उत्तर प्रदेश इंकम टैक्स डिपार्टमेंट में बांटी जा रही फर्जी नौकरियां

उत्तर प्रदेश इंकम टैक्स डिपार्टमेंट में बांटी जा रही थीं फर्जी नौकरियां। लखनऊ, नोएडा और बरेली के अफसर शामिल!

लखनऊ। इनकम टैक्स विभाग में फर्जी नौकरी स्कैम सामने आया है। बताया जा रहा है कि इस फर्जीवाड़े में लखनऊ, बरेली से लेकर नोएडा तक आयकर महकमे के अफसर शामिल हैं। दूसरी तरफ इनकम टैक्स विभाग स्कैम की जांच करने की बजाय लीपापोती में लगा हुआ है। विभाग ने लखनऊ पुलिस को एक शिकायत दी है, जिसमें अपने किसी अफसर या कर्मचारी का नाम नहीं दिया है। अब तक अपने किसी अफसर पर एक्शन भी नहीं लिया है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की विजिलेंस ब्रांच भी चुप्पी साधकर बैठी है। कोई जांच शुरू नहीं की है। इससे विभाग के उच्चाधिकारियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

ऊपर वाले अफसरों की भूमिका संदिग्ध

मिली जानकारी के मुताबिक लखनऊ पुलिस को दी गई तहरीर में मामले को घुमाया गया है। सिर्फ एक आरोपी प्रियंका मिश्रा के खिलाफ तहरीर दी गई है। शिकायत में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के किसी अफसर को आरोपी नहीं बनाया गया है। आपको बता दें कि लखनऊ में इनकम टैक्स के यूपी ईस्ट का मुख्यालय है। यहां बड़े-बड़े अफसरों की मौजूदगी में बड़ा स्कैम हो गया है लेकिन किसी भी बड़े अफसर की जवाबदेही तय नहीं की गई है। हेड क्वार्टर में घूस लेकर इनकम टैक्स ऑफिस में फर्जी नौकरी बांटी जा रही थीं। करीब महीने भर से यह स्कैम चल रहा था। सब खामोश थे। इनकम टैक्स के बड़े अफसरों की भूमिका संदेह के घेरे में है।

लखनऊ पुलिस को छानबीन में मिले सबूत

दूसरी ओर लखनऊ पुलिस की जांच में पर्याप्त सबूत मिले हैं। मिली जानकारी के मुताबिक इस घोटाले में लखनऊ, नोएडा और बरेली इनकम टैक्स के अफसर शामिल हैं। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट केंद्र सरकार का दफ्तर है। इस मामले में सीबीआई जांच भी हो सकती है। बताया जा रहा है कि लखनऊ पुलिस पूरे मामले में बेहद संजीदगी के साथ जांच-पड़ताल कर रही है। जो सबूत अब तक सामने आए हैं, उनके बारे में केंद्रीय वित्त मंत्रालय और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के शीर्ष अफसरों को सूचनाएं भेजी जा रही हैं।

Rotomac के खिलाफ 750 करोड़ की धोखाधड़ी का केस दर्ज

Rotomac Global के खिलाफ बैंक ने किया केस दर्ज, 750 करोड़ की धोखाधड़ी का इलज़ाम

कानपुर। इंडियन ओवरसीज बैंक ने पैन बनाने वाली कंपनी रोटोमैक ग्लोबल के खिलाफ 750 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया है।

इंडियन ओवरसीज बैंक ने रोटोमैक ग्लोबल पर आरोप लगाया है कि कंपनी की विदेशी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उन्होंने 11 साख पत्र (एलसी) जारी किये थे।  यह सभी के सभी पत्र हस्तांतरित कर दिए गए थे, जो 743.63 करोड़ रुपये के बराबर होता है।

पूरा मसला:
सीबीआई ने कानपुर स्थित रोटोमैक ग्लोबल और उसके निदेशकों के खिलाफ कथित तौर पर इंडियन ओवरसीज बैंक (आईओबी) से 750.54 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का मामला दर्ज किया है। पेन बनाने वाली कंपनी पर सात बैंकों के कंसोर्टियम का कुल 2,919 करोड़ रुपये बकाया है। इस बकाया में इंडियन ओवरसीज बैंक की 23 फीसदी हिस्सेदारी है। कंपनी और उसके निदेशकों को जांच एजेंसी के साथ आपराधिक साजिश (120-बी) और धोखाधड़ी (420) से संबंधित आईपीसी की धाराओं के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत प्रतिवादी के रूप में पंजीकृत किया गया है। बैंकों के एक संघ के सदस्यों की शिकायतों के आधार पर कंपनी की पहले से ही सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जांच की जा रही है।


कैसे रची यह साजिश?
इंडियन ओवरसीज बैंक ने आरोप लगाया कि कंपनी को 28 जून, 2012 को 500 करोड़ रुपये की क्रेडिट सीमा मंजूर की गई थी। 30 जून, 2016 को खाते को 750.54 करोड़ रुपये की बकाया राशि पर चूक के बाद गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) घोषित किया गया था। बैंक ने कहा कि उसने कंपनी की विदेश व्यापार जरूरतों को पूरा करने के लिए 11 साख पत्र (एलसी) जारी किए थे। हस्तांतरित राशि 743.63 करोड़ रुपये थी।

अब क्या होगा अगला कदम
बैंक का आरोप है कि लदान के बिलों में दावा किए गए व्यापारी जहाजों और यात्राओं की प्रामाणिकता सवालों के घेरे में है। फोरेंसिक ऑडिट में पाया गया कि बैंक ने कथित तौर पर खातों की पुस्तकों में हेरफेर किया और एलसी के संबंध में देनदारियों को छुपाया। लेखा परीक्षा में बिक्री अनुबंधों, लदान के बिलों और संबंधित यात्राओं में अनियमितताएं पाई गई हैं।

यह भी कहा गया है कि लगभग सभी जानकारी उपलब्ध है। 26,143 करोड़ रुपए एक ही मालिक और ग्रुप की चार पार्टियों को बेचे गए। बैंक ने आरोप लगाया कि रोटोमैक ग्रुप इन पार्टियों के लिए प्राथमिक आपूर्तिकर्ता था। जबकि इन पार्टियों की ओर से खरीदार बंज समूह था, विक्रेता अब उन्हें संपत्ति बेच रहे हैं। Bunge Group, Rotomac Group को उत्पाद बेचने वाला प्राथमिक विक्रेता था। चारों विदेशी क्लाइंट्स के कंपनी से कनेक्शन थे। कंपनी ने कथित तौर पर बैंक को धोखा दिया और पैसा डायवर्ट किया। इससे बैंक और कंपनी को गलत तरीके से 750.54 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ जो अभी तक पुनर्प्राप्त किया जाना है।

जलभराव से परेशान छात्र छात्राओं का फूटा गुस्सा, प्रधान के खिलाफ प्रदर्शन

जलभराव से नाराज देहरी खादर में स्कूली बच्चों ने किया प्रदर्शन। तमाम शिकायतों पर भी ध्यान नहीं देता ग्राम प्रधान।

अमरोहा। रहरा ब्लाक गंगेश्वरी क्षेत्र के गांव देहरी खादर में जलभराव से स्कूली बच्चे व ग्रामीण परेशान हो गए हैं। शिकायत के बावजूद ग्राम प्रधान सुनवाई को तैयार नहीं है। जलभराव से निजात पाने के लिए छात्राओं ने प्रदर्शन किया।

रहरा ब्लाक गंगेश्वरी क्षेत्र के गांव देहरी खादर में जलभराव के कारण बच्चों को स्कूल आने जाने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। जलभराव से ग्रामीण परेशान हो चुके हैं और साथ में स्कूली बच्चों को आने जाने में रोजाना दिक्कत हो रही है। बच्चों के कपड़े व पैर मिट्टी और पानी से गंदे हो जाते हैं। गिरकर चोट लगने की घटनाएं भी कई बार हो चुकी हैं। इस मामले में कई बार शिकायत करने पर भी ग्राम प्रधान कोई सुनवाई नहीं कर रहा है। इस बात से नाराज स्कूली छात्र छात्राओं ने प्रदर्शन किया। इस मौके पर विनीत, निखिल, जितेंद्र, भोला, गुंजन, विकेश, रोहित, अनुज आदि छात्र-छात्रा मौजूद रहे।

सचिव और प्रधान की मिलीभगत से हो गया 2 लाख का फ़र्ज़ी भुगतान

मनरेगा की आईडी पर नहीं मिली थी वित्तीय स्वीकृति, फिर भी डाली थी इंटरलॉकिंग

डीएम से शिकायत के बाद रोका गया था भुगतान

तीन महीने बाद उसी काम को ग्राम निधि में दिखाकर कर लिया फर्जी भुगतान

उरई (जालौन) | विकास कार्यों में इतना भ्रष्टाचार इसके पहले कभी नहीं देखा गया, जितना अधिकारियों के गैरजिम्मेदाराना रवैये से अब हो रहा है। ग्राम पंचायत में तो सरकारी पैसा लूटने की होड़ लगी हुई है, जिसके कारण कागजों में काम दिखाकर फ़र्ज़ी तरीके से पैसा निकाला जा रहा है। माधौगढ़ ब्लॉक के ग्राम असहना में सचिव और प्रधान ने इंटरलॉकिंग निर्माण के नाम पर दो लाख का फ़र्ज़ी भुगतान कर लिया। मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की गई लेकिन उसे भी फर्जी ही निस्तारण कर दिया।

ग्राम असहना में बिना इस्टीमेट और वित्तीय स्वीकृति के मार्च 2022 में तीन मनरेगा आईडी क्रमांक 8952, 8954 और 8955 पर इंटरलॉकिंग का निर्माण करा दिया गया। इसकी लिखित शिकायत जिलाधिकारी को श्रमदान घोषित करने के लिए की गई, साथ ही ग्राम सचिव से आरटीआई डालकर इस्टीमेट और वित्तीय स्वीकृति की छायाप्रति भी मांगी गई लेकिन भृष्टाचार की पराकाष्ठा को पार किये सचिव शैलेश सोनकर ने जवाब नहीं दिया और खंड विकास अधिकारी दीपक कुमार ने करवाये गए कार्य का भुगतान रोक दिया बल्कि ब्लॉक में इसी प्रकार कराये गए ज्यादातर कामों के भुगतान पर रोक लगा दी। शिकायतों के बाद सचिव शैलेश सोनकर और प्रधान सोना देवी ने आपस में सांठगांठ कर 13 जून 2022 को इसी इंटरलॉकिंग को फ़र्ज़ी तरीके से ग्राम निधि में सीसी रोड से रामकुमारी के मकान तक दर्शाकर 2 लाख 4 हज़ार 578 का भुगतान कर लिया। यह जानकारी होने के बाद पूरे मामले की जानकारी खंड विकास अधिकारी को दी गई और मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की गई। उसके बाद भी भृष्ट सचिव की ठीठता देखिए कि शिकायत पर वर्तमान सचिव अभिनव पाठक से फ़र्ज़ी निस्तारण करा दिया। राष्ट्रीय स्तर पर छाए ऐसे ही फर्जी मामले पर कुछ दिन पूर्व दमरास गांव में कई जिम्मेदारों पर जिलाधिकारी के आदेश के बाद एफआईआर तक दर्ज हुई, लेकिन माधौगढ़ ब्लॉक के कई गांवों में मनरेगा से लेकर अन्य विकास कार्यों में जमकर लूट मची हुई है और जिम्मेदार अधिकारी कमीशनखोरी के आंकड़े में सब मैनेज कर मामले को दबाने की जुगत में लग जाते हैं।

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बैक पेपर के नाम पर विवेक कॉलेज कर रहा उगाही? धरती पर बैठे भावी चिकत्सक

बैक पेपर के नाम पर विवेक कॉलेज कर रहा उगाही? धरने पर बैठे नाराज छात्र छात्राएं। आंदोलनकारियों से मिलना भी गवारा नहीं कर रहा कॉलेज प्रशासन।

बिजनौर। बैक पेपर के नाम पर विवेक कॉलेज प्रशासन द्वारा उगाही की जानकारी सामने आई है। इस बात को लेकर विवेक कॉलेज आफ आयुर्वेदिक साइंसेज एंड हॉस्पिटल बिजनौर BAMS के छात्र छात्राओं ने बुधवार सवेरे कॉलेज गेट पर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। समाचार लिखे जाने तक मैनेजमेंट की ओर से कोई भी आंदोलनकारियों से मिलने नहीं पहुंचा था।

विवेक कॉलेज प्रशासन द्वारा बैक पेपर के नाम पर उगाही की जानकारी सामने आई है। नाराज छात्र छात्राओं ने बुधवार सवेरे कॉलेज गेट पर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। आरोप है कि उन्हें कई विषयों में जान बूझ कर फेल कर दिया जाता है और बैक पेपर के नाम पर प्रति छात्र छात्राओं से दो~दो हजार रुपए वसूले जाते हैं। कापियां जांचने के बाद भी पिछले वाले ही अंक आते हैं। छात्र छात्राओं का कहना है कि जब फीस दो लाख नौ हजार रुपए है तो उनसे ढ़ाई लाख रुपए क्यों वसूले जाते हैं। एग्जामिनेशन फीस और बैक पेपर फीस की पक्की रसीद नहीं दी जाती। शोभित यूनिवर्सिटी से 83 प्रतिशत अंक हासिल करने वाले छात्र की हर विषय में बैक आई है। यह भी आरोप है कि पुलिस के जरिए उन पर दबाव बनाया जा रहा है। देर शाम मैनेजमेंट की ओर से वार्ता के बाद आंदोलनकारियों ने धरना प्रदर्शन समाप्त कर दिया। इस मामले में कॉलेज मालिक, प्रबंधक से संपर्क का प्रयास किया गया लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। आंदोलनकारियों का आरोप है कि प्रशासन के विभिन्न कार्यों को करा कर कॉलेज प्रशासन बेलगाम हो गया है। आंदोलनकारी छात्र छात्राओं ने समस्या का निस्तारण न होने पर शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री से मिलने की ठान ली है। इस बीच थाना शहर कोतवाली पुलिस मौके पर मौजूद है और आंदोलनकारियों को समझाने के प्रयास में है।

धांधली की शिकायत करना शिक्षक को पड़ा भारी, निलंबन

किताब वितरण का मुद्दा उठाने वाले शिक्षक का दो माह का वेतन रोकने के बाद अंततः हुआ निलंबन, किताब वितरण में हुई देरी पर भुगतान रोकने की रखी थी मां



गोंडा। परिषदीय स्कूलों में किताब वितरण में हुई देरी के मुद्दे को उठाना शिक्षक नेता को भारी पड़ गया। दो माह तक वेतन रोकने के बाद शनिवार को बीएसए ने कार्यों में लापरवाही के आरोप में विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अनूप सिंह को निलंबित कर दिया है।

बेलसर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय बड़नापुर में कार्यरत शिक्षक नेता अनूप सिंह ने बीती 19 जुलाई को सीएम योगी से किताब वितरण में हुई देरी में जिम्मेदार अधिकारियों के विरूद्ध कार्रवाई की मांग की थी। इस पर सीएम के विशेष सचिव शशांक त्रिपाठी ने प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा को शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

महानिदेशक विजय किरण आनंद ने बीते पांच सितंबर को शासन को रिपोर्ट दी कि 29 लाख के सापेक्ष 17 लाख 44 हजार किताबें स्कूलों में बांट दी गई हैं और शेष 20 फीसदी किताब दो दिन के भीतर बांट दी जाएगी।

शिक्षक नेता अनूप सिंह ने बीएसए की रिपोर्ट को गलत बताया और पुनः 16 अक्टूबर को सीएम को पत्र भेजकर किताब वितरण कराने और देरी के कारण किताब का भुगतान रोकने की मांग की।

अनूप सिंह ने बताया कि बीएसए अखिलेश प्रताप सिंह ने शिकायत को उठा लेने की बात कही और उनकी बात न मानने पर पहले दो माह का वेतन रोका और निलंबित कर दिया है। वेतन रोकने का कारण पूछने पर भी कोई पत्र नहीं दिया गया।

अंग्रेजी माध्यम स्कूल में भेजी हिंदी माध्यम की किताबें

बेलसर के अंग्रेजी माध्यम प्राथमिक विद्यालय बड़नापुर में बीते अक्टूबर में हिन्दी माध्यम की किताबें भेजी गईं। यहां के बच्चों की पढ़ाई इसी किताब से शुरू हुई। फिर बीते एक नवंबर को अंग्रेजी माध्यम की किताबें भेजी गईं। यहां पर कार्यरत प्रधानाध्यापक अनूप सिंह ने दो बीईओ, एबीएसए और महानिदेशक स्कूल शिक्षा को पत्र भेजकर अंग्रेजी माध्यम स्कूल में हिन्दी माध्यम किताबों से बच्चों को पढ़ाने के लिए मार्गदर्शन मांगा था।

कार्यों में लापरवाही पर शिक्षक को किया निलंबित : बीएसए

बीएसए अखिलेश प्रताप सिंह ने बताया कि शिक्षक अनूप सिंह स्कूल के कार्यों में रूचि न लेकर समूह बनाकर लोगों को सोशल मीडिया पर उकसा रहे थे। बड़नापुर में अंग्रेजी माध्यम की किताबें 24 सितंबर को भेज दी गईं थी, जिसको शिक्षक ने वापस कर दिया। शासन के कार्यों को न करके पुस्तक न मिलने की अनावश्यक शिकायत कर रहे थे जो कर्मचारी आचरण नियमावली के विपरीत था। बीईओ इटियाथोक को जांच अधिकारी बनाया गया है।

धोखाधड़ी कर किसान के नाम पर लिया लोन, प्रबंधक सहित तीन लोगों पर मुकदमा दर्ज

धोखाधड़ी कर किसान के नाम पर लोन लेने पर प्रबंधक सहित तीन लोगों पर मुकदमा दर्ज



स्योहारा। धोखाधड़ी कर सहकारी समिति से किसान के नाम पर लोन लेने के आरोप में प्रबंधक सहित तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत किया गया है।
थाना क्षेत्र के ग्राम रवाना शिकारपुर निवासी सुनील कुमार पुत्र रमेश सिंह ने पुलिस को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि वह बिजली की दुकान चलाता है। उसका ताजपुर के सहकारी समिति में बैंक खाता खुला हुआ है। उसने कभी कोई लोन नहीं लिया है, लेकिन जिला सहकारी बैंक ताजपुर के मैनेजर वेदपाल सिंह, रविंद्र कुमार अमीन किसान सहकारी समिति ताजपुर व अन्य बैंक कर्मी ने मिलीभगत करके फर्जी तरीके से उसके नाम पर लोन दिखाकर नब्बे हजार रुपए बैंक से गबन कर लिए तथा धनराशि को प्रार्थी द्वारा अपनी जमीन को बंधक रखकर लोन लेना दिखा दिया है। उसने बताया कि न तो उसने जिला सहकारी बैंक ताजपुर से कोई लोन लिया है और ना ही उसके पास कोई जमीन उक्त लोन से संबंधित है और ना ही कभी उसने लोन लेने के लिए आवेदन किया है। फिर भी तीनों लोगों ने बैंक से गबन  करके उसकी जमीन पर लोन को दर्शा दिया है। इस बात की जानकारी से तब हुई जब आरोपियों द्वारा उसके घर आकर उससे पैसे वसूली की मांग की गई। उसने उक्त लोगों से कहा कि जब उसने किसी जमीन पर लोन लिया ही नहीं है तो वह किस बात का लोन चुकाए। तभी यह लोग उस पर भड़क गए और उसके साथ गाली गलौज करते हुए मारने की धमकी देने लगे। उसने किसी तरह इन लोगों से अपना पीछा छुड़वाया। उसने बताया कि इन लोगों ने फर्जी लोन दर्शा कर बैंक से गबन करके रुपए निकाल लिए जबकि उसने इन लोगों से जिला सहकारी बैंक से कभी कोई लोन नहीं लिया है। इन लोगों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर उसके फर्जी हस्ताक्षर कर गंभीर अपराध किया है। पीड़ित ने पुलिस को तहरीर सौंप कर आरोपियों के विरुद्ध कार्यवाही की मांग की। पुलिस ने तहरीर के आधार पर आरोपियों के विरुद्ध संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया है। थाना प्रभारी निरीक्षक राजीव चौधरी का कहना है कि पीड़ित की तहरीर के आधार पर प्रबंधक सहित तीन लोगों के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत किया गया है। मामले की जांच की जा रही है।

पुलिस प्रशासन की मिलीभगत से चल रहा मिट्टी के अवैध खनन का खेल

पुलिस प्रशासन की मिलीभगत से चल रहा मिट्टी के अवैध खनन का खेल

धरती का सीना छलनी कर रहे हैं खनन माफिया

बिजनौर। पुलिस प्रशासन की सरपरस्ती में इन दिनों मिट्टी के अवैध खनन का धंधा परवान पर है। खनन माफिया धरती का सीना छलनी कर अवैध कालोनियों में भराव कर रहे हैं। खनन फावड़े के बजाय जेसीबी से हो रहा है, अनुमति से अधिक स्थानों पर हो रहा है, जितने गहराई तक खुदाई की अनुमति है, उसके दोगुना खोदा जा रहा है। …और यह सब राजनीतिक और कुछ प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत से चल रहा है। जिले के आला अधिकारियों तक को इस बात की सूचना होने के बावजूद अभी तक किसी प्रकार की कार्रवाई खनन माफियाओं के खिलाफ नहीं की गई।

एनजीटी के आदेशों को पूरी तरह हवा में उड़ाते हुए खनन माफिया; पुलिस, प्रशासन और खनन विभाग तीनों से सेटिंग कर धड़ल्ले से अपना काम कर रहे हैं। क्षेत्र में बन रही कालोनियों में भराव के नाम पर रातों-रात खनन कर सैकड़ों ट्रालियां डंपर सड़कों पर दौड़ रहे हैं। मिट्टी खनन की शिकायतें लोगों ने कई बार जिम्मेदार अधिकारियों से कीं, लेकिन खनन माफिया पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस कारण खनन माफिया भराव के नाम पर ठेका ले रहे हैं। देहात क्षेत्रों में मिट्टी के अवैध खनन का कारोबार बड़े स्तर पर चल रहा है। रात भर सड़कों पर मिट्टी से भरे डंपर दौड़ते रहते हैं। नूरपुर रोड पर चारु पेपर मिल एवं नगला गांव में भाई बहन के मंदिर के पास के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मिट्टी का अवैध खनन किया जा रहा है। इतना ही नहीं अनुमति से दोगुना स्थानों पर अवैध खनन और वो भी जेसीबी से किया जा रहा है। यही नहीं जितनी गहराई तक खुदाई की अनुमति मिली है, उससे दोगुना से ज्यादा खुदाई करने के कारण बहुत स्थानों पर खाई बन गई हैं।

…तो भूमि हो जाएगी बंजर~ जानकारों का कहना है कि अवैध मिट्टी खनन के कारण खेतों से उर्वरा मिट्टी समाप्त होती जा रही है। यही हाल रहा तो अधिकतर भूमि बंजर हो जाएगी।

जेसीबी नहीं, फावड़े से है अनुमति

मिट्टी खनन के लिए जेसीबी से खनन करने की मंजूरी नहीं दी जाती है। रायल्टी जमा करने के बाद भी जेसीबी से खनन करने की मंजूरी न देते हुए प्रशासन सिर्फ फावड़े से ही मिट्टी उठाने की अनुमति देता है। इसके बावजूद खुलेआम जेसीबी से खनन किया जा रहा है। खनन माफिया प्लाटिंग करने वालों से हर ट्राली के हिसाब से ठेका कर लेते हैं। खनन माफिया से हर ट्राली और डंपर के हिसाब से पुलिस और खनन विभाग पैसा लेता है, जिस वजह से उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। शिकायत पर अगर कोई अधिकारी कार्रवाई करने की रणनीति तैयार करते हैं तो सबसे पहले सूचना खनन माफिया तक पहुंच जाती है। सरकारी मानकों को दरकिनार कर मनमर्जी खुदाई से सरकार  को भी करोड़ों का नुकसान हो रहा है। जिले के आला अधिकारियों तक को इस बात की सूचना होने के बावजूद अभी तक किसी प्रकार की कार्रवाई खनन माफियाओं के खिलाफ नहीं की गई।


ये हैं नियम


मिट्टी के खनन के लिए खनन विभाग की अनुमति जरूरी है। इसके लिए निर्धारित प्रारूप पर डीएम, एडीएम, खनन अधिकारी और बीडीओ के नाम पर एप्लीकेशन देनी होती है। आवेदक को जिस स्थान से मिट्टी लाई जा रही है, उसकी खतौनी के अनुसार भू स्वामी का भी पूरा ब्योरा देना होता है। यह भी सूचना देनी होती है कि कितनी मिट्टी का खनन हो रहा है, जहां मिट्टी खोदी जा रही है, वहां से निर्माण स्थल कितनी दूर है। मिट्टी ढोने वाले वाहन का नंबर, चालक का नाम और उसका मोबाइल नंबर भी बताना होता है।

अधिकारियों के फोन स्विच ऑफ: अवैध मिट्टी के खनन की वीडियो फुटेज एडीएम प्रशासन अरविंद सिंह और एसडीएम मोहित कुमार को एक खबरनवीस ने गुरुवार दिन में भेजी! बताया गया है कि एडीएम ने तुरंत ही मौके पर दबिश करने का दावा किया। देर शाम तक भी खनन जारी रहने पर मोबाइल फोन पर उनके पक्ष जानने की कोशिश की गई, दोनों अधिकारियों के फोन स्विच ऑफ रहे।

भ्रष्टाचार के आरोप में ब्लाक कर्मी निलंबित

बिजनौर। विकास खण्ड जलीलपुर के वरिष्ठ सहायक राजकुमार को विभिन्न अनियमितताओं के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। जिला विकास अधिकारी एस कृष्णा ने इस मामले में खण्ड विकास अधिकारी, हल्दौर को जाँच अधिकारी नियुक्त किया है।

जिला विकास अधिकारी एस कृष्णा ने बताया कि खण्ड विकास अधिकारी जलीलपुर द्वारा प्रेषित आख्यानुसार विकास खण्ड जलीलपुर के वरिष्ठ सहायक राजकुमार के विरुद्ध विभिन्न आरोपों के सम्बन्ध में अनुशासनिक कार्यवाही प्रस्तावित करते हुए तत्काल प्रभाव से निलम्बित किया गया है।
आरोप है कि वरिष्ठ सहायक राजकुमार द्वारा विकास खण्ड जलीलपुर में कार्यरत रहते हुए मनरेगा योजनान्तर्गत अनाधिकृत रूप से वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितता बरती गई।
इसके अलावा बिना अकुशल / कुशल के श्रमिकों की मजदूरी के मस्टरोल फीड किये और बिना सामग्री के बिल वाउचर फीड करा दिये गये। वहीं सामग्री अंश की सम्पूर्ण धनराशि का भुगतान सम्बन्धित फर्म के खाते में करा दिया गया। अकुशल / कुशल के श्रमिकों की मजदूरी के भुगतान में वित्तीय अनियमितता की गई। यह भी आरोप है कि वरिष्ठ सहायक राजकुमार ने उच्च अधिकारियों को गुमराह किया और उनके आदेशों की अवहेलना की गई। उनके द्वारा शासकीय कार्यो में लापरवाही / उदासीनता बरतते हुए शासकीय कार्यों में रुचि नहीं ली गई।

निलम्बन अवधि में वरिष्ठ सहायक को विकास खण्ड कार्यालय मोहम्मदपुर देवमल से सम्बद्ध रखा जाएगा।
इस प्रकरण में खण्ड विकास अधिकारी, हल्दौर को जाँच अधिकारी नियुक्त किया गया है। उन्हें इस प्रकरण में आरोप पत्र तैयार कर साक्ष्यों सहित एक माह के अन्दर अनुमोदनार्थ प्रस्तुत करना होगा।

विद्युत विभाग में काम के लिए बिन रिश्वत सब सून

बिना सुविधा शुल्क लिए काम करने को तैयार नहीं विद्युत विभाग के कर्मचारी। रिश्वत न मिली तो उतार ले गए केबिल। मुख्यमंत्री पोर्टल व पश्चिमांचल के अधिकारियों से शिकायत।

बिजनौर। विद्युत विभाग के अधिकारी कर्मचारी सुधरने को तैयार नहीं हैं। बिना सुविधा शुल्क लिए कुछ भी करना उन्हें रास नहीं आता, चाहे विभाग अथवा उपभोक्ता को इसकी कितनी भी कीमत क्यों ना चुकानी पड़े। ऐसा ही एक मामला बिजनौर में प्रकाश में आया है, जहां कनेक्शन स्वीकृत होने के और केबिल लग जाने के बाद भी विभाग के अधिकारी बिना वसूली के मीटर लगाने को तैयार नहीं है। पीड़ित उपभोक्ता ने जब अधिकारियों से मीटर लगाने की गुहार की, तो विभाग ने मीटर लगाने के बजाय उपभोक्ता का केबिल उतार कर उसे अंधेरे में पहुंचा दिया। पीड़ित उपभोक्ता ने पूरे मामले की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल व पश्चिमांचल के अधिकारियों से की है।
दरअसल मामला बिजनौर विद्युत वितरण खण्ड प्रथम क्षेत्र का है, नूरपुर मार्ग पर न्यू सिटी कॉलोनी में श्रीमती मंजू शर्मा ने मकान बनाया है। उन्होंने जुलाई माह में विद्युत कनेक्शन के लिए आवेदन किया था। आवेदन प्रक्रिया की औपचारिकता करने के बाद विभाग ने केबिल डाल दिया। केबिल डालने के बाद विभाग का मेहराब नामक मीटर लगाने वाला कर्मचारी मौके पर पहुँचा और उसने मकान की वीडियो बनाकर कनेक्शन प्रक्रिया को ही गलत बता दिया और उपभोक्ता को कनेक्शन काटने की धमकी दी। कर्मचारी ने जब उसने मीटर लगाने की एवज में उम्मीद से ज्यादा धनराशि मांगी तो उपभोक्ता ने इंकार कर दिया। मीटर लगाने वाले कर्मचारी का मानना था उसे मीटर के हिसाब से जेई से लेकर अधिशासी अभियंता से लेकर ऊपर तक के अधिकारियों को हिसाब करना पड़ता है। उसका तो पेट्रोल का खर्च भी नहीं निकल पाता। उपभोक्ता को मीटर लगाने का मैसेज विभागीय अधिकारियों ने आठ अगस्त को होना जारी दिखा दिया।
पूरे मामले की शिकायत उपभोक्ता ने जब अधिकारियों से की तो उन्होंने मीटर लगवाने के बजाय पूरा केबिल उतरवा लिया। अब उपभोक्ता अंधेरे में रहने को मजबूर है। उसने पूरे मामले की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल और पश्चिमांचल की हेल्प लाइन पर दर्ज करा दी है।

लगातार शिकायत, फिर भी नहीं हुआ “सम्पूर्ण समाधान”

बिजनौर। विद्युत विभाग के अधिकारियों की हीलाहवाली के चलते चार साल पहले कागजों पर कनेक्शन कटे दो नलकूप अब भी लगातार पानी उगल रहे हैं। वास्तव में इसे लापरवाही की पराकाष्ठा ही कहा जाएगा कि विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश व निर्देश का पालन कराने में कनिष्ठ अधिकारी कर्मचारी फेल साबित हो गए।

दअरसल दो भाइयों ने 15 जुलाई 2016 को 7.5 हॉर्स पावर के दो अलग निजी नलकूप फर्जी तरीके से लगवा लिए। जिस गांव की जमीन के कागजात के आधार पर कनेक्शन स्वीकृत हुए, नलकूप वहां न लगवा कर दूसरे गांव में, वो भी दूसरे की जमीन पर लगा लिए। एक साल बाद शिकायत हुई तो जांच के आदेश कछुआ चाल से चलते रहे। चार साल पहले दोनों नलकूपों के कनेक्शन काटे गए, लेकिन सिर्फ कागजों पर! दोनों ही कनेक्शन आज भी बदस्तूर धड़ल्ले से चल रहे हैं। विभागीय आदेश के अनुपालन में सामान विभागीय भंडार गृह में जमा नहीं कराया गया। इनके द्वारा खपत की जा रही बिजली के बिल की भरपाई कौन करेगा? मामले की शिकायत तहसील दिवस में की गई है।

सेवानिवृत्त पोस्ट मास्टर की शिकायत~ जानकारी के अनुसार 04 दिसंबर 2017 को ग्राम सदूपुरा निवासी सेवानिवृत्त पोस्ट मास्टर सोमदत्त ने तत्कालीन पुलिस अधीक्षक से लिखित शिकायत करते हुए बताया कि ग्राम फरीदपुर सल्लू स्थित 100 बीघा जमीन में से 48 बीघा का बैनामा कराया था। दाखिल खारिज की कार्रवाई के दौरान रफीक अहमद पुत्र अब्दुल हमीद, नफीस अहमद पुत्रगण अब्दुल हमीद अहमद निवासी ग्राम सद्पुरा ने एतराज किया, जिसका मुकदमा रेवन्यु बोर्ड तक चला। हालांकि बाद में दाखिल खारिज भी हो गया। सेवानिवृत्त पोस्ट मास्टर सोमदत्त की शिकायत के अनुसार उक्त दोनों ने बिजली स्वीकृत कराई ग्राम सदुपुरा की जमीन के लिए जबकि जिस जमीन पर प्रार्थी के बोरिंग में नलकूप लगाया, वह फरीदपुर सल्लु में है। इस प्रकार रफीक अहमद व नफीस अहमद ने जालसाजी, हेराफेरी व झूठा शपथ पत्र देकर बिजली कनेक्शन ले लिया ताकि प्रार्थी की जमीन पर मालिकाना हक जाहिर कर सके। सरकारी विभागों में प्रार्थना पत्र घूमता रहा। फिर 03 फरवरी 2018 को उपखंड अधिकारी विद्युत वितरण उपखण्ड द्वितीय बिजनौर जसवीर सिंह ने 33/11 केवी उपकेंद्र गंज के अवर अभियंता बहराम सिंह को उक्त दोनों कनेक्शन गलत स्थान पर संचालित होने की जानकारी देते हुए अविलंब उतारने और अवगत कराने के निर्देश दिए।

तीन दिन में मांगी थी रिपोर्ट~ इसके बाद विद्युत वितरण खण्ड बिजनौर के तत्कालीन अधिशासी अभियन्ता किताब सिंह ने 09 अप्रैल 2018 को निजी नलकूप संख्या 225/5027/130124 के लिए रफीक अहमद व निजी नलकूप संख्या 225/5027/130125 के लिए नफीस अहमद पुत्रगण हमीद निवासी ग्राम सदूपुरा बिजनौर को नोटिस जारी किया। इसमें कहा गया कि उनके द्वारा दिनांक 15 जुलाई 2016 को सामान्य योजना के अन्तर्गत 7.5 हॉर्स पावर के उक्त दो निजी नलकूप हेतु अनुबन्ध किया गया था। शिकायत प्राप्त होने पर जांच में पाया गया कि उनके द्वारा फर्द ग्राम सदुपुरा की लगायी गयी है जबकि निजी नलकूप ग्राम फरीदपुर सल्लू में स्थापित किए गए हैं। इससे स्पष्ट होता है कि उनके द्वारा विभाग को गुमराह करके संयोजन प्राप्त किया गया है। यह भी कहा कि पत्र प्राप्ति के 03 दिन के अन्दर स्पष्ट करें कि उनके द्वारा गलत फर्द क्यों लगायी गयी हैं,अन्यथा उनके विरूद्ध कानूनी कार्यवाही करते हुए संयोजन निरस्त कर दिया जायेगा।

अधिशासी अभियंता के निर्देश ताक पर~ 17 मई 2018 को तत्कालीन अधिशासी अभियंता ब्रह्मपाल ने उक्त दोनों कनेक्शन काटने के संबंध में कार्यालय से पत्र जारी किया। उपखंड अधिकारी विद्युत वितरण उपखण्ड द्वितीय बिजनौर को उक्त दोनों कनेक्शन काटने और नलकूप की समस्त सामग्री उतारकर विभागीय भंडार गृह में जमा कराने के निर्देश दिए। उन्होंने अधीक्षण अभियंता विद्युत वितरण मंडल बिजनौर के साथ ही उक्त दोनों कनेक्शन धारकों को भी इसकी एक प्रति सूचनार्थ भेजी। अब किसी प्रकार दोनों नलकूपों के कनेक्शन कट तो गए, लेकिन सिर्फ कागजों पर! असलियत में दोनों ही कनेक्शन आज तक बदस्तूर धड़ल्ले से चल रहे हैं। आज तक अधिशासी अभियंता ब्रह्मपाल के आदेश के अनुपालन में सामान विभागीय भंडार गृह में जमा नहीं कराया गया। एक बात और विचारणीय है कि तकरीबन चार साल से जिन दो निजी नलकूप का कनेक्शन कथित रूप से कटा हुआ है, उनके द्वारा खपत की गई बिजली के बिल का भुगतान कौन और कब करेगा? साथ ही विभाग के राजस्व की भरपाई कौन करेगा?

दोनों ही भाइयों के खिलाफ दर्ज हैं कई केस- उक्त दोनों ही भाई शातिर किस्म के बताए जाते हैं। उनके खिलाफ वर्ष 1987 से लेकर 2019 तक कई थानों में मुकदमे दर्ज हैं। इनमें हत्या, जान से मारने की धमकी, फ्राड आदि के थाना शहर कोतवाली में आठ व थाना स्योहारा में एक मुकदमा शामिल है।

SDO ने भी माना… सम्पूर्ण समाधान दिवस में प्राप्त शिकायत को सुन कर एसडीओ विद्युत वितरण खंड प्रथम बिजनौर प्रदीप कुमार ने 27 मई 2022 की निस्तारण रिपोर्ट में बताया था कि एसडीओ विद्युत वितरण खंड द्वितीय, बिजनौर सचिन रस्तोगी द्वारा 25 मई 2022 को दी गई जांच आख्या के अनुसार 7.5-7.5 हार्सपावर के उक्त दोनों ट्यूबवेल संचालित हैं और करीब पांच वर्ष पूर्व डिस्मेंटल किए जाने के आदेश के बावजूद बिजली चोरी कर ये ट्यूबवेल चलाए जा रहे हैं।

पुलिस की ओर से नहीं दी जा रही सुरक्षा? 27 मई 2022 और 18 अगस्त 2022 को पीड़ित द्वारा समाधान दिवस में प्रार्थना पत्र दिया गया। दोनों बार ही विद्युत विभाग के अधिकारियों ने पुलिस तथा प्रशासन से उक्त मामले में सहयोग मांगा। आरोप है कि एक बार भी सुरक्षा मुहैया नहीं कराई गई। अब पीड़ित ने एक बार फिर समाधान दिवस में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया है।

नगीना तहसील में 17 गावों की 60 हजार बीघा सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे

NGT व हाईकोर्ट के आदेशों को कमिश्नर ने किया दरकिनार? एनजीटी व हाईकोर्ट के आदेशों को दरकिनार कर कमिश्नर ने दिया स्थगन आदेश। योगी सरकार भूमाफियाओं पर कर रही कड़ी कार्रवाई, वहीं भाजपा नेता दे रहे हैं संरक्षण। कमिश्नर मुरादाबाद पर आदेश की अवहेलना का मामला हाईकोर्ट में है विचाराधीन।

बिजनौर। नगीना तहसील में 17 गावों की हजारों बीघा सरकारी जमीन पर चले आ रहे अवैध कब्जे के मामले में एसडीएम कोर्ट के फैसले के विरुद्ध कमिश्नर मुरादाबाद ने स्टे कर 3 अक्टूबर तक यथास्थिति बनाये रखने के आदेश दिए हैं।

60 हजार बीघा सरकारी भूमि पर है कब्जा: गौरतलब है कि एसडीएम नगीना ने उक्त जमीनों पर अवैध कब्जा मानते हुए एनजीटी व हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में खातेदारों के नाम निरस्त कर मूल श्रेणी जंगल, नदी आदि के नाम दर्ज करने के आदेश जारी किये थे।
महत्वपूर्ण तथ्य है कि लगभग 60 हजार बीघा भूमि पर, जो कि सरकारी है पर स्थानीय लोग वर्षों से काबिज हैं। ये प्रकरण एनजीटी व हाईकोर्ट में में जा चुका है, जहाँ इस भूमि को सरकारी मानते हुए अवैध कब्जे हटाये जाने के आदेश जारी हो चुके हैं। मजेदार तथ्य है कि हाईकोर्ट में कमिश्नर मुरादाबाद के विरुद्ध इस मामले में कोर्ट की अवहेलना का मामला भी विचाराधीन है, जिसमें मुख्य पार्टी कमिश्नर मुरादाबाद ही है, क्योंकि कोर्ट के आदेश अवैध कब्जे हटाए जाने व कब्जाने वालों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश का पालन नहीं किया गया है, उस के बावजूद कमिश्नर मुरादाबाद द्वारा कोढ़ में खाज कहावत चरितार्थ करते हुए एसडीएम नगीना के कब्जे हटाए जाने के आदेश को स्टे प्रदान कर हाईकोर्ट के आदेश को दरकिनार कर दिया गया है। यही नहीं स्टे की कार्यवाही कर मुरादाबाद कमिश्नर ने एनजीटी के आदेश को भी ताक पर रख दिया है।

नगीना एसडीएम इससे पूर्व ग्राम मुर्तजा बाद, हल्लोवाली, तथा शंकरपुर के तीन ग्रामों की लगभग 25 हजार बीघा जमीन अवैध कब्जे से हटाकर सरकारी भूमि में दर्ज भी करा चुके हैं। इन तीनों ग्रामों की जमीन जंगल, झाडी़, नदी राजस्व अभिलेखों में दर्ज होने के बावजूद एनजीटी देहली व  हाईकोर्ट इलाहाबाद के भूमि को मूल श्रेणी में दर्ज करते हुए दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों तथा हितपद व्यक्तियो के विरुद्ध क्रिमनल केस दर्ज करने के आदेशों के विपरीत कमिश्नर मुरादाबाद ने सरकारी भूमि व सरकार के विरुद्ध ही स्टे पारित कर दिया जबकि कमिश्नर को सरकारी सम्पति की रक्षा का मुख्य दायित्व होता है।

गौरतलब है कि जमींदारी उन्मूलन एक्ट लागू होने के पहले तत्कालीन राजस्व विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के चलते ग्राम तेलीवाडा़, राजपुर कोट, शंकरपुर, मुर्तजापुर, हल्लोवाली, कादरगंज, मदपुरी, चंपतपुर चकला व सुलेमान शिकोहपुर के जंगल में लगभग 24,050 बीघा में फैली नदियों, झाडि़यों एवं सार्वजनिक सरकारी भूमि को 1360 फसली में राजस्व रिकॉर्ड में लोगों के नाम दर्ज कर दिये गये थे।

बसपा सांसद की शिकायत पर नहीं सुनवाई: इस मामले में किशन चंद व बसपा सासंद गिरिशचंद ने अधिकारियों से शिकायत की थी पर कोई सुनवाई नहीं हुई। इस पर इस मामले में किशन चंद द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट के आदेश पर चकबंदी कमिश्नर की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने मामले की जांच कर तथ्यों को सही मानते हुए राजस्व अभिलेखों को सही करने की आख्या दी थी। इससे पहले तत्कालीन जिला प्रशासन ने भी इस मामले की जांच कराईं थी, जिसमें 17 गाँव की जंगल, रास्तों, नदी की लगभग 60 हजार बीघा सरकारी जमीन को वर्ष 1953 में कूट रचित प्रविष्टि के आधार पर खतौनी फसली वर्ष 1359 में एक लाइन का आदेश करके कुंवर चन्द्रभान सिंह के नाम करना पाया गया था। इसके बाद इन जमीनों के बैनामे होते रहे, तथा ये सरकारी भूमि अन्य लोगों के नाम पर की जाती रही।
एनजीटी देहली की पूर्ण पीठ ने 8 जून 2021 को याची किशन चंद बनाम राज्य सरकार में सुनवाई करते हुए जमीन पर काबिज लोगों को बेदखल कर उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिये थे। इस मामले में एसडीएम नगीना शैलेन्द्र कुमार की कोर्ट ने सुनवाई कर उक्त सरकारी भूमि पर काबिज लोगों को नोटिस जारी किये थे। भूमि से कब्जा हटाने की कार्यवाही शुरू होने पर क्षेत्रीय लोगों ने बढ़ापुर  विधानसभा के भाजपा विधायक सुशांत सिंह के दरबार में जाकर गुहार लगाई, जिसके बाद इस मामले में राजनीति शुरू हो गई। सत्तासीन सरकार के विधायक वोट बैंक को साधने के प्रयास में लगे दिखाई दिये तथा अवैध कब्जा धारियों की ऊपर तक पैरवी भी की जबकि मुख्यमंत्री अवैध कब्जे व भूमाफियाओं के विरुद्ध अभियान छेड़ अवैध कब्जे हटवाने में लगे हुए हैं।

सूत्रों की मानें तो इस अवैध कब्जों में बड़े बड़े नाम शामिल हैं, जो प्रभावशाली भूमिका में होने के कारण कई दशक से हजारों बीघा सरकारी भूमि पर काबिज हैं, वहीं करोड़ों अरबों की जमीन बेच भी चुके हैं, जो इन अवैध कब्जाधारियों की आड़ लेकर अपने को सुरक्षित करने तथा इस प्रक्रिया को आगे बढाने में लगे हुए हैं, देखना है कि योगी सरकार इन भू माफियाओं से सरकारी जमीन से कब्जा हटाने के लिए कार्यावाही करेगी या ये मामला राजनीति की भेंट चढे़गा?

उत्पीड़न से तंग आशा बहुओं व संगिनियों का अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन

बिजनौर। आशा कार्यकत्री वेलफेयर एसोसिएशन के तत्वावधान में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से जुड़ी आशा बहुओं व आशा संगिनियों ने विभिन्न मांगों व समस्याओं को लेकर कलक्ट्रेट में अनिश्चितकालीन धरना व प्रदर्शन शुरू कर दिया है। इस दौरान जिलाधिकारी को ज्ञापन भी दिया गया।

ज्ञापन में कहा गया कि लगभग 25 सौ की संख्या में आशा बहुएं व आशा संगिनी निरन्तर अपनी सेवा प्रदान कर रही हैं। इसके बावजूद उन्हें हेल्थ वैलनेस सेन्टर का कोई पैसा नहीं मिल रहा है। 2 वर्ष से खसरा बूस्टर व डिलीवरी का पैसा नहीं मिला। अप्रैल से अभी तक माह में आने वाले 2200 रुपए भी नहीं मिले। एक अन्य समस्या यह भी है, जब आशा जिला महिला अस्पताल में मरीज लेकर पहुंचती है तो वहां मरीजों को डराया जाता है कि इसका ऑपरेशन होगा परंतु वह डिलीवरी प्राईवेट अस्पताल में जाकर नॉर्मल हो जाती है। खून कम होने पर मरीजों को बाहर रेफर किया जाता है। वह प्राईवेट में जाकर सही हो जाती है। खून कम होने पर मरीजों के साथ वाली से खून लिया जाता है, वह मरीज को लगाते भी नहीं हैं और खून खराब हो जाता है।

नहीं सुनते सीएमओ- इस सम्बन्ध में मुख्य चिकित्साधिकारी को अवगत कराया गया परन्तु इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। आशा व आशा संगिनियों पर नसबन्दी का दवाब डाला जाता है। जब कोई नसबन्दी नहीं कराता है या कोई नसबन्दी फेल हो जाने पर आशा बहु व संगिनियों को हटाने की धमकी दी जाती है। आशाओं व संगिनियों ने जिलाधिकारी से जिला अस्पताल का सुधार करने, आशा व आशा संगिनी को समय पर भुगतान देने, आशा का पैसा अलग-अलग न देकर एक साथ दिए जाने, हर पीएचसी पर मांगे जाने वाले कमीशन को रोके जाने की मांग की। प्रदर्शन में जिला अध्यक्ष रेखा पाल, रीना रानी, रीना, यशोदा, गिरजा देवी, महामंत्री शशीबाला, रेखा रानी, पूर्णिमा सहित सैकड़ों आशा व संगिनी मौजूद रहीं।

प्रशासनिक मशीनरी के दांवपेंच में फंसा कर्मचारी

बिजनौर। जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय मुरादाबाद में तैनात एक वरिष्ठ कर्मचारी प्रशासनिक मशीनरी के दांवपेंच के बीच फंस कर रह गया है। पैरालिसिस से पीडित उक्त कर्मचारी को प्रशासनिक आधार पर बिजनौर कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया था। तमाम सरकारी शासनादेशों का हवाला देते हुए कर्मचारी भी अपने स्थानांतरण को रद्द करवाने की कवायद करते हुए थक गया, लेकिन बिजनौर के जिला उद्यान अधिकारी ने रिलीव नहीं किया। लगातार उत्पीड़न से तंग कर्मचारी को समझ में नहीं आ रहा कि आखिर किस दर पर लगाए गुहार!

जानकारी के अनुसार जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय मुरादाबाद में तैनात उर्दू अनुवादक सह वरिष्ठ लिपिक वसीम अहमद के विरूद्ध कौसर अली पुत्र कल्लन, मौ० आरिफ पुत्र मकसूद हुसैन व अजीमुश्शान पुत्र जिलेहसन निवासीगण जनपद मुरादाबाद द्वारा मुखामंत्री सहित अन्य उच्चाधिकारियों से शिकायत की गई थी। इस पर वसीम अहमद से दिनांक 4-4-2022 को द्वारा जिला उद्यान अधिकारी, मुरादाबाद के माध्यम से स्पष्टीकरण मांगा गया था। मुरादाबाद मंडल के उप निदेशक उद्यान एसके गुप्ता द्वारा 30 जून 2022 को कहा गया कि संबंधित से मांगे गए स्पष्टीकरण का कोई संतोषजनक उत्तर प्राप्त न होने पर एवं उच्चाधिकारियों द्वारा वसीम अहमद की कार्यशैली शासकीय नियमावली के प्राविधानों के अनुकूल न रहने पर अन्यत्र स्थानान्तरण किये जाने के दिये गये निर्देशों के क्रम में वसीम अहमद का स्थानान्तरण प्रशासनिक आधार पर जिला उद्यान अधिकारी बिजनौर कार्यालय के लिए कर दिया गया। पत्र में कहा गया कि श्री अहमद का वेतन अग्रिम आदेशों तक यथावत जिला उद्यान अधिकारी मुरादाबाद द्वारा वेतन मांग पत्र के आधार पर आहरित किया जायेगा। जिला उद्यान अधिकारी, मुरादाबाद वसीम अहमद को नवीन तैनाती स्थान पर योगदान करने हेतु तत्काल कार्यमुक्त करें। बताया गया है कि उप निदेशक उद्यान मुरादाबाद द्वारा हरजीत नाम के अपने खास सिपहसालार की बातों में आकर अधीनस्थ कर्मचारियों के स्पष्टीकरण की सत्यता को दरकिनार कर उनकी सत्यनिष्ठा एवं कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाकर उत्पीड़ित किया जाता है।

उधर संबंधित उर्दू अनुवादक वसीम अहमद ने 04 जुलाई 2022 को मुरादाबाद के आयुक्त व जिलाधकारी को पूर्व के शासनादेशों का हवाला देते हुए एक पत्र लिखा। इसमें आरोप लगाया कि निदेशक उद्यान मुरादाबाद मण्डल, मुरादाबाद द्वारा उनका स्थानान्तरण जनपद बिजनौर को दिनांक 30 जून 2022 द्वारा किया गया है, जो कि देश के तथा मेरे हित में है। वर्तमान में वह पैरालिसिस से पीडित हैं। उनका इलाज मुरादाबाद में ही राजकीय चिकित्सक डॉ योगेश कुमार से काफी समय से चल रहा है। मुझे चलने-फिरने में कठिनाई  होती है तथा वर्तमान में मेरा दाँया हाथ भी सही से चल नहीं पा रहा है। वह इस उत्पीड़न से काफी समय से ग्रस्त चल रहै हैं। वसीम अहमद ने अधिकारी द्वय से उनकी परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए स्थानान्तरण निरस्त करने की गुहार लगाई। इस पर 04 जुलाई 2022 को अपर आयुक्त (प्रशासन) मुरादाबाद मंडल ने जिलाधकारी को नियमानुसार कार्यवाही करने की लिखा। वहीं अपर जिलाधकारी (प्रशासन) ने 06 जुलाई 2022 को संज्ञान में लिया। 

क्या है शासनादेश!- निदेशालय उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण उत्तर प्रदेश, उद्यान भवन लखनऊ द्वारा दिनांक 13 मई 2022 को उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग, उ०प्र० के अन्तर्गत निदेशालय एवं फील्ड में से सम्बद्ध अन्यत्र सम्बद्ध अधिकारी / कर्मचारी की सम्बद्धता को निरस्त करते हुए उन्हें उनकी मूल तेनाली स्थान पर कार्य किये जाने हेतु आदेशित किया गया है। इस पर 23 मई 2022 को निदेशक आरके तोमर ने आदेश पारित कर निदेशालय तथा मण्डल स्तर से लिपिक संवर्ग में पूर्व में अन्यत्र कार्यालय / जनपद में सम्बद्ध किये गये समस्त कर्मचारियों की सम्बद्धता तत्काल प्रभाव से निरस्त करते हुए उन्हें उनकी मूल मैनाली स्थान पर कार्य किये जाने हेतु आदेशित किया। साथ ही कहा कि उपरोक्त आदेशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करते हुए कृत कार्यवाही की आख्या यथाशीघ्र निदेशालय को उपलब्ध कराई जाए।

विभागीय वेबसाइट पर पड़े हैं रॉन्ग नंबर? इस संबंध में उपनिदेशक एस के गुप्ता से संपर्क करने का प्रयास किया गया,किंतु विभागीय वेबसाइट पर उपलब्ध उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क किया गया तो दोनों नंबर किसी महिला द्वारा उठाकर रॉन्ग नंबर कहा गया कहा गया। इसके बाद उद्यान अधिकारी बिजनौर जितेंद्र कुमार द्वारा जो नंबर उपलब्ध कराया गया, उस पर बात करने की कोशिश की गई वह मोबाइल नंबर भी किसी महिला द्वारा ही उठाया गया तथा रॉन्ग नंबर बता दिया गया। 

बिजनौर डीएचओ ने दरकिनार कर दिया शासनादेश? आरोप है कि जिला उद्यान अधिकारी बिजनौर ने मुरादाबाद के संबद्ध कर्मचारी को रिलीव नहीं किया। दूसरी ओर तैनाती के समय से खाली बैठे कर्मचारियों को जुम्मा जुम्मा एक हफ्ता पहले उनके कार्य का बंटवारा कर दिया। विभाग में नियुक्त कर्मचारियों का काम अभी तक संविदा पर तैनात कर्मचारी से लिये जाने की सुगबुगाहट है। वहीं जिला उद्यान अधिकारी जितेंद्र कुमार का कहना है कि वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश का पालन किया गया है। कर्मचारी को पनिशमेंट के रूप में बिजनौर भेजा गया है। 

कोतवाल से मिलकर पत्रकार को फंसाने की रची जा रही साजिश?

वादी पर फैसले का दबाव बनाने और जेल जाने से बचने के लिए आरोपी दे रहे साजिश को अंजाम। रुपयों के अदाईगी की वीडियो का सहारा लेना पड़ेगा भारी। आरोपियों को न्यायालय से जमानत कराने के लिए 14 सितंबर को होना होगा हाजिर।

बिजनौर। बेकरी का बडा झांसा देकर लाखों रुपए की ठगी व हड़पने के मामले में न्यायालय नगीना में हुई आरोपियों के खिलाफ दाखिल चार्जशीट के बाद, अब आरोपीगण कोतवाल से मिलकर पीड़ित/वादी मुकदमा के खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कराने की चर्चा आम हो गयी है। कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में कस्बा कोटरा निवासी खुर्शीद, फखरे, साजिद, वाजिद,व इरफान पर लाखों रुपए के गबन, मारपीट व साजिश रचना आदि कई संगीन धाराए हैं, जबकि इनके एक भाई नजमुल ने चैक बाउंस के मामले में  27 जुलाई को अपनी जमानत कराई है।

बताया गया है कि क्षेत्र के कस्बा कोटरा निवासी नजमुल आलम व उसकी पत्नी अकलिमा ने वर्ष 2018 में पुणे में एक बड़ी बेकरी का झांसा देकर नगीना निवासी पत्रकार नौशाद अंसारी से 35 लाख रु ले लिए और विश्वास दिलाने के लिए नोटरी एग्रीमेंट भी हुए थे। पीडित ने लोन के रुपयों में से इन्हें भुगतान किया था। नजमुल के अन्य भाइयों खुर्शीद, फखरे, साजिद व वाजिद ने अपने भाई नजमुल व भाभी अकलिमा पर बकाया रकम को वापस करते हुए नगीना के नई बस्ती फुलवाड में स्थित एक मदरसे में दिनांक 26-09-2019 को 30 लाख रु की रकम लौटा दी। इस रकम के लौटाते समय सबूत के तौर पर दोनों पक्षों की सहमति से एक वीडियो भी बनी, जिसमें खुर्शीद अपने भाई नजमुल का पैसा नौशाद को लौटाते दिख रहे हैं। इतना ही नहीं रकम अदाईगी की तहरीर भी हुई थी। उधर नजमुल के भाईयों खुर्शीद, फकरे, साजिद व वाजिद ने फिर नौशाद को अपने झांसे में लेकर मजबूरी बताते हुए 35 लाख रु ले लिये और एक लिखित तहरीर नोटेरी के द्वारा भी हो गयी। खुर्शीद, फकरे, साजिद व वाजिद ने जब पैसा समय पर अदा नहीं किया तो पीड़ित नौशाद ने तत्कालीन पुलिस अधीक्षक के आदेश पर नगीना थाने में 21 अगस्त 021 को मु.अ.स. 309/021 धारा 120 बी 406, 392, 504, 506 के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया था। क्राइम ब्रांच ने दर्ज कराए गए मुकदमे में खुर्शीद, फखरे, साजिद, वाजिद निवासी कस्बा कोटरा व इरफान पुत्र बाबू अंसारी निवासी ग्राम बैरमनगर नहटौर के खिलाफ जुर्म अंतर्गत धारा 406, 504, 323, 506, 120बी के आरोप पत्र संख्या 140/022 दाखिल न्यायालय कर दिया। न्यायालय ने सभी आरोपियों खुर्शीद, फकरे पुत्र इकबाल, साजिद, वाजिज पुत्र रफीक कस्बा कोटरा व इरफान पुत्र बाबू अंसारी बैरमनगर नहटौर को संज्ञान लेते हुए 29 अगस्त कि तारीख निर्धारित की और समन जारी कर दिए। नगीना पुलिस को समन मिलने के बाद भी सम्मनों की तामिल नहीं हुई। वर्तमान में 14 सितंबर की तारीख न्यायालय में लगी है। अब सभी आरोपियों ने जेल जाने के डर से वादी मुकदमा नौशाद अंसारी पर कोतवाल से मिलकर झूठा मुकदमा दर्ज कराने की साजिश रची। इसके क्रम में आरोपियों ने अपने ही गांव के एक चहेते व्यक्ति वसीम को लालच देकर कोतवाल पर कोई बात न आए, झूठी कहानी रचकर न्यायालय में 156(3) में लाखों रुपए हडपने और घर पर जाकर रंगदारी मांगने का प्रार्थना पत्र दिलवा दिया। न्यायालय ने 31 अगस्त को मुकदमा दर्ज कर निष्पक्ष जांच करने के निर्देश दिए। उधर मुकदमा दर्ज होने से पहले वादी वसीम ने राज खोलते हुए पूरी साजिश बता दी और 03 सितंबर को वादी वसीम ने शपथ पत्र देकर नोटेरी करा दिया कि, मेरे साथ कोई घटना नहीं हुई। चश्मदीद गवाह अनवर सलीम ने तो यहां तक शपथ पत्र में लिखकर दे दिया कि, वसीम ने जो यह मुकदमा लिखवाया है, वह झूठा और फर्जी है। मेरे सामने इस तरह की कोई घटना नहीं घटित हुई और मेरा नाम चश्मदीद गवाह के रुप मे वसीम ने झूठा लिखवा दिया है। गव़ाह वसीम का अनवर सलीम सगा चचेरा भाई है। न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने 05 सितंबर को मु.अ.स. 292/022 दर्ज किया। वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी में पूरा मामला आने के बाद उन्होंने वसीम के मुकदमा को नगीना से हटाकर क्राइम ब्रांच को निष्पक्ष जांच के निर्देश दे दिए। दोनो पत्रकार भाईयों नौशाद व शहजाद को जेल भेजने की साजिश को नाकाम होता देख कोतवाल प्रिंस शर्मा ने अब उन आरोपियों खुर्शीद, नजमुल, फकरे आदि पर अपना आशीर्वाद का हाथ रंख दिया, जिसमें इन सभी आरोपियों को 14 सितंबर तक न्यायालय में हाजिर होकर अपनी जमानत करानी है।

क्या है वीडियो प्रकरण का सच, रुपयों के अदाईगी की वीडियो पर उछल रहे हैं शातिर ठग…

आरोपी खुर्शीद, नजमुल, फखरे आदि उस वीडियो के आधार पर कोतवाल प्रिंस शर्मा के सहयोग से एक झूठा मुकदमा लिखाने की कोशिश कर रहे हैं। इसमें नजमुल पर बकाया रुपए दिनांक 26 सितंबर 2019 में बनी सहमति के साथ वीडियो में यह खुद आरोपी 30 लाख रुपये बकाया नजमुल के देते नौशाद को दिख रहे हैं और उसी रकम की अदाएगी की एक तहरीर भी कराए हुए हैं जो नोटेरी एडवोकेट से प्रमाणित है। उधर न्यायालय में दाखिल चार्जशीट मु 309/ 021 में क्राइम ब्रांच ने कहा है कि नजमुल के भाइयों ने नजमुल पर बकाया वर्ष 2018 की तीस लाख रूपए की रकम वादी नौशाद को दिनांक 26-9-2019 को अदा की है। वर्ष 2019 में बनी पेसों के लेन देन की वीडियो के सहारे अब शातिर आरोपी खुर्शीद, फकरे, नजमुल आदि कोतवाल के सहयोग से दोनों पत्रकार भाईयों नौशाद व शहजाद पर झूठा केस बनाने की एक और कोशिश में लगे हुए हैं!

असली पुलिस के हत्थे चढ़ा फर्जी दरोगा

बिजनौर। पुलिस ने एक फर्जी दरोगा को पुलिस की वर्दी पहने गिरफ्तार किया है। फर्जी दरोगा पुलिस में लोगों की भर्ती कराने के नाम पर पैसा लेता था। बिजनौर कोतवाली शहर पुलिस ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। अपर पुलिस अधीक्षक (नगर) डॉ प्रवीण रंजन सिंह ने बताया कि उक्त फर्जी दरोगा लोगों को जॉइनिंग लेटर देने आया हुआ था। कुछ लोगों से एक लाख रुपए ले चुका था और बाकी रकम आज लेने आया था। इसी दौरान पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। फर्जी दरोगा बिजनौर के थाना हल्दौर अंतर्गत कुम्हारपुरा का रहने वाला सेल्फी कुमार है। उसे गिरफ्तार करने के बाद अग्रिम कार्रवाई की जा रही है।

डॉक्टर प्रवीन रंजन सिंह अपर पुलिस अधीक्षक नगर बिजनौर

पत्रकार का खास डीलर नहीं बांटता राशन

बिजनौर। अंधा बांटे रेवड़ी, चीन्ह चीन्ह के दे। ये कहावत चरितार्थ कर रहा है कोतवाली देहात अंतर्गत सिखेड़ा बरुकी का राशन डीलर दयाराम। काम बिल्कुल नाम के विपरीत। दया नाम की कोई चीज नहीं, और राम का नाम लेना नहीं। सुबह से राशन लेने को लाइन में लगे उपभोक्ताओं को भरी दोपहरी ने चलता कर देता है। कहता है कि मशीन अंगूठा नहीं पकड़ रही। जिला पूर्ति अधिकारी से शिकायत करने की बात कहो तो सीना ठोंक कर कहता है कि महीना देता हूं, लखनऊ तक कर लो शिकायत।

कोतवाली देहात अंतर्गत सिखेड़ा बरुकी का राशन डीलर राशन बांटने में मनमर्जी कर रहा है। वह एक पत्रकार को अपना खास बताता है। पत्रकार भी वो जिसने अपनी पत्नी को राशन कोटा दिला रखा है। एक बार जिला पूर्ति अधिकारी की जांच में फंसा तो नदी में डूबकर आत्महत्या करने की बात करने लगा। तब जनपद स्तर के कुछ वरिष्ठ पत्रकारों के सहयोग से उसकी गर्दन बच सकी थी।

हर यूनिट पर कटौती- आरोप है कि दयाराम हर यूनिट पर सभी का एक किलो राशन काटता है। अंगूठा लगा कर भी राशन नहीं देता। कई उपभोक्ताओं ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि तीन से चार महीने हो गए, वह मशीन पर अंगूठा तो लगवा लेता है, लेकिन राधन नहीं देता। फिलहाल अंगूठा नहीं लगने की बात कहकर राशन नहीं बांट रहा। कई उपभोक्ताओं ने उच्चाधिकारियों से शिकायत करने की बात कही तो वह उक्त पत्रकार को अपना खास बताते हुए उल्टा चढ़ बैठा। साथ ही सीना ठोंक कर यह भी कहा कि डीएसओ को पैसा देता हूं, लखनऊ तक कर लो शिकायत, कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

कभी था एक-एक रुपए के लिए मोहताज- एक समय ऐसा भी था जब राशन डीलर दयाराम एक-एक रुपए के लिए मोहताज था। …लेकिन जुगाड़ बिठाकर राशन डीलर बनने के बाद उसकी संपत्ति में यकायक इजाफा हो गया। ग्रामीण बताते हैं कि हाल ही में शादी की सालगिरह पर उसने अपनी पत्नी को सोने के दो हार बतौर गिफ्ट दिये।

बिरादरी का देता है खौफ- राशन डीलर अपनी बिरादरी को लेकर भी लोगों को धमकाने से गुरेज नहीं करता। लोगों को दलित उत्पीड़न के फर्जी मामलों में फंसने की धमकी देता है। इस कारण लोग डर की वजह से सामने आने से डरते हैं।

बोले दयाराम- राशन डीलर दयाराम से उनके मोबाइल नंबर 09837869489 पर जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि मशीन अंगूठा नहीं पकड़ रही। जिला पूर्ति अधिकारी कार्यालय को अवगत कराया था। उन्होंने लखनऊ से समस्या होने की जानकारी दी है। वह सभी को पूरा राशन दे रहे हैं, कटौती की बात गलत है। हालांकि वह मिलकर बात करने को भी कहता है। अब ये तो सभी जानते हैं कि मिल कर क्या बात होती होगी?

मनरेगा में भ्रष्टाचार की इंतेहा! होमगार्ड के नाम पर निकाला पैसा

उरई/जालौन। वैसे तो मोदी योगी सरकार भ्रष्टाचार मुक्त शासन की बात करती हैं लेकिन उन्हीं के मातहत सरकारी नुमाईंदे कागजों में काम कर करोड़ों रुपए के फर्जीवाड़े करने में मशगूल हैं। मनरेगा में तो इतना बड़ा घोटाला है कि सीबीआई और ईडी की ही जरूरत पड़ेगी, लेकिन इन शिकायतों पर किसी को कोई दिलचस्पी नहीं है। 

माधौगढ़ विकास खंड में मनरेगा के तहत करोड़ों रुपए के काम कागजों में दिखा कर निकाल लिये गए तो कहीं फ़र्ज़ी जॉबकार्ड भरकर वारे-न्यारे किये जा रहे हैं। आम जनता की शिकायतों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया जाता है, या शिकायतकर्ता को इतना परेशान कर दिया जाता है कि वह थक हार कर शांत बैठ जाता है। मिर्जापुर गांव में ग्राम प्रधान मुनीम कुशवाहा द्वारा मनरेगा के आधे से ज़्यादा काम ट्रैक्टरों से करा कर 14 दिनों की मजदूरी होमगार्ड गंभीर जॉबकार्ड संख्या-2 और पीआरडी जवान दिनेश जॉब कार्ड संख्या-3 के जॉबकार्ड में दिखाकर भर दी। जब इसकी शिकायत पंचायत के वार्ड सदस्य अंकित सिंह ने की तो उसके ख़िलाफ़ फर्जी शिकायतें दर्ज कराई जाने लगी। ऐसे ही ग्राम असहना में सुदामा के खेत से मचकचा तक चकबन्ध निर्माण के नाम पर 9 लाख का भुगतान निकाल लिया गया। इस चकबन्ध में एक फावड़ा तक मजदूर ने नहीं डाला और भुगतान भी गांव से 16 किमी दूर अकबरपुरा के मजदूरों के नाम हो गया। पूरे फर्जीबाड़े में न वर्क इंचार्ज को अपनी नौकरी की चिंता न भुगतान प्रक्रिया में शामिल एपीओ, जेई या प्रमुख जिम्मेदार खंड विकास अधिकारी को। ऐसे में योगी सरकार इनके घर कब जमींदोज करेगी? इस बात का इंतजार आम जनता कर रही है। (साभार-जालौन टाइम्स)

श्रम विभाग में नियुक्ति घोटाले के सूत्रधार सपा विधायक?

माननीय के दबाव में हुआ श्रम विभाग का नियुक्ति घोटाला! श्रमिक मृत्यु अंत्येष्टि व विकलांग सहायता योजना में हुआ था घोटाला। बाद में आउटसोर्सिंग पर नियुक्त 12 लड़कों को धमका कर लिया इस्तीफा। उनकी जगह की गईं नियम विरुद्ध नई नियुक्तियां। एक माननीय के दबाव में रचा गया पूरा खेल!

बिजनौर। श्रम विभाग बिजनौर में एक और घोटाला हो गया। श्रमिक मृत्यु अंत्येष्टि व विकलांग सहायता योजना में हुए घोटाले के बाद इसी अगली कड़ी में विभाग द्वारा आउटसोर्सिंग पर की गई नियुक्ति में खेल किये जाने के संकेत मिले हैं। इस मामले का मुख्य सूत्रधार वर्तमान सपा विधायक एवं एक बोर्ड के तत्कालीन सदस्य को बताया जा रहा है!

धमका कर ले लिया 13 कर्मचारियों का इस्तीफा-
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस विभाग में 2015-16 में आउटसोर्सिंग से कुल 13 नियुक्ति की गई थी,  जिसमें से अत्यधिक दबाव व किसी भी मामले में फंसाने की धमकी मिलने के बाद 12 ने 7-1-19 में इस्तीफा दे दिया था। यहाँ गौर करने वाली बात है कि आज की बेरोजगारी में युवा संविदा में जहाँ भर्ती के लिए लाइन में लग जाते हैं ऐसे में श्रम विभाग में चार वर्ष तक आजीविका पर जमे 12 लड़कों को स्वयं इस्तीफा देकर नौकरी छोड़नी पड़ी।

हैरत में डालने वाली कहानी- इस्तीफा दिये जाने की कहानी भी हैरत में डालने वाली है, इस विभाग में पूर्व में कार्यरत रह चुके तथा वर्तमान में सपा के टिकट से विधायक बने एक माननीय को बताया जा रहा है। इस्तीफा दे चुके युवाओं ने बताया कि उस समय श्रम मन्त्री के काफी नजदीक रहे रामौतार सैनी उ० प्र० भवन एवं सह निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के सदस्य पद पर नियुक्त थे। पहले इस विभाग में कार्यरत रहने के कारण यहाँ की उपयोगिता को जानते भी थे। इसलिए रामौतार सैनी ने इन लड़कों पर झूठी शिकायतें करवा कर उच्च स्तर पर दबाव बनाते हुए इस्तीफा देने को मजबूर किया ताकि इनकी इच्छा अनुसार इनके रिश्तेदार व निकटतम को विभाग में रक्खा जा सके। चूंकि रामौतार सैनी प्रदेश में विभाग के प्रतिष्ठित व प्रभावी पद पर आसीन थे, इन युवाओं पर दबाव बनाने में सफल रहे। नाम न बताने की शर्त पर कुछ युवाओं ने दावा किया कि अगर हम इस्तीफा नहीं देते तो हमें किसी भी झूठे मामलों में फंसाया जा सकता था।

तुरंत ही नौकरी पर रख लिये विधायक के रिश्तेदार- गौरतलब है कि इन बारह युवाओं के इस्तीफा देने के बाद ही रामौतार सैनी के भांजे राजवीर सैनी को रख लिया गया। इनके अलावा मेघनाथ सैनी, हिमांशु सैनी, रामौतार सैनी के ड्राइवर के भाई अंकुल व राहुल भारती भी नौकरी हासिल करने वालों में शामिल हैं। इन सभी को जनवरी में पुराने लड़कों के इस्तीफा देने के बाद इसी महीने में रख लिया गया।

मिला था प्रशस्ति पत्र- गौरतलब है कि जिन बारह लड़कों को हटाया गया, उन पर चार वर्षों में कभी कोई आरोप नहीं लगा, न किसी घपले में शामिल रहे। इस बात की पुष्टि में निवर्तमान सहायक श्रम आयुक्त सरजीत सिंह द्वारा इन सभी को सन्तोषजनक कार्य व ईमानदारी से करने के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाना है। इन सभी लड़कों को निवर्तमान सहायक श्रम आयुक्त घनश्याम सिंह के समय हटाया गया था, जो वर्तमान में मेरठ में हैं तथा बातचीत में यह स्वीकार करते हैं कि रामौतार सैनी के दबाव के चलते इन लड़कों को हटाने के लिए इस्तीफे लिए गए थे। घनश्याम सिंह का कहना है कि रामौतार सैनी के दबाव में ही तीन लड़कों सिद्दार्थ चौहान, हेमंत व अभिषेक वालिया के विरुद्ध योजनाओं में अनियमितता बरतने के बारे में शिकायत उच्च स्तर पर की गई थी, जबकि सिद्दार्थ चौहान जो कि अनुसेवक के पद पर कार्यरत् था, उसका किसी योजना से दूर तक कोई लेना देना नहीं था। इन बारह लड़कों  के इस्तीफा देने के बाद एक हफ्ते में ही पहले से तय लड़कों को रख लिया गया। इसके लिए विभाग ने नियुक्ति के लिए किसी समाचारपत्र में न कोई विज्ञप्ति जारी की, न ही कोई नोटिस कार्यालय पर चस्पा किया। रखे गए लड़कों के टाइपिंग टैस्ट तक लिया जाना जरुरी नहीं समझा गया। इस मामले में सपा विधायक का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

विवादित जमीन के असली मालिक को लेकर संशय, हंगामा

झंडापुर में है करोड़ों की भूमि। भूमि पर चारदीवारी की नींव रखने को लेकर ग्रामीणों का हंगामा। जमीन के असली मालिक को लेकर अभी भी संशय।

बिजनौर। गंज मार्ग स्थित झंडापुर में खाली पड़ी चूना भट्टी की जमीन पर चारदीवारी निर्माण के लिए नींव भराव का मामला गरमा गया है। यहां के रास्ते निकलने वाले कई गांवों के ग्रामीणों ने हंगामा करते हुए थाना कोतवाली शहर में शिकायत दर्ज कराई। फिलहाल तहसीलदार ने मौके पर काम रुकवा दिया है। ग्रामीण उक्त जमीन के बैनामे को विवादित बता रहे हैं।

जानकारी के अनुसार गंज मार्ग स्थित झंडापुर में खाली पड़ी चूना भट्टी की जमीन की कीमत करोड़ों रुपए में बताई जाती है। एक दिन पूर्व उक्त स्थान पर भराव और नींव निर्माण का कार्य तालिब ठेकेदार ने शुरू करा दिया। भनक लगते ही ग्राम पूरनपुर, जलालपुर व तीबड़ी के ग्रामीणों ने हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने थाना कोतवाली शहर पहुंच कर निर्माण कार्य रुकवाने की मांग की। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उक्त स्थान से होकर उनके गांवों का रास्ता जाता है, जिसे पटवारी अजब सिंह और ठेकेदार तालिब बंद कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि तत्कालीन पटवारी अजब सिंह ने ग्राम प्रधान से सांठगांठ कर उक्त भूमि की श्रेणी बदलवाई और दलित के नाम बैनामा करा दिया था। बाद में पटवारी ने करोड़ों रुपए कीमत की उक्त भूमि का बैनामा अपने नाम करा लिया। अब करीब डेड़ करोड़ रुपए में तालिब ने कुछ हिस्सा खरीद लिया है? इस बीच बताया गया है कि मामले की जानकारी प्राप्त होते ही तहसीलदार ने मौके पर काम रुकवा दिया है।

ठेकेदार ने बैनामे की बात गलत ठहराई- तालिब ठेकेदार का कहना है कि उनके द्वारा उक्त जमीन का बैनामा कराने की बात सही नहीं है। तत्कालीन पटवारी अजब सिंह के कहने पर उन से मित्रता के नाते वहां नींव का भराव करा रहे थे। वर्ष 1952 से सरकारी पट्टा चला आ रहा था। वर्ष 2003 में पट्टेदार से अजब सिंह ने अपने नाम बैनामा करा लिया था, इस बात को भी करीब 20 साल हो गए हैं। आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने खाली पड़ी भूमि को रास्ते के तौर पर इस्तेमाल करना शुरू कर दिया, जबकि सरकारी रास्ता अलग है। उक्त भूमि को रास्ते के तौर पर प्रयोग न करने के आदेश कोर्ट ने दिये हुए हैं। पुलिस प्रशासन को भी कोर्ट के आदेश की प्रति दिखा दी गई है।

पटवारी की पत्नी के नाम है जमीन वहीं तत्कालीन पटवारी अजब सिंह ने बताया कि उक्त भूमि का बैनामा वर्ष 2003 में उनकी पत्नी चंचल सैनी के नाम हुआ था। पूर्व में उक्त जमीन ओबीसी श्रेणी के ख्वानी ढीमर पुत्र हरदेवा के नाम थी। उसके एक पुत्र सोनू उर्फ सुन्दू व एक पुत्री थे। पुत्री की शादी बढ़ापुर थानांतर्गत ग्राम सरदारपुर छायली में हुई थी। सुन्दु बहरा और अविवाहित था व अपनी बहन के घर ही रहता था। ख्वानी की मौत के बाद भूमि उसकी पुत्री के नाम आ गई। इस बीच उसकी मौत हो गई और इस कारण जमीन उसके चार पुत्रों कुड़वा, मूलचंद, महेश आदि के नाम हो गई। वर्ष 2003 में सुन्दु का बहनोई हरिराम सिंह उनसे मिला और जमीन बेचने की बात कही। उसने बताया कि दवाई लेने तक के पैसे नहीं हैं। इस पर उन्होंने डेढ़ लाख रुपए अपनी पत्नी चंचल से दिला कर बैनामा करा लिया।

सरकारी रास्ता है दाहिनी तरफ- जमीन खाली पड़ी देख कर ग्रामीणों ने रास्ते के तौर पर उपयोग शुरू कर दिया, जबकि दाहिनी ओर पक्की सरकारी चक रोड है। गन्ना विकास परिषद ने उक्त जमीन पर पत्थर डाले तो वो कोर्ट पहुंच गए। परिषद की ओर से कोई नहीं आया। कोर्ट ने आदेश कर दिया कि बिना उक्त भूमि को खरीदे वहां कुछ कार्य नहीं करा सकते। जमीन उनकी पत्नी के ही नाम है किसी को बेची नहीं है। ठेकेदार तालिब को मित्रता के नाते उन्होंने बाउंड्री बनाने के लिए कहा था।

नकली खाद, कीटनाशक फैक्ट्री पकड़ी, भारी मात्रा में माल बरामद

नकली खाद, कीटनाशक फैक्ट्री पकड़ी, भारी मात्रा में बना अधबना माल बरामद। मलिक समेत 3 गिरफ्तार। मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू। भारतीय किसान यूनियन का हंगामा।

बिजनौर। एसडीएम धामपुर व कृषि विभाग के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से नहटौर कस्बे के रहमत नगर में हाथी वाला मंदिर के पास अवैध/अनाधिकृत फैक्ट्री/गोदाम पर संयुक्त रूप से छापा डाला। इस दौरान भारी मात्रा में नकली/मिलावटी उर्वरक व कीटनाशक रसायन बरामद हुए हैं। दो लोगों को गिरफ्तार करने के साथ ही उक्त स्थान को सील कर संबंधित मालिक के भाई की सुपुर्दगी में दे दिया गया है। गोदाम में पाए गए उर्वरकों एवं कीटनाशक रसायनों के गुणवत्ता परीक्षण हेतु नियमानुसार नमूने ग्रहित किए गए हैं। थाना नहटौर में मुकदमा दर्ज कराया गया है।

गोपनीय सूचना पर हुई छापामार कार्रवाई- उप जिलाधिकारी धामपुर मनोज कुमार सिंह ने गोपनीय सूचना के आधार पर जिला कृषि अधिकारी, डॉ अवधेश मिश्र, जिला कृषि रक्षा अधिकारी मनोज रावत एवं कृषि विभाग के कार्मिकों, सहायक विकास अधिकारी कृषि रक्षा सत्य प्रकाश, प्रभारी राजकीय कृषि बीज भंडार सुभाष सिंह, कनिष्ठ सहायक रजत चौधरी एवं रचित सिंह, वाहन चालक भोपाल सिंह तथा पुलिस फोर्स के साथ नहतौर कस्बे के रहमत नगर में हाथी वाला मंदिर के पास अवैध/अनाधिकृत फैक्ट्री/गोदाम पर संयुक्त रूप से छापा डाला। छापे के दौरान गोदाम में दो श्रमिक फेरस सल्फेट की पैकिंग करते हुए पाए गए। गोदाम के निरीक्षण के समय गोदाम में एनपीके, एसएसपी, जिंक सल्फेट मोनोहाइड्रेट, सूक्ष्म पोषक तत्व मिश्रित उर्वरक, फेरस सल्फेट, म्यूरेट आफ पोटाश के 269 भरे हुए कट्टे, कारटॉप हाइड्रोक्लोराइड एवं फटेरा के 23 भरे हुए कट्टों के साथ-साथ नकली/मिलावटी उर्वरक तैयार करने हेतु कच्चे माल के रूप में जिप्सम, बायो ग्रेन्यूल्स, सागरिका, रेता, नमक, जिप्सम की काली व भूरी गोलियां के 1195 भरे हुए कट्टे, उर्वरक और कीटनाशक दवाइयों के प्रतिष्ठित विनिर्माता कंपनियों के 3995 खाली बैग्स, प्लास्टिक की 2500 बोतलें, कीटनाशक रसायनों के पैकिंग हेतु 500 गत्ते, वजन तोलने की इलेक्ट्रॉनिक मशीन, सिलाई मशीन, जनरेटर, धागे आदि पाए गए। गोदाम में पाए गए उर्वरकों एवं कीटनाशक रसायनों के गुणवत्ता परीक्षण हेतु नियमानुसार नमूने ग्रहित किए गए। छापे के दौरान गोदाम में उपस्थित दो श्रमिकों से पूछताछ करने पर अवगत कराया गया कि इस गोदाम के मालिक अनुराग जैन पुत्र अरुण कुमार जैन निवासी मोहल्ला गुली तालाब,नहटौर हैं और उन्हीं के द्वारा यह कार्य लंबे समय से किया जा रहा है। साथ ही गोदाम के निरीक्षण के समय उर्वरक व कीटनाशक रसायनों के विनिर्माण एवं भंडारण तथा व्यवसाय से संबंधित वैध लाइसेंस अथवा आवश्यक अभिलेख दिखाया अथवा प्रस्तुत नहीं किया जा सका।

नामी गिरामी कंपनियों का पैकिंग मैटीरियल बरामद- जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि निरीक्षण के दौरान गोदाम में पाए गए विभिन्न प्रकार के उर्वरक व कीटनाशक रसायनों तथा कच्चे माल व खाली बैग एवं पैकिंग हेतु आवश्यक सामग्रियों से स्पष्ट होता है कि इस अवैध/ अनाधिकृत रूप से संचालित गोदाम/फैक्टरी में नकली/मिलावटी उर्वरक व कीटनाशक रसायनों की पैकिंग की जाती है। छापे के दौरान फैक्ट्री में फेरस सल्फेट की पैकिंग करते हुए पकड़ा गया है। इस प्रकार उर्वरक नियंत्रण आदेश, कीटनाशक अधिनियम व कीटनाशक नियमावली की सुसंगत धाराओं के उल्लंघन करने एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के अंतर्गत दंडनीय अपराध किए जाने तथा विभिन्न प्रतिष्ठित निर्माता कंपनियों के कूट रचित बैग तैयार करने पर अवैध/अनाधिकृत गोदाम/फैक्ट्री के मालिक अनुराग जैन पुत्र अरुण कुमार जैन तथा गोदाम में पकड़े गए श्रमिकों क़ालीम पुत्र मुन्ने शाह एवं सरफराज पुत्र कॉलिंम के विरुद्ध थाना नहटौर में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। पकड़ी गई अवैध/अनाधिकृत गोदाम/ फैक्ट्री तथा अनुराग जैन द्वारा संचालित उर्वरक व कीटनाशक रसायन की दुकान को भी सील कर सील्ड गोदाम एवं प्रतिष्ठान को अनुराग जैन के सगे छोटे भाई अंकुर जैन की सुपुर्दगी एवं अभिरक्षा में दिया गया है। वहीं जिला कृषि अधिकारी अवधेश मिश्र ने बताया कि नकली खाद फैक्ट्री के संचालक अनुराग जैन सहित तीन लोगों को मौके से पकड़ा है। मौके से बरामद हुए सामान की सूची बनाकर पुलिस को तहरीर गई है। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही शुरू कर दी है। छापेमारी के दौरान कोतवाल राधेश्याम, शहर इंचार्ज बब्लू सिंह सहित बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स मौजूद रही।

भाकियू ने किया हंगामा- उधर नकली खाद की फैक्ट्री पकड़े जाने की भनक लगने पर भारतीय किसान यूनियन के ब्लॉक अध्यक्ष संजीव कुमार, विक्रम सिंह, कुलदीप राठी, युवा ब्लॉक अध्यक्ष रोहित राणा सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी मौके पर पहुँच गये तथा कुछ अधिकारियों की मिलिभगत से अवैध फैक्ट्री संचालित होने का आरोप लगाते जमकर नारेबाजी की। उन्होंने मामले की विस्तृत जांच कराने की मांग की।

श्रेय बटोरने के लिए अवनीश अवस्थी ने कराई राज्य सरकार की किरकिरी!

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह की राजनीतिक कर्मस्थली उरई चढ़ी अफसरशाही की भेंट।

उरई (जालौन)। प्रधानमंत्री द्वारा उदघाटन के 5 दिन बाद ही बुंदेलखंड एक्सप्रेस ₹-वे के क्षतिग्रस्त होने के वायरल वीडियो से राज्य सरकार की जो जबरदस्त किरकिरी हुई है। उसका ठीकरा यूपीडा के सीईओ अवनीश अवस्थी के सिर फोड़ा जा रहा है, जो अफसरशाही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नाक के बाल माने जाते हैं। खास बात यह भी है कि भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह की राजनीतिक कर्मस्थली भी है उरई।

विवादों से रहा है गहरा नाता- अवनीश अवस्थी शुरू से विवादों के केंद्र में रहे हैं. कोरोना काल में भी उन पर जम कर उंगलियां उठी थी पर जैसे-जैसे उनकी आलोचना बढ़ती गयी वैसे-वैसे उनके लिए मुख्यमंत्री का समर्थन गहराता गया. यहां तक कहा जाने लगा कि सत्ता संचालन के सारे सूत्र नेपथ्य में अवनीश अवस्थी के ही हाथ में कैद हो गए हैँ. केंद्र तक इसकी ख़बरें पहुंची पर मुख्यमंत्रीका उन पर भरोसा इसके वाबजूद नहीं डिगा.

उद्घाटन कराने की हड़बड़ी? बताया जाता है कि बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के लिए निर्धारित समय में 8 महीने का टाइम बकाया था पर अपनी सेवा निवृति के पहले इसका उदघाटन कराने के लिए उतावले अवनीश अवस्थी ने हड़बड़ी में इसकी आयोजना कर डाली, जिसका नतीजा सामने है।

आधे अधूरे बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे के कारण पहली बरसात में ही इसमें जालौन क्षेत्र में छिरिया सलेमपुर के पास दरार आ गयी, जिसके कारण दो कार और एक बाइक दुर्घटना की शिकार हो गयी। इससे राज्य सरकार की फ़जीहत हो रही है। इसके विपरीत प्रभाव प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी की छवि पर भी पड़ रहे हैं। विरोधी नेताओं ने नहीं भाजपा सांसद वरुण गांधी ने भी इसे ले कर सरकार को आड़े हाथों लिया है।

लीपापोती कर दूसरे पर टाला- उधर अवनीश अवस्थी हमेशा की तरह इसकी लीपापोती कर अपनी जवाबदेही दूसरे पर डालने की जुगत में जुट गए हैं। देखना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस बार फिर उनके झांसे को झटक पाते हैं या नहीं? इसी बीच यूपीडा के अभियंताओं ने क्षतिग्रस्त सडक और पुलिया की मरम्मत करा कर यातायात को सुचारु बना देने का दावा किया है।

साभार- केपी सिंह जालौन टाइम्स

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रहस्यमय परिस्थितियों में खुला  धामपुर के सील नर्सिंग होम का ताला!

आश्चर्यजनक रूप से खुल गया धामपुर का सील नर्सिंग होम। समाधान दिवस में शिकायत के बाद डीएम के आदेश पर एसडीएम व स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मारा था छापा। पांच नर्सिंग होम हुए थे सील। नोडल अधिकारी क्वेक्स का दावा, सीएमओ के निर्देश पर खुला ताला।

बिजनौर। धामपुर में पिछले महीने सील किये गए पांच नर्सिंग होम में से एक बुधवार को अप्रत्याशित और आश्चर्यजनक रूप से खुल गया! डीएम के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उक्त पांचों को सील किया था। उस दौरान कुछ नर्सिंग होम संचालक कार्रवाई के डर से फरार हो गए थे। वहीं पांच नर्सिंग होम सील कर दिए गए थे। इस मामले में नोडल अधिकारी का कहना है कि सीएमओ के आदेश के तहत सील खोली गई है। सीएमओ का पक्ष नहीं मिल सका।

गौरतलब है कि धामपुर में अवैध तौर पर कईं नर्सिंग-होम अस्पताल संचालित कर अनाधिकृत तौर पर ऑपरेशन तक करने की शिकायतें जिलाधिकारी उमेश मिश्रा को प्राप्त हुई थीं। समाधान दिवस में शिकायत में बताया गया कि इन अस्पतालों में से कईं में लापरवाही के कारण जच्चा-बच्चा की मौत भी हो चुकी है। नोडल अफसर क्वैक्स डा.देवीदास ने इन्हें नोटिस जारी कर चिकित्सा अभ्यास से संबंधित अभिलेखों समेत तलब किया था। बताया गया है कि आरोपियों में से कोई भी सीएमओ ऑफिस नहीं पहुंचा। इस पर जिलाधिकारी के निर्देश पर एसडीएम विजयवर्धन तोमर के नेतृत्व में नोडल अफसर डा. देवीदास ने अपनी टीम के राजकुमार सक्सेना, विजयपाल व पुलिस बल के साथ जून के पहले सप्ताह में छापेमारी की।

ये हुए थे सील- रेलवे क्रॉसिंग रोड स्थित अर्चना नर्सिंग होम, चन्दन हॉस्पिटल, रौनक नर्सिंग होम, परिधि नर्सिंग होम जैतरा, अदन नर्सिंग होम नगीना रोड धामपुर को कार्रवाई के तहत सील कर दिया गया था। इनके अलावा दो अन्य को नोटिस जारी किया गया।

CMO के आदेश पर खुली सील!- सीएमओ के आदेश के तहत रौनक नर्सिंग होम की सील खोली गई है। नोडल अधिकारी देवीदास ने दूरभाष पर यह दावा किया। सील खोलने का आधार क्या है, इसके जवाब में उन्होंने कहा कि नर्सिंग होम संचालक ने कागजात प्रस्तुत कर दिए होंगे, इसका पटल अलग होता है। अन्य जानकारी उन्हें नहीं है।

वन विभाग ही दे रहा कटान माफिया को संजीवनी!

बिजनौर। पर्यावरण की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी वन विभाग के कंधों पर है, उसी विभाग के अफसरों को उन पेड़ों की पहचान नहीं है। जिन्हें 10 साल का बच्चा भी पहचान ले। …या यह कहें कि वन माफियाओं को संरक्षण देने के लिए वन अफसर इन पेड़ों की पहचान नहीं करना चाहते। ऐसा ही नजारा उस समय देखने को मिला जब माफियाओं ने आम व शीशम के हरे-भरे पेड़ काट डाले। मामले ने तूल पकड़ा तो वन दरोगा को मौके पर भेजा गया लेकिन वहां कटे पड़े आम व शीशम के पेड़ों को यूकेलिप्टिस व सिम्बल के पेड़ बताकर माफियाओं को संजीवनी दी जाने लगी। अब देखने वाली बात होगी कि जिला स्तर के अधिकारी इन पेड़ों की पहचान कर पाते हैं या नहीं।


शेरकोट में थाने से चंद दूरी पर ईदगाह के निकट एक आम का बाग है। इसमें शीशम, जामुन आदि के पेड़ भी खड़े हैं।  बताया जाता है कि धामपुर निवासी एक माफिया ने आम के इस हरे भरे बाग पर आरी चलवा दी। सूत्रों का कहना है कि लगभग 50 आम व शीशम आदि के पेड़ों को काटा जा चुका है। इनमें से कुछ पेड़ तो ढो लिए लेकिन कई पेड़ अभी भी मौके पर ही पड़े हुए हैं। शुरूआत में तो वन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को इस बारे में कुछ पता नहीं चल सका या यह कहें कि जानकर अंजान बने रहे लेकिन जब मामले ने तूल पकड़ा तो वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। हालांकि तब तक पेड़ काटने व कटवाने वाले तो चंपत हो चुके थे लेकिन कटे हुए पेड़ मौके पर थे।

वन दरोगा का दावा आम व शीशम नहीं- वन विभाग इस मामले में माफियाओं पर क्या कठोर कार्यवाही करेगा, जब इस संबंध में रेंजर से बात की गई तो लोगों का वो अंदेशा बिल्कुल सच साबित होता दिखा, जिसमें यह कटान का कार्य माफियाओं और वन अफसरों की मिली भगत से होना जताया जा रहा था। रेंजर का दावा है कि मौके पर वन दरोगा लक्ष्मीचंद को भेजा गया था। उनके मुताबिक आम व शीशम नहीं बल्कि यूकेलिप्टिस और सिम्बल के पेड़ों को काटा गया है।

जिस जगह से आम व अन्य कई प्रजातियों के पेड़ काटे गए हैं, वह शमशान घाट की भूमि है। सरकारी भूमि से पेड़ काटने से पहले वन विभाग की ओर से मूल्यांकन कराया जाता है और उसके बाद नीलामी प्रक्रिया पूरी कर पेड़ काटे जाते हैं। इन पेड़ों को काटने से पहले ऐसा कुछ नहीं किया गया। सरकारी भूमि पर पेड़ काटने से पहले ऐसा कुछ नहीं किया गया जिस कारण यह कटान पूरी तरह अवैध है। अगर यह भूमि ग्राम पंचायत के अधीन आती है तो ग्राम प्रधान और अगर नगरीय क्षेत्र में आती है तो ईओ इस संबंध में एफआईआर दर्ज कराएंगे।
डा. अनिल कुमार पटेल
डीएफओ बिजनौर

गजब: बिना नौकरी किये ईओ ने निकाल लिया 6 माह का वेतन!

बिना नौकरी किये ईओ ने निकाला 6 माह का वेतन जिलाधिकारी को दिया गया शिकायती पत्र। नगर पंचायत झालू का मामला।

बिजनौर। बिना नौकरी किये छह महीने का वेतन निकालने का मामला प्रकाश में आया है। मामला नगर पंचायत झालू के अधिशासी अधिकारी का है। इस मामले में नगर निवासी एक व्यक्ति द्वारा जिलाधिकारी से शिकायत की गई है।

बताया गया है कि नगर पंचायत झालू के अधिशासी अधिकारी प्रेमचन्द पूर्व में जनपद रामपुर की नगर पंचायत शाहबाद में तैनात थे। इनका शासन द्वारा दिनांक 15 जुलाई 2021 को स्थानान्तरण जनपद बिजनौर की नगर पंचायत झालू में हो गया था। बताया गया है कि इनके द्वारा नगर पंचायत झालू में अपनी योगदान आख्या दिनांक 08 जनवरी 2022 को दी गयी। इस प्रकार 6 माह तक इनके द्वारा सर्विस नहीं की गयी। आरोप है कि वित्तीय वर्ष 2022 में नगर पंचायत झालू के अध्यक्ष शहजाद अहमद की सांठगाठ से अधिशासी अधिकारी प्रेमचन्द ने सर्विस से बाहर रहे 6 माह का वेतन नगर पंचायत झालू से आहरित कर लिया। इसी प्रकार पूर्व में तैनात अधिशासी अधिकारी धर्मदेव व अध्यक्ष शहजाद अहमद ने आपस में सांठगाठ कर तमाम फर्जी भुगतान निकाल लिए गए,जो आडिटर के द्वारा आपत्तियों में प्रदर्शित किये गए। आपत्तियों के निस्तारण अभी तक नहीं किए गए हैं। कस्बा झालू बिजनौर के मोहल्ला चौधरियान निवासी संजीव राणा पुत्र करन सिंह ने जिलाधिकारी को दिये शिकायती पत्र में अनुरोध किया है कि उपरोक्त घोर अनियमितता व शासकीय धनराशि के दुरूपयोग की जांच कराकर तत्काल प्रभावी कार्यवाही करें।

शहजाद अहमद अध्यक्ष नगर पंचायत झालू

वहीं अध्यक्ष शहजाद अहमद ने बताया कि यह बात सही है कि अधिशाषी अधिकारी ने छह माह बाद ड्यूटी जॉइन की थी, लेकिन वह मेडिकल लीव पर थे, लिहाजा उक्त अवधि के वेतन का आहरण नियम विरुद्ध नहीं है।

ठेकेदार ने हड़प लिया पंचायत घर का सरिया!

ठेकेदार ने हड़प लिया पंचायत घर का सरिया!

बिजनौर। ग्राम पंचायत अब्दुलपुर मुन्ना उर्फ हादरपुर पंचायत घर के मामले में ग्राम पंचायत सचिव मोहित कुमार ने ठेकेदार कासिम पर सरिया चोरी का आरोप लगाया है। थाना शहर कोतवाली में दी तहरीर में बताया कि नए भवन के निर्माण के लिए जीर्णशीर्ण पड़े पंचायत घर को तोड़ना जरूरी था। इसके लिये टिकोपुर निवासी ठेकेदार कासिम को कहा गया था, लेकिन उसकी नीयत में खोट आ गई।

वहीं बताया गया है कि इस मामले में ग्रामीणों, सचिव तथा राशन डीलर आदि के दबाव में आकर ठेकेदार कासिम ने चोरी किया हुआ सरिया हादरपुर में बने सरकारी स्कूल में रखवा दिया। राशन डीलर नरेंद्र कुमार का कहना है ठेकेदार कासिम के लोग सरिये को ठेले में भरकर कहीं ले जा रहे थे। पूछने पर बताया उक्त सरिया ठेकेदार ने मंगाया है। उस दौरान उनके साथ कई ग्रामीण भी मौजूद थे। इस मामले में ग्राम सचिव मोहित कुमार ने थाना कोतवाली शहर पुलिस को तहरीर भी दी है। दूसरी ओर ग्राम प्रधान ने मामले की जानकारी होने से इंकार किया है।

विकास कार्यों में धांधली पर दो पंचायत सचिव निलंबित

विकास कार्यों में धांधली पर दो पंचायत सचिव निलंबित
बिजनौर (रोहित चौधरी)। ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधानों व पंचायत सचिवों के भ्रष्टाचार की पोल दिन-प्रतिदिन खुलती ही जा रही है। ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव अपनी तिजोरी भरने के चक्कर में विकास कार्यों के लिए शासन से आई रकम को डकारने में लगे हुए हैं। निरीक्षण के दौरान कई बार ग्राम प्रधानों व पंचायत सचिवों पर गाज भी गिर चुकी है।


ताजा मामला हल्दौर विकास खंड की ग्राम पंचायत मुकरंदपुर व बल्दिया का है। डीपीआरओ ने विकास कार्यों में घोर अनियमितताएं बरते जाने पर मुकरंदपुर के पंचायत सचिव विनीत कुमार को निलंबित कर दिया, तो वहीं ग्राम प्रधान के अधिकार सीज करने की बात कही गई है। इसके अलावा डीपीआरओ सतीश कुमार को हल्दौर विकास खंड की ग्राम पंचायत बल्दिया में भी ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव द्वारा विकास कार्यों में धांधली मिली। इसे लेकर उन्होंने ग्राम प्रधान के अधिकार सीज कर दिए एवं पंचायत सचिव को निलंबित कर दिया। डीपीआरओ ने बताया कि लापरवाही किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आगे भी निरीक्षण का दौर जारी रहेगा। डीपीआरओ की इस कार्यवाही से ग्रामीणों में खुशी देखने को मिली है।

भ्रष्टाचार में पूरी तरह डूबे हैं ग्राम पंचायत सचिव-
सूत्रों की मानें तो जनपद में कई ग्राम प्रधान व कई ग्राम पंचायत सचिव भ्रष्टाचार में पूरी तरह डूबे हैं। विकास कार्यों में कमीशन लेना तो मानों उनके बाएं हाथ का काम हो। बताया तो यहां तक जाता है कि बिना कमीशन के वह किसी ठेकेदार को कोई काम नहीं देते हैं।

दबंग दंपत्ति ने फ़िल्म में काम करवाने के नाम पर हड़पे ₹2 लाख

-फर्जी केस लगवा कर भिजवा दिया जेल।
-पुलिस प्रशासन के अधिकारियों से तमाम शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई। -जानलेवा हमला कर कई दिन तक बनाए रहे बंधक

बिजनौर। एक दंपत्ति ने दबंग व्यक्ति पर उसके पुत्र को झूठा फंसाने का आरोप लगाया है। इस मामले में डीएम को प्रार्थना पत्र दिया गया है।

हीमपुरदीपा के गांव सिकंदरी निवासी गिरवर सिंह पुत्र विजयपाल सिंह ने आरोप लगाया कि उसका पुत्र यूट्यूबर है, जिसका जिले में काफी नाम है। उन्होंने बताया कि घेर रामबाग निवासी कथित रूप से दबंग व अपराधी प्रवृत्ति के पति – पत्नी ने उनके पुत्र से मुंबई में फिल्म में काम दिलाने के नाम पर दो लाख रुपए लिए। काम न होने पर उनके पुत्र ने अपने दो लाख रुपए वापस मांगे। इसके चलते उन्होंने उसके पुत्र पर जानलेवा हमला किया और कई दिनों तक बंधक बनाकर रखा। इसके बाद आरोपितों ने उसके पुत्र को युवती से छेड़छाड़ व एससी-एसटी के झूठे मुकदमे में फंसाकर जेल भिजवा  दिया। इस पूरे मामले में एक दरोगा भी उनके साथ हमसाज थे। उन्होंने डीआईजी मुरादाबाद को भी शिकायत भेज कर इंसाफ की गुहार लगाई थी।

फिल्म बनाने का ख्याल भी छोड़ दे- आरोप है कि पूछने पर आरोपी ने कहा कि मैने तेरे लड़के को समझाया था कि किसी को कुछ मत बताना व रुपए वापिस मत मांगना और फिल्म बनाने का ख्याल भी छोड़ दे, लेकिन तुम दोनों बाप बेटे की समझ मे मेरी बात नहीं आयी, जब जीवन भर तेरा लड़का जेल में रहेगा। एल०बी० यू-ट्यूब चैनल चलाकर ऑफिस खोलकर हमारे काम को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा था। तुम दोनों बाप बेटे का काम ही खत्म कर दिया है। यह भी आरोप है कि उक्त अभियुक्तगण का बहुत बड़ा गैंग है।

पुलिस प्रशासन से शिकायत पड़ी हैं पैंडिंग में- पीड़ित कई बार थाने गया तथा अन्य अधिकारियों से भी शिकायत कर चुका है। प्रार्थी इस सम्बन्ध में दिनांक 10.08.2021 व 19.05.2022 को जनता दरवार में तथा दिनांक 08.10.2021 को डाक रजिस्ट्री के माध्यम से डीएम के समक्ष प्रार्थना पत्र दे चुका है। वहीं 09.06.2021 को डी०आई०जी० मुरादाबाद के समक्ष प्रस्तुत होकर प्रार्थना पत्र दिया। इसके अलावा 08.10.2021 व 26.05.2022 को डाक रजिस्ट्री के माध्यम से दिया तथा एक प्रार्थना पत्र मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली को दि. 26. 04.2022 को दिया। प्रार्थना पत्रों पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गयी है। जिलाधिकारी को ज्ञापन देने वालों में हिन्द मजदूर किसान मोर्चा के राजेश, अमर पाल, अग्र्राज, रवेन्द्र, सपना, ज्यपाल, विपिन आदि शामिल रहे।

CM योगी की मंशा को हैरतअंगेज तरीके से पलीता लगाते ADO, VDO

रिपोर्ट-नरपाल सिंह

गांव नहीं अपने विकास में जुटे सेक्रेट्री!

2. संपत्ति की हो जाए जांच तो धनकुबेरों के पैरों तले की जमीन जाएगी खिसक।

3. आलीशान बंगलों जमीन जायदाद के हैं मालिक।

4. पेट्रोल पंप तक के मालिक हैं गांवों के खेवनहार।

सत्ता के गठजोड़ से चलता रहता है पूरा मामला।

फर्जी बिल, बैक डेट के विज्ञापन ही नहीं बैंकों तक मे खुलवा लिए फर्जी खाते।

अखबारों के असली मालिक तक होंगे अनजान।

8. प्रधान बेचने लगे घर से निर्माण सामग्री।

9. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती के बावजूद मोटी चमड़ी वालों की ही चलती मर्जी।

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की ताजा रिपोर्ट “ग्लोबल करप्शन बैरोमीटर फॉर एशिया’ के अनुसार भ्रष्टाचार के मामले में भारत अब एशिया में शीर्ष पर है। इस रिपोर्ट के अनुसार करीब 50 फीसदी लोगों को अपना काम निकलवाने के लिए रिश्वत देनी पड़ी। इनमें से 63 फीसदी ने इस डर से कोई शिकायत भी नहीं की क्योंकि इससे उन्हें कहीं बाद में कोई परेशान ना करे। इस रिपोर्ट के अनुसार करीब आधी आबादी अपने संपर्कों या जुगाड़ से काम निकलवाने में भरोसा रखती है। यह भी एक तरह का भ्रष्टाचार ही है और इससे सिस्टम में भ्रष्टाचार को ही बढ़ावा मिलता है। भ्रष्टाचार के मामले में भारत और चीन की स्थिति बराबर की रही है, लेकिन जहां चीन ने अपनी रैंकिंग में सुधार किया है, वहीं पिछले साल की तुलना में भारत की स्थिति और भी बदतर हुई है।

ताकतवर ही सबसे भ्रष्ट …! हमारे यहां सबसे शक्तिशाली समूह राजनीतिज्ञों का है। भ्रष्टाचार जैसी बीमारी को दूर करने का काम केवल राजनैतिक इच्छाशक्ति से ही हो सकता है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर हमारा राजनीतिक सिस्टम इसमें पहल क्यों नहीं करता? इसका जवाब इन आंकड़ों में है : हमारे यहां दागी सांसदों की संख्या जहां 2004 में 43 प्रतिशत थी, वहीं यह 2019 में बढ़कर 43 फीसदी हो गई। इनमें भी सबसे ज्यादा संख्या सत्ताधारी पार्टी में है। इसी दरमियान बिहार में हुए चुनाव में दागी विधायकों की संख्या में 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। 2015 में जहां चुने हुए विधायकों में से 58 फीसदी पर आपराधिक मामले दर्ज थे, वहीं 2020 में यह संख्या बढ़कर 68 फीसदी हो गई। हमारे जनप्रतिनिधियों के दागी होने का मतलब यही है कि जब उनका दामन साफ नहीं होगा तो वे भ्रष्टाचार को दूर करने का प्रयास क्यों करेंगे, क्योंकि व्यवस्था में भ्रष्टाचार ही इन्हें अपने कारनामों को ढंकने में मदद करता है।

तो नागरिक क्या कर सकते हैं? “ग्लोबल करप्शन बैरोमीटर’ रिपोर्ट कहती हैं कि हमारे यहां 46 फीसदी लोगों ने अपने संपर्कों के जरिए अपने काम करवाए। इनमें से अधिकांश काम छोटे-बड़े नेताओं के जरिए ही करवाए जाते हैं। अगर ये नेता मदद नहीं करते तो उस काम के लिए उन्हें रिश्वत देनी पड़ती। यानी यहां लोगों को यह समझने की जरूरत है कि राजनीतिज्ञ इतने शक्तिशाली हैं कि अगर वे चाहें तो वे पूरे सिस्टम को बदल सकते हैं। अब यह आम नागरिकों की जिम्मेदारी है कि वे नेता ही ऐसे चुनेें जिनकी ईमानदारी और निष्ठा तमाम सवालों से परे हो। अगर राजनीति ईमानदार होगी तो नौकरशाही को अपने आप ईमानदार होना होगा। शीर्ष नौकरशाह जब ईमानदार होंगे तो निचले स्तर पर कार्य करने वाले कर्मचारी भ्रष्टाचार करने का साहस नहीं कर पाएंगे। जब नेता ईमानदार होगा, अफसर ईमानदार होंगे, कर्मचारी ईमानदार होंगे तो आम लोगों में भी वे लोग जो अपने गलत काम भी पैसे देकर या जुगाड़ से करवा लेते हैं, उनके लिए यह सबकुछ इतना आसान नहीं रह जाएगा।

लेकिन यह होगा कैसे? जनता ईमानदार नेता चुनें, यह कहना आसान है, लेकिन करना मुश्किल। इसके लिए हमें कुछ बुनियादी बदलाव करने होंगे। इलेक्टोरल बॉड्स को बंद करके राजनीतिक दलों को होने वाली फंडिंग में पारदर्शिता लानी होगी। आपराधिक रिकॉर्ड वाले लागों को चुनाव का टिकट देने पर रोक लगानी होगी और किसी दागी को टिकट देने पर संबंधित राजनीतिक दल के मुखिया को जिम्मेदार ठहराना होगा। इसके लिए सिविल सोसाइटी का दबाव बनाना होगा और जब भी जरूरत हो, कोर्ट का दरवाजा खटखटाने से भी नहीं पीछे नहीं रहना होगा। इसके लिए मीडिया को भी अहम भूमिका निभानी होगी।

कहां है समस्या? – कुछ साल पहले एक जाने-माने राजनेता ने कहा था कि चुनावी फंडिंग ही भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी गंगोत्री है। इससे निबटने के लिए सरकार इलेक्टोरल बॉन्ड्स लेकर आई, लेकिन इसने तो चुनावी फंडिंग को और भी अस्पष्ट और अपारदर्शी बना दिया है। दरअसल, हमारे राजनीतिज्ञ राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता बिल्कुल नहीं चाहते। यह बात कुछ कारपोरेट्स हाउसेस को भी रास आती है, क्योंकि इससे वे बड़ी आसानी से राजनीतिक दलों को पैसा दे देते हैं और चुनावों के बाद सरकार से बेजा फायदा उठाते हैं। – भ्रष्टाचार से निबटने के लिए हमें प्रभावी सीबीआई, सीवीसी और एंटी करप्शन ब्यूरो चाहिए। …लेकिन इन सभी विभागों का मूल संगठन यानी पुलिस के बारे में आम धारणा यही है कि यह सबसे भ्रष्ट विभाग है। इसलिए हम पुलिस से और प्रकारांतर में इन तमाम संगठनों से यह उम्मीद नहीं कर सकते कि ये भ्रष्टाचार को मिटाने में कारगर रहेंगे, जब तक कि इनके पीछे राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं होगी। – सरकारी सेवकों को भी जवाबदेह नहीं बनाया गया है। सरकारी शिक्षक स्कूल नहीं जाते हैं या जाते हैं तो पढ़ाते नहीं। डॉक्टर सरकारी हास्पिटल या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं जाते। अस्पतालों में दवाइयां नहीं मिलती। सड़के, जलापूर्ति, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं की स्थिति अक्सर खराब मिलती है। और दुर्भाग्य से किसी को भी खराब काम करने या जिम्मेदारी न निभाने पर नौकरी से नहीं निकाला जाता। समस्या यह है कि अच्छा काम करने वाले को पुरस्कार भी नहीं मिलता। तो अच्छा काम करने की प्रेरणा भी नहीं मिलती।

केरल और बिहार के सबक … एक रिपोर्ट के अनुसर केरल में केवल 10 फीसदी नागरिकों को अपने काम करवाने के लिए रिश्वत देनी पड़ी, जबकि बिहार में 75 फीसदी लोगों को। आखिर ऐसा क्यों है, इसको लेकर तो व्यापक अध्ययन की जरूरत है, लेकिन इसमें कहीं न कहीं शिक्षा और साक्षरता का योगदान तो नजर आता ही है। केरल भारत का सबसे साक्षर प्रदेश है, जबकि बिहार का नाम साक्षरता के मामले में नीचे से शीर्ष के राज्यों में शुमार होता है। त्रिलोचन शास्त्री

(लेखक आईआईएम बैंगलोर में प्रोफेसर हैं। एडीआर – एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के फाउंडर चेयरमैन भी रहे हैं।)

गांव नहीं अपने विकास में जुटे सेक्रेट्री! संपत्ति की हो जाए जांच तो धनकुबेरों के पैरों तले की खिसक जाएगी जमीन

गांव नहीं अपने विकास में जुटे सेक्रेट्री! संपत्ति की हो जाए जांच तो धनकुबेरों के पैरों तले की जमीन जाएगी खिसक। आलीशान बंगलों जमीन जायदाद के हैं मालिक। सत्ता के गठजोड़ से चलता रहता है पूरा मामला। पेट्रोल पंप तक के मालिक हैं गांवों के खेवनहार। फर्जी बिल, बैक डेट के विज्ञापन ही नहीं बैंकों तक मे खुलवा लिए फर्जी खाते। अखबारों के असली मालिक तक होंगे अनजान। प्रधान बेचने लगे घर से निर्माण सामग्री।

बिजनौर (रोहित चौधरी)। जिले में ग्राम पंचायतों का विकास कार्यों को लेकर बुरा हाल है। पंचायतों को शासन से विकास कार्यों के लिए करोड़ों रुपये मिले। ..लेकिन अधिकारी जमीनी हकीकत देखकर हैरान हैं। अधिकारियों को निरीक्षण में गड़बड़ी मिली। इस मामले में कोतवाली ब्लॉक के चार ग्राम विकास अधिकारी निलंबित किए जा चुके हैं। ग्राम विकास अधिकारियों पर ड्यूटी से नदारद रहने व विकास कार्यों के क्रियान्वयन में गड़बड़ी के आरोप रहे।


जिले में 11 ब्लॉक हैं, इनमें कोतवाली ब्लॉक सबसे अधिक क्षेत्रफल वाला ब्लॉक है। इसमें सबसे अधिक 149 ग्राम पंचायत हैं। प्रशासन को कोतवाली ब्लॉक की पंचायतों में अनियमितताओं की सबसे अधिक शिकायत मिल रही थी। उपनिदेशक पंचायत व डीपीआरओ ने कोतवाली ब्लॉक की पंचायतों का निरीक्षण किया, जहां बड़े पैमाने पर गड़बड़ी मिली। पंचायत सचिव ड्यूटी से नदारद थे। गली मोहल्लों में कूड़े के ढेर मिले। सड़कों व रास्तों में गंदगी फैली थी। दूषित पानी से संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका जताई गई। पानी निकासी के नाले व नाली गंदगी से अटे मिले। सचिवालय में कामकाज ठप मिला। सामुदायिक शौचालय में ताले लटके मिले। प्रधानों द्वारा शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं के क्रियान्वयन में दिलचस्पी नहीं लेने के आरोप लगे। इस बिना पर कोतवाली ब्लॉक के चार पंचायत सचिवों को निलंबित किया गया। गांवों में ये हुए हैं विकास कार्य
ग्राम पंचायतों में पंचायत घरों का जीर्णोद्धार हुआ। जहां पंचायत घर नहीं थे वहां नए पंचायत घर बने। सामुदायिक शौचालयों का निर्माण हुआ। मुख्यमंत्री की ग्राम सचिवालय मॉडल योजना में सचिवालय बने। बरसाती व घरेलू पानी की निकासी के लिए नाले व नाली बने। सीसी रोड बनीं। अंत्येष्टि स्थल बने। उपनिदेशक पंचायत पंचायतों के निरीक्षण में यह देखकर हैरान रह गए कि पंचायतों को विकास कार्यों के लिए करोड़ों की धनराशि आवंटित होने के बाद भी जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट है। निर्माण आधे अधूरे पड़े हैं। ग्रामीणों ने उपनिदेशक व डीपीआरओ के समक्ष आरोप लगाए कि सफाई कर्मचारी प्रधानों का निजी काम करते हैं। सफाई के लिए कहने पर बदसलूकी करते हैं। सचिव उनकी बात नहीं सुनते।ये ग्राम विकास अधिकारी हुए निलंबित
जिला विकास अधिकारी एस कृष्णा के अनुसार निरीक्षण आख्या के आधार पर ग्राम पंचायत खुर्रमपुर खड़क की ग्राम विकास अधिकारी/ सचिव प्रियंका राजपूत, ग्राम पंचायत कनकपुर व फाजलपुर भारु में तैनात ग्राम विकास अधिकारी/ सचिव काकेंद्र कुमार सिंह, ग्राम पंचायत नूर अलीपुर भगवंत के ग्राम विकास अधिकारी/सचिव कमलकांत पाल, तथा ग्राम पंचायत महमूदपुर भांवता में नियुक्त ग्राम विकास अधिकारी/सचिव नंदराम सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में प्रियंका राजपूत व काकेंद्र कुमार सिंह, ब्लॉक नहटौर, नंदराम सिंह ब्लॉक अफजलगढ़, कमलकांत पाल ब्लॉक नजीबाबाद से संबद्ध रहेंगे। सभी निलंबित ग्राम विकास अधिकारियों की आगे की जांच सक्षम अधिकारियों को सौंपी गई। जांच अधिकारी को एक माह में आरोप पत्र जिला विकास अधिकारी को सौंपना है।

अब तक एक दर्जन से अधिक कर्मचारी हुए निलंबित
डीएम उमेश मिश्रा के निर्देश पर पंचायतों की जमीनी हकीकत परखी जा रही है। पंचायतीराज विभाग के जिला व मंडल अधिकारी लगातार पंचायतों में विकास कार्य का निरीक्षण कर रहे हैं। जांच में खूब अनियमितता सामने आ रही हैं। डीपीआरओ सतीश कुमार के अनुसार अब तक एक दर्जन से अधिक पंचायत सचिव व सफाई कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई हुई है। आठ सचिव के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू हुई है। शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं में रुचि नहीं लेने पर ग्राम प्रधानों को कारण बताओ नोटिस भेजे गए हैं।

दी गई प्रतिकूल प्रविष्टि, रोकी वेतनवृद्धि
कोतवाली ब्लॉक में एक और ग्राम विकास अधिकारी/ पंचायत सचिव की अनियमितताओं के आरोप में प्रतिकूल प्रविष्टि देने के साथ वेतन वृद्धि रोक दी है। जिला विकास अधिकारी एस कृष्णा ने बताया कि कोतवाली ब्लॉक की ग्राम पंचायत उमरपुर बरखेड़ा में तैनात रहे ग्राम विकास अधिकारी/ पंचायत सचिव विवेक देशवाल को उपनिदेशक की जांच में अनियमितता मिलने पर प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है। साथ ही एक वार्षिक वेतन वृद्धि रोकी है। डीडीओ के मुताबिक पंचायत में पंचायत घर का निर्माण दिसंबर 2021 से शुरू हुआ। जांच में अधूरा मिला। इसी तरह की अन्य अनियमितताएं मिली हैं।

कागजों में कट गया बिजली कनेक्शन, फिर भी चार साल से चल रहे 2 नलकूप

बिजनौर। बिजली विभाग के भी खेल निराले हैं। बिजली चोरी जैसे मामले तो आम बात हो गई है; जालसाजी के तो ऐसे-ऐसे मामले भरे पड़े हैं जो पता चल जाएं तो सिर घूम जाए। ऐसा ही एक मामला है जो विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत, लापरवाही और अकर्मण्यता की पोल खोलता है।

दअरसल दो भाइयों ने 7.5 हॉर्स पावर के दो अलग निजी नलकूप फर्जी तरीके से लगवा लिए। जिस गांव की जमीन के कागजात के आधार पर कनेक्शन स्वीकृत हुए, नलकूप वहां न लगवा कर दूसरे गांव में, वो भी दूसरे की जमीन पर लगा लिए। एक साल बाद शिकायत हुई तो जांच के आदेश कछुआ चाल से चलते रहे। चार साल पहले दोनों नलकूपों के कनेक्शन काटे गए, लेकिन सिर्फ कागजों पर! दोनों ही कनेक्शन आज भी बदस्तूर धड़ल्ले से चल रहे हैं। विभागीय आदेश के अनुपालन में सामान विभागीय भंडार गृह में जमा नहीं कराया गया। इनके द्वारा खपत की जा रही बिजली के बिल की भरपाई कौन करेगा? मामले की शिकायत तहसील दिवस में की गई है।

जानकारी के अनुसार 04 दिसंबर 2017 को ग्राम सदूपुरा निवासी सेवानिवृत्त पोस्ट मास्टर सोमदत्त ने पुलिस अधीक्षक से लिखित शिकायत करते हुए बताया कि ग्राम फरीदपुर सल्लू स्थित 100 बीघा जमीन में से 48 बीघा का बैनामा कराया था। दाखिल खारिज की कार्रवाई के दौरान रफीक अहमद पुत्र अब्दुल हमीद, नफीस अहमद पुत्रगण अब्दुल हमीद अहमद निवासी ग्राम सद्पुरा ने एतराज किया, जिसका मुकदमा रेवन्यु बोर्ड तक चला। हालांकि बाद में दाखिल खारिज भी हो गया। सेवानिवृत्त पोस्ट मास्टर सोमदत्त की शिकायत के अनुसार उक्त दोनों लोगों ने बिजली स्वीकृत कराई ग्राम सदुपुरा की जमीन के लिए जबकि जिस जमीन पर प्रार्थी के बोरिंग में नलकूप लगाया, वह फरीदपुर सल्लु में है। इस प्रकार रफीक अहमद व नफीस अहमद ने जालसाजी, हेराफेरी व झूठा शपथ पत्र देकर बिजली कनेक्शन लगवा लिया ताकि प्रार्थी की जमीन पर मालिकाना हक जाहिर कर सके। सरकारी विभागों में प्रार्थना पत्र घूमता रहा। फिर 03 फरवरी 2018 को उपखंड अधिकारी विद्युत वितरण उपखण्ड द्वितीय बिजनौर जसवीर सिंह ने 33/11 केवी उपकेंद्र गंज के अवर अभियंता बहराम सिंह को उक्त दोनों कनेक्शन गलत स्थान पर संचालित होने की जानकारी देते हुए अविलंब उतारने और अवगत कराने के निर्देश दिए।

इसके बाद विद्युत वितरण खण्ड बिजनौर के अधिशासी अभियन्ता किताब सिंह ने 09 अप्रैल 2018 को निजी नलकूप संख्या 225/5027/130124 के लिए रफीक अहमद व निजी नलकूप संख्या 225/5027/130125 के लिए नफीस अहमद पुत्रगण हमीद निवासी ग्राम सदूपुरा बिजनौर को नोटिस जारी किया। इसमें कहा गया कि उनके द्वारा दिनांक 15 जुलाई 2016 को सामान्य योजना के अन्तर्गत 7.5 हॉर्स पावर के उक्त दो निजी नलकूप हेतु अनुबन्ध किया गया था। शिकायत प्राप्त होने पर जांच में पाया गया कि उनके द्वारा फर्द ग्राम सदुपुरा की लगायी गयी है जबकि निजी नलकूप ग्राम फरीदपुर सल्लू में स्थापित किए गए हैं। इससे स्पष्ट होता है कि उनके द्वारा विभाग को गुमराह करके संयोजन प्राप्त किया गया है। यह भी कहा कि पत्र प्राप्ति के 03 दिन के अन्दर स्पष्ट करें कि उनके द्वारा गलत फर्द क्यों लगायी गयी हैं,अन्यथा उनके विरूद्ध कानूनी कार्यवाही करते हुए संयोजन निरस्त कर दिया जायेगा।

वहीं 17 मई 2018 को अधिशासी अभियंता ब्रह्मपाल ने उक्त दोनों कनेक्शन काटने के संबंध में कार्यालय से पत्र जारी किया। उपखंड अधिकारी विद्युत वितरण उपखण्ड द्वितीय बिजनौर को उक्त दोनों कनेक्शन काटने और नलकूप की समस्त सामग्री उतारकर विभागीय भंडार गृह में जमा कराने के निर्देश दिए। उन्होंने अधीक्षण अभियंता विद्युत वितरण मंडल बिजनौर के साथ ही उक्त दोनों कनेक्शन धारकों को भी इसकी एक प्रति सूचनार्थ भेजी। अब किसी प्रकार दोनों नलकूपों के कनेक्शन कट तो गए, लेकिन सिर्फ कागजों पर! असलियत में दोनों ही कनेक्शन आज तक बदस्तूर धड़ल्ले से चल रहे हैं। आज तक अधिशासी अभियंता ब्रह्मपाल के आदेश के अनुपालन में सामान विभागीय भंडार गृह में जमा नहीं कराया गया। एक बात और विचारणीय है कि तकरीबन चार साल से जिन दो निजी नलकूप का कनेक्शन कथित रूप से कटा हुआ है, उनके द्वारा खपत की गई बिजली के बिल का भुगतान कौन, किस से और कब करेगा? 

दोनों ही भाइयों के खिलाफ दर्ज हैं कई केस– दरअसल उक्त दोनों ही भाई शातिर किस्म के हैं। उनके खिलाफ वर्ष 1987 से लेकर 2019 तक कई थानों में मुकदमे दर्ज हैं। इनमें हत्या, जान से मारने की धमकी, फ्राड आदि के थाना शहर कोतवाली में आठ व थाना स्योहारा में एक मुकदमा शामिल है।

बहुत ही गंभीर मामला है। वह अधिशासी अभियंता को इस मामले में यथोचित कार्रवाई के लिये निर्देशित कर रहे हैं। यदि  इतने वर्ष से अवैध रूप से दोनों कनेक्शन संचालित हो रहे हैं तो इसमें संलिप्त विभागीय अधिकारी, कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच व कार्रवाई की जाएगी। शासकीय धन की वसूली के लिए भी कठोर कार्रवाई की जाएगी। –नंदलाल, अधीक्षण अभियंता।

डिप्टी सीएम ने छापा मारकर पकड़ीं साढ़े 16 करोड़ की एक्सपायरी दवाएं

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के अस्पतालों में ताबड़तोड़ औचक निरीक्षण के क्रम में शुक्रवार को डिप्टी सीएम डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने मेडिसिन सप्लाई कार्पोरेशन के गोदाम पर छापा मारा। इस दौरान लगभग साढ़े 16 करोड़ रुपए की एक्सपायरी दवाईंयां मिलीं। इस पर उन्होंने फटकार लगाते हुए तीन दिन के अंदर संबंधित से रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।

गौरतलब है कि डिप्टी सीएम डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक प्रदेश के अस्पतालों में औचक निरीक्षण कर रहे हैं। अस्पतालों में मिल रही अव्यवस्थाओं पर वो जिम्मेदारों को फटकार लगा रहे हैं। इसके साथ ही व्यवस्थाओं को दुरूस्त करने के निर्देश दे रहे हैं।

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने ट्वीट कर कहा है कि, ‘उत्तर प्रदेश मेडिसिन सप्लाई कार्पोरेशन, गोदाम पहुंचकर वहां मानक अनुरूप दवाइयों की उपलब्धता व सप्लाई रिपोर्ट का औचक निरीक्षण कर प्रथम दृष्टया 16,40,33,033 रुपये की एक्सपायरी दवाएं पाई गईं। इसकी जांच हेतु समिति को जांच रिपोर्ट 3 दिनों में प्रस्तुत करने संबंधी आदेश दे दिए गए हैं।’

विदित हो कि, इससे पहले लोहिया अस्पताल में डिप्टी सीएम ने छापेमारी की थी, जहां पर लाखों रुपये की एक्सपायरी डेट की दवाईंया मिलीं थीं, जिसमें उन्होंने सख्त कार्रवाई के आदेश दिए थे।

दो बोतल दारू क्यों नहीं चढ़ी, गृह मंत्री से शिकायत

Viral News: दो बोतल शराब पीने के बाद भी जब नहीं चढ़ा नशा, गृह मंत्री को भेजी शिकायत

पीड़ित शख्स ने बताया कि दो बोतल शराब पीने के बाद भी उसको नशा नहीं हुआ। इस बात से वो नाराज था। वह चाहता है कि ऐसी धोखाधड़ी किसी और कस्टमर के साथ नहीं हो।

उज्जैन। एक तरफ शिवराज सिंह चौहान की सरकार मिलावटखोरी के खिलाफ माफिया पर बुलडोजर चलाने जैसी कड़ी कार्रवाई कर रही है तो वहीं अब मध्य प्रदेश में शराब में मिलावट की बात भी सामने आई है। दरअसल मध्य प्रदेश के उज्जैन में एक शराबी ने राज्य के गृह मंत्री को शिकायत भेजी है। वह सबूत के तौर पर आबकारी थाने में शराब की दो बोतलें लेकर भी पहुंचा।

हैरान रह गए आबकारी अधिकारी

लोकेंद्र सेठिया को आबकारी थाने में देख आबकारी अधिकारी भी हैरान रह गए। बाद में अधिकारी ने उन्हें उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। पीड़ित ने बताया कि उसने 2 बोतल शराब पी लेकिन, फिर भी उसको नशा नहीं हुआ। उसने कहा कि ये शराब कैसी है, नशा नहीं हो रहा है? ठेकेदार पानी मिलाकर दे रहे हैं; ठेकेदारों पर कार्रवाई करो।

शराबी ने की ये मांग

दरअसल, लोकेंद्र सेठिया 12 अप्रैल को देशी शराब की दो बोतल पीने के बाद आबकारी विभाग में शिकायत करने पहुंचे थे। उसने शिकायत की थी कि इसमें नशा नहीं है, इसमें तो पानी मिला हुआ है। वह सबूत के तौर पर शराब की दो बोतलें लेकर भी पहुंचा था। उसने कहा कि यकीन नहीं हो तो शराब की जांच कर लें। ठेकेदार की तरफ से की गई इस धोखाधड़ी को संज्ञान में लेकर कार्रवाई करो।

साभार – राहुल सिंह राठौड़: जी न्यूज़ डेस्क

शिकायत से ख़फ़ा डीलर ने बंद किया गरीबों का राशन

बिजनौर। राशन डीलर द्वारा तय मात्रा से कम मात्रा में राशन देने के सम्बन्ध में उपजिलाधिकारी चान्दपुर से शिकायत करना गरीब उपभोक्ताओं को भारी पड़ा है। नाराज डीलर ने उनके कार्ड निरस्त कराने की धमकी देते हुए राशन देना बंद कर दिया है। अब मामला जिलाधिकारी के दरबार में पहुंच गया है।

मामला ग्राम महबुल्लापुर ढाकी वि०ख० जलीलपुर जिला बिजनौर का है। यहां के रहने वाले तथा सरकार द्वारा पात्र राशन प्राप्तकर्ता उपभोक्ता राशन डीलर की मनमानी का शिकार हो कर रह गए हैं। आरोप है कि गांव का अधिकृत राशन डीलर यकील अहमद सभी ग्रामवासियों को तय मात्रा से कम मात्रा में राशन देता है। यही नहीं जितना देता है वो भी तौले गये राशन से कम निकलता है। भुक्तभोगियों ने जब उक्त राशन डीलर से ऐसा करने से मना किया तो वह आगबबूला हो कर गाली गलौज व धमकाते हुए कहने लगा, लेना हो तो लो वरना राशनकार्ड ही निरस्त करा दूंगा।

ऊपर तक पहुंचाता हूं पैसा!- पीड़ितों का कहना है कि जब उन्होंने कहा कि उन्हें तो सरकार द्वारा तय राशन ही चाहिए तो उसने कहा जो तुम से हो कर लेना, मेरी पहुंच ऊपर तक है। सब को पैसे पहुंचाता हूं, मेरा किसी से कुछ नहीं होने वाला है। इस सम्बन्ध में दिनांक  25.02.2022 को एक पत्र उपजिलाधिकारी चान्दपुर को दिया गया। उन्होंने जांच करने हेतु कुछ कर्मचारी गांव में भेजे। उन कर्मचारियों ने कहा कि पूरे गांव से लिखवा कर दो; 5-10 आदमियों की शिकायत पर कोई कार्यवाही नहीं होगी। आरोप यह भी है कि जांच करने पहुंचे कर्मचारी राशन डीलर के घर में आधा घंटे तक बैठे रहे और उस से हमसाज होकर कोई कार्यवाही नहीं की।

…और करो मेरी शिकायत- जब इस शिकायत का पता राशन डीलर को लगा तो उसने शिकायतकर्ताओं को राशन देने से मना कर दिया और कहा कि और करो मेरी शिकायत,  तुम मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते, जांच कर्मचारियों को भी सैट कर दिया है। इसके बाद आज तक उक्त राशन डीलर ने राशन देने से मना कर दिया और धमकाया कि वह राशनकार्ड निरस्त करवा कर ही दम लेगा। उक्त शिकायत पर उपजिलाधिकारी द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गयी उल्टा जांच कर्मचारी राशन डीलर से हमसाज होकर गरीब पात्र उपभोक्ताओं के लिये मुसीबत पैदा कर आये।

…अब डीएम से ही आसरा- जिलाधिकारी को भेजे शिकायती पत्र में कहा कि वह गरीब व मजदूर वर्ग के व्यक्ति हैं तथा उनके परिवार का भरण पोषण राशन से ही चलता है; जो कि पहले तो कम मिलता था अब बिल्कुल ही मिलना बंद हो गया है। पीड़ितों ने जिले के सर्वोच्च अधिकारी से प्रार्थना की है कि उक्त राशन डीलर के विरुद्ध उचित जांच कर उनका राशन दिलाया जाए। डीएम को शिकायती पत्र भेजने वाले गरीब उपभोक्ताओं में परवेज फुरकान, सलीम हैदर, मजहर, साबिर, तसलीम फात्मा, रेशमा साईद, फुरकान, मौ० मन् कलवा खां, कल्लो, हनीफ शामिल हैं।

नियमों को ताक पर रखकर मदरसे में नियुक्तियों की तैयारी!

बिजनौर। मदरसा मिफ्ताह उल उलूम. चान्दपुर में नियमों को दरकिनार कर विभिन्न पदों पर नियुक्तियों का प्रयास किया जा रहा है। इस संबंध में मदरसे के उप सचिव/ उप प्रबन्धक इफ्तेखार अहमद ने मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश को शिकायती पत्र भेजा है। पत्र में अनियमितता संबंधी जानकारी दी गई है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

मुख्यमंत्री को प्रेषित पत्र में आरोप लगाया गया है कि तथाकथित प्रबन्धक / सेकरेट्री मदरसा मिफ्ताह उल उलूम, कराल रोड, चान्दपुर, जिला बिजनौर द्वारा एक स्थानीय समाचार पत्र में दिनांक : 19.04.2022 में सहायक अध्यापक (तहतानिया). सहायक अध्यापक (फौकानिया), प्रवक्ता/मुदर्रिस, कनिष्ठ सहायक एवं प्रधानाचार्य के पदों का नियम विरूद्ध विज्ञापन प्रकाशित कराया गया है।

शिकायतकर्ता ने बताया कि मदरसा मिफ्ताह उल उलूम, कराल रोड, चान्दपुर, जिला- बिजनौर शासन द्वारा मान्यता एवं सहायता प्राप्त एक अल्पसंख्यक मदरसा है। उक्त मदरसे के तथाकथित प्रबन्धक / सेकरेट्री मौ0 जीशान एवं मदरसा प्रधानाचार्य द्वारा हमसाज होकर कूटरचित एवं षड्यन्त्र रच कर उक्त मदरसे के रिक्त पदों को जिला अल्पसंख्याक कल्याण अधिकारी, बिजनौर के साथ मिल कर पदों पर नियुक्तियां करना चाह रहें है। उन्होंने बताया कि शासन की मंशा निस्तर समाचार पत्रों में प्रकाशित हो रही है, कि अब मदरसों में भी नियुक्तियां MTET उत्तीर्ण अभ्यार्थियों की ही नियमानुसार होनी है, जिससे मदरसे में अध्ययनरत छात्रों को गुणवत्ता के साथ साथ उच्चकोटि की शिक्षा प्राप्त हो सके, परन्तु मदरसे के तथाकथित प्रबन्धक, प्रधानाचार्य एवं जिला अल्पसंख्याक कल्याण अधिकारी, बिजनौर आपस में मिल कर अपने सगे सम्बन्धियों को नियुक्त करना चाह रहे हैं। उक्त के अतिरिक्त विभिन्न कारणें से भी उक्त विज्ञापन निरस्त होने योग्य है। इसकी क्रमवार जानकारी देते हुए बताया कि (01) मौ० जीशान प्रबन्धक / सेकरेट्री के चुनाव से सम्बन्धित एक वाद माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबद में याचिका संख्या 10898 / 2022 के अन्तर्गत लम्बित है, जबकि नियमानुसार कोई भी अधिकारी किसी मदरसे में नियुक्ति की अनुमति तभी प्रदान करता है, जब प्रबन्धक /सेकरेट्री प्रबन्ध समिति से सम्बन्धित कोई वाद न्यायालय में लम्बित ना हो।

प्रतीकात्मक तस्वीर

(02) मदरसे में नियुक्ति से पूर्व किसी चयन समिति का गठन नही किया गया है, जबकि मदरसा नियमावली में उक्त चयन समिति के गठन का प्रावधान निहित है।

(03) शासन द्वारा नीतिगत निर्णय लगातार समाचार पत्रों में प्रकाशित होते रहते हैं, जिससे ज्ञात हुआ, कि शासन तीन वर्षों से एक ही जिले में तैनात अधिकारियों के स्थानान्तरण की नीति घोषित करने जा रही है। जिला अल्पसंख्याक कल्याण अधिकारी बिजनौर जिले में तीन वर्ष से नियुक्त हैं। आरोप है कि उक्त अधिकारी अपने स्थानान्तरण से पूर्व एक मोटी रकम एवं एक पद पर अपने परिचित की नियुक्ति के इरादे से जल्द से जल्द नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करना चाहते हैं!

(04) विज्ञापन में कनिष्ठ सहायक के एक पद पर विज्ञापन प्रकाशित कराया गया है, जबकि कनिष्ठ सहायक की नियुक्ति हेतु P.E.T. परीक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक बनाया गया है, जबकि विज्ञापन में उक्त परीक्षा का कहीं भी उल्लेख नहीं किया गया है। मदरसे के उप सचिव/ उप प्रबन्धक इफ्तेखार अहमद ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है, कि विज्ञापन को रद्द करने हेतु सम्बन्धित अधिकारी को निर्देशित किया जाए। शिकायती पत्र की प्रतिलिपि रजिस्ट्रार मदरसा शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश, मंडलायुक्त मुरादाबाद, जिलाधिकारी बिजनौर व जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को भेजी गई हैं।

गौरतलब है कि मदरसा बोर्ड ने मदरसा शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के उद्देश्य से योग्य शिक्षकों के चयन के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की तर्ज पर मदरसा शिक्षक पात्रता परीक्षा (एमटीईटी) लागू करने का निर्णय लिया है। बोर्ड ने रजिस्ट्रार को इसका प्रस्ताव बनाकर शीघ्र शासन को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। यानी अब मदरसों में रिक्त पदों पर भर्तियां उन्हीं अभ्यर्थियों से की जाएंगी जो एमटीईटी परीक्षा पास होंगे। वर्तमान में करीब 550 मदरसा शिक्षकों के पद रिक्त हैं। एमटीईटी के लागू होने से भर्तियों में भाई-भतीजावाद के आरोप भी नहीं लगेंगे

खबर दबाने को पत्रकार ने की अवैध वसूली! ऑडियो वायरल

डीजे पर हाथ में तमंचा लहराकर युवक ने उड़ायी कानून की धज्जियां
-ग्राम पाडली माण्डू के प्रधान का भाई है आरोपी युवक, खबर दबाने को हुआ लेन-देन का मामला भी हुआ उजागर


बिजनौर। धामपुर क्षेत्र के एक शादी समारोह में डीजे पर नाचते एक युवक की वीडियो वायरल हो गयी। डीजे पर नाच रहा यह युवक हाथ में तमंचा लिए है और गाने के बोल “तमंचे पर डिस्को” है। वीडियो बनी तो इस मामले को दबाने के लिए एक तथाकथित पत्रकार और ग्राम प्रधान के बीच पैसों का लेन-देन भी हुआ। जब मामला न दबा और वीडियो वायरल हो गयी तो ग्राम प्रधान ने तथाकथित पत्रकार तनवीर अहमद के खिलाफ पुलिस को तहरीर देकर कार्यवाही की मांग कर डाली, जिससे यह बात साफ हो गयी कि तमंचे को हाथ में लेकर डांस करने वाले युवक का अपराध माफी लायक नहीं है। उधर पुलिस इन दोनों मामलों की जांच कर कार्यवाही में जुटी है।


गौरतलब है कि धामपुर थाना क्षेत्र के एक गांव में गत 5 अप्रैल को शादी समारोह का प्रोग्राम चल रहा था। बताया जाता है कि ग्राम पाडली मांडू के प्रधान सुशील कुमार का भाई सौरभ उस शादी समारोह में शामिल था और वह बज रहे डीजे पर वह अचानक डांस करने लगा। गाना बज रहा था; तमंचे पर डिस्को! तो उसने अपनी कमर में लगे तमंचे को अचानक हाथ में निकालकर हवा में लहरा दिया और डांस करने लगा। किसी ने उसकी वीडियो बना ली। जब इस बात का पता सौरभ के भाई को पता तो उन्होंने मामले को निपटाने का प्रयास किया। इस मामले में लेन-देन भी हुआ, लेकिन यह वीडियो ना सिर्फ वायरल हुई, बल्कि समाचारों की सुर्खी भी बन गई। इस पर ग्राम प्रधान सुशील कुमार ने एतराज जताते हुए उक्त तथाकथित पत्रकार तनवीर को दिए पैसे लौटाने की बात एक ऑडियो कॉल रिकॉर्डिंग में कहीं। वह भी इस समय तेजी के साथ वायरल हो रही है। प्रधान सुशील कुमार ने पुलिस को तहरीर देकर ब्लैकमेलिंग करने वाले तथाकथित पत्रकार तनवीर अहमद के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। उधर डीजे पर डांस कर रहे आरोपी सौरभ कुमार की तमंचा लहराते हुए वीडियो वायरल होने से पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया और उन्होंने आनन-फानन में इस मामले में कार्यवाही करते हुए आरोपी सौरभ को गिरफ्तार कर लिया। अब मामला अवैध धन के लेनदेन के निपटारे का रह गया है।

खबर दबाने को पत्रकार ने की अवैध वसूली! ऑडियो वायरल

डीजे पर हाथ में तमंचा लहराकर युवक ने उड़ायी कानून की धज्जियां
-ग्राम पाडली माण्डू के प्रधान का भाई है आरोपी युवक, खबर दबाने को हुआ लेन-देन का मामला भी हुआ उजागर


बिजनौर। धामपुर क्षेत्र के एक शादी समारोह में डीजे पर नाचते एक युवक की वीडियो वायरल हो गयी। डीजे पर नाच रहा यह युवक हाथ में तमंचा लिए है और गाने के बोल “तमंचे पर डिस्को” है। वीडियो बनी तो इस मामले को दबाने के लिए एक तथाकथित पत्रकार और ग्राम प्रधान के बीच पैसों का लेन-देन भी हुआ। जब मामला न दबा और वीडियो वायरल हो गयी तो ग्राम प्रधान ने तथाकथित पत्रकार तनवीर अहमद के खिलाफ पुलिस को तहरीर देकर कार्यवाही की मांग कर डाली, जिससे यह बात साफ हो गयी कि तमंचे को हाथ में लेकर डांस करने वाले युवक का अपराध माफी लायक नहीं है। उधर पुलिस इन दोनों मामलों की जांच कर कार्यवाही में जुटी है।


गौरतलब है कि धामपुर थाना क्षेत्र के एक गांव में गत 5 अप्रैल को शादी समारोह का प्रोग्राम चल रहा था। बताया जाता है कि ग्राम पाडली मांडू के प्रधान सुशील कुमार का भाई सौरभ उस शादी समारोह में शामिल था और वह बज रहे डीजे पर वह अचानक डांस करने लगा। गाना बज रहा था; तमंचे पर डिस्को! तो उसने अपनी कमर में लगे तमंचे को अचानक हाथ में निकालकर हवा में लहरा दिया और डांस करने लगा। किसी ने उसकी वीडियो बना ली। जब इस बात का पता सौरभ के भाई को पता तो उन्होंने मामले को निपटाने का प्रयास किया। इस मामले में लेन-देन भी हुआ, लेकिन यह वीडियो ना सिर्फ वायरल हुई, बल्कि समाचारों की सुर्खी भी बन गई। इस पर ग्राम प्रधान सुशील कुमार ने एतराज जताते हुए उक्त तथाकथित पत्रकार तनवीर को दिए पैसे लौटाने की बात एक ऑडियो कॉल रिकॉर्डिंग में कहीं। वह भी इस समय तेजी के साथ वायरल हो रही है। प्रधान सुशील कुमार ने पुलिस को तहरीर देकर ब्लैकमेलिंग करने वाले तथाकथित पत्रकार तनवीर अहमद के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। उधर डीजे पर डांस कर रहे आरोपी सौरभ कुमार की तमंचा लहराते हुए वीडियो वायरल होने से पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया और उन्होंने आनन-फानन में इस मामले में कार्यवाही करते हुए आरोपी सौरभ को गिरफ्तार कर लिया। अब मामला अवैध धन के लेनदेन के निपटारे का रह गया है।

गाजियाबाद के SSP सस्पेंड; कानून व्यवस्था में विफलता और भ्रष्टाचार के आरोप

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में नई सरकार के गठन के बाद से ही योगी सरकार भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ एक्शन में है। गुरुवार को डीएम सोनभद्र को निलंबित करने के बाद गाजियाबाद एसएसपी पवन कुमार पांडेय पर गाज गिरी है। पांडेय को कानून व्यवस्था में विफलता और भ्रष्टाचार के आरोपों में सस्पेंड किया गया है।

भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ सरकार सख्त
अपने दूसरे कार्यकाल में योगी सरकार भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ काफी सख्त नजर आ रही है। डीएम सोनभद्र के बाद एसएसपी गाजियाबाद को भी भ्रष्टाचार और जनता से जुड़े मामले में लापरवाही बरतने में सस्पेंड किया गया है।

हाल ही में हुई थी लाखों की लूट– अभी कुछ दिन पहले ही गाजियाबाद के थाना मसूरी क्षेत्र में दिनदहाड़े बदमाशों ने फायरिंग करके पेट्रोल कर्मचारियों से 25 लाख रुपये की लूट की वारदात को अंजाम दिया था। घटना का वीडियो भी सामने आया था, जिसमें बदमाशों ने दिनदहाड़े फायरिंग करके लाखों रुपये लूट लिए थे।

आईपीएस पवन कुमार अगस्त 2021 में मुरादाबाद से गाजियाबाद ट्रांसफर होकर आए थे। मूलरूप से राजस्थान के हनुमानगढ़ निवासी पवन कुमार 2009 बैच के आइपीएस अधिकारी हैं। 

अपराध नियंत्रण की रणनीति फेल
भाजपा सांसद, विधायक के अलावा आरएसएस कार्यकर्ताओं और हिंदुवादी संगठनों ने पुलिस कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। एसएसपी पवन कुमार को सस्पेंड करने की देर शाम सूचना मिलने पर महकमे में एकाएक हड़कंप मच गया। इस कार्रवाई के पीछे ऑफ द रिकॉर्ड कई कारण बताए जा रहे हैं। 

धड़ल्ले से हो रहा अवैध खनन, प्रशासन मौन

बिजनौर। अफजलगढ़ थाना क्षेत्र में मिट्टी का खनन जोरों पर है। खनन माफिया दिन-रात जेसीबी मशीन से धरती का सीना फाड़कर भराव का कारोबार कर रहे हैं और अपनी जेबे भरने में लगे इन खनन माफियाओं की ओर से शासन प्रशासन अपनी आंखें मूंदे हुए हैं जिससे इन खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। सूचना देने पर भी उच्च अधिकारियों द्वारा कोई कार्यवाही नहीं होती है। 

राष्ट्रीय राजमार्ग 74 पर स्थित गांव जिक्रीवाला के समीप व भूतपुरी क्षेत्र में खनन माफिया पुलिस व प्रशासन की मदद से खनन के कारोबार में लगे हैं। इन स्थानों पर इन खनन माफियाओं द्वारा प्लाटों को भरने का कार्य बेरोकटोक किया जा रहा है। यह खनन माफिया स्थानीय पुलिस से सांठगांठ कर शाम होते ही बड़ा हाइवे,डम्फर व टैक्टर ट्रालियों सहित मैदान में आ जाते हैं और रात के दस बजते ही यह लोग जेसीबी मशीन से धरती का सीना चीरते हुए रात भर खनन का कार्य करते हैं।

थाना क्षेत्र के गांव जिक्रीवाला,  कासमपुरगढ़ी, आसफाबाद चमन, भूतपुरी, सुआवाला, कादराबाद सहित अनेक स्थानों पर देखा जा सकता है कि मिट्टी का भराव का कार्य चल रहा है। यह खनन माफिया प्लाटों में भराव कर अपनी जेबें भरने में लग रहे हैं। खनन माफिया ओवर लोड वाहनों से मिट्टी ढ़ोते हैं जिसके कारण मार्ग तक क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। वहीं कहीं न कहीं इन लोगों के सिर पर कुछ सफेदपोश लोगों का हाथ है।

क्षेत्र में अवैध रूप से मिट्टी भराव कारोबार में दूसरे विधानसभा के लोगों की बढ़ती संख्या को देखते हुए क्षेत्र के खनन माफियाओं के एक गुट ने इन लोगों का विरोध किया तो दोनों गुटों में अपना अपना वर्चस्व बनाने को लेकर कभी भी बड़ी घटना घट सकती है।

अगर पुलिस प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया तो खनन माफियाओं के दोनों गुटों में खूनी संघर्ष की संभावना दिखाई दे रही है। यदि इन खनन माफियाओं की शिकायत कोई करता भी है तो पहले तो पुलिस या विभागीय अधिकारियों द्वारा शिकायत कर्ता का नाम बताकर खनन माफियाओं को सूचना दी जाती है और खनन माफियाओं द्वारा शिकायत कर्ता को ही हड़काया जाता है। यदि फिर भी कार्रवाई करने की जिद होती है तो एक दूसरे विभाग के जिम्मे बताकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। इतना ही नहीं उल्टे इन खनन माफियाओं तक शिकायत किये जाने की बात कहते हुए इन्हें सावधान कर अवैध रूप से चल रही मिट्टी खनन को बन्द करा दिया जाता है । कुछ घंटों बाद फिर से रात भर मिट्टी का खनन शुरू कर दिया जाता है। ग्रामीणों ने डीएम से अवैध रूप से प्लाटों में भराव कर रहे खनन माफियाओं पर अंकुश लगाने की मांग करते हुए कारवाई किये जाने की मांग की है।

(सच/झूठ) प्रधानमंत्री रामबाण सुरक्षा योजना 2021: ऑनलाइन आवेदन | एप्लीकेशन फॉर्म

साभार 12th March 2022 by Madhuri

आज के दौर में हमारा देश डिजिटलीकरण की तरफ बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में सभी प्रकार की प्रक्रियाएं ऑनलाइन हो रही है। सरकार द्वारा भी विभिन्न प्रकार की योजनाएं समय-समय पर आरंभ की जाती है। जिसके अंतर्गत आवेदन करने की प्रक्रिया ऑनलाइन होती है। ऐसे में कई बार ऐसा होता है कि कुछ गलत सूत्रों से ऐसी योजनाओं की जानकारी फैल जाती है जो सरकार द्वारा आरंभ ही नहीं की गई हो। आज हम आपको ऐसी ही एक योजना से संबंधित जानकारी प्रदान करने जा रहे हैं जिसका नाम प्रधानमंत्री रामबाण सुरक्षा योजना है। इस लेख को पढ़कर आपको पता चलेगा यह योजना सच है या झूठ। तो दोस्तों यदि आप Pradhanmantri Ramban Suraksha Yojana की विश्वसनीयता की जांच करना चाहते हैं तो आपसे निवेदन है कि आप हमारे इस लेख को अंत तक पढ़े।

Fake Pradhanmantri Ramban Suraksha Yojana

विभिन्न प्रकार के ऑनलाइन एवं ऑफलाइन सूत्रों से यह दावा किया जा रहा है कि हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा प्रधानमंत्री रामबाण सुरक्षा योजना का शुभारंभ किया गया है। इस योजना के माध्यम से देश के सभी युवाओं को कोरोनावायरस के नि:शुल्क इलाज के लिए ₹4000 की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। वायरल मैसेज में यह भी दावा किया जा रहा है कि इस योजना के अंतर्गत आवेदन करने की अंतिम तिथि 18 अगस्त 2021 है। यदि आप इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं तो आपको मैसेज में दिए गए लिंक पर क्लिक करके अपना फॉर्म भरना होगा। आपको बता दें सरकार द्वारा ऐसी कोई भी योजना नहीं संचालित की जा रही है। सरकार के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पीआईबी फैक्ट चेक द्वारा प्रधानमंत्री रामबाण सुरक्षा योजना को फेक बताया गया है। आपसे निवेदन है कि आप ऐसी किसी भी योजना के अंतर्गत आवेदन ना करें। यदि सरकार द्वारा ऐसी कोई भी योजना लागू की जाएगी तो हम आपको योजना से संबंधित संपूर्ण जानकारी प्रदान करेंगे। लेकिन अभी सरकार द्वारा ऐसी कोई योजना संचालित नहीं की जा रही है।

फ़र्ज़ी प्रधानमंत्री रामबाण सुरक्षा योजना

यदि आपके पास भी Pradhan Mantri Ramban Suraksha Yojana के आरम्भ होने से सम्बन्धित जानकारी सांझा की गयी है तो आपको बता दे पीएम रामबाण सुरक्षा योजना पूरी तरह से झूठी, भ्रामक और फ़र्ज़ी योजना है | पीआईबी द्वारा इस फ़र्ज़ी प्रधानमंत्री रामबाण सुरक्षा योजना का खंडन करते हुए बताया कि इस प्रकार कि कोई भी योजना नहीं है और न ही सरकार द्वारा कोई आवेदन इस गलत भ्रामक रामबाण सुरक्षा योजना के अंतर्गत मांगे गए है | कृपया इस प्रकार कि गलत झूठी फेक योजना के झांसे में न आये और अपनी कोई भी जानकारी किसी से भी शेयर न करे | इस प्रकार के धोखे (Fraud Pradhan Mantri Ramban Suraksha Yojana ) से खुद को बचाकर रखे और किसी भी योजना पर विश्वास करने से पहले उसकी सत्यता कि जांच कर ले

झूठ प्रधानमंत्री रामबाण सुरक्षा योजना का उद्देश्य

यह दावा किया जा रहा है कि Pradhanmantri Ramban Suraksha Yojana का मुख्य उद्देश्य कोरोनावायरस के इलाज के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करना है। यह आर्थिक सहायता ₹4000 की होगी। इस योजना के अंतर्गत आर्थिक सहायता भारत सरकार द्वारा प्रदान की जाएगी। लेकिन आपको बता दें की यह दावा पूरी तरह से झूठ है। सरकार द्वारा ऐसी कोई भी योजना नहीं संचालित की जा रही है। कोरोनावायरस के इलाज के लिए सरकार द्वारा कई अन्य योजनाएं संचालित की जा रही है। लेकिन Pradhanmantri Ramban Suraksha Yojana नाम की कोई योजना सरकार द्वारा नहीं संचालित की जा रही है। जैसे ही सरकार द्वारा ऐसी कोई भी योजना संचालित की जाएगी हम आपको जरूर सूचित करेंगे।

वायरल मैसेज के दावे के अनुसार प्रधानमंत्री रामबाण सुरक्षा योजना के निम्नलिखित लाभ एवं विशेषताएं हैं।

  • विभिन्न प्रकार के ऑनलाइन ऑफलाइन सूत्रों से यह दावा किया जा रहा है की हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा प्रधानमंत्री रामबाण सुरक्षा योजना का शुभारंभ किया गया है।
  • इस योजना के माध्यम से देश के युवाओं को कोरोनावायरस के इलाज ने ₹4000 की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
  • इस योजना के अंतर्गत आवेदन करने की अंतिम तिथि 18 अगस्त 2021 वायरस मैसेज के अनुसार बताई जा रही है।
  • मैसेज में इस योजना के अंतर्गत आवेदन करने के लिए एक लिंक भी दी गई है।
  • इस लिंक पर क्लिक करके फॉर्म भरने पर यह दावा किया जा रहा है कि आप इस योजना के अंतर्गत आवेदन कर सकेंगे।
  • आपको बता दें सरकार द्वारा ऐसी कोई भी योजना नहीं संचालित की जा रही है।
  • सरकार के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पीआईबी फैक्ट पैक चेक पर इस योजना को फेंक बताया गया है।
  • आपसे निवेदन है कि आप ऐसी किसी भी योजना के अंतर्गत आवेदन ना करें।

गलत रामबाण सुरक्षा योजना पात्रता तथा महत्वपूर्ण दस्तावेज

वायरल मैसेज के अनुसार यह दावा किया जा रहा है कि इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित पात्रता एवं महत्वपूर्ण दस्तावेज होना अनिवार्य है।

  • आवेदक भारत का स्थाई निवासी होना चाहिए।
  • आधार कार्ड
  • राशन कार्ड
  • निवास प्रमाण पत्र
  • आय प्रमाण पत्र
  • आयु प्रमाणपत्र
  • मोबाइल नंबर
  • पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ

सच/झूठ प्रधानमंत्री रामबाण सुरक्षा योजना आवेदन

  • वायरल मैसेज में यह दावा किया जा रहा है कि यदि आप प्रधानमंत्री रामबाण सुरक्षा योजना के अंतर्गत आवेदन करना चाहते हैं तो आपको मैसेज में दिए गए लिंक पर क्लिक करना होगा।
  • लिंक पर क्लिक करने के बाद आपके सामने एक आवेदन फॉर्म खुलकर आएगा।
  • आपको इस आवेदन फॉर्म में पूछी गई सभी महत्वपूर्ण जानकारी जैसे कि आपका नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी आदि दर्ज करना होगा।
  • इसके पश्चात आपको सभी महत्वपूर्ण दस्तावेजों को अपलोड करना होगा।
  • अब आपको सबमिट के विकल्प पर क्लिक करना होगा।
  • इस प्रकार आप प्रधानमंत्री रामबाण सुरक्षा योजना के अंतर्गत आवेदन कर पाएंगे।

Note:- अपनी कोई भी जानकारी किसी भी व्यक्ति या ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से शेयर न करे क्योकि यह योजना पूरी तरह से झूठी और भ्रामक है | किसी भी जानकारी पर विश्वास करने से पहले उसकी अच्छी प्रकार से जाँच कर लें।

डाक्टरों को महंगे गिफ्ट! फार्मा कंपनियां भी जिम्मेदार

डाक्टरों को मिलने वाले महंगे उपहार का मामला, केंद्र सरकार को नोटिस

नई दिल्ली (एजेंसी)। सुप्रीम कोर्ट ने फार्मा कंपनियों की ओर से डाक्टरों को दिए जाने वाले गिफ्ट और महंगे उपहारों को रेगुलेट करने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। वर्तमान में फार्मा कंपनियों की ओर से डाक्टरों को गिफ्ट देने के लिए डाक्टरों को ही जिम्मेदार ठहराया जाता है।

याचिका में मांग की गई है कि महंगे उपहारों के लिए फार्मा कंपनियों को भी जिम्मेदार ठहराया जाए। इसके पहले एक दूसरी याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि डाक्टरों को महंगे उपहार देना कानून सम्मत नहीं है। कोर्ट ने कहा था कि फार्मा कंपनियां डाक्टरों को महंगे गिफ्ट देकर कानून से भाग नहीं सकती हैं।

बिजनौर से फर्जी शिक्षक को पकड़ ले गई उत्तराखंड पुलिस

धामपुर (बिजनौर)। उत्तराखंड की खानपुर पुलिस ने फर्जी प्रमाण-पत्रों के आधार पर शिक्षा विभाग में नौकरी कर रहे आरोपी को गिरफ्तार किया है। मई 2021 में तत्कालीन उप खण्ड शिक्षा अधिकारी ने प्राथमिक विद्यालय खानपुर के शिक्षक लोकेश कुमार निवासी बिजनौर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। जांच उपरांत मामला कुछ और ही निकलकर सामने आया। जब पुलिस सुबूतों के आधार पर धामपुर पहुंची और रणबीर सिंह उर्फ प्रीतम सिंह नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया तो उसने यकायक सब कुबूल लिया।

जानकारी के मुताबिक, पुलिस जांच में यह पता चला कि रणबीर उर्फ प्रीतम सिंह पुत्र सुखराम निवासी खुर्द कादराबाद थाना स्योहारा जिला बिजनौर, लोकेश कुमार के फर्जी प्रमाण-पत्रों पर नौकरी कर रहा था; जबकि उसकी शैक्षिक योग्यता बहुत कम थी। प्रथमदृष्ट्या शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भी यही लगा था कि लोकेश कुमार फर्जी प्रमाण-पत्र के आधार पर नौकरी कर रहा है; जबकि उसके डॉक्यूमेंट सही थे और प्रीतम सिंह उसके फर्जी प्रमाण-पत्र बनाकर शिक्षा विभाग में नौकरी कर रहा था। ऐसे में पुलिस फर्जी प्रमाण-पत्र लगाकर शिक्षा विभाग में नौकरी कर रहे आरोपी प्रीतम सिंह को तलाश कर रही थी, जो काफी समय से फरार चल रहा था। उसकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही थी। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने आरोपी रणबीर सिंह उर्फ प्रीतम सिंह को धामपुर शहर पहुंचकर दयावती अस्पताल के पास से गिरफ्तार कर लिया। खानपुर थाना प्रभारी संजीव थपलियाल ने बताया कि फर्जी कागजों के बलबूते आरोपी शिक्षा विभाग में नौकरी कर रणबीर सिंह उर्फ प्रीतम सिंह को गिरफ्तार किया गया है। बताया कि थाना खानपुर में पंजीकृत मु.अ.सं. 5/21 धारा 420/467/468/471 आईपीसी, जिसमें तत्कालीन उप शिक्षा अधिकारी प्राथमिक शिक्षा खानपुर जनपद हरिद्वार द्वारा फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर शिक्षा विभाग में अध्यापक की नौकरी प्राप्त करने के संबंध में लोकेश कुमार पुत्र चंद्रपाल सिंह निवासी कादराबाद खुर्द स्योहारा जनपद बिजनौर उत्तर प्रदेश के विरुद्ध थाना खानपुर में अभियोग पंजीकृत कराया गया था। विवेचना क्रम में प्रकाश में आया कि रणबीर उर्फ प्रीतम सिंह पुत्र सुखराम निवासी खुर्द कादराबाद थाना स्योहारा जिला बिजनौर द्वारा लोकेश कुमार उपरोक्त के फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर शिक्षा विभाग में नौकरी पाई गयी। उन्होंने बताया कि आरोपी के दो-दो नाम होने से यह तय नहीं हो पा रहा था कि यह एक ही है या अलग अलग, लेकिन लोकेश के अनुसार आरोपी रणबीर सिंह उर्फ प्रीतम सिंह एक ही नाम है। इसके पश्चात अभियोग से संबंधित वांछित अभियुक्त रणबीर सिंह उर्फ प्रीतम सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

आतंकियों का साथी निकला शिमला का एसपी; एनआईए ने किया गिरफ्तार

NIA की बड़ी कार्रवाई, शिमला के SP अरविंद दिग्विजय गिरफ्तार, आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा से कनेक्शन का आरोप। 5 अन्य लोग भी गिरफ्त में।

नई दिल्ली (एजेंसी)। NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) ने आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा से कनेक्शन के आरोप में हिमाचल कैडर के आईपीएस अरविंद दिग्विजय नेगी को गिरफ्तार किया है। इस पुलिस अधिकारी पर खुफिया जानकारी लीक करने का आरोप है। वहीं, एसपी के अलावा एनआईए ने 5 अन्य लोगों को भी इस मामले में गिरफ्तार किया है। एनआईए के प्रवक्ता से मिली सूचना के अनुसार भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 2011 बैच में पदोन्नत नेगी को पिछले साल छह नवंबर को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा दर्ज एक मामले के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एनआईए 6 नवंबर 2021 में दर्ज हुए ओवर ग्राउंड वर्कर्स नेटवर्क केस की जांच कर रही है। इसमें लश्कर के आतंकियों को लोकल सपोर्ट मुहैया कराने के मामले की जांच चल रही है। इन आतंकियों को भारत में खौफनाक वारदातों को अंजाम देने के लिए मदद पहुंचाई जाती थी। अब तक एजेंसी ने केस में 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान एजेंसी ने आरोपी नेगी की भूमिका संदिग्ध पाई थी। प्रवक्ता ने बताया कि एनआईए से लौटने के बाद शिमला में तैनात नेगी की भूमिका की जांच की गई और उनके घरों की तलाशी ली गई। इसके बाद शिमला के एसपी अरविंद दिग्विजय नेगी की पहचान साबित की गई। अधिकारी पर सीक्रेट दस्तावेजों को लीक करने का भी आरोप है। नेगी ने ओवर ग्राउंड वर्कर्स के साथ इन दस्तावेजों को शेयर किया था, जिसका लश्कर के साथ कनेक्शन है।

चारा घोटाले में लालू दोषी करार, 21 फरवरी को होगा सजा का एलान

update big breaking : चारा घोटाले में लालू दोषी करार, सजा का एलान 21 फरवरी को

रांची (एजेंसी)। चारा घोटाले केस में CBI कोर्ट ने बिहार के पूर्व सीएम और राष्‍ट्रीय जनता दल के अध्‍यक्ष लालू प्रसाद यादव को दोषी करार दिया है। डोरंडा कोषागार केस में कोर्ट का फैसला आया है। सजा का एलान 21 फरवरी को किया जाएगा।

डोरंडा कोषागार से अवैध निकासी का चारा घोटाले से जुड़ा पांचवा मामला है। इस मामले को सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सबसे अधिक 139.5 करोड़ रुपये की यहां से निकासी हुई थी। इससे पहले चाईबासा के दो, देवघर और दुमका कोषागार से जुड़े एक-एक मामले पर अदालत सजा सुना चुकी है। लालू प्रसाद इन मामलों में सजायाफ्ता हैं। फिलहाल जमानत पर हैं।

डोरंडा कोषगार मामले में सीबीआई कोर्ट ने लालू प्रसाद समेत 75 आरोपी को दोषी करार दिया है। मामले में 99 आरोपियों में से 24 को बरी किया गया। दोषियों को 18 फरवरी को सजा सुनाई जाएगी।

गिरगिट को भी फेल करते नेता जी…

आज बड़े हो गए हैं, कल तो छोटे से थे!

बिजनौर। वर्तमान के हालात में नेताओं की रंगत गिरगिट को फेल करने पर तुली हुई है। यह सभी जगह का हाल है। इक्का दुक्का को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश नेता निचले पायदान से धीरे धीरे ऊपर तक पहुंचे गए। जो पैदल थे, आज उनके नीचे भारी भरकम गाड़ियां हैं। लकदक दिखाई देने के लिए कपड़े धुलवा कर धोबियों तक को पैसा देने में रुलाने वाले सिर तानकर चल रहे हैं। खबर छपवाने के लिए मीडिया वालों की चरण वंदना में जुटे रहने वालों को आज RO (रिलीज़ ऑर्डर) का जादुई शब्द भी पता है। ऐसे ही एक छोटे से नेता जी आज बहुत तो नहीं, फिर भी काफी बड़े हो गए हैं। तकरीबन 10 से 12 साल पहले के दरमियान अलग अलग अवसरों पर उन्होंने मौखिक रूप से एक दैनिक, एक सांध्य व एक साप्ताहिक अखबार में विज्ञापन प्रकाशित कराए। पहले का पेमेंट टलते रहने के बावजूद अखबार नवीस को भरोसा था कि आज नहीं तो कल 30 हजार रुपए का भुगतान हो ही जाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। पहले तो नेता जी आज, कल और परसों कह कर टालते रहे। फिर दिन, महीने साल बीतते रहे। वो भी छोटे से बड़े का सफर तय करते रहे। बीच में उन्होंने विज्ञापन का रिलीज़ आर्डर (RO) दिखाने की बात कह कर अपनी असली रंगत दिखा दी। अब नाम बताने की जरूरत तो है नहीं क्योंकि सुधि पाठकों को समझ में आ रहा होगा कि आखिरकार कौन हो सकते हैं वो नेताजी? RO शब्द का इस्तेमाल कब, कहां और कौन करता है। हालांकि अब वो सिर्फ बड़े लोगों के साथ ही उठते बैठते हैं, अपने दुर्दिनों के समय के पालनहारों के फोन तक रिसीव नहीं करते।

छोटा, बड़ा अखबार- यह बात तो जनता को बखूबी मालूम है कि जन समस्याओं को आला अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए अधिकतर तथाकथित नेताओं द्वारा पीड़ितों के ज्ञापन की टाइपिंग, फोटो कॉपी और तो और मीडिया में प्रकाशित कराने के नाम पर भी रकम ऐंठी जाती रही है। यही हाल जिला पंचायत चुनाव के दौरान एक बड़े राजनीतिक दल के पदाधिकारियों ने भी किया था। अब विधानसभा चुनाव में भी उसी पुरानी परंपरा का निर्वहन बखूबी किया जा रहा है?

डीलर ने बाजार में बेच दिया राशन, रिपोर्ट दर्ज

चांदपुर। सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार के लाख दावे किए जाएं लेकिन राशन डीलर द्वारा खाद्यान्न वितरण में लगातार धांधली की जा रही है और गरीबों गरीबों को मिलने वाले राशन की कालाबाजारी की जा रही है। पूर्ति निरीक्षक की जांच में एक राशन विक्रेता द्वारा खाद्यान्न में कालाबाजारी का मामला सामने आया है। आरोपी डीलर पर पूर्ति निरीक्षक योगेश कुमार ने राशन डीलर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।

जिलाधिकारी की अनुमति के बाद पूर्ति निरीक्षक योगेश कुमार की ओर से दर्ज रिपोर्ट में कहा गया कि विभाग व प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने राजपुर परसु के राशन डीलर की लगातार शिकायतों के बाद जांच की। जांच में पाया गया कि में राशन डीलर ने गेहूं 299.30 कुंटल व चावल 129.40 कुंटल 93 पैकेट चने का वितरण न कर उसको कालाबाजारी कर बेच दिया।

अधिकारियों की चौकड़ी ने किया झालू समिति के धन का गबन!

बिजनौर। झालू जाटान सेवा सहकारी समिति के अपदस्थ अध्यक्ष पति मोहम्मद अकबर ने कहा कि अधिकारियों की चौकड़ी ने समिति धन का गबन; मिसयूज करने के अपने उद्देश्य में बाधक समिति सभापति सहित बोर्ड के निर्वाचित 6 संचालकों की सदस्यता खत्म करने में षड्यंत्र के तहत एक राय होकर सबसे अहम भूमिका निभाई है। अपदस्थ किए गए सभापति, संचालकों को 1 वर्ष बीत जाने के बाद भी जांच रिपोर्ट, आर्डर शीट व अन्य सूचना प्राप्त नहीं कराई गई है।

मोहल्ला पीरजादगान स्थित अपने आवास पर मोहम्मद अकबर ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि पूर्व सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता बिजनौर अमित कुमार त्यागी, एडीसीओ सुनील कुमार सैनी, एडीओ जयवीर सिंह, पूर्व एमडी धर्मपाल सिंह व वर्तमान एमडी शिव बहादुर की केमिस्ट्री ने एक राय होकर समिति के धन का गबन; मिसयूज करने के अपने उद्देश्य में बाधक समिति सभापति सहित बोर्ड के निर्वाचित 6 संचालकों की सदस्यता से संबंधित मूल दस्तावेजों सदस्यता प्रार्थना पत्र, घोषणापत्र, सदस्यता रजिस्टर्ड, कार्यवाही रजिस्टर, कैश बुक, लेजर आदि को षड्यंत्र के तहत बदल कर सदस्यता समाप्त कराने में सबसे अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि अपदस्थ किए गए सभापति संचालकों को 1 वर्ष बीत जाने के बाद भी कार्यालय सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता बिजनौर ने सदस्यता के संबंध में कराई गई जांच की जांच रिपोर्ट, आर्डर शीट व अन्य सूचनाएं प्राप्त नहीं कराई हैं। दस्तावेज उपलब्ध न कराने का कारण स्पष्ट है कि उनकी सदस्यता से संबंधित दस्तावेजों को बदल दिया एवं नष्ट कर दिया गया है, जो कृत्य झालू समिति में हुआ है ऐसा सहकारिता विभाग उत्तर प्रदेश के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ कि किसी भी समिति के 9 में से 6 निर्वाचित संचालक को षड्यंत्र के तहत हटा दिया गया हो। झालू समिति में उत्तर प्रदेश सहकारी अधिनियम नियमावली उपलब्धियां लागू नहीं होती है, वहां तो पूर्व सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता बिजनौर अमित कुमार त्यागी, एडीसीओ सुनील कुमार सैनी, एडीओ जयवीर सिंह, पूर्व एमडी धर्मपाल सिंह व एमडी शिव बहादुर की चौकड़ी के निर्मित कायदे कानून चलते हैं। उन्होंने कहा कि उक्त चौकड़ी द्वारा एक और षडयंत्र रचा गया है कि गैर कृषक ₹100 से वाले सदस्यों की सदस्यता भी समाप्त की जाए, जिसके क्रियान्वयन को एमडी शिव बहादुर अंतिम रूप देने में लगे हैं। उनका हौसला सातवें आसमान पर है क्योंकि जब उन्होंने निर्वाचित संचालकों के सदस्यता से संबंधित दस्तावेजों को नष्ट एवं बदलकर अपदस्थ करा दिया तो उनके लिए गैर कृषक ₹100 हिस्सा वाले सदस्यों की सदस्यता समाप्त करना कोई मायने नहीं रखता है।

उन्होंने कहा कि उक्त अधिकारियों की चौकड़ी झालू समिति के निर्वाचित बोर्ड को भंग कराकर उसके स्थान पर प्रशासनिक कमेटी का गठन कराकर समिति के धन का भरपूर गबन व मिस यूज कर रही है और अब गैर कृषक ₹100 का वाले सदस्यों की सदस्यता समाप्त कराकर आगामी चुनाव में समिति के परिसीमन को बिगाड़ना एवं अपनी कठपुतली वाले बोर्ड का गठन करना चाहते हैं, ताकि आगे भी समिति के धन का गबन, मिसयूज सुचारू रूप से जारी रहे। उन्होंने दो टूक कहा कि मेरे ऊपर 40 वर्ष के कार्यकाल में ₹1 का गबन भी सिद्ध कर दे तो मैं 10 गुना देने को तैयार हूं। मोहम्मद अकबर ने जनपद बिजनौर के तेजतर्रार एवं ईमानदार छवि के जिलाधिकारी उमेश मिश्रा से उक्त अधिकारियों के कृत्य की जांच कराकर न्याय दिलाने की मांग की है। उधर इस संबंध में पक्ष जानने को संबंधित अधिकारियों से मोबाइल संपर्क नहीं हो सका।

12 वर्ष से नदारद आंगनबाड़ी को दिया जा रहा मानदेय

बाल विकास परियोजना का कारनामे की खुली पोल, पिछले 12 वर्षो से केंद्र से नदारद आंगनबाड़ी कार्यकत्री को दिया जा रहा मानदेय।

बिजनौर। बाल विकास परियोजना में भृष्टाचार का मामला सामने आया है, जिसमें पिछले 12 वर्षो से केंद्र से नदारद आंगनबाड़ी का मानदेय दिया जा रहा है और सरकार द्वारा दिए गए स्मार्टफोन केंद्र का संचालन करने वाली सहायिका को अभी तक न मिलने से कार्य प्रभावित हो रहा है। जिलाधिकारी से मामले की जाच कराकर कार्यवाही किये जाने की मांग की गई है।


आंगनबाड़ी केंद्र जलालपुर आसरा की सहायिका के पति पंकज कुमार दक्ष ने मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर जिलाधिकारी को शिकायत दर्ज कराते हुए कहा है कि सरकार एवं बाल विकास विभाग से आंगनबाड़ी केंद्र को संचालन करने के लिए मोबाइल फोन दिए गए हैं लेकिन आज तक जलालपुर आसरा केन्द्र को स्मार्टफोन नहीं मिला है, जबकि नहटौर ब्लाक अन्य आंगनबाड़ी केंद्रों को स्मार्टफोन दे दिये गये हैं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि आंगनबाड़ी कार्यकत्री डोली देवी लगभग 12 वर्षों से केन्द्र पर नहीं आ रही है जबकि इससे पूर्व में भी उपरोक्त कार्यकत्री डोली देवी की शिकायत कार्यवाहक सीडीपीओ एवं सुपरवाइजर शोभा वर्मा से की गई, जिस पर शोभा वर्मा यह कहती हैं कि कार्यकत्री डोली देवी का मानदेय नहीं बन रहा है और उसने अपने पद से त्याग पत्र दे दिया है। यदि आंगनबाड़ी कार्यकत्री डोली देवी ने त्याग पत्र दे दिया है तो उसका मानदेय उसके खाते में क्यों आ रहा है और विभाग उसको मानदेय क्यों दे रहा है, जबकि विभाग सहायिका से सहायिका एवं कार्यकत्री दोनों का काम ले रहा है।
बाल विकास परियोजना विभाग की सीडीपीओ कार्यवाहक एवं सुपरवाइजर श्रीमती शोभा वर्मा की कार्यप्रणाली से लगभग 12 वर्षों से परेशान आंगनबाड़ी सहायिका इन्द्रेश कुमारी के पति पंकज कुमार दक्ष ने इस भ्रष्टाचार की पोल खोलते हुए मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई है। पंकज दक्ष ने जिलाधिकारी से मामले की जांच कराकर कार्यवाही किये जाने की मांग की है।

प्रयागराज डीएम और बीएसए का बड़ा कारनामा, जिला रिलीव हुए बिना बीईओ को दिया ब्लॉक

प्रयागराज डीएम और बीएसए का बड़ा कारनामा, जिला रिलीव हुए बिना बीईओ को दिया ब्लॉक

बेसिक विभाग ने खण्ड शिक्षाधिकारियों के तबादले में किया गया है जमकर खेल

आचार संहिता लगने के बाद बैक डेट में रात्रि में ही जारी की लिस्ट

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बेसिक विभाग ने आचार संहिता लागू होने के बाद में बड़े स्तर पर खण्ड शिक्षा अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। खण्ड शिक्षा अधिकारियों के बड़े स्तर पर तबादला हुए अभी एक दिन भी नहीं बीता है कि प्रयागराज के जिलाधिकारी ने बिना रिलीव हुए ही खण्ड शिक्षा अधिकारियों को ब्लॉक आबंटित कर दिया। प्रयागराज के डीएम संजय खत्री ने रायबरेली के दो बीईओ की ड्यूटी ब्लॉक आवंटन के साथ में माघ मेला में लगा दी है। सबसे मजे कि बात ये है कि अभी वह रायबरेली से रिलीव भी नहीं हुए है कि उन्हें प्रयागराज के डीएम के पास में ब्लॉक आवंटन की सूची पहुँच गई है। ब्लॉक आवंटन की सूची प्रयागराज के बीएसए प्रवीण तिवारी की तरफ से भेजी गई है। उनकी तरफ से किस तरह खेल किया गया है इसका बड़ा नमूना ब्लॉकों का आवंटन है।

बता दें, बेसिक शिक्षा निदेशालय की तरफ से खण्ड शिक्षा अधिकारियों के तबादले आचार संहिता लगने के बाद में किए गए हैं। बेसिक शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों ने बैक डेट में सात जनवरी को तबादले किये हैं, जबकि खण्ड शिक्षा अधिकारियों को ऐसे ऑर्डर 8 जनवरी की रात में किया है। विभाग के बड़े अधिकारियों ने खेला करते हुए रात्रि में ही लगभग 450 खण्ड शिक्षाधिकारियों की लिस्ट जारी की है। तबादला होने वाले खण्ड शिक्षाधिकारियों का कहना है कि विभाग के अधिकारियों की तरफ से मनमानी की गई है और चुनाव आयोग के पत्र का हवाला देकर भारी संख्या में तबादला करके परेशान करने का काम किया गया है। वहीं, विभाग के इस काम से खण्ड शिक्षा अधिकारी संघ ने भी आपत्ति जाहिर की है और अधिकारियों से नाराज है। संघ ने अधिकारियों से वार्ता भी की, लेकिन अभी तक कुछ खास नतीजा नहीं निकलकर आया है।

बिना जिला रिलीव हुए ही मिल गया ब्लॉक

खण्ड शिक्षा अधिकारियों के तबादले में किस तरह से खेल किया गया और इसमें कितने अधिकारी शामिल है; इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रयागराज के डीएम ने बिना जिलों से रिलीव हुए बीईओ की ड्यूटी लगाई है। माघ मेला की जिलाधिकारी संजय खत्री की तरफ से जारी की गई सूची में दो ऐसे खण्ड शिक्षा अधिकारियों की ड्यूटी लगाई जो अभी रायबरेली जिले से रिलीव ही नहीं हुए है। रायबरेली के सलोन और ऊंचाहार ब्लॉक में तैनात रहे विश्वनाथ प्रजापति और अनिल त्रिपाठी को प्रयागराज में विकासखंड भी आवँटित कर दिए गए हैं। अनिल त्रिपाठी को प्रयागराज में सैदाबाद और विश्वनाथ प्रजापति को फूलपुर विकास खण्ड आवँटित कर दिया गया है।

इन जिलों के डीएम ने रिलीव करने से किया मना

बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से भले ही खण्ड शिक्षाधिकारी का तबादला कर दिया गया है लेकिन चुनाव में बाधा आने की वजह से कई जिलों के डीएम ने बीईओ को रिलीव करने से मना कर दिया है। बरेली, मिर्जापुर, ललितपुर, सहारनपुर,अमेठी, बहराइच, कन्नौज, एटा, प्रयागराज, शाहजहॉपुर, फतेहपुर, कौशांबी, मुरादाबाद,बलरामपुर, लखीमपुर, बांदा, अंबेडकर नगर, मथुरा, सुल्तानपुर, मैनपुरी के डीएम ने रिलीव करने से मना कर दिया है। बता दें, जिला निर्वाचन अधिकारियों की तरफ से बीईओ को एआरईओ से लेकर मास्टर ट्रेनर तक में ड्यूटी लगा दी गई है और उन लोगों ने ट्रेनिंग भी ले ली है, ऐसे में उन्हें कार्यमुक्त करने से निर्वाचन कार्य में बाधा भी आएगी।

खबर का दिखा असर: विभाग ने मानी गलती, कुछ स्थान्तरण निरस्त

खण्ड शिक्षा अधिकारियों के तबादले में की गई धांधली को प्रमुखता के साथ में प्रकाशित किया गया। इसका असर यह दिखा है कि आज निदेशालय की तरफ से बैक डेट में फिजा मिर्जा, अजय तिवारी और भारती शाक्य का तबादला बदलकर निकट के जिलों में कर दिया गया है। विभाग की तरफ से बैक डेट में संशोधन करके ही उन्हें पास के जिलों में तैनाती दी गई है।

टैक्स चोरी में वाणिज्य कर विभाग के 14 अधिकारी निलंबित

लखनऊ। भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के तहत शासन ने कर चोरी में संलिप्त पाए गए मुरादाबाद के वाणिज्य कर विभाग के 14 अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इन पर कम टैक्स जमा करने का आरोप है, जिससे सरकार को करीब 25 लाख रुपए राजस्व की हानि हुई थी। इस संबंध में द मुरादाबाद टैक्स बार, जोनल टैक्स बार एवं टैक्स बार एसोसिएशन ने 18 सितंबर 2021 को प्रदेश के मुख्यमंत्री को संयुक्त शिकायती पत्र भेजा था।

मामले में सचल दल अधिकारियों की अनियमित कार्यप्रणाली, गठित भौतिक सत्यापन समिति की अनियमित कार्यप्रणाली और जोनल एडिशनल कमिश्नर द्वारा भ्रामक आख्या प्रेषित करने के कारण 14 अधिकारियों तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया।

निलंबित किए गए वरिष्ठ अधिकारियों में 2 एडिशनल कमिश्नर, 4 ज्वाइंट कमिश्नर, 4 असिस्टेंट कमिश्नर और 4 वाणिज्य कर अधिकारी शामिल हैं, वहीं 14 अधिकारियों पर कार्रवाई होने से पूरे प्रदेश के वाणिज्यकर अधिकारियों में खलबली मची हुई है।

ये अधिकारी हुए निलंबित

निलंबित होने वालों में एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-1 अरविंद कुमार-1, एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-2 मुरादाबाद अवधेश कुमार सिंह, ज्वाइंट कमिश्रर सम्भाग ए मुरादाबाद, ज्वाइंट कमिश्नर संभाग बी मुरादाबाद चन्द्र प्रकाश मिश्र शामिल है। इसके अलावा, ज्वाइंट कमिश्नर (कारपोरेट) मुरादाबाद डॉ. श्याम सुंदर तिवारी, ज्वाइंट कमिश्नर (कार्यपालक) सम्भाग बी मुरादाबाद अनूप कुमार प्रधान, असिस्टेंट कमिश्नर (सचल दल) चतुर्थ इकाई, मुरादाबाद कुलदीप सिंह प्रथम, असिस्टेंट कमिश्नर (सचल दल) पंचम इकाई मुरादाबाद सत्येंद्र प्रताप, असिस्टेंट कमिश्नर (सचल दल) षष्टम इकाई मुरादाबाद राकेश उपाध्याय और असिस्टेंट कमिश्नर (सचल दल) द्वितीय इकाई मुरादाबाद, देवेंद्र कुमार प्रथम शामिल हैं।

कर चोरी करा रहे थे अधिकारी
दरअसल मुरादाबाद के वाणिज्य कर विभाग के सचल दल ने 26 और 27 जुलाई 2021 को दो ट्रक यूपी-23 टी-5177 और यूपी-23 एटी-1745  को जांच के लिए पकड़ा था। इन दोनों मामले में व्यापारियों से सांठगांठ कर कम टैक्स जमा करवाया गया। इससे विभाग को करीब 25 लाख रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ। एक ट्रक में 10.97 लाख और दूसरे ट्रक में 15.37 लाख रुपए की राजस्व हानि हुई। मामले की जांच की गई तो कई अधिकारियों को दोषी पाया गया। इसके बाद वाणिज्यकर अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया।

5 हजार रुपए रिश्वत लेते दरोगा गिरफ्तार

लखनऊ। एंटी करप्शन विभाग की टीम ने राजधानी के बिजनौर थाना क्षेत्र के नतकुर चौकी इंचार्ज राधेश्याम यादव को 5 हजार रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोपी दरोगा ठगी के मामले में दर्ज एफआईआर में धाराएं बढ़ाने के नाम पर रिटायर्ड सीओ बीएल दोहरे से रिश्वत मांग रहा था। रिश्वत देने के लिए दोहरे के साथ पहुंची भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने बिजनौर चौराहे पर रंगे हाथों आरोपी दरोगा को दबोच लिया।

20 लाख की ठगी का मामला
हिन्द नगर निवासी रिटायर्ड सीओ बीएल दोहरे के मुताबिक एक साल पहले उनकी मुलाकात मलिहाबाद के चौकराना निवासी सौरभ सैनी व ऋषभ सैनी से हुई थी। जालसाजों ने उन्हें एक करोड़ रुपए देने पर मंडी परिषद का चेयरमैन बनाने की बात कही थी। झांसे में लेने के लिए बीजेपी के कई बड़े नेताओं के साथ अपनी फोटो भी दिखाई। 20 लाख रुपए रिश्वत दे भी दी, लेकिन उन्हें चेयरमैन का पद नहीं मिला। रकम वापस मांगने पर आरोपित टालमटोल करने लगे। इस पर उन्होंने सरोजनी नगर थाने में सौरभ सैनी समेत सात लोगों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई थी। यह मुकदमा नव सृजित थाना बिजनौर में स्थानांतरित हो गया। इसकी विवेचना दरोगा राधेश्याम यादव कर रहे थे। आरोप है कि दरोगा बिना रिश्वत के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करना चाह रहे थे। कुछ भी कहने पर वह रिश्वत की मांग कर रहे थे।


टीम ने पकड़ा रंगे हाथ- गुरुवार की दोपहर बीएल दोहरे करीब साढ़े तीन बजे सरोजनी नगर के बिजनौर चौराहे पर पहुंचे। वहां मिठाई की एक दुकान पर उन्होंने दरोगा राधेश्याम यादव को पांच हजार रुपए घूस दी। रकम लेकर जेब में रखते ही एंटी करप्शन के इंस्पेक्टर लक्ष्मी नारायण यादव व उनकी टीम ने दरोगा राधेश्याम यादव को धर दबोचा तो राधेश्याम टीम के पुलिसकर्मियों से धक्कामुक्की करने लगा, लेकिन किसी तरह उसे काबू कर लिया गया। इसके बाद दरोगा को पीजीआई थाने ले जाया गया। पीजीआई इंस्पेक्टर धर्मपाल सिंह ने बताया कि घूस लेते पकड़े गए बिजनौर थाने के दरोगा राधेश्याम यादव निवासी ग्राम व पोस्ट डुमरी, थाना फेफना, जिला बलिया के खिलाफ एंटी करप्शन के इंस्पेक्टर लक्ष्मी नारायण यादव ने तहरीर दी है। मामले में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आरोपी दरोगा को कोर्ट में पेश किया जाएगा। रिटायर्ड डीएसपी श्री दोहरे का कहना है कि मुकदमे में कार्रवाई के लिए विवेचक राधेश्याम यादव छह महीने से दौड़ा रहे थे। वह कहते थे कि कार्रवाई कराना है तो कुछ खर्च करो…, धारा बढ़वानी है और गिरफ्तारी करानी है तो कुछ खर्च करो…। एंटी करप्शन टीम का कहना है कि आरोपी दारोगा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

रिश्वतखोर सिपाही को एसपी ने किया सस्पेंड

एसपी डॉ. धर्मवीर सिंह

बिजनौर। किरतपुर थाना क्षेत्र में डायल 112 पर तैनात एक पुलिस कर्मी द्वारा खाकी वर्दी को दागदार करने का मामला प्रकाश में आया है। पुलिस कर्मी द्वारा ग्राम प्रधान के घर रिश्वत लेते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। मामले को लेकर पुलिस विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। एसपी डॉ. धर्मवीर सिंह ने वायरल वीडियो का  संज्ञान लेते हुए आरोपी पुलिस कर्मी को सस्पेंड कर दिया।

जानकारी के अनुसार किरतपुर थाना क्षेत्र में पीआरवी-2436 (डायल 112) पर तैनात पुलिसकर्मी मंटल कुमार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इसमें उक्त पुलिस कर्मी गांव शाहजहांपुर रोशन में ग्राम प्रधान के घर पर कुछ पैसों की डिमांड करके रिश्वत लेते दिख रहा है। यह पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। पुलिस कर्मी द्वारा वर्दी को दागदार करने का वायरल वीडियो जब एसपी डॉ. धर्मवीर सिंह के संज्ञान में आया तो उन्होंने तत्काल प्रभाव से उसे निलंबित कर दिया।

सड़क को लेकर विधायक और सिंचाई अफसर आमने सामने

दमदारी से बचाव में उतरे अधिकारी। लखनऊ से भी रखी जा रही नजर।

बिजनौर। गांव खेड़ा के पास नहर की पटरी पर बन रही सड़क के उद्घाटन के दौरान नारियल से टूटने के विवाद ने तूल पकड़ लिया है। अब सदर विधायक सुचि मौसम चौधरी और सिंचाई विभाग के अफसर आमने-सामने नजर आ रहे हैं। जहां सदर विधायक सुचि मौसम चौधरी ने प्रेसवार्ता कर खुलकर आरोप लगाए कि सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार हो रहा था और अफसर, ठेकेदार रुपयों की बंदरबांट कर रहे थे। वहीं, सिंचाई विभाग के अफसरों ने नारियल से सड़क टूटने की बात पर आपत्ति जताते हुए डीएम को पत्र लिख दिया है। इसके अलावा इस मामले में लखनऊ से भी नजर रखी जा रही है।

सड़क निर्माण में बरती गई अनियमितता: विधायक

बिजनौर। सदर विधायक सुचि मौसम चौधरी ने पत्रकार वार्ता में कहा कि सड़क के जो हालात है, उसे देख लगा रहा है कि सड़क निर्माण में भारी अनियमितता बरती जा रही थी। आरोप लगाया कि टेंडर में साफ उल्लेख है कि सड़क हॉट मिक्स से बनाई जानी थी। ठेकेदार को हॉट मिक्स प्लांट होने का शपथ पत्र देना था। लेकिन अधिकारियों से मिलीभगत के चलते सड़क बिना हॉट मिक्स के ही बनाई जा रही है। उन्होंने इस मामले की जांच एसआईटी से कराने की मांग की। सदर विधायक सुचि मौसम चौधरी ने कहा कि हमारी सरकार का एक ही संकल्प है, भय मुक्त और भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश। भ्रष्टाचार जो भी अधिकारी करेगा, ठेकेदार करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती रही है, आगे भी कोई भ्रष्टाचार की कोशिश करेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी। सिंचाई विभाग की सड़क का मामला आया जिसके निर्माण में अनियमितता पाई गई सड़क का निर्माण रुकवा  दिया गया है।

नारियल से नहीं टूटी, फावड़े से तोड़ी गई सड़क: अधिशासी अभियंता

बिजनौर। सडक निर्माण में गड़बड़ी के आरोप लगे तो सिंचाई विभाग के अफसर खुलकर स्वमने आ गए। सिंचाई खंड के अधिशासी अभियंता विकास अग्रवाल ने जहां एक दिन पहले ही डीएम को पत्र लिखकर पूरी सड़क की जांच किसी दूसरे विभाग से कराने की मांग की थी। वहीं, नारियल से सड़क टूटने का दाया किए जाने पर आपत्ति जता दी है। शनिवार को सिंचाई विभाग के अफसरों की एक टीम ने मौके पर पहुंचकर सड़क की जांच भी की। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता विकास ने कहा कि फावड़ा मारकर सड़क को तोड़ा गया था। अभी सड़क का निर्माण शुरू ही  हुआ था. उस पर सीकीट होना शेष था। अभी तो सड़क पूरी है, तरह तैयार भी नहीं हुई थी।

एई व जेई सस्पेंड

जलशक्ति मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह ने इस पर संज्ञान लेते हुए कड़ी कार्रवाई कर दी। उन्होंने फोन पर बताया कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सड़क निर्माण कार्य की देखरेख कर रहे जेई शिवानी गुप्ता और एई सुरेंद्र को निलंबित करने और सड़क को दोबारा बनाने के आदेश जारी कर दिए हैं। इसके अलावा अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग से इस पूरे मामले में स्पष्टीकरण मांगा गया है। डॉ. महेंद्र सिंह ने बताया कि सोमवार को निलंबन का पत्र भी पहुंच जाएगा।

रिश्वत लेते आरपीएफ इंस्पेक्टर और सिपाही गिरफ्तार

लखनऊ। सीबीआई ने आरपीएफ इंस्पेक्टर और सिपाही को 63 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। दोनों की गिरफ्तारी बाराबंकी रेलवे स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया से शनिवार की देर रात की गई। टीम दोनों आरोपियों को पहले कोतवाली और फिर लखनऊ ले आई। 

बाराबंकी जिले के एक व्यापारी ने सीबीआई में शिकायत दर्ज कराई थी कि आरपीएफ बाराबंकी इंस्पेक्टर अखिलेश यादव उस पर काम के लिए रिश्वत देने का दबाव बना रहे हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए सीबीआई ने मुकदमा पंजीकृत किया था। शनिवार की देर रात सीबीआई ने बाराबंकी रेलवे स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया से इंस्पेक्टर आरपीएफ अखिलेश यादव और सिपाही आशुतोष तिवारी को 63 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। टीम दोनों आरोपियों को लेकर नगर कोतवाली पहुंची। इसके बाद सुबह करीब आठ बजे आरोपी इंस्पेक्टर और सिपाही को टीम लखनऊ लेकर रवाना हो गई।

बताया जा रहा है आरोपी इंस्पेक्टर के आवास से पांच लाख रुपए भी बरामद हुए हैं। मंडल सुरक्षा आयुक्त लखनऊ अभिषेक कुमार ने बताया कि सीबीआई ने शिकायत पर आरपीएफ बाराबंकी इंस्पेक्टर व सिपाही को गिरफ्तार किया है। इस मामले में सीबीआई ने मुकदमा दर्ज किया था। शनिवार की देर रात सीबीआई टीम ने गिरफ्तारी की है। आरोपी इंस्पेक्टर अखिलेश यादव और सिपाही आशुतोष तिवारी को निलंबित किया जा चुका है। उनके खिलाफ विभागीय जांच बैठाकर कार्यवाही की जा रही है।

सड़कों पर लगे फड़ वालों से की जा रही अवैध वसूली!

आखिर कौन कर रहा सड़कों पर लगे फड़ों से अवैध वसूलीरामलीला मैदान में प्रत्येक रविवार व बुधवार को लगता है साप्ताहिक बाजार।

बिजनौर। रामलीला मैदान में प्रत्येक रविवार व बुधवार को लगने वाले साप्ताहिक बाजार के बाहर फड़ वालों से अवैध वसूली की जा रही है।

शहर के रामलीला मैदान में प्रत्येक रविवार व बुधवार को साप्ताहिक बाजार लगता है। रामलीला में लगने वाली दुकानों व फड़ों से रामलीला समिति के लोग निर्धारित शुल्क वसूलते हैं लेकिन रामलीला के बाहर लगने वाले फड़ों व ठेलों से भी वसूली की जा रही है। यह सभी फड़ व ठेले आदि सरकारी जमीन पर लग रहे है लेकिन ताज्जुब की बात है कि इन फड़ों से वसूली करने वाले ना तो नगर पालिका के कर्मचारी हैं और ना ही किसी अन्य सरकारी विभाग के, बल्कि कुछ प्राइवेट जाने पहचाने चेहरे हर बाजार को सड़क पर लगने वाले प्रत्येक फड़ व ठेले वालों से वसूली करते दिखते हैं। ये लोग निर्धारित शुल्क के रूप में अधिकांश सभी फड़ व ठेले वालों से रुपए लेते हैं। कई बार रुपए ना मिलने पर काफी नोंकझोंक भी देखी जाती है। लोग दबी जुबान से इस अवैध उगाही में रामलीला समिति के इर्द-गिर्द घूमने वाले लोगों के नाम ले रहे हैं। फिलहाल प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है लेकिन उक्त लोग अवैध रूप से भारी भरकम वसूली कर सरकारी विभाग को ही चूना लगाया जा रहे हैं।

वित्तीय आपराधिक मामलों से निपटने को यूपी में तीन विशेष अदालतें

लखनऊ। वित्तीय मामलों से जुड़े आपराधिक मुकदमों की सुनवाई के लिए यूपी में तीन विशेष अदालत बनाई जाएंगी। इससे जनता से वित्तीय धोखाधड़ी करने वालों पर लगाम लगेगी और पीड़ितों को जल्द न्याय मिल सकेगा। इसके जरिये साइबर क्राइम के जरिये धन उड़ा ले जाने, बिल्डरों द्वारा रकम हड़प लेने और फर्जी वित्तीय संस्थाओं पर लग रोक लग सकेगी। फिलहाल ये अदालतें लखनऊ, नोएडा, गोरखपुर में स्थापित की जाएंगी।

शीर्ष सूत्रों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियों में शामिल अपराधियों को जल्द सजा दिलाई जा सकेगी। इसके जरिए अपराधियों को अधिकतम दस साल की सजा या दस लाख रुपए का जुर्माना या दोनों सजा मिल सकेगी। इसका मकसद साइबर क्राइम के जरिए ठगी करने और गड़बड़ी करने वाले बिल्डरों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करना है। इस दायरे में आवंटियों से धोखाधड़ी करने वाले बिल्डर से जुड़े मामले भी इन अदालतों में आएंगे।

सूत्रों के मुताबिक अभी हर माह औसतन 100 शिकायतें बिल्डरों से जुड़ी आती हैं। यूपी में कार्यरत बहुराज्यीय सहकारी समितियों के खिलाफ आने वाली शिकायतों पर अब तेजी से कार्रवाई होगी। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ईओडब्लू और यूपी पुलिस के बीच अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की जाएगी।

धोखाधड़ी रोकने के सख्त निर्देश

संस्थागत वित्त विभाग के महानिदेशक शिव कुमार यादव के अनुसार वित्तीय धोखाधड़ी रोकने के लिए मुख्यमंत्री ने सख्त निर्देश दिए हैं। अब जनता के बीच जागरुकता अभियान  चलाया जाएगा। अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम 2019 के तहत बैनिंग एक्ट ग्रिवांस पोर्टल तैयार किया जाएगा। इसका शुभारंभ मुख्यमंत्री करेंगे। इसके जरिए कोई धोखाधड़ी का शिकार व्यक्ति इस पर शिकायत दर्ज कर सकता है। बैनिंग एक्ट के तहत हर जिले में विशेष अदालतों का गठन होगा। इसके लिए उच्च न्यायालय ने मंजूरी दे दी है।  

NCB की कमान संभालेंगे IPS अफसर सत्य नारायण प्रधान

वरिष्ठ IPS अफसर सत्य नारायण प्रधान को बनाया गया NCB का महानिदेशक, 2024 तक रहेगी कमान

वरिष्ठ IPS अफसर सत्य नारायण प्रधान को बनाया गया NCB का महानिदेशक, 2024 तक रहेगी कमान

मुंबई (एजेंसी)। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के महानिदेशक के रूप में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सत्य नारायण प्रधान की नियुक्ति की गई है। वह इस पद पर 31 अगस्त, 2024 को अपनी सेवानिवृत्ति की तारीख तक या अगले आदेश तक बने रहेंगे। झारखंड कैडर के 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी प्रधान वर्तमान में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) के महानिदेशक की जिम्मेदारी संभालने के बावजूद एनसीबी प्रमुख का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे।

अभी तक था अतिरिक्त प्रभार: राकेश अस्थाना को दिल्ली पुलिस आयुक्त के रूप में नियुक्त किए जाने के बाद उन्हें एनसीबी के महानिदेशक का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। वहीं 1988 बैच के गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी अतुल करवाल को एनडीआरएफ के महानिदेशक के रूप में नियुक्त किया गया है। कैबिनेट की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने बुधवार देर रात के आदेश में प्रधान को पूर्णकालिक आधार पर एनसीबी का महानिदेशक नियुक्त किया।

Satya Narayan Pradhan appointed as Narcotics Control Bureau chief |  NewsTrack English 1

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बाद में संबंधित विंग को एसीसी (कैबिनेट की नियुक्ति समिति) की मंजूरी के लिए सत्य नारायण प्रधान को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के महानिदेशक के पद पर प्रतिनियुक्ति के आधार पर नियुक्त करने का निर्देश दिया। उनके पदभार ग्रहण करने की तारीख से और 31 अगस्त, 2024 को उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख तक या अगले आदेश तक, ये आदेश प्रभावी रहेगा। गृह मंत्रालय ने प्रधान को एनडीआरएफ के महानिदेशक के पद से तत्काल मुक्त करने का भी अनुरोध किया है, ताकि उन्हें नया कार्यभार संभालने में दिक्कत ना आए।

आर्यन केस से चर्चा में है NCB: एसएन प्रधान की नियुक्ति ऐसे वक्त में हुई है, जब एनसीबी काफी चर्चा में है। अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की गिरफ्तारी के बाद एनसीबी के अधिकारियों पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं। एनसीबी के क्षेत्रीय निदेशक समीर वानखेड़े पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। एनसीपी नेता नवाब मलिक उन्हें लेकर आए दिन ट्वीट कर उनकी जांच पर सवाल खड़े कर रहे हैं, जिसके चलते वानखेड़े के पिता ने मानहानि का मुकदमा भी दायर किया है। मामले की सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि समीर वानखेड़े एक सरकारी अधिकारी हैं और कोई भी उनके कामकाज की समीक्षा कर सकता है।

मिठाई के साथ डिब्बा तौलकर ग्राहकों से कमाया मोटा माल

मिठाई के साथ डिब्बा तौलकर ग्राहकों से कमाया मोटा माल। नहीं तौल सकते डिब्बा। डिब्बा तौलने पर जुर्माना ₹ कई हजार। जिले में हैं मिठाई की हजारों दुकान। अलग से करवाएं डिब्बे का वजन, लें बिल।

बिजनौर (शैली सक्सेना)। कोरोना की मार झेल रही आम जनता फिर से ठगी गई। त्योहारी सीजन में मिठाई की दुकानों में मिठाई के साथ गत्ते का डिब्बा तौलकर ग्राहकों को जमकर चूना लगाया गया। कानूनन मिठाई के साथ डिब्बा तौलने वाले दुकानदारों से पांच हजार रुपए  जुर्माना का प्रावधान है। माप तौल विभाग ने हमेशा से चले आ रहे इस गोरखधंधे को रोकने के लिए छापेमारी करने के लिए कोई प्लान तैयार नहीं किया। लिहाजा ग्राहकों की खूब जेब कतरी गई।

नहीं तौल सकते डिब्बा- बाजारों में मिठाई की दुकानों में जितनी महंगी मिठाई, उतना ही डिब्बे का मूल्य लगता है। हमेशा से दुकानदार यह खेल करते चले आ रहे हैं। वैसे तो यह पूरे साल होता है। …लेकिन त्योहारों में मिठाई की मांग बढ़ने पर यह खेल और बढ़ जाता है। डिब्बे का वजन अगर सौ से 150 ग्राम है तो ग्राहक को इतनी ही मिठाई कम मिलती है। ग्राहक भी बिना कुछ कहे मिठाई लेकर चला जाता है। इससे महंगी मिठाई में ग्राहकों को चपत लगती है। मिठाई तौलते वक्त डिब्बे का वजन भी उसमें शामिल कर लेना घटतौली में आता है, जो कानूनन अपराध है।

डिब्बा तौलने पर जुर्माना ₹ कई हजार- मिठाई के साथ डिब्बे का वजन भी तौलते पकड़े जाने पर पांच से 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाने का प्रावधान है। डिब्बे के साथ मिठाई तौलने वाले दुकानदारों की ग्राहक शिकायत कर सकते हैं। शिकायत मिलने पर विभाग की टीम फर्जी ग्राहक तैयार करेगी। इसके बाद दुकान में जाकर जांच करेगी। ऐसा करने पर जुर्माना किया जाएगा। 

जिले में हैं मिठाई की हजारों दुकान- जिले में मिठाई की कई हजार दुकानें हैं। इसके अलावा त्योहारी सीजन में मिठाई बेचने वाले स्टाल भी लगाते हैं। त्योहारी सीजन देखते हुए स्पेशल मिठाई के डिब्बे बनवाए जाते हैं। इनका वजन भी सौ से डेढ़ सौ ग्राम तक होता है। एक डिब्बा 7 से 10 रुपए का पड़ता है।

क्या कहते हैं अधिकारी- माप मौल विभाग के सूत्रों का कहना है कि मिठाई विक्रेता, मिठाई के साथ डिब्बा नहीं तौल सकते हैं। मिठाई विक्रेता ऐसा करते हैं तो कोई भी व्यक्ति शिकायत कर सकता है। अगर ऐसा करता हुआ कोई मिठाई विक्रेता मिलता है तो उस पर अधिकतम 10 हजार रुपए तक जुर्माना किया जाएगा। 

अलग से करवाएं डिब्बे का वजन, लें बिल
मिठाई के साथ डिब्बा तौलने की शिकायत मिलने पर संबंधित दुकानदार के विरूद्ध विधिक माप अधिनियम 2009 के तहत शत प्रतिशत कार्रवाई की जाती है। मिठाई खरीदते समय डिब्बे का वजन अलग से करवाएं एवं खरीदी गई मिठाई का बिल आवश्यक रूप से लेना चाहिए।

हैल्थ डिपार्टमेंट: कार्रवाई से पहले तैयार हो जाती है बचाव की पटकथा!

पहले ही तैयार हो जाती है बचाव की पटकथा! जगजाहिर हैं नोडल क्वेक्स डॉक्टर एसके निगम के कारनामे!

बिजनौर। जनपद में नीम हकीमों द्वारा आएदिन लोगों की जान ली जा रही है लेकिन नोडल क्वेक्स केवल उगाही को अंजाम दे रहे हैं!

गत दिनों चांदपुर के एक अवैध रूप से संचालित नर्सिंग होम में हुई मौत के बाद खूब बवाल हुआ। प्रशासन को काफी मशक्कत के बाद जाम खुलवाने में कामयाबी हासिल हुई। इस हंगामे को होते देख नोडल अधिकारी क्वेक्स एसके निगम चांदपुर पहुंचे और आनन-फानन में उन नर्सिंग होम, अस्पतालों को नोटिस जारी कर दिया, जिनसे वह वर्षों से अवैध उगाही करते चले आ रहे हैं? इसके बाद अस्पताल संचालक और डॉक्टर अपने बचाव के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में पहुंच गए। बताया जाता है कि डॉ. एसके निगम द्वारा एक बाबू को उनको बचाव की जानकारी के लिए लगा दिया गया!

…और बाबू पर भी नहीं किसी का काबू: बाबू ने ऐसा षड्यंत्र रचा कि डॉक्टर बागबाग हो गए और एक मोटी रकम डॉ. एसके निगम को भेंट स्वरूप दी गई। बचाव के रास्ते की जानकारी मिलने पर सीएमओ साहब भी गदगद हो गए! वह बचाव में दलीलें देते नजर आते हैं। बात यहीं खत्म नहीं हो जाती, दरअसल मामला बरसों पुराना है। बरसों से जो भी नोडल कवेक्स बनाए जाते हैं, उनका एकमात्र उद्देश्य इन झोलाछाप नीम हकीम डॉक्टर से अवैध उगाही करना ही बना हुआ है। डॉक्टर एसके निगम एक वर्ष से ज्यादा से नोडल कवेक्स हैं और लगातार चांदपुर में नीम हकीम को नोटिस जारी कर उगाही करते रहे हैं! जब भी कोई ऐसा मामला फंसता नजर आता है तब वह भारी संख्या में नीम हकीम को नोटिस जारी कर देते हैं और बाद में मामला शांत होने पर अवैध उगाही कर उन्हें अभयदान प्रदान करते हुए अपनी एक निश्चित रकम तय कर लेते हैं। एक नीम हकीम को उगाही की जिम्मेदारी देते हैं या फिर गाड़ी में बैठ कर अस्पताल के बाहर अपने ड्राइवर के माध्यम से उगाही के कार्य को अंजाम देते रहते हैं। इस बार भी कुछ अलग नहीं होने जा रहा है।

तगड़ी हो रही उगाही– नाम न छापने की शर्त पर एक अस्पताल संचालक ने बताया कि उनसे प्रतिमाह ₹ 2 से ₹4000 तक की प्रतिमाह उगाही की जाती है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है की डॉ. एसके निगम गरीब मरीजों की जान से खिलवाड़ करने की खुली छूट अवैध रूप से संचालित अस्पतालों व नीमहकीमो को दिए हुए हैं जबकि उनके रिटायरमेंट के कुछ माह शेष हैं। ऐसे में वह कोई मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहते और वह सारे नीम हकीम अल्ट्रासाउंड सेंटर से अवैध उगाही के लिए ताबड़तोड़ दौरे कर रहे हैं। यहां उल्लेखनीय है कि छुट्टी के दिन निगम अपनी व्यक्तिगत गाड़ी लेकर उगाही के लिए निकल जाते हैं।

प्रशासन और सरकार की बदनामी- आरोप है कि वह जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार को बदनाम करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। साथ ही कुछ स्थानीय पार्टी नेताओं व अधिकारियों को एक मोटी रकम प्रतिमाह अपनी उगाही से देते रहते हैं। इस कारण आज तक किसी सत्तारूढ़ पार्टी के नेता या फिर स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी उनकी ओर आंख उठाकर भी नहीं देखते। अभी उन्होंने चांदपुर में नौ और नजीबाबाद के भागूवाला में 11 चिकित्सकों को नोटिस जारी कर प्रमाण पत्र मांगे हैं, जबकि पंजीकृत अस्पतालों का रिकॉर्ड सीएमओ ऑफिस में मौजूद रहता है लेकिन इन पर डॉक्टर निगम ध्यान नहीं देते हैं क्योंकि उन्हें तो अवैध उगाही करनी है। उन्हें इससे क्या लेना कि कोई अस्पताल या डॉक्टर पंजीकृत है या नहीं है। अक्सर होता यह भी है कि अस्पताल का पंजीकरण जिस डॉक्टर के नाम से कराया जाता है वह उस हॉस्पिटल में कभी आता ही नहीं है। इस बात की पुष्टि इन अस्पतालों में लगे स