नई पेंशन योजना लाने की तैयारी में सरकार

देश के करोड़ों कर्मचारियों के काम की खबर, नई पेंशन योजना लाने की तैयारी में सरकार

नई दिल्ली (एजेंसी)। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) संगठित क्षेत्र के 15,000 रुपये से अधिक का मूल वेतन पाने वाले तथा कर्मचारी पेंशन योजना-1995 (ईपीएस-95) के तहत अनिवार्य रूप से नहीं आने वाले कर्मचारियों के लिए एक नई पेंशन योजना लाने पर विचार कर रहा है। वर्तमान में संगठित क्षेत्र के वे कर्मचारी जिनका मूल वेतन (मूल वेतन और महंगाई भत्ता) 15,000 रुपये तक है, अनिवार्य रूप से ईपीएस-95 के तहत आते हैं। एक सूत्र ने कहा, ‘‘ईपीएफओ के सदस्यों के बीच ऊंचे योगदान पर अधिक पेंशन की मांग की गई है। अगर इस तरह का फैसला लिया जाता है तो देश के करोडो़ं कर्मचारियों को फायदा हो सकता है। इस प्रकार उन लोगों के लिए एक नया पेंशन उत्पाद या योजना लाने के लिए सक्रिय रूप से विचार किया जा रहा है, जिनका मासिक मूल वेतन 15,000 रुपये से अधिक है।’’



सूत्र के अनुसार, इस नए पेंशन उत्पाद पर प्रस्ताव 11 और 12 मार्च को गुवाहाटी में ईपीएफओ के निर्णय लेने वाले शीर्ष निकाय केंद्रीय न्यासी बोर्ड (सीबीटी) की बैठक में आ सकता है। बैठक के दौरान सीबीटी द्वारा नवंबर, 2021 में पेंशन संबंधी मुद्दों पर गठित एक उप-समिति भी अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। सूत्र ने बताया कि ऐसे ईपीएफओ अंशधारक हैं जिन्हें 15,000 रुपये से अधिक का मासिक मूल वेतन मिल रहा है, लेकिन वे ईपीएस-95 के तहत 8.33 प्रतिशत की कम दर से ही योगदान कर पाते हैं। इस तरह उन्हें कम पेंशन मिलती है। ईपीएफओ ने 2014 में मासिक पेंशन योग्य मूल वेतन को 15,000 रुपये तक सीमित करने के लिए योजना में संशोधन किया था। 15,000 रुपये की सीमा केवल सेवा में शामिल होने के समय लागू होती है। संगठित क्षेत्र में वेतन संशोधन और मूल्यवृद्धि की वजह से इसे एक सितंबर, 2014 से 6,500 रुपये से ऊपर संशोधित किया गया था। बाद में मासिक मूल वेतन की सीमा को बढ़ाकर 25,000 रुपये करने की मांग हुई और उसपर विचार-विमर्श किया गया, लेकिन प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल पाई।




उद्योग के अनुमान के अनुसार, पेंशन योग्य वेतन बढ़ाने से संगठित क्षेत्र के 50 लाख और कर्मचारी ईपीएस-95 के दायरे में आ सकते हैं। पूर्व श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने दिसंबर, 2016 में लोकसभा में एक लिखित जवाब में कहा था, ‘‘कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 के तहत ‘कवरेज’ के लिए वेतन सीमा 15,000 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 25,000 रुपये मासिक करने का प्रस्ताव ईपीएफओ ने पेश किया था, लेकिन इस पर कोई निर्णय नहीं हुआ। सूत्र ने कहा कि उन लोगों के लिए एक नए पेंशन उत्पाद की आवश्यकता है जो या तो कम योगदान करने के लिए मजबूर हैं या जो इस योजना की सदस्यता नहीं ले सके हैं, क्योंकि सेवा में शामिल होने के समय उनका मासिक मूल वेतन 15,000 रुपये से अधिक था।

EPFO का बड़ा फैसला, कर्मचारी की मौत के बाद मिलेगा दोगुना पैसा

EPFO का बड़ा फैसला, कर्मचारी की मौत के बाद मिलेगा दोगुना पैसा

नई दिल्ली (एजेंसी)। एम्प्लॉय प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (EPFO) ने अपने कर्मचारियों और उनके ऊपर आश्रितों को लेकर बड़ा फैसला किया है। दरअसल, ईपीएफओ कर्मचारियों की अचानक हुई मौत के बाद उनके नॉमिनी को दोगुनी रकम दी जाएगी।

सेंट्रल बोर्ड की ओर से कर्मचारी के आकस्मिक निधन के बाद उनके परिजन को एक्स ग्रेशिया डेथ रिलीफ फंड दिया जाता है, जिसको लेकर ईपीएफओ ने यह राहत दी है। इससे ईपीएफओ के देशभर में कर्मचारियों को फायदा मिलेगा। इस फैसले को लेकर संस्थान ने अपने दफ्तरों में सर्कुलर भी जारी कर दिया है। 

यह भी निर्णय किया गया है कि हर तीसरे साल पर इस राशि को तकरीबन 10 फीसदी बढ़ाए जाने की कोशिश की जाएगी। बता दें कि ईपीएफओ के सदस्यों ने मांग की थी कि कम-से-कम 10 लाख रुपये और अधिकतम 20 लाख रुपये की राशि दी जाए। ईपीएफओ के सर्कुलर के अनुसार, अगर कर्मचारी की मौत गैर-कोविड से हुई है तो उसके परिवार या फिर नॉमिनी को 8 लाख रुपये की राशि मिलेगी। यह राशि ईपीएफओ के देशभर में मौजूद कर्मचारियों के लिए होगी। यह राशि वेल्फेयर फंड से दी जाएगी। वहीं, अगर कर्मचारी की मौत कोरोना वायरस की वह से हुई होगी तो फिर 28 अप्रैल, 2020 का वाला ऑर्डर लागू होगा।

इस बार पीएफ खाते में आएगा मोटा पैसा

EPFO- 6.5 करोड़ नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी। इस बार पीएफ खाते में आएगी मोटी रकम।

नई दिल्ली। 6.5 करोड़ नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के 6 करोड़ खाताधारक काफी समय से इस उम्मीद में थे कि जुलाई की अंत में पीएफ (PF) का पैसा खाते (pf account) में ट्रांसफर हो जाएगा, लेकिन 31 जुलाई तक EPFO ने पैसा ट्रांसफर नहीं किया। हालांकि, खबर है कि पीएफ खाताधारकों को PF का पैसा इसी अगस्त महीने में ट्रांसफर कर दिए जाएंगे। ईपीएफओ ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर पीएफ ब्याज (PF interest rate) को लेकर अहम जानकारी दी है…

EPFO ने क्या कहा?
ट्विटर पर एक खाताधारक ने EPFO को टैग करके सवाल पूछा कि कब ईपीएफओ की ओर से ब्याज का पैसा ट्रांसफर होगा? इस पर ईपीएफओ आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर रिप्लाई किया है कि जब भी ब्याज खाते में क्रेडिट किया जाएगा, ये एक साथ जमा किया जाएगा और पूरा पैसा दिया जाएगा। किसी का भी ब्याज को लेकर नुकसान नहीं होगा। हालांकि, EPFO ने यह नहीं बताया कि ब्याज का पैसा कब PF खाते में कब ट्रांसफर किया जाएगा। बता दें कि सरकार ने फिलस्कल ईयर 2020-21 के लिए 8.5 फीसदी ब्याज की मंजूरी दे दी है।

पेरोल आंकड़े: EPFO ने नवंबर 2020 में 10.11 लाख नए सदस्य जोड़े

ईपीएफओ ने जारी किए पेरोल आंकड़े, चालू वित्त वर्ष (अप्रैल से नवंबर, 2020 तक) लगभग 45.29 लाख नए सदस्य जोड़े

नई दिल्ली। ईपीएफओ ने 20 जनवरी को, अनंतिम पेरोल आंकड़े जारी किए हैं। इसके अंतर्गत नवंबर, 2020 के माह में ईपीएफओ के साथ 10.11 लाख नए सदस्य जुड़ गए हैं। कोविड-19 महामारी होने के बावजूद, ईपीएफओ ने चालू वित्त वर्ष (अप्रैल से नवंबर, 2020 तक) लगभग 45.29 लाख नए सदस्य जोड़े हैं। प्रकाशित किए गए आंकड़ों में उन सभी नए सदस्यों को भी शामिल किया गया है जो इस माह के दौरान शामिल हुए हैं और जिनका योगदान प्राप्त हो चुका है। नवंबर, 2020 माह में, लगभग 6.41 लाख नए सदस्य ईपीएफओ में शामिल हुए हैं। लगभग 3.70 लाख कुल सदस्य बाहर निकल गए और फिर ईपीएफओ से जुड़ गए, जो ईपीएफओ द्वारा कवर किए गए प्रतिष्ठानों के अंदर सदस्यों द्वारा नौकरियों की अदला-बदली का संकेत देते हैं और सदस्यों द्वारा अंतिम निपटारा का विकल्प चुनने के बजाय फंड के हस्तांतरण के माध्यम से अपनी सदस्यता बरकरार रखने की पुष्टि करते हैं। बाहर निकलने वाले सदस्यों का फिर से इसमें वापस आना इस बात का भी संकेत देता है कि भारत में कोविड-19 के सक्रिय मामलों में हो रही गिरावट के साथ ही सदस्य अपनी नौकरी पर वापस लौट रहे हैं। अगर उम्र के आधार पर नए सदस्यों का विश्लेषण किया जाये तो नवंबर 2020 माह में सबसे ज्यादा जुड़ने वाले नए सदस्य 22-25 वर्ष के हैं, जिसकी संख्या 2.72 लाख है। उसके बाद 18-21 वर्ष के लोग हैं जिनकी संख्या 2,21 लाख है।  18-25 आयु वर्ग के सदस्यों को श्रम बाजार में नए रोजगार के रूप में देखा जा सकता है और नवंबर, 2020 में इन नए सदस्यों द्वारा लगभग 48.72 प्रतिशत का योगदान दिया गया है।

राज्यों के पेरोल आंकड़ों की तुलना करने से पता चलता है कि महाराष्ट्र, हरियाणा, गुजरात, तमिलनाडु और कर्नाटक रोजगार रिकवरी चक्र में सबसे आगे बने हुए हैं और इन राज्यों में वित्त वर्ष 2020-21 (अप्रैल से नवंबर, 2020 तक) के दौरान सभी उम्र के लोगों के आधार पर नए सदस्यों की संख्या में 53 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। विशेषज्ञ सेवा श्रेणी में उद्योग का श्रेणीवार विश्लेषण करने से पता चलता है कि (जिसमें मुख्य रूप से मैनपावर एजेंसियां, निजी सुरक्षा एजेंसियां और छोटे ठेकेदार शामिल हैं) सभी आयु समूहों में चालू वित्त वर्ष के दौरान 23.45 लाख की संख्या में संयुक्त पेरोल में योगदान करके सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी अवधि के लिए यह शीर्ष दस उद्योग श्रेणियों के लिए शुद्ध नए पेरोल का लगभग 60 प्रतिशत हैं। हालांकि, बिल्डिंग और निर्माण उद्योग, इंजीनियर और इंजीनियरिंग कांट्रैक्टर क्षेत्र, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल या जनरल इंजीनियरिंग उत्पाद जैसे अन्य उद्योगों के प्रदर्शन का वर्गीकरण करने से पता चलता है कि अन्य क्षेत्रों में भी रिकवरी शुरू हो चुकी है।

महिलाओं की कुल संख्या 1.43 लाख- नवंबर 2020 माह के लिए, लिंग-वार विश्लेषण करने से पता चलता है कि नए सदस्यों में महिलाओं की हिस्सेदारी अक्टूबर, 2020 में 21.64 प्रतिशत और नवंबर, 2020 में 22.40 प्रतिशत हो गई है। नवंबर, 2020 माह में ईपीएफ योजना में कुल 6.41 लाख शुद्ध सदस्य शामिल हुए, जिनमें महिलाओं की कुल संख्या 1.43 लाख है। ईपीएफओ, एक सामाजिक सुरक्षा संगठन के रूप में अपनी अवधारणा की पुष्टि करता है, जिसका उद्देश्य सार्वभौमिक कवरेज प्रदान करना है और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से अपने हितधारकों को निर्बाध और निरंतर सेवाओं का वितरण सुनिश्चित करना है। पेरोल के यह आंकडे अनंतिम है क्योंकि कर्मचारियों के रिकॉर्ड को अपडेट करना एक निरंतर होने वाली प्रक्रिया है और इसलिए इन्हें प्रत्येक माह के आधार पर अपडेट किया जाता है।

दफ्तर की duty 1 अप्रैल से 12 घंटे!

12 घंटे करना होगा दफ्तर का काम ! 1 अप्रैल से बदल जाएंगे नियम

नई दिल्ली। वर्ष 2020 में संसद में पारित तीन मजदूरी संहिता विधेयक (कोड ऑन वेजेज बिल) इस साल 1 अप्रैल से लागू होने की संभावना है। इसके तहत आपकी ग्रेच्युटी, पीएफ और काम के घंटों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। कर्मचारियों को ग्रेच्युटी और भविष्य निधि (पीएफ) मद में बढ़ोतरी होगी। वहीं, हाथ में आने वाला पैसा (टेक होम सैलरी) घटेगा और कंपिनयों की बैलेंस शीट भी प्रभावित होगी।

नई परिभाषा- वेज यानी मजदूरी की नई परिभाषा के तहत भत्ते कुल सैलेरी के अधिकतम 50 फीसदी होंगे। इसका मतलब है कि मूल वेतन (सरकारी नौकरियों में मूल वेतन और महंगाई भत्ता) अप्रैल से कुल वेतन का 50 फीसदी या अधिक होना चाहिए। बताया जा रहा है कि देश के 73 साल के इतिहास में पहली बार इस प्रकार से श्रम कानून में बदलाव किए जा रहे हैं। सरकार का दावा है कि ये नियोक्ता और श्रमिक दोनों के लिए फायदेमंद साबित होंगे।

नए ड्राफ्ट कानून में कामकाज के समय सीमा को 8 घंटे से बढ़ाकर 12 करने का प्रस्ताव है। इसके लागू होने के बाद दफ्तर में आपको ज्यादा काम करना होगा यानि की 12 घंटे काम करना होगा। हालांकि, ओएसच कोड के ड्राफ्ट नियमों में 15 से 30 मिनट के बीच के अतिरिक्त कामकाज को भी 30 मिनट गिनकर ओवरटाइम में शामिल करने का प्रावधान है। इसके अलावा इस नए नियम में कर्मचारी से लगातार 5 घंटे से ज्यादा काम कराने पर भी रोक लगाया गया है। इसका मतलब ही कि हर पांच घंटे काम करने के बाद कर्मचारियों को आधा घंटे का आराम देने का निर्देश भी इस ड्राफ्ट नियम में शामिल है। रिटायरमेंट के बाद आपको मिलने वाली राशि में बदलाव आएगा
अगर ग्रेच्युटी और पीएफ में योगदान बढ़ता है तो रिटायरमेंट के बाद आपको मिलने वाली राशि में भी इजाफा होगा। पीएम और ग्रेच्युटी बढ़ेगी तो कंपनियों की लागत भी बढ़ेगी। कंपनियों को कर्मचारियों के पीएफ में ज्यादा योगदान देना पड़ेगा। इसका असर कंपनियों की बैलेंस शीट पर भी नजर आएगा।

CRPF, BSF, CISF को राहत: सेवारत कर्मियों को सेवा के दौरान दिव्यांगता का शिकार होने पर “क्षतिपूर्ति”

सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ इत्यादि के जवानों को बड़ी राहत
सभी सेवारत कर्मियों को सेवा के दौरान दिव्यांगता का शिकार होने की स्थिति में “दिव्यांगता क्षतिपूर्ति” दी जाएगी- डॉ जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली (धारा न्यूज़): पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्यमंत्री डॉक्टर जितेंद्र सिंह ने नए वर्ष पर केंद्र सरकार के सभी कर्मचारियों के लिए “दिव्यांगता क्षतिपूर्ति” योजना की शुरुआत के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि यदि कोई कर्मचारी सेवा के दौरान दिव्यांगता का शिकार होता है और उसकी सेवाएँ दिव्यांग होने के बाद भी बरकरार रखी जाती हैं तो उन्हें “दिव्यांगता क्षतिपूर्ति” का लाभ दिया जाएगा।

आज का यह आदेश केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल सीएपीएफ के युवा जवानों जैसे सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ इत्यादि के जवानों को बड़ी राहत उपलब्ध कराएगा, जिनकी सेवा की प्रकृति के चलते अपना दायित्व निभाते हुए दिव्यांगता का शिकार होने की संभावना बनी रहती है।

यहां यह उल्लेख करना आवश्यक है कि नया आदेश सेवा नियमों की एक विसंगति को दूर करेगा जिसके चलते केंद्रीय कर्मचारियों को जटिलताओं का सामना करना पड़ता था। इस संबंध में 5 मई, 2009 को जारी किए गए आदेश के तहत 1 जनवरी, 2004 या उसके बाद सेवा में शामिल हुए सरकारी कर्मियों को केंद्रीय नागरिक सेवाओं (सीसीएस)ईओपी नियमों के अंतर्गत दिव्यांगता का लाभ नहीं मिलेगा और वह राष्ट्रीय पेंशन सिस्टम (एनपीएस) के अंतर्गत कवर होंगे। कार्मिक लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के पेंशन विभाग द्वारा जारी नए आदेश के अंतर्गत अब उन कर्मचारियों को भी अतिरिक्त असाधारण पेंशन (ईओपी) के नियम 9 के तहत लाभ प्राप्त होगा जो एनपीएस के दायरे में आते हैं।

अन्य शब्दों में यदि एक सरकारी कर्मचारी अपनी ड्यूटी के दौरान दिव्यांगता का शिकार होता है और यह दिव्यांगता उसकी सरकारी सेवा को प्रभावित करती है और उसकी सेवा बरकरार रखी जाती है तो उसे एकमुश्त राहत राशि उपलब्ध कराई जाएगी। इसकी गणना समय-समय पर जारी की जाने वाली परिवर्तित सारणी के आधार पर की जाएगी।

इस आदेश के जारी होने पर संतोष व्यक्त करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि मोदी सरकार नियमों के सरलीकरण के लिए और विभेदकारी नियमों को खत्म करने के लिए सभी आवश्यक उपाय कर रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह की सभी प्रकार की नई पहल का मुख्य उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों के जीवन को आसान बनाना है। इससे वह कर्मचारी भी लाभान्वित होंगे जो आज पेंशन भोगी हैं अथवा जिनके परिजन पेंशन प्राप्त कर रहे हैं।

सरकारी कर्मचारियों के हित में कार्मिक मंत्रालय ने हाल ही में एक और आदेश जारी किया था जिसके अंतर्गत पेंशन प्राप्त करने के लिए न्यूनतम 10 वर्ष की सेवा शर्त में छूट दी थी, यदि कोई सरकारी कर्मचारी शरीर से या चिकित्सकीय अक्षमता के कारण सरकारी सेवाओं से सेवानिवृत्त होता है तो। इस संदर्भ में सीसीएस (पेंशन) के नियम 38 में संशोधन कर आखिरी भुगतान के 50% पेंशन देने का नियम लागू किया गया, भले ही कर्मचारी 10 वर्ष की न्यूनतम आवश्यक सेवा शर्त को पूर्ण नहीं कर पाया हो।

पेंशन से जुड़े नियमों में एक और महत्वपूर्ण सुधार पेंशन से जुड़े नियमों में एक और महत्वपूर्ण सुधार किया गया और यह निर्णय किया गया कि सरकारी कर्मचारी के आश्रित को आखिरी भुगतान के 50% पेंशन का अधिकार प्राप्त करने के लिए 7 वर्ष की न्यूनतम सेवा की आवश्यक शर्त को भी खत्म किया गया। इसके तहत यदि किसी सरकारी कर्मचारी की 7 वर्ष की सेवा पूर्ण होने से पहले ही सेवा के दौरान मृत्यु हो जाती है तब भी कर्मचारी के परिवार को उसके आखिरी भुगतान के 50% राशि पेंशन के तौर पर निर्धारित की जाएगी।

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आपकी टेक-होम सैलरी पर अप्रैल में चल सकती है तलवार!

नए पारिश्रमिक नियम के तहत प्रावधान, प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारी होंगे प्रभावित

अप्रैल से घट सकती है आपकी टेक-होम सैलरी

सरकार ने नए पारिश्रमिक नियम के तहत जिन ड्राफ्ट नियमों की अधिसूचना जारी की है, उसके तहत कंपनियों को अपने सैलरी पैकेज के स्ट्रक्चर में बदलाव लाना पड़ेगा। ये नए नियम Code on Wages, 2019 के तहत आते हैं, जो संभवत: इस साल अप्रैल से प्रभावी होने वाला है।

नई दिल्ली (धारा न्यूज़): अगले वित्त वर्ष की शुरुआत यानी अप्रैल, 2021 से कर्मचारियों की इन-हैंड या टेक-होम सैलरी (Take-Home Salary) के कंपोनेंट या स्ट्रक्चर (Salary Structure) में बदलाव किए जा सकते हैं, जिससे आपकी टेक होम सैलरी कम हो सकती है। सरकार ने नए पारिश्रमिक नियम के तहत जिन ड्राफ्ट नियमों की अधिसूचना जारी की है, उसके तहत कंपनियों को अपने सैलरी पैकेज के स्ट्रक्चर में बदलाव लाना पड़ेगा। ये नए नियम Code on Wages, 2019 के तहत आते हैं, जो संभवत: इस साल अप्रैल से प्रभावी होने वाला है। नए नियमों के तहत allowance component यानी सैलरी के साथ मिलने वाले भत्ते, कुल सैलरी या CTC से 50 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकते और इसका सीधा मतलब है कि बेसिक सैलरी, सैलरी स्ट्रक्चर का 50 फीसदी होगी। इस नियम का पालन करने के लिए, कंपनियों को सैलरी के बेसिक पे कंपोनेंट को बढ़ाना होगा, जिसके चलते ग्रेच्युटी पेमेंट और कर्मचारी की ओर से भरे जाने वाले प्रॉविडेंट फंड की रकम बढ़ जाएगी। रिटायरमेंट के लिए डाली जाने वाली रकम बढ़ने का मतलब है कि आपकी टेक-होम सैलरी कम हो जाएगी लेकिन आपका रिटायरमेंट फंड बढ़ेगा।

प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों पर पड़ेगा प्रभाव

वर्तमान में, अधिकतर प्राइवेट कंपनियां कुल CTC के बड़े हिस्से में गैर-भत्ते वाला हिस्सा कम और भत्ते वाला हिस्सा ज्यादा रखने को वरीयता देती हैं। हालांकि, नया नियम आ जाने के बाद से यह बदल जाएगा। संभावना है कि इन नियमों से प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों की सैलरी प्रभावित होगी क्योंकि आमतौर पर उन्हें ज्यादा भत्ता मिलता है। नए नियमों के मुताबिक, कंपनियों को 50 फीसदी बेसिक सैलरी की अनिवार्यता को पूरा करने के लिए उनकी बेसिक सैलरी को बढ़ाना होगा। इन नियमों से भले ही टेक-होम सैलरी घट जाएगी। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि इससे लोगों को बेहतर सामाजिक सुरक्षा और रिटायरमेंट बेनेफिट्स मिलेंगे।

EPFO जमा करेगा 6 करोड़ लोगों के खातों में एकमुश्त ब्याज

EPFO की योजना से 6 करोड़ लोगों को होगा फायदा

दिसंबर के अंत तक अंशधारकों के खातों में जमा होगा एकमुश्त ब्याज

नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) खातों में दिसंबर के अंत तक एकमुश्त 8.5 प्रतिशत का ब्याज डाला जाएगा। सितंबर में श्रम मंत्री संतोष गंगवार की अगुवाई में हुई न्यासियों की बैठक में ईपीएफओ ने ब्याज को 8.15% और 0.35% की दो किस्तों में डालने का फैसला किया था। श्रम मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय को 2019-20 के लिए ईपीएफ में एक बार में 8.5 प्रतिशत का ब्याज डालने का प्रस्ताव इसी महीने भेजा गया है। इस पर वित्त मंत्रालय की मंजूरी कुछ दिन में मिलने की उम्मीद है। ऐसे में अंशधारकों के खातों में ब्याज इसी महीने डाला जाएगा।

मार्च में CBT ने दी थी मंजूरी

इससे पहले वित्त मंत्रालय ने बीते वित्त वर्ष के लिए ब्याज पर कुछ स्पष्टीकरण मांगा था। वित्त मंत्रालय को यह स्पष्टीकरण दे दिया गया है। श्रम मंत्री गंगवार की अगुवाई वाले ईपीएफओ के निर्णय लेने वाले शीर्ष निकाय केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) की मार्च में हुई बैठक में 2019-20 के लिए ईपीएफ पर 8.5 प्रतिशत ब्याज दर को मंजूरी दी गई थी। सीबीटी की मार्च में हुई बैठक में 8.5 प्रतिशत के ब्याज देने की प्रतिबद्धता को पूरा करने का फैसला किया गया था। इसके साथ ही सीबीटी ने तय किया था कि 8.5 प्रतिशत के ब्याज को दो किस्तों (8.15 प्रतिशत और 0.35 प्रतिशत) में अंशधारकों के खातों में डाला जाएगा।

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