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update रहें…हर दम, हर पल

पल भर को “आभा” विकसा कर हो जाते हैं अंतर्ध्यान…

संसारी आशाएं जिन का मानव मन में मोह अपार, या तो मिट्टी में मिल जातीं या फलतीं केवल पल चार।

आदरणीय स्वर्गीय ताऊ जी और ताई जी को शत शत नमन

जैसे धूलि भरे मरू मुख पर हिम के कण होते छविमान, पल भर को “आभा” विकसा कर हो जाते हैं अंतर्ध्यान

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