जिला कारागार में धूमधाम से मनाया गया योग दिवस


आजादी का अमृत महोत्सव
जिला कारागार में धूमधाम से मनाया गया योग दिवस
बिजनौर। इंटरनेशनल नेचुरोपैथी ऑर्गनाइजेशन इकाई जनपद बिजनौर के द्वारा जिला कारागार में योग दिवस बंधुओं के बीच में धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जिला जेलर शैलेंद्र प्रताप सिंह ने कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्वलित करके किया तथा सभी कैदियों तथा कारागार के कर्मचारियों के साथ योग किया। इस अवसर पर नगर अध्यक्ष सोमदत्त शर्मा महामंत्री ओपी शर्मा महामंत्री सुरेंद्र पाल सिंह ने योग कराया। डॉक्टर नरेंद्र सिंह जिला अध्यक्ष इंटरनेशनल नेचरोपैथी ऑर्गेनाइजेशन एवं योगी अनंत योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान के एडिटर ने कहा के हम योग के माध्यम से अपने सभी पाप पापों को नष्ट कर सकते हैं तथा आने वाले जीवन में खुशियां ला सकते हैं। उन्होंने सभी कैदियों से निवेदन किया कि आगे के जीवन के लिए उन्हें अच्छे कर्म करने चाहिए तथा बुरे कर्मों का पश्चाताप करने के लिए दूसरों की सेवा करनी चाहिए। अपना ध्यान परमात्मा में दूसरों की सेवा में लगाना चाहिए डॉ सिंह ने कहा कि आज सभी कैदियों को सौगंध खानी हैं कि हम कोई ऐसा कार्य न करें जिससे हमें इस कारागार में आना पड़े। अच्छे कर्म करें राष्ट्र का निर्माण करें समाज का कल्याण करें। डॉ सिंह ने कहा कि हम योग और प्राकृतिक चिकित्सा से अपने जीवन को दूसरों के जीवन को सुखी बना सकते हैं। उन्होंने चक्रों के द्वारा शरीर का शोधन करने और शरीर को तप के माध्यम से शुद्ध करने का आह्वान किया। डॉ सिंह ने कहा कि हमारे शरीर में गंगा जमुना सरस्वती वह रही है, हमें उसी त्रिवेणी में स्नान करना है और सभी पापों से मुक्त होना है।

शनि जयंती पर कारागार में बंदियों ने किया यज्ञ

बन्दियों के नैतिक बौद्धिक और सामाजिक विकास में जुटे प्रभारी जेल अधीक्षक शैलेंद्र प्रताप सिंह

कारागार में निरुद्ध बंदियों द्वारा पूर्ण आस्था के साथ यज्ञ कार्य में लिया गया भाग

बिजनौर। शनि देव जयंती के शुभ अवसर पर जिला कारागार बिजनौर में पूजा अर्चना का कार्यक्रम आयोजित किया गया। कारागार में निरुद्ध बंदियों ने पूर्ण आस्था के साथ यज्ञ कार्य मे भाग लिया।

विदित हो कि जिला कारागार बिजनौर के प्रभारी जेल अधीक्षक शैलेंद्र प्रताप सिंह बंदियों के कल्याण हेतु विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन जेल में कराते रहते हैं ताकि बन्दियों का नैतिक बौद्धिक और सामाजिक विकास हो सके और बंदी सुधार गृह में रहते हुए अपने अंदर विकृतियों को दूर कर सकें।

इस अवसर पर गायत्री परिवार से पधारे परिव्राजक विजेंद्र सिंह राठी एवं केदारनाथ साहू ने पूजा अर्चना तथा यज्ञ कराया। कारागार में निरुद्ध बंदियों ने पूर्ण आस्था के साथ यज्ञ कार्य मे भाग लिया। इस शुभ अवसर पर आचार्यो द्वारा यज्ञ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, नैतिक प्रवर्चन किया गया। कार्यक्रम में जिला कारागार के अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा पूर्ण आस्था के साथ भाग लिया गया। इस अवसर पर जिला कारागार बिजनौर के प्रभारी जेल अधीक्षक शैलेंद्र प्रताप सिंह ने अपने संबोधन में यज्ञ को वातावरण को शुद्ध करने वाला अर्थात अशुद्धिनाशक एवं त्याग व समर्पण का प्रतीक बताया। साथ ही गायत्री परिवार संस्था के सदस्यों का आभार व्यक्त कर धन्यवाद ज्ञापित किया।

27 महीने बाद रिहा हुए आजम खां, रामपुर रवाना

लखनऊ (एजेंसी)। 27 महीने बाद शुक्रवार सुबह करीब 8 बजे सपा नेता आजम खां जेल से रिहा हो गए। इससे पहले ही दोनों बेटे अब्दुल्ला, अदीब आजम और शिवपाल सिंह यादव सीतापुर जेल के बाहर पहुंच गए थे, जो उन्हें लेकर रवाना हो गए। गौरतलब है कि 89वें मामले में उन्हें गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई थी, लेकिन रिहाई का फरमान जिला कारागार न पहुंच पाने से वह रिहा नहीं हो सके थे।

पहुंचे पूर्व सपा विधायक अनूप गुप्ता के घर

पहले से ही लगाए जा रहे कयास के अनुसार आजम खां जेल से रिहा होकर सपा के पूर्व विधायक अनूप गुप्ता के घर पहुंचे। अनूप गुप्ता को आजम के सुख दु:ख का साथी माना जाता है। वहीं आजम खां को हिदायत दी गई है कि वह मीडिया आदि से बात न करें, यही वजह रही कि उनकी कार का शीशा नीचे नहीं हुआ और उन्होंने किसी से भी बात नहीं की।

आजम ने खाए आलू के पराठे
पूर्व सपा विधायक अनूप गुप्ता ने पत्रकारों को बताया कि आजम खां ने नाश्ते में आलू के पराठे खाए। गुप्ता ने ये भी बताया कि अखिलेश यादव ने ही आजम खां का पूरा ध्यान रखने को कहा था। उनके परिवार की हर तरह से मदद करने को कहा था। मेरी तबीयत ठीक नहीं थी ऐसे में वह मुझे देखने आए थे। जब उनसे पूछा गया कि क्या आजम अखिलेश यादव से नाराज हैं तो उन्होंने कहा कि ऐसी कोई नाराजगी नहीं है।

अब्दुल्ला आजम बोले हमें न्याय मिला

अब्दुल्ला आजम ने सीतापुर में पत्रकारों से कहा, सुप्रीम कोर्ट ने हमें न्याय दिया। वह पिता को लेने अपने भाई अदीब आजम के साथ सीतापुर पहुंचे हैं।

चौकस रही जेल के बाहर सुरक्षा व्यवस्था

सपा नेता आजम खान की रिहाई से पहले सीतापुर जिला जेल के बाहर पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर आजम के बेटे अदीब ने कहा कि मैं शीर्ष अदालत के फैसले से बहुत खुश हूं। हम सीधे रामपुर जाएंगे। वहीं बताया गया है कि आजम की रिहाई के मद्देनजर सपा विधायक आशु मलिक भी सीतापुर जेल पहुंच गए।

FASTER सिस्टम से अब जमानत मिलने के बाद कैदियों की रिहाई प्रक्रिया होगी और तेज

नई दिल्ली (एजेंसी) देश में अब जमानत मिलने के बाद कैदियों की रिहाई प्रक्रिया और तेज हो जाएगी। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट मुख्य न्यायधीश एनवी रमणा आज फास्ट एंड सिक्योर ट्रांसमिशन आफ इलेक्ट्रानिक रिका‌र्ड्स को लॉन्च करेंगे। बताया गया है कि मुख्य न्यायाधीश FASTER सॉफ्टवेयर को वर्चुअली लॉन्च करेंगे। कार्यक्रम में CJI समेत सुप्रीम कोर्ट के अन्य जज और सभी हाईकोर्ट के जज शामिल होंगे। इस सिस्टम के आने के बाद कैदियों को जमानत के दस्तावेजों की हार्ड कॉपी के जेल प्रशासन तक पहुंचने का इंतजार नहीं करना होगा।

सितंबर 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला लेते हुए अपने आदेशों को संबंधित पक्षों तक पहुंचाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन के सिस्टम को लागू करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने आदेश देते समय जमानत मिलने के बावजूद कैदियों को जेल से रिहाई में होने वाली देरी पर चिंता जताई थी। FASTER के जरिए अदालत के फैसलों की तेजी से जानकारी मिल सकेगी और उस पर तेजी से आगे की कार्यवाही संभव हो सकेगी।

इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स या फास्टर का तेज और सुरक्षित ट्रांसमिशन जेलों में ड्यूटी-होल्डर्स को अंतरिम आदेशों, जमानत आदेशों, स्थगन आदेशों और कार्यवाही के रिकॉर्ड की ई-प्रमाणित प्रतियों को भेजने में मदद करेगा, ताकि एक सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन चैनल के माध्यम से अनुपालन और उचित निष्पादन हो सके। पिछले साल मुख्य न्यायाधीश एनवी रमणा, न्यायमूर्ति नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की तीन सदस्यीय पीठ ने राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों, जेल विभागों और अन्य संबंधित अधिकारियों को ई-प्रमाणित प्रतियों को स्वीकार करने के लिए जेलों में व्यवस्था करने का निर्देश दिया था।

लाल चौक पर झंडा फहराने जाते हुए थे गिरफ्तार

बिजनौर। वर्ष 1992 में लाल चौक पर तिरंगा फहराने पूरे देश से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के हजारों कार्यकर्ता भी ट्रेनों में सवार होकर जम्मू पहुंचे थे। जम्मू से सभी बसों आदि वाहनों से कश्मीर के लाल चौक की ओर रवाना हो गए। पुलिस ने सभी को उधमपुर में गिरफ्तार कर लिया। इन पंक्तियों का लेखक पत्रकार संजय सक्सेना (तत्कालीन नगर मंत्री अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद उरई जालौन), वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष भाजपा श्री स्वतंत्र देव सिंह, पूर्व जेल मंत्री हरिओम उपाध्याय, शिवेंद्र बुंदेला, ब्रजभूषण सिंह मुन्नू, विधायक मूलचंद निरंजन आदि भी गिरफ्तार होने वालों में शामिल थे। हम लोगों को एक डिग्री कालेज में तीन दिन तक हिरासत में रखा गया। तत्कालीन जम्मू कश्मीर सरकार ने मात्र गिनती के कुछ वरिष्ठ लोगों को हवाई रास्ते से पहुंचा कर तिरंगा फहराने की अनुमति दी थी। बाद में हम लोगों को कड़ी सुरक्षा के बीच ट्रेनों से दिल्ली के लिए रवाना कर दिया गया।

साल 1992 में मुरली मनोहर जोशी और नरेन्द्र मोदी श्रीनगर के लाल चौक पर झंडा फहराते हुए
1992 में मुरली मनोहर जोशी और नरेन्द्र मोदी श्रीनगर के लाल चौक पर झंडा फहराते हुए 

भारतीय जनता पार्टी ने कन्याकुमारी से शुरू एकता यात्रा का 26 जनवरी 1992 को लाल चौक पर तिरंगा फहराते हुए संपन्न करने का एलान किया था। कश्मीर में अलगाववादियों, आतंकियों और मुख्यधारा की सियासत करने वाले राजनीतिक दलों, राष्ट्रवादियों और सुरक्षाबलों के लिए पहली बार प्रतिष्ठा का सवाल बन गया था।

साल 1992 में मुरली मनोहर जोशी और नरेन्द्र मोदी श्रीनगर के लाल चौक पर झंडा फहराते हुए

आतंकी और अलगाववादियों ने खुलेआम एलान किया था कि तिरंगा नहीं फहराने दिया जाएगा। भाजपा की एकता यात्रा पूरी होने से पहले ही आतंकियों ने पुलिस मुख्यालय पर ग्रेनेड धमाका किया था, जिसमें तत्कालीन पुलिस महानिदेशक श्री जेएन सक्सेना जख्मी हुए थे। भाजपा के इस एलान के बाद पूरी रियासत में स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण हो गई थी।

साल 1992 में मुरली मनोहर जोशी और नरेन्द्र मोदी श्रीनगर के लाल चौक पर झंडा फहराते हुए

हवाई जहाज से पहुंचाया था श्रीनगर
हालात को भांपते हुए तत्कालीन प्रशासन ने श्री मुरली मनोहर जोशी, श्री नरेंद्र मोदी समेत भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं को हवाई जहाज के जरिए श्रीनगर पहुंचाया था। लाल चौक पूरी तरह से युद्घक्षेत्र बना हुआ था। चारों तरफ सिर्फ सुरक्षाकर्मी ही थे। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच लगभग 15 मिनट में ही श्री मुरली मनोहर जोशी व उनकी टीम के सदस्य के रूप में शामिल श्री नरेंद्र मोदी व अन्य ने तिरंगा फहराया। इस दौरान आतंकियों ने रॉकेट भी दागे जो निशाने पर नहीं लगे। इसके बाद सभी नेता सुरक्षित वापस लौट गए थे। 

साल 1992 में मुरली मनोहर जोशी और नरेन्द्र मोदी श्रीनगर के लाल चौक पर झंडा फहराते हुए

प्रधानमंत्री श्री मोदी उस वक्त जोशी जी की उस टीम के सदस्य थे, जो घनघोर आतंकवाद के उस दौर में श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराने पहुंची थी।

साल 1992 में मुरली मनोहर जोशी और नरेन्द्र मोदी श्रीनगर के लाल चौक पर झंडा फहराते हुए

कई जगह ट्रेन पटरियों पर विस्फोट- उस समय कश्मीर में स्थिति बेहद विस्फोटक थी। आतंकवादी रेल पटरियों को उड़ाने से पीछे नहीं हट रहे थे। जब हम लोग जम्मू स्टेशन पहुंचे तो पता चला कि हमारी ट्रेन पहुंचने के लगभग आधा घंटा पहले और बाद में भी आतंकवादियों ने कई जगह ट्रेन पटरियों पर विस्फोट किये।

(फोटो व कुछ तथ्य विभिन्न स्रोतों से लिये गए हैं)

पहल: कारागार बुलंदशहर के कर्मियों का प्रशिक्षण

कारागार बुलंदशहर के कर्मियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम

बुलंदशहर। देश की प्रथम महिला आईपीएस अधिकारी व वर्तमान में पुडुचेरी की उप राज्यपाल डा0 किरन बेदी को एशिया की सबसे बड़ी जेलों में से एक दिल्ली की तिहाड जेल में आईजी के रूप में कार्य करते हुए सुधार कार्यक्रम के लिए उन्हें विश्व प्रसिद्ध मेगसेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

मेगसेसे पुरस्कार में मिली धनराशि से डा. किरन बेदी ने बंदियों के सुधार व कारागार में विभिन्न सुधार कार्यक्रम चलाने हेतु वर्ष 1994 में स्वयंसेवी संगठन “INDIA VISION FOUNDATION ” की स्थापना की, जो विगत 25 वर्षों से कारागार सुधार कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।

उसी कड़ी में कारागार बुलंदशहर के कर्मियों के लिए एक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान कर्मियों को बंदियों के प्रति अधिक संवेदनशील बनने व बंदी सुधार कार्यक्रम आयोजित किए जाने पर जोर दिया गया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम को संगठन की निदेशक श्रीमती मोनिका धवन, तिहाड जेल के पूर्व विधि अधिकारी सुनील गुप्ता आदि ने सम्बोधित किया। कारागार बुलंदशहर से जेल अधीक्षक मिजाजी लाल सहित लगभग 30 अधिकारियों/कर्मचारियों ने भाग लिया।

जिला कारागार को ऑक्सीजन कंसंट्रेटर भेंट

बिजनौर। आज दिनांक 26.5.21 को जिलाधिकारी रमाकांत पाण्डेय के निर्देशानुसार ज्वाइंट मजिस्ट्रेट एसडीएम सदर विक्रमादित्य सिंह मलिक ने जिला कारागार बिजनौर को एक 10 LPM का ऑक्सीजन कंसंट्रेटर उपलब्ध करवाया। जेल सुपरिटेंडेंट व जेलर ने इन्हे रिसीव किया। विदित हो कि ज्वाइंट मजिस्ट्रेट विक्रमादित्य सिंह मलिक की पहल पर जिला बिजनौर को निजी संस्थानों ने कई मेडिकल उपकरण उपलब्ध करवाए हैं, जिन्हें जिला अस्पताल और अन्य सीएचसी में बांटा गया हैं।

बिजनौर जेल से छोड़े जाएंगे 20 कैदी और 160 बंदी

जिला कारागार से छोड़े जाएंगे 20 कैदी और 160 बंदी अंतरिम जमानत व 60 दिन की पैरोल की कवायद 

बिजनौर। कोरोना संक्रमण के बढ़़ते खतरे को देखते हुए शासन के निर्देश पर जिला कारागार से करीब 20 कैदी और 160 बंदी जिला कारागार से छोड़े जाएंगे।  इन बंदियों को अंतरिम जमानत और कैदियों को पैरोल पर छोड़ा जाएगा। इसके लिए लिस्ट तैयार की जा रही है। कोरोना महामारी के लगातार बढ़ते खतरे को देखते हुए शासन ने जेलों में बंदियों का बोझ कम करने के लिए निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत 60 दिन की पैरोल पर कैदियों को छोड़ा जाएगा। वहीं लगभग इतने ही दिनों की अंतरिम जमानत बंदियों को दी जानी है। विदित हो कि पिछले साल लॉकडाउन में भी बंदियों और कैदियों को छोड़ा गया था। उस वक्त बिजनौर जेल से 175 बंदी अंतरिम जमानत पर बाहर आए थे, जबकि 16 कैदियों को पैरोल मिली थी। उन्हें 28 दिन के लिए छोड़ा गया था लेकिन बाद में इस अवधि को बढ़ाते हुए 5 महीने कर दिया गया था। एक बार अब फिर से वही व्यवस्था की जा रही है। शासन के आदेश पर जिला कारागार प्रशासन ने करीब 160 बंदियों की लिस्ट तैयार की है। इन्हें अंतरिम जमानत के लिए जेल में लगने वाली कोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा। इसके अलावा 20 कैदियों की लिस्ट तैयार कर शासन को भेजी जानी है। इसके बाद ही इन्हें पैरोल पर रिहा कर दिया जाएगा।जेलर एसपी सिंह ने बताया कि करीब 160 बंदियों को शासन के निर्देश पर अंतरिम जमानत दिलाई जानी है। इसके लिए सूची तैयार हो चुकी है। 10 मई से 20 मई तक जज और मजिस्ट्रेट जेल में दौरा कर अंतरिम जमानत की प्रक्रिया को पूरा करेंगे। इनमें ऐसे लोगों को अंतरिम जमानत पर छोड़ा जाएगा जो कि 7 साल तक की सजा वाले केस में जेल में बंद हैं। शासन के दिशा निर्देश के चलते पैरोल पर छोडऩे के लिए सूची तैयार की जा रही है। कैदियों की सूची शासन को भेजी जाएगी। जबकि बंदियों को अंतरिम जमानत पर छोड़ा जाना है।

बाहुबली शहाबुद्दीन की कोरोना से मौत की खबर तिहाड़ जेल प्रशासन ने नकारी!

नई दिल्ली। बिहार के सिवान से सांसद रहे मोहम्मद शहाबुद्दीन की कोरोना वायरस के चलते मौत की खबर को तिहाड़ जेल प्रशासन ने अफवाह करार दिया है। सोशल मीडिया पर चल रही खबरों पर जेल प्रशासन ने कहा कि पूर्व सांसद की हालत गंभीर है, उनका इलाज दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में चल रहा है। शनिवार सुबह से ही बिहार के बाहुबली नेता की कोरोना के कारण मौत की खबरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही थीं। वहीं समाचार एजेंसी ANI ने अपने पूर्व के ट्वीट को डिलीट करते हुए कहा कि सूचनाएं पारिवारिक व पार्टी सूत्रों पर आधारित थीं। वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में अभी भी मौत का दावा किया जा रहा है।

Bahubali Shahabuddin appeals for release on parole on father's death –  Granthshala News

दिल्ली की तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे शहाबुद्दीन का दिल्ली के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने कोरोना से संक्रमित होने के बाद मोहम्मद शहाबुद्दीन को चिकित्सीय निगरानी और समुचित इलाज मुहैया कराने के लिए दिल्ली सरकार और तिहाड़ जेल प्रशासन को निर्देश दिया था। पिछले मंगलवार की रात उन्हें कोरोना पॉजिटिव होने के बाद पंडित दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

दो बार विधानसभा सदस्य और चार बार सांसद रह चुके शहाबुद्दीन के खिलाफ तीन दर्जन से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। तिहाड़ जेल में शिफ्ट किए जाने से पहले उसने बिहार की भागलपुर जेल और सीवान जेल में भी काफी वक्त काटा है। साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने उसे सीवान से दिल्ली की तिहाड़ जेल ट्रांसफर करने का आदेश दिया था।

शहाबुद्दीन का नाम सबसे अधिक सुर्खियों में सबसे अधिक तब आया था, जब उसने दो भाइयों को तेजाब से नहला कर जिंदा जला दिया था। वैसे, इससे पहले लेफ्ट और बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ खूनी मारपीट के चलते वह चर्चा में आया था। यह बात अस्सी के दशक के आसपास की है। आलम यह था कि उसका नाम ही शाबू-AK 47 पड़ गया था। 1986 में जिस हुसैनगंज थाने में इसके खिलाफ पहला केस हुआ था, वहीं यह ए कैटेगरी का हिस्ट्रीशीटर (कभी न सुधरने वाला अपराधी) था।

15 फरवरी 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें बिहार की सीवान जेल से तिहाड़ लाने का आदेश दिया था। जेल के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया कि तिहाड़ में तीन ऐसे कैदी (शहाबुद्दीन, छोटा राजन और नीरज बवाना) हैं जिनको अलग-अलग बैरकों में अकेला रखा गया है। इनका किसी से भी मिलना-जुलना नहीं होता है। पिछले 20-25 दिनों से इनके परिजनों को भी इन कैदियों से मिलने नहीं दिया जा रहा है। इन सबके बावजूद शहाबुद्दीन कैसे कोरोना संक्रमित हो गया, ये चिंता करने की बात है।

रिटर्न्स ऑफ मुख्तार, बदले बदले नजर आएंगे सरकार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की बांदा जेल की बैरक नंबर-15 में मुख्तार अंसारी की जिंदगी बिल्‍कुल किसी आम कैदी की तरह होगी। आपराधिक मामलों में बंद होने के कारण उन्हें राजनीतिक बंदी नहीं माना जाएगा। एक समय था जब इसी जेल में मुख्‍तार का सिक्‍का चलता था। वह जब पहली बार बांदा जेल में बंद थे तो दूसरे अपराधी उनके नाम से थर-थर कांपते थे। मुख्‍तार के पास वर्षों के जेल जीवन का अनुभव है। जेलों में उनका दरबार लगता रहा है लेकिन इस बाद मुख्‍तार को वही सुविधाएं मिलेंगी जो जेल में किसी भी दूसरे कैदी को मिलती हैं।

इसके पहले मुख्‍तार को 2017 में बांदा जेल की बैरक नंबर-15 में ही रखा गया था। इस बार एसी और निजी जेनरेटर जैसी विशेष सुविधाएं नदारद है। इस माफिया को शायद पहली बार ऐसी कड़ी निगरानी का सामना करना पड़ रहा है। मुख्‍तार अंसारी पहली बार कानून के सामने इस कदर लाचार हुए हैं। इसके पहले तक उनका रसूख और रुपए जेल के बाहर की तरह जेल के अंदर भी उनका साम्राज्‍य फीका नहीं पड़ने देते थे।

राजा भैया और अतीक अहमद भी यहां रह चुके हैं बंद-
मुख्‍तार के अलावा बांदा जेल में यूपी के कुछ अन्‍य बाहुबली राजा भैया और अतीक अहमद भी बंद रह चुके हैं। उनके अलावा शीलू बलात्कार कांड का आरोपी नरैनी से बसपा विधायक पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी, नोएडा का गैंगस्टर अनिल दुजाना ने भी यहां सजा काटी।

बांदा जेल में सुरक्षा बढ़ाई गई
मुख्‍तार रिटर्न को लेकर बांदा जेल में सुरक्षा व्‍यवस्‍था पहले से काफी कड़ी कर दी गई है। जेल के बाहर अतिरिक्‍त पुलिस बल तैनात किया गया है। जेल में अब जो लोग भी दाखिल किए जाएंगे, उनकी पूरी पड़ताल की जाएगी। बिना जांच-पड़ताल के जेल स्‍टॉफ को भी इंट्री न दी जाए। जेल में कौन कितनी बार आया इसका हिसाब रखा जाएगा। बकायदा रजिस्‍टर मेंटेन किया जाएगा।

रोपड़ से मुख्तार अंसारी को लेकर निकलने वाली है UP पुलिस

इन्हीं वाहनों में पंजाब के लिए रवाना हुई पुलिस

डेढ़ सौ पुलिस कर्मियों में एक डिप्टी एसपी, दो इंस्पेक्टर और छह दरोगा

10 वाहनों में भेजी गई है पुलिस टीम, पीएसी की बटालियन भी शामिल

लखनऊ। मऊ से बाहुबली विधायक और गैंगस्टर मुख्तार अंसारी को बांदा जेल लाने के लिए पुलिस टीम पंजाब के रोपड़ में मौजूद है।डेढ़ सौ पुलिस कर्मियों की टीम में एक डिप्टी एसपी, दो इंस्पेक्टर और छह दरोगा के अलावा एक कंपनी पीएसी शामिल हैं। आईजी के सत्यनारायणा ने सोमवार को पुलिस टीम को पंजाब के लिए रवाना किया था। 10 वाहनों में एक एंबुलेंस भी शामिल है। टीम के बुधवार सुबह तक बांदा पहुंचने की संभावना है।

वज्र वाहन को चेक करते पुलिस कर्मी

आईजी के. सत्यनारायणा ने बताया था कि पंजाब के रोपड़ जेल से अंसारी को बांदा लाने के लिए एक पुलिस टीम बनाई जाएगी और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के साथ ही पुलिस टीम को पंजाब रवाना किया जाएगा। आईजी की निगरानी में गठित पुलिस टीम में एक डिप्टी एसपी, दो इंस्पेक्टर, 6 दरोगा, 40 कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल व बाकी अन्य जवान शामिल हैं। आईजी ने पुलिस टीम को वज्र वाहन समेत दर्जन भर गाड़ियों के साथ पंजाब के लिए रवाना किया। पंजाब के रोपड़ में पुलिस टीम को पुलिस लाइन में ठहराया गया। कागजी औपचारिताएं पूरी कराने के बाद पुलिस टीम गैंगस्टर मुख्तार अंसारी को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बांदा जेल लाएगी। मुख्तार अंसारी के वापसी के रूट को लेकर गोपनीयता बरती जा रही है। रास्ते मे पड़ने वाले सभी जिलों को अलर्ट किया गया है। रोपड़ की रूपनगर जेल में बंद मुख्तार अंसारी को 8 अप्रैल से पहले पंजाब पुलिस को यूपी पुलिस के हवाले करना है। इस बीच मंगलवार सुबह यूपी लाने से पहले मुख्तार का कोरोना टेस्ट कराया गया है। अभी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

यह एंबुलेंस भी वाहनों की फ्लीट में हैं शामिल

मुख्तार अंसारी को बांदा जेल में शिफ्ट किए जाने को लेकर पिछले एक सप्ताह से माथापच्ची की जा रही थी। कारागार डीआईजी ने मंडल कारागार की व्यवस्थाओं का जायजा लिया था। इसके साथ ही रविवार को आईजी के. सत्यनारायणा, जिलाधिकारी आनंद कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ शंकर मीणा और सीएमओ ने निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कारागार की सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए थे। सीसीटीवी कैमरों के साथ ही पीएसी और पुलिस का भी सख्त पहरा रहेगा। 

मुख्तार अंसारी (फाइल फोटो)
मुख्तार अंसारी का फाइल फोटो

मुख्तार के खिलाफ UP में दर्ज हैं 52 मुकदमे- यूपी नंबर प्लेट की एंबुलेंस में मुख्तार अंसारी को पंजाब के मोहाली कोर्ट तक लाए जाने के मामले में भी यूपी के बाराबंकी में मुख्तार के खिलाफ केस दर्ज हुआ है और यूपी के मऊ से पहली गिरफ्तारी भी हो गई है। उत्तर प्रदेश में मुख्तार पर अब तक 52 मुकदमे दर्ज हैं, अंसारी गैंग के 96 सदस्य गिरफ्तार हुए हैं और उसकी 192 करोड़ की ज्यादा की संपत्तियों को जब्त करने और गिराने की कार्रवाई भी हुई है।

मुख्तार के भाई अफजाल जाएंगे कोर्ट- मुख्तार के भाई और गाजीपुर के बीएसपी सांसद अफजाल अंसारी ने कहा है कि उत्तर प्रदेश की जेल में मुख्तार के खिलाफ साजिश रची जा सकती है। अफजाल अंसारी ने मुख्तार की सुरक्षा के लिए कोर्ट जाने की बात भी कही है।

सजायाफ्ता मुजरिम ने अस्थाई जेल में की आत्महत्या



सजायाफ्ता मुजरिम ने अस्थाई जेल में की आत्महत्या।

दो फरवरी को सेंट्रल जेल बरेली से दीवार कूदकर भागा था नरपाल।

फरार नरपाल को दो फरवरी की शाम को किया था गिरफ्तार।

अस्थाई जेल के बाथरूम में लोअर से की खुदकुशी।

थाना कोतवाली शहर बिजनौर के आश्रय ग्रह शेल्टर होम का मामला।

बिजनौर। बरेली जेल से फरार होकर बिजनौर पुलिस के हत्थे चढ़े नरपाल ने नुमाइश ग्राउंड स्थित अस्थाई जेल में आत्महत्या कर ली। रात के अंधेरे में जेल के बाथरूम में उसने अपने लोअर से फांसी लगा ली। घटना से पुलिस जेल प्रशासन में हड़कम्प मच गया।

थाना किरतपुर के ग्राम मौज्जमपुर रायपुर निवासी नरपाल उर्फ सोनू पुत्र रमेश चंद पाल  14 फरवरी 2009 ने किरतपुर थाना क्षेत्र की नाबालिग बालिका के साथ दुष्कर्म किया था। थाना किरतपुर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था। 14 सितम्बर 2009 को न्यायालय फास्ट ट्रैक कोर्ट-1 द्वारा उसे आजीवन कारावास व 15,000/रुपए के अर्थदण्ड की सज़ा सुनाई गई। नरपाल  के विरूद्ध एनएसए की कार्यवाही भी की गयी थी। बाद में उसे केन्द्रीय कारागार जनपद बरेली शिफ्ट कर दिया गया था। एक फरवरी 2021 को मौका देख नरपाल सुबह सवेरे बरेली जेल से फरार हो गया था। आईजी बरेली जोन ने नरपाल की जल्द गिरफ्तारी के लिये 50,000/रुपए का इनाम भी घोषित किया था। 02 फरवरी 2021 को थाना किरतपुर पुलिस ने नरपाल को गिरफ्तार कर लिया। आवश्यक विधिक कार्यवाही करते हुए उसे बिजनौर में नुमाइश ग्राउंड के पास बने शेल्टर होम/अस्थाई जेल में दाखिल किया गया था। पुलिस सूत्रों के अनुसार नरपाल ने बीती रात बाथरूम के रोशनदान में लोअर बांधकर फांसी लगा ली। गुरुवार सुबह आत्महत्या की जानकारी मिलते ही पुलिस और जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

बरेली जेल से फरार रेप, मर्डर का आरोपी बिजनौर पुलिस ने पकड़ा


बिजनौर। बरेली सेंट्रल जेल में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहा रेप व मर्डर केस का फरार आरोपी बिजनौर जिले के किरतपुर में पकड़ा गया है। उसके खिलाफ बरेली के थाना इज्जतनगर में रिपोर्ट दर्ज है। इस मामले में जेल प्रशासन चीफ वार्डर, हेड वार्डर और बंदी रक्षक को सस्पेंड कर चुका है। आईजी बरेली रेंज की ओर से कैदी की गिरफ्तारी पर घोषित ₹50 हजार का इनाम बिजनौर पुलिस को मिलेगा।

सूत्रों का कहना है कि बरेली जेल से फरार नरपाल अपने गांव जा रहा था। शक होने पर किरतपुर पुलिस व स्वाट टीम ने ग्राम रायपुर मौजमपुर तिराहे से गिरफ्तार कर लिया गया। तलाशी लेने पर उसके पास से 315 बोर का तमंचा व दो जिंदा कारतूस बरामद हुए। बरेली पुलिस ने नरपाल के पकड़े जाने से राहत की सांस ली है। हालांकि आईजी बरेली रेंज इससे पहले कैदी की गिरफ्तारी पर पचास हजार का इनाम घोषित कर चुके थे, इसलिए यह राशि बिजनौर पुलिस को मिलेगी।

किरतपुर थाना क्षेत्र के ग्राम रायपुर निवासी नरपाल उर्फ सोनू (36 वर्ष) पुत्र रमेश चंद्र को 376/302 रेप व मर्डर केस में वर्ष 2010 में आजीवन कारावास की सजा हुई। 28 अप्रैल, 2012 को उसे बिजनौर जिला जेल से बरेली सेंट्रल जेल भेजा गया था। वह जेल में नंबरदार था, लिहाजा उसे सभी बैरकों और परिसर में आने-जाने की छूट थी। रविवार रात दो बजे से सोमवार सुबह छह बजे के बीच किसी समय घने कोहरे में सरिया के सहारे वह दीवार फांदकर फरार हो गया। जेल प्रशासन को सोमवार सुबह छह बजे गिनती के दौरान उसके फरार होने की जानकारी मिली। इस पर जेल में हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंचे वरिष्ठ जेल अधीक्षक आरएन पांडेय ने डिप्टी जेलर, सभी बंदी रक्षक और जेल की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों को बुलाकर पूरे जेल में उसकी तलाश कराई। इसके बाद मामले की जानकारी एसएसपी रोहित सिंह सजवाण को दी। जिले में बैरियर लगाकर चेकिंग कराई गई। वाहनों की भी तलाशी ली गई लेकिन नरपाल का कोई पता नहीं चला। थाना इज्जतनगर में वरिष्ठ जेल अधीक्षक आरएन पांडेय की ओर नरपाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई।

पुलिस के मुताबिक सेंट्रल जेल में इन दिनों निर्माण कार्य चल रहा है। परिसर में काफी निर्माण सामग्री पड़ी है, लेकिन जेल की 20 फुट ऊंची दीवार पर चढ़ना संभव नहीं था। नंबरदार होने के कारण नरपाल को हर जगह आने-जाने की छूट थी। इसी का फायदा उठाते हुए उसने सरिया में एक गोल फंदा और ऊपर अंकड़ी बनाकर दीवार में फंसा दी। इसी के सहारे कोहरे का फायदा उठाकर दीवार पर चढ़कर वह दूसरी ओर फांदकर भाग निकला। हालांकि इस कार्य में उसे समय भी लगा होगा लेकिन कोहरे के चलते उस पर किसी की नजर नहीं पड़ी।

तैनाती को तरस रहे प्रोन्नत जेलर, पांच को दे दीं मलाईदार जेल !

प्रोन्नत जेलर को तैनाती नहीं, पांच किए अटैच !

लखनऊ। बाप बड़ा ना भईया, सबसे बड़ा रुपैया….! जेल मुख्यालय के अफसरों पर ये कहावत एकदम फिट बैठती है। मुख्यालय अफसरों ने प्रोन्नति पाये जेलरों की तैनाती तो की नहीं, किन्तु कमाई के फेर में पांच जेलर को इधर-उधर अटैच कर दिया। मोटी रकम देने वाले अधिकारियों को कमाई वाली जेलों पर, तो कम देने वालों को कम कमाऊ जेल पर अटैच कर दिया गया। यह मामला विभागीय अफसरों में चर्चा का विषय बना हुआ है। चर्चा है कि एक जेल अधिकारी जाने से पहले कमाई का कोई अवसर छोड़ना नहीं चाहता!

विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जेल मुख्यालय से गुरुवार को पांच जेलर का विभिन्न जेल पर अटैचमेन्ट किया गया। इसमें मुरादाबाद जेल में तैनात जेलर मनीष कुमार को मेरठ, अंजनी गुप्ता को बरेली से बलिया, नागेश को बुलंदशहर से मऊ, राजेश वर्मा को बाराबंकी से ज्ञानपुर के साथ विजय गुप्ता को रामपुर से मुरादाबाद जेल में अटैच किया गया है। सूत्रों का कहना है कि मोटी रकम देने वाले मनीष व विजय को अधिक कमाऊ मानी जाने वाली जेल पर, तो वहीं कम देने वाले अंजनी, नागेश व राजेश को कमाऊ से कम कमाई वाली जेल पर भेज दिया गया। बताया गया है कि जेलर मनीष कुमार की मुख्यालय में अच्छी सेटिंग-गेटिंग है। इस कारण इनका अधिकांश समय पश्चिम उत्तर प्रदेश की जेल में ही रहा है। वह तीन बार मुरादाबाद जेल के साथ अलीगढ, गाज़ियाबाद, एटा, शाहजहांपुर में तैनात रहे।

गौरतलब है कि पिछले दिनों विभाग में 15 डिप्टी जेलर को जेलर पद पर प्रोन्नत किया गया। इन जेलर को प्रोन्नत हुए करीब दो माह होने को है, किंतु आज तक इनकी तैनाती नहीं की गई है। आलम यह है कि कई जेल पर जेलर नहीं है, तो कहीं आधा दर्जन की तैनाती है। आरोप है कि यह अव्यवस्था जेल मुख्यालय व शासन को दिखाई नहीं पड़ रही है।

इस संबंध में असलियत जानने के लिए एआईजी शरद से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। एक अन्य अधिकारी ने सिर्फ इतना ही कहा कि यह रूटीन प्रक्रिया है, अटैचमेन्ट होते रहते हैं। नए  जेलर की तैनाती के सवाल पर उन्होंने फ़ोन ही काट दिया।
-राकेश यादव (INN)