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रोकथाम के लिए प्रभावी नीतियां और कार्यक्रम बनाना आवश्यक

भारत में आत्महत्या एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या

~by, Bhupendra Nirankari

Bijnor

हाल के वर्षों में भारत में आत्महत्या की प्रवृत्ति में वृद्धि एक गंभीर सामाजिक समस्या बनकर उभरी है। छोटी-छोटी बातों पर आवेश में आकर लोग अपनी जान दे रहे हैं, जिसका खामियाजा उनके पूरे परिवार को भुगतना पड़ता है। यह चिंता का विषय है कि मनुष्य जीवन के अनमोल होने के बावजूद, लोग इसे यूं ही गवा रहे हैं।
लेखक के अनुसार यह एक ऐसी समस्या है, जिस पर केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, जिला प्रशासन और न्यायपालिका को विशेष ध्यान देना चाहिए। इसके लिए मनोचिकित्सकों को आगे आने और सामाजिक संस्थाओं को जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया है कि स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित शिक्षा को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए, ताकि लोग जीवन की चुनौतियों का सामना करना सीखें।

लेखक का मानना है, यह हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम लोगों को जीवन के प्रति प्रेरित करें और उन्हें यह बताएं कि कोई भी समस्या इतनी बड़ी नहीं होती कि उसके लिए जीवन समाप्त कर दिया जाए।

भूपेंद्र निरंकारी

दरअसल, भारत में आत्महत्या के आँकड़े चिंताजनक हैं और समय के साथ इनमें बढ़ोतरी देखी गई है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की एक्सीडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड्स इन इंडिया (ADSI) रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में आत्महत्या के 1,70,924 मामले दर्ज किए गए थे, जो कि 2021 में दर्ज 1,64,033 मामलों से अधिक हैं। 📈

मुख्य आंकड़े और रुझान

~ कुल आत्महत्याएं: 2022 में भारत में 1,70,924 आत्महत्याएं हुईं, जो पिछले साल (2021) की तुलना में 4.2% की वृद्धि दर्शाती हैं।
~ आत्महत्या की दर: प्रति एक लाख आबादी पर आत्महत्या की दर 2021 में 12.0 से बढ़कर 2022 में 12.4 हो गई, जो अब तक की सबसे अधिक दर्ज की गई दर है।
~ लिंग-आधारित दर: आत्महत्या की घटनाओं में पुरुषों की संख्या महिलाओं से काफी अधिक है। 2023 में, प्रति 100,000 पर पुरुषों में आत्महत्या की दर 22.8 थी, जबकि महिलाओं में यह 5.9 थी।
~ सबसे अधिक मामले: महाराष्ट्र, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में आत्महत्या के सबसे अधिक मामले दर्ज किए गए हैं।
~ ग्रामीण बनाम शहरी क्षेत्र: शहरों में आत्महत्या की दर ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक है। 2022 में, भारत के 53 प्रमुख शहरों में आत्महत्या की कुल घटनाओं का 10% से अधिक हिस्सा था।

आत्महत्या के प्रमुख कारण

एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, आत्महत्या के कुछ प्रमुख कारण इस प्रकार हैं:
~ पारिवारिक समस्याएँ: 2022 में आत्महत्या के सबसे बड़े कारण के रूप में पारिवारिक समस्याएँ (54,127 मामले) सामने आईं।
~ बीमारी: 31,484 मामलों के साथ गंभीर बीमारियाँ दूसरा सबसे बड़ा कारण रहीं।
~ विवाह संबंधी मुद्दे: 15,793 मामलों में शादी से जुड़ी समस्याएं आत्महत्या का कारण बनीं।
~ नशे की लत: 11,634 मामले शराब या नशीले पदार्थों के दुरुपयोग से संबंधित थे।

संवेदनशील समूह

कुछ खास समूहों में आत्महत्या की प्रवृत्ति अधिक देखी गई है:
~ गृहिणियां: 2022 में कुल आत्महत्याओं में 15% गृहिणियां थीं।
~ छात्र: 2022 में 13,044 छात्रों ने आत्महत्या की, जो कुल आत्महत्याओं का 7.6% हिस्सा है। हालांकि, 2021 की तुलना में इसमें मामूली गिरावट आई है, लेकिन यह संख्या अभी भी चिंताजनक है।
~ किसान और दिहाड़ी मजदूर: किसानों और दिहाड़ी मजदूरों के बीच भी आत्महत्या की दर में वृद्धि देखी गई है।

इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि भारत में आत्महत्या एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है, जिसके पीछे कई सामाजिक, आर्थिक और मनोवैज्ञानिक कारक काम कर रहे हैं। इन आंकड़ों के आधार पर, आत्महत्या रोकथाम के लिए प्रभावी नीतियां और कार्यक्रम बनाना महत्वपूर्ण है।

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