सैकड़ों लोगों ने उठाया निःशुल्क प्राकृतिक चिकित्सा शिविर का लाभ


बिजनौर। आरोग्य भारती द्वारा योगी अनंत योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा सेवा संस्थान साकेत कॉलोनी सिविल लाइन सेकंड बिजनौर अध्यक्ष योगेश द्वारा प्राकृतिक चिकित्सा का शिविर नि:शुल्क लगाया गया। शिविर में मिट्टी चिकित्सा, एक्यूप्रेशर चिकित्सा, स्टीम बाथ, मसाज नि:शुल्क की गई। उपचार करने वालों में प्राकृतिक चिकित्सक सोमदत्त शर्मा, ओपी शर्मा ने प्राकृतिक चिकित्सा की। डॉक्टर नरेंद्र सिंह एवं राम सिंह पाल जिला प्रभारी पतंजलि ने यज्ञ किया।

राम नवमी के अवसर पर डॉक्टर नरेंद्र सिंह ने सभी को हार्दिक बधाई दी और कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों पर चलना है, हमें उनके भाइयों से सीखना है, पिताजी दशरथ से सीखना है, भाइयों के आदर्श पर चलना है, माता सीता के आदर्शों पर चलना है, हमें समाज के कल्याण के लिए राष्ट्र के निर्माण के लिए कार्य करना है। इस अवसर पर जीतू सिरोही, अश्वनी सिरोही, सदुपुरा से श्री राम सिंह, रामपुर दास नगीना से राखी, धामपुर से किरण, भोगपुर से रामलाल, आदमपुर से कविता, रिंकू, पृथ्वी मलकपुर से सुमन, नगीना से जयमाला, बाकरपुर से कृष्ण कुमार, धनवाला से रवि कुमार, मौजमपुर जान से रिया, प्रेमवती, पिंकी, अक्षय, साकेत कॉलोनी से सोनम आदि सभी लोगों ने उपचार कराया।

एफपीओ द्वारा ग्राम अगरी में मृदा परीक्षण की अभिनव पहल

एफ.पी.ओ. द्वारा ग्राम अगरी में मृदा परीक्षण की अभिनव पहल

बिजनौर। ग्राम अगरी में कृषक उत्पादक संगठन “हल्दौर फेड फारमर्स प्रोड्यूसर कम्पनी लिमिटेड” द्वारा एक मृदा परीक्षण लैब स्थापित की जा रही है।

एफ.पी.ओ. के सीईओ विकास कुमार ने बताया कि इस प्रयोगशाला में कृषक नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, पीएच, ईसी,सल्फर, जिंक, बोरोन, कापर, जीवांश कार्बन आदि की जांच करा सकते हैं। एक मृदा नमूना के सभी तत्वों की टेस्टिंग की फीस 400 रूपये निर्धारित की गयी है। इसके साथ ही यदि कोई कृषक कुछ चुनिंदा तत्वों की जांच कराना चाहता है तो इसकी फीस तुलनात्मक रूप से उसी तरह से कम हो जाएगी। नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश में से किसी एक तत्व की जांच के लिए ₹28 देने होंगे। पीएच मान की जांच के लिए ₹48 तथा ऑर्गेनिक कार्बन के लिए 65 रुपए का शुल्क देय होगा। एक मृदा नमूने के संपूर्ण तत्वों की जांच के लिए लगभग 1 घंटे का समय लगता है। कृषक उत्पादक संगठन के चेयरमैन ब्रह्मपाल सिंह द्वारा बताया गया कि जनपद बिजनौर में किसी भी एफपीओ द्वारा यह अनूठी पहल है तथा संतुलित उर्वरक प्रयोग हेतु यह प्रयोगशाला मील का पत्थर साबित होगी।
स्थापित की जाने वाली प्रयोगशाला का निरीक्षण उप कृषि निदेशक गिरीश चन्द्र द्वारा किया गया। मौके पर उपस्थित कृषकों को उप कृषि निदेशक द्वारा जानकारी दी गई कि मृदा परीक्षण से भूमि में उपलब्ध पोषक तत्वों के स्तर की जानकारी होगी तथा आगामी मौसम में बोई जाने वाली फसल के लिए पोषक तत्वों की सही आवश्यकता की जानकारी से संतुलित उर्वरकों का प्रयोग कर सकेंगे, जिससे उत्पादन लागत में कमी आएगी। इस अवसर पर उनके साथ उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी बिजनौर व आत्मा प्रभारी योगेन्द्र पाल सिंह योगी उपस्थित रहे। आत्मा प्रभारी द्वारा उपस्थित कृषकों से परिचर्चा में जैविक कृषि अपनाए जाने पर बल दिया गया।

आयुर्वेदिक धूपबत्ती के धुएं से भागेगा कोरोना

कोरोना से बचाएगा एयर वैद्य। धूप चिकित्सा पद्धति पर भारत में हुआ पहला अध्ययन। बीएचयू और एमिल फार्मास्युटिकल्स ने मिलकर किया है अध्ययन। 19 तरह की जड़ी बूटियों का अहम रोल।

नई दिल्ली (एजेंसी)। कोरोना वायरस से बचाव में धूपबत्ती अहम भूमिका निभाएगी। आयुर्वेद में वर्षों से चली आ रही धूप चिकित्सा पद्धति पर भारत में हुए दुनिया के पहले वैज्ञानिक अध्ययन के बाद वैज्ञानिकों ने यह दावा किया है। वैज्ञानिकों ने “एयर वैद्य” की खोज की है, जो संक्रमण से बचाव के अलावा उसे प्रसारित भी नहीं होने देता।

अब कोरोना से बचाएगा एयर वैद्य, धूप चिकित्सा पद्धति पर भारत में हुआ पहला अध्ययन

एयर वैद्य एक धूप है, जिसकी सुगंध के जरिये 19 तरह की जड़ी बूटियों का सेवन दिन में दो बार कर कोरोना संक्रमण से बचा जा सकता है। इतना ही नहीं एक पारदर्शी केबिन में बंद मक्खियों पर भी इसका परीक्षण हुआ है,, जिसमें किसी भी तरह के हानिकारक तत्व की पहचान नहीं हुई। यानी कि इंसानों के लिए एयर वैद्य को पूरी तरह से सुरक्षित पाया गया है। इस अध्ययन को बनारस हिंदू विवि (बीएचयू) और एमिल फार्मास्युटिकल्स ने मिलकर किया है। नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद की क्लीनिकल रजिस्ट्री ऑफ इंडिया में भी पंजीयन के बाद यह अध्ययन दो समूह में किया गया।

बीएचयू के वरिष्ठ डॉ. केआरसी रेड्डी ने बताया कि 19 जड़ी-बूटियों से खोजा गया एयर वैद्य एक हर्बल धूप (एवीएचडी) के रुप में है। हाल ही में इस पर दूसरे चरण का क्लीनिकल ट्रायल पूरा हुआ है। दो अलग अलग समूह में हुए इस अध्ययन में पता चला है कि दिन में दो बार इसके इस्तेमाल करने पर कोरोना संक्रमण से बचाव किया जा सकता है।

एक सवाल पर डॉ. रेड्डी ने बताया कि एक समूह में 100 और दूसरे समूह में 150 यानी 250 लोगों को इस अध्ययन में शामिल किया गया। एक समूह को एयर वैद्य की धूप चिकित्सा सुबह-शाम दी गई। दूसरे समूह के लोगों को यह चिकित्सा नहीं दी गई। 30 दिन तक यह प्रक्रिया अपनाने के बाद जब कोविड जांच हुई तो पता चला कि जिन्होंने एयर वैद्य का इस्तेमाल नहीं किया उनमें 37 फीसदी लोग संक्रमित मिले। जबकि जिन्होंने इसका इस्तेमाल किया उनमें महज चार फीसदी संक्रमित मिले। एयर वैद्य की वजह से इनमें से किसी भी रोगी में लक्षण विकसित नहीं हुआ।

एमिल फार्मास्युटिकल के कार्यकारी निदेशक डॉ. संचित शर्मा ने बताया कि राल, नीम, वासा, अजवाइन, हल्दी, लेमन ग्रास और वच सहित 19 जड़ी बूटियों पर अध्ययन हुआ है। इस दौरान एयर वैद्य में चार किस्म के औषधीय गुण वायरस रोधी होना, सूजनरोधी होना, सूक्ष्मजीव रोधी और प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत करना शामिल हैं। डॉ. रेड्डी का कहना है कि यही चारों गुण कोरोना वायरस के खिलाफ बचाव में कार्य करते हैं।

सीएससी सेंटरों पर मनाया गया गणतंत्र दिवस

सीएससी सेंटरों पर मनाया गया गणतंत्र दिवस। प्रधानमंत्री के विज़न लोकल फ़ॉर वोकल को बढ़ावा। जिला प्रबंधक ने दी ग्रामीण ई स्टोर की जानकारी।


मलिहाबाद,लखनऊ। सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्रालय भारत सरकार की संस्था सीएससी ई- गवर्नेंस सर्विजेज़ इंडिया लिमिटेड द्वारा संचालित कॉमन सर्विस सेंटरों के माध्यम से 73 वें गणतंत्र दिवस का आयोजन मलिहाबाद के गोपेश्वर ऑनलाइन सेंटर तहसील कैम्पस सहित जिले के 800 से ज्यादा सेंटरों पर हुआ।

इस दौरान विशिष्ट अतिथियों द्वारा झंडारोहण किया गया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री के विज़न लोकल फ़ॉर वोकल को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीण ई स्टोर की जानकारी जिला प्रबंधक रवींद्र वर्मा द्वारा दी गई। सीएससी के विभिन सर्विसेज हेतु आयुष्मान भारत, ई-श्रम पंजीकरण, प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान, किसान जनधन योजना, फसल बीमा योजना, सम्माननिधि योजना आदि का कैम्प लगाकर लाभार्थी का पंजीकरण किया गया। वहीं जिला प्रबंधक रवींद्र वर्मा ने कॉमन सर्विस सेंटरों की उपयोगिता के प्रति लोगों को जागरूक करते हुए बताया कि केंद्र सरकार से लेकर प्रदेश सरकार तक जनहित में संचालित सभी योजनाओं का लाभ कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से आम लोगों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। अब आपको अपने गांव में ही सभी सरकारी सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।

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फिलीपींस के साथ ब्रह्मोस्त्र के सौदे की दूर तक जाती गूंज


फिलीपींस को ब्रह्मोस्त्र मिसाइल बेचने का सौदा करने भारत दुनिया के उन चंद देशों के सूची में आ गया जो दूसरे देशों को शस्त्र बेचते हैं। यह भारत की बड़ी उपलब्धि है। ये खबर दुनिया भर की मीडिया में चर्चा बनी। संपादकीय लिखे गए। ब्रह्मोस्त्र की बिक्री का यह शोर इस बात का नहीं है कि भारत ने 375 मिलियन डॉलर के हथियार बेचे हैं बल्कि यह शोर इसलिए है कि देखो, दुनिया की हथियार बाजार में एक और नया बेचने वाला देश आ गया है।
ब्रह्मोस मिसाइल के लिए ये पहला विदेशी ऑर्डर है।फिलीपींस को 36 ब्रह्मोस्त्र बेची जानी है। रिपोर्टों के मुताबिक ब्रह्मोस्त्र को लेकर दक्षिण पूर्व एशिया के कुछ और देशों के साथ बातचीत की जा रही है। हम शस्त्र काफी समय से निर्यात कर रहे हैं। ब्रह्मोस्त्र को लेकर चर्चा में इसलिए आए कि यह दुनिया की आधुनिकतम मिसाइल है। चीन इसके निर्माण और टैस्टिंग को लेकर कई बार आपत्ति दर्ज करा चुका है। अभी हिंदुस्तान एयरनोटिक्स का मारीशस को एडवास लाइस् हैलिकाप्टर (एएचएल एम के −3) की एक यूनिट देने का सौदा हुआ है। मारीशस पहले भी इस कंपनी के हैलिकाप्टर प्रयोग कर रहा है। भारत ने वियतनाम के साथ भी 100 मिलियन डॉलर यानि 750 करोड़ रुपये का रक्षा समझौता किया है, जिसमें वियतनाम को भारत में बनी 12 हाई स्पीड गार्ड बोट दी जाएंगी। भारत अर्मेनिया को 280 करोड़ की रडार प्रणाली निर्यात कर रहा है। भारत 100 से ज्यादा देशों को राष्ट्रीय मानक की बुलेटप्रूफ जैकेट का निर्यात शुरू कर रहा है। भारत की मानक संस्था ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (बीआईएस) के मुताबिक, बुलेटप्रूफ जैकेट खरीददारों में कई यूरोपीय देश भी शामिल हैं। अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी के बाद भारत चौथा देश है, जो राष्ट्रीय मानकों पर ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की बुलेटप्रूफ जैकेट बनाता है। भारत में बनी बुलेटप्रूफ जैकेट की खूबी है कि ये 360 डिग्री सुरक्षा के लिए जानी जाती है।


42 देश भारत से हथियार खरीद रहे हैं। इनमें से बहुत सारे देश वो हैं, जो चीन से परेशान हैं और अब भारत हथियार देकर उनकी मदद कर रहा है।
वर्तमान भारत सरकार रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने पर ज़ोर देती रही है। इसके लिए कई वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध भी लगाया है। भारत रक्षा क्षेत्र में निर्यात बढ़ाने का लक्ष्य लेकर भी चल रहा है। पिछले साल दिसंबर में रक्षा मंत्रालय ने संसद में एक सवाल के जवाब में बताया कि 2014-15 में भारत का रक्षा क्षेत्र में निर्यात 1940.64 करोड़ रुपये था । 2020-21 में ये बढ़कर 8,435.84 करोड़ रुपये हो गया।साल 2019 में प्रधानमंत्री ने रक्षा उपकरणों से जुड़ी भारतीय कंपनियों को साल 2025 तक पांच अरब डॉलर तक के निर्यात का लक्ष्य दिया।
सुपरसोनिक मिसाइल। रैडार सिस्टम । और भी बहुत कुछ।इनकी बिक्री के लिए आज बहुत बड़ा बाजार मौजूद है और सब हमारे बड़े शत्रु चीन पैदाकर रहा है। चीन के अपनी सीमा से सटे देशों से ही नहीं सुदूरवर्ती देशों से विवाद है। साउथ चाइना-सी में चीन की बढ़ती दादागिरी से फिलीपींस सहित दक्षिणी पूर्वी एशियाई देश परेशान हैं। दक्षिणी पूर्वी एशियाई देशों ने चीन को जवाब देने की ठानी है। पांच देश- फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ब्रूनेई और इंडोनेशिया का मिलकर एक गठबंधन बनाने की बात चल रही है। ये गठबंधन साउथ चाइना-सी में आक्रमक चीन को जवाब देने के लिए है और इनके लिए भारत एक बढ़िया और सस्ता शस्त्र विक्रेता हो सकता है।
पिछले दो दशकों में चीन ने बांग्लादेश, म्यांमार, पाकिस्तान, श्रीलंका और अफगानिस्तान जैसे देशों को आधुनिक हथियार बेचे। चीन ऐसा करके भारत को घेरना चाहता है। अब चीन के खिलाफ भारत ने भी इसी रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। भारत ने चीन के शत्रु देशों से दोस्ती और उन्हे मजबूत करने की नीति पर तेजी से आगे बढ़ना प्रारंभ कर दिया।

आधुनिक शस्त्र का निर्यात ये रक्षा क्षेत्र के विकास की कहानी है, जबकि हमने कई क्षेत्र में अच्छा कार्य किया है।कोराना महामारी के आने से पहले हम इसके बचाव के लिए प्रयोग होने वाला कोई उपकरण नही बनाते थे। अब हम मास्क , पीइपी किट, वैंटीलेटर के साथ कोराना की वैक्सीन भी बना रहे हैं। अपने देश के 150 करोड़ से ज्यादा नागरिकों को तो वैक्सीन लगी ही,दुनिया के कई देशों को हमने वैक्सीन मुक्त दी। आज कई देशों में इसकी मांग हैं।
देश बदल रहा है। तेजी से बदल रहा है।कुछ समय पूर्व तक वह अपनी जरूरतों के दूसरे देशपर निर्भर था। सेना की जरूरत के लिए दूसरे बड़े देश के आगे हाथ फैलाने पड़ते थे अब यह गर्व की बात है कि वह दूसरे देशों को अन्य सामान ही नहीं शस्त्र बेचने लगा है।
मुझे याद आता है 1965 का भारत− पाकिस्तान युद्ध का समय।उस समय हम अपनी जरूरत का गेंहू और अन्य अनाज भी पैदा नही कर पाते थे।अमेरिका अपना घटिया लाल गेंहू हमें बेचता था। ये देश में राशान की दुकानों से जनता को बांटा जाता था। 1965 के पाकिस्तान युद्ध के समय अमेरिका ने देश के प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री को धमकाया था कि वह युद्ध रोंके नहीं तो हम भारत को गेंहू की आपूर्ति बंद कर देंगें। भारत के देशवासी भूखे मरने लगेंगे। शास्त्री जी ने उसकी बात को नजर अंदाज कर दिया था।उन्होंने देशवासियों से अपील की थी कि अनाज के संकट को देखते हुए सप्ताह में एक दिन उपवास रखें।उसी के साथ हमने मेहनत की। उत्पादन बढ़ाया।कल− कारखाने लगाए। आज हम काफी आत्म निर्भर हो गये। दुनियाभर में भारत की प्रतिभा का आज डंका बजा है। देश के वैज्ञानिक और तकनीकि विशेषज्ञ दुनिया के प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवा दे रहे हैं। भारतीय उत्पादों की दुनिया में मांग हैं। हम विकास और निर्माण के नए आयाम बना रहे हैं।


अशोक मधुप
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)
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आजादी का अमृत महोत्सव एवं चौरी-चौरा शताब्दी समारोह की थीम पर किया जाएगा: डीएम उमेश मिश्रा

बिजनौर। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने कहा कि उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशों के अनुपालन में 24 जनवरी, 2022 को “उत्तर प्रदेश दिवस” के रूप में मनाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 से प्रतिवर्ष 24 जनवरी को उत्तर प्रदेश राज्य की स्थापना दिवस के रूप में उत्तर प्रदेश दिवस का आयोजन किया जा रहा है। विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी आगामी 24 जनवरी को उत्तर प्रदेश दिवस का आयोजन सभी जिलों में वर्तमान समय में लागू आदर्श आचार संहिता तथा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष उत्तर प्रदेश दिवस का आयोजन आजादी का अमृत महोत्सव एवं चौरी-चौरा शताब्दी समारोह की थीम पर किया जाएगा। इस अवसर पर जिला स्तर पर विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इसके अंतर्गत राष्ट्रीय गीत का गायन, पुलिस बैंड द्वारा रामधुन का वादन आदि भी सम्मिलित होंगे। उन्होंने बताया कि जिले की स्थानीय बोली भाषा में आजादी से जुड़े लोगों के गीतों का गायन आजादी की कथाओं पर आधारित नाटक तथा नृत्य नाटिकाओं तथा जिले की समृद्ध संस्कृति को प्रदर्शित करने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों का जन सहभागिता के आधार पर आयोजन भी किया जाएगा।
उन्होंने निर्देश दिए कि कार्यक्रम स्थल पर जिले के गौरवशाली इतिहास, चौरी-चौरा गोरखपुर की घटना तथा स्वतंत्रता संग्राम में जिले के योगदान, शहीद स्मारकों एवं स्थानों पर आधारित अभिलेख एवं चित्र दृश्यों का आयोजन करना सुनिश्चित करें तथा कार्यक्रम के अंतर्गत जिले की शहीद स्मारकों, पर्यटन स्थलों पर आधारित ऑनलाइन फोटोग्राफी तथा पेंटिंग प्रतियोगिताओं का भी आयोजन कर युवा वर्ग को कार्यक्रम में भागीदार बनाएं। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि कार्यक्रम स्थल पर “एक जनपद एक उत्पाद” के अंतर्गत पारंपरिक विशिष्ट उत्पाद के शिल्पी/ कर्मकारों की कला का प्रदर्शन स्वयं सहायता समूह के माध्यम से तथा यूपी के स्टार्टअप पर आधारित प्रदर्शनियों का आयोजन सुनिश्चित किया जाए।


जिलाधिकारी श्री मिश्रा ने उक्त संबंध में आदेशित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश दिवस के आयोजन के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में कोविड-19 की परिस्थितियों के दृष्टिगत अनिवार्य रूप से कोविड हैल्थ डैस्क मुख्य चिकित्सा अधिकारी के पर्यवेक्षण में स्थापित कराई जाए तथा सोशल डिस्टेंसिंग का भी अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले में उत्तर प्रदेश दिवस कार्यक्रम का आयोजन उसकी मूल मंशा के अनुरूप कराना सुनिश्चित करें और कार्यक्रमों के फोटोग्राफ्स एवं विवरण ईमेल आईडी updivas1@gmail.com पर प्रेषित किया जाना सुनिश्चित करें।

दूसरी कंपनियों का खेल बिगाड़ रहा BSNL

BSNL ने डेली 3GB डेटा और अनलिमिटेड कॉलिंग के साथ निकाला एक्स्ट्रा वैलिडिटी का प्लान। बिगाड़ा दूसरी कंपनियों का खेल।

BSNL ने बिगाड़ा दूसरी कंपनियों का खेल, डेली 3GB डेटा और अनलिमिटेड कॉलिंग के साथ निकाला एक्स्ट्रा वैलिडिटी का प्लान  

नई दिल्ली (एजेंसी)। सरकारी टेलिकॉम कंपनी BSNL अपने प्रीपेड प्लान्स और ऑफर्स से प्राइवेट कंपनियों को कड़ी टक्कर दे रही है। इसी कड़ी में बीएसएनएल अपने 2399 रुपये वाले ऐनुअल प्लान में 90 दिन की एक्स्ट्रा वैलिडिटी ऑफर कर रहा है। कंपनी ने इस ऑफर घोषणा पिछले महीने की थी और यह 15 जनवरी को खत्म होने वाला था। हालांकि, ऐसा नहीं हुआ और यूजर्स की डिमांड को देखते हुए बीएसएनएल का यह ऑफर अभी भी लाइव है। 2399 रुपये वाले प्लान में कंपनी 365 दिन की वैलिडिटी देती है, लेकिन इस ऑफर के साथ प्लान की वैलिडिटी बढ़कर 455 दिन की हो जाती है।  

इसी तरह बीएसएनएल अपने तीन महीने की वैलिडिटी वाले प्लान में भी दूसरी कंपनियों के मुकाबले बेहतर बेनिफिट दे रहा है। जियो से तुलना करें तो जियो अपने यूजर्स 666 की कीमत में 84 दिन की वैलिडिटी वाला प्लान ऑफर करता है, जिसमें डेली 1.5जीबी डेटा मिलता है। वहीं, बीएसएनएल का क्वॉटर्ली प्लान 485 रुपये का है और इसमें आपको 90 दिन की वैलिडिटी और डेली 1.5जीबी डेटा मिलेगा। 

जियो के 2999 रुपये वाले प्लान में 365 दिन की वैलिडिटी
जियो के इस प्लान में एक साल की वैलिडिटी मिलती है। इंटरनेट यूज करने के लिए कंपनी इस प्लान में हर दिन 2.5 जीबी डेटा देती है। अनलिमिटेड वॉइस कॉलिंग के साथ आने वाले इस प्लान आपको डेली 100 फ्री एसएमएस का भी फायदा होगा। वहीं, बीएसएनएल के 2399 रुपये वाले प्लान में आपको हर दिन 3जीबी डेटा और अनलिमिटेड वॉइस कॉलिंग जैसे बेनिफिट मिलेंगे। 

इंटरनेशनल नेचुरोपैथी ऑर्गनाइजेशन के जिला अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र सिंह सम्मानित

बिजनौर। जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एसके बबली ने इंटरनेशनल नेचुरोपैथी ऑर्गनाइजेशन के जिला अध्यक्ष डॉक्टर नरेंद्र सिंह को उनके सामाजिक कार्यों के लिए सम्मान स्वरूप गुरु गोविंद सिंह जी का चित्र भेंट किया।

पूर्व अध्यक्ष एसके बबली ने डॉक्टर नरेंद्र सिंह को योग और प्राकृतिक चिकित्सा, एक्यूप्रेशर चिकित्सा, मसाज चिकित्सा, रंग चिकित्सा, जल चिकित्सा, बिना किसी दवाई के चिकित्सा आदि के जरिये समाज की नि:शुल्क सेवा करने के लिए सम्मानित किया। साथ ही उनसे आशा की, कि इसी प्रकार समाज की सेवा करते रहेंगे। इस अवसर पर साथ में बार एसोसिएशन के एडवोकेट भी उपस्थित रहे। विदित हो कि वरिष्ठ अधिवक्ता एसके बबली इंटरनेशनल नेचुरोपैथी ऑर्गनाइजेशन यूनिट बिजनौर के संरक्षक भी हैं।

फिट इंडिया – फिट रहो

फिट इंडिया लोगो
स्कूल-सप्ताह-प्रमाण पत्र

फिट इंडिया मूवमेंट के बारे में

फिट इंडिया मूवमेंट 29 अगस्त, 2019 को प्रधान मंत्री द्वारा फिटनेस को हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने की दृष्टि से शुरू किया गया था। आंदोलन का मिशन व्यवहार में बदलाव लाना और अधिक शारीरिक रूप से सक्रिय जीवन शैली की ओर बढ़ना है। इस मिशन को प्राप्त करने की दिशा में, फिट इंडिया निम्नलिखित उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए विभिन्न पहल करने और कार्यक्रम आयोजित करने का प्रस्ताव करता है:

  • फिटनेस को आसान, मजेदार और मुफ्त के रूप में बढ़ावा देना।
  • फिटनेस और विभिन्न शारीरिक गतिविधियों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए जो केंद्रित अभियानों के माध्यम से फिटनेस को बढ़ावा देते हैं।
  • स्वदेशी खेलों को बढ़ावा देना।
  • फिटनेस को हर स्कूल, कॉलेज/विश्वविद्यालय, पंचायत/गांव आदि तक पहुंचाने के लिए।
  • भारत के नागरिकों के लिए जानकारी साझा करने, जागरूकता बढ़ाने और व्यक्तिगत फिटनेस कहानियों को साझा करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए एक मंच तैयार करना।

अपने फिटनेस स्तर की जांच करें, अपने कदमों को ट्रैक करें। अपनी नींद को ट्रैक करें, अपने कैलोरी सेवन को ट्रैक करें, फिट इंडिया इवेंट्स का हिस्सा बनें, अनुकूलित डाइट प्लान प्राप्त करें आयु-वार फिटनेस स्तर फिटनेस मंत्र फिट इंडिया मिशन लोगों को अपने दैनिक जीवन में कम से कम 30-60 मिनट की शारीरिक गतिविधियों को शामिल करके फिट इंडिया मूवमेंट का हिस्सा बनने के लिए प्रोत्साहित करता है।आंदोलन का मिशन व्यवहार में बदलाव लाना और अधिक शारीरिक रूप से सक्रिय जीवन शैली की ओर बढ़ना है।

फिटनेस की खुराक आधा घंटा रोज- इनसाइट्स फिट इंडिया ने फिटनेस के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देने और फैलाने के लिए कई अभियान शुरू किए हैं और यह सुनिश्चित करने के लिए गतिविधियां शुरू की जा सकती हैं कि फिटनेस हर स्कूल, कॉलेज / विश्वविद्यालय, पंचायत / गांव आदि तक पहुंचे।

चीन को पटखनी देने की एक और तैयारी

नई दिल्ली। भारत सरकार चीन को पटखनी देने की तैयारी में है। दरअसल सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले बोर्ड के मामले में देश अब आत्मनिर्भर बनेगा। इसके मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने पीएलआई योजना को मंजूरी दी है। सरकार को इस योजना के तहत अगले 5-6 वर्षों में 76,000 करोड़ रुपए  (10 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक) के निवेश का अनुमान है।

विदित हो कि भारत में सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले बोर्ड आयात किया जाता है। भारत आयात के लिए मुख्यतौर पर चीन पर निर्भर है। अब सरकार के ताजा फैसले से चीन पर से निर्भरता कम हो जाएगी।

सरकार का प्लान: दूरसंचार और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस फैसले से माइक्रोचिप के डिजाइन, विनिर्माण, पैकिंग और परीक्षण में मदद मिलेगी। वहीं, एक संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित होगा। अश्विनी वैष्णव के मुताबिक भारत के करीब 20 फीसदी इंजीनियर्स सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में हैं। इस संख्या को बढ़ाने के लिए 85 हज़ार हाइली क्वालिफाइड, वेल ट्रेंड इंजीनियर के लिए ‘चिप्स टू स्टार्टअप’ प्रोग्राम बनाया गया है। इसमें बी-टेक, एम-टेक, पीएचडी इंजीनियर्स को तैयार किया जाएगा।

पीआईबी के अनुसार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने और भारत को इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाइन एवं विनिर्माण के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से, देश में सेमीकंडक्टरों और डिस्प्ले इकोसिस्टम के विकास के लिए व्यापक कार्यक्रम को मंजूरी दी है। यह कार्यक्रम सेमीकंडक्टरों और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग के साथ-साथ डिजाइन के क्षेत्र में कंपनियों को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी प्रोत्साहन पैकेज प्रदान करके इलेक्ट्रॉनिक सामग्रियों के निर्माण में एक नए युग की शुरुआत करेगा। यह सामरिक महत्व तथा आर्थिक आत्मनिर्भरता के इन क्षेत्रों में भारत के प्रौद्योगिकीय नेतृत्व के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा।

सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स की नींव हैं, जो उद्योग 4.0 के तहत डिजिटल परिवर्तन के अगले चरण की ओर आगे बढ़ा रहे हैं। सेमीकंडक्टरों और डिस्प्ले प्रणालियों का उत्पादन बहुत जटिल तथा प्रौद्योगिकी की अधिकता वाला क्षेत्र है, जिसमें भारी पूंजी निवेश, उच्च जोखिम, लंबी अवधि और पेबैक अवधि तथा प्रौद्योगिकी में तेजी से बदलाव शामिल हैं और इसके लिए अत्यधिक एवं निरंतर निवेश की आवश्यकता होती है। यह कार्यक्रम पूंजी सहायता और प्रौद्योगिकीय सहयोग की सुविधा प्रदान करके सेमीकंडक्टरों और डिस्प्ले प्रणाली के उत्पादन को बढ़ावा देगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सिलिकॉन सेमीकंडक्टर फैब, डिस्प्ले फैब, कंपाउंड सेमीकंडक्टरों/सिलिकॉन फोटोनिक्स/सेंसर (एमईएमएस सहित) फैब, सेमीकंडक्टर पैकेजिंग (एटीएमपी/ओएसएटी), सेमीकंडक्टर डिजाइन के काम में लगी हुई कंपनियों/संघों को आकर्षक प्रोत्साहन सहायता प्रदान करना हैं।

आन बान व शान के साथ हुई तिरंगा दौड़

बिजनौर। स्वाधीनता के अमृत महोत्सव के अंतर्गत बिजनौर में तिरंगा दौड़ आयोजित की गई। तिरंगा दौड़ में 6 वर्ष के कृष्णा व 7 वर्ष की काव्या मुख्य आकर्षण रहे। 1000 से अधिक शहर वासियों ने दौड़ में प्रतिभाग किया।


स्वाधीनता के अमृत महोत्सव के अंतर्गत आरबीआईटी एवं क्रीड़ा भारती द्वारा संयुक्त रुप से बिजनौर शहर में तिरंगा दौड़ का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में 6 वर्ष से 70 वर्ष के धावकों द्वारा प्रतिभाग किया गया। तिरंगा दौड़ नेहरू स्टेडियम से प्रारंभ होकर नुमाइश ग्राउंड, निरीक्षण भवन, विकास भवन, रोडवेज, पोस्ट ऑफिस चौराहा, सिविल लाइन, महाराणा प्रताप चौक, जजी चौक होते हुए नेहरू स्टेडियम पर समाप्त हुई। तिरंगा दौड़ का शुभारंभ मुख्य विकास अधिकारी केपी सिंह, आरबीआईटी के प्रबंध निदेशक सनी देशवाल, जिला क्रीड़ा अधिकारी जय वीर सिंह व क्रीडा भारती के अध्यक्ष योगेंद्र पाल सिंह द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।


डॉ. राघव मेहरा व पंकज कुमार विश्नोई द्वारा देश भक्ति के गण गीत कराए गए। तिरंगा दौड़ का मुख्य आकर्षण ग्राम जमालपुर के 6 वर्षीय कृष्णा व 7 वर्षीय काव्या रहीं। इस दौरान भारत माता की जय व वंदे मातरम के नारे लगातार हवाओं में गूंजते रहे। तिरंगा दौड़ की शुरुआत पंडित विनोद गोस्वामी द्वारा वेद मंत्र के उच्चारण व शंख ध्वनि जे साथ की गई।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्य विकास अधिकारी केपी सिंह ने स्वाधीनता आंदोलन के महानायकों के बारे में बताते हुए कहा कि 1947 में प्राप्त स्वाधीनता हमारे पूर्वजों का बलिदान है। इसे हमें समाज में आपसी सौहार्द्र कायम करते हुए देश व समाज के उत्थान हेतु कार्य करने की आवश्यकता है। युवा इसमें एक बहुत बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार रहे।


क्रीड़ा भारती के जिला अध्यक्ष योगेंद्र पाल सिंह ने तिरंगा दौड़ के आयोजन के संबंध में बताते हुए कहा कि 1947 में देश को स्वतंत्रता यूं ही नहीं मिली; स्वतंत्रता की प्राप्ति के लिए लाखों युवाओं ने अपनी कुर्बानियां दी हैं। इन क्रांतिकारियों में न जाने कितने ऐसे क्रांतिकारी हैं, जिनके बारे में किताबों में नहीं पढ़ाया जाता है और न ही बताया जाता है। ऐसे सभी जाने अनजाने क्रांतिकारियों को नमन करने एवं उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए तिरंगा दौड़ का आयोजन शहर में किया गया है। देश को शक्तिशाली बनाने एवं विश्व गुरु बनाने हेतु युवाओं की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। युवाओं को देश की प्रगति एवं सुरक्षा के लिए अथक प्रयास करने होंगे।

आरबीआईटी के प्रबंध निदेशक सनी देशवाल ने कहा कि देशभक्ति से ओतप्रोत युवाओं की फिटनेस हेतु क्रीड़ा भारती जब भी सहयोग का अनुरोध करेगी, उनकी संस्था सहयोग हेतु तत्पर रहेगी तथा ऐसे आयोजनों में अग्रणी भूमिका निभाएगी। आरबीआईटी द्वारा 400 प्रतिभागियों को नि:शुल्क टी शर्ट व 50 प्रतिभागियों को रानी लक्ष्मीबाई, सरदार भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, सुभाष चंद्र बोस, महाराणा प्रताप, वीर शिवाजी, महात्मा गांधी, अशफाक उल्ला खान, वीर सावरकरआदि महापुरुषों के चित्र देकर सम्मानित किया गया।


दौड़ को सफल बनाने में क्रीड़ा भारती के जैनेंद्र सिंह, देशराज सिंह, विनय कुमार, अरविंद अहलावत, सुबोध कुमार, रोबिन चौधरी, डॉक्टर विकास कुमार, दीपक कुमार, राकेश शर्मा, करण सिंह आदि का सहयोग रहा।

झांसी में बनेंगे टैंक रोधी मिसाइल व हल्के हेलीकाप्टर

लखनऊ (एजेंसी)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज बुंदेलखंड में किसानों-जवानों को तमाम बेशकीमती सौगातें देंगे। इनकी कुल लागत करीब 6600 करोड़ है। महोबा में वह चार बांधों को जोड़ने वाली अर्जुन सहायक परियोजना के साथ करीब 3263 करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण करेंगे। उसके बाद झांसी में डिफेन्स कॉरीडोर के पहले प्रोजेक्ट की आधारशिला रखेंगे। यहां टैंक रोधी मिसाइल व हल्के हेलीकाप्टर बनेंगे। यहीं वह मेगा सोलर पार्क समेत सबसे हल्का स्वदेशी हेलीकॉप्टर, वारफेयर सूट समेत तमाम सैन्य आयुध व उपकरण देंगे। इनकी कुल लागत 3414 करोड़ है।

रानी का किले भी जाएंगे मोदी-
झांसी में प्रधानमंत्री रानी लक्ष्मीबाई के जन्मदिवस समारोह में शामिल होने से पहले रानी झांसी का किला देखेंगे। अंग्रेजों से युद्ध के दौरान रानी जिस स्थान से घोड़े पर सवार होकर कूदी थीं, वह भी देखेंगे। किले के सबसे ऊंचे बुर्ज से वह शहर का नजारा लेंगे। मोदी जो तोहफे देने वाले हैं, उनमें से डिफेंस कॉरीडोर को हटा दें तो ज्यादातर पानी से संबंधित हैं। बुंदेलखंड के सातों जिले दशकों से जलसंकट ग्रस्त रहे हैं। यह योजनाएं 500 से ज्यादा गांवों, 10 लाख से ज्यादा किसानों को लाभान्वित करेंगी। इनमें ललितपुर का भावनी बांध, महोबा की अर्जुन सहायक परियोजना मुख्य हैं।

इतिहास दोहराने की कोशिश
विधानसभा चुनाव की दहलीज पर खड़े यूपी में चुनावी शंखनाद पहले ही हो चुका है। अब 19 सीटों वाले बुंदेलखंड में मोदी के ताबड़तोड़ दो कार्यक्रम हो रहे हैं। 2017 के विस चुनाव में भाजपा ने यहां की सभी 19 सीटें जीत ली थीं। पार्टी पर इस बार भी वही इतिहास दोहराने का दबाव है। पिछले चुनाव में बुंदेलखंड की दो सीटें महरौनी और राठ भाजपा ने करीब एक लाख वोटों से जीती थीं। दो अन्य सीटें उरई और ललितपुर क्रमश: 80 और 58 हजार से जीती थीं। इस इलाके में भाजपा कोई भी सीट 16 हजार से कम अंतर से नहीं जीती। पानी यहां सबसे बड़ी जरूरत है। जल-संकट दूर करने वाली अरबों की योजनाएं इसीलिए बड़ी तेजी से पूरी की गईं, जिनका लोकार्पण मोदी कल करने वाले हैं।

2014 से लगातार जीत रही भाजपा
6 दिसंबर 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद समाजवादी पार्टी और बसपा जैसे क्षेत्रीय राजनीतिक खिलाड़ियों ने बुंदेलखंड के राजनीतिक परिदृश्य पर कब्जा करने के लिए भाजपा को पछ़ाड़ दिया था, लेकिन 2014 में पार्टी ने जोरदार वापसी की, तब से भाजपा लगातार जीत हासिल कर रही है। बुंदेलखंड में गैर यादव ओबीसी और गैर जाटव दलितों की एक बड़ी आबादी है, जिन्होंने इन चुनाव में भाजपा को वोट दिया था। बुंदेलखंड में दलितों की आबादी लगभग 30 प्रतिशत और मुसलमानों की सात प्रतिशत आबादी है। 

बुंदेलखंड को मिलने वाले तोहफे
महोबा में 3263 करोड़ की योजनाएं
अर्जुन सहायक परियोजना: 2655 करोड़
रतौली बांध परियोजना: 54 करोड़
मझगवां-चिल्ली सिंचाई परियोजना: 18 करोड़
भावनी बांध परियोजना: 512 करोड़
पांच अन्य परियोजनाएं:24 करोड़
झांसी में 3414 करोड़ की सौगात
600 मेगावाट अल्ट्रामेगा सोलर पार्क: 3013 करोड़
झांसी डिफेंस कॉरिडोर: 400 करोड़
एकता पार्क:  ₹1.30 करोड़

डेढ़ घंटे झांसी में… प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार को महोबा में एक घंटे और झांसी में डेढ़ घंटे रहेंगे। वह 2:35 बजे महोबा पहुंचेंगे और शाम को करीब साढ़े छह बजे झांसी से उनकी वापसी होगी। प्रधानमंत्री खजुराहो एयरपोर्ट में उतरकर हेलीकाप्टर से महोबा पहुंचेंगे। महोबा हेलीपैड से पौने तीन बजे रैली स्थल पुलिस लाइन पहुंचेंगे जहां पर एक घंटे रहेंगे। महोबा से वह करीब चार बजे झांसी के लिए रवाना होंगे। महोबा में उनके कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, जलशक्ति मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह के अलावा प्रदेश सरकार के कई मंत्री रहेंगे।  प्रधानमंत्री 4:50 बजे झांसी पहुंचेंगे और यहां करीब डेढ़ घंटे रहेंगे। मुख्य कार्यक्रम के अलावा वह 15 मिनट झांसी का किला भी देखेंगे। झांसी से साढ़े छह बजे पीएम मोदी वापस होंगे। 

मौजूद रहेंगे-
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा राज्यमंत्री अजय भट्ट, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के अलावा चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत, थल सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल विवेक राम चौधरी और नौ सेनाध्यक्ष एडमिरल कर्मवीर सिंह भी झांसी पहुंचेंगे। झांसी में किले के मैदान में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय एमएसएमई राज्यमंत्री भानुप्रताप वर्मा, विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह, जिले के प्रभारी मंत्री रामनरेश अग्निहोत्री, श्रम एवं सेवायोजन राज्यमंत्री मनोहर लाल पंथ समेत झांसी, ललितपुर और जालौन जिले के विधायक, सांसद, जिला पंचायत अध्यक्ष समेत 750 लोग मौजूद रहेंगे।

लोग दीर्घायु होंगे, स्वस्थ होंगे तो राष्ट्र का धन विकास के कार्यों में लगेगा: राजेश सैनी

राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा दिवस पर गोष्ठी का आयोजन। मंडी धनौरा से आए चेयरमैन का फूल मालाओं से भव्य स्वागत 

बिजनौर। इंटरनेशनल नेचुरोपैथी ऑर्गनाइजेशन इकाई जनपद बिजनौर के जिला अध्यक्ष डॉक्टर नरेंद्र सिंह संरक्षक राजपाल सिंह योगी, अनंत योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा सेवा संस्थान के अध्यक्ष योगेश कुमार, सचिव अनंत कुमार, कोषाध्यक्ष श्रीमती सुनीता, सदस्य सोमदत्त शर्मा, उपाध्यक्ष राजवीर सिंह  एडवोकेट, मंडी धनौरा जिला अमरोहा से आए राजेश सैनी चेयरमैन भाजपा, उनकी पत्नी डॉली सैनी, संजीव सैनी, ललित सैनी, चंद्रप्रकाश, चंद्रभान,  जयप्रकाश, बिजनौर नहर कॉलोनी से डालचंद, भरत विहार से इंद्रपाल, मास्टर राजीव कुमार, रवि कुमार प्राकृतिक चिकित्सा गोष्ठी में उपस्थित रहे।

इस अवसर पर श्री सैनी ने कहा 18 नवंबर 2021 प्राकृतिक चिकित्सा के कार्यक्रम के लिए समाज को स्वस्थ करने की योजना बनाई जाए। समाज को बिना किसी औषधि के कैसे स्वस्थ करना है, इसके लिए गांव-गांव, शहर-शहर में प्राकृतिक चिकित्सा का प्रचार प्रसार आंदोलन के रूप में हो ताकि प्रत्येक व्यक्ति बिना किसी औषधि के दीर्घायु और स्वस्थ हो। इससे समाज का और राष्ट्र का दोनों प्रकार से लाभ होगा। लोग दीर्घायु होंगे, स्वस्थ होंगे तो राष्ट्र का धन विकास के कार्यों में लगेगा। इंटरनेशनल नेचरोपैथी ऑर्गेनाइजेशन यूनिट बिजनौर एवं योगी अनंत योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा सेवा ट्रस्ट के लिए पूरी मदद करने के लिए पूरा सहयोग करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि हम प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग के लिए तन मन धन से पूर्ण तरीके से सहायता करेंगे।

इस अवसर पर डॉक्टर नरेंद्र सिंह जिला अध्यक्ष इंटरनेशनल नेचरोपैथी ऑर्गेनाइजेशन यूनिट बिजनौर, योगी अनंत योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष योगेश कुमार ने चेयरमैन राजेश सैनी का फूल मालाओं से स्वागत किया और जनपद बिजनौर में आने के लिए उनका हृदय से धन्यवाद किया। बाद में सभी लोगों को जलपान कराया गया।

जिस साड़ी को हम ठुकरा रहे हैं, आज दुनिया के कई देश उसे अपना रहे हैं

जिस साड़ी को हम ठुकरा रहे हैं आज दुनिया के कई देश उसे अपना रहे हैं

जिस साड़ी को हम ठुकरा रहे हैं आज दुनिया के कई देश उसे अपना रहे हैं

आज समय बदल रहा है। जींस पैंट शर्ट, पंजाबी सलवार−सूट ज्यादा पहने जाने लगे। साड़ी को पहनने की परेशानी से बचने के लिए महिलाओं और युवतियों ने टॉप−जीन्स, सलवार−सूट स्वीकार कर लिया। भारतीय महिलाओं का सबसे पसंदीदा परिधान साड़ी अब समारोह में पहनी जाने लगी।

हाल ही में दिल्ली के एक रेस्टोरेंट में एक महिला को इसलिए प्रवेश नहीं दिया गया कि वह साड़ी पहने थी। समाचार आया। बड़ा अजीब-सा लगा। भारत में महिलाओं की वेशभूषा में सदियों से साड़ी स्वीकार्य है। महिलाएं साड़ी पहनती रही हैं। साड़ी का पहनावा भारतीय है। हालांकि क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग भी पहनावे रहे पर साड़ी भारतीयों की महिलाओं की पहचान मानी गई। साड़ी पहने महिला को रेस्टोरेंट में न जाने देना अजीब-सा लगा। लगा कि आधुनिकता में हम इतने रम गए कि हम अपना पहनावा, रहन सहन, वेशभूषा ही भूल गए।

आज समय बदल रहा है। जींस पैंट शर्ट, पंजाबी सलवार−सूट ज्यादा पहने जाने लगे। साड़ी को पहनने की परेशानी से बचने के लिए महिलाओं और युवतियों ने टॉप−जीन्स, सलवार−सूट स्वीकार कर लिया। भारतीय महिलाओं का सबसे पसंदीदा परिधान साड़ी अब समारोह में पहनी जाने लगी। साड़ी अब किसी समारोह या विवाह आदि में ही पहने जाने वाले परिधान में आ गई। हालांकि भारतीय महिलाओं को आज भी सबसे ज्यादा पसंद साड़ी ही है।

लगभग सात साल पहले श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के प्रतिनिधिमंडल में मुझे श्रीलंका जाने का अवसर मिला। सात दिन का प्रवास था। एक बड़े मॉल में हम खरीदारी करने के लिये गए। मॉल में लगभग सभी अटेंडेंट महिलाएं थीं। उनमें एक−दो को छोड़ सब साड़ी पहने थीं। कुछ अजीब-सा लगा। भारत, जहां महिलाओं का पहनावा साड़ी है, वहां की युवतियां अब साड़ी नहीं पहनतीं। यहां शान के साथ युवतियां साड़ी पहने ड्यूटी कर रहीं हैं। श्रीलंका की संसद में हमारे लिए भोजन की व्यवस्था थी। भोजन के बाद संसद का भ्रमण भी कार्यक्रम में शामिल था। मैं देखकर आश्चर्यचकित था कि वहां कार्य करने वाली सभी युवतियां और महिलाएं साड़ी पहने हुए थीं। ऐसा लग रहा था कि श्रीलंका में नहीं भारत में खड़ा हूं। हमारी गाईड भी साड़ी पहने थी। हम कोलंबो के एक पार्क में जाते हैं। यहां एक नवयुगल फोटो शूट करा रहा है। युवती बहुत खूबसूरत रंगबिरंगी साड़ी पहने हुए है। श्रीलंका में घूमने के दौरान काफी तादाद में महिलाएं साड़ी पहने मिलीं। साड़ी श्रीलंका स्टाइल में अलग होती है। भारतीय से अलग श्रीलंकन साड़ी पहनती हैं। ये नीचे से लहंगा टाइप होती है। ऊपर से उसे साड़ी की तरह बांधती हैं।

श्रीलंका की हमारी पत्रकार साथी सुभाषिनी डी. सिल्वा ने बताया कि साड़ी श्रीलंकाई महिलाओं की नेशनल ड्रेस है। कई सरकारी और प्राइवेट कार्यालयों में भी महिलाओं के लिए साड़ी पहनकर ऑफिस आने के आदेश हैं। महिलाओं के लिये साड़ी पहनना गौरव की बात मानी जाती है। हमारे यहां साड़ी पहनने का प्रचलन कम होता जा रहा है, जबकि दूसरे देश वाले इसे स्वीकार कर रहे हैं। 2012 में मैं नेपाल के होटल ड्रेगन में रुका था। ये एक चाइनीज होटल है। एक दिन सवेरे नाश्ते के दौरान मैंने और मेरी पत्नी ने चीन की दो लड़कियों को सफेद साड़ी पहने देखा। ठिगना कद। गोरा दूधिया रंग और गुलाबी चेहरा। ऐसे बदन पर सफ़ेद साड़ी ऐसा लग रहा था, कि स्वर्ग की अप्सराएं धरती पर उतर आईं हों। उनसे कुछ दूर बैठे हम उन्हें काफी देर देखते रहे। वह तो हिंदी−अंग्रेजी नहीं समझ पा रहीं थीं, किंतु होटल के प्रबंधक ने बताया कि चीन की नई युवतियां साड़ी पसंद करतीं हैं। इसमें नया लुक आता है। ये गर्व की बात है कि हम भारतीय जिस पहनावे को त्याग रहे हैं, दूसरे देश उसे स्वीकार कर रहे हैं।

-अशोक मधुप (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

प्रधानमंत्री ने विशेष गुणों वाली फसलों की 35 किस्में कीं राष्ट्र को समर्पित


राष्ट्रीय जैविक तनाव प्रबंधन संस्थान, रायपुर का नवनिर्मित परिसर राष्ट्र को समर्पित।

कृषि विश्वविद्यालयों को ग्रीन कैंपस अवार्ड भी वितरित।

“जब भी किसानों और कृषि को सुरक्षा कवच मिलता है, उनका तेजी से विकास होता है”- मोदी

“हमारी प्राचीन कृषि परंपराओं के साथ-साथ भविष्य की ओर आगे बढ़ना भी समान रूप से महत्वपूर्ण है”

नई दिल्ली (PMO)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से विशेष गुणों वाली फसलों की 35 किस्में राष्ट्र को समर्पित कीं। उन्होंने राष्ट्रीय जैविक तनाव प्रबंधन संस्थान, रायपुर का नवनिर्मित परिसर भी राष्ट्र को समर्पित किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कृषि विश्वविद्यालयों को ग्रीन कैंपस अवार्ड वितरित किये। उन्होंने उन किसानों के साथ बातचीत की, जो नवोन्मेषी तरीकों का उपयोग करते हैं तथा सभा को भी संबोधित किया।  

प्रधानमंत्री ने जम्मू और कश्मीर के गांदरबल की श्रीमती जैतून बेगम, बुलंदशहर उत्तर प्रदेश के किसान और बीज उत्पादक श्री कुलवंत सिंह, बारदेज, गोवा की रहने वाली श्रीमती दर्शना पेडनेकर, मणिपुर के श्री थोइबा सिंह व उधम सिंह नगर, उत्तराखंड के निवासी श्री सुरेश राणा से उनके क्षेत्र व कार्य से संबंधित बातचीत की।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले छह-सात वर्षों में कृषि से संबंधित चुनौतियों के समाधान के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी का प्राथमिकता के आधार पर उपयोग किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा, “हमारा सबसे ज्यादा ध्यान अधिक पौष्टिक बीजों पर है, जो खासकर बदलते मौसम में, नई परिस्थितियों के अनुकूल हैं।”

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि जब भी किसानों और कृषि को सुरक्षा कवच मिलता है तो उनका विकास तेजी से होता है। उन्होंने बताया कि भूमि के संरक्षण के लिए 11 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए गए हैं। प्रधानमंत्री ने सरकार की किसान-हितैषी पहलों के बारे में बताया, जैसे – किसानों को जल सुरक्षा प्रदान करने के लिए लगभग 100 लंबित सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने के लिए अभियान, फसलों को बीमारियों से बचाने के लिए किसानों को नई किस्मों के बीज उपलब्ध कराना और इस प्रकार अधिक उपज प्राप्त करना। उन्होंने कहा कि एमएसपी बढ़ाने के साथ-साथ खरीद प्रक्रिया में भी सुधार किया गया ताकि अधिक से अधिक किसानों को इसका लाभ मिल सके। रबी सीजन में 430 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की खरीद की गई है और किसानों को 85 हजार करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है। महामारी के दौरान गेहूं खरीद केंद्रों की संख्‍या को तीन गुना से अधिक बढ़ाया गया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि किसानों को तकनीक से जोड़कर हमने उनके लिए बैंकों से मदद लेना आसान बना दिया है। आज किसानों को मौसम की जानकारी बेहतर तरीके से मिल रही है। हाल ही में 2 करोड़ से अधिक किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्‍ध कराए गए हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण जो नए प्रकार के कीट, नई बीमारियां, महामारियां आ रही हैं, इससे इंसान और पशुधन के स्वास्थ्य पर भी बहुत बड़ा संकट आ रहा है और फसलें भी प्रभावित हो रही है। इन पहलुओं पर गहन रिसर्च निरंतर जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब साइंस, सरकार और सोसायटी मिलकर काम करेंगे तो उसके नतीजे और बेहतर आएंगे। किसानों और वैज्ञानिकों का ऐसा गठजोड़, नई चुनौतियों से निपटने में देश की ताकत बढ़ाएगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि किसान को सिर्फ फसल आधारित इनकम सिस्टम से बाहर निकालकर, उन्हें वैल्यू एडिशन और खेती के अन्य विकल्पों के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। उन्‍होंने कहा कि साइंस और रिसर्च के समाधानों से अब मोटे अनाजों सहित अन्य अनाजों को और विकसित करना ज़रूरी है। उन्‍होंने कहा इसका मकसद ये कि देश के अलग-अलग हिस्सों में, अलग-अलग ज़रूरतों के हिसाब से इन्हें उगाया जा सके। उन्होंने लोगों से कहा कि वे संयुक्त राष्ट्र द्वारा आगामी वर्ष को मिलेट वर्ष घोषित किए जाने के फलस्‍वरूप उपलब्‍ध होने वाले अवसरों का उपयोग करने के लिए तैयार रहें।

बीते 6-7 सालों में साइंस और टेक्नॉलॉजी को खेती से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए प्राथमिकता के आधार पर उपयोग किया जा रहा है।

विशेष रूप से बदलते हुए मौसम में, नई परिस्थितियों के अनुकूल, अधिक पोषण युक्त बीजों पर हमारा फोकस बहुत अधिक है: PM @narendramodi— PMO India (@PMOIndia) September 28, 2021

पिछले वर्ष ही कोरोना से लड़ाई के बीच में हमने देखा है कि कैसे टिड्डी दल ने भी अनेक राज्यों में बड़ा हमला कर दिया था।

भारत ने बहुत प्रयास करके तब इस हमले को रोका था, किसानों का ज्यादा नुकसान होने से बचाया था: PM @narendramodi— PMO India (@PMOIndia) September 28, 2021

किसानों को पानी की सुरक्षा देने के लिए, हमने सिंचाई परियोजनाएं शुरू कीं, दशकों से लटकी करीब-करीब 100 सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने का अभियान चलाया।

फसलों को रोगों से बचाने के लिए, ज्यादा उपज के लिए किसानों को नई वैरायटी के बीज दिए गए: PM @narendramodi— PMO India (@PMOIndia) September 28, 2021

MSP में बढ़ोत्तरी के साथ-साथ हमने खरीद प्रक्रिया में भी सुधार किया ताकि अधिक-से-अधिक किसानों को इसका लाभ मिल सके।

रबी सीजन में 430 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा गेंहूं खरीदा गया है।

इसके लिए किसानों को 85 हजार से अधिक का भुगतान किया गया है: PM @narendramodi— PMO India (@PMOIndia) September 28, 2021

किसानों को टेक्नोलॉजी से जोड़ने के लिए हमने उन्हें बैंकों से मदद को और आसान बनाया गया है।

आज किसानों को और बेहतर तरीके से मौसम की जानकारी मिल रही है।

हाल ही में अभियान चलाकर 2 करोड़ से ज्यादा किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड दिए गए हैं: PM @narendramodi— PMO India (@PMOIndia) September 28, 2021

जलवायु परिवर्तन के कारण जो नए प्रकार के कीट, नई बीमारियां, महामारियां आ रही हैं, इससे इंसान और पशुधन के स्वास्थ्य पर भी बहुत बड़ा संकट आ रहा है और फसलें भी प्रभावित हो रही है।

इन पहलुओं पर गहन रिसर्च निरंतर ज़रूरी है: PM @narendramodi— PMO India (@PMOIndia) September 28, 2021

जब साइंस, सरकार और सोसायटी मिलकर काम करेंगे तो उसके नतीजे और बेहतर आएंगे।

किसानों और वैज्ञानिकों का ऐसा गठजोड़, नई चुनौतियों से निपटने में देश की ताकत बढ़ाएगा: PM @narendramodi— PMO India (@PMOIndia) September 28, 2021

किसान को सिर्फ फसल आधारित इनकम सिस्टम से बाहर निकालकर, उन्हें वैल्यू एडिशन और खेती के अन्य विकल्पों के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है: PM @narendramodi— PMO India (@PMOIndia) September 28, 2021

साइंस और रिसर्च के समाधानों से अब मिलेट्स और अन्य अनाजों को और विकसित करना ज़रूरी है।

मकसद ये कि देश के अलग-अलग हिस्सों में, अलग-अलग ज़रूरतों के हिसाब से इन्हें उगाया जा सके: PM @narendramodi— PMO India (@PMOIndia) September 28, 2021

Cafe D, शॉपर्स प्राइड मॉल, बिजनौर

बच्चों पर कोरोना वैक्सीन का परीक्षण पूरा, कंपनी DCGI को सौंपेगी रिपोर्ट

COVID-19 Vaccine | DCGI Approves Phase II/III Clinical Trial Of Covaxin On  2-18 Year-olds

नई दिल्ली (एजेंसी)। भारत बायोटेक ने अठारह वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर कोवाक्सिन टीके के दूसरे और तीसरे चरण का परीक्षण पूरा कर लिया है। कंपनी परीक्षण से जुड़े आंकड़े अगले सप्ताह ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) को सौंप सकती है।

परीक्षण में शामिल थे एक हजार बच्चे- भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक डॉ. कृष्णा एला ने ये जानकारी देते हुए बताया कि पीडियाट्रिक कोवाक्सिन के दूसरे और तीसरे चरण का परीक्षण पूरा हो गया है। डाटा का अध्ययन जारी है। अगले सप्ताह हम परीक्षण के जुड़े आंकड़े को दवा नियंत्रक को सौंप सकते हैं। परीक्षण में करीब एक हजार बच्चों को शामिल किया गया था।

Bharat Biotech's Covaxin gets DCGI nod to conduct clinical trials on  children - Coronavirus Outbreak News

नाक के जरिये टीका– डॉ. कृष्णा एला ने बताया कि इंट्रानेजल वैक्सीन का भी परीक्षण दूसरे चरण में हैं। उम्मीद है कि अगले माह इसका परीक्षण पूरा हो जाएगा। टीके से नाक के भीतर वायरस के खिलाफ इम्युन रिसपॉन्स बनता है। वायरस जब नाक के जरिए प्रवेश करता है तो ये वायरस को वहीं पर नष्ट कर सकती है। इस टीके का परीक्षण 650 लोगों पर किया गया है।

देश के बाद विदेश- भारत बायोटेक ने ये भी स्पष्ट किया है कि कंपनी दूसरे देशों को भी टीका निर्यात करने को तैयार है। डॉ. एला ने कहा कि अभी हमारी कोशिश देश में टीके की जरूरत को पूरा करना है। देश में टीकाकरण लगभग पूरा हो जाएगा तब आगे इस पर विचार किया जा सकता है।

Cafe D, शॉपर्स प्राइड मॉल, बिजनौर

स्वदेशी Covaxin को इस सप्ताह मिल सकती है WHO की मंजूरी

भारत की स्वदेशी वैक्सीन Covaxin को इस सप्ताह मिल सकती है WHO की मंजूरी

Good News: भारत की स्वदेशी वैक्सीन Covaxin को इस सप्ताह मिल सकती है WHO की मंजूरी

नई दिल्ली (एजेंसी)। भारत की स्वदेशी वैक्सीन ‘कोवाक्सिन’ को इस सप्ताह विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की मंजूरी मिल सकती है। जानकारी के मुताबिक, डब्ल्यूएचओ की मंजूरी के लिए कुछ औपचारिकताएं शेष हैं। इससे पहले कोविशील्ड और स्पू‍तनिक V को पहले ही विश्व स्वास्थ्य संगठन की मंजूरी मिल चुकी है। माना जा रहा है कि वैक्सीन के परीक्षण से जुड़े डेटा के प्रकाशित होने के बाद डब्ल्यूएचओ इस वैक्सीन को अपनी मंजूरी दे देगा।

India's “Covaxin” vaccine shows high efficacy against COVID-19 infections  in phase 3 trial | Gavi, the Vaccine Alliance

विदित हो कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पिछले महीने ही कहा था कि भारत बायोटेक की कोरोना वैक्सीन कोवाक्सिन को आपातकालीन मंजूरी देने पर सितंबर अंत तक फैसला लिया जा सकता है। इस टीके को अभी तक किसी पश्चिमी देश की नियामक संस्था से भी मंजूरी नहीं मिली है।

समुद्र से दुश्मन देशों की मिसाइल पर नजर रखेगा भारत का ‘ध्रुव’

अब पाक-चीन की खैर नहीं! समुद्र से दुश्मन देशों की मिसाइल पर नजर रखेगा भारत का ‘ध्रुव’, जानें इसकी खासियतें

नई दिल्ली (एजेंसी)। समुद्र में भारत की ताकत और बढ़ने वाली है। भारत 10 सितंबर को पहला मिसाइल ट्रैकिंग शिप ‘ध्रुव’ लॉन्च करेगा। न्यूक्लियर और बैलेस्टिक मिसाइल को ट्रैक करने वाला ये भारत का पहला जहाज है। ध्रुव की लॉन्चिंग के साथ ही भारत इस तकनीक से लैस दुनिया का 5वां देश बन जाएगा। फिलहाल केवल अमेरिका, फ्रांस, रूस और चीन के पास ही ये तकनीक है। सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल विशाखापट्टनम में ‘ध्रुव’ को लॉन्च करेंगे। 

मिसाइल को ट्रैक करने वाले ये जहाज रडार और एंटीना से लैस होते हैं। इनका काम दुश्मन की मिसाइल और रॉकेट को ट्रैक करना होता है। ट्रैकिंग शिप की शुरुआत अमेरिका से हुई, जिसने द्वितीय विश्व युद्ध के बचे हुए जहाजों को ट्रैकिंग शिप में बदल दिया।

10 सितंबर को कमीशन होने वाले इस जहाज के जरिए 2 हजार किमी पर चारों ओर से नजर रखी जा सकती है. कई सार रडार से लैस इस जहाज के जरिए एक से अधिक टार्गेट पर नजर गड़ाई जा सकती है. जहाजों से निकलने वाले इलेक्ट्रोमैग्नेनिट रेडिएशन के जरिए ध्रुव उनकी सटीक लोकेशन बता सकता है.

‘डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइनजेशन’ (DRDO), ‘नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन’ (NTRO) और भारतीय नौसेना ने मिलकर ‘ध्रुव’ को तैयार किया है। ध्रुव को तैयार करने का काम जून 2014 में शुरू हुआ जो 2018 में पूरा हुआ और फिर 2019 से इसका समुद्र में परीक्षण किया जाने लगा।

सबसे उन्नत तकनीक से लैस- ध्रुव जहाज रडार टेक्नोलॉजी की सबसे उन्नत तकनीक ‘इलेक्ट्रिॉनिक स्‍कैन्‍ड अरे रडार्स’ (AESA) से लैस है। इसके जरिए दुश्मन की सैटेलाइट्स, मिसाइल की क्षमता और टार्गेट से उसकी दूरी जैसी चीजों का पता लगाया जा सकता है। ध्रुव परमाणु मिसाइल, बैलेस्टिक मिसाइल और जमीन आधारित सैटेलाइट्स को भी आसानी से ट्रैक कर सकता है।

ध्रुव जहाज भारत के लिए बेहद अहमियत वाला जहाज है. इंटर कॉन्टीनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल को ट्रैक करने के लिए ध्रुव जहाज काफी मायने रखता है. सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को इस तरह के कई जहाज तैयार करने की जरूरत है.

2 हजार किमी तक निगहबानी- 10 सितंबर को कमीशन होने वाले इस जहाज के जरिए 2 हजार किमी पर चारों ओर नजर रखी जा सकती है। कई रडार से लैस इस जहाज के जरिए एक से अधिक टार्गेट पर नजर गड़ाई जा सकती है। जहाजों से निकलने वाले इलेक्ट्रोमैग्नेनिट रेडिएशन के जरिए ध्रुव उनकी सटीक लोकेशन बता सकता है। ध्रुव जहाज के रडार डोम में X- बैंड रडार लगाए गए हैं। लंबी दूरी तक नजर बनाए रखने के लिए इसमें S-बैंड रडार लगाए गए हैं। इनके जरिए हाई रेजॉल्यूशन पर टार्गेट को देखना, जैमिंग से बचना और लंबी दूरी तक स्कैन करना मुमकिन है। वहीं, जहाज से चेतक जैसे मल्टीरोल हेलिकॉप्टर का भी संचालन हो सकता है।

बेहद खुफिया रहा प्रोजेक्ट- भारत ने ध्रुव प्रोजेक्ट को बेहद खुफिया रखा और इसे दुनिया की नजरों से बचाए रखा। इसका कोडनेम पहले VC-11184 रखा गया। इस नाम को विशाखापट्टनम में यार्ड नंबर के तौर पर दिया गया। मेक इन इंडिया इनीशिएटिव के तहत विशाखापट्टनम के एक बंद डोकयार्ड में ध्रुव को तैयार किया गया। ध्रुव जहाज भारत के लिए बेहद अहमियत वाला जहाज है। इंटर कॉन्टीनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल को ट्रैक करने के लिए ध्रुव जहाज काफी मायने रखता है। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को इस तरह के कई जहाज तैयार करने की जरूरत है।

खादी को ‘राष्ट्रीय वस्त्र’ के रूप में अपनाएं: उप राष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति ने देश के नागरिकों से खादी को ‘राष्ट्रीय वस्त्र’ के रूप में अपनाने की अपील की

खादी को व्यापक रूप से स्वीकार करना वर्तमान समय की मांग- उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति ने शैक्षणिक संस्थानों से यूनिफार्म के लिए खादी का इस्तेमाल करने का आग्रह किया

उपराष्ट्रपति ने ‘खादी इंडिया क्विज प्रतियोगिता’ का शुभारंभ किया

नई दिल्ली (PIB)। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने आज देश के नागरिकों से खादी को ‘राष्ट्रीय वस्त्र’ के रूप में अपनाने की अपील की और इसके इस्तेमाल को व्यापक रूप से बढ़ावा देने का आग्रह किया। श्री नायडू ने विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियों से इसके लिए आगे आने तथा खादी के उपयोग को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित करने का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति, खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) द्वारा मनाये जा रहे ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के तहत आयोजित ‘खादी इंडिया क्विज प्रतियोगिता’ के शुभारंभ अवसर पर संबोधित कर रहे थे।

खादी इंडिया क्विज प्रतियोगिता- श्री नायडू ने सभी से ‘खादी इंडिया क्विज प्रतियोगिता’ में भाग लेने का आग्रह करते हुए कहा कि यह प्रतियोगिता हमें अपनी जड़ों की ओर वापस ले जाने का एक रोचक माध्यम है, क्योंकि यह हमारे स्वतंत्रता संग्राम के ऐतिहासिक क्षणों और हमारे महान स्वतंत्रता सेनानियों के अद्वितीय योगदान का स्मरण कराती है।

‘आजादी का अमृत महोत्सव’- उपराष्ट्रपति ने ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के हिस्से के रूप में आयोजित अधिकृत ‘दांडी मार्च’ के समापन समारोह में भाग लेने के लिए इस वर्ष 6 अप्रैल को अपनी दांडी यात्रा को याद किया। उन्होंने कहा कि दांडी मार्च में भाग लेने वाले प्रतिभागियों के साथ बातचीत करते हुए उन्हें भारतीय इतिहास के गौरवमयी क्षणों को फिर से जीने का अवसर मिला और उन्होंने इसे “एक बहुत ही समृद्ध अनुभव” कहकर संदर्भित किया।

याद किया स्वतंत्रता सेनानियों का सर्वोच्च बलिदान- हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के सर्वोच्च बलिदान को याद करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि मातंगिनी हाजरा, भगत सिंह, प्रीतिलता वाद्देदार, राजगुरु, सुखदेव और हजारों अन्य स्वाधीनता सेनानियों ने एक स्वतंत्र राष्ट्र के सार्वलौकिक स्वप्न को साकार करने के लिए अपने जीवन का बलिदान करने से पहले दो बार नहीं सोचा। उन्होंने कहा, “इन वीर पुरुषों और महिलाओं ने यह जानते हुए भी सर्वोच्च बलिदान दिया कि वे अपने सपने को हकीकत में बदलता देखने के लिए जीवित नहीं होंगे।”

अभूतपूर्व बदलाव पर प्रसन्नता व्यक्त- श्री नायडू ने पिछले 7 वर्षों में खादी के अभूतपूर्व बदलाव पर प्रसन्नता व्यक्त की और इसके विकास में तेजी लाने के लिए सरकार, केवीआईसी तथा अन्य सभी हितधारकों की सराहना की। उपराष्ट्रपति ने कहा, “मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि केवीआईसी ने पूरे भारत में अपनी पहुंच स्थापित करने में सफलता प्राप्त की है और लोगों को देश के दूर-दराज के कोनों में भी स्थायी स्वरोजगार गतिविधियों से जोड़ा गया है।”

आय का एक स्रोत- उपराष्ट्रपति ने खादी की ऐतिहासिक प्रासंगिकता को याद किया और कहा कि यह स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जनता को जोड़ने के लिए एक बंधनकारी शक्ति थी। श्री नायडू ने कहा कि महात्मा गांधी ने वर्ष 1918 में गरीबी से पीड़ित जनता के लिए आय का एक स्रोत उत्पन्न करने के लिए खादी आंदोलन शुरू किया और बाद में उन्होंने इसे विदेशी शासन के खिलाफ एक शक्तिशाली प्रतीकात्मक उपकरण में बदल दिया।

खादी पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ- खादी के पर्यावरणीय लाभों का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि खादी में शून्य कार्बन फुटप्रिंट है क्योंकि इसके निर्माण के लिए बिजली या किसी भी प्रकार के ईंधन की आवश्यकता नहीं होती है। उन्होंने कहा, “ऐसे समय में जब दुनिया कपड़ों के क्षेत्र में स्थायी विकल्प तलाश रही है, तो हमें यह याद रखना चाहिए कि खादी पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ वस्त्र के रूप में निश्चित ही हमारी आवश्यकताओं को पूरा करती है।”

शैक्षणिक संस्थानों से यूनिफार्म के रुप में मनाने की अपील- उपराष्ट्रपति ने शैक्षणिक संस्थानों से यूनिफार्म के लिए खादी के रूप में इसके उपयोग का मार्ग तलाशने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह न केवल छात्रों को खादी के कई लाभों का अनुभव करने का अवसर देगा बल्कि उन्हें हमारे महान स्वतंत्रता सेनानियों और स्वाधीनता आंदोलन के इतिहास से जुड़ने में भी मदद करेगा। उन्होंने कहा, “अपनी विशिष्ट झिरझिरटी बनावट के कारण खादी हमारी स्थानीय जलवायु परिस्थितियों के लिए काफी उपयुक्त है।” श्री नायडू ने युवाओं से खादी को फैशन स्टेटमेंट बनाने और उत्साह के साथ सभी के द्वारा इसके उपयोग को प्रोत्साहन देने की अपील की।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री नारायण राणे, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्य मंत्री भानु प्रताप सिंह वर्मा, खादी और ग्रामोद्योग आयोग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम के सचिव बीबी स्वैन और अन्य व्यक्ति कार्यक्रम के दौरान मौजूद थे।

Truecaller को टक्कर देगा भारतीय App

Truecaller को टक्कर देने आई ये भारतीय App, जानें क्या है इसमें खास

नई दिल्ली (एजेंसी)। कॉलर आईडी ऐप ट्रूकॉलर को टक्कर देने के लिए भारतीय कॉलर आईडी ऐप लॉन्च हो गया है। इस स्वदेशी कॉलर आईडी का नाम भारतकॉलर है। इसे बनाने वाले इंजीनियरों का दावा है कि यह कॉलर आईडी विदेशी और अन्य कॉलर आईडी की तरह आपके कॉल लॉग्स, कॉन्टैक्ट्स या संदेशों को अपने सर्वर पर अपलोड नहीं करता। न ही इसके कर्मचारियों के पास आपके फोन नंबर्स का डेटाबेस एक्सेस करने का अधिकार है। इस एप के निर्माता का यह कहना है कि वे ट्रूकॉलर से कुछ मामलों में आगे हैं और यह एप भारतीयों को ट्रूकॉलर से बेहतर लगेगी।

BharatCaller App

इस ऐप को भारत के ही कुछ इंजीनियरों ने बनाया है। आईआईएम बैंगलोर के पूर्व छात्र और इस एप की निर्माता टीम के प्रमुख सदस्य, प्रज्ज्वल सिन्हा यह कहते हैं कि यह एप भारत में ट्रूकॉलर का विकल्प बन सकता है और यह पूरी तरह सुरक्षित है। प्रज्ज्वल कहते हैं कि कुछ समय पहले भारतीय सेना ने भारत में ट्रूकॉलर को बैन कर दिया था। इस समय प्रज्ज्वल और उनके मित्र को यह सूझा कि भारत की कोई अपनी कॉलर आइडी एप नहीं है और होनी चाहिए। तभी उन्होंने इस एप को बनाने का फैसला किया।

प्रज्ज्वल बताते हैं कि तीन महीने की रिसर्च के बाद, दिसंबर 2020 में इस एप पर काम शुरू हुआ और इसे पूरी तरह तैयार होने में छह महीने का समय लग गया। ट्रायल्स के सफल होने के बाद इस एप के पहले वर्जन को लॉन्च किया गया, जो करीब 1 करोड़ यूजर्स के उपयोग करने के लायक है। भारतकॉलर के निर्माता कहते हैं कि अभी भी वह अपनी एप को वहां नहीं पहुंचा पाए हैं जहां यह एप अंतर्राष्ट्रीय स्तर की ऐसी दूसरी एप्स से मुकाबला कर सके। अपडेट्स की प्रक्रिया चल रही है और एआई आधारित ऐल्गोरिद्म में सुधार किए जा रहे हैं। वह कहते हैं कि अभी उन्हें काफी काम और करना है।

BharatCaller App

भारतकॉलर एप में क्या है खास 
यह एप बाकी एप्स से इस तरह भिन्न है कि यह अपने यूजरस के कॉन्टैक्ट्स और कॉल लॉग्स को अपने सर्वर पर सेव नहीं करता जिससे यूजर्स की निजता पर कोई प्रभाव न पड़े। साथ ही, इस एप का डाटा इन्क्रिप्टेड फॉर्मैट में स्टोर किया जाता है और इसका सर्वर भारत के बाहर कोई इस्तेमाल नहीं कर सकता है। इसलिए भारतकॉलर एप पूरी तरह से सुरक्षित और यूजर-फ्रेंडली है। भारतकॉलर को विभिन्न भारतीय भाषाओं में लॉन्च किया गया है, जैसे अंग्रेजी, हिन्दी, तमिल, गुजराती, बांग्ला, मराठी आदि। इसके पीछे का कारण है एप को समावेशी यानी इन्क्लूसिव बनाना जिससे हर भारतीय अपने सुख और अपनी पसंद से भाषा चुन सके और उस भाषा में एप को इस्तेमाल कर सके।  इस एप को एंड्रॉयड और iOS का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स, सभी डाउनलोड कर सकते हैं।

किसानों के लिये डिजिटल प्लेटफार्म किसान सारथी लॉन्च

किसानों को उनकी भाषा में ‘सही समय पर सही जानकारी’ प्राप्त करने की सुविधा के लिए डिजिटल प्लेटफार्म किसान सारथी लॉन्च किया गया


किसान डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से वैज्ञानिकों से सीधे कृषि और संबद्ध क्षेत्रों पर व्यक्तिगत परामर्श का लाभ उठा सकते हैं: सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव

नई दिल्ली (PIB)। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर द्वारा संयुक्त रूप से आज वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के 93वें स्थापना दिवस के अवसर पर किसानों को उनकी वांछित भाषा में सही समय पर सही जानकारी प्राप्त करने के लिए एक डिजिटल प्लेटफार्म ‘किसान सारथी’ लॉन्च किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला, कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री कैलाश चौधरी और कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंडलाजे ने की।

इस अवसर पर इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव अजय साहनी, सचिव (डीएआरई) एवं महानिदेशक (आईसीएआर) डॉ. त्रिलोचन महापात्र, डिजिटल इंडिया कारपोरेशन के एमडी एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी अभिषेक सिंह एवं आईसीएआर एवं डीएआरई के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। इस कार्यक्रम को देश भर में किसानों, हितधारकों और आईसीएआर, डीएआरई, सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा केवीके भागीदारों ने देखा।

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री वैष्णव ने दूरदराज के क्षेत्रों में किसानों तक पहुंचने के लिए तकनीकी हस्तक्षेप के साथ किसानों को सशक्त बनाने की दिशा में किसान सारथी की इस पहल के लिए कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को बधाई दी। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफार्म से किसान सीधे तौर पर कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) के संबंधित वैज्ञानिकों कृषि और संबद्ध क्षेत्रों पर व्यक्तिगत सलाह प्राप्त कर सकते हैं।

श्री वैष्णव ने आईसीएआर के वैज्ञानिकों से कहा कि वे किसान की फसल को उनके खेत के गेट से गोदामों, बाजारों और उन जगहों पर ले जाने के क्षेत्र में नए तकनीकी हस्तक्षेपों पर अनुसंधान करें जहां वह कम से कम नुकसान के साथ बेचना चाहते हैं। केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने आश्वासन दिया कि इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय, संचार मंत्रालय, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय किसानों को सशक्त बनाने में आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए हमेशा तैयार रहेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि रेल मंत्रालय फसलों के परिवहन के लिए लगने वाले समय को कम से कम करने की योजना बना रहा है।

श्री वैष्णव ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद को 93वें स्थापना दिवस पर बधाई देते हुए कहा कि कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर के सक्षम नेतृत्व और मार्गदर्शन में किसान सारथी पहल न केवल किसानों की विशिष्ट सूचना आवश्यकताओं को पूरा करने में बल्कि आईसीएआर की कृषि विस्तार, शिक्षा और अनुसंधान गतिविधियों में भी अत्यधिक मूल्यवान होगी।

एकलव्य बाण समाचार

स्वचालित ट्रेन शौचालय सीवरेज निपटान प्रणाली – जैव शौचालयों के लिए एक लागत प्रभावी विकल्प

नई दिल्ली (एकलव्य बाण समाचार)। भारतीय रेलवे की शौचालय प्रणाली को बनाए रखने के लिए शौचालय कचरे के संग्रहण के लिए एक स्वचालित तकनीक का उपयोग किया जा सकता है।स्वचालित तकनीक का रखरखाव आसान है। एक भारतीय वैज्ञानिक द्वारा विकसित जैव शौचालय सात गुना सस्ता विकल्प है।

वर्तमान जैव शौचालय मानव अपशिष्ट को गैस में बदलने के लिए एनारोबिक बैक्टीरिया का उपयोग करते हैं, लेकिन वह बैक्टीरिया यात्रियों द्वारा शौचालयों में फेंकी गई प्लास्टिक और कपड़े की सामग्री को विघटित नहीं कर सकते। इसलिए टैंक के अंदर ऐसी गैर-विघटित सामग्रियों का रखरखाव और उन्हें हटाना कठिन है।

चेब्रोलु इंजीनियरिंग कॉलेज के डॉ. आर. वी. कृष्णैया द्वारा विकसित प्रौद्योगिकी चलती ट्रेनों से शौचालय कचरे के संग्रह और विभिन्न सामग्रियों के अलगाव और उपयोग करने योग्य चीजों में प्रसंस्करण के लिए एक स्वचालित प्रणाली है।

‘मेक इन इंडिया’ पहल के साथ जुड़े विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के उन्नत मैन्युफैक्चरिंग प्रौद्योगिकी कार्यक्रम के समर्थन से विकसित प्रौद्योगिकी को पांच राष्ट्रीय पेटेंट प्रदान किए गए हैं और यह परीक्षण के चरण में है।

स्वचालित प्रणाली में तीन सरल चरण होते हैं-सेप्टिक टैंक (जो ट्रैक के नीचे रखा जाता है, यानी ट्रेन लाइन) टॉप कवर तब खोला जाता है जब ट्रेन क्रमशः इंजन और सेप्टिक टैंक स्थिति में रखे गए रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) सेंसर और रीडर का उपयोग करके सेप्टिक टैंक स्थान पर पहुंच जाती है, शौचालय टैंक में सीवरेज सामग्री को सेप्टिक टैंक में छोड़ दिया जाता है जब वे पारस्परिक रूप से तालमेंल में होते हैं और अंत में सेप्टिक टैंक कवर बंद हो जाता है जब ट्रेन इससे दूर हो जाती है।

ट्रेन के शौचालयों से एकत्र सीवरेज सामग्री को अलग किया जाता है ताकि मानव अपशिष्ट को एक टैंक में संग्रहित किया जा सके, और अन्य सामग्री जैसे प्लास्टिक सामग्री, कपड़े की सामग्री दूसरे टैंक में संग्रहीत की जाती है। मानव अपशिष्ट को उपयोग करने योग्य सामग्री में बदलने के लिए अलग से प्रसंस्कृत किया जाता है। प्लास्टिक और कपड़े की सामग्री अलग से प्रसंस्कृत की जाती है।

इस तकनीक को विशेष रूप से लागत में कमी लाने और समय लेने वाले एनारोबिक बैक्टीरिया उत्पादन की आवश्यकता का निराकरण करने के उद्देश्य से भारतीय रेलवे को लक्षित करते हुए विकसित किया गया है। बायो टॉयलेट के विपरीत, जिसकी लागत एक लाख प्रति यूनिट है, नई तकनीक से लागत घटकर केवल 15 हजार रुपये रह जाती है। डॉ. आर.वी.कृष्णैया ने इस तकनीक को और अधिक बढ़ाने के लिए एमटीई इंडस्ट्रीज के साथ करार किया

विस्तृत विवरण के लिए डा. आर.वी.कृष्णैया  (9951222268, r.v.krishnaiah@gmail.com) से संपर्क किया जा सकता है।

एकलव्य बाण समाचार

अब पुलिस अपराधी को जल्द दिला सकेगी सजा

अहमदाबाद (PIB)। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अहमदाबाद में राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय के नवनिर्मित Centre of Excellence for Research & Analysis of Narcotics and Psychotropic Substances का उद्घाटन किया। श्री शाह ने महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराधों की जाँच पर एक वर्चुअल ट्रेनिंग का भी उद्घाटन किया।

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उद्बोधन के मुख्य बिंदु 👇

दुनियाभर में नेशनल फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय की उत्कृष्टता और प्रतिष्ठा को देखते हुए इस सेंटर को स्थापित करने का निर्णय लिया गया।

देश के क्रिमिनल जस्टिस को और ताकतवर और परिणामलक्षी बनाने के लिए इस विश्वविद्यालय को देश के फलक पर ले जाना बहुत ज़रूरी।

अब थर्ड डिग्री का जमाना नहीं है और कठोर से कठोर व्यक्ति को वैज्ञानिक जाँच के आधार पर सजा दिलवाई जा सकती है।

हमारी नई शिक्षा नीति में वैज्ञानिक शिक्षा पर बहुत ज़ोर दिया गया है, प्रधानमंत्री का आग्रह है कि हमारी शिक्षा नीति और व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि विद्यार्थी हर क्षेत्र में सर्वोच्च प्राप्त करें।

इस सेंटर में बनाए गए साइबर डिफ़ेंस सेंटर और बेलेस्टीक रिसर्च सेंटर पूरे एशिया में अपने प्रकार के अनूठे सेंटर हैं और देश इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रहा है।

साइबर वॉर और साइबर क्राइम के ख़िलाफ़ लड़ाई हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण, भारत की सुरक्षा और प्रधानमंत्री के पाँच ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को पूरा करने के लिए साइबर सुरक्षा बहुत ज़रूरी।

21वीं सदी में भारत के आगे ढेर सारी चुनौतियाँ हैं, इनसे सफलतापूर्वक निपटने के लिए हमें क्रिमिनल जस्टिस को मज़बूत करना होगा, इसके लिए फ़ोरेंसिक साइंस एक महत्वपूर्ण अंग।

सरकार, देशभर के पुलिस अधिकारियों, न्यायाधीशों, वकीलों और क़ानून विश्वविद्यालयों के साथ CrPC, IPC और Evidence Act तीनों में आमूल चूल परिवर्तन करने के लिए एक बहुत बड़ा संवाद कर रही है ताकि इन्हे आज की आवश्यकताओं के हिसाब से आधुनिक बना सकें।

हमारी पुलिस पर नो एक्शन और एक्स्ट्रीम एक्शन का आरोप लगता है, हमें जस्ट एक्शन चाहिए और यह तभी हो सकता है जब वैज्ञानिक साक्ष्य के आधार पर जाँच को आगे बढ़ाएँ।


हमारे समाज, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर मादक पदार्थों का जो बुरा प्रभाव पड़ रहा है इससे पूरा देश चिंतित है।

सरकार ने तय किया है कि हम भारत में नारकोटिक्स पदार्थों को आने भी नहीं देंगे और भारत को उसका रास्ता भी नहीं बनने देंगे।

अपने संबोधन में श्री शाह ने कहा कि कहा कि देश में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दूसरी बार सरकार बनी तब दुनियाभर में नेशनल फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय की उत्कृष्टता और प्रतिष्ठा को देखते हुए इस सेंटर को स्थापित करने का निर्णय लिया गया और यह बिल्कुल उचित फैसला था। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि जब गुजरात फ़ोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी बनी, तब मोदी जी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और वे राज्य के गृह मंत्री थे और जब नेशनल फ़ोरेंसिक सांइस यूनिवर्सिटी बनी तो श्री मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं और वे गृह मंत्री हैं। वर्ष 2009 में श्री मोदी ने यहाँ जो एक छोटा सा बीज बोया था, वह आज क्रिमिनल जस्टिस को मज़बूत बनाने के लिए एक विशाल बट वृक्ष बन गया है।

इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी, प्रदेश के गृह मंत्री प्रदीप सिंह जडेजा, केन्द्रीय गृह सचिव और केन्द्र तथा राज्य सरकार के अनेक वरिष्ठ अधिकारी भी मौजद थे।

आईएनएस डेगा में एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर शामिल

नई दिल्ली। वाइस एडमिरल अजेंद्र बहादुर सिंह, एवीएसएम, वीएसएम, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ, पूर्वी नौसेना कमान (ईएनसी) की उपस्थिति में ‘322 डेगा फ्लाइट’ का इंडक्शन समारोह नौसेना वायु स्टेशन, आईएनएस डेगा में आयोजित किया गया। इस दौरान तीन स्वदेश निर्मित उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर (एएलएच) एमके III शामिल किए गए।  इन समुद्र टोही और तटीय सुरक्षा (एमआरसीएस) हेलीकॉप्टरों को शामिल करने के साथ ही पूर्वी नौसेना कमान को देश के समुद्री हितों की राह में बल की क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा बढ़ावा मिला। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा निर्मित ये हेलीकॉप्टर उड़ान भरने वाली अत्याधुनिक मशीनें हैं और “आत्मनिर्भर भारत” की हमारी खोज की दिशा में एक बड़ा कदम हैं।

Ministry of Defence की ओर से बताया गया कि एएलएच एमके III हेलीकॉप्टरों में ऐसी अनेक कंप्यूटरीकृत प्रणालियां हैं जो पहले केवल भारतीय नौसेना के भारी, बहु-भूमिका वाले हेलीकॉप्टरों पर ही देखी जाती थी। इन हेलीकॉप्टरों में आधुनिक निगरानी रडार और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल उपकरण लगे हैं, जिससे वे दिन और रात दोनों समय लंबी दूरी का खोज और बचाव कार्य करने के अलावा समुद्री टोह की भूमिका भी निभा सकते हैं। विशेष अभियान क्षमताओं के अलावा, एएलएच एमके III में कॉन्स्टेबुलरी मिशन शुरू करने के दृष्टिकोण से भारी मशीनगन भी लगी हुई है। गंभीर रूप से बीमार मरीजों को एयरलिफ्ट करने के लिए एएलएच एमके III हेलीकॉप्टरों पर एक चिकित्सा गहन चिकित्सा इकाई (एमआईसीयू) भी लगी है जिसको हटाया भी जा सकता है । हेलीकॉप्टर में अनेक प्रकार के उन्नत एवियोनिक्स भी हैं, जिससे यह वास्तव में हर मौसमी परिस्थिति में काम करने वाला एयरक्राफ्ट बन गया है ।

उड़ान का नेतृत्व कमांडर एस एस दाश द्वारा फर्स्ट फ्लाइट कमांडर के तौर पर किया जा रहा है, जो सैन्य अभियानों के व्यापक अनुभव वाले एएलएच क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर (क्यूएफआई) हैं।

करो योग-रहो निरोग, योग अपनाएं कोरोना भगाएं

वी. प्रकाश तनोट
वैदिक योग चिकित्सक

‘योग’ सम्पूर्ण मानव जाति को शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ रखने के लिए प्रतिदिन करने का एक ऐसा उपाय है, जिससे व्यक्ति आजीवन स्वस्थ रहते हुए अपनी जीवन यात्रा पूर्ण करता है। हमारे देश के महान योग ऋषि पंतजलि ने अपने विवेक और आध्यात्मिक ज्ञान के आधार पर योग को आठ भागों में विभाजित किया है। यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि। उनके अनुसार इन आठ नियमों का पालन करने वाला मनुष्य ही एक सम्पूर्ण योगी होता है। वस्तुत: देखा जाये तो भिन्न-भिन्न व्यक्तियों, संतों, ऋषियों ने अपने ज्ञान और प्राचीन ग्रंथों के आधार पर योग शब्द की भिन्न-भिन्न व्याख्याएं की हैं, जिन पर फिर कभी मंथन या चिंतन करेंगे। इस वक्त सम्पूर्ण विश्व कोरोना महामारी से जूझ रहा है तो इसी विषय को पूर्व की भांति आगे बढ़ाते हुए आज हम अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिये योग के दो अन्य प्राणायाम 1. सूर्यांग प्राणायाम और 2. चन्द्राग प्राणायाम पर चर्चा करेंगे। इन प्राणायामों का अभ्यास करने से श्वसन तंत्र मजबूत होता हैं। साथ ही शरीर के मुख्य अंग जैसे हृदय, मस्तिष्क, फेफड़ों, लीवर, किडनी, आंतों और आमाश्य को शक्ति मिलती है। 

सूर्यांग प्राणायाम

1. सूर्यांग प्राणायाम– किसी भी ध्यानात्मक आसन से सीधे बैठ जायें। पहले श्वांस को सामान्य करें फिर दाहिने हाथ की मध्यमा व अनामिका अंगुलियों से बाईं नासिका को बंद करके दाहिनी नासिका से श्वांस भरकर दाहिने हाथ के अंगूठे से दाहिनी नासिका को बंद करके बाईं नासिका से निकाल दें। बार-बार इस क्रिया को करें। ध्यान रहे श्वास हमेशा दाहिनी नासिका से लेना है और बायीं नासिका से छोडऩा है। 2 से 3 मिनट अभ्यास करें। 

चंद्राग प्राणायाम

2. चंद्राग प्राणायाम- पूर्व की भांति ध्यानात्मक आसन में बैठ जायें। यह सूर्यांग का विपरीत प्राणायाम है अर्थात इस प्राणायाम में दाहिने हाथ के अंगूठे से दाहिनी नासिका को बंद करके बाईं नासिका से श्वांस भरकर मध्यमा व अनामिका अंगुलियों से बाईं नासिका को बंद करके हमेशा दाहिनी नासिका से बाहर निकालना है। बार-बार इस क्रिया को करें। ध्यान रहे श्वांस हमेशा बाईं नासिका से लेना है व दाहिनी नासिका से छोडऩा है। 2 से 3 मिनट अभ्यास करें।

अब चलते हैं खानपान की तरफ। यदि योग के साथ-साथ एक रोग प्रतिरोधक आहार भी लिया जाये तो सोने पर सुहागा वाली कहावत सिद्ध होती है। कोरोना संक्रमण से हमें बचाने व संक्रमित होने की स्थिति में विटामिन ‘सी’ जिंक और विटामिन ‘डी’ का सेवन हमारे बहुत काम आता है। 

विटामिन ‘सी’ से सम्पन्न फल नींबू, मौसमी, संतरा, ब्रोकली, कीवी, पपीता, आंवला, स्ट्रावरी, अमरूद, अन्नास, मिर्च, अंकुरित मूंग आदि। 

‘जिंक’ से सम्पन्न खाद्य पदार्थमशरूम, तिल, पालक, मसूर दाल, चने, काजू, शतावर, सोयाबीन आदि।

विटामिन ‘डी’ से सम्पन्न खाद्य पदार्थसभी डेयरी प्रोडक्ट जैसे दूध, पनीर आदि। 

नोट: यदि पाठकगण किसी भी प्रकार की जीर्ण, साध्य या फिर कोई ऐसी बीमारी से पीडि़त हैं, जिसका इलाज करते-कराते आप थक चुके हैं और आपने उसको असाध्य मान लिया है। कैसा भी, कितना भी पुराना (स्त्री/पुरुष) रोग हो नीचे दिये नम्बर पर व्हाटसअप या ईमेल करें। आपको आपकी बीमारी का सटीक, स्थाई व  शीघ्र प्रभावी आयुर्वेदिक उपचार बताया जाएगा।

वी. प्रकाश तनोट
वैदिक योग चिकित्सक
(पूर्व वैदिक चिकित्सक एमजेबीवाईएस, महाराष्ट्र)
संपर्क-6395575501

email-snewsdaily24@gmail.com

कोरोना के खिलाफ जंग में इस दवा को मिली मंजूरी

drdo

नई दिल्ली। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से निपटने के लिए भारत तेजी से प्रभावी कदम उठा रहा है। डीआरडीओ की एक लैब इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड साइंसेज द्वारा डॉक्टर रेड्डी की लैब के साथ मिलकर बनाई गई कोरोना की ओरल दवा- 2- डिऑक्सी-डी-ग्लूकोज को भारत में आपात इस्तेमाल की मंजूरी दे दी गई है। दवा के क्लिनिकल ट्रायल के नतीजे बताते हैं कि यह दवा अस्पताल में मौजूद कोरोना के मरीजों की जल्दी रिकवरी में सहायक है और इसी के साथ ही यह दवा मरीजों की ऑक्सीजन की जरूरत को भी कम करती है।

बताया गया है कि इस दवाई को लेने वाले कोरोना मरीजों की रिपोर्ट आरटी-पीसीआर टेस्ट में निगेटिव आई है। इस महामारी मे कोरोना वायरस से जूझ रहे लोगों के लिए यह दवाई काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। पीएम मोदी की कोरोना महामारी के खिलाफ तैयार होकर रहने की बात पर अमल करते हुए डीआरडीओ ने कोरोना की दवा- 2-डीजी बनाने का कदम उठाया। 

अप्रैल 2020 में, महामारी की पहली लहर के दौरान INMAS-DRDO वैज्ञानिकों ने हैदराबाद के सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CCMB) की मदद से प्रयोगशाला में प्रयोग किए गए और पाया कि यह अणु SARS-CoV-2 वायरस के खिलाफ प्रभावी ढंग से काम करता है और वायरस की वृद्धि को रोकता है। इन परिणाणों के आधार पर DCGI ने मई,2020 में इस दवा के दूसरे चरण के ट्रायल करने की मंजूरी दी थी।

DRDO ने अपने उद्योग भागीदार डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज (DRL, हैदराबाद) के साथ मिलकर COVID-19 रोगियों में दवा की सुरक्षा और प्रभावकारिता का परीक्षण  परीक्षण शुरू किया। मई से अक्टूबर 2020 के दौरान किए गए चरण- II के परीक्षणों में, दवा COVID-19 रोगियों में सुरक्षित पाई गई, और उनकी रिकवरी में महत्वपूर्ण सुधार हुआ।

चरण 2A 6 अस्पतालों में आयोजित किया गया था और चरण 2B (खुराक लेकर) ks नैदानिक परीक्षण पूरे देश के 11 अस्पतालों में आयोजित किए गए थे। चरण- II का परीक्षण 110 रोगियों पर किया गया। प्रभावकारिता के रुझानों में,जिन रोगियों का इलाज 2-डीजी के साथ किया गया था। उन रोगियों ने विभिन्न बिंदुओं पर मानक देखभाल (SoC) की तुलना में तेजी से सुधार देखा गया।

करो योग-रहो निरोग कोरोना-साध्य या असाध्य

करो योग-रहो निरोग
विषय- कोरोना-साध्य या असाध्य

वी. प्रकाश तनोट
वैदिक योग चिकित्सक
(पूर्व वैदिक चिकित्सक एमजेबीवाईएस, महाराष्ट्र)
संपर्क-6395575501

कोरोना साध्य है या असाध्य! इस पर चर्चा से पहले मैं थोड़ा योग शब्द पर चर्चा करूंगा। आज के युग में योग अपना परिचय देने के लिए विश्व में किसी सहारे का मोहताज नहीं। योग क्या है? इसका जन्म स्थान क्या है? जन्मदाता कौन है? इसका जन्म कब, क्यों कैसे हुआ? यहां संक्षेप में इतना ही कहा जा सकता है कि योग सदियों पुराना एक ऐसा दिव्य ज्ञान है जिसको अपना कर संपूर्ण मानव जाति, मानव समाज ने स्वयं को शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक, सामाजिक एवं आर्थिक रूप से स्वस्थ रहते हुए जीवन के हर क्षेत्र में तरक्की की है। यह हमें ईश्वर द्वारा प्रदान किया एक ऐसा दिव्य मंत्र है, जिसमें मनुष्य ने योग की विभिन्न क्रियाओं को करते हुए स्वयं की सुप्त शक्तियों और ऊर्जाओं को जागृत करके अपना अकथनीय विकास किया है। देवों के देव महादेव भी एक महान योगी थे।
महर्षि पतंजलि और न जाने कितने ऋषि-मुनियों साधु-संतों ने योग रूपी अमृत को जनसामान्य के बीच में बांटते हुए संसार को इसकी दिव्य शक्तियों से परिचित कराया। वर्तमान समय में योग गुरु माननीय स्वामी रामदेव जी ने अपने अथक प्रयासों द्वारा भारत ही नहीं संपूर्ण जगत में इसका व्यापक प्रचार प्रसार किया है, जिसका फल यह हुआ कि विश्व के एक विशाल मानव समाज ने अपने जीवन में योग को आत्मसात करते हुए स्वयं को शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ बनाते हुए अपने देश की उन्नति में योगदान दिया। विषय व्यापक है, समय का अभाव है इसलिए अपने मुख्य बिंदु कोरोना व्याधि की तरफ चलते हैं, जिसने आज संपूर्ण विश्व में हाहाकार मचा रखा है। विश्व में करोड़ों की आबादी इस व्याधि से त्रस्त है। लाखों लोग काल के गाल में समा चुके हैं। लाखों व्यक्ति अभी भी बीमारी के संक्रमण से जूझ रहे हैं। मानव जीवन को बचाने के लिए सभी देशों की सरकारें अस्पतालों, कोविड वैक्सीन विभिन्न दवाइयों (एलोपैथिक, होम्योपैथिक व आयुर्वेदिक) द्वारा अपने हर संभव प्रयासों द्वारा कोरोना महामारी से पार पाने के लिए युद्ध स्तर पर कोशिशें कर रही हैं। समाज सेवा से जुड़े व्यक्तियों के अनेक समूह भी अपने तन, मन, धन से इसमें भागीदारी कर रहे हैं। एक योगाचार्य व आयुर्वेद का ज्ञाता होने के नाते मैं भी भारत देश की जनता की सेवा के लिए अपना एक छोटा सा योगदान दे रहा हूं। मुझे पूर्ण विश्वास है कि देश की जनता भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन करते हुए मेरे द्वारा बताए गए योग के विभिन्न प्राणायामों, आसनों और विभिन्न आयुर्वेदिक प्राकृतिक चीजों का सेवन करके स्वयं को कोरोना संक्रमण से बचा सकते हैं और संक्रमित रोगी अपने चिकित्सक की सलाह से मेरे द्वारा बताए नुस्खों योग क्रियाओं को करके जल्दी ठीक हो सकते हैं।

ये तीन प्राणायाम हमारे फेफड़ों को संक्रमण से बचाने में व इम्युनिटी बढ़ाने में विशेष कारगर हैं-

१. भस्त्रिका: किसी भी ध्यान वाले आसन में जैसे सुखासन, पद्मासन या सिद्धासन में किसी मैट, दरी या चादर पर सीधे बैठ जाएं। कमर, गर्दन सीधा रखते हुए दोनों हाथों को घुटनों पर ध्यान मुद्रा में रखें। श्वांस को धीरे-धीरे दोनों नासिका रंध्रों से फेफड़ों भरें व छोडं़े। ध्यान रहे श्वांस लेने और छोडऩे का अनुपात समान हो। आंखें बंद करके पूरा ध्यान श्वांस प्रश्वांस पर रखें। दो से 3 मिनट अभ्यास करें। उच्च रक्तचाप व हृदय रोगी इस को तीव्र गति से ना करें।

कपाल भांति प्राणायाम

२.कपाल भांति: किसी भी ध्यानात्मक आसन से पूर्व की भांति सीधे बैठ जाएं। श्वांस को सामान्य करें फिर थोड़ा प्रेशर के साथ नासिका से श्वास को बाहर फेंकें। उसी समय पेट को अधिकतम पीछे की तरफ खींचे। बार-बार इस क्रिया को दोहराएं। 5 मिनट करें।

अनुलोम विलोम प्राणायाम

३.अनुलोम विलोम: पूर्व की भांति बैठ जाएं। पहले श्वांस को सामान्य करें। फिर अपने दाएं हाथ को उठाकर मुंह के सामने लाते हुए अंगूठे से दाहिने नासिका रंध्र को बंद करते हुए बाएं नासिका रंध्र से श्वांस भरें और दाएं हाथ की मध्यमा और अनामिका उंगलियों से बाएं रंध्र को बंद करते हुए अंगूठे को हटाते हुए दाएं रंध्र से निकाल दें। फिर दाहिने रंध्र से भर कर बाएं से निकाल दें। इस क्रिया को 5 मिनट तक करें।

विशेष आयुर्वेदिक सुझाव
१. गर्म पानी में थोड़ा-सा सेंधा नमक डालकर रोज दो से तीन बार गरारे करने से गला संक्रमण से मुक्त रहता है।
२. दो कप पानी में पांच तुलसी पत्र दो लौंग, एक पिप्पली व एक चुटकी दालचीनी पाउडर डालकर हल्की आंच पर इतना पकाएं कि एक कप पानी रह जाए। सुबह-शाम पीने से इम्युनिटी बढ़ती है।
३. रात में सोते समय एक गिलास गर्म दूध में 5 ग्राम शुद्ध हल्दी पाउडर डालकर रोज पिएं।

नोट-पाठकगण अपनी किसी भी जीर्ण/ पुरानी बीमारी से संबंधित किसी भी समस्या के लिए गुरुजी से व्हाट्सएप नंबर पर मैसेज करें।
प्रस्तुति-
वी. प्रकाश तनोट
वैदिक योग चिकित्सक
(पूर्व वैदिक चिकित्सक एमजेबीवाईएस, महाराष्ट्र)
संपर्क-6395575501

आयुष-64 और काबासुरा कुडिनीर के राष्ट्रव्यापी वितरण का अभियान शुरू


कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर का मुकाबला करने के लिए मंत्रालय की नई पहल

मुख्य फोकस अस्पताल के बाहर के कोविड-19 रोगी

नई दिल्ली। देश में कोविड-19 संक्रमण की दूसरी लहर का मजबूती से मुकाबला करने के लिए आयुष मंत्रालय आज शुक्रवार 07 मई 2021 से अपनी पॉली हर्बल औषधि आयुष-64 और काबासूरा कुडिनीर को कोविड-19 संक्रमित रोगियों (जो अस्पताल में भर्ती नहीं हैं) को वितरित करने के लिए एक देशव्यापी अभियान शुरू कर रहा है। इन दवाओं की उपयोगिता और प्रभावशीलता बहु-केंद्रीयक्लीनिकल परीक्षणों के माध्यम से साबित हो चुकी है। युवा मामले और खेल राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और आयुष मंत्री (अतिरिक्त प्रभार) किरेन रिजिजू द्वारा शुरू किए जा रहे इस अभियान से यह सुनिश्चित किया जायेगा कि दवाएँ पारदर्शी तरीके से ज़रूरतमंदों तक पहुँचे। अभियान में मुख्य सहयोगी के रूप में सेवा भारती संस्था साथ जुड़ी है।

कोविड के लक्षणविहीन, हल्के और मध्यम संक्रमण के इलाज में कारगर इन औषधियों के देशव्यापी वितरण की एक व्यापक रणनीति बनाई गई है, जिसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इसके लिए आयुष मंत्रालय के तत्वावधान में काम करने वाले विभिन्न संस्थानों के व्यापक नेटवर्क का उपयोग किया जाएगा और यह सेवा भारती के देशव्यापी नेटवर्क द्वारा समर्थित होगा।

आयुष मंत्रालय द्वारा विभिन्न स्तरों पर किये जा रहे प्रयासों को कारगर बनाने के लिए तथा इस तरह की पहल के लिए रणनीति तैयार करने और विकसित करने के लिए वरिष्ठ विशेषज्ञों के एक समूह के साथ एक अंतःविषयक आयुष अनुसंधान और विकास कार्य बल पहले से ही काम कर रहा है। कोविड-19 के दुष्प्रभाव को घटाने और प्रबंधन में आयुष हस्तक्षेप की भूमिका का आकलन करने के लिए कई नैदानिक (क्लीनिकल), पर्यवेक्षणीय अध्ययन भी किए गए हैं। इसके अलावा, मंत्रालय ने ‘राष्ट्रीय नैदानिक प्रबंधन प्रोटोकॉल: आयुर्वेद और योग के एकीकरण’ के लिए एक अंतःविषयक समिति भी स्थापित की है, जिसकी अध्यक्षता ICMR के पूर्व महानिदेशक डॉ. वी.एम. कटोच तथा विशेषज्ञों के समूह ने की है।

कोविड-19 के खिलाफ जारी इस जंग में आयुष मंत्रालय द्वारा की गई विभिन्न पहलों में आयुर्वेद और योग पर आधारित कोविड-19 के प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय नैदानिक प्रबंधन प्रोटोकॉल भी शामिल है, जिसका उद्देश्य आम जनता को इन प्रणालियों की ताकत का लाभ उठाने में मदद प्रदान करना है। इसके अलावा, कोविड-19 की इस दूसरी लहर के उभार के दौरान मंत्रालय ने आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सकों के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं और साथ ही कोविड-19 रोगियों के लिए होम आइसोलेशन के दौरान आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा पद्धति के अनुसार स्वयं की देखभाल के लिए निवारक उपाय साझा किये हैं। इसके अलावा, मंत्रालय ने कोविड-19 महामारी के दौरान एथिकल प्रैक्टिसेज पर आयुष चिकित्सकों के लिए सलाह-सहायिका भी जारी की है।

ज्ञात हो कि महामारी की दूसरी लहर के दौरान आयुष-64 और काबासुरा कुडिनीर कोविड-19 के हल्के एवं मध्यम संक्रमण के रोगियों के लिए आशा की किरण बनकर उभरे हैं। देश के प्रतिष्ठित शोध संस्थानों के वैज्ञानिकों ने पाया है कि आयुष-64, जो कि आयुष मंत्रालय के केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) द्वारा विकसित एक पॉली हर्बल दवा है, हल्के और मध्यम कोविड-19 संक्रमण के उपचार में मानक देखभाल के लिए सहायक के रूप में उपयोगी है।

1980 में विकसित की गई थी आयुष-64: उल्लेखनीय है कि आयुष-64 प्रारंभ में मलेरिया के लिए 1980 में विकसित की गई थी और अब इसे कोविड-19 के लिए पुनरुद्देशित किया गया है। आयुष मंत्रालय तथा वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान मंत्रालय (CSIR) के सहयोग ने हाल ही में कोविड-19 के हल्के एवं मध्यम संक्रमण के रोगियों में आयुष 64 की सुरक्षा और प्रभावकारिता का मूल्यांकन करने के लिए एक व्यापक बहु-केंद्र क्लीनिकल परीक्षण कार्य पूरा किया है। इसके अलावा सिद्ध पद्धति के औषधीय काढ़े काबासुरा कुडिनीर को भी आयुष मंत्रालय के तहत कार्यरत केंद्रीय सिद्ध अनुसंधान परिषद (CCRS) ने कोविड-19 रोगियों में इसकी प्रभावकारिता का अध्ययन करने के लिए क्लिनिकल परीक्षणों द्वारा जांचा और तथा हल्के से मध्यम कोविड-19 संक्रमण के रोगियों के उपचार में उपयोगी पाया।

आयुष -64 और काबासुरा कुडिनीर के उत्साहवर्धक परिणामों के आधार पर लक्षणविहीन, हल्के से मध्यम COVID-19 संक्रमण में मानक देखभाल के लिए सहायक के रूप में, आयुष मंत्रालय इन औषधियों के वितरण के लिए इस राष्ट्रव्यापी अभियान का शुभारंभ कर रहा है ताकि होम आइसोलेशन में रह रहे कोविड-19 संक्रमण के मरीजों को इन औषधियों का सही लाभ मिल सके और उन्हें अस्पतालों के चक्कर लगाने की नौबत ही न आने पाए।

आधी कीमत में बनाया वेंटिलेटर, वजन मात्र किलो


डॉक्टर दंपती की तकनीक और रिटायर्ड वैज्ञानिक की मदद से इंदौर के उद्योगपति ने आधी कीमत में बनाया वेंटिलेटर। 10 महीने की मेहनत से 50 हजार में किया तैयार। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दी मंजूरी।
सिलेंडर खत्म होने पर वातावरण से ऑक्सीजन लेकर मरीज को देगा।

इंदौर। (एजेंसी) कोरोना के गंभीर मरीजों को आ रही वेंटिलेटर की समस्या को देखते हुए शहर के एक उद्योगपति ने आधी कीमत में देसी वेंटिलेटर बना लिया है। विदेश से लौटे डॉक्टर दंपती की तकनीक और कैट के रिटायर्ड सांइटिस्ट की मदद से यह हो सका है। उनके वेंटिलेटर को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है। पोलोग्राउंड में साईं प्रसाद उद्योग के संचालक संजय पटवर्धन ने बताया कि नान इन्वेजिव टाइप का वेंटिलेटर 10 माह में तैयार हुआ है। इसकी कीमत करीब 50 हजार है, जबकि विदेशी वेंटिलेटर एक-डेढ़ से 10 लाख में मिलते हैं। यह कम ऑक्सीजन फ्लो में भी सपोर्ट करता है। सिलेंडर में ऑक्सीजन खत्म होने पर तीन-चार घंटे वातावरण से ऑक्सीजन लेकर मरीज को दे सकेगा। मरीज को कहीं शिफ्ट करना हो या फिर छोटी जगहों पर मरीज गंभीर हो जाए और संक्रमण 50-60 फीसदी हो तो ऐसी स्थिति में यह जिंदगी बचा सकता है। इसका वजन दो किलो है, जिससे इसे आसानी से कहीं भी ले जा सकते हैं।

बना है यूरोपीय मानकों के अनुसार-पटवर्धन बताते हैं कि डॉ. एसके भंडारी और उनकी पत्नी डॉ. पूर्णिमा के पास इसकी तकनीक थी। कैट के रिटायर्ड वैज्ञानिक अनिल थिप्से ने मदद की। मेडिकल उपकरण के लिए जरूरी लाइसेंस लेने, यूरोप के मानक के अनुसार बनाने के लिए पार्ट्स अमेरिका, मुंबई आदि जगह से मंगाए। टेस्टिंग, रजिस्ट्रेशन आदि में भी काफी समय लगा।

इसलिए पड़ती है वेंटिलेटर की जरूरतवेंटिलेटर तब उपयोग में आता है, जब मरीज खुद सांस नहीं ले पाता। वेंटिलेटर दो तरह के होते हैं। पहला – इन्वेजिव, जिसमें लंग्स तक पाइपलाइन जाती है। दूसरा- नाॅन इन्वेजिव, जिसमें नाक में पाइपलाइन जाती है। मरीज के लंग्स चलते हैं। (दै.भा.)

दूरसंचार विभाग ने दी 5जी तकनीक और स्पेक्ट्रम ट्रॉयल को मंजूरी

टेलिकॉम सेवाएं देने वाली कंपनियां भारत के विभिन्न स्थानों पर 5जी ट्रॉयल शुरू कर सकेंगी

ग्रामीण, अर्द्ध शहरी और शहरी इलाकों को 5जी ट्रॉयल में शामिल किया जाएगा

ट्रॉयल के तहत 5जी से जुड़ी घरेलू तकनीकी को भी शामिल किया जाएगा

नई दिल्ली। भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने मंगलवार को दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (टीएसपी) को 5जी तकनीक के उपयोग और एप्लीकेशन के लिए परीक्षण करने की अनुमति दे दी। आवेदक कंपनियों में भारती एयरटेल लिमिटेड, रिलायंस जिओ इंफोकॉम लिमिटेड, वोडाफोन इंडिया लिमिटेड और एमटीएनएल शामिल हैं। इन कंपनियों (टीएसपी) ने मूल उपकरण निर्माताओं और प्रौद्योगिकी प्रदाताओं के साथ समझौता किया है। जिसमें एरिक्सन, नोकिया, सैमसंग और सी-डॉट शामिल हैं। इसके अलावा रिलायंस जिओ इंफोकॉम लिमिटेड भी अपनी स्वदेशी तकनीक का उपयोग करते हुए परीक्षण करेगी।

डीओटी ने यह मंजूरी टीएसपी द्वारा पहचान की गई प्राथमिकताओं और प्रौद्योगिकी सहयोगी कंपनियों के आधार पर दी है। प्रयोग के लिए यह स्पेक्ट्रम विभिन्न बैंडों में दिया जा रहा है जिसमें मिड-बैंड (3.2 गीगाहर्ट्ज़ से 3.67 गीगाहर्ट्ज़), मिलीमीटर वेव बैंड (24.25 गीगाहर्ट्ज़ से 28.5 गीगाहर्ट्ज़) और सब-गीगाहर्ट्ज़ बैंड (700 गीगाहर्ट्ज़) शामिल हैं। टीएसपी को इसके अलावा 5 जी परीक्षणों के संचालन के लिए उनके मौजूदा स्पेक्ट्रम (800 मेगाहर्ट्ज, 900 मेगाहर्ट्ज, 1800 मेगाहर्ट्ज और 2500 मेगाहर्ट्ज) के तहत ट्रॉयल की अनुमति होगी।

वर्तमान में परीक्षणों की अवधि 6 महीने के लिए है। इसमें उपकरणों की खरीद और स्थापना के लिए 2 महीने की अवधि शामिल है।

अनुमति पत्र के अनुसार प्रत्येक टीएसपी को शहरों के अलावा ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भी परीक्षण करना होगा ताकि देश भर में 5जी टेक्नोलॉजी का लाभ प्राप्त हो और यह केवल शहरी क्षेत्रों तक ही सीमित न हो।

टीएसपी को पहले से ही मौजूद 5जी प्रौद्योगिकी के अलावा 5जी आई तकनीक का उपयोग परीक्षण करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) ने 5जीआई तकनीक को भी मंजूरी दी है। इसकी भारत ने वकालत की थी, क्योंकि यह 5जी टावरों और रेडियो नेटवर्क की पहुंच को आसान बनाता है। 5जीआई तकनीक का विकास आईआईटी मद्रास वायरलेस टेक्नोलॉजी के उत्कृष्ट केंद्र (सीईडब्ल्यूआईटी) और आईआईटी हैदराबाद द्वारा विकसित किया गया है।

5जी परीक्षणों का संचालन विशेष रुप से भारतीय संदर्भ में उद्देश्यों में 5जी स्पेक्ट्रम का प्रसार भारतीय जरूरतों के आधारों पर करना है। मॉडल ट्यूनिंग और चुने हुए उपकरण औऱ उनके वेंडर का मूल्यांकन, स्वदेशी तकनीक का परीक्षण, एप्लीकेशन आधारित तकनीकी का परीक्षण (जैसे टेली-मेडिसिन, टेली-शिक्षा, संवर्धित / वर्चुअल रियल्टी, ड्रोन-आधारित कृषि निगरानी, ​​आदि।) और 5जी फोन और उपकरणों का परीक्षण करने के लिए किया गया है।

5 जी तकनीक से डेटा डाउनलोड दरों (4 जी के 10 गुना होने की उम्मीद) है। इससे उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं मिलेगी, जिसके जरिए स्पेक्ट्रम क्षमता से तीन गुना अधिक उपयोग किया जा सकेगा और उद्योग जगत को 4.0 एप्लीकेशन के लिए सक्षम कर सकेगा। इन एप्लीकेशंस का इस्तेमाल कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, यातायात प्रबंधन, स्मार्ट शहरों, स्मार्ट घरों और आईओटी (इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स) में हो सकेगा।

डीओटी ने निर्दिष्ट किया है कि परीक्षण को अलग से किया जाएगा और टीएसपी के मौजूदा नेटवर्क के साथ नहीं जोड़ा जाएगा। परीक्षण गैर-वाणिज्यिक आधार पर होंगे। परीक्षणों के दौरान उत्पन्न डेटा भारत में संग्रहीत किया जाएगा। टीएसपी से यह भी उम्मीद है कि वह परीक्षण के हिस्से के रूप में स्वदेशी रूप से विकसित उपकरणों और तकनीकी का इस्तेमाल करेंगी। हाल ही में 5 जी एप्लीकेशन पर हैकाथन आयोजित करने के बाद डीओटी द्वारा चुने गए 100 एप्लीकेशन / इस्तेमाल मामलों का भी इन परीक्षणों को उपयोग किया जा सकता है।

कोविड-19 संक्रमण के उपचार में उपयोगी है ‘आयुष-64’

आयुष मंत्रालय ने देशभर में ‘आयुष – 64’ की उपलब्धता बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए


पॉलीहर्बल औषधि ‘आयुष – 64’ को नैदानिक परीक्षणों में कोविड- 19 के हल्के से लेकर मध्यम स्तर के संक्रमण के इलाज में बहुत उपयोगी पाया गया।

नई दिल्ली। कोविड -19 महामारी, विशेष रूप से पिछले कुछ हफ्तों में संक्रमण के मामलों में हुई वृद्धि, को देश के सामने सार्वजनिक स्वास्थ्य की सदी की सबसे बड़ी चुनौती के तौर पर देखा गया है। इस अवधि के दौरान, शारीरिक और भावनात्मक स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज करने में स्वास्थ्य सेवा की आयुष प्रणालियों की क्षमता का उपयोग बड़े पैमाने पर व्यक्तियों और चिकित्सकों द्वारा समान रूप से किया गया है और इसके कई उल्लेखनीय परिणाम सामने आए हैं।

पॉलीहर्बल आयुर्वेदिक औषधि है आयुष-64- कोविड -19 के उपचार के लिए ‘आयुष- 64’, जोकि एक पॉलीहर्बल आयुर्वेदिक औषधि है, का उपयोग इस दिशा में सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक रहा है। ‘आयुष- 64’ को मूल रूप से मलेरिया के उपचार के लिए 1980 में विकसित किया गया था और यह सभी नियामक संबंधी जरूरतों और गुणवत्ता एवं फार्माकोपियोअल मानकों का अनुपालन करता है।

देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों ने किया परीक्षण- सीसीआरएएस ने हाल ही में वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और देशभर के कई अन्य अनुसंधान संगठनों और मेडिकल कॉलेजों के सहयोग से बिना लक्षण वाले, हल्के से लेकर मध्यम स्तर के कोविड -19 संक्रमण के प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करते हुए इस औषधि के व्यापक सुदृढ़ नैदानिक परीक्षणों को पूरा किया। देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों के नेतृत्व में किए गए इन परीक्षणों से पता चला कि ‘आयुष – 64’ में एंटीवायरल, इम्यून- मोडुलेटर और एंटीपायरेटिक गुण हैं। यह बिना लक्षण वाले, हल्के और मध्यम स्तर के कोविड -19 संक्रमण के उपचार में उपयोगी पाया गया है। नतीजतन, इस औषधि को अब कोविड -19 के इलाज के लिए उपयोग में लाया गया है। आयुष मंत्रालय द्वारा इस आशय की घोषणा 29 अप्रैल, 2021 को एक संवाददाता सम्मेलन में की गई थी।

सभी राज्यों के लाइसेंसिंग अधिकारियों को एडवाइजरी जारी- आयुष मंत्रालय ने देशभर में ‘आयुष – 64’ के वितरण को व्यवस्थित करने और इसके उत्पादन में तेजी लाने के लिए कई कदम उठाए हैं ताकि यह औषधि कम समय में बड़ी संख्या में लोगों को उपलब्ध हो सके। इस प्रयास के तहत सीसीआरएएस (CCRAS) और नेशनल रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर (NDRC) ने आपसी सहयोग के जरिए ‘आयुष – 64’ का व्यापक पैमाने पर उत्पादन और व्यावसायीकरण करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए। मौजूदा संकेतों के अलावा, आयुष मंत्रालय ने 27 अप्रैल, 2021 को हल्के से लेकर मध्यम स्तर के कोविड -19 संक्रमण के इलाज के लिए एक उपाय के तौर पर ‘आयुष -64’ का उपयोग करने के लिए सभी राज्यों के एएसयू दवाओं के लाइसेंसिंग अधिकारियों को एडवाइजरी भी जारी की है।

दवा कंपनियों को प्रोत्साहन- देशभर में ‘आयुष – 64’ की उपलब्धता सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर देते हुए, आयुष मंत्रालय ने अधिक से अधिक दवा कंपनियों को इस दवा के उत्पादन के लिए आगे आने और लाइसेंस प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया है। इससे जुड़ी प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण के लिए इच्छुक कंपनियां सीसीआरएएस और एनआरडीसी से संपर्क कर सकती हैं। सीसीआरएएस एएसयू दवाओं के निर्माताओं को ‘आयुष – 64’ के उत्पादन में तकनीकी सहायता प्रदान करेगा। इसके अलावा, राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण उत्पादन से जुड़े ऐसे आवेदनों की लाइसेंसिंग / अनुमोदन की प्रक्रिया में तेजी ला रहे हैं बशर्ते वेड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स, 1945 के निर्धारित मानकों और प्रासंगिक प्रावधानों पर खरा उतरते हों।

देशव्यापी आयुष नेटवर्क पहले से ही मौजूद- विभिन्न राज्यों और केन्द्र- शासित प्रदेशों के प्रशासन से भी राष्ट्रीय आयुष मिशन,जिसके तहत एक देशव्यापी आयुष नेटवर्क पहले से ही मौजूद है, के माध्यम से इस प्रक्रिया में और आगे योगदान देने की अपेक्षा है। राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण आयुर्वेद और योग से जुड़े उपायों पर आधारित राष्ट्रीय नैदानिक प्रबंधन प्रोटोकॉल (नेशनल क्लिनिकल मैनेजमेंट प्रोटोकॉल) के अनुरूप ‘आयुष–64’ के उपयोग को बढ़ावा देगा।

हल्के से मध्यम कोविड-19 संक्रमण के उपचार में ‘आयुष 64’ उपयोगी- केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान परिषद

हल्के से मध्यम कोविड-19 संक्रमण के उपचार में ‘आयुष 64’ उपयोगी- केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान परिषद

नई दिल्ली। कोविड-19 महामारी के विश्वव्यापी कहर के बीच ‘आयुष 64’ दवा हल्के और मध्यम कोविड-19 संक्रमण के रोगियों के लिए आशा की एक किरण के रूप में उभरी है। देश के प्रतिष्ठित अनुसंधान संस्थानों के वैज्ञानिकों ने पाया है कि आयुष मंत्रालय की केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान परिषद (CCRAS) द्वारा विकसित एक पॉली हर्बल फॉर्मूला आयुष 64, लक्षणविहीन, हल्के और मध्यम कोविड-19 संक्रमण के लिए मानक उपचार की सहयोगी (adjunct to standard care) के तौर पर लाभकारी है। उल्लेखनीय है कि आयुष 64 मूल रूप से मलेरिया की दवा के रूप में वर्ष 1980 में विकसित की गई थी तथा कोविड 19 संक्रमण हेतु पुनरुद्देशित (repurpose) की गई है।

हाल ही में आयुष मंत्रालय तथा-सीएसआईआर द्वारा हल्के से मध्यम कोविड-19 संक्रमण के प्रबंधन में आयुष 64 की प्रभावकारिता और इसके सुरक्षित होने का मूल्यांकन करने के लिए एक व्यापक और गहन बहु-केंद्र नैदानिक (क्लीनिकल) परीक्षण पूरा किया गया है।

आयुष 64, सप्तपर्ण (Alstonia scholaris), कुटकी (Picrorhiza kurroa), चिरायता (Swertia chirata) एवं कुबेराक्ष (Caesalpinia crista) औषधियों से बनी है। यह व्यापक वैज्ञानिक अनुसंधान के आधार पर बनाई गयी है और सुरक्षित तथा प्रभावी आयुर्वेदिक दवा है। इस दवाई को लेने की सलाह आयुर्वेद एवं योग आधारित नेशनल क्लीनिकल मैनेजमेंट प्रोटोकॉल (National Clinical Management Protocol based on Ayurveda and Yoga)’ द्वारा भी दी गयी है जो कि आईसीएमआर की कोविड प्रबंधन पर राष्ट्रीय टास्क फोर्स (National Task Force on COVID Management) के निरीक्षण के बाद जारी किया गया था।

पुणे के सेंटर फॉर रूमेटिक डिसीज के निदेशक और आयुष मंत्रालय के ‘आयुष मंत्रालय-सीएसआईआर सहयोग’ के मानद मुख्य नैदानिक समन्वयक डॉ. अरविंद चोपड़ा ने बताया कि परीक्षण तीन केंद्रों पर आयोजित किया गया था। इसमें KGMU लखनऊ, DMIMS, वर्धा और BMC कोविड केंद्र मुंबई शामिल रहे तथा प्रत्येक केंद्र में 70 प्रतिभागी शामिल रहे। डॉ. चोपड़ा ने कहा कि आयुष 64 ने मानक चिकित्सा (Standard of Care यानी एसओसी) के एक सहायक के रूप में महत्वपूर्ण सुधार प्रदर्शित किया और इस तरह इसे एसओसी के साथ लेने पर अकेले एसओसी की तुलना में अस्पताल में भर्ती होने की अवधि भी कम देखी गई।

उन्होंने यह भी साझा किया कि सामान्य स्वास्थ्य, थकान, चिंता, तनाव, भूख, सामान्य हर्ष और नींद पर आयुष 64 के कई महत्वपूर्ण, लाभकारी प्रभाव भी देखे गए। निष्कर्ष रूप में डॉ. चोपड़ा ने कहा कि इस तरह के ‘नियंत्रित दवा परीक्षण अध्ययन’ ने स्पष्ट सबूत दिए हैं कि आयुष 64 को कोविड -19 के हल्के से मध्यम मामलों का उपचार करने के लिए मानक चिकित्सा के सहायक के रूप में प्रभावी और सुरक्षित दवा के रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जो रोगी आयुष 64 ले रहे हैं, उनकी निगरानी की अभी भी आवश्यकता होगी ताकि अगर बीमारी और बिगड़ने की स्थिति हो तो उसमें अस्पताल में भर्ती होने के दौरान ऑक्सीजन और अन्य उपचार उपायों के साथ अधिक गहन चिकित्सा की आवश्यकता की पहचान की जा सके।

आयुष नेशनल रिसर्च प्रोफेसर तथा कोविड-19 पर अंतर-विषयक आयुष अनुसंधान और विकास कार्य बल (Inter-disciplinary Ayush Research and Development Task Force on COVID-19) के अध्यक्ष डॉ. भूषण पटवर्धन ने कहा कि आयुष 64 पर हुए इस अध्ययन के परिणाम अत्यधिक उत्साहजनक हैं और आपदा की इस कठिन घड़ी में ज़रूरतमंद मरीज़ों आयुष 64 का फायदा मिलना ही चाहिए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आयुष-सीएसआईआर संयुक्त निगरानी समिति (Ayush-CSIR Joint Monitoring Committee) ने इस बहु-केंद्रीय परीक्षण की निगरानी की थी। स्वास्थ्य शोध विभाग के पूर्व सचिव तथा आईसीएमआर के पूर्व महानिदेशक डॉ. वी एम कटोच इस समिति के अध्यक्ष हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आयुष 64 पर हुए इन नैदानिक अध्ययनों (clinical studies) की समय-समय पर एक स्वतंत्र संस्था ‘डेटा और सुरक्षा प्रबंधन बोर्ड’ (Data and Safety Management Board यानी डीएसएमबी) द्वारा समीक्षा की जाती थी।

डॉ. पटवर्धन के दावे की पुष्टि करते हुए आयुष-सीएसआईआर संयुक्त निगरानी समिति के अध्यक्ष डॉ वीएम कटोच ने बताया कि समिति ने आयुष 64 के अध्ययन के परिणामों की गहन समीक्षा की है। उन्होंने कोविड-19 के लक्षणविहीन संक्रमण, हल्के तथा मध्यम संक्रमण के प्रबंधन के लिए इसके उपयोग की संस्तुति की। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि इस निगरानी समिति ने आयुष मंत्रालय से सिफारिश की है कि वह राज्यों के लाइसेंसिंग अधिकारियों / नियामकों (Regulators) को आयुष 64 के इस नये उपयोग (Repurposing) के अनुरूप इसे हल्के और मध्यम स्तर के कोविड-19 संक्रमण के प्रबंधन में उपयोगी के तौर पर सूचित करे।

केंद्रीय आयुर्वेदीय अनुसन्धान संस्थान (CCRAS) के महानिदेशक डॉ. एन. श्रीकांत ने विस्तार से बताया कि CSIR-IIIM, DBT-THSTI, ICMR-NIN, AIIMS जोधपुर और मेडिकल कॉलेजों सहित पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़; किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ; गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, नागपुर; दत्ता मेघे इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, नागपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में आयुष 64 पर अध्ययन जारी हैं। अब तक मिले परिणामों ने हल्के और मध्यम कोविड-19 संक्रमणों से निबटने में इसकी भूमिका स्पष्ट तौर पर जाहिर की है। उन्होंने यह भी बताया कि सात नैदानिक (क्लीनिकल) अध्ययनों के परिणाम से पता चला है कि आयुष 64 के उपयोग से संक्रमण के जल्दी ठीक होने (Early clinical recovery) और बीमारी के गंभीर होने से बचने के संकेत मिले हैं।

लगभग 20,000 परिवारों को आयुष काढ़ा के 50 ग्राम के 20,880 पैकैटों का वितरण किया गया- लखनऊ। अपर मुख्य सचिव प्रशान्त त्रिवेदी ने बताया कि कोरोना संक्रमण काल में आम जनता को कोविड-19 के संक्रमण से बचाने के लिए आयुष विभाग तेजी से काम कर रहा है। आयुर्वेद विभाग के चिकित्साधिकारियों और कर्मचारियों ने कुल 43,474 आयुर्वेद कोविड-19 किट का वितरण प्रदेश के 91,692 लोगों को किया है। इसमें संशमनी वटी, आयुष-64, अगस्त्य हरीतकी और अणु तैल है। इसके अलावा आयुर्वेद विधा से लगभग 20,000 परिवारों को आयुष काढ़ा के 50 ग्राम के 20,880 पैकैटों का वितरण किया गया है। साथ ही होम्योपैथिक चिकित्साधिकारियों द्वारा 6,28,300 आर्सेनिक एलबम की शीशियां जिलों में कोविड की रोकथाम और बचाव के लिए दी जा रही हैं। यूनानी चिकित्सकों ने बहीदाना, सपिस्ता, उन्नाब और अर्क अजीब नामक यूनानी औषधियों को करीब 3198 लोगों को दिया है।

जनता की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा की औषधियां रामबाण बनी हैं। कोरोना के उपचार में भी आयुर्वेद काफी कारगर साबित हो रहा है। इसको देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आयुष अधिकारियों से कहा है कि वे घरेलू बगीचे में पाए जाने वाली गुणकारी औषधियों की जानकारी भी लोगों तक पहुंचाएं। घर की रसोई में पाए जाने वाली औषधियों के गुण और मसालों के रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले गुणों की भी जानकारी लोगों को अवश्य दें।

पंचरत्न: फेफड़ों को मजबूत बनाने के लिए रोज करें सेवन


फेफड़ों को मजबूत बनाने के लिए रोजाना इन चीजों का सेवन करें।
फेफड़ों से फिल्टर होने के बाद ही ऑक्सीजन आपके पूरे शरीर में पहुंचती हैं। ऐसे में लंग्स का खास ख्याल रखना बहुत ही ज्यादा जरूरी है।


स्वस्थ फेफड़ों से ही शरीर को हमेशा हेल्दी रखा जा सकता है। फेफड़ों से फिल्टर होने के बाद ही ऑक्सीजन पूरे शरीर में पहुंचती हैं। इसलिए इनका खास ख्याल रखना बहुत ही ज्यादा जरूरी है। फेफड़े ठीक ढंग से काम नहीं करेंगे तो अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, निमोनिया, टीबी, कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है। कोरोना वायरस जैसी महामारी से बचने के लिए फेफड़ों का मजबूत होना बहुत ही जरूरी हैं क्योंकि यह सीधे लंग्स पर ही अटैक करता है। इस कारण सांस लेने में अधिक समस्या होती है।

कोरोना की दूसरी लहर में इस बार 60 से 65 फीसदी मरीजों को सांस लेने में काफी दिक्कत आ रही है। उनका ऑक्सीजन लेवल तेजी से घट कर 2 से 3 दिन के अंदर 80 से नीचे पहुंच जाता है। ऐसे में तुरंत ऑक्सीजन की जरूरत होती है। इस दौरान ऑक्सीजन ना मिले तो हालात बहुत गंभीर हो जाते हैं। इसलिए जरूरी है कि फेफड़ों का पहले ही ध्यान रखें। कुछ फूड्स के प्रयोग से आपके फेफड़े तेजी से मजबूत हो जाएंगे और ऑक्सीजन लेवल भी बढ़ेगा।

फेफड़ों को मजबूत बनाने के लिए रोजाना करें इन चीजों का सेवन, ऑक्सीजन लेवल भी बढ़ेगा

हल्दी
हल्दी में भरपूर मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लामेट्री गुण पाए जाते हैं जो आपको हर तरह के संक्रमण से बचाते हैं। रोजाना सोने से पहले दूध में हल्दी डालकर इसका सेवन करें। इसके साथ-साथ आप हल्दी, गिलोय, दालचीनी, लौंग, अदरक और तुलसी का काढ़ा बनाकर पिएं। इससे लंग्स मजबूत रहने के साथ इम्यूनिटी मजबूत होगी।

शहद
आयुर्वेद में शहद का बहुत अधिक महत्व बताया गया है, क्योंकि एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं। इसका सेवन करने से आपके फेफड़े मजबूत होते हैं। इसके अलावा फेफड़ों से विषाक्त तत्वों को बाहर निकालने के लिए सुबह गर्म नींबू पानी में शहद डालकर पिएं। काढ़ा में भी शहद डाल कर पी सकते हैं।

तुलसी
तुलसी के पत्ते में अधिक मात्रा में पोटैशियम, आयरन, क्लोरोफिल मैग्नीशियम, कैरीटीन और विटामिन-सी पाया जाता है। यह फेफड़ों को हेल्दी रखने में मदद करता है। रोजाना सुबह 4-5 पत्तियों को चबा लें। इसके आप गिलोय और तुलसी का आयुर्वेदिक काढ़ा बनाकर पी सकते हैं।

अंजीर
अंजीर में बहुत सारे चमत्कारी तत्व पाए जाते हैं। इसमें विटामिन ए, विटामिन-सी, विटामिन-के, पोटेशियम, मैग्नीशियम, कॉपर और आयरन जैसे जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसके सेवन करने से लंग्स मजबूत होगे। इसके साथ ही दिल हेल्दी रहेगा।

लहसुन
लहसुन में भरपूर मात्रा में एंटीबायोटिक, एंटीफंगल, एंटीवायरल गुणों के साथ-साथ कैल्शियम, फॉस्फोरस, लौह तत्व, विटामिन जैसे तत्व पाए जाते है। जो फेफड़ों को मजबूत रखने में मदद करते हैं। रोजाना सुबह खाली पेट 2-3 लहसुन की कली का सेवन कर सकते हैं। इसके अलावा अगर आपको ज्यादा गर्मी लगती है तो रात को लहसुन एक कली भिगो दें और सुबह इनका सेवन कर लें।

बड़े काम का नीलगिरी (यूकेलिप्टस) का तेल

नीलगिरी का पेड़ काफी लंबा और पतला होता है। इसकी पत्तियों से प्राप्त होने वाले तेल का उपयोग औषधि और अन्य रूप से किया जाता है। नीलगिरी की पत्तियां लंबी और नुकीली होती हैं, जिनकी सतह पर गांठ पाई जाती है और इन्हीं गाठों में तेल संचित रहता है। नीलगिरी का वानस्पतिक नाम यूकेलिप्टस ग्लोब्यूलस है। परफ्यूम इंडस्ट्री में नीलगिरी का तेल खूब इस्तेमाल होता है। शरीर की मालिश के लिए नीलगिरी का तेल उपयोग में लाया जाए तो गम्भीर सूजन तथा बदन में होने वाले दर्द से छुटकारा मिलता है, वैसे आदिवासी मानते हैं कि नीलगिरी का तेल जितना पुराना होता जाता है इसका असर और भी बढ़ता जाता है। इसका तेल जुकाम, पुरानी खांसी से पीड़ित रोगी के लिए फायदेमंद होता है। इसे छिड़ककर सुंघाने से लाभ मिलता है। नीलगिरी का तेल एक सूती कपड़े में लगा दिया जाए और सर्दी और खाँसी होने पर सूंघा जाए तो आराम मिलता है। गले में दर्द होने पर भी नीलगिरी के तेल का उपयोग किया जाता है। माइग्रेन होने की दशा में इसके तेल को माथा में लगाएं तो आराम मिलता है। एक बाल्टी पानी में दो चम्मच लहसुन का रस और 2 बूंद नीलगिरी का तेल डाल दीजिए और फिर घर में पोछा करें, अगले 5-6 घंटों तक मच्छरों का अता पता नहीं रहेगा, इसी पानी को आंगन में छिड़क दीजिए, मच्छर दूर भाग जाएंगे।

मोती जैसे चमकदार दांतों के लिए

दिल्ली। अधिकतर लोग दांतों के पीलेपन की समस्या से परेशान रहते हैं। ऐसा ज्यादातर दांतों पर प्लाक की परत जम जाने के कारण होता है। इसके अलावा दांतों की अच्छी तरह से सफाई न करने की वजह से भी दांत पीले पड़ जाते हैं। आप इस समस्या को कुछ घरेलू उपायों के जरिए दूर कर सकते हैं और दोबारा मोती जैसे चमकदार दांत पा सकते हैं।

हल्दी और सरसों का तेल- आप दांतों की सफाई के लिए हल्दी और सरसों के तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए आप एक चम्मच तेल और आधा चम्मच हल्दी के मिश्रण को बनाकर दांतों पर मसाज करें। ऐसा करने से दांत साफ होते हैं साथ ही मजबूत भी होते हैं।

केले के छिलके – दांतों को मजबूत और चमकदार बनाने के लिए केले के छिलके बेहद फायदेमंद साबित हो सकते हैं। इसके लिए केले के छिलके का सफेद वाला भाग दांतों पर रगड़ें। इसमें पोटैशियम, मैग्नीज और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स होते हैं, जो दांतों को फायदा पहुंचाते हैं और पीलापन दूर करते हैं।

संतरे का छिलका – संतरा खाने में फायदेमंद होने के साथ इसका छिलका भी बेहद काम आता है। दांतों के पीलापन से निजात दिलाने के लिए संतरे के छिलके भी असरदार हैं। संतरे के सूखे छिलकों को पीसकर पाउडर बना लें और इस पाउडर को रात को दांतों पर रगड़ें, इससे आपके दांतों का पीलापन दूर हो सकता है।

बेकिंग सोडा – दांतों को चमकाने के लिए बेकिंग सोडा का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। एक चम्मच बेकिंग सोडा में नींबू का रस मिलाएं और इस पेस्ट को दांतों पर अच्छी तरह मसाज करें। इसे बस एक मिनट तक ही लगाएं, क्योंकि ज्यादा देर तक लगाने से यह दांतों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

टेलीमेडिसिन सेवा-ईसंजीवनी के प्रति बढ़ रहा रुझान

भारत सरकार की टेलीमेडिसिन सेवा ने 30 लाख परामर्श प्रदान किए रोजाना 35,000 से अधिक मरीज डिजिटल रूप से स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्‍त करने के लिए ईसंजीवनी का उपयोग कर रहे हैं।

नई दिल्ली। भारत सरकार की राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा-ईसंजीवनी ने 30 लाख परामर्श उपलब्‍ध कराकर एक महत्‍वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। वर्तमान में, राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा 31 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में संचालित है और प्रतिदिन देश के 35,000 से अधिक मरीज स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्‍त करने के लिए इस नवाचारी डिजिटल माध्यम – ईसंजीवनी का उपयोग कर रहे हैं। राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा स्थापित की गई है। दो प्रकार की ईसंजीवनी सेवाएं शामिल हैं। पहली सेवा, डॉक्टर से डॉक्टर (ईसंजीवनी एबी-एचडब्‍ल्‍यूसी) टेलीमेडिसिन प्लेटफ़ॉर्म जो हब और स्पोक मॉडल पर आधारित है, जबकि दूसरी सेवा, मरीज से डॉक्टर टेलीमेडिसिन प्लेटफ़ॉर्म (ईसंजीवनी ओपीडी) है, जो मरीजों को उनके घरों पर ही ओपीडी सेवाएं प्रदान करती है। ईसंजीवनी एबी-एचडब्‍ल्‍यूसी आयुष्मान भारत योजना के तहत स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों में लागू की जा रही है। दिसंबर 2022 तक इस सेवा को पूरे भारत में 1,55,000 स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों में संचालित कर दिया जाएगा। यह योजना नवंबर 2019 में शुरू की गई थी और आंध्र प्रदेश ईसंजीवनी एबी-एचडब्‍ल्‍यूसी शुरू करने वाला पहला राज्य था।

इसकी शुरूआत से लेकर अभी तक विभिन्न राज्यों में 1,000 से अधिक केन्‍द्र और लगभग 15,000 स्‍पोक्‍स स्थापित किए गए हैं। ईसंजीवनी एबी-एचडब्‍ल्‍यूसी ने लगभग 9 लाख परामर्श पूरे कर लिए हैं। ईसंजीवनी ओपीडी में स्थापित 250 से अधिक ऑनलाइन ओपीडी के माध्यम से नागरिकों को डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्‍ध कराई जा रही हैं। इन ऑनलाइन ओपीडी में 220 से अधिक विशेषज्ञ ओपीडी हैं और शेष सामान्य ओपीडी हैं। ईसंजीवनी ओपीडी देश में पहले लॉकडाउन के दौरान 13 अप्रैल 2020 को शुरू की गई थी, अन्‍य सभी ओपीडी बंद कर दी गई थीं। अभी तक ईसंजीवनी ओपीडी के माध्‍यम से 21 लाख से अधिक रोगियों को सेवा प्रदान की गई है।

सबसे बड़ी संख्या में परामर्श प्राप्‍त करने वाले शीर्ष पांच जिलों के नाम इस प्रकार हैं – सलेम, तमिलनाडु (1,23,658), मदुरै, तमिलनाडु (60,547), हासन, कर्नाटक (43,995), मेरठ, उत्‍तर प्रदेश (35,297) और रायबरेली, उत्‍तर प्रदेश (34,227) । ये आंकड़े दर्शाते है कि थ्री टिअर और 4 टिअर शहरों में नागरिकों ने ईसंजीवनी को अधिक‍ उपयोगी पाया है।

जन औषधि दिवस सप्ताह-2021 का समापन आज

जन औषधि दिवस सप्ताह-2021 समारोह का समापन आज। जन औषधि दवाओं की कीमत कम से कम 50 प्रतिशत और कुछ मामलों में ब्रांडेड दवाओं के बाजार मूल्य का 90 प्रतिशत तक कम है। 5 मार्च, 2021 तक 593.84 करोड़ रुपये (एमआरपी पर) की बिक्री। देश के आम नागरिकों के लगभग 3600 करोड़ रुपये की हुई बचत।

नई दिल्ली। उत्तम गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवाओं के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिये जन औषधि दिवस सप्ताह-2021 समारोह का छठा दिन शनिवार को मनाया गया। कार्यक्रम के दौरान, मोटर साइकिल रैली, पदयात्रा और मानव श्रृंखला जैसी गतिविधियां देश भर में जन आयुषी मित्र और जन आयुषी केंद्र मालिकों की बीपीपीआई टीम द्वारा आयोजित की गईं। इन आयोजनों के माध्यम से, जनता को जेनेरिक दवाओं की प्रभावकारिता और शक्ति के बारे में बताया गया, जो जन औषधि केंद्रों में बहुत कम कीमतों पर बेची जा रही हैं, इस प्रकार जेनेरिक दवाओं के बारे में लोगों के आम मिथक को तोड़ दिया गया है।

प्रधानमंत्री जन औषधि परियोजना (पीएमबीजेपी) के तहत एक दवा की कीमत शीर्ष तीन ब्रांडेड दवाओं के औसत मूल्य के अधिकतम से 50 प्रतिशत कम मूल्य के सिद्धांत पर रखी गई है। इसलिए, जन औषधि दवाओं की कीमत कम से कम 50 प्रतिशत और कुछ मामलों में ब्रांडेड दवाओं के बाजार मूल्य का 90 प्रतिशत तक कम है। चालू वित्त वर्ष 2020-21 में, पीएमबीजेपी ने 5 मार्च, 2021 तक 593.84 करोड़ रुपये (एमआरपी पर) की बिक्री की है। इसके कारण देश के आम नागरिकों के लगभग 3600 करोड़ रुपये की बचत हुई है।

जन औषधि दिवस सप्ताह- 2021 पूरे देश में 7400 से अधिक प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्रों के माध्यम से मनाया जा रहा है। जन स्वास्थ्य केंद्र मालिक स्वास्थ्य और स्वच्छता के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन कर रहे हैं। 1 मार्च 2021 को स्वास्थ्य जांच कैंप की मेजबानी करके समारोह शुरू हुआ। दूसरे दिन ब्लड प्रेशर की जांच, मधुमेह की जांच, मुफ्त डॉक्टर परामर्श, मुफ्त दवा वितरण आदि की व्यवस्था की गई, जिसमें ‘जन औषधि परिचर्चा’ आयोजित की गई थी। यह चर्चा डॉक्टरों, अस्पतालों, क्लीनिकों और अन्य हितधारकों के सहयोग से बीपीपीआई के दल ने, जन आयुषी मित्र और जन आयुष केंद्र के मालिकों द्वारा आयोजित की गई। जन औषधि दिवस सप्ताह के तीसरे दिन यानी 3 मार्च, 2021 को, बीपीपीआई की टीम, जन आयुषी मित्र और जन औषधि केंद्र मालिकों ने इस दिन को देश भर में ‘टीच देम यंग’ यानी युवाओं को शिक्षा देने की तर्ज पर मनाया। इस गतिविधि के दौरान, बीपीपीआई के अधिकारियों ने स्कूलों, कॉलेजों, फार्मेसी कॉलेजों और अन्य संस्थानों का दौरा किया और छात्रों के साथ बातचीत की। चौथे दिन, पीएमबीजेपी ने गतिविधियों में भाग लिया और महिलाओं को सैनिटरी पैड के उपयोग के बारे में शिक्षित करने के लिए शिविरों की मेजबानी की। इस सप्ताह का 5 वां दिन वरिष्ठ नागरिकों को समर्पित ‘जन औषधि का साथ’ के संदेश के साथ मनाया गया।

Ministry of Chemicals and Fertilizers की ओर से बताया गया है कि जन औषधि दिवस सप्ताह 2021 का उत्सव 7 मार्च, 2021 को समाप्त होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘जन औषधि दिवस’ समारोह को 7 मार्च, 2021 को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सवेरे 10 बजे संबोधित करेंगे।

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ऑनलाइन बिक्री पोर्टल से नई ऊंचाई पर खादी और ग्रामोद्योग आयोग

खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के ऑनलाइन बिक्री पोर्टल ने नई ऊंचाइयों को छुआ, स्वदेशी को अधिक बढ़ावा

नई दिल्ली। खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने ऑनलाइन विपणन खंड में प्रवेश कर बड़ी तेजी से देश लोगों के बीच अपनी पहुंच स्थापित की है। खादी के ई-पोर्टल http://www.khadiindia.gov.in ने अपनी शुरुआत के महज 8 महीनों में ही 1.12 करोड़ रुपये से अधिक का सकल कारोबार किया है।

7 जुलाई 2020 को लॉन्च होने के बाद खादी ई-पोर्टल ने अब तक इस पर आने वाले 65,000 लोगों में से 10,000 से अधिक ग्राहकों द्वारा ऑर्डर किया गया सामान पहुंचाया है। केवीआईसी ने इन ग्राहकों को 1 लाख से अधिक वस्तुएं / चीज़ें वितरित की हैं। इस अवधि के दौरान, औसत ऑनलाइन खरीद 11,000 रुपये प्रति ग्राहक दर्ज की गई है जो खादी की लगातार बढ़ती लोकप्रियता और खरीदारों के सभी वर्गों के लिए इसकी उत्पाद श्रृंखला की विविधता का संकेत है।



खादी ई-पोर्टल: मुख्य आकर्षण (26.02.2021 को आंकड़े)

खादी ई-पोर्टल का शुभारंभ

7 जुलाई 2020

8 महीने में सकल ऑनलाइन बिक्री

1.12 करोड़ रुपये

8 महीनों में मिले ऑर्डर्स की संख्या

10,100

ई-पोर्टल पर आगंतुकों की संख्या

65,000

प्रति ग्राहक औसत बिक्री

11,000 रुपये

ऑर्डर्स में भेजी गई कुल मात्रा

1,00,600

प्रति ऑर्डर औसत मात्रा

10

ऑनलाइन इन्वेंट्री में उत्पादों की संख्या

800

उच्चतम व्यक्तिगत बिक्री मूल्य

1.25 लाख रुपये

अधिकतम भेजे गए ऑर्डर्स

महाराष्ट्र (1785) दिल्ली (1584)

उत्तर प्रदेश (1281)

ऑनलाइन बेस्ट सेलर्स

खादी मास्क, शहद, हर्बल साबुन, किराना, मसाले, कपड़े, अगरबत्ती

केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने खादी के सफल ई-कॉमर्स उद्यम की सराहना करते हुए कहा कि इससे खादी और ग्रामीण उद्योग के उत्पादों की पहुंच एक बड़ी आबादी तक सुलभ कराने के लिए इसे एक व्यापक विपणन मंच प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा, खादी की ई-मार्केटिंग गेम-चेंजर साबित हो रही है। श्री गडकरी ने कहा, प्रति वर्ष 200 करोड़ रुपये के कारोबार तक पहुंचने का प्रयास किया जाना चाहिए।

केवीआईसी ने वेब-डेवलपमेंट पर एक भी रुपया खर्च किए बिना ही ई-पोर्टल को इन-हाउस विकसित किया है। यह एक अन्य कारक है जो खादी ई-पोर्टल को अन्य ई-कॉमर्स साइटों से अलग करता है – अन्य ऑनलाइन पोर्टलों के विपरीत केवीआईसी कैटलॉग, उत्पाद फोटोशूट जैसे सभी लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढांचे का विशेष ख्याल रखता है। साथ ही यह ऑनलाइन इन्वेंट्री बनाए रखता है और ग्राहकों के दरवाजे तक सामान की ढुलाई तथा परिवहन का विशेष ध्यान रखता है। यह खादी कारीगरों, संस्थानों और पीएमईजीपी इकाइयों को खादी उत्पादों को किसी भी वित्तीय बोझ से बचाता है।

केवीआईसी के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि, खादी ई-पोर्टल के संचालन पर होने वाले सभी खर्च केवीआईसी द्वारा वहन किए जाते हैं। अन्य ई-कॉमर्स साइटों के मामले में जहां उत्पाद सूचीकरण, पैकेजिंग और प्रेषण संबंधित विक्रेताओं की जिम्मेदारी है, वहीं केवीआईसी की एक नीति है कि खादी संस्थानों और पीएमईजीपी इकाइयों को ऐसे किसी भी वित्तीय और तार्किक बोझ से मुक्त किया जाता है। उन्होंने कहा, इससे उनके पास बहुत पैसा बचता है और इसलिए, खादी का ई-पोर्टल लाखों खादी कारीगरों के लिए एक अनूठा मंच है। श्री सक्सेना ने कहा कि खादी के ई-पोर्टल ने स्वदेशी को काफी बढ़ावा दिया है। उन्होंने कहा कि इसने कारीगरों को अपना माल बेचने के लिए एक अतिरिक्त मंच प्रदान किया है, केवीआईसी ने खादी के प्रति लोगों के प्रेम और भारत को आत्मनिर्भर बनाने के उनके संकल्प को भी प्रदर्शित किया है।

खादी की ऑनलाइन बिक्री केवल खादी के फेस मास्क बनाने के साथ शुरू हुई थी लेकिन इसने इतनी जल्दी ही पूरी तरह से विकसित ई-मार्केट मंच का रूप धारण कर लिया है। आज इस पर लगभग 800 उत्पाद मौजूद हैं और बहुत से उत्पाद इसमें शामिल होने की प्रक्रिया में हैं। उत्पादों की श्रृंखला में हाथ से कते और हाथ से बुने महीन कपड़े जैसे मलमल, सिल्क, डेनिम और सूती कपड़े, महिला – पुरुष विचार वस्त्र, खादी की सिग्नेचर कलाई घड़ी, अनेक प्रकार के शहद, हर्बल और ग्रीन टी, हर्बल दवाइयां और साबुन, पापड़, कच्ची घानी सरसों का तेल, गोबर / गोमूत्र साबुन एवं अन्य पदार्थों के साथ विविध प्रकार के हर्बल सौंदर्य प्रसाधन भी शामिल हैं।

खादी फैब्रिक फुटवियर, गाय के गोबर से बने अभिनव खादी प्राकृतिक पेंट और पुनर्जीवित विरासत मोनपा वाले हस्तनिर्मित कागज जैसे कई अनूठे उत्पाद भी ऑनलाइन बेचे जा रहे हैं। उत्पादों की कीमत 50 रुपये से 5000 रुपये तक है, जो खरीदारों के सभी वर्गों की पसंद और सामर्थ्य को ध्यान में रखते हुए तय की जाती है।

केवीआईसी को 31 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों से ऑनलाइन ऑर्डर्स प्राप्त हुए हैं, जिनमें दूर-दराज स्थित अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, अरुणाचल प्रदेश, केरल, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर भी शामिल हैं।

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ऑनलाइन बिक्री पोर्टल से नई ऊंचाई पर खादी और ग्रामोद्योग आयोग

खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के ऑनलाइन बिक्री पोर्टल ने नई ऊंचाइयों को छुआ, स्वदेशी को अधिक बढ़ावा

नई दिल्ली। खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने ऑनलाइन विपणन खंड में प्रवेश कर बड़ी तेजी से देश लोगों के बीच अपनी पहुंच स्थापित की है। खादी के ई-पोर्टल http://www.khadiindia.gov.in ने अपनी शुरुआत के महज 8 महीनों में ही 1.12 करोड़ रुपये से अधिक का सकल कारोबार किया है।

7 जुलाई 2020 को लॉन्च होने के बाद खादी ई-पोर्टल ने अब तक इस पर आने वाले 65,000 लोगों में से 10,000 से अधिक ग्राहकों द्वारा ऑर्डर किया गया सामान पहुंचाया है। केवीआईसी ने इन ग्राहकों को 1 लाख से अधिक वस्तुएं / चीज़ें वितरित की हैं। इस अवधि के दौरान, औसत ऑनलाइन खरीद 11,000 रुपये प्रति ग्राहक दर्ज की गई है जो खादी की लगातार बढ़ती लोकप्रियता और खरीदारों के सभी वर्गों के लिए इसकी उत्पाद श्रृंखला की विविधता का संकेत है।



खादी ई-पोर्टल: मुख्य आकर्षण (26.02.2021 को आंकड़े)

खादी ई-पोर्टल का शुभारंभ

7 जुलाई 2020

8 महीने में सकल ऑनलाइन बिक्री

1.12 करोड़ रुपये

8 महीनों में मिले ऑर्डर्स की संख्या

10,100

ई-पोर्टल पर आगंतुकों की संख्या

65,000

प्रति ग्राहक औसत बिक्री

11,000 रुपये

ऑर्डर्स में भेजी गई कुल मात्रा

1,00,600

प्रति ऑर्डर औसत मात्रा

10

ऑनलाइन इन्वेंट्री में उत्पादों की संख्या

800

उच्चतम व्यक्तिगत बिक्री मूल्य

1.25 लाख रुपये

अधिकतम भेजे गए ऑर्डर्स

महाराष्ट्र (1785) दिल्ली (1584)

उत्तर प्रदेश (1281)

ऑनलाइन बेस्ट सेलर्स

खादी मास्क, शहद, हर्बल साबुन, किराना, मसाले, कपड़े, अगरबत्ती

केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने खादी के सफल ई-कॉमर्स उद्यम की सराहना करते हुए कहा कि इससे खादी और ग्रामीण उद्योग के उत्पादों की पहुंच एक बड़ी आबादी तक सुलभ कराने के लिए इसे एक व्यापक विपणन मंच प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा, खादी की ई-मार्केटिंग गेम-चेंजर साबित हो रही है। श्री गडकरी ने कहा, प्रति वर्ष 200 करोड़ रुपये के कारोबार तक पहुंचने का प्रयास किया जाना चाहिए।

केवीआईसी ने वेब-डेवलपमेंट पर एक भी रुपया खर्च किए बिना ही ई-पोर्टल को इन-हाउस विकसित किया है। यह एक अन्य कारक है जो खादी ई-पोर्टल को अन्य ई-कॉमर्स साइटों से अलग करता है – अन्य ऑनलाइन पोर्टलों के विपरीत केवीआईसी कैटलॉग, उत्पाद फोटोशूट जैसे सभी लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढांचे का विशेष ख्याल रखता है। साथ ही यह ऑनलाइन इन्वेंट्री बनाए रखता है और ग्राहकों के दरवाजे तक सामान की ढुलाई तथा परिवहन का विशेष ध्यान रखता है। यह खादी कारीगरों, संस्थानों और पीएमईजीपी इकाइयों को खादी उत्पादों को किसी भी वित्तीय बोझ से बचाता है।

केवीआईसी के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि, खादी ई-पोर्टल के संचालन पर होने वाले सभी खर्च केवीआईसी द्वारा वहन किए जाते हैं। अन्य ई-कॉमर्स साइटों के मामले में जहां उत्पाद सूचीकरण, पैकेजिंग और प्रेषण संबंधित विक्रेताओं की जिम्मेदारी है, वहीं केवीआईसी की एक नीति है कि खादी संस्थानों और पीएमईजीपी इकाइयों को ऐसे किसी भी वित्तीय और तार्किक बोझ से मुक्त किया जाता है। उन्होंने कहा, इससे उनके पास बहुत पैसा बचता है और इसलिए, खादी का ई-पोर्टल लाखों खादी कारीगरों के लिए एक अनूठा मंच है। श्री सक्सेना ने कहा कि खादी के ई-पोर्टल ने स्वदेशी को काफी बढ़ावा दिया है। उन्होंने कहा कि इसने कारीगरों को अपना माल बेचने के लिए एक अतिरिक्त मंच प्रदान किया है, केवीआईसी ने खादी के प्रति लोगों के प्रेम और भारत को आत्मनिर्भर बनाने के उनके संकल्प को भी प्रदर्शित किया है।

खादी की ऑनलाइन बिक्री केवल खादी के फेस मास्क बनाने के साथ शुरू हुई थी लेकिन इसने इतनी जल्दी ही पूरी तरह से विकसित ई-मार्केट मंच का रूप धारण कर लिया है। आज इस पर लगभग 800 उत्पाद मौजूद हैं और बहुत से उत्पाद इसमें शामिल होने की प्रक्रिया में हैं। उत्पादों की श्रृंखला में हाथ से कते और हाथ से बुने महीन कपड़े जैसे मलमल, सिल्क, डेनिम और सूती कपड़े, महिला – पुरुष विचार वस्त्र, खादी की सिग्नेचर कलाई घड़ी, अनेक प्रकार के शहद, हर्बल और ग्रीन टी, हर्बल दवाइयां और साबुन, पापड़, कच्ची घानी सरसों का तेल, गोबर / गोमूत्र साबुन एवं अन्य पदार्थों के साथ विविध प्रकार के हर्बल सौंदर्य प्रसाधन भी शामिल हैं।

खादी फैब्रिक फुटवियर, गाय के गोबर से बने अभिनव खादी प्राकृतिक पेंट और पुनर्जीवित विरासत मोनपा वाले हस्तनिर्मित कागज जैसे कई अनूठे उत्पाद भी ऑनलाइन बेचे जा रहे हैं। उत्पादों की कीमत 50 रुपये से 5000 रुपये तक है, जो खरीदारों के सभी वर्गों की पसंद और सामर्थ्य को ध्यान में रखते हुए तय की जाती है।

केवीआईसी को 31 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों से ऑनलाइन ऑर्डर्स प्राप्त हुए हैं, जिनमें दूर-दराज स्थित अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, अरुणाचल प्रदेश, केरल, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर भी शामिल हैं।

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3 करोड़ पहुंची लखनऊ मेट्रो की राइडरशिप

लखनऊ मेट्रो की एक और उपलब्धि- यात्री सेवा की शुरुआत से अब तक की कुल राइडरशिप पहुंची 3 करोड़

लखनऊ। मेट्रो ने एक और उपलब्धि प्राप्त की है। 5 सितंबर, 2017 से प्रारंभ हुई लखनऊ मेट्रो सेवा ने आज अपनी अब तक की यात्रा में तीन करोड़ की राइडरशिप (यात्री संख्या) को पार कर लिया। यह महत्तवपूर्ण उपलब्धि इसलिए भी ख़ास है क्योंकि तब से अब तक अपनी कार्य पद्धति और समपिंत यात्री सेवा से लखनऊ मेट्रो ने शहरवासियों के दिलों में अहम जगह बनाई है और उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुकी है।

इस उपलब्धि के मौके पर उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक कुमार केशव ने यूपीएमआरसी की पूरी टीम के साथ लखनऊ की जनता को भी बधाई दी है। उन्होंने कहा कि ‘‘निश्चित तौर पर लखनऊ मेट्रो के लिए यह क्षण ऐतिहासिक और गर्व की अनुभूति कराने वाला है। हमने तमाम बाधाओं को पार कर लखनऊ के लोगों के लिए जिस आरामदायक और सुरक्षित यात्रा का संकल्प लिया था, आज वह यात्रियों से मिल रहे निरंतर समर्थन और भरोसे की वजह से एक मुकाम तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। हम इसके लिए लखनऊवासियों के आभारी हैं और उन्हें विश्वास दिलाते हैं कि भविष्य में भी इसी कर्मठता और समर्पण के साथ उनकी सेवा के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे।”

वर्तमान में कोविड के मद्देनज़र मेट्रो स्टेशनों और मेट्रो ट्रेनों पर सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किए गए तमाम प्रबंध जारी हैं। सुरक्षित और सुगम यात्रा के लिए सैनिटाइजेशन और शारीरिक दूरी का विशेष ख्याल रखा जा रहा है। इस साल की शुरुआत से अल्ट्रावायलेट किरणों से मेट्रो ट्रेनों के कोच को सैनिटाइज करने वाली लखनऊ मेट्रो देश की पहली मेट्रो सेवा बन गई है। हमारे इन प्रयासों का नतीजा है कि पिछले साल कोविड के बाद अनलॉक में 7 सितंबर 2020 से मेट्रो सेवा के पुनः आरंभ होने के बाद से मेट्रो की यात्री संख्या में लगातार सुधार हुआ है। लखनऊ मेट्रो 42 हजार यात्री संख्या के साथ कोरोना पूर्व की राइडरशिप का 65 प्रतिशत पहले ही हासिल कर चुकी है। हालांकि इसी वक्त में अन्य राज्यों की मेट्रो सेवाओं की राइडरशिप रिकवरी काफी कम है।

लखनऊ में सीसीएस एयरपोर्ट से मुंशीपुलिया के बीच 23 किलोमीटर उत्तर दक्षिण कोरिडोर में मेट्रो ट्रेन प्रतिदिनि 343 फेरे लगाती है। मेट्रो की ये सार्वजनिक परिवहन प्राणाली सुरक्षित होने के साथ साथ पर्यावरण के अनुकूल तो है ही साथ ही सवारी के कई माध्यमों से सस्ती भी है। यहां विशेष यात्रियों और महिलाओं की सहूलियत का भी पूरा ध्यान रखा जाता है। लखनऊ मेट्रो की लॉस्ट एंड फाउंड पॉलिसी के तहत यात्रियों का अब तक स्टेशनों और ट्रेनों में छूटा करीब साढ़े सात लाख रुपया और कीमती साजोसामान लौटाया गया है जिसने यात्रियों के दिल में इस सेवा के प्रति एक अटूट भरोसा भी पैदा किया है। लखनऊ मेट्रो की प्रतिबद्धता है कि वो इसी तरह यात्रियों की सेवा में सदैव तत्पर रहेगी।

नोएडा में सरस आजीविका मेला 14 मार्च 2021 तक

केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने सरस आजीविका मेला 2021 का उद्घाटन किया

पारिवारिक आय और जीवन स्तर में सुधार हेतु स्वयं सहायता समूह की भूमिका अहम: श्री तोमर

नोएडा हाट में 26 फरवरी से शुरू हुआ मेला 14 मार्च तक जारी रहेगा

नोएडा। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण, ग्रामीण विकास, पंचायती राज और खाद्य प्रसंस्करण मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने नोएडा में सरस आजीविका मेला 2021 का उद्घाटन किया। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री कैलाश चौधरी भी उपस्थित थे।


उद्घाटन अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए श्री तोमर ने कहा कि ग्रामीण विकास मंत्रालय, स्वयं सहायता समूहों में और अधिक संख्या में महिलाओं को सम्मिलित करने पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों ने पारिवारिक आय में वृद्धि और जीवन स्तर में सुधार के लिए महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।

प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के आह्वान के संदर्भ में बात करते हुए श्री तोमर ने कहा कि यह लक्ष्य सिर्फ सरकार की योजनाओं और प्रयासों से हासिल नहीं होगा, लोगों की सहभागिता इसके लिए महत्वपूर्ण होगी और स्वयं सहायता समूह इस लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं। उन्होंने सशक्त स्वयं सहायता समूहों से आगे आने और अन्य स्वयं सहायता समूहों की मदद करने का आह्वान किया ताकि वह भी आत्मनिर्भर बन सकें।

श्री कैलाश चौधरी ने कोविड-19 महामारी के दौरान ग्रामीण महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए स्वयं सहायता समूहों द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह में निर्यात गुणवत्ता का उत्पाद निर्मित करने की क्षमता है और इन समूहों की मदद से देश को आत्मनिर्भर बनाने का सपना साकार हो सकता है।

ग्रामीण विकास मंत्रालय में सचिव नागेंद्र नाथ सिन्हा ने स्वयं सहायता समूह और हस्तशिल्पियों को सुझाव दिया कि ग्राहक की मांग के बारे में जाने और उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार लाएं। उन्होंने कहा कि मंत्रालय इस मेले का प्रचार प्रसार करेगा ताकि इस मेले में शामिल होने वाले सभी विक्रेताओं को बड़ी संख्या में लोगों के समक्ष अपने उत्पाद प्रदर्शित करने का अवसर मिल सके।

सरस आजीविका मेला 2021 का 26 फरवरी से 14 मार्च 2021 के बीच ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा आयोजन किया जा रहा है। इस मेले में 27 राज्यों से 300 से अधिक स्वयं सहायता समूह और हस्तशिल्पी भाग ले रहे हैं। इस मेले में लगभग 150 स्टॉल और 15 खानपान के स्टॉल लगाए गए हैं और 60 से अधिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इस मेले के दौरान उत्पादों की पैकेजिंग और डिजाइन, संचार संबंधी कुशलता, सोशल मीडिया पर प्रचार-प्रसार और व्यापार से व्यापार के विपणन संबंधी प्रशिक्षण हेतु कार्यशाला का भी आयोजन किया जाएगा। इसमें ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों और हस्तशिल्पियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इस मेले में सुबह 11:00 बजे से रात 8:00 बजे तक प्रतिदिन आम लोग शिरकत कर सकते हैं।

मेले के उद्घाटन अवसर पर राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान के महानिदेशक डॉ. जी नरेन्द्र कुमार, ग्रामीण विकास मंत्रालय में अपर सचिव श्रीमती अल्का उपाध्याय और ग्रामीण विकास मंत्रालय में संयुक्त सचिव चरणजीत सिंह भी उपस्थित थे।

राज्य स्तरीय गो महोत्सव का शुभारंभ

लखनऊ। मलिहाबाद गोपेश्वर गौशाला द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय गो महोत्सव का पंडित अजय याग्निक और सांसद कौशल किशोर द्वारा शुभारंभ किया गया। महिलाओं द्वारा मंगल कलश यात्रा निकाली गई, जिसका संचालन अनुराधा श्रीवास्तव और शिवानी गुप्ता ने किया।

इस अवसर पर अन्य जिलों से आए हुए गो प्रेमी और गोपंचगव्य उत्पाद बनाने वालों की प्रदर्शनी भी लगी, जिसका शुभारंभ उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम नंदन सिंह और प्रदेश भाजपा कार्यालय प्रभारी भरत दीक्षित द्वारा किया गया। उनके द्वारा हवन की लकड़ी गाय के गोबर से बनाने वाले दीपक और धूपबत्ती आदि का निरीक्षण किया गया।

उन्होंने कानपुर से आए हुए मंगलम दीक्षित द्वारा बनाए गए गोबर गैस प्लांट का निरीक्षण किया। गोकृपा महोत्सव में वृंदावन से आए कथा वाचक इंद्रेश उपाध्याय के द्वारा भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। सोमवार को कथा में विशेष रूप से श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की महिमा का मार्मिक बखान किया गया। महोत्सव में सीतापुर, हरदोई, कानपुर, बाराबंकी, उन्नाव, बरेली, कानपुर, लालगंज रायबरेली आदि जिले से लोग पहुँच रहे हैं। गो उत्पाद बनाने के उद्देश्य से 3 दिवसीय नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा तथा गोबर से बनने वाले पदार्थ तथा गाय के दूध से बनने वाले अन्य पदार्थों का भी नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा।

आकाश-एनजी मिसाइल का सफल परीक्षण

आकाश-एनजी मिसाइल का सफल परीक्षण नई दिल्ली। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने गणतंत्र दिवस से ठीक एक दिन पहले 25 जनवरी, 2021 को ओडिशा के तट से दूर एकीकृत परीक्षण रेंज से आकाश-एनजी (नई पीढ़ी) मिसाइल का सफल पहला प्रक्षेपण किया। आकाश-एनजी एक नई पीढ़ी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है, जिसका उद्देश्य भारतीय वायु सेना द्वारा उपयोग के लिए ऊंचाई से हमला करने वाले कम आरसीएस हवाई खतरों को रोकना है।

मिसाइल ने टेक्स्ट बुक सटीकता के साथ लक्ष्य पर निशाना साधा। मिसाइल ने प्रक्षेपवक्र के दौरान उच्च स्तरीय क्षमता का प्रदर्शन करके सभी परीक्षण उद्देश्यों को पूरा किया। परीक्षण के दौरान कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम, ऑनबोर्ड एवियोनिक्स और मिसाइल के एयरोडायनामिक विन्यास का प्रदर्शन सफलतापूर्वक सत्यापित हुआ। परीक्षण प्रक्षेपण के दौरान मिसाइल के पूरे उड़ान पथ पर नजर रखी गई और उड़ान के आंकड़ों को आईटीआर चांदीपुर द्वारा तैनात रडार, ईओटीओ और टेलीमेट्री सिस्टम जैसे विभिन्न रेंज उपकरणों द्वारा हासिल किया गया।

प्रणाली के साथ एकीकृत करके मल्टी फंक्शन रडार का उसकी क्षमता के लिए परीक्षण किया गया। आकाश-एनजी प्रणाली को कनस्तरीकृत लांचर और बहुत छोटे ग्राउंड सिस्टम फुटप्रिंट के साथ अन्य समान प्रणालियों की तुलना में बेहतर तैनाती के साथ विकसित किया गया है। यह परीक्षण भारतीय वायु सेना के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), बीडीएल और बीईएल की संयुक्त टीम द्वारा किया गया था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि के लिए डीआरडीओ, बीईएल और भारतीय वायु सेना की टीम के वैज्ञानिकों को बधाई दी । सचिव डीडी आरएंडडी और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ जी सतीश रेड्डी ने आकाश एनजी मिसाइल के सफल उड़ान परीक्षण के लिए टीम को बधाई दी। ****

CRPF को मिली मोटर बाइक एम्बुलेंस ‘रक्षिता’

मोटर बाइक एम्बुलेंस ‘रक्षिता’

डीआरडीओ ने मोटर बाइक एम्बुलेंस ‘रक्षिता’ सीआरपीएफ को सौंपी

नई दिल्ली। भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन के दिल्ली स्थित नामिकीय औषिध तथा संबद्ध विज्ञान संस्थान (आईएनएमएएस) ने आज बाइक आधारित कैजुअल्टी ट्रांसपोर्ट इमरजेंसी वाहन, ‘रक्षिता’, को एक समारोह में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) को सौंपा। समारोह नई दिल्ली स्थित केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के मुख्यालय में आयोजित किया गया।

जीवन रक्षक सहायता प्रदान करेगी ‘रक्षिता’

डीआरडीओ के डीएस एवं डीजी (एलएस) डॉ. एके सिंह ने ‘रक्षिता’ के मॉडल को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के महानिदेशक एपी माहेश्वरी को सौंपा, जिसके बाद इस अवसर पर 21 बाइकों के एक दल को झंडी दिखाकर रवाना किया गया। यह बाइक एम्बुलेंस भारतीय सुरक्षा बलों और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के सामने आने वाली समस्याओं में तत्काल मदद करेगी। यह कम तीव्र संघर्ष वाले इलाकों से घायलों को निकालने के दौरान जीवन रक्षक सहायता प्रदान करेगी। यह संकीर्ण सड़कों और दूरदराज के इलाकों के लिए उपयुक्त होगी, जहां एम्बुलेंस के माध्यम से पहुंचना मुश्किल और अधिक समय लेने वाला है। यह बाइक एम्बुलेंस अपनी कार्यक्षमता और एकीकृत आपातकालीन चिकित्सा सहायता प्रणाली के चलते चार-पहिया एम्बुलेंस की तुलना में तेजी से रोगियों के लिए एक चिकित्सा आपातकालीन आवश्यकता उपलब्ध करा सकती है। बाइक एम्बुलेंस ‘रक्षिता’ में एक स्वनिर्धारित रिक्लाइनिंग कैजुअल्टी इवैक्यूएशन सीट (सीईएस) लगाई गई है, जिसे आवश्यकता के अनुसार उपयोग किया जा सकता है। ‘रक्षिता’ में हेड इम्मोबिलाइज़र, सुरक्षा हार्नेस जैकेट, हाथों और पैरों की सुरक्षा के लिए सुरक्षा पट्टियाँ, ड्राइवर के लिए वायरलेस मॉनिटरिंग क्षमता और ऑटो चेतावनी प्रणाली के साथ फ़िज़ियोलॉजिकल पैरामीटर मापने वाले उपकरण भी अन्य प्रमुख विशेषताओं में शामिल है। घायल साथी के हाल की रियल टाइम निगरानी डैशबोर्ड पर लगे एलसीडी पर की जा सकती है। बाइक एंबुलेंस मौके पर ही स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने के लिए एयर स्प्लिंट, मेडिकल और ऑक्सीजन किट से भी लैस है। यह बाइक एम्बुलेंस न केवल अर्धसैनिक और सैन्य बलों के लिए उपयोगी है, बल्कि नागरिकों के लिए भी इसका उपयोग किया जा सकता है। डॉ. जी. सतीश रेड्डी, अध्यक्ष डीआरडीओ और सचिव डीडी आरएंडडी ने हमारे सुरक्षा बलों के सामने आने वाली चुनौतियों के जवाब में इस स्वदेशी और लागत प्रभावी समाधान के लिए वैज्ञानिकों के प्रयासों की सराहना की।

संजीवनी की तरह याद किया जाएगा टीका: डॉ हर्षवर्धन

कोविड-19 टीकाकरण: भारत ने आरम्भ किया विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान, इस ऐतिहासिक दिवस पर नई दिल्ली के एम्स में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के साथ शामिल हुए डॉ. हर्षवर्धन, दिल्ली के एम्स में सफाई कर्मचारी को लगा कोरोना का पहला टीका

नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने आज इस ऐतिहासिक दिवस पर नई दिल्ली के एम्स में डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों तथा अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं के साथ रहना पसंद किया, जब प्रधानमंत्री ने विश्व के सबसे बड़े कोविड-19 टीकाकरण अभियान की शुरुआत की। उन्होंने कोविड-19 के खिलाफ राष्ट्र की लड़ाई के प्रति उनके निस्वार्थ समर्पण एवं प्रतिबद्धता की सराहना की, जब एक सफाई कर्मचारी मनीष कुमार नई दिल्ली के एम्स में टीकाकरण अभियान में शामिल होने वाले पहले वयक्ति बने। इस प्रक्रिया को एक वर्ष पूर्व शुरू हुई महामारी के चरमोत्कर्ष की शुरुआत बताते हुए डॉ. हर्षवर्धन ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी आरम्भ से ही महामारी के प्रबंधन में व्यक्तिगत रूप से शामिल रहे हैं। आज का दिन कोविड टीकाकरण आरम्भ करने के लिए पांच महीने की कड़ी मेहनत की परिणति का प्रतीक है।”

प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुबह 10:30 बजे कोविड-19 टीकाकरण अभियान का शुभारंभ किया। स्वास्थ्य मंत्री ने दुनिया के सबसे बड़े कोविड-19 टीकाकरण अभियान के विस्तार और संभावना पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा, “सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में आज 3,006 सत्र स्थलों पर एक साथ इस प्रक्रिया की शुरुआत हुई और प्रत्येक स्थल पर लगभग 100 लाभार्थियों को टीका लगाया गया। 138 करोड़ की जनसंख्या और सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम, जिसमें टीका के जरिए रोकथाम की जाने वाली बारह बीमारियों के खिलाफ लक्षित टीकाकरण शामिल है, के साथ भारत आज इतिहास दर्ज करने के शिखर पर खड़ा है और दुनिया भर में अन्य देशों को रास्ता दिखा रहा है। चेचक और पोलियो के बाद अब कोविड की बारी है। आज की प्रक्रिया में सभी दूरस्थ, दुर्गमक्षेत्रों, शहरी झुग्गी-झोपड़ी, जनजातीय क्षेत्र शामिल हैं।”

डॉ. हर्षवर्धन ने यह विशाल प्रक्रिया आरम्भ करने के लिए की गई तैयारियों के बारे में विस्तार से बताया कि “एक लाख से अधिक टीका लगाने वालों को प्रशिक्षित किया गया, कई मॉक अभ्यास किए गए, छोटी से छोटी गलतियों को दुरुस्त करने के लिए एक अखिल भारतीय राष्ट्रीय प्रक्रिया भी संचालित की गई। निष्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग किया गया। ईविन प्लेटफॉर्म को को-विन (कोविड पर विजय) में रिपर्पस किया गया, पिछले दो दिनों से (आज के सत्र के लिए) सभी लाभार्थियों को एसएमएस भेजा गया, जिसे सभी सत्रों में सभी निर्धारित लाभार्थियों के लिए उनकी दूसरी खुराक के लिए दोहराया जाएगा।” स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि कुशल टीम वर्क और दृढ़ राजनीतिक प्रतिबद्धता ने इस विशाल प्रक्रिया की आधारशिला रखी। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री और मेरे सभी सहयोगी स्वास्थ्य मंत्रियों के साथ सभी मुख्यमंत्रियों ने एक टीम के रूप में काम किया है और आज एक इतिहास बनाया है।” डॉ. हर्षवर्धन पहली टीका खुराक दिए जाने की निगरानी करते हुए   डॉ. हर्षवर्धन ने इस अवसर पर उपयोग सभी लोगों को पिछले वर्ष कोविड के विरूद्ध अर्जित उल्लेखनीय उपलब्धियों को याद दिलाने के लिए किया। उन्होंने कहा, “रोग के फैलने के तरीके की गहन निगरानी के साथ सक्रिय, रोकथाम करने के उपायों तथा निरंतर दृष्टिकोण के साथ, प्रभावी नैदानिक प्रबंधन ने इसके खिलाफ एक वीरतापूर्ण युद्ध में हमें सक्षम बनाया है और बहुत अधिक हद तक हमारे लोगों की जान बचाई है। भारत में सर्वोच्च रिकवरी दर है जो 96 प्रतिशत से अधिक है और मृत्यु दर 1.5 प्रतिशत से नीचे है, जो सबसे कम है।” टीकों को ‘विजय का मार्ग’ बताते हुए, उन्होंने टिप्पणी की “कोविड-19 टीकों को कोविड के ऊपर विजय प्राप्त करने में संजीवनी की तरह स्मरण किया जाएगा” डॉ. हर्षवर्धन ने कोविड योद्धाओं के वीरतापूर्ण बलिदानों का स्मरण किया, जिन्होंने समान रूप से निजी और सार्वजनिक सुविधा केन्द्रों के स्वास्थ्य कर्मियों को टीका देने के निर्णय का बचाव करते हुए अपनी खुद की जान जोखिम में डालने के जरिए दूसरों की मदद की। उन्होंने भारत के उन आम लोगों को भी बधाई दी, जिन्होंने टीका के परीक्षणों में उत्साहपूर्वक योगदान दिया है।

डॉ. हर्षवर्धन ने कोविड-19 टीकों की खुराक के संबंध में फैली अफवाहों का मुकाबला करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे भ्रामक सूचनाओं से गुमराह न हों तथा केवल विश्वसनीय और प्रामाणिक जानकारी पर ही भरोसा करें। डॉ. हर्षवर्धन ने कहा, “पूरा देश जीवन के सामान्य होने की प्रतीक्षा कर रहा है। लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है। वैसे चंद लोग जो इस प्रक्रिया की अखंडता पर सवाल उठाते हुए दूसरों को गुमराह कर रहे हैं, वे आम लोगों द्वारा किए गए बलिदानों तथा हमारे समाज के भविष्य के प्रति अनुचित कार्य कर रहे हैं।” एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया और नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) तथा कोविड-19 के लिए टीका प्रबंधन के राष्ट्रीय विशेषज्ञ समूह (एनईजीवीएसी) के अध्यक्ष डॉ. वी.के. पॉल ने भी एम्स में टीका लगवाया। नई दिल्ली के एम्स के दौरे के बाद, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने गंगाराम अस्पताल में टीकाकरण स्थल का दौरा किया, जहां उन्होंने स्वास्थ्य और अग्रिम पंक्ति कार्यकर्ताओं के साथ परस्पर बातचीत की तथा राष्ट्र की सेवा करने की उनकी भावना को प्रणाम किया। उन्होंने कहा, “हम पिछले कई महीनों से आपके निरंतर और निस्वार्थ कार्य के कारण सुरक्षित रहे हैं”।

DRDO ने बनाई पहली स्वदेशी 9 mm मशीन पिस्टल

DRDO की पहली स्वदेशी 9 mm मशीन पिस्टल नजदीकी लड़ाई में टूटेगी बनकर कहर

नई दिल्ली। भारत ने अपनी पहली 100 फीसदी स्वदेशी मशीन पिस्टल बना ली है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO), भारतीय सेना (Indian Army) और इन्फैंट्री स्कूल महू (MHOW) ने मिलकर इसे बनाया है। रक्षा मंत्रालय ने इस पिस्टल को मीडिया के समक्ष प्रस्तुत कर इसकी खासियतें बताईं। माना जा रहा है कि इस पिस्टल का उपयोग क्लोज कॉम्बैट, वीआईपी सिक्योरिटी और आतंकरोधी मिशन में किया जा सकता है। इस 9 मिमी मशीन पिस्टल (9 mm Machine Pistol) की डिजाइनिंग DRDO के आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट इस्टैबलिशमेंट और आर्मी इन्फैंट्री स्कूल, महू ने मिलकर की है। इसे बनाने में डीआरडीओ को सिर्फ 4 महीने लगे। इसके एक किलोग्राम एवं 1.80 किलोग्राम वजन के दो वैरिएंट हैं। 9 मिमी मशीन पिस्टल के ऊपर दुनिया के किसी भी तरह के माउंट लगाए जा सकते हैं। वह किसी भी तरह का टेलीस्कोप, बाइनोक्यूलर या लेजर बीम हो सकते हैं। गन का ऊपरी हिस्सा एयरक्राफ्ट ग्रेड के एल्यूमिनियम से बना है, जबकि निचला हिस्सा कार्बन फाइबर से बनाया गया है। इसको बनाने के लिए थ्रीडी प्रिटिंग डिजाइनिंग की भी मदद ली गई। एक पिस्टल की उत्पादन लागत 50 हजार रुपए से कम है। कोई भी देश इसे भारत से खरीद सकता है।

इस 9 mm Machine Pistol का नाम अस्मि (Asmi) रखा गया है… अर्थात गर्व, आत्मसम्मान और कड़ी मेहनत। 100 मीटर की रेंज तक यह पिस्टल सटीक निशाना लगा सकती है। इसकी मैगजीन में स्टील की लाइनिंग लगी है यानी यह गन में अटकेगी नहीं। इसकी मैगजीन को पूरा लोड करने पर 33 गोलियां आती हैं। इसका लोडिंग स्विच दोनों तरफ हैं। यानी दाहिने और बाएं हाथों से बंदूक चलाने वाले को कोई दिक्कत नहीं होगी। आगे की तरफ आर्म ग्रिप है जो सही निशाना लगाने के लिए मददगार साबित होता है। पिस्टल की बट फोल्डेबल है। यानी जरूरत पड़ने पर कंधे पर टिकाएं या फिर फोल्ड करके सीधे फायर करें।

अब भारत ने तैयार किया M-RNA टीका

कोरोना के विरुद्ध भारत का एक और युद्ध, इसके खिलाफ जंग में भारत को एक और कामयाबी, दुनिया का सबसे खास M-RNA टीका देश में तैयार

नई दिल्ली। कोरोना महामारी के खिलाफ भारत को एक और बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। देश में दुनिया का सबसे खास M-RNA तकनीक पर आधारित कोरोना तैयार कर लिया गया है। इस खास तकनीक पर आधारित टीके के कारण भारत आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में और मजबूत हुआ है। भारत लगातार मेडिसीन खास तौर पर कोरोना से जंग में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। इसी कड़ी में अब एम-आरएनए टीका बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। तापमान से लेकर कीमतों तक में यह टीका बाकी देशों की तुलना में सबसे अलग होगा। भारतीय वैज्ञानिकों की लंबी खोज और रात-दिन की मेहनत के बाद इस टीके को तैयार किया जा रहा है।

विदित हो कि दुनिया में फ़िलहाल एमआरएनए तकनीक पर दो ही टीके उपलब्ध हैं। इनमें पहला अमरीकी दवा कंपनी फाइजर का है। इसे -70 डिग्री सेल्सियस तापमान पर रखना बेहद जरूरी है। इस टीके की प्रति डोज कीमत करीब 1431 रुपए है। वहीं दूसरा टीका मोर्डना का है, जिसे 2 से आठ डिग्री सेल्सियस तापमान पर रखा जा सकता है, लेकिन प्रति डोज इस टीके की कीमत करीब 2715 रुपए हो सकती है। देखा जाए तो इन टीकों की दो खुराक का इस्तेमाल करने में एक व्यक्ति को कम से कम पांच हजार रुपए खर्च करना होगा। इन दो टीकों के मुकाबले भारत में तैयार हो रहा टीका काफी सस्ता होगा। एम-आरएनए तकनीक से विकसित टीका 2 से आठ डिग्री सेल्सियस तापमान में ही सुरक्षित रहेगा और इसकी कीमत भी करीब प्रति डोज 200 से 300 रुपए के आसपास हो सकती है, हालांकि कीमतों को लेकर यह अनुमान है। स्वास्थ्य मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों को उम्मीद है कि यह टीका इससे अधिक कीमत पर उपलब्ध नहीं होगा।

कोरोना की जड़ पर करेगा वार-जानकारी के अनुसार जेनोवा बायोफार्मास्युटिकल्स लिमिटेड और भारत सरकार के डीबीटी मंत्रालय के वैज्ञानिकों ने मिलकर इसे तैयार किया है। मौजूदा समय में इस टीके पर पहले चरण के तहत ह्यूमन ट्रायल चल रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने बताया कि इस टीके पर दूसरे चरण का परीक्षण आगामी मार्च माह में होने की उम्मीद है। नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने इसे बड़ी कामयाबी बताते हुए कहा कि भारतीय वैज्ञानिकों ने भारत की जरूरतों को समझते हुए एकदम अलग टीका तैयार किया है, जिसे अधिक तापमान पर भी सुरक्षित रखा जा सकता है। एम-आरएनए टीके में कोरोना वायरस की आनुवंशिक सामग्री का एक खास हिस्सा होता है। इसे मैसेंजर आरएनए या एम-आरएनए कहते हैं। शरीर में दाखिल होने पर यह एम-आरएनए हमारी ही कोशिकाओं को वायरस वाला वह प्रोटीन बनाने का निर्देश देने लगता है, जिसकी मदद से असली कोरोना वायरस हमला बोलता है। इसके चलते शरीर में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने लगती है।

लखनऊ पहुंची 11 लाख कोविशील्ड वैक्सीन की खेप,  टीका लगेगा 16 से

11 लाख कोविशील्ड वैक्सीन की खेप पहुंची लखनऊ, 16 से लगेगा टीका

लखनऊ। कोविड-19 की वैक्सीन मंगलवार शाम 4 बजे विशेष विमान से पुणे से लखनऊ पहुंची। उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने अमौसी एयरपोर्ट पर 11 लाख कोविशील्ड वैक्सीन को रिसीव किया। इसके बाद वैक्सीन को कंटेनर में लोड किया गया। स्वास्थ्य मंत्री ने हरी झंडी दिखाकर वहां से रवाना किया। 16 जनवरी को लखनऊ में केजीएमयू, एरा, एसजीपीजीआई, सीएचसी माल और मोहनलालगंज सहित कुल 16 केंद्रों पर वैक्सिनेशन किया जाएगा। वैक्सिनेशन की मॉनिटरिंग लाइव फीड द्वारा की जाएगी।

अमौसी एयरपोर्ट पर वैक्सीन को लेकर अलर्ट जारी किया गया था। CISF की कड़ी निगरानी में राजधानी में वैक्सीन को रखा जाएगा। साथ ही लखनऊ से प्रदेश के सभी मंडलों में वैक्सीन को भेजा जाएगा। मंडलों से जिला कोविड सेंटर्स पर वैक्सीन जाएगी। जिले के कमांड सेंटर्स से सीएचसी और पीएचसी तक वैक्सीन पहुंचाई जाएगी, जिन सेंटर्स पर वैक्सीन लगनी है, वहां उसी दिन वैक्सीन भेजी जाएगी।

पहले चरण में 16 केंद्रों पर होगा टीकाकरण-
पहले चरण में 16 केंद्रों पर वैक्सिनेशन किया जाएगा। सभी केंद्रों की लाइव फीड द्वारा मॉनिटरिंग होगी। 15 जनवरी तक सभी तैयारियां पूरी करने का आदेश दिया गया है। सभी 61 केंद्रों की इंट्रीग्रेटेड कोविड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर मॉनिटरिंग करेगा। सभी केंद्रों पर 15 जनवरी तक सभी तैयारियों को पूरा कर लिया जाएगा और सभी नोडल अधिकारी अपने अपने केंद्रों के जाकर सभी व्यवस्थाओं को स्वयं चेक करेंगे। सभी नोडल अपने-अपने केंद्रों में फ्लेक्सी लगवाएंगे। ओपन एरिया व इंटरनल स्पेस में फ्लेक्सी लगवाने के साथ-साथ वैक्सिनेशन रूम में ग्रीन स्क्रीन भी लगवाई जाएंगी। केंद्रों पर सोशल डिस्टेंसिग, मास्क व कोविड प्रोटोकॉल का अनुपालन कड़ाई से कराया जाएगा साथ ही लोकल थाने से भी समन्वय स्थापित किया जाएगा।

वैक्सिनेशन के लिए 61 केंद्र चिह्नित-
वैक्सिनेशन के लिए कुल 61 केंद्रों को चिह्नित किया गया है। सभी 61 केंद्रों को इंट्रीग्रेटेड कोविड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर से जोड़ा गया है। इस सेंटर द्वारा सभी केंद्रों की मॉनिटरिंग की जाएगी। सभी टीमें कितने बजे अपने-अपने केंद्रों पर पहुंचीं, हर दो घण्टे में किस केंद्र पर कितने लोगों का वैक्सिनेशन हुआ, कितने बाकी हैं, किस केंद्र के पास कितनी वैक्सीन अथवा अन्य चिकित्सकीय स्टॉक उपलब्ध है आदि की रिपोर्ट कमांड सेंटर द्वारा सभी केंद्रों से ली जाएगी। हर बूथ पर महिला कॉन्‍स्‍टेबल की भी नियुक्ति की गई है। साथ ही साथ सभी बूथ सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में होंगे। सभी स्टाफ को बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की ट्रेनिग कराई जा रही है।

पूनावाला का दावा: सबसे सस्ती sirum की डोज़

पूनावाला ने कहा, हम दे रहे कोरोना की सबसे सस्ती दवा, आर्डर जा सकता है  5 से 6 करोड़ डोज
नई दिल्ली। सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला ने दावा किया है कि वो कोरोना की सबसे सस्ती वैक्सीन दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को 200 रुपये प्रति डोज के हिसाब से वैक्सीन दे रहे हैं। ये कीमत पहले 100 मिलियन डोज की है। वैक्सीन का ऑर्डर मार्च तक 5 से 6 करोड़ तक जाएगा।

सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ और ऑनर अदार पूनावाला ने महाराष्ट्र के पुणे स्थित अपनी फैक्ट्री से कोविशील्ड की आपूर्ति को ‘ऐतिहासिक क्षण’ करार दिया और कहा कि वो कोविड-19 महामारी से लड़ने में भारत सरकार की मदद करना चाहते हैं। इसलिए उन्होंने वैक्सीन पर लाभ नहीं कमाने का फैसला किया है। यह भी स्पष्ट किया कि वो सिर्फ सरकार को ही 10 करोड़ डोज 200 रुपये की दर से देंगे और अगर कोई बाजार में कोविशील्ड खरीदने जाएगा तो उसे 1,000 रुपये देना होगा।

देश में अब 2.2 लाख से भी कम सक्रिय मरीज: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की ओर से मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया।  स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण ने कहा कि देश में कोरोना संक्रमण के सक्रिय मामलों की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है। उन्होंने बताया कि देश में अब कोरोना के 2.2 लाख से भी कम सक्रिय मरीज रह गए हैं। उन्होंने कहा कि केवल दो राज्य ऐसे हैं जहां सक्रिय मामले 50 हजार से ज्यादा हैं। ये दो राज्य महाराष्ट्र और केरल हैं।

गोबर्धन: अब बरसेगा गोबर से धन

बाजार में आया गाय के गोबर से बना पेंट, किसानों को मिलेगा Gobar se Dhan

खादी और ग्रामोद्योग आयोग की जयपुर इकाई कुमारप्पा नेशनल हैंडमेड पेपर इंस्टीट्यूट ने तैयार किया गोबर पेंट

खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) की मदद से की जाएगी पेंट की बिक्री

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नई दिल्ली। अभी तक हम गोबर्धन को एक त्योहार के रूप में ही मनाते आ रहे हैं, लेकिन अब सच में ही गोबर से धन (Gobar se Dhan) बरसेगा। किसानों की आमदनी बढ़ाने में गोबर का अहम रोल होगा। अब किसान गोबर से आमदनी भी करेंगे।

गाय का दूध-घी, गोमूत्र से बने पेस्टीसाइट, गाय के गोबर के दीये के बाद अब गाय के गोबर से बना पेंट। जी हां, सही पढ़ा आपने, गाय के गोबर से बना पेंट, जिससे आप अपने घर, ऑफिस या दुकान रंगते हैं। इसे  वेदिक पेंट (Vedic Paint) नाम दिया गया है।

गाय के गोबर से बने पेंट की बिक्री खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) की मदद से की जाएगी। गोबर पेंट को खादी और ग्रामोद्योग आयोग की जयपुर की इकाई कुमारप्पा नेशनल हैंडमेड पेपर इंस्टीट्यूट (Kumarappa National Handmade Paper Institute) ने तैयार किया है। इस पेंट को बीआईएस (BIS) यानी भारतीय मानक ब्यूरो भी प्रमाणित कर चुका है। किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में गाय के गोबर से बना पेंट एक बड़ा कदम साबित होगा।

एंटीफंगल, एंटीबैक्टीरियल, इको फ्रेंडली पेंट (Cow dung Paint):

खादी और ग्रामोद्योग आयोग का कहना है कि गाय के गोबर से बना यह पेंट एंटीफंगल, एंटीबैक्टीरियल और इको फ्रेंडली है। दीवार पर पेंट करने के बाद यह सिर्फ चार घंटे में सूख जाएगा। इस पेंट में अपनी जरूरत के हिसाब से रंग भी मिलाया जा सकता है।

विभिन्न पैकिंग में तैयार:

खादी प्राकृतिक पेंट (Khadi Prakritik Paint) दो रूप में उपलब्ध होगा, डिस्टेंपर पेंट (distemper paint) और प्लास्टिक एम्युनेशन पेंट (plastic emulsion paint)। इस पेंट में हैवी मैटल (heavy metals) जैसे- सीसा (lead), पारा (mercury), क्रोमियम (chromium), आर्सेनिक, कैडमियम आदि का इस्तेमाल नहीं किया गया है। फिलहाल इसकी पैकिंग 2 लीटर से लेकर 30 लीटर तक तैयार की गई है।

30,000 रुपये की आमदनी:

खादी और ग्रामोद्योग आयोग का कहना है कि इस पेंट से स्थानीय निर्माताओं को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। पेंट की इस तकनीक से गाय के गोबर का इस्तेमाल बढ़ेगा। यह गो शालाओं की आमदनी बढ़ाने में भी अहम भूमिका अदा करेगा। इस पेंट के निर्माण से किसान या गोशाला को एक पशु से हर साल तकरीबन 30,000 रुपये की आमदनी होगी। ग्राहकों के लिए सस्ता, किसानों के लिए लाभदायक-वैदिक पेंट का मुख्य अवयव गोबर होने से यह आम पेंट के मुकाबले सस्ता पड़ेगा। इससे रंग-रोगन कराने पर ग्राहकों की जेब कम ढीली होगी। वहीं यह देश के किसानों की आय बढ़ाने वाला होगा। टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के माध्यम से इसकी स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जाएगा।

जूते से मिलेगी दुश्मन की आहट, फौरन मार दो गोली!

बॉर्डर पर जूता देगा दुश्मन की आहट, मार दो गोली

काशी के युवा वैज्ञानिक ने बनाया इंटेलिजेंस जूता, बॉर्डर पर घुसपैठ रोकने में कारगर, गोलियां दागने में भी सक्षम

जूते में लगा विशेष प्रकार का सेंसर 20 किमी तक वाइब्रेट करके अलार्म से जवानों को करेगा अलर्ट। इसमें लगे 2 फोल्डिंग 9 एमएम के गन बैरल से की जा सकती है फायरिंग। रेडियो फ्रिक्वेंसी और मोबाइल नेटवर्क पर भी काम करने में सक्षम जूते का वजन मात्र 650 ग्राम। सोलर चार्जिंग सिस्टम से लैस जूते में लगा एक विशेष प्रकार का हीटर जवानों के पैरों को रखेगा गर्म।


वाराणसी (धारा न्यूज): बार्डर पर घुसपैठ रोकने के लिए बनारस के युवा वैज्ञानिक ने एक ऐसा जूता तैयार किया है जो 20 किलोमीटर तक की दूरी तक किसी दुश्मन की आहट को महसूस करेगा और घुसपैठ को रोक सकेगा। यह इंटेलिजेंस जूता गोलियां दागने में भी सक्षम है। इसका उपयोग दुश्मनों को रोकने के लिए किया जाएगा। इसको युवा वैज्ञानिक श्याम चौरसिया ने बनाया है।

प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के युवा वैज्ञानिक श्याम चौरसिया महिलाओं और सेना के लिए कई नए-नए इनोवेशन कर चुके हैं। श्याम चौरसिया ने एक न्यूज़ एजेंसी को बताया कि, “देश में घुसपैठिये चुपचाप बार्डर पर घुसने का प्रयास करते हैं। उन्हें रोकने के लिए इंटेलिजेंस जूता बनाया है। जो बार्डर पर घुसपैठ की घटना होते ही सचेत कर देगा। इस जूते में एक विशेष प्रकार का सेंसर लगाया गया है, जो कि 20 किमी तक की घटना के लिए यह जवानों को वाइब्रेट करके आलर्म के माध्यम से अलर्ट करेगा। इससे समय रहते जवान अपनी और बॉर्डर की सुरक्षा कर सकेंगे।” यह जूता महज कुछ सेकेंडों में जानकरी दे देगा। इसमें आपातकाल को देखते हुए 2 फोल्डिंग 9 एमएम के गन बैरल लगाए गए हैं, जो फायर भी कर सकते हैं। इससे जवान अपनी सुरक्षा भी कर सकते हैं। वैज्ञानिक श्याम चौरसिया बताते हैं कि, “यह दुश्मन की हर प्रकार की गतिविधियों पर नजर रख सकता है। यह रेडियो फ्रिक्वेंसी और मोबाइल नेटवर्क पर भी काम करता है। इसका वजन महज 650 ग्राम है। रबड़ और स्टील की प्लेट को मिलाकर इसे तैयार किया गया है। ठंड से जवानों को बचाने के लिए इसमें एक विशेष प्रकार का हीटर लगाया गया है, जो कि उनके पैरों को गर्म रखेगा। इसके अलावा इसमें सोलर चार्जिंग सिस्टम भी लगा है। इसमें स्टील की चादर, एलईडी लाइट, सोलर प्लेट रेडियो सर्किट, स्विच इलेक्ट्रॉनिक ट्रिगर के अलाव वाइब्रेशन मोटर का भी इस्तेमाल हुआ है। इसका लेजर सेंसर और ह्यूमन सेंसर बॉर्डर में रखा होगा। जैसे ही दुश्मन की हरकत होगी और वह इसकी रेंज में आएगा। इसके बाद यह तुरंत एक्टिव होकर जवान के जूते पर सिग्नल भेजेगा। जूते में लगा अलार्म जवान को सूचित कर देगा कि कोई अराजक तत्व बॉर्डर में दाखिल हुआ है। जवान सतर्क हो जाएंगे और समय रहते ही दुश्मन को रोकने में सक्षम हो सकते हैं। आपातकाल के समय जवान इसमें दुश्मन को टारगेट करके फायर भी कर सकते हैं। जूता आगे और पीछे दोनों तरफ रिमोट के माध्यम से फायर कर सकेगा। इस यंत्र के इस्तेमाल से बॉर्डर और जवान दोनों की आसानी से सुरक्षा होगी।

वहीं गोरखपुर नक्षत्रशाला के क्षेत्रीय वैज्ञानिक अधिकारी महादेव पांडेय कहते हैं कि, “इस इंटेलिजेंस जूते की तकनीक बहुत अच्छी है। इसमें जितना मजबूत सेंसर होगा, यह उतना ही कारगर होगा। यह घुसपैठ को राकेगा। जैपनीज गाड़ियों में देखने को मिला है कि अगर कहीं दूर कोई आवाज होती है तो 2 किलोमीटर पहले से इंडिकेटर बजने लगता है। यह बहुत अच्छी खोज है। इसमें सेंसर का बहुत बड़ा रोल होता है। इसलिए इसे और मजबूत करने की जरूरत है।”

कोरोना: 10 दिन में शुरू हो सकता है टीकाकरण

10 दिन में शुरू हो सकता है टीकाकरण

नई दिल्ली (धारा न्यूज): केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने आज कहा कि कोरोना वैक्सीन को मंजूरी मिलने के 10 दिन बाद रोलआउट हो सकती है। कोरोना वैक्सीन को DCGI ने 3 जनवरी को मंजूरी दी थी। इस लिहाज से 13 या 14 जनवरी से देश में कोरोना वैक्सीनेशन कार्यक्रम शुरू हो सकती है। आज प्रेस कॉन्फ्रेंस के दाैरान केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा कि सरकार 10 दिन के अंदर कोरोना वैक्सीन को रोलआउट करने को तैयार है। राजेश भूषण ने कहा, “चूंकि अब कोरोना वैक्सीन को मंजूरी मिल चुकी है, अब 10 दिन के अंदर टीकाकरण कार्यक्रम शुरू हो जाएगा।”

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि भारत सरकार ने किसी भी तरीके से किसी भी वैक्सीन के एक्सपोर्ट को बैन नहीं किया है। कोविशील्ड ओर कोवैक्सीन को 2-8 डिग्री तापमान पर रखे जाने की जरूरत है। कैडिला की वैक्सीन DNA आधारित वैक्सीन है। परीक्षण के दौरान देखा गया कि अच्छी एंटीबॉडी बनी है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि Co-WIN सिस्टम भारत में बना है, लेकिन दुनिया के देशों की जरूरतों के हिसाब से इसे तैयार किया गया है। अन्य देश अगर इसे उपयोग करेंगे तो उनकी मदद की जाएगी। कोरोना वैक्सीन की जानकारी देते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने बताया कि करनाल, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता में स्थित GMSD नामक 4 प्राथमिक वैक्सीन स्टोर बनाए गए हैं और देश में ऐसे 37 वैक्सीन स्टोर हैं। वे टीकों को थोक में इकठ्ठा करेंगे और फिर आगे वितरित किए जाएंगे।


स्वदेशी टीके पर छिड़ा ट्विटर युद्ध

लखनऊ (धारा न्यूज़): कोरोना संक्रमण से बचाव को देश में तैयार टीके को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बयान पर सियासी ट्विटर युद्ध छिड़ गया है।

मायावती का रुख सकारात्मक

बहुजन समाज पार्टी की अध्‍यक्ष और पूर्व मुख्‍यमंत्री मायावती ने कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के टीके को लेकर रविवार को सकारात्‍मक प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त की। मायावती ने ट्वीट कर संक्रमण से बचाव के लिए स्‍वदेशी टीके का स्‍वागत किया और इसके लिए वैज्ञानिकों को बधाई दी। मायावती ने साथ ही केंद्र सरकार से देश में सभी स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों के साथ-साथ समाज के अति गरीब लोगों के लिए भी इस टीके की निशुल्क व्‍यवस्‍था करने का भी अनुरोध किया।

गर्व का विषय: स्‍वतंत्र देव सिंह

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्‍यक्ष स्‍वतंत्र देव सिंह ने रविवार को ट्वीट किया ,‘‘ यह गर्व की बात है कि जिन दो वैक्‍सीन के इमरजेंसी इस्‍तेमाल को मंजूरी दी गई है, वे दोनों मेड इन इंडिया हैं। यह आत्‍मनिर्भर भारत के सपने को पूरा करने के लिए हमारे वैज्ञानिक समुदाय की इच्‍छा शक्ति को दर्शाता है।’’

टीकाकरण को इवेंट न समझे BJP: अखिलेश

समाजवादी पार्टी के अध्‍यक्ष एवं पूर्व मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव ने सुबह ट्वीट किया, ‘‘कोरोना का टीकाकरण एक संवेदनशील प्रक्रिया है इसीलिए भाजपा सरकार इसे कोई सजावटी-दिखावटी इवेंट न समझे और पुख्‍ता इंतज़ामों के बाद ही इसे शुरू करे। ये लोगों के जीवन से जुड़ा विषय है अत: इसमें बाद में सुधार का खतरा नहीं उठाया जा सकता है। गरीबों के टीकाकरण की निश्चित तारीख घोषित हो।’’ इस पर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त की है। भाजपा के प्रदेश उपाध्‍यक्ष व विधान परिषद सदस्‍य विजय बहादुर पाठक ने अखिलेश यादव के ट्वीट को टैग करते हुए कहा,‘‘ बंद कमरे में सियासत करने से बातें देर से समझ आ रही, थोड़ा बाहर निकलें, जनता के बीच जाएं।’’ पाठक ने कहा ,‘‘ वैक्‍सीन का विषय लोगों के जीवन का विषय है, पार्टी का नहीं। इसे पार्टियों के खांचे में न बांट, स्‍वागत करें।’’ इसके पहले अखिलेश यादव ने शनिवार को कहा था,‘‘ हम भाजपा की राजनीतिक वैक्‍सीन नहीं लगवाएंगे।’’

देश के चिकित्सकों, वैज्ञानिकों का अपमान-केशव प्रसाद मौर्य

अखिलेश यादव ने शनिवार को कोरोना वायरस के टीके को लेकर नई बहस शुरू कर दी जिसके जवाब में भाजपा संगठन और सरकार ने तीखी प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त करते हुए अखिलेश के बयान को देश के वैज्ञानिकों और डॉक्टरों का अपमान बताया। शनिवार को यादव ने पत्रकारों से बातचीत में कहा था, ‘‘मैं तो नहीं लगवाऊंगा अभी टीका, मैंने अपनी बात कह दी। वह भी भाजपा लगायेगी, उसका भरोसा करूं मैं। अरे जाओ भई, अपनी सरकार आयेगी तो सबको फ्री वैक्सीन लगेगी। हम भाजपा का टीका नहीं लगवा सकते।’’ इसके बाद अखिलेश यादव के बयान पर पलटवार करते हुये प्रदेश के उप मुख्यमंत्री और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्‍यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि अखिलेश यादव को टीके पर भरोसा नहीं है और यह देश के चिकित्सकों और वैज्ञानिकों का अपमान है। उन्होंने कहा, ‘‘अखिलेश यादव जी को टीके पर भरोसा नहीं है और उत्तर प्रदेश वासियों को उन पर (अखिलेश यादव) पर भरोसा नहीं है। उनका टीके पर सवाल उठाना, हमारे देश के चिकित्सकों एवं वैज्ञानिकों का अपमान है जिसके लिए उन्हें माफी माननी चाहिए।

पैंगोंग झील में तैनात की जाएंगी 12 स्वदेशी नौकाएं

पैंगोंग झील में तैनात होंगी 12 स्वदेशी नौकाएं
चप्पे-चप्पे नजर रखेगी भारतीय सेना

नई दिल्ली (धारा न्यूज): भारतीय सेना हाई परफॉर्मेंस पेट्रोलिंग बोट्स खरीदने की तैयारी में है। पूरी तरह से सशस्त्र इन बोट्स को लद्दाख में पैंगोंग झील पर तैनात किया जाएगा। इसका इस्तेमाल उस क्षेत्र में और उसके आसपास गश्त व तेजी से सैनिकों की तैनाती के लिए किया जाएगा। इसके जरिये जवान चीन की हर हरकत पर नजर रखेंगे। भारत की सरकारी कंपनी गोवा शिपयार्ड से इन पेट्रोलिंग बोट्स को खरीदा जाएगा। वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत और चीन के बीच तनाव अभी भी जारी है। लद्दाख में पैंगोंग झील क्षेत्र में अपनी उपस्थिति और तैनाती को मजबूत करने के अपने प्रयासों के लिए भारतीय सेना ने 12 नौकाओं के अधिग्रहण का अनुबंध किया है। गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा ये नौकाएं बनाई जा रही हैं। इसमें आगे और पीछे दोनों तरफ बंदूकें होंगी और ये सैनिकों को ले जाने में सक्षम होगी। भारतीय सेना ने बड़े जल निकायों की निगरानी और गश्त के लिए 12 फास्ट पैट्रोल नावों के लिए मेसर्स गोवा शिपयार्ड लिमिटेड के साथ एक अनुबंध किया था, जिसमें उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में शामिल थे। इनकी डिलीवरी मई 2021 से शुरू होगी।
सेना के अधिकारियों ने कहा, “नावों का संचालन और रखरखाव इंजीनियर्स द्वारा किया जाएगा। ये नावें ऊंचाई वाले क्षेत्रों में विशाल जल निकायों में फैली सीमाओं / नियंत्रण रेखा पर सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण होंगी।” उन्होंने कहा उच्च गति और युद्धाभ्यास वाली नौकाएं अत्याधुनिक जहाज पर प्रणालियों से सुसज्जित होंगी।

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10 लिंक्स यू2 फायर नियंत्रण प्रणाली से लैस होगी नौसेना

10 लिंक्स यू2 फायर नियंत्रण प्रणाली से लैस होगी नौसेना
आपूर्ति के लिए रक्षा मंत्रालय ने किये बीईएल के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर

नई दिल्ली (धारा न्यूज़): रक्षा मंत्रालय (एमओडी) ने विक्रय (भारतीय) श्रेणी के तहत 1,355 करोड़ रुपये की लागत से भारतीय नौसेना के प्रमुख युद्धपोतों के लिए 10 लिंक्स यू2 फायर नियंत्रण प्रणाली की खरीद हेतु भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) के साथ नई दिल्ली में एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। लिंक्स प्रणाली को स्वदेश में डिजाइन और विकसित किया गया है और यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘आत्म-निर्भर’ भारत के दृष्टिकोण को बढ़ावा देगी।

लिंक्स यू2 जीएफसीएस एक नावल गन फायर नियंत्रण प्रणाली है, जिसे समुद्री हलचल के बीच निगरानी करने और लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए विकसित किया गया है। यह सटीक रूप से हवा/जमीन के लक्ष्यों पर नज़र रखने के साथ-साथ हथियार के लक्ष्य का अनुमान लगाने के लिए आवश्यक लक्ष्य डेटा बनाने में सक्षम है। इसे जहाज पर उपलब्ध मध्यम/छोटी रेंज की बंदूकों जैसे रूसी एके176, ए190, एके630 और एसआरजीएम के साथ संचालित किया जा सकता है।

गन फायर नियंत्रण प्रणाली को शानदार तरीके से डिजाइन दिया गया है और इसके माध्यम से सरल और लचीले तरीके से विभिन्न कार्यों को अंजाम दिया जा सकता है। यह प्रणाली भारतीय नौसेना के लिए विकसित और वितरित की गई है और पिछले दो दशकों से सेवा में है। इसके साथ-साथ यह विभिन्न श्रेणियों के विध्वंसकों, फ्रिगेट, मिसाइल बोट, कोरवेट, आदि भारतीय नौसेना के जहाजों की सामरिक आवश्यकताओं को संतोषजनक रूप से पूरा कर रही है।

पूर्णतया स्वदेशी तकनीक से विकसित प्रणाली-
इस प्रणाली को लगातार उन्नत किया गया है और प्रौद्योगिकी उन्नयन के साथ-साथ स्वदेशीकरण पर प्रमुख ध्यान रहा है। इस प्रणाली में उपयुक्त सामाग्री में स्वदेशी तकनीक में लगातार वृद्धि करते हुए विदेशी ओईएम पर पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही निर्भरता को खत्म किया जा रहा है। इस प्रणाली को एनओपीवी, तलवार और टीजी श्रेणी के जहाजों पर लगाया जाएगा। प्रणाली में शामिल निगरानी रडार, सर्वो और हथियार नियंत्रण मॉड्यूल सभी को पूरी तरह से बीईएल द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है। स्वदेशी तकनीक से विकसित यह प्रणाली अधिकतम समय तक कार्य करने के साथ-साथ इसके जीवनपर्यन्त उत्कृष्ट उत्पाद की गारंटी को सुनिश्चित करेगी। इन्हें अगले पांच वर्षों में बीईएल, बेंगलुरु द्वारा प्रदान किया जाएगा।

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प्रधानमंत्री कल रखेंगे GHTC-इंडिया के LHP की आधारशिला

प्रधानमंत्री 1 जनवरी को रखेंगे GHTC-इंडिया के LHP की आधारशिला
PMAYU, ASHA-इंडिया पुरस्कारों का भी वितरण

नई दिल्ली। छह राज्यों में छह स्थानों पर ग्लोबल हाउसिंग टेक्नोलॉजी चैलेंज- इंडिया (जीएचटीसी- इंडिया) के तहत हल्के मकान से जुड़ी परियोजनाओं (लाइट हाउस प्रोजेक्ट्स) की आधारशिला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 1 जनवरी, 2021 को सुबह 11 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से रखेंगे। प्रधानमंत्री अफोर्डेबल सस्टेनेबल हाउसिंग एक्सेलेरेटर्स- इंडिया (एएसएचए- इंडिया) के तहत विजेताओं की भी घोषणा करेंगे और प्रधानमंत्री आवास योजना- शहरी (पीएमएवाई-यू) मिशन के कार्यान्वयन में उत्कृष्टता के लिए वार्षिक पुरस्कार देंगे।

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री एनएवीएआरआईटीआईएच (न्यू, अफोर्डेबल, वैलिडेटेड, रिसर्च इनोवेशन टेक्नोलॉजिज फॉर इंडियन हाउसिंग) नाम से नवोन्मेषी निर्माण प्रौद्योगिकी पर एक सर्टिफिकेट कोर्स और जीएचटीसी- इंडिया के जरिये पहचान किए गए 54 नवोन्मेषी आवास निर्माण प्रौद्योगिकी के एक संग्रह का विमोचन भी करेंगे। इस अवसर पर आवास एवं शहरी कार्य मंत्री (स्वंतत्र प्रभार) के अलावा त्रिपुरा, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री उपस्थित रहेंगे।


लाइट हाउस प्रोजेक्ट्स: लाइट हाउस प्रोजेक्ट्स (एलएचपी) देश में पहली बार निर्माण क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर नए जमाने की वैकल्पिक वैश्विक प्रौद्योगिकी, सामग्रियों और प्रक्रियाओं का बेहतरीन प्रदर्शन करती हैं। इनका निर्माण जीएचटीसी- इंडिया के तहत किया जा रहा है, जो आवास निर्माण के क्षेत्र में नवीन तकनीकों को अपनाने के लिए एक समग्र परिवेश तैयार करने की परिकल्पना करता है। इन एलएचपी का निर्माण इंदौर (मध्य प्रदेश), राजकोट (गुजरात), चेन्नई (तमिलनाडु), रांची (झारखंड), अगरतला (त्रिपुरा) और लखनऊ (उत्तर प्रदेश) में किया जा रहा है। इसमें प्रत्येक स्थान पर संबद्ध बुनियादी ढांचा सुविधाओं के साथ लगभग 1,000 मकानों को शामिल किया गया है। ये परियोजनाएं पारंपरिक तौर पर ईंट एवं कंक्रीट वाले निर्माण के मुकाबले कहीं अधिक तेजी से यानी महज बारह महीने के भीतर रहने के लिए तैयार मकानों को प्रदर्शित और वितरित करेंगी। इसके अलावा ये मकान उच्च गुणवत्ता के साथ किफायती और टिकाऊ भी होंगे।

हल्के मकानों इन परियोजनाएं कई प्रकार की तकनीकों का प्रदर्शन: हल्के मकानों की ये परियोजनाएं कई प्रकार की तकनीकों का प्रदर्शन करती हैं। इनमें इंदौर के एलएचपी में प्रीफैब्रिकेटेड सैंडविच पैनल सिस्टम, राजकोट के एलएचपी में टनल फॉर्मवर्क का उपयोग करते हुए मोनोलिथिक कंक्रीट कंस्ट्रक्शन, चेन्नई की परियोजना में प्रीकास्ट कंक्रीट कंस्ट्रक्शन सिस्टम, रांची के एलएचपी में 3डी वॉल्यूमेट्रिक प्रीकास्ट कंक्रीट कंस्ट्रक्शन सिस्टम, अगरतला की परियोजना में लाइट गेज स्टील इन्फिल पैनलों के साथ ढांचागत स्टील फ्रेम और लखनऊ के एलएचपी में पीवीसी स्टे इन प्लेस फॉर्मवर्क सिस्टम शामिल हैं। हल्के मकानों की परियोजनाएं संबंधित जगहों पर प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण एवं उसके अनुकरण की सुविधा के लिए एक लाइव प्रयोगशाला के रूप में काम करेंगी। इसमें योजना, डिजाइन, उपकरणों का उत्पादन, निर्माण प्रथाओं और परीक्षण के लिए आईआईटी, एनआईटी, अन्य इंजीनियरिंग कॉलेजों और प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर कॉलेजों के संकाय एवं छात्रों के अलावा बिल्डर, निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्रों के पेशेवर एवं अन्य हितधारक शामिल हैं।


एएसएचए- इंडिया: अफोर्डेबल सस्टेनेबल हाउसिंग एक्सेलेरेटर्स- इंडिया यानी (एएसएचए- इंडिया) का उद्देश्य भविष्य की संभावित प्रौद्योगिकी को तैयार करने में सहायता प्रदान करते हुए घरेलू अनुसंधान और उद्यमिता को बढ़ावा देना है। एएसएचए- इंडिया पहल के तहत प्रौद्योगिकी को तैयार करने में सहायता प्रदान करने के लिए पांच एएसएचए- इंडिया केंद्र स्थापित किए गए हैं। इसके तहत संभावित प्रौद्योगिकी विजेताओं की घोषणा प्रधानमंत्री द्वारा की जाएगी। इस पहल के माध्यम से पहचान की जाने वाली प्रौद्योगिकी, प्रक्रियाओं और सामग्रियों से रचनात्मक दिमाग वाले युवाओं, स्टार्ट-अप, इनोवेटर और उद्यमियों को एक मदद मिलेगी।

पीएमएवाई- यू मिशन: प्रधानमंत्री आवास योजना- शहरी (पीएमएवाई- यू) मिशन को ‘2022 तक सभी के लिए आवास’ के दृष्टिकोण के साथ डिजाइन किया गया है। इसमें राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, शहरी स्थानीय निकायों और लाभार्थियों के उत्कृष्ट योगदान को मान्‍यता देने के लिए आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने पीएमएवाई- यू के कार्यान्वयन में उत्कृष्टता के लिए वार्षिक पुरस्कार देने की योजना बनाई है। पीएमएवाई (शहरी) पुरस्कार- 2019 के विजेताओं को इस कार्यक्रम के दौरान सम्मानित किया जाएगा।

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स्वदेशी मिसाइल MRSAM का सफल परीक्षण, सतह से हवा में मार करने में सक्षम

सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल एमआरएसएएम का सफल परीक्षण

नई दिल्ली। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने ओडिशा तट के चांदीपुर एकीकृत परीक्षण रेंज से सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (एमआरएसएएम) के सेना संस्‍करण का पहला सफल परीक्षण करते हुए एक उल्‍लेखनीय कामयाबी हासिल की। मिसाइल ने एक उच्च गति वाले मानव रहित हवाई लक्ष्य को पूरी तरह से नष्ट कर दिया। उसने लक्षित विमान का पीछा करते हुए सीधे तौर पर प्रहार किया।

भारत व इजराइल के संयुक्त सहयोग से विकसित

एमआरएसएएम का सेना संस्करण भारत के डीआरडीओ और इजराइल के आईएआई द्वारा भारतीय सेना के उपयोग के लिए संयुक्त रूप से विकसित सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है। एमआरएसएएम आर्मी हथियार प्रणाली में कमांड पोस्ट, मल्टी-फंक्शन रडार और मोबाइल लॉन्चर प्रणाली शामिल हैं। डिलिवरेबल कॉन्फिगरेशन में परीक्षण के दौरान पूरी फायर यूनिट का उपयोग किया गया है। उपयोगकर्ताओं यानी भारतीय सेना की एक टीम भी परीक्षण के दौरान मौजूद थी। इस दौरान तमाम रेंज उपकरण जैसे रडार, टेलीमेट्री और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम को तैनात किया गया था और लक्ष्य के विध्‍वंश के साथ-साथ हथियार प्रणाली के प्रदर्शन एवं संपूर्ण मिशन का डेटा एकत्रित किया गया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ और इस मिशन में शामिल टीम सदस्यों के प्रयासों की सराहना की। उन्‍होंने कहा कि भारत ने उन्नत हथियार प्रणालियों के स्वदेशी डिजाइन और विकास में उच्च स्तर की क्षमता हासिल की है।

रक्षा विभाग के सचिव (आरएंडडी) और डीआरडीओ के चेयरमैन डॉ. जी. सतीश रेड्डी ने पहले परीक्षण के दौरान लक्ष्य पर सीधा प्रहार करते हुए एमआरएसएएम सेना हथियार प्रणाली के सफल प्रदर्शन पर डीआरडीओ समुदाय को बधाई दी। उन्‍होंने रिकॉर्ड समय के भीतर इस हथियार प्रणाली को साकार करने और निर्धारित कार्यक्रम को पूरा करने में पूरी टीम के प्रयासों की सराहना की।

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खेलो इंडिया यूथ गेम्स-2021 में चार स्वदेशी खेल शामिल

खेलो इंडिया यूथ गेम्स-2021 में चार स्वदेशी खेलों को मिला स्थान

खेल मंत्रालय का स्वदेशी खेलों को बड़ा प्रोत्साहन

गतका, कलारीपयट्टू, थांग-ता और मलखम्ब खेलो इंडिया यूथ गेम्स- 2021 में शामिल

नई दिल्ली। खेल मंत्रालय ने हरियाणा में आयोजित होने वाले खेलो इंडिया यूथ गेम्स- 2021 में चार स्वदेशी खेलों को शामिल करने को मंजूरी दी है। इन खेलों में गतका, कलारीपयट्टू, थांग-ता और मलखम्ब हैं।
इस निर्णय के बारे में केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री किरेन रिजीजू ने कहा, ‘भारत में स्वदेशीय खेलों की एक समृद्ध विरासत है और इन खेलों को को संरक्षित करना, प्रोत्साहन देना और लोकप्रिय बनाना खेल मंत्रालय की प्राथमिकता है। खेलो इंडिया गेम्स से बेहतर दूसरा कोई मंच नहीं है, जहां इन खेलों के खिलाड़ी प्रतिस्पर्धा कर सकें। इसकी बहुत लोकप्रियता है और इनका प्रसारण देशभर में स्टार स्पोर्ट्स द्वारा किया जाता है, इसलिए मुझे विश्वास है कि 2021 में खेलो इंडिया यूथ गेम्स में योगासन के साथ ये चार प्रतिस्पर्धा देश के खेल उत्साही दर्शकों और युवाओं का अपनी ओर अधिक ध्यान आर्कषित करेंगे। आने वाले वर्षों में हम खेलो इंडिया गेम्स में और अधिक स्वदेशी खेलों को शामिल करने में सक्षम होंगे।’

देश के अलग-अलग हिस्सों का प्रतिनिधित्व करते हैं ये चार चयनित खेल

ये चार चयनित खेल देश के अलग-अलग हिस्सों का प्रतिनिधित्व करते हैं। कलारीपयट्टू की उत्पत्ति केरल में हुई है और इसे खेलने वाले पूरे विश्व में हैं। बॉलीवुड अभिनेता विद्युत जामवाल इनमें से एक हैं। वहीं मलखम्ब को मध्य प्रदेश सहित पूरे देश में अच्छी तरह से जाना जाता है। महाराष्ट्र इस खेल का मुख्य केंद्र है। गतका खेल का संबंध पंजाब से है और यह निहंग सिख योद्धाओं की पारंपरिक लड़ाई शैली है। वे इसका उपयोग आत्म-रक्षा के साथ-साथ खेल के रूप में भी करते हैं। थांग-ता मणिपुर की एक मार्शल आर्ट है, जो पिछले कुछ दशकों के दौरान लुप्त होती जा रही है, लेकिन खेलो इंडिया यूथ गेम्स- 2021 की मदद से इसे एक बार फिर राष्ट्रीय पहचान मिलेगी।

नेशनल गतका एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष हरजीत सिंह ग्रेवाल ने कहा, ‘हमें यह जानकर खुशी हुई है कि खेल मंत्रालय ने भारतीय प्राचीन मार्शल आर्ट गतका को खेलो इंडिया यूथ गेम्स में शामिल किया है। हमें विश्वास है कि खेलो इंडिया का यह प्रयास निश्चित तौर पर लुप्त होती जा रही एक ऐतिहासिक महत्व रखने वाली भारतीय पारंपरिक मार्शल आर्ट को बढ़ावा देने और पुनर्जीवित करने में मदद करेगा। इसके अतिरिक्त यह कदम देश के साथ-साथ विदेशों में जागरूकता पैदा करने के लिए नेशनल गतका एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रयासों को बढ़ावा देगा।’
वहीं थांग-ता फेडरेशन ने भी इसकी पुष्टि की है कि यह प्रतिस्पर्धा इस खेल को काफी लोकप्रिय बनाएगी। थांग-ता फेडरेशन ऑफ इंडिया के सचिव विनोद शर्मा ने कहा, ‘इस प्रतियोगिता में विभिन्न राज्यों के 400 से अधिक एथलीट हिस्सा लेंगे। हम लोग इस प्रतिस्पर्धा में बहुत सफल होना चाहते हैं और इससे खेल को राष्ट्रीय एवं अतंरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक पहचान प्राप्त करने में मदद मिलेगी।’
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