आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को चुनाव समेत अन्य दूसरे कामों में लगाने पर रोक

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को चुनाव समेत अन्य दूसरे कामों में लगाने पर रोक। कोर्ट का कहना, चुनाव या किसी अन्य काम में ड्यूटी से धात्री, गर्भवती समेत अन्य के स्वास्थ्य पर पड़ेगा गंभीर असर।

लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को चुनाव समेत अन्य दूसरे कामों में लगाने पर रोक लगा दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अदालत ने अपने आदेश की प्रति मुख्य सचिव को भेजा है, जिससे कि वह संबंधित जिलाधिकारियों को जरूरी निर्देश जारी कर सकें। विदित हो कि प्रदेश में 1.89 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को एक बड़ी राहत देते हुए उनकी ड्यूटी चुनाव समेत अन्य कार्यों में लगाने पर रोक लगा दी है। लखनऊ बेंच के न्यायमूर्ति आलोक माथुर की एकल पीठ ने एक रिट पर यह फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति आलोक माथुर की एकल पीठ ने यह फैसला मनीषा कनौजिया व एक अन्य की याचिका पर दिया। याचियों का कहना था कि वह बाराबंकी जिले के आंगनबाड़ी केंद्र सिटी गुलेरिया गरदा में बतौर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में कार्यरत हैं। प्रशासन ने उन्हें स्थानीय निकाय चुनाव में बतौर बूथ लेवल अफसर (बीएलओ) की ड्यूटी में लगाया है। यह केंद्र और राज्य सरकार की आदेशों व निर्देशों में खिलाफ है। इस तैनाती से क्षेत्र में बच्चों व माताओं के स्वास्थ्य की देखभाल की व्यवस्था प्रभावित होगी। याचियों का तर्क था कि चुनाव के काम में अन्य ग्राम स्तर के कर्मियों को लगाया जा सकता है।

दूसरी ओर बाराबंकी के डीएम व अन्य पक्षकारों की ओर से जवाब में कहा गया कि चुनाव का कार्य सर्वोच्च अहमियत वाला है। ऐसे में सभी अफसरों को इसमें सहयोग करना होता है। इस पर कोर्ट ने कहा कि इन कार्यकर्ताओं का काम काफी अहमियत वाला होता है। इनकी चुनाव या किसी अन्य काम में ड्यूटी से धात्री, गर्भवती समेत अन्य के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ेगा। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने अपना आदेश जारी कर दिया है।

इस सम्बन्ध में महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ उप्र के अध्यक्ष एवं हिन्द मजदूर सभा के राष्ट्रीय सचिव गिरीश पाण्डेय ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को बच्चों के देख-रेख के अलावा चुनाव, जनगणना, कोरोना आदि ड्यूटी में लगा दिया जाता था। इसके एवज में आंगनबाड़ी महिलाओं को बहुत निम्न मानदेय दिया जाता है। इस कारण आंगनबाड़ी महिलाएं मानसिक रूप से परेशान रहती हैं।

इन्ही समस्याओं को देखते हुए बाराबंकी की महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ उप्र की जिलाध्यक्ष मनीषा कन्नौजिया द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में रिट दायर की गयी। इस विषय पर न्यायमूर्ति आलोक माथुर की एकल पीठ ने फैसला सुनाते हुए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को चुनाव समेत अन्य दूसरे कामों में ड्यूटी लगाने पर रोक लगा दी।

याचिकाकर्ता और वकील का आभार: उधर फैसला आने के बाद संगठन द्वारा लोहिया मजदूर भवन नरही, लखनऊ में एक बैठक का आयोजित कर याचिकाकर्ता मनीषा कन्नौजिया को माला पहनाकर उनका अभिनन्दन किया गया। बैठक में फैसले का स्वागत करते हुए उच्च न्यायालय को धन्यवाद देते हुए दायर याचिका की अधिवक्ता अभिलाषा पाण्डेय को भी संगठन द्वारा आभार जताया गया।

संगठन के अध्यक्ष ने बताया कि 62 वर्ष पूर्ण कर चुकी आंगनबाड़ी महिलाओं को बिना ग्रेच्युटी व पेंशन के जबरन उनकी सेवा समाप्त कर दिया गया, इस पर भी संगठन की तरफ से हाईकोर्ट में याचिका दायर है। उन्होंने आशा जताई है कि 62 वर्ष पूर्ण करने वाली महिलाओं के पक्ष में भी न्यायालय न्याय जरूर करेगा ।

नमामि गंगे: गंगा सफाई का क्या है जमीनी सच?

गंगा सफाई का क्या है जमीनी सच? सरकार के दावों पर नाराज क्यों है हाईकोर्ट?


लखनऊ: उत्तर प्रदेश में गंगा को प्रदूषण मुक्त करने की जमीनी स्थिति क्या है? सरकार का दावा है कि तेजी से काम हो रहा है। नमामि गंगे प्रोजैक्ट से गंगा की अविरलता और निर्मलता दोबारा प्राप्त हुई है। वहीं दूसरी तरफ हाईकोर्ट का मानना है कि गंगा प्रदूषण मुक्त करने के काम में तमाम विभागों में तालमेल का ही अभाव है। हाईकोर्ट काे कहना पड़ रहा है कि रिपोर्ट बहुत अच्छी है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और दिखाई दे रही है। रिपोर्ट में नाले टैप है, गंदा पानी नहीं जा रहा। लेकिन गंगा का प्रदूषण खत्म नहीं हो रहा, जितना उत्सर्जन है, शोधन क्षमता उससे काफी कम है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि गंगा सफाई को लेकर सच क्या है?
गंगा सफाई को लेकर खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सराहना करते हुए कहते हैं कि पहले गंगा का जल आचमन योग्य नहीं होता था लेकिन आज गंगा में डॉल्फिन भी दिखाई पड़ती है। सीएम योगी ने मंगलवार को ग्रेटर नोएडा में आयोजित 5 दिवसीय इंडिया वाटर वीक-2022 के दौरान कहा कि प्रदेश में पहले गंगा का सबसे क्रिटिकल प्वाइंट कानपुर हुआ करता था, लेकिन आज नमामि गंगे प्रोजेक्ट से कानपुर का सीसामऊ सीवर प्वाइंट सेल्फी प्वाइंट बन गया है। इतना ही नहीं नमामि गंगे परियोजना के पहले और बाद के बदलाव का असर अब अविनाशी काशी में भी दिखाई पड़ता है। पहले गंगा का जल आचमन करने योग्य नहीं होता था। एनडीआरएफ की टीम ने बताया कि दो से तीन दिन गंगा में जाने के कारण शरीर पर लाल-लाल चकत्ते पड़ जाते थे,  लेकिन आज गंगा में डॉल्फिन भी दिखाई पड़ती हैं। गंगा की अविरलता और निर्मलता दोबारा नमामि गंगे प्रोजेक्ट से प्राप्त हुई है।

विभागों, निगमों और अधिकरणों के हलफनामे विरोधाभासी
वहीं दूसरी तरफ इलाहाबाद हाईकोर्ट गंगा प्रदूषण के लिए चल रहे सरकारी काम से खुश नहीं है। हाईकोर्ट ने अब गंगा प्रदूषण मामले में विभागों, निगमों व अधिकरणों में तालमेल न होने और विरोधाभासी हलफनामा दाखिल कर एक-दूसरे को जवाबदेह ठहराने पर सख्त रवैया अपना लिया है। कोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वह इस मामले में आपसी तालमेल बैठाने के लिए सभी विभागों के अधिकारियों की एक कमिटी गठित करें, जो प्रदेश के महाधिवक्ता को कोर्ट की कार्यवाही में सहयोग करेंगे। कोर्ट ने इसके लिए मुख्य सचिव को जरूरी दिशा-निर्देश जारी करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने महाधिवक्ता अजय कुमार मिश्र से कहा है कि सभी विभागों, निगमों, स्थानीय निकायों व अधिकरणों की तरफ से पर्यावरण सचिव का आदेशों के अनुपालन पर एक हलफनामा दाखिल करें।

केंद्रीय प्रदूषण नियमंत्र बोर्ड और आईआईटी कानपुर की रिपोर्ट में भिन्नता
कोर्ट में जल निगम ग्रामीण के अधिवक्ता ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट व गंगा जल प्रदूषण पर दाखिल रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए और कहा कि आईआईटी कानपुर की रिपोर्ट बोर्ड की रिपोर्ट से भिन्न है। कोर्ट ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिवक्ता कुंवर बाल मुकुंद सिंह से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। उन्होंने जानकारी लेने के लिए समय मांगा। दूसरी तरफ, कोर्ट ने राष्ट्रीय ग्रीन ट्राइब्यूनल और केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के प्रदूषण मानकों में भिन्नता को लेकर एएसजी आई शशि प्रकाश सिंह व भारत सरकार के अधिवक्ता राजेश त्रिपाठी से जानकारी मांगी है। जनहित याचिका की अगली सुनवाई एक दिसंबर को होगी।

रिपोर्ट अच्छी लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और दिख रही: हाईकोर्ट
में याचिका की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल, न्यायमूर्ति एमके गुप्ता और न्यायमूर्ति अजित कुमार की फुल बेंच कर रही है। भारत सरकार के एएसजीआई ने जल शक्ति मंत्रालय की तरफ से दाखिल हलफनामे में गंगा स्वच्छता अभियान के मद में 3000 करोड़ धन देने व खर्च का ब्योरा पेश किया और कहा कि केंद्र सरकार इसकी मानिटरिंग कर रही है। कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट बहुत अच्छी है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और दिखाई दे रही है। रिपोर्ट में नाले टैप है, गंदा पानी नहीं जा रहा, लेकिन गंगा का प्रदूषण खत्म नहीं हो रहा, जितना उत्सर्जन है, शोधन क्षमता उससे काफी कम है

पुलिस की प्रभावी पैरवी से 9 आरोपियों को कारावास और जुर्माना

बिजनौर। जनपदीय पुलिस व अभियोजन द्वारा प्रभावी पैरवी करते हुए धारा 324/149 भादवि0 के 05 अभियुक्तगणों को 02-02 वर्ष का साधारण कारावास व 17-17 हजार रुपए के अर्थ दण्ड से दण्डित कराया गया। इसी के साथ धारा 308 भादवि0 के 04 अभियुक्तगणों को 03~03 वर्ष के साधारण कारावास व 50-50 हजार रुपए के अर्थ दण्ड से दण्डित कराया गया है।

पुलिस कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार पुलिस अधीक्षक, जनपद बिजनौर द्वारा जनपदीय पुलिस को न्यायालय में विचाराधीन अभियोगों की प्रभावी पैरवी हेतु निर्देशित किया गया था। इसी क्रम में विशेष न्यायाधीश (ई०सी० एक्ट)/ अपर सत्र न्यायाधीश, बिजनौर में विचाराधीन थाना को0 देहात के मु0अ0सं0 77ए/11 धारा 147,148,323/149, 324/149,506 भादवि0 की लगातार समीक्षा की जा रही थी। साथ ही मॉनिटरिंग सैल, स्थानीय पुलिस व पैरोकारों द्वारा प्रभावी पैरवी की गई। प्रभावी पैरवी से विशेष न्यायाधीश ( ई०सी० एक्ट)/ अपर सत्र न्यायाधीश, बिजनौर द्वारा दिनांक 15.10.2022 को अभियुक्त 1. सोनू, 2. पतराम पुत्रगण लक्ष्मण सिंह, 3. सुमित्रा पत्नी लक्ष्मण सिंह, 4. लक्ष्मण सिंह पुत्र बल्देवा, 5. वीरेन्द्र पुत्र हेतराम सिंह समस्त निवासीगण ग्राम मखवाड़ा थाना को0 देहात जनपद बिजनौर को 02-02 वर्ष का सश्रम कारावास व 17-17 हजार रुपए के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया है। अर्थदण्ड न अदा किये जाने की दशा में 01-01 माह के अतिरिक्त कारावास से दण्डित किया जायेगा।

वहीं दूसरी ओर विशेष न्यायाधीश (ई०सी० एक्ट)/ अपर सत्र न्यायाधीश, बिजनौर में विचाराधीन थाना को0 देहात के मु0अ0सं0 77/11 धारा 452,308/34,323/34,325/34 भादवि0 की लगातार समीक्षा की जा रही थी। विशेष न्यायाधीश (ई०सी० एक्ट)/ अपर सत्र न्यायाधीश, बिजनौर द्वारा दिनांक 15.10.2022 को अभियुक्त 1. विजय सिंह, 2. गजेन्द्र सिंह, 3. ब्रजपाल सिह व 4. सुभाष पुत्रगण अमर सिंह समस्त निवासीगण ग्राम मखवाड़ा थाना को0 देहात जनपद बिजनौर को 03-03 वर्ष का साधारण कारावास व 50-50 हजार रुपए के अर्थ दण्ड से दण्डित किया गया है। अर्थदण्ड न अदा किये जाने की दशा में 02-02 माह के अतिरिक्त कारावास से दण्डित किया जायेगा। माननीय न्यायालय के फैसले से जनमानस में सुरक्षा का भाव पैदा होगा तथा अपराधियों में भय का माहौल व्याप्त होगा ।

पशु विभाग के अधिकारी सहित दो के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म व धोखाधड़ी में मुकदमा

कोर्ट के आदेश पर पशु विभाग के अधिकारी सहित दो के विरुद्ध सामूहिक दुष्कर्म व धोखाधड़ी में मुकदमा दर्ज

बिजनौर। स्योहारा पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर पशु विभाग के एक अधिकारी सहित दो के विरुद्ध सामूहिक दुष्कर्म व धोखाधड़ी के आरोप में मुकदमा दर्ज किया है।

बिजनौर शहर निवासी एक महिला ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि छह माह पूर्व वह अपने परिवार संग गुलावठी जिला बुलंदशहर मजदूरी करने गई थी, जहाँ उसकी मुलाकात पशु विभाग में अधिकारी त्रिवेन्द्र निवासी जमालपुर मान उर्फ़ पोटा थाना नूरपुर से हुई। उसने कहा कि पशु विभाग की ओर से वह बकरी पालन के लिए बैंक से पांच छह लाख रुपए का लोन दिला देगा, जिसमें आधे की छूट भी रहती है। उसने बैंक लोन की कार्यवाई के लिए त्रिवेंद्र को पांच हजार रुपए बैंक की पासबुक आधार कार्ड आदि भी दिया। पीड़िता का आरोप है कि 14 अगस्त को त्रिवेंद्र उसके घर आया और उसने स्योहारा एक बैंक अधिकारी से मिलने को कहा।

इस पर वह त्रिवेंद्र पर विश्वास करके उसके साथ स्योहारा चली आई। वहां पर त्रिवेंद्र ने उसे कोल्ड ड्रिंक पिलाई, जिसे पीकर उसे बेहोशी छाने लगी। इसके बाद त्रिवेंद्र व उसके साथी दीक्षित ने उसके साथ दुष्कर्म किया | दुष्कर्म के बाद दोनों बेहोशी की हालत में उसे स्योहारा नूरपुर रोड पर नहर के पास छोड़ कर फरार हो गये। पीड़िता का आरोप है कि पुलिस ने भी उनकी रिपोर्ट नहीं लिखी। कोर्ट ने पीड़िता की तहरीर पर स्योहारा पुलिस को मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए। पुलिस ने त्रिवेंद्र व दीक्षित के विरुद्ध सम्बंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दिया है। थानाध्यक्ष राजीव चौधरी ने मुक़दमे की पुष्टि की है। वहीं पशुधन प्रसार अधिकारी त्रिवेन्द्र कुमार का कहना है कि उसकी बहन सुधा की शादी जैतरा धामपुर में हुई थी। उसके ससुरालजनों ने दहेज की मांग की थी, जिस कारण सुधा के ससुराल वालों पर उसने दहेज का मुकदमा दर्ज कराया था।  सुधा के ससुराल वालों ने उस पर फर्जी दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया है। वह पूरी तरह से निर्दोष है।

प्रशासनिक के स्थान पर न्यायालय के आदेशों को दें प्राथमिकता: डीएम लखनऊ

लखनऊ। गुरुवार को कलक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी सूर्य पाल गंगवार द्वारा लखनऊ बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ परिचायात्मक बैठक आहूत की गई। बैठक में बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों व जिला स्तरीय अधिकारियों द्वारा एक दूसरे को अपना परिचय दिया गया। जिलाधिकारी द्वारा बताया गया कि प्रशासनिक आदेशों के स्थान पर न्यायालय के आदेशों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि पैमाईश सम्बंधित प्रकरणों को धारा 24 के अंतर्गत उप जिलाधिकारी न्यायालय में वाद दाखिल कराते हुए पैमाईश कराई जाए। जिलाधिकारी ने कहा कि बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों से सदभावपूर्ण वार्तालाप किया जाये, जिससे आपसी समान्जस बनाया जा सकें। साथ ही वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से भी समय-समय पर मीटिंग करने की व्यवस्था को सुनिश्चित किया जाए। सभी अधिकारीगण व अधिवक्तागण राजस्व के अंग है।

जिलाधिकारी ने कहा कि सभी अधिकारियों द्वारा दैनिक कार्यो का समय अवधि में निस्तारण किया जाए, सभी कोर्ट में दैनिक कार्य हो, तहसीलों में पैमाइश आदि के कार्यो का निस्तारण समय से हो, ताकि कोई समस्या उत्पन्न न हो। कोर्ट में वादों का समयबद्ध निस्तारण करनें की व्यवस्था की जाये और प्रशासनिक दयत्वों को निभाते हुए रेगूलर कार्ट की जाये। समस्त अधिवक्तागण तथ्यात्मक रुप से कोर्ट में वाद प्रतिवाद करने के लिए प्रतिबद्ध हों तथा नियमों के आधार पर पक्ष प्रस्तुत किया जाये, जिसके लिए अपने जूनियर के माध्यम से तथ्यों को कोर्ट में पेश किया जाये ताकि कोर्ट के वादों का निस्तारण नियमानुसार गुण्वत्तापूर्ण तथा सही समय पर किया जा सके। बाद में जिलाधिकारी द्वारा बार एसोसिएशन के कार्यालय भवन का भी निरीक्षण किया गया। बैठक में अपर जिलाधिकारी प्रशासन, अपर जिलाधिकारी नगर पूर्वी, अपर जिलाधिकारी एल0ए0 प्रथम, अपर जिलाधिकारी एल0ए0 द्वितीय, समस्त अपर नगर मजिस्ट्रेट, अध्यक्ष बार एसोसिएशन, उपाध्यक्ष बार एसोसिएशन, महामंत्री बार एसोसिएशन सहित समस्त बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों द्वारा प्रतिभाग किया गया।

तहसीलकर्मियों ने दलित की जमीन कर दी दूसरों के नाम!

बिजनौर। सरकारी कर्मचारियों के खेल भी निराले हैं। कभी भी, कहीं भी और कुछ भी कर दें, पता नहीं। बाप बड़ा न भइया, सबसे बड़ा रुपैया के सिद्धांत पर ही होता है काम। ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया है। तहसील बिजनौर के  तीन लेखपालों व एक राजस्व निरीक्षक ने भारी भरकम रकम डकार कर करोड़ों की जमीन पर अन्य लोगों का कब्जा करा दिया।

पीड़िता ऊषा के अनुसार उसके दादा छज्जू सिंह पुत्र ज्ञाना निवासी ग्राम फिरोजपुर मान्डू परगना दारानगर तहसील व जिला बिजनौर, अनुसूचित जाति से चमार थे। उनके एकमात्र पुत्र तेजा सिंह उर्फ तेजपाल थे। तेजा सिंह ऊषा के पिता थे। ऊषा के दादा द्वारा छोड़ी गई आराजी काश्त उसकी माता व भाई के नाम बतौर वारिस आनी चाहिए थी। आरोप है कि विरेन्द्र पाल लेखपाल, पवन लेखपाल, सहजराम लेखपाल व प्रमोद कुमार सैनी राजस्व निरीक्षक ने कागजात में हेराफेरी करके फर्जी तरीके से पीड़िता की पुश्तैनी जमीन अन्य व्यक्तियों के नाम कर दी।

कागजात में हेराफेरी कर जमीन की दूसरों के नाम- महिला ने आरोप लगाया कि उक्त सरकारी कर्मचारियों ने कागजात में हेराफेरी कर उसकी दादिलाही जमीन प्रमोद, आमोद पुत्रगण जसबन्त सिंह निवासी मौ0 नई बस्ती-14 निकट करबला थाना को0 शहर जिला बिजनौर, चेतन पुत्र प्रीतम निवासी ग्राम लखपत नगर थाना कोतवाली शहर जिला बिजनौर, नौबहार, महावीर, सोहन, मोहन पुत्रगण मूला निवासी ग्राम मुन्डूपुर थाना-को०शहर जिला बिजनौर, बलजोर पुत्र गिरवर निवासी ग्राम लक्खीवाला थाना-को०शहर जिला बिजनौर, बलवीर पुत्र गरीबा निवासी ग्राम लक्खीवाला थाना को०शहर जिला बिजनौर, राजीव, संजीव पुत्रगण मुनेशवर, नीरज पुत्र तपेशवर नि०गण ग्राम  पृथ्वीपुर थाना को०शहर जिला बिजनौर के नाम कर दी। पीड़िता ने बताया कि उसके दादा व पिता ने अपनी आराजी काश्त का बैनामा कभी भी किसी के नाम नहीं किया।

आखिर क्या है मामला? छज्जू सिंह पुत्र ज्ञाना के खसरा सं0- 72/1, 173/1, 50/6, 52/1, 53, 54/1, 95/1, 109/1 में 9 बीघा पक्की यानी 27 बीघा जमीन थी। मौजा दारानगर बी0ए0 परगना दारानगर तहसील व जिला बिजनौर में खसरा नं0- 336, 337 में आम का बाग भी उनके हिस्से में ही था। छज्जू सिंह व उनके पुत्र तेजा सिंह उर्फ तेजपाल की मृत्यु के बाद उक्त जमीन उनके पुत्रों के नाम बतौर वारिसान दर्ज होनी थी। आरोप है कि सरकारी कर्मचारियों व आरोपित ग्रामीणों ने आपस में हमसाज होकर  कागजात में हेराफेरी करके छज्जू पुत्र ज्ञाना नाम का फायदा उठाकर महिला की पुश्तैनी जमीन छज्जू सैनी पुत्र गरीबा निवासी ग्राम लक्खीवाला के नाम करवा दी। पीड़िता व परिजनों को इस बात की भनक तक न हुई कि आरोपियों ने माल कागजात में हेराफेरी करके उपरोक्त व्यक्तियों के नाम दर्ज कर दिये हैं। जब ऊषा ने अपनी आराजी काश्त की नकल ली, तब मामला सामने आया।

काम के बदले मांगी रिश्वत- पीड़िता ने बताया कि इस बात को लेकर वह राजस्व निरीक्षक प्रमोद कुमार से मिली तो उसने दादा व पिता द्वारा छोड़ी गई जमीन उसकी मां व भाइयों के नाम करने की एवज में 50 हजार रुपए मांगे। इस बात की शिकायत उच्च अधिकारियों से की तो उक्त सभी उससे रंजिश रखने लगे। यह भी आरोप है कि अधिकारियों ने भी कोई सही कार्यवाही आज तक नहीं की।

घर में घुसकर पीटा, तोड़फोड़- 06 जुलाई 2020 को सुबह 7 बजे प्रमोद, आमोद, चेतन, महावीर, सोहन, मोहन व विरेन्द्र पाल, सहजराम, बलजोरा, प्रमोद कुमार सैनी, संजीव, नीरज और राजीव, बलवीर ने ऊषा की उसके घर में घुसकर जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए जमकर पिटाई की। इस दौरान हमलावर उच्च अधिकारियों से शिकायत करने पर उसके भाइयों को जान से मारने की धमकी देते रहे। उन्होंने उसके घर के सामान को तोड़फोड़ कर तहसनहस कर दिया। शोर सुनकर पहुंचे नरेश, निधि व बहुत से लोगों ने उस को बचाया।

पुलिस अधीक्षक को सौंपा कोर्ट का आदेश: पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक दिनेश सिंह को प्रार्थना पत्र देकर अवगत कराया कि उसने अपनी रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए उपरोक्त मुल्जिमान के विरूद्ध थाना कोतवाली शहर बिजनौर को एक प्रार्थना पत्र दिया था, लेकिन उस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक बिजनौर को भी प्रार्थना पत्र दिया लेकिन उस भी कोई कार्यवाही नहीं हुई। इसके बाद न्यायालय में एडीजे कोर्ट नं- 2 बिजनौर परिवाद सं.- 36/20 उषा बनाम प्रमोद आदि दायर किया था। इस पर न्यायालय ने दिनांक 05-04-2022 को उपरोक्त प्रमोद, आमोद, चेतन, नौबहार, महावीर, सोहन, मोहन, बलजोरा, बलवीर, राजीव, संजीव व नीरज को धारा-323, 504, 506 आई.पी.सी. व 3/1 द,ध, एस०सी०/एस०टी० एक्ट में तलब किया था। वहीं विरेन्द्र पाल लेखपाल, पवन लेखपाल, सहजराम लेखपाल व प्रमोद कुमार सैनी राजस्व निरीक्षक को यह कहते हुए तलब नहीं किया कि धारा-197 सीआरपीसी के अन्तर्गत लोक सेवक के विरूद्ध राज्य सरकार से पूर्व में अनुमति प्राप्त किये जाने के पश्चात ही अभियोग लाया जा सकता है। पीड़िता ने उपरोक्त आदेश के विरूद्ध उच्च न्यायालय में उपरोक्त मुल्जिमान को अभियुक्त बनाने के लिए याचिका अन्तर्गत धारा-482 याचिका सं0-22288/2022 उषा बनाम राज्य सरकार 16 आदि दायर की थी। इस पर उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने दिनांक 28-07-2022 को अपनी रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए पुलिस अधीक्षक बिजनौर के समक्ष प्रार्थना पत्र देने हेतु निर्देशित किया है। इसके अलावा पुलिस अधीक्षक को भी प्रार्थिनी के प्रार्थना पत्र पर अभियोग पंजीकृत कराने हेतु आदेशित किया गया है।

एसपी ने दिए जांच के आदेश: पुलिस अधीक्षक दिनेश सिंह ने सीओ सिटी को पीड़िता ऊषा के प्रार्थना पत्र पर जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने को निर्देशित किया है।

आरोपियों में खलबली: महिला के प्रार्थना पत्र तथा कोर्ट के आदेश की भनक लगते ही आरोपियों में खलबली मच गई है। अब वे जोड़तोड़ की कोशिश में जुट गए हैं। एक तहसील कर्मी प्रमोद कुमार सैनी ने बताया कि बैनामा वर्ष 1960 में हो चुके थे, तब से दो चकबंदी भी निकल चुकी हैं। किसी के भी द्वारा इस मामले में कोई यथोचित पैरवी नहीं की गई।

भावी प्रत्याशी हाजी मोहम्मद रफी मुचलका पाबंद

भावी प्रत्याशी हाजी मोहम्मद रफी मुचलका पाबंदबीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के पोस्टर/फ्लैक्सी के ऊपर लगाई थी अपनी पोस्टर फ्लैक्सी।

बिजनौर। चांदपुर में पोस्टर/फ्लैक्सी के चक्कर में नपे भावी प्रत्याशी। पुलिस ने दो लाख के मुचलकों में पाबंद किया। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के पोस्टर/फ्लैक्सी के ऊपर लगाई थी अपनी पोस्टर फ्लैक्सी।
मामला बिजनौर जिले के तहसील चांदपुर क्षेत्र का है, जहां भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष चौधरी भूपेन्द्र सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने पर शीर्ष नेतृत्व के आभार और शुभकामनाओं के पोस्टर फ्लैक्सी लगे हुए हैं।
निकाय चुनाव को लेकर भावी प्रत्याशी चांदपुर में भी जगह-जगह पोस्टर फ्लेक्सी लगा रहे हैं। चांदपुर में ऐसा मानो जैसा एक तरह से पोस्टर वार चल रहा हो। अब इस पोस्टर वार के चक्कर में बेचारे नगर पालिका परिषद के भावी प्रत्याशी हाजी मोहम्मद नफीस नप गए, जिसका उन्हें भारी खामियाजा भुगतना पड़ा है।

बताया जाता है कि पुलिस रोड गश्त कर रही थी। इसी दौरान देखा कि मोहम्मद नफीस निवासी मोहल्ला काजीजादगान कस्बा व थाना चांदपुर अपने फ्लेक्सी पोस्टर, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के लगे पोस्टर फ्लेक्सी को हटाकर लगवा रहे थे। इसके लिए उन्होंने नगर पालिका से अनुमति भी प्राप्त नहीं की थी। दूसरी ओर यह देखकर लोगों में आक्रोश फैल गया। उनके द्वारा ऐसा काम करने से मना करने पर मोहम्मद नफीस आग बबूला हो गए। मौके पर विवाद बढ़ने लगा।

मना करने पर भी नहीं माने
उधर पुलिस ने शांति भंग होने की आशंका में भावी प्रत्याशी को गिरफ्तार कर लिया और थाने ले आई। फिर उनको न्यायालय भेजा गया। न्यायालय से ₹200000 के मुचलके पर उन्हें जमानत दे दी गई है।

नया गांव हत्याकांड में सभी 8 आरोपी साक्ष्य के अभाव में बरी

बिजनौर। लगभग साढ़े 5 साल पूर्व नया गांव के बहुचर्चित विशाल हत्याकाण्ड के सभी 8 आरोपियों को अदालत ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है।

जानकारी के अनुसार 10 जनवरी 2017 को ग्राम कच्छपुरा व नया गांव के बीच स्थित सरकारी ट्यूबवैल पर नया गांव निवासी संजय के पुत्र विशाल की अज्ञात लोगों ने चाकू से गोदकर व गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस घटना में पेदा निवासी प्रधान अनीस, पूर्व प्रधान इकबाल तथा शमीम, हनीफ, नफीस, इस्तखार, फुरकान व अकबर को नामजद किया गया था। विशाल की हत्या वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान बिजनौर में हुई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुनावी सभा के दिन ही सभा के थोड़ी देर बाद हुई थी। इस हत्याकाण्ड को राजनीतिक रूप व काफी तूल दिया गया था। तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी। मामले की विवेचना सीबीसीआईडी बरेली जोन को दी गई थी। सीबीसीआईडी ने सभी नामजद आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की और सभी अभियुक्तों को जेल जाना पड़ा। अभियुक्त इकबाल, हनीफ और फुरकान करीब तीन साल से जेल में थे।

इस मुकदमे का विचारण अपर जिला सत्र न्यायाधीश डॉ. विजय कुमार के न्यायालय में हुआ। न्यायालय ने आरोपियों के जेल में अधिक समय से होने के कारण त्वरित गति से सुनवाई की। अभियोजन पक्ष के मौके के सभी गवाहों की गवाही के साथ पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर के बयान भी कराये गए। सबूत पक्ष के सभी कागजातों की औपचारिकता को बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं द्वारा स्वीकार कर लेने के बाद अभियोजन के गवाहों व अभियुक्तों के बयान तथा बहस सुनकर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. विजय कुमार ने साक्ष्य के अभाव में सभी अभियुक्तों को निर्दोष मानते हुए बरी कर दिया। अभियुक्तों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र कुमार पूर्व अध्यक्ष जिला बार एसोसिएशन तथा जकावत हुसैन एड. ने पैरवी की।

वोट काटने पर फंसे एसडीएम और तहसीलदार, कोर्ट ने दिये एफआइआर के आदेश

एसडीएम, तहसीलदार समेत 5 के खिलाफ एफआइआर के आदेश। अनुसूचित जाति के व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटाने का मामला। कोर्ट की शरण मे पहुंचा पीड़ित। थाना बढ़ापुर पुलिस को एससी/एसटी एक्ट में मुकदमा पंजीकृत करने के आदेश। प्रशासन में मचा हड़कम्प।

बिजनौर। एससी/एसटी एक्ट के विशेष न्यायाधीश ने धामपुर के तत्कालीन उपजिलाधिकारी विजय वर्धन तोमर एवं तहसीलदार रमेश चौहान के विरूद्ध अनुसूचित जाति के व्यक्ति पवन कुमार का विधान सभा चुनाव 2022 में वोट काटने के मामले में थाना बढ़ापुर के प्रभारी निरीक्षक को एससी/एसटी एक्ट में मुकदमा पंजीकृत कर विवेचना कराने का आदेश दिया है। न्यायालय द्वारा तहसीलदार एवं उपजिलाधिकारी के विरूद्ध मुकदमा पंजीकृत करने के आदेश से प्रशासन में हड़कम्प मच गया है।

जानकारी के अनुसार धामपुर विधान सभा क्षेत्र के आलमपुर गांवमण्डी निवासी पवन पुत्र कृपाल सिंह ने अपने एडवोकेट शमशाद अहमद के माध्यम से विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी न्यायालय, जनपद बिजनौर में 156 (3) द०प्र०सं० में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। प्रार्थना पत्र में न्यायालय को अवगत कराया कि प्रार्थी अनुसूचित जाति का व्यक्ति है, विपक्षी गैर अनुसूचित जाति के हैं। विधान सभा चुनाव 2017, लोक सभा चुनाव 2019 एवं ग्राम पंचायत चुनाव 2021 में मतदाता सूची में प्रार्थी का नाम दर्ज था। प्रार्थी गांव का स्थायी निवासी है। तत्कालीन उपजिलाधिकारी विजय वर्धन तोमर एवं तहसीलदार रमेश चौहान ने अपने पद का दुरूपयोग कर उसका नाम मतदाता सूची से जानबूझ कर काट दिया। इस कारण प्रार्थी मतदान के संवैधानिक अधिकार से वंचित रह गया। संविधान के अनुच्छेद 324 में मतदाता सूची बनाना एवं स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव कराना भारत निर्वाचन आयोग की संवैधानिक ड्यूटी है। आयोग के नियमों के अनुरूप मृतक, डुप्लीकेट एवं टेम्प्रेरी रेजिडेंट, जो निवास स्थान छोड़ कर चले गये हैं, का नाम ही मतदाता सूची से डिलीट किया जा सकता है और इनका नाम भी डिलीट करने से पूर्व पंजीकृत डाक से सूचना देनी अनिवार्य है। अपने प्रार्थना पत्र में पवन ने यह भी उल्लेख किया है कि तत्कालीन उपजिलाधिकारी एवं तहसीलदार, जो निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी एवं सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी थे, उन्होने आयोग के दिशा निर्देशों का उल्लंघन करके कुटरचित मतदाता सूची बनाकर उसका चुनाव में उपयोग किया और प्रार्थी को मतदान से वंचित करा दिया। इस संबंध में पहले थाना अफजलगढ एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, बिजनौर को दोषियों के विरूद्ध मुकदमा पंजीकृत कराने का प्रार्थना पत्र दिया था, जिस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। मजबूर होकर पवन ने विशेष न्यायाधीश एससी / एसटी के न्यायालय में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया, जिस पर विशेष न्यायाधीश ने 30.07.2022 को उक्त प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए उपजिलाधिकारी, तहसीलदार एवं 05 अन्य अज्ञात के विरूद्व एससी / एसटी एक्त के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर 03 दिन के अंदर आख्या न्यायालय को प्रेषित किये जाने के आदेश पारित किये हैं। न्यायालय के आदेश के बाद प्रशासन में हड़कम्प मचा हुआ है।

पवन के एडवोकेट शमशाद अहमद का कहना है कि न्यायालय में 420,467,468,471,120बी,166,167 भा0द०सं० व लोक प्रतिनिधि अधिनियम व 3 (2) 5 एससी/एसटी एक्ट में विवेचना कराये जाने की मांग की गई। उनका कहना था कि जिस प्रकार प्रशासनिक अफसरों ने कमजोर वर्ग के लोगों का वोट काटकर उन्हें मतदान से वंचित किया है, इसकी जिम्मेदारी जिला निर्वाचन अधिकारी, मुख्य निर्वाचन अधिकारी और भारत निर्वाचन आयोग की भी है।

भूमाफिया को झटका, करोड़ों की विवादित भूमि का अहले कमीशन

करोड़ों की विवादित जमीन का अहले कमीशन करने के कोर्ट ने दिये आदेश। दोनों पक्षों के वकील और पुलिस रही मौजूद।

बिजनौर। नहटौर में करोड़ों रुपए की विवादित भूमि का गुरुवार को कोर्ट के आदेश पर अहले कमीशन किया गया। नासिर और सलीम नाम के दोनों पक्षों के वकीलों की देखरेख में अहले कमीशन की कार्यवाही की गई। इस दौरान दोनों पक्षों के वकील उनके चपरासी और पुलिस की मौजूदगी में इस कार्रवाई को अमल में लाया गया। गौरतलब है कि जनपद बिजनौर के थाना नहटौर क्षेत्र के शेटपुर धनेश्वर में स्थित 18 बीघा विवादित भूमि पड़ी है, जिसमें दोनों पक्ष सलीम और नासिर की ओर से कोर्ट में वाद दायर किया गया है।

गुरुवार को कोर्ट ने नासिर के पक्ष में आदेश करते हुए अहले कमीशन का आदेश जारी किया। बता दें कि नहटौर निवासी भूमाफिया सलीम का बातचीत में झूठ जगजाहिर हो रहा है। पहले तो सलीम खुद बोल रहे हैं कि यह जमीन हमने भस्सू से खरीदी थी लेकिन बाद में सलीम का कहना है कि यह जमीन उसने भस्सू के भाई रामू से खरीदी थी। हालांकि कोर्ट ने दोनों वकीलों की दलीलों के बाद नासिर के हक में फैसला सुनाते हुए जमीन के अहले कमीशन का आदेश जारी किया है। पहले भी नासिर अहले कमीशन कराने पहुंचा था, जिसमें भूमाफिया सलीम ने अपनी दबंगई के बल पर नासिर को वहां से भगा दिया था। कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस की सुरक्षा के बीच अहले कमीशन की कार्रवाई की गई है।

जनपद बिजनौर में समाचार, विज्ञापन एवं एजेंसी के लिए संपर्क करें, ब्यूरो चीफ सतेंद्र सिंह 8433047794

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का फैसला मानने को बाध्य नहीं पुतिन!

पुतिन मानेंगे अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का फैसला?


नई दिल्ली (एजेंसी)। यूक्रेन पर हमले को लेकर वर्तमान हालात को देखते हुए यह बिलकुल भी नहीं लगता है कि व्लादिमीर पुतिन अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का फैसला मानेंगे। वो हमले के पहले ही दिन यूक्रेन को कड़ा सबक सिखाने की धमकी दे चुके हैं। इतना ही नहीं, अमेरिका और बाकी पश्चिमी देशों ने पहले ही रूस पर इतना प्रतिबंध लगा दिया है कि पुतिन के पास इस फैसले को न मानने के सिवा कोई चारा नहीं बचा है। एक बात यह भी है कि रूस के पास भी यूएनएससी का वीटो पावर है। ऐसे में दुनिया का यह सबसे शक्तिशाली संगठन भी रूस पर कोई दबाव नहीं बना सकता है। इसलिए माना जा रहा है कि यूक्रेन के इस दांव से रूस की थोड़ी बहुत निंदा के अलावा कुछ खास असर होने वाला नहीं है।

फैसला मानने के लिए बाध्य नहीं है कोई देश-
पहले भी कई बार अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के अधिकार क्षेत्र को लेकर सवाल उठ चुके हैं। विशेषज्ञों की राय है कि कोई भी देश अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का फैसला मानने के लिए बाध्य नहीं है। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय अपना फैसला मनवाने के लिए सबसे पहले संबंधित देशों को सुझाव देता है। इसके बाद वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पास जाता है, जिससे संबंधित देश पर दबाव बनाया जा सके। लेकिन, पहले भी देखा गया है कि कई देश अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का फैसला मानने से इंकार कर चुके हैं। इसमें सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य चीन तो कुख्यात है। चीन ने दक्षिण चीन सागर पर उसके अधिकार को लेकर दिए गए अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के फैसले को मानने से साफ इंकार कर दिया था। वीटो पावर वाले देश को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का फैसला मनवाने में सुरक्षा परिषद की ताकत भी काम नहीं आती।

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय-
अंतरराष्ट्रीय न्यायालय संयुक्त राष्ट्र का एक महत्वपूर्ण न्यायिक शाखा है। इसकी स्थापना 1945 में नीदरलैंड की राजधानी द हेग में की गई थी। इस न्यायालय ने 1946 से काम करना भी शुरू कर दिया था। हर तीन साल में इसके अध्यक्ष का चुनाव किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की वेबसाइट के अनुसार, इसका काम अंतरराष्ट्रीय कानूनी विवादों का निपटारा करना और संयुक्त राष्ट्र के अंगों और विशेष एजेंसियों को कानूनी राय देना है। इसके कर्तव्यों में अंतरराष्ट्रीय कानून के हिसाब से विवादों पर निर्णय सुनाना और संयुक्त राष्ट्र की इकाइयों को मांगने पर राय देना है।

नियुक्त नहीं हो सकते एक देश के दो जज-
अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में कुल 15 न्यायाधीश होते हैं। इनका चुनाव संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद के जरिए होता है। इन जजों का कार्यकाल 9 साल का होता है। अगर कोई जज अपने कार्यकाल के बीच में ही इस्तीफा दे देता है तो, बाकी बचे कार्यकाल के लिए दूसरे जज का चुनाव किया जाता है। इनकी नियुक्ति को लेकर भी काफी सख्त प्रावधान हैं, जैसे एक ही देश के दो जज अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में नियुक्त नहीं हो सकते। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य देशों के जज हमेशा ही अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में नियुक्त होते हैं। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की आधिकारिक भाषा अंग्रेजी और फ्रेंच है। इसी भाषा में यह कोर्ट सुनवाई करता है और फैसले सुनाता है।

4 वर्ष बाद भी नहीं किया हाईकोर्ट के आदेश का पालन

पंचायत ग्रामीण विकास विभाग के अधीन राज्य स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण, भोपाल द्वारा 4 वर्ष बीत जाने के बाद भी नहीं किया गया उच्च न्यायालय जबलपुर के आदेश का पालन।


उच्च न्यायालय द्वारा निरस्त आदेशों को फिर से लागू करने का नायाब कारनामा।


भोपाल। जिला पंचायत पन्ना में जिला समन्वयक, समग्र स्वच्छता अभियान के पद पर पदस्थ मनेन्दु पहारिया को विगत 4 वर्षों से उच्च न्यायालय जबलपुर के द्वारा सेवा में रखे जाने के आदेश उपरांत अभी तक राज्य कार्यक्रम अधिकारी, राज्य स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), भोपाल द्वारा ना तो कार्यादेश दिया गया ना ही पारिश्रमिक दिया जा रहा है।
जिला पंचायत पन्ना में संविदा में पदस्थ जिला समन्वयक मनेन्दु पहारिया ने बताया कि राज्य कार्यालय एवं कलेक्टर पन्ना के आदेशों से अगस्त 2015 में मेरी सेवा समाप्त की गई थी।
उक्त दोनों आदेशों को उच्च न्यायालय जबलपुर में दायर याचिका क्रमांक 14338-2015 में पारित आदेश दिनांक 22.02.2018 के द्वारा निरस्त कर दिया गया एवं विधि अनुसार निर्णय लेने हेतु राज्य कार्यालय को निर्देश प्रदान किए गए। मनेंदु पहारिया द्वारा उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा पारित आदेश के परिपालन में दिनांक 07-03-2018 को जिला पंचायत पन्ना में अपनी उपस्थिति दी गई। उपस्थिति पर कार्यालय जिला पंचायत पन्ना द्वारा राज्य कार्यक्रम अधिकारी, भोपाल को पत्र प्रेषित कर मार्गदर्शन चाहा गया।
मनेन्दु पहारिया ने बताया कि राज्य स्तर पर आज तक मेरे बारे में कोई निर्णय नहीं लिये जाने के कारण कार्यालय मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत पन्ना में मुझे नियमित उपस्थित होने के उपरांत भी कोई कार्य दायित्व नहीं सौंपा जा रहा है, ना ही मुझे पारिश्रमिक प्रदाय किया जा रहा है।
श्री पहारिया ने ये भी बताया कि वह इस संबंध में व्यक्तिगत तौर पर पंचायत ग्रामीण विकास विभाग में आयुक्त, स्वच्छता मिशन ग्रामीण के राज्य कार्यक्रम अधिकारी, संयुक्त आयुक्त आदि को कई बार व्यक्तिगत रूप से समक्ष उपस्थित होकर लिखित मैं आवेदन भी दे चुके हैं, लेकिन कोई निराकरण नहीं  किया गया।
मनेन्दु पहारिया द्वारा सेवा समाप्ती के संबंध में सूचना के अधिकार अंतर्गत चाही गई जानकारी में कार्यालय मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत पन्ना द्वारा प्रेषित पत्र दिनांक 02-11-2021 में स्पष्ट लिखा गया कि मनेन्दु पहारिया को सेवा से हटाने का कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं है साथ ही कलेक्टर विधि शाखा जिला पन्ना को प्रेषित पत्र दिनांक 28-10-2021 में स्पष्ट लेख किया है कि प्रकरण में राज्य शासन द्वारा निर्णय लिया जाना है।
मनेन्दु पहारिया द्वारा बताया गया कि इसके पूर्व कार्यालय मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत पन्ना द्वारा राज्य कार्यक्रम अधिकारी, राज्य स्वच्छ भारत मिशन, भोपाल को प्रेषित पत्र दिनांक 11-02-2021 में स्पष्ट लिखा गया है कि पूर्व में दिनांक 07-03-2018 को भेजे पत्र द्वारा इस प्रकरण में चाहा गया मार्गदर्शन प्राप्त नहीं हुआ है साथ ही जिला पंचायत में लगभग 07 वर्ष के दौरान इनका कार्य अच्छा रहा है।
उच्च न्यायालय द्वारा दिये गये निर्णय, जिला पंचायत पन्ना द्वारा प्रेषित पत्रों एवं मेरे द्वारा किए गए पत्राचार के फलस्वरुप राज्य कार्यक्रम अधिकारी, राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन (ग्रामीण), भोपाल के पत्र दिनांक 17-11-2021 में उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा निरस्त आदेशों को पुन: प्रभावशील कर देने की बात कही है।
कुल मिलाकर कलेक्टर पन्ना एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत पन्ना के पास भी मनेन्दु पहारिया की संविदा सेवा अवधि समाप्त करने का भी कोई आदेश आज दिनांक तक नहीं है।
मनेन्दु पहारिया द्वारा अवगत कराया गया कि राज्य कार्यक्रम अधिकारी, भोपाल द्वारा उन्हें भेजे जाने वाले समस्त पत्र कलेक्टर पन्ना या मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत पन्ना के माध्यम से ही प्रेषित किए जाते हैं।
कार्यालय राज्य कार्यक्रम अधिकारी, राज्य स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण द्वारा मनेन्दु पहारिया को कार्यादेश एवं पारिश्रमिक प्रदान न कर विगत 07 वर्ष से मानसिक एवं आर्थिक रुप से प्रताड़ित किया जा रहा है।

नाराज अधिवक्ताओं ने दिया धरना

बिजनौर। जिला बार एसोसिएशन एंड लाइब्रेरी के अधिवक्ताओं ने जजी परिसर में बैठक की। बैठक अध्यक्ष अजीत पवार एवं महासचिव रामेंद्र सिंह एडवोकेट के संचालन में संपन्न हुई। बैठक में वकीलों ने निर्णय लिया कि कुछ न्यायिक अधिकारियों का व्यवहार अधिवक्ताओं के प्रति सही नहीं है, जो न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप ही नहीं है। वकीलों का आरोप है कि बार-बार सीनियर अधिवक्ताओं को अपमानित किया जाता है, जिससे सीनियर अधिवक्ता भी अपनी पूर्ण बात न्यायालय के समक्ष नहीं रख पाते हैं। जिला बार एसोसिएशन के संज्ञान में यह भी आया कि कुछ न्यायिक अधिकारियों द्वारा भी वकीलों के साथ अशोभनीय व अभद्र व्यवहार किया जाता है जिससे अधिवक्ताओं में रोष है। इसके बाद अधिवक्तागण जिला जज न्यायालय के बाहर धरने पर बैठ गये। शांति व्यवस्था के लिये सीओ सिटी कुलदीप गुप्ता जजी परिसर में मौजूद रहे। अधिवक्ताओं ने न्यायालय से अपने इस व्यवहार को सुधार करने की अपील की है।

बैठक व धरने पर बार अध्यक्ष अजीत पंवार, सचिव रामेंद्र सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष अरविंद शर्मा, कामेंद्र सिंह, अनिल, सुरेंद्र सिंह, अनुज चौधरी, नवदीप सिंह, एस. के. बबली, करतार सिंह, मनोज सेठी, आलोक, सिंह, अतुल सिसौदिया, संजय चौधरी, तारा सिंह, उत्तम कुमार, फहीम अहमद, कुलदीप सिंह, मनोज सिंह, इंद्रवीर सिंह, सौरभ चौधरी, मनोज कुमार, गफ्फार खा, नवदीप सिंह, विवेक चौधरी, आशीष चौधरी आदि अधिवक्ता शामिल रहे।

एक लाख की मांग पूरी न होने पर विवाहिता की हत्या

एक लाख की मांग पूरी न होने पर विवाहिता की हत्या। पति समेत छह के खिलाफ मुकदमा। कोर्ट के आदेश पर हुई रपट।


नूरपुर (बिजनौर)। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने दहेज में एक लाख रुपए की मांग पूरी न होने पर विवाहिता की हत्या के आरोप में पति सहित छः लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। सीओ चांदपुर इस मामले की विवेचना में जुट गये हैं।


शेरकोट के मोहल्ला अचारजान निवासी राजू पुत्र रामकुमार ने न्यायालय में दायर याचिका में कहा कि उसने अपनी पुत्री संगीता की शादी 22 अप्रैल 2021 को नूरपुर के मोहल्ला इस्लामनगर निवासी अरविंद पुत्र रतन के साथ हिंदू रीति रिवाज के अनुसार की थी। उसने अपनी हैसियत के मुताबिक पुत्री को दान दिया था। आरोप है कि उसका दामाद अरविंद, ससुर, सास, जेठ रवि, जेठानी गीता व देवर अर्जुन इतने दान दहेज से खुश नहीं थे और पुत्री को पहली बार लिवाने के एवज में एक लाख रुपए की मांग कर रहे थे। मांग पूरी न करने पर उसकी पुत्री को प्रताड़ित करते हुए घर से निकाल दिया। उसकी पुत्री घर पहुंची और सारा किस्सा सुनाया। उसने अपनी पुत्री को परिवार की इज्जत का वास्ता देकर वापस ससुराल भेज दिया। राजू के अनुसार 13 जुलाई को दामाद अरविंद ने उसे फोन पर बताया कि उनकी बेटी की तबीयत खराब है और नूरपुर के एक निजी अस्पताल मे भर्ती है। वह अपनी पत्नी विमला व अन्य रिश्तेदारों को लेकर नूरपुर अस्पताल में पहुंचा तो वहां उनकी पुत्री नहीं मिली। जब दामाद के घर पहुंचे तो वहां देखा उनकी पुत्री मृत पड़ी थी। दामाद अरविन्द व उसके परिजनों ने उन्हें कोई कानूनी कार्यवाही करने पर जान से मारने की धमकी देते हुए सभी को एक कमरे मे बंद करके सबूत मिटाने की नीयत से उसकी पुत्री के शव को कहीं ले जाकर जला दिया। उसके बाद उन्हें कमरे से बाहर निकालकर भगा दिया। वह इस घटना की सूचना देने थाने पहुंचा तो पुलिस ने कोई सुनवाई नहीं की। इसके बाद पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाई। उन्होंने मामला महिला सहायता केंद्र भेज दिया। यहां भी निराशा हाथ लगी। तब उसने न्याय पाने के लिए कोर्ट की शरण ली। मंगलवार को पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर उक्त सभी ससुरालियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया। इस मामले की विवेचना सीओ चांदपुर शुभ सुचित कुमार कर रहे हैं।

घर-घर तक न्याय वितरण के लिए विधि और न्याय मंत्रालय का विशेष अखिल भारतीय अभियान शुरू

विधि और न्याय मंत्रालय ने घर-घर तक न्याय वितरण के लिए शुरू किया विशेष अखिल भारतीय अभियान


टेली-लॉ के तहत बड़े पैमाने पर पंजीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए देश भर में ‘एक पहल’ अभियान

Press Release, Ministry of Law and Justice

नई दिल्ली (PIB)। भारत के संविधान की प्रस्तावना अपने नागरिकों के लिए ‘न्याय’ को सुरक्षित किए जाने वाली पहली सुपुर्दगी के रूप में मान्यता देती है। एक सफल और जीवंत लोकतंत्र की पहचान यह है कि प्रत्येक नागरिक को न केवल न्याय की गारंटी दी जाए, बल्कि वह भी ऐसा जो न्यायसंगत हो। यह देश को एक ऐसा वातावरण बनाने के लिए बाध्य करता है, जहां न्याय-वितरण को एक संप्रभु कार्य के रूप में नहीं बल्कि नागरिक-केंद्रित सेवा के रूप में देखा जाता है।  वैश्विक महामारी ने लोगों की पीड़ा को कम करने में कानूनी सहायता संस्थानों की भूमिका को और अधिक स्पष्ट कर दिया है। इस परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखते हुए, न्याय विभाग और नालसा ने कानूनी सहायता को मुख्यधारा में लाने और प्रत्येक नागरिक के लिए न्याय तक पहुंच की आकांक्षा को साकार करने के लिए एक विशेष अखिल भारतीय अभियान चलाया है।

जैसा कि देश “आजादी का अमृत महोत्सव” मना रहा है, न्याय विभाग ने टेली-लॉ के तहत बड़े पैमाने पर पंजीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए दिनांक 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक देश भर में “एक पहल/एक पहल” अभियान शुरू किया। टेली लॉ का माध्यम प्रभावी रूप से पैनल वकीलों द्वारा लाभार्थियों को 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 633 जिलों में 50,000 ग्राम पंचायतों में 51,434 सामान्य सेवा केंद्रों को कवर करने वाले लाभार्थियों को पूर्व-मुकदमे संबंधी सलाह/ परामर्श प्रदान करता है।

5480 लाभार्थियों के पंजीकरण लॉगिन के साथ इस लॉगिन अभियान में लाभार्थियों के दैनिक औसत पंजीकरण की तुलना में 138% की वृद्धि दर्ज की गई। सीएससी में क्षेत्रीय भाषाओं में 25000 से अधिक बैनर कानूनी सलाह सहायक केंद्र के रूप में प्रदर्शित किए गए।

‘न्याय आपके द्वार’

To bring justice close to the people, a massive nationwide legal awareness campaign is launched focusing on the rights of common people, NALSA Legal Services Mobile App, salient features of application and Victim Compensation Schemes of NALSA & Mediation etc. pic.twitter.com/QDaswT5IlR— Kiren Rijiju (@KirenRijiju) September 17, 2021

नालसा और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण सभी नागरिकों, विशेषकर जरूरतमंद और गरीब लोगों को निकट, सस्ता और त्वरित न्याय प्रदान करके कानूनी सहायता वितरण और नागरिकों के कानूनी सशक्तिकरण का एक मजबूत ढांचा तैयार करने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। नालसा ने अपने देशव्यापी संगठनात्मक ढांचे के माध्यम से कानूनी जागरूकता पैदा करने के लिए एक अखिल भारतीय विशेष अभियान शुरू किया था। 
इस अभियान के मुख्य आकर्षण में 185 मोबाइल वैन और अन्य वाहनों को एक्सेस टू जस्टिस कार्यक्रम पर बनी फिल्में और वृत्तचित्र प्रदर्शित करने के लिए तैनात करना, 672 जिलों में विधिक सहायता को लेकर ग्राम स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के अलावा 37,000 पैनल वकीलों और पैरा-लीगल वॉलंटियर्स की मदद से आम नागरिकों को प्री-लिटिगेशन/कानूनी सलाह देने के लिए 4100 लीगल एड क्लीनिकों का आयोजन शामिल है।

Bringing Justice closer to the needy people.
This is the launch of Legal Awareness at Chattishgarh by Hon’ble Acting Chief justice. pic.twitter.com/M5EHrmvRbz— Kiren Rijiju (@KirenRijiju) September 17, 2021

डोर-टू-डोर अभियान, कानूनी सेवाओं पर बैनर का प्रदर्शन, रोड शो, नुक्कड़ नाटक आयोजित किए गए थे, जिन्हें 14.85 लाख से अधिक नागरिकों की उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया मिली।

न्याय विभाग और नालसा का यह संयुक्त प्रयास समावेशी शासन को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही बेजुबानों को आवाज देना और ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका न्याय’ के लक्ष्य के प्रति समर्पित रहना है।

प्रदेश के समस्त भरण पोषण प्राधिकरणों में 11 सितम्बर को राष्ट्रीय लोक अदालत

प्रदेश के समस्त भरण पोषण प्राधिकरणों में 11 सितम्बर को होगी राष्ट्रीय लोक अदालत।

वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली के अधीन समझौते के आधार पर निपटाए जाने योग्य मामलों, वादों, अपीलों को चिन्हित किया जाए।

वादकारियों के मध्य पारस्परिक समझौते के अधिकतम प्रयास किये जाएं।

सूचनाधिकारी, दिनेश कुमार सिंह, पत्र सूचना शाखा, (मीडिया सेल, गृह विभाग) सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, उ0प्र0 लखनऊ ने दी जानकारी।

लखनऊ। उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आगामी 11 सितम्बर 2021 को प्रदेश के सभी भरण पोषण प्राधिकरणों में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है। अपर मुख्य सचिव, गृह अवनीश कुमार अवस्थी द्वारा इस संबंध में प्रदेश के समस्त जिला अधिकारियों, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक, चारो पुलिस आयुक्तों तथा अपर पुलिस महानिदेशक, यातायात को आवश्यक निर्देश भेजे गये है। कहा गया है कि उक्त लोक अदालत की सफलता हेतु वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली के अधीन समझौते के आधार पर निपटाये जाने योग्य मामलों, वादों, अपीलों को चिन्हित किया जाए। साथ ही प्रस्तावित राष्ट्रीय लोक अदालत के सम्बन्ध में वादकारियों को आदेशिकाओं एवं समन की तामील कराये जाने के सम्बन्ध में व्यवस्थित प्रणाली विकसित की जाए। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण नियमावली-2014 के अन्तर्गत निर्धारित दायित्वों के क्रम में उक्त नियमावली के अधीन गठित प्रदेश के समस्त भरण-पोषण प्राधिकरणों में आगामी 11 सितम्बर को यह राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित की जा रही है। यह भी निर्देश दिये गये कि कोविड-19 की परिस्थितियों के दृष्टिगत यदि उपरोक्त पूर्व आयोजित बैठकों में वादकारियों के बीच सुलह समझौता हो जाए, तो उन्हे लोक अदालत में प्रतिभाग हेतु न बुलाया जाए। वादकारियों के मध्य पारस्परिक समझौते के लिए अधिकतम प्रयास किये जाएं। प्रस्तावित लोक अदालत में मामले के निस्तारण से पूर्व न्यूनतम 2 या 3 तिथियों पर माध्यस्थम/सुलह/समझौते हेतु बैठकें आयोजित कर ली जाएं तथा इस राष्ट्रीय लोक अदालत के आयोजन के संबंध में व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जाए

दो दरोगाओं व सिपाही के खिलाफ हत्या व एससी एसटी एक्ट में मुकदमा

बिजनौर। नूरपुर थाने में तैनात एक वरिष्ठ उपनिरीक्षक, एक उपनिरीक्षक और 1 सिपाही सहित 8 लोगों पर न्यायालय के आदेश के बाद हत्या व एससी एसटी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद से पुलिस विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। मामले की जांच पुलिस क्षेत्राधिकारी चाँदपुर को सौंपी गयी है।  

जानकारी के अनुसार नूरपुर क्षेत्र के गांव झीरन निवासी जयपाल सिंह ने एडीजे कोर्ट में दिए प्रार्थना पत्र में कहा था कि गत 12 जुलाई को उसके पुत्र नीटू का किसी बात को लेकर गांव के ही कल्लन, मनीष पुत्र शीशराम, मनीष पुत्र दलीप, देशी व चमन से विवाद हो गया था। इस विवाद के चलते हुई कहासुनी में पुलिस को बुला लिया गया था। मौके पर पहुंचे वरिष्ठ उपनिरीक्षक शिव कुमार, हलका दरोगा शहजाद अली, कांस्टेबल सचिन व अन्य 4 से 5 अज्ञात पुलिसकर्मियों ने नीटू की निर्ममता से पिटाई की और मरणासन्न अवस्था में उठाकर अपने साथ ले गए थे।जयपाल सिंह ने कई बार अपने पुत्र के विषय में पुलिस से जानकारी चाही परन्तु उसे कोई संतोषजनक जबाब नहीं मिला। पत्र में बताया गया कि 17 जुलाई को दरोगा शहजाद अली उसके घर पहुंचा और जयपाल को बिजनौर स्थित गंगा बैराज ले गया। वहां पहले से ही काफी पुलिसकर्मी मौजूद थे। जयपाल सिंह ने आरोप  लगाया है कि वहां उसके साथ अभद्र व्यवहार कर गाली गलौज व जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए कोरे कागज पर उसके अंगूठे लगवा लिए गए और उसकी मर्जी के बिना नीटू का अंतिम संस्कार कर दिया गया। न्यायालय ने उक्त प्रार्थना पत्र पर विचार करने के बाद कल्लन, मनीष पुत्र शीशराम, मनीष पुत्र दलीप, देशी व चमन के साथ ही वरिष्ठ उपनिरीक्षक शिव कुमार, उपनिरीक्षक शहजाद अली, कांस्टेबल सचिन कुमार व 4 से 5 अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या व एससी एसटी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए। पुलिस ने न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज कर लिया। मामले की जांच पुलिस क्षेत्राधिकारी चाँदपुर को सौंपी गयी है। एसएचओ रविंद्र वर्मा ने मुकदमा दर्ज होने ने की पुष्टि की है।  

एसपी ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए मांगी क्षमा 

बिजनौर: नगीना के बहुचर्चित श्री कृष्ण गौशाला प्रकरण में उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा पुलिस अधीक्षक बिजनौर को लगाई गई लताड़ के उपरांत पुलिस ने विनीत नारायण एवं अलका लहोटी के खिलाफ दर्ज केस को बंद कर दिया है. अदालत में एसपी ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए क्षमा मांगी. हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों के गिरते स्तर पे नाराजगी जाहिर की तथा 6 अगस्त के निर्णय का गलत प्रयोग कर भ्रामक पोस्ट डालने पर संजय बंसल को लताड़ा उन्होंने तुरंत सभी पोस्टों को हटाने का भी आदेश दिया.
ज्ञातव्य हो कि नगीना की ऐतिहासिक श्री कृष्ण गौशाला को लेकर वरिष्ठ पत्रकार विनीत नारायण द्वारा एक पोस्ट फेसबुक पर डाली गई थी जिसमें नगीना निवासी चंपत राय बंसल (विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय महासचिव) के कुटुंब कुटुंबियो पर श्री कृष्ण गौशाला की करोड़ों रुपए भूमि कबजाने में शामिल होने का आरोप लगाया था, जिससे कुपित होकर चंपत राय बंसल के सबसे छोटे भाई संजय बंसल ने 19 जून 2021 को नगीना थाना में कइ गंभीर धाराओं में पत्रकार विनीत नारायण, रजनीश कुमार व श्री कृष्ण गौशाला की अध्यक्ष अलका लहोटी के विरुद्ध विभिन्न संगीन धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कराया था.
जवाब में वरिष्ठ पत्रकार विनीत नारायण रजनीश कुमार एवं अलका लाहोटी ने एफआई आर का विरोध करते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जिसके परिणाम स्वरूप न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के उपरांत हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए 6 अगस्त 2021 को बिजनौर एसपी को तलब किया तथा उत्तर प्रदेश पुलिस अधिकारियों के गिरते स्तर पर नाराजगी जाहिर की.
उच्च न्यायालय के सम्मुख बिजनौर पुलिस अधीक्षक डॉ धर्मवीर सिंह ने गलती स्वीकार करते हुए कहा कि एफआईआर को पूरी तरह पढ़ नहीं सके.

श्री कृष्ण गौशाला प्रकरण मे हाईकोर्ट के निर्णय के उपरांत नगीना मे चर्चाओं का बाजार गर्म है, बुद्धिजीवियों का कहना है कि दी गई तहरीर में जब एक व्यक्ति पर मुकदमा बनता था तो फिर अलका लाहोटी को 2 महीने तक क्यों परेशान किया गया? यही नहीं इसके कुछ दिनों के बाद ही एससी एसटी एक्ट में भी उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उनका मानसिक उत्पीड़न किया गया, लोगों का यह भी कहना है कि कहीं यह गौशाला पर कब्जा करने की साजिश तो नहीं है, विदित रहे कि पिछले छ-सात दशकों से अलका लाहोटी का परिवार ही गौशाला को पूरी लग्न एवं तन्मयता से चलाता आ रहा है तथा वहां की 1 इंच भूमि को भी इधर-उधर नहीं होने दिया, इस सत्य को नकारा भी नहीं जा सकता।

जस्टिस BV नागराथन होंगी देश की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश!

जस्टिस BV नागराथन होंगी देश की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश! कॉलेजियम ने की 9 जजों के नाम की सिफारिश

जस्टिस BV नागराथन होंगी देश की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश! कॉलेजियम ने की 9 जजों के नाम की सिफारिश

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम ने सरकार से 9 जजों के नाम की सिफारिश की है। कॉलेजियम ने तीन महिला जजों के नाम की सिफारिश की है। अगर कॉलेजियम के नाम को मंजूरी मिलती है तो भारत को पहली महिला मुख्य न्यायाधीश मिल सकती है। कॉलेजियम ने कर्नाटका हाईकोर्ट की जस्टिस BV नागराथन, तेलंगाना हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश जस्टिस हिमा कोहली और गुजरात हाईकोर्ट की जस्टिस बेला त्रिवेदी के नाम की सिफारिश की है।

जस्टिस बी.वी. नागरत्ना बन सकती है देश की पहली महिला CJI, जानें - कब संभालेंगी पदभार

जस्टिस BV नागराथन भारत की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश हो सकती हैं। कॉलिजियम ने वरिष्ठ वकील PS नरसिम्हा के नाम की भी सिफारिश की है। कॉलेजियम ने जस्टिस AS ओका, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस JK माहेश्वरी, जस्टिस CT रवींद्र कुमार, जस्टिस MM सुंदरेश के नाम की सिफारिश भी की है।

इससे पहले केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया था कि सुप्रीम कोर्ट में 8 जजों के पद खाली हैं। अगले दो महीनों में सुप्रीम कोर्ट के दो और जज जस्टिस आर एफ नरीमन और जस्टिस नवीन सिन्हा रिटायर हो जाएंगे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट की कुल स्वीकृत 34 जजों में 29 फीसदी पद खाली हो जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट में पिछले डेढ़ साल से जजों की नियुक्ति नहीं हुई है। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, 2018 में 8 और 2019 में 10 जजों की नियुक्ति हुई थी। सुप्रीम कोर्ट में अभी 26 जज कार्यरत हैं, इसमें 25 पुरुष और सिर्फ एक महिला जज हैं।

वहीं अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति में हो रही देरी के लिए सीधे-सीधे मौजूदा सरकार को जिम्मेदार ठहराया था। सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि सरकार उन जजों को नियुक्त करने में देरी कर रही है, जिनका नाम हाईकोर्ट कॉलेजियम ने सुझाया है।

कुछ साल पहले भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश, टीएस ठाकुर ने भी इस मामले को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने उठाया था और कहा था कि सरकार द्वारा जजों की नियुक्ति करने में देरी हो रही है। टीएस ठाकुर ने पीएम मोदी से कहा था कि यही मुख्य कारण है जो आज अदालतों में इतने केसेज पेंडिंग पड़े हैं। 2016 में भी जजों की नियुक्ति को लेकर न्यायालयों और सरकार के बीच विवाद हो चुका है।

उम्मीदवार घोषणा के 48 घंटे में जारी करनी होगी मुकदमों की जानकारी

उम्मीदवार के ऐलान के 48 घंटे के भीतर जारी करनी होगी मुकदमों की जानकारी

चुनाव में अपराधीकरण पर SC का आदेश: उम्मीदवार के ऐलान के 48 घंटे के भीतर जारी करनी होगी मुकदमों की जानकारी

नई दिल्ली (एजेंसी)। राजनीति के अपराधीकरण से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला देते हुए आदेश दिया है कि राजनीतिक दल, चयन के 48 घंटों के भीतर अपने उम्मीदवारों के आपराधिक इतिहास को जनता को सूचित करें। दलों को चुनाव के लिए चयनित उम्मीदवारों का आपराधिक इतिहास प्रकाशित करना होगा। SC ने इस संबंध में अपने 13 फरवरी, 2020 के फैसले को संशोधित किया है।

गौरतलब है कि फरवरी 2020 के फैसले के पैराग्राफ 4.4 में, सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि उम्मीदवार के चयन के 48 घंटे के भीतर या नामांकन दाखिल करने की पहली तारीख से कम से कम दो सप्ताह पहले, जो भी पहले हो, उसका आपराधिक इतिहास प्रकाशित किया जाएगा। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसने उक्त फैसले के पैरा 4.4 में सुधार किया है और चयन को 48 घंटे के भीतर इसे प्रकाशित किया जाएगा इसके अलावा बेंच ने कुछ अतिरिक्त निर्देश भी पारित किए हैं।

जस्टिस आरएफ नरीमन और जस्टिस बीआर गवई की बेंच ने ये फैसला दिया। बेंच ने कहा कि हमने पुराने फैसले के अलावा कुछ और दिेशानिर्देश जारी किए हैं। अपने उम्मीदवारों के आपराधिक इतिहास को प्रकाशित करने में विफल रहने वाले राजनीतिक दलों के खिलाफ अवमानना कार्यवाही की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट के 13 फरवरी, 2020 के आदेश में बिहार के चुनाव में उतरे उम्मीदवारों के आपराधिक इतिहास का खुलासा करने के लिए व्यापक प्रकाशन का निर्देश दिया था। इन निर्देशों का पालन ना करने के खिलाफ दायर अवमानना याचिकाओं पर अदालत ने सुनवाई कर फैसला सुरक्षित रखा था। 

बार काउसिल ऑफ उत्तर प्रदेश प्रयागराज से हुआ मलिहाबाद बार एसोसिएशन का सम्बद्धीकरण

लखनऊ। आम के मामले में विश्व विख्यात उत्तर प्रदेश की राजधानी की तहसील मलिहाबाद के बार एसोसिएशन का सम्बद्धीकरण बार काउसिल ऑफ उत्तर प्रदेश प्रयागराज से हो गया है। अभी तक यह बहुप्रतीक्षित कार्य किन्हीं कारणों से नहीं हो पाया था। वर्तमान कार्यकारिणी के महामंत्री राम सिंह यादव एडयोकेट के अथक प्रयास रंग लाए हैं।

राजधानी की तहसील मलिहाबाद आम के मामले में विश्व विख्यात है। दशकों तक मलिहाबाद बार एसोसिएशन का सम्बद्धीकरण बार काउसिल ऑफ उत्तर प्रदेश प्रयागराज से किन्हीं कारणों से नहीं हो पाया था।

वर्तमान कार्यकारिणी के महामंत्री राम सिंह यादव एडयोकेट के अथक प्रयासों से मलिहाबाद बार एसोसिएशन का सम्बद्धीकरण बार काउसिल ऑफ उत्तर प्रदेश प्रयागराज द्वारा बार काउसिंल अध्यक्ष शिरीष कुमार मल्होत्रा द्वारा किया जा चुका है।

खुशी की लहर- सम्बद्धीकरण प्रमाण पत्र मिलते ही मलिहाबाद बार एसोसिएशन के समस्त सदस्यों में खुशी की लहर दौड़ गयी। सभी ने एक दूसरे को मिठाई खिला कर बधाई दी और एकमत होकर संकल्प लिया कि मलिहाबाद बार एसोसिएशन को मजबूत करने के लिये सभी का सहयोग रहेगा। अधिवक्ता हितों की अनदेखी कतई बर्दास्त नहीं की जायेगी।

इस दौरान महामंत्री राम सिंह यादव एडवोकेट, वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य जसकरन सिंह, फुरकान खान, मो. फरीद खान, समाट सिंह, विनोद तिवारी, केके सिंह, मनोज सिंह, आनन्द कुमार दीक्षित, गोपीचन्द्र कनौजिया, रमेश कुमार सिंह, अमरेन्द्र कुमार सिंह, आदित्य नारायण द्विवेदी, रवि शंकर, प्रकाशचंद
शर्मा, शरीक शमीम खाँ, सर्वेश यादव, सर्वेश सैनी, रईस अहमद, अनिल यादव, शशिकान्त मिश्रा, पुतान सिंह, रामचन्द्र, विनोद यादव, राम शंकर, अमित सिंह, उत्तम कुमार, मेवालाल, इरशाद हुसैन, मनोज कनौजिया, परमेश्वरदीन, अशोक यादव, अमर पाण्डेय, वीरेन्द्र प्रताप सिंह, शाहबाज खान, फैसल खान, नमन प्रताप सिंह, हंसराज गुप्ता, राघवेन्द्र सिंह, कपिल यादव, देवेन्द्र सिंह, रिलेश यादव, गौरव प्रजापति व ओम प्रकाश यादव आदि लोग मौजूद रहे।

राष्ट्रीय लोक अदालत: समझौता राशि वसूली ₹बारह करोड़ अस्सी लाख

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बिजनौर के तत्वाधान में राष्ट्रीय लोक अदालत का हुआ आयोजन, कुल 12386 वादों का निस्तारण करते हुए ₹ 921985 (रुपए नौ लाख इक्कीस हजार नौ सौ पिचासी मात्र) जुर्माना धनराशि एवं ₹ 128047001 (रुपए बारह करोड़ अस्सी लाख सैत्तालीस हजार एक मात्र) समझौता धनराशि के रूप में वसूला गया। इस अवसर पर प्रशासनिक न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव द्वारा पौधारोपण किया गया।

बिजनौर (एकलव्य बाण समाचार)। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बिजनौर के तत्वाधान में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन प्रशासनिक न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव के संरक्षण एवं जनपद न्यायाधीश अतुल कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन में दीप प्रज्वलन कर जिला जजी परिसर बिजनौर में किया गया। इस दौरान कुल 12386 वादों का निस्तारण करते हुए ₹921985 (नौ लाख इक्कीस हजार नौ सौ पिचासी रुपए मात्र) जुर्माना धनराशि एवं ₹128047001 (बारह करोड़ अस्सी लाख सैत्तालीस हजार एक रुपए मात्र) समझौता धनराशि के रूप में वसूला गया।

कार्यक्रम का आयोजन अपर जिला जज/ नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत श्रीमती मनु कालिया की अध्यक्षता में एवं संचालन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव शिवानन्द गुप्ता द्वारा किया गया। जनपद न्यायाधीश अतुल कुमार गुप्ता द्वारा कुल 09 वादों का निस्तारण किया गया।

प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय बिजनौर संजीव पाण्डेय द्वारा कुल 45 वादों का निस्तारण करते हुए ₹ 1690000 समझौता धनराशि एवं अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय बिजनौर श्रीमती चित्रा शर्मा द्वारा कुल 56 वादों का निस्तारण करते हुए  ₹ 3009200 की समझौता धनराशि वसूल की गयी।

मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण केे पीठासीन अधिकारी प्रमोद कुमार द्वारा कुल 80 वादों का निस्तारण करते हुए ₹ 30531575 की धनराशि प्रतिकर स्वरूप पीड़ित परिवारों को दिलायी गयी। अतिरिक्त न्यायधीश   आरए कौशिक द्वारा 28 वादों का निस्तारण करते हुए ₹ 8312896 मात्र की समझौता धनराशि वसूल की गयी।

अपर जनपद न्यायाधीश प्रथम दिनेश कुमार द्वारा 4 वादों का निस्तारण करते हुए ₹ 2000 की जुर्माना धनराशि, अपर जनपद न्यायाधीश, द्वितीय श्रीमती मनु कालिया द्वारा 2 वादों का निस्तारण, अपर जनपद न्यायाधीश बलजोर सिंह द्वारा 3 वादों का निस्तारण करते हुए ₹500 की जुर्माना धनराशि वसूली गयी। स्पेशल जज ई0सी0 एक्ट, चंपत सिंह द्वारा 376 वादों का निस्तारण, स्पेशल जज पोक्सो एक्ट कु0 पारूल जैन द्वारा 3 वादों का निस्तारण करते हुए  ₹1500 की जुर्माना धनराशि, अपर जनपद न्यायाधीश, नगीना मनमोहन सिंह द्वारा 2 वादों का निस्तारण, अपर जनपद न्यायाधीश हनी गोयल द्वारा कुल 2 वादों का निस्तारण, अपर जनपद न्यायाधीश (डा.) विजय कुमार द्वारा कुल 1 वाद का निस्तारण, अपर जनपद न्यायाधीश श्रीमती कंचन द्वारा कुल 5 वादों का निस्तारण करते हुए ₹2500 की जुर्माना धनराशि, अपर जनपनद न्यायाधीश श्रीमती शगुन पंवार द्वारा 3 वादों का निस्तारण, अपर जनपद न्यायाधीश (त्वरित न्यायालय-1) योगेश कुमार द्वारा कुल 2 वादों का निस्तारण करते हुए ₹1000 की धनराशि, अपर जनपद न्यायाधीश (त्वरित न्यायालय-2) अनिल कुमार राणा द्वारा कुल 2 वादों का निस्तारण करते हुए ₹ 10500 की जुर्माना धनराशि, लधुवाद न्यायाधीश श्रीमती नीलू मेनवाल द्वारा कुल 2 वादों का निस्तारण किया गया।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट बिजनौर विमल त्रिपाठी द्वारा 712 वादों का निस्तारण करते हुए ₹748780 की जुर्माना धनराशि वसूली गयी, सिविल जज सिनियर डिवीजन श्रीमती रचना द्वारा 11 वादों का निस्तारण , अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शारिब अली द्वारा 680 वादों का निस्तारण करते हुए ₹ 14650 की समझौता धनराशि, अपर सिविल जज सि0 डि0 अभिनव यादव द्वारा कुल 382 वादों का निस्तारण करते हुए ₹129410 की जुर्माना धनराशि, अपर अपर मुख्य न्यायिक मजिस्टेट शोभित बंसल द्वारा कुल 127 वादों का निस्तारण करते हुए ₹2390 की जुर्माना धनराशि, सिविल जज सि0 डि0 (त्वरित न्यायालय) सुश्री नीलम सरोज द्वारा 10 वादों का निस्तारण करते हुए ₹400 की जुर्माना धनराशि वसूल की गयी तथा बाह्य न्यायालय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्टेट अमोद कान्त द्वारा कुल 301 वादों का निस्तारण करते हुए ₹43755 की जुर्माना धनराशि, सिविल जज जूडि नजीबाबाद कु0 इन्दू रानी द्वारा कुल 307 वादों का निस्तारण करते हुए ₹ 19450 जुर्माना धनराशि, सिविल जज जू. डि. चान्दपुर नपेन्द्र कुमार द्वारा कुल 470 वादों का निस्तारण करते हुए ₹ 37030 की जुर्माना धनराशि एवं सिविल जज जूनियर डिवीजन नगीना देवेन्द्र कुमार द्वारा कुल 326 वादों का निस्तारण करते हुए ₹ 39240 की जुर्माना धनराशि वसूली गयी।

राजस्व न्यायालय द्वारा कुल 7473 वादों का निस्तारण किया गया व बैंकों द्वारा बैंक रिकवरी के कुल 893 वादों का निस्तारण करते हुए लगभग ₹84305619 की धनराशि वसूल कर समझौते किये गये।