विवादित जमीन के असली मालिक को लेकर संशय, हंगामा

झंडापुर में है करोड़ों की भूमि। भूमि पर चारदीवारी की नींव रखने को लेकर ग्रामीणों का हंगामा। जमीन के असली मालिक को लेकर अभी भी संशय।

बिजनौर। गंज मार्ग स्थित झंडापुर में खाली पड़ी चूना भट्टी की जमीन पर चारदीवारी निर्माण के लिए नींव भराव का मामला गरमा गया है। यहां के रास्ते निकलने वाले कई गांवों के ग्रामीणों ने हंगामा करते हुए थाना कोतवाली शहर में शिकायत दर्ज कराई। फिलहाल तहसीलदार ने मौके पर काम रुकवा दिया है। ग्रामीण उक्त जमीन के बैनामे को विवादित बता रहे हैं।

जानकारी के अनुसार गंज मार्ग स्थित झंडापुर में खाली पड़ी चूना भट्टी की जमीन की कीमत करोड़ों रुपए में बताई जाती है। एक दिन पूर्व उक्त स्थान पर भराव और नींव निर्माण का कार्य तालिब ठेकेदार ने शुरू करा दिया। भनक लगते ही ग्राम पूरनपुर, जलालपुर व तीबड़ी के ग्रामीणों ने हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने थाना कोतवाली शहर पहुंच कर निर्माण कार्य रुकवाने की मांग की। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उक्त स्थान से होकर उनके गांवों का रास्ता जाता है, जिसे पटवारी अजब सिंह और ठेकेदार तालिब बंद कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि तत्कालीन पटवारी अजब सिंह ने ग्राम प्रधान से सांठगांठ कर उक्त भूमि की श्रेणी बदलवाई और दलित के नाम बैनामा करा दिया था। बाद में पटवारी ने करोड़ों रुपए कीमत की उक्त भूमि का बैनामा अपने नाम करा लिया। अब करीब डेड़ करोड़ रुपए में तालिब ने कुछ हिस्सा खरीद लिया है? इस बीच बताया गया है कि मामले की जानकारी प्राप्त होते ही तहसीलदार ने मौके पर काम रुकवा दिया है।

ठेकेदार ने बैनामे की बात गलत ठहराई- तालिब ठेकेदार का कहना है कि उनके द्वारा उक्त जमीन का बैनामा कराने की बात सही नहीं है। तत्कालीन पटवारी अजब सिंह के कहने पर उन से मित्रता के नाते वहां नींव का भराव करा रहे थे। वर्ष 1952 से सरकारी पट्टा चला आ रहा था। वर्ष 2003 में पट्टेदार से अजब सिंह ने अपने नाम बैनामा करा लिया था, इस बात को भी करीब 20 साल हो गए हैं। आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने खाली पड़ी भूमि को रास्ते के तौर पर इस्तेमाल करना शुरू कर दिया, जबकि सरकारी रास्ता अलग है। उक्त भूमि को रास्ते के तौर पर प्रयोग न करने के आदेश कोर्ट ने दिये हुए हैं। पुलिस प्रशासन को भी कोर्ट के आदेश की प्रति दिखा दी गई है।

पटवारी की पत्नी के नाम है जमीन वहीं तत्कालीन पटवारी अजब सिंह ने बताया कि उक्त भूमि का बैनामा वर्ष 2003 में उनकी पत्नी चंचल सैनी के नाम हुआ था। पूर्व में उक्त जमीन ओबीसी श्रेणी के ख्वानी ढीमर पुत्र हरदेवा के नाम थी। उसके एक पुत्र सोनू उर्फ सुन्दू व एक पुत्री थे। पुत्री की शादी बढ़ापुर थानांतर्गत ग्राम सरदारपुर छायली में हुई थी। सुन्दु बहरा और अविवाहित था व अपनी बहन के घर ही रहता था। ख्वानी की मौत के बाद भूमि उसकी पुत्री के नाम आ गई। इस बीच उसकी मौत हो गई और इस कारण जमीन उसके चार पुत्रों कुड़वा, मूलचंद, महेश आदि के नाम हो गई। वर्ष 2003 में सुन्दु का बहनोई हरिराम सिंह उनसे मिला और जमीन बेचने की बात कही। उसने बताया कि दवाई लेने तक के पैसे नहीं हैं। इस पर उन्होंने डेढ़ लाख रुपए अपनी पत्नी चंचल से दिला कर बैनामा करा लिया।

सरकारी रास्ता है दाहिनी तरफ- जमीन खाली पड़ी देख कर ग्रामीणों ने रास्ते के तौर पर उपयोग शुरू कर दिया, जबकि दाहिनी ओर पक्की सरकारी चक रोड है। गन्ना विकास परिषद ने उक्त जमीन पर पत्थर डाले तो वो कोर्ट पहुंच गए। परिषद की ओर से कोई नहीं आया। कोर्ट ने आदेश कर दिया कि बिना उक्त भूमि को खरीदे वहां कुछ कार्य नहीं करा सकते। जमीन उनकी पत्नी के ही नाम है किसी को बेची नहीं है। ठेकेदार तालिब को मित्रता के नाते उन्होंने बाउंड्री बनाने के लिए कहा था।

नकली खाद, कीटनाशक फैक्ट्री पकड़ी, भारी मात्रा में माल बरामद

नकली खाद, कीटनाशक फैक्ट्री पकड़ी, भारी मात्रा में बना अधबना माल बरामद। मलिक समेत 3 गिरफ्तार। मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू। भारतीय किसान यूनियन का हंगामा।

बिजनौर। एसडीएम धामपुर व कृषि विभाग के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से नहटौर कस्बे के रहमत नगर में हाथी वाला मंदिर के पास अवैध/अनाधिकृत फैक्ट्री/गोदाम पर संयुक्त रूप से छापा डाला। इस दौरान भारी मात्रा में नकली/मिलावटी उर्वरक व कीटनाशक रसायन बरामद हुए हैं। दो लोगों को गिरफ्तार करने के साथ ही उक्त स्थान को सील कर संबंधित मालिक के भाई की सुपुर्दगी में दे दिया गया है। गोदाम में पाए गए उर्वरकों एवं कीटनाशक रसायनों के गुणवत्ता परीक्षण हेतु नियमानुसार नमूने ग्रहित किए गए हैं। थाना नहटौर में मुकदमा दर्ज कराया गया है।

गोपनीय सूचना पर हुई छापामार कार्रवाई- उप जिलाधिकारी धामपुर मनोज कुमार सिंह ने गोपनीय सूचना के आधार पर जिला कृषि अधिकारी, डॉ अवधेश मिश्र, जिला कृषि रक्षा अधिकारी मनोज रावत एवं कृषि विभाग के कार्मिकों, सहायक विकास अधिकारी कृषि रक्षा सत्य प्रकाश, प्रभारी राजकीय कृषि बीज भंडार सुभाष सिंह, कनिष्ठ सहायक रजत चौधरी एवं रचित सिंह, वाहन चालक भोपाल सिंह तथा पुलिस फोर्स के साथ नहतौर कस्बे के रहमत नगर में हाथी वाला मंदिर के पास अवैध/अनाधिकृत फैक्ट्री/गोदाम पर संयुक्त रूप से छापा डाला। छापे के दौरान गोदाम में दो श्रमिक फेरस सल्फेट की पैकिंग करते हुए पाए गए। गोदाम के निरीक्षण के समय गोदाम में एनपीके, एसएसपी, जिंक सल्फेट मोनोहाइड्रेट, सूक्ष्म पोषक तत्व मिश्रित उर्वरक, फेरस सल्फेट, म्यूरेट आफ पोटाश के 269 भरे हुए कट्टे, कारटॉप हाइड्रोक्लोराइड एवं फटेरा के 23 भरे हुए कट्टों के साथ-साथ नकली/मिलावटी उर्वरक तैयार करने हेतु कच्चे माल के रूप में जिप्सम, बायो ग्रेन्यूल्स, सागरिका, रेता, नमक, जिप्सम की काली व भूरी गोलियां के 1195 भरे हुए कट्टे, उर्वरक और कीटनाशक दवाइयों के प्रतिष्ठित विनिर्माता कंपनियों के 3995 खाली बैग्स, प्लास्टिक की 2500 बोतलें, कीटनाशक रसायनों के पैकिंग हेतु 500 गत्ते, वजन तोलने की इलेक्ट्रॉनिक मशीन, सिलाई मशीन, जनरेटर, धागे आदि पाए गए। गोदाम में पाए गए उर्वरकों एवं कीटनाशक रसायनों के गुणवत्ता परीक्षण हेतु नियमानुसार नमूने ग्रहित किए गए। छापे के दौरान गोदाम में उपस्थित दो श्रमिकों से पूछताछ करने पर अवगत कराया गया कि इस गोदाम के मालिक अनुराग जैन पुत्र अरुण कुमार जैन निवासी मोहल्ला गुली तालाब,नहटौर हैं और उन्हीं के द्वारा यह कार्य लंबे समय से किया जा रहा है। साथ ही गोदाम के निरीक्षण के समय उर्वरक व कीटनाशक रसायनों के विनिर्माण एवं भंडारण तथा व्यवसाय से संबंधित वैध लाइसेंस अथवा आवश्यक अभिलेख दिखाया अथवा प्रस्तुत नहीं किया जा सका।

नामी गिरामी कंपनियों का पैकिंग मैटीरियल बरामद- जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि निरीक्षण के दौरान गोदाम में पाए गए विभिन्न प्रकार के उर्वरक व कीटनाशक रसायनों तथा कच्चे माल व खाली बैग एवं पैकिंग हेतु आवश्यक सामग्रियों से स्पष्ट होता है कि इस अवैध/ अनाधिकृत रूप से संचालित गोदाम/फैक्टरी में नकली/मिलावटी उर्वरक व कीटनाशक रसायनों की पैकिंग की जाती है। छापे के दौरान फैक्ट्री में फेरस सल्फेट की पैकिंग करते हुए पकड़ा गया है। इस प्रकार उर्वरक नियंत्रण आदेश, कीटनाशक अधिनियम व कीटनाशक नियमावली की सुसंगत धाराओं के उल्लंघन करने एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के अंतर्गत दंडनीय अपराध किए जाने तथा विभिन्न प्रतिष्ठित निर्माता कंपनियों के कूट रचित बैग तैयार करने पर अवैध/अनाधिकृत गोदाम/फैक्ट्री के मालिक अनुराग जैन पुत्र अरुण कुमार जैन तथा गोदाम में पकड़े गए श्रमिकों क़ालीम पुत्र मुन्ने शाह एवं सरफराज पुत्र कॉलिंम के विरुद्ध थाना नहटौर में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। पकड़ी गई अवैध/अनाधिकृत गोदाम/ फैक्ट्री तथा अनुराग जैन द्वारा संचालित उर्वरक व कीटनाशक रसायन की दुकान को भी सील कर सील्ड गोदाम एवं प्रतिष्ठान को अनुराग जैन के सगे छोटे भाई अंकुर जैन की सुपुर्दगी एवं अभिरक्षा में दिया गया है। वहीं जिला कृषि अधिकारी अवधेश मिश्र ने बताया कि नकली खाद फैक्ट्री के संचालक अनुराग जैन सहित तीन लोगों को मौके से पकड़ा है। मौके से बरामद हुए सामान की सूची बनाकर पुलिस को तहरीर गई है। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही शुरू कर दी है। छापेमारी के दौरान कोतवाल राधेश्याम, शहर इंचार्ज बब्लू सिंह सहित बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स मौजूद रही।

भाकियू ने किया हंगामा- उधर नकली खाद की फैक्ट्री पकड़े जाने की भनक लगने पर भारतीय किसान यूनियन के ब्लॉक अध्यक्ष संजीव कुमार, विक्रम सिंह, कुलदीप राठी, युवा ब्लॉक अध्यक्ष रोहित राणा सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी मौके पर पहुँच गये तथा कुछ अधिकारियों की मिलिभगत से अवैध फैक्ट्री संचालित होने का आरोप लगाते जमकर नारेबाजी की। उन्होंने मामले की विस्तृत जांच कराने की मांग की।

श्रेय बटोरने के लिए अवनीश अवस्थी ने कराई राज्य सरकार की किरकिरी!

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह की राजनीतिक कर्मस्थली उरई चढ़ी अफसरशाही की भेंट।

उरई (जालौन)। प्रधानमंत्री द्वारा उदघाटन के 5 दिन बाद ही बुंदेलखंड एक्सप्रेस ₹-वे के क्षतिग्रस्त होने के वायरल वीडियो से राज्य सरकार की जो जबरदस्त किरकिरी हुई है। उसका ठीकरा यूपीडा के सीईओ अवनीश अवस्थी के सिर फोड़ा जा रहा है, जो अफसरशाही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नाक के बाल माने जाते हैं। खास बात यह भी है कि भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह की राजनीतिक कर्मस्थली भी है उरई।

विवादों से रहा है गहरा नाता- अवनीश अवस्थी शुरू से विवादों के केंद्र में रहे हैं. कोरोना काल में भी उन पर जम कर उंगलियां उठी थी पर जैसे-जैसे उनकी आलोचना बढ़ती गयी वैसे-वैसे उनके लिए मुख्यमंत्री का समर्थन गहराता गया. यहां तक कहा जाने लगा कि सत्ता संचालन के सारे सूत्र नेपथ्य में अवनीश अवस्थी के ही हाथ में कैद हो गए हैँ. केंद्र तक इसकी ख़बरें पहुंची पर मुख्यमंत्रीका उन पर भरोसा इसके वाबजूद नहीं डिगा.

उद्घाटन कराने की हड़बड़ी? बताया जाता है कि बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के लिए निर्धारित समय में 8 महीने का टाइम बकाया था पर अपनी सेवा निवृति के पहले इसका उदघाटन कराने के लिए उतावले अवनीश अवस्थी ने हड़बड़ी में इसकी आयोजना कर डाली, जिसका नतीजा सामने है।

आधे अधूरे बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे के कारण पहली बरसात में ही इसमें जालौन क्षेत्र में छिरिया सलेमपुर के पास दरार आ गयी, जिसके कारण दो कार और एक बाइक दुर्घटना की शिकार हो गयी। इससे राज्य सरकार की फ़जीहत हो रही है। इसके विपरीत प्रभाव प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी की छवि पर भी पड़ रहे हैं। विरोधी नेताओं ने नहीं भाजपा सांसद वरुण गांधी ने भी इसे ले कर सरकार को आड़े हाथों लिया है।

लीपापोती कर दूसरे पर टाला- उधर अवनीश अवस्थी हमेशा की तरह इसकी लीपापोती कर अपनी जवाबदेही दूसरे पर डालने की जुगत में जुट गए हैं। देखना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस बार फिर उनके झांसे को झटक पाते हैं या नहीं? इसी बीच यूपीडा के अभियंताओं ने क्षतिग्रस्त सडक और पुलिया की मरम्मत करा कर यातायात को सुचारु बना देने का दावा किया है।

साभार- केपी सिंह जालौन टाइम्स

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रहस्यमय परिस्थितियों में खुला  धामपुर के सील नर्सिंग होम का ताला!

आश्चर्यजनक रूप से खुल गया धामपुर का सील नर्सिंग होम। समाधान दिवस में शिकायत के बाद डीएम के आदेश पर एसडीएम व स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मारा था छापा। पांच नर्सिंग होम हुए थे सील। नोडल अधिकारी क्वेक्स का दावा, सीएमओ के निर्देश पर खुला ताला।

बिजनौर। धामपुर में पिछले महीने सील किये गए पांच नर्सिंग होम में से एक बुधवार को अप्रत्याशित और आश्चर्यजनक रूप से खुल गया! डीएम के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उक्त पांचों को सील किया था। उस दौरान कुछ नर्सिंग होम संचालक कार्रवाई के डर से फरार हो गए थे। वहीं पांच नर्सिंग होम सील कर दिए गए थे। इस मामले में नोडल अधिकारी का कहना है कि सीएमओ के आदेश के तहत सील खोली गई है। सीएमओ का पक्ष नहीं मिल सका।

गौरतलब है कि धामपुर में अवैध तौर पर कईं नर्सिंग-होम अस्पताल संचालित कर अनाधिकृत तौर पर ऑपरेशन तक करने की शिकायतें जिलाधिकारी उमेश मिश्रा को प्राप्त हुई थीं। समाधान दिवस में शिकायत में बताया गया कि इन अस्पतालों में से कईं में लापरवाही के कारण जच्चा-बच्चा की मौत भी हो चुकी है। नोडल अफसर क्वैक्स डा.देवीदास ने इन्हें नोटिस जारी कर चिकित्सा अभ्यास से संबंधित अभिलेखों समेत तलब किया था। बताया गया है कि आरोपियों में से कोई भी सीएमओ ऑफिस नहीं पहुंचा। इस पर जिलाधिकारी के निर्देश पर एसडीएम विजयवर्धन तोमर के नेतृत्व में नोडल अफसर डा. देवीदास ने अपनी टीम के राजकुमार सक्सेना, विजयपाल व पुलिस बल के साथ जून के पहले सप्ताह में छापेमारी की।

ये हुए थे सील- रेलवे क्रॉसिंग रोड स्थित अर्चना नर्सिंग होम, चन्दन हॉस्पिटल, रौनक नर्सिंग होम, परिधि नर्सिंग होम जैतरा, अदन नर्सिंग होम नगीना रोड धामपुर को कार्रवाई के तहत सील कर दिया गया था। इनके अलावा दो अन्य को नोटिस जारी किया गया।

CMO के आदेश पर खुली सील!- सीएमओ के आदेश के तहत रौनक नर्सिंग होम की सील खोली गई है। नोडल अधिकारी देवीदास ने दूरभाष पर यह दावा किया। सील खोलने का आधार क्या है, इसके जवाब में उन्होंने कहा कि नर्सिंग होम संचालक ने कागजात प्रस्तुत कर दिए होंगे, इसका पटल अलग होता है। अन्य जानकारी उन्हें नहीं है।

वन विभाग ही दे रहा कटान माफिया को संजीवनी!

बिजनौर। पर्यावरण की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी वन विभाग के कंधों पर है, उसी विभाग के अफसरों को उन पेड़ों की पहचान नहीं है। जिन्हें 10 साल का बच्चा भी पहचान ले। …या यह कहें कि वन माफियाओं को संरक्षण देने के लिए वन अफसर इन पेड़ों की पहचान नहीं करना चाहते। ऐसा ही नजारा उस समय देखने को मिला जब माफियाओं ने आम व शीशम के हरे-भरे पेड़ काट डाले। मामले ने तूल पकड़ा तो वन दरोगा को मौके पर भेजा गया लेकिन वहां कटे पड़े आम व शीशम के पेड़ों को यूकेलिप्टिस व सिम्बल के पेड़ बताकर माफियाओं को संजीवनी दी जाने लगी। अब देखने वाली बात होगी कि जिला स्तर के अधिकारी इन पेड़ों की पहचान कर पाते हैं या नहीं।


शेरकोट में थाने से चंद दूरी पर ईदगाह के निकट एक आम का बाग है। इसमें शीशम, जामुन आदि के पेड़ भी खड़े हैं।  बताया जाता है कि धामपुर निवासी एक माफिया ने आम के इस हरे भरे बाग पर आरी चलवा दी। सूत्रों का कहना है कि लगभग 50 आम व शीशम आदि के पेड़ों को काटा जा चुका है। इनमें से कुछ पेड़ तो ढो लिए लेकिन कई पेड़ अभी भी मौके पर ही पड़े हुए हैं। शुरूआत में तो वन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को इस बारे में कुछ पता नहीं चल सका या यह कहें कि जानकर अंजान बने रहे लेकिन जब मामले ने तूल पकड़ा तो वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। हालांकि तब तक पेड़ काटने व कटवाने वाले तो चंपत हो चुके थे लेकिन कटे हुए पेड़ मौके पर थे।

वन दरोगा का दावा आम व शीशम नहीं- वन विभाग इस मामले में माफियाओं पर क्या कठोर कार्यवाही करेगा, जब इस संबंध में रेंजर से बात की गई तो लोगों का वो अंदेशा बिल्कुल सच साबित होता दिखा, जिसमें यह कटान का कार्य माफियाओं और वन अफसरों की मिली भगत से होना जताया जा रहा था। रेंजर का दावा है कि मौके पर वन दरोगा लक्ष्मीचंद को भेजा गया था। उनके मुताबिक आम व शीशम नहीं बल्कि यूकेलिप्टिस और सिम्बल के पेड़ों को काटा गया है।

जिस जगह से आम व अन्य कई प्रजातियों के पेड़ काटे गए हैं, वह शमशान घाट की भूमि है। सरकारी भूमि से पेड़ काटने से पहले वन विभाग की ओर से मूल्यांकन कराया जाता है और उसके बाद नीलामी प्रक्रिया पूरी कर पेड़ काटे जाते हैं। इन पेड़ों को काटने से पहले ऐसा कुछ नहीं किया गया। सरकारी भूमि पर पेड़ काटने से पहले ऐसा कुछ नहीं किया गया जिस कारण यह कटान पूरी तरह अवैध है। अगर यह भूमि ग्राम पंचायत के अधीन आती है तो ग्राम प्रधान और अगर नगरीय क्षेत्र में आती है तो ईओ इस संबंध में एफआईआर दर्ज कराएंगे।
डा. अनिल कुमार पटेल
डीएफओ बिजनौर

गजब: बिना नौकरी किये ईओ ने निकाल लिया 6 माह का वेतन!

बिना नौकरी किये ईओ ने निकाला 6 माह का वेतन जिलाधिकारी को दिया गया शिकायती पत्र। नगर पंचायत झालू का मामला।

बिजनौर। बिना नौकरी किये छह महीने का वेतन निकालने का मामला प्रकाश में आया है। मामला नगर पंचायत झालू के अधिशासी अधिकारी का है। इस मामले में नगर निवासी एक व्यक्ति द्वारा जिलाधिकारी से शिकायत की गई है।

बताया गया है कि नगर पंचायत झालू के अधिशासी अधिकारी प्रेमचन्द पूर्व में जनपद रामपुर की नगर पंचायत शाहबाद में तैनात थे। इनका शासन द्वारा दिनांक 15 जुलाई 2021 को स्थानान्तरण जनपद बिजनौर की नगर पंचायत झालू में हो गया था। बताया गया है कि इनके द्वारा नगर पंचायत झालू में अपनी योगदान आख्या दिनांक 08 जनवरी 2022 को दी गयी। इस प्रकार 6 माह तक इनके द्वारा सर्विस नहीं की गयी। आरोप है कि वित्तीय वर्ष 2022 में नगर पंचायत झालू के अध्यक्ष शहजाद अहमद की सांठगाठ से अधिशासी अधिकारी प्रेमचन्द ने सर्विस से बाहर रहे 6 माह का वेतन नगर पंचायत झालू से आहरित कर लिया। इसी प्रकार पूर्व में तैनात अधिशासी अधिकारी धर्मदेव व अध्यक्ष शहजाद अहमद ने आपस में सांठगाठ कर तमाम फर्जी भुगतान निकाल लिए गए,जो आडिटर के द्वारा आपत्तियों में प्रदर्शित किये गए। आपत्तियों के निस्तारण अभी तक नहीं किए गए हैं। कस्बा झालू बिजनौर के मोहल्ला चौधरियान निवासी संजीव राणा पुत्र करन सिंह ने जिलाधिकारी को दिये शिकायती पत्र में अनुरोध किया है कि उपरोक्त घोर अनियमितता व शासकीय धनराशि के दुरूपयोग की जांच कराकर तत्काल प्रभावी कार्यवाही करें।

शहजाद अहमद अध्यक्ष नगर पंचायत झालू

वहीं अध्यक्ष शहजाद अहमद ने बताया कि यह बात सही है कि अधिशाषी अधिकारी ने छह माह बाद ड्यूटी जॉइन की थी, लेकिन वह मेडिकल लीव पर थे, लिहाजा उक्त अवधि के वेतन का आहरण नियम विरुद्ध नहीं है।

ठेकेदार ने हड़प लिया पंचायत घर का सरिया!

ठेकेदार ने हड़प लिया पंचायत घर का सरिया!

बिजनौर। ग्राम पंचायत अब्दुलपुर मुन्ना उर्फ हादरपुर पंचायत घर के मामले में ग्राम पंचायत सचिव मोहित कुमार ने ठेकेदार कासिम पर सरिया चोरी का आरोप लगाया है। थाना शहर कोतवाली में दी तहरीर में बताया कि नए भवन के निर्माण के लिए जीर्णशीर्ण पड़े पंचायत घर को तोड़ना जरूरी था। इसके लिये टिकोपुर निवासी ठेकेदार कासिम को कहा गया था, लेकिन उसकी नीयत में खोट आ गई।

वहीं बताया गया है कि इस मामले में ग्रामीणों, सचिव तथा राशन डीलर आदि के दबाव में आकर ठेकेदार कासिम ने चोरी किया हुआ सरिया हादरपुर में बने सरकारी स्कूल में रखवा दिया। राशन डीलर नरेंद्र कुमार का कहना है ठेकेदार कासिम के लोग सरिये को ठेले में भरकर कहीं ले जा रहे थे। पूछने पर बताया उक्त सरिया ठेकेदार ने मंगाया है। उस दौरान उनके साथ कई ग्रामीण भी मौजूद थे। इस मामले में ग्राम सचिव मोहित कुमार ने थाना कोतवाली शहर पुलिस को तहरीर भी दी है। दूसरी ओर ग्राम प्रधान ने मामले की जानकारी होने से इंकार किया है।

विकास कार्यों में धांधली पर दो पंचायत सचिव निलंबित

विकास कार्यों में धांधली पर दो पंचायत सचिव निलंबित
बिजनौर (रोहित चौधरी)। ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधानों व पंचायत सचिवों के भ्रष्टाचार की पोल दिन-प्रतिदिन खुलती ही जा रही है। ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव अपनी तिजोरी भरने के चक्कर में विकास कार्यों के लिए शासन से आई रकम को डकारने में लगे हुए हैं। निरीक्षण के दौरान कई बार ग्राम प्रधानों व पंचायत सचिवों पर गाज भी गिर चुकी है।


ताजा मामला हल्दौर विकास खंड की ग्राम पंचायत मुकरंदपुर व बल्दिया का है। डीपीआरओ ने विकास कार्यों में घोर अनियमितताएं बरते जाने पर मुकरंदपुर के पंचायत सचिव विनीत कुमार को निलंबित कर दिया, तो वहीं ग्राम प्रधान के अधिकार सीज करने की बात कही गई है। इसके अलावा डीपीआरओ सतीश कुमार को हल्दौर विकास खंड की ग्राम पंचायत बल्दिया में भी ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव द्वारा विकास कार्यों में धांधली मिली। इसे लेकर उन्होंने ग्राम प्रधान के अधिकार सीज कर दिए एवं पंचायत सचिव को निलंबित कर दिया। डीपीआरओ ने बताया कि लापरवाही किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आगे भी निरीक्षण का दौर जारी रहेगा। डीपीआरओ की इस कार्यवाही से ग्रामीणों में खुशी देखने को मिली है।

भ्रष्टाचार में पूरी तरह डूबे हैं ग्राम पंचायत सचिव-
सूत्रों की मानें तो जनपद में कई ग्राम प्रधान व कई ग्राम पंचायत सचिव भ्रष्टाचार में पूरी तरह डूबे हैं। विकास कार्यों में कमीशन लेना तो मानों उनके बाएं हाथ का काम हो। बताया तो यहां तक जाता है कि बिना कमीशन के वह किसी ठेकेदार को कोई काम नहीं देते हैं।

दबंग दंपत्ति ने फ़िल्म में काम करवाने के नाम पर हड़पे ₹2 लाख

-फर्जी केस लगवा कर भिजवा दिया जेल।
-पुलिस प्रशासन के अधिकारियों से तमाम शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई। -जानलेवा हमला कर कई दिन तक बनाए रहे बंधक

बिजनौर। एक दंपत्ति ने दबंग व्यक्ति पर उसके पुत्र को झूठा फंसाने का आरोप लगाया है। इस मामले में डीएम को प्रार्थना पत्र दिया गया है।

हीमपुरदीपा के गांव सिकंदरी निवासी गिरवर सिंह पुत्र विजयपाल सिंह ने आरोप लगाया कि उसका पुत्र यूट्यूबर है, जिसका जिले में काफी नाम है। उन्होंने बताया कि घेर रामबाग निवासी कथित रूप से दबंग व अपराधी प्रवृत्ति के पति – पत्नी ने उनके पुत्र से मुंबई में फिल्म में काम दिलाने के नाम पर दो लाख रुपए लिए। काम न होने पर उनके पुत्र ने अपने दो लाख रुपए वापस मांगे। इसके चलते उन्होंने उसके पुत्र पर जानलेवा हमला किया और कई दिनों तक बंधक बनाकर रखा। इसके बाद आरोपितों ने उसके पुत्र को युवती से छेड़छाड़ व एससी-एसटी के झूठे मुकदमे में फंसाकर जेल भिजवा  दिया। इस पूरे मामले में एक दरोगा भी उनके साथ हमसाज थे। उन्होंने डीआईजी मुरादाबाद को भी शिकायत भेज कर इंसाफ की गुहार लगाई थी।

फिल्म बनाने का ख्याल भी छोड़ दे- आरोप है कि पूछने पर आरोपी ने कहा कि मैने तेरे लड़के को समझाया था कि किसी को कुछ मत बताना व रुपए वापिस मत मांगना और फिल्म बनाने का ख्याल भी छोड़ दे, लेकिन तुम दोनों बाप बेटे की समझ मे मेरी बात नहीं आयी, जब जीवन भर तेरा लड़का जेल में रहेगा। एल०बी० यू-ट्यूब चैनल चलाकर ऑफिस खोलकर हमारे काम को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा था। तुम दोनों बाप बेटे का काम ही खत्म कर दिया है। यह भी आरोप है कि उक्त अभियुक्तगण का बहुत बड़ा गैंग है।

पुलिस प्रशासन से शिकायत पड़ी हैं पैंडिंग में- पीड़ित कई बार थाने गया तथा अन्य अधिकारियों से भी शिकायत कर चुका है। प्रार्थी इस सम्बन्ध में दिनांक 10.08.2021 व 19.05.2022 को जनता दरवार में तथा दिनांक 08.10.2021 को डाक रजिस्ट्री के माध्यम से डीएम के समक्ष प्रार्थना पत्र दे चुका है। वहीं 09.06.2021 को डी०आई०जी० मुरादाबाद के समक्ष प्रस्तुत होकर प्रार्थना पत्र दिया। इसके अलावा 08.10.2021 व 26.05.2022 को डाक रजिस्ट्री के माध्यम से दिया तथा एक प्रार्थना पत्र मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली को दि. 26. 04.2022 को दिया। प्रार्थना पत्रों पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गयी है। जिलाधिकारी को ज्ञापन देने वालों में हिन्द मजदूर किसान मोर्चा के राजेश, अमर पाल, अग्र्राज, रवेन्द्र, सपना, ज्यपाल, विपिन आदि शामिल रहे।

CM योगी की मंशा को हैरतअंगेज तरीके से पलीता लगाते ADO, VDO

रिपोर्ट-नरपाल सिंह

गांव नहीं अपने विकास में जुटे सेक्रेट्री!

2. संपत्ति की हो जाए जांच तो धनकुबेरों के पैरों तले की जमीन जाएगी खिसक।

3. आलीशान बंगलों जमीन जायदाद के हैं मालिक।

4. पेट्रोल पंप तक के मालिक हैं गांवों के खेवनहार।

सत्ता के गठजोड़ से चलता रहता है पूरा मामला।

फर्जी बिल, बैक डेट के विज्ञापन ही नहीं बैंकों तक मे खुलवा लिए फर्जी खाते।

अखबारों के असली मालिक तक होंगे अनजान।

8. प्रधान बेचने लगे घर से निर्माण सामग्री।

9. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती के बावजूद मोटी चमड़ी वालों की ही चलती मर्जी।

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की ताजा रिपोर्ट “ग्लोबल करप्शन बैरोमीटर फॉर एशिया’ के अनुसार भ्रष्टाचार के मामले में भारत अब एशिया में शीर्ष पर है। इस रिपोर्ट के अनुसार करीब 50 फीसदी लोगों को अपना काम निकलवाने के लिए रिश्वत देनी पड़ी। इनमें से 63 फीसदी ने इस डर से कोई शिकायत भी नहीं की क्योंकि इससे उन्हें कहीं बाद में कोई परेशान ना करे। इस रिपोर्ट के अनुसार करीब आधी आबादी अपने संपर्कों या जुगाड़ से काम निकलवाने में भरोसा रखती है। यह भी एक तरह का भ्रष्टाचार ही है और इससे सिस्टम में भ्रष्टाचार को ही बढ़ावा मिलता है। भ्रष्टाचार के मामले में भारत और चीन की स्थिति बराबर की रही है, लेकिन जहां चीन ने अपनी रैंकिंग में सुधार किया है, वहीं पिछले साल की तुलना में भारत की स्थिति और भी बदतर हुई है।

ताकतवर ही सबसे भ्रष्ट …! हमारे यहां सबसे शक्तिशाली समूह राजनीतिज्ञों का है। भ्रष्टाचार जैसी बीमारी को दूर करने का काम केवल राजनैतिक इच्छाशक्ति से ही हो सकता है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर हमारा राजनीतिक सिस्टम इसमें पहल क्यों नहीं करता? इसका जवाब इन आंकड़ों में है : हमारे यहां दागी सांसदों की संख्या जहां 2004 में 43 प्रतिशत थी, वहीं यह 2019 में बढ़कर 43 फीसदी हो गई। इनमें भी सबसे ज्यादा संख्या सत्ताधारी पार्टी में है। इसी दरमियान बिहार में हुए चुनाव में दागी विधायकों की संख्या में 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। 2015 में जहां चुने हुए विधायकों में से 58 फीसदी पर आपराधिक मामले दर्ज थे, वहीं 2020 में यह संख्या बढ़कर 68 फीसदी हो गई। हमारे जनप्रतिनिधियों के दागी होने का मतलब यही है कि जब उनका दामन साफ नहीं होगा तो वे भ्रष्टाचार को दूर करने का प्रयास क्यों करेंगे, क्योंकि व्यवस्था में भ्रष्टाचार ही इन्हें अपने कारनामों को ढंकने में मदद करता है।

तो नागरिक क्या कर सकते हैं? “ग्लोबल करप्शन बैरोमीटर’ रिपोर्ट कहती हैं कि हमारे यहां 46 फीसदी लोगों ने अपने संपर्कों के जरिए अपने काम करवाए। इनमें से अधिकांश काम छोटे-बड़े नेताओं के जरिए ही करवाए जाते हैं। अगर ये नेता मदद नहीं करते तो उस काम के लिए उन्हें रिश्वत देनी पड़ती। यानी यहां लोगों को यह समझने की जरूरत है कि राजनीतिज्ञ इतने शक्तिशाली हैं कि अगर वे चाहें तो वे पूरे सिस्टम को बदल सकते हैं। अब यह आम नागरिकों की जिम्मेदारी है कि वे नेता ही ऐसे चुनेें जिनकी ईमानदारी और निष्ठा तमाम सवालों से परे हो। अगर राजनीति ईमानदार होगी तो नौकरशाही को अपने आप ईमानदार होना होगा। शीर्ष नौकरशाह जब ईमानदार होंगे तो निचले स्तर पर कार्य करने वाले कर्मचारी भ्रष्टाचार करने का साहस नहीं कर पाएंगे। जब नेता ईमानदार होगा, अफसर ईमानदार होंगे, कर्मचारी ईमानदार होंगे तो आम लोगों में भी वे लोग जो अपने गलत काम भी पैसे देकर या जुगाड़ से करवा लेते हैं, उनके लिए यह सबकुछ इतना आसान नहीं रह जाएगा।

लेकिन यह होगा कैसे? जनता ईमानदार नेता चुनें, यह कहना आसान है, लेकिन करना मुश्किल। इसके लिए हमें कुछ बुनियादी बदलाव करने होंगे। इलेक्टोरल बॉड्स को बंद करके राजनीतिक दलों को होने वाली फंडिंग में पारदर्शिता लानी होगी। आपराधिक रिकॉर्ड वाले लागों को चुनाव का टिकट देने पर रोक लगानी होगी और किसी दागी को टिकट देने पर संबंधित राजनीतिक दल के मुखिया को जिम्मेदार ठहराना होगा। इसके लिए सिविल सोसाइटी का दबाव बनाना होगा और जब भी जरूरत हो, कोर्ट का दरवाजा खटखटाने से भी नहीं पीछे नहीं रहना होगा। इसके लिए मीडिया को भी अहम भूमिका निभानी होगी।

कहां है समस्या? – कुछ साल पहले एक जाने-माने राजनेता ने कहा था कि चुनावी फंडिंग ही भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी गंगोत्री है। इससे निबटने के लिए सरकार इलेक्टोरल बॉन्ड्स लेकर आई, लेकिन इसने तो चुनावी फंडिंग को और भी अस्पष्ट और अपारदर्शी बना दिया है। दरअसल, हमारे राजनीतिज्ञ राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता बिल्कुल नहीं चाहते। यह बात कुछ कारपोरेट्स हाउसेस को भी रास आती है, क्योंकि इससे वे बड़ी आसानी से राजनीतिक दलों को पैसा दे देते हैं और चुनावों के बाद सरकार से बेजा फायदा उठाते हैं। – भ्रष्टाचार से निबटने के लिए हमें प्रभावी सीबीआई, सीवीसी और एंटी करप्शन ब्यूरो चाहिए। …लेकिन इन सभी विभागों का मूल संगठन यानी पुलिस के बारे में आम धारणा यही है कि यह सबसे भ्रष्ट विभाग है। इसलिए हम पुलिस से और प्रकारांतर में इन तमाम संगठनों से यह उम्मीद नहीं कर सकते कि ये भ्रष्टाचार को मिटाने में कारगर रहेंगे, जब तक कि इनके पीछे राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं होगी। – सरकारी सेवकों को भी जवाबदेह नहीं बनाया गया है। सरकारी शिक्षक स्कूल नहीं जाते हैं या जाते हैं तो पढ़ाते नहीं। डॉक्टर सरकारी हास्पिटल या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं जाते। अस्पतालों में दवाइयां नहीं मिलती। सड़के, जलापूर्ति, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं की स्थिति अक्सर खराब मिलती है। और दुर्भाग्य से किसी को भी खराब काम करने या जिम्मेदारी न निभाने पर नौकरी से नहीं निकाला जाता। समस्या यह है कि अच्छा काम करने वाले को पुरस्कार भी नहीं मिलता। तो अच्छा काम करने की प्रेरणा भी नहीं मिलती।

केरल और बिहार के सबक … एक रिपोर्ट के अनुसर केरल में केवल 10 फीसदी नागरिकों को अपने काम करवाने के लिए रिश्वत देनी पड़ी, जबकि बिहार में 75 फीसदी लोगों को। आखिर ऐसा क्यों है, इसको लेकर तो व्यापक अध्ययन की जरूरत है, लेकिन इसमें कहीं न कहीं शिक्षा और साक्षरता का योगदान तो नजर आता ही है। केरल भारत का सबसे साक्षर प्रदेश है, जबकि बिहार का नाम साक्षरता के मामले में नीचे से शीर्ष के राज्यों में शुमार होता है। त्रिलोचन शास्त्री

(लेखक आईआईएम बैंगलोर में प्रोफेसर हैं। एडीआर – एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के फाउंडर चेयरमैन भी रहे हैं।)

गांव नहीं अपने विकास में जुटे सेक्रेट्री! संपत्ति की हो जाए जांच तो धनकुबेरों के पैरों तले की खिसक जाएगी जमीन

गांव नहीं अपने विकास में जुटे सेक्रेट्री! संपत्ति की हो जाए जांच तो धनकुबेरों के पैरों तले की जमीन जाएगी खिसक। आलीशान बंगलों जमीन जायदाद के हैं मालिक। सत्ता के गठजोड़ से चलता रहता है पूरा मामला। पेट्रोल पंप तक के मालिक हैं गांवों के खेवनहार। फर्जी बिल, बैक डेट के विज्ञापन ही नहीं बैंकों तक मे खुलवा लिए फर्जी खाते। अखबारों के असली मालिक तक होंगे अनजान। प्रधान बेचने लगे घर से निर्माण सामग्री।

बिजनौर (रोहित चौधरी)। जिले में ग्राम पंचायतों का विकास कार्यों को लेकर बुरा हाल है। पंचायतों को शासन से विकास कार्यों के लिए करोड़ों रुपये मिले। ..लेकिन अधिकारी जमीनी हकीकत देखकर हैरान हैं। अधिकारियों को निरीक्षण में गड़बड़ी मिली। इस मामले में कोतवाली ब्लॉक के चार ग्राम विकास अधिकारी निलंबित किए जा चुके हैं। ग्राम विकास अधिकारियों पर ड्यूटी से नदारद रहने व विकास कार्यों के क्रियान्वयन में गड़बड़ी के आरोप रहे।


जिले में 11 ब्लॉक हैं, इनमें कोतवाली ब्लॉक सबसे अधिक क्षेत्रफल वाला ब्लॉक है। इसमें सबसे अधिक 149 ग्राम पंचायत हैं। प्रशासन को कोतवाली ब्लॉक की पंचायतों में अनियमितताओं की सबसे अधिक शिकायत मिल रही थी। उपनिदेशक पंचायत व डीपीआरओ ने कोतवाली ब्लॉक की पंचायतों का निरीक्षण किया, जहां बड़े पैमाने पर गड़बड़ी मिली। पंचायत सचिव ड्यूटी से नदारद थे। गली मोहल्लों में कूड़े के ढेर मिले। सड़कों व रास्तों में गंदगी फैली थी। दूषित पानी से संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका जताई गई। पानी निकासी के नाले व नाली गंदगी से अटे मिले। सचिवालय में कामकाज ठप मिला। सामुदायिक शौचालय में ताले लटके मिले। प्रधानों द्वारा शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं के क्रियान्वयन में दिलचस्पी नहीं लेने के आरोप लगे। इस बिना पर कोतवाली ब्लॉक के चार पंचायत सचिवों को निलंबित किया गया। गांवों में ये हुए हैं विकास कार्य
ग्राम पंचायतों में पंचायत घरों का जीर्णोद्धार हुआ। जहां पंचायत घर नहीं थे वहां नए पंचायत घर बने। सामुदायिक शौचालयों का निर्माण हुआ। मुख्यमंत्री की ग्राम सचिवालय मॉडल योजना में सचिवालय बने। बरसाती व घरेलू पानी की निकासी के लिए नाले व नाली बने। सीसी रोड बनीं। अंत्येष्टि स्थल बने। उपनिदेशक पंचायत पंचायतों के निरीक्षण में यह देखकर हैरान रह गए कि पंचायतों को विकास कार्यों के लिए करोड़ों की धनराशि आवंटित होने के बाद भी जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट है। निर्माण आधे अधूरे पड़े हैं। ग्रामीणों ने उपनिदेशक व डीपीआरओ के समक्ष आरोप लगाए कि सफाई कर्मचारी प्रधानों का निजी काम करते हैं। सफाई के लिए कहने पर बदसलूकी करते हैं। सचिव उनकी बात नहीं सुनते।ये ग्राम विकास अधिकारी हुए निलंबित
जिला विकास अधिकारी एस कृष्णा के अनुसार निरीक्षण आख्या के आधार पर ग्राम पंचायत खुर्रमपुर खड़क की ग्राम विकास अधिकारी/ सचिव प्रियंका राजपूत, ग्राम पंचायत कनकपुर व फाजलपुर भारु में तैनात ग्राम विकास अधिकारी/ सचिव काकेंद्र कुमार सिंह, ग्राम पंचायत नूर अलीपुर भगवंत के ग्राम विकास अधिकारी/सचिव कमलकांत पाल, तथा ग्राम पंचायत महमूदपुर भांवता में नियुक्त ग्राम विकास अधिकारी/सचिव नंदराम सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में प्रियंका राजपूत व काकेंद्र कुमार सिंह, ब्लॉक नहटौर, नंदराम सिंह ब्लॉक अफजलगढ़, कमलकांत पाल ब्लॉक नजीबाबाद से संबद्ध रहेंगे। सभी निलंबित ग्राम विकास अधिकारियों की आगे की जांच सक्षम अधिकारियों को सौंपी गई। जांच अधिकारी को एक माह में आरोप पत्र जिला विकास अधिकारी को सौंपना है।

अब तक एक दर्जन से अधिक कर्मचारी हुए निलंबित
डीएम उमेश मिश्रा के निर्देश पर पंचायतों की जमीनी हकीकत परखी जा रही है। पंचायतीराज विभाग के जिला व मंडल अधिकारी लगातार पंचायतों में विकास कार्य का निरीक्षण कर रहे हैं। जांच में खूब अनियमितता सामने आ रही हैं। डीपीआरओ सतीश कुमार के अनुसार अब तक एक दर्जन से अधिक पंचायत सचिव व सफाई कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई हुई है। आठ सचिव के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू हुई है। शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं में रुचि नहीं लेने पर ग्राम प्रधानों को कारण बताओ नोटिस भेजे गए हैं।

दी गई प्रतिकूल प्रविष्टि, रोकी वेतनवृद्धि
कोतवाली ब्लॉक में एक और ग्राम विकास अधिकारी/ पंचायत सचिव की अनियमितताओं के आरोप में प्रतिकूल प्रविष्टि देने के साथ वेतन वृद्धि रोक दी है। जिला विकास अधिकारी एस कृष्णा ने बताया कि कोतवाली ब्लॉक की ग्राम पंचायत उमरपुर बरखेड़ा में तैनात रहे ग्राम विकास अधिकारी/ पंचायत सचिव विवेक देशवाल को उपनिदेशक की जांच में अनियमितता मिलने पर प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है। साथ ही एक वार्षिक वेतन वृद्धि रोकी है। डीडीओ के मुताबिक पंचायत में पंचायत घर का निर्माण दिसंबर 2021 से शुरू हुआ। जांच में अधूरा मिला। इसी तरह की अन्य अनियमितताएं मिली हैं।

कागजों में कट गया बिजली कनेक्शन, फिर भी चार साल से चल रहे 2 नलकूप

बिजनौर। बिजली विभाग के भी खेल निराले हैं। बिजली चोरी जैसे मामले तो आम बात हो गई है; जालसाजी के तो ऐसे-ऐसे मामले भरे पड़े हैं जो पता चल जाएं तो सिर घूम जाए। ऐसा ही एक मामला है जो विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत, लापरवाही और अकर्मण्यता की पोल खोलता है।

दअरसल दो भाइयों ने 7.5 हॉर्स पावर के दो अलग निजी नलकूप फर्जी तरीके से लगवा लिए। जिस गांव की जमीन के कागजात के आधार पर कनेक्शन स्वीकृत हुए, नलकूप वहां न लगवा कर दूसरे गांव में, वो भी दूसरे की जमीन पर लगा लिए। एक साल बाद शिकायत हुई तो जांच के आदेश कछुआ चाल से चलते रहे। चार साल पहले दोनों नलकूपों के कनेक्शन काटे गए, लेकिन सिर्फ कागजों पर! दोनों ही कनेक्शन आज भी बदस्तूर धड़ल्ले से चल रहे हैं। विभागीय आदेश के अनुपालन में सामान विभागीय भंडार गृह में जमा नहीं कराया गया। इनके द्वारा खपत की जा रही बिजली के बिल की भरपाई कौन करेगा? मामले की शिकायत तहसील दिवस में की गई है।

जानकारी के अनुसार 04 दिसंबर 2017 को ग्राम सदूपुरा निवासी सेवानिवृत्त पोस्ट मास्टर सोमदत्त ने पुलिस अधीक्षक से लिखित शिकायत करते हुए बताया कि ग्राम फरीदपुर सल्लू स्थित 100 बीघा जमीन में से 48 बीघा का बैनामा कराया था। दाखिल खारिज की कार्रवाई के दौरान रफीक अहमद पुत्र अब्दुल हमीद, नफीस अहमद पुत्रगण अब्दुल हमीद अहमद निवासी ग्राम सद्पुरा ने एतराज किया, जिसका मुकदमा रेवन्यु बोर्ड तक चला। हालांकि बाद में दाखिल खारिज भी हो गया। सेवानिवृत्त पोस्ट मास्टर सोमदत्त की शिकायत के अनुसार उक्त दोनों लोगों ने बिजली स्वीकृत कराई ग्राम सदुपुरा की जमीन के लिए जबकि जिस जमीन पर प्रार्थी के बोरिंग में नलकूप लगाया, वह फरीदपुर सल्लु में है। इस प्रकार रफीक अहमद व नफीस अहमद ने जालसाजी, हेराफेरी व झूठा शपथ पत्र देकर बिजली कनेक्शन लगवा लिया ताकि प्रार्थी की जमीन पर मालिकाना हक जाहिर कर सके। सरकारी विभागों में प्रार्थना पत्र घूमता रहा। फिर 03 फरवरी 2018 को उपखंड अधिकारी विद्युत वितरण उपखण्ड द्वितीय बिजनौर जसवीर सिंह ने 33/11 केवी उपकेंद्र गंज के अवर अभियंता बहराम सिंह को उक्त दोनों कनेक्शन गलत स्थान पर संचालित होने की जानकारी देते हुए अविलंब उतारने और अवगत कराने के निर्देश दिए।

इसके बाद विद्युत वितरण खण्ड बिजनौर के अधिशासी अभियन्ता किताब सिंह ने 09 अप्रैल 2018 को निजी नलकूप संख्या 225/5027/130124 के लिए रफीक अहमद व निजी नलकूप संख्या 225/5027/130125 के लिए नफीस अहमद पुत्रगण हमीद निवासी ग्राम सदूपुरा बिजनौर को नोटिस जारी किया। इसमें कहा गया कि उनके द्वारा दिनांक 15 जुलाई 2016 को सामान्य योजना के अन्तर्गत 7.5 हॉर्स पावर के उक्त दो निजी नलकूप हेतु अनुबन्ध किया गया था। शिकायत प्राप्त होने पर जांच में पाया गया कि उनके द्वारा फर्द ग्राम सदुपुरा की लगायी गयी है जबकि निजी नलकूप ग्राम फरीदपुर सल्लू में स्थापित किए गए हैं। इससे स्पष्ट होता है कि उनके द्वारा विभाग को गुमराह करके संयोजन प्राप्त किया गया है। यह भी कहा कि पत्र प्राप्ति के 03 दिन के अन्दर स्पष्ट करें कि उनके द्वारा गलत फर्द क्यों लगायी गयी हैं,अन्यथा उनके विरूद्ध कानूनी कार्यवाही करते हुए संयोजन निरस्त कर दिया जायेगा।

वहीं 17 मई 2018 को अधिशासी अभियंता ब्रह्मपाल ने उक्त दोनों कनेक्शन काटने के संबंध में कार्यालय से पत्र जारी किया। उपखंड अधिकारी विद्युत वितरण उपखण्ड द्वितीय बिजनौर को उक्त दोनों कनेक्शन काटने और नलकूप की समस्त सामग्री उतारकर विभागीय भंडार गृह में जमा कराने के निर्देश दिए। उन्होंने अधीक्षण अभियंता विद्युत वितरण मंडल बिजनौर के साथ ही उक्त दोनों कनेक्शन धारकों को भी इसकी एक प्रति सूचनार्थ भेजी। अब किसी प्रकार दोनों नलकूपों के कनेक्शन कट तो गए, लेकिन सिर्फ कागजों पर! असलियत में दोनों ही कनेक्शन आज तक बदस्तूर धड़ल्ले से चल रहे हैं। आज तक अधिशासी अभियंता ब्रह्मपाल के आदेश के अनुपालन में सामान विभागीय भंडार गृह में जमा नहीं कराया गया। एक बात और विचारणीय है कि तकरीबन चार साल से जिन दो निजी नलकूप का कनेक्शन कथित रूप से कटा हुआ है, उनके द्वारा खपत की गई बिजली के बिल का भुगतान कौन, किस से और कब करेगा? 

दोनों ही भाइयों के खिलाफ दर्ज हैं कई केस– दरअसल उक्त दोनों ही भाई शातिर किस्म के हैं। उनके खिलाफ वर्ष 1987 से लेकर 2019 तक कई थानों में मुकदमे दर्ज हैं। इनमें हत्या, जान से मारने की धमकी, फ्राड आदि के थाना शहर कोतवाली में आठ व थाना स्योहारा में एक मुकदमा शामिल है।

बहुत ही गंभीर मामला है। वह अधिशासी अभियंता को इस मामले में यथोचित कार्रवाई के लिये निर्देशित कर रहे हैं। यदि  इतने वर्ष से अवैध रूप से दोनों कनेक्शन संचालित हो रहे हैं तो इसमें संलिप्त विभागीय अधिकारी, कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच व कार्रवाई की जाएगी। शासकीय धन की वसूली के लिए भी कठोर कार्रवाई की जाएगी। –नंदलाल, अधीक्षण अभियंता।

डिप्टी सीएम ने छापा मारकर पकड़ीं साढ़े 16 करोड़ की एक्सपायरी दवाएं

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के अस्पतालों में ताबड़तोड़ औचक निरीक्षण के क्रम में शुक्रवार को डिप्टी सीएम डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने मेडिसिन सप्लाई कार्पोरेशन के गोदाम पर छापा मारा। इस दौरान लगभग साढ़े 16 करोड़ रुपए की एक्सपायरी दवाईंयां मिलीं। इस पर उन्होंने फटकार लगाते हुए तीन दिन के अंदर संबंधित से रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।

गौरतलब है कि डिप्टी सीएम डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक प्रदेश के अस्पतालों में औचक निरीक्षण कर रहे हैं। अस्पतालों में मिल रही अव्यवस्थाओं पर वो जिम्मेदारों को फटकार लगा रहे हैं। इसके साथ ही व्यवस्थाओं को दुरूस्त करने के निर्देश दे रहे हैं।

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने ट्वीट कर कहा है कि, ‘उत्तर प्रदेश मेडिसिन सप्लाई कार्पोरेशन, गोदाम पहुंचकर वहां मानक अनुरूप दवाइयों की उपलब्धता व सप्लाई रिपोर्ट का औचक निरीक्षण कर प्रथम दृष्टया 16,40,33,033 रुपये की एक्सपायरी दवाएं पाई गईं। इसकी जांच हेतु समिति को जांच रिपोर्ट 3 दिनों में प्रस्तुत करने संबंधी आदेश दे दिए गए हैं।’

विदित हो कि, इससे पहले लोहिया अस्पताल में डिप्टी सीएम ने छापेमारी की थी, जहां पर लाखों रुपये की एक्सपायरी डेट की दवाईंया मिलीं थीं, जिसमें उन्होंने सख्त कार्रवाई के आदेश दिए थे।

दो बोतल दारू क्यों नहीं चढ़ी, गृह मंत्री से शिकायत

Viral News: दो बोतल शराब पीने के बाद भी जब नहीं चढ़ा नशा, गृह मंत्री को भेजी शिकायत

पीड़ित शख्स ने बताया कि दो बोतल शराब पीने के बाद भी उसको नशा नहीं हुआ। इस बात से वो नाराज था। वह चाहता है कि ऐसी धोखाधड़ी किसी और कस्टमर के साथ नहीं हो।

उज्जैन। एक तरफ शिवराज सिंह चौहान की सरकार मिलावटखोरी के खिलाफ माफिया पर बुलडोजर चलाने जैसी कड़ी कार्रवाई कर रही है तो वहीं अब मध्य प्रदेश में शराब में मिलावट की बात भी सामने आई है। दरअसल मध्य प्रदेश के उज्जैन में एक शराबी ने राज्य के गृह मंत्री को शिकायत भेजी है। वह सबूत के तौर पर आबकारी थाने में शराब की दो बोतलें लेकर भी पहुंचा।

हैरान रह गए आबकारी अधिकारी

लोकेंद्र सेठिया को आबकारी थाने में देख आबकारी अधिकारी भी हैरान रह गए। बाद में अधिकारी ने उन्हें उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। पीड़ित ने बताया कि उसने 2 बोतल शराब पी लेकिन, फिर भी उसको नशा नहीं हुआ। उसने कहा कि ये शराब कैसी है, नशा नहीं हो रहा है? ठेकेदार पानी मिलाकर दे रहे हैं; ठेकेदारों पर कार्रवाई करो।

शराबी ने की ये मांग

दरअसल, लोकेंद्र सेठिया 12 अप्रैल को देशी शराब की दो बोतल पीने के बाद आबकारी विभाग में शिकायत करने पहुंचे थे। उसने शिकायत की थी कि इसमें नशा नहीं है, इसमें तो पानी मिला हुआ है। वह सबूत के तौर पर शराब की दो बोतलें लेकर भी पहुंचा था। उसने कहा कि यकीन नहीं हो तो शराब की जांच कर लें। ठेकेदार की तरफ से की गई इस धोखाधड़ी को संज्ञान में लेकर कार्रवाई करो।

साभार – राहुल सिंह राठौड़: जी न्यूज़ डेस्क

शिकायत से ख़फ़ा डीलर ने बंद किया गरीबों का राशन

बिजनौर। राशन डीलर द्वारा तय मात्रा से कम मात्रा में राशन देने के सम्बन्ध में उपजिलाधिकारी चान्दपुर से शिकायत करना गरीब उपभोक्ताओं को भारी पड़ा है। नाराज डीलर ने उनके कार्ड निरस्त कराने की धमकी देते हुए राशन देना बंद कर दिया है। अब मामला जिलाधिकारी के दरबार में पहुंच गया है।

मामला ग्राम महबुल्लापुर ढाकी वि०ख० जलीलपुर जिला बिजनौर का है। यहां के रहने वाले तथा सरकार द्वारा पात्र राशन प्राप्तकर्ता उपभोक्ता राशन डीलर की मनमानी का शिकार हो कर रह गए हैं। आरोप है कि गांव का अधिकृत राशन डीलर यकील अहमद सभी ग्रामवासियों को तय मात्रा से कम मात्रा में राशन देता है। यही नहीं जितना देता है वो भी तौले गये राशन से कम निकलता है। भुक्तभोगियों ने जब उक्त राशन डीलर से ऐसा करने से मना किया तो वह आगबबूला हो कर गाली गलौज व धमकाते हुए कहने लगा, लेना हो तो लो वरना राशनकार्ड ही निरस्त करा दूंगा।

ऊपर तक पहुंचाता हूं पैसा!- पीड़ितों का कहना है कि जब उन्होंने कहा कि उन्हें तो सरकार द्वारा तय राशन ही चाहिए तो उसने कहा जो तुम से हो कर लेना, मेरी पहुंच ऊपर तक है। सब को पैसे पहुंचाता हूं, मेरा किसी से कुछ नहीं होने वाला है। इस सम्बन्ध में दिनांक  25.02.2022 को एक पत्र उपजिलाधिकारी चान्दपुर को दिया गया। उन्होंने जांच करने हेतु कुछ कर्मचारी गांव में भेजे। उन कर्मचारियों ने कहा कि पूरे गांव से लिखवा कर दो; 5-10 आदमियों की शिकायत पर कोई कार्यवाही नहीं होगी। आरोप यह भी है कि जांच करने पहुंचे कर्मचारी राशन डीलर के घर में आधा घंटे तक बैठे रहे और उस से हमसाज होकर कोई कार्यवाही नहीं की।

…और करो मेरी शिकायत- जब इस शिकायत का पता राशन डीलर को लगा तो उसने शिकायतकर्ताओं को राशन देने से मना कर दिया और कहा कि और करो मेरी शिकायत,  तुम मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते, जांच कर्मचारियों को भी सैट कर दिया है। इसके बाद आज तक उक्त राशन डीलर ने राशन देने से मना कर दिया और धमकाया कि वह राशनकार्ड निरस्त करवा कर ही दम लेगा। उक्त शिकायत पर उपजिलाधिकारी द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गयी उल्टा जांच कर्मचारी राशन डीलर से हमसाज होकर गरीब पात्र उपभोक्ताओं के लिये मुसीबत पैदा कर आये।

…अब डीएम से ही आसरा- जिलाधिकारी को भेजे शिकायती पत्र में कहा कि वह गरीब व मजदूर वर्ग के व्यक्ति हैं तथा उनके परिवार का भरण पोषण राशन से ही चलता है; जो कि पहले तो कम मिलता था अब बिल्कुल ही मिलना बंद हो गया है। पीड़ितों ने जिले के सर्वोच्च अधिकारी से प्रार्थना की है कि उक्त राशन डीलर के विरुद्ध उचित जांच कर उनका राशन दिलाया जाए। डीएम को शिकायती पत्र भेजने वाले गरीब उपभोक्ताओं में परवेज फुरकान, सलीम हैदर, मजहर, साबिर, तसलीम फात्मा, रेशमा साईद, फुरकान, मौ० मन् कलवा खां, कल्लो, हनीफ शामिल हैं।

नियमों को ताक पर रखकर मदरसे में नियुक्तियों की तैयारी!

बिजनौर। मदरसा मिफ्ताह उल उलूम. चान्दपुर में नियमों को दरकिनार कर विभिन्न पदों पर नियुक्तियों का प्रयास किया जा रहा है। इस संबंध में मदरसे के उप सचिव/ उप प्रबन्धक इफ्तेखार अहमद ने मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश को शिकायती पत्र भेजा है। पत्र में अनियमितता संबंधी जानकारी दी गई है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

मुख्यमंत्री को प्रेषित पत्र में आरोप लगाया गया है कि तथाकथित प्रबन्धक / सेकरेट्री मदरसा मिफ्ताह उल उलूम, कराल रोड, चान्दपुर, जिला बिजनौर द्वारा एक स्थानीय समाचार पत्र में दिनांक : 19.04.2022 में सहायक अध्यापक (तहतानिया). सहायक अध्यापक (फौकानिया), प्रवक्ता/मुदर्रिस, कनिष्ठ सहायक एवं प्रधानाचार्य के पदों का नियम विरूद्ध विज्ञापन प्रकाशित कराया गया है।

शिकायतकर्ता ने बताया कि मदरसा मिफ्ताह उल उलूम, कराल रोड, चान्दपुर, जिला- बिजनौर शासन द्वारा मान्यता एवं सहायता प्राप्त एक अल्पसंख्यक मदरसा है। उक्त मदरसे के तथाकथित प्रबन्धक / सेकरेट्री मौ0 जीशान एवं मदरसा प्रधानाचार्य द्वारा हमसाज होकर कूटरचित एवं षड्यन्त्र रच कर उक्त मदरसे के रिक्त पदों को जिला अल्पसंख्याक कल्याण अधिकारी, बिजनौर के साथ मिल कर पदों पर नियुक्तियां करना चाह रहें है। उन्होंने बताया कि शासन की मंशा निस्तर समाचार पत्रों में प्रकाशित हो रही है, कि अब मदरसों में भी नियुक्तियां MTET उत्तीर्ण अभ्यार्थियों की ही नियमानुसार होनी है, जिससे मदरसे में अध्ययनरत छात्रों को गुणवत्ता के साथ साथ उच्चकोटि की शिक्षा प्राप्त हो सके, परन्तु मदरसे के तथाकथित प्रबन्धक, प्रधानाचार्य एवं जिला अल्पसंख्याक कल्याण अधिकारी, बिजनौर आपस में मिल कर अपने सगे सम्बन्धियों को नियुक्त करना चाह रहे हैं। उक्त के अतिरिक्त विभिन्न कारणें से भी उक्त विज्ञापन निरस्त होने योग्य है। इसकी क्रमवार जानकारी देते हुए बताया कि (01) मौ० जीशान प्रबन्धक / सेकरेट्री के चुनाव से सम्बन्धित एक वाद माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबद में याचिका संख्या 10898 / 2022 के अन्तर्गत लम्बित है, जबकि नियमानुसार कोई भी अधिकारी किसी मदरसे में नियुक्ति की अनुमति तभी प्रदान करता है, जब प्रबन्धक /सेकरेट्री प्रबन्ध समिति से सम्बन्धित कोई वाद न्यायालय में लम्बित ना हो।

प्रतीकात्मक तस्वीर

(02) मदरसे में नियुक्ति से पूर्व किसी चयन समिति का गठन नही किया गया है, जबकि मदरसा नियमावली में उक्त चयन समिति के गठन का प्रावधान निहित है।

(03) शासन द्वारा नीतिगत निर्णय लगातार समाचार पत्रों में प्रकाशित होते रहते हैं, जिससे ज्ञात हुआ, कि शासन तीन वर्षों से एक ही जिले में तैनात अधिकारियों के स्थानान्तरण की नीति घोषित करने जा रही है। जिला अल्पसंख्याक कल्याण अधिकारी बिजनौर जिले में तीन वर्ष से नियुक्त हैं। आरोप है कि उक्त अधिकारी अपने स्थानान्तरण से पूर्व एक मोटी रकम एवं एक पद पर अपने परिचित की नियुक्ति के इरादे से जल्द से जल्द नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करना चाहते हैं!

(04) विज्ञापन में कनिष्ठ सहायक के एक पद पर विज्ञापन प्रकाशित कराया गया है, जबकि कनिष्ठ सहायक की नियुक्ति हेतु P.E.T. परीक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक बनाया गया है, जबकि विज्ञापन में उक्त परीक्षा का कहीं भी उल्लेख नहीं किया गया है। मदरसे के उप सचिव/ उप प्रबन्धक इफ्तेखार अहमद ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है, कि विज्ञापन को रद्द करने हेतु सम्बन्धित अधिकारी को निर्देशित किया जाए। शिकायती पत्र की प्रतिलिपि रजिस्ट्रार मदरसा शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश, मंडलायुक्त मुरादाबाद, जिलाधिकारी बिजनौर व जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को भेजी गई हैं।

गौरतलब है कि मदरसा बोर्ड ने मदरसा शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के उद्देश्य से योग्य शिक्षकों के चयन के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की तर्ज पर मदरसा शिक्षक पात्रता परीक्षा (एमटीईटी) लागू करने का निर्णय लिया है। बोर्ड ने रजिस्ट्रार को इसका प्रस्ताव बनाकर शीघ्र शासन को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। यानी अब मदरसों में रिक्त पदों पर भर्तियां उन्हीं अभ्यर्थियों से की जाएंगी जो एमटीईटी परीक्षा पास होंगे। वर्तमान में करीब 550 मदरसा शिक्षकों के पद रिक्त हैं। एमटीईटी के लागू होने से भर्तियों में भाई-भतीजावाद के आरोप भी नहीं लगेंगे

खबर दबाने को पत्रकार ने की अवैध वसूली! ऑडियो वायरल

डीजे पर हाथ में तमंचा लहराकर युवक ने उड़ायी कानून की धज्जियां
-ग्राम पाडली माण्डू के प्रधान का भाई है आरोपी युवक, खबर दबाने को हुआ लेन-देन का मामला भी हुआ उजागर


बिजनौर। धामपुर क्षेत्र के एक शादी समारोह में डीजे पर नाचते एक युवक की वीडियो वायरल हो गयी। डीजे पर नाच रहा यह युवक हाथ में तमंचा लिए है और गाने के बोल “तमंचे पर डिस्को” है। वीडियो बनी तो इस मामले को दबाने के लिए एक तथाकथित पत्रकार और ग्राम प्रधान के बीच पैसों का लेन-देन भी हुआ। जब मामला न दबा और वीडियो वायरल हो गयी तो ग्राम प्रधान ने तथाकथित पत्रकार तनवीर अहमद के खिलाफ पुलिस को तहरीर देकर कार्यवाही की मांग कर डाली, जिससे यह बात साफ हो गयी कि तमंचे को हाथ में लेकर डांस करने वाले युवक का अपराध माफी लायक नहीं है। उधर पुलिस इन दोनों मामलों की जांच कर कार्यवाही में जुटी है।


गौरतलब है कि धामपुर थाना क्षेत्र के एक गांव में गत 5 अप्रैल को शादी समारोह का प्रोग्राम चल रहा था। बताया जाता है कि ग्राम पाडली मांडू के प्रधान सुशील कुमार का भाई सौरभ उस शादी समारोह में शामिल था और वह बज रहे डीजे पर वह अचानक डांस करने लगा। गाना बज रहा था; तमंचे पर डिस्को! तो उसने अपनी कमर में लगे तमंचे को अचानक हाथ में निकालकर हवा में लहरा दिया और डांस करने लगा। किसी ने उसकी वीडियो बना ली। जब इस बात का पता सौरभ के भाई को पता तो उन्होंने मामले को निपटाने का प्रयास किया। इस मामले में लेन-देन भी हुआ, लेकिन यह वीडियो ना सिर्फ वायरल हुई, बल्कि समाचारों की सुर्खी भी बन गई। इस पर ग्राम प्रधान सुशील कुमार ने एतराज जताते हुए उक्त तथाकथित पत्रकार तनवीर को दिए पैसे लौटाने की बात एक ऑडियो कॉल रिकॉर्डिंग में कहीं। वह भी इस समय तेजी के साथ वायरल हो रही है। प्रधान सुशील कुमार ने पुलिस को तहरीर देकर ब्लैकमेलिंग करने वाले तथाकथित पत्रकार तनवीर अहमद के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। उधर डीजे पर डांस कर रहे आरोपी सौरभ कुमार की तमंचा लहराते हुए वीडियो वायरल होने से पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया और उन्होंने आनन-फानन में इस मामले में कार्यवाही करते हुए आरोपी सौरभ को गिरफ्तार कर लिया। अब मामला अवैध धन के लेनदेन के निपटारे का रह गया है।

खबर दबाने को पत्रकार ने की अवैध वसूली! ऑडियो वायरल

डीजे पर हाथ में तमंचा लहराकर युवक ने उड़ायी कानून की धज्जियां
-ग्राम पाडली माण्डू के प्रधान का भाई है आरोपी युवक, खबर दबाने को हुआ लेन-देन का मामला भी हुआ उजागर


बिजनौर। धामपुर क्षेत्र के एक शादी समारोह में डीजे पर नाचते एक युवक की वीडियो वायरल हो गयी। डीजे पर नाच रहा यह युवक हाथ में तमंचा लिए है और गाने के बोल “तमंचे पर डिस्को” है। वीडियो बनी तो इस मामले को दबाने के लिए एक तथाकथित पत्रकार और ग्राम प्रधान के बीच पैसों का लेन-देन भी हुआ। जब मामला न दबा और वीडियो वायरल हो गयी तो ग्राम प्रधान ने तथाकथित पत्रकार तनवीर अहमद के खिलाफ पुलिस को तहरीर देकर कार्यवाही की मांग कर डाली, जिससे यह बात साफ हो गयी कि तमंचे को हाथ में लेकर डांस करने वाले युवक का अपराध माफी लायक नहीं है। उधर पुलिस इन दोनों मामलों की जांच कर कार्यवाही में जुटी है।


गौरतलब है कि धामपुर थाना क्षेत्र के एक गांव में गत 5 अप्रैल को शादी समारोह का प्रोग्राम चल रहा था। बताया जाता है कि ग्राम पाडली मांडू के प्रधान सुशील कुमार का भाई सौरभ उस शादी समारोह में शामिल था और वह बज रहे डीजे पर वह अचानक डांस करने लगा। गाना बज रहा था; तमंचे पर डिस्को! तो उसने अपनी कमर में लगे तमंचे को अचानक हाथ में निकालकर हवा में लहरा दिया और डांस करने लगा। किसी ने उसकी वीडियो बना ली। जब इस बात का पता सौरभ के भाई को पता तो उन्होंने मामले को निपटाने का प्रयास किया। इस मामले में लेन-देन भी हुआ, लेकिन यह वीडियो ना सिर्फ वायरल हुई, बल्कि समाचारों की सुर्खी भी बन गई। इस पर ग्राम प्रधान सुशील कुमार ने एतराज जताते हुए उक्त तथाकथित पत्रकार तनवीर को दिए पैसे लौटाने की बात एक ऑडियो कॉल रिकॉर्डिंग में कहीं। वह भी इस समय तेजी के साथ वायरल हो रही है। प्रधान सुशील कुमार ने पुलिस को तहरीर देकर ब्लैकमेलिंग करने वाले तथाकथित पत्रकार तनवीर अहमद के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। उधर डीजे पर डांस कर रहे आरोपी सौरभ कुमार की तमंचा लहराते हुए वीडियो वायरल होने से पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया और उन्होंने आनन-फानन में इस मामले में कार्यवाही करते हुए आरोपी सौरभ को गिरफ्तार कर लिया। अब मामला अवैध धन के लेनदेन के निपटारे का रह गया है।

गाजियाबाद के SSP सस्पेंड; कानून व्यवस्था में विफलता और भ्रष्टाचार के आरोप

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में नई सरकार के गठन के बाद से ही योगी सरकार भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ एक्शन में है। गुरुवार को डीएम सोनभद्र को निलंबित करने के बाद गाजियाबाद एसएसपी पवन कुमार पांडेय पर गाज गिरी है। पांडेय को कानून व्यवस्था में विफलता और भ्रष्टाचार के आरोपों में सस्पेंड किया गया है।

भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ सरकार सख्त
अपने दूसरे कार्यकाल में योगी सरकार भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ काफी सख्त नजर आ रही है। डीएम सोनभद्र के बाद एसएसपी गाजियाबाद को भी भ्रष्टाचार और जनता से जुड़े मामले में लापरवाही बरतने में सस्पेंड किया गया है।

हाल ही में हुई थी लाखों की लूट– अभी कुछ दिन पहले ही गाजियाबाद के थाना मसूरी क्षेत्र में दिनदहाड़े बदमाशों ने फायरिंग करके पेट्रोल कर्मचारियों से 25 लाख रुपये की लूट की वारदात को अंजाम दिया था। घटना का वीडियो भी सामने आया था, जिसमें बदमाशों ने दिनदहाड़े फायरिंग करके लाखों रुपये लूट लिए थे।

आईपीएस पवन कुमार अगस्त 2021 में मुरादाबाद से गाजियाबाद ट्रांसफर होकर आए थे। मूलरूप से राजस्थान के हनुमानगढ़ निवासी पवन कुमार 2009 बैच के आइपीएस अधिकारी हैं। 

अपराध नियंत्रण की रणनीति फेल
भाजपा सांसद, विधायक के अलावा आरएसएस कार्यकर्ताओं और हिंदुवादी संगठनों ने पुलिस कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। एसएसपी पवन कुमार को सस्पेंड करने की देर शाम सूचना मिलने पर महकमे में एकाएक हड़कंप मच गया। इस कार्रवाई के पीछे ऑफ द रिकॉर्ड कई कारण बताए जा रहे हैं। 

धड़ल्ले से हो रहा अवैध खनन, प्रशासन मौन

बिजनौर। अफजलगढ़ थाना क्षेत्र में मिट्टी का खनन जोरों पर है। खनन माफिया दिन-रात जेसीबी मशीन से धरती का सीना फाड़कर भराव का कारोबार कर रहे हैं और अपनी जेबे भरने में लगे इन खनन माफियाओं की ओर से शासन प्रशासन अपनी आंखें मूंदे हुए हैं जिससे इन खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। सूचना देने पर भी उच्च अधिकारियों द्वारा कोई कार्यवाही नहीं होती है। 

राष्ट्रीय राजमार्ग 74 पर स्थित गांव जिक्रीवाला के समीप व भूतपुरी क्षेत्र में खनन माफिया पुलिस व प्रशासन की मदद से खनन के कारोबार में लगे हैं। इन स्थानों पर इन खनन माफियाओं द्वारा प्लाटों को भरने का कार्य बेरोकटोक किया जा रहा है। यह खनन माफिया स्थानीय पुलिस से सांठगांठ कर शाम होते ही बड़ा हाइवे,डम्फर व टैक्टर ट्रालियों सहित मैदान में आ जाते हैं और रात के दस बजते ही यह लोग जेसीबी मशीन से धरती का सीना चीरते हुए रात भर खनन का कार्य करते हैं।

थाना क्षेत्र के गांव जिक्रीवाला,  कासमपुरगढ़ी, आसफाबाद चमन, भूतपुरी, सुआवाला, कादराबाद सहित अनेक स्थानों पर देखा जा सकता है कि मिट्टी का भराव का कार्य चल रहा है। यह खनन माफिया प्लाटों में भराव कर अपनी जेबें भरने में लग रहे हैं। खनन माफिया ओवर लोड वाहनों से मिट्टी ढ़ोते हैं जिसके कारण मार्ग तक क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। वहीं कहीं न कहीं इन लोगों के सिर पर कुछ सफेदपोश लोगों का हाथ है।

क्षेत्र में अवैध रूप से मिट्टी भराव कारोबार में दूसरे विधानसभा के लोगों की बढ़ती संख्या को देखते हुए क्षेत्र के खनन माफियाओं के एक गुट ने इन लोगों का विरोध किया तो दोनों गुटों में अपना अपना वर्चस्व बनाने को लेकर कभी भी बड़ी घटना घट सकती है।

अगर पुलिस प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया तो खनन माफियाओं के दोनों गुटों में खूनी संघर्ष की संभावना दिखाई दे रही है। यदि इन खनन माफियाओं की शिकायत कोई करता भी है तो पहले तो पुलिस या विभागीय अधिकारियों द्वारा शिकायत कर्ता का नाम बताकर खनन माफियाओं को सूचना दी जाती है और खनन माफियाओं द्वारा शिकायत कर्ता को ही हड़काया जाता है। यदि फिर भी कार्रवाई करने की जिद होती है तो एक दूसरे विभाग के जिम्मे बताकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। इतना ही नहीं उल्टे इन खनन माफियाओं तक शिकायत किये जाने की बात कहते हुए इन्हें सावधान कर अवैध रूप से चल रही मिट्टी खनन को बन्द करा दिया जाता है । कुछ घंटों बाद फिर से रात भर मिट्टी का खनन शुरू कर दिया जाता है। ग्रामीणों ने डीएम से अवैध रूप से प्लाटों में भराव कर रहे खनन माफियाओं पर अंकुश लगाने की मांग करते हुए कारवाई किये जाने की मांग की है।

(सच/झूठ) प्रधानमंत्री रामबाण सुरक्षा योजना 2021: ऑनलाइन आवेदन | एप्लीकेशन फॉर्म

साभार 12th March 2022 by Madhuri

आज के दौर में हमारा देश डिजिटलीकरण की तरफ बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में सभी प्रकार की प्रक्रियाएं ऑनलाइन हो रही है। सरकार द्वारा भी विभिन्न प्रकार की योजनाएं समय-समय पर आरंभ की जाती है। जिसके अंतर्गत आवेदन करने की प्रक्रिया ऑनलाइन होती है। ऐसे में कई बार ऐसा होता है कि कुछ गलत सूत्रों से ऐसी योजनाओं की जानकारी फैल जाती है जो सरकार द्वारा आरंभ ही नहीं की गई हो। आज हम आपको ऐसी ही एक योजना से संबंधित जानकारी प्रदान करने जा रहे हैं जिसका नाम प्रधानमंत्री रामबाण सुरक्षा योजना है। इस लेख को पढ़कर आपको पता चलेगा यह योजना सच है या झूठ। तो दोस्तों यदि आप Pradhanmantri Ramban Suraksha Yojana की विश्वसनीयता की जांच करना चाहते हैं तो आपसे निवेदन है कि आप हमारे इस लेख को अंत तक पढ़े।

Fake Pradhanmantri Ramban Suraksha Yojana

विभिन्न प्रकार के ऑनलाइन एवं ऑफलाइन सूत्रों से यह दावा किया जा रहा है कि हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा प्रधानमंत्री रामबाण सुरक्षा योजना का शुभारंभ किया गया है। इस योजना के माध्यम से देश के सभी युवाओं को कोरोनावायरस के नि:शुल्क इलाज के लिए ₹4000 की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। वायरल मैसेज में यह भी दावा किया जा रहा है कि इस योजना के अंतर्गत आवेदन करने की अंतिम तिथि 18 अगस्त 2021 है। यदि आप इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं तो आपको मैसेज में दिए गए लिंक पर क्लिक करके अपना फॉर्म भरना होगा। आपको बता दें सरकार द्वारा ऐसी कोई भी योजना नहीं संचालित की जा रही है। सरकार के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पीआईबी फैक्ट चेक द्वारा प्रधानमंत्री रामबाण सुरक्षा योजना को फेक बताया गया है। आपसे निवेदन है कि आप ऐसी किसी भी योजना के अंतर्गत आवेदन ना करें। यदि सरकार द्वारा ऐसी कोई भी योजना लागू की जाएगी तो हम आपको योजना से संबंधित संपूर्ण जानकारी प्रदान करेंगे। लेकिन अभी सरकार द्वारा ऐसी कोई योजना संचालित नहीं की जा रही है।

फ़र्ज़ी प्रधानमंत्री रामबाण सुरक्षा योजना

यदि आपके पास भी Pradhan Mantri Ramban Suraksha Yojana के आरम्भ होने से सम्बन्धित जानकारी सांझा की गयी है तो आपको बता दे पीएम रामबाण सुरक्षा योजना पूरी तरह से झूठी, भ्रामक और फ़र्ज़ी योजना है | पीआईबी द्वारा इस फ़र्ज़ी प्रधानमंत्री रामबाण सुरक्षा योजना का खंडन करते हुए बताया कि इस प्रकार कि कोई भी योजना नहीं है और न ही सरकार द्वारा कोई आवेदन इस गलत भ्रामक रामबाण सुरक्षा योजना के अंतर्गत मांगे गए है | कृपया इस प्रकार कि गलत झूठी फेक योजना के झांसे में न आये और अपनी कोई भी जानकारी किसी से भी शेयर न करे | इस प्रकार के धोखे (Fraud Pradhan Mantri Ramban Suraksha Yojana ) से खुद को बचाकर रखे और किसी भी योजना पर विश्वास करने से पहले उसकी सत्यता कि जांच कर ले

झूठ प्रधानमंत्री रामबाण सुरक्षा योजना का उद्देश्य

यह दावा किया जा रहा है कि Pradhanmantri Ramban Suraksha Yojana का मुख्य उद्देश्य कोरोनावायरस के इलाज के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करना है। यह आर्थिक सहायता ₹4000 की होगी। इस योजना के अंतर्गत आर्थिक सहायता भारत सरकार द्वारा प्रदान की जाएगी। लेकिन आपको बता दें की यह दावा पूरी तरह से झूठ है। सरकार द्वारा ऐसी कोई भी योजना नहीं संचालित की जा रही है। कोरोनावायरस के इलाज के लिए सरकार द्वारा कई अन्य योजनाएं संचालित की जा रही है। लेकिन Pradhanmantri Ramban Suraksha Yojana नाम की कोई योजना सरकार द्वारा नहीं संचालित की जा रही है। जैसे ही सरकार द्वारा ऐसी कोई भी योजना संचालित की जाएगी हम आपको जरूर सूचित करेंगे।

वायरल मैसेज के दावे के अनुसार प्रधानमंत्री रामबाण सुरक्षा योजना के निम्नलिखित लाभ एवं विशेषताएं हैं।

  • विभिन्न प्रकार के ऑनलाइन ऑफलाइन सूत्रों से यह दावा किया जा रहा है की हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा प्रधानमंत्री रामबाण सुरक्षा योजना का शुभारंभ किया गया है।
  • इस योजना के माध्यम से देश के युवाओं को कोरोनावायरस के इलाज ने ₹4000 की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
  • इस योजना के अंतर्गत आवेदन करने की अंतिम तिथि 18 अगस्त 2021 वायरस मैसेज के अनुसार बताई जा रही है।
  • मैसेज में इस योजना के अंतर्गत आवेदन करने के लिए एक लिंक भी दी गई है।
  • इस लिंक पर क्लिक करके फॉर्म भरने पर यह दावा किया जा रहा है कि आप इस योजना के अंतर्गत आवेदन कर सकेंगे।
  • आपको बता दें सरकार द्वारा ऐसी कोई भी योजना नहीं संचालित की जा रही है।
  • सरकार के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पीआईबी फैक्ट पैक चेक पर इस योजना को फेंक बताया गया है।
  • आपसे निवेदन है कि आप ऐसी किसी भी योजना के अंतर्गत आवेदन ना करें।

गलत रामबाण सुरक्षा योजना पात्रता तथा महत्वपूर्ण दस्तावेज

वायरल मैसेज के अनुसार यह दावा किया जा रहा है कि इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित पात्रता एवं महत्वपूर्ण दस्तावेज होना अनिवार्य है।

  • आवेदक भारत का स्थाई निवासी होना चाहिए।
  • आधार कार्ड
  • राशन कार्ड
  • निवास प्रमाण पत्र
  • आय प्रमाण पत्र
  • आयु प्रमाणपत्र
  • मोबाइल नंबर
  • पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ

सच/झूठ प्रधानमंत्री रामबाण सुरक्षा योजना आवेदन

  • वायरल मैसेज में यह दावा किया जा रहा है कि यदि आप प्रधानमंत्री रामबाण सुरक्षा योजना के अंतर्गत आवेदन करना चाहते हैं तो आपको मैसेज में दिए गए लिंक पर क्लिक करना होगा।
  • लिंक पर क्लिक करने के बाद आपके सामने एक आवेदन फॉर्म खुलकर आएगा।
  • आपको इस आवेदन फॉर्म में पूछी गई सभी महत्वपूर्ण जानकारी जैसे कि आपका नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी आदि दर्ज करना होगा।
  • इसके पश्चात आपको सभी महत्वपूर्ण दस्तावेजों को अपलोड करना होगा।
  • अब आपको सबमिट के विकल्प पर क्लिक करना होगा।
  • इस प्रकार आप प्रधानमंत्री रामबाण सुरक्षा योजना के अंतर्गत आवेदन कर पाएंगे।

Note:- अपनी कोई भी जानकारी किसी भी व्यक्ति या ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से शेयर न करे क्योकि यह योजना पूरी तरह से झूठी और भ्रामक है | किसी भी जानकारी पर विश्वास करने से पहले उसकी अच्छी प्रकार से जाँच कर लें।

डाक्टरों को महंगे गिफ्ट! फार्मा कंपनियां भी जिम्मेदार

डाक्टरों को मिलने वाले महंगे उपहार का मामला, केंद्र सरकार को नोटिस

नई दिल्ली (एजेंसी)। सुप्रीम कोर्ट ने फार्मा कंपनियों की ओर से डाक्टरों को दिए जाने वाले गिफ्ट और महंगे उपहारों को रेगुलेट करने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। वर्तमान में फार्मा कंपनियों की ओर से डाक्टरों को गिफ्ट देने के लिए डाक्टरों को ही जिम्मेदार ठहराया जाता है।

याचिका में मांग की गई है कि महंगे उपहारों के लिए फार्मा कंपनियों को भी जिम्मेदार ठहराया जाए। इसके पहले एक दूसरी याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि डाक्टरों को महंगे उपहार देना कानून सम्मत नहीं है। कोर्ट ने कहा था कि फार्मा कंपनियां डाक्टरों को महंगे गिफ्ट देकर कानून से भाग नहीं सकती हैं।

बिजनौर से फर्जी शिक्षक को पकड़ ले गई उत्तराखंड पुलिस

धामपुर (बिजनौर)। उत्तराखंड की खानपुर पुलिस ने फर्जी प्रमाण-पत्रों के आधार पर शिक्षा विभाग में नौकरी कर रहे आरोपी को गिरफ्तार किया है। मई 2021 में तत्कालीन उप खण्ड शिक्षा अधिकारी ने प्राथमिक विद्यालय खानपुर के शिक्षक लोकेश कुमार निवासी बिजनौर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। जांच उपरांत मामला कुछ और ही निकलकर सामने आया। जब पुलिस सुबूतों के आधार पर धामपुर पहुंची और रणबीर सिंह उर्फ प्रीतम सिंह नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया तो उसने यकायक सब कुबूल लिया।

जानकारी के मुताबिक, पुलिस जांच में यह पता चला कि रणबीर उर्फ प्रीतम सिंह पुत्र सुखराम निवासी खुर्द कादराबाद थाना स्योहारा जिला बिजनौर, लोकेश कुमार के फर्जी प्रमाण-पत्रों पर नौकरी कर रहा था; जबकि उसकी शैक्षिक योग्यता बहुत कम थी। प्रथमदृष्ट्या शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भी यही लगा था कि लोकेश कुमार फर्जी प्रमाण-पत्र के आधार पर नौकरी कर रहा है; जबकि उसके डॉक्यूमेंट सही थे और प्रीतम सिंह उसके फर्जी प्रमाण-पत्र बनाकर शिक्षा विभाग में नौकरी कर रहा था। ऐसे में पुलिस फर्जी प्रमाण-पत्र लगाकर शिक्षा विभाग में नौकरी कर रहे आरोपी प्रीतम सिंह को तलाश कर रही थी, जो काफी समय से फरार चल रहा था। उसकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही थी। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने आरोपी रणबीर सिंह उर्फ प्रीतम सिंह को धामपुर शहर पहुंचकर दयावती अस्पताल के पास से गिरफ्तार कर लिया। खानपुर थाना प्रभारी संजीव थपलियाल ने बताया कि फर्जी कागजों के बलबूते आरोपी शिक्षा विभाग में नौकरी कर रणबीर सिंह उर्फ प्रीतम सिंह को गिरफ्तार किया गया है। बताया कि थाना खानपुर में पंजीकृत मु.अ.सं. 5/21 धारा 420/467/468/471 आईपीसी, जिसमें तत्कालीन उप शिक्षा अधिकारी प्राथमिक शिक्षा खानपुर जनपद हरिद्वार द्वारा फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर शिक्षा विभाग में अध्यापक की नौकरी प्राप्त करने के संबंध में लोकेश कुमार पुत्र चंद्रपाल सिंह निवासी कादराबाद खुर्द स्योहारा जनपद बिजनौर उत्तर प्रदेश के विरुद्ध थाना खानपुर में अभियोग पंजीकृत कराया गया था। विवेचना क्रम में प्रकाश में आया कि रणबीर उर्फ प्रीतम सिंह पुत्र सुखराम निवासी खुर्द कादराबाद थाना स्योहारा जिला बिजनौर द्वारा लोकेश कुमार उपरोक्त के फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर शिक्षा विभाग में नौकरी पाई गयी। उन्होंने बताया कि आरोपी के दो-दो नाम होने से यह तय नहीं हो पा रहा था कि यह एक ही है या अलग अलग, लेकिन लोकेश के अनुसार आरोपी रणबीर सिंह उर्फ प्रीतम सिंह एक ही नाम है। इसके पश्चात अभियोग से संबंधित वांछित अभियुक्त रणबीर सिंह उर्फ प्रीतम सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

आतंकियों का साथी निकला शिमला का एसपी; एनआईए ने किया गिरफ्तार

NIA की बड़ी कार्रवाई, शिमला के SP अरविंद दिग्विजय गिरफ्तार, आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा से कनेक्शन का आरोप। 5 अन्य लोग भी गिरफ्त में।

नई दिल्ली (एजेंसी)। NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) ने आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा से कनेक्शन के आरोप में हिमाचल कैडर के आईपीएस अरविंद दिग्विजय नेगी को गिरफ्तार किया है। इस पुलिस अधिकारी पर खुफिया जानकारी लीक करने का आरोप है। वहीं, एसपी के अलावा एनआईए ने 5 अन्य लोगों को भी इस मामले में गिरफ्तार किया है। एनआईए के प्रवक्ता से मिली सूचना के अनुसार भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 2011 बैच में पदोन्नत नेगी को पिछले साल छह नवंबर को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा दर्ज एक मामले के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एनआईए 6 नवंबर 2021 में दर्ज हुए ओवर ग्राउंड वर्कर्स नेटवर्क केस की जांच कर रही है। इसमें लश्कर के आतंकियों को लोकल सपोर्ट मुहैया कराने के मामले की जांच चल रही है। इन आतंकियों को भारत में खौफनाक वारदातों को अंजाम देने के लिए मदद पहुंचाई जाती थी। अब तक एजेंसी ने केस में 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान एजेंसी ने आरोपी नेगी की भूमिका संदिग्ध पाई थी। प्रवक्ता ने बताया कि एनआईए से लौटने के बाद शिमला में तैनात नेगी की भूमिका की जांच की गई और उनके घरों की तलाशी ली गई। इसके बाद शिमला के एसपी अरविंद दिग्विजय नेगी की पहचान साबित की गई। अधिकारी पर सीक्रेट दस्तावेजों को लीक करने का भी आरोप है। नेगी ने ओवर ग्राउंड वर्कर्स के साथ इन दस्तावेजों को शेयर किया था, जिसका लश्कर के साथ कनेक्शन है।

चारा घोटाले में लालू दोषी करार, 21 फरवरी को होगा सजा का एलान

update big breaking : चारा घोटाले में लालू दोषी करार, सजा का एलान 21 फरवरी को

रांची (एजेंसी)। चारा घोटाले केस में CBI कोर्ट ने बिहार के पूर्व सीएम और राष्‍ट्रीय जनता दल के अध्‍यक्ष लालू प्रसाद यादव को दोषी करार दिया है। डोरंडा कोषागार केस में कोर्ट का फैसला आया है। सजा का एलान 21 फरवरी को किया जाएगा।

डोरंडा कोषागार से अवैध निकासी का चारा घोटाले से जुड़ा पांचवा मामला है। इस मामले को सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सबसे अधिक 139.5 करोड़ रुपये की यहां से निकासी हुई थी। इससे पहले चाईबासा के दो, देवघर और दुमका कोषागार से जुड़े एक-एक मामले पर अदालत सजा सुना चुकी है। लालू प्रसाद इन मामलों में सजायाफ्ता हैं। फिलहाल जमानत पर हैं।

डोरंडा कोषगार मामले में सीबीआई कोर्ट ने लालू प्रसाद समेत 75 आरोपी को दोषी करार दिया है। मामले में 99 आरोपियों में से 24 को बरी किया गया। दोषियों को 18 फरवरी को सजा सुनाई जाएगी।

गिरगिट को भी फेल करते नेता जी…

आज बड़े हो गए हैं, कल तो छोटे से थे!

बिजनौर। वर्तमान के हालात में नेताओं की रंगत गिरगिट को फेल करने पर तुली हुई है। यह सभी जगह का हाल है। इक्का दुक्का को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश नेता निचले पायदान से धीरे धीरे ऊपर तक पहुंचे गए। जो पैदल थे, आज उनके नीचे भारी भरकम गाड़ियां हैं। लकदक दिखाई देने के लिए कपड़े धुलवा कर धोबियों तक को पैसा देने में रुलाने वाले सिर तानकर चल रहे हैं। खबर छपवाने के लिए मीडिया वालों की चरण वंदना में जुटे रहने वालों को आज RO (रिलीज़ ऑर्डर) का जादुई शब्द भी पता है। ऐसे ही एक छोटे से नेता जी आज बहुत तो नहीं, फिर भी काफी बड़े हो गए हैं। तकरीबन 10 से 12 साल पहले के दरमियान अलग अलग अवसरों पर उन्होंने मौखिक रूप से एक दैनिक, एक सांध्य व एक साप्ताहिक अखबार में विज्ञापन प्रकाशित कराए। पहले का पेमेंट टलते रहने के बावजूद अखबार नवीस को भरोसा था कि आज नहीं तो कल 30 हजार रुपए का भुगतान हो ही जाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। पहले तो नेता जी आज, कल और परसों कह कर टालते रहे। फिर दिन, महीने साल बीतते रहे। वो भी छोटे से बड़े का सफर तय करते रहे। बीच में उन्होंने विज्ञापन का रिलीज़ आर्डर (RO) दिखाने की बात कह कर अपनी असली रंगत दिखा दी। अब नाम बताने की जरूरत तो है नहीं क्योंकि सुधि पाठकों को समझ में आ रहा होगा कि आखिरकार कौन हो सकते हैं वो नेताजी? RO शब्द का इस्तेमाल कब, कहां और कौन करता है। हालांकि अब वो सिर्फ बड़े लोगों के साथ ही उठते बैठते हैं, अपने दुर्दिनों के समय के पालनहारों के फोन तक रिसीव नहीं करते।

छोटा, बड़ा अखबार- यह बात तो जनता को बखूबी मालूम है कि जन समस्याओं को आला अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए अधिकतर तथाकथित नेताओं द्वारा पीड़ितों के ज्ञापन की टाइपिंग, फोटो कॉपी और तो और मीडिया में प्रकाशित कराने के नाम पर भी रकम ऐंठी जाती रही है। यही हाल जिला पंचायत चुनाव के दौरान एक बड़े राजनीतिक दल के पदाधिकारियों ने भी किया था। अब विधानसभा चुनाव में भी उसी पुरानी परंपरा का निर्वहन बखूबी किया जा रहा है?

डीलर ने बाजार में बेच दिया राशन, रिपोर्ट दर्ज

चांदपुर। सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार के लाख दावे किए जाएं लेकिन राशन डीलर द्वारा खाद्यान्न वितरण में लगातार धांधली की जा रही है और गरीबों गरीबों को मिलने वाले राशन की कालाबाजारी की जा रही है। पूर्ति निरीक्षक की जांच में एक राशन विक्रेता द्वारा खाद्यान्न में कालाबाजारी का मामला सामने आया है। आरोपी डीलर पर पूर्ति निरीक्षक योगेश कुमार ने राशन डीलर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।

जिलाधिकारी की अनुमति के बाद पूर्ति निरीक्षक योगेश कुमार की ओर से दर्ज रिपोर्ट में कहा गया कि विभाग व प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने राजपुर परसु के राशन डीलर की लगातार शिकायतों के बाद जांच की। जांच में पाया गया कि में राशन डीलर ने गेहूं 299.30 कुंटल व चावल 129.40 कुंटल 93 पैकेट चने का वितरण न कर उसको कालाबाजारी कर बेच दिया।

अधिकारियों की चौकड़ी ने किया झालू समिति के धन का गबन!

बिजनौर। झालू जाटान सेवा सहकारी समिति के अपदस्थ अध्यक्ष पति मोहम्मद अकबर ने कहा कि अधिकारियों की चौकड़ी ने समिति धन का गबन; मिसयूज करने के अपने उद्देश्य में बाधक समिति सभापति सहित बोर्ड के निर्वाचित 6 संचालकों की सदस्यता खत्म करने में षड्यंत्र के तहत एक राय होकर सबसे अहम भूमिका निभाई है। अपदस्थ किए गए सभापति, संचालकों को 1 वर्ष बीत जाने के बाद भी जांच रिपोर्ट, आर्डर शीट व अन्य सूचना प्राप्त नहीं कराई गई है।

मोहल्ला पीरजादगान स्थित अपने आवास पर मोहम्मद अकबर ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि पूर्व सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता बिजनौर अमित कुमार त्यागी, एडीसीओ सुनील कुमार सैनी, एडीओ जयवीर सिंह, पूर्व एमडी धर्मपाल सिंह व वर्तमान एमडी शिव बहादुर की केमिस्ट्री ने एक राय होकर समिति के धन का गबन; मिसयूज करने के अपने उद्देश्य में बाधक समिति सभापति सहित बोर्ड के निर्वाचित 6 संचालकों की सदस्यता से संबंधित मूल दस्तावेजों सदस्यता प्रार्थना पत्र, घोषणापत्र, सदस्यता रजिस्टर्ड, कार्यवाही रजिस्टर, कैश बुक, लेजर आदि को षड्यंत्र के तहत बदल कर सदस्यता समाप्त कराने में सबसे अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि अपदस्थ किए गए सभापति संचालकों को 1 वर्ष बीत जाने के बाद भी कार्यालय सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता बिजनौर ने सदस्यता के संबंध में कराई गई जांच की जांच रिपोर्ट, आर्डर शीट व अन्य सूचनाएं प्राप्त नहीं कराई हैं। दस्तावेज उपलब्ध न कराने का कारण स्पष्ट है कि उनकी सदस्यता से संबंधित दस्तावेजों को बदल दिया एवं नष्ट कर दिया गया है, जो कृत्य झालू समिति में हुआ है ऐसा सहकारिता विभाग उत्तर प्रदेश के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ कि किसी भी समिति के 9 में से 6 निर्वाचित संचालक को षड्यंत्र के तहत हटा दिया गया हो। झालू समिति में उत्तर प्रदेश सहकारी अधिनियम नियमावली उपलब्धियां लागू नहीं होती है, वहां तो पूर्व सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता बिजनौर अमित कुमार त्यागी, एडीसीओ सुनील कुमार सैनी, एडीओ जयवीर सिंह, पूर्व एमडी धर्मपाल सिंह व एमडी शिव बहादुर की चौकड़ी के निर्मित कायदे कानून चलते हैं। उन्होंने कहा कि उक्त चौकड़ी द्वारा एक और षडयंत्र रचा गया है कि गैर कृषक ₹100 से वाले सदस्यों की सदस्यता भी समाप्त की जाए, जिसके क्रियान्वयन को एमडी शिव बहादुर अंतिम रूप देने में लगे हैं। उनका हौसला सातवें आसमान पर है क्योंकि जब उन्होंने निर्वाचित संचालकों के सदस्यता से संबंधित दस्तावेजों को नष्ट एवं बदलकर अपदस्थ करा दिया तो उनके लिए गैर कृषक ₹100 हिस्सा वाले सदस्यों की सदस्यता समाप्त करना कोई मायने नहीं रखता है।

उन्होंने कहा कि उक्त अधिकारियों की चौकड़ी झालू समिति के निर्वाचित बोर्ड को भंग कराकर उसके स्थान पर प्रशासनिक कमेटी का गठन कराकर समिति के धन का भरपूर गबन व मिस यूज कर रही है और अब गैर कृषक ₹100 का वाले सदस्यों की सदस्यता समाप्त कराकर आगामी चुनाव में समिति के परिसीमन को बिगाड़ना एवं अपनी कठपुतली वाले बोर्ड का गठन करना चाहते हैं, ताकि आगे भी समिति के धन का गबन, मिसयूज सुचारू रूप से जारी रहे। उन्होंने दो टूक कहा कि मेरे ऊपर 40 वर्ष के कार्यकाल में ₹1 का गबन भी सिद्ध कर दे तो मैं 10 गुना देने को तैयार हूं। मोहम्मद अकबर ने जनपद बिजनौर के तेजतर्रार एवं ईमानदार छवि के जिलाधिकारी उमेश मिश्रा से उक्त अधिकारियों के कृत्य की जांच कराकर न्याय दिलाने की मांग की है। उधर इस संबंध में पक्ष जानने को संबंधित अधिकारियों से मोबाइल संपर्क नहीं हो सका।

12 वर्ष से नदारद आंगनबाड़ी को दिया जा रहा मानदेय

बाल विकास परियोजना का कारनामे की खुली पोल, पिछले 12 वर्षो से केंद्र से नदारद आंगनबाड़ी कार्यकत्री को दिया जा रहा मानदेय।

बिजनौर। बाल विकास परियोजना में भृष्टाचार का मामला सामने आया है, जिसमें पिछले 12 वर्षो से केंद्र से नदारद आंगनबाड़ी का मानदेय दिया जा रहा है और सरकार द्वारा दिए गए स्मार्टफोन केंद्र का संचालन करने वाली सहायिका को अभी तक न मिलने से कार्य प्रभावित हो रहा है। जिलाधिकारी से मामले की जाच कराकर कार्यवाही किये जाने की मांग की गई है।


आंगनबाड़ी केंद्र जलालपुर आसरा की सहायिका के पति पंकज कुमार दक्ष ने मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर जिलाधिकारी को शिकायत दर्ज कराते हुए कहा है कि सरकार एवं बाल विकास विभाग से आंगनबाड़ी केंद्र को संचालन करने के लिए मोबाइल फोन दिए गए हैं लेकिन आज तक जलालपुर आसरा केन्द्र को स्मार्टफोन नहीं मिला है, जबकि नहटौर ब्लाक अन्य आंगनबाड़ी केंद्रों को स्मार्टफोन दे दिये गये हैं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि आंगनबाड़ी कार्यकत्री डोली देवी लगभग 12 वर्षों से केन्द्र पर नहीं आ रही है जबकि इससे पूर्व में भी उपरोक्त कार्यकत्री डोली देवी की शिकायत कार्यवाहक सीडीपीओ एवं सुपरवाइजर शोभा वर्मा से की गई, जिस पर शोभा वर्मा यह कहती हैं कि कार्यकत्री डोली देवी का मानदेय नहीं बन रहा है और उसने अपने पद से त्याग पत्र दे दिया है। यदि आंगनबाड़ी कार्यकत्री डोली देवी ने त्याग पत्र दे दिया है तो उसका मानदेय उसके खाते में क्यों आ रहा है और विभाग उसको मानदेय क्यों दे रहा है, जबकि विभाग सहायिका से सहायिका एवं कार्यकत्री दोनों का काम ले रहा है।
बाल विकास परियोजना विभाग की सीडीपीओ कार्यवाहक एवं सुपरवाइजर श्रीमती शोभा वर्मा की कार्यप्रणाली से लगभग 12 वर्षों से परेशान आंगनबाड़ी सहायिका इन्द्रेश कुमारी के पति पंकज कुमार दक्ष ने इस भ्रष्टाचार की पोल खोलते हुए मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई है। पंकज दक्ष ने जिलाधिकारी से मामले की जांच कराकर कार्यवाही किये जाने की मांग की है।

प्रयागराज डीएम और बीएसए का बड़ा कारनामा, जिला रिलीव हुए बिना बीईओ को दिया ब्लॉक

प्रयागराज डीएम और बीएसए का बड़ा कारनामा, जिला रिलीव हुए बिना बीईओ को दिया ब्लॉक

बेसिक विभाग ने खण्ड शिक्षाधिकारियों के तबादले में किया गया है जमकर खेल

आचार संहिता लगने के बाद बैक डेट में रात्रि में ही जारी की लिस्ट

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बेसिक विभाग ने आचार संहिता लागू होने के बाद में बड़े स्तर पर खण्ड शिक्षा अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। खण्ड शिक्षा अधिकारियों के बड़े स्तर पर तबादला हुए अभी एक दिन भी नहीं बीता है कि प्रयागराज के जिलाधिकारी ने बिना रिलीव हुए ही खण्ड शिक्षा अधिकारियों को ब्लॉक आबंटित कर दिया। प्रयागराज के डीएम संजय खत्री ने रायबरेली के दो बीईओ की ड्यूटी ब्लॉक आवंटन के साथ में माघ मेला में लगा दी है। सबसे मजे कि बात ये है कि अभी वह रायबरेली से रिलीव भी नहीं हुए है कि उन्हें प्रयागराज के डीएम के पास में ब्लॉक आवंटन की सूची पहुँच गई है। ब्लॉक आवंटन की सूची प्रयागराज के बीएसए प्रवीण तिवारी की तरफ से भेजी गई है। उनकी तरफ से किस तरह खेल किया गया है इसका बड़ा नमूना ब्लॉकों का आवंटन है।

बता दें, बेसिक शिक्षा निदेशालय की तरफ से खण्ड शिक्षा अधिकारियों के तबादले आचार संहिता लगने के बाद में किए गए हैं। बेसिक शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों ने बैक डेट में सात जनवरी को तबादले किये हैं, जबकि खण्ड शिक्षा अधिकारियों को ऐसे ऑर्डर 8 जनवरी की रात में किया है। विभाग के बड़े अधिकारियों ने खेला करते हुए रात्रि में ही लगभग 450 खण्ड शिक्षाधिकारियों की लिस्ट जारी की है। तबादला होने वाले खण्ड शिक्षाधिकारियों का कहना है कि विभाग के अधिकारियों की तरफ से मनमानी की गई है और चुनाव आयोग के पत्र का हवाला देकर भारी संख्या में तबादला करके परेशान करने का काम किया गया है। वहीं, विभाग के इस काम से खण्ड शिक्षा अधिकारी संघ ने भी आपत्ति जाहिर की है और अधिकारियों से नाराज है। संघ ने अधिकारियों से वार्ता भी की, लेकिन अभी तक कुछ खास नतीजा नहीं निकलकर आया है।

बिना जिला रिलीव हुए ही मिल गया ब्लॉक

खण्ड शिक्षा अधिकारियों के तबादले में किस तरह से खेल किया गया और इसमें कितने अधिकारी शामिल है; इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रयागराज के डीएम ने बिना जिलों से रिलीव हुए बीईओ की ड्यूटी लगाई है। माघ मेला की जिलाधिकारी संजय खत्री की तरफ से जारी की गई सूची में दो ऐसे खण्ड शिक्षा अधिकारियों की ड्यूटी लगाई जो अभी रायबरेली जिले से रिलीव ही नहीं हुए है। रायबरेली के सलोन और ऊंचाहार ब्लॉक में तैनात रहे विश्वनाथ प्रजापति और अनिल त्रिपाठी को प्रयागराज में विकासखंड भी आवँटित कर दिए गए हैं। अनिल त्रिपाठी को प्रयागराज में सैदाबाद और विश्वनाथ प्रजापति को फूलपुर विकास खण्ड आवँटित कर दिया गया है।

इन जिलों के डीएम ने रिलीव करने से किया मना

बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से भले ही खण्ड शिक्षाधिकारी का तबादला कर दिया गया है लेकिन चुनाव में बाधा आने की वजह से कई जिलों के डीएम ने बीईओ को रिलीव करने से मना कर दिया है। बरेली, मिर्जापुर, ललितपुर, सहारनपुर,अमेठी, बहराइच, कन्नौज, एटा, प्रयागराज, शाहजहॉपुर, फतेहपुर, कौशांबी, मुरादाबाद,बलरामपुर, लखीमपुर, बांदा, अंबेडकर नगर, मथुरा, सुल्तानपुर, मैनपुरी के डीएम ने रिलीव करने से मना कर दिया है। बता दें, जिला निर्वाचन अधिकारियों की तरफ से बीईओ को एआरईओ से लेकर मास्टर ट्रेनर तक में ड्यूटी लगा दी गई है और उन लोगों ने ट्रेनिंग भी ले ली है, ऐसे में उन्हें कार्यमुक्त करने से निर्वाचन कार्य में बाधा भी आएगी।

खबर का दिखा असर: विभाग ने मानी गलती, कुछ स्थान्तरण निरस्त

खण्ड शिक्षा अधिकारियों के तबादले में की गई धांधली को प्रमुखता के साथ में प्रकाशित किया गया। इसका असर यह दिखा है कि आज निदेशालय की तरफ से बैक डेट में फिजा मिर्जा, अजय तिवारी और भारती शाक्य का तबादला बदलकर निकट के जिलों में कर दिया गया है। विभाग की तरफ से बैक डेट में संशोधन करके ही उन्हें पास के जिलों में तैनाती दी गई है।

टैक्स चोरी में वाणिज्य कर विभाग के 14 अधिकारी निलंबित

लखनऊ। भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के तहत शासन ने कर चोरी में संलिप्त पाए गए मुरादाबाद के वाणिज्य कर विभाग के 14 अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इन पर कम टैक्स जमा करने का आरोप है, जिससे सरकार को करीब 25 लाख रुपए राजस्व की हानि हुई थी। इस संबंध में द मुरादाबाद टैक्स बार, जोनल टैक्स बार एवं टैक्स बार एसोसिएशन ने 18 सितंबर 2021 को प्रदेश के मुख्यमंत्री को संयुक्त शिकायती पत्र भेजा था।

मामले में सचल दल अधिकारियों की अनियमित कार्यप्रणाली, गठित भौतिक सत्यापन समिति की अनियमित कार्यप्रणाली और जोनल एडिशनल कमिश्नर द्वारा भ्रामक आख्या प्रेषित करने के कारण 14 अधिकारियों तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया।

निलंबित किए गए वरिष्ठ अधिकारियों में 2 एडिशनल कमिश्नर, 4 ज्वाइंट कमिश्नर, 4 असिस्टेंट कमिश्नर और 4 वाणिज्य कर अधिकारी शामिल हैं, वहीं 14 अधिकारियों पर कार्रवाई होने से पूरे प्रदेश के वाणिज्यकर अधिकारियों में खलबली मची हुई है।

ये अधिकारी हुए निलंबित

निलंबित होने वालों में एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-1 अरविंद कुमार-1, एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-2 मुरादाबाद अवधेश कुमार सिंह, ज्वाइंट कमिश्रर सम्भाग ए मुरादाबाद, ज्वाइंट कमिश्नर संभाग बी मुरादाबाद चन्द्र प्रकाश मिश्र शामिल है। इसके अलावा, ज्वाइंट कमिश्नर (कारपोरेट) मुरादाबाद डॉ. श्याम सुंदर तिवारी, ज्वाइंट कमिश्नर (कार्यपालक) सम्भाग बी मुरादाबाद अनूप कुमार प्रधान, असिस्टेंट कमिश्नर (सचल दल) चतुर्थ इकाई, मुरादाबाद कुलदीप सिंह प्रथम, असिस्टेंट कमिश्नर (सचल दल) पंचम इकाई मुरादाबाद सत्येंद्र प्रताप, असिस्टेंट कमिश्नर (सचल दल) षष्टम इकाई मुरादाबाद राकेश उपाध्याय और असिस्टेंट कमिश्नर (सचल दल) द्वितीय इकाई मुरादाबाद, देवेंद्र कुमार प्रथम शामिल हैं।

कर चोरी करा रहे थे अधिकारी
दरअसल मुरादाबाद के वाणिज्य कर विभाग के सचल दल ने 26 और 27 जुलाई 2021 को दो ट्रक यूपी-23 टी-5177 और यूपी-23 एटी-1745  को जांच के लिए पकड़ा था। इन दोनों मामले में व्यापारियों से सांठगांठ कर कम टैक्स जमा करवाया गया। इससे विभाग को करीब 25 लाख रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ। एक ट्रक में 10.97 लाख और दूसरे ट्रक में 15.37 लाख रुपए की राजस्व हानि हुई। मामले की जांच की गई तो कई अधिकारियों को दोषी पाया गया। इसके बाद वाणिज्यकर अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया।

5 हजार रुपए रिश्वत लेते दरोगा गिरफ्तार

लखनऊ। एंटी करप्शन विभाग की टीम ने राजधानी के बिजनौर थाना क्षेत्र के नतकुर चौकी इंचार्ज राधेश्याम यादव को 5 हजार रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोपी दरोगा ठगी के मामले में दर्ज एफआईआर में धाराएं बढ़ाने के नाम पर रिटायर्ड सीओ बीएल दोहरे से रिश्वत मांग रहा था। रिश्वत देने के लिए दोहरे के साथ पहुंची भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने बिजनौर चौराहे पर रंगे हाथों आरोपी दरोगा को दबोच लिया।

20 लाख की ठगी का मामला
हिन्द नगर निवासी रिटायर्ड सीओ बीएल दोहरे के मुताबिक एक साल पहले उनकी मुलाकात मलिहाबाद के चौकराना निवासी सौरभ सैनी व ऋषभ सैनी से हुई थी। जालसाजों ने उन्हें एक करोड़ रुपए देने पर मंडी परिषद का चेयरमैन बनाने की बात कही थी। झांसे में लेने के लिए बीजेपी के कई बड़े नेताओं के साथ अपनी फोटो भी दिखाई। 20 लाख रुपए रिश्वत दे भी दी, लेकिन उन्हें चेयरमैन का पद नहीं मिला। रकम वापस मांगने पर आरोपित टालमटोल करने लगे। इस पर उन्होंने सरोजनी नगर थाने में सौरभ सैनी समेत सात लोगों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई थी। यह मुकदमा नव सृजित थाना बिजनौर में स्थानांतरित हो गया। इसकी विवेचना दरोगा राधेश्याम यादव कर रहे थे। आरोप है कि दरोगा बिना रिश्वत के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करना चाह रहे थे। कुछ भी कहने पर वह रिश्वत की मांग कर रहे थे।


टीम ने पकड़ा रंगे हाथ- गुरुवार की दोपहर बीएल दोहरे करीब साढ़े तीन बजे सरोजनी नगर के बिजनौर चौराहे पर पहुंचे। वहां मिठाई की एक दुकान पर उन्होंने दरोगा राधेश्याम यादव को पांच हजार रुपए घूस दी। रकम लेकर जेब में रखते ही एंटी करप्शन के इंस्पेक्टर लक्ष्मी नारायण यादव व उनकी टीम ने दरोगा राधेश्याम यादव को धर दबोचा तो राधेश्याम टीम के पुलिसकर्मियों से धक्कामुक्की करने लगा, लेकिन किसी तरह उसे काबू कर लिया गया। इसके बाद दरोगा को पीजीआई थाने ले जाया गया। पीजीआई इंस्पेक्टर धर्मपाल सिंह ने बताया कि घूस लेते पकड़े गए बिजनौर थाने के दरोगा राधेश्याम यादव निवासी ग्राम व पोस्ट डुमरी, थाना फेफना, जिला बलिया के खिलाफ एंटी करप्शन के इंस्पेक्टर लक्ष्मी नारायण यादव ने तहरीर दी है। मामले में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आरोपी दरोगा को कोर्ट में पेश किया जाएगा। रिटायर्ड डीएसपी श्री दोहरे का कहना है कि मुकदमे में कार्रवाई के लिए विवेचक राधेश्याम यादव छह महीने से दौड़ा रहे थे। वह कहते थे कि कार्रवाई कराना है तो कुछ खर्च करो…, धारा बढ़वानी है और गिरफ्तारी करानी है तो कुछ खर्च करो…। एंटी करप्शन टीम का कहना है कि आरोपी दारोगा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

रिश्वतखोर सिपाही को एसपी ने किया सस्पेंड

एसपी डॉ. धर्मवीर सिंह

बिजनौर। किरतपुर थाना क्षेत्र में डायल 112 पर तैनात एक पुलिस कर्मी द्वारा खाकी वर्दी को दागदार करने का मामला प्रकाश में आया है। पुलिस कर्मी द्वारा ग्राम प्रधान के घर रिश्वत लेते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। मामले को लेकर पुलिस विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। एसपी डॉ. धर्मवीर सिंह ने वायरल वीडियो का  संज्ञान लेते हुए आरोपी पुलिस कर्मी को सस्पेंड कर दिया।

जानकारी के अनुसार किरतपुर थाना क्षेत्र में पीआरवी-2436 (डायल 112) पर तैनात पुलिसकर्मी मंटल कुमार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इसमें उक्त पुलिस कर्मी गांव शाहजहांपुर रोशन में ग्राम प्रधान के घर पर कुछ पैसों की डिमांड करके रिश्वत लेते दिख रहा है। यह पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। पुलिस कर्मी द्वारा वर्दी को दागदार करने का वायरल वीडियो जब एसपी डॉ. धर्मवीर सिंह के संज्ञान में आया तो उन्होंने तत्काल प्रभाव से उसे निलंबित कर दिया।

सड़क को लेकर विधायक और सिंचाई अफसर आमने सामने

दमदारी से बचाव में उतरे अधिकारी। लखनऊ से भी रखी जा रही नजर।

बिजनौर। गांव खेड़ा के पास नहर की पटरी पर बन रही सड़क के उद्घाटन के दौरान नारियल से टूटने के विवाद ने तूल पकड़ लिया है। अब सदर विधायक सुचि मौसम चौधरी और सिंचाई विभाग के अफसर आमने-सामने नजर आ रहे हैं। जहां सदर विधायक सुचि मौसम चौधरी ने प्रेसवार्ता कर खुलकर आरोप लगाए कि सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार हो रहा था और अफसर, ठेकेदार रुपयों की बंदरबांट कर रहे थे। वहीं, सिंचाई विभाग के अफसरों ने नारियल से सड़क टूटने की बात पर आपत्ति जताते हुए डीएम को पत्र लिख दिया है। इसके अलावा इस मामले में लखनऊ से भी नजर रखी जा रही है।

सड़क निर्माण में बरती गई अनियमितता: विधायक

बिजनौर। सदर विधायक सुचि मौसम चौधरी ने पत्रकार वार्ता में कहा कि सड़क के जो हालात है, उसे देख लगा रहा है कि सड़क निर्माण में भारी अनियमितता बरती जा रही थी। आरोप लगाया कि टेंडर में साफ उल्लेख है कि सड़क हॉट मिक्स से बनाई जानी थी। ठेकेदार को हॉट मिक्स प्लांट होने का शपथ पत्र देना था। लेकिन अधिकारियों से मिलीभगत के चलते सड़क बिना हॉट मिक्स के ही बनाई जा रही है। उन्होंने इस मामले की जांच एसआईटी से कराने की मांग की। सदर विधायक सुचि मौसम चौधरी ने कहा कि हमारी सरकार का एक ही संकल्प है, भय मुक्त और भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश। भ्रष्टाचार जो भी अधिकारी करेगा, ठेकेदार करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती रही है, आगे भी कोई भ्रष्टाचार की कोशिश करेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी। सिंचाई विभाग की सड़क का मामला आया जिसके निर्माण में अनियमितता पाई गई सड़क का निर्माण रुकवा  दिया गया है।

नारियल से नहीं टूटी, फावड़े से तोड़ी गई सड़क: अधिशासी अभियंता

बिजनौर। सडक निर्माण में गड़बड़ी के आरोप लगे तो सिंचाई विभाग के अफसर खुलकर स्वमने आ गए। सिंचाई खंड के अधिशासी अभियंता विकास अग्रवाल ने जहां एक दिन पहले ही डीएम को पत्र लिखकर पूरी सड़क की जांच किसी दूसरे विभाग से कराने की मांग की थी। वहीं, नारियल से सड़क टूटने का दाया किए जाने पर आपत्ति जता दी है। शनिवार को सिंचाई विभाग के अफसरों की एक टीम ने मौके पर पहुंचकर सड़क की जांच भी की। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता विकास ने कहा कि फावड़ा मारकर सड़क को तोड़ा गया था। अभी सड़क का निर्माण शुरू ही  हुआ था. उस पर सीकीट होना शेष था। अभी तो सड़क पूरी है, तरह तैयार भी नहीं हुई थी।

एई व जेई सस्पेंड

जलशक्ति मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह ने इस पर संज्ञान लेते हुए कड़ी कार्रवाई कर दी। उन्होंने फोन पर बताया कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सड़क निर्माण कार्य की देखरेख कर रहे जेई शिवानी गुप्ता और एई सुरेंद्र को निलंबित करने और सड़क को दोबारा बनाने के आदेश जारी कर दिए हैं। इसके अलावा अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग से इस पूरे मामले में स्पष्टीकरण मांगा गया है। डॉ. महेंद्र सिंह ने बताया कि सोमवार को निलंबन का पत्र भी पहुंच जाएगा।

रिश्वत लेते आरपीएफ इंस्पेक्टर और सिपाही गिरफ्तार

लखनऊ। सीबीआई ने आरपीएफ इंस्पेक्टर और सिपाही को 63 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। दोनों की गिरफ्तारी बाराबंकी रेलवे स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया से शनिवार की देर रात की गई। टीम दोनों आरोपियों को पहले कोतवाली और फिर लखनऊ ले आई। 

बाराबंकी जिले के एक व्यापारी ने सीबीआई में शिकायत दर्ज कराई थी कि आरपीएफ बाराबंकी इंस्पेक्टर अखिलेश यादव उस पर काम के लिए रिश्वत देने का दबाव बना रहे हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए सीबीआई ने मुकदमा पंजीकृत किया था। शनिवार की देर रात सीबीआई ने बाराबंकी रेलवे स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया से इंस्पेक्टर आरपीएफ अखिलेश यादव और सिपाही आशुतोष तिवारी को 63 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। टीम दोनों आरोपियों को लेकर नगर कोतवाली पहुंची। इसके बाद सुबह करीब आठ बजे आरोपी इंस्पेक्टर और सिपाही को टीम लखनऊ लेकर रवाना हो गई।

बताया जा रहा है आरोपी इंस्पेक्टर के आवास से पांच लाख रुपए भी बरामद हुए हैं। मंडल सुरक्षा आयुक्त लखनऊ अभिषेक कुमार ने बताया कि सीबीआई ने शिकायत पर आरपीएफ बाराबंकी इंस्पेक्टर व सिपाही को गिरफ्तार किया है। इस मामले में सीबीआई ने मुकदमा दर्ज किया था। शनिवार की देर रात सीबीआई टीम ने गिरफ्तारी की है। आरोपी इंस्पेक्टर अखिलेश यादव और सिपाही आशुतोष तिवारी को निलंबित किया जा चुका है। उनके खिलाफ विभागीय जांच बैठाकर कार्यवाही की जा रही है।

सड़कों पर लगे फड़ वालों से की जा रही अवैध वसूली!

आखिर कौन कर रहा सड़कों पर लगे फड़ों से अवैध वसूलीरामलीला मैदान में प्रत्येक रविवार व बुधवार को लगता है साप्ताहिक बाजार।

बिजनौर। रामलीला मैदान में प्रत्येक रविवार व बुधवार को लगने वाले साप्ताहिक बाजार के बाहर फड़ वालों से अवैध वसूली की जा रही है।

शहर के रामलीला मैदान में प्रत्येक रविवार व बुधवार को साप्ताहिक बाजार लगता है। रामलीला में लगने वाली दुकानों व फड़ों से रामलीला समिति के लोग निर्धारित शुल्क वसूलते हैं लेकिन रामलीला के बाहर लगने वाले फड़ों व ठेलों से भी वसूली की जा रही है। यह सभी फड़ व ठेले आदि सरकारी जमीन पर लग रहे है लेकिन ताज्जुब की बात है कि इन फड़ों से वसूली करने वाले ना तो नगर पालिका के कर्मचारी हैं और ना ही किसी अन्य सरकारी विभाग के, बल्कि कुछ प्राइवेट जाने पहचाने चेहरे हर बाजार को सड़क पर लगने वाले प्रत्येक फड़ व ठेले वालों से वसूली करते दिखते हैं। ये लोग निर्धारित शुल्क के रूप में अधिकांश सभी फड़ व ठेले वालों से रुपए लेते हैं। कई बार रुपए ना मिलने पर काफी नोंकझोंक भी देखी जाती है। लोग दबी जुबान से इस अवैध उगाही में रामलीला समिति के इर्द-गिर्द घूमने वाले लोगों के नाम ले रहे हैं। फिलहाल प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है लेकिन उक्त लोग अवैध रूप से भारी भरकम वसूली कर सरकारी विभाग को ही चूना लगाया जा रहे हैं।

वित्तीय आपराधिक मामलों से निपटने को यूपी में तीन विशेष अदालतें

लखनऊ। वित्तीय मामलों से जुड़े आपराधिक मुकदमों की सुनवाई के लिए यूपी में तीन विशेष अदालत बनाई जाएंगी। इससे जनता से वित्तीय धोखाधड़ी करने वालों पर लगाम लगेगी और पीड़ितों को जल्द न्याय मिल सकेगा। इसके जरिये साइबर क्राइम के जरिये धन उड़ा ले जाने, बिल्डरों द्वारा रकम हड़प लेने और फर्जी वित्तीय संस्थाओं पर लग रोक लग सकेगी। फिलहाल ये अदालतें लखनऊ, नोएडा, गोरखपुर में स्थापित की जाएंगी।

शीर्ष सूत्रों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियों में शामिल अपराधियों को जल्द सजा दिलाई जा सकेगी। इसके जरिए अपराधियों को अधिकतम दस साल की सजा या दस लाख रुपए का जुर्माना या दोनों सजा मिल सकेगी। इसका मकसद साइबर क्राइम के जरिए ठगी करने और गड़बड़ी करने वाले बिल्डरों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करना है। इस दायरे में आवंटियों से धोखाधड़ी करने वाले बिल्डर से जुड़े मामले भी इन अदालतों में आएंगे।

सूत्रों के मुताबिक अभी हर माह औसतन 100 शिकायतें बिल्डरों से जुड़ी आती हैं। यूपी में कार्यरत बहुराज्यीय सहकारी समितियों के खिलाफ आने वाली शिकायतों पर अब तेजी से कार्रवाई होगी। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ईओडब्लू और यूपी पुलिस के बीच अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की जाएगी।

धोखाधड़ी रोकने के सख्त निर्देश

संस्थागत वित्त विभाग के महानिदेशक शिव कुमार यादव के अनुसार वित्तीय धोखाधड़ी रोकने के लिए मुख्यमंत्री ने सख्त निर्देश दिए हैं। अब जनता के बीच जागरुकता अभियान  चलाया जाएगा। अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम 2019 के तहत बैनिंग एक्ट ग्रिवांस पोर्टल तैयार किया जाएगा। इसका शुभारंभ मुख्यमंत्री करेंगे। इसके जरिए कोई धोखाधड़ी का शिकार व्यक्ति इस पर शिकायत दर्ज कर सकता है। बैनिंग एक्ट के तहत हर जिले में विशेष अदालतों का गठन होगा। इसके लिए उच्च न्यायालय ने मंजूरी दे दी है।  

NCB की कमान संभालेंगे IPS अफसर सत्य नारायण प्रधान

वरिष्ठ IPS अफसर सत्य नारायण प्रधान को बनाया गया NCB का महानिदेशक, 2024 तक रहेगी कमान

वरिष्ठ IPS अफसर सत्य नारायण प्रधान को बनाया गया NCB का महानिदेशक, 2024 तक रहेगी कमान

मुंबई (एजेंसी)। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के महानिदेशक के रूप में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सत्य नारायण प्रधान की नियुक्ति की गई है। वह इस पद पर 31 अगस्त, 2024 को अपनी सेवानिवृत्ति की तारीख तक या अगले आदेश तक बने रहेंगे। झारखंड कैडर के 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी प्रधान वर्तमान में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) के महानिदेशक की जिम्मेदारी संभालने के बावजूद एनसीबी प्रमुख का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे।

अभी तक था अतिरिक्त प्रभार: राकेश अस्थाना को दिल्ली पुलिस आयुक्त के रूप में नियुक्त किए जाने के बाद उन्हें एनसीबी के महानिदेशक का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। वहीं 1988 बैच के गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी अतुल करवाल को एनडीआरएफ के महानिदेशक के रूप में नियुक्त किया गया है। कैबिनेट की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने बुधवार देर रात के आदेश में प्रधान को पूर्णकालिक आधार पर एनसीबी का महानिदेशक नियुक्त किया।

Satya Narayan Pradhan appointed as Narcotics Control Bureau chief |  NewsTrack English 1

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बाद में संबंधित विंग को एसीसी (कैबिनेट की नियुक्ति समिति) की मंजूरी के लिए सत्य नारायण प्रधान को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के महानिदेशक के पद पर प्रतिनियुक्ति के आधार पर नियुक्त करने का निर्देश दिया। उनके पदभार ग्रहण करने की तारीख से और 31 अगस्त, 2024 को उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख तक या अगले आदेश तक, ये आदेश प्रभावी रहेगा। गृह मंत्रालय ने प्रधान को एनडीआरएफ के महानिदेशक के पद से तत्काल मुक्त करने का भी अनुरोध किया है, ताकि उन्हें नया कार्यभार संभालने में दिक्कत ना आए।

आर्यन केस से चर्चा में है NCB: एसएन प्रधान की नियुक्ति ऐसे वक्त में हुई है, जब एनसीबी काफी चर्चा में है। अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की गिरफ्तारी के बाद एनसीबी के अधिकारियों पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं। एनसीबी के क्षेत्रीय निदेशक समीर वानखेड़े पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। एनसीपी नेता नवाब मलिक उन्हें लेकर आए दिन ट्वीट कर उनकी जांच पर सवाल खड़े कर रहे हैं, जिसके चलते वानखेड़े के पिता ने मानहानि का मुकदमा भी दायर किया है। मामले की सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि समीर वानखेड़े एक सरकारी अधिकारी हैं और कोई भी उनके कामकाज की समीक्षा कर सकता है।

मिठाई के साथ डिब्बा तौलकर ग्राहकों से कमाया मोटा माल

मिठाई के साथ डिब्बा तौलकर ग्राहकों से कमाया मोटा माल। नहीं तौल सकते डिब्बा। डिब्बा तौलने पर जुर्माना ₹ कई हजार। जिले में हैं मिठाई की हजारों दुकान। अलग से करवाएं डिब्बे का वजन, लें बिल।

बिजनौर (शैली सक्सेना)। कोरोना की मार झेल रही आम जनता फिर से ठगी गई। त्योहारी सीजन में मिठाई की दुकानों में मिठाई के साथ गत्ते का डिब्बा तौलकर ग्राहकों को जमकर चूना लगाया गया। कानूनन मिठाई के साथ डिब्बा तौलने वाले दुकानदारों से पांच हजार रुपए  जुर्माना का प्रावधान है। माप तौल विभाग ने हमेशा से चले आ रहे इस गोरखधंधे को रोकने के लिए छापेमारी करने के लिए कोई प्लान तैयार नहीं किया। लिहाजा ग्राहकों की खूब जेब कतरी गई।

नहीं तौल सकते डिब्बा- बाजारों में मिठाई की दुकानों में जितनी महंगी मिठाई, उतना ही डिब्बे का मूल्य लगता है। हमेशा से दुकानदार यह खेल करते चले आ रहे हैं। वैसे तो यह पूरे साल होता है। …लेकिन त्योहारों में मिठाई की मांग बढ़ने पर यह खेल और बढ़ जाता है। डिब्बे का वजन अगर सौ से 150 ग्राम है तो ग्राहक को इतनी ही मिठाई कम मिलती है। ग्राहक भी बिना कुछ कहे मिठाई लेकर चला जाता है। इससे महंगी मिठाई में ग्राहकों को चपत लगती है। मिठाई तौलते वक्त डिब्बे का वजन भी उसमें शामिल कर लेना घटतौली में आता है, जो कानूनन अपराध है।

डिब्बा तौलने पर जुर्माना ₹ कई हजार- मिठाई के साथ डिब्बे का वजन भी तौलते पकड़े जाने पर पांच से 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाने का प्रावधान है। डिब्बे के साथ मिठाई तौलने वाले दुकानदारों की ग्राहक शिकायत कर सकते हैं। शिकायत मिलने पर विभाग की टीम फर्जी ग्राहक तैयार करेगी। इसके बाद दुकान में जाकर जांच करेगी। ऐसा करने पर जुर्माना किया जाएगा। 

जिले में हैं मिठाई की हजारों दुकान- जिले में मिठाई की कई हजार दुकानें हैं। इसके अलावा त्योहारी सीजन में मिठाई बेचने वाले स्टाल भी लगाते हैं। त्योहारी सीजन देखते हुए स्पेशल मिठाई के डिब्बे बनवाए जाते हैं। इनका वजन भी सौ से डेढ़ सौ ग्राम तक होता है। एक डिब्बा 7 से 10 रुपए का पड़ता है।

क्या कहते हैं अधिकारी- माप मौल विभाग के सूत्रों का कहना है कि मिठाई विक्रेता, मिठाई के साथ डिब्बा नहीं तौल सकते हैं। मिठाई विक्रेता ऐसा करते हैं तो कोई भी व्यक्ति शिकायत कर सकता है। अगर ऐसा करता हुआ कोई मिठाई विक्रेता मिलता है तो उस पर अधिकतम 10 हजार रुपए तक जुर्माना किया जाएगा। 

अलग से करवाएं डिब्बे का वजन, लें बिल
मिठाई के साथ डिब्बा तौलने की शिकायत मिलने पर संबंधित दुकानदार के विरूद्ध विधिक माप अधिनियम 2009 के तहत शत प्रतिशत कार्रवाई की जाती है। मिठाई खरीदते समय डिब्बे का वजन अलग से करवाएं एवं खरीदी गई मिठाई का बिल आवश्यक रूप से लेना चाहिए।

हैल्थ डिपार्टमेंट: कार्रवाई से पहले तैयार हो जाती है बचाव की पटकथा!

पहले ही तैयार हो जाती है बचाव की पटकथा! जगजाहिर हैं नोडल क्वेक्स डॉक्टर एसके निगम के कारनामे!

बिजनौर। जनपद में नीम हकीमों द्वारा आएदिन लोगों की जान ली जा रही है लेकिन नोडल क्वेक्स केवल उगाही को अंजाम दे रहे हैं!

गत दिनों चांदपुर के एक अवैध रूप से संचालित नर्सिंग होम में हुई मौत के बाद खूब बवाल हुआ। प्रशासन को काफी मशक्कत के बाद जाम खुलवाने में कामयाबी हासिल हुई। इस हंगामे को होते देख नोडल अधिकारी क्वेक्स एसके निगम चांदपुर पहुंचे और आनन-फानन में उन नर्सिंग होम, अस्पतालों को नोटिस जारी कर दिया, जिनसे वह वर्षों से अवैध उगाही करते चले आ रहे हैं? इसके बाद अस्पताल संचालक और डॉक्टर अपने बचाव के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में पहुंच गए। बताया जाता है कि डॉ. एसके निगम द्वारा एक बाबू को उनको बचाव की जानकारी के लिए लगा दिया गया!

…और बाबू पर भी नहीं किसी का काबू: बाबू ने ऐसा षड्यंत्र रचा कि डॉक्टर बागबाग हो गए और एक मोटी रकम डॉ. एसके निगम को भेंट स्वरूप दी गई। बचाव के रास्ते की जानकारी मिलने पर सीएमओ साहब भी गदगद हो गए! वह बचाव में दलीलें देते नजर आते हैं। बात यहीं खत्म नहीं हो जाती, दरअसल मामला बरसों पुराना है। बरसों से जो भी नोडल कवेक्स बनाए जाते हैं, उनका एकमात्र उद्देश्य इन झोलाछाप नीम हकीम डॉक्टर से अवैध उगाही करना ही बना हुआ है। डॉक्टर एसके निगम एक वर्ष से ज्यादा से नोडल कवेक्स हैं और लगातार चांदपुर में नीम हकीम को नोटिस जारी कर उगाही करते रहे हैं! जब भी कोई ऐसा मामला फंसता नजर आता है तब वह भारी संख्या में नीम हकीम को नोटिस जारी कर देते हैं और बाद में मामला शांत होने पर अवैध उगाही कर उन्हें अभयदान प्रदान करते हुए अपनी एक निश्चित रकम तय कर लेते हैं। एक नीम हकीम को उगाही की जिम्मेदारी देते हैं या फिर गाड़ी में बैठ कर अस्पताल के बाहर अपने ड्राइवर के माध्यम से उगाही के कार्य को अंजाम देते रहते हैं। इस बार भी कुछ अलग नहीं होने जा रहा है।

तगड़ी हो रही उगाही– नाम न छापने की शर्त पर एक अस्पताल संचालक ने बताया कि उनसे प्रतिमाह ₹ 2 से ₹4000 तक की प्रतिमाह उगाही की जाती है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है की डॉ. एसके निगम गरीब मरीजों की जान से खिलवाड़ करने की खुली छूट अवैध रूप से संचालित अस्पतालों व नीमहकीमो को दिए हुए हैं जबकि उनके रिटायरमेंट के कुछ माह शेष हैं। ऐसे में वह कोई मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहते और वह सारे नीम हकीम अल्ट्रासाउंड सेंटर से अवैध उगाही के लिए ताबड़तोड़ दौरे कर रहे हैं। यहां उल्लेखनीय है कि छुट्टी के दिन निगम अपनी व्यक्तिगत गाड़ी लेकर उगाही के लिए निकल जाते हैं।

प्रशासन और सरकार की बदनामी- आरोप है कि वह जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार को बदनाम करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। साथ ही कुछ स्थानीय पार्टी नेताओं व अधिकारियों को एक मोटी रकम प्रतिमाह अपनी उगाही से देते रहते हैं। इस कारण आज तक किसी सत्तारूढ़ पार्टी के नेता या फिर स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी उनकी ओर आंख उठाकर भी नहीं देखते। अभी उन्होंने चांदपुर में नौ और नजीबाबाद के भागूवाला में 11 चिकित्सकों को नोटिस जारी कर प्रमाण पत्र मांगे हैं, जबकि पंजीकृत अस्पतालों का रिकॉर्ड सीएमओ ऑफिस में मौजूद रहता है लेकिन इन पर डॉक्टर निगम ध्यान नहीं देते हैं क्योंकि उन्हें तो अवैध उगाही करनी है। उन्हें इससे क्या लेना कि कोई अस्पताल या डॉक्टर पंजीकृत है या नहीं है। अक्सर होता यह भी है कि अस्पताल का पंजीकरण जिस डॉक्टर के नाम से कराया जाता है वह उस हॉस्पिटल में कभी आता ही नहीं है। इस बात की पुष्टि इन अस्पतालों में लगे सीसीटीवी कैमरे से की जा सकती है, लेकिन इस सब को दरकिनार कर नोडल अधिकारी कवेक्स अपने उगाही के धंधे को जारी रखे हुए हैं। इससे सरकार व जिला प्रशासन की बदनामी के साथ ही कार्यशैली पर राशन लगना तो लाजमी है।

सरेआम होती इस लूट को रोकने के लिए सख्ती कीजिये

भारत के लोग रोज लुट रहे हैं। ठगी के शिकार हो रहे हैं। धोखा देकर उनके खातों से रकम निकाली जा रही है। युवा फर्जी  विश्वविद्यालय में प्रवेश लेकर धन और समय बर्बाद कर रहे हैं। इतना  होने पर भी रोकने के लिए जिम्मेदार संस्थाएं आंखें मूंदे बैठी हैं। वह कुछ नहीं कर पा रहीं। आम उपभोक्ता, देश का युवा नागरिक रोज लुट-पिट कर घर बैठ जाता है। शिकायत करने के बाद भी कुछ भी नहीं कर पाता।

भारतीय स्टेट बैंक ने अपने खाताधारकों से कहा है कि वह बैंक का कस्टमर केयर नंबर गूगल या किसी और प्लेटफार्म पर सर्च ना करें। स्टेट बैंक की सही वेबसाइट का प्रयोग करें। उसने यह भी कहा है उसके नाम (स्टेट बैंक) से मिलती -जुलती लगभग आधा दर्जन वेब साइट गूगल और अन्य ऐसे ही प्लेटफार्म पर मौजूद थे। जरा सी  गलती से आप इन पर लॉगिन करके ठगी के शिकार हो सकते हैं। यह आदेश स्टेट बैंक के नहीं हैं, आज सभी बैंक इस तरह के आदेश कर रहे हैं। बैंक खाताधारकों को जानकारी दे रहे हैं कि वे बैंक के नाम पर हो रही ठगी से कैसे बचेंॽ

यही हालत यूजीसी ग्रांट कमीशन (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) की है। उसे पता है कि देश में कितने फर्जी विश्वविद्यालय चल रहे हैं। वह साल में कई बार इन विश्वविद्यालयों की सूची अखबार में छपवाता  है। वह सिर्फ सूची छपवा कर अपनी जिम्मेदारी  से मुक्त हो जाता है। अपनी जिम्मेदारी से छूट जाता है। सही विश्वविद्यालयों की जानकारी संज्ञान में ना होने पर जो युवा इन फर्जी विश्वविद्यालयों में प्रवेश ले लेते हैं, उनके साल तो बर्बाद होते ही है पढ़ाई के दौरान व्यय हुआ धन भी बेकार जाता है।

कुछ यही हालत राम मंदिर की साइट की भी है। मंदिर का निर्माण कार्य कराने का निर्णय हुआ। धन संग्रह के लिए मंदिर निर्माण समिति ने साइट बनाई। उसकी साइट तो बाद में बनी, उस जैसी मिलते- जुलते नाम की कई साइट और बनकर खड़ी हो गई। आम आदमी राम मंदिर को चंदा देना चाहता है। उसकी मंदिर में आस्था है, लेकिन  ये फर्जी साइट बनाने वाले  उनकी आस्था और विश्वास का लाभ उठाकर उनकी भावनाओं से खिलवाड़ करते हैं। उनकी मेहनत की कमाई लूट रहे हैं। राम मंदिर ही नहीं, अन्य प्रसिद्ध मंदिरों के नाम से मिलती −जुलती साइट भी मौजूद हैं।

भारतीय सेना के लिए धन संग्रह वाली अलग साइट है। इसके लिए जो दान करना चाहता है, वहाँ जाकर कर सकता है, लेकिन इसके नाम से मिलती-जुलती कई साइट पहले ही मौजूद हैं। पिछले साल जब चीन से तनातनी चली, तब  इन फर्जी संस्थाओं में दान देने के  बारे में पब्लिक प्लेटफॉर्म, व्हाट्सएप, ट्विटर और फेसबुक आदि पर लगातार मैसेज आए। जनता से अपील की गई  कि सेना को मजबूत करने सैनिकों की सुविधा विस्तार के लिए खुले मन से इनमें दान करें। बाद में पता चलता है कि इन इन सब का अधिकृत एजेंसी से कोई लेना-देना नहीं। यह तो देशवासी की आस्थाओं पर डाका डालने में लगे हुए है। ऐसी ही साइट के बारे में लोगों ने रक्षा मंत्रालय और केंद्र की कई जिम्मेदार संस्थाओं को मेल कर वस्तु स्थिति जाननी चाही। एक साल बीतने पर भी कोई  उत्तर नहीं मिला।

जिम्मेदार संस्थाएं बैंक, विश्व विद्यालय अनुदान आयोग आदि इन धोखेबाज के खिलाफ मुकदमे दर्ज क्यों नहीं करते?
हम जानते हैं कि ठगी हो रही है। लोगों की आस्थाओं का गलत लाभ उठाया जा रहा है। कुछ चोर −लुटेरे आराम से लोगों की मेहनत की कमाई पर अय्याशी कर रहे हैं।

इस तरह की ठगी, लूट और धोखाधड़ी रोकने के लिए केंद्र सरकार के स्तर पर कोई संस्था होनी चाहिए। ऐसा करने वालों पर कठोर दंड की व्यवस्था हो, तुरत-फुरत न्याय हो, कठोर साइबर कानून हो। इसके साथ जरूरी है कि अपराधी के प्रति कोई दया या कृपा न बरती जाए। उत्तर प्रदेश की तरह अपराधियों की संपत्ति पर तुरंत सरकार कब्जा कर ले। तभी जाकर इन अपराधों पर रोक लग सकती है, अन्यथा ये तो चलता ही रहेगा।

बिजनौर पालिका EO के खिलाफ अग्रवाल समाज ने खोला मोर्चा!

बिजनौर। नगर पालिका बिजनौर के EO (अधिशासी अधिकारी) के कथित रूप से प्रेमचंद अग्रवाल स्पीकर उत्तराखंड व कपिल देव मंत्री उत्तर प्रदेश के पोस्टर पर लात मारने का मामला गर्मा गया है!

शुक्रवार देर शाम नगर पालिका परिषद कार्यालय परिसर में अग्रवाल समाज के लोगों ने मामले में विरोध दर्ज कराया। घटना को लेकर अग्रवाल समाज के लोगों में बहुत ज्यादा गुस्से का माहौल बना हुआ है। वह लोग EO के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं। वहीं पालिका सूत्रों का कहना है कि अतिक्रमण हटाने के अभियान के दौरान शहर में लगे पोस्टर, बैनर, होर्डिंग्स आदि उतारे गए। किसी भी वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी के लिये इस तरह का कृत्य नहीं किया गया। दूसरी ओर अग्रवाल समाज के लोगों का आरोप है कि पोस्टर आदि के लिये अनुमति ली गई थी।

समाचार लिखे जाने तक नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी मनोज कुमार, अवर अभियंता यशवंत, सेनेटरी इंस्पेक्टर गोविंद के अलावा गौतम अग्रवाल समाज के लोगों को समझाने में जुटे हुए थे।

विदित हो कि महाराजाधिराज अप्रसेन जी की जयंती समारोह का आयोजन शनिवार 09 अक्टूबर को सायं 06 बजे शहनाई बैंकट हॉल में किया जा रहा है।

चर्चाओं में हैं पालिका प्रशासन!

नगर पालिका परिषद के अधिकारी विवादों से नाता बना बैठे हैं। अभी शहर की एक मानक विपरीत बनी सड़क का मामला उनके गले की फांस बना हुआ है? उच्च स्तर पर शिकायत के बाद संबंधित ठेकेदार से लाखों की रकम वसूल कर शासकीय खजाने में जमा कराने के साथ ही उसे ब्लैकलिस्टेड करने के आदेश पर लीपापोती की जा रही है। सूत्रों का दावा है कि उक्त सड़क को श्रमदान में घोषित करा कर ठेकेदार को भले ही कुछ लाख की आर्थिक क्षति पहुंचा दी जाए लेकिन उसे ब्लैकलिस्टेड होने से बचाने के साथ ही अपनी और अन्य की गर्दन भी बचा ली जाएगी!

55,243 अपात्रों से वसूली जाएगी किसान सम्मान निधि योजना की रकम

बरेली। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा पकड़े जाने के बाद अब अपात्रों से रिकवरी की तैयारी है। सरकारी नौकरी में होने या फिर अच्छा बिजनेस करने के बावजूद भी 55,243 खातों में सम्मान निधि की धनराशि पहुंच रही थी। बरेली मंडल में सितंबर में शासन स्तर पर मामले की जांच कराई गई। तब फर्जीवाड़ा पकड़ा गया। अब इन अपात्रों को जिला कृषि विभाग की ओर से रिकवरी नोटिस जारी किए जा रहे हैं। वसूली गई रकम भारत सरकार के कोष में जमा कराई जाएगी।

केंद्र सरकार के पास तीन महीने पहले प्रधानमंत्री कृषि सम्मान निधि योजना के संबंध में फर्जीवाड़ा की शिकायतें पहुंची थीं। आरोप था कि बड़ी संख्या में ऐसे किसान हैं, जो किसान नहीं बल्कि सरकारी नौकरी में हैं या फिर बड़े बिजनेस कारोबारी हैं। इसके बावजूद भी उनके खाते में सम्मान निधि योजना की रकम पहुंच रही है। शासन स्तर पर मामले की जांच के दौरान जिला स्तर पर जब सम्मान निधि की रिपोर्ट मांगी गई तो जांच में खुलासा हुआ।

विभागीय सूत्रों का कहना है कि प्रदेश में 2,34,010 आयकर दाता, 32,393 मृतक, 3,86,250 गलत खाते पकड़े गए। 57,987 अपात्र और 68,540 अवैध आधार कार्ड मिले। प्रदेश में 7,79,180 अपात्रों को सम्मान निधि का लाभ मिल रहा था। बरेली मंडल में सम्मान निधि का लाभ लेने वाले आयकर दाता 8,314, मृतक 2189, गलत खाता में भुगतान वाले 31,637, अपात्र 5,336, अवैध आधार 7,767 कुल मिलाकर 55,243 लोग चिन्हित किए गए। यह वह लोग हैं, जो गलत तरीके से सम्मान निधि का लाभ ले रहे थे। बरेली जिले में 16707, बदायूं में 15743, पीलीभीत में 12817 व शाहजहांपुर में 9,976 लोग सम्मान निधि को अपात्र चुने गए हैं।

आधार कार्ड से पकड़ में आया घपला

सरकार ने किसान सम्मान निधि लेने वाले किसानों की सत्यापन रिपोर्ट आधार कार्ड से कराई। बैंक एकाउंट में आधार नंबर को डालकर सर्च करते ही आधार से जुड़े सभी एकाउंट लिंक हो गए। जांच में बरेली मंडल में 8,314 आयकर दाता किसान सम्मान निधि का लाभ लेते मिले। 5,336 ऐसे किसान चिन्हित हुए, जिनके एक परिवार में कई- कई लोग सम्मान निधि ले रहे थे। पत्नी, बेटे और बहू के खाते में भी सम्मान निधि पहुंच रही थी। जो किसान मर गए, उनके खाते भी सम्मान निधि आ रही थी। ऐसे 2189 मृतकों के खाता पकड़ में आए। 31,637 गलत खाते मिले।

बरेली मंडल में कुल 55,243 अपात्र: किसान सम्मान निधि पाने वालों का सत्यापन जिला स्तर पर किया गया। किसान के नाम, पिता या पति का नाम, गांव, आधार संख्या, खसरा खतौनी की जांच ऑनलाइन की गई। मण्डल में 55,243 अपात्र मिले। उनको रिकवरी नोटिस भेजे जा रहे हैं। -धीरेंद्र सिंह चौधरी प्रभारी उप कृषि निदेशक

यूपी में 7 वरिष्ठ IPS अधिकारियों के तबादले

  • उत्तर प्रदेश में सात IPS अधिकारियों का तबादला
  • गुरुवार देर शाम को जारी की गई लिस्ट

स्थानांतरित होने वाले आईपीएस अधिकारियों में धर्मेंद्र सिंह, राम बदन सिंह, अनिल कुमार, अभिषेक वर्मा, संकल्प शर्मा, अपर्णा गौतम और ओपी सिंह शामिल।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सात IPS अधिकारियों के तबादले किये गए हैं। इसमें पुलिस अधीक्षक भदोही, पुलिस अधीक्षक बदायूं, पुलिस अधीक्षक गाजीपुर के साथ-साथ अपर पुलिस उपायुक्त (कानपुर) का नाम शामिल है। अपर मुख्य सचिव अवनीश कुमार अवस्थी ने गुरुवार देर शाम आदेश जारी किया।

उत्तर प्रदेश में वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। ऐसे में प्रदेश सरकार की ओर से प्रशासनिक सेवाओं को अधिक बेहतर करने का काम किया जा रहा है। इसके चलते विभागीय अफसरों में फेरबदल की कवायद भी तेज हो गई है।

अपर मुख्य सचिव द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, रेलवे पुलिस में पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) धर्मेंद्र सिंह का ट्रांसफर कर उन्हें प्रदेश के रूल्स एंड मैनुअल्स विभाग में डीआईजी पद पर भेज दिया गया है। भदोही जिला के एसपी राम बदन सिंह को गाजीपुर का एसपी बना दिया गया है। गाजीपुर के एसपी डा. ओपी सिंह को बदायूं का एसएसपी नियुक्त कर दिया गया है। कानपुर कमिश्नरेट के अपर पुलिस उपायुक्त अनिल कुमार को भदोही का एसपी बना दिया गया है। अनिल कुमार के स्थान पर बदायूं के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) संकल्प शर्मा को भेज दिया गया है। लखनऊ स्थित पुलिस महानिदेशक मुख्यालय पर तैनात एसपी अभिषेक वर्मा को औरैया जिला के एसपी के तौर पर नियुक्त किया गया है। यहां नियुक्त एसपी अपर्णा गौतम को लखनऊ स्थित डीजीपी मुख्यालय में एसपी के पद पर नियुक्त किया गया है।

10 दिन में 67 PCS: पिछले महीने उत्तर प्रदेश में 29 वरिष्ठ पीसीएस अधिकारियों के तबादले हुए थे। इसमें गोंडा, बहराइच व रायबरेली सहित कई जिलों के अधिकारियों का ट्रांसफर हुआ था। इससे कुछ दिन पहले ही 38 वरिष्ठ पीसीएस अधिकारियों का तबादला किया गया था। इस तरह 10 दिनों के भीतर 67 अधिकारियों का तबादला किया।

पुलिस महकमे पर योगी की सख्त निगाह

यूपी पुलिस को लेकर सीएम ने कानपुर में गुरुवार को कड़ा रुख दिखाते हुए साफ कहा था कि अगर पुलिस कर्मी की वर्दी पर कोई दाग (भ्रष्टाचार आदि में संलिप्ता) मिला तो, उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ सकती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऐसे पुलिसकर्मियों की लिस्ट बनाने को कहा है, जिन पर कई तरह के आरोप हैं। सीएम का कहना है कि भ्रष्टाचार में संलिप्त एक भी पुलिसकर्मी यूपी पुलिस में नहीं रहना चाहिए। विदित हो कि गोरखपुर में कानपुर के प्रॉपर्टी डीलर मनीष गुप्ता की हत्या के मामले में इंसपेक्टर समेत छह पुलिस कर्मियों पर आरोप है।

मोदीनगर शहर के साथ पालिका प्रशासन कर रहा सौतेला व्यवहार: आशीष शर्मा

पालिका सभासदों के अनिश्चितकालीन धरने को कांग्रेस ने दिया समर्थन। शहर अध्यक्ष आशीष शर्मा ने लगाया आरोप मोदीनगर शहर के साथ पालिका प्रशासन कर रहा है सौतेला व्यवहार


मोदीनगर। शहर कांग्रेस कमेटी मोदीनगर के तत्वाधान में शहर अध्यक्ष आशीष शर्मा के नेतृत्व में नगर पालिका परिषद मोदीनगर गेट पर पालिका सभासदों द्वारा शहर की विभिन्न समस्याओं को लेकर चल रहे अनिश्चितकालीन धरने पर पहुँचकर भारी संख्या में कांग्रेसजनों के साथ अपना समर्थन पत्र सौंपा।

इस मौके पर शहर अध्यक्ष आशीष शर्मा ने कहा कि पालिका प्रशासन शहर के साथ सौतेला व्यवहार कर रहा है। पूरे शहर में गढडे हैं, सारी गलियां टूटी पड़ी हैं। सीकरी रोड, फफराना रोड, महेश मार्ग, तिबड़ा रोड, आन्नदीपुरा, गुरूद्वारा रोड, सौंदा रोड, महेन्द्रपुरी सी लाईन, बिसोखर रोड, गोविन्दपुरी, सारा रोड, हरमुखपुरी सभी सड़के टूटी पड़ी हैं। सीवरेज योजना में अनिमितताएं बरती जा रही हैं। वार्डो में कूड़े के ढेर लगे हुए हैं, लेकिन पालिका प्रशासन इन सब समस्याओं से अपनी आंख मूंदे बैठा है।
शहर अध्यक्ष आशीष शर्मा ने सभी सभासदों को कांग्रेस कमेटी की ओर से आश्वस्त किया कि आपके हर संघर्ष में कांग्रेस कमेटी कंधे से कंधा मिलाकर आपके साथ है।

इस मौके पर इंटक प्रवक्ता सुरेश कुमार शर्मा, शहर उपाध्यक्ष पंकज सोई, डा. रवि सिंह, शहर महासचिव नंद किशोर शर्मा, हरविन्द्र भुटानी, शारदा सैन, शहर सचिव बीना ठाकुर, ममता शर्मा, इन्द्रा शर्मा, निर्मल पाॅल, गुलबीर भारद्वाज, पवन कोरी, ईशांत सहगल, कोषाध्यक्ष श्रीओम शर्मा, अरमान मेंहदी, रोहित सिंह अध्यक्ष सेवादल युथ विंग, आकाश वर्मा, वार्ड अध्यक्ष अरूण शर्मा, विनय कुमार, समीर, जितेन्द्र कुमार, राजेन्द्र शर्मा, मुकुल शर्मा, प्रेम कुमार सिंह, महेश दत्त शर्मा, इन्द्रा पाॅल, रामकिशन शर्मा, सन्नी कुमार ब्लाक अध्यक्ष एससी, सुरज कुमार, गोपाल शर्मा, सोमदेव शर्मा, अमन सहित काॅफी संख्या में कांग्रेसजन मौजूद रहे।

कुर्सी छोड़कर भागे खाद्य विभाग के कर्मचारी

बिजनौर। व्यापारियों की समस्याओं को लेकर जिला अध्यक्ष मनोज कुच्छल के नेतृत्व में व्यापारी खाद्य विभाग कार्यालय पहुंचे. इस दौरान खाद्य विभाग के कर्मचारी अपनी कुर्सी छोड़कर कार्यालय से गायब हो गए।

उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के बैनर तले जिलाध्यक्ष मनोज कुछल के नेतृत्व में व्यापारी आज खाद्य सुरक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचे जहां उन्हें देख कर्मचारी कुर्सियां छोड़ कर गायब हो गए। इसके बाद उन्होंने खाद्य सुरक्षा अधिकारी पंकज कुमार को फोन करके बुलाया और ज्ञापन सौंपा। व्यापारियों ने कहा कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम में 31 मार्च तक लाइसेंस होने के बाद भी रिनुअल के समय 1 माह पहले 100 प्रतिदिन के हिसाब से लेट फीस लगाई जा रही है। इससे व्यापारियों का उत्पीड़न हो रहा है। उन्होंने मांग की कि लाइसेंस की अंतिम तिथि समाप्त होने के बाद ही लेट फीस लगाई जाए। उन्होंने कहा कि पैकिंग के आइटम में कंपनियों के साथ-साथ रिटेल के व्यापारियों को भी सजा व जुर्माने से दंडित किया जा रहा है, जिसमें उसका कोई दोष नहीं होता है। सैंपल पास होने पर भी पैकिंग पर छपे प्रिंटिंग मटेरियल में कमी पाए जाने पर रिटेल के व्यापारियों पर जुर्माना लगाया जा रहा है। पैकिंग को रिटेल का व्यापारी नहीं छापता है। इसलिए उसका कोई अपराध नहीं है। पैकिंग पदार्थ के सैंपल भरे जाने पर यदि कोई कमी आती है तो रिटेलर के खिलाफ कोई कार्यवाही, जुर्माना न लगाए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि उसे सिर्फ गवाह बनाया जाए व सजा और जुर्माना कंपनी पर लगाया जाए। उनकी मांग थी कि निर्माताओं के लिए विभाग द्वारा मांगी जा रही सालाना रिटर्न ऑडिट की व्यवस्था समाप्त की जाए। व्यापारियों की यह भी मांग थी कि अधिकारियों द्वारा सैंपलिंग के समय सैम्पल शीशी मौके पर सील न करने व फार्म 5 मौके पर ना उपलब्ध कराने की शिकायत लगातार प्राप्त हो रही है। उन्होंने कहा कि इस पर सख्त आदेश पारित किया जाए। सैंपल शीशी मौके पर सील की जाए तथा फार्म 5 सेम्पलिंग के समय तत्काल भरकर व्यापारिक उपलब्ध कराया जाए। ज्ञापन देने वालों में मनोज कुच्छल, सचिन राजपूत, मानव सचदेवा, नवनीत चौध री, मनु कुमार, दिलशाद खान, बीएस राजपूत आदि मौजूद रहे।

राशन की कालाबाजारी रोकने को सीएम सख्त

कोटेदारों द्वारा किए जा रहे गबन को रोकने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नया फरमान, किसी भी प्रकार की धांधली होने पर इस नंबर पर करें संपर्क….

 Posted by “Shubham Vishwakarma”

लखनऊ। पीडीएस यानी कि सामाजिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत सभी सरकारी गल्लों की दुकान पर अब बायोमैट्रिक सेवा द्वारा राशन का वितरण किया जाता है। ..परंतु कोटेदारों द्वारा अपनी दुकानों पर माप तौल के लिए अभी भी बटकरें और तराजू का प्रयोग किया जाता है। ऐसे में कई स्थानों से लगातार शिकायतें प्राप्त हुई थी कि कोटेदार राशन में मिलावट और वजन में हेराफेरी करते हैं। बात जब मुख्यमंत्री तक पहुंची तो उन्होंने कोटेदारों द्वारा किए जा रहे इस गबन पर लगाम लगाने हेतु एक फरमान जारी किया।

मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की है कि अगर अब वह किसी कोटेदार को वजन या राशन की गुणवत्ता में धांधली करते हुए पकड़ते हैं तो तुरंत 1076 या 1075 पर अपनी शिकायत तुरंत दर्ज करें। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा इस मामले की त्वरित सुनवाई कर दोषी को तुरंत दंडित किया जाएगा।


कैसे होती है कमाई कोटेदारों की:-

सरकारी अनाज के गोदाम से कोटेदार के दुकान तक राशन उत्तर प्रदेश सरकार अपने खर्च से पहुंचाती हैं। कोटेदार को राशन पर 70 पैसा प्रति किलो की दर से कमीशन मिलता है। उदाहरण से समझ जाए तो किसी पात्र व्यक्ति का सिर्फ एक यूनिट है यानी 5 किलो तो कोटेदार का कमीशन होगा 5×70पैसा=3 र 50 पैसा। किसी पात्र परिवार जिसके 4 यूनिट उसमे कोटेदार को 14 रुपया मिलते हैं। ऐसे में ज्यादा कमाई करने के उद्देश्य से कोटेदार राशन की गुणवत्ता में मिलावट करते हैं या फिर राशन की तौल करते वक्त हेराफेरी करते हैं

2 हज़ार करोड़ का अनाज बेचकर मुफ्त राशन ले रहे 66 हज़ार किसान

उत्तर प्रदेश में बह रही उल्टी गंगा: सरकारी केंद्रों पर 2 हज़ार करोड़ का अनाज बेचकर मुफ्त राशन ले रहे 66 हज़ार किसान

नई दिल्ली (एजेंसी)। नियमानुसार जिस परिवार की शहरी क्षेत्र में प्रतिवर्ष आय तीन लाख और ग्रामीण क्षेत्र में दो लाख रुपये से ज्यादा है उसका राशन कार्ड नहीं बन सकता। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में एक लाख से ज्यादा का अनाज बेचने वाले  मुफ्त अनाज के लिए अपात्र हैं। यह केवल अनाज का ही रिकॉर्ड है अगर गन्ने का भी इसी तरह मिलान किया जाए तो लाखों की संख्या में ऐसे किसान मिलेंगे जो मिल पर प्रतिवर्ष लाखों का गन्ना मिल पर बेचते हैं और सरकार से मुफ्त राशन लेते हैं।

उत्तर प्रदेश में उल्टी गंगा बह रही है। यहां के हज़ारों किसान सरकार से मुफ्त राशन ले रहे हैं और ये किसान सरकारी क्रयों केंद्र पर सालाना 3 लाख से 8 लाख तक का अनाज सरकार को बेच रहे हैं। आधार कार्ड के मिलान से गड़बड़ी का पता चलने पर महकमे में खलबली मची गई है। सरकार ने इसकी गहन जांच के निर्देश दिए हैं।

विदित हो कि उत्तर प्रदेश में 3 करोड़ 60 लाख राशनकार्ड धारक हैं। इनमें से 40 लाख 79 हजार अंत्योदय और तीन करोड़ 19 लाख पात्र गृहस्थी के कार्ड बने हुए हैं। इन कार्डों में कुल 14 करोड़ 87 लाख यूनिट दर्ज हैं। कोरोना काल में सरकार की ओर से गरीब आदमियों को कुछ राहत देते हुए प्रधानमंत्री गरीब अन्न कल्याण योजना के तहत प्रतिमाह मुफ्त का राशन वितरण किया जा रहा है।

जांच में यह सामने आया कि उत्तर प्रदेश में 66 हजार राशनकार्ड धारक ऐसे किसान हैं, जिन्होंने अपने पास कृषि भूमि दर्शाते हुए एक साल में रबी और खरीफ में तीन लाख रुपये से ज्यादा का गेहूं व धान क्रय केंद्रों पर बेचा है। इन किसानों ने सरकार को दो हज़ार करोड़ का अनाज बेचा है। इस मामले में सामने आया है कि कुछ किसानों ने आठ से दस लाख रुपये तक का भी अनाज बेचा गया है।

दरअसल, यह पूरी गड़बड़ी आधार कार्ड के जरिये पकड़ में आई है। विभाग ने सॉफ्टवेयर से सभी राशनकार्डों पर दर्ज आधार नंबर से उन किसानों का मिलान किया, जिन्होंने सरकारी क्रय केंद्रों पर धान व गेहूं बेचे हैं। जांच में 66 हजार आधार नंबर ऐसे मिले जिनके राशनकार्ड बने हैं और उन्होंने तीन लाख रुपये से ज्यादा का अनाज बेचा है।

गड़बड़ी सामने आने के बाद सरकार की जांच का मुख्य बिंदु यह है कि अपात्रों को कैसे राशन वितरण किया जा रहा है। जांच का एक पहलू यह भी है कि कहीं सरकार से मुफ्त का राशन लेकर क्रय केंद्रों पर वापस सरकार को तो नही बेच दिया। साथ ही अपात्रों के राशनकार्ड कैसे बने। या फिर इसमें राशन माफिया और राशन विक्रेता खेल कर रहें हैं।

मामला सामने आने पर सभी जिलाधिकारियों को गहन जांच के निर्देश दिए गए हैं। सभी को 15 दिन में पूरी रिपोर्ट भेजने को कहा गया है। रिपोर्ट आने के बाद इन पर कार्रवाई होगी। 
वीना कुमारी मीना, प्रमुख सचिव खाद्य एवं रसद

यह केवल एक ही तरह का मामला सामने आया है। अगर सरकार ईमानदारी से मुफ्त योजनाओं जैसे- प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री जन औषधि योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, आदि योजनाओं की जांच की जाए तो अपात्रों की भरमार मिल सकती है।

ED की पूछताछ में शामिल नहीं हुईं जैकलीन फर्नांडीज

मुश्किलें में घिरीं अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीज, ED की पूछताछ में नहीं हुईं शामिल- 200 करोड़ की रंगदारी से जुड़ा है केस

मुश्किलें में घिरीं अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीज, ED की पूछताछ में नहीं हुईं शामिल- 200 करोड़ की रंगदारी से जुड़ा है केस 

नई दिल्ली (एजेंसी)। बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीज को शनिवार प्रवर्तन निदेशालय (ED) के समक्ष मनी लांड्रिंग से जुड़े एक मामले में पेश होना था, लेकिन वो पूछताछ के लिए दिल्ली में हाजिर नहीं हुईं। यह लगातार दूसरी बार है, जब वो ईडी के नोटिस के बावजूद पूछताछ में शामिल नहीं हुई हैं। हालांकि जैकलीन किसी शूटिंग की व्यस्तता की वजह से दिल्ली नहीं आईं या कोई और वजह थी, इस पर अभी कोई जानकारी नहीं मिली है। यह मामला तिहाड़ जेल में 200 करोड़ की रंगदारी से जुड़ा है। इसका मास्टरमाइंड सुकेश चंद्रशेखर तिहाड़ जेल के भीतर से पूरा रैकेट चला रहा था।

सुकेश चंद्रशेखर केस में ED ने की एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस से पूछताछ; दर्ज  किया बयान - Republic Bharat

जानकारी के मुताबिक, दो सौ करोड़ की ये रंगदारी वसूलने के लिए मास्टरमाइंड सुकेश चंद्रशेखर फिल्म अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस को तिहाड़ जेल के भीतर से ही मोबाइल फोन करता था। जांच एजेंसी के सूत्रों का कहना है कि सुकेश चंदशेखर तिहाड़ जेल के अंदर से ही जैकलीन को कॉल स्पूफिंग सिस्टम के माध्यम से फोन करता था। लेकिन सुकेश चंद्रशेखरअपनी पहचान और पद बड़ा चढ़ाकर बताता था।

जांच एजेंसी के अनुसार, जब जैकलिन सुकेश के जाल में फंसने लगी तो उसे महंगे फूल और चॉकलेट गिफ्ट के तौर पर भेजने लगा। जैकलीन ये नहीं समझ पा रही थी कि ये सारा कुछ तिहाड़ जेल में बंद शातिर ठग सुकेश चंदशेखर कर रहा है। जांच एजेंसियों को सुकेश के अहम कॉल रिकॉर्ड हाथ लगे हैं। इसी आधार पर जैकलीन के साथ हुई धोखाधड़ी का जांच एजेंसियों को भी जानकारी मिल सकी।

जांच एजेंसियों ने सुरक्षा कारणों से उस नाम और पद का खुलासा नहीं किया है जो सुकेश चंद्रशेखर बॉलीवुड एक्ट्रेस जैकलीन को बताता था। इसी से जैकलीन सुकेश के बहकावे में आ गई। बॉलीवुड की एक और कई हिट फिल्मों में काम कर चुकी महिला सेलिब्रेटी को भी सुकेश ने निशाना बनाया था। एक फिल्म अभिनेता भी उसके निशाने पर था और इन सभी से जल्दी ही पूछताछ हो सकती है

इससे पहले 30 अगस्त 2021 की शाम ANI ने ट्वीट कर बताया कि दिल्ली में ED जैकलीन से पूछताछ कर रही है। मगर धीरे-धीरे इस मामले में अन्य डिटेल्स भी बाहर आ रहे हैं। NDTV ने अपने सूत्रों के हवाले से बताया कि जैकलीन इस केस में मास्टरमाइंड सुकेश चंद्रशेखर की पार्टनर लीना पॉल की वजह से फंसी हैं और वो खुद इस स्कैम का शिकार बन गईं। पांच घंटे तक चली पूछताछ के दौरान जैकलीन ने ऑफिसर्स को इस केस से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी। इनवेस्टिगेशन के दौरान ये भी पता चला है कि सुकेश इस बार एक बड़े बॉलीवुड सुपरस्टार को अपना निशाना बनाने वाला था। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उस सुपरस्टार का नाम नहीं बताया गया। बताया गया है कि एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने एक मनी लॉन्डरिंग केस में बॉलीवुड एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस से पूछताछ की। रिपोर्ट्स के मुताबिक दिल्ली में यह पूछताछ सेशन तकरीबन पांच घंटों तक चला।

फर्जी कागजों पर चल रही राशन की दुकान

बिजनौर। फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्र के आधार पर एक व्यक्ति राशन डीलर बना बैठा है। तमाम अधिकारियों से हुई शिकायत के बाद जांच हुए भी पूरे ढ़ाई साल बीत चुके हैं। इसे राशन डीलर को विभागीय अधिकारियों कर्मचारियों की सरपरस्ती हासिल होना ही माना जाएगा कि जांच में पोल खुलने के बावजूद उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।

जिलाधिकारी को लिखित शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया था कि ग्राम पाडली मांडू पोस्ट बसेडा खुर्द तहसील धामपुर जिला बिजनौर निवासी मौ० असलम पांचवी पास की फर्जी अंक तालिका के आधार पर राशन कोटा संचालित कर रहा है। इस बात की शिकायत आपूर्ति इंस्पेक्टर, एसडीएम के अलावा तहसील दिवस व जिलाधिकारी से भी की गई। इसके उपरान्त फरवरी माह 2020 को यथावत इसकी जांच जिलाधिकारी कार्यालय से हुई। जांच में यह प्रमाणित हुआ कि मो. असलम के शैक्षिक प्रमाणपत्र फर्जी हैं। आरोप है कि अभी तक भी राशन डीलर के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं हो सकी। राशन डीलर अपनी मनमानी कर रहा है और आपूर्ति विभाग इस बात से अंजान बना बैठा है।

अवैध रूप से संचालित सिटी हॉस्पिटल सील

सिटी मजिस्ट्रेट ने सिटी हॉस्पिटल पर छापामार कर की कार्रवाई

मुजफ्फरनगर। शहर के बीचों बीच अवैध रूप से चलाए जा रहे अस्पताल को जिला प्रशासन और औषधि विभाग की संयुक्त टीम ने छापामार कार्यवाही करते हुए सील कर दिया है। प्रशासन की इस कार्यवाही से अस्पतालों के जरिए धन बटोरने में लगे लोगों में हड़कंप मच गया है। पुलिस द्वारा कई लोग हिरासत में भी लिये गये है।

जिला प्रशासन और औषधि विभाग की टीम सिटी मजिस्ट्रेट अभिषेक कुमार सिंह और ड्रग इंस्पेक्टर लवकुश प्रसाद की अगुवाई में शहर के बीचों बीच थाना सिविल लाइन क्षेत्र में मदीना चौक के समीप स्थित सिटी हॉस्पिटल पर छापामार कार्रवाई करने के लिए पहुंची। जिला प्रशासन और औषधि विभाग की टीम ने अस्पताल के दस्तावेजों की जांच की, लेकिन अस्पताल प्रबंधन अनुमति और लाइसेंस आदि की बाबत कोई वैध कागजात टीम को नहीं दिखा सका। इस दौरान अस्पताल में योग्य डॉक्टर भी नहीं मिले, जबकि बाहर लगे बोर्ड पर कई बड़े डॉक्टरों के नाम लिखवाए गए थे। सिटी अस्पताल के भीतर मेडिकल स्टोर भी चलता मिला, जहां से लाखों रुपए की अवैध दवाइयां टीम द्वारा बरामद की गई। जिला प्रशासन और औषधि विभाग की टीम ने अवैध रूप से चलाए जा रहे सिटी हॉस्पिटल और उसके भीतर बने मेडिकल स्टोर को सील कर दिया है। पुलिस ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए कई लोगों को हिरासत में भी लिया है। छापामार कार्यवाही के दौरान मौके पर भारी पुलिस फोर्स मौजूद रही। छापामार कार्रवाई को देखने के लिए आसपास के इलाके के लोगों का अस्पताल के इर्द-गिर्द भारी जमावड़ा लगा रहा।

धड़ल्ले से हो रहा अवैध निर्माण, विकास खंड अधिकारी नहीं करते कार्यवाई

धड़ल्ले से हो रहा अवैध निर्माण, विकास खंड अधिकारी ने नहीं की कार्यवाही। बिजनौर के टाइम्स में छपा टेंडर? तकनीकी सहायक, रोजगार सहायक बन ठेकेदार। विकास खंड अधिकारी उंगलियों पर नाचते हैं इनकी उंगलियों पर। नीचे से ऊपर तक कमीशन-म।

बिजनौर। जनपद के नूरपुर ब्लॉक में प्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित मानक व नियमों को ताक पर रख निर्माण कार्यों को अंजाम तक पहुंचाया जा रहा है। मतलब साफ है कि अवैध निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं, यह कहना कोई अतिश्योक्ति न होगी। ऐसा ही एक मामला नूरपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत पैजनिया में सामने आया है। यहां अवैध रूप से सड़क निर्माण का दावा अनेक ग्रामीणों द्वारा किया गया है। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार संज्ञान में आया है कि ग्राम पंचायत में लगभग चार सौ मीटर की एक सीसी रोड का निर्माण अवैध रूप से किया जा चुका है। कई ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त बताया कि उक्त सड़क नियमों को ताक पर रख बिना निर्धारित प्रक्रिया अपनाए निर्मित की गई है।

बिजनौर के टाइम्स में छपा टेंडर?– ग्राम पंचायत अधिकारी जितेंद्र कुमार तोमर ने बताया कि उक्त सड़क के लिए निर्धारित प्रक्रिया अपनाते हुए निर्माण कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि उक्त सड़क के निर्माण के लिए बिजनौर से प्रकाशित दैनिक टाइम्स नामक समाचार पत्र में दस दिन पहले विज्ञापन प्रकाशित कराया गया है। मजेदार बात यह है कि वह सुबह लेकर शाम के छह बजे तक भी उक्त टेंडर प्रकाशन का दिनांक बताने में असमर्थ रहे।

तकनीकी सहायक, रोजगार सहायक बने ठेकेदार– मौके पर मौजूद भूरे नामक युवक ने खुद को इस निर्माण कार्य का ठेकेदार बताया। विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि वह पड़ोसी ग्राम का निवासी है, जो रोजगार सहायक के रूप में कार्य कर रहा है। वहीं तकनीकी सहायक भी दूसरे पड़ोसी ग्राम का निवासी है, जो नूरपुर ब्लॉक में ही तकनीकी सहायक के रूप में संविदा पर नियुक्त है।

उंगलियों पर नाचते हैं अधिकारी!– विकास खंड अधिकारी उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करने से बचते हैं। तकनीकी सहायक अपनी पत्नी के नाम पर अपने कार्य क्षेत्र में आने वाली ग्राम पंचायतो में निर्माण कार्यों को अवैध रूप से अंजाम देता रहता है। अधिकारी महोदय तकनीकी सहायक की शिकायतों को रद्दी की टोकरी में डाल देते हैं। इस गोरखधंधे में शामिल रहने वालों को अभयदान देने से ऐसा जान पड़ता है कि वह तकनीकी सहायक की उंगलियों पर नाचते हैं।

नीचे से ऊपर तक कमीशन– तकनीकी सहायक ने दावा किया है कि नीचे से उपर तक के अधिकारियों को कमीशन देता हूं, मेरा कुछ नहीं बिगड़ेगा। अनुमान लगाया जा सकता है कि निर्माण पूर्णतः अवैध रूप से किया जा रहा है। दूसरी ओर विकास खंड अधिकारी जितेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि इस संबंध में सुबह कोई जानकारी दे पाएंगे, लेकिन इसके बावजूद विकास खण्ड अधिकारी तीन दिन से लगातार कॉल करने बाद भी फोन रिसीव करने को भी तैयार नहीं हैं। अब देखना यह है कि जनपद स्तरीय अधिकारी इस मामले कोई कार्रवाई करते हैं कि नहीं?

एडीओ पंचायत की मुखालफत में उतरा ग्राम प्रधान संघ

बिजनौर। ग्राम प्रधान संघ ने एडीओ पंचायत के विरुद्ध गंभीर आरोप लगाते हुए जांच पूरी होने तक
उन्हें जिला मुख्यालय से अटैच करने की मांग की है। इस संबंध में एक शिकायती पत्र जिलाधिकारी को सौंपा गया है।

ग्राम प्रधान संघ के अध्यक्ष प्रशांत चौधरी के नेतृत्व में कई ग्राम प्रधानों ने समाधान दिवस पर नजीबाबाद के डवाकरा हॉल में पहुंचे जिलाधिकारी उमेश मिश्रा से भेंट की। इस दौरान उन्हें एक शिकायती पत्र सौंपा। इसमें कहा गया कि पिछले दिनों गंभीर श्रेणी की शिकायतों के बाद किरतपुर ब्लॉक में तैनात एडीओ पंचायत राकेश कुमार का स्थानांतरण कर मुख्यालय से अटैच कर दिया गया था। आरोप है कि कुछ दिनों बाद ही भ्रष्टाचार के आरोप में लिप्त उक्त एडीओ पंचायत को विकासखंड नजीबाबाद में तैनात कर दिया गया है, जबकि एडीओ पंचायत राकेश कुमार के विरुद्ध अवैध रूप से अर्जित संपत्ति की जांच लोकायुक्त लखनऊ कार्यालय में चल रही है। किरतपुर तैनाती के दौरान उनकी रिश्वत लेते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी।

ग्राम प्रधान संगठन ने जांच पूरी होने तक एडीओ पंचायत राकेश कुमार को जिला मुख्यालय पर संबद्ध करने एवं उनके विरुद्ध भ्रष्टाचार के मामलों की जांच किसी अन्य एजेंसी से कराने की मांग की है। यह भी कहा है कि अगर उक्त भ्रष्ट अधिकारी का स्थानांतरण नजीबाबाद ब्लॉक से नहीं किया जाता है तो ग्राम प्रधान संगठन अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होगा, जिसकी सारी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी।

इंस्पेक्टर व हेड कॉन्स्टेबल के खिलाफ भ्रष्टाचार का केस दर्ज

पुलिस पदक से सम्मानित सदर बाजार इंस्पेक्टर बिजेंद्र राणा का फाइल फोटो

मेरठ। पुलिस पदक से सम्मानित सदर बाजार इंस्पेक्टर बिजेंद्र राणा और हेड कांस्टेबल मनमोहन के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज किया गया है। हेड कांस्टेबल को 30 हजार रिश्वत लेते रंगेहाथ एसपी सिटी की टीम ने मंगलवार को दबोच लिया। पूछताछ में इंस्पेक्टर की भूमिका भी सामने आई।

गाजियाबाद के मसूरी निवासी ट्रक चालक अब्दुल सलाम ने 5 फरवरी को मेरठ सदर बाजार थाने में ट्रक चोरी का मुकदमा दर्ज कराया था। यह मुकदमा फर्जी तरह से ट्रक के इंश्योरेंस की रकम लेने को दर्ज कराया था। ट्रक को कहीं और बेच दिया गया था। सदर बाजार पुलिस छानबीन कर रही थी और ट्रक मालिक को पूछताछ के लिए बुलाया गया। खुलासा हुआ ट्रक चोरी नहीं हुआ और फर्जी मुकदमा सदर थाने में लिखवाया गया। बावजूद इसके सदर बाजार पुलिस ने इस मामले में एफआर लगा दी।

ऐसे खुला मामला- सदर पुलिस ने ट्रक मालिक को पूछताछ के लिए बुलाया था। ट्रक मालिक ने शुरुआत में बताया कि उसने मुजफ्फरनगर निवासी वसीम को ट्रक देकर कटवा दिया और चोरी का फर्जी मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस वसीम को उठा लाई। हालांकि जब ट्रक मालिक और वसीम का आमना-सामना हुआ तो खुलासा हुआ वसीम ने किसी ट्रक का कटान नहीं किया। इसके बावजूद पुलिस वसीम को परेशान कर रही थी और मोटी रकम मांगी जा रही थी। पैसा न देने पर जेल भेजने की दी। वहीं ट्रक मालिक को एक लाख रिश्वत लेकर छोड़ दिया। वसीम की शिकायत पर एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने जांच एसपी सिटी विनीत भटनागर को दी थी।

हेड कांस्टेबल रंगे हाथ गिरफ्तार– एसपी सिटी विनीत भटनागर की टीम ने मंगलवार को सदर बाजार थाने के हेड कांस्टेबल मनमोहन को रंगेहाथ 30 हजार रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया। आरोपी को हिरासत में लेकर घंटों पूछताछ की गई। ट्रक के मामले में फाइनल रिपोर्ट वर्तमान इंस्पेक्टर बिजेंद्र राणा के कार्यकाल में लगी है और भ्रष्टाचार में इंस्पेक्टर के लिप्त होने की जानकारी भी मिली। एसपी सिटी ने आरोपी हेड कांस्टेबल से पूछताछ की और बयान की रिकॉर्डिंग की।

हेड कांस्टेबल गिरफ्तार, इंस्पेक्टर फरार- कानूनी राय लेने के बाद सदर बाजार इंस्पेक्टर बिजेंद्र राणा और हेड कांस्टेबल मनमोहन के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज किया गया। आरोपी हेड कांस्टेबल को गिरफ्तार कर सदर बाजार थाने के लॉकअप में रखा गया। मुकदमे की जानकारी लगते ही इंस्पेक्टर बिजेंद्र राणा फरार हो गए। उक्त इंस्पेक्टर मेरठ के कंकरखेड़ा व गंगानगर थाने के प्रभारी रह चुके हैं। वहीं कुख्यात शक्ति नायडू के एनकाउंटर पर उन्हें पुलिस पदक से सम्मानित किया जा चुका है।

सदर बाजार थाने में ट्रक चोरी का मुकदमा दर्ज कराया गया था। मुजफ्फरनगर निवासी वसीम को उठाकर प्रताड़ित किया जा रहा था और रिश्वत ली गई। ज्यादा रकम देने का दबाव बनाया गया, जिसके बाद मामला अधिकारियों तक आया। रिश्वत लेते हुए हेड कांस्टेबल मनमोहन को रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। इंस्पेक्टर बिजेन्द्र राणा और हेड कॉन्स्टेबल मनमोहन के खिलाफ सदर बाजार थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। – विनीत भटनागर, एसपी सिटी, मेरठ

सीएम से शिकायत पर पत्रकार को धमकी!

पंचायत के विकास कार्य की जानकारी मांगने पर पत्रकार को मिल रही धमकी

बिजनौर। विकास खण्ड नजीबाबाद की ग्राम पंचायत में विकास कार्यों की जानकारी मांगने पर प्रधान व पंचायत सचिव ने एक कथित महिला नेत्री को धमकी देने के लिए पत्रकार के घर पर भेज दिया।

ग्राम पंचायत तातारपुर लालू में रहने वाले पत्रकार ने अपनी पंचायत के विकास कार्य की कुछ जानकारी लेने के लिए सीएम हेल्प डेस्क पर सितम्बर महीने में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसका जवाब समय सीमा में देना तय है। निर्धारित समय में शिकायत का उत्तर लेने के लिए जैसे ही अधिकारियों ने संबंधित पंचायत सचिव व प्रधान से सम्पर्क किया तो खलबली मच गयी। इस पर पड़ी तारीख को अधिकारियों ने सम्बंधित व्यक्तियों से सम्पर्क किया। वैसे ही संबंधित व्यक्तियों ने शिकायतकर्ता पत्रकार पर दवाब बनाना शुरू कर दिया। आरोप है कि इस चौकड़ी में शामिल पंचायत की ही रहने वाली स्वयंभू नेत्री और कथित समाजसेवी पिछले रात्रि लगभग साढ़े दस बजे शिक़ायतकर्ता पत्रकार के घर आ धमकी। बताया गया है कि वह अपना नाम कामिनी शर्मा बता रही थी। इतनी रात को घर आने का कारण पूछने पर कहने लगी कि मैं सुबह से तीन बार तेरे घर आ गयी हूं, तू नहीं मिल रहा था। मैंने इस प्रधान को चुनाव लड़ाया था और जीत दिलवायी थी। अगर इसकी कोई भी जाँच कराने की कोशिश की, तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा। मेरी पहुँच बहुत ऊपर तक है। इस बीच उक्त महिला नेत्री वीडियो बनने का एहसास होने पर वहां से नौ दो ग्यारह हो गई। पत्रकार के घर से बाहर निकलने के समय भी पंचायत सचिव, प्रधान, प्रधान पति पतेन्द्र व महिला नेत्री गालियां व अभद्र भाषा का उपयोग करते हुए जान से मारने की धमकी देते रहे।

…अब घर बैठ जाएं पत्रकार!
कुल मिला कर ये तो साबित हो रहा है कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ माने जाने वाले पत्रकारों को अपने घर ही बैठ जाना चाहिए। यदि पत्रकारों को ऐसी ही धमकियां मिलने लगीं और पत्रकार चुप होकर घर बैठ जाते हैं, तो ऐसे लोग भ्रष्टाचार करने से बिलकुल नहीं डरेंगे । अपनी मनमर्जी के कार्य करते रहेंगे। शासन, प्रशासन को ध्यान देना चाहिए।

चार पत्रकारों को सीओ ने भेजा नोटिस

बक्सर : बिहार के बक्सर जिले के सिमरी से खबर है कि चार पत्रकारों को सिमरी सीओ अनिल कुमार ने नोटिस भेजा है। इन पत्रकारों ने सीओ अनिल कुमार की करतूत को लेकर खबरों का प्रकाशन किया था।

इन पत्रकारों में दैनिक जागरण के सवांददाता श्रीकांत दुबे, दैनिक भास्कर के पत्रकार अरविंद कुमार चौबे उर्फ चुनु चौबे, इंडिया24डिजिटल पोर्टल न्यूज़ के संचालक दिनेश राय और एमवी ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल के संचालक अनीश कुमार पाठक का नाम शामिल है।

इन पत्रकारों ने कुछ दिन पहले तक सीओ के खिलाफ कई खबरें छापी। सीओ ने अब कानूनी नोटिस भेज कर पूर्व में चलाई गई तमाम खबरों के सम्बंध में साक्ष्य की मांग की है।

नोटिस में सीओ अनिल कुमार ने कहा है कि यदि खबरों के साक्ष्य 5 दिनों में नहीं प्रस्तुत किए गए तो चारों पत्रकारों के खिलाफ थाने में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

एसपी ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए मांगी क्षमा 

बिजनौर: नगीना के बहुचर्चित श्री कृष्ण गौशाला प्रकरण में उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा पुलिस अधीक्षक बिजनौर को लगाई गई लताड़ के उपरांत पुलिस ने विनीत नारायण एवं अलका लहोटी के खिलाफ दर्ज केस को बंद कर दिया है. अदालत में एसपी ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए क्षमा मांगी. हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों के गिरते स्तर पे नाराजगी जाहिर की तथा 6 अगस्त के निर्णय का गलत प्रयोग कर भ्रामक पोस्ट डालने पर संजय बंसल को लताड़ा उन्होंने तुरंत सभी पोस्टों को हटाने का भी आदेश दिया.
ज्ञातव्य हो कि नगीना की ऐतिहासिक श्री कृष्ण गौशाला को लेकर वरिष्ठ पत्रकार विनीत नारायण द्वारा एक पोस्ट फेसबुक पर डाली गई थी जिसमें नगीना निवासी चंपत राय बंसल (विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय महासचिव) के कुटुंब कुटुंबियो पर श्री कृष्ण गौशाला की करोड़ों रुपए भूमि कबजाने में शामिल होने का आरोप लगाया था, जिससे कुपित होकर चंपत राय बंसल के सबसे छोटे भाई संजय बंसल ने 19 जून 2021 को नगीना थाना में कइ गंभीर धाराओं में पत्रकार विनीत नारायण, रजनीश कुमार व श्री कृष्ण गौशाला की अध्यक्ष अलका लहोटी के विरुद्ध विभिन्न संगीन धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कराया था.
जवाब में वरिष्ठ पत्रकार विनीत नारायण रजनीश कुमार एवं अलका लाहोटी ने एफआई आर का विरोध करते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जिसके परिणाम स्वरूप न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के उपरांत हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए 6 अगस्त 2021 को बिजनौर एसपी को तलब किया तथा उत्तर प्रदेश पुलिस अधिकारियों के गिरते स्तर पर नाराजगी जाहिर की.
उच्च न्यायालय के सम्मुख बिजनौर पुलिस अधीक्षक डॉ धर्मवीर सिंह ने गलती स्वीकार करते हुए कहा कि एफआईआर को पूरी तरह पढ़ नहीं सके.

श्री कृष्ण गौशाला प्रकरण मे हाईकोर्ट के निर्णय के उपरांत नगीना मे चर्चाओं का बाजार गर्म है, बुद्धिजीवियों का कहना है कि दी गई तहरीर में जब एक व्यक्ति पर मुकदमा बनता था तो फिर अलका लाहोटी को 2 महीने तक क्यों परेशान किया गया? यही नहीं इसके कुछ दिनों के बाद ही एससी एसटी एक्ट में भी उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उनका मानसिक उत्पीड़न किया गया, लोगों का यह भी कहना है कि कहीं यह गौशाला पर कब्जा करने की साजिश तो नहीं है, विदित रहे कि पिछले छ-सात दशकों से अलका लाहोटी का परिवार ही गौशाला को पूरी लग्न एवं तन्मयता से चलाता आ रहा है तथा वहां की 1 इंच भूमि को भी इधर-उधर नहीं होने दिया, इस सत्य को नकारा भी नहीं जा सकता।

आखिरकार बिक ही गया विजय माल्या का kingfisher house

आखिरकार बिक ही गई विजय माल्या की प्रापर्टी, 8 बार नीलामी फेल होने के बाद 52 करोड़ रुपये में बिका Kingfisher House

आखिरकार बिक ही गई विजय माल्या की प्रापर्टी, 8 बार नीलामी फेल होने के बाद 52 करोड़ रुपये में बिका Kingfisher House

नई दिल्ली (एजेंसी)। भगोड़े कारोबारी विजय माल्या का किंगफिशर हाउस आखिरकार बिक ही गया। किंगफिशर हाउस को 52 करोड़ रुपये में हैदराबाद स्थित एक डेवलपर को बेचा गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हैदराबाद स्थित Saturn Realtors ने इस प्रॉपर्टी को ऑरिजनल आस्किंग प्राइस से बहुत कम भाव पर खरीदा है। बिक्री भाव अपने रिजर्व प्राइस 135 करोड़ रुपए का लगभग एक तिहाई है।

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विजय माल्या की प्रॉपर्टीज को नीलाम करने में कारोबारियों को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। बैंकों की तरफ से माल्या की प्रॉपर्टीज का जो वैल्युएशन किया जा रहा है, उस दाम पर कोई प्रॉपर्टी खरीद ही नहीं रहा। किंगफिशर हाउस की प्रॉपर्टी की नीलामी भी 8 बार फेल हुई थी। मार्च 2016 में बैंकों ने इस बिल्डिंग का रिजर्व प्राइस 150 करोड़ रुपये रखा था। यही वजह है कि ये बिल्डिंग अब तक बिक नहीं पाई थी।

सुप्रीम कोर्ट से आजम खां को बेटे समेत मिली राहत

आजम खां और बेटे अब्दुल्ला को मिली सुप्रीम कोर्ट से राहत। पासपोर्ट और पैन गड़बड़ी मामले में जमानत।

सुप्रीम कोर्ट से आजम खां और बेटे अब्दुल्ला को मिली राहत, पासपोर्ट और पैन गड़बड़ी मामले में जमानत

नई दिल्ली (एजेंसी)। पासपोर्ट, पैनकार्ड बनाने में गड़बड़ी से जुड़े मामले में सपा नेता आजम खां और बेटे अब्दुल्ला को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। महीनों से जेल में बंद पिता-पुत्र को इस मामले में अंतरिम जमानत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस आपराधिक मामले में निचली अदालत को चार सप्ताह के भीतर मामले में बयान दर्ज करने के बाद उन्हें जमानत पर रिहा करने को कहा है।

आजम और उनके बेटे अब्दुल्ला पर कई मामलों में केस दर्ज हैं। लंबे वक्त से दोनों उत्तर प्रदेश की सीतापुर जेल में बंद थे। हाल ही में जब आजम खां की तबीयत बिगड़ी तो उन्हें लखनऊ के मेदांता अस्पताल में शिफ्ट किया गया है। आजम खां और उनके बेटे पर जमीन हड़पने, फर्जी कागजात समेत अन्य मामलों में उत्तर प्रदेश की अलग-अलग अदालतों में केस चल रहे हैं। कुछ वक्त पहले ही आजम खां की पत्नी को जमानत मिली थी और वो बाहर आई थीं।

इस मामले में सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में सपा नेता आज़म खान और उनके बेटे अबुल्लाह आज़म की ज़मानत याचिका का विरोध किया। उत्तर प्रदेश की तरफ से वकील एसवी राजू ने कहा कि आज़म खान पर कई संगीन मामलो में एफआईआर दर्ज है। अपराधिक पृष्टभूमि की वजह से उनको जमानत नहीं दी जानी चाहिए। आजम खां और अब्दुल्ला आजम पर आरोप है कि पहला पैन कार्ड मौजूद होने के बाद भी दूसरा पैन कार्ड बनवाया और पहले पैन कार्ड की जानकारी छिपाई।

आजम के वकील सिब्बल ने कहा कि सरकार ने पासपोर्ट और पैन कार्ड मामले में अलग-अलग एफआईआर दर्ज की है, जबकि इस मामले में मुख्य एफआईआर में आजम खा को जमानत मिल चुकी है। आरोपी को जेल में रखने के लिए सरकार ने एक ही मामले में अलग-अलग एफआईआर दर्ज की है। यही हाल अबुल्लाह आजम का है। कपिल सिब्बल ने कहा कि आज़म खां को तीन मामलों को छोड़ कर सभी मामलों मे ज़मानत मिल चुकी है। गौरतलब है कि आज के आदेश के बाद आजम और अब्दुल्लाह आजम को थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन वो दोनों फिलहाल जेल से रिहा नही हो पाएंगे। अभी उनके खिलाफ तीन और मामले लंबित हैं, जिसमें जमानत मिलनी बाकी है।

20 हजार की रिश्वत दोगे तो मिलेगा पीएम आवास योजना का लाभ!

बिजनौर। जनपद के थाना मंडावली अंतर्गत तहसील नजीबाबाद के ग्राम औरंगपुर बसंता उर्फ काटपुर के व्यक्ति को पात्र होने के बावजूद प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं दिया जा रहा। पीएम आवास के लिये सेक्रेटरी उससे ₹20 हजार की रिश्वत मांग रहा है। नतीजा, ग्रामीण परिवार समेत झोपड़ी में रहने को मजबूर है।

तहसील नजीबाबाद के ग्राम औरंगपुर बसंता उर्फ काटपुर निवासी लोकेंद्र सिंह पुत्र घसीटा सिंह परिवार सहित काफी समय से एक झोपड़ी में गुजर-बसर कर रहे हैं। कारण यह है कि पात्र होने के बावजूद प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल रहा। आरोप है कि सेक्रेटरी अजय कुमार शुक्ला ₹20000 की रिश्वत मांग रहा है। रिश्वत की रकम न देने पर संबंधित विभाग के अधिकारी द्वारा परेशान किया जा रहा है। आला अधिकारियों से समस्या की गुहार कई बार लगाई, लेकिन अभी तक समाधान नहीं हो पाया है।

पीड़ित ने बताया कि बरसात के दिनों में हम लोगों को बहुत का दिक्कत सामना करना पड़ता है। पीड़ित व्यक्ति ने यह भी आरोप लगाया कि हमारे गांव में अपात्र लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना में पात्र करके उनके आवास बनवा दिए गए। सेक्रेटरी बार-बार पैसों की मांग करता है और लिस्ट से हमारा नाम कटवा देता है और यह भी कहता है कि आप पैसा दोगे तो ही आपका मकान बनेगा। लोकेंद्र सिंह का कहना है कि ना तो ग्राम प्रधान द्वारा कोई सुनवाई की जा रही है और ना ही सेक्रेटरी द्वारा आवास योजना का लाभ दिलाने की कार्यवाही की जा रही है। पीड़ित व्यक्ति ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभ हासिल करने के लिए आला अधिकारियों से गुहार लगाते लगाते थक चुके हैं।

Mumbai Police के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह के खिलाफ वसूली का केस दर्ज, 7 अन्य कर्मियों  पर भी FIR

Bombay high court raps Param Bir Singh, asks why no FIR against Deshmukh |  Mumbai News - Times of India

मुंबई। मुंबई पुलिस ने पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह के खिलाफ वसूली का केस दर्ज किया है। परमबीर सिंह के अलावा 7 अन्‍य लोगों के खिलाफ भी पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है जिसमें 2 सिविलियन और 6 पुलिस वाले शामिल हैं। इन पुलिसवालों में मुंबई क्राइम ब्रांच के डीसीपी अकबर पठान का नाम भी शामिल है। पुलिस ने दो सिविलियन को गिरफ्तार किया है, जिसमें सुनील जैन और पुनमिया नाम का आरोपी शामिल है। मुंबई के मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन में पुलिस ने FIR दर्ज की है।

मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह पर 2015 से 2018 तक तबादला होने के बाद भी सरकारी आवास का इस्तेमाल करने पर 24 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। परमबीर जब ठाणे के पुलिस कमिश्नर थे तब 2 सरकारी आवासों का इस्तेमाल कर रहे थे। परमबीर सिंह पर 2018 तक 54 लाख 10 हजार 545 रुपये का जुर्माना लगाया गया था, जिसमें से उन्होंने 29 लाख 43 हजार का भुगतान कर दिया है, लेकिन अभी भी 24 लाख 66 हजार का भुगतान बाकी है। परमबीर सिंह उस समय मालाबार हिल के नीलिमा अपार्टमेंट में रह रहे थे। सूत्रों के मुताबिक, 24 लाख रुपये का यह जुर्माना उनके वेतन से या सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले पैसो में से वसूला जा सकता है। परमबीर इस समय होमगार्ड के DG हैं।

परमबीर सिंह ने एनसीपी के सीनियर नेता और महाराष्ट्र के तत्कालीन गृहमंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। इन आरोपों के बाद विवाद काफी बढ़ गया था। कुछ ही दिन बाद अनिल देशमुख को पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

परमबीर सिंह ने कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाए थे कि अनिल देशमुख के खिलाफ शिकायत करने के बाद से उन्हें राज्य सरकार की तरफ से कई तरह की जांच का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही उन्होंने इन मामलों को महाराष्ट्र से बाहर ट्रांसफर किए जाने और सीबीआई जैसी किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की भी मांग की थी।

कर चोरी के शक में दैनिक भास्कर के दफ्तरों पर आयकर विभाग के छापे

कर चोरी की सूचना पर मीडिया ग्रुप दैनिक भास्कर के दफ्तरों पर आयकर विभाग की रेड

मीडिया ग्रुप दैनिक भास्कर के दफ्तरों पर आयकर विभाग की रेड, कर चोरी की सूचना पर कार्रवाई

नई दिल्ली। आयकर विभाग द्वारा देश भर में दैनिक भास्कर समूह के कई कार्यालयों पर छापे मारे जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार अधिकारी नई दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में दैनिक भास्कर के परिसरों की तलाशी ले रहे हैं। 

आयकर अधिकारियों ने मीडिया को बताया कि मीडिया समूह दैनिक भास्कर के भोपाल, जयपुर और अन्य स्थानों पर स्थित कई परिसरों में छापे मारे गए हैं।

सूत्रों के अनुसार मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल समेत इंदौर में भी अखबार के दफ्तरों पर छापे मारे जा रहे हैं। इनके अलावा आयकर विभाग के अधिकारी अखबार समूह के प्रमोटरों के आवास की भी तलाशी ले रहे हैं। आयकर विभाग के सूत्रों का कहना है कि समूह द्वारा कर चोरी की सूचना के बाद ये छापेमारी की जा रही है।

विदित हो कि दैनिक भास्कर का मध्य प्रदेश में मुख्यालय है। यह समूह देश के सबसे बड़े मीडिया समूह में से एक है, जिसके एक दर्जन से अधिक राज्यों में 60 से अधिक संस्करण अलग-अलग भाषाओं में प्रकाशित होते हैं।

मोदीनगर में अतिक्रमण कर प्लाटिंग का कार्य जोरों पर

प्रतीकात्मक तस्वीर

भू- स्वामियों व भू माफियाओं द्वारा कादराबाद की भूमि पर अवैध रूप से अतिक्रमण कर प्लाटिंग काटने का कार्य जोरों पर

मोदी नगर । मेरठ से गाजियाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित ग्राम कादराबाद परगना जलालाबाद तहसील मोदी नगर जनपद गाजियाबाद पर गोल्डन पैलेस वैंकट हाल के निकट खसरा संख्या 612 मि, क्षेत्रफल है0 , क्रमशः 1,4130 – 0,02366- 0, 0180 जो कि धर्मवीर/ दीन दयाल, अजय कुमार/ शौदान व राजवीर निवासी कादराबाद तहसील मोदी नगर जनपद गाजियाबाद की मोदी नगर तहसील रिकार्ड में श्रेणी: 1-क में भू- स्वामियों के नाम दर्ज है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

आरोप है कि भू- स्वामियों ने भू- माफियाओं से सांठ- गांठ कर ली है और अपने दम पर अवैध एवं अनाधिकृत तरीके से बिना मानचित्र स्वीकृत कराये प्लाटिंग कर रहे हैं। जब कि अभी तक भू- स्वामी द्वारा उक्त भूमि का भू- परिवर्तन उपयोग नहीं करवाया गया है। भू- स्वामियों द्वारा गाजियाबाद विकास प्राधिकरण गाजियाबाद विकास क्षेत्र मोदी नगर के मास्टर प्लान 2021के नियमानुसार ग्रीन बैल्ट भूमि में आती है, ग्रीन बैल्ट भूमि पर भी हरित पट्टी के बजाय उस पर अवैध रूप से अतिक्रमण कर निर्माण कर लिया है। भू- स्वामियों द्वारा ग्रीन बैल्ट भूमि के नियमों का पालन नहीं किया गया है, जिससे गाजियाबाद विकास प्राधिकरण गाजियाबाद को भू- परिवर्तन उपयोग शुल्क, विकास शुल्क, ग्रीन बैल्ट भूमि उपयोग शुल्क की राजस्व क्षति पहुँचाने का अपराध किया है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

गाजियाबाद विकास प्राधिकरण गाजियाबाद विकास क्षेत्र मोदी नगर जोन- 2 के अधिकारी द्वारा उक्त भूमि पर स्थानीय थाने में मुकदमा दर्ज करवाया गया था । फिर भी भू- स्वामी व भू- माफिया आखिरकार किसके दम पर उक्त अवैध रूप से अतिक्रमण व प्लाटिंग कर रहे हैं, जिससे उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास अधिनियम- 1973 का धड़ले से उल्लंघन हो रहा है?

घटिया सामग्री से तैयार हो रहा हरिद्वार एनएच-74 फोर लेन

एनएच-74 फोर लेन निर्माण में दरारें

मुकेश कुमार (एकलव्य बाण समाचार)

नजीबाबाद (बिजनौर) हरिद्वार एनएच-74 फोर लेन को तैयार करने में घटिया सामग्री प्रयोग की जा रही है।

नजीबाबाद हरिद्वार एनएच-74 फोर लेन का निर्माण कार्य चल रहा है। आरोप है कि सड़क निर्माण में काफी घटिया सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है। नजीबाबाद रोड का काफी कार्य हो चुका है, जिसमें आरसीसी रोड में इतना घटिया मैटेरियल लगाया जा रहा है कि आगे आगे रोड बनती जा रही है और पीछे पीछे दरारें आ रही हैं। थाना मंडावली क्षेत्र के ग्राम भागूवाला पुलिस चौकी के समीप 10 से 20 मीटर की दूरी पर इतना घटिया मैटेरियल लगाया गया है कि सड़क को बने हुए करीब 1 से 2 महीने ही हुए हैं और सड़क में दरारें पड़ने लगी हैं। बताया गया है कि सड़क का निर्माण कहीं-कहीं पर किया जा रहा है। इस कारण प्रारंभ अवस्था में ही दरारें आ चुकी हैं।

एनएच-74 फोर लेन निर्माण में दरारें
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थानेदार की वसूली का ऑडियो वायरल, सस्पेंड

टिहरी गढ़वाल वायरल ऑडियो कांड। SO कर रहे थे वसूली। ऑडियो हो गया वायरल। एसएसपी ने किया निलंबित।

टिहरी गढ़वाल (एकलव्य बाण समाचार)। उत्तराखंड में एक एसओ का ऑडियो का वायरल होने से प्रशासन में हड़ंकप मच गया है। बताया जा रहा है कि ये ऑडियो हिंडोलाखाल पुलिस थाने के एसओ जितेंद्र कुमार का है। इसमें वह हफ्ता वसूली की बात कर रहे हैं। इतना ही नहीं शराब मंगवाने की बात भी कर रहे हैं। ऑडियो के सामने आने के बाद एसएसपी तृप्ति भट्ट ने एसओ जितेंद्र कुमार को सस्पेंड कर दिया है। ऑडियो की जांच के आदेश दिए गए हैं।

जानकारी के अनुसार जितेंद्र कुमार की तैनाती हिंडोलाखाल थाने में एक साल पहले हुई थी। वे अवैध शराब के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में भी सक्रिय रहे है। किसी युवक ने उनकी शराब के ठेके के सेल्समैन के साथ फोन पर हुई बातों की रिकार्डिंग को सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। इसमें शराब मंगाने को लेकर कथित बातचीत की जा रही है। वायरल ऑडियो में सुना जा सकता है कि एसओ जितेंद्र कुमार और भंडारी नाम के व्यक्ति के बीच शराब और हफ्ता वसूली के बारे में बातचीत की जा रही है। हालांकि ये ऑडियो काफी पुराना बताया गया है, लेकिन ऑडियो के वायरल होते ही एसएसपी तृप्ति भट्ट ने संज्ञान लेते हुए एसओ जितेंद्र कुमार को सस्पेंड कर दिया है। उनकी जगह पर बलदेव कंडियाल को नियुक्त कर दिया गया है। साथ ही सीओ टिहरी को इस मामले की जांच करने के आदेश भी दिए हैं, मामले में जांच जारी है।

नियमों को ताक पर रखकर नियुक्तियां और नाला निर्माण

बड़े बड़े वादों के बल पर बनीं ग्राम प्रधान। चलीं पुराने प्रधान के नक्शेकदम पर। सार्वजनिक शौचालय पर कर दीं अवैध रूप से नियुक्तियां। बिना प्रस्ताव, बिना कोई सूचना अवैध रूप से नाला निर्माण।

निजामतपुरा गंज/बिजनौर (एकलव्य बाण समाचार)
विकास कार्य कराने एवं पंचायत को भ्रष्टाचार मुक्त रखने के बड़े-बड़े वादों के साथ पहली बार प्रधान बनी ग्राम पुरा निवासी फिरोजा परवीन भी शायद पुराने प्रधान के कदमों पर चल निकली हैं। उनके प्रधान बनने के साथ ही गांव वासियों को उम्मीद थी। ग्रामीण सोच रहे थे कि जिस भ्रष्टाचार मुक्त ग्राम पंचायत बनाने का वादा किया गया था, शायद वह नए प्रधान द्वारा पूरा किया जाएगा। परंतु प्रधान द्वारा किया गया वादा खोखला साबित हुआ। अभी 4 दिन नहीं हुए प्रधान बने कि प्रधान जी ने अपनी असलियत दिखानी शुरू कर दी है। इसका जीता जागता सबूत ग्राम के सार्वजनिक शौचालय पर अवैध रूप से की गई नियुक्तियां हैं। यही नहीं बिना कोई प्रस्ताव, बिना कोई सूचना दिए अवैध रूप से नाला निर्माण किया गया। इसमें भ्रष्टाचार की बू आ रही है। सूत्रों का कहना है कि अभी तक पंचायत के कार्यों के संचालन हेतु ग्राम प्रधान अधिकृत ही नहीं है, तो ग्राम पंचायत में कार्य किस आधार पर किया गया। आरोप है कि नाला निर्माण या तो लेनदेन के आधार पर किया गया और इसी आधार पर नियुक्तियां की गई अथवा प्रधान जी द्वारा अन्य कोई खेल किया गया। अब यह तो वही जाने अथवा ग्राम पंचायत अधिकारी, परंतु जनता का कहना है कि प्रधान जी द्वारा विकास के वादे को इस तरह पूरा किया जा रहा है कि नाला निर्माण में अत्यंत घटिया सामग्री लगाई गई है एवं सड़क एवं नाले को उखाड़ने के दौरान पुरानी लगी ईटों की शायद बंदरबांट कर दी गई। अब इसका जवाब तो प्रधान जी ही दे सकती हैं परंतु आम जनता को विकास की उम्मीद करना बेमानी है क्योंकि पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं। अभी तो शुरुआत है। अभी तो पूरे 5 वर्ष ग्राम पंचायत को जमकर भ्रष्टाचार झेलना है?

एकलव्य बाण समाचार

नकली सीमेंट निर्माण: मुकदमा दर्ज, आरोपी फरार

उपजिलाधिकारी के निर्देश पर पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा
कापी राइट एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा हुआ दर्ज


बिजनौर (एकलव्य बाण समाचार)। अल्ट्राटैक कंपनी के अधिकारियों की शिकायत पर उपजिलाधिकारी नजीबाबाद के नेतृत्व में पहुंची पुलिस के छापे में भारी संख्या में नकली सीमेंट, खाली बोरे व उपकरण आदि पकड़े जाने के मामले में स्थानीय पुलिस ने आरोपी फर्म स्वामी के खिलाफ कापी राइट एक्ट, ट्रेडमार्क एक्ट तथा विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। हालांकि पुलिस ने छापामारी के दौरान अन्य कंपनियों के मिले नकली सीमेंट का जिक्र दर्ज मुकदमे में नहीं किया है।  
थाना कोतवाली नजीबाबाद पर कमल सिंह पुत्र रूप सिंह निवासी आईआईआरएस कन्सटिंग प्राइवेट लिमिटेड यूनिट 55 सनसिटी सक्सेस टावर, गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड, सैक्टर-65 गुरुग्राम हरियाणा तथा हरजीत सिंह पुत्र भजन सिंह निवासी मोहनगढ़ उत्तम नगर नई दिल्ली की ओर से नकली अल्ट्राटैक सीमेंट बनाकर उसकी बिक्री किए जाने के मामले में विभिन्न धाराओं  में मुकद्दमा दर्ज किया गया है। अल्ट्राटैक कंपनी के उक्त अधिकारियों की ओर से की गयी शिकायत पर मंगलवार को उपजिलाधिकारी परमानंद झा के निर्देशन में तथा थाना कोतवाली प्रभारी निरीक्षक दिनेश गौड़ नेतृत्व में स्थानीय पुलिस ने थाना कोतवाली नजीबाबाद की चौकी आदर्श नगर क्षेत्र में नजीबाबाद-कोतवाली मार्ग स्थित दयावती एन्टरप्राइजेज व ओम ट्रेडर्स पर छापेमारी करते हुए चैकिंग की। इस दौरान दुकान व फर्म स्वामी अखिलेश उर्फ निखिलेश पुत्र ओमप्रकाश निवासी आदर्श नगर थाना नजीबाबाद फरार हो गया। पुलिस को छापामारी के दौरान भारी मात्रा में सिद्धबली सीमेंट, बर्जर सीमेंट तथा अल्ट्राटेक सीमेंट के कट्टों में मिलावटी सीमेंट भरा हुआ मिला था। पुलिस ने अल्ट्राटैक कंपनी के अधिकारियों की तहरीर के आधार पर फर्म स्वामी अखिलेश उर्फ निखिलेश के खिलाफ धोखाधडी कर नकली सीमेन्ट बनाने, नकली नानट्रेड मार्क बनाना व अधिकृत कम्पनी अल्ट्राटैक के नाम से नकली सीमेन्ट अल्ट्राटैक की नकली बोरी छपवाकर उसमें नकली सीमेन्ट भरकर लोहे की कीपनुमा कुप्पी लगाकर भरने तथा अल्ट्राटेक कम्पनी का सीमेन्ट बताकर बेचते पाए जाने व मौके से खाली अल्ट्राटैक के नकली पीले बोरे 1971, अल्ट्राटैक के सरकारी निर्माण कार्य में प्रयोग किए जाने वाले खाली नकली नानट्रेड के सफेद बोरे 300, अल्ट्राटैक के नकली सीमेंट के भरे हुए बोरे 58, एक छलना, एक लोहे की कुप्पी, दो तसले बरामद होने तथा अभियुक्त अखिलेश के मौके से फरार हो जाने को लेकर मुकदमा अपराध संख्या 361/2021 धारा 63/65 कापी राइट एक्ट व धारा 102/113 ट्रेडमार्क एक्ट व धारा 420, 482, 483 आईपीसी बनाम अखिलेश पुत्र ओमप्रकाश निवासी आदर्श नगर थाना नजीबाबाद जिला विजनौर पंजीकृत किया गया है। पुलिस मामले में आवश्यक कार्यवाही कर रही है। छापामारी के दौरान पुलिस टीम में उपनिरीक्षक आशीष कुमार, कांस्टेबिल जियाउल हक, कांस्टेबिल मोहित कुमार आदि शामिल रहे थे। उधर कोतवाल दिनेश गौड़ का कहना है कि आरोपी अखिलेश उर्फ निखिलेश के खिलाफ अल्ट्राटैक कंपनी के प्रतिनिधियों की ओर से दी गयी तहरीर के आधार पर मुकदमा पंजीकृत किया गया है। जिन अन्य कंपनियों, सिद्धबली सीमेंट व बर्जर सीमेंट का माल छापामारी में बरामद हुआ है। उनकी ओर से तहरीर मिलने पर आरोपी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

सीमेंट के सफेद बोरों की भी होगी जांच: एसडीएम
नजीबाबाद-कोतवाली मार्ग स्थित दयावती एंटरप्राइजेज तथा ओम ट्रेडर्स पर की गयी छापेमारी के दौरान वहां से बरामद किए गए सीमेंट के सफेद रंग के कट्टों की भी जांच करायी जाएगी। इसका कारण यह है कि सफेद रंग के कट्टे सरकारी निर्माण कार्य में लगने वाले सीमेंट के लिए प्रयोग में लाए जाते हैं।


आखिर कैसे आए सीमेंट के सफेद कट्टे?
छापेमारी के दौरान पकड़े गए सफेद रंग के सीमेंट के कट्टों को लेकर चर्चा बनी हुई है कि हो सकता है उक्त व्यापारी की ओर से मनरेगा आदि सरकारी कामों में नकली सीमेंट की सप्लाई की जाती रही हो अथवा मनरेगा आदि सरकारी निर्माण कार्य स्थलों से उक्त कट्टे चोरी कर गोदाम तक लाए गए हो? हालांकि यह जांच के बाद ही सामने आ पाएगा कि सरकारी निर्माण कार्य में प्रयोग में लाए जाने वाले सफेद रंग के सीमेंट के कट्टे नकली सीमेंट का निर्माण कर विभिन्न कंपनियों के नाम से नकली सीमेंट की बिक्री करने वाले व्यक्ति के गोदाम तक कैसे पहुंचे?

एकलव्य बाण समाचार

रुद्रप्रयाग जिले के 14 शिक्षकों के खिलाफ FIR

देहरादून (एकलव्य बाण समाचार)। राज्य में लंबे समय से फर्जी डिग्री के आधार शिक्षक बनने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रमुख सचिव गृह के आदेश के बाद अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध एवं कानून व्यवस्था आदेशानुसार बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत फर्जी शिक्षकों व अन्य समस्त शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच अपर पुलिस अधीक्षक/सैक्टर अधिकारी के निर्देशन में सीआइडी सैक्टर देहरादून कर रहा था।

जांच के लिए गठित एसआईटी की ओर से चलाये जा रहे अभियान के अन्तर्गत जनपद रूद्रप्रयाग के 25 शिक्षकों के विरुद्ध विधिक कार्यवाही करने हेतु रिपोर्ट महानिदेशक, विद्यालयी शिक्षा, उत्तराखण्ड को विभिन्न तिथियों को प्रेषित की गई थी। सैक्टर अधिकारी द्वारा महानिदेशक, विद्यालयी शिक्षा उत्तराखण्ड से पत्राचार करने पर 14 अन्य निम्न शिक्षकों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।

आरोपी शिक्षकों के नाम 👇

  1. कान्ति प्रसाद, सहायक अध्यापक राप्रावि जैली ब्लॉक जखोली जनपद रूदप्रयाग।
  2. संगीता बिष्ट, सहायक अध्यापिका राप्रावि कैलाशनगर ब्लॉक जखोली जनपद रूदप्रयाग।
  3. मोहन लाल, सहायक अध्यापक, राप्रावि सारी, ब्लॉक ऊखीमठ, जनपद रूदप्रयाग।
  4. महेन्द्र सिंह, सहायक अध्यापक, राजकीय प्राथमिक विद्यालय लुखन्द्री, ब्लॉक जखोली, जनपद रूदप्रयाग।
  5. राकेश सिंह, सहायक अध्यापक, राजकीय प्राथमिक विद्यालय धारतोन्दला, ब्लॉक अगस्तमुनि, जनपद रूदप्रयाग।
  6. माया सिंह, सहायक अध्यापिका, राप्रावि जयकण्डी ब्लॉक अगस्तमुनि जनपद रूदप्रयाग।
  7. विरेन्द्र सिंह, सहायक अध्यापक, जनता जूनियर हाई स्कूल, जखन्याल गांव, ब्लॉक जखोली, जनपद रूदप्रयाग
  8. विजय सिंह, सहायक अध्यापक, राप्रावि भुनालगांव, ब्लॉक जखोली, जनपद रूदप्रयाग।
  9. जगदीश लाल. सहायक अध्यापक, राप्रावि जौला, ब्लॉक अगस्तमुनि, जनपद रूदप्रयाग
  10. राजू लाल सअ राप्रावि जग्गीबगवान लॉक ऊखीमठ जनपद रूद्रप्रयाग।
  11. संग्राम सिह. राअ, राप्रावि स्यूर बरसाल, ब्लॉक जखोली जनपद रूद्रप्रयाग।
  12. सहायक अध्यापक मलकराज पुत्र शौला लाल राप्रावि जगोठ, ब्लॉक अगस्तमुनि, जनपद रूदप्रयाग
  13. सहायक अध्यापक रघुवीर सिंह पुत्र भरत सिंह जनता जूनियर हाईस्कूल जखन्याल गांव, ब्लॉक जखोली, जनपद रूदप्रयाग
  14. अध्यापक श्री महेन्द्र सिंह पुत्र रणबीर सिंह राप्रावि रायडी, ब्लॉक जखोली, जनपद रूदप्रयाग

अब तक की कार्यवाही- एसआईटी द्वारा अब तक फर्जी शिक्षकों के विरूद्ध विधिक कार्यवाही करने हेतु 120 रिपोर्ट महानिदेशक, विद्यालयी शिक्षा, उत्तराखण्ड को प्रेषित की गई है, जिनमें से 68 अभियोग 80 शिक्षकों के विरूद्ध एफआईआर पंजीकृत की जा चुकी है। वर्ष 2012 से 2016 तक में नियुक्त कुल 9602 शिक्षक जोकि जांच के दायरे में हैं, उनके नियुक्ति सम्बन्धी कुल अभिलेख 64641 हैं। इनमें से 35722 अभिलेखो का सत्यापन कराया जा चुका है। शेष 28919 अभिलेखों के सत्यापन की कार्यवाही प्रचलित है। वर्तमान में एसआइटी में लोकजीत सिंह के निर्देशन में 8 निरीक्षक (4 देहरादून सैक्टर में तथा 04 हल्द्वानी सैक्टर में) नियुक्त हैं।

सांठगांठ से चल रहा है शकुंतला अस्पताल!

मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा शकुंतला अस्पताल के प्रबंधक से नियमानुसार अनापत्ति प्रपत्रों को मानकों के अनुरूप पूर्ण कराये बिना पहले पंजीकरण व प्रतिवर्ष किया जा रहा है नवीनीकरण! भ्रष्टाचार के चलते मरीजों के जीवन से किया जा रहा खिलवाड़!


मोदी नगर, गाजियाबाद (एकलव्य बाण समाचार)। मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा शकुंतला अस्पताल के प्रबंधक से नियमानुसार अनापत्ति प्रपत्रों को मानकों के अनुरूप पूर्ण कराये बिना मरीजों के जीवन से खिलवाड़ कर पहले पंजीकरण व प्रतिवर्ष नवीनीकरण किया जा रहा है। इससे अस्पताल में किसी भी घटना घटने की प्रबल संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। मरीज की जान माल भी सुरक्षित नहीं है। बहुत ही छोटी जगह में अस्पताल संचालित है, आवागमन का रास्ता बिलकुल भी मरीज के लिए सुरक्षा की दृष्टि से सुरक्षित नहीं है। अग्नि शमन उपकरणों की समुचित व्यवस्था नहीं है, अस्पताल की अपनी पार्किंग नहीं है, वाहनों को सड़क पर खड़ा करना पड़ता है। शकुंतला अस्पताल किसी भी प्रकार से मानकों के अनुरूप नहीं है बल्कि मानकों के विपरीत कार्य कर रहा है!

नाम न छापने की शर्त पर कई लोगों का कहना है कि ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से हटा देना चाहिए जो कि भ्रष्टाचार में लिप्त हो और उत्तर प्रदेश शासन के शासनादेशों का पालन नहीं करा सकता हो।
मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय के अधिकारियों व अस्पताल के प्रबंधक द्वारा शासनादेशों का पालन न करना अपराध की श्रेणी में आता है, जो कि एक गंभीर मामला है और भ्रष्टाचार से जुड़ा है। जनहित में स्वास्थ्य विभाग उत्तर प्रदेश शासन को इस ओर कदम उठा कर इनके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।

रिवर फ्रंट घोटाले में सीबीआई की 3 राज्यों में छापेमारी

रिवर फ्रंट घोटाले में सीबीआई की 3 राज्यों में छापेमारी। सपा सरकार में हुआ था घोटाला। 42 ठिकानों पर तलाशी।

लखनऊ (एकलव्य बाण समाचार)। सपा सरकार में हुए रिवर फ्रंट घोटाले में सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई की है। लखनऊ, कोलकाता, अलवर, सीतापुर, रायबरेली, गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ, बुलंदशहर, इटावा, अलीगढ़, एटा, गोरखपुर, मुरादाबाद और आगरा में एक साथ छापेमारी की। 13 जिलों में छापे, 42 ठिकानों में  तलाशी हो रही है। सीबीआई ने कई सुपरिंटेंड इंजीनियर और अधिशासी इंजीनियरों के खिलाफ  केस दर्ज किया है। 
गोमती नगर थाने में दर्ज है मुकदमा
सीबीआई लखनऊ की एंटी करप्शन ब्रांच ने प्रदेश सरकार के निर्देश पर सिंचाई विभाग की ओर से लखनऊ के गोमती नगर थाने में दर्ज कराए गए मुकदमे को आधार बनाकर 30 नवंबर 2017 में नया मुकदमा दर्ज किया था। इसमें सिंचाई विभाग के तत्कालीन मुख्य अभियंता (अब सेवानिवृत्त) गुलेश चंद, एसएन शर्मा व काजिम अली, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता (अब सेवानिवृत्त) शिव मंगल यादव, अखिल रमन, कमलेश्वर सिंह व रूप सिंह यादव तथा अधिशासी अभियंता सुरेश यादव नामजद हैं। सीबीआई ने अपनी जांच शुरू भी कर दी। उसने सिंचाई विभाग से हासिल पत्रावलियों की जांच करने के अलावा कुछ आरोपियों से पूछताछ भी की।

बड़े अधिकारी हैं फंसे-
सीबीआई जांच की संस्तुति करने से पहले प्रदेश सरकार ने अप्रैल 2017 को इस घोटाले की न्यायिक जांच कराई थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज न्यायमूर्ति आलोक सिंह की अध्यक्षता में गठित समिति ने जांच में दोषी पाए गए इंजीनियरों व अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराए जाने की संस्तुति की थी। इसके बाद 19 जून 2017 को सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता डॉ. अंबुज द्विवेदी ने गोमतीनगर थाने में धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। बाद में यह जांच सीबीआई को स्थानान्तरित हो गई।

काम पूरा होने के पहले कैसे खर्च हुआ ९५ प्रतिशत धन
सीबीआई अब इस आरोप की जांच कर रही है कि प्रोजेक्ट के तहत निर्धारित कार्य पूर्ण कराए बगैर ही स्वीकृत बजट की 95 प्रतिशत धनराशि कैसे खर्च हो गई? प्रारंभिक जांच के अनुसार प्रोजेक्ट में मनमाने तरीके से खर्च दिखाकर सरकारी धन की बंदरबांट की गई है। यह प्रोजेक्ट लगभग 1513 करोड़ रुपये का था, जिसमें से 1437 करोड़ रुपये काम खर्च हो जाने के बाद भी 60 फीसदी काम भी पूरा नहीं हो पाया। आरोप यह भी है कि जिस कंपनी को इस काम का ठेका दिया गया था, वह पहले से डिफाल्टर थी।

विधवा का कनेक्शन ऑन लाइन काटा, जोड़ने के नाम पर वसूली भी की

विधवा का कनेक्शन ऑन लाइन काटा, वसूली भी की कई ऑपरेशन झेल रही अकेली विधवा महिला के कनेक्शन को ऑनलाइन बिना सूचना के काटा, बिल के अलावा अतिरिक्त वसूली भी की।

बिजनौर। एक तरफ लॉक डाउन की मार और दूसरी तरफ विद्युत विभाग का वसूली अभियान अब गरीब औऱ परेशान तबके का खून चूसने का काम बखूबी करेगा।
रसूखदार, नेताओं व बड़े बकायदारों को छोड़ कर ये वसूली अभियान गरीबों के कनेक्शन भी काटेगा। बिल के अलावा उनसे कनेक्शन जोड़ने के नाम पर 600 रु की अतिरिक्त वसूली भी की जा रही है।
आरोप है कि वसूली टीम में शामिल जेई समय सिंह, मलखान सिंह आदि मिलकर गरीबों को खूब तंग कर बड़े लोगों को अभयदान दे रहे हैं। बताया गया है कि स्योहारा के मोहल्ला इस्लाम नगर में एक विधवा अकेली महिला रहती है। इसका घरेलू कनेक्शन न्याज़ अहमद पुत्र रमजानी के नाम से है। हाल ही में विधवा की आंख एवं कूल्हे का ऑपरेशन हुआ है। वो अकेली ही ज़िंदगी से लड़ रही है। कुछ बकाया बिजली विभाग का था, दो दिन पूर्व वसूली टीम ने उसका ऑनलाइन कनेक्शन काट दिया। इसकी सूचना महिला को किसी भी रूप में नही दी गयी। अब ऐसे में यदि कोई बड़ा अधिकारी उक्त कनेक्शन, जिसको ऑनलाइन काटा हुआ दर्शा दिया गया है, को चेक करने आ जाये और वहां उसको बिजली जली हुई मिल जाये तो यकीनन उक्त महिला पर बिजली चोरी का आरोप और जड़ दिया जाएगा। महिला के परिचित आपस मे सहयोग करते हुए बिजली का बिल जमा करने पहुंचे तो उनसे 600 रु कनेक्शन जोड़ने के नाम पर और वसूले गए। जबकि न कनेक्शन कटा और न ही इसकी सूचना महिला को दी गयी थी। बरहाल जैसे तैसे वो 600 रु भी अवैध वसूली के रूप में जमा करा दिए गए। दु:खी महिला ने बताया कि उसके पड़ोस में काफी लोगों पर बड़ा बड़ा बकाया बाकी है, लेकिन सिर्फ कार्यवाही उसी पर क्यों की गयी! बहरहाल बिना सूचना दिए ऑनलाइन कनेक्शन कटा होने व फिर भी बिजली जुड़ी रहने की बाबत जब एसडीओ, जेई व लाइनमैन से पूछा गया तो वो सब बगले झांकते नज़र आए।
आरोप है कि विभाग का रवैया इसी तरह चलता रहा और अमीरों को छोड़ गरीबों को तंग करने का सिलसिला चलता रहा तो कोई बड़ा विवाद वसूली टीम के साथ हो सकता है क्योंकि गरीब तबका इस समय लाकडाउन की मार झेलने के कारण रोज़ी रोटी से जूझ रहा है। ऊपर से विभाग का ये पक्षपात वाला रवैया आग में घी डालने जैसा साबित हो सकता है।

ट्रांसफर नीति ठेंगे पर: बरसों से जमे हुए हैं ड्रग इंस्पेक्टर! 

पॉलिटिकल अप्रोच: बरसों से जमे हुए हैं ड्रग इंस्पेक्टर! 

बिजनौर। जिला औषधि निरीक्षक (ड्रग इंस्पेक्टर) आशुतोष मिश्रा के लिए कोई सरकारी नियम मायने नहीं रखता। आरोप है कि धन बल और सत्ताधारियों की कृपा के चलते वह अक्टूबर 2016 से बिजनौर जिले में निर्विघ्न जमे हुए हैं। हाल ही में प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ ने नई स्थानांतरण नीति को मंजूरी दी है। अब देखना ये है कि 15 जुलाई की तय समय सीमा में इनका बोरिया बिस्तर बंधता है या फिर से ये यहीं टिके रहने में कामयाब हो जाएंगे! 

मेडिकल स्टोर संचालक कर उठे त्राहिमाम- 

जनपद बिजनौर के मेडिकल स्टोर संचालक त्राहिमाम की मुद्रा में हैं। आरोप है कि बिना भेंट चढ़ावा के जिला औषधि निरीक्षक कार्यालय से कोई फाइल आगे नहीं बढ़ती। जिला औषधि निरीक्षक (ड्रग इंस्पेक्टर) आशुतोष मिश्रा के खास कर्मचारियों का काकस इतना मजबूत है कि मेडिकल स्टोर संचालकों को शोषण से कोई भी नहीं बचा पा रहा। लाइसेंस रिन्यूवल हो या अन्य कोई काम, हर काम के रेट बंधे हुए हैं। शिकायत करने वाले को इस तरह फंसाया जाता है कि अगले कई जन्मों तक वो किसी से भी पंगा लेने की बात सपने में भी नहीं सोच सकता। 

राजनैतिक विरासत के धनी- बताया गया है कि आशुतोष मिश्रा के परिवार के कई लोग राजनैतिक पार्टियों से जुड़े हुए हैं। यही कारण है कि बिजनौर में तैनाती के दौरान भी वह इन संबंधों का फायदा उठा रहे हैं। बिजनौर के कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं से इनके घनिष्ठ संबंध बताए जाते हैं। 

बड़े बेआबरू होकर नेताजी थाने से निकले!

बड़े बेआबरू होकर नेताजी थाने से खिसके। गौकशी में लिप्त युवक की सिफारिश करने पहुंचे थे थाने।

बिजनौर। किरतपुर में भारतीय जनता पार्टी के एक मुस्लिम नेता को गौकशी करने वाले एक युवक की सिफारिश करना उस समय महंगा पड़ गया, जब थाने में बैठे भाजपा नेताओं व एसएचओ ने उसे खरी खोटी सुनाते हुए खूब हड़काया।
ग्राम मेमन सादात निवासी एक युवक थाने पहुंचा और एसएचओ राजकुमार शर्मा को अपना परिचय देते हुए बताया कि वह दिल्ली प्रदेश भारतीय जनता पार्टी अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ का मंत्री है। उसके गांव में गौकशी के नाम पर जिस युवक को पुलिस परेशान कर रही है, वह बेक़सूर है नेता जी की यह बात सुनकर एसएचओ ने उसे चेतावनी देते हुए कहा कि गौकशी के मामले में किसी की भी सिफारिश करने मेरे पास मत आ जाना नहीं तो शक के दायरे में आप भी आएंगे। एसएचओ की यह दो टूक चेतावनी सुनकर भी नेता जी के तेवर ढीले नहीं पड़े और वह लगातार सिफारिश करते रहे। वहां बैठे भारतीय जनता पार्टी व हिन्दू युवा वाहिनी के नेताओ ने भी उसे लगे हाथों ले लिया और कहा कि भविष्य में गले में बीजेपी का पट्टा डाल कर मत घूमना और थाने के बाहर अपनी गाड़ी खड़ी कर के रौब गालिब मत करना और भूल कर भी कभी गौकशी करने वालो  की सिफारिश लेकर थाने मत आ जाना। उन्होंने ऐसे तथाकथित नेताओं को वार्निंग देते हुए कहा कि वह पार्टी की नीतियों का दुरुपयोग कतई न करें। उन्होंने कहा कि ऐसे नेताओं के क्रिया कलापों के कारण ही पार्टी की छवि धूमिल हो रही है। नेताजी ने अपने पद की पुष्टि कराने के लिए अपने उच्च पदाधिकारियों को फोन मिलाया परन्तु  किसी ने भी उनका फोन रिसीव नही किया। इतना सब कुछ होने के बाद नेताजी बड़े बेआबरू होकर थाने से खिसक लिए।

ग्राम विकास अधिकारी की खिलाफत में उतरे रोजगार सेवक

ग्राम विकास अधिकारी के खिलाफ हुए रोजगार सेवक।
कार्रवाई न हुई तो सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी।


बिजनौर। नूरपुर ब्लॉक में तैनात ग्राम विकास अधिकारी अवधेश कुमार के द्वारा अपनी ताकत का इस्तेमाल करते हुए रोजगार सेवक कपिल कुमार शर्मा व कंप्यूटर ऑपरेटर देवेंद्र कुमार के साथ अभद्र व्यवहार गाली गलौज का मामला सामने आया है।
इससे पहले भी ग्राम विकास अधिकारी अवधेश कुमार एक ऑडियो क्लिपिंग में जमकर गाली गलौज धमकी देते हुए सुनाई दे रहे हैं। वहीं रोजगार सेवक कपिल कुमार शर्मा व कंप्यूटर ऑपरेटर देवेंद्र कुमार ने अपने शिकायती पत्र में ग्राम विकास अधिकारी अवधेश कुमार के खिलाफ उच्च अधिकारियों से शिकायत की है। कहा है कि अगर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई तो रोजगार सेवक सामूहिक तौर पर इस्तीफा देने का कार्य भी करेंगे। इसके जिम्मेदार खुद खंड विकास अधिकारी से लेकर उच्च अधिकारी होंगे।

सत्ता के करीबी होने का दावा- उन्होंने कहा कि आएदिन ग्राम विकास अधिकारी सत्ता में बैठे हुए नेता अधिकारियों से अपने घरेलू संपर्क बताता है। उसके खिलाफ हर कोई बोलता हुआ घबराता है। उसका कहना है कि मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता, मेरे तालुकात सरकार में बैठे हुए बड़े नेताओं से हैं। ग्राम विकास अधिकारी लगातार सरकार की छवि को खराब करने में लगा हुआ है।

सड़कों पर उतर करेंगे आंदोलन-
चेतावनी दी है कि रोजगार सेवकों को  ग्राम विकास अधिकारी अवधेश कुमार के खिलाफ सड़कों पर उतर कर आंदोलन को मजबूर होना पड़ेगा। शिकायत करने वालों में कपिल शर्मा, जयवीर सिंह, कविता रानी, राजीव कुमार, त्रिलोक कुमार, उसमान अली, हरपाल सिंह, देवेंद्र कुमार, सुशील कुमार, देवेंद्र कुमार, आलोक कुमार, रोहित सिंह, अंकित कुमार, नेपाल सिंह, प्रमोद कुमार व भूपेंद्र सिंह आदि रोजगार सेवक मौजूद थे

दलालों के हवाले है डूडा कार्यालय

डूडा कार्यालय में दलालों का बोलबाला

बिजनौर। नगर पालिका परिषद नगीना में डूडा कर्मचारी सर्वेयर मोहित कुमार के भ्रष्टाचारी आचरण के बाद लोग पशोपेश में हैं। वहीं संबंधित अधिकारियों ने भी पल्ला झाड़ने की जुगत ठान रखी है।

ऐसा नहीं है कि केवल एक या दो सर्वेयर ही भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। सूत्रों का कहना है कि यदि आप डूडा कार्यालय जाएं तो वहां कर्मचारियों से अधिक दलाल दिखाई देते हैं। बताया जाता है कि इन दलालों की पकड़ इतनी मजबूत है कि कोई बिरला ही इन्हें बिना चढ़ावा चढ़ाए डूडा कार्यालय में अपना काम करा पाता है। कुछ लोगों का तो यह भी कहना है कि इन दलालों को खुद डूडा अधिकारी का संरक्षण प्राप्त है। प्रधानमंत्री आवास योजना को पलीता लगा रहा यह भ्रष्ट गठजोड़ न केवल पात्रों का हक़ मारने में लगा है बल्कि अपात्रों को लाभ पहुंचाने से आम लोगों में गुस्सा भी पनप रहा है जो किसी भी अप्रिय स्थिति का कारण बन सकता है। साथ ही यह सरकार की छवि को भी हानि पहुंचाने का कार्य कर रहा है। इस संबंध में कई बार शिकायत दर्ज कराने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई न होना भी अपने आप में एक कहानी कहता है। अब देखने वाली बात यह है कि इस बार भी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई की जाएगी या फिर पहले की तरह लीपापोती कर मामले को दबा दिया जाएगा।

गौरतलब है कि एक दिन पहले ही युवा राष्ट्रीय लोकदल ने जिलाधिकारी उमेश मिश्रा को दिये ज्ञापन में आरोप लगा कर नगर पालिका परिषद नगीना में डूडा कर्मचारी सर्वेयर मोहित कुमार का मय सबूत कच्चा चिट्ठा खोला था।

PM आवास योजना में भ्रष्टाचार की शिकायत

जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा विभाग) जिला बिजनौर में प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी में भ्रष्ट कर्मचारियों द्वारा किया जा रहा भ्रष्टाचार।

बिजनौर। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी में कर्मचारियों के भ्रष्टाचार की बातें आम हो गई है। इसका कारण यह कि इन भ्रष्ट कर्मचारियों की शिकायत होने के बाद भी ये इस योजना में गरीबों को जमकर लूट रहे हैं। गरीबों का पैसा ऐसे लोगों को दिया जा रहा है जिनके आवास पहले से ही पक्के बने हुए हैं। उक्त आरोप लगाते हुए युवा राष्ट्रीय लोकदल बिजनौर के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।

युवा रालोद नेताओं ने जिलाधिकारी उमेश मिश्रा को दिये ज्ञापन में आरोप लगाया कि नगर पालिका परिषद नगीना में डूडा कर्मचारी सर्वेयर मोहित कुमार ने  अपना ही खेल कर रखा है। शिकायत के सम्बन्ध में बिन्दुवार अवगत कराया गया। बताया कि मोहित कुमार द्वारा नीरू पत्नी कृष्ण कुमार निवासी विश्नोई सराय रेती नगीना के मकान का नींव का फोटो बाला पत्नी अमर सिंह निवासी मोहल्ला विश्नोई सराय रेती नगीना के मकान की नींव पर खींचा गया है। मोहित कुमार सर्वेयर द्वारा 50,000 रुपए लेकर नीरू पत्नी कृष्ण कुमार का सरकारी अस्पताल के ऊपर पहले से ही बना हुआ मकान दिखा दिया गया है। सरकारी पैसे का बन्दरबाट मोहित कुमार व नीरू द्वारा किया गया है। नीरू के नाम 20 बीघा जमीन है, पिछले कई वर्षों से अरबन अस्पताल नीरू के खुद के मकान में चल रहा है, जिसका किराया 20,000 रुपए प्रतिमाह सरकार से नीरू द्वारा लिया जा रहा है। युवा रालोद नेताओं ने इस मामले की उच्च स्तरीय सैम्पलिंग जांच अति आवश्यक बताई।

इसके अलावा आरोप लगाया कि मोहित कुमार सर्वेयर द्वारा मोनू पुत्र रामपाल निवासी मोहल्ला कस्बा नगीना का प्रथम जियो-टैग प्लाट पर किया गया था, जिसकी प्रथम किस्त मोनू द्वारा प्राप्त की गई तथा 1 वर्ष 6 माह मोहित कुमार सर्वेयर द्वारा सांठ गांठ कर अपने पुराने मकान की छत पर नींव का फोटो करा कर सरकारी पैसा लिया गया है तथा सरकारी पैसे का दुरूपयोग किया गया है। शिकायत के साथ सबूत के तौर पर  फोटो भी उपलब्ध कराए गए हैं। प्रतिनिधि मंडल ने जिलाधिकारी से कहा कि जनहित में मोहित कुमार सर्वेयर को तत्काल नगर पालिका परिषद नगीना से बर्खास्त कर उच्च स्तरीय जांच समिति से सैम्पलिंग जांच कराई जाए, जिससे भविष्य कोई कर्मचारी ऐसी हरकत ना करें।

जिलाधिकारी से मिलने वालों में युवा राष्ट्रीय लोकदल बिजनौर के राजीव चौधरी, सचिन, हर्षवर्धन, पारितोष कुमार शामिल रहे।

ग्राम पंचायत भूमि पर कब्जा, मुक्त कराने को सौंपा ज्ञापन

ग्रामीणों ने अराजी को कब्जामुक्त कराने को सौंपा ज्ञापन
ग्राम पंचायत गांगूवाला के ग्राम सिकनदरपुर बसी का मामला।

बिजनौर। नजीबाबाद अंतर्गत ग्राम पंचायत गांगूवाला के ग्राम सिकन्दरपुर बसी के ग्रामीणों ने ग्राम समाज की आराजी को अवैध कब्जे से मुक्त कराने की मांग को लेकर एक ज्ञापन उपजिलाधिकारी को सौंपा।  
मंगलवार को ग्राम सिकन्दरपुर बसी के ग्रामीण उपजिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी परमानन्द झा को एक ज्ञापन सौंप कर कहा कि दिनांक 14 जून को ग्राम सिकन्दरपुर बसी में एक बैठक हुयी। जिसमें तय किया गया कि गांव की जिस 19 बीघा आराजी पर कुछ लोगों ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा है, उस भूमि को कब्जा मुक्त कराया जाना जरूरी है। इस कारण आएदिन गांव में अशांति का माहौल बना रहता है। ग्रामीणों ने ज्ञापन सौंप कर उपजिलाधिकारी से 19 बीघा ग्राम समाज की आराजी को कब्जा मुक्त कराने की मांग की है। इसके अलावा ज्ञापन में प्राथमिक कन्या पाठशाला के लिए छोड़ी गयी जमीन को कब्जा मुक्त कराने, ग्राम समाज खसरा सं0 375क, 375ख, 375ग के रकबे को कब्जा मुक्त कराने, आराजी के कुछ अंश (भू-भाग) पर वाद सं0 371/2014 सीताराम आदि बनाम नन्हें सिंह न्यायालय सिविल जज जूनियर डिवीजन नजीबाबाद के यहां वाद विचाराधीन होने की बात कही गयी है। साथ ही यह भी कहा गया है कि उक्त ग्राम समाज की आराजी पर सीताराम पुत्र मूला सिंह के भाईयों राजपाल, टीकम, उदल की ओर से नवनिर्माण जारी है। ग्रामीणों ने कहा कि पैमाईश करते समय तत्कालीन लेखपाल देवेन्द्र ने उक्त आराजी को ग्राम समाज बताकर घरोनी पैमाईश नहीं की थी। उक्त जमीन पर निर्माण को रोके जाने की भी मांग की गई। ज्ञापन देने वालो में प्रमोद कुमार, आशाराम, विनोद कुमार, ऋषिपाल, ठाकुर गजेन्द्र सिंह आदि शामिल रहे।

रिश्वत मांगते एएनएम की वीडियो वायरल, सस्पेंड

सरकारी अस्पताल में डिलीवरी करने के नाम पर  एएनएम मांग रही थी रिश्वत। वीडियो वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप। डीएम के आदेश पर निलंबित।

रिश्वत मांगने की आरोपी एएनएम सीमा

बिजनौर। अफजलगढ़ क्षेत्र के कादराबाद उप स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात एएनएम सीमा की रिश्वत की डिमांड करते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। आसपास के ग्रामीणों का आरोप है कि उक्त एएनएम काफी समय से डिलीवरी के लिए 7 से 8 हजार रुपए वसूलती रही है।

थाना अफजलगढ़ क्षेत्र के कादराबाद उप स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात एएनएम सीमा का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। इसमें वह डिलवरी के लिए 7 से 8 हजार रुपए की मांग कर रही है। पीड़ित मरीज व तीमारदारों के पूछने पर एनएम कह रही है कि अगर ज्यादा सुविधाएं चाहिए तो पैसे भी ज्यादा देने होंगे। सरकार स्वास्थ्य केंद्र में इतनी सुविधाएं नहीं देती। साथ ही मरीज को यह कह कर आतंकित करती हैं कि यदि किसी और हॉस्पिटल में ऑपरेशन कराने पर 60 हजार रुपए का खर्च आएगा।

डॉ. एसके निगम एडिशनल सीएमओ प्रशासन

डॉ. एसके निगम एडिशनल सीएमओ प्रशासन ने बताया कि रिश्वत लेने की बात करते एएनएम सीमा की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।डीएम के आदेश पर एएनएम को निलंबित कर दिया गया है और विधि कार्रवाई की जा रही है।

सत्ता पक्ष की जी हुजूरी न करने पर हटे कोतवाल!

धामपुर में महज 12 दिन ही टिक पाए राजकुमार शर्मा, अब जीत सिंह को मिला धामपुर कोतवाली का चार्ज

बिजनौर। पुलिस अधीक्षक डा. धर्मवीर सिंह ने राजकुमार शर्मा का तबादला किरतपुर करते हुए उनके स्थान पर जीत सिंह को धामपुर कोतवाली का प्रभारी निरीक्षक बनाया है। गत 29 मई को अरुण कुमार त्यागी का तबादला कर राजकुमार शर्मा को धामपुर कोतवाली का चार्ज दिया गया था।

29 मई 2021 को धामपुर कोतवाली का चार्ज संभालने वाले राजकुमार शर्मा का अचानक तबादला क्यों हुआ? अब यह सुगबुगाहट शुरु हो गयी है कि ऐसा क्या हुआ जो 12 दिन के भीतर ही तबादला कर दिया गया। किरतपुर में प्रभारी निरीक्षक रहे जीत सिंह को धामपुर कोतवाली में प्रभारी निरीक्षक बनाया गया है। राजकुमार शर्मा का तबादला होने के बाद यह चर्चा है कि वह सत्ता पक्ष के नेताओं की नहीं सुन रहे थे और केवल अपनी मर्जी ही चला रहे थे। इस कारण सत्ता पक्ष के नेता उनसे काफी नाराज थे। इसी के चलते उन पर तबादले की गाज गिरी। विभागीय सूत्रों का दावा है कि धामपुर क्षेत्र में सिर्फ एक की ही चलती है। उसकी खिलाफत करना महंगा ही साबित होता है और वो कौन है, ये सभी को पता है!

बताया गया है कि लगभग 4 महीने पूर्व किरतपुर थाना प्रभारी बनाए गए जीत सिंह अपने व्यवहार एवं कुशलता के लिए क्षेत्र में काफी प्रभाव बनाए हुए थे। किरतपुर क्षेत्र की जनता उनको काफी पसंद करती थी और उनके व्यवहार की प्रशंसा करती थी। जीत सिंह व्यापारियों एवं क्षेत्र की जनता का विशेष ध्यान रखते थे। वह अपराध पर काफी हद तक अंकुश लगाए हुए थे। पिछले दो महीने लॉकडाउन के समय उन्होंने सरकार द्वारा दी गई गाइडलाइन का पालन कराने को जनता के सहयोग से अहम भूमिका निभाई। यही नहीं थाने का स्टाफ भी जीत सिंह के व्यवहार से काफी खुश था। उन्होंने अपने कार्यकाल में थाना परिसर में महिला हेल्प डेस्क एवं पुलिस स्टाफ के खाने के लिए मैस का पुलिस अधीक्षक डॉ. धर्मवीर सिंह द्वारा शुभारंभ कराया।

खाकी और खादी के गठजोड़ से हो रहा अवैध खनन!

खाकी और खादी के गठजोड़ से चल रहा अवैध खनन!

मालामाल होते जा रहे अधिकारी और छुटभैये नेता!

योगी सरकार को बदनाम करने की साजिश!

बिजनौर (एकलव्य बाण समाचार) खाकी और खादी के संरक्षण में नगीना देहात क्षेत्र की नदी और ग्राम सुंदर वाली में खनन माफिया बिना किसी खौफ के सरेआम खनन कर रातों रात लखपति बनते जा रहे हैं। साथ ही अधिकारी और सत्ताधारी छूट भैया नेता भी मालामाल हो रहे हैं, वहीं योगी सरकार बदनामी का पात्र बन गई है। इसका असर अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव पर पड़ेगा।

आधा दर्जन खनन माफियाओं ने खो नदी में 28 बीघा एक पट्टा सरकार से लेकर उस पार खनन का काम शुरू किया था, जिसकी आड़ में खनन माफिया लगभग 500 से 800 बीघा तक अवैध खनन कर योगी सरकार की छवि को धूमिल करने में लगे हैं।खनन माफिया नदियों से पॉप मशीन, जेसीबी, मशीनों से नदियों का सीना चीर कर बड़े-बड़े ट्रैक्टरों और ट्रकों से रेत बजरी का खनन बिना किसी डर खौफ के 24 घंटे खनन का काम कर रहे हैं। बताया गया है कि इस संबंध में यदि कोई हलका पुलिस या जिला स्तर के प्रशासनिक अधिकारियों को रात दिन खनन होने की शिकायत करते हैं तो पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी अधिकारी अनसुनी कर देते हैं। यही नहीं खनन माफियाओं को शिकायतकर्ता का नाम बता देते हैं, जिससे खनन माफिया शिकायत करने वालों को रास्ते में या उनके घर जाकर दोबारा शिकायत करने पर देख लेने की  धमकियां देते हैं। तमाम शिकायतों के बावजूद कोई भी अधिकारी खनन स्थान का निरीक्षण करने को तैयार नहीं।

सत्ताधारी नेता और हर छोटे बड़े अधिकारी को पहुंच रहा पैसा! खनन माफिया क्षेत्र के सत्ताधारी नेता और हर छोटे बड़े अधिकारी को पैसा पहुंचाने की बात भी सरेआम कह रहे हैं। खनन माफियाओ का कहना है कि जब हम नेता और अधिकारियों को पैसा देते हैं, तो हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता, जिसकी गवाही पिछले दो माह से सुंदर वाली गांव के साथ-साथ क्षेत्र की सभी नदियों से खनन माफियाओं द्वारा किया जा रहा रेत बजरी का खनन दे रहा है।

मीडिया भी शामिल! आरोप है कि खनन माफियाओं ने पुलिस, खनन विभाग के अधिकारी, क्षेत्रीय सत्ताधारी नेता और जिला स्तर के अनेक अधिकारियों के पैरों मे नोटों की गड्डी बांध दी हैं, जिससे उन से उठा और खड़ा भी नहीं हुआ जा पा रहा है। कई ग्रामीणों ने अपना नाम ना छापने की पर बताया कि खनन के इस गोरखधंधे में खादी और खाकी वे संबंधित विभाग के अधिकारियों के साथ साथ चंद बहरुपिए तथाकथित मीडिया कर्मी भी शामिल है। जो नदियों का सीना चीर कर निकाला जा रहा रेत बजरी का खनन से लहूलुहान होता देख रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि खनन रात्रि के समय भी बड़ी-बड़ी मशीनों से किया जा रहा है। नदियों में 10 से 15 फीट गहरे गहरे गड्ढे हो गए हैं, जिनसे आने-जाने वाले ग्रामीणों को और पशुओं को  हर समय जान का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि जब से यहां खनन शुरू हुआ है, गांव वालों का नदियां पार करना भी कठिन हो रहा है, लेकिन ग्रामीणों और पशुओं की  ब्रा टोपी समस्या अधिकारियों को दिखाई नहीं दे रही हैं। अधिकारियों के दम पर चल रहा खुलेआम अवैध खनन रुकने का नाम नहीं ले रहा,  कोरोना मे  खनन माफिया रायल्टी और टैक्स की चोरी भी कर रहे हैं, जिससे प्रदेश  सरकार को करोड़ों का चूना लग रहा है। लेकिन बिजनौर प्रशासन खनन माफियाओं के सामने नतमस्तक है। आवाज उठाने वाले को मिलती धमकी अधिकारियों की खामोशी की वजह से गरीब तबके के ग्रामीणों व छोटे किसानों का बुरा हाल है। अगर कोई आवाज उठाता है तो खनन माफिया  जान से मारने की धमकियां दे देते हंै, जिसकी वजह से किसानों में और गरीबों में भय व्याप्त है। सूत्रो की मानें तो अवैध खनन का यह गोरखधंधा बिजनौर पुलिस-प्रशासन और राजस्व विभाग की मिलीभगत से चल रहा है। सुन्दरवाली खो नदी में दो मन्दिर और देवता महाराज का थला भी है। यह लोग मन्दिरों को भी ढ़हाने मे लगे हैं। समय रहते अधिकारियों द्वारा खनन माफिया पर नकेल नहीं कसी गई तो वहां खड़े धार्मिक स्थल भी धराशाई हो सकते हंै। 

नए डीएम के सामने गंभीर चुनौतियां: नवागत जिलाधिकारी के लिए चुनौतियों से कम नहीं होगा खनन माफियाओं पर नकेल कसना, क्योंकि इस गोरखधंधे में पुलिस के साथ साथ सत्ता की खादी भी शामिल है!

खनन सामग्री से भरा वाहन रोकने पर अभद्रता!

खनन सामग्री से भरा वाहन रोकने पर की अभद्रता!
वाहन स्वामी ने रेंजर पर लगाए वसूली के आरोप

बिजनौर। नजीबाबाद वन विभाग के कर्मचारियों की ओर से खनन सामग्री से भरा वाहन चैकिंग के लिए रोकने पर वन विभाग कर्मचारियों के साथ अभद्रता करने के मामले में सम्बन्धित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। वहीं वाहन स्वामी ने वाहन सीज करने की धमकी देकर धन लेने का आरोप लगाया है।
बिजनौर वन प्रभाग की साहनपुर रेंज के रेंज अधिकारी गजेन्द्र पाल सिंह ने बताया कि साहनपुर रेंज स्टाफ तीन जून को अपराह्न समय 2:10 बजे नजीबाबाद स्थित आरा मशीनों की चैकिग के लिए जा रहे थे। रास्ते में एक खनन सामग्री से भरा वाहन दिखायी देने पर चैक करने के लिए रोका गया। उक्त वाहन में आरबीएम भरा पाया गया। चालक वाहन में भरी सामग्री से सम्बन्धित कागजात नहीं दिखा सका। तभी यूसुफ पुत्र अय्यूब व अन्य कई लोग दो कारों में सवार होकर आए और स्टाफ के साथ अभद्रता करने लगे। वाहन चालक खनन से भरे वाहन को भगा कर ले गया। युसूफ की गतिविधियों से खनन माफिया होने की पुष्टी होती है। उसके खिलाफ सम्बन्धित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। इसी कारण यूसुफ बचने के लिए अनर्गल आरोप लगा रहा है। उन्होंने बताया कि उन पर लगाए गए आरोप निराधार हैं।

₹20 हजार लेकर छोड़ा! जलालाबाद निवासी ट्रांसपोर्टर यूसुफ पुत्र अय्यूब का आरोप है कि उसके पास कागजात होने के बावजूद अवैध वसूली की जा रही थी। डीएफओ व मुख्यमंत्री पार्टल पर रेंजर के खिलाफ शिकायत की है। कहा गया है कि तीन जून की रात्रि वाहन सुंदरवाली से नजीबाबाद आ रहा था। रेंजर गजेन्द्र यादव ने दरोगा व पुलिस टीम के साथ रायपुर थाने के कनकपुर क्षेत्र में रोक लिया और सीज करने की धमकी देते हुए 20 हजार रुपए लेकर वाहन को छोड़ा।

कैसे करें जीएसटी के फर्जी बिल की पहचान?

जीएसटी के फर्जी बिल की पहचान कैसे करें?

जिस कारोबार को फाइनल GSTIN नंबर नहीं मिला है, उन्हें प्रोविजनल जीएसटी नंबर इस्तेमाल करना चाहिए.

नई दिल्ली। देश में एक जुलाई 2019 से ही गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) लागू है। बिल के मामले में शॉपिंग करने वाले लोगों के लिए कर प्रावधान में यह बदलाव बहुत अच्छा नहीं रहा। वजह यह है कि कई बार ग्राहकों को गलत या फर्जी बिल पकड़ा दिए जाते हैं।

योग्य नहीं फिर भी फाड़ रहे बिल
सभी दुकान के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन जरूरी नहीं है और इस हिसाब से वे आपसे जीएसटी चार्ज भी नहीं कर सकते.म, जिस बिल में जीएसटी IN नंबर है, उसमें सेंट्रल जीएसटी और स्टेट जीएसटी का अलग ब्रेक अप होना जरूरी है।

पुराने फॉर्मेट में जीएसटी वसूलना
यह भी देखा गया है कि बहुत से कारोबारी और दुकानदार पुरानी रसीद से ही जीएसटी वसूल रहे हैं। इसमें वैट या टिन नंबर लिखा है, जो कि गलत है। ऐसे मामलों के जानकार कहते हैं कि, ‘जीएसटी नंबर लेना और उसका ही बिल देना जरूरी हो है। सभी कारोबार को तुरंत जीएसटी पर जाना चाहिए और बिल में जीएसटी IN का प्रयोग करना चाहिए। इसमें सेंट्रल जीएसटी और स्टेट जीएसटी का अलग उल्लेख होना चाहिए।’

प्रोविजनल जीएसटी नंबर चलेगा?
बहुत से दुकानदार प्रोविजनल जीएसटी नंबर के साथ बिल देते हैं और कहते हैं कि अगर सरकार ने उनका जीएसटी IN मंजूर किया तब वे उस तरह का बिल देंगे, यह गलत चलन है। बिल में जीएसटी IN नंबर मेंशन किये बिना ग्राहक से यह वसूलना गलत है। जीएसटी नंबर वेरीफाय नहीं होने का बहाना भी गलत है।, ‘जिस कारोबार को फाइनल जीएसटी IN नंबर नहीं मिला है, उन्हें प्रोविजनल जीएसटी नंबर इस्तेमाल करना चाहिए। साथ ही उन्हें समय पर रिटर्न फाइल करना चाहिए और दूसरे नियम फ़ॉलो करना चाहिए. प्रोविजनल जीएसटी नंबर ही जीएसटी IN में बदल जाता है।’
ग्राहक को पता होना चाहिए कि दुकानदार या कारोबारी आपको सही बिल दे रहा है या नहीं!

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अगर जीएसटी नंबर गलत है तो आपको यह संदेश दिखाई देगा:
आपने जो जीएसटी IN/UIN नंबर डाला है वह गलत है. कृपया सही जीएसटी IN/UIN नंबर डालें।

अगर जीएसटी IN/UIN नंबर सही है तो आपको उसकी यह स्थिति दिखाई देगी:
कारोबार का नाम, राज्य, रजिस्ट्रेशन की तारीख, कारोबार का प्रकार-निजी या पब्लिक लिमिटेड कंपनी, पूर्ण स्वामित्व या पार्टनरशिप कंपनी

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वेरिफिकेशन पेंडिंग होना
अगर आपको साईट यह दिखा रही है कि इस जीएसटी IN/UIN का वेरिफिकेशन पेंडिंग है, तब भी यह सही है। इस प्रोविजनल आईडी है जो कारोबार को जारी किया गया है।

जीएसटी IN/UIN का स्ट्रक्चर

  1. पहले दो अंक स्टेट कोड के लिए होते हैं। हर राज्य के लिए कोड अलग है जैसे महाराष्ट्र का 27 और दिल्ली का 07 है।
  2. अगले 10 अंक कारोबार मालिक या दुकान का पैन नंबर हैं।
  3. 13 वां अंक किसी राज्य में कारोबार में रजिस्ट्रेशन की संख्या के हिसाब से जारी किया जाता है।
  4. 14वां अंक डिफॉल्ट तरीके से z रखा गया है।
  5. आखिरी अंक चेक कोड के लिए दिया गया है। यह कोई अंक या अक्षर हो सकता है।
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सफाई कर्मचारियों की जेब हो रही साफ !

बिजनौर। जिला पंचायत राज अधिकारी के कार्यालय में कुछ गड़बड़ चल रहा है। सफाई कर्मचारियों से अवैध उगाही के मामले सामने आए हैं। कार्यालय में तैनात एक लिपिक पर इसका पूरा दारोमदार आ रहा है। आरोप है कि सफाई कर्मचारियों से तनख्वाह व फंड निकालने आदि काम के लिए भरपूर धन बटोरे जा रहे हैं।

…आखिर पत्नी व पुत्र ने कैसे लड़े जिला पंचायत सदस्य के तीन महंगे चुनाव– यह भी बताया जा रहा है कि उक्त लिपिक की धर्मपत्नी पूर्व में दो बार जिला पंचायत सदस्य का चुनाव काफी जोरशोर से लड़ कर हार चुकी हैं। तीसरे चुनाव में उनके सुपुत्र को सफलता मिल गई है। कोई नादान सा व्यक्ति भी इतनी समझ तो रखता ही है कि कोई भी चुनाव लड़ना आर्थिक रूप से हर किसी के बूते की बात नहीं है। खासतौर पर जिला पंचायत चुनाव तो बेहद ही खर्चीला माना जाता है। अब इनके पास इतनी छोटी नौकरी में इतना धन कहां से आ रहा है सोचने वाली बात है। यह बात अलग है कि अब ये कमाऊ पूत साबित होने वाले हैं। जिले में बीजेपी ने 56 वार्ड में से 55 पर समर्थन किया था। चुनाव में तगड़ा झटका लगने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी के पास कुल मिला कर 8 ही सदस्य हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव होने वाला है। देश व प्रदेश में सत्तारूढ़ होने के नाते हर हाल में अध्यक्ष पद पर काबिज होने की जुगत भी भिड़ाई जा रही है। इसके लिए साम, दाम, दण्ड, भेद की नीति हर राजनीतिक दल अपनाता भी है। (सफाई कर्मचारियों से अवैध वसूली के इन आरोपों की पुष्टि करता आडियो क्लिप इन पंक्तियों के लेखक के पास सुरक्षित है।)

सरकारी कर्मचारी होते हुए भी सरकार की खिलाफत: सरकारी विभाग के कर्मचारी होते हुए भी यह सरकार के विरोधी लगते हैं! ऐसा इनके मोबाइल नंबर की डीपी में लगी फोटो बयान कर रही है। देश में नवीनतम प्रौद्योगिकी के तौर पर 5G नेटवर्क के परीक्षण की अनुमति हाल ही में केंद्र सरकार ने दी है।

कोरोना संक्रमण के दूसरे दौर में विभिन्न राजनीतिक दल 5G का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस खतरनाक बीमारी का कारण यही नेटवर्क है। यह बात अलग है कि WHO के अलावा सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI) आदि सरकारी एजेंसियों की ओर से इस प्रकार के किसी भी अंदेशे से साफ इंकार किया गया है।

बामसेफ से रहे हैं जुड़े– सूत्रों का कहना है कि उक्त लिपिक बहुजन समाज पार्टी के बामसेफ में पदाधिकारी रहे हैं। मोहभंग हुआ तो पुत्र को साथ लेकर आजाद समाज पार्टी का दामन थाम लिया।

गलत तरीके से अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र जारी करवा कर बना प्रधान!

लखनऊ। पंचायत चुनाव में गलत तरीके से अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र जारी करवाकर आरक्षण प्राप्त करने वाले नव निर्वाचित ग्राम प्रधान का शपथ ग्रहण रद करने के लिए ग्रामीणों ने शिकायत की है। इस मामले में डाक द्वारा कानून मंत्री, पंचायती राज मंत्री, पंचायती राज अधिकारी, जिलाधिकारी, राज्य निर्वाचन आयोग, उपजिलाधिकारी, अनुसूचित जाति आयोग, खण्ड विकास अधिकारी, रिटर्निंग अधिकारी से शिकायत जन सुनवाई पोर्टल के माध्यम से की है। शिकायतकर्ता अनिल कुमार मौर्य व हिमांशु निगम के मुताबिक बीते 19 अप्रैल को जनपद लखनऊ के मलिहाबाद विकासखंड में हुए प्रधानी चुनाव में संविधान के नियम विरुद्ध तहसील से अनुसूचित जाति का जाति प्रमाणपत्र जारी कर गलत तरीके से आरक्षण दिया गया है।

मलिहाबाद की गांव पंचायत कसमंडी खुर्द के प्रधान पद का आरक्षण अनुसूचित जाति के लिए निर्धारित था। जो प्रधान प्रत्याशी चुनाव जीता है, उसको प्रधान जीतने का प्रमाण पत्र सलीम पुत्र शिव गुलाम के नाम से जारी हुआ है। सलीम की पत्नी नाज भी मुस्लिम है जो विकास खण्ड मलिहाबाद की ग्राम पंचायत फिरोजपुर के मजरे सदरपुर की रहने वाली है। उससे सलीम ने निकाह भी किया है, तो फिर सलीम का अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र तहसील से कैसे जारी किया गया, यह एक बड़ा सवाल है। भारतीय संविधान के आदेश 1950 के पैरा 3 में यह साफ तौर पर लिखा है यदि कोई अनुसूचित जाति का व्यक्ति मुस्लिम धर्म के रीति रिवाज से रहता है और मुस्लिम धर्म का अनुपालन करता है तो वह अनुसूचित जाति की श्रेणी में नहीं आएगा। इसका मतलब है सलीम का अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र गलत जारी किया गया है। यह चुनाव रद्द होना चाहिए और नए सिरे से ग्राम प्रधान का चुनाव होना चाहिए। इस पूरे प्रकरण में अनुसूचित जाति के लोगों के अधिकारों का हनन हुआ है।
आरोप है कि चुनाव नामांकन के दौरान सलीम का जाति प्रमाणपत्र उनके प्रस्तावक व प्रधानी संचालक तारिक यूसुफ खां द्वारा समस्त बातों को छुपाते हुए तहसील में अधिकारियों को गुमराह करते हुए बनवाया गया है। इसलिए सलीम अनुसूचित जाति का आरक्षण प्राप्त करने के योग्य नहीं है। इसलिये अधिकारियों की लापरवाही को समझते हुए तत्काल ग्राम पंचायत कसमंडी खुर्द का शपथ ग्रहण रोका जाए, साथ ही न्यायहित में जांच कर कानूनी कार्यवाही की मांग की है।

वहीं मोहनलाल गंज सांसद कौशल किशोर ने भी प्रदेश के मुख्यमंत्री से ट्विटर के माध्यम के सलीम का जाति प्रमाणपत्र गलत जारी होने से ग्राम पंचायत कसमंडी खुर्द का चुनाव रद करके नए सिरे से ग्राम प्रधान का चुनाव कराने का अनुरोध किया है।

गोदाम से गायब हो गए खाद के 350 कट्टे

एसडीएम की जांच में खुलासा: गोदाम से गायब हो गए खाद के 350 कट्टे। षडय़ंत्र के तहत खाद बेचने को लेकर किसानों ने किया हंगामा। अहमदपुर सादात साधन सहकारी समिति पर किसानों ने किया हंगामा।

बिजनौर। साधन सहकारी समिति अहमदपुर सादात में घोटाला और किसानों के हंगामे की सूचना पर पहुंचे उपजिलाधिकारी नजीबाबाद ने खाद के स्टाक में 350 कट्टे कम पाए। एसडीएम ने समिति के गोदाम इंचार्ज को पुलिस की हिरासत में सौंपते हुए रिपोर्ट दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। मंगलवार सुबह करीब सवा नौ बजे उपजिलाधिकारी नजीबाबाद परमानंद झा को सूचना मिली कि साधन सहकारी समिति अहमदपुर सादात पर षडय़ंत्र के तहत खाद के कट्टे बेच दिए जाने को लेकर क्षेत्रीय किसान हंगामा कर रहे हैं। इस पर एसडीएम मौके पर पहुंच गए और समिति के स्टाक रजिस्टर से मिलान कर गोदाम के स्टाक की जांच की। उन्होंने पाया कि गोदाम में 550 के स्थान पर मात्र दो सौ कट्टे ही रखे हुए हैं। स्टाक में खाद के 350 कट्टे कम पाए गए। एसडीएम ने समिति के खाद गोदाम प्रभारी लिपिक सुधीर कुमार पुत्र किशन लाल से खाद के 350 कट्टे कम पाए जाने पर स्पष्टीकरण मांगा। बताया जा रहा है कि सुधीर कुमार की ओर से गलती होना भी स्वीकार किया गया। समिति के एमडी नंद किशोर, सभापति जोगिन्दर सिंह तथा पदाधिकारी कुंवरपाल सिंह ने बताया कि साधन सहकारी समिति के मुख्य गेट की चाबी चौकीदार वीरेश कुमार पुत्र घनश्याम सिंह तथा गोदाम की चाबी खाद गोदाम प्रभारी लिपिक सुधीर कुमार पुत्र किशनलाल के पास रहती है। सोमवार की शाम साढ़े पांच बजे समिति कार्यालय को बंद कराए जाने तक गोदाम में 550 कट्टे खाद रखा हुआ था, जिसे मंगलवार को किसानों को वितरित किया जाना था, जबकि सुबह गोदाम में मात्र 200 कट्टे खाद ही मिला। एसडीएम ने आरोपी सुधीर कुमार को पुलिस के हवाले कर दिया और गोदाम को सील करने तथा इस मामले में मुकदमा दर्ज कर नियमानुसार कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए हैं। समिति के पदाधिकरियों की ओर से पुलिस को मामले में तहरीर दी गयी है। पुलिस साधन सहकारी समिति से लिपिक सुधीर कुमार तथा चौकीदार वीरेश कुमार को थाने ले गयी। उधर थाना प्रभारी नगीना देहात उदय प्रताप सिंह ने बताया कि अभी मुकदमा पंजीकृत नहीं किया गया है। विभागीय मामले में उच्च अधिकारियों की जांच व आरोप सिद्ध होने के बाद मुकदमा दर्ज किया जा सकेगा।

बैट्री निर्माता के यहां से 38 ऑक्सीजन सिलेण्डर बरामद

कालाबाजारी की सूचना पर पकड़े 38 ऑक्सीजन सिलेण्डर!
पुलिस ने की बैट्री निर्माता के यहां से बरामदगी

बिजनौर। नजीबाबाद में एक ओर ऑक्सीजन गैस प्लांट को शुरू कराने के लिए सामाजिक संगठन और राजनैतिक लोग प्रयासरत हैं, वहीं दूसरी ओर पुलिस ने एक बैट्री निर्माता के यहां दर्जनों ऑक्सीजन गैस सिलेण्डर पकड़े। इस मामले में पुलिस ने अपने स्तर से सिलेंडर रखने सम्बन्धित किसी प्रकार की अनुमति नहीं होने की बात कही है।
रविवार को गोविन्द नगर कालोनी में एक बैट्री निर्माता के यहां पर पुलिस ने छापामारी की। पुलिस को एक वाहन से करीब 38 ऑक्सीजन गैस सिलेण्डर मिले। बताया जा रहा है कि पुलिस को छानबीन के दौरान 11 सिलेन्डर मकान के अंदर से बरामद हुए। उक्त मामले में काफी संख्या में नगर के नामचीन लोग बैट्री निर्माता के बचाव में उतरकर पैरवी करने में जुट गए। बाद में एक बैट्री निर्माता की ओर से बचाव में बताया गया कि उक्त सिलेण्डर गुरुद्वारे की ओर से जरूरतमंदो के लिए लाए गए थे। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि जनहित में मरीजों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन की अनुमति होनी जरूरी है, लेकिन उपजिलाधिकारी ने किसी भी प्रकार की अनुमति अपने स्तर से न दिए जाने अथवा अपने संज्ञान में न होने की बात कही है। छापामारी के दौरान मौजूद पुलिसकर्मी के अनुसार मामा बैट्री वाले के घर में 11 ऑक्सीजन गैस सिलेण्डर थे और बाकी वाहन में थे, जो मौके पर मिले। पुलिस को ऑक्सीजन गैस सिलेण्डर की कालाबाजारी की सूचना मिली थी, जिस पर मौके पर पहुंची पुलिस ने कार्रवाई की।

किसी संस्था ने नहीं ली अनुमति: एसडीएम

इस मामले में उपजिलाधिकारी परमानंद झा ने कहा कि पुलिस की ओर से छापा मारकर गोविन्द नगर कॉलोनी में काफी संख्या में ऑक्सीजन सिलेन्डर पकड़े जाने का मामला संज्ञान में आया है। बताया जा रहा है कि उक्त सिलेण्डर जरूरतमंदों को उपलब्ध कराने के लिए मंगाए गए थे, जबकि इसके लिए किसी संस्था की ओर से कोई अनुमति नहीं ली गयी है।

कोविड-19: सरकार मुफ्तखोरों पर भी करे ध्यान: मनोज शास्त्री

बुरा मानो या भला। कोविड-19 काल में सरकार इन मुफ्तखोरों पर भी ध्यान करे: मनोज शास्त्री

इधर देश में कोविड-19 शुरू हुआ और उधर मुफ्तखोरों और उनके आकाओं ने चिल्लपों मचानी शुरू कर दी कि लॉकडाउन में सरकार बिजली, पानी, गेहूं राशन इत्यादि मुफ़्त दे। दरअसल ग़लती इन मुफ्तखोरों की नहीं है, गलती है उन “अयोग्य राजनीतिक नेताओं” की है, जिन्होंने चुनाव जीतकर “मुफ़्त राशन-कपड़ा बांटो” अभियान चलाकर कुछ लोगों को हरामखोरी की आदत डाल दी। किसी ने मुफ़्त में लैपटॉप बांटे, किसी ने बिजली-पानी मुफ़्त दिया, किसी ने बसों में यात्रा मुफ़्त कर दी तो कोई सब्सिडी के नाम पर सरकारी खज़ाना लुटा रहा है। जनता के खून-पसीने की गाढ़ी कमाई को अपने राजनीतिक फायदे के लिए बांटने की एक नई परम्परा की शुरुआत हो चुकी है और मुफ्तखोरों को अब उसकी लत लग गई है। मुफ़्त में शराब और कबाब पाने वाले अब मुफ़्त का बिजली, पानी, कम्प्यूटर, लैपटॉप आदि पाने की इच्छा करने लगे हैं। हद तो यह है कि अपने घर के शौचालय में जाने के लिए भी बाइक का इस्तेमाल करने वाले भी मुफ़्त का पेट्रोल चाहते हैं। इन मुफ्तखोरों से कोई पूछे कि इनके बाप-दादाओं ने भी कभी इन्कम टैक्स/सेल्स टैक्स या कोई सा भी टैक्स सरकार को कभी दिया है? कभी सरकार को अपनी कमाई का हिसाब-किताब देना तो दूर की बात है, इनमें से बहुतों के पास तो वैध दस्तावेज़ भी नहीं होंगे। अगर CAA और NRC लागू करा दिया जाए तो इनमें से 90 प्रतिशत लोग घुसपैठियों की सूची में शामिल होंगे और इनके आका सड़कों पर ढपलियाँ बजाते नज़र आएंगे। इन मुफ्तखोरों को न कोई धर्म है, न ईमान। हरामखोरी और मुफ़्तख़ोरी इनका मुख्य व्यवसाय है। अपने आकाओं के ईशारों पर सोशल मीडिया पर सरकार का विरोध और हमेशा मुफ़्तख़ोरी की पैरवी करना ही इनका एकमात्र धर्म है।

इस देश में बहुत लोग ऐसे हैं जो वास्तव में जरूरतमंद हैं, ग़रीब हैं, सही शब्दों में कहा जाए तो जो लोग वाकई में सरकारी मदद के मुस्तहिक़ हैं, उन बेचारों को तो 1kg गेहूं भी बमुश्किल मिल पाता है, जबकि अवैध घुसपैठ करने वाले कथित शरणार्थी और मुफ़्तख़ोर अपने आकाओं के दम पर सरकारी मदद की सबसे ज़्यादा मौज उड़ा रहे हैं। यह सही है कि कोविड-19 की इस आपदा की घड़ी में सरकार को बिजली के बिल/पानी के बिल माफ़ करने चाहिए और सम्भव हो तो कोरोना मरीजों को मुफ़्त में ईलाज भी मिले। लेकिन यह सब उन लोगों के लिए हो, जो इस सबके वाकई मुस्तहिक़ हैं या जो लोग समय पर आयकर/बिक्रीकर भरते हैं और जिनपर वैध दस्तावेज़ मौजूद हैं।

🖋️ *मनोज चतुर्वेदी “शास्त्री”* समाचार सम्पादक- उगता भारत हिंदी समाचार-पत्र (नोएडा से प्रकाशित एक राष्ट्रवादी समाचार-पत्र)

जमाखोरी से मेडिकल स्टोर्स पर जीवन रक्षक दवाइयों की किल्लत

जमाखोरी से मेडिकल स्टोरों पर जीवन रक्षक दवाइयों का टोटा। दहशत में जरूरत से अधिक दवाईयों की खरीद रहे लोग

लखनऊ। कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले और सरकार द्वारा रोकथाम के प्रयास के बीच मेडिकल स्टोर्स से दवाइयां भी कम होती जा रही हैं। मांग के हिसाब से आपूर्ति न होना व कोरोना महामारी के दौरान लॉकडाउन के समय दवाइयों की अचानक जरूरत की बात सोचकर लोग आवश्यकताओं से अधिक दवाइयों की खरीदकर उसका स्टॉक कर रहे हैं। लोगों की यह जमाखोरी आम इंसान के लिए समस्या बनती जा रही है। बाजार से गायब होने के कारण लोगों को यह दवाएं उपलब्ध नहीं हो रही। 

सामान्यतः प्रयोग होने वाली दवाइयां लगभग सभी मेडिकल स्टोर्स पर मिल जाती हैं। कुछ विशेष दवाइयों को मेडिकल स्टोर्स संचालकों द्वारा नोट करवा कर अगले दिन उपलब्ध करवा दिया जाता है। नियमित दवाइयों का सेवन करने वालों के लिये अधिकतर दवाइयां उनके लिये जीवन रक्षक दवाइयां जैसी ही होती है। गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के अलावा रक्तचाप, मधुमेह, थायरायड जैसे रोगों से पीड़ितों को लगातार दवाइयों का सेवन करना होता है। इसके अलावा सर्दी, बुखार, पेट दर्द जैसी सामान्य दवा व सर्जिकल आदि के केस वालों की दवाइयां होती है जो कि अल्प अवधि के लिये इस्तेमाल की जाती है। कोविड-19 के सेकेंड स्ट्रीम की गंभीरता और लगातार संक्रमण की बढ़ोत्तरी ने लोगों के दिलो में दहशत भर दी है। लोगों के लागतार संक्रमित होने का सिलसिला थमने का नाम नही ले रहा है। दूसरी ओर बिना किसी टेस्ट और लक्षण वाले व्यक्तियों की सांस लेने की दिक्कत से होने वाली मौतों ने लोगो के माथे पर चिंता की लकीरें गहरा दी है।

कोविड मरीजों को सुगमता से इलाज मिल सके, इसके लिये सरकारी अस्पतालों में ओपीडी लगभग बन्द है। अब निजी चिकित्सकों ने भी ओपीडी या तो बन्द कर रखी है या फिर सीमित कर दी है। ऐसे में नियमित मरीजों को इलाज में दिक्कत हो रही है और वह दवाई कराने के लिये झोलाछापों या मेडिकल स्टोरों के ही भरोसे है। कोविड संक्रमण का असर कहा जाये या मौसम का मिजाज, लगभग सभी के घरों में खांसी, जुखाम, बुखार के मरीज हैं। ऐसे में मेडिकल स्टोर्स से दवाइयों की खरीद बढ़ गयी है। मेडिकल स्टोर्स में दवाइयों की जबरदस्त किल्लत देखने को मिल रही है। एक मेडिकल एजेंसी के संचालक ने बताया कि लॉकडाउन होने की वजह से दवाइयों के आने में समस्या आ रही है। कुछ एक दवाइयों की ऊपर से भी कम सप्लाई मिल रही है। लोगों की आवश्यकताओं से अधिक दवाइयों की खरीद की वजह से भी दवाइयों की कमी सामने आ रही है। शुगर, बीपी, हार्ट आदि में काम आने वाली दवाइयां जैसे ग्लाइकोमेट, ग्लाइकोमेट 0.5, ग्लाइमेट एमएक्स एवं चिकित्सकों द्वारा पैरासीटामाल डोलो 650, कालपाल समेत कई दवाइयों की खपत बढ़ गई है। इसके अलावा खांसी के सीरप आदि की मांग अधिक है।

मौत के तांडव के बीच भी खेल कमीशन का…!

मौत के तांडव के बीच भी खेल कमीशन का…! एम्बुलेंस चालक और मरीज के तीमारदार के बीच सड़क पर दिनदहाड़े मची ये जंग आजकल कोई नया नजारा नहीं रह गया है। आएदिन ऐसे मामले देखने, सुनने और पढ़ने को मिल जाएंगे कि मरीज को लाने ले जाने के लिए एम्बुलेंस मालिकों, चालकों ने कैसी लूट खुलेआम मचा रखी है। दो चार नहीं, 10 गुना तक किराया। अपने पहले से तय निजी अस्पताल, लैब आदि में ले जाने की जबरदस्ती।

यह मामला बिजनौर के सिविल लाइंस क्षेत्र का है। एक अस्पताल में भर्ती मरीज का सीटी स्कैन आदि होना था। मरीज के परिजन उसे सरकारी अस्पताल ले जाना चाहते थे लेकिन एम्बुलेंस चालक अपनी जान पहचान बता कर कहीं और ले जाना चाह रहा था। अब यह बात तो पढ़े लिखे से लेकर अनपढ़ व्यक्ति तक भी बखूबी समझता है कि जान पहचान का मतलब क्या होता है। इसका सीधा सा मतलब है कमीशन। कमीशन का मतलब है धन। ….और धन का मतलब है आजकल का सबसे बड़ा सच! इसी के पीछे दुनिया भाग रही है। बहरहाल, इस मामले के पीछे भी एम्बुलेंस चालक की कुछ ऐसी ही चाह रही होगी। काफी देर बवाल चला। आते-जाते लोग रुके, कुछ देखकर आगे बढ़ गए, कुछ ने एम्बुलेंस चालक को खरी खोटी सुनाई। लिहाजा मामले का पटाक्षेप हो गया। फिर भी एक विचारणीय प्रश्न अनुत्तरित रह गया कि चारों तरफ मचे हाहाकार के बीच कोई कैसे मानवता को ताक पर रख देता है! ब्लैक करने के लिए दवा आदि की कृत्रिम कमी, फल, सब्जी, किराना हर चीज के दाम बढ़ा कर बेचना, ये सब क्या है ? सोचिएगा।

मानदेय के लिए परेशान रहे शिक्षक व कर्मचारी!

मानदेय के लिए परेशान रहे शिक्षक व कर्मचारी!

बिजनौर। कोरोना महामारी के इस दौर में एक ओर सरकार व सभी संगठन लोगों से घरों में रहने तथा जरूरी काम से ही बाहर निकलने पर सोशल डिस्टेंसिंग तथा मास्क लगाने की अपील कर रहे हैं। वहीं रविवार से दूसरे दिन तक कोरोना गाइडलाइंस की धज्जियां उड़ा कर कर्मचारियों शिक्षकों को मतगणना पूरी कराने के बाद भी मानदेय नहीं दिया गया! परेशान शिक्षक, कर्मचारी लगातार सोशल मीडिया के जरिए एक दूसरे से पूछ रहे हैं कि किस ब्लॉक में मतगणना के पश्चात नियत मानदेय दिया गया है। कुल मिलाकर भारी अव्यवस्थाओं के बीच चुनाव लगभग संपन्न हो गया।जानकारी के अनुसार प्रत्येक टेबल पर एक पर्यवेक्षक व तीन अन्य की ड्यूटी लगाई गई थी, जिन्हें मानदेय दिया जाना था। ड्यूटी के लिए प्रात: 8:00 बजे से सायं के 8:00 बजे तक पहली शिफ्ट तथा रात्रि 8:00 बजे से प्रात: 800 बजे तक दूसरी शिफ्ट लगाई गई थी। वहीं बताया गया है कि पहली टीम को पुन: प्रात: 8:00 बजे बुलाया गया। आरोप है कि महामारी के इस खतरनाक दौर में शिक्षक कर्मचारी जान हथेली पर रखकर एक मेज पर चारों ओर बैठकर 12 से 15 घंटे की ड्यूटी करने के बावजूद चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित मानदेय अधिकांश ब्लॉक में नहीं दिया जा सका। कई शिक्षकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मानदेय देने के नाम पर कई बहाने बनाए गए। कई ब्लॉक में कहा गया कि मतगणना पूरी होने के बाद दिया जाएगा। गणना में लगे कर्मचारियों ने बताया कि पर्यवेक्षक को रुपए 700  तथा अन्य को रुपए 500 दिए जाने थे। आरोप लगाया कि मानदेय के लिए इतना परेशान किया गया कि अनेक शिक्षक कर्मचारी मानदेय लिए बिना ही वापस आ गए। 

रेमडेसिविर की कालाबाजारी में अपोलो अस्पताल कर्मी समेत 2 गिरफ्तार, सरगना फरार

कालाबाजारी में अब तक दो दर्जन आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार। पांच से छह हजार रुपए में खरीद कर बेचते थे 20 से 25 हजार में।

लखनऊ। कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के इलाज में कारगर रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी के खिलाफ पुलिस का अभियान जारी है। बंथरा पुलिस ने रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वाले दो लोगों को धर दबोचा, जबकि सरगना भाग निकला। पकड़े गए आरोपितों में एक अपोलो अस्पताल का कर्मचारी बताया जा रहा है। आरोपियों के कब्जे दो इंजेक्शन बरामद हुए हैं।

इंस्पेक्टर बंथरा के मुताबिक मुखबिर की सूचना पर सोमवार देर रात हनुमान मंदिर के पास दो आरोपियों को पकड़ा गया है जबकि गिरोह का सरगना भाग निकला। गिरफ्तार आरोपितों में विकास सिंह उर्फ लकी निवासी बंथरा कस्बा, अल्ताफ आलम निवासी श्रावस्ती भिनगा, वर्तमान समय में एलडीए कॉलोनी सेक्टर डी कृष्णानगर में रहता है। अल्ताफ  ने बताया कि वह अपोलो अस्पताल का कर्मचारी है। सरगना अनुज निवासी हरदोई भाग निकला। अनुज पकड़े गये आरोपियों को इंजेक्शन उपलब्ध कराता था। मौके से दो इंजेक्शन बरामद हुए हैं। गिरफ्तार आरोपी विकास का बंथरा में मेडिकल स्टोर हैं। आरोपियों ने अब तक दर्जनभर से अधिक इंजेक्शन बेचने की बात कबूल की है। पुलिस का कहना है कि अनुज पांच से छह हजार रुपए में इंजेक्शन देता था और यह लोग 20 से 25 हजार में बेचते थे।

गौरतलब है कि 22 व 23 अप्रैल को लखनऊ कमिश्नरेट पुलिस ने ठाकुरगंज, नाका, मानक नगर, अमीनाबाद व गोमतीनगर से 18 लोगों को गिरफ्तार करते हुए उनके कब्जे से भारी मात्रा में नकली व असली रेमडेसिविर इंजेक्शन बरामद किए थे। वहीं अमीनाबाद पुलिस ने बीते सोमवार को नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन के साथ पांच लोगों को गिरफ्तार किया था।

रेमडेसिविर, ऑक्सीजन सिलेंडर के नाम पर ठगी

रेमडेसिविर, ऑक्सीजन सिलेंडर के नाम पर ठगी की घटनाओं में बढ़ोत्तरी। कोरोना संक्रमण के दौर में एक एक सांस के लिए जूझते लोगों को ठगने से भी नहीं हिचक रहे ठग।

लखनऊ। राजधानी के एलडीए कॉलोनी निवासी आशुतोष के संक्रमित रिश्तेदार भर्ती हैं। गुरुवार को डॉक्टर ने रेमडेसिविर का इंतजाम करने को कहा। आशुतोष ने गूगल पर सर्च किया तो कंपनी व उसका फोन नंबर मिला। उस पर बात की तो छह इंजेक्शन के 30 हजार रुपए बताए गए। इस पर आशुतोष ने छह इंजेक्शन के लिए बताए बैंक अकाउंट में रकम ट्रांसफर कर दी। इसके बाद न तो इंजेक्शन मिले और न ही उस मोबाइल नंबर पर बात हो सकी।

इसी प्रकार केशवनगर निवासी नदीम के बुजुर्ग पिता संक्रमित हैं। पिता का ऑक्सीजन लेवल कम होने पर डॉक्टर से बात की तो घर में ऑक्सीजन सिलेंडर का इंतजाम करने को कहा गया। इस पर ओएलएक्स पर सर्च किया तो 20 हजार रुपए में एक ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था हो गई। नदीम ने बताए गए नंबर पर कॉल की। सौदा तय होने पर नदीम ने उक्त नंबर पर बताए गए खाते में रकम ट्रांसफर कर दी मगर न तो ऑक्सीजन सिलेंडर मिला और न ही अब उस नंबर पर बात हो पा रही है।

नकली इंजेक्शन का धंधा भी जोरों पर: विपदा की इस घड़ी में नकली इंजेक्शन व दवाओं के कारोबार में भी तेजी आ गई है। लखनऊ पुलिस ने अमीनाबाद इलाके से रेमडेसिविर के 10 हजार से अधिक नकली इंजेक्शन बरामद किए। इसके अलावा कोविड के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली नकली दवाइयां भी बड़ी मात्रा में मिली हैं। पुलिस ने इस संबंध में चार लोगों को हिरासत में लिया है। मॉल एवन्यू निवासी विपुल वैभव गौतम के दोस्त को रेमडेसिविर इंजेक्शन की जरूरत थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में दिए नंबर पर गुरुवार रात आठ बजे रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए फोन किया। फोन पर आमिर अब्बास नाम के युवक ने तीन हजार रुपए में छह इंजेक्शन देने की बात कही। विपुल इंजेक्शन लेने अमीनाबाद स्थित प्रकाश कुल्फी के पास पहुंचे। आमिर ने उन्हें 6 इंजेक्शन थमाए। वॉयल पर स्पेलिंग गलत देख उन्हें शक हुआ तो विपुल ने फोटो खींचकर अपने डॉक्टर सुलभ ग्रोवर को  वॉट्सऐप किया। डॉक्टर ने बताया कि इंजेक्शन गड़बड़ है। विपुल ने उसे बातों में उलझाकर 11 इंजेक्शन और मांगे। युवक बाइक की डिग्गी से इंजेक्शन निकालने लगा। इस बीच विपुल ने पुलिस को बुला लिया। पुलिस ने आमिर को दबोच कर पूछताछ शुरू कर दी। उसने इंजेक्शन के नकली होने की बात स्वीकार कर ली।आमिर की निशानदेही पर पुलिस ने अमीनाबाद के एक घर में छापेमारी कर रेमडेसिविर इंजेक्शन की 11 पेटियां बरामद कीं। इनमें 10 हजार से अधिक इंजेक्शन रखे थे। इसके अलावा फ्लू व कोविड के इलाज में इस्तेमाल होने वाली नकली दवाइयां सहित अन्य सामान भी बरामद किया गया है। अमीनाबाद एसएचओ अलोक कुमार राय का कहना है कि हिरासत में लिए सभी आरोपितों से पूछताछ के बाद गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।

चुपके से सिपाही ने चोरी कर ली सेब की पेटी, SP ने किया निलंबित

बिजनौर। जनपद के नहटौर में पीर की चुंगी पर शकील फल वाले के यहां से सेब की पेटी चोरी के मामले में सिपाही को निलंबित किया गया है। रात्रि के करीब साढ़े तीन बजे सब्जी मंडी में चोरी को अंजाम देने वाले की सीसीटीवी फुटेज चैक करने से मामले का खुलासा हुआ। एसपी डॉ धर्मवीर सिंह ने मामला संज्ञान में लेते हुए दिनेश कुमार चहल को निलंबित कर दिया है। जांच सीओ धामपुर को सौंपी गई है।

consumerhelpline.gov.in पर जाकर करें कालाबाजारी के खिलाफ शिकायत

consumerhelpline.gov.in पर जाकर करें कालाबाजारी के खिलाफ शिकायत। …या फिर करें 1800-11-4000 पर कॉल।

लखनऊ। कोरोना वायरस के कारण देशभर में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। इसी को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ ने अग्रिम आदेश तक रोजाना रात्रि कर्फ्यू के साथ ही शनिवार व रविवार को लॉक डाउन घोषित कर दिया है। आने वाले दिनों में किसी परेशानी से बचने के लिए घबराहट में लोग सामान खरीदकर अपने घरों में भर रहे हैं। इस मौके का फायदा उठाकर कई जगह दुकानदार मनमानी करने लगे हैं। ग्राहकों से मनमाने तरीके से वसूली की जा रही है। अगर आप भी इस परेशानी का सामना कर रहे हैं तो सरकार से घर बैठे इसकी शिकायत कर सकते हैं।

शिकायत करने के तरीके

1. कंज्यूमर मामले की शिकायत consumerhelpline.gov.in पर जाकर ऑनलाइन कर सकता है।

2. कंज्यूमर टोल फ्री नंबर 14404 या फिर 1800-11-4000 पर फोन करके भी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।

3. कंज्यूमर 8130009809 नंबर पर एसएमएस भेजकर भी शिकायत कर कर सकते हैं। एसएमएस मिलने के बाद कंज्यूमर को फोन किया जाएगा और उसकी शिकायत दर्ज की जाएगी।

जानिए अपने अधिकार:

1-सुरक्षा का अधिकार यानी सही वस्तुओं और सेवाओं को पाने का अधिकार है। अगर कोई वस्तु या सेवा कंज्यूमर के जीवन और संपत्ति के लिए खतरनाक है, तो उसके खिलाफ सुरक्षा पाने का अधिकार है।

2- सूचना के अधिकार यानी कंज्यूमर को वस्तुओं और सेवाओं की गुणवत्ता, मात्रा, शक्ति, शुद्धता, मानक और कीमत के बारे में जानकारी पाने का अधिकार है। इसका मतलब यह है कि अगर कोई दुकानदार या सप्लायर या फिर कंपनी आपको किसी वस्तु या सामान की सही जानकारी नहीं देती है, तो उसके खिलाफ आप केस कर सकते हैं।

3- चुनने का अधिकार यानी कंज्यूमर को वस्तुओं और सेवाओं को चुनने का अधिकार है। वो अपनी पसंद की सेवा या वस्तु का चुनाव कर सकता है। किसी भी कंज्यूमर को कोई विशेष वस्तु या सेवा लेने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।

सख्त कार्रवाई करेगी सरकार: सामानों की कालाबाजारी कर मनमानी कीमत वसूलने वालों को सावधान होने की जरूरत है। शिकायत मिलने पर सरकार सख्त कार्रवाई करेगी। ऐसे लोगों पर सरकार की नजर है। सरकार कोरोना के खतरे से उत्पन्न स्थिति में तमाम आवश्यक वस्तुओं की बाजार में उपलब्धता पर लगातार नजर बनाए हुए है। इसके साथ ही सभी राज्य सरकारों के संपर्क में है ताकि कहीं भी किसी चीज की किल्लत न हो। सभी उत्पादकों और व्यापारियों से भी अपील है कि इस घड़ी में मुनाफाखोरी से बचें।

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सिगरेट, बीड़ी व गुटका की कालाबाजारी शुरू

तंबाकू उत्पादों के थोक विक्रेताओं ने दुकानें की बंद। दुकान का चैनल व शटर बंद कर ओवर रेट में करते रहे बिक्री। लॉक डाउन की आशंका के मद्देनजर अन्य कई उत्पाद भी किए महंगे।

बिजनौर। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के चलते शनिवार व रविवार दो दिन संपूर्ण लाकडाउन की घोषणा कर दी गई है। इसके बाद तंबाकू उत्पादों के थोक विक्रेताओं ने ग्राहकों को माल न होने तथा सरकार की ओर से सिगरेट, बीड़ी व गुटका की बिक्री बंद करने के आदेश की बात कहते हुए अपने प्रतिष्ठानों के शटर व चैनल बंद कर दिए। साथ ही धड़ल्ले से ओवर रेट में पान मसाला, गुटका, बीड़ी, जर्दा और सिगरेट को ओवर रेट में बेचना शुरु कर दिया। 

प्रदेश सरकार की ओर से रविवार का लॉक डाउन घोषित किए जाने के बाद तंबाकू उत्पादों के थोक विक्रेताओं ने फुटकर विक्रेताओं को रिटेल प्राइस पर पान मसाला, गुटका, जर्दा व खैनी आदि की बिक्री में कटौती शुरु कर दी थी। अब प्रदेश सरकार की ओर से रात्रि कर्फ्यू और शनिवार व रविवार दो दिन का लॉक डाउन घोषित किए जाने पर थोक विक्रताओं ने माल न होने की बात कहते हुए अपनी दुकानों के शटर व चैनल बंद कर दिए हैं। कुछ ग्राहकों के अनुसार थोक विक्रेता कह रहे हैं कि सरकार की ओर से बीड़ी, सिगरेट, गुटका की दुकानों को बंद करने आदेश पर उन्होंने दुकानें बंद की हैं। सूत्रों की मानें तो अपने प्रतिष्ठानों के शटर गिराने वाले थोक विक्रेताओं ने ओवर रेट पर तंबाकू उत्पादों को बेचना शुरु कर दिया है। गली-मोहल्लों के छोटे दुकानदारों को माल न होने की बात कहने वाले होल सेलर ने काफी बड़ी मात्रा में ही ओवर रेट पर सामान खरीदने वालों को तंबाकू उत्पादों की बिक्री करना शुरु कर दिया है। इस दौरान दुकानों के बाहर खरीददारों की अत्यधिक भीड़ लगने की आपाधापी में सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। 

ब्रांडेड कंपनी के वाशिंग पाउडर पर भी ब्लैक नजीबाबाद। इस बार पिछले वर्ष की तरह मात्र तंबाकू उत्पादों को ही दाम बढ़ाकर नहीं बेचा जा रहा है, बल्कि इस बार कुछ नामचीन वाशिंग पाउडर को भी ओवर रेट पर बेचना शुरु ही गया है। थोक विक्रेता छोटे दुकानदारों को पूर्व की तरह वाशिंग पाउडर की आधा दर्जन अथवा दर्जन भर थैलियां बेचने से इंकार करते हुए थैलियों का कट्टा खरीदने वालों को ही माल की आपूर्ति करा रहे हैं। उप जिलाधिकारी नजीबाबाद परमानंद झा ने बताया कि तंबाकू, बीड़ी, पान मसाला आदि की दुकानों को बंद कराने के कोई आदेश अभी नहीं आए हैं। मामला उनके संज्ञान में नहीं है। वह  मामले की जांच कराएंगे।

लॉक डाउन के नाम पर तंबाकू उत्पादों की ब्लैक मार्केटिंग शुरु

लॉकडाउन की संभावना से तंबाकू उत्पादों पर ब्लैक शुरु। खुदरा मूल्य पर थोक विक्रेता कर रहे तंबाकू उत्पादों की बिक्री। पान मसाला, जर्दा (गुटका), सिगरेट, खैनी पर लिया जा रहा ओवररेट।

बिजनौर। प्रदेश में लॉकडाउन की आशंका को देखते हुए तंबाकू उत्पादों के थोक  विक्रेताओं ने विगत वर्ष लगे लॉकडाउन की तरह ही मोटा मुनाफा कमाने की नीयत से अभी से ओवर रेट पर पान मसाला+जर्दा (गुटका), सिगरेट, खैनी व सुरति आदि की बिक्री शुरु कर दी है। इसके चलते खुदरा दुकानदारों ने भी ग्राहकों से निर्धारित से अधिक दाम वसूलने शुरु कर दिए हैं।

प्रदेश में रोजाना बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के आंकड़ों को देखते हुए तंबाकू उत्पादों की बिक्री करने वाले लोगों ने सबसे पहले काली कमाई करने के लिए अपना गुणा गणित बैठाना शुरु कर दिया है। विगत वर्ष मार्च माह में देश भर में लॉकडाउन लगाए जाने के बाद तंबाकू उत्पादों की बिक्री करने वालों ने पान मसाला, जर्दा, खैनी, सुरति, सिगरेट आदि को निर्धारित से चार गुने दामों तक पर बेचा था। इसका मुख्य कारण तंबाकू उत्पादों के थोक विक्रताओं की ओर से खुदरा दुकानदारों को तंबाकू उत्पाद निर्धारित दरों से तीन गुनी दरों पर बेचा जाना बताया जाता रहा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रदेश के कोविड प्रभावित पांच शहरों प्रयागराज, लखनऊ, वाराणसी, कानपुर नगर और गोरखपुर में आगामी 26 अप्रैल तक लाकडाउन लगाए जाने का आदेश दिया है। इस आदेश की जानकारी होते ही तंबाकू उत्पादों के थोक विक्रेताओं ने खुदरा दुकानदारों से माल न होने की बात कहनी शुरु कर दी। साथ ही सिगरेट, पान मसाला, जर्दा (गुटका), खैनी, सुरती आदि उत्पादों को उनके खुदरा मूल्य पर ही दे पाने के साथ ही बड़ी मात्रा में देने की शर्त भी रख दी है। इसके बाद से खुदरा दुकानदारों ने भी तंबाकू उत्पादों के दामों में इजाफा कर दिया। उधर एक खुदरा दुकानदार ने बताया कि थोक विक्रेताओं ने रोजाना भाव बढऩे के संकेत देते हुए बड़ी मात्रा में माल लेने की पेशकश की है। उपभोक्ताओं ने तंबाकू उत्पादों के दामों पर की जा रही कालाबाजारी पर अंकुश लगाए जाने की मांग की है।

ऊपर तक सैटिंग का दावा!

थोक मार्केट में गुटखे के प्रत्येक पैकेट पर 30 से 40 रुपए, बीड़ी के बंडल पर ₹50 से भी ज्यादा दाम अभी से बढ़ा दिए गए हैं। जनता को आगे से महंगा माल मिलने का हवाला देकर मनमाना दाम वसूला जा रहा है। एक दुकानदार से इस बाबत पूछा गया तो उसने बताया कि जब महंगा मिला है, तो उसी हिसाब से बेचेंगे भी। शिकायत का डर नहीं है, पूछने पर ताल ठोंक कर कहा कोई भी, किसी को भी कर ले शिकायत! थोक वालों की ऊपर तक तगड़ी सैटिंग है। आम ग्राहकों के मन में सवाल ये है कि क्या पिछले साल की तरह इस बार भी कालाबाजारियों पर अधिकारियों की दया दृष्टि बनी रहेगी या प्रशासन की तरफ से कोई उचित व ठोस कार्यवाही की जाएगी।

फिर बढ़े गुटखा के दाम, शौकीनों की शामत

फिर बढ़े गुटखा के दाम, शौकीनों की शामत

लखनऊ। । कोरोना के बढ़ते संक्रमण के चलते जनपद में रात्रि कर्फ्यू व रविवार को लॉक डाउन की घोषणा होते ही गुटखे की कालाबाजारी का सिलसिला शुरू हो गया। इसके चलते गुटखा का सेवन करने वालों की जेब ढीली हो रही है। लोग दोगुनी कीमत पर गुटखा खरीदने को मजबूर हैं।
ज्ञात हो कि कोरोना संक्रमण से पिछले वर्ष हुए लॉक डाउन में गुटखा व्यवसाय की चांदी रही। गुटखा डम्प करने वाले व्यवसायियों ने चौगुने रेट पर बिक्री की थी। इस वर्ष भी हालात कुछ ऐसे ही बनते जा रहे हैं। गुटखा व्यापारियों ने माल को डम्प कर कालाबाजारी करने का सिलसिला शुरू कर दिया है। ऐसे में गुटखे के लती मंहगे दामों में गुटखा खरीदने को मजबूर हैं। इस कालाबाजारी का असर सबसे ज्यादा गुटखा प्रेमियों पर पड़ रहा है। राजश्री गुटखा का हाल तो यह है कि शुक्रवार से ही मंहगा बिकने लगा। फुटकर दुकानदारों ने बताया कि होल सेलर के यहां से माल मंहगा मिलने के चलते मजबूरी में दाम बढ़ाकर बेचते हैं। अब तो आलम यह है कि अन्य गुटखा व्यवसायी भी दाम बढ़ाने की जुगत में हैं। 

पार्टी विरोधी गतिविधियों में छह साल के लिए निष्कासित

पार्टी विरोधी गतिविधियों में भाजपा से छह साल का निष्कासन

बिजनौर। भारतीय जनता पार्टी ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में कथित रूप से पार्टी से अधिकृत प्रत्याशियों के विरोध में चुनाव लडऩे एवं लड़ाने वाले जिले के छह पदाधिकारियों व प्राथमिक सदस्यों को छह वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया है। जिलाध्यक्ष सुभाष वाल्मीकि ने प्रेस नोट जारी कर बताया कि इस मामले में प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को रिपोर्ट भेजी गई थी। उनकी अनुमति मिलने के बाद यह निर्णय लिया गया है।

पार्टी से छह वर्ष के लिए निष्कासित किए गए पदाधिकारियों में प्रांतीय पार्षद व पूर्व जिला महांत्री रमेश रागी, पूर्व नगर उपाध्यक्ष बिजनौर जितेंद्र राणा, सेक्टर संयोजक नरेश कुमार के अलावा प्राथमिक सदस्य विनीत बहादुर, गिरीराज सैनी व विनोद कुमार शामिल हैं।

बिजनौर की धरती बंजर करने पर उतारू खनन माफिया!

इस तरह तो खोखली हो जाएगी सोना उगलने वाली जनपद की जमीन। सत्ता, प्रशासन और माफिया के गठजोड़ से हो रहा अवैध खनन! ये तिकड़ी बिजनौर को कर देगी बर्बाद!

बिजनौर। सत्ता, प्रशासन और माफिया का गठजोड़ जनपद की धरती को खोखला करने पर उतारू है। मिट्टी, रेत, बालू, पत्थर आदि के अवैध खनन रोकने के योगी सरकार के दावों के बीच बिजनौर की सोना उगलने वाली धरती को बंजर बनाने का षडयंत्र चल रहा है। शिकायत करने के बावजूद प्रशानिक अफसरों की इस संबंध में हीलाहवाली साबित कर रही है कि मात्र दाल में कुछ काला नहीं है, बल्कि पूरी की पूरी दाल ही काली है। शिकायत के बाद खनन की सरपट दौड़ती गाड़ी पर कुछ समय का ब्रेक और फिर बेतहाशा रफ्तार की वजह से यह मानने का कोई कारण नहीं है कि संलिप्तता बड़े अधिकारियों तक की है।

वैसे तो जनपद में कई स्थानों पर अवैध खनन जोरशोर से चल रहा है, लेकिन यह मामला चांदपुर तहसील के ग्राम करनपुर गांवड़ी व तोहफापुर का है। यहां खेतों में पिछले सप्ताह भर से लगातार जेसीबी, डम्फर के द्वारा अवैध खनन किया जा रहा है। कोई कार्यवाही न किए जाने से तहसील प्रशासन की संलिप्तता उजागर हो रही है। प्रदेश सरकार लाख प्रयास करे, लेकिन प्रशानिक अधिकारी मनमानी पर उतारू हैं, इसका जीता जागता उदाहरण अवैध खनन पर कार्यवाही न किए जाने से प्रदर्शित हो रहा है। दरअसल मामला चांदपुर तहसील व हल्दौर थाना क्षेत्र से सम्बन्धित है, जहां पर एक सप्ताह से लगातार अवैध खनन किया जा रहा है। लाख शिकायतों के बाद भी प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। हमारे संवाददाता द्वारा बुधवार रात्रि 8:00 बजे उपजिलाधकारी चांदपुर को इस अवैध खनन के बारे में पूरी जानकारी उपलब्ध कराने के बाद शुक्रवार प्रात: काल 8:00 बजे तक कोई कार्यवाही न होने से साबित हो रहा है कि खनन माफिया के हौसले कितने बुलंद हैं। 

खनन माफिया को किसकी सरपरस्ती हासिल? विश्वस्त सूत्रों के अनुसार उक्त खनन माफिया के सिर पर सत्तारूढ़ पार्टी के एक दिग्गज का हाथ बताया जा रहा है। अक्सर इस खनन माफिया को उनके इर्दगिर्द देखा जा सकता है। सूत्रों का दावा है कि यह माफिया उनकी व स्थानीय अधिकारियों की अनैतिक आवश्यकताओं की पूर्ति करने में कभी भी पीछे नहीं हटता। यही कारण है कि छोटे से लेकर बड़े तक स्थानीय अधिकारियों की कृपा का पात्र बन सरकार व पर्यावरण को गहरी चोट पहुंचा रहा है और जनपद का प्रशानिक अमला कुंभकर्णी नींद सो रहा है। माफिया दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की कर रहा है।

दो दिन रुका और फिर शुरू अवैध खनन: कोई कार्रवाई न होते देख अवैध खनन करने वाले माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। शिकायत पर मात्र दिखाने भर को दो दिन से बंद खनन पुन: शुरू हो गया है। जब इस संबंध में उपजिलाधिकारी चांदपुर से बात की गई तो जवाब के बजाय उन्होंने पूछा कि क्या खनन अभी भी चल रहा है!