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  • बीहड़ में डकैतों की आस्था का बड़ा केंद्र रहे मंदिर के विकास को ₹1 करोड़

    लखनऊ, (01 अक्टूबर 2025)। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने आदि शक्ति उपासकों और श्रद्धालुओं को बड़ा उपहार दिया है। मुख्यमंत्री पर्यटन स्थलों के विकास योजना अंतर्गत कानपुर देहात के कथरी स्थित प्राचीन कात्यायनी देवी मंदिर के पर्यटन विकास के लिए 1 करोड़ रुपए की धनराशि स्वीकृत की गई है। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया, कि ‘कात्यायनी देवी मंदिर शक्ति आराधना का महत्वपूर्ण स्थल है। सरकार का उद्देश्य इस प्राचीन व धार्मिक स्थल को पर्यटन मानचित्र पर और सशक्त बनाना है, जिससे श्रद्धालु और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिल सके।

    मंत्री जयवीर सिंह ने बताया… ‘उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग का प्रयास है कि कथरी स्थित कात्यायनी देवी मंदिर को क्षेत्रीय धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।’

    कानपुर देहात को धार्मिक मानचित्र पर विशिष्ट पहचान दिलाने के लिए पर्यटन विभाग ने कथरी स्थित प्राचीन कात्यायनी देवी मंदिर के समेकित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। इस परियोजना के तहत पर्यटन स्थल पर सौंदर्यीकरण, आधुनिक प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छ शौचालय, सूचना केंद्र और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इन सुविधाओं के विकसित होने से न केवल स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि जनपद की पौराणिक और सांस्कृतिक धरोहर को भी नई पहचान मिलेगी।

    मां कात्यायनी को देवी दुर्गा का छठा रूप माना जाता है। मान्यता है कि जो भी भक्त विशेषकर नवरात्र में श्रद्धा से मां कात्यायिनी का पूजन करता है, उसकी मनोकामना पूर्ण होती है। यह मंदिर बीहड़ के डाकुओं की आस्था का बड़ा केंद्र माना जाता रहा है। क्षेत्र में डाकुओं द्वारा सबसे पहले ध्वज चढ़ाने की कई कहानियां प्रचलित हैं। सांसद बनने के बाद फूलन देवी भी यहां पूजन करने आईं थीं। किंवदंती के अनुसार, कालांतर में शाहजहांपुर के तत्कालीन राजा गजाधर दुबे ने पुत्र-प्राप्ति की मन्नत पूरी होने पर भव्य मंदिर का निर्माण कराया था।

    यह प्राचीन मंदिर इटावा रोड पर शाहजहांपुर गांव से लगभग छह किलोमीटर तथा तहसील मुख्यालय भोगनीपुर से करीब 16 किलोमीटर की दूरी पर बीहड़ में स्थित है। कानपुर नगर से मंदिर की दूरी करीब 85 किलोमीटर है। नवरात्रि के समय इस मंदिर में बड़ा मेला लगता है। मेले में निकटवर्ती जनपदों के भी श्रद्धालु एवं भक्तगण बड़ी संख्या में आते हैं।

    पर्यटन के लिहाज से कानपुर देहात उभरता जिला है। यहां दुर्वासा ऋषि आश्रम, 500 साल पुराना बरगद वृक्ष सहित कई दर्शनीय स्थल हैं। जनपद में वर्ष 2024 में 9,47,914 लाख से अधिक पर्यटक आए थे। वहीं, वर्ष 2025 की पहली तिमाही (जनवरी से मार्च) में ही 2,63,679 से अधिक सैलानियों ने जिले का रुख किया। बढ़ते पर्यटक आगमन से न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिल रहे हैं।

    उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा, ‘धार्मिक पर्यटन में उत्तर प्रदेश अन्य राज्यों की तुलना में पहले पायदान पर है। कानपुर देहात प्राचीन और पौराणिकता स्थलों के लिए विख्यात है। सरकारी प्रयास है कि चर्चित स्थलों को विश्व पर्यटन मानचित्र पर और अधिक सशक्त तरीके से स्थापित किया जाए। साथ ही, अल्पज्ञात स्थलों को भी प्रदेश की पहचान से जोड़ते हुए प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित किया जाए।’

  • ड्राफ्ट्समैन को अभियंता का लाइसेंस: नियत प्राधिकारी की कार्यशैली पर सवाल !

    Target Tv Live

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    कैसे हुआ नियमों का उल्लंघन ?

    नियमों के अनुसार, अभियंता का लाइसेंस केवल योग्यताधारी इंजीनियर को ही प्रदान किया जा सकता है, जिसे मान्यता प्राप्त संस्थान से डिग्री या डिप्लोमा प्राप्त हो। लेकिन, इस मामले में नियत प्राधिकारी ने एक ड्राफ्ट्समैन को अभियंता के रूप में मान्यता दे दी, जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है। सूत्रों के अनुसार, इस प्रक्रिया में न केवल तकनीकी मानकों को नजरअंदाज किया गया, बल्कि इस निर्णय से निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है। एक गैर-प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा अभियंता की भूमिका निभाना सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

  • लखनऊ। डिजिटल युग में जहां बैंकिंग और शॉपिंग आसान हुई है, वहीं साइबर ठग भी नए-नए तरीकों से लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसिद्ध ज्वेलरी ब्रांड ‘तनिष्क’ (Tanishq) के नाम से एक मैसेज तेजी से वायरल हो रहा है। इस मैसेज में दावा किया जा रहा है कि कंपनी अपनी सालगिरह के अवसर पर सभी को “विशेष उपहार” (Anniversary Gift) दे रही है।

    वायरल हो रहे इस मैसेज में एक लिंक दिया गया है जो देखने में तनिष्क जैसा लगता है, लेकिन असल में यह एक फिशिंग लिंक है। साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, इस लिंक पर क्लिक करते ही उपयोगकर्ता से कुछ सवाल पूछे जाते हैं और फिर उपहार पाने के लिए मैसेज को 10 से 20 लोगों को फॉरवर्ड करने का दबाव बनाया जाता है।

    1. लालच देना: सबसे पहले “फ्री गिफ्ट” या “कैशबैक” का लालच देकर यूजर को लिंक पर क्लिक करने के लिए उकसाया जाता है।

    2. निजी जानकारी की चोरी: लिंक पर क्लिक करने के बाद यूजर से उसका नाम, मोबाइल नंबर और कभी-कभी बैंक संबंधी जानकारी मांगी जाती है।

    3. फॉरवर्ड करने की शर्त: मैसेज को वायरल करने के लिए इसे कई ग्रुप्स में शेयर करने को कहा जाता है, जिससे अधिक से अधिक लोग इनके जाल में फंस सकें।

    URL की जांच करें: तनिष्क की आधिकारिक वेबसाइट tanishq.co.in है। वायरल मैसेज में taicoz.cyou जैसे संदिग्ध लिंक दिए जा रहे हैं, जो पूरी तरह फर्जी हैं।

    अनाधिकारिक घोषणा: कोई भी प्रतिष्ठित कंपनी इस तरह व्हाट्सएप पर मैसेज फॉरवर्ड करने के बदले महंगे उपहार नहीं बांटती।

    भाषा और डिजाइन: ऐसे फर्जी मैसेजेस में अक्सर वर्तनी (Spelling) की गलतियां और खराब ग्राफिक्स का इस्तेमाल होता है।

    यदि आपको भी ऐसा कोई मैसेज प्राप्त होता है, तो उस पर क्लिक न करें और न ही उसे किसी को फॉरवर्ड करें। अपनी बैंकिंग जानकारी या ओटीपी (OTP) किसी भी अनजान वेबसाइट पर साझा न करें। यदि आप किसी धोखाधड़ी का शिकार होते हैं, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

    1.अज्ञात स्रोतों से आए लिंक को न खोलें।

    2. उपहार के लालच में आकर अपनी निजी जानकारी साझा न करें।

    3. किसी भी ऑफर की पुष्टि कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या नजदीकी स्टोर पर जाकर ही करें।

  • अक्सर आपने प्रशासनिक अधिकारियों, स्कूल के प्रधानाचार्यों या बड़े व्यापारियों को हस्ताक्षर के लिए हरे रंग के पेन का उपयोग करते देखा होगा। साधारण तौर पर इसे केवल एक पद की पहचान माना जाता है, लेकिन ज्योतिष, अंकशास्त्र (Numerology) और मेनिफेस्टेशन (Manifestation) की दुनिया में हरे पेन की स्याही को ‘समृद्धि का सूत्र’ माना गया है। आइए जानते हैं कि कैसे एक छोटा सा हरा पेन आपके करियर, धन और स्मरण शक्ति में चमत्कारिक बदलाव ला सकता है।

    ज्योतिष शास्त्र में हरा रंग बुध ग्रह का प्रतीक है। बुध को बुद्धि, तर्क, संचार (Communication) और व्यापार का कारक माना जाता है।

    बुध को मजबूती: हरे पेन का उपयोग करने से कुंडली में बुध ग्रह की स्थिति मजबूत होती है, जिससे व्यक्ति की वाणी में प्रभाव और निर्णय लेने की क्षमता में सटीकता आती है।

    विकास का प्रतीक: प्रकृति में हरा रंग विकास (Growth) और नई शुरुआत को दर्शाता है। यही कारण है कि यह सकारात्मकता का संचार करता है।

    आधुनिक समय में ‘लॉ ऑफ अट्रैक्शन’ के विशेषज्ञों का मानना है कि रंगों का हमारे अवचेतन मन पर गहरा प्रभाव पड़ता है:

    मनोकामना पूर्ति: अपनी इच्छाओं को एक डायरी में वर्तमान काल (Present Tense) में हरे पेन से लिखने से वे जल्दी साकार होती हैं। उदाहरण के लिए— “मैं एक सफल व्यवसायी हूँ।”

    धन की बरकत (Angel Numbers): सफेद कागज पर हरे पेन से ‘520’ या ‘741’ जैसे अंक लिखकर या ‘Infinity’ (∞) का चिन्ह बनाकर अपने पर्स में रखने से अनावश्यक खर्च रुकते हैं और आय के स्रोत बढ़ते हैं।

    विद्यार्थियों और पेशेवरों के लिए हरा पेन एक ‘लकी चार्म’ साबित हो सकता है:

    स्मरण शक्ति: शोध बताते हैं कि हरा रंग आंखों को सुकून देता है और एकाग्रता बढ़ाता है। छात्र यदि अपने नोट्स या होमवर्क में हरे पेन का संतुलन के साथ प्रयोग करें, तो उन्हें चीजें जल्दी याद होती हैं।

    अटके हुए काम: यदि आपका कोई काम लंबे समय से अटका हुआ है या नौकरी में तरक्की नहीं मिल रही है, तो अपनी ‘टू-डू लिस्ट’ (To-Do List) हरे पेन से बनाना शुरू करें। यह आपके काम को ‘ग्रीन सिग्नल’ देने जैसा है।

    अपनी राशि के अनुसार जानें कि आप हरे पेन का उपयोग किस क्षेत्र में कर सकते हैं:

    | राशि | प्रभाव और उपाय |

    उच्चाधिकारियों की पसंद और व्यावहारिक महत्व

    भारत में राजपत्रित अधिकारियों (Gazetted Officers) द्वारा हरे पेन का प्रयोग करना उनकी आधिकारिक मंजूरी को दर्शाता है। यह रंग “सकारात्मकता, अधिकार और विकास” का प्रतीक है। जब कोई अधिकारी हरे पेन से साइन करता है, तो इसका अर्थ होता है कि उस फाइल को आगे बढ़ने की अनुमति मिल गई है।

    कुल मिलाकर हरे पेन का चमत्कारिक उपयोग केवल एक धारणा नहीं, बल्कि सकारात्मक मनोविज्ञान और ज्योतिष का अनूठा संगम है। यदि आप भी अपने जीवन में समृद्धि और स्पष्टता चाहते हैं, तो एक हरा पेन आपके भाग्य के बंद दरवाजे खोलने की चाबी बन सकता है।

  • #WestBengalPolitics #NewGovernment #RNRavi #SuvenduAdhikari #Newsdaily24 #Kolkata #NDA

    नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीतिक धरा पर एक नए युग की आहट सुनाई दे रही है। विधानसभा चुनावों में 207 सीटों के प्रचंड बहुमत के साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राजग (NDA) ने सत्ता की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। राज्यपाल आर. एन. रवि द्वारा संवैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए विधानसभा भंग किए जाने के बाद अब सबकी निगाहें 12 मई को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह पर टिकी हैं। बंगाल के राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि ‘नबन्ना’ (राज्य सचिवालय) में नई कैबिनेट की बागडोर कौन से दिग्गज नेता संभाल सकते हैं।

    हालांकि अंतिम निर्णय भाजपा संसदीय दल की बैठक में होना है, लेकिन राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए कुछ नाम सबसे आगे चल रहे हैं:

    शुभेंदु अधिकारी: मुख्यमंत्री पद के सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। उनके नेतृत्व में भाजपा ने तृणमूल के गढ़ों में सेंध लगाई है।

    दिलीप घोष और सुकांत मजूमदार: इन दिग्गजों को भी नई सरकार में अत्यंत महत्वपूर्ण और निर्णायक भूमिका दी जा सकती है।

    माना जा रहा है कि नई कैबिनेट में क्षेत्रीय और जातीय संतुलन का विशेष ध्यान रखा जाएगा। संभावित चेहरों की सूची इस प्रकार हो सकती है:

    || निशीथ प्रमाणिक | गृह या राजस्व (संभावित) | उत्तर बंगाल में पार्टी की पकड़ को और मजबूत करने के लिए।

    || शांतनु ठाकुर | जहाजरानी या मत्स्य पालन | मतुआ समुदाय के हितों और विकास का प्रतिनिधित्व।

    || अग्निमित्रा पॉल | महिला एवं बाल विकास | शहरी क्षेत्रों और महिला सशक्तीकरण का चेहरा।

    || डॉ. सुकांत मजूमदार | शिक्षा एवं सांस्कृतिक विभाग | राज्य की शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव के लिए।

    || मनोज तिग्गा | जनजातीय एवं चाय बागान विकास | जंगलमहल और डुआर्स क्षेत्र की समस्याओं के समाधान हेतु।

    80 सीटों के साथ विपक्ष में बैठने जा रही तृणमूल कांग्रेस ने भी अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है।

    सक्रिय विपक्ष: ममता बनर्जी ने संकेत दिए हैं कि वे एक ‘वॉचडॉग’ की तरह सरकार के हर कदम पर नजर रखेंगी।

    अस्मिता की राजनीति: विपक्ष का मुख्य जोर बंगाली संस्कृति और अस्मिता के मुद्दों पर सरकार को घेरने का रह सकता है।

    12 मई को शपथ लेने वाली नई सरकार अपनी पहली ही बैठक में जनहित से जुड़े कुछ ऐतिहासिक निर्णय ले सकती है, जिसमें आयुष्मान भारत को लागू करना और भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति प्रमुख हो सकती है।

  • ~ भूपेंद्र निरंकारी

    बिजनौर। जिला मुख्यालय स्थित विकास भवन, जहां से पूरे जिले की विकास योजनाओं की रूपरेखा तैयार होती है, उसी के प्रवेश द्वार पर स्थित सामुदायिक शौचालय खुद अपने ‘विकास’ की बाट जोह रहा है। जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) द्वारा निर्मित यह पुरुष शौचालय देखरेख के अभाव में वर्तमान में बदहाली का पर्याय बन चुका है।

    शौचालय की स्थिति इतनी खस्ता है कि इसके पास से गुजरना भी दूभर हो गया है। चारों तरफ गंदगी पसरी हुई है और नियमित सफाई न होने के कारण भीषण दुर्गंध उठ रही है। फोटो में साफ देखा जा सकता है कि फर्श से लेकर दीवारों तक की स्थिति जर्जर हो चुकी है। रख-रखाव के अभाव में शौचालय का मूल उद्देश्य ही समाप्त होता दिख रहा है।

    शौचालय का उपयोग स्वच्छता के बजाय अब असामाजिक गतिविधियों के लिए अधिक होने लगा है। स्थानीय लोगों और राहगीरों का आरोप है कि शाम ढलते ही यहाँ शराब पीने वालों का जमावड़ा लग जाता है। शौचालय परिसर के भीतर और आसपास शराब के खाली क्वार्टर, डिस्पोजेबल गिलास और प्लास्टिक की थैलियां बिखरी पड़ी हैं, जो प्रशासनिक दावों की पोल खोल रही हैं।

    विकास भवन के गेट पर इस तरह की स्थिति न केवल शहर की छवि खराब कर रही है, बल्कि यहाँ आने वाले लोगों की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर भी सवालिया निशान लगा रही है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत जहां सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं जिला मुख्यालय पर ही डूडा की यह कार्यप्रणाली लापरवाही को उजागर करती है।

    स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि संबंधित विभाग तत्काल इस शौचालय की सुध ले। यहाँ नियमित सफाईकर्मी की तैनाती की जाए और पुलिस प्रशासन को भी शाम के समय गश्त बढ़ानी चाहिए ताकि इसे शराबियों का अड्डा बनने से रोका जा सके।

    रिपोर्ट: टीम newsdaily24

  • विशेष संवाददाता, अल्मोड़ा (newsdaily24)

    अल्मोड़ा: पहाड़ की खेती को पुनर्जीवित करने के दावों के बीच अल्मोड़ा जिले से एक परेशान करने वाली खबर सामने आई है। विकासखंड भैसियाछाना की जिला पंचायत सदस्य शैलजा चम्याल ने सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर आरोप लगाया है कि विभाग ‘बजट के अभाव’ का रोना रोकर किसानों को ठग रहा है, जबकि दूसरी ओर अनुचित जगहों पर करोड़ों रुपये बहाए जा रहे हैं।

    शैलजा चम्याल द्वारा जिलाधिकारी को सौंपे गए पत्र के अनुसार, क्षेत्र की कई महत्वपूर्ण सिंचाई योजनाएं पिछले कई वर्षों से बंद पड़ी हैं। लघु सिंचाई विभाग, अल्मोड़ा को कई बार सूचित करने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। सिंचाई न होने के कारण हजारों नाली उपजाऊ भूमि बंजर होने को मजबूर है, जिससे स्थानीय किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

    पत्र में विभाग के भ्रष्टाचार और अदूरदर्शिता की ओर इशारा करते हुए कहा गया है कि विभाग बजट की कमी का बहाना बनाता है, लेकिन नदी किनारे उबड़-खाबड़ क्षेत्रों में चेकडैम बनाने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। ये चेकडैम अक्सर पहली ही बारिश में बह जाते हैं। शैलजा चम्याल ने दो टूक शब्दों में विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़ा करते हुए इसे सरकारी धन की बर्बादी बताया है।

    पत्र में प्रमुख रूप से तीन बड़ी योजनाओं के ध्वस्त होने का विवरण दिया गया है:

    1. लिगुड़ता-मंगलता सिंचाई योजना: पाइप लाइन टूटने से 2000-3000 नाली भूमि प्रभावित है।

    2. रैयत-लिगुड़ता सिंचाई योजना: गूल (नहर) पूरी तरह ध्वस्त है, जिससे 700-800 नाली भूमि प्यासी है।

    3. पार की टानी सिंचाई योजना (डूंगरालेख): गूल क्षतिग्रस्त होने से करीब 500 नाली भूमि बंजर पड़ी है।

    जिला पंचायत सदस्य ने जिलाधिकारी से मांग की है कि इन योजनाओं को तुरंत सुचारू करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। किसानों का कहना है कि यदि उनकी सिंचाई गूलों को ठीक नहीं किया गया, तो उनके पास खेती छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।

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  • नई दिल्ली/लखनऊ। टेक जगत में मोबाइल एक्सेसरीज को लेकर एक बड़ा क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल रहा है। अक्सर पावर बैंक के फटने या गर्म होकर खराब होने की खबरें आती रहती हैं, लेकिन अब ‘Solly’ नामक एक स्टार्टअप ने दुनिया का पहला ऐसा सोलर पावर बैंक पेश किया है जो सॉलिड-स्टेट बैटरी (Solid-State Battery) तकनीक पर आधारित है। यह न केवल सुरक्षित है, बल्कि सौर ऊर्जा से सीधे चार्ज होने की क्षमता भी रखता है।

    बाजार में मौजूद सामान्य पावर बैंक लिथियम-आयन बैटरी का इस्तेमाल करते हैं, जिनमें शॉर्ट सर्किट या गर्मी के कारण आग लगने का जोखिम बना रहता है। इसके विपरीत, Solly में दी गई सॉलिड-स्टेट बैटरी इसे पूरी तरह से सुरक्षित बनाती है। परीक्षणों के दौरान इस बैटरी में छेद करने या इसे आग के संपर्क में लाने पर भी कोई विस्फोट नहीं हुआ, जो इसे यात्रा और ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प बनाता है।

    पावर और परफॉर्मेंस की जुगलबंदी

    • दमदार क्षमता: इसमें 20,000mAh की विशाल बैटरी दी गई है, जो आधुनिक स्मार्टफोन को कई बार फुल चार्ज कर सकती है।
    • सुपरफास्ट चार्जिंग: यह 140W की पावर आउटपुट देता है, जिसका अर्थ है कि आप इससे सिर्फ फोन ही नहीं, बल्कि MacBook या अन्य लैपटॉप भी बेहद तेजी से चार्ज कर सकते हैं।
    • अनलिमिटेड बैकअप: इसके साथ एक विशेष सोलर पैनल अटैचमेंट आता है। बिजली न होने की स्थिति में बस इसे धूप में रखकर चार्ज किया जा सकता है।

    कीमत और उपलब्धता

    Solly को वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए पेश किया गया है। इसकी शुरुआती कीमत करीब $79 (लगभग ₹6,600) रखी गई है, जबकि रिटेल मार्केट में इसकी कीमत ₹9,000 से ₹10,000 के बीच रहने का अनुमान है। हालांकि भारत में इसके आधिकारिक लॉन्च की तारीख अभी घोषित नहीं हुई है, लेकिन टेक विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल के अंत तक यह भारतीय ई-कॉमर्स साइट्स पर उपलब्ध हो सकता है।

    भविष्य की तकनीक

    यह चार्जर उन लोगों के लिए एक वरदान साबित हो सकता है जो अक्सर बिजली की कटौती से परेशान रहते हैं या ऐसी जगहों पर जाते हैं जहां चार्जिंग की सुविधा नहीं होती। सोलर पैनल के साथ सॉलिड-स्टेट बैटरी का यह मिश्रण भविष्य के गैजेट्स की एक नई दिशा तय कर रहा है।

  • अल्मोड़ा। जिले के विकास खंड भैंसियाछाना के अंतर्गत राजकीय प्राथमिक विद्यालय तल्ला सेराघाट में शिक्षा ग्रहण कर रहे मासूमों के सिर पर खतरे की तलवार लटक रही है। अतिवृष्टि के कारण स्कूल भवन की हालत इतनी खस्ता हो गई है कि छत से सीमेंट, रेत और कंकड़ गिरने लगे हैं। स्थिति इतनी भयावह है कि छत के भीतर लगे लोहे के सरिए अब बाहर दिखाई देने लगे हैं, जिससे किसी भी समय बड़ी अनहोनी की आशंका बनी हुई है।

    विद्यालय भवन की दयनीय स्थिति के कारण बच्चों के साथ-साथ वहां तैनात शिक्षक और बच्चों के अभिभावक भी गहरे खौफ में हैं। आगामी मानसून सीजन को देखते हुए यह डर और अधिक बढ़ गया है। जर्जर छत के नीचे बैठकर पढ़ाई करना बच्चों के लिए जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है। अभिभावकों का कहना है कि वे हर दिन डर के साए में अपने बच्चों को स्कूल भेजते हैं, और कई बार असुरक्षा के कारण बच्चों की उपस्थिति पर भी इसका असर पड़ रहा है।

    इस गंभीर समस्या को देखते हुए जिला पंचायत सदस्य (क्षेत्र संख्या 44, सल्ला भाटकोट) शैलजा चम्याल ने मोर्चा संभाला है। उन्होंने जिलाधिकारी अल्मोड़ा को पत्र भेजकर स्थिति से अवगत कराया है। चम्ब्याल ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि भवन की स्थिति अत्यधिक खराब हो चुकी है और यहाँ कभी भी कोई अप्रिय घटना घट सकती है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि छात्र हित और सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाएं।

    प्रमुख मांगें:

    इस पत्र की प्रतिलिपि जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा) को भी सूचनाार्थ और आवश्यक कार्यवाही हेतु भेजी गई है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस संवेदनशील मामले पर कितनी जल्दी संज्ञान लेता है, ताकि मासूम बच्चों का भविष्य और जीवन सुरक्षित रह सके।

  • ~ भूपेंद्र निरंकारी

    बिजनौर। मंडावर रोड स्थित भरत विहार कॉलोनी में नगर पालिका की बड़ी लापरवाही सामने आई है। नाली निर्माण में तकनीकी खामी के कारण आज पूरी कॉलोनी जलमग्न है। इस समस्या से त्रस्त दर्जनों निवासियों ने अब एकजुट होकर मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर न्याय की मांग की है।

    कालोनी निवासियों का कहना है कि करीब तीन वर्ष पूर्व नगर पालिका द्वारा यहाँ सड़क और नाली का निर्माण कराया गया था, लेकिन नाली की ढलान विपरीत दिशा में बना दी गई। इस कारण पानी आगे निकलने के बजाय लोगों के घरों के भीतर भर रहा है। निकासी मार्ग को आगे से बंद कर दिए जाने के कारण पूरी कॉलोनी ने तालाब का रूप ले लिया है। गंदा पानी जमा होने से उठने वाली दुर्गंध ने लोगों का सांस लेना तक दूभर कर दिया है।

    ठहरे हुए गंदे पानी में मच्छरों का भारी उत्पादन हो रहा है, जिससे घर-घर में लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्होंने वार्ड सदस्य, नगर पालिका अध्यक्ष और जिलाधिकारी से कई बार शिकायत की, लेकिन किसी के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।

    इस जनसमस्या को लेकर कॉलोनी के दर्जनों लोग लामबंद हो गए हैं। मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में मुख्य रूप से लज्जा देवी, कुमकुम, रेखा देवी, नूतन, नीशू कश्यप, धीरज कुमार, कलानी, सुशीला, अंजू, मंजू, अनीता, रजनी, सोमदत्त शर्मा, ओमपाल सिंह, निर्मला शर्मा और बबलू ने अपनी आवाज उठाई है।

    इन सभी के साथ मुख्य प्रार्थी मनोज पाल ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही क्षतिग्रस्त नाले को ठीक कर निकासी का रास्ता नहीं खोला गया, तो कॉलोनीवासी बड़े आंदोलन के लिए विवश होंगे।

  • लखनऊ: शहर के अलीगंज इलाके में कूड़ा प्रबंधन के नाम पर ‘यूजर चार्ज’ वसूलने में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। खुद को नगर निगम द्वारा अधिकृत कंपनी का कर्मचारी बताकर कुछ जालसाज घरों से अवैध तरीके से पैसा वसूल रहे हैं और बदले में फर्जी रसीदें थमा रहे हैं।

    लखनऊ नगर निगम के पांच जोनों में कूड़ा उठाने का जिम्मा ‘लखनऊ स्वच्छता अभियान प्राइवेट लिमिटेड’ को दिया गया है। कंपनी को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ अज्ञात व्यक्ति विभिन्न स्थानों पर बिल देकर यूजर चार्ज वसूल रहे हैं। जांच में पाया गया कि इन रसीदों पर आवश्यक विवरण और ‘ट्रांजेक्शन आईडी’ तक अंकित नहीं है।

    लखनऊ स्वच्छता अभियान के रीजनल डायरेक्टर अभय रंजन ने बताया कि यूजर चार्ज के भुगतान से संबंधित कुछ अनियमितताएं संज्ञान में आई हैं। प्रारंभिक जांच में संदिग्ध पाए गए व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और एफआईआर (FIR) दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

    अधूरा विवरण: अलीगंज के घरों में दी गई रसीदों में बुनियादी जानकारी भी गायब थी।

    नगर निगम की ढिलाई: स्थानीय लोगों का आरोप है कि ऐसा फर्जीवाड़ा पहले भी पकड़ा गया था, लेकिन नगर निगम ने उस समय गंभीरता नहीं दिखाई, जिससे जालसाजों के हौसले बुलंद हुए।

    प्रशासन और कंपनी ने जनता से अपील की है कि वे यूजर चार्ज देते समय सतर्क रहें:

    1. ऑनलाइन भुगतान को प्राथमिकता: डिजिटल भुगतान को प्राथमिकता दें। नगर निगम अब कई क्षेत्रों में ऑनलाइन भुगतान या क्यूआर कोड (QR Code) के जरिए भुगतान को बढ़ावा दे रहा है। नकद (Cash) देने से पहले पूरी जांच कर लें।

    2. ट्रांजेक्शन आईडी की जांच: भुगतान के बाद मिलने वाली रसीद पर ‘ट्रांजेक्शन आईडी’ अवश्य चेक करें। बिना आईडी वाली स्लिप को फर्जी मानें।

    3. अधिकृत रसीद मांगें: कूड़ा उठाने वाला शुल्क (User Charge) लेने आए व्यक्ति से हमेशा नगर निगम या अधिकृत एजेंसी (जैसे ‘इको ग्रीन’ या वर्तमान में सक्रिय एजेंसी) की आधिकारिक रसीद मांगें।

    4. आईडी कार्ड चेक करें: कूड़ा कलेक्शन करने वाले कर्मचारियों के पास विभाग द्वारा जारी वैध पहचान पत्र (ID Card) होना अनिवार्य है।

    5. निर्धारित शुल्क: लखनऊ नगर निगम ने हर क्षेत्र और घर के प्रकार के हिसाब से शुल्क तय किया है। यदि कोई उससे ज्यादा पैसे मांगता है, तो वह फर्जी हो सकता है।

    6. शिकायत दर्ज कराएं: किसी भी प्रकार के संदेह या अवैध वसूली की स्थिति में अथवा यदि कोई आपसे जबरन या बिना रसीद के पैसे मांगे, तो तुरंत लखनऊ नगर निगम के हेल्पलाइन नंबर 1533 या टोल-फ्री नंबर 1800-1234-999 पर पर कॉल करें। इसके अलावा ‘लखनऊ वन’ (Lucknow One) ऐप के जरिए शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

    न्यूज अपडेट: नगर निगम प्रशासन ने भी क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं ताकि आम जनता की गाढ़ी कमाई पर डाका डालने वाले इन फर्जी कर्मचारियों को जल्द से जल्द पकड़ा जा सके।

  • लखनऊ/बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में जल जीवन मिशन के तहत निर्माणाधीन पानी की टंकी गिरने के मामले को सरकार ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। हादसे के तुरंत बाद प्रदेश के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए उत्तरदायित्व तय किया और अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई की गाज गिरा दी है। इस हादसे ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    जानकारी के अनुसार बरेली के आलमपुर जाफराबाद ब्लॉक की ग्राम पंचायत सरदारनगर में डेढ़ साल पहले 3.62 करोड़ रुपये की लागत से 60 फीट ऊंचा ओवरहेड टैंक बना था। सोमवार शाम करीब पांच बजे ओवरहेड टैंक भरभराकर गिर गया। इस हादसे में वहां ताश पत्ते खेल रहे गांव के डोरीलाल (32), अर्जुन (30), वीरपाल (48), रविंद्र (50), नन्कू उर्फ वेदपाल (45) मलबे में दबकर घायल हो गए। इनका उपचार अस्पताल में चल रहा है।

    मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के निर्देश पर विभाग में हड़कंप मच गया। लापरवाही के आरोप में संबंधित अधिकारियों पर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की गई है:

    सेवाएं समाप्त: राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के एक असिस्टेंट इंजीनियर और एक जूनियर इंजीनियर को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त (सेवाएं समाप्त) कर दिया गया है।

    निलंबन: जल निगम ग्रामीण के संबंधित जूनियर इंजीनियर (JE) को सस्पेंड कर दिया गया है।

    विभागीय जांच: जल निगम ग्रामीण के असिस्टेंट इंजीनियर के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं, जबकि अधिशासी अभियंता (EE) को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया गया है।

    हादसे के लिए जिम्मेदार निर्माणदायी संस्था NCC लिमिटेड के खिलाफ न केवल FIR दर्ज कराई गई है, बल्कि उसे ब्लैकलिस्ट करने का नोटिस भी थमा दिया गया है।

    थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन (TPI) पर एक्शन: निगरानी में विफल रही कंपनी ‘बीएलजी’ के बरेली स्थित सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को पद से हटा दिया गया है। कंपनी पर भारी जुर्माना लगाते हुए उसे भी ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

    मामले की प्रारंभिक जांच के लिए एक टेक्नीकल ऑडिट कमेटी (TAC) का गठन किया गया है। जलशक्ति मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कमेटी 24 घंटे के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी। टीएसी की रिपोर्ट आने के बाद इस भ्रष्टाचार के खेल में शामिल अन्य बड़े चेहरों पर भी अग्रिम कार्रवाई तय मानी जा रही है।

    ज्ञात हो कि भमोरा थाना क्षेत्र के सरदारनगर गांव में जल जीवन मिशन के तहत पानी की टंकी का निर्माण चल रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टंकी अचानक हिलने लगी और देखते ही देखते जोरदार आवाज के साथ जमींदोज हो गई।

    बैठकी स्थल: ग्रामीणों ने बताया कि टंकी के नीचे एक पुराना पेड़ था जहाँ अक्सर लोग बैठते थे, सौभाग्य रहा कि हादसे के वक्त वहां भीड़ कम थी, अन्यथा बड़ी जनहानि हो सकती थी।

    यह हादसा जल जीवन मिशन जैसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में निचले स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। मंत्री स्वतंत्र देव सिंह की त्वरित कार्रवाई ने यह संदेश दिया है कि योगी सरकार में विकास कार्यों में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति का उल्लंघन करने वालों के लिए कोई जगह नहीं है।

  • बिजनौर। जनपद में बढ़ते यातायात दबाव और जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए ट्रैफिक पुलिस अब पूरी तरह से एक्शन मोड में नजर आ रही है। बिजनौर यातायात प्रभारी रविंद्र जैन के कुशल नेतृत्व में जिले भर में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य आम जनमानस को यातायात नियमों के प्रति सजग बनाना और सड़कों पर व्यवस्था सुधारना है।

    इसी कड़ी में आज शहर के सबसे व्यस्ततम ‘पोस्ट ऑफिस चौराहे’ पर यातायात पुलिस की विशेष सक्रियता देखने को मिली। ट्रैफिक सब इंस्पेक्टर (टी.एस.आई.) देवकीनंदन ने मौके पर मौजूद रहकर ई-रिक्शा चालकों की क्लास ली। उन्होंने चालकों को सड़क सुरक्षा की बारीकियों से अवगत कराते हुए स्पष्ट चेतावनी दी कि शहर की मुख्य सड़कों पर ई-रिक्शा को इधर-उधर खड़ा करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    टीएसआई देवकीनंदन ने ई-रिक्शा चालकों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि:

    सवारी सीमा: ई-रिक्शा में निर्धारित चार सवारियों से अधिक बैठाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    अवैध पार्किंग: चौराहे या मुख्य मार्ग के बीच में रिक्शा खड़ा करने पर चालान का सामना करना होगा।

    जाम से मुक्ति: शहर के सुगम यातायात के लिए चालक अपने रिक्शे को केवल निर्धारित स्टैंड या किनारे पर ही खड़ा करें ताकि जाम की स्थिति पैदा न हो।

    स्थानीय नागरिकों और राहगीरों ने भी ट्रैफिक पुलिस की इस पहल की सराहना की है। ड्यूटी के प्रति बेहद सजग रहने वाले सब इंस्पेक्टर देवकीनंदन अपनी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के लिए जाने जाते हैं। चौराहे पर जिस तरह से उन्होंने ई-रिक्शा चालकों को बारीकी से नियम समझाए, उससे साफ है कि पुलिस केवल दंड देने के बजाय जागरूकता के माध्यम से सुधार लाने के प्रयास में है।

    यातायात प्रभारी रविंद्र जैन ने कहा कि यह अभियान निरंतर जारी रहेगा। पुलिस का उद्देश्य केवल चालान काटना नहीं, बल्कि लोगों की जान सुरक्षित रखना और शहर को जाम मुक्त बनाना है। उन्होंने शहरवासियों से भी अपील की है कि वे यातायात पुलिस का सहयोग करें और नियमों का पालन करें।

  • आचार्य वागभट्ट जी के अनुसार कीजिए एकरेखीय बर्तनों का त्याग जानिए लोटा और गिलास के पानी में अंतर कभी भी ना पियें गिलास में पानी ~ शैली सक्सेना भारत में हजारों साल की पानी पीने की जो सभ्यता है वो गिलास नहीं है, ये गिलास जो है विदेशी है. गिलास भारत का नहीं है. गिलास […]

    कभी भी ना पियें गिलास में पानी
  • बिजनौर। पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी विधानसभा चुनावों के परिणामों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शानदार प्रदर्शन और ऐतिहासिक जीत से उत्साहित होकर आज नगर पालिका चौक पर भव्य विजय उत्सव मनाया गया। जैसे ही चुनावी रुझान स्पष्ट हुए, कार्यकर्ता और समर्थक ढोल-नगाड़ों की थाप पर थिरक उठे और एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जीत की बधाई दी।

    नगर पालिका चौक पर सुबह से ही कार्यकर्ताओं का तांता लगना शुरू हो गया था। जीत की खबर मिलते ही समूचा क्षेत्र “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम” के नारों से गूंज उठा। कार्यकर्ताओं ने जमकर आतिशबाजी की और जीत का जश्न मनाया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि यह जनादेश सुशासन, विकास और ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के प्रति जनता के अटूट विश्वास का प्रमाण है। उन्होंने विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में भाजपा की बढ़ती ताकत को विकास की राजनीति की जीत करार दिया।

    विजय उत्सव के दौरान नगर पालिका के कर्मचारियों, नागरिकों और समर्थकों के बीच भारी मात्रा में मिठाइयां बांटी गईं। बूथ अध्यक्ष कपिल भाटिया, अशोक कुमार, कपिल राजपूत, मनु सैनी और राहुल सैनी ने भी इस मौके पर मिठाई बांटकर अपनी खुशी का इजहार किया। स्थानीय नेताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है और यह चुनावी नतीजे उसी का परिणाम हैं।

    इस ऐतिहासिक उत्सव में स्थानीय भाजपा नेता भारतेंद्र सिंह, सुभाष वाल्मीकि, विकास अग्रवाल, इंदिरा सिंह, डॉ. बीरबल सिंह, साकेंद्र प्रताप सिंह, विनय राणा, दीपक, पंडित गोपाल धीमान, अंकुर गौतम, मानव सचदेवा, राजवीर चौहान, धीर सिंह, नीरज शर्मा (उपाध्यक्ष), अवनीश निगम, रचना पाल, माया पाल, नेहा पंडित, उपासना आर्य, संजू प्रधान, दीपक अरोड़ा, इरशाद अहमद, नवील अहमद, शुभम अग्रवाल, राजीव लोचन, कार्तिक बालियान, मुकेश अग्रवाल, नीरज विश्नोई, शशीबाला सहित भारी संख्या में सभासद और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

  • कोलकाता/लखनऊ। पश्चिम बंगाल के चुनावी रण में आज जो ऐतिहासिक परिणाम सामने आए हैं, उसने न केवल राज्य की सत्ता की दिशा बदली है, बल्कि दशकों पुराने राजनीतिक समीकरणों को भी ध्वस्त कर दिया है। इस बड़ी जीत के पीछे जिस रणनीतिकार की सबसे अधिक चर्चा हो रही है, वह हैं— नितिन नवीन।

    बिहार की मिट्टी से निकले इस ‘लाल’ ने बंगाल की जटिल राजनीति में वह कर दिखाया जिसे अब तक ‘असंभव’ माना जा रहा था। उन्होंने ममता बनर्जी के उस ‘भद्रलोक’ कार्ड की काट ढूंढ निकाली, जिसके भरोसे वह पिछले 15 वर्षों से सत्ता पर काबिज थीं।

    बंगाल की राजनीति को समझने के लिए ‘भद्रलोक’ समाज को समझना अनिवार्य है। आजादी के बाद से ही बंगाल का वैचारिक और राजनीतिक नेतृत्व इसी वर्ग के पास रहा है। चाहे कांग्रेस हो, सीपीएम हो या तृणमूल, मुख्यमंत्री की कुर्सी हमेशा इसी वर्ग से निकली है। ऐतिहासिक रूप से इस समाज के तीन प्रमुख स्तंभ रहे हैं:

    1. कुलीन कायस्थ: जिनमें बोस (श्रीवास्तव), घोष (सूर्यध्वज), मित्रा (माथुर) और गुहा (अम्बष्ट) शामिल हैं।

    2. कुलीन ब्राह्मण: मुखर्जी, चटर्जी, बनर्जी, भट्टाचार्जी और गांगुली।

    3. वैद्य (बोदी): दासगुप्ता, सेनगुप्ता, सेन, रॉय आदि।

    नितिन नवीन की रणनीति ने इसी वैचारिक दीवार में सेंध लगाकर राष्ट्रवादी विचारधारा को हर घर तक पहुँचाया।

    विशेषज्ञों के अनुसार, बंगाल का मूल नाम ‘गौड़ प्रदेश’ था, जिसका सीधा संबंध भगवान चित्रगुप्त के पुत्र से है। सेन काल के दौरान बंगाल के मानकीकरण और आधुनिकीकरण के लिए कन्नौज से पांच ब्राह्मण और पांच कायस्थ बुलाए गए थे। इन कुलीन ब्राह्मणों ने धर्म और रीति-रिवाजों का शास्त्रोक्त विधान किया, तो कुलीन कायस्थों ने शासन, कूटनीति और राजनीति में अपना उत्कृष्ट योगदान दिया।

    इस समाज में दत्त (सक्सेना) वर्ग का भी विशेष उल्लेख मिलता है, जो स्वयं को श्रेष्ठतम मानते हुए स्वाभिमान के साथ बंगाल की प्रगति में सहभागी रहे। नितिन नवीन ने इसी गौरवशाली इतिहास और जड़ों को याद दिलाते हुए बंगाल के कायस्थ समाज को राष्ट्रवादी चेतना से जोड़ने में सफलता प्राप्त की।

    रिपोर्ट के अनुसार, मगध से आए अम्बष्ठ कायस्थों ने भी बंगाल (गौड़ प्रदेश) में अपनी विशेष पहचान बनाई। धन्वंतरि परंपरा के इन वैद्यों ने स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा के माध्यम से अपनी प्रतिष्ठा स्थापित की। यह वर्ग भी बंगाल के सामाजिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार के चुनावों में इन सभी वर्गों का झुकाव राष्ट्रवादी ताकतों की ओर होना जीत का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।

    ब्रह्मक्षत्रिय कायस्थ सेना और अन्य संगठनों के सूत्रों का कहना है कि नितिन नवीन ने बंगाल की जमीन पर उतरकर न केवल चुनावी प्रबंधन किया, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों—दत्ता, साहा, मल्लिक, सिन्हा, विश्वास, सरकार और चौधरी जैसे विविध उपनामों वाले कायस्थों को एक मंच पर लाने का कार्य किया। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि सामूहिक नेतृत्व और अपनी सांस्कृतिक जड़ों के प्रति सम्मान ही बड़ी जीत का आधार है।

    निष्कर्ष: पश्चिम बंगाल में बीजेपी की यह जीत महज एक सत्ता परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह बंगाल के वैचारिक नेतृत्व के पुनर्गठन का संकेत है। बिहार के लाल नितिन नवीन के इस पराक्रम ने यह साबित कर दिया कि सही रणनीति और ऐतिहासिक बोध के साथ किसी भी राजनीतिक दुर्ग को जीता जा सकता है।

  • लखनऊ। धार्मिक पर्वों और उपवास के दिनों में साबूदाना खिचड़ी सबसे पसंदीदा फलाहार मानी जाती है। कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होने के कारण यह दिन भर शरीर को ऊर्जावान बनाए रखती है। हालांकि, कई बार घर पर इसे बनाते समय यह चिपचिपी हो जाती है या दाने आपस में जुड़ जाते हैं। आज हम आपको बता रहे हैं वो आसान तरीका और कुछ खास टिप्स जिससे आपकी खिचड़ी रेस्टोरेंट की तरह खिली-खिली और लाजवाब बनेगी।

    साबूदाना खिचड़ी का सारा दारोमदार उसे भिगोने के तरीके पर होता है। यदि आपके पास समय कम है, तो साबूदाने को 2-3 बार अच्छी तरह धोकर उसका स्टार्च निकाल दें। इसके बाद इसे हल्के गुनगुने पानी में केवल एक से डेढ़ घंटे के लिए भिगो दें। ध्यान रहे कि पानी का स्तर साबूदाने से आधा इंच ही ऊपर हो। इससे साबूदाना जल्दी नरम हो जाता है और अंदर तक फूल जाता है।

    खिचड़ी को आपस में चिपकने से बचाने के लिए एक बेहतरीन तकनीक है— साबूदाना भिगोने के बाद उसमें दरदरी पिसी हुई भुनी हुई मूंगफली और सेंधा नमक पहले ही मिला दें। मूंगफली का पाउडर साबूदाने की अतिरिक्त नमी को सोख लेता है, जिससे कड़ाही में डालने पर दाने अलग-अलग रहते हैं।

    आवश्यक सामग्री (Checklist):

    1. भीगा हुआ साबूदाना
    2. उबले या बारीक कटे कच्चे आलू
    3. देसी घी, जीरा और हरी मिर्च
    4. कढ़ी पत्ता और बारीक कटा हरा धनिया
    5. काली मिर्च पाउडर और नींबू का रस

    बनाने की विधि: स्टेप-बाय-स्टेप

    1. सबसे पहले कड़ाही में देसी घी गर्म करें। घी व्रत में ऊर्जा के लिए सबसे अच्छा विकल्प है।

    2. इसमें जीरा, कढ़ी पत्ता और हरी मिर्च का तड़का लगाएं।

    3. अब आलू डालकर उन्हें सुनहरा होने तक भूनें। यदि आलू कच्चे हैं, तो उन्हें धीमी आंच पर ढककर पकाएं।

    4. तैयार साबूदाना मिश्रण डालें और मध्यम आंच पर चलाते रहें।

    5. जब साबूदाने के दाने मोतियों की तरह पारदर्शी (Transparent) दिखने लगें, तो समझिये खिचड़ी तैयार है।

    6. अंत में नींबू का रस और हरा धनिया डालकर इसे गर्मागर्म परोसें।

    साबूदाना पचाने में आसान होता है और उपवास के दौरान पेट को ठंडा रखता है। इसमें नींबू और मूंगफली मिलाने से विटामिन और प्रोटीन का संतुलन भी बना रहता है। लखनऊ के मशहूर खान-पान विशेषज्ञों का मानना है कि साबूदाना खिचड़ी को दही के साथ लेने से शरीर में पानी की कमी नहीं होती और डाइजेशन भी दुरुस्त रहता है।

  • दिल्ली/लखनऊ। पश्चिम बंगाल की चुनौतीपूर्ण और जटिल राजनीति में राष्ट्रवाद का जो नया विस्तार दिखाई दे रहा है, उसके पीछे शांत लेकिन बेहद सटीक संगठनात्मक कौशल काम कर रहा है। इस वैचारिक परिवर्तन के मुख्य सूत्रधारों में मालवा-निमाड़ की माटी से निकले वरिष्ठ प्रचारक और संगठन रणनीतिकार श्री सोहन सोलंकी का नाम प्रमुखता से उभर कर आया है। संगठन की कार्यशैली में अपनी तेज-तर्रार छवि के कारण “व्हाइट टाइगर” के रूप में विख्यात सोलंकी वर्तमान में विश्व हिंदू परिषद (VHP) के कोलकाता क्षेत्र के क्षेत्र संगठन मंत्री के रूप में बंगाल में सक्रिय हैं।

    श्री सोहन सोलंकी का संगठनात्मक जीवन मध्य भारत के मालवा-निमाड़ अंचल से शुरू हुआ। वर्षों के निरंतर प्रवास और कार्यकर्ता निर्माण की उनकी तपस्या ने उन्हें एक कुशल रणनीतिकार के रूप में स्थापित किया। संघ के वरिष्ठ प्रचारक और बजरंग दल के राष्ट्रीय संयोजक के रूप में उन्होंने देश भर में युवाओं की एक विशाल टोली खड़ी की। इसके बाद उन्होंने मेरठ क्षेत्र (उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड) में संगठन मंत्री रहते हुए अपनी कार्यक्षमता का लोहा मनवाया। अब उनकी यही सांगठनिक दक्षता बंगाल के दुर्गम राजनीतिक क्षेत्रों में राष्ट्रवादी विचारधारा का विस्तार कर रही है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल जैसे संवेदनशील राज्य में, जहां राजनीतिक हिंसा एक बड़ी बाधा रही है, वहां संगठन को प्रखंड और ग्राम स्तर तक ले जाना एक हिमालयी कार्य था। सूत्रों के अनुसार, सोहन सोलंकी ने ‘प्रवास ही संगठन है’ के मंत्र को आत्मसात करते हुए गांव-गांव तक कार्यकर्ताओं का जाल बिछाया। प्रशिक्षण वर्गों और निरंतर जनसंपर्क के माध्यम से उन्होंने कार्यकर्ताओं का आत्मविश्वास जगाया और उन्हें मुख्यधारा के वैचारिक विमर्श से जोड़ा।

    बंगाल में श्री सोलंकी के नेतृत्व में संगठन ने केवल संख्यात्मक विस्तार नहीं किया, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के हर वर्ग को साथ लाने का प्रयास किया। उनके मार्गदर्शन में चलाए गए जनजागरण अभियानों का ही परिणाम है कि आज बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्रवादी विचारधारा के प्रति गहरा आकर्षण और सामाजिक आत्मविश्वास बढ़ा है।

    सोहन सोलंकी की सबसे बड़ी विशेषता उनका व्यक्तिगत प्रचार से दूर रहना और ‘टीम भावना’ को प्राथमिकता देना है। कार्यकर्ताओं के बीच वे अपने सरल स्वभाव, अनुशासन और स्पष्ट वैचारिक दृष्टि के लिए जाने जाते हैं। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि उन्होंने बंगाल में संगठन विस्तार का एक ऐसा ‘स्थायी मॉडल’ विकसित किया है, जो हर चुनौती को अवसर में बदलने की क्षमता रखता है।

    बंगाल में संगठन को मिली इस वैचारिक और सांगठनिक मजबूती के बाद देशभर के सामाजिक संगठनों और कार्यकर्ताओं द्वारा उन्हें बधाई संदेश प्राप्त हो रहे हैं। विशेषज्ञ इसे उनकी दीर्घकालिक रणनीति और अटूट वैचारिक प्रतिबद्धता की जीत मान रहे हैं।

  • लखनऊ/बिजनौर। उत्तर प्रदेश में बिजली के स्मार्ट मीटरों के खिलाफ आम आदमी पार्टी (आप) ने मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को राजधानी लखनऊ में राज्यसभा सांसद संजय सिंह एवं शकील मलिक के आह्वान पर ‘आप’ अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ द्वारा शक्ति भवन के सामने विशाल प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने प्रदेश सरकार और बिजली विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए स्मार्ट मीटरों को “जनता की जेब पर डकैती” करार दिया।

    प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे पदाधिकारियों ने कहा कि प्रदेश में स्मार्ट मीटर पारदर्शिता लाने के बजाय उपभोक्ताओं के आर्थिक शोषण का माध्यम बन गए हैं। पार्टी का आरोप है कि जिन घरों में पहले 1500 रुपये का बिल आता था, स्मार्ट मीटर लगने के बाद वही बिल अब 6000 से 7000 रुपये तक पहुँच रहा है। प्रीपेड मीटर व्यवस्था की विफलता पर सवाल उठाते हुए वक्ताओं ने कहा कि एडवांस भुगतान के बावजूद उपभोक्ताओं को 10-12 घंटे की बिजली कटौती झेलनी पड़ रही है।

    प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने नलकूपों (ट्यूबवेल) पर 4G सिम-आधारित स्मार्ट मीटर लगाने की योजना का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में खराब कनेक्टिविटी के कारण सिंचाई बाधित हो रही है और किसानों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डाला जा रहा है, जो सीधे तौर पर उनकी आजीविका पर प्रहार है।

    प्रदर्शन के अंत में महामहिम राज्यपाल महोदया को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन के माध्यम से ‘आप’ ने निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:

    1. प्रदेश में स्मार्ट मीटर के नाम पर हो रही ‘लूट’ पर तत्काल रोक लगे।

    2. पूरी स्मार्ट मीटर परियोजना की किसी स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जाए।

    3. तकनीकी खामियों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कंपनियों पर कड़ी कार्रवाई हो।

    4. उपभोक्ताओं और किसानों के लिए पारदर्शी व न्यायसंगत बिलिंग व्यवस्था लागू की जाए।

    इस शक्ति प्रदर्शन में मुख्य रूप से जिला अध्यक्ष वसीम सिद्दीक़ी, पूर्व जिला महासचिव डॉ. सैयद फ़ख़रूल इमाम, वर्तमान जिला अध्यक्ष इरम रिज़वी, दिनेश पटेल, प्रतिपाल सिंह, शाहबाज़ अहमद सहित सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता और पदाधिकारी उपस्थित रहे।

    इसी क्रम में जिला बिजनौर जिलाध्यक्ष जितेंद्र सिंह चौहान के नेतृत्व में भी स्थानीय स्तर पर विरोध दर्ज कराते हुए जनहित में कार्रवाई की मांग की गई। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस जनविरोधी व्यवस्था को जल्द नहीं सुधारा, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

  • 🚩 जय श्री राम! जय हनुमान! 🚩

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    Sanjay Saxena

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  • गुर्दे की पथरी (Kidney Stones) आज के समय में एक आम लेकिन बेहद दर्दनाक समस्या बन चुकी है। खानपान की गलत आदतें और पानी की कमी इसके मुख्य कारण हैं। एक बार पथरी होने पर इसके दोबारा होने की संभावना 50 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। ऐसे में सही आहार और जीवनशैली ही इससे राहत दिला सकती है।

    पथरी के मरीजों के लिए विस्तार से आहार संबंधी दिशा-निर्देश :

    पथरी से बचने और उसे बाहर निकालने के लिए शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा होना सबसे अनिवार्य है।

    कितना पानी पिएं: एक स्वस्थ व्यक्ति को दिन में कम से कम 3 से 4 लीटर पानी पीना चाहिए ताकि पेशाब का रंग साफ रहे।

    तरल पदार्थ: नींबू पानी, नारियल पानी और ताजे फलों का जूस (बिना चीनी के) पीना फायदेमंद होता है। नींबू में मौजूद ‘सिट्रेट’ पथरी को बनने से रोकता है।

    भोजन में अधिक नमक का सेवन पेशाब में कैल्शियम की मात्रा को बढ़ा देता है, जो आगे चलकर पथरी का रूप ले लेती है।

    इनसे बचें: जंक फूड, डिब्बाबंद सूप, अचार, पापड़ और नमकीन स्नैक्स में सोडियम की मात्रा बहुत अधिक होती है।

    विकल्प: खाना बनाते समय ऊपर से नमक डालने की आदत छोड़ें।

    ज्यादातर पथरी ‘कैल्शियम ऑक्सालेट‘ की बनी होती है। इसलिए जिन चीजों में ऑक्सालेट की मात्रा अधिक हो, उनका सेवन सीमित करना चाहिए:

    सब्जियां: पालक, चौलाई, बैंगन और टमाटर (बीज निकालकर)।

    अन्य: चॉकलेट, मूंगफली, शकरकंद और काली चाय।

    पथरी के मरीजों को सलाह दी जाती है कि वे उन फल और सब्जियों से परहेज करें जिनमें छोटे-छोटे बीज होते हैं, क्योंकि ये आसानी से पचते नहीं हैं और पथरी की समस्या बढ़ा सकते हैं।

    उदाहरण: अमरूद, टमाटर, अनार और भिंडी का सेवन सावधानी से करें या इनके बीज निकाल दें।

    पशु प्रोटीन (Animal Protein) जैसे रेड मीट, अंडा और मछली का अधिक सेवन शरीर में यूरिक एसिड बढ़ा सकता है। यूरिक एसिड की अधिकता से पथरी बनने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। प्रोटीन के लिए दालों और डेयरी उत्पादों का संतुलित मात्रा में प्रयोग करें।

    अक्सर लोग यह समझते हैं कि कैल्शियम छोड़ने से पथरी ठीक हो जाएगी, जबकि यह एक भ्रांति है। शरीर में कैल्शियम की कमी से ऑक्सालेट का स्तर बढ़ सकता है।

    क्या करें: सप्लीमेंट लेने के बजाय प्राकृतिक स्रोतों जैसे दूध, दही और पनीर का सेवन करें।

    कोल्ड ड्रिंक्स: सोडा और कोल्ड ड्रिंक्स में फॉस्फेट होता है जो पथरी के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है।

    शराब और कैफीन: चाय, कॉफी और शराब का अधिक सेवन शरीर को डिहाइड्रेट (पानी की कमी) करता है।

    विशेष नोट: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। पथरी किस प्रकार की है (कैल्शियम, यूरिक एसिड या सिस्टीन), यह जानने के बाद डॉक्टर या डाइटिशियन से व्यक्तिगत डाइट चार्ट बनवाना सबसे बेहतर रहता है।

  • लखनऊ/बक्शी का तालाब। राजधानी के बक्शी का तालाब (169) विधानसभा अंतर्गत कुम्हरावां स्थित नवनिर्मित श्री सूर्य नारायणी कात्यायनी नव दुर्गे देवस्थली मंदिर में विशेष आध्यात्मिक उल्लास देखने को मिला। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया प्रभारी श्री ललन कुमार ने मंदिर पहुंचकर मां भगवती के दर्शन किए और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।

    मंदिर आगमन पर पीठाधीश्वर बाला जी महाराज के परम भक्त पंडित विमल मिश्र ‘कुम्हरावां’, हरगांव सीतापुर के प्रसिद्ध वैदिक आचार्य श्री श्याम मनोहर मिश्र एवं सुनील मिश्रा के सानिध्य में अतिथि का भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान आचार्य जी के निर्देशन में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा संपन्न हुई। मंदिर प्रबंधन द्वारा श्री ललन कुमार को ‘राम नामी’ पटका पहनाकर और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

    इस अवसर पर पंडित विमल मिश्र ने पुराने संस्मरण साझा करते हुए बताया कि श्री ललन कुमार का मंदिर के प्रति सदैव सेवा भाव रहा है। उन्होंने बताया कि कुछ वर्षों पूर्व श्री ललन कुमार ने उनके आग्रह पर मंदिर परिसर की व्यवस्था हेतु दो सौर ऊर्जा (सोलर) लाइटें लगवाई थीं, जिससे श्रद्धालुओं को काफी सुविधा मिल रही है।

    दर्शन के पश्चात मीडिया प्रभारी ललन कुमार ने कहा, “मां कात्यायनी के दरबार में आकर असीम शांति की अनुभूति होती है। मैंने माता रानी से क्षेत्रवासियों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे, ऐसी मंगल कामना की है।”इस धार्मिक आयोजन में क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक और भक्तगण उपस्थित रहे, जिन्होंने मंदिर की भव्यता और वहां की आध्यात्मिक ऊर्जा की सराहना की।

  • ~ भूपेंद्र निरंकारी

    बिजनौर। नगर के प्रतिष्ठित श्री बालाजी मंदिर प्रांगण में भक्ति, श्रद्धा और परंपरा का एक अनूठा दृश्य देखने को मिला। अवसर था मंदिर के दिवंगत पीठाधीश्वर श्री श्री 108 अजय दास जी महाराज की श्रद्धांजलि सभा और उनके उत्तराधिकारी के गद्दी अभिषेक का। इस पावन अवसर पर सिद्धपीठ से आए प्रख्यात संतों, राजनेताओं और भारी संख्या में भक्तों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

    कार्यक्रम का शुभारंभ पूज्य स्वर्गीय अजय दास जी महाराज को पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इस दौरान उपस्थित जनसमूह की आंखें अपने गुरुदेव की याद में नम दिखीं। सिद्धपीठ से पधारे परम पूज्य महामंडलेश्वर श्री ईश्वर दास जी महाराज और पूज्य जगद्गुरु जी महाराज सहित अन्य उच्च कोटि के संतों ने महाराज जी के जीवन और उनके द्वारा धर्म के प्रचार-प्रसार में दिए गए योगदान को याद किया।

    श्रद्धांजलि सभा के पश्चात, गुरुदेव महाराज की आज्ञा और परंपराओं का निर्वहन करते हुए उनके छोटे पुत्र, श्रद्धेय उज्जवल जी का गद्दी अभिषेक किया गया। उपस्थित महामंडलेश्वरों और धर्माचार्यों के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उज्जवल जी को गद्दी पर विराजमान कराया गया। संतों ने उन्हें तिलक लगाकर आशीर्वाद दिया और आशा व्यक्त की कि वे अपने पिता के पदचिह्नों पर चलते हुए धर्म की ध्वजा को आगे बढ़ाएंगे।

    इस धार्मिक अनुष्ठान में नगर के प्रमुख राजनीतिक चेहरों और सम्मानित व्यक्तियों ने भी हिस्सा लिया। मुख्य रूप से नगरपालिका अध्यक्ष, क्षेत्रीय विधायक और अन्य गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। सभी ने नए पीठाधीश्वर को शुभकामनाएं दीं और मंदिर के सेवा कार्यों में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।

    श्री बालाजी सेवा समिति बिजनौर के कार्यकर्ताओं ने व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संभाला। कार्यक्रम में केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों से आए श्री बालाजी परिवार के हजारों भक्तों ने हिस्सा लिया। पूरे कार्यक्रम के दौरान “जय श्री बालाजी” के उद्घोष से मंदिर परिसर गुंजायमान रहा।

  • कायस्थों के कोड 21 से अलग बंगाली कायस्थों को दिया कोड संख्या 205 राष्ट्रीय कायस्थ महापरिषद ने जताया विरोध, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन जातीय गणना में कायस्थों के लिए दो कोड स्वीकार्य नहीं अररिया। बिहार में जातीय गणना की शुरुआत हो चुकी है, इसके लिए सभी जातियों के लिए एक कोड आवंटित किया गया […]

    जातीय गणना में कायस्थों के लिए दो कोड स्वीकार्य नहीं
  • बिजनौर। स्थानीय मोहल्ला नई बस्ती स्थित प्राचीन शिव मंदिर में श्रद्धा और उल्लास के साथ एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इस धार्मिक अनुष्ठान में भारी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा का प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम के दौरान समूचा क्षेत्र भक्ति के रंग में डूबा नजर आया और भक्त अपने आराध्य के जयकारे लगाते हुए झूमते दिखाई दिए।

    भंडारे का शुभारंभ मुख्य अतिथि वर्द्धमान कॉलेज के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. चंद्रप्रकाश आर्य एवं डॉ. संतोष कुमारी द्वारा बाबा खाटू श्याम जी के विशेष भोग और आरती पूजन के साथ किया गया। पंडित कौशल किशोर कौशिक ने विधि-विधान से पूजा संपन्न कराई। आरती के पश्चात विधिवत रूप से भंडारा प्रारंभ हुआ, जो प्रभु इच्छा तक निरंतर चलता रहा।

    मंदिर प्रांगण में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। श्रद्धालुओं के उत्साह और भक्ति भाव ने माहौल को पूरी तरह अध्यात्मिक बना दिया। इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय नागरिकों और सेवादारों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

    भंडारे की व्यवस्थाओं में वरिष्ठ पत्रकार भूपेंद्र निरंकारी, पंडित अस्माकं कौशिक, रवि प्रकाश आर्य, अनिल सक्सेना, तनु सक्सेना, कु. छवि, दिव्या प्रजापति, शोभित जैन (हल्दौर) और मालती आदि का सराहनीय योगदान रहा। सभी सेवादारों ने निस्वार्थ भाव से आगंतुक श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया।

  • लखनऊ, 29 अप्रैल 2026: उत्तर प्रदेश के लाखों सरकारी पेंशनर्स के बीच पेंशन पर आयकर को लेकर एक संदेश तेजी से वायरल हो रहा है। ‘सरकारी पेंशनर्स कल्याण एसोसिएशन’ के अध्यक्ष और लखनऊ निवासी सेवानिवृत्त IAS आर.एस. वर्मा के नाम से जारी इस संदेश में पेंशन को टैक्स-फ्री करने की मांग की गई है। NewsDaily24 ने इस वायरल दावे और यूपी पर इसके असर की पड़ताल की।

    उत्तर प्रदेश सरकार के वित्त विभाग के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में करीब 11.2 लाख राज्य पेंशनर्स हैं। लखनऊ मंडल में ही 1.8 लाख से ज्यादा सेवानिवृत्त कर्मचारी पेंशन ले रहे हैं। यदि पेंशन टैक्स-फ्री होती है तो औसतन ₹35,000 मासिक पेंशन पाने वाले कर्मचारी को सालाना ₹25,000 से ₹40,000 तक की सीधी बचत हो सकती है।

    वायरल संदेश में 4 मुख्य तर्क दिए गए हैं:

    1. पेंशन 30-36 साल की सेवा का ‘विलंबित वेतन’ है, नई आय नहीं।

    2. सेवा के दौरान वेतन पर टैक्स दे चुके हैं, तो पेंशन पर दोबारा टैक्स क्यों?

    3. सांसदों-विधायकों की पेंशन टैक्स-फ्री है, तो कर्मचारियों की क्यों नहीं?

    4. सभी सेवानिवृत्त सदस्य आंदोलन शुरू करें और इसे 20 लोगों को भेजें।

    दावा 1: सांसदों की पेंशन टैक्स-फ्री है – फर्जी

    Income Tax Act, 1961 के तहत सांसदों और विधायकों की पेंशन भी ‘Income from Other Sources’ के अंतर्गत पूरी तरह कर-योग्य है। PIB ने 2019 में इस दावे को फेक न्यूज बताया था। यूपी के 80 लोकसभा और 403 विधानसभा सदस्यों की पेंशन पर भी सामान्य नियम लागू होते हैं।

    दावा 2: पेंशन ‘विलंबित वेतन’ है – कानूनी रूप से गलत

    आयकर की धारा 17(1)(ii) के तहत पेंशन को स्पष्ट रूप से ‘Salary’ की श्रेणी में रखा गया है। इसलिए कानूनन इस पर टैक्स बनता है।

    उत्तर प्रदेश पेंशनर्स कल्याण एसोसिएशन, लखनऊ के विश्वसनीय सूत्र ने newsDaily24 से कहा: “हम 2018 से यह मांग उठा रहे हैं। लखनऊ में लगभग हर महीने कमिश्नरी पर धरना देते हैं। महंगाई में पेंशन ही सहारा है, उस पर टैक्स नाइंसाफी है। मुख्यमंत्री से भी मिल चुके हैं।”

    नई टैक्स व्यवस्था में ₹12.75 लाख तक की सालाना आय टैक्स-फ्री है, जिसका फायदा यूपी के 70% पेंशनर्स को मिल रहा है।

    1. सही: आर.एस. वर्मा लखनऊ के सेवानिवृत्त IAS हैं। यूपी में पेंशन टैक्स-फ्री की मांग पुरानी है।

    2. गलत: सांसदों-विधायकों की पेंशन टैक्स-फ्री होने का दावा गलत है।

    3. भ्रामक: यह कोई नया सरकारी आदेश नहीं, बल्कि आंदोलन का हिस्सा है।

    डिस्क्लेमर: यूपी के पेंशनर्स अपनी टैक्स देनदारी के लिए http://incometax.gov.in या नजदीकी आयकर सेवा केंद्र से संपर्क करें। वायरल मैसेज के आधार पर ITR न भरें।

    रिपोर्ट: NewsDaily24 ब्यूरो, लखनऊ

  • जानकारी हासिल कर चुनें अपनी गाड़ी के लिए सही टायर मिलेगी सड़क पर सुरक्षित रहने में हमेशा मदद क्या आप जानते हैं वाहन के टायरों पर लिखे कोड का अर्थ वाहनों के टायरों पर लिखे कोड बहुत महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं, जो टायर के आकार, प्रकार, प्रदर्शन और निर्माण के बारे में बताते हैं। यह […]

    क्या आप जानते हैं वाहन के टायरों पर लिखे कोड का अर्थ
  • लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने मई 2026 के लिए प्रदेश भर में नि:शुल्क राशन वितरण की घोषणा कर दी है। खाद्य एवं रसद विभाग के अनुसार, राशन वितरण का यह अभियान 24 अप्रैल से शुरू होकर 8 मई 2026 तक संचालित किया जाएगा। इस बार सरकारी गल्लों की दुकानों पर अनाज के साथ-साथ रोजमर्रा की अन्य जरूरी वस्तुएं भी उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध रहेंगी।

    सरकार ने राशन की मात्रा और वितरण के मानकों को स्पष्ट कर दिया है:

    भीषण गर्मी और उपभोक्ताओं की सहूलियत को देखते हुए दुकानों के समय में बदलाव किया गया है। अब कोटेदार सुबह 6 बजे से रात 9 बजे तक राशन का वितरण करेंगे। इसके अलावा, ‘वन नेशन वन राशन कार्ड’ योजना के तहत पोर्टेबिलिटी की सुविधा भी लागू रहेगी, जिससे लाभार्थी किसी भी नजदीकी सरकारी राशन की दुकान से अपना हिस्सा प्राप्त कर सकते हैं।

    ई-पॉस (e-POS) मशीन पर बायोमेट्रिक या आधार प्रमाणीकरण में विफल रहने वाले लाभार्थियों को घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसे उपभोक्ता अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी (OTP) के माध्यम से भी राशन प्राप्त कर सकेंगे।

    इस बार राशन वितरण केंद्रों का स्वरूप बदला हुआ नजर आएगा। विभाग ने निर्णय लिया है कि खाद्यान्न के साथ-साथ अब उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर टॉर्च, माचिस और साबुन जैसी अन्य दैनिक उपयोगी वस्तुएं भी इन्हीं दुकानों पर उपलब्ध कराई जाएंगी।

    विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि कोई व्यक्ति गलत जानकारी देकर राशन कार्ड का लाभ उठा रहा है, तो जांच में दोषी पाए जाने पर उसका कार्ड तत्काल रद्द कर दिया जाएगा। विशेष रूप से चार पहिया वाहन, एसी या शस्त्र लाइसेंस रखने वाले व्यक्ति इस योजना के लिए अपात्र माने जाएंगे। नागरिक अपनी पात्रता की जांच आधिकारिक वेबसाइट fcs.up.gov.in पर जाकर कर सकते हैं।

    यदि किसी कार्डधारक को कम राशन मिलने, समय पर दुकान न खुलने या कोटेदार द्वारा अभद्रता करने की समस्या आती है, तो वे तत्काल टोल-फ्री नंबरों पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं:

    हेल्पलाइन नंबर: 1967

    टोल-फ्री नंबर: 1800-1800-150

  • [27/4, 8:16 am] Sanjay Saxena: आज बन रहा है सोमवार और एकादशी का शुभ संयोग, इन राशियों पर बरसेगी नारायण और महादेव की विशेष कृपा https://newzo.indiatv.in/Lnk/SRWR202604270734564781966153

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  • कुंभरावा, लखनऊ। बीकेटी ब्लॉक के कुंभरावा स्थित ‘सूर्य नारायणी नव दुर्गे देव स्थली’ में सनातन संस्कृति की भव्य झलक देखने को मिली। पीठाधीश्वर बालाजी महाराज के अनन्य साधक पंडित विमल मिश्र के परिवार में उनके बड़े भाई श्री सुनील मिश्रा एवं उनकी पत्नी सुधा मिश्रा के पुत्रों, टुन्ना मिश्र और सानू मिश्र का जनेऊ (यज्ञोपवीत) संस्कार वैदिक आचार्यों के सानिध्य में विधि-विधान से संपन्न हुआ।

    इस मांगलिक अवसर पर बटुकों को आशीर्वाद देने के लिए क्षेत्र की कई प्रतिष्ठित हस्तियां पहुँचीं। बीकेटी विधायक योगेश शुक्ला, पूर्व विधायक अविनाश त्रिवेदी, एसएस पब्लिक स्कूल के प्रबंधक प्रवीण सिंह चौहान, ग्राम प्रधान अमित बाजपेई और लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर राजीव शुक्ला ने कार्यक्रम में सम्मिलित होकर बच्चों के उज्जवल भविष्य की कामना की और परिवार को बधाई दी।

    संस्कारों की भव्यता: स्वर्गीय श्री सूर्य नारायण मिश्र की शाखा से जुड़े इस परिवार के इस आयोजन में प्राचीन परंपराओं का पालन किया गया। जनेऊ संपन्न होने के बाद पंडित विमल मिश्र ने सभी अतिथियों और आगंतुकों के चरणों में चंदन लगाकर, अक्षत और गुलाब के फूलों की वर्षा कर उनका सत्कार किया। साथ ही, सभी उपस्थित लोगों को दक्षिणा देकर सम्मानित किया गया।

    इस पारिवारिक अनुष्ठान में श्री सुनील मिश्रा, पंकज मिश्रा, श्रीकांत मिश्र, विवेक मिश्र, माधुरी मिश्रा, विमला मिश्रा, बाबुल मिश्र, दिनेश मिश्र, राजेश मिश्रा, उमेश मिश्र, एडवोकेट नवल किशोर मिश्र एवं बहन रंजना शुक्ला व सुनीता शुक्ला सहित परिवार के समस्त सदस्य उपस्थित रहे।

    रिपोर्ट: न्यूज़डेस्क, newsdaily24

  • मुजफ्फरपुर/मधुबनी (newsdaily24 ब्यूरो): साहित्य और कला की उर्वर भूमि मुजफ्फरपुर में रविवार को एक भव्य राष्ट्रीय सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। काव्य हिंदुस्तान अंतरराष्ट्रीय साहित्य समूह के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में मधुबनी के निवासी, प्रसिद्ध अभिनेता एवं लेखक संजय कुमार अम्बष्ट को शिक्षा, साहित्य, पर्यावरण और कला के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रतिष्ठित ‘कलम के जादूगर रामवृक्ष बेनीपुरी सम्मान’ से सम्मानित किया गया।

    “कला और साहित्य का मान: संजय कुमार अम्बष्ट को मिला राष्ट्रीय सम्मान।

    मुजफ्फरपुर स्थित नवयुवक समिति ट्रस्ट के सभागार में आयोजित इस समारोह में देश के विभिन्न कोनों से आए 50 साहित्यकारों और 10 वरिष्ठ पत्रकारों को अंग वस्त्र, मोमेंटो और पौधा देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और डॉ. विनोद कुमार हँसोड़ा द्वारा गाए गए छंदों के साथ हुआ, जिसने पूरे वातावरण को साहित्यिक रंग में सरोबोर कर दिया।

    संजय कुमार अम्बष्ट को यह राष्ट्रीय पुरस्कार राष्ट्रपति एवं राज्यपाल द्वारा सम्मानित डॉ. मीना कुमारी परिहार ‘मान्य’ और संस्था की अध्यक्षा डॉ. रेखा शर्मा के हाथों प्रदान किया गया। सम्मान स्वरूप उन्हें प्रमाण पत्र, अंगवस्त्र, माला और एक भव्य मोमेंटो भेंट किया गया।

    प्रथम सत्र में ‘कलम के जादूगर’ रामवृक्ष बेनीपुरी जी के जीवन और उनके साहित्यिक अवदान पर विस्तार से चर्चा हुई। इस सत्र की अध्यक्षता बेनीपुरी जी के नाती डॉ. राजीव रंजन ने की। मुख्य अतिथि के रूप में प्रसिद्ध शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अरुण कुमार साह मौजूद रहे। संस्था की राष्ट्रीय संयोजक प्रो. पुष्पा गुप्ता ने मुख्य वक्ता के रूप में विचार रखे और धन्यवाद ज्ञापन किया।

    ज्ञात हो कि संजय कुमार अम्बष्ट वर्तमान में मधुबनी में सरकारी सेवा में कार्यरत हैं, लेकिन कला और समाज सेवा के प्रति उनका जुनून निरंतर जारी है। उन्हें पूर्व में भी सैकड़ों राष्ट्रीय और प्रादेशिक पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। इस उपलब्धि पर मधुबनी और साहित्य जगत के लोगों ने उन्हें बधाई दी है।

    काव्य गोष्ठी में गूँजी रचनाएँ

    दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ, जिसका संचालन उमेश राज ने किया। इस सत्र में डॉ. हरि किशोर प्रसाद सिंह, सत्येन्द्र कुमार सत्यन, सुप्रिया सोनी, डॉ. सिगबतुल्लाह हमिदी, और प्रेम कुमार वर्मा सहित कई दिग्गजों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम की संपूर्ण व्यवस्था राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष उत्तम कुमार शर्मा द्वारा कुशलतापूर्वक संपन्न की गई।

    ~ newsdaily24.in (निष्पक्ष खबरें, सटीक विश्लेषण)

  • लखनऊ। राजधानी के विकास नगर स्थित जीवन दीप आश्रम में इन दिनों भक्ति की अविरल धारा बह रही है। श्री हनुमंत सेवा समिति, लखनऊ द्वारा आयोजित संगीतमय श्री राम कथा के अवसर पर समूचा क्षेत्र प्रभु श्री राम के जयकारों से गुंजायमान है। कार्यक्रम में क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों सहित भारी संख्या में श्रद्धालु प्रभु की पावन कथा का श्रवण करने पहुँच रहे हैं।

    कथा के विशेष सत्र में बीकेटी के क्षेत्रीय विधायक योगेश शुक्ला सम्मिलित हुए। उन्होंने व्यासपीठ पर विराजमान पूज्य व्यास जी का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान उनके साथ मुख्य यजमान दिलीप मिश्र भी उपस्थित रहे। विधायक जी ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा और समरसता का संचार होता है।

    कार्यक्रम के मुख्य यजमान दिलीप मिश्र एवं राघवेंद्र शुक्ला (सुकलनपुरवा) ने सपरिवार व्यासपीठ की आरती उतारी और आशीर्वाद लिया। आयोजन में सूर्य नारायणी नव दुर्गे देव स्थली (बीकेटी ब्लॉक, कुम्भरावा) के पीठाधीश्वर बालाजी महाराज के अनन्य साधक पंडित विमल मिश्र ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।

    कथा के दौरान आध्यात्मिक चेतना की पराकाष्ठा तब देखने को मिली जब श्री यतींद्रानंद गिरी महाराज जी ने पंडित विमल मिश्र को अपना विशेष आशीर्वाद प्रदान किया। पंडित विमल मिश्र ने इसे अपने जीवन का सौभाग्य बताते हुए कहा कि संतों का सानिध्य ही वास्तविक संपत्ति है। वहीं, प्राचीन गुल्लाचीन मंदिर के हनुमंत लाल जी के दास का आशीर्वाद भी भक्तों को प्राप्त हुआ।

    आयोजन को सफल बनाने में श्री हनुमंत सेवा समिति के पदाधिकारियों का विशेष सहयोग रहा। इस अवसर पर मुख्य रूप से: संजय सिंह एडवोकेट, धर्मेंद्र मिश्र, तेज कुमार शुक्ला एवं श्री दिलीप मिश्र का समस्त परिवार उपस्थित रहा।

    समिति द्वारा बताया गया कि कथा का समापन पूर्ण विधि-विधान और विशाल भंडारे के साथ किया जाएगा। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सेवादारों द्वारा सुरक्षा और बैठने के विशेष प्रबंध किए गए हैं।

  • Culture

    लखनऊ। ‘विश्व धरोहर दिवस’ के मौके पर राजधानी लखनऊ में शनिवार को विरासत और संस्कृति को समर्पित एक प्रेरणादायक आयोजन किया गया, जिसने लोगों को अपनी ऐतिहासिक धरोहरों के महत्व को समझने और उन्हें सहेजने का संदेश दिया।

    राज्य संग्रहालय में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में ‘हमारी धरोहरें, हमारा गौरव’ विषय के जरिए भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आकर्षक और प्रभावी रूप में प्रस्तुत किया गया।इस कार्यक्रम के तहत संग्रहालय परिसर में एक भव्य प्रदर्शनी लगाई गई, जिसमें भारत की प्रमुख ऐतिहासिक धरोहरों और स्मारकों के छायाचित्रों को प्रदर्शित किया गया। इस प्रदर्शनी में अजंता-एलोरा की गुफाओं, आगरा के किले और ताजमहल से लेकर हाल ही में विश्व धरोहर सूची में शामिल असम के चराईदेव स्थित अहोम राजवंश की टीला-दफन प्रणाली तक की झलक देखने को मिली। और बड़ी संख्या में दर्शकों ने इसका अवलोकन किया।

    पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि, इस मौके पर छात्र-छात्राओं के लिए चित्रकला और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न विद्यालयों के सैकड़ों प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से बच्चों ने अपनी रचनात्मकता और ज्ञान का प्रदर्शन करते हुए भारत की सांस्कृतिक विरासत को रंगों और विचारों के माध्यम से जीवंत कर दिया। विजेताओं को पुरस्कार और प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया।पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि डॉ. संजय कुमार बिस्वाल ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि सांस्कृतिक धरोहरें किसी भी राष्ट्र की पहचान होती हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं का अपनी विरासत से जुड़ना न केवल गर्व की बात है, बल्कि भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी है। उन्होंने संग्रहालय की इस पहल की सराहना करते हुए सभी प्रतिभागियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इसके अलावा राज्य संग्रहालय के निदेशक डॉ. विनय कुमार सिंह ने कहा कि विश्व धरोहरें हमारी साझा संस्कृति और इतिहास की अमूल्य पहचान हैं। उन्होंने सभी को इन धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूक रहने और आने वाली पीढ़ियों के लिए इन्हें सुरक्षित रखने का आह्वान किया। उनके अनुसार, यह केवल सरकारी प्रयास नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

    पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि, ‘विश्व धरोहर दिवस’ के इस आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि हमारी सांस्कृतिक विरासत ही हमारी असली पहचान है। ऐसे प्रयास न केवल लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं, बल्कि एक जागरूक और जिम्मेदार समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

  • लखनऊ/शाहजहाँपुर: भगवान परशुराम जयंती के अवसर पर शाहजहांपुर जिले स्थित परशुरामपुरी एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। यह स्थान भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम की जन्मस्थली के रूप में व्यापक रूप से माना जाता है।

    पूर्व में जलालाबाद के नाम से प्रसिद्ध यह क्षेत्र धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है, जहां स्थित प्राचीन परशुराम मंदिर में हर वर्ष जयंती के अवसर पर श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या उमड़ती है एवं पूरा क्षेत्र भक्ति, श्रद्धा और उत्सव के उल्लास से सराबोर हो उठता है। इस स्थान की आध्यात्मिक महत्ता और धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं को देखते हुए उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा परशुराम मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण और कायाकल्प का कार्य कराया जा रहा है। लगभग 18 करोड़ रुपये की लागत से विकसित हो रही इस परियोजना में अब तक 11 करोड़ रुपये स्वीकृत किए जा चुके हैं। अधिकारियों के अनुसार परियोजना का कार्य तेज गति से प्रगति पर है और इसके जुलाई 2026 तक पूर्ण होने की संभावना है।

    इस अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा, “भगवान परशुराम जयंती हमारी सभ्यतागत जड़ों से जुड़ने और धर्म व न्याय के प्रतीक भगवान परशुराम के आदर्शों को स्मरण करने का अवसर है। शाहजहांपुर की परशुरामपुरी, जिसे भगवान परशुराम की जन्मस्थली माना जाता है, ऐतिहासिक रूप से पहले जोगीखेड़ा और बाद में जलालाबाद के नाम से जानी जाती रही है। आज यह स्थान पुनः अपनी पारंपरिक पहचान ‘परशुरामपुरी’ के रूप में स्थापित हो चुका है, जो हमारी सांस्कृतिक विरासत के प्रति बढ़ते सम्मान और ऐतिहासिक धरोहरों को पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है।” उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में लगभग 60 लाख पर्यटकों ने शाहजहांपुर का भ्रमण किया, जो जिले के धार्मिक स्थलों के प्रति बढ़ती आस्था और आकर्षण को दर्शाता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ऐसे महत्वपूर्ण विरासत स्थलों का विकास कर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    परशुराम मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण एवं कायाकल्प के अंतर्गत श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए विभिन्न विकास कार्य कराए जा रहे हैं। इनमें सत्संग भवन, मल्टीपर्पस हॉल (जिसका प्रथम तल निर्मित हो चुका है), ट्रस्ट कार्यालय एवं पुजारी कक्ष, मंदिर मंडप, पार्किंग तथा डॉरमेट्री का निर्माण और मुख्य प्रवेश द्वार व कवर्ड शेड का विकास शामिल है। इसके साथ ही आंतरिक व बाह्य विद्युतीकरण, सत्संग भवन में लिफ्ट की स्थापना, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था तथा माइक एवं साउंड सिस्टम की व्यवस्था भी की जा रही है। इसके अतिरिक्त मंदिर मंडप और सत्संग भवन में पिंक शेड स्टोन कार्य तथा मंदिर परिसर में सीसी रोड निर्माण का कार्य भी परियोजना के अंतर्गत किया जा रहा है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान परशुराम का जन्म वैशाख शुक्ल तृतीया को महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका के यहां हुआ था। धर्मग्रंथों में वर्णित है कि उन्होंने उस काल में अधर्म और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष करते हुए धर्म की स्थापना की। कार्तवीर्य अर्जुन का वध, कामधेनु की पुनर्प्राप्ति और पिता की हत्या का प्रतिशोध उनके जीवन से जुड़ी प्रमुख कथाएं मानी जाती हैं। भगवान परशुराम को राम जमदग्न्य और राम भार्गव के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू परंपरा में उन्हें भगवान विष्णु का ऐसा अवतार माना जाता है जो आज भी पृथ्वी पर विद्यमान हैं और कल्कि पुराण के अनुसार भविष्य में भगवान कल्कि को युद्ध और तपस्या की शिक्षा देंगे।

    अपर मुख्य सचिव, पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग, अमृत अभिजात ने कहा, “परशुरामपुरी केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि हमारी सभ्यतागत विरासत और आस्था पर्यटन की महत्वपूर्ण कड़ी है। मंदिर परिसर के कायाकल्प के माध्यम से राज्य सरकार श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ एक समग्र तीर्थ अनुभव विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है। इस प्रकार की पहलें प्रदेश के विरासत स्थलों और जीवंत धार्मिक परंपराओं को पुनर्जीवित करने के साथ उत्तर प्रदेश को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।”

  • लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बागपत में 150 एकड़ से अधिक क्षेत्र में बनने जा रहे अंतरराष्ट्रीय योग एवं वेलनेस सेंटर की तैयारियां तेज हो गई हैं।

    शुक्रवार को लखनऊ के पर्यटन भवन में आयोजित ‘स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन’ में सरकार, निवेशकों और विशेषज्ञों ने इस मेगा प्रोजेक्ट के ब्लूप्रिंट पर मंथन किया। ईशा फाउंडेशन समेत देश के प्रतिष्ठित योग, साधना, नेचुरोपैथी और वेलनेस संस्थाओं से जुड़े 20 से अधिक प्रतिनिधियों ने इसमें हिस्सा लेकर अपने सवाल और सुझाव साझा किए। सरकार की ओर से बताया गया कि बागपत में बनने जा रहा अंतरराष्ट्रीय योग एवं वेलनेस सेंटर ‘जनता का और जनता के लिए’ समर्पित होगा। ‘स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन’ में देशभर के प्रतिष्ठित संस्थाओं ने ऑनलाइन जुड़कर अपने विचार रखे। इस बैठक में ईशा फाउंडेशन, चड्ढा चैरिटेबल ट्रस्ट, शौर्य नेचुरोपैथी, आबयोगा एसएमएस फाउंडेशन, जीबी कॉर्पोरेशन, हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट, गोपालन फाउंडेशन, द योगा इंस्टीट्यूट और आई चेंज मेकर समेत कई संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

    ‘स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन’ के दौरान देशभर से जुड़े निवेशकों और विशेषज्ञों ने न सिर्फ अपने अनुभव साझा किए, बल्कि राज्य सरकार की नीतियों, रियायतों और जमीन अधिग्रहण जैसे अहम मुद्दों पर भी सवाल पूछे। गाजियाबाद से जसपाल सिंह गिल ने अपने चल रहे प्रोजेक्ट्स का अनुभव साझा किया, जबकि कर्नाटक से ऑनलाइन जुड़े शारदा ने उत्तर प्रदेश में वेलनेस टूरिज्म की अपार संभावनाओं पर जोर दिया। उन्होंने बागपत प्रोजेक्ट में रुचि जताते हुए सरकार से प्रोत्साहन बढ़ाने की मांग भी की। वहीं, गौरव वाजपेयी ने जमीन अधिग्रहण को लेकर सवाल पूछे और अशोक भार्गव ने 450 करोड़ रुपये के निवेश व तकनीकी पहलुओं पर जानकारी मांगी। पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने सभी जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए निवेशकों को उत्तर प्रदेश पर्यटन नीति के प्रावधानों का हवाला दिया।

    पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के हरिया खेड़ा गांव में एक भव्य अंतरराष्ट्रीय योग एवं वेलनेस सेंटर पर्यटन विभाग की स्वामित्व वाली लगभग 65.815 हेक्टेयर भूमि पर विकसित की जाएगी। इस मेगा प्रोजेक्ट में आधुनिक सुविधाओं के साथ पारंपरिक योग और आयुर्वेद को एक ही परिसर में समाहित किया जाएगा। इस वृहद वेलनेस कैंपस में पारंपरिक और आधुनिक स्वास्थ्य प्रणालियों का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। यहां 2,000 से 3,000 लोगों की क्षमता वाला भव्य योग हॉल, ओपन योग एरीना और ध्यान केंद्र तैयार किए जाएंगे। इसके साथ ही 200 बेड का अस्पताल, किसान औषधि बाजार, 100 बेड के कॉटेज और कम से कम 1,500 बेड की डॉर्मिटरी भी विकसित की जाएगी। यही नहीं, कैंपस में स्टाफ आवास, 3,000 लोगों की क्षमता वाला विशाल भोजनालय, रेस्टोरेंट और कैफे, एम्फीथिएटर, ध्यान उद्यान और वॉकिंग ट्रैक जैसी सुविधाएं भी होंगी। पर्यावरण के लिहाज से सोलर ऊर्जा प्रणाली और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी स्थापित किए जाएंगे। यह प्रोजेक्ट आधुनिकता के साथ-साथ सतत विकास का भी उदाहरण बनेगा। 

    अंतर्राष्ट्रीय योग एवं वेलनेस सेंटर में योग प्रशिक्षण, ध्यान कार्यक्रम, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा से लेकर वेलनेस रिट्रीट, शोध एवं प्रमाणन, सात्विक भोजन, ऑर्गेनिक उत्पादों की बिक्री और सांस्कृतिक आयोजन जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। खास बात यह है कि पूरे परिसर को पूरी तरह अनुशासित और शुद्ध वातावरण में विकसित किया जाएगा, जहां शराब, धूम्रपान, मांसाहार, प्रदूषण, शोरगुल और किसी भी प्रकार की मनोरंजन गतिविधियों पर सख्त प्रतिबंध रहेगा।

  • आस्था का केंद्र: मालाओं स्टेट हवेली स्थित ‘मल्केश्वर महादेव’ का अलौकिक चमत्कार चोरों को मिला महादेव का दंड, जब घंटे चुराने वालों की रातों-रात चली गई आंखों की रोशनी लाखों भक्तों की अटूट श्रद्धा का केंद्र बना मल्केश्वर महादेव मंदिर बांसगांव, गोरखपुर। गोरखपुर के बांसगांव संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मालाओं स्टेट हवेली गांव […]

    लाखों भक्तों की अटूट श्रद्धा का केंद्र बना मल्केश्वर महादेव मंदिर
  • लखनऊ। राजधानी के विकास नगर क्षेत्र में इन दिनों अध्यात्म और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। श्री हनुमंत कथा समिति के तत्वावधान में आयोजित ‘श्री हनुमंत चरित्र कथा’ के माध्यम से पूरे क्षेत्र में श्री राम भक्त हनुमान के आदर्शों की अमृत वर्षा हो रही है। सेक्टर-4 स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर पार्क में उमड़ रहे श्रद्धालुओं के सैलाब के बीच सुप्रसिद्ध पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरी जी महाराज हनुमान जी के प्रेरक प्रसंगों से जन-मानस को सराबोर कर रहे हैं।

    कथा के आयोजन में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करने हेतु पंडित विमल मिश्र (कुम्भरावा, बीकेटी ब्लॉक) निरंतर प्रयासरत हैं। उन्होंने बताया कि पितरों के शुभाशीष से उन्हें इस पावन आयोजन में पूजन-अर्चन और साधना का पुण्य अवसर मिला है। पंडित विमल मिश्र ने कथा की सफलता और जन-कल्याण हेतु व्यास पीठ के समीप रात्रि भर माला जाप व हनुमान चालीसा के सात विशेष पाठ संपन्न किए। उन्होंने समस्त ग्राम वासियों व मित्रों से इस पावन अमृत वर्षा का लाभ उठाने और व्यास पीठ से आशीर्वाद प्राप्त करने का आह्वान किया है।

    कथा व्यास: पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरी जी महाराज।

    मुख्य यजमान: श्री दिलीप कुमार मिश्रा (अध्यक्ष, आयोजन समिति)।

    समय: प्रतिदिन सायंकाल 5:00 बजे से रात्रि 8:00 बजे तक (18 अप्रैल तक समापन)।

    स्थान: श्री महाकालेश्वर मंदिर पार्क, सेक्टर-4, विकास नगर।

    समिति के अध्यक्ष श्री दिलीप कुमार मिश्रा ने जानकारी दी कि 14 अप्रैल से शुरू हुई इस कथा में भक्तों का उत्साह चरम पर है। महाराज श्री के वचनों को सुनने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुँच रहे हैं। आयोजन को भव्य रूप देने में समिति के पदाधिकारियों का सक्रिय सहयोग बना हुआ है:

    यह आध्यात्मिक उत्सव 18 अप्रैल तक निरंतर जारी रहेगा, जहाँ प्रतिदिन हनुमान जी के चरित्र के नवीन आयामों पर प्रकाश डाला जाएगा।

    कथा के मुख्य यजमानइस भव्य आयोजन में यजमान के रूप में श्री दिलीप कुमार मिश्रा सपरिवार उपस्थित हैं। उनके साथ उनके सुपुत्र आसू मिश्र तथा परिवार के सदस्य प्रदीप कुमार मिश्र व प्रवीण कुमार मिश्र मुख्य अनुष्ठान में सहभागिता कर रहे हैं। पूरा परिवार पूरी तन्मयता से हनुमंत लाल की सेवा और व्यवस्थाओं में जुटा हुआ है।

    सुरक्षा के साथ सनातन धर्म की सेवा में जुटा पुलिस प्रशासनविकास नगर में आयोजित इस कथा की सुरक्षा व्यवस्था सराहनीय है। विकासनगर थाना प्रभारी भानु प्रताप सिंह के नेतृत्व में एसएसआई रणधीर सिंह, एसआई राजकिशोर चौहान और हेड कांस्टेबल बहादुर सिंह व संतोष कुमार मुस्तैदी से तैनात हैं। साथ ही, महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए महिला थाने का समस्त स्टाफ भी तैनात है। सुरक्षा कर्मियों का यह समर्पण न केवल कानून-व्यवस्था बनाए हुए है, बल्कि वे तन-मन-धन से सनातन धर्म की ध्वजा लहराने में भी अपना पूर्ण सहयोग दे रहे हैं।

  • बालों को स्वाभाविक रूप से स्वस्थ और मजबूत बनाए रखने में भी करता है मदद प्राचीन ज्ञान का नया अवतार: बालों की देखभाल में लौट रहा लकड़ी का कंघा ~ Shalie Saxena लखनऊ, [27/02/2025] — आधुनिक प्लास्टिक के कंघों के बीच, सदियों पुराना लकड़ी का कंघा फिर से लोकप्रियता हासिल कर रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ […]

    प्राचीन ज्ञान का नया अवतार: बालों की देखभाल में लौट रहा लकड़ी का कंघा
  • बिजनौर। जनपद में अवैध खनन का काला कारोबार एक बार फिर सुर्खियों में है। खनन माफियाओं की मनमानी और नियमों को ताक पर रखकर किए जा रहे कार्यों ने जिला प्रशासन को अलर्ट मोड पर ला दिया है। जिलाधिकारी (DM) जसजीत कौर ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि अवैध गतिविधियों में लिप्त पाए जाने वाले ठेकेदारों के पट्टे तुरंत निरस्त (Cancellation) किए जाएंगे।

    जसजीत कौर, डीएम बिजनौर

    पिछले डेढ़ वर्षों के दौरान बिजनौर में खनन पट्टों की आड़ में बड़े पैमाने पर अवैध खनन की शिकायतें प्रशासन को प्राप्त हुई हैं। जांच के बाद कई पट्टों पर भारी जुर्माना भी लगाया गया है। इसके बावजूद, खनन करने वाले ठेकेदारों की कार्यशैली में कोई सुधार नहीं दिख रहा है, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुँच रहा है। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) वान्या सिंह ने भी स्पष्ट किया है कि सीमा क्षेत्र से बाहर खनन करने वालों के विरुद्ध जांच कर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

    सबसे विवादित मामला नजीबाबाद थाना क्षेत्र के अंतर्गत ‘वीरू वाला’ और ‘मीरपुर दुर्ग’ का सामने आया है।

    टीम ग्रोथ का मामला: ‘वीरू वाला’ में पूर्व में टीम ग्रोथ द्वारा किए जा रहे खनन पट्टे को बरेली से आई संयुक्त जांच टीम ने अवैध पाया था, जिसके बाद इसे निरस्त कर दिया गया था।

    करोड़ों का जुर्माना: इस पट्टे पर करोड़ों रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था, जो मामला वर्तमान में रिवीजन कोर्ट और कमिश्नर के यहाँ लंबित है।

    फिर से सक्रियता: आरोप है कि पुराने मामले की जांच ठंडी भी नहीं हुई और टीम ग्रोथ अब मीरपुर दुर्ग में नया पट्टा शुरू करने की तैयारी में है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा का विषय है कि भारी जुर्माने और पिछली अनियमितताओं के बावजूद नए पट्टे की अनुमति कैसे दी जा रही है।

    प्रतीकात्मक फोटो

    रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व में जब प्रशासन ने कार्रवाई की थी, तब संबंधित पक्ष माननीय उच्च न्यायालय की शरण में गया था। न्यायालय के आदेश पर दोबारा काम शुरू होने के बाद, आरोप है कि नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं। शिकायत मिलने पर प्रशासन ने दोबारा जांच कर पट्टा निरस्त किया, लेकिन वर्तमान में नए पट्टों की संचालन प्रक्रिया ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    अवैध खनन के इस बेखौफ खेल को लेकर जनता की नजरें अब प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और ईमानदार छवि वाली जिलाधिकारी जसजीत कौर पर टिकी हैं। प्रशासन समय-समय पर अभियान तो चलाता है, लेकिन खनन माफियाओं के बुलंद हौसले यह संकेत देते हैं कि उन्हें कानून का भय नहीं है। अब देखना यह है कि सरकारी खजाने को चूना लगाने वालों और अवैध खनन के इस सिंडिकेट पर प्रशासन कब और कितनी प्रभावी लगाम कसता है!

  • अंबेडकर नगर: जनपद के अलग-अलग क्षेत्रों में डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर भारी तनाव देखने को मिला। महरुआ थाना क्षेत्र के नसीरपुर गांव में जहां बिना अनुमति प्रतिमा स्थापित करने को लेकर ग्रामीण और प्रशासन आमने-सामने आ गए, वहीं जहांगीरगंज में असामाजिक तत्वों द्वारा झंडे का डंडा तोड़े जाने से आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया।

    महरुआ के नसीरपुर गांव में मंगलवार सुबह उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब गांव के कुंजीलाल ने अपने सहयोगियों के साथ बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थापित कर दी।

    आंबेडकर प्रतिमा स्थापित करने की जिद पर अड़े ग्रामीण।

    9 घंटे का गतिरोध: जैसे ही पुलिस को इसकी सूचना मिली, एसओ महरुआ महेंद्र सरोज बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस द्वारा मूर्ति हटाने की बात कहते ही गांव की महिलाएं उग्र हो गईं और नारेबाजी शुरू कर दी। देखते ही देखते सैकड़ों की भीड़ जमा हो गई।

    अधिकारियों की घेराबंदी: मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम भीटी धर्मेंद्र कुमार और सीओ भीटी लक्ष्मीकांत मिश्र कई थानों की फोर्स के साथ गांव पहुंचे। ग्रामीणों को समझाने का प्रयास घंटों चलता रहा, लेकिन महिलाएं मूर्ति न हटाने की जिद पर अड़ी रहीं।

    सहमति और सुरक्षा: करीब 9 घंटे की कड़ी मशक्कत और मान-मनौव्वल के बाद ग्रामीण शांत हुए। अंततः पुलिस ने सुरक्षित तरीके से मूर्ति हटवाकर कुंजीलाल के घर रखवा दी। कुंजीलाल ने आश्वासन दिया कि अब वे विधिवत अनुमति लेने के बाद ही प्रतिमा स्थापित करेंगे। गांव में एहतियातन पुलिस बल तैनात है।

    दूसरी घटना जहांगीरगंज थाना क्षेत्र के जोलहापुर मोड़ की है, जहां सोमवार रात किसी अज्ञात व्यक्ति ने जयंती के उपलक्ष्य में लगाए गए झंडे का डंडा तोड़ दिया।

    सड़क जाम: मंगलवार सुबह जब ग्रामीणों ने टूटा हुआ डंडा देखा, तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित लोगों ने कम्हरिया घाट मार्ग पर जाम लगा दिया, जिससे मुख्य मार्ग और लिंक रोड पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।

    झंडे का डंडा तोड़े जाने से आक्रोशित ग्रामीणों को समझाती पुलिस।

    CCTV खंगाल रही पुलिस: सूचना मिलने पर पहुंचे प्रभारी निरीक्षक संतोष सिंह ने ग्रामीणों को निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया। पुलिस ने कहा कि आसपास के सीसीटीवी कैमरों की मदद से आरोपी की पहचान की जा रही है और जल्द ही कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने जाम खोला।

    प्रशासनिक संदेश: पुलिस प्रशासन ने क्षेत्र में शांति बनाए रखने की अपील की है और स्पष्ट किया है कि कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों या बिना अनुमति सार्वजनिक स्थलों पर निर्माण करने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया जाएगा।

  • लखनऊ, (14 अप्रैल 2026)। लखनऊ में मंगलवार को संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सामाजिक समरसता और जागरूकता का एक प्रभावशाली संदेश दिया। इस खास मौके पर नाट्य मंचन और गायन प्रस्तुतियों के जरिए बाबा साहेब के जीवन और संघर्ष को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसने दर्शकों को भावुक और प्रेरित किया।उन्नाव से आए कलाकारों द्वारा प्रस्तुत नाटक में योगेंद्र पाल ने बाबा साहेब की भूमिका निभाते हुए उनके पूरे जीवन दर्शन को सशक्त तरीके से मंच पर उतारा। वहीं ‘नमक से पहले पानी’ जैसे नाट्य मंचन के जरिए डॉ. आंबेडकर की जीवन यात्रा को प्रभावी ढंग से दर्शाया गया। लखनऊ से आए विपिन कुमार और उनकी टीम ने भी अपने मंचन से कार्यक्रम में नई ऊर्जा भर दी, जबकि मुंबई से आए कलाकारों की गायन प्रस्तुति ने पूरे माहौल को और अधिक भावपूर्ण बना दिया।

    पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने आंबेडकर जयंती के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भीमराव आंबेडकर ने विश्व को एक श्रेष्ठ संविधान प्रदान किया। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने सामाजिक समरसता और समानता का ऐसा मार्ग दिखाया, जिसकी बदौलत आज समाज के वंचित और पिछड़े वर्ग भी मुख्यधारा में सशक्त रूप से शामिल हो रहे हैं। पर्यटन मंत्री ने आगे कहा कि प्रदेश सरकार बाबा साहेब से जुड़े स्मारकों के संरक्षण और विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। साथ ही इन स्थलों के सुदृढ़ीकरण के लिए आवश्यक धनराशि भी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि उनकी विरासत को सुरक्षित रखते हुए आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया जा सके।

    अपर मुख्य सचिव, पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात ने कहा कि इस अवसर पर देशभर से आए कलाकारों ने अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को जीवंत बना दिया। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब के जीवन मूल्यों को आत्मसात करते हुए प्रदेश सरकार निरंतर कार्य कर रही है और समाज में समरसता तथा समानता को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने यह भी कहा कि 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में जन्मे भीमराव आंबेडकर भारतीय इतिहास के अत्यंत विद्वान और दूरदर्शी व्यक्तित्वों में शामिल थे। स्वतंत्र भारत के प्रथम कानून मंत्री के रूप में उन्होंने संविधान निर्माण में अहम योगदान दिया। उनके सिद्धांत आज भी समाज को नई दिशा प्रदान कर रहे हैं, और इन्हीं मूल्यों को सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया।

  • लखनऊ | उत्तर प्रदेश सरकार राज्य को वेलनेस टूरिज्म के वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करने के लिए एक महत्वाकांक्षी कदम उठाने जा रही है। मेरठ-बागपत राष्ट्रीय राजमार्ग के समीप 150 एकड़ से अधिक विस्तृत क्षेत्र में एक ‘इंटरनेशनल योग एवं वेलनेस सेंटर’ विकसित किया जाएगा। इस वृहद परियोजना को धरातल पर उतारने और विश्वस्तरीय मानकों को सुनिश्चित करने के लिए आगामी 17 अप्रैल को लखनऊ स्थित पर्यटन भवन में एक महत्वपूर्ण ‘स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन’ (हितधारक परामर्श) का आयोजन किया जा रहा है।

    क्षेत्रफल: 150 एकड़ से अधिक की विशाल भूमि पर विकास।

    सुविधाएं: एक ही छत के नीचे योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा (नेचुरोपैथी) और समग्र स्वास्थ्य सेवाएं।

    कनेक्टिविटी: मेरठ-बागपत नेशनल हाईवे के पास होने से पर्यटकों के लिए सुगम पहुंच।

    उद्देश्य: उत्तर प्रदेश को वैश्विक वेलनेस टूरिज्म हब के रूप में नई पहचान दिलाना।

    प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने इस परियोजना को लेकर उत्साह व्यक्त करते हुए कहा कि बागपत का यह सेंटर कनेक्टिविटी के लिहाज से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। उन्होंने निवेशकों, वेलनेस विशेषज्ञों और ऑपरेटरों को आमंत्रित करते हुए कहा: > “यह परियोजना न केवल पर्यटन को नई दिशा देगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के बड़े अवसर सृजित करेगी और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगी। बागपत को ग्लोबल वेलनेस डेस्टिनेशन बनाने के लिए हम विशेषज्ञों के सुझावों का स्वागत करते हैं।”>

    अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग, अमृत अभिजात ने जानकारी दी कि राज्य सरकार निजी निवेशकों के साथ मिलकर अत्याधुनिक योग केंद्र, मेडिटेशन स्पेस और सतत पर्यटन (Sustainable Tourism) सुविधाएं विकसित करने की योजना बना रही है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य परियोजना शुरू होने से पहले सभी पक्षों की राय और आवश्यकताओं का सटीक आकलन करना है।

    लखनऊ में आयोजित होने वाले इस परामर्श सत्र में वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों के साथ-साथ ईको निदेशक पुष्प कुमार के० और देश-विदेश के प्रमुख वेलनेस ऑपरेटर शामिल होंगे। यह मंच सरकार और निजी क्षेत्र के बीच समन्वय स्थापित कर उत्तर प्रदेश में वेलनेस टूरिज्म के भविष्य की रूपरेखा तैयार करेगा।

    संक्षेप में: स्थान: बागपत, उत्तर प्रदेश। आयोजन: स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन, 17 अप्रैल, पर्यटन भवन, लखनऊ। लक्ष्य: योग और वेलनेस के माध्यम से वैश्विक पर्यटकों को आकर्षित करना।

  • लखनऊ। बख्शी का तालाब (बीकेटी) क्षेत्र के कुम्भरावा स्थित ‘सूर्य नारायणी नव दुर्गे देव स्थली’ इन दिनों अध्यात्म और सेवा की चर्चा का केंद्र बनी हुई है। क्षेत्र के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान एसएस पब्लिक स्कूल के प्रबंधक श्री प्रवीण सिंह चौहान ने पीठाधीश्वर और बालाजी महाराज के अनन्य साधक पंडित विमल मिश्र से भेंट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।

    प्रवीण सिंह चौहान केवल एक कुशल प्रबंधक ही नहीं, बल्कि एक संवेदनशील समाजसेवी के रूप में भी पहचाने जाते हैं। वह अपने विद्यालय में आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की शिक्षा का पूरा ध्यान रखते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, श्री चौहान का मानना है कि कोई भी बच्चा संसाधनों के अभाव में शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए। उनके इस प्रयास की सराहना पूरे क्षेत्र में हो रही है।

    पंडित विमल मिश्र जी से आशीर्वाद ग्रहण करते एसएस पब्लिक स्कूल के प्रबंधक श्री प्रवीण सिंह चौहान।

    शिक्षा के साथ-साथ श्री चौहान नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने का अनूठा कार्य भी कर रहे हैं। वे स्कूल आने वाले अभिभावकों और भक्तों को प्रभु की सुंदर तस्वीरें भेंट कर उन्हें ईश्वर के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। उनका यह भक्तिपूर्ण व्यवहार समाज में सकारात्मकता का संचार कर रहा है।

    इसी सेवा यात्रा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कुम्भरावा स्थित देव स्थली के पीठाधीश्वर पंडित विमल मिश्र जी के चरणों में माथा टेका। इस मुलाकात के दौरान पंडित विमल मिश्र ने उन्हें आशीर्वाद देते हुए कहा कि जो व्यक्ति शिक्षा और गरीबों की सेवा को अपना धर्म मानता है, उस पर बालाजी महाराज की कृपा सदैव बनी रहती है।

    बीकेटी ब्लॉक के ग्रामीणों और प्रबुद्ध वर्ग ने प्रवीण सिंह चौहान के इन कार्यों को एक आदर्श मिसाल बताया है। उनका कहना है कि शिक्षा के बाजारीकरण के इस दौर में श्री चौहान जैसे लोग समाज को नई दिशा दिखा रहे हैं।

  • बिजनौर। जनपद के नूरपुर थाना क्षेत्र में मानवता को शर्मसार कर देने वाला एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। यहाँ एक युवक ने प्रेम के नाम पर न केवल युवती का शोषण किया, बल्कि अपने दोस्तों के साथ मिलकर गैंगरेप और चोरी की वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने मुख्य आरोपी प्रेमी सहित उसके तीनों साथियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है।

    पुलिस के अनुसार, आरोपी प्रेमी ने अपनी प्रेमिका को नशीली गोलियां उपलब्ध कराई थीं। प्रेमी के बहकावे में आकर युवती ने रात के खाने में अपनी माँ और बहनों को वे गोलियां खिला दीं, जिससे वे अचेत हो गईं।

    जब परिवार बेहोश हो गया, तब प्रेमी युवती को बहला-फुसलाकर एक निजी बैंकट हॉल ले गया। वहां उसने स्वयं और उसके तीन दोस्तों ने युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। इसी दौरान, योजना के मुताबिक प्रेमी के तीनों दोस्त युवती के सूने घर पहुँचे और वहां से लाखों रुपये की नकदी व जेवरात चोरी कर फरार हो गए।

    होश में आने पर जब पीड़िता की माँ ने घर की हालत देखी और आपबीती सुनी, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। पीड़िता की माँ की तहरीर पर नूरपुर पुलिस ने तत्काल सामूहिक दुष्कर्म और चोरी की सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज किया।

    पुलिस प्रशासन का वक्तव्य: > “नूरपुर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। उनके कब्जे से चोरी किया गया माल बरामद कर लिया गया है। आरोपियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।”>

    ~ ब्यूरो रिपोर्ट: newsdaily24

  • आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर बाहरी चमक-धमक में खो जाते हैं और उन बुनियादी सत्यों को भूल जाते हैं जो हमारे चरित्र और भविष्य का निर्माण करते हैं। डॉ. महेंद्र सिंह ने जीवन की गहराई और मानवीय स्वभाव की जटिलताओं को कुछ बिंदुओं में पिरोया है, जो हर किसी के लिए एक मार्गदर्शक का काम कर सकते हैं।

    1. जीवन के कड़वे मगर अटूट सत्य (The Hard Realities): जीवन हमें कई सबक सिखाता है, लेकिन कुछ बातें ऐसी हैं जिन्हें स्वीकार करना ही बुद्धिमानी है:

    सफलता ही पहचान है: समाज अक्सर आपके संघर्ष को नहीं, बल्कि आपकी सफलता को देखता है। जब तक आप सफल नहीं होते, दुनिया को आपकी बातों में रुचि नहीं होती।

    समय और स्वास्थ्य की कीमत: समय एक ऐसी पूंजी है जो खर्च होने के बाद कभी वापस नहीं आती। वहीं, स्वास्थ्य को जीवन की ‘पहली संपत्ति’ माना गया है। यदि स्वास्थ्य नहीं, तो सारी सफलता व्यर्थ है। मेहनत बनाम प्रतिभा: प्रतिभा (Talent) आपको शुरुआत दे सकती है, लेकिन निरंतर कड़ी मेहनत (Hard Work) ही वह बल है जो प्रतिभा को भी पीछे छोड़ देती है।

    आराम का त्याग: ‘कंफर्ट जोन’ सुनने में सुखद लगता है, लेकिन असल में यह सपनों की कब्रगाह है। महान लक्ष्य कभी भी आराम के दायरे में रहकर हासिल नहीं किए जाते।

    2. सतर्कता: इन 6 तरह के लोगों से बनाएं दूरी (Beware of These Personalities) अध्यात्म और व्यवहार कुशलता का पहला नियम है—सही संगति। समाज में कुछ ऐसे व्यक्तित्व होते हैं जो आपकी मानसिक शांति और प्रगति में बाधक बन सकते हैं:

    1. गिरगिट की तरह व्यवहार बदलने वाले: जो लोग अपने आसपास के लोगों या स्थिति के अनुसार अपनी निष्ठा बदल लेते हैं, वे कभी भरोसेमंद नहीं होते।

    2. ‘विश्वास करो’ की रट लगाने वाले: गहरा और सच्चा विश्वास मौन होता है। जो बार-बार विश्वास दिलाने की कोशिश करे, समझ लीजिए वहां कुछ कमी है।

    3. दूसरों की निंदा करने वाले: याद रखें, जो आपके सामने दूसरों की बुराई कर रहा है, वह निश्चित रूप से दूसरों के सामने आपकी भी बुराई करेगा।

    4. राज न रख पाने वाले: ऐसे लोग जो किसी के गुप्त रहस्य को ‘अटेंशन’ पाने के लिए सार्वजनिक कर देते हैं, वे मित्रता के योग्य नहीं होते।

    5. हमेशा ‘विक्टिम कार्ड’ खेलने वाले: कुछ लोग हमेशा खुद को पीड़ित दिखाते हैं ताकि दूसरों की सहानुभूति बटोर सकें। अक्सर ऐसे लोग पर्दे के पीछे अपनी गलतियों को छुपा रहे होते हैं।

    6. स्वार्थी मित्र: जो केवल जरूरत पड़ने पर आपको याद करते हैं, उनके लिए आप एक मित्र नहीं बल्कि मात्र एक ‘साधन’ (Tool) हैं।

    निष्कर्ष: जीवन की सफलता केवल धन कमाने में नहीं, बल्कि सही लोगों की पहचान और समय के सही उपयोग में है। डॉ. सिंह के ये विचार हमें आत्म-मंथन करने की प्रेरणा देते हैं कि हम किसके साथ चल रहे हैं और कहाँ जा रहे हैं।

  • लखनऊ। राजधानी के विकास नगर क्षेत्र में श्री हनुमंत कथा समिति के तत्वावधान में भव्य ‘श्री हनुमंत चरित्र कथा’ का आयोजन होने जा रहा है। यह आध्यात्मिक समागम 14 अप्रैल से 18 अप्रैल 2026 तक श्री महाकालेश्वर मंदिर पार्क, सेक्टर-4, विकास नगर में आयोजित किया जाएगा।

    कथा का वाचन सुप्रसिद्ध पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरी जी महाराज द्वारा किया जाएगा। वह आज राजधानी पहुंच चुके हैं। उक्त जानकारी देते हुए आयोजन समिति के अध्यक्ष दिलीप कुमार मिश्रा ने बताया कि कथा का समय प्रतिदिन सायंकाल 5:00 बजे से रात्रि 8:00 बजे तक निर्धारित है। कार्यक्रम के पहले दिन के मुख्य यजमान दिलीप कुमार मिश्रा स्वयं रहेंगे। इस भक्तिमय आयोजन को लेकर क्षेत्र के श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है।

  • लखनऊ/जींद। सनातन धर्म की गौरवशाली परंपरा और आधुनिक राष्ट्रवाद के मध्य सेतु का कार्य कर रहे पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरी जी महाराज का व्यक्तित्व आज के समय में समाज के लिए प्रेरणा का मुख्य स्रोत बना हुआ है। जूना अखाड़े के वरिष्ठ महामंडलेश्वर और जीवनदीप आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी जी न केवल धार्मिक अनुष्ठानों बल्कि सामाजिक समरसता के लिए भी जाने जाते हैं।

    प्रखर वक्ता: स्वामी जी अपनी ओजस्वी वाणी से युवाओं में धर्म और राष्ट्र के प्रति अलख जगा रहे हैं।

    हनुमंत चरित्र कथा: 14 से 18 अप्रैल 2026 तक लखनऊ के विकास नगर में स्वामी जी के मुखारविंद से ‘श्री हनुमत चरित्र कथा’ का आयोजन किया जा रहा है।

    राष्ट्र प्रथम: उनके लिए राष्ट्र की सेवा ही सबसे बड़ी साधना है।

    “समाज को केवल उपदेशों की नहीं, बल्कि क्रियाशील संतों की आवश्यकता है।” – स्वामी यतींद्रानंद गिरी जी

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  • लखनऊ: आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली, अनियमित खान-पान और अत्यधिक तनाव के कारण गैस, ब्लोटिंग (पेट फूलना), अपच और सांस से जुड़ी बीमारियां घर-घर की समस्या बन गई हैं। लोग इन समस्याओं के लिए अक्सर अंग्रेजी दवाओं का सहारा लेते हैं, जिनके कई दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। ऐसे में आयुर्वेद का एक प्राचीन और सरल उपाय—अजवाइन और सौंफ का पानी—सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

    अजवाइन केवल एक मसाला नहीं, बल्कि औषधीय गुणों का खजाना है। इसमें मौजूद थाइमोल (Thymol) नामक तत्व पाचन एंजाइम्स को सक्रिय करता है, जिससे भोजन का पाचन सुचारू रूप से होता है।

    • गैस और एसिडिटी से राहत: यदि आप लगातार 10 दिनों तक सुबह खाली पेट अजवाइन का गुनगुना पानी पीते हैं, तो यह पुरानी से पुरानी गैस और एसिडिटी की समस्या को जड़ से खत्म करने में मदद करता है।
    • पेट दर्द में तुरंत आराम: यह पेट की मांसपेशियों को आराम देता है और जकड़न को कम करता है।

    सौंफ अपनी ठंडी तासीर और सुगंध के लिए जानी जाती है, लेकिन इसके स्वास्थ्य लाभ इससे कहीं अधिक गहरे हैं।

    • श्वसन तंत्र के लिए लाभकारी: 7 दिनों तक नियमित सौंफ के पानी का सेवन करने से फेफड़ों में जमा बलगम (कफ) साफ होता है और सांस की नलियां खुलती हैं। यह अस्थमा और एलर्जी के मरीजों के लिए भी सहायक माना जाता है।
    • नेचुरल डिटॉक्स: सौंफ में प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो शरीर के विषैले पदार्थों को बाहर निकालकर खून को साफ करते हैं।

    इसे बनाना बेहद आसान है और इसके लिए आपको किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं है:

    1. भिगोना: एक गिलास पानी में एक चम्मच अजवाइन या सौंफ (अथवा आधा-आधा चम्मच दोनों) डालकर रातभर के लिए छोड़ दें।
    2. उबालना: सुबह इस पानी को तब तक उबालें जब तक यह थोड़ा कम न हो जाए।
    3. सेवन: इसे छान लें और हल्का गुनगुना होने पर घूंट-घूंट कर पिएं। स्वाद के लिए इसमें नींबू या शहद मिलाया जा सकता है।
    • मजबूत मेटाबॉलिज्म: शरीर की चयापचय दर बढ़ती है, जिससे वजन घटाने में भी मदद मिलती है।
    • एक्टिव बॉडी: शरीर डिटॉक्स होने के कारण आप दिनभर हल्का और ऊर्जावान महसूस करते हैं।
    • गले की खराश: गले को ठंडक मिलती है और संक्रमण का खतरा कम होता है।

    आयुर्वेद विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी घरेलू नुस्खे की अति नुकसानदेह हो सकती है।

    • गर्भवती महिलाओं और किसी गंभीर बीमारी की दवा ले रहे व्यक्तियों को इसके नियमित सेवन से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य लेना चाहिए।
    • हमेशा सीमित मात्रा में और ताजे बने पानी का ही उपयोग करें।
  • लखनऊ। जिला प्रशासन ने निजी स्कूलों की ‘व्यावसायिक’ मनमानी पर जो कड़ा प्रहार किया है, उसने राजधानी में एक नई बहस छेड़ दी है। जिलाधिकारी सूर्य पाल गंगवार के इन कड़े निर्देशों ने एक तरफ अभिभावकों को राहत की उम्मीद दी है, तो दूसरी तरफ स्कूल प्रबंधनों के लिए एक स्पष्ट लक्ष्मण रेखा खींच दी है। लेकिन सवाल वही है — क्या केवल आदेश जारी होने से स्कूलों के रवैये में सुधार आएगा?

    प्रशासन के इस आदेश में तीन मुख्य बिंदु ऐसे हैं जो स्कूलों की उस पुरानी ‘मोनोपॉली’ पर वार करते हैं जिससे मध्यमवर्गीय परिवार सबसे ज्यादा त्रस्त थे:

    1. ड्रेस सिंडिकेट का अंत: अगले 5 सालों तक यूनिफॉर्म न बदलने का फैसला उन स्कूलों के लिए बड़ा झटका है जो हर दो साल में रंग या डिजाइन बदलकर पुराने बच्चों के कपड़ों को बेकार कर देते थे। इससे री-यूज (Reuse) की संस्कृति बढ़ेगी और मध्यम वर्गीय परिवारों का बजट सुधरेगा।

    2. दुकानों की ‘सेट-सेटिंग’ पर प्रहार: स्कूलों द्वारा ‘कमीशन’ के चक्कर में चुनिंदा दुकानों से सामान खरीदने का दबाव अब सीधे जेल की सलाखों तक ले जा सकता है। यह कदम बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देगा।

    3. फीस पर डिजिटल और नैतिक अंकुश: फीस वृद्धि को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से जोड़ना एक तार्किक कदम है, जो स्कूलों को बेतहाशा मुनाफे के बजाय संतुलित विकास की ओर मोड़ेगा।

    आदेश और उसका क्रियान्वयन (Implementation) दो अलग-अलग पहलू हैं। स्कूलों के रवैये में बदलाव तभी संभव होगा जब:

    निगरानी तंत्र की सक्रियता: प्रशासन द्वारा गठित ‘संयुक्त जांच टीम’ केवल कागजों पर न रहकर जमीन पर औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) करे।

    शिकायतकर्ता की गोपनीयता: अक्सर अभिभावक स्कूल के डर से शिकायत करने से बचते हैं। यदि प्रशासन शिकायतकर्ता की पहचान गुप्त रखते हुए कार्रवाई सुनिश्चित करे, तो स्कूलों में डर पैदा होगा।

    दंडात्मक कार्रवाई का उदाहरण: जब एक या दो बड़े स्कूलों पर वास्तव में 5 लाख का जुर्माना या मान्यता रद्दीकरण जैसी कार्रवाई होगी, तभी अन्य स्कूलों के लिए यह एक कड़ा संदेश (Deterrent) बनेगा।

    📋 जांच के लिए ‘संयुक्त टीम’ का गठन शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए जिलाधिकारी ने अपर जिलाधिकारी स्तर के नेतृत्व में एक संयुक्त जांच टीम का गठन किया है। इसमें क्षेत्रीय उप जिलाधिकारी, अपर नगर मजिस्ट्रेट और राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को शामिल किया गया है। यह टीम नियमित रूप से निरीक्षण करेगी और प्राप्त शिकायतों के आधार पर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। 🗣️ अभिभावक कहाँ और कैसे करें शिकायत? यदि कोई स्कूल एनसीईआरटी (NCERT) की जगह निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदने या विशेष दुकानों का दबाव बनाता है, तो निम्नलिखित माध्यमों से शिकायत की जा सकती है:

    कौन कर सकता है शिकायत: छात्र स्वयं, उनके अभिभावक या अध्यापक एसोसिएशन के सदस्य। संपर्क: शिकायतों के लिए अपर जिलाधिकारी (आपूर्ति) ज्योति गौतम और जिला विद्यालय निरीक्षक को नोडल अधिकारी नामित किया गया है।

    प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन स्कूलों में एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू है, वहां केवल एनसीईआरटी की पुस्तकों से ही शिक्षण कार्य कराया जाना अनिवार्य है। कैपिटेशन शुल्क (Capitation Fee) लेना पूरी तरह प्रतिबंधित है।

    जिलाधिकारी का यह कदम सराहनीय है क्योंकि यह शिक्षा को ‘सेवा’ से ‘शुद्ध व्यापार’ बनने की प्रक्रिया को रोकने का प्रयास है। यदि यह आदेश कड़ाई से लागू होता है, तो भविष्य में निजी स्कूलों के रवैये में पारदर्शिता और जवाबदेही का आना तय है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि स्कूल प्रबंधन इन नियमों के बीच कौन सा ‘लूपहोल’ तलाशते हैं या फिर वाकई लखनऊ के अभिभावकों को इस लूट से स्थायी मुक्ति मिलती है।

    विशेष विश्लेषण: प्रशासन की इस सख्ती से स्कूलों के भीतर एक आंतरिक ऑडिट का माहौल बनेगा। अब स्कूल प्रबंधन केवल मुनाफे पर ध्यान देने के बजाय अपनी साख और कानूनी सुरक्षा के प्रति अधिक सचेत रहेंगे।

  • लखनऊ/नई दिल्ली: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा अनुमान के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के निवासियों को बेमौसम बारिश से तो राहत मिल गई है, लेकिन अब सूरज के तीखे तेवर और ‘लू’ (Heatwave) का सामना करना पड़ेगा। आज यानी 12 अप्रैल को राज्य के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क रहेगा और तेज गर्म हवाएं चलने की संभावना है।

    उत्तर प्रदेश: तपिश की चपेट में प्रमुख शहर

    मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में अब बारिश की कोई संभावना नहीं है। हालांकि, पश्चिमी यूपी से लेकर पूर्वांचल तक गर्मी का प्रकोप बढ़ेगा।

    इन जिलों में बढ़ेगा तापमान: मेरठ, अलीगढ़, मथुरा, आगरा, बरेली, फिरोजाबाद, मैनपुरी, कानपुर, लखनऊ, अयोध्या, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर और देवरिया में भीषण गर्मी पड़ने के आसार हैं।

    राजधानी का हाल: लखनऊ में आज अधिकतम तापमान 36°C और न्यूनतम तापमान 22°C रहने का अनुमान है। तेज धूप के साथ चलने वाली शुष्क हवाएं दिन में बेचैनी बढ़ा सकती हैं।

    देश के अन्य हिस्सों में मौसम की स्थिति काफी विविधतापूर्ण बनी हुई है:

    उत्तर भारत के मैदानी राज्यों (पंजाब, हरियाणा, राजस्थान) में तापमान में 2-3 डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है। पहाड़ी राज्यों जैसे हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में हल्की बर्फबारी के बाद अब मौसम साफ होने की ओर है।

    जहाँ उत्तर भारत तप रहा है, वहीं दक्षिण भारत के कुछ राज्यों (केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक के तटीय क्षेत्र) में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। पूर्वोत्तर राज्यों—असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश—में गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।

    मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में पारा 40°C के करीब पहुँच सकता है। यहाँ भी उत्तर प्रदेश की तरह शुष्क और गर्म हवाएं चलने का पूर्वानुमान है।

    स्वास्थ्य विभाग की सलाह: ‘लू’ से ऐसे बचें बढ़ती गर्मी और गर्म हवाओं को देखते हुए विशेषज्ञों ने सावधानी बरतने की सलाह दी है:

    ~ दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच अनावश्यक बाहर निकलने से बचें।

    ~ ज्यादा से ज्यादा पानी और तरल पदार्थों (नींबू पानी, ओआरएस) का सेवन करें।

    ~ हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें और बाहर निकलते समय सिर ढककर रखें।

    ~ब्यूरो रिपोर्ट:newsdaily24

  • Culture

    लखनऊ। यूपी की समृद्ध लोक परंपराओं को सहेजने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत ‘संपदा कार्यक्रम‘ के जरिए विलुप्त होते पारंपरिक लोकगीतों का व्यवस्थित अभिलेखीकरण किया जा रहा है।

    उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान और उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के संयुक्त प्रयास से चल रहा यह अभियान न केवल सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित कर रहा है, बल्कि 60 वर्ष से ज्यादा उम्र वाले लोक कलाकारों को एक नया मंच भी प्रदान कर रहा है।

    इस पहल के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों से जुड़े कलाकारों को आमंत्रित कर उनके गीतों, अनुभवों और सांस्कृतिक ज्ञान को रिकॉर्ड किया जा रहा है। मिर्जापुर के मोहन बिन्द द्वारा प्रस्तुत ‘विजयमल’ जैसी विलुप्त होती लोकगाथा हो या वाराणसी के स्वर्गीय हरेराम द्विवेदी के यात्रा और संस्कार गीत-हर प्रस्तुति अपने आप में एक अमूल्य सांस्कृतिक दस्तावेज बनती जा रही है। प्रयागराज के उदय चंद्र परदेसी द्वारा विवाह, देवी, गर्भाधान, मुंडन और जनेऊ जैसे संस्कार गीतों का अभिलेखीकरण किया गया, वहीं पद्मश्री अजीता श्रीवास्तव ने कजरी लोक गायन की परंपरा को जीवंत किया। लखनऊ की रंजना मिश्रा ने गंगा से जुड़े लोकगीतों की प्रस्तुति देकर इस पहल को और समृद्ध बनाया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से लोकजीवन की विविधता और उसकी गहराई स्पष्ट रूप से सामने आ रही है। बलरामपुर के धनिराम चौधरी द्वारा थारु जनजाति के विलुप्त होते लोकगीतों का संरक्षण, गोरखपुर के रामज्ञान यादव, सुमित्रा देवी और सैलाबी देवी द्वारा रोपनी और सोहनी गीतों का अभिलेखीकरण, तथा अंबेडकर नगर की महेंद्र देवी की प्रस्तुतियां इस अभियान को और व्यापक बनाती हैं। उन्नाव के ओंकार नाथ अवस्थी द्वारा आल्हा लोक गायन और लखनऊ के कलाकारों द्वारा अवधी लोक परंपराओं को भी इसमें शामिल किया गया है।

    संपदा कार्यक्रम’ की खास बात यह है कि यह केवल रिकॉर्डिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोक कलाकारों के अनुभव, उनके जीवन संघर्ष और परंपरागत ज्ञान को भी सहेज रहा है। इससे जहां एक ओर लुप्त होती विधाओं को नई पहचान मिल रही है, वहीं दूसरी ओर युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर भी मिल रहा है। यह पहल न केवल उत्तर प्रदेश की लोक परंपराओं को संरक्षित कर रही है, बल्कि देश और दुनिया के सामने भारतीय लोक संस्कृति की समृद्धता को भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर रही है। आने वाले समय में ‘संपदा’ कार्यक्रम लोक विरासत को सहेजने की एक मजबूत और प्रेरणादायक पहल के रूप में स्थापित होगा।

    इस पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि, संपदा कार्यक्रम के माध्यम से हम अपनी लोक परंपराओं और विरासत को न केवल सहेज रहे हैं, बल्कि उन्हें नई पीढ़ी से जोड़ने का सशक्त प्रयास भी कर रहे हैं। लोक कलाकारों की आवाज और उनके अनुभव हमारी सांस्कृतिक पहचान की आत्मा हैं, जिन्हें संरक्षित करना हमारी प्राथमिकता है।

  • लखनऊ/आगरा। पर्यटन नगरी आगरा अब केवल अपने ऐतिहासिक स्मारकों के लिए ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनरुद्धार और आधुनिक शहरी विकास के वैश्विक मॉडल के रूप में नई पहचान बनाने जा रहा है। मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना के तहत विकसित हो रहा ‘ग्रेटर आगरा’ न केवल नोएडा और गुरुग्राम जैसे महानगरों पर बढ़ते आबादी के दबाव को कम करेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए एक नया ‘ग्रोध इंजन‘ भी साबित होगा।इस महत्वाकांक्षी परियोजना की सबसे अनूठी विशेषता इसका सांस्कृतिक दृष्टिकोण है। ग्रेटर आगरा में बनने वाली 10 टाउनशिप के नाम भारत की पावन नदियों के नाम पर रखे गए हैं। ये हैं— सिंधुपुरम, गंगापुरम, यमुनापुरम, गोमतीपुरम, बेतवापुरम, महानदीपुरम, नर्मदापुरम, गोदावरीपुरम, कृष्णापुरम और कावेरीपुरम।

    1.5 लाख आबादी के लिए ‘वर्ल्ड क्लास’ आवासीय सुविधाएं आगरा विकास प्राधिकरण (ADA) द्वारा ग्राम रायपुर और रहनकलां के लगभग 450 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित की जा रही इस योजना पर करीब 5142 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं।

    आवासीय क्षमता: यहाँ लगभग 1.5 लाख लोगों के रहने के लिए आधुनिक इंतजाम होंगे।

    भूखंडों का वर्गीकरण: कुल 4712 भूखंडों में ग्रुप हाउसिंग, कमर्शियल और मिश्रित उपयोग के प्लॉट शामिल हैं।

    आत्मनिर्भर शहर: स्कूल, अस्पताल, होटल, बैंक, पुलिस चौकी और फायर स्टेशन जैसी सभी जरूरी सुविधाएं परिसर के भीतर ही उपलब्ध होंगी।

    कनेक्टिविटी: विकास की नई लाइफलाइन ग्रेटर आगरा की लोकेशन इसे निवेश के लिहाज से सबसे खास बनाती है। यह परियोजना 100 मीटर चौड़ी इनर रिंग रोड के बिल्कुल समीप है। यमुना एक्सप्रेसवे, नेशनल हाईवे-19 और फतेहाबाद रोड से सीधे जुड़ी हुई है। कुबेरपुर रेलवे स्टेशन से नजदीकी के कारण आवागमन और व्यापार के लिए यह क्षेत्र बेहद सुगम होगा।

    उत्तर प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, ग्रेटर आगरा केवल रहने की जगह नहीं बल्कि निवेश का केंद्र बनेगा।

    यमुनापुरम: इसे एक बड़े ‘कमर्शियल हब’ के रूप में तैयार किया जा रहा है।

    कावेरीपुरम: यहाँ वाटर-बेस्ड एक्टिविटी और मनोरंजन के केंद्र विकसित होंगे, जो पर्यटकों को आकर्षित करेंगे।

    ग्रीन स्पेस: पर्यावरण का ध्यान रखते हुए प्रत्येक टाउनशिप में 15 प्रतिशत क्षेत्र पार्कों और हरियाली के लिए आरक्षित है।

    मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि निर्माण कार्य से लेकर सेवा क्षेत्र तक, इस परियोजना से लाखों लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से बड़ी कंपनियां यहाँ निवेश के लिए आकर्षित हो रही हैं, जिससे आगरा की स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

    “ग्रेटर आगरा की पहल न केवल भारतीय संस्कृति को सम्मान देती है, बल्कि यह देश के लिए एक स्मार्ट और सस्टेनेबल शहरी मॉडल पेश करेगी।” — जयवीर सिंह, पर्यटन मंत्री, उत्तर प्रदेश

    newsdaily24 विशेष: यह परियोजना आगरा को एक आधुनिक, योजनाबद्ध और बहुआयामी शहर के रूप में स्थापित करने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार का एक क्रांतिकारी कदम है।

  • लखनऊ। राजधानी के एक युवक को अपनी आर्थिक तंगी के समय भरोसा करना भारी पड़ गया। एक जालसाज न केवल पीड़ित की बाइक हड़प कर बैठ गया, बल्कि अब उसे तीसरे पक्ष को बेचने का दावा कर बैंक की किस्तों का भुगतान करने से भी मुकर गया है। इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू पुलिस का रवैया है, जो मामले को गंभीरता से लेने के बजाय पीड़ित को ही टरका रही है।

    लाल कुआं, चट्टान पार्क निवासी पीड़ित रितेश कुमार ने अपनी बाइक (UP-32 QE-7124), जो IDFC FIRST Bank से फाइनेंस थी, कसाई बाड़ा निवासी शारिक को इस शर्त पर सौंपी थी कि वह समय पर बैंक की किस्तें भरेगा। कुछ महीने तक तो सब ठीक रहा, लेकिन अब शारिक ने हाथ खड़े कर दिए हैं। जब रितेश उसके घर पहुंचा, तो आरोपी ने अभद्रता करते हुए कहा कि उसने गाड़ी किसी और को बेच दी है।

    बैंक के उत्पीड़न से मानसिक तनाव में पीड़ित रितेश का कहना है कि चूंकि गाड़ी कागजों में उनके नाम पर है, इसलिए बैंक के रिकवरी एजेंट उन्हें दिन-रात फोन कर कानूनी कार्यवाही और जेल भेजने की धमकी दे रहे हैं। पीड़ित का कहना है, “एक तरफ मेरी संपत्ति चली गई और दूसरी तरफ बैंक मुझे अपराधी की तरह प्रताड़ित कर रहा है, जबकि असली दोषी खुलेआम घूम रहा है।”

    पीड़ित की सबसे बड़ी चिंता यह है कि शारिक ने बाइक किसे बेची है, इसका कोई पता नहीं है। यदि उस बाइक से कोई सड़क दुर्घटना होती है या उसका उपयोग किसी आपराधिक गतिविधि (जैसे लूट या छिनैती) में किया जाता है, तो कानून की नजर में वाहन स्वामी होने के नाते रितेश ही सबसे पहले घेरे में आएंगे। इसी ‘फर्जी मुकदमे’ और ‘पुलिसिया कार्रवाई’ के डर ने पीड़ित की रातों की नींद उड़ा दी है।

    हैरानी की बात यह है कि स्पष्ट साक्ष्य और लिखित शिकायत के बावजूद पुलिस मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने में आनाकानी कर रही है। पीड़ित का आरोप है कि उसे थाने से चक्कर लगवाकर टरकाया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पुलिस किसी बड़ी वारदात या अनहोनी का इंतजार कर रही है?

    “मेरे पास न गाड़ी है और न पैसा। बैंक मुझे परेशान कर रहा है और पुलिस मेरी सुन नहीं रही। अगर उस गाड़ी से कल को कोई कांड हो गया, तो मेरा पूरा भविष्य बर्बाद हो जाएगा।” — रितेश कुमार (पीड़ित)

    कुल मिलाकर यह मामला ‘अमानत में खयानत’ का सीधा उदाहरण है। प्रशासन को चाहिए कि तत्काल इस मामले का संज्ञान लेकर गाड़ी बरामद करे और दोषी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करे, ताकि एक निर्दोष नागरिक को बैंक और भविष्य की कानूनी पेचीदगियों से बचाया जा सके।

  • लखनऊ। महापौर सुषमा खर्कवाल के कड़े आदेशों के बाद लखनऊ नगर निगम की सुस्ती टूटने की उम्मीद तो जगी है, लेकिन newsdaily24 ने जब शहर के धरातल पर हकीकत जांची, तो कई गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। एक तरह से 5 मिनट की देरी पर अफसरों का वेतन काटना अनुशासन के लिहाज से तो ठीक है, लेकिन सवाल उन निजी एजेंसियों (लायन एनवायरो) पर है जिनकी विफलता के कारण शहर नर्क बन रहा है।

    नगर निगम के रिकॉर्ड बताते हैं कि शहर का सफाई ढांचा बाहरी राज्यों के श्रमिकों पर निर्भर है। सवाल यह उठता है कि क्या इन एजेंसियों और नगर निगम के आला अधिकारियों को चुनावी तारीखों का ज्ञान नहीं था? यदि सफाई कर्मचारी वोट देने असम जाने वाले थे, तो लखनऊ की सड़कों पर कूड़ा सड़ने के लिए क्यों छोड़ दिया गया?

    newsdaily24 पूछता है कि क्या एजेंसियों ने किसी ‘प्लान-बी’ या वैकल्पिक श्रम शक्ति पर काम किया था?

    नगर निगम ने ‘लायन एनवायरो’ जैसी एजेंसियों को 30 अप्रैल तक अधूरे पड़ाव घर पूरे करने का अल्टीमेटम दिया है। लेकिन हकीकत यह है कि जब तक ये पड़ाव घर अधूरे हैं, तब तक कूड़ा सड़कों पर डंप हो रहा है।

    क्या अफसरों की वेतन कटौती के साथ-साथ इन एजेंसियों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा?

    क्या प्रशासन इन कंपनियों को ‘ब्लैकलिस्ट’ करने की हिम्मत दिखाएगा?

    एक तरफ अफसरों से सुबह 6 बजे की ‘लाइव लोकेशन’ मांगी जा रही है, वहीं दूसरी तरफ शहर के पॉश इलाकों से लेकर गलियों तक अवैध ठेलिया संचालक सक्रिय हैं। महापौर ने FIR के निर्देश दिए हैं, लेकिन स्थानीय निवासियों का कहना है कि ये अवैध धंधे बिना स्थानीय मिलीभगत के संभव नहीं हैं।

    1. जुर्माना या केवल चेतावनी?

    निजी एजेंसियों ने जो वैकल्पिक इंतजाम नहीं किए, उसके बदले उन पर अब तक कितनी राशि का जुर्माना लगा?

    2. नगर आयुक्त की निगरानी का क्या?

    जब शहर में 500 मीट्रिक टन कूड़ा सड़कों पर पड़ा रह गया, तो उस वक्त मॉनिटरिंग सिस्टम क्या कर रहा था?

    3. जनता के स्वास्थ्य का जिम्मेदार कौन?

    बढ़ती गर्मी में सड़ते हुए कचरे से बीमारियाँ फैलने का खतरा है; इसका हर्जाना कौन भरेगा?

    लखनऊ की जनता से अनुरोध है कि यदि आपके वार्ड में कूड़ा नहीं उठ रहा है, तो हमें फोटो और लोकेशन के साथ संदेश भेजें। हम आपकी आवाज सीधे प्रशासन तक पहुँचाएंगे।

    Email: snewsdaily24@gmail.com

    ब्यूरो रिपोर्ट: संजय सक्सेना, newsdaily24

  • लखनऊ। राजधानी लखनऊ में लगातार बिगड़ती सफाई व्यवस्था और कूड़ा प्रबंधन की सुस्त रफ्तार को लेकर महापौर सुषमा खर्कवाल ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। बुधवार को नगर निगम अधिकारियों और निजी एजेंसियों के साथ हुई एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में महापौर ने स्पष्ट किया कि अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी है कि यदि वे सुबह 6 बजे फील्ड पर मौजूद नहीं मिले, तो उनके खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

    महापौर ने अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए एक कड़ा आदेश जारी किया है। अब प्रतिदिन सुबह कंट्रोल रूम के माध्यम से सभी जोनल अधिकारियों और सेनेटरी अधिकारियों की निगरानी की जाएगी। सभी अफसरों को सुबह 6 बजे अपनी ‘लाइव लोकेशन’ साझा करनी होगी। यदि कोई भी अधिकारी अपनी लोकेशन भेजने में 5 मिनट से अधिक की देरी करता है, तो उसका एक दिन का वेतन काट लिया जाएगा।

    बैठक के दौरान महापौर ने शहर में जगह-जगह लगे कचरे के ढेरों और ‘डोर-टू-डोर’ कूड़ा कलेक्शन में आ रही शिकायतों पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों से सवाल किया कि “जब गाड़ियाँ क्षेत्रों में जा रही हैं, तो फिर घरों से कूड़ा क्यों नहीं उठ रहा?”

    अवैध ठेलिया पर रोक: सभी जोनल अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है कि उनके क्षेत्र में कोई भी अवैध ठेलिया संचालित न हो। पकड़े जाने पर ठेलिया जब्त कर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज कराई जाएगी।

    पड़ाव घर का निर्माण: निर्माणाधीन पड़ाव घरों को 30 अप्रैल तक हर हाल में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

    नियत स्थान पर डंपिंग: यदि निर्धारित पड़ाव घर के अलावा किसी अन्य स्थान पर कूड़ा डंप पाया गया, तो संबंधित क्षेत्र के अधिकारियों पर कार्रवाई होगी।

    सफाई व्यवस्था के चरमराने का एक बड़ा कारण कर्मचारियों की कमी बताया जा रहा है। दरअसल, शहर के अधिकांश सफाई कर्मचारी असम के रहने वाले हैं, जो वहां होने वाले मतदान में हिस्सा लेने के लिए अपने गृह राज्य चले गए हैं। निजी एजेंसियों द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था न किए जाने के कारण 5 अप्रैल से कचरा उठान बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

    नगर आयुक्त गौरव कुमार की मौजूदगी में हुई इस बैठक में महापौर ने साफ कर दिया कि शहर की स्वच्छता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। हालांकि, पर्यावरण अभियंता संजीव प्रधान ने आश्वस्त किया है कि बुधवार से स्थिति में काफी सुधार हुआ है और कूड़ा उठान की मात्रा वापस सामान्य स्तर पर आ रही है।

    लखनऊ नगर निगम हेल्पलाइन: आप 1533 पर कॉल करके अपने क्षेत्र की सफाई एजेंसी और जिम्मेदार सुपरवाइजर का नंबर मांग सकते हैं।

    ‘Lucknow One’ App: इस सरकारी ऐप पर आपके वार्ड से संबंधित सफाई कर्मचारी और एजेंसी की जानकारी उपलब्ध होती है।

    ~ब्यूरो रिपोर्ट, newsdaily24

  • लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अब यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के लिए राहत के रास्ते बंद होने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है, जिसके तहत यातायात नियमों से जुड़े अपराधों का अब शमन (Compounding) नहीं किया जा सकेगा। सरकार इसके लिए जल्द ही ‘उत्तर प्रदेश दंड विधि (अपराधों का शमन और विचारणों का उपशमन) (संशोधन) अध्यादेश, 2026’ लाने जा रही है।

    यह निर्णय उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के कड़े निर्देशों के बाद लिया गया है। दरअसल, पिछले वर्ष 20 नवंबर को एक याचिका की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicle Act) के तहत नियमों का उल्लंघन करने पर दिए जाने वाले दंड को पूरी तरह समाप्त या माफ नहीं किया जा सकता। न्यायालय के इसी रुख को देखते हुए राज्य सरकार ने अपने पुराने फैसलों को बदलने और नए कानून को लागू करने की प्रक्रिया शुरू की है।

    उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2023 में करीब 11 लाख मुकदमों और चालानों को समाप्त करने का निर्णय लिया था। ये मामले मुख्य रूप से वर्ष 2017 से 2021 के बीच के थे। हालांकि, अब नए अध्यादेश के लागू होने के बाद स्थिति पूरी तरह बदल जाएगी:

    जुर्माना भरना अनिवार्य: अब मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने वालों को निर्धारित जुर्माना हर हाल में भरना होगा।

    सजा का प्रावधान: केवल जुर्माना ही नहीं, बल्कि गंभीर और दंडनीय अपराधों की श्रेणी में आने वाले मामलों में दोषियों को सजा भी भुगतनी होगी।

    केस नहीं होंगे निरस्त: जो वाहन चालक यह उम्मीद कर रहे थे कि उनके पुराने केस या चालान माफी के दायरे में आ जाएंगे, उन्हें अब कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ेगा।

    कैबिनेट के इस फैसले से साफ है कि सरकार सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन को लेकर बेहद गंभीर है। नया अध्यादेश लागू होते ही पुलिस और परिवहन विभाग को ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों पर और अधिक सख्ती बरतने का कानूनी अधिकार मिल जाएगा।

    ~ ब्यूरो रिपोर्ट, newsdaily24

  • बिजनौर। जनपद के विकास भवन में बुधवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब विजिलेंस बरेली की टीम ने एक फिल्मी अंदाज में बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। टीम ने प्रभारी जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) रिजवान अहमद को एक ग्राम पंचायत सचिव से 20,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए उनके कार्यालय से ही गिरफ्तार कर लिया।

    कोतवाली ब्लॉक में तैनात सचिव शुभम मलिक ने विजिलेंस को दी शिकायत में बताया कि प्रभारी डीपीआरओ रिजवान अहमद उन्हें मनपसंद ग्राम पंचायत आवंटित करने और उनके विरुद्ध चल रही एक विभागीय जांच को खत्म करने के नाम पर 50,000 रुपये की मांग कर रहे थे। रिश्वत न देने पर उन्हें प्रतिकूल कार्रवाई की धमकी दी जा रही थी। अंततः सचिव और अधिकारी के बीच 20,000 रुपये की पहली किस्त पर सौदा तय हुआ।

    विजिलेंस एसपी अरविंद कुमार के निर्देशन में गठित टीम ने गिरफ्तारी के लिए बेहद चालाकी भरी रणनीति अपनाई। टीम के दो-तीन सदस्य कुर्ता-पायजामा पहनकर और गले में अंगोछा डालकर विकास भवन पहुंचे थे। उनकी वेशभूषा बिल्कुल वैसी ही थी, जैसी अमूमन कार्यालय में आने वाले ग्राम प्रधानों की होती है। यही कारण रहा कि कार्यालय के स्टाफ और खुद डीपीआरओ को भी उनके वहां मौजूद होने पर कोई संदेह नहीं हुआ।

    बुधवार दोपहर करीब 1:00 बजे जैसे ही सचिव शुभम मलिक ने डीपीआरओ के कक्ष में जाकर 20,000 रुपये उनके हाथ में दिए, बाहर तैनात विजिलेंस के सदस्यों ने तुरंत अंदर घुसकर उन्हें दबोच लिया। टीम ने रिजवान अहमद के पास से रिश्वत की रकम बरामद कर ली। इसके बाद लगभग साढ़े तीन घंटे तक कार्यालय के भीतर ही गहन कागजी कार्रवाई चली, जिसके दौरान किसी भी बाहरी व्यक्ति को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई।

    रिजवान अहमद का जिले में विवादों से पुराना नाता रहा है। वे मूल रूप से एडीपीआरओ के पद पर तैनात थे, लेकिन उन्हें बार-बार प्रभारी डीपीआरओ का प्रभार मिलता रहा:

    पहली बार: 8 अगस्त 2024 से 18 दिसंबर 2024

    दूसरी बार: 13 अगस्त 2025 से 30 अगस्त 2025

    तीसरी बार: 11 फरवरी 2026 से वे वर्तमान में प्रभारी के रूप में कार्य देख रहे थे।

    शाम करीब 4:45 बजे विजिलेंस टीम आरोपी रिजवान अहमद को लेकर बरेली के लिए रवाना हुई, जहाँ उन्हें भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट में पेश किया जाएगा। इस गिरफ्तारी के बाद विकास भवन के अन्य विभागों में भी सन्नाटा पसर गया है। यह कार्रवाई जिले के भ्रष्ट अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश मानी जा रही है।

    ~ newsdaily24, पारदर्शिता और सुशासन के लिए प्रतिबद्ध

  • लखनऊ/मैनपुरी: 1857 की क्रांति की गूंज से गढ़ी मैनपुरी की धरती पर संस्कृति और विरासत को नई पहचान देने के लिए यहां लगभग 63 करोड़ रुपए से सांस्कृतिक केंद्र विकसित किया जा रहा है। यही वह भूमि है, जहां चौहान वंश के महाराजा तेजसिंह जूदेव ने अपने किले से अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती देकर पराक्रम की अमिट कहानी लिखी थी। अब उसी ऐतिहासिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए मैनपुरी एक नए सांस्कृतिक केंद्र के जरिए अपनी पहचान को नया आयाम दिया जा रहा है। जहां अतीत की गौरवगाथा वर्तमान की रचनात्मकता और भविष्य की संभावनाएं एक साथ आकार लेंगी।

    इस परियोजना के लिए लगभग 25,544 वर्ग मीटर क्षेत्र आवंटित किया गया है, जो ऐतिहासिक तेज सिंह किले के पास स्थित है और सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। इस स्थान का चयन इस तरह किया गया है कि यहां आने-जाने में लोगों को सुविधा हो और अधिक से अधिक लोग इस केंद्र से जुड़ सकें। भवन का डिजाइन भी ऐसा तैयार किया जा रहा है, जिसमें आवागमन सुगम हो, रखरखाव आसान हो और विभिन्न गतिविधियों के लिए अलग-अलग स्थान उपलब्ध हों।

    इस केंद्र में कई महत्वपूर्ण सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, जिनमें संग्रहालय, प्रदर्शनी क्षेत्र, खुला रंगमंच (एम्फीथिएटर), प्रायोगिक थिएटर, पुस्तकालय, छात्रावास और कैफेटेरिया शामिल हैं। इसके अलावा 800 लोगों की क्षमता वाला आधुनिक सभागार भी बनाया जा रहा है, जिसमें सम्मेलन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और अन्य आयोजन हो सकेंगे। साथ ही शहर की कला, मूर्तियां और शिल्प को प्रदर्शित करने के लिए विशेष गैलरी भी तैयार की जा रही है।

    परियोजना में एक संग्रहालय ब्लॉक भी विकसित किया जा रहा है, जिसमें प्रदर्शनी गैलरी, कार्यशाला क्षेत्र, म्यूजिकल फांउटेन और मनोरंजन क्षेत्र शामिल होंगे। यहां आने वाले लोग न सिर्फ प्रदर्शनियों का आनंद ले सकेंगे, बल्कि विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों में भी भाग ले सकेंगे। इसके साथ ही खुदरा दुकानों और अन्य सुविधाओं के जरिए स्थानीय शिल्प और उत्पादों को भी बढ़ावा मिलेगा।

    मैनपुरी का यह सांस्कृतिक केंद्र शहर की पहचान को नई ऊंचाई देने का काम करेगा। यह न केवल कला और संस्कृति का केंद्र बनेगा, बल्कि पर्यटन और आर्थिक विकास को भी गति देगा। आने वाले समय में यह स्थान लोगों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनने के साथ-साथ स्थानीय विरासत को सहेजने और आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा।

    इस पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि, मैनपुरी में बन रहा सास्कतिक केंद्र हमारी समृद्ध विरासत को नई पहचान देने का एक महत्वपूर्ण कदम है। हमारा प्रयास है कि यह स्थान कला, संस्कृति और परंपराओं का जीवंत केंद्र बने, जहां स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिले और लोग अपनी जड़ों से जुड़ सकें। आने वाले समय में यह केंद्र न सिर्फ सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा, बल्कि देश-विदेश के पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनेगा।

    अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात ने बताया कि, मैनपुरी का यह सांस्कृतिक केंद्र हमारी समृद्ध ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक स्वरूप में प्रस्तुत करने की एक महत्वपूर्ण पहल है। राज्य सरकार का उद्देश्य विशेष रूप से युवाओं को अपनी जड़ों और समृद्ध इतिहास से जोड़ते हुए उनमें सांस्कृतिक चेतना और गौरव की भावना को सशक्त करना है। वर्तमान समय में प्रदेश के विभिन्न जनपदों में इसी प्रकार के सांस्कृतिक केंद्र और संग्रहालयों की परिकल्पना को जमीन पर उतारा जा रहा है। यह केंद्र मैनपुरी को सांस्कृतिक मानचित्र पर एक नई और विशिष्ट पहचान दिलाने में मील का पत्थर साबित होगा।

  • लखनऊ/गोरखपुर। उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन की सफलता के बाद अब योगी सरकार का पूरा ध्यान ‘इको-टूरिज्म’ (पारिस्थितिकी पर्यटन) पर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप गोरखपुर के कुसम्ही जंगल को एक अत्याधुनिक इको पार्क के रूप में विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। 4.84 करोड़ रुपए की इस महात्वाकांक्षी परियोजना के लिए शासन ने 50 लाख रुपए की पहली किस्त जारी कर काम को गति दे दी है। इस पहल से न केवल गोरखपुर वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर उभरेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के सैकड़ों नए अवसर भी पैदा होंगे।

    प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने इस परियोजना पर उत्साह व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश आज पर्यटन के क्षेत्र में अन्य राज्यों के लिए मिसाल बन रहा है। उन्होंने बताया कि गोरखपुर पूर्वांचल का केंद्र बिंदु है। कुसम्ही जंगल में बन रहा इको पार्क प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग जैसा होगा। यहाँ पर्यटकों के लिए स्विस कॉटेज, ट्री हाउस और योग केंद्र जैसी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी।

    कुसम्ही जंगल में विकसित होने वाले इस इको पार्क को आधुनिक और रोमांचक बनाने के लिए बजट का आवंटन विभिन्न सुविधाओं के आधार पर किया गया है:

    आकर्षक प्रवेश द्वार: 15.58 लाख रुपए की लागत से भव्य गेट बनेगा।

    इंटरप्रिटेशन सेंटर: 28.45 लाख रुपए से पर्यटकों को वन्यजीवों की जानकारी देने हेतु केंद्र बनेगा।

    स्विस कॉटेज: एक करोड़ रुपए से अधिक की लागत से ठहरने के लिए विलासितापूर्ण कॉटेज।

    ट्री हाउस एवं टेंट कैंपिंग: 30.88 लाख रुपए की लागत से पेड़ों पर घर और कैंपिंग का रोमांच।

    आधुनिक योग केंद्र: 41.86 लाख रुपए से निर्मित इस केंद्र में शांत वातावरण के बीच योग की सुविधा मिलेगी।

    कैफेटेरिया: 32.77 लाख रुपए से खान-पान की बेहतरीन व्यवस्था का उन्नयन होगा।

    इसके अतिरिक्त, पूरे परिसर में बायो टॉयलेट, सोलर सबमर्सिबल, सुरक्षा फेंसिंग और पार्किंग जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी विस्तार किया जाएगा।

    कुसम्ही जंगल की भौगोलिक स्थिति इसे पर्यटन के लिए आदर्श बनाती है:

    1. कनेक्टिविटी: गोरखपुर रेलवे स्टेशन से मात्र 10 किमी और एयरपोर्ट के बिल्कुल समीप।

    2. प्रमुख स्थल: कुशीनगर जाने वाले मार्ग पर स्थित होने के कारण भगवान बुद्ध के अनुयायियों के लिए सुलभ।

    3. स्थानीय आकर्षण: शहर का प्रसिद्ध रामगढ़ ताल भी यहाँ से महज 10 किमी की दूरी पर है।

    4. विजिटर्स: एम्स गोरखपुर और बिहार से आने वाले लोगों के लिए यह एक बेहतरीन ‘डे-आउट’ डेस्टिनेशन बनेगा।

    अपर मुख्य सचिव (पर्यटन एवं संस्कृति) अमृत अभिजात के अनुसार, उत्तर प्रदेश इको टूरिज्म बोर्ड का गठन ही इसीलिए किया गया है ताकि जंगलों, नदियों और झीलों को नुकसान पहुँचाए बिना उन्हें पर्यटन के अनुकूल बनाया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य स्थानीय युवाओं को गाइड, हॉस्पिटैलिटी और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में रोजगार से जोड़ना है।

    विशेष रिपोर्ट (newsdaily24)

  • बिजनौर। जनपद में जिला पंचायत के खनन टोल ठेकेदार की मनमानी और अवैध वसूली के चलते प्रशासन और जिला पंचायत विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, टोल ठेकेदार न केवल अवैध खनन को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि निर्धारित शुल्क से कई गुना अधिक वसूली कर जिला पंचायत अध्यक्ष की छवि को भी धूमिल करने में जुटा है।

    विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर सामने आ रही है कि जिला पंचायत द्वारा निर्धारित ₹100 की गाड़ी पर्ची के नाम पर टोल ठेकेदार द्वारा पट्टे धारकों और वाहन स्वामियों से जबरन ₹700 वसूले जा रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इस अतिरिक्त राशि के बदले गाड़ी वालों को कोई आधिकारिक पर्ची या रसीद भी नहीं दी जा रही है।

    बिना किसी रसीद के की जा रही इस वसूली का सीधा असर वाहन स्वामियों और पट्टे धारकों पर पड़ रहा है। उन्हें प्रति गाड़ी ₹600 का अतिरिक्त आर्थिक बोझ झेलना पड़ रहा है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि ठेकेदार की इस दबंगई के कारण जहां एक ओर सरकार के राजस्व को चूना लग रहा है, वहीं दूसरी ओर आम जनता में जिला पंचायत बिजनौर के प्रति भारी रोष व्याप्त है।

    सूत्रों का कहना है कि ठेकेदार के इस उत्पीड़न से परेशान होकर कुछ परमिट धारकों ने अब कानूनी रास्ता अपनाने का मन बना लिया है। बताया जा रहा है कि इस मामले को लेकर जल्द ही उच्च न्यायालय (High Court) का दरवाजा खटखटाया जा सकता है, जिससे जिला प्रशासन की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

    स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध वर्ग का मानना है कि ठेकेदार की इन गतिविधियों से जिला पंचायत अध्यक्ष की साख खराब हो रही है। लोगों की मांग है कि इस मामले में अध्यक्ष और उच्चाधिकारियों को तुरंत हस्तक्षेप कर अवैध वसूली रुकवानी चाहिए।

    अब देखना यह होगा कि बिजनौर जिला पंचायत अध्यक्ष और जिलाधिकारी इस गंभीर भ्रष्टाचार के मामले में क्या संज्ञान लेते हैं? क्या आरोपी ठेकेदार के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी या भ्रष्टाचार का यह खेल इसी तरह बदस्तूर जारी रहेगा? यह क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

    रिपोर्ट: ब्यूरो, newsdaily24

  • यूपी पुलिस को बेवकूफ बनाकर बच निकला आतंकी! AK-47 को बताया खिलौना और आतंकी को दे दी क्लीनचिट, थानेदार सस्पेंड, सीओ के खिलाफ सख्त एक्शन

    लखनऊ (Lucknow) में पकड़े गए संदिग्ध आतंकियों की जांच में ATS ने बड़ा खुलासा किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार इस नेटवर्क का संबंध दुबई में रह रहे मेरठ निवासी आकिब खान से है। यह वही आकिब है जिसे पिछले साल एक मामले में जिला बिजनौर पुलिस ने क्लीन चिट दे दी थी, जिससे अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। मामले में तत्कालीन थानाध्यक्ष नांगलसोती सत्येंद्र सिंह मलिक को निलंबित कर दिया गया है, जबकि नजीबाबाद के सीओ नितेश प्रताप सिंह को पद से हटा दिया गया है। साथ ही, विभागीय जांच के आदेश भी जारी किए गए हैं।

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  • आज के दौर में जहाँ लोग इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए तरह-तरह के सप्लीमेंट्स का सहारा ले रहे हैं, वहीं हमारी प्रकृति ने हमें ‘सहजन’ (Moringa) के रूप में एक अनमोल तोहफा दिया है। आयुर्वेद में 300 से अधिक बीमारियों के उपचार में सहायक माना जाने वाला सहजन, अब केवल सांभर या साधारण सब्जी तक सीमित नहीं है। गृहणियों और शेफ ने इसके गुणों को पराठे, पूड़ी और कचौड़ी जैसे पारंपरिक व्यंजनों में भी पिरोना शुरू कर दिया है।

    सहजन की फलियों और पत्तियों में दूध से 17 गुना ज्यादा कैल्शियम और संतरे से 7 गुना ज्यादा विटामिन-C पाया जाता है। यह हड्डियों की मजबूती, आंखों की रोशनी बढ़ाने और खून की कमी (एनीमिया) को दूर करने में रामबाण सिद्ध होता है।

    अक्सर बच्चे सहजन की सब्जी खाने में आनाकानी करते हैं, ऐसे में आप इन आधुनिक तरीकों से उन्हें पोषण दे सकते हैं:

    आहार विशेषज्ञों के अनुसार, सहजन की तासीर गर्म होती है, इसलिए इसे सर्दियों और बदलते मौसम में खाना सबसे अधिक फायदेमंद होता है। इसकी पत्तियों का पाउडर बनाकर भी आप दाल या सूप में ऊपर से डाल सकते हैं।

    • हड्डियों के लिए: कैल्शियम और फास्फोरस का बेहतरीन स्रोत।
    • शुगर कंट्रोल: डायबिटीज के मरीजों के लिए बेहद लाभकारी।
    • वेट लॉस: मेटाबॉलिज्म बढ़ाकर वजन घटाने में सहायक।

    अगली बार जब आप बाजार जाएं, तो इस औषधीय फली को अपने थैले में जगह जरूर दें। यह न केवल आपके भोजन की थाली का स्वाद बढ़ाएगी, बल्कि पूरे परिवार को बीमारियों से दूर रखने में भी मदद करेगी।

  • बिजनौर। आज सुबह जब नए शैक्षणिक सत्र के पहले दिन स्कूल खुले, तो सेंट मैरी स्कूल बिजनौर के बाहर एक डरावना मंजर देखने को मिला। नर्सरी कक्षा में प्रवेश दिलाने आए नन्हे-मुन्ने बच्चों और उनके अभिभावकों को स्कूल प्रशासन ने गेट के बाहर मुख्य सड़क पर लाइन में खड़ा कर दिया। शहर के सबसे व्यस्त चौराहे पर स्थित होने के कारण यहाँ वाहनों का भारी दबाव रहता है, जिससे किसी भी पल बड़ी दुर्घटना होने की संभावना बनी रही।

    अभिभावक संघ के अध्यक्ष निपेन्द्र देशवाल और सचिव अभिषेक वत्स ने इस कुप्रबंधन पर गहरा रोष व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि स्कूल के पास अपना विशाल मैदान उपलब्ध है, जहाँ इस भीड़ को आसानी से व्यवस्थित किया जा सकता था। इसके बावजूद, छोटे-छोटे बच्चों को चिलचिलाती धूप और भारी वाहनों के बीच सड़क किनारे खड़ा रखा गया। कई अभिभावक अपने बच्चों को गोद में लेकर अपनी बारी का इंतजार करते दिखे।

    अभिभावकों का कहना है कि सड़क पर तेज रफ्तार ट्रकों और अन्य वाहनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। ऐसे में यदि कोई बच्चा अनजाने में सड़क की ओर निकल जाता या कोई वाहन अनियंत्रित हो जाता, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होती? संघ ने इसे स्कूल प्रशासन की घोर लापरवाही करार दिया है।

    अभिभावक संघ ने जिला प्रशासन से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि वे जल्द ही अधिकारियों से मिलकर स्कूल प्रबंधन के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराएंगे, ताकि भविष्य में बच्चों की सुरक्षा के साथ ऐसा समझौता दोबारा न हो।

  • बांसगांव, गोरखपुर। जहाँ एक ओर आधुनिकता की चकाचौंध में लोग सुख-सुविधाओं के पीछे भाग रहे हैं, वहीं गोरखपुर के मालाओं स्टेट हवेली (बांसगांव) में भक्ति का एक अलग ही स्वरूप देखने को मिल रहा है। लखनऊ के कुंभरावा से आए पंडित विमल मिश्र, जो बालाजी महाराज के चरण रज साधक हैं, इन दिनों एक गरीब ब्राह्मण परिवार की ‘सुदामा कुटिया’ में रहकर अपनी तपस्या और सेवा में लीन हैं।

    पंडित विमल मिश्र जी वर्तमान में अपने परिचित पंडित अशोक कुमार पाण्डेय के आवास पर बने एक अत्यंत साधारण कक्ष, जिसे ‘सुदामा की कुटिया’ नाम दिया गया है, में ठहरे हुए हैं। पंडित जी ने बताया कि वे कुटिया के समीप स्थित गौशाला में समय बिताते हैं, क्योंकि शास्त्रों के अनुसार गाय में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है। उनकी यह सादगी क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।

    पंडित जी की यह साधना अत्यंत कठिन है। वे भीषण गर्मी और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद रात में बिना बिजली के, खुले आसमान के नीचे सोकर अपनी रातें व्यतीत करते हैं। उनका मानना है कि महादेव की भक्ति के लिए भौतिक सुखों का त्याग अनिवार्य है।

    पंडित विमल मिश्र केवल स्वयं साधना नहीं कर रहे, बल्कि पूरे गांव को अध्यात्म से जोड़ रहे हैं। वे प्रतिदिन गांव के मंदिरों में जाकर शंखनाद करते हैं और विधिवत पूजा-पाठ संपन्न कराते हैं। उनके इस प्रयास से मालाओं स्टेट का वातावरण भक्तिमय हो गया है। विशेषकर मल्केश्वर महादेव मंदिर में उनके द्वारा की जा रही सेवा से श्रद्धालु अत्यंत उत्साहित हैं।

    पंडित अशोक कुमार पाण्डेय के जन्मस्थली के समीप स्थित इस कुटिया से पंडित विमल मिश्र ने यह संदेश दिया है कि भगवान केवल महलों में नहीं, बल्कि सच्चे प्रेम और सादगी से भरी ‘सुदामा कुटिया’ में भी वास करते हैं। उनके इस समर्पण को देखकर क्षेत्र के लोग उन्हें एक सच्चे साधक के रूप में देख रहे हैं।

  • बांसगांव, गोरखपुर। गोरखपुर के बांसगांव संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मालाओं स्टेट हवेली गांव में स्थित मल्केश्वर महादेव मंदिर आज लाखों भक्तों की अटूट श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। यह मंदिर न केवल अपनी प्राचीनता के लिए जाना जाता है, बल्कि यहाँ होने वाले साक्षात चमत्कार भक्तों को महादेव की उपस्थिति का बोध कराते हैं।

    ग्रामीणों और मंदिर के इतिहास के अनुसार, इस मंदिर के साथ एक अत्यंत विस्मयकारी घटना जुड़ी है। बताया जाता है कि वर्षों पहले कुछ असामाजिक तत्वों ने मंदिर के घंटों को चुराने का दुस्साहस किया था। परंतु, महादेव के न्याय से वे बच न सके। चोरी की उसी रात उन सभी चोरों की आंखों की रोशनी चली गई। जब उन्होंने अपनी गलती स्वीकार कर महादेव से क्षमा मांगी, तब क्षेत्र में यह चर्चा का विषय बन गया। इस घटना के बाद से ही मंदिर के प्रति लोगों का विश्वास और अधिक गहरा हो गया।

    हाल ही में, वर्ष 2023 के सावन मास के दौरान मंदिर में एक और दिव्य चमत्कार देखा गया। स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं के अनुसार, मंदिर में स्थापित नंदी जी की प्रतिमा ने स्वयं दूध ग्रहण किया था। इस घटना की खबर फैलते ही पूरे क्षेत्र से भक्तों का तांता लग गया। लोग इसे महादेव और उनके वाहन नंदी जी की असीम कृपा मान रहे हैं।

    मल्केश्वर महादेव मंदिर में विशेष रूप से सोमवार और शुक्रवार को भारी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। भक्तों का मानना है कि यहाँ सच्चे मन से की गई पूजा कभी निष्फल नहीं जाती। वर्तमान में, मंदिर की आध्यात्मिक गतिविधियों और नियमित पूजा-पाठ का संचालन पंडित विमल कुमार मिश्र (कुम्भरावा, लखनऊ) द्वारा किया जा रहा है, जिनके सानिध्य में मंदिर की गरिमा और भक्ति भाव का निरंतर विस्तार हो रहा है।

    मालाओं स्टेट की यह हवेली और मल्केश्वर महादेव का यह दरबार अब केवल एक गांव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे गोरखपुर मंडल में अपनी चमत्कारिक पहचान बना चुका है। शिवभक्तों के लिए यह स्थान शांति और शक्ति का अनूठा संगम है।

  • बिजनौर। बसंती देवी धर्मशाला में शिवसेना की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता शिवसेना राज्य उपप्रमुख पंडित नरेश कुमार शर्मा ने की और संचालन जिला मंत्री शोभित गुर्जर द्वारा किया गया। बैठक में जिले के वर्तमान हालातों और राजनीतिक बयानबाजी पर गहरा रोष व्यक्त किया गया।

    बैठक को संबोधित करते हुए शिवसेना जिला प्रमुख चौधरी वीर सिंह ने तीखे तेवर अपनाते हुए कहा कि जिले में रॉबिन चौधरी, भारतेंदु सिंह और खालिद तालिब के बीच चल रहे विवाद में समाजवादी पार्टी के विधायक और नेता ‘आग में घी’ डालने का काम कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वोट बैंक की राजनीति के चलते जिले के सांप्रदायिक सौहार्द को खतरे में डाला जा रहा है।

    > “शासन-प्रशासन को सपा नेताओं के भड़काऊ बयानों पर तुरंत रोक लगानी चाहिए। हम एक हफ्ते से शांति बनाए हुए हैं, लेकिन अब बात बर्दाश्त से बाहर हो चुकी है।” — चौधरी वीर सिंह, जिला प्रमुख>

    चौधरी वीर सिंह ने एक सपा विधायक के उस बयान की कड़ी निंदा की जिसमें उन्होंने रॉबिन के साथ हुई बदतमीजी पर कहा था कि ‘वह कोई राष्ट्रपति थोड़े ही है’। जिला प्रमुख ने सवाल किया कि क्या इंसाफ सिर्फ राष्ट्रपति को मिलना चाहिए? क्या एक गरीब के बेटे को न्याय का हक नहीं है? उन्होंने कहा कि जब रॉबिन पर पिस्टल तानी गई और मारपीट हुई, तब ये नेता कहां थे? पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि जानलेवा हमले के बावजूद हमलावरों का चालान मामूली धाराओं (151) में करके उन्हें जमानत दे दी गई, जो न्याय के साथ मजाक है।

    सपा विधायक पर निशाना साधते हुए शिवसेना नेताओं ने कहा कि जो नेता आज मुसलमानों के हितैषी बन रहे हैं, उन्होंने कुछ समय पहले भाजपा के टिकट पर चांदपुर से चुनाव लड़ते समय हर मीटिंग में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बयानबाजी की थी। राजनीति के लिए इस तरह का दोहरा चरित्र जिले के लिए घातक है।

    शिवसेना ने स्पष्ट किया कि यदि सपा नेताओं के गलत बयानों पर अंकुश नहीं लगा, तो शिवसेना ‘हिंदू संघर्ष समिति’ का गठन करेगी। इसके माध्यम से सभी हिंदू संगठनों को एकजुट कर बिजनौर में एक विशाल हिंदू महापंचायत बुलाई जाएगी और सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन किया जाएगा।

    बैठक में मुख्य रूप से मुकेश लांबा, भूपेंद्र कुमार, दिनेश तोमर, शोभित गुर्जर, धर्मवीर सिंह तोमर, योगेश, राहुल, अरुण सैनी, मनीष सैनी, राहुल त्यागी, राजीव अहलावत, बंटी शरावत, संदीप चौहान और प्रियांशु चौधरी सहित दर्जनों शिवसैनिक मौजूद रहे।

  • नई दिल्ली/लखनऊ। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स में सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले को लेकर एक लंबा संदेश तेजी से वायरल हो रहा है। इस संदेश में दावा किया जा रहा है कि 1 जुलाई 2015 को सर्वोच्च न्यायालय ने एक ‘ऐतिहासिक फैसला’ सुनाया था, जिसके तहत पेंशन में संशोधन और वेतनमान में संशोधन को ‘अविभाज्य’ (Inseparable) माना गया है। संदेश में पेंशनभोगियों से अपील की जा रही है कि वे इसे अधिक से अधिक साझा करें ताकि सरकार पर दबाव बनाया जा सके।

    वायरल हो रहे संदेश में सिविल अपील संख्या 1123/2015 का हवाला दिया गया है। संदेश के अनुसार:

    1. पेंशन कोई खैरात (Boon) नहीं, बल्कि कर्मचारी का कानूनी अधिकार है।

    2. जब भी कार्यरत कर्मचारियों का वेतन बढ़ेगा, पेंशनभोगियों की पेंशन में भी उसी अनुपात में वृद्धि होनी चाहिए।

    3. सरकार वित्तीय बोझ का बहाना बनाकर पेंशनभोगियों का हक नहीं मार सकती।

    1. मामला ‘पी.एस. नटराजन बनाम भारत संघ’ का है: यह सच है कि 1 जुलाई 2015 को सुप्रीम कोर्ट ने *Union of India vs P.S. Natarajan & Ors* मामले में फैसला सुनाया था। लेकिन यह फैसला मुख्य रूप से पेंशन के तकनीकी नियमों और गणना के तरीकों की व्याख्या पर आधारित था। यह सभी श्रेणियों के पेंशनभोगियों (जैसे बैंक, रेलवे या निजी क्षेत्र) के लिए एकमुश्त ‘पेंशन अपडेशन’ का आदेश नहीं था।

    2. ‘डी.एस. नकारा’ केस का संदर्भ: संदेश में जिस डी.एस. नकारा बनाम भारत संघ (1982) मामले का जिक्र है, वह वास्तव में ऐतिहासिक है। इसी फैसले ने स्थापित किया था कि पेंशन एक ‘डेफर्ड वेज’ (स्थगित वेतन) है और यह सरकार की दया पर निर्भर नहीं है। 2015 के फैसले में केवल इसी पुराने सिद्धांत को दोहराया गया था, इसमें कोई नई ‘चमत्कारी’ घोषणा नहीं की गई थी।

    3. “अविभाज्य” होने का दावा: कोर्ट ने माना है कि समान रैंक से रिटायर होने वाले लोगों की पेंशन में बहुत बड़ा अंतर नहीं होना चाहिए, लेकिन ‘वेतन संशोधन’ और ‘पेंशन संशोधन’ के तकनीकी नियम अलग-अलग विभागों और संगठनों (जैसे बैंकों के आईबीए नियम) के लिए अलग होते हैं।

    पेंशन मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि यह संदेश आधा सच और आधा भ्रम है:

    पुराना फॉरवर्ड: यह मैसेज साल 2016-17 से इंटरनेट पर मौजूद है। इसे अब “ब्रेकिंग न्यूज” की तरह फैलाना गलत है।

    चेन मैसेज की प्रकृति: संदेश के अंत में “20 लोगों को भेजें” जैसी बातें इसे एक ‘स्पैम’ या ‘चेन मैसेज’ की श्रेणी में खड़ा करती हैं, जिनका उद्देश्य केवल सनसनी फैलाना होता है।

    वर्तमान स्थिति अलग है: 2015 के बाद से 7वां वेतन आयोग लागू हो चुका है और बैंकों में पेंशन अपडेशन का मुद्दा अभी भी कानूनी प्रक्रियाओं के अधीन है। यह वायरल मैसेज वर्तमान की जटिलताओं का समाधान नहीं देता।

    पेंशनभोगियों को सलाह दी जाती है कि वे व्हाट्सएप पर आने वाले ऐसे किसी भी मैसेज को बिना पुष्टि के सच न मानें। किसी भी कानूनी लाभ या पेंशन वृद्धि के लिए केवल भारत सरकार के कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय या संबंधित विभाग द्वारा जारी आधिकारिक ‘ऑफिस मेमोरेंडम’ (OM) या सर्कुलर पर ही भरोसा करें

    संपादकीय नोट: न्यूज़ डेली 24 अपने पाठकों से अपील करता है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली अपुष्ट जानकारियों को साझा करने से बचें और केवल विश्वसनीय स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं पर ही विश्वास करें।

  • लखनऊ, 5 अप्रैल। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को राजधानी स्थित भारतेंदु नाट्य अकादमी (BNA) के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित ‘स्वर्ण जयंती नाट्य समारोह’ (5 से 12 अप्रैल) का दीप प्रज्वलित कर विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कला, संस्कृति और राष्ट्रवाद के अंतर्संबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रंगमंच केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज को नई दिशा देने वाला एक सशक्त माध्यम है।

    • भावनाओं का शब्द और अभिनय में रूपांतरण: मुख्यमंत्री ने कहा कि रंगमंच वह स्थान है जहाँ मानवीय भावनाएं शब्दों का रूप लेती हैं और शब्द जीवंत अभिनय बनकर जनमानस को प्रभावित करते हैं।
    • राष्ट्र नायकों की गौरव गाथा का मंचन: सीएम ने संस्कृति विभाग और अकादमी को निर्देश दिया कि वे महाराज सुहेलदेव, रानी लक्ष्मीबाई, महाराजा महेंद्र प्रताप सिंह और झलकारी बाई जैसे महान राष्ट्र नायकों के शौर्य पर आधारित लघु नाटकों और नाट्य श्रृंखलाओं का निर्माण करें।
    • प्रभावी संवाद और संगीत की आवश्यकता: उन्होंने कलाकारों और लेखकों से अपील की कि नाटकों में संवाद, संगीत, स्क्रिप्ट, शब्दों का चयन और वाक्य विन्यास इतना प्रभावी होना चाहिए कि वह जन-जन को आकर्षित कर सके और समाज को जोड़ सके।

    समारोह के दौरान बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास ‘आनंदमठ’ पर आधारित नाट्य प्रस्तुति की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने बंगाल की ऐतिहासिक त्रासदी और आधुनिक कोरोना काल की चर्चा की।

    “जब सरकार में संवेदना होती है, तो वह नागरिकों के हितों के लिए बीमारी से लड़कर उसे भगा देती है। जहाँ ब्रिटिश हुकूमत ने बंगाल के अकाल और स्पेनिश फ्लू के दौरान जनता को मरने के लिए छोड़ दिया था, वहीं हमारी सरकार ने कोरोना काल में सकारात्मक और संवेदनशील रवैया अपनाकर करोड़ों लोगों की रक्षा की।”

    उन्होंने ‘वंदे मातरम’ गीत के 150 वर्ष पूर्ण होने पर अकादमी को निर्देश दिया कि इसकी प्रस्तुति को और विस्तार देते हुए प्रत्येक जनपद तक ले जाया जाए।

    मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि एक समय संस्थानों पर उन लोगों का कब्जा था जो पेशेवर गुंडों और माफियाओं को नायक के रूप में पेश करते थे। उन्होंने कहा:

    • महाराज सुहेलदेव का पुनरुद्धार: सीएम ने बताया कि एक समय था जब लोग आक्रांता सालार मसूद के मेले में जाते थे, लेकिन आज महाराज सुहेलदेव के स्मारक पर जनसैलाब उमड़ता है।
    • अत्याचारियों के प्रति कड़ा रुख: उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक अत्याचारी के साथ निर्मम व्यवहार नहीं किया जाएगा, वह भारतीय संस्कृति पर प्रहार करता रहेगा।

    मुख्यमंत्री ने भारतेंदु नाट्य अकादमी की मांगों को स्वीकार करते हुए अपर मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि अकादमी परिसर के भीतर ही आधुनिक छात्रावास (Hostel) का निर्माण कर उसे हैंडओवर किया जाए। उन्होंने पद्म पुरस्कार से सम्मानित डॉ. अनिल रस्तोगी को बधाई दी और अकादमी के गौरवशाली इतिहास (आपातकाल के समय भी शिक्षण कार्य जारी रखने) को याद किया।

    रामधारी सिंह दिनकर समारोह: मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि आगामी 24 अप्रैल से लखनऊ में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कृतियों पर आधारित तीन दिवसीय भव्य आयोजन होगा।

    अटल जी पर नाटक: उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की साहित्यिक कृतियों पर भी नाट्य मंचन की आवश्यकता जताई।

    भाषाई गौरव: भारतेंदु हरिश्चंद्र को आधुनिक हिंदी का प्रणेता बताते हुए सीएम ने ‘निज भाषा’ की उन्नति और काशी नागरी प्रचारिणी सभा के पुनरुद्धार पर जोर दिया।

    समारोह में पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह, महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक योगेश शुक्ल, कुलपति प्रो. मांडवी सिंह सहित भारी संख्या में रंगकर्मी और साहित्यकार उपस्थित रहे।

  • बाबा नीब करौरी की जन्मस्थली बनेगा वैश्विक पर्यटन हब, ₹865 लाख की परियोजना से संवर रहा है अकबरपुर

    लखनऊ/फिरोजाबाद | newsdaily24: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश में धार्मिक पर्यटन और आस्था के केंद्रों को वैश्विक पटल पर लाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी क्रम में फिरोजाबाद स्थित आध्यात्मिक संत बाबा नीब करौरी महाराज की जन्मस्थली, अकबरपुर को एक बड़े पर्यटन हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहाँ बन रहे आधुनिक कन्वेंशन सेंटर का कार्य अब अपने अंतिम चरण में है, जिसका 90 प्रतिशत निर्माण पूर्ण हो चुका है।

    लगभग 865.98 लाख रुपए की कुल लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर अब तक 769.74 लाख रुपए खर्च किए जा चुके हैं। पर्यटन विभाग के अनुसार, अप्रैल 2026 के अंत तक यह केंद्र पूरी तरह तैयार होकर आम जनता और श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा। यह केंद्र न केवल बाबा के अनुयायियों के लिए ठहरने का स्थान बनेगा, बल्कि उनकी आध्यात्मिक यात्रा को समझने का एक बड़ा माध्यम भी होगा।

    * आध्यात्मिक गैलरी: सेंटर में एक विशाल एग्जीबिशन हॉल बनाया जा रहा है, जहाँ बाबा नीब करौरी के जीवन दर्शन और उनके चमत्कारों को प्रदर्शित किया जाएगा।

    * ठहरने की उत्तम व्यवस्था: प्रथम तल पर आधुनिक डॉर्मिटरी बनाई गई हैं, जहाँ लगभग 60 लोगों के रुकने का प्रबंध है।

    * सुविधाजनक ढांचा: ग्राउंड फ्लोर पर 50 सीटों वाला कैफेटेरिया, डाइनिंग हॉल, आधुनिक किचन और मल्टीपर्पज हॉल की सुविधा मिलेगी।

    * बेहतर कनेक्टिविटी: इसके साथ ही ₹1.77 करोड़ की लागत से सड़क सुधार परियोजना पर भी काम शुरू हो गया है, ताकि श्रद्धालुओं का आवागमन सुगम हो सके।

    अपर मुख्य सचिव (पर्यटन एवं संस्कृति) अमृत अभिजात ने बताया कि अक्सर लोग बाबा के दर्शन के लिए उत्तराखंड स्थित ‘कैंची धाम’ जाते हैं, लेकिन उनकी जन्मस्थली अकबरपुर के बारे में जानकारी का अभाव रहा है। सरकार का लक्ष्य इस पावन स्थल को वैश्विक पहचान दिलाना है। यहाँ होम-स्टे और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास से विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।

    इस विकास मॉडल से फिरोजाबाद के इस ग्रामीण अंचल की तस्वीर पूरी तरह बदलने वाली है। पर्यटन केंद्र बनने से यहाँ स्थानीय गाइड, हस्तशिल्प और खान-पान से जुड़े छोटे व्यवसायों को सीधा लाभ मिलेगा, जिससे क्षेत्र में समृद्धि आएगी।

  • बिजनौर (किरतपुर)। भारतीय संस्कृति और गौरव के प्रतीक चैत्र शुक्ल प्रतिपदा एवं विक्रमी संवत 2083 के आगमन पर जनपद बिजनौर में राष्ट्रभक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश (जनपद बिजनौर) के तत्वावधान में आज शुक्रवार को किरतपुर स्थित सर्वोदय विद्यालय शाहपुर सुक्खा में “राष्ट्र गौरव दिवस” का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षकों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर भारतीय नव वर्ष का स्वागत किया।

    कार्यक्रम की मुख्य अतिथि, जिला उपाध्यक्ष रजनी कालरा ने अपने संबोधन में भारतीय काल गणना के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “चैत्र प्रतिपदा केवल एक तिथि नहीं, बल्कि हमारे गौरवशाली इतिहास और प्रकृति के पुनर्जागरण का दिन है। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी में देशप्रेम और नैतिक मूल्यों की जड़ें मजबूत होती हैं।

    मुख्य वक्ता ललित (सह मंत्री, क्रीड़ा भारती, मेरठ प्रांत) ने विद्यार्थियों को अनुशासन का पाठ पढ़ाते हुए राष्ट्र सेवा के लिए सदैव तत्पर रहने को प्रेरित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता माध्यमिक संवर्ग के प्रदेश मंत्री सुरेंद्र प्रकाश भटनागर ने की।

    समारोह में देशभक्ति गीतों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया।

    अक्ष राजपूत ने अपनी सुरीली आवाज में देशभक्ति गीत गाकर वातावरण को देशप्रेम के रंग में सराबोर कर दिया।

    शांतनु की प्रस्तुति ने दर्शकों को भावुक कर दिया और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध कराया।

    सान्वी अहलावत ने नारी शक्ति पर आधारित अपनी प्रस्तुति से कार्यक्रम में विशेष ऊर्जा और उल्लास भर दिया।

    कार्यक्रम को सफल बनाने में संगठन के पदाधिकारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। माध्यमिक संवर्ग से जिलाध्यक्ष अनिल कुमार, डॉ. होरी सिंह, जितेंद्र और सतवीर सहित अन्य वरिष्ठ सदस्य उपस्थित रहे। प्राथमिक संवर्ग से जिलाध्यक्ष दिग्विजय सिंह, अमर सिंह और रुपेश राजपूत के नेतृत्व में जयदीप मलिक, रोशन लाल और जिला मीडिया प्रभारी अरुण ने संयोजन संभाला।

    विशेष रूप से शैली शर्मा, मेघा, छाया, जिला संयोजिका रूपाली और उदिता सिसोदिया सहित मातृशक्ति की सक्रिय भागीदारी रही। कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया और विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण का संकल्प दिलाया गया।

    कार्यक्रम में प्रमुख रूप से सुनील कुमार (बुढ़नपुर), चंचल (धामपुर), प्रदीप और थम्मन आंकू, मुकेश देवरानी (नजीबाबाद), नकुल (हल्दौर), आसमा सचदेवा (देवमल) और पुष्पेंद्र (जलीलपुर) अपनी-अपनी टीम के साथ उपस्थित रहे।

  • लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के संकल्प के साथ, राजधानी स्थित भारतेन्दु नाट्य अकादमी अब एक विश्वस्तरीय सांस्कृतिक केंद्र के रूप में अपनी नई पहचान के लिए तैयार है। शुक्रवार को हिंदी रंगमंच दिवस के अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने अकादमी के नवनिर्मित और जीर्णोद्धार कार्यों का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने घोषणा की कि आगामी 5 अप्रैल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस आधुनिक और भव्य परिसर का लोकार्पण करेंगे। मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य कलाकारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं प्रदान कर प्रदेश की समृद्ध रंगमंच परंपरा को पुनर्जीवित करना है।

    राजधानी लखनऊ में शुक्रवार को हिंदी रंगमंच दिवस के अवसर पर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने भारतेन्दु नाट्य अकादमी (BNA) का दौरा किया। उन्होंने अकादमी परिसर में चल रहे फिनिशिंग कार्यों, आधुनिक ऑडिटोरियम और क्लासरूम का बारीकी से निरीक्षण किया। मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि गुणवत्ता से समझौता किए बिना सभी कार्य समय सीमा के भीतर पूरे किए जाएं, ताकि 5 अप्रैल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा इसका विधिवत लोकार्पण किया जा सके।

    निरीक्षण के दौरान मंत्री जयवीर सिंह ने रंगमंडल की प्रस्तुतियों का अवलोकन किया और कलाकारों की प्रतिभा की सराहना की। उन्होंने कहा, “भारतेन्दु अकादमी की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि अत्यंत समृद्ध है। यहाँ से निकले कलाकारों ने देश-दुनिया में नाम रोशन किया है। जर्जर हो चुके पुराने भवन को अब एक आधुनिक और बेहतर सांस्कृतिक डेस्टिनेशन के रूप में पुनर्जीवित किया गया है।”

    अकादमी के अध्यक्ष रतिशंकर त्रिपाठी ने इस मौके पर मंत्री के समक्ष कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं, जिनमें प्रमुख रूप से:

    1. छात्रों के लिए अत्याधुनिक छात्रावास की व्यवस्था।

    2. रिक्त पड़े शिक्षकों के पदों पर नियुक्ति।

    3. कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी की सुविधा।

    मंत्री जयवीर सिंह ने इन मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए आश्वासन दिया कि सरकार सांस्कृतिक संस्थानों और कलाकारों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। इस अवसर पर संस्कृति विभाग के विशेष सचिव संजय सिंह और अकादमी के निदेशक विपिन कुमार भी मौजूद रहे।

    ज्ञात हो कि हर साल 3 अप्रैल को ‘हिंदी रंगमंच दिवस’ मनाया जाता है। इसी दिन वर्ष 1868 में बनारस में शीतला प्रसाद त्रिपाठी द्वारा रचित पहले हिंदी नाटक ‘जानकी मंगल’ का मंचन हुआ था। ऐतिहासिक तथ्य है कि इस नाटक में स्वयं भारतेन्दु हरिश्चंद्र ने लक्ष्मण की भूमिका निभाई थी।

    अगस्त 1975 में स्थापित भारतेन्दु नाट्य अकादमी आज अभिनय, निर्देशन, प्रकाश व्यवस्था और मंच सज्जा जैसे क्षेत्रों में पेशेवर प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र है। मंत्री जयवीर सिंह ने जोर देकर कहा कि भारत की मूल संस्कृति और परंपराओं को पुनर्जीवित करने में यह संस्थान ‘विश्व गुरु’ के संकल्प को सिद्ध करने में सहायक होगा।

  • ~ नीरज शर्मा

    नहटौर (बिजनौर)। हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों में भक्ति और सेवा का अनूठा संगम देखने को मिला। इस अवसर पर प्रमुख समाजसेवी राजीव पवार ने क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों का भ्रमण कर दर्शन-पूजन किया और श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण किया। जैसे ही क्षेत्रवासियों को उनके आगमन की सूचना मिली, भारी संख्या में लोगों ने एकत्रित होकर उनका आत्मीय स्वागत किया।

    राजीव पवार ने केवल धार्मिक आयोजनों तक स्वयं को सीमित न रखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों का सघन दौरा किया। उन्होंने गांव की चौपालों पर गरीब, असहाय महिलाओं और बुजुर्गों के साथ बैठकर उनकी समस्याओं को बेहद संवेदनशीलता के साथ सुना।ग्रामीणों के बीच एक सामान्य व्यक्ति की भांति बैठकर चर्चा करते हुए उन्होंने कई जटिल समस्याओं का मौके पर ही निस्तारण कर दिया। जिन कार्यों में प्रशासनिक प्रक्रिया की आवश्यकता थी, उनके लिए उन्होंने ग्रामीणों को त्वरित समाधान का ठोस आश्वासन दिया।

    विशेष बात यह रही कि जहाँ राजनीतिक गलियारों में इसे चुनावी हलचल माना जा रहा है, वहीं राजीव पवार की ओर से यह स्पष्ट रहा कि यह कोई चुनावी प्रचार नहीं, बल्कि मात्र एक जनसंपर्क और जनता के लंबित कार्यों को गति देने हेतु किया गया भ्रमण था। वे निरंतर जनता के बीच रहकर उनकी बुनियादी सुविधाओं के लिए प्रयासरत दिखे।

    क्षेत्र के वरिष्ठ नागरिकों और लाचार माताओं ने राजीव पवार के सेवा भाव से अभिभूत होकर उन्हें अपना भरपूर आशीर्वाद दिया। ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय यह रहा कि इस बार 21-विधानसभा नहटौर से जनता राजीव पवार को विधायक के रूप में देखना चाहती है। एक ग्रामीण बुजुर्ग ने कहा कि “हमें ऐसा जनप्रतिनिधि चाहिए जो हमारे बीच बैठकर हमारी व्यथा सुने।”

    अधिकांश सूत्रों और जनसंवाद के अनुसार, नहटौर की जनता में उन्हें विधायक पद पर देखने हेतु भारी उत्सुकता और समर्थन दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से ईश्वर से प्रार्थना की कि आने वाले समय में नेतृत्व की कमान राजीव पवार जैसे कर्मठ व्यक्ति के हाथों में हो।

  • ~ अभिषेक मोदी

    होशियारपुर, (पंजाब): हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा टोल टैक्स की दरों में की गई बेतहाशा वृद्धि के विरोध में आज ट्रांसपोर्टरों और टैक्सी ऑपरेटरों का गुस्सा फूट पड़ा। तलवाड़ा टैक्सी एवं ट्रांसपोर्टर यूनियन के नेतृत्व में भारी संख्या में चालकों ने टेरेस रोड टोल प्लाजा के पास एकत्रित होकर सड़क जाम कर दी और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

    यूनियन के प्रधान एवं आम आदमी पार्टी हल्का तलवाड़ा के प्रधान श्री दीपक कुमार ने रोष व्यक्त करते हुए बताया कि हिमाचल सरकार ने टोल की दरों में तर्कहीन वृद्धि की है। उन्होंने कहा, *”पहले जिस टोल के लिए हमें 70 रुपये देने पड़ते थे, उसे अब सीधा बढ़ाकर 170 रुपये कर दिया गया है। 100 रुपये की यह सीधी वृद्धि मध्यम वर्गीय ट्रांसपोर्टरों और टैक्सी चालकों की कमर तोड़ देने वाली है।”

    प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने बढ़ी हुई कीमतों को तत्काल प्रभाव से वापस नहीं लिया, तो यह विरोध प्रदर्शन केवल एक सांकेतिक धरना बनकर नहीं रहेगा। यूनियन ने चेतावनी दी है कि आने वाले समय में हर टोल प्लाजा के सामने अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, भविष्य में यातायत व्यवस्था में पड़ने वाले किसी भी व्यवधान और जनता को होने वाली असुविधा की पूरी जिम्मेदारी हिमाचल सरकार की होगी।

    धरने के दौरान भारी संख्या में यूनियन सदस्य और स्थानीय नेता उपस्थित रहे। मुख्य रूप से दीपक कुमार (प्रधान), अशोक कुमार, अश्विनी कुमार, महावीर सिंह, जरनैल सिंह, शमशेर सिंह, सुभाष कुमार और परमिंदर सिंह टीनू सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति हाजिर थे। सभी ने एक स्वर में सरकार से इस जनविरोधी फैसले को बदलने की मांग की।

  • लखनऊ। कुम्भरावा स्थित सुप्रसिद्ध कुलदेवी गार्गी माता मंदिर के प्राघंण में सोमवार, 30 मार्च को एक भव्य धार्मिक समारोह का आयोजन किया गया। अवसर था श्रीमती वंदना मिश्र के पौत्र और श्री सुगंध मिश्र के बालक का मुंडन संस्कार। इस मांगलिक उत्सव में श्रद्धा, परंपरा और पारिवारिक मिलन का अनूठा संगम देखने को मिला।

    पंडित विमल मिश्र (बाला जी महाराज के चरण रज साधक) ने बताया कि यह आयोजन विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। परिवार की ऐसी अटूट श्रद्धा है कि बालक के रूप में उनके स्वर्गीय पिता श्री ओंकार नाथ मिश्रा जी का पुनर्जन्म वंदना मिश्र के घर हुआ है। इसी उपलक्ष्य में बालक के तीसरे वर्ष की आयु पूर्ण होने पर कुलदेवी गार्गी माता के चरणों में मुंडन संस्कार का संकल्प पूर्ण किया गया।

    हरगांव, सीतापुर से पधारे सुप्रसिद्ध वैदिक आचार्य विवेक मिश्र जी के सानिध्य में पूजन संपन्न हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पीतल के थाल में हल्दी, चंदन, दही और दूब रखकर ‘पेरी’ की रस्म निभाई गई। वंदना मिश्र की पुत्रवधू रिया मिश्र और सालनी मिश्र ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर माता गार्गी देवी को भेंट अर्पित की। कार्यक्रम की पूर्णता उज्जैन (महाकाल) स्थित संदीपनी वेद पाठशाला के निदेशक डॉ. अनूप मिश्रा जी के आशीर्वाद और वैदिक आचार्यों द्वारा कराए गए भव्य हवन पूजन के साथ हुई।

    इस मांगलिक अवसर पर कात्यायनी परिवार और कुम्भरावा ग्राम पंचायत के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए। समारोह में प्रमुख रूप से पारिवारिक सदस्य सुनील मिश्र, विमल मिश्र, राजेश मिश्र, रामू मिश्र, विवेक मिश्र, संजय तिवारी, बबली मिश्र, भोला मिश्र, पुटू मिश्र, प्रशांत मिश्र (टुन्ना), सचिन कात्यान, वंदना मिश्र, माधुरी मिश्रा, विमला मिश्र, सालनी मिश्र, अंजू अवस्थी एवं रिया मिश्र के अलावा व प्रबुद्ध वर्ग से राजन शुक्ला, राजेश कुमार मिश्र, सुनील कुमार मिश्र, विवेक मिश्र, प्रदीप मिश्र, सुजीत मिश्र, अनिल कुमार मिश्र, एडवोकेट अंकुर मिश्र (चौपटिया) सहित समस्त कुम्भरावा वासी उपस्थित रहे। पूरा मंदिर परिसर ‘जय माता दी’ और वैदिक जयघोष से गुंजायमान रहा। अंत में उपस्थित सभी भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया।

  • भारत में केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) देश की आंतरिक सुरक्षा की रीढ़ माने जाते हैं। सीमाओं की सुरक्षा से लेकर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति बहाली और आपदा प्रबंधन तक, इन बलों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे में जब भी इनके ढांचे, सेवा शर्तों या अधिकारों से जुड़ा कोई नया विधेयक या सुधार प्रस्ताव सामने आता है, तो स्वाभाविक रूप से व्यापक चर्चा होती है। …लेकिन हाल के समय में देखा गया है कि विपक्ष इन प्रस्तावों का मुखर विरोध कर रहा है। यह विरोध किन कारणों से प्रेरित है, इसे समझना जरूरी है।

    सबसे पहली चिंता संघीय ढांचे (फेडरल स्ट्रक्चर) को लेकर है। विपक्ष का आरोप है कि केंद्र सरकार सीएपीएफ के माध्यम से राज्यों के अधिकारों में हस्तक्षेप बढ़ा सकती है। यदि किसी विधेयक में इन बलों को अधिक स्वायत्तता या सीधे हस्तक्षेप के अधिकार दिए जाते हैं, तो यह राज्यों की कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी को कमजोर कर सकता है। यही कारण है कि कई विपक्षी दल इसे राज्यों के अधिकारों पर अतिक्रमण के रूप में देखते हैं।

    दूसरा महत्वपूर्ण मुद्दा बल के कर्मियों के अधिकारों और उनके कल्याण से जुड़ा है। विपक्ष का तर्क है कि सरकार सुधार के नाम पर अनुशासन और नियंत्रण को तो मजबूत कर रही है, लेकिन जवानों की बुनियादी समस्याओं—जैसे लंबी ड्यूटी, मानसिक तनाव, वेतन विसंगतियां और पुरानी पेंशन की मांग—पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा। यदि किसी विधेयक में इन मुद्दों का संतुलित समाधान नहीं होता, तो उसका विरोध स्वाभाविक है।

    तीसरा पहलू राजनीतिक दुरुपयोग की आशंका है। विपक्ष को डर है कि सीएपीएफ का इस्तेमाल राजनीतिक विरोध को दबाने या चुनावी लाभ के लिए किया जा सकता है। भारत जैसे जीवंत लोकतंत्र में सुरक्षा बलों की निष्पक्षता सर्वोपरि है, इसलिए किसी भी ऐसे प्रावधान पर सवाल उठना लाजिमी है जो इस निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता हो।

    हालांकि, यह भी सच है कि कई बार विरोध का कारण केवल नीतिगत असहमति नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति भी होती है। संसद में सरकार को घेरने और जनमत को प्रभावित करने के लिए विपक्ष अक्सर ऐसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाता है। इससे बहस तो होती है, लेकिन कई बार सार्थक समाधान पीछे छूट जाते हैं। इस पूरे परिदृश्य में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सीएपीएफ जैसे संवेदनशील विषय पर निर्णय लेते समय संतुलन और पारदर्शिता बनाए रखी जाए।सरकार को चाहिए कि वह सभी हितधारकों—राज्यों, सुरक्षा विशेषज्ञों और स्वयं बलों के कर्मियों—से व्यापक संवाद करे। वहीं, विपक्ष को भी केवल विरोध तक सीमित न रहकर रचनात्मक सुझाव देने चाहिए। सुरक्षा और लोकतंत्र के बीच संतुलन बनाए रखना ही सबसे बड़ी चुनौती है। सीएपीएफ सुधारों पर सहमति और संवाद का रास्ता ही देशहित में सबसे उपयुक्त साबित होगा।

    भारत की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था में सीएपीएफ—जैसे सीआरपीएफ (CRPF), बीएसएफ (BSF), आईटीबीपी (ITBP), सीआईएसएफ (CISF) और एसएसबी (SSB)—की भूमिका अद्वितीय रही है। ऐसे में “केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल विधेयक” का प्रस्ताव न केवल प्रशासनिक सुधार का विषय है, बल्कि यह देश की सुरक्षा संरचना को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम भी माना जा रहा है।

    इस विधेयक का मूल उद्देश्य सीएपीएफ के कार्य, अधिकार और जवाबदेही को एक समान कानूनी ढांचे के तहत लाना है। वर्तमान में अलग-अलग बलों के लिए अलग-अलग नियम हैं, जिससे समन्वय और निर्णय प्रक्रिया में जटिलताएं पैदा होती हैं। एक समेकित विधेयक इन समस्याओं को दूर कर सकता है, जिससे परिचालन (Operation) में स्पष्टता और दक्षता आएगी। हालांकि, इस प्रस्ताव के साथ कुछ गंभीर चिंताएं भी जुड़ी हैं। सबसे बड़ी चिंता जवानों के कल्याण को लेकर है। ये जवान लंबे समय से बेहतर कार्य-परिस्थितियों, निश्चित कार्य-घंटों और पेंशन संबंधी मुद्दों को उठाते रहे हैं। यदि यह विधेयक केवल प्रशासनिक केंद्रीकरण तक सीमित रह जाता है और जवानों की वास्तविक समस्याओं को नजरअंदाज करता है, तो इसका उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। इसके अलावा, संघीय ढांचे पर इसके प्रभाव को भी समझना जरूरी है। राज्यों की पुलिस व्यवस्था और केंद्रीय बलों के बीच तालमेल बनाए रखना एक संवेदनशील विषय है। यदि केंद्र के अधिकार असीमित होते हैं, तो यह राज्यों के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप का कारण बन सकता है।

    इस विधेयक के सफल क्रियान्वयन के लिए आवश्यक है कि इसमें पारदर्शिता, जवाबदेही और मानवाधिकारों के संरक्षण को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही, जवानों के मानसिक स्वास्थ्य, परिवार से लंबी दूरी और कठिन परिस्थितियों में सेवा देने जैसी चुनौतियों के लिए ठोस प्रावधान किए जाएं। यह विधेयक सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के साथ-साथ उन जवानों के जीवन को बेहतर बनाने का एक बड़ा अवसर है, जो दिन-रात देश की रक्षा में समर्पित हैं। यह तभी सार्थक होगा, जब सुरक्षा के साथ संवेदनशीलता और शक्ति के साथ संतुलन भी सुनिश्चित किया जाए।

  • लखनऊ | नवाबों के शहर लखनऊ का आईटी सिटी क्षेत्र जल्द ही भारतीय नौसेना की अदम्य शक्ति और गौरवशाली इतिहास का गवाह बनने जा रहा है। यहाँ निर्माणाधीन ‘नौसेना शौर्य संग्रहालय’ का कार्य अब अपने अंतिम चरणों में है। लगभग 70 प्रतिशत निर्माण पूरा होने के साथ ही, यह परियोजना अब एक विशाल युद्धपोत की तरह दिखने लगी है। यह संग्रहालय न केवल पर्यटन को नई ऊंचाइयां देगा, बल्कि नई पीढ़ी के लिए देशभक्ति और सैन्य तकनीक को समझने का एक बड़ा केंद्र भी बनेगा।

    इस संग्रहालय की सबसे बड़ी विशेषता इसकी वास्तुकला है। इसे पूरी तरह से एक जहाज के स्वरूप में डिजाइन किया जा रहा है। इसमें नौसैनिक वास्तुकला का बारीकी से पालन किया गया है, जिसमें पोर्थोल स्टाइल की खिड़कियां, जहाज की रेलिंग और वास्तविक नौसैनिक उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है।

    • नौसेना शौर्य वाटिका: इसका 65% कार्य पूरा हो चुका है। यहाँ ऐतिहासिक TU-142M विमान और सी किंग SK-42B हेलीकॉप्टर स्थापित किए जा रहे हैं।
    • आईएनएस गोमती के अवशेष: संग्रहालय में इस प्रसिद्ध युद्धपोत से जुड़े मिसाइल, टारपीडो, गन और पनडुब्बी रोधी उपकरणों को प्रदर्शित किया जाएगा।

    संग्रहालय को केवल एक प्रदर्शनी स्थल न बनाकर एक इंटरएक्टिव अनुभव केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहाँ आगंतुक निम्नलिखित आधुनिक सुविधाओं का आनंद ले सकेंगे:

    1. वॉरशिप सिम्युलेटर: एयरक्राफ्ट कैरियर पर लैंडिंग का वास्तविक अनुभव।
    2. 7D थिएटर: नौसैनिक अभियानों (जैसे ऑपरेशन सिंदूर) की रोमांचक प्रस्तुति।
    3. डिजिटल वॉटर स्क्रीन: पानी की बौछारों पर चलती कहानियाँ।
    4. मरीन लाइफ एक्वेरियम: समुद्र के नीचे की दुनिया और द्वारका मॉडल के दर्शन।
    5. ड्रेस लाइक योर हीरोज़: युवाओं को नौसैनिक वर्दी पहनकर गौरव महसूस करने का मौका।

    प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने परियोजना की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा…

    “यह संग्रहालय भारतीय नौसेना के त्याग और समुद्री शक्ति का जीवंत प्रतीक है। हमारा लक्ष्य इसे एक ऐसा स्थल बनाना है जहाँ पर्यटन के साथ-साथ युवाओं में सेना के प्रति सम्मान और देशभक्ति का भाव जगे। यहाँ का ‘स्मृति उद्यान’ हमारे वीर शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि होगा।”

    पर्यटन विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप यह संग्रहालय प्रदेश को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध करेगा। यह देश का अपनी तरह का पहला केंद्र होगा जहाँ रिटायर्ड युद्धपोतों के मूल उपकरणों को प्रदर्शित किया जा रहा है। छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए यहाँ दुर्लभ दस्तावेज उपलब्ध होंगे और नियमित रूप से कार्यशालाओं का आयोजन भी किया जाएगा।
    खासियतें एक नज़र में:

    || कुल कार्य | 70% पूर्ण || स्थान | सीजी सिटी, इकाना स्टेडियम के पास, लखनऊ

    || विशेष आकर्षण | TU-142M विमान, सी किंग हेलीकॉप्टर, स्मृति उद्यान

    || प्रमुख अनुभव | सिम्युलेटर, 7D थिएटर, डिजिटल गैलरी |

  • culture: पालि दिवस पर वैश्विक संवाद, 17वें अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में समानता, बंधुत्व और शांति पर हुआ मंथन

    पालि सम्मेलन में गूंजा सामाजिक न्याय और समानता का स्वर, विद्वानों के शोध से निकले समाज के लिए महत्वपूर्ण विचार

    लखनऊ/मेरठ। पालि दिवस के मौके पर बुधवार को आयोजित 17वें अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन ने ज्ञान, संस्कृति और आध्यात्मिक चिंतन को एक मंच पर साकार किया। मेरठ के स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में ‘पालि साहित्य में समानता और बंधुत्व’ विषय पर देश-विदेश के विद्वानों ने गहन विचार-विमर्श किया। पालि सोसाइटी ऑफ इंडिया और तथागत बुद्ध चेयर के संयुक्त आयोजन में अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के सहयोग से यह सम्मेलन सांस्कृतिक और बौद्धिक संवाद का प्रभावशाली मंच बनकर उभरा।

    कार्यक्रम के मुख्य वक्ता भदंत डॉ. तेजवरो महाथेरो ने पालि परंपराओं को वैश्विक शांति, समानता और भाईचारे का आधार बताते हुए उनके महत्व पर प्रकाश डाला। साथ ही विश्वविद्यालय के कुलपति प्रमोद कुमार शर्मा ने अपने वक्तव्य में पालि साहित्य की आज के समय में प्रासंगिकता और सामाजिक समरसता को मजबूत करने में उसकी भूमिका को विस्तार से समझाया। इसके अलावा सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में रवींद्र पंथ उपस्थित रहे।

    इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में अकादमिक सत्र के दौरान देश-विदेश के विद्वानों और शोधकर्ताओं ने विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए। इनमें बौद्ध समाजशास्त्र और सामाजिक न्याय, संघ के भीतर सांप्रदायिक सद्भाव, तथा पालि साहित्य में समानता और बंधुत्व के नैतिक आधार जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई। इस बौद्धिक विमर्श ने न केवल शोध के नए आयाम खोले, बल्कि समकालीन समाज के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश दिए।

    सम्मेलन के समापन सत्र में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि पालि साहित्य के माध्यम से समानता और बंधुत्व का संदेश जन-जन तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। विशेषज्ञों ने ऐसे अकादमिक मंचों को सांस्कृतिक संवाद और शोध सहयोग के लिए बेहद जरूरी बताया। धन्यवाद ज्ञापन और राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। यह सम्मेलन बौद्ध अध्ययन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और वैश्विक समझ को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ।

    इस सम्मेलन पर अपने विचार रखते हुए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया, पालि साहित्य हमारी सांस्कृतिक चेतना का आधार है, जो समाज को समानता, बंधुत्व और शांति का मार्ग दिखाता है। ऐसे अंतर्राष्ट्रीय मंच न केवल विचारों के आदान-प्रदान को मजबूत करते हैं, बल्कि हमारी विरासत को वैश्विक पहचान भी दिलाते हैं। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक प्रभावी रूप से पहुंचाएं और इसे भविष्य से जोड़ें।

  • बिजनौर। नगर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान जाट बाल विद्यालय में वार्षिक परीक्षा परिणाम घोषित होने पर एक भव्य पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मेधावी छात्र-छात्राओं को उनकी शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए सम्मानित किया गया, जिससे विद्यार्थियों के चेहरे खिल उठे।

    परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को विद्यालय के अध्यक्ष अनिल कुमार विश्नोई ने मेडल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि मेहनत और अनुशासन ही सफलता की कुंजी है।

    कक्षावार प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्र/छात्राएं:

    शिक्षा के क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने वाली विद्यालय की शिक्षिकाओं को भी प्रबंध समिति द्वारा सराहा गया। अनीता सैनी, शिल्पी चौधरी, राशि शर्मा, शिवानी रानी और राखी को उनकी कर्तव्यनिष्ठा के लिए विशेष रूप से पुरस्कृत किया गया।

    इस अवसर पर प्रबंध समिति के अध्यक्ष अनिल कुमार विश्नोई, कोषाध्यक्ष सुनीता सिंह, उपाध्यक्ष लोकेंद्र चौधरी और प्रबंधक राजेंद्र सिंह मुख्य रूप से उपस्थित रहे। सभी पदाधिकारियों ने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और शिक्षकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि विद्यालय भविष्य में भी बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध रहेगा। कार्यक्रम के अंत में अभिभावकों ने भी विद्यालय के बेहतर परीक्षा परिणाम पर संतोष व्यक्त किया और प्रबंध तंत्र का आभार जताया।

  • लखनऊ। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने देश भर के राष्ट्रीय राजमार्गों (NH) पर यात्रा को पूरी तरह डिजिटल और सुरक्षित बनाने के लिए 1 अप्रैल 2026 से नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब टोल प्लाजा पर नकद (Cash) भुगतान को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। डिजिटल भुगतान की अनिवार्यता के साथ-साथ यात्रियों की सुरक्षा के लिए ‘1033’ हेल्पलाइन को भी और अधिक सशक्त बनाया गया है।
    1 अप्रैल 2026 से प्रभावी नए डिजिटल नियम
    नए वित्तीय वर्ष से लागू हुए इन नियमों का उल्लंघन करने पर वाहन स्वामियों को भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है:

    फर्स्ट-एड किट: किसी भी छोटी चोट या स्वास्थ्य समस्या के लिए हर टोल पर मेडिकल किट उपलब्ध रहती है।

    सावधानी संदेश: सुरक्षित सफर के लिए अपने फास्टैग को रिचार्ज रखें और मोबाइल में 1033 नंबर को ‘Emergency’ नाम से सेव करें। newsdaily24 की अपील है कि नियमों का पालन करें और अपनी यात्रा को सुखद बनाएं।

    नकद भुगतान पूरी तरह बंद: अब टोल बूथों पर कोई ‘कैश लेन’ नहीं होगी। भुगतान केवल FASTag या UPI (QR Code) के माध्यम से ही स्वीकार किया जाएगा।

    दोगुना टोल और ई-नोटिस: यदि फास्टैग में बैलेंस नहीं है या वह काम नहीं कर रहा है, तो मौके पर दोगुना शुल्क देना होगा। इसके अलावा, बिना टोल दिए निकलने पर वाहन मालिक को ई-नोटिस के जरिए डिजिटल जुर्माना भेजा जाएगा।

    KYC और ब्लैकलिस्टिंग: जिन फास्टैग का KYC अपडेट नहीं है, उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जा रहा है। यात्रा से पहले केवाईसी सुनिश्चित करना अब अनिवार्य है।

    महंगा हुआ वार्षिक पास: सालाना फास्टैग पास की फीस अब ₹3,000 से बढ़ाकर ₹3,075 कर दी गई है। यह पास 1 साल या 200 टोल क्रॉसिंग के लिए मान्य होगा।

    संकट का साथी: ‘1033’ हेल्पलाइन की उपयोगिता
    डिजिटल नियमों के साथ-साथ यात्रियों की सुरक्षा के लिए 1033 एक जीवन रक्षक नंबर है। यह सेवा 24×7 उपलब्ध है:

    तत्काल चिकित्सा और एक्सीडेंट सहायता: किसी भी दुर्घटना की स्थिति में 1033 पर कॉल करने पर जीपीएस के जरिए आपकी लोकेशन ट्रैक कर तुरंत एम्बुलेंस और पेट्रोलिंग वाहन भेजे जाते हैं।

    मैकेनिकल ब्रेकडाउन: हाईवे पर गाड़ी खराब होने या टायर फटने पर क्रेन या तकनीकी सहायता के लिए इस नंबर का उपयोग किया जा सकता है।

    10-सेकंड और 100-मीटर का नियम: यदि टोल पर 100 मीटर से लंबी कतार है या आपको 10 सेकंड से ज्यादा इंतजार करना पड़ता है, तो आप 1033 पर इसकी शिकायत कर सकते हैं। नियमों के अनुसार ऐसी स्थिति में टोल फ्री होना चाहिए।

    यात्रियों के अधिकार और सुविधाएँ: NHAI ने स्पष्ट किया है कि टोल प्लाजा केवल वसूली केंद्र नहीं, बल्कि सुविधा केंद्र भी हैं: स्वच्छ पेयजल और शौचालय: हर टोल प्लाजा पर यात्रियों के लिए ये बुनियादी सुविधाएँ अनिवार्य हैं।

  • ~ भूपेंद्र निरंकारी

    बिजनौर। वर्धमान कॉलेज के भव्य खेल मैदान पर आयोजित दो दिवसीय ‘थर्ड राजेंद्र कुमार जगत प्रकाश मेमोरियल अंडर-14 क्रिकेट टूर्नामेंट (बालक वर्ग)’ का शानदार समापन हुआ। खिताबी भिड़ंत में वर्धमान क्रिकेट अकादमी ने अपने बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर पार्कर क्रिकेट अकादमी मुरादाबाद को पराजित कर विजेता ट्रॉफी पर कब्जा जमाया।

    फाइनल मैच में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए वर्धमान क्रिकेट अकादमी ने निर्धारित 20 ओवरों में 8 विकेट के नुकसान पर 133 रनों का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया। जीत के लक्ष्य का पीछा करने उतरी पार्कर क्रिकेट अकादमी की टीम वर्धमान के गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सकी और पूरी टीम महज 30 रनों पर ही सिमट गई। इस तरह वर्धमान अकादमी ने एक बड़े अंतर से जीत दर्ज की।

    मैच में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को विशेष पुरस्कारों से नवाजा गया:

    * मैन ऑफ द मैच: हिमांशु कुमार (44 रन और 1 विकेट)

    * best बैट्समैन: प्रलभ शांतनु

    * best बॉलर: आदर्श

    * best फील्डर: कार्तिकेय और अंकित

    महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर प्रीति खन्ना ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करते हुए विजेता टीम को ट्रॉफी प्रदान की और खिलाड़ियों को मेडल पहनाकर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर वरिष्ठ क्रिकेटर अजय जैन, कपिल चौधरी, मानव सचदेवा, ओपी सिंह, रजत शर्मा, किसन राजू और मोहसिन खान आदि गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर चारुदत्त आर्य एवं अमित श्रीवास्तव ने किया।

    टूर्नामेंट की सफलता में वर्धमान डिग्री कॉलेज के खेल इंचार्ज और आयोजन सचिव डॉ. जयदीप शर्मा का विशेष योगदान रहा। उनकी कड़ी मेहनत और कुशल प्रबंधन के चलते दो दिवसीय प्रतियोगिता बिना किसी बाधा के सफलतापूर्वक संपन्न हुई। प्राचार्या डॉ. प्रीति खन्ना ने उनके समर्पण की प्रशंसा करते हुए कहा कि डॉ. शर्मा की तत्परता खेल और खिलाड़ियों के विकास के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने भविष्य में भी इसी तरह के आयोजनों के लिए पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। उपस्थित अतिथियों ने भी आयोजन की व्यवस्थाओं की मुक्तकंठ से सराहना की।

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  • राजनीति की बिसात पर कुछ मोहरे ऐसे होते हैं, जिनके पैर जमीन पर नहीं, बल्कि ‘सत्ताधीशों के चरणों’ में टिके होते हैं। हमारे इन महानुभाव ने वर्षों तक पहले ‘नेता जी’ की आरती उतारी, उनके जूतों की चमक में अपना भविष्य देखा और उनकी जीहुजूरी को ही अपना एकमात्र ‘करियर’ माना। लेकिन जैसे ही लगा कि नेता जी की कश्ती थोड़ी डगमगा रही है, महाशय का ‘मोहभंग’ (स्वार्थ-भंग) हो गया। उन्होंने तुरंत वफादारी का चोला बदला और दूसरे खेमे में जा विराजे। वहाँ पहुँचते ही उन्होंने पिछले नेता जी का ऐसा ‘पोस्टमार्टम’ किया कि मेडिकल साइंस भी शरमा जाए। जो कल तक ‘अन्नदाता’ थे, वे अचानक ‘अधर्म के प्रतीक’ हो गए। छीछालेदर के ऐसे फुहारे छोड़े गए कि लगा अब गंगा नहाकर ही शुद्धि होगी।

    कहते हैं राजनीति में न कोई स्थाई दुश्मन होता है, न दोस्त—होती है तो सिर्फ स्थाई बेशर्मी। दूसरे आका के यहाँ जब दाल नहीं गली और अपनी हैसियत ‘स्टपनी’ जैसी होने लगी, तो महाशय को अचानक पुराने नेता जी की ‘महानता’ और अपनी ‘गलती’ का अहसास हुआ। वह फिर से उसी चौखट पर नाक रगड़ने पहुँच गए, जिसे कल तक ‘नरक का द्वार’ बता रहे थे। गालियाँ अभी हवा में गूँज ही रही थीं कि ‘सॉरी’ का मरहम लेकर हाजिर हो गए।

    कमाल की बात यह रही कि पुराने नेता जी ने भी ‘बड़ा दिल’ दिखाया और उन्हें गले लगा लिया। अब इसे नेता जी की ‘महानता’ कहें या मजबूरी? शायद उन्हें भी एक ऐसे ‘लाउडस्पीकर’ की जरूरत थी जो जरूरत पड़ने पर किसी के भी खिलाफ बज सके।

    कुल मिलाकर लब्बोलुआब यह है, इस पूरे मामले में अगर किसी की हार हुई है, तो वह है ‘ईमान’ की। बाकी तो सब ठीक है—नेता जी को पुराना दरबारी मिल गया, और दरबारी को फिर से जीहुजूरी का नया ठेका! सिद्धांतों का क्या है? वो तो बेचारे वैसे भी राजनीति के ‘अनाथालय’ में पड़े सिसक रहे हैं।

  • ~ भूपेंद्र निरंकारी

    बिजनौर। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) द्वारा सम्मिलित राज्य/प्रवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा का परिणाम घोषित होते ही जनपद में हर्ष का माहौल है। बिजनौर के होनहार युवा विक्रांत चौधरी ने अपनी कड़ी मेहनत और अटूट संकल्प के बल पर इस प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता प्राप्त की है। उनका चयन असिस्टेंट कमिश्नर (GST) के महत्वपूर्ण पद पर हुआ है।

    मूलरूप से कोतवाली देहात के निकटवर्ती ग्राम बढ़ापुर के निवासी और वर्तमान में बिजनौर शहर में रह रहे विक्रांत चौधरी एक अनुशासित पृष्ठभूमि से आते हैं। वह पूर्व सैनिक श्री यशपाल सिंह के सुपुत्र हैं। विक्रांत की यह सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि वह वर्तमान में बुलंदशहर में डिप्टी जेलर के पद पर कार्यरत रहते हुए अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं। ड्यूटी के व्यस्त समय के बीच पढ़ाई के लिए वक्त निकालकर उन्होंने इस मुकाम को हासिल किया है।

    विक्रांत के असिस्टेंट कमिश्नर बनने की सूचना मिलते ही उनके पैतृक गांव बढ़ापुर और बिजनौर स्थित निवास पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। पिता यशपाल सिंह ने बताया कि विक्रांत शुरू से ही मेधावी रहे हैं और उनका लक्ष्य हमेशा से प्रशासन में जाकर समाज की सेवा करना रहा है। परिवार के सदस्यों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर इस खुशी को साझा किया।

    ।डिप्टी जेलर से असिस्टेंट कमिश्नर बनने तक का विक्रांत का यह सफर जिले के उन तमाम युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है, जो सरकारी सेवा में रहते हुए बड़े लक्ष्यों की प्राप्ति का सपना देखते हैं। उनकी इस उपलब्धि पर क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों और शिक्षाविदों ने भी उन्हें शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।

  • ~ भूपेंद्र निरंकारी

    बिजनौर। वर्धमान कॉलेज के खेल मैदान पर सोमवार को दो दिवसीय ‘तृतीय राजेंद्र कुमार जगत प्रकाश मेमोरियल अंडर-14 बालक क्रिकेट टूर्नामेंट 2026’ का शानदार शुभारंभ हुआ। शारीरिक शिक्षा एवं खेलकूद विभाग द्वारा आयोजित इस नॉक-आउट प्रतियोगिता का उद्घाटन मुख्य अतिथि, सांध्य दैनिक के संपादक सूर्यमणि रघुवंशी एवं कॉलेज की प्राचार्या प्रो. प्रीति खन्ना ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया।

    प्रतियोगिता के पहले दिन तीन महत्वपूर्ण मैच खेले गए, जिसमें खिलाड़ियों का उत्साह चरम पर रहा:

    * प्रथम मैच (वर्धमान ए बनाम किरतपुर): वर्धमान कॉलेज (ए) ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। टीम की ओर से प्रलभ ने धुआंधार 117 रन और हिमांशु ने 29 रनों की महत्वपूर्ण पारी खेली। लक्ष्य का पीछा करने उतरी किरतपुर एकेडमी की टीम मात्र 43 रनों पर ढेर हो गई। वर्धमान (ए) ने यह मैच 159 रनों के विशाल अंतर से अपने नाम किया।

    * द्वितीय मैच (धामपुर बनाम वर्धमान बी): दूसरे मुकाबले में वर्धमान कॉलेज (बी) ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवरों में 66 रन बनाए। जवाब में धामपुर की टीम ने बेहतरीन खेल दिखाते हुए मात्र 12 ओवरों में ही जीत हासिल कर ली।

    * तृतीय मैच: दिन का तीसरा मुकाबला मेरठ और मुरादाबाद की टीमों के बीच खेला गया।

    आयोजन सचिव डॉ. जयदीप शर्मा ने जानकारी दी कि इस टूर्नामेंट में मेरठ, धामपुर, किरतपुर, मुरादाबाद, बहसूमा, बिजनौर, नूरपुर और हल्दौर सहित कुल आठ टीमें प्रतिभाग कर रही हैं। मंगलवार को प्रतियोगिता के सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबले खेले जाएंगे, जिसके बाद विजेता टीम को ट्रॉफी प्रदान की जाएगी।

    इस अवसर पर मीडिया प्रभारी मानव सचदेवा, प्रो. शशि प्रभा, डॉ. रेनू शर्मा, डॉ. शिवानी शर्मा, डॉ. चेतना शाक्य, डॉ. आयुष, डॉ. यश चौहान, डॉ. प्रशांत सिंह, डॉ. अचिन्त्य कुमार गुप्ता, रजत शर्मा, मोहसिन खान, अमित श्रीवास्तव, मुकुन्द शर्मा, राजू और बिशन सहित कॉलेज स्टाफ मौजूद रहा। मैच में अंपायरिंग की भूमिका रोहित व आयुष ने निभाई, जबकि स्कोरर अनामिका रहीं।

  • ~ भूपेंद्र निरंकारी

    बिजनौर। विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सांस्कृतिक राष्ट्रवाद अनिवार्य है। यह विचार प्रो. आनंद वर्धन शुक्ल (पूर्व आईपीएस एवं कुलपति, मेवाड़ विश्वविद्यालय) ने वर्धमान डिग्री कॉलेज में “विकसित भारत 2047: उपलब्धियां, चुनौतियां और संभावनाएं” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन अवसर पर व्यक्त किए।

    मुख्य अतिथि प्रो. शुक्ल ने जोर देकर कहा कि यदि हम अपनी सोच का विस्तार करें और शिक्षा, स्वास्थ्य, इंफ्रास्ट्रक्चर व इंडस्ट्री के क्षेत्र में नवाचार अपनाएं, तो दुनिया हमारे कदमों में होगी।

    इससे पहले कार्यक्रम के दूसरे दिन का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. आनंद वर्धन शुक्ल (पूर्व आईपीएस एवं कुलपति, मेवाड़ विश्वविद्यालय), प्राचार्या डॉ. प्रीति खन्ना और मुख्य वक्ता विजय वर्मा (दिल्ली विश्वविद्यालय) ने माँ सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर किया।

    इस दौरान विशिष्ट अतिथि प्रो. रश्मि रावल (प्राचार्या, आर.एम. डिग्री कॉलेज, धामपुर) ने भी अपने विचार साझा किए।

    संगोष्ठी के आयोजन में कन्वीनर प्रो. जी.के. विश्वकर्मा, कोऑर्डिनेटर धर्मेंद्र कुमार और आयोजन सचिव डॉ. चारुदत्त आर्य की महत्वपूर्ण भूमिका रही। डॉ. आर्य पिछले कई दिनों से इस कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार कर रहे थे, जिसमें उन्हें प्रो. ओ.पी. सिंह का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का संचालन प्रो. डॉ. रेशु शर्मा ने किया। अंत में प्राचार्या डॉ. प्रीति खन्ना ने सभी अतिथि वक्ताओं, शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का आभार प्रकट किया। संगोष्ठी का समापन राष्ट्रगान के साथ गरिमामय ढंग से हुआ।

  • बिजनौर। उत्तर प्रदेश सरकार के ‘मिशन शक्ति फेस 5.0’ अभियान के द्वितीय चरण के अंतर्गत जनपद बिजनौर के विभिन्न थानों की पुलिस और एंटी रोमियो टीमों ने रविवार को व्यापक जागरूकता अभियान चलाया। रोडवेज बस स्टैंड, प्रमुख बाजारों और ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं एवं बालिकाओं को न केवल उनकी सुरक्षा के प्रति सतर्क किया गया, बल्कि शासन द्वारा चलाई जा रही विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी भी दी गई।

    जनपद की एंटी रोमियो टीम ने रोडवेज बस स्टैंड बिजनौर पर महिलाओं और बालिकाओं से संवाद किया। टीम ने साइबर क्राइम से बचाव के टिप्स दिए और पम्प्लेट वितरित कर वूमेन पावर लाइन-1090, महिला हेल्पलाइन-181 और साइबर हेल्पलाइन-1930 जैसे महत्वपूर्ण नंबरों के बारे में बताया। इस दौरान नोडल अधिकारियों के संपर्क नंबर भी साझा किए गए।

    * कोतवाली शहर व महिला थाना: टीम ने ग्राम चांदपुरी और शहर के विशाल मेगा मार्ट में चेकिंग अभियान चलाया। संदिग्धों से पूछताछ की गई और महिलाओं से उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी ली गई।

    * अफजलगढ़ व नजीबाबाद: ग्राम चकमणि रघुनाथपुर (अफजलगढ़) में महिला उपनिरीक्षक रीनू पंवार और नजीबाबाद के राव धर्मशाला में पुलिस टीम ने घरेलू हिंसा के विरुद्ध आवाज उठाने का आह्वान किया। सोशल मीडिया के माध्यम से होने वाली छेड़छाड़ और अश्लील मैसेज आने पर तुरंत शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रेरित किया गया।

    * मंडावर व हीमपुर दीपा: ग्राम अगाखेड़ी और हीमपुर दीपा में मिशन शक्ति प्रभारी प्रेरणा यादव व पुलिस टीमों ने महिलाओं को अधिकारों के प्रति जागरूक किया और उनकी समस्याओं का मौके पर समाधान करने का आश्वासन दिया।

    अभियान के दौरान पुलिस ने केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि आर्थिक स्वावलंबन पर भी जोर दिया। महिलाओं को निम्नलिखित योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया गया:

    * विधवा एवं वृद्धावस्था पेंशन योजना

    * सुकन्या समृद्धि और मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना * प्रधानमंत्री आवास व उज्ज्वला योजना

    * नशा मुक्ति भारत अभियान और जन आरोग्य योजना

    * 1090: वूमेन पावर लाइन

    * 181: महिला हेल्पलाइन

    * 112: आपातकालीन सेवा

    * 1930: साइबर क्राइम हेल्पलाइन

    * 1098: चाइल्ड लाइन

    * 1076: मुख्यमंत्री हेल्पलाइन

  • प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और नजीर बनने वाली टिप्पणी की है। न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकल पीठ ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति पहले से विवाहित है और उसका पति या पत्नी जीवित है, तो वह बिना कानूनी तलाक लिए किसी तीसरे व्यक्ति के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में नहीं रह सकता। कोर्ट ने कहा कि इसे कानूनी अनुमति नहीं दी जा सकती।

    अदालत ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता की व्याख्या करते हुए कहा कि एक व्यक्ति की स्वतंत्रता वहां समाप्त हो जाती है, जहां दूसरे व्यक्ति का वैधानिक अधिकार शुरू होता है। कोर्ट के अनुसार:

    यह निर्णय आजमगढ़ निवासी अनु और राहुल सिंह की याचिका को निस्तारित करते हुए आया। याचियों ने सुरक्षा और हस्तक्षेप न करने की मांग की थी। हालांकि, रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि याचियों ने अपने पूर्व जीवनसाथी से कानूनी रूप से तलाक लिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लिव-इन रिलेशनशिप में प्रवेश करने से पहले सक्षम न्यायालय से तलाक लेना अनिवार्य है।

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    नई दिल्ली | विशेष संवाददाता | आज के डिजिटल युग में व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। होटल चेक-इन, ऑफिस एंट्री या किसी भी वेरिफिकेशन के लिए अक्सर हमें अपना पूरा आधार कार्ड सौंपना पड़ता है। लेकिन अब इसकी जरूरत नहीं होगी। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार ऐप में एक क्रांतिकारी फीचर ‘My Contact Card’ लॉन्च किया है, जो आपकी गोपनीयता को सुरक्षित रखते हुए पहचान साझा करने के तरीके को पूरी तरह बदल देगा।

    UIDAI द्वारा आधार ऐप में जोड़ा गया यह फीचर एक ‘डिजिटल बिजनेस कार्ड’ की तरह काम करता है। जब भी आपको अपनी पहचान साझा करनी हो, तो ऐप एक डायनामिक QR कोड जेनरेट करता है। सामने वाला व्यक्ति इस कोड को स्कैन करके आपकी वेरिफाइड जानकारी (जैसे नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल और पता) सीधे अपने फोन में सेव कर सकता है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें आपका 12 अंकों का आधार नंबर छिपा रहता है, जिससे इसके दुरुपयोग की संभावना शून्य हो जाती है।

    अक्सर देखा गया है कि फोटोकॉपी की दुकानों या होटलों में आधार कार्ड देने पर डेटा लीक होने का खतरा बना रहता है। साइबर विशेषज्ञ लंबे समय से चेतावनी देते रहे हैं कि हर जगह पूरा आधार नंबर देना जोखिम भरा हो सकता है।

    * सीमित जानकारी: इस फीचर के जरिए यूजर केवल वही जानकारी साझा करता है, जिसकी जरूरत है।

    * सीधा वेरिफिकेशन: साझा की गई जानकारी सीधे आधार डेटाबेस से प्रमाणित (Authenticate) होती है, जिससे फर्जीवाड़े की गुंजाइश नहीं रहती।

    * पूर्ण नियंत्रण: यूजर के पास अधिकार होता है कि वह क्या साझा करना चाहता है और क्या नहीं।

    * कागज मुक्त प्रक्रिया: अब पहचान पत्र की फोटोकॉपी साथ रखने या उसे कहीं जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी।

    * सुरक्षित स्टोरेज: स्कैन करने वाला व्यक्ति सीधे आपकी वेरिफाइड डिटेल्स अपने डिवाइस में सुरक्षित कर सकता है।

    * डेटा चोरी पर लगाम: आधार नंबर साझा न होने से बैंक फ्रॉड और आइडेंटिटी थेफ्ट जैसी घटनाओं में कमी आएगी।

    इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए यूजर्स को अपने फोन में अपडेटेड ‘आधार ऐप’ डाउनलोड करना होगा। ऐप के भीतर ‘My Contact Card’ सेक्शन में जाकर अपना डिजिटल कार्ड सेट किया जा सकता है। सरकार का यह कदम देश में ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘डेटा प्राइवेसी’ के मानकों को और अधिक मजबूत बनाने वाला साबित होगा।

  • मुंबई/कानपुर (newsdaily24)। भारतीय उद्योग जगत के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत हो गया। रेमंड ग्रुप (Raymond Group) के पूर्व चेयरमैन, बॉम्बे के पूर्व शेरिफ और पद्म भूषण से सम्मानित डॉ. विजयपत सिंघानिया का शनिवार शाम शांतिपूर्वक निधन हो गया। कंपनी के प्रवक्ता द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, उनका अंतिम संस्कार 29 मार्च 2026 (रविवार) को किया जाएगा। उनके निधन की खबर से औद्योगिक जगत और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई है।

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    सिंघानिया परिवार की यह गौरवशाली विरासत उत्तर प्रदेश के कानपुर के औद्योगिक परिवेश से निकली थी। अपने चाचा जे.के. सिंघानिया द्वारा स्थापित एक छोटी सी ऊनी मिल (रेमंड) को विजयपत सिंघानिया ने अपनी दूरदर्शिता और कड़ी मेहनत से 12,000 करोड़ रुपये के विशाल वैश्विक साम्राज्य में बदल दिया। उन्होंने ‘रेमंड’ को मात्र एक कपड़ा ब्रांड नहीं, बल्कि ‘द कम्प्लीट मैन’ के रूप में हर भारतीय घर की पहचान बना दिया।

    विजयपत सिंघानिया केवल बिजनेस डेस्क तक सीमित नहीं थे, बल्कि आसमान की ऊंचाइयों को छूना उनका जुनून था। उनके नाम एविएशन के क्षेत्र में कई साहसिक रिकॉर्ड दर्ज हैं:

    * ऐतिहासिक उड़ान: 26 नवंबर 2005 को, 67 वर्ष की आयु में उन्होंने गर्म हवा के गुब्बारे (Hot Air Balloon) से 21,027 मीटर (68,986 फीट) की ऊंचाई तक उड़ान भरकर विश्व रिकॉर्ड बनाया था।

    * गिनीज बुक में दर्ज नाम: उन्होंने कैमरॉन जेड-1600 गुब्बारे के जरिए पिछला 64,997 फीट का रिकॉर्ड तोड़कर इतिहास रचा, जो आज भी याद किया जाता है।

    देश के प्रति उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से नवाजा था। वे न केवल एक सफल उद्योगपति थे, बल्कि एक कुशल पायलट और समाजसेवी भी थे। उनके निधन पर कई दिग्गज हस्तियों ने शोक व्यक्त किया है।

  • बिजनौर (चांदपुर): तहसील परिसर में शिवसैनिकों का जोरदार प्रदर्शन, गौतस्करी रोकने और हिंदू कार्यकर्ताओं पर दर्ज ‘झूठे’ मुकदमे वापस लेने की उठाई मांगचांदपुर (newsdaily24)।जनपद बिजनौर के तहसील चांदपुर में आज शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने देशव्यापी ज्वलंत मुद्दों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। शिवसैनिकों ने प्रधानमंत्री के नाम संबोधित एक ज्ञापन उप-जिलाधिकारी (SDM) को सौंपकर हिंदूवादी नेताओं की सुरक्षा और गोवंश संरक्षण सुनिश्चित करने की पुरजोर मांग की।

    ज्ञापन सौंपते समय शिवसेना के पदाधिकारियों ने कड़े शब्दों में कहा कि पिछले कुछ समय से देश में हिंदूवादी नेताओं और संतों की हत्या की घटनाएं बढ़ी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन घटनाओं का शांतिपूर्ण विरोध करने वाले हिंदू कार्यकर्ताओं के साथ पुलिस द्वारा बेरहमी से मारपीट करना अब एक आम बात हो गई है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा

    प्रदर्शनकारियों ने देश भर में बढ़ रही गौतस्करी और गोकशी की घटनाओं पर गहरा रोष व्यक्त किया। शिवसेना की मुख्य मांगों में गाय माता को ‘राष्ट्र माता’ घोषित करना और देशभर में सक्रिय गो-रक्षकों पर दर्ज किए गए ‘झूठे’ मुकदमों को तुरंत वापस लेना शामिल है।

    इस विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन प्रक्रिया के दौरान जिला उप-प्रमुख मुकेश लांबा, शोभित गुर्जर, धर्मवीर तोमर, राजीव चौधरी, बंटी, दिनेश, सुरेंद्र, राहुल त्यागी, अजय शर्मा, सुनील पंडित, संजीव, विकास सैनी, पुष्पेंद्र, भूपेंद्र, अरुण सैनी, उधम सिंह, बंटी, विपिन सैनी आदि सहित भारी संख्या में शिवसैनिक उपस्थित रहे।

    * उद्देश्य: हिंदू नेताओं की सुरक्षा और गो-संरक्षण।

    * स्थान: तहसील चांदपुर, जनपद बिजनौर।

    * मांग: गाय को राष्ट्र माता का दर्जा और कार्यकर्ताओं से केस वापसी।

  • लखनऊ/मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य में वंचित वर्गों की आवाज बुलंद करने के उद्देश्य से आगामी 29 मार्च को मुरादाबाद के गांधी मैदान में एक विशाल ‘वंचित अधिकार महारैली’ का आयोजन किया जा रहा है। जन सेवा दल के तत्वावधान में आयोजित इस महारैली में मुख्य अतिथि के रूप में लोक मोर्चा एवं जन सेवा दल के अध्यक्ष विनेश कर्पूरी सम्मिलित होंगे।

    रैली का मुख्य उद्देश्य समाज के विभिन्न पिछड़े और वंचित वर्गों को एकजुट करना है। कार्यक्रम के आयोजकों और विनेश कर्पूरी के अनुसार, यह समय जातियों के बिखराव को छोड़कर एक ‘जमात’ (समूह) के रूप में संगठित होने का है। रैली के माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि जब तक वंचित समाज एकजुट नहीं होगा, तब तक सत्ता और संसाधनों में उनकी उचित भागीदारी सुनिश्चित नहीं हो सकेगी।

    लोक मोर्चा एवं जन सेवा दल के अध्यक्ष विनेश कर्पूरी ने स्पष्ट किया है कि जननायक के अधूरे मिशन को पूरा करना ही उनका लक्ष्य है। इस महारैली का प्रमुख नारा “जनसंख्या अनुपात में हिस्सेदारी” रखा गया है। विनेश कर्पूरी ने जनता से अपील करते हुए कहा है कि सभी वंचित जातियों के लोग अपने साथ कम से कम पांच अन्य लोगों को लेकर समय से गांधी मैदान पहुंचें, ताकि सत्ता के गलियारों तक अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई जा सके।

    * स्थान: गांधी मैदान, निकट सेंट मैरी स्कूल, दिल्ली रोड, मुरादाबाद

    स्थानीय स्तर पर इस रैली को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है और जन सेवा दल के कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर लोगों को इस महारैली का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। राजनीति के जानकारों का मानना है कि यह रैली मुरादाबाद ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के इतिहास में वंचितों के अधिकारों के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित होगी।

  • अल्मोड़ा। विकास खंड भैंसियाछाना के अंतर्गत आने वाली ग्राम सभा लिंगुड़ता में सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ी है। पिछले करीब 7-8 वर्षों से मुख्य सिंचाई गुल (नहर) के क्षतिग्रस्त होने के कारण क्षेत्र के किसानों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इस गंभीर समस्या को लेकर क्षेत्र की जिला पंचायत सदस्य (वार्ड संख्या 44-सल्ला भाटकोट) शैलजा चाम्याल ने लघु सिंचाई खंड, अल्मोड़ा के अधिशासी अभियंता को पत्र भेजकर गुल की जल्द मरम्मत कराने की मांग उठाई है।

    प्रेस को जारी जानकारी के अनुसार, ग्राम सभा लिंगुड़ता के टोक लिंगुड़ता में वर्षों पूर्व ‘रौयत’ से ‘हाटबिटोली’ तक सिंचाई गुल का निर्माण किया गया था। इस 2.0 किलोमीटर लंबी गुल से लगभग 750 से 800 नाली खेतों की सिंचाई होती थी। कभी यह क्षेत्र अपनी उन्नत खेती के लिए जाना जाता था, लेकिन गुल के टूटने से अब यहाँ खेती का काम भगवान भरोसे है।

    जिला पंचायत सदस्य शैलजा चाम्याल ने बताया कि गुल पिछले 8 सालों से बंद पड़ी है। सिंचाई का कोई वैकल्पिक साधन न होने के कारण कृषि कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। उन्होंने प्रशासन को अवगत कराया कि:

    शैलजा चाम्याल ने अभियंता से पुरजोर मांग की है कि किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए इस ध्वस्त गुल का अविलंब जीर्णोद्धार किया जाए, ताकि ग्रामीण एक बार फिर सुचारू रूप से खेती कर सकें और उनकी आजीविका सुरक्षित हो सके।

  • लखनऊ/बागपत | (27 मार्च 2026)। उत्तर प्रदेश की ‘टेंपल इकोनॉमी’ पहल के तहत बागपत जिले के ऐतिहासिक पुरा महादेव मंदिर ने सतत तीर्थ पर्यटन (Sustainable Tourism) की एक नई परिभाषा लिखी है। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर यहाँ लागू की गई ‘जीरो वेस्ट’ व्यवस्था ने यह साबित कर दिया है कि धार्मिक परंपराओं की पवित्रता को बनाए रखते हुए पर्यावरण का संरक्षण कैसे किया जा सकता है। 2024 में ‘बेस्ट हेरिटेज टूरिस्ट विलेज’ का खिताब जीतने वाले इस गाँव ने अब जिम्मेदारी भरे पर्यटन का एक प्रभावशाली मॉडल पेश किया है।

    मंदिर परिसर में उमड़ने वाली लाखों की भीड़ के बावजूद, जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने एक ऐसी प्रणाली विकसित की जहाँ उत्सव के दौरान उत्पन्न होने वाले हर अवशेष को कचरे के बजाय संसाधन माना गया। फूलों की भेंट, दूध, प्लास्टिक और यहाँ तक कि श्रद्धालुओं द्वारा छोड़ी गई चप्पलों को भी सम्मानजनक तरीके से रिसायकल किया गया।

    सामग्रीमात्रा / प्रभावपुनर्चक्रण (Recycling) का तरीका
    फूलों की भेंट450 किलोग्राम +प्रोसेसिंग कर धूपबत्ती और अन्य उत्पादों में बदला गया।
    जैविक अवशेष1 टन लगभगकम्पोस्टिंग के जरिए जैविक खाद तैयार की गई।
    प्लास्टिक बोतलें700 किलोग्रामइन्हें प्रोसेस कर ‘फाइबर फिल’ में परिवर्तित किया गया।
    अभिषेक का दूध4,563 लीटरएकत्रित कर सुरक्षित तरीके से गौशालाओं और पशु देखभाल में भेजा गया।
    पुरानी चप्पलें2,500 जोड़ीइन्हें रिसायकल कर उपयोगी ‘मैट’ और कलाकृतियों (Installations) में बदला गया।
    पूजा के धागे3,000 से अधिकएकत्र कर पुन: उपयोग के लिए प्रोसेस किया गया।

    प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा: “यह मॉडल उत्तर प्रदेश की टेंपल इकोनॉमी को मजबूत करने के हमारे संकल्प का हिस्सा है। यह दर्शाता है कि सरकारी योजना, सामुदायिक भागीदारी और पारंपरिक मूल्यों के समन्वय से पर्यटन और सतत विकास को एक साथ साधा जा सकता है।”

    यह मॉडल केवल स्वच्छता तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय आजीविका का माध्यम भी बना है। जिलाधिकारी बागपत, अस्मिता लाल के अनुसार, इस पहल में स्थानीय महिलाओं की सक्रिय भागीदारी रही। कचरे की छंटाई और प्रोसेसिंग गतिविधियों ने ग्रामीण महिलाओं को रोजगार के नए अवसर प्रदान किए हैं, जिससे मंदिर अब सांस्कृतिक के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों का केंद्र भी बन रहा है।

    पुरा महादेव की सफलता को देखते हुए जिला प्रशासन ने इस ‘जीरो वेस्ट मॉडल’ को अन्य प्रमुख मंदिरों में भी लागू करने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत विशेष ‘प्रोसेसिंग हब’ बनाए जाएंगे और स्थानीय स्वयं सहायता समूहों को जोड़ा जाएगा। श्रद्धालुओं ने भी इस स्वच्छ वातावरण और भेंट सामग्री के सम्मानजनक निस्तारण की जमकर प्रशंसा की है।

  • लखनऊ | लखीमपुर खीरी का शारदा बैराज अब वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर एक बड़ी छलांग लगाने के लिए तैयार है। उत्तर प्रदेश ईको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड (UPETDB) यहाँ निजी सहभागिता के माध्यम से एक भव्य ‘टेंट सिटी’ विकसित करने जा रहा है। प्रकृति की गोद में बसने वाली यह टेंट सिटी न केवल पर्यटकों के ठहरने का स्थान होगी, बल्कि इसे एक ‘एकोमोडेशन एंड वेलनेस टूरिज्म डेस्टिनेशन’ के रूप में पहचान दिलाई जाएगी।

    प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने इस परियोजना की घोषणा करते हुए बताया कि तहसील सदर के ग्राम कोठिया में स्थित करीब 2.67 एकड़ भूमि पर इस परियोजना को मूर्त रूप दिया जाएगा।

    शारदा बैराज की भौगोलिक स्थिति इसे बेहद खास बनाती है। यह स्थल विश्व प्रसिद्ध दुधवा नेशनल पार्क और कतर्नियाघाट वन्यजीव अभ्यारण्य के ठीक मध्य में स्थित है। टेंट सिटी के निर्माण से यहाँ आने वाले वन्यजीव प्रेमियों को अब जंगलों की सफारी के साथ-साथ शारदा बैराज के शांत जलक्षेत्र के किनारे वेलनेस सुविधाओं (जैसे योग, ध्यान और प्राकृतिक चिकित्सा) का आनंद लेने का भी अवसर मिलेगा।

    * क्षेत्रफल: 2.67 एकड़ में फैला विस्तृत परिसर।

    * सुविधाएँ: आधुनिक टेंट आवास, वेलनेस सेंटर, और ईको-फ्रेंडली बुनियादी ढांचा।

    * विकास मॉडल: पीपीपी (निजी सहभागिता) मॉडल पर आधारित।

    * रोजगार: स्थानीय स्तर पर गाइड, हॉस्पिटलिटी और अन्य क्षेत्रों में नए अवसर।

    उत्तर प्रदेश ईको टूरिज्म विकास बोर्ड ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए इच्छुक फर्मों और एजेंसियों से निविदाएं (Tenders) आमंत्रित की हैं।

    * अंतिम तिथि: 30 अप्रैल 2026 (शाम 06:00 बजे तक)।

    * वेबसाइट: निविदाएं ऑनलाइन http://etender.up.nic.in पर जमा की जा सकती हैं।

    * संपर्क: अधिक जानकारी के लिए upetdb@gmail.com या आधिकारिक पोर्टल http://www.upecoboard.up.gov.in पर विजिट किया जा सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना से लखीमपुर खीरी केवल ‘डे-विजिट’ सेंटर न रहकर एक ‘स्टे-ओवर’ डेस्टिनेशन बनेगा। इससे जिले की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और उत्तर प्रदेश का ‘समग्र टूरिज्म मॉडल’ पूरे देश के लिए एक मिसाल पेश करेगा।

  • लखनऊ | लखीमपुर खीरी का शारदा बैराज अब वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर एक बड़ी छलांग लगाने के लिए तैयार है। उत्तर प्रदेश ईको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड (UPETDB) यहाँ निजी सहभागिता के माध्यम से एक भव्य ‘टेंट सिटी’ विकसित करने जा रहा है। प्रकृति की गोद में बसने वाली यह टेंट सिटी न केवल पर्यटकों के ठहरने का स्थान होगी, बल्कि इसे एक ‘एकोमोडेशन एंड वेलनेस टूरिज्म डेस्टिनेशन’ के रूप में पहचान दिलाई जाएगी।

    प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने इस परियोजना की घोषणा करते हुए बताया कि तहसील सदर के ग्राम कोठिया में स्थित करीब 2.67 एकड़ भूमि पर इस परियोजना को मूर्त रूप दिया जाएगा।

    शारदा बैराज की भौगोलिक स्थिति इसे बेहद खास बनाती है। यह स्थल विश्व प्रसिद्ध दुधवा नेशनल पार्क और कतर्नियाघाट वन्यजीव अभ्यारण्य के ठीक मध्य में स्थित है। टेंट सिटी के निर्माण से यहाँ आने वाले वन्यजीव प्रेमियों को अब जंगलों की सफारी के साथ-साथ शारदा बैराज के शांत जलक्षेत्र के किनारे वेलनेस सुविधाओं (जैसे योग, ध्यान और प्राकृतिक चिकित्सा) का आनंद लेने का भी अवसर मिलेगा।

    * क्षेत्रफल: 2.67 एकड़ में फैला विस्तृत परिसर।

    * सुविधाएँ: आधुनिक टेंट आवास, वेलनेस सेंटर, और ईको-फ्रेंडली बुनियादी ढांचा।

    * विकास मॉडल: पीपीपी (निजी सहभागिता) मॉडल पर आधारित।

    * रोजगार: स्थानीय स्तर पर गाइड, हॉस्पिटलिटी और अन्य क्षेत्रों में नए अवसर।

    उत्तर प्रदेश ईको टूरिज्म विकास बोर्ड ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए इच्छुक फर्मों और एजेंसियों से निविदाएं (Tenders) आमंत्रित की हैं।

    * अंतिम तिथि: 30 अप्रैल 2026 (शाम 06:00 बजे तक)।

    * वेबसाइट: निविदाएं ऑनलाइन http://etender.up.nic.in पर जमा की जा सकती हैं।

    * संपर्क: अधिक जानकारी के लिए upetdb@gmail.com या आधिकारिक पोर्टल http://www.upecoboard.up.gov.in पर विजिट किया जा सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना से लखीमपुर खीरी केवल ‘डे-विजिट’ सेंटर न रहकर एक ‘स्टे-ओवर’ डेस्टिनेशन बनेगा। इससे जिले की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और उत्तर प्रदेश का ‘समग्र टूरिज्म मॉडल’ पूरे देश के लिए एक मिसाल पेश करेगा।

  • मंडावर (बिजनौर)। बालावाली रोड स्थित मिर्जापुर गाँव के समीप पौराणिक और ऐतिहासिक श्री गलखा माता मंदिर में चैत्र नवरात्रि की अष्टमी (चैती आठे) के अवसर पर भव्य मेले का आयोजन किया गया। सुबह 7 बजे से ही माता के जयकारों के साथ श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़नी शुरू हो गई, जो देर शाम तक जारी रही। श्रद्धालुओं ने माता को प्रसाद चढ़ाकर मन्नतें माँगी और कई परिवारों द्वारा मनोकामना पूर्ण होने पर भंडारे भी आयोजित किए गए।

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    इस वर्ष मेले में धार्मिक अनुष्ठान के साथ-साथ जनसेवा का अनूठा संगम देखने को मिला। मेले में पहली बार बी.एम.आई. (BMI) हेल्थ चेकअप कैंप का आयोजन किया गया, जहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अपना स्वास्थ्य परीक्षण कराया। वहीं, मेला परिसर खिलौनों, मिठाइयों और पकौड़ी की दुकानों से सजा रहा। बच्चों ने झूलों का भरपूर आनंद लिया, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल बना रहा।

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    आस्था के इस संगम के बीच प्रशासनिक व्यवस्थाएँ पूरी तरह चरमराई नजर आईं। स्थानीय श्रद्धालुओं का आरोप है कि सुबह 7 बजे से भीड़ बढ़नी शुरू हो गई थी, लेकिन मंडावर पुलिस का दस्ता करीब 11 बजे के बाद मौके पर पहुँचा।

    * लापरवाही: भीड़ को नियंत्रित करने के बजाय तैनात पुलिसकर्मी कुर्सियों पर बैठे नजर आए, जिससे मंदिर परिसर में अव्यवस्था बनी रही।

    * अपराध: सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगाते हुए चोरों ने एक श्रद्धालु की गाड़ी पर हाथ साफ कर दिया। पीड़ित ने इसकी शिकायत डायल 112 पर दर्ज कराई है।

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    गंगा किनारे स्थित इस मंदिर की मान्यता अत्यंत प्राचीन है। स्थानीय लोक कथाओं के अनुसार, यह स्थान महाभारत काल में रानी रुक्मिणी की तपोस्थली रहा है। माना जाता है कि इसी स्थान से भगवान श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी का हरण किया था। पौराणिक महत्व के कारण यहाँ न केवल नवरात्रि, बल्कि वर्ष भर भक्तों का तांता लगा रहता है।

    मेले में आए श्रद्धालुओं ने प्रशासन के प्रति नाराजगी व्यक्त करते हुए मांग की है कि इतने बड़े धार्मिक आयोजन में पुलिस बल को समय से पहले और सक्रिय रूप से तैनात किया जाना चाहिए। भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में गश्त न होने के कारण ही चोरी जैसी घटनाएँ घटित हो रही हैं। भक्तों की कामना है कि अगली बार प्रशासन बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करे ताकि माँ के दर्शन में कोई बाधा न आए।

  • अमृतसर/फिरोजपुर। एक ओर जहाँ रेल मंत्रालय भारतीय रेलवे से ‘वीआईपी कल्चर’ को खत्म करने के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर फिरोजपुर मंडल में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने इन दावों की पोल खोल कर रख दी है। रेल मंत्रालय में कार्यकारी निदेशक (लोक शिकायत) विकास जैन की पत्नी और बेटी के अमृतसर दौरे के दौरान मिली सुविधाओं से असंतुष्ट होने के बाद, मंडल के चार वरिष्ठ अधिकारियों को स्पष्टीकरण के लिए दिल्ली बुलाकर फटकार लगाई गई है।

    सूत्रों के अनुसार, महिला दिवस के उपलक्ष्य में ईडीपीजी विकास जैन की पत्नी और बेटी शताब्दी एक्सप्रेस से अमृतसर पहुँची थीं। स्थानीय रेल प्रशासन ने उनके स्वागत में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्हें रेलवे रेस्ट हाउस के डीआरएम सुइट में ठहराया गया। प्रोटोकॉल के तहत उनके लिए विशेष भोजन, शहर भ्रमण और अटारी सीमा पर ‘रिट्रीट सेरेमनी’ देखने की व्यवस्था भी की गई। अगले दिन रविवार को उन्हें श्री दरबार साहिब में माथा टिकवाया गया और कमर्शियल विभाग के अधिकारी निरंतर उनके साथ तैनात रहे।

    हैरानी की बात यह है कि इतनी खातिरदारी के बावजूद अधिकारी की पत्नी सुविधाओं से संतुष्ट नहीं थीं। उनकी शिकायत थी कि रेस्ट हाउस का कमरा छोटा था, खिड़कियों के पर्दे पुराने थे और बाथरूम की सफाई मानक के अनुरूप नहीं थी। बताया जा रहा है कि वह किसी आलीशान होटल में ठहरने की उम्मीद कर रही थीं। अपनी नाराजगी उन्होंने तुरंत अपने पति (विकास जैन) तक पहुँचाई।

    नाम न छापने की शर्त पर एक स्थानीय रेल अधिकारी ने बताया कि “रेलवे नियमों के अनुसार अधिकारियों के परिजनों को विशेष वीआईपी सुविधाएं देने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है, फिर भी उपलब्ध संसाधनों में सर्वश्रेष्ठ व्यवस्था की गई थी।”

    पत्नी की शिकायत मिलते ही ईडीपीजी ने कथित तौर पर उत्तर रेलवे के जीएम राजेश कुमार पांडे से संपर्क कर कार्रवाई की बात कही। अगले ही दिन, मंडल के सीनियर डीसीएम (Sr. DCM), सीनियर डीईएन को-ऑर्डिनेशन (Sr. DEN Co.), सीनियर कमांडेंट आरपीएफ और एक अन्य अधिकारी को दिल्ली स्थित कार्यालय में तलब किया गया। बताया जा रहा है कि वहां उन्हें इस ‘लापरवाही’ के लिए कड़ी फटकार झेलनी पड़ी।

    इस घटना ने रेलवे के भीतर एक नई बहस छेड़ दी है। विभाग के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि उक्त उच्चाधिकारी का जूनियर अधिकारियों के साथ ऐसा व्यवहार पहले भी चर्चा में रहा है। मंडल के कर्मचारियों और अधिकारियों में इस बात को लेकर गहरा रोष है कि एक तरफ रेल मंत्री वीआईपी कल्चर खत्म करने की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ व्यक्तिगत नाराजगी के आधार पर वरिष्ठ अधिकारियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।

    इस पूरे प्रकरण पर अब तक न तो विकास जैन की ओर से कोई स्पष्टीकरण आया है और न ही रेल मंत्रालय ने कोई आधिकारिक रुख स्पष्ट किया है।

    * क्या रेलवे के नियम केवल निचले कर्मचारियों के लिए हैं?

    * क्या पारिवारिक यात्राओं के लिए सरकारी मशीनरी का इस तरह उपयोग उचित है?

    यह विवाद दर्शाता है कि रेलवे में सामंती सोच (Feudal Mindset) आज भी अपनी जड़ें जमाए हुए है।

  • लखनऊ। राजधानी लखनऊ में कल, 27 मार्च 2026 को “रामनवमी की धार्मिक भगवा यात्रा” का भव्य आयोजन होने जा रहा है। इस विशाल शोभायात्रा के दौरान शहरवासियों को यातायात संबंधी समस्याओं का सामना न करना पड़े, इसके लिए लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने विस्तृत ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की है। यात्रा शाम 16:00 बजे कपूरथला चौराहे से शुरू होकर शाम 19:00 बजे खाटूश्याम मंदिर पर समाप्त होगी।

    पुलिस प्रशासन ने सुगम यातायात के लिए 17 प्रमुख स्थानों पर रूट डायवर्ट किया है। मुख्य बदलाव निम्नलिखित हैं:

    * कपूरथला की ओर जाने वाले रास्ते: छन्नी लाल चौराहा, नीरा नर्सिंग होम, निरालानगर मोड़ और अल्कापुरी तिराहे से सामान्य यातायात कपूरथला की ओर नहीं जा सकेगा। वाहन चालक मिडलैंड हॉस्पिटल, वायरलेस चौराहा या पुरनिया चौराहा होकर अपने गंतव्य तक जा सकेंगे।

    * डालीगंज और आईटी चौराहा मार्ग: डालीगंज रेलवे क्रॉसिंग और इक्का टांगा तिराहे से आने वाला ट्रैफिक डालीगंज ओवरब्रिज या मदेयगंज होकर निकाला जाएगा। वर्मा बिस्कुट तिराहे से आने वाले वाहन गीता वस्त्रालय तिराहा होकर जा सकेंगे।

    * पुराना लखनऊ और चौक क्षेत्र: रूमी गेट से इमामबाड़ा की तरफ यातायात प्रतिबंधित रहेगा। लोग नया पक्का पुल और टीले वाली मस्जिद मार्ग का उपयोग कर सकते हैं। इसी तरह, फूलमंडी से चौक चौराहा की ओर जाने वाले वाहन रूमी गेट होकर जा सकेंगे।

    * हनुमान सेतु और खाटू श्याम मंदिर मार्ग: हनुमान सेतु तिराहे से सुशीला स्मृतिका की तरफ जाने वाले वाहनों को सुभाष चौराहे की ओर मोड़ा जाएगा। सुशीला स्मृतिका से खाटू श्याम मंदिर की ओर जाने वाला मार्ग पूरी तरह बंद रहेगा; यहाँ से ट्रैफिक को संकल्प वाटिका और सिकंदरबाग की ओर भेजा जाएगा।

    पुलिस ने स्पष्ट किया है कि डाइवर्जन के बावजूद मानवीय संवेदनाओं का पूरा ख्याल रखा जाएगा।

    * मेडिकल इमरजेंसी: एम्बुलेंस और गंभीर मरीजों के वाहनों को प्रतिबंधित मार्गों पर भी प्राथमिकता दी जाएगी।

    * स्कूली वाहन व अन्य: स्कूली बसें, फायर सर्विस और शव वाहनों को स्थानीय पुलिस और ट्रैफिक पुलिस द्वारा सुरक्षित मार्ग से निकाला जाएगा।

    यातायात पुलिस ने अपील की है कि असुविधा से बचने के लिए वैकल्पिक मार्गों का प्रयोग करें। किसी भी समस्या या जानकारी के लिए नागरिक ट्रैफिक कंट्रोल नंबर पर संपर्क कर सकते हैं:> हेल्पलाइन नंबर: 9454405155>

  • https://x.com/i/status/2036725060900471174

    लखनऊ: पिछले कुछ दिनों से पेट्रोल पंपों और गैस एजेंसियों के बाहर लग रही लंबी कतारों और ईंधन की कमी की खबरों के बीच इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) ने स्थिति स्पष्ट की है। विभाग ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए जनता को आश्वस्त किया है कि राज्य में ईंधन और रसोई गैस (LPG) की कोई कमी नहीं है।

    इंडियन ऑयल के कार्यकारी निदेशक और राज्य समन्वयक संजय भंडारी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में ईंधन का पर्याप्त भंडार मौजूद है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से फैल रही अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल अपनी जरूरत के अनुसार ही खरीदारी करें। ‘पैनिक बाइंग’ (घबराहट में खरीदारी) के कारण ही पंपों पर बेवजह भीड़ देखी जा रही है।

    आधिकारिक जानकारी के अनुसार, प्रदेश में ईंधन आपूर्ति का ढांचा पूरी तरह मजबूत है:

    * कुल पंप: यूपी में 13,000 से अधिक पेट्रोल पंप और 4,000 से अधिक एलपीजी वितरक सक्रिय हैं।

    * पंपों पर स्टॉक: वर्तमान में हर पेट्रोल पंप पर औसतन 4 से 5 दिनों का स्टॉक उपलब्ध है।

    * डिपो में बैकअप: तेल डिपो में 16 से 17 दिनों का अतिरिक्त स्टॉक सुरक्षित रखा गया है।

    * कुल उपलब्धता: कुल मिलाकर राज्य के पास अगले 22 दिनों की निर्बाध आपूर्ति के लिए पर्याप्त तेल मौजूद है।

    एलपीजी की स्थिति पर जानकारी देते हुए बताया गया कि उत्तर प्रदेश में रोजाना लगभग 7 लाख गैस सिलेंडरों की आपूर्ति की जा रही है। भविष्य में किसी भी प्रकार का संकट न पैदा हो, इसके लिए सप्लाई चेन को और भी मुस्तैद कर दिया गया है। अब डिपो से आपूर्ति देने से पहले हर पंप के मौजूदा स्टॉक की गहन जांच की जा रही है ताकि वितरण संतुलित रहे।

    तेल कंपनियों ने डीलरों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे डीजल की जमाखोरी (Hoarding) पर कड़ी नजर रखें। खुदरा पंपों से डीजल की थोक बिक्री पर फिलहाल रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आम उपभोक्ताओं को किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।

    ईरान सहित मध्य-पूर्व के देशों में जारी संघर्ष और हॉर्मुज समुद्री मार्ग के बंद होने की आशंका के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होने का खतरा जरूर बना हुआ है। हालांकि, भारत का पेट्रोलियम मंत्रालय स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए है। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर यह सुनिश्चित कर रही हैं कि अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल का असर आम जनता की रसोई और परिवहन पर न पड़े।

  • लखनऊ (न्यूज़डेस्क): राजधानी के आशियाना स्थित सेक्टर-M, LDA कॉलोनी के प्रसिद्ध नागेश्वर महादेव मंदिर में भारतीय नववर्ष और विक्रम संवत 2083 का स्वागत बड़े ही हर्षोल्लास और भक्तिमय वातावरण में किया जा रहा है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के पावन अवसर पर मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक अनुष्ठानों की श्रृंखला जारी है।

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    मंदिर में 19 मार्च, बृहस्पतिवार से माता के विशेष भजनों और कीर्तन का आयोजन रोजाना किया जा रहा है। चैत्र मास के शुभारंभ के साथ ही पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक रंग में रंग गया है। इस आयोजन में भारत विकास परिषद (मानसरोवर शाखा, लखनऊ) का विशेष सहयोग प्राप्त हो रहा है, जो ‘सम्पर्क, सहयोग, संस्कार, सेवा और समर्पण’ के ध्येय वाक्य के साथ समाज को जोड़ रही है।

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    इस उत्सव की मुख्य शोभा ‘महिला मंडल नागेश्वर मंदिर’ की सदस्याएं हैं, जिनकी देखरेख में कीर्तन का कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो रहा है। कार्यक्रम को भव्य बनाने में महिला मंडल की प्रमुख पदाधिकारियों का विशेष योगदान रहा, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं श्रीमती क्षमा श्रीवास्तव, श्रीमती आभा शर्मा, श्रीमती संगीता टुटेजा, श्रीमती सीमा जैन, श्रीमती संतोष मुद्गल।

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    आयोजन के दौरान मंदिर परिसर लाल परिधानों में सजी महिला भक्तों की उपस्थिति से जीवंत हो उठा है। ढोलक की थाप और मंजीरों की गूँज के बीच माता के भजनों पर श्रद्धालु झूमते नजर आ रहे हैं। देवी माँ की प्रतिमाओं के सम्मुख सामूहिक आरती और कीर्तन ने पूरे वातावरण को दिव्य बना दिया है। स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालु भक्तों ने इस अवसर पर एक-दूसरे को भारतीय नववर्ष की शुभकामनाएं दीं और विश्व कल्याण की कामना की।

  • लखनऊ। उत्तर प्रदेश के अन्य बड़े शहरों जैसे प्रयागराज, मेरठ, कानपुर और झांसी के बाद अब ईंधन की किल्लत की आहट राजधानी लखनऊ में भी साफ देखी जा रही है! शहर के अधिकांश पेट्रोल पंपों पर अचानक भीड़ उमड़ पड़ी है, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई है। आलम यह है कि कई पेट्रोल पंपों पर तेल खत्म होने के कारण आपूर्ति ठप हो गई है, जबकि जहां तेल उपलब्ध है, वहां लाइन में लगे लोग अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।

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    पेट्रोल पंपों पर इस अचानक बढ़ी भीड़ के पीछे दो मुख्य कारण माने जा रहे हैं। पहला, पिछले कुछ दिनों से अन्य शहरों से आ रही तेल की कमी की खबरें और दूसरा, सार्वजनिक अवकाश के चलते लॉजिस्टिक्स में आई मामूली देरी। इन खबरों के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों में ‘पैनिक बाइंग’ (घबराहट में खरीदारी) शुरू हो गई, जिससे सामान्य से कई गुना अधिक मांग बढ़ गई।

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    लखनऊ के कई प्रमुख इलाकों में स्थित पेट्रोल पंपों पर ‘स्टॉक समाप्त’ के बोर्ड लगा दिए गए हैं। जिन पंपों पर पेट्रोल-डीजल मिल रहा है, वहां वाहनों की कतारें मुख्य सड़कों तक पहुंच गई हैं, जिससे यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। दोपहिया और चार पहिया वाहन चालक इस डर से अपनी टंकियां फुल करवा रहे हैं कि आने वाले दिनों में किल्लत और बढ़ सकती है।

    बढ़ती अफरा-तफरी को देखते हुए जिला प्रशासन और पेट्रोलियम कंपनियों ने स्थिति स्पष्ट की है। अधिकारियों का कहना है कि:

    * प्रदेश में ईंधन की कोई वास्तविक कमी नहीं है।

    * डिपो से सप्लाई सुचारू रूप से जारी है।

    * अचानक मांग बढ़ने के कारण टैंकरों को पंपों तक पहुंचने और रीफिलिंग में समय लग रहा है।

    प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और जरूरत के अनुसार ही तेल भरवाएं। जमाखोरी की कोशिश न करें क्योंकि इससे कृत्रिम संकट पैदा हो सकता है।

    * प्रयागराज और कानपुर के बाद लखनऊ में भी दिखा असर।

    * लंबी लाइनों के कारण कई जगहों पर लगा ट्रैफिक जाम।

    * पेट्रोलियम कंपनियों ने आपूर्ति सामान्य होने का दावा किया।

    सूत्रों के अनुसार, लखनऊ में ईंधन की सामान्य खपत से 40-50% अधिक मांग अचानक बढ़ गई है। तेल कंपनियों का कहना है कि डिपो से आपूर्ति सामान्य है, लेकिन पंपों की स्टोरेज क्षमता सीमित होने के कारण स्टॉक जल्दी खत्म हो रहा है।

    प्रशासन की ‘राशनिंग’ की तैयारी: कुछ क्षेत्रों में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन पेट्रोल पंपों को निर्देश दे सकता है कि एक निश्चित राशि (जैसे 500 या 1000 रुपये) से अधिक का तेल एक बार में न दिया जाए, ताकि सभी को ईंधन मिल सके।

    आवश्यक सेवाओं पर असर: एम्बुलेंस, स्कूल बसें और नगर निगम के वाहनों के लिए कुछ पंपों को ‘रिजर्व’ रखने पर विचार किया जा रहा है ताकि आपातकालीन सेवाएं प्रभावित न हों।

    ट्रांसपोर्टर्स की हड़ताल की अफवाह: शहर में यह चर्चा भी तेज है कि हिट-एंड-रन कानून या अन्य मांगों को लेकर टैंकर चालकों की सांकेतिक हड़ताल के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, हालांकि आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है।