सरकार ने बदले नियम; अब घर बैठे मिलेगा नया sim

अब इन ग्राहकों को नहीं मिलेगा नया Sim, नियमों में सरकार ने किया बदलाव। अब करना होगा ऑनलाइन अप्लाई, घर पहुंचेगा सिम।

18 साल से अधिक उम्र के लोगों को नया सिम कार्ड लेने के लिए आधार देना होगा या डिजिलॉकर में सेव किसी दस्तावेज से खुद को वेरिफाई करना होगा। ये सभी काम ऑनलाइन भी किए जा सकते हैं और इसके लिए केवाईसी भी ऑनलाइन की जाएगी। ऑनलाइन सिम कार्ड की बुकिंग कर सकते हैं, जिसकी डिलीवरी घर के पते पर की जाएगी।

नई दिल्ली (एजेंसी)। सरकार ने सिम कार्ड को लेकर नियमों को बदल दिया है। नए नियम के तहत अब कुछ कस्टमर्स के लिए नया सिम लेना आसान हो गया है, लेकिन कुछ कस्टमर्स के लिए नया सिम लेना मुश्किल हो गया है।

Extend Sim Card re-registration to the end of the year and stop the  pressure -NIA to government - myactiveonline

करना होगा ऑनलाइन अप्लाई- नए नियम के तहत कस्टमर्स अब नए सिम के लिए ऑनलाइन अप्लाई करेंगे और सिम कार्ड उनके घर तक पहुंचाया जाएगा। ग्राहकों को मोबाइल कनेक्शन एक ऐप/पोर्टल बेस्ड प्रोसेस के जरिए दिया जाएगा, जिसमें ग्राहक घर बैठे मोबाइल कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकते हैं। दरअसल, पहले मोबाइल कनेक्शन के लिए या प्रीपेड से पोस्टपेड कराने के लिए ग्राहकों को KYC प्रोसेस से गुजरना पड़ता था।

बस एक रुपए का भुगतान- सरकार ने सिम के लिए नियमों में बदलाव कर दिया है। अब नए नियम के तहत 18 साल से कम उम्र के कस्टमर्स को कंपनी नया सिम नहीं बेच सकती है। वहीं, 18 साल के ऊपर के उम्र के कस्टमर अपने नए सिम के लिए आधार या डिजीलॉकर में स्टोर्ड किसी भी डॉक्यूमेंट से खुद को वेरिफाई कर सकते हैं। विदित हो कि DoT का यह कदम 15 सितंबर 2021 को कैबिनेट द्वारा अप्रूव्ड टेलीकॉम रिफॉर्म्स का हिस्सा है। अब यूजर्स को नए मोबाइल कनेक्शन के लिए UIDAI की Aadhaar बेस्ड e-KYC सर्विस के माध्यम से सर्टिफिकेशन के लिए बस एक रुपए का भुगतान करना होगा।

इनको नहीं मिलेगी नई सिम– टेलीकॉम डिपार्टमेंट के नए नियमों के मुताबिक अब कंपनी 18 साल से कम उम्र के यूजर्स को सिम कार्ड नहीं मिलता। इसके अलावा अगर कोई शख्स मानसिक रूप से बीमार है तो ऐसे व्यक्ति को भी नया सिम कार्ड जारी नहीं किया जाएगा। अगर ऐसे शख्स नियमों का उल्लंघन करते पकड़ा गया तो उस टेलीकॉम कंपनी को दोषी माना जाएगा, जिसने सिम बेचा है। वैसे उन लोगों के लिए सिम खरीदना आसान होगा जिनका यूआईडीएआई से वेरिफिकेशन हो जाए। अगर वेरिफिकेशन नहीं हो तो सिम कार्ड लेना मुश्किल होगा। अब सबकुछ यूआईडीएआई से वेरिफिकेशन पर निर्भर करेगा। मोबाइल और सिम कार्ड के जरिये होने वाले फ्रॉड पर शिकंजा कसने के लिए यह नया नियम लाया गया है। सिम कार्ड से जुड़े ये नए नियम टेलीकॉम विभाग ने जारी किए हैं जिन्हें कैबिनेट की मंजूरी मिली है।

5 स्‍टेप्‍स में पूरी होगी सेल्‍फ केवाईसी की प्रक्रिया-


1. सिम प्रोवाइडर का ऐप डाउनलोड करें. फिर अपने फोन से रजिस्टर करें।

2. अपना दूसरा या अपने परिवार के किसी व्‍यक्ति का नंबर दें।

3. इसके बाद मिले वन टाइम पासवर्ड (OTP) की मदद से लॉगिन करें।

4. इसमें सेल्फ केवाईसी का ऑप्शन चुनें।

5. जानकारी भरकर प्रक्रिया पूरा करें।

इस नियम के तहत लागू किया गया है नियम
इस कॉन्ट्रैक्ट को इंडियन कॉन्ट्रैक्ट लॉ 1872 के तहत लागू किया गया है। इस कानून के तहत कोई भी कॉन्ट्रैक्ट 18 से ज्यादा उम्र के लोगों के बीच होना चाहिए। भारत में एक व्यक्ति अधिकतम अपने नाम से 12 सिम खरीद सकता है। इसमें से 9 सिम का इस्तेमाल मोबाइल कॉलिंग के लिए किया जा सकता है, जबकि अन्य सिम का इस्तेमाल मशीन-टू-मशीन कम्यूनिकेशन के लिए उपयोग किया जा सकेगा।

कोरोना से मौत: मुआवजे के फर्जी दावों पर सुप्रीम कोर्ट चिंतित

नई दिल्ली (एजेंसी)। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कोविड से हुई मौत के संबंध में मुआवजे के फर्जी दावों पर अपनी चिंता जताई और कहा कि वह इस मामले में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) को जांच का निर्देश दे सकता है। शीर्ष अदालत ने सुझाव दिया कि कथित फर्जी मौत के दावों की जांच महालेखा परीक्षक कार्यालय को सौंपी जा सकती है।

न्यायमूर्ति एम.आर. शाह और न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना की पीठ ने कहा: हमने कभी नहीं सोचा था कि इस तरह के फर्जी दावे आ सकते हैं। हमने कभी नहीं सोचा था कि इस योजना का दुरुपयोग किया जा सकता है। पीठ ने कहा कि अगर इसमें कुछ अधिकारी भी शामिल हैं तो यह बहुत गंभीर है। अधिवक्ता गौरव कुमार बंसल ने आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 52 की ओर इशारा किया, जो इस तरह की चिंताओं को दूर करता है। न्यायमूर्ति शाह ने कहा, हमें शिकायत दर्ज करने के लिए किसी की आवश्यकता है।

एक वकील ने राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरणों द्वारा मुआवजे के दावों की रैंडम जांच करने का सुझाव दिया। बच्चों को मुआवजे के पहलू पर, शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि उसके द्वारा आदेशित 50,000 रुपये का अनुग्रह भुगतान, कोविड -19 के कारण प्रत्येक मृत्यु के लिए किया जाना है, न कि प्रभावित परिवार के प्रत्येक बच्चे को। 7 मार्च को, सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों द्वारा कोविड की मौतों के लिए अनुग्रह मुआवजे का दावा करने के लिए लोगों को नकली चिकित्सा प्रमाण पत्र जारी करने पर चिंता व्यक्त की, और कहा कि वह इस मामले की जांच का आदेश दे सकता है।

राकेश अस्थाना की बतौर पुलिस कमिश्नर नियुक्ति पर SC का केंद्र को नोटिस

राकेश अस्थाना को पुलिस कमिश्नर नियुक्त करने के मामले में SC का केंद्र को नोटिस, 14 दिन में मांगा जवाब

नई दिल्ली (एजेंसी)। उच्चतम न्यायालय ने राकेश अस्थाना को दिल्ली पुलिस आयुक्त नियुक्त करने के मामले में शुक्रवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है। न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना की पीठ ने केंद्र सरकार के अलावा गुजरात कैडर के 1984 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी अस्थाना को नोटिस जारी किया है।

केंद्र सरकार द्वारा अस्थाना की नियुक्ति को दिल्ली उच्च न्यायालय ने 12 अक्टूबर को कानून सम्मत बताया था तथा नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी थी। उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर आज उच्चतम न्यायालय ने केंद्र और अस्थाना को नोटिस जारी कर उन्हें दो सप्ताह में जवाब देने को कहा है।शीर्ष अदालत ने 18 नवंबर को शीघ्र सुनवाई की वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण गुहार पर इस मामले में आज सुनवाई की अनुमति दी थी। भूषण ने ‘विशेष उल्लेख’ के तहत गुहार लगाई थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया था।

बेरहमी से 50 बार गोदकर RSS कार्यकर्ता की हत्या

केरल में RSS कार्यकर्ता की बेरहमी से हत्या। शरीर पर मिले 50 से ज्यादा हमले के निशान।

केरल में RSS कार्यकर्ता की बेरहमी से हत्या, शरीर पर मिले 50 से ज्यादा हमले के निशान

पल्लकड़ (एजेंसी)। केरल के पल्लकड़ में आरएसएस कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई है। सोमवार सुबह करीब 9 बजे परिवार के साथ कहीं जाते समय उस पर हमला किया गया। मृतक की पहचान 27 वर्षीय एस संजीत (27 वर्ष) के रूप में हुई है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आरएसएस कार्यकर्ता एस संजीत (27 वर्ष) अपनी पत्नी के साथ सफर कर रहा था। इसी दौरान रास्‍ते में कुछ हमलावरों ने उन्‍हें रोक लिया और उन पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावर वहां से भाग निकले। घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने तुरंत संजीत को अस्‍पताल में भर्ती कराया जहां डॉक्‍टरों ने उन्‍हें मृत घोषित कर दिया।

बीजेपी जिला अध्यक्ष केएम हरीदास ने इस हत्या के लिए सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया पर आरोप लगाया है, जो कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी पीएफआई की राजनीतिक इकाई है। पुलिस ने बताया कि संजीत के शरीर पर 50 से ज्यादा बार धारदार हथियार से वार के निशान मिले हैं। हत्या के बाद इलाके में तनाव का माहौल है और पुलिस ने सुरक्षा कड़ी कर दी है। फिलहाल जांच जारी है।

फांसी देगा, हाथ काटेगा और शरीर के टुकड़े भी करेगा तालिबान!

न्यूयॉर्क (एजेंसी)। अफगानिस्तान में बेहतर और समावेशी शासन देने के तालिबान के कथित दावों के बीच उसकी हरकतों से आतंकवादी संगठन का असली चेहरा सामने आने लगा है और इसी कड़ी में तालिबान ने ऐलान किया है कि वह अफगानिस्तान में फांसी देने, हाथ काटने और शरीर के टुकड़े करने जैसी बर्बर सजा को फिर से वापस लाएगा। हालांकि, सुपर पावर अमेरिका ने तालिबान के इस बयान की कड़ी निंदा की है और कहा है कि उसकी कथनी और करनी दोनों पर हमारी नजर है। 

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने शरिया कानूनों को लागू करने पर तालिबान के हालिया बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा, तालिबान का शरिया कानून मानवाधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है और वे अफगानिस्तान में मानवाधिकार सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ काम कर रहे हैं। 

नेड प्राइस ने कहा कि हम न केवल तालिबान के बयान पर बल्कि अफगानिस्तान में उसके एक्शन पर भी नजर रख रहे हैं। प्राइस ने कहा कि अमेरिका अफगान पत्रकारों, नागरिक कार्यकर्ताओं, महिलाओं, बच्चों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और विकलांग लोगों के साथ खड़ा है और तालिबान से उनके अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए कहा है।

अमेरिका की यह प्रतिक्रिया ऐसे वक्त में आई है, जब तालिबान के संस्थापकों में से एक मुल्ला नूरुद्दीन तुराबी ने कहा कि अफगानिस्तान में एक बार फिर फांसी और अंगों को काटने की सजा दी जाएगी। हालांकि, उसने कहा था कि यह संभव है कि ऐसी सजा सावर्जनिक स्थानों पर न दी जाए। तुराबी ने साफ कहा है कि स्टेडियम में दंड देने को लेकर दुनिया ने हमारी आलोचना की है। हमने उनके नियमों और कानूनों के बारे में कुछ नहीं कहा है। ऐसे में कोई हमें यह नहीं बताए कि हमारे नियम क्या होने चाहिए। हम इस्लाम का पालन करेंगे और कुरान पर अपने कानून बनाएंगे।

तालिबान द्वारा फांसी और हाथ और शरीर काटने जैसी सजाएं फिर शुरू किये जाने की चेतावनी के एक दिन बाद संगठन ने इस पर अमल भी कर दिखाया। चार लोगों के शवों को बड़ी क्रूरता से क्रेन के माध्यम से चौराहों पर लटका दिया गया। गौरतलब है कि 15 अगस्त को अफगानिस्तान में सत्ता संभालने के बाद से तालिबान अपने पिछले कार्यकाल की तुलना में नरम शासन का वादा करता रहा है लेकिन देश भर से मानवाधिकारों के हनन की कई खबरें पहले ही सामने आ चुकी हैं।

ED की पूछताछ में शामिल नहीं हुईं जैकलीन फर्नांडीज

मुश्किलें में घिरीं अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीज, ED की पूछताछ में नहीं हुईं शामिल- 200 करोड़ की रंगदारी से जुड़ा है केस

मुश्किलें में घिरीं अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीज, ED की पूछताछ में नहीं हुईं शामिल- 200 करोड़ की रंगदारी से जुड़ा है केस 

नई दिल्ली (एजेंसी)। बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीज को शनिवार प्रवर्तन निदेशालय (ED) के समक्ष मनी लांड्रिंग से जुड़े एक मामले में पेश होना था, लेकिन वो पूछताछ के लिए दिल्ली में हाजिर नहीं हुईं। यह लगातार दूसरी बार है, जब वो ईडी के नोटिस के बावजूद पूछताछ में शामिल नहीं हुई हैं। हालांकि जैकलीन किसी शूटिंग की व्यस्तता की वजह से दिल्ली नहीं आईं या कोई और वजह थी, इस पर अभी कोई जानकारी नहीं मिली है। यह मामला तिहाड़ जेल में 200 करोड़ की रंगदारी से जुड़ा है। इसका मास्टरमाइंड सुकेश चंद्रशेखर तिहाड़ जेल के भीतर से पूरा रैकेट चला रहा था।

सुकेश चंद्रशेखर केस में ED ने की एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस से पूछताछ; दर्ज  किया बयान - Republic Bharat

जानकारी के मुताबिक, दो सौ करोड़ की ये रंगदारी वसूलने के लिए मास्टरमाइंड सुकेश चंद्रशेखर फिल्म अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस को तिहाड़ जेल के भीतर से ही मोबाइल फोन करता था। जांच एजेंसी के सूत्रों का कहना है कि सुकेश चंदशेखर तिहाड़ जेल के अंदर से ही जैकलीन को कॉल स्पूफिंग सिस्टम के माध्यम से फोन करता था। लेकिन सुकेश चंद्रशेखरअपनी पहचान और पद बड़ा चढ़ाकर बताता था।

जांच एजेंसी के अनुसार, जब जैकलिन सुकेश के जाल में फंसने लगी तो उसे महंगे फूल और चॉकलेट गिफ्ट के तौर पर भेजने लगा। जैकलीन ये नहीं समझ पा रही थी कि ये सारा कुछ तिहाड़ जेल में बंद शातिर ठग सुकेश चंदशेखर कर रहा है। जांच एजेंसियों को सुकेश के अहम कॉल रिकॉर्ड हाथ लगे हैं। इसी आधार पर जैकलीन के साथ हुई धोखाधड़ी का जांच एजेंसियों को भी जानकारी मिल सकी।

जांच एजेंसियों ने सुरक्षा कारणों से उस नाम और पद का खुलासा नहीं किया है जो सुकेश चंद्रशेखर बॉलीवुड एक्ट्रेस जैकलीन को बताता था। इसी से जैकलीन सुकेश के बहकावे में आ गई। बॉलीवुड की एक और कई हिट फिल्मों में काम कर चुकी महिला सेलिब्रेटी को भी सुकेश ने निशाना बनाया था। एक फिल्म अभिनेता भी उसके निशाने पर था और इन सभी से जल्दी ही पूछताछ हो सकती है

इससे पहले 30 अगस्त 2021 की शाम ANI ने ट्वीट कर बताया कि दिल्ली में ED जैकलीन से पूछताछ कर रही है। मगर धीरे-धीरे इस मामले में अन्य डिटेल्स भी बाहर आ रहे हैं। NDTV ने अपने सूत्रों के हवाले से बताया कि जैकलीन इस केस में मास्टरमाइंड सुकेश चंद्रशेखर की पार्टनर लीना पॉल की वजह से फंसी हैं और वो खुद इस स्कैम का शिकार बन गईं। पांच घंटे तक चली पूछताछ के दौरान जैकलीन ने ऑफिसर्स को इस केस से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी। इनवेस्टिगेशन के दौरान ये भी पता चला है कि सुकेश इस बार एक बड़े बॉलीवुड सुपरस्टार को अपना निशाना बनाने वाला था। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उस सुपरस्टार का नाम नहीं बताया गया। बताया गया है कि एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने एक मनी लॉन्डरिंग केस में बॉलीवुड एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस से पूछताछ की। रिपोर्ट्स के मुताबिक दिल्ली में यह पूछताछ सेशन तकरीबन पांच घंटों तक चला।

पहचान दिखाने के लिए ‘दलित’ शब्द के प्रयोग से किया जाए परहेज़

अनुसूचित जातियों से सम्बन्धित किसी भी व्यक्ति की पहचान दिखाने के लिए ‘दलित’ शब्द के प्रयोग से परहेज़ किया जाए: अनुसूचित जाति आयोग

चंडीगढ़ (एजेंसी)। पंजाब के नव-नियुक्त मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के लिए ‘दलित’ शब्द का प्रयोग किए जाने का नोटिस लेते हुए पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग की चेयरपर्सन श्रीमती तजिन्दर कौर ने मंगलवार को हिदायत जारी की, कि सोशल मीडिया पेज, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में अनुसूचित जाति से सम्बन्धित किसी भी व्यक्ति की पहचान को दिखाने के लिए ‘दलित’ शब्द का प्रयोग न किया जाए। इस संबंधी जानकारी देते हुए श्रीमती तजिन्दर कौर ने कहा कि ‘संविधान या किसी विधान में ‘दलित’ शब्द का जि़क्र नहीं मिलता और इसके अलावा भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा पहले ही राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के सभी मुख्य सचिवों को इस संबंधी निर्देश दिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के माननीय हाईकोर्ट के ग्वालियर बेंच की तरफ से तारीख़ 15.01.2018 को केस नंबर डब्ल्यू.पी. 20420 ऑफ 2017 (पीआईएल)-डॉ. मोहन लाल माहौर बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य के अंतर्गत नीचे लिखे अनुसार निर्देशित किया गया है:….. कि केंद्र सरकार /राज्य सरकार और इसके अधिकारी /कर्मचारी अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों के लिए ‘दलित’ शब्द का प्रयोग करने से परहेज़ करें क्योंकि यह भारत के संविधान या किसी कानून में मौजूद नहीं है।

उन्होंने आगे कहा कि माननीय हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों /केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि अनुसूचित जातियों से संबंधित व्यक्तियों के लिए दलित’’ की बजाय अनुसूचित जाति शब्द का प्रयोग किया जाए। इस संबंधी विभिन्न मीडिया समूहों द्वारा किए जा रहे उल्लंघनों की रिपोर्टों पर कार्रवाही करते हुए सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने प्राईवेट सैटेलाइट टीवी चैनलों को नोटिस जारी करके उनको बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा पहले दिए गए आदेशों का पालन करते हुए रिपोर्टों में ‘दलित’ शब्द का प्रयोग न करने के लिए कहा है। 

विदित हो कि पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग की चेयरपर्सन तेजिन्दर कौर ने 13 सितम्बर, 2021 को मुख्य सचिव विनी महाजन को लिए पत्र में जाति आधारित नामों वाले गाँवों, कस्बों और अन्य स्थानों जिनके नामों में चमार, शिकारी आदि शामिल है, को बदलने और ऐसे शब्दों का प्रयोग करने से परहेज़ करने के लिए कहा। इसके अलावा साल 2017 में राज्य सरकार की तरफ से जारी निर्देशों के सख्ती से पालन को यकीनी बनाकर सरकारी कामकाज में हरिजन और गिरिजन शब्द न बरतने का भी निर्देश दिया था।  

Cafe D, शॉपर्स प्राइड मॉल, बिजनौर

घर-घर तक न्याय वितरण के लिए विधि और न्याय मंत्रालय का विशेष अखिल भारतीय अभियान शुरू

विधि और न्याय मंत्रालय ने घर-घर तक न्याय वितरण के लिए शुरू किया विशेष अखिल भारतीय अभियान


टेली-लॉ के तहत बड़े पैमाने पर पंजीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए देश भर में ‘एक पहल’ अभियान

Press Release, Ministry of Law and Justice

नई दिल्ली (PIB)। भारत के संविधान की प्रस्तावना अपने नागरिकों के लिए ‘न्याय’ को सुरक्षित किए जाने वाली पहली सुपुर्दगी के रूप में मान्यता देती है। एक सफल और जीवंत लोकतंत्र की पहचान यह है कि प्रत्येक नागरिक को न केवल न्याय की गारंटी दी जाए, बल्कि वह भी ऐसा जो न्यायसंगत हो। यह देश को एक ऐसा वातावरण बनाने के लिए बाध्य करता है, जहां न्याय-वितरण को एक संप्रभु कार्य के रूप में नहीं बल्कि नागरिक-केंद्रित सेवा के रूप में देखा जाता है।  वैश्विक महामारी ने लोगों की पीड़ा को कम करने में कानूनी सहायता संस्थानों की भूमिका को और अधिक स्पष्ट कर दिया है। इस परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखते हुए, न्याय विभाग और नालसा ने कानूनी सहायता को मुख्यधारा में लाने और प्रत्येक नागरिक के लिए न्याय तक पहुंच की आकांक्षा को साकार करने के लिए एक विशेष अखिल भारतीय अभियान चलाया है।

जैसा कि देश “आजादी का अमृत महोत्सव” मना रहा है, न्याय विभाग ने टेली-लॉ के तहत बड़े पैमाने पर पंजीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए दिनांक 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक देश भर में “एक पहल/एक पहल” अभियान शुरू किया। टेली लॉ का माध्यम प्रभावी रूप से पैनल वकीलों द्वारा लाभार्थियों को 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 633 जिलों में 50,000 ग्राम पंचायतों में 51,434 सामान्य सेवा केंद्रों को कवर करने वाले लाभार्थियों को पूर्व-मुकदमे संबंधी सलाह/ परामर्श प्रदान करता है।

5480 लाभार्थियों के पंजीकरण लॉगिन के साथ इस लॉगिन अभियान में लाभार्थियों के दैनिक औसत पंजीकरण की तुलना में 138% की वृद्धि दर्ज की गई। सीएससी में क्षेत्रीय भाषाओं में 25000 से अधिक बैनर कानूनी सलाह सहायक केंद्र के रूप में प्रदर्शित किए गए।

‘न्याय आपके द्वार’

To bring justice close to the people, a massive nationwide legal awareness campaign is launched focusing on the rights of common people, NALSA Legal Services Mobile App, salient features of application and Victim Compensation Schemes of NALSA & Mediation etc. pic.twitter.com/QDaswT5IlR— Kiren Rijiju (@KirenRijiju) September 17, 2021

नालसा और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण सभी नागरिकों, विशेषकर जरूरतमंद और गरीब लोगों को निकट, सस्ता और त्वरित न्याय प्रदान करके कानूनी सहायता वितरण और नागरिकों के कानूनी सशक्तिकरण का एक मजबूत ढांचा तैयार करने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। नालसा ने अपने देशव्यापी संगठनात्मक ढांचे के माध्यम से कानूनी जागरूकता पैदा करने के लिए एक अखिल भारतीय विशेष अभियान शुरू किया था। 
इस अभियान के मुख्य आकर्षण में 185 मोबाइल वैन और अन्य वाहनों को एक्सेस टू जस्टिस कार्यक्रम पर बनी फिल्में और वृत्तचित्र प्रदर्शित करने के लिए तैनात करना, 672 जिलों में विधिक सहायता को लेकर ग्राम स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के अलावा 37,000 पैनल वकीलों और पैरा-लीगल वॉलंटियर्स की मदद से आम नागरिकों को प्री-लिटिगेशन/कानूनी सलाह देने के लिए 4100 लीगल एड क्लीनिकों का आयोजन शामिल है।

Bringing Justice closer to the needy people.
This is the launch of Legal Awareness at Chattishgarh by Hon’ble Acting Chief justice. pic.twitter.com/M5EHrmvRbz— Kiren Rijiju (@KirenRijiju) September 17, 2021

डोर-टू-डोर अभियान, कानूनी सेवाओं पर बैनर का प्रदर्शन, रोड शो, नुक्कड़ नाटक आयोजित किए गए थे, जिन्हें 14.85 लाख से अधिक नागरिकों की उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया मिली।

न्याय विभाग और नालसा का यह संयुक्त प्रयास समावेशी शासन को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही बेजुबानों को आवाज देना और ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका न्याय’ के लक्ष्य के प्रति समर्पित रहना है।

मासूम बबली की लाश पर बिछी सियासी बिसात!

अपराध. कर्म दर्शन, 16 से 31 मई 2002

मासूम बबली की लाश पर बिछी सियासी बिसात!

संजय सक्सेना, उरई जालौन

दुर्गाष्टमी के दिन दलित युवती की संदिग्ध मौत मामला दिन पर दिन उलझता जा रहा है। सम्बन्धित थाना कदौरा पुलिस पर पक्षपात के आरोप खुलकर लग रहे हैं। वहीं आरोपियों के पक्ष में पूर्व मंत्री के खुलकर उतर आने के बाद पीड़ित पक्ष की पैरवी में भाकपा (माले) आ जुटी है।

२० अप्रैल को दुर्गाष्टमी के अवसर पर ग्राम बड़ागाँव थाना कदौरा के ग्रामीण जवारों की तैयारियों में लगे हुए थे कि शोर मच गया। हरी शंकर निषाद की १६ वर्षीय पुत्री बबली ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। मृतका के चाचा सरजू प्रसाद द्वारा कदौरा थाने में दर्ज कराई गयी प्राथमिकी में ग्राम प्रधान बाबूलाल व उसके परिवार के राकेश बाबू, रामबाबू व राकेश को नामजद कराते हुए आरोप लगाया गया कि उक्त लोगों ने बबली को घर में अकेला पाकर बलात्कार का प्रयास किया परन्तु अपनी कुत्सित इरादों में असफल होने पर फांसी पर लटका दिया, इससे बबली के प्राण पखेरू उड़ गये। थानाध्यक्ष शैलेन्द्र सिंह ने रिपोर्ट तो दर्ज कर ली परन्तु गांव के भीतर इस काण्ड को लेकर सियासी चालें चली जाने लगी। प्रत्येक गांव की तरह इस गांव में भी एक पक्ष पीड़ितों के पक्ष में आ खड़ा हुआ तो कुछ लोग दबंग प्रथान बाबूलाल की तरफ आ मिले जबकि कुछ बचे ग्रामिणों ने किसी भी ओर से मुंह खोलने से गुरेज करते हुए खुद को किनारे करने में भलाई समझी।

चार दिन बाद पूर्व मंत्री श्री रामपाल के आरोपी पक्ष की पैरवी में उतर आने से मामले ने एक नया मोड़ ले लिया। बहुजन समाज पार्टी की सरकारों में तीन बार मंत्री पद पर रह चुके श्रीरामपाल इस बार पार्टी से निकाल दिये जाने के बाद जब समाजवादी पार्टी के टिकट पर लड़कर चुनाव हार गये तो संभवतः दबे कुचले समाज के प्रति उनका मोह खत्म हो गया। इन चर्चाओं के अनुसार इसी कारण श्री रामपाल ने दबंग प्रधान बुन्देलखण्ड केसरी रह चुके बाबूलाल के बचाव का बीड़ा उठाया है। २४ अप्रैल को श्री रामपाल अपने साथ बाबूलाल को लेकर पुलिस अधीक्षक अमरेन्द्र सिंह सेंगर के पास पहुंचे और उक्त काण्ड में बाबूलाल को कथित रूप फंसाए जाने का आरोप लगाते हुए मामले की एक अलग तस्वीर पेश की। श्रीरामपाल के अनुसार मृतका बबली के गांव के ही सजातीय युवक वैलू से अवैध सम्बन्ध थे। अष्टमी के दिन जब गांव जवारे निकालने की तैयारी में लगा था तो सूना घर पाकर उक्त युवक बबली के पास जा पहुंचा और दुनिया से बेखबर दोनों प्रेमी प्रेमलाप में मग्न हो गये। अचानक युवती का पिता हरीशंकर वहां पहुंचा और उन दोनों को आपत्तिजनक स्थिति में देख आगबबूला हो गया। हरीशंकर ने लाठी लेकर दोनों की पिटाई शुरु कर दी और जब युवक घबराकर भाग गया तो उसने बबली को मारपीटकर बेहोश कर डाला, बाद में अपनी साफी (अंगोछे) से फांसी लगाकर मार दिया। चर्चा यह भी रही कि पिता द्वारा पीटे जाने से क्षुब्ध होकर बबली ने स्वयं फांसी पर लटककर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। मामले को राजनैतिक रंग देते हुए पुलिस अधीक्षक को बताया गया कि ग्राम प्रधानी के चुनाव में हरिशंकर का भाई वीर सिंह उम्मीदवार रहा था जो कि पराजित होने के बाद बाबूलाल से रंजिश मानने लगा था। इसी कारण बबली के परिजनों ने अपनी रंजिश मुनाते हुए बाबूलाल व उसके परिवार के युवकों को मामले में अभियुक्त बनवा दिया।

गौरतलब है कि थानाध्यक्ष शैलेन्द्र सिंह का पूरा कार्यकाल विवादों से अछूता नहीं रह सका है। वह जिस थाने में भी रहे वहीं कोई न कोई ऐसा मामला जरूर हुआ जिसमें शैलेन्द्र सिंह आरोपों से घिरे मानवाधिकार आयोग में भी उनके खिलाफ जांच चल रही है। आरोप है कि कुठौन्द रामपुरा व रेन्ढर के थानाध्यक्ष पदों पर रहते हुए उन्होंने न सिर्फ भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया बल्कि अराजक तत्वों को अभयदान देकर निरीह ग्रामीणों को सताया भी, यही कारण रहा कि उनके खिलाफ डेढ़ दर्जन से ज्यादा जांचे थीं जिनमें से कुछ चल रही हैं और कुछ दबा दी गयी। थानाध्यक्ष के पिछले रिकार्ड का हवाला देकर ग्राम बड़ांगाव के प्रधान का बचाव करने को सामने आने वाले लोगों का मानना है कि शैलेन्द्र सिंह ने व्यक्तिगत स्वार्थों की पूर्ति के

वहीं दूसरी ओर मामले में जिस युवक बैलू उर्फ रामबाबू को आरोपी पत्र में केन्द्र बिन्दुः बनाया था, उसको घटना के नौवें दिन जो रहस्योद्घाटन किया उससे चर्चाओं ने फिर दूसरा मोड़ ले लिया है। रामबाबू के अनुसार उसने दुर्गा मंदिर में बबली से शादी कर ली थीं। पिछले वर्ष हुई इस शादी की खबर बबली के घरवालों को हुई तो उन्होंने उसकी शादी कर्बी में तय कर दी। घटना वाले दिन सगाई रस्म होनी थी, बबली द्वारा विरोध जताने पर लड़के वाले वापस चले गये। उसी दिन घर सुनसान पाकर बबली ने उसे बुला लिया और इस नयी समस्या से निपटने के विषय में बातें करने लगी। इसी बीच उसके पिता हरिशंकर वहां आ गये और क्रोधित होकर दोनों की पिटाई कर दी। रामबाबू किसी प्रकार वहां से जान बचाकर भाग आया। रामबाबू के अनुसार हरिशंकर ने बबली की चोटों का इलाज भी कराया था। उसकी मौत कैसे हुई यह बात वह स्वयं नहीं जानता।

घटना के परिप्रेक्ष्य में भाकपा (माले) ने खोजबीन कर जो निष्कर्ष निकाला वो यह है कि बबली की मौत से करीब ८ दिन पहले इस काण्ड की रूपरेखा दबंग प्रधान द्वारा रच ली गयी थी। पार्टी के अनुसार ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि बबली कुएं से पानी भरकर लौट रही थी कि राह में राकेशबाबू, रामबाबू व राकेश ने उसे छेड़ा जिस पर बबली नै चप्पल फेंक कर मारी थी। इस अपमान का बदला लेने के लिये अभियुक्तों ने पहले तो उसे अपनी कामपिपासा का शिकार बनाया फिर फांसी पर लटका कर उसकी जान ले ली। भाकपा नेताओं के अनुसार बबली की लाश कहीं लटकी हुई नहीं पाई गयी और उसके गले में साफी पड़ी थी, गर्दन की हड्डी टूटी थी जैसा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी स्पष्ट है। भाकपा माले नेता देवेन्द्र शुक्ल ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि पुलिस अधिकारी, पत्रकार व उनकी पार्टी के एक-एक सदस्य की टीम गठित कर बड़ागांव भेजी जाये जिससे दूध का दूध, पानी का पानी हो सके। आरोप है कि अभियुक्तों में से एक रामबाबू ने अपनी शादी बबली से हो चुकने की बात प्रचारित कर केस को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश की है। शक की गुंजाइश इसलिये भी है क्योंकि थानाध्यक्ष शैलेन्द्र सिंह आपराधिक मामलों को उलटफेर करने के गणित में माहिर है ही खास तौर से तब जब मामले में कोई तगड़ा आसानी फंसा हो।

बार काउसिल ऑफ उत्तर प्रदेश प्रयागराज से हुआ मलिहाबाद बार एसोसिएशन का सम्बद्धीकरण

लखनऊ। आम के मामले में विश्व विख्यात उत्तर प्रदेश की राजधानी की तहसील मलिहाबाद के बार एसोसिएशन का सम्बद्धीकरण बार काउसिल ऑफ उत्तर प्रदेश प्रयागराज से हो गया है। अभी तक यह बहुप्रतीक्षित कार्य किन्हीं कारणों से नहीं हो पाया था। वर्तमान कार्यकारिणी के महामंत्री राम सिंह यादव एडयोकेट के अथक प्रयास रंग लाए हैं।

राजधानी की तहसील मलिहाबाद आम के मामले में विश्व विख्यात है। दशकों तक मलिहाबाद बार एसोसिएशन का सम्बद्धीकरण बार काउसिल ऑफ उत्तर प्रदेश प्रयागराज से किन्हीं कारणों से नहीं हो पाया था।

वर्तमान कार्यकारिणी के महामंत्री राम सिंह यादव एडयोकेट के अथक प्रयासों से मलिहाबाद बार एसोसिएशन का सम्बद्धीकरण बार काउसिल ऑफ उत्तर प्रदेश प्रयागराज द्वारा बार काउसिंल अध्यक्ष शिरीष कुमार मल्होत्रा द्वारा किया जा चुका है।

खुशी की लहर- सम्बद्धीकरण प्रमाण पत्र मिलते ही मलिहाबाद बार एसोसिएशन के समस्त सदस्यों में खुशी की लहर दौड़ गयी। सभी ने एक दूसरे को मिठाई खिला कर बधाई दी और एकमत होकर संकल्प लिया कि मलिहाबाद बार एसोसिएशन को मजबूत करने के लिये सभी का सहयोग रहेगा। अधिवक्ता हितों की अनदेखी कतई बर्दास्त नहीं की जायेगी।

इस दौरान महामंत्री राम सिंह यादव एडवोकेट, वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य जसकरन सिंह, फुरकान खान, मो. फरीद खान, समाट सिंह, विनोद तिवारी, केके सिंह, मनोज सिंह, आनन्द कुमार दीक्षित, गोपीचन्द्र कनौजिया, रमेश कुमार सिंह, अमरेन्द्र कुमार सिंह, आदित्य नारायण द्विवेदी, रवि शंकर, प्रकाशचंद
शर्मा, शरीक शमीम खाँ, सर्वेश यादव, सर्वेश सैनी, रईस अहमद, अनिल यादव, शशिकान्त मिश्रा, पुतान सिंह, रामचन्द्र, विनोद यादव, राम शंकर, अमित सिंह, उत्तम कुमार, मेवालाल, इरशाद हुसैन, मनोज कनौजिया, परमेश्वरदीन, अशोक यादव, अमर पाण्डेय, वीरेन्द्र प्रताप सिंह, शाहबाज खान, फैसल खान, नमन प्रताप सिंह, हंसराज गुप्ता, राघवेन्द्र सिंह, कपिल यादव, देवेन्द्र सिंह, रिलेश यादव, गौरव प्रजापति व ओम प्रकाश यादव आदि लोग मौजूद रहे।

कमिश्नर के कुत्ते को घर घर ढूंढ रही पुलिस

कमिश्नर साहब का कुत्ता हुआ गुम। खोजने में जुटा पूरा पुलिस प्रशासन। लाउडस्पीकर पर ऐलान कर घर-घर की जा रही तलाशी।

अजब: कमिश्नर साहब का कुत्ता हुआ गुम, खोजने में जुटा पूरा पुलिस प्रशासन- लाउडस्पीकर पर ऐलान कर घर-घर की जा रही तलाशी

गुजरांवाला (एजेंसी)। कई वर्ष पहले भारत के उत्तर प्रदेश से खबर आई थी कि सपा नेता आजम खान की भैंस चोरी होने पर एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने लंबे समय तक जांच जारी रखने के बाद चोर को गिरफ्तार भी किया। अब ऐसी ही खबर पाकिस्तान के गुजरांवाला से आई है। यहां के कमिश्नर जुल्फिकार अहमद गुमान के पालतू कुत्ते को ढूंढने के लिए पूरा पुलिस प्रशासन जुट गया है। इतना ही नहीं घर-घर तलाशी के अलावा जगह-जगह लाउडस्पीकर से लापता कुत्ते को लेकर घोषणाएं तक हो रही हैं।

कुत्ते की खोज में लाउडस्पीकर से एलान

पाकिस्तान के मीडिया की खबर के मुताबिक कमिश्नर का कुत्ता मंगलवार को लापता हुआ था। इसके बाद उन्होंने पूरे प्रशासन को उसे खोजने में लगा दिया। कमिशनर ने जगह-जगह रिक्शे पर लाउडस्पीकर के जरिए लापता कुत्ते की खोज के लिए घोषणाएं करवाई और अपने नीचे काम करने वालों को यह आदेश दिया है कि किसी भी कीमत पर कुत्ते को खोज निकालें।

रुद्रप्रयाग जिले के 14 शिक्षकों के खिलाफ FIR

देहरादून (एकलव्य बाण समाचार)। राज्य में लंबे समय से फर्जी डिग्री के आधार शिक्षक बनने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रमुख सचिव गृह के आदेश के बाद अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध एवं कानून व्यवस्था आदेशानुसार बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत फर्जी शिक्षकों व अन्य समस्त शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच अपर पुलिस अधीक्षक/सैक्टर अधिकारी के निर्देशन में सीआइडी सैक्टर देहरादून कर रहा था।

जांच के लिए गठित एसआईटी की ओर से चलाये जा रहे अभियान के अन्तर्गत जनपद रूद्रप्रयाग के 25 शिक्षकों के विरुद्ध विधिक कार्यवाही करने हेतु रिपोर्ट महानिदेशक, विद्यालयी शिक्षा, उत्तराखण्ड को विभिन्न तिथियों को प्रेषित की गई थी। सैक्टर अधिकारी द्वारा महानिदेशक, विद्यालयी शिक्षा उत्तराखण्ड से पत्राचार करने पर 14 अन्य निम्न शिक्षकों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।

आरोपी शिक्षकों के नाम 👇

  1. कान्ति प्रसाद, सहायक अध्यापक राप्रावि जैली ब्लॉक जखोली जनपद रूदप्रयाग।
  2. संगीता बिष्ट, सहायक अध्यापिका राप्रावि कैलाशनगर ब्लॉक जखोली जनपद रूदप्रयाग।
  3. मोहन लाल, सहायक अध्यापक, राप्रावि सारी, ब्लॉक ऊखीमठ, जनपद रूदप्रयाग।
  4. महेन्द्र सिंह, सहायक अध्यापक, राजकीय प्राथमिक विद्यालय लुखन्द्री, ब्लॉक जखोली, जनपद रूदप्रयाग।
  5. राकेश सिंह, सहायक अध्यापक, राजकीय प्राथमिक विद्यालय धारतोन्दला, ब्लॉक अगस्तमुनि, जनपद रूदप्रयाग।
  6. माया सिंह, सहायक अध्यापिका, राप्रावि जयकण्डी ब्लॉक अगस्तमुनि जनपद रूदप्रयाग।
  7. विरेन्द्र सिंह, सहायक अध्यापक, जनता जूनियर हाई स्कूल, जखन्याल गांव, ब्लॉक जखोली, जनपद रूदप्रयाग
  8. विजय सिंह, सहायक अध्यापक, राप्रावि भुनालगांव, ब्लॉक जखोली, जनपद रूदप्रयाग।
  9. जगदीश लाल. सहायक अध्यापक, राप्रावि जौला, ब्लॉक अगस्तमुनि, जनपद रूदप्रयाग
  10. राजू लाल सअ राप्रावि जग्गीबगवान लॉक ऊखीमठ जनपद रूद्रप्रयाग।
  11. संग्राम सिह. राअ, राप्रावि स्यूर बरसाल, ब्लॉक जखोली जनपद रूद्रप्रयाग।
  12. सहायक अध्यापक मलकराज पुत्र शौला लाल राप्रावि जगोठ, ब्लॉक अगस्तमुनि, जनपद रूदप्रयाग
  13. सहायक अध्यापक रघुवीर सिंह पुत्र भरत सिंह जनता जूनियर हाईस्कूल जखन्याल गांव, ब्लॉक जखोली, जनपद रूदप्रयाग
  14. अध्यापक श्री महेन्द्र सिंह पुत्र रणबीर सिंह राप्रावि रायडी, ब्लॉक जखोली, जनपद रूदप्रयाग

अब तक की कार्यवाही- एसआईटी द्वारा अब तक फर्जी शिक्षकों के विरूद्ध विधिक कार्यवाही करने हेतु 120 रिपोर्ट महानिदेशक, विद्यालयी शिक्षा, उत्तराखण्ड को प्रेषित की गई है, जिनमें से 68 अभियोग 80 शिक्षकों के विरूद्ध एफआईआर पंजीकृत की जा चुकी है। वर्ष 2012 से 2016 तक में नियुक्त कुल 9602 शिक्षक जोकि जांच के दायरे में हैं, उनके नियुक्ति सम्बन्धी कुल अभिलेख 64641 हैं। इनमें से 35722 अभिलेखो का सत्यापन कराया जा चुका है। शेष 28919 अभिलेखों के सत्यापन की कार्यवाही प्रचलित है। वर्तमान में एसआइटी में लोकजीत सिंह के निर्देशन में 8 निरीक्षक (4 देहरादून सैक्टर में तथा 04 हल्द्वानी सैक्टर में) नियुक्त हैं।

न्याय विभाग की टेली लॉ सर्विस शुरू

न्याय विभाग की टेली लॉ सर्विस शुरू

अब जन जन तक पहुंचेगा न्याय

कॉमन सर्विस सेंटरों के द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी सुविधा

बिजनौर। (एकलव्य बाण समाचार) जन जन तक न्याय की पहुंच को सभी जनता तक पहुंचाने के लिए न्याय विभाग द्वारा टेली लॉ सर्विस को शुरू कर किया गया है। यह कॉमन सर्विस सेंटरों के द्वारा उपलब्ध कराई जा रही है। उक्त जानकारी सीएससी के जिला प्रबंधक नसीम अहमद ने प्रेस वार्ता करते हुए दी। उन्होंने बताया कि इस सुविधा को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य हमारे ग्रामीण भाई जो गांव के किसी भी कोने में बैठे हैं और उनको कानून संबंधित कोई जानकारी चाहिए। वे वकील के पास जाने में असमर्थ रहते हैं क्योंकि उनसे कचहरी या वकील बहुत दूर होता है। इसी परेशानी को देखते हुए प्रधानमंत्री और कानून मंत्री द्वारा टेली लॉ सर्विस शुरू हुई है, जिसमें वकील आपको वीडियो कॉलिंग या टेली कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा सलाह देते हैं। इस सुविधा में पीड़ित गांव के किसी भी जनसेवा केंद्र में जाकर अपनी परेशानी को रजिस्टर्ड कर सकता है। उसके बाद हमारे वकील जो उनसे काफी दूर हैं। पीड़ित को फोन करके उनको सलाह तथा समस्या का समाधान करते हैं। यह सुविधा 2017 में शुरू की गई थी। अभी तक यह सुविधा उत्तर प्रदेश के केवल 8 जिलों में उपलब्ध थी। अब इस सुविधा को जनपद बिजनौर के लगभग 1500 कॉमन सर्विस सेंटरों पर उपलब्ध कर दिया गया है। इसमें हमारा पैरा लीगल वालंटियर गांव गांव में लोगों की समस्याओं को सुनकर टेली लॉ पोर्टल पर रजिस्टर कराता है और उस पीड़ित को घर बैठे ही कानूनी सलाह वकीलों द्वारा मिल जाती है। पोर्टल के माध्यम से कानूनी सलाह के मामले जैसे दहेज, घरेलू हिंसा, जमीन जायदाद व संपत्ति के मामले तथा लिंग और भ्रूण जांच, जमानती तथा गैर जमानती अपराध, जमानत मिलने की प्रक्रिया, अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के प्रति अत्याचार के मामले दर्ज किए जा सकते हैं। यह सुविधा महिलाएं, बच्चे जो 18 साल से कम उम्र के हैं, अनुसूचित जाति व जनजाति, दिव्यांग व्यक्ति, मनरेगा मजदूर, प्राकृतिक आपदा से पीड़ित जैसे भूकंप आदि, जिस की वार्षिक आय कम है और जो लोग हिरासत में हैं, इस तरह के लोगों को लिए निशुल्क दी जाती है अन्य व्यक्ति से रुपए 30 देकर कानूनी सलाह प्राप्त कर सकते हैं। इस सुविधा को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य जैसे कि कोई गांव में वृद्ध आदमी जिसको वृद्धावस्था पेंशन नहीं मिल रही है वह यह जानना चाहता है कि उसे वृद्धावस्था पेंशन के लिए क्या करना पड़ेगा तो वह सीधा जन सेवा केंद्र में आकर केस रजिस्टर करा सकता है और हमारा वकील उसको बताएगा कि वह कहां जाकर इस समस्या का निदान पा सकता है।

इसी तरह से यदि कोई महिला किसी घर में प्रताड़ित हो रही है तो वह भी जन सेवा केंद्र में जाकर अपनी समस्या को रजिस्टर करते हुए हमारे वकील द्वारा टेलीफोन के माध्यम से सलाह पा सकती है। इतना ही नहीं अगर उस महिला को किसी वकील की भी जरूरत है तो हमारे जिला विधिक कार्यालय द्वारा वकील भी उपलब्ध कराया जाएगा जो कि नि:शुल्क होगा । लाभार्थी को किसी बारे में कानूनी सलाह चाहिए तो वह अपने साथ आधार कार्ड, राशन कार्ड, वोटर आईडी, जाति प्रमाण पत्र, विकलांगता पहचान पत्र लाकर केस रजिस्टर करा सकते हैं।

आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को होम डिलीवरीकी अनुमति

बिजनौर। कोविड-19 (कोरोनावायरस ) के रोकथाम के दृष्टिगत जनपद बिजनौर उत्तर प्रदेश में घोषित लॉकडाउन के दौरान आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बनाए रखने हेतु निम्न कुछ दुकानदारों को वस्तुओं की होम डिलीवरी किये जाने की अनुमति दी गई है।

( होम डिलीवरी निर्धारित मूल्य पर )

…तो भैंस के मांस के साथ पकड़े दो आरोपी!

गौकशी करते तीन पकड़े जाने की रही क्षेत्र में चर्चा।

पुलिस ने भैंस के मीट के साथ दो का किया चालान।

बिजनौर। नजीबाबाद पुलिस ने दो युवकों को 20 किलो भैंस के मीट के साथ गिरफ्तार कर चालान किए जाने का प्रेस नोट जारी किया है। साथ ही तीसरा आरोपी को/ फरार हो जाना बताया है। वहीं क्षेत्र में गौकशी करते तीन लोगों को गिरफ्तार किए जाने की चर्चा जोरों पर बनी रही। कोतवाली थाना नजीबाबाद पुलिस ने शनिवार को जारी किए गए प्रेस नोट में बताया है कि शुक्रवार की शाम दरोगा विजय यादव अपनी टीम के साथ लाकडाउन चैकिंग कर रहे थे। तभी पुलिस टीम को ग्राम हर्षवाड़ा स्थित एक मदरसे के पास तीन युवक हाथ में कट्टे ले जाते दिखाई दिए, जिन्हें पुलिस ने पकड़ लिया और घूमने का कारण पूछा। पूछताछ व तलाशी लेने पर दो युवकों के पास से 30 किलो भैंस का मीट, औजार, चाकू आदि बरामद हुए। पूछताछ में युवकों ने अपने नाम आकिब पुत्र यूसूफ काला और रिजवान पुत्र सरफराज बताए। उन्होंने बताया कि गुरुवार की रात्रि में उन्होंने एक भैंस काटी थी, जिसमें से कुछ मीट बेच दिया गया था। शेष मीट को खेत में छुपा कर रखा गया था। उसे लेकर वे लोग बेचने के लिए जा रहे थे। उधर शुक्रवार को दिन भर क्षेत्र में चर्चा बनी रही कि पुलिस ने तीन लोगों को हर्षवाड़ा क्षेत्र से गौकशी करते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। इनमें एक क्षेत्र के नामचीन और रसूखदार व्यक्ति का पुत्र है। अब क्या कहें चर्चा तो आखिर चर्चा ही है। बहरहाल पुलिस की ओर से मुकदमा दर्ज कर दो लोगों को भैंस के मांस के साथ गिरफ्तार किए जाने और उनके एक साथी के फरार हो जाने का प्रेस नोट जारी कर देने से साफ हो गया कि क्षेत्र में गौकशी नहीं की गयी और पुलिस ने भी रंगेहाथ गौकशी करते तीन आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर आकिब व रिजवान का चालान दिया है। वहीं तीसरा आरोपी आजाद पुत्र जाहिद पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सका है। पुलिस के मुताबिक भैस के अवशेष भी नष्ट किए गए हैं। इसके बाद क्षेत्र के लोगों में भी अब बस यही चर्चा है कि तो यह गौकशी का मामला नहीं था, भैस के मांस के साथ दो आरोपियों को ही गिरफ्तार किया गया था। साथ ही यह भी चर्चा रही कि एक तेज तर्रार उपनिरीक्षक और चार कांस्टेबिल होने के बावजूद दो दिनों में भी फरार आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया जा सका। पुलिस की उक्त कार्रवाई में उपनिरीक्षक विजय यादव के साथ कांस्टेबिल रविन्द्र कुमार, कांस्टेबिल  मान सिंह. कांस्टेबिल ईशू पवार व कांस्टेबिल योगेश कुमार के साथ होने की बात पुलिस की ओर से जारी किए गए प्रेस नोट में भी है। 

आपत्तिजनक फोटो वायरल करने का आरोपी गिरफ्तार

आपत्तिजनक फोटो वायरल करने वाला गिरफ्तार। महाराज नरसिहानन्द की आपत्तिजनक फोटो फेसबुक पर की थी वायरल। पुलिस ने धार्मिक भावनाओं भडक़ाने के मामले में हर्षवाड़ा से किया गिरफ्तार।

बिजनौर। महाराज नरसिहानन्द की आपत्तिजनक फोटो फेसबुक के माध्यम से वायरल करने वाले युवक को नजीबाबाद पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

मंगलवार व बुधवार की दरम्यानी रात्रि कोतवाली थाना पुलिस ने निकटवर्ती ग्राम हर्षवाड़ा से परवेज अंसारी पुत्र नफीस आलम हाल निवासी हर्षवाड़ा तथा स्थायी निवासी बुलन्दशहर जनपद के ग्राम कियाला, गुलावठी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक उक्त युवक ने विगत दिनों महाराज नरसिहानन्द की आपत्तिजनक फोटो फेसबुक पर वायरल की थी। फेसबुक पर वायरल उक्त फोटो में महाराज नरसिहानन्द की फोटो पर कुत्ते द्वारा मूत्र विर्सजन करते हुए दिखाया गया था।  पुलिस के मुताबिक उक्त वायरल फोटो को हिन्दू धर्म की भावनाओं को ठेस पहुंचाने, भडक़ाने एवं जनता को उत्तेजित करने के लिए पोस्ट किया गया, जिससे दो धर्म तथा जाति के समुदायो के बीच शत्रुता, धर्म का अपमान होने एवं दोनो धर्मो के मध्य शत्रुता फैलाने का कृत्य किया गया है। इस सम्बन्ध में थाना नजीबाबाद पर मुकदमा अपराध संख्या 237/2021 धारा 153 ए 295 भारतीय दंड विधान बनाम परवेज अंसारी पंजीकृत किया गया है। पुलिस ने गिरफ्तार किए गए आरोपी परवेज अंसारी पुत्र नफीस आलम का सम्बन्धित धाराओं में चालान कर दिया। आरोपी को गिरफ्तार करने वाली टीम में उप निरीक्षक विजय यादव तथा कांस्टेबिल मान सिंह शामिल रहे।

361 का चालान कर वसूला ₹ 2 लाख साढ़े 56 हजार जुर्माना

बिजनौर। कोरोना संक्रमण की रोकथाम हेतु पुलिस अधीक्षक डॉ. धर्मवीर सिंह के निर्देशन में बिना मास्क घूमने वालों के विरुद्ध अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में शुक्रवार दिनांक 07.05.2021 को जनपदीय पुलिस द्वारा बिना मास्क घूम रहे 361 व्यक्तियों का चालान कर 2,56,500 रुपए का जुर्माना वसूला गया।

अकारण घूमते लोगों के एसपी ग्रामीण ने कटवाए चालान
नजीबाबाद। एसपी ग्रामीण ने स्वयं खड़े होकर बिना किसी जरूरी कारण घूमते मिले लोगों की क्लास लगायी। उन्होंने कोतवाली थाना प्रभारी निरीक्षक को कई लोगों के चालान काटने के निर्देश दिए और अपने सामने कई लोगो के चालान कटवाए। इसके अलावा साथ सख्त कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी। शुक्रवार की दोपहर पहुंचे एसपी ग्रामीण संजय कुमार ने रेलवे स्टेशन चौकी के सामने सडक़ पर बेखौफ आवागमन करते हुए लोगों को देख कोतवाली थाना प्रभारी निरीक्षक दिनेश गौड़ से कहा कि लोग खुले आम तुम्हारे सामने से जा रहे हैं तुम क्या कर रहे हो?  दौरे पर आए एसपी ग्रामीण संजय कुमार इस दौरान नजीबाबाद रेलवे स्टेशन पुलिस चौकी के बाहर खड़े हो गए थे। उप जिलाधिकारी परमानन्द झा तथा क्षेत्राधिकारी पुलिस गजेन्द्र पाल सिंह भी वहां पर मौजूद थे। एसपी ग्रामीण ने कहा कि लॉकडाउन का मतलब ही क्या है? जब पुलिस के सामने ही खुले आम लोग दौड़ रहे हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि लॉकडाउन का सख्ती से पालन कराया जाए। बिना कारण सडक़ों पर घूमने वाले लोगों का सीधे चालान करो तभी लोग समझेंगे। जब कोई कहने से नहीं मान रहा तो सख्ती अपनानी जरूरी है। उन्होंने स्वयं खड़े होकर वाहनों को रोका और पूछताछ की जो लोग बिना कारण घूमते मिले उनका चालान कराया।

यक्ष प्रश्न बना मंडावली में अवैध खनन!

मंडावली थाना क्षेत्र में खुलेआम हो रहा अवैध खनन। प्रशासन और पुलिस दिन रात दौड़ते डंपरों को लेकर मौन। शासन-सत्ता को धता बता कौन दे रहा संरक्षण।

बिजनौर। तहसील नजीबाबाद के मंडावली थाना क्षेत्र में दिन-रात शासन व सत्ता को धता बताते हुए किए जा रहे अवैध खनन को लेकर प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी -कर्मचारी चुप्पी साधे हुए हैं। लोगों का कहना है कि आखिर वह कौन सी अदृश्य शक्ति है, जिसके सामने सभी लोग गौण होकर रह गए हैं? इस बार मंडावली थाना क्षेत्र के सबलगढ़ में दिन-रात किए जा रहे अवैध खनन कार्य में मजदूरों के स्थान पर मशीनों से काम लिया जा रहा है। तेजी से अवैध खनन किए जाने और कम से कम समय में अवैध खनन का अधिक से अधिक भंडारण किए जाने के चलते डंपरों के पीछे की ओर लगे डालों को भी खनन माफियाओं ने कटवा दिया है।

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए मतदान संपन्न होने के बाद से ही थाना मंडावली क्षेत्र में खुलेआम दिन-रात नदी का सीना चीरकर अवैध खनन किया जाना जारी है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस मानों आंखें मूंदे हुए अवैध खनन माफिया के सामने चुप्पी साधे हुए है। कोरोना महामारी के बढ़ते संक्रमण के चलते क्षेत्र की सडक़ों पर विभिन्न स्थानों पर दिन भर वाहन चैकिंग अभियान चलाने वाली पुलिस को भी सामने से गुजरते अवैध खनन से लदे ट्रक और डंपर ऐसे दिखायी नहीं देते है, मानो वह अदृश्य रूप में उनके सामने से गुजर रहे हों।

पूर्व में इस क्षेत्र में अवैध खनन किए जाने की शिकायत पर कई मर्तबा तत्कालीन उपजिलाधिकारी नजीबाबाद तथा खनन विभाग के अधिकारी छापामार कार्रवाई करते रहे हैं। इस बार अवैध खनन माफिया के सामने स्थानीय प्रशासन व पुलिस कार्रवाई करते दिखायी नहीं दे रही है। पूर्व में उपजिलाधिकारी नजीबाबाद ने सबलगढ़ क्षेत्र में होने वाले अवैध खनन पर  कार्रवाई करते हुए पूर्ण रूप से अंकुश लगा दिया था। इसके बाद विगत दिनों उक्त क्षेत्र में उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश का सीमांकन भी कराया गया।ब सीमांकन प्रक्रिया के दौरान एसडीएम ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि किसी भी कीमत पर अवैध खनन नहीं होने दिया जाएगा।

करीब एक सप्ताह से मंडावली थाना क्षेत्र के सबलगढ़ के जंगल क्षेत्र में कुत्ता घाट पर खुलेआम दिनदहाड़े अवैध खनन होने पर भी शासन-प्रशासन स्तर से अंकुश लगाने के लिए किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की गयी। इस बार अपने नए अवतार में अवैध खनन करने को मैदान में उतरे खनन माफिया ने दिन-रात नदी का सीना चीरकर कम से कम समय में अधिक से अधिक अवैध खनन सामग्री भंडारण करने के उद्देश्य से मजदूरों को भी खनन कार्य में नहीं लगाया है। मजदूरों के स्थान पर ट्रैक्टरों से नदी से खनन सामग्री उठाकर डंपरों और ट्रकों में भरने का कार्य किया जा रहा है। इसके लिए अवैध खनन में जुटे माफिया ने डंपर के पिछले हिस्से को बंद करने वाले डाले भी कटवाकर अलग रख दिए हैं। अवैध खनन के दौरान मजदूरों को काम न मिलने से पूर्व में अवैध खनन में माफिया के लिए काम करते रहे क्षेत्र के मजदूरों ने भी अपनी नाराजगी व्यक्त की है। हालांकि वह मजदूर भी अवैध खनन के काले कारोबार को संचालित करने वाले खनन माफिया के सामने आकर विरोध करने की क्षमता न होने की बात कर रहे हैं। एक मजदूर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अवैध खनन माफिया की पहुंच काफी ऊपर तक है, जिसकी वजह से शासन-सत्ता और पुलिस भी मौन होकर सबकुछ देखते हुए अनजान बनी हुई है।

अवैध खनन किस के इशारे पर! बड़ा सवाल यह है कि एसडीएम नजीबाबाद की ओर से क्षेत्र में अवैध खनन न होने देने को कहे जाने के बावजूद दिन-रात खुलेआम हो रहा खनन किसके इशारे पर हो रहा है? और क्या स्थानीय पुलिस दिन-रात अपने सामने से अवैध खनन सामग्री लादकर सडक़ों पर सरपट दौड़ रहे वाहनों पर कोई कार्रवाई करना गवांरा करेगी? सवाल यह भी है कि क्या क्षेत्र में हो रहे अवैध खनन के काले कारोबार पर पूर्ण रूप से अंकुश लग सकेगा? ऐसे कई प्रश्नों के उत्तर भविष्य के गर्भ में छिपे हैं।

जाम का कारण बन रहे अवैध खनन से लदे डंपर

नजीबाबाद नगर के मालगोदाम तिराहे से मोटाआम होते हुए मालन नदी तक भारी वाहनों के आवागमन पर रोक के बावजूद रात-दिन अवैध खनन से लदे डंपर सरपट दौड़ रहे हैं। इससे एक ओर जहां दुर्घटनाओं का अंदेशा बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर उक्त मार्ग पर जाम की स्थिति बनी रहने से लोग आजिज हैं। स्थानीय पुलिस ने नगर में मालगोदाम तिराहे से मालन नदी पुल तक के लिए पूर्व में भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दी थी। स्थानीय पुलिस ने रोडवेज बसों समेत सभी भारी वाहनों को हर्षवाड़ा के समीप से होकर गुजरने वाले बाइपास मार्ग से आवागमन करने के सख्त निर्देश दिए थे। इसके बाद नगर के मालगोदाम तिराहा, कृष्णा टाकीज चौराहा, मोटा आम चौराहा तथा मोहल्ला रम्पुरा चौराहे पर काफी हद तक जाम की समस्या से नागरिकों को निजात मिल गयी थी। विगत कई दिन से एक बार फिर अवैध खनन से लदे डंपरों का उनके चालकों ने मालगोदाम तिराहे से मोटाआम होकर मालन नदी तक जाने वाले मार्ग से आवागमन कराना शुरु कर दिया है। इस वजह से नगर में एक बार फिर जाम की स्थिति बनने लगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस को पहली वाली यातायात व्यवस्था को चालू रखते हुए भारी वाहनों का आवागमन बाइपास से ही कराना चाहिए, जिससे नागरिकों को जाम की समस्या से निजात मिल सके।

बिजनौर की धरती बंजर करने पर उतारू खनन माफिया!

इस तरह तो खोखली हो जाएगी सोना उगलने वाली जनपद की जमीन। सत्ता, प्रशासन और माफिया के गठजोड़ से हो रहा अवैध खनन! ये तिकड़ी बिजनौर को कर देगी बर्बाद!

बिजनौर। सत्ता, प्रशासन और माफिया का गठजोड़ जनपद की धरती को खोखला करने पर उतारू है। मिट्टी, रेत, बालू, पत्थर आदि के अवैध खनन रोकने के योगी सरकार के दावों के बीच बिजनौर की सोना उगलने वाली धरती को बंजर बनाने का षडयंत्र चल रहा है। शिकायत करने के बावजूद प्रशानिक अफसरों की इस संबंध में हीलाहवाली साबित कर रही है कि मात्र दाल में कुछ काला नहीं है, बल्कि पूरी की पूरी दाल ही काली है। शिकायत के बाद खनन की सरपट दौड़ती गाड़ी पर कुछ समय का ब्रेक और फिर बेतहाशा रफ्तार की वजह से यह मानने का कोई कारण नहीं है कि संलिप्तता बड़े अधिकारियों तक की है।

वैसे तो जनपद में कई स्थानों पर अवैध खनन जोरशोर से चल रहा है, लेकिन यह मामला चांदपुर तहसील के ग्राम करनपुर गांवड़ी व तोहफापुर का है। यहां खेतों में पिछले सप्ताह भर से लगातार जेसीबी, डम्फर के द्वारा अवैध खनन किया जा रहा है। कोई कार्यवाही न किए जाने से तहसील प्रशासन की संलिप्तता उजागर हो रही है। प्रदेश सरकार लाख प्रयास करे, लेकिन प्रशानिक अधिकारी मनमानी पर उतारू हैं, इसका जीता जागता उदाहरण अवैध खनन पर कार्यवाही न किए जाने से प्रदर्शित हो रहा है। दरअसल मामला चांदपुर तहसील व हल्दौर थाना क्षेत्र से सम्बन्धित है, जहां पर एक सप्ताह से लगातार अवैध खनन किया जा रहा है। लाख शिकायतों के बाद भी प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। हमारे संवाददाता द्वारा बुधवार रात्रि 8:00 बजे उपजिलाधकारी चांदपुर को इस अवैध खनन के बारे में पूरी जानकारी उपलब्ध कराने के बाद शुक्रवार प्रात: काल 8:00 बजे तक कोई कार्यवाही न होने से साबित हो रहा है कि खनन माफिया के हौसले कितने बुलंद हैं। 

खनन माफिया को किसकी सरपरस्ती हासिल? विश्वस्त सूत्रों के अनुसार उक्त खनन माफिया के सिर पर सत्तारूढ़ पार्टी के एक दिग्गज का हाथ बताया जा रहा है। अक्सर इस खनन माफिया को उनके इर्दगिर्द देखा जा सकता है। सूत्रों का दावा है कि यह माफिया उनकी व स्थानीय अधिकारियों की अनैतिक आवश्यकताओं की पूर्ति करने में कभी भी पीछे नहीं हटता। यही कारण है कि छोटे से लेकर बड़े तक स्थानीय अधिकारियों की कृपा का पात्र बन सरकार व पर्यावरण को गहरी चोट पहुंचा रहा है और जनपद का प्रशानिक अमला कुंभकर्णी नींद सो रहा है। माफिया दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की कर रहा है।

दो दिन रुका और फिर शुरू अवैध खनन: कोई कार्रवाई न होते देख अवैध खनन करने वाले माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। शिकायत पर मात्र दिखाने भर को दो दिन से बंद खनन पुन: शुरू हो गया है। जब इस संबंध में उपजिलाधिकारी चांदपुर से बात की गई तो जवाब के बजाय उन्होंने पूछा कि क्या खनन अभी भी चल रहा है! 

रिटर्न्स ऑफ मुख्तार, बदले बदले नजर आएंगे सरकार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की बांदा जेल की बैरक नंबर-15 में मुख्तार अंसारी की जिंदगी बिल्‍कुल किसी आम कैदी की तरह होगी। आपराधिक मामलों में बंद होने के कारण उन्हें राजनीतिक बंदी नहीं माना जाएगा। एक समय था जब इसी जेल में मुख्‍तार का सिक्‍का चलता था। वह जब पहली बार बांदा जेल में बंद थे तो दूसरे अपराधी उनके नाम से थर-थर कांपते थे। मुख्‍तार के पास वर्षों के जेल जीवन का अनुभव है। जेलों में उनका दरबार लगता रहा है लेकिन इस बाद मुख्‍तार को वही सुविधाएं मिलेंगी जो जेल में किसी भी दूसरे कैदी को मिलती हैं।

इसके पहले मुख्‍तार को 2017 में बांदा जेल की बैरक नंबर-15 में ही रखा गया था। इस बार एसी और निजी जेनरेटर जैसी विशेष सुविधाएं नदारद है। इस माफिया को शायद पहली बार ऐसी कड़ी निगरानी का सामना करना पड़ रहा है। मुख्‍तार अंसारी पहली बार कानून के सामने इस कदर लाचार हुए हैं। इसके पहले तक उनका रसूख और रुपए जेल के बाहर की तरह जेल के अंदर भी उनका साम्राज्‍य फीका नहीं पड़ने देते थे।

राजा भैया और अतीक अहमद भी यहां रह चुके हैं बंद-
मुख्‍तार के अलावा बांदा जेल में यूपी के कुछ अन्‍य बाहुबली राजा भैया और अतीक अहमद भी बंद रह चुके हैं। उनके अलावा शीलू बलात्कार कांड का आरोपी नरैनी से बसपा विधायक पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी, नोएडा का गैंगस्टर अनिल दुजाना ने भी यहां सजा काटी।

बांदा जेल में सुरक्षा बढ़ाई गई
मुख्‍तार रिटर्न को लेकर बांदा जेल में सुरक्षा व्‍यवस्‍था पहले से काफी कड़ी कर दी गई है। जेल के बाहर अतिरिक्‍त पुलिस बल तैनात किया गया है। जेल में अब जो लोग भी दाखिल किए जाएंगे, उनकी पूरी पड़ताल की जाएगी। बिना जांच-पड़ताल के जेल स्‍टॉफ को भी इंट्री न दी जाए। जेल में कौन कितनी बार आया इसका हिसाब रखा जाएगा। बकायदा रजिस्‍टर मेंटेन किया जाएगा।

बूढ़े माता पिता की सेवा न करने पर वापस ली जा सकेगी संपत्ती

योगी सरकार लाने वाली है नया कानून, बूढ़े मां बाप की सेवा न करने पर बच्चों से वापस ली जा सकेगी संपत्ती

लखनऊ। बुजुर्ग मां-बाप की संपत्ति पाने के बावजूद उनकी देखरेख न करने वाली संतानों की अब खैर नहीं होगी। उत्तर प्रदेश में जल्दी ही एक ऐसा कानून आने वाला है, जिसके जरिए अगर कोई बच्चा अपने मां-बाप की सेवा नहीं करता है तो उन्हें दी गई संपत्ति को वापस लिया जा सकता है। उत्तर प्रदेश स्टेट लॉ कमिशन ने इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रस्ताव सौंपा है। UPSLC ने अपने प्रस्ताव में ‘माता-पिता तथा वरिष्ठ नागरिकों के भरण पोषण एवं कल्याण कानून-2007’ में संशोधन का प्रस्ताव दिया है। प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि अगर कोई बुजुर्ग शिकायत करता है तो मां-बाप की ओर से अपने बच्चे या वारिस को दी गई संपत्ति की रजिस्ट्री या दानपत्र को भी निरस्त कर दिया जाएगा। प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि अगर कोई बच्चा या रिश्तेदार बुजुर्गों के घर में रहता है और उनकी देखभाल नहीं करता, या फिर उनसे अनुचित व्यवहार करता है तो उन्हें घर से निकाला जा सकता है। विदित हो कि UPSLC ने कानून का अध्ययन करने के बाद सौंपी गई अपनी पूर्व की 13 रिपोर्टों में यह बताया था कि कई मामलों में बूढ़े माता-पिता को उनके ही बच्चे उनकी प्रॉपर्टी से निकाल देते हैं, या उनका ख्याल रखने की जगह घर में माता-पिता से पराया व्यवहार करते हैं।

अब 30 जून तक करें पैन कार्ड आधार से लिंक

दिल्ली। सरकार ने पैन कार्ड को आधार कार्ड से जोड़ने के लिए आखिरी तारीख तीन महीने बढ़ा दी है। अभी तक ये तारीख 31 मार्च 2021 थी, लेकिन अब उसे बढ़ाकर 30 जून कर दिया गया है। पैन और आधार लिंक न होने पर 1000 रुपए तक का जुर्माना देना पड़ सकता है। जुर्माने का प्रावधान आयकर कानून, 1961 में जोड़े गए नए सेक्शन 234H के तहत किया गया है। सरकार ने ऐसा 23 मार्च को लोकसभा से पारित हुए फाइनेंस बिल 2021 के जरिए किया है। आयकर कानून में जोड़े गए नए प्रावधान के तहत सरकार पैन और आधार की लिंकिंग न किए जाने पर लगने वाले जुर्माने का अमाउंट तय करेगी। यह जुर्माना 1000 रुपए से ज्यादा नहीं होगा।

बुधवार को आयकर विभाग की वेबसाइट यूजर्स के भारी दबाव के कारण कई बार क्रैश हो गई थी। वित्त वर्ष 2019-20 या आकलन वर्ष 2020-21 का विलंबित इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने वाले लोगों और पैन कार्ड को आधार के साथ लिंक कराने वालों की भारी संख्या के चलते वेबसाइट क्रैश हो गई। इस कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। लोगों ने सोशल मीडिया पर समयसीमा को बढ़ाने की भी मांग की। अब ऐसे लोगों को भी राहत मिली है, जो इंकम टैक्स की वेबसाइट क्रैश होने के चलते बुधवार को पैन कार्ड को आधार के साथ लिंक नहीं करा पाए।

आधार कार्ड को पैन कार्ड से कैसे लिंक करें –

आपका पैन कार्ड पहले से ही आधार कार्ड से जुड़ा हुआ है, यह जांचने के लिए आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट – incometaxindiaefiling.gov.in पर लॉग ऑन करें।

दोनों को लिंक करने के लिए, वेबसाइट पर ‘लिंक आधार’ विकल्प पर क्लिक करना होगा। अब एक नया पृष्ठ खुलेगा जहां आपको अपना पैन कार्ड नंबर, आधार संख्या और अपना नाम जैसी सभी जानकारी भरने की आवश्यकता है। आधार और पैन के बीच नाम में परिवर्तन के मामले में, जो भी नाम सही है उसे भरना होगा।

अगर आप इनकम टैक्स की वेबसाइट पर लॉग इन करके अपने पैन को आधार से लिंक नहीं कर पा रहे हैं, तो आप साधारण एसएमएस के जरिए भी ऐसा कर सकते हैं। आपको 567678 या 56161 पर एसएमएस भेजना होगा। एसएमएस का प्रारूप UIDPAN <SPACE> <12 अंक आधार> <SPACE> <10 अंक पैन> है। एनएसडीएल या यूटीआई द्वारा एसएमएस भेजने वाले पर कोई शुल्क नहीं लगाया जा रहा है।

पुलिस पर हमले के चार आरोपियों पर गैंगस्टर

पुलिस पर हमले के चारआरोपियों पर गैंगस्टर
बिजनौर। पुलिस टीम पर हमला और मारपीट करने वाले चार आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट में भी केस दर्ज किया गया है। चारों आरोपी जेल में बंद है।
थाना कोतवाली देहात के प्रभारी निरीक्षक लव सिरोही की ओर से फिरोज पुत्र इब्ने हसन, सरताज हैदर पुत्र एजाज, नवाब पुत्र इबने हसन और हमजा पुत्र परवेज निवासीगण मोहल्ला सादात कोतवाली देहात के खिलाफ गैंगस्टर में अभियोग पंजीकृत किया गया है। उक्त चारों आरोपी पुलिस टीम पर हमला करने के आरोप में पहले से ही बंद हैं। प्रभारी निरीक्षक लव सिरोही ने बताया  कि 16 फरवरी की रात जन सेवा केंद्र में लाखों की चोरी की पड़ताल के लिए पुलिस संदिग्धों से पूछताछ कर रही थी। एक संदिग्ध से पूछताछ करने के लिए 26 फरवरी को पुलिस टीम मोहल्ला सादात में गई थी। आरोपियों ने पुलिस टीम पर हमला करते हुए मारपीट की। हमले में एक दरोगा और एक सिपाही घायल हो गए थे। पुलिस ने संगीन धाराओं में केस दर्ज करते हुए अगले ही दिन चारों नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। अभी अज्ञात की गिरफ्तारी होना बाकी है। पुलिस ने जेल में बंद चारों आरोपियों पर गैंगस्टर में अभियोग दर्ज कर लिया है।

भड़काने वाले TV कार्यक्रमों पर लगाम क्यों नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने निष्पक्ष और सत्यपरक रिपोर्टिंग की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि समस्या तब आती है, जब इसका इस्तेमाल दूसरों के खिलाफ किया जाता है। कुछ ऐसे कार्यक्रम हैं, जिनके प्रभाव भड़काने वाले हैं और आप सरकार होने के नाते इस पर कुछ नहीं कर रहे हैं।

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने केन्द्र सरकार को उन टीवी कार्यक्रमों पर लगाम लगाने के लिए कुछ नहीं करने पर फटकार लगाई, जिनके असर भड़काने वाले होते हैं। साथ ही कहा कि ऐसी खबरों पर नियंत्रण उसी प्रकार से जरूरी हैं, जैसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिये एहतियाती उपाय। उच्चतम न्यायालय ने गणतंत्र दिवस पर किसानों की ट्रैक्टर पेरड के हिंसक होने के बाद दिल्ली के कुछ इलाकों में इंटरनेट सेवा को बंद किए जाने का जिक्र किया और निष्पक्ष और सत्यपरक रिपोर्टिंग की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि समस्या तब आती है, जब इसका इस्तेमाल दूसरों के खिलाफ किया जाता है।

प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे की अगुवाई वाली पीठ ने गुरुवार को केंद्र की तरफ से पेश हुए सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता से कहा, तथ्य यह है कि कुछ ऐसे कार्यक्रम हैं, जिनके प्रभाव भड़काने वाले हैं और आप सरकार होने के नाते इस पर कुछ नहीं कर रहे हैं। पीठ में न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमण्यम भी शामिल हैं। पीठ ने यह बात उन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कही, जिनमें पिछले वर्ष कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के दौरान तबलीगी जमात के कार्यक्रम पर मीडिया रिपोर्टिंग का मुद्दा उठाया गया था। पीठ ने कहा, ऐसे कार्यक्रम हैं जो भड़काने वाले होते हैं या एक समुदाय को प्रभावित करते हैं, लेकिन एक सरकार के नाते, आप कुछ नहीं करते। न्यायमूर्ति बोबड़े ने कहा, कल आपने किसानों के दिल्ली यात्रा पर आने के कारण इंटरनेट और मोबाइल सेवा बंद कर दी। मैं गैर विवादास्पद शब्दावली का इस्तेमाल कर रहा हूं। आपने मोबाइल इंटरनेट बंद कर दिया। ये ऐसी समस्याएं हैं जो कहीं भी पैदा हो सकती हैं। मुझे नहीं पता कि कल टेलीविजन में क्या हुआ। शीर्ष अदालत ने कहा कि टीवी पर लोगों द्वारा कही जा रही बातों में उसकी कोई दिलचस्पी नहीं है लेकिन उसे उन कार्यक्रमों को लेकर चिंता है जिनका असर भड़काने वाला होता है।

कपड़े के ऊपर से अंगों को छूना यौन अपराध नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फैसले पर रोक

कपड़े के ऊपर से अंगों को छूना यौन अपराध नहीं, सुप्रीम कोर्ट की बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले पर रोक
नई दिल्ली। बॉम्बे हाईकोर्ट के स्किन टू स्किन (Skin to Skin Contact) फैसले पर देश की शीर्ष अदालत ने बुधवार को रोक लगा दी है। साथ ही हाईकोर्ट से विस्तृत जानकारी मांगी है। विदित हो कि हाईकोर्ट ने एक नाबालिग लड़की के वक्षस्थल (ब्रेस्ट) को बिना स्किन टू स्किन टच के छूने के अपराध को पॉक्सो ऐक्ट के दायरे से बाहर बताया था। यूथ बार एसोसिएशन में बॉम्बे हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाई कोर्ट के इस फैसले पर विवाद छिड़ गया था।
आरोपी को बरी करने के आधार को बताते हुए कहा गया था कि आरोपी का बच्चे के साथ सीधा शारीरिक संपर्क नहीं हुआ है। इस पर अटॉर्नी जनरल ने सवाल उठाते हुए इसे खतरनाक बताया था, जिसके बाद उच्चतम न्यायलय ने इस पर रोक लगाते हुए आरोपी को बरी करने पर भी रोक लगा दी है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने 12 वर्ष की एक नाबालिग के साथ हुए इस अपराध के मुकदमे की सुनवाई में कहा था कि बच्ची को निर्वस्त्र किए बिना, उसके वक्षस्थल (ब्रेस्ट) को छूना यौन हमला (Sexual Assault) नहीं कहा जा सकता।

इससे पहले बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा था कि किसी नाबालिग को निर्वस्त्र किए बिना, उसके स्तन को छूना, यौन उत्पीड़न नहीं कहा जा सकता। इस तरह का कृत्य पोक्सो अधिनियम के तहत यौन हमले के रूप में परिभाषित नहीं किया जा सकता। बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ की न्यायमूर्ति पुष्पा गनेडीवाला ने 19 जनवरी को पारित एक आदेश में कहा कि यौन हमले का कृत्य माने जाने के लिए यौन मंशा से स्किन से स्किन का संपर्क होना जरूरी है। उन्होंने अपने फैसले में कहा कि महज छूना भर यौन हमले की परिभाषा में नहीं आता है। न्यायमूर्ति गनेडीवाला ने एक सत्र अदालत के फैसले में संशोधन किया, जिसने 12 वर्षीय लड़की का यौन उत्पीड़न करने के लिए 39 वर्षीय व्यक्ति को तीन वर्ष कारावास की सजा सुनाई थी।


अभियोजन पक्ष और नाबालिग पीड़िता की अदालत में गवाही के मुताबिक, दिसंबर 2016 में आरोपी सतीश नागपुर में लड़की को खाने का कोई सामान देने के बहाने अपने घर ले गया। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में यह दर्ज किया कि अपने घर ले जाने पर सतीश ने उसके वक्ष को पकड़ा और उसे निर्वस्त्र करने की कोशिश की।
हाई कोर्ट ने कहा, चूंकि आरोपी ने लड़की को निर्वस्त्र किए बिना उसके सीने को छूने की कोशिश की, इसलिए इस अपराध को यौन हमला नहीं कहा जा सकता है और यह भादंसं की धारा 354 के तहत महिला के शील को भंग करने का अपराध है। धारा 354 के तहत जहां न्यूनतम सजा एक वर्ष की कैद है, वहीं पॉक्सो कानून के तहत यौन हमले की न्यूनतम सजा तीन वर्ष कारावास है।
सत्र अदालत ने पोक्सो कानून और भादंसं की धारा 354 के तहत उसे तीन वर्ष कैद की सजा सुनाई थी। दोनों सजाएं साथ-साथ चलनी थीं। बहरहाल, हाई कोर्ट ने उसे पॉक्सो कानून के तहत अपराध से बरी कर दिया और भादंसं की धारा 354 के तहत उसकी सजा बरकरार रखी। हाई कोर्ट ने कहा, अपराध के लिए (पोक्सो कानून के तहत) सजा की कठोर प्रकृति को ध्यान में रखते हुए अदालत का मानना है कि मजबूत साक्ष्य और गंभीर आरोप होना जरूरी हैं। कहा, किसी विशिष्ट ब्यौरे के अभाव में 12 वर्षीय बच्ची के स्तन को छूना और क्या उसका टॉप हटाया गया या आरोपी ने हाथ टॉप के अंदर डाला और उसके वक्ष को छुआ गया, यह सब यौन हमले की परिभाषा में नहीं आता है। न्यायमूर्ति गनेडीवाला ने अपने फैसले में कहा कि स्तन छूने का कृत्य शील भंग करने की मंशा से किसी महिला-लड़की के प्रति आपराधिक बल प्रयोग है।

पोक्सो कानून के तहत यौन हमले की परिभाषा है कि जब कोई यौन मंशा के साथ बच्ची-बच्चे के निजी अंगों, वक्ष को छूता है या बच्ची-बच्चे से अपना या किसी व्यक्ति के निजी अंग को छुआता है या यौन मंशा के साथ कोई अन्य कृत्य करता है जिसमें संभोग किए बगैर यौन मंशा से शारीरिक संपर्क शामिल हो, उसे यौन हमला कहा जाता है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यौन हमले की परिभाषा में ‘शारीरिक संपर्क प्रत्यक्ष होना चाहिए या सीधा शारीरिक संपर्क होना चाहिए।

तहसील मलिहाबाद में अनियमिताओं का बोलबाला

लखनऊ। तहसील मलिहाबाद में व्याप्त अनियमिताएं, हीलाहवाली व सुचारू रूप से कार्य ना होने के कारण मलिहाबाद बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने एक अति आवश्यक बैठक महामंत्री राम सिंह यादव एडवोकेट के संचालन में आहुत की। बैठक में तमाम अधिवक्ताओं ने अपने विचार रखे। इससे स्पष्ट रूप से यह सामने आया कि तहसील मलिहाबाद में कोई भी कर्मचारी अपने कार्यो एवं अपने दायित्वों के प्रति जिम्मेदार नहीं है। इस भीषण शीतलहर के चलते तहसील प्रांगण में कहीं भी अलाव के इंतजामात  प्रशासन द्वारा नहीं किये गए हैं।
तहसील परिसर में दूर दराज से तमाम लोग अपने कार्य के लिए आते जाते रहते हैं, लेकिन मलिहाबाद के प्रांगण में भीषण ठंडक के बचाव हेतु  कोई अलाव का कोई इंतजाम ना होने से आम जनमानस व अधिवक्ताओं में रोष व्याप्त है।
महामंत्री राम सिंह यादव एडवोकेट ने बताया कि तहसील मलिहाबाद में कोई भी काम क्रमवार तरीके से नहीं हो रहा है। एक फरियादी ने आरोप लगाया कि धन उगाही के पश्चात भी लेखपाल व अन्य कर्मचारी महीनों तक दौडाते रहते हैं, अधिकारी भी अनसुना कर देते है। आलम यह है कि नायब तहसीलदार माल व न्यायिक तहसीलदार के न्यायालय के खुलने का कोई निश्चित समय नहीं है। उक्त तमाम कमियों के निराकरण हेतु एसोसिएशन ने प्रशाशन को दो दिन की मोहलत दी। तत्पश्चात आगे की रणनीति तय की जाएगी। मलिहाबाद बार एसोसियेशन ने तत्काल लकड़ी मंगाकर तहसील परिसर में जगह जगह अलाव भी जलवाए।

योगी बाबा के राज में हो रहा जमीन पर कब्जा!

भूमाफिया के सामने लाचार चांदपुर पालिका प्रशासन

योगी बाबा के राज में हो रहा जमीन पर कब्जा! भूमाफिया के सामने लाचार चांदपुर पालिका प्रशासन

UP में एंटी भू माफिया पोर्टल का शुभारम्भ राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने पिछले साल के अंतिम माह में किया था। इस ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से उत्तर प्रदेश के किसान और नागरिक अवैध कब्जे की शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

लखनऊ। जिला बिजनौर की नगर पालिका परिषद चांदपुर क्षेत्र में कर्मचारियों, अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी जमीन पर खुलेआम कब्जा कर अवैध निर्माण कराया जा रहा है। सभासदों व जागरुक नागरिकों की शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई न होना साबित करता है कि भूमाफिया के हौसले बेहद बुलंद हैं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले भूमाफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रहे हैं। बड़े से बड़े दिग्गजों के अवैध निर्माण गिराए जा रहे हैं, या जब्त करने की कार्रवाई हो रही है। इसके बावजूद मंडल मुरादाबाद के अंतर्गत जिला बिजनौर की तहसील चांदपुर में भूमाफिया सक्रिय हैं। जानकारी के अनुसार मुहल्ला काजीजागदान में नगर के गन्दे पानी की निकासी के लिए मुख्य नाला निकला हुआ है। इसकी पटरी पर भूमाफिया द्वारा अवैध तरीके से कब्जा कर दुकानों का निर्माण कराया जा रहा है। सभासद परवेज व अशरफ के अलावा कई जागरूक नागरिकों ने सरकारी जमीन पर कब्जा और निर्माण होते देखा तो रोष व्याप्त हो गया। उन्होंने इस बात की शिकायत नगर पालिका की आराजी की देखरेख कर रहे कर्मचारी व अवर अभियंता उमेश बाबू को मोबाइल फोन पर सूचना देकर शिकायत की। आरोप है कि इसके बावजूद किसी ने भी न तो मौके पर आने की जहमत उठाई और न ही काम रुका। यह रवैया इस बात को साबित करने के लिए काफी है कि पालिका परिषद के कर्मचारियों व अधिकारियों की मिलीभगत से ही भूमाफिया के हौसले बुलंद हैं।

शिकायतकर्ताओं ने अधिशासी अधिकारी/एसडीएम से संबंधित लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्यवाही करने की मांग की है। सभासद अशरफ ने बताया कि शिकायत की प्रतिलिपि जिलाधिकारी, मंडलायुक्त मुरादाबाद, नगर विकास मंत्री उत्तर प्रदेश व मुख्यमंत्री को भी प्रेषित की गई है। उन्होंने बताया कि चार वर्ष पूर्व भी इस स्थान पर एक अवैध निर्माण कार्य हुआ था। तत्कालीन जिलाधिकारी के आदेश पर ध्वस्त कर दिया गया था।

”कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम” पर LU में कार्यशाला

लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में हुआ ”कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न आधिनियम” कार्यशाला का आयोजन

लखनऊ। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती रेखा शर्मा की अध्यक्षता में लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में ”कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न ( निवारण, प्रतिषेध, और प्रतितोष) अधिनियम, 2013” के अंतर्गत गठित स्थानीय परिवाद समिति की कार्यशाला का आयोजन किया गया। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग एवं लखनऊ विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में राज्य महिला आयोग उत्तर प्रदेश की उपाध्यक्ष श्रीमती सुषमा सिंह, लखनऊ विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति की अध्यक्ष प्रोफ़ेसर शीला मिश्रा की देखरेख में कार्यशाला का आयोजन किया गया। उन्होंने आंतरिक समिति की कार्यप्रणाली, उसके महत्त्व पर प्रकाश डालने के साथ ही संस्थानों में लैंगिक समता/ समानता का माहौल व्याप्त करने में इसकी भूमिका एवं उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा स्त्री सुरक्षा, सम्मान एवं आत्मनिर्भरता को ध्यान में रखते हुए शुरू किये गए अभियान ‘मिशन शक्ति’ के सुदृढ़ीकरण में आंतरिक शिकायत समिति किस प्रकार एक सकारात्मक भूमिका निभा सकती है, से भी अवगत कराया व सभी मुख्य अतिथियों एव वक्ताओं का स्वागत किया।

कार्यशाला में समस्त राज्य विश्वविद्यालयों के आईसी अध्यक्ष एवं सदस्यों के साथ ही मिशन शक्ति समूह के सदस्यों ने प्रतिभाग किया। पुलिस प्रशासन की ओर से दो विषय विशेषज्ञ डिप्टी एसपी सुश्री मोनिका यादव व विधिक सलाहकार सुश्री अंचल गुप्ता नामित किए गए। उनके द्वारा ऐक्ट के नियमानुसार विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यशाला में उपस्थित नव्या एनजीओ से दिलीप हर्षवर्धन ने POSH अधिनियम के विषय में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम में प्रतिभागी सभी सदस्यों के साथ परस्पर संवाद के माध्यम से उनके प्रश्नों को सुनकर विधिक विशेषज्ञों द्वारा उनका यथोचित समाधान किया गया तथा उनके अनुभव साझा किए गए। सभागार में उपस्थिति सभी सदस्यों को आंतरिक समिति की कार्यप्रणाली, शिकायत निस्तारण प्रक्रिया से अवगत कराया गया। समापन समारोह में मिशन शक्ति लखनऊ विश्वविद्यालय की टीम द्वारा सभी सदस्यों को महिला सुरक्षा की शपथ भी दिलाई गई। आंतरिक शिकायत समिति की सदस्य डॉ कुसुम यादव ने कार्यशाला में प्रतिभागी सभी सदस्यों को सहृदय धन्यवाद ज्ञापित किया। महिला कल्याण विभाग के डिप्टी डायरेक्टर सर्वेश कुमार पांडे, वन स्टॉप केंद्र लखनऊ की केंद्र प्रबंधक अर्चना सिंह, आंतरिक समिति लखनऊ विश्वविद्यालय की सदस्य डॉ श्रद्धा, डॉ. अमर कुमार सिंह, डॉ. कुसुम यादव, अदिति कुमारी, मिशन शक्ति समूह से शिवांगी श्रीवास्तव, नीति कुशवाहा, मनीष, प्रियंका वर्मा, उत्कर्ष मिश्रा, अविनाश कुमार, महिला आयोग से वैयक्तिक सहायक प्रिया सिंह आदि उपस्थित रहे।

हवाला पर IT की रेड: ₹14 करोड़ नकद, 2 करोड़ मूल्य का बुलियन जब्त

आयकर विभाग ने दिल्ली में चलाया तलाशी अभियान
₹14 करोड़ नकद और 2 करोड़ रुपये मूल्य का बुलियन जब्त

नई दिल्ली। आयकर विभाग ने दिल्ली क्षेत्र में बेहिसाब नकदी रुटिंग और संचालन की गतिविधि में शामिल कई हवाला ऑपरेटरों के विरूद्ध तलाशी और जब्ती की कार्रवाई मंगलवार को की। तलाशी कार्रवाई में बेहिसाब 14 करोड़ रुपये नकद और 2 करोड़ रुपये मूल्य का बुलियन जब्त किया गया है। आगे की जांच अभी जारी है।

तलाशी की कार्रवाई के परिणामस्वरूप दोषी प्रमाणित करने वाले सबूतों के बारे में पता चला है कि विभिन्न फर्जी संस्थाओं का उपयोग फर्जी खरीद / बिक्री बिलों को तैयार करने के लिए किया जा रहा है और अनेक बैंक खातों के माध्यम से बेहिसाब धन की रुटिंग की जा रही है। ऐसी फर्जी संस्थाएं दो महीने के बाद बंद कर दी जाती हैं और नई संस्थाएं बना ली जाती हैं।

इसके अलावा, 300 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की बिक्रियों को छुपाने तथा फर्जी खरीदों को लेकर दोषी प्रमाणित करने वाले कागजातों का पता चला है। तलाशी कार्रवाई में बेहिसाब 14 करोड़ रुपये नकद और 2 करोड़ रुपये मूल्य का बुलियन जब्त किया गया है। आगे की जांच जारी है।

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15 साल बाद CBI की संशोधित अपराध नियमावली जारी


सीबीआई की संशोधित अपराध नियमावली जारी
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने दी बधाई

नई दिल्ली। केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अन्तरिक्ष राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज एक आधिकारिक कार्यक्रम के दौरान सीबीआई की संशोधित अपराध नियमावली जारी की। कार्यक्रम के दौरान सीबीआई के निदेशक ऋषि कुमार शुक्ल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

Ministry of Personnel, Public Grievances & Pensions के प्रवक्ता के अनुसार डॉ. जितेन्द्र सिंह ने 15 साल बाद सीबीआई की संशोधित अपराध नियमावली को तैयार करने के लिए सीबीआई को बधाई दी। सीबीआई की इस संशोधित नियमावली को कानून, जाँच की तकनीक और प्रक्रियाओं में हुए नवीमतम बदलावों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।

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