नगर पंचायत मंडावर में करोड़ों का घोटाला किया “शान से”…!

नगर पंचायत मंडावर में शान से हुआ करोड़ों का घोटाला!

तत्कालीन डीएम, सीडीओ, चार ईओ और तीन ठेकेदारों पर गंभीर आरोप

सपा से चेयरमैन आशिफ उर्फ “शान” के कार्यकाल सन 2012 से 17 के बीच का मामला

अंत्येष्टि स्थल, कान्हा पशु आश्रय स्थल और प्रकाश पब्लिक स्कूल से मंडी समिति तक इंटर लॉकिंग की जगह पक्की सड़क निर्माण में घपले की हुई शिकायत

अफसरशाही में दब कर रह गई शिकायतकर्ता की आवाज़

बिजनौर। नगर पंचायत मण्डावर के द्वारा कराए गए कार्यों में करोड़ों रुपए के घोटाले का मामला प्रकाश में आया है। यह मामला समाजवादी पार्टी के नेता और सभासद की पत्नी के कार्यकाल सन 2012 से 17 तक के बीच का बताया गया है। खास बात यह है कि इसमें तत्कालीन जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, चार अधिशासी अधिकारियों और तीन ठेकेदारों की शिकायत मुख्यमंत्री से करते हुए सीबीआई जांच की मांग शिकायतकर्ता ने की है। मामला अंत्येष्टि स्थल, कान्हा पशु आश्रय स्थल के निर्माण और प्रकाश पब्लिक स्कूल से मंडी समिति तक इंटर लॉकिंग की जगह पक्की सड़क निर्माण से जुड़ा हुआ है। इन सभी में घोर अनियमितता कर शासन को कई करोड़ रुपए के राजस्व की क्षति पहुंचाई गई।

जानकारी के अनुसार एक शिकायतकर्ता द्वारा मुख्यमंत्री को दिनांक 02 फरवरी 2019 एवं भाजपा सांसद भारतेन्द्र सिंह को अवगत कराया गया कि समाजवादी पार्टी के नेता और सभासद की पत्नी के कार्यकाल सन 2012 से 17 तक के बीच घोटालों और अनियमितताओं की जांच को दबाया जा रहा है! शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर आनलाईन शिकायत कर कहा कि अंत्येष्टि स्थल का अधूरा निर्माण पीडब्लूडीए के द्वारा एक करोड़ 22 लाख रुपए में कराया गया। रोड पर साईड पटरी के नाम पर अवैध रूप से 5 करोड़ 87 लाख 97 हजार रुपए का कार्य तीन ठेकेदारों संजीव मदान निवासी सिविल लाइंस बिजनौर, शौकीन शाह निवासी ग्राम गजरौला शिव और अमित कुमार निवासी मोहल्ला जाटान बिजनौर ने कराया। यही नहीं कान्हा पशु आश्रय स्थल में भी उक्त ठेकेदारों ने शाह विलायत मण्डावर मोहम्मदपुर देवमल रोड बनाया। इसमें भी लाख रुपए का घोटाला किया गया। गंभीर आरोप ये है कि इस पूरे प्रकरण में समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल में रहे डीएम जगत राज तथा मुख्य विकास अधिकारी इन्द्रमणि त्रिपाठी को व्यक्तिगत लाभ पहुंचाया गया। शिकायतकर्ता ने मामले की जांच सीबीआई से करने का अनुरोध किया। यह भी अवगत कराया कि अधिशासी अधिकारी गार्गी त्यागी ने भुगतान राशि में करोड़ों रुपए के जीएसटी, इनकम टैक्स की कोई जानकारी नहीं दी, जिसमें ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया गया है। इन सभी ठेकेदारों को जीएसटी, इनकम टैक्स काटकर कितना भुगतान किया गया इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई। यह सब कुछ शासन में बैठे अधिकारियों के कारण हुआ है, जिनको मोटी रिश्वत देकर शिकायत दबा ली जाती है।

आरोपों के क्रम में बताया कि नगर पंचायत मण्डावर में रहे पूर्व अधिशासी अधिकारी बिजेन्द्र पाल सिंह, सीमा रानी वर्मा, संदीप कुमार एवं मौजूदा ईओ गार्गी त्यागी, जो कि कोतवाली ब्लॉक में कार्यरत हैं। ईओ ने करोड़ों रुपए के गबन की शिकायत को छह माह तक दबाए रखा तथा शासन को गुमराह किया। डेढ़ वर्ष बीतने के बावजूद शासन को सही सूचना नहीं दी। ईओ मण्डावर गार्गी त्यागी ने फर्जी बोर्ड प्रस्ताव कर दिनांक 19 मार्च 2019 को नया सवेरा योजना में एक करोड़ 10 लाख 51 हजार 855 रुपए निकाल दिये, जिससे रिश्वत देने तथा नेताओं द्वारा जांच को दबाने में कामयाब हो गई। सूचना अधिकार अधिनियम द्वारा मांगी गई जानकारी में सम्बन्धित पत्रावली की कोई जानकारी नहीं दी गई। यह भी आरोप लगाया कि इसके अलावा भी जो ठेकेदार सपा सरकार में रहे, वो ही आज तक कार्य कर रहे हैं तथा चेयरमैन को लाभ पहुचाते हैं। नगर पंचायत मण्डावर में जल निगम द्वारा पूर्व में किए गए बोरिंग को भी मेन लाईन से नहीं जोड़ा गया, इस कारण पानी की समस्या आती रहती है। इस कार्य में भी लाखों रुपए का गबन किया गया। किसी भी शिकायत का कोई समाधान नहीं किया गया है। तत्कालीन जिलाधिकारी रमाकान्त पाण्डे ने इसी शिकायत से सम्बन्धित पत्रांक सं0-3092 विषेश सचिव अनुभाग-1 लखनऊ दिनांक 26 फरवरी 2020 को भेज दिया था। इसकी जांच सीबीआई से कराई जानी अति आवश्यक है।

कहानी अभी बाकी है…

तहसीलकर्मियों ने दलित की जमीन कर दी दूसरों के नाम!

बिजनौर। सरकारी कर्मचारियों के खेल भी निराले हैं। कभी भी, कहीं भी और कुछ भी कर दें, पता नहीं। बाप बड़ा न भइया, सबसे बड़ा रुपैया के सिद्धांत पर ही होता है काम। ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया है। तहसील बिजनौर के  तीन लेखपालों व एक राजस्व निरीक्षक ने भारी भरकम रकम डकार कर करोड़ों की जमीन पर अन्य लोगों का कब्जा करा दिया।

पीड़िता ऊषा के अनुसार उसके दादा छज्जू सिंह पुत्र ज्ञाना निवासी ग्राम फिरोजपुर मान्डू परगना दारानगर तहसील व जिला बिजनौर, अनुसूचित जाति से चमार थे। उनके एकमात्र पुत्र तेजा सिंह उर्फ तेजपाल थे। तेजा सिंह ऊषा के पिता थे। ऊषा के दादा द्वारा छोड़ी गई आराजी काश्त उसकी माता व भाई के नाम बतौर वारिस आनी चाहिए थी। आरोप है कि विरेन्द्र पाल लेखपाल, पवन लेखपाल, सहजराम लेखपाल व प्रमोद कुमार सैनी राजस्व निरीक्षक ने कागजात में हेराफेरी करके फर्जी तरीके से पीड़िता की पुश्तैनी जमीन अन्य व्यक्तियों के नाम कर दी।

कागजात में हेराफेरी कर जमीन की दूसरों के नाम- महिला ने आरोप लगाया कि उक्त सरकारी कर्मचारियों ने कागजात में हेराफेरी कर उसकी दादिलाही जमीन प्रमोद, आमोद पुत्रगण जसबन्त सिंह निवासी मौ0 नई बस्ती-14 निकट करबला थाना को0 शहर जिला बिजनौर, चेतन पुत्र प्रीतम निवासी ग्राम लखपत नगर थाना कोतवाली शहर जिला बिजनौर, नौबहार, महावीर, सोहन, मोहन पुत्रगण मूला निवासी ग्राम मुन्डूपुर थाना-को०शहर जिला बिजनौर, बलजोर पुत्र गिरवर निवासी ग्राम लक्खीवाला थाना-को०शहर जिला बिजनौर, बलवीर पुत्र गरीबा निवासी ग्राम लक्खीवाला थाना को०शहर जिला बिजनौर, राजीव, संजीव पुत्रगण मुनेशवर, नीरज पुत्र तपेशवर नि०गण ग्राम  पृथ्वीपुर थाना को०शहर जिला बिजनौर के नाम कर दी। पीड़िता ने बताया कि उसके दादा व पिता ने अपनी आराजी काश्त का बैनामा कभी भी किसी के नाम नहीं किया।

आखिर क्या है मामला? छज्जू सिंह पुत्र ज्ञाना के खसरा सं0- 72/1, 173/1, 50/6, 52/1, 53, 54/1, 95/1, 109/1 में 9 बीघा पक्की यानी 27 बीघा जमीन थी। मौजा दारानगर बी0ए0 परगना दारानगर तहसील व जिला बिजनौर में खसरा नं0- 336, 337 में आम का बाग भी उनके हिस्से में ही था। छज्जू सिंह व उनके पुत्र तेजा सिंह उर्फ तेजपाल की मृत्यु के बाद उक्त जमीन उनके पुत्रों के नाम बतौर वारिसान दर्ज होनी थी। आरोप है कि सरकारी कर्मचारियों व आरोपित ग्रामीणों ने आपस में हमसाज होकर  कागजात में हेराफेरी करके छज्जू पुत्र ज्ञाना नाम का फायदा उठाकर महिला की पुश्तैनी जमीन छज्जू सैनी पुत्र गरीबा निवासी ग्राम लक्खीवाला के नाम करवा दी। पीड़िता व परिजनों को इस बात की भनक तक न हुई कि आरोपियों ने माल कागजात में हेराफेरी करके उपरोक्त व्यक्तियों के नाम दर्ज कर दिये हैं। जब ऊषा ने अपनी आराजी काश्त की नकल ली, तब मामला सामने आया।

काम के बदले मांगी रिश्वत- पीड़िता ने बताया कि इस बात को लेकर वह राजस्व निरीक्षक प्रमोद कुमार से मिली तो उसने दादा व पिता द्वारा छोड़ी गई जमीन उसकी मां व भाइयों के नाम करने की एवज में 50 हजार रुपए मांगे। इस बात की शिकायत उच्च अधिकारियों से की तो उक्त सभी उससे रंजिश रखने लगे। यह भी आरोप है कि अधिकारियों ने भी कोई सही कार्यवाही आज तक नहीं की।

घर में घुसकर पीटा, तोड़फोड़- 06 जुलाई 2020 को सुबह 7 बजे प्रमोद, आमोद, चेतन, महावीर, सोहन, मोहन व विरेन्द्र पाल, सहजराम, बलजोरा, प्रमोद कुमार सैनी, संजीव, नीरज और राजीव, बलवीर ने ऊषा की उसके घर में घुसकर जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए जमकर पिटाई की। इस दौरान हमलावर उच्च अधिकारियों से शिकायत करने पर उसके भाइयों को जान से मारने की धमकी देते रहे। उन्होंने उसके घर के सामान को तोड़फोड़ कर तहसनहस कर दिया। शोर सुनकर पहुंचे नरेश, निधि व बहुत से लोगों ने उस को बचाया।

पुलिस अधीक्षक को सौंपा कोर्ट का आदेश: पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक दिनेश सिंह को प्रार्थना पत्र देकर अवगत कराया कि उसने अपनी रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए उपरोक्त मुल्जिमान के विरूद्ध थाना कोतवाली शहर बिजनौर को एक प्रार्थना पत्र दिया था, लेकिन उस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक बिजनौर को भी प्रार्थना पत्र दिया लेकिन उस भी कोई कार्यवाही नहीं हुई। इसके बाद न्यायालय में एडीजे कोर्ट नं- 2 बिजनौर परिवाद सं.- 36/20 उषा बनाम प्रमोद आदि दायर किया था। इस पर न्यायालय ने दिनांक 05-04-2022 को उपरोक्त प्रमोद, आमोद, चेतन, नौबहार, महावीर, सोहन, मोहन, बलजोरा, बलवीर, राजीव, संजीव व नीरज को धारा-323, 504, 506 आई.पी.सी. व 3/1 द,ध, एस०सी०/एस०टी० एक्ट में तलब किया था। वहीं विरेन्द्र पाल लेखपाल, पवन लेखपाल, सहजराम लेखपाल व प्रमोद कुमार सैनी राजस्व निरीक्षक को यह कहते हुए तलब नहीं किया कि धारा-197 सीआरपीसी के अन्तर्गत लोक सेवक के विरूद्ध राज्य सरकार से पूर्व में अनुमति प्राप्त किये जाने के पश्चात ही अभियोग लाया जा सकता है। पीड़िता ने उपरोक्त आदेश के विरूद्ध उच्च न्यायालय में उपरोक्त मुल्जिमान को अभियुक्त बनाने के लिए याचिका अन्तर्गत धारा-482 याचिका सं0-22288/2022 उषा बनाम राज्य सरकार 16 आदि दायर की थी। इस पर उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने दिनांक 28-07-2022 को अपनी रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए पुलिस अधीक्षक बिजनौर के समक्ष प्रार्थना पत्र देने हेतु निर्देशित किया है। इसके अलावा पुलिस अधीक्षक को भी प्रार्थिनी के प्रार्थना पत्र पर अभियोग पंजीकृत कराने हेतु आदेशित किया गया है।

एसपी ने दिए जांच के आदेश: पुलिस अधीक्षक दिनेश सिंह ने सीओ सिटी को पीड़िता ऊषा के प्रार्थना पत्र पर जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने को निर्देशित किया है।

आरोपियों में खलबली: महिला के प्रार्थना पत्र तथा कोर्ट के आदेश की भनक लगते ही आरोपियों में खलबली मच गई है। अब वे जोड़तोड़ की कोशिश में जुट गए हैं। एक तहसील कर्मी प्रमोद कुमार सैनी ने बताया कि बैनामा वर्ष 1960 में हो चुके थे, तब से दो चकबंदी भी निकल चुकी हैं। किसी के भी द्वारा इस मामले में कोई यथोचित पैरवी नहीं की गई।

मुफ्त राशन लेने वाले अपात्रों से वसूली करेगी सरकार

आया राशन कार्ड का नया न‍ियम, अपात्र तुरंत करें सरेंडर वरना सरकार करेगी वसूली

Ration Card New Rule : राशन कार्ड का आया नया न‍ियम, तुरंत करें सरेंडर वरना सरकार करेगी वसूली

लॉकडाउन के दौरान स्वघोषित आय और आधार कार्ड के आधार पर ऑनलाइन राशन कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी जिसकी आड़ में कुछ संपन्न लोगों ने भी इसके तहत राशन कार्ड बना लिए थे। अब सरकार इस पर कार्रवाई कर वसूली की योजना बना रही है। साथ ही राशन कार्ड निरस्त करने की भी योजना है।

नई दिल्ली। (एजेंसी)। कोव‍िड-19 महामारी के दौरान शुरू की गई मुफ्त राशन योजना का लाभ कई अपात्र पर‍िवार भी उठा रहे हैं। ऐसी शिकायतें मिलने के बाद सरकार की तरफ से ऐसे पर‍िवारों से राशन कार्ड को सरेंडर करने की अपील की गई है।

सरकार की तरफ से कुछ शर्तों के तहत राशन कार्ड सरेंडर करने का न‍ियम बनाया गया है। इन न‍ियमों की अनदेखी भारी पड़ सकती है और आपसे वसूली हो सकती है। इतना ही नहीं आपके ख‍िलाफ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।

पात्र कार्ड धारकों को नहीं म‍िल पा रहा राशन

दरअसल, कोरोना महामारी के दौरान सरकार ने गरीब परिवारों को मुफ्त राशन देना शुरू क‍िया था। सरकार की तरफ से शुरू की गई यह व्‍यवस्‍था गरीब पर‍िवारों के ल‍िए अभी तक लागू है। इस बीच सरकार की जानकारी में आया है क‍ि कई राशन कार्ड धारक, इसके योग्‍य ही नहीं हैं और वे फ्री राशन का लाभ उठा रहे हैं। वहीं योजना के पात्र कई कार्ड धारकों को इसका फायदा नहीं म‍िल पा रहा है।

जांच के बाद होगी कानूनी कार्रवाई

अब अध‍िकार‍ियों के माध्‍यम से अपात्र लोगों से तुरंत राशन कार्ड सरेंडर करने के ल‍िए कहा जा रहा है। अगर कोई अपात्र व्‍यक्‍त‍ि राशन कार्ड सरेंडर नहीं करता है तो जांच के बाद उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

होगी वसूली

यद‍ि राशन कार्ड को सरेंडर नहीं किया जाता है तो ऐसे लोगों का कार्ड जांच के बाद रद्द कर द‍िया जाएगा। साथ ही उस परिवार के ख‍िलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। इतना ही नहीं जब से वह राशन ले रहा है, तब से राशन की वसूली भी की जाएगी।

सरकारी राशन के ल‍िए अपात्र लोग

मोटरकार, ट्रैक्टर, एसी, हार्वेस्टर, पांच केवी या अधिक क्षमता का जनरेटर, 100 वर्ग मीटर का प्लाट या मकान, पांच एकड़ से अधिक जमीन, एक से अधिक शस्त्र लाइसेंस, आयकरदाता, ग्रामीण क्षेत्र में परिवार की आय 2 लाख प्रतिवर्ष और शहरी क्षेत्र में 3 लाख रुपए प्रतिवर्ष वाले परिवार योजना के लिए अपात्र हैं। ऐसे लोगों को अपना राशन कार्ड तहसील और डीएसओ कार्यालय में सरेंडर करना होगा।

लोगों से अपील

कई राज्‍यों में पात्र लोगों का राशन कार्ड नहीं बन पा रहा है। ऐसे में सरकार की तरफ से लोगों से अपील की गई है कि अपात्र लोग राशन कार्ड को सरेंडर कर दें, ताकि गरीब परिवारों का कार्ड बनाया जा सके। राशन कार्ड सरेंडर नहीं करने पर ऐसे लोगों के ख‍िलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

आपको मिला है KBC की ओर से ₹25 लाख जीतने का मैसेज?

…हो जाएं सावधान, नहीं तो खाली हो जाएगा आपका अकाउंट

व्हाट्सएप (WhatsApp) पर कई दिनों से KBC के नाम से एक मैसेज तेजी से फैल रहा है। इसमें दावा किया जा रहा है कि आपके व्हाट्सएप नंबर ने 25 लाख रुपये का इनाम जीता है। इस इनाम को पाने के लिए आपको मैसेज में दिए गए लिंक पर क्लिक करना होगा।

नई दिल्ली (एजेंसी)। इन दिनों व्हाट्सएप (WhatsApp) पर लोकप्रिय क्विज-शो कौन बनेगा करोड़पति (KBC) का एक मैसेज तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें 25 लाख रुपये इनाम देने का दावा किया गया है। इस मैसेज में कहा जा रहा है कि आपके व्हाट्सएप नंबर को केबीसी सिम कार्ड लकी ड्रा कॉम्पिटिशन 2021 के तहत चुना गया है। साथ ही इसमें मैसेज क्लेम करने के लिए एक लिंक पर क्लिक करने के लिए भी कहा गया है। बता दें इससे पहले भी एक मैसेज वायरल हुआ था, जिसको भारत सरकार ने फर्जी घोषित किया था।

ये msz हो रहा है वायरल- ऑनलाइन है और अपनी केबीसी पुरस्कार राशि की जानकारी प्राप्त करें! आपका लॉटरी नंबर 0099 आपका केबीसी फाइल नंबर: BT12 प्रिय विजेता कृपया केवल व्हाट्सएप पर कॉल करें! अब अपने व्हाट्सएप नंबर से केबीसी ऑफिस में व्हाट्सएप कॉल करें! https://api.whatsapp.com/send?phone=917011789860 धन्यवाद”

दिल्ली पुलिस की साइबर सेल के मुताबिक, इस तरह की ऑनलाइन धोखाधड़ी में साइबर ठग अनजान नंबर से पीड़ितों को व्हाट्सएप मैसेज भेजते हैं (उनमें से ज्यादातर +92, पाकिस्तान के आईएसडी कोड से शुरू होते हैं) यह दावा करते हुए कि उनके मोबाइल नंबर ने 25 लाख रुपये की लॉटरी जीती है, जिसे कौन बनेगा करोड़पति और रिलायंस जियो द्वारा आयोजित किया गया है। साथ ही पीडितों को मैसेज दिए गए लिंक पर क्लिक करने के लिए कहा जाता है।

जब पीड़ित जीती हुई राशि पाने के लिए उल्लिखित नंबर पर कॉन्टैक्ट करता है, तो साइबर ठग उसे बताता है कि उन्हें पहले लॉटरी टैक्स के साथ-साथ जीएसटी आदि के लिए एक निश्चित राशिप पहले जमा करानी होगी। एक बार जब पीड़ित उस पैसे को जमा कर देता है, तो वे किसी न किसी बहाने से ज्यादा की मांग करने लगते हैं। जालसाज केवल व्हाट्सएप के माध्यम से बात करने पर जोर देते हैं।

कैरी बैग का पैसा वसूला तो देना पड़ सकता है जुर्माना

नई दिल्ली (एजेंसी)। देश में पॉलिथीन के उपयोग पर रोक लगने के बाद से ही उपभोक्ताओं से कैरी बैग के नाम पर अनावश्यक राशि की वसूली शुरू हो गई है। दुकानदार या फिर शॉपिंग मॉल में बिना ग्राहक को बताये उनके बिल में कैरी बैग के पैसे डालकर उनसे एक्स्ट्रा चार्ज किया जाता है। ऐसे में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कैरी बैग की राशि बिना बताए बिल में जोड़ देने को अनफेयर ट्रेड प्रेक्टिस माना है। आयोग इसे लेकर अब सख्त रुख आपने रही है। आयोग का मानना है कि उपभोक्ताओं के खरीद से विक्रेता या उत्पादक लाभ कमाते हैं इसलिए उनका दायित्व बनता है कि उपभोक्ताओं को सुविधा का ख्याल रखें। ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिसमें कैरी बैग के बदले में चार्ज वसूलने पर जुर्माना लगाया गया है। उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कैरी बैग का शुल्क लेने के लिए मुआवजे के तौर पर शिकायतकर्ता को मुआवजा भुगतान करने का आदेश दिया है। इस प्रैक्टिस को तुरंत प्रभाव से बंद करने को भी कहा जा रहा है।

कैरी बैग का चार्ज नहीं ले सकते दुकानदार-
पिछले दिनों ही केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने प्लास्टिक के कचरे को कम करने और इस पर नियंत्रण करने के लिए प्लास्टिक निर्माता या उत्पादकों, प्लास्टिक पैकेजिंग का कचरा पैदा करने वाले ब्रांड्स की जवाबदेही को बढ़ाने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं। उत्पादकों की जिम्मेदारी को बढ़ाने वाले इन दिशा-निर्देश को सरकार ने तत्काल प्रभाव से लागू करने को कहा है। इसलिए आप अगर शॉपिंग करने जाते हैं तो कैरी बैग को लेकर पहले से ही सूचना ले लें। बिल भुगतान करते समय जांच जरूर लें कि कैरी बैग का तो चार्ज नहीं जोड़ा गया है। इसके साथ ही जीएसटी एवं अन्य टैक्स का भी जांच करें, क्योंकि एमआरपी के बाद किसी भी प्रकार का टैक्स नहीं लगाया जा सकता है। बता दें कि नए कंज्यूमर प्रोटक्शन एक्ट-2019 के मुताबिक रिटेलर अपनी कंपनी के लोगो का उपयोग किए बिना प्लास्टिक कैरी बैग के लिए शुल्क ले सकता है। मतलब रिटेलर पैसे ले कर सादा कैरी बैग बेच तो सकता है, लेकिन अगर कैरी बैग में कंपनी का लोगो बेचा जाता है तो उसकी मुफ्त में आपूर्ति की जानी चाहिए।

चारा घोटाले में लालू दोषी करार, 21 फरवरी को होगा सजा का एलान

update big breaking : चारा घोटाले में लालू दोषी करार, सजा का एलान 21 फरवरी को

रांची (एजेंसी)। चारा घोटाले केस में CBI कोर्ट ने बिहार के पूर्व सीएम और राष्‍ट्रीय जनता दल के अध्‍यक्ष लालू प्रसाद यादव को दोषी करार दिया है। डोरंडा कोषागार केस में कोर्ट का फैसला आया है। सजा का एलान 21 फरवरी को किया जाएगा।

डोरंडा कोषागार से अवैध निकासी का चारा घोटाले से जुड़ा पांचवा मामला है। इस मामले को सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सबसे अधिक 139.5 करोड़ रुपये की यहां से निकासी हुई थी। इससे पहले चाईबासा के दो, देवघर और दुमका कोषागार से जुड़े एक-एक मामले पर अदालत सजा सुना चुकी है। लालू प्रसाद इन मामलों में सजायाफ्ता हैं। फिलहाल जमानत पर हैं।

डोरंडा कोषगार मामले में सीबीआई कोर्ट ने लालू प्रसाद समेत 75 आरोपी को दोषी करार दिया है। मामले में 99 आरोपियों में से 24 को बरी किया गया। दोषियों को 18 फरवरी को सजा सुनाई जाएगी।

वित्तीय आपराधिक मामलों से निपटने को यूपी में तीन विशेष अदालतें

लखनऊ। वित्तीय मामलों से जुड़े आपराधिक मुकदमों की सुनवाई के लिए यूपी में तीन विशेष अदालत बनाई जाएंगी। इससे जनता से वित्तीय धोखाधड़ी करने वालों पर लगाम लगेगी और पीड़ितों को जल्द न्याय मिल सकेगा। इसके जरिये साइबर क्राइम के जरिये धन उड़ा ले जाने, बिल्डरों द्वारा रकम हड़प लेने और फर्जी वित्तीय संस्थाओं पर लग रोक लग सकेगी। फिलहाल ये अदालतें लखनऊ, नोएडा, गोरखपुर में स्थापित की जाएंगी।

शीर्ष सूत्रों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियों में शामिल अपराधियों को जल्द सजा दिलाई जा सकेगी। इसके जरिए अपराधियों को अधिकतम दस साल की सजा या दस लाख रुपए का जुर्माना या दोनों सजा मिल सकेगी। इसका मकसद साइबर क्राइम के जरिए ठगी करने और गड़बड़ी करने वाले बिल्डरों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करना है। इस दायरे में आवंटियों से धोखाधड़ी करने वाले बिल्डर से जुड़े मामले भी इन अदालतों में आएंगे।

सूत्रों के मुताबिक अभी हर माह औसतन 100 शिकायतें बिल्डरों से जुड़ी आती हैं। यूपी में कार्यरत बहुराज्यीय सहकारी समितियों के खिलाफ आने वाली शिकायतों पर अब तेजी से कार्रवाई होगी। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ईओडब्लू और यूपी पुलिस के बीच अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की जाएगी।

धोखाधड़ी रोकने के सख्त निर्देश

संस्थागत वित्त विभाग के महानिदेशक शिव कुमार यादव के अनुसार वित्तीय धोखाधड़ी रोकने के लिए मुख्यमंत्री ने सख्त निर्देश दिए हैं। अब जनता के बीच जागरुकता अभियान  चलाया जाएगा। अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम 2019 के तहत बैनिंग एक्ट ग्रिवांस पोर्टल तैयार किया जाएगा। इसका शुभारंभ मुख्यमंत्री करेंगे। इसके जरिए कोई धोखाधड़ी का शिकार व्यक्ति इस पर शिकायत दर्ज कर सकता है। बैनिंग एक्ट के तहत हर जिले में विशेष अदालतों का गठन होगा। इसके लिए उच्च न्यायालय ने मंजूरी दे दी है।  

फर्जी कागजों पर चल रही राशन की दुकान

बिजनौर। फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्र के आधार पर एक व्यक्ति राशन डीलर बना बैठा है। तमाम अधिकारियों से हुई शिकायत के बाद जांच हुए भी पूरे ढ़ाई साल बीत चुके हैं। इसे राशन डीलर को विभागीय अधिकारियों कर्मचारियों की सरपरस्ती हासिल होना ही माना जाएगा कि जांच में पोल खुलने के बावजूद उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।

जिलाधिकारी को लिखित शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया था कि ग्राम पाडली मांडू पोस्ट बसेडा खुर्द तहसील धामपुर जिला बिजनौर निवासी मौ० असलम पांचवी पास की फर्जी अंक तालिका के आधार पर राशन कोटा संचालित कर रहा है। इस बात की शिकायत आपूर्ति इंस्पेक्टर, एसडीएम के अलावा तहसील दिवस व जिलाधिकारी से भी की गई। इसके उपरान्त फरवरी माह 2020 को यथावत इसकी जांच जिलाधिकारी कार्यालय से हुई। जांच में यह प्रमाणित हुआ कि मो. असलम के शैक्षिक प्रमाणपत्र फर्जी हैं। आरोप है कि अभी तक भी राशन डीलर के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं हो सकी। राशन डीलर अपनी मनमानी कर रहा है और आपूर्ति विभाग इस बात से अंजान बना बैठा है।

मोबाइल एप से SBI ग्राहकों को ₹70 लाख की चपत, अलर्ट जारी

कानपुर (एजेंसी)। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के ग्राहकों को चार मोबाइल एप के जरिए ₹70 लाख का चूना लगाया जा चुका है। पिछले चार महीने में कुल 150 ग्राहक इनके शिकार हुए। मामले की गंभीरता को देखते हुए SBI ने अपने ग्राहकों को अलर्ट किया है कि इन चार एप से बचकर रहें।
जालसाज बातों में फंसाकर एप डाउनलोड करा लेते हैं और खाता साफ कर देते हैं। बैंक ने अपने खाताधारकों से कहा है कि एनीडेस्क, क्विक सपोर्ट, टीमव्यूअर और मिंगलव्यू एप को भूलकर भी अपने मोबाइल पर इस्टॉल न करें, वरना खाता खाली हो जाएगा। 

देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई ने अपने खाताधारकों को यूनीफाइड पेमेंट सिस्टम को लेकर भी सतर्क करते हुए कहा है कि किसी भी अज्ञात सोर्स से यूपीआई कलेक्ट रिक्वेस्ट या क्यूआर कोड स्वीकार न करें। अज्ञात वेबसाइटों से हेल्पलाइन नंबर खोजने की भूल न करें, क्योंकि आधा दर्जन से ज्यादा फर्जी वेबसाइट एसबीआई के नाम पर चल रही हैं। किसी भी समाधान के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर ही जाएं और ठीक से चेक करने के बाद ही अपनी सूचनाएं साझा करें। ग्राहकों को बैंक ने सलाह दी है कि प्रत्येक डिजिटल लेनदेन के बाद बैंक एसएमएस भेजता है। अगर आपने लेनदेन नहीं किया है तो तुरंत उस मैसेज को एसएमएस में दिए गए नंबर पर फॉरवर्ड कर दें। 

फर्जीवाड़े का शिकार हो गए हैं तो कहां करें शिकायत

  • कस्टमर केयर नंबर 
  • 1800111109
  • 9449112211
  • 080 26599990
  • 155260 (नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल)

एशियन पेंट की नकली फैक्ट्री पकड़ी, एक गिरफ्तार

बाजार से भी कम कीमत पर लोगों को बेचा जा रहा था पेंट। नकली पेंट की 38 बाल्टियां, 124 लीटर नकली पेंट के डिब्बे, 73 खाली बाल्टियां आदि बरामद।

गाजियाबाद (एजेंसी)। देश की नामचीन एशियन पेंट कंपनी के नाम पर नकली रंग रोगन बनाने वाली नकली पेंट फैक्ट्री का भंडाफोड़ पुलिस ने किया है। इस मामले में एक व्यक्ति को तब गिरफ्तार किया गया, जब पेंट को बाजार से भी कम कीमत पर लोगों को बेचा जा रहा था।

दिल्ली के मयूर विहार से एशियन पेंट्स कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि पंकज सिंह ने गाजियाबाद के नंदग्राम थाना पुलिस को इलाके में नकली पेंट बनाए जाने का इनपुट दिया था। इसके बाद कंपनी के प्रतिनिधि और पुलिस ने मंगलवार अपरान्ह संयुक्त रूप से गाजियाबाद के मोरटा स्थित एक मकान पर छापा मारा। यहां से फैक्ट्री मालिक राकेश कुमार को गिरफ्तार किया गया। इंस्पेक्टर नीरज कुमार सिंह ने बताया कि लोकल पेंट को नकली पेंट फैक्ट्री में ब्रांडेड का रूप दिया जा रहा था। पुलिस को मौके से भारी संख्या में एशियन पेंट्स नाम से छपे हुए डिब्बे और बाल्टियां बरामद हुई हैं। नकली पेंट को इन डिब्बों में भरकर बाजार में ऊंचे दाम पर बेच दिया जाता था। कंपनी प्रतिनिधि को उस समय शक हुआ जब बाजार में अधिकृत रेट से भी कम पर पेंट्स बिकने की जानकारी मिली। कंपनी के रेट और मार्केट के रेट में भारी अंतर देख उन्होंने जांच की तो पता चला कि एशियन पेंट्स के नाम पर नकली पेंट बनाकर बाजार में बेचा जा रहा है। इसके बाद पूरी तरह से रेकी करके छापामार कार्रवाई की गई। फैक्ट्री से नकली पेंट की 38 बाल्टियां, 124 लीटर नकली पेंट के डिब्बे, 73 खाली बाल्टियां आदि सामान बरामद हुआ है। पुलिस ने सारे सामान को जब्त करते हुए सील कर दिया है।

विज्ञापन के ₹20 हजार हजम कर गए नेता जी!

लखनऊ। अखबार में छपे विज्ञापनों के ₹20 हजार हजम कर गए नेता जी। …जी हां, आश्चर्यजनक किंतु सत्य! जनपद बिजनौर के भाजपा नेता का चिट्ठा अब खोला जाना है। उनके द्वारा दिये गए विज्ञापन दैनिक जागरण नंबर-1, सान्ध्य दैनिक प्रयाण व साप्ताहिक युगदीप टाइम्स में प्रकाशित हुए। तीनों ही अखबार में विज्ञापन की रकम इन पंक्तियों के लेखक द्वारा अपनी खून पसीने की तनख्वाह से जमा की जा चुकी है।

सर्वविदित है कि अखबारों में मौखिक रूप से अनुमति लेकर विज्ञापन प्रकाशित कर दिये जाते हैं। सरकारी विज्ञापनों के लिए रिलीज ऑर्डर लिया जाता है। बड़ा नेता बनने के बाद इन भाजपा नेता को RO (रिलीज ऑर्डर) का जादुई शब्द पता लग गया। कभी फोन रिसीव भी कर लिया तो RO की बात पूछा करते। दैनिक जागरण के धामपुर इंचार्ज रहते इनका विज्ञापन छापने का ₹ 10 हजार का पेमेंट मांगने पर पहले तो वह करीब 2 साल तक टहलाते रहे। कभी किसी ठेकेदार से, तो कभी किसी अधिकारी से पेमेंट कराने की बात कहते रहे। …लेकिन पेमेंट आज तक नहीं हुआ। उसके बावजूद इस समाचार के लेखक ने सांध्य दैनिक प्रयाण और अपने बड़े भाई समान रविन्द्र भटनागर जी के साप्ताहिक अखबार युगदीप टाइम्स में इन्हीं नेता जी से मोबाइल फोन पर पूछ कर ₹ 5-5 हजार के विज्ञापन प्रकाशित करा दिए। कारण ये था कि तब मंत्री जी सिर्फ छोटे से नेता थे, जिला स्तर के। धामपुर दैनिक जागरण के कार्यालय में इंचार्ज संजय सक्सेना के पास आकर घंटों बैठक करते, चाय नाश्ता करते। विभिन्न प्रकार के मामलों पर चर्चा भी करते। इस कारण विश्वास था कि आज नहीं तो कल, कल नहीं तो परसों विज्ञापन का भुगतान वो कर, या करा ही देंगे। लेकिन पद मिलते ही नजर और मंशा बदल गईं! वो यह भी भुला बैठे कि जिस को वो इतने साल से टहला रहे हैं, वो वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह के कॉलेज के दिनों का साथी है। उरई जालौन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का नगर मंत्री, भाजपा युवा मोर्चा और हिंदू जागरण मंच के जिला प्रवक्ता का पद संभालने के बावजूद पत्रकारिता का क्षेत्र चुना। वहीं स्वतंत्र देव उर्फ कांग्रेस सिंह जी ने राजनीति चुन ली। अब क्योंकि काम अपना है तो प्रदेश अध्यक्ष के सामने ये मामला ले जाना भी उचित नहीं लगता।

…हालांकि रकम केवल ₹ 20 हजार की है, लेकिन उनकी मंशा नहीं थी और न है भुगतान करने की। इस मामले को तकरीबन 10 साल हो गए। अब वो फोन रिसीव नहीं करते। तीनों ही अखबार में विज्ञापन की रकम इन पंक्तियों के लेखक द्वारा अपनी खून पसीने की तनख्वाह से जमा की जा चुकी है।

खतरा है, लेकिन no problem- नेता जी का नाम औऱ फोटो अतिशीघ्र दी जाएगी। अब वो इतने बड़े पद पर हैं कि इन पंक्तियों के लेखक को किसी भी फर्जी मामले में फ़ांस सकते हैं, या फंसवा भी सकते हैं। एक वजह ये भी है कि चाटुकार पत्रकारों की फौज भी अब जुड़ी है उनके साथ।…लेकिन हम भी डरने वाले नहीं, उरई जालौन में मशहूर है, अपना एक ही नारा… हिंदी है मजबूत, गणित कमजोर! मतलब समझ ही गए होंगे! क्योंकि हम हैं बुंदेलखंडी।

आखिरकार बिक ही गया विजय माल्या का kingfisher house

आखिरकार बिक ही गई विजय माल्या की प्रापर्टी, 8 बार नीलामी फेल होने के बाद 52 करोड़ रुपये में बिका Kingfisher House

आखिरकार बिक ही गई विजय माल्या की प्रापर्टी, 8 बार नीलामी फेल होने के बाद 52 करोड़ रुपये में बिका Kingfisher House

नई दिल्ली (एजेंसी)। भगोड़े कारोबारी विजय माल्या का किंगफिशर हाउस आखिरकार बिक ही गया। किंगफिशर हाउस को 52 करोड़ रुपये में हैदराबाद स्थित एक डेवलपर को बेचा गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हैदराबाद स्थित Saturn Realtors ने इस प्रॉपर्टी को ऑरिजनल आस्किंग प्राइस से बहुत कम भाव पर खरीदा है। बिक्री भाव अपने रिजर्व प्राइस 135 करोड़ रुपए का लगभग एक तिहाई है।

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विजय माल्या की प्रॉपर्टीज को नीलाम करने में कारोबारियों को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। बैंकों की तरफ से माल्या की प्रॉपर्टीज का जो वैल्युएशन किया जा रहा है, उस दाम पर कोई प्रॉपर्टी खरीद ही नहीं रहा। किंगफिशर हाउस की प्रॉपर्टी की नीलामी भी 8 बार फेल हुई थी। मार्च 2016 में बैंकों ने इस बिल्डिंग का रिजर्व प्राइस 150 करोड़ रुपये रखा था। यही वजह है कि ये बिल्डिंग अब तक बिक नहीं पाई थी।

सुप्रीम कोर्ट से आजम खां को बेटे समेत मिली राहत

आजम खां और बेटे अब्दुल्ला को मिली सुप्रीम कोर्ट से राहत। पासपोर्ट और पैन गड़बड़ी मामले में जमानत।

सुप्रीम कोर्ट से आजम खां और बेटे अब्दुल्ला को मिली राहत, पासपोर्ट और पैन गड़बड़ी मामले में जमानत

नई दिल्ली (एजेंसी)। पासपोर्ट, पैनकार्ड बनाने में गड़बड़ी से जुड़े मामले में सपा नेता आजम खां और बेटे अब्दुल्ला को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। महीनों से जेल में बंद पिता-पुत्र को इस मामले में अंतरिम जमानत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस आपराधिक मामले में निचली अदालत को चार सप्ताह के भीतर मामले में बयान दर्ज करने के बाद उन्हें जमानत पर रिहा करने को कहा है।

आजम और उनके बेटे अब्दुल्ला पर कई मामलों में केस दर्ज हैं। लंबे वक्त से दोनों उत्तर प्रदेश की सीतापुर जेल में बंद थे। हाल ही में जब आजम खां की तबीयत बिगड़ी तो उन्हें लखनऊ के मेदांता अस्पताल में शिफ्ट किया गया है। आजम खां और उनके बेटे पर जमीन हड़पने, फर्जी कागजात समेत अन्य मामलों में उत्तर प्रदेश की अलग-अलग अदालतों में केस चल रहे हैं। कुछ वक्त पहले ही आजम खां की पत्नी को जमानत मिली थी और वो बाहर आई थीं।

इस मामले में सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में सपा नेता आज़म खान और उनके बेटे अबुल्लाह आज़म की ज़मानत याचिका का विरोध किया। उत्तर प्रदेश की तरफ से वकील एसवी राजू ने कहा कि आज़म खान पर कई संगीन मामलो में एफआईआर दर्ज है। अपराधिक पृष्टभूमि की वजह से उनको जमानत नहीं दी जानी चाहिए। आजम खां और अब्दुल्ला आजम पर आरोप है कि पहला पैन कार्ड मौजूद होने के बाद भी दूसरा पैन कार्ड बनवाया और पहले पैन कार्ड की जानकारी छिपाई।

आजम के वकील सिब्बल ने कहा कि सरकार ने पासपोर्ट और पैन कार्ड मामले में अलग-अलग एफआईआर दर्ज की है, जबकि इस मामले में मुख्य एफआईआर में आजम खा को जमानत मिल चुकी है। आरोपी को जेल में रखने के लिए सरकार ने एक ही मामले में अलग-अलग एफआईआर दर्ज की है। यही हाल अबुल्लाह आजम का है। कपिल सिब्बल ने कहा कि आज़म खां को तीन मामलों को छोड़ कर सभी मामलों मे ज़मानत मिल चुकी है। गौरतलब है कि आज के आदेश के बाद आजम और अब्दुल्लाह आजम को थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन वो दोनों फिलहाल जेल से रिहा नही हो पाएंगे। अभी उनके खिलाफ तीन और मामले लंबित हैं, जिसमें जमानत मिलनी बाकी है।

कर चोरी के शक में दैनिक भास्कर के दफ्तरों पर आयकर विभाग के छापे

कर चोरी की सूचना पर मीडिया ग्रुप दैनिक भास्कर के दफ्तरों पर आयकर विभाग की रेड

मीडिया ग्रुप दैनिक भास्कर के दफ्तरों पर आयकर विभाग की रेड, कर चोरी की सूचना पर कार्रवाई

नई दिल्ली। आयकर विभाग द्वारा देश भर में दैनिक भास्कर समूह के कई कार्यालयों पर छापे मारे जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार अधिकारी नई दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में दैनिक भास्कर के परिसरों की तलाशी ले रहे हैं। 

आयकर अधिकारियों ने मीडिया को बताया कि मीडिया समूह दैनिक भास्कर के भोपाल, जयपुर और अन्य स्थानों पर स्थित कई परिसरों में छापे मारे गए हैं।

सूत्रों के अनुसार मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल समेत इंदौर में भी अखबार के दफ्तरों पर छापे मारे जा रहे हैं। इनके अलावा आयकर विभाग के अधिकारी अखबार समूह के प्रमोटरों के आवास की भी तलाशी ले रहे हैं। आयकर विभाग के सूत्रों का कहना है कि समूह द्वारा कर चोरी की सूचना के बाद ये छापेमारी की जा रही है।

विदित हो कि दैनिक भास्कर का मध्य प्रदेश में मुख्यालय है। यह समूह देश के सबसे बड़े मीडिया समूह में से एक है, जिसके एक दर्जन से अधिक राज्यों में 60 से अधिक संस्करण अलग-अलग भाषाओं में प्रकाशित होते हैं।

मोदीनगर में अतिक्रमण कर प्लाटिंग का कार्य जोरों पर

प्रतीकात्मक तस्वीर

भू- स्वामियों व भू माफियाओं द्वारा कादराबाद की भूमि पर अवैध रूप से अतिक्रमण कर प्लाटिंग काटने का कार्य जोरों पर

मोदी नगर । मेरठ से गाजियाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित ग्राम कादराबाद परगना जलालाबाद तहसील मोदी नगर जनपद गाजियाबाद पर गोल्डन पैलेस वैंकट हाल के निकट खसरा संख्या 612 मि, क्षेत्रफल है0 , क्रमशः 1,4130 – 0,02366- 0, 0180 जो कि धर्मवीर/ दीन दयाल, अजय कुमार/ शौदान व राजवीर निवासी कादराबाद तहसील मोदी नगर जनपद गाजियाबाद की मोदी नगर तहसील रिकार्ड में श्रेणी: 1-क में भू- स्वामियों के नाम दर्ज है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

आरोप है कि भू- स्वामियों ने भू- माफियाओं से सांठ- गांठ कर ली है और अपने दम पर अवैध एवं अनाधिकृत तरीके से बिना मानचित्र स्वीकृत कराये प्लाटिंग कर रहे हैं। जब कि अभी तक भू- स्वामी द्वारा उक्त भूमि का भू- परिवर्तन उपयोग नहीं करवाया गया है। भू- स्वामियों द्वारा गाजियाबाद विकास प्राधिकरण गाजियाबाद विकास क्षेत्र मोदी नगर के मास्टर प्लान 2021के नियमानुसार ग्रीन बैल्ट भूमि में आती है, ग्रीन बैल्ट भूमि पर भी हरित पट्टी के बजाय उस पर अवैध रूप से अतिक्रमण कर निर्माण कर लिया है। भू- स्वामियों द्वारा ग्रीन बैल्ट भूमि के नियमों का पालन नहीं किया गया है, जिससे गाजियाबाद विकास प्राधिकरण गाजियाबाद को भू- परिवर्तन उपयोग शुल्क, विकास शुल्क, ग्रीन बैल्ट भूमि उपयोग शुल्क की राजस्व क्षति पहुँचाने का अपराध किया है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

गाजियाबाद विकास प्राधिकरण गाजियाबाद विकास क्षेत्र मोदी नगर जोन- 2 के अधिकारी द्वारा उक्त भूमि पर स्थानीय थाने में मुकदमा दर्ज करवाया गया था । फिर भी भू- स्वामी व भू- माफिया आखिरकार किसके दम पर उक्त अवैध रूप से अतिक्रमण व प्लाटिंग कर रहे हैं, जिससे उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास अधिनियम- 1973 का धड़ले से उल्लंघन हो रहा है?

घटिया सामग्री से तैयार हो रहा हरिद्वार एनएच-74 फोर लेन

एनएच-74 फोर लेन निर्माण में दरारें

मुकेश कुमार (एकलव्य बाण समाचार)

नजीबाबाद (बिजनौर) हरिद्वार एनएच-74 फोर लेन को तैयार करने में घटिया सामग्री प्रयोग की जा रही है।

नजीबाबाद हरिद्वार एनएच-74 फोर लेन का निर्माण कार्य चल रहा है। आरोप है कि सड़क निर्माण में काफी घटिया सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है। नजीबाबाद रोड का काफी कार्य हो चुका है, जिसमें आरसीसी रोड में इतना घटिया मैटेरियल लगाया जा रहा है कि आगे आगे रोड बनती जा रही है और पीछे पीछे दरारें आ रही हैं। थाना मंडावली क्षेत्र के ग्राम भागूवाला पुलिस चौकी के समीप 10 से 20 मीटर की दूरी पर इतना घटिया मैटेरियल लगाया गया है कि सड़क को बने हुए करीब 1 से 2 महीने ही हुए हैं और सड़क में दरारें पड़ने लगी हैं। बताया गया है कि सड़क का निर्माण कहीं-कहीं पर किया जा रहा है। इस कारण प्रारंभ अवस्था में ही दरारें आ चुकी हैं।

एनएच-74 फोर लेन निर्माण में दरारें
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नियमों को ताक पर रखकर नियुक्तियां और नाला निर्माण

बड़े बड़े वादों के बल पर बनीं ग्राम प्रधान। चलीं पुराने प्रधान के नक्शेकदम पर। सार्वजनिक शौचालय पर कर दीं अवैध रूप से नियुक्तियां। बिना प्रस्ताव, बिना कोई सूचना अवैध रूप से नाला निर्माण।

निजामतपुरा गंज/बिजनौर (एकलव्य बाण समाचार)
विकास कार्य कराने एवं पंचायत को भ्रष्टाचार मुक्त रखने के बड़े-बड़े वादों के साथ पहली बार प्रधान बनी ग्राम पुरा निवासी फिरोजा परवीन भी शायद पुराने प्रधान के कदमों पर चल निकली हैं। उनके प्रधान बनने के साथ ही गांव वासियों को उम्मीद थी। ग्रामीण सोच रहे थे कि जिस भ्रष्टाचार मुक्त ग्राम पंचायत बनाने का वादा किया गया था, शायद वह नए प्रधान द्वारा पूरा किया जाएगा। परंतु प्रधान द्वारा किया गया वादा खोखला साबित हुआ। अभी 4 दिन नहीं हुए प्रधान बने कि प्रधान जी ने अपनी असलियत दिखानी शुरू कर दी है। इसका जीता जागता सबूत ग्राम के सार्वजनिक शौचालय पर अवैध रूप से की गई नियुक्तियां हैं। यही नहीं बिना कोई प्रस्ताव, बिना कोई सूचना दिए अवैध रूप से नाला निर्माण किया गया। इसमें भ्रष्टाचार की बू आ रही है। सूत्रों का कहना है कि अभी तक पंचायत के कार्यों के संचालन हेतु ग्राम प्रधान अधिकृत ही नहीं है, तो ग्राम पंचायत में कार्य किस आधार पर किया गया। आरोप है कि नाला निर्माण या तो लेनदेन के आधार पर किया गया और इसी आधार पर नियुक्तियां की गई अथवा प्रधान जी द्वारा अन्य कोई खेल किया गया। अब यह तो वही जाने अथवा ग्राम पंचायत अधिकारी, परंतु जनता का कहना है कि प्रधान जी द्वारा विकास के वादे को इस तरह पूरा किया जा रहा है कि नाला निर्माण में अत्यंत घटिया सामग्री लगाई गई है एवं सड़क एवं नाले को उखाड़ने के दौरान पुरानी लगी ईटों की शायद बंदरबांट कर दी गई। अब इसका जवाब तो प्रधान जी ही दे सकती हैं परंतु आम जनता को विकास की उम्मीद करना बेमानी है क्योंकि पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं। अभी तो शुरुआत है। अभी तो पूरे 5 वर्ष ग्राम पंचायत को जमकर भ्रष्टाचार झेलना है?

एकलव्य बाण समाचार

PM आवास योजना में भ्रष्टाचार की शिकायत

जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा विभाग) जिला बिजनौर में प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी में भ्रष्ट कर्मचारियों द्वारा किया जा रहा भ्रष्टाचार।

बिजनौर। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी में कर्मचारियों के भ्रष्टाचार की बातें आम हो गई है। इसका कारण यह कि इन भ्रष्ट कर्मचारियों की शिकायत होने के बाद भी ये इस योजना में गरीबों को जमकर लूट रहे हैं। गरीबों का पैसा ऐसे लोगों को दिया जा रहा है जिनके आवास पहले से ही पक्के बने हुए हैं। उक्त आरोप लगाते हुए युवा राष्ट्रीय लोकदल बिजनौर के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।

युवा रालोद नेताओं ने जिलाधिकारी उमेश मिश्रा को दिये ज्ञापन में आरोप लगाया कि नगर पालिका परिषद नगीना में डूडा कर्मचारी सर्वेयर मोहित कुमार ने  अपना ही खेल कर रखा है। शिकायत के सम्बन्ध में बिन्दुवार अवगत कराया गया। बताया कि मोहित कुमार द्वारा नीरू पत्नी कृष्ण कुमार निवासी विश्नोई सराय रेती नगीना के मकान का नींव का फोटो बाला पत्नी अमर सिंह निवासी मोहल्ला विश्नोई सराय रेती नगीना के मकान की नींव पर खींचा गया है। मोहित कुमार सर्वेयर द्वारा 50,000 रुपए लेकर नीरू पत्नी कृष्ण कुमार का सरकारी अस्पताल के ऊपर पहले से ही बना हुआ मकान दिखा दिया गया है। सरकारी पैसे का बन्दरबाट मोहित कुमार व नीरू द्वारा किया गया है। नीरू के नाम 20 बीघा जमीन है, पिछले कई वर्षों से अरबन अस्पताल नीरू के खुद के मकान में चल रहा है, जिसका किराया 20,000 रुपए प्रतिमाह सरकार से नीरू द्वारा लिया जा रहा है। युवा रालोद नेताओं ने इस मामले की उच्च स्तरीय सैम्पलिंग जांच अति आवश्यक बताई।

इसके अलावा आरोप लगाया कि मोहित कुमार सर्वेयर द्वारा मोनू पुत्र रामपाल निवासी मोहल्ला कस्बा नगीना का प्रथम जियो-टैग प्लाट पर किया गया था, जिसकी प्रथम किस्त मोनू द्वारा प्राप्त की गई तथा 1 वर्ष 6 माह मोहित कुमार सर्वेयर द्वारा सांठ गांठ कर अपने पुराने मकान की छत पर नींव का फोटो करा कर सरकारी पैसा लिया गया है तथा सरकारी पैसे का दुरूपयोग किया गया है। शिकायत के साथ सबूत के तौर पर  फोटो भी उपलब्ध कराए गए हैं। प्रतिनिधि मंडल ने जिलाधिकारी से कहा कि जनहित में मोहित कुमार सर्वेयर को तत्काल नगर पालिका परिषद नगीना से बर्खास्त कर उच्च स्तरीय जांच समिति से सैम्पलिंग जांच कराई जाए, जिससे भविष्य कोई कर्मचारी ऐसी हरकत ना करें।

जिलाधिकारी से मिलने वालों में युवा राष्ट्रीय लोकदल बिजनौर के राजीव चौधरी, सचिन, हर्षवर्धन, पारितोष कुमार शामिल रहे।

राशन डीलर की गुंडागर्दी से ग्रामीण परेशान

राशन डीलर की गुंडागर्दी को लेकर ग्रामवासी परेशान

बिजनौर। नांगल सोती क्षेत्र अंतर्गत ग्राम रसूलपुर में राशन डीलर अपनी मनमानी कर रहा है। इसका सोशल मीडिया पर वीडियो भी वायरल हो रहा है। राशन डीलर नौशाद लोगों पर खुलेआम अपनी गुंडागर्दी कर रौब जमा रहा है। यह भी आरोप है कि टोकने पर मार पिटाई करने को उतारू हो जाता है।

5 नहीं 4 किलो बांट रहा राशन- आरोप है कि काफी समय से राशन डीलर 4 किलो राशन वितरण कर रहा है। सरकार द्वारा 5 किलो राशन बांटने के आदेश दिए गए हैं। राशन डीलर अपने आप को नेता भी बताता है और खुलेआम गुंडागर्दी कर ग्राम वासियों पर‌ रौब जमाता है।

गलत तरीके से अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र जारी करवा कर बना प्रधान!

लखनऊ। पंचायत चुनाव में गलत तरीके से अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र जारी करवाकर आरक्षण प्राप्त करने वाले नव निर्वाचित ग्राम प्रधान का शपथ ग्रहण रद करने के लिए ग्रामीणों ने शिकायत की है। इस मामले में डाक द्वारा कानून मंत्री, पंचायती राज मंत्री, पंचायती राज अधिकारी, जिलाधिकारी, राज्य निर्वाचन आयोग, उपजिलाधिकारी, अनुसूचित जाति आयोग, खण्ड विकास अधिकारी, रिटर्निंग अधिकारी से शिकायत जन सुनवाई पोर्टल के माध्यम से की है। शिकायतकर्ता अनिल कुमार मौर्य व हिमांशु निगम के मुताबिक बीते 19 अप्रैल को जनपद लखनऊ के मलिहाबाद विकासखंड में हुए प्रधानी चुनाव में संविधान के नियम विरुद्ध तहसील से अनुसूचित जाति का जाति प्रमाणपत्र जारी कर गलत तरीके से आरक्षण दिया गया है।

मलिहाबाद की गांव पंचायत कसमंडी खुर्द के प्रधान पद का आरक्षण अनुसूचित जाति के लिए निर्धारित था। जो प्रधान प्रत्याशी चुनाव जीता है, उसको प्रधान जीतने का प्रमाण पत्र सलीम पुत्र शिव गुलाम के नाम से जारी हुआ है। सलीम की पत्नी नाज भी मुस्लिम है जो विकास खण्ड मलिहाबाद की ग्राम पंचायत फिरोजपुर के मजरे सदरपुर की रहने वाली है। उससे सलीम ने निकाह भी किया है, तो फिर सलीम का अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र तहसील से कैसे जारी किया गया, यह एक बड़ा सवाल है। भारतीय संविधान के आदेश 1950 के पैरा 3 में यह साफ तौर पर लिखा है यदि कोई अनुसूचित जाति का व्यक्ति मुस्लिम धर्म के रीति रिवाज से रहता है और मुस्लिम धर्म का अनुपालन करता है तो वह अनुसूचित जाति की श्रेणी में नहीं आएगा। इसका मतलब है सलीम का अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र गलत जारी किया गया है। यह चुनाव रद्द होना चाहिए और नए सिरे से ग्राम प्रधान का चुनाव होना चाहिए। इस पूरे प्रकरण में अनुसूचित जाति के लोगों के अधिकारों का हनन हुआ है।
आरोप है कि चुनाव नामांकन के दौरान सलीम का जाति प्रमाणपत्र उनके प्रस्तावक व प्रधानी संचालक तारिक यूसुफ खां द्वारा समस्त बातों को छुपाते हुए तहसील में अधिकारियों को गुमराह करते हुए बनवाया गया है। इसलिए सलीम अनुसूचित जाति का आरक्षण प्राप्त करने के योग्य नहीं है। इसलिये अधिकारियों की लापरवाही को समझते हुए तत्काल ग्राम पंचायत कसमंडी खुर्द का शपथ ग्रहण रोका जाए, साथ ही न्यायहित में जांच कर कानूनी कार्यवाही की मांग की है।

वहीं मोहनलाल गंज सांसद कौशल किशोर ने भी प्रदेश के मुख्यमंत्री से ट्विटर के माध्यम के सलीम का जाति प्रमाणपत्र गलत जारी होने से ग्राम पंचायत कसमंडी खुर्द का चुनाव रद करके नए सिरे से ग्राम प्रधान का चुनाव कराने का अनुरोध किया है।

गोदाम से गायब हो गए खाद के 350 कट्टे

एसडीएम की जांच में खुलासा: गोदाम से गायब हो गए खाद के 350 कट्टे। षडय़ंत्र के तहत खाद बेचने को लेकर किसानों ने किया हंगामा। अहमदपुर सादात साधन सहकारी समिति पर किसानों ने किया हंगामा।

बिजनौर। साधन सहकारी समिति अहमदपुर सादात में घोटाला और किसानों के हंगामे की सूचना पर पहुंचे उपजिलाधिकारी नजीबाबाद ने खाद के स्टाक में 350 कट्टे कम पाए। एसडीएम ने समिति के गोदाम इंचार्ज को पुलिस की हिरासत में सौंपते हुए रिपोर्ट दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। मंगलवार सुबह करीब सवा नौ बजे उपजिलाधिकारी नजीबाबाद परमानंद झा को सूचना मिली कि साधन सहकारी समिति अहमदपुर सादात पर षडय़ंत्र के तहत खाद के कट्टे बेच दिए जाने को लेकर क्षेत्रीय किसान हंगामा कर रहे हैं। इस पर एसडीएम मौके पर पहुंच गए और समिति के स्टाक रजिस्टर से मिलान कर गोदाम के स्टाक की जांच की। उन्होंने पाया कि गोदाम में 550 के स्थान पर मात्र दो सौ कट्टे ही रखे हुए हैं। स्टाक में खाद के 350 कट्टे कम पाए गए। एसडीएम ने समिति के खाद गोदाम प्रभारी लिपिक सुधीर कुमार पुत्र किशन लाल से खाद के 350 कट्टे कम पाए जाने पर स्पष्टीकरण मांगा। बताया जा रहा है कि सुधीर कुमार की ओर से गलती होना भी स्वीकार किया गया। समिति के एमडी नंद किशोर, सभापति जोगिन्दर सिंह तथा पदाधिकारी कुंवरपाल सिंह ने बताया कि साधन सहकारी समिति के मुख्य गेट की चाबी चौकीदार वीरेश कुमार पुत्र घनश्याम सिंह तथा गोदाम की चाबी खाद गोदाम प्रभारी लिपिक सुधीर कुमार पुत्र किशनलाल के पास रहती है। सोमवार की शाम साढ़े पांच बजे समिति कार्यालय को बंद कराए जाने तक गोदाम में 550 कट्टे खाद रखा हुआ था, जिसे मंगलवार को किसानों को वितरित किया जाना था, जबकि सुबह गोदाम में मात्र 200 कट्टे खाद ही मिला। एसडीएम ने आरोपी सुधीर कुमार को पुलिस के हवाले कर दिया और गोदाम को सील करने तथा इस मामले में मुकदमा दर्ज कर नियमानुसार कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए हैं। समिति के पदाधिकरियों की ओर से पुलिस को मामले में तहरीर दी गयी है। पुलिस साधन सहकारी समिति से लिपिक सुधीर कुमार तथा चौकीदार वीरेश कुमार को थाने ले गयी। उधर थाना प्रभारी नगीना देहात उदय प्रताप सिंह ने बताया कि अभी मुकदमा पंजीकृत नहीं किया गया है। विभागीय मामले में उच्च अधिकारियों की जांच व आरोप सिद्ध होने के बाद मुकदमा दर्ज किया जा सकेगा।

बैट्री निर्माता के यहां से 38 ऑक्सीजन सिलेण्डर बरामद

कालाबाजारी की सूचना पर पकड़े 38 ऑक्सीजन सिलेण्डर!
पुलिस ने की बैट्री निर्माता के यहां से बरामदगी

बिजनौर। नजीबाबाद में एक ओर ऑक्सीजन गैस प्लांट को शुरू कराने के लिए सामाजिक संगठन और राजनैतिक लोग प्रयासरत हैं, वहीं दूसरी ओर पुलिस ने एक बैट्री निर्माता के यहां दर्जनों ऑक्सीजन गैस सिलेण्डर पकड़े। इस मामले में पुलिस ने अपने स्तर से सिलेंडर रखने सम्बन्धित किसी प्रकार की अनुमति नहीं होने की बात कही है।
रविवार को गोविन्द नगर कालोनी में एक बैट्री निर्माता के यहां पर पुलिस ने छापामारी की। पुलिस को एक वाहन से करीब 38 ऑक्सीजन गैस सिलेण्डर मिले। बताया जा रहा है कि पुलिस को छानबीन के दौरान 11 सिलेन्डर मकान के अंदर से बरामद हुए। उक्त मामले में काफी संख्या में नगर के नामचीन लोग बैट्री निर्माता के बचाव में उतरकर पैरवी करने में जुट गए। बाद में एक बैट्री निर्माता की ओर से बचाव में बताया गया कि उक्त सिलेण्डर गुरुद्वारे की ओर से जरूरतमंदो के लिए लाए गए थे। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि जनहित में मरीजों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन की अनुमति होनी जरूरी है, लेकिन उपजिलाधिकारी ने किसी भी प्रकार की अनुमति अपने स्तर से न दिए जाने अथवा अपने संज्ञान में न होने की बात कही है। छापामारी के दौरान मौजूद पुलिसकर्मी के अनुसार मामा बैट्री वाले के घर में 11 ऑक्सीजन गैस सिलेण्डर थे और बाकी वाहन में थे, जो मौके पर मिले। पुलिस को ऑक्सीजन गैस सिलेण्डर की कालाबाजारी की सूचना मिली थी, जिस पर मौके पर पहुंची पुलिस ने कार्रवाई की।

किसी संस्था ने नहीं ली अनुमति: एसडीएम

इस मामले में उपजिलाधिकारी परमानंद झा ने कहा कि पुलिस की ओर से छापा मारकर गोविन्द नगर कॉलोनी में काफी संख्या में ऑक्सीजन सिलेन्डर पकड़े जाने का मामला संज्ञान में आया है। बताया जा रहा है कि उक्त सिलेण्डर जरूरतमंदों को उपलब्ध कराने के लिए मंगाए गए थे, जबकि इसके लिए किसी संस्था की ओर से कोई अनुमति नहीं ली गयी है।

ड्रग इंस्पेक्टर रोक रहे लिक्विड ऑक्सीजन आपूर्ति: लीना सिंघल

नजीबाबाद में ऑक्सीजन प्लांट चलवाने की मांग। भाजपा नेत्री लीना सिंघल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर की मांग। ड्रग इंस्पेक्टर पर लगाया लिक्विड ऑक्सीजन आपूर्ति रोकने का आरोप

बिजनौर। नजीबाबाद में एक मई से बंद पड़े ऑक्सीजन प्लांट को शुरु कराए जाने के लिए भाजपा नेत्री लीना सिंघल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में ड्रग इंस्पेक्टर बिजनौर पर उक्त प्लांट की लिक्विड ऑक्सीजन की आपूर्ति रुकवाने का भी आरोप लगाया है।

भारतीय जनता पार्टी की प्रांतीय पार्षद, पूर्व क्षेत्रीय मंत्री, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्व क्षेत्रीय प्रभारी बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान पश्चिमी उत्तर प्रदेश तथा पूर्व नगर पालिका परिषद अध्यक्ष श्रीमती लीना सिंघल ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर जनपद बिजनौर के नजीबाबाद विधानसभा क्षेत्र के सिकन्दरपुर बसी में स्थित गोयल इंडस्ट्रियल गैस प्लांट को पुन: संचालित कराए जाने की मांग की है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि जनपद बिजनौर में ऑक्सीजन गैस की आपूर्ति एक नजीबाबाद तथा दूसरा हल्दौर में स्थापित केवल दो प्लांट से की जा रही थी। महामारी के इस दौर में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से निरंतर जनता की सुविधा के लिए ऑक्सीजन प्लांट, वेंटिलेटर, ऑक्सीजन कंन्संट्रेटर आदि की आपूर्ति लगातार बढ़ायी जा रही है तथा निरंतर सप्लाई भी की जा रही है। नजीबाबाद विधानसभा क्षेत्र के सिकन्दरपुर बसी गांव में स्थापित गोयल इंडस्ट्रियल गैस प्लांट में एक मई से लिक्विड ऑक्सीजन की आपूर्ति ड्रग इंस्पेक्टर बिजनौर की ओर से रोक दी गयी है, जिसके चलते उक्त प्लांट में मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन बन्द हो गया है। पत्र में यह भी कहा गया है कि उपजिलाधिकारी नजीबाबाद के मार्गदर्शन तथा कंट्रोल में 22 अप्रैल से 30 अप्रैल तक नजीबाबाद क्षेत्र के 50 किलोमीटर के दायरे में आने वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र समीपुर, पूजा हॉस्पिटल, आजाद हॉस्पिटल, संसार हॉस्पिटल आदि अस्पतालों में तथा होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों को प्रतिदिन ऑक्सीजन दी जा रही थी। इसकी अनुमति उपजिलाधिकारी नजीबाबाद के स्तर पर कराए जाने के दौरान प्रतिदिन 24 घण्टे दो पुलिस वालों की उपस्थिति में आपूर्ति की जा रही थी। साथ ही एसडीएम प्रतिदिन प्लांट का निरीक्षण करते रहे हैं। जबकि 30 अप्रैल के बाद से ड्रग इंस्पेक्टर बिजनौर ने उक्त प्लांट के लिए लिक्विड ऑक्सीजन की आपूर्ति रोक दी, जिससे उपरोक्त प्लांट से प्रतिदिन मिलने वाली 400 सिलेंडर ऑक्सीजन गैस की आपूर्ति बाधित हो गयी। उक्त प्लांट से जीवनदायिनी ऑक्सीजन का उत्पादन पुन: शुरु कराए जाने से पूरे क्षेत्र की जनता के लिए इस महामारी के दौर में ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने में सहायता मिलेगी। उन्होंने जिलाधिकारी को निर्देशित कर उक्त प्लांट को लिक्विड ऑक्सीजन की आपूर्ति कराए जाने तथा किसी सक्षम अधिकारी की देखरेख में पुन: ऑक्सीजन उत्पादन कराए जाने की मांग की है। उधर नजीबाबाद बार एसोसिएशन की ओर से जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन तहसीलदार राधेश्याम शर्मा को सौंपकर सिकन्दरपुर बसी स्थित ऑक्सीजन गैस प्लान्ट शुरू कराने की मांग की गयी है। ज्ञापन सौंपने वालो में अध्यक्ष धीरेन्द्र सिंह, सचिव फहीम अहमद एड, इंतजार अहमद एड, आसिफ हुसैन आदि मौजूद रहे। 

नजीबाबाद से धोखाधड़ी के दो आरोपियों को पकड़ ले गई महाराष्ट्र पुलिस

बिजनौर। धोखाधड़ी के मामले में महाराष्ट्र पुलिस की टीम नजीबाबाद क्षेत्र के एक गांव से दो युवकों को पकड़ ले गई। दोनों आरोपियों के खिलाफ थाणे में मुकदमा दर्ज है।

जानकारी के अनुसार मंगलवार रात मुबंई पुलिस ने नजीबाबाद थाने पहुंच कर आमद कराई। महाराष्ट्र पुलिस के एसआआई सचिन ढगे, कां. गोकुल ठाकरे व कां. कैशव डगरे नजीबाबाद थाने से एसआई विनोद कुमार पिप्पल, कां.आकाश यादव व कां. प्रवीण शर्मा को साथ लेकर ग्राम कनकपुर पहुंच कर दबिश दी। वहां पुलिस ने कलीम अंसारी व फिरोज अंसारी पुत्रगण रईस अंसारी निवासी कनकपुर कला थाना नजीबाबाद को गिरफ्तार कर लिया। महाराष्ट्र पुलिस दोनों आरोपियों को अपने साथ मुबई ले गई।

कोविड-19: सरकार मुफ्तखोरों पर भी करे ध्यान: मनोज शास्त्री

बुरा मानो या भला। कोविड-19 काल में सरकार इन मुफ्तखोरों पर भी ध्यान करे: मनोज शास्त्री

इधर देश में कोविड-19 शुरू हुआ और उधर मुफ्तखोरों और उनके आकाओं ने चिल्लपों मचानी शुरू कर दी कि लॉकडाउन में सरकार बिजली, पानी, गेहूं राशन इत्यादि मुफ़्त दे। दरअसल ग़लती इन मुफ्तखोरों की नहीं है, गलती है उन “अयोग्य राजनीतिक नेताओं” की है, जिन्होंने चुनाव जीतकर “मुफ़्त राशन-कपड़ा बांटो” अभियान चलाकर कुछ लोगों को हरामखोरी की आदत डाल दी। किसी ने मुफ़्त में लैपटॉप बांटे, किसी ने बिजली-पानी मुफ़्त दिया, किसी ने बसों में यात्रा मुफ़्त कर दी तो कोई सब्सिडी के नाम पर सरकारी खज़ाना लुटा रहा है। जनता के खून-पसीने की गाढ़ी कमाई को अपने राजनीतिक फायदे के लिए बांटने की एक नई परम्परा की शुरुआत हो चुकी है और मुफ्तखोरों को अब उसकी लत लग गई है। मुफ़्त में शराब और कबाब पाने वाले अब मुफ़्त का बिजली, पानी, कम्प्यूटर, लैपटॉप आदि पाने की इच्छा करने लगे हैं। हद तो यह है कि अपने घर के शौचालय में जाने के लिए भी बाइक का इस्तेमाल करने वाले भी मुफ़्त का पेट्रोल चाहते हैं। इन मुफ्तखोरों से कोई पूछे कि इनके बाप-दादाओं ने भी कभी इन्कम टैक्स/सेल्स टैक्स या कोई सा भी टैक्स सरकार को कभी दिया है? कभी सरकार को अपनी कमाई का हिसाब-किताब देना तो दूर की बात है, इनमें से बहुतों के पास तो वैध दस्तावेज़ भी नहीं होंगे। अगर CAA और NRC लागू करा दिया जाए तो इनमें से 90 प्रतिशत लोग घुसपैठियों की सूची में शामिल होंगे और इनके आका सड़कों पर ढपलियाँ बजाते नज़र आएंगे। इन मुफ्तखोरों को न कोई धर्म है, न ईमान। हरामखोरी और मुफ़्तख़ोरी इनका मुख्य व्यवसाय है। अपने आकाओं के ईशारों पर सोशल मीडिया पर सरकार का विरोध और हमेशा मुफ़्तख़ोरी की पैरवी करना ही इनका एकमात्र धर्म है।

इस देश में बहुत लोग ऐसे हैं जो वास्तव में जरूरतमंद हैं, ग़रीब हैं, सही शब्दों में कहा जाए तो जो लोग वाकई में सरकारी मदद के मुस्तहिक़ हैं, उन बेचारों को तो 1kg गेहूं भी बमुश्किल मिल पाता है, जबकि अवैध घुसपैठ करने वाले कथित शरणार्थी और मुफ़्तख़ोर अपने आकाओं के दम पर सरकारी मदद की सबसे ज़्यादा मौज उड़ा रहे हैं। यह सही है कि कोविड-19 की इस आपदा की घड़ी में सरकार को बिजली के बिल/पानी के बिल माफ़ करने चाहिए और सम्भव हो तो कोरोना मरीजों को मुफ़्त में ईलाज भी मिले। लेकिन यह सब उन लोगों के लिए हो, जो इस सबके वाकई मुस्तहिक़ हैं या जो लोग समय पर आयकर/बिक्रीकर भरते हैं और जिनपर वैध दस्तावेज़ मौजूद हैं।

🖋️ *मनोज चतुर्वेदी “शास्त्री”* समाचार सम्पादक- उगता भारत हिंदी समाचार-पत्र (नोएडा से प्रकाशित एक राष्ट्रवादी समाचार-पत्र)

लखनऊ जिला प्रशासन ने एंबुलेंस के रेट तय किए

लखनऊ जिला प्रशासन ने एंबुलेंस के रेट तय किए

एंबुलेंस चालकों के मनमाने किराए पर जिला प्रशासन की रोक

कोविड संक्रमित रोगियों को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस का किराया तय

बिना ऑक्सीजन एंबुलेंस में मरीज को ले जाने पर ₹1000 प्रति 10 किलोमीटर देना होगा

10 किलोमीटर से आगे ले जाने पर प्रति किलोमीटर ₹100 देना होगा

ऑक्सीजन युक्त एंबुलेंस में ले जाने पर 1500 रुपए प्रति 10 किलोमीटर

10 किलोमीटर से आगे ले जाने पर ऑक्सीजन युक्त एंबुलेंस को ₹100 प्रति किलोमीटर के हिसाब से देना होगा

वेंटिलेटर सपोर्टेड एंबुलेंस को 2500 रुपए प्रति 10 किलोमीटर

10 किलोमीटर से आगे ले जाने पर ₹200 प्रति किलोमीटर के हिसाब से देना होगा

जमाखोरी से मेडिकल स्टोर्स पर जीवन रक्षक दवाइयों की किल्लत

जमाखोरी से मेडिकल स्टोरों पर जीवन रक्षक दवाइयों का टोटा। दहशत में जरूरत से अधिक दवाईयों की खरीद रहे लोग

लखनऊ। कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले और सरकार द्वारा रोकथाम के प्रयास के बीच मेडिकल स्टोर्स से दवाइयां भी कम होती जा रही हैं। मांग के हिसाब से आपूर्ति न होना व कोरोना महामारी के दौरान लॉकडाउन के समय दवाइयों की अचानक जरूरत की बात सोचकर लोग आवश्यकताओं से अधिक दवाइयों की खरीदकर उसका स्टॉक कर रहे हैं। लोगों की यह जमाखोरी आम इंसान के लिए समस्या बनती जा रही है। बाजार से गायब होने के कारण लोगों को यह दवाएं उपलब्ध नहीं हो रही। 

सामान्यतः प्रयोग होने वाली दवाइयां लगभग सभी मेडिकल स्टोर्स पर मिल जाती हैं। कुछ विशेष दवाइयों को मेडिकल स्टोर्स संचालकों द्वारा नोट करवा कर अगले दिन उपलब्ध करवा दिया जाता है। नियमित दवाइयों का सेवन करने वालों के लिये अधिकतर दवाइयां उनके लिये जीवन रक्षक दवाइयां जैसी ही होती है। गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के अलावा रक्तचाप, मधुमेह, थायरायड जैसे रोगों से पीड़ितों को लगातार दवाइयों का सेवन करना होता है। इसके अलावा सर्दी, बुखार, पेट दर्द जैसी सामान्य दवा व सर्जिकल आदि के केस वालों की दवाइयां होती है जो कि अल्प अवधि के लिये इस्तेमाल की जाती है। कोविड-19 के सेकेंड स्ट्रीम की गंभीरता और लगातार संक्रमण की बढ़ोत्तरी ने लोगों के दिलो में दहशत भर दी है। लोगों के लागतार संक्रमित होने का सिलसिला थमने का नाम नही ले रहा है। दूसरी ओर बिना किसी टेस्ट और लक्षण वाले व्यक्तियों की सांस लेने की दिक्कत से होने वाली मौतों ने लोगो के माथे पर चिंता की लकीरें गहरा दी है।

कोविड मरीजों को सुगमता से इलाज मिल सके, इसके लिये सरकारी अस्पतालों में ओपीडी लगभग बन्द है। अब निजी चिकित्सकों ने भी ओपीडी या तो बन्द कर रखी है या फिर सीमित कर दी है। ऐसे में नियमित मरीजों को इलाज में दिक्कत हो रही है और वह दवाई कराने के लिये झोलाछापों या मेडिकल स्टोरों के ही भरोसे है। कोविड संक्रमण का असर कहा जाये या मौसम का मिजाज, लगभग सभी के घरों में खांसी, जुखाम, बुखार के मरीज हैं। ऐसे में मेडिकल स्टोर्स से दवाइयों की खरीद बढ़ गयी है। मेडिकल स्टोर्स में दवाइयों की जबरदस्त किल्लत देखने को मिल रही है। एक मेडिकल एजेंसी के संचालक ने बताया कि लॉकडाउन होने की वजह से दवाइयों के आने में समस्या आ रही है। कुछ एक दवाइयों की ऊपर से भी कम सप्लाई मिल रही है। लोगों की आवश्यकताओं से अधिक दवाइयों की खरीद की वजह से भी दवाइयों की कमी सामने आ रही है। शुगर, बीपी, हार्ट आदि में काम आने वाली दवाइयां जैसे ग्लाइकोमेट, ग्लाइकोमेट 0.5, ग्लाइमेट एमएक्स एवं चिकित्सकों द्वारा पैरासीटामाल डोलो 650, कालपाल समेत कई दवाइयों की खपत बढ़ गई है। इसके अलावा खांसी के सीरप आदि की मांग अधिक है।

मौत के तांडव के बीच भी खेल कमीशन का…!

मौत के तांडव के बीच भी खेल कमीशन का…! एम्बुलेंस चालक और मरीज के तीमारदार के बीच सड़क पर दिनदहाड़े मची ये जंग आजकल कोई नया नजारा नहीं रह गया है। आएदिन ऐसे मामले देखने, सुनने और पढ़ने को मिल जाएंगे कि मरीज को लाने ले जाने के लिए एम्बुलेंस मालिकों, चालकों ने कैसी लूट खुलेआम मचा रखी है। दो चार नहीं, 10 गुना तक किराया। अपने पहले से तय निजी अस्पताल, लैब आदि में ले जाने की जबरदस्ती।

यह मामला बिजनौर के सिविल लाइंस क्षेत्र का है। एक अस्पताल में भर्ती मरीज का सीटी स्कैन आदि होना था। मरीज के परिजन उसे सरकारी अस्पताल ले जाना चाहते थे लेकिन एम्बुलेंस चालक अपनी जान पहचान बता कर कहीं और ले जाना चाह रहा था। अब यह बात तो पढ़े लिखे से लेकर अनपढ़ व्यक्ति तक भी बखूबी समझता है कि जान पहचान का मतलब क्या होता है। इसका सीधा सा मतलब है कमीशन। कमीशन का मतलब है धन। ….और धन का मतलब है आजकल का सबसे बड़ा सच! इसी के पीछे दुनिया भाग रही है। बहरहाल, इस मामले के पीछे भी एम्बुलेंस चालक की कुछ ऐसी ही चाह रही होगी। काफी देर बवाल चला। आते-जाते लोग रुके, कुछ देखकर आगे बढ़ गए, कुछ ने एम्बुलेंस चालक को खरी खोटी सुनाई। लिहाजा मामले का पटाक्षेप हो गया। फिर भी एक विचारणीय प्रश्न अनुत्तरित रह गया कि चारों तरफ मचे हाहाकार के बीच कोई कैसे मानवता को ताक पर रख देता है! ब्लैक करने के लिए दवा आदि की कृत्रिम कमी, फल, सब्जी, किराना हर चीज के दाम बढ़ा कर बेचना, ये सब क्या है ? सोचिएगा।

मानदेय के लिए परेशान रहे शिक्षक व कर्मचारी!

मानदेय के लिए परेशान रहे शिक्षक व कर्मचारी!

बिजनौर। कोरोना महामारी के इस दौर में एक ओर सरकार व सभी संगठन लोगों से घरों में रहने तथा जरूरी काम से ही बाहर निकलने पर सोशल डिस्टेंसिंग तथा मास्क लगाने की अपील कर रहे हैं। वहीं रविवार से दूसरे दिन तक कोरोना गाइडलाइंस की धज्जियां उड़ा कर कर्मचारियों शिक्षकों को मतगणना पूरी कराने के बाद भी मानदेय नहीं दिया गया! परेशान शिक्षक, कर्मचारी लगातार सोशल मीडिया के जरिए एक दूसरे से पूछ रहे हैं कि किस ब्लॉक में मतगणना के पश्चात नियत मानदेय दिया गया है। कुल मिलाकर भारी अव्यवस्थाओं के बीच चुनाव लगभग संपन्न हो गया।जानकारी के अनुसार प्रत्येक टेबल पर एक पर्यवेक्षक व तीन अन्य की ड्यूटी लगाई गई थी, जिन्हें मानदेय दिया जाना था। ड्यूटी के लिए प्रात: 8:00 बजे से सायं के 8:00 बजे तक पहली शिफ्ट तथा रात्रि 8:00 बजे से प्रात: 800 बजे तक दूसरी शिफ्ट लगाई गई थी। वहीं बताया गया है कि पहली टीम को पुन: प्रात: 8:00 बजे बुलाया गया। आरोप है कि महामारी के इस खतरनाक दौर में शिक्षक कर्मचारी जान हथेली पर रखकर एक मेज पर चारों ओर बैठकर 12 से 15 घंटे की ड्यूटी करने के बावजूद चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित मानदेय अधिकांश ब्लॉक में नहीं दिया जा सका। कई शिक्षकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मानदेय देने के नाम पर कई बहाने बनाए गए। कई ब्लॉक में कहा गया कि मतगणना पूरी होने के बाद दिया जाएगा। गणना में लगे कर्मचारियों ने बताया कि पर्यवेक्षक को रुपए 700  तथा अन्य को रुपए 500 दिए जाने थे। आरोप लगाया कि मानदेय के लिए इतना परेशान किया गया कि अनेक शिक्षक कर्मचारी मानदेय लिए बिना ही वापस आ गए। 

रेमडेसिविर की कालाबाजारी में अपोलो अस्पताल कर्मी समेत 2 गिरफ्तार, सरगना फरार

कालाबाजारी में अब तक दो दर्जन आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार। पांच से छह हजार रुपए में खरीद कर बेचते थे 20 से 25 हजार में।

लखनऊ। कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के इलाज में कारगर रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी के खिलाफ पुलिस का अभियान जारी है। बंथरा पुलिस ने रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वाले दो लोगों को धर दबोचा, जबकि सरगना भाग निकला। पकड़े गए आरोपितों में एक अपोलो अस्पताल का कर्मचारी बताया जा रहा है। आरोपियों के कब्जे दो इंजेक्शन बरामद हुए हैं।

इंस्पेक्टर बंथरा के मुताबिक मुखबिर की सूचना पर सोमवार देर रात हनुमान मंदिर के पास दो आरोपियों को पकड़ा गया है जबकि गिरोह का सरगना भाग निकला। गिरफ्तार आरोपितों में विकास सिंह उर्फ लकी निवासी बंथरा कस्बा, अल्ताफ आलम निवासी श्रावस्ती भिनगा, वर्तमान समय में एलडीए कॉलोनी सेक्टर डी कृष्णानगर में रहता है। अल्ताफ  ने बताया कि वह अपोलो अस्पताल का कर्मचारी है। सरगना अनुज निवासी हरदोई भाग निकला। अनुज पकड़े गये आरोपियों को इंजेक्शन उपलब्ध कराता था। मौके से दो इंजेक्शन बरामद हुए हैं। गिरफ्तार आरोपी विकास का बंथरा में मेडिकल स्टोर हैं। आरोपियों ने अब तक दर्जनभर से अधिक इंजेक्शन बेचने की बात कबूल की है। पुलिस का कहना है कि अनुज पांच से छह हजार रुपए में इंजेक्शन देता था और यह लोग 20 से 25 हजार में बेचते थे।

गौरतलब है कि 22 व 23 अप्रैल को लखनऊ कमिश्नरेट पुलिस ने ठाकुरगंज, नाका, मानक नगर, अमीनाबाद व गोमतीनगर से 18 लोगों को गिरफ्तार करते हुए उनके कब्जे से भारी मात्रा में नकली व असली रेमडेसिविर इंजेक्शन बरामद किए थे। वहीं अमीनाबाद पुलिस ने बीते सोमवार को नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन के साथ पांच लोगों को गिरफ्तार किया था।

यक्ष प्रश्न बना मंडावली में अवैध खनन!

मंडावली थाना क्षेत्र में खुलेआम हो रहा अवैध खनन। प्रशासन और पुलिस दिन रात दौड़ते डंपरों को लेकर मौन। शासन-सत्ता को धता बता कौन दे रहा संरक्षण।

बिजनौर। तहसील नजीबाबाद के मंडावली थाना क्षेत्र में दिन-रात शासन व सत्ता को धता बताते हुए किए जा रहे अवैध खनन को लेकर प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी -कर्मचारी चुप्पी साधे हुए हैं। लोगों का कहना है कि आखिर वह कौन सी अदृश्य शक्ति है, जिसके सामने सभी लोग गौण होकर रह गए हैं? इस बार मंडावली थाना क्षेत्र के सबलगढ़ में दिन-रात किए जा रहे अवैध खनन कार्य में मजदूरों के स्थान पर मशीनों से काम लिया जा रहा है। तेजी से अवैध खनन किए जाने और कम से कम समय में अवैध खनन का अधिक से अधिक भंडारण किए जाने के चलते डंपरों के पीछे की ओर लगे डालों को भी खनन माफियाओं ने कटवा दिया है।

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए मतदान संपन्न होने के बाद से ही थाना मंडावली क्षेत्र में खुलेआम दिन-रात नदी का सीना चीरकर अवैध खनन किया जाना जारी है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस मानों आंखें मूंदे हुए अवैध खनन माफिया के सामने चुप्पी साधे हुए है। कोरोना महामारी के बढ़ते संक्रमण के चलते क्षेत्र की सडक़ों पर विभिन्न स्थानों पर दिन भर वाहन चैकिंग अभियान चलाने वाली पुलिस को भी सामने से गुजरते अवैध खनन से लदे ट्रक और डंपर ऐसे दिखायी नहीं देते है, मानो वह अदृश्य रूप में उनके सामने से गुजर रहे हों।

पूर्व में इस क्षेत्र में अवैध खनन किए जाने की शिकायत पर कई मर्तबा तत्कालीन उपजिलाधिकारी नजीबाबाद तथा खनन विभाग के अधिकारी छापामार कार्रवाई करते रहे हैं। इस बार अवैध खनन माफिया के सामने स्थानीय प्रशासन व पुलिस कार्रवाई करते दिखायी नहीं दे रही है। पूर्व में उपजिलाधिकारी नजीबाबाद ने सबलगढ़ क्षेत्र में होने वाले अवैध खनन पर  कार्रवाई करते हुए पूर्ण रूप से अंकुश लगा दिया था। इसके बाद विगत दिनों उक्त क्षेत्र में उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश का सीमांकन भी कराया गया।ब सीमांकन प्रक्रिया के दौरान एसडीएम ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि किसी भी कीमत पर अवैध खनन नहीं होने दिया जाएगा।

करीब एक सप्ताह से मंडावली थाना क्षेत्र के सबलगढ़ के जंगल क्षेत्र में कुत्ता घाट पर खुलेआम दिनदहाड़े अवैध खनन होने पर भी शासन-प्रशासन स्तर से अंकुश लगाने के लिए किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की गयी। इस बार अपने नए अवतार में अवैध खनन करने को मैदान में उतरे खनन माफिया ने दिन-रात नदी का सीना चीरकर कम से कम समय में अधिक से अधिक अवैध खनन सामग्री भंडारण करने के उद्देश्य से मजदूरों को भी खनन कार्य में नहीं लगाया है। मजदूरों के स्थान पर ट्रैक्टरों से नदी से खनन सामग्री उठाकर डंपरों और ट्रकों में भरने का कार्य किया जा रहा है। इसके लिए अवैध खनन में जुटे माफिया ने डंपर के पिछले हिस्से को बंद करने वाले डाले भी कटवाकर अलग रख दिए हैं। अवैध खनन के दौरान मजदूरों को काम न मिलने से पूर्व में अवैध खनन में माफिया के लिए काम करते रहे क्षेत्र के मजदूरों ने भी अपनी नाराजगी व्यक्त की है। हालांकि वह मजदूर भी अवैध खनन के काले कारोबार को संचालित करने वाले खनन माफिया के सामने आकर विरोध करने की क्षमता न होने की बात कर रहे हैं। एक मजदूर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अवैध खनन माफिया की पहुंच काफी ऊपर तक है, जिसकी वजह से शासन-सत्ता और पुलिस भी मौन होकर सबकुछ देखते हुए अनजान बनी हुई है।

अवैध खनन किस के इशारे पर! बड़ा सवाल यह है कि एसडीएम नजीबाबाद की ओर से क्षेत्र में अवैध खनन न होने देने को कहे जाने के बावजूद दिन-रात खुलेआम हो रहा खनन किसके इशारे पर हो रहा है? और क्या स्थानीय पुलिस दिन-रात अपने सामने से अवैध खनन सामग्री लादकर सडक़ों पर सरपट दौड़ रहे वाहनों पर कोई कार्रवाई करना गवांरा करेगी? सवाल यह भी है कि क्या क्षेत्र में हो रहे अवैध खनन के काले कारोबार पर पूर्ण रूप से अंकुश लग सकेगा? ऐसे कई प्रश्नों के उत्तर भविष्य के गर्भ में छिपे हैं।

जाम का कारण बन रहे अवैध खनन से लदे डंपर

नजीबाबाद नगर के मालगोदाम तिराहे से मोटाआम होते हुए मालन नदी तक भारी वाहनों के आवागमन पर रोक के बावजूद रात-दिन अवैध खनन से लदे डंपर सरपट दौड़ रहे हैं। इससे एक ओर जहां दुर्घटनाओं का अंदेशा बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर उक्त मार्ग पर जाम की स्थिति बनी रहने से लोग आजिज हैं। स्थानीय पुलिस ने नगर में मालगोदाम तिराहे से मालन नदी पुल तक के लिए पूर्व में भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दी थी। स्थानीय पुलिस ने रोडवेज बसों समेत सभी भारी वाहनों को हर्षवाड़ा के समीप से होकर गुजरने वाले बाइपास मार्ग से आवागमन करने के सख्त निर्देश दिए थे। इसके बाद नगर के मालगोदाम तिराहा, कृष्णा टाकीज चौराहा, मोटा आम चौराहा तथा मोहल्ला रम्पुरा चौराहे पर काफी हद तक जाम की समस्या से नागरिकों को निजात मिल गयी थी। विगत कई दिन से एक बार फिर अवैध खनन से लदे डंपरों का उनके चालकों ने मालगोदाम तिराहे से मोटाआम होकर मालन नदी तक जाने वाले मार्ग से आवागमन कराना शुरु कर दिया है। इस वजह से नगर में एक बार फिर जाम की स्थिति बनने लगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस को पहली वाली यातायात व्यवस्था को चालू रखते हुए भारी वाहनों का आवागमन बाइपास से ही कराना चाहिए, जिससे नागरिकों को जाम की समस्या से निजात मिल सके।

चुपके से सिपाही ने चोरी कर ली सेब की पेटी, SP ने किया निलंबित

बिजनौर। जनपद के नहटौर में पीर की चुंगी पर शकील फल वाले के यहां से सेब की पेटी चोरी के मामले में सिपाही को निलंबित किया गया है। रात्रि के करीब साढ़े तीन बजे सब्जी मंडी में चोरी को अंजाम देने वाले की सीसीटीवी फुटेज चैक करने से मामले का खुलासा हुआ। एसपी डॉ धर्मवीर सिंह ने मामला संज्ञान में लेते हुए दिनेश कुमार चहल को निलंबित कर दिया है। जांच सीओ धामपुर को सौंपी गई है।

consumerhelpline.gov.in पर जाकर करें कालाबाजारी के खिलाफ शिकायत

consumerhelpline.gov.in पर जाकर करें कालाबाजारी के खिलाफ शिकायत। …या फिर करें 1800-11-4000 पर कॉल।

लखनऊ। कोरोना वायरस के कारण देशभर में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। इसी को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ ने अग्रिम आदेश तक रोजाना रात्रि कर्फ्यू के साथ ही शनिवार व रविवार को लॉक डाउन घोषित कर दिया है। आने वाले दिनों में किसी परेशानी से बचने के लिए घबराहट में लोग सामान खरीदकर अपने घरों में भर रहे हैं। इस मौके का फायदा उठाकर कई जगह दुकानदार मनमानी करने लगे हैं। ग्राहकों से मनमाने तरीके से वसूली की जा रही है। अगर आप भी इस परेशानी का सामना कर रहे हैं तो सरकार से घर बैठे इसकी शिकायत कर सकते हैं।

शिकायत करने के तरीके

1. कंज्यूमर मामले की शिकायत consumerhelpline.gov.in पर जाकर ऑनलाइन कर सकता है।

2. कंज्यूमर टोल फ्री नंबर 14404 या फिर 1800-11-4000 पर फोन करके भी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।

3. कंज्यूमर 8130009809 नंबर पर एसएमएस भेजकर भी शिकायत कर कर सकते हैं। एसएमएस मिलने के बाद कंज्यूमर को फोन किया जाएगा और उसकी शिकायत दर्ज की जाएगी।

जानिए अपने अधिकार:

1-सुरक्षा का अधिकार यानी सही वस्तुओं और सेवाओं को पाने का अधिकार है। अगर कोई वस्तु या सेवा कंज्यूमर के जीवन और संपत्ति के लिए खतरनाक है, तो उसके खिलाफ सुरक्षा पाने का अधिकार है।

2- सूचना के अधिकार यानी कंज्यूमर को वस्तुओं और सेवाओं की गुणवत्ता, मात्रा, शक्ति, शुद्धता, मानक और कीमत के बारे में जानकारी पाने का अधिकार है। इसका मतलब यह है कि अगर कोई दुकानदार या सप्लायर या फिर कंपनी आपको किसी वस्तु या सामान की सही जानकारी नहीं देती है, तो उसके खिलाफ आप केस कर सकते हैं।

3- चुनने का अधिकार यानी कंज्यूमर को वस्तुओं और सेवाओं को चुनने का अधिकार है। वो अपनी पसंद की सेवा या वस्तु का चुनाव कर सकता है। किसी भी कंज्यूमर को कोई विशेष वस्तु या सेवा लेने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।

सख्त कार्रवाई करेगी सरकार: सामानों की कालाबाजारी कर मनमानी कीमत वसूलने वालों को सावधान होने की जरूरत है। शिकायत मिलने पर सरकार सख्त कार्रवाई करेगी। ऐसे लोगों पर सरकार की नजर है। सरकार कोरोना के खतरे से उत्पन्न स्थिति में तमाम आवश्यक वस्तुओं की बाजार में उपलब्धता पर लगातार नजर बनाए हुए है। इसके साथ ही सभी राज्य सरकारों के संपर्क में है ताकि कहीं भी किसी चीज की किल्लत न हो। सभी उत्पादकों और व्यापारियों से भी अपील है कि इस घड़ी में मुनाफाखोरी से बचें।

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लॉक डाउन के नाम पर तंबाकू उत्पादों की ब्लैक मार्केटिंग शुरु

लॉकडाउन की संभावना से तंबाकू उत्पादों पर ब्लैक शुरु। खुदरा मूल्य पर थोक विक्रेता कर रहे तंबाकू उत्पादों की बिक्री। पान मसाला, जर्दा (गुटका), सिगरेट, खैनी पर लिया जा रहा ओवररेट।

बिजनौर। प्रदेश में लॉकडाउन की आशंका को देखते हुए तंबाकू उत्पादों के थोक  विक्रेताओं ने विगत वर्ष लगे लॉकडाउन की तरह ही मोटा मुनाफा कमाने की नीयत से अभी से ओवर रेट पर पान मसाला+जर्दा (गुटका), सिगरेट, खैनी व सुरति आदि की बिक्री शुरु कर दी है। इसके चलते खुदरा दुकानदारों ने भी ग्राहकों से निर्धारित से अधिक दाम वसूलने शुरु कर दिए हैं।

प्रदेश में रोजाना बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के आंकड़ों को देखते हुए तंबाकू उत्पादों की बिक्री करने वाले लोगों ने सबसे पहले काली कमाई करने के लिए अपना गुणा गणित बैठाना शुरु कर दिया है। विगत वर्ष मार्च माह में देश भर में लॉकडाउन लगाए जाने के बाद तंबाकू उत्पादों की बिक्री करने वालों ने पान मसाला, जर्दा, खैनी, सुरति, सिगरेट आदि को निर्धारित से चार गुने दामों तक पर बेचा था। इसका मुख्य कारण तंबाकू उत्पादों के थोक विक्रताओं की ओर से खुदरा दुकानदारों को तंबाकू उत्पाद निर्धारित दरों से तीन गुनी दरों पर बेचा जाना बताया जाता रहा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रदेश के कोविड प्रभावित पांच शहरों प्रयागराज, लखनऊ, वाराणसी, कानपुर नगर और गोरखपुर में आगामी 26 अप्रैल तक लाकडाउन लगाए जाने का आदेश दिया है। इस आदेश की जानकारी होते ही तंबाकू उत्पादों के थोक विक्रेताओं ने खुदरा दुकानदारों से माल न होने की बात कहनी शुरु कर दी। साथ ही सिगरेट, पान मसाला, जर्दा (गुटका), खैनी, सुरती आदि उत्पादों को उनके खुदरा मूल्य पर ही दे पाने के साथ ही बड़ी मात्रा में देने की शर्त भी रख दी है। इसके बाद से खुदरा दुकानदारों ने भी तंबाकू उत्पादों के दामों में इजाफा कर दिया। उधर एक खुदरा दुकानदार ने बताया कि थोक विक्रेताओं ने रोजाना भाव बढऩे के संकेत देते हुए बड़ी मात्रा में माल लेने की पेशकश की है। उपभोक्ताओं ने तंबाकू उत्पादों के दामों पर की जा रही कालाबाजारी पर अंकुश लगाए जाने की मांग की है।

ऊपर तक सैटिंग का दावा!

थोक मार्केट में गुटखे के प्रत्येक पैकेट पर 30 से 40 रुपए, बीड़ी के बंडल पर ₹50 से भी ज्यादा दाम अभी से बढ़ा दिए गए हैं। जनता को आगे से महंगा माल मिलने का हवाला देकर मनमाना दाम वसूला जा रहा है। एक दुकानदार से इस बाबत पूछा गया तो उसने बताया कि जब महंगा मिला है, तो उसी हिसाब से बेचेंगे भी। शिकायत का डर नहीं है, पूछने पर ताल ठोंक कर कहा कोई भी, किसी को भी कर ले शिकायत! थोक वालों की ऊपर तक तगड़ी सैटिंग है। आम ग्राहकों के मन में सवाल ये है कि क्या पिछले साल की तरह इस बार भी कालाबाजारियों पर अधिकारियों की दया दृष्टि बनी रहेगी या प्रशासन की तरफ से कोई उचित व ठोस कार्यवाही की जाएगी।

विदुर कुटी के जीर्णोद्धार को जनांदोलन बनाने में जुटे स्वामी अंश चैतन्य

विदुर कुटी के जीर्णोद्धार को जनांदोलन बनाने में जुटे स्वामी अंश चैतन्य
प्रधानमंत्री को भेजा विदुर कुटी के जीर्णोद्धार को पत्र, डीएम से लेकर सीएम तक पहुंचा चुके हैं शिकायत

बिजनौर/हिंदू युवा सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी अंश चैतन्य महाराज ने महाभारत कालीन विदुरकुटी के जीर्णोद्धार के लिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजा है। वह अब इस मुद्दे को जनांदोलन बनाने की तैयारी में हैं। इससे पहले उन्होंने जिलाधिकारी के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन भेज कर इस मामले में त्वरित कार्रवाई की मांग की थी।

हिंदू युवा सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी अंश चैतन्य महाराज

हिंदू युवा सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी अंश चैतन्य महाराज ने बताया कि विदुर कुटी जनपद बिजनौर का प्रमुख ऐतिहासिक एवं हिन्दू धर्म की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां पुरातन काल से महात्मा विदुर का मन्दिर गौशाला व आश्रम विद्यालय आदि स्थापित हैं। विश्व का ऐतिहासिक तीर्थ स्थल होने के नाते केंद्र व राज्य सरकार के द्वारा करोड़ों रुपए हर वर्ष अनुदान आता है। आम जनता द्वारा भी अनुदान दिया जाता है, इसके बावजूद भी यहां की व्यवस्था विकास कार्य जीर्णशीर्ण अवस्था में हैं। महाभारत सर्किट व भारत के शीर्ष आइकॉनिक स्थलों में भी चयनित इस स्थान पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर चुके हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि विश्व की ऐतिहासिक महात्मा विदुर की तपोभूमि आज भी विकास के लिए तड़प रही है। प्रबंध समितियों के गोलमाल करने के कारण आज भी जीर्णशीर्ण अवस्था में है। बाहर से आए दर्शनार्थियों के लिए यहां न तो भोजन की व्यवस्था है और न ही ठहरने की व्यवस्था। स्नानघर और शौचालय की व्यवस्था भी नहीं है। कभी विदुर कुटी के मंदिर की पैडिय़ों से छू कर अवरिल बहने वाली मां गंगा वर्तमान में यहां से दो किलोमीटर दूर जा चुकी है। उक्त स्थान पर गंगा स्नान पर्व पर विशाल मेले का आयोजन प्रतिवर्ष होता है, जिसमें लाखों की संख्या में जनता आस्था के महापर्व में स्नान करने आती है। गंगा का जल गहरा होने के कारण अनेकों दुर्घटनाएं भी घटित हो चुकी है। श्रद्धालु बरसात के मौसम में भयानक रूप धारण की हुई मां गंगा के जल में स्नान करते हैं। स्वामी अंश चैतन्य महाराज ने कहा कि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये प्रशासन को आदेशित कर विदुर कुटी तीर्थ स्थल पर मूलभूत सुविधाओं का प्रबंध किया जाए। मां गंगा को एक नहर का रूप देकर विदुर कुटी के बराबर से निकाला जाए। ऐसे प्रबंध किये जाएं जिससे महात्मा विदुर के आश्रम, गौशाला, विद्यालय, मंदिर का विकास उच्च स्तर पर हो सके। ज्ञातव्य है कि इससे पहले उन्होंने जिलाधिकारी के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन भेज कर इस मामले में त्वरित कार्रवाई की मांग कर चुके हैं।

अवैध खनन पर प्रशासन का चाबुक

खनन सामग्री लदेे दो वाहन सीज, मंडी समिति में खड़े कराए
 एसडीएम को कागजात नहीं दिखा पाए वाहन चालक

बिजनौर। उपजिलाधिकारी नजीबाबाद ने राष्ट्रीय राजमार्ग-119 पर ओवरलोड खनन सामग्री लादकर दौड़ रहे हो वाहनों को रोककर जांच पड़ताल की। जांच में चालक खनन सामग्री से सम्बन्धित कागजात नहीं दिखा पाए। इस पर दोनों वाहनों को सीज कर कृषि उत्पादन मंडी समिति परिसर में खड़ा करा दिया गया है। 
राष्ट्रीय राजमार्ग-119 पर उपजिलाधिकारी परमानंद झा ने नजीबाबाद-किरतपुर के बीच खनन सामग्री लादकर दौड़ रहे वाहनों पर छापामारी करते हुए उन्हें रोक लिया। एसडीएम ने वाहन संख्या यूके 15 सीए-1131 में रेत तथा यूपी 20 एटी-7386 में  आरबीएम भरा हुआ पाया। एसडीएम ने चालकों मोहम्मद कासिम आदि से खनन सामग्री से सम्बन्धित दस्तावेज दिखाने को कहा, जिस पर वे बगले झांकने लगे। मांगे जाने पर कोई भी कागजात न दिखा पाने पर एसडीएम ने खनन से लदे दोनों वाहनों को सीज कर दिया। चालकों ने उपजिलाधिकारी को पूछताछ में बताया कि वे आज तक बिना कागजों के ही खनन सामग्री ले जाते रहे हैं। उधर वाहनों में भरी खनन सामग्री जांच में ओवरलोड भरी होना भी पाई गई। एसडीएम परमानंद झा ने बताया कि उन्होंने दोनों खनन वाहनों को सीज कर कृषि उत्पादन मंडी समिति परिसर में खड़ा करा दिया और उसकी रिपोर्ट जिला प्रशासन को कार्यवाही के लिए भेज दी है।

बिजनौर में लाखों का नकली दूध बरामद, पिता पुत्र गिरफ्तार

छापामारी में लाखों का मिलावटी दूध बरामद, पिता-पुत्र गिरफ्तार। दुग्ध निर्माता कंपनी अधिकारियों ने स्थानीय प्रशासन को साथ लेकर मारा छापा। एसडीएम नजीबाबाद के नेतृत्व में व्यापारी के प्रतिष्ठान के बाद आवास पर पहुंची टीम-टीम ने मिलावटी दूध तैयार करने को रखी सामग्री तब्जे में लेकर की सील।

बिजनौर। एक दुग्ध निर्माता कंपनी के अधिकारी व अधिवक्ता की शिकायत पर उपजिलाधिकारी नजीबाबाद के नेतृत्व में खाद्य निरीक्षकों और पुलिस की संयुक्त टीम ने एक व्यापारी के प्रतिष्ठान व आवास पर छापा मारकर लाखों रुपए का दुग्ध पाउडर, दूध पाउडर बनाने के लिए मिलाई जाने वाली सामग्री तथा रैपर आदि जब्त कर सील कर दिए। टीम ने नकली दुग्ध पाउडर निर्माण व बिक्री करने के मामले में पिता-पुत्र को गिरफ्तार कर लिया है।

बुधवार दोपहर उपजिलाधिकारी नजीबाबाद परमानंद झा के नेतृत्व में खाद्य निरीक्षकों और पुलिस की टीम ने बाजार कल्लूगंज मोरी क्षेत्र में एक दुकान पर छापा मारा। इस दौरान दुकान पर विशाल गुप्ता पुत्र विजय गुप्ता निवासी मोहल्ला सब्नीग्रान मौजूद था। टीम के साथ पहुंचे मधुसूदन दुग्ध पाउडर निर्माता कंपनी के नोएडा से आए सेल्स एक्ज्यूकेटिव जितेन्द्र सिंह तथा कंपनी के अधिवक्ता नीरज पाल ने दुकानदार विशाल गुप्ता से दूध पाउडर की बड़ी खेप खरीदने की बात की। इस पर उसने बताया कि बड़ी सप्लाई का काम वह घर से करते हैं। इसके बाद उक्त टीम व्यापारी के पुत्र को साथ लेकर मोहल्ला सब्नीग्रान स्थित विजय गुप्ता पुत्र राम निवास के आवास पर पहुंच गयी। जहां छापामार टीम को जानकारी हुई कि व्यापारी पारस दूध पाउडर के पैकेट को नीचे की ओर से काटकर उसमें माल्टर नाम का कैमिकल तथा मक्की का आटा मिलाकर पुन: पारस व मधुसूदन कंपनी के दूध पाउडरों के पाउच में पैक कर बेच देते थे। व्यापारी के यहां से काफी मात्रा में मधुसूदन दूध पाउडर के खाली रैपर, 85 कट्टे कैमिकल, 365 कट्टे पारस मिल्क पाउडर तथा खुले हुए पाउच मिले। टीम ने घंटों की छानबीन के बाद 28 लाख 27 हजार रुपए के माल व कैमिकल के बिल मिलने की बात कही है।

मिल्क पाउडर निर्माता मघुसूदन कंपनी के अधिकारी ने कहा कि कंपनी के नाम से नकली दूध पाउडर बेचे जाने की सूचना के आधार पर करीब एक सप्ताह पूर्व उन्होंने उक्त व्यापारी से अपनी कंपनी के दूध पाउडर के कुछ पाउच खरीदे थे, जिन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया। जांच में उक्त पाउच में मिलावटी मिल्क पाउडर होना पाया गया। इस आधार पर कंपनी ने प्रशासनिक उच्चाधिकारियों से शिकायत कर कार्यवाही किए जाने की मांग की थी। उक्त टीम ने छापामारी में मिले सभी सामान को सील कर दिया। साथ ही व्यापारी विजय गुप्ता व उसके पुत्र विशाल गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया। छापामारी करने वाली टीम में पुलिस क्षेत्राधिकारी गजेन्द्र पाल सिंह, नायब तहसीलदार राजीव यादव, कोतवाल सत्य प्रकाश सिंह, खाद्य निरीक्षक रामवीर सिंह व पंकज कुमार तथा बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद रहे।   

IT की रेड में 220 करोड़ रुपए की अघोषित आय का पता चला

Ministry of Finance की ओर से बताया गया है कि आयकर विभाग ने तमिलनाडु में छापेमारी की है। एक जाने-माने व्यावसायिक समूह के 11 ठिकानों पर छापेमारी की गई। अब तक 220 करोड़ रुपए की कुल अघोषित आय का पता चला है। 8.30 करोड़ रुपए की नकदी ज़ब्त की गई है। छापेमारी और जांच की कार्रवाई अभी जारी है।

नई दिल्ली। आयकर विभाग ने चेन्नई स्थित एक जाने-माने व्यावसायिक समूह के ठिकानों पर छापेमारी की है। समूह से जुड़े 11 ठिकानों पर छापे मारे गए और 9 स्थानों पर सर्वेक्षण किए गए। यह तमिलनाडु, गुजरात और कोलकाता में स्थित हैं। व्यावसायिक समूह टाइल्स और सैनीटरी वेयर के उत्पादन और विपणन के व्यवसाय से संबद्ध है और दक्षिण भारत का टाइल्स के व्यवसाय का अग्रणी समूह है।

तलाशी अभियान में टाइल्स की बिक्री और खरीद के गैर हिसाबी मामलों का पता चला। तलाशी दल के प्रयासों के चलते गैर लिखित लेन देन के विवरण सामने आए हैं, जो खुफिया कार्यालय और क्लाउड से संचालित सॉफ्टवेर पर दर्ज थे। 26 फरवरी 2021 से शुरू रेड में पता चला है कि व्यवसायिक समूह के 50 प्रतिशत के करीब लेन-देन को लेखा पुस्तिका से अलग रखा गया है। पिछले टर्न ओवर को ध्यान में रखते हुए किए गए आंकलन के मुताबिक तकरीबन 120 करोड़ रुपये की आय को छिपाया गया है। यह 100 करोड़ रुपये की अघोषित आय के अतिरिक्त है, जिसे व्यावसायिक समूह ने छद्म कंपनियों के माध्यम से शेयर प्रीमियम के रूप में दिखाया था।
अब तक 220 करोड़ रुपये की कुल अघोषित आय का पता चला है। 8.30 करोड़ रुपये की नक़दी भी बरामद हुई है जिसे विभाग द्वारा ज़ब्त कर लिया गया है। छापेमारी और जांच की कार्रवाई अभी जारी है।

विभाग ने इस बात की निगरानी करने की भी पूरी तैयारी की है कि कहीं इन पैसों का दुरुपयोग मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए तो नहीं किया जा रहा है। विभाग तमिलनाडु और पुद्दुचेरी में गैर हिसाबी धन के स्रोतों और इसके प्रवाह पर भी नज़र रखने को लेकर प्रतिबद्ध है।

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IG मेरठ का फर्जी फ़ेसबुक अकाउंट बना कर उगाही का प्रयास! Paytm नंबर जारी कर मांगे पैसे

पुलिस महानिरीक्षक मेरठ रेंज का फर्जी फ़ेसबुक अकाउंट बना कर उगाही का प्रयास, Paytm नंबर जारी कर मांगे पैसे!

लखनऊ। शातिर साइबर अपराधियों ने पुलिस महानिरीक्षक मेरठ रेंज का फर्जी फ़ेसबुक  अकाउंट बना डाला। मामले का खुलासा तब हुआ जब इस अकॉउंट पर Paytm नंबर जारी कर परिचितों से पैसे मांगने शुरू किए गए।

मेरठ पुलिस का कहना है कि अज्ञात व्यक्ति या व्यक्तियों ने पुलिस महानिरीक्षक मेरठ रेंज के नाम से फर्जी फेसबुक अकाउंट बनाया। इसके बाद उसने मैसेंजर के माध्यम से रुपए मांगने की लिए पेटीएम नंबर भी जारी कर दिया। आरोपी ने इसी अकाउंट के जरिए कई लोगों से संपर्क कर रुपए मांगने शुरू कर दिये। किसी के द्वारा मामले की सूचना मिलने पर मेरठ पुलिस ने जानकारी जुटानी शुरू की। पता चला कि ऐसा कोई भी अकाउंट पुलिस महानिरीक्षक मेरठ रेंज के नाम से अधिकृत रूप से नहीं बनाया गया है।

हरियाणा से अकॉउंट का संचालन

कड़ी से कड़ी जोड़ती पुलिस को पता चला कि उक्त अकाउंट का संचालन हरियाणा राज्य के होडल जनपद से किया जा रहा है। वहीं पेटीएम धारक का पता उत्तर प्रदेश के जनपद बुलंदशहर और जनपद रायबरेली का पाया गया।

सर्विलांस सैल जांच में जुटी

मेरठ के SSP अजय साहनी ने बताया कि सर्विलांस सैल की ओर से फर्जी अकाउंट को बंद करा दिया गया है। अज्ञात बदमाशों के खिलाफ थाना सिविल लाइन पर धारा 420 आईपीसी और 66 आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। इसके साथ ही आरोपियों की तलाश की जा रही है।

प्रतापगढ़ में लुटे 40 लाख, MP पुलिस ने बरामद किए 1.85 करोड़!



लखनऊ/ग्वालियर। मध्य प्रदेश के सिवनी में इनोवा की बोनट में आग लगने के बाद बरामद 1.85 करोड़ रुपयों के तार प्रतापगढ़ में हुई लूट से जुड़े पाए गए हैं। बनारस के जिस कारोबारी रिंकू सेठ के रूपये प्रतापगढ़ में लूटे गए थे, सिवनी में बरामद रुपये भी उसी के बताए जा रहे हैं। खास बात यह है कि सिवनी पुलिस ने कुल 1.85 करोड़ रुपए बरामद करते हुए तीन लोगों को पकड़ा है, जबकि कारोबारी की ओर से केवल 40 लाख रुपए ही लूटे जाने की रिपोर्ट दर्ज है। इससे पुलिस उलझ गई है। पूछताछ के लिए कारोबारी को सिवनी बुलाया गया है।
प्रतापगढ़ में हुई थी लूट?
प्रतापगढ़ के कुंडा में शनिवार को पुलिस को सूचना मिली कि वाराणसी से दिल्ली सोना खरीदने जा रहे कारोबारी के कर्मचारियों की स्कॉर्पियो समेत लाखों रुपए इनोवा सवार बदमाशों ने लूट लिये हैं। पुलिस को कारोबारी की स्कॉर्पियो पड़ोसी जिले कौशांबी में रविवार सुबह लावारिस हालत में बरामद हुई। वाराणसी से पहुंचे कारोबारी रिंकू सेठ ने बताया कि उसने कौशांबी के कोखराज थाने में 40 लाख लूट की रिपोर्ट भी दर्ज कराई हुई है।


इनोवा के बोनट में लगी आग तो बरामद हुए 1.85 करोड़-
रविवार की शाम मध्य प्रदेश के सिवनी में पुलिस ने नेशनल हाइवे से इनोवा सवार तीन लोगों को 1.85 करोड़ रुपयों के साथ पकड़ा। तीनों युवकों ने नोटों के बंडल को कार की बोनट में इंजन के पास छिपाया था। नोटों के कारण कार के बोनट में आग लग गई। बोनट से नोटों के बंडल बाहर निकालते ही 500-500 के अधजले नोट सड़क पर बिखर गए। नोटों को देखकर ग्रामीणों की भीड़ जुटने लगी तो अधजले नोटों को मौके पर छोड़कर तीनों इनोवा लेकर भागने लगे। ग्रामीणों से मिली सूचना पर पुलिस ने नाकेबंदी की और तीनों को कुरई के पास गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए सुनील वर्मा, हरिओम यादव और ग्यास बाबू ने बताया कि रुपए बनारस के कारोबारी रिंकू सेठ के हैं। वह लोग रुपए लेकर सोना खरीदने मुंबई जा रहे थे।

सिवनी पुलिस ने कारोबारी को बुलवाया-
सिवनी पुलिस ने वाराणसी पुलिस से संपर्क कर कारोबारी के बारे में पता करने को कहा। पता चला कि उसी कारोबारी के 40 लाख रुपए प्रतापगढ़ में इनोवा सवारों ने लूट लिये हैं। एक तरफ 40 लाख की लूट और दूसरी तरफ इनोवा से 1.85 करोड़ बरामद होने से पुलिस उलझ गई। सिवनी पुलिस ने वाराणसी के कारोबारी रिंकू सेठ को मामले को सुलझाने के लिए बुलाया है। खास बात ये कि सिवनी पुलिस ने जिन तीन युवकों को गिरफ्तार किया है, उसमें से एक कारोबारी के चालक हरिनाथ यादव का सगा भाई हरिओम यादव है। हरिओम यादव के मुताबिक प्रतापगढ़ में लूट नहीं हुई थी, बल्कि हरिनाथ ने बाइक से नोटों की गड्डी उन तक पहुंचाई थी। उसके साथ एक और व्यक्ति था। रुपए लेकर हरिओम, सुनील और ग्यास सिवनी होते हुए मुंबई जा रहे थे।


मामला हवाला और तस्करी से जुड़ने की आशंका-
पुलिस को आशंका है कि पूरा मामला हवाला और सोने की तस्करी से जुड़ा हो सकता है। यदि कारोबारी की स्कार्पियो से ही 1.85 करोड़ रुपए इनोवा सवारों को दिये गए और कर्मचारी ने लूट की अफवाह उड़ाई तो इसके पीछे किसका दिमाग है? कारोबारी ने 1.85 करोड़ की जगह केवल 40 लाख लूट की रिपोर्ट क्यों दर्ज कराई? पुलिस को आशंका है कि मामला सोने की तस्करी से जुड़ा हो सकता है। पूरा धंधा अवैध तरीके से चलाया जा रहा था। इसकी जानकारी कर्मचारियों को भी थी। ऐसे में कर्मचारियों ने ही कारोबारी के रुपए लूटने की साजिश रची।

दूसरी तरफ पुलिस अधीक्षक सिवनी कुमार प्रतीक ने बताया कि दिनांक 31 जनवरी 2021 को थाना कुरई में राहगीरों द्वारा सूचना प्राप्त हुई कि एक कार से जले हुए नोटों को उड़ते हुए देखा गया। सूचना पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमलेश खरपुसे एवं अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) बरघाट शशिकांत सरयाम के द्वारा थाना प्रभारी कुरई को मुखबिर सूचना पर कार्यवाही हेतु आदेशित किया गया। पुलिस द्वारा तत्काल चैकिंग लगाई गई व संदिग्ध वाहन को रोका गया एवं सूक्ष्मता से वाहन की तलाशी ली गई। तलाशी पर उसमें से बड़ी मात्रा में रुपयों के साथ जले हुए नोट भी प्राप्त हुए। उक्त कार में सवार व्यक्तियों से पूछताछ की गई जिसमें संदिग्ध हरिओम यादव द्वारा बताया गया कि वह मुबंई में वाहन चलाने का काम करता है उसका भाई हरिनाथ यादव बनारस में दशरथ सोनी ज्वेलर्स की दुकान में काम कर रहा है। वह अक्सर बनारस से अपनी गाड़ी में नगद राशि ले जाता है और मुबंई या दिल्ली से सोना चांदी लेकर बनारस आता है। इस काम के लिए उसे अच्छी राशि मिल जाती है। वर्तमान में हरिओम यादव की गाड़ी खराब थी तो वह अपने मित्र सुनील की गाड़ी इनोवा एमएच 01 एएच 7264 को ग्यास बाबू के साथ दिनांक 29/01/2021 को मुबंई से रवाना होकर भुसावल, इंदौर, देवास, झांसी, कानपुर होते हुए इलाहाबाद इटावा मार्ग पहुंचा ।
इलाहाबाद से पूर्व चाचा के ढाबे में हरिनाथ यादव अपने किसी एक आदमी के साथ मोटर साइकिल से आया और गाड़ी में रखे रुपए के पैकेट रखकर चले गये। वहां से तीनों गाड़ी में मैहर होकर जबलपुर मार्ग से सिवनी होते हुए मुबंइ जा रहे थे। तभी सुकतरा के पास इंजन गर्म होने के कारण वायर शार्ट होने से वाहन में आग लग गई। चालक द्वारा बोनट खोलने पर इंजन के पास छिपाकर रखे हुए नोट जलते हुए हवा उड़ने लगे, जिन्हें राहगीरों ने देखा तो पुलिस को सूचना दे दी।

गिरफ्तार आरोपी :– 1. हरिओम यादव निवासी मोतीशाह लेन मझगांव मुबंई, 2. सुनील वर्मा निवासी साईन कोलीवाड़ा थाना अंटापीर मुबंई, 3. ग्यास बाबू निवासी भिन्डी बाजार मुबंई,  जब्त नोट: – 1. 1,74,00,000 / – ( एक करोड़ चौहत्तर लाख रुपए) 2. 1,87,500 / – रुपये (एक लाख सत्तासी हजार रुपए) आंशिक जले हुए। 3.500 रुपए के 81 नोट अधिक मात्रा में जले हुए। पुलिस टीम–निरी. मनोज गुप्ता, SI रोहित काकोडिया, SI आरपी गायधने, SI दामिनी हेड़ाउ, SI करिश्मा चौधरी, ASI रघुराज चौधरी, आर मनीराम यादव, आर अरुण, आर चंचलेश, कमलेश, आर महेन्द्र, आर पंकज, आर सूरज, आर दिलिप का योगदान रहा।

मां-बेटी घर में छाप रही थीं 500 व 2000 के नोट, चार गिरफ्तार

नकली करेंसी छापने वाले गिरोह का भंडाफोड़ मां-बेटी सहित 4 गिरफ्तार, पांच लाख की नकली करेंसी बरामद

लखनऊ। मेरठ में गंगानगर पुलिस ने थाना क्षेत्र के एक मकान में नकली नोट छापने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में मां-बेटी सहित कुल 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने 500 व 2000 के नकली नोट के अलावा नोट छापने वाले प्रिंटर भी बरामद किये हैं।
जानकारी के अनुसार गंगानगर के बी-ब्लॉक स्थित एक दुकान पर एक युवती 2000 का नोट लेकर पहुंची। दुकानदार ने नोट नकली लगने पर सूचना पुलिस को दी। दुकानदार के अनुसार उक्त युवती कुछ दिन पूर्व भी नकली नोट देकर गई थी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने  युवती से पूछताछ की तो मामला खुल गया।

एसपी देहात केशव कुमार ने पुलिस लाइन्स में  घटना का खुलासा करते हुए बताया कि इस जगह पर पिछले काफी समय से नकली नोटों के छापने का काम चल रहा था। गैंग की मुखिया सिखेड़ा निवासी महिला है, जो गंगानगर में किराए पर रहती है। सिवाया निवासी उसकी बहन का बेटा रोबिन भी साथ में रहता है। ये सभी मिलकर नकली नोट छापने का धंधा कर रहे हैं। गैंग में शामिल ज्यादातर लोग एक दूसरे के रिश्तेदार हैं। इस गैंग में शामिल पिलखुवा, हापुड़ का सिकंदर पहले भी कई आपराधिक मामलों में जेल जा चुका है। पूछताछ में दर्जनभर लोगों के नाम सामने आए। मास्टरमाइंड केरल निवासी प्रशांत नाम का युवक बताया गया है, लेकिन वह अभी जेल में है। आरोपी 500 और 2000 के नोट छापकर उनको मेरठ और आसपास के इलाकों में सप्लाई करते थे। ये अभी तक करीब सवा लाख से ज्यादा के नकली नोट छाप चुके हैं।  कई युवतियां भी गैंग में शामिल हैं। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। पुलिस ने इस मामले में सुमन, माही, रोबिन उर्फ मुकेश व सिकंदर उर्फ सतेंद्र को गिरफ्तार किया है।

हवाला पर IT की रेड: ₹14 करोड़ नकद, 2 करोड़ मूल्य का बुलियन जब्त

आयकर विभाग ने दिल्ली में चलाया तलाशी अभियान
₹14 करोड़ नकद और 2 करोड़ रुपये मूल्य का बुलियन जब्त

नई दिल्ली। आयकर विभाग ने दिल्ली क्षेत्र में बेहिसाब नकदी रुटिंग और संचालन की गतिविधि में शामिल कई हवाला ऑपरेटरों के विरूद्ध तलाशी और जब्ती की कार्रवाई मंगलवार को की। तलाशी कार्रवाई में बेहिसाब 14 करोड़ रुपये नकद और 2 करोड़ रुपये मूल्य का बुलियन जब्त किया गया है। आगे की जांच अभी जारी है।

तलाशी की कार्रवाई के परिणामस्वरूप दोषी प्रमाणित करने वाले सबूतों के बारे में पता चला है कि विभिन्न फर्जी संस्थाओं का उपयोग फर्जी खरीद / बिक्री बिलों को तैयार करने के लिए किया जा रहा है और अनेक बैंक खातों के माध्यम से बेहिसाब धन की रुटिंग की जा रही है। ऐसी फर्जी संस्थाएं दो महीने के बाद बंद कर दी जाती हैं और नई संस्थाएं बना ली जाती हैं।

इसके अलावा, 300 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की बिक्रियों को छुपाने तथा फर्जी खरीदों को लेकर दोषी प्रमाणित करने वाले कागजातों का पता चला है। तलाशी कार्रवाई में बेहिसाब 14 करोड़ रुपये नकद और 2 करोड़ रुपये मूल्य का बुलियन जब्त किया गया है। आगे की जांच जारी है।

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छात्रवृत्ति घोटाले में जिला समाज कल्याण अधिकारी निलंबित, FIR के आदेश

मथुरा छात्रवृत्ति घोटाले में नपे जिला समाज कल्याण अधिकारी, निलंबित कर FIR के आदेश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के निजी आईटीआई संस्थानों में छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति में अनियमितता, भ्रष्टाचार और गबन के चर्चित मामले में मथुरा के जिला समाज कल्याण अधिकारी करुणेश त्रिपाठी को निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही, भ्रष्टाचार के दोषी पाए गए सभी अधिकारियों व कर्मचारियों के अलावा संबंधित संस्थाओं के खिलाफ एफआईआर कराई जाएगी तथा संबंधित आईटीआई कॉलेजों को ब्लैक लिस्ट किया जाएगा।

₹23 करोड़ का गबन आया सामने-
मुख्यमंत्री कार्यालय ने बुधवार को सोशल मीडिया के जरिए इसकी जानकारी दी। मथुरा जिले के चार दर्जन से अधिक निजी आईटीआई कॉलेजों में हुए इस गड़बड़झाले के मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर जांच कराई गई थी। जांच समिति ने अलग-अलग तरीकों से छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति के नाम पर करीब 23 करोड़ रुपए गबन होने की बात पाई है। यही नहीं, दर्जन भर अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत की पुष्टि भी हुई है।

दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर होगी FIR-
सीएम योगी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस की नीति के अनुरूप सभी दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों व संस्थाओं के खिलाफ एफआईआर कराने के आदेश दिए हैं। जिला समाज कल्याण अधिकारी करुणेश त्रिपाठी को निलंबित करते हुए उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने के आदेश दिए गए हैं। मान्यता विहीन संस्थाओं में दाखिला लेने वाले छात्रों को परीक्षा में सम्मिलित करने के लिए स्टेट काउंसिल फ़ॉर वोकेशनल ट्रेनिंग, लखनऊ की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। अब इनके खिलाफ भी जांच होगी।

तीन सदस्यीय जांच समिति ने किया था गबन का खुलासा-
तीन सदस्यीय जांच समिति ने पाया कि 11 मान्यताविहीन शिक्षण संस्थानों में करीब 253.29 लाख का गबन हुआ, जबकि 23 कॉलेजों में पांच हजार से अधिक छात्रों ने कोर्स ही पूरा नहीं किया और उन्हें करीब 969 लाख की छात्रवृत्ति मिल गई। कई निजी आईटीआई कॉलेजों में स्वीकृत सीट के सापेक्ष करीब पांच हजार दाखिले अतिरिक्त कर लिए गए। इन्हें भी छात्रवृत्ति दिलाई गई। जांच में सामने आया कि 38 कॉलेजों में 100 से अधिक समान नाम, पिता का नाम और समान जन्म तिथि वाले फर्जी छात्रों को भी शुल्क प्रतिपूर्ति कराई गई। यही नहीं फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर भी छात्रों के दाखिले करने और उन्हें छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति कराने का काम भी हुआ। सीएम योगी ने अब सभी दोषियों के खिलाफ एफआईआर करने के आदेश दिए हैं।

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क्रिकेट घोटाला: फारुख अब्दुल्ला की 12 करोड़ की संपत्ति सीज

जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम फारुख अब्दुल्ला पर ED का शिकंजा

क्रिकेट घोटाले में 12 करोड़ की संपत्ति सीज

नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जम्मू-कश्मीर क्रिकेट घोटाला मामले में बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने पूर्व मुख्यमंत्री फारूख अब्दुल्ला की करीब 12 करोड़ की संपत्ति सीज कर दी है। इस संपत्ति में 3 घर, 2 प्लॉट और 1 कॉमर्शियल प्रॉपर्टी अटैच शामिल है। इसमें एक घर गुपकार रोड, दूसरा तहसील कटिपोरा, तन्मर्ग, और तीसरा भटंडी जम्मू में होना बताया गया है। ईडी ने फारूख अब्दुल्ला और अन्य की करीब 12 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई को जम्मू-कश्मीर क्रिकेट संघ में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच से हिस्सा बताया है। इन संपत्तियों की जब्त कीमत 11.86 करोड़ रुपये है, लेकिन इनका बाजार मूल्य लगभग 60-70 करोड़ रुपये है।

43.69 करोड़ के घोटाले से जुड़ा मामला

यह मामला जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन के 43.69 करोड़ के घोटाले से जुड़ा हुआ है। साल 2005-06 से 2011-12 तक J&KCA को BCCI से 94.06 करोड़ का फंड अलॉट हुआ था, जो कि J&K में क्रिकेट के डेवलेपमेंट के लिए था, लेकिन आरोप है कि J&K के पूर्व मुख्यमंत्री और J&KCA के तत्कालीन अध्यक्ष फारूख अब्दुल्ला ने अहसान अहमद मिर्जा और मीर मंजूर गजनफर के साथ मिल कर 43.69 करोड़ रुपये का घोटाला किया और अपने बैंक खातों में इन पैसों को जमा कराया या कैश निकाल लिया।

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लखनऊ TP नगर योजना में ₹100 करोड़ की हेराफेरी!

लखनऊ TP नगर योजना में ₹100 करोड़ की हेराफेरी!
80 भूखंड की फाइलें गायब

लखनऊ। एलडीए की ट्रांसपोर्ट नगर योजना में 80 भूखंड की फाइलें गायब हैं। इन भूखंडों की कीमत लगभग 100 करोड़ बताई जा रही है। डिस्पोजल रजिस्टर में भी इनका कोई विवरण नहीं है। एलडीए को यह भी नहीं पता कि इन भूखंडों को आवंटित किया गया था या नहीं। जिन भूखंडों की फाइलें नहीं मिल रही है उनका उपयोग ट्रांसपोर्ट से जुड़ी सेवाओं के लिए किया जाना था। मामला सामने आने के बाद सचिव पवन गंगवार ने मामले की जांच शुरू करा दी है।

1978 में आई थी ट्रांसपोर्ट नगर योजना:

ट्रांसपोर्ट नगर योजना वर्ष 1978 में आई थी उस समय पूरा रिकॉर्ड मैनुअल ही रहता था। ट्रांसपोर्ट को आवंटन भी सीधे आवेदन पर हुए लेकिन इन भूखंडों की नीलामी नहीं हुई। ऐसे में रिकॉर्ड बाकी भूखंडों की तरह नहीं मौजूद हैं। बाद में कंप्यूटर में भी इन भूखंडों का रिकॉर्ड नहीं चढ़ाया गया। डिस्पोजल रजिस्टर पर भी आवंटन की कोई जानकारी नही है, जिससे आवंटन से संपर्क किया जा सके। ऐसे में संभावनाएं बन रही है कि आवंटन नहीं हुआ हो। यदि ऐसा है तब भी अपने खाली भूखंडों का पता न होना, एलडीए की घोर लापरवाही है।

फर्जी आवंटन की भी आशंका:

इन भूखंड के फर्जी आवंटन किए जाने की भी आशंका है, क्योंकि इन भूखंडों की कीमत अब व्यावसायिक के बराबर है। इन भूखंडों की मांग भी ज्यादा है। ऐसे में रिकॉर्ड का गायब हो जाना बड़े फर्जीवाड़े की ओर भी संकेत कर रहा है।

हमेशा विवादों में रही ट्रांसपोर्ट नगर योजना: 

एलडीए की ट्रांसपोर्ट नगर योजना हमेशा विवादों में रही है। फर्जी आवंटन से लेकर फाइलों के गायब होने के प्रकरण यहां आते रहे हैं। बिना नीलामी के ही व्यवसायिक भूखंड यहां आवंटित हुए। भूखंडों के अवैध तरीके से समायोजन के मामले भी आए, हालांकि योजना में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर भूखंडों के रिकॉर्ड गायब होने का मामला सामने आया।

कहां किसको आवंटन हुआ नोटिस जारी…


इस प्रकरण में संयुक्त सचिव व्यवसायिक ने नोटिस जारी किया है। इसमें कहा गया है कि किसी को इन भूखंड का आवंटन किया गया है तो इसके साक्ष्य दिखाएं। ऐसा नहीं होने पर 15 दिन के बाद एलडीए नीलामी से इनकी बिक्री की प्रक्रिया शुरू कर देगा। संयुक्त सचिव डी एम कटियार का कहना है कि सर्वे भी कराया गया है। इसमें यह भूखंड अभी खाली पड़े हुए हैं। किसी निर्माण का साक्ष्य नहीं मिला है।

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