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पितरों की नाराजगी के मुख्य संकेत

आषाढ़ अमावस्या पर दु:खों से मुक्ति पाने के लिए करें पितरों को प्रसन्न

डेस्क। सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का बेहद खास महत्व बताया गया है। हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के अगले दिन अमावस्या का पर्व मनाया जाता है। वर्ष 2024 में आषाढ़ अमावस्या 05 जुलाई को होगी। इस दिन नाराज पितरों के आशीर्वाद से घर और पूरे परिवार की उन्नति प्राप्त करने के लिए उनको खुश करते हैं। पितरों की नाराजगी के कारण परिवार की तरक्की रुक जाती है। अमावस्या पर भगवान विष्णु व पितरों की पूजा और गंगा स्नान करने का विधान है। इसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित कर पितरों की उपासना करने के साथ ही पितृ स्तोत्र का पाठ करना शास्त्र सम्मत है। अंत में श्रद्धा अनुसार गरीब लोगों में दान करें। ऐसा करने से इंसान को सुख-शांति की प्राप्ति होती है और पितरों का आशीर्वाद मिलता है। 

।।पितृ स्तोत्र का पाठ।।

अर्चितानाममूर्तानां पितृणां दीप्ततेजसाम् ।

नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम्।।

इन्द्रादीनां च नेतारो दक्षमारीचयोस्तथा ।

सप्तर्षीणां तथान्येषां तान् नमस्यामि कामदान् ।।

मन्वादीनां च नेतार: सूर्याचन्दमसोस्तथा ।

तान् नमस्यामहं सर्वान् पितृनप्युदधावपि ।।

नक्षत्राणां ग्रहाणां च वाय्वग्न्योर्नभसस्तथा ।

द्यावापृथिवोव्योश्च तथा नमस्यामि कृताञ्जलि:।।

देवर्षीणां जनितृंश्च सर्वलोकनमस्कृतान् ।

अक्षय्यस्य सदा दातृन् नमस्येहं कृताञ्जलि: ।।

प्रजापते: कश्पाय सोमाय वरुणाय च ।

योगेश्वरेभ्यश्च सदा नमस्यामि कृताञ्जलि: ।।

नमो गणेभ्य: सप्तभ्यस्तथा लोकेषु सप्तसु ।

स्वयम्भुवे नमस्यामि ब्रह्मणे योगचक्षुषे ।।

सोमाधारान् पितृगणान् योगमूर्तिधरांस्तथा ।

नमस्यामि तथा सोमं पितरं जगतामहम् ।।

अग्रिरूपांस्तथैवान्यान् नमस्यामि पितृनहम् ।

अग्रीषोममयं विश्वं यत एतदशेषत: ।।

ये तु तेजसि ये चैते सोमसूर्याग्रिमूर्तय:।

जगत्स्वरूपिणश्चैव तथा ब्रह्मस्वरूपिण: ।।

तेभ्योखिलेभ्यो योगिभ्य: पितृभ्यो यतामनस:।

नमो नमो नमस्तेस्तु प्रसीदन्तु स्वधाभुज ।।

।।पितृ कवच का पाठ।।

कृणुष्व पाजः प्रसितिम् न पृथ्वीम् याही राजेव अमवान् इभेन।

तृष्वीम् अनु प्रसितिम् द्रूणानो अस्ता असि विध्य रक्षसः तपिष्ठैः॥

तव भ्रमासऽ आशुया पतन्त्यनु स्पृश धृषता शोशुचानः।

तपूंष्यग्ने जुह्वा पतंगान् सन्दितो विसृज विष्व-गुल्काः॥

प्रति स्पशो विसृज तूर्णितमो भवा पायु-र्विशोऽ अस्या अदब्धः।

यो ना दूरेऽ अघशंसो योऽ अन्त्यग्ने माकिष्टे व्यथिरा दधर्षीत्॥

उदग्ने तिष्ठ प्रत्या-तनुष्व न्यमित्रान् ऽओषतात् तिग्महेते।

यो नोऽ अरातिम् समिधान चक्रे नीचा तं धक्ष्यत सं न शुष्कम्॥

ऊर्ध्वो भव प्रति विध्याधि अस्मत् आविः कृणुष्व दैव्यान्यग्ने।

अव स्थिरा तनुहि यातु-जूनाम् जामिम् अजामिम् प्रमृणीहि शत्रून्। 

क्यों लगता है पितृ दोष ?

अमावस्या या पितृ पक्ष के समय में तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध कर्म आदि न करने से पितर क्रोधित होते हैं। वे अतृप्त होने से दु:खी हो जाते हैं। इसके कारण परिवार को पितृ दोष लगता है। शास्त्रों में पितरों की नाराजगी से संबंधित कुछ संकेतों के बारे में बताया गया है…

1. यदि आपके पितर नाराज होते हैं तो उस परिवार के वंश की वृद्धि नहीं होती है। उस परिवार के सदस्य संतानहीन होते हैं। इस वजह से उस परिवार की अगली पीढ़ी खत्म हो जाती है। संतान दोष को पितरों की नाराजगी का एक कारण माना जाता है। कई बार पितृ दोष के कारण विवाह में भी बाधा आती है या दांपत्य जीवन कष्टकारी हो जाता है।

2. यदि आपके कार्यों में लगातार बाधाएं आती हैं, जो भी काम शुरु करते हैं, वह बीच में ही अटक जाता है। किसी भी कार्य में सफलता नहीं मिलती है तो यह भी पितरों की नाराजगी का कारण माना जाता है।

3. यदि घर के आंगन में पीपल का पौधा उग जाता है तो इसे अशुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितरों की नाराजगी के कारण घर के अंदर पीपल का पौधा उगता है।

4. घर में हमेशा अशांति बनी रहती है। परिवार के सदस्यों के बीच छोटी-छोटी बातों पर वाद विवाद या झगड़े की स्थिति बन जाती है तो यह पितरों की नाराजगी का संकेत होता है।

5. घर का कोई न कोई सदस्य अचानक दुर्घटना का शिकार हो रहा हो या फिर किसी रोग से पीड़ित हो रहा हो तो इसे भी पितरों की नाराजगी का संकेत माना जाता है।

6. पितरों की नाराजगी के कारण अचानक धन हानि हो सकती है। बिजनेस में लगातार घाटा होना भी इसी का संकेत है। आर्थिक संकट में फंसे रहना भी नाराज पितरों का संकेत माना जाता है।

7. घर के मांगलिक कार्यों जैसे विवाह, उनपयन संस्कार आदि में पितरों की पूजा न करने, उनका तिरस्कार करने से भी वे नाराज हो जाते हैं।

इस संकेतों की मदद से पितर बताना चाहते हैं कि उनके वंश के लोग उन्हें तृप्त करें। उनके लिए तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध, पंचबलि कर्म आदि करें, जिससे वे तृप्त हों, उनको मुक्ति मिल सके।

(अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं।)

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