्य स्वागत। डीएम ने लवी को बताया बिजनौर का हीरो। युवाओं से किया प्रेरणा लेने का आह्वान।

बिजनौर। जूनियर एशियाई वालीबॉल चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय टीम के सदस्य लवी चौधरी का बिजनौर पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। लवी चौधरी हरियाणा से सोमवार को बिजनौर लौटे।

ईरान के शहर तेहरान में आयोजित हुई जूनियर एशियाई वॉलीबॉल चैंपियनशिप में भारतीय टीम ने कांस्य पदक प्राप्त किया है। भारतीय टीम के सदस्य रहे ग्राम रहमापुर निवासी लवी चौधरी सोमवार को हरियाणा से बिजनौर पहुंचे। गंगा बैराज पर लवी चौधरी का भव्य स्वागत किया गया। वहां से ढ़ोल नगाड़ों की थाप पर भारत माता की जय और वन्दे मातरम के उद्घोष लगाते हुए नेहरु स्टेडियम पहुंचे। स्टेडियम में वालीबाल संघ की ओर से कार्यक्रम आयोजित किया गया। नेहरु स्टेडियम में डीएम उमेश मिश्रा और एसपी दिनेश सिंह और एएसपी सिटी डा. प्रवीन रंजन सिंह ने लवी चौधरी का जोरदार स्वागत किया। नेहरू स्टेडियम में युवा खिलाड़ियों ने अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी लवी चौधरी और उनके कोच अजित चौधरी को कंधों पर उठा लिया और मैदान में लेकर पहुंचे। वहां सैकड़ों की संख्या में खिलाड़ी लवी चौधरी का इंतजार कर रहे थे। डीएम उमेश मिश्रा, एसपी दिनेश सिंह, एसडीएम रीतु चौधरी ने लवी चौधरी को फूलों की माला पहनाकर स्वागत किया। डीएम उमेश मिश्रा ने खिलाड़ियों से कहा कि लवी चौधरी से प्रेरणा लेकर जिले का नाम रौशन करें। डीएम ने खिलाड़ियों से लवी चौधरी को बिजनौर का हीरो बताते हुए जिले का नाम रौशन करने का आह्वान किया। डीएम ने कहा कि शिक्षा के साथ खेल जरुरी है। जिले में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। जिले के युवा अगर ठान लें तो हर क्षेत्र में नाम रौशन कर सकते हैं। युवा अपनी प्रतिभा को पहचानें और जिले के साथ देश का नाम रौशन करें। डीएम ने जिला क्रीड़ा अधिकारी जयवीर सिंह से खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत करने को कहा।

इस अवसर पर जिला क्रीड़ा अधिकारी जयवीर सिंह, बीएसए जयकरन यादव, वॉलीबाल कोच अजित तोमर, योगेन्द्र पाल सिंह योगी, मानव सचेदवा, निपेन्द्र देशवाल, विकास अग्रवाल, विकास सेतिया, पवन कुमार कृष्णा कालेज, चित्रा चौहान, अरविंद देशवाल आदि मौजूद रहे। बाद में गांव पहुंचने पर लोगों ने अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी लवी चौधरी को फूल मालाओं से लाद दिया। उनकी उपलब्धि पर गांव में खुशी का माहौल है और उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। वहीं बताया गया है कि मंगलवार को कोतवाली देहात में लवी चौधरी का भव्य स्वागत किया जाएगा।

सदैव करते रहें सेवा सत्संग व सुमिरन: श्री गुरु दयाल जी

नांगल जट में हुआ संत निरंकारी मंडल ब्रांच बिजनौर के तत्वाधान में सत्संग। सत्संग के बाद हुआ विशाल लंगर का आयोजन।

बिजनौर। संत निरंकारी मंडल ब्रांच बिजनौर के तत्वाधान में ग्राम नांगल जट में एक विशाल सत्संग का आयोजन महात्मा धर्मपाल सिंह के निवास स्थान पर किया गया। इस अवसर पर जसपुर से पधारे महात्मा पूर्व क्षेत्रीय संचालक श्री गुरु दयाल जी ने कहा कि हमें सदैव सेवा सत्संग व सुमिरन करते रहना चाहिए, तभी हमारा बेड़ा पार होगा। अगर हमारे जीवन में इन तीनों में से किसी भी एक चीज की कमी है तो हमारी भक्ति अधूरी है। इन तीनों के संगम से ही हमारी भक्ति पूरी होती है।

सब सुखों की खान है सत्संग- महात्मा श्री गुरु दयाल जी ने कहा कि सत्संग में आने से हमें सदैव सुख ही सुख मिलते हैं, क्योंकि सत्संग सब सुखों की खान है। सत्संग के लिए देवी देवता भी तरसते हैं। हमें जो यह मानव जन्म मिला है, यह बहुत ही भाग्य से मिला है क्योंकि इस मानव योनि नहीं हम भवसागर से पार हो सकते हैं और बिना गुरु के मुक्ति नहीं है गुरु ही हमें मुक्ति का रास्ता बताते हैं और भवसागर से हमारा बेड़ा पार कर देते हैं। गुरु की कृपा से ही हमारा यह लोक सुखी होता है। इसीलिए हमें हमेशा सेवा सत्संग सुमिरन करते रहना चाहिए। आज सतगुरु माता जी सुदीक्षा जी महाराज समय की पैगंबर हैं और निरंकारी मिशन की सतगुरु हैं, वही हमारा बेड़ा पार कर रही हैं। उनसे जो हमें ब्रह्म ज्ञान प्राप्त हुआ है वह बहुत ही अच्छा है। ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति होने पर हमारे कई जन्मों के पाप धुल जाते हैं।जो हमें ब्रह्म ज्ञान मिल जाता है तो हम बहुत सुखी हो जाते हैं। सद्गुरु की कृपा से ब्रह्म ज्ञान के द्वारा जब हम रमई राम को पा लेते हैं, तो कुछ भी बाकी नहीं रहता। हमें सदैव प्यार से रहना चाहिए क्योंकि प्यार सजाता है गुलशन को और नफरत वीरान करे।

पूर्व संचालक महात्मा कृपाल सिंह त्यागी के संचालन में हुए सत्संग में संयोजक महात्मा बाबूराम निरंकारी, कुशल पाल मुखी, राजवीर सिंह बगीची, आसाराम, राम अवतार, फकीरचंद, हुकुम सिंह पूर्व ग्राम प्रधान नंगल जट, चंद्रपाल, रमेश, चंद्रपाल सिकंदरी, अक्षय सागर, मीडिया प्रभारी भूपेंद्र कुमार निरंकारी पत्रकार, लोकेश, सुशीला, मंजू, वंदना त्यागी, प्रियांशी, संध्या, खुशी, अंजलि, गीता, सर्वेश, जोगराज, वंश आदि ने अपने अपने विचार व आध्यात्मिक गीत प्रस्तुत किए। सत्संग में अनुयायियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। सत्संग के बाद एक विशाल लंगर का आयोजन किया गया। सत्संग कार्यक्रम में सेवा दल के सदस्यों व अन्य महापुरुषों का विशेष योगदान रहा।

दलित, वंचित और शोषितों के मसीहा थे बाबू मंडल जी: चौधरी शैलेंद्र सिंह

अपना दल (एस) ने मनाई बाबू बीपी मंडल जी की जयंती।

बिजनौर। नजीबाबाद में अपना दल (एस) के क्षेत्रीय कार्यालय पर बाबू बीपी मंडल जी की जयंती मनाई गई। इस अवसर चौधरी शैलेंद्र सिंह एडवोकेट पूर्व चेयरमैन की उपस्थिति में एक सभा का आयोजन किया गया। सर्वप्रथम मंडल जी के चित्र पर माल्यार्पण कर पुष्प अर्पित किये गए। शैलेंद्र चौधरी एडवोकेट ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि मंडल जी ने बिहार के सातवें मुख्यमंत्री के रूप में रहते हुए सामाजिक न्याय के लिए कार्य किया। बाबू जी दलित, वंचित और शोषितों के मसीहा थे। मंडल जी ने समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए जमीनी स्तर पर कार्य कर के समाज में एक चेतना को जागृत करने का काम किया। कार्यक्रम में सूर्य प्रताप सिंह जिलाध्यक्ष आईटी सेल, हिमांशु राजपूत जिला महासचिव, यशपाल एडवोकेट, नरेश चौहान, अमर सिंह कश्यप, नरेश सैनी, राजीव शर्मा, सुंदर सिंह, गोपाल पहलवान, भानु प्रताप आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे।

नजीबाबाद में अपना दल (एस) के क्षेत्रीय कार्यालय पर बाबू बीपी मंडल जी की जयंती मनाते कार्यकर्ता

लखनऊ पुलिस की कस्टडी से बिजनौर का कुख्यात बदमाश आदित्य फरार

दरोगा समेत 4 पुलिस कर्मियों पर मुकदमा दर्ज। बिजनौर पेशी से लौटते शाहजहांपुर में हुई वारदात। खाना खाने के दौरान टॉयलेट के बहाने निकल भगा। बिजनौर से लेकर लखनऊ तक हड़कंप

लखनऊ/ बिजनौर। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की जेल में बंद कुख्यात बदमाश आदित्य राणा पुलिस हिरासत से फरार हो गया। मंगलवार को लखनऊ पुलिस बिजनौर जिला अदालत में एक मुकदमे में पेशी के लिए राणा को  लेकर आई थी। बिजनौर से वापस जाते हुए शाहजहांपुर में ढाबे पर खाना खाने के दौरान वह पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। राणा के फरार हो जाने से उसे हिरासत में लेकर चल रहे पुलिसकर्मियों में हड़कंप मच गया। आला अधिकारियों को इस मामले की जानकारी दी गई। सूचना पर रामचंद्र मिशन थाना क्षेत्र की पुलिस और आला अधिकारी मौके पर पहुंच गए। काफी देर तक तलाश की, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। आदित्य राणा बिजनौर जिले के थाना स्योहारा के राणा नंगला गांव का रहने वाला है। उस पर लूट, हत्या, अपहरण, रंगदारी समेत तमाम संगीन धाराओं में  29 मुकदमे दर्ज हैं। 

टॉयलेट करने के बहाने हुआ चंपत
आदित्य राणा को पेशी से वापस लेकर लखनऊ पुलिस लौट रही थी। शाहजहांपुर में रेड चिली ढाबे पर वह खाना खाने को रुके। इसी दौरान टॉयलेट करने के बहाने चकमा देकर वह फरार हो गया। देर रात फरार हुए अपराधी की तलाश में पुलिस लगातार तलाशी अभियान छेड़ दिया। इस मामले में लापरवाही बरतने के कारण दरोगा समेत चार पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज किया गया है।

दरोगा समेत 4 पुलिस कर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज- सीओ अखंड प्रताप सिंह ने बताया कि पुलिसकर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर लखनऊ और बिजनौर पुलिस को सूचना दे दी गई है। चार पुलिसकर्मियों और फरार कैदी आदित्य राणा के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। इसमें लखनऊ पुलिस लाइन में तैनात सब-इंस्पेक्टर दीपक कुमार, सिपाही अमित कुमार, रिंकू और चालक मनोज शामिल हैं।

2 दर्जन से अधिक मुकदमे हैं दर्ज- बिजनौर के स्योहारा निवासी आदित्य राणा पर दो दर्जन से अधिक मुकदमे पंजीकृत हैं। वह संगीन धाराओं में दर्ज मुकदमों को लेकर लखनऊ जेल में बंद था। राकेश, मुकेश के घर पर पुलिस तैनात कर दी गई है। इससे पहले 4 अगस्त 2017 को हत्या के आरोप में जेल में बंद आदित्य मुरादाबाद मे पेशी के लिए कचहरी स्थित सेशन कोर्ट से सिपाही की आंखों में मिर्च झोंक कर हथकड़ी सहित फरार हो गया था।

सुर्खियों में आया कब- स्योहारा थाना क्षेत्र के ग्राम राणा नंगला निवासी कुख्यात बदमाश आदित्य चौधरी गांव के ही दो सगे भाइयों राकेश व मुकेश की हत्या करके सुर्खियों में आ गया था। आदित्य ने पुलिस से मुखबिरी के शक में 14 अक्टूबर 2017 को गांव के पास ही मुकेश की गोलियों से भून कर हत्या कर दी थी और फरार हो गया था। मामले की पैरवी मुकेश का भाई राकेश कर रहा था। फिर 27 सितंबर 2018 को आदित्य ने राकेश की भी हत्या कर दी। मुकेश हत्याकांड के पैरोकार राकेश की हत्या के मामले में मेरठ जेल में बंद आदित्य, उसकी बहन मोनिका समेत सात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।

क्या हुआ था वर्ष 2017 में? गांव राणा नंगला निवासी राकेश की गांव बेरखेड़ा में बाइक सवार तीन बदमाशों ने गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी। राकेश हत्याकांड में कुख्यात बदमाश आदित्य गैंग का नाम सामने आया था। आदित्य ने 14 अक्तूबर 2017 को राकेश के भाई मुकेश को पुलिस को मुखबिरी करने के शक में गोलियों से भून डाला था। मुकेश हत्याकांड की पैरवी उसका भाई राकेश कर रहा था। इस बात पर ही आदित्य गैंग ने राकेश का भी कत्ल कर दिया। मेरठ जेल में बंद आदित्य ने राकेश की हत्या की जिम्मेदारी अपने गैंग को दी थी। इस मामले में जेल में बंद आदित्य, उसकी बहन मोनिका, चाचा जयवीर, जयवीर के बेटे शुभम, दूसरे चचेरे भाई राहुल, आदित्य के भाई बिट्टू व रोबिन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। मोनिका पर पहले से ही अपने भाई आदित्य की मदद करने के आरोप लगते रहे थे। आदित्य के गैंग की कमान मोनिका के हाथ में रहती थी। आदित्य की फरारी के दौरान भी मोनिका ही गैंग को चला रही थी। राकेश की हत्या के बाद गांव राना नंगला व बेरखेड़ा में सन्नाटा पसर गया था ।

ईरान में बिजनौर के “लवी” ने बिखेरा जलवा

साथियों के साथ कांस्य पदक की जीत का जश्न मानते हुए 8 नंबर जर्सी में लवी चौधरी

ईरान में छाया बिजनौर का छोरा लवी29 को बिजनौर के नेहरू स्टेडियम में स्वागत की तैयारियां।

नई दिल्ली। ईरान के तेहरान में आयोजित हुई जूनियर एशियन वॉलीबॉल चैंपियनशिप 2022 में भारतीय टीम ने कांस्य पदक प्राप्त किया। सोमवार को खेले गए मुकाबले में भारत ने दक्षिण कोरिया को हराया। यह जीत इसलिए महत्वपूर्ण हैछोटा भाई लवी चौधरी ऐसे ही एक दिन वालीबॉल की  दुनिया का सिरमौर बने; यही कामना है। 29 अगस्त को बिजनौर के नेहरू स्टेडियम में स्वागत की तैयारियां की जा रही हैं।

पत्रकार साथी का छोटा भाई- बिजनौर के पत्रकार साथियों के लिए यह जीत इसलिए महत्तवपूर्ण है, क्यूंकि इस जीत में अहम भूमिका निभाने वाले लवी चौधरी, न केवल जिले के रहने वाले हैं, बल्कि पूर्व में हिन्दुस्तान और वर्तमान में अमर उजाला में कार्यरत अचल चौधरी के छोटे भाई हैं।

गौरतलब है कि ईरान में खेली गई अंडर-18 एशियन चैंपियनशिप में भारत की टीम ने कांस्य पदक जीता है। टीम में मुजफ्फरनगर जिले के सिसौली कस्बे के आर्यन बालियान, सहारनपुर के देवबंद के आदित्य राणा और बिजनौर के लवी चौधरी भी शामिल थे।

16 अगस्त को दी थी थाईलैंड को मात
16 अगस्त को भारतीय टीम ने रोचक मुकाबले में थाईलैंड को मात दी थी। उसके बाद 18 अगस्त को भारत की टीम ने कोरिया के साथ मुकाबले में भी एकतरफा जीत हासिल की। वहीं 20 अगस्त की शाम को चीनी ताइपे की टीम को हराकर सेमीफाइनल क्वालीफाई किया। सोमवार को सेमीफाइनल मुकाबले में ईरान की टीम ने भारतीय टीम को हरा दिया। सोमवार देर शाम चैंपियनशिप में भारत की टीम ने कोरिया को हराकर कांस्य पदक पर अपना कब्जा किया।

2003 में जीता था भारत ने अंडर-18 खिताब
भारत ने 2003 में एशियाई अंडर-18 लड़कों की वॉलीबॉल चैंपियनशिप का खिताब जीता था। उसके बाद भारतीय टीम 2005, 2008 में कांस्य पदक जीतने के अलावा 2007 में उपविजेता रही। अब 2010 के बाद पहली बार भारत की टीम ने चीनी ताइपे को हराकर सेमीफाइनल में क्वालीफाई किया। फाइनल में भारतीय टीम ने दक्षिण कोरिया को 3-2 से हराकर तीसरा स्थान प्राप्त किया। टीम ने कांस्य पदक हासिल कर उत्तर प्रदेश का नाम रोशन किया है। भारतीय टीम की इस जीत से 2023 में अंडर-19 वॉलीबॉल विश्व चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई करने में मदद मिलेगी।

अत्याधुनिक होगा बिजनौर रेलवे स्टेशन: अश्विनी वैष्णव

रेलवे और बीएसएल में विशेष योजनाओं पर हो रहा काम: अश्वनी वैष्णव। दो दिवसीय दौरे पर बिजनौर पहुंचे रेलवे एवं दूर संचार मंत्री अश्वनी वैष्णव। प्रेस वार्ता में बताईं सरकार की आगामी योजनाएं। गांव-गांव तक उपलब्ध होंगी आधुनिक संचार सुविधा।

बिजनौर। भारत सरकार रेलवे विभाग को अत्यधिक सुविधाजनक बनाने के लिए विशेष योजनाएं बनाने की तैयारियां कर रही है। रेलवे एवं दूर संचार मंत्री अश्वनी वैष्णव ने यह बात प्रेस वार्ता में कहीं। रेलवे एवं दूर संचार मंत्री मंगलवार को विशेष ट्रेन से दो दिवसीय दौरे पर बिजनौर पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि मेरठ से हस्तिनापुर व बिजनौर रेलमार्ग का सर्वे कराया जाएगा।

भाजपा कार्यालय पर पत्रकारों से वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि बिजनौर रेलवे स्टेशन को अत्याधुनिक बनाने के निर्देश रेलवे विभाग के अधिकारियों को जारी किये जा चुके हैं। अब ये रेलवे स्टेशन अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित नज़र आने लगेगा। बिजनौर रेलवे स्टेशन छोटा ज़रूर है लेकिन अब इसकी सूरत बड़े शहरों के रेलवे स्टेशनों जैसी होगी। बिजनौर नगीना रेलवे फाटक पर बहुत जल्दी फ्लाई ओवर बनाया जायेगा। जन प्रतिनिधियों के माध्यम से भी ये जानकारी मिली है। इसके निदान के लिए उन्होंने डीआरएम को इस्टीमेट बनाकर उनके सामने प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किये हैं। सरकार ने इस वर्ष 62 हज़ार करोड़ रुपए की छूट रेलवे यात्रियों को दी है, जो अब तक कि सबसे बड़ी छूट है।

उन्होंने बताया कि सरकार दूर संचार की सुविधाओं से भी जनता को सीधे तौर पर लाभ पहुँचने के लिए प्रयासरत है, जिसके तहत भारत संचार निगम गांव और देहातों में फुल पावर के टावर लगा कर ग्रामीण जनता को नई दूर संचार की सुविधा मुहैया कराएगी। इसके लिए केंद्र सरकार ने एक लाख 64 हजार करोड़ रुपए जारी किये हैं। पिछले बार 92 हजार करोड़ रुपए जारी हुए थे। पिछली सरकारों ने बीएसएनएल को बिल्कुल बर्बाद कर दिया। अब डेढ़ से दो साल के भीतर हालात सुधार दी जाएगी। संबंधित अधिकारियों को इस दिशा में तेजी से कार्य करने के निर्देश दिये गए हैं। इस दौरान कई बीजेपी कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे।

इससे पहले केंद्रीय रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव मंगलवार सुबह करीब सवा 10 बजे विशेष ट्रेन से रेलवे स्टेशन बिजनौर पहुंचे। उनके साथ भाजपा क्षेत्रीय अध्यक्ष मोहित बेनीवाल भी मौजूद थे। यहां पर भाजपा नेताओं ने उनका फूल मालाओं से जोरदार स्वागत किया। इसके बाद रेल मंत्री ने भाजपा कार्यालय में कोर कमेटी की बैठक में कार्यकर्ताओं को आवश्यक दिशा निर्देश दिये। 

पुलिस का इकबाल रहे बुलंद: सिटी एएसपी व सीओ ने की पैदल गश्त

सिटी एएसपी व सीओ ने शहर में की पैदल गश्त

बिजनौर। आगामी त्योहारों को सकुशल सम्पन्न कराने एवं जनपद की कानून व्यवस्था को सुदृढ करने हेतु पुलिस विभाग सतत प्रयासरत है। इसी क्रम में अपर पलिस अधीक्षक नगर डॉ प्रवीण रंजन सिंह व क्षेत्राधिकारी नगर अनिल कुमार द्वारा थाना कोतवाली शहर क्षेत्रान्तर्गत पुलिस फोर्स के साथ आमजन को सुरक्षा का एहसास कराने के लिए पैदल गश्त की गई। इस दौरान उन्होंने लोगों को समझाया कि किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या मामले को देखते ही समीपवर्ती थाना, चौकी पर सूचित करें।

साहित्य की ‘सरस्वती’ के इतिहास में 20 अगस्त

20 अगस्त : तारीख जो तवारीख बन गई

साहित्य की ‘सरस्वती’ के इतिहास में 20 अगस्त का अपना अलग ही महत्व है। साहित्य की इस ‘सरस्वती’ का उद्गम 20 अगस्त 1899 को ही हुआ था। वैसे, उद्गम का अर्थ स्थान से जोड़ा जाता है लेकिन साहित्य की ‘सरस्वती’ के उद्गम का अर्थ यहां तारीख से है। यह वही तारीख है जो आधुनिक हिंदी साहित्य की तवारीख बन गई। इसी दिन इंडियन प्रेस (प्रयागराज) के संस्थापक-स्वामी बाबू चिंतामणि घोष ने काशी नागरी प्रचारिणी सभा को सचित्र मासिक पत्रिका के प्रकाशन संबंधी पत्र भेजकर संपादन का भार संभालने का प्रस्ताव दिया था। इस पत्र में पत्रिका के शीर्षक का कोई उल्लेख नहीं था। मासिक पत्रिका का नाम ‘सरस्वती’ कैसे पड़ा? यह अब तक रहस्य ही है।
1893 में स्थापित नागरी प्रचारिणी सभा हिंदी के प्रचार- प्रसार में सक्रिय में सक्रिय थी। 7 वर्षों में वह हिंदी को स्थापित करने में कई सफलताएं भी अर्जित कर चुकी थी। दस्तावेज देखने से पता चलता है कि इंडियन प्रेस के सचित्र मासिक पत्रिका के प्रकाशन संबंधी प्रस्ताव को नागरी प्रचारिणी सभा ने पहले- पहल बहुत गंभीरता से नहीं लिया। श्री गोविंददास जी के सभापतित्व में 21 अगस्त 1899 को संपन्न हुए सभा के साधारण अधिवेशन के कुल 25 विचारणीय विषयों में इंडियन प्रेस के सचित्र मासिक पत्रिका के प्रकाशन का विषय 23वें नंबर पर था। 24वें नंबर पर चार पुस्तकों के प्रकाशन संबंधी सूचना और अंतिम विषय के रूप में सभापति का धन्यवाद प्रस्ताव। इसी से स्पष्ट है कि मासिक पत्रिका के प्रकाशन का प्रकरण सभा के लिए कितना महत्वपूर्ण था? नागरी प्रचारिणी सभा के साधारण अधिवेशन में इंडियन प्रेस का यह पत्र विचारार्थ प्रस्तुत तो किया गया लेकिन कार्य अधिक होने के कारण उस दिन उस पत्र पर कोई विचार नहीं किया जा सका। सभा की कार्यवाही में लिखा गया-“(23) इंडियन प्रेस का 20 अगस्त का सचित्र मासिक पत्र संबंधी पत्र सभा में उपस्थित किया गया। आज्ञा हुई कि आगामी अधिवेशन में विचारार्थ उपस्थित किया जाए।”
11 सितंबर 1899 को श्री गोविंददास जी की ही अध्यक्षता में ही संपन्न हुए अधिवेशन में इंडियन प्रेस के पत्रिका प्रकाशन संबंधी प्रस्ताव पर निर्णय लिया गया- ‘इंडियन प्रेस के 20 अगस्त के मासिक सचित्र पत्र संबंधी पत्र पर निश्चय हुआ कि सभा उस पत्र के संपादन करने का वा उसके संबंध में और किसी कार्य का भार अपने ऊपर नहीं ले सकती है परंतु इंडियन प्रेस को सम्मति देती है कि वह उस पत्र को अवश्य निकालें क्योंकि उससे भाषा के उपकार की संभावना है और यदि इंडियन प्रेस के स्वामी चाहे तो सभा उन्हें ऐसे कुछ लोगों के नाम बता सकती है जो संपादक का कार्य करने के उपयुक्त हों। वे उनसे सब बातें स्वयं निश्चय कर लें’। सभा ने मासिक पत्र के प्रकाशन पर अपनी सम्मति तो दी लेकिन संपादन संबंधी कार्यभार स्वीकार नहीं किया लेकिन इंडियन प्रेस के संस्थापक बाबू चिंतामणि घोष ने हार नहीं मानी। वह जानते थे कि प्रस्तावित पत्रिका की सफलता के लिए सभा का सहयोग नितांत आवश्यक है। उन्होंने अपना प्रयत्न जारी रखा और 14 अक्टूबर को पुनः एक मासिक पत्र प्रकाशन संबंधी प्रस्ताव नागरी प्रचारिणी सभा के समक्ष प्रस्तुत किया।
इस नए प्रस्ताव पर 13 नवंबर 1899 को पंडित सुदर्शनदास जी के सभापतित्व में संपन्न हुए नागरी प्रचारिणी सभा के साधारण अधिवेशन में प्रस्तावित मासिक पत्र के लिए संपादक समिति बनाने पर निर्णय लिया गया। सभा की साधारण सभा ने क्रमशः बाबू श्यामसुंदर दास, बाबू राधा कृष्ण दास, बाबू जगन्नाथ दास, बाबू कार्तिक प्रसाद खत्री और पंडित किशोरी लाल गोस्वामी के नाम संपादक समिति के लिए प्रस्तावित किए। अपने प्रयासों की शुरुआती सफलता से उत्साहित बाबू चिंतामणि घोष ने डेढ़ माह में ही सचित्र मासिक पत्रिका के प्रकाशन की व्यवस्था सुनिश्चित की। इस तरह 1 जनवरी 1900 को सरस्वती का जन्म हुआ। उद्गम के साथ ही ‘सरस्वती’ के मुख्य पृष्ठ पर संपादक समिति के सदस्यों के नाम इस क्रम से प्रकाशित किए गए-
बाबू कार्तिक प्रसाद खत्री
पंडित किशोरी लाल गोस्वामी
बाबू जगन्नाथदास बीए
बाबू राधा कृष्ण दास
बाबू श्यामसुंदर दास बीए
सरस्वती के मुख्य पृष्ठ पर संपादक समिति के इन सदस्यों के नाम के ठीक ऊपर ‘काशी नागरी प्रचारिणी सभा के अनुमोदन से प्रतिष्ठित’ भी बड़े- बड़े अक्षरों में छापा गया। सरस्वती के 1 वर्ष पूर्ण होने पर 12वें अंक में बाबू चिंतामणि घोष का प्रकाशकीय वक्तव्य (पृष्ठ 399) पर ‘प्रकाशक का निवेदन’ शीर्षक से प्रकाशित हुआ। प्रकाशक का यह निवेदन बताता है कि उस समय हिंदी की मासिक पत्रिका निकालना कितने जोखिम का काम था। वह लिखते हैं-‘इसे नष्ट करने के लिए उतारू इतने ही लोगों के कटाक्षों की वज्रवर्षा भी होती रही।’
सरस्वती के दूसरे वर्ष के प्रथम अंक से संपादन संबंधी दायित्व संपादक समिति के स्थान पर अकेले बाबू श्यामसुंदरदास जी ने संभाला। दो वर्ष तक अकेले सरस्वती का संपादन करने के बाद बाबू श्यामसुंदर दास ने व्यस्तता के चलते अपने को संपादन कार्य से अलग कर लिया। दिसंबर 1902 के अंतिम अंक के आरंभ में उन्होंने अपना वक्तव्य ‘विविध वार्ता’ शीर्षक से प्रकाशित किया। उन्होंने लिखा- ‘इस मास की संख्या के साथ सरस्वती का तीसरा वर्ष पूरा होता है। पहले वर्ष से लेकर आज तक मेरा संबंध इस पत्रिका से घनिष्ट बना रहा। पहले वर्ष में एक समिति इस पत्रिका का संपादन करती रही और मैं भी उस समिति का सभासद रहा। दूसरे और तीसरे वर्ष में इसके संपादन का भार पूरा-पूरा मेरे ऊपर रहा परंतु चौथे वर्ष के प्रारंभ से यह कार्य हिंदी के प्रसिद्ध लेखक पंडित महावीर प्रसाद द्विवेदी के अधीन रहेगा। इस परिवर्तन का मुख्य कारण यह हुआ कि मैं समय के अभाव से सरस्वती के संपादन में इतना दत्त चित्त न रह सका जितना कि मुझे होना उचित था। इसलिए केवल नाम के लिए संपादक बना रहना मैंने उचित नहीं समझा परंतु मैं अपने पाठकों और पत्रिका के लिए को विश्वास दिलाता हूं कि यद्यपि आगामी संख्या से मैं इसका संपादक न रहूंगा पर इस पत्रिका के साथ मेरी वैसी ही सहानुभूति बनी रहेगी जैसी अब तक रही और मैं सदा इसकी उन्नति से पसंद होऊंगा। अंत में मुझे अपने उन मित्रों से प्रार्थना करनी है जो लेखों के द्वारा 3 वर्ष तक मेरी सहायता करते रहे। आशा है कि वह अगले वर्ष में भी इसी प्रकार सहायता करते रहेंगे। अब भविष्य में सरस्वती में प्रकाशनार्थ सब लेख परिवर्तन के संवाद पत्र तथा समालोचनार्थ पुस्तक आदि निम्नलिखित पते से भेजे जाने चाहिए-
पंडित महावीर प्रसाद द्विवेदी
संपादक सरस्वती,
झांसी।
पत्रिका का प्रबंध तथा मूल्य संबंधी पत्र व्यवहार पूर्ववत प्रयाग के इंडियन प्रेस से ही रहेगा।’
आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के संपादकत्व में निकलने वाली सरस्वती से वर्ष 1903 से लेकर 1905 तक अर्थात 3 वर्ष तक सभा का अनुमोदन संबंध यथावत रहा लेकिन कुछ अपरिहार्य कारणों से सभा को सरस्वती पत्रिका पर से अपना अनुमोदन हटाना पड़ा। वर्ष 1905 में प्रकाशित सभा के वार्षिक विवरण पत्र में इस संबंध में दर्ज है-
‘मासिक पत्रों में अब सबसे श्रेष्ठ सरस्वती है। यद्यपि कई कारणों से अब इस पत्रिका के साथ सभा का कोई संबंध नहीं है पर यह सभा इस पत्रिका की उन्नति देखकर प्रसन्न होती है। सरस्वती में सब प्रकार के लोगों की रूचि के अनुसार सरल भाषा में लेखों के रहने से इसका आदर दिनोंदिन बढ़ता जाता है। सभा को दुख है कि सरस्वती के प्रकाशक ने उसमें अपवादपूर्ण लेखों का रोकना उचित न जानकर सभा से अपना संबंध तोड़ना उचित समझा परंतु सभा को विश्वास है कि इस पत्रिका द्वारा हिंदी का हित निरंतर साधन होता रहेगा।’

काशी नागरी प्रचारिणी सभा का 5 वर्षों तक ‘सरस्वती’ के उत्थान में निरंतर सहयोग और साथ आधुनिक हिंदी साहित्य में एक महत्वपूर्ण परिघटना के रूप में देखी जाती है। माना भी जाता है कि अगर ‘सरस्वती’ प्रकट न हुई होती तो हिंदी और हिंदी साहित्य इस रूप में हम सबके सामने तो और न ही होता।

सरस्वती के पूर्व संपादक
बाबू श्यामसुंदर दास
किशोरी लाल गोस्वामी
बाबू कार्तिक प्रसाद खत्री
जगन्नाथदास रत्नाकर
बाबू राधा कृष्ण दास
आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी
पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी
पंडित देवी दत्त शुक्ल
पंडित उमेश चंद्र मिश्र
पंडित देवी दयाल चतुर्वेदी मस्त
पंडित देवी प्रसाद शुक्ल
पंडित श्री नारायण चतुर्वेदी ‘भैया साहब’
नितीश कुमार राय

प्रोफेसर देवेंद्र कुमार शुक्ला

पूर्व संयुक्त संपादक
ठाकुर श्री नाथ सिंह
श्रीमती शीला शर्मा

पंडित बलभद्र प्रसाद मिश्र

∆ गौरव अवस्थी
रायबरेली/उन्नाव

धूमधाम से मनाया जा रहा है श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व

लखनऊ। प्रत्येक वर्ष की भांति इस बार भी सम्पूर्ण भारतवर्ष में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर हुआ था। इस दिन रोहिणी नक्षत्र में बाल गोपाल का जन्म हुआ।

इस वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी की तिथि को लेकर काफी असमंजस रहा। दरअसल, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 18 और 19 अगस्त दोनों ही दिन पड़ रही है। ऐसे में लोगों में जन्माष्टमी मनाने को लेकर असमंजस रहा। कई पंडितों के अनुसार इन दोनों ही दिन जन्माष्टमी मनाई जा सकती है। इस दिन विधि अनुसार श्री कृष्ण की पूजा करने का विधान है। भगवान श्री कृष्ण की पूजा करने से जीवन‌ में सफलता के साथ संपन्नता आती है। हमारे देश में कृष्ण जी का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। लोग श्री कृष्णा जी का झूला सजाते हैं और उनका श्रृंगार करते हैं। कृष्ण जन्मोत्सव पर भक्त एक दूसरे को बधाई संदेश भी भेजते हैं। यही नहीं रक्षा बंधन पर्व का समापन भी इसी दिन करने का विधान है। बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उन्हें सुखमय जीवन का आशीर्वाद देती हैं। वहीं भाई भी अपनी सामर्थ्य के अनुसार भेंट देते हैं।

नहटौर पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री कॉलेज में हुआ टैबलेट वितरण

बिजनौर। नहटौर पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री कॉलेज नहटौर जनपद बिजनौर में परा स्नातक छात्र छात्राओं को टैबलेट वितरण किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की फ्री टैबलेट मोबाइल योजना के अंतर्गत विधायक ओम कुमार ने टैबलेट वितरण किया।

इस अवसर पर महाविद्यालय के अध्यक्ष इंजीनियर आशीष सिंघल, प्राचार्य डॉक्टर संजीव गौर, डॉक्टर कैलाश सिंह, डॉक्टर सीमा, डॉक्टर दीपशिखा, अश्वनी, जावेद अली, विपिन सैनी, आबिद हुसैन, चमन सैनी, मनोज हिटलर आदि उपस्थित रहे।

ट्राईसाइकिल पाकर खिले दिव्यांगजनों के चेहरे

35 दिव्यांगजनों को हुआ ट्राईसाइकिल का वितरण

ट्राईसाइकिल पाकर खिले दिव्यांगजनो के चेहरे, जताया मुख्यमंत्री का आभार

बिजनौर। विकास भवन प्रांगण में दिव्यांगजनों को ट्राईसाइकिल वितरण कार्यक्रम आयोजित हुआ। विधायक सदर श्रीमती सूचि चौधरी ने द्विव्यांगजनों को ट्राईसाइकिल का वितरण किया। दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में 35 दिव्यांगजन को ट्राईसाईकिल का वितरण किया गया। ट्राईसाइकिल पाकर दिव्यांगजनों के चेहरे खिल गये और उन्होंने मुख्यमंत्री उ0प्र0 व प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकार दिव्यांगजनों व आमजनों के हित मे कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार आमजन की मदद करने वाली लोकप्रिय सरकार है। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी पूर्ण बोरा, परियोजना निदेशक डीआरडीए ज्ञानेश्वर तिवारी, जिला दिव्यांगजन कल्याण अधिकारी अजय कुमार सहित अन्य अधिकारी, कर्मचारी व दिव्यांगजन मौजूद रहे।

श्रीकांत को लेकर आरपार की लड़ाई के मूड में त्यागी समाज

श्रीकांत त्यागी के मामले को लेकर त्यागी समाज उद्वेलित। कलक्ट्रेट में, धरना प्रदर्शन कर दी चेतावनी। नोएडा के सांसद डॉ. महेश शर्मा के खिलाफ क्यों नहीं कार्रवाई? समाज को अपमानित करने का हक मीडिया को दिया किसने?



बिजनौर। श्रीकांत त्यागी कांड को लेकर त्यागी समाज के लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है। दरअसल 05 अगस्त 2022 को नोएडा के ओमेक्स सोसाइटी सेक्टर-93 का विवाद दिन प्रतिदिन गहराता जा रहा है। श्रीकांत त्यागी की पत्नी को हिरासत में रखने तथा घर की बिजली, पानी की आपूर्ति बंद करने, संवेदना प्रकट करने पहुंचने वाले को गिरफ्तार करने से आक्रोशित त्यागी समाज ने मुख्यमंत्री को संबोधित आठ सूत्रीय ज्ञापन एडीएम को देकर मामले में निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।

कलक्ट्रेट में त्यागी समाज का जोरदार प्रदर्शन
भारी संख्या में एकत्र त्यागी समाज के लोगों ने कलक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन एडीएम को सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि श्रीकांत त्यागी के मामले में बढ़ा चढ़ाकर धाराएं लगाई गई हैं। उन्होंने मामले की जांच कर उचित धाराओं में कार्यवाही करने की मांग की।

महिला सम्मान की मंशा पर लगा प्रश्नचिन्ह
ज्ञापन में कहा गया कि श्रीकांत त्यागी की पत्नी को अवैध रूप से अमानवीय व्यवहार करते हुए पुरुष पुलिस थाने में हिरासत में रखने से महिला सम्मान पर प्रश्न चिन्ह लगा है। श्रीकांत त्यागी के घर की बिजली और पानी काट कर अनैतिक कार्य किया गया है, जिससे बच्चे सहमे हुए हैं। परिवार से मिलने समाज के जो व्यक्ति गए उन्हें भी पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, उन्हें तुरंत रिहा करने की भी मांग उठाई गई।

अभद्र भाषा प्रयोग करने पर सांसद के खिलाफ भी हो FIR

त्यागी समाज ने आठ सूत्रीय ज्ञापन में निष्पक्ष जांच की मांग करने के साथ ही कहा कि नोएडा सांसद डॉ. महेश शर्मा के खिलाफ भी पुलिस कमिश्नर को भारी भीड़ में अभद्र भाषा प्रयोग करने पर मुकदमा दर्ज करना चाहिए।

समाज को अपमानित करने वाले मीडिया कर्मियों पर हो कार्रवाई– ज्ञापन में यह भी कहा गया कि जिस महिला ने श्रीकांत के घर पर दंगा किया, उसकी भी उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। इसके अलावा देश की मीडिया ने जो त्यागी समाज को अभद्र भाषा से अपमानित किया है, उनके विरुद्ध भी कार्रवाई की जाए। वहां की हरियाली और लगे हुए वृक्षों को अपने हाथ में कानून लेते हुए उखाड़ने वालों के विरुद्ध वन विभाग द्वारा कार्रवाई कराई जाए क्योंकि पेड़ों को विस्थापित करने का अधिकार सिर्फ वन विभाग को है।

कलक्ट्रेट में धरना प्रदर्शन के दौरान इन्द्रजीत त्यागी, पराग त्यागी, नागेश त्यागी, मुदित त्यागी, राकेश त्यागी, मृणाल त्यागी, विकास त्यागी, शांति प्रकाश त्यागी, सुभाष चंद्र त्यागी, गौतम त्यागी, सौरभ मुनि त्यागी, अनिल त्यागी, राजपाल त्यागी, अनुनय भारद्वाज, सचिन भारद्वाज, ओमेंद्र त्यागी, अनुज त्यागी, पवन त्यागी, विक्की त्यागी, संदीप त्यागी, मनोज त्यागी आदि शामिल रहे।

संशय: भारत का स्वतंत्रता दिवस 75वां या 76वां?

देश की स्वतंत्रता के 75 साल पूरे होने पर कई कार्यक्रमों का आयोजन तो किया ही जा रहा है, साथ ही 75वीं वर्षगांठ की चर्चा भी हो रही है। इस दौरान लोगों के दिमाग में यह कन्फ्यूजन आ गया है कि यह आजादी की 75वीं वर्षगांठ है तो 76वां स्वतंत्रता दिवस कैसे?

दरअसल लाखों-करोड़ों लोगों के बलिदान के बाद 15 अगस्त 1947 को भारत अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हुआ। अब वर्ष 2022 में जब देश स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ पर ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ मना रहा है तो लोगों के मन में एक संशय उत्पन्न हो गया है। लोग जानना चाहते हैं कि आखिर यह कौन सा स्वतंत्रता दिवस है, 75वां या 76वां?

पूरा मामला इस तरह समझें
देश ने 15 अगस्त 1947 को पहला स्वतंत्रता दिवस मनाया,अर्थात 15 अगस्त 1948 को आजादी का एक साल पूरा हुआ तो देश ने दूसरा स्वतंत्रता दिवस मनाया। इसी तरह से 1956 में 10वां, 1966 में 20वां, 1996 में 50वां, 2016 में 70वां और 2021 में 75वां स्वतंत्रता दिवस मनाया गया। इस कारण 2022 में देश अपना 76वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है।

पुलिस कर्मियों को पुलिस महानिदेशक प्रशंसा चिन्ह गोल्ड व सिल्वर मैडल

लखनऊ। आजादी का अमृत महोत्सव स्वतंत्रता दिवस के पावन पर्व पर पुलिस आयुक्त लखनऊ एसबी शिरडकर द्वारा रिजर्व पुलिस लाइन्स में ध्वजारोहण किया गया।

ध्वजारोहण कार्यक्रम में पुलिस आयुक्त लखनऊ ने उपस्थित सभी पुलिसकर्मियों को भारतवर्ष के गौरवशाली इतिहास से अवगत कराते हुए शपथ दिलाई। सभी पुलिसकर्मियों को अपने-अपने कार्यों का पूरे मनोयोग व ईमानदारी से निर्वहन करते हुए देश की एकता व अखण्डता को बनाये रखने तथा देश के प्रगति में अपना योगदान देने की शपथ दिलाई गई। ध्वजारोहण के बाद पुलिस आयुक्त द्वारा पुलिस कर्मियों को मिष्ठान वितरण किया गया। इसी के साथ  पुलिस विभाग में रहते हुए अपनी मेहनत व लगन से कर्तव्यों का पालन करते हुए, उत्कृष्ट व सराहनीय कार्य करने वाले पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों को पुलिस महानिदेशक प्रशंसा चिन्ह, गोल्ड व सिल्वर मैडल प्रदान कर सम्मानित किया गया। 

जादूगर एनए पाशा ने श्रोताओं को जादू की प्रस्तुतियों से किया मंत्रमुग्ध


देश की आजादी के 75 वर्ष के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम के दूसरे दिन शुक्रवार देर रात तक संचालित कार्यक्रम में एन ए पाशा जादूगर ने श्रोताओं को जादू की प्रस्तुतियों से किया मंत्रमुग्ध, कार्यक्रम में प्रतिभाग करने वाले कलाकारों को शाल ओढ़ाकर किया गया सम्मानित

बिजनौर। प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश शासन संस्कृति अनुभाग के तत्वावधान देश की आजादी के 75 वर्ष के अवसर पर 11 से से 15 अगस्त 2022 तक निरंतर रूप से आयोजित होने वाले कार्यक्रम के दूसरे दिन शुक्रवार देर रात तक संचालित कार्यक्रम का मुख्य विकास अधिकारी पूर्ण बोरा द्वारा शाम 07:00 बजे कृणा बेंकट हाल में दीप प्रज्वलित कर विधिवत रूप से शुभारंभ किया गया।

एन ए पाशा जादूगर द्वारा प्रस्तुत किए गए भव्य प्रस्तुतीकरण की श्रोताओं द्वारा मुक्तकंठ से प्रशंसा की गई। इस अवसर पर उनके द्वारा जादू की कलाओं एवं प्रस्तुतियों से देश भक्ति पर आधारित कार्यक्रम तथा प्रदेश सरकार द्वारा संचालित जन कल्याणकारी योजनाओं एवं नीतियों का प्रभावी रूप से प्रस्तुतीकरण किया गया।

मुख्य विकास अधिकारी पूर्ण बोरा ने कृष्णा बैंकट हॉल, नजीबाबाद रोड, बिजनौर में 11 से 15 अगस्त तक नियमित रूप से शाम को 7:00 से आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि 14 अगस्त को बुंदेली लोक नृत्य का प्रस्तुतीकरण सुश्री राधा प्रजापति, झांसी द्वारा तथा 15 अगस्त को नृत्य नाटिका का मंचन होगा, जिसका प्रस्तुतीकरण अंजना पांडे, लखनऊ द्वारा किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि उक्त कार्यक्रमों में चयनित स्थानीय कलाकारों द्वारा भी अपनी प्रस्तुति प्रस्तुत की जाएगी।
कार्यक्रम का संचालन संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधि डॉ. राजेंद्र चौधरी, सचिव नाट्यदीप फाउंडेशन, धामपुर द्वारा प्रभावी रूप से किया गया।
कार्यक्रम के अंत में मुख्य विकास अधिकारी, परियोजना निदेशक डीआरडीए, जिला पंचायत राज अधिकारी तथा बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा कार्यक्रम में प्रतिभाग करने वाले एन ए पाशा जादूगर सहित अन्य कलाकारों को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के दौरान मुख्य विकास अधिकारी पूर्ण बोरा,परियोजना निदेशक डीआरडीए ज्ञानेश्वर तिवारी, जिला पंचायत राज अधिकारी/नोडल अधिकारी सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं हर घर तिरंगा सतीश कुमार, बेसिक शिक्षा अधिकारी जयकरण यादव, हिमांशु धीमान सहित अन्य अधिकारी, शहर के संभ्रांत नागरिक एवं भारी संख्या में श्रोतागण मौजूद थे।

आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मोहा मन


देश की आजादी के 75 वर्ष के अवसर पर 11 से 15 अगस्त 2022 तक निरंतर रूप से आयोजित होने वाले कार्यक्रम के प्रथम दिन गुरुवार देर रात तक संचालित कार्यक्रम का मुख्य विकास अधिकारी पूर्ण बोरा द्वारा शाम कृणा बैंकट हाल में दीप प्रज्वलित कर विधिवत रूप से किया गया शुभारंभ

बिजनौर। प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश शासन संस्कृति अनुभाग के निर्देशों के अनुपालन में देश की आजादी के 75 वर्ष के अवसर पर 11 से से 15 अगस्त 2022 तक निरंतर रूप से आयोजित होने वाले कार्यक्रम के प्रथम दिन गुरुवार देर रात तक संचालित कार्यक्रम का मुख्य विकास अधिकारी पूर्ण बोरा द्वारा शाम 07:00 बजे कृणा बैंकट हाल में दीप प्रज्वलित कर विधिवत रूप से शुभारंभ किया गया।
कार्यक्रम के उद्घाटन के बाद स्वागत गीत, गणेश वंदन तथा देश भक्ति गीत मनु विश्वास, कपल एकल नृत्य अभी धीमान तथा भांगड़ा नृत्य का प्रस्तुतीकरण अभी धीमान, हिमांशु धीमान, हर्ष शर्मा, आदित्य कुमार, खुशी सैनी, कनक सैनी आदि कलाकारों द्वारा भव्य रूप से किया गया। इस अवसर पर शहीद भगत सिंह के बलिदान पर आधारित नाटक का मंचन भी बहुत रोमांचक रूप से किया गया। सभी कार्यक्रमों की श्रोताओं द्वारा मुक्तकंठ से प्रशंसा की गई।–संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधि डॉ. राजेंद्र चौधरी, सचिव नाट्यदीप फाउंडेशन, धामपुर द्वारा प्रभावी रूप से कार्यक्रम का संचालन किया गया। इस अवसर पर उनके द्वारा भक्ति गीत भी प्रस्तुत किए गए।

रोजाना होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम- मुख्य विकास अधिकारी पूर्ण बोरा ने कृष्णा बैंकट हॉल, नजीबाबाद रोड, बिजनौर में रोजाना शाम को 7:00 बजे से आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि 14 अगस्त को बुंदेली लोक नृत्य का प्रस्तुतीकरण सुश्री राधा प्रजापति, झांसी द्वारा तथा 15 अगस्त को नृत्य नाटिका का मंचन होगा, जिसका प्रस्तुतीकरण अंजना पांडे, लखनऊ द्वारा किया जाएगा। उन्होंने बताया कि उक्त कार्यक्रमों में चयनित स्थानीय कलाकारों द्वारा भी अपनी प्रस्तुति दी जाएगी।

कार्यक्रम के दौरान अपर जिलाधिकारी प्रशासन विनय कुमार सिंह, परियोजना निदेशक डीआरडीए ज्ञानेश्वर तिवारी, नोडल अधिकारी सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं हर घर तिरंगा सतीश कुमार, बेसिक शिक्षा अधिकारी जयकरण यादव, चेयर पर्सन पति शमशाद अंसारी सहित अन्य अधिकारी, शहर के संभ्रांत नागरिक एवं भारी संख्या में श्रोतागण मौजूद थे।

शहीद स्मारक पर धर्म गुरुओं की मौजूदगी में वीर शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि

जश्न ए आज़ादी ट्रस्ट और पत्रकार एसोसिएशन ने किया स्वतंत्रता सेनानी के परिजन, समाजसेवी, शायर, वकील और पत्रकारों को सम्मानितशहीद स्मारक पर धर्म गुरुओं की मौजूदगी में वीर शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि

लखनऊ। स्वतंत्रता दिवस से पूर्व जश्न -ए -आजादी ट्रस्ट एवं उ. प्र. ज़िला मान्यता प्राप्त पत्रकार एसोसिएशन ने शहीद स्मारक पर वीर शहीदों की याद में 75 कैंडिल जलाकर तथा पुष्प अर्पित करके उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस मौके पर मौलाना ख़ालिद रशीद फरंगी महली, उदय खत्री, मेजर आशीष चतुर्वेदी, मंत्री दानिश आजाद अंसारी, मेयर संयुक्ता भाटिया, सूचना आयुक्त नरेंद्र श्रीवास्तव, मुरलीधर आहूजा, निगहत खान, अब्दुल वहीद, जुबैर अहमद, वामिक खान ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के परिजनों सहित समाज मे सराहनीय कार्य करने वाले समाज सेवियों, शायर, कवि, वकील और पत्रकारों को सम्मानित किया।कार्यक्रम का संचालन अब्दुल वहीद ने किया।

इस अवसर पर आमिर मुख्तार ने देश भक्ति पर कई तराने गाए। वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के उपरांत सम्मान कार्यक्रम हुआ। उस दौरान उदय खत्री, मेजर आशीष चतुर्वेदी, डॉक्टर नीमा पंत, डॉक्टर रूबी राज सिन्हा, विशाल सिंह फूडमैन, मुर्तुजा अली, शहजादे कलीम, संजय गुप्ता, स्नेहलता सिंह, इमरान खान, रजिया नवाज़, आबिद अली कुरैशी आदि को सम्मानित किया गया।

इस आयोजन में जश -ए -आजादी ट्रस्ट के अध्यक्ष मुरलीधर आहूजा, निगहत खान, मौलाना मुश्ताक, मौलाना सूफियान, वामिक खान, अब्दुल वहीद, अजीज सिद्दीकी सहित संजय सिंह, सुशील दुबे, शाहिद सिद्दीकी, जुबैर अहमद, अजीम खान, बज़्मी युनुस, क़ुदरत उल्ला खान, नीलोफर नवाज,अभय अग्रवाल, योग गुरु कृष्ण दत्त मिश्रा, नजम अहसन, एमएम मोहसिन,संतराम यादव, आरिफ मुक़ीम, भानु प्रताप, रईस खान,कमर अली, आफताब आलम, महेश दीक्षित, प्रिंस आर्य,,नूर आलम खान, शान फरीदी, वसी अहमद सिद्दीकी, आफाक मंसूरी, इस्लाम खान, मुश्ताक बेग आदि मौजूद थे। उल्लेखनीय है कि ट्रस्ट स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर एक सप्ताह तक देश भक्ति पर तमाम बड़े कार्यक्रम हर वर्ष आयोजित करती है।

शहीद के परिजनों व पूर्व सैनिकों का माल्यार्पण व शाल उढाकर सम्मान

शहीद के परिजनों व पूर्व सैनिकों का माल्यार्पण व शाल उढाकर सम्मान आजादी के अमृत महोत्सव अन्तर्गत तहसील बिजनौर में आयोजित हुआ कार्यक्रम

बिजनौर। आजादी का अमृत महोत्सव सप्ताह 11 से 17 अगस्त 2022 के अन्तर्गत पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार तहसील बिजनौर सभागार में कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य अथिति विनय कुमार सिह अपर जिलाधिकारी प्रशासन बिजनौर रहे। कार्यक्रम में उपजिलाधिकारी बिजनौर मोहित कुमार, तहसीलदार बिजनौर अनुराग सिंह भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन अनिरूद्ध कुमार यादव, नायब तहसीलदार ने किया।


कार्यक्रम में भारत की सशस्त्र सेना में अपनी जान न्यौछावर करने वाले शहीद सैनिकों के परिवारों व पूर्व सैनिक तथा अन्य गणमान्य व्यक्तियों को भी आमन्त्रित किया गया। इनमें भारत चीन अंतरराष्ट्रीय सीमा पर शहीद जाट रेजिमेन्ट के  सिपाही गजेन्द्र सिंह के पिता सीताराम निवासी ग्राम फतेहपुर कला। भारत पाक युद्ध 1965 में शहीद महार रेजिमेन्ट के सिपाही मेहरबान सिंह की पुत्री अनुराधा नि. मौ. खत्रियान] बिजनौर। पूर्व सैनिक सूबेदार मेजर अरविन्द कुमार वर्म, नायब सूबेदार तेजपाल सिंह, नायब सूबेदार मुस्तकीम अहमद, कैप्टन वीएस पंवार, कैप्टन गुणप्रकाश शर्मा,-हवलदार मौ. असलम, हवलदार राकेश कुमार व नायक वीआर शर्मा उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में विनय कुमार सिंह अपर जिलाधिकारी प्रशासन बिजनौर द्वारा सभी उपरोक्त शहीद के परिवारों के सदस्यों एवं पूर्व सैनिकों को माल्यार्पण व शाल उढाकर सम्मानित किया गया। उपजिलाधिकारी मोहित कुमार व तहसीलदार  अनुराग सिंह द्वारा सभी आमन्त्रित व्यक्तियों को ब्रोच फ्लैग तिरंगा लगाकर स्वागत व सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर समस्त राजस्व परिवार के सदस्य भी उपस्थित रहे। सभी के द्वारा सभी आमन्त्रित व उपस्थित व्यक्तियों को घर-घर तिरंगा कार्यक्रम के अन्तर्गत तिरंगा वितरण किया गया।

अपर जिलाधिकारी प्रशासन विनय कुमार सिंह ने आजादी के अमृत महोत्सव के अन्तर्गत सभी से अपने-अपने घर पर तिरंगा लगाने तथा 75 वें स्वतन्त्रता दिवस को धूमधाम से त्योहार की तरह मनाने की भी अपील की। उपजिलाधिकारी मोहित कुमार द्वारा आजादी में स्वतन्त्रता संग्राम सेनानियों के बलिदान एवं शहीद पूर्व सैनिकों द्वारा देश की रक्षा में किये गये योगदान पर प्रकाश डाला गया। सभी उपस्थित अथितियों को सूक्ष्म जलपाल कराकर कार्यक्रम का समापन किया गया।

तिरंगा रैली के साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत

कलक्ट्रेट से विकास भवन तक निकाली तिरंगा रैली 15 अगस्त तक जनपद में होंगे विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम

बिजनौर। तिरंगा रैली का उद्देश्य अमृत महोत्सव कार्यक्रम के अंतर्गत जनसामान्य में तिरंगे के प्रति जागरूकता, सम्मान एवं प्रेम की भावना को और अधिक बलवती तथा संवेदनशील बनाना है। यह विचार जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने तिरंगा झंडा रैली का नेतृत्व करते हुए व्यक्त किए गए। रैली का आयोजन स्थानीय नगर पालिका परिषद बिजनौर द्वारा कलक्ट्रेट परिसर से विकास भवन तक किया गया था।

जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने बताया कि आज प्रत्येक नगर निकाय एवं ग्राम पंचायतों में भी तिरंगा रैली कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश शासन, संस्कृति अनुभाग, लखनऊ के पत्र संख्या -1585 / चार -2022 दिनॉक 06 अगस्त, 2022 के अनुक्रम में दिनांक 11 से 15 अगस्त 2022 तक जनपद में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। अमृत महोत्सव के अंतर्गत आयोजित होने वाली कार्यक्रमों के अंतर्गत जिला स्तर पर सफलतापूर्वक आयोजन के लिए नोडल अधिकारी जिला पंचायत राज अधिकारी, बिजनौर को बनाया गया है। इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी प्रशासन विनय कुमार सिंह, वित्त एवं राजस्व अरविंद कुमार सिंह, उप जिलाधिकारी सदर मोहित कुमार, नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी विकास कुमार, लेखा अधिकारी शमीम अहमद सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद थे।

महंगाई, बेरोजगारी के खिलाफ सड़कों पर उतरी कांग्रेस, सौंपा ज्ञापन

बिजनौर। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी एवं उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर शुक्रवार को जिला/ब्लाक कांग्रेस कमेटी बिजनौर द्वारा सभी 11 ब्लॉक कार्यालयों में राष्ट्रपति को सम्बोधित मांग पत्र सौंपा गया। जिला मुख्यालय पर ज्ञापन जिलाधिकारी को दिया गया। कांग्रेस जन जिला कार्यालय से जुलूस की शक्ल में इकट्ठा होकर जिला उपाध्यक्ष मुनीश त्यागी एवं जिला महासचिव नज़ाकत अल्वी के नेतृत्व में नारेबाजी करते हुए कलक्ट्रेट पहुंचे और मांग पत्र दिया।

कांग्रेस जनों ने मांग पत्र में अवगत कराते हुए मांग की है कि भाजपा शासन काल मे देश प्रदेश में दिन प्रति दिन बढ़ती महंगाई के चलते त्राहि त्राहि मची हुई है, जिसके चलते आम नागरिक को दो वक्त की रोटी मिलना भी दूभर हो गया हैगरीब मजदूर भूखे मरने के कगार पर है। बेरोजगारी चरम पर है, पढ़े लिखे नौजवानों के लिए सरकारी नौकरी नहीं है। बेरोजगारों के लिए रोजगार नहीं है। पढ़े लिखे नौजवान हर रोज खुदकुशी कर रहे हैं, लेकिन देश की गूंगी बहरी ओर अंधी सरकार इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही है। हर रोज़ खानपान में इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री पर भी सरकार द्वारा भारी जीएसटी लगा कर लूटने का काम किया गया है, जिससे देश के गरीबों की थाली से भोजन ही गयाब होने लगा है। किसानों के इस्तेमाल में आने वाली कीटनाशक दवाईयों और बीज पर भारी जीएसटी लगने की वजह से देश का अन्नदाता भी परेशान है, जो खेती करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

राष्ट्रपति से जिला कांग्रेस कमेटी बिजनौर एवं ब्लाक कांग्रेस कमेटी मोहम्मद पुर देवमल ने मांग की है कि देश में चल रही जन विरोधी भाजपा सरकार को तत्काल बर्खास्त करें।
इस अवसर पर जिला उपाध्यक्ष मुनीश त्यागी, जिला महासचिव नज़ाकत अल्वी, पूर्व मंत्री ओमवती देवी, इकबाल अहमद ठेकेदार, रविराय गुलशन कुमार, मिस बाबुल हसन, विक्रम सिंह एड०,शमीम कुरैशी, पदम् सिंह, मो०रफत नेता, सुधीर कुमार रवि, राजवीर सिंह सैनी,।वसीम अहमद, आमोद शर्मा, वीरेश गहलोत, दिनेश कुमार, जलालुद्दीन, संजीव चौधरी, नसीम, मो०अयूब मलिक आदि मौजूद रहे।

स्योहारा। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की ओर से एक बैठक का आयोजन स्योहारा में ब्लॉक परिसर में किया गया। बैठक के बाद राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन बीडीओ को सौंपा गया। ज्ञापन में तत्काल प्रभाव से भाजपा सरकार को बर्खास्त करने की मांग की गई। सभा में प्रतिदिन बढ़ती महंगाई की समस्याएं उठाई गई। उन्होंने राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन बीडीओ रामकुमार सिंह को सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि देश में धर्म के नाम पर नफरत, अल्पसंख्यकों, किसानों, मजदूरों, महिलाओ, दलितों पर निरन्तर हमले हो रहे हैं।बेरोजगारी बढ़ रही है, युवा वर्ग परेशान है, बढ़ती महंगाई से जनता त्रस्त है। अन्नदाता दो वक्त की रोटी नहीं खा पा रहा है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की ओर राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन में भाजपा सरकार को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की मांग की गई। इस मौके पर डॉ यज्ञदत्त गौड़, प्रेम सिंह सैनी, एहसान जमील, चांद चौधरी, आसिफ कुरेशी, नरेंद्र सैनी, हरि सिंह सागर, फहीम व सतपाल सिंह आदि लोग मौजूद रहे।

काकोरी कांड की वर्षगांठ पर हुईं विभिन्न प्रतियोगिताएं

लखनऊ। काकोरी ट्रेन ऐक्शन की 97 वीं वर्षगांठ को भव्य स्तर पर मनाए जाने के क्रम में जिला प्रशासन के निर्देश पर लखनऊ जिले के विद्यालयों के छात्र-छात्राओं की निबंध प्रतियोगिता, भाषण एवं चित्रकला प्रतियोगिता जनपद स्तर पर काकोरी स्थित बाबू त्रिलोकी सिंह इंटर कॉलेज काकोरी में संपन्न हुई। इन प्रतियोगिताओं में जिले के 36 विद्यालयों के 205 छात्र छात्राओं ने उत्साह पूर्वक प्रतिभाग किया।


प्राथमिक, जूनियर तथा सीनियर वर्ग के विद्यार्थियों के लिए आयोजित इन प्रतियोगिताओं में ‘ काकोरी ट्रेन ऐक्शन स्वतंत्रता आंदोलन के संदर्भ में ‘विषयक निबंध प्रतियोगिता में प्राथमिक वर्ग से प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय स्थान क्रमशः शगुन पाल, ऐलीना, अतुल जूनियर वर्ग से क्रमशः अंजू गौतम, जोया खातून, राखी कुमारी को व सीनियर वर्ग से शादियां हसीन, आंचल मौर्य, उमे कुलसुम को प्राप्त हुआ।

आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत काकोरी के क्रांतिकारियों का योगदान विषय पर संपन्न हुई भाषण प्रतियोगिता में प्राथमिक वर्ग से प्रथम द्वितीय व तृतीय स्थान क्रमशः तस्मिया फातिमा, शैलवी मिश्रा तथा अब्दुल फहद व मोहम्मद तनवीर को प्राप्त हुआ। वहीं जूनियर वर्ग में प्रथम, द्वितीय तृतीय स्थान पर रिमझिम यादव, पूर्वी शर्मा तथा अंश यादव रहे। सीनियर वर्ग में प्रथम द्वितीय तृतीय स्थान पर क्रमशः वेदांत, आर्यन सिंह, राशि गुप्ता का चयन किया गया। आजादी का अमृत महोत्सव तथा काकोरी ट्रेन ऐक्शन विषय पर संपन्न कक्षा 1 से 8 व 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में कक्षा एक से पांच तक के वर्ग में प्रथम स्थान श्रेयांश कुशवाहा, द्वितीय कृतिका तथा तृतीय आलिया कुरैशी को प्राप्त हुआ वहीं जूनियर वर्ग से प्रथम द्वितीय तृतीय स्थान क्रमशः अंशिका सिंह, सिमरन तथा गुलशन को प्राप्त हुआ तथा सीनियर वर्ग में प्रथम द्वितीय तृतीय स्थान खुलूद मोहम्मद रफी, विशेष कुमार तथा प्रार्थना सोनकर को प्राप्त हुआ।

भव्य रूप में संपन्न इन प्रतियोगिताओं में 6 प्राथमिक विद्यालय, 8 उच्च प्राथमिक विद्यालय, 1 कंपोजिट विद्यालय, 3 राजकीय हाईस्कूल/इन्टर कॉलेज, 8 सहायता प्राप्त इण्टर कालेज तथा 10 मान्यता प्राप्त प्राइवेट विद्यालय के विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। प्रतियोगिता का संचालन एवं निर्णायक मंडल का चयन जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा किया गया। जिला विद्यालय निरीक्षक राकेश कुमार पांडे एवं कालेज के प्रधानाचार्य डॉ राजकुमार सिंह ने विजेता प्रतिभागियों को बधाई दी। प्रधानाचार्य ने बताया कि विजेता प्रतिभागियों को 9 अगस्त को काकोरी शहीद स्मारक पर आयोजित समारोह में प्रशासन द्वारा पुरस्कृत किया जाएगा।

जश्न-ए-आजादी ट्रस्ट भारी उत्साह और उमंग के साथ मनाएगा आजादी का उत्सव

जश्न ए आजादी ट्रस्ट भारी उत्साह और उमंग के साथ मनाएगा आजादी का जश्न

महापुरुषों की प्रतिमाओं की साफ सफाई, पौधरोपण के साथ ही एक सप्ताह तक विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से आजादी का जश्न मनाएगा ट्रस्ट

ट्रस्ट के आयोजनों में बड़े पैमाने पर सभी धर्मों के लोग होंगे शामिल

जश्न ए आज़ादी ट्रस्ट ने सरकार से पुराने लखनऊ की ऐतिहासिक इमारतों के आसपास यूपी के सबसे ऊंचे (राष्ट्रीय ध्वज) को लगाने की मांग की

लखनऊ। जश्न ए आजादी ट्रस्ट हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी (15 अगस्त) को आजादी का महा उत्सव मनाएगी। आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर ट्रस्ट द्वारा 7 से 15 अगस्त तक देश भक्ति पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

इस मौके पर जश्न ए आजादी ट्रस्ट के संरक्षक मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा कि यूं तो तमाम संस्थानों में 15 अगस्त के प्रोग्राम आयोजित होते हैं लेकिन आवामी तौर पर कोई बड़ा प्रोग्राम आयोजित नहीं होता था लेकिन जश्न ए आजादी ट्रस्ट ने पिछले कई वर्षों से इस कमी को दूर करने की कोशिश की है। जश्न ए आजादी के कार्यक्रमों में तमाम धर्म के लोग शरीक होकर देश की आजादी का जश्न मनाते हैं और एक दूसरे को मुबारकबाद देते हैं। जश्न ए आज़ादी ट्रस्ट की ओर से मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली, राजेंद्र सिंह बग्गा, स्वामी सारंग महाराज ने सरकार से पुराने लखनऊ की ऐतिहासिक इमारतों इमामबाड़ा, घंटाघर, रूमी गेट के आसपास यूपी का सबसे ऊंचा (राष्ट्रीय ध्वज) लगाने की मांग की।

इस बारे में ट्रस्ट के अध्यक्ष मुरलीधर आहूजा और सचिव निगहत खान ने बताया कि देश का सबसे बड़ा त्योहार 15 अगस्त बहुत ही जोशो-खरोश के साथ मनाया जाएगा। हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध,आदि सभी धर्मो के लोग एक साथ मिलकर 15 अगस्त के इस जश्न में शामिल होंगे। साथ ही आयोजन में सभी धर्मों के धर्म-गुरु शामिल होकर एकता और अखंडता का संदेश भी देंगे तथा राष्ट्रीय पर्व पर देश की खुशहाली और अमन शांति की दुआ करेंगे। निगहत खान और मुरलीधर आहूजा ने बताया कि ट्रस्ट के इस आयोजन में विभिन्न सामाजिक संस्थानों का भी योगदान रहता है। इस बार भी ट्रस्ट के साथ टीम केयर इंडिया एंड रिसर्च फाउंडेशन, शराबबंदी संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश आर्टिस्ट एकेडमी, उ. प्र. जिला मान्यता प्राप्त पत्रकार एसोसिएशन, इंसानियत वेलफेयर सोसाइटी आदि का सहयोग रहेगा।
जश्न -ए- अजादी ट्रस्ट के संस्थापक सदस्य वामिक खान, अब्दुल वहीद,जुबैर अहमद ने बताया कि भारत पर्व की शुरुआत 7 अगस्त से होगी। इस दिन लखनऊ में विभिन्न स्थानों पर लगी महापुरुषों की प्रतिमाओं की सफाई के साथ ही जनेश्वर मिश्रा पार्क में योगा और प्रभात फेरी होगी जिसका संचालन योग गुरु केडी मिश्रा द्वारा किया जायेगा। लोहिया अस्पताल में प्रसादम के माध्यम से 8 अगस्त को 775 लोगों को खाने का वितरण किया जाएगा।
9 अगस्त को शहर के विभिन्न स्थानों पर पौधरोपण किया जायेगा। 10 अगस्त को गंभीर रूप से बीमार जरुरतमंदों के लिए स्वास्थ शिविर और रक्त दान शिविर का आयोजन किया जाएगा। 11 अगस्त को शहीद स्मारक पर 75 कैंडिल जलाकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाएगी तथा देश भक्ति पर कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का आयोजन होगा। 12 अगस्त को 75 बच्चों को खिलौनों का वितरण किया जाएगा। 13 अगस्त को देश भक्ति पर पोस्टर प्रतियोगिता और झण्डे का वितरण किया जाएगा। 14 अगस्त को देश भक्ति पर संगीत की बेहतरीन शाम का आयोजन होने के साथ ही शहर में सराहनीय कार्य करने वालों का सम्मान भी किया जाएगा।
15 अगस्त को हजरतगंज में तिरंगा ध्वज फहरा कर झंडारोहण किया जाएगा और 75 किलो के लड्डू का वितरण भी होगा। 16 अगस्त को प्रातः ट्रस्ट का एक विशेष दल लखनऊ शहर के हर क्षेत्रों में जाकर कागज व झंडों को एकत्रित करेगा तथा उनको सम्मान के साथ यथा स्थान पर रक्खा जायेगा।

कोरोना महामारी को देखते हुए एहितयात के पूरे प्रबंध होंगे। सभी आयोजन कोरोना गाइड लाइन के मुताबिक ही किए जाएगें। इस मौके पर समाजसेवी राजिया नवाज, संजय सिंह, शाहिद सिद्दीकी, सतीश अजवानी, महेश दीक्षित, नजम अहसन, तनवीर सिद्दीकी, एमएम मोहसिन, आफाक मंसूरी, इस्लाम खान आदि प्रमुख रूप से मौजूद थे।

अब दिन रात कभी भी फहरा सकेंगे राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने “भारतीय झंडा संहिता” में संशोधन किया है। जिसके अंतर्गत अब राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा को दिन में और रात में फहरा सकते हैं। नये नियम के अनुसार अब पोलिस्टर एवं मशीन के द्वारा बनाए गए तिरंगे का भी उपयोग किया जा सकेगा।

इस बार सरकार आजादी के पर्व को एक अलग ही अंदाज में मनाने जा रही है। आपको बता दें कि इस बार आजादी के अमृत महोत्सव’ के तहत सरकार 13 से 15 अगस्त तक ‘हर घर तिरंगा’ कार्यक्रम की शुरुआत करने जा रही है। इस कार्यक्रम की सफलता के लिए शासन प्रशासन पूरी लगन के साथ जुटा है।

सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के सचिवों को लिखे एक पत्र में केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का प्रदर्शन, फहराना और उपयोग भारतीय झंडा संहिता, 2002 और राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के तहत आता है। जिसके अनुसार भारतीय झंडा संहिता, 2002 में 20 जुलाई, 2022 के एक आदेश के जरिए संशोधन किया गया है।

अब भारतीय झंडा संहिता, 2002 के भाग-दो के पैरा 2.2 के खंड (11) को अब इस तरह पढ़ा जाएगा- ‘जहां झंडा खुले में प्रदर्शित किया जाता है या किसी नागरिक के घर पर प्रदर्शित किया जाता है, इसे दिन-रात फहराया जा सकता है। इससे पहले, तिरंगे को केवल सूर्योदय से सूर्यास्त तक फहराने की अनुमति थी। झंडा संहिता के बदले गए प्रावधान में अब  ‘राष्ट्रीय ध्वज हाथ से काता और हाथ से बुना हुआ या मशीन से बना हुआ/कपास/पॉलिएस्टर/ऊन/ रेशमी खादी से बना होगा। इससे पहले, मशीन से बने और पॉलिएस्टर से बने राष्ट्रीय ध्वज के उपयोग की अनुमति नहीं थी।

पत्रकार को लिखने से रोका नहीं जा सकता- सुप्रीम कोर्ट

जिस तरह वकील को बहस करने से नहीं रोका जा सकता, उसी तरह पत्रकार को भी लिखने से रोका नहीं जा सकता-न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। पत्रकारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर देश के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड ने बहुत बड़ी बात कही है। एक फैसले में उन्होंने पत्रकारों को कुछ कहने या लिखने से नहीं रोकने की व्यवस्था देते हुए कहा कि यह बिल्कुल वैसा होगा कि हम एक वकील से यह कहें कि आपको बहस नहीं करनी चाहिए।

दरअसल उत्तर प्रदेश सरकार के अधिवक्ता ने पत्रकार द्वारा सरकार के खिलाफ भविष्य मे न लिखने की शर्त के साथ जमानत देने का अनुरोध किया था।

अखिल भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार परिषद संगठन के  राष्ट्रीय अध्यक्ष/ संस्थापक एडवोकेट हरिमोहन दूबे ने अपने समर्थकों के साथ सुप्रीम कोर्ट के इस सुप्रीम फैसले का स्वागत करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति को पूरे देश के पत्रकार संगठनों की तरफ से धन्यवाद ज्ञापित किया और कहा कि पत्रकार को देश में लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है। वह हमेशा देश को मजबूत करने और स्वस्थ समाज की परिकल्पना की आवाज को अपनी लेखनी से उजागर करता है। इसलिए उसके स्वस्थ लेखन पर सर्वोच्च न्यायालय ने रोक ना लगा कर देश के  प्रशासनिक अधिकारियों को, एक बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने अपने संगठन के लोगों की तरफ से उच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा; “जिस तरह न्यायालय में वकील को बहस करने से नहीं रोका जा सकता है। उसी तरीके पत्रकार को खबर लिखने से रोका नहीं जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट का अहम निर्णय है। यह निर्णय लोकतंत्र को मजबूत करने का स्तंभ है।”

नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट इंडिया की अयोध्या इकाई ने सुप्रीम कोर्ट के इस सुप्रीम फैसले का स्वागत करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति को पूरे देश के पत्रकार संगठनों की तरफ से धन्यवाद ज्ञापित किया है और कहा है कि पत्रकार को देश का चौथा स्तंभ माना जाता है और वह हमेशा देश को मजबूत करने और स्वस्थ समाज की परिकल्पना की आवाज को अपनी लेखनी से उजागर करता है। इसलिए उसके स्वस्थ लेखन पर सर्वोच्च न्यायालय ने रोक ना लगा कर देश की प्रशासनिक अधिकारियों को एक संदेश दिया।

‌यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष त्रियुग नारायण तिवारी, जिला अध्यक्ष नाथ बख्श सिंह, प्रदीप पाठक, जयप्रकाश सिंह सहित अनेक पत्रकारों ने उच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा “जिस तरह न्यायालय में वकील को बहस करने से नहीं रोका जा सकता, उसी तरीके पत्रकार को खबर लिखने से रोका नहीं जा सकता”; सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय लोकतंत्र को मजबूत करने का  स्तंभ है।

 दरअसल ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर को उत्तर प्रदेश में उनके खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकी में अंतरिम जमानत देते हुए न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना की पीठ ने कहा कि जुबैर को लगातार हिरासत में रखने का कोई औचित्य नहीं है। पीठ ने कहा कि जुबैर उत्तर प्रदेश पुलिस और दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज सभी प्राथमिकियों को रद्द करने के अनुरोध को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय जा सकते हैं, क्योंकि ये सभी प्राथमिकियां अब एक साथ जुड़ गई हैं। दिल्ली की अदालत ने उन्हें दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ द्वारा दर्ज प्राथमिकी में जमानत दे दी, जो पहले से ही उनके संगठन के ट्वीट और वित्तपोषण की पूरी जांच कर रही है। पीठ ने कहा कि यदि सभी मामलों की जांच विभिन्न अधिकारियों द्वारा अलग-अलग किये जाने के बजाय एक प्राधिकरण द्वारा की जाती है तो यह निष्पक्ष और उचित होगा। उच्चतम न्यायालय ने जुबैर को भविष्य में ट्वीट करने से रोकने से इंकार करते हुए कहा कि क्या एक वकील को बहस करने से रोका जा सकता है?

“आम” भोज के मौके पर समान नागरिक संहिता की प्रबल वकालत

लखनऊ। भारत रक्षा दल ट्रस्ट ने मलिहाबाद विधानसभा क्षेत्र के तिलसुवा ग्राम सभा के दूधाधारी मंदिर प्रांगण में आम भोज के कार्यक्रम के आयोजन के राष्ट्रीय जनआंदोलन हेतु ग्राम्य कार्यकर्ता जन चौपाल आयोजित किया गया। अध्यक्षता ग्राम सभा के पूर्व प्रधान जीत बहादुर ने व संचालन संगठन के रहीमाबाद इकाई के संरक्षक सुशील गुप्ता ने किया। कार्यक्रम का आयोजन ट्रस्ट के मजदूर किसान प्रकोष्ठ के अध्यक्ष निरंजन सिंह लल्ला यादव ने किया। चौपाल में जिन अन्य प्रमुख लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए उसमें संगठन के संयुक्त मंत्री महेंद्र सिंह राणा, भारत रक्षा दल ट्रस्ट के सरोज बाला सोनी, सहायक महामंत्री कैप्टन मनोज कुमार राय, महामन्त्री भागीरथी विश्वकर्मा, डॉ शशि मिश्रा, रितु अग्रवाल, एसबी सिंह, शिशिर तिवारी, लल्ला यादव प्रमुख रहे।

इस मौके पर आयोजित जन चौपाल को संबोधित करते हुए कार्यक्रम के मुख्य वक्ता भारत रक्षा दल ट्रस्ट के संस्थापक श्रीनिवास राय राष्ट्रवादी ने उपस्थित जन का ध्यान तीन मुद्दों की ओर आकर्षित करते हुए कहा कि आज देश सवाल कर रहा है कि जब 1947 में भारत आजाद हुआ तब संख्या और धार्मिकता के आधार पर अलग देश पाकिस्तान बना तो भारत हिंदू राष्ट्र क्यो नही बना ? इसलिए अब से ही सही भारत को हिंदू राष्ट्र बनना चाहिए। उन्होंने समान नागरिक संहिता की भी प्रबल वकालत करते हुए कहा कि देश के नागरिकों में किसी भी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। इसलिये एक देश एक कानून जो सबको आगे बढ़ने का समान अवसर प्रदान करे। इसके लिये समान नागरिक संहिता आज वक्त की मांग है। उन्होंने देश की जनसँख्या पर चिंता जताते हुए कहा कि अब हमारा देश आबादी के दृष्टि से चीन से भी आगे निकल चुका है, जो अत्यंत चिंता का विषय है। अब इस पर कड़ा कानून न बनाना सरकार की गलती है।

मुख्य अतिथि विधायक जयदेवी कौशल ने अपने सम्बोधन में कहा कि हमारी सरकार इन तीनों मुद्दों पर गम्भीरतापूर्वक कार्य कर रही है। उपस्थित जनता ने इन तीन मुद्दों पर दोनों हाथ उठाकर संगठन को अपना समर्थन दिया। निकट भविष्य में और ग्राम सभाओं में भी इस प्रकार के चौपाल का निर्णय लिया गया। इस मौके पर जनसँख्या नियंत्रण कानून के लिये हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया, जिसमें 188 लोगों ने हस्ताक्षर किया। इस मौके पर चन्दन सिंह, आभा पाण्डेय, संगीता भट्ट, सरला तिवारी, तेजा सिंह, सबलू खान, सजीवन लाल, राजेन्द्र यादव, दीपक यादव मौजूद थे। कार्यक्रम में गांव के सबसे बुजुर्ग 97 वर्षीय श्री रामप्यारे यादव का विधायक जयदेवी द्वारा सम्मान किया गया।

राहत: बिना पैकिंग के आटा दाल लस्सी बेचने पर GST नहीं

नई दिल्ली (एजेंसी)। हाल ही में देश में कई चीजों के दाम बढ़ गए हैं। इस बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक लिस्ट शेयर करते हुए कहा कि लिस्ट में मौजूद 14 चीजों को यदि खुला (Loose) बेचा जाएगा, अर्थात बिना पैकिंग के बेचा जाएगा तो उन पर जीएसटी की कोई भी दर लागू नहीं होगी। इस लिस्ट में दाल, गेहूं, बाजरा, चावल, सूजी और दही/लस्सी जैसी रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण चीजें शामिल हैं अनाज, चावल, आटा और दही जैसी चीजों पर 5 फीसदी GST के सरकार के फैसले का बचाव करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि यह जीएसटी केवल उन्हीं उत्पादों पर लागू है जो प्री-पैक्ड और लेबल्ड हैं। विदित हो कि पिछले महीने जीएसटी परिषद की चंडीगढ़ में हुई 47वीं बैठक में ये फैसले लिए गए थे।

GST को लेकर फैली हैं गलतफहमियां
निर्मला सीतारमण ने आगे बताया कि, ‘हाल ही में, जीएसटी परिषद ने अपनी 47 वीं बैठक में दाल, अनाज, आटा जैसे विशिष्ट खाद्य पदार्थों पर जीएसटी लगाने के फैसले पर पुनर्विचार करने की सिफारिश की है। हालांकि काफी गलतफहमियां फैली है, यहां तथ्यों को सामने लाने की कोशिश है।’ “क्या यह पहली बार है; जब इस तरह के खाद्य पदार्थों पर कर लगाया जा रहा है? नहीं, राज्य सरकारें जीएसटी से पहले की व्यवस्था में खाद्यान्न से काफी राजस्व एकत्र कर रहे थे। अकेले पंजाब ने पर्चेज टैक्स के रूप में खाद्यान्न पर 2,000 करोड़ रुपए से अधिक का संग्रह किया। यूपी ने ₹700 करोड़ जुटाए।

डाक विभाग के इण्डिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक में ₹299 में होगा 10 लाख का बीमा – पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव

डाक विभाग के इण्डिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक में ₹299 में होगा 10 लाख का बीमा – पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव

लखनऊ। महंगे प्रीमियम पर बीमा करवाने में असमर्थ लोगों के लिए डाक विभाग का इण्डिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक एक विशेष सामूहिक दुर्घटना सुरक्षा बीमा लेकर आया है, जिसमें वर्ष में महज 299 और 399 रुपए के प्रीमियम के साथ लाभार्थी का 10 लाख रुपए का बीमा होगा। एक साल खत्म होने के बाद अगले साल यह बीमा रिन्यू करवाना होगा। इसके लिए इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक में लाभार्थी का खाता होना अनिवार्य है। उक्त जानकारी वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने दी।

पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि इण्डिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक और टाटा ए.आई.जी के मध्य हुए एक एग्रीमेंट के तहत 18 से 65 वर्ष आयु के लोगों को यह सामूहिक दुर्घटना बीमा सुरक्षा मिलेगी। इसके तहत, दोनों प्रकार के बीमा कवर में दुर्घटना से मृत्यु, स्थाई या आंशिक पूर्ण अपंगता, अंग विच्छेद या पैरालाइज्ड होने पर 10 लाख रुपए का कवर मिलेगा। साथ ही साथ इस बीमा में दुर्घटना से हॉस्पिटल में भर्ती रहने के दौरान इलाज हेतु 60,000 रुपए तक का आई.पी.डी खर्च और ओ.पी.डी में 30,000 रुपए तक का क्लेम मिलेगा। वहीं, 399 रुपए के प्रीमियम बीमा में उपरोक्त सभी लाभों के अलावा दो बच्चों की पढ़ाई के लिए एक लाख तक का खर्च, दस दिन अस्पताल में रोजाना का एक हजार खर्च, किसी अन्य शहर में रह रहे परिवार हेतु ट्रांसपोर्ट का 25,000 रूपए तक का खर्च और मृत्यु होने पर अंतिम संस्कार के लिए 5,000 तक का खर्च मिलेगा।

इस बीमा सुविधा में पंजीकरण के लिए लोग अपने नजदीकी डाकघर में संपर्क कर सकते हैं। इसके तहत ज्यादा से ज्यादा लोगों को कवर करने हेतु डाक विभाग द्वारा ‘मिशन सुरक्षा’ अभियान 15 अगस्त तक चलाया जा रहा है।

आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति संरक्षण अभियान; वरिष्ठ कथाकार चित्रा मुद्गल जी के विचार

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आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति संरक्षण अभियान के संदर्भ में वरिष्ठ कथाकार चित्रा मुद्गल जी के विचार। उनकी फेसबुक वॉल से…

गांधी शांति प्रतिष्ठान की 9 जुलाई 2022 की सांझ समर्पित थी हिंदी को गढने, स॔वारने और उसे विषय गत वैविध्य से समृद्ध करने, सरस्वती पत्रिका के माध्यम से उसे निरंतर सृजनात्मक नया उन्मेष प्रदान करने वाले युग प्रवर्तक साहित्यकार, संपादक आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के नाम।
महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मारक समिति ने अपने अनेक समर्पित गणमान्य सदस्यों और वरिष्ठ साहित्यकार और पत्रकार गौरव अवस्थी के दायित्वपूर्ण देखरेख और संचालन में, अपने 25 वर्षों का सार्थक और सक्रिय सफर पूरा किया है। इस स्वागत योग्य संकल्प के साथ कि यह वर्ष महावीर प्रसाद द्विवेदी के जयंती वर्ष के रूप में मनाया जाएगा देश के कोने कोने में और उसकी पहली कड़ी का आरंभ हो रहा है, देश की राजधानी दिल्ली से।
अचानक अस्वस्थ होने के चलते गौरव अवस्थी जी की अनुपस्थिति में, मीडिया विशेषज्ञ, पत्रकार श्री अरविंद सिंह जी ने पूरे समय उनकी अनुपस्थिति को अपनी सरस उपस्थिति के चलते महसूस नहीं होने दिया।

बैसवाड़ा के साहित्य प्रेमियों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश और विश्व भर में फैले हिंदी प्रेमियों के लिए यह सूचना हर्ष और गौरव का विषय है।
महावीर प्रसाद जयंती वर्ष के शुभारंभ के साथ ही 9 जुलाई की यह सांझ साक्षी बनी देश के प्रतिष्ठित जाने-माने पत्रकार त्रिलोक दीप जी के सम्मान के साथ, वरिष्ठ पत्रकार रहे साहित्य तक के प्रस्तोता श्री जय प्रकाश पांडे जी के साथ देश के कोने-कोने से आए अपने-अपने क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान देने वालों विशिष्ट जनों को आदर पूर्वक सम्मानित करने का भी।…

छात्रा से गंदी बात करते सुन लिया था बच्चे ने, इसलिए हैवान बना था टीचर!

👉Ⓜ️पटना के मसौढ़ी में एक कोचिंग टीचर ने 5 साल के बच्चे की थी बेहरमी से पिटाई, वीडियो वायरल होने पर टीचर गिरफ्तार, बच्चे की पिटाई की वजह सुनकर आप हैरान हो जाएंगे। एक छात्रा के साथ गंदी बातें कर रहा था, जिसे इस छात्र ने देख सुन लिया था। इसी बात से नाराज़ होकर मासूम की बेरहमी से पिटाई की।

पटना। सोशल मीडिया पर पिछले दिनों वायरल वीडियो में छोटे बच्चे की पिटाई के आरोपी शिक्षक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

बताया गया है कि राजधानी पटना में बीते दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें एक शिक्षक छोटे बच्चे की बेरहमी से पिटाई करते दिख रहा है।

वीडियो वायरल होने के बाद पटना पुलिस ने इस पर स्वत: संज्ञान लेते हुए एक टीम गठित किया और आरोपी शिक्षक को नालंदा जिले के तेल्हाड़ा से गिरफ्तार कर लिया। वह यहां डालने मामा के घर में छिपा हुआ था। आरोपी शिक्षक का नाम अमरकांत कुमार है, जो जहानाबाद जिले के घोषी थाना क्षेत्र का रहने वाला है।

2 जुलाई 2022 को पटना पुलिस को एक वीडियो मिला था। वीडियो में शिक्षक अपने ही संस्थान में पढ़ने वाले एक नाबालिग छात्र की बेरहमी से पिटाई करते दिख रहा था। पुलिस ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच शुरू की, तो मामला धनरूआ थाना क्षेत्र में स्थित जय पब्लिक स्कूल सह कोचिंग संस्थान का निकला। पुलिस ने आरोपी शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया है।

मानवजीत सिंह ढिल्लो एसएसपी पटना

सरकार ने बदले नियम; अब घर बैठे मिलेगा नया sim

अब इन ग्राहकों को नहीं मिलेगा नया Sim, नियमों में सरकार ने किया बदलाव। अब करना होगा ऑनलाइन अप्लाई, घर पहुंचेगा सिम।

18 साल से अधिक उम्र के लोगों को नया सिम कार्ड लेने के लिए आधार देना होगा या डिजिलॉकर में सेव किसी दस्तावेज से खुद को वेरिफाई करना होगा। ये सभी काम ऑनलाइन भी किए जा सकते हैं और इसके लिए केवाईसी भी ऑनलाइन की जाएगी। ऑनलाइन सिम कार्ड की बुकिंग कर सकते हैं, जिसकी डिलीवरी घर के पते पर की जाएगी।

नई दिल्ली (एजेंसी)। सरकार ने सिम कार्ड को लेकर नियमों को बदल दिया है। नए नियम के तहत अब कुछ कस्टमर्स के लिए नया सिम लेना आसान हो गया है, लेकिन कुछ कस्टमर्स के लिए नया सिम लेना मुश्किल हो गया है।

Extend Sim Card re-registration to the end of the year and stop the  pressure -NIA to government - myactiveonline

करना होगा ऑनलाइन अप्लाई- नए नियम के तहत कस्टमर्स अब नए सिम के लिए ऑनलाइन अप्लाई करेंगे और सिम कार्ड उनके घर तक पहुंचाया जाएगा। ग्राहकों को मोबाइल कनेक्शन एक ऐप/पोर्टल बेस्ड प्रोसेस के जरिए दिया जाएगा, जिसमें ग्राहक घर बैठे मोबाइल कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकते हैं। दरअसल, पहले मोबाइल कनेक्शन के लिए या प्रीपेड से पोस्टपेड कराने के लिए ग्राहकों को KYC प्रोसेस से गुजरना पड़ता था।

बस एक रुपए का भुगतान- सरकार ने सिम के लिए नियमों में बदलाव कर दिया है। अब नए नियम के तहत 18 साल से कम उम्र के कस्टमर्स को कंपनी नया सिम नहीं बेच सकती है। वहीं, 18 साल के ऊपर के उम्र के कस्टमर अपने नए सिम के लिए आधार या डिजीलॉकर में स्टोर्ड किसी भी डॉक्यूमेंट से खुद को वेरिफाई कर सकते हैं। विदित हो कि DoT का यह कदम 15 सितंबर 2021 को कैबिनेट द्वारा अप्रूव्ड टेलीकॉम रिफॉर्म्स का हिस्सा है। अब यूजर्स को नए मोबाइल कनेक्शन के लिए UIDAI की Aadhaar बेस्ड e-KYC सर्विस के माध्यम से सर्टिफिकेशन के लिए बस एक रुपए का भुगतान करना होगा।

इनको नहीं मिलेगी नई सिम– टेलीकॉम डिपार्टमेंट के नए नियमों के मुताबिक अब कंपनी 18 साल से कम उम्र के यूजर्स को सिम कार्ड नहीं मिलता। इसके अलावा अगर कोई शख्स मानसिक रूप से बीमार है तो ऐसे व्यक्ति को भी नया सिम कार्ड जारी नहीं किया जाएगा। अगर ऐसे शख्स नियमों का उल्लंघन करते पकड़ा गया तो उस टेलीकॉम कंपनी को दोषी माना जाएगा, जिसने सिम बेचा है। वैसे उन लोगों के लिए सिम खरीदना आसान होगा जिनका यूआईडीएआई से वेरिफिकेशन हो जाए। अगर वेरिफिकेशन नहीं हो तो सिम कार्ड लेना मुश्किल होगा। अब सबकुछ यूआईडीएआई से वेरिफिकेशन पर निर्भर करेगा। मोबाइल और सिम कार्ड के जरिये होने वाले फ्रॉड पर शिकंजा कसने के लिए यह नया नियम लाया गया है। सिम कार्ड से जुड़े ये नए नियम टेलीकॉम विभाग ने जारी किए हैं जिन्हें कैबिनेट की मंजूरी मिली है।

5 स्‍टेप्‍स में पूरी होगी सेल्‍फ केवाईसी की प्रक्रिया-


1. सिम प्रोवाइडर का ऐप डाउनलोड करें. फिर अपने फोन से रजिस्टर करें।

2. अपना दूसरा या अपने परिवार के किसी व्‍यक्ति का नंबर दें।

3. इसके बाद मिले वन टाइम पासवर्ड (OTP) की मदद से लॉगिन करें।

4. इसमें सेल्फ केवाईसी का ऑप्शन चुनें।

5. जानकारी भरकर प्रक्रिया पूरा करें।

इस नियम के तहत लागू किया गया है नियम
इस कॉन्ट्रैक्ट को इंडियन कॉन्ट्रैक्ट लॉ 1872 के तहत लागू किया गया है। इस कानून के तहत कोई भी कॉन्ट्रैक्ट 18 से ज्यादा उम्र के लोगों के बीच होना चाहिए। भारत में एक व्यक्ति अधिकतम अपने नाम से 12 सिम खरीद सकता है। इसमें से 9 सिम का इस्तेमाल मोबाइल कॉलिंग के लिए किया जा सकता है, जबकि अन्य सिम का इस्तेमाल मशीन-टू-मशीन कम्यूनिकेशन के लिए उपयोग किया जा सकेगा।

आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय पुरस्कार 9 जुलाई को

लखनऊ। आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति संरक्षण अभियान के रजत जयंती वर्ष पर समारोह की श्रंखला नई दिल्ली के गांधी शांति प्रतिष्ठान के सभागार में 9 जुलाई 2022 दिन शनिवार को प्रारंभ होने जा रही है।
राष्ट्रीय आयोजन समिति के संयोजक वरिष्ठ पत्रकार गौरव अवस्थी ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि समारोह की मुख्य अतिथि प्रसिद्ध कथाकार श्रीमती चित्रा मुद्गल जी हैं।

समारोह में बुजुर्ग पत्रकार आदरणीय श्री त्रिलोकदीप जी को आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय पुरस्कार से पुरस्कृत किया जाएगा। उनके अतिरिक्त अन्य दिग्गज पत्रकार-साहित्यकार विभिन्न पुरस्कारों से पुरस्कृत किए जाएंगे (विस्तार से विवरण आमंत्रण पत्र में उल्लिखित है)। उन्होंने कहा कि अपने पूर्वज की स्मृतियों से जुड़ने का यह सुनहरा मौका हाथ से जाने न दें।

फर्जी मैसेज फारवर्ड न करें…

नई दिल्ली। नए आईटी नियम माह मई के अंतिम सप्ताह से प्रभावी हो चुके हैं। इसमें केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया मंच पर जारी होने वाली सामग्री के प्रति कंपनियों की जिम्मेदारी और जवाबदेही तय की है। हालांकि, नए नियमों को लेकर केंद्र सरकार और सोशल मीडिया कंपनियों में तकरार शुरू हो गई। इस बीच सोशल मीडिया पर एक दावा किया जा रहा है कि सरकार नए नियमों के जरिए सोशल मीडिया पोस्ट और फोन कॉल्स पर नजर रखेगी। क्या वाकई सरकार ने सोशल मीडिया को को मॉनिटर करने के लिए यह नया नियम बनाया है? जानिए इसकी सच्चाई….

दरअसल, एक वायरल मैसेज में दावा किया जा रहा है कि भारत सरकार द्वारा अब ‘नए संचार नियम’ के तहत सोशल मीडिया और फोन कॉल की निगरानी रखी जाएगी। इस दावे पर केंद्र ने कहा कि उसने लोगों के सोशल मीडिया पोस्ट या फोन कॉल पर नजर रखने के अधिकार वाला कोई नया नियम नहीं बनाया है। सोशल मीडिया संबंधी नये नियमों को लेकर सरकार और ट्विटर के बीच चल रही तनातनी तथा दिल्ली पुलिस के ट्विटर इंडिया के दफ्तर पहुंचने के बीच यह बयान आया है।

वहीं, वायरल मैसेज के दावे को गलत बताते हुए पीआईबी फैक्ट चैक ने ट्विटर पर एक पोस्ट में लिखा, ‘एक वायरल संदेश में दावा किया जा रहा है कि भारत सरकार नये संचार नियमों के तहत अब सोशल मीडिया और फोन कॉल पर निगरानी रखेगी।’ इसमें स्पष्ट किया गया, ‘यह दावा फर्जी है। भारत सरकार ने ऐसा कोई नियम लागू नहीं किया है। ऐसी किसी फर्जी या अपुष्ट सूचना को आगे नहीं बढ़ाएं।’

भारत में कौन कितना लोकप्रिय
-व्हॉट्सएप : 53 करोड़
-यूट्यूब : 44.8 करोड़
-फेसबुक : 41 करोड़
-इंस्टाग्राम : 21 करोड़
-ट्विटर : 1.75 करोड़
-कू : 60 लाख

रविशंकर प्रसाद का संदेश?

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने Koo पर एक पोस्ट कर सोशल मीडिया कंपनियों के लेकर बनाए गए नए नियमों पर सरकार का पक्ष रखा। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि नए नियम सिर्फ सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए ही बनाए गए हैं। बता दें कि, सोशल मीडिया कंपनियों ने नए नियमों को लेकर प्रश्न उठाया था और कहा था कि इससे निजता खत्म होगी। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि नए नियमों का पूरा मकसद यह पता करना है कि असल में पहली बार विवादित मैसेज का पोस्ट किसने किया था, जिसकी वजह से अपराध होते हैं।

1 जुलाई 2022 से चिन्हित एकल उपयोग वाली प्लास्टिक वस्तुओं पर प्रतिबंध


प्रतिबंधित एकल उपयोग वाली प्लास्टिक वस्तुओं के अवैध निर्माण, आयात, भंडारण, वितरण, बिक्री और उपयोग पर रोक लगाने के लिए राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर नियंत्रण कक्ष स्थापित किए जायेंगे

सभी हितधारकों द्वारा प्रभावी भागीदारी और ठोस कार्रवाई के माध्यम से ही इस प्रतिबंध की सफलता संभव है

एकल उपयोग वाली प्लास्टिक (एसयूपी) पर प्रतिबंध लगाने में जनभागीदारी महत्वपूर्णPosted Date:- Jun 28, 2022

नई दिल्ली (PIB)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 2022 तक एकल उपयोग वाली प्लास्टिक वस्तुओं को समाप्त करने के लिए दिए गए स्पष्ट आह्वान के अनुरूप, भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 12 अगस्त 2021 को प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन संशोधन नियम, 2021 को अधिसूचित किया। ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ की भावना को आगे बढ़ाते हुए, देश द्वारा कूड़े एवं अप्रबंधित प्लास्टिक कचरे से होने वाले प्रदूषण को रोकने के उद्देश्य से एक निर्णायक कदम उठाया जा रहा है। भारत 1 जुलाई, 2022 से पूरे देश में चिन्हित एकल उपयोग वाली प्लास्टिक वस्तुओं, जिनकी उपयोगिता कम और प्रदूषण क्षमता अधिक है, के निर्माण, आयात, भंडारण,  वितरण, बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगाएगा।

समुद्री पर्यावरण सहित स्थलीय और जलीय इकोसिस्टम पर एकल उपयोग वाली प्लास्टिक  वस्तुओं के प्रतिकूल प्रभावों को वैश्विक स्तर पर पहचाना गया है। एकल उपयोग वाली प्लास्टिक वस्तुओं के कारण होने वाले प्रदूषण को दूर करना सभी देशों के लिए एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय चुनौती बन गया है।

2019 में आयोजित चौथी संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा में, भारत ने एकल उपयोग वाले प्लास्टिक उत्पादों के प्रदूषण से निपटने के लिए एक प्रस्ताव रखा था, जिसमें वैश्विक समुदाय द्वारा इस बहुत महत्वपूर्ण मुद्दे पर ध्यान केंद्रित करने की तत्काल आवश्यकता को स्वीकार किया गया था। यूएनईए 4 में इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया जाना एक महत्वपूर्ण कदम था। मार्च 2022 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा के हाल ही में संपन्न पांचवें सत्र में, भारत प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ वैश्विक स्तर पर कार्रवाई शुरू करने के संकल्प पर आम सहमति विकसित करने के लिए सभी सदस्य देशों के साथ रचनात्मक रूप से जुड़ा।

भारत सरकार ने सिंगल यूज प्लास्टिक से उत्पन्न कचरे से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। प्रतिबंधित वस्तुओं की सूची में ये वस्तुएं शामिल हैं- प्लास्टिक स्टिक वाले ईयर बड, गुब्बारों के लिए प्लास्टिक स्टिक, प्लास्टिक के झंडे, कैंडी स्टिक, आइसक्रीम स्टिक, सजावट के लिए पॉलीस्टाइनिन (थर्मोकोल), प्लास्टिक की प्लेट, कप, गिलास, कटलरी, कांटे, चम्मच, चाकू, स्ट्रॉ, ट्रे, मिठाई के डिब्बों को रैप या पैक करने वाली फिल्म, निमंत्रण कार्ड, सिगरेट के पैकेट, 100 माइक्रोन से कम के प्लास्टिक या पीवीसी बैनर, स्टिरर।

प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन संशोधन नियम 2021 के अंतर्गत 75 माइक्रोन से कम मोटाई वाले प्लास्टिक कैरी बैग के निर्माण, आयात, संग्रहण, वितरण, बिक्री और उपयोग पर 30 सितंबर 2021 से और 120 माइक्रोन से कम मोटाई वाले इस सामान पर 31 दिसंबर, 2022 से प्रतिबंध लगाया गया है

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 16 फरवरी, 2022 को प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन संशोधन नियम, 2022 के रूप में प्लास्टिक पैकेजिंग पर विस्तारित उत्पादकों की जिम्मेदारी पर दिशा-निर्देशों को भी अधिसूचित किया है। विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (ईपीआर) दरअसल उत्पाद की शुरुआत से अंत तक उसके पर्यावरण की दृष्टि से बेहतर प्रबंधन के लिए एक उत्पादक की जिम्मेदारी होती है। ये दिशा-निर्देश प्लास्टिक पैकेजिंग कचरे की चक्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, प्लास्टिक पैकेजिंग के नए विकल्पों के विकास को बढ़ावा देने और कारोबारी जगत द्वारा टिकाऊ प्लास्टिक पैकेजिंग के विकास की दिशा में कदम बढ़ाने से संबंधित रूपरेखा मुहैया कराएंगे।

एमएसएमई इकाइयों के लिए क्षमता निर्माण कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है,  ताकि उन्हें सीपीसीबी/एसपीसीबी/पीसीसी के साथ-साथ लघु, सूक्ष्म और मध्यम उद्यम मंत्रालय तथा केंद्रीय पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग संस्थान (सीआईपीईटी) और उनके राज्य-केन्द्रों की भागीदारी के साथ प्रतिबंधित एकल उपयोग वाली प्लास्टिक वस्तुओं के विकल्प के निर्माण के लिए तकनीकी सहायता प्रदान की जा सके। ऐसे उद्यमों को प्रतिबंधित एकल उपयोग वाली प्लास्टिक के निर्माण को बंद करने में सहायता करने के भी प्रावधान किये गए हैं।

भारत सरकार ने नवाचार को बढ़ावा देने और पूरे देश में त्वरित पहुंच और विकल्पों की उपलब्धता के लिए एक इकोसिस्टम प्रदान करने के उद्देश्य से भी कदम उठाए हैं।

1 जुलाई 2022 से चिन्हित एसयूपी वस्तुओं पर प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय नियंत्रण कक्ष स्थापित किये जायेंगे तथा प्रतिबंधित एकल उपयोग प्लास्टिक के अवैध निर्माण, आयात, भंडारण,  वितरण, बिक्री एवं उपयोग की निगरानी के लिए विशेष प्रवर्तन दल गठित किये जायेंगे। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को किसी भी प्रतिबंधित एकल उपयोग वाली प्लास्टिक की वस्तुओं के अंतर-राज्य परिवहन को रोकने के लिए सीमा जांच केंद्र स्थापित करने के लिए कहा गया है।

सीपीसीबी शिकायत निवारण ऐप, नागरिकों को प्लास्टिक से जुड़ी समस्या से निपटने में मदद हेतु सशक्त बनाने के लिए शुरू किया गया है। जनता तक व्यापक पहुंच बनाने के लिए प्रकृति नाम के शुभंकर की भी 5 अप्रैल को शुरुआत की गई।

सरकार एकल उपयोग वाली प्लास्टिक को समाप्त करने के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए विभिन्न उपाय कर रही है। जागरूकता अभियान में उद्यमियों और स्टार्ट अप्स, उद्योग,  केंद्रीय, राज्य और स्थानीय सरकारों नियामक निकायों,  विशेषज्ञों, नागरिक संगठनों, अनुसंधान एवं विकास और अकादमिक संस्थानों को एकजुट किया गया है। मंत्रालय का विश्वास है कि इस पाबंदी की सफलता तभी संभव है, जबकि सभी हितधारकों और उत्साही जन भागीदारों को इसमें प्रभावी रूप से शामिल किया जाए और वे सम्मिलित रूप से प्रयास करें।

जिंदा हूं और धरती से बोल रहा हूं मैं: सुरेन्द्र शर्मा

नई दिल्ली (एजेंसी)। सिंगर सिद्धू मूसेवाला के बाद एक और दिग्गज कलाकार के निधन से पंजाबी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री शोक में डूब गई है। पंजाब के प्रसिद्ध कॉमेडियन, लेखक और शायर सुरिंदर शर्मा (Surinder Sharma) का निधन हो गया है। हालांकि, उनके बदले मीडिया ने देश के जाने-माने हास्य कवि और पद्मश्री से सम्मानित सुरेन्द्र शर्मा (Surendra Sharma) को श्रद्धांजलि देना शुरू कर दिया, जिसके बाद उन्होंने खुद सोशल मीडिया के जरिए स्पष्ट किया है कि वे जिंदा हैं।

खुद सोशल मीडिया पोस्ट कर दिया स्पष्टीकरण
निधन की खबरों के बाद हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा को खुद सोशल मीडिया पर आकर स्पष्टीकरण देना पड़ा। उन्होंने एक पोस्ट शेयर कर खुद बताया बताया कि वह सही सलामत हैं और जीवित हैं। उन्होंने पोस्ट का कैप्शन भी मजेदार दिया है। उन्होंने लिखा- सुरेंद्र शर्मा जी धरती से बोल रहे हैं। साथ ही हंसने वाली इमोजी भी शेयर की है। 

Surinder Sharma The Comedian And Actor Of Punjabi Films Passes Away GGA

कई फिल्मों और सीरियल्स में किया था सुरिंदर शर्मा ने काम

पंजाब के जिस कॉमेडियन सुरिंदर शर्मा के निधन की बात कही जा जा रही है, बताया जा रहा है कि उन्होंने कई पॉपुलर पंजाबी फिल्मों और टीवी सीरियल्स में काम किया है। रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि उन्होंने दारा सिंह और राजिंदर नाथ  जैसे कई दिग्गज कलाकारों के साथ काम किया था। पंजाबी कॉमेडियन गुरचेत चित्रकार ने सुरेन्द्र शर्मा की मौत की पुष्टि की है। हालांकि, अभी तक सुरिंदर शर्मा की मौत की असली वजह सामने नहीं आई है।

Surinder Sharma The Comedian And Actor Of Punjabi Films Passes Away GGA

रिलैक्स्ड महसूस करने के लिए बजाते थे बांसुरी, लेखन का शौक

एक पंजाबी चैनल से बातचीत में एक बार जब सुरिंदर शर्मा से पूछा गया कि वे खुद को रिलैक्स करने के लिए क्या करते हैं तो उन्होंने कहा था, “यह पहली बार है, जब मुझसे इस तरह का सवाल किया जा रहा है। जब भी मैं अशांत महसूस करता हूं और रिलैक्स्ड होना चाहता हूं, तब मैं अक्सर अपने शरीर, दिमाग और आत्मा को शांत करने के लिए बांसुरी बजाता हूं।” सुरिंदर शर्मा ने यह भी कहा था कि उन्होंने बांसुरी बजाना अपने पिता से सीखा था। उनके मुताबिक़, वे रिलैक्स्ड होने के लिए जो दूसरा काम करते थे, वह लेखन था। उनके मुताबिक़, उन्होंने कई शॉर्ट स्टोरीज और एक एक्ट प्ले लिखा था। 

धरती से बोल रहा हूं- सुरेंद्र शर्मा
हास्य कवि ने सोशल मीडिया पर खुद का एक वीडियो शेयर किया और कहा कि मैं सुरेंद्र शर्मा हास्य कवि, धरती से बोल रहा हूं। आप ये नहीं सोचें कि मैं ऊपर जा चुका हूं, न्यूज में गलत छाप दी थी, मेरी फोटो डाल दी।पंजाब के किसी कलाकार का निधन हुआ है। मैं उस कलाकार के परिवार के प्रति संवेदनाएं प्रकट करता हूं। जो मुझे संवेदनाएं देना चाहते हैं, मैं उनसे कहना चाहता हूं कि अभी थोडा और इंतजार करें। अभी तो मुझे आपको काफी हंसाना है। इससे ज्यादा जिंदा होने का सबूत मैं दे नहीं सकता। आप स्वस्थ रहें, मस्त रहें और सब लोग तंदुरुस्त रहें

कौन हैं सुरेंद्र शर्मा-
सुरेंद्र शर्मा लेखक और हास्य कवि हैं। वो अपनी हास्य कविताओं से लोगों को हंसाते रहते हैं। सुरेंद्र शर्मा अपनी हास्य कविता में मारवाड़ी और हरियाणवी बोली का इस्तेमाल करते हैं। सुरेंद्र शर्मा हरियाणा के महेंद्रगढ़ के नंगल चौधरी गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से डिग्री हासिल की है। कॉलेज के दिनों से वो कविता पाठ करते हैं।
साल 1966 में पहली बार उन्होंने कॉलेज में कविता पढ़ना शुरू किया। साल 1970 के बाद से वो पेशेवर तौर पर कविता पढ़ने लगे। साल 1980 में टी-सीरीज ने उनकी कविता पर एक कैसेट निकाला, जिसका नाम चार लैना कवि है। साल 2004 में कॉमेडियन ने रेडियो शो ‘शर्मा जी से पूछो’ की मेजबानी शुरू की।
हास्य कवि से लोगों को हंसाने वाले सुरेंद्र शर्मा को कई सम्मान मिल चुका है। साल 2013 में साहित्य में योगदान के लिए उनको पद्मश्री सम्मान मिला। अक्टूबर 2018 में दिल्ली सराकर ने हिंदी अकादमी का उपाध्यक्ष बनाया। इससे पहले उन्होंने हरियाणा साहित्य अकादमी के उपाध्यक्ष का भी पद संभाला था। सुरेंद्र शर्मा केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के सदस्य भी हैं।

जुलाई में इन दिनों बंद रहेंगे बैंक

नई दिल्ली (एजेंसी)। अगले महीने जुलाई में रथ यात्रा और बकरीद जैसे बड़े त्योहार पड़ रहे हैं, ऐसे में अगर आपको बैंक संबंधित कोई जरूरी काम है तो आपके लिए यह खबर काम की है। दरअसल, जुलाई में बैंक कुल 14 दिन बंद रहेंगे। भारतीय रिजर्व बैंक ने जुलाई के लिए बैंकों की छुट्टियों की लिस्‍ट जारी कर दी है। इस लिस्‍ट के मुताबिक अगले महीने बैंक 14 दिन बैंकों में कामकाम नहीं होंगे। इसमें दूसरा और चौथा शनिवार और रविवार की साप्तहिक छुट्टियां भी शामिल हैं। स्थानीय पर्व-त्योहार के चलते राज्यों की छुट्टियां होती हैं और उस दिन बैंक बंद रहते हैं। ये कोई जरूरी नहीं कि एक ही दिन सभी राज्यों में बैंक बंद रहें।

जुलाई 2022 में बैंकों के छुट्टियों की सूची

1 जुलाई: कांग (रथयात्रा)/रथ यात्रा- भुवनेश्वर-इंफाल में बैंक बंद रहेंगे। 
3 जुलाई: रविवार (साप्ताहिक अवकाश) 
5 जुलाई: मंगलवार – गुरु हरगोबिंद सिंह जी का प्रकाश दिवस – जम्मू और कश्मीर में बैंक बंद रहेंगे। 
7 जुलाई: खर्ची पूजा- अगरतला में बैंक बंद रहेंगे। 
9 जुलाई: शनिवार (महीने का दूसरा शनिवार), ईद-उल-अजा (बकरीद) 
10 जुलाई: रविवार (साप्ताहिक अवकाश)
11 जुलाई: ईद-उल-अजा- जम्मू और श्रीनगर में बैंक बंद रहेंगे। 
13 जुलाई: भानू जयंती- गंगटोक में बैंक बंद रहेंगे। 
14 जुलाई: बेन डिएनखलाम- शिलांग में बैंक बंद रहेंगे। 
16 जुलाई: हरेला- देहरादून में बैंक बंद रहेंगे। 
17 जुलाई: रविवार (साप्ताहिक अवकाश)
23 जुलाई: शनिवार (महीने का चौथा शनिवार)
24 जुलाई: रविवार (साप्ताहिक अवकाश)
31 जुलाई: रविवार (साप्ताहिक अवकाश)

Attention plz- 3 दिन बंद रहेंगे बैंक

3 दिन बंद रहेंगे बैंक। शनिवार और रविवार का अवकाश, सोमवार को बैंककर्मी हड़ताल पर रहेंगे

नई दिल्ली। अगर आपको बैंक में जरूरी काम है तो शुक्रवार तक निपटा लें। क्योंकि 3 दिन बैंक बंद रहेंगे। शनिवार और रविवार का अवकाश रहेगा। सोमवार को हड़ताल होने के कारण बैंक बंद रहेंगे।

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के आह्वान पर 27 जून को हड़ताल है। हड़ताल के चलते बैंकों पर ताला रहेगा। इधर सोमवार से पहले रविवार और शनिवार का अवकाश रहेगा। अगर किसी को बैंक से संबंधित काम है तो वह 24 जून तक निपटा लें। 24 जून के बाद एटीएम भी खाली रह सकते हैं। हड़ताल का दिन सोमवार भी रणनीति के तहत चुना गया है, जिससे 3 दिन तक ग्राहकों को परेशानी हो।

बैंक कर्मियों ने अपनी प्रमुख मांगों को लेकर फिर से 27 जून को अखिल भारतीय बैंक हड़ताल का एलान कर दिया है। बैंक यूनियंस द्वारा हड़ताल की तिथि ऐसी तय की गई है कि उससे पूर्व भी दो दिन तक बैंक नहीं खुलेंगे। इस बार फिर से रणनीति के तहत हड़ताल का दिन प्रस्तावित होने के कारण बैंकों में लेनदेन सहित अन्य कार्य प्रभावित होंगे। यहां तक कि एटीएम भी धोखा दे सकते हैं।

24 जून को बैंकिंग सेवा पूर्व समय तक खुलेगी। ऐसे में बैंक उपभोक्ता जरूरत के काम निपटा लें ताकि किसी भी तरह की समस्या न हो। हड़ताल को लेकर बैंक भी पहले से उपभोक्ताओं को जागरूक कर रही हैं। उधर प्रस्तावित हड़ताल को लेकर भी तैयारी शुरू हो गई है। उत्तर प्रदेश बैंक एंप्लाइज यूनियन के सहायक सचिव एटा यूनिट के जिला सचिव उमेश यादव ने बताया है कि 27 जून की प्रस्तावित हड़ताल पांच प्रमुख समस्याओं को लेकर है।

बैंक कर्मियों का कहना है कि हमारी मांगों पर लंबे समय से ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसमें पांच दिवसीय बैंकिंग, पेंशन का फिर से निर्धारण, नई पेंशन योजना की समाप्ति एवं पुरानी पेंशन योजना को लागू करना और बैंककर्मियों की लंबित मांगों को पूरा करने समेत कई मांगें हैं।

योग भारत की धरती से पूरे विश्व को एक बहुत बड़ी देन- मण्डलायुक्त आञ्जनेय कुमार सिंह


आठवें अंतर्राष्ट्रीय योगा दिवस पर मंडलायुक्त मुरादाबाद मंडल आन्जनेय कुमार सिंह की अध्यक्षता में नेहरू स्टेडियम बिजनौर में हुआ सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम

जनपद में अष्टम अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित हुए कार्यक्रम

योग को बनाएं जीवन का हिस्सा, नियमित योग अभ्यास रोग दूर करने में सहायक- मण्डलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह

कोई भी देश, समाज व विश्व बिना स्वस्थ नागरिकों के विकास नहीं कर सकता- मण्डलायुक्त

योग शारीरिक और मानसिक स्वास्थय की कुंजी -जिलाधिकारी

योग जीवन को स्वस्थ व निरोग रखने में सहायक- जिलाधिकारी उमेश मिश्रा

देश हमें देता है सब कुछ हम भी तो कुछ देना सीखें।।

बिजनौर। जनपद मे आज अष्टम अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस पर मुख्य कार्यक्रम का आयोजन नेहरू स्टेडियम व गंगा बैराज घाट पर किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि आयुक्त मुरादाबाद मण्डल, पूर्व सांसद व जिलाधिकारी ने दीप प्रज्जवलन कर किया। मण्डलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह ने कहा कि आज योग दिवस पूरे विश्व मे मनाया जा रहा है। योग भारत की धरती से पूरे विश्व को एक बहुत बडी देन है। गंगा बैराज घाट पर मां गंगा को दूध व पुष्प अर्पित कर मां गंगा की आरती की गयी। सभी अधिकारियों कर्मचारियों व आमजन ने योगाभ्यास में प्रतिभाग किया।

आयुक्त श्री सिंह ने कहा कि किसी भी देश के लिए उसकी सबसे महत्वपूर्ण संपदा उसकी मानव संपदा होती है। आज योग दिवस पूरे विश्व में मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दक्ष मानव संपदा है तो बेहतर है लेकिन उसके साथ-साथ स्वस्थ मानव संपदा का होना अत्यन्त आवश्यक है। मनुष्य का शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ होना आवश्यक है। शारीरिक स्वास्थय के साथ-साथ मन का स्वस्थ होना भी आवश्यक है। योग के माध्यम से मानसिक स्वास्थय का व शारीरिक स्वास्थय दोनो को ठीक रखा जा सकता है।

आयुक्त ने कहा कि योग हमारे शारीरिक व मन को स्वस्थ रखने मे सहायक होता है और अगर हम शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ है तो देश व समाज के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं। हमारे प्रधानमंत्री ने योग को आगे बढाया और आज पूरा विश्व इसे स्वीकार कर रहा है। योग भारत की धरती से पूरे विश्व को एक बहुत बडी देन है। योग एक बहुत बडी संपदा है जो हमारे पूर्वजो, ऋषियों व मुनियों ने हमें सौंपी है। योग को स्वीकार व अंगीकार करते हुए अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। कोई भी देश समाज व विश्व बिना अपने स्वस्थ नागरिकों के विकास नहीं कर सकता। नियमित योग अभ्यास रोग दूर करने मे सहायक होता है। योग पांचवी चिकित्सीय परामर्श के रूप मे माना जाने लगा है।

जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने कहा कि योग शारीरिक और मानसिक स्वास्थय की कुंजी है। उन्होंने आमजन से योग अपनाने की अपील की। योग जीवन को स्वस्थ व निरोग रखने मे सहायक होता है। उन्होंने बताया कि आठवें अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2022 की थीम मानवता के लिए योग घोषित की गयी है।

नेहरू स्टेडियम मे आयोजित कार्यक्रम में प्रशांत महर्षि ने योगाभ्यास सिखाया और भारती गौड व विनोद गोस्वामी का सहयोग रहा। वहीं गंगा बैराज घाट पर आयोजित कार्यक्रम में योग प्रशिक्षक तिलकराम ने योगाभ्यास सिखाया और सदभावना, हिमानी आदि का सहयोग रहा।

योग दिवस पर आयोजित योगाभ्यास कार्यक्रम में योग प्रशिक्षकों द्वारा प्राणायाम, भ्रामरी, शीतली प्राणायाम, कपाल भाती, अनुलोम विलोम सहित करीब 35 योगा आसन सिखाये गए। योग प्रशिक्षकों ने कहा कि योेग हमें अनुशासन सिखाता है। इस अवसर पर ब्रहम कुमारी ने मण्डलायुक्त को पुस्तिका भेंट की।

इस अवसर पर पूर्व सांसद भारतेन्द्र सिंह, पुलिस अधीक्षक डा0 धर्मवीर सिंह, जिला वन अधिकारी डा0 अनिल पटेल, मुख्य विकास अधिकारी केपी0 सिंह, अपर जिलाधिकारी प्रशासन विनय कुमार सिंह, पीडी डीआरडीए ज्ञानेश्वर तिवारी सहित अन्य अधिकारी, कर्मचारी, क्रीडा भारती के सदस्य व बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।

अग्निवीर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी

अग्निवीर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी, 8वीं पास भी कर सकेंगे अप्‍लाई

नई दिल्ली (एजेंसी)। अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीर भर्ती रैली के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। भारतीय सेना ने नोटिफिकेशन में कहा है कि ट्रेनिंग पीरियड सहित चार साल की सेवा अवधि के लिए उम्मीदवारों को नामांकित किया जाएगा। इसके तहत उम्‍मीदवारों को ऑनलाइन रजिस्‍ट्रेशन करना अनिवार्य है। इसके बाद भारतीय सेना की आधिकारिक वेबसाइट joinindianarmy.nic.in पर विजिट करना होगा।

अग्निवीर सेना अधिनियम, 1950 के अधीन होंगे। ऐसे में उन्हें भूमि, समुद्र या वायु मार्ग से कहीं पर भी आने जाने के लिए उत्तरदायी माना जाएगा। नोटिफिकेशन के मुताबिक, उम्मीदवारों की भर्ती चार सालों के लिए होगी। इस दौरान हर साल उन्हें 30 दिन की छुट्टी भी मिलेगी। सेवा के पहले साल 30 हजार रुपए, दूसरे साल 33 हजार रुपए, तीसरे साल 36,500 रुपए और आखिरी साल यानी चौथे साल 40 हजार रुपए वेतन तथा भत्ते दिए जाएंगे।

नोटिफिकेशन के अनुसार, भर्तियां पूरी तरह से उपलब्ध रिक्तियों के आधार पर मेरिट आधारित होंगी। केवल भर्ती प्रक्रिया में पास होने वाले उम्मीदवारों को सेना में भर्ती का दावा करने का कोई अधिकार नहीं होगा। यह भी कहा गया है कि जिन उम्मीदवारों के पास जरूरी सर्टिफिकेट नहीं होंगे, वे खुद रिजेक्शन के लिए उत्तरदायी होंगे।

NCC सर्टिफिकेट धारकों को मिलेंगे बोनस मार्क्स
सभी पदों पर भर्ती के लिए NCC-A सर्टिफिकेट धारकों को 05 बोनस मार्क्स मिलेंगे। NCC-B सर्टिफिकेट धारकों को 10 बोनस अंक मिलेंगे जबकि NCC-C सर्टिफिकेट धारकों को 15 बोनस अंक मिलेंगे। अग्निवीर जनरल ड्यूटी और क्‍लर्क/स्‍टोरकीपर पदों के लिए NCC-C सर्टिफिकेट धारकों को CEE (कॉमन एंट्रेंस एग्‍जाम) से छूट मिलेगी।

Indian Army Agniveer Requirement Notification Out Know Eligibility Process  Application Date Here joinindianarmy.nic.in Sarkari Naukri - Agniveer  Recruitment: भारतीय सेना ने जारी की अग्निवीर भर्ती रैली की ...

पद जिनके लिए होगी भर्ती
भारतीय सेना द्वारा जारी किए गए नोटिफिकेशन के मुताबिक, ‘अग्निवीर जनरल ड्यूटी, अग्निवीर टेक्निकल, अग्निवीर टेक्निकल (एविएशन/ एम्युनिशन एग्जामनर), अग्निवीर क्लर्क/स्टोर कीपर टेक्निकल, अग्निवीर ट्रेडमैन 10 वीं पास और अग्निवीर ट्रेड्समैन 8 वीं पास के लिए संबंधित एआरओ द्वारा जुलाई 2022 से रजिस्ट्रेशन ओपन होगा।’ यानी कि इन पांच ट्रेड्स पर भर्ती होनी है।

जरूरी योग्यताएं
– जनरल ड्यूटी के लिए उम्मीदवारों के पास में 45 फीसदी अंकों के साथ में 10वीं पास की योग्यता होनी चाहिए।
– अग्निवीर तकनीकी (विमानन/गोला-बारूदपरीक्षक) के लिए फिजिक्स, केमेस्ट्री, मैथ्स और इंग्लिश सब्जेक्ट में 50 फीसदी अंकों के साथ में 12वीं पास।
– क्लर्क/ स्टोरकीपर पदों के लिए 60 फीसदी अंकों के साथ 12वीं पास की योग्यता। अंग्रेजी और गणित में 50 फीसदी अंक जरूरी।
– ट्रेड्समैन के लिए 10वीं और 8वीं पास उम्मीदवारों की अलग-अलग भर्ती होगी। आवेदक के सभी विषयों में 33 फीसदी अंक होने चाहिए।

नियम और शर्तें
-अग्निवीरों को सेना अधिनियम 1950 के तहत 4 वर्ष की सेवा अवधि के लिए नामांकित किया जाएगा।
-आवेदकों की आयुसीमा 17.5 वर्ष से 23 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
-अग्निवीरों को आदेश के अनुसार थल, जल और वायु कहीं भी भेजा जा सकेगा।
-नामांकित अग्निवीर किसी भी तरह की पेंशन या ग्रेच्युटी के पात्र नहीं होंगे।
-सभी अग्निवीरों को चार वर्ष की सेवा पूरी होने पर सेवामुक्त कर दिया जाएगा।
– सेवा मुक्ति के समय उन्हें सेवा नीधि दी जाएगी।

सर्विस के बाद
चार साल की सर्विस पूरी होने के बाद अग्निवीरों को सेवा निध‍ि पैकेज, अग्निवीर स्किल सर्टिफिकेट और कक्षा 12वीं के समकक्ष योग्‍यता प्रमाणपत्र भी मिलेगा। जो उम्‍मीदवार 10वीं पास हैं उन्‍हें 4 साल के बाद 12वीं समकक्ष पास सर्टिफिकेट भी मिलेगा जिसकी पूरी जानकारी बाद में जारी की जाएगी।

अग्निपथ योजना: फेक न्यूज चलाने वाले 35 व्हाट्सएप ग्रुप पर बैन

अग्निपथ योजना को लेकर सोशल मीडिया पर फेक न्यूज चलाने वाले 35 व्हाट्सएप ग्रुप पर बैन।

नई दिल्ली। केंद्र की सैन्य भर्ती प्रक्रिया को लेकर नई योजना ‘अग्निपथ’ के बारे में कथित तौर पर फर्जी खबरें फैलाने वाले 35 व्हाट्सएप समूहों पर रविवार को सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। कुछ दिन पहले इस योजना की घोषणा के बाद से देश के विभिन्न हिस्सों में इसके खिलाफ हिंसक विरोध के बीच यह कदम उठाया गया है। सरकारी अधिकारियों ने कहा कि ‘अग्निपथ’ योजना के बारे में कथित रूप से फर्जी खबरें फैलाने के लिए सरकार द्वारा 35 व्हाट्सएप समूहों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

हालांकि, इन समूहों के बारे में या उनके एडमिनिस्ट्रेटर के खिलाफ कोई कार्रवाई शुरू की गई है या नहीं, इसकी तत्काल जानकारी नहीं मिल सकी है। व्यापक प्रदर्शन के बावजूद अग्निपथ भर्ती योजना वापस लेने से इनकार करते हुए सेना, नौसेना और वायुसेना ने नयी नीति के तहत भर्ती के लिए रविवार को विस्तृत कार्यक्रम प्रस्तुत किया और इस बात पर जोर दिया कि सशस्त्र बलों में उम्र संबंधी प्रोफाइल को घटाने के लिए इसे लागू किया जा रहा है।

गौरतलब है कि देश के कई हिस्सों में युवा विवादास्पद रक्षा भर्ती योजना का विरोध कर रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में, विभिन्न शहरों और कस्बों से प्रदर्शनकारियों द्वारा रेलवे स्टेशन पर तोड़फोड़ किए जाने, रेलगाड़ियों में आग लगाने और सड़कों तथा रेलवे पटरियों को अवरुद्ध करने की घटनाएं सामने आई हैं। गत शुक्रवार को विरोध प्रदर्शन के तहत तेलंगाना के सिकंदराबाद में पुलिस की गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। आक्रोशित युवाओं के प्रदर्शन के दौरान कई ट्रेनों में आग लगा दी गई थी, निजी, सार्वजनिक वाहनों, रेलवे स्टेशन में तोड़फोड़ की गई और राजमार्गों तथा रेलवे लाइन को अवरुद्ध कर दिया गया था।

विदित हो कि गत 14 जून को घोषित अग्निपथ योजना में साढ़े सत्रह साल से 21 वर्ष की आयु के युवाओं को केवल चार साल के लिए भर्ती करने का प्रावधान है, जिसमें से 25 प्रतिशत को 15 और वर्षों तक बनाए रखने का प्रावधान है। बाद में, सरकार ने 2022 में भर्ती के लिए ऊपरी आयु सीमा को 23 वर्ष तक बढ़ा दिया था। नई योजना के तहत भर्ती किए जाने वाले कर्मियों को अग्निवीर के रूप में जाना जाएगा। इस योजना का एक प्रमुख उद्देश्य सैन्य कर्मियों की औसत आयु को कम करना और बढ़ते वेतन एवं पेंशन भुगतान में कटौती करना है।

आम जवानों जैसी सहूलियत, एक करोड़ का बीमा

अग्निपथ पर चले अग्निवीरों को आम जवानों जैसी सहूलियत, एक करोड़ का बीमा

नई दिल्ली। अग्निपथ योजना के विरोध में चल रहे प्रदर्शन से निपटने के लिए बैठकों का दौर लगातार जारी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए तीनों सेनाओं के प्रमुख दृढ़ता से डटे हुए हैं। रविवार को रक्षा मंत्रालय ने एक अहम प्रेस कांफ्रेंस में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया कि अग्निपथ स्कीम रोलबैक नहीं होगी। यह भी बताया कि अग्निवीर के जरिए भारतीय सेना में किस तरह से जोश और होश का संतुलन बनाने की योजना है।

अब सभी रिक्रूटमेंट केवल अग्निवीर से- प्रेस कांफ्रेंस के दौरान मौजूद वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया कि सेना में अब सभी रिक्रूटमेंट केवल अग्निवीर के तहत ही होंगे। उन्होंने कहा कि जिन्होंने पहले अप्लाई किया था, उनके लिए एज लिमिट बढ़ा दी गई है। सभी को नए सिरे से अप्लाई करना होगा। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि वैकल्पिक भर्ती की कोई योजना नहीं है ।

सैन्य मामलों के विभाग के अतिरिक्त सचिव लेफ्टिनेंट जनरल अरुण पुरी ने कहा कि यह योजना काफी विचार-विमर्श करके लाई गई है। इस योजना का उद्देश्य युवाओं के जोश-होश के बीच तालमेल बनाना है। उन्होंने कहा कि अग्निपथ योजना युवाओं के लिए फायदेमंद है। सभी अग्निवीरों को आम जवानों की तरह फायदे मिलेंगे। उन्होंने कहा कि आज की तुलना में अग्निवीरों को ज्यादा अलाउंस मिलेगा। उन्होंने कहा कि दो साल से इस योजना पर चर्चा चल रही थी। अरुण पुरी ने कहा कि हर साल लगभग 17,600 लोग तीनों सेवाओं से समय से पहले सेवानिवृत्ति ले रहे हैं। किसी ने कभी उनसे यह पूछने की कोशिश नहीं की कि वे सेवानिवृत्ति के बाद क्या करेंगे? उन्होंने कहा कि यह योजना युवाओं के भविष्य के लिए सोच-समझकर उठाया गया कदम है। इन सब के बीच भारतीय वायुसेना ने अग्निपथ योजना के तहत भर्ती करने के लिए विवरण जारी किया है। इस विवरण में वायुसेना ने बताया है कि अग्निपथ सशस्त्र बलों के लिए एक नई मानव संसाधन प्रबंधन योजना है। इस योजना के माध्यम से शामिल किए गए उम्मीदवारों को अग्निवीर कहा जाएगा। इनकी भर्ती वायुसेना अधिनियम 1950 के तहत चार वर्षों के लिए की जाएगा।

अभी है योजना की शुरुआत

लेफ्टिनेंट जनरल पुरी ने कहा कि अभी योजना के शुरू में 46000 अग्निवीरों की भर्ती की जा रही है, यह क्षमता अभी और बढ़ेगी। अगले 4-5 सालों में यह संख्या 50,000-60,000 होगी और फिर इसे 90 हजार से बढ़ाकर एक लाख किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सेना की योजना में 1.25 लाख तक अग्निवीरों की भर्ती की जाएगी। इस प्रकार से यदि 25 फीसदी को परमानेंट रखा जाएगा तो ऑटोमैटिकली 46,000 अग्निवीर परमानेंट रूप से भर्ती होंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई अग्निवीर देशसेवा के दौरान शहीद होता है उसे एक करोड़ रुपए की आर्थिक मदद मिलेगी।

FIR है दर्ज तो नहीं बन सकेंगे अग्निवीर

केंद्र सरकार की ओर से तीनों सेनाओं में भर्ती के लिए लाई गई अग्निपथ योजना के विरोध के बीच सेना की ओर से उम्मीदवारों को साफतौर पर चेतावनी देते हुए कहा गया है कि अगर उनके खिलाफ FIR दर्ज होती है तो वह ‘अग्निवीर’ नहीं बन सकेंगे। सेना ने कहा कि भर्ती में शामिल होने वाले हर उम्मीदवार को लिखित में यह बताना होगा कि वो अग्निपथ योजना के विरोध के दौरान हिंसा और तोड़फोड़ करने वालों में शामिल नहीं थे। सैन्य मामलों के विभाग के अतिरिक्त सचिव लेफ्टिनेंट जनरल अनिल पुरी ने कहा कि उम्मीदवारों को एक लिखित प्रमाण पत्र देना होगा कि वे विरोध या तोड़फोड़ का हिस्सा नहीं थे। पुरी ने कहा कि भारतीय सेना की नींव में अनुशासन है। आगजनी या तोड़फोड़ के लिए कोई जगह नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति को एक प्रमाण पत्र देना होगा कि वे विरोध या तोड़फोड़ का हिस्सा नहीं थे। पुलिस सत्यापन अनिवार्य है, इसके बिना कोई भी शामिल नहीं हो सकता है।

सेना में अनुशासनहीनता के लिए कोई जगह नहीं

लेफ्टिनेंट जनरल पुरी ने आगे कहा अगर किसी उम्मीदवार के खिलाफ कोई प्राथमिकी दर्ज की जाती है तो वे सेना में शामिल नहीं हो सकते। सशस्त्र बलों में अनुशासनहीनता के लिए कोई जगह नहीं है। केंद्र सरकार की ओर से मंगलवार को योजना के ऐलान के बाद बुधवार को बिहार में अग्निपथ के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था।

वायुसेना में कब से शुरू होगी Agniveer भर्ती ?

एयर मार्शल एसके झा ने बताया कि पहले बैच के अग्निवीर भर्ती के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 24 जून 2022 से शुरू से होगी। इस बैच के लिए फेज-1 की ऑनलाइन परीक्षा 24 जुलाई से शुरू होगी। वहीं पहले बैच की ट्रेनिंग के लिए रजिस्ट्रेशन दिसंबर में शुरू होंगे और इस प्रक्रिया को 30 दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा।

नौसेना में Agniveer भर्ती के आवेदन 21 नवंबर से वाइस एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने बताया कि पहले नवल अग्निवीर 21 नवंबर 2022 से ओडिशा स्थिति आईएनएस चिल्का में ट्रेनिंग के लिए पहुंचना शुरू कर देंगे। नौसेना में महिला और पुरुष दोनों अग्निवीरों की भर्ती की जाएगी। उन्होंने बताया कि नौसेना में पहले से ही विभिन्न जहाजों में 30 महिला अधिकारी तैनात हैं। ऐसे में नौसेना ने अग्निपथ योजना के तहत भी महिला अग्निवीरों की भर्ती का फैसला किया है।

घास की चिता पर जली थी झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की निर्जीव देह

164वें बलिदान दिवस (18 जून) पर विशेष

1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम में जान की कुर्बानी देने वाले योद्धाओं की शौर्य गाथाएं खूब गाईं गईं। सैकड़ों लोकगीत, नाटक, उपन्यास और अनेक भाषाओं में शूरवीरों के जीवन चरित्र लिखे गए लेकिन ब्रिटिश हुकूमत के अत्याचारों के डर से लोकगीत दबी जुबान ही गाए जाते थे। खुलकर इन्हें गाने की हिम्मत अच्छे-अच्छों में नहीं थी। स्वाधीन भारत में अंग्रेजों के छक्के छुड़ाने वाली झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की वीरता-शूरता का इतिहास लिखना आसान था। महाश्वेता देवी से लेकर सैकड़ों लेखकों ने लेखनी चलाई लेकिन ‘सिपाही विद्रोह’ या ‘गदर’ कहे गए 1857 के भीषण संग्राम पर गुलामी के दौर में कलम उठाना उतना ही खतरे से खाली नहीं था, जितना सिपाही विद्रोह में कृपाण उठाना।


यह वह दौर था जब अंग्रेज लेखक अपने अत्याचारों पर पर्दा डालने के लिए गदर का मनमाना इतिहास लिखकर भारतीयों की हिंसात्मक कार्यवाही को बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर रहे थे। अप्रतिम वीर और भारतीय जनमानस पर अमिट छाप छोड़ने वाली झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के बारे में दुष्प्रचार किया जा रहा था कि विद्रोह के समय अंग्रेजों को सहायता देनी कबूल की। उनके चरित्र को इस तरह चित्रित किया गया कि मानो झांसी की रानी बिना चाहे ही अंग्रेजों से लड़कर वीर नारी बन गई हों।
ऐसे वक्त में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी गदर के संबंध में अंग्रेजी लेखकों द्वारा लिखे जा रहे/ लिखे गए ‘झूठे’ इतिहास को कैसे बर्दाश्त कर सकते थे? उन्हें सरस्वती का संपादन संभाले हुए एक साल ही बीता था। प्रेस मालिकों के नियम और अंग्रेजी कानूनों के डर के बीच अंग्रेज़ों के झूठ के पदार्फाश और झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की वीरता-शूरता को हिंदी भाषी समाज के सामने लाने की उत्कंठा अंदर से रोज-ब-रोज जोर मार ही रही थी। उसी बीच उन्हें झांसी की रानी पर मराठी लेखक दत्तात्रेय बलवंत‌ पारसनीस की मराठी में लिखी पुस्तक ने रास्ता दिखाया। पुस्तक पढ़ने के बाद झांसी की रानी की वीरता पर अंग्रेज हुकूमत द्वारा फैलाए गए भ्रम को दूर करने के लिए पारसनीस की नीति अपनाते हुए ही उन्होंने 1904 में सरस्वती के जनवरी और फरवरी अंक में पर क्रमश: दो लेख ‘झांसी की रानी लक्ष्मी बाई’ प्रकाशित किए।


द्विवेदी जी ने सरस्वती में लिखे गए अपने पहले लेख के साथ झांसी के किले और रानी के महल के दो चित्र भी लगाए। दूसरी किस्त के साथ झांसी के म्यूटिनी के स्मारक का चित्र और एक चित्र रानी के युद्ध का, जिसमें रानी एक हाथ में तलवार और दूसरे में भाला लिए अंग्रेजों पर वार करती हुई दिखाई गई हैं। चित्र के नीचे कैप्शन दिया गया कि ग्वालियर के एक पुराने चित्र से सरस्वती के लिए यह फोटोग्राफ उतारा गया है। इन लेखों को सुंदर ढंग से सजाकर छापने में द्विवेदी जी ने काफी परिश्रम भी किया।
उन्होंने पारसनीस की चार सौ पृष्ठ की पुस्तक के आधार पर लेखों में विद्रोही सिपाहियों को दुष्ट कहा। बच्चों की प्रचारित हत्या की निंदा की और झांसी की रानी की वीरता की प्रशंसा। द्विवेदी जी ने पारसनीस के प्रमाण संग्रह और इतिहास के अध्ययन की प्रशंसा करते हुए लेख की शुरूआत पारसनीस की पुस्तक के प्रभाव का महत्व स्वीकार करते हुए इस तरह की-‘इस पुस्तक को पढ़कर लक्ष्मीबाई का अतुल पराक्रम, उनका अतुल धैर्य और उनकी अतुल वीरता आंखों के सम्मुख आ जाती है। ऐसी वीर नारी इस देश में क्या और देशों में भी शायद ही हुई होगी।’ हालांकि, सर एडविन अर्नाल्ड ने लक्ष्मी बाई की उपमा फ्रांस की प्रसिद्ध बाला जोन आप आर्क से दी है। लक्ष्मीबाई को परास्त करने वाले सर ह्यूरोज ने भी रानी की वीरता की प्रशंसा की है। द्विवेदी जी लिखते हैं कि ऐसी पुस्तक लिख कर पारसनीस ने इस देश के साहित्य का बड़ा उपकार किया। वह पारसनीस की प्रशंसा करते हुए हिंदी पाठकों से सिफारिश करते हैं कि मराठी न आती हो तो इस एक ही पुस्तक को पढ़ने के लिए ही सही मराठी सीखें जरूर।
पारसनीस की किताब के हवाले से द्विवेदीजी ने झांसी की रानी की वीरता और संग्राम का बखान करते हुए झांसी की लड़ाई के बारे में लिखा-’23 मार्च 1818 को यह आरंभ हुआ झांसी को चारों ओर से अंग्रेजी सेना ने घेर लिया। 24 और 18 पौंडर्स नाम की तोपें शहर की दीवार पर चलने लगीं और दूसरी तोपों से बम के गोले शहर के भीतर फेंके जाने लगे। झांसी के चारों ओर जो दीवार है उसकी चौड़ाई कोई 16 फुट है। उस पर और किले के बुर्ज पर रानी साहब ने सब मिलाकर कोई 50 के ऊपर तोपें लगा दीं। उनमें से भवानी शंकर, कड़क बिजुली, घनगर्ज, नालदार आदि तोपे बड़ी ही भयंकर थीं। रानी साहब खुद युद्ध की देखभाल करने लगी और समय-समय पर अपने योद्धा और सेना नायकों को उत्साहित करने लगीं। उनके युद्ध कौशल का ही कमाल था कि अंग्रेजों ने झांसी की सेना की वीरता और युद्ध कौशल की प्रशंसा की। सर ह्यूरोज ने रानी की प्रशंसा करते हुए लिखा-‘स्त्रियां तक तोपखाने में काम करती थीं और गोला-बारूद लाने में सहायता देती थीं। अंग्रेज 11 दिन का झांसी का घेरा डाले रहे। विकट युद्ध हुआ तथापि रानी साहब के धैर्य और दृढ़ निश्चय के सामने दूसरे पक्ष की कुछ न चली।’
लेख के इस एक अंश से आपको उनके अंग्रेज हुकूमत के प्रति दृष्टिकोण का अंदाज करना आसान होगा–‘महाप्रबल और परम दयालु अंग्रेजी सरकार’ से शत्रुता करने का फल झांसी वालों को मिला। लड़ाई में जो सैनिक मारे गए, उनके अलावा अंग्रेजी फौज ने शहर में पहुंचकर प्रलय आरंभ कर दिया। एक और शहर में उसने आग लगा दी और दूसरी ओर से लड़के और स्त्रियों को छोड़कर बिजन बोल दिया। सात दिन तक लूटमार और फूंक-फांक होती रही। आठवें दिन प्रजा को अभय वचन दिया गया और जिनका कोई वारिस न था, ऐसे मृतकों के ढेर रास्ते में फूंक दिए गए। ये तमाम लोग जो मारे गए थे, निहत्थे थे और उन्होंने न तो किसी कत्लेआम में भाग लिया था न ले सकते थे।’
लेख में झांसी की रानी की वीरता का उल्लेख इस तरह है-‘उनके साथ उनकी दासी मुंदर भी एक घोड़े पर थी। उस पर एक गोरे ने प्राणहारक आघात किया। वह चिल्ला उठी। रानी साहब ने उसको मारने वाले के कंठ में एक निमिष मात्र अपनी तलवार रख दी। अंग्रेजी सेना के वीरों ने रानी साहब को कोई महाशूर सेनानायक समझकर चारों ओर से घेर लिया। इस पर भी वह जरा भयभीत नहीं हुईं। उनकी तलवार अपना काम बड़ी भी भीषणता से बराबर करती रही परंतु एक कोमल और अल्पवयस्क अबला अनेक वीरों के बीच कब तक सजीव रह सकती है? एक अंग्रेज योद्धा ने उनके सिर पर पीछे से तलवार का वार किया जिससे उनके सिर का दाहिना भाग छिल गया और एक आंख निकल आई। इस योद्धा ने रानी साहब की छाती पर किर्च का भी प्रहार किया परंतु धन्य रानी लक्ष्मीबाई की वीरता, धन्य उनका धैर्य और धन्य उनका साहस! इस दशा को प्राप्त होकर भी उन्होंने इस वीर से पूरा बदला लिया। उसे तत्काल ही उन्होंने धरा तीर्थ को भेजकर अपना जीवन सार्थक किया!! धन्य वह शौर्य और धन्य वह पराक्रम!!!
घायल रानी ने सरदार रामचंद्रराव के साथ एक झोपड़ी में प्रवेश किया। 18 जून 1858 को ग्वालियर के पास समरांगण में भारतवर्ष का महा शौर्यशाली दिव्य स्त्री रत्न खो गया। रानी साहब के सेवक और सरदारों ने एक घास की गंजी से घास लाकर उसकी चिता बनाई और उसी पर रानी साहब की निर्जीव देह रखकर उसे अग्निदेवता के अर्पण कर दिया।’ मुगल शासकों को लोहे के चने चबवाने वाले महाराणा प्रताप ने भले घास की रोटियां खाईं थीं लेकिन यह किताब प्रामाणिक रूप से बताती है कि अंग्रेजों से लड़ते-लड़ते वीरगति को प्राप्त करने वाली झांसी की रानी लक्ष्मी बाई की देह घास की चिता पर ही पंचतत्व में विलीन हुई थी। इतिहास में रुचि रखने वाले लोग भले ही इस तथ्य को जानते हों लेकिन नई पीढ़ी इस इतिहास से शायद ही परिचित होंगे।
पारसनीस से प्रभावित आचार्य द्विवेदी लिखते हैं कि यह बहुत अच्छा क्रांतिकारी साहित्य है। वैसा साहित्य है, जिसे पढ़कर भारत के नौजवान अंग्रेजी अंग्रेजी राज्य से नफरत करना सीखते थे और जिन्हें संवैधानिक तरीकों पर या अहिंसात्मक तरीकों पर विश्वास नहीं था वे लक्ष्मीबाई की तरह हथियार को उठाकर अंग्रेजों से लड़ने का प्रयत्न करते थे। आचार्य द्विवेदी झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के वास्तविक इतिहास को जानने- समझने के लिए हिंदी भाषी समाज को पारसनीस की मराठी पुस्तक पढ़ने का मंत्र दे रहे थे। वह भी भाषण या मौखिक नहीं बल्कि लेख में बाकायदा लिखकर। उस दौर में झांसी की रानी के वास्तविक इतिहास से हिंदी भाषी समाज को परिचित कराने के थोड़े से होने वाले प्रयासों में एक प्रयास आचार्य द्विवेदी का भी था। यह भारत के उन महान योद्धाओं के प्रति उनकी अपनी श्रद्धा का भी प्रमाण है। आइए! हम सब मिलकर शूरवीर झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित करें।

जय प्रथम स्वाधीनता संग्राम!!
जय झांसी की रानी लक्ष्मीबाई!!

∆ गौरव अवस्थी
रायबरेली

मातृभाषा प्रेमी पंडित माधव राव सप्रे

151वीं जयंती पर विशेष

मातृभाषा प्रेमी पंडित माधव राव सप्रे

हिंदी नवजागरण और भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में बढ़चढ़ कर योगदान देने वाले पंडित माधव राव सप्रे का मातृभाषा प्रेम महात्मा गांधी और महावीर प्रसाद द्विवेदी से कतई कमतर नहीं था। गुलाम भारत में प्रभुत्व जमाती अंग्रेजी के खिलाफ मातृभाषा और राष्ट्रभाषा के प्रश्न पर ‘म’ अक्षर वाले तीनों महारथी- महात्मा गांधी, माधवराव सप्रे और महावीर प्रसाद द्विवेदी ही मोर्चा संभालने वाले लोगों में अग्रणी थे। यह तीनों ही महानुभाव राष्ट्रभाषा के साथ अन्य भारतीय भाषाओं के महत्व पर जोर देते हुए हिंदी नवजागरण और भारतीय स्वाधीनता आंदोलन को अपनी-अपनी तरह से गतिशील बना रहे थे।
1917 की ‘सरस्वती’ में माधव राव सप्रे का एक लेख छपा था-‘राष्ट्रीयता की हानि का कारण’। इस लेख में उन्होंने कहा-‘अंग्रेजी भाषा के अधिक प्रचार और देशी भाषाओं के अनादर से राष्ट्रीयता की जो हानि हो रही है, उसका पूरा पूरा वर्णन करना कठिन है। जब तक अंग्रेजी भाषा का अनावश्यक महत्व न घटाया जाएगा और जब तक शिक्षा का द्वार देशी भाषाओं को बनाकर वर्तमान शिक्षा पद्धति में उचित परिवर्तन न किया जाएगा, तब तक ऊपर लिखी गई बुराइयों से हमारा छुटकारा नहीं हो सकता।’
इसी एक में उनका कथन है-‘किसी समय रूस में उच्च वैज्ञानिक शिक्षा जर्मन और फ्रेंच भाषाओं के द्वारा दी जाती थी परंतु अब वहां यह बात नहीं है। सन् 1880 ईस्वी में एक प्रोफेसर ने रूसी भाषा में वैज्ञानिक शिक्षा देना आरंभ किया। दूसरे प्रोफेसरों ने भी उसका अनुकरण किया। फल यह हुआ कि अब रूसी भाषा बोलने वाले रूस के समस्त प्रांतों में वैज्ञानिक शिक्षा रूसी भाषा ही के द्वारा दी जा रही है।’ अपने उसी लेख में सप्रे जी यह भी लिखते हैं-‘जापान के विश्वविद्यालयों का भी यही हाल है। वहां कठिन से कठिन और गहन से गहन तत्वपूर्ण विषयों पर व्याख्यान जापानी भाषा में ही होते हैं। जापानी भाषा का साहित्य थोड़े समय पहले ऐसा था कि उसकी तुलना भारतीय देशी भाषाओं के साहित्य से करना उसको सम्मान देना कहा जा सकता है। ऐसी अवस्था में भारतवासी ही अपनी मातृभाषा में शिक्षा पाने से वंचित क्यों रहें?
अपने इस लेख में वह राष्ट्रभाषा और भारतीय भाषा के सवाल को इस तरह भी रेखांकित करते हुए आलोचनात्मक जस्ट भ डालते हैं-‘संसार के अग्रगण्य वैज्ञानिकों में भारतवर्ष के सुप्रसिद्ध अध्यापक जगदीश चंद्र बसु भी हैं। वे अपने सभी आविष्कारों का वर्णन अंग्रेजी भाषा में करते हैं और ग्रंथ लेखन भी उसी भाषा में यदि वे बंगला भाषा का उपयोग करने लगे तो देशी भाषाओं में वैज्ञानिक ग्रंथों का आंशिक अभाव दूर हो सकता है।’ सप्रे जी केवल राष्ट्रभाषा और भारतीय भाषाओं के महत्व पर ही जोर नहीं दे रहे थे। अपने समकालीन और अपनी से आगे की पीढ़ी के महत्वपूर्ण लोगों को यह आईना भी दिखा रहे थे कि मातृभाषा को महत्व देना देश की उन्नति, राष्ट्र की एकता, भारत और भारतीय भाषाओं को गुलामी की दास्तां से मुक्ति दिलाने का एकमात्र माध्यम मातृभाषा ही है।
महात्मा गांधी का मातृभाषा और राष्ट्रभाषा प्रेम जगजाहिर ही है। गांधीजी भारतीय भाषाओं के व्यवहार के प्रबल समर्थक थे। उन्हें हिंदी बोलने पर ही नहीं गुजराती का व्यवहार करने पर भी धक्के खाने पड़े थे। राष्ट्रभाषा और मातृभाषा को महात्मा गांधी देशोद्धार और देशोन्नति का प्रधान साधन समझते थे। दक्षिण अफ्रीका की जेल में बंद रहते समय महात्मा गांधी को अपनी पत्नी की बीमारी का तार मिलने का किस्सा सबको पता ही है। महात्मा गांधी यदि जुर्माना अदा कर देते तो उन्हें जेल से छुटकारा मिल जाता और वे अपने घर जाकर अपनी पत्नी की सेवा आदि कर सकते थे पर उन्होंने अपने सिद्धांत से समझौता नहीं किया। जेलर की आज्ञा प्राप्त करके अपनी पत्नी को उन्होंने गुजराती में एक पत्र लिखा। पत्र देखकर जेलर चौंक गया, क्योंकि वह उसे पढ़ न सका। जेलर ने उस पत्र को तो जाने दिया पर आज्ञा दी कि गांधीजी अपने अगले पत्र अंग्रेजी में ही लिखेंगे। गांधी जी ने उस जेलर से कहा-‘ मेरे हाथ के गुजराती पत्र इस बीमारी की दशा में मेरी पत्नी के लिए दवा का काम करेंगे। इस कारण आप मुझे गुजराती में ही लिखने की आज्ञा दीजिए’ पर जेलर नहीं माना और फल यह हुआ कि गांधी जी ने अंग्रेजी में लिखने से इंकार कर दिया। महावीर प्रसाद द्विवेदी ने ऐसे दृढ़ प्रतिज्ञ और मातृभाषा भक्त महात्मा गांधी को इंदौर के आठवें हिंदी साहित्य सम्मेलन का सभापति बनाए जाने की भी प्रशंसा की थी।
महावीर प्रसाद द्विवेदी सरस्वती के माध्यम से मातृभाषा और राष्ट्रभाषा के सवाल पर खुद तो लिख ही रहे थे और दूसरे लेखकों के लेख भी प्रमुखता से छपते हुए अंग्रेजों से आजादी की लड़ाई को अपने ढंग और सरस्वती के मालिकों की रीति-नीति पर खरा उतरते हुए नई ताकत दे रहे थे। द्विवेदी जी ने बहुतसंख्यक जनता को शिक्षित करने की नीति अपनाई थी। उनका स्पष्ट मानना था कि विभिन्न प्रदेशों की जनता अपनी-अपनी मातृभाषाओं के माध्यम से ही शिक्षित हो सकती थी। द्विवेदी जी ने कहा कि शिक्षित होने का अर्थ अंग्रेजी भाषा का ज्ञान नहीं है। वे लगातार सवाल उठा रहे थे-‘अच्छा शिक्षा के मानी क्या? अंग्रेजी भाषा में धड़ल्ले के साथ बोलना और लिखना आ जाना ही क्या शिक्षा है? द्विवेदी जी ने लिखा था-’30 करोड़ भारतवासियों की ज्ञान वृद्धि क्या इन अंग्रेजी के मुट्ठी भर शुद्ध लेखकों से हो जाएगी?’ अंग्रेजी राज से निराश होकर उन्होंने लिखा-‘लक्षणों से तो यही मालूम होता है कि घर के धान भी पयाल में जाना चाहते हैं। इस दशा में जब तक हम लोग स्वयं ही अपने उद्योग से अपने स्कूल खोल कर अपने मन की शिक्षा न देंगे तब तक यथेष्ट उद्धार की आशा नहीं है।’
पंडित माधव राव सप्रे की आज 151वीं जयंती है। जयंती पर हम मराठी भाषी सप्रे जी के मातृभाषा और राष्ट्रभाषा हिंदी के लिए दिए गए योगदान को याद रखने नई पीढ़ी को याद दिलाना महत्वपूर्ण है। उनके उठाए हुए कदम 100 साल पहले भी प्रासंगिक थे और आज के संदर्भ में भी प्रासंगिक ही बने हुए हैं।

ऐसे माधव राव सप्रे जी को शत्-शत् नमन!!!

∆ गौरव अवस्थी
रायबरेली/उन्नाव

भारत से पहले कई देशों में भी लागू है सेना में “टूर ऑफ ड्यूटी” सिस्टम, अग्निवीरों के लिए CAPFs और असम राइफल्स में भर्ती के लिए आरक्षण

भारत से पहले निम्नलिखित देशों में भी लागू है – सेना में “टूर ऑफ ड्यूटी” सिस्टम, लेकिन इन देशों में अनिवार्य है, भारत में इसे स्वेच्छिक रखा गया है

अग्निवीरों के लिए CAPFs और असम राइफल्स में भर्ती के लिए आरक्षण

नई दिल्ली: अग्निपथ योजना (Agnipath Scheme) के तहत भर्ती होने वाले युवाओं की अधिकतम उम्र की सीमा को 21 साल से बढ़ाकर 23 वर्ष करने के फैसले के एक दिन बाद केंद्र सरकार ने शनिवार को एक और बड़ा एलान किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (HMO India) ने अपने नए आदेश में अग्निवीरों के लिए CAPFs और असम राइफल्स में भर्ती के लिए 10% रिक्तियों को आरक्षित करने का निर्णय लिया है। दो बलों में भर्ती के लिए अग्निवीरों को ऊपरी आयु सीमा से 3 वर्ष की छूट दी गई। अग्निवीर के पहले बैच के लिए आयु में अधिकतम आयु सीमा से 5 वर्ष की छूट होगी। गृह मंत्रालय ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी।

इजरायल : टूर ऑफ ड्यूटी के मामले में इजरायल सबसे सख्त देश है, यहां इजरायली रक्षा बल में पुरुषों को तीन साल और महिलाओं को दो साल अनिवार्य सेवा देनी होती है. कुछ धार्मिक और स्वास्थ्य के आधार पर तथा गर्भवती महिलाओं को इससे छूट दी जाती है. इसे सेवा और सम्मान का जरिया माना जाता है.

चीन : चीन में आम नागरिकों को जबरन सेना में भर्ती किया जाता है. चीन में हर नागरिक के लिए 18 से 22 वर्ष की आयु के बीच दो साल की सैन्य सेवाएं देना अनिवार्य हैं. यानी चीन का कोई युवा चाहता हो या ना चाहता हो, उसे सेना में भर्ती होना ही पड़ता है. चीन की सेना में करीब 35 प्रतिशत ऐसे युवा हैं, जिन्हें मजबूर करके सैनिक बनाया जाता है.

नार्वे : नार्वे में सभी पुरुषों और महिलाओं के लिए टूर ऑफ ड्यूटी अनिवार्य है. यहां 19 से 44 साल की उम्र के बीच कभी भी पंजीकरण कराया जा सकता है. महिलाओं के लिए ये नियम 2016 में अनिवार्य किया गया, ताकि उन्हें भी पुरुषों के बराबर हक मिल सके.

स्विटजरलैंड : यहां पर 18 से 34 साल तक युवाओं के लिए सेना में ड्यूटी देना अनिवार्य है, इसके लिए इन्हें 21 सप्ताह की बेसिक ट्रेनिंग दी जाती है. महिलाओं के लिए ये अनिवार्य नहीं है, यह उनकी स्वेच्छा पर निर्भर करता है.

तुर्की : यहां वे युवा जो 20 साल से ज्यादा उम्र के हैं उनके लिए मिलिट्री सर्विस अनिवार्य है. यहां उन लोगों को छूट मिल सकती है जो तीन साल या उससे अधिक समय से विदेश में हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें एक निश्चित राशि अदा करनी होती है. महिलाओं के लिए ये नियम अनिवार्य नहीं है.

ब्राज़ील : ब्राजील में 18 से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए टूर ऑफ ड्यूटी अनिवार्य है. इसकी समय सीमा 10 से 12 माह के लिए होती है. यहां थोड़े समय के लिए भी सेना ज्वाइन करने वालों का मेडिकल टेस्ट होता है, ताकि भविष्य में जरूरत पड़ने पर इन्हें परमानेंट किया जा सके.

उत्तर कोरिया : विश्व के लिए सनसनी बनने वाले उत्तर कोरिया में भी टूर ऑफ ड्यूटी अनिवार्य है, खास बात ये है कि यहां पर पुरुषों को तीनों सेनाओं में ड्यूटी करनी पड़ती है, इसके लिए 23 माह नेवी में, 24 माह वायुसेना में और 21 माह थल सेना में काम करना पड़ता है.

दक्षिण कोरिया : उत्तर कोरिया की तरह ही यहां पर भी तीनों सेनाओं में टूर ऑफ ड्यूटी करना अनिवार्य है, इसमें नौसेना में 23 माह, थल सेना में 21 माह और वायुसेना में 24 माह सर्विस देनी होती है.

रूस : रूस में 18 से 27 साल की उम्र के बीच में कभी भी टूर ऑफ ड्यूटी की जा सकती है, कम से कम 12 माह सैन्य सेवा करना अनिवार्य है.

यूक्रेन: यूक्रेन में भी युवाओं के लिए सैन्य सेवा अनिवार्य है, हालांकि इसके लिए कोई उम्र और न्यूनतम सीमा तय नहीं है, हालिया युद्ध में टूर ऑफ ड्यूटी के तहत कई लोगों ने हथियार उठाकर युद्ध में हिस्सा लिया और रूस जैसे ताकतवर देश को टक्कर देने में सफल रहे.

इसके अलावा ग्रीस में 19 वर्ष की उम्र वाले युवकों को कम से कम 9 माह, ईरान में 24 माह टूर ऑफ ड्यूटी करनी होती है. (एजेंसियां)

श्रीमती न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई भारतीय प्रेस परिषद की अध्यक्ष नियुक्त

केंद्र सरकार ने न्यायमूर्ति श्रीमती रंजना प्रकाश देसाई को भारतीय प्रेस परिषद का अध्यक्ष नियुक्त किया है। श्रीमती जस्टिस देसाई उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश हैं। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने यह जानकारी दी।

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई को भारतीय प्रेस परिषद (पीसीआई) के अध्यक्ष पद के लिए चुना गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और भारतीय प्रेस परिषद के सदस्य प्रकाश दुबे की एक समिति ने पीसीआई अध्यक्ष के रूप में उनकी नियुक्ति को मंजूरी दी। एक महत्वपूर्ण बैठक में ये फैसला लिया गया। 

सूत्रों ने बताया कि पीसीआई प्रमुख के रूप में न्यायमूर्ति रंजना देसाई की नियुक्ति की एक आधिकारिक अधिसूचना जल्द ही जारी की जाएगी। सूत्रों ने बताया कि मीडिया वॉचडॉग के अन्य सदस्यों की भी जल्द ही नियुक्ति की जाएगी। पैनल में सांसदों की नियुक्ति की सिफारिश का भी इंतजार है।

गौरतलब है कि इससे पहले न्यायमूर्ति चंद्रमौली कुमार प्रसाद (सेवानिवृत्त) पीसीआई अध्यक्ष थे। उनका कार्यकाल पूरा होने और पिछले साल नवंबर में पद छोड़ने के बाद से यह पद खाली पड़ा था। अब जाकर इस पर न्यायमूर्ति रंजना देसाई की नियुक्ति हुई है। 

न्यायमूर्ति रंजना देसाई का परिचय-
न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई का जन्म 30 अक्टूबर 1949 को हुआ था। उन्होंने 1970 में एल्फिंस्टन कॉलेज मुंबई से कला में स्नातक और 1973 में गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, मुंबई से कानून में स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की। वे सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रही हैं। 13 सितंबर 2011 को वे इस पद पर नियुक्त हुई थीं। इसके अलावा 72 वर्षीय न्यायमूर्ति देसाई बंबई उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश हैं। जस्टिस रंजना देसाई ने हाल ही में जम्मू और कश्मीर पर परिसीमन आयोग का नेतृत्व किया था, जिसे केंद्र शासित प्रदेश के विधानसभा क्षेत्रों को फिर से बनाने के लिए स्थापित किया गया था। कुछ दिनों पहले उत्तराखंड सरकार ने समान नागरिकता संहिता (यूनिफार्म सिविल कोड) लागू करने के लिए जो ड्राफ्टिंग कमेटी की घोषणा की है उसमें रंजना प्रकाश देसाई भी शामिल हैं।

शांतिपूर्ण माहौल में व्यतीत हुआ जुमा

जिले भर में शांति पूर्ण ढंग से सम्पन्न हुई जुमे की नमाज

बिजनौर-पुलिस प्रशासन की मेहनत रंग लाई।
बिजनौर में शांतिपूर्ण ढंग से जुमे की नमाज़ हुई अदा।
मस्जिदों से नमाज़ पढ़कर नमाज़ी घरों में हुए क़ैद।
पुलिस प्रशाशन ने ली राहत की सांस।

बिजनौर। जुमे की नमाज को लेकर पुलिस और प्रशासन अलर्ट मोड में रहा। नमाज से पहले सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये गए थे। किसी भी परिस्थिति पर नजर रखने के लिए ड्रोन के अलावा सादी वर्दी में पुलिस के जवानों को तैनात किया गया था। डीएम उमेश मिश्रा व एसपी डॉ धर्मवीर सिंह ने पुलिस अधिकारियों के साथ पैदल मार्च कर मुस्लिम धर्म गुरुओं से शांति बनाए रखने की अपील की। सभी जगहों पर बाजारों में चहल पहल आम दिनों की तरह ही रही।

विदित हो कि जुमे की नमाज को लेकर जिले में हाई अलर्ट किया हुआ था। एसपी डॉ धर्मवीर सिंह ने बताया कि जिले में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने को लेकर 21 सेक्टर बनाने के साथ ही कुल 6 जोन में बांटा गया था। जिले की शांति व्यवस्था मजबूत रखने के लिए 21 थानों में हर थानों को 200 अतिरिक्त आरक्षी दिए गए। साथ ही 3 कंपनी पीएसी और फायर ब्रिगेड तैनात रही। वहीं सोशल मीडिया पर पुलिस की विशेष निगरानी रही। अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ पुलिस कड़ी कार्यवाही की तैयारी में रही। सोशल मीडिया वालियंटर्स की भी तैनाती रही।

बारिश, ठंडी हवाओं से मौसम हुआ सुहाना

नई दिल्ली (एजेंसी)। उत्तर भारत में झुलसा देने वाली गर्मी पड़ने के बाद पंजाब में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने का असर नजर आया। शुक्रवार तड़के 3 बजे झमाझम बारिश हुई। बारिश से पहले रात 12 बजे से आसमान में बिजली कड़कती रही और तेज हवाएं चल रहीं थीं, जिससे लोगों को ठंडक का अहसास हुआ। इसके बाद बारिश होने से तापमान में गिरावट दर्ज की गई। सुबह 4 बजे तापमान 27 डिग्री था।

मौसम विभाग के अनुसार अभी 4 से 5 दिन बादल छाए रहेंगे। बादल छा जाने से लोगों को लू से राहत मिली। मौसम में बदलाव होते ही कई शहर वासियों ने पहाड़ों की ओर रुख कर लिया है। लोग मौसम का आनंद उठाने के लिए हिल  एरिया में जाने लगे हैं। ठंडी हवाओं ने जहां लोगों को राहत दी, वहीं लोगों की चहल कदमी भी अधिक हो गई। आज लुधियाना में हवा 40 किलोमीटर की रफ्तार से चली। बादलों की गरज के साथ बारिश रुक-रुक कर होती रही। हालांकि 17 से 21 जून तक आसमान में बादल छाए रहने की पूरी संभावना है।

शुक्रवार को लुधियाना का अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है। फिरोजपुर जिले का 31 डिग्री, अमृतसर 27 डिग्री, पटियाला 29 डिग्री, जालंधर 29 डिग्री, बठिंडा 32 डिग्री, मोगा 31 डिग्री, श्री फतेहगढ़ साहिब 29 डिग्री रहेगा। मौसम के इस बदलाव का लोग खूब आनंद उठा रहे हैं।

राजधानी में पिछले कई दिनों से पड़ रही भीषण गर्मी से शुक्रवार सुबह थोड़ी राहत मिली। हल्की बूंदाबांदी से तापमान में काफी गिरावट आई। सुबह छह बजे गरज के साथ हुई हल्की बारिश से मौसम सुहाना हो गया। इस दौरान हल्की हवाएं भी चल रही थीं। तापमान 26 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने 21 जून तक तेज हवाओं के साथ बारिश होने का अनुमान जताया है। विभाग के मुताबिक, 22 जून के बाद मौसम साफ हो जाएगा और शुष्क पछुआ हवाएं चलेंगी हालांकि, तापमान तेजी से बढ़ने का पूर्वानुमान नहीं है. मानसून दिल्ली में सामान्य तिथि 27 जून या इससे एक या दो दिन पहले पहुंचने की उम्मीद है। आईएमडी ने अगले 5 दिनों में गरज के साथ छीटें पड़ने या हल्की बारिश की चेतावनी के साथ ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है। पिछले साल आईएमडी ने अनुमान जताया था कि दिल्ली में अनुमान से करीब दो हफ्ते पहले मानसून आएगा। हालांकि, यह 13 जुलाई को आया था जिससे 19 वर्षों में यह सबसे देर से पहुंचने वाला मानसून बन गया था।

वहीं उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुई हल्की बारिश ने मौसम को सुहावना बना दिया। तापमान में गिरावट आने से लोगों को गर्मी से थोड़ी राहत मिली। लोग अपने घरों और प्रतिष्ठानों के बाहर बैठकर ठंडी हवाओं और सुहावने मौसम का आनंद लेने लगे। हालांकि गुरुवार सुबह से ही गर्मी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था। दोपहर होते-होते सूर्य के तेवर तल्ख होते गए और गर्मी से बेहाल लोग बारिश की आस लगा रहे थे। शाम होते ही मौसम का मिजाज बदला और आसमान में बादल छा गए। फिर हल्की बारिश हुई, तो लोगों को गर्मी से राहत मिली। बारिश और ठंडी हवाओं ने मौसम सुहावना कर दिया।

इससे पहले मई के आखिरी सप्ताह में मॉनसून 2022 को लेकर मौसम विभाग ने बड़ी अच्‍छी खबर सुनाई थी।  दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून तय समय से तीन दिन पहले ही केरल पहुंच चुका था। आमतौर पर केरल में मॉनसून 1 जून को पहुंचता है। मानसून के 20 जून तक गुजरात पहुंचने का पहले अनुमान लगाया गया है। IMD ने एक मैप जारी कर बताया है कि भारत के किन-किन राज्‍यों में मॉनसून की आमद कब तक होगी।

आपके यहां कब तक पहुंचेगा मॉनसून?

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पूर्वी उत्‍तर प्रदेश में मॉनसून 15-20 जून के बीच पहुंचेगा। मौसम विभाग के मैप के अनुसार, आपके यहां मॉनसून पहुंचने की संभावित तारीख (नोट: इन अनुमानों में ±5 दिन का अंतर देखने को मिल सकता है।)

20 जून: गुजरात, मध्‍य प्रदेश के कुछ हिस्‍से, पूर्वी उत्‍तर प्रदेश, राजस्‍थान के कुछ हिस्‍से, उत्‍तराखंड, हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्‍से

25 जून: दक्षिणी राजस्‍थान, पंजाब-हरियाणा के कुछ हिस्‍से, मेन यूपी, हिमाचल प्रदेश का बाकी हिस्‍सा, जम्‍मू कश्‍मीर, लद्दाख

30 जून: मध्‍य राजस्‍थान, दिल्‍ली-एनसीआर, पंजाब-हरियाणा, मुजफ्फराबाद, गिलगित-बाल्टिस्तान

5 जुलाई: पश्चिमी राजस्‍थान, पंजाब-हरियाणा के सीमावर्ती हिस्‍से

किसानों को 6 हजार सालाना देने के खिलाफ उतरे ताकतवर देश

किसानों को 6 हजार सालाना देने के खिलाफ उतरे ताकतवर देश, भारत ने दिया मुंहतोड़ जवाब

नई दिल्ली (एजेंसी)। वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन यानी WTO की बैठक जेनेवा में हुई। इसमें अमेरिका और यूरोपीय देशों ने मोदी सरकार द्वारा भारतीय किसानों को दी जाने वाली एग्रीकल्चरल सब्सिडी का विरोध किया। किसानों को सालाना दिये जाने वाले रुपए 6000 रुपए भी एग्रीकल्चरल सब्सिडी में शामिल है। ऐसे में इसे रोकने के लिए अमेरिका और यूरोप ने पूरी ताकत झोंक दी है। भारत ने भी इस मुद्दे पर ताकतवर देशों के आगे झुकने से इनकार कर दिया है।

12 जून से 15 जून 2022 तक जेनेवा में WTO की बैठक का आयोजन हुआ। बैठक में 164 सदस्य देशों वाले WTO के G-33 ग्रुप के 47 देशों के मंत्रियों ने हिस्सा लिया। भारत की ओर से केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल शामिल हुए। इस साल होने वाली WTO की बैठक में इन 3 अहम मुद्दों पर प्रस्ताव लाने की तैयारी की गई…1. कृषि सब्सिडी को खत्म करने के लिए. 2. मछली पकड़ने पर अंतरराष्ट्रीय कानून बनाने के लिए 3. कोविड वैक्सीन पेटेंट पर नए नियम लाने के लिए। अमेरिका, यूरोप और दूसरे ताकतवर देश इन तीनों ही मुद्दों पर लाए जाने वाले प्रस्ताव के समर्थन में थे, जबकि भारत ने इन तीनों ही प्रस्ताव पर ताकतवर देशों का जमकर विरोध किया। भारत ने ताकतवर देशों के दबाव के बावजूद एग्रीकल्चरल सब्सिडी को खत्म करने से इनकार कर दिया है। वहीं अब इस मामले में भारत को WTO के 80 देशों का साथ मिला है।

अमेरिका और यूरोप चाहते हैं कि भारत अपने यहां किसानों को दी जाने वाली हर तरह की एग्रीकल्चरल सब्सिडी को खत्म करे. इसमें ये सारे एग्रीकल्चरल सब्सिडी में शामिल हैं- PM किसान सम्मान निधि के तहत दिए जाने वाले सालाना 6 हजार रुपए, यूरिया, खाद और बिजली पर दी जाने वाली सब्सिडी। अनाज पर MSP के रूप में दी जाने वाली सब्सिडी। अमेरिका जैसे ताकतवर देशों का मानना है कि सब्सिडी की वजह से भारतीय किसान चावल और गेहूं का भरपूर उत्पादन करते हैं।बइसकी वजह से भारत का अनाज दुनिया भर के बाजार में कम कीमत में मिल जाता है। अमेरिका और यूरोपीय देशों के अनाज की कीमत ज्यादा होने की वजह से विकासशील देशों में इसकी बिक्री कम होती है। यह