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  • बीहड़ में डकैतों की आस्था का बड़ा केंद्र रहे मंदिर के विकास को ₹1 करोड़

    लखनऊ, (01 अक्टूबर 2025)। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने आदि शक्ति उपासकों और श्रद्धालुओं को बड़ा उपहार दिया है। मुख्यमंत्री पर्यटन स्थलों के विकास योजना अंतर्गत कानपुर देहात के कथरी स्थित प्राचीन कात्यायनी देवी मंदिर के पर्यटन विकास के लिए 1 करोड़ रुपए की धनराशि स्वीकृत की गई है। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया, कि ‘कात्यायनी देवी मंदिर शक्ति आराधना का महत्वपूर्ण स्थल है। सरकार का उद्देश्य इस प्राचीन व धार्मिक स्थल को पर्यटन मानचित्र पर और सशक्त बनाना है, जिससे श्रद्धालु और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिल सके।

    मंत्री जयवीर सिंह ने बताया… ‘उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग का प्रयास है कि कथरी स्थित कात्यायनी देवी मंदिर को क्षेत्रीय धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।’

    कानपुर देहात को धार्मिक मानचित्र पर विशिष्ट पहचान दिलाने के लिए पर्यटन विभाग ने कथरी स्थित प्राचीन कात्यायनी देवी मंदिर के समेकित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। इस परियोजना के तहत पर्यटन स्थल पर सौंदर्यीकरण, आधुनिक प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छ शौचालय, सूचना केंद्र और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इन सुविधाओं के विकसित होने से न केवल स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि जनपद की पौराणिक और सांस्कृतिक धरोहर को भी नई पहचान मिलेगी।

    मां कात्यायनी को देवी दुर्गा का छठा रूप माना जाता है। मान्यता है कि जो भी भक्त विशेषकर नवरात्र में श्रद्धा से मां कात्यायिनी का पूजन करता है, उसकी मनोकामना पूर्ण होती है। यह मंदिर बीहड़ के डाकुओं की आस्था का बड़ा केंद्र माना जाता रहा है। क्षेत्र में डाकुओं द्वारा सबसे पहले ध्वज चढ़ाने की कई कहानियां प्रचलित हैं। सांसद बनने के बाद फूलन देवी भी यहां पूजन करने आईं थीं। किंवदंती के अनुसार, कालांतर में शाहजहांपुर के तत्कालीन राजा गजाधर दुबे ने पुत्र-प्राप्ति की मन्नत पूरी होने पर भव्य मंदिर का निर्माण कराया था।

    यह प्राचीन मंदिर इटावा रोड पर शाहजहांपुर गांव से लगभग छह किलोमीटर तथा तहसील मुख्यालय भोगनीपुर से करीब 16 किलोमीटर की दूरी पर बीहड़ में स्थित है। कानपुर नगर से मंदिर की दूरी करीब 85 किलोमीटर है। नवरात्रि के समय इस मंदिर में बड़ा मेला लगता है। मेले में निकटवर्ती जनपदों के भी श्रद्धालु एवं भक्तगण बड़ी संख्या में आते हैं।

    पर्यटन के लिहाज से कानपुर देहात उभरता जिला है। यहां दुर्वासा ऋषि आश्रम, 500 साल पुराना बरगद वृक्ष सहित कई दर्शनीय स्थल हैं। जनपद में वर्ष 2024 में 9,47,914 लाख से अधिक पर्यटक आए थे। वहीं, वर्ष 2025 की पहली तिमाही (जनवरी से मार्च) में ही 2,63,679 से अधिक सैलानियों ने जिले का रुख किया। बढ़ते पर्यटक आगमन से न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिल रहे हैं।

    उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा, ‘धार्मिक पर्यटन में उत्तर प्रदेश अन्य राज्यों की तुलना में पहले पायदान पर है। कानपुर देहात प्राचीन और पौराणिकता स्थलों के लिए विख्यात है। सरकारी प्रयास है कि चर्चित स्थलों को विश्व पर्यटन मानचित्र पर और अधिक सशक्त तरीके से स्थापित किया जाए। साथ ही, अल्पज्ञात स्थलों को भी प्रदेश की पहचान से जोड़ते हुए प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित किया जाए।’

  • ड्राफ्ट्समैन को अभियंता का लाइसेंस: नियत प्राधिकारी की कार्यशैली पर सवाल !

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    कैसे हुआ नियमों का उल्लंघन ?

    नियमों के अनुसार, अभियंता का लाइसेंस केवल योग्यताधारी इंजीनियर को ही प्रदान किया जा सकता है, जिसे मान्यता प्राप्त संस्थान से डिग्री या डिप्लोमा प्राप्त हो। लेकिन, इस मामले में नियत प्राधिकारी ने एक ड्राफ्ट्समैन को अभियंता के रूप में मान्यता दे दी, जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है। सूत्रों के अनुसार, इस प्रक्रिया में न केवल तकनीकी मानकों को नजरअंदाज किया गया, बल्कि इस निर्णय से निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है। एक गैर-प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा अभियंता की भूमिका निभाना सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

  • अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस पर दुधवा को बूस्ट: 8.79 करोड़ से इको-टूरिज्म को नई रफ्तार, बनेगा वर्ल्ड क्लास हब

    मुख्य प्रवेश द्वार पर प्रदर्शित होगी दुधवा की थीम, नेचर इंटरप्रिटेशन सेंटर, कैंटीन, सभागार और पुस्तकालय का होगा सौंदर्यीकरण

    तराई की हरियाली से आर्थिक समृद्धि, इको-टूरिज्म को बढ़ावा दे रही सरकार- जयवीर सिंह

    लखनऊ। अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस (21 मार्च) के मौके पर उत्तर प्रदेश में इको-टूरिज्म को नई रफ्तार देने की तैयारी तेज हो गई है। तराई की हरियाली और समृद्ध जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध दुधवा नेशनल पार्क अब बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है। लखीमपुर खीरी के पलिया स्थित दुधवा में इंटरप्रिटेशन सेंटर के इको पर्यटन विकास, महेशपुर वन रेंज में इको-टूरिज्म विकास और दिल्ली-एनसीआर व लखनऊ से आने वाले राजमार्गों पर साइनेज लगाने के लिए 8.79 करोड़ रुपए की पहली किश्त जारी की गई है। यह कदम दुधवा को विश्वस्तरीय पर्यटन हब के रूप में विकसित करने की दिशा में अहम होगा। 

    उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस- 2026 की थीम ‘वन और अर्थव्यवस्थाएं’ है। यह थीम स्पष्ट तौर पर प्रदेश के वन क्षेत्र को पर्यावरण तक सीमित न रखते हुए, रोजगार, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने का संदेश देती है। उन्होंने कहा, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश इको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड नवाचार की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। इस पहल से जहां एक ओर पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी, वहीं पर्यटन विकास को भी नई गति प्राप्त होगी।’ 

    लखीमपुर खीरी के पलिया स्थित दुधवा नेशनल पार्क के इंटरप्रिटेशन सेंटर का इको पर्यटन विकास किया जाएगा। इसके लिए करीब 4.49 करोड़ रुपए की योजना को मंजूरी मिल चुकी है, जिसमें से 3.36 करोड़ रुपए की पहली किश्त जारी कर दी गई है। योजना के तहत यहां एक भव्य और आकर्षक मुख्य प्रवेश द्वार बनाया जाएगा, जो दुधवा की थीम को दर्शाएगा। इसके अलावा स्वागत कक्ष, नेचर इंटरप्रिटेशन सेंटर, कैंटीन, बहुउद्देशीय सभागार और पुस्तकालय का सौंदर्यीकरण किया जाएगा। खास बात यह है कि यहां थारू जनजाति और उनके परिवेश पर आधारित आकर्षक सेल्फी प्वाइंट का निर्माण किया जाएगा, जिससे पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

    वहीं, लखीमपुर खीरी के महेशपुर वन रेंज को इको-टूरिज्म के तौर पर विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। इस परियोजना के लिए करीब 2.39 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई है, जिसमें से लगभग 1.78 करोड़ रुपए की पहली किस्त जारी भी कर दी गई है। योजना अंतर्गत पर्यटकों की सुविधा और आकर्षण को ध्यान में रखते हुए कई आधुनिक व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। यहां पेयजल की सुविधा, पेड़ों के नीचे बैठने के लिए विशेष इंतजाम, गज़ीबो का निर्माण और वर्षा जल संचयन प्रणाली स्थापित की जाएगी। इसके अलावा, इंटरलॉकिंग पाथवे, जानवरों की 3D आकृतियां और सेल्फी पॉइंट बनाए जाएंगे। साथ ही, बेंच, एलईडी लैंप से लैस स्ट्रीट पोल और सोलर स्ट्रीट लाइट्स भी लगाई जाएगी, जिससे क्षेत्र की सुंदरता और सुविधाएं दोनों बढ़ेंगी।

    इसी प्रकार, दिल्ली-एनसीआर और लखनऊ से दुधवा नेशनल पार्क जाने वाले राजमार्गों पर साइनेज (संकेतक बोर्ड) लगाए जाएंगे, जिससे पर्यटकों को रास्ता ढूंढने में आसानी होगी। सरकार द्वारा करीब 4.88 करोड़ रुपए की स्वीकृत योजना के लिए 3.65 करोड़ रुपए जारी की जा चुकी है। साइनेज लगने से विशेषकर दिल्ली-एनसीआर और राजधानी लखनऊ से आने वाले पर्यटकों को काफी राहत मिलेगी। अक्सर बाहरी राज्यों से आने वाले लोग रास्तों को लेकर भ्रमित हो जाते हैं, ऐसे में ये संकेतक उनकी यात्रा को आसान और सुगम बनाएंगे।

    पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘दुधवा नेशनल पार्क और महेशपुर वन रेंज में विकसित हो रही आधुनिक सुविधाएं, इंटरप्रिटेशन सेंटर का उन्नयन और प्रमुख मार्गों पर साइनेज की व्यवस्था पर्यटकों को विशेष अनुभव प्रदान करेगी। पर्यटन विकास योजनाएं प्रदेश को विश्व स्तरीय पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। साथ ही, यह प्रयास पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है।’

  • बॉलीवुड अभिनेत्री सेलिना जेटली के भाई, मेजर (रिटायर्ड) विक्रांत जेटली पिछले कई महीनों से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की जेल में बंद हैं। यह मामला अब केवल एक पूर्व सैन्य अधिकारी की गिरफ्तारी का नहीं रह गया है, बल्कि यह ‘बहन की चिंता’ और ‘पत्नी के कानूनी अधिकार’ के बीच एक अभूतपूर्व कानूनी टकराव बन चुका है।

    विक्रांत जेटली 2016 से दुबई में एक प्रतिष्ठित कंपनी में कार्यरत थे। 6 सितंबर 2024 को उन्हें अचानक हिरासत में ले लिया गया।
    * गोपनीयता का घेरा: यूएई की सुरक्षा एजेंसियों ने उन पर लगे आरोपों को बेहद ‘संवेदनशील’ और ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ से जुड़ा बताया है।
    * कूटनीतिक पेच: चूंकि वे एक पूर्व भारतीय सैन्य अधिकारी रहे हैं, इसलिए भारत सरकार और विदेश मंत्रालय इस मामले पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं। विक्रांत ने केवल अपनी पत्नी चारुल जेटली को ही अपनी स्थिति की जानकारी साझा करने के लिए अधिकृत किया है।

    सेलिना ने दिल्ली हाई कोर्ट में गुहार लगाई थी कि उनके भाई को “अवैध रूप से” रखा गया है और उन्हें बेहतर कानूनी टीम की जरूरत है। लेकिन उनकी राह में सबसे बड़ी बाधा खुद उनके भाई का बयान बन गया:
    * संवाद से इनकार: जेल में भारतीय दूतावास के अधिकारियों से मुलाकात के दौरान विक्रांत ने साफ कहा— “मुझे अपनी बहन से कोई बात नहीं करनी।”
    * अधिकारों की जंग: विक्रांत की पत्नी चारुल ने अदालत में तर्क दिया कि सेलिना का हस्तक्षेप उनके निजी जीवन और कानूनी रणनीति में खलल डाल रहा है। कानून के अनुसार, पत्नी ही ‘Next of Kin’ (निकटतम संबंधी) होती है, इसलिए सेलिना को इस मामले में हस्तक्षेप का कोई कानूनी आधार नहीं मिल पा रहा है।

    न्यायपालिका के विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला ‘स्वायत्तता’ (Autonomy) का है।
    ~ “यदि कोई वयस्क व्यक्ति होशोहवास में यह कहता है कि उसे किसी विशेष संबंधी की मदद नहीं चाहिए, तो अदालत उस पर कोई फैसला नहीं थोप सकती। यहां तक कि बहन की सद्भावना भी कानून के सामने तब तक बेअसर है, जब तक भाई उसे स्वीकार न करे।”

    सेलिना जेटली का दावा है कि उनका भाई किसी अज्ञात ‘दबाव’ में है, जबकि विक्रांत की पत्नी का रुख है कि वे अपनी कानूनी लड़ाई अपने तरीके से लड़ रहे हैं। इस खींचतान के बीच मेजर विक्रांत की रिहाई की प्रक्रिया और जटिल होती जा रही है।

    | गिरफ्तारी की तारीख | 6 सितंबर 2024 |
    | स्थान | संयुक्त अरब अमीरात (UAE) |
    | मुख्य विवाद | बहन (सेलिना) बनाम पत्नी (चारुल) |
    | कोर्ट का रुख | भाई की मर्जी और पत्नी के अधिकारों को प्राथमिकता |

  • 70 किमी दूर से आने वाले फरियादी मायूस, बंद दफ्तर देख आर्थिक और मानसिक रूप से हो रहे प्रताड़ित

    मुख्यमंत्री के आदेशों की उड़ी धज्जियां: बिजनौर खनन कार्यालय पर ‘लिपिक’ का पहरा, बाहर बैठे रहे अधिकारी

    बिजनौर, (अमित चौधरी)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘जीरो टॉलरेंस’ और ‘समयबद्ध कार्यप्रणाली’ के दावों को बिजनौर का खनन विभाग ठेंगा दिखा रहा है। जिले में खनन कार्यालय के बंद रहने और एक लिपिक (क्लर्क) की मनमानी के कारण आम जनमानस को भारी दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। ताज़ा मामले ने विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जहाँ दफ्तर की चाबियों पर लिपिक का कब्जा होने के कारण खान अधिकारी और खान निरीक्षक खुद कार्यालय के बाहर कमान सेंटर में बैठने को मजबूर दिखे।

    साहब बाहर, चाबी बाबू के पास!

    बिजनौर खनन कार्यालय में व्यवस्थाएं इस कदर चरमरा गई हैं कि यहाँ तैनात खनन लिपिक की मर्जी के बिना दफ्तर का ताला तक नहीं खुलता। सूत्रों के अनुसार, कार्यदिवस होने के बावजूद कार्यालय बंद पाया गया। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिले के जिम्मेदार खान अधिकारी और खान निरीक्षक स्वयं दफ्तर के बाहर कमान सेंटर में बैठकर समय काटते नजर आए, क्योंकि दफ्तर की चाबियाँ लिपिक के पास थीं और वह नदारद था।

    मुख्यमंत्री के आदेशों की खुली अवहेलना

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी सरकारी कार्यालय कार्यदिवसों (Working Days) में निर्धारित समय पर खुलेंगे और जनता की समस्याओं का निस्तारण करेंगे। लेकिन बिजनौर खनन विभाग में इन आदेशों का कोई असर नहीं दिख रहा। आए दिन दफ्तर बंद रहने से यह स्पष्ट है कि यहाँ के कर्मचारियों में शासन का कोई भय नहीं रह गया है।

    दूर-दराज से आने वाले लोगों की बढ़ी मुसीबत

    बिजनौर जिला भौगोलिक दृष्टि से काफी विस्तृत है। खनन संबंधी कार्यों के लिए लोग रेहड़, कालागढ़ और नजीबाबाद जैसे दूर-दराज के क्षेत्रों से लगभग 70-80 किलोमीटर का सफर तय करके जिला मुख्यालय आते हैं।
    * आर्थिक हानि: किराया और समय खर्च कर आने वाले लोगों को जब दफ्तर बंद मिलता है, तो उनकी मेहनत की कमाई पानी में चली जाती है।
    * मानसिक प्रताड़ना: बार-बार चक्कर काटने के बाद भी काम न होने से जनता में भारी रोष है।

    जवाबदेही तय होना जरूरी

    एक सरकारी कार्यालय का चाबी के अभाव में बंद रहना न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा करता है। आखिर एक लिपिक इतना प्रभावशाली कैसे हो गया कि उच्चाधिकारी भी उसके सामने बेबस नजर आ रहे हैं? जनता अब सवाल पूछ रही है कि इस लापरवाही की जवाबदेही किसकी है? क्या ऐसे लापरवाह कर्मचारियों और मूकदर्शक बने अधिकारियों पर शासन की गाज गिरेगी?

    “दफ्तर बंद होने से आम आदमी को होने वाली आर्थिक और मानसिक क्षति का जिम्मेदार कौन है? क्या बिजनौर का खनन विभाग शासन के नियमों से ऊपर है?”

  • पीठाधीश्वर पं. विमल मिश्र के सान्निध्य में महिला भजन मंडली ने दी सुमधुर प्रस्तुतियां

    हनुमान जी की भव्य आरती करने कुम्हरावां पहुंचे बड़ी संख्या में श्रद्धालु

    सूर्य नारायणी नव दुर्गे देव स्थली पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

    लखनऊ। राजधानी के बीकेटी ब्लॉक स्थित कुम्हरावां की प्रतिष्ठित और विख्यात सूर्य नारायणी नव दुर्गे देव स्थली में मंगलवार को भक्ति का अनुपम दृश्य देखने को मिला। मंदिर के पीठाधीश्वर पं. विमल मिश्र जी महाराज के पावन सान्निध्य में हनुमान जी का भव्य भजन-पूजन और दिव्य आरती का आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र के बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लेकर पुण्य लाभ कमाया।

    भजन और कीर्तन से भक्तिमय हुआ वातावरण

    कार्यक्रम के दौरान महिला भजन मित्र मंडली द्वारा भगवान हनुमान जी के चरणों में सुमधुर भजनों की प्रस्तुतियां दी गईं। माधुरी मिश्रा, रामेश्वरी मिश्रा और बिमला मिश्रा सहित परिवार की सभी महिला सदस्यों ने प्रतिदिन की भांति संध्या भजन के माध्यम से मंदिर परिसर को भक्तिमय कर दिया। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि हनुमान जी के अनन्य भक्त पं. विमल मिश्र जी पर पवनपुत्र की विशेष कृपा है, जिससे यहाँ आने वाले भक्तों को मानसिक शांति का अनुभव होता है।

    41 दिन की कठिन साधना और सेवा भाव

    उल्लेखनीय है कि पीठाधीश्वर पं. विमल मिश्र जी ने हनुमान जी की भक्ति में लीन रहते हुए 41 दिनों की कठिन साधना की है, जिसमें उन्होंने 60 घंटे का मौन व्रत भी धारण किया। मंदिर के उत्कर्ष और सेवा कार्यों में श्रीकांत मिश्र, माधुरी मिश्रा, सुनील मिश्रा, पंकज मिश्रा, वंदना मिश्रा, बनवारी लाल मिश्र, बिमला मिश्रा, डॉ. अनूप मिश्रा और धर्मेंद्र मिश्र (एडवोकेट) जैसे समर्पित सेवादारों का विशेष सहयोग रहता है।

    कष्टों का निवारण और अटूट आस्था

    सूर्य नारायणी नव दुर्गे देव स्थली में प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी की विशेष ‘अर्जी’ लगती है। दूर-दराज से लोग अपनी शारीरिक और मानसिक व्याधियों के निवारण की कामना लेकर यहाँ आते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि बाला जी महाराज के आशीर्वाद से यहाँ सभी कष्टों का निराकरण होता है।

    “हनुमान जी की असीम कृपा से ही भगवान श्री राम की भक्ति, मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति संभव है।”  — पीठाधीश्वर पं. विमल मिश्र जी महाराज

  • धर्म और आस्था: व्रत में भोजन साझा करना, कितना सही और कितना गलत?

    धर्म और परंपरा के कड़े पालन के संदर्भ में, व्रत रखे व्यक्ति की प्लेट से बिना व्रत रखे व्यक्ति को कुछ भी नहीं खाना चाहिए। यह व्रत की शुद्धता और ‘जूठा’ न खाने के नियमों के विरुद्ध माना जाता है।

    हिन्दू धर्म में उपवास (व्रत) का एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। यह केवल भोजन का त्याग नहीं, बल्कि तन, मन और आत्मा की शुद्धि का एक माध्यम है। उपवास के दौरान भोजन की शुद्धता, पवित्रता और उसे ग्रहण करने की विधि पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इस संदर्भ में अक्सर एक प्रश्न उठता है कि क्या उपवास के नियमों का पालन करते हुए दो या दो से अधिक व्यक्ति एक ही प्लेट से भोजन कर सकते हैं? आइए जानते हैं राजधानी लखनऊ के बीकेटी ब्लॉक स्थित कुम्हरावां की प्रतिष्ठित और विख्यात सूर्य नारायणी नव दुर्गे देव स्थली के पीठाधीश्वर पं. विमल मिश्र जी महाराज द्वारा धार्मिक ग्रंथों, परंपराओं और सामान्य धारणाओं के आधार पर इस विषय के विभिन्न पहलू…

    जूठा भोजन और उसकी अपवित्रता की अवधारणा

    हिन्दू धर्म में ‘जूठा’ (उच्छिष्ट) भोजन करने को बहुत बड़ा दोष माना जाता है। मान्यता है कि जब कोई व्यक्ति भोजन करता है, तो उसके लार या स्पर्श से भोजन दूषित हो जाता है। यदि कोई दूसरा व्यक्ति उस जूठे भोजन को खाता है, तो वह उसकी अशुद्धि को ग्रहण करता है। सामान्य दिनों में भी इसे टाला जाता है, लेकिन उपवास के दौरान, जहाँ सूक्ष्म स्तर की शुद्धि पर ध्यान दिया जाता है, जूठा भोजन करना बहुत बड़ा दोष माना जाता है।

    परिस्थिति 1: जब कोई व्रत तोड़कर खा रहा हो और कोई व्रत में हो

    क्या उस व्यक्ति की प्लेट से भोजन किया जा सकता है जो किसी कारणवश (जैसे बीमारी या यात्रा) व्रत में ही अन्न या सामान्य भोजन कर रहा है? धार्मिक दृष्टिकोण से इसका उत्तर स्पष्ट है।
    * निषेध: धार्मिक मान्यता के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति उपवास के नियमों का पालन नहीं कर रहा है, तो उसकी प्लेट से भोजन करना पूरी तरह से वर्जित है, चाहे वह व्रत रखने वाला व्यक्ति हो या बिना व्रत वाला।
    * तर्क: जो व्यक्ति व्रत में भोजन कर रहा है, उसका आचरण उस विशेष दिन के लिए अशुद्ध माना जाता है। उसके द्वारा स्पर्श की गई प्लेट या सांझा किया गया भोजन ‘जूठा’ और अपवित्र हो जाता है। यदि कोई व्रत रखने वाला व्यक्ति ऐसे व्यक्ति की प्लेट से भोजन करता है, तो उसका अपना व्रत तत्काल भंग हो सकता है और वह नियम उल्लंघन का दोषी माना जा सकता है।
    * निष्कर्ष: इस परिस्थिति में, पवित्रता और नियम के कड़े पालन को प्राथमिकता देनी चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति को अलग-अलग प्लेट का उपयोग करना चाहिए।

    परिस्थिति 2: जब दोनों व्यक्ति ही व्रत में हों

    क्या दो व्यक्ति जो दोनों ही उपवास रख रहे हैं, एक ही प्लेट से भोजन साझा कर सकते हैं? इस पर राय अधिक लचीली है और यह परंपरा व विश्वास पर निर्भर करती है।
    * सामान्य धारणा: आमतौर पर माना जाता है कि दो व्रतधारी व्यक्ति एक ही प्लेट से भोजन साझा कर सकते हैं। इसके पीछे का विचार यह है कि क्योंकि दोनों व्यक्ति पवित्रता के एक ही नियम (फलाहार या बिना नमक का भोजन) का पालन कर रहे हैं और समान रूप से आध्यात्मिक रूप से सक्रिय हैं, इसलिए उनका भोजन एक-दूसरे के लिए अशुद्ध नहीं माना जाता। यह एक प्रकार की समानता और आध्यात्मिक बंधन को भी दर्शाता है।
    * रूढ़िवादी दृष्टिकोण: कुछ अत्यंत कड़े नियमों का पालन करने वाले भक्तों या समुदायों में, उपवास के दौरान किसी भी प्रकार का सांझा भोजन करना उचित नहीं माना जाता है। उनका मानना है कि यद्यपि दोनों व्यक्ति व्रत में हैं, फिर भी सूक्ष्म स्तर पर ‘जूठा’ होने का दोष लग सकता है, जो आध्यात्मिक ऊर्जा को प्रभावित कर सकता है। वे प्रत्येक व्यक्ति के लिए पूरी तरह से अलग प्लेट और भोजन के बर्तन का उपयोग करने की सलाह देते हैं।
    * क्षेत्रीय और सांप्रदायिक भिन्नताएं: भारत के विभिन्न क्षेत्रों और संप्रदायों (जैसे वैष्णव, शैव) में उपवास के दौरान भोजन साझा करने के बारे में अलग-अलग परंपराएं हैं। कुछ समुदायों में यह अभ्यास बहुत आम हो सकता है, विशेष रूप से परिवार के सदस्यों या एक ही आध्यात्मिक समूह के लोगों के बीच।

    शास्त्रों का ज्ञान और व्यवहारिक सलाह

    * शास्त्रों का दृष्टिकोण: अधिकांश शास्त्रों में उपवास के दौरान भोजन सांझा करने के बारे में कोई स्पष्ट और कड़ा निषेध नहीं है। मुख्य जोर भोजन की तैयारी की शुद्धता और खाने के तरीके पर है। पवित्रता को सबसे महत्वपूर्ण तत्व माना जाता है।
    * विशेषज्ञ की सलाह: यदि आप एक ही प्लेट से भोजन साझा करने पर विचार कर रहे हैं और आपके मन में संदेह है, तो अपने आध्यात्मिक गुरु, पंडित या परिवार के बुजुर्गों से सलाह लेना सबसे अच्छा है। वे आपको आपके विशिष्ट धार्मिक सिद्धांतों और परंपरा के आधार पर बेहतर मार्गदर्शन कर सकते हैं।

    पं. विमल मिश्र जी महाराज, पीठाधीश्वर सूर्य नारायणी नव दुर्गे देव स्थली कुम्हरावां, ब्लॉक बीकेटी लखनऊ

    भोजन साझा करते समय सावधानियां

    यदि आप दोनों ही व्रत में हैं और भोजन साझा करने का निर्णय लेते हैं, तो निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना आवश्यक है:
    * भोजन की शुद्धता: सुनिश्चित करें कि भोजन तैयार करते और परोसते समय स्वच्छता और पवित्रता का उच्चतम स्तर बनाए रखा जाए।
    * खाने की विधि: भोजन करते समय भी स्वच्छता का ध्यान रखें। अपने हाथों को अच्छी तरह धोएं और साफ बर्तनों का उपयोग करें। यदि संभव हो, तो चम्मच या कांटे का उपयोग करें ताकि हाथों का स्पर्श सीधे भोजन से कम हो।
    * परस्पर सम्मान: एक ही प्लेट से भोजन साझा करते समय, एक-दूसरे का सम्मान करें और इस बात का ध्यान रखें कि आपकी हरकतें आपके साथी के उपवास के अनुभव को प्रभावित न करें।

    उपवास: एक आध्यात्मिक यात्रा

    पीठाधीश्वर पं. विमल मिश्र जी महाराज कहते हैं कि उपवास केवल भोजन का त्याग नहीं है, बल्कि एक आध्यात्मिक यात्रा है। भोजन ग्रहण करने के तरीके पर निर्णय लेते समय, प्राथमिक ध्यान उपवास के पीछे के आध्यात्मिक उद्देश्य पर होना चाहिए। यदि दोनों व्यक्ति व्रत में हैं, तो साझा भोजन परंपरा और व्यक्तिगत विश्वास के आधार पर स्वीकार्य हो सकता है, बशर्ते पवित्रता का ध्यान रखा जाए। …लेकिन यदि एक भी व्यक्ति व्रत के नियमों का पालन नहीं कर रहा है, तो उसकी प्लेट से भोजन करना पूरी तरह से वर्जित है, क्योंकि यह व्रत की पवित्रता और नियम दोनों का उल्लंघन है। अंततः, आपको अपने विवेक और परंपरा के अनुसार कार्य करना चाहिए जो आपकी आध्यात्मिक यात्रा को सबसे अच्छी तरह से समर्थन दे।

    लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है:
    जब हम एक सामान्य धार्मिक नियम या परंपरा के बारे में पूछते हैं, तो उत्तर “नहीं” ही होता है। व्यक्तिगत स्तर पर कोई क्या करता है, वह उनकी अपनी आस्था और परिवार की परंपरा पर निर्भर करता है।

  • पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर का बड़ा बयान; हाईकोर्ट के आदेशानुसार समय पर होंगे चुनाव, नहीं बढ़ाया जाएगा किसी का कार्यकाल

    संशय खत्म: जुलाई 2026 तक संपन्न होंगे UP पंचायत चुनाव

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर पिछले काफी समय से बनी अनिश्चितता की स्थिति पर राज्य सरकार ने पूरी तरह विराम लगा दिया है। प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के चुनाव जुलाई 2026 तक हर हाल में संपन्न करा लिए जाएंगे।
    सरकार के इस फैसले से साफ़ हो गया है कि चुनावी तैयारियों में अब तेजी आएगी और प्रशासनिक मशीनरी को निर्धारित समयसीमा के भीतर ही प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

    कार्यकाल विस्तार की संभावनाएँ खत्म

    मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने जोर देते हुए कहा कि ग्राम प्रधान, ब्लॉक प्रमुख, जिला पंचायत सदस्य और जिला पंचायत अध्यक्षों के कार्यकाल भले ही अलग-अलग समय पर समाप्त हो रहे हों, लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि का कार्यकाल जुलाई 2026 से आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट के आदेशों का अक्षरशः पालन किया जाएगा और पूरी प्रक्रिया को बाधा रहित संपन्न कराने के लिए निर्वाचन आयोग व प्रशासन को जरूरी निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

    OBC आरक्षण पर सरकार का रुख स्पष्ट

    आरक्षण के मुद्दे पर चल रही चर्चाओं को स्पष्ट करते हुए मंत्री ने बताया कि आगामी कैबिनेट बैठक में पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को आधिकारिक मंजूरी मिल जाएगी।
    * जनगणना का आधार: चुनाव में आरक्षण का निर्धारण 2011 की जनगणना के आधार पर ही होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इसके लिए कोई नई गणना नहीं कराई जाएगी।
    * आरक्षण चक्र: पूर्व में लागू आरक्षण चक्र (Rotation) को ही यथावत जारी रखा जाएगा, जिससे प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।

    आयोग की रिपोर्ट के बाद घोषित होगा कार्यक्रम

    पंचायती राज विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट प्राप्त होते ही सीटों के आरक्षण की अंतिम सूची तैयार कर ली जाएगी। इसके तत्काल बाद राज्य निर्वाचन आयोग के साथ समन्वय स्थापित कर चुनाव की विस्तृत समय-सारणी (Notification) घोषित कर दी जाएगी। वर्तमान में प्रशासनिक स्तर पर मतदाता सूची के पुनरीक्षण और अन्य तकनीकी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

    अभी सार्वजनिक रूप से जारी होना है औपचारिक शासनादेश (Government Order – G.O.)

    पंचायती राज मंत्री के हालिया बयान के आधार पर, जुलाई 2026 तक चुनाव संपन्न कराने की समयसीमा को लेकर अभी औपचारिक शासनादेश (Government Order – G.O.) सार्वजनिक रूप से जारी होने की प्रतीक्षा है। वर्तमान में यह सरकार की आधिकारिक नीतिगत घोषणा है, जिसे जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी के बाद विधिवत लागू किया जाएगा।

    इस प्रक्रिया से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण विधिक और प्रशासनिक जानकारियाँ

    1. पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन (विधिक अनिवार्यता)

    सुप्रीम कोर्ट के ‘ट्रिपल टेस्ट’ फॉर्मूले के तहत ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट अनिवार्य है। मंत्री के बयान के अनुसार, अगली कैबिनेट बैठक में इस आयोग के गठन को मंजूरी दी जाएगी। शासन स्तर पर इसकी फाइल तैयार हो चुकी है।

    2. कार्यकाल की स्थिति (विधिक प्रावधान)

    उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम के अनुसार, पंचायतों का कार्यकाल उनकी पहली बैठक से 5 वर्ष का होता है।
    * उत्तर प्रदेश में पिछली बार ग्राम पंचायतों का गठन मई 2021 में हुआ था, जिसके अनुसार उनका कार्यकाल मई 2026 में समाप्त हो रहा है।
    * मंत्री द्वारा जुलाई 2026 की समयसीमा तय करने का अर्थ है कि कार्यकाल समाप्त होने और नए चुनाव के बीच के समय (Transition period) को न्यूनतम रखने का प्रयास किया जा रहा है।

    3. परिसीमन और मतदाता सूची (प्रशासनिक तैयारी)

    शासनादेश जारी होने से ठीक पहले पंचायती राज विभाग निम्नलिखित प्रक्रियाएं पूरी करता है:
    * मतदाता सूची पुनरीक्षण: 1 जनवरी 2026 को आधार मानकर नई वोटर लिस्ट तैयार की जाएगी।
    * आरक्षण का रोटेशन: 2011 की जनगणना के आधार पर ही चक्रानुक्रम (Rotation) व्यवस्था लागू होगी, जैसा कि मंत्री ने स्पष्ट किया है।

    4. हाईकोर्ट का हस्तक्षेप

    पंचायत चुनाव समय पर कराने को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट पहले भी कई बार सख्त रुख अपना चुका है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह विधिक अड़चनों से बचने के लिए कोर्ट के निर्देशों के अनुसार ही जुलाई तक प्रक्रिया पूरी करना चाहती है।

  • एलन मस्क का प्लेटफॉर्म अचानक हुआ ठप

    करोड़ों यूजर्स परेशान; एप और वेबसाइट दोनों पर फीड लोड होने में दिक्कत

    मैसेज दिख रहा ‘Something went wrong’

    X Down: दुनियाभर में ‘X’ की रफ्तार पर लगा ब्रेक

    नई दिल्ली/लखनऊ, 18 मार्च 2026: सोशल मीडिया दिग्गज एलन मस्क के प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) के करोड़ों यूजर्स के लिए बुधवार की शाम तकनीकी परेशानियों वाली साबित हो रही है। भारतीय समयानुसार रात करीब 8:15 बजे से दुनियाभर में X की सेवाएं अचानक ठप हो गई हैं। इस बड़े आउटेज के कारण यूजर्स न तो नई पोस्ट देख पा रहे हैं और न ही अपनी टाइमलाइन रिफ्रेश कर पा रहे हैं।

    टाइमलाइन खाली, रिफ्रेश करने पर आ रही एरर

    दुनियाभर के यूजर्स जैसे ही अपना X अकाउंट खोल रहे हैं, उन्हें नई पोस्ट्स की जगह “Something went wrong. Try Reloading” का एरर मैसेज दिखाई दे रहा है। समस्या केवल होम फीड तक सीमित नहीं है; यूजर्स ने शिकायत की है कि प्रोफाइल सर्च, नोटिफिकेशन सेक्शन और डायरेक्ट मैसेज (DM) की सेवाएं भी पूरी तरह प्रभावित हुई हैं। डेस्कटॉप वर्जन और मोबाइल एप, दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर यह तकनीकी खराबी बनी हुई है।

    भारत समेत अमेरिका और यूरोप में भी हाहाकार

    आउटेज को ट्रैक करने वाली प्रमुख वेबसाइट DownDetector के अनुसार, रात 8:15 के बाद अचानक रिपोर्ट दर्ज कराने वालों की संख्या में हजारों का इजाफा हुआ है।

    • प्रभावित क्षेत्र: यह समस्या केवल भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जापान और कई यूरोपीय देशों से भी लगातार आउटेज की खबरें आ रही हैं।
    • रिपोर्ट्स का आंकड़ा: खबर लिखे जाने तक, अकेले भारत में 4,500 से अधिक और वैश्विक स्तर पर लाखों यूजर्स ने इस समस्या की पुष्टि की है।

    X की ओर से आधिकारिक बयान का इंतज़ार

    आमतौर पर किसी भी तकनीकी खराबी पर तुरंत प्रतिक्रिया देने वाली X की टीम की ओर से अभी तक इस आउटेज के कारणों पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि यह किसी सर्वर अपडेट या बैकएंड डेटाबेस में आई खराबी का परिणाम हो सकता है।

    यूजर रिएक्शन: अन्य प्लेटफॉर्म्स पर पहुंची ‘X’ की चर्चा

    X के डाउन होते ही ‘X Down’ और ‘Twitter Down’ जैसे हैशटैग अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे इंस्टाग्राम और थ्रेड्स पर ट्रेंड करने लगे हैं। लोग मीम्स और स्क्रीनशॉट साझा कर अपनी परेशानी और हैरानी व्यक्त कर रहे हैं।

    newsdaily24 विशेष नोट: हम इस तकनीकी खराबी पर नजर बनाए हुए हैं। जैसे ही सेवाएं बहाल होंगी या कंपनी का कोई बयान आएगा, हम आपको तुरंत सूचित करेंगे।

  • उत्तर भारत दर्शन परिषद का 40वां राष्ट्रीय अधिवेशन 19 मार्च से, देश-विदेश के विद्वान करेंगे मंथन

    चित्रकूट में जुटेगा दार्शनिकों का कुंभ: भारतीय दर्शन से निकलेगा वैश्विक शांति का मार्ग

    लखनऊ/चित्रकूट, (18 मार्च 2026)। धर्मनगरी चित्रकूट के जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय में कल यानी 19 मार्च से विचारों का एक महाकुंभ शुरू होने जा रहा है। भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद (नई दिल्ली) के सहयोग से उत्तर भारत दर्शन परिषद का 40वां राष्ट्रीय अधिवेशन और एक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। तीन दिवसीय इस कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘वैश्विक शांति: चुनौतियां और समाधान’ रखा गया है।

    प्रमुख आकर्षण: जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य का संबोधन

    आयोजन के दूसरे दिन, 20 मार्च को पद्म विभूषण जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य मुख्य उद्बोधन देंगे। उनका व्याख्यान ‘भारतीय दर्शन में सनातन धर्म की मीमांसा’ विषय पर केंद्रित होगा। इस दौरान सनातन परंपरा, विपश्यना, आधुनिकता और नीतिशास्त्र जैसे गूढ़ विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे।

    तीन दिवसीय कार्यक्रम की रूपरेखा

    * 19 मार्च (उद्घाटन सत्र): अधिवेशन का औपचारिक शुभारंभ होगा। इसमें प्रो. संगम लाल पाण्डेय, देवात्म, योग विज्ञानी महाराज और प्रो. देवकीनंदन द्विवेदी जैसी महान विभूतियों की स्मृति में विशेष व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे। शाम को संस्कृति विभाग द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी।
    * 20 मार्च (विमर्श सत्र): जगद्गुरु रामभद्राचार्य के सानिध्य में वैचारिक सत्र होंगे। समकालीन भारतीय चिंतन और अनुप्रयुक्त नीतिशास्त्र (Applied Ethics) पर चर्चा होगी।
    * 21 मार्च (समापन सत्र): शोधपत्र वाचन और तकनीकी सत्रों के बाद समापन समारोह होगा। उत्कृष्ट शोधपत्र प्रस्तुत करने वाले युवाओं और शिक्षकों को पुरस्कृत किया जाएगा।

    > “दर्शन केवल शास्त्रों तक सीमित नहीं, बल्कि यह समाज को शांति और सह-अस्तित्व का मार्ग दिखाने वाली चेतना है। हमारी दार्शनिक विरासत ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ का संदेश देती है।”

    जयवीर सिंह, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री, उत्तर प्रदेश

    आयोजक संस्थाओं का गौरवशाली इतिहास

    * उत्तर भारत दर्शन परिषद: 1975 में प्रो. संगम लाल पाण्डेय द्वारा स्थापित यह संस्था शोध और प्रकाशन में अग्रणी है। इसकी पत्रिका ‘संदर्शन’ दार्शनिक विचारों का प्रमुख संवाहक है।
    * जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय: 2001 में स्थापित यह देश का पहला विश्वविद्यालय है जो विशेष रूप से दिव्यांगजनों को उच्च शिक्षा प्रदान करता है।
    * अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान: 1985 से संचालित यह संस्थान बौद्ध धर्म, कला और संस्कृति के संरक्षण का केंद्र है, जहाँ 12 हजार से अधिक पुस्तकों का समृद्ध पुस्तकालय उपलब्ध है।
    यह समागम न केवल चित्रकूट बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश को ज्ञान, शोध और सांस्कृतिक विमर्श के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

  • लोदीपुर धाम के कायाकल्प को मिली रफ्तार, 1.67 करोड़ की परियोजना से बदलेगा मंदिर का स्वरूप

    चैत्र अमावस्या मेले में उमड़ा आस्था का सैलाब, देशभर से लाखों श्रद्धालु पहुंचे लोदीपुर धाम

    आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगा 200 साल पुराना श्री जम्भेश्वर मंदिर

    लोदीपुर धाम के विकास के जरिए विरासत संरक्षण और गुरु जम्भेश्वर जी के मूल्यों को मिलेगा बढ़ावा- जयवीर सिंह

    प्रमुख पर्यटन सर्किट से आगे बढ़कर यूपी पर्यटन विभाग का अल्पज्ञात धार्मिक स्थलों पर फोकस

    लखनऊ/मुरादाबाद, 18 मार्च 2026: उत्तर प्रदेश में आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और अल्पज्ञात धार्मिक स्थलों को नई पहचान दिलाने के तहत लोदीपुर धाम के विकास को नई गति मिली है। मुरादाबाद जिले में स्थित ऐतिहासिक श्री जम्भेश्वर मंदिर (लोदीपुर धाम) का कायाकल्प होगा, मंदिर में पर्यटन विकास एवं सौंदर्यीकरण पर 1.67 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इस योजना के तहत मंदिर परिसर में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर व्यवस्था मिल सकेगी और यह स्थल एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में उभरेगा।

    उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि, “लोदीपुर धाम स्थित श्री जम्भेश्वर मंदिर का विकास हमारी उस प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसके तहत हम उत्तर प्रदेश के आध्यात्मिक और अल्पज्ञात स्थलों को नई पहचान दे रहे हैं। इस परियोजना के अंतर्गत सत्संग भवन, यज्ञशाला, विश्राम गृह, रसोई, आधुनिक शौचालय, भव्य प्रवेश द्वार और ढका हुआ परिक्रमा मार्ग जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे न केवल श्रद्धालुओं को बेहतर और सुविधाजनक अनुभव मिलेगा, बल्कि बिश्नोई समाज की समृद्ध विरासत का संरक्षण भी सुनिश्चित होगा। आने वाले समय में लोदीपुर धाम एक सशक्त और प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में उभरेगा।”

    चैत्र अमावस्या मेले में उमड़ी आस्था, लाखों श्रद्धालु पहुंचे लोदीपुर धाम

    इसी बीच, लोदीपुर धाम में हर साल चैत्र अमावस्या के अवसर पर लगने वाला दो दिवसीय धार्मिक मेला इस बार भी श्रद्धा और उत्साह के साथ बुधवार को संपन्न हुआ। राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, गुजरात और मध्य प्रदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचे और पूजा-अर्चना कर धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। श्री गुरु जम्भेश्वर धाम सेवा समिति के सचिव अजीत सिंह बिश्नोई के अनुसार, इस वर्ष मेले में एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आस्था और सामाजिक एकता के इस संगम में श्रद्धालुओं ने पर्यावरण संरक्षण व सदाचार का संकल्प लिया। बढ़ती भीड़ को देखते हुए लोदीपुर धाम का विकास धार्मिक पर्यटन के साथ स्थानीय रोजगार व व्यापार को भी बढ़ावा देगा।

    200 साल पुराना श्री जम्भेश्वर मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र

    लोदीपुर धाम में स्थित 200 साल से अधिक पुराना श्री जम्भेश्वर मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। गुरु जम्भेश्वर जी, जिन्हें जांभोजी के नाम से भी जाना जाता है, बिश्नोई संप्रदाय के संस्थापक थे। यह समुदाय प्रकृति संरक्षण और संतुलित जीवन शैली के लिए प्रसिद्ध है। उनका जन्म करीब 1451 में राजस्थान के नागौर जिले के पिपासर गांव में पंवार राजवंश में हुआ था। श्रद्धालु उन्हें भगवान विष्णु का अवतार मानते हैं।

    श्री गुरु जम्भेश्वर धाम सेवा समिति के सचिव अजीत सिंह बिश्नोई के अनुसार, गुरु जम्भेश्वर जी के आगमन पर भक्त सुरजी देवी के आग्रह पर लगाया गया पवित्र खेजड़ी का पेड़ आज भी मंदिर परिसर में आस्था का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि 1485 के भीषण अकाल के दौरान गुरु जी ने लोगों की मदद कर नैतिक जीवन और सामाजिक सुधार का संदेश दिया तथा बिश्नोई संप्रदाय की स्थापना कर 29 नियम बताए, जो आज भी समाज के मूल्यों का आधार हैं।

    मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि “बिश्नोई समाज पर्यावरण संरक्षण के लिए देशभर में जाना जाता है। उनकी यह परंपरा प्रेरणादायक है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा पर्यटन विकास और बेहतर कनेक्टिविटी पर किए गए कामों का असर अब साफ दिखने लगा है। मुरादाबाद में पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में यहां 72.04 लाख पर्यटक पहुंचे, जो अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने बताया, कि लोदीपुर धाम का विकास न सिर्फ धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगा, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को भी नई पहचान दिलाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और क्षेत्र का समग्र विकास होगा।”

  • UP पर्यटन विभाग का अल्पज्ञात धार्मिक स्थलों के विकास पर जोर- जयवीर सिंह

    89.82 लाख रुपए की पर्यटन विकास योजना से बदलेगी तस्वीर, 60 लाख रुपए की पहली किस्त जारी

    शिव मंदिर के सौंदर्यीकरण और पर्यटक सुविधाओं पर बल, आधुनिक स्वरूप में नजर आएगा धार्मिक स्थल

    वर्ष 2025 में लखनऊ में 1.71 करोड़ से अधिक पर्यटकों का आगमन, जिनमें 38 हजार से अधिक विदेशी

    आधुनिक सुविधाओं से निखरने जा रहा लखनऊ का प्राचीन जलसाई नाथ मंदिर

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग अल्पज्ञात और कम चर्चित धार्मिक स्थलों को विशिष्ट पहचान देने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। इसी कड़ी में राजधानी लखनऊ के सरोजनी नगर स्थित प्राचीन श्री महादेव जलसाई नाथ जी मंदिर का कायाकल्प होने जा रहा है। मंदिर के सौंदर्यीकरण और समग्र विकास के लिए करीब 89.82 लाख रुपए की महत्वाकांक्षी परियोजना पर काम शुरू हो चुका है, जिसके तहत 60 लाख रुपए की पहली किस्त जारी कर दी गई है। इस पहल से न केवल मंदिर का स्वरूप भव्य और आधुनिक होगा, बल्कि स्थानीय पर्यटन को भी गति मिलेगी। यह स्थल श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख आकर्षण बनकर उभरेगा।

    उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘जलसाई नाथ मंदिर परिसर के समग्र विकास के तहत इसे आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है। परियोजना अंतर्गत यात्री हॉल का निर्माण, शीट रूफिंग युक्त यात्री शेड, बैठने के प्लेटफॉर्म, स्टील रेलिंग, ग्रीन पावर से युक्त इंटरलॉकिंग टाइल्स और आरसीसी बेंच स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही स्ट्रीट लाइट, स्वच्छ पेयजल सुविधा और बागवानी कार्य के जरिए परिसर का सौंदर्यीकरण भी किया जाएगा। मंत्री ने बताया कि इस पहल से जहां श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, वहीं लखनऊ के धार्मिक पर्यटन को भी नई गति मिलेगी।’

    मंदिर को लेकर मान्यताएं

    जनश्रुति के मुताबिक, भगवान भोलेनाथ का प्राचीन जलसाई नाथ मंदिर स्वयंभू माना जाता है। अनुमानतः यह मंदिर करीब 200 साल से भी अधिक पुराना है। स्थानीय श्रद्धालुओं ने मिलकर इसका निर्माण कराया था, जो समय के साथ इलाके की आस्था का बड़ा केंद्र बन गया। उत्तर प्रदेश सरकार इसे धार्मिक पर्यटन के नक्शे पर मजबूत पहचान दिलाने में जुटी है, जिसके तहत मंदिर को एक आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। खास बात यह है कि सावन और महाशिवरात्रि के मौके पर यहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। 

    मंदिरों का हो रहा पर्यटन विकास

    उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग अब राज्य के प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों के साथ-साथ अल्पज्ञात और प्राचीन मंदिरों के पर्यटन विकास व सौंदर्यीकरण पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। इसी क्रम में राजधानी लखनऊ के सरोजनी नगर स्थित जलसाई नाथ मंदिर, चौक क्षेत्र के कोनेश्वर महादेव मंदिर और बारा बिरवा के संत रविदास मंदिर समेत कई अन्य मंदिरों का विकास किया जा रहा है। पर्यटन विभाग इन स्थलों पर सौंदर्यीकरण, बेहतर सुविधाएं और आकर्षक पर्यटन माहौल तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है। 

    ‘लखनऊ में मंदिरों की वृहद श्रृंखला’

    पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘समृद्ध विरासतों, पारंपरिक व्यंजनों और प्राचीन मंदिरों की श्रृंखला से सजा लखनऊ देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन चुका है। बेहतर कनेक्टिविटी, आधुनिक सुविधाओं और पर्यटन वातावरण के चलते वर्ष 2025 में शहर में 1.71 करोड़ से अधिक पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया। इनमें 38 हजार से ज्यादा विदेशी पर्यटक रहे। लखनऊ की बढ़ती लोकप्रियता और धार्मिक पर्यटन विकास की रफ्तार ने शहर को पर्यटन मानचित्र पर विशिष्ट स्थान प्रदान किया है। उत्तर प्रदेश धार्मिक पर्यटन में देश में अव्वल राज्य है, जिसे बरकरार रखने का प्रयास है।’

  • आर्थिक मदद की गुहार
    ऑपरेशन की जरूरत और घर में कमाने वाला कोई नहीं

    जिला पंचायत सदस्य ने जिलाधिकारी से मांगी सहायता

    सीढ़ियों से गिरकर गंभीर घायल हुए हीरा सिंह के परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

    अल्मोड़ा (उत्तराखंड)। जनपद के धौरगढ़ेरा (ग्राम सभा- हटौला) निवासी हीरा सिंह के परिवार पर इन दिनों भारी संकट आन पड़ा है। कुछ माह पूर्व सीढ़ियों से गिरकर कमर में आई गंभीर चोट ने न केवल उन्हें बिस्तर पर ला दिया है, बल्कि पूरे परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट भी खड़ा कर दिया है।

    इलाज में लापरवाही और बढ़ती मुश्किलें

    परिजनों के अनुसार, चोट लगने के बाद हीरा सिंह को इलाज के लिए हल्द्वानी ले जाया गया था। वहाँ प्राथमिक उपचार और यूरिन पाइप लगाने के बाद उन्हें घर भेज दिया गया, लेकिन स्वास्थ्य में सुधार होने के बजाय समस्या और जटिल हो गई है। बताया जा रहा है कि लगाई गई पाइप शरीर के अंदर चिपक गई है, जिसे अब वरिष्ठ डॉक्टरों ने ऑपरेशन के जरिए निकालने की सलाह दी है।

    परिवार की दयनीय स्थिति

    हीरा सिंह अपने घर के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे। उनकी पत्नी का पूर्व में ही देहांत हो चुका है। वर्तमान में घर में उनकी वृद्ध माँ और छोटे बच्चे हैं, जिनकी देखभाल और भरण-पोषण की जिम्मेदारी अब अधर में लटकी है। ग्रामीणों और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के सहयोग से अब तक जैसे-तैसे इलाज का खर्च वहन किया गया, लेकिन ऑपरेशन और आगे के खर्च के लिए परिवार पूरी तरह असमर्थ है।

    जिलाधिकारी से आर्थिक मदद की मांग

    मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पंचायत सदस्य (क्षेत्र-44, सल्ला भाटकोट) शैलजा चम्याल ने जिलाधिकारी अल्मोड़ा को पत्र लिखकर पीड़ित परिवार के लिए विशेष आर्थिक सहायता की मांग की है। पत्र में उन्होंने परिवार की दयनीय स्थिति का हवाला देते हुए मानवीय आधार पर जल्द से जल्द मदद पहुँचाने का निवेदन किया है, ताकि हीरा सिंह का समय पर इलाज हो सके और उनके बच्चों व वृद्ध माँ को सहारा मिल सके।

  • जानें आवेदन से लेकर हथियार खरीदने तक की पूरी प्रक्रिया

    अब यूपी में शस्त्र लाइसेंस पाना हुआ आसान और पारदर्शी

    मुख्य बातें:
    * डिजिटल हुआ सिस्टम: अब NDAL-ALIS पोर्टल के जरिए घर बैठे करें ऑनलाइन आवेदन।
    * बदले नियम: एक व्यक्ति अब रख सकेगा अधिकतम दो हथियार, लाइसेंस की वैधता भी बढ़ी।
    * अनिवार्य प्रशिक्षण: बिना ट्रेनिंग और मेडिकल फिटनेस के नहीं मिलेगा लाइसेंस।

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सुरक्षा के नजरिए से शस्त्र लाइसेंस रखने के इच्छुक नागरिकों के लिए राहत की खबर है। सरकार ने शस्त्र (संशोधन) नियमावली के तहत पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बना दिया है। अब बिचौलियों के चक्कर काटने के बजाय आवेदक सीधे भारत सरकार के आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।

    ऑनलाइन आवेदन: स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया

    प्रशासन के अनुसार, इच्छुक आवेदकों को सबसे पहले NDAL-ALIS पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा। यहाँ ‘Form A1’ भरकर अपनी व्यक्तिगत जानकारी, कार्य की प्रकृति और सुरक्षा की आवश्यकता का विवरण देना होता है। फॉर्म जमा होने के बाद एक यूनिक रेफरेंस नंबर प्राप्त होता है, जिससे फाइल को ट्रैक किया जा सकता है।

    इन 5 दस्तावेजों के बिना आवेदन अधूरा

    नए नियमों के तहत अब केवल आवेदन करना पर्याप्त नहीं है। इसके साथ निम्नलिखित प्रमाणपत्र अनिवार्य कर दिए गए हैं:
    * मेडिकल सर्टिफिकेट (Form S-3): सरकारी जिला अस्पताल के डॉक्टर द्वारा प्रमाणित शारीरिक और मानसिक फिटनेस।
    * ट्रेनिंग सर्टिफिकेट (Form S-1): पुलिस लाइन या अधिकृत शूटिंग रेंज से हथियार चलाने का बुनियादी प्रशिक्षण।
    * यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर (UIN): पुराने लाइसेंस धारकों के लिए भी अपना UIN जेनरेट करवाना अब अनिवार्य है।
    * पहचान व निवास प्रमाण: आधार कार्ड, पैन कार्ड और वर्तमान पते का साक्ष्य।
    * आय का विवरण: आयकर रिटर्न (ITR) या आय का अन्य वैध प्रमाण।

    लाइसेंस की अवधि और हथियारों की सीमा

    केंद्र सरकार के नए संशोधनों के बाद, अब एक व्यक्ति अपने पास अधिकतम दो हथियार ही रख सकता है। पहले यह सीमा तीन थी। हालांकि, लाइसेंस धारकों के लिए अच्छी खबर यह है कि अब लाइसेंस के नवीनीकरण (Renewal) की अवधि को 3 साल से बढ़ा कर 5 साल कर दिया गया है।

    कितना आएगा खर्च और कितना लगेगा समय?

    विशेषज्ञों के अनुसार, सरकारी आवेदन शुल्क (पिस्टल/रिवॉल्वर के लिए ₹1000) के साथ मेडिकल, ट्रेनिंग और शपथ पत्र मिलाकर कुल खर्च लगभग ₹4,000 से ₹6,000 के बीच आता है। पूरी प्रक्रिया, जिसमें पुलिस और एलआईयू (LIU) वेरिफिकेशन शामिल है, आमतौर पर 3 से 6 महीने में पूरी हो जाती है।

    संपादकीय सलाह: जिम्मेदारी के साथ सुरक्षा

    शस्त्र लाइसेंस केवल आत्मरक्षा के उद्देश्य से दिया जाता है। हर्ष फायरिंग (Joy Firing) या डराने-धमकाने के उद्देश्य से इसका उपयोग करने पर लाइसेंस निरस्त होने के साथ-साथ कठोर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

    ~ संपादक मंडल, newsdaily24.news.blog

  • लखनऊ के आशियाना इलाके में दिल दहलाने वाली वारदात

    प्रतापगढ़ से ससुराल आए 30 वर्षीय विष्णु की छीन ली जिंदगी

    चारपाई के पाये से पीट-पीटकर की हत्या

    🚨 प्रेम विवाह से नाराज ससुर और चार सालियों ने मिलकर दामाद को उतारा मौत के घाट

    📍📲 ताजा खबरों के लिए फॉलो करें: newsdaily24.news.blog

    लखनऊ | 18 मार्च (newsdaily24): राजधानी लखनऊ के आशियाना थाना क्षेत्र में मंगलवार रात रिश्तों को शर्मसार करने वाली एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। चार साल पहले किए गए प्रेम विवाह की खुन्नस में एक अधिवक्ता ससुर ने अपनी चार बेटियों के साथ मिलकर अपने ही दामाद विष्णु यादव (30) की निर्मम हत्या कर दी। हमला इतना बर्बर था कि विष्णु ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। पुलिस ने मुख्य आरोपी ससुर और उसकी चार बेटियों को हिरासत में ले लिया है।

    साजिश के तहत घर बुलाकर किया हमला

    प्रतापगढ़ के सांगीपुर निवासी विष्णु यादव ने चार साल पहले आशियाना सेक्टर-आई निवासी अधिवक्ता डॉ. तीरथराज सिंह की बेटी साक्षी से प्रेम विवाह किया था। जानकारी के मुताबिक, तीरथराज इस विवाह के बाद से ही विष्णु से गहरी रंजिश रखता था। मंगलवार सुबह जब विष्णु अपनी पत्नी साक्षी और दो साल की बेटी के साथ ससुराल पहुँचा, तो किसी को अंदाजा नहीं था कि वहां मौत उसका इंतजार कर रही है।
    रात करीब 10 बजे घर के आंगन में ससुर और दामाद के बीच विवाद शुरू हुआ। देखते ही देखते तीरथराज और उसकी चार बेटियों (राधा, रत्ना, ज्योति और एक नाबालिग) ने विष्णु पर हमला बोल दिया। आरोपियों ने चारपाई के लकड़ी के पाये और डंडों से विष्णु के सिर पर ताबड़तोड़ वार किए।

    पति को बचाने के लिए गुहार लगाती रही पत्नी

    जब साक्षी अपने पति को बचाने के लिए दौड़ी, तो आरोपियों ने उसे भी नहीं बख्शा और लाठियों से पीटकर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। साक्षी की सूचना पर डीसीपी मध्य विक्रांत वीर, एसीपी कैंट अभय मल्ल और इंस्पेक्टर आशियाना भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल लकड़ी के पाये को बरामद कर लिया है।

    पेशेवर परिवार पर लगा हत्या का दाग

    हैरानी की बात यह है कि मुख्य आरोपी तीरथराज पेशे से अधिवक्ता है और उसकी दो बेटियाँ, रत्ना और राधा भी वकालत के पेशे से जुड़ी हैं। वहीं, मृतक विष्णु एक ऑनलाइन कंपनी में डिलीवरी बॉय का काम करता था।

    🚓 डीसीपी मध्य विक्रांत वीर का बयान:
    “प्रेम विवाह से उपजी रंजिश और आपसी कलह के कारण इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया है। ससुर और सालियों समेत सभी आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। फॉरेंसिक टीम ने साक्ष्य जुटाए हैं और सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”

    रिश्तों पर दाग: लखनऊ में पहले भी हुए ऐसे मामले

    यह पहली बार नहीं है जब प्रेम विवाह के कारण दामाद को निशाना बनाया गया हो। पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े चिंताजनक हैं:

    1. अप्रैल 2022 (चिनहट): प्रेम विवाह से नाराज ससुराल वालों ने दामाद को मरणासन्न किया।

    2. सितंबर 2023 (मड़ियांव): अंतरजातीय विवाह के चलते युवक पर जानलेवा हमला।

    3. फरवरी 2024 (गोमतीनगर): वैलेंटाइन डे के दिन ही प्रेम विवाह के विरोध में परिवार ने अपनी ही बेटी और दामाद को जान से मारने की धमकी दी थी, जिसके बाद पीड़ित जोड़े को पुलिस में सुरक्षा के लिए शिकायत दर्ज करानी पड़ी थी।

    4. जुलाई 2024 (ठाकुरगंज): प्रेम विवाह के बाद युवक के परिजनों पर हमले का आरोप।

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    https://nz.kesariya.news/Lnk/SRWR202603180850493022346193

  • ब्रज रंगोत्सव 2026 ने तोड़े रिकॉर्ड; होली के प्रमुख दिनों में पहुँचे 44 लाख से अधिक पर्यटक

    ‘ग्रेवयार्ड इकॉनमी’ से ‘टेंपल इकॉनमी’ की ओर बढ़ता उत्तर प्रदेश: जयवीर सिंह

    लखनऊ/आगरा। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने प्रदेश की बदलती आर्थिक और सांस्कृतिक तस्वीर पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब पिछली सरकारों की ‘ग्रेवयार्ड इकॉनमी’ (कब्रिस्तान आधारित राजनीति) के दौर से निकलकर ‘टेंपल इकॉनमी’ (मंदिर आधारित अर्थव्यवस्था) का गवाह बन रहा है। मंत्री ने जोर देकर कहा कि जहाँ कभी सैफई में नृत्य महोत्सवों का शोर होता था, आज ब्रज में ‘राधे-राधे’ की वैश्विक गूंज सुनाई दे रही है।

    आस्था से आर्थिक समृद्धि का नया मॉडल: ब्रज रंगोत्सव

    पर्यटन मंत्री ने बताया कि वर्ष 2026 के ब्रज रंगोत्सव ने आस्था और आर्थिक पर्यटन के बीच एक सफल सेतु का कार्य किया है। होली के मुख्य आयोजनों के दौरान रिकॉर्ड 44 लाख से अधिक पर्यटकों ने ब्रज भूमि पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। लठमार होली, फूलों की होली और हुरंगा जैसे पारंपरिक उत्सवों ने न केवल देश, बल्कि अमेरिका, ब्रिटेन, रूस और ब्राजील जैसे देशों के श्रद्धालुओं को भी आकर्षित किया।

    पर्यटन आय में 300% का उछाल, मथुरा-काशी-अयोध्या बने आर्थिक हब

    प्रदेश में ‘टेंपल सर्किट’ के विकास के कारण पर्यटन से होने वाली आय में 300% की अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। मंत्री ने डेटा साझा करते हुए बताया कि:
    * मथुरा में वार्षिक उछाल: वर्ष 2025 में अकेले मथुरा में 10.24 करोड़ श्रद्धालु पहुँचे।
    * विकास की प्रतिबद्धता: ब्रज तीर्थ विकास परिषद के माध्यम से ब्रज के बुनियादी ढांचे के लिए 300 करोड़ रुपये के नए कार्यों को मंजूरी दी गई है।
    * आधुनिक कनेक्टिविटी: मथुरा-वृंदावन के बीच 11.80 किमी फोरलेन और पॉड रैपिड ट्रांजिट सिस्टम पर काम शुरू हो चुका है।

    आंकड़ों में ब्रज की विकास गाथा

    राज्य सरकार ने ब्रज तीर्थ विकास परिषद के बजट में निरंतर वृद्धि की है, जो इस क्षेत्र के प्रति सरकार की गंभीरता को दर्शाता है:

    धार्मिक केंद्रों पर ‘वोकल फॉर लोकल’ का जादू

    मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि पर्यटन सिर्फ दर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्थानीय रोजगार का इंजन बन गया है।
    * जैत गांव: यहाँ का ‘तुलसी माला’ निर्माण उद्योग अब एक बड़ा रोजगार केंद्र बन चुका है।
    * हस्तशिल्प और बाजार: परासौली का हस्तशिल्प और गोवर्धन का फूल बाजार हजारों परिवारों की आजीविका का आधार बन गया है।

    ब्रज में पर्यटकों का बढ़ता ग्राफ (फरवरी-मार्च डेटा)

    * 2016: 19.90 लाख
    * 2023: 33.26 लाख
    * 2025: 54 लाख से अधिक
    * 2026 (होली सप्ताह): 44 लाख+

    निष्कर्ष: उत्तर प्रदेश सरकार अब मथुरा परिक्रमा मार्ग के नवीनीकरण, प्राचीन कुंडों के जीर्णोद्धार और वृंदावन में आधुनिक कन्वेंशन हॉल के निर्माण के माध्यम से ब्रज को एक विश्वस्तरीय धार्मिक पर्यटन केंद्र बनाने की ओर अग्रसर है।

  • ✅ कानूनी रास्ता अपनाएं, बिचौलियों से बचें

    आपकी मदद के लिए उपलब्ध है हर जिले की ‘जिला बाल संरक्षण इकाई’ (DCPU)

    कानूनी तरीके से बच्चा गोद लेना – एक सुरक्षित और बेहतर भविष्य का आधार

    क्या आप एक बच्चे को गोद लेकर उसे नया जीवन देने का विचार कर रहे हैं? 😇
    बच्चा गोद लेना एक नेक काम है, लेकिन इसे कानूनी तरीके से करना बेहद जरूरी है ताकि बच्चे का भविष्य सुरक्षित रहे। Newsdaily24 लाया है गोद लेने की पूरी प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों की लिस्ट।
    ✅ सरकारी पोर्टल CARINGS पर पंजीकरण ही पहला कदम है।
    ✅ बिचौलियों से बचें, कानूनी रास्ता अपनाएं।
    ✅ हर जिले की ‘जिला बाल संरक्षण इकाई’ (DCPU) आपकी मदद के लिए उपलब्ध है। पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें:  newsdaily24.news.blog
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    लखनऊ। अक्सर लोग बच्चा गोद लेने की इच्छा तो रखते हैं, लेकिन सही प्रक्रिया और कानूनी जानकारी के अभाव में वे बिचौलियों या अनैतिक रास्तों के जाल में फँस जाते हैं। बच्चा गोद लेना न केवल एक भावनात्मक निर्णय है, बल्कि एक कानूनी प्रक्रिया भी है। इसे ‘अवैध’ के बजाय ‘कानूनी’ तरीके से करना ही बच्चे और आपके परिवार के भविष्य के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प है।

    क्यों जरूरी है कानूनी प्रक्रिया (CARA/CARINGS)?

    बिना सरकारी पंजीकरण के बच्चा गोद लेना भारत में बाल तस्करी (Child Trafficking) की श्रेणी में आ सकता है। केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) के नियमों का पालन करने से आपको निम्नलिखित लाभ मिलते हैं:
    * बच्चे की मेडिकल हिस्ट्री: आपको गोद लिए जाने वाले बच्चे की स्वास्थ्य संबंधी पूरी जानकारी मिलती है।
    * कानूनी सुरक्षा: जिला मजिस्ट्रेट (DM) द्वारा जारी ‘दत्तक ग्रहण आदेश’ (Adoption Order) बच्चे को आपके परिवार का पूर्ण कानूनी वारिस बनाता है।
    * भविष्य की सुरक्षा: इससे भविष्य में उत्तराधिकार या अन्य कानूनी मामलों में कोई विवाद नहीं होता।

    गोद लेने की सरल प्रक्रिया:

    * पंजीकरण: सबसे पहले सरकारी पोर्टल CARINGS पर अपना ऑनलाइन पंजीकरण करें।
    * होम स्टडी: एक सामाजिक कार्यकर्ता आपके घर आकर एक ‘होम स्टडी रिपोर्ट’ (HSR) तैयार करेगा।
    * बच्चे का मिलान: आपकी पात्रता और HSR के आधार पर पोर्टल के माध्यम से बच्चे की प्रोफाइल साझा की जाएगी।
    * कानूनी आदेश: एजेंसी की मदद से जिला न्यायालय या जिला मजिस्ट्रेट की अदालत में याचिका दायर की जाएगी और आपको कानूनी आदेश प्राप्त होगा।

    बरतें सावधानी :

    * किसी भी अनजान व्यक्ति या अनधिकृत संस्था को गोद लेने के लिए कोई भी ‘अवैध’ भुगतान न करें।
    * केवल सरकारी मान्यता प्राप्त ‘विशिष्ट दत्तक ग्रहण एजेंसी’ (SAA) के माध्यम से ही आगे बढ़ें।

    बच्चा गोद लेने के लिए आवश्यक दस्तावेजों की चेकलिस्ट

    गोद लेने की प्रक्रिया शुरू करने से पहले, सुनिश्चित करें कि आपके पास निम्नलिखित दस्तावेजों की प्रतियां तैयार हैं:
    1. पहचान और निवास प्रमाण (Identity & Residence Proof):
    * आधार कार्ड: पति और पत्नी दोनों का (अनिवार्य)।
    * पैन कार्ड: आयकर संबंधी जानकारी के लिए।
    * निवास प्रमाण: राशन कार्ड, वोटर आईडी, बिजली बिल या कोई भी सरकारी पता प्रमाण।
    2. पारिवारिक और वैवाहिक प्रमाण (Family & Marital Proof):
    * विवाह प्रमाण पत्र (Marriage Certificate): सरकारी पंजीकरण प्रमाण पत्र।
    * पारिवारिक फोटो: एक हालिया पारिवारिक तस्वीर (Family Photograph)।
    3. स्वास्थ्य और चिकित्सा प्रमाण (Medical Proof):
    * मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट: किसी सरकारी अस्पताल के सीएमओ (CMO) या अधिकृत डॉक्टर द्वारा जारी प्रमाण पत्र, जो यह प्रमाणित करे कि आप शारीरिक और मानसिक रूप से बच्चे की देखभाल करने में सक्षम हैं और किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित नहीं हैं।
    4. आर्थिक प्रमाण (Financial Proof):
    * आय प्रमाण पत्र (Income Proof): पिछले 3 वर्षों का आईटीआर (ITR) या वेतन पर्ची (Salary Slip), जो आपकी आर्थिक स्थिरता को दर्शाता हो।
    5. अतिरिक्त दस्तावेज:
    * दो संदर्भ (Two References): दो ऐसे व्यक्तियों के नाम और फोन नंबर जो आपके परिवार को अच्छी तरह जानते हों (वे रिश्तेदार नहीं होने चाहिए)।

    आम जनता के लिए अपील

    यदि आप या आपका कोई परिचित बच्चा गोद लेना चाहता है, तो कृपया अपने जिले के जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU) या जिला प्रोबेशन कार्यालय से संपर्क करें। कहीं भी हों, सरकारी प्रक्रिया ही एकमात्र रास्ता है।

    ‘एक बच्चा, एक उम्मीद, और हमारी जिम्मेदारी’

    newsdaily24 पर पिछले कुछ समय से हमें ऐसे कई सवाल मिले हैं, जहाँ पाठक बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया और इसकी कानूनी पेचीदगियों के बारे में जानना चाहते थे। समाज में अक्सर भावनात्मक और अधूरी जानकारी के चलते लोग गलत रास्तों पर कदम रख देते हैं, जो न केवल उनके भविष्य के लिए जोखिम भरा होता है, बल्कि उस मासूम बच्चे के लिए भी असुरक्षित है जिसे वे अपना प्यार देना चाहते हैं।
    एक समाचार पोर्टल के रूप में, हमारा मानना है कि ‘सही जानकारी ही सबसे बड़ा सशक्तिकरण है’। कानूनी तरीके से गोद लेना केवल एक कागजी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि उस बच्चे को एक गरिमापूर्ण पहचान और सुरक्षा कवच देने का एक माध्यम है।
    हमारा उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना भी है। यदि इस लेख के माध्यम से किसी एक बच्चे को भी उसका सही घर और सुरक्षित भविष्य मिलता है, तो Newsdaily24 का यह छोटा सा प्रयास सार्थक हो जाएगा।
    हम आप सभी से आग्रह करते हैं—भावुकता में गलत कदम न उठाएं। सरकारी नियमों का पालन करें, अपनी गरिमा बनाए रखें और एक पारदर्शी समाज के निर्माण में अपना योगदान दें।

    — संपादक, newsdaily24

  • EO पर पद के दुरुपयोग और जान से मारने की धमकी का आरोप

    दोनों पक्षों ने पुलिस से लगाई न्याय की गुहार

    मलिहाबाद: नगर पंचायत विस्तार सर्वे में धांधली?, EO पर मारपीट और अवैध वसूली की शिकायत

    लखनऊ। राजधानी के मलिहाबाद क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सदरपुर में नगर पंचायत विस्तार के सर्वेक्षण को लेकर विवाद अब पुलिस की चौखट तक पहुँच गया है। ग्राम निवासी हाशिम खाँ ने नगर पंचायत मलिहाबाद के अधिशासी अधिकारी (EO) राजकुमार चौधरी पर पद के दुरुपयोग, मारपीट और अवैध वसूली जैसे कई संगीन आरोप लगाते हुए लखनऊ पुलिस और जनसुनवाई पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई है।

    सर्वेक्षण में विसंगति: करीबियों को फायदा पहुँचाने का आरोप

    शिकायतकर्ता हाशिम खाँ का मुख्य आरोप है कि अधिशासी अधिकारी ने सर्वेक्षण में जानबूझकर धांधली की है। आरोप के अनुसार, टाउन एरिया से बिल्कुल सटे हुए क्षेत्र ‘बख्तियार नगर’ और ‘गढ़ी संजर खाँ’ को सर्वे से बाहर छोड़ दिया गया, जबकि दूर स्थित सदरपुर गाँव को नगर पंचायत मलिहाबाद में शामिल कर दिया गया। इस विसंगति को लेकर पीड़ित ने फरवरी माह में मुख्यमंत्री पोर्टल (IGRS) पर शिकायत दर्ज कराई थी, जिसे विवाद की मुख्य जड़ माना जा रहा है।

    विरोध करने पर मारपीट और सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग

    शिकायत पत्र के अनुसार, 13 मार्च 2026 को मुख्यमंत्री पोर्टल पर की गई शिकायत से क्षुब्ध होकर अधिशासी अधिकारी अपनी टीम के साथ गाँव पहुँचे। आरोप है कि उन्होंने रंजिशवश पीड़ित के घर के पास लगा हैंडपंप कटवाना शुरू कर दिया। जब पीड़ित के पुत्र ने इसका विरोध किया, तो अधिकारी और उनके सहयोगियों ने कथित तौर पर उसके साथ गाली-गलौज और धक्का-मुक्की की। पीड़ित का दावा है कि अधिकारी ने अपनी ऊँची पहुँच का हवाला देते हुए उन्हें झूठे मुकदमों में फँसाने और जान से मारने की धमकी भी दी है।

    महिलाओं से धनउगाही और उत्पीड़न का संगीन दावा

    हाशिम खाँ ने अपनी शिकायत में एक और चौंकाने वाला दावा किया है। उनके अनुसार, अधिकारी मोहल्ले के घरों में घुसकर महिलाओं को सरकारी ‘कॉलोनी’ दिलाने का झांसा देकर जबरन धनउगाही कर रहे हैं। पीड़ित परिवार ने अपनी जान-माल की सुरक्षा की गुहार लगाते हुए संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

    EO का पलटवार: आरोपों को बताया निराधार

    दूसरी ओर, इन गंभीर आरोपों पर सफाई देते हुए अधिशासी अधिकारी राजकुमार चौधरी ने इन्हें पूरी तरह निराधार और मनगढ़ंत बताया है। उनका कहना है कि सरकारी कार्य में बाधा डाली गई और जैद नामक युवक ने उनके साथ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए गाली-गलौज की। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने इस संबंध में पहले ही मुकदमा दर्ज करा दिया है और जाँच के बाद सच्चाई सामने आ जाएगी।

    (विशेष नोट) : यह समाचार रिपोर्ट प्राप्त तथ्यों और दोनों पक्षों के बयानों पर आधारित है। पुलिस जाँच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।)

  • शुभेंद्र आर्य को मंत्री और अशोक त्यागी को मिली कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी

    सर्वसम्मति से चुनी गई नई कार्यकारिणी

    आर्य प्रतिनिधि सभा बिजनौर के जिला प्रधान बने कामेंद्र सिंह एडवोकेट

    ~ भूपेंद्र निरंकारी

    बिजनौर। जनपद की प्रतिष्ठित संस्था आर्य प्रतिनिधि सभा बिजनौर का वार्षिक चुनाव रविवार, 15 मार्च 2026 को दयानंद जूनियर हाई स्कूल के प्रांगण में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। चुनाव प्रक्रिया पूर्व निर्धारित एजेंडे के अनुसार पूरी की गई, जिसमें जिले भर की आर्य समाज इकाइयों के प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

    सर्वसम्मति से हुआ पदाधिकारियों का चयन

    निवर्तमान प्रधान रविंद्र पाल सिंह आर्य की अध्यक्षता एवं मास्टर ब्रह्मपाल सिंह के कुशल संचालन में आयोजित इस बैठक में सर्वसम्मति का माहौल रहा। चुनाव अधिकारी अमन सिंह आर्य एवं चुनाव पर्यवेक्षक रमेश सिंह आर्य की देखरेख में कार्यकारिणी का गठन किया गया। सदन ने एकमत से कामेंद्र सिंह एडवोकेट को जिला प्रधान, शुभेंद्र आर्य को जिला मंत्री और पूर्व प्रधानाचार्य अशोक त्यागी को कोषाध्यक्ष मनोनीत किया।

    तीन दिन में गठित होगी पूर्ण कार्यकारिणी

    नवनियुक्त पदाधिकारियों को बधाई देते हुए चुनाव अधिकारी व पर्यवेक्षक ने निर्देश दिया कि आगामी तीन दिनों के भीतर जिला कार्यकारिणी का पूर्ण विस्तार कर सूची उपलब्ध कराई जाए। इस सूची को अंतिम अनुमोदन के लिए प्रदेश इकाई के पास भेजा जाएगा, ताकि नई टीम सुचारू रूप से सामाजिक एवं वैचारिक कार्यों को गति दे सके।

    इनकी रही मुख्य उपस्थिति

    चुनाव के दौरान जनपद की विभिन्न इकाइयों से आए 69 प्रतिनिधियों ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई। इस अवसर पर मुख्य रूप से तेजपाल सिंह, देवेंद्र दत्त सत्यार्थी, शिशुपाल सिंह, अतुल भाटिया, आदित्य बिश्नोई, सुरेश पाल सिंह आर्य, सुशील कुमार, मनजीत सिंह, पवन आर्य, डलहौजी, जयपाल सिंह, भानु प्रताप सिंह, मुकेश आर्य, वीरेंद्र कुमार सिंह, प्रवीण शर्मा, डॉ. मुकुल आर्य, संदीप आर्य, नेपाल सिंह आर्य, कल्याण सिंह, महावीर सिंह जिंघाला, रमेश आर्य, विनोद कुमार आर्य, राधेश्याम चिकारा एडवोकेट, जयप्रकाश मुनि, हितेश शर्मा, हर्ष शर्मा, दीपक अग्रवाल, योगेश कुमार आर्य, अचल कुमार आर्य और विश्वजीत सिंह आर्य सहित अन्य गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।

  • ‘ब्राइडल ट्रांसफॉर्मेशन’ (दुल्हन का श्रृंगार) के लिए प्रसिद्ध प्वाइंट्स आशियाना LDA, लखनऊ के शीर्ष ब्यूटी पार्लर और ब्राइडल मेकअप स्टूडियो लखनऊ का आशियाना क्षेत्र अब शहर के प्रमुख कमर्शियल हब के रूप में विकसित हो चुका है। यहाँ सौंदर्य और ग्रूमिंग के लिए कई प्रीमियम विकल्प मौजूद हैं, जो विशेष रूप से ‘ब्राइडल ट्रांसफॉर्मेशन’ (दुल्हन […]

    आशियाना LDA, लखनऊ के शीर्ष ब्यूटी पार्लर और ब्राइडल मेकअप स्टूडियो
  • LPG की किल्लत के बीच सरकार का बड़ा फैसला

    दोहरे कनेक्शन रखने वालों को सरेंडर करना होगा सिलेंडर

    सावधान! जिनके घर में है पीएनजी, उन्हें अब नहीं मिलेगा एलपीजी सिलेंडर

    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक स्तर पर गैस आपूर्ति की चुनौतियों के बीच भारत सरकार ने एक बड़ा नीतिगत निर्णय लिया है। सरकार ने घरेलू रसोई गैस (LPG) के वितरण को लेकर नए नियम लागू कर दिए हैं। अब उन उपभोक्ताओं को एलपीजी की सुविधा नहीं मिलेगी जिनके घरों में पहले से पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) का कनेक्शन मौजूद है।

    सीमित संसाधनों का सही वितरण है प्राथमिकता

    सरकार के इस कड़े कदम का मुख्य उद्देश्य सीमित गैस संसाधनों का न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करना है। केंद्र सरकार का मानना है कि एलपीजी सिलेंडर की प्राथमिकता उन ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए होनी चाहिए जहाँ पीएनजी की पाइपलाइन अभी तक नहीं पहुँची है। जिनके पास पाइप से गैस (PNG) का विकल्प उपलब्ध है, उन्हें अब सिलेंडर पर निर्भरता छोड़नी होगी।

    नया नियम: न रिफिलिंग होगी, न मिलेगा नया कनेक्शन

    शनिवार को जारी नई अधिसूचना के अनुसार, नियम अब पूरी तरह स्पष्ट हैं:
    * पात्रता खत्म: पीएनजी उपभोक्ता अब नए एलपीजी कनेक्शन के लिए पात्र नहीं होंगे।
    * रिफिलिंग पर रोक: जिन घरों में पाइप वाली गैस चालू है, वहाँ अब पुराने एलपीजी सिलेंडरों की रिफिलिंग नहीं की जाएगी।
    * अनिवार्य सरेंडर: यदि किसी उपभोक्ता के पास दोनों कनेक्शन (PNG और LPG) एक साथ हैं, तो उन्हें तत्काल अपना एलपीजी सिलेंडर विभाग को सौंपना (सरेंडर करना) होगा।

    उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई

    सरकार ने उपभोक्ताओं को चेतावनी दी है कि वे स्वेच्छा से अपने एलपीजी कनेक्शन को सरेंडर कर दें। सरेंडर करने की प्रक्रिया में किसी प्रकार का जुर्माना नहीं लगाया जाएगा। हालांकि, यदि कोई उपभोक्ता नियमों को ताक पर रखकर दोनों सुविधाओं का लाभ उठाते हुए पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

    क्यों पड़ी इस कड़े फैसले की जरूरत?

    विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया के हालातों ने वैश्विक गैस कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है। ऐसे में देश के भीतर एलपीजी की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए यह कदम अनिवार्य था। यह नई नीति वितरण तंत्र में पारदर्शिता लाएगी और ‘पैनिक बुकिंग’ जैसी समस्याओं को कम करने में मददगार साबित होगी।

    क्या करें उपभोक्ता?

    जिन उपभोक्ताओं के पास दोहरे कनेक्शन हैं, वे अपने नजदीकी एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर या संबंधित गैस कंपनी के ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर अपना कनेक्शन सरेंडर कर सकते हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कदम केवल व्यवस्था को सुदृढ़ करने और जरूरतमंदों तक ईंधन पहुँचाने के लिए उठाया गया है।

  • प्रभारी मंत्री कपिल देव अग्रवाल होंगे मुख्य अतिथि

    हाईस्कूल से लेकर स्नातकोत्तर युवाओं को मिलेगा रोजगार

    17 मार्च को सजेगा ‘वृहद रोजगार मेला’, नामचीन कंपनियों में नौकरी का सुनहरा अवसर

    ~ भूपेंद्र निरंकारी

    बिजनौर। उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन योजना के अंतर्गत जनपद के बेरोजगार युवाओं के लिए एक अच्छी खबर है। आगामी 17 मार्च, दिन मंगलवार को बिजनौर में एक विशाल रोजगार मेले का आयोजन होने जा रहा है। इस मेले में देश की कई प्रतिष्ठित और नामचीन कंपनियां शिरकत करेंगी, जो पात्र अभ्यर्थियों का चयन कर उन्हें रोजगार के अवसर प्रदान करेंगी।

    संयुक्त तत्वावधान में होगा आयोजन

    प्रभारी जिला सेवायोजन अधिकारी पंकज चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि यह मेला जिला सेवायोजन कार्यालय बिजनौर और राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) बिजनौर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रभारी मंत्री कपिल देव अग्रवाल द्वारा किया जाएगा।

    समय और स्थान

    रोजगार मेले का आयोजन नगीना रोड स्थित राजकीय आईटीआई के प्रांगण में किया जाएगा। मेले की प्रक्रिया प्रातः 10:00 बजे से शुरू हो जाएगी। विज्ञापन के अनुसार, चयन की यह पूरी प्रक्रिया पूर्णतः निःशुल्क है, इसके लिए अभ्यर्थियों को कोई शुल्क नहीं देना होगा।

    योग्यता और पात्रता

    इस मेले में विभिन्न शैक्षिक योग्यता वाले अभ्यर्थियों के लिए पद उपलब्ध होंगे। मुख्य रूप से निम्नलिखित योग्यता रखने वाले युवा इसमें प्रतिभाग कर सकते हैं:
    ~ हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट
    ~ स्नातक (Graduate) एवं परास्नातक (Post Graduate)
    ~ आईटीआई (ITI) एवं डिप्लोमा धारक
    ~ कंप्यूटर कार्य में दक्ष अभ्यर्थी

    पंजीकरण की प्रक्रिया

    रोजगार मेले में भाग लेने के इच्छुक अभ्यर्थी विभागीय वेबसाइट rojgaarsangam.up.gov.in पर जाकर अपना पंजीकरण करा सकते हैं। जिला प्रशासन और सेवायोजन कार्यालय ने युवाओं से अपील की है कि वे इस सुनहरे अवसर का लाभ उठाएं और समय से आयोजन स्थल पर पहुंचकर अपनी योग्यता के अनुसार रोजगार प्राप्त करें।

  • ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर उपस्थिति न दिखने और पहनावे को लेकर मिली डांट

    शिक्षिका के माफीनामे ने लिया विभाग को घेरे में

    बिहार में ‘दुपट्टे’ पर रार! शिक्षिका के माफीनामे ने मचाया हड़कंप 🚩

    बिहार के शिक्षा विभाग में अजीबोगरीब मामलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मुंगेर की एक शिक्षिका का ‘माफीनामा’ सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। मामला अटेंडेंस और पहनावे से जुड़ा है।

    📌 क्या है पूरा विवाद?

    • पोर्टल की मार: ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर तकनीकी खराबी के कारण नहीं दर्ज हुई उपस्थिति।
    • दुपट्टे पर डांट: शिक्षिका ने स्पष्टीकरण में लिखा— “गर्मी के कारण दुपट्टा बैग में रख लिया था, जिसके लिए डांट खानी पड़ी, क्षमा चाहती हूं।”
    • परीक्षा ड्यूटी का फेर: इंटर परीक्षा के दौरान मैनुअल हाजिरी बनाने के बावजूद थमाया गया नोटिस।
      डिजिटल हाजिरी के दौर में क्या शिक्षकों को तकनीकी खामियों और ऐसे छोटे-छोटे कारणों के लिए प्रताड़ित करना सही है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं। 👇
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    बिहार के मुंगेर जिले से सामने आया यह मामला न केवल शिक्षा विभाग की तकनीकी खामियों को दर्शाता है, बल्कि महिला कर्मचारियों के प्रति प्रशासनिक व्यवहार पर भी सवाल खड़े करता है। ‘दुपट्टा’ और ‘ई-शिक्षाकोष पोर्टल’ के इर्द-गिर्द घूमता यह विवाद अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है।

    मुंगेर। बिहार का शिक्षा विभाग एक बार फिर अपने अजीबो-गरीब फरमानों और विवादों के कारण सुर्खियों में है। ताजा मामला मुंगेर जिले का है, जहां एक सरकारी शिक्षिका को अपनी उपस्थिति (Attendance) स्पष्ट करने के लिए जो माफीनामा लिखना पड़ा, वह अब चर्चा और विवाद का केंद्र बन गया है। मामला न केवल तकनीकी विफलता का है, बल्कि शिक्षिका के पहनावे पर हुई कथित टिप्पणी ने भी तूल पकड़ लिया है।

    क्या है पूरा मामला?

    राजकीय +2 उच्च विद्यालय, खड़गपुर में इंटरमीडिएट परीक्षा के दौरान प्रतिनियुक्त एक शिक्षिका को जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। आरोप था कि फरवरी और मार्च माह के कुछ दिनों में उनकी उपस्थिति ‘ई-शिक्षाकोष पोर्टल’ पर दर्ज नहीं थी। इसी के जवाब में शिक्षिका ने जो लिखित स्पष्टीकरण दिया, उसने विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    तकनीकी खामी या प्रशासनिक सख्ती?

    शिक्षिका ने अपने पत्र में विस्तार से बताया कि:
    * इंटर परीक्षा में ड्यूटी: 2 से 12 फरवरी 2026 तक उनकी ड्यूटी इंटर परीक्षा में थी, जहां उन्होंने ‘मार्क ऑन ड्यूटी’ के तहत उपस्थिति दर्ज की थी।
    * पोर्टल की समस्या: 7, 12 और 13 फरवरी को स्कूल-इन और स्कूल-आउट के समय पोर्टल में तकनीकी दिक्कत के कारण उनकी हाजिरी ऑनलाइन नहीं दिख सकी।
    * मैनुअल साक्ष्य: शिक्षिका का कहना है कि उन्होंने संबंधित विद्यालय में मैनुअल रजिस्टर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी, जिसे नजरअंदाज किया गया।

    दुपट्टे पर रार: ‘साहब…, बैग में था दुपट्टा’

    इस पूरे विवाद में सबसे हैरान करने वाला पहलू पहनावे को लेकर है। शिक्षिका ने अपने स्पष्टीकरण में स्वीकार किया कि उपस्थिति दर्ज कराते समय उन्होंने दुपट्टा नहीं लिया था, जिसके लिए उन्हें भारी डांट-फटकार सुननी पड़ी। पत्र में लिखा गया, “गर्मी के कारण दुपट्टा बैग में रख लिया था, उपस्थिति के समय वह नहीं दिखा, जिसके लिए क्षमा चाहती हूं। भविष्य में ऐसी गलती नहीं होगी।” शिक्षिका के इस ‘आत्मसमर्पण’ भरे लहजे ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है कि क्या अटेंडेंस और ड्यूटी की गुणवत्ता से ज्यादा महत्व पहनावे को दिया जा रहा है?

    अवकाश और उपस्थिति का गणित

    शिक्षिका ने मार्च माह का विवरण देते हुए स्पष्ट किया कि 2 और 7 मार्च को वे आकस्मिक एवं विशेष अवकाश पर थीं। वहीं 9 और 10 मार्च का डेटा पोर्टल पर पहले से मौजूद है। उन्होंने डीईओ से अनुरोध किया है कि इन मानवीय और तकनीकी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए उन्हें इस मामले से मुक्त किया जाए।

    बढ़ता विवाद!

    शिक्षा जगत के जानकारों का कहना है कि एक तरफ सरकार डिजिटल हाजिरी पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी तरफ पोर्टल की तकनीकी खामियों का खामियाजा शिक्षकों को मानसिक प्रताड़ना और स्पष्टीकरण के रूप में भुगतना पड़ रहा है। महिला शिक्षिका के दुपट्टे को लेकर उपजा विवाद आने वाले दिनों में तूल पकड़ सकता है।

  • कोठारी में पूतना उद्धार और छप्पन भोग के साथ गोवर्धन पूजा का दिव्य व अलौकिक वर्णन

    कथा व्यास राधे श्रिया जी के सानिध्य में गूँजी श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं

    प्रयागराज (बहरिया): विकास खण्ड बहरिया के रामगढ़ कोठारी गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास राधे श्रिया जी ने अपनी सुमधुर वाणी से भगवान श्रीकृष्ण के जन्म, उनकी बाल लीलाओं और दिव्य शक्तियों का ऐसा जीवंत वर्णन किया कि उपस्थित श्रोता भाव-विभोर हो उठे।

    आध्यात्मिक संदेश: परमात्मा की प्राप्ति ही जीवन का लक्ष्य
    कथा के दौरान राधे श्रिया जी ने पूतना वध और अन्य राक्षसों के उद्धार की कथा सुनाते हुए भक्तों को जीवन के सार से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि संसार के नश्वर भोग पदार्थों की प्राप्ति में समय और सामर्थ्य नष्ट करने के बजाय मनुष्य को अपने भीतर स्थित परमात्मा को पाने का लक्ष्य रखना चाहिए। श्रीकृष्ण केवल ग्वाल-बालों के सखा ही नहीं, बल्कि आत्मा को जागृत कर सुंदर जीवन जीने का मार्ग दिखाने वाले परम गुरु भी हैं।

    गोवर्धन पूजा और छप्पन भोग का आनंद

    कथा के मुख्य आकर्षणों में गोवर्धन पूजा और छप्पन भोग की झांकी रही। भगवान को अर्पित किए गए विविध व्यंजनों और गोवर्धन पर्वत के अलौकिक वर्णन ने पांडाल को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु भगवान के जयकारों और भक्ति गीतों पर झूमने को मजबूर हो गए। इस अवसर पर नृत्य और संगीत के माध्यम से उत्सव जैसा माहौल बना रहा।

    विद्वानों और गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति

    यज्ञ मण्डप में आचार्य लक्ष्मीकांत मिश्र, सुभाष चन्द्र त्रिपाठी और गंगा प्रसाद मिश्र द्वारा श्रीमद्भागवत का मूल पाठ वाचन संपन्न हुआ। इस अवसर पर श्रीतीर्थ राज प्रयाग पीठाधीश्वर श्रीमज्जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री सुदर्शनचर्या जी और सूर्य नारायणी नव दुर्गा देवस्थली, लखनऊ के पीठाधीश्वर आचार्य पं. विमल मिश्र जी का सानिध्य व मार्गदर्शन भी श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ।

    आयोजन में उमड़ा जनसैलाब

    महान समाजसेवी भक्त श्री मोहन मुरारी जी शुक्ल की स्मृति में आयोजित इस कार्यक्रम के मुख्य यजमान श्रीमती प्रेमा देवी एवं उनके सुपुत्र द्वय आयोजक क्षेत्रीय पंचायत सदस्य विपिन शुक्ल व मेडिकल डिस्ट्रीब्यूटर विनय शुक्ल रहे। कार्यक्रम में ग्राम प्रधान प्रतिनिधि अनिल पटेल, पं. सूर्यकांत शुक्ल मार्शल, राधेश्याम मिश्र, प्रकाश चंद्र मिश्र, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य दिनेश चंद्र पाण्डेय, राहुल शुक्ला, रमाशंकर शुक्ला, विनोद पटेल, मुनीम शुक्ला, राजीव मोहन मिश्र, केसी पाण्डेय, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अशोक दूबे, श्रीदत्त पाण्डेय, पुरुषोत्तम पाण्डेय, गिरजा शंकर पाण्डेय, के के शुक्ला, योगानंद मिश्रा, राम पाण्डेय, प्रताप बहादुर पटेल, रामजी यादव, अवकाश प्राप्त अधिकारी राजकुमार पाण्डेय, शेषमणि मिश्र, कमलाकान्त मिश्र अलीपुर सहित बड़ी संख्या में मातृशक्तियां और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

  • सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के पावन जन्मदिवस पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं

    “ज्ञान की पावन गंगा बहाकर, जग का तिमिर मिटाया है,
    रहमतों की ओढ़ चुनरिया, खुशियों का संसार सजाया है।
    धन्य हुई यह धरा आज, जो मिला आपका वरदान माँ,
    जन्मदिवस पर सतगुरु चरणों में, कोटि-कोटि प्रणाम माँ।”

    सतगुरु माता जी के जन्मोत्सव की बेला आई, भक्तों के मन में छाई है, खुशियों की अनहद बधाई। आशीर्वाद का हाथ रहे सदा, हम पर माँ आपका छाया, भवसागर से पार लगाती, आपकी यह पावन माया। चरणों में अर्जी हमारी, भक्ति का अमृत मिलता रहे, श्रद्धा का यह निर्मल मानस, आपके नूर से खिलता रहे। खुश रहें आप सदा यूँ ही, जग को राह दिखाते रहना, कृपा की अमृत वर्षा से, हमारा बेड़ा पार करते रहना।

    सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के जन्मदिवस की अनंत शुभकामनाएँ! “हे दाता! अपनी दया दृष्टि हम पर सदैव बनाए रखें और सेवा-सुमिरन का दान प्रदान करें।”

    ~ सादर वंदन, वरिष्ठ पत्रकार भूपेंद्र निरंकारी, बिजनौर।
    Mob~ 089544 18027
  • सीखें, झटपट घर पर बनाने की विधि

    ‘शाही पाचक चूर्ण’ से हाजमा रहेगा दुरुस्त

    ~ by, Shalie Saxena

    ‘शाही पाचक चूर्ण’ (Shahi Pachak Churna) एक आयुर्वेदिक मिश्रण है जो गैस, एसिडिटी, अपच और पेट के भारीपन को कम कर पाचन को दुरुस्त रखता है। इसमें मौजूद हींग, जीरा, काला नमक और अन्य जड़ी-बूटियाँ पाचन एंजाइमों को उत्तेजित करती हैं, जिससे भोजन का अवशोषण बेहतर होता है और कब्ज में राहत मिलती है।

    ‘शाही पाचक चूर्ण’ बनाने की विधि, जिसे आप घर पर आसानी से तैयार कर सकते हैं। यह स्वाद में चटपटा होने के साथ-साथ गैस और भारीपन को मिनटों में दूर कर देता है:

    आवश्यक सामग्री (अनुपात):

    * अजवाइन: 50 ग्राम (गैस के लिए सबसे उत्तम)
    * जीरा: 50 ग्राम (पाचन सक्रिय करता है)
    * सौंफ: 50 ग्राम (मुंह की शुद्धि और पेट की ठंडक के लिए)
    * काला नमक: 25 ग्राम (स्वाद और पाचक रस के लिए)
    * हींग (शुद्ध): 5-10 ग्राम (पेट दर्द और अफारा के लिए रामबाण)
    * सोंठ (सूखा अदरक) पाउडर: 20 ग्राम (जठराग्नि तेज करने के लिए)
    * छोटी हरड़ (हल्की भुनी हुई): 20 ग्राम (प्राकृतिक लेक्सेटिव)

    बनाने की विधि:

    * हल्का भूनें: धीमी आंच पर अजवाइन, जीरा और सौंफ को हल्का सुनहरा होने तक भून लें। इससे इनकी नमी खत्म हो जाएगी और खुशबू बढ़ जाएगी।
    * हींग तैयार करें: यदि आपके पास ढेले वाली हींग है, तो उसे थोड़े से घी में हल्का भूनकर पीस लें। पाउडर वाली हींग को सीधे इस्तेमाल किया जा सकता है।
    * मिश्रण तैयार करें: अब भुनी हुई सामग्री को ठंडा होने दें। इसके बाद इसमें काला नमक, सोंठ और हरड़ का पाउडर मिलाएं।
    * पीसना: इन सभी को मिक्सी में दरदरा या बारीक (अपनी पसंद के अनुसार) पीस लें।
    * स्टोर करें: इसे कांच की सूखी बरनी में भरकर रखें।

    सेवन कैसे करें?

    * दोपहर या रात के भोजन के बाद आधा चम्मच गुनगुने पानी के साथ लें।
    * यदि अचानक बहुत ज्यादा गैस या पेट में भारीपन महसूस हो, तो इसे सादे पानी के साथ भी लिया जा सकता है।

  • भक्ति की बयार: मंत्री बेबी रानी मौर्य ने की शिरकत

    पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह के प्रयासों की हुई जमकर सराहना

    ‘जो राम को लाए हैं’ भजनों से गूंज उठा पूरा परिसर

    सामौर बाबा महोत्सव: कन्हैया मित्तल के भजनों पर झूमा सिरसागंज, उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब

    लखनऊ/फिरोजाबाद/सिरसागंज | फिरोजाबाद जिले के सिरसागंज अंतर्गत ग्राम करहरा स्थित सुप्रसिद्ध सामौर बाबा धाम इन दिनों भक्ति और उत्साह के चरमोत्कर्ष पर है। सात दिवसीय ‘सामौर बाबा महोत्सव’ के पांचवें दिन मंगलवार की शाम ऐतिहासिक रही। सुप्रसिद्ध भजन गायक कन्हैया मित्तल की सुरीली आवाज और भक्ति गीतों ने हजारों श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। जय श्री राम और खाटू श्याम के जयकारों से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा।

    भजन संध्या: ‘जो राम को लाए हैं’ पर थिरके भक्त

    महोत्सव की सबसे यादगार कड़ी ‘भजन संध्या’ रही। जैसे ही कन्हैया मित्तल ने अपने चिर-परिचित अंदाज में भजनों की प्रस्तुति शुरू की, पंडाल में मौजूद हजारों की भीड़ भक्ति के रंग में रंग गई। विशेष रूप से “जो राम को लाए हैं, हम उनको लाएंगे” भजन पर श्रद्धालु अपनी सीटों से उठकर नाचने लगे। सिरसागंज ही नहीं, बल्कि आगरा, इटावा और आसपास के जनपदों से आए भक्तों ने इस आध्यात्मिक शाम का भरपूर आनंद लिया।

    कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश की महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार मंत्री बेबी रानी मौर्य मौजूद रहीं। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर संध्या का शुभारंभ किया। इस अवसर पर जिला सहकारी बैंक फिरोजाबाद के अध्यक्ष अतुल प्रताप सिंह सहित कई गणमान्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

    मंत्री जयवीर सिंह के प्रयासों की चौतरफा प्रशंसा

    महोत्सव की भव्यता और सफल आयोजन के लिए प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के प्रयासों की जमकर सराहना की गई।
    * बेबी रानी मौर्य ने कहा: “भक्तों का यह सैलाब बता रहा है कि यह आयोजन कितना सफल है। मैं जयवीर सिंह जी की प्रतिबद्धता की सराहना करती हूं, जिन्होंने अपनी मेहनत से इस महोत्सव को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान दिलाई है।”
    * कन्हैया मित्तल ने कहा: “सामौर बाबा की पावन धरा पर भक्तों की ऊर्जा अद्भुत है। मंत्री जयवीर सिंह जी के विजन के कारण ही आज इतनी भव्य व्यवस्था संभव हो पाई है।”

    जनता की राय: “ऐसा आयोजन पहले कभी नहीं देखा”
    महोत्सव में पहुंचे स्थानीय नागरिकों में भारी उत्साह देखा गया।

    > “भजन संध्या ने मन को शांति और ऊर्जा से भर दिया। कन्हैया मित्तल जी को लाइव सुनना एक अलग ही अनुभव था। जयवीर सिंह जी ने सिरसागंज को एक नई पहचान दी है।” > — विकास पांडे (श्रद्धालु, फिरोजाबाद)

    > “इतनी भीड़ होने के बावजूद व्यवस्थाएं बहुत शानदार थीं। बाबा सामौर के धाम में इस तरह का भव्य महोत्सव हम सभी के लिए गर्व की बात है।” > — रितु सिंह (स्थानीय निवासी, सिरसागंज)

    सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का संगम

    आयोजकों के अनुसार, सामौर बाबा महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्रीय कला, संस्कृति और सामूहिक सद्भाव का प्रतीक बन चुका है। सात दिनों तक चलने वाले इस मेले में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और आने वाले दिनों में कई अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई है।

    ब्यूरो रिपोर्ट: newsdaily24

  • 25 Kmpl से ज्यादा का माइलेज और दमदार फीचर्स

    5 लाख से कम में घर लाएं ये 3 ऑटोमैटिक कारें

    ऑटो डेस्क: भारत में कार खरीदने का सपना अब पहले से कहीं ज्यादा किफायती और आसान हो गया है। खासकर शहरों की भागदौड़ भरी जिंदगी और ट्रैफिक को देखते हुए, ऑटोमैटिक कारों की मांग तेजी से बढ़ी है। हाल ही में ऑटोमोबाइल क्षेत्र में हुए बदलावों और कीमतों में आई गिरावट के बाद, अब 5 लाख रुपये से भी कम के बजट में आप न केवल कार, बल्कि बेहतरीन ‘ऑटोमैटिक’ (AMT) फीचर्स वाली कार के मालिक बन सकते हैं।

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    इन कारों में आपको क्लच दबाने और बार-बार गियर बदलने के झंझट से मुक्ति मिलती है, साथ ही ये रिलायबिलिटी और परफॉर्मेंस के मामले में भी शानदार हैं। आइए जानते हैं देश की उन 3 बजट-फ्रेंडली ऑटोमैटिक कारों के बारे में जो माइलेज का बाप मानी जाती हैं।

    1. Maruti Suzuki Alto K10 (AMT): कम बजट में प्रीमियम अनुभव

    अगर आपका बजट बेहद सीमित है और आप एक भरोसेमंद ऑटोमैटिक कार की तलाश में हैं, तो Maruti Suzuki Alto K10 (AMT) एक परफ़ेक्ट विकल्प है।
    * वैरिएंट: इसके VXI AT और VXI+ AT मॉडल विशेष रूप से ऑटोमैटिक ड्राइविंग के शौकीनों के लिए बनाए गए हैं।
    * कीमत: इसकी शुरुआती कीमत महज 4.95 लाख रुपये है।
    * माइलेज: यह कार 25 किलोमीटर प्रति लीटर तक का शानदार माइलेज देती है, जो इसे मध्यमवर्गीय परिवारों की पहली पसंद बनाता है।

    2. Maruti Suzuki S-Presso (AMT): मिनी SUV का अहसास

    ऊंची सीटिंग और बोल्ड लुक पसंद करने वालों के लिए मारुति की S-Presso एक बेहतरीन हैचबैक है। यह कार 998cc के शक्तिशाली पेट्रोल इंजन के साथ आती है।
    * वैरिएंट: ऑटोमैटिक अनुभव के लिए आप इसका VXi Opt AT या VXi Plus Opt AT वैरिएंट चुन सकते हैं।
    * कीमत: इस कार की शुरुआती कीमत लगभग 4.5 लाख रुपये से शुरू होती है।
    * माइलेज: माइलेज के मामले में यह सबको पीछे छोड़ते हुए 25.3 kmpl का बेहतरीन एवरेज देती है।

    3. Renault Kwid: स्टाइल और माइलेज का संगम

    फ्रांसीसी कंपनी रेनॉल्ट की Kwid अपनी स्पोर्टी डिजाइन और आधुनिक फीचर्स के लिए जानी जाती है। कम बजट में यह कार एक ‘फायदेमंद सौदा’ साबित हो सकती है।
    * इंजन: इसमें 1.0 लीटर का पेट्रोल इंजन मिलता है जो सिटी ड्राइविंग के लिए पर्याप्त पावर देता है।
    * फीचर्स: क्विड में ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ-साथ टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट जैसे स्मार्ट फीचर्स भी मिलते हैं।
    * माइलेज: यह कार सड़क की स्थितियों के आधार पर 21 से 25 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज आसानी से निकाल लेती है।

    निष्कर्ष: क्यों चुनें ऑटोमैटिक कार?

    शहरों के भारी ट्रैफिक में बार-बार क्लच का इस्तेमाल पैरों के लिए थकाऊ होता है। ऑटोमैटिक कारें न केवल ड्राइविंग को आसान बनाती हैं, बल्कि अब ये मैनुअल कारों की तरह ही किफायती भी हो गई हैं। 5 लाख रुपये के अंदर मिलने वाली ये कारें उन लोगों के लिए बेहतरीन हैं जो पहली बार कार खरीद रहे हैं या शहर में इस्तेमाल के लिए दूसरी कार चाहते हैं।

    प्रमुख अंतर और विशेषताएं

    * सबसे ज्यादा माइलेज: अगर आपकी प्राथमिकता सिर्फ ईंधन की बचत है, तो Maruti S-Presso इस सूची में सबसे आगे है, जो 25.30 kmpl तक का माइलेज देती है।
    * सबसे ज्यादा जगह (Space): सामान रखने के लिए Renault Kwid सबसे बेहतर है। इसका 279 लीटर का बूट स्पेस लंबी यात्रा के लिए अधिक उपयोगी है।
    * खराब रास्तों के लिए: यदि आप ऐसे रास्तों पर चलते हैं जहाँ गड्ढे ज्यादा हैं, तो Kwid और S-Presso का हाई ग्राउंड क्लीयरेंस (180mm+) आपके लिए बेहतर रहेगा।
    * आधुनिक तकनीक: Renault Kwid में आपको 8-इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम मिलता है जो Android Auto और Apple CarPlay को सपोर्ट करता है, जो इस बजट में एक बड़ा प्लस पॉइंट है।

    निष्कर्ष: आपके लिए कौन सी सही है?

    * Alto K10: उन लोगों के लिए जो एक कॉम्पैक्ट और भरोसेमंद कार चाहते हैं जिसे तंग गलियों में चलाना आसान हो।
    * S-Presso: उन लोगों के लिए जिन्हें एक ‘मिनी SUV’ जैसा ऊंचा अहसास और बेहतरीन माइलेज चाहिए।
    * Renault Kwid: उन लोगों के लिए जो कम बजट में स्टाइलिश लुक और ज्यादा आधुनिक फीचर्स (जैसे रिवर्स कैमरा) चाहते हैं।

    किफायती ड्राइविंग का गणित: मेंटेनेंस और रीसेल वैल्यू की तुलना

    एक नई कार खरीदते समय केवल उसकी कीमत देखना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे चलाने का साल भर का खर्च और भविष्य में उसे बेचने पर मिलने वाली कीमत भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

    1. मेंटेनेंस खर्च (Maintenance Cost)
    भारतीय बाजार में मारुति अपनी ‘लो-मेंटेनेंस’ छवि के लिए जानी जाती है, वहीं रेनॉल्ट ने भी अपनी सर्विसिंग को काफी प्रतिस्पर्धी बनाया है।
    | कार मॉडल | औसत वार्षिक सर्विस खर्च (लगभग) | 5 साल का कुल मेंटेनेंस (अनुमानित) |
    | Maruti Alto K10 | ₹3,000 – ₹4,500 | ₹14,000 – ₹18,000 |
    | Maruti S-Presso | ₹3,500 – ₹5,000 | ₹17,000 – ₹20,000 |
    | Renault Kwid | ₹2,500 – ₹4,000 | ₹10,000 – ₹12,000 |
    * विशेष टिप: रेनॉल्ट क्विड का 5 साल का मेंटेनेंस पैकेज कई बार मारुति से भी सस्ता पड़ता है, लेकिन मारुति के स्पेयर पार्ट्स देश के किसी भी कोने में आसानी से और कम कीमत पर मिल जाते हैं।

    2. रीसेल वैल्यू (Resale Value)
    जब बात कार को 3-4 साल बाद बेचने की आती है, तो ब्रांड की वैल्यू और डिमांड बहुत मायने रखती है।
    * Maruti Alto K10: इसकी रीसेल वैल्यू सबसे अधिक है। भारत के पुराने कार बाजार (Second-hand market) में ऑल्टो की डिमांड कभी कम नहीं होती, इसलिए आपको अपनी पुरानी ऑल्टो की बेहतरीन कीमत मिल सकती है।
    * Maruti S-Presso: मारुति ब्रांड होने के कारण इसकी रीसेल भी अच्छी है, लेकिन ऑल्टो की तुलना में इसके ग्राहक थोड़े विशिष्ट (Specific) होते हैं।
    * Renault Kwid: क्विड की रीसेल वैल्यू मारुति की तुलना में थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन इसके लुक्स और फीचर्स की वजह से युवा खरीदारों के बीच इसकी अच्छी मांग रहती है।

    निष्कर्ष: बजट और भरोसे का चुनाव

    * यदि आप ऐसी कार चाहते हैं जिसे चलाने का खर्च न्यूनतम हो और 5 साल बाद बेचने पर भी अच्छी कीमत मिले, तो Maruti Alto K10 बेजोड़ है।
    * यदि आप कम मेंटेनेंस के साथ-साथ मॉडर्न फीचर्स और ‘SUV’ जैसा फील चाहते हैं, तो S-Presso और Renault Kwid आपके लिए बेहतर निवेश हैं।

    ~By: newsdaily24

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  • एक पल रुक कर सोचें— क्या आप वाकई अपने ही खून को कहना चाहते हैं ‘अवैध’?

    इस शब्द का असली अर्थ और रिश्तों पर इसके गहरे जख्म!

    अज्ञानता या आदत? खोखली कर रही हैं रिश्तों की बुनियाद

    बोलचाल में आम होता ‘हरामी’ जैसा अपशब्द

    [विशेष संपादकीय: newsdaily24]

    नई दिल्ली/लखनऊ। अक्सर घरों में भाई-बहन की नोकझोंक हो या माता-पिता का बच्चों पर गुस्सा, कुछ अपशब्द अनजाने में ही जुबान पर आ जाते हैं। इनमें सबसे आम शब्द है— ‘हरामी’। सुनने में यह शब्द आज की ‘कूल’ पीढ़ी के लिए शायद एक आम स्लैंग (Slang) बन गया हो, लेकिन क्या आप जानते हैं कि जब एक मां अपने बच्चे को या एक भाई अपनी बहन को यह शब्द बोलता है, तो वह अनजाने में अपने ही परिवार के चरित्र और मर्यादा पर कालिख पोत रहा होता है?

    शब्द का अर्थ: जिसे सुनकर कांप जाएगी रूह

    भाषाई विशेषज्ञों और शब्दकोश के अनुसार, ‘हरामी’ शब्द का जन्म अरबी के ‘हराम’ से हुआ है। इसका सीधा और क्रूर अर्थ है— ‘अवैध संतान’ या ‘व्यभिचार से उत्पन्न’।
    जब कोई पिता अपने बेटे को यह कहता है, तो वह अनजाने में स्वयं के चरित्र और अपनी पत्नी (बच्चे की मां) के सतीत्व पर प्रश्नचिह्न लगा रहा होता है। यह शब्द केवल एक गाली नहीं, बल्कि एक पूरे वंश के अपमान का पर्याय है।

    क्यों बढ़ा अपनों के बीच ‘कैजुअल’ गाली का चलन?

    समाजशास्त्री मानते हैं कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स, वेब सीरीज और सोशल मीडिया के प्रभाव ने अपशब्दों को ‘नॉर्मल’ बना दिया है।

    * देखा-देखी: “दोस्त बोलते हैं तो हमने भी बोल दिया” – यह मानसिकता परिवार तक पहुंच गई है।
    * अर्थ की अज्ञानता: 90% लोग इस शब्द का प्रयोग केवल ‘चालाक’ या ‘नटखट’ के संदर्भ में करते हैं, उन्हें इसके वास्तविक अपमानजनक अर्थ का बोध ही नहीं होता।
    * संस्कारों का क्षरण: अपनों के बीच सम्मान की जगह अब ‘अनौपचारिकता’ ने ले ली है, जहाँ मर्यादा की रेखा धुंधली होती जा रही है।

    मनोवैज्ञानिक प्रभाव: बच्चों के मानस पर चोट

    मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, जब घर के बड़े बच्चों के लिए ऐसे शब्दों का प्रयोग करते हैं, तो बच्चों के आत्म-सम्मान (Self-esteem) को गहरी चोट पहुंचती है।
    * वे अपशब्दों को भाषा का अनिवार्य हिस्सा मान लेते हैं।
    * अपनों के प्रति सम्मान कम होने लगता है।
    * बाहर की दुनिया में भी वे इन्हीं शब्दों का प्रयोग कर अपमानित होते हैं।

    निष्कर्ष: खुद से करें सुधार की शुरुआत

    रिश्ते रेशम की डोर की तरह होते हैं, जो कड़वे शब्दों की रगड़ से टूट सकते हैं। भाषा की शुद्धता जीवन में मिठास घोलती है। अगली बार जब यह शब्द आपकी जुबान पर आए, तो एक पल रुककर सोचें— क्या आप वाकई अपने ही खून को ‘अवैध’ कहना चाहते हैं?

    > बदलाव का संकल्प: आइए, आज से ही अपने घर की डिक्शनरी से ऐसे शब्दों को बाहर करें जो अपनों का ही अपमान करते हों।
    > टीम newsdaily24

  • मेरठ समेत 5 जिलों में गैस संकट गहराया

    सप्लाई चेन टूटने से कच्चे माल और ईंधन के दाम दोगुने

    घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बुकिंग की समय सीमा बढ़ी

    इज़रायल-ईरान युद्ध की आग में झुलसी पश्चिमी यूपी की रसोई

    मेरठ/सहारनपुर/बागपत/बिजनौर/शामली/मुजफ्फरनगर। (newsdaily24 विशेष रिपोर्ट)

    पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों ने अब भारत के घरेलू बजट और औद्योगिक रफ्तार पर सीधा प्रहार करना शुरू कर दिया है। अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण पेट्रोलियम पदार्थों की अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन बाधित हुई है, जिसका सबसे बड़ा असर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, सहारनपुर, बागपत, बिजनौर और शामली जिलों में देखने को मिल रहा है। रसोई गैस से लेकर कमर्शियल सिलेंडरों की किल्लत ने आम जनता से लेकर बड़े होटल व्यवसायियों तक की नींद उड़ा दी है। हालांकि इन सबके बीच मुजफ्फरनगर से राहत भरी खबर है, जहाँ फिलहाल पीएनजी और एलपीजी की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है, हालांकि भविष्य के संकट को लेकर वहां भी बाजार में सुगबुगाहट तेज है।

    बुकिंग के नियमों में बदलाव: अब 21 नहीं, 25 दिन का इंतज़ार

    ईंधन की कमी को देखते हुए सरकार ने गैस सिलेंडरों की रीफिलिंग के नियमों में सख्ती कर दी है। अब उपभोक्ता 21 दिन के बजाय कम से कम 25 दिन के अंतराल पर ही अगला सिलेंडर बुक कर सकेंगे। इस नए नियम ने उन परिवारों की चिंता बढ़ा दी है जहाँ गैस की खपत अधिक है। कई जिलों में बुकिंग के 4-5 दिन बाद भी होम डिलीवरी न होने की शिकायतें आम हो गई हैं।

    मेरठ: उद्योगों और कैटरिंग कारोबार पर भारी मार

    मेरठ में गैस की किल्लत का असर केवल घरों तक सीमित नहीं है। जनपद के होटल और रेस्टोरेंट व्यवसायी खासे परेशान हैं।
    होटल उद्योग: जिन स्थानों पर पीएनजी (PNG) कनेक्शन है, वहां भी लाइव स्टॉल के लिए सिलेंडर उपलब्ध नहीं हैं।सिलेंडरों की कमी के कारण छोटे रेहड़ी-पटरी वालों से लेकर बड़े होटलों तक का संचालन संकट में है।

    सहारनपुर: पाइप लाइन सप्लाई बंद, 8 लाख उपभोक्ता प्रभावित

    सहारनपुर में स्थिति और भी गंभीर है। प्रशासन ने होटलों और रेस्टोरेंट में होने वाली पाइपलाइन गैस सप्लाई को फिलहाल बंद कर दिया है।
    * जिले में कुल 8.33 लाख उपभोक्ता हैं, जहाँ प्रतिदिन औसतन 17 हजार सिलेंडरों की बुकिंग होती है।
    * कीमतों में बेतहाशा वृद्धि और सप्लाई में देरी ने मध्यम वर्गीय परिवारों का बजट बिगाड़ दिया है।

    बागपत और बिजनौर: कमर्शियल सप्लाई पूरी तरह ठप

    घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए बागपत और बिजनौर प्रशासन ने कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति रोक दी है।
    * बागपत: यहाँ हर महीने होने वाली 2,000 कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई रुकने से व्यापारिक गतिविधियां ठप हैं। अब एजेंसियां रोजाना के बजाय एक दिन छोड़कर गैस प्राप्त कर रही हैं।
    * बिजनौर: यहाँ लोग भविष्य की अनिश्चितता को देखते हुए अतिरिक्त सिलेंडर स्टॉक करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन 25 दिन के प्रतिबंध के कारण बुकिंग नहीं हो पा रही है।

    शामली में व्यापारियों ने जताई चिंता

    शामली में पिछले तीन दिनों से कमर्शियल गैस की आपूर्ति पूरी तरह ठप है। उत्तर प्रदेश व्यापार प्रतिनिधि मंडल ने इस संकट को लेकर जिलाधिकारी से हस्तक्षेप की मांग करने की बात कही है। कई मिठाई की दुकानों और रेस्टोरेंट्स के पास स्टॉक खत्म होने की कगार पर है।

  • अब 21 नहीं 25 दिन बाद ही मिलेगा दूसरा रिफिल

    सावधान: LPG सिलेंडर बुकिंग के नियम बदले

    नई दिल्ली | मार्च 2026 में एलपीजी (LPG) गैस बुकिंग और कीमतों से जुड़े नियमों में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं। सरकार ने जमाखोरी रोकने और आपूर्ति (supply) को स्थिर रखने के लिए ये कदम उठाए हैं।

    खाद्य एवं रसद विभाग और तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडर की बुकिंग और वितरण प्रक्रिया में बड़े बदलाव किए हैं। यह बदलाव मार्च 2026 से प्रभावी हो गए हैं। यदि आप भी समय से पहले सिलेंडर बुक करने के आदी हैं, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है।
    1. बुकिंग के बीच का अंतराल बढ़ा: अब 25 दिन का ‘लॉक-इन’ पीरियड
    सरकार ने पैनिक बुकिंग और सिलेंडरों की कालाबाजारी पर लगाम लगाने के लिए बुकिंग के अंतर को बढ़ा दिया है।
    * नया नियम: अब उपभोक्ता एक सिलेंडर की डिलीवरी लेने के 25 दिन बाद ही अगला सिलेंडर बुक कर सकेंगे।
    * पुरानी व्यवस्था: पहले यह सीमा 15 दिन थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 21 दिन किया गया था। अब इसे और कड़ा कर 25 दिन कर दिया गया है।
    * असर: यदि आपका सिलेंडर 25 दिन से पहले खत्म होता है, तो सॉफ्टवेयर आपकी नई बुकिंग स्वीकार नहीं करेगा।

    2. कीमतों में भारी उछाल: रसोई का बजट बिगड़ा
    7 मार्च 2026 से लागू नई दरों के अनुसार, घरेलू और कमर्शियल दोनों श्रेणियों में कीमतों में वृद्धि की गई है:
    * घरेलू सिलेंडर (14.2 kg): इसमें 60 रुपये की सीधी बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में अब इसकी कीमत 913 रुपये पहुंच गई है।
    * कमर्शियल सिलेंडर (19 kg): व्यापारियों पर बोझ बढ़ाते हुए इसमें 115 रुपये का इजाफा किया गया है। अब इसकी नई कीमत 1,883 रुपये (दिल्ली) होगी।

    3. e-KYC और DAC कोड अनिवार्य
    पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अब तकनीकी नियमों को सख्त किया गया है:
    * e-KYC: जिन उपभोक्ताओं ने अभी तक अपनी गैस एजेंसी पर जाकर आधार प्रमाणीकरण (e-KYC) नहीं कराया है, उनकी सप्लाई रोकी जा सकती है।
    * डिलीवरी कोड (DAC): सिलेंडर की डिलीवरी तभी पूरी मानी जाएगी जब आप डिलीवरी मैन को अपने पंजीकृत मोबाइल पर आया Delivery Authentication Code देंगे। इसके बिना रसीद जेनरेट नहीं होगी।

    4. कोटा और सब्सिडी का गणित
    * सालाना सीमा: एक वित्तीय वर्ष में एक उपभोक्ता अधिकतम 15 सिलेंडर ही ले सकेगा।
    * सब्सिडी: केवल 12 सिलेंडरों पर ही सब्सिडी देय होगी। शेष 3 सिलेंडर बाजार मूल्य पर खरीदने होंगे।
    * उज्ज्वला राहत: उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को मिलने वाली 300 रुपये की सब्सिडी जारी रहेगी, जिससे उन्हें महंगाई से थोड़ी राहत मिलेगी।

    > विशेष नोट: newsdaily24 अपने पाठकों को सलाह देता है कि वे अपने गैस उपयोग का प्रबंधन इस प्रकार करें कि 25 दिनों का चक्र प्रभावित न हो। यदि आपके घर में खपत ज्यादा है, तो समय का ध्यान रखते हुए ही बुकिंग करें क्योंकि 25 दिन से पहले सिस्टम आपकी बुकिंग स्वीकार नहीं करेगा। ध्यान दें कि यदि परिवार बड़ा है, तो वैकल्पिक ईंधनों या इंडक्शन कुकिंग को बैकअप के तौर पर रखें।

  • मुख्य अतिथि डॉ. सृष्टि धवन (PCS) ने बच्चों को बांटे पुरस्कार

    पूर्व शिक्षक एम.ए. सिद्दीकी को मिला ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’

    एविज़ कॉन्वेंट स्कूल में ‘रिपोर्ट कार्ड डे’ का भव्य आयोजन: मेधावी छात्र और श्रेष्ठ माताएं सम्मानित

    लखनऊ। गढ़ीपीर खां स्थित एविज़ कॉन्वेंट स्कूल में सोमवार को ‘रिपोर्ट कार्ड और पुरस्कार वितरण’ समारोह हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर विद्यालय के प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया।

    मुख्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति

    कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. सृष्टि धवन (पी.सी.एस.), एडिशनल डायरेक्टर, संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश रहीं। उनके साथ स्कूल के संस्थापक डॉ. एस.एफ. इमाम और प्रधानाचार्या श्रीमती मसर्रत फखरुल ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की।

    इन होनहारों ने लहराया सफलता का परचम

    उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों में मुख्य रूप से अर्णव यादव, विरसू, आलिया सिद्दीकी, सारा, साफिया, इल्म खातून, अहदा खान, अब्दुल्ला अहमद, तूबा फातिमा, अतशिफा, मोहम्मद अभिस, मोहम्मद अरमान, मरियम सिद्दीकी, अरीबा, अर्णव चौधरी, जोया अंसारी, ज़िक्र खातून, आयरा, अबुज़र सिद्दीकी, जिकस, अनामत्ता मोमजीज, मो. ज़ैद, अर्मिश शेख, लाइबा, हया उमैर, तैबा फातिमा, मो. हुमैद खान, तज़किया ज़फर, मदीहा, अल्शीन सईद, और सना दिलशेर शामिल रहे, जिन्हें प्रमाण पत्र और पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

    ‘श्रेष्ठ मदर’ और ‘लाइफटाइम अचीवमेंट’ सम्मान

    शिक्षा में अभिभावकों के योगदान को सराहते हुए ‘अतिरिक्त श्रेष्ठ मदर पुरस्कार’ से श्रीमती जोया खान, श्रीमती सरिता त्रिपाठी, श्रीमती शबीना, श्रीमती शाहिदा और श्रीमती सूफिया सिद्दीकी को नवाजा गया। कार्यक्रम के अंत में स्कूल के चेयरमैन डॉ. एस.एफ. इमाम ने पूर्व शिक्षक श्री एम.ए. सिद्दीकी को उनके अतुलनीय योगदान के लिए ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’ से सम्मानित किया।

  • [Newsdaily24 एक्सक्लूसिव]

    खाड़ी युद्ध से ‘गैस संकट’: कमर्शियल सप्लाई ठप होने से अब घरेलू सिलेंडरों पर मंडराया कालाबाजारी का साया

    लखनऊ | (शैली सक्सेना)। राजधानी लखनऊ के व्यापारिक गलियारों से लेकर आम आदमी की रसोई तक, सोमवार की सुबह एक नई चिंता लेकर आई है। खाड़ी देशों—अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक तेल आपूर्ति की चेन तोड़ दी है। इसका तात्कालिक असर लखनऊ में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) द्वारा कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई और फिलिंग रोकने के रूप में सामने आया है।… लेकिन इस संकट की आड़ में एक बड़ा ‘अवैध खेल’ शुरू होने की आशंका गहरा गई है।

    कमर्शियल की किल्लत, घरेलू पर ‘डाका’

    लखनऊ में प्रतिदिन लगभग 10,000 कमर्शियल सिलेंडरों की खपत होती है। सप्लाई ठप होते ही शहर के हजारों होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों के सामने चूल्हे ठंडे होने की नौबत आ गई है। जानकारों का मानना है कि इस कमी को पूरा करने के लिए अब ‘घरेलू गैस सिलेंडरों’ का बड़े पैमाने पर अवैध डायवर्जन शुरू हो सकता है।

    • चोरी-छिपे इस्तेमाल: लखनऊ के अधिकांश छोटे ढाबों और स्ट्रीट वेंडर्स के पास पहले से ही घरेलू सिलेंडरों का अवैध स्टॉक रहता है। अब कमर्शियल सप्लाई न होने से यह अवैध इस्तेमाल 80% तक बढ़ने की आशंका है।
    • कालाबाजारी का डर: बिचौलिए और डिलीवरी एजेंट अधिक मुनाफे के लालच में घरेलू उपभोक्ताओं का कोटा काटकर होटलों को ऊंचे दामों पर सिलेंडर सप्लाई कर सकते हैं।

    प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

    अब गेंद जिला प्रशासन और रसद विभाग (Supply Department) के पाले में है। क्या विभाग घरेलू गैस की कालाबाजारी रोकने के लिए ढाबों और गोदामों पर छापेमारी करेगा? क्या लखनऊ के आम उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर मिल पाएगा?

    सुरक्षा की धज्जियां: ‘रिफिलिंग’ का जानलेवा खेल

    सप्लाई रुकने का सबसे खतरनाक पहलू गैस रिफिलिंग (पलटी मारना) है। कमर्शियल सिलेंडर खाली होने पर छोटे वेंडर्स घरेलू सिलेंडरों से गैस निकालकर उनमें भरते हैं। तंग गलियों में चलने वाला यह खेल किसी बड़े हादसे को दावत दे सकता है।

    बाजार पर असर: महंगी होगी थाली! 

    व्यापारियों का कहना है कि अगर 48 घंटों में स्थिति सामान्य नहीं हुई, तो तैयार भोजन की कीमतों में 15 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी तय है। शादियों के सीजन में कैटरिंग व्यवसाय पर भी इसका गहरा असर पड़ेगा।

    newsdaily24 की अपील: हम अपने पाठकों और व्यापारियों से अपील करते हैं कि इस संकट के समय में घरेलू गैस का अवैध भंडारण या असुरक्षित रिफिलिंग न करें। किसी भी प्रकार की कालाबाजारी की सूचना तुरंत रसद विभाग को दें।

  • इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने रोकी फिलिंग

    राजधानी में प्रतिदिन 10,000 सिलेंडरों की खपत पर लगा ब्रेक, महंगाई बढ़ने की पूरी आशंका

    खाड़ी देशों में छिड़े युद्ध की तपिश: कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई पूरी तरह ठप

    लखनऊ। राजधानी लखनऊ सहित देश भर के व्यापारियों और होटल संचालकों के लिए सोमवार की सुबह एक बुरी खबर लेकर आई। खाड़ी देशों में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और युद्ध के चलते इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई और फिलिंग तत्काल प्रभाव से रोक दी है। इस फैसले का सीधा असर लखनऊ की अर्थव्यवस्था और खान-पान के कारोबार पर पड़ता दिख रहा है।

    प्रतीकात्मक फोटो

    सप्लाई रुकने का मुख्य कारण: वैश्विक अस्थिरता

    कॉर्पोरेशन के अधिकारियों के अनुसार, खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध ने वैश्विक तेल और गैस बाजार को अस्थिर कर दिया है। कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में अप्रत्याशित उछाल के कारण आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) बाधित हुई है। फिलहाल सुरक्षा और स्टॉक प्रबंधन के मद्देनजर सिलेंडरों की भराई का काम बंद रखा गया है।
    लखनऊ में हाहाकार: 10,000 सिलेंडरों की दैनिक खपत
    लखनऊ में कमर्शियल गैस का एक बड़ा बाजार है। आंकड़ों के मुताबिक:

    प्रतीकात्मक फोटो

    * दैनिक मांग: लगभग 10,000 सिलेंडर।
    * प्रभावित क्षेत्र: शहर के हजारों छोटे-बड़े होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, कैंटीन और हलवाई।
    * बैकअप की कमी: अधिकांश छोटे व्यापारियों के पास एक या दो दिन से ज्यादा का स्टॉक नहीं होता है, जिससे मंगलवार से संकट और गहराने की आशंका है।

    महंगाई का नया दौर शुरू होने की आशंका

    व्यापारियों और उद्यमी संगठनों ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि अगले 48 घंटों में सप्लाई बहाल नहीं हुई, तो:
    * तैयार भोजन (Ready-to-eat food) की कीमतों में 15% से 20% तक की वृद्धि हो सकती है।
    * स्ट्रीट वूड वेंडर्स और छोटे दुकानदारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा।
    * लॉजिस्टिक्स खर्च बढ़ने से अन्य जरूरी वस्तुओं के दाम भी बढ़ सकते हैं।

    अधिकारियों का पक्ष

    इंडियन ऑयल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “यह एक वैश्विक संकट है। कच्चा माल (LPG/Propane) की आवक प्रभावित होने से फिलहाल फिलिंग प्लांट पर काम रुका है। हम वैकल्पिक रास्तों और उच्चाधिकारियों के निर्देशों का इंतजार कर रहे हैं।”

    > विशेष नोट: यह रिपोर्ट newsdaily24 के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाई जा रही है। युद्ध के हालात और अंतरराष्ट्रीय बाजार की पल-पल बदलती स्थितियों पर हमारी पैनी नजर बनी हुई है।

  • यूपी इको टूरिज्म’ ऐप से आपकी उंगलियों पर राज्य की प्राकृतिक सुंदरता; जंगल, झरने और रोमांच का लें आनंद

    ऐप में GPS सपोर्ट स्मार्ट मैप्स, नेविगेशन फीचर, AI इटिनेररी प्लान की सुविधा और सुरक्षा का खास ख्याल 

    ‘यूपी इको टूरिज्म’ से पर्यटक कर सकेंगे समय का सदुपयोग, सुरक्षा का खास ख्याल

    प्रदेश में इको टूरिज्म अब और ‘स्मार्ट’, नवाचार व तकनीक से बदल रहा पर्यटन परिदृश्य- जयवीर सिंह

    यूपी इको टूरिज्म को लगा डिजिटल पंख, बस एक क्लिक पर प्रदेश के पर्यटन स्थलों की जानकारी

    ~ शैली सक्सेना

    लखनऊ। प्रकृति प्रेमियों और रोमांचक पर्यटन के शौकीनों के लिए अच्छी खबर है। प्रदेश के इको टूरिज्म स्थलों की संपूर्ण जानकारी, बुकिंग सुविधाएं और जरूरी मार्गदर्शन अब बस एक क्लिक की दूरी पर उपलब्ध होंगे। उत्तर प्रदेश ईको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड (UPETDB) द्वारा तैयार कराया गया ‘यूपी इको टूरिज्म’ (UP Eco Tourism) मोबाइल ऐप प्रदेश के वन्य जीव अभ्यारण्यों, राष्ट्रीय उद्यानों, जंगल ट्रेल्स, झरनों और नदियों जैसे प्राकृतिक आकर्षणों को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर समेटते हुए पर्यटकों को विशेष अनुभव प्रदान करता है।

    उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘डिजिटल युग की मांगों के अनुरूप विकसित ‘यूपी इको टूरिज्म’ ऐप प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र में एक नई क्रांति का सूत्रपात है। यह पहल पर्यटकों को प्रकृति से जोड़ने के साथ-साथ स्थानीय समुदायों की भागीदारी और पर्यावरण संरक्षण को भी नई दिशा देगी। साथ ही, प्रदेश को इको-फ्रेंडली, सतत और जिम्मेदार पर्यटन के नए दौर में भी अग्रसर करेगी।’ हालांकि, यह ऐप अभी शुरुआती चरण में है, जिसमें लगातार बदलाव किए जा रहे हैं। 

    ऐप में क्या है खास?

    इस मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से उपयोगकर्ता उत्तर प्रदेश के इको टूरिज्म स्थलों की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, जिनमें फोटो, वीडियो, मार्ग विवरण, आसपास के आकर्षण, गंतव्य तक पहुंच संबंधी जानकारी और यात्रा के लिए उपयुक्त समय आदि शामिल है। इसमें राष्ट्रीय उद्यान, वेटलैंड्स, नेचर ट्रेल्स, फॉरेस्ट सर्किट, ग्रामीण पर्यटन और नदी आधारित गतिविधियों को आसानी से ढूंढा जा सकता है। स्मार्ट सर्च और फ़िल्टर की मदद से गंतव्यों (डेस्टिनेशन) को जिला, गतिविधियों के प्रकार, बजट, दूरी, लोकप्रियता और रेटिंग के आधार पर ढूंढा जा सकता है।

    GPS सपोर्ट स्मार्ट मैप्स और नेविगेशन फीचर

    ऐप में स्वाइप आधारित नेविगेशन सुविधा दी गई है, जिससे उपयोगकर्ता पसंदीदा स्थल को सेव कर सकते हैं या अगले विकल्प को देख सकते हैं। जीपीएस सपोर्ट स्मार्ट मैप्स और नेविगेशन फीचर के जरिए इको टूरिज्म साइट्स, ठहरने के विकल्प, गतिविधियों और नजदीकी आकर्षण देखे जा सकते हैं। टर्न-बाय-टर्न दिशा निर्देश, आसपास के स्थानों की जानकारी और ऑफलाइन मैप्स की सुविधा कम नेटवर्क वाले क्षेत्रों में भी उपयोगी रहती है।

    AI इटिनेररी प्लान की सुविधा

    ‘यूपी इको टूरिज्म’ ऐप कई मायनों में खास है। नवाचार का सुन्दर प्रयोग करते हुए उपयोगकर्ता को यात्रा कार्यक्रम (इटिनेररी) का विकल्प भी दिया गया है। ऐप का एआई (AI) इटिनेररी प्लानर उपलब्ध दिनों, समय, रुचियों और स्थान के आधार पर व्यक्तिगत यात्रा योजना तैयार करता है। उसे मैप्स व बुकिंग सिस्टम से जोड़ने की योजना है। इसी प्रकार, कम्युनिटी और रिव्यू सेक्शन में यात्री अपने अनुभव साझा कर सकते हैं, फोटो और कहानियां भी अपलोड कर सकते हैं। अन्य यात्रियों की समीक्षाएं पढ़ सकते हैं और रेटिंग देकर दूसरों को सही निर्णय लेने में मदद कर सकते हैं।

    सुरक्षा का खास ख्याल

    सुरक्षा के लिए ऐप में SOS इमरजेंसी फीचर दिया गया है, जिसमें एक टैप अलर्ट, ऑटो लोकेशन शेयरिंग, आपातकालीन संपर्क निर्देशिका और ऑफलाइन एसएमएस सपोर्ट शामिल है। ऐप में उपयोगकर्ता को रियल टाइम नोटिफिकेशन के माध्यम से मौसम अलर्ट, नए इको टूरिज्म डेस्टिनेशन, बुकिंग रिमाइंडर और सरकारी सलाह समय-समय पर मिलती रहेगी। यह ऐप फिलहाल अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध है, शीघ्र ही हिंदी में भी सुलभ होगा। इच्छुक UP Eco Tourism ऐप को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं। शीघ्र ही ios प्लेटफॉर्म पर भी लॉन्च किया जाएगा। 

    ऐप से होगा समय का सदुपयोग-मंत्री

    उत्तर प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘यूपी इको टूरिज्म’ ऐप का उद्देश्य पर्यटकों को एक ही मंच पर प्रदेश के सभी इको पर्यटन स्थलों की समग्र जानकारी उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि अक्सर ऐसा होता है कि किसी पसंदीदा स्थल की सैर के बाद पर्यटकों के पास अतिरिक्त समय बच जाता है, पर उन्हें आस-पास के अन्य प्राकृतिक आकर्षणों की जानकारी नहीं मिल पाती। ऐसी परिस्थितियों में यह ऐप मात्र एक क्लिक पर निकटवर्ती इको टूरिज्म स्थलों का सुझाव देकर उनकी यात्रा को और रोमांचक बनाने में मदद करता है। उन्होंने बताया कि भविष्य में ‘यूपी इको टूरिज्म’ ऐप में कई अन्य सुविधाएं देखने को मिलेंगी।’

  • 15 मार्च को भंडारे के साथ होगा समापन

    रामगढ़ कोठारी गांव में श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ, कलश यात्रा में उमड़े श्रद्धालु

    प्रयागराज। जनपद प्रयागराज की फूलपुर तहसील अंतर्गत रामगढ़ कोठारी गांव में शुक्रवार को श्रीमद्भागवत कथा का भव्य शुभारंभ कलश यात्रा के साथ हुआ। कथा के पहले दिन गांव और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और पूरे क्षेत्र में भक्ति एवं आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला।

    कथा वाचिका श्री राधे सिया जी के सानिध्य में निकाली गई कलश यात्रा गांव के विभिन्न मंदिरों और प्रमुख मार्गों से होकर यज्ञ स्थल तक पहुंची, जहां विधिवत पूजा-अर्चना के साथ कथा का शुभारंभ किया गया। कलश यात्रा में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
    कथा के प्रथम दिन श्रद्धालुओं ने भगवान की कथा श्रवण कर धर्म, भक्ति और जीवन मूल्यों का संदेश ग्रहण किया। आयोजन समिति के अनुसार कथा का वाचन प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक किया जाएगा।

    इस धार्मिक आयोजन की मुख्य यजमान श्रीमती प्रेमा देवी हैं, जबकि कार्यक्रम के मुख्य आयोजक श्री विपिन कुमार शुक्ला और श्री विनय कुमार शुक्ला हैं। आयोजन में योगानंद मिश्र, लल्लन शुक्ला, अनिल कुमार पटेल और दिनेश कुमार पांडेय सहित अनेक ग्रामीणों का भी विशेष सहयोग रहा।

    इस अवसर पर पंडित विमल कुमार मिश्र (सूर्य नारायणी नव दुर्गे देवस्थली, बीकेटी ब्लॉक कुम्भरावा, लखनऊ) भी उपस्थित रहे और उन्होंने श्रद्धालुओं को धर्म एवं भक्ति के महत्व के बारे में बताया।

    पंडित विमल कुमार मिश्र ने बताया कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजनों से समाज में आध्यात्मिक चेतना का विकास होता है और लोगों को धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।
    यह श्रीमद्भागवत कथा 15 मार्च को विशाल भंडारे के साथ संपन्न होगी, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

  • बरेली के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान की कमान संभालेंगे आंवला निवासी निर्मल विजय

    समाजसेवा और व्यापार जगत में भी है खास पहचान

    निर्मल विजय सक्सेना बने आर्य पुत्री इंटर कॉलेज के प्रबंधक, कायस्थ समाज और गणमान्य व्यक्तियों ने दी बधाई

    लखनऊ। बरेली के सुभाष नगर स्थित आर्य पुत्री इंटर कॉलेज की प्रबंध समिति ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए आंवला निवासी निर्मल विजय सक्सेना को कॉलेज का नया प्रबंधक मनोनीत किया है। श्री सक्सेना की इस नियुक्ति से शिक्षा जगत और कायस्थ समाज में हर्ष की लहर है।

    बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी हैं निर्मल विजय

    निर्मल विजय सक्सेना न केवल शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय हुए हैं, बल्कि वे सामाजिक और राजनीतिक रूप से भी काफी प्रभावशाली हैं। वर्तमान में वे निम्नलिखित महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं:
    * प्रदेश अध्यक्ष: अखिल भारतीय कायस्थ कल्याणकारी सभा।
    * महानगर अध्यक्ष: प्रतिनिधि उद्योग व्यापार मंडल।
    * जिला सहसंयोजक: भारतीय जनता पार्टी।
    * व्यवसाय: वे कंस्ट्रक्शन, इंटीरियर और एक्सटीरियर कार्य के प्रतिष्ठित व्यवसायी हैं।

    कायस्थ समाज ने जताई खुशी, दीं शुभकामनाएं

    उनकी नियुक्ति की सूचना मिलते ही कायस्थ समाज के विभिन्न संगठनों और शहर के गणमान्य व्यक्तियों ने उन्हें बधाई दी। हर्ष व्यक्त करने वालों में मुख्य रूप से संजीव सक्सेना (पूर्व महापौर प्रत्याशी), डॉ. अरुण (मंत्री), अधिक सक्सेना (नगर अध्यक्ष), अतुल विजय (आंवला), वेद प्रकाश सक्सेना ‘कातिब’, अश्विनी कमठान, डॉ. सुबोध अस्थाना, आलोक प्रधान, श्यामदीप सक्सेना के अलावा युवा एवं समाजसेवी सुनील सक्सेना ‘मिलन’, मनोज सक्सेना ‘गोपाल धूप वाले’, रवि सक्सेना ‘अवधपुरी’, आशीष सक्सेना, सचिन कंचन, डब्बल भटनागर, अमित सक्सेना ‘मिठ’ तथा आशीष सिन्हा, अनूप सक्सेना, शांतनु सक्सेना, विकास सक्सेना ‘नीटू’, शैलेंद्र सक्सेना ‘शैलू’, सुंदरम सक्सेना ‘गोलू’, अमन सक्सेना, आदित्य सक्सेना ‘हनी’  शामिल रहे।

    शिक्षा की गुणवत्ता पर रहेगा जोर

    प्रबंधक पद पर मनोनीत होने के बाद श्री सक्सेना को बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। शुभचिंतकों का मानना है कि उनके नेतृत्व में आर्य पुत्री इंटर कॉलेज अनुशासन और शिक्षा के नए मानक स्थापित करेगा। समाजसेवा में अग्रणी रहने के कारण उनसे कॉलेज के चहुंमुखी विकास की उम्मीदें जताई जा रही हैं।

  • ‘ब्राइडल ट्रांसफॉर्मेशन’ (दुल्हन का श्रृंगार) के लिए प्रसिद्ध प्वाइंट्स

    आशियाना LDA, लखनऊ के शीर्ष ब्यूटी पार्लर और ब्राइडल मेकअप स्टूडियो

    लखनऊ का आशियाना क्षेत्र अब शहर के प्रमुख कमर्शियल हब के रूप में विकसित हो चुका है। यहाँ सौंदर्य और ग्रूमिंग के लिए कई प्रीमियम विकल्प मौजूद हैं, जो विशेष रूप से ‘ब्राइडल ट्रांसफॉर्मेशन’ (दुल्हन का श्रृंगार) के लिए प्रसिद्ध हैं।

    1. Gals & Guys Unisex Salon

    यह सैलून आशियाना के सबसे पुराने और भरोसेमंद नामों में से एक है। यह अपनी प्रीमियम मेकअप सेवाओं के लिए जाना जाता है।
    * विशेषता: यहाँ का ब्राइडल मेकअप स्टूडियो आधुनिक तकनीकों जैसे Airbrush और HD Makeup में माहिर है। यहाँ प्री-ब्राइडल ग्रूमिंग (फेशियल, वैक्सिंग, मैनीक्योर-पेडिक्योर) के आकर्षक पैकेज मिलते हैं।
    * ब्राइडल पैकेज: सगाई, हल्दी-मेहंदी और मुख्य विवाह समारोह के लिए अलग-अलग कस्टमाइज्ड पैकेजेस।
    * संपर्क: +91 79052 35914
    * स्थान: C, 2/170, LDA कॉलोनी, सेक्टर H, आशियाना।

    2. लैक्मे सैलून (Lakme Salon)

    अगर आप एक स्थापित ब्रांड और मानक गुणवत्ता की तलाश में हैं, तो लैक्मे सैलून सबसे सुरक्षित विकल्प है।
    * विशेषता: यहाँ के मेकअप आर्टिस्ट राष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षित होते हैं। यह सैलून अपनी स्किन केयर कंसल्टेशन के लिए प्रसिद्ध है। दुल्हन के लिए यहाँ ‘ब्यूटी रूटीन’ शादी से कुछ हफ्ते पहले ही शुरू कर दिया जाता है।
    * ब्राइडल पैकेज: यहाँ ‘आइडियल ब्राइड’ पैकेज उपलब्ध हैं जिनमें हेयरस्टाइलिंग, ड्रेपिंग और मेकअप शामिल है।
    * संपर्क: +91 80091 14455
    * स्थान: CP/1, सेक्टर G मार्ग, सेक्टर H, आशियाना।

    3. द टॉप नॉट (The Top Knot)

    स्टाइल और लेटेस्ट ट्रेंड्स के मामले में ‘द टॉप नॉट’ युवाओं की पहली पसंद बनता जा रहा है।
    * विशेषता: यह सैलून विशेष रूप से कंटेम्पररी (आधुनिक) ब्राइडल लुक के लिए जाना जाता है। अगर आप भारी मेकअप के बजाय ‘नेचुरल और ग्लोइंग’ लुक चाहती हैं, तो यह बेस्ट जगह है।
    * सुविधाएं: एडवांस हेयर ट्रीटमेंट, नेल आर्ट और सिग्नेचर ब्राइडल मेकअप।
    * संपर्क: +91 73111 25111
    * स्थान: A6, सेक्टर-J, रेल नगर, आशियाना।

    4. नेचुरल्स सैलून (Naturals Salon)

    खजाना मार्केट के पास स्थित यह सैलून अपनी बेहतरीन सर्विस और फ्रेंडली स्टाफ के लिए लोकप्रिय है।
    * विशेषता: यहाँ दक्षिण भारतीय और उत्तर भारतीय, दोनों तरह के ब्राइडल लुक्स पर विशेषज्ञता उपलब्ध है। इनके पास बजट के अनुकूल (Budget-friendly) विकल्प भी होते हैं।
    * ब्राइडल पैकेज: इनके पैकेज अक्सर ₹8,000 से शुरू होकर प्रीमियम रेंज तक जाते हैं।
    * संपर्क: +91 80900 81000
    * स्थान: पहली मंजिल, खजाना मार्केट चौराहा, सेक्टर K, आशियाना।

    5. विवेरे सैलून – द फैमिली सैलून (Vivere Salon)

    एक संपूर्ण पारिवारिक सैलून जहाँ दुल्हन के साथ-साथ परिवार के अन्य सदस्य भी तैयार हो सकते हैं।
    * विशेषता: यहाँ व्यक्तिगत ध्यान (Personal attention) दिया जाता है। यह सैलून स्वच्छता और रिलैक्सिंग वातावरण के लिए 4.9 रेटिंग रखता है।
    * सुविधाएं: ब्राइडल मेकअप, हेयर स्पा, और स्किन ट्रीटमेंट।
    * संपर्क: +91 91404 90513
    * स्थान: K-39, सेक्टर K, आशियाना।

    सुझाव
    शादी की तैयारी करते समय सही पार्लर का चुनाव करना महत्वपूर्ण है। newsdaily24 की सलाह है कि:
    * ट्रायल जरूर लें: मुख्य दिन से पहले एक डेमो या ट्रायल सेशन बुक करें।
    * बुकिंग: कम से कम 1-2 महीने पहले अपनी डेट बुक कर लें।
    * कंसल्टेशन: अपनी स्किन टाइप और एलर्जी के बारे में आर्टिस्ट को पहले ही बता दें।

    आशियाना, लखनऊ के इन प्रमुख सैलून के रेट कार्ड …

    कृपया ध्यान दें कि ये कीमतें 2026 के अनुमानित रेट्स और उपलब्ध डेटा पर आधारित हैं। शादी के सीजन और विशेष ऑफर्स के अनुसार इनमें बदलाव हो सकता है।

    1. लैक्मे सैलून (Lakme Salon) – रेट कार्ड
    लैक्मे के पास ब्राइडल और पार्टी मेकअप के लिए बहुत ही विस्तृत रेंज है:
    | सेवा का प्रकार | कलाकार (Artist) | वरिष्ठ कलाकार/एक्सपर्ट |
    | वेडिंग मेकअप (Creme Base) | ₹9,500 | – |
    | वेडिंग मेकअप (Liquid Lustre) | ₹13,000 | – |
    | HD एयरब्रश मेकअप | – | ₹26,000 |
    | प्रीमियम/डिजाइनर मेकअप | – | ₹34,000 – ₹45,000 |
    | पार्टी मेकअप (Glam/Radiance) | ₹6,500 | ₹9,000 |
    | मेकअप ट्रायल (Trial Run) | ₹700 – ₹1,000 | ₹1,400 – ₹1,700 |
    * अन्य सेवाएं: आई मेकअप (Eyes only) ₹1,500 से शुरू, आईलैश (Lashes) ₹1,500 – ₹2,000।

    2. द टॉप नॉट (The Top Knot) – रेट कार्ड
    यह सैलून अपने हाई-एंड लुक्स और प्रोफेशनल आर्टिस्ट्स के लिए जाना जाता है:
    * ब्राइडल मेकअप (Starting): ₹15,000 से शुरू।
    * HD ब्राइडल मेकअप: ₹20,000 – ₹30,000।
    * एयरब्रश ब्राइडल मेकअप: ₹28,000 – ₹45,000।
    * सगाई (Engagement) मेकअप: ₹15,000 – ₹20,000।
    * पार्टी मेकअप (Family/Friends): ₹3,500 – ₹5,000 प्रति व्यक्ति।
    * प्री-ब्राइडल पैकेज: ₹35,000 से ₹90,000 (कस्टमाइज्ड)।

    3. नेचुरल्स सैलून (Naturals Salon) – रेट कार्ड
    नेचुरल्स अपनी बजट-फ्रेंडली और पारदर्शी कीमतों के लिए लोकप्रिय है:
    * बेसिक ब्राइडल मेकअप: ₹7,999 – ₹15,000।
    * HD मेकअप: ₹20,000 से शुरू।
    * एयरब्रश मेकअप: ₹25,000 से शुरू।
    * मेट (Matte) मेकअप: ₹12,000 से शुरू।
    * प्री-ब्राइडल पैकेज (बेसिक): ₹9,999 से शुरू (इसमें फेशियल, बॉडी पॉलिशिंग आदि शामिल है)।
    * पार्टी मेकअप (दुल्हन के लिए): ₹6,000।
    * साड़ी ड्रेपिंग: ₹1,000 से शुरू।

    4. गल्स & गया यूनिसेक्स सैलून (Gals & Guys Salon)
    * ब्राइडल मेकअप: इनकी रेंज आमतौर पर ₹15,000 से ₹25,000 के बीच होती है।
    * पार्टी मेकअप: ₹2,500 से ₹5,000 के बीच।
    * विशेष नोट: यह सैलून अक्सर ‘ग्रुप डिस्काउंट’ (4 से ज्यादा लोगों पर 20% तक) ऑफर करता है।

    5. विवेरे सैलून (Vivere Salon)
    * ब्राइडल मेकअप: यहाँ सेवाएं लगभग ₹10,000 – ₹18,000 से शुरू होती हैं।
    * विशेषता: यहाँ Kryolan Waterproof Makeup का विकल्प भी उपलब्ध है।
    * हेयर स्पा/ट्रीटमेंट: ₹1,700 – ₹4,500 के बीच।

    महत्वपूर्ण सुझाव:
    * कंसल्टेशन: अधिकांश सैलून (जैसे विवेरे और टॉप नॉट) फ्री कंसल्टेशन देते हैं, जहाँ आप अपनी स्किन दिखा कर सही पैकेज तय कर सकते हैं।
    * टैक्स: ऊपर दी गई कीमतों में GST अलग से जोड़ा जा सकता है (आमतौर पर 18%)।
    * बुकिंग अमाउंट: ब्राइडल बुकिंग के लिए आमतौर पर 50% एडवांस देना होता है।

  • Bridal Emergency Kit: नई दुल्हन के लिए ‘लाइफ सेवर’ हैं ये चीजें, विदाई से पहले जरूर कर लें तैयार

    ~ शैली सक्सेना

    शादी का दिन जितना खूबसूरत होता है, उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी भी। विदाई के बाद एक नई दुल्हन के लिए नए परिवार में ढलना और हर पल परफेक्ट दिखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। कई बार ऐसी छोटी-मोटी परेशानियां आ जाती हैं जिन्हें आप तुरंत किसी से कह नहीं पातीं। ऐसे में आपकी ‘ब्राइडल इमरजेंसी किट’ आपकी सबसे अच्छी दोस्त साबित होती है।

    newsdaily24 के इस खास आर्टिकल में जानिए कि आपकी किट में मेकअप के अलावा और क्या-क्या होना बेहद जरूरी है:

    1. कपड़ों और स्टाइलिंग के लिए जरूरी सामान

    * सेफ्टी पिन्स और बॉबी पिन्स: दुपट्टा सरक जाए या जूड़ा ढीला हो, रंगीन सेफ्टी पिन्स और एक्स्ट्रा बॉबी पिन्स आपको ऐन वक्त पर शर्मिंदगी से बचाती हैं। इन्हें ‘सेफ्टी’ का नाम यूं ही नहीं दिया गया है।
    * सुई-धागा: लहंगा, ब्लाउज या दुपट्टे में अचानक आई किसी छोटी सी सिलाई की खराबी को ठीक करने के लिए इसे हमेशा पास रखें।
    * डबल साइडेड टेप: यह किट का सबसे जादुई हिस्सा है। मांग टीका फिक्स करना हो, ब्लाउज की फिटिंग संभालनी हो या शू-बाइट (जूते से कटने) से बचना हो, यह हर जगह काम आता है।

    2. पर्सनल हाइजीन और फ्रेशनेस

    * सेनेटरी नैपकिन: तनाव और भागदौड़ में पीरियड्स की डेट ऊपर-नीचे हो सकती है। इसे रखना बिल्कुल न भूलें।
    * हैंड सैनिटाइजर और वाइप्स: नई दुल्हन को सैकड़ों लोगों से मिलना पड़ता है। बार-बार हाथ धोने के बजाय सैनिटाइजर और वेट वाइप्स का इस्तेमाल करें।
    * रुमाल और मेकअप रिमूवर: पसीना पोंछने के लिए सूती रुमाल और रात को भारी मेकअप हटाने के लिए रिमूवर वाइप्स आपकी स्किन को सुरक्षित रखेंगे।
    * परफ्यूम और मिंट: पसीने की बदबू दूर करने के लिए परफ्यूम और माउथ फ्रेशनर के तौर पर मिंट जरूर रखें।

    3. हेल्थ और एनर्जी बूस्टर्स

    * इमरजेंसी दवाइयां: सिरदर्द, बुखार, पेनकिलर और पाचन (एसिडिटी) की गोलियां किट में जरूर होनी चाहिए।
    * चॉकलेट और स्नैक्स: अगर रस्मों के बीच भूख लगे या एनर्जी कम महसूस हो, तो चॉकलेट आपको तुरंत राहत देगी।

    4. गैजेट्स और सुरक्षा

    * पावर बैंक और चार्जर: फोन डिस्चार्ज होना आज के समय में बड़ी मुसीबत है। पावर बैंक साथ रखें ताकि आप अपनों से जुड़ी रहें।
    * आईडी कार्ड और कैश: आपके पास अपनी पहचान का प्रमाण और कुछ नगदी (Cash) होनी चाहिए, इसकी जरूरत कभी भी पड़ सकती है।
    * इमरजेंसी डायरी: दुर्घटना वश अगर फोन खो जाए या बंद हो जाए, तो जरूरी फोन नंबरों वाली एक छोटी डायरी, लिखने को पैड और पैन 🖊️ आपकी बहुत मदद करेंगे।

    5. ग्रूमिंग और ट्रेवल किट

    * हेयर एक्सेसरीज: हेयर स्प्रे और छोटा कंघा बालों को सेट रखने के लिए जरूरी है।
    * मिनी स्विमिंग किट: अगर शादी के तुरंत बाद हनीमून का प्लान है, तो एक मिनी स्विमिंग कॉस्ट्यूम और जरूरी सामान पहले ही पैक कर लें।
    * हाइजीन टूल्स: टूथपिक, डेंटल फ्लॉस, माउथवॉश और रेजर जैसी चीजें भी आपके आत्मविश्वास को बनाए रखती हैं।

    newsdaily24 की खास टिप:

    कोशिश करें कि इन सभी चीजों को छोटे (Mini/Travel size) स्वरूप में रखें ताकि आपकी किट भारी न हो और आप इसे आसानी से कैरी कर सकें। शादी आपकी जिंदगी का अहम हिस्सा है, और एक छोटी सी तैयारी इसे और भी सुखद बना सकती है।
    इस जानकारी को अपनी सहेलियों और होने वाली दुल्हनों के साथ जरूर शेयर करें!

  • बिजनौर के नगीना में दहला देने वाली वारदात

    सफेद कोट पर बिखरा खून, अस्पताल के भीतर मची चीख-पुकार

    वारदात के बाद हमलावर फरार, जांच में जुटी पुलिस

    🚨 मरीज बनकर आया ‘यमदूत’, डॉक्टर के सीने में उतार दीं गोलियां!

    “क्या अब अस्पताल भी सुरक्षित नहीं हैं? क्या मरीज के रूप में मौत आपके सामने खड़ी है? बिजनौर के नगीना से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरे उत्तर प्रदेश के चिकित्सा जगत को हिला कर रख दिया है। एक डॉक्टर, जो जीवन बचाने के लिए रिपोर्ट देख रहा था, उसे क्या पता था कि सामने खड़ा शख्स दवा माँगने नहीं, मौत देने आया है!”

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के नगीना थाना क्षेत्र में गुरुवार शाम एक दुस्साहसिक वारदात सामने आई है। यहाँ एक निजी अस्पताल के संचालक और वरिष्ठ चिकित्सक की उनके ही केबिन में घुसकर गोली मारकर हत्या कर दी गई। हमलावर मरीज बनकर अस्पताल पहुँचा था, जिससे किसी को उस पर शक नहीं हुआ। इस घटना से जिले के चिकित्सा जगत और स्थानीय व्यापारियों में भारी रोष और दहशत का माहौल है।

    परामर्श के बहाने मारी गोली

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान डॉ. राजकुमार के रूप में हुई है, जो नगीना-नजीबाबाद मार्ग पर स्थित अपने निजी अस्पताल का संचालन करते थे। गुरुवार की देर शाम लगभग 07 बजे, जब डॉक्टर अपने केबिन में मरीजों को देख रहे थे, तभी एक अज्ञात युवक मरीज बनकर अंदर दाखिल हुआ।
    प्रत्यक्षदर्शियों और शुरुआती पुलिस जांच के मुताबिक, युवक ने पहले डॉक्टर को कुछ मेडिकल रिपोर्ट दिखाईं। जैसे ही डॉक्टर रिपोर्ट देखने में व्यस्त हुए, युवक ने तमंचा निकालकर उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। गोली लगने से डॉ. राजकुमार लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़े। अस्पताल में चीख-पुकार मचते ही आरोपी मौके का फायदा उठाकर फरार हो गया।

    अस्पताल में मची अफरा-तफरी

    गोली चलने की आवाज सुनकर अस्पताल का स्टाफ और तीमारदार केबिन की ओर दौड़े, लेकिन तब तक हमलावर फरार हो चुका था। आनन-फानन में डॉक्टर को बचाने का प्रयास किया गया, लेकिन घाव गहरे होने के कारण उन्होंने दम तोड़ दिया।

    पुलिस की कार्रवाई और जांच के बिंदु

    घटना की सूचना मिलते ही अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) और क्षेत्राधिकारी (CO) भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे। पुलिस ने घटनास्थल को सील कर दिया है और साक्ष्य जुटाने के लिए फॉरेंसिक टीम को भी बुलाया गया है।
    * CCTV फुटेज: पुलिस अस्पताल के भीतर और बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि हमलावर की पहचान की जा सके।
    * रंजिश की आशंका: पुलिस हत्या के पीछे के कारणों की तलाश कर रही है। इसमें पेशेवर रंजिश, पुरानी दुश्मनी या किसी अन्य विवाद के पहलुओं पर जांच की जा रही है।
    * नाकेबंदी: जिले की सीमाओं और प्रमुख मार्गों पर चेकिंग अभियान चलाया गया है ताकि आरोपी को पकड़ा जा सके।

    स्थानीय लोगों और डॉक्टरों में आक्रोश

    डॉ. राजकुमार क्षेत्र के प्रतिष्ठित चिकित्सकों में से एक थे। उनकी हत्या की खबर फैलते ही अस्पताल के बाहर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और व्यापारी एकत्र हो गए। लोगों ने कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आरोपी की जल्द से जल्द गिरफ्तारी की मांग की है।

    पुलिस का बयान: > “नगीना क्षेत्र के एक निजी अस्पताल में चिकित्सक की हत्या की सूचना प्राप्त हुई है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस की कई टीमें गठित कर दी गई हैं और जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।”

  • छत्तीसगढ़ महिला आयोग की अध्यक्ष का बेबाक बयान लड़कियां अपनी मर्जी से बनाती हैं संबंध फिर खुद ही दर्ज कराती हैं रेप केस रायपुर। अधिकांश मामलों में लड़कियां लिव-इन में रहकर संबंध बनाती हैं। जब शादी नहीं होती या रिश्ता बिगड़ जाता है तो वे रेप का केस दर्ज करा देती हैं। ऐसे में लड़कियों […]

    लड़कियां अपनी मर्जी से बनाती हैं संबंध: डॉ किरणमयी नायक
  • अवैध संबंधों के शक में पति ने खेली ‘खून की होली’

    पत्नी का गला रेता, प्रेमी को तेजाब से जलाया, खुद को भी किया घायल

    शाहजहाँपुर में ट्रिपल अटैक से हड़कंप

    लखनऊ (newsdaily24): रंगों के त्योहार होली से ठीक पहले उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर जिले में एक रूह कंपा देने वाली वारदात सामने आई है। यहाँ अवैध संबंधों के शक में एक सिरफिरे पति ने अपनी पत्नी और उसके कथित प्रेमी पर जानलेवा हमला बोल दिया। आरोपी ने धारदार हथियार से पत्नी का गला काट दिया और प्रेमी के चेहरे पर तेजाब फेंककर उसे बुरी तरह झुलसा दिया। इतना ही नहीं, वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी ने खुद को भी लहूलुहान कर लिया।

    सोते समय हमला, चीख-पुकार से दहला इलाका

    घटना शाहजहाँपुर के रोज़ा थाना क्षेत्र की है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी पति को काफी समय से अपनी पत्नी और गाँव के ही एक युवक के बीच अवैध संबंधों का शक था। इसी रंजिश में सोमवार रात जब दोनों सो रहे थे, तब आरोपी ने खौफनाक योजना को अंजाम दिया।
    * पत्नी पर हमला: आरोपी ने बांके (धारदार हथियार) से पत्नी की गर्दन पर वार किया।
    * प्रेमी पर तेजाब: इसके बाद उसने कथित प्रेमी के चेहरे और शरीर पर तेजाब डाल दिया, जिससे वह गंभीर रूप से झुलस गया।

    खुद की जान लेने की भी कोशिश

    वारदात का पता चलते ही इलाके में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों को इकट्ठा होते देख आरोपी ने उसी हथियार से खुद का गला और शरीर काटकर आत्महत्या का प्रयास किया। मौके पर पहुँची पुलिस ने तीनों को लथपथ हालत में जिला अस्पताल पहुँचाया, जहाँ से गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें हायर सेंटर रेफर किया गया है।

    पुलिस की जाँच और फॉरेंसिक साक्ष्य

    घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए एसपी सिटी और भारी पुलिस बल मौके पर पहुँचा। पुलिस ने घटनास्थल से खून से सना हथियार और तेजाब की बोतल बरामद की है।
    > “प्राथमिक जाँच में मामला प्रेम प्रसंग और शक का लग रहा है। आरोपी ने अपनी पत्नी और एक अन्य युवक पर हमला किया है। तीनों का उपचार चल रहा है और मामले में कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।” – पुलिस प्रशासन, शाहजहाँपुर
    >

    ग्रामीणों में दहशत का माहौल

    होली के उल्लास के बीच हुई इस खूनी वारदात ने पूरे गाँव को सन्न कर दिया है। पुलिस अब इस बात की जाँच कर रही है कि तेजाब कहाँ से लाया गया और क्या इस घटना में कोई और भी शामिल था।

  • [संपादकीय: विशेष विश्लेषण: newsdaily24 डेस्क]

    रिश्तों में बढ़ती कड़वाहट और हिंसा का तांडव—आखिर कहाँ जा रहे हैं हम?

    होली का त्योहार रंगों, उमंग और आपसी गिले-शिकवे मिटाने का पर्व है। लेकिन इस वर्ष उत्तर प्रदेश के महराजगंज और शाहजहाँपुर से आई खबरों ने समाज के अंतर्मन को झकझोर कर रख दिया है। एक ओर जहाँ पत्नी ने पति को पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया, वहीं दूसरी ओर शक की आग में जलते पति ने पत्नी का गला रेत दिया और तेजाब से ‘खून की होली’ खेली। ये घटनाएँ केवल अपराध नहीं हैं, बल्कि हमारे सामाजिक ताने-बाने में लगी उस ‘दीमक’ की पहचान हैं, जो धीरे-धीरे रिश्तों की नींव खोखली कर रही है।

    संवाद का अभाव और बढ़ता आवेश

    इन दोनों घटनाओं के मूल में गौर करें तो संवादहीनता सबसे बड़ा कारण नजर आती है। महराजगंज की घटना में शराब की लत और बुढ़ापे की हताशा ने एक महिला को इतना क्रूर बना दिया कि उसने अपने ही जीवनसाथी को तड़पते छोड़ दिया। वहीं शाहजहाँपुर में ‘संदेह’ ने विवेक को इस कदर अंधा कर दिया कि कानून का खौफ भी खत्म हो गया। आज के दौर में धैर्य (Patience) की कमी और तत्काल प्रतिक्रिया (Instant Reaction) देने की आदत ने छोटी-छोटी बातों को जघन्य अपराध में बदल दिया है।

    नशे की गिरफ्त में बिखरते परिवार

    महराजगंज की घटना प्रत्यक्ष रूप से नशे के दुष्प्रभावों की ओर इशारा करती है। जब शराब का नशा रिश्तों की गरिमा पर हावी हो जाता है, तो इंसान अपनी संवेदनाएं खो देता है। समाज में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति न केवल स्वास्थ्य बिगाड़ रही है, बल्कि यह घरेलू हिंसा का सबसे बड़ा कारक बनकर उभर रही है।

    अविश्वास और डिजिटल युग की चुनौतियां

    शाहजहाँपुर की वारदात में ‘अवैध संबंधों का शक’ केंद्र में है। आज के समय में आपसी विश्वास की कमी और निजी संबंधों में पारदर्शिता का न होना परिवारों को कोर्ट और थानों की दहलीज तक ले जा रहा है। तेजाब जैसे घातक पदार्थों का इस्तेमाल यह दर्शाता है कि अपराधी के मन में पीड़ित को केवल मारने की ही नहीं, बल्कि उसे जीवनभर के लिए विकृत करने की कुंठा भी भरी हुई थी।

    समय की माँग: सामाजिक जागरूकता

    कानून अपनी प्रक्रिया पूरी करेगा, दोषियों को सजा भी मिलेगी, लेकिन क्या सजा मात्र से ये अपराध रुक जाएंगे? शायद नहीं। हमें एक समाज के रूप में निम्नलिखित पहलुओं पर विचार करना होगा:
    * मानसिक स्वास्थ्य: क्या हमारे बड़े-बुजुर्ग या युवा मानसिक तनाव के दौर से गुजर रहे हैं? क्या उनके पास कोई ऐसा है जिससे वे मन की बात साझा कर सकें?
    * सामुदायिक हस्तक्षेप: यदि पड़ोस में या गाँव में किसी परिवार में लगातार झगड़े हो रहे हैं, तो समाज और पंचायत को हस्तक्षेप कर सुलह या कानूनी मदद की कोशिश करनी चाहिए।
    * संस्कार और शिक्षा: नई पीढ़ी को रिश्तों की अहमियत और विपरीत परिस्थितियों में धैर्य रखने की शिक्षा देना अनिवार्य है।

    newsdaily24 का निष्कर्ष

    ये खौफनाक खबरें हमें चेतावनी दे रही हैं। रिश्तों में ‘रंग’ भरने के लिए आपसी विश्वास, सम्मान और प्रेम की आवश्यकता होती है। यदि हम केवल शक और नशे को स्थान देंगे, तो समाज में ‘खून की होली’ के ऐसे ही मंजर बार-बार देखने को मिलेंगे। अब वक्त है कि हम अपनों से बात करें, उनकी सुनें और नफरत की आग को समय रहते संवाद के पानी से बुझा दें।

  • अफजलगढ़ पुलिस की बड़ी कामयाबी

    चोरी की बाइक, मोबाइल, नकदी और अवैध असलहा बरामद

    काशीपुर से चुराई बाइक पर फर्जी नंबर डालकर दे रहे थे वारदातों को अंजाम

    मुठभेड़ में पेट्रोल पंप लुटेरे गिरफ्तार, गोली लगने से एक बदमाश घायल

    बिजनौर (newsdaily24): बिजनौर पुलिस ने अपराध और अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत एक बड़ी सफलता हासिल की है। थाना अफजलगढ़ पुलिस ने पेट्रोल पंप पर सेल्समैन से हुई छिनैती और मोबाइल चोरी की घटनाओं का सफल अनावरण करते हुए दो शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के दौरान हुई मुठभेड़ में एक बदमाश पुलिस की गोली लगने से घायल हो गया है।

    चैकिंग के दौरान हत्थे चढ़ा पहला आरोपी

    दिनांक 3 मार्च 2026 की रात्रि को थानाध्यक्ष बिजेंद्र सिंह राठी के नेतृत्व में पुलिस टीम पड़ाव चौराहे पर संदिग्ध वाहनों की चैकिंग कर रही थी। इसी दौरान एक बाइक सवार को रुकने का इशारा किया गया। पुलिस को देख आरोपी ने भागने की कोशिश की, लेकिन बाइक फिसलने के कारण वह पकड़ा गया। पूछताछ में उसकी पहचान निखिल पुत्र राजपाल (निवासी आलमपुर गावड़ी) के रूप में हुई। उसके पास से 9,000 रुपये नकद बरामद हुए।

    पुलिस मुठभेड़: बदमाश ने चलाई गोली, जवाबी फायरिंग में हुआ घायल

    पकड़े गए निखिल की निशानदेही पर पुलिस ने उसके साथी शरद कुमार गौतम को गिरफ्तार किया। जब पुलिस टीम बरामदगी के लिए उसे बैरागी टांडा मार्ग पर स्थित एक आम के बाग में ले गई, तो शरद ने वहां छिपाकर रखे तमंचे से पुलिस पर जान से मारने की नीयत से फायर कर दिया। पुलिस ने आत्मरक्षार्थ जवाबी फायरिंग की, जिसमें शरद के बाएं पैर में गोली लगी। उसे घायल अवस्था में जिला अस्पताल बिजनौर में भर्ती कराया गया है।

    वारदातों का कबूलनामा और बरामदगी

    पूछताछ में अभियुक्तों ने स्वीकार किया कि:
    * पेट्रोल पंप लूट: 28 फरवरी को उन्होंने भूतपुरी-सुआवाला रोड स्थित भारत पेट्रोल पंप के सेल्समैन से ₹25,000 छीने थे।
    * बाइक चोरी: बरामद मोटरसाइकिल (UK18P7009) 24 फरवरी को उत्तराखंड के काशीपुर से चोरी की गई थी, जिस पर फर्जी नंबर डालकर वे घूम रहे थे।
    * मोबाइल चोरी: 27 फरवरी को सुआवाला रोड स्थित स्टोन क्रेशर के पास से एक मोबाइल चोरी करने की बात भी स्वीकार की।

    पुलिस ने इनके पास से कुल 19,000 रुपये नकद, चोरी की बाइक, एक मोबाइल फोन, एक 315 बोर तमंचा, दो जिंदा कारतूस और एक खोखा बरामद किया है।

    शातिर है अभियुक्तों का आपराधिक इतिहास

    पकड़े गए दोनों आरोपियों का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड है। घायल अभियुक्त शरद कुमार गौतम पर पूर्व में पोक्सो एक्ट और अपहरण जैसी धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं। वहीं, निखिल पर भी चोरी और छिनैती के कई मामले बिजनौर और उत्तराखंड में पंजीकृत हैं।
    > “हमारी टीम ने तत्परता दिखाते हुए लूट और चोरी की घटनाओं का खुलासा किया है। मुठभेड़ में एक अभियुक्त घायल हुआ है, जिसका उपचार चल रहा है। क्षेत्र में अपराध नियंत्रण के लिए पुलिस पूरी तरह सतर्क है।” – थानाध्यक्ष बिजेंद्र सिंह राठी
    >

    पुलिस टीम की सराहना

    सफल अनावरण करने वाली टीम में थानाध्यक्ष बिजेंद्र सिंह राठी के साथ उपनिरीक्षक राजीव कुमार, शिवम तायल, हेड कांस्टेबल विपिन मान और कांस्टेबल देवकरण, विजय राणा, मोनू, विपिन व राजीव कुमार शामिल रहे।

  • लखनऊ पुलिस की बड़ी कार्रवाई; बुद्धेश्वर चौराहे की घटना

    शांतिभंग और संक्रमण फैलाने की धाराओं में केस दर्ज

    मुरादाबादी बिरयानी की दुकान पर थूककर रोटी बनाने का वीडियो वायरल, आरोपी कारीगर गिरफ्तार

    लखनऊ (newsdaily24 ब्यूरो): राजधानी लखनऊ के पारा क्षेत्र से एक विचलित करने वाला मामला सामने आया है, जिसने खाद्य सुरक्षा और जन स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बुद्धेश्वर चौराहे पर स्थित एक मुरादाबादी बिरयानी की दुकान पर रोटी बनाते समय थूकने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी कारीगर को गिरफ्तार कर लिया है।

    सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था वीडियो

    जानकारी के अनुसार, 02 मार्च को सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से प्रसारित हुआ, जिसमें एक युवक तंदूर पर रोटी लगाते समय उस पर थूकता हुआ साफ दिखाई दे रहा था। वीडियो वायरल होते ही स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया और नेटिजन्स ने लखनऊ पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग की।

    पुलिस की जांच और पहचान

    चौकी इंचार्ज बुद्धेश्वर, विनय पटेल ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच शुरू की। पड़ताल में पता चला कि यह वीडियो बुद्धेश्वर चौराहा स्थित एक मुरादाबादी बिरयानी की दुकान का है। वीडियो में दिख रहे युवक की पहचान अनस (निवासी: भानमऊ, कोठी, बाराबंकी) के रूप में हुई है, जो दुकान पर कारीगर के रूप में कार्य करता है।

    कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पारा पुलिस ने आरोपी अनस के खिलाफ संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज की। इंस्पेक्टर पारा, सुरेश सिंह ने बताया कि:
    > “आरोपी को शांतिभंग की धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया है। यह कृत्य न केवल घृणित है, बल्कि जानलेवा बीमारियों के संक्रमण को फैलाने की गंभीर लापरवाही भी है।”

    6 महीने तक की हो सकती है जेल

    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस तरह की लापरवाही जन स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। इसके तहत अपराधी को 6 महीने तक की कैद, भारी जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है। पुलिस अब दुकान संचालक की भूमिका की भी जांच कर रही है कि क्या उसे इस कृत्य की जानकारी थी।

    ब्यूरो रिपोर्ट: संजय सक्सेना newsdaily24 (ब्यूरो चीफ, श्रीजी एक्सप्रेस, लखनऊ)

  • – मेरठ के IIMT कॉलेज में विश्व हिंदू परिषद का भव्य होली मिलन समारोह संपन्न

    – फूलों और गुलाल से खेली गई होली, कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को दी बधाई

    – ‘उत्सव और परंपराएं हिंदू समाज की आत्मा’ – क्षेत्र संगठन मंत्री

    होली पर्व सामाजिक सौहार्द और समरसता का प्रतीक: मुकेश खांडेकर

    मेरठ। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) मेरठ प्रांत की ओर से सोमवार को महानगर के आईआईएमटी (IIMT) कॉलेज के प्रांगण में ‘होली मिलन समारोह’ का अत्यंत भव्य और भावपूर्ण आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित क्षेत्र संगठन मंत्री श्री मुकेश खांडेकर जी ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि होली का पावन पर्व केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि यह हमारे सामाजिक सौहार्द और समरसता का जीवंत प्रतीक है।

    महापुरुषों के दीप प्रज्वलन से हुआ शुभारंभ

    कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ क्षेत्र प्रचारक श्रीमान महेंद्र जी, क्षेत्र संगठन मंत्री श्री मुकेश खांडेकर जी, पूज्य स्वामी यशवीर जी महाराज, प्रांत संगठन मंत्री श्री अरुण पांचजन्य और प्रांत मंत्री श्री राजकुमार जी ने भारत माता के चित्र के समक्ष संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर मेरठ प्रांत के विभिन्न जिलों और महानगरों से आए भारी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

    अधर्म के नाश और धर्म की स्थापना का संदेश

    मुख्य वक्ता मुकेश खांडेकर जी ने अपने संबोधन में भारतीय संस्कृति की गहराई पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा:

    > “भारतवर्ष में आयोजित होने वाले उत्सव, तीर्थ यात्राएं और हमारी परंपराएं प्रत्येक हिंदू की आत्मा में बसी हैं। जब-जब समाज में अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान अत्याचार का अंत करने के लिए अवतार लेते हैं।”

    > उन्होंने भक्त प्रह्लाद और भगवान नरसिंह के प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे ईश्वर ने धर्म की रक्षा की। साथ ही उन्होंने 1947 के वीर सपूतों के बलिदान को याद करते हुए देश की आजादी के संघर्ष को भी नमन किया।

    सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन

    समारोह में भक्ति और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला:

    * हनुमान चालीसा: कार्यक्रम की शुरुआत में सामूहिक हनुमान चालीसा का भावपूर्ण पाठ किया गया।
    * काव्य पाठ: अनिल चंद्र द्विवेदी और राजीव कुमार ने अपनी कविताओं के माध्यम से कार्यकर्ताओं में जोश भरा।
    * नृत्य प्रस्तुति: आईआईएमटी कॉलेज की छात्राओं ने राधा-कृष्ण के भजनों पर मनमोहक नृत्य पेश किया।
    * नाटिका: मुक्ताकाश संस्थान के बच्चों ने भक्त प्रह्लाद के जीवन पर आधारित नाटक प्रस्तुत कर होली के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाया।

    फूलों और गुलाल की होली के साथ संपन्न हुआ उत्सव

    कार्यक्रम के अंत में सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को फूलों और गुलाल से सराबोर कर दिया। सभी ने एक-दूसरे को मिष्ठान खिलाकर पर्व की शुभकामनाएं दीं।

    इस भव्य समारोह में प्रांत उपाध्यक्ष रविंद्र लाम्बा, छाया बहन जी, जितेंद्र चौधरी, अमित जिंदल, मनोज सिरोहा (प्रांत सह मंत्री), निमेष वशिष्ठ (प्रांत संयोजक), अलका तेवतिया, काजल बहन जी (दुर्गा वाहिनी), ललित जोशी (प्रांत प्रचार प्रमुख) और सुधीर अग्रवाल (विभाग मंत्री) सहित हजारों की संख्या में मातृशक्ति और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

    रिपोर्ट: newsdaily24 डेस्क

  • राजधानी के बख्शी का तालाब क्षेत्र में सनसनी; तीन दिन से लापता था युवक, घटनास्थल पर बिखरे मिले सुराग

    बिरयानी शॉप के फ्रीजर में मिली युवक की लाश, हत्या की आशंका

    * मृतक की पहचान: किशनपुर निवासी विजय पाल (38 वर्ष) के रूप में हुई।
    * स्थान: जीसीआरजी कॉलेज के सामने स्थित एक वेज बिरयानी की दुकान।
    * सुराग: एक चप्पल सड़क पर, दूसरी दुकान के अंदर; शराब के पाउच भी बरामद।

    लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बख्शी का तालाब (BKT) इलाके में रविवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक अस्थायी बिरयानी की दुकान के डीप फ्रीजर से एक युवक का शव बरामद हुआ। मृतक की पहचान शुक्रवार दोपहर से लापता किशनपुर गांव निवासी विजय पाल के रूप में हुई है।

    दुकान के संचालक सनी के पिता का हाल ही में निधन हो गया था। इस कारण दुकान बंद थी। रविवार सुबह जब कुछ बर्तन लेने दुकान पहुंचे, तो फ्रीजर के अंदर विजय का शव देखकर उनके होश उड़ गए। उन्होंने तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दी।

    हत्या की ओर इशारा कर रहे हैं साक्ष्य

    घटनास्थल पर मौजूद परिस्थितियों ने पुलिस और फॉरेंसिक टीम को हत्या की आशंका की ओर मोड़ा है। छानबीन के दौरान पुलिस को विजय पाल की एक चप्पल सड़क के किनारे मिली, जबकि दूसरी दुकान के भीतर पाई गई।

    दुकान के अंदर का नजारा:
    * दुकान के भीतर शराब के खाली पाउच और गिलास बरामद हुए हैं।
    * पुलिस का अनुमान है कि संभवतः विजय की हत्या कहीं और की गई और साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से शव को फ्रीजर में डाल दिया गया।
    * अस्थायी दुकान होने के कारण सामने का हिस्सा खुला था, जिससे अंदर प्रवेश करना आसान था।

    पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और पुलिस की जांच

    डीसीपी नॉर्थ गोपाल चौधरी और एडीसीपी ऋषभ रूणवाल ने मौके का मुआयना किया। शुरुआती पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है, जिसके चलते विसरा और हार्ट को सुरक्षित (Preserve) रख लिया गया है।
    पुलिस के अनुसार, विजय पाल जुए और शराब की लत का शिकार था। पुलिस अब उसके मोबाइल की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि यह पता चल सके कि वह आखिरी बार किसके साथ देखा गया था।

    परिजनों का बुरा हाल

    विजय खेती-किसानी के साथ एक टेलीकॉम कंपनी में केबल बिछाने का काम करता था। उसके परिवार में पिता डलई और भाई पवन हैं। बताया जा रहा है कि आपसी विवाद के कारण विजय की पत्नी अपनी 6 वर्षीय बेटी के साथ काफी समय से मायके में रह रही है। फिलहाल परिजनों ने किसी पर सीधा आरोप नहीं लगाया है, लेकिन पुलिस हर पहलू से मामले की तफ्तीश कर रही है।

    ~ रिपोर्ट: newsdaily24 डेस्क

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    संगीतमय सुंदरकांड पाठ से गूँजेगा राजेंद्र नगर, बहेड़ी ग्रुप द्वारा तैयारियाँ पूर्ण

    भव्य आयोजन की रूपरेखा तैयार

    बरेली: मनोकामना मंदिर में 10 मार्च को उमड़ेगा बालाजी भक्तों का सैलाब

    बरेली। धर्म और आध्यात्म की नगरी बरेली में आगामी 10 मार्च को भक्ति की बयार बहने वाली है। श्री बालाजी सुंदरकांड आयोजन समिति, इंदिरानगर (बरेली) की ओर से इस बार संगीतमय सुंदरकांड पाठ का आयोजन अत्यंत भव्य तरीके से किया जा रहा है। इस विशेष धार्मिक अनुष्ठान की जिम्मेदारी इस वर्ष बहेड़ी ग्रुप को सौंपी गई है, जो आयोजन को ऐतिहासिक बनाने में जुटा है। 

    सायं 5 बजे से होगा भक्ति का आगाज़

    आयोजन समिति के मुख्य संरक्षक वेद प्रकाश सक्सेना ‘कातिव’ ने बताया कि श्री बालाजी महाराज की असीम कृपा से यह कार्यक्रम राजेंद्र नगर स्थित प्रसिद्ध ‘मनोकामना मंदिर’ में संपन्न होगा। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलवार, 10 मार्च 2026 को सायंकाल 5:00 बजे होगा। संगीतमय प्रस्तुति के माध्यम से भक्त हनुमान जी की महिमा का गुणगान करेंगे

    भक्तों से अपील

    समस्त आयोजन समिति ने जनपद और आसपास के सभी बालाजी सेवकों और धर्मप्रेमी जनता से विनम्र अनुरोध किया है कि अधिक से अधिक संख्या में पधारकर सुंदरकांड पाठ का श्रवण करें। समिति का मानना है कि ऐसे आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा और भाईचारे का संचार होता है।

    प्रसाद एवं आशीर्वाद

    पाठ के समापन के उपरांत प्रभु का विशेष भोग लगाकर भक्तों में प्रसाद वितरण किया जाएगा। आयोजन समिति के सदस्यों का कहना है कि व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा चुका है और सुरक्षा व सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया है।
    > “हम सभी भक्त श्री बालाजी महाराज के चरणों में हाजिरी लगाने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उत्सुक हैं। यह आयोजन केवल एक पाठ नहीं, बल्कि सामूहिक श्रद्धा का प्रतीक है।” – आयोजन समिति
    >

    मुख्य विवरण एक नज़र में:

    * कार्यक्रम: संगीतमय सुंदरकांड पाठ
    * दिनांक: 10 मार्च 2026
    * समय: शाम 5:00 बजे से
    * स्थान: मनोकामना मंदिर, राजेंद्र नगर, बरेली
    * आयोजक: श्री बालाजी सुंदरकांड आयोजन समिति (इंदिरानगर) एवं बहेड़ी ग्रुप


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  • हरियाणा में योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा कार्यशाला संपन्न

    सूर्या फाउंडेशन और INO के तत्वावधान में देशभर के चिकित्सकों ने लिया प्रशिक्षण

    बिजनौर के प्रतिनिधियों ने भी दर्ज कराई उपस्थिति

    योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा: बिना दवा स्वस्थ रहने का मंत्र

    झिंझोली (हरियाणा): सूर्या साधना स्थली, झिंझोली में सूर्या फाउंडेशन एवं इंटरनेशनल नेचुरोपैथी आर्गेनाइजेशन (INO) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चार दिवसीय ‘डॉक्टर्स मैनेजमेंट ट्रेनिंग कैंप’ का सफलतापूर्वक समापन हो गया। 21 फरवरी से 24 फरवरी 2026 तक चले इस शिविर में संपूर्ण भारत से आए योग एवं प्राकृतिक चिकित्सकों ने भाग लिया, जहाँ उन्हें आधुनिक जीवनशैली में बिना दवाओं के निरोगी रहने के गुर सिखाए गए।

    जन-आंदोलन बनाने का संकल्प

    कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य योग और प्राकृतिक चिकित्सा को एक जन-आंदोलन का रूप देना है। प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से जटिल रोगों का उपचार संभव है। उपस्थित चिकित्सकों ने संकल्प लिया कि वे इस पद्धति को घर-घर तक पहुँचाएंगे ताकि समाज को दवा मुक्त और स्वस्थ बनाया जा सके।

    बिना दवा उपचार की ट्रेनिंग

    चार दिनों तक चले इस गहन प्रशिक्षण शिविर में विभिन्न शारीरिक और मानसिक रोगों के उपचार के लिए प्राकृतिक तौर-तरीकों, खान-पान के नियमों और योगिक क्रियाओं का अभ्यास कराया गया। शिविर में प्रतिभागियों के रहने और सात्विक भोजन की संपूर्ण व्यवस्था आयोजकों द्वारा की गई थी।

    बिजनौर के चिकित्सकों ने बढ़ाया मान

    इस राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला में जनपद बिजनौर से भी महत्वपूर्ण भागीदारी रही। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले मुख्य प्रतिनिधियों में शामिल रहे:
    * डॉ. नरेंद्र सिंह (प्रदेश उपाध्यक्ष संरक्षक)
    * श्री सुनील कुमार राजपूत (जिला अध्यक्ष)
    * श्री ओपी शर्मा
    * योगाचार्य गीता राजपूत

    प्रमाण पत्र वितरण के साथ समापन

    कार्यक्रम के अंतिम सत्र में सभी सफल प्रतिभागियों को ‘डॉक्टर्स मैनेजमेंट ट्रेनिंग’ के आधिकारिक सर्टिफिकेट प्रदान किए गए। आयोजकों ने विश्वास जताया कि यहाँ से प्रशिक्षित होकर निकले चिकित्सक अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर प्राकृतिक चिकित्सा के प्रचार-प्रसार में मील का पत्थर साबित होंगे।

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  • सड़क सुरक्षा पर मुख्य अतिथि चौधरी वीर सिंह ने दी सीख; ‘हेलमेट और सीट बेल्ट’ को बताया जीवन रक्षक

    📍 विवेकानंद महाविद्यालय: NSS शिविर का भव्य समापन और सड़क सुरक्षा का संकल्प! 🛡️🗳️

    बिजनौर। विवेकानंद महाविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय विशेष शिविर का भव्य समापन हुआ। शिविर के अंतिम दिन को ‘मतदाता जागरूकता दिवस’ के रूप में मनाते हुए युवाओं को लोकतंत्र में उनकी भागीदारी का महत्व समझाया गया।

    सरस्वती वंदना से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

    कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के सचिव श्री अतुल कुमार चौहान और मुख्य अतिथि चौधरी वीर सिंह (समाज सेवी व जिला प्रमुख, शिव सेना) द्वारा माँ सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर संयुक्त रूप से किया गया। इस अवसर पर स्वयंसेवकों ने प्रेरणागीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।

    सड़क दुर्घटनाओं पर चिंता: ‘सावधानी ही बचाव है’

    मुख्य अतिथि चौधरी वीर सिंह ने अपने संबोधन में जिले में प्रतिदिन हो रही सड़क दुर्घटनाओं पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने छात्र-छात्राओं को सड़क सुरक्षा के नियमों के प्रति जागरूक करते हुए कहा:
    * “सड़क दुर्घटनाओं से बचने के लिए दोपहिया वाहन पर हेलमेट और कार में सीट बेल्ट का प्रयोग अनिवार्य रूप से करें।”
    * “ट्रैफिक सिग्नल (लाल, हरी बत्ती) का पूर्णतः पालन करें।”
    * “वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात न करें और शराब पीकर वाहन चलाना खुद और दूसरों की जान जोखिम में डालना है।”
    * उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे ‘तेज गति’ के रोमांच से बचें, क्योंकि जिले में हो रही असमय मौतें अत्यंत दुखद हैं।

    ‘गुड समैरिटन’ शिव सेना जिला प्रमुख का सम्मान

    कार्यक्रम के समापन पर महाविद्यालय प्रबंधन द्वारा समाज सेवा और जन-जागरूकता के क्षेत्र में सक्रिय योगदान देने वाले ‘गुड समैरिटन’ एवं शिव सेना जिला प्रमुख चौधरी वीर सिंह को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
    इस अवसर पर महाविद्यालय का समस्त स्टाफ, एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी और बड़ी संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित रहे, जिन्होंने समाज सेवा और सुरक्षा नियमों के पालन का संकल्प लिया।

  • ‘श्री रामलीला सेवा समिति’ ने धूमधाम से निकाला रंगों का जुलूस

    नगर पालिका अध्यक्ष ने किया शुभारंभ

    बिजनौर पुलिस की चाक-चौबंद सुरक्षा के बीच उल्लास के साथ मना पर्व

    बिजनौर। नगर में होली के पर्व की उमंग अपने चरम पर है। इसी क्रम में श्री रामलीला सेवा समिति द्वारा ‘रंगों की एकादशी’ के अवसर पर एक भव्य रंगों का जुलूस निकाला गया। रामलीला ग्राउंड से शुरू हुए इस जुलूस का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती इंदिरा सिंह द्वारा किया गया।

    अबीर-गुलाल से गुलाबी हुआ शहर

    जुलूस की शुरुआत होते ही पूरा वातावरण ‘होली है’ के जयकारों से गूंज उठा। इस बार समिति द्वारा सूखे रंगों और हर्बल गुलाल के प्रयोग पर जोर दिया गया। जुलूस में शामिल हुरियारे मस्ती में झूमते हुए चल रहे थे, जिससे शहर की गलियां और बाजार अबीर-गुलाल के रंगों से सराबोर हो गए। जुलूस में चार बैंड बाजे और आकर्षक झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं, जो उत्सव की शोभा बढ़ा रही थीं।

    डीजे की धुन पर थिरके हुरियारे

    शोभा यात्रा में बज रहे डीजे पर होली के गीतों ने समां बांध दिया। युवाओं और बच्चों की टोलियों ने जमकर नृत्य किया और एक-दूसरे को रंग लगाकर पर्व की बधाई दी। हरे, पीले और गुलाबी रंगों के बीच हुरियारों का जोश देखते ही बन रहा था।

    सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम: बिजनौर पुलिस का सराहनीय योगदान

    इस भव्य आयोजन को शांतिपूर्ण और सुरक्षित संपन्न कराने में बिजनौर पुलिस फोर्स का विशेष योगदान रहा। सुरक्षा की दृष्टि से चप्पे-चप्पे पर पुलिस के जवान तैनात रहे। पुलिस प्रशासन ने पूरी मुस्तैदी दिखाते हुए जुलूस के मार्ग की निगरानी की। विशेषकर ट्रैफिक पुलिस ने यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई, जिससे आम जनता को असुविधा न हो और जुलूस भी निर्बाध रूप से निकलता रहे।

    इनकी रही मुख्य उपस्थिति: शोभा यात्रा का सफल नेतृत्व समिति के पदाधिकारियों और गणमान्य नागरिकों द्वारा किया गया, जिनमें मुख्य रूप से शामिल रहे:
    * संजय गुप्ता (मुख्य संरक्षक)
    * बबली अग्रवाल (अध्यक्ष, बार सभा)
    * अचल अग्रवाल (अध्यक्ष, रामलीला समिति)
    * राहुल शर्मा (महामंत्री)
    * प्रदीप कौशिक ‘बंटी’ (भवन मंत्री)
    इसके साथ ही विनय अग्रवाल, अजय अग्रवाल (एडवोकेट), कपिल चौधरी, राहुल गुप्ता (कोषाध्यक्ष), राजेंद्र गौतम, सुमित सिंघल, वरुण अग्रवाल, संदीप चौधरी, चिराग, वैभव, रचित और विनीत अग्रवाल सहित भारी संख्या में श्रद्धालु और नगरवासी मौजूद रहे।

  • ब्यूरोक्रेट्स इंडिया ने जारी की सूची

    विदेश सचिव और डीजीपी जैसे दिग्गजों के साथ भारतीय डाक सेवा के अधिकारी को मिला सम्मान

    तकनीक और सुशासन के संगम से बदली डाक सेवाओं की सूरत

    देश के ‘टॉप 25 चेंजमेकर्स’ में शामिल हुए पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव

    ~ पंचदेव यादव

    लखनऊ/अहमदाबाद | (27 फरवरी, 2026)।  सुशासन की रीढ़ माने जाने वाले सिविल सेवा अधिकारियों के समर्पण और नवाचार को सम्मानित करते हुए ‘ब्यूरोक्रेट्स इंडिया’ ने वर्ष 2025 के लिए “टॉप 25 चेंजमेकर्स” की अखिल भारतीय सूची जारी की है। इस प्रतिष्ठित सूची में उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ निवासी और भारतीय डाक सेवा के वर्ष 2001 बैच के वरिष्ठ अधिकारी श्री कृष्ण कुमार यादव ने अपनी जगह बनाई है। यह सम्मान उन्हें तकनीक-आधारित और नागरिक-केंद्रित सुधारों के माध्यम से अंतिम छोर तक शासन पहुँचाने के लिए दिया गया है।

    वरिष्ठतम अधिकारियों की सूची में यूपी के लाल का नाम

    इस सूची में विदेश सचिव, विभिन्न राज्यों के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP) सहित देश के चुनिंदा आईएएस, आईपीएस, आईएफएस और केंद्रीय सिविल सेवाओं के 25 प्रभावशाली अधिकारियों को शामिल किया गया है। कृष्ण कुमार यादव का चयन उनके उत्कृष्ट नेतृत्व और लोकसेवा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

    दो दशकों का सफर: डाकघर से डिजिटल केंद्र तक

    इंडिया पोस्ट में दो दशकों से अधिक की सेवा के दौरान श्री यादव ने डाक सेवाओं को आधुनिक रूप प्रदान किया है।
    * प्रमुख सेवाएं: उन्होंने उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी सहित अंडमान-निकोबार, जोधपुर और अहमदाबाद जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दी हैं।
    * नवाचार: वर्तमान में उत्तर गुजरात परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल के रूप में उन्होंने गांधीनगर IIT में देश के पहले ‘जेन-ज़ी’ थीम आधारित डाकघर का शुभारंभ किया, जो युवाओं और आधुनिक तकनीक के बीच एक सेतु बना है।

    साहित्य और सुशासन का अनोखा संगम

    कृष्ण कुमार यादव केवल एक कुशल प्रशासनिक अधिकारी ही नहीं, बल्कि एक प्रख्यात साहित्यकार, कवि और ब्लॉगर भी हैं। उनकी साहित्यिक अभिव्यक्ति सामाजिक विषयों को जनसंवाद से जोड़ने का कार्य करती है। एक ‘नवोदयन’ और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र के रूप में उनकी यह उपलब्धि उत्तर प्रदेश के लिए गौरव का विषय है।

    पारदर्शिता और प्रभावी सेवा वितरण

    उनके नेतृत्व में डाक विभाग की सेवाएं अधिक पारदर्शी और सुलभ बनी हैं। समावेशी शासन और सार्वजनिक सेवा वितरण में प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग ने नागरिकों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया है। ‘ब्यूरोक्रेट्स इंडिया’ ने उनकी कार्यशैली को उत्कृष्टता और भारत की प्रगति के प्रति साझा प्रतिबद्धता का एक सशक्त उदाहरण माना है।

    newsdaily24 विशेष: गौरव का क्षण
    > “श्री कृष्ण कुमार यादव की यह उपलब्धि दर्शाती है कि यदि दृष्टि स्पष्ट हो और तकनीक का सही उपयोग किया जाए, तो पारंपरिक सरकारी विभाग भी आधुनिक बदलाव के वाहक बन सकते हैं।”

  • होली और चंद्र ग्रहण के चलते बदला छुट्टियों का कैलेंडर

    2 से 4 मार्च तक उत्तर प्रदेश में रहेगा तीन दिनों का सार्वजनिक अवकाश

    योगी सरकार का बड़ा फैसला: 28 फरवरी को खुलेंगे दफ्तर, होली से पहले कर्मचारियों के खातों में आएगा वेतन

    लखनऊ | (27 फरवरी, 2026)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों, संविदा कर्मियों और आउटसोर्सिंग स्टाफ को होली का बड़ा तोहफा दिया है। त्योहार की खुशियों में कोई आर्थिक बाधा न आए, इसके लिए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि फरवरी माह का वेतन होली से पहले यानी 28 फरवरी को ही जारी कर दिया जाए। इसी क्रम में शासन ने छुट्टियों के कैलेंडर में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं।

    28 फरवरी को ‘वर्किंग डे’

    सामान्यतः महीने के अंतिम दिनों में छुट्टियों के कारण वेतन प्रक्रिया में देरी हो जाती है, लेकिन इस बार सरकार ने 28 फरवरी (शनिवार) को पूर्ण कार्य दिवस घोषित किया है।
    * वेतन का भुगतान: शनिवार को दफ्तर खुलने से यह सुनिश्चित होगा कि सभी विभागों के पे-रोल समय पर प्रोसेस हो सकें और शनिवार शाम तक कर्मचारियों के बैंक खातों में सैलरी क्रेडिट हो जाए।
    * सफाई कर्मियों को प्राथमिकता: मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से सफाई कर्मियों और दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों का वेतन समय पर देने के कड़े निर्देश दिए हैं।

    होली पर 3 दिन की लगातार छुट्टी का तोहफा

    28 फरवरी (शनिवार) को काम करने के बदले शासन ने होली के अवकाश को विस्तार दिया है। अब प्रदेश में लगातार तीन दिनों तक उत्सव का माहौल रहेगा:
    * 02 मार्च (सोमवार): होलिका दहन के अवसर पर सार्वजनिक अवकाश।
    * 03 मार्च (मंगलवार): 28 फरवरी के कार्यदिवस के बदले घोषित विशेष अवकाश। (इसी दिन पूर्ण चंद्र ग्रहण भी है)।
    * 04 मार्च (बुधवार): धुलेंडी यानी रंगों वाली होली का मुख्य सार्वजनिक अवकाश।

    चंद्र ग्रहण का भी रखा गया ध्यान

    3 मार्च को होने वाले पूर्ण चंद्र ग्रहण के कारण कई धार्मिक संस्थानों और दफ्तरों के समय में बदलाव की संभावना थी। सरकार द्वारा इस दिन छुट्टी घोषित किए जाने से आम जनता को सूतक काल और ग्रहण के समय पूजा-पाठ व अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में भी सुविधा होगी।

    आम जनता और बैंक ग्राहकों के लिए सूचना

    जहाँ सरकारी दफ्तर 28 फरवरी को खुलेंगे, वहीं बैंक नियमों के अनुसार 28 फरवरी (महीने का चौथा शनिवार) होने के कारण बैंक बंद रहेंगे। बैंक ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वे अपने जरूरी काम आज ही निपटा लें या डिजिटल माध्यमों का उपयोग करें।

    newsdaily24 की अपील:
    > “होली के इस पावन पर्व पर शांति और सौहार्द बनाए रखें। सरकार के इस फैसले से अब आप बिना किसी आर्थिक चिंता के रंगों के उत्सव का आनंद ले सकेंगे।”

  • बिना हेलमेट और ‘ओवरलोडिंग’ के साथ सड़क पर उतरीं दादी

    मनोरंजन के साथ सुरक्षा पर भी उठे सवाल

    क्या कहता है राजस्थान ट्रैफिक कानून?

    अजमेर की ‘बुजुर्ग बाइकर’ का वीडियो वायरल: राजस्थानी स्वैग के बीच ट्रैफिक नियमों की अनदेखी बनी चर्चा का विषय

    अजमेर/जयपुर | 27 फरवरी, 2026 सोशल मीडिया पर इन दिनों अजमेर की कुछ बुजुर्ग महिलाओं का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने नेटिजन्स का ध्यान अपनी ओर खींचा है। वीडियो में ‘ड्राइवर दादी’ बड़े ही आत्मविश्वास के साथ बाइक चला रही हैं, जबकि पीछे बैठी अन्य बुजुर्ग महिलाएं राजस्थानी ठाठ और बीड़ी का लुत्फ लेते हुए सफर कर रही हैं। जहाँ एक ओर लोग इसे “असली राजस्थानी स्वैग” और “लेडी डॉन” का नाम दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यह वीडियो यातायात नियमों की गंभीर अनदेखी को भी प्रदर्शित कर रहा है।

    मनोरंजन या जोखिम? ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन

    वीडियो में दिख रहा ‘देसी नजारा’ भले ही चेहरे पर मुस्कान ले आए, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से यह बेहद खतरनाक है। राजस्थान यातायात पुलिस के नियमों के अनुसार, वायरल वीडियो में कई स्पष्ट उल्लंघन देखे जा सकते हैं:
    * हेलमेट की अनिवार्यता: दुपहिया वाहन चालक और पीछे बैठी सवारी (Pillion Rider), दोनों के लिए आईएसआई (ISI) मार्का हेलमेट पहनना अनिवार्य है। वीडियो में किसी भी महिला ने हेलमेट नहीं पहना है।
    * ओवरलोडिंग: दुपहिया वाहन पर केवल दो व्यक्तियों के बैठने की अनुमति है। वीडियो में एक ही बाइक पर दो से अधिक सवारी बैठी नजर आ रही हैं, जो मोटर वाहन अधिनियम की धारा 128 का उल्लंघन है।
    * असुरक्षित ड्राइविंग: ड्राइविंग के दौरान एकाग्रता आवश्यक है, और पीछे बैठी सवारी द्वारा बीड़ी पीना या अन्य गतिविधियां चालक का ध्यान भटका सकती हैं, जो दुर्घटना का कारण बन सकती हैं।

    राजस्थान में क्या है जुर्माने का प्रावधान?

    राजस्थान परिवहन विभाग के मौजूदा नियमों के तहत इन उल्लंघनों पर भारी जुर्माने का प्रावधान है:
    * बिना हेलमेट: ₹1,000 का जुर्माना और 3 महीने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई हो सकती है।
    * ओवरलोडिंग : ₹1,000 का जुर्माना प्रति अतिरिक्त सवारी।
    * खतरनाक ड्राइविंग: स्थिति की गंभीरता के आधार पर ₹1,000 से ₹5,000 तक का जुर्माना या कारावास।

    उम्र का उत्साह बनाम कानून का पालन

    इसमें कोई शक नहीं कि इन बुजुर्ग महिलाओं का आत्मविश्वास और ‘एडवेंचर’ की भावना काबिले तारीफ है; लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ‘स्वैग’ के चक्कर में सुरक्षा को ताक पर रखना भारी पड़ सकता है। अजमेर पुलिस अक्सर सोशल मीडिया के जरिए अपील करती रही है कि चाहे युवा हों या बुजुर्ग, सड़क पर चलते समय नियम सभी के लिए समान हैं।

    निष्कर्ष: मनोरंजन अपनी जगह है, लेकिन सड़क पर सुरक्षित रहना प्राथमिक जिम्मेदारी है। यह वीडियो हमें याद दिलाता है कि जोश में होश खोना भारी पड़ सकता है।

    newsdaily24 की अपील:
    एडवेंचर और उत्साह जीवन के लिए जरूरी हैं, लेकिन सड़क पर चलते समय नियम आपकी और आपके अपनों की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं। “मौज-मस्ती करें, लेकिन हेलमेट जरूर पहनें!”

  • 60 वर्षों की विरासत का साक्षी बनेगा ‘यूपी टूरिज्म’

    ITB बर्लिन-2026 में प्रदेश की समृद्ध संस्कृति और आधुनिक पर्यटन विजन का होगा भव्य प्रदर्शन: जयवीर सिंह

    बर्लिन के वैश्विक मंच पर दिखेगा उत्तर प्रदेश का जलवा

    ~ शैली सक्सेना

    लखनऊ | 27 फरवरी, 2026 उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अब प्रदेश के पर्यटन को सात समंदर पार जर्मनी की राजधानी बर्लिन में नई ऊंचाइयों पर ले जाने की तैयारी कर चुकी है। विश्व पर्यटन उद्योग के सबसे प्रतिष्ठित मंच ‘आईटीबी बर्लिन-2026’ (ITB Berlin) में उत्तर प्रदेश अपनी सांस्कृतिक विरासत, अध्यात्म और आधुनिक पर्यटन संभावनाओं के साथ शिरकत करेगा। आगामी 03 से 05 मार्च तक आयोजित होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय महाकुंभ में यूपी अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराएगा।

    60 साल की गौरवशाली विरासत का उत्सव

    पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि इस वर्ष आईटीबी बर्लिन अपनी स्थापना के 60 वर्ष पूरे कर रहा है। आयोजन की थीम ‘डिस्कवर द स्टोरीज बिहाइंड 60 इयर्स ऑफ लेगेसी’ (60 वर्षों की विरासत के पीछे की कहानियों को जानें) रखी गई है। यह मंच उत्तर प्रदेश के लिए एक सुनहरा अवसर है जहाँ वह दुनिया भर के निवेशकों और नीति-निर्माताओं के साथ सीधा संवाद स्थापित करेगा।

    एडवेंचर से लेकर मेडिकल टूरिज्म तक का प्रदर्शन

    प्रदर्शनी को केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित न रखकर विभिन्न श्रेणियों में बांटा गया है, जिसमें उत्तर प्रदेश अपनी विशेषज्ञता दिखाएगा:
    * विविध टूरिज्म: एडवेंचर, लग्जरी, मेडिकल और बिजनेस ट्रैवल के नए उभरते रुझान।
    * डिजिटल पहुँच: विभाग की आधिकारिक वेबसाइट्स और मोबाइल एप्लीकेशन का वैश्विक प्रदर्शन।
    * वेलनेस और सर्किट: प्रदेश के प्रमुख पर्यटन सर्किट और वेलनेस सेंटर्स की विस्तृत जानकारी।

    बर्लिन में दिखेगी ‘ओडीओपी’ और हस्तशिल्प की चमक

    मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, बर्लिन के एक्सपो सेंटर सिटी में उत्तर प्रदेश का एक भव्य पवेलियन बनाया जाएगा। इस पवेलियन की खासियतें निम्नलिखित होंगी:
    * स्थानीय कला का संगम: प्रदेश की प्रसिद्ध कलाकृतियों और ओडीओपी (एक जनपद, एक उत्पाद) का विशेष प्रदर्शन होगा।
    * बहुभाषी संवाद: विदेशी पर्यटकों की सुविधा के लिए साइनेज और डिस्प्ले अंग्रेजी के साथ-साथ स्थानीय जर्मन भाषा में भी उपलब्ध होंगे।
    * सांस्कृतिक झलक: वीवीआईपी लाउंज और रचनात्मक सेटअप के माध्यम से यूपी की ‘अतिथि देवो भव’ की परंपरा को प्रदर्शित किया जाएगा।

    वैश्विक मानचित्र पर बढ़ेगी यूपी की धमक

    इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन के माध्यम से उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग का लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या में वृद्धि करना और विदेशी निवेशकों को पर्यटन क्षेत्र में आकर्षित करना है। यह आयोजन न केवल यूपी की ब्रांडिंग करेगा, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को पर्यटन के जरिए नई गति भी प्रदान करेगा।

  • पर्यटन विभाग ने शुरू किया सौंदर्यीकरण का कार्य

    सोलर प्लांट, आधुनिक डॉरमेट्री और सुख-सुविधाओं से लैस होगा परिसर

    ₹80.27 लाख से संवरेगा लखनऊ का 87 साल पुराना ‘बारा बिरवा’ धाम

    ~ शैली सक्सेना

    लखनऊ | राजधानी लखनऊ के धार्मिक और सांस्कृतिक मानचित्र पर अब कानपुर रोड स्थित बारा बिरवा का प्रसिद्ध रविदास मंदिर एक नए और भव्य स्वरूप में चमकने को तैयार है। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने इस ऐतिहासिक मंदिर के व्यापक विकास और सौंदर्यीकरण की योजना को धरातल पर उतारना शुरू कर दिया है। इस पूरी परियोजना पर 80.27 लाख रुपए की धनराशि व्यय की जाएगी, जिसमें से विकास कार्यों को गति देने के लिए 60 लाख रुपए की प्रथम किस्त भी जारी कर दी गई है।

    श्रद्धालुओं को मिलेंगी विश्वस्तरीय सुविधाएं

    प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने परियोजना की जानकारी साझा करते हुए बताया कि मंदिर परिसर को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य श्रद्धालुओं को स्वच्छ, सुरक्षित और सुव्यवस्थित वातावरण प्रदान करना है। इसके तहत परिसर में आधुनिक सार्वजनिक शौचालय (सिविल, प्लंबिंग और फायर सेफ्टी सहित) का निर्माण किया जा रहा है। साथ ही, दूर-दराज से आने वाले यात्रियों के विश्राम के लिए सुविधा संपन्न टूरिस्ट रेस्ट रूम और डॉरमेट्री बनाई जाएगी।”

    ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरण पर जोर

    मंदिर को आधुनिकता के साथ-साथ पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए परिसर में 10 किलोवाट क्षमता का सोलर पावर प्लांट स्थापित किया जाएगा। इससे मंदिर की बिजली व्यवस्था सुदृढ़ होगी और ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता आएगी। इसके अतिरिक्त:
    * साइन बोर्ड: बाहर से आने वाले भक्तों के मार्गदर्शन के लिए आधुनिक दिशा-सूचक बोर्ड।
    * स्वच्छता: पूरे परिसर में पर्याप्त संख्या में डस्टबिन और बैठने के लिए आरामदायक बेंच।
    * सुदृढ़ीकरण: मंदिर की ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए उसके बुनियादी ढांचे को मजबूत करना।

    समरसता और आस्था का संगम

    87 साल पुराना यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि संत शिरोमणि गुरु रविदास की शिक्षाओं और सामाजिक समरसता का प्रतीक भी है। संत रविदास सेवा समिति की देखरेख में यहाँ वर्ष भर धार्मिक आयोजन होते हैं, विशेषकर रविदास जयंती पर लाखों की भीड़ जुटती है।
    मंत्री जयवीर सिंह ने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार संत परंपरा से जुड़े पवित्र स्थलों के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस परियोजना को समयबद्ध और सुनियोजित ढंग से पूरा किया जाएगा ताकि लखनऊ की धार्मिक पर्यटन छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान मिल सके।

  • संगठन की मजबूती और किसान हितों के लिए संघर्ष को दी प्राथमिकता

    राजपाल शर्मा ने जारी किया मनोनयन पत्र

    गौरव कुमार बने भारतीय किसान यूनियन के पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रदेश उपाध्यक्ष

    ~भूपेंद्र निरंकारी

    बिजनौर/सिसौली: भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने अपने संगठन का विस्तार करते हुए बिजनौर जनपद के ग्राम स्वाहेडी निवासी गौरव कुमार पुत्र श्री गजेन्द्र सिंह को एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। गौरव कुमार की कार्यकुशलता और संगठन के प्रति समर्पण को देखते हुए उन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पद पर मनोनीत किया गया है।

    भाकियू के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष राजपाल शर्मा द्वारा जारी आधिकारिक मनोनयन पत्र (पत्रांक-42/BKU/2026) में यह घोषणा की गई। पत्र में गौरव कुमार से अपेक्षा की गई है कि वे संगठन की विचारधारा और चौधरी टिकैत जी की नीतियों का प्रचार-प्रसार करते हुए किसान यूनियन को धरातल पर और अधिक मजबूती प्रदान करेंगे।

    गौरव कुमार की इस नियुक्ति से उनके गृह जनपद बिजनौर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर है। समर्थकों का मानना है कि गौरव के नेतृत्व में क्षेत्रीय किसानों की समस्याओं को मजबूती से उठाया जाएगा।

  • TFI के बैनर तले BSA कार्यालय से कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च

    RTE लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को छूट देने की मांग

    टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ बिजनौर में शिक्षकों का हल्लाबोल; प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन

    ~ भूपेंद्र निरंकारी

    बिजनौर। टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI) के आह्वान पर जनपद के सैकड़ों शिक्षकों ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) लागू होने की तिथि से पूर्व नियुक्त अध्यापकों पर टीईटी (TET) की अनिवार्यता थोपने के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर धरना देने के बाद कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकाला और जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को मांग पत्र सौंपा।

    ‘अवैधानिक है टीईटी की अनिवार्यता’

    धरने की अध्यक्षता करते हुए टीएफआई के जिला संयोजक भूपेंद्र कुमार चौहान ने कहा कि जो शिक्षक आरटीई अधिनियम लागू होने से पहले सेवा में आए हैं, उन पर टीईटी की पात्रता थोपना पूरी तरह से असंवैधानिक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार को शिक्षकों के हितों का ध्यान रखते हुए इस समस्या का तत्काल समाधान करना चाहिए।
    सुप्रीम कोर्ट के आदेश और अध्यादेश की मांग
    शिक्षकों ने प्रधानमंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन में उल्लेख किया कि:
    * शिक्षा का अधिकार अधिनियम 27 जुलाई 2011 से प्रभावी हुआ है, अतः टीईटी की अनिवार्यता इसके बाद की नियुक्तियों पर ही लागू होनी चाहिए।
    * 1 सितंबर 2025 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, पुराने शिक्षकों के लिए भी पदोन्नति हेतु टीईटी अनिवार्य कर दिया गया है, जो कि अनुचित है।
    * संसद में अध्यादेश लाकर कानून पारित किया जाए ताकि पूर्व नियुक्त शिक्षकों को इस अनिवार्यता से स्थायी छूट मिल सके।

    विभिन्न शिक्षक संगठनों ने दिखाई एकजुटता

    इस आंदोलन को जनपद के अन्य प्रमुख शिक्षक संगठनों का भी भरपूर समर्थन मिला। जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष सुधीर कुमार यादव ने शिक्षकों को एकजुट होने का आह्वान किया, वहीं माध्यमिक शिक्षक संघ के जिला मंत्री विनोद कुमार ने कहा कि उनका संगठन परिषदीय शिक्षकों की इस न्यायसंगत लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर साथ खड़ा है।

    प्रदर्शन में शामिल मुख्य संगठन:

    प्रदर्शन में मुख्य रूप से निम्नलिखित संगठनों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई:
    * उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ
    * उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ
    * उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ
    * सेवानिवृत शिक्षक संघ
    * आदर्श विशिष्ट बीटीसी वेलफेयर एसोसिएशन
    * ऑल टीचर्स एंड एम्पलाई वेलफेयर एसोसिएशन (ATEWA)

    ये शिक्षक रहे उपस्थित: धरने का संचालन वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेंद्र कुमार ने किया। इस दौरान जिला मंत्री प्रशांत सिंह, राहुल राठी, असीम चौहान, विपिन कुमार शर्मा, नजमा खातून, तारिक अलीम, चंद्रहास सिंह, विजेंद्र सिंह, अनीता रानी, मीनू सिंह, तरनजीत कौर मलिक, और बड़ी संख्या में अन्य शिक्षक साथी मौजूद रहे।

    ~ब्यूरो रिपोर्ट: newsdaily24

  • UP Board Exam 2026: पुलिस की बड़ी कार्रवाई

    हल्दौर पुलिस ने भूपेंद्र सिंह को रंगे हाथों पकड़ा

    असली छात्र सत्यम के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज

    बिजनौर में दूसरे के स्थान पर परीक्षा देते ‘मुन्ना भाई’ गिरफ्तार

    बिजनौर (हल्दौर): उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए प्रशासन की सख्ती के बावजूद जालसाजी के मामले सामने आ रहे हैं। ताज़ा मामला जनपद बिजनौर के थाना हल्दौर क्षेत्र का है, जहाँ पुलिस ने हाईस्कूल की परीक्षा में दूसरे छात्र के स्थान पर परीक्षा दे रहे एक युवक को गिरफ्तार किया है।

    फर्जीवाड़े का खुलासा: केंद्र व्यवस्थापक की सतर्कता आई काम

    दिनांक 25 फरवरी 2026 को झालू स्थित हृदयानन्द सार्वजनिक इण्टर कॉलेज में हाईस्कूल की परीक्षा के दौरान केंद्र व्यवस्थापक श्री प्रशांत कुमार को एक परीक्षार्थी पर संदेह हुआ। जाँच करने पर पता चला कि ग्राम भूतपुरी (थाना नूरपुर) निवासी भूपेंद्र सिंह पुत्र रामपाल सिंह, असली परीक्षार्थी सत्यम के स्थान पर अवैध रूप से परीक्षा दे रहा था।

    केंद्र व्यवस्थापक की तहरीर पर थाना हल्दौर में अभियुक्तों के विरुद्ध मु.अ.सं. 32/2026 के तहत BNS की धारा 319 (2) और उ.प्र. सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम 2024 की धारा 4/11/13 के अंतर्गत मुकदमा पंजीकृत किया गया है।

    पुलिस की त्वरित कार्यवाही और गिरफ्तारी

    मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना हल्दौर पुलिस ने तत्काल कार्यवाही करते हुए अभियुक्त भूपेंद्र सिंह को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस टीम में उपनिरीक्षक कुलदीप कुमार, मुख्य आरक्षी चेतन सिंह और होमगार्ड योगेंद्र सिंह शामिल रहे। पुलिस अब असली छात्र सत्यम की तलाश और मामले की अन्य कानूनी कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

    बरामद किए गए महत्वपूर्ण साक्ष्य

    पुलिस ने अभियुक्त के पास से धोखाधड़ी की पुष्टि करने वाले निम्नलिखित दस्तावेज बरामद किए हैं:
    * हृदयानन्द इण्टर कॉलेज की उपस्थिति शीट की प्रमाणित छायाप्रति।
    * देवता इण्टर कॉलेज मोरना (नूरपुर) की उपस्थिति शीट।
    * हृदयानन्द इण्टर कॉलेज के कमरा नंबर 14 का सीटिंग प्लान।
    * असली परीक्षार्थी सत्यम पुत्र गौरव का प्रवेश पत्र।

    > सम्पादकीय नोट: सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम 2024 के तहत इस तरह के अपराधों में कठोर कारावास और भारी जुर्माने का प्रावधान है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की सेंधमारी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

  • बिजनौर के लिए ऐतिहासिक जीत! 

    “बाहरी नेताओं से सावधान रहने की ज़रूरत, बिजनौर के विकास की चोरी नहीं होने देंगे” — चौधरी वीर सिंह

    गंगा एक्सप्रेसवे की राह साफ़ होने पर शिवसेना ने मनाया जश्न

    बिजनौर। जनपद बिजनौर के विकास को एक नई गति मिलने वाली है। समाचार पत्रों के माध्यम से बिजनौर से गंगा एक्सप्रेसवे निकाले जाने की सूचना प्राप्त होते ही समूचे जनपद में हर्ष की लहर दौड़ गई है। इसी क्रम में आज चांदपुर स्थित बसंती देवी धर्मशाला में शिवसेना की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर इस बड़ी जीत का जश्न मनाया।

    प्रमुखता से उठाई थी मांग, मिला जन-संगठनों का साथ

    बैठक को संबोधित करते हुए शिवसेना जिला प्रमुख चौधरी वीर सिंह ने कहा कि बिजनौर को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने की मांग को शिवसेना ने हमेशा प्रमुखता से उठाया है। इसके लिए लगातार धरना-प्रदर्शन और आंदोलनों के माध्यम से सरकार तक बिजनौर वासियों की आवाज पहुंचाई गई।
    इस संघर्ष में शिवसेना को अकेले नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग का समर्थन प्राप्त हुआ। चौधरी वीर सिंह ने विशेष रूप से निम्नलिखित संगठनों के सहयोग का आभार व्यक्त किया:

    * बार एसोसिएशन चांदपुर और व्यापार संगठन
    * श्री कृष्ण सेना और जाट संघर्ष समिति
    * सफाई कर्मचारी संगठन एवं खिलाड़ी संगठन

    उन्होंने कहा कि इन सभी संगठनों के एकजुट प्रयास और समर्थन का ही परिणाम है कि आज गंगा एक्सप्रेसवे बिजनौर वासियों को मिलने जा रहा है।

    “विकास की चोरी” के प्रति किया आगाह

    जश्न के बीच जिला प्रमुख ने जनता को सतर्क रहने की भी सलाह दी। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, “बिजनौर वासियों को बाहरी नेताओं से सावधान रहने की आवश्यकता है। कहीं ऐसा न हो कि एक बार फिर बिजनौर के विकास को राजनीतिक लाभ के लिए ‘चोरी’ कर लिया जाए।” उन्होंने संकल्प दोहराया कि शिवसेना बिजनौर के हक की लड़ाई इसी तरह लड़ती रहेगी और जिले की जनता के साथ किसी भी प्रकार का छल नहीं होने दिया जाएगा।

    इस खुशी के अवसर पर शिवसेना के वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य रूप से पंडित नरेश शर्मा, विजय मोहन गुप्ता, ऋतुल शर्मा, मुकेश लंबा, दिनेश तोमर शामिल हैं। बैठक के अंत में सभी शिव सैनिकों ने संकल्प लिया कि वे जनपद के सर्वांगीण विकास के लिए सदैव तत्पर रहेंगे।

  • सामाजिक कार्यकर्ता संजय पाण्डे ने किया निरीक्षण

    रानीखेत: राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय की व्यवस्थाओं पर बढ़ा जनता का भरोसा

    अल्मोड़ा के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता ने अस्पताल की कार्यप्रणाली और औषधियों की उपलब्धता की जाँची धरातलीय स्थिति

    रानीखेत (newsdaily24 ब्यूरो): जनसेवा और जनस्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अल्मोड़ा के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता संजय पाण्डे ने रानीखेत स्थित गोविंद सिंह माहरा राजकीय नागरिक चिकित्सालय परिसर में संचालित राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने चिकित्सालय की व्यवस्थाओं की समीक्षा की और मरीजों को मिल रही सुविधाओं की जानकारी ली।

    प्रतिदिन 50-60 मरीज करा रहे उपचार; होम्योपैथी के प्रति बढ़ता रुझान

    निरीक्षण के दौरान संजय पाण्डे ने ओ.पी.डी. पंजीकरण, दवाओं के स्टॉक और मरीजों की दैनिक संख्या का बारीकी से अवलोकन किया। चिकित्सालय में तैनात डॉ. आनंद ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 50 से 60 मरीज उपचार के लिए पहुँच रहे हैं। मरीजों की यह बढ़ती संख्या इस बात का प्रमाण है कि क्षेत्र की जनता का झुकाव अब सुरक्षित और दुष्प्रभाव रहित होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

    निशुल्क दवाओं से आमजन को मिल रही बड़ी राहत

    समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि चिकित्सालय में लगभग सभी आवश्यक होम्योपैथिक औषधियां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। डॉ. आनंद ने स्पष्ट किया कि सरकारी स्तर पर ये सभी दवाइयां मरीजों को पूर्णतः निशुल्क प्रदान की जा रही हैं। इससे विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा प्राप्त करने में बड़ी मदद मिल रही है।

    “सुदृढ़ स्वास्थ्य व्यवस्था ही समाज की वास्तविक शक्ति” – संजय पाण्डे
    निरीक्षण के पश्चात अपने संबोधन में सामाजिक कार्यकर्ता संजय पाण्डे ने कहा: > “जब सरकारी संस्थान पारदर्शिता, नियमितता और संवेदनशीलता के साथ कार्य करते हैं, तो जनता का विश्वास स्वतः ही मजबूत होता है। सुदृढ़ स्वास्थ्य ढांचा ही किसी भी समृद्ध समाज की पहचान है।”

    उन्होंने क्षेत्रवासियों से अपील की कि वे राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय की इन निशुल्क सेवाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। उन्होंने स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता पर जोर देते हुए कहा कि जनसहभागिता और समय-समय पर संस्थानों की समीक्षा से ही व्यवस्थाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

  • ‘ब्रेकिंग न्यूज’: यूपी में दौड़ेगी बुलेट ट्रेन

    रेलवे बोर्ड ने NHSRCL को पुरानी DPR अपडेट करने के दिए निर्देश

    250 से 350 किमी की रफ्तार से सफर होगा आसान

    दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर को हरी झंडी, अयोध्या समेत 12 शहरों में होंगे स्टेशन

    नई दिल्ली/लखनऊ | देश के रेल परिवहन में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। केंद्रीय बजट में घोषित सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में से दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर सबसे पहले काम शुरू करने का फैसला लिया गया है। रेलवे बोर्ड ने ‘नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड’ (NHSRCL) को पत्र लिखकर वर्ष 2021 में तैयार की गई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को तत्काल अपडेट करने का निर्देश दिया है।
    इन 12 शहरों से होकर गुजरेगी ‘सपनों की ट्रेन’
    सूत्रों के अनुसार, नई डीपीआर में स्टेशनों के बदलाव की गुंजाइश बेहद कम है। यह बुलेट ट्रेन दिल्ली (सराय काले खां) से शुरू होकर उत्तर प्रदेश के हृदय स्थल से गुजरते हुए वाराणसी पहुंचेगी।

    प्रस्तावित स्टेशन सूची:

    • दिल्ली (सराय काले खां)
    • नोएडा एवं जेवर (इंटरनेशनल एयरपोर्ट)
    • मथुरा, आगरा एवं फिरोजाबाद
    • इटावा एवं कन्नौज
    • लखनऊ एवं अयोध्या (कनेक्टिंग लिंक)
    • रायबरेली, प्रयागराज एवं भदोही
    • वाराणसी (अंतिम स्टेशन)

    जमीनी स्तर पर तैयारी तेज: 2-3 महीनों में शुरू होगा काम

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बजट में की गई घोषणा के बाद रेलवे बोर्ड एक्शन मोड में है। बोर्ड अधिकारियों का मानना है कि यदि प्रक्रिया सुचारू रही, तो अगले दो से तीन महीनों में परियोजना का कार्य जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगेगा। NHSRCL की एक विशेष टीम ने हाल ही में उत्तर प्रदेश का दौरा कर प्रोजेक्ट के क्षेत्रीय कार्यालयों के लिए स्थानों का चयन शुरू कर दिया है।

    16 लाख करोड़ का निवेश और ‘एक देश-एक मानक’

    वित्त मंत्री ने बजट भाषण में सात कॉरिडोर के लिए 16 लाख करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान जताया है। इन ट्रैक्स पर ट्रेनें 250 से 350 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेंगी। कॉमन स्टैंडर्ड: देश में बुलेट ट्रेन के लिए एक समान तकनीकी मानक तय किए जाएंगे, जिसकी जिम्मेदारी NHSRCL को दी गई है। निगरानी: प्रत्येक प्रोजेक्ट के लिए फील्ड में कोर टीम बनेगी और प्रगति की रिपोर्ट हर हफ्ते सीधे रेलवे बोर्ड को भेजी जाएगी।

    वाराणसी से सिलीगुड़ी तक बढ़ेगा जाल

    दिल्ली-वाराणसी मार्ग के अलावा अन्य प्रमुख कॉरिडोर पर भी काम की योजना है: वाराणसी-सिलीगुड़ी (सर्वेक्षण जल्द) मुंबई-पुणे और पुणे-हैदराबाद हैदराबाद-चेन्नई और हैदराबाद-बंगलूरूबंगलूरू-चेन्नई

    DPR अपडेट करने के सख्त आदेश

    7 फरवरी को हुई बैठक में रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि जिन परियोजनाओं की डीपीआर पहले से तैयार है, उनकी संशोधित लागत (Revised Cost) और भूमि अधिग्रहण से जुड़ी गतिविधियों की सूची जल्द तैयार की जाए। कॉन्ट्रैक्ट डॉक्यूमेंट्स और टेंडर प्रक्रिया को भी तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।

    ~ ब्यूरो रिपोर्ट: newsdaily24

  • ‘फोकस एडजस्ट’ करने वाले चश्मों की चौंकाने वाली सच्चाई

    विशेषज्ञों ने दी सिरदर्द और आंखों में तनाव की चेतावनी

    बिना डॉक्टर की सलाह के ‘इंस्टेंट 20/20’ चश्मे पहनना पड़ सकता है भारी

    सावधान: विज्ञापन के चक्कर में कहीं गंवा न बैठें अपनी आंखें!

    लखनऊ | 25 फरवरी, 2026 (शैली सक्सेना)। सोशल मीडिया और ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट्स पर आजकल ऐसे चश्मों की बाढ़ आई हुई है, जिनका ‘डायल’ घुमाकर आप खुद ही अपना नंबर सेट कर सकते हैं। विज्ञापनों में दावा किया जाता है कि अब आपको महंगे आई-टेस्ट या डॉक्टर के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है। लेकिन क्या ये चश्मे वाकई सुरक्षित हैं? newsdaily24 की विशेष पड़ताल में सामने आया है कि ये ‘जादुई’ चश्मे आपकी आंखों के लिए फायदे से ज्यादा नुकसानदेह साबित हो सकते हैं।

    ‘फोकस एडजस्ट’ या ऑटो-फोकस (जैसे ‘Mag Vision’) करने वाले चश्मे अक्सर विज्ञापनों में एक जादुई समाधान के रूप में पेश किए जाते हैं, जो सभी के लिए एक ही पावर का दावा करते हैं। हकीकत में, ये महंगे रीयूजेबल रीडिंग ग्लासेज हैं जो एकाधिक नंबरों को ठीक नहीं करते, बल्कि केवल धुंधलापन कम कर सकते हैं। ये आँख के तनाव का कारण बन सकते हैं और गंभीर दृष्टि समस्याओं (एस्टिग्मैटिज्म) को नहीं सुधारते।

    क्या है इन चश्मों का विज्ञान?

    ये चश्मे मुख्य रूप से ‘अल्वारेज़ लेंस’ तकनीक पर काम करते हैं। इसमें दो लेंस एक-दूसरे के ऊपर लगे होते हैं, जिन्हें फ्रेम पर लगी एक घुंडी (Dials) के जरिए खिसकाया जाता है। इससे लेंस की पावर कम या ज्यादा हो जाती है। पहली नजर में यह तकनीक बहुत क्रांतिकारी लगती है, लेकिन इसके पीछे के खतरे समझना जरूरी है।

    विज्ञापनों के दावों की पोल खोलती हकीकत

    * सिर्फ ‘रीडिंग’ के लिए सीमित: ये चश्मे केवल साधारण नजदीक या दूर की नजर के लिए काम कर सकते हैं। यदि आपकी आंखों में ‘एस्टिगमैटिज्म’ (सिलिंड्रिकल पावर) है, तो ये चश्मे उसे ठीक नहीं कर सकते।
    * सिरदर्द और चक्कर का खतरा: डॉक्टर जब चश्मा बनाते हैं, तो वे दोनों आंखों के बीच की दूरी (IPD) का सटीक माप लेते हैं। जब आप खुद डायल घुमाकर फोकस सेट करते हैं, तो अक्सर दोनों आंखों में थोड़ा अंतर रह जाता है, जिससे भयानक सिरदर्द और आंखों की मांसपेशियों में खिंचाव हो सकता है।
    * गंभीर बीमारियों की अनदेखी: चश्मे का नंबर बढ़ना कभी-कभी ग्लूकोमा या मोतियाबिंद का संकेत होता है। खुद से चश्मा सेट करने पर आप इन बीमारियों के लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो भविष्य में अंधेपन का कारण बन सकता है।

    विशेषज्ञों की सलाह: कब करें इस्तेमाल?

    नेत्र विशेषज्ञों का मानना है कि इन चश्मों को केवल ‘इमरजेंसी बैकअप’ के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
    * अगर आपका असली चश्मा टूट गया है और आपको तुरंत कुछ पढ़ना है, तो इनका इस्तेमाल कुछ मिनटों के लिए ठीक है।
    * इन्हें रोजाना 8-10 घंटे पहनना आपकी आंखों की रोशनी को स्थाई नुकसान पहुंचा सकता है।

    निष्कर्ष
    सस्ते और विज्ञापनी दावों के झांसे में न आएं। आंखें अनमोल हैं, इसलिए हमेशा लाइसेंस प्राप्त ऑप्टोमेट्रिस्ट या नेत्र रोग विशेषज्ञ से जांच कराने के बाद ही चश्मा बनवाएं।

    ~✓ब्यूरो रिपोर्ट: newsdaily24

  • साइबर अवेयरनेस ट्रेनिंग प्रोग्राम (समूह- सप्तम) संपन्न

    प्रभावी रहा ‘सप्तम समूह’ का कार्यक्रम

    बिजनौर पुलिस की ‘डिजिटल स्ट्राइक’! 🛡️900+ रिक्रूट्स बने ‘साइबर स्मार्ट’

    बिजनौर | (24 फरवरी, 2026)। जनपद बिजनौर में साइबर अपराधों पर लगाम लगाने और भविष्य की पुलिसिंग को तकनीक के साथ सशक्त बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। पुलिस अधीक्षक, जनपद बिजनौर के कुशल निर्देशन में रिजर्व पुलिस लाइन में आयोजित तीन दिवसीय ‘साइबर अवेयरनेस ट्रेनिंग प्रोग्राम (समूह-सप्तम)’ का सफल समापन हुआ। 20 फरवरी से 22 फरवरी तक चले इस प्रशिक्षण सत्र में पुलिस रिक्रूट्स को डिजिटल चुनौतियों से निपटने के गुर सिखाए गए।

    ASP गौतम राय की गरिमामयी उपस्थिति: आधुनिक चुनौतियों पर मंथन

    यह प्रशिक्षण कार्यक्रम सहायक पुलिस अधीक्षक श्री गौतम राय की विशेष उपस्थिति में संपन्न हुआ। प्रतिदिन सुबह 11:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक चले इन सत्रों में साइबर जगत की वर्तमान जटिलताओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

    प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु:

    * डिजिटल ठगी के नए पैंतरे: रिक्रूट्स को बताया गया कि कैसे अपराधी पहचान बदलकर लोगों को शिकार बना रहे हैं।
    * सोशल मीडिया सुरक्षा: प्लेटफॉर्म्स के सुरक्षित उपयोग और डेटा प्राइवेसी पर विशेष सत्र।
    * त्वरित रिपोर्टिंग: साइबर अपराध होने की स्थिति में तत्काल कार्रवाई और रिपोर्टिंग की प्रक्रिया।

    प्रशिक्षकों ने व्यावहारिक उदाहरणों से दी ‘कमांड’

    प्रशिक्षण सत्र के दौरान विषय विशेषज्ञों शशांक कुमार, मनमीत और नैतिक भट्ट ने प्रशिक्षक के रूप में अपनी भूमिका निभाई। उन्होंने केवल किताबी ज्ञान न देकर रिक्रूट्स को निम्नलिखित माध्यमों से प्रशिक्षित किया:
    * लाइव प्रेजेंटेशन: जटिल तकनीकी विषयों को सरल ग्राफिक्स के जरिए समझाया।
    * केस स्टडी: बीते समय में हुए बड़े साइबर अपराधों का विश्लेषण।
    * व्यावहारिक उदाहरण: फील्ड पर आने वाली चुनौतियों और उनके समाधान का लाइव डेमो।

    900 से अधिक रिक्रूट्स ने दिखाई उत्सुकता

    दो दिनों के मुख्य सत्र में भारी संख्या में पुलिस बल की सहभागिता रही:
    * प्रथम दिन: 453 रिक्रूट्स ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।
    * द्वितीय दिन: 455 रिक्रूट्स ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

    कुल मिलाकर 908 रिक्रूट्स ने अपनी डिजिटल दक्षता में सुधार किया और साइबर अपराधों की पहचान व रोकथाम के व्यावहारिक तरीके सीखे।

    सतर्क पुलिसिंग और सुरक्षित डिजिटल बिजनौर

    यह ट्रेनिंग प्रोग्राम बिजनौर पुलिस को टेक्नोलॉजी-सक्षम और संवेदनशील बनाने की दिशा में एक बड़ा निवेश है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के प्रशिक्षण से न केवल साइबर अपराधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा, बल्कि बिजनौर के नागरिकों को एक सुरक्षित और पारदर्शी डिजिटल वातावरण भी उपलब्ध कराया जा सकेगा।

    > “भविष्य की पुलिसिंग के लिए तकनीक का ज्ञान अनिवार्य है। यह प्रशिक्षण हमारे रिक्रूट्स को अपराधियों से दो कदम आगे रहने में मदद करेगा।”  — अभिषेक झा, पुलिस अधीक्षक बिजनौर।

    #CyberSafeBijnor #UPPolice #newsdaily24ब्यूरो रिपोर्ट: newsdaily24

    ~ ब्यूरो रिपोर्ट: newsdaily24

  • कुशीनगर में उमड़ा आस्था का सैलाब: ‘मिनी थाईलैंड’ बना महापरिनिर्वाण स्थल

    थाई राजदूत और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की मौजूदगी में संपन्न हुआ पांच दिवसीय भव्य महोत्सव

    भारत-थाईलैंड सांस्कृतिक रिश्तों को मिली नई ऊँचाई

    ~ शैली सक्सेना

    कुशीनगर/लखनऊ | (24 फरवरी, 2026)। भगवान बुद्ध की पावन महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संस्कृति के अनूठे संगम का गवाह बनी। थाई मोनेस्ट्री कुशीनगर द्वारा आयोजित पांच दिवसीय (20-24 फरवरी) समारोह के अंतिम दिन निकाली गई ’17वीं पवित्र बुद्ध धातु शोभा यात्रा’ ने पूरे क्षेत्र को ‘धम्ममय’ कर दिया। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दिया, बल्कि भारत और थाईलैंड के बीच प्रगाढ़ होते कूटनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों पर भी मुहर लगा दी।

    शोभायात्रा: महापरिनिर्वाण मंदिर से रामाभार स्तूप तक की दिव्य यात्रा

    मंगलवार सुबह हाथी-घोड़ों, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और गाजे-बाजे के साथ शुरू हुई यह शोभायात्रा कुशीनगर के मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर से प्रस्थान कर रामाभार स्तूप पहुँची।

    * वैश्विक सहभागिता: यात्रा में थाईलैंड, नेपाल, तिब्बत, लद्दाख और अन्य हिमालयी क्षेत्रों के हजारों श्रद्धालु शामिल हुए।
    * विशिष्ट अतिथि: मुख्य अतिथि महाराज यतींद्र मोहन प्रताप मिश्रा और थाई राजदूत चवानाथ थानसून फांट ने इस यात्रा की शोभा बढ़ाई।
    * आध्यात्मिक नेतृत्व: थाई बौद्ध धर्म गुरु फ्रा था थेप बोधियोंग और डॉ. पी सोम पोंग की देखरेख में रामाभार स्तूप पर विशेष पूजन-वंदन संपन्न हुआ।

    थाई कलाकारों के ‘सोम पोथा फ्रा धात’ नृत्य ने मोहा मन

    शोभायात्रा का सबसे मुख्य आकर्षण थाईलैंड से आए 50 कलाकारों का समूह रहा। पारंपरिक और सुसज्जित वेशभूषा में सजे इन कलाकारों ने ‘सोम पोथा फ्रा धात’ नृत्य की ऐसी भावपूर्ण प्रस्तुति दी कि उपस्थित जनसमूह मंत्रमुग्ध हो उठा। यह नृत्य थाईलैंड की प्राचीन परंपरा और बुद्ध के प्रति उनकी अगाध श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है।

    पर्यटन क्षेत्र में नया कीर्तिमान: उत्तर प्रदेश बना बौद्ध सर्किट का केंद्र

    उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने इस अवसर पर प्रदेश की उपलब्धियों को साझा किया:
    * रिकॉर्ड पर्यटक: वर्ष 2025 में उत्तर प्रदेश के बौद्ध सर्किट (कुशीनगर, श्रावस्ती, सारनाथ, आदि) में 4.42 लाख से अधिक विदेशी पर्यटकों का आगमन हुआ।
    * इनबाउंड टूरिज्म: यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘बोधि यात्रा’ को बढ़ावा देने और इनबाउंड टूरिज्म के लिए मील का पत्थर साबित हो रहा है।
    * सांस्कृतिक सेतु: मंत्री ने इसे पीएम मोदी और सीएम योगी के विजन का परिणाम बताते हुए कहा कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच एक ‘सांस्कृतिक सेतु’ है।

    पांच दिनों तक रचनात्मकता और सेवा का संगम

    20 फरवरी से शुरू हुए इस महोत्सव में केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि सामाजिक और रचनात्मक गतिविधियाँ भी शामिल रहीं:
    * प्रतियोगिताएं: छात्रों के लिए बुद्ध के संदेशों पर आधारित गायन, चित्रकला और रंग भरो प्रतियोगिता आयोजित की गई।
    * सेवा कार्य: निःशुल्क चिकित्सा शिविर और भिक्षादान के माध्यम से मानवता की सेवा का संदेश दिया गया।
    * सम्मान समारोह: शोभायात्रा के समापन पर विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।

    > “भगवान बुद्ध की शांति और करुणा का संदेश आज भी वैश्विक सद्भाव का सबसे बड़ा आधार है। हम दुनिया भर के बौद्ध अनुयायियों को उत्तर प्रदेश से अपनी बोधि यात्रा शुरू करने के लिए आमंत्रित करते हैं।”
    जयवीर सिंह, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री, उ.प्र.


    ~ ब्यूरो रिपोर्ट: newsdaily24

  • संत निरंकारी मिशन ने गंगा बैराज पर चलाया विशाल स्वच्छता अभियान

    newsdaily24

    ‘स्वच्छ जल-स्वच्छ मन’ के तहत बिजनौर ब्रांच के सेवादारों ने दिखाई अटूट लगन

    बाबा हरदेव सिंह जी के जन्मदिवस पर दी ‘सफाई’ की सौगात

    ~ भूपेंद्र निरंकारी

    बिजनौर। संत निरंकारी मंडल, ब्रांच बिजनौर के तत्वावधान में रविवार को भारत सरकार के सांस्कृतिक मंत्रालय के ‘प्रोजेक्ट अमृत’ (स्वच्छ जल, स्वच्छ मन) के अंतर्गत विशाल स्वच्छता अभियान का आयोजन किया गया। गंगा बैराज घाट पर आयोजित इस पुनीत कार्य में सेवा दल के महिला एवं पुरुष सदस्यों सहित साध संगत के महापुरुषों ने पूरे उत्साह और अनुशासन के साथ श्रमदान किया।

    प्रदूषण अंदर का हो या बाहर का, दोनों ही हानिकारक: मुखी महात्मा

    अभियान का नेतृत्व कर रहे बिजनौर ब्रांच के मुखी महात्मा सुरेंद्र पाल सिंह ने इस अवसर पर संगत को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह अभियान सद्गुरु बाबा हरदेव सिंह जी महाराज के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में चलाया गया है। बाबा जी का संदेश था कि “प्रदूषण चाहे मन के अंदर हो या पर्यावरण के बाहर, दोनों ही हानिकारक हैं।” उन्होंने आगे कहा: “तन् के साथ-साथ समय-समय पर मन की सफाई भी अनिवार्य है। सद्गुरु के दर पर सेवा करने से मन के विकार और मैल धुल जाते हैं। स्वच्छ मन में ही ईश्वर का वास होता है और यह सेवा बड़े सौभाग्य से प्राप्त होती है।”

    वैश्विक स्तर पर निरंकारी मिशन की पहचान

    संबोधन के दौरान जानकारी दी गई कि आज संत निरंकारी मिशन संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) का ब्रांड एंबेसडर है। यह केवल देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी अपनी शाखाओं के माध्यम से सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेता है। जब भी समाज या राष्ट्र को सेवाओं की आवश्यकता होती है, मिशन सदैव तत्पर रहता है।

    इन सेवादारों ने निभाई अहम भूमिका

    सेवादल संचालक विनोद कुमार एडवोकेट के कुशल निर्देशन में आयोजित इस अभियान में बड़ी संख्या में अनुयायियों ने भाग लिया। मुख्य रूप से निम्नलिखित सदस्य उपस्थित रहे:
    पुरुष दल: शिक्षक महात्मा आदित्य, सोनू, डीके सागर, राजवीर सिंह, मनोज कुमार, पत्रकार भूपेंद्र निरंकारी, दीपू सिंह, दीपक खेड़की, अजय कुमार, प्रिंस, दीपक शर्मा, मुन्नू सिंह, अवनीश सिंह, मोहित कुमार, बृजेश सागर एडवोकेट, यशपाल सिंह, मेघराज सिंह, और बृजवीर भारती।
    महिला दल: कल्पना, प्रियांशी, आराधना, किरण, शिक्षिका कलावती, संध्या, लावण्या, गीता, अंजलि, कविता सागर आदि।

    लंगर के साथ समापन

    अभियान के पश्चात महात्मा राधेश्याम जी के सौजन्य से सभी उपस्थित सेवादारों और श्रद्धालुओं को लंगर का प्रसाद वितरित किया गया। कार्यक्रम के अंत में बिजनौर ब्रांच के मुखी महात्मा सुरेंद्र पाल सिंह ने सभी का आभार व्यक्त किया और भविष्य में भी इसी प्रकार के सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहने का आह्वान किया।

  • UP-Bihar Special: ‘फरा’ – स्वाद और सेहत से भरपूर देसी डम्पलिंग्स, नोट करें यह आसान रेसिपी

    उत्तर भारतीय रसोई की खुशबू ‘फरा’ के बिना अधूरी है। उत्तर प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ का यह पारंपरिक व्यंजन आज के ‘मोमोज’ का एक स्वस्थ और पोषण से भरपूर विकल्प है। इसे अक्सर ‘देसी डम्पलिंग्स’ भी कहा जाता है। चूंकि ये भाप (Steam) में पकाए जाते हैं, इसलिए ये लो-कैलोरी होते हैं और डाइटिंग करने वालों के लिए भी बेहतरीन नाश्ता हैं।

    क्यों खास है फरा?

    * ग्लूटेन-फ्री: चावल के आटे से बनने के कारण यह पचने में आसान है।
    * लो-फैट: इसे भाप में पकाया जाता है, जिससे तेल का इस्तेमाल न के बराबर होता है।
    * प्रोटीन का स्रोत: बेसन और दाल (वैकल्पिक) की स्टफिंग इसे मांसपेशियों के लिए अच्छा बनाती है।

    आवश्यक सामग्री (Ingredients)

    1. बाहरी परत (Dough) के लिए:
    * चावल का आटा: 2 कप (हल्का सूखा भुना हुआ)
    * गर्म पानी: 1 से 1.5 कप (गूंथने के लिए)
    * नमक: 1/2 छोटा चम्मच
    * तेल: 1 बड़ा चम्मच

    2. स्टफिंग (Filling) तैयार करने के लिए:
    * उबले आलू: 3 मीडियम साइज (अच्छी तरह मसले हुए)
    * भुना बेसन: 2 बड़े चम्मच (बाइंडिंग के लिए)
    * बारीक कटा प्याज: 1 मध्यम आकार का
    * अदरक-मिर्च का पेस्ट: 1 बड़ा चम्मच
    * मसाले: जीरा (1/2 चम्मच), हींग (एक चुटकी), हल्दी (1/4 चम्मच), धनिया पाउडर (1 चम्मच)
    * नमक: स्वादानुसार
    * ताजा हरा धनिया: 2 बड़े चम्मच (बारीक कटा हुआ)

    3. चटपटा तड़का (Seasoning) के लिए:
    * तेल या घी: 2 बड़े चम्मच
    * राई और करी पत्ता: तड़के के लिए
    * लाल मिर्च पाउडर: 1/4 छोटा चम्मच

    बनाने की विधि (Step-by-Step Recipe)

    स्टेप 1: चटपटी स्टफिंग तैयार करें

    एक कढ़ाही में तेल गरम करें, उसमें जीरा और हींग का तड़का लगाएं। अब प्याज डालकर हल्का सुनहरा होने तक भूनें। इसमें अदरक, हरी मिर्च और सभी सूखे मसाले डालें। अंत में मसले हुए आलू और भुना बेसन मिलाएं। 5 मिनट तक धीमी आंच पर भूनने के बाद हरा धनिया डालें और मिश्रण को ठंडा होने दें।

    स्टेप 2: चावल का नरम आटा गूंथें

    एक बर्तन में भुने हुए चावल के आटे में नमक और तेल मिलाएं। अब धीरे-धीरे खौलता हुआ गर्म पानी डालें और चम्मच से मिलाएं। जब यह छूने लायक हो जाए, तो हाथों से इसे मसलकर एक नरम डो (Dough) तैयार कर लें। इसे 10 मिनट के लिए ढककर छोड़ दें।

    स्टेप 3: फरा को आकार दें और भाप दिलाएं

    आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाएं और उन्हें हथेली पर फैलाकर पूरी जैसा आकार दें। बीच में एक चम्मच आलू की स्टफिंग रखें और किनारों को आपस में जोड़कर बंद कर दें (गुझिया की तरह)। अब स्टीमर या इडली स्टैंड को चिकना करें और इन फरों को 15-20 मिनट तक भाप में पकाएं।

    स्टेप 4: क्रिस्पी तड़का लगाएं

    जब फरा ठंडे हो जाएं, तो उन्हें छोटे टुकड़ों में काट लें। एक पैन में तेल गरम करें, उसमें राई, करी पत्ता और थोड़ी सी लाल मिर्च डालें। फरा के टुकड़ों को इसमें डालकर 2-3 मिनट तक सुनहरा होने तक भूनें।

    सर्विंग सुझाव (How to Serve)

    गरमा-गरम फरा को तीखी लहसुन की चटनी, पुदीने की हरी चटनी या फिर आलू-सेव की पतली करी के साथ परोसें। यह शाम की चाय के साथ एक परफेक्ट स्नैक है।

    सेहत के लिए फायदे (Health Benefits)

    * डायबिटीज फ्रेंडली: कम तेल में बने होने के कारण टाइप 2 डायबिटीज वाले लोग इसे सीमित मात्रा में ले सकते हैं।
    * वेट लॉस: यह पेट को लंबे समय तक भरा रखता है, जिससे आप फालतू कैलोरी खाने से बचते हैं।

    प्रो टिप: अगर आप इसे और ज्यादा पौष्टिक बनाना चाहते हैं, तो आलू की जगह भीगी हुई चना दाल या मूंग दाल को पीसकर उसकी स्टफिंग भी तैयार कर सकते हैं।

  • newsdaily24 के पाठकों लिए कुछ आसान और प्रभावी घरेलू उपाय

    अब घर बैठे तेज करें मिक्सी के ब्लेड की धार

    newsdaily24 डेस्क: मिक्सी के ब्लेड की धार कम होना एक आम समस्या है, लेकिन इसे ठीक करने के लिए आपको हर बार मैकेनिक के पास जाने की जरूरत नहीं है। newsdaily24 के पाठकों लिए यहाँ कुछ आसान और प्रभावी घरेलू उपाय दिए गए हैं:

    1. नमक का इस्तेमाल (सबसे आसान तरीका)

    यह सबसे पुराना और असरदार नुस्खा है।
    * मिक्सी के जार में 2-3 बड़े चम्मच सादा नमक डालें।
    * अब मिक्सी को 1-2 मिनट के लिए चलाएं।
    * नमक के घर्षण (friction) से ब्लेड की धार तेज हो जाती है। बाद में इस नमक को आप खाना पकाने में इस्तेमाल कर सकते हैं।

    2. अंडे के छिलके

    अंडे के छिलके फेंकने के बजाय उन्हें सुखाकर रख लें।
    * सूखे हुए अंडे के छिलकों को जार में डालें।
    * मिक्सी को थोड़ी देर के लिए चलाएं।
    * इससे ब्लेड की धार भी तेज होगी और जार के अंदर जमी गंदगी भी साफ हो जाएगी।

    3. एल्युमिनियम फॉयल

    * एल्युमिनियम फॉयल के छोटे-छोटे टुकड़े करके जार में भर दें।
    * मिक्सी को कुछ सेकंड के लिए घुमाएं।
    * यह प्रक्रिया ब्लेड को फिर से धारदार बना देती है।

    4. पत्थर के नमक (सेंधा नमक) के डले
    अगर आपके पास ढेले वाला सेंधा नमक है, तो उसके छोटे टुकड़ों को मिक्सी में पीसने से भी ब्लेड काफी तीखे हो जाते हैं।

    कुछ जरूरी सावधानियां:

    * सफाई: कई बार ब्लेड के नीचे गंदगी जमा होने से भी वह ठीक से नहीं घूमता। जार को गुनगुने पानी और डिश सोप से अच्छी तरह साफ करें।
    * गीलापन: धार तेज करने के बाद जार को अच्छे से धो लें ताकि नमक या छिलकों के कण निकल जाएं।
    * चेक करें: अगर ब्लेड ढीला है, तो उसे पेचकस (screwdriver) से टाइट कर लें।

    मिक्सी को लंबे समय तक नया जैसा बनाए रखने और बार-बार खराब होने से बचाने के लिए ये मेंटेनेंस टिप्स आपके बहुत काम आएंगे:

    1. जार को कभी पूरा न भरें

    मिक्सी के जार को हमेशा 3/4 (तीन-चौथाई) हिस्सा ही भरें। अगर आप इसे ऊपर तक भर देंगे, तो मोटर पर दबाव बढ़ेगा और ब्लेड जल्दी घिस जाएंगे। साथ ही, ढक्कन खुलने या लीकेज का डर भी रहता है।

    2. पल्स (Pulse) मोड का इस्तेमाल करें

    लगातार 2-3 मिनट तक मिक्सी न चलाएं। इसके बजाय 30 सेकंड चलाएं, फिर रुकें। इससे मोटर ठंडी रहती है और जलने का खतरा कम हो जाता है। सख्त चीजों (जैसे हल्दी या सूखे मसाले) के लिए हमेशा ‘पल्स’ बटन का इस्तेमाल करें।

    3. ठंडे पानी का जादू

    मसाला पीसते समय जार गरम हो जाता है। पीसने के तुरंत बाद जार के निचले हिस्से (कपलर) पर थोड़ा ठंडा पानी डाल दें या जार को ठंडे पानी से धोएं। इससे रबर की वॉशर और बुश (Bush) की लाइफ बढ़ जाती है।

    4. चिकनाई (Oiling) बेहद जरूरी है

    मिक्सी के जार के नीचे जो ब्लेड की रॉड निकली होती है, वहां महीने में एक बार नारियल तेल या मशीन का तेल की एक बूंद डालें। इससे ब्लेड जाम नहीं होंगे और आवाज भी कम करेंगे।

    5. गरम चीजें सीधे न पीसें

    उबली हुई सब्जियां या गरम दाल सीधे मिक्सी में न डालें। गरम भाप के दबाव से ढक्कन उछल सकता है और जार की सील खराब हो सकती है। हमेशा सामग्री को कमरे के तापमान (Room Temperature) पर आने दें।
    सफाई का सही तरीका:
    * नींबू के छिलके: जार से बदबू आ रही हो, तो नींबू के छिलके डालकर एक बार मिक्सी घुमा दें।
    * बेकिंग सोडा: अगर जार अंदर से पीला पड़ गया है, तो बेकिंग सोडा और पानी का पेस्ट बनाकर 15 मिनट छोड़ दें, फिर धो लें।

    एक प्रो-टिप: मिक्सी चलाने से पहले हमेशा सुनिश्चित करें कि जार मोटर पर ठीक से फिट बैठा है। गलत फिटिंग से जार के नीचे के दांत (Coupler) टूट सकते हैं।

  • ‘दिलचस्प तथ्य’: ढक्कन में ही छिपा है दिलचस्प गणित और विज्ञान

    बोतल के ढक्कन में 21 धारियां: क्या कभी गिनी आपने?

    नई दिल्ली (newsdaily24): हम रोज़ाना कोल्ड ड्रिंक या बियर की बोतलें खोलते हैं, लेकिन क्या कभी आपने उसके ‘क्राउन कैप’ यानी ढक्कन पर ध्यान दिया है? पहली नज़र में साधारण दिखने वाले इस छोटे से धातु के टुकड़े में इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना छिपा है। दुनिया भर में बिकने वाली इन बोतलों के ढक्कन पर हमेशा 21 धारियां (दांत) ही होती हैं। आइए जानते हैं इसके पीछे का दिलचस्प गणित और विज्ञान।

    1. 24 से 21 का सफर: क्यों बदली गई संख्या?

    सन् 1892 में जब विलियम पेंटर ने ‘क्राउन कॉर्क’ का आविष्कार किया, तब शुरुआती ढक्कनों में 24 धारियां हुआ करती थीं। लेकिन इस्तेमाल के दौरान दो बड़ी समस्याएं आईं:
    * पहली: 24 धारियों वाला ढक्कन बोतल के मुंह को इतनी मजबूती से पकड़ लेता था कि उसे खोलने की कोशिश में अक्सर कांच की बोतल टूट जाती थी।
    * दूसरी: यदि धारियां कम कर दी जातीं, तो अंदर भरी गैस (Carbonation) लीक हो जाती थी।

    कई साल के परीक्षण के बाद ’21’ को सबसे सटीक संख्या माना गया, जो न तो बहुत सख्त है और न ही ढीली।

    2. विज्ञान: 21 धारियां ही क्यों हैं जरूरी?

    इसके पीछे मुख्य रूप से तीन तकनीकी कारण काम करते हैं:
    * समान दबाव का वितरण: कोल्ड ड्रिंक और बियर में उच्च दबाव वाली कार्बन डाइऑक्साइड गैस होती है। 21 धारियां इस दबाव को बोतल के चारों ओर समान रूप से बांट देती हैं, जिससे ढक्कन उखड़ता नहीं है।
    * ग्रिप और सीलिंग: ये 21 दांत बोतल के कांच पर एक ‘परफेक्ट लॉक’ बनाते हैं। यह संख्या एक विषम संख्या (Odd Number) होने के कारण सीलिंग मशीन को बेहतर संतुलन प्रदान करती है।
    * खोलने में आसानी: यह संख्या इतनी संतुलित है कि एक साधारण ओपनर के हल्के दबाव से ढक्कन आसानी से खुल जाता है, बिना बोतल को नुकसान पहुंचाए।

    3. ढक्कन के अंदर की वो ‘खास परत’

    क्या आपने कभी सोचा है कि ढक्कन के अंदर प्लास्टिक या रबर की एक पतली गोल परत क्यों होती है?
    * गैस्केट का काम: धातु और कांच कभी भी एक-दूसरे के साथ पूरी तरह एयर-टाइट नहीं हो सकते। यह प्लास्टिक लाइनर एक ‘गैस्केट’ की तरह काम करता है, जो गैस को बाहर निकलने और बाहर की ऑक्सीजन को अंदर जाने से रोकता है।
    * स्वाद बरकरार: यदि यह परत न हो, तो आपकी ड्रिंक कुछ ही घंटों में ‘बेस्वाद’ और ‘फ्लैट’ हो जाएगी।

    4. ट्विस्ट-ऑफ तकनीक: बिना ओपनर का जादू

    आजकल कई बोतलों के ढक्कन हाथ से घुमाकर (Twist-off) खुल जाते हैं। इनमें भी 21 धारियां ही होती हैं, लेकिन बोतल के गले पर बारीक चूड़ियां (Threads) बनी होती हैं। जब मशीन ढक्कन को दबाती है, तो ढक्कन के दांत उन चूड़ियों का आकार ले लेते हैं, जिससे उन्हें हाथ से घुमाना संभव हो पाता है।

    > विशेष सुझाव: अगली बार जब आप अपनी पसंदीदा ड्रिंक का ढक्कन खोलें, तो उन 21 धारियों को गिनना न भूलें। यह छोटा सा ढक्कन इस बात का प्रमाण है कि एक छोटी सी चीज़ को ‘परफेक्ट’ बनाने के लिए भी कितना गहरा शोध किया जाता है।

  • newsdaily24 पर आज के महत्वपूर्ण समाचार

    [20/02, 6:38 am] Sanjay Saxena: *साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण कब लगेगा, होलिका दहन या होली किसे करेगा प्रभावित*
    https://news.newzo.in/Lnk/SRWR202602200637393022349857


    [20/02, 6:40 am] Sanjay Saxena: *मृत्यु के बाद गरुड़ पुराण क्यों पढ़ते हैं? जानिए रहस्य*
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    [20/02, 7:45 am] Sanjay Saxena: *Rashifal 20 February: गजकेसरी योग से चमकेगी 4 राशियों की किस्मत*
    https://campaign.astropanchang.in/Lnk/SRWR202602200637214781969825


    [20/02, 7:45 am] Sanjay Saxena: *पेट्रोल-डीजल के रेट, कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग*
    https://news.newzo.in/Lnk/SRWR202602200638554781969124


    [20/02, 7:45 am] Sanjay Saxena: *बोनट पर गिरे युवक को टांगकर एक किलोमीटर दौड़ाई कार, गिरने पर कुचल कर भागे, मौत*
    https://news.newzo.in/Lnk/SRWR202602200639334781962874


    [20/02, 7:46 am] Sanjay Saxena: *रेलवे ने 10 ट्रेनों से छीना सुपरफास्ट का तमगा, किराया भी हो जाएगा कम; देखें लिस्ट*
    https://news.newzo.in/Lnk/SRWR202602200640534781966017


    [20/02, 9:18 am] Sanjay Saxena: *मार्केट का गेम बदलने आ रही न्यू ब्रेजा, इसमें CNG सिलेंडर भी मिलेगा*
    https://news.newzo.in/Lnk/SRWR202602200917523022341347


    [20/02, 9:35 am] Sanjay Saxena: *बारिश के मौसम में कीड़ों से भर जाती हैं ये सब्जियां, इस मौसम में खाने से जरूर बचें*
    https://news.newzo.in/Lnk/SRWR202602200934143022348529


    [20/02, 9:36 am] Sanjay Saxena: *पूर्व प्रेमिका ने अपनी शादी में बुलाया, अकेले पहुंचा प्रेमी, भरी महफिल में जो किया, लड़का हो गया शर्मिंदा!*
    https://news.newzo.in/Lnk/SRWR202602200935593022344953


    [20/02, 9:37 am] Sanjay Saxena: *बोर्ड ऑफ पीस की पहली ही बैठक में शहबाज शरीफ की बेइज्जती, किनारे धकेले गए- VIDEO*
    https://news.newzo.in/Lnk/SRWR202602200936473022347537


    [20/02, 9:44 am] Sanjay Saxena: *एक फोटो के लिए ले ली बेजुबान की जान? 72 साल के पूर्व मंत्री ने मारी दुर्लभ शार्क, फिर पोस्ट की सेल्फी!*
    https://news.newzo.in/Lnk/SRWR202602200940474781967368


    [20/02, 9:44 am] Sanjay Saxena: *इंतजार खत्म! फाइनली आज लॉन्च होने जा रही नई टाटा पंच EV; जानिए डिजाइन, फीचर्स से रेंज तक सबकुछ*
    https://news.newzo.in/Lnk/SRWR202602200942484781961949


    [20/02, 11:45 am] Sanjay Saxena: *लखनऊ की सड़कों पर मौत का तांडव: अलग-अलग हादसों में 3 की मौत, 8 गंभीर घायल*
    https://wp.me/pcjbvZ-bwP


    [20/02, 1:38 pm] Sanjay Saxena: *कान्हा रेस्टोरेंट में IT रेड: दीवारों में स्ट्रांग रूम बनाकर छुपाए गये थे करोड़ों के जेवरात, चमक देख चौंधिया गई अफसरों की आंखें*
    https://news.newzo.in/Lnk/SRWR202602201338043022341642


    [20/02, 1:40 pm] Sanjay Saxena: *‘हर गेंद पर लप्पा नहीं मार सकते, कंफर्ट जोन से निकले बाहर’ अभिषेक शर्मा को सरहद पार से मिली बड़ी सलाह*
    https://news.newzo.in/Lnk/SRWR202602201338553022343949


    [20/02, 2:02 pm] Sanjay Saxena: *बॉबी देओल की फिल्म ‘बंदर’ की रिलीज डेट अनाउंस, इस दिन सिनेमाघरों में देगी दस्तक*
    https://nz.e24bollywood.com/Lnk/SRWR202602201355164781963874


    [20/02, 2:02 pm] Sanjay Saxena: *3 साल की बच्ची का रेप, वारदात से पहले खेलता रहा आरोपी, दिल दहलाने वाले खुलासे*
    https://campaign.indianews.in/Lnk/SRWR202602201357064781965334

  • बोनट पर 1 किमी तक घसीटा, MBBS छात्र की भी गई जान

    राजधानी की सड़कों पर ‘रफ्तार’ बनी काल

    लखनऊ की सड़कों पर मौत का तांडव: अलग-अलग हादसों में 3 की मौत, 8 गंभीर घायल

    लखनऊ | विशेष संवाददाता। राजधानी लखनऊ में पिछले 24 घंटे सड़क हादसों के नाम रहे। तेज रफ्तार और यातायात नियमों की अनदेखी ने दो घरों के चिराग बुझा दिए। सबसे वीभत्स घटना एलडीए कॉलोनी में सामने आई, जहाँ एक कार चालक ने युवक को टक्कर मारने के बाद उसे बोनट पर लटकाकर करीब एक किलोमीटर तक घसीटा। वहीं, विभूतिखंड इलाके में एक होनहार एमबीबीएस छात्र की ट्रक की चपेट में आने से मौत हो गई।

    1. मानवता शर्मसार: बोनट पर लटके युवक को 1 KM तक घसीटा, फिर कुचला

    स्थान: बरिगवां, एलडीए कॉलोनी
    एलडीए कॉलोनी के बरिगवां इलाके में दिल दहला देने वाली वारदात हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, एक तेज रफ्तार वैगनआर कार ने सड़क किनारे खड़े विमल पाल (35) को जोरदार टक्कर मारी।
    * खौफनाक मंजर: टक्कर लगते ही विमल कार के बोनट पर गिर गए। अपनी जान बचाने के लिए उन्होंने कार के वाइपर को कसकर पकड़ लिया और चालक से गाड़ी रोकने की गुहार लगाई।
    * चालक की बर्बरता: आरोपी चालक ने गाड़ी रोकने के बजाय रफ्तार और बढ़ा दी। विमल करीब एक किलोमीटर तक बोनट पर लटके रहे, लेकिन अंततः पकड़ छूटने पर वह सड़क पर गिर गए और कार उन्हें कुचलते हुए निकल गई। विमल की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि हत्यारे चालक को दबोचा जा सके।

    2. कंटेनर की टक्कर से लोहिया संस्थान के MBBS छात्र की मौत

    स्थान: विभूतिखंड (UP-112 मुख्यालय के सामने)
    विभूतिखंड थाना क्षेत्र में एक और भीषण हादसा हुआ, जिसने चिकित्सा जगत को शोक में डुबो दिया। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के एमबीबीएस अंतिम वर्ष के छात्र ध्रुव अग्रवाल (23) अपने भाई के साथ बाइक से जा रहे थे।
    * कैसे हुआ हादसा: यूपी-112 मुख्यालय के सामने एक अनियंत्रित कंटेनर ने उनकी बाइक को पीछे से टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि ध्रुव छिटककर सामने से आ रहे एक अन्य ट्रक के नीचे आ गए।
    * हॉस्पिटल में मातम: ध्रुव की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके भाई गंभीर रूप से घायल हैं। ध्रुव एक होनहार छात्र थे और जल्द ही डॉक्टर बनने वाले थे। पुलिस ने कंटेनर को कब्जे में ले लिया है, हालांकि चालक फरार होने में कामयाब रहा।

    3. लखनऊ-कानपुर हाईवे: बारात से लौट रही वैन दुर्घटनाग्रस्त

    स्थान: बंथरा बॉर्डर
    उन्नाव-लखनऊ बॉर्डर के पास एक वैन और अज्ञात वाहन के बीच भीषण भिड़ंत हो गई। वैन में सवार लोग एक शादी समारोह से लौट रहे थे। इस हादसे में एक मजदूर की मौत हो गई, जबकि 7 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हैं। घायलों को इलाज के लिए ट्रामा सेंटर भेजा गया है, जहाँ दो की हालत चिंताजनक बनी हुई है।

    > ‘newsdaily24’ की अपील: > सड़क पर वाहन चलाते समय गति सीमा का ध्यान रखें और सुरक्षा उपकरणों (हेल्मेट/सीटबेल्ट) का प्रयोग अनिवार्य रूप से करें। आपकी एक लापरवाही परिवार को उम्र भर का गम दे सकती है।

    पुलिस प्रशासन का आधिकारिक बयान
    “राजधानी में हुई इन तीनों घटनाओं में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है। कुल 3 मौतों की पुष्टि हुई है और घायलों का उपचार ट्रामा सेंटर में चल रहा है। फरार चालकों की गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित कर दी गई हैं।”
    — प्रवक्ता, लखनऊ पुलिस

  • किसी को रिवाॅल्वर, देशी कट्टा या पिस्टल लेनी हो तो संपर्क करें यह मैसेज सुनकर भले ही विश्वास नहीं हो, लेेकिन यह हकीकत सोशल मीडिया की है। हथियार तस्कर ऐसे विज्ञापन सोशल मीडिया पर खुलेआम पोस्ट कर रहे हैं। फेसबुक पर हथियार तस्कर वाट्सऐप नंबर उपलब्ध करा रहे हैं। गैंगस्टर Durlabh Kashyap के नाम से […]

    कट्टा रिवाल्वर पिस्टल की खुलेआम होम डिलीवरी
  • बहराइच में हृदयविदारक और हैरान कर देने वाली घटना

    प्रसव पीड़ा से तड़पती बेबस मां ने चाकू से खुद पेट चीर कर नवजात को निकाला बाहर

    लखनऊ (19 फरवरी, 2026)। उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ फखरपुर थाना क्षेत्र के नंदवल गांव में एक गर्भवती महिला ने असहनीय प्रसव पीड़ा और घर में किसी की मौजूदगी न होने के कारण खौफनाक कदम उठा लिया। महिला ने स्वयं ही चाकू से अपना पेट फाड़कर नवजात बच्ची को बाहर निकाल लिया। फिलहाल महिला की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है और उसे लखनऊ के ट्रामा सेंटर रेफर किया गया है।

    मदद के अभाव में उठाया आत्मघाती कदम

    नंदवल गांव निवासी 34 वर्षीय ननकई गर्भवती थी। गुरुवार दोपहर को उसे अचानक तेज प्रसव पीड़ा (Labor Pain) शुरू हुई। दुर्भाग्यवश, उस समय घर पर कोई भी मौजूद नहीं था जो उसे अस्पताल पहुंचा सके या उसकी मदद कर सके। पीड़ा जब बर्दाश्त से बाहर हो गई, तो महिला ने घर में रखे चाकू से अपने पेट पर वार कर उसे चीर दिया और कोख से नवजात बच्ची को बाहर खींच लिया।

    खून से लथपथ मिली महिला, हड़कंप

    महिला की चीख-पुकार सुनकर जब आसपास की ग्रामीण महिलाएं घर के भीतर पहुंचीं, तो वहां का नजारा देख उनके होश उड़ गए। ननकई खून से लथपथ तड़प रही थी और पास ही नवजात बच्ची थी। ग्रामीणों ने तत्काल इसकी सूचना स्थानीय एएनएम (ANM) को दी, जिसके बाद एम्बुलेंस बुलाकर उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) फखरपुर ले जाया गया।

    लखनऊ ट्रामा सेंटर रेफर, नवजात सुरक्षित

    सीएचसी में प्राथमिक उपचार के बाद महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। वहां डॉ. शिवम मिश्रा और डॉ. राजेश सोनकर ने उपचार शुरू किया, लेकिन आंतरिक चोटें और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण हालत चिंताजनक देख उसे तत्काल लखनऊ ट्रामा सेंटर भेज दिया गया।

    मेडिकल बुलेटिन: मेडिकल कॉलेज के सर्जन एफ.आर. मलिक ने बताया कि महिला की स्थिति काफी नाजुक है, जबकि नवजात बच्ची पूरी तरह स्वस्थ है और उसे महिला विंग में भर्ती किया गया है।

    6 माह पहले हुई थी पति की मौत: संघर्षों भरी कहानी

    इस घटना के पीछे की पृष्ठभूमि अत्यंत दुखद है। महिला की मां मुन्नी देवी ने बताया कि ननकई के पति की मृत्यु छह माह पहले ही हो चुकी है। वह पहले से ही पांच बच्चों की मां है और यह उसका छठा प्रसव था। गरीबी और अकेलेपन के बीच इस दर्दनाक हादसे ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और सामाजिक सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • वाराणसी की गंगा नदी में संचालित हो रहे गंगा क्रूजों को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार बहस

    https://nz.kesariya.news/Lnk/SRWR202602191736133022341330

    यूपी विधान परिषद में गंगा क्रूज पर तीखी बहस

    मंत्री जयवीर सिंह बोले– ‘पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं’

    लखनऊ | 19 फरवरी, 2026; उत्तर प्रदेश विधान परिषद में बुधवार को वाराणसी की गंगा नदी में संचालित हो रहे क्रूजों को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार बहस देखने को मिली। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि सरकार पूरी शुचिता और कड़े मानकों के साथ कार्य कर रही है।

    विपक्ष का सवाल: कितने क्रूज और क्या हैं मानक?

    सदन की कार्यवाही के दौरान समाजवादी पार्टी के सदस्य आशुतोष सिन्हा ने वाराणसी में क्रूज संचालन पर सवाल खड़े किए। उन्होंने सरकार से पूछा कि:
    ~ वर्तमान में वाराणसी में कुल कितने सरकारी और निजी क्रूज चल रहे हैं?
    ~ इनके संचालन के लिए किन मानकों का पालन किया जा रहा है?
    ~ क्या सरकार इन विवरणों को सदन के पटल पर सार्वजनिक करेगी?

    मंत्री का जवाब: 5 सरकारी और 2 निजी क्रूज का संचालन
    विपक्ष के सवालों पर पलटवार करते हुए पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने जानकारी दी कि वर्तमान में वाराणसी में 5 सरकारी और 2 निजी क्रूज संचालित हो रहे हैं। उन्होंने मानकों पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा:
    ~ क्रूज का संचालन भारतीय अन्तर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश अन्तर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण द्वारा निर्धारित नियमों के तहत हो रहा है।
    ~ 6 दिसंबर 2023 को अधिसूचना जारी कर विधेयक पारित किया गया था, जिसमें परिवहन विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है।
    ~ 6 दिसंबर 2024 से इन नियमों के तहत अग्रिम कार्यवाही और निगरानी शुरू कर दी गई है।

    सदन में बढ़ी राजनीतिक तल्खी: ‘थोड़ा पढ़ लेते तो प्रश्न नहीं उठता’

    चर्चा के दौरान उस समय माहौल गरमा गया जब मंत्री जयवीर सिंह ने विपक्ष पर बिना तैयारी के आने का आरोप लगाया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “सभी जानकारियां सार्वजनिक हैं, यदि विपक्ष थोड़ा अध्ययन कर लेता तो शायद यह प्रश्न उठाने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती।” मंत्री के इस बयान पर विपक्षी सदस्यों ने कड़ा ऐतराज जताया, जिससे सदन में कुछ देर के लिए गतिरोध की स्थिति बनी रही।

    पर्यटन में ‘अभूतपूर्व’ वृद्धि का दावा

    विवाद के बीच मंत्री ने प्रदेश के पर्यटन आंकड़ों को भी सदन के सामने रखा। उन्होंने दावा किया कि:
    ~ वर्ष 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में पर्यटन क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार हुआ है।
    ~ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन से वाराणसी सहित अन्य धार्मिक शहर ग्लोबल टूरिज्म मैप पर उभरे हैं।
    ~ धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन अब प्रदेश की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार बन रहा है।

    वाराणसी में गंगा क्रूज न केवल पर्यटन का केंद्र हैं, बल्कि यह स्थानीय रोजगार और जल परिवहन के आधुनिक बुनियादी ढांचे का भी प्रतीक बन चुके हैं।

  • प्राकृतिक धरोहरों के पेशेवर प्रबंधन की पहल, इच्छुक 27 फरवरी 2026 तक कर सकते हैं आवेदन

    जिम्मेदार पर्यटन का सशक्त मॉडल पेश कर रहा उ०प्र० ईको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड, निजी सहभागिता से बढ़ेगी रफ्तार

    उत्तर प्रदेश बनेगा ईको टूरिज्म हब, दूरदर्शी नीतियों के साथ बढ़ रहे आगे- जयवीर सिंह

    यूपी में ईको टूरिज्म परियोजनाओं को नई उड़ान, 10 ईको टूरिज्म स्थलों के संचालन हेतु प्रस्ताव आमंत्रित

    ~ शैली सक्सेना

    लखनऊ, (18 फरवरी 2026)। उत्तर प्रदेश के हरित पर्यटन को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए उत्तर प्रदेश ईको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड (UPETDB) ने राज्य के 10 प्रमुख ईको टूरिज्म स्थलों के संचालन और देखरेख के लिए इच्छुक संस्थाओं, कंपनियों एवं अनुभवी एजेंसियों से प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। बोर्ड के इस कदम से न केवल प्राकृतिक पर्यटन स्थलों के पेशेवर प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि दीर्घकालिक निवेश, गुणवत्ता सुधार और पर्यावरण संरक्षण के समन्वित मॉडल को भी सुदृढ़ आधार प्राप्त होगा।

    उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘चयनित एजेंसियों को ईको-टूरिज्म परियोजनाओं का संचालन प्रारंभिक रूप से 15 वर्षों के लिए सौंपा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि संतोषजनक प्रदर्शन की स्थिति में यह अवधि आगे भी बढ़ाई जा सकेगी। यह निर्णय प्रदेश में जिम्मेदार और पर्यावरण-संवेदनशील पर्यटन विकास के लिए एक सुदृढ़ एवं संस्थागत ढांचा तैयार करेगा, जिससे स्थानीय समुदायों को रोजगार के अवसर मिलेंगे और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित संरक्षण सुनिश्चित होगा।’

    10 प्रमुख स्थलों के संचालन हेतु प्रस्ताव आमंत्रित

    उत्तर प्रदेश इको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड ने राज्य में ईको टूरिज्म को प्रोत्साहन देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए अयोध्या की उधेला झील, ललितपुर के बदरौन स्थित करकरावल जलप्रपात, बाराबंकी की बघर झील, बलिया के मैरीटार गांव, सीतापुर की अज्जेपुर झील, महाराजगंज के देवदह स्थल, कुशीनगर की रामपुर सोहरौना झील, चित्रकूट के रामनगर, जालौन के पचनदा तथा बांदा जनपद की तहसील नरैनी में कालिंजर किले के समीप पर्यटन सुविधा केंद्र सहित कुल 10 स्थलों पर विकसित ईको टूरिज्म परियोजनाओं के संचालन एवं देखरेख के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। सभी परियोजनाएं पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी मोड) पर विकसित होंगी। 

    कब तक करें आवेदन?

    इच्छुक आवेदकों को निर्धारित दिशा-निर्देशों एवं पात्रता मानदंडों के अनुरूप अपने प्रस्ताव निर्धारित समयावधि के भीतर प्रस्तुत करने होंगे। विस्तृत विवरण, शर्तें एवं आवेदन प्रक्रिया से संबंधित जानकारी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट https://upecoboard.up.gov.in/en/tenders पर उपलब्ध है। आवेदन की अंतिम तारीख 27 फरवरी 2026 है। 

    दूरदर्शी सोच के साथ बढ़ रहे आगे- जयवीर सिंह

    पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘उत्तर प्रदेश प्राकृतिक संपदा, जैव-विविधता और सांस्कृतिक धरोहर की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है। ईको टूरिज्म के क्षेत्र में हमारे पास अपार संभावनाएं हैं, उन्हें व्यवस्थित और पेशेवर प्रबंधन के माध्यम से वैश्विक स्तर तक पहुंचाने का प्रयास है। उत्तर प्रदेश इको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड द्वारा 10 प्रमुख स्थलों के संचालन हेतु प्रस्ताव आमंत्रित करना इसी दूरदर्शी सोच का परिणाम है। हमारा उद्देश्य केवल पर्यटन विकास नहीं, बल्कि जिम्मेदार और पर्यावरण-संवेदनशील पर्यटन का एक सशक्त मॉडल विकसित करना है। यह पहल प्रदेश में दीर्घकालिक निवेश आधुनिक सुविधाओं का विकास सुनिश्चित करेगी।’

  • जानें बकाया बिल के नाम पर आए इस मैसेज की सच्चाई

    FACT CHECK: क्या बिजली विभाग काट रहा है आपका कनेक्शन?

    लखनऊ (विशेष संवाददाता): अगर आपके मोबाइल पर भी UPPCL के नाम से बिजली बिल बकाया होने और कनेक्शन काटने का मैसेज आया है, तो सावधान हो जाएं! यह बिजली विभाग का नोटिस नहीं, बल्कि साइबर ठगों द्वारा बिछाया गया एक ‘डिजिटल जाल’ है।

    क्या है वायरल मैसेज का सच?

    हाल ही में एक उपभोक्ता को उसके मोबाइल नंबर पर कनेक्शन नंबर के साथ ₹30,939.00 के बकाये का मैसेज प्राप्त हुआ। चौंकाने वाली बात यह है कि उस उपभोक्ता के परिवार में किसी के भी नाम पर कोई बिजली कनेक्शन ही नहीं है। यह साबित करता है कि ठग बिना किसी डेटा के रैंडम नंबरों पर डर फैलाने वाले मैसेज भेज रहे हैं।

    ठगों के मैसेज की 3 बड़ी पहचान (How to Identify Fraud)

    * संदिग्ध लिंक (Fake URL): आधिकारिक UPPCL का लिंक हमेशा uppclonline.com या upenergy.in होता है। मैसेज में दिया गया rtxt.in या अन्य कोई छोटा लिंक पूरी तरह फर्जी है।
    * धमकी भरी भाषा: ठग हमेशा एक डेडलाइन देते हैं (जैसे: आज रात 9:30 बजे तक या फलां तारीख तक)। असली विभाग कभी भी बिना पूर्व नोटिस और कानूनी प्रक्रिया के तुरंत कनेक्शन काटने की धमकी SMS पर नहीं देता।
    * व्यक्तिगत मोबाइल नंबर: विभाग के मैसेज अक्सर एक आधिकारिक ‘Header’ (जैसे: VM-UPPCL, AD-UPPCL) से आते हैं, न कि किसी साधारण 10 अंकों के मोबाइल नंबर से।

    कैसे होती है ठगी? (The Trap)

    जैसे ही आप दिए गए लिंक पर क्लिक करते हैं, आपसे एक छोटा सा भुगतान (जैसे 10 या 20 रुपये) करने को कहा जाता है ताकि “सिस्टम अपडेट” हो सके। जैसे ही आप अपनी बैंकिंग डिटेल्स डालते हैं, ठग आपके खाते का पूरा एक्सेस पा लेते हैं और पल भर में खाता खाली कर देते हैं।

    newsdaily24 की अपील: नोट कर लें ये 4 बातें
    * पुष्टि करें: किसी भी मैसेज पर भरोसा करने के बजाय बिजली विभाग के टोल-फ्री नंबर 1912 पर कॉल करें।
    * लिंक से बचें: SMS में आए किसी भी लिंक के जरिए भुगतान कभी न करें।
    * ऐप डाउनलोड न करें: ठगों के कहने पर कभी भी AnyDesk, QuickSupport या TeamViewer जैसे रिमोट एक्सेस ऐप इंस्टॉल न करें।
    * शिकायत: यदि आपने गलती से क्लिक कर दिया है, तो तुरंत अपना बैंक खाता ब्लॉक कराएं और 1930 पर शिकायत दर्ज करें।
    > विशेष नोट: सतर्कता ही साइबर अपराध से बचने का एकमात्र हथियार है। इस जानकारी को अपने परिजनों और मित्रों के साथ साझा करें।
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  • पूरी तरह डिजिटल होगी प्रक्रिया

    मोबाइल पर आएगा कन्फर्मेशन मैसेज

    22 मई से घर-घर दस्तक देंगे प्रगणक

    डिजिटल जनगणना-2027: आपके 33 सवालों के जवाब तय करेंगे प्रदेश के विकास का भविष्य

    लखनऊ (राज्य ब्यूरो)। उत्तर प्रदेश में आगामी ‘जनगणना-2027’ को लेकर तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू हो गई हैं। इस बार की जनगणना न केवल डिजिटल होगी, बल्कि यह अधिक सटीक और पारदर्शी भी होगी। आपके घर में शौचालय है या नहीं, पीने के पानी का स्रोत क्या है, और रसोई की क्या स्थिति है— ऐसे कुल 33 महत्वपूर्ण सवालों के आधार पर भविष्य की सरकारी योजनाओं और बजट का खाका तैयार किया जाएगा।

    डिजिटल जनगणना की शुरुआत: मास्टर ट्रेनरों का प्रशिक्षण शुरू

    जनगणना को त्रुटिहीन और समयबद्ध बनाने के लिए लखनऊ स्थित राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान में चार दिवसीय (17 से 20 फरवरी) विशेष आवासीय प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ मंगलवार को हो चुका है।
    * प्रथम चरण: इसमें प्रदेश के 27 जिलों के 285 मास्टर ट्रेनरों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
    * प्रशिक्षक: 8 राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षक इन मास्टर ट्रेनरों को डिजिटल डेटा एंट्री और सुरक्षा के गुर सिखा रहे हैं।
    * शामिल जिले: आगरा, मथुरा, मेरठ, मुरादाबाद, गाजियाबाद, वाराणसी और सहारनपुर सहित पश्चिमी व पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रमुख जिले इस चरण में शामिल हैं।

    स्व-गणना (Self-Enumeration) की भी मिलेगी सुविधा

    इस बार आम जनता को खुद अपनी जानकारी दर्ज करने का विकल्प भी दिया जाएगा:
    * 7 से 21 मई: इस अवधि के दौरान लोग पोर्टल के माध्यम से स्व-गणना कर सकेंगे।
    * 22 मई से 20 जून: प्रगणक (Enumerators) घर-घर जाकर मोबाइल ऐप के जरिए डेटा एकत्र करेंगे।

    > खास बात: यदि आप प्रक्रिया के दौरान अपना मोबाइल नंबर दर्ज कराते हैं, तो डेटा सुरक्षित रूप से सबमिट होते ही आपके फोन पर पुष्टि (Confirmation) का मैसेज प्राप्त होगा।

    इन 33 सवालों पर टिकी है विकास की दिशा

    जनगणना के दौरान पूछे जाने वाले 33 सवालों में मुख्य रूप से बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है:
    * आवास की स्थिति: घर में कमरों की संख्या, रसोई घर अलग है या नहीं।
    * बुनियादी सुविधाएं: शौचालय की उपलब्धता, पेयजल का स्रोत, एलपीजी सिलेंडर का उपयोग।
    * संपत्ति का विवरण: घर के स्वामित्व और उपलब्ध संसाधनों की जानकारी।

    महत्व: इन आंकड़ों के आधार पर ही केंद्र और राज्य सरकारें यह तय करेंगी कि किस क्षेत्र में कितने नए स्कूल, अस्पताल, सड़क और पाइपलाइन बिछाने की आवश्यकता है।

    पूरी तरह सुरक्षित होगा आपका डेटा

    प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल जनगणना की प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित है। मास्टर ट्रेनरों को सिखाया जा रहा है कि डेटा को कैसे इन्क्रिप्टेड फॉर्म में सर्वर पर भेजा जाए ताकि किसी भी प्रकार की डेटा लीक की गुंजाइश न रहे।

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    newsdaily24 के पाठकों के लिए एक विशेष चेकलिस्ट, ताकि वे जनगणना के समय प्रगणकों को सही और सटीक जानकारी देने के लिए पहले से तैयार रहें:

    📋 जनगणना 2027: तैयार रखें इन 33 सवालों के जवाब (चेकलिस्ट)

    जनगणना प्रगणक जब आपके द्वार आएंगे, तो वे मुख्य रूप से आवास, घरेलू सुविधाओं और संपत्तियों से जुड़े सवाल पूछेंगे। भविष्य की योजनाओं का लाभ उठाने के लिए इनका सही उत्तर देना आवश्यक है।
    1. आवास की स्थिति (Housing Details)
    * [ ] भवन/मकान नंबर (स्वामित्व: निजी है या किराए का)।
    * [ ] घर की छत, दीवार और फर्श में इस्तेमाल की गई सामग्री।
    * [ ] परिवार के पास रहने के लिए कुल कमरों की संख्या।
    * [ ] क्या घर में अलग से रसोई (Kitchen) उपलब्ध है?
    2. बुनियादी सुविधाएं (Basic Amenities)
    * [ ] पेयजल: पीने के पानी का मुख्य स्रोत क्या है (नल, हैंडपंप, या अन्य) और यह परिसर के भीतर है या बाहर?
    * [ ] बिजली: घर में रोशनी का मुख्य स्रोत (बिजली, सौर ऊर्जा, या अन्य)।
    * [ ] शौचालय: क्या घर में शौचालय उपलब्ध है? यदि हाँ, तो वह किस प्रकार का है (पाइप, सेप्टिक टैंक आदि)?
    * [ ] निकासी: गंदे पानी की निकासी के लिए बंद नाली है या खुली?
    3. घरेलू ईंधन और साधन (Fuel & Assets)
    * [ ] खाना पकाने के लिए मुख्य ईंधन (LPG/PNG कनेक्शन, बिजली, या अन्य)।
    * [ ] क्या परिवार के पास रेडियो/ट्रांजिस्टर है?
    * [ ] क्या घर में टेलीविजन (TV) है?
    * [ ] इंटरनेट सुविधा के साथ या बिना लैपटॉप/कंप्यूटर की उपलब्धता।
    * [ ] टेलीफोन/मोबाइल फोन का विवरण।
    4. वाहन और परिवहन (Transport)
    * [ ] क्या परिवार के पास साइकिल है?
    * [ ] दोपहिया वाहन (स्कूटर/मोटर साइकिल) की उपलब्धता।
    * [ ] चार पहिया वाहन (कार/जीप/वैन) का विवरण।
    5. मुख्य अनाज और बैंक खाता
    * [ ] परिवार द्वारा मुख्य रूप से उपभोग किया जाने वाला अनाज।
    * [ ] क्या परिवार का कोई भी सदस्य बैंक/डाकघर के खाते का उपयोग करता है?

    💡newsdaily24 की विशेष सलाह:

    * मोबाइल नंबर: प्रक्रिया पूरी होने पर रसीद के रूप में कन्फर्मेशन मैसेज पाने के लिए अपना सक्रिय मोबाइल नंबर जरूर दर्ज कराएं।
    * दस्तावेज: वैसे तो इसके लिए किसी दस्तावेज की मांग नहीं की जाती, लेकिन सटीक जानकारी (जैसे मकान नंबर) पास रखने से समय की बचत होगी।
    * डिजिटल विकल्प: याद रखें, आप 7 से 21 मई के बीच खुद भी ऑनलाइन जानकारी (Self-Enumeration) भर सकते हैं।

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  • कर्जदारों को कमीशन का लालच देकर उनके खातों का करते थे इस्तेमाल

    चेकबुक और डेबिट कार्ड पर रखते थे कब्जा

    लखनऊ पुलिस (@lkopolice) ने ATS अधिकारी बनकर डराने वाले 3 शातिर ठगों को दबोचा

    डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 90 लाख की बड़ी ठगी का पर्दाफाश!

    लखनऊ। साइबर अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान में लखनऊ पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। खुद को एटीएस (ATS) अधिकारी बताकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर 90 लाख रुपये की सनसनीखेज ठगी करने वाले गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने इनके पास से ठगी में इस्तेमाल किए गए कई उपकरण और दस्तावेज बरामद किए हैं।

    ठगी का मॉडस ऑपेरंडी: ऐसे बुना जाता था जाल

    पुलिस पूछताछ में गिरोह की कार्यप्रणाली का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। यह गैंग बेहद शातिर तरीके से दो चरणों में वारदात को अंजाम देता था:

    1. बैंक खातों का प्रबंधन (लेयरिंग):
      गिरोह सबसे पहले ऐसे व्यक्तियों की पहचान करता था जो आर्थिक रूप से बेहद कमजोर हों या भारी कर्ज में डूबे हों। उन्हें मोटी कमीशन का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते थे। एक बार खाता खुलने के बाद, आरोपी उस व्यक्ति की चेकबुक, डेबिट कार्ड और मोबाइल बैंकिंग का पासवर्ड अपने पास रख लेते थे ताकि पैसों के लेनदेन पर उनका पूर्ण नियंत्रण रहे।
    2. डिजिटल अरेस्ट का खौफ:
      इसके बाद गिरोह के सदस्य पीड़ितों को कॉल करते थे। खुद को ATS, CBI या अन्य सरकारी एजेंसी का वरिष्ठ अधिकारी बताकर वे पीड़ितों को डराते थे कि उनका नाम मनी लॉन्ड्रिंग या किसी गंभीर राष्ट्रविरोधी अपराध में आया है। गिरफ्तारी का डर दिखाकर उन्हें घंटों तक वीडियो कॉल पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखा जाता था और मामला रफा-दफा करने के नाम पर लाखों रुपये अपने नियंत्रित खातों में ट्रांसफर करा लिए जाते थे।

    90 लाख की ठगी और पुलिस की कार्रवाई

    हाल ही में एक पीड़ित से इसी तरह डरा-धमकाकर ₹90 लाख की बड़ी धनराशि हड़प ली गई थी। लखनऊ पुलिस की साइबर टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और सर्विलांस की मदद से इस गिरोह के ठिकानों पर दबिश दी और तीन मुख्य अभियुक्तों को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की।

    सावधानी ही बचाव है: पुलिस या कोई भी जांच एजेंसी कभी भी वीडियो कॉल पर किसी को ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती और न ही फोन पर पैसों की मांग करती है।

    क्या होता है डिजिटल अरेस्ट?
    डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी का एक नया और खतरनाक तरीका है। इसमें अपराधी:

    • फेक सेटअप: पुलिस स्टेशन या सरकारी दफ्तर जैसा बैकग्राउंड तैयार करते हैं।
    • कानूनी धमकी: सुप्रीम कोर्ट के फर्जी वारंट या आदेश दिखाते हैं।
    • आइसोलेशन: पीड़ित को किसी से बात करने या कैमरा बंद करने की अनुमति नहीं दी जाती।
      ठगी होने पर क्या करें?

    यदि आप या आपका कोई परिचित ऐसी स्थिति का सामना करता है, तो तुरंत 1930 डायल करें या http://www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।

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  • मैसेज के बाद आती है एक ‘मिस्ड कॉल’ और हैक हो जाता है आपका फोन

    मुरादाबाद में 10 दिन में 3 बड़ी ठगी; चंद घंटों में लाखों पार

    सावधान! ‘मोबाइल बैटरी अपडेट’ के नाम पर खाली हो रहे बैंक खाते

    ~ shalie newsdaily24

    मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश)। साइबर अपराधियों ने आम जनता की गाढ़ी कमाई लूटने के लिए अब ‘बैटरी अपडेट’ का नया और खतरनाक जाल बुना है। मुरादाबाद में पिछले 10 दिनों के भीतर इस नए तरीके से ठगी के तीन मामले सामने आए हैं, जिसमें पीड़ितों को लाखों रुपये का चूना लगा है। ठग अब लोगों के डर और तकनीक के प्रति अज्ञानता का फायदा उठाकर उनके मोबाइल फोन का पूरा नियंत्रण अपने हाथ में ले रहे हैं।

    कैसे काम करता है यह नया ‘बैटरी अपडेट’ स्कैम?

    एसपी क्राइम सुभाष चंद्र गंगवार के अनुसार, ठगों का यह नया षड्यंत्र बेहद तकनीकी और शातिर है:

    • फर्जी संदेश (The Bait): पीड़ित के मोबाइल पर एक मैसेज आता है जिसमें लिखा होता है— “अपनी मोबाइल बैटरी तुरंत अपडेट करें, अन्यथा आपका फोन स्थाई रूप से बंद हो जाएगा।”
    • लिंक पर क्लिक: डर के मारे जैसे ही यूजर ‘अपडेट’ विकल्प या दिए गए लिंक पर क्लिक करता है, एक संदिग्ध फाइल बैकग्राउंड में डाउनलोड हो जाती है।
    • मिस्ड कॉल और हैकिंग: क्लिक करने के कुछ मिनट बाद एक मिस्ड कॉल आती है। यह कॉल मोबाइल को पूरी तरह हैक करने की प्रक्रिया को सक्रिय कर देती है। इसके बाद फोन घंटों तक ‘अपडेशन मोड’ में दिखता है, जबकि असल में वह हैकर्स के नियंत्रण में होता है।
    • सफाई से चपत: फोन हैक होने के दौरान ठग ओटीपी (OTP) और बैंकिंग विवरणों तक पहुंच बना लेते हैं और खाते से पैसे उड़ा देते हैं।

    प्रमुख मामले: जब पीड़ितों के उड़े होश

    केस 1 (जीशान इदरीस): रहमतनगर के कारोबारी जीशान के पास 10 फरवरी को मैसेज आया। अपडेट पर क्लिक करने और एक मिस्ड कॉल आने के बाद उनका फोन 24 घंटे तक हैक रहा। नतीजा? तीन अलग-अलग खातों से ₹4.82 लाख गायब हो गए।

    केस 2 (दानिश): मुगलपुरा के दानिश के साथ 8 फरवरी को यही हुआ। एक घंटे बाद आई मिस्ड कॉल ने फोन हैक कर दिया और उनके खाते से ₹1.29 लाख निकल गए।

    ‘गोल्डन ऑवर’ की अहमियत: 1930 है आपकी सुरक्षा का कवच

    साइबर सेल के अनुसार, इन मामलों में सबसे बड़ी चूक समय पर शिकायत न करना रही। यदि ठगी के तत्काल बाद (पहले 1-2 घंटे के भीतर) कार्रवाई की जाए, तो पैसे बचाए जा सकते हैं।

    याद रखें: मोबाइल फोन हैक होने या खाते से पैसे कटने की सूचना मिलते ही बिना देरी किए 1930 पर कॉल करें।

    1930 पर क्या जानकारी दें?

    • अपना नाम और मोबाइल नंबर।
    • जिस बैंक खाते या UPI ID से पैसे कटे हैं, उसका विवरण।
    • ट्रांजैक्शन का समय और कुल राशि।
    • यदि संभव हो, तो ठग का खाता नंबर या UPI ID।
      विशेषज्ञों की सलाह: इन 4 बातों का रखें ध्यान
    • आधिकारिक अपडेट ही चुनें: फोन की बैटरी या सिस्टम अपडेट हमेशा फोन की ‘Settings’ में जाकर करें। किसी मैसेज के लिंक से नहीं।
    • अज्ञात लिंक से बचें: बैटरी अपडेट के नाम पर आने वाले किसी भी पॉप-अप या SMS लिंक पर क्लिक न करें।
    • मिस्ड कॉल पर सतर्क रहें: अनजान नंबर से आने वाली संदिग्ध कॉल या मिस्ड कॉल के बाद यदि फोन अजीब व्यवहार करे, तो तुरंत इंटरनेट बंद कर दें।
    • शिकायत दर्ज करें: आधिकारिक पोर्टल http://www.cybercrime.gov.in पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।

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  • श्रद्धालुओं को लंबी कतारों से मिलेगी राहत, अब बिना प्रतीक्षा करें श्रीराम जन्मभूमि के दर्शन

    लखनऊ-अयोध्या एक दिवसीय पैकेज से करें आरामदायक यात्रा, वरिष्ठ नागरिकों को शुल्क में रियायत 

    सरकार की प्राथमिकता, बिना असुविधा श्रद्धालुओं को मिले रामलला के दिव्य दर्शन- जयवीर सिंह

    हर राम भक्त तक पहुंचे सुगम और सुरक्षित दर्शन की सुविधा- जयवीर सिंह

    यूपीएसटीडीसी ने शुरू किया ‘सुगम दर्शन’ टूर पैकेज, श्रद्धालुओं के लिए अयोध्या यात्रा हुई आसान

    लखनऊ, (17 फरवरी 2026)। उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) ने श्रद्धालुओं की आस्था और सुविधा को सर्वोपरि रखते हुए लखनऊ से अयोध्या तक विशेष टूर पैकेज की शुरुआत की है। ‘सुगम दर्शन’ सेवा के माध्यम से अब राम भक्त बिना लंबी कतारों में प्रतीक्षा किए सीधे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र में रामलला के दर्शन कर सकेंगे। अयोध्या जिला प्रशासन के सहयोग से तैयार यह विशेष व्यवस्था श्रद्धालुओं के आध्यात्मिक अनुभव को अविस्मरणीय बनाएगी।

    उत्तर प्रदेश पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘यूपीएसटीडीसी द्वारा वर्ष 2025 से संचालित लखनऊ-अयोध्या टूर पैकेज को यात्रियों का भरपूर समर्थन मिला है। इसी कड़ी में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक दिवसीय आरामदायक यात्रा के लिए टेंपो ट्रैवलर सेवा प्रारंभ की जा रही है, जिसकी पहली यात्रा 21 फरवरी को प्रस्तावित है। इच्छुक श्रद्धालु इस विशेष टूर पैकेज की बुकिंग यूपीएसटीडीसी की आधिकारिक वेबसाइट upstdc.co.in के माध्यम से कर सकते हैं।’

    सुबह लखनऊ से प्रस्थान, दिनभर राम नगरी के दर्शन

    यात्रा की शुरुआत प्रातः 08:00 बजे लखनऊ के होटल गोमती से होगी, जो करीब 10:30 बजे तक अयोध्या पहुंचेगी। तत्पश्चात, यात्रियों को हनुमानगढ़ी, श्रीराम जन्मभूमि और कनक भवन के पावन दर्शन कराए जाएंगे। दोपहर के समय सरयू गेस्ट हाउस में भोजन के उपरांत सरयू रिवर फ्रंट (राम की पैड़ी) एवं नागेश्वरनाथ मंदिर का भ्रमण कराया जाएगा। सायं लगभग 08:30 बजे यात्रियों की लखनऊ वापसी होगी। 

    कितना होगा किराया? 

    इस टूर पैकेज में यात्रियों को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र में सुगम दर्शन की विशेष सुविधा मिलेगी। रामनगरी जाने वाले यात्रियों को टेंपो ट्रैवलर से आरामदायक यात्रा, सरयू गेस्ट हाउस में दोपहर का भोजन, संध्याकालीन चाय, स्थानीय गाइड तथा शुद्ध पेयजल की सुविधा मिलेगी। यूपीएसटीडीसी का मानना है कि यह टूर पैकेज राम भक्तों विशेष आध्यात्मिक अनुभव देगा। वरिष्ठ नागरिकों के लिए 1,500 रुपए तथा अन्य यात्रियों के लिए 2,000 रुपए यात्रा शुल्क निर्धारित किया गया है। प्रत्येक यात्री को स्मृति-चिन्ह प्रदान किया जाएगा, जो उनकी यात्रा को यादगार बनाएगा।

    ‘लखनऊ दर्शन’ सहित अन्य टूर पैकेज भी  

    उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम द्वारा पर्यटकों के लिए अन्य यात्रा गतिविधियां भी संचालित की जा रही हैं। यूपीएसटीडीसी राजधानी में डबल डेकर ‘लखनऊ दर्शन’ बस सेवा के संचालन के अलावा नैमिषारण्य, वाराणसी-प्रयागराज तथा दुधवा जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों के लिए आकर्षक टूर पैकेज भी संचालित कर रहा है। इन सभी पैकेजों की ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा upstdc.co.in पर उपलब्ध है। पर्यटक घर बैठे अपनी यात्रा की योजना बना सकते हैं।

    यूपीएसटीडीसी के नए टूर पैकेज  

    यूपीएसटीडीसी आने वाले दिनों में नीब करौरी बाबा से जुड़े प्रमुख आध्यात्मिक स्थलों के लिए टूर पैकेज शुरू करने की तैयारी में है। प्रस्तावित पैकेज के माध्यम से देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को उत्तर प्रदेश की समृद्ध आध्यात्मिक केंद्रों का समग्र अनुभव प्राप्त होगा। 

    रामलला दर्शन का मिले दिव्य अनुभव- मंत्री 

    पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘प्रदेश सरकार का उद्देश्य अयोध्या आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को सुविधाजनक, सुरक्षित और आरामदायक यात्रा उपलब्ध कराना है। यूपीएसटीडीसी का ‘सुगम दर्शन’ इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में रामनगरी अयोध्या ने पर्यटन के क्षेत्र में नया इतिहास रचते हुए 29 करोड़ से अधिक पर्यटकों का स्वागत किया, जिनमें 65 हजार से अधिक विदेशी पर्यटक शामिल रहे। यह आंकड़ा अयोध्या की वैश्विक पहचान और बढ़ते आध्यात्मिक आकर्षण का प्रमाण है।’

  • प्रशासनिक गलियारों में हलचल

    निजी पसंद या सेवा नियमों का उल्लंघन? जानें क्या कहता है कानून

    IAS अवि प्रसाद ने रचाई तीसरी शादी, तीनों पत्नियाँ हैं IAS अधिकारी

    भोपाल/दिल्ली: मध्य प्रदेश कैडर के 2014 बैच के आईएएस अधिकारी अवि प्रसाद इन दिनों अपनी पेशेवर उपलब्धियों से ज्यादा अपनी निजी जिंदगी को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में उन्होंने आईएएस अंकिता धाकरे के साथ अपना तीसरा विवाह संपन्न किया है। दिलचस्प पहलू यह है कि अवि प्रसाद की दोनों पूर्व पत्नियाँ भी मध्य प्रदेश में ही आईएएस अधिकारी हैं और वर्तमान में कलेक्टर के रूप में अपनी सेवाएँ दे रही हैं।
    सोशल मीडिया पर इस खबर के वायरल होने के बाद, आम जनता के बीच प्रशासनिक अधिकारियों के विवाह और उससे जुड़े नियमों को लेकर जिज्ञासा बढ़ गई है। इस पूरे प्रकरण के कानूनी और प्रशासनिक (Service Rules) पहलू।

    1. क्या एक IAS अधिकारी तीन शादियां कर सकता है?
    भारतीय कानून और विशेष रूप से हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत, कोई भी व्यक्ति अपनी पिछली पत्नी के जीवित रहते या बिना कानूनी तलाक लिए दूसरा विवाह नहीं कर सकता। आईएएस अधिकारियों पर भी यही नियम लागू होता है।
    * कानूनी स्थिति: यदि अवि प्रसाद ने अपनी दोनों पूर्व पत्नियों से अदालत के माध्यम से ‘तलाक की डिक्री’ (Decree of Divorce) प्राप्त कर ली है, तो वे कानूनी रूप से तीसरी शादी करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं।

    2. सिविल सेवा आचरण नियम (All India Services Conduct Rules)
    एक आईएएस अधिकारी केवल देश के सामान्य कानून से ही नहीं, बल्कि All India Services (Conduct) Rules, 1968 से भी बंधा होता है।
    * नियम 19: यह नियम स्पष्ट करता है कि कोई भी सरकारी कर्मचारी ‘द्विविवाह’ (Bigamy) नहीं कर सकता। यदि कोई अधिकारी बिना तलाक लिए दूसरी शादी करता है, तो उसे सेवा से बर्खास्त किया जा सकता है।
    * अनुमति की प्रक्रिया: पुनर्विवाह की स्थिति में, अधिकारी को अपने विभाग (Department of Personnel and Training – DoPT) को सूचित करना अनिवार्य होता है। अवि प्रसाद के मामले में, यदि उन्होंने नियमों का पालन करते हुए विभाग को सूचित किया है, तो यह उनका व्यक्तिगत अधिकार है।

    3. ‘newsdaily24’ का विश्लेषण: प्रशासनिक गलियारों में चर्चा क्यों?
    प्रशासनिक हलकों में इस विवाह की चर्चा के दो मुख्य कारण हैं:
    * एक ही कैडर: अवि प्रसाद और उनकी तीनों पत्नियाँ (वर्तमान और पूर्व) एक ही राज्य (MP) और एक ही सेवा (IAS) से जुड़ी हैं।
    * समान पद: पूर्व की दोनों पत्नियाँ वर्तमान में ‘कलेक्टर’ जैसे पावरफुल पदों पर तैनात हैं, जो इस संयोग को और भी दुर्लभ बनाता है।

    कुल मिलाकर….
    लोकसेवक होने के नाते आईएएस अधिकारियों का जीवन सार्वजनिक होता है, लेकिन कानून उन्हें भी अपनी निजी जिंदगी गरिमा के साथ जीने का अधिकार देता है। यदि सभी विवाह और तलाक कानूनी प्रक्रिया के तहत हुए हैं, तो यह पूरी तरह से एक निजी विषय है। हालांकि, सेवा नियमों की कठोरता यह सुनिश्चित करती है कि कोई भी अधिकारी अपने पद की गरिमा के विरुद्ध आचरण न करे।

    गौरतलब है कि मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी अवि प्रसाद इन दिनों चर्चा में हैं। इसका कारण उनका तीसरा विवाह है। उनकी दोनों पूर्व पत्नी इस समय प्रदेश में ही कलेक्टर हैं। अब तीसरा विवाह मंत्रालय में कार्यरत आईएएस अधिकारी अंकिता धाकरे से किया है। अवि प्रसाद मध्य प्रदेश में रोजगार गारंटी परिषद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) हैं और प्रदेश के कई जिलों में कलेक्टर भी रह चुके हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के रहने वाले अवि प्रसाद 2014 बैच के आईएएस अधिकारी हैं।

  • खगोलीय घटना: दक्षिण अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में आंशिक दृश्यता; सूतक काल मान्य नहीं

    साल 2026 का पहला पूर्ण सूर्य ग्रहण आज: अंटार्कटिका में दिखेगा ‘रिंग ऑफ फायर’, भारत में असर नहीं

    ~ shalie, newsdaily24

    नई दिल्ली/लखनऊ। आज, 17 फरवरी 2026 को दुनिया साल के पहले पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse) की साक्षी बन रही है। खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए यह एक दुर्लभ और अद्भुत घटना है, जहाँ चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आकर सूर्य की रोशनी को पूरी तरह बाधित कर देता है। हालांकि, भौगोलिक स्थिति के कारण यह ग्रहण भारत के आकाश में दिखाई नहीं दे रहा है।

    कहाँ-कहाँ दिखाई देगा ग्रहण?

    खगोलविदों के अनुसार, इस पूर्ण सूर्य ग्रहण का सबसे स्पष्ट और विस्तृत नजारा अंटार्कटिका के बर्फीले क्षेत्रों में दिखाई देगा। इसके अतिरिक्त:

    • दक्षिण अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के कुछ दक्षिणी हिस्सों में आंशिक सूर्य ग्रहण (Partial Solar Eclipse) देखा जा सकेगा।
    • हिंद महासागर के कुछ द्वीपों पर भी सूर्य का एक हिस्सा चंद्रमा के पीछे छिपा हुआ नजर आएगा।

    भारत में क्यों नहीं है सूतक काल?

    भारतीय समय के अनुसार, यह ग्रहण दिन के समय घटित हो रहा है, लेकिन भारतीय उपमहाद्वीप के किसी भी हिस्से में इसकी दृश्यता शून्य है। शास्त्र सम्मत मान्यताओं के अनुसार, सूर्य या चंद्र ग्रहण का ‘सूतक काल’ वहीं प्रभावी होता है जहाँ वह नग्न आंखों से दिखाई दे। चूंकि भारत में यह अदृश्य है, इसलिए:

    ~ मंदिरों के कपाट बंद नहीं किए जाएंगे।

    ~ पूजा-पाठ और भोजन से संबंधित कोई भी पाबंदी लागू नहीं होगी।

    ~ गर्भवती महिलाओं के लिए भी किसी विशेष सावधानी की धार्मिक आवश्यकता नहीं बताई गई है।

    विज्ञान के नजरिए से क्यों है खास?

    वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पूर्ण सूर्य ग्रहण बेहद महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इस दौरान सूर्य के बाहरी वातावरण, जिसे ‘कोरोना’ कहा जाता है, का अध्ययन करना आसान हो जाता है। अंटार्कटिका में तैनात विभिन्न देशों के वैज्ञानिक दल इस घटना के डेटा को रिकॉर्ड करने में जुटे हैं ताकि सौर वायु (Solar Winds) और अंतरिक्ष के मौसम पर इसके प्रभाव को समझा जा सके।

    अगला ग्रहण कब?

    खगोलीय गणनाओं के अनुसार, साल 2026 में ही एक और प्रमुख सूर्य ग्रहण अगस्त के महीने में लगेगा। वह ग्रहण यूरोप के कई देशों में पूर्ण रूप से दिखाई देगा और वैज्ञानिकों के लिए शोध का बड़ा केंद्र बनेगा।

    चेतावनी: जहाँ ग्रहण दिखाई दे रहा है, वहाँ विशेषज्ञों ने सख्त निर्देश जारी किए हैं कि सूर्य को कभी भी नग्न आंखों से न देखें। इसके लिए विशेष सोलर फिल्टर वाले चश्मों का ही उपयोग करें, अन्यथा आंखों की रोशनी को स्थाई नुकसान पहुँच सकता है।

  • लखनऊ साइबर सेल और इटौंजा पुलिस का बड़ा खुलासा

    100 करोड़ से अधिक के फर्जीवाड़े की आशंका

    मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी पुलिस

    मजदूर के नाम पर फर्जी फर्म बनाकर 2.75 करोड़ की टैक्स चोरी, महिला समेत चार गिरफ्तार

    ~ शैली (newsdaily24)

    लखनऊ। राजधानी की साइबर सेल, स्वाट और इटौंजा पुलिस की संयुक्त टीम ने जीएसटी चोरी करने वाले एक शातिर अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह ने एक साधारण मजदूर के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर फर्जी फर्म बनाई और करोड़ों रुपये का कागजी कारोबार दिखाकर सरकार को चूना लगाया। पुलिस ने इस मामले में एक महिला समेत चार आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि गिरोह का मुख्य मास्टरमाइंड अभी भी फरार है।

    कागजों पर चलता था करोड़ों का कारोबार

    डीसीपी (अपराध एवं साइबर अपराध) कमलेश दीक्षित के अनुसार, यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब राज्य कर विभाग के सहायक आयुक्त अभिमन्यु पाठक ने सितंबर 2025 में इटौंजा थाने में मुकदमा दर्ज कराया। जांच में सामने आया कि कानपुर निवासी मजदूर दौलतराम के नाम पर ‘स्वराज ट्रेडर्स’ नामक फर्म पंजीकृत की गई थी। इस फर्म के जरिए एल्युमिनियम वेस्ट, स्क्रैप और स्टील की फर्जी बिक्री दिखाई गई। हैरानी की बात यह है कि यह व्यापार केवल कागजों पर था, धरातल पर फर्म का कोई अस्तित्व नहीं मिला।

    10-20 हजार के लालच में हड़पे दस्तावेज

    पुलिस की विवेचना में गिरोह के काम करने के तरीके (Modus Operandi) का सनसनीखेज खुलासा हुआ है:
    * दस्तावेजों की खरीद: गिरोह गरीब लोगों को 10 से 20 हजार रुपये का लालच देकर उनके आधार और पैन कार्ड ले लेता था।
    * फर्जी पंजीकरण: इन दस्तावेजों के आधार पर मास्टरमाइंड अम्मार अंसारी की मदद से जीएसटी पोर्टल पर फर्जी फर्म रजिस्टर कराई जाती थीं।
    * कमीशन का खेल: फर्जी फर्म बनाने के बदले बिचौलियों को 1 लाख रुपये तक मिलते थे। मजदूर दौलतराम को उसके दस्तावेजों के बदले मात्र 25 हजार रुपये दिए गए थे।

    पुलिस ने इस फर्जीवाड़े में शामिल चार लोगों को गिरफ्तार किया है:
    * तबस्सुम उर्फ जान्हवी सिंह: गिरोह की अहम सदस्य, जो पहचान बदलकर लोगों को फंसाती थी।
    * प्रशांत बेंजवाल: कानपुर के एक मॉल का पूर्व कैशियर, जो तबस्सुम के साथ मिलकर नेटवर्क चला रहा था।
    * सुमित सौरभ: ‘एसएस गैलक्सी’ और ‘एसएस इंटरप्राइजेज’ का मालिक, जिसने फर्जी इनवॉइस के जरिए 19 लाख की टैक्स चोरी की।
    * दौलतराम: वह मजदूर जिसके नाम पर फर्जी फर्म ‘स्वराज ट्रेडर्स’ बनाई गई थी।

    > “जांच में पता चला है कि इस गिरोह ने न केवल टैक्स चोरी की, बल्कि 52 लाख रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) भी अन्य कंपनियों को अवैध रूप से बेचा। आशंका है कि यह पूरा घोटाला 100 करोड़ रुपये से अधिक का हो सकता है।” — पुलिस उपायुक्त, लखनऊ

    रडार पर कई अधिकारी और मास्टरमाइंड

    पुलिस अब गिरोह के मास्टरमाइंड अम्मार अंसारी की सरगर्मी से तलाश कर रही है। जांच टीम को अंदेशा है कि इतने बड़े स्तर पर फर्जी फर्मों का पंजीकरण बिना किसी विभागीय मिलीभगत के संभव नहीं है, इसलिए कई सरकारी अधिकारी भी अब पुलिस की रडार पर हैं। पुलिस ने आरोपितों के पास से भारी मात्रा में फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए हैं।

  • घरों पर चस्पा किए ‘मकान बिकाऊ है’ के पोस्टर

    बरेली के मोहम्मदगंज में गहराया तनाव: 200 हिंदू परिवारों ने किया पलायन का ऐलान

    लखनऊ/बरेली | विशारतगंज: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से सांप्रदायिक तनाव और प्रशासनिक अनदेखी की एक बड़ी खबर सामने आ रही है। तहसील क्षेत्र के मोहम्मदगंज गांव में अवैध रूप से संचालित नमाज स्थल को लेकर उपजा विवाद अब इस कदर बढ़ गया है कि गांव के लगभग 200 हिंदू परिवारों ने सामूहिक पलायन की चेतावनी दे दी है। आक्रोशित ग्रामीणों ने अपने घरों के बाहर ‘यह मकान बिकाऊ है’ के पोस्टर लगा दिए हैं, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया है।

    विवाद की जड़: घर में सामूहिक नमाज पर आपत्ति

    मोहम्मदगंज गांव एक मुस्लिम बहुल क्षेत्र है, जहाँ हिंदू अल्पसंख्यक आबादी के रूप में रहते हैं। विवाद का मुख्य कारण गांव के ही एक निजी घर को मदरसे या नमाज स्थल के रूप में इस्तेमाल करना बताया जा रहा है।
    * पुरानी व्यवस्था: ग्रामीणों के अनुसार, गांव में कोई आधिकारिक मस्जिद नहीं है। वर्षों से मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज पढ़ने के लिए 1 किलोमीटर दूर पड़ोसी गांव जाते थे।
    * नया घटनाक्रम: आरोप है कि पिछले कुछ समय से एक खाली घर में बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के सामूहिक नमाज (विशेषकर जुम्मे की नमाज) का आयोजन शुरू कर दिया गया।
    * विरोध का कारण: हिंदू पक्ष का कहना है कि नई परंपरा डालकर गांव का माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है और बिना अनुमति धार्मिक स्थल का संचालन अवैध है।
    सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद बढ़ा तनाव
    मामला तब और गरमा गया जब 16 जनवरी 2026 को इस सामूहिक नमाज का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो के आधार पर हिंदू संगठनों और स्थानीय ग्रामीणों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
    > कार्रवाई का अभाव: उस समय पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लगभग 12-15 लोगों को हिरासत में लिया था, लेकिन बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि आरोपियों के छूटने के बाद वहां फिर से गतिविधियां शुरू हो गई हैं।

    ‘असुरक्षा के साये में ग्रामीण’: पलायन को क्यों हुए मजबूर?
    पलायन का ऐलान करने वाले परिवारों का कहना है कि वे अब अपने ही गांव में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। ग्रामीणों के मुख्य आरोप निम्नलिखित हैं:
    * प्रशासनिक उदासीनता: बार-बार शिकायत के बावजूद अवैध नमाज स्थल को स्थायी रूप से बंद नहीं कराया गया।
    * मनमानी का आरोप: समुदाय विशेष द्वारा नियमों को ताक पर रखकर गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
    * डर का माहौल: ग्रामीणों का कहना है कि यदि आज इस पर रोक नहीं लगी, तो भविष्य में स्थितियां और भी विकट हो सकती हैं।

    प्रशासनिक रुख और वर्तमान स्थिति

    बरेली पुलिस और जिला प्रशासन इस मामले को शांत कराने के प्रयास में जुटा है। अधिकारियों का कहना है कि:
    * मामले की गहन जांच की जा रही है।
    * किसी भी नई धार्मिक परंपरा या बिना अनुमति के सामूहिक आयोजन की अनुमति नहीं दी जाएगी।
    * गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि ग्रामीणों का भरोसा प्रशासन पर से डगमगा चुका है। वे अब किसी ठोस कार्रवाई से कम पर मानने को तैयार नहीं हैं।

    बरेली के मोहम्मदगंज में 200 हिंदू परिवारों ने किया पलायन का ऐलान, घरों के बाहर लगे ‘मकान बिकाऊ है’ के पोस्टर
    https://news.newzo.in/Lnk/SRWR202602161852433022342333

  • बजट तुलना के जरिए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने साधा विपक्ष पर निशाना

    12 सर्किट मॉडल से बदलेगा पर्यटन का नक्शा, मंत्री जयवीर सिंह ने गिनाईं 366 परियोजनाएं

    पर्यटन विकास हेतु 109 करोड़ बनाम 1734 करोड़

    मंदिर, मठ और स्मारकों के विकास पर फोकस

    योगी सरकार ने कनेक्टिविटी के लिए दिए 1000 करोड़- पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह

    यूपी विधानसभा में पर्यटन पर सियासी संग्राम, विपक्ष के सवालों पर मंत्री जयवीर सिंह का आंकड़ों से पलटवार

    ~ shalie saxena

    लखनऊ, (16 फरवरी, 2026)। उत्तर प्रदेश विधानसभा में सोमवार से वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट पर चर्चा शुरू होते ही पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत का मुद्दा प्रमुखता से उभरा। जिस पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने सरकार द्वारा परियोजनों और उसके बजट के आंकड़ों से विपक्ष को करारा जवाब दिया। सदन में समाजवादी पार्टी के विधायक कमाल अख्तर और नफीस अहमद ने प्रदेश के प्रमुख पर्यटक स्थलों के विकास, सौंदर्यीकरण और नई पर्यटन नीति को लेकर सरकार से तीखे सवाल पूछे। विपक्ष ने जानना चाहा कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिहाज से किन स्थलों को विकसित किया जा रहा है और प्रदेश सरकार की दीर्घकालिक नीति क्या है?

    12 सर्किट में बंटा प्रदेश, सभी वर्गों को किया शामिल: मंत्री जयवीर सिंह

    जवाब में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि सरकार ने पूरे प्रदेश को 12 पर्यटन सर्किट में विभाजित कर समग्र विकास की रणनीति अपनाई है। इनमें रामायण, कृष्ण-ब्रज, बौद्ध, महाभारत, शक्तिपीठ, आध्यात्मिक, सूफी-कबीर, जैन, बुंदेलखंड, इको टूरिज्म, वन्यजीव एवं पर्यावरण, शिल्प और स्वतंत्रता संग्राम सर्किट शामिल हैं। मंत्री ने कहा कि इन सर्किटों का गठन किसी धर्म या जाति के आधार पर नहीं, बल्कि सभी समुदायों और सांस्कृतिक विरासत को साथ लेकर किया गया है।

    110 परियोजनाएं पूरी, 366 नई स्वीकृत

    मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, वर्ष 2022 से 2025-26 के बीच बौद्ध धर्म से जुड़ी 43, जैन धर्म से संबंधित 30, वाल्मीकि समाज के 6 पर्यटन स्थलों पर सुविधा विकसित की, रविदास समाज के लिए 19, रैदास समाज के लिए 1, कबीर पंथ के 7, गुरुद्वारों के लिए 9 और डॉ. भीमराव अंबेडकर की स्मृति में 5 परियोजनाएं समेत कुल 110 परियोजनाएं स्वीकृत कर पूरी की गई हैं। उन्होंने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि वर्ष 2017 में पिछली सरकार ने पर्यटन क्षेत्र में केवल 24 परियोजनाएं और 109 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था। इसके मुकाबले वर्तमान सरकार ने वर्ष 2024-25 में 1734.31 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है, जो 15-16 गुना अधिक है। इसी अवधि में 366 परियोजनाएं स्वीकृत की गईं और उन्हें समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा किया जा रहा है। इसके अलावा कनेक्टिविटी पर भी फोकस पर अपनी बात रखते हुए, मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों की बेहतर कनेक्टिविटी के लिए धर्मार्थ कार्य विभाग से 1000 करोड़ रुपये अलग से स्वीकृत किए गए हैं।

    विपक्षी विधायक के क्षेत्र का भी जिक्र

    सदन में मंत्री ने सीधे कमाल अख्तर का नाम लेते हुए कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्रों में भी विकास कार्य कराए गए हैं। वर्ष 2020-21 में 50 लाख रुपये की धनराशि दी गई थी। इसके अलावा ग्राम ढाकी स्थित प्राचीन शिव मंदिर के पर्यटन विकास के लिए 91 लाख रुपये और भोजीपुरा के मोइनी मंदिर के विकास के लिए 150 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।बजट बहस के बीच पर्यटन विकास को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने दिखे। जहां विपक्ष नीति की पारदर्शिता और प्राथमिकताओं पर सवाल उठा रहा है, वहीं सरकार आंकड़ों और बजट प्रावधानों के जरिए अपने कामकाज का दावा मजबूत कर रही है। स्पष्ट है कि 2026-27 के बजट सत्र में पर्यटन केवल विकास का मुद्दा नहीं, बल्कि राजनीतिक विमर्श का भी केंद्र बन चुका है। हालांकि पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने आंकड़ों से यह स्पष्ट कर दिया कि योगी सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पूर्णता कटिबंध है।

    बजट बहस के बीच पर्यटन विकास को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने दिखे। जहां विपक्ष नीति की पारदर्शिता और प्राथमिकताओं पर सवाल उठा रहा है, वहीं सरकार आंकड़ों और बजट प्रावधानों के जरिए अपने कामकाज का दावा मजबूत कर रही है। स्पष्ट है कि 2026-27 के बजट सत्र में पर्यटन केवल विकास का मुद्दा नहीं, बल्कि राजनीतिक विमर्श का भी केंद्र बन चुका है। हालांकि पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने आंकड़ों से यह स्पष्ट कर दिया कि योगी सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पूर्णता कटिबंध है।

  • पांच पत्रों की अनदेखी के बाद पुलिस सख्त

    185 सफाईकर्मी पहले ही छोड़ चुके हैं नौकरी, सत्यापन में टालमटोल जारी

    संदिग्ध बांग्लादेशियों पर नगर निगम की ‘खामोशी’, संयुक्त पुलिस आयुक्त ने थमाया छठा नोटिस

    ~ ब्यूरो रिपोर्ट, शैली सक्सेना (newsdaily24)

    लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों और संदिग्धों की धरपकड़ के बीच एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। नगर निगम प्रशासन सफाई कर्मचारियों का ब्योरा पुलिस को उपलब्ध कराने में लगातार ‘टालमटोल’ कर रहा है। संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून व्यवस्था) बबलू कुमार ने अब नगर आयुक्त को छठा पत्र लिखकर सात दिन के भीतर जवाब मांगा है।

    पत्राचार का लंबा सिलसिला: कब-कब भेजे गए नोटिस?

    पुलिस विभाग की ओर से संदिग्धों की सूची और सत्यापन के लिए लगातार रिमाइंडर भेजे जा रहे हैं, लेकिन निगम की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखी।

    • पिछले वर्ष: 21 नवंबर, 2 दिसंबर और 12 दिसंबर को पत्र भेजे गए।
    • इस वर्ष: 6 जनवरी, 7 जनवरी और अब 7 फरवरी को ताजा नोटिस भेजा गया है।

    9 जनवरी को नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने कागजी कार्रवाई करते हुए जोन 1, 3, 4, 6 और 7 के जोनल सेनेटरी अफसरों को पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर सत्यापन के निर्देश दिए थे, लेकिन हकीकत में जमीन पर कोई काम नहीं हुआ।

    ATS की रडार पर सफाई संस्थाएं

    आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) ने 7 नवंबर 2025 को ही नगर निगम से कूड़ा प्रबंधन और सफाई कार्य देख रही निजी संस्थाओं के श्रमिकों का पूरा ब्योरा मांगा था। एटीएस ने स्पष्ट किया था कि प्रदेश में अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों की मौजूदगी की जांच की जा रही है।

    मांगा गया विवरण: ठेकेदारों की प्रमाणित सूची, श्रमिकों का निवास स्थान, पहचान पत्र और मोबाइल नंबर।

    एनआरसी (NRC) नंबर मांगते ही 185 कर्मचारी फरार

    जांच की सुगबुगाहट शुरू होते ही संदिग्धों में हड़कंप मच गया है। जब कूड़ा प्रबंधन देखने वाली कंपनियों—मेसर्स लखनऊ स्वच्छता अभियान और मेसर्स लायन सिक्योरिटी—ने कर्मचारियों से एनआरसी नंबर मांगा, तो 185 सफाईकर्मी बिना किसी सूचना के रातों-रात काम छोड़कर गायब हो गए। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या ये लोग शहर छोड़ चुके हैं या छिपकर कहीं और काम कर रहे हैं।

    अन्य जिलों की स्थिति: लखनऊ पिछड़ा, बरेली-मेरठ ने दी क्लीन चिट
    जहां लखनऊ नगर निगम ब्योरा देने में सुस्ती बरत रहा है, वहीं प्रदेश के अन्य जिलों ने अपनी रिपोर्ट पुलिस को सौंप दी है:

    नगर स्वास्थ्य अधिकारी का तर्क

    इस पूरे मामले पर नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पीके श्रीवास्तव का कहना है कि सूची भेजी गई थी। हालांकि, उन्होंने यह भी तर्क दिया कि नगर निगम के पास ऐसा कोई ‘तंत्र’ नहीं है जिससे किसी व्यक्ति के मूल रूप से बांग्लादेशी होने की वैज्ञानिक पुष्टि की जा सके।अब देखना यह है कि सात फरवरी को भेजे गए इस छठे पत्र के बाद नगर निगम सात दिनों की समय सीमा के भीतर संदिग्धों का ब्योरा पुलिस को सौंपता है या यह मामला फाइलों में ही दबता रहेगा।

  • ब्रज क्षेत्र को मिलेगी विशिष्ट पहचान: मंत्री जयवीर सिंह

    सेवा और समानता की राह दिखाएंगे पाँच पिलर

    ‘वेदों की ओर लौटो’ का संदेश देगा आर्य गुरुकुल म्यूज़ियम

    ~ शैली सक्सेना

    लखनऊ/आगरा, (15 फरवरी 2026)। उत्तर भारत का आधुनिक आर्य गुरुकुल म्यूज़ियम अब लगभग तैयार है। नई तकनीक से सुसज्जित यह संग्रहालय अतीत की गौरवगाथा को नए और आकर्षक अंदाज़ में पेश करेगा, जहां इतिहास केवल पढ़ा नहीं जाएगा, बल्कि महसूस किया जाएगा। ब्रज क्षेत्र की यह महत्वाकांक्षी परियोजना न सिर्फ पर्यटन को नई राष्ट्रीय पहचान देगी, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का एक मजबूत माध्यम भी बनेगी। फिरोजाबाद जिले के सिरसागंज में 24.45 करोड़ रुपये की लागत से उत्तर प्रदेश का पहला आर्य गुरुकुल म्यूज़ियम तेजी से तैयार हो रहा है, जिसका लगभग 80 फीसदी से अधिक कार्य पूरा किया जा चुका है। इसको लेकर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने समीक्षा बैठक के दौरान जल्द से जल्द कार्य संपन्न करने के निर्देश दिए।

    विज़ुअल स्टोरीटेलिंग में सजेगा आर्य इतिहास

    इसकी विशेषता पर जानकारी देते हुए मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि, इस म्यूजियम में इतिहास को इमर्सिव लर्निंग, विज़ुअल स्टोरीटेलिंग और इंटरैक्टिव डिस्प्ले के जरिए दिखाया जाएगा, ताकि हर उम्र का व्यक्ति इसे आसानी से समझ सके। यहां स्थापना और शुरुआती दौर, संस्थापक और स्थानीय नेताओं का योगदान, आजादी की लड़ाई में भूमिका, सिद्धांत और विचारधारा, योग की अहमियत और आज के समय में इसकी जरूरत जैसे जोन बनाए गए हैं। कुल मिलाकर, आर्य गुरुकुल म्यूजियम सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने और उनसे प्रेरणा लेने का एक बेहतरीन माध्यम है।

    म्यूजियम में ऑडिटोरियम, मल्टीपर्पज हॉल, एम्फीथिएटर, हेलीपैड, फायर फाइटिंग सिस्टम और कई ब्लॉकों का ढांचा तैयार हो गया है और अधिकतर जगहों पर फिनिशिंग का काम चल रहा है। बाहरी इलेक्ट्रिफिकेशन, ट्यूबवेल, अंडरग्राउंड सम्प और कुछ अन्य कार्य प्रगति पर हैं, जबकि सीसी रोड, हॉर्टिकल्चर, तालाब विकास, फ्लोटिंग मल्टीमीडिया और CCTV जैसे कुछ काम अभी शुरू होने बाकी हैं। कुल मिलाकर परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है और तय समय में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

    सत्य, धर्म और सेवा का संदेश देता संग्रहालय

    इसके अलावा इस म्यूजियम में पाँच पिलरों की सीख भी होगी। जिसमें पहला, ईश्वर ही सच्चे ज्ञान का असली स्रोत है-वह निराकार, अनंत और पूरी सृष्टि का रचयिता है। दूसरा, वेद हमें सही सोच और सही जीवन जीने का मार्ग दिखाते हैं, इसलिए उन्हें समझना और उनके अनुसार चलना हमारी जिम्मेदारी है। तीसरा, हमें हर हाल में सच का साथ देना चाहिए और गलत बातों से दूर रहना चाहिए, ताकि हमारा हर कदम धर्म और ईमानदारी पर टिका हो। चौथा, हमारा उद्देश्य केवल अपनी तरक्की नहीं, बल्कि पूरी मानवता की शारीरिक, मानसिक और सामाजिक उन्नति करना है; और पाँचवां, हमें सभी लोगों के साथ प्रेम, सम्मान और न्याय से व्यवहार करना चाहिए एवं दूसरों की प्रगति में ही अपनी सफलता देखनी चाहिए।

    पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने हाल ही में हुई एक बैठक में इसे जल्द पूरा करने का निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि आर्य गुरुकुल म्यूजियम हमारे अतीत की विरासत और भविष्य की संभावनाओं के बीच एक सशक्त माध्यम है। अब सिर्फ आगरा का ताजमहल ही नहीं बल्कि आर्य गुरुकुल म्यूज़ियम भी वैश्विक स्तर पर नई पहचान कायम करेगा। ब्रज क्षेत्र का यह म्यूज़ियम केवल इतिहास को संजोने का प्रयास नहीं, बल्कि उस चेतना को फिर से जागृत करने का संकल्प है जिसने समाज को ज्ञान, समानता और राष्ट्रभाव की दिशा दी। आधुनिक तकनीक और नवाचार के माध्यम से हम अपनी सांस्कृतिक धरोहर को नई पीढ़ी के दिल और दिमाग से जोड़ रहे हैं, ताकि वे केवल इतिहास को जानें ही नहीं, बल्कि उसे महसूस करें, समझें और उससे प्रेरणा लेकर एक सशक्त भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।

    हाल ही में पर्यटन मंत्री ने प्रमुख और महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को लेकर अहम समीक्षा बैठक की थी, जिसमें फिरोजाबाद में बन रहे ग्लास म्यूजियम फिरोजाबाद, मैनपुरी के कल्चरल सेंटर, आर्य गुरुकुल म्यूजियम तथा सामौर बाबा मंदिर कॉम्प्लेक्स की प्रगति और विकास योजनाओं का विस्तार से अवलोकन किया गया था।

    आर्य गुरुकुल म्यूज़ियम सिर्फ एक भवन नहीं है, बल्कि एक ऐसे आंदोलन की कहानी बताएगा, जिसने भारत में सोच, समाज और देशभक्ति को नई दिशा दी। आर्य समाज ने “वेदों की ओर लौटो” का संदेश देकर लोगों को जागरूक किया और सामाजिक बराबरी, शिक्षा और तर्क की सोच को मजबूत बनाया। यह म्यूज़ियम आज की पीढ़ी के लिए एक एजुकेशनल हब की तरह काम करेगा, जहां लोग अपने इतिहास और संस्कारों को आसान और दिलचस्प तरीके से समझ सकते हैं।

  • Cyber Alert! कहीं आपका Bank Account न हो जाए खाली, Phone में तुरंत बदलें ये 5 Security Settings

    Hackers Pixabay
    दिव्यांशी भदौरिया । Feb 15 2026 6:40PM

    अपने स्मार्टफोन को हैकर्स से बचाने और बैंक खाते को सुरक्षित रखने के लिए एक ‘डिजिटल हेल्थ चेकअप’ करें, जिसमें ईमेल लीक की जांच, आधार बायोमेट्रिक लॉक, और व्हाट्सएप की सुरक्षा जैसी 5 जरूरी सेटिंग्स को बदलना शामिल है। इन सेटिंग्स को ठीक करके आप बड़े ऑनलाइन फ्रॉड और डेटा चोरी के खतरे से बच सकते हैं।

    https://campaign.prabhasakshi.com/Lnk/SRWR202602151903353022344006

  • मोतियाबिंद का एकमात्र समाधान सर्जरी

    विशेष रिपोर्ट: सोशल मीडिया पर ‘जादुई’ आई ड्रॉप्स के दावों की हकीकत

    लखनऊ | समाचार डेस्क (शैली – newsdaily24) आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर स्वास्थ्य संबंधी भ्रामक विज्ञापनों की बाढ़ आ गई है। इनमें सबसे खतरनाक ‘Clear Vision’ जैसे आई ड्रॉप्स के विज्ञापन हैं, जो बिना ऑपरेशन के मोतियाबिंद (Cataract) को जड़ से खत्म करने का दावा करते हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ऐसे दावों में फंसना न केवल आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है, बल्कि आँखों की रोशनी हमेशा के लिए छीन सकता है।

    क्या ड्रॉप से मोतियाबिंद ठीक होना संभव है?

    नेत्र रोग विशेषज्ञों (Ophthalmologists) के अनुसार, मोतियाबिंद कोई संक्रमण नहीं है जिसे दवा या ड्रॉप से ‘साफ’ किया जा सके। यह आँख के प्राकृतिक लेंस के प्रोटीन में होने वाला एक संरचनात्मक बदलाव है, जिससे लेंस धुंधला हो जाता है। वर्तमान में दुनिया भर के चिकित्सा विज्ञान में ऐसी कोई भी आई ड्रॉप प्रमाणित नहीं है जो इस धुंधलेपन को वापस पारदर्शी बना सके।

    भ्रामक विज्ञापनों के पीछे का छुपा हुआ खतरा

    सोशल मीडिया पर बिकने वाले इन ड्रॉप्स में अक्सर स्टेरॉयड या हानिकारक रसायन हो सकते हैं। इनके इस्तेमाल से होने वाले जोखिम निम्नलिखित हैं:

    • काला मोतिया (Glaucoma): स्टेरॉयड युक्त ड्रॉप्स आँख का दबाव बढ़ा सकते हैं, जिससे काला मोतिया हो सकता है।
    • सर्जरी में जटिलता: ड्रॉप के भरोसे रहने से मोतियाबिंद ‘पक’ (Hyper-mature) जाता है, जिससे बाद में होने वाली सर्जरी कठिन और जोखिम भरी हो जाती है।
    • संक्रमण का डर: गैर-प्रमाणित दवाओं से आँखों में गंभीर एलर्जी या अल्सर हो सकता है।

    मोतियाबिंद: पहचान और आधुनिक समाधान

    शुरुआती लक्षण:

    1. दृष्टि का धीरे-धीरे धुंधला होना।

    2. रात में गाड़ी चलाते समय सामने वाली लाइट से बहुत ज़्यादा चकाचौंध (Glare) होना।

    3. रंगों का फीका या पीला नजर आना।

    4. चश्मे के नंबर का बार-बार बदलना।

    आज की तकनीक: दर्द रहित और सुरक्षित

    अब मोतियाबिंद का ऑपरेशन पहले जैसा डरावना नहीं रहा। फेको (Phacoemulsification) और लेजर (FLACS) जैसी तकनीकों से बिना टांके और बिना पट्टी के मात्र 10-15 मिनट में ऑपरेशन संभव है। अत्याधुनिक लेंस (जैसे Multifocal या Toric) की मदद से मरीज को दूर और पास, दोनों के चश्मों से मुक्ति मिल सकती है।

    सर्जरी के बाद ‘रिकवरी’ के लिए गोल्डन रूल्स

    ऑपरेशन की सफलता केवल डॉक्टर पर नहीं, बल्कि मरीज की बाद की सावधानी पर भी निर्भर करती है: स्वच्छता: आँखों को छूने से पहले हाथ साबुन से धोएं। सुरक्षा: धूल और तेज़ धूप से बचने के लिए काला चश्मा लगाएं। परहेज: कम से कम एक हफ्ते तक आँख में सीधा पानी न जाने दें और झुककर भारी वजन न उठाएं। आहार: विटामिन-C (आंवला, संतरा) और हरी सब्जियों का सेवन बढ़ाएं। डायबिटीज के मरीज अपना शुगर लेवल नियंत्रित रखें।

    विशेषज्ञ की राय (अलर्ट): > “आँखों के मामले में किसी भी विज्ञापन पर भरोसा न करें। यदि दृष्टि में बदलाव महसूस हो, तो तुरंत किसी योग्य नेत्र रोग विशेषज्ञ से सलाह लें। मोतियाबिंद का एकमात्र वैज्ञानिक इलाज सर्जरी ही है।”

    यह जानकारी जनहित में newsdaily24 द्वारा साझा की गई है। आँखों के किसी भी उपचार से पहले डॉक्टरी परामर्श अनिवार्य है।

  • रणनीति और प्रस्तुति से चमकेगा रिजल्ट

    जेपी पब्लिक स्कूल की शिक्षिका अनुपम अग्रवाल ने साझा किए सफलता के मंत्र

    newsdaily24 शिक्षा विशेष: हिंदी की बोर्ड परीक्षा में कैसे पाएं 90+ अंक?

    ~ विकास अग्रवाल

    बिजनौर/चांदपुर | ब्यूरो रिपोर्ट – newsdaily24 जैसे-जैसे बोर्ड परीक्षाओं की घड़ी नजदीक आ रही है, छात्र-छात्राओं में अच्छे परिणाम को लेकर तनाव और उत्साह दोनों बढ़ रहे हैं। विद्यार्थियों की इसी उलझन को दूर करने के लिए जेपी पब्लिक स्कूल, चांदपुर की प्रसिद्ध हिंदी शिक्षिका अनुपम अग्रवाल ने एक विशेष मार्गदर्शिका साझा की है। उनका मानना है कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि अंकों का वह खजाना है जिसे सटीक रणनीति और सुंदर प्रस्तुति से हासिल किया जा सकता है।

    रटने की आदत छोड़ें, ‘समझ’ पर दें जोर

    शिक्षिका अनुपम अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि हिंदी में अच्छे अंक लाने के लिए रटना काफी नहीं है। छात्र सबसे पहले पूरे पाठ्यक्रम (Syllabus) को समझें:
    * गद्य और पद्य: कविताओं के भावार्थ और काव्य-सौंदर्य को गहराई से समझें। गद्यांश के उत्तर हमेशा तार्किक और क्रमबद्ध होने चाहिए।
    * नोट्स का महत्व: अध्यायों को पढ़ते समय महत्वपूर्ण अंशों को रेखांकित (Underline) करें और स्वयं के नोट्स तैयार करें।

    व्याकरण: सफलता का सॉलिड आधार

    व्याकरण को गणित की तरह अंकदायी बताते हुए उन्होंने कहा कि रस, अलंकार, छंद और वाक्य-शुद्धि का नियमित अभ्यास विद्यार्थियों को दूसरों से आगे खड़ा कर सकता है। नियमों को उदाहरणों के माध्यम से समझना परीक्षा में प्रश्न हल करना आसान बना देता है।

    अनुपम अग्रवाल, प्रसिद्ध हिंदी शिक्षिका, जेपी पब्लिक स्कूल, चांदपुर बिजनौर

    लेखन कौशल: परीक्षक के दिल तक पहुंचने का रास्ता

    लेखन अनुभाग (Writing Section) में निबंध, पत्र और अनुच्छेद लेखन की भाषा सहज लेकिन प्रभावशाली होनी चाहिए।
    * लिखावट और वर्तनी: शुद्ध वर्तनी (Spelling) और साफ-सुथरी लिखावट परीक्षक पर सकारात्मक प्रभाव डालती है।
    * पॉइंट्स में लिखें: लंबे पैराग्राफ के बजाय उत्तरों को बिंदुवार (Point-wise) लिखने से स्पष्टता बढ़ती है।

    परीक्षा भवन के लिए ‘टाइम मैनेजमेंट’ टिप्स

    अनुपम अग्रवाल ने समय प्रबंधन पर विशेष जोर दिया:
    * शुरुआती 15 मिनट: प्रश्नपत्र को शांत मन से पढ़ें।
    * सरल से कठिन की ओर: जो प्रश्न सबसे अच्छे से आते हों, उन्हें पहले हल करें।
    * अंतिम जांच: पेपर खत्म होने के बाद कम से कम 10 मिनट उत्तरपुस्तिका की त्रुटियों को सुधारने के लिए बचाकर रखें।

    🔎 सफलता के लिए ‘चेकलिस्ट’

    * ✅ भाषा: सरल और प्रभावशाली शब्दों का प्रयोग करें।
    * ✅ व्याकरण: व्याकरण संबंधी प्रश्नों को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
    * ✅ अपठित गद्यांश: उत्तरों को कॉपी करने के बजाय अपने शब्दों में लिखें।
    * ✅ अभ्यास: पुराने प्रश्नपत्रों (PyQs) को समय सीमा में हल करें।

    प्रेरक व्यक्तित्व: समर्पण की प्रतिमूर्ति अनुपम अग्रवाल

    चांदपुर की अनुपम अग्रवाल केवल एक शिक्षिका नहीं, बल्कि छात्रों के लिए एक मार्गदर्शक हैं। अपनी सरल शिक्षण शैली के लिए विख्यात अनुपम विद्यार्थियों में भाषा के प्रति प्रेम और आत्मविश्वास जगाने का कार्य बखूबी कर रही हैं। उनके मार्गदर्शन में छात्र न केवल बोर्ड परीक्षाओं में टॉप कर रहे हैं, बल्कि भाषा की गरिमा को भी समझ रहे हैं।

    शिक्षा विभाग डेस्क, newsdaily24 (शैली)
    विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए समर्पित
    newsdaily24 (शैली) की ओर से शुभकामनाएं

  • युवक की संदिग्ध मौत मामले में FIR दर्ज करने में टालमटोल पर भड़के संजय सिंह गंगवार

    SP को बुलाकर जताई नाराजगी

    राज्यमंत्री का कड़ा रुख, पीलीभीत कोतवाल को सस्पेंड करने के निर्देश

    [पीलीभीत/लखनऊ | ब्यूरो रिपोर्ट – newsdaily24]

    पीलीभीत। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में एक युवक की संदिग्ध मौत और पुलिस की लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। पूर्व पुलिसकर्मी से कॉलोनाइजर बने एक रसूखदार व्यक्ति के कार्यालय में हुई युवक की मौत के मामले में 30 घंटे तक FIR दर्ज न करने पर राज्यमंत्री संजय सिंह गंगवार ने कड़ा रुख अपनाया है। मंत्री ने कोतवाल की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए एसपी (SP) को तत्काल उन्हें सस्पेंड करने के निर्देश दिए हैं।

    दफ्तर की छत पर फंदे से लटका मिला शव

    मामला कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला छोटा खुदागंज का है। यहाँ के निवासी 24 वर्षीय अनिल कुमार का शव शुक्रवार सुबह मोहल्ला देशनगर स्थित कॉलोनाइजर वेदप्रकाश कश्यप (पूर्व पुलिसकर्मी) के दफ्तर ‘मधुरवानी फर्म’ की छत पर लटका मिला था।

    • नौकरी से निकाला गया था: अनिल कुमार पिछले सात साल से इसी दफ्तर में काम करता था, लेकिन कुछ दिन पहले ही उसे नौकरी से हटा दिया गया था।
    • सुबह 4 बजे का रहस्यमयी कॉल: परिजनों का आरोप है कि घटना की सुबह 4 बजे कॉलोनाइजर ने अनिल को फोन करके बुलाया और उसके महज तीन घंटे बाद घर पर उसकी मौत की खबर पहुंची।

    पुलिस की ‘टालमटोल’ और रसूखदार को बचाने का आरोप

    परिजनों ने शुक्रवार को ही हत्या की तहरीर देकर कॉलोनाइजर पर कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन पुलिस 30 घंटे से अधिक समय तक मामले को दबाए रही। आरोप है कि पुलिस आरोपी कॉलोनाइजर के रसूख के आगे नतमस्तक थी और एफआईआर दर्ज करने से बचती रही।

    गोलमोल बातें करते नजर आए कोतवाल

    जब पुलिस ने कोई सुनवाई नहीं की, तो पीड़ित परिवार राज्यमंत्री संजय सिंह गंगवार के पास पहुंचा। मंत्री ने जब कोतवाल सत्येंद्र कुमार से जवाब मांगा, तो वे संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके और गोलमोल बातें करते नजर आए।

    मंत्री का एक्शन: एसपी को कड़े निर्देश

    पीड़ित परिवार का दर्द देख राज्यमंत्री ने तत्काल एसपी को मौके पर बुलाया। उन्होंने कोतवाली पुलिस की लापरवाही को अत्यंत गंभीर मानते हुए कोतवाल को तुरंत निलंबित करने और तत्काल हत्या का मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया।

    प्रशासन में मची खलबली

    राज्यमंत्री के इस कड़े रुख के बाद जिले के पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। रसूखदार कॉलोनाइजर वेदप्रकाश कश्यप, जिसने पुलिस की नौकरी छोड़कर प्रॉपर्टी का काम शुरू किया था, अब कानूनी शिकंजे में है। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करा लिया है और अब मंत्री के हस्तक्षेप के बाद आगे की कार्रवाई तेज कर दी गई है।

    ~ संपादक मंडल, newsdaily24
    निष्पक्ष जांच और न्याय के संकल्प के साथ

  • कौशांबी में आक्रोश, आंदोलन ने पकड़ा जोर

    अब पुलिस अधीक्षक कार्यालय के घेराव की कड़ी चेतावनी

    तीसरे दिन भी ‘डायट मैदान’ में डटे पत्रकार

    | ब्यूरो रिपोर्ट – newsdaily24

    कौशांबी। जिला मुख्यालय स्थित डायट मैदान में पत्रकार इश्तियाक अहमद के समर्थन में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना आज तीसरे दिन भी जारी रहा। प्रशासन की हठधर्मी और मामले में निष्पक्ष जांच की अनदेखी से आक्रोशित पत्रकारों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। धरना स्थल पर मौजूद पत्रकार संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही न्यायोचित कार्रवाई नहीं हुई, तो वे पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय परिसर में विशाल धरना प्रदर्शन करने को विवश होंगे।

    न्याय की आस में ठिठुरती रातें, पर हौसले बुलंद

    कौशांबी संदेश के अनुसार, पत्रकार इश्तियाक अहमद को जिस तरह जल्दबाजी में जेल भेजा गया, उसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। समर्थकों और पत्रकारों का आरोप है कि बिना किसी पारदर्शी और समुचित जांच के की गई यह गिरफ्तारी लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को दबाने की एक साजिश है।

    SP कार्यालय के घेराव की बड़ी चेतावनी

    धरना स्थल पर हुई सभा में वक्ताओं ने प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कहा:
    * निर्णायक मोड़: “अब आंदोलन केवल डायट मैदान तक सीमित नहीं रहेगा। यदि हमारी मांगों पर गौर नहीं किया गया, तो अगला पड़ाव पुलिस अधीक्षक कार्यालय होगा।”
    * प्रशासनिक चुप्पी: तीन दिन बीत जाने के बाद भी प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक संवाद न होने को पत्रकारों ने अपना अपमान बताया है।
    * दबाव की राजनीति: पत्रकारों ने सवाल उठाया कि आखिर किसके दबाव में आकर जांच पूरी होने से पहले ही गिरफ्तारी का कदम उठाया गया?

    व्यापक समर्थन और एकजुटता

    धरने के तीसरे दिन जिले के विभिन्न कोनों से पत्रकार संगठन और सामाजिक संगठनों ने पहुंचकर अपना समर्थन दिया। धरना स्थल पर लगातार भीड़ बढ़ रही है और लोग इस कार्रवाई को अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला मान रहे हैं। पत्रकारों का कहना है कि जब तक दूध का दूध और पानी का पानी नहीं हो जाता, तब तक वे पीछे नहीं हटेंगे।

    सच्चाई के लिए संघर्ष जारी

    पत्रकारों की मुख्य मांग है कि मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पत्रकार के खिलाफ कार्रवाई किन परिस्थितियों और किन स्वार्थों के चलते की गई है। फिलहाल, जिले में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और प्रशासन की अगली चाल पर सभी की नजरें टिकी हैं।

  • यूपी में पर्यटन विभाग की होमस्टे नीति को मिली नई उड़ान, दो महीनों में प्रमाणन करीब 5 गुना, घर-घर रोजगार के अवसर बढ़े

    पिछले छह महीनों में तेजी से बढ़ी होमस्टे की संख्या, बेड एंड ब्रेकफास्ट (बी एंड बी) पॉलिसी से रुक रहा पलायन, हो रही घर वापसी

    रिकॉर्ड पर्यटक संख्या को ध्यान में रखते हुए ‘अतिथि देवो भव’ के तहत 1 लाख से अधिक कमरों की स्टे क्षमता बढ़ाने का प्रयास: जयवीर सिंह

    अब अपना घर बन रहा आय का जरिया, पर्यटन विभाग की होमस्टे योजना से यूपी में बढ़ रहे रोजगार के अवसर

    ~ शैली सक्सेना

    लखनऊ, (14 फरवरी 2026)। उत्तर प्रदेश में पर्यटन बढ़ने के साथ अब आम लोगों के घर भी आय का जरिया बन रहे हैं। प्रदेश की बेड एंड ब्रेकफास्ट (बी एंड बी) और होमस्टे पॉलिसी-2025 के तहत लोग अपने घर के खाली कमरों को पर्यटकों को किराये पर देकर अतिरिक्त कमाई कर रहे हैं। सरकार इस योजना के तहत पंजीकरण, प्रशिक्षण और प्रचार जैसी सुविधाएं भी दे रही है। इससे न सिर्फ ग्रामीण पलायन रुका है, बल्कि बाहर काम कर रहे लोग अब घर वापसी कर रहे हैं और होमस्टे पॉलिसी से रोजगार कर रहे हैं।

    होमस्टे प्रमाणपत्र में पांच गुना वृद्धि

    पिछले छह महीनों में होमस्टे योजना के तहत आवेदन और प्रमाणपत्र जारी होने की प्रक्रिया में उल्लेखनीय तेजी देखी गई है। फरवरी 2026 की शुरुआत तक 1700 से अधिक लोगों ने अपने घरों को होमस्टे के रूप में पंजीकृत कराने के लिए आवेदन किया, जिनमें से करीब 700 होमस्टे को आधिकारिक प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं। खास बात यह है कि जनवरी 2026 के पहले सप्ताह तक प्रमाणपत्र प्राप्त होमस्टे की संख्या केवल करीब 150 थी, जो अब बढ़कर लगभग 700 हो गई है। इसका मतलब है कि बहुत कम समय में प्रमाणपत्र जारी होने की संख्या में लगभग पांच गुना वृद्धि दर्ज की गई है। केवल जनवरी महीने में ही 400 से अधिक होमस्टे को प्रमाणपत्र दिए गए, जो इस योजना के तेजी से लागू होने और लोगों की बढ़ती रुचि को दर्शाता है। यह बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि अब आम लोग भी पर्यटन से जुड़कर अपने घरों को आय का नया स्रोत बना रहे हैं।

    पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि, “उत्तर प्रदेश में पर्यटन तेजी से बढ़ रहा है। बढ़ती पर्यटकों की संख्या को देखते हुए बेड एंड ब्रेकफास्ट योजना के तहत 1 लाख से अधिक कमरों की व्यवस्था करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोगों को घर के पास ही रोजगार मिल रहा है और उनकी आय बढ़ रही है।”अपर मुख्य सचिव, पर्यटन संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग, अमृत अभिजात* ने कहा,“यह योजना आम परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए शुरू की गई है। जिन लोगों के पास अतिरिक्त कमरे हैं, वे अब उन्हें पर्यटकों को देकर नियमित आय प्राप्त कर सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ रहा है और लोगों को बाहर जाने की जरूरत कम हो रही है।”

    अपर मुख्य सचिव, पर्यटन संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग, अमृत अभिजात ने कहा,“यह योजना आम परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए शुरू की गई है। जिन लोगों के पास अतिरिक्त कमरे हैं, वे अब उन्हें पर्यटकों को देकर नियमित आय प्राप्त कर सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ रहा है और लोगों को बाहर जाने की जरूरत कम हो रही है।”

    योजना के तहत मिल रही प्रमुख सुविधाएं

    उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के अनुसार, इस योजना में पंजीकरण कराने वाले लोगों को कई लाभ मिलते हैं—

    1. घर के खाली कमरे किराये पर देकर अतिरिक्त आय का मौका
    2. बिजली, पानी और हाउस टैक्स में आवासीय दरों का लाभ
    3. पर्यटन विभाग की वेबसाइट पर होमस्टे का प्रचार-प्रसार
    4. मुफ्त प्रशिक्षण और कौशल विकास की सुविधा
    सोलर ऊर्जा योजना से जुड़ने पर अतिरिक्त लाभ
    5. सुरक्षित संचालन के लिए सीसीटीवी और जरूरी सुरक्षा व्यवस्था

    होमस्टे में मालिक का घर में रहना जरूरी होता है और अधिकतम छह कमरे (12 बेड) पर्यटकों को दिए जा सकते हैं। वहीं बेड एंड ब्रेकफास्ट श्रेणी में केयरटेकर रखना अनिवार्य होता है।

  • 15 से 17 फरवरी तक होंगी रंगारंग प्रस्तुतियां, ‘आज की शाम कालिंजर के नाम’ और ‘बांदा गॉट टैलेंट’ होंगे मुख्य आकर्षण 

    कालिंजर महोत्सव-2026 बनेगा विरासत, पर्यटन और जनभागीदारी का विराट उत्सव- जयवीर सिंह

    खेल महोत्सव में होंगी खो-खो, कबड्डी एवं दंगल प्रतियोगिताएं 

    तृप्ती शाक्या एण्ड ग्रुप, साधो द बैण्ड और चर्चित गायिका ममता शर्मा सजाएंगी सुरमयी शाम 

    कालिंजर महोत्सव 2026: ‘इतिहास की गूंज, संस्कृति की आत्मा’ थीम के साथ बांदा में सजेगा तीन दिवसीय सांस्कृतिक महासंगम

    लखनऊ, (14 फरवरी 2026)। बुंदेलखंड के बांदा जिले के ऐतिहासिक धरती पर 15 से 17 फरवरी तक तीन दिवसीय भव्य कालिंजर महोत्सव 2026 का आयोजन किया जा रहा है। ‘इतिहास की गूंज, संस्कृति की आत्मा’ थीम पर आधारित यह महोत्सव उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और कलात्मक उत्कृष्टता का अद्भुत उत्सव होगा। महोत्सव का आयोजन जिला पर्यटन एवं संस्कृति परिषद तथा जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयास से कटरा कालिंजर मेला ग्राउंड में किया जाएगा।

    उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘कालिंजर महोत्सव के दौरान बुंदेली लोक नृत्य, आल्हा गायन, भजन और लोकगीतों सहित विविध प्रस्तुतियां होंगी, जो क्षेत्र की समृद्ध परंपराओं को नया मंच प्रदान करेंगी। बांदा जनपद के प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक वैभव से परिपूर्ण कालिंजर किले की पृष्ठभूमि में यह आयोजन आगंतुकों को लोक उत्सव के वातावरण में इतिहास और संस्कृति से जुड़ने का अवसर प्रदान करेगा। देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए भी स्मरणीय अनुभव सिद्ध होगा।’

    हर विधा के कलाकार संग परंपरा और नवाचार 

    कालिंजर महोत्सव के तीन दिवसीय आयोजन में जहां एक ओर रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की छटा बिखरेगी, वहीं खेल महोत्सव के माध्यम से युवाओं की ऊर्जा और प्रतिस्पर्धात्मक भावना को मंच मिलेगा। ‘बांदा गॉट टैलेंट’ के जरिए स्थानीय प्रतिभाओं को अपनी कला प्रदर्शित करने का सुनहरा अवसर मिलेगा, तो ‘आज की शाम कालिंजर के नाम’ के अंतर्गत विभिन्न विधाओं के कलाकार, गायक और खिलाड़ी अपनी विधा से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे। यह महोत्सव स्थानीय सांस्कृतिक धरोहर की झलक के साथ परंपरा और नवाचार का उत्सव बनकर भी उभरेगा। महोत्सव अंतर्गत मंडलीय सरस मेले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़ी महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों की आकर्षक प्रदर्शनी एवं विभागीय स्टॉल लगाए जाएंगे तथा सम्मेलन एवं गोष्ठी भी होगी। 

    खेल महोत्सव और ‘बांदा गॉट टैलेंट’

    खेल महोत्सव प्रतिदिन प्रातः 08 बजे से अपराह्न 04 बजे तक आयोजित किया जाएगा, जिसमें 15 फरवरी को खो-खो प्रतियोगिता, 16 फरवरी को कबड्डी प्रतियोगिता तथा 17 फरवरी को दंगल प्रतियोगिता का आयोजन होगा। कालिंजर महोत्सव के अंतर्गत ‘बांदा गॉट टैलेंट’ का आयोजन प्रतिदिन अपरान्ह 01 बजे से 03 बजे तक किया जाएगा, जिसके अंतर्गत 15 फरवरी को विद्यालय स्तरीय कार्यक्रम आयोजित होगा। 16 फरवरी को महाविद्यालय स्तरीय प्रतिभागी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे, जबकि 17 फरवरी को सांस्कृतिक उत्सव 2025-26 के जनपद स्तरीय विजेताओं द्वारा विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी। 

    ‘आज की शाम कालिंजर के नाम’ से सजेगी सुरमयी शाम 

    कालिंजर महोत्सव में 15, 16 व 17 फरवरी को प्रतिदिन अपराह्न 04 बजे से सायं 06 बजे तक ‘स्थानीय सांस्कृतिक धरोहर’ के अंतर्गत बुंदेली लोक संस्कृति की प्रस्तुतियां होंगी। इनमें बुंदेली लोक नृत्य, बुंदेली लोक गायन, वीर रस से ओत-प्रोत आल्हा गायन तथा भजन एवं लोक गीतों के माध्यम से क्षेत्र की समृद्ध परंपरा की झलक दर्शकों को देखने को मिलेगी।  ‘आज की शाम कालिंजर के नाम’ के अंतर्गत महोत्सव में प्रतिदिन शाम 06 बजे से रात्रि 10 बजे तक सांस्कृतिक संध्या का भव्य आयोजन किया जाएगा। 15 फरवरी को तृप्ती शाक्या एण्ड ग्रुप अपनी प्रस्तुति से माहौल को सुरमयी बनाएंगे। 16 फरवरी को साधो द बैण्ड एण्ड ग्रुप तथा राधा श्रीवास्तव एण्ड ग्रुप दर्शकों का मनोरंजन करेंगे। वहीं, 17 फरवरी को ममता शर्मा एवं राजा रेन्चो अपनी प्रस्तुतियों से महोत्सव की संध्या को यादगार बनाएंगे।

    अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात ने बताया कि ‘कालिंजर महोत्सव-2026 बुंदेलखंड की ऐतिहासिक चेतना और जनभागीदारी का सशक्त उत्सव है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा गणतंत्र दिवस की झांकी में भी कालिंजर किला को प्रमुखता से प्रदर्शित कर उसकी वैश्विक पहचान को नई ऊंचाई दी गई है। पर्यटन विभाग का सतत प्रयास है कि बुंदेलखंड के चर्चित एवं विरासत स्थलों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर सशक्त रूप से स्थापित किया जाए। हमें विश्वास है कि यह आयोजन पर्यटन संवर्धन, स्थानीय अर्थव्यवस्था के सशक्तिकरण और सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।’

  • मंदबुद्धि का दिखावा या देश को खतरे में डालने का षड्यंत्र?

    वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी से पार्टी में बढ़ा आक्रोश

    अंतर्कलह के भंवर में कांग्रेस: नेतृत्व पर सवाल या वजूद का संकट?

    नई दिल्ली/ब्यूरो। भारतीय राजनीति की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस इस समय अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। एक तरफ जहां चुनावी मैदान में पार्टी का ग्राफ लगातार गिर रहा है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के भीतर से ही राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर तीखे सवाल उठने लगे हैं। वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा और मुस्लिम वोट बैंक का खिसकना पार्टी के लिए खतरे की घंटी माना जा रहा है।

    राहुल गांधी के नेतृत्व पर अपनों ने ही खोला मोर्चा

    कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे डॉ. शकील अहमद ने राहुल गांधी की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें ‘असुरक्षित और अहंकारी’ करार दिया है। अहमद का कहना है कि राहुल वरिष्ठ नेताओं के साथ काम करने में असहज महसूस करते हैं क्योंकि उन्हें अनुभवी नेताओं को ‘आप’ कहकर संबोधित करना पड़ता है, जो उनके अहंकार को रास नहीं आता। उन्होंने यहाँ तक आरोप लगाया कि मल्लिकार्जुन खरगे महज एक ‘कठपुतली अध्यक्ष’ हैं, जबकि पर्दे के पीछे सारे निर्णय राहुल ही लेते हैं।

    मुस्लिम नेताओं का मोहभंग: वोट बैंक की राजनीति पर चोट

    स्वतंत्रता के बाद से ही कांग्रेस का आधार स्तंभ रहे मुस्लिम मतदाता अब छिटकते नजर आ रहे हैं। वरिष्ठ नेता राशिद अल्वी ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि पार्टी केवल मुसलमानों का वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करती है, लेकिन उनके हितों की परवाह नहीं करती। उन्होंने आरोप लगाया कि इंदिरा और राजीव गांधी के दौर में कार्यकर्ताओं की पहुंच नेतृत्व तक आसान थी, लेकिन आज संवाद के सारे रास्ते बंद हैं। इसी तरह बसपा से कांग्रेस में आए नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने भी अनदेखी के कारण पार्टी को अलविदा कह दिया।

    विद्वता की उपेक्षा: शशि थरूर और ‘जी-23’ का दर्द

    पार्टी के भीतर केवल मुस्लिम नेता ही नहीं, बल्कि शशि थरूर जैसे विद्वान नेता भी हाशिए पर धकेले जा रहे हैं। जानकारों का मानना है कि थरूर की काबिलियत ही उनके लिए मुसीबत बन गई है। अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ना और राष्ट्रीय मुद्दों पर स्पष्ट स्टैंड लेना शायद आलाकमान को पसंद नहीं आया। पार्टी के कुछ सांसद अब इन आत्ममंथन की मांग करने वाले नेताओं को “2026 बैच के जयचंद” कहकर अपमानित कर रहे हैं।

    चुनावी प्रदर्शन: बिहार और बीएमसी में करारी हार

    आंकड़े गवाह हैं कि कांग्रेस का संगठनात्मक ढांचा चरमरा रहा है:
    * बिहार विधानसभा चुनाव: कांग्रेस को मात्र 8.71% वोट मिले और वह केवल 6 सीटें जीत सकी। गठबंधन सहयोगियों ने भी हार का ठीकरा कांग्रेस के कमजोर प्रचार पर फोड़ा।
    * बीएमसी चुनाव: यहाँ भी पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा, जहाँ 227 सीटों में से कांग्रेस केवल 24 सीटें जीत पाई और वोट प्रतिशत गिरकर 9.31% रह गया।

    आगामी चुनौतियां: क्या नेतृत्व परिवर्तन ही एकमात्र विकल्प?

    अब जब तमिलनाडु, केरल, बंगाल और असम जैसे राज्यों में चुनाव नजदीक हैं, पार्टी के भीतर दबी जुबान में यह मांग उठने लगी है कि क्या कांग्रेस को राहुल गांधी के नेतृत्व से मुक्ति मिल पाएगी? क्या पार्टी वास्तव में आत्ममंथन करेगी या “बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधे” वाली स्थिति बनी रहेगी?

    प्रस्तुति: आर्य राजेश, उपसंपादक (Super India News TV 5 / Z9 News TV)

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    > (newsdaily24) – सत्यमेव जयते

  • विशेष रिपोर्ट: मिशन 2029 की तैयारी और राजनीतिक बिसात

    ‘मूड ऑफ द नेशन 2026’: क्या विपक्ष की एकता को चुनौती दे रही है पीएम मोदी की बढ़ती लोकप्रियता?

    नई दिल्ली | newsdaily24 डेस्क | 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद लगा था कि भारतीय राजनीति में विपक्ष की वापसी एक नया मोड़ लेगी, लेकिन जनवरी 2026 के ताज़ा आंकड़ों ने समीकरणों को फिर से दिलचस्प बना दिया है। ‘इंडिया टुडे-सी वोटर मूड ऑफ द नेशन’ (MOTN) के ताज़ा सर्वे के अनुसार, अगर आज चुनाव होते हैं, तो सत्ताधारी गठबंधन (NDA) अपनी पकड़ और मज़बूत करता दिख रहा है।

    सर्वे के चौंकाने वाले आंकड़े

    * NDA की बढ़त: सर्वे के अनुसार, बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए 352 सीटों तक पहुँच सकता है। यह 2024 के मुकाबले एक बड़ी छलांग है।
    * बीजेपी का खुद का प्रदर्शन: बीजेपी अकेले 287 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत का आंकड़ा पार करती दिख रही है, जो कि 2024 में 240 पर रुक गई थी।
    * विपक्ष (INDIA गठबंधन) की स्थिति: विपक्षी गठबंधन को इस सर्वे में तगड़ा झटका लगता दिख रहा है। उनकी सीटें 234 से घटकर 182 के आसपास रहने का अनुमान है।

    प्रमुख राजनीतिक बदलाव और चुनौतियां

    newsdaily24 के विश्लेषण के अनुसार, वर्तमान में राजनीति तीन बड़े केंद्रों पर घूम रही है:
    * नेतृत्व का चेहरा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अप्रूवल रेटिंग अभी भी 57-58% पर स्थिर है। वहीं राहुल गांधी की लोकप्रियता में भी इजाफा हुआ है (27% के करीब), लेकिन यह वोटों में कितना बदल पाएगा, यह बड़ा सवाल है।
    * राज्यों के समीकरण: पश्चिम बंगाल में टीएमसी और बीजेपी के बीच कड़ी टक्कर है, तो वहीं केरल में बीजेपी अपना वोट शेयर बढ़ाने की कोशिश में है। महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार के आकस्मिक निधन (जनवरी 2026) के बाद सत्ता के समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं।
    * जातीय जनगणना और परिसीमन: 2026 तक जनगणना पूरी होने की संभावना है, जिसके बाद लोकसभा सीटों का परिसीमन (Delimitation) एक बड़ा मुद्दा बनेगा। सीटों की संख्या 800 से अधिक हो सकती है, जो भविष्य की राजनीति को पूरी तरह बदल देगी।

    newsdaily24 का नज़रिया

    आगामी महीनों में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ये चुनाव केवल राज्यों के मुख्यमंत्री तय नहीं करेंगे, बल्कि 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए ‘सेमीफाइनल’ की तरह देखे जा रहे हैं।

    एक्सक्लूसिव (फरवरी 2026 तक के घटनाक्रम के आधार पर):
    1. महाराष्ट्र: ‘सहानुभूति’ और ‘विलय’ की आहट

    अजित पवार के निधन (28 जनवरी 2026) के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा मोड़ आया है।
    * नतीजे: हाल ही में संपन्न हुए 12 जिला परिषद चुनावों में महायुति (BJP, NCP-अजित, शिवसेना-शिंदे) ने प्रचंड जीत हासिल की है। अजित पवार की NCP के पक्ष में बड़ी ‘सहानुभूति लहर’ देखी गई है।
    * विलय की चर्चा: शरद पवार ने संकेत दिए हैं कि दोनों NCP गुटों के विलय पर अंतिम फैसला जल्द हो सकता है, जो 2029 की बिसात को पूरी तरह पलट सकता है।

    2. पश्चिम बंगाल: चौतरफा मुकाबला
    बंगाल में खेल अब केवल TMC बनाम BJP नहीं रहा।
    * कांग्रेस का दांव: कांग्रेस ने घोषणा की है कि वह 2026 विधानसभा चुनाव में सभी 294 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी। इससे ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के वोटों में बिखराव तय माना जा रहा है, जिसका सीधा फायदा BJP को मिल सकता है।
    3. परिसीमन (Delimitation) का नया मोड़
    सरकार ने संकेत दिए हैं कि 2027 की जनगणना के बाद सीटों का बंटवारा जनसंख्या और विकास (Development) दोनों मानकों पर आधारित हो सकता है, ताकि दक्षिण भारतीय राज्यों का प्रतिनिधित्व कम न हो।

    इन्फोग्राफिक डेटा (Infographic Ideas):

  • समाज ने जताया सामूहिक आभार

    पंडित हर गोविंद पंत जिला चिकित्सालय के डॉक्टरों की कर्मठता को सामाजिक कार्यकर्ता संजय पाण्डे ने सराहा

    तालियों की गूंज और भावुक क्षणों के बीच हुआ अभिनंदन

    विषम परिस्थितियों में ‘देवदूत’ बने चिकित्सकों का ऐतिहासिक सम्मान

    अल्मोड़ा। सीमित संसाधन, कठिन भौगोलिक परिस्थितियां और जिम्मेदारियों का भारी बोझ—इन सबके बीच मानवता की सेवा को अपना सर्वोच्च धर्म मानने वाले चिकित्सकों के सम्मान में आज अल्मोड़ा का वातावरण श्रद्धा और कृतज्ञता से भर गया। स्थानीय पंडित हर गोविंद पंत जिला चिकित्सालय में कार्यरत चिकित्सकों के सम्मान में वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता संजय पाण्डे के नेतृत्व में एक गरिमामय समारोह आयोजित किया गया, जिसने चिकित्सा जगत और समाज के बीच के अटूट विश्वास को एक नई ऊंचाई दी।

    सेवाभावी चिकित्सकों का अभिनंदन

    समारोह में चिकित्सालय के उन स्तंभों को सम्मानित किया गया जो दिन-रात जनसेवा में जुटे हैं:
    * डॉ. हरीश चंद्र गड़कोटी (मुख्य चिकित्सा अधीक्षक)
    * डॉ. अमित सुकोटी एवं डॉ. धीरज राज (वरिष्ठ लेप्रोस्कोपिक सर्जन)
    * डॉ. मोनिका सम्मल (नाक-कान-गला विशेषज्ञ)
    * डॉ. अविनाश (अस्थि रोग विशेषज्ञ)
    * डॉ. मोहित टम्टा (रेडियोलॉजिस्ट)
    सभी चिकित्सकों को शॉल ओढ़ाकर और पुष्प मालाएं अर्पित कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मौजूद गणमान्य नागरिकों ने खड़े होकर तालियों की गूंज के साथ इन जीवन रक्षकों का स्वागत किया।

    चिकित्सा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनता अल्मोड़ा

    वक्ताओं ने इस बात पर विशेष हर्ष व्यक्त किया कि आज जिला चिकित्सालय में आधुनिक लेप्रोस्कोपिक तकनीक से जटिल सर्जरी, ईएनटी के सफल ऑपरेशन और सटीक रेडियोलॉजी जांच सेवाएं उपलब्ध हैं। अब मरीजों को बड़े शहरों की ओर नहीं दौड़ना पड़ता। यह आत्मनिर्भर चिकित्सा व्यवस्था की ओर अल्मोड़ा का एक बड़ा कदम है।

    “डॉक्टर ही ईश्वर का साक्षात रूप”

    अपने संबोधन में संजय पाण्डे अत्यंत भावुक नजर आए। उन्होंने कहा: “जब कोई व्यक्ति जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहा होता है, तब डॉक्टर ही उसके लिए ईश्वर का साक्षात रूप बनकर सामने आते हैं। संसाधनों की कमी के बावजूद इनका समर्पण कर्तव्य नहीं, बल्कि एक कठिन तपस्या है। समाज इस ऋण को कभी चुका नहीं सकता।”

    उपस्थित गणमान्य जन

    इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी रामशिला वार्ड के पार्षद नवीन चंद्र आर्य (बबलू भाई), टेलर एसोसिएशन के अध्यक्ष एस.आर. बेग, सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य श्री आनंद सिंह बिष्ट सहित बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक बने। सभी ने एक स्वर में चिकित्सकों के मृदुभाषी और करुणामयी व्यवहार की प्रशंसा की।
    कार्यक्रम के अंत में संजय पाण्डे ने घोषणा की, कि उत्कृष्ट सेवा देने वाले स्वास्थ्यकर्मियों को सम्मानित करने की यह परंपरा भविष्य में भी जारी रहेगी ताकि सेवा और संवेदना का यह प्रवाह निरंतर बना रहे।

  • बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिका पर पीड़िता को जारी किया नोटिस 

    आदित्य पंचोली की कोर्ट से 2019 का रेप केस रद्द करने की मांग

    मुंबई: बॉलीवुड अभिनेता आदित्य पंचोली को बॉम्बे हाईकोर्ट से एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रिया में राहत की उम्मीद जगी है। अदालत ने साल 2019 में दर्ज दुष्कर्म की प्राथमिकी (FIR) को रद्द करने की उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए शिकायतकर्ता महिला को नोटिस जारी किया है।

    मुख्य कानूनी घटनाक्रम

    गुरुवार को न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति पृथ्वीराज चव्हाण की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। आदित्य पंचोली ने अपनी याचिका में तर्क दिया है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं और यह FIR कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है। कोर्ट ने अब इस मामले में शिकायतकर्ता का पक्ष जानने के लिए उन्हें अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

    क्या है पूरा मामला?

    यह मामला 2019 का है, जब एक प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेत्री ने आदित्य पंचोली के खिलाफ वर्सोवा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी।
    *आरोप: अभिनेत्री ने आरोप लगाया था कि 2004 से 2009 के बीच पंचोली ने उनका यौन शोषण किया, उन्हें बंधक बनाकर रखा और मारपीट की।
    *धाराएं: पुलिस ने आईपीसी की धारा 376 (दुष्कर्म), 328, 384, 341, 342, 323 और 506 के तहत मामला दर्ज किया था।

    पंचोली का पक्ष

    आदित्य पंचोली शुरुआत से ही इन आरोपों को नकारते रहे हैं। उनके कानूनी दल का कहना है कि यह प्राथमिकी काफी देरी से दर्ज कराई गई थी और इसके पीछे आपसी रंजिश या अन्य उद्देश्य हो सकते हैं। इसी आधार पर उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाकर इस FIR को पूरी तरह से रद्द (Quash) करने की मांग की है।

    आगे की राह

    हाईकोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद अब शिकायतकर्ता को अदालत में अपना पक्ष रखना होगा। यदि अदालत को लगता है कि प्राथमिकी में पर्याप्त मेरिट नहीं है, तो इसे रद्द किया जा सकता है। फिलहाल, मामले की अगली सुनवाई तक सभी की नजरें पीड़िता के जवाब और कोर्ट के अगले रुख पर टिकी हैं।

    आदित्य पंचोली बनाम अभिनेत्री: कानूनी विवाद की कहानी

    यह मामला दशकों पुरानी घटनाओं और हालिया कानूनी लड़ाइयों का एक जटिल मिश्रण है। इसकी मुख्य कड़ियाँ :
    | समय सीमा | मुख्य घटनाक्रम |
    | 2004 – 2009 | अभिनेत्री के आरोपों के अनुसार, इसी कालखंड के दौरान कथित तौर पर यौन शोषण और मारपीट की घटनाएं हुईं। |
    | मई 2019 | अभिनेत्री की बहन ने मुंबई पुलिस में आदित्य पंचोली के खिलाफ दुर्व्यवहार की प्रारंभिक शिकायत दर्ज कराई। |
    | जून 2019 | वर्सोवा पुलिस स्टेशन में अभिनेत्री के बयान के आधार पर धारा 376 (दुष्कर्म) सहित अन्य गंभीर धाराओं में FIR दर्ज की गई। |
    | जुलाई 2019 | मुंबई की डिंडोशी सत्र अदालत ने आदित्य पंचोली को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत प्रदान की। |
    | 2020 – 2024 | मामला विभिन्न अदालती प्रक्रियाओं और पुलिस जांच के दौर से गुजरा। पंचोली ने लगातार इन आरोपों को “झूठा और प्रेरित” बताया। |
    | फरवरी 2026 | आदित्य पंचोली ने बॉम्बे हाईकोर्ट में FIR रद्द करने की याचिका दायर की। |
    | 12 फरवरी 2026 | वर्तमान स्थिति: बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई की और शिकायतकर्ता को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया। |

    क्या होगा अगला कदम?

    अब शिकायतकर्ता (अभिनेत्री) को हाईकोर्ट में अपना हलफनामा (Affidavit) दाखिल करना होगा, जिसमें उन्हें यह बताना होगा कि FIR को रद्द क्यों नहीं किया जाना चाहिए। इसके बाद अदालत तय करेगी कि क्या मामले को ट्रायल के लिए भेजा जाए या इसे यहीं समाप्त कर दिया जाए।