स्वास्थ्य विभाग के छापे में 04 क्लीनिक सील

मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले चार क्लीनिक सील। एक क्लीनिक के बाहर चारपाई पर मरीज को चढ़ा रहे थे ग्लुकोज। स्वास्थ्य विभाग की कड़ी कार्रवाई से मचा हड़कंप। संपूर्ण समाधान दिवस में हुई थी शिकायत।

हापुड़। गढ़मुक्तेश्वर में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में कुछ लोगों द्वारा बहादुरगढ़ क्षेत्र में स्थित देहरा कुटी के एक अस्पताल की शिकायत के बाद उच्चाधिकारियों के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर जांच की। मरीजों की जान से खिलवाड़ करने के आरोप में चार क्लीनिकों को सील कर दिया गया। एक क्लीनिक के बाहर चारपाई पर मरीज को लेटाकर उसे ग्लुकोज लगाया जा रहा था। विभाग ने उसे नोटिस देकर कागजात दिखाने का आदेश दिया है। स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई से जिले में अफरातफरी का माहौल बना हुआ है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने आगे भी इस कार्रवाई को जारी रखने की बात कही है। अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डाक्टर केपी सिंह ने बताया कि मुख्य चिकित्साधिकारी डाक्टर सुनील कुमार त्यागी के निर्देश पर झोलाछापों के क्लीनिक को सील करने का अभियान युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है।

एक क्लीनिक को थमाया नोटिस: टीम ने मौके पर देखा कि अस्पताल के बाहर चारपाई बिछी हुई थीं। उन पर मरीज लेटे हुए थे और उन्हें ग्लूकोज लगाकर उपचार दिया जा रहा था। टीम ने इस प्रकार लापरवाही बरतने पर क्लीनिक संचालक को नोटिस देते हुए जवाब देने का आदेश दिया गया है। इसके अलावा टीम ने गढ़मुक्तेश्वर के बहादुरगढ़ में ही स्थित राजपाल सिंह का क्लीनिक सील कर दिया। इसके बाद टीम गढ़मुक्तेश्वर पहुंची। गढ़मुक्तेश्वर में वेदप्रकाश के क्लीनिक को सील कर दिया गया।

अभियान चलता रहेगा लगातार: डाक्टर केपी सिंह ने बताया कि सिंभावली के गांव वैट में संचालित नदीम और डाक्टर आवेश के क्लीनिक को भी सील कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि बिना पंजीकरण और बिना डिग्री किसी को भी क्लीनिक और अस्पताल संचालित नहीं होने दिया जाएगा। कार्रवाई से बचे लोगों के खिलाफ भी कड़ी से कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि जिन लोगों का स्वास्थ्य विभाग में पंजीकरण नहीं हैं, वह अपना पंजीकरण करा लें।

बिजनौर को मिलीं 15 स्टाफ नर्स

सीएमओ आफिस में 15 स्टाफ नर्स को प्रदान किए नियुक्ति पत्र

बिजनौर। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से चयनित जिले की 15 स्टाफ नर्स को सीएमओ आफिस में नियुक्ति पत्र वितरित किए गये। यह पत्र एमएलए सदर बिजनौर शुचि चौधरी, नगर अध्यक्ष भाजपा राजीव गुप्ता व सीएमओ डा. विजय कुमार गोयल ने दिए।

इस अवसर पर जिला कार्यक्रम प्रबंधक फारुख अजीज ने कहा कि लोक सेवा आयोग से चयनित होने के बाद जिले को 15 स्टाफ नर्स मिल गयी हैं। सीएमओ कार्यालय में आकर इनमें से डोली, शालिनी यादव, नेहा, शबनम, रूबी, रश्मि, आकांक्षा, संध्या, मनीशा पाल, दीपा स्टाफ नर्स ने नियुक्ति पत्र ले लिया है। अब ये जल्द ही जिले को अपनी सेवाएं देंगी। इस अवसर पर डा. शैलेश जैन, डा पीआर नायर, डा बीएस रावत, डीसीपीएम पूनम रानी, रोहित बाबू, जिला परिवार नियोजन प्रबंधक रहमत अली आदि‌‌ मौजूद रहे।

पहले से ज्यादा खतरनाक हुआ डेंगू, कर रहा ब्रेन अटैक


यूपी में बेकाबू हुआ डेंगू, ठीक होने के बाद प्लेटलेट्स हो रहे कम, अब तक सामने आए 11 हजार से अध‍िक मामले। मरीज पर धोखे से हमला कर रहा डेंगू का ये नया वेरिएंट। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि डेंगू अब ब्रेन पर अटैक कर रहा। ठीक होने के बाद अचानक कम हो रहे हैं मरीज के प्लेटलेट्स।

लखनऊ। यूपी में डेंगू मरीजों का आंकड़ा 11 हजार पार कर गया है। रोजाना करीब डेढ़ हजार नए मरीज आ रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि डेंगू अब ब्रेन पर अटैक कर रहा है। इससे यह पहले से कई गुना अधिक जानलेवा हो गया। मरीज तेजी से पैरालिसिस, इंसेफेलाइटिस और GB सिंड्रोम की चपेट में आ रहे हैं। मरीजों में मल्टी आर्गन फेलियर के केस सामने आए। कोरोना वायरस की तरह इस बार भी डेंगू का बदला हुआ रूप मरीजों के लिए खतरा बनता जा रहा है। कानपुर, मेरठ, अलीगढ़, बरेली, लखनऊ, फतेहपुर, कन्‍नौज, उन्‍नाव, बाराबंकी, गोरखपुर आद‍ि ज‍िलों में रोज डेंगू के मरीज सामने आ रहे हैं। डेंगू का ये नया वेरिएंट मरीज पर धोखे से हमला कर रहा है। ठीक होने के बाद अचानक मरीज के प्लेटलेट्स कम हो रहे हैं। डाक्टरों का कहना है कि ऐसे लक्षण कई मरीजों में देखे गए हैं। रोगी को पहले दो दिनों तक बुखार रहता है। तीसरे दिन बुखार उतर जाता है। रोगी स्वयं को स्वस्थ समझता है। इसके बाद अचानक मरीज के प्लेटलेट्स कम होने लगते हैं।

क‍िडनी-ल‍िवर को डेमेज कर रहा डेंगू
मरीज के क‍िडनी ल‍िवर को भी डेंगू डेमेज कर रहा है। डेंगू के मामलों में प्लेटलेट्स की कमी के साथ-साथ बढ़ते सामान्य बुखार को देखते हुए ब्लड बैंकों में प्लेटलेट्स की मांग इन दिनों तेजी से बढ़ रही है। नए संस्करण को लेकर लोगों में कुछ भ्रांतियां भी हैं, लेकिन चिकित्सकों का सुझाव है कि केवल डॉक्टर ही प्लेटलेट्स की आवश्यकता और किस स्तर की पहचान कर सकते हैं।

यूपी में अब तक डेंगू के 11 हजार से अध‍िक मामले
यूपी में जनवरी 2022 से लेकर अभी तक डेंगू के कुल साढ़े 11 हजार रोगी मिल चुके हैं। मरीजों की मदद के लिए स्वास्थ्य महानिदेशालय में राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम तैयार कर लिया गया है। कंट्रोल रूम के दो हेल्पलाइन नंबर 18001805145 और 104 के माध्यम से मरीजों की मदद की जा रही है। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक की ओर से अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि कंट्रोल रूम चौबीस घंटे चालू रहे और मरीजों की समस्या का समाधान किया जाए। प्रदेश भर के सभी मेडिकल कालेजों व अस्पतालों में डेंगू मरीजों के लिए अलग वार्ड बनाया गया है।

सभी अस्‍पतालों में दवा, बेड और डेंगू की जांच की पुख्ता व्यवस्था के न‍िर्देश
सभी जिलों के मुख्य चिकित्साधिकारियों (सीएमओ) और अस्पतालों के मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों (सीएमएस) को निर्देश दिए गए हैं कि दवा, बेड और डेंगू की जांच की पुख्ता व्यवस्था की जाए। अगर मरीजों की कंट्रोल रूम के माध्यम से शिकायत मिली तो जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। अस्पतालों में डाक्टर व कर्मियों की टीमें गठित कर उपचार किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी क्षेत्र में डेंगू का एक मरीज मिलने पर आसपास के क्षेत्र के 60 घरों की स्क्रीनिंग करने के निर्देश पहले दिए गए थे और इसे और बढ़ाने को कहा गया है। विभिन्न क्षेत्रों में टीमें भेजकर घर-घर स्क्रीनिंग करने के निर्देश दिए गए हैं।

बरतें विशेष सतर्कता ~ डेंगू के लक्षण होने पर यानी फीवर आएं और पहले ही दिन आंखों के पीछे तेज दर्द या जोड़ों का दर्द, मांसपेशियों का दर्द हो या फिर रैशेज दिखें तो तुरंत सतर्क हो जाएं। लिक्विड डाइट पर फोकस करें। खूब सारा पानी पिये, शिकंजी और इलेक्ट्रॉल पाउडर भी लें।
चिकित्सकों का कहना है कि कोई भी दवाई बिना डॉक्टर की सलाह के न लें। दवा लेने में अगर लापरवाही बरतेंगे तो यह घातक होगा। अनावश्यक दवाएं लेने से परहेज करें। बेहतर होगा सिर्फ बुखार की दवा लें और एनाल्जेसिक, एस्प्रिन और आईबीब्रूफेन जैसी दवाएं न खाएं। बुखार के लिए पैरासिटामोल और स्पंजिंग करें। इसे मैनेज कर लिया तो कॉम्प्लिकेशंस नहीं बढ़ेंगे, नहीं तो हालात बिगड़ना तय है।

रेट पर शासन की नजर

डेंगू के बढ़ते आंकड़ों और पूर्वी इलाकों में डेंगू की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए शासन ने प्रदेशभर में प्लेटलेट्स और ब्लड की दरें तय कर दी हैं। निजी और सरकारी ब्लड बैंकों में इनसे अधिक दरों पर इन्हें नहीं बेचा जा सकता है। इसमें सिंगल डोनर प्लेटलेट्स की सरकारी दर 11 हजार रुपए है, इसे ही जंबो पैक भी कहते हैं। इस पैक में तकरीबन 180 से 250 एमएल तक जिंदा प्लेटलेट्स होती हैं। रैंडम डोनर प्लेटलेट्स के छोटे छोटे 30 से 40 एमएल प्लेटलेट्स के पाउच 400 से 450 रुपए तक में उपलब्ध हैं।

डेंगू ज्यादा भयावह नजर आने की वजह ?
डेंगू के 4 सिरोटाइप होते हैं। सिरोटाइप- 1, सिरोटाइप-2, सिरोटाइप-3 और सिरोटाइप-4। अब तक हर साल डेंगू के सिरोटाइप-2 और टाइप-3 के केस आते थे। वह भी सीजनल। कुछ केस में कॉम्पलिकेशन बढ़ जाते थे। जिन्हें हम डेंगू हैंमोरेजिक फीवर और न्यूरोलॉजिकल कॉम्पलिकेशन कहते हैं। ये 6 से 8% तक ही मिलते थे। मगर इस बार न्यूरोलॉजिकल कॉम्पलिकेशन 30% तक बढ़ गई है। यानी दिमाग पर डेंगू का असर इस बार ज्यादा हो रहा है। इसलिए, वह ज्यादा भयावह नजर आ रहा है।

दो सप्ताह से बुखार पीड़ित 14 वर्षीया बालिका की मौत

दो सप्ताह से बुखार पीड़ित 14 वर्षीया बालिका की मौत

बिजनौर। बढ़ापुर नगर के समीपवर्ती ग्राम कुंजैटा में एक 14 वर्षीय बालिका की बुखार के कारण मौत हो गई। वह बीते दो सप्ताह से बुखार से पीड़ित बताई जा रही है।
बताया जाता है कि गांव निवासी चंद्रपाल सिंह की पुत्री प्राची बीते दो सप्ताह से बुखार से पीड़ित चल रही थी। उसका नगर के ही चिकित्सक के यहां उपचार चल रहा था। तीन-चार दिन पहले उसकी हालत में कुछ सुधार देखा जा रहा था। मंगलवार को चंद्रपाल सिंह परिवार सहित हरिद्वार गंगा स्नान के लिए गया था। वहां से आने के बाद प्राची फिर से बुखार की चपेट में आ गई। बुधवार की रात्रि प्राची की हालत बिगड़ने पर परिजन उसे उपचार के लिए नगीना ले गए। उसकी हालत को चिंताजनक देखते हुए डॉक्टर ने बिजनौर के लिए रेफर कर दिया। बताया जाता है कि रास्ते में ही प्राची की मौत हो गई।

बिजनौर में पांव पसारता जा रहा डेंगू और वायरल बुखार

पांव पसारता जा रहा है डेंगू और वायरल बुखार

जिला अस्पताल में बनाया गया मरीजों के लिए 30 बेड का एक और वार्ड, मेडिकल स्टाफ की छुट्टियां रद्द

बिजनौर। जिले में डेंगू और वायरल बुखार पांव पसारता जा रहा है। सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। गंभीर हालात को देखते हुए जिला अस्पताल में मरीजों के लिए 30 बेड का एक और वार्ड बनाया गया है। वहीं सीएमएस ने मेडिकल स्टाफ की छुट्टियां रद्द कर दी हैं। जिला अस्पताल में रोजाना डेढ़ हजार की ओपीडी हो रही है, औसतन 40 मरीज भर्ती किए जा रहे हैं।

जिले में वायरल बुखार और डेंगू का प्रकोप फैलना शुरू हो गया है। जिले भर में हजारों लोग अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। जिला अस्पताल में वायरल और डेंगू के मरीजों की भरमार हो गई है। सीएमएस डाक्टर अरुण पांडे ने मरीजों की बढ़ती हुई संख्या को देखते हुए स्टाफ की छुट्टियां रद्द कर दी हैं। स्टाफ को लगातार एक्टिव रहने को निर्देश दिए हैं। इमरजेंसी या ओपीडी में गंभीर मरीजों को तत्काल भर्ती करने के निर्देश दिए गए हैं। डेंगू के मरीजों के लिए बेड पर मच्छरदानी लगा दी गई हैं और 30 बेड की वैकल्पिक व्यवस्था अलग से की गई है।

वायरल के 50 से ज्यादा मरीज भर्ती
जिला अस्पताल में फिलहाल डेंगू के 10 और वायरल फीवर के 50 से अधिक मरीज भर्ती बताए गए हैं। ओपीडी में रोजाना आने वाले 12 सौ से 15 सौ मरीजों का टैस्ट कराया जा रहा है। सीएमएस अरुण पांडे ने दावा किया है कि अस्पताल आने वाले प्रत्येक मरीज का इलाज किया जा रहा है। उनका यह भी कहना है कि ब्लड बैंक में 100 यूनिट ब्लड हर समय मौजूद है, दवाई की भी कोई कमी नहीं है।

करें ताजा भोजन, पहने पूरे कपड़े
जिले के अन्य अस्पतालों, प्राइवेट अस्पतालों, चिकत्सकों के यहां भी बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। चिकित्सकों का कहना है कि बरसात होने के कारण बुखार और डेंगू के मरीज अचानक बढ़ गए हैं। लोगों को पूरे कपड़े पहनने, मच्छरों से बचकर रहने, साफ सफाई का विशेष ध्यान रखने, बासी भोजन ना करने और मच्छर जनित बीमारियों से सावधान रहने के साथ ही बीमार होने पर योग्य चिकित्सक से परामर्श लेने की सलाह दी गई है।

डेंगू से बचाव को स्वास्थ्य विभाग ने कराया एंटी लारवा का छिड़काव

स्वास्थ्य विभाग द्वारा डेंगू से बचाव के लिए कराया गया एंटी लारवा का छिड़काव

स्योहारा। डेंगू से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से सीएचसी प्रभारी डॉ0 विशाल दिवाकर के दिशा निर्देशन में स्वास्थ्य कर्मचारियों ने ग्राम किवाड़ में लारवा साइड का छिड़काव कराया। साथ ही गांव में भ्रमण कर आमजन को डेंगू के प्रति जागरूक करते हुए उन्हें सफाई के प्रति जागरूक भी किया। इसके अलावा मच्छरदानी के प्रयोग पर भी जोर दिया गया।
इस मौके पर स्वास्थ्य पर्यवेक्षक वीर सिंह, डॉ0 राजेश सहित आदि स्वास्थ्य कर्मी मौजूद रहे।

स्वच्छता के प्रति घर-घर जाकर जन सामान्य को करें जागरूक: डीएम उमेश मिश्रा

बिजनौर। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि एएनएम एवं आशाओं को अपने स्तर से निर्देशित करें कि वे अपने कार्य क्षेत्र में घर-घर जाकर जन सामान्य को स्वच्छता के प्रति जागरूक करें, क्योंकि संचारी रोगों का मुख्य कारण गंदगी होता है। बुखार के रोगी का पता चलने पर उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य/सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र तथा जिला अस्पताल में भेजते हुए उनका सही तरीके से उपचार कराएं एवं आसपास के क्षेत्रों पर भी गहरी नजर रखें। इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी सहित सभी स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिए कि संचारी रोग एवं वैक्टर जनित रोग के बचाव व सावधानी के बारे में प्रचार-प्रसार कराना सुनिश्चित करें, ताकि लोग जागरूक एवं सचेत रह कर स्वयं बचाव एवं सुरक्षा के उपाय करें।

जिलाधिकारी उमेश मिश्रा कलक्ट्रेट महात्मा विदुर सभाकक्ष में आयोजित राष्ट्रीय वैक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान को सफलतापूर्वक संचालित करने के उद्देश्य से अंतर्विभागीय समन्वय समीक्षात्मक बैठक की अध्यक्षता करते हुए संबंधित अधिकारियो को निर्देश दे रहे थे। उन्होंने बताया कि शासन के निर्देशों के अनुपालन में विगत वर्षाे की भांति इस वर्ष माह अक्तूबर,2022 में संचारी रोगों की रोकथाम हेतु प्रभावी उपाय अपनाते हुए व्यापक अभियान चलाया, संचालित किया जाएगा। इसी क्रम मे वर्ष 2022 मे संचारी रोग नियंत्रण अभियान 01 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2022, तक तथा दस्तक अभियान का प्रथम चरण 07 अक्टूबर से 21 अक्टूबर तक संचालित किया जायेगा। अतः पूर्व की भांति सभी गतिविधियां पुनः विस्तृत कार्ययोजना बनाकर इस वर्ष भी संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियाना को संचालित करना सुनिश्चित करें।

डीएम ने बैठक मे डेंगू/संचारी रोगों एवं अन्य वेक्टर जनित रोगों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने के लिए पूर्ण गुणवत्ता के साथ विशेष संचारी रोग नियन्त्रण अभियान की गहनता से समीक्षा कर उपस्थित सभी संबंधित अधिकारियों को अभियान को पूर्णतः सफल बनाने के निर्देश दिए। डेंगू/संचारी रोगों तथा मलेरिया बुखार पर प्रभावी नियंत्रण तथा इनका त्वरित एवं सही उपचार सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है तथा इसके लिए अंतर्विभागीय सहयोग से संचारी रोगों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए अभियान चलाया जाये। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि वर्तमान समय मे संचारी रोगों का प्रभाव है, जिसके कारण डेंगू रोग की सम्भावना को मद्देनजर रखते हुुए इस अभियान को पूर्ण मानक और निष्ठा के साथ संचालित करना सुनिश्चित करें ताकि अधिक से अधिक लोगों के जीवन की सुरक्षा की जा सके।

जिलाधिकारी ने कहा कि इन रोगों से बचाव हमारे लिये चुनौती के रूप में है, जिसको स्वीकार करते हुए हमें अंर्तविभागीय समन्वय के साथ कार्य करते हुये विजय प्राप्त करनी है। इसके लिये सम्बन्धित समस्त विभागों को अपने अपने कार्याे को लक्ष्य के सापेक्ष शत प्रतिशत उपलब्धि प्राप्त करने हेतु निर्देशित किया गया है। अभियान के अंतर्गत स्वास्थ्य, शिक्षा, पंचायत, पशु, महिला बाल विकास, नगर निकाय सहित अन्य संबंधित विभागों के कार्याे की समीक्षा की और उन्हें आवश्यक दिशा निर्देश दिये।

उन्होंने जिला पंचायज विभाग को निर्देशित करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई तथा जल निकासी का विशेष ध्यान रखें। नगरीय क्षेत्रों मे समस्त अधिशासी अधिकारी कचरा निस्तारण तथा नालियों की सफाई के साथ-साथ पेयजल की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान रखें। अपने रोस्टर के अनुसार कार्य करते हुए बुखार के रोगी मिलने पर विशेषतया उस क्षेत्र में लार्वासाइड का छिडकाव एवं फांगिंग कराये जाने के निर्देश प्रदत्त किए जाएं।

इस अवसर पर संचारी रोग एवं वैक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी/जिला मलेरिया अधिकारी ने बैठक का संचालन करते हुए विस्तार से संचारी रोगों से बचाव एवं सुरक्षा के उपाय के साथ अभियान के दौरान आयोजित होने वाले कार्यक्रमों एव उक्त अभियान की जानकारी उपलब्ध कराई। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा0 विजय कुमार गोयल, समस्त अपर मुख्य चिकित्साधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, ई0ओ0 नगर पलिका/नगर पंचायत सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारियों व संबंधित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।

दो झोलाछाप डाक्टर के क्लीनिक सील


बिजनौर। तमाम फजीहतों औऱ शिकायतों के बाद जागे स्वास्थ्य विभाग का सरकारी चाबुक अब लगातार झोलाछाप डॉक्टरो पर चलता नज़र आ रहा है। इसी क्रम में तमाम शिकायतों के बाद सीएमओ के आदेश पर सीएचसी प्रभारी डॉ विशाल दिवाकर व उनकी टीम स्योहारा के ग्राम मेवाजठ पहुंची। यहां चर्चित फर्जी व नशे के सौदागर के नाम से विख्यात झोलाछाप डॉ मतलूब अली और डॉ सत्यम की क्लिनिक को सील कर दिया। स्वास्थ्य विभाग की इस कार्यवाही के बाद क्षेत्र के बाकी फर्जी चिकित्सकों में अफरातफरी मची हुई है।

कब्जामुक्त नहीं हो पा रहे स्वास्थ्य विभाग के भवन

नजीबाबाद (बिजनौर)। स्वास्थ्य विभाग में दो साल पहले गैर जनपद हुए ट्रांसफर के बाद अधिकारियों की ओर से बार-बार नोटिस जारी करने के बाद भी आवास खाली नहीं हो रहे है। बताया जाता है कि सरकारी अस्पतालों के आवास पर उन चिकित्सकों ने अभी तक अपना अवैध कब्जा कर रखा है, जिनका कई साल पहले यहां से गैर जनपद या दूसरे स्थान पर ट्रांसफर हो चुका है। यहां तक कि खुद प्रभारी चिकित्सा अधिकारी के आवास पर कई साल पहले ट्रांसफर हुए डॉक्टर का कब्जा चल रहा है, जबकि इस दौरान कई प्रभारियों की नियुक्ति हो चुकी है। सरकारी अस्पतालों के आवास पर एक दूसरे को देख कर धड़ल्ले से अवैध कब्जे का खेल चल रहा है। बार-बार नोटिस जारी होने के बाद भी कब्जाधारियों पर कोई असर होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। इसके चलते नजीबाबाद तबादला होकर आए अन्य चिकित्सा अधिकारियों को आवास के लिए परेशान होना पड़ रहा है। विगत दिनों पूर्व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर आए सीएमओ विजय गोयल से सरकारी आवासो पर अवैध कब्जे की शिकायत की गई थी, जिस पर सीएमओ ने नोटिस देकर शीघ्र सरकारी आवासो खाली करने को कहा था लेकिन कई नोटिसों के बाद भी सरकारी आवास खाली नहीं हो पा रहे हैं। तीन दिन पूर्व सम्पूर्ण समाधान दिवस पहुंचे डीएम उमेश मिश्रा के सामने मीडियाकर्मियों ने यह मुद्दा उठाया था। डीएम ने सीएमओ को सख्त आदेश करते हुए कहा था कि कब्जा करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए और पुलिस का सहारा लेकर आवासों को कब्जा मुक्त कराया जाये। डीएम उमेश मिश्रा के आदेश के बाद भी सरकारी आवास कब्जा मुक्त ना होने से स्वास्थ्य विभाग को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

सीएमओ की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल

नजीबाबाद। बार-बार नोटिस जारी करने के बाद भी सरकारी आवास को कब्जा मुक्त ना करने पर अभी तक कोई भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है, जबकि सीएमओ की ओर से मुकदमा दर्ज करने की बात कही गई थी। सवाल उठ रहे हैं कि कहीं इसके पीछे खुद सीएमओ का तो मौन समर्थन हासिल नहीं है, जिसकी बदौलत सरकारी आवास कब्जा मुक्त नहीं हो पा रहे हैं।

उत्पीड़न से तंग आशा बहुओं व संगिनियों का अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन

बिजनौर। आशा कार्यकत्री वेलफेयर एसोसिएशन के तत्वावधान में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से जुड़ी आशा बहुओं व आशा संगिनियों ने विभिन्न मांगों व समस्याओं को लेकर कलक्ट्रेट में अनिश्चितकालीन धरना व प्रदर्शन शुरू कर दिया है। इस दौरान जिलाधिकारी को ज्ञापन भी दिया गया।

ज्ञापन में कहा गया कि लगभग 25 सौ की संख्या में आशा बहुएं व आशा संगिनी निरन्तर अपनी सेवा प्रदान कर रही हैं। इसके बावजूद उन्हें हेल्थ वैलनेस सेन्टर का कोई पैसा नहीं मिल रहा है। 2 वर्ष से खसरा बूस्टर व डिलीवरी का पैसा नहीं मिला। अप्रैल से अभी तक माह में आने वाले 2200 रुपए भी नहीं मिले। एक अन्य समस्या यह भी है, जब आशा जिला महिला अस्पताल में मरीज लेकर पहुंचती है तो वहां मरीजों को डराया जाता है कि इसका ऑपरेशन होगा परंतु वह डिलीवरी प्राईवेट अस्पताल में जाकर नॉर्मल हो जाती है। खून कम होने पर मरीजों को बाहर रेफर किया जाता है। वह प्राईवेट में जाकर सही हो जाती है। खून कम होने पर मरीजों के साथ वाली से खून लिया जाता है, वह मरीज को लगाते भी नहीं हैं और खून खराब हो जाता है।

नहीं सुनते सीएमओ- इस सम्बन्ध में मुख्य चिकित्साधिकारी को अवगत कराया गया परन्तु इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। आशा व आशा संगिनियों पर नसबन्दी का दवाब डाला जाता है। जब कोई नसबन्दी नहीं कराता है या कोई नसबन्दी फेल हो जाने पर आशा बहु व संगिनियों को हटाने की धमकी दी जाती है। आशाओं व संगिनियों ने जिलाधिकारी से जिला अस्पताल का सुधार करने, आशा व आशा संगिनी को समय पर भुगतान देने, आशा का पैसा अलग-अलग न देकर एक साथ दिए जाने, हर पीएचसी पर मांगे जाने वाले कमीशन को रोके जाने की मांग की। प्रदर्शन में जिला अध्यक्ष रेखा पाल, रीना रानी, रीना, यशोदा, गिरजा देवी, महामंत्री शशीबाला, रेखा रानी, पूर्णिमा सहित सैकड़ों आशा व संगिनी मौजूद रहीं।

ANM की पैरवी में CDO के खिलाफ खोला मोर्चा

CDO की खिलाफत में मातृ शिशु एवं परिवार कल्याण संघ ने खोला मोर्चा।

एक हफ्ते में निलंबित ANM की बहाली नहीं तो छेड़ेंगे आंदोलन।

जिलाधकारी को ज्ञापन देकर दिया अल्टीमेटम।

बिजनौर। मुख्य विकास अधिकारी पूर्ण बोरा द्वारा विकास खण्ड मौ०पुर देवमल के ग्राम पंचायत अलाउद्दीनपुर उर्फ जन्दरपुर में तैनात एएनएम दीपा कोटवाल के निलंबन का मामला गर्मा गया है। मातृ शिशु एवं परिवार कल्याण संघ ने जिलाधकारी को ज्ञापन सौंप कर चेतावनी दी है कि एक सप्ताह में निलंबन स्थगित न होने पर महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चली जाएंगीं।

ज्ञापम में कहा गया कि मुख्य विकास अधिकारी पूर्ण बोरा द्वारा विकास खण्ड मौ०पुर देवमल के ग्राम पंचायत अलाउद्दीनपुर उर्फ जन्दरपुर में वीएचएनडी सत्र का औचक  निरीक्षण किया गया। समाचार पत्रों के माध्यम से अवगत हुआ है कि निरीक्षण के दौरान एएनएम दीपा कोटवाल का कार्य असंतोषजनक था, जिस कारण मुख्य विकास अधिकारी ने एएनएम को तत्काल प्रभाव से निलम्बित करने के निर्देश दिये। वीएचएनडी सत्र पर जिन जांचों की जानकारी (एचआईवी  सिफलिस, शुगर एल्बुमिन, बीपी) से संबंधी कोई भी लोजिस्टिक विभाग से प्राप्त नहीं कराई जाती है। समाचार पत्र में दिये गये सामान में से कुछ ही सामान एएनएम को प्राप्त कराया जाता है, जोकि मानक के अनुरूप नहीं होता है, जबकि वीएचएनडी सत्र पर सभी सामान मानक के अनुसार चैक किया जाता है। कम मात्रा में होने पर एएनएम को पूर्ण जिम्मेदार मानते हुए उसके विरुद्ध कार्यवाही की जाती है, जबकि यह पूर्ण जिम्मेदारी विभाग की होती है।

डीएमसी यूनिसेफ की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह? वीएचएनडी सत्र का निरीक्षण किसी भी उच्च अधिकारी द्वारा होने पर पूर्व में सूचना दी जाती है, परन्तु डीएमसी यूनिसेफ और मुख्य विकास अधिकारी द्वारा बिना सीएमओ या एमओआईसी को सूचना दिये बिना मुख्य विकास अधिकारी को डीएमसी यूनिसेफ द्वारा कार्यस्थल पर ले जाया गया।
डीएमसी द्वारा पूर्व में भी एएनएम  का मानसिक उत्पीड़न किया जाता रहा है। जिस सामान का उल्लेख सत्र में किया गया है,उसमें से बहुत से सामान आज तक एएनएम को प्राप्त ही नहीं कराये गये हैं।

ANM के साथ कोई अनहोनी हो गई तो? डीएमसी / मुख्य विकास अधिकारी के उत्पीड़न से परेशान होकर दीपा कोटवाल मानसिक रूप से परेशान हो गयी थी। यदि एएनएम दीपा के साथ कोई भी अनहोनी हो जाती है तो उसकी पूर्ण जिम्मेदारी डीएमसी/मुख्य विकास अधिकारी सम्बन्धित (उच्चाधिकारियों) की होगी। यदि एएनएम का निलम्बन स्थगित नहीं किया जाता तो एक सप्ताह के भीतर मातृ शिशु एवं परिवार कल्याण संघ की सभी महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चली जाएंगीं। ज्ञापन देने वालों में अध्यक्ष रूपधारा, मंत्री मीना, वरिष्ठ उपा० उमा, उपाध्यक्ष चंचल, उपमंत्री  संगीता, सँगठन मंत्री सविता,  कोषाध्यक्ष सुशीला देवी, संरक्षक आदेश बाला व ऑडीटर सीमा राजपूत आदि शामिल रहीं।

डेंगू से सावधानी व सतर्कता बनाए रखने को डीएम की अपील

डेंगू एक गम्भीर रोग, सावधानी व सतर्कता बनाए रखें-जिलाधिकारी। लक्षण दिखने पर नजदीकी सरकारी अस्पताल में चिकित्सीय परामर्श लें व जांच कराएं। दायित्वों के निर्वहन में यदि शिथिलता या लापरवाही बरती जाती है तो दोषी व्यक्तियों के विरूद्ध की जायेगी कार्यवाही।

बिजनौर। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने शासन स्तर से समय-समय पर कराये गये दिशा-निर्देशों के क्रम में आमजन को अवगत कराते हुए कहा कि डेंगू रोग एक गम्भीर रोग है जो मादा एडीज इजिप्टाई मच्छर के काटने से फैलता है। उन्होंने कहा कि सावधानी व सर्तकता बनायें रखें। लक्षण दिखने पर नजदीकी सरकारी अस्पताल में चिकित्सीय परामर्श लें व जांच करायें। उन्होंने अधिकारियों के दायित्व निर्धारित करते हुए कहा कि शिथिलता या लापरवाही बरती जाती है तो दोषी व्यक्तियों के विरूद्ध कार्यवाही करने के साथ ही शासन को सूचित कर दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि जनपद बिजनौर मे मुख्य चिकित्सा अधिकारी बिजनौर को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गयाहै।

जिलाधकारी ने बताया कि इस रोग का प्रसार अधिकतर माह जुलाई से माह नवम्बर के मध्य होता है। यह मच्छर घर के अन्दर व उसके आस-पास के वातावरण में रहता है और पलता है तथा केवल दिन के समय में काटता है और रात को विश्राम करता है। डेंगू बुखार का वायरस (विषाणु) इन मच्छरों के द्वारा एक प्रभावित व्यक्ति से दूसरे स्वस्थ व्यक्ति में फैलता है। जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि डेंगू के नियन्त्रण हेतु विभिन्न कार्यवाहियाँ सुनिश्चित करायी जायें जिसमें प्रत्येक जिला स्तरीय चिकित्सालय में डेंगू के रोगियों के लिये एक पृथक वार्ड चिन्हित किया जाये। प्रत्येक बैड पर रोगी के लिए मच्छरदानी की व्यवस्था हो, सम्भावित डेंगू रोग के सभी रोगियों का चिकित्सालय में भर्ती कर निःशुल्क उपचार किया जाये। इन रोगियों के रोग की पुष्टि हेतु सीरम का जॉच एलाइजा/रेपिड टेस्ट द्वारा कराई जाये। सभी रोगियों का टूर्निकेट टेस्ट तथा प्लेटलेट काउन्ट कराया जाये।
उन्होंने निर्देशित किया कि चिकित्सालय एवं रोगियों के निवास स्थान के क्षेत्र में एडिज इजिप्टाई मच्छर के घनत्व का नियमित अनुश्रवण किया जाये। कन्टेनर इन्डेक्स एवं हाउस इन्डेक्स के माध्यम से एडिज इजिप्टाई मच्छर के लार्वा की जानकारी नियमित रूप से कराई जाये। वाहक मच्छर पर नियन्त्रण हेतु घर के बर्तनों, कूलरों, घड़े, पानी की टंकी में एकत्रित पानी एक सप्ताह के अन्दर अवश्य बदल दें। बहुमंजिली इमारत में वाहक मच्छर की वृद्धि को रोकने के लिये उनके प्रबन्धकों के स्तर से यह सुनिश्चित करा लें कि उनकी इमारतों कूलर, पानी की टंकी आदि दशा में बदल दिया जाये। प्रत्येक व्यक्ति शरीर को अधिक से अधिक ढकने के लिये उपयुक्त कपड़े पहने। मच्छरदानी एवं अन्य उपाय जैसे- मैटस, अगरबत्ती, क्रीम इत्यादि का प्रयोग करे। समस्त स्कूल/कालेज में बच्चों में मच्छर के काटने बचाने की पूरी बॉह के कपडे तथा पैरों में लम्बे मोजे/सलवार इत्यादि पहनने की सलाह दें।

चिकनगुनिया रोग पर भी रखें नजर- उन्होंने कहा कि चिकनगुनिया रोग भी एक वायरस के कारण होता है। इसका प्रसार भी डेंगू के समान एडिज इजिप्टाई मच्छर द्वारा होता है। इस रोग के मुख्य लक्षण भी डेंगू की तरह तेज बुखार के साथ शरीर के सभी जोड़ों में असहनीय दर्द तथा शरीर में दाने होना होता है। इस रोग से बचाव हेतु उपरोक्तानुसार डेंगू के समान सभी उपाय कराये जाएं। रोग की पुष्टि हेतु चिकनगुनिया रोग के सम्भावित रोगियों के सीरम की जाँच एन०सी०डी०सी०, 22 शाम नाथ मार्ग, दिल्ली (भारत सरकार) में भेजकर कराई जाये।

हाई कोर्ट ने तय की जिम्मेदारी- जिलाधकारी ने बताया कि उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा पारित आदेश के द्वारा नगर पालिकाओं के अधिशासी अधिकारी एवं नगर निगमों व नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी व चेयरमैन अपने क्षेत्र में सामान्य सफाई के लिए उत्तरदायी होंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में जिला पंचायत राज अधिकारी सफाई के लिए उत्तरदायी होगे। निजी नर्सिंग होम के मालिक व्यवस्थापक एवं प्रभारी अपने जनपद के जिलाधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी को डेंगू से पीड़ित व्यक्ति की पॉजिटिव रिपोर्ट होने पर अनिवार्य रूप से सूचित करेगें। राज्य सरकार रोग से बचाव हेतु किये जाने वाले उपायों की जनसामान्य में जानकारी हेतु व्यापक प्रचार- प्रसार करेगी।

सीएमओ बनाए गए नोडल अधिकारी- डीएम ने कहा कि उपरोक्त निर्देशों का कड़ाई के साथ अनुपालन सुनिश्चित करने हेतु जनपद बिजनौर में मुख्य चिकित्सा अधिकारी बिजनौर को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी स्वयं यह सुनिश्चित करेंगे कि निर्धारित प्रारूप पर सूचना शासन को प्रत्येक दिन समय से प्राप्त होती रहे। कोविड-19 महामारी को दृष्टिगत रखते हुए सोशल डिस्टेसिंग व व्यक्तिगत स्वच्छता/सेनिटाईजेशन को अपनाते हुए समस्त विभागाध्यक्ष अपने से सम्बन्धित कार्याे/निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन कराना सुनिश्चित करें।

चिकित्सा स्वास्थ्य महासंघ ने दी महानिदेशक को चेतावनी

लखनऊ। चिकित्सा स्वास्थ्य महासंघ, उत्तर प्रदेश ने महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाएं स्वास्थ्य भवन, लखनऊ को महत्वपूर्ण पत्र भेजा है। पत्र में कहा गया है कि चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण महानिदेशालय मिनिस्ट्रीयल एसोसिएशन स्वास्थ भवन, लखनऊ की ओर से दिनांक 11-07- 2022 को पत्र भेजा गया था। उसमें गया है कि स्थानांतरण आदेशों में हुई त्रुटियों का निराकरण/ संशोधन संबंधित प्राप्त प्रत्यावेदनों पर अपने स्तर से निस्तारित करने का कष्ट करें, जिससे भविष्य में कार्य संपादन किए जाने में महानिदेशालय के कर्मचारी अपने को सुरक्षित महसूस करते हुए सुचारू रुप से कार्य का संपादन करते रहें अन्यथा की स्थिति में संघ इसका पुरजोर विरोध करते हुए किसी भी समय आन्दोलनात्मक कार्यवाही हेतु बाध्य होगा, जिसे हेतु संघ उत्तरदाई नहीं होगा। अशोक कुमार प्रधान महासचिव चिकित्सा स्वास्थ्य महासंघ, उत्तर प्रदेश ने निवेदन किया है कि उक्त मिनिस्ट्रीयल एसोसिएशन चिकित्सा स्वास्थ्य महासंघ उत्तर प्रदेश का प्रमुख घटक संघ है, कृपया इनकी मांगों पर सौहार्दपूर्ण वातावरण में वार्ता कर समस्याओं का हल करवाएं अन्यथा की स्थिति में महासंघ भविष्य में इनके द्वारा किए जा रहे आंदोलन में पूर्ण रुप से भागीदारी करेगा जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन व प्रशासन की होगी।

पत्र भेजते हुए अशोक कुमार प्रधान महासचिव चिकित्सा स्वास्थ्य महासंघ, उत्तर प्रदेश ने सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु उप मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार/बृजेश पाठक, अपर मुख्य सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण उत्तर प्रदेश शासन व अध्यक्ष/मंत्री समस्त संबद्ध संगठन को इसकी प्रतिलिपि प्रेषित की है।

अवैध उगाही के बलबूते अल्ट्रासाउंड सेंटर व नर्सिंग होम का संचालन!

बिजनौर जनपद में बिना वैध कागजों के संचालित नर्सिंग होम व अल्ट्रासाउंड सेंटर जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत के चलते इन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही। यहां तक कि इनके खिलाफ कार्रवाई करने के डीएम के आदेश को भी हवा में उड़ा दिया गया।

बादस्तूर जारी है उगाही का का धंधा!- सूत्रों ने दावा किया है कि पाडली अल्ट्रासाउंड सेंटर, रामवीर धन्वंतरि हॉस्पिटल हसुपुरा नूरपुर, पारस अल्ट्रासाउंड सेंटर व नर्सिंग होम चांदपुर, मोहित नर्सिंग होम चांदपुर, राजवंश नर्सिंग होम चांदपुर, एचएमएस हॉस्पिटल नजीबाबाद, जीवनराज चंद्रा हॉस्पिटल नजीबाबाद, बीसी अल्ट्रासाउंड सेंटर धामपुर, सिसोदिया अल्ट्रासाउंड सेंटर धामपुर व पायल हॉस्पिटल कालागढ़ रोड धामपुर बिना किसी वैध कागजात के संचालित किये जा रहे हैं। गंभीर बात यह है कि इनमें से किसी पर भी किसी चिकित्सक की तैनाती नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के दस्तूर के मुताबिक पहले डॉ एसके निगम यहां से उगाही कर रहे थे और उनके रिटायरमेंट के बाद डॉ देवीदास ने कमान संभाल ली है?

सांठगांठ कर धंधा बदस्तूर जारी- आरोप है कि फर्जी तरीके से संचालित अस्पतालों में से कईं में लापरवाही के कारण जच्चा-बच्चा की मौत भी हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग अपनी पुरानी रीति के अनुसार नोडल अफसर क्वैक्स के जरिये इन्हें नोटिस जारी कर चिकित्सा अभ्यास से संबंधित अभिलेखों समेत तलब करता है। कुछ ही दिन में आरोपियों से सांठगांठ कर धंधा बदस्तूर चालू करा दिया जाता है। 

गौरतलब है कि जनपद में फर्जी अल्ट्रासाउंड सेंटरों के संचालित होने की खबरों को अनदेखा करने वाले स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के कारनामे अब सामने आने लगे हैं। माह जून के प्रथम सप्ताह में तहसील समाधान दिवस में जनता की शिकायत पर जिलाधिकारी ने जिले में फर्जी तरीके से चल रहे अल्ट्रासाउंड सेंटर सील करने के निर्देश दिए थे।

इस पर एसडीएम विजयवर्धन तोमर के नेतृत्व में नोडल अफसर डा. देवीदास ने अपनी टीम के राजकुमार सक्सेना, विजयपाल व पुलिस बल के साथ छापेमारी कर रेलवे क्रॉसिंग रोड स्थित अर्चना नर्सिंग होम, चन्दन हॉस्पिटल, रौनक नर्सिंग होम, परिधि नर्सिंग होम जैतरा, अदन नर्सिंग होम नगीना रोड धामपुर को कार्रवाई के तहत सील कर दिया और दो अन्य को नोटिस जारी किया था। बताया जा रहा है कि लेनदेन सम्पन्न होने के बाद इसी हफ्ते इनमें से एक का ताला खुल गया, जबकि जल्दी ही अन्य का शटर उठाने की तैयारी है।

इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी का पक्ष जानने के लिए उन से उनके मोबाइल फोन नंबर पर संपर्क का प्रयास किया गया। बात नहीं हो सकी।

रहस्यमय परिस्थितियों में खुला  धामपुर के सील नर्सिंग होम का ताला!

आश्चर्यजनक रूप से खुल गया धामपुर का सील नर्सिंग होम। समाधान दिवस में शिकायत के बाद डीएम के आदेश पर एसडीएम व स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मारा था छापा। पांच नर्सिंग होम हुए थे सील। नोडल अधिकारी क्वेक्स का दावा, सीएमओ के निर्देश पर खुला ताला।

बिजनौर। धामपुर में पिछले महीने सील किये गए पांच नर्सिंग होम में से एक बुधवार को अप्रत्याशित और आश्चर्यजनक रूप से खुल गया! डीएम के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उक्त पांचों को सील किया था। उस दौरान कुछ नर्सिंग होम संचालक कार्रवाई के डर से फरार हो गए थे। वहीं पांच नर्सिंग होम सील कर दिए गए थे। इस मामले में नोडल अधिकारी का कहना है कि सीएमओ के आदेश के तहत सील खोली गई है। सीएमओ का पक्ष नहीं मिल सका।

गौरतलब है कि धामपुर में अवैध तौर पर कईं नर्सिंग-होम अस्पताल संचालित कर अनाधिकृत तौर पर ऑपरेशन तक करने की शिकायतें जिलाधिकारी उमेश मिश्रा को प्राप्त हुई थीं। समाधान दिवस में शिकायत में बताया गया कि इन अस्पतालों में से कईं में लापरवाही के कारण जच्चा-बच्चा की मौत भी हो चुकी है। नोडल अफसर क्वैक्स डा.देवीदास ने इन्हें नोटिस जारी कर चिकित्सा अभ्यास से संबंधित अभिलेखों समेत तलब किया था। बताया गया है कि आरोपियों में से कोई भी सीएमओ ऑफिस नहीं पहुंचा। इस पर जिलाधिकारी के निर्देश पर एसडीएम विजयवर्धन तोमर के नेतृत्व में नोडल अफसर डा. देवीदास ने अपनी टीम के राजकुमार सक्सेना, विजयपाल व पुलिस बल के साथ जून के पहले सप्ताह में छापेमारी की।

ये हुए थे सील- रेलवे क्रॉसिंग रोड स्थित अर्चना नर्सिंग होम, चन्दन हॉस्पिटल, रौनक नर्सिंग होम, परिधि नर्सिंग होम जैतरा, अदन नर्सिंग होम नगीना रोड धामपुर को कार्रवाई के तहत सील कर दिया गया था। इनके अलावा दो अन्य को नोटिस जारी किया गया।

CMO के आदेश पर खुली सील!- सीएमओ के आदेश के तहत रौनक नर्सिंग होम की सील खोली गई है। नोडल अधिकारी देवीदास ने दूरभाष पर यह दावा किया। सील खोलने का आधार क्या है, इसके जवाब में उन्होंने कहा कि नर्सिंग होम संचालक ने कागजात प्रस्तुत कर दिए होंगे, इसका पटल अलग होता है। अन्य जानकारी उन्हें नहीं है।

20 CMO समेत 39 चिकित्साधिकारियों के तबादले

लखनऊ। यूपी में गुरुवार शाम से शुरू हुआ ताबड़तोड़ तबादलों का दौर लगातार जारी है। प्रदेश में डेढ़ दर्जन विभागों में 1000 से ज्यादा तबादलों के बाद शुक्रवार सुबह 39 चिकित्साधिकारियों के तबादले का भी आदेश जारी कर दिया गया। इनमें से 20 को मुख्य चिकित्सा अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

तबादला सूची के अनुसार डॉ. मंजीत सिंह को हाथरस का मुख्य चिकित्साधिकारी बनाया गया है। इसी तरह डॉ. आभा मिश्रा को ललितपुर, डॉ. तरन्नुम रजा को सम्भल, डॉ. अवनींद्र कुमार को फर्रूखाबाद, डॉ. रश्मि वर्मा को गोंडा, डॉ. सुधाकर पांडेय को झांसी, डॉ. गिरेंद्र मोहन को प्रतापगढ़, डॉ. अरुणेंद्र कुमार त्रिपाठी को लखीमपुर खीरी, डॉ. शारदा प्रसाद तिवारी को श्रावस्ती, डॉ. राजीव सिंघल को अमरोहा, डा. राजेंद्र प्रसाद को मिर्जापुर, डॉ. आलोक रंजन को कानपुर नगर, डॉ. सुनील कुमार को हापुड़, डॉ. विमल कुमार बैसवार को देवरिया, डॉ. हरिदास अग्रवाल को बस्ती, डॉ. अवध किशोर प्रसाद को कासगंज, डॉ. विमलेंदु शेखर को अमेठी, डॉ. सुष्पेंद्र कुमार को कौशाम्बी, डॉ. राजेश कुमार श्रीवास्तव को हरदोई, डॉ. सुनील भारतीय को फतेहपुर, डॉ. जयंत कुमार को बलिया, डॉ. नीना वर्मा को महाराजगंज, डॉ. अनिरूद्घ कुमार सिंह को संतकबीरनगर, डॉ. विनोद कुमार अग्रवाल को सिद्घार्थनगर और डॉ. धनेश कुमार गर्ग को महोबा का मुख्य चिकित्साधिकारी बनाया गया है।

धामपुर के चार अल्ट्रासाउंड सेंटर्स पर छापा

बिजनौर। जिलाधिकारी के निर्देश पर नोडल अधिकारी तथा एसडीएम धामपुर ने नगर में संचालित चार अल्ट्रासाउंड सेंटरों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान तमाम कमियां मिलने पर संचालकों को सुधार के सख्त निर्देश दिए। प्रशासन की इस कार्यवाही से अल्ट्रासाउंड संचालकों में हड़कंप मचा रहा।

जानकारी के अनुसार जिलाधिकारी उमेश मिश्रा के निर्देश पर नोडल अधिकारी देवीदास तथा धामपुर एसडीएम मनोज कुमार सिंह संयुक्त रूप से निदान डायग्नोस्टिक सेंटर, दमयंती देवी नर्सिंग होम, सरल अस्पताल तथा टीएमआई इमेजिंग सेंटर पर औचक निरीक्षण करने पहुंच गए। बताया जाता है कि इन चारों अस्पतालों पर पहुंचकर टीम ने मानक संबंधी कागजात व अन्य दस्तावेजों का गहनता से परीक्षण किया। इस दौरान अल्ट्रासाउंड मशीनों पर तैनात चिकित्सक का भी ब्यौरा स्वास्थ्य विभाग, एसडीएम ने लिया। बताया जाता है कि अधिकांश अल्ट्रासाउंड सेंटर पर कई कमियां पाए जाने पर टीम ने असंतोष जताते हुए जल्द सुधार के निर्देश भी दिए।

उधर नोडल अधिकारी तथा एसडीएम के अल्ट्रासाउंड सेंटर पर छापेमारी की सूचना मिलने से नगर में संचालित अन्य अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालकों में हड़कंप मच गया तथा वहअपने-अपने सेंटर बंद कर मौके से फरार हो गए। बताया जाता है कि नगर में कई झोलाछाप चिकित्सकों के यहां भी अवैध रूप से अल्ट्रासाउंड संचालित किए जा रहे हैं। टीम की छापेमारी से इन झोलाछाप चिकित्सकों में भी हड़कंप मचा रहा। एसडीएम मनोज कुमार ने बताया कि सभी सेंटर संचालकों को सख्त हिदायत देते हुए जल्द सुधार के निर्देश दिए गए हैं।

राष्ट्रव्यापी कोविड टीकाकरण के तहत अब तक लगाए गए 185.70 करोड़ से अधिक टीके

राष्ट्रव्यापी कोविड टीकाकरण के तहत अब तक 185.70 करोड़ से अधिक टीके लगाए जा चुके हैं


12-14 आयु वर्ग में 2.21 करोड़ से अधिक खुराकें लगाई गई

भारत में कोरोना के सक्रिय मामले 11,132 हैं

पिछले 24 घंटों में 1,054 नए मामले सामने आए

स्वस्थ होने की वर्तमान दर 98.76 प्रतिशत

साप्ताहिक सक्रिय मामलों की दर 0.23 प्रतिशत है।

नई दिल्ली (PIB)। भारत का कोविड-19  टीकाकरण  कवरेज  आज सुबह 7 बजे तक  अंतिम रिपोर्ट के  अनुसार 185.70 करोड़ (1,85,70,71,655) से अधिक हो गया।इस उपलब्धि को 2,24,70,964 टीकाकरण  सत्रों के जरिये प्राप्त किया गया है।

12-14 आयु वर्ग के लिए कोविड-19 टीकाकरण 16 मार्च,2022 को प्रारंभ हुआ था। अब तक 2.21 करोड़ (2,21,97,507) से अधिक किशोरों को कोविड-19 टीके की पहली खुराक लगाई गई है।

लगातार गिरावट दर्ज करते हुए भारत में सक्रिय मामले आज कम होकर 11,132 रह गए। सक्रिय मामले कुल मामलों के 0.03 प्रतिशत हैं।

नतीजतन, भारत में स्वस्थ होने की दर 98.76 प्रतिशत है।पिछले 24 घंटों में 1258 रोगियों के ठीक होने के साथ  ही स्वस्थ होने वाले मरीजों (महामारी की शुरुआत के बाद से) की कुल संख्या बढ़कर 4,25,02,454हो गई है।

बीते 24 घंटे में कोरोना के 1,054 नए मामले सामने आए।पिछले 24 घंटों में कुल 4,18,345 जांच की गई हैं। भारत ने अब तक कुल 79.38 करोड़ से अधिक  (79,38,47,740) जांच की गई हैं।

साप्ताहिक और दैनिक पुष्टि वाले मामलों की दर में भी लगातार गिरावट दर्ज की गई है। देश में साप्ताहिक पुष्टि वाले मामलों की दर 0.23।प्रतिशत है और दैनिक रूप से पुष्टि वाले मामलों की दर भी 0.25 प्रतिशत है।

अब कोरोना वायरस के नए XE वैरिएंट की दस्तक

कोरोना वायरस के नए XE वैरिएंट ने उड़ाए होश, भारत में मिला पहला केस

नई दिल्ली (एजेंसी)। कोरोना वायरस का कहर पिछले तीन महीनों से थमता नजर आ रहा था लेकिन एक बार फिर इसने टेंशन को बढ़ा दिया है। अभी हाल ही में कोरोना की दूसरी लहर का कारण ‘ओमीक्रॉन’ वेरिएंट पर काबू पाया ही था कि एक और नए वेरिएंट ने दस्तक दे दी है। इसके मामले भी अब सामने आने शुरू हो गए है।

जानकरी के अनुसार कोरोना वायरस के नए वैरिएंट XE का पहला केस बुधवार को मुंबई में दर्ज किया गया। इस मामले के सामने आने से ही स्वास्थ्य विभाग चौकन्ना हो गया है। कुल 376 सैंपल में से एक मरीज में कोरोना के XE वैरिएंट के संक्रमण की पुष्टि हुई है। इस वैरिएंट की शुरुआत युनाइटेड किंगडम से हुई थी। गौरतलब है कि थमती रफ्तार के बाद कोरोना के पॉजिटिव मामले एक बार फिर बढ़ गए है। भारत में संक्रमित हो चुके लोगों की संख्या 4,30,30,925 से अधिक हो गई है।

…और लाइन में लग कर हेल्थ मिनिस्टर ने जाना महकमे का स्वास्थ्य

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में डिप्टी सीएम एवं चिकित्सा शिक्षा तथा स्वास्थ्य मंत्री का कार्यभार संभालने वाले कैबिनेट मंत्री बृजेश पाठक ने केजीएमयू पहुंचकर वहां मरीजों को दी जा रही सुविधाओं का निरीक्षण किया। मास्क लगाकर डिप्टी सीएम खुद लाइन में लगे और मरीजों से बातचीत कर वहां मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी ली। हालांकि तमाम चौकसी के बावजूद स्वास्थ्य कर्मी डिप्टी सीएम को पहचान गए और अस्पताल की व्यवस्थाएं दुरुस्त करने में जुट गए।

मंगलवार को उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक अचानक केजीएमयू अस्पताल पहुंच गए और वहां पर खुद मरीजों को दी जा रही सुविधाओं का निरीक्षण किया। मास्क लगाकर खुद लाइन में लगे डिप्टी सीएम ने मरीजों से बातचीत कर वहां मिलने वाली सुविधाओं के बारे में जाना। निरीक्षण के दौरान ओपीडी में मिली बदइंतजामी पर डिप्टी सीएम ने गहरी नाराजगी जताई। वहीं पंजीकरण के लिए केजीएमयू के नंबर पर फोन करने वाले मरीजों की कॉल रिसीव नहीं होने पर उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों की जमकर क्लास लगाई।

चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री ने अगले 24 घंटे के भीतर अस्पताल की व्यवस्थाओं को दुरुस्त किए जाने की चेतावनी दी। कैबिनेट मंत्री ने निरीक्षण के दौरान कई बार पंजीकरण के लिए दिए गए नंबर पर अपने फोन से कॉल की, परंतु हर बार नंबर बिजी बताता रहा, इससे नाराज होकर वह प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक्सचेंज में पहुंच गए। वहां सिर्फ दो लाइन पर बात हो रही थी। बाकी 10 लाइनें खाली पड़ी हुई थी। इस पर डिप्टी सीएम का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने एजेंसी को हटाने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अब एजेंसी को प्रति कॉल रिसीव करने के हिसाब से भुगतान किया जाए। ओपीडी में कुर्सियों पर मिली गंदगी और उनके टूटे होने पर भी उन्होंने गहरी नाराजगी जताई।

क्षय रोगियों के बेहतर इलाज के लिये कटिबद्धता जताई

बिजनौर। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने बताया कि भारत सरकार के आह्वान पर प्रदेश सरकार का यह संकल्प है कि उत्तर प्रदेश को क्षय रोग से पूरी तरह मुक्त किया जायेगा। उन्होंने बताया कि इसके लिये क्षय रोगियों के चिन्हॉकन के पश्चात उनकी चिकित्सा नियमित रूप से सुनिश्चित की जा रही है ताकि कोई भी व्यक्ति इस बीमारी के समुचित इलाज से वंचित न रहने पाए और स्वास्थ्य लाभ हासिल कर स्वस्थ समाज का हिस्सा बने। उन्होंने चिकित्साधिकारी को निर्देश दिए कि पूरी गहनता और गंभीरता के साथ क्षय रोगियों के चिन्हिीकरण का कार्य करें और जो भी रोगी पाया जाए उसके समुचित इलाज की व्यवस्था के साथ-साथ चिकित्सा की अवधि में उत्तम पोषण उपलब्ध कराया जाए, जिससे वे पूर्णरूप से स्वस्थ हो सके। जिलाधिकारी श्री मिश्रा कल देर शाम विकास भवन के सभागार में आगामी 24 मार्च 2022 को आयोजित होने वाले विश्व क्षय रोग दिवस के अवसर पर सम्पन्न होने वाले कार्यक्रमों से संबंधित बैठक की अध्यक्षता करते हुए निर्देश दे रहे थे। उन्होंने नोडल अधिकारी क्षय रोग को निर्देश दिए कि जिले में सुनियोजित एवं सुव्यस्थित रूप से क्षय रोगियों का चिन्हिकरण का कार्य कराएं और एक भी क्षय रोगी इलाज से वंचित न रहने पाए। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर जिले में भिन्न-भिन्न श्रेणी के क्षय रोगियों को विभिन्न समाजिक एवं स्वयंसेवी संगठनों / शैक्षणिक संस्थानों एवं अधिकारियों को गोद लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है ताकि जनसहयोग के साथ इस बीमारी से जिला बिजनौर को मुक्त किया जाना सम्भव हो सके।

इसी क्रम में जनपद बिजनौर में उक्त दिवस पर अधिक से अधिक मरीजों को गोद लिया जायेगा। उन्होंने सभी चिकित्साधिकारियों को निर्देशित किया कि यदि उनकी संज्ञान में कोई ऐसा व्यक्ति आए जिसे दो सप्ताह से ज्यादा खांसी रही है, तो तत्काल उसकी जांच कराना सुनिश्चित करें तथा सभी शैक्षिक संस्थाओं के व्यवस्थापकों एंव अध्यापकगणों को भी सूचित करें कि यदि कोई विद्यार्थी दो हफतों से अधिक खांसी से पीड़ित है तो उसको भी तत्काल जांच के लिए चिकित्सालय भेजना सुनिश्तिच करें। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी केपी सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी डा. विजय कुमार गोयल, सभी अपर मुख्य चिकित्साधिकारी, प्राईवेट चिकित्सक, नर्सिंग होम संचालक, समस्त स्कूल प्रधानाचार्य तथा स्वयंसेवी संस्थाओं के पदाधिकारी मौजूद थे।

फर्जीवाड़े से हासिल करेंगे कोविड वैक्सीनेशन का लक्ष्य!

कोविड वैक्सीनेशन का लक्ष्य पूरा करने के लिए फर्जीवाड़ा
जिन्हें लगी है पहली ही डोज, उन्हें दूसरी डोज लगी दिखाकर जारी किया प्रमाण पत्र



बिजनौर। कोविड वैक्सिनेशन का लक्ष्य पूरा करने के लिए स्वास्थ्य विभाग जमकर फर्जीवाड़ा कर रहा है! जिन लोगों ने कोविड 19 वैक्सीन की केवल एक ही डोज लगवाई है, उनको दोनों डोज लगवाने का सर्टिफिकेट जारी किया जा रहा है।

केंद्र सरकार के कोविड-19 वैक्सीनेशन के फुल्ली वैक्सीनेटेड अभियान के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग द्वारा नागरिकों को कोविड-19 वैक्सीन की दोनों डोज लगाने का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों व सरकारी अस्पतालों में ही नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों व शिक्षण संस्थाओं में भी अभियान चलाकर कोविड-19 वैक्सीन की डोज लगाई जा रही है। नगीना के मोहल्ला पहाड़ी दरवाजा निवासी युवती राबिया खानम ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी किए गए कोविड-19 वैक्सिनेशन के फुल्ली वैक्सिनेटेड सर्टिफिकेट को दिखाते हुए बताया कि उन्होंने कोविड-19 वैक्सीनेशन की पहली डोज 24 जून 2021 को लगवाई थी लेकिन दूसरी डोज आज तक भी नहीं लगवाई है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी कोविड-19 वैक्सिनेशन के फुल्ली वैक्सिनेटेड सर्टिफिकेट में उनको दूसरी डोज 22 जनवरी 2022 को लगाना दिखाया गया है और फुल्ली वैक्सीनेटेड का सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नगीना की जया वर्मा द्वारा राबिया खानम को कोविड 19 वैक्सीन की दोनों डोज लगाने वाले स्वास्थ्य कर्मी के रूप में अंकित किया गया है। अब बड़ा सवाल यही है कि जब राबिया खानम को कोविड 19 का फुल्ली वैक्सिनेटेड का सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया है तो वह अब दूसरी डोज कैसे लगवाएंगी? राबिया खानम अब कोविड वेक्सीन की दूसरी डोज लगवाने से वंचित रह जाएंगी।

वहीं हिंदू इंटर कॉलेज नगीना में कक्षा 12 के छात्र अनिकेत कुमार द्वारा भी कोविड 19 वैक्सीन की दोनों डोज लगवाने का सर्टिफिकेट प्रस्तुत किया है। 19 वर्ष के अनिकेत कुमार को पहली डोज 26 जुलाई 2021 को तथा दूसरी डोज 8 नवंबर 2021 को लगाई गई है। अनिकेत को जारी कोविड 19 के फुल्ली वैक्सिनेटेड सर्टिफिकेट में पीएचसी कोतवाली की स्वास्थ्य कर्मी संगीता द्वारा अनिकेत को डोज लगाने वाली स्वास्थ्य कर्मी का नाम अंकित है। इस संबंध में कोरोना कंट्रोल रूम बिजनौर में तैनात प्रमोद कुमार से उनके मोबाइल पर संपर्क नहीं हो स्का।

UP: 24 घंटे में मिले 4228 नए कोरोना केस

लखनऊ। यूपी में नए कोरोना मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हालांकि अभी भी कई राज्यों की तुलना में यहां केसों की संख्या कम है। पिछले 24 घंटे में हुई दो लाख 19 हजार 256 कोविड सैंपलों की जांच में नोएडा में 721, गाजियाबाद में 607 केस, लखनऊ में 577, मेरठ में 411, वाराणसी में 224 सहित कुल 4228 नए केस मिले हैं। महाराजगंज में कोरोना से एक मौत भी हुई है। इसी अवधि में 119 मरीज स्वस्थ होकर डिस्चार्ज भी हुए। वर्तमान में एक्टिव कोविड केसों की संख्या बढ़कर 12,327 पर पहुंच गई है। 

आगरा में 169 मुरादाबाद में 157 और प्रयागराज में 104, कानपुर नगर और मुजफ्फरनगर में 91-91, अलीगढ़ में 85, सहारनपुर में 80, गोरखपुर में 71, शामली में 62, बुलंदशहर में 58, बरेली में 53, झांसी में 51, बागपत में 43, मथुरा में 42, संभल में 26, बाराबंकी व उन्नाव में 24, बिजनौर में 22, हापुड़ और चंदौली में 20-20, अमरोहा और रामपुर में 19-19, मैनपुरी में 18, रायबरेली में 16, जौनपुर, अयोध्या और देवरिया में 15-15, गाजीपुर में 14, सोनभद्र और लखीमपुर खीरी में 13-13, आजमगढ़, सीतापुर और एटा में 12-12, बदायूं, फिरोजाबाद, बस्ती, शाहजहांपुर में 11-11, हरदोई, मिर्जापुर, महाराजगंज और हाथरस में 10-10, औरैया में 09, फर्रुखाबाद में 08, बलिया, सिद्धार्थनगर, सुल्तानपुर, इटावा, अंबेडकर नगर में 07-07, बहराइच, मऊ और कन्नौज में 06-06, बांदा, कुशीनगर, ललितपुर, गोंडा में 05-05, महोबा, फतेहपुर और कासगंज में 04-04, कानपुर देहात में 03, हमीरपुर, संतकबीर नगर, कौशांबी, चित्रकूट में 02-02, जालौन, प्रतापगढ़, पीलीभीत, अमेठी, बलरामपुर में 01-01 कोरोना केस मिले हैं। 

रिकवरी रेट में गिरावट

कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने के साथ ही रिकवरी रेट भी कम होने लगा है। शुक्रवार को पॉजिटिविटी रेट जहां बढ़कर 1.93 फीसदी पहुंच गया। वहीं रिकवरी रेट घट कर अब 98 फीसदी पर आ गया है। गुरुवार को यह 98.2 प्रतिशत था। 

संडिगो सेवा समिति के शिविर में हुआ रक्तदान

लखनऊ। गोमती नगर के विराज खण्ड स्थित संडिगो सेवा समिति के कार्यालय पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर, बलरामपुर अस्पताल के ब्लड ट्रांसफ्यूज़न मेडिसीन विभाग की टीम के देख रेख में किया गया। शिविर में लगभग 25 लोगों ने रजिस्ट्रेशन किया, जिसमें से 15 लोगों ने रक्त दान किया।

इस अवसर पर संडीगो के डायरेक्टर बृजेश यादव, श्रीमती अर्चना यादव और अनन्त श्रीवास्तव सहित 15 कर्मचारियों ने रक्त दान किया। समारोह का समापन राजकीय नर्सेज संघ उत्तर प्रदेश के महामंत्री अशोक कुमार ने किया। उन्होंने बताया कि हर साल रक्त दान करना चाहिए इससे कोशिकाएं पुनर्जिवित होती हैं। रक्तदान करने से कोई कमजोरी भी नहीं होती है। रक्त दान से बड़ा कोई दान नहीं है। आप लोगों के इस रक्त दान से जाने अंजाने पता नहीं कितने लोगों की मदद समय समय पर होती रहती है; चाहे वो अमीर हो या गरीब हो। इसलिए जब भी मौक़ा मिले रक्त दान अवश्य करें। बलरामपुर चिकित्सालय, लखनऊ से आई ब्लडबैंक टीम को भी धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

शिफा नर्सिंग होम संचालिका को नोटिस जारी

शिफा नर्सिंग होम की फरार संचालिका को नोटिस जारी
अवैध नर्सिंग होम पर लटका ताला


बिजनौर। बुखारा में लंबे समय से चल रहे अवैध नर्सिंग होम में एक और महिला की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इस नर्सिंग होम की संचालिका झोलाछाप चिकित्सक को नोटिस जारी किया है। कोई भी डिग्री न होने के चलते अब इस मामले में कार्यवाही तय मानी जा रही है।
मालूम हो कि स्थानीय मोहल्ला बुखारा अरबी मस्जिद के पास निवासी रेहान ने बुधवार को प्रसव पीड़ा के बाद अपनी पत्नी परवीन को मोहल्ले में ही अवैध चलने वाले शिफा नर्सिंग होम में भर्ती कराया था। पुत्री को जन्म देने के बाद उसकी हालत बिगड़ गयी। आरोप है कि उसके बाद उचित उपचार करने के बाद इस अवैध नर्सिंग होम की संचालिका शिफा फरार हो गयी। दूसरे नर्सिंग होम ले जाने पर महिला परवीन की मौत हो गयी। इसके बाद नर्सिंग होम पर देर रात तक हंगामा हुआ। बताया जाता है कि बाद में दोनों पक्षों में समझौता हो गया। बताया जाता है कि बुखारा में लंबे समय से यह नर्सिंग होम खुलेआम चल रहा है। इससे पूर्व भी कई महिलाओं की मौत होने पर हंगामा हो चुका है।

नोडल अधिकारी डॉ एसके निगम ने बताया कि शिफा नर्सिंग होम संचालिका को नोटिस जारी किया गया है। साथ ही 23 दिसंबर को सारे चिकित्सकीय अभिलेखों के साथ तलब किया गया है।

UP में मरीज लाचार व स्वास्थ्य सेवा हुईं बेहाल

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार के सभी विभागों के मुखिया को कमर्चारियों की समस्याओं के निराकरण हेतु स्पष्ट आदेश होने के बावजूद आला अधिकारियों व प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री की उदासीनता के चलते मरीज लाचार व स्वास्थ्य सेवा बेहाल हो चुकी हैं।

प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में फार्मासिस्टों के लगातार चल रहे 2 घंटे के कार्य बहिष्कार से अस्पतालों में मरीजों को दवा लेने के लिए घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है। दरअसल प्रदेश के फार्मासिस्टों द्वारा लगातार कई दिनों से जारी सांकेतिक व क्रमिक हड़ताल के तहत सरकार द्वारा उनकी वेतन विसंगतियों, पदनाम परिवर्तन, राईट टू प्रेस्क्रिप्शन, कैडर पुनर्गठन, मानक अनुसार अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर नियुक्तियों सहित 20 सूत्रीय मांगों पर उदासीनता व अड़ियल रवैया अपनाए जाने के कारण स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी होती जा रही हैं। 17 दिसम्बर से 19 दिसंबर को इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर पूर्ण कार्य बहिष्कार व 20 दिसम्बर से इमरजेंसी सेवाओं सहित पूर्ण कार्य बहिष्कार के चलते स्वास्थ्य सेवाएं पूर्ण रूप से ठप्प हो सकती हैं, जिसे रोकना अब सरकार के हाथों में है।
इसी क्रम में डिप्लोमा फार्मसिस्ट एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के फार्मासिस्टों ने प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों में अपनी 20 सूत्रीय मांगों के सापेक्ष उत्तर प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य मंत्री द्वारा अड़ियल रवैया अपनाए जाने के विरोध में आज आंदोलन के 12वें दिन भी 2 घंटे का बहिष्कार व जोरदार प्रदर्शन कर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदेश अध्यक्ष संदीप बडोला के नेतृत्व में बलरामपुर चिकित्सालय में प्रान्तीय कोषाध्यक्ष अजय पाण्डेय, डीपीए जनपद शाखा लखनऊ अध्यक्ष अरुण अवस्थी, कार्यकारी अध्यक्ष कपिल वर्मा, राजेश वरुण, बलरामपुर अस्पताल में तैनात प्रदेश संरक्षक केके सचान, पूर्व महामंत्री श्रवण सचान, पूर्व प्रान्तीय कोषाध्यक्ष रजत यादव, सुभाष श्रीवास्तव, संजय कनौजिया, संयुक्त मंत्री विवेक श्रीवास्तव, संप्रेक्षक जितेंद्र कुमार, पंकज रस्तोगी, निशा तिवारी, मंजुलता, सुनीता सचान, संगीता वर्मा, सुनीता यादव, महेंद्र यादव, अब्दुल रहमान, निशा तिवारी, आरपी सिंह, दयाशंकर त्यागी, डीके श्रीवास्तव व अन्य सभी साथियों ने सुबह 8 बजे से 10 बजे तक 2 घंटे के कार्य बहिष्कार की कमान संभाली।
डीपीए जनपद लखनऊ संगठन मंत्री अविनाश सिंह के नेतृत्व में सीएचसी गोसाईं गंज में हनुमान प्रसाद वर्मा, अकील अंसारी, आरबी मौर्या, राम सुमित्र पटेल, अखिलेश ओझा, अतुल श्रीवास्तव, कन्हैयालाल, जनपद लखनऊ कोषाध्यक्ष चंद्रशेखर श्रीवास्तव ने 2 घण्टे कार्य बहिष्कार कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
सिविल अस्पताल में डीपीए उत्तर प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष सुनील यादव के नेतृत्व में रजनीश पांडेय, जीसी दुबे, ओपी पटेल, श्रवण चौधरी, सलिल श्रीवास्तव, पंकज श्रीवास्तव, सुधाकर शर्मा, रंजीत गुप्ता आदि साथियों ने कमान संभाली।
लोकबंधु अस्पताल में सीएल शांति के नेतृत्व में मोहम्मद अजमल, सरोज सिंह, संजुलता श्रीवास्तव, गिरिजेश यादव, प्रतिभा पटेल, मलिहाबाद सीएचसी से कमलेश वर्मा, सीएचसी सरोजनी नगर में जनपद लखनऊ वरिष्ठ उपाध्यक्ष आरबी मौर्या के नेतृत्व में राजेश गौतम, सुनील मिश्रा, कमलकांत वर्मा, अनिल त्रिपाठी, सीएचसी मोहनलालगंज से अनिल सचान के नेतृत्व में अरविंद वर्मा, अनीता अवस्थी, विकास शर्मा, रविन्द्र परिहार, आनंद कुशवाहा, सीएचसी इटौंजा से डीपीए लखनऊ मंत्री अखिल सिंह के नेतृत्व में अशोक गुप्ता, काज़ी इरसाद सहित सभी फार्मासिस्टों ने जोरदार प्रदर्शन किया।

डफरिन से जसवंत सिंह के नेतृत्व में अरविंद तिवारी, पवन शर्मा, टीबी अस्पताल से रामेंद्र सिंह, राजेश कोहली, कल्पना सचान, जितेंद्र कुमार पटेल सहित सभी फार्मासिस्ट/चीफ फार्मासिस्ट साथियों के अलावा जनपद लखनऊ के सभी सामु०स्वा०केंद्र व प्रा०स्वा०केंद्रों पर तैनात सभी फार्मासिस्ट/चीफ फार्मासिस्ट साथियों द्वारा 2 घंटे का कार्य बहिष्कार करते हुए जमकर नारेबाजी करते हुए सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया।
डीपीए जनपद शाखा लखनऊ के कार्यकारी अध्यक्ष कपिल वर्मा ने संवर्ग के सभी फार्मेसिस्ट/चीफ फार्मासिस्ट साथियों द्वारा 12वें दिन भी भारी संख्या में अपने-अपने कार्यस्थल पर 2 घंटे का कार्य बहिष्कार करते हुए विरोध दर्ज कराने के लिए आभार व्यक्त किया गया

20 सूत्रीय मांगों को लेकर फार्मासिस्टों का कार्य बहिष्कार व जोरदार प्रदर्शन

लखनऊ। डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के फार्मासिस्टों ने प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों में अपनी 20 सूत्रीय मांगों के सापेक्ष उत्तर प्रदेश सरकार के अडिय़ल रवैया के विरोध में 2 घंटे का बहिष्कार व जोरदार प्रदर्शन जारी रखा। वहीं जनपद लखनऊ के विभिन्न अस्पतालों में डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन जनपद शाखा लखनऊ के पदाधिकारियों व डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के पदाधिकारियों के नेतृत्व में 2 घंटे कार्यबहिष्कार सहित जोरदार प्रदर्शन किया गया। बलरामपुर अस्पताल में प्रदेश संरक्षक केके सचान व प्रदेश महामंत्री उमेश मिश्रा के नेतृत्व में पूर्व महामंत्री श्रवण सचान,प्रान्तीय कोषाध्यक्ष अजय पाण्डे,पूर्व प्रान्तीय कोषाध्यक्ष रजत यादव,सुभाष श्रीवास्तव, संजय कनौजिया, संयुक्त मंत्री विवेक श्रीवास्तव,  संप्रेक्षक जितेंद्र कुमार, पंकज रस्तोगी, निशा तिवारी, मंजुलता,सुनीता सचान, संगीता वर्मा, सुनीता यादव, महेंद्र यादव, अब्दुल रहमान, निशा तिवारी, आरपी सिंह, दयाशंकर त्यागी, डीके श्रीवास्तव व अन्य सभी साथियों ने सुबह 8 बजे से 10 बजे तक 2 घंटे के कार्यबहिष्कार की कमान संभाली।
 डीपीए जनपद लखनऊ के कार्यकारी अध्यक्ष कपिल वर्मा व संगठन मंत्री अविनाश सिंह के नेतृत्व में सीएचसी गोसाईं गंज में हनुमान प्रसाद वर्मा, अकील अंसारी, आरबी मौर्या, राम सुमित्र पटेल, अखिलेश ओझा, अतुल श्रीवास्तव, कन्हैयालाल व जनपद लखनऊ कोषाध्यक्ष चंद्रशेखर श्रीवास्तव ने 2 घण्टे कार्य बहिष्कार कर विरोध प्रदर्शन किया।


सिविल अस्पताल में डीपीए  जनपद लखनऊ के अध्यक्ष अरुण अवस्थी के नेतृत्व में डीपीए उत्तर प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष सुनील यादव,रजनीश पांडेय,जी सी दुबे,ओ पी पटेल,श्रवण चौधरी, सलिल श्रीवास्तव, पंकज श्रीवास्तव,सुधाकर शर्मा,रंजीत गुप्ता आदि साथियों ने कमान संभाली।
 लोकबंधु अस्पताल में सीएल शांति के नेतृत्व में मोहम्मद अजमल, सरोज सिंह, संजुलता श्रीवास्तव, गिरिजेश यादव, प्रतिभा पटेल, मालिहाबाद सीएचसी से राजेश वरुण के नेतृत्व में नीलम वर्मा, सीएचसी सरोजनी नगर में जनपद लखनऊ वरिष्ठ उपाध्यक्ष आरबी मौर्या के नेतृत्व में राजेश गौतम, सुनील मिश्रा, कमलकांत वर्मा, अनिल त्रिपाठी, सीएचसी मोहनलालगंज से अनिल सचान के नेतृत्व में अरविंद वर्मा, अनीता अवस्थी, विकाश शर्मा, रविन्द्र परिहार, आनंद कुशवाहा, सीएचसी गुडंबा से डीपीए लखनऊ मंत्री अखिल सिंह के नेतृत्व में सभी फार्मासिस्टों ने जोरदार प्रदर्शन किया।
वहीं डफरिन से जसवंत सिंह के नेतृत्व में अरविंद तिवारी, पवन शर्मा, टीबी अस्पताल से रामेंद्र सिंह, राजेश कोहली, कल्पना सचान, जितेंद्र कुमार पटेल सहित सभी फार्मासिस्ट/चीफ फार्मासिस्ट साथियों ने कमान संभाली। साथ ही जनपद लखनऊ के सभी सामु0स्वा0केंद्र व प्रा0स्वा0केंद्रों पर तैनात सभी फार्मासिस्ट/चीफ फार्मासिस्ट साथियों द्वारा 2 घंटे का कार्य बहिष्कार करते हुए जमकर नारेबाजी करते हुए सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। डीपीए जनपद शाखा लखनऊ के कार्यकारी अध्यक्ष कपिल वर्मा द्वारा संवर्ग के सभी फार्मेसिस्ट/चीफ फार्मासिस्ट साथियों द्वारा आंदोलन के आठवें दिन भी भारी संख्या में अपने अपने कार्यस्थल पर 2 घंटे का कार्य बहिष्कार करते हुए अपना विरोध दर्ज कराने के लिए सभी साथियों का आभार व्यक्त किया गया।

फार्मासिस्टों ने किया दो घंटे कार्य बहिष्कार

सरकार की वादा खिलाफी पर फार्मासिस्टों का दो घंटे कार्य बहिष्कार


नूरपुर (बिजनौर)। प्रदेश सरकार की वादा खिलाफी पर डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के आव्हान पर विभिन्न म़ागो को लेकर फार्मासिस्टों ने ताला बंद कर दो घंटे कार्य बहिष्कार किया।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर गुरुवार को फार्मासिस्टों ने दवा केंद्र का ताला बंद कर दो घंटे कार्य बहिष्कार किया। एसोसिएशन के वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष विक्रांत बहादुर सिंह ने बताया कि एसोसिएशन पिछले काफी समय से अपनी बीस सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलनरत है। …लेकिन प्रदेश सरकार उनकी मांगे पूरी करने का वादा भूल रही है। सरकार की वादा खिलाफी के खिलाफ एसोसिएशन के आव्हान पर 9 दिसंबर से 16 दिसंबर तक दो घंटे कार्य बहिष्कार का निर्णय लिया गया है।

इसी क्रम में विक्रांत बहादुर सिंह फार्मासिस्ट नूरपुर सीएचसी, इमरान अली नूरपुर पीएचसी, राजेंद्र सिंह उप पीएचसी मोरना, अंजुल कुमार ताजपुर, विपिन कुमार गोहावर, राजीव कुमार फीना व भोजेंद्र कुमार खासपुरा दो घंटे कार्य बहिष्कार पर रहे।

काला फीता बांधकर फार्मासिस्ट ने किया कार्य

लखनऊ। डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन उत्तर प्रदेश द्वारा पूर्व घोषित आंदोलन के क्रम में आज तीसरे दिन बलरामपुर चिकित्सालय लखनऊ में फार्मासिस्ट/चीफ फार्मासिस्ट साथियों ने काला फीता बांधकर कार्य करते हुए विरोध प्रदर्शन किया।

आज के विरोध प्रदर्शन में डीपीए जनपद लखनऊ कार्यकारी अध्यक्ष कपिल वर्मा के नेतृत्व में बलरामपुर चिकित्सालय में तैनात डीपीए उत्तर प्रदेश संरक्षक केके सचान, पूर्व महामंत्री श्रवण सचान, पूर्व प्रान्तीय कोषाध्यक्ष रजत यादव, सुभाष श्रीवास्तव, संजय कनौजिया सहित अन्य फार्मासिस्ट/चीफ फार्मासिस्ट साथियों द्वारा अपने अपने ड्यूटी काउंटर पर ही काला फीता बांधकर कार्य करते हुए विरोध प्रदर्शन किया गया।
लखनऊ के ही सिविल अस्पताल में डीपीए जनपद शाखा लखनऊ के अध्यक्ष अरुण अवस्थी के नेतृत्व में पूर्व फार्मेसी कॉउन्सिल अध्यक्ष सुनील यादव, श्रवण चौधरी, पंकज रस्तोगी, सलिल श्रीवास्तव, सुधाकर शर्मा, रंजीत सहित सभी फार्मासिस्ट/चीफ फार्मासिस्ट साथियों ने काला फीता बांधकर कार्य करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। साथ ही जनपद लखनऊ के सभी सामु०स्वा०केंद्र व प्रा०स्वा०केंद्रों पर भी तैनात सभी फार्मासिस्ट/चीफ फार्मासिस्ट साथियों द्वारा काला फीता बांधकर कार्य करते हुए विरोध प्रदर्शन किया गया। संगठन के जनपदीय शाखा के कार्यकारी अध्यक्ष कपिल वर्मा द्वारा संवर्ग के सभी फार्मेसिस्ट/चीफ फार्मासिस्ट साथियों से अनुरोध किया गया कि संगठन के इस आंदोलन कार्यक्रम को भी पूर्णतया सफल बनाने में कोई कोर- कसर ना छोड़ें।

दिल्ली में मिला ओमीक्रॉन का पहला मरीज, देश में संख्या हुई पांच

दिल्ली में मिले इस नए केस के साथ ही देश में ओमीक्रॉन के मरीज़ों की तादाद बढ़ कर पांच हो गई है। इससे पहले पिछले दिन मुंबई में ओमीक्रॉन का चौथा मामला दर्ज किया गया था।

दिल्ली में मिला Omicron का पहला केस, तंजानिया से लौटे शख्स में वैरिएंट की तसदीक

नई दिल्ली। दुनिया भर में कोरोना के नए वैरिएंट ओमीक्रॉन के बढ़ते मामलों के बीच भारत में भी इसके केस धीरे-धीरे बढ़ने लगे हैं। अब राजधानी दिल्ली में पहला ओमीक्रॉन पॉजिटिव मरीज मिला है। यह यात्री तंजानिया से आया था। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के अनुसार 12 संक्रमित मरीजों के सैंपल जिनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजे गए थे, जिनमें से एक मरीज़ की रिपोर्ट में ओमीक्रॉन वैरिएंट पाया गया है। दिल्ली में मिले इस नए केस के साथ ही भारत में ओमीक्रॉन के मरीज़ों की संख्या बढ़ कर पांच हो गई है। इससे एक दिन पहले ही मुंबई में ओमीक्रॉन का चौथा मामला दर्ज किया गया था।

दिल्ली के हेल्थ मिनिस्टर सत्येंद्र जैन ने बयान जारी कर कहा कि दिल्ली में पहला ओमीक्रॉन केस मिला है। एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती मरीज तंजानिया से लौटा था।

चार दिसंबर से सीएमओ कार्यालय पर धरना

लखनऊ। डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन शाखा लखनऊ की प्रथम प्रेस वार्ता आज दिनाँक 1-12-2021 को बलरामपुर चिकित्सालय लखनऊ में सम्पन्न हुई।

इस दौरान नवनिर्वाचित अध्यक्ष अरुण अवस्थी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष आरबी मौर्या, उपाध्यक्ष सुशील कुमार विद्यार्थी, संगठन मंत्री अविनाश सिंह, कोषाध्यक्ष चन्द्र शेखर श्रीवास्तव सहित कई फार्मासिस्ट उपस्थित रहे।कार्यक्रम में डीपीए जनपद शाखा लखनऊ के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों का स्वागत जनपद के पंकज रस्तोगी, रजत यादव, रंजीत गुप्ता व चिकित्सा स्वास्थ्य महासंघ के प्रधान महासचिव अशोक कुमार, एलटी संघ से कमल श्रीवास्तव और सुनील कुमार सहित कर्ई संघों के प्रदाधिकारियों द्वारा किया गया।
जिला अध्यक्ष अरुण अवस्थी ने बताया कि जिला कार्यकारिणी द्वारा बहुमत से कपिल वर्मा चीफ फार्मासिस्ट, बलरामपुर चिकित्सालय लखनऊ को “कार्यकारी अध्यक्ष” मनोनीत किया गया है। उन्होंने अवगत कराया कि प्रदेश नेतृत्व द्वारा दिनांक 04/12/21 से जिले पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय पर धरना के साथ पूर्व घोषित आंदोलन को सफल बनाने में जिले के सभी सदस्य भागीदारी करेंगे।

पीएचसी पर संविदा कर्मियों का धरना

वरिष्ठ पत्रकार गुणवंत सिंह की कलम से

नूरपुर/बिजनौर। सोमवार को उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ पंजीकृत के आह्वान पर संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने समान वेतन और स्थाई नियुक्ति की मांग को लेकर कार्य बहिष्कार कर एक दिवसीय धरना दिया।
धरना देने वालो में शालिनी विश्नोई, उजमा, पूनम रानी, शोभा, निकेता, मीना, धर्मेंद्र सिंह, अरुण कुमार, राजीव मठपाल, योगेश, दीपक, डा. रंजना एवं डा. सारिका आदि शामिल रहे।

अब सिरिंज संकट से जूझेगी दुनिया!

WHO की चेतावनी, दुनिया में अब सिरिंज संकट!

नई दिल्ली। अगले साल तक दुनिया में करीब 200 करोड़ इंजेक्शन सिरिंज की कमी हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनियाभर में कोरोना वैक्सीनेशन की वजह से बड़े पैमाने पर सिरिंज का इस्तेमाल हो रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभी तक पूरी दुनिया में 725 करोड़ से ज्यादा कोरोना वैक्सीन की डोज दी जा चुकी हैं। इनमें सिंगल, डबल और बूस्टर डोज शामिल हैं। वैक्सीन की यह मात्रा आमतौर पर सालभर में लगने वाले कुल टीकों की संख्या से दोगुना ज्यादा है। हर डोज के लिए अलग सिरिंज का इस्तेमाल होता है, इसलिए सिरिंज की खपत भी हर साल से दोगुनी हो गई है।

आखिरकार झोलाछापों पर विभाग ने तरेरी आंखें, कार्रवाई शुरू

बिजनौर। जिले में अवैध रूप से प्रैक्टिस करने के आरोप में 12 झोलाछाप चिकित्सकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए तहरीर दी गई है। इसके अलावा पैथोलॉजी लैब व एक्स-रे मशीन को भी सील किया गया है।
एक दिन पूर्व ग्राम खारी में झोलाछाप की कथित लापरवाही के चलते महिला की मृत्यु के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी निशाने पर आ गए थे। इसी के दृष्टिगत नोडल अधिकारी क्वेक्स डा. एसके निगम ने सख्त रूख अपनाया। उन्होंने ग्राम खारी स्थित जच्चा-बच्चा केंद्र का मौका मुआयना कर मामले की जानकारी ली। साथ ही वहां के चिकित्सक डा. कृष्ण गोपाल घोष व मौसमी घोष आशा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए हल्दौर थाने में प्रार्थनापत्र दे दिया। इसके अलावा डा. एसके निगम ने नजीबाबाद में अल नजीब पैथ लैब एवं एक्स-रे मशीन को सील करते हुए डा. शेख लुकमान के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

दूसरी तरफ ग्राम हरेवली में डा. प्रभाष मंडल, आरोग्य डायोनिसिस्ट पैथोलॉजी लैब उमरी के संचालक डा. सनी कुमार, सहारा लैब नींदडू के संचालक डा. मुदस्सर अली, योग हैल्थ केयर भागूवाला के संचालक डा. मुस्तकीम अहमद, आलिया बच्चों का क्लीनिक भागूवाला के संचालक डा. जुऐब अंसारी, साबिया बच्चों का क्लीनिक भागूवाला के संचालक डा. फाइम अहमद, डा. नासिर बेगमपुर शादी, डा. नवनीत ग्राम खारी व डा. ओमप्रकाश ग्राम खारी के खिलाफ भी अनाधिकृत रूप से एलोपैथिक चिकित्सा अभ्यास करने पर सम्बंधित थानों में एफआईआर दर्ज कराने के लिए तहरीर दे दी गई है।

नोडल अधिकारी क्वेक्स डा. एसके निगम ने बताया कि जिले में झोलाछापों को किसी भी मरीज के स्वास्थ्य से खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा। अवैध रूप से प्रैक्टिस करने वालों के खिलाफ लगातार छापेमारी कर कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने संकेत दिए कि कुछ अन्य क्लीनिकों पर भी छापेमारी कर झोलाछापों पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

लेखपाल तैयार करेंगे गांवों में कोविड टीकाकरण को सूची

लखनऊ। प्रदेश में टीकाकरण की रफ्तार और तेज करने के लिए खासतौर से गांवों पर फोकस किया जा रहा है। जिलाधिकारियों के जरिए पूरे प्रदेश के गांवों को टीकाकरण के लिहाज से नए सिरे से सूचीबद्ध किया जाएगा। शासन से मिले आदेश के अनुसार अब हर लेखपाल अपने प्रभार वाले गांवों की सूची तैयार करेगा। इसमें संबंधित गांव में टीकाकरण के प्रतिशत का जिक्र होगा। जिन गांवों में 80 से 90 फीसदी के बीच टीकाकरण हुआ है, वहां अभियान चलाकर उसे शत-प्रतिशत किया जाएगा। उसके बाद उन गांवों को लिया जाएगा जहां 90 से 95 प्रतिशत टीकाकरण हो चुका है।

एक दिन में सर्वाधिक टीकाकरण औऱ सबसे ज्यादा टीके लगाने वाले राज्य की उपलब्धियां यूपी के खाते में दर्ज हैं। स्वास्थ्य विभाग ने गांवों में टीकाकरण को तेज करने के लिए इसी साल जून में क्लस्टर योजना शुरू की थी। इससे शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ गांवों में भी बड़ी संख्या में टीकाकरण हुआ। अब गांवों में शत-प्रतिशत टीकाकरण कराने की तैयारी है। इसके लिए क्लस्टर-2.0 शुरू किया गया है। लेखपालों द्वारा गांवों का सर्वे कराया जा रहा है। इस सर्वे की रिपोर्ट संबंधित क्षेत्र के मेडिकल अफसर के साथ साझा की जाएगी। उसके हिसाब से वो चिन्हित गांवों में टीकाकरण की व्यवस्था करेंगे।

गांवों में आबादी के हिसाब से टीका सेशन

क्लस्टर-2.0 के तहत गांवों में आबादी की जरूरत के हिसाब से टीका सेशन आयोजित किए जाएंगे। जरूरत पड़ने पर एक ही गांव में घंटों के हिसाब से अलग-अलग क्षेत्र में भी सेशन लगेंगे ताकि गांव के हर कोने के लोगों को टीका लगाया जा सके। प्रदेश में अभी तक 66 फीसदी से अधिक लोगों को टीके की कम से कम एक डोज लग चुकी है, जबकि कुल टीकाकरण का आंकड़ा 13 करोड़ को पार कर चुका है, जो देश में सर्वाधिक है।

हैल्थ डिपार्टमेंट: कार्रवाई से पहले तैयार हो जाती है बचाव की पटकथा!

पहले ही तैयार हो जाती है बचाव की पटकथा! जगजाहिर हैं नोडल क्वेक्स डॉक्टर एसके निगम के कारनामे!

बिजनौर। जनपद में नीम हकीमों द्वारा आएदिन लोगों की जान ली जा रही है लेकिन नोडल क्वेक्स केवल उगाही को अंजाम दे रहे हैं!

गत दिनों चांदपुर के एक अवैध रूप से संचालित नर्सिंग होम में हुई मौत के बाद खूब बवाल हुआ। प्रशासन को काफी मशक्कत के बाद जाम खुलवाने में कामयाबी हासिल हुई। इस हंगामे को होते देख नोडल अधिकारी क्वेक्स एसके निगम चांदपुर पहुंचे और आनन-फानन में उन नर्सिंग होम, अस्पतालों को नोटिस जारी कर दिया, जिनसे वह वर्षों से अवैध उगाही करते चले आ रहे हैं? इसके बाद अस्पताल संचालक और डॉक्टर अपने बचाव के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में पहुंच गए। बताया जाता है कि डॉ. एसके निगम द्वारा एक बाबू को उनको बचाव की जानकारी के लिए लगा दिया गया!

…और बाबू पर भी नहीं किसी का काबू: बाबू ने ऐसा षड्यंत्र रचा कि डॉक्टर बागबाग हो गए और एक मोटी रकम डॉ. एसके निगम को भेंट स्वरूप दी गई। बचाव के रास्ते की जानकारी मिलने पर सीएमओ साहब भी गदगद हो गए! वह बचाव में दलीलें देते नजर आते हैं। बात यहीं खत्म नहीं हो जाती, दरअसल मामला बरसों पुराना है। बरसों से जो भी नोडल कवेक्स बनाए जाते हैं, उनका एकमात्र उद्देश्य इन झोलाछाप नीम हकीम डॉक्टर से अवैध उगाही करना ही बना हुआ है। डॉक्टर एसके निगम एक वर्ष से ज्यादा से नोडल कवेक्स हैं और लगातार चांदपुर में नीम हकीम को नोटिस जारी कर उगाही करते रहे हैं! जब भी कोई ऐसा मामला फंसता नजर आता है तब वह भारी संख्या में नीम हकीम को नोटिस जारी कर देते हैं और बाद में मामला शांत होने पर अवैध उगाही कर उन्हें अभयदान प्रदान करते हुए अपनी एक निश्चित रकम तय कर लेते हैं। एक नीम हकीम को उगाही की जिम्मेदारी देते हैं या फिर गाड़ी में बैठ कर अस्पताल के बाहर अपने ड्राइवर के माध्यम से उगाही के कार्य को अंजाम देते रहते हैं। इस बार भी कुछ अलग नहीं होने जा रहा है।

तगड़ी हो रही उगाही– नाम न छापने की शर्त पर एक अस्पताल संचालक ने बताया कि उनसे प्रतिमाह ₹ 2 से ₹4000 तक की प्रतिमाह उगाही की जाती है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है की डॉ. एसके निगम गरीब मरीजों की जान से खिलवाड़ करने की खुली छूट अवैध रूप से संचालित अस्पतालों व नीमहकीमो को दिए हुए हैं जबकि उनके रिटायरमेंट के कुछ माह शेष हैं। ऐसे में वह कोई मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहते और वह सारे नीम हकीम अल्ट्रासाउंड सेंटर से अवैध उगाही के लिए ताबड़तोड़ दौरे कर रहे हैं। यहां उल्लेखनीय है कि छुट्टी के दिन निगम अपनी व्यक्तिगत गाड़ी लेकर उगाही के लिए निकल जाते हैं।

प्रशासन और सरकार की बदनामी- आरोप है कि वह जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार को बदनाम करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। साथ ही कुछ स्थानीय पार्टी नेताओं व अधिकारियों को एक मोटी रकम प्रतिमाह अपनी उगाही से देते रहते हैं। इस कारण आज तक किसी सत्तारूढ़ पार्टी के नेता या फिर स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी उनकी ओर आंख उठाकर भी नहीं देखते। अभी उन्होंने चांदपुर में नौ और नजीबाबाद के भागूवाला में 11 चिकित्सकों को नोटिस जारी कर प्रमाण पत्र मांगे हैं, जबकि पंजीकृत अस्पतालों का रिकॉर्ड सीएमओ ऑफिस में मौजूद रहता है लेकिन इन पर डॉक्टर निगम ध्यान नहीं देते हैं क्योंकि उन्हें तो अवैध उगाही करनी है। उन्हें इससे क्या लेना कि कोई अस्पताल या डॉक्टर पंजीकृत है या नहीं है। अक्सर होता यह भी है कि अस्पताल का पंजीकरण जिस डॉक्टर के नाम से कराया जाता है वह उस हॉस्पिटल में कभी आता ही नहीं है। इस बात की पुष्टि इन अस्पतालों में लगे सीसीटीवी कैमरे से की जा सकती है, लेकिन इस सब को दरकिनार कर नोडल अधिकारी कवेक्स अपने उगाही के धंधे को जारी रखे हुए हैं। इससे सरकार व जिला प्रशासन की बदनामी के साथ ही कार्यशैली पर राशन लगना तो लाजमी है।

विक्रांत चौधरी ने किया चिकित्सकों का अभिनंदन

बिजनौर। भारत सरकार द्वारा 100 करोड़ कोविड वैक्सीन का आँकड़ा सबसे कम समय में सफलता पूर्वक पूरा करने के उपलक्ष्य में नजीबाबाद स्थित लाला भोजराम नेत्र चिकित्सालय में अभिनंदन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर भाजपा जिला सह मीडिया प्रभारी विक्रांत चौधरी ने वैक्सीनेशन टीम का अभिनंदन किया। साथ ही अस्पताल में मौजूद सभी चिकित्सकों  और स्टाफ़ का धन्यवाद किया। सभी ने देशवासियों की कोरोना काल में समय हर सुविधा मुहैया कराने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा कि हमारे पीएम वास्तव में जननायक हैं, जो बिना भेदभाव किए हमेशा देशवासियों की चिंता में लगे रहते हैं।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ फ़ैज़ हैदर, ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर निपेंद्र चौधरी, अखिलेश वर्मा, वैशाली कुमारी, अभिषेक त्यागी, संदीप पांडे फार्मेसिस्ट, बृजेश कुमार फार्मेसिस्ट, कौशिक, विशाल कुमार, राजवीर कुशवाहा बाला देवी  आदि उपस्थित रहे।

जिला अस्पताल में वैक्सीनेशन टीम का अभिनंदन

बिजनौर। भारत सरकार द्वारा 100 करोड़ कोविड वैक्सीन लगाने का आँकड़ा सबसे कम समय में सफलतापूर्वक पूरा करने के उपलक्ष्य में जिला अस्पताल में वैक्सीनेशन टीम का अभिनंदन किया गया।

भारतीय जनता पार्टी की ओर से कोविड वैक्सीनेशन टीम के अभिनंदन के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जिला अस्पताल में मौजूद सभी चिकित्सक और स्टाफ़ का धन्यवाद ज्ञापित करने के साथ ही मिष्ठान वितरण किया गया। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष, जिला महामंत्री विनय राणा, भूपेंद्र चौहान बॉबी, मुकेन्द्र त्यागी, भीष्म सिंह राजपूत, आईटी विभाग संयोजक विपुल शर्मा, नगर अध्यक्ष के साथ नगर टीम के पदाधिकारी आदि उपस्थित रहे।

अल्ट्रासाउंड सेंटर्स: डीएम ने कसे विभागीय अधिकारियों के पेंच


चेताया कि कन्या भ्रूण चिन्हिकरण बर्दाश्त नहीं। सप्ताह में कम से कम तीन अल्ट्रासाउंड सेन्टर्स का हो निरीक्षण

अल्ट्रासाउण्ड मशीन की अनुमति प्राप्त करने से पूर्व पुरानी मशीन का डिस्पोजल और एक्सपर्ट की आख्या, डाक्टर का निरीक्षण सहित चैकलिस्ट के आधार पर सभी आवश्यक कार्यवाही करना सुनिश्चिित करें, अल्ट्रासाउंड नीवनीकरण होने वाले मामलों में भी पूरी छानबीन करने के बाद ही उन्हें अनुमति प्रदान की जाए-जिलाधिकारी उमेश मिश्रा”

बिजनौर। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने प्राईवेट स्वास्थ्य केन्द्रों में नई अल्ट्रासाउण्ड मशीन की अनुमति प्राप्त करने के सम्बन्ध में निर्देश दिए कि अनुमति से पूर्व पुरानी मशीन का डिस्पोजल और एक्सपर्ट का ओपनीयन, डाक्टर का निरीक्षण सहित चैकलिस्ट के आधार पर सभी आवश्यक कार्यवाही पहले ही करना सुनिश्चिित करें तभी नई मशीन लगाने की अनुमति दिये जाने की कार्यवाही की जाय। उन्होंने नोडल अधिकारी पीसीपीएनडीटी को निर्देशित किया कि नर्सिंग होम आदि की जांच के लिए संबंधित उपजिला मजिस्ट्रेट को साथ लेना भी सुनिश्चिित करें। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जिले में कन्या भ्रूण चिन्हिकरण का कार्य नहीं होने दिया जाएगा और जिस किसी को भी अल्ट्रासाउंड सैन्टर पर इस प्रकार की कोई शिकायत प्राप्त होती है और निरीक्षण के बाद सही पायी जाती है तो केन्द्र को बन्द करा कर उसके संचालक के विरूद्व कड़ी कानूनी कार्यवाही अमल में लायी जाएगी।

पीसीपीएनडीटी से संबंधित समिति की बैठक
जिलाधिकारी श्री मिश्रा सोमवार दोपहर कलक्ट्रेट सभागार में पीसीपीएनडीटी से संबंधित समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए बोल रहे थे।
उन्होंने नोडल अधिकारी पीसीपीएनडीटी को निर्देश दिये कि अल्ट्रासाउण्ड मशीन ऑपरेटिंग के लिए आवेदन पत्र में जिस व्यक्ति का नाम अंकित किया गया है, उसके अभिलेखों की जांच कर सुनिश्चित कर लें कि वह व्यक्ति पात्र है, यदि अल्ट्रासाउण्ड संचालक के अभिलेख आदि संदिग्ध पाए जाते हैं तो किसी भी सूरत में उसका अनुमोदन नहीं किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि सप्ताह में कम से कम तीन अल्ट्रासाउंड सैन्टर्स का निरीक्षण करना सुनिश्चित करें और नए अल्ट्रासाउंड केन्द्र एवं नवीनीकरण की अनुमति तभी दी जाए, जब संबंधित अल्ट्रासाउंड केन्द्रों में सभी औपचारिकताएं पूरी पाई जाएं।
उन्होंने कहा कि हमारे देश और जिले में लिंग अनुपात में भारी अन्तर का होना एक गम्भीर एवं चिंताजनक समस्या है। इस समस्या का समाधान केवल बैठकों से ही सम्भव नहीं है, बल्कि जन सामान्य को लिंग अनुपात के संकट के प्रति जागरूक करना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होने निर्देश दिए कि जिले में अल्ट्रासाउंड सेन्टर्स और नीवनीकरण होने वाले मामलों में पूरी छानबीन करने के बाद ही उन्हें अनुमति प्रदान की जाए और हर सेन्टर पर कन्या भ्रूण हत्या से संबंधित कानूनी जानकारी पर आधारित स्पष्ट शब्दों में बोर्ड अथवा दीवार पर आईसी मेटीरियल लिखवाना और अल्ट्रासाउंड कक्ष में सीसीटीवी कैमरों की स्थापना को अनिवार्य किया जाए, उसके बाद ही अल्ट्रासाउंड केन्द्रों के नवीनीकरण आदि की अनुमति दी जाए। उन्हेांने कड़े निर्देश दिये कि कन्या भ्रूण चिन्हिकरण करने वाले किसी भी सेन्टर एवं संचालक पर सख्त कानूनी कार्यवाही अमल में लायें चाहे वह व्यक्ति कितना ही प्रभावशाली या बलशाली हो, तभी इस कानून का औचित्य सिद्व हो सकता है।

इस अवसर पर नोडल अधिकारी पीसीपीएनडीटी डा. एसके निगम, डा0. प्रभा रानी मुख्य चिकित्साधीक्षिका, डा. बीआर त्यागी, श्रीमती सुधा राठी, मुकेश त्यागी डीजीसी सहित समिति के अन्य सदस्य मौजूद थे।

PCPNDT का तात्पर्य! पूर्व गर्भाधान और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (PCPNDT) अधिनियम, 1994 भारत में कन्या भ्रूण हत्या और गिरते लिंगानुपात को रोकने के लिए भारत की संसद द्वारा पारित एक संघीय कानून है। इस अधिनियम से प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक ‘पीएनडीटी’ एक्ट 1996, के तहत जन्म से पूर्व शिशु के लिंग की जांच पर पाबंदी है। ऐसे में अल्ट्रासाउंड या अल्ट्रासोनोग्राफी कराने वाले जोड़े या करने वाले डाक्टर, लैब कर्मी को तीन से पांच साल सजा और 10 से 50 हजार जुर्माने की सजा का प्रावधान है। प्रत्येक आनुवांशिक परामर्श केंद्र, आनुवांशिक प्रयोगशाला या आनुवांशिक क्लिनिक परामर्श देने या प्रसव पूर्व निदान तकनीकों का संचालन करने में लगे हुए हैं, जैसे कि गर्भाधान से पहले और बाद में लिंग चयन की संभावनाओं के साथ इन विट्रो फर्टिलाईजेशन (आईवीएफ) पीसीसीपीटी अधिनियम के दायरे में आता है और इस पर प्रतिबंध है। इसके बावजूद जनपद बिजनौर में ये हवाहवाई साबित हो रहा है। जिले के लगभग हर तहसील, कस्बों में खुलेआम अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित हो रहे हैं और जिले के प्रशानिक मुखिया यानी जिलाधिकारी को अंधेरे में रख कर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौज काट रहे हैं। कायदे से जांच हो जाए तो इक्का दुक्का अल्ट्रा साउंड सेंटर में ही  प्रशिक्षित स्टाफ मिलेगा। अधिकतर अल्ट्रासाउंड सेंटर जिस चिकित्सक के नाम से संचालित हैं, उनका कुछ आता पता नहीं है।

अवैध रूप से संचालित सिटी हॉस्पिटल सील

सिटी मजिस्ट्रेट ने सिटी हॉस्पिटल पर छापामार कर की कार्रवाई

मुजफ्फरनगर। शहर के बीचों बीच अवैध रूप से चलाए जा रहे अस्पताल को जिला प्रशासन और औषधि विभाग की संयुक्त टीम ने छापामार कार्यवाही करते हुए सील कर दिया है। प्रशासन की इस कार्यवाही से अस्पतालों के जरिए धन बटोरने में लगे लोगों में हड़कंप मच गया है। पुलिस द्वारा कई लोग हिरासत में भी लिये गये है।

जिला प्रशासन और औषधि विभाग की टीम सिटी मजिस्ट्रेट अभिषेक कुमार सिंह और ड्रग इंस्पेक्टर लवकुश प्रसाद की अगुवाई में शहर के बीचों बीच थाना सिविल लाइन क्षेत्र में मदीना चौक के समीप स्थित सिटी हॉस्पिटल पर छापामार कार्रवाई करने के लिए पहुंची। जिला प्रशासन और औषधि विभाग की टीम ने अस्पताल के दस्तावेजों की जांच की, लेकिन अस्पताल प्रबंधन अनुमति और लाइसेंस आदि की बाबत कोई वैध कागजात टीम को नहीं दिखा सका। इस दौरान अस्पताल में योग्य डॉक्टर भी नहीं मिले, जबकि बाहर लगे बोर्ड पर कई बड़े डॉक्टरों के नाम लिखवाए गए थे। सिटी अस्पताल के भीतर मेडिकल स्टोर भी चलता मिला, जहां से लाखों रुपए की अवैध दवाइयां टीम द्वारा बरामद की गई। जिला प्रशासन और औषधि विभाग की टीम ने अवैध रूप से चलाए जा रहे सिटी हॉस्पिटल और उसके भीतर बने मेडिकल स्टोर को सील कर दिया है। पुलिस ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए कई लोगों को हिरासत में भी लिया है। छापामार कार्यवाही के दौरान मौके पर भारी पुलिस फोर्स मौजूद रही। छापामार कार्रवाई को देखने के लिए आसपास के इलाके के लोगों का अस्पताल के इर्द-गिर्द भारी जमावड़ा लगा रहा।

डेंगू की चपेट में आए सीतापुर के DM, लखनऊ में भर्ती

लखनऊ। डेंगू से पीड़ित सीतापुर के जिलाधिकारी विशाल भारद्वाज की हालत बिगड़ने पर राजधानी के सहारा अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जिला अस्पताल में हुई जांच में उनके शरीर में डेंगू एनएस-1 संक्रमण पाया गया। इसके बाद उन्हें लखनऊ जाने की सलाह दी गई।

इस बीच सीतापुर जिले में संक्रमण बढ़ता जा रहा है।स्वास्थ्य विभाग ने जिले में आठ डेंगू के मरीज मिलने की पुष्टि की है। चौबीस घण्टे के भीतर 22 बच्चे अधिक बुखार आने पर भर्ती कराए गए हैं। इनका इलाज चल रहा है। अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. सुरेन्द्र सिंह का कहना है कि जिले में डेंगू से पीड़ित कुल आठ मरीज मिले हैं। संक्रमण की जांच के लिए ब्लॉक स्तर पर गठित रिस्पॉस टीम गांव-गांव भेजी जा रही है। टेस्टिंग बढ़ाई गई है। जिला अस्पताल के पैथालॉजी प्रभारी डॉ. पीसी विश्वकर्मा का कहना है कि चौबीस घण्टे में किए गए टेस्ट में दो मरीज मलेरिया के मिले हैं।

डॉक्टरों को पहली पदोन्नति देने से पहले ग्रामीण सेवा हो अनिवार्य: उपराष्ट्रपति


उपराष्ट्रपति ने देश में विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में अत्याधुनिक स्वास्थ्य अवसंरचना का निर्माण करने की आवश्यकता पर बल दिया।

डॉक्टर-मरीज अनुपात में अंतर को ध्यान में रखते हुए मेडिकल कॉलेजों की संख्या में बढ़ोत्तरी करने की आवश्यकता।

चिकित्सा शिक्षा और उपचार सस्‍ता होना चाहिए: उपराष्ट्रपति।

नई दिल्ली (PIB)। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि सरकारी क्षेत्र में डॉक्टरों को पहली पदोन्नति देने से पहले ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा को अनिवार्य किया जानी चाहिए। 11वें वार्षिक चिकित्सा शिक्षक दिवस समारोह में बोलते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस बात को ध्यान में रखते हुए कि देश की 60 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है, युवा डॉक्टरों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में तीन से पांच साल की सेवा जरूरी है।

चिकित्सा पेशे को एक नेक कार्य बताते हुए उन्होंने डॉक्टरों को सलाह दिया कि वे कोई भी कमी और चूक न करें, बल्कि जुनून के साथ देश की सेवा करें। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी ने बेहतर स्वास्थ्य अवसंरचना की आवश्यकता पर बल दिया है और राज्य सरकारों को इस पहलू पर विशेष रूप से ध्यान देने की सलाह भी दी।

उपराष्ट्रपति ने मेडिकल कॉलेजों की संख्या में बढ़ोत्तरी करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि देश में डॉक्टर-रोगी अनुपात 1:1,456 है जबकि डब्ल्यूएचओ का मानक 1:1000 है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों का शहरी-ग्रामीण अनुपात भी बहुत ज्यादा विषम है क्योंकि ज्यादातर चिकित्सा पेशेवर शहरी क्षेत्रों में ही काम करना पसंद करते हैं। इस बात पर भी बल दिया कि चिकित्सा शिक्षा और उपचार दोनों सस्ता और आम लोगों की पहुंच में होनी चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने भारत के पूर्व राष्ट्रपति और राजनेता-दार्शनिक, स्वर्गीय श्री सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इससे पहले उन्होंने जाने-माने हृदय रोग विशेषज्ञ और पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष, डॉ. के. श्रीनाथ रेड्डी और डॉ. देवी शेट्टी सहित अन्य लोगों को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान किया।

इस अवसर पर तेलंगाना के गृह मंत्री, मो. महमूद अली, एएनबीआई के अध्यक्ष, डॉ अलेक्जेंडर थॉमस, राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड के अध्यक्ष, डॉ अभिजात सेठ, ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन, डॉ जी एस राव, ऑर्गेनाइजिंग सचिव, डॉ लिंगैया, एपी एंड टीएस एएनबीएआई के अध्यक्ष और अन्य लोग उपस्थित हुए।

जिले भर में 1336 टीम घर-घर तलाशेंगी मरीज

बिजनौर। जिले भर में स्वास्थ्य विभाग की 1336 टीम आगामी 7 सितंबर से 16 सितंबर तक घर-घर सर्वे कर मरीज तलाशेंगी। शुक्रवार को इसे लेकर जिला स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक में रणनीति तैयार की गई। सर्वे में कोविड के लक्षणों वाले लोगों से लेकर अन्य बीमारों तक का पता लगाने के साथ ही टीकाकरण की स्थिति भी देखी जाएगी।

जिला प्रतिरक्षण अधिकारी एसीएमओ डा. अशोक कुमार ने बताया कि 31 अगस्त को शासन से विस्तृत दिशानिर्देश प्राप्त हुए हैं। पल्स पोलियो अभियान की तर्ज पर पिछले वर्ष संचालित अभियान की तरह ही कार्ययोजना बनाकर जिले के सभी घरों का भ्रमण करते हुए संचालित किया जाएगा। इस अभियान के दौरान 8 सितंबर व 15 सितंबर को नियमित टीकाकरण दिवस आ रहे हैं। इन दोनों दिवसों का आयोजन अगले सप्ताह में सुनिश्चित किया जाएगा। सर्वे का मुख्य मकसद कोविड संवेदीकरण, ज्वर पीड़ित व्यक्तियों, कोविड तथा टीबी के लक्षण युक्त लोगों, नियमित टीकाकरण से छूटे बच्चों तथा 45 वर्ष से अधिक आयु वाले कोविड का टीका न लगवाने वाले लोगों का चिन्हीकरण करना है। घर-घर सर्वे अभियान में 1336 टीमों को लगाया जा रहा है।

मच्छर का लार्वा मिला तो पहले नोटिस, फिर जुर्माना ₹5 हजार

बिजनौर। डेंगू और मलेरिया समेत वेक्टरजनित रोगों से बचाव के लिये मलेरिया विभाग ने अभियान शुरू कर दिया है। इसके तहत घरों में निरीक्षण कर लारवा तलाशने का काम किया जा रहा है। डेंगू के लारवा की ब्रीडिंग को नष्ट करने के साथ ही संबंधित गृहस्वामी को नोटिस जारी किया जा रहा है। दोबारा लारवा पाए जाने पर 5 हजार रुपए जुर्माना वसूला जाएगा।

मलेरिया विभाग की टीम ने विभिन्न मोहल्लों का सर्वे कर डेंगू और मलेरिया समेत वेक्टरजनित रोगों से बचाव को घरों में निरीक्षण कर लारवा तलाशने का काम शुरू कर दिया है। कांशीराम कालोनी में एक घर में डेंगू के लारवा पाए जाने पर गृहस्वामिनी को नोटिस नोटिस जारी किया गया। जिला मलेरिया अधिकारी बृजभूषण ने बताया कि नोटिस के बाद किसी भी घर के कंटेनर, गमले या कूलर आदि में दोबारा लारवा पाए जाने पर 5 हजार रुपए का जुर्माना किया जाएगा। शहरी क्षेत्र के वार्डों के अलावा गांवों में लारवासाइड का स्प्रे व फॉगिंग कराई गयी है। डेंगू व मलेरिया से बचाव ही बेहतर उपाय है।

सतीश यादव 12 वीं बार अध्यक्ष, दिनेश तीसरी बार एनएमए संघ के मंत्री बने

सतीश यादव 12 वीं बार अध्यक्ष, दिनेश तीसरी बार एन एम ए संघ के मंत्री बने

लखनऊ। राजकीय कुष्ठ चिकित्सा कर्मचारी संघ जनपद शाखा लखनऊ के अधिवेशन में सतीश चंद यादव अध्यक्ष पद पर लगातार 12वी बार, दिनेश कुमार तीसरी बार मंत्री निर्वाचित हुए। अन्य पदों पर सुरेश यादव उपाध्यक्ष, राकेश शर्मा संयुक्त मंत्री, आलम नवाज कोषाध्यक्ष चुने गए।

निर्वाचन अधिकारी राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जनपद अध्यक्ष सुभाष श्रीवास्तव द्वारा चुनाव सम्पन्न कराया गया। परिषद के प्रमुख उपाध्यक्ष सुनील यादव ने विजयी पदाधिकारियो को संघ के संविधान की शपथ दिलाई।
मुख्य अतिथि के रूप में जिला कुष्ठ अधिकारी डॉ अम्बुज सिंह, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के महामंत्री अतुल मिश्रा, सचिव डॉ पी के सिंह ने अधिवेशन को संबोधित किया ।
डॉ अम्बुज सिंह ने कहा कि कोविड काल मे एन एम ए कर्मियों ने बहुत ही सराहनीय कार्य किया है। प्रशासन स्तर पर कर्मियों की हर समस्या का समाधान किया जाएगा।

परिषद के महामंत्री अतुल मिश्रा ने कर्मचारियों को एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कर्मचारियों के लिए संघर्ष का समय है। परिषद कर्मचारियों की समस्याओं के लिए लगातार संघर्ष कर रही है।
डॉ पी के सिंह, सुभाष श्रीवास्तव और सुनील यादव ने अधिवेशन को चिंतन का एक मंच बताया, उन्होंने कुष्ठ कर्मियों की वेतन विसंगति को केंद्र की भांति 1996 से दिए जाने की मांग की।

जननी सुरक्षा योजना में मानक से कम प्रगति पर डीएम नाराज

जननी सुरक्षा योजना में मानक से कम प्रगति तथा आशाओं के मानदेय का भुगतान कम होने पर जिलाधिकारी ने व्यक्त की नाराजगी। CMO को संबंधित अधिकारियों का स्पष्टीकरण तलब करने के निर्देश।

बिजनौर। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने जननी सुरक्षा योजना में मानक से कम प्रगति तथा आशाओं के मानदेय का भुगतान न करने पर नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों का स्पष्टीकरण तलब करने के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिए। उन्होंने निर्देश दिए कि जिले के समस्त क्षय रोगियों की शत प्रतिशत एचआईवी जांच कराना सुनिश्चित करें और डाटा फिडिंग में किसी प्रकार की शिथिलता न बरती जाये। उन्होंने जननी सुरक्षा योजना के गुणवत्तापूर्वक संचालन के लिए सभी एमओआईसी को निर्देश दिए कि संस्थागत डिलीवरी केस बढ़ाना सुनिश्चित करें ताकि सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों की विश्वस्नीयता में वृद्वि हो सके। मुख्य चिकित्साधिकारी को निर्देशित देते हुए कहा कि सम्भावित कोविड की तीसरी लहर से सफलतापूर्वक निपटने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूर्व में पूरी करना सुनिश्चित करें तथा जिले के सभी मुख्य स्वास्थ्य केन्द्रों में ऑक्सीजन सिलेण्डर की पर्याप्त संख्या में उपलब्धता सुनिश्चित रखें ताकि किसी भी समय अपात हालात में उनका उपयोग किया जा सके। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि कोविड वैक्सीन की उपलब्धता के सापेक्ष शत प्रतिशत रूप से टीकाकरण करना सुनिश्चित करें और एक भी डोज़ बेकार न जाने पाए।
जिलाधिकारी श्री मिश्रा विकास भवन के सभागार में आयोजित जिला स्वास्थ्य समिति शासी निकाय की बैठक की अध्यक्षता करते हुए उपस्थित अधिकारियों को निर्देश दे रहे थे।
उन्होंने कहा कि शासन की स्पष्ट मंशा है कि स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ निःशुल्क रूप में पूर्ण गुणवत्ता के साथ जनसामान्य को प्राप्त हो। सभी प्रभारी चिकित्साधिकारियों को कड़े निर्देश दिये कि जिले में जननी सुरक्षा योजना का संचालन पूर्ण गुणवत्ता और मानक के अनुरूप करें और प्राथमिक एंव सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों की विश्वसनीयता को बढ़ाना सुनिश्चित करें ताकि प्राईवेट नर्सिगं होम में प्रसव कराने का जन सामान्य का रूझान कम से कम से हो सके। निर्देश दिये कि जो चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मी अपने कार्य में शिथिलाता बरत रहे हैं और अपने कर्तव्य के प्रति असंवेदनशील हैं, उनको तत्काल सेवा मुक्त किया जाए और उनके स्थान पर कर्मठ और निष्ठावान कर्मियों को नियुक्त किया जाए। जिलाधिकारी ने निर्देश दिये कि आशाओं का भुगतान भी जल्द से कराना सुनिश्चत करें।
उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिये कि फैमिली प्लानिंग का प्रतिशत कम होना एक गंभीर चिन्ता का विषय है इसको भी ध्यान से देखा जाना जरूरी है तथा आरसीएच पोर्टल पीएमएमवीवाई में महिलाओं व बच्चों के रजिस्ट्रेशन के प्रतिशत पर कमी को बढाने के निर्देश स्वास्थ्य अधिकारियों को दिये। उन्होंने आरबीएसके, एनबीसीपी, पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय रोग कार्यक्रम, एम0डी0आर/एक्स0डी0आर, राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम, एच0आई0वी0/एड्स नियंत्रण कार्यक्रम, राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन, जैम पोर्टल, इन्फेक्शन प्रिवेंशन ट्रेनिंग, कायाकल्प स्कोर्स आदि सभी बिंदुओं पर गहनता से विचार विमर्श कर उपस्थित अधिकारियों को सभी कार्यक्रमों में निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष कार्य पूर्ण गुणवत्ता के साथ पूरा करने के निर्देश दिये। उन्होंने समस्त एमओआईसी को निर्देश देते हुए कहा कि टीकाकरण कार्य में लापरवाही न बरती जाये और जिन जगहों पर लक्ष्य के सापेक्ष कम टीकाकरण कार्य हुआ है, वहॉ सुधार करना सुनिश्चित करे।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी कामता प्रसाद सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी डा0 विजय कुमार गोयल, जिला मलेरिया अधिकारी बृजभूषण, मुख्य चिकित्साधीक्षक महिला एवं पुरूष अस्पताल, डीपीएम फारूक़ अजीज के अलावा सभी उप मुख्य चिकित्साधिकारी तथा एमओआईसी मौजूद थे।

एम्बुलेंस हड़ताल: 570 कर्मचारी बर्खास्त

एम्बुलेंस हड़ताल पर कड़ा रुख, 570 ड्राइवर व ईएमटी को नौकरी से हटाया। सभी जिलों में संघ के पदाधिकारियों को नौकरी से हटाया गया।

एम्बुलेंस हड़ताल : सीएम योगी का कड़ा रुख, 570 ड्राइवर व ईएमटी को नौकरी से हटाया

लखनऊ (एकलव्य बाण समाचार)। एम्बुलेंस सेवा के कर्मचारियों के प्रति कंपनी ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए हड़ताली कर्मचारियों के बर्खास्तगी की कार्रवाई तेज कर दी गई है। बुधवार को 570 ड्राइवर व ईएमटी को नौकरी से हटा दिया गया। कंपनी ने सबसे पहले एम्बुलेंस संघ के पदाधिकारियों पर प्रहार करते हुए सभी जिलों में संघ के पदाधिकारियों को नौकरी से हटा दिया है। अधिकारियों ने गुरुवार से एम्बुलेंस का संचालन सामान्य होने का दावा किया है। इस बीच एम्बुलेंस हड़ताल से प्रदेश में बुधवार को सीतापुर में एक महिला मरीज की समय से इलाज न मिल पाने के कारण मौत हो गई।

यूपी में सरकारी एम्बुलेंस का संचालन जीवीकेईएमआरआई कर रही है। 108 व 102 नम्बर पर फोन करने वाले जरूरतमंदों को मुफ्त एम्बुलेंस मुहैया कराई जाती है। प्रदेश में 102 सेवा की 2270 एम्बुलेंस हैं। 108 सेवा की 2200 एम्बुलेंस हैं। एडवांस लाइफ सपोर्ट की 250 एम्बुलेंस हैं। रोजाना 35 से 40 हजार जरूरतमंदों को एम्बुलेंस मुहैया कराई जाती है। लखनऊ में 108 की 44 एम्बुलेंस हैं।रोजाना 150 से ज्यादा गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाकर जान बचाने में मदद की जाती रही है। वहीं 102 की 34 एम्बुलेंस हैं। इसमें गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था है। प्रतिदिन 276 से 300 गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाया जाता रहा है। प्रसव के बाद प्रसूताओं को घर पहुंचाने की जिम्मेदारी भी एम्बुलेंस की है।

एम्बुलेंस के पहिए तीन दिन से जाम-
सोमवार से जीवनदायिनी स्वास्थ्य विभाग 108-102 एम्बुलेंस संघ ने एम्बुलेंस का चक्का जाम किया हुआ है। इस कारण हजारों मरीजों की जिंदगी दांव पर लग गई है। गंभीर मरीज जोखिम भरा सफर तय कर ऑटो-रिक्शा से अस्पताल पहुंचाए जा रहे हैं।

मामले के पीछे कारण-
अभी तक एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) का संचालन जीवीके कर रही थी। शासन के निर्देश पर एएलएस के संचालन के लिए नया टेंडर निकाला गया। टेंडर दूसरी कंपनी को मिला। आरोप है कि नौकरी से निकाले जाने की आशंका के मद्देनजर एम्बुलेंस के कर्मचारियों ने राजनीति शुरू कर दी। हंगामा, धरना और प्रदर्शन शुरू कर दिया, हड़ताल कर दी। बताया गया है कि नई कंपनी ने वरीयता के आधार पर नौकरी देने की बात कही थी।

अब तक 570 कर्मचारियों की बर्खास्तगी- एएलएस कर्मचारियों की सभी मांगों को पूरा किया जा चुका है। फिर भी कुछ लोगों के बहकावे में आकर कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। सेवाएं बाधित करने वाले करीब 570 कर्मचारियों को बर्खास्‍त किया जा चुका है। आगे भी कोई सेवाएं बाधित करने का प्रयास करता है तो उसके खिलाफ भी कार्यवाही की जाएगी। कल तक जो कर्मचारी ज्‍वाइन कर लेंगे उन्‍हें ड्यूटी दी जाएगी। जो लोग बर्खास्त हो चुके हैं उन्हें ड्यूटी नहीं मिलेगी। ज्‍यादातर जिलों में सेवाएं पूर्ण रूप से बहाल हो चुकी हैं। बाकी जगहों पर प्रशासन की मदद से सेवाओं का संचालन करने का प्रयास किया जा रहा है। – टीवीएसके रेड्डी, सीनियर वाइस प्रेसीडेंट, जीवीके ईएमआरआई, यूपी

बाधित नहीं होनी चाहिए एम्बुलेंस सेवाएं: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेशवासियों को गुणवत्तापरक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। इसीलिए 102 व 108 एम्बुलेंस सेवाओं का प्रभावी संचालन कराया जाए। एम्बुलेंस सेवाओं को किसी भी दशा में बाधित नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने बुधवार को टीम-9 के साथ बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया कि यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रत्येक जरूरतमंद को एम्बुलेंस सेवा समय से प्राप्त हो जाए। ऐसा यदि नहीं होता है, तो संबंधित एम्बुलेंस प्रोवाइडर के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाए।

वैक्सीन: भागूवाला क्षेत्र को बाद में कवर कर लेंगे!

बिजनौर (एकलव्य बाण समाचार)। कोविड-19 वैक्सीनेशन ना होने से नजीबाबाद तहसील क्षेत्र के ग्रामीणों में रोष व्याप्त हो गया है। दर्जनों गांव के ग्रामीणों ने वैक्सीनेशन कराने की मांग उठाई है। बताया गया है कि काफी संख्या में ग्रामीणों को पहली खुराक भी नहीं मिली, वहीं चिकित्सा प्रभारी नजीबाबाद का कहना है कि भागूवाला क्षेत्र को बाद में कवर कर लेंगे।

ग्रामीण कोविड-19 का टीका लगवाने को परेशान-
नजीबाबाद तहसील क्षेत्र अंतर्गत भागूवाला क्षेत्र के राजगढ़, जसपुर, रामपुर चाठा, रामदासवाली, सबलगढ़, श्यामीवाला, काशीरामपुर, मिर्जापुर, कोटसराय, कोटावाली इत्यादि गांव के ग्रामीण कोविड-19 का टीका लगवाने को परेशान हैं। काफी संख्या में ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्हें कोविड-19 की पहली खुराक भी प्राप्त नहीं हुई है। कुछ ग्रामीण ऐसे हैं जिन्हें दूसरी डोज को लगभग 65-70 दिन हो गए हैं। ग्रामीण शाहनवाज, मुकेश, शरीफ, वीरेंद्र, मुकेश आर्य, अब्दुला, अब्दुल हनीफ, अनीश, सलीम, खालिक, मुकेश, विरेंदर, जमीर, शौकत, जाकिर इत्यादि का कहना है की टीवी में, अखबारों पर तीसरी लहर का खतरा सिर पर मंडराता दिखाया, बताया रहा है। हमारे क्षेत्र में हम लोगों को अभी कोरोना की पहली खुराक भी नहीं मिल पाई है। ऐसे में हमारी जान माल की सुरक्षा कैसे होगी? ग्रामीणों ने मांग की है कि भागूवाला में कैंप लगाकर ग्रामीणों को टीके लगवाए जाएं, जिससे कोविड-19 की तीसरी लहर से बचा जा सके।
वहीं प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजीत सिंह का कहना है कि अभी तक  वैक्सीन की कमी थी पहले मंडावली और नांगल सोती में वैक्सीनेशन कराया जा रहा है, बाद में भागूवाला क्षेत्र को कवर कर लेंगे।

कोरोना: तीसरी लहर की शुरुआत! 13 राज्यों में बजी खतरे की घंटी

सावधान! देश में कोरोना की तीसरी लहर की शुरुआत, 13 राज्यों में बजी खतरे की घंटी

नई दिल्ली। ब्रिटेन, रूस समेत कई देशों में टीकाकरण के बावजूद कोरोना के बढ़ते संक्रमण से भारत की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। फिलहाल भारत में करीब 68 फीसदी लोग सीरो पॉजिटिव पाए गए हैं। इसके बावजूद कोरोना संक्रमण के दैनिक औसत मामले एक महीने से 40 हजार पर स्थिर बने हुए हैं। विशेषज्ञ चिंता जता रहे हैं कि इनमें बढ़ोत्तरी हो सकती है।

आंकड़े स्थिर, तीसरी लहर की आहट- कोरोना की दूसरी लहर के बाद हुए सीरो सर्वे में करीब 68 फीसदी लोगों में एंटीबॉडी पाई गई है। इसमें टीका लगा चुके लोग भी शामिल हैं। इसके बावजूद देश के 13 राज्यों में कोरोना के सक्रिय रोगियों की संख्या में बढ़ोत्तरी का रुझान है। केरल, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड, ओडिशा के अलावा पूर्वोत्तर के तमाम राज्यों में कोरोना के दैनिक मामलों की दर ऊंची बनी हुई है। वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के निदेशक प्रोफेसर जुगल किशोर का कहना है कि बड़े पैमाने पर लोगों में एंटीबॉडी मिलने से यह स्पष्ट है कि कोरोना की तीसरी लहर पहले जैसी भयावह नहीं होगी। लेकिन जिस प्रकार तेजी से मामले घट रहे थे और वह 40 हजार पर स्थिर हो गए हैं, यह तीसरी लहर की आहट हो सकती है। कई देशों में ऐसा ही हुआ है। वह अब तक कई लहर का सामना कर चुके हैं। कई प्रदेशों में भी दो से अधिक लहर आ चुकी हैं।

लापरवाही पड़ेगी भारी- अभी देश में कोरोना की तीसरी लहर के आने के संकेत मिल रहे हैं। ऐसे में लोगों की लापरवाही इस लहर को भी दूसरी लहर की तरह ही खतरनाक बना सकती है। ज्‍यादा भीड़भाड़ कोरोना को और भी ज्‍यादा बढ़ा सकती है। अगर लोग कुछ दिन और कोरोना गाइडलाइन का पालन करें तो कोरोना की तीसरी लहर से बचा जा सकता है। सीरो सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक देश में 40 करोड़ लोग कोरोना संक्रमण से बचे हुए हैं और उन्‍होंने अभी तक टीका भी नहीं लगवाया है।

पीजीआई: अब मरीजों को मिलेगी सीटी स्कैन और एमआरआई की लंबी वेटिंग से राहत

लखनऊ (एकलव्य बाण समाचार)। उत्तर प्रदेश की राजधानी के पीजीआई में अब मरीजों को सीटी स्कैन और एमआरआई की लंबी वेटिंग से राहत मिल सकेगी। संस्थान में अब पीपीपी मॉडल पर एमआरआई और सीटी स्कैन की सुविधा शुरू होने जा रही है। साथ ही क्रिटिकल केयर में बेड और डॉक्टरों को बढ़ाने के लिए कई डीएम और पीडीसीसी कोर्स में सीटों का इजाफा किया गया है।
इससे डॉक्टरों की संख्या बढ़ेगी।

पीजीआई की गवर्निंग बॉडी मीटिंग में इन सभी फैसलों पर मुहर लगाई गई। मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी की अध्यक्षता में प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा आलोक कुमार, संस्थान के निदेशक डॉ. आर के धीमन समेत अन्य सदस्य इसमें शामिल रहे।

पीजीआई में जांच के लिए पीपीपी मॉडल लागू करने पर यहां के कर्मचारी विरोध कर रहे थे। हाल में संस्थान के निदेशक को इस संबंध में पत्र भी लिखा गया था। इसके बाद भी पीजीआई ने पीपीपी मॉडल पर मुहर लगा दी गई है। इसका कारण है कि पीजीआई में तीन सीटी स्कैन मशीन हैं। इनसे रोजाना 80 से 120 सीटी स्कैन होते हैं। वहीं, एमआरआई की एक मशीन है।

बताया गया है कि इससे एक दिन में 40 जांचें हो रही हैं, जबकि मरीज इससे कहीं ज्यादा आते हैं। इस कारण जांच के लिए लंबी वेटिंग चल रही है। कर्मचारी लंबे समय से मशीन बढ़ाने की मांग कर रहे थे। ऐसे में वेटिंग कम करने के लिए पीपीपी मॉडल का सहारा लिया जा रहा है। इसमें थर्ड पार्टी यहां मशीन लगाकर मरीजों की जांच करेगी। इससे मरीजों को काफी राहत मिलेगी। केजीएमयू में पहले से ही इस मॉडल पर जांच की जा रही है।

इन विभागों में बढ़ेंगे डॉक्टर
बैठक में कई विभागों में पाठ्यक्रमों की सीटों में बढ़ोतरी की गई है। इससे यहां रेजिडेंट डॉक्टर बढ़ेंगे। डिपार्टमेंट ऑफ क्लिनिकल इम्यूनॉलजी में डीएम की चार सीटें, पीडियाट्रिक में पीडीसीसी की एक सीट, पल्मोनरी मेडिसिन विभाग में 6 सीट, इन्डोक्राइन सर्जरी में तीन और नेफ्रॉलजी में तीन रेजिडेंट डॉक्टरों के पद बढ़ाने पर चर्चा हुई। साथ ही क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग में सीनियर रेजीडेन्ट के पदों में वृद्धि को मंजूरी मिली।

एकलव्य बाण समाचार

स्वास्थ्य विभाग में थोक तबादले, 17 को भेजा पूर्वांचल

स्वास्थ्य विभाग में थोक में तबादले। 17 बाबुओं को भेजा गैरजनपद। पूर्वांचल भेजने से रोष। संशोधन के जुगाड़ शुरू

बिजनौर (एकलव्य बाण समाचार)। शासन ने स्वास्थ्य विभाग में तैनात 17 बाबुओं के तबादले कर दिये हैं। आसपास के जनपदों के बजाय ज्यादातर पूर्वांचल में किए गए तबादलों से रोष व्याप्त हो गया है। इनमें से छह को तो दंपति नीति के तहत भी छूट नहीं मिली है।
शासन ने सीएमओ के अधीन तैनात 16 तथा जिला अस्पताल में तैनात एक लिपिक का तबादला गैरजनपद कर दिया है। इनमें भी एक को छोड़कर बाकी सब को पूर्वांचल भेजा गया है। इस कारण रोष व्याप्त हो गया है।

सीएमओ के अधीन तैनात नीरज कुमार का रायबरेली, राजेश कुमार एकाउंट का लखनऊ, राजेन्द्र कुमार का रायबरेली, सुनील सैनी का हरदोई, दीपक कुमार जलीलपुर का लखनऊ, स्टेनो मोहम्म्द अहमद का सीतापुर, अरुण कुमार का सुल्तानपुर, हितेश कुमार का सीतापुर, शालिनी का सीतापुर, राजेश कुमार डिस्पैच का सीतापुर, अमित कुमार का हरदोई, गजेन्द्र कुमार का सीतापुर, शुभम का हरदोई, दीपक कुमार हल्दौर का रायबरेली, निसार फात्मा का सहारनपुर, अनूप कुमार नहटौर का हरदोई तथा जिला अस्पताल में तैनात मोहम्मद साइम जफर का रायबरेली तबादला किया गया है।

दम्पति नीति के तहत आने वाले 6 भी लपेटे में-
इनमें शुभम, निसार फात्मा समेत 6 ऐसे भी बताए जाते हैं जो दम्पति नीति के तहत आते हैं और उनका तबादला नहीं किया जाना था। सीएमओ ने ऐसे लिपिकों के प्रत्यावेदन भेजे जाने की बात कही है। ये लोग प्रत्यावेदन में लग गए हैं तो कई ऐसे भी हैं जो संशोधित कराकर आसपास के जनपदों के तबादलों जुगाड़ भिड़ाने में जुट गए हैं।

एकलव्य बाण समाचार

UP में नई जनसंख्या नीति का एलान, बढ़ती आबादी विकास में बाधक: CM योगी

UP में CM योगी ने किया नई जनसंख्या नीति का ऐलान, बोले- बढ़ती आबादी विकास में बाधक

लखनऊ (एकलव्य बाण समाचार)। विश्व जनसंख्या दिवस के मौके पर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य के लिए नई जनसंख्या नीति का ऐलान कर दिया है। लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बढ़ती आबादी विकास में बाधक होती है। यूपी सीएम ने जानकारी दी कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए और भी प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने इसका सम्बन्ध हर नागरिक से होने की बात करते हुए कहा कि इसके लिए जागरूकता सबसे ज्यादा आवश्यक है।

समाज के हर तबके का ध्यान- मुख्यमंत्री ने कहा कि बढ़ती जनसंख्या गरीबी का कारण है। उन्होंने दो बच्चों के बीच गैप होने की भी वकालत की। इसके पीछे का कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि अगर दो बच्चों के बीच एक अच्छा अंतराल नहीं होगा तो उनके पोषण पर भी असर पड़ेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीबी और बढ़ती आबादी एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। उन्होंने विश्वास दिलाया कि जनसंख्या नीति को लागू करने में समाज के हर तबके का ध्यान रखा गया है।

चलाएंगे जागरूकता अभियान- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “जनसंख्या नीति का संबंध केवल जनसंख्या स्थिरीकरण के साथ ही नहीं है, बल्कि हर एक नागरिक के जीवन में खुशहाली और समृद्धि का रास्ता उसके द्वार तक पहुँचाना भी है। उत्तर प्रदेश में और प्रयास की जरूरत है। हम बढ़ती आबादी को लेकर लोगों को जागरूक करते रहेंगे। स्कूलों में और अन्य सार्वजनिक जगहों पर इसके बारे में लोगों को जागरूक किया जाएगा।”

विदित हो कि योगी आदित्यनाथ सरकार के द्वारा जारी की गई नई जनसंख्या नीति के तहत सरकार ने जन्मदर कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत सरकार गर्भ निरोधक उपायों की सुलभता को बढ़ाएगी और सुरक्षित गर्भपात की समुचित व्यवस्था देने का प्रयास भी करेगी।

उन्नत स्वास्थ्य सुविधाओं के माध्यम से नवजात जन्म दर, मृत्यु दर व मातृ मृत्यु दर को कम करने तथा नपुंसकता/बांझपन की समस्या के सुलभ समाधान उपलब्ध कराने का प्रयास भी होगा। वर्ष 2026 तक जन्मदर को प्रति हजार आबादी पर 2.1 तक तथा वर्ष 2030 तक 1.9 तक लाने का लक्ष्य रखा गया है।

बुजुर्गों की डिजिटल ट्रैकिंग- 11 से 19 वर्ष के किशोरों के पोषण, शिक्षा व स्वास्थ्य के बेहतर प्रबंधन के अलावा, बुजुगों की देखभाल के लिए व्यापक व्यवस्था भी की जाएगी। नई नीति में आबादी स्थिरीकरण के लिए स्कूलों में हेल्थ क्लब बनाये जाने का प्रस्ताव भी शामिल है। डिजिटल हेल्थ मिशन की भावनाओं के अनुरूप नवजातों, किशोरों व बुजुर्गों की डिजिटल ट्रैकिंग भी कराने की योजना है।

सांठगांठ से चल रहा है शकुंतला अस्पताल!

मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा शकुंतला अस्पताल के प्रबंधक से नियमानुसार अनापत्ति प्रपत्रों को मानकों के अनुरूप पूर्ण कराये बिना पहले पंजीकरण व प्रतिवर्ष किया जा रहा है नवीनीकरण! भ्रष्टाचार के चलते मरीजों के जीवन से किया जा रहा खिलवाड़!


मोदी नगर, गाजियाबाद (एकलव्य बाण समाचार)। मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा शकुंतला अस्पताल के प्रबंधक से नियमानुसार अनापत्ति प्रपत्रों को मानकों के अनुरूप पूर्ण कराये बिना मरीजों के जीवन से खिलवाड़ कर पहले पंजीकरण व प्रतिवर्ष नवीनीकरण किया जा रहा है। इससे अस्पताल में किसी भी घटना घटने की प्रबल संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। मरीज की जान माल भी सुरक्षित नहीं है। बहुत ही छोटी जगह में अस्पताल संचालित है, आवागमन का रास्ता बिलकुल भी मरीज के लिए सुरक्षा की दृष्टि से सुरक्षित नहीं है। अग्नि शमन उपकरणों की समुचित व्यवस्था नहीं है, अस्पताल की अपनी पार्किंग नहीं है, वाहनों को सड़क पर खड़ा करना पड़ता है। शकुंतला अस्पताल किसी भी प्रकार से मानकों के अनुरूप नहीं है बल्कि मानकों के विपरीत कार्य कर रहा है!

नाम न छापने की शर्त पर कई लोगों का कहना है कि ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से हटा देना चाहिए जो कि भ्रष्टाचार में लिप्त हो और उत्तर प्रदेश शासन के शासनादेशों का पालन नहीं करा सकता हो।
मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय के अधिकारियों व अस्पताल के प्रबंधक द्वारा शासनादेशों का पालन न करना अपराध की श्रेणी में आता है, जो कि एक गंभीर मामला है और भ्रष्टाचार से जुड़ा है। जनहित में स्वास्थ्य विभाग उत्तर प्रदेश शासन को इस ओर कदम उठा कर इनके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।

भारत सरकार की निःशुल्क टेलीमेडिसिन सेवा ‘ई – संजीवनी’ ने पूरे किए 70 लाख परामर्श

भारत सरकार की निःशुल्क टेलीमेडिसिन सेवा ‘ई – संजीवनी’ ने पूरे किए 70 लाख परामर्श। प्रधानमंत्री ने डिजिटल इंडिया पहल की छठी वर्षगांठ पर ‘ई-संजीवनी’ की सराहना की। पिछले दो सप्ताह में 50 हजार से अधिक दैनिक परामर्श के साथ इस राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा से पिछले 30 दिनों में लगभग 12.50 लाख (1.25 मिलियन) रोगियों को लाभ हुआ।

नई दिल्ली (एकलव्य बाण समाचार)। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा – ‘ई – संजीवनी’ ने 7 मिलियन (70 लाख) परामर्श पूरा करके एक और मील का पत्थर पार कर लिया है। स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े परामर्श की तलाश में मरीज इस नवीन डिजिटल माध्यम का उपयोग करके दैनिक आधार पर डॉक्टरों और विशेषज्ञों से परामर्श हासिल करते हैं। एक अन्य महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में, जून माह में इस सेवा ने लगभग 12.50 लाख रोगियों की मदद की, जोकि पिछले साल मार्च में इसके शुरू होने के बाद से सबसे अधिक है। वर्तमान में, यह राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा 31 राज्यों/ केन्द्र – शासित प्रदेशों में कार्यरत है।

ई – संजीवनीएबी–एचडब्ल्यूसी, जोकि डॉक्टर-से-डॉक्टर के बीच एक टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म है, को लगभग 21,000 स्वास्थ्य एवं कल्याण केन्द्रों और लगभग 30 राज्यों के जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में स्थित 1900 से अधिक हब में स्पोक्स के तौर पर लागू किया गया है। डॉक्टर-से-डॉक्टर के बीच के इस टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म ने 32 लाख से अधिक रोगियों की सेवा की है। रक्षा मंत्रालय ने भी ‘ई-संजीवनी’ ओपीडी पर एक राष्ट्रीय ओपीडी का आयोजन किया है, जहां रक्षा मंत्रालय द्वारा बुलाए गए 100 से अधिक अनुभवी डॉक्टर और विशेषज्ञ देशभर के मरीजों की सेवा करते हैं।

‘ई-संजीवनी’ ओपीडी- पिछले साल अप्रैल में, इस महामारी की वजह से राष्ट्रीय स्तर पर लगाए गए पहले लॉकडाउन के तुरंत बाद केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ‘ई-संजीवनी’ ओपीडी शुरू की। ‘ई-संजीवनी’ ओपीडी एक मरीज और डॉक्टर के बीच का एक टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म है, जो जनता को उनके घरों में ही स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करता है। ‘ई-संजीवनी’ ओपीडी पर 420 ऑनलाइन ओपीडी आयोजित की जाती है और यह प्लेटफॉर्म स्पेशलिटी और सुपर-स्पेशियलिटी ओपीडी का आयोजन करता है। साथ ही, इनमें से कई स्पेशियलिटी और सुपर-स्पेशियलिटी ओपीडी का प्रबंधन 5 राज्यों (हिमाचल प्रदेश, पंजाब, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड) में स्थित एम्स, लखनऊ में स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी आदि जैसे प्रमुख अस्पतालों द्वारा किया जा रहा है। पिछले दो सप्ताह से 50,000 से अधिक मरीज ई-संजीवनी सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं और लगभग 2000 डॉक्टर दैनिक आधार पर टेलीमेडिसिन के जरिए परामर्श देते हैं।

अत्याधुनिक राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा- केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय इस अत्याधुनिक राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा की पहुंच बढ़ाने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। पिछले महीने, केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय और मोहाली में सी-डैक के साथ मिलकर डिजिटल स्वास्थ्य विभाजन में दूसरी तरफ पड़े लोगों के लिए देशभर में 3.75 लाख कॉमन सर्विस सेंटरों के माध्यम से ई-संजीवनी सेवाओं का निःशुल्क लाभ उठाने का प्रावधान किया था। 1 जुलाई, 2021 को, डिजिटल इंडिया पहल की छठी वर्षगांठ के अवसर पर प्रधानमंत्री द्वारा ‘ई-संजीवनी’ की सराहना की गई। प्रधानमंत्री ने बिहार के पूर्वी चंपारण के एक लाभार्थी के साथ आभासी माध्यम से बातचीत की थी, जो अपनी बीमार दादी के लिए केजीएमसी, लखनऊ द्वारा संचालित जेरियाट्रिक्स और मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित ऑनलाइन ओपीडी के जरिए ई-संजीवनी की स्पेशियलिटी सेवाओं का लाभ उठा रहा है।

शहरी रोगियों के लिए भी उपयोगी- कई राज्यों में लोगों ने ई-संजीवनी के फायदों को तेजी से पहचाना है और इसने स्वास्थ्य सेवाओं की तलाश में इस डिजिटल तरीके को व्यापक रूप से तेजी से अपनाने की उत्साहजनक प्रवृत्ति को जन्म दिया है। इससे खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में विशिष्ट स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में व्यापक सुधार हुआ है। इसके अलावा, यह सेवा शहरी इलाके के रोगियों के लिए भी उपयोगी बन गई है, विशेष रूप से इस महामारी की दूसरी लहर के दौरान जिसने देश में स्वास्थ्य सेवाओं की वितरण प्रणाली पर भारी बोझ डाला है।

अस्पतालों पर बोझ को कम- बहुत ही कम समय में, भारत सरकार की इस राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा ने डिजिटल स्वास्थ्य के मामले में शहरी और ग्रामीण भारत के बीच मौजूद अंतर को पाटकर भारतीय स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को सहयोग देना शुरू कर दिया है। यह सेवा माध्यमिक और तृतीयक स्तर के अस्पतालों पर बोझ को कम करते हुए जमीनी स्तर पर डॉक्टरों और विशेषज्ञों की कमी को भी दूर कर रही है। राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन के अनुरूप, ‘ई-संजीवनी’ देश में डिजिटल स्वास्थ्य के इकोसिस्टम को भी मजबूत कर रहा है।

ई-संजीवनी को अपनाने (परामर्श की संख्या) के मामले में 10 अग्रणी राज्य – आंध्र प्रदेश (16,32,377), तमिलनाडु (12,66,667), कर्नाटक (12,19,029), उत्तर प्रदेश (10,33,644), गुजरात (3,03,426), मध्यप्रदेश (2,82,012), महाराष्ट्र (2,25,138), बिहार (2,23,197), केरल (1,99,339) और उत्तराखंड (1,66,827) – हैं।

ई-संजीवनी’ https://esanjeevaniopd.in/  के अलावा एंडरॉयड पर भी उपलब्ध है।

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने किया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण

लखनऊ। प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर निरीक्षण करने पहुंचे और खंड विकास परिसर में वृक्षारोपण किया। साथ में विधायक जय देवी कौशल व जिला अध्यक्ष श्रीकृष्ण लोधी मौजूद रहे।

रविवार को शाम करीब 4 बजे वित्त मंत्री सुरेश खन्ना का काफिला खंड विकास कार्यालय पहुँचा। यहां पर मंत्री का स्वागत सीडीओ अश्वनी पांडेय और बीडीओ संस्कृता मिश्रा ने पुष्पगुच्छ देकर किया।

उन्होंने ब्लॉक परिसर में कदम पेड़ का वृक्षारोपण किया। साथ ही ब्लॉक के साफ सुथरे परिसर को देखकर बीडीओ संस्कृता मिश्रा की तारीफ की।

इसके बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण करने पहुंचे। निरीक्षण के दौरान अस्पताल जननी सुरक्षा वार्ड में जाकर एडमिट महिलाओं के परिजनों को फल वितरित करने के साथ ही सीएससी अधीक्षक को साफ सफाई और कोविड-19 के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए कहा। उन्होंने वैक्सीन लगाए जाने वाले कक्ष, लेबर रूम, जननी सुरक्षा वार्ड को भी देखा।

विकासखंड सभागार में मलिहाबाद मण्डल की टीम से संवाद कर कोरोना महामारी के प्रति लोगों को जागरूक करने व सरकार की योजनाओं को लोगों तक पहुँचाने की बात कही। इस दौरान जिला महामंत्री विजय मौर्य ,मंडल अध्यक्ष जितेंद्र अवस्थी,जय गोविंद अवस्थी,आशीष द्विवेदी समेत कई कार्यकर्ता मौजूद रहे ।

रिश्वत मांगते एएनएम की वीडियो वायरल, सस्पेंड

सरकारी अस्पताल में डिलीवरी करने के नाम पर  एएनएम मांग रही थी रिश्वत। वीडियो वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप। डीएम के आदेश पर निलंबित।

रिश्वत मांगने की आरोपी एएनएम सीमा

बिजनौर। अफजलगढ़ क्षेत्र के कादराबाद उप स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात एएनएम सीमा की रिश्वत की डिमांड करते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। आसपास के ग्रामीणों का आरोप है कि उक्त एएनएम काफी समय से डिलीवरी के लिए 7 से 8 हजार रुपए वसूलती रही है।

थाना अफजलगढ़ क्षेत्र के कादराबाद उप स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात एएनएम सीमा का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। इसमें वह डिलवरी के लिए 7 से 8 हजार रुपए की मांग कर रही है। पीड़ित मरीज व तीमारदारों के पूछने पर एनएम कह रही है कि अगर ज्यादा सुविधाएं चाहिए तो पैसे भी ज्यादा देने होंगे। सरकार स्वास्थ्य केंद्र में इतनी सुविधाएं नहीं देती। साथ ही मरीज को यह कह कर आतंकित करती हैं कि यदि किसी और हॉस्पिटल में ऑपरेशन कराने पर 60 हजार रुपए का खर्च आएगा।

डॉ. एसके निगम एडिशनल सीएमओ प्रशासन

डॉ. एसके निगम एडिशनल सीएमओ प्रशासन ने बताया कि रिश्वत लेने की बात करते एएनएम सीमा की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।डीएम के आदेश पर एएनएम को निलंबित कर दिया गया है और विधि कार्रवाई की जा रही है।