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बुंदेलखंड के ऐतिहासिक महत्व को प्राप्त होगा विश्व पटल पर प्रमुख स्थान

ललितपुर, बांदा, चित्रकूट, बरूआ सागर और झांसी में हैं स्थित

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री मोदी से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित तालबेहट किला (ललितपुर), कालिंजर किला (बांदा), मडफा (चित्रकूट), बरूआ सागर झांसी के घाट की सीढ़ियों के उन्नयन एवं विकास हेतु राज्य सरकार को हस्तांतरित करने का किया अनुरोध

एएसआई द्वारा संरक्षित किलों व स्मारकों के उन्नयन से बुंदेलखंड पर्यटन को मिलेगी वैश्विक पहचान- जयवीर सिंह

CM योगी का PM मोदी से प्रमुख ऐतिहासिक स्थल हस्तांतरित करने का अनुरोध

लखनऊ, 23 सितंबर, 2025। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित चार प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों को राज्य सरकार को हस्तांतरित करने का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा है कि तालबेहट किला (जिला ललितपुर), कालिंजर किला (जनपद बांदा), मडफा (जिला चित्रकूट) और बरुआसागर (झांसी) के घाट की सीढ़ियां वर्तमान में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण में हैं। इन स्थलों का भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम-1958) के अंतर्गत राज्य सरकार को हस्तांतरण होने से इनका संरक्षण व विकास और प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा।

यह जानकारी प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि ’16 सितंबर, 2025 को आदरणीय प्रधानमंत्री जी को लिखे पत्र में मुख्यमंत्री जी ने बुंदेलखंड की भौगोलिक तथा पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थलों का विवरण देते हुए कहा है कि बुंदेलखंड भारत का हृदय स्थल है। पहले इस क्षेत्र को दशार्ण दस नदियों का क्षेत्र, जेजाकभुक्ति और जुझौती कहा जाता था। यह क्षेत्र पाषाण काल से ही मानव की गतिविधियों का साक्षी रहा है। कालांतर में गुप्त एवं चंदेल राजाओं द्वारा यहां पर अनेक मंदिरों, किलों का निर्माण कराया गया है।’ पत्र में मुख्यमंत्री जी ने यह भी अवगत कराया है कि शौर्य पराक्रम की गाथाओं से परिपूर्ण बुंदेलखंड भूभाग का भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता के विकास में अमूल्य योगदान है, तथा शैक्षणिक, सांस्कृतिक, कलात्मक, प्राकृतिक, आध्यात्मिक एवं धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत समृद्धशाली क्षेत्र है, किन्तु कतिपय कारणों से वर्ष 2014 तक यह क्षेत्र उपेक्षित रहा। बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन के अवसर पर आप द्वारा प्रेरणा दी गई थी कि बुंदेलखंड में स्थित महलों, किलों तथा स्मारकों को संरक्षित कर इन्हें पर्यटन की दृष्टि से विश्व पटल पर स्थापित कर इनका विकास कराया जाए।

पर्यटन मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री जी के निर्देशों के अनुपालन में राज्य सरकार के स्वामित्व में स्थित स्मारक स्थलों का संरक्षण, संवर्धन एवं विकास कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। फलस्वरूप बुंदेलखंड के स्थानीय निवासियों को जीवन यापन के लिए साधन उपलब्ध हो सकेंगे और ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण किया जा सकेगा। इस प्रकार बुंदेलखंड के ऐतिहासिक महत्व को विश्व पटल पर प्रमुख स्थान प्राप्त होगा। इसके लिए विशेषज्ञ संस्था पर्यावरण, नियोजन और प्रौद्योगिकी केन्द्र (सीईपीटी यूनिवर्सिटी) अहमदाबाद से सर्वेक्षण एवं अध्ययन कराया गया है। सेप्ट ने अपने अध्ययन रिपोर्ट में कुल 31 स्थलों को चयनित किया है।

पर्यटन मंत्री ने बताया कि इन चयनित स्थानों की संभवनाओं एवं उनके संरक्षण तथा विकास की रूपरेखा व कार्ययोजना तैयार की गई है। अध्ययन में पाया गया है कि इन 31 स्थानों में से 05 किले/स्मारक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के संरक्षण में हैं। इनके संरक्षण एवं जनोपयोगी बनाने के लिए यह आवश्यक है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित तालबेहट किला (जिला ललितपुर), कालिंजर किला (जनपद बांदा), मडफा (जिला चित्रकूट), बरूआ सागर झांसी के घाट की सीढ़ियों को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम 1958 के अंतर्गत प्रदेश सरकार को हस्तांतरित किया जाए।

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