14 फरवरी तक बंद रहेंगे स्कूल!

बोर्ड के अलावा दूसरी परीक्षाओं पर संशय, केस घटे तो तीसरे सप्ताह तक दोबारा खुल सकते हैं स्कूल

लखनऊ। कोरोना संक्रमण के कारण प्रदेश में 30 जनवरी तक शहरी इलाकों में स्कूल बंद हैं। इधर, प्रदेश में लगातार कोरोना के केस और मौतों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। ऐसे में 31 जनवरी के बाद स्कूलों के खुलने की उम्मीद कम नजर आ रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि 14 फरवरी के बाद केस कम हुए तो स्कूल खुलने की संभावना बन सकती है। हालांकि शिक्षा विभाग ने स्कूल खोलने या नहीं खोलने को लेकर राज्य सरकार को किसी तरह का प्रस्ताव फिलहाल नहीं भेजा है। लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि स्कूल खुलने का निर्णय लेने में समय लगेगा। इस बीच परीक्षाओं को लेकर संशय बना हुआ है। दरअसल, स्कूल खोलने या नहीं खोलने का फैसला शिक्षा विभाग के बजाय हेल्थ डिपार्टमेंट करेगा। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद ही स्कूल खुल सकते हैं। आज की स्थिति में उम्मीद नहीं है कि हेल्थ डिपार्टमेंट ऐसी कोई स्वीकृति देगा। बुधवार को ही राज्य के 33 में से सिर्फ छह जिलों में कोविड पॉजिटिव की संख्या सौ से कम है। बाकी 27 जिलों में कोरोना पॉजिटिव केस का प्रतिदिन का आंकड़ा सौ से ज्यादा है। तीन जिलों में तो यह हजार से ज्यादा है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि फरवरी के दूसरे या तीसरे सप्ताह तक ही स्कूल खुलने की संभावना बन सकती है।

परीक्षा को लेकर भी संशय
कोविड के चलते फरवरी में भी स्कूल नहीं खुले तो गैर बोर्ड कक्षाओं की परीक्षाएं भी खतरे में पड़ सकती हैं। शिक्षा विभाग इन विकल्पों पर विचार कर रहा है कि किस तरह स्टूडेंट्स की मार्किंग की जा सकती है। हाफ इयरली एग्जाम तक के मार्क्स स्कूल के पास हैं। इसी के आधार पर रिजल्ट दिया जा सकता है। शिक्षा विभाग ने पिछले दिनों तीन महीने का शेड्यूल जारी कर दिया था। दरअसल, ये शेड्यूल भी इसी आधार पर निकाला गया है कि स्कूल मार्च तक नहीं खुले तो कैसे पढ़ाई करानी है। बोर्ड परीक्षाएं होना तय
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर की दसवीं और बारहवीं के साथ बोर्ड पैटर्न पर होने वाली आठवीं की परीक्षाएं होना तय माना जा रहा है। आठवीं बोर्ड के फॉर्म तीस जनवरी तक ही भरे जा रहे हैं। इसकी तारीख में बढ़ोतरी हो सकती है। दरअसल, कोरोना की पहली लहर में भी बोर्ड परीक्षाएं हुई थी। तब से इस बार रोगियों की संख्या कम है और अस्पताल में भर्ती रोगियों की संख्या भी बहुत कम है।

हाई स्कूल इंटरमीडिएट परीक्षा 2021 का फर्जी कार्यक्रम वायरल

हाई स्कूल इंटरमीडिएट परीक्षा कार्यक्रम 2021

लखनऊ। कुछ शराराती तत्वों ने इंटरनेट मीडिया पर उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की इंटर तथा हाईस्कूल परीक्षा 2021 का फर्जी कार्यक्रम वायरल कर दिया। इसमें पांच जून से परीक्षा कार्यक्रम को देखकर प्रदेश के लाखों छात्र-छात्राओं के होश उड़ गए। इस बीच उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव ने इसका खंडन करने के साथ ही इसको वायरल करने वाले के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की बात कही है।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस संक्रमण के कारण प्रदेश सरकार ने सीबीएसई और आइसीएससी की तर्ज पर उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद यानी यूपी बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा 2021 को स्थगित कर दिया है। इसके बाद बोर्ड कोविड संक्रमण की स्थिति में कुछ सुधार होने के बाद जुलाई के पहले हफ्ते तक इंटर की परीक्षा कराने की योजना बना रही है।

इसी बीच सोमवार को इंटरनेट मीडिया पर परीक्षा कार्यक्रम वायरल हो गया। मैसेज में यूपी बोर्ड की हाईस्कूल इंटरमीडिएट परीक्षा कार्यक्रम 2021 को पांच से 25 जून के मध्य में सम्पन्न कराने का संदेश है। इसके साथ ही इसमें निर्देश है कि कोविड-19 के नियमों को ध्यान मे रखते हुए परीक्षा संपन्न कराई जाएगी। सूचना मिलते ही उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने इसका खंडन करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश बोर्ड परीक्षा-2021 की कोई समय सारिणी नहीं जारी हुई है। वायरल शेड्यूल पूरी तरह से फर्जी है।

यूपी बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने कहा कि यह पूरी तरह फर्जी है। यह नितांत ही गलत कृत्य है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से आग्रह किया है कि इस फर्जी कार्यक्रम का संज्ञान न लें, इनकी अनदेखी करें। इस मामले में एफआईआर दर्ज कराएंगे। इस तरह की फर्जी सूचना प्रसारित करने वालों पर शीघ्र ही कड़ी कार्रवाई भी होगी।

मई के पहले सप्ताह से हो सकती हैं बोर्ड परीक्षाएं!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाएं 24 अप्रैल से 12 मई तक कराने की तैयारियां चल रही थीं। वहीं राज्य निर्वाचन आयोग भी 23 अप्रैल तक चार चरणों में मतदान प्रक्रिया पूरी करने को तत्पर था। इस बीच हाईकोर्ट द्वारा फिर से आरक्षण कराने के निर्देश पर राज्य सरकार ने नए सिरे से आरक्षण प्रक्रिया शुरू कराई। अब 27 मार्च को आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के साथ आयोग भी चुनाव की अधिसूचना जारी करने की तैयारी में है।

चुनाव प्रक्रिया को चाहिए 42 दिन: राज्य निर्वाचन आयोग के सूत्रों का कहना है कि होली से ठीक पहले 27 मार्च को अधिसूचना जारी होने से उसे विधिवत चुनाव कराने के लिए 42 दिन चाहिए। चार चरण में जिलेवार सभी पदों का एक साथ चुनाव कराने के लिए 42 दिन का समय होने पर प्रत्येक चरण में प्रचार के लिए एक सप्ताह का समय दिया जा सकेगा। ऐसे में आयोग चाहता है कि यूपी बोर्ड की परीक्षाएं मई के पहले सप्ताह तक टल जाएं ताकि मतगणना आदि भी उससे पहले करा ली जाए।

पहले पंचायत चुनाव, फिर बोर्ड परीक्षाएं: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा का भी दायित्व संभाल रहे उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा का कहना है कि पंचायत चुनाव के बाद ही बोर्ड परीक्षाएं कराई जाएंगी। ऐसे में बोर्ड परीक्षाएं 24 अप्रैल से तो नहीं होंगी। वहीं सूत्रों का कहना है कि माध्यमिक शिक्षा विभाग बोर्ड परीक्षाएं और टालने के पक्ष में नहीं हैं। अधिकारी 10 जून के आसपास नतीजे घोषित करना चाहते हैं। इधर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की परीक्षाएं चार मई से शुरू होने के कारण सम्भावना है कि यूपी बोर्ड की परीक्षाएं भी तीन-चार मई से शुरू कराई जाएं।

बोर्ड परीक्षाएं एक सप्ताह आगे बढ़ाने पर विचार: अपर मुख्य सचिव पंचायतीराज मनोज कुमार सिंह का कहना है कि पंचायत चुनाव के मद्देनजर बोर्ड परीक्षाएं एक सप्ताह आगे बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। आयोग के सूत्रों का कहना है कि 30 अप्रैल तक का भी समय मिल जाने पर चार चरणों में मतदान की प्रक्रिया तो पूरी ही कर ही ली जाएगी। मतगणना तीन-चार मई को कराई जा सकती है। हाईकोर्ट के आदेशानुसार आयोग को जनता से चुने जाने वाले पंचायतों के चारों पदों का चुनाव 10 मई तक कराना है।

यूपी बोर्ड परीक्षा में इस बार कई बदलाव

लखनऊ (धारा न्यूज़): यूपी बोर्ड परीक्षाएं अप्रैल में करने की तैयारी है! सीबीएसई की दसवीं व बारहवीं की बोर्ड परीक्षा 4 मई से शुरू होने के ऐलान के बाद यूपी बोर्ड ने भी तैयारियां शुरू कर दी है। 14 जनवरी को होने वाली बैठक में यूपी बोर्ड परीक्षाओं की तारीखों पर अंतिम निर्णय होगा। वैसे भी यूपी में 31 मार्च को पंचायत चुनावों की समाप्ति के बाद ही यूपी बोर्ड परीक्षाएं करवाई जाएंगी! इस समय स्कूलों में प्री बोर्ड की परीक्षाएं चल रही हैं।

बदली नजर आएगी परीक्षा केंद्रों की तस्वीर:
पिछली बार तक एक परीक्षा केंद्र पर अधिकतम 1200 विद्यार्थी तक हो सकते थे लेकिन इस बार इसे घटाकर अधिकतम 800 कर दिया गया है। हर विद्यार्थी को 20 वर्ग फीट की जगह 36 वर्ग फीट का स्पेस मिलेगा। यूपी बोर्ड के मानकों के मुताबिक 500 वर्ग फीट के कमरे में सिर्फ 14 से 15 छात्र ही बैठेंगे। इससे दो छात्रों के बीच काफी स्पेस होगा।

परीक्षा केंद्र हुए दोगुने: 2020 में जहां 7783 परीक्षा केंद्र थे, वहीं इस बार करीब 14000 परीक्षा केंद्र होंगे। इतने अधिक केद्रों पर शिक्षकों की तैनाती के चलते यह मुमकिन नहीं हो पाएगा कि हर रूम में पिछले वर्षों की तरह दो-दो शिक्षक बतौर निरीक्षक तैनात किए जाएं। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए बोर्ड ने भी नियम में ढील दे दी है और कहा है कि हर रूम में एक निरीक्षक ही तैनात हो सकता है।यूपी बोर्ड 11 जनवरी तक परीक्षा केंद्रों की सूची जारी कर देगा। इसके साथ ही विद्यार्थियों को आवंटित परीक्षा केंद्रों की लिस्ट भी जारी कर दी जाएगी। इसके बाद फाइनल परीक्षा केंद्रों की सूची 9 फरवरी तक जारी होगी।

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यूपी बोर्ड परीक्षा होंगी पंचायत चुनाव के बाद!

लखनऊ (धारा न्यूज़) माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाई स्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा 2021 पंचायत चुनाव के बाद आयोजित की जाएंगी! बोर्ड परीक्षा के लिए उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा की अध्यक्षता में 14 जनवरी को होने वाली बैठक में निर्णय लिया जाएगा।

बताया जा रहा है कि बोर्ड परीक्षा के लिए पंचायत चुनाव के प्रस्तावित कार्यक्रम का इंतजार हो रहा है। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित विद्यालय परीक्षा केंद्र भी हैं, उन्हें पंचायत चुनाव के लिए मतदान केंद्र भी बनाया जाएगा। चुनाव और परीक्षा दोनों में ही शिक्षकों की ड्यूटी भी लगाई जाएगी। इसलिए परीक्षा पंचायत चुनाव के बाद कराने की योजना है। यूपी में ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य के चुनाव इस बार एक साथ होंगे। अभी तक की तैयारियां मार्च 2021 में चुनाव कराने की हैं। आरक्षण का फार्मूला जल्द तय हो जाएगा। वार्डों के आरक्षण की प्रक्रिया फरवरी के तीसरे सप्ताह तक पूर्ण कर ली जाएगी।

Covid-19 के चलते प्रदेश में पंचायत चुनाव समय से नहीं हो पाए हैं। ग्राम पंचायतों में 26 दिसंबर से विकास खंडों के सहायक विकास अधिकारियों (एडीओ पंचायत) को प्रशासक नियुक्त कर दिया गया। जिला पंचायत अध्यक्ष का कार्यकाल पूरा होने पर जिलाधिकारी और क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष (ब्लाक प्रमुख) का कार्यकाल पूरा होने पर उप जिलाधिकारी (एसडीएम) को प्रशासक तैनात किया जाएगा।

विदित हो कि शासन ने पंचायत चुनावों को कराने के लिए युद्ध स्तर पर तैयारी प्रारंभ कर रखी है। सरकार की मंशा मार्च में पंचायत चुनाव कराने की है। पिछली बार ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत सदस्य के चुनाव एक साथ हुए थे। क्षेत्र पंचायत सदस्य व जिला पंचायत सदस्य के चुनाव अलग से हुए थे। इस बार समय बचाने के लिए चारों पदों के चुनाव एक साथ कराने की तैयारी है।

एक मतदाता को इस बार लगानी होगी चार बैलेट पेपर पर मुहर: एक मतदाता को इस बार चार बैलेट पेपर पर मुहर लगानी होगी। मतदाताओं की सुविधा के लिए प्रत्येक पोलिंग स्टेशन पर ग्राम प्रधान-ग्राम पंचायत सदस्य और बीडीसी-जिला पंचायत सदस्य के लिए अलग-अलग बूथ बनाए जाएंगे। यानी, प्रत्येक बूथ में वोटर को दो बैलेट पेपर देकर भेजा जाएगा।

CBSE 10वीं और 12वीं कक्षा के बोर्ड Exams 4 मई से, नतीजे 15 जुलाई तक

CBSE 10वीं और 12वीं कक्षा के बोर्ड Exams का बिगुल बजा

4 मई से शुरू होंगे Exams- 15 जुलाई तक आएंगे नतीजे, केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने की घोषणा

नई दिल्ली (धारा न्यूज): केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की कक्षा 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा 2021 की तारीखों का ऐलान हो गया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि परीक्षाएं 4 मई से प्रारंभ होंगी, जिन्हें 10 जून तक पूरा कर लिया जाएगा, नतीजे 15 जुलाई तक आएंगे।

10वीं व 12वीं का प्रैक्टिकल एक मार्च से शुरू होगा। सीबीएसई की ओर से जल्द ही डेट शीट जारी की जाएगी। निशंक ने कहा- हमने अपने बच्चों का साल खराब नहीं होने दिया। सुरक्षा, सजगता के साथ हमने परीक्षा कराई और उनका साल खराब होने से बचाया है। छात्रों ने भी जिस मनोबल से काम किया, यह अद्भुत उदाहरण है। हमारे देश में 33 करोड़ छात्र-छात्राएं हैं। यह अमेरिका की कुल आबादी से भी ज्यादा है। डिजिटल लर्निंग पर उन्होंने कहा- कोविड-19 के संकट के दौरान भी हमारे छात्रों और हर किसी ने चुनौतियों का सामना किया। अध्यापकों ने योद्धा बनकर काम किया। डिजिटल पढ़ाई हुई। छात्र-छात्राओं ने खुद को तैयार किया। कुछ छात्र-छात्राएं हैं, जिनके पास स्मार्ट फोन नहीं था, लेकिन हमने टेलीविजन और रेडियो के माध्यम से ऐसे छात्रों के लिए काम किया।

आम तौर पर सीबीएसई बोर्ड में प्रैक्टिकल परीक्षाओं की शुरुआत जनवरी में हो जाती है और लिखित परीक्षाएं फरवरी के आस-पास होती हैं। इस साल कोरोना के कारण पहली बार ऐसा हो रहा है कि बोर्ड परीक्षाएं मई में और प्रैक्टिकल मार्च में हो रहे हैं। इससे पहले डॉ़ निशंक ने ट्वीट करके कहा,” मुझे विश्वास है कि सीबीएसई द्वारा आयोजित 10वीं एवं 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में प्रविष्ट होने वाले हमारे विद्यार्थी पूर्ण लगन एवं मेहनत से बेहतर तैयारी कर रहे होंगे।”

उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस महामारी के चलते लगाए गए लॉकडाउन के बाद देशभर के सभी स्कूल मार्च में बंद कर दिए थे। अक्तूबर में कुछ राज्यों ने आंशिक तौर पर स्कूलों को दोबारा खोलने की शुरुआत की थी। हालांकि, कुछ राज्यों ने संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए अपने यहां अभी तक स्कूलों को बंद ही रखा है।

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