राहत: बिना पैकिंग के आटा दाल लस्सी बेचने पर GST नहीं

नई दिल्ली (एजेंसी)। हाल ही में देश में कई चीजों के दाम बढ़ गए हैं। इस बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक लिस्ट शेयर करते हुए कहा कि लिस्ट में मौजूद 14 चीजों को यदि खुला (Loose) बेचा जाएगा, अर्थात बिना पैकिंग के बेचा जाएगा तो उन पर जीएसटी की कोई भी दर लागू नहीं होगी। इस लिस्ट में दाल, गेहूं, बाजरा, चावल, सूजी और दही/लस्सी जैसी रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण चीजें शामिल हैं अनाज, चावल, आटा और दही जैसी चीजों पर 5 फीसदी GST के सरकार के फैसले का बचाव करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि यह जीएसटी केवल उन्हीं उत्पादों पर लागू है जो प्री-पैक्ड और लेबल्ड हैं। विदित हो कि पिछले महीने जीएसटी परिषद की चंडीगढ़ में हुई 47वीं बैठक में ये फैसले लिए गए थे।

GST को लेकर फैली हैं गलतफहमियां
निर्मला सीतारमण ने आगे बताया कि, ‘हाल ही में, जीएसटी परिषद ने अपनी 47 वीं बैठक में दाल, अनाज, आटा जैसे विशिष्ट खाद्य पदार्थों पर जीएसटी लगाने के फैसले पर पुनर्विचार करने की सिफारिश की है। हालांकि काफी गलतफहमियां फैली है, यहां तथ्यों को सामने लाने की कोशिश है।’ “क्या यह पहली बार है; जब इस तरह के खाद्य पदार्थों पर कर लगाया जा रहा है? नहीं, राज्य सरकारें जीएसटी से पहले की व्यवस्था में खाद्यान्न से काफी राजस्व एकत्र कर रहे थे। अकेले पंजाब ने पर्चेज टैक्स के रूप में खाद्यान्न पर 2,000 करोड़ रुपए से अधिक का संग्रह किया। यूपी ने ₹700 करोड़ जुटाए।

पेट्रोल 9.5 और डीजल 7 रुपए सस्ता

पेट्रोल 9.5 रुपए और डीजल 7 रुपए सस्ता, अब सिलेंडर पर 9 करोड़ लाभार्थियों को केंद्र सरकार देगी सब्‍सिडी

नई दिल्ली (एजेंसी)। केंद्र सरकार ने आम लोगों को बड़ी राहत देते हुए पेट्रोल के उत्पाद शुल्क में आठ रुपये तथा डीजल में छह रुपये प्रति लीटर की कटौती की घोषणा की है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को यह घोषणा करते हुए कहा कि इस कटौती के कारण पेट्रोल के दाम साढ़े नौ रुपये प्रति लीटर और डीजल के दाम सात रुपये प्रति लीटर घट जायेंगे। उन्होंने ट्वीटर पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि केंद्रीय उत्पाद शुल्क में कटौती किये जाने से सरकार को हर साल करीब एक लाख करोड़ रुपये राजस्व हानि होगी।

Petrol-Diesel Price Today: आज के लिए पेट्रोल-डीजल की कीमतें जारी, जानें  आपके शहर में क्या है रेट | TV9 Bharatvarsh

उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया आज मुश्किल दौर से गुजर रही है। पूरी दुनिया कोरोना महामारी के प्रभाव से उबर ही रही थी कि यूक्रेन में जारी युद्ध ने आपूर्ति बाधा की समस्यायें पैदा कर दीं। इसकी वजह से कई चीजों की किल्लत हो गई। इससे महंगाई बढ़ रही है और कई देशों में आर्थिक संकट के हालात पैदा हो गये हैं। सीतारमण ने कहा कि चुनौतीपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों के बावजूद केंद्र सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि देश में आवश्यक वस्तुओं की कोई किल्लत न रहे। यहां तक कि कुछ विकसित देश भी आपूर्ति बाधा और वस्तुओं की कमी से बच नहीं पाये हैं।

उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार जरूरी वस्तुओं के दाम नियंत्रण में रखने के लिए प्रतिबद्ध है। वित्त मंत्री ने कहा, मैं सभी राज्य सरकारों से कहूंगी कि वे भी इसी तरह की कटौती करें और आम लोगों को राहत दें। यह आग्रह उन राज्यों के लिए खासकर है, जिन्होंने नवंबर 2021 के दौरान उत्पाद शुल्क में की गई कटौती के साथ कर में कटौती नहीं की थी। केंद्र सरकार ने साथ ही प्रधानमंत्री उज्‍जवला योजना के नौ करोड़ से अधिक लाभार्थियों को इस साल 12 गैस सिलेंडर तक प्रति सिलेंडर 200 रुपये की सब्सिडी देने की घोषणा की है। सीतारमण ने कहा कि इससे हमारी मां और बहनों को मदद मिलेगी। इससे राजस्व में 6,100 करोड़ रुपये की कमी आयेगी। केंद्र सरकार साथ ही प्लास्टिक उत्पादों के कच्चे माल पर भी उत्पाद शुल्क में कटौती करेगी।

अपने आशियाने पर महंगे सीमेंट की मार

नई दिल्ली (एजेंसी)। बढ़ती मांग के बीच कच्चे माल की कीमतों में तेजी के कारण सीमेंट के दाम में अभी और बढ़ोतरी होने की संभावना है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के अनुसार गत माह सीमेंट की कीमतों में मासिक आधार पर दो से तीन फीसदी की तेजी दर्ज की गयी है। हालांकि, साल के अंत में लक्ष्य की पूर्ति के लिये सीमेंट के उत्पादन में तेजी भी लायी गयी थी, लेकिन इससे भी सीमेंट के दाम को नियंत्रित नहीं किया जा सका।

कंपनी ने बताया कि डीलर्स के साथ की गयी बातचीत से यह पता चला है कि दक्षिण और मध्य भारत में सीमेंट की कीमतों में प्रति बोरी 15 से 20 रुपये की तेजी रही, जबकि पूर्वी, उत्तरी और पश्चिमी क्षेत्रों में सीमेंट के दाम प्रति बोरी पांच से दस रुपये बढ़े। कंपनी का कहना है कि सीमेंट कंपनियां कच्चे माल की कीमतों के प्रभाव को कम करने के लिये इसका बोझ ग्राहकों पर और डालेंगी, जिससे सीमेंट के दाम तेज होंगे।

कोयले और पेट्रोलियम कोक की बढ़ी कीमतों का प्रभाव अप्रैल 2022 से ऊर्जा की कीमतों पर दिखेगा। पिछले कुछ दिनों से डीजल के दाम भी बढ़ रहे हैं, जिससे माल ढुलाई की लागत अधिक हो गयी है। सीमेंट कंपनियों ने पूरे देश में अप्रैल से सीमेंट की हर बोरी पर 40 से 50 रुपये बढ़ाने के संकेत दिये हैं।

जनवरी और फरवरी में सुस्ती के बाद मार्च में सीमेंट की मांग में सुधार आया। मार्च 2022 में वार्षिक आधार पर सीमेंट की मांग तीन से पांच प्रतिशत बढ़ी, जबकि जनवरी-फरवरी के दौरान इसमें छह प्रतिशत की गिरावट रही। कुछ डीलर्स का कहना है कि अप्रैल से सीमेंट के दाम में तेजी होने की आशंका के कारण मार्च के अंत में सीमेंट की मांग बढ़ गयी थी। वास्तविक मांग रूझान का पता अप्रैल के मध्य में ही चलेगा।

आसमान छू रहे निम्बू के दाम

नई दिल्ली। एक महीने में ही नींबू 70 रुपए से 400 रुपए तक पहुंच गया है। सब्जी बेचने वाले 10 रुपए में 1 नींबू दे रहे हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार आने वालों दिनों में इसकी कीमत कम होने के आसार नहीं दिख रहे।

बताया जा रहा है कि इस बार फसल कम होने के साथ ही आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से आने वाले नींबू की महंगाई के लिए डीजल के भाव भी काफी हद तक जिम्मेदार हैं। डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से माल भाड़े में भी 15% की बढ़ोतरी हो गई है। इससे नींबू की कीमत पर दोगुना असर हुआ है।

सेब, अंगूर व अनार से भी महंगा बिक रहा नींबू- नींबू के दाम बढ़ने से अब घरों के अलावा होटल व ढाबों से भी नींबू गायब हो गया है। स्थिति ये है कि घर, होटल व ढाबों पर भी सलाद से नींबू (जायका) कम हो गया है। होटल व ढाबा संचालक भी सलाद में नींबू का इस्तेमाल कम ही कर रहे हैं। वहीं गन्ने के रस, शिंकजी व सब्जियों में भी नींबू का उपयोग कम मात्रा में कर रहे हैं। इन दिनों नींबू सेब, अंगूर व अनार से भी महंगा बिक रहा है।

बेमौसम बारिश से खराब हुई फसल- मद्रास, महाराष्ट्र और गुजरात समेत देशभर के कई इलाकों में बेमौसम बारिश से नींबू की फसल को काफी नुकसान हुआ है। जरूरत के मुकाबले उत्पादन कम हुआ है, इसलिए कीमतें रिकॉर्ड तोड़ बढ़ी हैं।

नवरात्र और रमजान- इस समय नवरात्र चल रहे हैं और रमजान का महीना है। व्रत और रोजे के दौरान भी नींबू का इस्तेमाल ज्यादा होता है। इस समय उत्पादन कम है और डिमांड ज्यादा है।

महंगा ईंधन- पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ने के साथ ही माल भाड़ा भी बढ़ गया है। इसका असर नींबू सहित सभी फल-सब्जियों की कीमतों में देखने का मिल रहा है।

खेतों से सीधे फैक्ट्रियों मेंसॉफ्ट ड्रिंक के साथ ही कई दवाइयों और फूड प्रोडक्ट में नींबू इस्तेमाल किया जाता है। खेतों से नींबू सीधा फैक्ट्रियों में पहुंच रहा है। इस वजह से भी आम जरूरत के मुताबिक नींबू बाजार तक नहीं पहुंच रहा है।

अभी कर लें टंकी फुल और बचा लें ₹400

4 अप्रैल को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 40-40 पैसे/लीटर का इजाफा किया गया

पेट्रोल और डीजल के दामों में अब तक 14 में से 12 दिन बढ़ोतरी

नई दिल्ली (एजेंसी)। पेट्रोल और डीजल की कीमतों (Petrol-Diesel Price) में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है। मंगलवार, 5 अप्रैल को सुबह 6 बजे से दो ईंधनों के दाम (Fuel Price) में एक बार फिर 80 पैसे प्रति लीटर का इजाफा कर दिया गया है। बढ़ोतरी के बाद राजधानी दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की कीमत (Petrol Price) 104.61 रुपए प्रति लीटर और डीजल की कीमत (Diesel Price) 95.87 रुपए प्रति लीटर हो गई है।

देश में 137 दिनों के विराम के बाद 22 मार्च 2022 से पेट्रोल और डीजल के दाम में वृद्धि का सिलसिला शुरू हुआ। तब से पेट्रोल और डीजल के दामों में अब तक 14 में से 12 दिन बढ़ोतरी हुई है। पेट्रोल-डीजल की महंगाई से हाल-फिलहाल राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। इसकी वजह है कि ऑयल कंपनियां, 137 दिनों के विराम के दौरान हुए भारी नुकसान की भरपाई करने में लगी हुई हैं। उस दौरान कच्चे तेल के दाम (Crude Oil Price) बहुत उच्च बने रहे और देश में 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों व कुछ अन्य कारणों से फ्यूल के दाम नहीं बढ़े। तो अब कंपनियां घाटा पूरा करने की कोशिश कर रही हैं।

अभी टंकी फुल कराई तो कैसे होगी बचत– क्रिसिल रिसर्च की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के नुकसान की भरपाई के लिए पेट्रोल-डीजल की कीमत में 15 से 20 रुपए तक का इजाफा करना होगा। 22 मार्च से शुरू हुई दाम वृद्धि के चलते अब तक 13 किस्तों में पेट्रोल और डीजल दोनों ही 9.20 रुपए प्रति लीटर महंगे हो चुके हैं। पेट्रोल की कीमत में 13 किस्तों में क्रमशः 80, 80, 80, 80, 50, 30, 80, 80, 80, 80, 80, 40 व 80 पैसे की बढ़ोतरी हुई है। अगर मान लें कि पेट्रोल की कीमत में अभी 12 दिन और बढ़ोतरी होगी और यह 80 पैसे के हिसाब से होगी तो अगले 12 दिन में पेट्रोल लगभग 10 रुपए और महंगा हो जाएगा। ऐसे में 12 दिन बाद आपको 40 लीटर टैंक कैपेसिटी वाली गाड़ी की टंकी में फुल कराने के लिए लगभग 400 रुपए एक्स्ट्रा देने होंगे। यानी अगर आप अभी कार की टंकी फुल कराते हैं तो आपको 400 रुपए की बचत होगी।

तेल कंपनियों के नुकसान का आंकड़ा मूडीज की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्यूल कीमतों में 4 नवंबर 2021 से लेकर 21 मार्च 2022 यानी 137 दिन तक कोई वृद्धि न किए जाने से पेट्रोलियम कंपनियों इंडियन ऑयल, एचपीसीएल और बीपीसीएल को 19,000 करोड़ रुपए का नुकसान झेलना पड़ा है। इंडियन ऑयल को 1 अरब से लेकर 1.1 अरब डॉलर, बीपीसीएल और एचपीसीएल प्रत्येक को 55 से लेकर 65 करोड़ डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा।

कच्चे तेल की कीमतें कहां- आज यानी 5 अप्रैल को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 80-80 पैसे प्रति लीटर का इजाफा किया गया है। इसके बाद दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की कीमत (Petrol Price) 104.61 रुपए प्रति लीटर और डीजल का दाम (Diesel Price) 95.87 रुपए प्रति लीटर हो गया है। जहां तक कच्चे तेल की कीमतों की बात है तो सोमवार को इसमें तेजी दर्ज की गई। अंतररराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 3.12 डॉलर प्रति बैरल की छलांग लगा कर 107.52 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इसी तरह डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 4.03 डॉलर प्रति बैरल की छलांग लगा कर 103.30 डॉलर पर पहुंच गया।

15 अप्रैल से महंगा हो सकता है ट्रेन का सफर

नई दिल्ली (एजेंसी)। डीजल इंजनों से चलने वाली ट्रेनों से लम्बी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों से अब अधिक किराया वसूला जा सकता है। ये अतिरिक्त शुल्क 15 अप्रैल से टिकट बुकिंग के समय रेल यात्रा में स्वत: जुड़ जाएगा। दरअसल, रेलवे बोर्ड डीजल इंजनों से चलने वाली ट्रेनों में यात्रा करने वाले यात्रियों पर 10 रुपये से 50 रुपये के बीच हाइड्रोकार्बन सरचार्ज (एचसीएस) या ‘डीजल कर’ लगाने की योजना बना रहा है। यह सरचार्ज उन ट्रेनों पर लागू होगा जो डीजल इंजनों का उपयोग कर आधी से अधिक दूरी तक चलेंगी। यह ईंधन आयात के प्रभाव को कम करने के लिए किया जा रहा है, जो तेल की बढ़ती लागत से गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। एसी क्लास के लिए 50 रुपए, स्लीपर क्लास के लिए 25 रुपए और अनारक्षित क्लास के लिए न्यूनतम 10 रुपए फीस तीन कैटेगरी के तहत ली जाएगी।

Additional charges on a railway journey from 15 April , Delhi News in Hindi  - www.khaskhabar.com

उपनगरीय रेल यात्रा टिकटों पर ऐसा कोई अधिभार नहीं लगाया जाएगा। रेलवे बोर्ड ने सभी जोनों को उन ट्रेनों की पहचान करने का निर्देश दिया है जो निर्धारित दूरी का 50 प्रतिशत डीजल से चलती हैं। इस सूची को हर तीन महीने में संशोधित किया जाना है। हालांकि 15 अप्रैल से पहले बुक किए गए टिकटों पर सरचार्ज लगाने के बारे में अभी कोई स्पष्टता नहीं है। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष के साथ-साथ सऊदी अरब और यमन के बीच झड़प के कारण वैश्विक तेल की कीमतें वर्तमान में रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच चुकी हैं। भारत द्वारा रूस से रियायती कीमतों पर तेल आयात करने के बावजूद, आपूर्ति की कमी है। देश में ईंधन की कीमतों में लगातार 12 दिनों तक बढ़ोतरी के साथ उपभोक्ता ईंधन की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। एचसीएस सरचार्ज का इस्तेमाल भारतीय रेलवे के चालू विद्युत अभियान के लिए भी किया जाएगा। रेलवे राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर ‘मिशन 100 प्रतिशत विद्युतीकरण – नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन’ योजना के तहत जनता को पर्यावरण के अनुकूल, हरित और स्वच्छ परिवहन प्रदान करने के लिए अपने पूरे ब्रॉड गेज नेटवर्क को विद्युतीकृत करने के लिए एक मिशन मोड पर है। उपयोगकर्ता शुल्क में इस बढ़ोत्तरी का मतलब होगा कि ट्रेन का अंतिम किराया बढ़ जाएगा। रेलवे बोर्ड सरचार्ज जोड़कर, रियायतों में कटौती कर या मूल किराए को छुए बिना आराम व सुविधाओं को कम कर कुल किराया बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

UP के 28 लाख पेंशनरों को मिलेगा 34 % DA, DR का लाभ!

लखनऊ। प्रदेश के करीब 16 लाख कर्मचारियों और 12 लाख पेंशनरों को जल्द ही महंगाई भत्ते और महंगाई राहत बढ़ोतरी का लाभ मिल सकता है। उम्मीद है कि मई में मिलने वाले अप्रैल के वेतन के साथ बढ़े हुए डीए व डीआर का भुगतान भी होगा। प्रदेश का वित्त विभाग इसके लिए तैयारियां कर रहा है।

केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय कर्मचारियों व पेंशनरों के लिए तीन फीसदी महंगाई भत्ता (डीए) व महंगाई राहत (डीआर) की घोषणा केंद्रीय कैबिनेट ने कर दी है। केंद्र के आदेश के बाद ही यूपी में भी बढ़ा डीए व डीआर दिया जाता है। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक, प्रदेश में तीन फीसदी वृद्धि होने पर कर्मचारियों और पेंशनरों का डीए व डीआर 34 फीसदी हो जाएगा। अभी 31 फीसदी मिल रहा है। तीन फीसदी डीए के थाना पिल का लाभ दिए जाने पर सालाना 1000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार आएगा।

LPG सिलेंडर ₹250 महंगा!

नए वित्त वर्ष के पहले ही दिन महंगाई की मार, 250 रुपए बढ़े LPG सिलेंडर के दाम

नई दिल्ली (एजेंसी) नए वित्त वर्ष के पहले ही दिन आज 1 अप्रैल को महंगाई का जोरदार झटका लगा है। नए वित्त वर्ष 2022-23 की शुरुआत के साथ ही एलपीजी गैस सिलेंडर की नई कीमतें जारी हो गई हैं। सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में 250 रुपए की बढ़ोतरी की है। हालांकि यह बढ़ोतरी घरेलू रसोई गैस सिलेंडर में नहीं बल्कि कामर्शियल गैस सिलेंडर में हुई है। घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ। पिछले महीने 22 मार्च को रसोई गैस सिलेंडर के दाम 50 रुपए बढ़े थे, जबकि कमर्शियल गैस सिलेंडर सस्ता हुआ था।

नए वित्त वर्ष के पहले दिन घरेलू रसोई गैस की कीमतें नहीं बढ़ाए जाने से आम आदमी को थोड़ी राहत मिली है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बिना सब्सिडी वाले 14.2 किग्रा गैस सिलेंडर के दाम 949.5 रुपए हैं। कोलकाता में 976 रुपए, मुंबई में 949.50 रुपए और चेन्नई में बिना सब्सिडी वाले सिलेंडर की कीमत अब 965.50 रुपए है।

कामर्शियल सिलेंडर महंगा होने से अब बाहर खाना महंगा हो सकता है। दिल्ली में 19 किलो वाला कामर्शियल सिलेंडर एक मार्च को दिल्ली में 2012 रुपए में रीफिल हो रहा था। 22 मार्च को इसकी कीमत घटकर 2003 रुपए पर आ गई थी, लेकिन आज इसमें फिर से बढ़ोतरी कर दी गई है। दिल्ली में इसे रीफिल करवाने के लिए 2253 रुपए खर्च करने होंगे। वहीं मुंबई में अब यह 1955 रुपए की जगह 2205 रुपए में मिलेगा। कोलकाता में इसकी कीमत 2,087 रुपए के बढ़कर 2351 रुपए हो गई है जबकि चेन्नई में इसके लिए अब 2,138 रुपए के बजाय 2,406 रुपए खर्च करने होंगे। पिछले दो महीने में 19 किलो वाले एलपीजी गैस सिलेंडर में 346 रुपए की बढ़ोतरी हुई है। एक मार्च को 19 किलो वाले कामर्शियल सिलेंडर के रेट में 105 रुपए का इजाफा हुआ था जबकि 22 मार्च को 9 रुपए सस्ता हुआ।

एक बार फिर बढ़े पेट्रोल और डीजल के दाम

नई दिल्ली (एजेंसी)। सरकारी तेल कंपनियों ने शनिवार को पेट्रोल-डीजल के नए रेट जारी कर दिए हैं। एक बार फिर पेट्रोल और डीजल के दाम में बढ़ोतरी की गई गई है। Petrol-Diesel की कीमतों में आज दिल्ली समेत अधिकतर शहरों में 70-80 पैसे की बढ़ोतरी की गई है। पेट्रोल आज 70 पैसे महंगा हुआ, वहीं डीजल 80 पैसे प्रति लीटर तक महंगा हुआ है। 

विदित हो कि पिछले पांच दिनों में यह चौथी बढ़ोतरी है। तेल कंपनियों ने 22 मार्च (24 मार्च को छोड़कर) से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी जारी रखी है। इस तरह पांच दिन में पेट्रोल और डीजल की कीमत में 3.20 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। 

इस बढ़ोतरी के बाद अब देश की राजधानी दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 98.61 रुपये हो गई है, जबकि डीजल की कीमत 89.87 रुपये है। वहीं मुंबई में पेट्रोल 84 पैसा महंगा होकर 113.35 रुपये प्रति लीटर की दर से बिक रहा है, जबकि डीजल 97.55 रुपये पर है। वहीं, कोलकाता में पेट्रोल 83 पैसा महंगा हुआ है और यह 107.18 रुपए से बढ़कर 108.01 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया। कोलकाता में डीजल 93.01 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बिक करा है। चेन्नई में एक लीटर पेट्रोल की कीमत में 76 पैसे की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और यह 104.43  रुपये लीटर पर पहुंच गया है और डीजल 94.47 रुपये लीटर मिल रहा है।

अब इन लोगों के खाते में आयेंगे गैस Subsidy के पैसे

958 रूपये पहुंचा गैस सिलेंडर का दाम, सरकार ने शुरू की सब्सिडी, अब इन लोगों के खाते में आयेंगे Subsidy के पैसे

LPG Subsidy: घरेलू गैस सिलेंडर की महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। इसको लेकर आम आदमियों को बहुत ही दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार ने एक आंतरिक मूल्यांकन किया था जिसके परिणाम मिले थे कि उपभोक्ता एक सिलेंडर के लिए ₹1000 तक दे सकता है। घरेलू गैस सिलेंडर को लेकर सरकार ने एक नया प्लान बनाया है।

इस प्लान के अंतर्गत सरकार बिना सब्सिडी के सभी उपभोक्ताओं को सिलेंडर देगी या चुने हुए उपभोक्ताओं को सरकार सब्सिडी का लाभ देगी। घरेलू गैस सिलेंडर के दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं इसको लेकर सरकार नए से नए प्लान बना कर उन पर अमल करना चाह रही है।

सरकार ने दिया नया प्लान

घरेलू गैस सिलेंडर की बढ़ती महंगाई को देखते हुए सरकार ने सब्सिडी देने के बारे में अभी तक कुछ स्पष्ट नहीं किया है। कई लोगों का मानना है कि 10 लाख रुपए इंकम का नियम सरकार जारी रखेगी। इसके अलावा सरकार उज्जवला योजना के उपभोक्ताओं की सब्सिडी लागू रखेगी। वहीं अन्य उपभोक्ताओं को सब्सिडी का लाभ बंद किया जा सकता है। सरकार ने पिछले कई महीनों से घरेलू गैस सिलेंडर पर सब्सिडी चालू कर दी थी।

आसमान छू रही घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत

पिछले कुछ सालों से घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इसके अलावा पिछले साल यानी कि 2021 से गैस सिलेंडरों की कीमत में कुछ ज्यादा ही उछाल दर्ज की गई है। इस कारण आम आदमियों की दिक्कत बढ़ती जा रही है। आम आदमी को घरेलू गैस सिलेंडर खरीदने के लिए बहुत ही ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। लेकिन अब रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के कारण घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में और ज्यादा उछाल आने की संभावना जताई जा रही है। इससे आम आदमियों पर बहुत ज्यादा असर पड़ेगा।

जोर का झटका: ₹50 महंगी हो गई रसोई गैस

एक झटके में 50 रुपये महंगी हो गई रसोई गैस, पटना में 1000 रुपये से महंगा हुआ सिलेंडर

दिल्ली में रसोई गैस सिलेंडर की कीमत 949.50 रुपये हुई

दिल्ली में रसोई गैस सिलेंडर की कीमत 949.50 रुपये हुई

नई दिल्ली (एजेंसी)। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने मंगलवार को रसोई गैस सिलेंडर के दाम बढ़ा दिए. इसकी कीमत में पिछले साल अक्टूबर से कोई बदलाव नहीं हुआ था।

  • दिल्ली में 949.50 रुपये हुई रसोई गैस की कीमत
  • 6 अक्टूबर से कीमतों में नहीं हुआ था बदलाव

रसोई गैस उपभोक्ताओं को मंगलवार को बड़ा झटका लगा। इसकी वजह ये है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने मंगलवार को एक झटके में 14.2 किलोग्राम के एलपीजी सिलेंडर के दाम में 50 रुपये का इजाफा कर दिया। इसके बाद बिहार की राजधानी पटना में रसोई गैस की कीमत 1,047.50 रुपये हो गई। इसी तरह देश के अधिकतर प्रमुख शहरों में एलपीजी सिलेंडर की कीमत 1,000 रुपये के करीब पहुंच गई है।

दिल्ली, मुबंई में एलपीजी सिलेंडर के दाम

देश में 14.2 किलोग्राम के एलपीजी सिलेंडर के दाम में 6 अक्टूबर, 2021 के बाद से कोई बदलाव नहीं हुआ था, लेकिन अब रेट अचानक से 50 रुपये बढ़ गए हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एलपीजी सिलेंडर (LPG Cylinder) का दाम 899.50 रुपये से बढ़कर 949.50 रुपये हो गया है। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में भी एलपीजी सिलेंडर का मूल्य 949.50 रुपये हो गया है। मायानगरी में भी मंगलवार से पहले रसोई गैस सिलेंडर का भाव 899.50 रुपये पर था।

कोलकाता, चेन्नई में इतने हो गए हैं दाम

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में 14.2 किलोग्राम के एलपीजी सिलेंडर का मूल्य बढ़कर 965.50 रुपये हो गया है। वहीं, पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में LPG Cylinder लेने के लिए अब 976 रुपये का भुगतान करना होगा। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़कर 987.5 रुपये हो गई है।

कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 19 किलोग्राम के कॉमर्शियल गैस सिलेंडर का दाम 2,003.5 रुपये पर है। वहीं, चेन्नई में इसकी कीमत 2,137.50 रुपये पर है. मुंबई में कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमत 1954.50 रुपये पर आ गई है।

रेट बढ़ने की वजह

रूस और यूक्रेन के बीच जंग की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमत में 40 फीसद तक की तेजी देखने को मिली है। इस वजह से घरेलू स्तर पर एलपीजी सिलेंडर और पेट्रोल-डीजल के दाम में बढ़ोत्तरी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लिए जरूरी हो गया था।

द कश्मीर फाइल्स के बाद दूसरा धमाका लाल बहादुर शास्त्री; देखने के लिए हो जाएं तैयार…

कश्मीर फाइल्स के बाद दूसरा धमाका देखने के लिए हो जाओ तैयार…

लालबहादुर शास्त्री https://youtu.be/yq9TOW43TYs

लालबहादुर शास्त्री (जन्म: 2 अक्टूबर 1904 मुगलसराय (वाराणसी) : मृत्यु: 11 जनवरी 1966 ताशकन्द, सोवियत संघ रूस), भारत के दूसरे प्रधानमन्त्री थे। वह 9 जून 1964 से 11 जनवरी 1966 को अपनी मृत्यु तक लगभग अठारह महीने भारत के प्रधानमन्त्री रहे। इस प्रमुख पद पर उनका कार्यकाल अद्वितीय रहा। शास्त्री जी ने काशी विद्यापीठ से शास्त्री की उपाधि प्राप्त की भारत  की  स्वतन्त्रता के पश्चात शास्त्रीजी को उत्तर प्रदेश के संसदीय सचिव के रूप में नियुक्त किया गया था। गोविंद बल्लभ पंत के मन्त्रिमण्डल में उन्हें पुलिस एवं परिवहन मन्त्रालय सौंपा गया। परिवहन मन्त्री के कार्यकाल में उन्होंने प्रथम बार महिला संवाहकों (कण्डक्टर्स) की नियुक्ति की थी। पुलिस मंत्री होने के बाद उन्होंने भीड़ को नियन्त्रण में रखने के लिये लाठी की जगह पानी की बौछार का प्रयोग प्रारम्भ कराया। 1951 में, जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में वह अखिल भारत कांग्रेस कमेटी के महासचिव नियुक्त किये गये। उन्होंने 1952, 1957 व 1962 के चुनावों में कांग्रेस पार्टी को भारी बहुमत से जिताने के लिये बहुत परिश्रम किया।

साफ सुथरी छवि- जवाहरलाल नेहरू का उनके प्रधानमन्त्री के कार्यकाल के दौरान 27 मई, 1964 को देहावसान हो जाने के बाद साफ सुथरी छवि के कारण शास्त्रीजी को 1964 में देश का प्रधानमन्त्री बनाया गया। उन्होंने 9 जून 1964 को भारत के प्रधानमंत्री का पद भार ग्रहण किया। उनके शासनकाल में 1965 का भारत पाक युद्ध शुरू हो गया। इससे तीन वर्ष पूर्व चीन का युद्ध भारत हार चुका था। शास्त्रीजी ने अप्रत्याशित रूप से हुए इस युद्ध में नेहरू के मुकाबले राष्ट्र को उत्तम नेतृत्व प्रदान किया और पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी। इसकी कल्पना पाकिस्तान ने कभी सपने में भी नहीं की थी। ताशकंद में पाकिस्तान के प्रधानमन्त्री अयूब खान के साथ युद्ध समाप्त करने के समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद 11 जनवरी 1966 की रात में ही रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गयी। उनकी सादगीदेशभक्ति और ईमानदारी के लिये मरणोपरान्त भारत रत्‍न से सम्मानित किया गया।

लाल बहादुर शास्त्री जी के जन्मदिवस पर 2 अक्टूबर को शास्त्री जयन्ती व उनके देहावसान वाले दिन 11 जनवरी को लालबहादुर शास्त्री स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है।

श्रीवास्तव से बने शास्त्री– लालबहादुर शास्त्री का जन्म 1904 में मुगलसराय (उत्तर प्रदेश) में एक कायस्थ परिवार में मुंशी शारदा प्रसाद श्रीवास्तव के यहाँ हुआ था। उनके पिता प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक थे अत: सब उन्हें मुंशीजी ही कहते थे। बाद में उन्होंने राजस्व विभाग में लिपिक (क्लर्क) की नौकरी कर ली थी। लालबहादुर की माँ का नाम रामदुलारी था। परिवार में सबसे छोटे होने के कारण बालक लालबहादुर को परिवार वाले प्यार में नन्हें कहकर ही बुलाया करते थे। जब नन्हें अठारह महीने के हुए तो दुर्भाग्य से पिता का निधन हो गया। उनकी माँ रामदुलारी अपने पिता हजारीलाल के घर मिर्जापुर चली गयीं। कुछ समय बाद उसके नाना भी नहीं रहे। बिना पिता के बालक नन्हें की परवरिश करने में उनके मौसा रघुनाथ प्रसाद ने उसकी माँ का बहुत सहयोग किया। ननिहाल में रहते हुए उन्होंने प्राथमिक शिक्षा ग्रहण की। उसके बाद की शिक्षा हरिश्चन्द्र हाई स्कूल और काशी विद्यापीठ में हुई। काशी विद्यापीठ से शास्त्री की उपाधि मिलने के बाद उन्होंने जन्म से चला आ रहा जातिसूचक शब्द श्रीवास्तव हमेशा हमेशा के लिये हटा दिया और अपने नाम के आगे ‘शास्त्री’ लगा लिया। इसके पश्चात् शास्त्री शब्द लालबहादुर के नाम का पर्याय ही बन गया।

1928 में उनका विवाह मिर्जापुर निवासी गणेशप्रसाद की पुत्री ललिता से हुआ। ललिता और शास्त्रीजी की छ: सन्तानें हुईं, दो पुत्रियाँ-कुसुम व सुमन और चार पुत्र – हरिकृष्ण, अनिल, सुनील व अशोक। उनके चार पुत्रों में से दो दिवंगत हो चुके हैं। अनिल कांग्रेस पार्टी के एक वरिष्ठ नेता हैं जबकि सुनील शास्त्री भाजपा के नेता हैं।

देशसेवा का व्रत- संस्कृत भाषा में स्नातक स्तर तक की शिक्षा समाप्त करने के पश्चात् वे भारत सेवक संघ से जुड़ गये और देशसेवा का व्रत लेते हुए यहीं से अपने राजनैतिक जीवन की शुरुआत की। शास्त्रीजी सच्चे गांधीवादी, थे जिन्होंने अपना सारा जीवन सादगी से बिताया और उसे गरीबों की सेवा में लगाया। भारतीय स्वाधीनता संग्राम के सभी महत्वपूर्ण कार्यक्रमों व आन्दोलनों में उनकी सक्रिय भागीदारी रही और उसके परिणामस्वरूप उन्हें कई बार जेलों में भी रहना पड़ा। स्वाधीनता संग्राम के जिन आन्दोलनों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही उनमें 1921 का असहयोग आंदोलन, दांडी मार्च तथा 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन उल्लेखनीय हैं।

“मरो नहीं, मारो!”किया बुलंद- दूसरे विश्व युद्ध में इंग्लैण्ड को बुरी तरह उलझता देख जैसे ही नेताजी ने आजाद हिन्द फौज को “दिल्ली चलो” का नारा दिया, गान्धी जी ने मौके की नजाकत को भाँपते हुए 8 अगस्त 1942 की रात में ही बम्बई से अँग्रेजों को “भारत छोड़ो” व भारतीयों को “करो या मरो” का आदेश जारी किया और सरकारी सुरक्षा में यरवदा पुणे स्थित आगा खान पैलेस में चले गये। 9 अगस्त 1942 के दिन शास्त्रीजी ने इलाहाबाद पहुँचकर इस आन्दोलन के गान्धीवादी नारे को चतुराई पूर्वक “मरो नहीं, मारो!” में बदल दिया और अप्रत्याशित रूप से क्रान्ति की दावानल को पूरे देश में प्रचण्ड रूप दे दिया। पूरे ग्यारह दिन तक भूमिगत रहते हुए यह आन्दोलन चलाने के बाद 19 अगस्त 1942 को शास्त्रीजी गिरफ्तार हो गये।

गृहमन्त्री के बाद प्रधानमंत्री- शास्त्रीजी के राजनीतिक दिग्दर्शकों में पुरुषोत्तमदास टंडन और पण्डित गोविंद बल्लभ पंत के अतिरिक्त जवाहरलाल नेहरू भी शामिल थे। सबसे पहले 1929 में इलाहाबाद आने के बाद उन्होंने टण्डन जी के साथ भारत सेवक संघ की इलाहाबाद इकाई के सचिव के रूप में काम करना शुरू किया। इलाहाबाद में रहते हुए ही नेहरूजी के साथ उनकी निकटता बढ़ी। इसके बाद तो शास्त्रीजी का कद निरन्तर बढ़ता ही चला गया और एक के बाद एक सफलता की सीढियाँ चढ़ते हुए वे नेहरूजी के मंत्रिमण्डल में गृहमन्त्री के प्रमुख पद तक जा पहुँचे। और इतना ही नहीं, नेहरू के निधन के पश्चात भारत वर्ष के प्रधान मन्त्री भी बने।

जय जवान-जय किसान का नारा- उन्होंने अपने प्रथम संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि उनकी शीर्ष प्राथमिकता खाद्यान्न मूल्यों को बढ़ने से रोकना है और वे ऐसा करने में सफल भी रहे। उनके क्रियाकलाप सैद्धान्तिक न होकर पूर्णत: व्यावहारिक और जनता की आवश्यकताओं के अनुरूप थे। निष्पक्ष रूप से यदि देखा जाये तो शास्त्रीजी का शासन काल बेहद कठिन रहा। पूँजीपति देश पर हावी होना चाहते थे और दुश्मन देश हम पर आक्रमण करने की फिराक में थे। 1965 में अचानक पाकिस्तान ने भारत पर सायं 7.30 बजे हवाई हमला कर दिया। परम्परानुसार राष्ट्रपति ने आपात बैठक बुला ली जिसमें तीनों रक्षा अंगों के प्रमुख व मन्त्रिमण्डल के सदस्य शामिल थे। संयोग से प्रधानमन्त्री उस बैठक में कुछ देर से पहुँचे। उनके आते ही विचार-विमर्श प्रारम्भ हुआ। तीनों प्रमुखों ने उनसे सारी वस्तुस्थिति समझाते हुए पूछा: “सर! क्या हुक्म है?” शास्त्रीजी ने एक वाक्य में तत्काल उत्तर दिया: “आप देश की रक्षा कीजिये और मुझे बताइये कि हमें क्या करना है?” शास्त्रीजी ने इस युद्ध में नेहरू के मुकाबले राष्ट्र को उत्तम नेतृत्व प्रदान किया और जय जवान-जय किसान का नारा दिया। इससे भारत की जनता का मनोबल बढ़ा और सारा देश एकजुट हो गया। इसकी कल्पना पाकिस्तान ने कभी सपने में भी नहीं की थी।

अमेरिका ने की युद्धविराम की अपील- भारत पाक युद्ध के दौरान 6 सितम्बर को भारत की 15वीं पैदल सैन्य इकाई ने द्वितीय विश्व युद्ध के अनुभवी मेजर जनरल प्रसाद के नेत्तृत्व में इच्छोगिल नहर के पश्चिमी किनारे पर पाकिस्तान के बहुत बड़े हमले का डटकर मुकाबला किया। इच्छोगिल नहर भारत और पाकिस्तान की वास्तविक सीमा थी। इस हमले में खुद मेजर जनरल प्रसाद के काफिले पर भी भीषण हमला हुआ और उन्हें अपना वाहन छोड़ कर पीछे हटना पड़ा। भारतीय थलसेना ने दूनी शक्ति से प्रत्याक्रमण करके बरकी गाँव के समीप नहर को पार करने में सफलता अर्जित की। इससे भारतीय सेना लाहौर के हवाई अड्डे पर हमला करने की सीमा के भीतर पहुँच गयी। इस अप्रत्याशित आक्रमण से घबराकर अमेरिका ने अपने नागरिकों को लाहौर से निकालने के लिये कुछ समय के लिये युद्धविराम की अपील की।

रूस और अमरिका की मिलीभगत? आखिरकार रूस और अमरिका की मिलीभगत से शास्त्रीजी पर जोर डाला गया। उन्हें एक सोची समझी साजिश के तहत रूस बुलवाया गया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। हमेशा उनके साथ जाने वाली उनकी पत्नी ललिता शास्त्री को बहला फुसलाकर इस बात के लिये मनाया गया कि वे शास्त्रीजी के साथ रूस की राजधानी ताशकंद न जायें और वे भी मान गयीं। अपनी इस भूल का श्रीमती ललिता शास्त्री को मृत्युपर्यन्त पछतावा रहा। जब समझौता वार्ता चली तो शास्त्रीजी की एक ही जिद थी कि उन्हें बाकी सब शर्तें मंजूर हैं परन्तु जीती हुई जमीन पाकिस्तान को लौटाना हरगिज़ मंजूर नहीं। काफी जद्दोजहेद के बाद शास्त्रीजी पर अन्तर्राष्ट्रीय दबाव बनाकर ताशकन्द समझौते के दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करा लिये गये। उन्होंने यह कहते हुए हस्ताक्षर किये थे कि वे हस्ताक्षर जरूर कर रहे हैं पर यह जमीन कोई दूसरा प्रधान मन्त्री ही लौटायेगा, वे नहीं। पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के साथ युद्धविराम के समझौते पर हस्ताक्षर करने के कुछ घण्टे बाद 11 जनवरी 1966 की रात में ही उनकी मृत्यु हो गयी। यह आज तक रहस्य बना हुआ है कि क्या वाकई शास्त्रीजी की मौत हृदयाघात के कारण हुई थी? कई लोग उनकी मौत की वजह जहर को ही मानते हैं।

शास्त्रीजी को उनकी सादगी, देशभक्ति और ईमानदारी के लिये आज भी पूरा भारत श्रद्धापूर्वक याद करता है। उन्हें मरणोपरान्त वर्ष 1966 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

शास्त्रीजी की अंत्येष्टि पूरे राजकीय सम्मान के साथ शान्तिवन (नेहरू जी की समाधि) के आगे यमुना किनारे की गयी और उस स्थल को विजय घाट नाम दिया गया। जब तक कांग्रेस संसदीय दल ने इंदिरा गांधी को शास्त्री का विधिवत उत्तराधिकारी नहीं चुन लिया, गुलजारी लाल नंदा कार्यवाहक प्रधानमन्त्री रहे।

पोस्टमार्टम क्यों नहीं कराया? शास्त्रीजी की मृत्यु को लेकर तरह-तरह के कयास लगाये जाते रहे। बहुतेरे लोगों का, जिनमें उनके परिवार के लोग भी शामिल हैं, मानते है कि शास्त्रीजी की मृत्यु हार्ट अटैक से नहीं बल्कि जहर देने से ही हुई। पहली इन्क्वायरी राज नारायण ने करवायी थी, जो बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गयी ऐसा बताया गया। मजे की बात यह कि इण्डियन पार्लियामेण्ट्री लाइब्रेरी में आज उसका कोई रिकार्ड ही मौजूद नहीं है। यह भी आरोप लगाया गया कि शास्त्रीजी का पोस्ट मार्टम भी नहीं हुआ। 2009 में जब यह सवाल उठाया गया तो भारत सरकार की ओर से यह जबाव दिया गया कि शास्त्रीजी के प्राइवेट डॉक्टर आर०एन०चुघ और कुछ रूस के कुछ डॉक्टरों ने मिलकर उनकी मौत की जाँच तो की थी परन्तु सरकार के पास उसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। बाद में प्रधानमन्त्री कार्यालय से जब इसकी जानकारी माँगी गयी तो उसने भी अपनी मजबूरी जतायी।

आउटलुक पत्रिका ने खोली पोल- शास्त्रीजी की मौत में संभावित साजिश की पूरी पोल आउटलुक नाम की एक पत्रिका ने खोली। 2009 में, जब साउथ एशिया पर सीआईए की नज़र (अंग्रेजी CIA’s Eye on South Asia) नामक पुस्तक के लेखक अनुज धर ने सूचना के अधिकार के तहत माँगी गयी जानकारी पर प्रधानमन्त्री कार्यालय की ओर से यह कहना कि “शास्त्रीजी की मृत्यु के दस्तावेज़ सार्वजनिक करने से हमारे देश के अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्ध खराब हो सकते हैं तथा इस रहस्य पर से पर्दा उठते ही देश में उथल-पुथल मचने के अलावा संसदीय विशेषधिकारों को ठेस भी पहुँच सकती है। ये तमाम कारण हैं जिससे इस सवाल का जबाव नहीं दिया जा सकता।”।

ललिता के आँसू- सबसे पहले सन् 1978  में प्रकाशित एक हिन्दी पुस्तक ललिता के आँसू में शास्त्रीजी की मृत्यु की करुण कथा को स्वाभाविक ढँग से उनकी धर्मपत्नी ललिता शास्त्री के माध्यम से कहलवाया गया था। उस समय (सन् उन्निस सौ अठहत्तर में) ललिताजी जीवित थीं। यही नहीं, कुछ समय पूर्व प्रकाशित एक अन्य अंग्रेजी पुस्तक में लेखक पत्रकार कुलदीप नैयर ने भी, जो उस समय ताशकन्द में शास्त्रीजी के साथ गये थे, इस घटना चक्र पर विस्तार से प्रकाश डाला है। जुलाई 2012 में शास्त्रीजी के तीसरे पुत्र सुनील शास्त्री ने भी भारत सरकार से इस रहस्य पर से पर्दा हटाने की माँग की थी। मित्रोखोन आर्काइव नामक पुस्तक में भारत से संबन्धित अध्याय को पढ़ने पर ताशकंद समझौते के बारे में एवं उस समय की राजनीतिक गतिविधियों के बारे में विस्तरित जानकारी मिलती है।

पिछले 132 दिन से भारत में तेल पर महंगाई नहीं

यूक्रेन युद्ध के बीच Petrol 3 रुपए हुआ महंगा, सबसे सस्ता तेल बेचने वाले देशों में भी महंगाई

नई दिल्ली (एजेंसी)। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 140 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं हैं। इसका असर दुनिया के सभी देशों पर पड़ा। सबसे सस्ता पेट्रोल बेचने वाले देशों में भी महंगाई की मार पड़ी है। पेट्रोल की कीमत 3 रुपये तक बढ़ गई, जबकि दुनिया भर में पेट्रोल औसतन 7 रुपये लीटर महंगा हुआ है। आज भी सबसे सस्ता पेट्रोल वेनेजुएला में है तो सबसे महंगा हांगकांग में है। हालांकि, पिछले 132 दिन से भारत के लोगों पर क्रूड के महंगा होने का कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। पेट्रोल के रेट अभी भी स्थिर हैं।

हांगकांग में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 18 रुपये बढ़कर 220.20 रुपये प्रति लीटर हो गई है। वहीं, वेनुजुएला में भारतीय रुपये के रूप में 1.91 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। दुनिया में 5 ऐसे देश हैं, जहां पेट्रोल की कीमत 25 रुपये प्रति लीटर से भी कम है। हालांकि दुनिया भर में पेट्रोल (गैसोलीन) की औसत कीमत 94.60 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 101.28 रुपये हो गई है। हालांकि, देशों के बीच इन कीमतों में काफी अंतर है। विभिन्न देशों में कीमतों में अंतर पेट्रोल के लिए विभिन्न टैक्सों और सब्सिडी के कारण है। वैसे भारत में पेट्रोल की कीमत अब कुछ शहरों में ही 100 रुपये प्रति लीटर के पार है।

वेबसाइट globalpetrolprices.com के ताजा आंकड़ों के मुताबिक पाकिस्तान में 7 फरवारी को एक लीटर पेट्रोल की औसत कीमत 63.07 रुपये थी और अब बढ़कर 64.03 भारतीय रुपया हो गई है। वहीं, श्रीलंका में पेट्रोल की कीमत अब 76.54 रुपये से बढ़कर 84.97 रुपये प्रति लीटर हो गई है। यहां पेट्रोल का भाव 25 अक्टूबर को 68.35 रुपये और 8 नवंबर को 67.55 रुपये लीटर था। वहीं 29 नवंबर को यहां पेट्रोल की कीमत 68.12 रुपये पर पहुंच गई थी। इसके अलावा 21 फरवरी के रेट के मुताबिक बांग्लादेश में पेट्रोल 77.52 रुपये तो नेपाल में 90.95 रुपये लीटर था। अब नेपाल में पेट्रोल 93:80 रुपये लीटर है। वहीं, बांग्लादेश में एक लीटर पेट्रोल की कीमत भारतीय रुपये में 79.19 रुपये पड़ रही है।

देश नहीं बिकने देंगे; हुंकार के साथ पहुंचे दिल्ली के जंतर मंतर

आल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कंफेडरेशन द्वारा बैंकों के निजीकरण के खिलाफ चल रही मुहिम ‘बैंक बचाओ देश बचाओ’ भारत यात्रा का समापन दिल्ली के जन्तर मंतर पर रैली के रूप में हुआ।

बैंक बचाओ देश बचाओ भारत यात्रा, कोलकाता और मुम्बई से चलकर पहुँची दिल्ली। बैंकों के निजीकण के खिलाफ चल रहे आंदोलन में दिल्ली के जंतर मंतर पर शामिल हुए NMOPS व अटेवा के अध्यक्ष विजय कुमार 'बन्धु'*

लखनऊ। ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन द्वारा देश के सरकारी बैंकों के निजीकरण के विरोध में जो यात्रा 24 नवंबर को कोलकाता व मुम्बई से प्रारम्भ की थी, वह आज दिल्ली जन्तर मंतर पहुँची। सार्वजनिक सेक्टर को बैंकों के निजीकरण के खिलाफ जन्तर मंतर पर हुए इस आंदोलन में बैंक कर्मियों के अतिरिक्त बड़ी संख्या में शिक्षक, नर्सेज, डॉक्टर्स, मजदुर, किसान, छात्र व नौजवान शामिल हुए। सभी का यह मानना है कि सार्वजनिक क्षेत्र भारत का गौरव हैं, इनका निजीकरण देश के साथ गद्दारी है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दास्त नहीं किया जाएगा। इसके लिए जितना भी लंबा और कड़ा संघर्ष करना पड़ेगा हम सब मिलकर करेंगे, लेकिन देश को किसी भी हाल में बिकने नहीं देंगे।

रैली को कई वरिष्ठ वक्ताओं ने संबोधित किया, सभी ने इस मुहिम को सराहनीय बताया और देश व बैंक बचाने की इस मुहिम में साथ देने का भरोसा दिलाया। वक्ताओं में प्रमुख रूप से पूर्व सांसद तपन सिन्हा, महाराष्ट्र के सांसद, आईटी सीटू की अध्यक्ष अमृत कौर, कन्हैया कुमार, प्रोफेसर ऋतु सहित तमाम शिक्षक, कर्मचारी, किसान, मजदूर व छात्र संगठनों ने संबोधित किया। उत्तर प्रदेश से ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन के वरिष्ठ नेतागण सौरभ श्रीवास्तव, पवन कुमार, बीपी सिंह सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे।

ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कंफेडरेशन के राष्ट्रीय महासचिव सौम्य दत्ता ने कहा बैंकों का निजीकण बर्दास्त नहीं किया जाएगा, आज जन्तर मंतर पर हमने अपनी एकता का एक ट्रेलर दिखाया है। इस तानाशाह सरकार के खिलाफ हम अंतिम क्षण तक लड़ेंगे लेकिन बैंकिंग अमेंडमेंट बिल संसद में पास नहीं होने देंगे। बैंकों के निजीकरण के खिलाफ चल रही इस मुह में NMOPS के राष्ट्रीय अध्यक्ष व अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार 'बन्धु' ने कहा कि आज निजीकरण देश की बहुत बड़ी समस्या है, इससे केवल सरकारी कर्मचारी ही नहीं बल्कि देश का प्रत्येक नागरिक प्रभावित होगा। आने वाले समय में निजीकरण के कारण देश विभिन्न समस्याओं का सामना करेगा। अमीरों और गरीबों के बीच की खाईं और बढ़ेगी। NPS तो निजीकरण का एक छोटा सा भाग है, जिससे आज देश के लाखों लोगों का शोषण हो रहा है। अगर सब कुछ निजी हाथों में चला गया तो आप उसकी भयावहता के बारे में अंदाजा लगा सकते हैं। राजकीय नर्सेज संघ उत्तर प्रदेश के महामंत्री व चिकित्सा स्वास्थ्य महासंघ के प्रधान महासचिव अशोक कुमार ने कहा निजीकण इस समय पूरे देश में सभी विभागों की समस्या है, यह आम जनमानस की लड़ाई है। बैंक बचाओ देश बचाओ अभियान को हमारा पूरा समर्थन हैं, हम इस मुहिम की हर सम्भव मदद करेंगे, लेकिन देश की राष्ट्रीय संपत्तियों को बिकने नहीं देंगे। अगर यह सरकार अड़ियल रुख अपनाते हुए बैंकों के निजीकरण पर अड़ी रहती है तो हम भी चुप बैठने वाले नहीं हैं। आने वाले पाँच राज्यों के चुनाव में हम अपनी एकता दिखाएंगे, इन्हें सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाएँगे। अभियान में जन्तर मंतर पर NMOPS व अटेवा के पदाधिकारी व सहयोगी संगठन भी शामिल रहे। इनमें दिल्ली NMOPS के प्रदेश अध्यक्ष मंजीत पटेल, जावेद अख्तर, अटेवा उत्तर प्रदेश के प्रदेश महामंत्री डॉ. नीरजपति त्रिपाठी, प्रदेश उपाध्यक्ष चंद्रहास सिंह, प्रदेश संगठन मंत्री रजत प्रकाश, रजनीश कुमार, शिव शंकर यादव, गर्वित चौधरी, आकिल अख्तर, राजस्थान से सुरेंद्र बेनीवाल, केआर सियाग, जगदीश प्रसाद यादव, मेरठ नर्सेज संघ की शर्ली भण्डारी उपाध्यक्ष राजकीय नर्सेज संघ उत्तर प्रदेश, शिवानी चौधरी, सुशीला, मंजू, पवन मिश्रा, कौंसल्या गौतम, विक्टोरिया NMOPS उत्तराखण्ड से रोहित शर्मा सहित सैकड़ों साथी अटेवा के साथी बैंक कर्मियों के इस आंदोलन में शामिल रहे और सभी ने बैंक व देश बचाने की इस मुहिम को अंजाम तक पहुंचाने का प्रण लिया।

जियो ने भी महंगे कर दिये मोबाइल प्लांस

बड़ा अपडेट! 1 दिसंबर से महेंगे होंगे Reliance Jio के रिचार्ज प्लान, चेक करें नए रेट्स

नई दिल्ली (एजेंसी)। भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया द्वारा मोबाइल टैरिफ दरों में बढोतरी किये जाने के बाद सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस जियो ने भी अपने टैरिफ दरों में 20 फीसदी तक की बढोतरी कर दी है। जियो के नए अनलिमिटेड प्लान 1 दिसंबर से लागू होंगे। रिलायंस जियो का दावा है कि उसके टैरिफ रेट अब भी सबसे कम हैं। जियो के विभिन्न प्लान में 31 रुपए से लेकर 480 रुपए तक का इजाफा किया गया है। जियोफोन के लिए विशेष तौर पर लाए गए पुराने 75 रुपए के प्लान की नई कीमत अब 91 रुपए होगी। वहीं अनलिमिटेड प्लान का 129 रुपए वाला टैरिफ प्लान अब 155 रुपए में मिलेगा। एक वर्ष की वैलीडिटी वाले प्लान में रेट सबसे ज्यादा बढ़े हैं। पहले यह प्लान 2399 रुपए का था जिसे अब 2879 रुपए कर दिया गया है।


रिलायंस जियो के डाटा एड-ऑन प्लान के रेट भी बढ़े हैं। 6जीबी वाले 51 रुपए के प्लान के लिए अब 61 रुपए और 101 वाले 12 जीबी वाले एड-ऑन प्लान के लिए अब 121 रुपए लगेंगे। सबसे बड़ा 50 जीबी वाला प्लान भी अब 50 रुपए महंगा हो कर 301 रुपए का हो गया है।

आतिशबाजी की बिक्री न होने से करोड़ों के नुकसान की आशंका

बिजनौर में खाली पड़ीं आतिशबाजी की दुकानें

बिजनौर अपडेट …..
प्रयाण की ग्राउंड जीरो रिपोर्ट

आतिशबाजी की बिक्री न होने से करोड़ों के नुकसान की संभावना

  • दुकानदारी न होने से आतिशबाजी व्यापारियों का त्योहार रह सकता है फीका।
  • बिजनौर आईटीआई में प्रशासन ने लगवाई है आतिशबाजी की दुकानें।

बिजनौर (नदीम अहमद आज़ाद)। आईटीआई में लगे आतिशबाजी व्यापारियों के स्टाल पर इस बार ग्राहक कम हैं। इस कारण व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है!  व्यापारियों के अनुसार इस बार अन्य वर्षों की भांति ग्राहक बहुत कम हैं। हमें नुकसान उठाना पड़ेगा। एक अनुमान के मुताबिक लगभग 5 करोड की आतिशबाज़ी की दुकानें आईटीआई परिसर में लगी हैं।
ग्राहक कम पहुंचने की वजह के बारे में व्यापारियों ने अपने अलग-अलग तर्क दिए। उन्होंने इस बार आतिशबाजी बिकने के स्थान की जानकारी लोगों को न होना बताया। कुछ व्यापारियों के अनुसार प्रदूषण की वजह से होने वाले नुकसान को लेकर लोगों का जागरूक होना भी इसकी एक मुख्य वजह है। वहीं कुछ व्यापारियों ने लोगों के पास कोरोना काल की वजह से मन्द पड़े काम धंधों को मुख्य कारण बताया।

अभी भी संभावना है बाकी- फिलहाल इतना ही कहा जा सकता है कि राजकीय आईटीआई बिजनौर में आतिशबाजी बेचने वाले दुकानदार जिस तरह से हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं, उससे उन को भारी नुकसान हो सकता है और उनकी दीवाली की मिठास खत्म हो सकती है। हालांकि अभी दुकानदारों को आतिशबाजी की बिक्री होने की संभावना भी लग रही है।

फिर महंगा हो सकता है रसोई गैस सिलेंडर!

फिर से महंगा हो सकता है रसोई गैस सिलेंडर, कीमत बढ़ने के आसार

नई दिल्ली (एजेंसी)। दो दिन के अंतराल के बाद बुधवार को वाहन ईंधन कीमतों में फिर बढ़ोतरी होने के बाद एलपीजी गैस सिलेंडर के रेट एक बार फिर बढ़ने की आशंका है। एलपीजी के मामले में लागत से कम मूल्य पर बिक्री से होने वाला नुकसान (अंडर रिकवरी) 100 रुपए प्रति सिलेंडर पर पहुंच चुका है। इस वजह से इसकी कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। रसोई गैस सिलेंडर का दाम कितना बढ़ेगा, यह सरकार की परमिशन पर निर्भर करेगा।

इससे पहले 6 अक्टूबर को रसोई गैस सिलेंडर के दाम 15 रुपए बढ़ाए गए थे। पेट्रोल और डीजल दोनों के दाम 35 पैसे प्रति लीटर और बढ़ गए हैं। इससे पिछली बार 6 अक्टूबर को LPG के दाम में 15 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई थी।

गन्ना ब्याज हुंकार रैली से सरकार पर बनेगा दबाव: सरदार वीएम सिंह

लोहा गरम है, किसान चोट कर दे। बढ़े हुए 25 रुपए वापस ले ले सरकार। डीजल आदि हर चीज का दाम पांच साल पहले जैसा कर दे।

बिजनौर। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सरदार वीएम सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 27 अक्तूबर तक ब्याज सहित गन्ना भुगतान के निर्देश दिए हैं। सरकार पर कोर्ट का दबाव है। मिल मालिकों से एक बार ब्याज ले लिया तो फिर कभी किसान को भुगतान के लिए धरना नहीं देना होगा।

अमरोहा में आयोजित गन्ना ब्याज हुंकार रैली में जाने से पहले बिजनौर पहुंचे वीएम सिंह ने गन्ना समिति में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि किसान को लागत का डेढ़ गुना वादा करने वाली सरकार अब गन्ने में चार साल बाद केवल 25 रुपए बढ़ा रही है। सरकार ये बढ़ी रकम वापस ले ले और डीजल आदि हर चीज का दाम पांच साल पहले जैसा कर दे। गन्ना दाम कम से कम 450 रुपए प्रति क्विंटल होना चाहिए था।

उन्होंने कहा कि 25 साल हम लड़े। पिछली सरकार ने ब्याज माफ कर दिया। लोहा गरम है, किसान चोट कर दे। चुनाव आ गए हैं, योगी जी को पता चल जाएगा। ब्याज मिल जाए तो हर एकड़ पर किसान के घर मे 25-25 हजार रुपए ब्याज आ जाएगा, उसके त्योहार अच्छे मन जाएंगे। कई मिल ग्रुप ऐसे भी हैं जो किसानों को विलंब भुगतान का ब्याज देने के नाम पर नुकसान दिखा रहे थे और अब कई कई चीनी मिल खोल चुके हैं। उन्होंने कहा कि भुगतान न मिलने पर किसान को गन्ना समिति को ब्याज देना पड़ता है तो किसान को भी सरकार से ब्याज लेने का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने ब्याज सहित भुगतान देने को कहा है। सरकार पर कोर्ट का दबाव है।

लखीमपुर खीरी प्रकरण में राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि गृह राज्यमंत्री अजय शर्मा के गलत बयान की वजह से किसान भड़के और ये हादसा हुआ। मंत्री पर एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। उनके साथ वेस्ट यूपी महासचिव कैलाश लांबा, जिलाध्यक्ष विनोद कुमार आदि रहे।

महीने के पहले दिन बढ़े LPG सिलेंडर के दाम

महीने के पहले दिन महंगाई की मार, LPG सिलेंडर के दाम बढ़े

नई दिल्ली (एजेंसी)। सितंबर महीने के पहले दिन सरकारी तेल कंपनियों ने एक बार फिर घरेलू रसोई गैस सिलेंडर के दाम बढ़ा दिए हैं। देश की सबसे बड़ी सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) ने बिना सब्सिडी वाले 14.2 किलोग्राम गैस सिलेंडर की कीमत में 25 रुपए की बढ़ोतरी की है, वहीं 19 किलोग्राम कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम में 75 रुपए का इजाफा हुआ है।

अब दिल्ली में 14.2 किग्रा का एलपीजी सिलेंडर 884.5 रुपए हो गया है, जबकि इससे पहले यह 859.50 रुपए मिल रहा था। इससे पहले 18 अगस्त को रसोई गैस सिलेंडर की कीमत में 25.50 रुपए की बढ़ोतरी हुई थी। दिल्ली में रसोई गैस की कीमत 834.50 रुपए से बढ़कर 859.50 रुपए हो गई थी। 15 दिन में ही गैर-सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर 50 रुपए महंगा हो चुका है।

पेट्रोलियम पदार्थों की मूल्य वृद्धि के खिलाफ सडक़ों पर कांग्रेसी 

पेट्रोलियम पदार्थों की मूल्य वृद्धि के खिलाफ सडक़ों पर उतरे कांग्रेसी जिले भर में पेट्रोल पंप के सामने धरना प्रदर्शन।

बिजनौर। पेट्रोलियत पदार्थों की कीमतों में लगातार बेतहाशा वृद्धि के चलते कांग्रेसियों का पारा चढ़ गया। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के आह्वान एवं उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर जिले के विभिन्न स्थानों पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने धरना प्रदर्शन किया।

जिला मुख्यालय पर ब्लाक कांग्रेस कमेटी मोहम्मद पुर देवमल एवं जिला कांग्रेस कमेटी बिजनौर ने पूरे देश में डीजल पेट्रोल के निरन्तर बढ़ते दामों को ले कर बैराज मार्ग स्थित मित्तल पेट्रोल पम्प बैराज रोड के सामने धरना दे कर प्रदर्शन किया। सभी कांग्रेस जन अपने हाथों में डीजल पेट्रोल के दाम कम करो कि मांग के नारे लिखी तख्तियां ले कर तपती धूप में बैठे रहे और जम कर नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं ने देश के प्रधानमंत्री, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री व देश के पेट्रोलियम मंत्री से नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देने की मांग की। कहा कि देश में निरन्तर डीजल/पेट्रोल के बढ़ते दामों पर केन्द्र सरकार अंकुश लगाने में पूरी तरह फेल हो चुकी है। महामारी के चलते केन्द्र सरकार लगातार डीजल पेट्रोल के दाम बड़ा कर देश की जनता की जेब काटने का काम कर रही है। जनता के साथ की गई खुल्लमखुल्ला लूट को कांग्रेस बर्दाश्त नहीं करेगी। जनता के साथ हुए किसी भी अत्याचार पर कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी। चाहे कांग्रेस के एक एक कार्यकर्ता को जेल ही क्यों न जाना पड़े। धरने का नेतृत्व ब्लाक कांग्रेस कमेटी मोहम्मद पुर देवमल केअध्यक्ष गुलशन कुमार ने किया। धरना देने वालों में जिला उपाध्यक्ष मुनीश त्यागी, जिला महासचिव नजाकत अल्वी, हुमायूं बेग, चितवन शर्मा, अब्दुल समद आजाद, डा. ओमप्रकाश सिंह, इकबाल अहमद, शमीम कुरैशी, विशाल कुमार, राजवीर सिंह सैनी आदि शामिल रहे।

पीएम सीएम से मांग इस्तीफा नजीबाबाद। कांग्रेस कार्यकर्ता नगर में डबल फाटक के समीप स्थित एक पेट्रोल पंप पर एकत्रित हुए। जहां उन्होंने बढ़ती महंगाई के विरोध में प्रदर्शन किया। कांग्रेसियों ने बहुत हुई महंगाई की मार, अब नहीं चाहिए मोदी सरकार लिखी तख्ती हाथों में लेकर केंद्र व प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस अवसर पर कांग्रेस कमेटी के मौहम्मद अकरम खान एडवोकेट, मनोरे मियां, राकेश शर्मा, मुस्तकीम राइन, हाजी नसीम अंसारी, अभिनव अग्रवाल एडवोकेट, शारीब अंसारी एडवोकेट, खालीक हुसैन, गोविंद सिंह कुशवाह, मौहम्मद नवेद, मकसूद अहमद, निसार अहमद, हाजी जहुर, फराज एडवोकेट आदि रहे।
अफजलगढ़ में कीमत वृद्धि पर जताया रोष अफजलगढ़। सबसे पहले कांग्रेसियों ने गणेश जी के दर्शन किए और हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ जमके नारेबाजी की। कहा कि यह वही सरकार है जो बढ़ते हुए पेट्रोल और डीजल के दामों का विरोध करती थी, लेकिन पूरी तरह से झूठी साबित हुई है। आम आदमी का बजट पूरी तरह से बिगड़ चुका है।

जल्दी ही सस्ता हो सकता है खाने का तेल!

नई दिल्ली। खाद्य तेलों की खुदरा में एक साल में 55.55 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। अब बंदरगाह पर फंसे तेल के बाजार में आने के बाद कीमतें नरम पड़ने की उम्मीद की जा रही है। कोविड-19 महामारी से उत्पन्न संकट का सामना कर रहे उपभोक्ता की परेशानी और बढ़ी है।

केंद्र ने उम्मीद जताई है कि बंदरगाह पर मंजूरी मिलने के इंतजार में फंसे आयातित स्टॉक के जारी होने के बाद खाद्य तेलों की खुदरा कीमतें नरम पड़ जायेंगी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, खाद्य तेलों की खुदरा कीमतों में एक साल में 55.55 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसके कारण पहले से ही कोविड-19 महामारी से उत्पन्न संकट का सामना कर रहे उपभोक्ता की परेशानी और बढ़ी है।
खाद्य सचिव सुधांशु पांडे के अनुसार सरकार कीमतों पर करीबी से नजर रखे हुए है। तेल उद्योग ने हाल ही में इसका जिक्र किया है कि कोविड स्थिति के मद्देनजर सामान्य जोखिम विश्लेषण के रूप में विभिन्न एजेंसियों द्वारा किए जा रहे परीक्षणों से संबंधित मंजूरी में देरी के कारण कांडला और मुंद्रा बंदरगाहों पर कुछ स्टॉक फंसा है।
उन्होंने एक आभासी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ” इस समस्या का सीमा शुल्क और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के साथ मिलकर समाधान किया गया है और जैसे ही यह स्टॉक को बाजार में जारी होगा, हमें खाद्य तेलों के दाम पर इसका असर होने की उम्मीद है।’’
सचिव ने कहा कि खाद्य तेल की कमी को पूरा करने के लिए देश आयात पर निर्भर है। सालाना, देश में 75,000 करोड़ रुपये के खाद्य तेलों का आयात होता है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल आठ मई को वनस्पति की खुदरा कीमत 55.55 प्रतिशत बढ़कर 140 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई है, जो एक साल पहले इसी अवधि में 90 रुपए प्रति किलोग्राम थी।
इसी तरह पाम ऑयल का खुदरा मूल्य 51.54 प्रतिशत बढ़कर 132.6 रुपए प्रति किलोग्राम हो गया है, जो पहले 87.5 रुपए प्रति किलोग्राम था, सोया तेल का 50 प्रतिशत बढ़कर 158 रुपए प्रति किलोग्राम हो गया जो पहले 105 रुपए प्रति किलोग्राम था, जबकि सरसों का तेल 49 प्रतिशत बढ़कर 163.5 रुपए प्रति किलोग्राम हो गया जो पहले 110 रुपए प्रति किलोग्राम पर था।
उक्त अवधि में सोयाबीन तेल की खुदरा कीमत भी 37 प्रतिशत बढ़कर 132.6 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई है जो पहले 87.5 रुपए किलो थी, जबकि मूंगफली तेल 38 प्रतिशत बढ़कर 180 रुपए प्रति किलोग्राम हो गया जो पहले 130 रुपए प्रति किलोग्राम पर था।

अखबारों के दाम बढ़े, विरोध में हड़ताल

लखनऊ : इस वजह से आपको नहीं मिल रहा न्यूज़ पेपर, कई दिनों तक चल सकती है यह समस्या

लखनऊ। यदि आप सुबह सुबह न्यूज़ पेपर यानी कि समाचार पत्र पढ़ने के आदी है तो आगामी कुछ दिनों तक आपको समाचार पत्र नही मिलने वाला है । दरअसल पूरा मामला यह है कि प्रमुख हिंदी समाचार पत्र कंपनियों ने न्यूज़ पेपर के मूल्यों में 50 प्रतिशत की वृद्धि कर दी है । इसके विरोध में समाचार पत्र विक्रेता और डिलीवरी करने वाले लोग स्ट्राइक पर आ गए हैं ।

महानगर लखनऊ के समाचार विक्रेता संघ के प्रमुख मनीष सिंह रावत ने बताया कि एक तो ग्राहकों ने कोरोना की वजह से वैसे ही न्यूज़ पेपर लेना कम कर दिया है दूसरी तरफ मूल्यों में 50 प्रतिशत वृद्दि होने से मौजूद ग्राहक भी न्यूज़ पेपर लेना बंद कर देंगे । समाचार पत्रों ने इस कोरोना काल मे न केवल पेपर के पृष्ठों की संख्या कम कर दिया है बल्कि मूल्यों में वृद्धि भी कर दी है । विक्रेताओं के हितों को भी समाचार पत्रों ने कोई स्थान नहीं दिया है, जिससे लोगों के सामने आजीविका चलाने की समस्या पैदा हो गयी है । उन्होंने संबंधित लोगों अधिकारियों और सरकार से निवेदन किया है कि इस समस्या का समाधान निकाला जाए और न्यूज़ पेपर विक्रेताओं और डिलीवरी करने वाले लोगों के हितों को संरक्षित किया जाए।

आपको बता दे कि समाचार पत्र विक्रेता और डिलीवरी में लगे लोग अपने जान को हथेली पर रखकर न्यूज़ पेपर लोगो तक पहुँचा रहे हैं । संगठन ने यह स्पष्ट किया है कि जब तक समाचार पत्र कंपनियां इनकी बातों को नहीं मानतीं, तब तक इनकी डिलीवरी बन्द रहेगी ।

दूसरी तरफ समाचार पत्र कंपनियां, जिन्होंने मूल्य में वृद्धि की है, उनका कहना हैं कि बिज्ञापन न मिलने से उनकी प्रिंटिंग लागत बढ़ गयी है और यदि वो मूल्य नहीं बढ़ाती हैं तो प्रकाशन करना मुश्किल हो जाएगा।

श्री राहुल जो कि नियमित न्यूज़ पेपर लेते है उनका कहना है कि इस वैश्विक महामारी की स्थिति में समाचार पत्र प्रकाशन करने वाली कंपनियों को मूल्य में वृद्धि नही करना चाहिए इसे अगले कुछ महीनों के लिए टाल देना चाहिए ।

शहर में अनेक लोग न्यूज़ पेपर पढ़ने के आदी हैं और न्यूज़ पेपर न मिलने से उनमे गुस्सा देखा जा सकता है। आपको बता दें कि पहले सभी प्रमुख समाचार पत्रों के डिजिटल एडिशन पढ़ने के लिए फ्री थे लेकिन पिछले वर्ष से कई कंपनियों ने उसे भी पेड बेसिस कर दिया है ।

सरकार ने लोकसभा में मानी पेट्रोल-डीजल से खूब कमाई की बात

सरकार ने लोकसभा में मानी पेट्रोल-डीजल से खूब कमाई की बात, वित्त मंत्री बोलीं-GST में लाने का प्रस्ताव नहीं

नई दिल्ली। लोकसभा में सरकार ने स्वीकार किया कि पेट्रोल-डीजल से उसकी अच्छी खासी कमाई हो रही है. लोकसभा में एक सवाल के जवाब में स्वीकार किया कि 6 मई 2020 के बाद से पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क, उपकर और अधिभार से क्रमश: 33 रुपये और 32 रुपये प्रति लीटर की कमाई हो रही है. जबकि मार्च 2020 से 5 मई 2020 के बीच उसकी ये आय क्रमशः 23 रुपये और 19 रुपये प्रति लीटर थी.

गैस में लगी आग: आम आदमी को फिर तगड़ा झटका

गैस में लगी आग: आम आदमी को फिर लगा तगड़ा झटका
25 रुपए महंगा हुआ रसोई गैस सिलेंडर
नई दिल्ली। मार्च के पहले दिन फिर से एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत में 25 रुपए का इजाफा हुआ है। फरवरी के महीने में गैस सिलेंडर की कीमत में 100 रुपए का उछाल आया था।
इससे पहले 25 फरवरी को कीमत में उछाल आया था। पहले, 4 फरवरी को 25 रुपए, 14 फरवरी को 50 रुपए की बढ़ोतरी हुई थी। वहीं 25 फरवरी को इसमें 25 रुपए का इजाफा हुआ था। फरवरी महीने में रसोई गैस का दाम 100 रुपए बढ़ गया। पिछले एक महीने में कीमत में चौथी बार तेजी आई है और अब तक 125 रुपए बढ़ गए हैं। इसी के साथ कीमत में बढ़ोतरी के बाद अब दिल्ली में घरेलू गैस का रेट 794 से बढ़कर 819 रुपए हो गया है।

इन चार महानगरों में लेटेस्ट प्राइस-
-दिल्ली में नई कीमत 819 रुपए
-मुंबई में नई कीमत 819 रुपए
-कोलकाता में नई कीमत 845.50 रुपए
-चेन्नई में नई कीमत 835 रुपए

19 किलोग्राम वाले सिलेंडर का रेट
वैसे हर महीने की पहली तरीख को एलपीजी के दाम में बदलाव होते हैं। 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम में 90.50 रुपए का उछाल आया है। अब दिल्ली में इस सिलेंडर की कीमत 1614 रुपए हो गई है। उसी तरह मुंबई का रेट अब 1563.50 रुपए प्रति सिलेंडर हो गया है। कोलकाता में यह कीमत 1681.50 रुपए और चेन्नई का रेट 1730.5 रुपए हो गया है। इससे पहले राजधानी में 19 किलो वाले सिलेंडर का भाव 1533.00 रुपए, कोलकाता में 1598.50 रुपए, मुंबई में 1482.50 रुपए और चेन्नई में 1649.00 रुपए था।

ऐसे चेक करें एलपीजी की कीमत-
रसोई गैस सिलेंडर की कीमत चेक करने के लिए सरकारी तेल कंपनी की वेबसाइट खोलनी होगी। यहां पर कंपनियां हर महीने नए रेट्स जारी करती हैं। (https://iocl.com/Products/IndaneGas.aspx) इस लिंक पर आप अपने शहर के गैस सिलिंडर के दाम चेक कर सकते हैं।

इस महीने तीसरी बार बढ़े LPG सिलेंडर के रेट

आम आदमी को करारा झटका, फरवरी में तीसरी बार बढ़े LPG सिलेंडर के दाम

नई दिल्ली। सरकारी तेल कंपनियों ने आम आदमी को एक और बड़ा झटका दिया है। रसोई गैस का सिलेंडर के दाम फिर बढ़ गए हैं। IOC ने फरवरी में 14.2 किलो वाले रसोई गैस सिलेंडर के दाम एक बार फिर बढ़ाए हैं। इसके बाद बिना सब्सिडी वाले 14.2 किलोग्राम के एलपीजी सिलेंडर की कीमत 769 रुपये से बढ़कर 794 रुपये हो गई है। बढ़े हुए दाम आज 25 फरवरी 2021 से लागू हो गए हैं। इस महीने गैस सिलेंडर की कीमतों में यह तीसरी बार बढ़ोतरी की गई है। बिना सब्सिडी वाले सिलेंडर के दाम में आज 25 रुपये तक का इजाफा किया गया है।


फरवरी महीने में तीन बार गैस सिलेंडर के दाम बढ़ाए हैं। सरकार ने 4 फरवरी को LPG के दाम में 25 रुपये का इजाफा किया था। उसके बाद 15 फरवरी को एक फिर से सिलेंडर के दाम 50 रुपये बढ़ा दिए गए थे और अब यह तीसरी बार है। अब फिर से 25 रुपये की बढ़ोतरी की गई है।1 दिसम्बर को गैस सिलेंडर 594 रुपये से बढ़कर 644 रुपये हुए थे। 1 जनवरी को फिर से 50 रुपए बढ़ाए गए, जिसके बाद 644 रुपये वाला सिलेंडर 694 रुपये हो गया। 4 फरवरी को की गई बढ़ोत्तरी के बाद इसकी कीमत 644 रुपये से बढ़कर 719 रुपये हो गई है। 15 फरवरी को 719 रुपये से 769 रुपये हुई और 25 फरवरी को 25 रुपये दाम बढ़ने से इसकी कीमत 769 रुपये से 794 रुपये पर आ गई।

वैसे हर महीने की पहली तरीख को एलपीजी के दाम में बदलाव होते हैं। इस बार एक फरवरी को सिर्फ कामर्शियल गैस सिलेंडर के दामों में 190 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। इसके बाद देश की राजधानी में 19 किलो वाले सिलेंडर का भाव 1533.00 रुपये, कोलकाता में 1598.50 रुपये, मुंबई में 1482.50 रुपये और चेन्नई में 1649.00 रुपये हो गए हैं।

769 का Gas Cylinder मिल रहा सिर्फ ₹69 में

769 का Gas Cylinder मिल रहा सिर्फ 69 रुपए में, Offer सीमित समय तक
नई दिल्ली। रसोई गैस सिलेंडर शहर से लेकर गावं तक हर घर में उपयोग में आती है। अभी हाल ही में सरकार ने एलपीजी के दाम में 50 रुपये की वृद्धि की है। इसके बाद बिना सब्सिडी वाले 14.2 किलोग्राम के एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़कर 769 रुपये हो गई है। इस महीने गैस सिलेंडर की कीमतों में यह दूसरी बार बढ़ोतरी है। रसोई गैस के दाम पहले 25 और फिर 50 रुपये बढ़ाए गए, लेकिन अब आप इस महंगे सिलेंडर को मात्र 69 रुपये में खरीद सकते हैं। इस ऑफर के मुताबिक आप पेटीएम Paytm से अपना एलपीजी सिलेंडर बुक कर 700 रुपये तक का कैशबैक पा सकते हैं। देश के अधिकांश भागों में जहां एलपीजी सिलेंडर सब्सिडी के बाद 700 से 769 रुपये के बीच है, ऐसे में पेटीएम के खास कैशबैक का फायदा उठाकर आप इसे मात्र 69 रुपये में खरीद सकते हैं।

इस तरह से उठाएं ऑफर का लाभ:- 1. अगर आपके फोन में Paytm App नहीं है तो पहले डाउनलोड करें।
2. अब अपने फोन पर पेटीएम ऐप खोलें।
3. उसके बाद ‘recharge and pay bills’ पर जाएं।
4. अब ‘book a cylinder’ (बुक ए सिलेंडर) ऑप्शन खोलें।
5. भारत गैस, एचपी गैस या इंडेन में से अपना गैस प्रोवाइडर चुनें।
6. रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर या अपने LPG ID दर्ज करें।
7. इसके बाद आपको पेमेंट ऑप्शन दिखेगा।
8. अब पेमेंट करने से पहले ऑफर पर ‘FIRSTLPG’ प्रोमो कोड डालें।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 700 रुपये तक का यह कैशबैक पेटीएम ऐप के माध्यम से पहली बार एलपीजी गैस सिलेंडर बुक करवाने वाले ग्राहक ही पा सकते हैं। ग्राहक Paytm LPG Cylinder Booking Cashback Offer का लाभ 28 फरवरी 2021 तक ही ले सकते हैं। इस ऑफर के लिए पेटीएम ने कई गैस कंपनियों से करार किया है।

LPG सिलेंडर, Petrol-Diesel फिर हुए महंगे

महंगाई का दोहरा झटका, कंपनियों ने बढ़ाए LPG सिलेंडर, Petrol-Diesel के दाम
नई दिल्ली। सरकारी तेल कंपनियों ने केंद्र के बजट के बाद आज आम जनता को दोहरा झटका दिया है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी के साथ ही एलपीजी रसोई गैस सिलेंडर के दाम भी बढ़ाए गए हैं। तेल कंपनियां हर महीने एलपीजी सिलेंडर के दामों की समीक्षा करती हैं। हर राज्य में टैक्स अलग-अलग होने के हिसाब से एलपीजी के दामों में अंतर होता है। उपभोक्ता को आज से 14.2 किलोग्राम के बगैर सब्सिडी वाले एलपीजी रसोई गैस सिलेंडर के लिए ज्यादा कीमत चुकानी होगी।

सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के दाम में बढ़ोत्तरी कर दी है। पिछले एक साल के मुकाबले पेट्रोल 13.55 पैसा महंगा हुआ है। 02 फरवरी 2020 को राजधानी दिल्ली में पेट्रोल का भाव 73.10 रुपए प्रति लीटर और एक लीटर डीजल का भाव 66.14 रुपए लीटर था। वहीं आज दिल्ली में पेट्रोल 86.65 रुपए प्रति लीटर एवं डीजल 76.83 रुपए लीटर है। लगातार हो रही बढ़ोत्तरी से पेट्रोल-डीजल के कीमत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। ईंधन की कीमतों में वृद्धि के कारण बढ़ने वाली महंगाई का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पढ़ता है।

इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) की वेबसाइट के अनुसार, 14.2 किलोग्राम वाला गैर-सब्सिडी एलपीजी सिलिंडर 25 रुपए महंगा हुआ है। दिल्ली और मुंबई में यह 694 रुपये से बढ़कर अब 719 रुपए का हो गया है। कोलकाता में इसका दाम 720.50 रुपए था, जो अब 745.50 रुपए हो गया है और चेन्नई में यह 710 रुपए से बढ़कर 735 रुपए का हो गया है। इससे पहले 15 दिसंबर को भी इसकी कीमतों में 50 रुपए का इजाफा किया गया था।

किस शहर में कितने रुपए लीटर बिक रहा पेट्रोल डीजल-

-दिल्ली में पेट्रोल 86.65 रुपए और डीजल 76.83 रुपए प्रति लीटर
– मुंबई में पेट्रोल 93.20 रुपए और डीजल 83.73 रुपए प्रति लीटर
– कोलकाता में पेट्रोल 88.01 रुपए और डीजल 80.41 रुपए प्रति लीटर
-चेन्नई में पेट्रोल 89.13 रुपए और डीजल 82.04 रुपए प्रति लीटर
-बैंगलूरु में पेट्रोल 89.54 रुपए और डीजल 81.44 रुपए प्रति लीटर
-नोएडा में पेट्रोल 85.91 रुपए और डीजल 77.24 रुपए प्रति लीटर
-गुरुग्राम में पेट्रोल 84.72 रुपए और डीजल 77.39 रुपए प्रति लीटर

आपकी टेक-होम सैलरी पर अप्रैल में चल सकती है तलवार!

नए पारिश्रमिक नियम के तहत प्रावधान, प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारी होंगे प्रभावित

अप्रैल से घट सकती है आपकी टेक-होम सैलरी

सरकार ने नए पारिश्रमिक नियम के तहत जिन ड्राफ्ट नियमों की अधिसूचना जारी की है, उसके तहत कंपनियों को अपने सैलरी पैकेज के स्ट्रक्चर में बदलाव लाना पड़ेगा। ये नए नियम Code on Wages, 2019 के तहत आते हैं, जो संभवत: इस साल अप्रैल से प्रभावी होने वाला है।

नई दिल्ली (धारा न्यूज़): अगले वित्त वर्ष की शुरुआत यानी अप्रैल, 2021 से कर्मचारियों की इन-हैंड या टेक-होम सैलरी (Take-Home Salary) के कंपोनेंट या स्ट्रक्चर (Salary Structure) में बदलाव किए जा सकते हैं, जिससे आपकी टेक होम सैलरी कम हो सकती है। सरकार ने नए पारिश्रमिक नियम के तहत जिन ड्राफ्ट नियमों की अधिसूचना जारी की है, उसके तहत कंपनियों को अपने सैलरी पैकेज के स्ट्रक्चर में बदलाव लाना पड़ेगा। ये नए नियम Code on Wages, 2019 के तहत आते हैं, जो संभवत: इस साल अप्रैल से प्रभावी होने वाला है। नए नियमों के तहत allowance component यानी सैलरी के साथ मिलने वाले भत्ते, कुल सैलरी या CTC से 50 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकते और इसका सीधा मतलब है कि बेसिक सैलरी, सैलरी स्ट्रक्चर का 50 फीसदी होगी। इस नियम का पालन करने के लिए, कंपनियों को सैलरी के बेसिक पे कंपोनेंट को बढ़ाना होगा, जिसके चलते ग्रेच्युटी पेमेंट और कर्मचारी की ओर से भरे जाने वाले प्रॉविडेंट फंड की रकम बढ़ जाएगी। रिटायरमेंट के लिए डाली जाने वाली रकम बढ़ने का मतलब है कि आपकी टेक-होम सैलरी कम हो जाएगी लेकिन आपका रिटायरमेंट फंड बढ़ेगा।

प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों पर पड़ेगा प्रभाव

वर्तमान में, अधिकतर प्राइवेट कंपनियां कुल CTC के बड़े हिस्से में गैर-भत्ते वाला हिस्सा कम और भत्ते वाला हिस्सा ज्यादा रखने को वरीयता देती हैं। हालांकि, नया नियम आ जाने के बाद से यह बदल जाएगा। संभावना है कि इन नियमों से प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों की सैलरी प्रभावित होगी क्योंकि आमतौर पर उन्हें ज्यादा भत्ता मिलता है। नए नियमों के मुताबिक, कंपनियों को 50 फीसदी बेसिक सैलरी की अनिवार्यता को पूरा करने के लिए उनकी बेसिक सैलरी को बढ़ाना होगा। इन नियमों से भले ही टेक-होम सैलरी घट जाएगी। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि इससे लोगों को बेहतर सामाजिक सुरक्षा और रिटायरमेंट बेनेफिट्स मिलेंगे।

गैस सिलेंडर में विस्फोट: महीने के बीच में ही महंगा हुआ LPG

बीच महीने में ही बढ़ गए LPG गैस सिलेंडर के दाम

नई दिल्ली। ऑयल कंपनियों ने एलपीजी गैस की कीमतों (price of LPG Gas) में महीने के बीच में ही बढ़ोतरी कर दी है। 14.2 किलो वाले सिलेंडर (LPG Cylinder) की कीमत में 50 रुपये का इजाफा किया गया है। इसी तरह 5 किलोग्राम के सिलेंडर की कीमत 18 रुपये बढ़ाई गई है। 19 किलो के सिलेंडर में 36.50 रुपये का इजाफा किया गया है।

देश की सबसे बड़ी ऑयल कंपनी आईओसी (IOC) के मुताबिक दिल्ली में बिना सब्सिडी वाले 14.2 किलो के गैस सिलेंडर की कीमत अब 644 रुपये हो गई है। कोलकाता में यह 670.50 रुपये, मुंबई में 644 रुपये और चेन्नई में 660 रुपये हो गई है।

इससे पहले 1 दिसंबर 2020 को भी घरेलू रसोई गैस सिलेंडर के रेट्स में बढ़ाए गए थे। 19 किलोग्राम वाले कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम में 55 रुपये तक का इजाफा किया गया था। हालांकि, अक्टूबर और नवंबर में HPCL, BPCL, IOC ने रसोई गैस सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं किया था।

अमूमन ऑयल कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को रसोई गैस की कीमतों में संशोधन करती हैं, लेकिन इस बार कुछ अलग हुआ। 1 दिसंबर को आईओसी ने बताया कि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमत में कोई वृद्धि नहीं की गई है। दिल्‍ली में इसकी कीमत लगातार सातवें महीने 594 रुपये पर स्थिर रखी गई है। लेकिन 15 दिन बाद ही इंडियन ऑयल की वेबसाइट पर 14.2 किलोग्राम वाले गैर सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत 50 रुपये बढ़ाकर दिल्‍ली में 644 रुपये कर दी गई।

इंडियन ऑयल की वेबसाइट के मुताबिक 1 दिसंबर को देश के चार महानगरों में 14.2 किलोग्राम बिना सब्सिडी वाले रसोई गैस की कीमत दिल्‍ली में 594 रुपये, कोलकाता में 620.50 रुपये, मुंबई में 594 रुपये और चेन्‍नई में 610 रुपये बताई गई थी। 15 दिसंबर को इसी वेबसाइट पर 14.2 किलोग्राम बिना सब्सिडी वाले रसोई गैस की कीमत दिल्‍ली में 644 रुपये, कोलकाता में 670.50 रुपये, मुंबई में 644 रुपये और चेन्‍नई में 660 रुपये हो गई है।

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