खुशनसीबी: मौला अली की दरगाह ईरान के बाद केवल हिंदुस्तान में

खुशनसीबी: मौला अली की दरगाह ईरान के बाद केवल हिंदुस्तान में। नवनियुक्त अध्यक्ष इरम अली के पहली बार दरगाह आगमन पर लोगों ने किया गर्मजोशी के साथ स्वागत। सिर्फ़ शिया ही नहीं बल्कि हर वर्ग के लोग आते हैं अपनी मुरादें लेकर।

बिजनौर। विश्व विख्यात दरगाह ए आलिया नजफे हिन्द जोगीपुरा के नवनियुक्त अध्यक्ष इरम अली के पहली बार दरगाह आगमन पर लोगों ने गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। इस दौरान बिजनौर सहित कई जिलों के लोग उनके स्वागत समारोह में शिरकत करने के लिए दरगाह ए आलिया पहुंचे।

दरगाह ए आलिया नजफे हिन्द जोगीपुरा की इंतेज़ामिया कमेटी अभी हाल ही में गठित हुई है। कमेटी में मुज़फ्फरनगर नगर निवासी इरम अली को अध्यक्ष बनाया गया है। इनके अलावा नौगावा निवासी मोहम्मद अब्बास को सचिव और कोतवाली देहात के मौलाना क़सीम को उप सचिव नियुक्त किया गया है। दरगाह की नव गठित प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष पहली बार जब दरगाह पहुंचे तो लोगों ने उनका गर्मजोशी के साथ स्वागत किया।

इस अवसर पर दरगाह के शमसुल हसन हाल में एक गोष्ठी का आयोजन हदीसे किसा के साथ किया गया। इसका संचालन कमेटी के सदस्य विक़ार आब्दी ने किया। इस अवसर पर कमेटी के अध्यक्ष ने कहा कि दरगाह ए आलिया; इमाम हज़रत अली की दुनिया में दूसरे नंबर की दरगाह है। हज़रत अली की असल रोज़ा नजफ ईरान में है। हम लोगों की खुशनसीबी है कि उसके बाद मौला अली की दरगाह केवल हिंदुस्तान में है, जिसे दरगाह ए आलिया नजफे हिन्द के नाम से पूरी दुनिया में जाना जाता है। जो लोग नजफ ईरान नहीं जा सकते, उनके लिए दरगाह ए आलिया नजफे हिन्द है। इस दर पर सिर्फ़ शिया ही नहीं बल्कि हर वर्ग के लोग अपनी मुरादें लेकर आते हैं और उनकी मुरादें पूरी भी होती हैं। उन्होंने आगे कहा कि दरगाह पर आने वाले हर ज़ायरीन, श्रद्धालु को पूरी सुविधाएं मिलनी चाहिए। ये हम सबकी कोशिश होगी कि आने वाले किसी भी आदमी को कोई परेशानी न होने पाए। उन्होंने ये भी कहा कि बहुत जल्द इंतेज़ामिया कमेटी का विस्तार किया जायेगा, जिसमें काम करने वाले लोगों को सदस्य बनाया जाएगा। दरगाह के बिजली का बिल निपटाने का काम कमेटी के सदस्यों से बातचीत करने के बाद किया जाएगा। उन्होंने ये भी कहा कि दरगाह की कमेटी में जो पदाधिकारी व सदस्य के अलावा दरगाह के सभी कर्मचारी और आने वाले तमाम लोग अपने आप को दरगाह ए आलिया का जिम्मेदार समझें।

धूम्रपान करने वालों के आसपास रहने से दाद, खाज होने का खतरा

नई दिल्ली (एजेंसी)। धूम्रपान करने वालों के आसपास रहना जोखिम भरा हो सकता है। एक हालिया शोध के मुताबिक, ऐसे लोगों के आसपास रहने वालों को त्वचा से जुड़ी बीमारियां, जैसे दाद, खाज और सोराइसिस होने का खतरा ज्यादा होता है।

कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इस पर शोध किया कि धूम्रपान करने वालों से धूम्रपान न करने वाले पर क्या असर पड़ता है। इस आधार पर निष्कर्ष निकाला कि थर्डहैंड स्मोक के मानव त्वचा के संपर्क में आने से त्वचा संबंधी बीमारियां शुरू हो जाती हैं। थर्ड हैंड स्मोक सिगरेट पीने के बाद बचे हुए रसायन को कहते हैं। ये हानिकारक रसायन उस जगह की दीवारों, फर्श और धूल आदि से चिपक जाते हैं, जहां धूम्रपान किया गया होता है। यह इनडोर सतहों पर लंबे समय तक रह सकता है।

द लैंसेट फैमिली ऑफ जर्नल्स के ई- बायोमेडिसिन में प्रकाशित यह अध्ययन थर्ड हैंड स्मोक (टीएसएस) के संपर्क में आने वाले मनुष्यों पर किया जाने वाला पहला अध्ययन है। अध्ययन से जुड़े शेन सकामाकी चिंग ने कहा, किसी और के धूम्रपान करने से निकलने वाला धुआं मानव त्वचा के संपर्क में आता है और यह दाद, खाज और सोराइसिस का जोखिम बढ़ा देता है।

स्वस्थ लोगों पर अध्ययन: शोध में 22 से 45 साल के 10 लोगों को शामिल किया गया। इनमें से कोई भी धूम्रपान नहीं करता था। तीन घंटे के लिए हर व्यक्ति को धूम्रपान से निकले प्रदूषण वाली एक शर्ट पहनाकर ट्रेडमिल पर 15 मिनट के लिए वॉक कराई गई। पसीने से शरीर में यह प्रदूषण और जल्दी प्रवेश करता है। इसके बाद प्रतिभागियों के रक्त और मूत्र के नमूने लिए गए। इससे उनके शरीर के प्रोटीन समेत अन्य कारकों में बदलाव की जांच की गई। वैज्ञानिकों ने पाया कि प्रदूषण के संपर्क में आने से लोगों के डीएनए, लिपिड और प्रोटीन को नुकसान पहुंचा। ये सिगरेट पीने वाले – लोगों को होने वाले नुकसान जैसा था। इनमें त्वचा संबंधी परेशानी देखी गई।

कैंसर, हृदय रोग भी संभव: थर्ड हैंड स्मोक श्वसन तंत्र में इपीथिलियल कोशिकाओं को भी नुकसान पहुंचा सकता है। ऑक्सीडेटिव बायोमार्कर बढ़ने से कैंसर, हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों की आशंका भी बढ़ जाती है। अगर कोई एक ऐसे कमरे में बैठा है, जिसमें किसी ने धूम्रपान नहीं किया तो भी व व्यक्ति सिगरेट के धुंए के संपर्क में धुए आ सकता है।

कार खरीदने में भी जोखिम: शोध प्रमुख प्रो. टैलबोट ने कहा कि अगर धूम्रपान करने वाले की कार खरीदते हैं, तो खुद को जोखिम में डाल रहे हैं। अगर कैसीनो में जाते हैं, तो चाहें आप धूम्रपान करें या नहीं लेकिन आप टीएचएस के शिकार हो रहे हैं। दरअसल, सिगरेट में 4000 से ज्यादा रसायन होते हैं। इन्हें आसानी से नहीं हटाया जा सकता है।

अब बच्चों से दूर ही रखें जॉनसन बेबी पाउडर!

जॉनसन बेबी पाउडर का लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द

मुंबई। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के माध्यम से बहुराष्ट्रीय कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निर्मित ‘जॉनसन बेबी पाउडर’ कॉस्मेटिक्स का लाइसेंस 15 सितंबर, 2022 से स्थायी रूप से रद्द कर दिया गया है।


जानकारी के अनुसार खाद्य एवं औषधि प्रशासन के नासिक और पुणे के औषधि निरीक्षकों ने परीक्षण के लिए नमूने लिए थे। सरकारी विश्लेषक, ड्रग कंट्रोल लेबोरेटरी, मुंबई द्वारा बेबी पाउडर उत्पाद को घटिया घोषित किए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई।


नवजात शिशुओं और बच्चों की त्वचा को नुकसान पहुंचने की संभावना: ‘जॉनसन बेबी पाउडर’ मुख्य रूप से नवजात शिशुओं के लिए प्रयोग किया जाता है। उपरोक्त निर्माण विधि में दोषों के कारण उक्त उत्पाद का पीएच प्रमाणित मानक के अनुसार नहीं है। इसके इस्तेमाल से नवजात शिशुओं और बच्चों की त्वचा को नुकसान पहुंचने की संभावना रहती है, इसलिए जनहित में इस उत्पादन को जारी रखना उचित नहीं होगा, इसलिए मुलुंड, मुंबई में विनिर्माण संयंत्र का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है।


कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था कि उपरोक्त असत्यापित घोषित पैटर्न के अनुसार संगठन का लाइसेंस रद्द क्यों नहीं किया जाना चाहिए? या उक्त लाइसेंस के तहत स्वीकृत सौंदर्य प्रसाधनों के निर्माण लाइसेंस को निलंबित क्यों नहीं करते? इस संबंध में संगठन को इस उत्पाद के स्टॉक को बाजार से वापस बुलाने का भी निर्देश दिया गया था। चूंकि उपरोक्त नमूने के लिए प्राप्त सरकारी विश्लेषक की रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया गया था, संस्थान ने दवा प्रयोगशाला द्वारा पुन: परीक्षण के लिए नासिक और पुणे की अदालतों में आवेदन किया था।


…और तब की गई कार्रवाई: खाद्य एवं औषधि प्रशासन, मुंबई के संयुक्त आयुक्त गौरी शंकर ब्याले के अनुसार, केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला, कोलकाता के निदेशक ने केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला से उक्त पुन: जांच के नमूनों का परीक्षण करने के बाद रिपोर्ट को असत्यापित घोषित करने के बाद लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई की गई।

आज है विश्व संगीत दिवस

शायद ही कोई ऐसा इंसान हो जिसे संगीत पसंद ना हो। संगीत ऐसी चीज है, जो लोगों के दिल और दिमाग पर गहरा प्रभाव डालती है। इसी वजह से दुनिया भर के गायकों और संगीतकारों को म्यूजिक के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सम्मान देने के उद्देश्य से आज (21 जून) विश्व भर में ‘वर्ल्ड म्यूजिक डे’ सेलिब्रेट किया जाता है। इस दिन कई देशों में संगीत प्रोग्राम आयोजित किए जाते हैं।

हर साल 21 जून को मनाए जाने वाले विश्व संगीत दिवस की एक खास थीम होती है। संगीत दिवस 2022 की थीम ‘चौराहों पर संगीत’ (Music At Intersections) है। इसी थीम पर इस साल के सभी कार्यक्रम आयोजित होंगे। संगीत दिवस का उद्देश्य दुनियाभर के गायकों और संगीतकारों का संगीत के क्षेत्र में योगदान को सम्मान देना है।

फ्रांस में 1982 में जब पहला संगीत दिवस मनाया गया तो इसे 32 से ज्यादा देशों का समर्थन मिला। इस दौरान कई कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। उसके बाद से अब भारत समेत इटली, ग्रीस, रूस, अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, पेरू, ब्राजील, इक्वाडोर, मैक्सिको, कनाडा, जापान, चीन, मलेशिया और दुनिया के तमाम देश विश्व संगीत दिवस हर साल 21 जून को मनाते हैं।

भारत से पहले कई देशों में भी लागू है सेना में “टूर ऑफ ड्यूटी” सिस्टम, अग्निवीरों के लिए CAPFs और असम राइफल्स में भर्ती के लिए आरक्षण

भारत से पहले निम्नलिखित देशों में भी लागू है – सेना में “टूर ऑफ ड्यूटी” सिस्टम, लेकिन इन देशों में अनिवार्य है, भारत में इसे स्वेच्छिक रखा गया है

अग्निवीरों के लिए CAPFs और असम राइफल्स में भर्ती के लिए आरक्षण

नई दिल्ली: अग्निपथ योजना (Agnipath Scheme) के तहत भर्ती होने वाले युवाओं की अधिकतम उम्र की सीमा को 21 साल से बढ़ाकर 23 वर्ष करने के फैसले के एक दिन बाद केंद्र सरकार ने शनिवार को एक और बड़ा एलान किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (HMO India) ने अपने नए आदेश में अग्निवीरों के लिए CAPFs और असम राइफल्स में भर्ती के लिए 10% रिक्तियों को आरक्षित करने का निर्णय लिया है। दो बलों में भर्ती के लिए अग्निवीरों को ऊपरी आयु सीमा से 3 वर्ष की छूट दी गई। अग्निवीर के पहले बैच के लिए आयु में अधिकतम आयु सीमा से 5 वर्ष की छूट होगी। गृह मंत्रालय ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी।

इजरायल : टूर ऑफ ड्यूटी के मामले में इजरायल सबसे सख्त देश है, यहां इजरायली रक्षा बल में पुरुषों को तीन साल और महिलाओं को दो साल अनिवार्य सेवा देनी होती है. कुछ धार्मिक और स्वास्थ्य के आधार पर तथा गर्भवती महिलाओं को इससे छूट दी जाती है. इसे सेवा और सम्मान का जरिया माना जाता है.

चीन : चीन में आम नागरिकों को जबरन सेना में भर्ती किया जाता है. चीन में हर नागरिक के लिए 18 से 22 वर्ष की आयु के बीच दो साल की सैन्य सेवाएं देना अनिवार्य हैं. यानी चीन का कोई युवा चाहता हो या ना चाहता हो, उसे सेना में भर्ती होना ही पड़ता है. चीन की सेना में करीब 35 प्रतिशत ऐसे युवा हैं, जिन्हें मजबूर करके सैनिक बनाया जाता है.

नार्वे : नार्वे में सभी पुरुषों और महिलाओं के लिए टूर ऑफ ड्यूटी अनिवार्य है. यहां 19 से 44 साल की उम्र के बीच कभी भी पंजीकरण कराया जा सकता है. महिलाओं के लिए ये नियम 2016 में अनिवार्य किया गया, ताकि उन्हें भी पुरुषों के बराबर हक मिल सके.

स्विटजरलैंड : यहां पर 18 से 34 साल तक युवाओं के लिए सेना में ड्यूटी देना अनिवार्य है, इसके लिए इन्हें 21 सप्ताह की बेसिक ट्रेनिंग दी जाती है. महिलाओं के लिए ये अनिवार्य नहीं है, यह उनकी स्वेच्छा पर निर्भर करता है.

तुर्की : यहां वे युवा जो 20 साल से ज्यादा उम्र के हैं उनके लिए मिलिट्री सर्विस अनिवार्य है. यहां उन लोगों को छूट मिल सकती है जो तीन साल या उससे अधिक समय से विदेश में हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें एक निश्चित राशि अदा करनी होती है. महिलाओं के लिए ये नियम अनिवार्य नहीं है.

ब्राज़ील : ब्राजील में 18 से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए टूर ऑफ ड्यूटी अनिवार्य है. इसकी समय सीमा 10 से 12 माह के लिए होती है. यहां थोड़े समय के लिए भी सेना ज्वाइन करने वालों का मेडिकल टेस्ट होता है, ताकि भविष्य में जरूरत पड़ने पर इन्हें परमानेंट किया जा सके.

उत्तर कोरिया : विश्व के लिए सनसनी बनने वाले उत्तर कोरिया में भी टूर ऑफ ड्यूटी अनिवार्य है, खास बात ये है कि यहां पर पुरुषों को तीनों सेनाओं में ड्यूटी करनी पड़ती है, इसके लिए 23 माह नेवी में, 24 माह वायुसेना में और 21 माह थल सेना में काम करना पड़ता है.

दक्षिण कोरिया : उत्तर कोरिया की तरह ही यहां पर भी तीनों सेनाओं में टूर ऑफ ड्यूटी करना अनिवार्य है, इसमें नौसेना में 23 माह, थल सेना में 21 माह और वायुसेना में 24 माह सर्विस देनी होती है.

रूस : रूस में 18 से 27 साल की उम्र के बीच में कभी भी टूर ऑफ ड्यूटी की जा सकती है, कम से कम 12 माह सैन्य सेवा करना अनिवार्य है.

यूक्रेन: यूक्रेन में भी युवाओं के लिए सैन्य सेवा अनिवार्य है, हालांकि इसके लिए कोई उम्र और न्यूनतम सीमा तय नहीं है, हालिया युद्ध में टूर ऑफ ड्यूटी के तहत कई लोगों ने हथियार उठाकर युद्ध में हिस्सा लिया और रूस जैसे ताकतवर देश को टक्कर देने में सफल रहे.

इसके अलावा ग्रीस में 19 वर्ष की उम्र वाले युवकों को कम से कम 9 माह, ईरान में 24 माह टूर ऑफ ड्यूटी करनी होती है. (एजेंसियां)

किसानों को 6 हजार सालाना देने के खिलाफ उतरे ताकतवर देश

किसानों को 6 हजार सालाना देने के खिलाफ उतरे ताकतवर देश, भारत ने दिया मुंहतोड़ जवाब

नई दिल्ली (एजेंसी)। वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन यानी WTO की बैठक जेनेवा में हुई। इसमें अमेरिका और यूरोपीय देशों ने मोदी सरकार द्वारा भारतीय किसानों को दी जाने वाली एग्रीकल्चरल सब्सिडी का विरोध किया। किसानों को सालाना दिये जाने वाले रुपए 6000 रुपए भी एग्रीकल्चरल सब्सिडी में शामिल है। ऐसे में इसे रोकने के लिए अमेरिका और यूरोप ने पूरी ताकत झोंक दी है। भारत ने भी इस मुद्दे पर ताकतवर देशों के आगे झुकने से इनकार कर दिया है।

12 जून से 15 जून 2022 तक जेनेवा में WTO की बैठक का आयोजन हुआ। बैठक में 164 सदस्य देशों वाले WTO के G-33 ग्रुप के 47 देशों के मंत्रियों ने हिस्सा लिया। भारत की ओर से केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल शामिल हुए। इस साल होने वाली WTO की बैठक में इन 3 अहम मुद्दों पर प्रस्ताव लाने की तैयारी की गई…1. कृषि सब्सिडी को खत्म करने के लिए. 2. मछली पकड़ने पर अंतरराष्ट्रीय कानून बनाने के लिए 3. कोविड वैक्सीन पेटेंट पर नए नियम लाने के लिए। अमेरिका, यूरोप और दूसरे ताकतवर देश इन तीनों ही मुद्दों पर लाए जाने वाले प्रस्ताव के समर्थन में थे, जबकि भारत ने इन तीनों ही प्रस्ताव पर ताकतवर देशों का जमकर विरोध किया। भारत ने ताकतवर देशों के दबाव के बावजूद एग्रीकल्चरल सब्सिडी को खत्म करने से इनकार कर दिया है। वहीं अब इस मामले में भारत को WTO के 80 देशों का साथ मिला है।

अमेरिका और यूरोप चाहते हैं कि भारत अपने यहां किसानों को दी जाने वाली हर तरह की एग्रीकल्चरल सब्सिडी को खत्म करे. इसमें ये सारे एग्रीकल्चरल सब्सिडी में शामिल हैं- PM किसान सम्मान निधि के तहत दिए जाने वाले सालाना 6 हजार रुपए, यूरिया, खाद और बिजली पर दी जाने वाली सब्सिडी। अनाज पर MSP के रूप में दी जाने वाली सब्सिडी। अमेरिका जैसे ताकतवर देशों का मानना है कि सब्सिडी की वजह से भारतीय किसान चावल और गेहूं का भरपूर उत्पादन करते हैं।बइसकी वजह से भारत का अनाज दुनिया भर के बाजार में कम कीमत में मिल जाता है। अमेरिका और यूरोपीय देशों के अनाज की कीमत ज्यादा होने की वजह से विकासशील देशों में इसकी बिक्री कम होती है। यही वजह है कि दुनिया के अनाज बाजार में दबदबा कायम करने के लिए ताकतवर देश भारत को एग्रीकल्चरल सब्सिडी देने से रोकना चाहते हैं। भारत इसे मानने के लिए तैयार नहीं है। WTO में भले ही अमेरिका और दूसरे ताकतवर देश विकासशील देशों के किसानों को सब्सिडी देने से मना करते हों, लेकिन खुद अमेरिका अपने देश के समृद्ध किसानों को सब्सिडी देने में दूसरे देशों से कहीं आगे है, वो भी तब, जब अमेरिकी किसानों की सालाना आय भारतीय किसानों से 52 गुना ज्यादा है।

Whatsapp ने लगाया लाखों खातों पर प्रतिबंध

नई दिल्ली (एजेंसी)। व्हाट्सएप ने फरवरी महीने में भारत के 1,426,000 अनैतिक एवं हानिकारक अकाउंट्स पर प्रतिबंध लगा दिया है। ऐसा 2021 के नए आईटी नियमों के  अनुपालन में किया गया है।

कंपनी ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने जनवरी में 1,858,000 अकाउंट्स या खातों पर प्रतिबंध लगा दिया था। उसे देश से एक ही महीने में 335 शिकायतें मिलीं और उनमें से 21 पर जनवरी में कार्रवाई की गई। व्हाट्सएप के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, आईटी नियम 2021 के अनुसार, हमने फरवरी 2022 महीने के लिए अपनी नौवीं मासिक रिपोर्ट प्रकाशित की है।

प्रवक्ता ने कहा, जैसा कि नवीनतम मासिक रिपोर्ट में दर्ज किया गया है, व्हाट्सएप ने फरवरी के महीने में 14 लाख से अधिक खातों पर प्रतिबंध लगा दिया है। कंपनी ने कहा कि साझा किए गए डेटा में व्हाट्सएप द्वारा 1 फरवरी से 28 फरवरी के बीच दुरुपयोग का पता लगाने के दृष्टिकोण का उपयोग करके प्रतिबंधित भारतीय खातों की संख्या पर प्रकाश डाला गया है, जिसमें इसके रिपोर्ट फीचर के माध्यम से यूजर्स से प्राप्त नकारात्मक प्रतिक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए की गई कार्रवाई भी शामिल है।

रूस के आफर से भारत में सस्ते हो सकते हैं पेट्रोल-डीजल, यूरिया

नई दिल्ली (एजेंसी)। रूस और यूक्रेन के युद्ध के चलते महंगाई बढ़ने की आशंका के बीच रूस ने भारत को सस्ता पेट्रोल डीजल और यूरिया खरीदने की आफर दिया है। ऐसा अमेरिका द्वारा रूस से तेल के इम्पोर्ट पर रोक लगाने से हुआ है। ऐसी स्थिति में रूस अपने क्रूड आयल एवं अन्य सामान को पूरी दुनिया में बेचने की जुगत में है। इसी कारण रूस ने अपने मित्र राष्ट्र भारत से संपर्क किया है। अतः भारत सरकार, रूस से डिस्काउंट प्राइस पर क्रूड ऑयल एवं अन्य चीजों को खरीदने के बारे में विचार कर रही है, ऐसा भारतीय अधिकारियों का कहना है।

गौरतलब है कि भारत अपनी जरूरतों का 80 फीसदी ऑयल इम्पोर्ट करता है। भारत करीब 2-3 फीसदी तेल रूस से खरीदता है, चूंकि अभी कच्चा तेल की कीमतें 40 फीसदी ऊपर जा चुकी हैं, भारत सरकार इम्पोर्ट बिल कम करने के लिए विकल्पों की तलाश कर रही है। क्रूड की कीमतें बढ़ने से अगले वित्त वर्ष में भारत का इम्पोर्ट बिल 50 बिलियन डॉलर तक बढ़ सकता है। इस कारण सरकार सस्ते तेल के साथ ही रूस और बेलारूस से यूरिया जैसे फर्टिलाइजर्स का सस्ता कच्चा माल भी खरीदने पर गौर कर रही है। इससे सरकार को खाद सब्सिडी के मोर्चे पर बड़ी राहत मिलने की संभावना है।

मतगणना के दिन Share Market में आई तेजी

चुनाव परिणामों से Share Market में तेजी, Sensex 1000 अंक के पार खुला

नई दिल्ली (एजेंसी)। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद मतगणना के बीच शेयर बाजार ने मजबूती के जोरदार संकेत दिये हैं। बाजार को मजबूत ग्लोबल ट्रेंड से भी सपोर्ट मिल रहा है। इन संकेतों के चलते बाजार ने आज कारोबार की जबरदस्त शुरुआत की और खुलते ही 1200 अंक चढ़ गया।

प्री-ओपन से ही मजबूत बाजार में सेंसेक्स 2.5 फीसदी तक चढ़ा हुआ था। एसजीएक्स निफ्टी भी मजबूत बना हुआ था। सुबह के 09:20 बजे सेंसेक्स 1130 अंक से ज्यादा मजबूत होकर 55,800 अंक के आस-पास ट्रेड कर रहा था। इसी तरह निफ्टी 2 फीसदी से ज्यादा चढ़कर 16.650 अंक के पार निकल चुका था।

रूस और यूक्रेन के बीच जारी लड़ाई के चलते दुनिया भर के शेयर बाजारों में बिकवाली का माहौल बना हुआ है। इन सब घटनाक्रमों के बीच क्रूड ऑयल में उबाल है और यह 14 साल के रिकॉर्ड हाई लेवल पर जा चुका है। रूस के तेल और गैस पर अमेरिका के प्रतिबंध के बाद इन्वेस्टर्स सहमे हुए हैं। भारत के बाजार में भी यह ट्रेंड साफ दिख रहा है क्योंकि एफपीआई लगातार पैसे निकाल रहे हैं। कल भले ही बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली, लेकिन एफपीआई ने भारतीय बाजार से करीब 5 हजार करोड़ रुपये की निकासी की थी।

रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध का कारण?

देवेश प्रताप सिंह राठौर (AMJA)

रूस और यूक्रेन का विवाद इतना तूल क्यों पकड़ा, युद्ध जैसी स्थिति बनी और युद्ध शुरू हो गया। अमेरिका का इतिहास रहा है देशों को लड़ाना और राज्य करना। उसी का एक हिस्सा यूक्रेन अमेरिका के बहकावे में आ गया और आज पूरा विश्व तीसरे विश्वयुद्ध के मुंह में जाने को खड़ा है। इस बार अगर तीसरा विश्व युद्ध हुआ उसकी कल्पना नहीं कर सकते कौन बचेगा, कौन नहीं!…क्योंकि अमेरिका ने जापान पर परमाणु बम डाले थे। हिरोशिमा और नागासाकी शहर पर क्या स्थिति बनी? उसके बाद परमाणु बम के कार्यक्रम को रोकने के लिए प्रावधान बनाया गया। वही स्थिति फिर बन रही है।

यूक्रेन और रूस के बीच का लड़ाई का मुख्य कारण क्या है संक्षेप में जानते हैं। यूक्रेन पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंधों को बेहतर बनाने की कोशिशों में जुटा है, रूस को यह बात पसंद नहीं है। वह नहीं चाहता कि यूक्रेन पश्चिमी देशों से अच्छे संबंध रखे या नाटो का सदस्य बने। अमेरिका और ब्रिटेन समेत दुनिया के 30 देश इस संगठन के सदस्य हैं। नाटो का सदस्य होने का मतलब है कि अगर सगंठन के किसी भी देश पर कोई तीसरा देश हमला करता है तो सभी सदस्य एकजुट होकर उसका मुकाबला करेंगे। रूस का कहना है कि अगर नाटो की तरफ से यूक्रेन को मदद मिली तो उसका अंजाम सबको भुगतना होगा। यूक्रेन की राजधानी पर लगातार मिसाइलें दागी गईं। इनमें से एक मिसाइल कीव के बाहरी इलाके स्थित एक आवासीय बहुमंजिला इमारत की 16वीं और 21वीं मंजिल के बीच से गुजर गई और इमारत की दो मंजिलें आग से घिर गईं। हमले में कम से कम छह नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गए जबकि 80 को बचाकर निकाला गया। एक अन्य मिसाइल कीव को पानी की आपूर्ति करने वाले बांध को निशाना बनाकर दागी गई लेकिन यूक्रेन ने इसे हवा में ही मार गिराया। देश के इंफ्रास्ट्रक्चर मंत्री ने बताया कि अगर यह मिसाइल निशाने पर गिरती तो कीव के उपनगरों में बाढ़ आ जाती। वहीं, रूस के रक्षा प्रवक्ता इगोर कोनाशेंकोव ने फिर दावा किया रूसी मिसाइलें सिर्फ यूक्रेन के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर दागी जा रही हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आखिर इस विवाद की जड़ क्या है

यूक्रेन की सीमा पश्चिम में यूरोप और पूर्व में रूस से जुड़ी है। 1991 तक यूक्रेन पूर्ववर्ती सोवियत संघ का हिस्सा था। रूस और यूक्रेन के बीच तनाव नवंबर 2013 में तब शुरू हुआ जब यूक्रेन के तत्कालीन राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच का कीव में विरोध शुरू हुआ, जबकि उन्हें रूस का समर्थन था।

यानुकोविच को अमेरिका-ब्रिटेन समर्थित प्रदर्शनकारियों के विरोध के कारण फरवरी 2014 में देश छोड़कर भागना पड़ा।इससे खफा होकर रूस ने दक्षिणी यूक्रेन के क्रीमिया पर कब्जा कर लिया। इसके बाद वहां के अलगाववादियों को समर्थन दिया। इन अलगाववादियों ने पूर्वी यूक्रेन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया। वर्ष 2014 के बाद से रूस समर्थक अलगाववादियों और यूक्रेन की सेना के बीच डोनबास प्रांत में संघर्ष चल रहा था। इससे पहले जब 1991 में यूक्रेन सोवियत संघ से अलग हुआ था तब भी कई बार क्रीमिया को लेकर दोनों देशों में टकराव हुआ। 2014 के बाद रूस व यूक्रेन में लगातार तनाव व टकराव को रोकने व शांति कायम कराने के लिए पश्चिमी देशों ने पहल की। फ्रांस और जर्मनी ने 2015 में बेलारूस की राजधानी मिन्स्क में दोनों के बीच शांति व संघर्ष विराम का समझौता कराया। 

हाल ही में यूक्रेन ने नाटो से करीबी व दोस्ती गांठना शुरू किया। यूक्रेन के नाटो से अच्छे रिश्ते हैं। 1949 में तत्कालीन सोवियत संघ से निपटने के लिए नाटो यानी ‘उत्तर अटलांटिक संधि संगठन’ बनाया गया था। यूक्रेन की नाटो से करीबी रूस को  नागवार गुजरने लगी। अमेरिका और ब्रिटेन समेत दुनिया के 30 देश नाटो के सदस्य हैं। यदि कोई देश किसी तीसरे देश पर हमला करता है तो नाटो के सभी सदस्य देश एकजुट होकर उसका मुकाबला करते हैं। रूस चाहता है कि नाटो अपना विस्तार न करे। राष्ट्रपति पुतिन इसी मांग को लेकर यूक्रेन व पश्चिमी देशों पर दबाव डाल रहे थे।आखिरकार रूस ने अमेरिका व अन्य देशों की पाबंदियों की परवाह किए बगैर यूक्रेन पर हमला बोल दिया। अब तक तो नाटो, अमेरिका व किसी अन्य देश ने यूक्रेन के समर्थन में जंग में कूदने का एलान नहीं किया है। वे यूक्रेन की अपरोक्ष मदद कर रहे हैं, ऐसे में  कहना मुश्किल है कि यह जंग क्या मोड़ लेगी। यदि यूरोप के देशों या अमेरिका ने रूस के खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई की तो समूची दुनिया के लिए मुसीबत पैदा हो सकती है। यूक्रेन को अमेरिका से दूरी बनानी होगी, नाटो के संगठन से हटना पड़ेगा; तभी रूस बातचीत करने में रुचि रखेगा ऐसा मेरा मानना है।

यूक्रेन में फंसे भारतीयों की सुरक्षा को लेकर बसपा चिंतित, डीएम को सौंपा ज्ञापन

बिजनौर। रुस द्वारा युक्रेन पर हुए हमले के बाद बहुजन समाज पार्टी ने वहां फंसे जिला बिजनौर के लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। इस परिप्रेक्ष्य में पार्टी के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी से भेंट कर ज्ञापन सौंपा और लोगों को सुरक्षित बुलाये जाने की मांग की।

बसपा के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी उमेश मिश्रा से उनके कार्यालय पर मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में रुस द्वारा युक्रेन पर हुए हमले में जिला बिजनौर के फंसे लोगों को सुरक्षित अपने घरों को बुलाये जाने की मांग की गई। जिलाधिकारी ने बसपा नेताओं को इस संबंध में शीघ्र ही कार्यवाही का आश्वासन दिया।

प्रतिनिधिमंडल में जिला अध्यक्ष जितेन्द्र सागर, बढापुर से पूर्व विधायक एवं प्रत्याशी मोहम्मद गाज़ी, बिजनौर से पूर्व विधायक एवं प्रत्याशी रुची वीरा, धामपुर से पूर्व विधायक एवं प्रत्याशी मूलचंद चौहान के सुपुत्र अमित चौहान, नजीबाबाद से प्रत्याशी शाहनवाज खलील, नुरपुर से प्रत्याशी जियाउद्दीन अंसारी, पूर्व मन्त्री धनीराम सिंह शामिल रहे।

whatsapp रिलीज करेगा ग्लोबल ऑडियो प्लेयर

नई दिल्ली। अब WhatsApp अपने यूजर्स के लिए ग्लोबल ऑडियो प्लेयर रिलीज करने जा रहा है। इससे पहले WhatsApp Desktop यूजर्स वॉइस प्लेयर को पॉज और रिज्यूम कर सकते थे, लेकिन इसके लिए उन्हें चैट विंडो में ही रहना होता था। नए अपडेट के बाद यूजर्स को ऐसा नहीं करना होगा। वह चैट विंडोज में शफल करते हुए वॉइस मैसेज को सुन सकेंगे।

इस फीचर की मदद से यूजर्स चैट विंडो में स्विच करते हुए ऑडियो नोट्स को सुन भी करेंगे। WABetaInfo के मुताबिक, ‘जब हम वॉइस नोट प्ले करते हैं और दूसरे चैट में स्विच करते हैं, तो WhatsApp ऑडियो बंद नहीं होता है और एक नया ऑडियो प्लेयर बार चैट लिस्ट के नीचे नजर आने लगता है। इस Audio Player Bar की मदद से यूजर्स वॉइस नोट को आसानी से कंट्रोल कर सकेंगे। इस पर प्लेबैक बटन और प्रोग्रेस बार मिलता है, जो वॉइस नोट के खत्म होने की जानकारी देता है। यह फीचर फिलहाल बीटा यूजर्स के लिए जारी हुआ है। जल्द ही हम इसे अपने डेस्कटॉप पर भी देख सकेंगे।

इस फीचर की मदद से यूजर्स चैट और वॉइस प्लेयर दोनों को एक साथ मैनेज कर सकेंगे। हाल में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, WhatsApp जल्द ही Delete For Everyone फीचर की टाइम लिमिट बढ़ा सकता है। ऐप इसकी टाइम लिमिट को बढ़ाकर दो दिन कर सकता है। 

दुनिया का सबसे पहला प्रेम पत्र!

कृष्ण कुमार यादव; पोस्ट मास्टर जनरल वाराणसी परिक्षेत्र

हम में से हर किसी ने अपने जीवन में किसी न किसी रूप में प्रेम-पत्र लिखा होगा। प्रेम-पत्रों का अपना एक भरापूरा संसार है। प्रेम जैसी अनुपम भावना को व्यक्त करने के लिए शब्द सचमुच नाकाफी होते हैं। दुनिया की तमाम मशहूर शख्सियतों ने प्रेम-पत्र लिखे हैं- फिर चाहे वह नेपोलियन हों, अब्राहम लिंकन, क्रामवेल, बिस्मार्क या बर्नार्ड शॉ हों। आज ये पत्र एक धरोहर बन चुके हैं। ऐसे में यह जानना अचरज भरा लगेगा कि दुनिया का सबसे पुराना प्रेम पत्र बेबीलोन के खंडहरों से मिला था। बेबिलोन की किसी युवती का प्रेमी अपनी भावनाओं को समेटकर उससे जब अपने दिल की बात कहने वहां तक पहुंचा, तो वह युवती तब तक वहां से जा चुकी थी। वह प्रेमी युवक अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाया और उसने वहीं मिटटी के फर्श पर खोदते हुए लिखा- ‘मैं तुमसे मिलने आया था, तुम नहीं मिली।’ यह छोटा-सा संदेश विरह की जिस भावना से लिखा गया था, उसमें कितनी तड़प शामिल थी। इसका अंदाजा सिर्फ वह युवती ही लगा सकती थी, जिसके लिए इसे लिखा गया। भावनाओं से ओत-प्रोत यह पत्र ईसा से बहुत पहले का है और इसे ही दुनिया का प्रथम प्रेम पत्र माना जाता है।

चीन को पटखनी देने की एक और तैयारी

नई दिल्ली। भारत सरकार चीन को पटखनी देने की तैयारी में है। दरअसल सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले बोर्ड के मामले में देश अब आत्मनिर्भर बनेगा। इसके मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने पीएलआई योजना को मंजूरी दी है। सरकार को इस योजना के तहत अगले 5-6 वर्षों में 76,000 करोड़ रुपए  (10 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक) के निवेश का अनुमान है।

विदित हो कि भारत में सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले बोर्ड आयात किया जाता है। भारत आयात के लिए मुख्यतौर पर चीन पर निर्भर है। अब सरकार के ताजा फैसले से चीन पर से निर्भरता कम हो जाएगी।

सरकार का प्लान: दूरसंचार और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस फैसले से माइक्रोचिप के डिजाइन, विनिर्माण, पैकिंग और परीक्षण में मदद मिलेगी। वहीं, एक संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित होगा। अश्विनी वैष्णव के मुताबिक भारत के करीब 20 फीसदी इंजीनियर्स सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में हैं। इस संख्या को बढ़ाने के लिए 85 हज़ार हाइली क्वालिफाइड, वेल ट्रेंड इंजीनियर के लिए ‘चिप्स टू स्टार्टअप’ प्रोग्राम बनाया गया है। इसमें बी-टेक, एम-टेक, पीएचडी इंजीनियर्स को तैयार किया जाएगा।

पीआईबी के अनुसार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने और भारत को इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाइन एवं विनिर्माण के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से, देश में सेमीकंडक्टरों और डिस्प्ले इकोसिस्टम के विकास के लिए व्यापक कार्यक्रम को मंजूरी दी है। यह कार्यक्रम सेमीकंडक्टरों और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग के साथ-साथ डिजाइन के क्षेत्र में कंपनियों को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी प्रोत्साहन पैकेज प्रदान करके इलेक्ट्रॉनिक सामग्रियों के निर्माण में एक नए युग की शुरुआत करेगा। यह सामरिक महत्व तथा आर्थिक आत्मनिर्भरता के इन क्षेत्रों में भारत के प्रौद्योगिकीय नेतृत्व के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा।

सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स की नींव हैं, जो उद्योग 4.0 के तहत डिजिटल परिवर्तन के अगले चरण की ओर आगे बढ़ा रहे हैं। सेमीकंडक्टरों और डिस्प्ले प्रणालियों का उत्पादन बहुत जटिल तथा प्रौद्योगिकी की अधिकता वाला क्षेत्र है, जिसमें भारी पूंजी निवेश, उच्च जोखिम, लंबी अवधि और पेबैक अवधि तथा प्रौद्योगिकी में तेजी से बदलाव शामिल हैं और इसके लिए अत्यधिक एवं निरंतर निवेश की आवश्यकता होती है। यह कार्यक्रम पूंजी सहायता और प्रौद्योगिकीय सहयोग की सुविधा प्रदान करके सेमीकंडक्टरों और डिस्प्ले प्रणाली के उत्पादन को बढ़ावा देगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सिलिकॉन सेमीकंडक्टर फैब, डिस्प्ले फैब, कंपाउंड सेमीकंडक्टरों/सिलिकॉन फोटोनिक्स/सेंसर (एमईएमएस सहित) फैब, सेमीकंडक्टर पैकेजिंग (एटीएमपी/ओएसएटी), सेमीकंडक्टर डिजाइन के काम में लगी हुई कंपनियों/संघों को आकर्षक प्रोत्साहन सहायता प्रदान करना हैं।

Omicron का नया लक्षण जो दिखाई देगा सिर्फ रात में

डॉक्टरों ने किया आगाह, Omicron का नया लक्षण जो सिर्फ रात में दिखाई देगा- रहें सावधान 

डॉक्टरों ने किया आगाह, Omicron का नया लक्षण जो सिर्फ रात में दिखाई देगा- रहें सावधान 

नई दिल्ली (एजेंसी)। एक वायरल इंफेक्शन का सबसे खतरनाक पहलू उसकी गंभीरता है। कोविड-19 के डेल्टा वैरिएंट ने भारत समेत दुनियाभर के देशों में कहर बरपाया था। डेल्टा वैरिटएंट की संक्रामकता बहुत ज्यादा थी। इसमें मरीजों को हल्के और गंभीर लक्षण दोनों महसूस हो रहे थे। उनमें तेज बुखार, लगातार खांसी, सांस में तकलीफ, छाती में दर्द, खून में ऑक्सीजन की कमी जैसे लक्षण देखे जा रहे थे। अब कोरोना का नया ओमिक्रॉन वैरिएंट दुनिया के सामने एक नई मुसीबत बनकर खड़ा हो गया है। इसकी गंभीरता, ट्रांसमिशन रेट और लक्षणों को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं।

WHO का दावा है कि नया ओमिक्रॉन वैरिएंट पहले संक्रमित हो चुके लोगों को भी आसानी से अपनी चपेट में ले सकता है। इसके अलावा, वैक्सीन के दोनों डोज ले चुके लोग भी ओमिक्रॉन के खिलाफ सुरक्षित नहीं हैं। आने वाले कुछ दिन या सप्ताह में साफ हो जाएगा कि ओमिक्रॉन वैरिएंट आखिर कितना खतरनाक है। अब तक दुनियाभर के डॉक्टर्स और वैज्ञानिक ओमिक्रॉन में कई तरह के लक्षण दिखने का दावा भी कर चुके हैं।

रात में पसीना और शरीर में दर्द
दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य विभाग के जनरल प्रैक्टिशनर डॉ. उनबेन पिल्ले कहते हैं कि ओमिक्रॉन से संक्रमित मरीजों को रात में पसीना आने की शिकायत हो सकती है। कई बार मरीज को इतना ज्यादा पसीना आता है कि उसके कपड़े या बिस्तर तक गीला हो सकता है। संक्रमित को ठंडी जगह में रहने पर भी पसीना आ सकता है। इसके अलावा मरीज को शरीर में दर्द की शिकायत भी हो सकती है।

सूखी खांसी और शरीर में दर्द
डॉ. उनबेन पिल्ले कहते हैं कि उन्होंने ओमिक्रॉन से संक्रमित मरीज में सूखी खांसी के लक्षण भी देखे हैं। ये लक्षण कोरोना के अब तक सभी पुराने स्ट्रेन में देखा जा चुका है। इसके अलावा बुखार और मांसपेशियों में दर्द भी ओमिक्रॉन के लक्षण हो सकते हैं।

गले का छिलना
इससे पहले दक्षिण अफ्रीका की एक डॉक्टर एंजलीके कोएट्जी ने ओमिक्रॉन से संक्रमित लोगों में गले में खराश की बजाय गला छिलने जैसी दिक्कत देखने का दावा किया था, जो कि असामान्य है। ये दोनों लक्षण लगभग एक जैसे हो सकते हैं। हालांकि गले में छिलने की समस्या ज्यादा दर्दनाक हो सकती है।

हल्का बुखार
कोरोना के किसी भी वैरिएंट के साथ हल्का या तेज बुखार होने की शिकायत लगातार सामने आई हैं। डॉ. कोएट्जी कहती हैं कि ओमिक्रॉन के संक्रमण में मरीज को हल्का बुखार हो सकता है और इसमें बॉडी का टेंपरेचर अपने आप नॉर्मल हो जाता है।

थकावट
पिछले तमाम वैरिएंट्स की तरह ओमिक्रॉन में भी मरीज को बहुत ज्यादा थकान महसूस हो सकती है। इसमें संक्रमित इंसान का एनेर्जी लेवल काफी कम हो जाता है। शरीर में दिख रहे इस लक्षण को इग्नोर करने की बजाए तुरंत कोविड-19 की जांच कराएं।

‘डॉक्‍टर डेथ’ ने बनाई सुसाइड मशीन, चंद सेकेंड में कीजिए आत्महत्या!

(एजेंसी)। आत्महत्या को लेकर दुनियाभर में हमेशा तमाम बातें होती रहती हैं। इसी बीच यूरोपीय देश स्विटजरलैंड ने आत्‍महत्‍या करने में मदद देने वाली मशीन को कानूनी मंजूरी दे दी है। यह मशीन सिर्फ मिनट में आत्‍महत्‍या की प्रक्रिया को पूरी कर देती है। इससे इंसान बिना दर्द के हमेशा के लिए मौत की नींद सो सकता है। इसके बाद इस मशीन को लेकर पूरी दुनिया में चर्चा शुरू हो गई है।

दरअसल, यह मशीन एक ताबूत के आकार की बनी हुई है। ‘द इंडिपेंडेंट’ की एक ऑनलाइन रिपोर्ट के मुताबिक, इस मशीन के माध्यम से ऑक्सीजन का स्तर धीरे-धीरे कम करके हाइपोक्सिया और हाइपोकेनिया के माध्यम से मौत दी जाती है। इस प्रक्रिया में सिर्फ 30 सेकेंड में नाइट्रोजन की मात्रा कई गुना बढ़ जाती है जिसकी वजह से ऑक्सीजन का स्तर 21 प्रतिशत से 1 हो जाता है और कुछ ही सेकेंड में इंसान की मौत हो जाती है। हालांकि रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि यह मशीन ऐसे मरीजों के लिए मददगार है जो बीमारी के कारण बोल नहीं पाते हैं या हिल नहीं पाते हैं। इस मशीन को यूजर को अपनी पसंदीदा जगह पर ले जाना होगा। इसके बाद मशीन का नष्‍ट होने योग्‍य कैप्‍सूल अलग हो जाता है ताकि उसे ताबूत की तरह से इस्‍तेमाल किया जा सके। 

इस मशीन को बनाने का आइडिया एक्जिट इंटरनेशनल के निदेशक और ‘डॉक्‍टर डेथ’ कहे जाने वाले डॉक्‍टर फिलीप निटस्‍चके ने दिया है। डॉक्‍टर डेथ ने बताया कि अगर कोई अप्रत्‍याशित कठिनाई नहीं हुई तो हम अगले साल तक इस सार्को मशीन को देश में मुहैया करा देंगे। यह अब तक बेहद महंगा प्रॉजेक्‍ट है लेकिन हमें भरोसा है कि हम अब इसे सरल बनाने के बेहद करीब हैं।

एक तथ्य यह भी है कि स्विटजरलैंड में मदद के साथ आत्‍महत्‍या करना कानूनी माना जाता है और पिछले साल 1300 लोगों ने इस सेवा का इस्‍तेमाल आत्‍महत्‍या करने के लिए किया। वहीं इस मशीन पर सवाल खड़े होने भी शुरू हो गए हैं। लोग डॉक्‍टर डेथ की भी आलोचना भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह एक गैस चेंबर की तरह से है। कुछ अन्‍य लोगों का यह भी कहना है कि यह मशीन आत्‍महत्‍या को बढ़ावा देती है।

अगले महीने आएगी कोरोना की तीसरी लहर!

ओमिक्रॉन के बढ़ते खतरे के बीच एक्सपर्ट का दावा, जनवरी में आएगी तीसरी लहर

ओमिक्रॉन के बढ़ते खतरे के बीच एक्सपर्ट का दावा, जनवरी में आएगी तीसरी लहर

रविवार तक देश में ओमिक्रॉन के 5 मामले सामने आ चुके हैं और वैज्ञानिक आशंका जता रहे हैं कि जनवरी के आखिरी सप्ताह या फरवरी की शुरुआत में ओमिक्रॉन का पीक होगा।

साभार Zee News Desk|Updated: Dec 05, 2021, 03:58 PM IST

  • जनवरी से फरवरी के बीच आएगी तीसरी लहर
  • दूसरी लहर के मुकाबले कम घातक होगी तीसरी लहर
  • नहीं पड़ेगी कम्प्लीट लॉकडाउन की जरूरत

नई दिल्ली: कोरोना के नए वेरिएंट ‘ओमिक्रॉन’ के आने के बाद देश में तीसरी लहर आना लगभग तय माना जा रहा है. रविवार तक देश में ओमिक्रॉन के 5 मामले सामने आ चुके हैं और वैज्ञानिक आशंका जता रहे हैं कि जनवरी के आखिरी सप्ताह या फरवरी की शुरुआत में ओमिक्रॉन का पीक होगा. IIT के वरिष्ठ वैज्ञानिक पद्मश्री प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने नए अध्ययन में यह दावा किया है. हालांकि वैज्ञानिकों का यह भी मानना है कि तीसरी लहर, दूसरी लहर के मुकाबले कम घातक होगी. रविवार को ही दिल्ली में पहला ओमिक्रॉन केस सामने आया है जो कि देश का पांचवा ओमिक्रॉन केस है. इसके बाद काफी लोगों को कोरोना की तीसरी लहर का डर सता रहा है.

कम घातक होगी तीसरी लहर

इंडिया टुडे की खबर के अनुसार प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने नए अध्ययन में दावा किया है कि तीसरी लहर, दूसरी लहर की तुलना में कम घातक होगी. प्रो. अग्रवाल ने अपने गणितीय मॉडल सूत्र के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला है. गौरतलब है कि इससे पहले प्रो. मणींद्र ने ही अपने गणितीय मॉडल के आधार पर ही दूसरी लहर के बाद नए म्यूटेंट के आने से तीसरी लहर की आशंका जताई थी. अब प्रो. अग्रवाल ने दक्षिण अफ्रीका से फैले ओमीक्रॉन वेरिएंट पर स्टडी शुरू कर ताजा निष्कर्ष जारी किए हैं. 

हर रोज मिलेंगे एक से डेढ़ लाख मरीज

इन निष्कर्षों के मुताबिक अब तक जितनी भी केस स्टडी सामने आई हैं, उसमें संक्रमण तेजी से फैल रहा है, लेकिन बहुत अधिक घातक नहीं मिला है. प्रो. अग्रवाल के मुताबिक दूसरी लहर के हल्के होने के बाद यानी सितंबर में तीसरी लहर को लेकर उन्होंने जो आंकलन किया था, वह सच साबित होता दिख रहा है. कई देशों में फैलने के बाद भारत में भी ओमीक्रॉन संक्रमण के मामले मिलने लगे हैं. उन्होंने बताया कि जब तीसरी लहर अपने चरम पर होगी, तब रोजाना एक से डेढ़ लाख के बीच संक्रमित मरीजों के मिलने की संभावना है.

बच्चों पर ऐसा रहेगा असर

प्रो. अग्रवाल के मुताबिक कोरोना की तीसरी लहर का असर बच्चों पर कम देखने को मिलेगा. उनमें लक्षण भी कम नजर आएंगे और वे जल्दी रिकवर हो जाएंगे. साथ ही उन्होंने बताया कि ओमिक्रॉन से संक्रमित मरीज जल्दी रिकवर होंगे. उन्हें सामान्य सर्दी-जुकाम जैसे लक्षण होंगे लेकिन दूसरी लहर की तरह अधिक परेशान नहीं होंगे. प्रो. अग्रवाल ने बताया कि यह वेरिएंट नेचुरल इम्युनिटी को ज्यादा बाईपास नहीं कर रहा है. नेचुरल इम्युनिटी का मतलब जो लोग एक बार कोरोना संक्रमित हो चुके हैं, उन्हें अधिक घबराने की जरूरत नहीं है. वे संक्रमण से नहीं बच पाएंगे लेकिन अधिक दिक्कत जैसी स्थिति नहीं होगी.

नहीं पड़ेगी कम्प्लीट लॉकडाउन की जरूरत

प्रो. अग्रवाल ने यह भी बताया कि कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए पूरा लॉकडाउन लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. बचाव की चीजों को ही अगर सख्ती से पालन कराया जाए तो काफी है. जरूरत पड़ने पर हल्का लॉकडाउन लगाया जा सकता है.

मास्क और वैक्सीन ही बचाव

प्रो. अग्रवाल के मुताबिक कोरोना की तीसरी लहर से बचने का सबसे अच्छा माध्यम सावधानी बरतना और वैक्सीन है. जिन लोगों ने वैक्सीन की दूसरी डोज या अभी पहली ही डोज नहीं लगवाई है, वे तुरंत वैक्सीन लगवा लें. मास्क व सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें.

Google यूजर्स परेशान, स्क्रीन पर दिख रहा error मैसेज

नई दिल्ली। प्रमुख सर्च इंजन साइट गूगल की सर्विस में आज यानी 1 दिसंबर को काफी दिक्कत आ रही है। कई देशों के यूजर्स गूगल पर सर्च नहीं कर पा रहे हैं और कईयों के गूगल न्यूज की फीड अपडेट नहीं हो रही है।

Google की सर्विस ठप, यूजर्स को स्क्रीन पर मिल रहा error मैसेज

आउटेज को ट्रैक करने वाली साइट डाउन डिटेक्टर ने भी गूगल के ठप होने की पुष्टि की है। डाउन डिटेक्टर के मुताबिक गूगल की सर्विस में दिक्कत 1 दिसंबर को सुबह 7 बजे से हो रही है। डाउन डिटेक्टर पर अभी तक 250 से अधिक लोगों ने शिकायत की है। यूजर्स को सर्च, लॉगिन और साइट में दिक्कत हो रही है।

क्रोम या किसी अन्य ब्राउजर में गूगल ओपन करने पर लंबे समय तक लोडिंग हो रही है और उसके बाद यूजर्स को एरर का मैसेज मिल रहा है। इस आउटेज पर गूगल ने कहा है कि उसके इंजीनियर्स इसे ठीक करने की कोशिश में लगे हैं। यह इंटर्नल सर्वर की दिक्कत है। 

मलिहाबाद वनअप सेंटर में सेलेरियो कार की नई पिक्चर के साथ हुई लॉन्चिंग

मलिहाबाद वनअप सेंटर में सेलेरियो कार की नई पिक्चर के साथ हुई लॉन्चिंग

लखनऊ। मलिहाबाद मारुति सुजुकी ने एक बार फिर लॉन्च की सेलरीयो कार। यह इस बार नए फ्यूचर एवं नए लुक के साथ भारत की सबसे ज्यादा माइलेज देने वाली पहली कार है।

मलिहाबाद हरदोई राज मार्ग स्थित वनअप ऑटो प्राइवेट लिमिटेड शोरूम पर कार की लांचिंग की गई । इस अवसर पर मुख्य अतिथि हरि ओम सिंह, मो. तारिक़,अरविंद शर्मा, राजीव तिवारी, पंचदेव यादव, वीरेंद्र सिंह एवं वनअप मोटर्स के समस्त कर्मचारियों ने कार का पर्दा हटवा कर लोकार्पण कराया। वनअप मोटर्स के सेल्स मैनेजर सौरभ सिंह ने बताया कि कंपनी ने 2014 में सेलेरियो लॉन्च की थी। 2021 में एक बार फिर नए फीचर्स और नए मॉडल के साथ भारत की सबसे ज्यादा माइलेज देने वाली कार की लांचिंग की गई है। पेट्रोल से चलने वाली यह कार 26.68 किमी प्रति लीटर का माइलेज देगी।

कुंबले की जगह सौरव गांगुली संभालेंगे बीसीसीआई अध्यक्ष की जिम्मेदारी

नई दिल्ली (एजेंसी)। बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली को आईसीसी पुरुष क्रिकेट समिति का चेयरमैन नियुक्त किया गया है। यह फैसला दुबई में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) की बोर्ड बैठक में लिया गया। गांगुली अपने पूर्व साथी और भारत के कप्तान अनिल कुंबले की जगह लेंगे, जिन्होंने अपने नौ साल के कार्यकाल पूरा करने के बाद पद को छोड़ा है।

आईसीसी अध्यक्ष ग्रेग बार्कले ने कहा, मुझे आईसीसी क्रिकेट समिति के चेयरमैन के पद पर सौरव का स्वागत करते हुए खुशी हो रही है। दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में से एक और बाद में एक प्रशासक के रूप में उनका अनुभव हमें आगे बढ़ने और क्रिकेट निर्णयों को सही दिशा प्रदान करने में मदद करेगा। मैं अनिल को भी धन्यवाद देना चाहता हूं। पिछले नौ वर्षों में उनके उत्कृष्ट नेतृत्व के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय खेल में सुधार करने में मदद मिली, जिसमें डीआरएस और संदिग्ध गेंदबाजी एक्शन की पहचान करना शामिल है।

आईसीसी बोर्ड ने आईसीसी विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप (डब्ल्यूटीसी) को जारी रखने की भी मंजूरी दी। जिसमें शीर्ष दो टीमों के बीच फाइनल के साथ दो सालों तक नौ टीमों के बीच टूर्नामेंट आयोजित किया जाएगा।

2027 में आईसीसी क्रिकेट विश्व कप के 14 टीम के आयोजन के विस्तार को भी बोर्ड ने मुख्य कार्यकारी समिति (सीईसी) की एक सिफारिश को स्वीकार कर लिया है। इस आयोजन के लिए कुछ योग्यता रखी गई हैं, जिसमे ओडीआई रैंकिंग के टॉप 10 टीमें सीधे क्वोलीफाई करेगी। वहीं, अन्य टीमों को क्वालीफायर राउंड के माध्यम से टूर्नामेंट में जगह बनानी पड़ेगी।

इसके साथ ही, बोर्ड ने प्रथम श्रेणी की स्टेटस को भी अनुमति दी, जो पुरुषों के खेल के साथ महिला क्रिकेट पर लागू किया जा रहा है। वहीं, आने वाले समय में आईसीसी महिला समिति को आईसीसी महिला क्रिकेट समिति के रूप में जाना जाएगा और महिला क्रिकेट से संबंधित सभी निर्णय की जानकारी सीईसी को सौंपेगी जाएगी। क्रिकेट वेस्टइंडीज के सीईओ जॉनी ग्रेव को आईसीसी महिला क्रिकेट समिति में नियुक्त किया गया है।

बार्कले के अनुसार, यह बोर्ड की बैठकों का महत्वपूर्ण फैसला रहा है और मैं अपने साथी बोर्ड निदेशकों को दुबई आने के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं। यह हमारी दो साल से अधिक समय बाद आमने-सामने बैठक हुई है। कोरोना महामारी में अंतर्राष्ट्रीय यात्रा आसान नहीं है, लेकिन हमने एक ही कमरे में बैठकर महत्वपूर्ण फैसले किए हैं।

WhatsApp यूजर्स के लिए पैसे कमाने का मौका

WhatsApp यूजर्स के लिए पैसे कमाने का मौका, जानिए क्या है ऑफर

WhatsApp to stop working on these smartphones from January 1

नई दिल्ली (एजेंसी)। WhatsApp पेमेंट सर्विस भारत में कुछ समय से चल रही है। WhatsApp के जरिए एक दूसरे को पैसे भेज सकते हैं। ये दरअसल UPI पर ही काम करता है। पहले आपको व्हाट्सएप पे सेटअप करना होता है फिर आप पेमेंट कर सकते हैं।  WhatsApp अब अपने प्लैटफॉर्म पर ज्यादा से ज्यादा लोगों को पेमेंट सर्विस यूज करने के लिए एनकरेज करने की तैयारी में है। इसके लिए अब यूजर्स को कैशबैक मिलने शुरू हो गए हैं।

WhatsApp ने यूजर्स को पैसे सेंड करने पर 51 रुपये का कैशबैक देना शुरू कर दिया है। पिछले महीने ही कंपनी ने भारत में UPI बेस्ड पेमेंट शुरू किया था। आने वाले समय में Paytm और PhonePe को टक्कर मिलने वाली है।

WhatsApp ने फिलहाल एंड्रॉयड ऐप के लिए बैनर डिस्प्ले किया है। यहां चैट के टॉप में Give Cash, Get 51 back’ लिखा है। कंपनी के मुताबिक अलग अलग कॉन्टैक्ट को पैसे भेज कर पांच बार 51 रुपये का कैशबैक जीत सकते हैं। 

अच्छी बात ये है कि इस ऑफर के तहत कोई मिनिमम अमाउंट नहीं रखा गया है। यानी आप 10 रुपये किसी को भेज कर भी 51 रुपये का कैशबैक व्हाट्सएप से पा सकते हैं। इसकी लिमिट पांच बार ही है। 

नोट करने वाली बात ये है कि अभी ये कैशबैक ऑफर एंड्रॉयड के बीटा वर्जन व्हाट्सएप यूजर्स के लिए ही है। जल्द ही कंपनी इसे सभी यूजर्स के लिए रोल आउट कर सकती है, क्योंकि कंपनी ज्यादा से ज्यादा यूजर्स को अपने प्लेटफॉर्म पर UPI बेस्ड ट्रांजैक्शन कराना चाहती है। 

Paytm, PhonePe और Google Pay भारत में पॉपुलर UPI बेस्ड मनी ट्रांसफर प्लेटफॉर्म माने जाते हैं। Google Pay में भी कैशबैक दिए जाते रहे हैं। अब व्हाट्सएप भी उन्हीं के तर्ज पर चल रहा है। 

कैशबैक के लिए वॉट्सऐप ने गूगल Pay की तरह ही कार्ड्स की भी शुरुआत की है। ये दरअसल पर्सनलाइज्ड एक्स्पीरिएंस के लिए है। ये फीचर भी एंड्रॉयड बीटा यूजर्स के लिए ही उपलब्ध होगा। (UHN)

नहीं बदला तालिबान, सिखों को धर्म बदलने का फरमान

नहीं बदला तालिबान, सिखों को धर्म बदलने का फरमान
अशोक मधुप
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अफगानिस्तान के कब्जे के दो माह बाद भी तालिबान का रवैया वही है, जो बीस साल पहले था। खस्ता हाल और भूखे देश को चलाने के लिए उसे मदद चाहिए,वह भी अपनी शर्तों पर।


अफगानिस्तान के हालात को लेकर दुनिया भर के देश चिंतित हैं। सब चाहते हैं कि अफगानिस्तान में विकास हो। बाकी जनता की समस्याएं हल हों। हालात सामान्य हो। लोगों को भरण-पोषण की चीजें उपलब्ध हों। पर अफगानिस्तान पर काबिज अपने एजेंडे से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उसका क्रूरता का चेहरा वैसा ही है जैसा बीस साल पहले था। उसने उस पर कोई मुखौटा नहीं लगाया। कोई आवरण नहीं ओढ़ा। उनको दुनिया से अपने लिए मदद चाहिए, वह भी अपनी शर्तों पर। उन्हें न मानवता से कुछ लेना है, न मानव समाज से।
अभी रूस ने अफगानिस्तान के मुद्दे पर मेजबानी की। इसमें तालिबान प्रतिनिधियों ने भाग लिया। भारत ने भी बात की। भारत ने सहायता का आश्वासन भी दिया। चीन ने युद्धग्रस्त देश अफगानिस्तान को 10 लाख अमेरिकी डॉलर उपलब्ध कराए हैं। तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने बताया कि चीन ने यह आर्थिक मदद दी है और मानवीय मदद (विशेष रूप से भोजन और दवाओं के लिए) के तौर पर पांच लाख अमेरिकी डॉलर और उपलब्ध कराने का वादा भी किया है।
अफगानिस्तान की आर्थिक हालात ठीक नहीं हैं। वहां भोजन का संकट हैं। पेट भरने के लिए लोग अपनी बेटियां तक बेच रहे हैं। वहां न जरूरत का समान है, न ठंड से बचने के लिए कपड़े। इस हालात से दुनिया अफगानिस्तान की जनता के बारे में सोच रही है। चिंताकर रही हैं, किंतु अफगानिस्तान पर काबिज तालिबान का रवैया कुछ और ही कहता है। उनके आचरण से लगता है कि पिछले 20 साल में उन्होंने अपने में कोई बदलाव नहीं किया। उनका एजेंडा वही है। वे कट्टर इस्लामवाद से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।सत्ता पर कब्जा करने के बाद तालिबान ने मान्यता पाने के लिए सभी धर्मों को साथ लेकर चलने का दावा किया था। लेकिन अब अल्पसंख्यकों के लिए वहां सुरक्षा हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। तालिबान ने वहां रहने वाले सिखों को फरमान जारी करते हुए कहा है कि या तो इस्लाम कुबूल कर लो या फिर देश छोड़ दो। इतना ही नहीं इस्लाम कबूल न करने पर जान से मारने की धमकी दी जा रही है। तालिबान ने सत्ता संभालते ही जेल में बंद सभी कैदियों को रिहा कर दिया। अब ये रिहा कैदी उन्हें सजा देने वाले न्यायधीश को खोज रहे हैं। न्यायधीश अपनी जान बचाते घूम रह हैं। अफगानिस्तान से भागी 26 महिला जज ग्रीस में शरण लिए हैं।
अफगानिस्तान में तालिबान के आने के बाद लगा था कि चीन पाकिस्तान और रूस तथा आसपास के कुछ इस्लामिक कंट्री उसे तुरंत मान्यता दे देंगे। पाकिस्तान तो इस अभियान के लिए सक्रिय भी हुआ। इतना सब होने के दो माह बाद भी अब तक एक भी देश तालिबान सरकार को मान्यता नहीं दे सका। इसका सबसे बड़ा कारण यह रहा कि अमेरिका से वार्ता में उसने वायदा किया था कि वह देश में मौजूद सभी संगठनों को साथ लेकर सरकार बनाएगा।
अफगानिस्तान से सटे देश चाहते हैं कि अफगानिस्तान में शांति रहे। वहां की जनता को जरूरत की चीज आराम से मिलती रहे, किंतु यह सब आपके−मेरे चाहने और सोचने से होने वाला नही हैं। उसके लिए तो तालिबान को ही अपने रवैये में परिवर्तन करना होगा। उसे ही अपने को इस योग्य बनाना होगा कि दुनिया स्वयं सहायता के लिए आगे आए।


अशोक मधुप
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

अब नभ की ऊंचाई और समुद्र की गहराई में चलेगा BSNL

BSNL को कनेक्टिविटी के लिए मिला लाइसेंस। हवाई जहाज और समुद्र में भी मिलेंगी सेवाएं।

अब हवाई जहाज और समुद्र में मिलेगी BSNL की कनेक्टिविटी, मिल गया लाइसेंस -  Hindi News

नई दिल्ली। हवाई जहाज और समुद्र में चलने वाले जहाजों के यात्री इंटरनेट का मजा ले सकेंगे। इसके लिए भारत संचार निगम लिमिटेड को लाइसेंस मिल गया है। कंपनी वैश्विक स्तर पर कनेक्टिविटी भी देगी।  BSNL के रणनीतिक साझेदार और वैश्विक मोबाइल उपग्रह संचार दिग्गज इनमारसैट ने पुष्टि की कि टेल्को को भारत में इनमारसैट की ग्लोबल एक्सप्रेस (GX) मोबाइल ब्रॉडबैंड सेवाएं देने के लिए आवश्यक लाइसेंस प्राप्त हुआ है। इनफ्लाइट एंड मैरीटाइम कनेक्टिविटी लाइसेंस के तहत GX सरकार, विमानन और समुद्री क्षेत्र में भारतीय ग्राहकों के लिए उपलब्ध होगा।

इन-फ्लाइट कनेक्टिविटी के लिए GX तैनात करने वाली उड़ानों के साथ-साथ, भारत की वाणिज्यिक समुद्री कंपनियां भी प्रभावी जहाज संचालन और चालक दल कल्याण सेवाओं के लिए अपने जहाजों के डिजिटलीकरण को बढ़ाने में सक्षम होंगी। बीएसएनएल का लाइसेंस यह भी सुनिश्चित करेगा कि GX सेवा, सरकार के साथ-साथ अन्य उपयोगकर्ताओं को भी दी जाए। ग्राहकों और भागीदारों के लिए सेवाओं की चरणबद्ध शुरुआत होगी।

बीएसएनएल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक, पीके पुरवार ने कहा कि ग्लोबल एक्सप्रेस को सरकार और मोबिलिटी बिजनेस ग्राहकों के लिए दुनिया की सबसे अच्छी हाई-स्पीड सैटेलाइट संचार सेवा के रूप में मान्यता प्राप्त है और हम भारत में उपयोगकर्ताओं के लिए इन क्षमताओं को उपलब्ध कराकर बहुत खुश हैं।

इनमारसैट के सीईओ राजीव सूरी ने कहा कि वे भारत के लिए प्रतिबद्ध हैं और हाल के विकास से उन्हें आगे की आर्थिक वृद्धि को कम करने में मदद मिलेगी जो वे भारत में देखना चाहते हैं। वहीं, स्पाइसजेट के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अजय सिंह ने कहा कि जब हम अपना नया बोइंग 737 मैक्स विमान पेश करेंगे, तो उम्मीद करते हैं कि यात्रियों को यह अभूतपूर्व कनेक्टिविटी सेवा दे पाएंगे।

गौरतलब है कि यूपी के गाजियाबाद में स्थित, GX केए-बैंड में संचालित होता है और यह एक हाई स्पीड ब्रॉडबैंड नेटवर्क है, जिसे गतिशीलता और सरकारी ग्राहकों के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह सेवा हाई बैंडविड्थ, विश्वसनीयता और सुरक्षा प्रदान करती है जो कमर्शियल और सरकारी-ग्रेड मोबिलिटी ग्राहकों की डिमांड है। कंपनी अगले तीन वर्षों में सात GZ उपग्रहों को और लॉन्च कर रही है।

कुंडलिनी योग: हिंदू धर्म रूपी पेड़ पर उगने वाला मीठा फल, सिर्फ तब तक, जब तक है पेड़

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दोस्तों, यह पोस्ट शांति के लिए और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए समर्पित है। क्योंकि कुंडलिनी योग विशेषरूप से हिंदु धर्म से जुड़ा हुआ है, इसीलिए इसको कतई भी अनदेखा नहीँ किया जा सकता। मैं वैसा बनावटी और नकली योगी नहीँ हूँ कि बाहर से योग-योग करता फिरूँ और योग के मूलस्थान हिंदूवाद पर हो रहे अत्याचार को अनदेखा करता रहूँ। अभी हाल ही में इस्लामिक आतंकियों ने कश्मीर में एक स्कूल में घुसकर बाकायदा पहचान पत्र देखकर कुछ हिंदुओं-सिखों को मार दिया, और मुस्लिम कर्मचारियों को घर जाकर नमाज पढ़ने को कहा। इसके साथ ही, बांग्लादेश में मुस्लिमों की भीड़ द्वारा हिंदुओं और उनके धर्मस्थलों के विरुद्ध व्यापक हिंसा हुई। उनके सैकड़ों घर जलाए गए। उन्हें बेघर कर दिया गया। कई हिंदुओं को जान से मार दिया गया। जेहादी भीड़ मौत का तांडव लेकर उनके सिर पर नाचती रही। सभी हिंदु डर के साए में जीने को मजबूर हैं। मौत से भयानक तो मौत का डर होता है। यह असली मौत से पहले ही जिंदगी को खत्म कर देता है। इन कट्टरपंथियों के दोगलेपन की भी कोई हद नहीँ है। हिंदुओं के सिर पर तलवार लेके खड़े हैं, और उन्हीं को बोल रहे हैं कि शांति बनाए रखो। भई जब मर गए तो कैसी शान्ति। हिंसा के विरुद्ध कार्यवाही करने के बजाय हिंसा को जस्टिफाई किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि कुरान का अपमान हुआ, इस्लाम का अपमान हुआ, पता नहीँ क्या-2। वह भी सब झूठ और साजिश के तहत। फेसबुक पर झूठी पोस्ट वायरल की जा रही है। पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां चुपचाप मूकदर्शक बनी हुई हैं। उनके सामने भी हिंसा हो रही है। धार्मिक हिंसा के विरुद्ध सख्त अंतरराष्ट्रीय कानून बनाए जाने की सख्त जरूरत है। दुनियादारी मानवीय नियम-कानूनों से चलनी चाहिए। किसी भी धर्म में कट्टरवाद बर्दाश्त नहीं होना चाहिये। सभी धर्म एक-दूसरे की ओर उंगली दिखाकर अपने कट्टरवाद को उचित ठहराते हुए उसे जस्टिफाई करते रहते हैं। यह रुकना चाहिए। कट्टरवाद के खिलाफ खुल कर बोलना चाहिए। मैं जो आज आध्यात्मिक अनुभवों के शिखर के करीब पहुंचा हूँ, वह कट्टरपंथ के खिलाफ बोलते हुए और जीवन जीते हुए ही पहुंचा हूँ। कई बार तो लगता है कि पश्चिमी देशों की हथियार निर्माता लॉबी के हावी होने से ही इन हिंसाओं पर इतनी अंतरराष्ट्रीय चुप्पी बनी रहती है। 

इस्कॉन मंदिर को गम्भीर रूप से क्षतिग्रस्त किया गया, भगवान की मूर्तियां तोड़ी गईं, और कुछ इस्कॉन अनुयायियों की बेरहमी से हत्या की गई। सबको पता है कि यह सब पाकिस्तान ही करवा रहा है। इधर दक्षिण एशिया में बहुत बड़ी साजिश के तहत हिंदुओं का सफाया हो रहा है, उधर पूरा अंतरराष्ट्रीय समुदाय चुप, संयुक्त राष्ट्र संघ चुप, मानवाधिकार संस्थाएँ चुप। क्या हिंदुओं का मानवाधिकार नहीँ होता? क्या हिंदु जानवर हैँ? फिर यूएनओ की पीस कीपिंग फोर्स कब के लिए है। हिंदुओं के विरुद्ध यह साजिश कई सदियों से है, इसीलिए तो पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं की जनसँख्या कई गुणा कम हो गई है, और आज विलुप्ति की कगार पर है, पर मुसलमानों की जनसंख्या कई गुना बढ़ी है। अफगानिस्तान और म्यांमार में भी हिंदुओं के खिलाफ ऐसे साम्प्रदायिक हमले होते ही रहते हैं। यहाँ तक कि भारत जैसे हिन्दु बहुल राष्ट्र में भी अनेक स्थानों पर हिंदु सुरक्षित नहीं हैं, विशेषकर जिन क्षेत्रों में हिन्दु अल्पसंख्यक हैं। आप खुद ही कल्पना कर सकते हैं कि जब भारत जैसे हिन्दु बहुल देश के अंदर और उसके पड़ोसी देशों में भी हिंदु सुरक्षित नहीं हैं, तो 50 से ज्यादा इस्लामिक देशों में हिंदुओं की कितनी ज्यादा दुर्दशा होती होगी। पहले मीडिया इतना मजबूत नहीं था, इसलिए दूरपार की दुनिया ऐसी साम्प्रदायिक घटनाओँ से अनभिज्ञ रहती थी, पर आज तो अगर कोई छींकता भी है, तो भी ऑनलाइन सोशल मीडिया में आ जाता है। इसलिए आज तो जानबूझकर दुनिया चुप है। पहले संयुक्त राष्ट्र संघ जैसी संस्थाएँ नहीं होती थीं, पर आज भी ये संस्थाएँ न होने की तरह ही हैं, क्योंकि ये अल्पसंख्यकों को कोई सुरक्षा नहीँ दे पा रही हैं। वैसा बॉस भी क्या, जो अपने मातहतों को काबू में न रख सके। मुझे तो यह दिखावे का यूएनओ लगता है। उसके पास शक्ति तो कुछ भी नहीँ दिखती। क्योँ वह नियम नहीं बनाता कि कोई देश धर्म के आधार पर नहीँ बन सकता। आज के उदारवादी युग में इस्लामिक राष्ट्र का क्या औचित्य है। इसकी बात करना ही अल्पसंख्यक के ऊपर अत्याचार है, लागू करना तो दूर की बात है। जब इस्लामिक राष्ट्र का मतलब ही अन्य धर्मों पर अत्याचार है, तो यूएनओ इसकी इजाजत कैसे दे देता है। यूएनओ को चाशनी में डूबा हुआ खंजर क्यों नहीं दिखाई देता। प्राचीन भारत के बंटवारे के समय आधा हिस्सा हिंदुओं को दिया गया, और आधा मुसलमानों को। पर हिंदुओं को तो कोई हिस्सा भी नहीं मिला। दोनों हिस्से मुसलमानों के हो गए। आज जिसे भारत कहते हैं, वह भी दरअसल हिंदुओं का नहीं है। दुनिया को हिन्दुओं का दिखता है, पर है नहीँ। यह एक बहुत बड़ा छलावा है, जिसे दुनिया को समझना चाहिए। भारत में मुसलमानों को अल्पसंख्यक के नाम से बहुत से विशेषाधिकार प्राप्त हैं, जिसका ये खुल कर दुरुपयोग करते हैं, जिसकी वजह से आज भारत की अखंडता और संप्रभुता को खतरा पैदा हो गया लगता है। पूरी दुनिया में योग का गुणगान गाया जाता है, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है, पर जिस धर्म से योग निकला है, उसे खत्म होने के लिए छोड़ दिया गया है। बाहर-बाहर से योग का दिखावा करते हैं। उन्हें यह नहीं मालूम कि यदि हिंदु धर्म नष्ट हो गया, तो योग भी नहीं बच पाएगा, क्योंकि मूलरूप में असली योग हिंदु धर्म में ही है। पतंजलि योगसूत्रों पर जगदप्रसिद्ध और गहराई से भरी हुई पुस्तक लिखने वाले एडविन एफ. ब्रयांट लिखते हैं कि हिंदू धर्म और इसके ग्रँथ ही योग का असली आधारभूत ढांचा है, जैसे अस्थिपंजर मानव शरीर का आधारभूत ढांचा होता है। योग तो उसमें ऐसे ही सतही है, जैसे मानवशरीर में चमड़ी। जैसे मानव को चमड़ी सुंदर और आकर्षक लगती है, वैसे ही योग भी। पर अस्थिपंजर के बिना चमड़ी का अस्तित्व ही नहीँ है। इसलिए योग को गहराई से समझने के लिए हिन्दु धर्म को गहराई से समझना पड़ेगा। इसीलिए योग को बचाने के लिए हिन्दु धर्म और उसके ग्रन्थों का अध्ययन और उन्हें संरक्षित करने की जरूरत है। उन्होंने कई वर्षों तक कड़ी मेहनत करके हिन्दु धर्म को गहराई से समझा है, उसे अपने जीवन में उतारा है। मैंने भी हिंदु धर्म का भी गहराई से अध्ययन किया है, और योग का भी, इसलिए मुझे पता है। अन्य धर्मों का भी पता है मुझे कि वे कितने पानी में हैं। अधिकांशतः वे सिर्फ हिंदु धर्म का विरोध करने के लिए ही बने हुए लगते हैं। तो आप खुद ही सोच सकते हैं कि जब हिंदु धर्म पूरी तरह से वैज्ञानिक है, तो दूसरे धर्म कैसे होंगे। बताने की जरूरत नहीं है। समझदारों को इशारा ही काफी होता है। जिन धर्मों को अपने बढ़ावे के लिए हिंसा, छल और जबरदस्ती की जरूरत पड़े, वे धर्म कैसे हैं, आप खुद ही सोच सकते हैं। मैंने इस वेबसाइट में हिंदु धर्म की वैज्ञानिकता को सिद्ध किया है। अगर किसी को विश्वास न हो तो वह इस वेबसाइट का अध्ययन कर ले। मैं यहाँ किसी धर्म का पक्ष नहीं ले रहा हूं, और न ही किसी धर्म की बुराई कर रहा हूँ, केवल वैज्ञानिक सत्य का बखान कर रहा हूं, अपनी आत्मा की आवाज बयाँ कर रहा हूँ, अपने कुंडलिनी जागरण के अनुभव की आवाज को बयाँ कर रहा हूँ, अपने आत्मज्ञान के अनुभव की आवाज को बयाँ कर रहा हूँ, अपने पूरे जीवन के आध्यात्मिक अनुभवों की आवाज को बयां कर रहा हूँ, अपने दिल की आवाज को बयां कर रहा हूँ। मैं तो कुछ भी नहीँ हूँ। एक आदमी क्या होता है, उसका तर्क क्या होता है, पर अनुभव को कोई झुठला नहीं सकता। प्रत्यक्ष अनुभव सबसे बड़ा प्रमाण होता है। आज इस्कॉन जैसे अंतरराष्ट्रीय हिन्दु संगठन की पीड़ा भी किसी को नहीं दिखाई दे रही है, जबकि वह पूरी दुनिया में फैला हुआ है। मैंने उनकी पीड़ा को दिल से अनुभव किया है, जिसे मैं लेखन के माध्यम से अभिव्यक्त कर रहा हूँ। यदि हिंदु धर्म को हानि पहुंचती है, तो प्रकृति को भी हानि पहुंचती है, धरती को भी हानि पहुंचती है। प्रकृति-पूजा और प्रकृति-सेवा का व्यापक अभियान हिंदु धर्म में ही निहित है। देख नहीँ रहे हो आप, दुनिया के देशों के बीच किस तरह से घातक हथियारों की होड़ लगी है, और प्रदूषण से किस तरह धरती को नष्ट किया जा रहा है। धरती को और उसके पर्यावरण को यदि कोई बचा सकता है, तो वह हिंदु धर्म ही है।भगवान करे कि विश्व समुदाय को सद्बुद्धि मिले।

टोक्यो पैरालिंपिक: डीएम सुहास के रैकेट का बेस प्राइज ₹50 लाख

जब भारत ने कहा ‘शुक्रिया सुहास’ “नमामि गंगे परियोजना” में किया जाएगा ई-ऑक्शन में मिली राशि का उपयोग। पदक जीतने वाले देश के पहले आईएएस।

नई दिल्ली (PIB) जो पिछले 56 साल के इतिहास में कभी नहीं हुआ वह कर दिखाया सुहास एल यथिराज ने। तभी पूरे देश के दिल से आवाज आयी शुक्रिया सुहास। टोक्यो पैरालिंपिक में नोएडा के डीएम  सुहास एल यथिराज ने बेडमिंटन की मेंस सिंगल्स प्रतियोगिता में ना केवल सिल्वर मेडल जीता बल्की इतिहास भी रच दिया। अभी तक के पैरालिंपिक खेलों में एक प्रशासनिक अधिकारी का यह सबसे बेहतरीन प्रदर्शन था। वो पदक जीतने वाले देश के पहले आईएएस बन गए ।

टोक्यो पैरालिंपिक में मेंस सिंगल्स एसएल-4 कैटिगिरी में सुहास एल यथिराज का सामना फ्रांस के लुकास मजूर से हुआ। फाइनल मुकाबले में सुहास ने पहला राउंड जीत लिया था, लेकिन अगले दो राउंड में उनको हार मिली और वे गोल्ड मेडल से चूक गए लेकिन उन्होंने गर्व के साथ पोडियम पर रजत पदक पहन कर भारत को गौरवान्वित किया।  

सेवा और खेल का एक शानदार संगम! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुहास एल यथिराज को ट्वीट संदेश के जरिये बधाई देते हुए करते हुए कहा, “सेवा और खेल का एक शानदार संगम! डीएम गौतमबुद्ध नगर सुहास यतिराज ने अपने असाधारण खेल प्रदर्शन से हमारे पूरे देश की कल्पना पर कब्जा कर लिया है। बैडमिंटन में रजत पदक जीतने पर उन्हें बधाई। उन्हें उनके भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं।”

बचपन से ही रही खेल के प्रति बेहद दिलचस्पी- सुहास एलवाई का जन्म कर्नाटक के शिमोगा में हुआ। जन्म से ही दिव्यांग सुहास शुरुआत में IAS नहीं बनना चाहते थे। वो बचपन से ही खेल के प्रति बेहद दिलचस्पी रखते थे। इसके लिए उन्हें पिता और परिवार का भरपूर साथ मिला। 2007 में उत्तर प्रदेश कैडर से आइएएस बनने के बाद जहां उन्होंने कई विश्व स्तरीय प्रतियोगिताओं में देश के लिये मैडल जीते वहीं प्रयागराज और नोएडा के जिलाधिकारी की भी जिम्मेदारियां निभायीं।

ऐतिहासिक बेडमिंटन रैकेट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेंट- जिस बेडमिंटन रैकेट से सुहास ने इतिहास रचा उसे उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेंट कर दिया है। अब जबकी प्रधानमंत्री को मिले उपहारों का ई-ऑक्शन शुरू हो चुका है। सुहास का बैडमिंटन भी उन वस्तुओं की सूची में शामिल है जिनका ऑक्शन किया जा रहा है। 17 सितम्बर से शुरू यह ई-आक्शन  7 अक्टूबर तक चलेगा। सुहास की उपलब्धि की निशानी को आप हासिल कर गौरवान्वित हो सकते हैं। इससे मिली राशि का उपयोग “नममि गंगे परियोजना” में किया जाएगा। ई-ऑक्शन में डीएम सुहास के रैकेट का बेस प्राइज 50 लाख रखा गया हैI

नोएडा के डीएम सुहास के बैडमिंटन रैकेट को बनाएं अपना, अभी www.pmmementos.gov.in पर करें लॉग ऑन।

फांसी देगा, हाथ काटेगा और शरीर के टुकड़े भी करेगा तालिबान!

न्यूयॉर्क (एजेंसी)। अफगानिस्तान में बेहतर और समावेशी शासन देने के तालिबान के कथित दावों के बीच उसकी हरकतों से आतंकवादी संगठन का असली चेहरा सामने आने लगा है और इसी कड़ी में तालिबान ने ऐलान किया है कि वह अफगानिस्तान में फांसी देने, हाथ काटने और शरीर के टुकड़े करने जैसी बर्बर सजा को फिर से वापस लाएगा। हालांकि, सुपर पावर अमेरिका ने तालिबान के इस बयान की कड़ी निंदा की है और कहा है कि उसकी कथनी और करनी दोनों पर हमारी नजर है। 

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने शरिया कानूनों को लागू करने पर तालिबान के हालिया बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा, तालिबान का शरिया कानून मानवाधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है और वे अफगानिस्तान में मानवाधिकार सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ काम कर रहे हैं। 

नेड प्राइस ने कहा कि हम न केवल तालिबान के बयान पर बल्कि अफगानिस्तान में उसके एक्शन पर भी नजर रख रहे हैं। प्राइस ने कहा कि अमेरिका अफगान पत्रकारों, नागरिक कार्यकर्ताओं, महिलाओं, बच्चों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और विकलांग लोगों के साथ खड़ा है और तालिबान से उनके अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए कहा है।

अमेरिका की यह प्रतिक्रिया ऐसे वक्त में आई है, जब तालिबान के संस्थापकों में से एक मुल्ला नूरुद्दीन तुराबी ने कहा कि अफगानिस्तान में एक बार फिर फांसी और अंगों को काटने की सजा दी जाएगी। हालांकि, उसने कहा था कि यह संभव है कि ऐसी सजा सावर्जनिक स्थानों पर न दी जाए। तुराबी ने साफ कहा है कि स्टेडियम में दंड देने को लेकर दुनिया ने हमारी आलोचना की है। हमने उनके नियमों और कानूनों के बारे में कुछ नहीं कहा है। ऐसे में कोई हमें यह नहीं बताए कि हमारे नियम क्या होने चाहिए। हम इस्लाम का पालन करेंगे और कुरान पर अपने कानून बनाएंगे।

तालिबान द्वारा फांसी और हाथ और शरीर काटने जैसी सजाएं फिर शुरू किये जाने की चेतावनी के एक दिन बाद संगठन ने इस पर अमल भी कर दिखाया। चार लोगों के शवों को बड़ी क्रूरता से क्रेन के माध्यम से चौराहों पर लटका दिया गया। गौरतलब है कि 15 अगस्त को अफगानिस्तान में सत्ता संभालने के बाद से तालिबान अपने पिछले कार्यकाल की तुलना में नरम शासन का वादा करता रहा है लेकिन देश भर से मानवाधिकारों के हनन की कई खबरें पहले ही सामने आ चुकी हैं।

PM की कोवैक्सीन को लेकर कांग्रेस हमलावर, गए कैसे अमेरिका?

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने पीएम नरेंद्र मोदी को कोवैक्सीन लगवाने के बाद भी अमेरिका में एंट्री मिलने को लेकर सवाल उठाया है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि इस वैक्सीन को अमेरिका ने अपनी लिस्ट में शामिल नहीं किया है। ऐसे में इस टीके को लगवाने के बाद भी पीएम नरेंद्र मोदी को एंट्री कैसे मिली है? दिग्विजय सिंह ने ट्वीट किया, ‘यदि मुझे सही से याद है, तो पीएम नरेंद्र मोदी ने कोवैक्सीन ली थी, जिसे अमेरिका की ओर से मंजूरी नहीं मिली है। …या फिर उन्होंने इसके अलावा कोई और वैक्सीन भी ली है या अमेरिका के प्रशासन ने उन्हें छूट दी है? देश यह जानना चाहता है।

दिग्विजय सिंह के अलावा कांग्रेस की सीनियर नेता मारग्रेट अल्वा के बेटे निखिल अल्वा ने भी इस पर सवाल उठाया है। उन्होंने खुद भी कोवैक्सीन ही लगवाई है। निखिल अल्वा ने ट्वीट किया, ‘अपने प्रधानमंत्री की तरह मैंने भी आत्मनिर्भर कोवैक्सीन लगवाई है। अब मैं ईरान, नेपाल और कुछ अन्य देशों को छोड़कर दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में नहीं जा सकता।…लेकिन मुझे यह जानकर हैरानी हो रही है कि पीएम नरेंद्र मोदी को अमेरिका जाने की अनुमति मिल गई है, जो कोवैक्सीन को मान्यता ही नहीं देता है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि वास्तव में उन्होंने कौन सी वैक्सीन ली थी।

विदित हो कि पीएम नरेंद्र मोदी ने 1 मार्च को दिल्ली स्थित एम्स अस्पताल में जाकर कोरोना वैक्सीन का पहला टीका लगवाया था। उन्होंने भारत में ही बनी कोवैक्सीन की डोज ली थी। वहीं कोवैक्सीन को अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रे्लिया समेत दुनिया के कई बड़े देशों की ओर से मान्यता नहीं दी गई है। हालांकि कोविशील्ड को इस सूची में शामिल किया गया है।

ICJ के चीफ जस्टिस नहीं बने भारत के दलवीर भंडारी, इस कोर्ट में ऐसा कोई पद ही नहीं

<img src="https://images-thequint-com.cdn.ampproject.org/ii/AW/s/images.thequint.com/quint-hindi%2F2021-09%2Fa0d07576-cf53-4904-9fca-0faf7a161d12%2F2.PNG&quot; alt="<div class="paragraphs"><p>सोर्स : स्क्रीनशॉट/ट्विटर</p>

ICJ के चीफ जस्टिस नहीं बने भारत के दलवीर भंडारी, इस कोर्ट में ऐसा कोई पद ही नहीं

वायरल मैसेज में दावा किया जा रहा है कि मोदी सरकार के प्रयासों से भारत के दलवीर भंडारी ICJ में चीफ जस्टिस बन गए हैं

सिद्धार्थ सराठे वेबकूफ Published: 10 Sep 2021, 6:25 PM IST

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