बिजनौर के हीरो लवी चौधरी का भव्य स्वागत

बिजनौर पहुंचने पर लवी चौधरी का हुआ भव्य स्वागत। डीएम ने लवी को बताया बिजनौर का हीरो। युवाओं से किया प्रेरणा लेने का आह्वान।

बिजनौर। जूनियर एशियाई वालीबॉल चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय टीम के सदस्य लवी चौधरी का बिजनौर पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। लवी चौधरी हरियाणा से सोमवार को बिजनौर लौटे।

ईरान के शहर तेहरान में आयोजित हुई जूनियर एशियाई वॉलीबॉल चैंपियनशिप में भारतीय टीम ने कांस्य पदक प्राप्त किया है। भारतीय टीम के सदस्य रहे ग्राम रहमापुर निवासी लवी चौधरी सोमवार को हरियाणा से बिजनौर पहुंचे। गंगा बैराज पर लवी चौधरी का भव्य स्वागत किया गया। वहां से ढ़ोल नगाड़ों की थाप पर भारत माता की जय और वन्दे मातरम के उद्घोष लगाते हुए नेहरु स्टेडियम पहुंचे। स्टेडियम में वालीबाल संघ की ओर से कार्यक्रम आयोजित किया गया। नेहरु स्टेडियम में डीएम उमेश मिश्रा और एसपी दिनेश सिंह और एएसपी सिटी डा. प्रवीन रंजन सिंह ने लवी चौधरी का जोरदार स्वागत किया। नेहरू स्टेडियम में युवा खिलाड़ियों ने अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी लवी चौधरी और उनके कोच अजित चौधरी को कंधों पर उठा लिया और मैदान में लेकर पहुंचे। वहां सैकड़ों की संख्या में खिलाड़ी लवी चौधरी का इंतजार कर रहे थे। डीएम उमेश मिश्रा, एसपी दिनेश सिंह, एसडीएम रीतु चौधरी ने लवी चौधरी को फूलों की माला पहनाकर स्वागत किया। डीएम उमेश मिश्रा ने खिलाड़ियों से कहा कि लवी चौधरी से प्रेरणा लेकर जिले का नाम रौशन करें। डीएम ने खिलाड़ियों से लवी चौधरी को बिजनौर का हीरो बताते हुए जिले का नाम रौशन करने का आह्वान किया। डीएम ने कहा कि शिक्षा के साथ खेल जरुरी है। जिले में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। जिले के युवा अगर ठान लें तो हर क्षेत्र में नाम रौशन कर सकते हैं। युवा अपनी प्रतिभा को पहचानें और जिले के साथ देश का नाम रौशन करें। डीएम ने जिला क्रीड़ा अधिकारी जयवीर सिंह से खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत करने को कहा।

इस अवसर पर जिला क्रीड़ा अधिकारी जयवीर सिंह, बीएसए जयकरन यादव, वॉलीबाल कोच अजित तोमर, योगेन्द्र पाल सिंह योगी, मानव सचेदवा, निपेन्द्र देशवाल, विकास अग्रवाल, विकास सेतिया, पवन कुमार कृष्णा कालेज, चित्रा चौहान, अरविंद देशवाल आदि मौजूद रहे। बाद में गांव पहुंचने पर लोगों ने अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी लवी चौधरी को फूल मालाओं से लाद दिया। उनकी उपलब्धि पर गांव में खुशी का माहौल है और उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। वहीं बताया गया है कि मंगलवार को कोतवाली देहात में लवी चौधरी का भव्य स्वागत किया जाएगा।

ईरान में बिजनौर के “लवी” ने बिखेरा जलवा

साथियों के साथ कांस्य पदक की जीत का जश्न मानते हुए 8 नंबर जर्सी में लवी चौधरी

ईरान में छाया बिजनौर का छोरा लवी29 को बिजनौर के नेहरू स्टेडियम में स्वागत की तैयारियां।

नई दिल्ली। ईरान के तेहरान में आयोजित हुई जूनियर एशियन वॉलीबॉल चैंपियनशिप 2022 में भारतीय टीम ने कांस्य पदक प्राप्त किया। सोमवार को खेले गए मुकाबले में भारत ने दक्षिण कोरिया को हराया। यह जीत इसलिए महत्वपूर्ण हैछोटा भाई लवी चौधरी ऐसे ही एक दिन वालीबॉल की  दुनिया का सिरमौर बने; यही कामना है। 29 अगस्त को बिजनौर के नेहरू स्टेडियम में स्वागत की तैयारियां की जा रही हैं।

पत्रकार साथी का छोटा भाई- बिजनौर के पत्रकार साथियों के लिए यह जीत इसलिए महत्तवपूर्ण है, क्यूंकि इस जीत में अहम भूमिका निभाने वाले लवी चौधरी, न केवल जिले के रहने वाले हैं, बल्कि पूर्व में हिन्दुस्तान और वर्तमान में अमर उजाला में कार्यरत अचल चौधरी के छोटे भाई हैं।

गौरतलब है कि ईरान में खेली गई अंडर-18 एशियन चैंपियनशिप में भारत की टीम ने कांस्य पदक जीता है। टीम में मुजफ्फरनगर जिले के सिसौली कस्बे के आर्यन बालियान, सहारनपुर के देवबंद के आदित्य राणा और बिजनौर के लवी चौधरी भी शामिल थे।

16 अगस्त को दी थी थाईलैंड को मात
16 अगस्त को भारतीय टीम ने रोचक मुकाबले में थाईलैंड को मात दी थी। उसके बाद 18 अगस्त को भारत की टीम ने कोरिया के साथ मुकाबले में भी एकतरफा जीत हासिल की। वहीं 20 अगस्त की शाम को चीनी ताइपे की टीम को हराकर सेमीफाइनल क्वालीफाई किया। सोमवार को सेमीफाइनल मुकाबले में ईरान की टीम ने भारतीय टीम को हरा दिया। सोमवार देर शाम चैंपियनशिप में भारत की टीम ने कोरिया को हराकर कांस्य पदक पर अपना कब्जा किया।

2003 में जीता था भारत ने अंडर-18 खिताब
भारत ने 2003 में एशियाई अंडर-18 लड़कों की वॉलीबॉल चैंपियनशिप का खिताब जीता था। उसके बाद भारतीय टीम 2005, 2008 में कांस्य पदक जीतने के अलावा 2007 में उपविजेता रही। अब 2010 के बाद पहली बार भारत की टीम ने चीनी ताइपे को हराकर सेमीफाइनल में क्वालीफाई किया। फाइनल में भारतीय टीम ने दक्षिण कोरिया को 3-2 से हराकर तीसरा स्थान प्राप्त किया। टीम ने कांस्य पदक हासिल कर उत्तर प्रदेश का नाम रोशन किया है। भारतीय टीम की इस जीत से 2023 में अंडर-19 वॉलीबॉल विश्व चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई करने में मदद मिलेगी।

एसीसीए यूनाइटेड किंगडम की परीक्षा उत्तीर्ण कर प्रिया सिंह ने बढ़ाया बिजनौर का मान

बिजनौर। कोतवाली देहात क्षेत्र के ग्राम शादीपुर निवासी प्रिया सिंह ने एसीसीए यूनाइटेड किंगडम की परीक्षा उत्तीर्ण की है। प्रिया सिंह की उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में हर्ष व्याप्त है।

ग्राम शादीपुर निवासी इंजीनियर युवराज सिंह की पत्नी प्रिया सिंह ने सन 2017 में चार्टर्ड अकाउंटेंट की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इसके बाद वह एसीसीए यूनाइटेड किंगडम की परीक्षा की तैयारी कर रही थीं। प्रिया सिंह ने बताया कि ऑनलाइन संपन्न हुई इस परीक्षा को देश भर के चुनिंदा सीए ही उत्तीर्ण कर पाए हैं। यह परीक्षा चार्टर्ड अकाउंटेंट की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद दी जाती है। प्रिया सिंह की उपलब्धि से क्षेत्र में हर्ष व्याप्त है। वह जिला सहकारी बैंक के पूर्व चेयरमैन  स्वर्गीय राजेंद्र पाल सिंह की पुत्रवधू हैं। प्रिया सिंह के परीक्षा उत्तीर्ण करने की खबर सुनते ही क्षेत्र वासियों एवं ग्रामवासियों का उनके निवास शादीपुर पर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा।

पैतृक गांव में भी हर्ष का माहौल-  प्रिया सिंह के पैतृक गांव नारायणपुर में उनके पिता बिजेंद्र सिंह को भी उनकी पुत्री की इस उपलब्धि पर क्षेत्रवासियों ने बधाई दी। प्रिया सिंह की इस उपलब्धि पर बिजनौर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. बीरबल सिंह ने भी उनके उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी। इस उपलब्धि पर वीरबाला देवी पत्नी स्व. राजेन्द्र पाल सिंह ने बताया कि प्रिया; हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत है। उन्होंने घर पर बधाई देने आए सभी मेहमानों का स्वागत करते हुए मिठाई वितरित की।

गौरतलब है कि1904 में स्थापित, चार्टर्ड सर्टिफाइड अकाउंटेंट एसोसिएशन (ACCA) एक वैश्विक पेशेवर लेखा निकाय है। एसीसीए का मुख्यालय लंदन में है और मुख्य प्रशासनिक कार्यालय ग्लास्गो में है। एसीसीए 52 देशों में 104 से अधिक कार्यालयों और केंद्रों के नेटवर्क के माध्यम से काम करता है – 323 स्वीकृत लर्निंग पार्टनर्स (एएलपी) और दुनिया भर में 7,300 से अधिक स्वीकृत नियोक्ता हैं।

सौजन्य से- प्रशांत कुमार

जनपद बिजनौर में समाचार, विज्ञापन एवं एजेंसी के लिए संपर्क करें, ब्यूरो चीफ सतेंद्र सिंह 8433047794

योग भारत की धरती से पूरे विश्व को एक बहुत बड़ी देन- मण्डलायुक्त आञ्जनेय कुमार सिंह


आठवें अंतर्राष्ट्रीय योगा दिवस पर मंडलायुक्त मुरादाबाद मंडल आन्जनेय कुमार सिंह की अध्यक्षता में नेहरू स्टेडियम बिजनौर में हुआ सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम

जनपद में अष्टम अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित हुए कार्यक्रम

योग को बनाएं जीवन का हिस्सा, नियमित योग अभ्यास रोग दूर करने में सहायक- मण्डलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह

कोई भी देश, समाज व विश्व बिना स्वस्थ नागरिकों के विकास नहीं कर सकता- मण्डलायुक्त

योग शारीरिक और मानसिक स्वास्थय की कुंजी -जिलाधिकारी

योग जीवन को स्वस्थ व निरोग रखने में सहायक- जिलाधिकारी उमेश मिश्रा

देश हमें देता है सब कुछ हम भी तो कुछ देना सीखें।।

बिजनौर। जनपद मे आज अष्टम अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस पर मुख्य कार्यक्रम का आयोजन नेहरू स्टेडियम व गंगा बैराज घाट पर किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि आयुक्त मुरादाबाद मण्डल, पूर्व सांसद व जिलाधिकारी ने दीप प्रज्जवलन कर किया। मण्डलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह ने कहा कि आज योग दिवस पूरे विश्व मे मनाया जा रहा है। योग भारत की धरती से पूरे विश्व को एक बहुत बडी देन है। गंगा बैराज घाट पर मां गंगा को दूध व पुष्प अर्पित कर मां गंगा की आरती की गयी। सभी अधिकारियों कर्मचारियों व आमजन ने योगाभ्यास में प्रतिभाग किया।

आयुक्त श्री सिंह ने कहा कि किसी भी देश के लिए उसकी सबसे महत्वपूर्ण संपदा उसकी मानव संपदा होती है। आज योग दिवस पूरे विश्व में मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दक्ष मानव संपदा है तो बेहतर है लेकिन उसके साथ-साथ स्वस्थ मानव संपदा का होना अत्यन्त आवश्यक है। मनुष्य का शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ होना आवश्यक है। शारीरिक स्वास्थय के साथ-साथ मन का स्वस्थ होना भी आवश्यक है। योग के माध्यम से मानसिक स्वास्थय का व शारीरिक स्वास्थय दोनो को ठीक रखा जा सकता है।

आयुक्त ने कहा कि योग हमारे शारीरिक व मन को स्वस्थ रखने मे सहायक होता है और अगर हम शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ है तो देश व समाज के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं। हमारे प्रधानमंत्री ने योग को आगे बढाया और आज पूरा विश्व इसे स्वीकार कर रहा है। योग भारत की धरती से पूरे विश्व को एक बहुत बडी देन है। योग एक बहुत बडी संपदा है जो हमारे पूर्वजो, ऋषियों व मुनियों ने हमें सौंपी है। योग को स्वीकार व अंगीकार करते हुए अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। कोई भी देश समाज व विश्व बिना अपने स्वस्थ नागरिकों के विकास नहीं कर सकता। नियमित योग अभ्यास रोग दूर करने मे सहायक होता है। योग पांचवी चिकित्सीय परामर्श के रूप मे माना जाने लगा है।

जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने कहा कि योग शारीरिक और मानसिक स्वास्थय की कुंजी है। उन्होंने आमजन से योग अपनाने की अपील की। योग जीवन को स्वस्थ व निरोग रखने मे सहायक होता है। उन्होंने बताया कि आठवें अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2022 की थीम मानवता के लिए योग घोषित की गयी है।

नेहरू स्टेडियम मे आयोजित कार्यक्रम में प्रशांत महर्षि ने योगाभ्यास सिखाया और भारती गौड व विनोद गोस्वामी का सहयोग रहा। वहीं गंगा बैराज घाट पर आयोजित कार्यक्रम में योग प्रशिक्षक तिलकराम ने योगाभ्यास सिखाया और सदभावना, हिमानी आदि का सहयोग रहा।

योग दिवस पर आयोजित योगाभ्यास कार्यक्रम में योग प्रशिक्षकों द्वारा प्राणायाम, भ्रामरी, शीतली प्राणायाम, कपाल भाती, अनुलोम विलोम सहित करीब 35 योगा आसन सिखाये गए। योग प्रशिक्षकों ने कहा कि योेग हमें अनुशासन सिखाता है। इस अवसर पर ब्रहम कुमारी ने मण्डलायुक्त को पुस्तिका भेंट की।

इस अवसर पर पूर्व सांसद भारतेन्द्र सिंह, पुलिस अधीक्षक डा0 धर्मवीर सिंह, जिला वन अधिकारी डा0 अनिल पटेल, मुख्य विकास अधिकारी केपी0 सिंह, अपर जिलाधिकारी प्रशासन विनय कुमार सिंह, पीडी डीआरडीए ज्ञानेश्वर तिवारी सहित अन्य अधिकारी, कर्मचारी, क्रीडा भारती के सदस्य व बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।

आचार्य द्विवेदी स्मृति रजत जयंती वर्ष का नया लोगो रिलीज

आचार्य द्विवेदी स्मृति रजत जयंती वर्ष का नया लोगो

लखनऊ। आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति संरक्षण अभियान के रजत जयंती वर्ष के लिए राष्ट्रीय स्मारक समिति ने नया लोगो गुरुवार को रिलीज किया।
गुरुवार को एक ऑनलाइन कार्यक्रम में नया लोगो रिलीज करते हुए आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति के अध्यक्ष विनोद शुक्ला ने बताया कि नया लोगो नई दिल्ली के डिजाइनर राजीव कुमार ने तैयार किया है। नए लोगो में 25 साल की स्मृति यात्रा दर्शाने के साथ-साथ आचार्य द्विवेदी के राष्ट्र प्रेम, समाज उत्थान की भावना का भी समावेश किया गया है।

आचार्य द्विवेदी स्मृति रजत जयंती वर्ष का नया लोगो


समिति की अमेरिका इकाई की अध्यक्ष श्रीमती मंजु मिश्रा ने कहा कि आचार्य द्विवेदी ईश्वर के संरक्षण अभियान का रजत जयंती वर्ष यादगार बनाया जाएगा। अमेरिका इकाई भी इस यज्ञ में अपनी आहुति डालेगी। महामंत्री अनिल मिश्र ने कहा कि वर्ष पर्यंत कार्यक्रमों की श्रंखला चलेगी।

आचार्य द्विवेदी स्मृति रजत जयंती वर्ष का नया लोगो रिलीज

आचार्य द्विवेदी स्मृति रजत जयंती वर्ष का नया लोगो

लखनऊ। आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति संरक्षण अभियान के रजत जयंती वर्ष के लिए राष्ट्रीय स्मारक समिति ने नया लोगो गुरुवार को रिलीज किया।
गुरुवार को एक ऑनलाइन कार्यक्रम में नया लोगो रिलीज करते हुए आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति के अध्यक्ष विनोद शुक्ला ने बताया कि नया लोगो नई दिल्ली के डिजाइनर राजीव कुमार ने तैयार किया है। नए लोगो में 25 साल की स्मृति यात्रा दर्शाने के साथ-साथ आचार्य द्विवेदी के राष्ट्र प्रेम, समाज उत्थान की भावना का भी समावेश किया गया है।

आचार्य द्विवेदी स्मृति रजत जयंती वर्ष का नया लोगो


समिति की अमेरिका इकाई की अध्यक्ष श्रीमती मंजु मिश्रा ने कहा कि आचार्य द्विवेदी ईश्वर के संरक्षण अभियान का रजत जयंती वर्ष यादगार बनाया जाएगा। अमेरिका इकाई भी इस यज्ञ में अपनी आहुति डालेगी। महामंत्री अनिल मिश्र ने कहा कि वर्ष पर्यंत कार्यक्रमों की श्रंखला चलेगी।

चूहों को बिल्ली से भी ज्यादा इस फल से लगता है डर…

ओटावा (एजेंसी)। चूहों को लेकर आपने सुना होगा कि वह बिल्ली से डरते हैं, लेकिन शोधकर्ताओं ने चूहों के डर से जुड़ी एक अबीजोगरीब खोज की है। उन्होंने पता लगाया है कि चूहा केले से डरता है। 

Research on Rat: चूहों पर हाल ही में एक ऐसी रिसर्च हुई है जिसे जानकर आप काफी हैरान होंगे. दरअसल वैज्ञानिकों से अनजाने में हुए इस रिसर्च में सामने आया है कि चूहे बिल्ली से ज्यादा केले से डरते हैं. उन्होंने इसके पीछे की वजह भी निकाली. आइए जानते हैं क्या है रिसर्च….

Latest Viral News: अगर कोई आपसे ये पूछे कि चूहे सबसे ज्यादा किससे डरते हैं, तो शायद आप जवाब देंगे कि बिल्ली से. लेकिन ऐसा नहीं है, चूहे बिल्ली से भी ज्यादा ऐसी चीज से डरते हैं जिसकी कल्पना शायद आप न कर पाएं. हैरानी की बात ये है कि ये कोई जीव नहीं, बल्कि फल है. हाल ही में एक रिसर्च में खुलासा हुआ है कि चूहों को केले से बहुत डर लगता है. हालांकि यह खोज प्लानिंग के तहत नहीं, बल्कि अनजाने में हुई है, लेकिन अब इसकी खूब चर्चा हो रही है.

क्या है पूरी रिसर्च

साइंस एडवांस में छपी इस स्टडी रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने बताया है कि, ‘नर चूहों में केले को देखने के बाद तनाव ज्यादा मिला. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मॉन्ट्रियल में मैगकिल यूनिवर्सिटी की रिसर्च टीम गर्भवती और स्तनपान कराने वाली मादा चूहों पर रिसर्च कर रही थी. इस दौरान दिखा कि अजनबी नर चूहों को कैसे मादा चूहे आक्रामकता दिखा रही हैं. आक्रमकता दिखाने के दौरान मादा चूहों ने मूत्र चिह्न के साथ रिएक्ट किया. यह रिएक्शन अजनबी नर चूहों को भगाने और उन्हें चेतावनी देने के लिए दिया गया था, लेकिन टीम यह देखकर हैरान हो गई कि जो नर चूहे अपनी आक्रमकता के लिए जाने जाते हैं, वो मादा चूहों के रसायन से कैसे भाग गए.

मूत्र को सूंघते ही भाग गया चूहा

इसके बाद टीम ने इस पर रिसर्च शुरू किया. इस स्टडी में शामिल प्रोफेसर जेफरी मोगिल ने बताया कि, चूहे और दूसरे स्तनधारी अपनी सूंघने की शक्तियों को यूज करते हैं. इन सबके लिए अलग-अलग समय पर यूरिन की गंध के अलग-अलग मतलब होते हैं. सूंघने वाले संकेत आमतौर पर नर किसी मादा को भेजते हैं, लेकिन यहां बिल्कुल उल्टा हुआ. इस रिसर्च में मादा चूहे ने नर चूहे को सूंघने वाला संकेत भेजा. इससे साफ हुआ कि मादा चूहा अजनबी नर चूहे को दूर रहने के लिए कह रही है.

ये है केले की थियोरी

अब रिसर्च टीम को ये पता करना था कि माद चूहे ने जो मूत्र चिह्न छोड़ा है उसमें ऐसा क्या था जिसे देखकर नर चूहे को भागना पड़ा. टीम ने जब इस पर काम किया तो पता चला कि स्तनपान कराने वाली मादा चूहों के मूत्र में एन-पेंटाइल एसीटेट (N-Pentyl Acetate) नाम का एक यौगिक था. यह केले समेत कई दूसरे बड़े फलों में मिलने वाले यौगिक के समान होता है. वैज्ञानिकों ने बताया कि केले का अर्क बनाने के लिए इसे फल से निकालते हैं. इस रसायन से नर चूहों में हार्मोन में परिवर्तन होने लगता है. इसके बाद टीम ने अलग से इस थ्योरी पर काम करने की योजना बनाई. उन्होंने केले के अर्क को नर चूहों के पिंजरे में डाल दिया. इसके बाद नतीजा देखकर वह हैरान हो गए. दरअसल केले के अर्क को देखने के बाद चूहों में तनाव अधिक बढ़ गया था. ये तनाव बिल्कुल उतना ही था, जितना दूसरे चूहों से लड़ाई के दौरान उनमें होता है.

6G आते ही खत्म हो जाएंगे स्मार्टफोन? Nokia के CEO की भविष्यवाणी

6G

6G Technology: दुनिया के कई देशों में 5G टेक्नोलॉजी आ चुकी है और अब 6G की तैयारी हो रही है. Nokia के CEO Pekka Lundmark ने 6G और स्मार्टफोन्स के फ्यूचर को लेकर एक भविष्यवाणी की है. उनका मानना है कि साल 2030 तक स्मार्टफोन खत्म हो जाएंगे.

6G

  • नोकिया CEO Pekka Lundmark ने की भविष्यवाणी
  • साल 2030 तक खत्म हो जाएगी स्मार्टफोन की जरूरत?
  • दावोस में World Economic Forum में कही यह बात

फोन से मोबाइल फोन और फिर स्मार्टफोन तक का सफर बहुत छोटा है. बातचीत के लिए तैयार किए गए इस डिवाइस का इतिहास आम लोगों के बीच मुश्किल से कुछ दशक का है. कयास लगाए जा रहे हैं कि जल्द ही यह इतिहास का हिस्सा भी बन सकते हैं. स्मार्टफोन तेजी से विकसित होने वाले प्रोडक्ट्स में से एक है.

आज से 15-20 साल पहले मौजूदा स्मार्टफोन्स के फीचर्स वाले किसी डिवाइस को हाथ में लेकर घूमना एक कल्पना मात्र थी. स्मार्टफोन्स के तेज विकास की वजह से ही इसके भविष्य पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं.  

Nokia के CEO की भविष्यवाणी 

दरअसल, Nokia के CEO Pekka Lundmark का मानना है कि साल 2030 तक 6G टेक्नोलॉजी शुरू हो चुकी होगी, लेकिन तब तक स्मार्टफोन ‘कॉमन इंटरफेस’ नहीं होंगे. उन्होंने ये बात दावोस में चल रहे World Economic Forum में कही है.  Pekka Lundmark ने कहा कि कॉमर्शियल मार्केट में 2030 तक 6G की एंट्री हो जाएगी.

उन्होंने कहा कि 6G के आने से पहले ही लोग स्मार्टफोन की तुलना में स्मार्ट ग्लासेस और दूसरे डिवाइस को यूज करने लगेंगे. नोकिया सीईओ ने बताया, ‘तब तक, हम जिन स्मार्टफोन्स को यूज कर रहे हैं, वह सबसे ज्यादा यूज होने वाला इंटरफेस नहीं रह जाएंगे. इनमें से बहुत सी चीजें हमारी बॉडी में सीधे तौर पर मिलने लगेंगी.’

एलॉन मस्क की कंपनी कर रही इस पर काम

हालांकि, Lundmark ने ये नहीं बताया है कि वह किस डिवाइस के बारे में बात कर रहे हैं. एलॉन मस्क की Neuralink जैसी कुछ कंपनियां फिलहाल इस पर काम कर रही हैं और ब्रेन कम्प्यूटर इंटरफेस तैयार कर रही हैं. 

पिछले साल अप्रैल में मस्क ने एक फुटेज रिलीज कर इसका डेमो दिखाया था. वीडियो में उन्होंने दिखाया कि कैसे एक मेल मकाक (अफ्रीकी लंगूर) के दिमाग में चिप लगाई गई है और वह ‘माइंड पॉन्ग’ प्ले कर रहा है.

लंगूर को जॉयस्टिक मूव करने के लिए ट्रेंड जरूर किया गया था, लेकिन इस टेस्ट के दौरान उसके अनप्लग रखा गया था. मकाक पैडल को अपने दिमाग की मदद से कंट्रोल कर रहा था. हालांकि, उसे ऐसा लग रहा था कि वह जॉयस्टिक की मदद से ऐसा कर पा रहा है.

कब तक आएगा 6G?

6G को लेकर अभी बहुत सी चीजें क्लियर नहीं है. भारत अभी 5G की लॉन्चिंग की तैयारी कर रहा है. हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6G पर बताया था कि एक टास्ट फोर्स को तैयार किया गया है. इस साल के अंत तक हमें भारत में 5G टेक्नोलॉजी देखने को मिल जाएगी.

इससे पहले भारत के आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी घोषणा की थी कि देश अपनी स्वदेशी 6G तकनीक पर काम कर रहा है। 2023-2024 तक ये तकनीक तैयार भी हो सकती है। 6G को लेकर अभी कुछ भी साफ नहीं है। अभी 5G की लॉन्चिंग की तैयारी है और इस साल के अंत तक हमें भारत में 5G टेक्नोलॉजी देखने को मिल जाएगी। ऐसे में नोकिया के सीईओ का ये बयान भविष्य में टेक्नोलॉजी की मजबूती को बताता है।

गाने जो हिट थे हिट रहेंगे ! बिनाका गीतमाला और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल !!

गाने जो हिट थे हिट रहेंगे  ! बिनाका गीतमाला और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल !! साभार-अजय पौंडरिक

एक संगीत प्रेमी के रूप में हम बीनका गीतमाला में श्री अमीन सयानी द्वारा मापे गए गीतों की लोकप्रियता पर विश्वास करते हैं…।

साल 1953 में…

बिनाका गीतमाला हिंदी सिनेमा के शीर्ष फिल्मी गीतों का एक साप्ताहिक रेडियो काउंटडाउन शो था, जिसे लाखों हिंदी संगीत प्रेमियों ने सुना, जिसे 1953 से 1988 तक रेडियो सीलोन पर प्रसारित किया गया और फिर 1989 में ऑल इंडिया रेडियो नेटवर्क की विविध भारती सेवा में स्थानांतरित कर दिया गया। 1994 तक चला। यह भारतीय फिल्मी गीतों का पहला रेडियो काउंटडाउन शो था और इसके चलने के दौरान इसे भारत में सबसे लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम के रूप में उद्धृत किया गया है। इसे बिनाका द्वारा प्रायोजित किया गया था, जहां से इसे इसका नाम मिला। बिनाका गीतमाला, और इसके बाद के अवतारों का नाम सिबाका, सिबाका संगीतमाला, सिबाका गीतमाला, और कोलगेट सिबाका संगीतमाला के नाम पर रेडियो सीलोन पर और फिर विविध भारती पर 1954 से 1994 तक चला, जिसमें वार्षिक वर्ष के अंत की सूची 1954 से 1993 तक प्रसारित हुई।

बिनाका गीतमाला के वार्षिक प्रोग्राम में बजनेवाले  “फाइनल गीतों” की गिनती करें, तो 1953 से 1993 तक “फाइनल  गीतों ” की संख्या 40 वर्षों में 1259 हो जाती है

लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल          २४५  गाने 

शंकर-जयकिशन               १४४  गाने     

राहुल देव बर्मन                  १३३  गाने 

कल्याणजी-आनंदजी            ७५ गाने   

सचिन देव बर्मन                   ५५ गाने     

रवि                                  ४६ गाने  

बप्पी लाहिरी                       ४४ गाने 

नौशाद                             ३४  गाने                           

ओ  पी  नय्यर                    ३३  गाने 

राजेश रोशन                      २८  गाने

मदन मोहन                        २४ गाने 

रोशन                              १७ गाने 

सलिल  चौधरी                  १५  गाने 

AMIN SAYANI & PYARELAL (Laxmikant-Pyarelal)

बिनाका गीतमाला में लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के २४५”फाइनल गीतों” की वर्षवार सूची / स्थिति।

1963

लक्ष्मीकांत प्यारेलाल, जिन्होंने कुछ “पारसमणि” फिल्म के अविस्मरणीय संगीत के साथ धमाकेदार शुरुआत की. इस फिल्म से उनकी चार रचनाओं को बिनाका गीतमाला साप्ताहिक और दो गाने फाइनल में शामिल किया गया जो पायदान नंबर १५ और  पायदान नम्बर ६ पर बजे. बहोत ही बढियाँ शरुआत,लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के लिए.. 

नंबर 15   वो जब याद आया लता – रफ़ी.. “पारसमणि”

नंबर 06  हसता  हुआ नूरानी चेहरा, लता – कमल बारोट “पारसमणि”

1964

बिनाका गीतमाला में  वर्ष के अंत में 32 “फाइनल गीत” हैं। लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के  “हरिश्चंद्र तारामती” के कुछ बेहतरीन  गीत हैं. “दोस्ती” से लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल – मोहम्मद रफ़ी (३७९ गाने ) और  “मिस्टर एक्स इन बॉम्बे” से लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल – किशोर कुमार (४०२ गाने ) का लम्बा दौर चला.  “मिस्टर एक्स इन बॉम्बे” से लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल और आनंद बक्शी की रिकॉर्ड ब्रेकिंग पार्टनरशिप शुरू (३०२ फिल्म्स और १६८० गाने )

नंबर 30  मैं एक नन्हा सा .. लता .. “हरिश्चंद्र तारामती”

नंबर 26  राही मनावा .. रफ़ी ..”दोस्ती”

नंबर 21  चाहुंगा मैं तुझे..रफ़ी..”दोस्ती”

नंबर 06  मेरे महबूब क़यामत ..किशोर .. “मिस्टर एक्स इन बॉम्बे”

1965

बिनाका गीतमाला 1965 भले ही बॉलीवुड संगीत निर्देशकों के बीच धीरे-धीरे लेकिन लगातार बदलाव देख रहा हो, क्योंकि इस बार शीर्ष स्लॉट सहित अधिकांश स्लॉट पर कल्याणजी आनंदजी, लक्ष्मीकांत प्यारेलाल,       आर डी बर्मन जैसे नवागंतुकों का कब्जा था।

जैसा कि पहले के वर्षों में हुआ था, इस वर्ष भी भारत में एक फिल्मी गीत को पंथ का दर्जा ( cult status) प्राप्त हुआ। यह गीत था- संत ज्ञानेश्वर का “ज्योत से ज्योत जगाते ते चलो”।

नंबर 29  खुदा मुहब्बत ना होती..रफ़ी…”बॉक्सर”

नंबर 25  कोई जब रहा ना पाये..रफी..दोस्ती’

नंबर 24  नींद निगाहो की .. लता .. “लुटेरा”

नंबर 18  अजनबी तुम जाने…किशोर..हम सब उस्ताद है”

नंबर 04  ज्योत से ज्योत जगाते चलो … लता-मुकेश “संत ज्ञानेश्वर”

नंबर 02  चाहुंगा मैं तुझे … रफ़ी “दोस्ती”

1966

नंबर 26  दिन जवानी की चार यार ..किशोर .. “प्यार किए जा”

नंबर 24  गोर हाथों पर ना जुल्म..रफ़ी.”प्यार किए जा”

नंबर 20   पायल की झंकार रस्ते .. लता .. “मेरे लाल”

नंबर 14   ये आज कल के लडके..उषा “दिल्लगी”

1967

लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के संगीत निर्देशन में मिलन के गीतों ने 1967 में पूरे देश में धूम मचा दी और बिनाका गीतमाला कोई अपवाद नहीं था। एक और नवागंतुक, आर डी बर्मन, जिनका संगीत निर्देशक के रूप में करियर 1961 के बाद रुका हुआ था, ने अचानक अपने करियर को बड़े पैमाने पर आगे बढ़ते हुए पाया- “तीसरी मंजिल” में उनके संगीत के लिए धन्यवाद।

नंबर  33 ये कली जब त क..लता – महेंद्र “आए दिन बहार के”

नंबर  24 माँ मुझे अपने आँचल .. लता .. “छोटा भाई”

नंबर  23 मैं देखु  जिस और..लता..”अनीता”

नंबर  21 मेरा यार बड़ा शर्मिला .. रफी .. “मिलन की रात”

नंबर  17 मुबारक हो सबको..मुकेश..’मिलन’

नंबर 13 मेरे दुश्मन तू .. रफ़ी ..” आए दिन बहार के “

नंबर  07 ना बाबा ना बाबा..लता..अनीता”

नंबर  06 हम तुम युग युग .. लता-मुकेश .. “मिलन”

नंबर  01 सावन का महीना  ..लता-मुकेश .. “मिलन”

1968

नंबर  32 मस्त बहारों का मैं..रफ़ी..”फ़र्ज”

नंबर  24 छलकाए  जाम..रफ़ी..”मेरे हमदम मेरे दोस्त’

नंबर  22 बड़े मियां दीवाने..’शागिर्द’

नंबर  20 महबूब मेरे..लता-मुकेश..”पत्थर के सनम”

नंबर  16 मेरा नाम है चमेली .. लता .. “राजा और रैंक”

नंबर  14 चलो सजना .. लता .. “मेरे हमदम मेरे दोस्त”

नंबर  11 बड़दु क्या लाना..लता…”पत्थर के सनम”

नंबर  01 दिल बिल प्यार व्यार .. लता .. “शागिर्द”

1969

नंबर  31 वो कौन है .. लता-मुकेश … “अंजना”

नंबर  25 महबूबा महबूबा .. रफ़ी .. “साधु और शैतान”

नंबर  23 रेशम की डोरी..लता-रफ़ी..”साजन”

नंबर  22 रुक जा जरा … लता .. “इज्जत”

नंबर 19 आया सावन झूम के..लता-रफी..”आया सावन झूम के’

नंबर 18 बड़ी मस्तानी है..रफ़ी..”जीने की राह”

नंबर 16 दिल में क्या है..लता-रफ़ी. “जिगरी दोस्त”

नंबर 12 एक तेरा साथ.लता-रफ़ी.. “वापस”

नंबर 09 जे हम तुम चोरी से..लता-मुकेश.. “धरती कहे पुकार के”

नंबर 06 आ मेरे हमजोली आ..लता-रफी..’ जीने की राह’

नंबर 01 कैसे रहूँ चुप , .. लता .. “इन्तेकाम

1970

लगातार चौथे वर्ष, लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की रचना वर्ष के शीर्ष गीत के रूप में उभरी।

नंबर  28 हाय रे हाय निंद नहीं .. लता-रफी .. “हमजोली”

नंबर  18 झिल मिल सितारोंका .. लता-रफी .. “जीवन मृत्यु”

नंबर  16 है शुक्र के तू है लडका..रफ़ी..’हिम्मत’

नंबर  14 वो कौन है। लता-मुकेश .. “अंजना”

नंबर  12 छुप गए सारे..लता-रफ़ी..’दो रास्ते’

नंबर  11 शादी के लिए..रफ़ी..’देवी’

नंबर  09 शराफत छोड दी..लता, “शराफत”

नंबर  08 सा रे गा मा पा..लता-किशोर .. “अभिनेत्री”

नंबर  05 खिलोना जान कर..रफ़ी..खिलोना”

नंबर  01 बिंदिया चमकेगी..लता…”दो रास्ते

1971

नंबर  32 सोना लाई जा रे .. लता .. “मेरा गांव मेरा देश”

नंबर  31 जवानी ओ दीवानी तू ..किशोर .. “आन मिलो सजना”

नंबर  26 तारों ने सज के..मुकेश..जल बिन मछली नृत्य बिन बिजली”

नंबर  22 ओ मितवा ओ मितवा … लता .. “जल बिन मछलील नृत्य बिन बिजली”

नंबर  14 तुमको भी तो ..लता-किशोर .. “आप आए बहार आई”

नंबर  06 चल चल चल मेरे साथी..किशोर..’हाथी मेरे साथी’

नंबर  02 अच्छा तो हम चलते हैं..लता-किशोर .. “आन मिलो सजना”

1972

नंबर  33  मैंने देखा तूने देखा..लता.”दुश्मन’

नंबर  34 ना तू ज़मीन के लिए..रफ़ी..”दास्तान”

नंबर  29 एक प्यार का नगमा है, लता-मुकेश “शोर”

नंबर  28 रेशमा जवान हो गई..रफ़ी..’मॉम की गुड़िया’

नंबर  24 राम ओ राम ..मुकेश .. “एक बेचारा”

नंबर  23 दिल की बात दिल ही जाने..किशोर-लता..’रूप तेरा मस्ताना’

नंबर  20 शीश भारी गुलाब की … लता .. “जीत”

नंबर  16 मैं एक राजा हूं..रफी..उपहार’

नंबर  08 ये जीवन है..किशोर .. “पिया का घर”

नंबर  04 वादा तेरा वादा..किशोर..दुश्मन”

1973

नंबर  34 जरा सा उसे छुआ तो..लता..”शोर”

नंबर  32 झूठ बोले कौवा कटे..लता-शैलेंद्र सिंह..’बॉबी’

नंबर  29 आज मौसम बड़ा..रफ़ी..’लोफ़र’

नंबर  20 मेरे दिल में आज क्या है..किशोर..’दाग’

नंबर 16 धीरे धीरे बोल कोई .. लता-मुकेश .. “गोरा और काला”

नंबर 12 एबीसीडी छोडो .. लता .. “राजा जानी”

नंबर  07 अब चाहे मा रूठे .. लता-किशोर .. “दाग”

नंबर  02 और चाबी खो जाए .. लता-शैलेंद्र सिंह, “बॉबी”

1974

नंबर  32 बैठ जा बैठ गई..किशोर-लता..”अमीर गरीब”

नंबर  26 दाल रोटी खाओ ..किशोर-लता .. “ज्वार भाटा”

नंबर  25 गम का फसाना..किशोर..’मनचली”

नंबर  24 ओ मनचली कहां चली…किशोर..”मनचली”

नंबर  23 तू रु तू रु तेरा मेरा..किशोर..”ज्वर भाटा’

नंबर  22 शोर मच गया शोर..किशोर.. “बदला”

नंबर  12 मैं शायर तो नहीं..शैलेंद्र सिंह..”बॉबी”

नंबर  04 गड़ी बुला रही है..किशोर…”दोस्त”

नंबर  03 झूठ बोले कौवा कटे .. लता-शैलेंद्र सिंह। “बॉबी”

1975

नंबर  26 मैं जाट यमला पगला..रफ़ी..”प्रतिज्ञा”

नंबर  23 फौजी गया जब गांव मैं..किशोर..”आक्रमण’

नंबर  21 आएगी जरूर चिट्ठी..लता…”दुल्हन”

नंबर  20 जीजाजी जीजाजी..आशा-किशोर..”पोंगा पंडित”

नंबर 15 ये जो पब्लिक है..किशोर…”रोटी”

नंबर 13 कभी खोले ना ..किशोर ..”बिदाई”

नंबर 10 चल दरिया मैं डुब जाए..किशोर-लता.. “प्रेम कहानी”

नंबर 02 हाय ये मजबूरी .. लता .. “रोटी कपड़ा और मकान”

नंबर  01 महंगाई  मार गई .. लता-मुकेश-चंचल-जानीबाबू .. “रोटी कपड़ा और मकान”

1976

1963 के बाद पहली बार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के गाने पहली १० में नहीं आ रहे हैं..

नंबर  33 की गल है कोई नहीं .. लता-किशोर .. “जेन मैन”

नंबर  28 जीजाजी जीजाजी मेरी ने किया ..किशोर-आशा ..”पोंगा पंडित”

नंबर  26 कल की हसीन मुलकात .. लता-किशोर .. “चरस”

नंबर  25 आजा तेरी याद आई..लता-आनंद बक्सी-रफी..’चरस’

नंबर  24 मुझे दर्द रहता है..लता-मुकेश..दस नंबरी’

नंबर  22 जेन मैन जेन मैन..किशोर ..”जेन मैन”

नंबर 10 कहत कबीर सुनो..मुकेश..दस नंबरी’

1977

लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने पीक पीरियड के अपने दूसरे चरण में वापसी की।

नंबर  41 तैयब अली प्यार का दुश्मन..रफ़ी-मुकरी..’अमर अकबर एंथनी’

नंबर  34 आते जाते खूबसूरत..किशोर..अनुरोध’

नंबर  29 मेरी दिलरुबा ..किशोर ..”आस पास”

नंबर  24 ड्रीम गर्ल ड्रीम गर्ल किशोर ..’ड्रीम गर्ल’

नंबर  21 बुरे काम का बुरा..रफ़ी-शैलेंद्र सिंह, “चाचा भतीजा”

नंबर 18 यार दिलदार तुझे कैसा..आशा-किशोर..’छैला बाबू”

नंबर 17 तेरी मेरी शादी पंडित ना..आशा-किशोर..”दिलदार”

नंबर 11 अनहोनी को होनी  कर दे..महेंद्र-किशोर-शैलेंद्र.. “अमर अकबर एंथनी”

नंबर 06 सत्यम शिवम सुंदरम .. लता .. “सत्यं शिवम सुंदरम”

नंबर 05 आप के अनुरोध पे … किशोर ..”अनुरोध”

नंबर 03 ओ मेरी महबूबा .. रफ़ी .. “धर्मवीर”

नंबर 02 पर्दा है परदा .. रफी .. “अमर अकबर एंथनी”

1978

नंबर  33 अजी ठहरो जरा सोचो..किशोर, रफी, शैलेंद्र सिंह “परवरिश”

नंबर  28 सोमवार को हम मिले … किशोर, सुलक्षणा पंडित .. “अपनापन”

नंबर  26 हम प्रेमी प्रेम कराना  जाने..किशोर, रफी, शैलेंद्र सिंह “परवरिश”

नंबर  25 ये खिडकी जो बंद रहती है… रफ़ी..”मैं तुलसी तेरे आंगन की”

नंबर  24 चंचल शीतल निर्मल कोमल .. मुकेश .. “सत्यम शिवम सुंदरम”

नंबर  23 मैं तुलसी तेरे आंगन की .. लता .. “मैं तुलसी तेरे आंगन की”

नंबर  19 जब आती होगी याद मेरी..रफ़ी-सुलक्षणा पंडित..’फंसी’

नंबर  07 यशोमती मैय्या से .. लता, मननाडे .. “सत्यं शिवम सुंदरम”

नंबर 02 आदमी मुसाफिर है .. लता-रफी .. “अपनापन”

1979

नंबर  36 मन्नूभाई मोटर चली ..किशोर .. “फूल खिले है गुलशन गुलशन”

नंबर  32 डफ़लीवाले डफ़ली बजा ..लता-रफ़ी, “सरगम”

नंबर  26 चलो रे डोली उठाओ .. रफ़ी .. “जानी दुश्मन”

नंबर  20 मेरी दुश्मन है ये … रफी .. “मैं तुलसी तेरे आंगन की”

नंबर 16 मैं तेरे प्यार मैं पागल..किशोर, लता.. “प्रेम बंधन”

नंबर 15 ओ मेरी जान ..किशोर, अनुराधा .. “जानी दुश्मन”

नंबर 10 तेरे हाथो मैं पहचान के..आशा-रफ़ी..”जानी दुश्मन”

नंबर 06 मैं तुलसी तेरे आंगन की .. लट्टा .. “मैं तुलसी तेरे आंगन की”

नंबर 04 ना जाने कैसे..किशोर, रफ़ी, सुमन.. “बदलते रिश्ते”

1980

लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के ऊपर के तीन गाने शीर्ष स्थान पर. 

नंबर  32 बने चाहे  दुश्मन..किशोर-रफ़ी..’दोस्ताना’

नंबर  30 मार गई मुजे…किशोर-आशा..”जुदाई”

नंबर  23  परबत के हम पर..लता-रफ़ी..”सरगम”

नंबर  22 हम तो चले परदेस..रफ़ी..’सरगम’

नंबर  16 मैं तो बेघर हौं..आशा..”सुहाग”

नंबर 15 मैं सोला बार्स की ..लता-किशोर .. “कर्ज़”

नंबर 11 तेरी रब ने बना दी..रफ़ी, आशा, शैलेंद्र..’सुहाग’

नंबर 09 ऐ यार सुन यारी तेरी..रफ़ी-शैलेंद्र सिंग-आशा..’सुहाग’

नंबर 07 कोयल बोली..लता-रफ़ी..”सरगम”

नंबर 03 शीशा हो या दिल..लता। “आशा”

नंबर 02 ओम शांति ओम..किशोर .. “कर्ज़”

नंबर 01 डफलीवाले डफली बजा .. लता-रफी .. “सरगम”

1981

नंबर  32 हम बने तुम बने..लता-एसपीबी..’एक दूजे के लिए’

नंबर  30 मेरे नसीब मैं .. लता “नसीब”

नंबर  27 मेरे दोस्त किस्सा..रफ़ी..’दोस्ताना’

नंबर  26 लुई शमशा उई .. लता-नितिन मुकेश .. “क्रांति”

नंबर 16 चल चमेली .. लता-सुरेश वाडकर .. “क्रोधी”

नंबर 12 एक रास्ता दो रही..रफ़ी-किशोर..’राम बलराम’

नंबर 10 जॉन जॉनी जनार्दन..रफी, “नसीब”

नंबर  08 मेरे जीवन साथी ..एसपीबी-अनुर्धा .. “एक दूजे के लिए”

नंबर  07 मार्च गई मुजे..किशोर-आशा..’जुदाई’

नंबर  06 चना ज़ोर गरम..किशोर, रफ़ी, किशोर, एन मुकेश .. “क्रांति”

नंबर  05 तेरे मेरे बीच मैं..लता/एसपीबी..’एक दूजे के लिए’

नंबर  03 चल चल मेरे भाई .. रफ़ी, अमिताभ .. “नसीब”

नंबर  02 जिंदगी की ना टूटी लादी..लता-एन मुकेश..’क्रांति’

1982

नंबर  31 मेघा रे मेघा रे..लता-सुरेश वाडकर..”प्यासा सावन”

नंबर  29 मेरी किस्मत में तू नहीं शायद .. लता-सुरेश वाडकर “प्रेम रोग”

नंबर  28 मेरे दिलदार का बकपन..रफ़ी-किशोर..”दीदार-ए-यार’

नंबर  25 सारा दिन सत्ते हो..किशोर-आशा..’रास्ते प्यार के’

नंबर  21 मेरे महबूब तुझे सलाम..रफ़ी-आशा। ”बगावत”

नंबर  20 अपने अपने मियां पे..आशा..”अपना बना लो’

नंबर  18 खातून की खिदमत मैं…किशोर…”देश प्रेमी”

नंबर  13 छोड मजा हाट ..किशोर-आशा .. “फिफ्टी फिफ्टी”

नंबर  12 मैं तुम मैं समां…एसपीबी-आशा..”रास्ते प्यार के”

नंबर  10 मोहब्बत है क्या चीज़..लता-सुरेश..”प्रेम रोग”

नंबर  09 प्यार का वादा फिफ्टी फिफ्टी ..आशा-किशोर ..”फिफ्टी फिफ्टी”

नबर  07 है राजू है डैडी..राजेश्वरी-एसपीबी .. “एक ही भूल”

नंबर 05 मैं हूं प्रेम रोगी .. सुरेश वाडकर .. “प्रेम रोग”

1983

1963 के बाद से दूसरी बार, यह पाया गया कि पहले TEN में LP गाने गायब हैं।

नंबर 29 ये अंधा कानून है ..किशोर कुमार .. “अंधा कंतों”

नंबर 25 ज़िंदगी मौज उड़ने का नाम ..महेंद्र कपूर “अवतार”

नंबर 19 लिखानेवाले ने लिख डाले .. लता-सुरेश वाडकर .. “अर्पण”

नंबर 12 मेरी किस्मत मैं तू नहीं शायद। लता-सुरेश वाडकर “प्रेम रोग”

1984

नंबर 26 लंबी जुदाई .. रेशमा … “हीरो”

नंबर 21 बिच्छू बालक गया ..किशोर-आशा “इंकलाब”

नंबर 17 मुझे पीने का शंख नहीं .. शब्बीर-अनुराधा “कुली”

नंबर 11 डिंग डोंग ओ बेबी एक गाना गाओ .. मनहर उधास-अनुराधा पंडवाल .. “हीरो”

नंबर 10 प्यार करनेवाले कभी ..मनहर उधास- लता “हीरो”

नंबर  08 ऊई मार्गई डॉ बाबू..अलका दग्निक – शैलेंद्र सिंह “घर एक मंदिर”

नंबर  05 दोनो जवानी के मस्ती मैं .. शब्बीर – आशा .. “कुली”

नंबर 01 तू मेरा जानू है। अनुराधा-मन्हार … “हीरो”

1985

नंबर  32 मन क्यों बेहका .. लता-आशा .. “उत्सव”

नंबर  26 दिल बेकरार था दिल बेकरार है..अनुराधा-शब्बीर..’तेरी मेहरबानियां’

नंबर  18 तेरी मेहरबानियां..शब्बीर कुमार..’तेरी मेहरबानियां’

नंबर  15 जिंदगी हर कदम .. लता-शब्बीर ..”मेरी जंग”

नंबर  14 ज़िहाल-ए-मुश्किल .. लता-शब्बीर … “गुलाम”

नंबर  10 श्री देवी तू नहीं .किशोर कुमार… “सीराफोरश”

नंबर  09 तुम याद न आया करो..शब्बीर-लता..’ जीने नहीं दूंगा’

नंबर  05 चाह लाख तूफान आए..लता-शब्बीर..प्यार झुकता नहीं’

नंबर  02 तुमसे मिल के ना जाने क्यों .. शब्बीर-कविता “प्यार झुकता नहीं”

1986

एक बार फिर टॉप थ्री गाने लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के हैं

नंबर  38 ओ मिस दे दे किस ..सुरेश वाडेकर-शैलेंद्र सिघ … “लव 86”

नंबर  35 तू कल चला जाएगा…मोहम्मद अजीज-मन्हर..”नाम”

नंबर  34 बोल बेबी बोल रॉक-एन-रोल ..किशोर-एस जानकी .. “मेरी जंग”

नंबर  29 भला है बुरा है… अनुराधा..”नसीब अपना अपना”

नंबर  27 एक लड़की जिस्का नाम..मोहम्मद अजीज-कविता…”आग और शोला”

नंबर  26 अमीरों के शाम ..मोहम्मद अजीज…’नाम’..

नंबर  23 मायका पिया बुलावे .. सुरेश वाडकर-लता .. “सुर संगम”

नंबर  17 मन क्यों बेहका .. लता-आशा ..”उत्सव”

नंबर  15 प्यार किया है .. शब्बीर-कविता “प्यार किता है प्यार करें”

नंबर  12 चिचि आई है.. पंकज उहदेस “नाम”

नंबर  11 बहरों की रंगिनीयों ..शब्बीर .. “नसीब अपना अपाना”

नंबर  07 गोरी का साजन..एस जानकी-मोहम्मद अजीज..आखिरी रास्ता”

नंबर  05 जिंदगी हर कदम..लता-शब्बीर..’मेरी जंग’

नंबर  03 हर करम अपना करेंगे .. कविता-मोहम्मद अजीज .. “कर्म”

नंबर  02 दुनिया मैं कितना घुम है..मोहम्मद अजीज..’अमृत’

नंबर  01 यशोदा का नंदलाला … लता मंगेशकर … “संजोग”

1987

नंबर  26 ना तुमने किया ना मैंने किया … लता … “नचे मयूरी”

नंबर  24 राम राम बोल..शब्बीर-अलका-कविता..”हुकुमत”

नंबर  19 नाम सारे..मोहम्मद अजीज-लता… ”सिंदूर”

नंबर  14 हवा हवाई .. कविता .. “मिस्टर इंडिया”

नंबर  13 डी डी डीड फुटबॉल..कविता..मिस्टर इंडिया”

नंबर  11 कराटे है हम प्यार..किशोर-कविता..’मिस्टर इंडिया’

नंबर  08 अमीरों की शाम..मोहम्मद अजीज..’नाम’

नंबर  05 तूने बैचैन इतना किया..मोहम्मद अजीज..”नगीना”

नंबर  04 मैं तेरी दुशमन… लता….”नगीना”

नंबर  03 न जयो परदेश..कविता.”कर्मा”

नंबर  01 चिट्ठी  आई है .. पंकज उधास .. “नाम”

1988

नंबर  27 लोग जहां पर रहते हैं..सुरेश-मोहम्मद अजीज-कविता..प्यार का मंदिर’

नंबर  25 फूल गुलाब का … अनुराधा-मोहम्मद अजीज .. “कीवी हो तो ऐसी”

नंबर  22 मैंने ही एक गीत लिखा है… शब्बीर कुमार..”हमारा खांडन”

नंबर  17 पतज़ड़ सावन बसंत बहार..सुरेश वाडकर-लता, “सिंदूर”

नंबर  13 कह दो की तुम मेरी हो .. अनुराधा-अमित कुमार .. “तेज़ाब”

नंबर  12 जब प्यार किया..मोहम्मद अजीज-अनुराधा..’वतन के रखवाले’

नंबर  11 आज फिर तुम से प्यार आया है..अनुराधा-पंकज उहदेस “दयावान”

नंबर  09 एक दो तीन चार..अलका याज्ञनिक/अमित कुमार…”तेज़ाब”

नंबर  07 ऊँगली  मैं अंगुठी .. मोहम्मद अजीज-लता, “राम अवतार”

नंबर  02 तुझे इतना प्यार करेन..लता-शब्बीर,। ” ”कुदरत का कानून”

1989

नंबर 19 चाहे तू मेरी जान ले ले..जॉली मुखर्जी..”दयावान”

नंबर 18 दिल तेरा किसने तोड़ा..मोहम्मद अजीज..”दयावान”

नंबर 10 मुझसे तुमसे है बिल्ली का बच्चा … मनहर उधास-अनुराधा “राम लखन”

नंबर 08 सो गया ये जहान..नितिन मुकेश, अलका, शब्बीर “तेज़ाब”

नंबर 07 तेरे लखन ने बड़ा दुख..लता मंगेशकर..’राम लखन’

नंबर 06 कहदो के तुम हो .. अनुराधा-अमित कुमार .. “तेज़ाब”

नंबर 04 हम तुम्हारे इतन प्यार करेंगे .. अनुराधा-मोहम्मद अजीज … “बीस साल बाद”

नंबर 01 एक दो का चार..मोहम्मद अजीज.. “राम लखन”

1990

नंबर  25 तेरा बीमार  मेरा दिल..मोहम्मद अजीज-कविता।” चालबाज़ “

नंबर  21 कहना ना तुम ये किस से..सलमा आगा-मोहम्मद अजीज..”पति पत्नी और तवायफ”

नंबर 19 ना जाने कहां से आई है..अमित-कविता- “चलबाज़”

नंबर  05 जुम्मा चुम्मा दे दे… सुदेश भोंसले..”हम”

1991

नंबर 19 इमली का बूटा .. सुदेश भोंसले-मोहम्मद अजीज ..”सौदागर”

नंबर 15 कागज़ कलाम दावत .. मोहम्मद अजीज-शोआ जोशी .. “हम”

नंबर 11 जां तुम चाहो जहां ..अमित कुमार-अलका याज्ञनिक “नरसिंह”

नंबर 09 इलु इलु क्या है..मनहर-कविता.. “सौदागर”

नंबर 05 सौदागर सौदा कर..कविता-मन्हार-सुखविंदर सिंह। “सौदागर”

1992

नंबर  22 तू रूप की रानी ..अमित कुमार-कविता .. “कमरे की रानी चोरों का राजा”

नंबर  13 पी पी पिया .. अलका-उदित नारायण .. “प्रेम दीवाने”

नंबर  03 तू मेज़ कुबुल मैं तुझे कुबुल ..मोहम्मद अजीज-कविथा.. “खुदा गवाह”

1993

नंबर  23 मैं तेरा आशिक हूं .. रूप कुमार राठौड़  “गुमराह”

नंबर 16 नायक नहीं कहलनायक हूं मैं…विनोद राठौड़-कविता..”खलनायक”

नंबर  01 चोली के पिछे  क्या है … अलका याग्निक -इला अरुण “खलनायक”

1993 से 1998 के बाद कई गाने आए लेकिन फिर बिनाका गीतमाला बंद हो गई।

बिनाका गीतमाला के इतिहास में लक्ष्मीकांत प्यारेलाल सबसे सफल संगीत निर्देशक हैं

भारत की मैंकल नामदेव व अमेरिका के ऋत्विक ने जीती अंतर्राष्ट्रीय निबंध प्रतियोगिता

पेंड्रा की मैंकल नामदेव और अमेरिका के ऋत्विक ने जीती निबंध प्रतियोगिता
-अमेरिका वर्ग से अयाति ओझा दूसरे स्थान पर रहीं
-भारत वर्ग से रायबरेली की आद्या गुप्ता दूसरे और फातिमा अंसारी तीसरे स्थान पर रहीं
-7 बच्चों के निबंध सांत्वना पुरस्कार के रुप में चुने गए
-अमेरिका में भारत के चांसरी प्रमुख रमाकांत कुमार ने की विजेता बच्चों के नामों की घोषणा
-मुख्य अतिथि अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के जनसंचार विभागाध्यक्ष डॉ कृपाशंकर चौबे ने समिति के प्रयासों की सराहना की

नई दिल्ली आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की भारत और अमेरिका इकाई द्वारा संयुक्त रूप से 12 से 18 वर्ष के बच्चों की आयोजित की गई अंतर्राष्ट्रीय निबंध प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ की मैंकल नामदेव और अमेरिका के ऋत्विक अग्रवाल विजेता रहे।

मैकल नामदेव को पुरस्कार में प्रमाणपत्र के साथ 21 सौ रुपए और ऋत्विक को 50 डालर दिए जाएंगे। इसी तरह दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे विजेता बच्चों को भी प्रमाण पत्र और नगद पुरस्कार से पुरस्कृत किया जाएगा। चयनित सभी निबंधों को ‘आचार्य पथ’ स्मारिका में भी स्थान देने का ऐलान किया गया।

विजेता बच्चों के नामों की घोषणा रविवार को आयोजित ऑनलाइन कार्यक्रम में अमेरिका में भारत के चांसरी प्रमुख रमाकांत कुमार ने की। करतल ध्वनि से सभी विजेता बच्चों को बधाई दी गई। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में अमेरिका वर्ग से ऋत्विक अग्रवाल प्रथम और अयाति ओझा दूसरे स्थान पर रही। भारत वर्ग से मैंकल नामदेव प्रथम, आद्या गुप्ता द्वितीय और फातिमा अंसारी तीसरे स्थान पर रहीं। तमिलनाडु की प्रतिभागी संजना एच, कात्यायनी त्रिवेदी, हिमांशी सिंह, गुनगुन मिश्रा, श्रवण कुमार मिश्रा, शान्तनु पांडेय और पंकज कुमार के निबंध भी सराहे गए। सभी को सांत्वना पुरस्कार देने की घोषणा की गई। विजेता बच्चों ने अपने-अपने निबंध भी पढ़कर सुनाए।

पुरस्कार वितरण समारोह के मुख्य अतिथि एवं अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग के अध्यक्ष डॉ. कृपा शंकर चौबे ने सभी विजेता बच्चों को बधाई देते हुए कहा कि जब हिंदी की विभिन्न विधाओं पर संकट गहरा रहा है ऐसे समय में आचार्य द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति द्वारा बच्चों के लिए निबंध प्रतियोगिता आयोजित करना बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य है। बच्चे के अंदर एक रचना छुपी होती है और उस रचना को निखारने एवं सामने लाने का अवसर देना निहायत जरूरी है।

समिति की अमेरिका इकाई की अध्यक्ष श्रीमती मंजु मिश्रा ने सभी प्रतिभागी बच्चों के साथ- साथ कार्यक्रम में उपस्थित निर्णायक मंडल की सदस्य प्रोफेसर नीलू गुप्ता (अमेरिका), डॉ. पद्मावती (चेन्नई), डॉ भारती सिंह (नोएडा), अनुपम परिहार (प्रयागराज), डॉ. सुमन फुलारा (उत्तराखंड) और बद्री दत्त मिश्र (रायबरेली) का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि हिंदी को बचाने और बढ़ाने के लिए भारत के साथ-साथ प्रवासी भारतीयों के बच्चों को मातृभाषा से जोड़े रखने के ही यह छोटे-छोटे प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारत से करीब 122 निबंध प्राप्त हुए।

भारत इकाई के अध्यक्ष विनोद शुक्ल ने कहा कि हिंदी को नया व्याकरण और भाषा देने वाले आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के योगदान को आज सभी स्वीकार कर रहे हैं। उनकी स्मृतियों को संरक्षित करने में समाज जागृत हो चुका है लेकिन सरकार का जागृत होना बाकी है।

आभार ज्ञापित करते हुए समिति के संयोजक गौरव अवस्थी ने कहा कि आचार्य द्विवेदी स्मृति संरक्षण अभियान का यह 25वां वर्ष है। सभी के प्रयासों और सहयोग से आचार्य द्विवेदी की स्मृतियां सात समंदर पार तक पहुंचने में सफल हुई हैं। भविष्य में भी ऐसा ही सहयोग बनाए रखने का अनुरोध किया।

कार्यक्रम का संचालन अमेरिकी इकाई की वरिष्ठ सदस्य श्रीमती रचना श्रीवास्तव ने किया और अमेरिका की शोनाली श्रीवास्तव ने सुमधुर स्वर में सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। कार्यक्रम में अमेरिकी इकाई की सदस्य डॉ कुसुम नैपसिक, श्रीमती ममता त्रिपाठी, गणेश दत्त, सुश्री नीलम सिंह, श्रीमती संगीता द्विवेदी, सुधीर द्विवेदी, करुणा शंकर मिश्रा, अभिषेक द्विवेदी आदि उपस्थित रहे।

आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति अंतर्राष्ट्रीय निबंध प्रतियोगिता का पुरस्कार वितरण एवं आशीर्वाद समारोह 22 मई रविवार को


आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति अंतर्राष्ट्रीय निबंध प्रतियोगिता का पुरस्कार वितरण एवं आशीर्वाद समारोह 22 मई 2022 रविवार को भारतीय समय के अनुसार सुबह 8:00 बजे ऑनलाइन आयोजित किया गया है।
समारोह में बतौर मुख्य अतिथि रमाकांत कुमार (चांसरी प्रमुख, भारतीय कौंसलावास सैनफ्रांसिस्को-अमेरिका) और डॉ. कृपा शंकर चौबे (अध्यक्ष-जनसंचार विभाग, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा-महाराष्ट्र) निबंध प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने वाले भारत और अमेरिका के बच्चों को आशीर्वाद एवं पुरस्कार प्रदान करेंगे।
पुरस्कार वितरण एवं आशीर्वाद समारोह का लाइव प्रसारण हमारी भाषा हिंदी फेसबुक पेज पर भी किया जाएगा। आपकी उपस्थिति हम सबका उत्साहवर्धन करेगी।
यह जानकारी आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की श्रीमती मंजु मिश्रा अध्यक्ष अमेरिका इकाई एवं विनोद शुक्ल अध्यक्ष भारत इकाई ने संयुक्त रूप से दी।

आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति निबंध प्रतियोगिता 22 को

आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति निबंध प्रतियोगिता 22 को

रायबरेली। आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की स्मृति में भारत और अमेरिका के बच्चों की निबंध प्रतियोगिता आयोजित की गई है। प्रतियोगिता के विजेताओं की घोषणा 22 मई को ऑनलाइन कार्यक्रम में की जाएगी।


आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की अमेरिका इकाई की अध्यक्ष श्रीमती मंजू मिश्रा ने बताया कि आचार्य द्विवेदी की जयंती 9 मई के उपलक्ष में 18 वर्ष के बच्चों की यह प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। छात्र छात्राओं के लिए निबंध के तीन विषय निर्धारित किए गए हैं।
निर्धारित किए गए तीन विषयों-
1-आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के लेखन की वर्तमान युग में प्रासंगिकता,
2-हिंदी को युवा वर्ग में लोकप्रिय कैसे बनाया जाए
3-हिन्दी की विदेशों में गूंज; पर ही निबंध स्वीकार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि निबंध भेजने की अंतिम तारीख 15 मई है। अंतिम तिथि के बाद कोई भी निबंध स्वीकार नहीं किया जाएगा। निबंध प्रतियोगिता में भाग लेने वाले छात्र छात्राएं अपने निबंध गूगल फॉर्म भरते समय ही भेज सकेंगे।
समिति की  भारत इकाई के अध्यक्ष विनोद शुक्ला ने बताया कि पुरस्कार समारोह को भारत और अमेरिका के हिंदी के विद्वान संबोधित करेंगे। विजेता बच्चों को भी अपने निबंध पढ़ने का अवसर प्रदान किया जाएगा। 

आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति निबंध प्रतियोगिता

भारत व अमेरिका में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति – निबंध प्रतियोगिता का आयोजन। ज़ूम के माध्यम से किया जाएगा कार्यक्रम का आयोजन।


लखनऊ। हमारी भाषा हिंदी तथा आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की भारत एवं अमेरिका इकाई द्वारा आयोजित ‘आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति निबंध प्रतियोगिता’ में भाग लेने के लिए भारत एवं अमेरिका के 12 से 18 वर्ष की उम्र के सभी छात्रों का स्वागत है। यह जानकारी देते हुए आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी समिति अमेरिका की अध्यक्ष मंजू मिश्रा ने बताया कि कार्यक्रम का आयोजन ज़ूम के माध्यम से किया जाएगा तथा इसका लाइव प्रसारण हमारी भाषा हिंदी के फ़ेसबुक पेज से किया जाएगा।

Program Details / कार्यक्रम का समय :

21 मई, 2022 शाम 7.30 बजे PST (कैलिफ़ोर्निया समय)
22 मई, 2022 प्रात: 8.00 बजे IST (भारतीय समय)

इच्छुक प्रतिभागी इस गूगल फॅार्म में प्रतिभागिता आवेदन के साथ सूची में दिए गए विषयों में से किसी एक विषय पर 250 – 300 शब्दों का निबंध 15 मई, 2022 तक जमा कर दें। विजेताओं को पुरस्कार के साथ कार्यक्रम में अपने निबंध पढ़ कर सुनाने का अवसर भी प्रदान किया जाएगा। सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा ।पुरस्कृत निबंध आचार्य पथ स्मारिका में भी प्रकाशित किए जाएंगे।


https://forms.gle/qTcWbdb7o9jm9fMTA

कार्यक्रम का आयोजन ज़ूम के माध्यम से किया जाएगा तथा इसका लाइव प्रसारण हमारी भाषा हिंदी के फ़ेसबुक पेज से किया जाएगा। आवेदन करने वाले सभी प्रतिभागियों ज़ूम लिंक तथा अन्य आवश्यक सूचना ईमेल के द्वारा भेजी जाएगी।

Essay Topics / निबंध के विषय :

  1. वर्तमान समय में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के विचारों की प्रासंगिकता
  2. युवा वर्ग में हिंदी को कैसे लोकप्रिय बनाया जाए
  3. विदेशों मे हिंदी की गूंज

Competition Rules / प्रातिभागिता के नियम :

  1. निबंध भेजने की अंतिम तिथि – 15 मई, 2022
  2. आयु सीमा : 12 से 18 वर्ष
  3. शब्द सीमा 250 – 300 ( 300 शब्दों से अधिक होने पर निबंध पर विचार नहीं किया जाएगा)

आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी समिति अमेरिका की अध्यक्ष मंजू मिश्रा ने अनुरोध किया है कि यह संदेश ज्यादा से ज्यादा लोगों तक प्रसारित करने में अपना सहयोग प्रदान करें।

वजीर-ए-आजम पाकिस्तान भी हुए मोदी के मुरीद!

इस्लामाबाद (एजेंसी)। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मुरीद हो गए हैं। अपनी गद्दी पर मंडरा रहे खतरे के बीच उन्होंने रविवार को भारत सरकार की विदेश नीति की तारीफ में कसीदे पढ़े। खैबर पख्तूनख्वा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए खान ने कहा कि हमारे पड़ोसी की विदेश नीति अपने लोगों के लिए है। भारत क्वाड का सदस्य है लेकिन प्रतिबंधों के बावजूद वह रूस से तेल खरीद रहा है।

खैबर पख्तूनख्वा के मलकंद जिले की दरगई तहसील में एक रैली को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के वजीर-ए-आजम इमरान खान ने कहा कि विपक्ष उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर जनता के साथ धोखा कर रहा है। वह माफ करने और अपनी पार्टी के बागी सांसदों को वापस लाने के लिए तैयार हैं। गौरतलब है कि विपक्ष लगातार दावा करता रहा है कि पीटीआई (इमरान खान की पार्टी) गठबंधन के कई दल उनके साथ संपर्क में हैं, जो अविश्वास प्रस्ताव में इमरान सरकार के खिलाफ वोट देंगे। पाकिस्तानी लोगों को संबोधित करते हुए इमरान खान ने अपने राजदूतों पर राजनयिक प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने का आरोप लगाया और कहा कि वे भारत को यह बताने से डरते हैं कि उन्होंने पाकिस्तान से क्या कहा, जैसे यूक्रेन पर रूसी हमले की आलोचना करना। इस जनसभा में चौंकाने वाली बात यह रही कि इमरान खान ने खुले मंच से भारत की तारीफों के पुल बांधे।

भारत को करता हूं सलाम: इमरान
इमरान खान ने कहा, ‘मैं आज भारत को सलाम करता हूं। उन्होंने हमेशा एक स्वतंत्र विदेश नीति का पालन किया है। आज भारत का अमेरिका के साथ गठबंधन है और वह रूस से तेल भी खरीद रहा है जबकि प्रतिबंध लागू हैं क्योंकि भारत की नीति अपने लोगों के लिए है। इमरान खान ने इस जनसभा में पीटीआई के बागी सांसदों को संबोधित करते हुए कहा कि पूरा देश समझ जाएगा कि सांसदों ने चोरों के पक्ष में वोट देकर अपना विवेक बेच दिया है।

इमरान रचेंगे इतिहास?
आगामी 2023 को पाकिस्तान में आम चुनाव होने हैं, लेकिन अभी से ही इमरान खान की कुर्सी खतरे में है। पाकिस्तान में विपक्ष एकजुट है, साथ ही इमरान की पार्टी के कई सांसद भी उनके खिलाफ हैं और इन सबके बीच आगामी 25 मार्च को नेशनल असेंबली में उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा। अगर यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाता है तो मतदान होगा। सांसदों के गणित में अभी इमरान सरकार अल्पमत में नजर आ रही है। पाकिस्तान के 75 साल के इतिहास में पाकिस्तान के एक भी प्रधानमंत्री ने अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं किया है। इमरान खान से पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को पनामा मामले में दोषी ठहराते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अयोग्य घोषित कर दिया था और उसके बाद नवाज शरीफ को इस्तीफा देना पड़ा था।

बाजवा ने कहा पद छोड़ें इमरान– यह भी ध्यान योग्य है कि पाकिस्‍तान में अब राजनीतिक संकट अपने चरम पर पहुंचता दिख रहा है। एकजुट विपक्ष अब इमरान खान सरकार के खिलाफ अपने अविश्‍वास प्रस्‍ताव को सोमवार को नैशनल असेंबली के अध्‍यक्ष के पास ले जाएगा। नैशनल असेंबली के अध्‍यक्ष अगर इस प्रस्‍ताव को स्‍वीकार कर लेते हैं तो पाकिस्‍तानी संसद में अविश्‍वास प्रस्‍ताव पर मतदान 28 मार्च होगा। इस बीच खुफिया सूत्रों से जानकारी मिली है कि इमरान खान पर इस्‍तीफे के लिए दबाव बन रहा है और आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा और आईएसआई चीफ नदीम अंजुम ने उन्‍हें इस्‍लामिक देशों के संगठन (OIC) की बैठक के बाद पद छोड़ने के लिए कह दिया है।

सेना के लाडले रह चुके इमरान खान को दोबारा मौका नहीं- हिंदुस्‍तान टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक इससे पहले इमरान खान की पार्टी ने सरकार बचाने के लिए पूर्व सेना प्रमुख जनरल राहिल शरीफ को मध्‍यस्‍थता के लिए सऊदी अरब से बुलाया था जो संभवत: फेल हो गया है। जनरल राहिल शरीफ ने इमरान खान की ओर से जनरल बाजवा से मुलाकात की लेकिन वह उन्‍हें मना नहीं पाए। जनरल बाजवा और अन्‍य वरिष्‍ठ जनरलों ने कहा कि सेना के लाडले रह चुके इमरान खान को दोबारा मौका नहीं दिया जाए। नई दिल्‍ली के सूत्रों ने बताया कि पाकिस्‍तानी सेना का आंकलन है कि इमरान खान का इस्‍तीफा दे देना ही ठीक रहेगा क्‍योंकि आर्थिक संकट के बीच वर्तमान राजनीतिक संकट देश के हित में नहीं है।

होली पर पाकिस्तान से नहीं हुआ मिष्ठान का आदान प्रदान

जैसलमेर। पिछले दिनों भारतीय मिसाइल के गलती से पाकिस्तानी हवाई सीमा में फायर होने से दोनों देशों के बीच रिश्तों में कड़वाहट का असर होली के त्योहार पर भी देखने को मिला। इस बार इस त्योहार पर दोनों देशों की तरफ से होली की मिठाई का आदान-प्रदान नहीं हुआ। हालांकि इसको लेकर अभी तक कोई भी आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है लेकिन सूत्रों ने बताया कि इस बार होली के त्योहार पर दोनों देशों में मिठाई का आदान-प्रदान नहीं हुआ जबकि इस बार 26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर रिश्तों में मिठास थी लेकिन मिसाइल वाली घटना के बाद रिश्तों में इस कड़वाहट को देखा जा रहा है।

रिश्तों की कड़वाहट नहीं हुई होली पर दूर- सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान द्वारा मिसाइल की घटना को गलत तरीके से पेश किए जाने से भारत भी नाराज है। भारत द्वारा गलती स्वीकार किए जाने के बाद भी उस ओर से गलत बयानबाजी से भारत नाराज है। बताया ये भी जा रहा है कि भारत ने पाकिस्तान से बधाई और मिठाई लेने से इनकार किया है। बदले में भारत द्वारा जो मिठाई दी जाती है वह भी नहीं दी गई। दरअसल पुलवामा हमले के बाद से रिश्तों में आई तल्खी धीरे धीरे कम हुई थी तथा दीवाली से रिश्तों में मिठास आनी शुरू हुई थी। मगर कुछ दिन पहले गलती से सीमा पार जा गिरी मिसाइल कीं वजह से पाकिस्तान में पैदा हुई रिश्तों की कड़वाहट को होली पर दूर किया जाना था। मगर इस बार होली पर ये सब नहीं हो पाया।

मिसाइल गिरी थी पाकिस्तान के इलाके में- उल्लेखनीय है कि नौ मार्च को रूटीन मेंटेनेंस के दौरान तकनीकी खराबी के चलते एक मिसाइल दुर्घटनावश फायर हो गई थी। भारत सरकार ने इसे गंभीरता से लिया और उच्चस्तरीय कोर्ट ऑफ इंक्वायरी का आदेश दे दिया है। ये जानने में आया है कि मिसाइल पाकिस्तान के इलाके में गिरी थी।

दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता बने पीएम मोदी, बाइडन, जॉनसन को भी पछाड़ा

दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता बने पीएम मोदी, बाइडन, जॉनसन को भी पछाड़ा

नई दिल्ली (एजेंसी)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर से दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता चुने गए हैं। ग्लोबल लीडर अप्रूवल ट्रैकर मॉर्निंग कंसल्ट की ओर से जारी की गई नेताओं की सूची में पीएम मोदी को 77 फीसदी अप्रूवल रेटिंग मिली है। इस रेटिंग के साथ वह पहले स्थान पर हैं। मॉर्निंग कंसल्टेंट की ओर से डेटा जारी करने के साथ कहा गया कि, 13 देशो में सबसे ज्यादा अप्रूवल रेटिंग पीएम मोदी की है, जो दिखाता है कि वह कितने लोकप्रिय नेता हैं।

इस सूची में पीएम मोदी के बाद दूसरे स्थान पर मेक्सिको के मैनुअल लोपेज हैं, जिन्हें 63 प्रतिशत रेटिंग मिली है। वहीं इटली के मारिया द्राघी 54 फीसदी रेटिंग के बाद सूची में तीसरे स्थान पर आते हैं। जापान के फुमियो किशिदा को 42 प्रतिशत रेटिंग मिली है। इसमें एक बात और खास है कि पीएम मोदी की डिसअप्रूवल रेटिंग भी सबसे कम 17 प्रतिशत है। संस्था के मुताबिक, पीएम मोदी 2020 से 2022 तक के अधिकांश महीनों में सबसे लोकप्रिय नेता बने रहे।

पीएम मोदी ने इस सूची में अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन, ब्रिटेन के पीएम बोरिस जॉनसन और कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो को भी पीछे छोड़ दिया है। सूची में जो बाइडन को 42 प्रतिशत, ट्रूडो को 41 प्रतिशत रेटिंग मिली है। वहीं जॉनसन इस सूची में सबसे निचले पायदान पर हैं। उन्हें 33 प्रतिशत रेटिंग मिली है।

द कश्मीर फाइल्स के बाद दूसरा धमाका लाल बहादुर शास्त्री; देखने के लिए हो जाएं तैयार…

कश्मीर फाइल्स के बाद दूसरा धमाका देखने के लिए हो जाओ तैयार…

लालबहादुर शास्त्री https://youtu.be/yq9TOW43TYs

लालबहादुर शास्त्री (जन्म: 2 अक्टूबर 1904 मुगलसराय (वाराणसी) : मृत्यु: 11 जनवरी 1966 ताशकन्द, सोवियत संघ रूस), भारत के दूसरे प्रधानमन्त्री थे। वह 9 जून 1964 से 11 जनवरी 1966 को अपनी मृत्यु तक लगभग अठारह महीने भारत के प्रधानमन्त्री रहे। इस प्रमुख पद पर उनका कार्यकाल अद्वितीय रहा। शास्त्री जी ने काशी विद्यापीठ से शास्त्री की उपाधि प्राप्त की भारत  की  स्वतन्त्रता के पश्चात शास्त्रीजी को उत्तर प्रदेश के संसदीय सचिव के रूप में नियुक्त किया गया था। गोविंद बल्लभ पंत के मन्त्रिमण्डल में उन्हें पुलिस एवं परिवहन मन्त्रालय सौंपा गया। परिवहन मन्त्री के कार्यकाल में उन्होंने प्रथम बार महिला संवाहकों (कण्डक्टर्स) की नियुक्ति की थी। पुलिस मंत्री होने के बाद उन्होंने भीड़ को नियन्त्रण में रखने के लिये लाठी की जगह पानी की बौछार का प्रयोग प्रारम्भ कराया। 1951 में, जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में वह अखिल भारत कांग्रेस कमेटी के महासचिव नियुक्त किये गये। उन्होंने 1952, 1957 व 1962 के चुनावों में कांग्रेस पार्टी को भारी बहुमत से जिताने के लिये बहुत परिश्रम किया।

साफ सुथरी छवि- जवाहरलाल नेहरू का उनके प्रधानमन्त्री के कार्यकाल के दौरान 27 मई, 1964 को देहावसान हो जाने के बाद साफ सुथरी छवि के कारण शास्त्रीजी को 1964 में देश का प्रधानमन्त्री बनाया गया। उन्होंने 9 जून 1964 को भारत के प्रधानमंत्री का पद भार ग्रहण किया। उनके शासनकाल में 1965 का भारत पाक युद्ध शुरू हो गया। इससे तीन वर्ष पूर्व चीन का युद्ध भारत हार चुका था। शास्त्रीजी ने अप्रत्याशित रूप से हुए इस युद्ध में नेहरू के मुकाबले राष्ट्र को उत्तम नेतृत्व प्रदान किया और पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी। इसकी कल्पना पाकिस्तान ने कभी सपने में भी नहीं की थी। ताशकंद में पाकिस्तान के प्रधानमन्त्री अयूब खान के साथ युद्ध समाप्त करने के समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद 11 जनवरी 1966 की रात में ही रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गयी। उनकी सादगीदेशभक्ति और ईमानदारी के लिये मरणोपरान्त भारत रत्‍न से सम्मानित किया गया।

लाल बहादुर शास्त्री जी के जन्मदिवस पर 2 अक्टूबर को शास्त्री जयन्ती व उनके देहावसान वाले दिन 11 जनवरी को लालबहादुर शास्त्री स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है।

श्रीवास्तव से बने शास्त्री– लालबहादुर शास्त्री का जन्म 1904 में मुगलसराय (उत्तर प्रदेश) में एक कायस्थ परिवार में मुंशी शारदा प्रसाद श्रीवास्तव के यहाँ हुआ था। उनके पिता प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक थे अत: सब उन्हें मुंशीजी ही कहते थे। बाद में उन्होंने राजस्व विभाग में लिपिक (क्लर्क) की नौकरी कर ली थी। लालबहादुर की माँ का नाम रामदुलारी था। परिवार में सबसे छोटे होने के कारण बालक लालबहादुर को परिवार वाले प्यार में नन्हें कहकर ही बुलाया करते थे। जब नन्हें अठारह महीने के हुए तो दुर्भाग्य से पिता का निधन हो गया। उनकी माँ रामदुलारी अपने पिता हजारीलाल के घर मिर्जापुर चली गयीं। कुछ समय बाद उसके नाना भी नहीं रहे। बिना पिता के बालक नन्हें की परवरिश करने में उनके मौसा रघुनाथ प्रसाद ने उसकी माँ का बहुत सहयोग किया। ननिहाल में रहते हुए उन्होंने प्राथमिक शिक्षा ग्रहण की। उसके बाद की शिक्षा हरिश्चन्द्र हाई स्कूल और काशी विद्यापीठ में हुई। काशी विद्यापीठ से शास्त्री की उपाधि मिलने के बाद उन्होंने जन्म से चला आ रहा जातिसूचक शब्द श्रीवास्तव हमेशा हमेशा के लिये हटा दिया और अपने नाम के आगे ‘शास्त्री’ लगा लिया। इसके पश्चात् शास्त्री शब्द लालबहादुर के नाम का पर्याय ही बन गया।

1928 में उनका विवाह मिर्जापुर निवासी गणेशप्रसाद की पुत्री ललिता से हुआ। ललिता और शास्त्रीजी की छ: सन्तानें हुईं, दो पुत्रियाँ-कुसुम व सुमन और चार पुत्र – हरिकृष्ण, अनिल, सुनील व अशोक। उनके चार पुत्रों में से दो दिवंगत हो चुके हैं। अनिल कांग्रेस पार्टी के एक वरिष्ठ नेता हैं जबकि सुनील शास्त्री भाजपा के नेता हैं।

देशसेवा का व्रत- संस्कृत भाषा में स्नातक स्तर तक की शिक्षा समाप्त करने के पश्चात् वे भारत सेवक संघ से जुड़ गये और देशसेवा का व्रत लेते हुए यहीं से अपने राजनैतिक जीवन की शुरुआत की। शास्त्रीजी सच्चे गांधीवादी, थे जिन्होंने अपना सारा जीवन सादगी से बिताया और उसे गरीबों की सेवा में लगाया। भारतीय स्वाधीनता संग्राम के सभी महत्वपूर्ण कार्यक्रमों व आन्दोलनों में उनकी सक्रिय भागीदारी रही और उसके परिणामस्वरूप उन्हें कई बार जेलों में भी रहना पड़ा। स्वाधीनता संग्राम के जिन आन्दोलनों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही उनमें 1921 का असहयोग आंदोलन, दांडी मार्च तथा 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन उल्लेखनीय हैं।

“मरो नहीं, मारो!”किया बुलंद- दूसरे विश्व युद्ध में इंग्लैण्ड को बुरी तरह उलझता देख जैसे ही नेताजी ने आजाद हिन्द फौज को “दिल्ली चलो” का नारा दिया, गान्धी जी ने मौके की नजाकत को भाँपते हुए 8 अगस्त 1942 की रात में ही बम्बई से अँग्रेजों को “भारत छोड़ो” व भारतीयों को “करो या मरो” का आदेश जारी किया और सरकारी सुरक्षा में यरवदा पुणे स्थित आगा खान पैलेस में चले गये। 9 अगस्त 1942 के दिन शास्त्रीजी ने इलाहाबाद पहुँचकर इस आन्दोलन के गान्धीवादी नारे को चतुराई पूर्वक “मरो नहीं, मारो!” में बदल दिया और अप्रत्याशित रूप से क्रान्ति की दावानल को पूरे देश में प्रचण्ड रूप दे दिया। पूरे ग्यारह दिन तक भूमिगत रहते हुए यह आन्दोलन चलाने के बाद 19 अगस्त 1942 को शास्त्रीजी गिरफ्तार हो गये।

गृहमन्त्री के बाद प्रधानमंत्री- शास्त्रीजी के राजनीतिक दिग्दर्शकों में पुरुषोत्तमदास टंडन और पण्डित गोविंद बल्लभ पंत के अतिरिक्त जवाहरलाल नेहरू भी शामिल थे। सबसे पहले 1929 में इलाहाबाद आने के बाद उन्होंने टण्डन जी के साथ भारत सेवक संघ की इलाहाबाद इकाई के सचिव के रूप में काम करना शुरू किया। इलाहाबाद में रहते हुए ही नेहरूजी के साथ उनकी निकटता बढ़ी। इसके बाद तो शास्त्रीजी का कद निरन्तर बढ़ता ही चला गया और एक के बाद एक सफलता की सीढियाँ चढ़ते हुए वे नेहरूजी के मंत्रिमण्डल में गृहमन्त्री के प्रमुख पद तक जा पहुँचे। और इतना ही नहीं, नेहरू के निधन के पश्चात भारत वर्ष के प्रधान मन्त्री भी बने।

जय जवान-जय किसान का नारा- उन्होंने अपने प्रथम संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि उनकी शीर्ष प्राथमिकता खाद्यान्न मूल्यों को बढ़ने से रोकना है और वे ऐसा करने में सफल भी रहे। उनके क्रियाकलाप सैद्धान्तिक न होकर पूर्णत: व्यावहारिक और जनता की आवश्यकताओं के अनुरूप थे। निष्पक्ष रूप से यदि देखा जाये तो शास्त्रीजी का शासन काल बेहद कठिन रहा। पूँजीपति देश पर हावी होना चाहते थे और दुश्मन देश हम पर आक्रमण करने की फिराक में थे। 1965 में अचानक पाकिस्तान ने भारत पर सायं 7.30 बजे हवाई हमला कर दिया। परम्परानुसार राष्ट्रपति ने आपात बैठक बुला ली जिसमें तीनों रक्षा अंगों के प्रमुख व मन्त्रिमण्डल के सदस्य शामिल थे। संयोग से प्रधानमन्त्री उस बैठक में कुछ देर से पहुँचे। उनके आते ही विचार-विमर्श प्रारम्भ हुआ। तीनों प्रमुखों ने उनसे सारी वस्तुस्थिति समझाते हुए पूछा: “सर! क्या हुक्म है?” शास्त्रीजी ने एक वाक्य में तत्काल उत्तर दिया: “आप देश की रक्षा कीजिये और मुझे बताइये कि हमें क्या करना है?” शास्त्रीजी ने इस युद्ध में नेहरू के मुकाबले राष्ट्र को उत्तम नेतृत्व प्रदान किया और जय जवान-जय किसान का नारा दिया। इससे भारत की जनता का मनोबल बढ़ा और सारा देश एकजुट हो गया। इसकी कल्पना पाकिस्तान ने कभी सपने में भी नहीं की थी।

अमेरिका ने की युद्धविराम की अपील- भारत पाक युद्ध के दौरान 6 सितम्बर को भारत की 15वीं पैदल सैन्य इकाई ने द्वितीय विश्व युद्ध के अनुभवी मेजर जनरल प्रसाद के नेत्तृत्व में इच्छोगिल नहर के पश्चिमी किनारे पर पाकिस्तान के बहुत बड़े हमले का डटकर मुकाबला किया। इच्छोगिल नहर भारत और पाकिस्तान की वास्तविक सीमा थी। इस हमले में खुद मेजर जनरल प्रसाद के काफिले पर भी भीषण हमला हुआ और उन्हें अपना वाहन छोड़ कर पीछे हटना पड़ा। भारतीय थलसेना ने दूनी शक्ति से प्रत्याक्रमण करके बरकी गाँव के समीप नहर को पार करने में सफलता अर्जित की। इससे भारतीय सेना लाहौर के हवाई अड्डे पर हमला करने की सीमा के भीतर पहुँच गयी। इस अप्रत्याशित आक्रमण से घबराकर अमेरिका ने अपने नागरिकों को लाहौर से निकालने के लिये कुछ समय के लिये युद्धविराम की अपील की।

रूस और अमरिका की मिलीभगत? आखिरकार रूस और अमरिका की मिलीभगत से शास्त्रीजी पर जोर डाला गया। उन्हें एक सोची समझी साजिश के तहत रूस बुलवाया गया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। हमेशा उनके साथ जाने वाली उनकी पत्नी ललिता शास्त्री को बहला फुसलाकर इस बात के लिये मनाया गया कि वे शास्त्रीजी के साथ रूस की राजधानी ताशकंद न जायें और वे भी मान गयीं। अपनी इस भूल का श्रीमती ललिता शास्त्री को मृत्युपर्यन्त पछतावा रहा। जब समझौता वार्ता चली तो शास्त्रीजी की एक ही जिद थी कि उन्हें बाकी सब शर्तें मंजूर हैं परन्तु जीती हुई जमीन पाकिस्तान को लौटाना हरगिज़ मंजूर नहीं। काफी जद्दोजहेद के बाद शास्त्रीजी पर अन्तर्राष्ट्रीय दबाव बनाकर ताशकन्द समझौते के दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करा लिये गये। उन्होंने यह कहते हुए हस्ताक्षर किये थे कि वे हस्ताक्षर जरूर कर रहे हैं पर यह जमीन कोई दूसरा प्रधान मन्त्री ही लौटायेगा, वे नहीं। पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के साथ युद्धविराम के समझौते पर हस्ताक्षर करने के कुछ घण्टे बाद 11 जनवरी 1966 की रात में ही उनकी मृत्यु हो गयी। यह आज तक रहस्य बना हुआ है कि क्या वाकई शास्त्रीजी की मौत हृदयाघात के कारण हुई थी? कई लोग उनकी मौत की वजह जहर को ही मानते हैं।

शास्त्रीजी को उनकी सादगी, देशभक्ति और ईमानदारी के लिये आज भी पूरा भारत श्रद्धापूर्वक याद करता है। उन्हें मरणोपरान्त वर्ष 1966 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

शास्त्रीजी की अंत्येष्टि पूरे राजकीय सम्मान के साथ शान्तिवन (नेहरू जी की समाधि) के आगे यमुना किनारे की गयी और उस स्थल को विजय घाट नाम दिया गया। जब तक कांग्रेस संसदीय दल ने इंदिरा गांधी को शास्त्री का विधिवत उत्तराधिकारी नहीं चुन लिया, गुलजारी लाल नंदा कार्यवाहक प्रधानमन्त्री रहे।

पोस्टमार्टम क्यों नहीं कराया? शास्त्रीजी की मृत्यु को लेकर तरह-तरह के कयास लगाये जाते रहे। बहुतेरे लोगों का, जिनमें उनके परिवार के लोग भी शामिल हैं, मानते है कि शास्त्रीजी की मृत्यु हार्ट अटैक से नहीं बल्कि जहर देने से ही हुई। पहली इन्क्वायरी राज नारायण ने करवायी थी, जो बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गयी ऐसा बताया गया। मजे की बात यह कि इण्डियन पार्लियामेण्ट्री लाइब्रेरी में आज उसका कोई रिकार्ड ही मौजूद नहीं है। यह भी आरोप लगाया गया कि शास्त्रीजी का पोस्ट मार्टम भी नहीं हुआ। 2009 में जब यह सवाल उठाया गया तो भारत सरकार की ओर से यह जबाव दिया गया कि शास्त्रीजी के प्राइवेट डॉक्टर आर०एन०चुघ और कुछ रूस के कुछ डॉक्टरों ने मिलकर उनकी मौत की जाँच तो की थी परन्तु सरकार के पास उसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। बाद में प्रधानमन्त्री कार्यालय से जब इसकी जानकारी माँगी गयी तो उसने भी अपनी मजबूरी जतायी।

आउटलुक पत्रिका ने खोली पोल- शास्त्रीजी की मौत में संभावित साजिश की पूरी पोल आउटलुक नाम की एक पत्रिका ने खोली। 2009 में, जब साउथ एशिया पर सीआईए की नज़र (अंग्रेजी CIA’s Eye on South Asia) नामक पुस्तक के लेखक अनुज धर ने सूचना के अधिकार के तहत माँगी गयी जानकारी पर प्रधानमन्त्री कार्यालय की ओर से यह कहना कि “शास्त्रीजी की मृत्यु के दस्तावेज़ सार्वजनिक करने से हमारे देश के अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्ध खराब हो सकते हैं तथा इस रहस्य पर से पर्दा उठते ही देश में उथल-पुथल मचने के अलावा संसदीय विशेषधिकारों को ठेस भी पहुँच सकती है। ये तमाम कारण हैं जिससे इस सवाल का जबाव नहीं दिया जा सकता।”।

ललिता के आँसू- सबसे पहले सन् 1978  में प्रकाशित एक हिन्दी पुस्तक ललिता के आँसू में शास्त्रीजी की मृत्यु की करुण कथा को स्वाभाविक ढँग से उनकी धर्मपत्नी ललिता शास्त्री के माध्यम से कहलवाया गया था। उस समय (सन् उन्निस सौ अठहत्तर में) ललिताजी जीवित थीं। यही नहीं, कुछ समय पूर्व प्रकाशित एक अन्य अंग्रेजी पुस्तक में लेखक पत्रकार कुलदीप नैयर ने भी, जो उस समय ताशकन्द में शास्त्रीजी के साथ गये थे, इस घटना चक्र पर विस्तार से प्रकाश डाला है। जुलाई 2012 में शास्त्रीजी के तीसरे पुत्र सुनील शास्त्री ने भी भारत सरकार से इस रहस्य पर से पर्दा हटाने की माँग की थी। मित्रोखोन आर्काइव नामक पुस्तक में भारत से संबन्धित अध्याय को पढ़ने पर ताशकंद समझौते के बारे में एवं उस समय की राजनीतिक गतिविधियों के बारे में विस्तरित जानकारी मिलती है।

रूस ने लगाई सोशल मीडिया पर नकेल

सोशल मीडिया पर नकेल लगाई रूस ने। Facebook, Twitter के साथ Youtube पर बैन। ‘फर्जी खबर’ चलाई तो होगी जेल।

मोस्को (एजेंसी)। रूस-यूक्रेन जंग के बीच रूस की पुतिन सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। रूस ने फेसबुक के साथ-साथ ट्विटर और यूट्यूब को भी देश में ब्लॉक कर दिया है। रुस ने आरोप लगाया है कि ये सोशल साइट्स रूसी मीडिया कंपनियों के साथ भेदभाव कर रही हैं।

रूस सेंसरशिप एजेंसी रोसकोम्नाडजोर ने कहा है कि, साल 2020 के अक्टूबर महीने से फेसबुक की ओर से रूसी मीडिया के खिलाफ भेदभाव के 26 मामले सामने आए हैं। द कीव इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने सोशल साइट फेसबुक पर प्रतिबंध लगाते हुए कहा है कि, फेसबुक रूसी मीडिया समूहों के खिलाफ भेदभाव कर रहा है। इधर, बैन के बाद फेसबुक की ओर से कहा गया है कि, प्रतिबंध से लाखों लोगों को विश्वसनीय जानकारी नहीं मिल पाएगी।बिज़नेस :

Russia-Ukraine War: रूस ने फेसबुक और ट्विटर के साथ-साथ यूट्यूब को भी को बैन  किया, BBC ने भी उठाया बड़ा कदम - Russia-Ukraine War: Russia banned Facebook  and Twitter as well as

गौरतलब है कि यूक्रेन के साथ युद्ध की शुरुआत में रूसी सरकार ने फेसबुक पर आंशिक प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद पुतिन सरकार ने पूरे रूस में फेसबुक पर बैन लगा दिया। इसके साथ ही रूसी सरकार ने अन्य सोशल साइट ट्विटर और यूट्यूब पर भी बैन लगा दिया है। इस बीच रूस के राष्ट्रपति ने एक प्रावधान पर भी मुहर लगा दी है, जिसके तहत सेना के खिलाफ जानबूझकर ‘फर्जी खबर’ फैलाने पर 15 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान किया गया है।

गौरतलब है कि रूस यूक्रेन के बीच की जंग लगातार तेज होती जा रही है। लड़ाई के 10वें दिन रूस ने यूक्रेन पर हमले भी तेज कर दिए हैं। रूसी सेना लगातार आगे बढ़ रही है। यूक्रेन पर हमले के 9वें दिन शुक्रवार को रूस की सेना और आक्रामक हो गई। रूसी सेना ने यूक्रेन को समुद्र मार्ग से काटने की कोशिश में नीपर नदी पर बसे एनेर्होदर शहर पर जम कर बमबारी की। इसी दौरान जपोरिजिया न्यूक्लियर पावर प्लांट (परमाणु ऊर्जा संयंत्र) में आग लग गई। यूरोप के सबसे बड़े इस न्यूक्लियर पावर प्लांट में लगी आग पर दमकल कर्मियों ने काबू पा लिया।

यूक्रेन पर हमले के विरूद्ध रूस में ही प्रदर्शन

यूक्रेन पर हमले के विरूद्ध रूस में ही प्रदर्शन प्रारंभ। यह कार्य रूस के साथ–साथ पूरी दुनिया में होना चाहिए। जनता को युद्ध का विरोध करना चाहिए।

अशोक मधुप

यूक्रेन पर हमला करने के लिए रूस की विश्व में आलोचना हो रही है। जगह−जगह प्रदर्शन हो रहे हैं। कहा जा रहा है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने अपने अहम के लिए दुनिया को युद्ध में धकेल दिया। यह भी खबर है कि रूस के राष्ट्रपति पुतिन हर हालात में यूक्रेन पर कब्जा चाहतें हैं। इसके लिए वह अपने 50 हजार सैनिक की बलि देने के लिए भी तैयार हैं। ऐसे हालात में रूस से ही अच्छी खबर आई है। वहां के नागरिक युद्ध का विरोध कर रहे हैं। यह कार्य रूस के साथ–साथ पूरी दुनिया में होना चाहिए। जनता को युद्ध का विरोध करना चाहिए।

यूक्रेन पर हमले के विरोध में रूस में लोगों का युद्ध के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। रूस की राजधानी मॉस्को, सेंट पीटर्सबर्ग और अन्य शहरों में शनिवार को लोग सड़क पर उतर आए और नारेबाजी की। पुलिस ने 460 लोगों को हिरासत में लिया। इसमें मॉस्को के 200 से अधिक लोग शामिल हैं।

रूस में यूक्रेन पर हमले की निंदा करने वाले ओपन लेटर भी जारी किए गए। इसमें 6,000 से अधिक मेडिकल स्टाफ, 3400 से अधिक इंजीनियरों और 500 टीचर्स ने साइन किए हैं। इसके अलावा पत्रकारों, लोकल बॉडी मेंबर्स और सेलिब्रिटिज ने भी ऐसे ही पिटीशन पर साइन किए हैं। यूक्रेन पर हमले को रोकने के लिए गुरुवार को एक ऑनलाइन पिटीशन शुरू की गई। इस पर शनिवार शाम तक 7,80,000 से अधिक लोगों ने साइन कर दिए हैं। माना जा रहा है कि यह बीते कुछ सालों में रूस में सबसे अधिक समर्थित ऑनलाइन याचिकाओं में से एक है।

रूस के अलावा जापान, हंगरी, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों में लोग यूक्रेन पर हमले की कड़ी निंदा कर रहे हैं। लोग ‘युद्ध नहीं चाहिए’ के नारे लिखे पोस्टर लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से इस युद्ध को रोकने की मांग कर रहे हैं। रूसी पुलिस ने दर्जनों शहरों में युद्ध के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले 1,700 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है।

ये भी सूचना है कि रूस की कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद युद्ध के खिलाफ हैं। कम्युनिस्ट पार्टी के दो सांसदों ने भी यूक्रेन पर हमले की निंदा की है। यह वही सांसद हैं, जिन्होंने कुछ दिन पहले पूर्वी यूक्रेन में दो अलगाववादी क्षेत्रों की स्वतंत्रता को मान्यता देने के लिए मतदान किया था। सांसद ओलेग स्मोलिन ने कहा कि जब हमला शुरू हुआ तो वह हैरान थे, क्योंकि राजनीति में सैन्य बल का इस्तेमाल अंतिम उपाय के रूप में किया जाना चाहिए। दूसरे सांसद मिखाइल मतवेव ने कहा कि युद्ध को तुरंत रोक दिया जाना चाहिए।

वरिष्ठ पत्रकार अशोक मधुप

उधर यूक्रेन से आ रही खबर अच्छी नहीं हैं। रूसी सेना सैनिक प्रतिष्ठान के अलावा सिविलियन पर भी हमले कर रही है। शहरों में घुसे रूसी सैनिक लूटपाट कर रहे हैं। खार्किव शहर पर कब्जा करने के बाद रूसी सैनिकों ने एक बैंक लूट लिया। एटीएम लूटे जा रहे हैं। सैनिक एक डिपार्टमेंटल स्टोर में घुसकर सामान भी उठाते नजर आए। यूक्रेन का दावा है कि अब तक रूसी हमले में 198 लोगों की जान जा चुकी है। इसमें 33 बच्चे भी शामिल हैं। इसके अलावा 1,115 लोग घायल हो गए हैं। यूक्रेन के हालात दिन पर दिन खराब हो रहे हैं। खाने− पीने का सामान कम पड़ गया है। रूसी हमले के बाद कीव, खार्किव, मेलिटोपोल जैसे बड़े शहरों में हर जगह तबाही दीख रही है। मिसाइल हमलों से इमारतें बर्बाद हो गई हैं। लोग खाने−पीने के सामान को तरस रहे हैं। कई जगह बच्चों से लेकर बड़े भी डर और दहशत की वजह से रोते देखे जा सकते हैं। लाखों लोग अपना शहर, देश छोड़कर बाहर जा रहे हैं। प्रत्येक व्यक्ति को अपने और अपने परिवार की चिंता है। वह जल्दी से जल्दी सुरक्षित स्थान पर पंहुच जाना चाहतें हैं। संयुक्त राष्ट्र के एक अधिकारी ने बताया कि अब तक 1.50 लाख से ज्यादा यूक्रेनी शरणार्थी पोलैंड, मोल्दोवा और रोमानिया पहुंच चुके हैं।

इस युद्ध के विरोध में रूस में जो हो रहा है, वह पूरी दुनिया में होना चाहिए। शांति स्थापना के लिए बनी एजेंसी और संगठन जब असफल हो जाएं तो जनता को इसके लिए उठना चाहिए। पिछले कुछ समय से लग रहा है कि दुनिया में अमन−शांति कायम रखने के लिए बना संयुक्त राष्ट्र संगठन अपनी महत्ता खो चुका है। वीटो पावर प्राप्त पांचों देश की दंबगई के आगे इसकी महत्ता खत्म हो गई है। ऐसे में पूरे विश्व को शांति स्थापना के लिए किसी नए संगठन को बनाने के बारे में सोचना होगा। इसके लिए आवाज बुलंद करनी होगी। आंदोलन करने होंगे। जनमत बनाना होगा।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का फैसला मानने को बाध्य नहीं पुतिन!

पुतिन मानेंगे अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का फैसला?


नई दिल्ली (एजेंसी)। यूक्रेन पर हमले को लेकर वर्तमान हालात को देखते हुए यह बिलकुल भी नहीं लगता है कि व्लादिमीर पुतिन अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का फैसला मानेंगे। वो हमले के पहले ही दिन यूक्रेन को कड़ा सबक सिखाने की धमकी दे चुके हैं। इतना ही नहीं, अमेरिका और बाकी पश्चिमी देशों ने पहले ही रूस पर इतना प्रतिबंध लगा दिया है कि पुतिन के पास इस फैसले को न मानने के सिवा कोई चारा नहीं बचा है। एक बात यह भी है कि रूस के पास भी यूएनएससी का वीटो पावर है। ऐसे में दुनिया का यह सबसे शक्तिशाली संगठन भी रूस पर कोई दबाव नहीं बना सकता है। इसलिए माना जा रहा है कि यूक्रेन के इस दांव से रूस की थोड़ी बहुत निंदा के अलावा कुछ खास असर होने वाला नहीं है।

फैसला मानने के लिए बाध्य नहीं है कोई देश-
पहले भी कई बार अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के अधिकार क्षेत्र को लेकर सवाल उठ चुके हैं। विशेषज्ञों की राय है कि कोई भी देश अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का फैसला मानने के लिए बाध्य नहीं है। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय अपना फैसला मनवाने के लिए सबसे पहले संबंधित देशों को सुझाव देता है। इसके बाद वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पास जाता है, जिससे संबंधित देश पर दबाव बनाया जा सके। लेकिन, पहले भी देखा गया है कि कई देश अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का फैसला मानने से इंकार कर चुके हैं। इसमें सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य चीन तो कुख्यात है। चीन ने दक्षिण चीन सागर पर उसके अधिकार को लेकर दिए गए अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के फैसले को मानने से साफ इंकार कर दिया था। वीटो पावर वाले देश को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का फैसला मनवाने में सुरक्षा परिषद की ताकत भी काम नहीं आती।

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय-
अंतरराष्ट्रीय न्यायालय संयुक्त राष्ट्र का एक महत्वपूर्ण न्यायिक शाखा है। इसकी स्थापना 1945 में नीदरलैंड की राजधानी द हेग में की गई थी। इस न्यायालय ने 1946 से काम करना भी शुरू कर दिया था। हर तीन साल में इसके अध्यक्ष का चुनाव किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की वेबसाइट के अनुसार, इसका काम अंतरराष्ट्रीय कानूनी विवादों का निपटारा करना और संयुक्त राष्ट्र के अंगों और विशेष एजेंसियों को कानूनी राय देना है। इसके कर्तव्यों में अंतरराष्ट्रीय कानून के हिसाब से विवादों पर निर्णय सुनाना और संयुक्त राष्ट्र की इकाइयों को मांगने पर राय देना है।

नियुक्त नहीं हो सकते एक देश के दो जज-
अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में कुल 15 न्यायाधीश होते हैं। इनका चुनाव संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद के जरिए होता है। इन जजों का कार्यकाल 9 साल का होता है। अगर कोई जज अपने कार्यकाल के बीच में ही इस्तीफा दे देता है तो, बाकी बचे कार्यकाल के लिए दूसरे जज का चुनाव किया जाता है। इनकी नियुक्ति को लेकर भी काफी सख्त प्रावधान हैं, जैसे एक ही देश के दो जज अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में नियुक्त नहीं हो सकते। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य देशों के जज हमेशा ही अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में नियुक्त होते हैं। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की आधिकारिक भाषा अंग्रेजी और फ्रेंच है। इसी भाषा में यह कोर्ट सुनवाई करता है और फैसले सुनाता है।

रूस के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय न्यायालय पहुंचा यूक्रेन

नई दिल्ली (एजेंसी)। यूक्रेन ने रूस के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) का दरवाजा खटखटाया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने रूस पर युद्ध के बहाने मासूम नागरिकों के नरसंहार का आरोप लगाया है। याचिका में रूस को सैन्य कार्रवाई रोकने का आदेश और सजा देने की मांग की गई है।

गौरतलब है कि यूक्रेन पर रूस के हमले बेकाबू होते जा रहे हैं। रूसी हमलों में अब तक सैकड़ों नागरिकों के मारे जाने की खबर है। उधर, रूस के सेंट्रल बैंक पर अमेरिका, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन ने प्रतिबंध लगा दिया है। जर्मनी समेत कई यूरोपीय देशों ने भी रूसी विमानों के लिए अपने एयरस्पेस बंद कर दिए हैं।

इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने बड़ा एलान करते हुए कहा कि उनकी तरफ से अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) में रूस के खिलाफ याचिका डाली गई है। यूक्रेन ने आरोप लगाया है कि रूस ने युद्ध के बहाने मासूम नागरिकों के खिलाफ नरसंहार किया है। यूक्रेन ने रूस को सैन्य कार्रवाई रोकने का आदेश और सजा देने की मांग उठाई है। बताया गया है कि रूस के खिलाफ इस याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई हो सकती है।

विदेश मंत्रालय तथा भारतीय दूतावास कीव, यूक्रेन द्वारा हेल्पलाइन संचालित

जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने यूक्रेन में फंसे भारतीय विद्यार्थियों एवं अन्य लोगों से संबंधित सूचना उपलब्ध कराने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रदेश स्तरीय एवं जिला स्तरीय संपर्क सूत्रों की उपलब्ध कराई जानकारी

बिजनौर। यूक्रेन में फंसे भारतीय विद्यार्थियों एवं अन्य लोगों को संभावित मदद उपलब्ध कराने के लिए भारत सरकार द्वारा स्वदेश वापसी सहित सभी आवश्यक प्रयास सुनिश्चित किए जा रहे हैं। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि यूक्रेन में उत्पन्न आपातकालीन परिस्थितियों के दृष्टिगत यूक्रेन आने जाने के लिए सभी कमर्शियल फ्लाइट बंद है तथा यूक्रेन का एयर स्पेस भी बंद है। उन्होंने बताया कि भारतीय दूतावास कीव यूक्रेन में मौजूद सभी भारतीय विद्यार्थियों एवं अन्य लोगों को संभावित मदद पहुंचाने के लिए प्रयासरत है। विदेश मंत्रालय भारत सरकार तथा भारतीय दूतावास कीव, यूक्रेन द्वारा हेल्पलाइन संचालित की जा रही है। उन्होंने उक्त हेल्पलाइन नंबर की जानकारी देते हुए बताया कि +91 11 23012113, +91 11 23014104, +91 11 23017905, नई दिल्ली स्थापित कंट्रोल रूम + 1800 118 797 तथा ईमेल आईडी situationroom@mea.gov.in पर संपर्क स्थापित किया जा सकता है।

राज्य स्तर पर कंट्रोल रूम संचालित-
जिलाधिकारी श्री मिश्रा ने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश के विद्यार्थी अथवा व्यक्ति जो यूक्रेन में मौजूद हैं, उन्हें स्वदेश लौटने की कार्यवाही के लिए राज्य स्तर पर भी कंट्रोल रूम संचालित किया गया है, जिस पर 24 घंटे संपर्क स्थापित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि राज्य स्तर पर स्थापित कंट्रोल रूम का टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर: 0522 1070 एवं मोबाइल नंबर 9454441081 तथा ईमेल आईडी rahat@nic.in है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में यूक्रेन देश में फंसे जिला बिजनौर के निवासी, की सूचना जिलाधिकारी कार्यालय, बिजनौर के फोन नंबर 01342 262295, 262031 तथा 262297 पर नोट कराई जा सकती है।

चंद्रशेखर आजाद और उनका फरारी जीवन

शहादत के 91वें साल (27 फरवरी) पर विशेष

शहादत के 91वें साल (27 फरवरी) पर विशेष

चंद्रशेखर आजाद और उनका फरारी जीवन

गुलाम भारत को आजाद कराने में अपने प्राणों का बलिदान देने वाले शहीद-ए-आजम चंद्रशेखर आजाद की शूरता-वीरता के किस्से आम हैं। काकोरी कांड के बाद आजाद; कभी हरिशंकर ब्रह्मचारी बने, कभी पंडित जी और कभी अंग्रेज सरकार के अफसर के ड्राइवर भी। क्रांतिकारी दल को मजबूत करने के लिए उन्होंने गाजीपुर के एक मठ के बीमार महंत से दीक्षा इसलिए ली कि उनके निधन के बाद मठ की संपत्ति क्रांति के काम आएगी। तीन-चार महीने महंत के मठ में समय बिताने के बाद जब संपत्ति प्राप्त करने के कोई आसार नजर नहीं आए तो वह पुनः क्रांति दल में सक्रिय हो गए। काकोरी कांड में फरारी के बाद आजाद के यह किस्से इतिहास में ही दफन होकर रह गए। आम लोगों के जेहन में उनके फरारी जीवन की जिंदगी घर नहीं कर पाई। आज उनकी शहादत का 91वां वर्ष है। आइए! आजाद के जीवन से जुड़े इन किस्सों से जुड़ा जाए..

सातार नदी का तट और हरिशंकर ब्रह्मचारी

काकोरी कांड में कई साथी तो अंग्रेज हुकूमत के हत्थे चढ़ गए लेकिन आजाद ‘आजाद’ ही रहे। हिंदुस्तानी विभीषण और अंग्रेजी सेना की खुफिया आजाद को पकड़ने के लिए पूरे देश में सक्रिय रही लेकिन आजाद पकड़े नहीं जा सके। फरार होने के बाद आजाद का अगला ठिकाना झांसी बना। खतरा देख आजाद ढिमरापुर में सातार नदी के तट पर कुटी बनाकर रहने लगे। यहां उन्होंने अपना नाम रखा ‘हरिशंकर ब्रह्मचारी’। इस बीच उनका झांसी आना-जाना भी बना रहा। ब्रह्मचारी के रूप में आजाद प्रवचन देते थे और बच्चों को पढ़ाते-लिखाते भी थे। एक दिन झांसी से साइकिल से लौटते समय इनाम के लालच में‌ दो सिपाहियों ने रोक कर उनसे थाने चलने को कहा।
सिपाहियों ने कहा-‘ क्यों तू आजाद है?’ आजाद ने उन्हें समझाते हुए कहा- आजाद जो है सो तो है। हम बाबा लोग होते ही आजाद हैं। हमें क्या बंधन? आजाद ने हर तरह से बचने की कोशिश की। सिपाहियों को हनुमान जी का डर भी दिखाया लेकिन वह मानने को तैयार नहीं हुए। सिपाहियों के साथ थोड़ी दूर चलकर आजाद बिगड़े और कहा कि तुम्हारे दरोगा से बड़े हमारे हनुमान जी हैं। हम तो हनुमान जी का ही हुक्म मानेंगे। हमें हनुमान जी का चोला चढ़ाना है। कहते हुए आजाद भाग खड़े हुए। बलिष्ठ शरीर देखकर सिपाही पकड़ने के लिए उनके पीछे भागने की हिम्मत नहीं जुटा पाए।

अचूक निशाने की अग्निपरीक्षा!

फरारी के दौरान झांसी के पास खनियाधाना के तत्कालीन नरेश खड़क सिंह जूदेव के यहां आजाद का आना-जाना हो गया। आजाद अपने साथी मास्टर रूद्र नारायण, सदाशिव मलकापुरकर और भगवानदास माहौर के साथ जूदेव के यहां अतिथि बनकर गए। वह राजा साहब के छोटे भाई बने हुए थे और उनके दरबार के अन्य लोगों के लिए ‘पंडित जी’। राजा साहब की कोठी के बगीचे में दरबार जमा हुआ था। बात निशानेबाजी की शुरू हुई। आजाद की बातें दरबार में उपस्थित ठाकुरों को पसंद नहीं आई। राजा के दरबारियों ने निशानेबाजी की परीक्षा लेनी चाही। बातों-बातों में आजाद के हाथों में बंदूक भी थमा दी गई। उनके साथी मास्टर रूद्र नारायण को आजाद की परीक्षा लेना उचित नहीं लगा। उन्हें डर था कि कहीं भेद खुल न जाए। उन्होंने बहाने से आजाद से बंदूक ले ली। भगवानदास माहौर ने बाल हठ करते हुए निशाना साधने की जिद की। बंदूक भगवानदास के हाथ में आ गई । एक पेड़ की सूखी टहनी पर सूखा अनार खोसा हुआ था। आजाद ने उन्हें अचूक निशानेबाजी की बारीक बातें बताई। भगवानदास माहौर के एक निशाने में सूखी टहनी पर खोसा हुआ अनार उड़ गया। इसके बाद माहौल सामान्य हुआ और आजाद अपने साथियों के साथ लौट आए।

बनारसी पितांबर और रेशमी कुर्ता-साफा

आजाद और उनके साथियों का क्रांतिकारी दल शुरुआती दौर में आर्थिक संकटों से गुजर रहा था। इसी बीच बनारस में क्रांति दल के साथियों को पता चला कि गाजीपुर में एक मठ के महंत बीमारी की अवस्था के चलते ऐसे लड़के की तलाश में थे, जिसको सन्यासी बनाकर मठ जिम्मेदारी सौंप दें। क्रांतिकारी दल की आर्थिक दिक्कतों को दूर करने के लिए आजाद ने अपने साथियों का वह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया, जिसमें उन्हें महंत का शिष्य बनना था। साथी लोग लेकर उन्हें गाजीपुर के मठ में पहुंचे। यहां आजाद का नाम चंद्रशेखर तिवारी बताया गया। ‘आजाद’ उपनाम की चर्चा ही नहीं की गई। पंडित लड़का पाकर महंत जी काफी खुश हुए और अगले ही दिन मठ में आजाद को दीक्षा देकर अपना शिष्य बना लिया। दीक्षा के पहले सिर मुंड़ाकर उन्हें रेशमी साफा पहनाया गया। शरीर पर कीमती बनारसी पीतांबर और रेशमी कुर्ता हल्के भगवा रंग का धारण कराया गया। माथे पर शुद्ध चंदन-केसर का लेप भी। इस सबमें मठ के हजार रुपए तक खर्च हुए होने का अनुमान भी क्रांतिकारी दल के सदस्यों ने लगाया था। आजाद मठ में करीब 4 महीने रहे। इस बीच महंत पूरी तरह स्वस्थ हो गए। आजाद को जब यह महसूस हुआ कि उनका क्रांतिकारी दल का संपत्ति प्राप्ति का सपना यहां पूरा नहीं होगा तो आजाद एक दिन चुपके से वहां से खिसक लिए।

मजदूर जीवन

छात्र जीवन में आजाद का पढ़ाई-लिखाई से ज्यादा मन युद्ध कौशल सीखने, तलवार आदि चलाने में लगता था। इसके बाद भी उन्हें तहसील में नौकरी मिल गई थी लेकिन आजाद ‘आजाद’ थे। उन्हें अंग्रेजों की नौकरी पसंद कैसे आती? एक दिन वह एक मोती बेचने वाले के साथ मुंबई चले गए। कुछ मजदूरों की सहायता से उन्हें जहाजों को रंगने वाले रंगसाज का काम भी मिल गया। मजदूरी से मिले पैसों से वह अपना जीवन चलाते थे। मजदूरों की मदद से लेटने भर की जगह भी एक कोठरी में मिली लेकिन उस घुटन भरे माहौल में आजाद का मन नहीं लगा। कभी-कभी तो वह रात भर सिनेमा हाल में बैठे रहते। नींद लगने पर ही अपने बिस्तर पर आते। मुंबई का यंत्रवत जीवन आजाद को रास नहीं आया लेकिन मजदूर जीवन का अनुभव लेकर एक दिन बनारस जाने वाली ट्रेन में बिना टिकट बैठ गए। यहां उन्नाव के शिव विनायक मिश्र से उनकी भेंट हुई। उनकी मदद से संस्कृत पाठशाला में उन्हें प्रवेश मिल गया। 1921 के असहयोग आंदोलन में संस्कृत कॉलेज बनारस पर धरना देते हुए ही वह पहली बार गिरफ्तार हुए थे और 15 बेंतों की सजा हुई थी। यहीं से बालक चंद्रशेखर तिवारी चंद्र शेखर आजाद बना और आजीवन आजाद ही रहा।

जब अंग्रेज सिपाही को पटक-पटक कर मारा

चंद्रशेखर आजाद बनारस रेलवे स्टेशन पर रामकृष्ण खत्री और बनवारी लाल (जो काकोरी केस में इकबाली मुलजिम बने और 4 वर्ष की सजा मिली थी) के साथ प्लेटफार्म पर टहल रहे थे। कुछ अंग्रेज सिपाही भी प्लेटफार्म पर थे। एक अंग्रेज सिपाही ने प्लेटफार्म पर जा रही हिंदुस्तानी नौजवान बहन के मुंह पर सिगरेट का धुआं फेंका। आजाद को अपनी हिंदुस्तानी बहन के साथ इस तरह की अभद्रता बर्दाश्त नहीं हुई और तुरंत अंग्रेज सिपाही पर झपट पड़े। लात, घूंसा थप्पड़ मारकर अंग्रेज सिपाही को गिरा दिया। अंग्रेज सिपाही इतना डर गया कि अपने दोनों हाथ ऊपर करके मार खाता रहा और कहता रहा-‘आई एम सॉरी, रियली आई एम वेरी सॉरी’। उसके अन्य साथी तो भाग ही खड़े हुए। आजाद ने तब अपने साथियों से कहा भी था कि इस साले अंग्रेज को सबक सिखाना जरूरी था ताकि आगे किसी हिंदुस्तानी बहन-बेटी के साथ छेड़खानी न कर सके।

ब्रह्मचारी का ‘ब्रम्हचर्य’ तोड़ने की वह कोशिशें

चंद्र शेखर आजाद ने देश को आजाद कराने की खातिर शादी न करने का वृत ले रखा था। आजीवन ब्रम्हचर्य भी उनका दृढ़ संकल्प था। उनके जीवन से जुड़े यह दो किस्से बड़े महत्वपूर्ण हैं। फरारी जीवन में ढिमरापुर में हरिशंकर ब्रह्मचारी के नाम से सातार नदी के किनारे रहते समय गांव की एक बाला उनके पीछे पड़ गई। किसी भी तरह उसके प्रभाव में न आने पर उस बाला ने अश्रु सरिता से मोहित-प्रभावित करने की भी कोशिश की लेकिन आजाद तो आजाद थे। गांव की बाला उनके पीछे लगाने में गांव के ही एक चतुर नंबरदार की साजिश थी। किसी भी तरह आजाद के बाला के प्रभाव में न आने पर वह नंबरदार आजाद का भक्त हो गया। उस नंबरदार ने आजाद को अपना पांचवा भाई मान लिया। उसे अपने सगे भाइयों से ज्यादा आजाद पर विश्वास हो चुका था। यहां तक कि उसने अपनी तिजोरी की चाबी भी आजाद को सौंप दी थी। बंदूकें भी उन्हीं की देखरेख में रहने लगीं। यह किस्सा स्वयं आजाद ने झांसी में अपने साथियों को सुनाया था।
दूसरा किस्सा, आजाद की एक जमींदार मित्र के घर का है। आजाद एक बार अपने धनी जमींदार मित्र के यहां रुके थे। मित्र को अचानक एक दिन के लिए बाहर जाना पड़ा। आजाद ने अन्यत्र रुकने का प्रस्ताव किया लेकिन जमींदार मित्र नहीं माने। आजाद उनके विशाल भवन के ऊपरी खंड में ठहरे थे। रात में कमरे में सो रहे थे। आधी रात के बाद जमींदार की विधवा बहन कमरे में आ गई। उसने कामेच्छा से धीरे से आजाद को जगाया। 24:00 अपने कमरे में विधवा बहन को देखकर आजाद को काटो तो खून नहीं। उन्होंने बहन को समझाया। बताया भी कि सांसारिक बंधन में बंधने का उनके पास अवसर ही नहीं है। विधवा बहन के न समझने पर आजाद बिजली की गति से बाहर निकले और तिमंजिले भवन की दीवार से नीचे कूद गए। कड़ाके की सर्दी वाली वह रात आजाद ने जंगल में एक पेड़ के नीचे गुजारी। कूदने के कारण चोट भी लगी लेकिन अपने ब्रह्मचर्य की रक्षा के लिए उन्होंने कभी कोई समझौता नहीं किया।

आजीवन आजाद रहे आजाद जी को बलिदान दिवस पर शत शत नमन!

∆ गौरव अवस्थी ‘आशीष’
रायबरेली/उन्नाव

यूक्रेन के राष्ट्रपति ने दी मोदी को ताजा हालात की जानकारी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलडोमेर जेलेंस्‍की के साथ बात की और वहां मौजूद छात्रों सहित भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और संरक्षा के प्रति भारत की गहरी चिंता से भी अवगत कराया।

राष्ट्रपति जेलेंस्की ने प्रधानमंत्री को यूक्रेन में जारी संघर्ष की स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी दी। प्रधानमंत्री ने जारी संघर्ष के कारण लोगों की मौत और सम्पत्ति के नुकसान पर गहरा दु:ख व्यक्त किया। उन्होंने हिंसा की तत्काल समाप्ति और संवाद को फिर से शुरू करने के अपने आह्वान को दोहराया तथा शांति प्रयासों में किसी भी तरह का योगदान देने की भारत की इच्छा व्यक्त की।

प्रधानमंत्री ने यूक्रेन में मौजूद छात्रों सहित भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और संरक्षा के प्रति  भारत की गहरी चिंता से भी अवगत कराया। उन्होंने भारतीय नागरिकों को तेजी से और सुरक्षित रूप से निकालने के लिए यूक्रेनी अधिकारियों द्वारा सुविधा देने की मांग की।

यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद के विकल्प

यूक्रेन पर रूस के हमले की आशंका सही साबित हो गई।रूस ने गुरुवार सुबह पांच बजे यूक्रेन पर हमला बोल दिया। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने नेशनल टेलिविजन पर हमले का ऐलान किया। धमकाने वाले अंदाज में बोले कि रूस और यूक्रेन के बीच किसी ने भी दख्ल दिया तो अंजाम बहुत बुरा होगा। लड़ाई जारी है। यूक्रेन ने रूस के सात फाइटर प्लेन गिराने का दावा किया है। रूस की सेना ने यूक्रेन के सैन्य हवाई अड्डों को निशाना बनाया है। यूक्रेन के सैन्य हवाई अड्डों को रूस की सेना द्वारा तबाह कर दिया गया है।इस कार्रवाई के बाद यूक्रेन ने सख्ती दिखाते हुए कहा कि, वह हार नहीं मानेंगे।

युद्ध शुरू हो गया तो यह भी निश्चित हो गया कि इसके परिणाम रूस और यूक्रेन पर ही असर नही छोडेंगे, पूरी दुनिया को प्रभावित करेंगे। युद्ध कभी ठीक नहीं होता। युद्ध कभी नहीं होना चाहिए। इसमें प्राकृतिक संसाधनों का तो विनाश होता ही है, मानव जाति की भी भारी क्षति होती है।देश −दुनिया का विकास प्रभावित होता है। सदियों तक इसका प्रभाव रहता है। अभी तो तेल के दाम बढे है, आगे तो मंहगाई के और ज्यादा बढ़ने की उम्मीद है।

रूस के हमले से पहले ही नाटों देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाने शुरू कर दिए हैं। अमेरिका रूस को भारी परिणाम भुगतने की धमकी दे तो रहा है किंतु वह युद्ध में भी कूदा नहीं है। युद्ध में अमेरिका और नाटो देश उतरते हैं तो यह निश्चित है कि चीन रूस का साथ देगा और फिर शुरू होगा एक नया विश्व युद्ध।

अमेरिका अगर युद्ध में नही उतरता हैं तो उसकी साख को बहुत बड़ा धक्का लगेगा। पहले ही अफगानिस्तान से भागने पर उसकी बहुत इमेज खराब हुई थी। इस हमले में उसकी चुप्पी पर उसके मित्र देशों का उससे भरोसा खत्म हो जाएगा। यह उसके लिए अच्छा नहीं होगा।

वैसे 2014 में जब रूस ने क्रीमिया पर कब्जा जमा लिया था, तब भी सब देश शांत रहे थे। रूस कब्जा करने में कामयाब रहा था। पूरी दुनिया तमाशाबीन बनी देखती रही थी। इस बार अमेरिका और उसके मित्र देश युद्ध में कूदते हैं तो नए विश्वयुद्ध की शुरूआत होगी। महाविनाश होगा, क्योंकि अमेरिका और रूस परमाणु शक्ति सपन्न देश हैं।
ये देश युद्ध में नहीं उतरते तो चीन उनकी कमजोरी का फायदा उठाएगा । वह अभी भी कहता रहा है कि अमेरिका धोखेबाज है। अमेरिका की इसी चुप्पी का फायदा उठाकर वह वियतनाम पर कब्जा करने का प्रयास करेगा। दोनों हालात ठीक नहीं हैं। ऐसे में इस आग से हम जितना बच सकें, बचने का प्रयास होना चाहिए। लड़ाई भले ही हमसे दूर हो किंतु चीन से सदा सचेत रहने की जरूरत है। कहीं वह रूस तथा अमेरिका और उसके मित्र देशों की व्यस्तता का फायदा उठाकर हमें कुचलने की कोशिश न करे!

इस हमले से ये तय हो गया कि संयुक्त राष्ट्र संघ का कोई औचित्य नहीं है क्योंकि रूस को वीटो पावर मिली हुई है। वह इसमें किसी भी प्रस्ताव को पारित नहीं होने देगा। एक भी वीटो संपन्न देश किसी भी प्रस्ताव को गिरा सकता है। वीटो पावर देश के सामने पूरी दुनिया बेकार है। यह भी स्पष्ट हो गया कि पहले भी ताकतवर दूसरे देश, उसकी संपत्ति पर कब्जा कर सकता था, आज भी। इसलिए जरूरी यह है कि इस जंगल राज में अपने को जिंदा रखना है, तो शेर बन कर रहें। ताकतवर बनें, ताकि कोई आपसे आंख मिलाने की हिम्मत न कर सके। प्रसिद्ध कवि रामधारी सिंह दिनकर ने कहा भी है, जहां शस्त्रबल नहीं, शास्त्र पछताते रोते हैं, ऋषियों को भी सिद्धि तभी तप में मिलती है, जब पहरे पर स्वंय धनुर्धर राम खड़े होते हैं।

अशोक मधुप (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

Pearlvine International Kya Hai? | पर्ल्वाइन की जानकारी

Pearlvine International Kya Hai? | पर्ल्वाइन की जानकारी

Pearlvine international kya hai: नमस्कार दोस्तों, आज हम बताएँगे कि  pearlvine international kya hai और  Pearlvine international कैसे काम करती है? सबसे पहले, यह जान लें कि Pearlvine International कोई कंपनी नहीं है और न ही कोई Investment प्लान है।

इसका कोई CMD / MD नहीं है और न ही इसकी कोई Branch है। Pearlvine का Software System 2015 से World में लॉन्च किए हैं और यह भारत में वर्ष 2018 में सक्रिय हुआ है।

यह System पिछले 5 वर्षों से 100% Safe & Secure होने का दावा कर रही है। इसमें ज्वाइन होने वाले किसी भी सदस्य पर 0% Liability है।

PEARLVINE INTERNATIONAL एक डिजिटल ग्लोबल Robotic Software base BANK है USA का, इसके FOUNDER डॉ. डेनियल जोनशन है।

यह अमेरिका के TAXAS शहर से 2015 से चल रही है, भारत मे यह 2018 में डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने के लिए लाया गया है। pearlvine international kya hai.

Pearlvine International कैसे काम करती है?

यह बैंकिंग रोबोटिक सॉफ्टवेयर सिस्टम से 156 देशो में DIGITAL BANK के माध्यम से काम करती है।

जैसे- SBI का UNO ई.वॉलेट,Paytm, Google pay, Phone Pay, Whatsapp, Facebook,Google, Crowm इत्यादि काम करती है।

Pearlvine में क्या होता है?

PEARLVINE में (भारतीय बैंक की तरह ) सिर्फ एक डिजिटल खाता खोला जाता है, 30 $ डॉलर यानी ₹-2250/- रुपये से।

Pearlvine में क्यो खाता खोलना चाहिए?

PEARLVINE हमें मालिक बनने का मौका देती है साथ में अनलिमिटेड Earning का अवसर प्रदान करती है। यहां हमें इतना वेतन पैसा मिलेगा कि,आने वाली पीढ़ियां भी खत्म नहीं कर पाएगी।

Pearlvine की सिक्योरिटी तथा सर्वर की क्या गारंटी हैं?

PEARLVINE में 7 लेयर सिक्योरिटी पासवर्ड है,जो कि HACK नही किया जा सकता है।

यह दुनियां का सबसे Strong सर्वर (Cloud Flare) सर्वर (DNS,DDOS PROTECTION,SSL CERTIFICATE) से लैस है जो कि दुनियां के किसी भी कोने में ये आसानी से फ़ास्ट काम करती है।

Pearlvine में मेंबर बनने से किस प्रकार का काम करना पड़ता है?

PEARLVINE में मेंबर बनने पर डाइरेक्ट रेफरल A/C, OPEN करना पड़ता है, ठीक बैंक की तरह।

Pearlvine में काम करने पर क्या Income होता है?

PEARLVINE में काम करने पर यहां 8 प्रकार INCOME होता है :–

1. Ref. Income 50%.

2. टीम Bonus 1.25 $.

3. Upgradation Income 50%.

4. Global Autopool Income हमारे सोच से भी जायदा।

5. Royality Income 1st Rank से ही वो भी हर सप्ताह ।

6. Shopping portal आने वाला।

7. Bonanza Autopool Income.

8. Bonanza Team perf. Income. आदि।

 Pearlvine में मेंबर बन कर किसी कारणवश काम नही करने पर क्या इनकम होगा?

जी हां, PEARLVINE में आपके मेंबर बनने पर स्वतः आपके नीचे सॉफ्टवेयर लोगो को जॉइन करती है, पूरे वर्ल्ड से यहां से आपको 8 क़िस्त में 8 बार क़िस्त देती है,

कुल 43,856 डॉलर,जो कि INDIAN INR में ₹-32,89,230/- रुपया होता है।
इसे PASSIVE INCOME कहते हैं।

Pearlvine के डॉलर को भारतीय बैंक में ट्रांसफर करने का क्या नियम है?

PEARLVINE के डॉलर को भारतीय बैंक में ट्रांसफर करने से पहले आपको PEARLVINE के खाते में KYC करना होगा,साथ मे 10% टैक्स देना होगा।

PEARLVINE में दो कंडीशन क्या है?

पहला कंडीशन – आज से 8 साल के बीच 4 ग्लोबल A/C OPEN करना होगा।

दूसरा कंडीशन :- अपने लेबल या पोस्ट को प्रमोशन करके आगे बढ़ना होगा।

Pearlvine किस आधार पर 8 क़िस्त में PAYMENT करती है?

PEARLVINE हमे FOUR के मैट्रिक्स प्रणाली के आधार पर स्वतः 4/16/64/256/1024/4,096/16,384/65,536
A/C खोलती है और सबसे कुछ रकम हमे 8 क़िस्त के रूप में देती है।

सबसे महत्वपूर्ण Pearlvine को कहां से Income होता है?

1. ADD.(विज्ञापन) से,

2. USER के द्वारा DATA उपयोग करने से,

3. USER के A/C को UPGRADE करने से,

4. SOCIAL MEDIA के माद्यम से,

5. E.COMMERCE के माद्यम से,

6. NEWS CHANNEL के माद्यम से हमरे सोच से भी ज्यादा,INCOME जाता है।

Pearlvine अगर India से भाग गई तो…?

बिल्कुल सही सवाल- ये कभी नही भागेगी,क्योकि ये कोई कंपनी नहीं एक सॉफ्टवेयर है।

कारण- (1) ये MEMBER के पैसे को 100% बंटवारा कर देती है, DONATION और REWARD के माद्यम से।

30 $ डॉलर का बंटवारा :-

1- ₹ -1125/-रुपया,यानी 15 डॉलर ,डाइरेक्ट स्पॉन्सर को,
2- ₹-750/- रुपया,10 डॉलर (1.25 $× 8) स्पॉन्सर को,
3- ₹-375/- रुपया, यानी 5 डॉलर, SYSTEM GLOBAL AUTOPOOL में।

₹-2250/-रुपया=30 डॉलर।
100%/100% बंटवारा हो जाता है।

कारण- (2) :- PEARLVINE BLOCK CHAIN TECNOLOGY के आधार पर कार्य करती है।

कारण- (3) :- PEARLVINE Decentralized System है, यानी PEARLVINE के मालिक रहते हुए मालिक के हाथ मे कुछ नही रहना,यहाँ Member ही खुद का मालिक होता है।

कारण- (4) :-यह CROWD FUNDING के माद्यम से काम करती है, यानी USER के द्वारा ₹2250/-रुपया दान देने पर USER के बीच ही पैसा बाँट देती है।
यानी नए USER से पैसा लेकर पुराने USER के बीच बाँट देती है।

पहले आओ ,पहले पाओ के आधार पर।

इसलिए दोस्तो आप निश्चिंत होकर काम करे,यह कभी नही भाग सकती है।

भारत की चीन पर डिजिटल स्ट्राइक, बैन किये 54 चीनी ऐप्स

Govt Bans 54 Chinese Apps: भारत सरकार की चीन पर डिजिटल स्ट्राइक, बैन किये 54 चीनी ऐप्स

राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए भारत सरकार ने 54 चीनी ऐप्स (54 Chinese Apps Bans) पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। ये सभी 54 चीनी ऐप्लिकेशन जो देश की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकते हैं इस कारण उन्हें भारत में बैन कर दिया गया है।

भारत सरकार ने बैन किए 54 चीनी ऐप्स

समाचार एजेंसी एएनआई ने सूत्रों का हवाला देते हर बताया है, सरकार का मानना है कि ये 54 चीनी ऐप भारतीयों की गोपनीयता और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करते हैं इस कारण उन्हें बैन किया जाएगा। सूत्रों ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) औपचारिक रूप से भारत में इन ऐप्स के संचालन पर प्रतिबंध लगाने की अधिसूचना जारी करेगा।

जिन ऐप्स को भारत में बैन किया जा रहा है उनमें स्वीट सेल्फी एचडी (Sweet Selfie HF), ब्यूटी कैमरा (Beauty Camera), म्यूजिक प्लेयर (Music Player), म्यूजिक प्लस (Music Plus), वॉल्यूम बूस्टर (Volume Booster), वीडियो प्लेयर मीडिया ऑल फॉर्मेट (Video Player Media All Format), वीवा वीडियो एडिटर (Viva Video Editor), नाइस वीडियो बायदु (Nice Video Baidu), ऐपलॉक (AppLock), ड्युअल स्पेस लाइट (Dual Space Lite), और एस्ट्राक्राफ्ट (AstraCraft) जैसे ऐप्स शामिल हैं।

इनमें से अधिकांश ऐप Tencent, अलीबाबा और गेमिंग फर्म NetEase जैसी प्रमुख चीनी टेक्नोलॉजी फर्मों के हैं। इन सभी चीनी टेक्नोलॉजी फर्मों ने या तो उन ऐप्स को “रीब्रांडेड या रीक्राइस्ट” कर दिया है, जिन्हें 2020 में केंद्र द्वारा प्रतिबंधित कर दिया गया था। सूत्रों ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeITY), जिसने पहले 2020 में चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया था, ने Google Play Store को इन एप्लिकेशन को ब्लॉक करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि एमईआईटीवाई ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A द्वारा निहित शक्तियों के माध्यम से इस संबंध में आवश्यक कदम उठाए हैं।

फिलीपींस के साथ ब्रह्मोस्त्र के सौदे की दूर तक जाती गूंज


फिलीपींस को ब्रह्मोस्त्र मिसाइल बेचने का सौदा करने भारत दुनिया के उन चंद देशों के सूची में आ गया जो दूसरे देशों को शस्त्र बेचते हैं। यह भारत की बड़ी उपलब्धि है। ये खबर दुनिया भर की मीडिया में चर्चा बनी। संपादकीय लिखे गए। ब्रह्मोस्त्र की बिक्री का यह शोर इस बात का नहीं है कि भारत ने 375 मिलियन डॉलर के हथियार बेचे हैं बल्कि यह शोर इसलिए है कि देखो, दुनिया की हथियार बाजार में एक और नया बेचने वाला देश आ गया है।
ब्रह्मोस मिसाइल के लिए ये पहला विदेशी ऑर्डर है।फिलीपींस को 36 ब्रह्मोस्त्र बेची जानी है। रिपोर्टों के मुताबिक ब्रह्मोस्त्र को लेकर दक्षिण पूर्व एशिया के कुछ और देशों के साथ बातचीत की जा रही है। हम शस्त्र काफी समय से निर्यात कर रहे हैं। ब्रह्मोस्त्र को लेकर चर्चा में इसलिए आए कि यह दुनिया की आधुनिकतम मिसाइल है। चीन इसके निर्माण और टैस्टिंग को लेकर कई बार आपत्ति दर्ज करा चुका है। अभी हिंदुस्तान एयरनोटिक्स का मारीशस को एडवास लाइस् हैलिकाप्टर (एएचएल एम के −3) की एक यूनिट देने का सौदा हुआ है। मारीशस पहले भी इस कंपनी के हैलिकाप्टर प्रयोग कर रहा है। भारत ने वियतनाम के साथ भी 100 मिलियन डॉलर यानि 750 करोड़ रुपये का रक्षा समझौता किया है, जिसमें वियतनाम को भारत में बनी 12 हाई स्पीड गार्ड बोट दी जाएंगी। भारत अर्मेनिया को 280 करोड़ की रडार प्रणाली निर्यात कर रहा है। भारत 100 से ज्यादा देशों को राष्ट्रीय मानक की बुलेटप्रूफ जैकेट का निर्यात शुरू कर रहा है। भारत की मानक संस्था ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (बीआईएस) के मुताबिक, बुलेटप्रूफ जैकेट खरीददारों में कई यूरोपीय देश भी शामिल हैं। अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी के बाद भारत चौथा देश है, जो राष्ट्रीय मानकों पर ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की बुलेटप्रूफ जैकेट बनाता है। भारत में बनी बुलेटप्रूफ जैकेट की खूबी है कि ये 360 डिग्री सुरक्षा के लिए जानी जाती है।


42 देश भारत से हथियार खरीद रहे हैं। इनमें से बहुत सारे देश वो हैं, जो चीन से परेशान हैं और अब भारत हथियार देकर उनकी मदद कर रहा है।
वर्तमान भारत सरकार रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने पर ज़ोर देती रही है। इसके लिए कई वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध भी लगाया है। भारत रक्षा क्षेत्र में निर्यात बढ़ाने का लक्ष्य लेकर भी चल रहा है। पिछले साल दिसंबर में रक्षा मंत्रालय ने संसद में एक सवाल के जवाब में बताया कि 2014-15 में भारत का रक्षा क्षेत्र में निर्यात 1940.64 करोड़ रुपये था । 2020-21 में ये बढ़कर 8,435.84 करोड़ रुपये हो गया।साल 2019 में प्रधानमंत्री ने रक्षा उपकरणों से जुड़ी भारतीय कंपनियों को साल 2025 तक पांच अरब डॉलर तक के निर्यात का लक्ष्य दिया।
सुपरसोनिक मिसाइल। रैडार सिस्टम । और भी बहुत कुछ।इनकी बिक्री के लिए आज बहुत बड़ा बाजार मौजूद है और सब हमारे बड़े शत्रु चीन पैदाकर रहा है। चीन के अपनी सीमा से सटे देशों से ही नहीं सुदूरवर्ती देशों से विवाद है। साउथ चाइना-सी में चीन की बढ़ती दादागिरी से फिलीपींस सहित दक्षिणी पूर्वी एशियाई देश परेशान हैं। दक्षिणी पूर्वी एशियाई देशों ने चीन को जवाब देने की ठानी है। पांच देश- फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ब्रूनेई और इंडोनेशिया का मिलकर एक गठबंधन बनाने की बात चल रही है। ये गठबंधन साउथ चाइना-सी में आक्रमक चीन को जवाब देने के लिए है और इनके लिए भारत एक बढ़िया और सस्ता शस्त्र विक्रेता हो सकता है।
पिछले दो दशकों में चीन ने बांग्लादेश, म्यांमार, पाकिस्तान, श्रीलंका और अफगानिस्तान जैसे देशों को आधुनिक हथियार बेचे। चीन ऐसा करके भारत को घेरना चाहता है। अब चीन के खिलाफ भारत ने भी इसी रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। भारत ने चीन के शत्रु देशों से दोस्ती और उन्हे मजबूत करने की नीति पर तेजी से आगे बढ़ना प्रारंभ कर दिया।

आधुनिक शस्त्र का निर्यात ये रक्षा क्षेत्र के विकास की कहानी है, जबकि हमने कई क्षेत्र में अच्छा कार्य किया है।कोराना महामारी के आने से पहले हम इसके बचाव के लिए प्रयोग होने वाला कोई उपकरण नही बनाते थे। अब हम मास्क , पीइपी किट, वैंटीलेटर के साथ कोराना की वैक्सीन भी बना रहे हैं। अपने देश के 150 करोड़ से ज्यादा नागरिकों को तो वैक्सीन लगी ही,दुनिया के कई देशों को हमने वैक्सीन मुक्त दी। आज कई देशों में इसकी मांग हैं।
देश बदल रहा है। तेजी से बदल रहा है।कुछ समय पूर्व तक वह अपनी जरूरतों के दूसरे देशपर निर्भर था। सेना की जरूरत के लिए दूसरे बड़े देश के आगे हाथ फैलाने पड़ते थे अब यह गर्व की बात है कि वह दूसरे देशों को अन्य सामान ही नहीं शस्त्र बेचने लगा है।
मुझे याद आता है 1965 का भारत− पाकिस्तान युद्ध का समय।उस समय हम अपनी जरूरत का गेंहू और अन्य अनाज भी पैदा नही कर पाते थे।अमेरिका अपना घटिया लाल गेंहू हमें बेचता था। ये देश में राशान की दुकानों से जनता को बांटा जाता था। 1965 के पाकिस्तान युद्ध के समय अमेरिका ने देश के प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री को धमकाया था कि वह युद्ध रोंके नहीं तो हम भारत को गेंहू की आपूर्ति बंद कर देंगें। भारत के देशवासी भूखे मरने लगेंगे। शास्त्री जी ने उसकी बात को नजर अंदाज कर दिया था।उन्होंने देशवासियों से अपील की थी कि अनाज के संकट को देखते हुए सप्ताह में एक दिन उपवास रखें।उसी के साथ हमने मेहनत की। उत्पादन बढ़ाया।कल− कारखाने लगाए। आज हम काफी आत्म निर्भर हो गये। दुनियाभर में भारत की प्रतिभा का आज डंका बजा है। देश के वैज्ञानिक और तकनीकि विशेषज्ञ दुनिया के प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवा दे रहे हैं। भारतीय उत्पादों की दुनिया में मांग हैं। हम विकास और निर्माण के नए आयाम बना रहे हैं।


अशोक मधुप
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)
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मार्च में मिल जायेगा ओमिक्रॉन के खात्मे के हथियार

न्यूयॉर्क (एजेंसी)। कोविड-19 का नया वैरिएंट ओमिक्रॉन दुनियाभर के तमाम देशों में तेजी से पांव पसार रहा है। खतरे को देखते हुए कई देशों में वैक्सीन की बूस्टर डोज दी जा रही है। ओमिक्रॉन के संक्रमण को रोकने के मकसद से तैयार की जा रही वैक्सीन को लेकर भी काम चल रहा है। दिग्गज फार्मा कंपनी फाइजर को उम्मीद है कि ओमिक्रॉन वैरिएंट को टारगेट करने वाली कोविड-19 वैक्सीन मार्च में तैयार हो जाएगी। कंपनी के प्रमुख ने यह जानकारी दी।

फाइजर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अलबर्ट बौर्ला ने सीएनबीसी को बताया कि सरकारों की ओर से भारी मांग के चलते फाइजर पहले से ही वैक्सीन की खुराकों का निर्माण कर रही है क्योंकि कोविड-19 संक्रमण के मामले बढ़ते जा रहे हैं। इसमें ऐसे लोगों की संख्या भी काफी है जो वैक्सीनेटेड होने के बावजूद ओमिक्रॉन के शिकार हुए। बौर्ला ने कहा, “यह वैक्सीन मार्च में तैयार हो जाएगी। मुझे नहीं पता कि हमें इसकी आवश्यकता होगी या नहीं। मुझे नहीं पता कि इसका उपयोग कैसे किया जाएगा।”

21 साल की हरनाज़ संधू बनी मिस यूनिवर्स 2021

फहीम अख्तर (बिजनौर)

मिस यूनिवर्स 2021 का खिताब चंडीगढ़ के सिख परिवार में जन्मी हरनाज संधू को मिला है। हरनाज संधू इससे पहले भी कई ब्यूटी पेजेंट में हिस्सा ले चुकी हैं। फिटनेस और योग की शौकीन हरनाज ने छोटी उम्र से ही ब्यूटी कॉम्पिटीशन में भाग लेना शुरू कर दिया था। उन्होंने साल 2017 में मिस चंडीगढ़ का खिताब भी जीता था। इसके एक साल बाद हरनाज को मिस मैक्स इमर्जिंग स्टार इंडिया 2018 का ताज भी मिल चुका है। इन दो प्रतिष्ठित खिताब को अपने नाम करने के बाद हरनाज ने मिस इंडिया 2019 में हिस्सा लिया, जिसमें वह टॉप 12 तक जगह बनाने में कामयाब रही थीं। साल 2018 में हरनाज ने मिस इंडिया पंजाब का खिताब हासिल करने के बाद द लैंडर्स म्यूजिक वीडियो तेराताली (Tarthalli) में भी काम किया। इसके बाद इसी साल उन्होंने सितंबर में मिस डीवा यूनिवर्स इंडिया 2021 का खिताब अपने नाम किया।

हरनाज को यह ताज खुद अभिनेत्री कृति सेनन ने पहनाया था। मिस यूनिवर्स 2021 का हिस्सा बनने से पहले ही हरनाज फिल्मों में अपनी जगह पक्का कर चुकी हैं। वह अगले साल रिलीज होने वाली दो पंजाबी फिल्में ‘Bai Ji Kuttange’ और ‘Yaara Diyan Poo Baran’ में नजर आएंगी। अपनी फिटनेस से बेहद प्यार करने वालीं हरनाज प्रकृति से भी बेशुमार प्यार करती हैं। ग्लोबल वार्मिंग और प्रकृति संरक्षण को लेकर उनके विचार ने ही मिस डीवा पेजेंट में जज पैनल को प्रभावित किया था।

उनका मानना है कि पृथ्वी को बचाने के लिए हमारे पास अभी भी समय है, इसलिए जितना हो सके प्रकृति का संरक्षण किया जाए।
मिस यूनिवर्स 2021 के दौरान हरनाज ने स्विमसूट से लेकर नेशनल कॉस्ट्यूम सेशन तक में अपनी खूबसूरती से भी को प्रभावित किया। उन्होंने नेशनल कॉस्ट्यूम सेशन में पिंक कलर का लहंगा पहना था। इसके साथ ही वह हाथों में मैचिंग छतरी लिए भी नजर आईं। उनका यह पारंपरिक आउटफिट भारतीय महारानी के शाही लुक को दर्शा रहा था।
भारत दो बार मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता जीत चुका है। इससे पहले साल 1994 में सुष्मिता सेन और 2000 में लारा दत्ता ने यह ताज अपने नाम किया था। ऐसे में अब हरनाज ने भारत को तीसरी बार मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता जीता के भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया है।

हेलीकॉप्टर क्रैश के बाद जिंदा थे सीडीएस जनरल बिपिन रावत

नई दिल्ली (एजेंसी)। तमिलनाडु के कुन्नूर में हुए हेलीकॉप्टर क्रैश के बाद सीडीएस जनरल बिपिन रावत जिंदा थे और उन्होंने धीमी आवाज में अपना नाम बताया था। यह दावा चॉपर के बिखरे पड़े मलबे के पास सबसे पहले पहुंचे राहत और बचाव दल में शामिल एक शख्स ने किया है। टीम में शामिल एनसी मुरली नाम के इस बचावकर्मी ने बताया, ‘हमने 2 लोगों को जिंदा बचाया, जिनमें से एक सीडीएस बिपिन रावत थे। उनकी मौत अस्पताल जाते वक्त रास्ते में हुई। हम उस वक्त जिंदा बचाए गए दूसरे शख्स की पहचान नहीं कर सके।

बचावकर्मी के अनुसार सीडीएस जनरल रावत के शरीर के निचले हिस्से बुरी तरह जल गये थे। उन्हें एक बेडशीट में लपेट कर एंबुलेंस में ले जाया गया था। जलते विमान के मलबे को बुझाने के लिए फायर सर्विस इंजन को वहां तक ले जाने के लिए सड़क नहीं थी। वो आसपास के घरों और नदियों से पानी लाकर इस आग को बुझाने की कोशिश कर रहे थे। यह ऑपरेशन काफी मुश्किल था। दुर्घटनास्थल के पास पेड़ भी थे। मुश्किल परिस्थितियों की वजह से बचाव कार्यों में देरी हो रही थी। बचावकर्मियों को 12 लोगों की डेड बॉडी मिली, जबकि 2 लोगों को जिंदा बचाया गया था। जिंदा बचे दोनों लोग बुरी तरह झुलसे हुए थे। इनमें से दूसरे शख्स की पहचान ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह के तौर पर की गई। भारतीय वायुसेना बचाव दल को हेलिकॉप्टर के खंडित हो चुके हिस्सों के बारे में लगातार गाइड कर रही थी। हादसे के स्थान से करीब 100 मीटर की दूरी पर काटेरी गांव में रहने वाली पोथम पोन्नम ने चॉपर के क्रैश होने से पहले उसके गुजरने की आवाज सुनी थी। उन्होंने बताया कि कुछ ही समय बाद एक जोरदार धमाका हुआ और पता चला कि हेलिकॉप्टर क्रैश हो चुका है। कटेरी के रहने वाले लोगों ने जिले के अधिकारियों को खबर दी थी, जिसके बाद उनके इलाके की बिजली तुरंत काट दी गई थी। हालांकि, इन लोगों को घटनास्थल पर जाने से पुलिस ने रोक दिया था। 

WhatsApp ने बैन किए 20 लाख से ज्यादा भारतीयों के अकाउंट

WhatsApp का बड़ा एक्शन, 20 लाख से ज्यादा भारतीयों के अकाउंट किए बैन

नई दिल्ली। व्हाट्सएप ने अब तक देश में 20 लाख से ज्यादा अकाउंट को बैन कर दिया है। आईटी रुल्स के तहत ये कार्रवाई की गई है। आपको बता दें कि ‘बैन अपील’ के तहत ये कार्रवाई की गई है।

कंपनी ने अक्टूबर कंप्लायंस रिपोर्ट में बताया कि इसे अक्टूबर महीने में 500 ग्रीवांस रिपोर्ट्स मिलें, जिनमें 18 अकाउंट पर प्रतिबंध लगा दिया गया। लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार व्हाट्सएप ने 2,069,000 भारतीय अकाउंट्स को इस टाइम पीरियड के दौरान बैन किया। 

WhatsApp 91 से शुरू होने वाले फोन नंबर को भारतीय अकाउंट कहता है। व्हाट्सएप के एक स्पोक्सपर्सन ने बताया कि एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग सर्विस में व्हाट्सएप एब्यूज रोकने में इंडस्ट्री लीडर है। इसके लिए वॉट्सऐप लगातार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और दूसरे आर्ट टेक्नोलॉजी के स्टेट में इनवेस्ट कर रहा है। इसके अलावा कंपनी डेटा साइंटिस्ट और एक्सपर्ट्स पर भी इनवेस्ट करता है ताकि इस प्लेटफॉर्म पर यूजर्स सेफ रहें। व्हाट्सएप स्पोक्सपर्सन ने आगे बताया कि IT Rules 2021 के तहत कंपनी ने पांचवीं बार मंथली रिपोर्ट को पब्लिश किया है। ये रिपोर्ट अक्टूबर महीने का है। व्हाट्सएप ने पहले बताया था कि 95 फीसदी बैन ऑटोमैटेड या बल्क मैसेजिंग (स्पैम) का अनऑथोराइज्ड यूज करना है। व्हाट्सएप ग्लोबल एवरेज में 80 लाख से ज्यादा अकाउंट्स हर महीने बैन करता है। 

सितंबर में भी वॉट्सऐप ने 20 लाख से ज्यादा अकाउंट्स को बैन किया था। इस दौरान इसे 560 ग्रीवांस रिपोर्ट्स मिले। आपको बता दें कि नए IT रूल के अनुसार 5 मिलियन से ज्यादा यूजर्स वाले डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को हर महीने कंप्लायंस रिपोर्ट जारी करना है।

सर्दियों में क्या न खाएं डायबिटीज के मरीज…

नई दिल्ली (शैली सक्सेना)। भारत में डायबिटीज के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इसमें ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल में रखना जरूरी होता है। इसलिए शुगर के मरीजों को अपने खानपान का खास ख्याल रखने की जरूरत होती है। खासकर सर्दियों के मौसम में शुगर के मरीजों को अपना ज्यादातर ख्याल रखने की जरूरत होती है। सर्दियों में लोग ड्राई फ्रूट्स का सेवन ज्यादा करते हैं। कुछ ड्राई फ्रूट्स आपके ब्लड शुगर लेवल को बढ़ा सकते हैं। इसलिए थोड़ी सी सतर्कता बरतने से काफी परेशानियों से बच जा सकता है। जानिए किस चीज से आपको बचने की जरूरत है….

किशमिश- किशमिश में ग्लूकोज काफी मात्रा में पाया जाता है, जिस कारण इसके सेवन से शरीर में ग्लूकोज की मात्रा काफी ज्यादा बढ़ जाती है। ऐसे में डायबिटीज के मरीजों को किशमिश का सेवन नहीं करना चाहिए।

खजूर- खजूर या फिर छुआरा में भी शुगर की मात्रा काफी ज्यादा पाई जाती है। इससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ने का खतरा रहता है। इसलिए डायबिटीज के मरीज खजूर या छुआरा का सेवन करने से बचें।

आलू- मधुमेह के रोगियों को आलू का सेवन भी बहुत कम मात्रा में करना चाहिए. ज्यादा आलू खाना शुगर पेशेंट्स के लिए नुकसानदायक हो सकता है. आलू में हाई कार्बोहाइड्रेट होता है साथ ही इसमें ग्लाइसेमिक इंडेक्स की मात्रा भी बहुत होती है. आलू खाने से ब्लड शुगर बढ़ने का खतरा रहता है

व्हाइट ब्रेड- व्हाइट ब्रेड भी डायबिटीज के मरीजों के लिए नुकसानदेह हो सकती है। ऐसे में इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को व्हाइट ब्रेड बिल्कुल नहीं खानी चाहिए।

चीकू- डायबिटीज के पेशेंट को फलों में चीकू खाने से भी परहेज करना चाहिए। चीकू खाने में बेहद मीठा होता है और इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी काफी ज्यादा बढ़ा हुआ होता है। इसलिए शुगर के मरीजों को चीकू खाने से बचना चाहिए।

बाल काव्य प्रतियोगिता में देश विदेश के 24 बच्चों ने दिखाई प्रतिभा

गाजियाबाद के शौर्य अभि ने भी दिखाया दमखम

नई दिल्ली। काव्य मंजरी साहित्यिक_मंच (रजि०) द्वारा बाल दिवस पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हुई बाल काव्य प्रतियोगिता में देश-विदेश से 24 बच्चों ने भाग लिया। प्रतियोगिता का उद्देश्य था बच्चों की प्रतिभा को निखारने का, उनके अंदर की योग्यता को सबके सामने लाने का और उनको एक ऐसा मंच देने का, जिससे उनको एक नया अनुभव व पहचान मिले।

कविता पाठ का विषय था “शिक्षाप्रद कविता” जिस पर विभिन्न कविताएं सुनने को मिलीं। अपने उत्साह और आत्मविश्वास का परिचय देते हुए बच्चों ने साबित कर दिया कि वर्तमान पीढ़ी आगे जाकर अपनी एक खास पहचान बनाने में कामयाब होगी।

आयोजक डॉ नीरजा मेहता ने सभी बच्चों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। साथ ही बताया कि *किसी भी प्रतियोगिता में प्रतिभागी की प्रस्तुति खास महत्व रखती है और इस प्रतियोगिता का आकलन हमारे निर्णायकों ने बखूबी किया। प्रबुद्ध निर्णायक प्रहलाद मराठा, सुश्रीइंदु सिंह, सुश्री मनीषा शर्मा ने निष्पक्ष निर्णय दिया और परिणाम इस प्रकार रहा –

पहली श्रेणी का परिणाम

(6 से 8 वर्ष)

प्रथम स्थान – अदिति नागर

द्वितीय स्थान – ध्वनि डुडेजा

तृतीय स्थान- अविका नागर

सराहनीय स्थान

अन्वी बैजल

लायरा डुडेजा

दूसरी श्रेणी का परिणाम –

(9 से 11 वर्ष)

प्रथम स्थान- प्रखर कानूनगो

द्वितीय स्थान – प्रकृति श्रीवास्तव

तृतीय स्थान – शौर्य अभि

सराहनीय स्थान कृतिका कानूनगो शाश्वत श्रीवास्तव

सभी बच्चों को सहभागिता प्रमाण पत्र दिया गया।आयोजन का संचालन डॉ अनीश गर्ग ने मनमोहक अंदाज़ में किया। संयोजिका नेहा शर्मा ‘नेह’, सहयोगिनी पदमा शर्मा ‘आँचल’, मार्गदर्शक डॉ आभा नागर और मंच के सभी रचनाकारों के सहयोग से आयोजन सफल हुआ।

आयोजक डॉ नीरजा मेहता ‘कमलिनी संस्थापिका एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष काव्य मंजरी साहित्यिक मंच (रजि) ने बताया कि अब समाचार, रचनाएँ और फोटो दिए गए प्रारूप के माध्यम से ही भेजना होगा तभी प्रकाशन होगा। प्रारूप के लिए हमारे मेनू सेक्शन पर रचना अपलोड करें का लिंक दिया गया हैं। देखें तथा उसमें ही पोस्ट करें। गौरतलब है कि ‘काव्य मञ्जरी’ चुने हुए रचनाकारों का एक साहित्यिक समूह है जो 29 जनवरी 2016 को स्थापित किया गया था। प्रतियोगिता रविवार, 14 नवंबर 2021 को गूगल मीट पर हुई।

बधाई हो बधाई.. खुशी है छाई..

बधाई हो बधाई.. खुशी है छाई..

हिंदीसेवी मंजु मिश्रा को अमेरिकी राष्ट्रपति ने दिया लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड

आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी अनुयाई परिवार के लिए बहुत ही गर्व और खुशी का दिन है।
अमेरिका में हिंदी का प्रचार-प्रसार करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता एवं आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की अमेरिकी इकाई की अध्यक्ष श्रीमती मंजु मिश्रा को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने “लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड” से सम्मानित किया है।


लखनऊ निवासी श्रीमती मंजु मिश्रा अमेरिका के कैलिफोर्निया में प्रवास कर रही हैं। अमेरिका में आप हिंदी के प्रचार प्रसार के साथ-साथ जरूरतमंदों की हर तरह से मदद करने को हर वक्त तत्पर रहती हैं। अमेरिका में कुछ मित्रों के साथ मिलकर वर्ष 2011 में श्रीमती मंजु मिश्रा ने विश्व हिंदी ज्योति नामक संस्था की शुरुआत की। यह संस्था अमेरिका के प्रवासी भारतीयों के बच्चों के साथ साथ अमेरिकी नागरिकों को भी हिंदी सिखाने का काम करती है। दो दशक से भी अधिक समय से कैलिफोर्निया में रह रहीं श्रीमती मंजु मिश्रा अमेरिका में अब तक हजारों भारतीय मूल के तथा गैर भारतीयों को हिंदी भाषा सिखा चुकी हैं।
अपने काम से यह संस्था आज काफी लोकप्रिय हो चुकी है। प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले हिंदी संवर्धन के कार्यक्रमों में भारतीय काउंसलेट भी सहयोग करता है। हिंदी की उल्लेखनीय सेवा के लिए आपको वर्ष 2014 में विश्व हिंदी सेवा सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है। उनका सपना है कि अमेरिका के स्कूलों में भी छात्रों के लिए विदेशी भाषा के रूप में हिंदी एक विकल्प हो। अपने इस सपने को पूरा करने में भी वह लगातार प्रयासरत हैं।


मंजु मिश्रा का जीवन पूर्ण रूप से समाज सेवा एवं हिंदी की सेवा को समर्पित है। श्रीमती मंजु मिश्रा उत्तर प्रदेश मंडल ऑफ अमेरिका (उपमा) की बोर्ड मेम्बर हैं तथा भारत में चलने वाले संस्था के कार्यक्रमों का काम-काज देखती हैं। प्रवासी भारतीय नीलू गुप्ता द्वारा द्वारा गठित उपमा संस्था उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में बच्चों की पढ़ाई और जरूरतमंदों की आर्थिक मदद सुनिश्चित करती है। इस संस्था के प्रोजेक्ट बुंदेलखंड रीजन के चित्रकूट एवं निसवारा में संचालित हो रहे हैं। एक प्रोजेक्ट साईधाम (फ़रीदाबाद- हरियाणा) में भी चल रहा है। कोरोना संकट के दौरान भी उत्तर प्रदेश मंडल ऑफ अमेरिका (उपमा) ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में जरूरतमंदों के लिए 20 लाख से अधिक रुपए भेजें। इस आर्थिक मदद से विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से जरूरतमंदों को खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई गई। भोपाल की सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती माया विश्वकर्मा की संस्था सुकर्मा को भी श्रीमती मंजु मिश्रा ने आई.सी. सी ट्राई वैली के माध्यम से मास्क सेनीटाइजर और ऑक्सीजन कंसंट्रेटर के लिए आर्थिक मदद उपलब्ध कराई थी। कोरोना संकट के दौरान उपमा के किए गए प्रयासों की अभी हाल ही में गौरव अवस्थी द्वारा संकलित और संपादित कोरोना योद्धाओं के काम पर केंद्रित पुस्तक “ताकि सनद रहे” में भी प्रमुखता से चर्चा हुई है। नारिका नाम की संस्था जो सैन फ़्रैन्सिस्को बे एरिया में घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं के लिए काम करती है उसके साथ बोर्ड मेम्बर के रूप में जुड़ कर आप भारतीय महिलाओं की मदद करने का काम भी कई वर्षों से कर रही हैं ।
श्रीमती मंजु मिश्रा को हिंदी साहित्य में भी महारत हासिल है। उनका एक काव्य संग्रह “जिंदगी यूं तो”प्रकाशित हो चुका है। 50 से अधिक संग्रहों एवं विभिन्न ई-पत्रिकाओं में भी आपकी कविता और कहानियां प्रकाशित हो चुकी हैं।
आपकी मातृभाषा और सामाजिक सेवा को देखते हुए ही आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की ओर से वर्ष 2017 में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी युगप्रेरक सम्मान से रायबरेली के भव्य समारोह में सम्मानित किया गया था। तभी से आप मातृभाषा हिंदी के साथ-साथ आचार्य द्विवेदी स्मृति संरक्षण अभियान को भी अपना संरक्षण-सहयोग-स्नेह प्रदान कर रही हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन द्वारा लाइव टाइम अचीवमेंट अवार्ड प्राप्त होने पर श्रीमती मंजु मिश्रा को आचार्य द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की भारत इकाई एवं हिंदी प्रेमियों की तरफ से बहुत-बहुत बधाई। आप का सानिध्य पाकर हम सब गौरवान्वित हैं। आप ऐसे ही सामाजिक कार्य और सात समंदर पार मातृभाषा हिंदी को पुष्पित पल्लवित करती रहें, यही सच्ची राष्ट्र सेवा है। यही राष्ट्रीय धर्म है। यही भारतीय समाज का मर्म है।

हम सब हिंदी प्रेमी भी आपके स्वास्थ्य सार्थक और दीर्घ जीवन की कामना करते हैं।

गौरव अवस्थी “आशीष”
रायबरेली/उन्नाव

प्रवासी भारतीय मंजु मिश्रा को अमेरिका का लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड

प्रवासी भारतीय मंजु मिश्रा को अमेरिका का लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड

नई दिल्ली। अमेरिका में हिंदी का प्रचार-प्रसार करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता एवं आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की अमेरिकी इकाई की अध्यक्ष श्रीमती मंजु मिश्रा को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने “लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड” से सम्मानित किया है।


लखनऊ निवासी श्रीमती मंजु मिश्रा अमेरिका के कैलिफोर्निया में प्रवास कर रही हैं। अमेरिका में आप हिंदी के प्रचार प्रसार के साथ-साथ जरूरतमंदों की हर तरह से मदद करने को हर वक्त तत्पर रहती हैं। अमेरिका में कुछ मित्रों के साथ मिलकर वर्ष 2011 में श्रीमती मंजु मिश्रा ने विश्व हिंदी ज्योति नामक संस्था की शुरुआत की। यह संस्था अमेरिका के प्रवासी भारतीयों के बच्चों के साथ साथ अमेरिकी नागरिकों को भी हिंदी सिखाने का काम करती है। दो दशक से भी अधिक समय से कैलिफोर्निया में रह रहीं श्रीमती मंजु मिश्रा अमेरिका में अब तक हजारों भारतीय मूल के तथा गैर भारतीयों को हिंदी भाषा सिखा चुकी हैं।
अपने काम से यह संस्था आज काफी लोकप्रिय हो चुकी है। प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले हिंदी संवर्धन के कार्यक्रमों में भारतीय काउंसलेट भी सहयोग करता है। हिंदी की उल्लेखनीय सेवा के लिए आपको वर्ष 2014 में विश्व हिंदी सेवा सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है। उनका सपना है कि अमेरिका के स्कूलों में भी छात्रों के लिए विदेशी भाषा के रूप में हिंदी एक विकल्प हो। अपने इस सपने को पूरा करने में भी वह लगातार प्रयासरत हैं।


अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन द्वारा लाइव टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किए जाने पर समिति के संयोजक गौरव अवस्थी, अध्यक्ष विनोद शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार अरविंद कुमार सिंह, लेखक पत्रकार श्रीमती कुसुमलता सिंह, सप्रे संग्रहालय के संस्थापक पद्मश्री विजय दत्त श्रीधर, लखनऊ की साहित्यकार स्नेहलता, श्रीमती संध्या सिंह, श्रीमती कल्पना वार्ष्णेय, नई दिल्ली की पत्रकार शेफाली सुरभि ने श्रीमती मंजु मिश्रा को बधाई दी है।


कोरोना संकट में भी भारतीयों की मदद में सक्रिय रहीं मंजु मिश्रा
मंजु मिश्रा का जीवन पूर्ण रूप से समाज सेवा एवं हिंदी की सेवा को समर्पित है। श्रीमती मंजु मिश्रा उत्तर प्रदेश मंडल ऑफ अमेरिका (उपमा) की बोर्ड मेम्बर हैं तथा भारत में चलने वाले संस्था के कार्यक्रमों का काम-काज देखती हैं। प्रवासी भारतीय नीलू गुप्ता द्वारा द्वारा गठित उपमा संस्था उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में बच्चों की पढ़ाई और जरूरतमंदों की आर्थिक मदद सुनिश्चित करती है। इस संस्था के प्रोजेक्ट बुंदेलखंड रीजन के चित्रकूट एवं निसवारा में संचालित हो रहे हैं। एक प्रोजेक्ट साईधाम (फ़रीदाबाद- हरियाणा) में भी चल रहा है। कोरोना संकट के दौरान भी उत्तर प्रदेश मंडल ऑफ अमेरिका (उपमा) ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में जरूरतमंदों के लिए 20 लाख से अधिक रुपए भेजे। इस आर्थिक मदद से विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से जरूरतमंदों को खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई गई। भोपाल की सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती माया विश्वकर्मा की संस्था सुकर्मा को भी श्रीमती मंजु मिश्रा ने आई.सी. सी ट्राई वैली के माध्यम से मास्क सेनीटाइजर और ऑक्सीजन कंसंट्रेटर के लिए आर्थिक मदद उपलब्ध कराई थी। कोरोना संकट के दौरान उपमा के किए गए प्रयासों की अभी हाल ही में “गौरव अवस्थी” द्वारा संकलित और संपादित कोरोना योद्धाओं के काम पर केंद्रित पुस्तक “ताकि सनद रहे” में भी प्रमुखता से चर्चा हुई है। “नारिका” नाम की संस्था जो सैन फ़्रैन्सिस्को बे एरिया में घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं के लिए काम करती है, उसके साथ बोर्ड मेम्बर के रूप में जुड़ कर आप भारतीय महिलाओं की मदद करने का काम भी कई वर्षों से कर रही हैं।


आचार्य द्विवेदी युग प्रेरक सम्मान से हो चुकी है सम्मानित
सात समंदर पार अमेरिका में मातृभाषा और सामाजिक सेवा को देखते हुए ही आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की ओर से वर्ष 2017 में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी युगप्रेरक सम्मान से रायबरेली के भव्य समारोह में सम्मानित किया गया था। तभी से आप मातृभाषा हिंदी के साथ-साथ आचार्य द्विवेदी स्मृति संरक्षण अभियान को भी अपना संरक्षण-सहयोग-स्नेह प्रदान कर रही हैं। इसी वर्ष उन्होंने आचार्य द्विवेदी की स्मृतियों को जीवंत बनाने के लिए अमेरिकी इकाई की अध्यक्ष का परिवार भी ग्रह किया है।

अब सिरिंज संकट से जूझेगी दुनिया!

WHO की चेतावनी, दुनिया में अब सिरिंज संकट!

नई दिल्ली। अगले साल तक दुनिया में करीब 200 करोड़ इंजेक्शन सिरिंज की कमी हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनियाभर में कोरोना वैक्सीनेशन की वजह से बड़े पैमाने पर सिरिंज का इस्तेमाल हो रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभी तक पूरी दुनिया में 725 करोड़ से ज्यादा कोरोना वैक्सीन की डोज दी जा चुकी हैं। इनमें सिंगल, डबल और बूस्टर डोज शामिल हैं। वैक्सीन की यह मात्रा आमतौर पर सालभर में लगने वाले कुल टीकों की संख्या से दोगुना ज्यादा है। हर डोज के लिए अलग सिरिंज का इस्तेमाल होता है, इसलिए सिरिंज की खपत भी हर साल से दोगुनी हो गई है।

‘डाकिया डाक लाया’ टॉप हिंदी ब्लॉग्स में शामिल हुआ पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव यादव का ब्लॉग

टॉप हिंदी ब्लॉग्स में शामिल हुआ पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव यादव का ब्लॉग ‘डाकिया डाक लाया’

लखनऊ। देश-विदेश में इंटरनेट पर हिंदी के व्यापक प्रचार-प्रसार और ब्लॉगिंग के माध्यम से अपनी रचनाधर्मिता को विस्तृत आयाम देने वाले वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव के ब्लॉग ‘डाकिया डाक लाया’ (http://dakbabu.blogspot.com/) को टॉप हिंदी ब्लॉग्स में शामिल किया गया है।

इंडियन टॉप ब्लॉग्स नामक सर्वे एजेंसी ने विश्व के हिंदी ब्लॉग पर किये गए सर्वे के आधार पर इसे सर्वश्रेष्ठ हिंदी ब्लॉग की डायरेक्टरी में सम्मिलित किया है, जिसमें वर्ष 2021 में 107 हिंदी ब्लॉगों को स्थान मिला है। सौ से ज्यादा देशों में देखे-पढ़े जाने वाले ‘डाकिया डाक लाया’ पर अब तक 1226 पोस्ट प्रकाशित हैं। इसे 6.72 लाख से ज्यादा लोगों ने पढ़ा है। वर्ष 2008 से ब्लॉगिंग में सक्रिय एवम ‘दशक के श्रेष्ठ हिंदी ब्लॉगर दम्पति’ और सार्क देशों के सर्वोच्च ‘परिकल्पना ब्लॉगिंग सार्क शिखर सम्मान’ से सम्मानित श्री कृष्ण कुमार यादव हिंदी ब्लॉगिंग के क्षेत्र में जाना-पहचाना नाम बन चुके हैं। ‘डाकिया डाक लाया’ ब्लॉग अपनी विभिन्न पोस्ट के माध्यम से डाक सेवाओं की व्यापकता, विविधता और आधुनिक दौर में उनमें हो रहे तमाम बदलावों को रेखांकित करता है। इसके माध्यम से डाक सेवाओं से सम्बंधित तमाम छुए-अनछुए पहलुओं को सामने लाने का प्रयास भी किया गया है।

भारतीय डाक सेवा के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी होने के साथ-साथ साहित्य और लेखन में भी सक्रिय पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव की अब तक 7 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं- ‘अभिलाषा’ (काव्य-संग्रह), ‘अभिव्यक्तियों के बहाने’ व ‘अनुभूतियाँ और विमर्श’ (निबंध-संग्रह), ‘India Post : 150 Glorious Years’ (2006), ‘क्रांति-यज्ञ : 1857-1947 की गाथा’, ‘जंगल में क्रिकेट’ (बाल-गीत संग्रह) और ’16 आने 16 लोग’ (निबंध-संग्रह)। विभागीय दायित्वों और हिन्दी के प्रचार-प्रसार के क्रम में अब तक वह लंदन, फ़्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, दक्षिण कोरिया, भूटान, श्रीलंका, नेपाल जैसे देशों की यात्रा कर चुके हैं। ‘शब्द सृजन की ओर’ (http://kkyadav.blogspot.com) और ‘डाकिया डाक लाया’ (http://dakbabu.blogspot.com) उनके चर्चित ब्लॉग हैं। नेपाल, भूटान और श्रीलंका सहित तमाम देशों में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर्स सम्मेलन में वह सम्मानित हो चुके हैं। देश के विभिन्न भागों- सूरत (गुजरात), कानपुर, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, इलाहाबाद, जोधपुर, लखनऊ में विभिन्न पदों पर कार्य करने के उपरांत सम्प्रति वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल पद पर कार्यरत हैं।

कायस्थ 24 घंटे के लिए क्यों नहीं करते कलम का उपयोग?

जब भगवान राम के राजतिलक में निमंत्रण छूट जाने से नाराज भगवान् चित्रगुप्त ने रख दी थी कलम !! उस समय शुरू हो चुका था परेवा काल।

लखनऊ (शैली सक्सेना)। परेवा के दिन कायस्थ समाज के लोग कलम का प्रयोग नहीं करते हैं। यानी किसी भी तरह का का हिसाब – किताब नहीं करते हैं। आखिर ऐसा क्यूँ है कि पूरी दुनिया में कायस्थ समाज के लोग दीपावली के दिन पूजन के बाद कलम रख देते हैं और फिर यम द्वितीया के दिन कलम-दवात के पूजन के बाद ही उसे उठाते हैं?

इसको लेकर सर्व समाज में कई सवाल अक्सर लोग कायस्थों से करते हैं। ऐसे में अपने ही इतिहास से अनभिग्य कायस्थ युवा पीढ़ी इसका कोई समुचित उत्तर नहीं दे पाती है। जब इसकी खोज की गई तो इससे सम्बंधित एक बहुत रोचक घटना का संदर्भ किवदंतियों में मिला….

…कहते हैं कि जब भगवान राम दशानन रावण का वध कर अयोध्या लौट रहे थे, तब उनके खडाऊं को राज सिंहासन पर रख कर राज्य चला रहे राजा भरत ने गुरु वशिष्ठ को भगवान राम के राजतिलक के लिए सभी देवी देवताओं को सन्देश भेजने की व्यवस्था करने को कहा। गुरु वशिष्ठ ने ये काम अपने शिष्यों को सौंप कर राज्यतिलक की तैयारी शुरू कर दीं।

भगवान राम ने पूछा- ऐसे में जब राज्यतिलक में सभी देवी देवता आ गए तब भगवान राम ने अपने अनुज भरत से पूछा भगवान चित्रगुप्त नहीं दिखाई दे रहे हैं। इस पर जब खोजबीन हुई तो पता चला कि गुरु वशिष्ठ के शिष्यों ने भगवान चित्रगुप्त को निमंत्रण पहुंचाया ही नहीं था। इसके चलते भगवान चित्रगुप्त नहीं आये। इधर भगवान चित्रगुप्त सब जान चुके थे और इसे प्रभु राम की महिमा समझ रहे थे। फलस्वरूप उन्होंने गुरु वशिष्ठ की इस भूल को अक्षम्य मानते हुए यमलोक में सभी प्राणियों का लेखा जोखा लिखने वाली कलम को उठा कर एक किनारे रख दिया।

रुके स्वर्ग और नरक के सारे काम- सभी देवी देवता जैसे ही राजतिलक से लौटे तो पाया कि स्वर्ग और नरक के सारे काम रुक गये थे, प्राणियों का लेखा-जोखा न लिखे जाने के चलते ये तय कर पाना मुश्किल हो रहा था कि किसको कहां भेजें?
तब गुरु वशिष्ठ की इस गलती को समझते हुए भगवान राम ने अयोध्या में भगवान विष्णु द्वारा स्थापित भगवान चित्रगुप्त के मंदिर (श्री अयोध्या महात्मय में भी इसे श्री धर्म हरि मंदिर कहा गया है। धार्मिक मान्यता है कि अयोध्या आने वाले सभी तीर्थयात्रियों को अनिवार्यत: श्री धर्म-हरि जी के दर्शन करना चाहिये, अन्यथा उसे इस तीर्थ यात्रा का पुण्यफल प्राप्त नहीं होता।) में गुरु वशिष्ठ के साथ जाकर भगवान चित्रगुप्त की स्तुति की और गुरु वशिष्ठ की गलती के लिए क्षमा याचना की। इसके बाद भगवान राम का आग्रह मानकर भगवान चित्रगुप्त ने लगभग ४ पहर (२४ घंटे बाद ) पुन: कलम दवात की पूजा करने के पश्चात उसको उठाया और प्राणियों का लेखा-जोखा लिखने का कार्य आरम्भ किया।

कायस्थ, ब्राह्मणों के लिए भी पूजनीय- कहते हैं कि तभी से कायस्थ दीपावली की पूजा के पश्चात कलम को रख देते हैं और यम द्वितीया के दिन भगवान चित्रगुप्त का विधिवत कलम दवात पूजन करके ही कलम को धारण करते हैं। तभी से कायस्थ, ब्राह्मणों के लिए भी पूजनीय हुए और इस घटना के पश्चात मिले वरदान के फलस्वरूप सबसे दान लेने वाले ब्राह्मणों से दान लेने का हक़ सिर्फ कायस्थों को ही है।
श्री चित्रगुप्त भगवान की जय

WhatsApp ने 22 लाख अकाउंट्स कर दिये बैन

WhatsApp ने 22 लाख अकाउंट्स पर चलाई कैंची, यूजर्स भूलकर भी न करें ये गलतियां

WhatsApp ने 22 लाख अकाउंट्स पर चलाई कैंची, यूजर्स भूलकर भी न करें ये गलतियां

नई दिल्ली (एजेंसी)। इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप व्हाट्सएप ने अपने एक फैसले के चलते 22 लाख से ज्यादा अकाउंट्स को बैन कर दिया है। इस बात का खुलासा कंपनी की मासिक रिपोर्ट में हुआ है। कहा जा है कि जिन व्हाट्सएप अकाउंट्स को बैन किया गया है, उन्होंने नियमों को तोड़ा था।

WhatsApp banned 20 lakh accounts within a month between May to June 2021  know reason behind it - Tech news hindi - बड़ा झटका! WhatsApp ने 20 लाख से  ज्यादा भारतीय यूजर्स

जानकारी के अनुसार व्हाट्सएप ने अपने यूजर्स की सेफ्टी और सिक्यॉरिटी को ध्यान में रखते हुए उन यूजर्स को बैन कर दिया है, जिन्होंने नियमों का उल्लंघन किया था। व्हाट्सएप की यूजर सेफ्टी रिपोर्ट से पता लगा है कि कुल बैन किए गए अकाउंट्स की संख्या 22 लाख 9 हजार है। व्हाट्सएप ने कहा कि इस यूजर सेफ्टी रिपोर्ट में यूजर्स की तरफ से मिली शिकायतें और उसपर की गई कार्रवाई के साथ-साथ प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग रोकने के लिए व्हाट्सएप द्वारा की कार्रवाई भी शामिल है।

व्हाट्सएप ने सरकार को बताया कि सितंबर में उन्हें अकाउंट सपोर्ट, बैन अपील, अन्य सपोर्ट व प्रोडक्ट सपोर्ट और सेफ्टी कैटेगरी में 560 यूजर जनरेटेड शिकायत रिपोर्ट मिली थी। अकाउंट सपोर्ट (121), बैन अपील (309), अन्य सपोर्ट व प्रोडक्ट सपोर्ट (49 प्रत्येक) और सेफ्टी (32)। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि व्हाट्सएप एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग सर्विस देने वाला और मैसेजिंग दुरुपयोग को रोकने में लीडिंग ऐप है। पिछले कुछ साल में, हमने अपने प्लेटफॉर्म पर अपने यूजर्स को सुरक्षित रखने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और दूसरी टेक्नोलॉजी, डेटा वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों में लगातार निवेश किया है।

कंपनी के मुताबिक, अगर कोई गैर-कानूनी, अश्लील, मानहानि से जुड़ा, धमकाने, डराने, परेशान और नफरत फैलाने वाला या नस्लीय या जातीय भेदभाव फैलाने वाले या फिर किसी को गैर-कानूनी या गलत व्यवहार करने के लिए उकसाने वाले कंटेंट को शेयर करता है तो उसका अकाउंट बैन कर दिया जाता है। इसके अलावा अगर कोई यूजर WhtasApp की टर्म्स एंड कंडीशन का उल्लंघन करता है तो भी उसका अकाउंट बंद हो जाता है। इसलिए ऐसे कंटेंट को किसी के साथ शेयर जो किसी को परेशान करें, इसी तरह आप अपने अकाउंट को सेफ रख पाएंगे। 

अब meta नाम से जाना जाएगा फ़ेसबुक

सैन फ्रांसिस्को (एजेंसी)। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक ने अपना नाम बदल दिया है। फेसबुक ने कंपनी का नाम बदलकर ‘मेटा’ करने की घोषणा कर दी है। पिछले कुछ दिनों से फेसबुक के नाम बदलने जाने की अटलकें लगाई जा रही थीं। कंपनी के फाउंडर और सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने नए नाम का ऐलान कर दिया है।

मार्क जुकेरबर्ग

जुकरबर्ग ने एक वार्षिक डेवलपर्स सम्मेलन के दौरान कहा, ‘हमने सामाजिक मुद्दों से संघर्ष करके और बंद प्लेटफार्मों के नीचे रहकर बहुत कुछ सीखा है, और हमने जो कुछ भी सीखा है उसे लागू करने और उसकी मदद से अगले अध्याय को बनाने का समय आ गया है।’ उन्होंने आगे कहा कि “हमारे एप्स और उनके ब्रांड, वे नहीं बदल रहे हैं।

यानी यह परिवर्तन फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे व्यक्तिगत प्लेटफॉर्म पर लागू नहीं होता है, केवल मूल कंपनी का नाम बदलकर ‘मेटा’ किया गया है, जिसके अंतर्गत ये सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स आते हैं।

मार्क जुकरबर्ग लंबे समय से अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की दोबारा ब्रान्डिंग करना चाह रहे थे। वे इसे एकदम अलग पहचान देना चाहते हैं, एक ऐसी पहचान जहां फेसबुक को सिर्फ एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के तौर पर ना देखा जाए। अब उसी दिशा में आगे बढ़ते हुए फेसबुक का नाम बदलकर ‘मेटा’ किया गया है।

फेसबुक का नाम बदलकर अब 'मेटा' हुआ, CEO मार्क जुकरबर्ग ने किया ऐलान

कंपनी का फोकस अब एक मेटावर्स बनाने पर है जिसके जरिए एक ऐसी वर्चुअल दुनिया का आगाज होगा जहां पर ट्रांसफर और कम्यूनिकेशन के लिए अलग-अलग टूल का इस्तेमाल किया जा सकेगा। 

दुबई के साथ हुए कश्मीर में विकास के समझाैते पर चुप्पी क्योंॽ

दुबई की सरकार ने जम्मू−कश्मीर में विकास का बड़ा ढांचा तैयार करने का बहुत बड़ा निर्णय लिया है। इसके लिए उसने जम्मू−कश्मीर सरकार से एमओयू (समझौता) किया है। पिछले हफ्ते हुआ यह समझौता देश और दुनिया के लिए बड़ी खबर था, पर देश की राजनीति और अखबारी दुनिया में ये समाचार दम तोड़ कर रह गया। हालत यह है कि इस बड़े कार्य के लिए देश की पीठ थपथपाने वाले भारत के अखबार− पत्रकार और नेता चुप हैं, जबकि इस समझौते को लेकर पाकिस्तान में हलचल है।

जम्मू −कश्मीर के विपक्षी नेताओं से इस समझौते पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं थी। उनके लिए तो ये खबर पेट में दर्द करने वाली ज्यादा है। हाल में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने जम्मू−कश्मीर में बाहरी व्यक्तियों की मौत पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने ये भी कहा था कि अनुच्छेद 370 हटाने का क्या लाभ हुआॽ जब लाभ हुआ तो उनकी बोलती बंद है।

दुनिया के अधिकांश देश जम्मू− कश्मीर को विवादास्पद क्षेत्र मानते रहे हैं। पाकिस्तान जम्मू− कश्मीर विवाद को प्रत्येक मंच पर उठाकार भारत को बदनाम करने की कोशिश करता रहा है। इस सबके बावजूद ये समझौता भारत सरकार की बड़ी उपलब्धि है।

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस बारे में बताया कि दुबई सरकार और जम्मू-कश्मीर सरकार ने एक समझौता किया है। दुबई से समझौते में औद्योगिक पार्क, आईटी टावर, बहुउद्देश्यीय टावर, रसद केंद्र, एक मेडिकल कॉलेज और एक स्पेशलिटी हॉस्पिटल सहित बुनियादी ढांचे का निर्माण होना शामिल है। दुबई और जम्मू-कश्मीर प्रशासन के साथ यह समझौता इस क्षेत्र में (केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद) किसी विदेशी सरकार की ओर से पहला निवेश समझौता है। यह समझौता आत्मानिर्भर जम्मू-कश्मीर बनाने की हमारी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।

केंद्रीय एवं वाणिज्य उद्योग मंत्रालय ने सोमवार को एक प्रेस रिलीज़ में बताया था कि इस समझौते के तहत दुबई की सरकार जम्मू-कश्मीर में रियल एस्टेट में निवेश करेगी, जिनमें इंडस्ट्रियल पार्क, आईटी टावर्स, मल्टीपर्पस टावर, लॉजिस्टिक्स, मेडिकल कॉलेज, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल शामिल हैं। ये तो नहीं बताया गया कि दुबई की सरकार कितना निवेश करेगी, पर यदि वह यहां एक भी रूपया लगाता है तो ये देश की बड़ी उपलब्धि है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद दुबई दुनिया का पहला देश है, जो जम्मू कश्मीर के विकास में निवेश करने जा रहा है। ये समझौता ऐसे समय में हुआ है जब घाटी में आतंकियों ने मासूम नागरिकों, खासतौर पर गैर-मुस्लिमों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।

भारत की मीडिया और नेता देश की उपलब्धि पर भले ही चुप हों, पर पाकिस्तान में हलचल है। इस मुद्दे पर पाकिस्‍तान के पूर्व राजनयिक अब्‍दुल बासित ने इसको भारत की बड़ी जीत बताया है। अब्‍दुल बासित पाकिस्‍तान के भारत में राजदूत रह चुके हैं। बासित ने यहां तक कहा है कि इस एमओयू के साइन होने के बाद ये बात साफ होने लगी है कि अब कश्‍मीर का मुद्दा पाकिस्‍तान के हाथों से निकलता जा रहा है। उन्‍होंने कश्‍मीर मुद्दे के फिसलने को मौजूदा इमरान सरकार की कमजोरी बताया है। उन्‍होंने ये भी कहा कि नवाज शरीफ सरकार में भी कश्‍मीर के मुद्दे को कमजोर ही किया गया। बासित के मुताबिक दुबई और भारत के बीच हुए इस सहयोग के बाद निश्‍चित तौर पर ये भारत की बड़ी जीत है।
पाकिस्‍तान के राजनयिक के मुताबिक दुबई की इस्‍लामिक सहयोग संगठन में काफी अहम भूमिका है। इस नाते भी ये करार काफी अहमियत रखता है।बासित ने कहा है कि अब ये हाल हो गया है कि एक मुस्लिम देश भारत के जम्मू−कश्मीर में निवेश के लिए एमओयू साइन कर रहा है। बासित ने ये भी कहा कि आने वाले दिनों में ये भी हो सकता है कि ईरान और यूएई जम्‍मू कश्‍मीर में अपने काउंसलेट खोल दें। उन्‍होंने कहा कि हाल के कुछ समय में पाकिस्‍तान को कश्‍मीर के मुद्दे पर मुंह की खानी पड़ी है। इस मुद्दे पर वो पूरी तरह से अलग-थलग पड़ चुका है।

छोटी−मोटी बात पर सरकार की आलोचना करने वाला देश का विपक्ष आज इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर चुप्पी साध जाए, मीडिया में खबर को जगह न मिले, इस पर संपादकीय न लिखे जाएं, तो यह आपकी सोच को बताता है। इतिहास सबके कारनामें नोट कर रहा है। वह किसी को माफ नहीं करता। किसी को माफ नहीं करेगा।

अशोक मधुप (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

गलती होने पर आएगा काम WhatsApp स्टेटस का नया फीचर

WhatsApp स्टेटस के लिए नया फीचर, गलती होने पर आएगा काम

नई दिल्ली (एजेंसी)। फेसबुक के स्वामित्व वाला मैसेजिंग ऐप व्हाट्सएप तस्वीरें एडिट करने के लिए Undo और Redo बटन पर काम कर रहा है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार कंपनी WhatsApp Status के लिए भी एक नया Undo बटन लाने जा रही है। यह Undo बटन स्टेटस लगाते समय आपसे हुई गलती को चुटकियों में सुधार देगा।

Whatsapp big feature how to share whatsapp status to facebook stories know  the full process in steps in hindi | WhatsApp का बड़ा अपडेट! बदल गया Status  लगाने का तरीका, यहां जानें

WABetaInfo की रिपोर्ट के अनुसार पॉपुलर मैसेजिंग ऐप एक ऐसे फीचर पर काम कर रहा है, जो इसके यूजर्स को गलती से पोस्ट किए गए स्टेटस अपडेट को तुरंत डिलीट करने में मदद करेगा। इसके लिए ऐप में एक Undo बटन दिया जाएगा। यह बटन Status Sent मैसेज के ठीक बगल में लिखा होगा। यानी स्टेटस लगते ही आप तुरंत एक्शन ले सकते हैं। ऐसा अक्सर देखा गया है कि कई बार गलती से स्टेटस पर तस्वीरें या वीडियो अपलोड हो जाती हैं।

गौरतलब है कि व्हाट्सएप पर पहले से ही यूजर्स को स्टेटस डिलीट करने का ऑप्शन मिलता है। हालांकि इसके लिए आपको पहले Status सेक्शन में जाकर स्टेटस सिलेक्ट करना होगा और तब डिलीट कर पाएंगे। इतनी देर में हो सकता है आपके कई कॉन्टैक्ट उस स्टेटस को देख भी लें। ऐसे में नया बटन तस्वीर/वीडियो हटाने का काम तेजी से कर पाता है। 

रिपोर्ट के मुताबिक जब आप किसी स्टेटस अपडेट को अनडू करते हैं, तो आप अब डिलीट करने की प्रक्रिया को भी फॉलो कर सकते हैं। पूरा होने पर व्हाट्सएप आपको सूचित करेगा कि आपने स्टेटस डिलीट कर दिया है। स्टेटस अपडेट के लिए Undo बटन फिलहाल व्हाट्सएप बीटा के एंड्रॉइड वर्जन 2.21.22.6 पर टेस्ट किया जा रहा है। टेस्टिंग पूरी होने के बाद इसे सभी यूजर्स के लिए जारी कर दिया जाएगा। 

न्यायपालिका में?, सभी जगह महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण क्यों नहीं-अशोक मधुप


न्यायपालिका में ही, सभी जगह महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण क्यों नहीं


सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एनवी रमण ने पिछले दिनों महिला वकीलों से आह्वान किया कि वे न्यायपालिका में 50 फीसदी आरक्षण की अपनी मांग को जोरदार ढंग से उठाएं। सीजेआई ने यह भी आश्वस्त किया कि उन्हें उनका पूरा समर्थन है। प्रश्न उठता है कि महिलाएं न्यायपालिका में ही क्यों 50 प्रतिशत आरक्षण की मांग करें। देश की सभी सेवाओं और विधायिका में क्यों नहीं 50 प्रतिशत आरक्षण की मांग करें। आधी दुनिया उनकी है तो अपने हिस्से का आधा आसमान उन्हें क्यों नहीं दिया जाताॽ    
नौ नवनियुक्त न्यायाधीशों के शीर्ष कोर्ट की महिला वकीलों द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में सीजेआई ने यह अहम बात कही। सीजेआई रमण ने कहा, ‘मैं नहीं चाहता कि आप रोएं, लेकिन आप गुस्से से चिल्लाएं और मांग करें कि हम 50 फीसदी आरक्षण चाहते हैं। चीफ जस्टिस ने कहा, ‘यह अधिकार का मामला है, दया का नहीं। मैं देश के लॉ स्कूलों में महिलाओं के लिए निश्चित मात्रा में आरक्षण की मांग का भी समर्थन करता हूं, ताकि वे न्यायपालिका में आ सकें’। 

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एनवी रमण ने न्यायपालिका में महिला वकीलों को 50 प्रतिशत आरक्षण की बात कही। प्रश्न यह है कि यह मांग न्यायपालिका तक ही सीमित क्यों रहे। महिलाएं जब आधी दुनिया हैं। आधी आबादी हैं। समाज का आधा हिंस्सा है, तो सभी क्षेत्र में आधी आबादी की बात होनी चाहिए। आधा आरक्षण देने की बात करनी  चाहिए थी। आसमान के आधे हिस्से पर उनका हक होना  चाहिए।
जब दुनिया के साथ ही भारत में महिलाओं की आधी आबादी है। तो उस पूरी आधी आबादी के लिए सेवाओं में 50 प्रतिशत आरक्षण की मांग क्यों नहीं होती? उसे उसका आधा हिस्सा क्यों नहीं मिलताॽ 

कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी ने भी कहा कि वह उत्तर प्रदेश विधान सभा में महिलाओं को 40 प्रतिशत टिकट देंगी। उन्होंने कहा कि वह तो  50 प्रतिशत  महिलाओं को टिकट देना चाहती थीं, किंतु मजबूरी है। हो सकता है कि अगली बार 50 प्रतिशत को भी टिकट दिया जा सकता है।   
एक ओर दावे यह हैं, वहीं हमारे राजनेता तो विधायिका में महिलाओं को 33 प्रतिशत भी आरक्षण  देने को तैयार नहीं।  2008 से विधायिका में महिलाओं का 33 प्रतिशत आरक्षण देने का मामला लंबित है। राज्य सभा में पारित हो जाने के बाद भी कुछ राजनैतिक दलों के रवैये के कारण से ये बिल संसद में पारित नही हो सका।
प्रश्न यह है कि महिलाएं न्यापालिका में ही 50 प्रतिशत आरक्षण की मांग क्यों करें। सभी सेवाओं में आरक्षण की मांग करें। सेना में अभी तक महिलाओं को प्रवेश नहीं था। न्यायालय के आदेश के बाद केंद्र सरकार को महिलाओं के लिए सेना के द्वार खोलने पड़े। आज ये हालत है कि देश की युवतियां लड़ाकू विमान उड़ा रहीं हैं। टोक्यो ओलम्पिक में भारत को मिले कुल पदकों में बेटियों का प्रतिशत 42.85 रहा जो अब तक का रिकॉर्ड है। त्रिस्थानीय पंचायत चुनाव में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत स्थान आरक्षित है। इसके बावजूद विजयी महिलाओं के कार्य उनके पति ही देखते हैं। अधिकांश विजेता महिला जन प्रतिनिधि स्वयं निर्णय लेने की हालत में नहीं होती। लेखक की एक परिचित महिला सांसद और उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री रहीं। किंतु उनका सारा कार्य उनके पति ही करते। पत्नी की ओर से पत्र भी वही लिखते हस्तक्षर भी वही करते रहे हैं। महिलाओं को हम तब आगे लाते हैं, जब आरक्षण या किसी मजबूरी के कारण हमारी दाल नहीं गलती। लालू यादव अपनी पत्नी राबडी देवी को मुख्यमंत्री पद खुशी से नहीं देते। जब उनकी कुछ नहीं चलती, तभी मजबूरी में ही वे उन्हें मुखयमंत्री बनाते हैं। महिलाओं का आरक्षण देने के साथ हमें उन्हें आत्मनिर्भर भी करना होगा। उनके हिस्से का आधा आसमान उन्हें सौंपना  ही होगा। ऐसाकर हम उन पर कोई अहसान नहीं करेंगे, उनका हक ही उन्हे देंगे।
 

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं) 

एक रुपए का यह सिक्का आपको कर देगा मालामाल!

नई दिल्ली। कोरोना वायरस संक्रमण काल में सभी जगत के लोगों को बड़ा नुकसान हुआ है, जिससे आर्थिक पहिया भी बेपटरी हो गया है। सभी के सामने पैसा कमाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है।

ऐसे में अगर आप पैसा कमाना चाहते हैं तो सबसे अच्छा मौका होगा। आपको पुराने सिक्के कलेक्ट करके रखने का शौक है तो फिर आपसे ज्यादा किस्मत वाला कोई नहीं। इन दिनों पुराने सिक्कों की निलामी लाखों और करोड़ों रुपए में हो रही है, जिससे आप भी पलक झपकते ही मोटी कमाई कर सकते हैं। आज आपको हम ऐसे सिक्के के बारे में बताने जा रहे हैं, जिससे आप करोड़ों रुपए की कमाई घर बैठे कर सकते हैं। दरअसल, 1 रुपए का यह सिक्का 10 करोड़ रुपए में नीलाम हुआ, लेकिन यह सिक्का मामूली सिक्का नहीं था। यह सिक्का अंग्रेजों के जमाने का होगा और उस पर सन् 1885 मुद्रण हो तो आपको उसके लिए 10 करोड़ रुपये मिलेंगे। इसे आप ऑनलाइन नीलामी के लिए डाल सकते हैं।

– यहां करें सिक्के की बिक्री

ऑनलाइन सेल में आप इस सिक्‍के की नीलामी कर 9 करोड़ 99 लाख रुपए तक आसानी से जीतेंगे। आपके पास ऐसे सिक्के हैं और आप इन्हें बेचना चाहते हैं तो सबसे पहले आप साइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन करें।सबसे पहले आप इस सिक्के की फोटो क्लिक करें और इसे साइट पर अपलोड करें। खरीदार सीधे आपसे संपर्क करेंगे। वहां से आप पेमेंट और डिलीवरी की शर्तों के मुताबिक अपना सिक्का बेच सकते हैं। साथ ही यहां आप बारगेनिंग भी कर सकते हैं। इसके साथ ही आप indiamart.com पर भी आप अपनी आईडी बना कर सिक्के की नीलामी कर सकते हैं। इसके लिए आपको लाखों रुपए मिल सकते हैं। नीलामी के लिए आपको अपने सिक्के की फोटो शेयर करनी होगी। बहुत से लोग एंटीक सामान खरीदते हैं। कुछ लोग जो पुराने सिक्कों को इकट्ठे करते हैं वे आपको इसके लिए अच्छे पैसे दे सकते हैं। (साभार)

कुंडलिनी योग: हिंदू धर्म रूपी पेड़ पर उगने वाला मीठा फल, सिर्फ तब तक, जब तक है पेड़

साभार

दोस्तों, यह पोस्ट शांति के लिए और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए समर्पित है। क्योंकि कुंडलिनी योग विशेषरूप से हिंदु धर्म से जुड़ा हुआ है, इसीलिए इसको कतई भी अनदेखा नहीँ किया जा सकता। मैं वैसा बनावटी और नकली योगी नहीँ हूँ कि बाहर से योग-योग करता फिरूँ और योग के मूलस्थान हिंदूवाद पर हो रहे अत्याचार को अनदेखा करता रहूँ। अभी हाल ही में इस्लामिक आतंकियों ने कश्मीर में एक स्कूल में घुसकर बाकायदा पहचान पत्र देखकर कुछ हिंदुओं-सिखों को मार दिया, और मुस्लिम कर्मचारियों को घर जाकर नमाज पढ़ने को कहा। इसके साथ ही, बांग्लादेश में मुस्लिमों की भीड़ द्वारा हिंदुओं और उनके धर्मस्थलों के विरुद्ध व्यापक हिंसा हुई। उनके सैकड़ों घर जलाए गए। उन्हें बेघर कर दिया गया। कई हिंदुओं को जान से मार दिया गया। जेहादी भीड़ मौत का तांडव लेकर उनके सिर पर नाचती रही। सभी हिंदु डर के साए में जीने को मजबूर हैं। मौत से भयानक तो मौत का डर होता है। यह असली मौत से पहले ही जिंदगी को खत्म कर देता है। इन कट्टरपंथियों के दोगलेपन की भी कोई हद नहीँ है। हिंदुओं के सिर पर तलवार लेके खड़े हैं, और उन्हीं को बोल रहे हैं कि शांति बनाए रखो। भई जब मर गए तो कैसी शान्ति। हिंसा के विरुद्ध कार्यवाही करने के बजाय हिंसा को जस्टिफाई किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि कुरान का अपमान हुआ, इस्लाम का अपमान हुआ, पता नहीँ क्या-2। वह भी सब झूठ और साजिश के तहत। फेसबुक पर झूठी पोस्ट वायरल की जा रही है। पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां चुपचाप मूकदर्शक बनी हुई हैं। उनके सामने भी हिंसा हो रही है। धार्मिक हिंसा के विरुद्ध सख्त अंतरराष्ट्रीय कानून बनाए जाने की सख्त जरूरत है। दुनियादारी मानवीय नियम-कानूनों से चलनी चाहिए। किसी भी धर्म में कट्टरवाद बर्दाश्त नहीं होना चाहिये। सभी धर्म एक-दूसरे की ओर उंगली दिखाकर अपने कट्टरवाद को उचित ठहराते हुए उसे जस्टिफाई करते रहते हैं। यह रुकना चाहिए। कट्टरवाद के खिलाफ खुल कर बोलना चाहिए। मैं जो आज आध्यात्मिक अनुभवों के शिखर के करीब पहुंचा हूँ, वह कट्टरपंथ के खिलाफ बोलते हुए और जीवन जीते हुए ही पहुंचा हूँ। कई बार तो लगता है कि पश्चिमी देशों की हथियार निर्माता लॉबी के हावी होने से ही इन हिंसाओं पर इतनी अंतरराष्ट्रीय चुप्पी बनी रहती है। 

इस्कॉन मंदिर को गम्भीर रूप से क्षतिग्रस्त किया गया, भगवान की मूर्तियां तोड़ी गईं, और कुछ इस्कॉन अनुयायियों की बेरहमी से हत्या की गई। सबको पता है कि यह सब पाकिस्तान ही करवा रहा है। इधर दक्षिण एशिया में बहुत बड़ी साजिश के तहत हिंदुओं का सफाया हो रहा है, उधर पूरा अंतरराष्ट्रीय समुदाय चुप, संयुक्त राष्ट्र संघ चुप, मानवाधिकार संस्थाएँ चुप। क्या हिंदुओं का मानवाधिकार नहीँ होता? क्या हिंदु जानवर हैँ? फिर यूएनओ की पीस कीपिंग फोर्स कब के लिए है। हिंदुओं के विरुद्ध यह साजिश कई सदियों से है, इसीलिए तो पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं की जनसँख्या कई गुणा कम हो गई है, और आज विलुप्ति की कगार पर है, पर मुसलमानों की जनसंख्या कई गुना बढ़ी है। अफगानिस्तान और म्यांमार में भी हिंदुओं के खिलाफ ऐसे साम्प्रदायिक हमले होते ही रहते हैं। यहाँ तक कि भारत जैसे हिन्दु बहुल राष्ट्र में भी अनेक स्थानों पर हिंदु सुरक्षित नहीं हैं, विशेषकर जिन क्षेत्रों में हिन्दु अल्पसंख्यक हैं। आप खुद ही कल्पना कर सकते हैं कि जब भारत जैसे हिन्दु बहुल देश के अंदर और उसके पड़ोसी देशों में भी हिंदु सुरक्षित नहीं हैं, तो 50 से ज्यादा इस्लामिक देशों में हिंदुओं की कितनी ज्यादा दुर्दशा होती होगी। पहले मीडिया इतना मजबूत नहीं था, इसलिए दूरपार की दुनिया ऐसी साम्प्रदायिक घटनाओँ से अनभिज्ञ रहती थी, पर आज तो अगर कोई छींकता भी है, तो भी ऑनलाइन सोशल मीडिया में आ जाता है। इसलिए आज तो जानबूझकर दुनिया चुप है। पहले संयुक्त राष्ट्र संघ जैसी संस्थाएँ नहीं होती थीं, पर आज भी ये संस्थाएँ न होने की तरह ही हैं, क्योंकि ये अल्पसंख्यकों को कोई सुरक्षा नहीँ दे पा रही हैं। वैसा बॉस भी क्या, जो अपने मातहतों को काबू में न रख सके। मुझे तो यह दिखावे का यूएनओ लगता है। उसके पास शक्ति तो कुछ भी नहीँ दिखती। क्योँ वह नियम नहीं बनाता कि कोई देश धर्म के आधार पर नहीँ बन सकता। आज के उदारवादी युग में इस्लामिक राष्ट्र का क्या औचित्य है। इसकी बात करना ही अल्पसंख्यक के ऊपर अत्याचार है, लागू करना तो दूर की बात है। जब इस्लामिक राष्ट्र का मतलब ही अन्य धर्मों पर अत्याचार है, तो यूएनओ इसकी इजाजत कैसे दे देता है। यूएनओ को चाशनी में डूबा हुआ खंजर क्यों नहीं दिखाई देता। प्राचीन भारत के बंटवारे के समय आधा हिस्सा हिंदुओं को दिया गया, और आधा मुसलमानों को। पर हिंदुओं को तो कोई हिस्सा भी नहीं मिला। दोनों हिस्से मुसलमानों के हो गए। आज जिसे भारत कहते हैं, वह भी दरअसल हिंदुओं का नहीं है। दुनिया को हिन्दुओं का दिखता है, पर है नहीँ। यह एक बहुत बड़ा छलावा है, जिसे दुनिया को समझना चाहिए। भारत में मुसलमानों को अल्पसंख्यक के नाम से बहुत से विशेषाधिकार प्राप्त हैं, जिसका ये खुल कर दुरुपयोग करते हैं, जिसकी वजह से आज भारत की अखंडता और संप्रभुता को खतरा पैदा हो गया लगता है। पूरी दुनिया में योग का गुणगान गाया जाता है, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है, पर जिस धर्म से योग निकला है, उसे खत्म होने के लिए छोड़ दिया गया है। बाहर-बाहर से योग का दिखावा करते हैं। उन्हें यह नहीं मालूम कि यदि हिंदु धर्म नष्ट हो गया, तो योग भी नहीं बच पाएगा, क्योंकि मूलरूप में असली योग हिंदु धर्म में ही है। पतंजलि योगसूत्रों पर जगदप्रसिद्ध और गहराई से भरी हुई पुस्तक लिखने वाले एडविन एफ. ब्रयांट लिखते हैं कि हिंदू धर्म और इसके ग्रँथ ही योग का असली आधारभूत ढांचा है, जैसे अस्थिपंजर मानव शरीर का आधारभूत ढांचा होता है। योग तो उसमें ऐसे ही सतही है, जैसे मानवशरीर में चमड़ी। जैसे मानव को चमड़ी सुंदर और आकर्षक लगती है, वैसे ही योग भी। पर अस्थिपंजर के बिना चमड़ी का अस्तित्व ही नहीँ है। इसलिए योग को गहराई से समझने के लिए हिन्दु धर्म को गहराई से समझना पड़ेगा। इसीलिए योग को बचाने के लिए हिन्दु धर्म और उसके ग्रन्थों का अध्ययन और उन्हें संरक्षित करने की जरूरत है। उन्होंने कई वर्षों तक कड़ी मेहनत करके हिन्दु धर्म को गहराई से समझा है, उसे अपने जीवन में उतारा है। मैंने भी हिंदु धर्म का भी गहराई से अध्ययन किया है, और योग का भी, इसलिए मुझे पता है। अन्य धर्मों का भी पता है मुझे कि वे कितने पानी में हैं। अधिकांशतः वे सिर्फ हिंदु धर्म का विरोध करने के लिए ही बने हुए लगते हैं। तो आप खुद ही सोच सकते हैं कि जब हिंदु धर्म पूरी तरह से वैज्ञानिक है, तो दूसरे धर्म कैसे होंगे। बताने की जरूरत नहीं है। समझदारों को इशारा ही काफी होता है। जिन धर्मों को अपने बढ़ावे के लिए हिंसा, छल और जबरदस्ती की जरूरत पड़े, वे धर्म कैसे हैं, आप खुद ही सोच सकते हैं। मैंने इस वेबसाइट में हिंदु धर्म की वैज्ञानिकता को सिद्ध किया है। अगर किसी को विश्वास न हो तो वह इस वेबसाइट का अध्ययन कर ले। मैं यहाँ किसी धर्म का पक्ष नहीं ले रहा हूं, और न ही किसी धर्म की बुराई कर रहा हूँ, केवल वैज्ञानिक सत्य का बखान कर रहा हूं, अपनी आत्मा की आवाज बयाँ कर रहा हूँ, अपने कुंडलिनी जागरण के अनुभव की आवाज को बयाँ कर रहा हूँ, अपने आत्मज्ञान के अनुभव की आवाज को बयाँ कर रहा हूँ, अपने पूरे जीवन के आध्यात्मिक अनुभवों की आवाज को बयां कर रहा हूँ, अपने दिल की आवाज को बयां कर रहा हूँ। मैं तो कुछ भी नहीँ हूँ। एक आदमी क्या होता है, उसका तर्क क्या होता है, पर अनुभव को कोई झुठला नहीं सकता। प्रत्यक्ष अनुभव सबसे बड़ा प्रमाण होता है। आज इस्कॉन जैसे अंतरराष्ट्रीय हिन्दु संगठन की पीड़ा भी किसी को नहीं दिखाई दे रही है, जबकि वह पूरी दुनिया में फैला हुआ है। मैंने उनकी पीड़ा को दिल से अनुभव किया है, जिसे मैं लेखन के माध्यम से अभिव्यक्त कर रहा हूँ। यदि हिंदु धर्म को हानि पहुंचती है, तो प्रकृति को भी हानि पहुंचती है, धरती को भी हानि पहुंचती है। प्रकृति-पूजा और प्रकृति-सेवा का व्यापक अभियान हिंदु धर्म में ही निहित है। देख नहीँ रहे हो आप, दुनिया के देशों के बीच किस तरह से घातक हथियारों की होड़ लगी है, और प्रदूषण से किस तरह धरती को नष्ट किया जा रहा है। धरती को और उसके पर्यावरण को यदि कोई बचा सकता है, तो वह हिंदु धर्म ही है।भगवान करे कि विश्व समुदाय को सद्बुद्धि मिले।

आईआईएमसी प्रोफेसर अनुभूति यादव की ‘’मीडिया लिट्रेसी’ का विमोचन

आईआईएमसी की प्रोफेसर अनुभूति यादव की किताब ’मीडिया लिट्रेसी’ का सफ़लता पूर्वक हुआ विमोचन

लखनऊ । वर्तमान मीडिया युग के दौर में सही खबरों का स्थान फेक न्यूज और अफवाहों ने बहुत तेजी से ले लिया है. इसी को मद्देनजर रखते हुए गलत खबरों को रोकने के लिए तमाम मीडिया संस्थानों द्वारा नए –नए प्रयोग किए जा रहे हैं।

खासकर महामारी के दौर में फेक न्यूज ने काफी विकराल रूप धारण कर लिया। सोमवार को आईआईएमसी की प्रोफेसर डॉ.अनुभूति यादव की किताब ’ मीडिया लिट्रेसी ’ का सफलता पूर्वक विमोचन हुआ। इस मौके पर डा अनुभूति यादव ने बताया कि मीडिया लिटरेसी: कीज़ टू इंटरप्रेटिंग मीडिया मैसेजेस नामक पुस्तक में मीडिया और सूचना साक्षरता के क्षेत्र के अपने समृद्ध अनुभवों के साथ इस प्रिंट संस्करण को निकालने का फैसला किया, जब हम सभी गलत सूचना, दुष्प्रचार और विभिन्न प्रकार की अफवाहों से घिरे हैं। महामारी के दौरान दुनिया ने इंफोडेमिक से निपटने के लिए मीडिया और सूचना साक्षरता के महत्व को पहचाना है।

इस किताब में लेखक के तौर पर प्रो. आर्ट सिल्वरब्लैट वेबस्टर यूनिवर्सिटी, सेंट लुइस, मिसौरी में मीडिया कम्युनिकेशंस के प्रोफेसर एमेरिटस प्रो. अनुभूति यादव, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन में न्यू मीडिया के प्रोफेसर भारत, डॉ. वेद व्यास कुंडू, गांधी स्मृति और दर्शन समिति के कार्यक्रम अधिकारी, भारत से वैश्विक एमआईएल समारोहों में एक योगदान है। यह भारतीय संस्करण डिजिटल इंटरनेशनल मीडिया लिटरेसी एजुकेशन प्रोजेक्ट (DIMLE) के तहत विकसित किया गया था।

तमाम मीडिया संस्थानों में कार्यरत पत्रकारों ने बताया कि मीडिया लिटरेसी किताब, मीडिया के छात्रों के अत्यंत उपयोगी साबित होगी। न्यू मीडिया व सोशल मीडिया के त्वरित सूचना प्रवाह में गलत खबरों की समस्त तरीकों से यह किताब रूबरू कराएगी।

पुस्तक के भाग एक में मीडिया पाठ के महत्वपूर्ण विश्लेषण के लिए एक सैद्धांतिक रूपरेखा प्रस्तुत की गई है। भाग दो-छात्रों को इस पद्धतिगत ढांचे को विभिन्न प्रकार के मीडिया प्रारूपों में लागू करने का अवसर देता है: पत्रकारिता, विज्ञापन और राजनीतिक संचार। भाग तीन में मास मीडिया मुद्दों (मीडिया, मीडिया और बच्चों में हिंसा, मीडिया और सामाजिक परिवर्तन, और वैश्विक संचार) पर एक संक्षिप्त विचार शामिल है, साथ ही लोगों के अधिक मीडिया साक्षर होने के बाद संभावित परिणामों की चर्चा भी शामिल है।

जिस साड़ी को हम ठुकरा रहे हैं, आज दुनिया के कई देश उसे अपना रहे हैं

जिस साड़ी को हम ठुकरा रहे हैं आज दुनिया के कई देश उसे अपना रहे हैं

जिस साड़ी को हम ठुकरा रहे हैं आज दुनिया के कई देश उसे अपना रहे हैं

आज समय बदल रहा है। जींस पैंट शर्ट, पंजाबी सलवार−सूट ज्यादा पहने जाने लगे। साड़ी को पहनने की परेशानी से बचने के लिए महिलाओं और युवतियों ने टॉप−जीन्स, सलवार−सूट स्वीकार कर लिया। भारतीय महिलाओं का सबसे पसंदीदा परिधान साड़ी अब समारोह में पहनी जाने लगी।

हाल ही में दिल्ली के एक रेस्टोरेंट में एक महिला को इसलिए प्रवेश नहीं दिया गया कि वह साड़ी पहने थी। समाचार आया। बड़ा अजीब-सा लगा। भारत में महिलाओं की वेशभूषा में सदियों से साड़ी स्वीकार्य है। महिलाएं साड़ी पहनती रही हैं। साड़ी का पहनावा भारतीय है। हालांकि क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग भी पहनावे रहे पर साड़ी भारतीयों की महिलाओं की पहचान मानी गई। साड़ी पहने महिला को रेस्टोरेंट में न जाने देना अजीब-सा लगा। लगा कि आधुनिकता में हम इतने रम गए कि हम अपना पहनावा, रहन सहन, वेशभूषा ही भूल गए।

आज समय बदल रहा है। जींस पैंट शर्ट, पंजाबी सलवार−सूट ज्यादा पहने जाने लगे। साड़ी को पहनने की परेशानी से बचने के लिए महिलाओं और युवतियों ने टॉप−जीन्स, सलवार−सूट स्वीकार कर लिया। भारतीय महिलाओं का सबसे पसंदीदा परिधान साड़ी अब समारोह में पहनी जाने लगी। साड़ी अब किसी समारोह या विवाह आदि में ही पहने जाने वाले परिधान में आ गई। हालांकि भारतीय महिलाओं को आज भी सबसे ज्यादा पसंद साड़ी ही है।

लगभग सात साल पहले श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के प्रतिनिधिमंडल में मुझे श्रीलंका जाने का अवसर मिला। सात दिन का प्रवास था। एक बड़े मॉल में हम खरीदारी करने के लिये गए। मॉल में लगभग सभी अटेंडेंट महिलाएं थीं। उनमें एक−दो को छोड़ सब साड़ी पहने थीं। कुछ अजीब-सा लगा। भारत, जहां महिलाओं का पहनावा साड़ी है, वहां की युवतियां अब साड़ी नहीं पहनतीं। यहां शान के साथ युवतियां साड़ी पहने ड्यूटी कर रहीं हैं। श्रीलंका की संसद में हमारे लिए भोजन की व्यवस्था थी। भोजन के बाद संसद का भ्रमण भी कार्यक्रम में शामिल था। मैं देखकर आश्चर्यचकित था कि वहां कार्य करने वाली सभी युवतियां और महिलाएं साड़ी पहने हुए थीं। ऐसा लग रहा था कि श्रीलंका में नहीं भारत में खड़ा हूं। हमारी गाईड भी साड़ी पहने थी। हम कोलंबो के एक पार्क में जाते हैं। यहां एक नवयुगल फोटो शूट करा रहा है। युवती बहुत खूबसूरत रंगबिरंगी साड़ी पहने हुए है। श्रीलंका में घूमने के दौरान काफी तादाद में महिलाएं साड़ी पहने मिलीं। साड़ी श्रीलंका स्टाइल में अलग होती है। भारतीय से अलग श्रीलंकन साड़ी पहनती हैं। ये नीचे से लहंगा टाइप होती है। ऊपर से उसे साड़ी की तरह बांधती हैं।

श्रीलंका की हमारी पत्रकार साथी सुभाषिनी डी. सिल्वा ने बताया कि साड़ी श्रीलंकाई महिलाओं की नेशनल ड्रेस है। कई सरकारी और प्राइवेट कार्यालयों में भी महिलाओं के लिए साड़ी पहनकर ऑफिस आने के आदेश हैं। महिलाओं के लिये साड़ी पहनना गौरव की बात मानी जाती है। हमारे यहां साड़ी पहनने का प्रचलन कम होता जा रहा है, जबकि दूसरे देश वाले इसे स्वीकार कर रहे हैं। 2012 में मैं नेपाल के होटल ड्रेगन में रुका था। ये एक चाइनीज होटल है। एक दिन सवेरे नाश्ते के दौरान मैंने और मेरी पत्नी ने चीन की दो लड़कियों को सफेद साड़ी पहने देखा। ठिगना कद। गोरा दूधिया रंग और गुलाबी चेहरा। ऐसे बदन पर सफ़ेद साड़ी ऐसा लग रहा था, कि स्वर्ग की अप्सराएं धरती पर उतर आईं हों। उनसे कुछ दूर बैठे हम उन्हें काफी देर देखते रहे। वह तो हिंदी−अंग्रेजी नहीं समझ पा रहीं थीं, किंतु होटल के प्रबंधक ने बताया कि चीन की नई युवतियां साड़ी पसंद करतीं हैं। इसमें नया लुक आता है। ये गर्व की बात है कि हम भारतीय जिस पहनावे को त्याग रहे हैं, दूसरे देश उसे स्वीकार कर रहे हैं।

-अशोक मधुप (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

9 अक्टूबर विश्व डाक दिवस: 9-16 अक्टूबर तक राष्ट्रीय डाक सप्ताह का आयोजन – पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव

9 अक्टूबर को विश्व डाक दिवस, 9-16 अक्टूबर तक राष्ट्रीय डाक सप्ताह का आयोजन – पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव

देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में डाक विभाग की अहम भूमिका – पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव

वाराणसी। डाक विभाग देश के सबसे पुराने विभागों में से एक है जो कि देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह एक ऐसा संगठन है जो न केवल देश के भीतर बल्कि देश की सीमाओं से बाहर अन्य देशों तक पहुँचने में भी हमारी मदद करता है। पूरे विश्व में हर वर्ष 9 अक्टूबर को “अंतर्राष्ट्रीय डाक दिवस” और उसी क्रम में 9-16 अक्टूबर तक भारत में राष्ट्रीय डाक सप्ताह मनाया जायेगा। उक्त जानकारी वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने दी। इस दौरान ‘आजादी के अमृत महोत्सव’ के संबंध में भी लोगों को जागरूक किया जायेगा।

इसलिए मनाया जाता है विश्व डाक दिवस

9 अक्टूबर को “अंतर्राष्ट्रीय डाक दिवस” मनाये जाने के बारे में पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि ‘एक विश्व-एक डाक प्रणाली’ की अवधारणा को साकार करने हेतु 9 अक्टूबर, 1874 को ‘यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन’ की स्थापना बर्न, स्विटजरलैण्ड में की गई, जिससे विश्व भर में एक समान डाक व्यवस्था लागू हो सके। भारत प्रथम एशियाई राष्ट्र था, जो कि 1 जुलाई 1876 को इसका सदस्य बना। कालांतर में वर्ष 1969 में टोकियो, जापान में सम्पन्न यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन कांग्रेस में इस स्थापना दिवस को ‘विश्व डाक दिवस’ के रूप में मनाने हेतु घोषित किया गया। तब से पूरी दुनिया में इस दिन को प्रतिवर्ष धूमधाम से मनाया जाता है। विश्व डाक दिवस के क्रम में ही पूरे सप्ताह को राष्ट्रीय डाक सप्ताह के रूप में मनाया जायेगा, इस दौरान तमाम कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।

विश्व डाक दिवस के क्रम में राष्ट्रीय डाक सप्ताह का आयोजन

पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि परिक्षेत्र के विभिन्न डाक मंडलों में भी ‘विश्व डाक दिवस’ और तदन्तर 9 से 16 अक्टूबर तक ‘राष्ट्रीय डाक सप्ताह’ का आयोजन किया जा रहा है। इस क्रम में 9 अक्टूबर को ‘विश्व डाक दिवस’, 11 अक्टूबर को बैंकिंग दिवस, 12 अक्टूबर को डाक जीवन बीमा दिवस, 13 अक्टूबर को फिलेटली दिवस, 14 अक्टूबर को व्यवसाय विकास दिवस और 16 अक्टूबर को मेल दिवस के रूप में मनाया जायेगा।

पोस्टमास्टर जनरल श्री यादव ने कहा कि ‘आजादी के अमृत महोत्सव’ के परिप्रेक्ष्य में इस दौरान क्षेत्रीय, मंडलीय कार्यालय और प्रधान डाकघरों को रोशनी से सुसज्जित करने के साथ-साथ उन पर अमृत महोत्सव का बोर्ड भी प्रदर्शित किया जायेगा। सेवाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं राजस्व अर्जन में वृद्धि पर जोर दिया जायेगा, वहीं उत्कृष्टता हेतु डाक कर्मियों का सम्मान, कस्टमर मीट, डाक सेवाओं की कार्य-प्रणाली को समझने हेतु स्कूली बच्चों द्वारा डाकघरों का भ्रमण, माई स्टैम्प, पेंटिंग व क्विज प्रतियोगिता, बचत बैंक, सुकन्या समृद्धि योजना, इण्डिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक व डाक जीवन बीमा मेला, आधार कैम्प इत्यादि तमाम कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।

वाराणसी में डाक सेवाएं

पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि वाराणसी में डाक सेवाओं का पुराना इतिहास रहा है। आजादी के पहले से ही डाक सेवाओं ने यहाँ के सामाजिक-आर्थिक परिवेश को प्रभावित किया है। वाराणसी डाक क्षेत्र के अधीन वाराणसी पूर्वी, वाराणसी पश्चिमी, गाजीपुर, जौनपुर और बलिया डाक मंडल अवस्थित हैं। वाराणसी में डाक सेवाओं की महत्ता के मद्देनजर ही वर्ष 2016 में यहाँ पोस्टमास्टर जनरल का पद सृजित किया गया, उससे पहले यहाँ का डाक प्रशासन पोस्टमास्टर जनरल, इलाहाबाद परिक्षेत्र के अधीन था। वाराणसी परिक्षेत्र में कुल 1699 डाकघर हैं, जिनमें से 6 मंडलों के अधीन कुल 6 प्रधान डाकघर, 268 उपडाकघर और 1425 शाखा डाकघर हैं। अकेले वाराणसी जनपद में कुल 252 डाकघर हैं। आज भी वाराणसी प्रधान डाकघर और वाराणसी सिटी डाकघर हेरिटेज भवनों में संचालित हैं। वाराणसी सिटी डाकघर सम्पूर्ण महिला डाकघर के रूप में कार्यरत है। विशेश्वरगंज स्थित प्रधान डाकघर में आज भी आजादी से पहले का लेटर बॉक्स धरोहर रूप में लगाया गया है, वहीं डाक बाँटने हेतु डाकियों द्वारा इस्तेमाल किये गए भाले इत्यादि भी सुरक्षित रखे गए हैं। प्रधान डाकघर में स्थित फिलेटलिक ब्यूरो डाक टिकट संग्रह के शौकीनों हेतु प्रमुख स्थल है, जहाँ तमाम नए-पुराने डाक टिकट प्रदर्शित हैं। डाक विभाग से तमाम मशहूर हस्तियों का भी नाता रहा है। उपन्यास सम्राट के नाम से प्रसिद्ध मुंशी प्रेमचंद के पिताजी भी डाक विभाग में ही कार्य करते थे।

प्रधानमंत्री ने लता मंगेशकर को उनके जन्मदिवस पर दी बधाई

प्रधानमंत्री ने सुश्री लता मंगेशकर को उनके जन्मदिवस पर बधाई दी

नई दिल्ली (PIB)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लता मंगेशकर को उनके जन्मदिवस पर बधाई दी है और उनके दुर्घायु होने तथा स्वस्थ जीवन की कामना की है।

अपने ट्वीट में प्रधानमंत्री ने कहा है….

 “आदरणीय लता दीदी को जन्मदिवस की बधाई। उनकी मधुर वाणी पूरे विश्व में गूंजती है। अपनी विनम्रता और भारतीय संस्कृति के प्रति लगाव के लिये उनका आदर किया जाता है। निजी तौर पर उनका आशीर्वाद मेरे लिये शक्ति का स्रोत है। मैं लता दीदी की दीर्घायु और उनके स्वस्थ जीवन के लिये प्रार्थना करता हूं।”

Birthday greetings to respected Lata Didi. Her melodious voice reverberates across the world. She is respected for her humility & passion towards Indian culture. Personally, her blessings are a source of great strength. I pray for Lata Didi’s long & healthy life. @mangeshkarlata— Narendra Modi (@narendramodi) September 28, 2021

WhatsApp की एक Setting बदल कर बचा सकते हैं फोन स्टोरेज और मोबाइल डेटा!

WhatsApp की एक Setting बदल कर बचा सकते हैं फोन स्टोरेज और मोबाइल डेटा! जानें आसान तरीका

WhatsApp पर कई धांसू ट्रिक मौजूद है.

वॉट्सऐप (WhatsApp) बहुत सारे मीडिया कंट्रोल के साथ आता है, जो यूज़र्स को अपने हिसाब से फोटोज, वीडियो और अन्य मल्टीमीडिया को कंट्रोल करने की अनुमति देता है. इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप यूज़र्स को एक बार में सभी चैट के लिए ऑटो-डाउनलोड को बंद करने का ऑप्शन भी देता है. आमतौर पर वॉट्सऐप रिसीव होने वाली सभी फ़ोटो और वीडियो को डाउनलोड करता है और उन्हें फोन की गैलरी में सेव करता है. ये ना केवल आपके डेटा की खपत करता है बल्कि आपके फोन स्टोरेज को कम करने के साथ, आपके फोन को भर देता है.

इसके अलावा, वॉट्सऐप के पास एक विकल्प भी है जिसे मीडिया विजिबिलिटी कहा जाता है. इस ऑप्शन को बंद करने के साथ ही आपके फोन पर ऑटोमैटिक फोटो और वीडियोज़ डाउनलोड होना बंद हो जाएंगे. आइए जानते हैं वॉट्सऐप पर मीडिया सेटिंग्स को कैसे मैनेज करें…

ज़रूरी बातें
> वॉट्सऐप का नया वर्जन होना चाहिए.

> वॉट्सऐप का एक्टिव अकाउंट होना चाहिए.

वॉट्सऐप पर ऑटो-डाउनलोड को कैसे बंद करें?

1- वॉट्सऐप खोलें और ऊपर दाईं ओर थ्री डॉट्स पर टैप करके सेटिंग्स में जाएं.

2- स्टोरेज एंड डेटा पर टैप करें और मीडिया ऑटो-डाउनलोड सेक्शन में जाएं.

यहां करें ये बदलाव-

-मोबाइल डेटा का इस्तेमाल करते समय — सभी बॉक्स अनचेक करें

-Wifi से कनेक्ट होने पर — सभी बॉक्स अनचेक करें.

-रोमिंग के समय — सभी बॉक्स को अनचेक करें

सभी चैट के लिए मीडिया विजिबिलिटी को कैसे बंद करें?

-सेटिंग पर जाएं -> चैट्स -> मीडिया विजिबिलिटी और इसे ऑफ कर दें.

पर्सनल चैट के लिए मीडिया विजिबिलिटी को कैसे बंद करें?

-वो चैट खोलें, जिसके लिए आप मीडिया विजिबिलिटी को बंद करना चाहते हैं और ऊपर से चैट के नाम पर टैप करें. मीडिया विजिबिलिटी को सर्च करें और इसे बंद कर दें. (साभार)

लांग जंप में शैली ने जीता सिल्वर मेडल

नई दिल्ली। नैरोबी में चल रहे अंडर-20 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप (U-20 World Athletics Championships) में भारतीय युवा खिलाड़ी शैली सिंह ने सिल्वर मेडल जीत कर देश को गौरवान्वित किया है। झांसी की 17 वर्षीय युवा एथलीट शैली ने रविवार को लॉन्ग जम्प स्पर्धा में 6.59 मीटर की छलांग लगाकर रजत पदक पर कब्जा लिया। वो गोल्ड मेडल जीतने के बेहद करीब थी और महज एक सेमी से इतिहास रचने से चूक गईं। स्वीडन की मौजूदा यूरोपीय जूनियर चैंपियन माजा अस्काग ने 6.60 मीटर जम्प लगाकर गोल्ड मेडल पर कब्जा जमा लिया। 

शैली सिंह का परिचय

बेहद गरीबी से उठकर खेल में आगे बढ़ने वाली झांसी की 17 वर्षीय शैली सिंह को अनुभवी लॉन्ग जम्पर अंजू बॉबी जॉर्ज और उनके पति रॉबर्ट बॉबी जॉर्ज ने ट्रेनिंग दी है। भारतीय एथलेटिक्स में सबसे चमकीले उभरते सितारों में से एक माने जाने वाली शैली ने शुक्रवार को 6.40 मीटर की सर्वश्रेष्ठ छलांग के साथ क्वालिफिकेशन राउंड में शीर्ष स्थान हासिल किया था। वर्तमान में वो बेंगलुरु में अंजू बॉबी जॉर्ज की अकादमी में प्रशिक्षण लेती है। उन्हें अंजू के पति बॉबी जॉर्ज ने ट्रेनिंग दी है। जून में शैली सिंह ने राष्ट्रीय (सीनियर) अंतर-राज्य चैंपियनशिप में महिलाओं की लंबी कूद स्पर्धा में 6.48 मीटर के प्रयास से जीत हासिल की थी, जो उनका पिछला व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ था। वह वर्तमान U-18 विश्व नंबर 2 और U-20 राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक हैं।

अनुराग ठाकुर ने दी बधाई 

केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने अपने ट्विटर हैंडल पर एथलीट को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई दी। ठाकुर ने अपने ट्वीट में यह भी साझा किया कि झांसी में जन्मी एथलीट बेंगलुरु में अंजू बॉबी जॉर्ज की अकादमी में प्रशिक्षण लेती हैं और अंजू के पति बॉबी जॉर्ज द्वारा प्रशिक्षित हैं।

तालिबान के खिलाफ फिर खड़ा हुआ उसका सबसे ‘पुराना दुश्मन’

Taliban

न्यूज़ एजेंसियां- अफगानिस्तान में तालिबान का सबसे पुराना दुश्मन उठ खड़ा हुआ है और उसकी हुकूमत के खिलाफ आवाज बुलंद कर दी है। तालिबान के कब्जे के बीच उसकी हुकूमत के खिलाफ खेमेबंदी तेज हो गई है। आतंकी संगठन से निपटने की रणनीति तैयार करने के लिए तालिबान विरोधी ताकतें बेहद खतरनाक पंजशीर घाटी में इकट्ठा हुई हैं। इनमें पूर्व उपराष्ट्रपति अमरूल्ला सालेह और अफगान सरकार के वफादार सिपहसालार जनरल अब्दुल रशीद दोस्तम व अता मोहम्मद नूर के अलावा नॉदर्न अलायंस से जुड़े अहमद मसूद की फौजें शामिल हैं। अहमद मसूद ‘पंजशीर के शेर’ के नाम से मशहूर पूर्व अफगान नेता अहमद शाह मसूद के बेटे हैं।

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, तालिबान के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंकने वाली फौजों यानी नॉदर्न अलायंस ने परवान प्रांत के चारिकार इलाके पर दोबारा नियंत्रण हासिल कर लिया है। चूंकि, चारिकार राजधानी काबुल को उत्तरी अफगानिस्तान के सबसे बड़े शहर मजार-ए-शरीफ से जोड़ता है, लिहाजा उस पर जीत को विद्रोहियों की बड़ी कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है। खबरों के अनुसार, चारिकार पर कब्जे के लिए सालेह के सैनिकों ने पंजशीर की तरफ से हमला किया था। यह अफगानिस्तान का अकेला ऐसा प्रांत है, जिस पर तालिबान का कब्जा नहीं हो सका है। विद्रोहियों ने पंजशीर में नॉदर्न अलायंस उर्फ यूनाइटेड इस्लामिक फ्रंट का झंडा भी फहरा दिया है। अब उनका इरादा पूरी पंजशीर घाटी पर कब्जा जमाने का है।

Northern Alliance

दो दशक बाद फिर खड़ा हुआ नॉदर्न अलायंस
नॉदर्न अलायंस को 1990 के दशक में अफगानिस्तान में तालिबान की हुकूमत के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए जाना जाता है। शुरुआत में इस अलायंस से सिर्फ तजाख और तालिबान विरोधी मुजाहिद्दीन ही जुड़े थे, पर बाद में अन्य कबीलों के सरदार भी इसमें शामिल हो गए। अफगानिस्तान के पूर्व रक्षा मंत्री अहमद शाह मसूद ने नॉदर्न अलायंस का नेतृत्व किया था।

सालेह ने अफगान अवाम के मन में जगाई उम्मीद
तालिबान से मुकाबले की रणनीति अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति अमरूल्ला सालेह के नेतृत्व में बन रही है। सालेह ने अफगान राष्ट्रपति अशरफ घनी के मुल्क छोड़कर भागने के बाद खुद को कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित कर दिया है। उन्होंने आखिरी दम तक तालिबान से लड़ने की प्रतिबद्धता जताई है। साथ ही भरोसा दिलाया है कि मुल्क को कभी तालिबान के हवाले नहीं होने देंगे। यही वजह है कि नॉदर्न अलायंस एक बार फिर से तालिबान से लोहा लेने को तैयार है। 

पंजशीर घाटी पर कभी कब्जा नहीं कर पाया तालिबान
पंजशीर घाटी अफगानिस्तान के 34 प्रांतों में से एक है। यह राजधानी काबुल के उत्तर में हिंदूकुश क्षेत्र में स्थित एक बेहद दुर्गम घाटी है, जो ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों से घिरी है। अफगान अवाम इसे भूलभुलैया के तौर देखती है, जहां परिंदे का पर मारना भी मुश्किल माना जाता है। यही कारण है कि 1980 के दशक से लेकर अब तक पंजशीर घाटी पर तालिबान का कब्जा नहीं हो सका है।

नामकरण की कहानी
पंजशीर घाटी का अर्थ है पांच शेरों की घाटी। मान्यता है कि दसवीं शताब्दी में पांच भाइयों ने गजनी के सुल्तान महमूद के लिए एक बांध बनाया था, जिससे बाढ़ के पानी को नियंत्रित करने में कामयाबी मिली थी। इसके बाद यह इलाका पंजशीर घाटी के नाम से जाना जाने लगा।

प्रतिरोध का गढ़
पंजशीर घाटी 1980 के दशक में सोवियत संघ तो 1990 के दशक में तालिबान के खिलाफ प्रतिरोध का गढ़ रही थी। इसकी भौगोलिक स्थिति को देखते हुए अमेरिका नीत फौजें भी क्षेत्र में जमीनी कार्रवाई करने की हिम्मत जुटा सकीं। उनका अभियान सिर्फ हवाई हमलों तक सीमित रहा।

सालेह की जन्मभूमि
पंजशीर घाटी अफगानिस्तान के ‘नेशनल रेजिस्टेंस फ्रंट’ का गढ़ कहलाती है। अमरूल्ला सालेह और अहमद मसूद इसके प्रमुख नेता हैं। सालेह का जन्म पंजशीर घाटी में ही हुआ था। उन्हें सैन्य प्रशिक्षण भी यहीं पर मिला था। वहीं, अहमद मसूद पूर्व अफगान नेता अहमद शाह मसूद के बेटे हैं, जिन्हें ‘पंजशीर के शेर’ के नाम से जाना था।

ताजिक बाहुल क्षेत्र
-01 लाख से अधिक है पंजशीर घाटी की आबादी, इनमें ज्यादातर ताजिक मूल के लोग शामिल
-150 किलोमीटर के लगभग है राजधानी काबुल से इसकी दूरी, पन्ना खनन का केंद्र कहलाती है।

तालिबान को खुला चैलेंज देने वाली लेडी गवर्नर कैद

तालिबान को खुला चैलेंज देने वाली लेडी गवर्नर हुईं कैद, महिला एंकर पर बैन शुरू

आखिरी उम्मीद भी खत्म: तालिबान को खुला चैलेंज देने वाली लेडी गवर्नर हुईं कैद, महिला एंकरों पर बैन लगाना शुरू

काबुल : अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद तालिबान एक तरफ सरकार बनाने में जुटा है। दूसरी ओर वॉरलॉर्ड्स को ढूंढ-ढूंढकर पकड़ रहा है। पहले तालिबान ने वॉरलॉर्ड्स इस्माइल खान को पकड़ा था। अब इसके लड़ाकों ने अफगानिस्तान की पहली महिला गवर्नर सलीमा मजारी को पकड़ लिया है। मजारी बल्ख प्रांत की चारकिंत जिले की गवर्नर हैं। तालिबान से लड़ने के लिए उन्होंने अपनी आर्मी बनाई थी और खुद भी हथियार उठाए थे। सलीमा आखिरी वक्त तक तालिबान का सामना करती रहीं।विज्ञापन

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, हजारा समुदाय के सूत्रों इस बात की पुष्टि की है कि अफगानिस्तान की लेडी गवर्नर सलीमा मजारी अब तालिबान के हाथों पकड़ी जा चुकी हैं। अफगानिस्तान की सलीमा मजारी बल्ख प्रांत की चारकिंत ज़िले की महिला गर्वनर हैं, जो बीते कुछ दिनों से तालिबान से लोहा लेने के लिए अपनी सेना बना रही थीं। यह घटना ऐसे वक्त में सामने आई है, जब तालिबान ने सभी अफगान सरकारी अधिकारियों के लिए “सामान्य माफी” की घोषणा की और उनसे काम पर लौटने का आग्रह किया, जिसमें शरिया कानून के अनुरूप महिलाएं भी शामिल थीं।अंतर्राष्ट्रीय :

अफगानिस्तान की पहली महिला गवर्नरो में से एक सलीमा मजारी को तालिबान ने कैद किया।

जब अफगानिस्तान में तालिबान कत्लेआम मचा रहा था और बाकी के नेता देश छोड़कर भाग रहे थे या फिर सरेंडर कर रहे थे, तब अपने लोगों को बचाने के लिए महिला गवर्नर सलीमा मजारी अपनी सेना खड़ी कर रही थीं और लोगों को साथ आऩे की अपील कर रही थीं। सलीमा ने अपने लोगों को बचाने के लिए तालिबान से डंटकर मुकाबला किया और पकड़े जाने से पहले तक बंदूक उठाकर अपने लोगों की रक्षा की। उनकी फौज में शामिल लोग अपनी जमीन और मवेशी बेच कर हथियार खरीद रहे थे और उनकी सेना में शामिल हो रहे थे। सलीमा मजारी खुद पिकअप की फ्रंट सीट पर बैठती थीं और जगह-जगह जाकर लोगों से अपनी सेना में शामिल होने को कहती थीं। 

अफगानिस्तान मूल की सलीमा माजरी का जन्म 1980 में एक रिफ्यूजी के तौर पर ईरान में हुआ, जब उनका परिवार सोवियत युद्ध से भाग गया था। उनकी पढ़ाई-लिखाई ईरान में ही हुई है। तेहरान विश्वविद्यालय से स्नातक होने के बाद उन्होंने दशकों पहले अपने माता-पिता को छोड़कर देश (अफगानिस्तान) जाने का फैसला करने से पहले विश्वविद्यालयों और अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन में विभिन्न भूमिकाएं निभाईं।  2018 में उन्हें पता चला कि चारकिंत जिला के गवर्नर पद की वैकेंसी आई है। यह उनकी पुश्तैनी मातृभूमि थी, इसिलए उन्होंने इस पद के लिए आवेदन भर दिया। इसके बाद वह गवर्नर के लिए चुनी गईं। तालिबान के खतरे को देखते हुए और जिले को सुरक्षित करने के लिए उन्होंने सिक्योरिटी कमिशन की स्थापना की थी, जो स्थानीय सेना में भर्ती का काम देखता था। हिरासत में होने से पहले सलीमा अपने कार्यकाल में तालिबानियों के नाक में दम कर चुकी हैं।

तालिबान ने मंगलवार को पूरे अफगानिस्तान में ‘आम माफी’ की घोषणा की और महिलाओं से उसकी सरकार में शामिल होने का आह्वान किया। इसके साथ ही तालिबान ने लोगों की आशंका दूर करने की कोशिश की, जो एक दिन पहले उसके शासन से बचने के लिए काबुल छोड़कर भागने की कोशिश करते दिखे थे और जिसकी वजह से हवाई अड्डे पर अफरा-तफरी का माहौल पैदा होने के बाद कई लोग मारे गए थे। अफगानिस्तान पर कब्जा करने वाला और कई शहरों को बिना लड़ाई जीतने वाला तालिबान वर्ष 1990 के क्रूर शासन के उलट खुद को अधिक उदार दिखाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन कई अफगान अब भी आशंकित हैं।

Facebook की तालिबान के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, संगठन से जुड़े सभी अकाउंट Delete

Facebook की तालिबान के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, संगठन से जुड़े सभी अकाउंट किए जाएंगे Delete

नई दिल्ली: फेसबुक ने कहा है कि अमेरिकी कानून के तहत तालिबान एक आतंकवादी संगठन है। ऐसे में उसे फेसबुक की सेवाओं से वंचित करने का फैसला लिया गया है। इसके अलावा तालिबान के सभी अकाउंट डिलीट किए जाएंगे। साथ ही तालिबान के समर्थन में पोस्ट करने वाले सभी अकाउंट पर बैन लगाया जाएगा। फेसबुक के एक प्रवक्ता ने कहा है कि कंपनी के पास दरी और पाश्तो भाषा के जानकारों की पूरी टीम है जो कि स्थानीय कंटेंट पर नजर रख रही हैं और हमें सूचित कर रही है।

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फेसबुक ने कहा कि पिछले कई साल से तालिबान के कई नेता और प्रवक्ता फेसबुक पर मौजूद हैं जिनके फॉलोअर्स की संख्या लाखों में है। फेसबुक का कहना है कि उसने तालिबान को अपने प्लेटफॉर्म पर बैन करना का फैसला राष्ट्रीय सरकार को ध्यान में रखते हुए नहीं लिया है, बल्कि वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के अधिकारों का पालन करती है। अपने सभी प्लेटफॉर्म यानी फेसबुक, फेसबुक मैसेंजर, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर तालिबान को बैन कर दिया है।

कर्जन वायली का वध करने वाले क्रांतिवीर मदन लाल धींगरा की जयंती पर विशेष

बलिदान दिवस (17 अगस्त 1909) पर विशेष

कर्जन वायली का वध करने वाले क्रांतिवीर मदन लाल धींगरा

राजस्थान के अजमेर में रेलवे स्टेशन के बाहर क्रांतिवीर मदन लाल धींगरा का स्मारक

बचपन में कुत्तों की भाषा बता कर अंग्रेजी पर प्रहार, किशोरवय में पिता की अंग्रेज परस्त बनाने की कोशिश को असफल, छात्र जीवन में आजादी के बीज का अंकुरण, युवावस्था में अंग्रेज अफसर कर्जन वायली का वध और हंसते-हंसते फांसी का फंदा चूम लेना किसी सामान्य व्यक्ति के लक्षण नहीं थे. ऐसे क्रांतिवीर का नाम था मदन लाल धींगरा. सिर्फ 25 साल की उम्र में धींगरा ने भारत को आजाद कराने के लिए मृत्यु का वरण किया था.
1 जुलाई 1909 की रात लंदन के इंडियन नेशनल एसोसिएशन के जलसे में कंपनी सरकार में भारतीयों पर तरह-तरह के जुल्म ढहाने वाले कर्जन वायली के सीने में अपनी पिस्टल से तड़ातड़ 2 गोलियां भरी सभा में उतार दी. धींगरा यह मौका किसी भी सूरत में हाथ से नहीं जाने देना चाहते थे. वही हुआ और कर्जन वायली मारा गया. उसे बचाने आया एक फ्रांसीसी नागरिक भी धींगरा की गोलियों का शिकार बना था. कुछ विद्वानों का मत है कि वायली के वध के बाद वीर धींगरा ने खुद को गोली मारने का जतन किया लेकिन पकड़े जाने पर वह इरादा पूरा नहीं हुआ. दूसरी ओर कुछ इतिहासकारों का मत है कि सभा से भागने के बजाय साहसी धींगरा वही खड़े रहे और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. धींगरा के इस साहस भरे कारनामे की अखबारों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा भी हुई. वायली के वध की खबर लंदन और पेरिस समेत कई देशों के समाचार पत्रों की सुर्खियां बना था. अंग्रेजों की मंशा ना होने के बावजूद भारत में भी यह समाचार तेज गति से फैल गया था.

वायली के वध को दुनिया के सामने गलत तरीके से पेश न किए जाने और अपनी अंतिम इच्छा एक पत्र के रूप में लिखकर उन्होंने जेब में रख लिया था लेकिन ब्रिटिश हुकूमत ने भारत में कंपनी राज कमजोर न पड़ने देने के लिए उस पत्र को गायब कर दिया. हालांकि ब्रिटिश सरकार को यह नहीं पता था कि धींगरा उस पत्र की एक प्रति पहले ही वीर सावरकर को सौंप चुके थे. वीर सावरकर ने धींगरा का वह पत्र चोरी-छिपे पेरिस पहुंचा कर फ्रांस के एक समाचार पत्र में छपवाने का प्रबंध कर दिया. उसके बाद ब्रिटिश सरकार वायली के वध के कारणों को लेकर को दुनिया को गुमराह नहीं कर सकने में कामयाब हुई. धींगरा से ब्रिटिश हुकूमत इतनी डरी हुई थी कि उसने भारत में राज करने वाली कंपनी सरकार को पत्र लिखकर कहा-” हम यह नहीं चाहते हैं कि इस शहीद के अवशेष पार्सल से भारत भेजे जाएं”

एक दिन जरूर आजाद होगा भारत:
साहस की प्रतिमूर्ति मदन लाल धींगरा भारत के एक ऐसे क्रांतिकारी थे जिन्होंने अंग्रेजों की धरती पर भारत विरोधी और अपने पिता भाइयों के करीबी अंग्रेज अफसर का वध करके दुनिया को एक संदेश दिया था कि वह दिन दूर नहीं जब भारत आजाद होगा. भारतीयों को वायली के वध के जुर्म में ब्रिटिश अदालत में दिया गया। धींगरा का वह बयान जरूर पढ़ना चाहिए जिसका एक-एक शब्द साहस को व्यक्त करने वाला है. वह मानते थे कि भारत पर राज करने वाले अंग्रेज अफसर 33 करोड़ भारतीयों के अपराधी हैं. अपने “चुनौती” नामक एक वक्तव्य में उन्होंने साफ-साफ कहा था- “मेरे को विश्वास है कि संगीनों के साए में पनप रहे भारत में एक युद्ध की तैयारी अवश्य चल रही होगी. क्योंकि यह लड़ाई असंभव मालूम पड़ती है और तमाम बंदूकों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. ऐसे स्थिति में मैं यही कर सकता था कि अपनी पिस्तौल से गोली मार दूं. मेरे जैसा गरीब और सामाजिक रुप से अप्रतिष्ठित व्यक्ति यही कर सकता था कि अपनी मातृभूमि के लिए अपना रक्त बहाऊं और मैंने यही किया. आज की स्थिति में हर भारतीय के लिए एक ही सबक है कि वह यह सीखे कि मृत्यु का वरण कैसे किया जाए? यह शिक्षा तभी फलीभूत होगी जब हम अपने प्राणों को मातृभूमि पर बलि चढ़ा दें. इसलिए मैं मर रहा हूं और मेरे शहीद होने से मातृभूमि का मस्तक ऊंचा ही होगा”

38 साल बाद अस्थियों को नसीब हुई देश की माटी:
17 अगस्त 1909 को लंदन की पेंटोनविले जेल में उन्हें फांसी पर चढ़ा दिया गया. अपनी अंतिम इच्छा में मदनलाल धींगरा ने कहा था कि उनके शव को कोई भी गैर हिंदू हाथ न लगाए और शव वीर सावरकर को सौंप दिया जाए. हिंदू रीति रवाज से ही मेरा अंतिम संस्कार हो लेकिन अंग्रेज हुकूमत ने उनकी आखिरी इच्छा डर के मारे पूरी नहीं की. सनातन हिंदू धर्म की परंपरा के विरुद्ध एक कोड नंबर एलाट कर शव को दफना दिया गया. शहादत के 38 वर्ष बाद भारत के आजाद होने पर भी इस क्रांतिवीर को सरकार की उपेक्षा सहन करनी पड़ी. वर्ष 1976 में मदनलाल धींगरा के अवशेष भारत लाए जा पाए थे. वह भी तब जब शहीद उधम सिंह के अवशेष को खोजते हुए धींगरा के अवशेषों पर खोजकर्ताओ की नजर पड़ी. इसके बाद ब्रिटिश सरकार ने उनके अवशेष भारत को सौंपा. वीर धगरा के अवशेष पंजाब भेजे गए लेकिन आज तक पंजाब में उनका कोई स्मारक का पता नहीं चलता. राजस्थान के अजमेर में जरूर रेलवे स्टेशन के बाहर एक छोटा सा स्मारक बना हुआ है.

विदेश में भारत की आजादी के लिए बलिदान देने वाले वह पहले क्रांतिवीर माने जाते हैं. उनकी शहादत को दुनियाभर ने सलाम किया था. फांसी दिए जाने के बाद एक आयरिश समाचार पत्र ने धींगरा को बहादुर व्यक्ति की संज्ञा दी थी. काहिरा से प्रकाशित होने वाले मिश्र के समाचार पत्र “लल्ल पेटी इजिप्शियन” ने धीगरा को अमर शहीद की उपाधि देते हुए आगामी 40 वर्षों में ब्रिटिश साम्राज्य के पतन की भविष्यवाणी की थी. यह भविष्यवाणी सच भी साबित हुई. धींगरा की शहादत के 38 साल बाद ही भारत में ब्रिटिश साम्राज्य का पतन हो गया. कांगेस की संस्थापक मानी जाने वाली श्रीमती एनी बेसेंट ने कहा था कि देश को इस समय बहुत से मदनलाल की जरूरत है. वीरेंद्र नाथ चट्टोपाध्याय ने धींगरा की स्मृति में एक मासिक पत्रिका प्रारंभ की थी, जिसका नाम था “मदन तलवार” यानी (मदनलाल की तलवार). कुछ समय बाद ही यह पत्रिका विदेश के भारतीय क्रांतिकारियों के लिए मुखपत्र बन गई थी. यह पत्रिका बर्लिन में मैडम कामा द्वारा प्रिंट कराई जाती थी. शहादत के 10 वर्ष बाद 1919 में डब्लू डब्लू ब्लंट की प्रकाशित पुस्तक में भी धींगरा की बहादुरी की प्रशंसा करते हुए लिखा गया- “धींगरा ने जिस बहादुरी के साथ एक न्यायाधीश के सामने अपना ओजस्वी बयान दिया वैसा किसी भी ईसाई शहीद ने नहीं दिया होगा”
1857 में प्रथम स्वाधीनता संग्राम के असफल होने और भारत पर ब्रिटिश हुकूमत के एकाधिकार के बीच 18 सितंबर 1886 ( अनुमान के आधार पर क्योंकि लंदन में अंग्रेज अफसर कर्जन वायली के वध के बाद संभवत अंग्रेजों के पिट्ठू पिता और भाई में सबूत मिटा दिए) को वीरों की धरती पंजाब के अमृतसर में जन्मे क्रांतिकारी मदन लाल धींगरा भारतीय स्वाधीनता संग्राम के चमकते सितारे थे. हालांकि अंग्रेज परस उनके पिता और भाइयों ने वायली के वध के बाद उनसे अपने सारे संबंध समाप्त कर लिए थे लेकिन देश के लोगों ने उन्हें शहीद का दर्जा दिया.
देश की आजादी और मातृभूमि के लिए प्राणों का उत्सर्ग करने वाले मदनलाल धींगरा को शहादत दिवस पर हर भारतीय की तरफ से शत-शत नमन..

◇ गौरव अवस्थी, वरिष्ठ पत्रकार
रायबरेली (उप्र)

कुशीनगर में अफगानी युवक की गिरफ्तारी से हड़कंप

लखनऊ (एजेंसियां)। अफगानिस्तान के एक युवक के कुशीनगर पुलिस द्वारा गिरफ्तार किये जाने से हड़कंप मचा हुआ है। टूरिस्ट वीजा पर भारत आया उक्त युवक फर्जी नाम पते पर आधार कार्ड बनवाने की कोशिश कर रहा था। खुफिया एजेंसियों ने मामले की छानबीन शुरू कर दी है।

कुशीनगर जिले के कुबेर स्थान थाना क्षेत्र के ग्राम-पिपरा जटामपुर के खुशी पट्टी में एक व्यक्ति के घर से पुलिस ने अफगानिस्तानी युवक को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने अपना नाम अहमद सगीर व पता नहियेसेदेह, मजांग, काबुल अफगानिस्तान बताया। वह वर्ष 2014 में टूरिस्ट वीजा पर दिल्ली आया था और बीते 18 जुलाई को कुशीनगर पहुंचा था। वह एक सप्ताह से फर्जी नाम पते पर आधार कार्ड बनवाने की कोशिश में लगा हुआ था। पुलिस ने बिना वीजा के रह रहे युवक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। आईबी और एटीएस की टीम युवक से पूछताछ में जुटी है।

जानकारी के अनुसार फखरुद्दीन अंसारी के घर 18 जुलाई से रह रहे एक अजनबी युवक की बोलचाल की भाषा से गांव के लोगों को उस पर संदेह हुआ। इसके बाद ग्रामीणों ने इसकी सूचना कुबेर स्थान पुलिस को दी। इस पर एसओ संजय कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम गांव से उक्त युवक को हिरासत में लेकर थाने ले गई। उच्च अधिकारियों को इसकी सूचना दी गयी। टूरिस्ट वीजा समाप्त होने के बाद वह कहां-कहां रहा, इसकी जानकारी की जा रही है।

IB और ATS सक्रिय- पुलिस ने उसके पास से एक आधार कार्ड और पासपोर्ट साइज के पांच फोटो बरामद किए हैं। उसके खिलाफ धोखाधड़ी एवं 14 विदेशी अधिनियम 1946 के तहत मुकदमा दर्ज किया है। अफगानिस्तान निवासी युवक के पकड़े जाने की जानकारी होने पर आईबी और एटीएस ने भी अपने स्तर से छानबीन शुरू कर दी है।

2014 में टूरिस्ट वीजा पर आया था दिल्ली- समीर ने बताया कि वर्ष 2014 में अफगानिस्तान में मारकाट आदि से तंग आकर वह छह माह के लिए टूरिस्ट वीजा पर भारत आया था। वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद भी अपने देश न जाकर भारत में ही रहने लगा। लोगों से झूठ बोलकर और बहाना बनाकर भारत का नागरिक बनने के लिए उसने दिल्ली के पते पर आधार कार्ड बनवा लिया था। दिल्ली में रहकर वह एक गारमेंट कंपनी में सिलाई का काम कर रहा था। वहीं काम करने वाले कुशीनगर के पिपरा जटामपुर के रहने वाले फखरुद्दीन से दोस्ती हुई। बाद में वह उसके घर कुशीनगर आ गया। यहां के पते पर भी आधार कार्ड बनवाने की फिराक में था। हालांकि, कहा यह जा रहा है कि फखरुद्दीन को उसके देश की जानकारी नहीं थी।

अफगानिस्तान भेजने को कहा तो लगा रोने- अफगानी युवक अहमद समीर वतन वापसी को तैयार नहीं है। शनिवार को पकड़े जाने के बाद पूछताछ के दौरान जब पुलिस ने उसे उसके वतन वापस भेजने की बात कही तो वह रोने लगा। समीर बार-बार यही कह रहा था कि साहब उसे यहां कहीं भी रहने की व्यवस्था करा दें मगर उसके वतन न भेंजे। वहां के हालात से वह वापस जाना नहीं चाहता है।

सीओ सदर संदीप वर्मा का कहना है कि पुलिस को एक संदिध विदेशी नागरिक के संबंध में सूचना मिली थी। उसे पकड़कर पुलिस थाने लाई और कड़ाई से पूछताछ की तो वह अफगानी नागरिक निकला। वह वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी फर्जी आधारकार्ड बनवाकर भारत में रह रहा था। उसके खिलाफ केस दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जा रही है।

बिना वीजा पकड़े गए अफगानिस्तान के संदिग्ध युवक के बारे में जो कुछ भी जानकारी और दस्तावेज मिले हैं, उसे अन्य एजेंसियों से भी साझा किया जा रहा है। पुलिस ने युवक के खिलाफ धोखाधड़ी और विदेशी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है। एजेंसियों द्वारा अन्य जानकारियां हासिल होने पर उसके मुताबिक भी कार्रवाई की जाएगी- सचिन्द्र पटेल, एसपी, कुशीनगर

तालिबान का कब्जा: अब देश का नाम ‘इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान’

अफगानिस्तान के राष्ट्रपति भवन पर तालिबान ने कब्जा कर लिया है। अल-जजीरा न्यूज नेटवर्क पर प्रसारित वीडियो फुटेज के मुताबिक, तालिबान लड़ाकों का एक बड़ा समूह राजधानी काबुल में स्थित राष्ट्रपति भवन के भीतर नजर आ रहा है। तालिबान द्वारा अफगानिस्तान पर अपने कब्जे की घोषणा राष्ट्रपति भवन से करने और देश को फिर से ‘इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान’ का नाम देने की उम्मीद है। बीस साल की लंबी लड़ाई के बाद अमेरिकी सेना के अफगानिस्तान से निकलने के कुछ ही दिनों के भीतर लगभग पूरे देश पर फिर से तालिबान का कब्जा हो गया है। 

संयुक्त राष्ट्र ने बुलाई आपात बैठक
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) एस्टोनिया और नॉर्वे के अनुरोध पर अफगानिस्तान की स्थिति पर आज सोमवार को आपात बैठक करेगी। परिषद के राजनयिकों ने रविवार को कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस परिषद के सदस्यों को राजधानी काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद के ताजा हालात से अवगत कराएंगे।

अमेरिका निकाल रहा अपने कर्मचारियों को बाहर
रविवार सुबह काबुल पर तालिबान लड़ाकों की दस्तक के बाद राष्ट्रपति अशरफ गनी ने देश छोड़ दिया। वहीं देशवासी और विदेशी भी युद्धग्रस्त देश से निकलने को प्रयासरत हैं, हालांकि काबुल हवाईअड्डे से वाणिज्यिक उड़ानें बंद होने के कारण लोगों की इन कोशिशों को झटका लगा है। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के अनुसार, अमेरिका काबुल स्थित अपने दूतावास से शेष कर्मचारियों को व्‍यवस्थित तरीके से बाहर निकाल रहा है। 

नागरिकों को सता रहा क्रूर शासन का डर
नागरिक इस भय से देश छोड़ना चाहते हैं कि तालिबान उस क्रूर शासन को फिर से लागू कर सकता है जिसमें महिलाओं के अधिकार खत्म हो जाएंगे। नागरिक अपने जीवन भर की बचत को निकालने के लिए एटीएम के बाहर खड़े हो गए। वहीं काबुल में अधिक सुरक्षित माहौल के लिए देश के ग्रामीण क्षेत्रों में अपने घरों को छोड़कर आये हजारों की संख्या में आम लोग पूरे शहर में उद्यानों और खुले स्थानों में शरण लिये हुए दिखे। अफगान राष्ट्रीय सुलह परिषद के प्रमुख अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने इसकी पुष्टि की है कि गनी देश से बाहर चले गए हैं। 

एक हफ्ते में कर लिया पूरे देश पर कब्जा: अफगानिस्तान में लगभग दो दशकों में सुरक्षा बलों को तैयार करने के लिए अमेरिका और नाटो द्वारा अरबों डॉलर खर्च किए जाने के बावजूद तालिबान ने आश्चर्यजनक रूप से एक सप्ताह में लगभग पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया। कुछ ही दिन पहले, एक अमेरिकी सैन्य आकलन ने अनुमान लगाया था कि राजधानी के तालिबान के दबाव में आने में एक महीना लगेगा।

काबुल का तालिबान के नियंत्रण में जाना अमेरिका के सबसे लंबे युद्ध के अंतिम अध्याय का प्रतीक है, जो 11 सितंबर, 2001 को अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन के षड्यंत्र वाले आतंकवादी हमलों के बाद शुरू हुआ था। ओसामा को तब तालिबान सरकार द्वारा आश्रय दिया गया था। एक अमेरिकी नेतृत्व वाले आक्रमण ने तालिबान को सत्ता से उखाड़ फेंका। हालांकि इराक युद्ध के चलते अमेरिका का इस युद्ध से ध्यान भंग हो गया।

अमेरिका वर्षों से, युद्ध से बाहर निकलने को प्रयासरत है। अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व में वॉशिंगटन ने फरवरी 2020 में तालिबान के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जो विद्रोहियों के खिलाफ प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई को सीमित करता है। इसने तालिबान को अपनी ताकत जुटाने और प्रमुख क्षेत्रों पर कब्जा करने के लिए तेजी से आगे बढ़ने की अनुमति दी। वहीं राष्ट्रपति जो बाइडन ने इस महीने के अंत तक अफगानिस्तान से सभी अमेरिकी सैनिकों की वापसी की अपनी योजना की घोषणा की।

रविवार की शुरुआत तालिबान द्वारा पास के जलालाबाद शहर पर कब्जा करने के साथ हुई, जो राजधानी के अलावा वह आखिरी प्रमुख शहर था जो उनके हाथ में नहीं था। अफगान अधिकारियों ने कहा कि आतंकवादियों ने मैदान वर्दक, खोस्त, कपिसा और परवान प्रांतों की राजधानियों के साथ-साथ देश की सरकार के कब्जे वाली आखिरी सीमा पर भी कब्जा कर लिया।

बाद में बगराम हवाई ठिकाने पर तैनात सुरक्षा बलों ने तालिबान के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। वहां एक जेल में करीब 5,000 कैदी बंद हैं। बगराम के जिला प्रमुख दरवेश रऊफी ने कहा कि इस आत्मसमर्पण से एक समय का अमेरिकी ठिकाना तालिबान लड़ाकों के हाथों में चला गया। जेल में तालिबान और इस्लामिक स्टेट समूह, दोनों के लड़ाके हैं।

मोदी ने फहराया लाल किले के प्राचीर से 8वीं बार तिरंगा

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 75वें स्तवंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले के प्राचीर से आज 8वीं बार तिरंगा फहराया। लाल किले से अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास के साथ सबका प्रयास को जोड़ा। उनके भाषण में बंटवारे का दर्द भी छलका, साथ ही आतंकवाद और विस्तारवाद का जिक्र कर परोक्ष रूप से पाकिस्तान और चीन पर निशाना साधा। पीएम मोदी ने अपने भाषण में ऐलान किया कि सरकार ने बेटियों के लिए सैनिक स्कूल के दरवाजे खोल दिए हैं।

चीन और पाक को कड़ा संदेश
पीएम मोदी ने अपने भाषण में आतंकवाद और विस्तारवाद का जिक्र कर परोक्ष रूप से पाकिस्तान और चीन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आज दुनिया, भारत को एक नई दृष्टि से देख रही है और इस दृष्टि के दो महत्वपूर्ण पहलू हैं। एक आतंकवाद और दूसरा विस्तारवाद। भारत इन दोनों ही चुनौतियों से लड़ रहा है और सधे हुए तरीके से बड़े हिम्मत के साथ जवाब भी दे रहा है। 

सभी सैनिक स्कूलों के दरवाजे बेटियों के लिए खुलेंगे: मोदी
सरकार ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए देश के सभी सैनिक स्कूलों के दरवाजे अब लड़कियों के लिए खोल दिये हैं, जिससे सभी स्कूलों में अब लड़कों के साथ साथ लड़कियों को भी प्रवेश दिया जायेगा। प्रधानमंत्री  मोदी ने कहा कि भारत की बेटियां देश में हर क्षेत्र में अपनी जगह बनाने में लगी है और इसलिए अब सरकार ने निर्णय लिया है कि सभी सैनिक स्कूलों में लड़कों के साथ साथ लड़कियों को भी प्रवेश दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि आज मैं एक खुशी देशवासियों से साझा कर रहा हूं। मुझे लाखों बेटियों के संदेश मिलते थे कि वो भी सैनिक स्कूल में पढ़ना चाहती हैं, उनके लिए भी सैनिक स्कूलों के दरवाजे खोले जाएं। आज भारत की बेटियां अपना स्पेस लेने के लिए आतुर हैं। दो-ढाई साल पहले मिजोरम के सैनिक स्कूल में पहली बार बेटियों को प्रवेश देने का प्रयोग किया गया था। अब सरकार ने तय किया है कि देश के सभी सैनिक स्कूलों को देश की बेटियों के लिए भी खोल दिया जाएगा। विदित हो कि सरकार ने दिसम्बर 2019 में देश के पांच सैनिक स्कूलों के दरवाजे लड़कियों के लिए खोले थे लेकिन आज प्रधानमंत्री ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए कहा कि सभी सैनिक स्कूलों में अब लड़कियों को प्रवेश दिया जायेगा।

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राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन की घोषणा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश को अगले 25 वर्षों में एनर्जी को लेकर आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन की घोषणा की। पीएम मोदी ने कहा कि भारत आज जो भी कार्य कर रहा है, उसमें सबसे बड़ा लक्ष्य है, जो भारत को क्वांटम जंप देने वाला है- वो है  ग्रीन हाइड्रोजन का क्षेत्र। मैं आज तिरंगे को  साक्षी मानते हुए राष्ट्रीय हाड्रोजन मिशन की घोषणा कर रहा हूं। उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति के लिए, आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए भारत को एनजीर् के मामले में आत्मनिर्भर होना अनिवार्य है। इसलिए आज भारत को संकल्प लेना होगा कि हमें आजादी के 100 साल होने से पहले देश को एनर्जी  के मामले में आत्मनिर्भर बनाना होगा। 

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बंटवारे का दर्द हिन्दुस्तान के सीने को छलनी करता है
पीएम मोदी ने कहा कि हम आजादी का जश्न मनाते हैं, मगर बंटवारे का दर्द आज भी हिंदुस्तान के सीने को छलनी करता है। यह पिछली शताब्दी की सबसे बड़ी त्रासदी में से एक है। कल ही देश ने भावुक निर्णय लिया है। अब से 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में याद किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने सभी देशवासियों को 75वें स्वतंत्रता दिवस की बधाई देते हुए कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव का यह वर्ष देशवासियों में नई ऊर्जा और नवचेतना का संचार करे।

जम्मू एवं कश्मीर में विधानसभा चुनाव की तैयारी चल रही है: प्रधानमंत्री
सभी के सामर्थ्य को उचित अवसर देने को लोकतंत्र की असली भावना करार देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जम्मू एवं कश्मीर में परिसीमन आयोग का गठन हो चुका है और वहां विधानसभा चुनाव की तैयार चल रही है। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि हिमालयी, तटीय और आदिवासी क्षेत्र भविष्य में भारत के विकास का ”बड़ा आधार बनेंगे। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में भारत को नयी ऊंचाई पर पहुंचाने के लिए भारत के सामर्थ्य का सही और पूरा इस्तेमाल जरूरी है और इसके लिए जो वर्ग या क्षेत्र पीछे छूट गए हैं उन्हें आगे बढ़ाना ही होगा। उन्होंने कहा कि हमारा पूर्वी भारत, पूर्वोत्तर, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख सहित पूरा हिमालय का क्षेत्र हो या हमारा तटीय क्षेत्र या फिर आदिवासी अंचल हो, यह भविष्य में भारत के विकास का बड़ा आधार बनेंगे। सभी के सामर्थ्य को उचित अवसर देना ही ”लोकतंत्र की असली भावना है।

नयी शिक्षा नीति देश की जरूरतें पूरी करने वाली: मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति देश की 21वीं सदी की जरूरतों को पूरा करने वाली है। राष्ट्रीय नई शिक्षा नीति से अब हमारे बच्चे ना ही कौशल के कारण रुकेंगे और ना ही भाषा के सीमा में बंधेंगे। दुभार्ग्य है कि हमारे देश में भाषा को लेकर एक विभाजन पैदा हो गया है। भाषा की वजह से हमने देश के बहुत बड़ी प्रतिभाओं को पिंजड़े में बांध दिया है। मातृभाषा में पढ़े हुए लोग आगे आएंगे तो उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा। जब गरीब की बेटी और बेटा मातृभाषा में पढ़कर आगे बढ़ेंगे तो उनके सामर्थ्य के साथ न्याय होगा। नई शिक्षा नीति में गरीबी के खिलाफ लड़ाई का साधन भाषा है। नई शिक्षा नीति गरीबी के खिलाफ लड़ाई का शस्त्र के रूप में काम आने वाली है। गरीबी के खिलाफ जंग जीतने का माध्यम भी मातृभाषा है। खेल के मैदान में भाषा बाधा नहीं है जिसका परिणाम देखा है, अब युवा खेल भी रहे हैं और खिल भी रहे। अब ऐसा ही जीवन के अन्य मैदानों में होगा। 

छोटे किसान बने देश की शान: मोदी
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि ‘छोटा किसान बने देश की शान’ यह हमारा सपना है । देश के 80 प्रतिशत से अधिक किसानों के पास दो हेक्टेयर से कम जमीन है। पहले की नीतियों में इन छोटे किसानों को प्राथमिकता नहीं दी गयी। अब इन्ही किसानों को ध्यान में रखकर निर्णय लिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन किसानों को ध्यान में रखकर फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया  रहा है, फसल बीमा योजना शुरू की गयी, सौर ऊर्जा पर जोर दिया जा रहा है और किसान उत्पादक समूह आदि का गठन किया जा रहा है। इससे किसानों की ताकत बढ़ेगी। ब्लॉक स्तर पर वेयरहाउस के निर्माण के लिए अभियान चलाया जा रहा है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत दस करोड़ से अधिक किसानों के बैंक खाते में डेढ़ लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि हस्तांतरित की गई है। आने वाले समय में सामूहिक शक्ति बढ़ानी होगी और नई सुविधाएं देनी होगी। 

प्रधानमंत्री ने भारत के ओलंपिक दल की सराहना की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के ओलंपिक दल की सराहना करते हुए कहा कि हाल में संपन्न हुए तोक्यो खेलों में उनके प्रदर्शन ने देश के युवाओं को प्रोत्साहित किया है। इस बार ओलंपिक खेलों में भाग लेने वाले खिलाड़ी स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान लाल किले पर मौजूद हैं। इस अवसर पर राष्ट्र को संबोधित कर रहे मोदी और लाल किले पर मौजूद अन्य लोगों ने तोक्यो में हाल में आयोजित ओलंपिक खेलों में भाग लेने वाले दल के लिए तालियां बजाईं।

ओबीसी से लेकर वंदेभारत ट्रेनों का जिक्र
मूलभूत जरूरतों की चिंता के साथ दलितों, पिछड़ों, आदिवासी वर्ग, सामान्य वर्ग के गरीबों के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया जा रहा है। संसद में कानून बनाकर OBC से जुड़ी सूची बनाने का अधिकार राज्यों को दे दिया गया है। पीएम मोदी ने कहा कि देश ने बहुत अहम फैसला लिया है। आजादी के अमृत महोत्सव के 75 सप्ताह में, 75 वंदे भारत ट्रेनें देश के हर कोने को जोड़ेंगी।आज जिस गति से देश में नए एयरपोर्ट्स का निर्माण हो रहा है, उड़ान योजना दूर-दराज के इलाकों को जोड़ रही है, वो भी अभूतपूर्व है।

सितंबर तक देश को मिल जायेगी सिंगल डोज वैक्सीन

भारत को सितंबर तक मिलेगी सिंगल डोज वैक्सीन। अब तक हो रहा आयात की हुई स्पुतनिक वी का इस्तेमाल। स्पुतनिक लाइट की कीमत 750 रुपए।

Good News: भारत को सितंबर तक मिलेगी सिंगल डोज वैक्सीन, महज इतने रुपए होगी कीमत

नई दिल्ली (एजेंसी) कोरोना वायरस के खिलाफ देश में तैयार हो रही रूसी वैक्सीन स्पुतनिक लाइट सितंबर तक भारत को मिल सकती है। बताया जा रहा है कि सिंगल डोज वाली ये वैक्सीन शुरुआत में सीमित संख्या में उपलब्ध होगी और इसकी कीमत 750 रुपए होगी। कंपनी ने इसके इमरजेंसी यूज के लिए भी आवेदन दे दिया है। भारत में अब तक आयात की हुई स्पुतनिक वी का इस्तेमाल हो रहा है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पैनेशिया ने इमरजेसी यूज की मंजूरी के लिए डोजियर जमा कर दिया है। स्पुतनिक लाइट को रूस की गमालेया इंस्टीट्यूट ने RDIF के समर्थन के साथ तैयार किया है। जुलाई में पेनेशिया बायोटेक ने स्पुतनिक वी वैक्सीन के निर्माण के लिए लाइसेंस लेने का ऐलान किया था।

वहीं रूस ने 6 मई को कोरोना वायरस के खिलाफ वैक्सीन स्पुतनिक लाइट को मंजूरी दी थी और कहा था कि इससे सामूहिक प्रतिरक्षा प्राप्त करने की प्रक्रिया में तेजी आ सकती है। रूस ने जनवरी में स्पुतनिक लाइट का मानव परीक्षण शुरू किया था और अध्ययन अभी भी जारी हैं। स्पुतनिक लाइट रूस में चौथी घरेलू विकसित कोविड वैक्सीन है, जिसे देश में मंजूरी दी गई है।

Vaccine Update: सितंबर से भारत में Sputnik v वैक्सीन का उत्पादन शुरू करेगा  SII, हर साल बनाई जाएंगी 30 करोड़ डोज | Serum to start production of Sputnik  V in India in

वहीं कोरोना वायरस के खिलाफ स्पुतनिक-V की प्रभावी क्षमता 90 फीसदी से अधिक बताई गई है। भारत ने पहली विदेशी वैक्सीन के रूप में इसे 12 अप्रैल को इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दी थी। डॉ रेड्डीज लैबोरेटरी ने स्पुतनिक-V वैक्सीन के लिए रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड (RDIF) के साथ समझौता किया था।

हाल ही में रूस ने अपनी स्पुतनिक वी कोरोना वैक्सीन के असर को लेकर जानकारी दी थी। रूस के स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराश्को ने कहा था कि स्पुतनिक वी कोरोना वैक्सीन 83 फीसदी डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ प्रभावी है। ये कोरोनावायरस के सभी नए स्ट्रेन के खिलाफ प्रभावी है।

पाकिस्तान के बाद अब बांग्लादेश के मंदिरों में तोड़फोड़

अब बांग्लादेश में हिंदुओं पर 100 कट्टरपंथियों का हमला। भीड़ ने घरों और मंदिरों में की तोड़फोड़।

अब बांग्लादेश में हिंदुओं पर 100 कट्टरपंथियों का हमला, भीड़ ने घरों और मंदिरों में की तोड़फोड़

ढाका (एजेंसी) बांग्लादेश के खुलना जिले में शनिवार को मौलवियों के उकसाने पर कट्टरपंथियों की भीड़ ने 50 से ज्यादा हिंदुओं के घरों को निशाना बनाया। इस दौरान भीड़ ने 10 से अधिक मंदिरों को अपनी चपेट में लिया और जमकर तोड़फोड़ की। यह घटना बांग्लादेश के खुलना जिले के रूपशा उपजिला के शियाली गांव की है। शियाली गांव में मंदिरों की मूर्तियां तोड़ी गईं। साथ ही दुकानों और हिंदू लोगों के कुछ घरों में जमकर तोड़फोड़ हुई। इस मामले में पुलिस ने रविवार को 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। बताते हैं सैकड़ों की संख्या में मुस्लिम कट्टरपंथियों ने हिंदू मंदिरों और घरों को निशाना बनाया। फिलहाल पुलिस आरोपियों की तलाश करने के साथ इलाके में शांति व्यवस्था बरकरार रखने पर जोर दे रही है।

बांग्लादेश में मंदिर पर हमला

एक पुलिस अधिकारी ने मीडिया को बताया कि यह घटना शनिवार दोपहर को हुई, जिसके बाद इलाके में तनाव की स्थिति पैदा हो गई और अधिकारियों को अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा। स्थानीय लोगों ने बताया कि शुक्रवार रात करीब नौ बजे अल्पसंख्यक हिंदू महिला श्रद्धालुओं के एक समूह ने एक धार्मिक यात्रा निकाली थी। यह यात्रा पुरबा पारा मंदिर से शियाली श्मशान घाट तक थी। उन्होंने रास्ते में एक मस्जिद पार की थी। इस दौरान मस्जिद के इमाम ने चिल्लाते हुए यात्रा का विरोध किया। इससे हिंदू भक्तों और इस्लामी मौलवी के बीच तीखी बहस हुई।

पुलिस के मुताबिक शनिवार शाम करीब पांच बजकर 45 मिनट पर करीब सौ हमलावर धारदार हथियारों के साथ तोड़फोड़ शुरू कर दी। हिंसा के दौरान चार मंदिरों को तोड़ा गया और एक घर में जमकर तोड़फोड़ की गई। साथ ही शियाली गांव में हिंदू समुदाय के लोगों की छह दुकानों में तोड़फोड़ की गई। स्थानीय पूजा उदयपोन परिषद के अध्यक्ष शक्तिपाड़ा बसु ने समाचार एजेंसी आईएएनएस को बताया कि सौ से अधिक मुस्लिमों ने धारदार हथियारों से हमला किया। उन्होंने बाजार में दवा की दुकान,किराना दुकान, चाय की दुकान में तोड़फोड़ की।

पाकिस्तान के बाद अब बांग्लादेश में हिंदू मंदिरों में तोडफ़ोड़, दंगाइयों ने घरों में की आगजनी और लूटपाट

जब हिंदुओं ने बीच-बचाव करने की कोशिश की तो इन लोगों ने मारपीट कर उन्हें बुरी तरह घायल कर दिया। इससे पहले कि ग्रामीण एकजुट हो पाते आरोपी युवक मौके से फरार हो चुके थे। पुलिस अधीक्षक (एसपी), अतिरिक्त एसपी की एक पुलिस टीम भी घटनास्थल पर पहुंची। एसपी (खुलना) महबूब हसन ने बताया कि इलाके में पुलिस टीमों को तैनात कर दिया गया है और शियाली गांव में स्थिति नियंत्रण में है। उन्होंने कहा कि पुलिस इस मामले में स्थानीय लोगों से समन्वय स्थापित कर रही है।

Golden Boy: कभी जैवलिन खरीदने को भी नहीं थे पैसे!

जैवलिन खरीदने और कोच रखने के पैसे नहीं थे नीरज चोपड़ा के पास।

नई दिल्ली। नीरज ऐसे ही गोल्डन ब्वॉय नहीं बने, इसके पीछे संघर्ष की एक लंबी कहानी है। नीरज के पास एक समय जैवलिन खरीदने का भी पैसा नहीं था, ना ही कोच रखने का। वह एक एथलीट होने के साथ-साथ भारतीय सेना में सूबेदार पद पर भी तैनात हैं और सेना में रहते हुए अपने बेहतरीन प्रदर्शन के बदौलत इन्हे सेना में विशिस्ट सेवा मैडल से भी सम्मानित किया जा चुका है।

टोक्यो ओलंपिक 2020 का जिक्र जब भी होगा, भारत के ‘गोल्डन ब्वॉय’ नीरज चोपड़ा का नाम सबसे पहले लिया जाएगा। टोक्यो ओलंपिक में भारत का आखिरी इवेंट जैवलिन थ्रो ही था और नीरज पर सभी की निगाहें टिकी हुई थीं। नीरज के गोल्ड मेडल से पहले भारत के खाते में छह मेडल आ चुके थे, जिसमें दो सिल्वर और चार ब्रॉन्ज मेडल शामिल थे। नीरज ने भारत की झोली में गोल्ड मेडल डालकर देशवासियों का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया।

नीरज चोपड़ा ट्रैक और फील्ड एथलीट प्रतिस्पर्धा में भाला फेंकने वाले खिलाड़ी हैं। नीरज ने 87.58 मीटर भाला फेंककर टोक्यो ओलंपिक 2020 में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा है |अंजू बॉबी जॉर्ज के बाद किसी विश्व चैम्पियनशिप स्तर पर एथलेटिक्स में स्वर्ण पदक को जीतने वाले वह दूसरे भारतीय हैं। [1]

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक गोल्ड मेडल जीत करोड़ों रुपए का ईनाम पाने वाले नीरज के पास एक समय 1.5 लाख रुपए का जैवलिन खरीदने का भी पैसा नहीं था, ना ही कोच रखने का। उन्होंने इन कमियों को अपनी मेहनत से पूरा किया और ओलंपिक खेलों में भारत को एथलेटिक्स पहला गोल्ड मेडल दिलाया। इतना ही नहीं इंडिविजुअल गोल्ड मेडल जीतने वाले नीरज दूसरे भारतीय हैं। इससे पहले 2008 में शूटिंग में अभिनव बिंद्रा ने इंडिविजुअल गोल्ड मेडल अपने नाम किया था।

व्यक्तिगत जीवन

नीरज चोपड़ा का जन्म 24 दिसंबर 1997 को हरियाणा राज्य के पानीपत नामक शहर के एक छोटे से गाँव खांद्रा में एक किसान रोड़ समुदाय में हुआ था। नीरज के परिवार में इनके पिता सतीश कुमार पेशे से एक छोटे किसान हैं और इनकी माता सरोज देवी एक गृहणी है। जैवलिन थ्रो में नीरज की रुचि तब ही आ चुकी थी जब ये केवल 11 वर्ष के थे और पानीपत स्टेडियम में जय चौधरी को प्रैक्टिस करते देखा करते थे।

सेना से विशिष्ट सेवा मेडल- वह एक भारतीय एथलिट हैं जो ट्रैक एंड फील्ड के जेवलिन थ्रो नामक गेम से जुड़े हुए हैं तथा राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। नीरज एक एथलीट होने के साथ-साथ भारतीय सेना में सूबेदार पद पर भी तैनात हैं और सेना में रहते हुए अपने बेहतरीन प्रदर्शन के बदौलत इन्हे सेना में विशिष्ट सेवा मैडल से भी सम्मानित किया जा चुका है। [2]

शिक्षा-नीरज चोपड़ा ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई हरियाणा से ही की है। अपनी प्रारंभिक पढ़ाई को पूरा करने के बाद नीरज चोपड़ा ने बीबीए कॉलेज ज्वाइन किया था और वहीं से उन्होंने ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की थी। नीरज चोपड़ा के कोच का नाम उवे हैं जो कि जर्मनी देश के पेशेवर जैवलिन एथलीट रह चुके हैं। (साभार)

पाकिस्तान किसी अहिंसा के पुजारी बापू का देश नहीं…!

🙏बुरा मानो या भला 🙏
पाकिस्तान किसी अहिंसा के पुजारी बापू का देश नहीं है 
—मनोज चतुर्वेदी “शास्त्री”

पाकिस्तान में एक बार फिर से एक मंदिर को निशाना बनाया गया। ताज़ा मामला पंजाब प्रांत के सादिकाबाद जिले के भोंग शरीफ गांव का है जहां सिद्धिविनायक मंदिर के अंदर बुधवार शाम जमकर तोड़फोड़ की गई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है।इस ख़बर को लेकर पूरे भारत में हंगामा मचा हुआ है, लेकिन कोई यह भी तो बताए कि आख़िर पाकिस्तान में किसी मंदिर का टूटना, किसी हिन्दू का जबरन धर्म-परिवर्तन, किसी हिन्दू का क़त्लेआम या फिर किसी हिन्दू बहन-बेटी की अस्मत लुटना कब से आठवां अजूबा बन गया है।

अरे भाई, पाकिस्तान किसी अहिंसा के पुजारी, किसी संत-महात्मा बापू का देश नहीं है। वह मौहम्मद अली जिन्ना का पाकिस्तान है, जिसने “डायरेक्ट एक्शन” के नाम पर हजारों-लाखों हिंदुओं का कत्लेआम करा दिया था। जिस पाकिस्तान की नींव ही हिंदुस्तानियों के खून से सींची गई हो, उससे आप शांति के कबूतर उड़ाने की उम्मीद रख भी कैसे सकते हैं?आप भूल गए कि यह वही पाकिस्तान है, जिसको 55 करोड़ रुपए की ख़ैरात दिलवाने के लिए हमारे देश के “बापू” ने अन्न-जल त्याग दिया था। इस पाकिस्तान के सर पर जो छत पड़ी थी, वह भी “तुष्टिकरण के महात्मा”  की ही देन थी।
पाकिस्तान के “क़ायदे आज़म” ने एक गाल पर थप्पड़ ख़ाकर दूसरा गाल आगे करना नहीं सिखाया, लेकिन हमारे “राष्ट्रपिता” ने सदैव हमें थप्पड़-घूंसे ख़ाकर चुप रहना ही सिखाया है। …जिसकी सज़ा हम आज तक भुगत रहे हैं और न जाने कब तक भुगतते रहेंगे।एक ओर पाकिस्तानी पुलिस है, जो मंदिरों और गुरुद्वारों के खण्डित होने को चुपचाप देखती रहती है, और दूसरी तरफ हमारे देश की पुलिस के जवान हैं जो फ्लाई ओवर, रेलवे प्लेटफार्म और रेलवे लाइनों पर बनी मजारों-दरगाहों की सुरक्षा में दिन-रात लगे रहते हैं, और उनकी तनख्वाह हमारी खून-पसीने की गाढ़ी कमाई के पैसे से दी जाती है। 
एक हमारे माननीय “नेताजी” थे, जिन्होंने एक मुगल आक्रांता की गुलामी की निशानी को बचाने के लिए अपने ही देशवासियों का खून बहाकर अपनी पीठ थपथपाई थी। दूसरी तरफ़ पाकिस्तान की सरकार है जिसने दो हमदर्दी के शब्द भी कभी नहीं बोले जबकि पाकिस्तान में रोज़ कहीं न कहीं एक मंदिर टूटता है।
 पाकिस्तान में “सेक्युलर” नहीं रहते जबकि हिंदुस्तान “सेक्युलर बुद्धिजीवियों” की धर्मशाला बन गया है। इस देश में जयचन्दों की कोई कमी नहीं है, यहां कदम-कदम पर जयचंद, ज्ञानचंद और रायचंद मिल जाएंगे। मज़े की बात तो यह है कि हम पाकिस्तान में मंदिर टूटने का शोक मना रहे हैं, लेकिन जब अपने ही देश की राजधानी में मां दुर्गा और भगवान हनुमान का मंदिर टूटा था तब हमने किसी का क्या बिगाड़ लिया था? 500 साल तक हमारे आराध्य प्रभु श्रीराम बेघर रहे, तब हमने कौन से तीर मार लिए थे।
हम बापू के देश में रहते हैं हमें कोई हक़ नहीं कि हम कोई विरोध प्रदर्शन करें, बस एक गाल पर थप्पड़ ख़ाकर दूसरे गाल के लाल होने की प्रतीक्षा करते रहो।

विशेष नोट- उपरोक्त विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं। समाचार पत्र, newsdaily24 के सम्पादक मंडल का उनसे सहमत होना न होना आवश्यक नहीं है। हमारा उद्देश्य जानबूझकर किसी की धार्मिक-जातिगत अथवा व्यक्तिगत आस्था एवं विश्वास को ठेस पहुंचाने नहीं है। यदि जाने-अनजाने ऐसा होता है तो उसके लिए हम करबद्ध होकर क्षमा प्रार्थी हैं।

फोटो-वीडियो देखते ही खुद हो जाएगा Delete

WhatsApp लाया कमाल का फीचर, फोटो-वीडियो देखते ही अपने आप हो जाएगा Delete

WhatsApp में आया कमाल का फीचर, फोटो-वीडियो देखते ही अपने आप हो जाएगा Delete- जानें कैसे करें यूज

नई दिल्ली। यूजर्स को उनकी प्राइवेसी पर ज्यादा कंट्रोल देने के लिए व्हाट्सएप ने ‘व्यू वन्स’ नाम से एक नया फीचर लांच किया है। यह फीचर अगले एक सप्ताह में सबको उपलब्ध हो जाएगा। इस फीचर के तहत टेक्स्ट, फोटो या वीडियो भेजने के बाद पाने वाले के देखने के बाद यूजर के चैट बाॅक्स से कंटेंट अपने आप डिलीट हो जाएगा। पाने वाले के देख लेने के बाद उसके चैट बाॅक्स से भी वह कंटेंट डिलीट हो जाएगा। वह उस कंटेंट को सेव, फारवर्ड या शेयर नहीं कर सकेगा।


 
कंपनी ने अपने एक बयान में कहा कि ‘व्यू वन्स’ फीचर के तहत कंटेंट एंड टू एंड एन्क्रिप्टेड होगा, जिससे वह पूरी तरह सुरक्षित होगा। उसे बीच मेंं कोई देख नहीं सकेगा। इस फीचर के तहत भेजे जाने वाले मैसेज में वन टाइम आइकन का मार्क दिखेगा। यह फीचर तुरंत फीडबैक पाने के लिए बड़े काम का होगा। उदाहरण के लिए यदि आप कोई नया कपड़ा ट्राइ कर रहे हैं और तुरंत किसी जानने वाले से कंमेंट चाहते हैं तो इस फीचर का यूज कर सकते हैं। वाईफाई पासवर्ड इस फीचर से दे सकते हैं ताकि काम होते ही वह डिलीट हो जाए।

भारतीय महिला हॉकी टीम ने रचा इतिहास, पहली बार ओलिंपिक के क्वार्टर फाइनल में जगह

तोक्यो
भारतीय महिला हॉकी टीम ने कमाल कर दिया। ओलिंपिक इतिहास में पहली बार अपनी महिलाएं क्वार्टर फाइनल खेलेंगी। शनिवार को भारत के सामने दो चुनौतियां थी। पहले तो उसे ‘करो या मरो’ के मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका को हराना था फिर उम्मीद लगानी थी कि ग्रेट ब्रिटेन, आयरलैंड को हरा दे। शायद सवा सौ करोड़ हिंदुस्तानियों की प्रार्थनाएं काम कर गईं। अब क्वार्टर फाइनल में रानी रामपाल की टीम की टक्कर मजबूत ऑस्ट्रेलिया से होगी।

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भारतीय महिला हॉकी टीमnullभारत ने 4-3 से दक्षिण अफ्रीका को हराया
स्ट्राइकर वंदना कटारिया के ऐतिहासिक तीन गोल के बूते भारत ने निचली रैंकिंग वाली दक्षिण अफ्रीका टीम को 4-3 से हराकर तोक्यो ओलिंपिक के क्वार्टर फाइनल में प्रवेश की उम्मीदें बरकरार रखी। वंदना ने चौथे, 17वें और 49वें मिनट में गोल किया। वह ओलिंपिक के इतिहास में तीन गोल करने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गई। नेहा गोयल ने 32वें मिनट में एक गोल दागा। दक्षिण अफ्रीका के लिए टेरिन ग्लस्बी (15वां), कप्तान एरिन हंटर (30वां) और मेरिजेन मराइस (39वां मिनट) ने गोल दागे।

ग्रेट ब्रिटेन की जीत से मिला ऑक्सीजन
भारत ने ग्रुप चरण में पहले तीन मैच हारने के बाद आखिरी दो मैचों में जीत दर्ज की, इससे भारत पूल ए में चौथे स्थान पर आ गया, लेकिन ग्रुप ए के आखिरी पूल मैच में अगर ग्रेट ब्रिटेन आयरलैंड को हरा देता या ड्रॉ खेलता तो आयरलैंड टीम पिछड़ जाती। हुआ भी ऐसा ही। मैच 2-0 से ग्रेट ब्रिटेन के पक्ष में रहा। लगातार चौथी हार के साथ आयरलैंड का सफर यही खत्म हो गया। अब हर पूल से शीर्ष चार टीमें नॉकआउट चरण खेलेंगी।


‘हम जीतने के लिए ही आए थे’
भारतीय महिला हॉकी टीम के कोच मारिन ने कहा, ‘प्रदर्शन में निरंतरता जरूरी है। टीम अगर क्वार्टर फाइनल में पहुंचती है तो वहां हालात एकदम अलग होंगे। कल हमने बहुत अच्छा खेला और फिर आज लगातार दूसरे दिन मैच खेलना था। हमारे बेसिक्स आज उतने सही नहीं थे जितने कि कल। हम जीतने के लिये ही आए थे। क्वार्टर फाइनल से नई शुरूआत होती है और पूल मैचों का प्रदर्शन मायने नहीं रखता। वहां अलग ही तरह का खेल होता है। अच्छी बात यह है कि हमारे लिए आखिरी दो मैच भी नॉकआउट की तरह ही थे।’


ओलिंपिक में भारतीय महिलाओं का सफर
1980 में पहली बार भारत की महिला हॉकी टीम ने ओलिंपिक खेलों में हिस्सा लिया था। हालांकि तब टीम चौथे स्थान पर जरूर रही थी, लेकिन उस वक्त क्वार्टर फाइनल नहीं होता था। जिम्बाब्वे ने गोल्ड जीता था। चेकोस्लोवाकिया के हिस्से में सिल्वर आया था। कांस्य सोवियत यूनियन ने कब्जाया था। फिर अगले ओलिंपिक में खेलने के लिए भारतीय महिलाओं को 36 साल का इंतजार करना पड़ा। 2016 के रियो ओलिंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम बिना कोई मैच जीते अंतिम स्थान पर रही थी। बीते चार साल में टीम में क्रांतिकारी निखार आया। भले भारतीय महिला हॉकी टीम को मेंस टीम की तरह लाइमलाइट नहीं मिला, लेकिन इस बार एक नई उम्मीद जागी है।


भारतीय मेंस टीम की टक्कर ग्रेट ब्रिटेन से
आठ बार की ओलिंपिक चैंपियन भारतीय हॉकी टीम ब्रिटेन के खिलाफ रविवार को जब क्वार्टर फाइनल में उतरेगी। ओलिंपिक में भारत को आखिरी पदक 1980 में मॉस्को में मिला था जब वासुदेवन भास्करन की कप्तानी में टीम ने गोल्ड जीता था, उसके बाद से भारतीय हॉकी टीम के प्रदर्शन में लगातार गिरावट आई और 1984 लॉस एंजिलिस ओलिंपिक में पांचवें स्थान पर रहने के बाद वह इससे बेहतर नहीं कर सकी। बीजिंग में 2008 ओलिंपिक में टीम पहली बार क्वालीफाई नहीं कर सकी और 2016 रियो ओलिंपिक में आखिरी स्थान पर रही। देश में हॉकी का ग्राफ लगातार नीचे चला गया। पिछले पांच साल में हालांकि भारतीय हॉकी टीम के प्रदर्शन में जबरदस्त सुधार आया है, जिससे वह विश्व रैंकिंग में तीसरे स्थान पर पहुंची।

कमिश्नर के कुत्ते को घर घर ढूंढ रही पुलिस

कमिश्नर साहब का कुत्ता हुआ गुम। खोजने में जुटा पूरा पुलिस प्रशासन। लाउडस्पीकर पर ऐलान कर घर-घर की जा रही तलाशी।

अजब: कमिश्नर साहब का कुत्ता हुआ गुम, खोजने में जुटा पूरा पुलिस प्रशासन- लाउडस्पीकर पर ऐलान कर घर-घर की जा रही तलाशी

गुजरांवाला (एजेंसी)। कई वर्ष पहले भारत के उत्तर प्रदेश से खबर आई थी कि सपा नेता आजम खान की भैंस चोरी होने पर एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने लंबे समय तक जांच जारी रखने के बाद चोर को गिरफ्तार भी किया। अब ऐसी ही खबर पाकिस्तान के गुजरांवाला से आई है। यहां के कमिश्नर जुल्फिकार अहमद गुमान के पालतू कुत्ते को ढूंढने के लिए पूरा पुलिस प्रशासन जुट गया है। इतना ही नहीं घर-घर तलाशी के अलावा जगह-जगह लाउडस्पीकर से लापता कुत्ते को लेकर घोषणाएं तक हो रही हैं।

कुत्ते की खोज में लाउडस्पीकर से एलान

पाकिस्तान के मीडिया की खबर के मुताबिक कमिश्नर का कुत्ता मंगलवार को लापता हुआ था। इसके बाद उन्होंने पूरे प्रशासन को उसे खोजने में लगा दिया। कमिशनर ने जगह-जगह रिक्शे पर लाउडस्पीकर के जरिए लापता कुत्ते की खोज के लिए घोषणाएं करवाई और अपने नीचे काम करने वालों को यह आदेश दिया है कि किसी भी कीमत पर कुत्ते को खोज निकालें।

तीनों सेनाओं के संयुक्त प्रशिक्षण पर जोर

अंडमान और निकोबार कमान के कमांडर-इन-चीफ ने किया पोर्ट ब्लेयर स्थित वायु सेना कंपोनेट का दौरा।

मुख्य बिंदु-

  • अंडमान और निकोबार कमान के कमांडर-इन-चीफ ने की ऑपरेशनल तैयारियों की समीक्षा।
  • तीनों सेनाओं के संयुक्त प्रशिक्षण पर जोर दिया।
  • अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के एयर डिफेन्स को मजबूत करने पर जोर दिया।
  • एयर वारियर्स के असाधारण समर्पण के लिए पुरस्कार देने की बात कही।

पोर्ट ब्लेयर। अंडमान और निकोबार कमान के कमांडर-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अजय सिंह ने 27 जुलाई, 2021 को परिचालन संबंधी तैयारियों की समीक्षा करने के लिए पोर्ट ब्लेयर में वायु सेना मुख्यालय के कंपोनेंट का दौरा किया। एयर फोर्स कंपोनेंट कमांडर एयर कमोडोर एस श्रीधर ने उनका स्वागत किया। लेफ्टिनेंट जनरल अजय सिंह को मुख्यालय वायु सेना कंपोनेंट के लेआउट और इसके इंफ्रास्ट्रक्चर विकास योजना के बारे में जानकारी दी गई।

Ministry of Defence की प्रेस Release में बताया गया कि लेफ्टिनेंट जनरल अजय सिंह ने वायु योद्धाओं के साथ बातचीत की और तीनों सेवाओं के संयुक्त उपयोग पर अपना दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने तीनों सेवाओं के संयुक्त प्रशिक्षण के महत्व को रेखांकित किया और विरोधियों पर बढ़त के लिए उभरती प्रौद्योगिकियों के साथ तालमेल बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि पेशेवर ज्ञान और कड़ी मेहनत सफलता की कुंजी है।

लेफ्टिनेंट जनरल अजय सिंह ने वायु सेना स्टेशन पर्थरापुर और 153 स्क्वाड्रन का भी दौरा किया, जिन्हें ‘द्वीप प्रहरी’ के रूप में जाना जाता है। भारतीय वायु सेना कर्मियों के साथ अपनी बातचीत के दौरान, उन्होंने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के एयर डिफेन्स को मजबूत करने पर जोर दिया, जिसका हिंद महासागर क्षेत्र में बदलती भू-राजनीतिक स्थिति के कारण सामरिक महत्व है। उन्होंने कुछ एयर वारियर्स के असाधारण समर्पण और कर्तव्य निर्वहन के लिए मौके पर ही प्रशंसा दी।

लेफ्टिनेंट जनरल अजय सिंह ने वायु विहार, ब्रुकशाबाद में वायु सेना कर्मियों के लिए नवनिर्मित आवासीय क्षेत्र का भी दौरा किया, जहां उन्हें आवासीय क्षेत्र में विकसित विभिन्न कल्याणकारी सुविधाओं के बारे में जानकारी दी गई। उन्होंने सुदूर द्वीपों में विभिन्न चुनौतियों के बावजूद प्रभावी हवाई निगरानी में वायु सेना कंपोनेंट द्वारा किए गए प्रयासों की भी सराहना की।

अब पुलिस अपराधी को जल्द दिला सकेगी सजा

अहमदाबाद (PIB)। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अहमदाबाद में राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय के नवनिर्मित Centre of Excellence for Research & Analysis of Narcotics and Psychotropic Substances का उद्घाटन किया। श्री शाह ने महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराधों की जाँच पर एक वर्चुअल ट्रेनिंग का भी उद्घाटन किया।

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उद्बोधन के मुख्य बिंदु 👇

दुनियाभर में नेशनल फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय की उत्कृष्टता और प्रतिष्ठा को देखते हुए इस सेंटर को स्थापित करने का निर्णय लिया गया।

देश के क्रिमिनल जस्टिस को और ताकतवर और परिणामलक्षी बनाने के लिए इस विश्वविद्यालय को देश के फलक पर ले जाना बहुत ज़रूरी।

अब थर्ड डिग्री का जमाना नहीं है और कठोर से कठोर व्यक्ति को वैज्ञानिक जाँच के आधार पर सजा दिलवाई जा सकती है।

हमारी नई शिक्षा नीति में वैज्ञानिक शिक्षा पर बहुत ज़ोर दिया गया है, प्रधानमंत्री का आग्रह है कि हमारी शिक्षा नीति और व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि विद्यार्थी हर क्षेत्र में सर्वोच्च प्राप्त करें।

इस सेंटर में बनाए गए साइबर डिफ़ेंस सेंटर और बेलेस्टीक रिसर्च सेंटर पूरे एशिया में अपने प्रकार के अनूठे सेंटर हैं और देश इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रहा है।

साइबर वॉर और साइबर क्राइम के ख़िलाफ़ लड़ाई हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण, भारत की सुरक्षा और प्रधानमंत्री के पाँच ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को पूरा करने के लिए साइबर सुरक्षा बहुत ज़रूरी।

21वीं सदी में भारत के आगे ढेर सारी चुनौतियाँ हैं, इनसे सफलतापूर्वक निपटने के लिए हमें क्रिमिनल जस्टिस को मज़बूत करना होगा, इसके लिए फ़ोरेंसिक साइंस एक महत्वपूर्ण अंग।

सरकार, देशभर के पुलिस अधिकारियों, न्यायाधीशों, वकीलों और क़ानून विश्वविद्यालयों के साथ CrPC, IPC और Evidence Act तीनों में आमूल चूल परिवर्तन करने के लिए एक बहुत बड़ा संवाद कर रही है ताकि इन्हे आज की आवश्यकताओं के हिसाब से आधुनिक बना सकें।

हमारी पुलिस पर नो एक्शन और एक्स्ट्रीम एक्शन का आरोप लगता है, हमें जस्ट एक्शन चाहिए और यह तभी हो सकता है जब वैज्ञानिक साक्ष्य के आधार पर जाँच को आगे बढ़ाएँ।


हमारे समाज, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर मादक पदार्थों का जो बुरा प्रभाव पड़ रहा है इससे पूरा देश चिंतित है।

सरकार ने तय किया है कि हम भारत में नारकोटिक्स पदार्थों को आने भी नहीं देंगे और भारत को उसका रास्ता भी नहीं बनने देंगे।

अपने संबोधन में श्री शाह ने कहा कि कहा कि देश में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दूसरी बार सरकार बनी तब दुनियाभर में नेशनल फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय की उत्कृष्टता और प्रतिष्ठा को देखते हुए इस सेंटर को स्थापित करने का निर्णय लिया गया और यह बिल्कुल उचित फैसला था। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि जब गुजरात फ़ोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी बनी, तब मोदी जी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और वे राज्य के गृह मंत्री थे और जब नेशनल फ़ोरेंसिक सांइस यूनिवर्सिटी बनी तो श्री मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं और वे गृह मंत्री हैं। वर्ष 2009 में श्री मोदी ने यहाँ जो एक छोटा सा बीज बोया था, वह आज क्रिमिनल जस्टिस को मज़बूत बनाने के लिए एक विशाल बट वृक्ष बन गया है।

इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी, प्रदेश के गृह मंत्री प्रदीप सिंह जडेजा, केन्द्रीय गृह सचिव और केन्द्र तथा राज्य सरकार के अनेक वरिष्ठ अधिकारी भी मौजद थे।

16 लाख किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से आ रहा सौर तूफान, किसी भी समय धरती से टकराने का खतरा

वाशिंगटन (एजेंसी)। सूरज की सतह से पैदा हुआ शक्तिशाली सौर तूफान 1609344 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी की तरफ बढ़ रहा है। यह सौर तूफान रविवार या सोमवार को किसी भी समय पृथ्वी से टकरा सकता है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस तूफान के कारण सैटेलाइट सिग्नलों में बाधा आ सकती है। विमानों की उड़ान, रेडियो सिग्नल, कम्यूनिकेशन और मौसम पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।
ध्रुवों पर दिखेगी रात में तेज रोशनी
स्पेसवेदर डॉट कॉम वेबसाइट के अनुसार, सूरज के वायुमंडल से पैदा हुए इस सौर तूफान के कारण पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के प्रभुत्व वाले अंतरिक्ष का एक क्षेत्र में काफी प्रभाव देखने को मिल सकता है। उत्तरी या दक्षिणी अक्षांशों पर रहने वाले लोग रात में सुंदर आरोरा देखने की उम्मीद कर सकते हैं। ध्रुवों के नजदीक आसमान में रात के समय दिखने वाली चमकीली रोशनी को आरोरा कहते हैं।

16 लाख किमी की रफ्तार से बढ़ रहा तूफान
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का अनुमान है कि ये हवाएं 1609344 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि हो सकता है कि इसकी स्पीड और भी ज्यादा हो। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अंतरिक्ष से महातूफान आता है तो धरती के लगभगर हर शहर से बिजली गुल हो सकती है।
पृथ्वी पर क्या होगा असर?
सौर तूफान के कारण धरती का बाहरी वायुमंडल गरमा सकता है जिसका सीधा असर सैटलाइट्स पर हो सकता है। इससे जीपीएस नैविगेशन, मोबाइल फोन सिग्नल और सैटलाइट टीवी में रुकावट पैदा हो सकती है। पावर लाइन्स में करंट तेज हो सकता है जिससे ट्रांसफॉर्मर भी उड़ सकते हैं। हालांकि, आमतौर पर ऐसा कम ही होता है क्योंकि धरती का चुंबकीय क्षेत्र इसके खिलाफ सुरक्षा कवच का काम करता है।

22 वर्ष पहले भी हो चुका ऐसा
ये पहली बार नहीं है जब सौर तूफान धरती की ओर आ रहा है। करीब 22 वर्ष पहले 1989 में भी सौर तूफान की वजह से कनाडा के क्‍यूबेक शहर में 12 घंटे के लिए बिजली गुल हो गई थी। इसके साथ ही लाखों लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा था।

इससे पहले वर्ष 1859 में आए चर्चित सबसे शक्तिशाली जिओमैग्‍नेटिक तूफान ने यूरोप और अमरीका में टेलिग्राफ नेटवर्क को तबाह कर दिया था।कुछ ऑपरेटर्स को बिजली का झटका भी लगा था। उस दौरान रात में भी इतनी तेज रोशनी हुई थी कि नॉर्दन अमरीका में बगैर लाइट के भी लोग अखबार पढ़ पा रहे थे।

प्रज्ञा जी पहले यह समझिए कि “दलित हिन्दू” जैसा कोई शब्द ही नहीं है

🙏बुरा मानो या भला🙏

प्रज्ञा जी पहले यह समझिए कि “दलित हिन्दू” जैसा कोई शब्द ही नहीं है—–मनोज चतुर्वेदी “शास्त्री”

एक यूट्यूब चैनल है, “प्रज्ञा का पन्ना” जिसे कोई प्रज्ञा मिश्रा नामक सभ्य महिला चलाती हैं। इस चैनल पर “हिंदुस्तान में मुस्लिम धर्मांतरण पर बवाल। दलित हिंदुओं के बौद्ध होने पर चुप्पी” नामक शीर्षक से एक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया जिसमें प्रज्ञा जी कहती हैं कि – “हिंदुओं के मुस्लिम बनने पर सरकार एक्शन लेती है लेकिन दलितों के बौद्ध बनने पर चुप्पी साध लेती हैं। प्रज्ञा जी कहती हैं कि हिंदूवादी सरकारों को हिन्दू-मुस्लिम वाले मुद्दे सूट करते हैं, क्योंकि इससे हिंदुत्व को खतरे में बताने में आसानी होती है और हिंदुत्व को खतरे में रखने से हिंदूवादी सरकारें ख़तरे से बाहर हो जाती हैं”. यहां प्रज्ञा मिश्रा जी का यह मानना है कि देश में जो हिन्दू-मुस्लिम धर्मांतरण का मुद्दा है वह भाजपा का चुनावी प्रोपेगैंडा है।

अब प्रज्ञा मिश्रा के सवाल पर आते हैं, जिसमें वह कहती हैं कि मुस्लिम धर्मांतरण पर बवाल। दलित हिंदुओं के बौद्ध होने पर चुप्पी क्यों?

प्रज्ञा जी को शायद यह नहीं मालूम कि “दलित हिन्दू” जैसा कोई जाति/सम्प्रदाय/धर्म पूरे भारत में कहीं नहीं है। यह शब्द “बौद्धिक जिहादियों”, अरबन नक्सलियों और हिन्दू विरोधियों के शब्दकोष की देन है।
दूसरी बात यह है कि बौद्ध, सिख, जैन कोई धर्म नहीं हैं बल्कि पंथ हैं, मत हैं। यह सभी सनातन धर्म के अंग हैं। यह विशुद्ध भारतीय हैं, इनके तीर्थ स्थल, महापुरुष, प्रवर्तक आदि सभी इस भारत भूमि पर जन्मे हैं। जबकि इस्लाम, ईसाई, पारसी और यहूदी विदेशी धर्म/मत हैं। इस्लाम का जन्म अरब से हुआ और इस्लामिक पीर-पैगम्बर, तीर्थस्थल, रीति-रिवाज़ और परम्पराएं सभी विदेशी आक्रांताओं और व्यापारियों के द्वारा भारत लाई गईं।

मुस्लिम समाज का पहनावा, तीज-त्यौहार, परम्पराएं, संस्कृति, सभ्यता, खानपान, भाषा, रहन-सहन, मान्यताएं, महापुरुष और यहां तक कि उनका इतिहास भी हिंदुओं से बिल्कुल अलग है। मुस्लिम समुदाय जिस बाबर, औरंगजेब, तैमूर लंग, अकबर और टीपू को अपना नायक मानता है, वहीं हिन्दू समाज उन्हें खलनायक मानता है। पाकिस्तान का बंटवारा मज़हब के आधार पर ही हुआ था।
जबकि महात्मा बुद्ध को हिन्दू समाज में एक अवतार पुरुष माना गया है। प्रज्ञा जी को शायद इस पर भी अध्ययन करना चाहिए कि आख़िर दलितों के महानायक डॉ. भीमराव अंबेडकर ने इस्लाम या किसी अन्य विदेशी धर्म को क्यों नहीं अपनाया था? इस प्रश्न का सही जवाब डॉ. आंबेडकर के लेख ‘बुद्ध और उनके धर्म का भविष्य’ में मिलता है. मूलरूप में यह लेख अंग्रेजी में बुद्धा एंड दि फ्यूचर ऑफ हिज रिलिजन (Buddha and the Future of his Religion) नाम से यह कलकत्ता की महाबोधि सोसाइटी की मासिक पत्रिका में 1950 में प्रकाशित हुआ था. यह लेख डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर राटिंग्स एंड स्पीचेज के खंड 17 के भाग- 2 में संकलित है. प्रज्ञा जी को यह भी रिसर्च करनी चाहिए कि इस्लाम को लेकर बाबा भीमराव अंबेडकर ने क्या विचार रखे हैं। बाबा साहेब ने सनातन संस्कृति का परित्याग नहीं किया था बल्कि हिन्दू समाज में फैले पाखंड, आडम्बर और भेदभावपूर्ण व्यवहार का विरोध किया था। इसीलिए उन्होंने बौद्ध मत को अपनाया ताकि सनातन संस्कृति से उनके सम्बन्ध कभी समाप्त न हों। ऐसा कहा जाता है कि बाबा साहेब का मानना था कि “दलितों को धर्मांतरण करके मुस्लिम मजहब नहीं अपनाना चाहिए, क्योंकि इससे मुस्लिम प्रभुत्व का ख़तरा वास्तविक हो जाएगा।”

प्रज्ञा मिश्रा जैसे लोग अपने अधकचरे ज्ञान और कुतर्कों द्वारा भले ही आम जनता को भ्रमित करने का कुप्रयास करते हों परन्तु ऐतिहासिक तथ्यों और अनुभवों को वह कभी नहीं झुठला पाएंगे। सत्य सदा सनातन है, और रहेगा।

🖋️ मनोज चतुर्वेदी “शास्त्री”
समाचार सम्पादक- उगता भारत हिंदी समाचार-
(नोएडा से प्रकाशित एक राष्ट्रवादी समाचार-पत्र)

मोबाईल- 9058118317

ईमेल- manojchaturvedi1972@gmail.com

*विशेष नोट- उपरोक्त विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं। उगता भारत समाचार पत्र व newsdaily24 के सम्पादक मंडल का उनसे सहमत होना न होना आवश्यक नहीं है। हमारा उद्देश्य जानबूझकर किसी की धार्मिक-जातिगत अथवा व्यक्तिगत आस्था एवं विश्वास को ठेस पहुंचाने नहीं है। यदि जाने-अनजाने ऐसा होता है तो उसके लिए हम करबद्ध होकर क्षमा प्रार्थी हैं।

फरवरी 1911 में प्रयागराज में आरम्भ हुई थी दुनिया की पहली हवाई डाक सेवा

फरवरी 1911 में प्रयागराज में आरम्भ हुई थी दुनिया की पहली हवाई डाक सेवा – पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव

एयरमेल सेवा ने पूरा किया 110 साल का सफरनामा, उ.प्र. में प्रयागराज से हुई थी शुरुआत

लखनऊ। डाक सेवाओं ने पूरी दुनिया में एक लम्बा सफर तय किया है। डाक सेवाओं के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश का स्थान प्रमुख है। उ.प्र. के प्रयागराज शहर को यह सौभाग्य प्राप्त है कि दुनिया की पहली हवाई डाक सेवा यहीं से आरम्भ हुई। वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि यह ऐतिहासिक घटना 110 वर्ष पूर्व 18 फरवरी 1911 को प्रयागराज में हुई थी। संयोग से उस साल कुंभ का मेला भी लगा था। उस दिन दिन  फ्रेंच पायलट मोनसियर हेनरी पिक्वेट ने एक नया इतिहास रचा था। वे अपने विमान में प्रयागराज से नैनी के लिए 6500 पत्रों को अपने साथ लेकर उड़े। विमान था हैवीलैंड एयरक्राफ्ट और इसने दुनिया की पहली सरकारी डाक ढोने का एक नया दौर शुरू किया। 

पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव के अनुसार प्रयागराज में उस दिन डाक की उड़ान देखने के लिए लगभग एक लाख लोग इकट्ठे हुए थे जब एक विशेष विमान ने शाम को साढ़े पांच बजे यमुना नदी के किनारों से उड़ान भरी और वह नदी को पार करता हुआ 15 किलोमीटर का सफर तय कर नैनी जंक्शन के नजदीक उतरा, जो प्रयागराज के बाहरी इलाके में सेंट्रल जेल के नजदीक था। आयोजन स्थल एक कृषि एवं व्यापार मेला था जो नदी के किनारे लगा था और उसका नाम ‘यूपी एक्जीबिशन’ था। इस प्रदर्शनी में दो उड़ान मशीनों का प्रदर्शन किया गया था। विमान का आयात कुछ ब्रिटिश अधिकारियों ने किया था। इसके कलपुर्जे अलग अलग थे, जिन्हें आम लोगों की मौजूदगी में प्रदर्शनी स्थल पर जोड़ा गया। प्रयागराज से नैनी जंक्शन तक का हवाई सफ़र आज से 110  साल पहले मात्र  13 मिनट में पूरा हुआ था।

पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि हालांकि यह उडान महज छह मील की थी, पर इस घटना को लेकर प्रयागराज में ऐतिहासिक उत्सव सा वातावरण था। ब्रिटिश एवं कालोनियल एयरोप्लेन कंपनी ने जनवरी 1911 में प्रदर्शन के लिए अपना एक विमान भारत भेजा था, जो संयोग से तब प्रयागराज आया जब कुम्भ का मेला भी चल रहा था। वह ऐसा दौर था जब जहाज देखना तो दूर लोगों ने उसके बारे में ठीक से सुना भी बहुत कम था। ऐसे में इस ऐतिहासिक मौके पर अपार भीड होना स्वाभाविक ही था। इस यात्रा में हेनरी ने इतिहास तो रचा ही पहली बार आसमान से दुनिया के सबसे बडे प्रयाग कुंभ का दर्शन भी किया। 

पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव के अनुसार कर्नल वाई विंधाम ने पहली बार हवाई मार्ग से कुछ मेल बैग भेजने के लिए डाक अधिकारियों से संपर्क किया, जिस पर उस समय के डाक प्रमुख ने अपनी सहर्ष स्वीकृति दे दी। मेल बैग पर ‘पहली हवाई डाक’ और ‘उत्तर प्रदेश प्रदर्शनी, इलाहाबाद’ लिखा था। इस पर एक विमान का भी चित्र प्रकाशित किया गया था। इस पर पारंपरिक काली स्याही की जगह मैजेंटा स्याही का उपयोग किया गया था। आयोजक इसके वजन को लेकर बहुत चिंतित थे, जो आसानी से विमान में ले जाया जा सके। प्रत्येक पत्र के वजन को लेकर भी प्रतिबंध लगाया गया था और सावधानीपूर्वक की गई गणना के बाद सिर्फ 6,500 पत्रों को ले जाने की अनुमति दी गई थी। विमान को अपने गंतव्य तक पहुंचने में 13 मिनट का समय लगा।

भारत में डाक सेवाओं पर तमाम लेख और एक पुस्तक ‘इंडिया पोस्ट : 150 ग्लोरियस ईयर्ज़’ लिख चुके कृष्ण कुमार यादव ने बताया  कि इस पहली हवाई डाक सेवा का विशेष शुल्क छह आना रखा गया था और इससे होने वाली आय को आक्सफोर्ड एंड कैंब्रिज हॉस्टल, इलाहाबाद को दान में दिया गया। इस सेवा के लिए पहले से पत्रों के लिए खास व्यवस्था बनाई गई थी। 18 फरवरी को दोपहर तक इसके लिए पत्रों की बुकिंग की गई। पत्रों की बुकिंग के लिए आक्सफोर्ड कैंब्रिज हॉस्टल में ऐसी भीड़ लगी थी कि उसकी हालत मिनी जी.पी.ओ सरीखी हो गई थी। डाक विभाग ने यहाँ तीन-चार कर्मचारी भी तैनात किए थे। चंद रोज में हॉस्टल में हवाई सेवा के लिए 3000 पत्र पहुँच गए। एक पत्र में तो 25 रूपये का डाक टिकट लगा था। पत्र भेजने वालों में प्रयागराज की कई नामी गिरामी हस्तियाँ तो थी हीं, राजा महाराजे और राजकुमार भी थे।

म्यांमार पर एक साल के लिए सेना का कब्जा, राष्ट्रपति म्यिंट व आंग सान सू की हिरासत में

म्यांमार में सैन्य तख्ता पलट, राष्ट्रपति व आंग सान सू की हिरासत में
नई दिल्ली। भारत के पड़ोसी देश म्यांमार में सेना ने तख्तापलट करते हुए देश की सर्वोच्च नेता आंग सान सू की और राष्ट्रपति विन म्यिंट समेत कई वरिष्ठ नेताओं को हिरासत में ले लिया है। सेना ने देश में सत्ता पर कब्जा करते हुए एक साल के लिए आपातकाल की घोषणा की है। पूरे देश की सत्ता सेना के कमांडर-इन-चीफ मिन आंग ह्लाइंग के पास आ गई है।

जानकारी के अनुसार पिछले साल के चुनाव के बाद म्यामांर के सांसद राजधानी नेपीता में संसद के पहले सत्र के लिए आज एकत्रित होने वाले थे। हालांकि, सेना के हालिया बयानों से सैन्य तख्तापलट की आशंका दिख रही थी। सू की, की पार्टी ने संसद के निचले और ऊपरी सदन की कुल 476 सीटों में से 396 पर जीत दर्ज की थी जो बहुमत के आंकड़े 322 से कहीं अधिक था। लेकिन वर्ष 2008 में सेना द्वारा तैयार किए गए संविधान के तहत कुल सीटों में 25 प्रतिशत सीटें सेना को दी गई हैं जो संवैधानिक बदलावों को रोकने के लिए काफी है। कई अहम मंत्री पदों को भी सैन्य नियुक्तियों के लिए सुरक्षित रखा गया है। सू की (75) देश की सबसे अधिक प्रभावी नेता हैं और देश में सैन्य शासन के खिलाफ दशकों तक चले अहिंसक संघर्ष के बाद वह देश की नेता बनीं। सेना ने चुनाव में धोखाधड़ी का आरोप लगाया हालांकि वह इसके सबूत देने में नाकाम रही। देश के स्टेट यूनियन इलेक्शन कमिशन ने पिछले सप्ताह सेना के आरोपों को खारिज कर दिया था। इन आरोपों से पिछले सप्ताह उस वक्त राजनीतिक तनाव पैदा हो गया जब सेना के एक प्रवक्ता ने अपने साप्ताहिक संवाददाता सम्मेलन में एक पत्रकार के सवाल के जवाब में सैन्य तख्तापलट की आशंका से इंकार नहीं किया।

एक साल की इमरजेंसी का ऐलान-कमांडर इन चीफ सीनियर जनरल मिन आंग लाइंग ने भी वरिष्ठ अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा था कि अगर कानून को सही तरीके से लागू नहीं किया गया तो संविधान को रद्द कर दिया जाएगा। इसके साथ ही देश के कई बड़े शहरों की सड़कों पर बख्तरबंद वाहनों की तैनाती से सैन्य तख्तापलट की आशंका बढ़ गई। हालांकि शनिवार को सेना ने तख्तापलट की धमकी देने की बात से इंकार किया और अज्ञात संगठनों एवं मीडिया पर उसके बारे में भ्रामक बातें फैलाने तथा जनरल की बातों को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया। सेना ने रविवार को भी अपनी बात दोहराते हुए तख्तापलट की आशंका को खारिज किया और इस बार उसने विदेशी दूतावासों पर सेना के बारे में भ्रामक बातें फैलाने का आरोप लगाया। अमेरिका में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अधिकारियों और विदेश मंत्रालय ने कहा कि वे म्यामांर में हो रहे घटनाक्रम की खबरों से अवगत हैं।

Mosad! हम ना भूलते हैं, और ना ही माफ करते हैं…

इजराइली दूतावास के बाहर धमाके के बाद लोग जानना चाहते होंगे, आखिर क्या है मोसाद!

दिल्ली में इजराइली दूतावास के बाहर शुक्रवार शाम बम विस्फोट हुआ तो जांच भी शुरू हो गई। दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम और खुफिया एजेंसियां मामले की जांच में जुट गईं। कड़ी से कड़ी जोड़ी जा रही है। भारतीय एजेंसियों के साथ इजराइली जांच एजेंसी “मोसाद” भी शामिल हो गई। लोग जानना भी  चाहते होंगे mosad है और इस खुफिया एजेंसी के कारनामे!

कब हुई मोसाद की स्थापना-
13 दिसंबर, 1949 को इस्राइल के तत्कालीन प्रधानमंत्री डेविड बेन-गूरियन की सलाह पर मोसाद की स्थापना की गई थी। वे चाहते थे कि एक केंद्रीय इकाई बनाई जाए जो मौजूदा सुरक्षा सेवाओं- सेना के खुफिया विभाग, आंतरिक सुरक्षा सेवा और विदेश के राजनीति विभाग के साथ समन्वय और सहयोग को बढ़ाने का कार्य करे। 1951 में इसे प्रधानमंत्री के कार्यालय का हिस्सा बनाया गया इसके प्रति प्रधानमंत्री की जवाबदेही तय की गई।

मोसाद के बड़े ऑपरेशन-

20 साल लगे, लेकिन चुन-चुन कर मारा-
1972 में म्यूनिख ओलंपिक के दौरान इजरायल टीम के 11 खिलाड़ियों को उनके होटल में मार दिया गया। इसके बाद मोसाद ने संदिग्धों की हिट लिस्ट बनाई। फिल्मी स्टाइल में उड़ती हुई कारें, फोन बम, नकली पासपोर्ट, जहर की सुई सभी का इस्तेमाल किया। कई देशों का प्रोटोकॉल तोड़ कर अपराधियों को चुन-चुन कर मारा। 20 साल चले इस ऑपरेशन में एजेंसी टारगेट के परिवार को एक बुके भेजती थी। उस पर लिखा होता था- ‘ये याद दिलाने के लिए कि हम ना तो भूलते हैं, ना ही माफ करते हैं।’


21 साल बाद महमूद अल मबूह की हत्या-
मोसाद ने अल मबूह से 21 साल पुराना बदला लेते हुए उसकी 19 जनवरी 2010 को दुबई के होटल अल बुस्तान रोताना में हत्या कर दी थी। मबूह हमास के लिए हथियार की खरीद-बिक्री किया करता था। एजेंसी ने उसके पैरों में सक्सिनीकोलीन का इंजेक्शन दिया था, जिससे वह पैरालाइज्ड (लकवा) हो गया। इसके बाद उसके मुंह पर तकिया रखकर उसकी हत्या कर दी गई। अल मबूह फिलिस्तीनी ग्रुप हमास के मिलिट्री विंग का संस्थापक था। उस पर 1989 में दो इजराइली सैनिकों को मारने का आरोप था।


यासिर अराफात के सहयोगी को मारीं 70 गोलियां-
मोसाद की हिट लिस्ट में शामिल फिलिस्तीन के नेता यासिर अराफात का दाहिना हाथ माने जाने वाला खलील अल वजीर उर्फ अबू जिहाद ट्यूनीशिया में रह रहा था। उसके खात्मे के लिए 30 एजेंट काम पर लगे। वे पर्यटक बनकर ट्यूनीशिया पहुंचे। कुछ ट्यूनिशिया सेना की वर्दी में भी थे। इस दौरान शहर के ऊपर मंडराते इजरायल के जहाज बोइंग 707 ने वहां के संचार माध्यमों को ब्लॉक कर दिया। फिर एजेंटों ने अबू के घर में दाखिल होकर पहले नौकरों को मारा, फिर परिवार के सामने अबू को 70 गोलियां मार कर मौत के घाट उतार दिया।

चुरा लिया रूस का मिग-21 लड़ाकू विमान-
60 के दशक में सबसे उन्नत और तेज रूस के मिग-21 लड़ाकू विमान को पाने में अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA असफल रही। जिम्मेदारी मिलने पर पहली और दूसरी कोशिश नाकाम होने के बाद भी mosad ने हार नहीं मानी। आखिरकार 1964 में उसे सफलता मिली। महिला एजेंट ने एक इराकी पायलट को इस विमान के साथ इजरायल लाने के लिए मना लिया था।

महिला एजेंट की मदद से दबोचा मौर्डेखाई वनुनु
इजराइल के गुप्त परमाणु कार्यक्रम के बारे में दुनिया को बताने वाले शख्स का नाम था मौर्डेखाई वनुनु। इसके लिए गुप्त अभियान के तहत एक महिला जासूस को उसे प्रेम जाल में फंसाने के लिए भेजा गया। वह उसे लंदन से यॉट में बैठा कर इटली के समंदर में ले आई। वहां से मोसाद के एजेंटों ने वनुनु को अगवा कर लिया। फिर इजराइल में मुकदमा चला कर सजा दी गई।

ऑपरेशन थंडरबोल्ट-
27 जून 1976 को रात के 11 बजे एयर फ्रांस की एयरबस ए300 वी4-203 ने इजरायली शहर तेल अवीव से ग्रीस की राजधानी एथेंस के लिए उड़ान भरी। विमान में 246 यात्री और 12 क्रू मेंबर सवार थे। इसमें सवार ज्यादातर यात्री यहूदी और इजरायली नागरिक थे। अरब के आतंकी विमान को कब्जे में ले कर पेरिस की बजाय लीबिया के शहर बेंगहाजी ले गए और विमान में ईंधन भरा। इसके बाद वे विमान को लेकर युगांडा के एंतेबे हवाई अड्डे पहुंचे। तब मोसाद ने दुनिया को अपनी ताकत दिखाते हुए 94 नागरिकों को सुरक्षित वापस निकाल लिया। इस ऑपरेशन में वर्तमान में इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के भाई जोनाथन नेतन्याहू भी शामिल थे, हालांकि ऑपरेशन के दौरान गोली लगने से उनकी मौत हो गई थी।

हिटलर के खास आइकमैन को फांसी-जर्मनी के तानाशाह एडोल्फ हिटलर ने बड़ी तादाद में यहूदियों की हत्या की थी। इसके लिए हिटलर को जरूरी सामान एडोल्फ आइकमैन ने उपलब्ध करवाया था। मोसाद ने 1960 में अर्जेंटीना से आइकमैन का अपहरण किया और उसे लेकर इजराइल ले गए। 11 अप्रैल 1961 को उस पर 60 लाख यहूदियों की मौत की साजिश में शामिल होने को लेकर मुकदमा चलाया गया। आठ महीनों तक चले मुकदमे के बाद उसे दिसंबर 1961 में मौत की सजा सुनाई गई। मई 1962 में उसे फांसी पर लटका दिया गया और उसकी अस्थियों को समुद्र में फेंक दिया गया।

मोसाद भी करेगी इस्रायली दूतावास के बाहर धमाके की जांच

इस्रायली दूतावास के बाहर धमाके की जांच में शामिल होगी मोसाद

दिल्ली। लुटियंस इलाके में औरंगजेब रोड पर इस्रायली दूतावास के बाहर शुक्रवार शाम बम विस्फोट की जांच विश्व की सबसे खतरनाक खुफिया एजेंसी मोसाद भी करेगी। दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम और खुफिया एजेंसियां मामले की जांच मे जुटी हुई हैं। सूत्रों के अनुसार भारतीय एजेंसियों के साथ इस्रायली जांच एजेंसी मोसाद भी जांच में सहयोग कर रहा है। इस्रायली अधिकारियों ने हमले के पीछे आतंकी हमले का अंदेशा जताया है। वहीं सीसीटीवी फुटेज को भी खंगाला जा रहा है।

दिल्ली में इजराइली दूतावास के पास IED ब्लास्ट

दिल्ली में इजराइली दूतावास के पास IED ब्लास्ट। कई कारों के शीशे टूटे। धमाके के समय चल रही थी बीटिंग द रिट्रीट। पूरा इलाका छावनी में तब्दील।

नई दिल्‍ली। इजरायली दूतावास के पास अब्दुल कलाम मार्ग पर एक कोठी में शुक्रवार की शाम विस्फोट हुआ। सीसीटीवी फुटेज की प्रारंभिक विवेचना से पता चला है कि एक कार चालक ने पैकेट में रखकर बम को फेंका था। कार के नंबर के आधार पर उसके मालिक का पता लगाया जा रहा है। पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। जिस समय दूतावास के पास धमाका हुआ उस समय बीटिंग द रिट्रीट चल रही थी।

पुलिस का कहना है कि कम तीव्रता के विस्‍फोट के चलते कुछ कारों के शीशे टूट गए हैं। किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। धमाके के बारे में किए गए फोन कॉल में इजराइल का जिक्र नहीं था। धमाका दूतावास के पास ही 6 नंबर बंगले में हुआ। सूचना पर दमकल की तीन गाड़ियां पहुंच गई। दिल्ली पुलिस का मानना है ये लो इंटेंसिटी का ब्लास्ट है। पुलिस इसे शरारती तत्वों की करतूत बता रही है। धमाके को लेकर दिल्ली पुलिस जांच में जुट गई है।

हवाई अड्डों, महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों और सरकारी भवनों पर अलर्ट जारी- केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल ने कहा है कि दिल्ली में विस्फोट की आशंका के मद्देनजर सभी हवाई अड्डों, महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों और सरकारी भवनों पर अलर्ट जारी किया गया है। जिस समय दूतावास के पास धमाका हुआ उस समय बीटिंग द रिट्रीट चल रही थी। इस आयोजन में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, रक्षामंत्री, लोकसभा अध्यक्ष और तीनों सेनाओं के प्रमुख भी मौजूद थे। दिल्ली पुलिस का कहना है कि घटनास्थल के आसपास और कोई बम नहीं मिला है।

इससे पहले 13 फरवरी 2012 को भी दिल्ली में इजराइली दूतावास की कार पर बम हमला किया गया था। उस हमले में इजरायली राजनयिक ताल येहोशुआ और चालक सहित चार लोग घायल हो गए थे। मामले की जांच के बाद दिल्‍ली पुलिस की स्‍पेशल सेल ने उस मामले में एक व्‍यक्ति को गिरफ्तार किया था।

आकाश-एनजी मिसाइल का सफल परीक्षण

आकाश-एनजी मिसाइल का सफल परीक्षण नई दिल्ली। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने गणतंत्र दिवस से ठीक एक दिन पहले 25 जनवरी, 2021 को ओडिशा के तट से दूर एकीकृत परीक्षण रेंज से आकाश-एनजी (नई पीढ़ी) मिसाइल का सफल पहला प्रक्षेपण किया। आकाश-एनजी एक नई पीढ़ी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है, जिसका उद्देश्य भारतीय वायु सेना द्वारा उपयोग के लिए ऊंचाई से हमला करने वाले कम आरसीएस हवाई खतरों को रोकना है।

मिसाइल ने टेक्स्ट बुक सटीकता के साथ लक्ष्य पर निशाना साधा। मिसाइल ने प्रक्षेपवक्र के दौरान उच्च स्तरीय क्षमता का प्रदर्शन करके सभी परीक्षण उद्देश्यों को पूरा किया। परीक्षण के दौरान कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम, ऑनबोर्ड एवियोनिक्स और मिसाइल के एयरोडायनामिक विन्यास का प्रदर्शन सफलतापूर्वक सत्यापित हुआ। परीक्षण प्रक्षेपण के दौरान मिसाइल के पूरे उड़ान पथ पर नजर रखी गई और उड़ान के आंकड़ों को आईटीआर चांदीपुर द्वारा तैनात रडार, ईओटीओ और टेलीमेट्री सिस्टम जैसे विभिन्न रेंज उपकरणों द्वारा हासिल किया गया।

प्रणाली के साथ एकीकृत करके मल्टी फंक्शन रडार का उसकी क्षमता के लिए परीक्षण किया गया। आकाश-एनजी प्रणाली को कनस्तरीकृत लांचर और बहुत छोटे ग्राउंड सिस्टम फुटप्रिंट के साथ अन्य समान प्रणालियों की तुलना में बेहतर तैनाती के साथ विकसित किया गया है। यह परीक्षण भारतीय वायु सेना के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), बीडीएल और बीईएल की संयुक्त टीम द्वारा किया गया था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि के लिए डीआरडीओ, बीईएल और भारतीय वायु सेना की टीम के वैज्ञानिकों को बधाई दी । सचिव डीडी आरएंडडी और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ जी सतीश रेड्डी ने आकाश एनजी मिसाइल के सफल उड़ान परीक्षण के लिए टीम को बधाई दी। ****

गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए लखनऊ वन विभाग सम्मानित

शासन द्वारा इसके लिए प्रदेश के आठ जिलों बाराबंकी, अयोध्या, लखनऊ, सीतापुर, मेरठ, चित्रकूट, बाँदा और गाजियाबाद को चयनित किया गया था।
इस दौरान लखनऊ के कर्मचारियों अधिकारियों ने अलग-अलग प्रजातियों के 220 पौधे लगाकर पर्यावरण को संरक्षित करने का काम किया था।

लखनऊ। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराने के बीते दिनों हुए कार्यक्रम को लेकर लखनऊ के जिला वन अधिकारी डॉ रवि कुमार तथा लखनऊ मंडल के मुख्य वन संरक्षक आरके सिंह ने लखनऊ में वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को उनके सराहनीय तथा अच्छे कार्य के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया है।

गौरतलब है कि जैव विविधता बनाए रखने और विलुप्त हो रहे पेड़ों की प्रजातियों को संरक्षित करने के लिए उत्तर प्रदेश के वन विभाग नें एक साथ कई प्रजातियों के पौधे रोपण करने पर गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज हुआ था। कार्यक्रम में अलग-अलग प्रजातियों के पौधे रोपकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया गया था। बीती 28 जुलाई को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड एजेंसी के कंसल्टेंट समेत कई गवाहों की मौजूदगी में आयोजित हुए इस पौधरोपण को एजेंसी ने मान्यता देते हुए वन विभाग का नाम गिनीज बुक में दर्ज कर सर्टिफिकेट जारी किया था।