6G आते ही खत्म हो जाएंगे स्मार्टफोन? Nokia के CEO की भविष्यवाणी

6G

6G Technology: दुनिया के कई देशों में 5G टेक्नोलॉजी आ चुकी है और अब 6G की तैयारी हो रही है. Nokia के CEO Pekka Lundmark ने 6G और स्मार्टफोन्स के फ्यूचर को लेकर एक भविष्यवाणी की है. उनका मानना है कि साल 2030 तक स्मार्टफोन खत्म हो जाएंगे.

6G

  • नोकिया CEO Pekka Lundmark ने की भविष्यवाणी
  • साल 2030 तक खत्म हो जाएगी स्मार्टफोन की जरूरत?
  • दावोस में World Economic Forum में कही यह बात

फोन से मोबाइल फोन और फिर स्मार्टफोन तक का सफर बहुत छोटा है. बातचीत के लिए तैयार किए गए इस डिवाइस का इतिहास आम लोगों के बीच मुश्किल से कुछ दशक का है. कयास लगाए जा रहे हैं कि जल्द ही यह इतिहास का हिस्सा भी बन सकते हैं. स्मार्टफोन तेजी से विकसित होने वाले प्रोडक्ट्स में से एक है.

आज से 15-20 साल पहले मौजूदा स्मार्टफोन्स के फीचर्स वाले किसी डिवाइस को हाथ में लेकर घूमना एक कल्पना मात्र थी. स्मार्टफोन्स के तेज विकास की वजह से ही इसके भविष्य पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं.  

Nokia के CEO की भविष्यवाणी 

दरअसल, Nokia के CEO Pekka Lundmark का मानना है कि साल 2030 तक 6G टेक्नोलॉजी शुरू हो चुकी होगी, लेकिन तब तक स्मार्टफोन ‘कॉमन इंटरफेस’ नहीं होंगे. उन्होंने ये बात दावोस में चल रहे World Economic Forum में कही है.  Pekka Lundmark ने कहा कि कॉमर्शियल मार्केट में 2030 तक 6G की एंट्री हो जाएगी.

उन्होंने कहा कि 6G के आने से पहले ही लोग स्मार्टफोन की तुलना में स्मार्ट ग्लासेस और दूसरे डिवाइस को यूज करने लगेंगे. नोकिया सीईओ ने बताया, ‘तब तक, हम जिन स्मार्टफोन्स को यूज कर रहे हैं, वह सबसे ज्यादा यूज होने वाला इंटरफेस नहीं रह जाएंगे. इनमें से बहुत सी चीजें हमारी बॉडी में सीधे तौर पर मिलने लगेंगी.’

एलॉन मस्क की कंपनी कर रही इस पर काम

हालांकि, Lundmark ने ये नहीं बताया है कि वह किस डिवाइस के बारे में बात कर रहे हैं. एलॉन मस्क की Neuralink जैसी कुछ कंपनियां फिलहाल इस पर काम कर रही हैं और ब्रेन कम्प्यूटर इंटरफेस तैयार कर रही हैं. 

पिछले साल अप्रैल में मस्क ने एक फुटेज रिलीज कर इसका डेमो दिखाया था. वीडियो में उन्होंने दिखाया कि कैसे एक मेल मकाक (अफ्रीकी लंगूर) के दिमाग में चिप लगाई गई है और वह ‘माइंड पॉन्ग’ प्ले कर रहा है.

लंगूर को जॉयस्टिक मूव करने के लिए ट्रेंड जरूर किया गया था, लेकिन इस टेस्ट के दौरान उसके अनप्लग रखा गया था. मकाक पैडल को अपने दिमाग की मदद से कंट्रोल कर रहा था. हालांकि, उसे ऐसा लग रहा था कि वह जॉयस्टिक की मदद से ऐसा कर पा रहा है.

कब तक आएगा 6G?

6G को लेकर अभी बहुत सी चीजें क्लियर नहीं है. भारत अभी 5G की लॉन्चिंग की तैयारी कर रहा है. हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6G पर बताया था कि एक टास्ट फोर्स को तैयार किया गया है. इस साल के अंत तक हमें भारत में 5G टेक्नोलॉजी देखने को मिल जाएगी.

इससे पहले भारत के आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी घोषणा की थी कि देश अपनी स्वदेशी 6G तकनीक पर काम कर रहा है। 2023-2024 तक ये तकनीक तैयार भी हो सकती है। 6G को लेकर अभी कुछ भी साफ नहीं है। अभी 5G की लॉन्चिंग की तैयारी है और इस साल के अंत तक हमें भारत में 5G टेक्नोलॉजी देखने को मिल जाएगी। ऐसे में नोकिया के सीईओ का ये बयान भविष्य में टेक्नोलॉजी की मजबूती को बताता है।

अब नहीं कर सकेंगे Truecaller से कॉल रिकॉर्डिंग

नई दिल्ली (एजेंसी)। मोबाइल नंबरों की पहचान कराने वाले पॉपुलर ऐप Truecaller ने कॉल रिकॉर्डिंग सर्विस बंद करने का ऐलान किया है। अब आप 11 मई से ट्रूकॉलर ऐप के माध्यम से कॉल की रिकॉर्डिंग नहीं कर पाएंगे। Truecaller ने गूगल की नई पॉलिसी के तहत यह फैसला किया है। गूगल ने 11 मई से API का एक्सेस बंद करने की बात कही है और तमाम कॉल रिकॉर्डिंग ऐप्स रिकॉर्डिंग के लिए API का ही इस्तेमाल करते रहे हैं।

गूगल के एक्शन के बाद Truecaller कॉल रिकॉर्डिंग फीचर को अपने ऐप से हटाने की बात कही है.

गूगल के इस एक्शन के बाद Truecaller कॉल रिकॉर्डिंग फीचर को अपने ऐप से हटाने की बात कही है। ट्रूकॉलर की ओर से कहा गया है कि Google की नई डेवलपर प्रोग्राम पॉलिसी के मुताबिक, अब कॉल रिकॉर्डिंग की सुविधा नहीं दे पाएंगे। ट्रूकॉलर का कहना है कि उसने यूजर्स की मांग के आधार पर सभी एंड्रॉयड स्मार्टफोन के लिए कॉल रिकॉर्डिंग की शुरुआत की थी। ट्रूकॉलर पर कॉल रिकॉर्डिंग सभी के लिए फ्री थी।

बिना कार्ड के निकालें ATM से रुपए

नई दिल्ली (एजेंसी)। एटीएम से पैसा निकालने वालों के लिए बहुत खास खबर है। अब बिना एटीएम कार्ड के ही आप पैसे निकाल सकते हैं। दरअसल, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति समीक्षा के फैसलों को जारी किया। इस मौके पर आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने ऐलान किया है कि अब बिना डेबिट कार्ड के एटीएम से पैसा निकालने की सुविधा सभी बैंकों में दी जाएगी। इसके पीछे डेबिट-एटीएम कार्ड के इस्तेमाल को कम करने और डिजिटल इकोनॉमी को आगे बढ़ाने का विचार प्रमुख है।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि अब बिना डेबिट कार्ड के एटीएम से पैसा निकालने की सुविधा सभी बैंकों में दी जाएगी। अभी तक सिर्फ कुछ ही बैंकों में बिना कार्ड के एटीएम से पैसे निकालने की सुविधा थी। उन्होंने बताया कि UPI के जरिए एटीएम से पैसा निकाला जा सकेगा।

कम होंगे कार्ड क्लोन के फ्रॉड
RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास के मुताबिक इस कदम से कार्ड क्लोन करके पैसे निकालने के फ्रॉड भी कम होंगे। बता दें कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को मॉनिटरी पॉलिसी का ऐलान किया।

Whatsapp ने लगाया लाखों खातों पर प्रतिबंध

नई दिल्ली (एजेंसी)। व्हाट्सएप ने फरवरी महीने में भारत के 1,426,000 अनैतिक एवं हानिकारक अकाउंट्स पर प्रतिबंध लगा दिया है। ऐसा 2021 के नए आईटी नियमों के  अनुपालन में किया गया है।

कंपनी ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने जनवरी में 1,858,000 अकाउंट्स या खातों पर प्रतिबंध लगा दिया था। उसे देश से एक ही महीने में 335 शिकायतें मिलीं और उनमें से 21 पर जनवरी में कार्रवाई की गई। व्हाट्सएप के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, आईटी नियम 2021 के अनुसार, हमने फरवरी 2022 महीने के लिए अपनी नौवीं मासिक रिपोर्ट प्रकाशित की है।

प्रवक्ता ने कहा, जैसा कि नवीनतम मासिक रिपोर्ट में दर्ज किया गया है, व्हाट्सएप ने फरवरी के महीने में 14 लाख से अधिक खातों पर प्रतिबंध लगा दिया है। कंपनी ने कहा कि साझा किए गए डेटा में व्हाट्सएप द्वारा 1 फरवरी से 28 फरवरी के बीच दुरुपयोग का पता लगाने के दृष्टिकोण का उपयोग करके प्रतिबंधित भारतीय खातों की संख्या पर प्रकाश डाला गया है, जिसमें इसके रिपोर्ट फीचर के माध्यम से यूजर्स से प्राप्त नकारात्मक प्रतिक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए की गई कार्रवाई भी शामिल है।

WhatsApp Tricks – इस सेटिंग को कर दें On ! नहीं होंगी सेंड की हुई फोटो की क्वालिटी कम !

साभार- In Hindi Hub

WhatsApp Tricks, WhatsApp Tips, WhatsApp, Tips, Setting, Photo,

WhatsApp Tricks

WhatsApp Tricks – WhatsApp का यूज आज के समय में ज्यादातर लोग करते हैं। इस लोकप्रिय इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप में कई सारे फीचर्स मिलते हैं। इनकी मदद से चैटिंग करने के अलावा यूजर्स अपने दोस्तों के साथ वॉइस और वीडियो कॉल भी कर सकते हैं। इतना ही नहीं, यहां से लोगों को फोटो, डॉक्यूमेंट भी भेज सकते हैं।

फोटो भेजने पर क्वालिटी कम हो जाती है –

WhatsApp से फोटो भेजने पर फोटो की क्वालिटी कम हो जाती है। पर अगर आप चाहे तो लोगो को WhatsApp के जरिये ही हाई क्वालिटी में भी फोटो सेंड कर सकते है। WhatsApp से हाई क्वालिटी में फोटो शेयर करने के 2 तरीके हैं। पहला तरीका है, यूजर सेटिंग में बदलाव करके और दूसरा तरीका है, फोटो को डॉक्यूमेंट के तौर पर भेजकर। तो चलिए आइये जानते है, कैसे आप WhatsApp के जरिये हाई क्वालिटी में फोटो सेंड कर सकते है।

Whatsapp की इस सेटिंग में बदलाव करें –

  • पहला तरीका सेटिंग में बदलाव करना है। इसके लिए सबसे पहले अपने डिवाइस पर WhatsApp ओपन करें।
  • उसके बाद होम पेज पर राइट साइड में सबसे ऊपर बने तीन डॉट आइकन पर क्लिक कर दें।
  • फिर सेटिंग के ऑप्शन को सिलेक्ट करें।
  • अब Storage and Data पर क्लिक करें।
  • यहां पर आपको सबसे नीचे Photo Upload Quality का ऑप्शन दिखाई देगा। उस पर क्लिक करें।
  • फिर स्क्रीन पर आ रहे 3 ऑप्शन Auto, Best Quality और Data Saver में से Best Quality को सिलेक्ट कर लें।

WhatsApp में फोटो को डॉक्यूमेंट में भेजें –

  • WhatsApp में डॉक्यूमेंट के जरिये फोटो भेजना। यह हाई क्वालिटी फोटो सेंड करने का यह सबसे आसान और अच्छा तरीका है।
  • इसके लिए WhatsApp ओपन करें और फिर कोई भी चैट ओपन कर लें।
  • अब नीचे मैसेज बार में दिए गए पेपर क्लिप आइकन पर क्लिक करें।
  • यहां आपको Document पर क्लिक करना होगा।
  • अब आप जो फोटो भेजना चाहते हैं, उसे सिलेक्ट करके डॉक्यूमेंट के तौर पर भेज दें।

इन दो तरीके से आप WhatsApp के जरिये High Quality में फोटो भेज सकते हैं।

भारत की चीन पर डिजिटल स्ट्राइक, बैन किये 54 चीनी ऐप्स

Govt Bans 54 Chinese Apps: भारत सरकार की चीन पर डिजिटल स्ट्राइक, बैन किये 54 चीनी ऐप्स

राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए भारत सरकार ने 54 चीनी ऐप्स (54 Chinese Apps Bans) पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। ये सभी 54 चीनी ऐप्लिकेशन जो देश की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकते हैं इस कारण उन्हें भारत में बैन कर दिया गया है।

भारत सरकार ने बैन किए 54 चीनी ऐप्स

समाचार एजेंसी एएनआई ने सूत्रों का हवाला देते हर बताया है, सरकार का मानना है कि ये 54 चीनी ऐप भारतीयों की गोपनीयता और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करते हैं इस कारण उन्हें बैन किया जाएगा। सूत्रों ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) औपचारिक रूप से भारत में इन ऐप्स के संचालन पर प्रतिबंध लगाने की अधिसूचना जारी करेगा।

जिन ऐप्स को भारत में बैन किया जा रहा है उनमें स्वीट सेल्फी एचडी (Sweet Selfie HF), ब्यूटी कैमरा (Beauty Camera), म्यूजिक प्लेयर (Music Player), म्यूजिक प्लस (Music Plus), वॉल्यूम बूस्टर (Volume Booster), वीडियो प्लेयर मीडिया ऑल फॉर्मेट (Video Player Media All Format), वीवा वीडियो एडिटर (Viva Video Editor), नाइस वीडियो बायदु (Nice Video Baidu), ऐपलॉक (AppLock), ड्युअल स्पेस लाइट (Dual Space Lite), और एस्ट्राक्राफ्ट (AstraCraft) जैसे ऐप्स शामिल हैं।

इनमें से अधिकांश ऐप Tencent, अलीबाबा और गेमिंग फर्म NetEase जैसी प्रमुख चीनी टेक्नोलॉजी फर्मों के हैं। इन सभी चीनी टेक्नोलॉजी फर्मों ने या तो उन ऐप्स को “रीब्रांडेड या रीक्राइस्ट” कर दिया है, जिन्हें 2020 में केंद्र द्वारा प्रतिबंधित कर दिया गया था। सूत्रों ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeITY), जिसने पहले 2020 में चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया था, ने Google Play Store को इन एप्लिकेशन को ब्लॉक करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि एमईआईटीवाई ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A द्वारा निहित शक्तियों के माध्यम से इस संबंध में आवश्यक कदम उठाए हैं।

whatsapp रिलीज करेगा ग्लोबल ऑडियो प्लेयर

नई दिल्ली। अब WhatsApp अपने यूजर्स के लिए ग्लोबल ऑडियो प्लेयर रिलीज करने जा रहा है। इससे पहले WhatsApp Desktop यूजर्स वॉइस प्लेयर को पॉज और रिज्यूम कर सकते थे, लेकिन इसके लिए उन्हें चैट विंडो में ही रहना होता था। नए अपडेट के बाद यूजर्स को ऐसा नहीं करना होगा। वह चैट विंडोज में शफल करते हुए वॉइस मैसेज को सुन सकेंगे।

इस फीचर की मदद से यूजर्स चैट विंडो में स्विच करते हुए ऑडियो नोट्स को सुन भी करेंगे। WABetaInfo के मुताबिक, ‘जब हम वॉइस नोट प्ले करते हैं और दूसरे चैट में स्विच करते हैं, तो WhatsApp ऑडियो बंद नहीं होता है और एक नया ऑडियो प्लेयर बार चैट लिस्ट के नीचे नजर आने लगता है। इस Audio Player Bar की मदद से यूजर्स वॉइस नोट को आसानी से कंट्रोल कर सकेंगे। इस पर प्लेबैक बटन और प्रोग्रेस बार मिलता है, जो वॉइस नोट के खत्म होने की जानकारी देता है। यह फीचर फिलहाल बीटा यूजर्स के लिए जारी हुआ है। जल्द ही हम इसे अपने डेस्कटॉप पर भी देख सकेंगे।

इस फीचर की मदद से यूजर्स चैट और वॉइस प्लेयर दोनों को एक साथ मैनेज कर सकेंगे। हाल में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, WhatsApp जल्द ही Delete For Everyone फीचर की टाइम लिमिट बढ़ा सकता है। ऐप इसकी टाइम लिमिट को बढ़ाकर दो दिन कर सकता है। 

सभी पहचान पत्रों के लिए एक ही Unique Digital ID

अब सभी पहचान पत्रों के लिए होगी एक ही Unique Digital ID, केंद्र का प्लान तैयार

अब सभी पहचान पत्रों के लिए होगी एक ही Unique Digital ID, केंद्र का प्लान तैयार 

नई दिल्‍ली (एजेंसी)। देशवासियों के लिए अब एक ऐसी यूनिक डिजिटल आईडी लाने की योजना पर काम हो रहा है, जिसमें सभी आईडी जुड़ी होंगी। इसके लिए इलेक्‍ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने फेडरेटेड डिजिटल आइडेंटिटी का नया मॉडल सुझाया है। इसके तहत नागरिकों की कई डिजिटल आईडी को आपस में इंटरलिंक और संग्रहित किया जा सकेगा। यह संभव हो सकेगा एक यूनिक डिजिटल आईडी के जरिये जिसमें पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, आधार और पैन को लिंक किया जा सकेगा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मंत्रालय ने सुझाव दिया है कि यह एम्ब्रेला डिजिटल आईडी नागरिक को इन पहचान पत्रों पर नियं‍त्रण रखने और उसे यह चुनने का विकल्प देगी कि किस उद्देश्य के लिए उसकी किस आईडी का इस्‍तेमाल किया जाए। प्रस्ताव के जल्द ही सार्वजनिक होने की उम्मीद है और मंत्रालय 27 फरवरी तक विचार मांगेगा।

‘डॉक्‍टर डेथ’ ने बनाई सुसाइड मशीन, चंद सेकेंड में कीजिए आत्महत्या!

(एजेंसी)। आत्महत्या को लेकर दुनियाभर में हमेशा तमाम बातें होती रहती हैं। इसी बीच यूरोपीय देश स्विटजरलैंड ने आत्‍महत्‍या करने में मदद देने वाली मशीन को कानूनी मंजूरी दे दी है। यह मशीन सिर्फ मिनट में आत्‍महत्‍या की प्रक्रिया को पूरी कर देती है। इससे इंसान बिना दर्द के हमेशा के लिए मौत की नींद सो सकता है। इसके बाद इस मशीन को लेकर पूरी दुनिया में चर्चा शुरू हो गई है।

दरअसल, यह मशीन एक ताबूत के आकार की बनी हुई है। ‘द इंडिपेंडेंट’ की एक ऑनलाइन रिपोर्ट के मुताबिक, इस मशीन के माध्यम से ऑक्सीजन का स्तर धीरे-धीरे कम करके हाइपोक्सिया और हाइपोकेनिया के माध्यम से मौत दी जाती है। इस प्रक्रिया में सिर्फ 30 सेकेंड में नाइट्रोजन की मात्रा कई गुना बढ़ जाती है जिसकी वजह से ऑक्सीजन का स्तर 21 प्रतिशत से 1 हो जाता है और कुछ ही सेकेंड में इंसान की मौत हो जाती है। हालांकि रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि यह मशीन ऐसे मरीजों के लिए मददगार है जो बीमारी के कारण बोल नहीं पाते हैं या हिल नहीं पाते हैं। इस मशीन को यूजर को अपनी पसंदीदा जगह पर ले जाना होगा। इसके बाद मशीन का नष्‍ट होने योग्‍य कैप्‍सूल अलग हो जाता है ताकि उसे ताबूत की तरह से इस्‍तेमाल किया जा सके। 

इस मशीन को बनाने का आइडिया एक्जिट इंटरनेशनल के निदेशक और ‘डॉक्‍टर डेथ’ कहे जाने वाले डॉक्‍टर फिलीप निटस्‍चके ने दिया है। डॉक्‍टर डेथ ने बताया कि अगर कोई अप्रत्‍याशित कठिनाई नहीं हुई तो हम अगले साल तक इस सार्को मशीन को देश में मुहैया करा देंगे। यह अब तक बेहद महंगा प्रॉजेक्‍ट है लेकिन हमें भरोसा है कि हम अब इसे सरल बनाने के बेहद करीब हैं।

एक तथ्य यह भी है कि स्विटजरलैंड में मदद के साथ आत्‍महत्‍या करना कानूनी माना जाता है और पिछले साल 1300 लोगों ने इस सेवा का इस्‍तेमाल आत्‍महत्‍या करने के लिए किया। वहीं इस मशीन पर सवाल खड़े होने भी शुरू हो गए हैं। लोग डॉक्‍टर डेथ की भी आलोचना भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह एक गैस चेंबर की तरह से है। कुछ अन्‍य लोगों का यह भी कहना है कि यह मशीन आत्‍महत्‍या को बढ़ावा देती है।

Google यूजर्स परेशान, स्क्रीन पर दिख रहा error मैसेज

नई दिल्ली। प्रमुख सर्च इंजन साइट गूगल की सर्विस में आज यानी 1 दिसंबर को काफी दिक्कत आ रही है। कई देशों के यूजर्स गूगल पर सर्च नहीं कर पा रहे हैं और कईयों के गूगल न्यूज की फीड अपडेट नहीं हो रही है।

Google की सर्विस ठप, यूजर्स को स्क्रीन पर मिल रहा error मैसेज

आउटेज को ट्रैक करने वाली साइट डाउन डिटेक्टर ने भी गूगल के ठप होने की पुष्टि की है। डाउन डिटेक्टर के मुताबिक गूगल की सर्विस में दिक्कत 1 दिसंबर को सुबह 7 बजे से हो रही है। डाउन डिटेक्टर पर अभी तक 250 से अधिक लोगों ने शिकायत की है। यूजर्स को सर्च, लॉगिन और साइट में दिक्कत हो रही है।

क्रोम या किसी अन्य ब्राउजर में गूगल ओपन करने पर लंबे समय तक लोडिंग हो रही है और उसके बाद यूजर्स को एरर का मैसेज मिल रहा है। इस आउटेज पर गूगल ने कहा है कि उसके इंजीनियर्स इसे ठीक करने की कोशिश में लगे हैं। यह इंटर्नल सर्वर की दिक्कत है। 

दुनिया का तीसरा और भारत का पहला पब्लिक ट्रांसपोर्ट रोपवे वाराणसी में

वाराणसी (एजेंसी)। दुनिया का तीसरा और भारत का पहला पब्लिक ट्रांसपोर्ट रोपवे प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में चलेगा। शहर में यातायात के दबाव व पर्यटकों की सुविधा के लिए कैंट रेलवे स्टेशन (वाराणसी जंक्शन ) से गिरजाघर चौराहे (गोदौलिया ) तक 4.2 किलोमीटर में रोपवे का निर्माण किया जाएगा। इससे काशी विश्वनाथ मंदिर व दशाश्वमेध घाट तक पहुंच आसान हो जाएगी। इस 424 करोड़ की परियोजना पर जल्द काम शुरू हो जाएगा। इसमें 80 फीसद केंद्र सरकार व 20 फीसद राज्य सरकार खर्च करेगी।

पीएम मोदी करेंगे शिलान्यास- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 से 15 दिसंबर तक काशी में प्रवास करेंगे। 13 दिसंबर को वह काशी विश्वनाथ धाम का लोकार्पण करेंगे। इसी दिन वह रोपवे का शिलान्यास कर सकते हैं।

भीड़-भाड़ वाले इलाके में होगा इस्तेमाल- नेशनल हाईवे, रिंग रोड, फ्लाइओवर, आरओबी के बाद अब वाराणसी के भीड़-भाड़ वाले इलाके में पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए रोपवे का इस्तेमाल होगा। पूर्वी भारत का गेटवे कहे जाने वाले वाराणसी आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों के साथ स्थानीय लोगों को राहत मिलेगी। दरअसल, बनारस के पुराने इलाकों की संकरी सड़कें व ट्रैफिक का दबाव निरंतर बढऩे से अक्सर जाम की स्थिति रहती है। रोपवे बनने से इससे निजात मिल जाएगी।

पायलट प्रोजेक्ट- वाराणसी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष ईशा दुहन के अनुसार बोलीविया देश के लापाज और मैक्सिको शहर के बाद विश्व में भारत तीसरा देश और वाराणसी पहला शहर होगा, जहां पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए रोपवे का इस्तेमाल किया जाएगा। ये पायलट प्रोजेक्ट है। काशी के मूल स्वरूप को कायम रखते हुए जापान के क्योटो के तर्ज पर अत्याधुनिक तरीके से इसे विकसित किया जाएगा।

चार स्टेशन और मिनट सिर्फ 15- वाराणसी कैंट स्टेशन से शुरू होकर गिरजाघर चौराहे तक कुल चार स्टेशन होंगे। इसमे कैंट रेलवे स्टेशन, साजन तिराहा, रथयात्रा और गिरजाघर चौराहे पर स्टेशन बनाया जाएगा। रोपवे की कुल दूरी 4.2 किलोमीटर है जो करीब 15 मिनट में तय होगी। करीब 45 मीटर की ऊंचाई पर ट्राली कार चलेगी। इसमें 220 ट्राली होंगी। एक ट्राली में 10 पैसेंजर सवार हो सकते हैं। हर डेढ़ से दो मिनट के अंतराल में यात्रियों को ट्राली उपलब्ध रहेगी। एक दिशा में एक बार में 4000 लोग यात्रा कर सकेंगे। यानी 8000 लोग दोनों दिशा से एक बार में आ जा सकेंगे। रोपवे रात में भी चलेगा।

झलकेगी बनारस की संस्कृति- रोपवे के लिए बनने वाले सभी स्टेशन पर काशी की कला-संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी। ट्राली पर भी काशी की थाती परिलक्षित होगी। कैंट रेलवे स्टेशन के पास ही रोडवेज है। इसलिए कैंट स्टेशन पर रोपवे स्टेशन बनने से ट्रेन और बस से यात्रियों को सुविधा होगी।

फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार- वैपकास कंपनी ने सर्वे पूरा करने के बाद फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार कर स्थानीय प्रशासन को भेजी थी, जिसे शासन को भेजदिया गया। पूरा प्रोजेक्ट पीपीपी मॉडल पर ही बनाकर संचालित किया जाना है ।

रोपवे योजना के पीछे कारण-

वाराणसी मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने बताया कि, शहर वासियों को सार्वजनिक परिवहन सेवा की आवश्यकता थी, इसलिए व्यापक गतिशीलता योजना के अनुसार, यातायात में सुधार के लिए रोपवे प्रणाली एक व्यवहार्य विकल्प थी। वहीं कमिश्नर दीपक अग्रवाल की अध्यक्षता में पिछले दिनों हुई बैठक में प्री-बिड में शामिल ईसीएल मैनेजमेंट एसडीएचडीएचडी, डोपल्मेयर, एफआईएल, पोमा, एक्रान इंफ्रा, एजीस इंडिया और कन्वेयर एंड रोप-वे सिस्टम फर्मों के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया। इनमें से ईसीएल, डोपल्मेयर, एफआईएल व पोमा फर्मों ने लिखित रूप से रोप-वे निर्माण की इच्छा जताई है। बैठक में प्रमुख सचिव आवास, वित्त विभाग, राजस्व विभाग एवं नियोजन विभाग के अलावा परियोजना सलाहकार वैपकॉस के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया। बैठक में वीसी ईशा दुहन के अलावा वीडीए के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

  • ईसीएल मेनेजमेंट एसडीएनडीएचडी
  • डोपल्मेयर
  • एफ़आईएल
  • पोमा


एक नजर में प्रस्तावित रोप-वे परियोजना-
गोदोलिया से कैंट रेलवे स्टेशन के मध्य (रथयात्रा एवं साजन तिराहा होते हुए)।
लंबाई 4.02 किलोमीटर।
यात्रा समय (एंड-टू-एंड) 15 मिनट।
केबल कार संख्या एवं विवरण – 220 केबल कार।
प्रत्येक 10 व्यक्तियों की क्षमतायुक्त, प्रत्येक 90 से 120 सेकेंड के अंतराल पर।
एक तरफ से एक समय में 4000 व्यक्तियों को यात्रा की सुविधा।
कुल प्रस्तावित स्टेशन पांच।
जमीन से 11 मीटर ऊंचाई पर होगा रोप-वे।
प्रत्येक स्टेशन काशी की थीम एवं संस्कृति पर आधारित होगा।
कुल परियोजना लागत 410.30 करोड़।

WhatsApp ने 22 लाख अकाउंट्स कर दिये बैन

WhatsApp ने 22 लाख अकाउंट्स पर चलाई कैंची, यूजर्स भूलकर भी न करें ये गलतियां

WhatsApp ने 22 लाख अकाउंट्स पर चलाई कैंची, यूजर्स भूलकर भी न करें ये गलतियां

नई दिल्ली (एजेंसी)। इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप व्हाट्सएप ने अपने एक फैसले के चलते 22 लाख से ज्यादा अकाउंट्स को बैन कर दिया है। इस बात का खुलासा कंपनी की मासिक रिपोर्ट में हुआ है। कहा जा है कि जिन व्हाट्सएप अकाउंट्स को बैन किया गया है, उन्होंने नियमों को तोड़ा था।

WhatsApp banned 20 lakh accounts within a month between May to June 2021  know reason behind it - Tech news hindi - बड़ा झटका! WhatsApp ने 20 लाख से  ज्यादा भारतीय यूजर्स

जानकारी के अनुसार व्हाट्सएप ने अपने यूजर्स की सेफ्टी और सिक्यॉरिटी को ध्यान में रखते हुए उन यूजर्स को बैन कर दिया है, जिन्होंने नियमों का उल्लंघन किया था। व्हाट्सएप की यूजर सेफ्टी रिपोर्ट से पता लगा है कि कुल बैन किए गए अकाउंट्स की संख्या 22 लाख 9 हजार है। व्हाट्सएप ने कहा कि इस यूजर सेफ्टी रिपोर्ट में यूजर्स की तरफ से मिली शिकायतें और उसपर की गई कार्रवाई के साथ-साथ प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग रोकने के लिए व्हाट्सएप द्वारा की कार्रवाई भी शामिल है।

व्हाट्सएप ने सरकार को बताया कि सितंबर में उन्हें अकाउंट सपोर्ट, बैन अपील, अन्य सपोर्ट व प्रोडक्ट सपोर्ट और सेफ्टी कैटेगरी में 560 यूजर जनरेटेड शिकायत रिपोर्ट मिली थी। अकाउंट सपोर्ट (121), बैन अपील (309), अन्य सपोर्ट व प्रोडक्ट सपोर्ट (49 प्रत्येक) और सेफ्टी (32)। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि व्हाट्सएप एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग सर्विस देने वाला और मैसेजिंग दुरुपयोग को रोकने में लीडिंग ऐप है। पिछले कुछ साल में, हमने अपने प्लेटफॉर्म पर अपने यूजर्स को सुरक्षित रखने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और दूसरी टेक्नोलॉजी, डेटा वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों में लगातार निवेश किया है।

कंपनी के मुताबिक, अगर कोई गैर-कानूनी, अश्लील, मानहानि से जुड़ा, धमकाने, डराने, परेशान और नफरत फैलाने वाला या नस्लीय या जातीय भेदभाव फैलाने वाले या फिर किसी को गैर-कानूनी या गलत व्यवहार करने के लिए उकसाने वाले कंटेंट को शेयर करता है तो उसका अकाउंट बैन कर दिया जाता है। इसके अलावा अगर कोई यूजर WhtasApp की टर्म्स एंड कंडीशन का उल्लंघन करता है तो भी उसका अकाउंट बंद हो जाता है। इसलिए ऐसे कंटेंट को किसी के साथ शेयर जो किसी को परेशान करें, इसी तरह आप अपने अकाउंट को सेफ रख पाएंगे। 

अब होंगे नए तरह के युद्ध: सीमा पर नहीं, शहरों में होगी जंग


दुनिया के देश आधुनिक युद्धास्त्र बनाने में लगे हैं।परमाणु बम, हाइड्रोजन बम के आगे के विनाशक बम पर काम चल रहा है। सुपर सोनिक मिसाइल बन रही हैं, किंतु लगता है कि आधुनिक युद्ध इन सबसे अलग तरह के अस्त्र−शस्त्रों के लड़ा जाएगा। अलग तरह के युद्ध होंगे। आने वाले युद्ध सीमा पर नहीं, शहरों में लड़े जाएगे। घरों में लड़े जाएगे। गली–मुहल्लों में लड़े जाएंगे। अभी से हमें इसके लिए सोचना और तैयार होना होगा।
पुणे इंटरनेशनल सेंटर द्वारा आयोजित ‘पुणे डॉयलॉग’ में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने कहा कि भविष्य में खतरनाक जैविक हथियार दुनिया के लिए गंभीर परिणाम साबित हो सकता है। दुनिया के लिए किसी भी जानलेवा वायरस को हथियार बनाकर इस्तेमाल करना गंभीर बात है। एनएसए डोभाल ने अपने बयान में कोरोना वायरस का उदाहरण देते हुए जैविक हथियारों का मुद्दा उठाया। ‘आपदा एवं महामारी के युग में राष्ट्रीय सुरक्षा की तैयारियों ’ पर बोलते हुए अजीत डोभाल ने कहा कि आपदा और महामारी का खतरा किसी सीमा के अंदर तक सीमित नहीं रहता और उससे अकेले नहीं निपटा जा सकता। इससे होने वाले नुकसान को घटाने की जरूरत है।
अभी तक पूरी दुनिया इस खतरे से जूझ रही है कि परमाणु बम किसी आतंकवादी संगठन के हाथ न लग जाए। उनके हाथ में जाने से इसे किस तरह रोका जाएॽ उधर आतंकवादी नए तरह के हथियार प्रयोग कर रहे हैं। शिक्षा बढ़ी है तो सबका सोच बढ़ा है। दुनिया के सुरक्षा संगठन समाज का सुरक्षित माहौल देने का प्रयास कर रहे हैं।आंतकवादी घटनाएं कैसे रोकी जाएं, ययोजनाएं बना रहे हैं। आंतकवादी इनमें से निकलने के रास्ते खोज रहे हैं। वे नए−नए हथियार बना रहे हैं। अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सैंटर पर हमले से पहले कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था कि विमान को भी घातक हथियार के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। इसमें विमानों को बम की तरह इस्तेमाल किया गया। माचिस की तिल्ली आग जलाने के लिए काम आती है। बिजनौर में कुछ आंतकवादी इन माचिस की तिल्लियों का मसाला उतार कर उसे गैस के सिलेंडर में भर कर बम बनाते विस्फोट हो जाने से घायल हुए थे।
हम विज्ञान और कम्यूटर की ओर गए। हमारे युद्धास्त्र कम्यूटरीकृत हो रहे हैं। उधर शत्रु इस सिस्टम को हैक करने के उपाए खोज रहा है। लेजर बम बन रहे हैं। हो सकता है कि हैकर शस्त्रों के सिस्टम हैक करके उनका प्रयोग मानवता के विनाश के लिए कर बैठें। बनाने वालों के निर्दे कोड से बने बनाए शस्त्र हैकर के इशारे पर चलने लगें।
रोगों के निदान के लिए वैज्ञानिक वायरस पर खोज रहे हैं। उनके टीके बना रहे हैं। दवा विकसित कर रहे हैं, तो कुछ वैज्ञानिक इस वायरस को शस्त्र के रूप में प्रयोग कर रहे हैं।
साल 1763 में ब्रिटिश सेना ने अमेरिकियों पर चेचक के वायरस का इस्तेमाल हथियार की तरह किया। 1940 में जापान की वायुसेना ने चीन के एक क्षेत्र में बम के जरिये प्लेग फैलाया था। 1942 में जापान के 10 हजार सैनिक अपने ही जैविक हथियारों का शिकार हो गए थे। हाल ही के दिनों में आतंकी गतिविधियों के लिए जैविक हथियार के इस्तेमाल की बात सामने आई है। इससे हमें सचेत रहना होगा। सीमाओं की सुरक्षा के साथ इन जैविक शास्त्रों से निपटने के उपाए खोजने होंगे। चीन की लैब में विकसित हो रहा कोरोना का वायरस अगर लीक न होता तो आने वाले समय में उसके किस विरोधी देश में फैलता यह नहीं समझा जा सकता, क्योंकि आज चीन की एक–दो देश छोड़ पूरी दुनिया से लड़ाई है।
लगता है कि आधुनिक युद्ध कोरोना की तरह शहरों में, गलियों में और भीड वाली जगह में लड़ा जाएगा। किसी विषाक्त वाररस से हमें कारोना के बचाव की तरह जूझना होगा।
बुजुर्ग कहते आए हैं कि ईश्वर जो करता है, अच्छा करता है। हर मुसीबत में कोई संदेश, कोई भविष्य के लिए तैयारी होती है। ऐसा ही शायद कोरोना महामारी के बारे में माना और समझा जा सकता है। जब यह महामारी फैली तो इसके लिए पूरा विश्व तैयार नहीं था। इसके फैलने पर सब आश्चर्यचकित से हो गए किसी की समझ नहीं आया। आज डेढ़ साल से ज्यादा हो गया, इसकी दुष्ट छाया से हमें मुक्ति नहीं मिली।आंकड़ों के अनुसार इस दौरान पूरी दुनिया में 50 लाख से ज्यादा मौत हुईं हैं।
जब यह महामारी आई तो किसी को न इसके बारे में पता था, न ही इसके लिए कोई तैयार था। आज डेढ़ साल के समय में दुनिया ने इसके अनुरूप अपने को तैयार कर लिया। वैक्सीन बनाई ही नहीं, तेजी से लगाई भी जा रही है। ये सब जानते हैं कि कोराना अभी गया नहीं, फिर भी अधिकतर लोग लापरवाह हो गए हैं। इसके प्रति बरते जाने वाले सुरक्षा उपाए करने छोड़ दिए। हमने इसके साथ जीना सीखा लिया।
आज पूरी दुनिया कोरोना वायरस की मार झेल रही है। भविष्य के जैविक हथियारों के खिलाफ सुरक्षा रणनीति को लेकर अजीत डोभाल ने कहा कि देश को अब नई रणनीति बनाने की जरूरत है। चीन का नाम लिए बिना अजीत डोभाल ने कहा कि बायोलॉजिकल रिसर्च करना बेहद जरूरी है। लेकिन इसकी आड़ में इसका दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि ऐसी रणनीति बनाई जाए जो हमारे मकसद को पूरा करे और हमारा नुकसान कम से कम हो।
कोरोना से युद्ध के बाद देश चिकित्सा सुविधा का विस्तार कर रहा है। कोरोना की दूसरी लहर में आक्सीजन की मारामारी मची। आज हम जिला स्तर पर सरकारी अस्पताल में अक्सीजन बनाने के संयंत्र लगा चुके हैं। जिला स्तर तक मेडिकल कॉलेज बनाना शायद इसी रणनीति का भाग है। जगह –जगह आधुनिक अस्पताल बन रहे हैं। वैक्सीन विकास का काम भी इसी की कड़ी का एक हिस्सा है। प्रकृति के दोहन के दुष्परिणाम से होने वाली आपदाएं हमें झेलनी होंगी। उसके लिए तैयार होना होगा और काम करना होगा। चिकित्सा सुविधाएं गांव−गांव तक पहुंचानी होंगी। स्वास्थ्य वर्कर गांव–गांव तक तैयार करने होंगे। आपदा नियंत्रण के लिए जन चेतना पैदा करने के लिए गांव−गांव तक वालियंटर बनाने और उन्हें प्रशिक्षित करना होगा। हमला किस तरह का होगा, उसका रूप क्या होगा, नहीं कहा जा सकता। बस नए हालात और परिस्थिति के लिए हम अपने और अपने समाज को तैयार कर सकतें हैं।


अशोक मधुप (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

अब meta नाम से जाना जाएगा फ़ेसबुक

सैन फ्रांसिस्को (एजेंसी)। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक ने अपना नाम बदल दिया है। फेसबुक ने कंपनी का नाम बदलकर ‘मेटा’ करने की घोषणा कर दी है। पिछले कुछ दिनों से फेसबुक के नाम बदलने जाने की अटलकें लगाई जा रही थीं। कंपनी के फाउंडर और सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने नए नाम का ऐलान कर दिया है।

मार्क जुकेरबर्ग

जुकरबर्ग ने एक वार्षिक डेवलपर्स सम्मेलन के दौरान कहा, ‘हमने सामाजिक मुद्दों से संघर्ष करके और बंद प्लेटफार्मों के नीचे रहकर बहुत कुछ सीखा है, और हमने जो कुछ भी सीखा है उसे लागू करने और उसकी मदद से अगले अध्याय को बनाने का समय आ गया है।’ उन्होंने आगे कहा कि “हमारे एप्स और उनके ब्रांड, वे नहीं बदल रहे हैं।

यानी यह परिवर्तन फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे व्यक्तिगत प्लेटफॉर्म पर लागू नहीं होता है, केवल मूल कंपनी का नाम बदलकर ‘मेटा’ किया गया है, जिसके अंतर्गत ये सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स आते हैं।

मार्क जुकरबर्ग लंबे समय से अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की दोबारा ब्रान्डिंग करना चाह रहे थे। वे इसे एकदम अलग पहचान देना चाहते हैं, एक ऐसी पहचान जहां फेसबुक को सिर्फ एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के तौर पर ना देखा जाए। अब उसी दिशा में आगे बढ़ते हुए फेसबुक का नाम बदलकर ‘मेटा’ किया गया है।

फेसबुक का नाम बदलकर अब 'मेटा' हुआ, CEO मार्क जुकरबर्ग ने किया ऐलान

कंपनी का फोकस अब एक मेटावर्स बनाने पर है जिसके जरिए एक ऐसी वर्चुअल दुनिया का आगाज होगा जहां पर ट्रांसफर और कम्यूनिकेशन के लिए अलग-अलग टूल का इस्तेमाल किया जा सकेगा। 

BSNL ने बंद किया 99 रुपए वाला पोस्टपेड प्लान

नई दिल्ली। BSNL ने अपने 99 रुपये वाले पोस्टपेड प्लान को बिलिंग सिस्टम से हटा दिया है। कंपनी का यह प्लान 1 सितंबर से डिस्कंटिन्यू हो गया है। ऐसे में अब बीएसएनएल यूजर इस प्लान को सब्सक्राइब नहीं करा सकते हैं। कंपनी ने 99 रुपये वाले प्लान के मौजूदा यूजर्स को 199 रुपये वाले प्लान पर माइग्रेट कर दिया है, जिससे उनके मंथली रेंटल में भी बढ़ोतरी हो गई है।

99 रुपये वाले प्लान के यूजर्स को इस महीने बढ़े हुए चार्ज के साथ मोबाइल बिल रिसीव हुआ। इससे कई यूजर्स को तगड़ा झटका लगा। कुछ यूजर्स ने इसे कस्टमर केयर पर कॉल करके समझने की कोशिश भी की। अक्टूबर 2021 के बिल में कंपनी ने 100 रुपये का अडिशनल सिक्योरिटी डिपॉजिट जोड़ दिया था। इस वजह से यूजर्स के पिछले प्लान का अब मंथली रेंटल 199 रुपये हो गया है। जिन यूजर्स को पहले 99 रुपये+GST का बिल मिलता था, अब उन्हें प्लान रिवाइज होने के बाद 299 रुपये+GST वाला बिल मिल सकता है। 

ये यूजर अभी भी उठा सकते हैं 99 रुपये वाले प्लान का फायदा
बीएसएनएल ने कहा है कि 99 रुपये वाले प्लान को हटाने के साथ ही इसके सब्सक्राइबर्स को कंपनी के अब सबसे सस्ते मंथली रेंटल प्लान यानी 199 रुपये पर माइग्रेट कर दिया गया है। इसके साथ ही बीएसएनएल ने साफ किया कि जिन यूजर ने 99 रुपये वाले प्लान को ऐनुअल पेमेंट स्कीम के तहत सब्सक्राइब कराया था, वे अभी भी इस प्लान पर बने रहेंगे। इन यूजर्स को कंपनी ऐनुअल पेमेंट या अडवांस रेंटल पीरियड के खत्म होने के बाद 199 रुपये वाले प्लान पर शिफ्ट करेगी। 

199 रुपये वाले प्लान में मिलने वाले बेनिफिट 
बीएसएनएल का यह पोस्टपेड प्लान देशभर में किसी भी नेटवर्क के लिए अनलिमिटेड कॉलिंग बेनिफिट के साथ आता है। हर दिन 100 फ्री एसएमएस देने वाले इस प्लान में आपको 25जीबी डेटा मिलता है। खास बात है कि कंपनी इस प्लान में 75जीबी तक का डेटा रोलओवर बेनिफिट भी दे रही है।  

गलती होने पर आएगा काम WhatsApp स्टेटस का नया फीचर

WhatsApp स्टेटस के लिए नया फीचर, गलती होने पर आएगा काम

नई दिल्ली (एजेंसी)। फेसबुक के स्वामित्व वाला मैसेजिंग ऐप व्हाट्सएप तस्वीरें एडिट करने के लिए Undo और Redo बटन पर काम कर रहा है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार कंपनी WhatsApp Status के लिए भी एक नया Undo बटन लाने जा रही है। यह Undo बटन स्टेटस लगाते समय आपसे हुई गलती को चुटकियों में सुधार देगा।

Whatsapp big feature how to share whatsapp status to facebook stories know  the full process in steps in hindi | WhatsApp का बड़ा अपडेट! बदल गया Status  लगाने का तरीका, यहां जानें

WABetaInfo की रिपोर्ट के अनुसार पॉपुलर मैसेजिंग ऐप एक ऐसे फीचर पर काम कर रहा है, जो इसके यूजर्स को गलती से पोस्ट किए गए स्टेटस अपडेट को तुरंत डिलीट करने में मदद करेगा। इसके लिए ऐप में एक Undo बटन दिया जाएगा। यह बटन Status Sent मैसेज के ठीक बगल में लिखा होगा। यानी स्टेटस लगते ही आप तुरंत एक्शन ले सकते हैं। ऐसा अक्सर देखा गया है कि कई बार गलती से स्टेटस पर तस्वीरें या वीडियो अपलोड हो जाती हैं।

गौरतलब है कि व्हाट्सएप पर पहले से ही यूजर्स को स्टेटस डिलीट करने का ऑप्शन मिलता है। हालांकि इसके लिए आपको पहले Status सेक्शन में जाकर स्टेटस सिलेक्ट करना होगा और तब डिलीट कर पाएंगे। इतनी देर में हो सकता है आपके कई कॉन्टैक्ट उस स्टेटस को देख भी लें। ऐसे में नया बटन तस्वीर/वीडियो हटाने का काम तेजी से कर पाता है। 

रिपोर्ट के मुताबिक जब आप किसी स्टेटस अपडेट को अनडू करते हैं, तो आप अब डिलीट करने की प्रक्रिया को भी फॉलो कर सकते हैं। पूरा होने पर व्हाट्सएप आपको सूचित करेगा कि आपने स्टेटस डिलीट कर दिया है। स्टेटस अपडेट के लिए Undo बटन फिलहाल व्हाट्सएप बीटा के एंड्रॉइड वर्जन 2.21.22.6 पर टेस्ट किया जा रहा है। टेस्टिंग पूरी होने के बाद इसे सभी यूजर्स के लिए जारी कर दिया जाएगा। 

WhatsApp की एक Setting बदल कर बचा सकते हैं फोन स्टोरेज और मोबाइल डेटा!

WhatsApp की एक Setting बदल कर बचा सकते हैं फोन स्टोरेज और मोबाइल डेटा! जानें आसान तरीका

WhatsApp पर कई धांसू ट्रिक मौजूद है.

वॉट्सऐप (WhatsApp) बहुत सारे मीडिया कंट्रोल के साथ आता है, जो यूज़र्स को अपने हिसाब से फोटोज, वीडियो और अन्य मल्टीमीडिया को कंट्रोल करने की अनुमति देता है. इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप यूज़र्स को एक बार में सभी चैट के लिए ऑटो-डाउनलोड को बंद करने का ऑप्शन भी देता है. आमतौर पर वॉट्सऐप रिसीव होने वाली सभी फ़ोटो और वीडियो को डाउनलोड करता है और उन्हें फोन की गैलरी में सेव करता है. ये ना केवल आपके डेटा की खपत करता है बल्कि आपके फोन स्टोरेज को कम करने के साथ, आपके फोन को भर देता है.

इसके अलावा, वॉट्सऐप के पास एक विकल्प भी है जिसे मीडिया विजिबिलिटी कहा जाता है. इस ऑप्शन को बंद करने के साथ ही आपके फोन पर ऑटोमैटिक फोटो और वीडियोज़ डाउनलोड होना बंद हो जाएंगे. आइए जानते हैं वॉट्सऐप पर मीडिया सेटिंग्स को कैसे मैनेज करें…

ज़रूरी बातें
> वॉट्सऐप का नया वर्जन होना चाहिए.

> वॉट्सऐप का एक्टिव अकाउंट होना चाहिए.

वॉट्सऐप पर ऑटो-डाउनलोड को कैसे बंद करें?

1- वॉट्सऐप खोलें और ऊपर दाईं ओर थ्री डॉट्स पर टैप करके सेटिंग्स में जाएं.

2- स्टोरेज एंड डेटा पर टैप करें और मीडिया ऑटो-डाउनलोड सेक्शन में जाएं.

यहां करें ये बदलाव-

-मोबाइल डेटा का इस्तेमाल करते समय — सभी बॉक्स अनचेक करें

-Wifi से कनेक्ट होने पर — सभी बॉक्स अनचेक करें.

-रोमिंग के समय — सभी बॉक्स को अनचेक करें

सभी चैट के लिए मीडिया विजिबिलिटी को कैसे बंद करें?

-सेटिंग पर जाएं -> चैट्स -> मीडिया विजिबिलिटी और इसे ऑफ कर दें.

पर्सनल चैट के लिए मीडिया विजिबिलिटी को कैसे बंद करें?

-वो चैट खोलें, जिसके लिए आप मीडिया विजिबिलिटी को बंद करना चाहते हैं और ऊपर से चैट के नाम पर टैप करें. मीडिया विजिबिलिटी को सर्च करें और इसे बंद कर दें. (साभार)

मोबाइल सिम लेने के लिए अब नहीं भरना होगा फिजिकल फॉर्म

मोबाइल सिम लेने के लिए अब नहीं भरना होगा फिजिकल फॉर्म, इस प्रकार होगी कस्टमर की वेरीफिकेशन

मोबाइल सिम लेने के लिए अब नहीं भरना होगा फिजिकल फॉर्म, इस प्रकार होगी कस्टमर की वेरीफिकेशन 

नई दिल्ली (एजेंसी)। अब आपको सिम कार्ड लेने में फिजिकल वैरीफिकेशन की जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि मोदी सरकार ने डिजिटल KYC को मंजूरी दे दी है। इस संबंध में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में सरकार की तरफ से कहा गया कि सिम कार्ड खरीदने के लिए अब डिजिटल फॉर्मेट में कस्टमर का वेरिफिकेशन होगा। इसके अलावा प्रीपेड से पोस्टपेड या पोस्टपेड से प्रीपेड में जाने पर दोबारा KYC नहीं किया जाएगा। यह भी बताया गया कि मोबाइल टावर को लेकर कई फ्रॉड केस सामने आए हैं। ऐसे में अब सेल्फ डिक्लेरेशन के आधार पर टावर का इंस्टालेशन होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला लिया गया कि अब मोबाइल सिम लेने के लिए ग्राहक को कोई फिजिकल फॉर्म नहीं भरना होगा।

Truecaller को तुरंत कर दें अपने फोन से डिलीट

Truecaller को करें अपने फोन से तुरंत डिलीट, जानिए क्या है खास वजह

नई दिल्ली (एजेंसी): कोरोना के बाद भारत में कई देसी ऐप्स आ गए हैं वो विदेशी ऐप्स को काफी बढ़िया से टक्कर दे रहे हैं, फिर चाहे वह ट्विटर देसी वर्जन Koo हो या PUBG का देसी ऐप बैटलग्राउंड इंडिया। इसी कड़ी में अब भारत में कॉलर आईडी ऐप Truecaller को टक्कर देने के लिए देसी ऐप BharatCaller ने दस्तक दी है। इस ऐप के निर्माता का कहना है कि उनकी ऐप ट्रूकॉलर से कुछ मामलों में आगे है और यह ऐप भारतीयों को ट्रूकॉलर से बेहतर अनुभव देगी। 

जानिए इस ऐप के बारे में…: 

कॉलर आईडी ऐप के जरिए आपके फ़ोन पर आए किसी भी अनजान कॉल करने वाले का नाम पता चल जाता है। यानि आपको आसानी से पता चल जाता है कि आपको कॉल करने वाले का नाम क्या है, वो कौन है? यहाँ तक कि आपको उसकी email id, facebook id भी नज़र आ सकती है। ऐसे में यदि कोई नंबर आपके फ़ोन में सेव (save) नहीं है तो वो सूचना आपके काफी काम आ जाती है। यानि आपको बिना फ़ोन उठाये पता चल जाता है कि फ़ोन किसी बैंक का है, क्रेडिट कार्ड वालों का है या किसी और का। इस ऐप के जरिए फ्रॉड कॉल को भी ब्लॉक किया जा सकता है। इसके साथ ही रियल स्टेट कंपनी और इंश्योरेंस कंपनी सहित शेयर मार्केट से संबधित कॉल से परेशान है तो आप उन्हें भी ब्लॉक कर सकते हैं। 

भारतकॉलर ऐप बाकी कॉलर आईडी ऐप्स से इस तरह भिन्न है कि यह अपने यूजरस के कॉन्टैक्ट्स और कॉल लॉग्स को अपने सर्वर पर सेव नहीं करता जिससे यूजर्स की प्राइवेसी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। साथ ही कंपनी के किसी भी कर्मचारी के पास यूजर्स के फोन नंबर्स का डाटाबेस नहीं होता है और न ही ऐसे किसी डाटा का एक्सेस होता है। इस ऐप का सारा डाटा इन्क्रिप्टेड फॉर्मैट में स्टोर किया जाता है और इसका सर्वर भारत के बाहर कोई इस्तेमाल नहीं कर सकता है। इसलिए भारतकॉलर ऐप पूरी तरह से सुरक्षित, भारतीय और यूजर-फ्रेंडली है। भारतकॉलर को कई भारतीय भाषाओं में लॉन्च किया गया है, जैसे अंग्रेजी, हिन्दी, तमिल, गुजराती, बांग्ला, मराठी आदि। ऐसे होने से कोई भी अपनी पसंद से भाषा चुन कर इस ऐप का इस्तेमाल आसानी से कर सकता है। यह एओ एंड्रॉयड और iOS दोनों यूजर्स के लिए उपलब्ध है। यह एक फ्री ऐप है। यह ऐप अभी तक 6000 बार डाउनलोड की गई है।

भारतकॉलर ऐप को एक भारतीय कंपनी किकहेड सॉफ्टवेयर्स प्रा. लि. ने बनाया है। इस कंपनी के संस्थापक हैं IIM बैंगलोर से आये प्रज्ज्वल सिन्हा और सह-संस्थापक हैं कुणाल पसरीचा। इनका ऑफिस नॉएडा, उत्तर प्रदेश में स्थित है।

BharatCaller को बनाने के पीछे जो उद्देश्य भारत का अपना कॉलर आईडी ऐप पेश करना है। क्योंकि प्राइवेसी के चलते कुछ ही समय पहले भारतीय सेना ने Truecaller को बैन कर दिया था। इस ऐप में स्पाईवेयर की वजह से ऐसा किया गया था। भारतीय सेना ने अपने जवानों से यह कहा था कि वो सभी अपने फोन्स से TrueCaller ऐप को तुरंत डिलीट कर दें।

Truecaller को टक्कर देगा भारतीय App

Truecaller को टक्कर देने आई ये भारतीय App, जानें क्या है इसमें खास

नई दिल्ली (एजेंसी)। कॉलर आईडी ऐप ट्रूकॉलर को टक्कर देने के लिए भारतीय कॉलर आईडी ऐप लॉन्च हो गया है। इस स्वदेशी कॉलर आईडी का नाम भारतकॉलर है। इसे बनाने वाले इंजीनियरों का दावा है कि यह कॉलर आईडी विदेशी और अन्य कॉलर आईडी की तरह आपके कॉल लॉग्स, कॉन्टैक्ट्स या संदेशों को अपने सर्वर पर अपलोड नहीं करता। न ही इसके कर्मचारियों के पास आपके फोन नंबर्स का डेटाबेस एक्सेस करने का अधिकार है। इस एप के निर्माता का यह कहना है कि वे ट्रूकॉलर से कुछ मामलों में आगे हैं और यह एप भारतीयों को ट्रूकॉलर से बेहतर लगेगी।

BharatCaller App

इस ऐप को भारत के ही कुछ इंजीनियरों ने बनाया है। आईआईएम बैंगलोर के पूर्व छात्र और इस एप की निर्माता टीम के प्रमुख सदस्य, प्रज्ज्वल सिन्हा यह कहते हैं कि यह एप भारत में ट्रूकॉलर का विकल्प बन सकता है और यह पूरी तरह सुरक्षित है। प्रज्ज्वल कहते हैं कि कुछ समय पहले भारतीय सेना ने भारत में ट्रूकॉलर को बैन कर दिया था। इस समय प्रज्ज्वल और उनके मित्र को यह सूझा कि भारत की कोई अपनी कॉलर आइडी एप नहीं है और होनी चाहिए। तभी उन्होंने इस एप को बनाने का फैसला किया।

प्रज्ज्वल बताते हैं कि तीन महीने की रिसर्च के बाद, दिसंबर 2020 में इस एप पर काम शुरू हुआ और इसे पूरी तरह तैयार होने में छह महीने का समय लग गया। ट्रायल्स के सफल होने के बाद इस एप के पहले वर्जन को लॉन्च किया गया, जो करीब 1 करोड़ यूजर्स के उपयोग करने के लायक है। भारतकॉलर के निर्माता कहते हैं कि अभी भी वह अपनी एप को वहां नहीं पहुंचा पाए हैं जहां यह एप अंतर्राष्ट्रीय स्तर की ऐसी दूसरी एप्स से मुकाबला कर सके। अपडेट्स की प्रक्रिया चल रही है और एआई आधारित ऐल्गोरिद्म में सुधार किए जा रहे हैं। वह कहते हैं कि अभी उन्हें काफी काम और करना है।

BharatCaller App

भारतकॉलर एप में क्या है खास 
यह एप बाकी एप्स से इस तरह भिन्न है कि यह अपने यूजरस के कॉन्टैक्ट्स और कॉल लॉग्स को अपने सर्वर पर सेव नहीं करता जिससे यूजर्स की निजता पर कोई प्रभाव न पड़े। साथ ही, इस एप का डाटा इन्क्रिप्टेड फॉर्मैट में स्टोर किया जाता है और इसका सर्वर भारत के बाहर कोई इस्तेमाल नहीं कर सकता है। इसलिए भारतकॉलर एप पूरी तरह से सुरक्षित और यूजर-फ्रेंडली है। भारतकॉलर को विभिन्न भारतीय भाषाओं में लॉन्च किया गया है, जैसे अंग्रेजी, हिन्दी, तमिल, गुजराती, बांग्ला, मराठी आदि। इसके पीछे का कारण है एप को समावेशी यानी इन्क्लूसिव बनाना जिससे हर भारतीय अपने सुख और अपनी पसंद से भाषा चुन सके और उस भाषा में एप को इस्तेमाल कर सके।  इस एप को एंड्रॉयड और iOS का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स, सभी डाउनलोड कर सकते हैं।

भारत में हाड्रोजन ईंधन से चलेंगीं ट्रेन

भारतीय रेलवे वैकल्पिक ईंधन संगठन (आईआरओएएफ) ने हरित रेलवे के लिए एक मिशन मोड पर, भारतीय रेलवे नेटवर्क पर हाइड्रोजन ईंधन सेल आधारित रेलगाड़ियों के लिए निविदाएं आमंत्रित की हैं। देश में इस परियोजना से हाइड्रोजन परिवहन की अवधारणा की शुरुआत होगी। आरंभ में, उत्तर रेलवे के 89 किलोमीटर लम्बे सोनीपत-जींद खंड के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई हैं। शुरूआत में, 2 डीईएमयू रैक को परिवर्तित किया जाएगा और उसके बाद, 2 हाइब्रिड इंजनों को हाइड्रोजन ईंधन सेल ऊर्जा परिवहन के आधार पर परिवर्तित किया जाएगा। इस परियोजना से प्रतिवर्ष 2.3 करोड़ रुपए की बचत होगी।

नई दिल्ली। भारत में अब जल्द ही हाइड्रोजन पर आधारित तकनीक से चलने वाली ट्रेनों की शुरुआत की जा सकती है। इस तकनीक को सबसे पहले जींद और सोनीपत के बीच 89 किमी ट्रैक पर चलने वाली विकसित किया जाएगा। अगर ये तकनीक भारत में सफल होती है, तो दुनिया में भारत तीसरा ऐसा देश बन जाएगा, जहां ग्रीन एनर्जी का उपयोग किया जाएगा।

Ministry of Railways की प्रेस Release में बताया गया है कि “उन्नत रसायन सेल (एसीसी) बैटरी” और “राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन” भारत सरकार के दो प्रमुख कार्यक्रम हैं। इसके तहत पेरिस जलवायु समझौते 2015 और 2030 तक “मिशन नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन रेलवे” के तहत ग्रीन हाउस गैस (जीएचजी) उत्सर्जन को कम करने के लक्ष्यों को पूरा किया जा सकेगा। इसके अनुसार, देश में हाइड्रोजन परिवहन की अवधारणा को शुरू करने के लिए हाल ही में बजटीय घोषणा की गई थी। इसे एक चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए, भारतीय रेलवे वैकल्पिक ईंधन संगठन (आईआरओएएफ), भारतीय रेलवे के हरित ईंधन वर्टिकल ने रेलवे नेटवर्क पर हाइड्रोजन ईंधन सेल आधारित रेलगाड़ियों के लिए निविदाएं आमंत्रित की हैं। यह परियोजना उत्तर रेलवे के 89 किलोमीटर लम्बे सोनीपत-जींद खंड पर शुरू होगी।

प्रारंभ में, 2 डीईएमयू रैक को परिवर्तित किया जाएगा और बाद में, 2 हाइब्रिड इंजनों को हाइड्रोजन ईंधन सेल ऊर्जा परिवहन के आधार पर परिवर्तित किया जाएगा। ड्राइविंग कंसोल में कोई बदलाव नहीं होगा। साथ ही, इस परियोजना से प्रति वर्ष 2.3 करोड़ रुपये की बचत होगी।

परियोजना का विवरण:

स्वीकृत कार्य:

• 2 डेमू रैक पर रेलगाड़ियों के अनुप्रयोग के लिए ईंधन सेल संचालित हाइब्रिड ट्रैक्शन सिस्टम का प्रावधान 

•  2021-22 की वर्तमान पिंक बुक आइटम नंबर 723

• चालू वर्ष के दौरान 8 करोड़ रुपए का आवंटन

कार्य का संक्षिप्त दायरा:

• आरडीएसओ विनिर्देश संख्या आर 2/347/ईंधन सैल-1 जुलाई, 2021के अनुसार ऑन-बोर्ड उपकरण।

• आरडीएसओ विनिर्देश संख्या जुलाई 2021 का आर 2/347/ईंधन सेल-1 के अनुसार कार्य स्थल पर स्थिर (जमीन पर) हाइड्रोजन भंडारण और फिलिंग स्टेशन।

निविदा प्रसंस्करण:

• दो बोली-पूर्व सम्मेलन 17/08/2021 और 09/09/2021 को निर्धारित है।

• प्रस्ताव जमा करने की 21/09/2021 से शुरुआत होगी।

• निविदा खोलने की तिथि 05/10/2021 है।

फोटो-वीडियो देखते ही खुद हो जाएगा Delete

WhatsApp लाया कमाल का फीचर, फोटो-वीडियो देखते ही अपने आप हो जाएगा Delete

WhatsApp में आया कमाल का फीचर, फोटो-वीडियो देखते ही अपने आप हो जाएगा Delete- जानें कैसे करें यूज

नई दिल्ली। यूजर्स को उनकी प्राइवेसी पर ज्यादा कंट्रोल देने के लिए व्हाट्सएप ने ‘व्यू वन्स’ नाम से एक नया फीचर लांच किया है। यह फीचर अगले एक सप्ताह में सबको उपलब्ध हो जाएगा। इस फीचर के तहत टेक्स्ट, फोटो या वीडियो भेजने के बाद पाने वाले के देखने के बाद यूजर के चैट बाॅक्स से कंटेंट अपने आप डिलीट हो जाएगा। पाने वाले के देख लेने के बाद उसके चैट बाॅक्स से भी वह कंटेंट डिलीट हो जाएगा। वह उस कंटेंट को सेव, फारवर्ड या शेयर नहीं कर सकेगा।


 
कंपनी ने अपने एक बयान में कहा कि ‘व्यू वन्स’ फीचर के तहत कंटेंट एंड टू एंड एन्क्रिप्टेड होगा, जिससे वह पूरी तरह सुरक्षित होगा। उसे बीच मेंं कोई देख नहीं सकेगा। इस फीचर के तहत भेजे जाने वाले मैसेज में वन टाइम आइकन का मार्क दिखेगा। यह फीचर तुरंत फीडबैक पाने के लिए बड़े काम का होगा। उदाहरण के लिए यदि आप कोई नया कपड़ा ट्राइ कर रहे हैं और तुरंत किसी जानने वाले से कंमेंट चाहते हैं तो इस फीचर का यूज कर सकते हैं। वाईफाई पासवर्ड इस फीचर से दे सकते हैं ताकि काम होते ही वह डिलीट हो जाए।

₹3,000 रुपए से भी कम में Nokia का 4G फोन

3,000 रुपए से भी कम की कीमत में Nokia ने लॉन्च किया 4G फोन। लगातार 12 दिन तक चल सकती है बैटरी।

3,000 रुपए से भी कम की कीमत में Nokia ने लॉन्च किया 4G फोन, 12 दिन तक लगातार चल सकती है बैटरी

नई दिल्ली (एकलव्य बाण समाचार)। नोकिया ने भारतीय बाजार में 110 4G फोन लॉन्च कर दिया है। फोन में HD Voice Call का मजा उठाया जा सकता है। साथ ही इसमें 4G VoLTE कनेक्टिविटी भी मिलेगी।

Nokia 110 4G में बैक कैमरा, टॉर्च, इंटरनेट एक्सेस, वायरलेस FM रेडियो, MP3 प्लेयर और 3-in-1 स्पीकर और गेम भी दिया गया। नोकिया 100 में लंबे समय तक चलने वाली बैटरी दी गई है। इस फोन की कीमत 2799 रुपए रखी गई है। फोन को तीन कलर ऑप्शन Yellow, Black और Aqua में लॉन्च किया गया है। इसमें 1.8 इंच का QQVGA डिस्प्ले मिलता है। फोन में डुअल Nano Sim Slot और Micro USB पोर्ट भी है। इस फोन में 1020mAh की बैटरी दी गई है।

अब Phone बंद होने पर भी कर सकेंगे चैटिंग, WhatsApp में आया ये जबरदस्त फीचर

अब Phone बंद होने पर भी आप कर सकेंगे चैटिंग, WhatsApp में आया ये जबरदस्त फीचर

नई दिल्ली (एकलव्य बाण समाचार) WhatsApp यूजर्स के लिए बड़ी खुशखबरी है जिस फीचर का यूजर्स को बेसब्री से इंतजार था, वह आखिरकार रोलआउट होना शुरू हो गया है। व्हाट्सएप का यह नया फीचर Multi-Device सपोर्ट है। इस फीचर की मदद से यूजर फोन के अलावा चार अलग-अलग डिवाइसेज पर एक साथ व्हाट्सएप चला सकेंगे। खास बात है कि अलग-अलग डिवाइसेज से व्हाट्सएप अकाउंट लिंक होने के बावजूद यूजर्स की प्रिवेसी पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि कंपनी इस फीचर को एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन के साथ ऑफर कर रही है।

WhatsApp multi-device hero

मल्टी-डिवाइस सपोर्ट की खासियत है कि फोन ऐक्टिव न रहने या इंटरनेट से कनेक्टेड न होने पर भी यूजर दूसरे डिवाइस जैसे लैपटॉप या डेस्कटॉप पर व्हाट्सएप चैटिंग का लुत्फ उठा सकेंगे।

हालांकि, दूसरे डिवाइस पर व्हाट्सएप ऐक्सेस करने के लिए इंटरनेट कनेक्शन जरूरी होगा। कंपनी इस फीचर को अभी बीटा वर्जन में रोलआउट कर रही है। अगर फोन बंद भी है तभी आप चैटिंग कर सकते हैं। वॉट्सऐप के हेड विल कैथकार्ट ने बीटा वर्जन के लिए रोलआउट किए जा रहे मल्टी-डिवाइस सपोर्ट फीचर की जानकारी अपने ऑफिशल ट्विटर हैंडल से ट्वीट करके दी। उन्होंने ट्वीट में कहा कि अब यूजर फोन ऐक्टिव न रहने पर भी वॉट्सऐप का डेस्कटॉप या वेब एक्सपीरियंस ले सकते हैं। नए फीचर को कंपनी ने बुधवार से रोलआउट करना शुरू किया है। 

whatsapp new feature for android users send high resolution videos |  WhatsApp का ये फीचर है जबरदस्त, हाई क्वालिटी Photo भेजने पर नहीं होगी खराब

कंपनी शुरुआत में इस फीचर को उन यूजर्स को उपलब्ध करा रही है, जो वॉट्सऐप की बीटा प्रोग्राम का हिस्सा हैं। कंपनी की प्लानिंग है कि आने वाले समय में वह स्टेबल वर्जन यूजर्स को बीटा वर्जन में स्विच करने का ऑप्शन भी देगी। आने वाले दिनों में यह ऑप्शन Linked Devices स्क्रीन में ऑफर किया जा सकता है।

Whatsapp View Once Feature: ये फीचर तो गजब है! WhatsApp में देखते ही मेसेज  अपने आप गायब हो जाएगा, जानें नुकसान या लाभ? - what is the benefit of  whatsapp view once

जिन यूजर्स को व्हाट्सएप मल्टी-डिवाइस फीचर मिल रहा है, उन्हें फोन के अलावा दूसरे डिवाइस पर व्हाट्सएप ऐक्सेस करने के लिए एक QR Code को स्कैन करना होगा। यह वैसा ही जैसा अभी हम लोग फोन के साथ लैपटॉप या डेस्कटॉप पर वॉट्सऐप चलाने के लिए लिंक डिवाइस QR Code को स्कैन करते हैं। दूसरे डिवाइस पर वॉट्सऐप लिंक करने के लिए बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन की भी जरूरत पड़ेगी। खास बात है कि यूजर कभी भी लिंक्ड डिवाइस से लॉगआउट कर सकते हैं और यह भी देख सकते हैं कि लिंक्ड डिवाइस पर उनका व्हाट्सएप अकाउंट आखिरी बार कब ऐक्टिव था।

एकलव्य बाण समाचार

प्रधानमंत्री 1 जुलाई को ‘डिजिटल इंडिया’ के लाभार्थियों के साथ करेंगे बातचीत

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 1 जुलाई को सुबह 11 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ‘डिजिटल इंडिया’ के लाभार्थियों के साथ बातचीत करेंगे।

नई दिल्ली (एकलव्य बाण समाचार) PIB की रिलीज़ के अनुसार कार्यक्रम का आयोजन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा ‘डिजिटल इंडिया’ के छह साल पूरे होने के अवसर पर किया जा रहा है। प्रधानमंत्री द्वारा 1 जुलाई, 2015 को ‘डिजिटल इंडिया’ कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया था। ‘डिजिटल इंडिया’, न्यू इंडिया के सबसे सफल कार्यक्रमों में से एक रहा है, जिसका लक्ष्य है – सेवाओं को सुलभ बनाना, सरकार को नागरिकों के करीब लाना, नागरिकों की भागीदारी को बढ़ावा देना और लोगों को सशक्त बनाना। इस अवसर पर केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री भी मौजूद रहेंगे।

आधी कीमत में बनाया वेंटिलेटर, वजन मात्र किलो


डॉक्टर दंपती की तकनीक और रिटायर्ड वैज्ञानिक की मदद से इंदौर के उद्योगपति ने आधी कीमत में बनाया वेंटिलेटर। 10 महीने की मेहनत से 50 हजार में किया तैयार। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दी मंजूरी।
सिलेंडर खत्म होने पर वातावरण से ऑक्सीजन लेकर मरीज को देगा।

इंदौर। (एजेंसी) कोरोना के गंभीर मरीजों को आ रही वेंटिलेटर की समस्या को देखते हुए शहर के एक उद्योगपति ने आधी कीमत में देसी वेंटिलेटर बना लिया है। विदेश से लौटे डॉक्टर दंपती की तकनीक और कैट के रिटायर्ड सांइटिस्ट की मदद से यह हो सका है। उनके वेंटिलेटर को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है। पोलोग्राउंड में साईं प्रसाद उद्योग के संचालक संजय पटवर्धन ने बताया कि नान इन्वेजिव टाइप का वेंटिलेटर 10 माह में तैयार हुआ है। इसकी कीमत करीब 50 हजार है, जबकि विदेशी वेंटिलेटर एक-डेढ़ से 10 लाख में मिलते हैं। यह कम ऑक्सीजन फ्लो में भी सपोर्ट करता है। सिलेंडर में ऑक्सीजन खत्म होने पर तीन-चार घंटे वातावरण से ऑक्सीजन लेकर मरीज को दे सकेगा। मरीज को कहीं शिफ्ट करना हो या फिर छोटी जगहों पर मरीज गंभीर हो जाए और संक्रमण 50-60 फीसदी हो तो ऐसी स्थिति में यह जिंदगी बचा सकता है। इसका वजन दो किलो है, जिससे इसे आसानी से कहीं भी ले जा सकते हैं।

बना है यूरोपीय मानकों के अनुसार-पटवर्धन बताते हैं कि डॉ. एसके भंडारी और उनकी पत्नी डॉ. पूर्णिमा के पास इसकी तकनीक थी। कैट के रिटायर्ड वैज्ञानिक अनिल थिप्से ने मदद की। मेडिकल उपकरण के लिए जरूरी लाइसेंस लेने, यूरोप के मानक के अनुसार बनाने के लिए पार्ट्स अमेरिका, मुंबई आदि जगह से मंगाए। टेस्टिंग, रजिस्ट्रेशन आदि में भी काफी समय लगा।

इसलिए पड़ती है वेंटिलेटर की जरूरतवेंटिलेटर तब उपयोग में आता है, जब मरीज खुद सांस नहीं ले पाता। वेंटिलेटर दो तरह के होते हैं। पहला – इन्वेजिव, जिसमें लंग्स तक पाइपलाइन जाती है। दूसरा- नाॅन इन्वेजिव, जिसमें नाक में पाइपलाइन जाती है। मरीज के लंग्स चलते हैं। (दै.भा.)

दूरसंचार विभाग ने दी 5जी तकनीक और स्पेक्ट्रम ट्रॉयल को मंजूरी

टेलिकॉम सेवाएं देने वाली कंपनियां भारत के विभिन्न स्थानों पर 5जी ट्रॉयल शुरू कर सकेंगी

ग्रामीण, अर्द्ध शहरी और शहरी इलाकों को 5जी ट्रॉयल में शामिल किया जाएगा

ट्रॉयल के तहत 5जी से जुड़ी घरेलू तकनीकी को भी शामिल किया जाएगा

नई दिल्ली। भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने मंगलवार को दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (टीएसपी) को 5जी तकनीक के उपयोग और एप्लीकेशन के लिए परीक्षण करने की अनुमति दे दी। आवेदक कंपनियों में भारती एयरटेल लिमिटेड, रिलायंस जिओ इंफोकॉम लिमिटेड, वोडाफोन इंडिया लिमिटेड और एमटीएनएल शामिल हैं। इन कंपनियों (टीएसपी) ने मूल उपकरण निर्माताओं और प्रौद्योगिकी प्रदाताओं के साथ समझौता किया है। जिसमें एरिक्सन, नोकिया, सैमसंग और सी-डॉट शामिल हैं। इसके अलावा रिलायंस जिओ इंफोकॉम लिमिटेड भी अपनी स्वदेशी तकनीक का उपयोग करते हुए परीक्षण करेगी।

डीओटी ने यह मंजूरी टीएसपी द्वारा पहचान की गई प्राथमिकताओं और प्रौद्योगिकी सहयोगी कंपनियों के आधार पर दी है। प्रयोग के लिए यह स्पेक्ट्रम विभिन्न बैंडों में दिया जा रहा है जिसमें मिड-बैंड (3.2 गीगाहर्ट्ज़ से 3.67 गीगाहर्ट्ज़), मिलीमीटर वेव बैंड (24.25 गीगाहर्ट्ज़ से 28.5 गीगाहर्ट्ज़) और सब-गीगाहर्ट्ज़ बैंड (700 गीगाहर्ट्ज़) शामिल हैं। टीएसपी को इसके अलावा 5 जी परीक्षणों के संचालन के लिए उनके मौजूदा स्पेक्ट्रम (800 मेगाहर्ट्ज, 900 मेगाहर्ट्ज, 1800 मेगाहर्ट्ज और 2500 मेगाहर्ट्ज) के तहत ट्रॉयल की अनुमति होगी।

वर्तमान में परीक्षणों की अवधि 6 महीने के लिए है। इसमें उपकरणों की खरीद और स्थापना के लिए 2 महीने की अवधि शामिल है।

अनुमति पत्र के अनुसार प्रत्येक टीएसपी को शहरों के अलावा ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भी परीक्षण करना होगा ताकि देश भर में 5जी टेक्नोलॉजी का लाभ प्राप्त हो और यह केवल शहरी क्षेत्रों तक ही सीमित न हो।

टीएसपी को पहले से ही मौजूद 5जी प्रौद्योगिकी के अलावा 5जी आई तकनीक का उपयोग परीक्षण करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) ने 5जीआई तकनीक को भी मंजूरी दी है। इसकी भारत ने वकालत की थी, क्योंकि यह 5जी टावरों और रेडियो नेटवर्क की पहुंच को आसान बनाता है। 5जीआई तकनीक का विकास आईआईटी मद्रास वायरलेस टेक्नोलॉजी के उत्कृष्ट केंद्र (सीईडब्ल्यूआईटी) और आईआईटी हैदराबाद द्वारा विकसित किया गया है।

5जी परीक्षणों का संचालन विशेष रुप से भारतीय संदर्भ में उद्देश्यों में 5जी स्पेक्ट्रम का प्रसार भारतीय जरूरतों के आधारों पर करना है। मॉडल ट्यूनिंग और चुने हुए उपकरण औऱ उनके वेंडर का मूल्यांकन, स्वदेशी तकनीक का परीक्षण, एप्लीकेशन आधारित तकनीकी का परीक्षण (जैसे टेली-मेडिसिन, टेली-शिक्षा, संवर्धित / वर्चुअल रियल्टी, ड्रोन-आधारित कृषि निगरानी, ​​आदि।) और 5जी फोन और उपकरणों का परीक्षण करने के लिए किया गया है।

5 जी तकनीक से डेटा डाउनलोड दरों (4 जी के 10 गुना होने की उम्मीद) है। इससे उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं मिलेगी, जिसके जरिए स्पेक्ट्रम क्षमता से तीन गुना अधिक उपयोग किया जा सकेगा और उद्योग जगत को 4.0 एप्लीकेशन के लिए सक्षम कर सकेगा। इन एप्लीकेशंस का इस्तेमाल कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, यातायात प्रबंधन, स्मार्ट शहरों, स्मार्ट घरों और आईओटी (इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स) में हो सकेगा।

डीओटी ने निर्दिष्ट किया है कि परीक्षण को अलग से किया जाएगा और टीएसपी के मौजूदा नेटवर्क के साथ नहीं जोड़ा जाएगा। परीक्षण गैर-वाणिज्यिक आधार पर होंगे। परीक्षणों के दौरान उत्पन्न डेटा भारत में संग्रहीत किया जाएगा। टीएसपी से यह भी उम्मीद है कि वह परीक्षण के हिस्से के रूप में स्वदेशी रूप से विकसित उपकरणों और तकनीकी का इस्तेमाल करेंगी। हाल ही में 5 जी एप्लीकेशन पर हैकाथन आयोजित करने के बाद डीओटी द्वारा चुने गए 100 एप्लीकेशन / इस्तेमाल मामलों का भी इन परीक्षणों को उपयोग किया जा सकता है।

कॉस्मिक किरणों की वजह से मोबाइल फ़ोन ऑफ रखने वाली खबर फर्जी है

FACT CHECK: कॉस्मिक किरणों की वजह से मोबाइल फ़ोन ऑफ रखने वाली खबर फर्जी है
  • By Vishvas News
  • Updated: June 26, 2019

नई दिल्ली (विश्वास टीम)। सोशल मीडिया पर कुछ समय से एक खबर वायरल हो रही है, जिसमें कहा गया है कि आज रात 12:30 बजे से 3:30 बजे तक पृथ्वी के पास से कुछ कॉस्मिक किरणें गुज़रेंगीं जिस दौरान अपने फोन को स्विच ऑफ रखने की सलाह दी गई है वरना यह शरीर के लिए हानिकारक होगा। हमने अपनी पड़ताल में पाया कि यह दावा गलत है। इसरो ने हमसे बातचीत में साफ करा कि यह फेक न्यूज़ है।

CLAIM

पोस्ट में क्लेम किया गया है, “आज रात 12:30 से 3:30 बजे तक अपने फोन और बाकी सभी गैजेट्स को बंद रखें और अपने शरीर से दूर रखें। सिंगापुर टीवी ने यह घोषणा की है। कृपया अपने परिवार और दोस्तों को बताएं। हमारे ग्रह के करीब से आज रात 12:30 बजे से 3:30 बजे तक कुछ कॉस्मिक किरणें गुज़रेंगीं। यह कॉस्मिक किरणें पृथ्वी के करीब से गुजरेंगीं इसलिए कृपया अपना सेल फोन बंद कर दें। अपनी मोबाइल डिवाइस को अपने शरीर के करीब मत छोड़े। यह आपको भयानक नुकसान पहुंचा सकता है। “

FACT CHECK

इस पोस्ट की पड़ताल करने के लिए हमें सबसे पहले जानना था कि आखिर कॉस्मिक किरणें होती क्या हैं। हमने जांच की तो पाया कि कॉस्मिक किरणें असल में उच्च ऊर्जा अभिकरण है जो मुख्य रूप से सौरमंडल के बाहर पैदा होती हैं। पृथ्वी लगातार कॉस्मिक किरणों के संपर्क में आती रहती है पर वायुमंडल और पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र ज्यादातर कॉस्मिक किरणों को अपनी सतह से ही बाहर भेज देते हैं और एक सुरक्षा कवच के रूप में काम करते हैं। हालांकि, कॉस्मिक किरणों के सीधे तौर पर संपर्क में आने पर आपको नुकसान हो सकता है पर अर्थ की एटमॉस्फेरिक लेयर्स आपको इन रेज़ से प्रोटेक्ट करती हैं। और आपको किसी भी तरह के खतरे से बचाती हैं। अंतरिक्ष में काम कर रहे एस्ट्रोनॉट्स के लिए यह किरणें हानिकारक हो सकती है इसलिए इसरो और नासा जैसी एजेंसियां लगातार इन किरणों पर नजर रखती हैं पर उस केस में भी बचाव के बहुत सारे तरीके होते हैं।

पोस्ट में सिंगापुर टीवी का ज़िक्र है। हमने जाँच की तो पाया कि ऐसा कोई चैनल नहीं है।

ज़्यादा पुष्टि के लिए हमने भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ISRO में बात की तो हमें बताया गया कि यह खबर गलत है। पृथ्वी पर लोग और मशीनें कॉस्मिक किरणों से सुरक्षित हैं।

इस पोस्ट को Ravindra Kumar Singh नाम के एक फेसबुक यूजर ने शेयर किया था।

निष्कर्ष: हमने अपनी पड़ताल में पाया कि यह दावा गलत है। इसरो ने हमसे बातचीत में साफ करा कि यह फेक न्यूज़ है। पृथ्वी लगातार कॉस्मिक किरणों के संपर्क में आती रहती है पर वायुमंडल और पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र ज्यादातर कॉस्मिक किरणों को अपनी सतह से ही बाहर भेज देते हैं, और एक सुरक्षा कवच के रूप में काम करते हैं। (साभार)

5G टेस्टिंग पर बैन लगाने को सुप्रीम कोर्ट में याचिका

5G इंटरनेट की टेस्टिंग पर प्रतिबंध लगाने के लिए वकील AP सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है और इसे यूजर्स के लिए खतरनाक बताया है।

5g Technology, 5g technology ban, 5G phone

भारत में 5G इंटरनेट टावर परिक्षण पर प्रतिबंध लागने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है. इस याचिका को वकील AP सिंह ने दायर किया है. याचिका में कहा कि भारत सहित आज दुनिया भर में 5G नेटवर्क का विरोध किया जा रहा है। धरती के लिए 5G नेटवर्क एक बहुत बड़ा खतरा हैं, लेकिन मोबाइल कंपनियों ने 5 जी स्मार्टफोन बेचना शुरू कर दिया है।

याचिका में कहा कि 5G इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता के लिए सबसे बड़ा खतरा है, उपयोगकर्ताओं के डेटा को आसानी से हैक भी हो सकता है। इसके साथ यह भी कहा गया कि नीदरलैंड में परीक्षण के दौरान सैकड़ों पक्षियों की अचानक मौत हो गई थी, हेग शहर में 5G नेटवर्क के परीक्षण के दौरान लगभग 300 पक्षियों की मौत हो गई, जिनमें से 150 पक्षियों की परीक्षण शुरू होने के बाद मौत हुई।

याचिका में कहा कि वर्ष 2018 में, चीनी कंपनी हुवावे ने गुरुग्राम, हरियाणा में 5 जी इंटरनेट का परीक्षण किया था।। कहा कि 5G नेटवर्क की तकनीक में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन का उपयोग किया जाता है, इससे कैंसर का खतरा भी बहुत बढ़ जाता है, गर्भावस्था के दौरान मोबाइल रेडिएशन से महिलाओं के साथ-साथ बच्चे पर भी असर पड़ता है। याचिका में कहा 5G नेटवर्क आतंकियों के लिए मददगार होगा और देश की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा है।

विदित हो कि सभी टेलिकॉम कंपनियां इन दिनों 5G टेस्टिंग पर जोर दे रही हैं। एयरटेल, जियो और वोडाफोन-आइडिया लगातार इसकी टेस्टिंग पर काम कर रही हैं। जियो ने हाल ही में 57123 करोड़ रुपए के स्पेक्ट्रम की खरीदारी की है। कंपनी ने 22 सर्किल में स्पेक्ट्रम खरीदा है। रिलायंस जियो की ओर से खरीदे गए स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल 5G सर्विस देने के लिए भी किया जाएगा। कंपनी ने ने हाल ही में घोषणा की थी कि उसने स्वदेशी 5G टेक्नोलॉजी डेवलप कर ली है जिसे अमेरीका में टेस्ट कर लिया गया है। इसके साथ ही कंपनी के मालिक मुकेश अंबानी ने भी इसी वर्ष 5G लॉन्च की घोषणा की है।

WhatsApp पिंक के चक्कर में उठा न लें नुकसान

Fact Check Viral Message on WhatsApp claiming to change into pink color साइबर विशेषज्ञों ने लिंक के जरिये फोन पर भेजे जा रहे वायरस को लेकर आगाह किया है। इस लिंक में दावा किया जाता है कि वॉट्सऐप गुलाबी रंग (Pink WhatsApp) का हो जाएगा और उसमें नई विशेषताएं (WhatsApp New Features) जुड़ जाएंगी। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार लिंक में दावा किया जाता है कि यह वॉट्सऐप (WhatsApp Updates) की तरह से आधिकारिक अद्यतन के लिये है, लेकिन लिंक पर क्लिक करते ही संबंधित यूजर्स का फोन हैक हो जाएगा और हो सकता है कि वे वॉट्सऐप का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ राजशेखर राजहरिया ने सोशल मीडिया पर लिखा है, ‘‘व्हाट्एसऐप पिंक को लेकर सावधान! एपीके डाउनलोड लिंक के साथ व्हाट्सऐप ग्रुप वायरस फैलाने का प्रयास किया जा रहा है। व्हाट्सऐप पिंक के नाम से किसी भी लिंक पर क्लिक नहीं करें। लिंक को क्लिक करने पर फोन का उपयोग करना मुश्किल हो जाएगा।’’

साइबर सुरक्षा से जुड़ी कंपनी वोयागेर इनफोसेक के निदेशक जितेन जैन ने कहा कि उपयोगकर्ताओं को यह सलाह दी जाती है कि वे गूगल या एप्पल के ऑधिकारिक ऐप स्टोर के अलावा एपीके या अन्य मोबाइल ऐप को इंस्टॉल नहीं करें। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के ऐप से आपके फोन में सेंध लग सकते हैं और फोटो, एसएमएस, संपर्क आदि जैसी सूचनाएं चुरायी जा सकती हैं।

इस बारे में संपर्क किये जाने पर व्हाट्स ऐप के अधिकारी ने कहा, ‘‘अगर किसी को संदिग्ध संदेश या ई-मेल समेत कोई संदेश आते हैं, उसका जवाब देने से पहले पूरी जांच कर लें और सतर्क रुख अपनाएं। व्हाट्सऐप पर हम लोगों को सुझाव देते हैं कि हमने जो सुविधाएं दी हैं, उसका उपयाग करें और हमें रिपोर्ट भेजे, संपर्क के बारे में जानकारी दें या उसे ब्लॉक करें।’’ 

कोरोना काल में विशेष सावधानी बरतें पत्रकार

सभी पत्रकार बरतें विशेष सावधानी क्यूंकि आप स्वयं भी आसानी से संक्रमित हो सकते हैं और संक्रमण को तेजी से फैला भी सकते हैं!

ये पोस्ट एक ग्रुप में पढ़ने को मिली, वर्तमान परिवेश में कटु सत्य भी है, इसलिए सभी पत्रकार बंधुओं को समर्पित….

मित्रों, मैंने अपने पत्रकारिता अनुभव में ऐसा नजारा कभी नहीं देखा, जहां एक महामारी इतनी तेजी से फैल रही है। सभी को ये ज्ञात है कि कोरोना बीमारी के कारण एक से दूसरा व्यक्ति आसानी से संक्रमित हो सकता है। पत्रकारिता धर्म हमें हर छोटी से बड़ी खबर हर सूरत में जनता तक पहुंचाने की जिम्मेदारी देता है और हमारे सारे पत्रकार बंधु हर सूरत में अपना ये धर्म बख़ूबी निभाते हैं, फिर चाहे वो दंगे हों, युद्ध हो, कोई हिंसक प्रदर्शन हो या फिर कुछ और!

लेकिन, इस बार परिदृश्य बेहद गंभीर है क्योंकि संक्रमण फैलाने वाली बीमारी से यदि कोई भी व्यक्ति संक्रमित हो तो वो वही संक्रमण कई जगह पहुंचा सकता है। एक पत्रकार दिन भर में कई जगह जाता है, आम जनता से लेकर अफसरों, राजनीतिज्ञों, स्वास्थ्य कर्मियों इत्यादि से मिलता है। ऐसे में उसके संक्रमित होने का ख़तरा कई गुना बढ़ जाता है और यदि वो संक्रमित हो जाए तो उससे ज्यादा तेजी से संक्रमण फैलाने वाला माध्यम और कोई नहीं हो सकता। इसीलिए पत्रकार बंधुओं को सबसे ज्यादा सावधानी रखने की आवश्यकता है। हमेशा मास्क पहने रहना, हर थोड़ी देर में हाथ धोना, sanitize करना, अस्पताल और ऑब्जर्वेशन व क्वारांटीन क्षेत्र से दूरी बनाने के अलावा निम्न सुझाव अमल में लाने योग्य हैं –

1) इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के बंधु पत्रकार अति आवश्यक होने पर ही बाइट लें, और यदि लें तो बूम माइक को टेली मोड पर रख एक मीटर की दूरी बनाएं, मास्क पहने रखें और यदि हो सके तो बूम माइक स्पोंज को हर बाइट के बाद सैनिटाइजर से sanetize करें। साथ ही दिन में कम से कम दो से तीन बार माइक यूनिट व कैमरों को भी एक sanetizer में भीगी हुई गौज़ से डिस इंफेक्ट करें।

2) प्रिंट मीडिया के बंधु फील्ड में खबर लिखते वक्त यदि डायरी पेन के इस्तेमाल की जगह अपने मोबाइल में सॉफ्ट नोट लिख कर डेस्क पर भेजें तो अधिक सावधानी रहेगी। साथ ही यदि फील्ड पर किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस या कार्यक्रम में कलम लाना भूल गए हों तो किसी दूसरे की कलम लेने से बचें और यदि किसी परिस्थिति में इस्तेमाल कर भी लिया हो, तो तुरंत बाद हाथ धोएं या sanitize करें।

3) सभी फील्ड के पत्रकार बंधु डेस्क ऑफिस आने जाने से बचे, उपलब्ध सॉफ्टवेयर या whatsapp के माध्यम से डेस्क तक खबरें पहुंचाएं।

4) किसी भी एयरपोर्ट, बस अड्डे या रेलवे स्टेशन पर चल रही स्क्रीनिंग का कवरेज या इन जगहों पर किसी संदिग्ध मरीज के मिलने का न्यूज़ प्वाइंट यदि बहुत आवश्यक हो तो ही कवर करने जाएं और उचित दूरी ज़रूर बनाए रखें। अब अत्याधुनिक मोबाइल फोन कैमरे भी काफी दूरी तक के विजुअल साफ ले लेते हैं, टेक्नोलॉजी का उपयोग कीजिए।

5) वैसे सभी प्रदेशों में प्रेस कॉन्फ्रेंस, गोष्ठी या अन्य कार्यक्रम स्थगित या रोक दिए गए हैं, फिर भी यदि अति आवश्यक हो तो पूरी सावधानी से अच्छी गुणवत्ता का मास्क लगा के जाएं, खत्म होते ही तुरंत निकल कर अपने इक्विपमेंट व हाथ sanitize करें।

6) अंतिम, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण! रोज के अपने मूवमेंट का रिकॉर्ड या लॉग अवश्य रखें, जैसे कि सुबह घर से निकल कर और वापस काम ख़त्म करके जब आप घर लौटे तो कहां-कहां गए। इसका दिनांक समेत रिकॉर्ड रखें और जरा सी भी तबीयत ख़राब होने पर तुरंत मेडिकल सहायता लें।

इस परीक्षा की घड़ी में सभी पत्रकार बंधु अपने पत्रकारिता धर्म को निभाने के साथ अपने स्वास्थ्य का व अपने नागरिक धर्म का भी बहुत खयाल रखें।

यदि आपको सुझाव ठीक लगें हो तो अधिक से अधिक पत्रकार बंधुओं तक पहुंचा कर सभी को सजग व सावधान रखने में सहायता करें।

अब इन कंप्यूटरों में नहीं चलेगा Google Chrome

ALERT: 15 साल पुराने कंप्यूटरों में नहीं चलेगा Google Chrome

नई दिल्ली। क्रोम ब्राउज़र इंजन जल्द पुराने प्रोसेसर पर काम करना बंद कर देगा। गूगल क्रोम दुनिया में सबसे ज्यादा यूज किए जाने वाला ब्राउज़र है। क्रोम के ओपन-सोर्स क्रोमियम इंजन का उपयोग अन्य ब्राउज़र जैसे कि Microsoft Edge, Brave, Vivaldi जैसे ब्राउज़र भी करते हैं। हाल ही में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक अगर आपके कंप्यूटर में 15 साल से ज्यादा पुराना CPU लगा है तो आपके पीसी में गूगल क्रोम काम नहीं करेगा।

Google के लोकप्रिय ब्राउज़र क्रोम पर काम करने वाले डेवलपर्स ने अब घोषणा की है कि ब्राउज़र इंजन जल्द पुराने प्रोसेसर पर काम करना बंद कर देगा। अगर आप बहुत पुराने प्रोसेसर वाला कंप्यूटर चला रहे हैं तो आपको इस दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक यदि आपके कंप्यूटर का सीपीयू 15 वर्ष से अधिक पुराना है, तो यह संभावना है कि वह कंप्यूटर क्रोम के सबसे पुराने 89 वर्जन को भी सपोर्ट नहीं करे। इसका सीधा मतलब है कि अगर आप सेलेरॉन एम सीरीज़ सीपीयू या इंटेल एटम प्रोसेसर चला रहे हैं, जो SSE3 (Supplemental Streaming SIMD Extensions 3) को भी सपोर्ट नहीं कर सकता तो आपके कंप्यूटर में क्रोम भी सपोर्ट नहीं करेगा। रिपोर्ट की मानें तो यदि आप अपने कंप्यूटर में क्रोम को जबरदस्ती इंस्टाल करने की कोशिश करेंगे तो क्रेश हो जाएगा। ऐसी स्थित में आपके कंप्यूटर की विंडो भी क्रेश हो सकती है। क्रोमियम द्वारा दिए जा रहे मेसेज के मुताबिक क्रोम 87 कुछ हफ्ते बाद काम करना बंद कर देगा। क्रोम के बंद होने के बाद आप अपने पुराने कंप्यूटर को रिटायर कर सकते हैं या इसे बेसिक लोकल होम सर्वर की तरह यूज कर सकते हैं। और यदि आप अभी भी इंटरनेट ब्राउज़ करने के लिए कंप्यूटर का उपयोग करना चाहते हैं, तो आप मोज़िला फ़ायरफ़ॉक्स ब्राउज़र को डाउनलोड कर सकते हैं।

WhatsApp ने 3 महीने के लिए टाली नई प्राइवेसी पॉलिसी

लोगों की नाराजगी के कारण तीन महीने टली WhatsApp की नई प्राइवेसी पॉलिसी, WhatsApp ने बताया है कि लोगों के बीच फैली ‘गलत जानकारी’ से बढ़ती चिंताओं के कारण प्राइवेसी अपडेट को टालने का फैसला लिया गया है।

नई दिल्ली। WhatsApp ने तीन महीने के लिए नई प्राइवेसी पॉलिसी को टाल दिया है। अब किसी का अकाउंट बंद नहीं किया जायेगा। WhatsApp ने घोषणा की है कि उसने प्राइवेसी अपडेट करने का अपना प्लान तीन महीने के लिए टाल दिया है। कंपनी का कहना है कि प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर यूजर्स में भ्रम है। इसलिए तीन महीने का समय देने से यूजर्स को पॉलिसी के बारे में जानने और उसकी समीक्षा करने के लिए ज्यादा वक्त मिलेगा।

WhatsApp ने बताया है कि लोगों के बीच फैली ‘गलत जानकारी’ से बढ़ती चिंताओं के कारण प्राइवेसी अपडेट को टालने का फैसला लिया गया है। ये भी कहा कि प्राइवेसी पॉलिसी के आधार पर कभी भी अकाउंट को हटाने की योजना नहीं बनाई गई है और भविष्य में भी ऐसी योजना नहीं होगी। कंपनी ने एक बयान में कहा, ‘8 फरवरी को किसी को भी WhatsApp अकाउंट सस्पेंड या डिलीट नहीं करना होगा। WhatsApp पर प्राइवेसी और सिक्योरिटी कैसे काम करती है, इसके बारे में जानकारी देने के लिए हम और भी बहुत कुछ करने जा रहे हैं। 15 मई को नया अपडेट ऑप्शन उपलब्ध होने से पहले हम अपनी पॉलिसी के बारे में लोगों का भ्रम दूर कर देंगे।’ इससे पहले कहा गया था कि WhatsApp 8 फरवरी 2021 को अपनी टर्म्स ऑफ सर्विस को अपडेट करने जा रहा है। यूजर्स इससे एग्री नहीं होते हैं तो वे WhatsApp इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। इसी वजह से कई मिलियन यूजर्स सिग्नल और टेलीग्राम ऐप पर चले गए।

नयी पॉलिसी के विरोध का कारण- छोटे व्यापारियों के संगठन कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) का दावा है कि WhatsApp की नई प्राइवेसी पॉलिसी में यूजर्स के सभी तरह के डेटा का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें निजी जानकारियों से लेकर, लेनदेन की जानकारी, संपर्क, लोकेशन और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल हैं, जिन्हें WhatsApp एकत्रित करेगी। उसके बाद वह किसी भी प्रयोजन के लिए इसका उपयोग कर सकती है। उसका कहना है कि देश में WhatsApp, Facebook के करीब 40 करोड़ यूजर्स हैं। ऐसे में हर यूजर के डेटा तक पहुंच होने से ना सिर्फ देश की अर्थव्यवस्था पर गहरा संकट है, बल्कि यह देश की सुरक्षा के लिए भी घातक है।

बेंगलुरु मेट्रो की दक्षिणी विस्तार लाइन का शुभारंभ

बेंगलुरू मेट्रो के चरण-2 का उद्घाटन-तेज आवागमन और स्मार्ट मोबिलिटी विकल्पों को सक्षम बनाने के लिए बेंगलुरू मिशन 2022 के लक्ष्यों की दिशा में उठाया गया कदम चरण-2 में 74 किलोमीटर लंबे रूट पर 62 स्टेशन के साथ चरण-1 में चारों दिशाओं में 34 किलोमीटर लंबाई में दोनों बैंगनी व हरी लाइनों और दो नई लाइनों का विस्तार शामिल है।

बेंगलुरू। आवासन और शहरी कार्य राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हरदीप सिंह पुरी, केन्द्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री सदानंद गौड़ा और कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने येलाचेनाहल्ली से सिल्क इंस्टीट्यूट मेट्रो स्टेशनों तक ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर नम्मा मेट्रो के चरण-2 के अंतर्गत 6 किलोमीटर लंबी दक्षिणी विस्तार लाइन का शुभारम्भ किया। मेट्रो विस्तार लाइन और एफओबी का उद्घाटन शहर में तेज आवागमन और स्मार्ट मोबिलिटी के विकल्पों को सक्षम बनाने के लिए बेंगलुरू मिशन, 2022 के लक्ष्यों की दिशा में एक कदम है। बेंगलुरू मेट्रो रेल परियोजना चरण-2 के तहत 74 किलोमीटर लंबे रूट पर 62 स्टेशन आते हैं और इसमें चारों दिशाओं में कुल 34 किलोमीटर में चरण-1 की बैंगनी और हरी दोनों लाइनों का विस्तार और दो नई लाइनें शामिल हैं। इन दो लाइनों में 21 किलोमीटर लंबा गोतीगेरे-नागावाड़ा रूट और 19 किलोमीटर लंबा आरवी रोड- बोम्मासैंड्रा रूट शामिल है। इस परियोजना को 30,695 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया जा रहा है। वर्तमान में परिचालन लाइन पर येलाचेनाहल्ली मेट्रो स्टेशन से आगे 5 नए स्टेशन कोननकुंटे क्रॉस, दोदोकल्लासैंड्र, वाजारहल्ली, थालाघट्टापुरा और सिल्क इंस्टीट्यूट शामिल हैं। विस्तार में वर्तमान में परिचालित 24.2 किलोमीटर लंबी हरी (उत्तर-दक्षिण) लाइन के दक्षिणी किनारे पर 6 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड मेट्रो शामिल है। इस विस्तार के साथ, एन-एस कॉरिडोर 30.2 किलोमीटर लंबा हो जाएगा। एलिवेटेड भाग में 213 स्पैन (पुल) शामिल हैं। इस काम में सुपरस्ट्रक्चर के लिए 1032 पाइल, 223 पियर्स और 1998 सेगमेंट व स्टेशनों में 665 गिरडर शामिल हैं। इसमें 2,10,965 कम कंक्रीट और 20,500 मीट्रिक टन स्टील इस्तेमाल किए गए हैं। ‘स्टेट ऑफ आर्ट इक्विपमेंट’ के अलावा बिजली से जुड़े कार्यों, सिग्नलिंग और दूरसंचार के लिए विभिन्न आकारों के 765 किलोमीटर केबल और तार बिछाए गए हैं।

मेट्रो की कुछ विशेषताएं: यात्रियों की सुविधा के लिए हर स्टेशन पर 8 एस्केलेटर और 4 एलिवेटर लगाए गए हैं, जिससे कुल 40 एस्केलेटर और 20 एलिवेटर हो गए हैं। इस विस्तार लाइन के सभी 5 स्टेशनों पर कुल 1.2 मेगावाट क्षमता के रूफ टॉप सौर उपकरण लगाए जा रहे हैं। सौर ऊर्जा संयंत्रों को मार्च, 2021 तकलगाने का लक्ष्य है। बेंगलुरू मेट्रो में ऐसा पहली बार है कि यहां सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए जा रहे हैं। सभी 5 स्टेशनों को ऊर्जा दक्ष एलईडी लाइट उपलब्ध कराई गई हैं। सभी स्टेशनों पर नई सर्विस रोड पर प्रवेश/निकासी की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। सर्विस रोड पर बस गलियारा, टैक्सी और ऑटो के लिए पिकअप व ड्रॉप एरिया निर्धारित किया गया है। शारीरिक दिव्यांग और नेत्रहीन लोगों के लिए रैम्प, लिफ्ट, अलग शौचालय, स्पर्श मार्ग व ट्रेनों में निश्चित स्थान जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। मल्टी मॉडल इंटीग्रेशन बस अड्डों का पता लगाने के लिए 5 स्टेशनों के दोनों तरफ विशेष मोड बदलाव सेवा लेन बनाई गई हैं और मध्यवर्ती सार्वजनिक परिवहन (आईपीटी) के लिए स्थान उपलब्ध कराया गया है।

एक देश एक कार्ड-बेंगलुरू मेट्रो ने स्वचालित किराया संग्रह (एएफसी) प्रणाली के लिए विशेष तकनीक का उपयोग किया है, जो उद्घाटन के साथ वन लूप एनसीएमसी ‘एक देश एक कार्ड’ के उपयोग से यात्रा में सहायक होता है। एनसीएमसी के लिए वर्तमान में परिचालित 42 किलोमीटर लंबे नेटवर्क के 40 स्टेशनों पर एएफसी प्रणाली को भी अपग्रेड किया जा रहा है। चरण-1 की लाइनों सहित सभी लाइनों पर एनसीएमसी आधारित टिकट सेवा 15 अगस्त, 2021 से पहले यात्रा के लिए उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। इसके बाद, बेंगलुरू में पश्चिमी विस्तार सहित 55 किलोमीटर लंबे पूरे मेट्रो नेटवर्क में यात्री अपनी यात्रा के लिए भुगतान करने के लिए रूपे कार्ड या कोई अन्य एनसीएमसी अनुपालित बैंक कार्ड का इस्तेमाल कर सकते हैं।

जूते से मिलेगी दुश्मन की आहट, फौरन मार दो गोली!

बॉर्डर पर जूता देगा दुश्मन की आहट, मार दो गोली

काशी के युवा वैज्ञानिक ने बनाया इंटेलिजेंस जूता, बॉर्डर पर घुसपैठ रोकने में कारगर, गोलियां दागने में भी सक्षम

जूते में लगा विशेष प्रकार का सेंसर 20 किमी तक वाइब्रेट करके अलार्म से जवानों को करेगा अलर्ट। इसमें लगे 2 फोल्डिंग 9 एमएम के गन बैरल से की जा सकती है फायरिंग। रेडियो फ्रिक्वेंसी और मोबाइल नेटवर्क पर भी काम करने में सक्षम जूते का वजन मात्र 650 ग्राम। सोलर चार्जिंग सिस्टम से लैस जूते में लगा एक विशेष प्रकार का हीटर जवानों के पैरों को रखेगा गर्म।


वाराणसी (धारा न्यूज): बार्डर पर घुसपैठ रोकने के लिए बनारस के युवा वैज्ञानिक ने एक ऐसा जूता तैयार किया है जो 20 किलोमीटर तक की दूरी तक किसी दुश्मन की आहट को महसूस करेगा और घुसपैठ को रोक सकेगा। यह इंटेलिजेंस जूता गोलियां दागने में भी सक्षम है। इसका उपयोग दुश्मनों को रोकने के लिए किया जाएगा। इसको युवा वैज्ञानिक श्याम चौरसिया ने बनाया है।

प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के युवा वैज्ञानिक श्याम चौरसिया महिलाओं और सेना के लिए कई नए-नए इनोवेशन कर चुके हैं। श्याम चौरसिया ने एक न्यूज़ एजेंसी को बताया कि, “देश में घुसपैठिये चुपचाप बार्डर पर घुसने का प्रयास करते हैं। उन्हें रोकने के लिए इंटेलिजेंस जूता बनाया है। जो बार्डर पर घुसपैठ की घटना होते ही सचेत कर देगा। इस जूते में एक विशेष प्रकार का सेंसर लगाया गया है, जो कि 20 किमी तक की घटना के लिए यह जवानों को वाइब्रेट करके आलर्म के माध्यम से अलर्ट करेगा। इससे समय रहते जवान अपनी और बॉर्डर की सुरक्षा कर सकेंगे।” यह जूता महज कुछ सेकेंडों में जानकरी दे देगा। इसमें आपातकाल को देखते हुए 2 फोल्डिंग 9 एमएम के गन बैरल लगाए गए हैं, जो फायर भी कर सकते हैं। इससे जवान अपनी सुरक्षा भी कर सकते हैं। वैज्ञानिक श्याम चौरसिया बताते हैं कि, “यह दुश्मन की हर प्रकार की गतिविधियों पर नजर रख सकता है। यह रेडियो फ्रिक्वेंसी और मोबाइल नेटवर्क पर भी काम करता है। इसका वजन महज 650 ग्राम है। रबड़ और स्टील की प्लेट को मिलाकर इसे तैयार किया गया है। ठंड से जवानों को बचाने के लिए इसमें एक विशेष प्रकार का हीटर लगाया गया है, जो कि उनके पैरों को गर्म रखेगा। इसके अलावा इसमें सोलर चार्जिंग सिस्टम भी लगा है। इसमें स्टील की चादर, एलईडी लाइट, सोलर प्लेट रेडियो सर्किट, स्विच इलेक्ट्रॉनिक ट्रिगर के अलाव वाइब्रेशन मोटर का भी इस्तेमाल हुआ है। इसका लेजर सेंसर और ह्यूमन सेंसर बॉर्डर में रखा होगा। जैसे ही दुश्मन की हरकत होगी और वह इसकी रेंज में आएगा। इसके बाद यह तुरंत एक्टिव होकर जवान के जूते पर सिग्नल भेजेगा। जूते में लगा अलार्म जवान को सूचित कर देगा कि कोई अराजक तत्व बॉर्डर में दाखिल हुआ है। जवान सतर्क हो जाएंगे और समय रहते ही दुश्मन को रोकने में सक्षम हो सकते हैं। आपातकाल के समय जवान इसमें दुश्मन को टारगेट करके फायर भी कर सकते हैं। जूता आगे और पीछे दोनों तरफ रिमोट के माध्यम से फायर कर सकेगा। इस यंत्र के इस्तेमाल से बॉर्डर और जवान दोनों की आसानी से सुरक्षा होगी।

वहीं गोरखपुर नक्षत्रशाला के क्षेत्रीय वैज्ञानिक अधिकारी महादेव पांडेय कहते हैं कि, “इस इंटेलिजेंस जूते की तकनीक बहुत अच्छी है। इसमें जितना मजबूत सेंसर होगा, यह उतना ही कारगर होगा। यह घुसपैठ को राकेगा। जैपनीज गाड़ियों में देखने को मिला है कि अगर कहीं दूर कोई आवाज होती है तो 2 किलोमीटर पहले से इंडिकेटर बजने लगता है। यह बहुत अच्छी खोज है। इसमें सेंसर का बहुत बड़ा रोल होता है। इसलिए इसे और मजबूत करने की जरूरत है।”

WhatsApp ने निजी चैट प्रभावित न होने का भरोसा दिलाया

नई शर्तों पर विवाद के बाद यूजर्स की प्राइवेसी को लेकर प्रतिबद्धता दोहराई

नई दिल्ली। whatsapp के इस्तेमाल को लेकर आठ फरवरी 2021 से लागू होने जा रही शर्तों को लेकर बवाल बढ़ता ही जा रहा है। इस बीच whatsapp ने प्रेस रिलीज में कहा कि नई सेवा शर्तों से यूजर्स की प्राइवेसी भंग नहीं होगी।

whatsapp ने प्रेस रिलीज में कहा कि नए अपडेट से whatsapp के जरिए शॉपिंग और बिजनेस करना पहले के मुकाबले काफी आसान हो जाएगा। अधिकतर लोग आज whatsapp का इस्तेमाल चैटिंग के अलावा बिजनेस एप के तौर पर भी कर रहे हैं। हमने अपनी प्राइवेसी पॉलिसी को बिजनेस के लिए एक सुरक्षित होस्टिंग सर्विस के तौर पर अपडेट किया है ताकि छोटे कारोबारियों को whatsapp के जरिए अपने ग्राहकों तक पहुंचने में आसानी हो। इसके लिए हम अपनी पैरेंट कंपनी फेसबुक की भी मदद लेंगे। whatsapp के एक प्रवक्ता ने कहा कि इस अपडेट से यूजर्स की प्राइवेसी भंग नहीं होगी। कंपनी आज भी यूजर्स की प्राइवेसी को लेकर प्रतिबद्ध है। नए अपडेट से फेसबुक और whatsapp के बीच डाटा शेयरिंग को लेकर कोई बदलाव नहीं होने जा रहा है।

WhatsApp की नई पॉलिसी-
इसी सप्ताह लाखों भारतीय यूजर्स को whatsapp की नई प्राइवेसी पॉलिसी और सेवा शर्तों को लेकर नोटिफिकेशन मिला है जो कि 8 फरवरी से लागू हो रही हैं। इन शर्तों में कहा गया है कि whatsapp पहले के मुकाबले अपनी पैरेंट कंपनी फेसबुक के साथ अधिक डाटा शेयर करेगा, जिसका इस्तेमाल विज्ञापनों में होगा। यदि आठ फरवरी तक कोई यूजर नई शर्तों को स्वीकार नहीं करता है तो उसके अकाउंट को बंद कर दिया जाएगा। एक्सपर्ट का कहना है कि यह सीधे तौर पर लोगों की निजता पर हमला है और उन्हें शर्तों को मानने के लिए मजबूर किया जा रहा है। एपल एप स्टोर पर लिस्टिंग के मुताबिक whatsapp अपने यूजर्स से 16 तरह का डाटा लेता है।

प्रधानमंत्री कल रखेंगे GHTC-इंडिया के LHP की आधारशिला

प्रधानमंत्री 1 जनवरी को रखेंगे GHTC-इंडिया के LHP की आधारशिला
PMAYU, ASHA-इंडिया पुरस्कारों का भी वितरण

नई दिल्ली। छह राज्यों में छह स्थानों पर ग्लोबल हाउसिंग टेक्नोलॉजी चैलेंज- इंडिया (जीएचटीसी- इंडिया) के तहत हल्के मकान से जुड़ी परियोजनाओं (लाइट हाउस प्रोजेक्ट्स) की आधारशिला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 1 जनवरी, 2021 को सुबह 11 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से रखेंगे। प्रधानमंत्री अफोर्डेबल सस्टेनेबल हाउसिंग एक्सेलेरेटर्स- इंडिया (एएसएचए- इंडिया) के तहत विजेताओं की भी घोषणा करेंगे और प्रधानमंत्री आवास योजना- शहरी (पीएमएवाई-यू) मिशन के कार्यान्वयन में उत्कृष्टता के लिए वार्षिक पुरस्कार देंगे।

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री एनएवीएआरआईटीआईएच (न्यू, अफोर्डेबल, वैलिडेटेड, रिसर्च इनोवेशन टेक्नोलॉजिज फॉर इंडियन हाउसिंग) नाम से नवोन्मेषी निर्माण प्रौद्योगिकी पर एक सर्टिफिकेट कोर्स और जीएचटीसी- इंडिया के जरिये पहचान किए गए 54 नवोन्मेषी आवास निर्माण प्रौद्योगिकी के एक संग्रह का विमोचन भी करेंगे। इस अवसर पर आवास एवं शहरी कार्य मंत्री (स्वंतत्र प्रभार) के अलावा त्रिपुरा, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री उपस्थित रहेंगे।


लाइट हाउस प्रोजेक्ट्स: लाइट हाउस प्रोजेक्ट्स (एलएचपी) देश में पहली बार निर्माण क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर नए जमाने की वैकल्पिक वैश्विक प्रौद्योगिकी, सामग्रियों और प्रक्रियाओं का बेहतरीन प्रदर्शन करती हैं। इनका निर्माण जीएचटीसी- इंडिया के तहत किया जा रहा है, जो आवास निर्माण के क्षेत्र में नवीन तकनीकों को अपनाने के लिए एक समग्र परिवेश तैयार करने की परिकल्पना करता है। इन एलएचपी का निर्माण इंदौर (मध्य प्रदेश), राजकोट (गुजरात), चेन्नई (तमिलनाडु), रांची (झारखंड), अगरतला (त्रिपुरा) और लखनऊ (उत्तर प्रदेश) में किया जा रहा है। इसमें प्रत्येक स्थान पर संबद्ध बुनियादी ढांचा सुविधाओं के साथ लगभग 1,000 मकानों को शामिल किया गया है। ये परियोजनाएं पारंपरिक तौर पर ईंट एवं कंक्रीट वाले निर्माण के मुकाबले कहीं अधिक तेजी से यानी महज बारह महीने के भीतर रहने के लिए तैयार मकानों को प्रदर्शित और वितरित करेंगी। इसके अलावा ये मकान उच्च गुणवत्ता के साथ किफायती और टिकाऊ भी होंगे।

हल्के मकानों इन परियोजनाएं कई प्रकार की तकनीकों का प्रदर्शन: हल्के मकानों की ये परियोजनाएं कई प्रकार की तकनीकों का प्रदर्शन करती हैं। इनमें इंदौर के एलएचपी में प्रीफैब्रिकेटेड सैंडविच पैनल सिस्टम, राजकोट के एलएचपी में टनल फॉर्मवर्क का उपयोग करते हुए मोनोलिथिक कंक्रीट कंस्ट्रक्शन, चेन्नई की परियोजना में प्रीकास्ट कंक्रीट कंस्ट्रक्शन सिस्टम, रांची के एलएचपी में 3डी वॉल्यूमेट्रिक प्रीकास्ट कंक्रीट कंस्ट्रक्शन सिस्टम, अगरतला की परियोजना में लाइट गेज स्टील इन्फिल पैनलों के साथ ढांचागत स्टील फ्रेम और लखनऊ के एलएचपी में पीवीसी स्टे इन प्लेस फॉर्मवर्क सिस्टम शामिल हैं। हल्के मकानों की परियोजनाएं संबंधित जगहों पर प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण एवं उसके अनुकरण की सुविधा के लिए एक लाइव प्रयोगशाला के रूप में काम करेंगी। इसमें योजना, डिजाइन, उपकरणों का उत्पादन, निर्माण प्रथाओं और परीक्षण के लिए आईआईटी, एनआईटी, अन्य इंजीनियरिंग कॉलेजों और प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर कॉलेजों के संकाय एवं छात्रों के अलावा बिल्डर, निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्रों के पेशेवर एवं अन्य हितधारक शामिल हैं।


एएसएचए- इंडिया: अफोर्डेबल सस्टेनेबल हाउसिंग एक्सेलेरेटर्स- इंडिया यानी (एएसएचए- इंडिया) का उद्देश्य भविष्य की संभावित प्रौद्योगिकी को तैयार करने में सहायता प्रदान करते हुए घरेलू अनुसंधान और उद्यमिता को बढ़ावा देना है। एएसएचए- इंडिया पहल के तहत प्रौद्योगिकी को तैयार करने में सहायता प्रदान करने के लिए पांच एएसएचए- इंडिया केंद्र स्थापित किए गए हैं। इसके तहत संभावित प्रौद्योगिकी विजेताओं की घोषणा प्रधानमंत्री द्वारा की जाएगी। इस पहल के माध्यम से पहचान की जाने वाली प्रौद्योगिकी, प्रक्रियाओं और सामग्रियों से रचनात्मक दिमाग वाले युवाओं, स्टार्ट-अप, इनोवेटर और उद्यमियों को एक मदद मिलेगी।

पीएमएवाई- यू मिशन: प्रधानमंत्री आवास योजना- शहरी (पीएमएवाई- यू) मिशन को ‘2022 तक सभी के लिए आवास’ के दृष्टिकोण के साथ डिजाइन किया गया है। इसमें राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, शहरी स्थानीय निकायों और लाभार्थियों के उत्कृष्ट योगदान को मान्‍यता देने के लिए आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने पीएमएवाई- यू के कार्यान्वयन में उत्कृष्टता के लिए वार्षिक पुरस्कार देने की योजना बनाई है। पीएमएवाई (शहरी) पुरस्कार- 2019 के विजेताओं को इस कार्यक्रम के दौरान सम्मानित किया जाएगा।

*****

राम मंदिर नींव निर्माण कार्य में आई बाधा!

राम मंदिर के नीचे मिली सरयू की धारा, नींव निर्माण कार्य में आई बाधा
IT से मांगी मदद

लखनऊ (धारा न्यूज): अयोध्या में राम मंदिर निर्माण कार्य में अब एक नई बाधा सामने आ गई है। मंदिर की नींव के नीचे सरयू नदी की धार मिलने के कारण निर्माण कार्य में अब मुश्किलें आ सकती हैं। इस मामले में मंदिर ट्रस्ट ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से मदद मांगी है। कुछ दिन पहले भी खंभों से जुड़े काम में दिक्कतों का सामना करना पड़ा था।

अयोध्या में राम मंदिर बनाए जाने के लिए 1200 खंभों की ड्राइंग तैयार की गई थी। यह डिजाइन प्लान के अनुसार, सफल होती नहीं दिख रही।मंदिर की बुनियाद के लिए खंभों की टेस्टिंग की गई थी। इस दौरान कुछ खंभों को 125 फीट गहराई में डाला। इनकी जांच करने के लिए करीब 30 दिनों तक छोड़ा गया। बाद में इस पर 700 टन का वजन डाला गया और भूकंप के झटके दिए गए, तो ये खंभे अपनी जगह से हिल गए और मुड़ भी गए।

इस बीच प्रधानमंत्री के पूर्व मुख्य सचिव नृपेंद्र मिश्रा की अगुआई में बनी निर्माण समिति की बैठक में तय किया गया है कि नींव के नीचे सरयू नदी की धारा मिलने के कारण मंदिर के लिए पहले से तैयार मॉडल सही नहीं है। सूत्रों ने बताया कि आईआईटी से मदद की अपील की गई है।

विदित है कि मंदिर का निर्माण 2023 में पूरा होना है। सूत्रों ने बताया कि फिलहाल, समिति दो तरीकों पर गौर कर रही है। पहला राफ्ट को सहायता देने के लिए वाइब्रो पत्थर का इस्तेमाल और दूसरा इंजीनियरिंग मिश्रण मिलाकर मिट्टी की क्वालिटी और पकड़ को बेहतर बनाया जाए।

—–

आकाश मिसाइल प्रणाली का निर्यात करेगा भारत

आकाश मिसाइल प्रणाली के निर्यात को मंजूरी

निर्यातों की त्वरित मंजूरी के लिए समिति गठित

नई दिल्ली (धारा न्यूज़): आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत आकाश मिसाइल सिस्टम के निर्यात को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने आज मंजूरी दे दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के ट्वीट कर कहा कि निर्यात किया जाने वाला मिसाइल सिस्टम वर्तमान में भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे संस्करण से अलग होगा।

आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत, भारत विभिन्न प्रकार के रक्षा प्लेटफार्मों और मिसाइलों के निर्माण में अपनी क्षमताओं में वृद्धि कर रहा है। आकाश देश की महत्वपूर्ण मिसाइल है, जिसका 96 प्रतिशत से अधिक स्वदेशीकरण किया गया है। इसी क्रम में आकाश मिसाइल प्रणाली के निर्यात को मंजूरी केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दी है।

सतह से हवा में मार करने में सक्षम है आकाश

आकाश सतह से हवा में मार करने वाली एक मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता 25 किलोमीटर तक है। इस मिसाइल को 2014 में भारतीय वायु सेना तथा 2015 में भारतीय सेना में शामिल किया गया था। रक्षा सेवाओं में इसके शामिल होने के बाद अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों/रक्षा प्रदर्शनी/एयरो इंडिया के दौरान कई मित्र देशों ने आकाश मिसाइल में अपनी रुचि दिखाई। मंत्रिमंडल की मंजूरी से विभिन्न देशों द्वारा जारी आरएफआई/आरएफपीमें भाग लेने के लिए भारतीय निर्माताओं को सुविधा मिलेगी।
अब तक, भारतीय रक्षा निर्यातों में पुर्जे/घटक आदि शामिल थे। बड़े प्लेटफार्मों का निर्यात न्यूनतम था। मंत्रिमंडल की इस पहल से देश को अपने रक्षा उत्पादों को बेहतर बनाने और उन्हें विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिलेगी।

तैनात सिस्टम से भिन्न होगा निर्यात संस्करण

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के ट्वीट कर कहा कि आकाश का निर्यात संस्करण वर्तमान में भारतीय सशस्त्र बलों में तैनात सिस्टम से भिन्न होगा। आकाश के अलावा, अन्य प्रमुख प्लेटफार्मों जैसे तटीय निगरानी प्रणाली, रडार और एयर प्लेटफार्मों में भी रुचि दिखाई जा रही है। ऐसे प्लेटफार्मों के निर्यात के लिए तेजी से अनुमोदन प्रदान करने के लिए, रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की एक समिति गठित की गई है। यह समिति विभिन्न देशों के लिए प्रमुख स्वदेशी प्लेटफार्मों के निर्यात को अधिकृत करेगी। समिति एक सरकार से दूसरी सरकार द्वारा खरीद सहित विभिन्न उपलब्ध विकल्पों का भी पता लगाएगी।

भारत सरकार ने 5 बिलियन अमेरिकी डॉलर के रक्षा निर्यात के लक्ष्य को प्राप्त करने और मित्र देशों के साथ रणनीतिक संबंधों को बेहतर बनाने के लिए उच्च मूल्य वाले रक्षा प्लेटफार्मों के निर्यात पर ध्यान केंद्रित करने का विचार किया है।

***

बिना Delete किए भी कर सकते हैं WhatsApp चैट Hide

Delete किये बिना ही कीजिए WhatsApp चैट Hide

नई दिल्ली। (धारा न्यूज़) WhatsApp यूजर्स यदि अपनी चैट किसी को नहीं दिखाना चाहते तो उसे तुरंत डिलीट करे बिना उसको hide कर के रख सकते हैं। WhatsApp में मैसेज को हाइड करने की सुविधा उपलब्ध है।

मैसेज डिलीट किए बिना उसे हाइड करने का आसान तरीका-

– सबसे पहले WhatsApp ओपन करें और इसके बाद जिसकी भी चैट आपको हाइड करनी है उस पर क्लिक करें।
– अब उस चैट पर टैप कर होल्ड करें। इसके बाद ऊपर की तरफ कुछ विकल्प सामने आएंगे। इसमें से एक एरो का विकल्प होगा। जो कि तीन डाट्स के बिल्कुल बराबर में मौजूद है और यह Archive बटन है।
– Archive बटन पर टैप करें। इस पर टैप करने से आपकी चैट Archive हो जाएगी। और किसी को भी दिखाई नहीं देगी।

जब भी आपको यह चैट देखनी होगी तो आपको WhatsApp चैट में सबसे नीचे स्क्रॉल करना होगा, जहां आपको Archived का विकल्प मिलेगा। इस पर टैप कर आपको Archive की हुई चैट मिल जाएगी। अगर आप इसे Unarchive करना चाहते हैं तो इसे टैप कर होल्ड करें और ऊपर दिए गए Archive आइकन को एक बार फिर टैप कर दें। इससे आपकी चैट Unarchive हो जाएगी।

——

द्रुतगति से हो रहा लाइट हाउस प्रोजेक्ट पर काम

नगर विकास मंत्री ने किया लाईट हाउस प्रोजेक्ट का स्थलीय निरीक्षण

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के नगर विकास मंत्री आशुतोष टंडन ने शहीद पथ स्थित अवध विहार योजना में प्रस्तावित लाईट हाउस प्रोजेक्ट (एल.एच.पी.) के निर्माण स्थल का निरीक्षण मौके पर जाकर किया। इस प्रोजेक्ट का शिलान्यास 1 जनवरी 2021 को भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा वर्चुअल माध्यम से किया जाना प्रस्तावित है, जबकि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शिलान्यास कार्यक्रम स्थल पर स्वयं मौजूद रहेंगे।

श्री टंडन ने इस अवसर पर कहा कि यह उत्तर प्रदेश और लखनऊ के लिए विशेष गर्व का विषय बने, इस प्रोजेक्ट की समीक्षा समय-समय पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा की गयी है। उन्होंने बताया कि इस योजना के लिए हमारा राज्य राष्ट्रीय स्तर पर इस प्रक्रिया के माध्यम से लाईट हाउस प्रोजेक्ट (एल.एच.पी.) के निर्माण के लिए एक माडल के रूप में चुना गया। लाईट हाउस प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन में नई तकनीक का प्रयोग किया जाएगा, जिसके कारण सम्पूर्ण निर्माण कार्य मात्र 15 माह में पूरा हो सकेगा। एल.एच.पी. निर्माण क्षेत्र को बदल कर रख देगा क्योंकि यह निर्माण की एक नई गति का विकास करेगा और प्री फैब्रिकेटेड वस्तुओं के प्रयोग से निर्माण ज्यादा टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल होगा।

14 मंजिला टावर में होंगे कमजोर वर्ग के लोगों के लिए 1040 फ्लैट-
नगर विकास मंत्री ने बताया कि लाईट हाउस प्रोजेक्ट का क्रियान्वयन 34-50 वर्ग मीटर कारपेट एरिया में किया जा रहा है, जिसके अन्तर्गत 14 मंजिला टावर बनेगा और उसमें 1040 फ्लैट कमजोर वर्ग के लोगों के लिए उपलब्ध होंगे। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार भवन निर्माण सम्बन्धित अनुसंधान संस्थाओं, छात्रों, प्रौद्योगिक संस्थाओं, वास्तुविदों तथा अभियंताओ में नई तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है।

उल्लेखनीय है कि भारत के प्रधानमंत्री की प्रेरणा से आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय भारत सरकार द्वारा शहरी कमजोर वर्गो को ध्यान में रखते हुए ग्लोबल हाउसिंग टेक्नोलाजी चैलेंज-इण्डिया (GHTC-India) प्रारम्भ किया गया है, जिसका उद्देश्य नवीन निर्माण तकनीकों को प्रोत्साहन देना और मुख्यधारा में लाना है।

देश में कुल छह स्थानों पर हो रहे निर्माण-

जी0एच0टी0सी0-इण्डिया तकनीकी के अंतर्गत भारतवर्ष में मध्य प्रदेश में इन्दौर, गुजरात में राजकोट, तमिलनाडु में चेन्नई, झारखण्ड में रांची, त्रिपुरा में अगरतला एवं उत्तर प्रदेश में लखनऊ में कुल 06 स्थानों पर लाईट हाउस प्रोजेक्ट के अंतर्गत आवास बनाये जाने का अनुमोदन भारत सरकार द्वारा प्रदान किया गया है।

——

Sunday से लेकर Monday, अब सब खा सकते हैं अंडे!

पूरे हफ्ते, अब रोज खाइये अंडे!

स्वादिष्ट भी और पूरी तरह से शाकाहारी

नई दिल्ली। शाकाहारी खाने के शौकीन अब अंडा खा सकते हैं। जी हां, बिल्कुल शुद्ध, देसी और सौ फीसदी शाकाहारी। इस अंडे को आईआईटी दिल्ली के छात्रों ने तैयार किया है। यह शाकाहारी अंडा, विकास और आहार प्रोटीन की जरूरतों को पूरा करता है। साथ ही स्वास्थ्य जागरूक मानकों पर भी खरा उतरता है।

IIT दिल्ली ने पाया पहला पुरस्कार

स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पूरी तरह से शाकाहारी इस आविष्कार के लिए आईआईटी दिल्ली ने इनोवेट्स फॉर एसडीजी फॉर एसडीजी प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया है। यह प्रतियोगिता यूएनडीपी (यूनाइटेड नेशन डेवलपमेंट प्रोग्राम) एक्सेलेरेटर लैब इंडिया द्वारा आयोजित की गई थी। जर्मनी के आर्थिक सहयोग और विकास की प्रमुख क्रिस्टिय ने आईआईटी दिल्ली को इस सम्मान पुरस्कृत किया। पुरस्कार में 5000 अमेरिकी डॉलर शामिल हैं। अपने इस नवाचार के लिए आईआईटी दिल्ली को ऑनलाइन सम्मानित किया गया।

आहार के प्रोटीन की जरूरतों को पूरा करता है ये अंडा

यूएनडीपी के अनुसार, “मॉक एग इनोवेशन एक परफेक्ट इनोवेशन है। नकली अंडे का विकास आहार की प्रोटीन की जरूरतों को पूरा करता है। स्वास्थ्य जागरूकता के प्रति भी सतर्क है। शाकाहारी पदार्थों से बनाया गया यह नकली अंडा भूख और अच्छे स्वास्थ्य की  अधिकांश आवश्यकताओं को पूरा करता है।’ प्रो. काव्या दशोरा ने कहा, ‘संयंत्र आधारित बनावट वाले खाद्य पदार्थ जो अंडे, मछली और चिकन से मिलते जुलते हैं, कुपोषण और स्वच्छ प्रोटीन के लिए लंबी लड़ाई को संबोधित करने के उद्देश्य से विकसित किए गए हैं। यह लोगों के लिए प्रोटीन भोजन युक्त है। मॉक एग को बहुत ही सरल खेत आधारित फसल से विकसित किया गया है। प्रोटीन, जो न केवल अंडे की तरह दिखता है और स्वाद होता है, बल्कि पोषण प्रोफाइल में भी अंडे के बहुत करीब है।”

—–

अब Google और Facebook पर खबरें फ्री में नहीं!


ऑस्ट्रेलिया सरकार लाई कानून

सिडनी। अब गूगल और फेसबुक पर खबरों को प्रकाशित करने के लिए कंपनियों को पैसे देने पड़ेंगे। ऑस्ट्रेलिया सरकार के नए प्रस्ताव के तहत गूगल और फेसबुक पर खबरें डालने के लिए कंपनियों को भुगतान करना पड़ेगा। ऑस्ट्रेलिया की सरकार का कहना है कि यह दुनिया का पहला कानून है, इसके तहत ऑनलाइन विज्ञापन बाजार में सबको समान मुकाबले का मौका मिलेगा। वहीं फेसबुक ने कहा है कि कानून इंटरनेट की गतिशीलता को गलत बताता है। ऑस्ट्रेलियाई
वित्त मंत्री जोश फ्राइडेनबर्ग ने एक बयान में कहा, कानून यह सुनिश्चित करेगा कि ऑस्ट्रेलिया में सार्वजनिक हित पत्रकारिता को बनाए रखने में मदद करने के लिए समाचार मीडिया कारोबार को उनके द्वारा दी गई सामग्री का उचित भुगतान हो। वित्त मंत्री ने कहा कि मीडिया जगत में दुनिया भर के लिए एक बड़ा परिवर्तन है। वर्तमान में ऑनलाइन विज्ञापनों पर गूगल का 53 फीसदी और फेसबुक का 23 फीसदी हिस्सा है।

——-