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  • पंचकोल चूर्ण, को आयुर्वेद में एक उत्कृष्ट दीपन (भूख बढ़ाने वाला) और पाचन (पाचन में सुधार करने वाला) औषधि माना जाता है, इसके कई लाभ हैं। पंचकोल में मौजूद पाँच जड़ी-बूटियाँ (पिप्पली, पिप्पलीमूल, चव्य, चित्रक और शुंठी/सोंठ) synergistic रूप से कार्य करती हैं और मुख्यतः जठराग्नि (पाचन अग्नि) को उत्तेजित करती हैं।

    पाचन में सुधार: यह अपच (Indigestion), पेट फूलना (ब्लोटिंग), पेट में गैस बनना और पेट दर्द (Colic Pain) जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करता है।

    भूख बढ़ाना: यह एनोरेक्सिया (Anorexia) यानी भूख न लगने की समस्या में बहुत फायदेमंद है, क्योंकि यह पाचन तंत्र को मजबूत कर भूख बढ़ाता है।

    कफ और श्वसन संबंधी रोग: इसकी गर्म तासीर के कारण यह कफ को कम करने में सहायक है। यह सर्दी, खांसी, जुकाम और कभी-कभी दमा/सांस लेने की समस्याओं में भी आराम देता है।

    अवशोषण (Absorption): यह पोषक तत्वों के बेहतर अवशोषण में मदद करता है, जिससे शरीर को भोजन का पूरा लाभ मिल पाता है।

    जलोदर (Ascites) और प्लीहा वृद्धि (Splenomegaly): यह कफ दोष से संबंधित कुछ गंभीर समस्याओं, जैसे जलोदर (पेट में पानी भरना) और प्लीहा वृद्धि के प्रबंधन में भी पारंपरिक रूप से उपयोग किया जाता है।

    पीरियड्स की समस्या: कुछ आयुर्वेदिक प्रयोगों में इसे दशमूल क्वाथ के साथ मिलाकर अनियमित या कम मासिक धर्म की समस्या में भी उपयोगी बताया गया है।

    पंचकोल के उपयोग का तरीका: पंचकोल का उपयोग आमतौर पर चूर्ण (पाउडर) या क्वाथ (काढ़ा) के रूप में किया जाता है।

    1. पिप्पली (Long Pepper – Piper longum)
    2. पिप्पलीमूल (Long Pepper Root – Piper longum root)
    3. चव्य (Piper retrofractum / Piper chaba)
    4. चित्रक (Ceylon leadwort – Plumbago zeylanica)
    5. शुंठी / नागर (सूखा अदरक / Ginger rhizome – Zingiber officinale)
  • बिजनौर। जिलाधिकारी (DM) श्रीमती जसजीत कौर ने कलेक्ट्रेट परिसर और नुमाइश ग्राउंड चौराहे से पंजाब के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए एक बड़ी राहत मुहिम के तहत वाहनों को रवाना किया। यह सहायता अफजलगढ़ क्षेत्र के स्वयंसेवकों द्वारा अथक प्रयासों से एकत्र की गई थी। इस राहत सामग्री में लगभग ढाई करोड़ रुपए की नकद धनराशि के साथ-साथ दवाइयों एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं पर आधारित सेवा सामग्री शामिल थी।

    राहत सामग्री वाहनों को रवाना करते हुए जिलाधिकारी श्रीमती जसजीत कौर ने प्रभावित लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा, “इस कठिन समय में हमारी संवेदनाएं पीड़ितों के साथ हैं। प्राकृतिक आपदाएं हमारे नियंत्रण से बाहर होती हैं, लेकिन हमारा साथ और सहयोग हमेशा आपके लिए है। “डीएम ने जोर देकर कहा कि इस विपरीत परिस्थिति में भी पूरा समाज एकजुट है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि धैर्य और सामूहिक प्रयास से इस चुनौती का सामना किया जाएगा और प्रभावित क्षेत्र पुनः समृद्धि की ओर बढ़ेंगे।

    जिलाधिकारी ने नि:स्वार्थ सहायता करने के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदाओं से पीड़ित लोगों की मदद करना मानवीय मूल्यों को बलवती बनाता है। उन्होंने कहा, “इस प्रकार के कार्य मानवीय संवेदना, मानवीय प्रेम व समानता, मानवीय करूणा, दया एवं सहयोग का प्रतिबिंब होते हैं, जो समाज के जीवित, संवेदनशील एवं मानवता के प्रति कर्तव्य परायणता को प्रदर्शित करता है। “उन्होंने स्थानीय समुदाय और सामाजिक संगठनों के सहयोग से नक़द लगभग $2.5 करोड़ की धनराशि और अन्य राहत सामग्री भेजने के इस महान कार्य की भूरी-भूरी सराहना की।

    इस अवसर पर राहत कार्य में सक्रिय भूमिका निभाने वाले प्रमुख व्यक्तियों में भाई धर्म सिंह वंशज, बाबा गुरप्रीत सिंह हस्तिनापुर, मलकीत सिंह (अध्यक्ष, अफजलगढ़ गन्ना समिति), सुरेंद्र सिंह प्रधान, सुखदेव सिंह, हरप्रीत सिंह, गुरमुख सिंह, बाबा गुरप्रीत सिंह, गुलजार सिंह, अजमेर सिंह, गुरविंदर सिंह (पूर्व चेयरमैन), भजन सिंह, और बलवंत कंबोज आदि उपस्थित रहे।

  • बिजनौर। धामपुर विकासखंड के ग्राम उमरी में जैविक खेती और कृषि नवाचार को एक नया आयाम मिला, जब जनपद की लोकप्रिय जिलाधिकारी श्रीमती जसजीत कौर (IAS) ने एक उच्च-स्तरीय दल के साथ प्रतिष्ठित किसान श्री ऋतुराज सिंह के जैविक फार्म का दौरा किया।

    अधिकारियों के दल ने श्री ऋतुराज सिंह द्वारा की जा रही ऑर्गेनिक ड्रैगन फ्रूट की आधुनिक खेती का गहन अवलोकन किया। यह खेती विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उर्द, गन्ना एवं अन्य औद्यानिक फसलों के साथ सहफसली पद्धति (Intercropping) के रूप में की जा रही है। यह नवीन प्रयोग कृषि को एक नया और टिकाऊ आयाम प्रदान कर रहा है, जहाँ एक ही भूमि से किसान अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं।

    किसान, श्री ऋतुराज सिंह की पूरी निष्ठा और लगन से की जा रही जैविक ड्रैगन फ्रूट खेती, तथा अन्य फसलों के जैविक उत्पादन को देखकर सभी अधिकारीगण अत्यधिक प्रभावित हुए। उन्होंने किसान की सराहना करते हुए उन्हें जनपद के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत बताया। जिलाधिकारी श्रीमती जसजीत कौर ने इस अवसर पर कहा कि –“ऐसे प्रगतिशील किसान ही जनपद के कृषि क्षेत्र का गौरव हैं। इनकी मेहनत और नवाचार से अन्य किसानों को भी नई दिशा मिलेगी। कृषि को जैविक और टिकाऊ बनाने की दिशा में यह कदम अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    इस अवलोकन के माध्यम से किसानों को एक महत्वपूर्ण संदेश भी दिया गया। अधिकारियों ने उन्हें प्रोत्साहित करते हुए कहा कि जैविक खेती केवल स्वस्थ भोजन का ही माध्यम नहीं है, बल्कि यह प्रकृति संरक्षण और किसानों की आर्थिक उन्नति का भी मजबूत आधार है। यह दौरा बिजनौर जनपद में जैविक और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।

    दिनांक 04 अक्टूबर 2025 को इस ऐतिहासिक अवलोकन में जिलाधिकारी के साथ उपजिलाधिकारी (SDM) धामपुर सुश्री स्मृति मिश्रा (IAS), उप कृषि निदेशक घनश्याम वर्मा, जिला कृषि अधिकारी जसवीर सिंह तेवतिया और जिला उद्यान अधिकारी भी शामिल थे।

  • Vision Arena द्वारा विशेष रूप से स्नातक फ्रेशर्स (Graduate Freshers) को कॉर्पोरेट जगत और जॉब मार्केट के लिए तैयार करने के उद्देश्य से एक 2-दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला ‘नयी उड़ान’ का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यशाला का मुख्य लक्ष्य प्रतिभागियों को नौकरी पाने की पूरी प्रक्रिया में मार्गदर्शन करना और उनके करियर की शुरुआत को सुगम बनाना है।

    यह कार्यशाला 9+ वर्षों के कॉर्पोरेट अनुभव वाले ट्रेनर कार्तिक चौधरी द्वारा संचालित की जाएगी।

    नाम: नयी उड़ान (NAYI UDAAN)

    प्रारूप: 2-दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला

    लक्ष्य समूह: स्नातक फ्रेशर्स

    प्रशिक्षक: कार्तिक चौधरी

    भाषा: हिंदी और अंग्रेजी (मिश्रित)

    शुल्क और छूट: केवल ₹1099 (वास्तविक मूल्य ₹2099 पर 47% की विशेष छूट)

    बोनस: प्रतिभागियों को कॉर्पोरेट सॉफ्ट स्किल्स सर्टिफिकेशन भी प्रदान किया जाएगा।

    कार्यशाला नौकरी पाने की पूरी प्रक्रिया को कवर करेगी, जिसमें निम्नलिखित प्रमुख विषय शामिल हैं:

    रिज्यूमे निर्माण: एक ऐसा प्रभावी रिज्यूमे कैसे तैयार करें जो शॉर्टलिस्ट हो सके, साथ ही आधुनिक एचआर (HR) प्रणालियों के लिए रिज्यूमे को अनुकूलित करने के तरीके।

    नौकरी खोज: उपयुक्त और सही नौकरियों को खोजने की तकनीकें और सफलतापूर्वक आवेदन करने की रणनीतियाँ।

    इंटरव्यू की तैयारी: इंटरव्यू के विभिन्न राउंड (जैसे टेक्निकल, एचआर) को सफलतापूर्वक पास करने का मार्गदर्शन।

    सवालों के जवाब: सामान्य और ट्रिकी इंटरव्यू सवालों के जवाब देने के लिए विशेष टिप्स और तकनीकें।

    सेक्टर ज्ञान: बैंकिंग, एनबीएफसी (NBFC) और बीपीओ (BPO) जैसे प्रमुख सेक्टर्स के कार्य करने के तरीके की विस्तृत जानकारी।

    भूमिका-आधारित कौशल: इन उद्योगों में प्रमुख विभागों और विभिन्न भूमिकाओं के लिए आवश्यक कौशल (Skills required for various roles) की विस्तृत जानकारी प्रदान की जाएगी

    पंजीकरण और संपर्क विवरण

    इच्छुक फ्रेशर्स निम्नलिखित माध्यमों से कार्यशाला के लिए पंजीकरण कर सकते हैं या अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं:

    यह करियर-उन्मुख वर्कशॉप फ्रेशर्स को नौकरी के लिए आवश्यक कौशल और ज्ञान प्रदान करने पर केंद्रित है।

    आप व्हाट्सएप के माध्यम से इस कार्यशाला के लिए आसानी से पंजीकरण कर सकते हैं। आपको बस 7982665095 नंबर पर एक मैसेज भेजना होगा, जिसमें आप अपनी रुचि व्यक्त करें और पंजीकरण की प्रक्रिया पूछें।

    > “नमस्ते, मैं ‘नयी उड़ान’ 2-दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला के लिए पंजीकरण करना चाहता/चाहती हूँ। कृपया मुझे पंजीकरण की प्रक्रिया और भुगतान विवरण बताएं। धन्यवाद।”>

  • हर साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को शरद पूर्णिमा मनाई जाती है। इसे कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस तिथि पर चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है और माना जाता है कि इसकी रोशनी से अमृत वर्षा होती है।
    वर्ष 2025 में, पूर्णिमा तिथि का आरंभ 6 अक्टूबर को होने के कारण, शरद पूर्णिमा 6 अक्टूबर 2025 (सोमवार) को मनाई जाएगी।

    विवरणसमय
    आश्विन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि का आरंभ6 अक्टूबर 2025, सुबह 11 बजकर 24 मिनट से
    आश्विन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि का समापन7 अक्टूबर 2025, सुबह 9 बजकर 35 मिनट तक
    शरद पूर्णिमा की मुख्य तिथि6 अक्टूबर 2025, सोमवार
    शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय का समयशाम 05 बजकर 31 मिनट पर
    शरद पूर्णिमा पर पूजा का महत्व और पूजा विधि
    शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस दिन स्नान और दान करने के साथ-साथ मां लक्ष्मी की पूजा का भी विधान है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात को मां लक्ष्मी धरती पर भ्रमण करती हैं। इसलिए इस दिन उनकी पूजा-अर्चना करने के साथ ही जागरण (रातभर जागना) किया जाता है।
    पूजा विधि का मुख्य अंग:पंचक: यह 3 अक्टूबर से आरंभ होकर 8 अक्टूबर को समाप्त होगा, जिसका प्रभाव शरद पूर्णिमा पर भी रहेगा।

    ज्योतिषीय घटना: शनि का नक्षत्र परिवर्तन

    शरद पूर्णिमा के आस-पास शनि देव का गुरु बृहस्पति के नक्षत्र पूर्वाभाद्रपद में प्रवेश भी होगा। यह नक्षत्र परिवर्तन ज्योतिष की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो कई राशियों के लिए तरक्की और नए अवसर लेकर आ सकता है, जबकि कुछ जातकों को चुनौतियों का सामना भी करना पड़ सकता है।

    रात को खुले आसमान के नीचे दूध से बनी खीर रखी जाती है, जिसे अगले दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।

    मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा की जाती है और उन्हें खीर का भोग लगाया जाता है।

    मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होता है और उसकी किरणें अत्यंत लाभकारी होती हैं। चंद्रमा का संबंध दूध से होने के कारण, इस दिन दूध से बनी वस्तुओं (खीर) को चंद्रमा की रोशनी में रखने से वह अमृत तुल्य हो जाती है। यह खीर सकारात्मक ऊर्जा से भर जाती है और इसका सेवन स्वास्थ्य के लिए उत्तम माना जाता है। यह खीर मां लक्ष्मी को भी अत्यंत प्रिय है।

    भद्रा काल: 6 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 23 मिनट पर आरंभ होकर रात 10 बजकर 53 मिनट पर समाप्त होगा।

  • स्तनधारी जीवों के संरक्षण का संदेश

    लखनऊ। दुनिया भर में प्रतिवर्ष 05 अक्टूबर को मनाए जाने वाले ‘ग्लोबल मैमल बिग डे’ के अवसर पर ओखला बर्ड सैंक्चुअरी में विशेष ईको रन का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन उत्तर प्रदेश ईको टूरिज्म और ग्लोबल वाइल्डलाइफ फेयर के सहयोग से किया जा रहा है। इस ईको रन का उद्देश्य सिर्फ दौड़ना नहीं, बल्कि प्रकृति और स्तनधारी जीवों के संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। यह जानकारी उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने दी। 

    पर्यटन मंत्री ने बताया कि ‘इको रन में सभी आयु वर्ग के लोग हिस्सा ले सकते हैं। ओखला बर्ड सैंक्चुअरी (दिल्ली-एनसीआर) की प्राकृतिक सुंदरता के बीच एक विशेष दौड़ में सम्मिलित होना धावकों को अविस्मरणीय अनुभव देगा। यह दौड़ ग्लोबल मैमल बिग डे का हिस्सा है, जो प्रत्येक वर्ष छोटे से छोटे चमगादड़ से लेकर विशाल हाथियों तक सभी स्तनधारी जीवों की विविधता, महत्व और संरक्षण को सम्मानित करता है।’ 

    ओखला बर्ड सैंक्चुअरी में ईको रन की शुरुआत 05 अक्टूबर (रविवार) की सुबह 7:00 बजे, गेट नंबर- 2 से शुरू होगी। इस दौड़ में संरक्षणवादियों, शिक्षाविदों, पर्यटन क्षेत्र के प्रतिनिधियों, फिटनेस उत्साही लोगों एवं सामान्य जनमानस की भागीदारी रहेगी। हर कदम के साथ प्रतिभागी न केवल जीवन के हर रूप का उत्सव मनाएंगे, बल्कि स्तनधारी जीवों के संरक्षण और उन्हें सुरक्षित रखने की साझा जिम्मेदारी के प्रति जागरूकता फैलाने में भी सक्रिय योगदान देंगे।

    उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया, कि ‘स्तनधारी जीव हमारे पर्यावरण और स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इनमें से कई संकट का सामना कर रहे हैं, जिनके संरक्षण की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है। इसी उद्देश्य के साथ यूपी ईको टूरिज्म और ग्लोबल वाइल्डलाइफ फेयर के सहयोग से ईको रन का आयोजन किया जा रहा है। यह विशेष कार्यक्रम लोगों को फिटनेस, जागरूकता और संरक्षण के लिए एक मंच प्रदान करता है।’ उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की भागीदारी से यह पहल स्तनधारी जीवों के संरक्षण और स्थानीय समुदाय की भागीदारी के बीच सेतु बनाती है। ईको रन प्रतिभागियों को न केवल दौड़ने का अवसर प्रदान करेगा, बल्कि वे प्रकृति और जैव विविधता की सुरक्षा के संदेश को भी आगे बढ़ाएंगे।

  • लखनऊ। उत्तर प्रदेश की आंगनवाड़ियों में कार्यकत्रियों और सहायिकाओं की बड़े पैमाने पर भर्ती प्रक्रिया शुरू होने वाली है। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार निदेशालय की ओर से जारी निर्देश के अनुसार, कुल 69,000 रिक्तियों को भरने की तैयारी है। इस भर्ती के लिए इंटरमीडिएट (12वीं) पास महिलाएं पात्र होंगी।

    राज्य सरकार आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं के लाखों खाली पदों को भरने जा रही है। इन पदों पर भर्ती के लिए सभी जिलों में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया है।

    कार्यकत्री पदों का वर्गीकरण:

    2,123 पद: पिछले वर्ष की भर्ती में त्रुटिपूर्ण अभिलेख, आरक्षण के अनुरूप आवेदन न होने या चयनितों द्वारा कार्यभार ग्रहण न करने से खाली।

    5,529 पद: नए आंगनबाड़ी केंद्र खुलने से सृजित नए पद।

    सहायिका पदों का वर्गीकरण:

    38,994 पद: 62 वर्ष की आयु पूरी करने और मृत्यु होने से खाली हुए पद।

    22,260 पद: मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों के मुख्य आंगनबाड़ी केंद्रों में अपग्रेड होने से सृजित नए पद।

    पात्रता मानदंड और आवेदन प्रक्रिया 📋

    आवेदन पोर्टल: इच्छुक महिलाएं upanganwadibharti.in पोर्टल पर जाकर आवेदन कर सकेंगी। जिलों में रिक्त पदों का ब्योरा इसी पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।

    आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को ₹7,500 प्रति माह मानदेय मिलेगा।

    आंगनबाड़ी सहायिकाओं को ₹3,750 प्रति माह मानदेय मिलेगा।

    वरीयता का प्रावधान:

    भर्ती में गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार की विधवा, तलाकशुदा या परित्यक्ता महिला को प्राथमिकता (वरीयता) दी जाएगी।

    ग्राम पंचायत में पात्र महिला न मिलने पर न्याय पंचायत से श्रेणीवार चयन किया जाएगा।सहायिका से कार्यकत्री पदोन्नति:

    आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के कुल रिक्त पदों में से 50 प्रतिशत पदों को आंगनबाड़ी सहायिकाओं से भरा जाएगा।

    पात्रता: जिस आंगनबाड़ी में पद रिक्त है, उस ग्रामीण क्षेत्र की ग्राम सभा या शहरी क्षेत्र के वार्ड में पाँच वर्ष की न्यूनतम सेवा पूरी करने वाली सहायिकाएं ही इसके लिए पात्र होंगी।

    अपात्रता: जिस सहायिका ने लापरवाही की है या तीन माह या उससे अधिक अनाधिकृत रूप से अवकाश लिया है, उसे इस अवसर का लाभ नहीं मिलेगा।

    अन्य महत्वपूर्ण नियम: बैकलॉग की समाप्ति: इस बार से भर्ती में बैकलॉग नहीं रहेगा। सहायिकाओं के न मिलने पर बचे हुए कार्यकत्री पदों को सीधी भर्ती से भरा जाएगा।

  • ~ Bhupendra Nirankari

    बिजनौर। भारत सरकार के निर्देशानुसार, राजकीय आईटीआई बिजनौर में 4 अक्टूबर 2025 को “कौशल दीक्षांत समारोह” का भव्य आयोजन किया गया। इस समारोह का मुख्य उद्देश्य आईटीआई सफलतापूर्वक पूर्ण कर चुके युवाओं को रोजगार के प्रति आश्वस्त करना और उन्हें सम्मानित करना था।

    दोपहर 1:00 बजे आयोजित इस समारोह की अध्यक्षता प्रधानाचार्य मंजुल मयंक ने की, जबकि संचालन प्रधान सहायक राकेश शर्मा द्वारा किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बिजनौर सांसद प्रतिनिधि विजय सिंह चौहान थे। मुख्य अतिथि विजय सिंह चौहान ने अपने संबोधन में आईटीआई कर चुके युवाओं को रोजगार दिलाने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि “सभी छात्र-छात्राएं अपना प्रशिक्षण मेहनत से पूरा कर अपने कार्य में दक्ष हों। मेरा वादा है कि आपको रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिष्ठित कंपनियों को आपके संस्थान में ही बुलाया जाएगा।”

    कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि विजय सिंह चौहान द्वारा मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित एवं पुष्प अर्पित कर किया गया।

    समारोह में वर्ष 2025 में आईटीआई में अपनी-अपनी ट्रेड में टॉपर रहे मेधावी छात्र-छात्राओं को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि ने इन छात्रों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए।

    सम्मानित मेधावी छात्र-छात्राएं: चिरायु तोमर, प्रिंस कुमार, प्रमोद कुमार, हर्मेन्द्र कुमार, आयुष कुमार, अभिषेक कुमार, आदित्य कुमार, रोहित कुमार, पूजा, सुमित कुमार, मोहम्मद अदीब, पूनम सैनी, इशू कुमार, विकुल कुमार शर्मा, शगुन चौहान, प्रिया एवं प्रियंका।

    इसके अतिरिक्त, वर्ष 2025 में सफलतापूर्वक आईटीआई प्रशिक्षण पूरा कर चुके सभी छात्र-छात्राओं को नेशनल ट्रेड सर्टिफिकेट (National Trade Certificate – NTC) प्रदान कर सम्मानित किया गया।

    सम्मानित छात्र-छात्राएं (प्रतिनिधि): सौतम, कुमार आदित्य कुमार, गजेंद्र, अक्षय, राधेश्याम, अविनाश कुमार, विशाल कुमार, निपेंद्र सैनी, रविकांत, तपस्या, सुधांशु कुमार, शिवम एवं तुषार शर्मा समेत अन्य सभी उत्तीर्ण छात्र-छात्राएं।

    कौशल दीक्षांत समारोह की शुरुआत से पूर्व, प्रातः 9:30 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक विज्ञान भवन नई दिल्ली में आयोजित हुए मुख्य कार्यक्रम का सीधा प्रसारण समस्त छात्र-छात्राओं एवं स्टाफ द्वारा देखा गया। कार्यक्रम के अंत में अध्यक्ष मंजुल मयंक ने जनपद में संचालित आईटीआई का विस्तृत विवरण उपलब्ध कराया और उपस्थित मुख्य अतिथियों, स्टाफ तथा छात्रों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

    कार्यक्रम में प्रधान सहायक राकेश शर्मा, फोरमैन दीपक कुमार गुप्ता, प्रहलाद सिंह, परितोष चंदेल, सत्येंद्र कुमार, दिवाकर चौधरी, कमलवीर सिंह, सुशील कुमार, मनोज चौहान, योगेश कुमार, नीरज चौधरी, अनुज यादव, राहुल सिंह, आशीष कुमार सक्सेना, आशीष कुमार, प्रेम सिंह, संजीव चौधरी, वी के वर्मा, विजयपाल सिंह, अशोक कुमार, कुलदीप ज़ख्मोला, नीरज कुमार शर्मा, प्रकाश सिंह, अबरार हुसैन, बृजेश कुमार खरवार, श्रवण कुमार गुप्ता, सुनील डडियाल, शशि भूषण शर्मा समेत समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।

  • बिजनौर। नगीना रोड स्थित ग्रीन फील्ड पब्लिक स्कूल, पेदी में आज मौखिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम भारत केयर संस्था और कोलगेट कम्पनी के सहयोग से किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य बच्चों में दांतों और मुँह की उचित साफ-सफाई के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।

    भारत केयर संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर, आनंद कुमार के नेतृत्व में स्वास्थ्य टीम ने बच्चों को मौखिक स्वास्थ्य के महत्व से परिचित कराया। अभियान के दौरान निम्नलिखित महत्वपूर्ण टिप्स और जागरूकता संदेश दिए गए:

    ~ उचित सफाई: बच्चों को दाँतों और मुँह की उचित तरीके से साफ-सफाई करने का व्यावहारिक प्रदर्शन (डेमो) दिया गया।

    ~ टीथ-ब्रश का समय: सुबह और शाम अच्छे से टीथ-ब्रश करने की आदत डालने पर जोर दिया गया, जिससे कैविटी और अन्य दंत रोगों से बचा जा सके।

    ~ स्वच्छता का महत्व: शारीरिक स्वास्थ्य और अच्छी आदतों के लिए स्वच्छता के महत्व को सरल भाषा में समझाया गया।

    जागरूकता अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए संस्था द्वारा सभी बच्चों, अध्यापकों और अध्यापिकाओं को निःशुल्क सामग्री वितरित की गई।

    डेमो किट्स: सभी प्रतिभागियों को व्यावहारिक उपयोग के लिए डेमो किट्स प्रदान की गईं।

    टूथपेस्ट कैलेंडर: बच्चों को नियमित ब्रशिंग की आदत विकसित करने में मदद करने के उद्देश्य से टूथपेस्ट कैलेंडर निःशुल्क वितरित किए गए।

    विद्यालय के प्रबंधक अनिल शर्मा ने सफल आयोजन के लिए भारत केयर संस्था और उसकी स्वास्थ्य टीम का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि “संस्था के सदस्यों व स्वास्थ्य टीम ने सरलता से टिप्स देकर बच्चों को जागरूक किया है। स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति इस प्रकार के सरल और प्रभावी मार्गदर्शन के लिए हम भारत केयर संस्था के कार्यकर्ताओं का हृदय से आभार प्रकट करते हैं।”

    कार्यक्रम में विद्यालय की ओर से प्रिया, अलशानिया, मयंक कुमार, रोशी, रिज़वी, शाज़िया, मोनिका शर्मा, नेहा रानी, मुसर्रत, मरियम, अतिया, अंशिका हल्दिया, पूजा, आशु, शिवानी, अभिषेक कुमार, और शशि शर्मा सहित बड़ी संख्या में अध्यापकों और अध्यापिकाओं ने भाग लिया और बच्चों को प्रोत्साहित किया।

  • बिजनौर। चांदपुर तहसील व थाना क्षेत्र के गांव दरबाड़ा में शुक्रवार रात एक अत्यंत हृदय विदारक घटना सामने आई, जहाँ खेत में पानी चलाने गए 60 वर्षीय एक बुजुर्ग किसान की हाईटेंशन (HT) लाइन के टूटे (या लटके) तार की चपेट में आने से मौके पर ही मौत हो गई। परिजनों ने इस मौत के लिए सीधे तौर पर बिजली विभाग के अधिकारियों की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है!

    दरबाड़ा निवासी अर्जुन सिंह (60 वर्ष) पुत्र शमशेर सिंह शुक्रवार दोपहर या शाम को अपने खेतों में पानी चलाने गए थे। परिजनों और ग्रामीणों के अनुसार, खेत के ऊपर से गुजर रही एचटी लाइन (हाईटेंशन लाइन) या तो काफी नीचे लटकी हुई थी, या उसका तार टूटकर पड़ा था। बताया गया है कि तार इतना नीचे था कि वह किसान के गर्दन से छू गया या किसान टूटे हुए तार की चपेट में आ गए, जिससे उन्हें तेज करंट लगा और वह घटनास्थल पर ही गिर पड़े। उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

    दुर्घटना का पता तब चला जब शाम के समय अकबरपुर गांव के किसान चारा काटने के लिए उसी जंगल की ओर जा रहे थे। उन्होंने अर्जुन सिंह को खेत में पड़े देखा, जिसके बाद गांव में इसकी जानकारी दी गई। सूचना मिलते ही परिजन और ग्रामीण बड़ी संख्या में घटनास्थल पर जमा हो गए। अर्जुन सिंह को मृत देखकर पूरे परिवार और गांव में मातम छा गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

    जानकारी के अनुसार मृतक अर्जुन सिंह के दो पुत्र हैं, जो नौकरी के सिलसिले में देहरादून और हरिद्वार में रहते हैं। उन्हें भी घटना की सूचना दे दी गई है।

    घटनास्थल पर मौजूद परिजनों और ग्रामीणों ने बिजली विभाग की घोर अनदेखी पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। परिजनों ने बताया कि खेत के ऊपर से गुजर रही एचटी लाइन काफी नीचे थी, जिसकी शिकायत वे कई बार बिजली विभाग के अधिकारियों को कर चुके थे। इसके बावजूद विभाग के अधिकारियों ने आँखें मूंदे रखीं और इस समस्या को ठीक नहीं किया। परिजनों का कहना है कि बिजली विभाग के अधिकारियों की इसी लापरवाही के चलते अर्जुन सिंह की मौत हुई है, और इसलिए इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के लिए बिजली विभाग के अधिकारी ही जिम्मेदार हैं।

    सूचना दिए जाने के बावजूद, काफी समय तक न तो पुलिस और न ही बिजली विभाग का कोई अधिकारी मौके पर पहुंचा, जिससे ग्रामीणों में गुस्सा और बढ़ गया। बाद में सूचना मिलने पर पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और मामले की जानकारी ली। वहीं किसान की मृत्यु का पता चलते ही समाजसेवी गुड सेमिरटर्न शिव सेना जिला प्रमुख चौधरी वीर सिंह तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने बिजली विभाग के एसडीओ, तहसीलदार चांदपुर व पुलिस इंस्पेक्टर चांदपुर से वार्ता की। उचित मुआवजा देने के आश्वासन पर किसान की डेड बॉडी पोस्टमार्टम के लिए भिजवाई गई।

  • लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय आज तीन ऐसे वरिष्ठ अधिकारियों की विदाई का साक्षी बना, जिन्होंने अपने दशकों के सेवाकाल में न सिर्फ कानून-व्यवस्था को मजबूत किया, बल्कि अपनी विशिष्ट उपलब्धियों से पुलिस संगठन के लिए एक अमिट विरासत भी छोड़ी। पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश, राजीव कृष्ण द्वारा आयोजित एक भावभीनी विदाई समारोह में डॉ. जी. के. गोस्वामी (ADG), श्री कमला प्रसाद यादव (DIG) और श्री पंकज कुमार पाण्डेय (SP) को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया।

    1. डॉ. जी. के. गोस्वामी, अपर पुलिस महानिदेशक (ADG)(IPS, 1997 बैच, सेवाकाल: 28+ वर्ष)

    फॉरेंसिक विज्ञान में नेतृत्व: उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS) के निदेशक के रूप में, उन्होंने संस्थान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    आधुनिकीकरण: पुलिस इन्वेस्टिगेशन और क्राइम सीन मैनेजमेंट में अत्याधुनिक तकनीकों और साइंटिफिक उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा दिया।

    जांच में विशेषज्ञता: जटिल आपराधिक मामलों की वैज्ञानिक जांच और विश्लेषण में उनकी विशेषज्ञता ने कई हाई-प्रोफाइल केसों को निर्णायक मोड़ दिया।

    2. श्री कमला प्रसाद यादव, पुलिस उप महानिरीक्षक (DIG)(PPS, 1994 बैच, सेवाकाल: 30+ वर्ष)

    भ्रष्टाचार पर नियंत्रण: भ्रष्टाचार निवारण संगठन में रहते हुए, उन्होंने भ्रष्टाचार के विरुद्ध कई सफल ऑपरेशन का नेतृत्व किया और सरकारी विभागों में पारदर्शिता लाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    फील्ड ऑपरेशन: विभिन्न जिलों में पुलिस अधीक्षक के रूप में तैनाती के दौरान, उन्होंने सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने और गंभीर अपराधों के नियंत्रण में उल्लेखनीय सफलता हासिल की।

    सामुदायिक पुलिसिंग: सामुदायिक पुलिसिंग और जन-संवाद के माध्यम से पुलिस-जनसंपर्क को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया।

    3. श्री पंकज कुमार पाण्डेय, पुलिस अधीक्षक (SP)(PPS, 1999 बैच, सेवाकाल: 26+ वर्ष)

    पीएसी में सुधार: पीएसी मुख्यालय में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने प्रोविंशियल आर्म्ड कॉन्स्टेबुलरी (PAC) की कार्यप्रणाली और जवानों के प्रशिक्षण स्तर में सुधार लाने के लिए कई पहल कीं।

    सुरक्षा व्यवस्था: प्रमुख आयोजनों और चुनाव के दौरान कुशल बल प्रबंधन और सुरक्षा योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया।

    अनुशासन और प्रशिक्षण: पीएसी जवानों के बीच अनुशासन और व्यावसायिकता को बढ़ाने पर केंद्रित कार्य किया।

    डीजीपी राजीव कृष्ण ने विदाई समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि इन अधिकारियों की सेवानिवृत्ति उत्तर प्रदेश पुलिस बल के लिए एक भावुक क्षण है। डीजीपी ने कहा: “आज हम न सिर्फ तीन उत्कृष्ट अधिकारियों को विदाई दे रहे हैं, बल्कि पुलिस विभाग के लिए उनकी अमूल्य विरासत को भी नमन कर रहे हैं। डॉ. जी. के. गोस्वामी ने वैज्ञानिक जांच के क्षेत्र में यूपी पुलिस को एक नई दिशा दी है। उनकी विशेषज्ञता के बिना, कई जटिल मामले अनसुलझे रह जाते। श्री कमला प्रसाद यादव ने अपनी 30 वर्षों की सेवा में ईमानदारी और निर्भीकता का जो मानक स्थापित किया है, वह हर युवा अधिकारी के लिए एक प्रेरणा है। वहीं, श्री पंकज कुमार पाण्डेय ने अपनी सेवाओं से पुलिस बल को संगठनात्मक और क्रियात्मक मजबूती प्रदान की है।”

    डीजीपी ने कहा कि”इन अधिकारियों ने अपने लंबे सेवाकाल में न केवल चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना किया, बल्कि हमेशा कानून और न्याय के प्रति अपनी निष्ठा को सर्वोपरि रखा। उनका सेवाकाल ‘सेवा, सुरक्षा और सहयोग’ के हमारे आदर्श वाक्य का सच्चा प्रतिबिंब रहा है। हम उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट कर उनके योगदान के प्रति आभार व्यक्त करते हैं और उनके स्वस्थ और सुखी सेवानिवृत्त जीवन के लिए हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं। उनकी विरासत हमेशा हमारे बल का मार्गदर्शन करती रहेगी।” विदाई समारोह में पुलिस मुख्यालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी तीनों सेवानिवृत्त अधिकारियों को पुष्पगुच्छ भेंट कर उनकी सेवाओं के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।

  • बिजनौर। दिनांक 04 अक्टूबर 2025 को रिजर्व पुलिस लाइन, बिजनौर में ‘अन्तर्जनपदीय पुलिस वॉलीबॉल एवं सेपक टकरा प्रतियोगिता (बरेली जोन, वर्ष 2025)’ का औपचारिक शुभारम्भ किया गया। पुलिस अधीक्षक, बिजनौर अभिषेक कुमार सिंह ने इस महत्वपूर्ण खेल आयोजन का उद्घाटन किया, जिसमें बरेली ज़ोन की विभिन्न जनपदों की टीमें हिस्सा ले रही हैं।

    कार्यक्रम का शुभारम्भ विधिवत उद्घाटन समारोह और परेड निरीक्षण के साथ हुआ। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक जनपद बिजनौर के साथ-साथ पुलिस अधीक्षक नगर, समस्त क्षेत्राधिकारीगण, प्रतिस्पर्धी टीमों के खिलाड़ी और पुलिस बल के अन्य अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित रहे। पुलिस अधीक्षक ने प्रतियोगिता में भाग लेने आई सभी टीमों का गर्मजोशी से स्वागत किया।

    अपने संबोधन में पुलिस अधीक्षक बिजनौर ने खिलाड़ियों से निष्ठा, अनुशासन और सच्ची खेल भावना के साथ प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने का आह्वान किया। उन्होंने इन आयोजनों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि: “ऐसे आयोजन न केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि टीम भावना और आपसी सहयोग को भी बढ़ावा देते हैं। खेल के मैदान में प्रदर्शन पुलिस बल की एकजुटता और फिटनेस को दर्शाता है।”

    इस अवसर पर उपस्थित अन्य अधिकारियों ने भी खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया और पूरी प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिए सभी को शुभकामनाएँ दीं। इस प्रतियोगिता के माध्यम से बरेली ज़ोन के विभिन्न पुलिस बलों को एक मंच पर आकर अपनी खेल प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा।

  • लखनऊ। गांधी जयंती (2 अक्टूबर) के दिन ‘ड्राई डे’ होने के बावजूद अवैध शराब बेचने वालों पर लखनऊ आबकारी विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। जिला आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह के निर्देश पर आबकारी विभाग की टीम ने सैरपुर थाना क्षेत्र में छापेमारी कर भारी मात्रा में अवैध विदेशी शराब बरामद की है।

    मुखबिर खास की सूचना पर आबकारी निरीक्षक शिखर मल्ल (सेक्टर 6) और अभिषेक सिंह (क्षेत्र 4) के नेतृत्व में आबकारी स्टाफ और सैरपुर थाना प्रभारी मनोज कुमार कोरी मय पुलिस बल की टीम ने मुबारकपुर चौराहे के पास छापा मारा। तलाशी के दौरान विभिन्न महंगी विदेशी ब्रांडों की कुल 365 बोतलें और केन जब्त की गईं। बरामद हुई शराब के ब्रांडों में बॉम्बे सैफ़ायर, जैगरमिस्टर, जैक डैनियल्स, रेड लेबल, टीचर्स, ब्लैक डॉग, ब्लैक एंड व्हाइट, 100 पाइपर, बडवाइजर, और ब्रीज़र शामिल हैं।छापेमारी के दौरान आबकारी निरीक्षक विजय और अखिलेश कुमार को 24 खाली बोतलें, 03 खाली हॉफ, 01 खाली पौवा, और 77 QR कोड भी मिले।

    मौके से पुलिस ने मुख्य आरोपी नवनीत गुप्ता उर्फ़ गोपाल गुप्ता (उम्र 32 वर्ष) पुत्र सतीश चंद्र गुप्ता, निवासी सदाबहार कॉलोनी, मुबारकपुर को गिरफ्तार कर लिया। नवनीत गुप्ता के विरुद्ध सैरपुर थाने में आबकारी अधिनियम की धारा 60 के तहत और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई कठोर धाराओं जैसे 61(2), 318(4), 336(3), 338, 340(2), और 350 के तहत अभियोग पंजीकृत कराया गया है। कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद आरोपी को जेल भेज दिया गया है।

    अगले दिन, शुक्रवार को, उपरोक्त मुक़दमे में वांछित सह-अभियुक्त मोनू सिंह पुत्र रमेश सिंह, निवासी हरीनगर, बालागंज, के विरुद्ध भी कार्रवाई की गई। मोनू सिंह के खिलाफ ठाकुरगंज थाने में BNS की धारा 318(4), 336(3), 338, 340(2) और $3/25 आयुध अधिनियम के तहत अभियोग पंजीकृत कराया गया, क्योंकि छापेमारी के दौरान एक देशी .315 बोर का तमंचा भी मिला था।

    आबकारी विभाग की इस बड़ी कार्रवाई से जिले के अवैध शराब कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। हालांकि, यह भी बताया गया है कि 2 अक्टूबर को इटौंजा, अर्जुनपुर कुंम्हरावां, बख़्शी का तालाब, सैरपुर समेत कई इलाकों में शराब निर्धारित मूल्य से ज्यादा ब्लैक रेट पर बेची गई थी, जिस पर स्थानीय पुलिस और आबकारी अधिकारियों ने कथित तौर पर ध्यान नहीं दिया था।

  • लखनऊ। कृष्णा नगर पुलिस ने गुरुवार को मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई करते हुए थाना क्षेत्र के गंगाखेड़ा रेलवे अण्डरपास से बाइक सवार तीन गांजा तस्करों को गिरफ्तार किया है।

    कृष्णा नगर कोतवाली प्रभारी पी के सिंह ने बताया कि पकड़े गए तस्करों के पास से 5.200 किलो गांजा और तस्करी में इस्तेमाल की गई एक मोटरसाइकिल बरामद हुई है।

    1. कलीमुद्दीन उर्फ कलाम पुत्र रमजान मियां, निवासी जवही मलही मुस्तकील, थाना तरया सुजान, जनपद कुशीनगर (हाल पता: सीपेट चौराहा, नादरगंज, रुस्तमविहार कॉलोनी, कृष्णानगर, लखनऊ)।
    2. फिरोज खांन पुत्र मुख्तार खान, निवासी कस्बा तकीनगर, थाना कोतवाली, जनपद उन्नाव।
    3. शमशुल्ला खांन पुत्र शमीउल्ला खान, निवासी दामोदर नगर, आलमबाग, थाना कृष्णानगर, लखनऊ।

    तस्करों ने बताया कि वे गांजे को क्रय कर छोटी-छोटी पुड़िया बनाकर जरूरतमंद लोगों को बेचकर अपना जीवन-निर्वाह करते थे। पुलिस ने तीनों गिरफ्तार तस्करों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई कर जेल भेज दिया है।

  • लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्पष्ट निर्देशों के अनुरूप अपराध और अपराधियों के प्रति शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance) की नीति, मिशन शक्ति के प्रभावी क्रियान्वयन और एंटी-रोमियो स्क्वॉड्स की संवेदनशील स्थानों पर सतत तैनाती के परिणामस्वरूप, उत्तर प्रदेश ने कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर बड़ी सफलता हासिल की है।

    राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की हाल ही में जारी ‘क्राइम इन इंडिया-2023’ रिपोर्ट इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण प्रस्तुत करती है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराध दर (Crime Rate) राष्ट्रीय औसत से काफी कम रही है।राज्य सरकार का दावा है कि यह उपलब्धि उत्तर प्रदेश की सुदृढ़ कानून-व्यवस्था और UP Police (उत्तर प्रदेश पुलिस) की सक्रियता का परिणाम है। इन प्रयासों के चलते प्रदेश में न केवल अपराध नियंत्रण में आया है, बल्कि जनता, विशेषकर महिलाओं और बालिकाओं, में सुरक्षा और विश्वास की भावना भी मजबूत हुई है।

    शून्य सहनशीलता की नीति के तहत संगठित अपराध और माफियाओं पर सख्त कार्रवाई की गई है, जबकि मिशन शक्ति ने महिला सुरक्षा और उनके सशक्तिकरण को सुनिश्चित करने के लिए बहुआयामी प्रयास किए हैं। इसके साथ ही, एंटी-रोमियो स्क्वॉड्स की लगातार गश्त ने सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    यह रिपोर्ट दर्शाती है कि अपराध नियंत्रण की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उठाए गए कड़े कदम प्रभावी साबित हुए हैं, और राज्य देश के लिए एक मजबूत कानून-व्यवस्था का मॉडल बनकर उभरा है।

  • बिजनौर। साहित्य महोपाध्याय, सुप्रसिद्ध साहित्यकार तथा वर्धमान कॉलेज के पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉक्टर रामस्वरूप आर्य को उनकी नवम् पुण्यतिथि पर याद किया गया। स्मृति कार्यक्रम में उपस्थित साहित्य प्रेमियों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित करते हुए उन्हें ससम्मान एवं भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।

    डा. रामस्वरूप आर्य स्मृति हिंदी शोध संस्थान के अध्यक्ष डा. चंद्र प्रकाश आर्य ने बताया कि सन् 2025 का डा. रामस्वरूप आर्य स्मृति सम्मान गाजियाबाद निवासी प्रसिद्ध साहित्यकार उमाशंकर मिश्र को प्रदान किया गया है। संस्थान की सचिव डा. संतोष कुमारी ने कहा कि डा. राम स्वरूप आर्य ने अपना संपूर्ण जीवन हिन्दी के प्रचार प्रसार के लिए समर्पित कर दिया था, इसलिए हिंदी की प्रचार प्रसार में लगे हुए साहित्यकारों के उत्साहवर्धन के लिए यह पुरस्कार प्रतिवर्ष संस्थान की ओर से एक हिंदी सेवी साहित्यकार को प्रदान किया जाता है। उन्होंने कहा कि शोध छात्रों की सहायता के लिए डॉक्टर रामस्वरूप आर्य के विशाल पुस्तकालय में संग्रहित ऐतिहासिक हस्तलिखित पांडुलिपियां, संस्कृत ग्रंथ एवं दुर्लभ हिन्दी पत्रिकाएं गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार को भेंट स्वरूप प्रदान की गई हैं।

    कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रेमप्रकाश ‘प्रेम’ व संचालन रवि प्रकाश आर्य ने किया। इस अवसर पर डॉ. मदनपाल सिंह, सुधीर कुमार, राजीव खंडेवाल, प्रमोद पुष्प, उपजा के जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह, डा. नरेद्र सिंह, डा. सुखराम सिंह, पत्रकार भूपेन्द्र निरंकारी, पंडित ललित, अनिल सक्सेना, सुश्री निकिता सिंह, डा. संतोष आर्य आदि उपस्थित रहे।

  • लखनऊ, (03 अक्टूबर 2025)। उत्तर प्रदेश सरकार ने धार्मिक पर्यटन स्थलों के उन्नयन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आजमगढ़ जनपद स्थित प्राचीन एवं आस्था से जुड़े दुर्वासा ऋषि आश्रम के पर्यटन विकास की स्वीकृति प्रदान की है। मुख्यमंत्री पर्यटन स्थलों के विकास अंतर्गत इस परियोजना के लिए लगभग 01 करोड़ रुपए की धनराशि स्वीकृत हुई है।

    उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि यह कदम न केवल प्रदेश के धार्मिक पर्यटन को नई पहचान देगा, बल्कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और स्थानीय रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराएगा। पर्यटन मंत्री ने बताया, ‘दुर्वासा ऋषि आश्रम के आसपास पर्यटक सुविधाओं के विकास से आगंतुकों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। पर्यटकों के लिए न केवल सुविधाजनक वातावरण तैयार होगा, बल्कि पूर्वांचल क्षेत्र में पर्यटन को भी नया आयाम मिलेगा।

    ‘आजमगढ़ को पर्यटन मानचित्र पर विशिष्ट पहचान दिलाने के लिए पर्यटन विभाग प्रयासरत है। इसी कड़ी में प्राचीन दुर्वासा ऋषि आश्रम का समेकित पर्यटन विकास किया जा रहा है। इस परियोजना के तहत पर्यटन स्थल पर सौंदर्यीकरण, आधुनिक प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छ शौचालय, सूचना केंद्र और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इन सुविधाओं के विकसित होने से न केवल स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि जिले की पौराणिक धरोहर को भी नई पहचान मिलेगी।पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘आजमगढ़ जिले की धरती प्राचीन काल से आध्यात्मिक ऋषि-मुनियों की तपोस्थली रही है। यहां तीन महान ऋषियों दुर्वासा ऋषि, दत्तात्रेय और चंद्रमा ऋषि के धाम हैं। यही कारण है कि आजमगढ़ को ऋषि-मुनियों की धरती भी कहा जाता है।

    दुर्वासा ऋषि आश्रम जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सावन और कार्तिक मास सहित विभिन्न पर्वों पर प्रतिवर्ष यहां मेले का आयोजन होता है, जिसमें श्रद्धालुओं की अपार भीड़ होती है। यह आश्रम तमसा एवं मंजूषा नदी के संगम पर स्थित है।’मंत्री ने बताया, ‘पौराणिकता मान्यता के अनुसार पाप से मोक्ष की प्राप्ति हेतु प्राचीन समय में लोग कार्तिक पूर्णिमा के दिन तमसा-मंजूषा नदी के संगम पर स्नान करते थे। आज भी परंपरा अनुसार प्रत्येक कातिक पूर्णिमा को लगने वाले तीन दिवसीय मेले में विभिन्न राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। तमसा और मंजूषा नदी के संगम पर आस्था की डुबकी लगाते हैं। महर्षि दुर्वासा 12 वर्ष की आयु में चित्रकूट से इस स्थल पर आकर कई वर्षों तक साधना की। पौराणिक कथाओं के अनुसार सतयुग, त्रेतायुग व द्वापर युग में महर्षि दुर्वासा का स्थान श्रेष्ठ माना गया है। पर्यटन के लिहाज से आजमगढ़ उभरता जनपद है। यहां चंद्रमा मुनि आश्रम, दत्तात्रेय मंदिर,भंवर नाथ मंदिर, अवंतिकापुरी धाम, नागा बाबा सरोवर, मेहनगर किला, निजामाबाद स्थित भगवान गणेश और मां दुर्गा मंदिर सहित कई अन्य पर्यटन स्थल हैं। 

    जिले में वर्ष 2024 में 15,82,855  लाख से अधिक पर्यटकों का आगमन हुआ था। वहीं, वर्ष 2025 की पहली तिमाही (जनवरी से मार्च) में 3,25,841  से अधिक सैलानियों ने जिले का रुख किया। पर्यटकों की बढ़ती संख्या से स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है।पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘उत्तर प्रदेश आज धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में अन्य राज्यों की तुलना में पहले पायदान पर खड़ा है। उत्तर प्रदेश पर्यटन नीति-2022 के अंतर्गत प्राचीन, पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व के स्थलों का समेकित पर्यटन विकास किया जा रहा है। सरकार के सतत प्रयासों से प्रदेश के चर्चित धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को विश्व पर्यटन मानचित्र पर और अधिक सशक्त रूप से स्थापित करने की दिशा में कार्य जारी है। साथ ही, अब तक कम चर्चित और अल्पज्ञात स्थलों को भी प्रदेश की पहचान से जोड़ते हुए प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित किया जा रहा है।’

  • बिजनौर: शहर के जाट बाल विद्यालय में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर एक गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विद्यालय के प्रबंधक राजेंद्र सिंह ने इस शुभ अवसर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इसके पश्चात, उन्होंने और सभी उपस्थित लोगों ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के चित्रों पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी पुष्पांजलि अर्पित की और उनके महान योगदान को याद किया।

    इस अवसर पर विद्यालय परिवार के कई गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे, जिनमें प्रधानाचार्य अनिता सैनी सहित सुनीता सिंह, राशि शर्मा, राखी, शिवानी, और शिल्पी चौधरी शामिल थे। इन सभी के साथ-साथ विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भी इस कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया।

    वक्ताओं ने दोनों महान नेताओं के जीवन सिद्धांतों और देश के प्रति उनके अमूल्य समर्पण पर प्रकाश डाला और सभी को उनके आदर्शों पर चलने के लिए प्रेरित किया।

  • बिजनौर: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 156वीं और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की 121वीं जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर, 2025 को बिजनौर में विभिन्न संगठनों और सरकारी संस्थानों ने कार्यक्रम आयोजित कर दोनों महान विभूतियों को याद किया। इस दिन दशहरा पर्व भी होने के कारण उत्साह का माहौल रहा।

    नजीबाबाद में वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति ने महात्मा गांधी जयंती, लाल बहादुर शास्त्री जयंती और बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक दशहरा पर्व को धूमधाम से मनाया। इस अवसर पर समिति ने अपने कर्तव्यों के प्रति सजगता के लिए पत्रकार मनोज शर्मा को शॉल ओढ़ाकर और मोमेंटो देकर विशेष सम्मान किया। संस्था के अध्यक्ष जितेंद्र कक्कड़ द्वारा रचित कविता “मैं एक पत्रकार हूँ” उन्हें सम्मान के रूप में भेंट की गई। इस सारगर्भित रचना का विश्लेषण अशोक अग्रवाल ने बहुत ही सुंदर ढंग से किया। कार्यक्रम के दौरान साहित्यकार कर्मवीर संस्था के साथ संरक्षक के रूप में जुड़े, जिनका समिति ने अभिनंदन किया।सभी वक्ताओं ने गांधी जी, शास्त्री जी और विजयदशमी के त्योहार के प्रति अपने विचार व्यक्त किए और विचारों का आदान-प्रदान किया। कार्यक्रम का संचालन महामंत्री मदन गोपाल टौंक ने किया। इस मौके पर राजपाल, विनीत कुमार, रसीद आजाद, अशोक अग्रवाल, श्याम सिंह, जयप्रकाश शर्मा, कमल कुमार, मंगू सिंह आदि उपस्थित रहे।

    प्रधान सहायक राकेश शर्मा

    राजकीय आईटीआई बिजनौर में झंडारोहण के बाद दोनों राष्ट्र नायकों के चित्र पर माल्यार्पण किया गया। इसके उपरांत रामधुन गाई गई। इस दौरान वक्ताओं ने महात्मा गांधी जी और लाल बहादुर शास्त्री जी के जीवन का विस्तार से वर्णन किया। कार्यक्रम में भारत के संविधान में नागरिकों के लिए निर्धारित कर्तव्यों का पालन करने और अपने अधिकारों का उपयोग करने पर भी जोर दिया गया।

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    इस अवसर पर राजकीय आईटीआई बिजनौर के प्रधानाचार्य, फोरमैन श्रीमती ज्योत्सना, दीपक कुमार गुप्ता, प्रधान सहायक राकेश शर्मा, आशीष कुमार सक्सेना, बृजेश कुमार खरवार, कमल वीर सिंह, सत्येंद्र कुमार, वीके वर्मा, सुशील कुमार, अबरार हुसैन, कामता प्रसाद, अशोक कुमार, साजिद हुसैन, कुलदीप ज़ख्मोला, मनोज चौहान, विजयपाल सिंह, सुमित कुमार शर्मा, धर्मवीर सिंह, श्याम सिंह, संतराम सहित समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।

    बिजनौर: शहर के जाट बाल विद्यालय में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर एक गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विद्यालय के प्रबंधक राजेंद्र सिंह ने इस शुभ अवसर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इसके पश्चात, उन्होंने और सभी उपस्थित लोगों ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के चित्रों पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी पुष्पांजलि अर्पित की और उनके महान योगदान को याद किया।

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    इस अवसर पर विद्यालय परिवार के कई गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे, जिनमें प्रधानाचार्य अनिता सैनी सहित सुनीता सिंह, राशि शर्मा, राखी, शिवानी, और शिल्पी चौधरी शामिल थे। इन सभी के साथ-साथ विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भी इस कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया।वक्ताओं ने दोनों महान नेताओं के जीवन सिद्धांतों और देश के प्रति उनके अमूल्य समर्पण पर प्रकाश डाला और सभी को उनके आदर्शों पर चलने के लिए प्रेरित किया।

  • लखनऊ। आबकारी आयुक्त उत्तर प्रदेश और जिलाधिकारी लखनऊ के सख्त निर्देशों के क्रम में, गांधी जयंती के अवसर पर शराब बंदी के बावजूद अवैध बिक्री और तस्करी को रोकने के लिए चलाए गए अभियान में आबकारी विभाग को बड़ी सफलता मिली है। जिला आबकारी अधिकारी करुणेंद्र सिंह के नेतृत्व में टीम ने छापेमारी कर भारी मात्रा में देशी शराब बरामद की और चार व्यक्तियों को गिरफ्तार किया।

    जिला आबकारी अधिकारी करुणेंद्र सिंह के नेतृत्व में टीम ने थाना नाका हिंडोला क्षेत्र के अंतर्गत मवैया क्रॉसिंग के पास स्थित एक होटल में छापा मारा। मौके से अवैध शराब की बिक्री करते हुए 4 व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया। इनके कब्जे से विंडीज ब्रांड देशी शराब की 12 पेटी और 52 लूज़ टेट्रा पैक बरामद किए गए। आबकारी टीम ने चारों अभियुक्तों के विरुद्ध थाना नाका हिंडोला में आबकारी अधिनियम की धारा 60 (अवैध शराब से संबंधित), भारतीय न्याय संहिता की धारा 221 (कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन) के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया है। कार्रवाई में आबकारी निरीक्षक सेक्टर 9 विजय राठी, आबकारी निरीक्षक सेक्टर 8 प्रदीप कुमार शुक्ला, और आबकारी निरीक्षक सेक्टर 7 कौशलेंद्र रावत अपनी टीम के साथ शामिल रहे।

    जिला आबकारी अधिकारी करुणेंद्र सिंह ने इस सफलता पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अवैध शराब की बिक्री और तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ उनका यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे कृत्यों में लिप्त पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्यवाही की जाएगी।

  • बिजनौर। जनपद पुलिस द्वारा दिनांक 02 अक्टूबर, 2025 को जनपद बिजनौर में महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण को सुनिश्चित करने के लिए मिशन शक्ति फेज 5.0 के तहत एक व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया। इस अभियान में एंटी रोमियो टीम, महिला थाना और विभिन्न थानों की पुलिस ने एक साथ कई सार्वजनिक स्थानों, शिक्षण संस्थानों और गाँवों में चौपालें आयोजित कीं।

    आयोजक: एंटी रोमियो टीम, महिला थाना, और जनपद बिजनौर के विभिन्न थानों की पुलिस।

    मुख्य उद्देश्य: महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण हेतु जागरूकता बढ़ाना, तथा उन्हें सरकारी हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी देना।

    राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, बिजनौर

    सर्राफा मार्केट

    रोडवेज बस स्टैंड, बिजनौर (दो बार चेकिंग और जागरूकता)

    बस अड्डा बिजनौर

    ग्रामीण और मोहल्ला चौपालें

    ग्राम जालपुर (थाना नांगल)

    गांव दहलावाला (थाना रेहड़)

    मोहल्ला मुनीरगंज (थाना नजीबाबाद)

    ग्राम अहीरपुरा (थाना नूरपुर)

    ग्राम खिजरपुर (थाना शेरकोट)

    ग्राम लोदीपुर मिल्क (थाना शिवालाकलां)

    ग्राम कादरपुर नानू (थाना नगीना देहात)

    ग्राम मोहम्मदपुर राजौरी (थाना अफजलगढ़)

    ग्राम हरेवाली (थाना शेरकोट) – यहाँ लगभग 250 महिलाओं ने हिस्सा लिया।

    1090: वूमेन पावर लाइन (Women Power Line)

    112: आपातकालीन सेवा (Emergency Service)

    1098: चाइल्ड हेल्प लाइन (Child Help Line)

    1930: साइबर हेल्प लाइन (Cyber Help Line)

    181: महिला हेल्प लाइन

    108/102: स्वास्थ्य/एम्बुलेंस सेवा

    1076: मुख्यमंत्री हेल्पलाइन

    महिला सुरक्षा और अधिकार: घरेलू हिंसा के विरुद्ध आवाज़ उठाना और अधिकारों के संबंध में जानकारी।

    साइबर अपराध से बचाव: मोबाइल/सोशल मीडिया द्वारा परेशान करने, अश्लील मैसेज भेजने की शिकायत संबंधी प्रक्रिया।

    शारीरिक सुरक्षा: महिलाओं के साथ मारपीट और लड़कियों के साथ छेड़छाड़ से बचाव संबंधी जानकारी।

    सरकारी योजनाएं: सरकार द्वारा चलाई जा रही जनकल्याण योजनाओं के बारे में बताना।

    समस्या समाधान: महिलाओं और बालिकाओं की व्यक्तिगत समस्याएं पूछना और उनका समाधान करना।

    कुल मिलाकर, बिजनौर पुलिस का यह अभियान महिलाओं और बालिकाओं को उनके अधिकारों के प्रति सशक्त करने और सुरक्षित माहौल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रहा।

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    *‘हिंदुस्तान की हुकूमत को सपोर्ट करना ही धर्म’, आई लव मोहम्मद विवाद पर बोले आचार्य प्रमोद कृष्णम*

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    *ED का शिकंजा: अंसल प्रॉपर्टीज की ₹10.55 करोड़ की संपत्ति अटैच, जानिए क्या है पूरा मामला*

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    *महाराष्ट्र में अब 24 घंटे खुली रह सकेंगी दुकानें और होटल; शराब प्रतिष्ठानों को छूट नहीं

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    *बड़े भाई ने छोटे की दी सुपारी, थार से पहुंचे किलर्स ने मारी टक्कर और फिर… करोड़ों की प्रॉपर्टी का है विवाद

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    *इंदौर में भी हो रही पाकिस्तान के झंडे वाले गुब्बारे लगे बिस्कुट की सप्लाई, सिंघल बंधुओं से पूछताछ जारी

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  • बीहड़ में डकैतों की आस्था का बड़ा केंद्र रहे मंदिर के विकास को ₹1 करोड़

    लखनऊ, (01 अक्टूबर 2025)। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने आदि शक्ति उपासकों और श्रद्धालुओं को बड़ा उपहार दिया है। मुख्यमंत्री पर्यटन स्थलों के विकास योजना अंतर्गत कानपुर देहात के कथरी स्थित प्राचीन कात्यायनी देवी मंदिर के पर्यटन विकास के लिए 1 करोड़ रुपए की धनराशि स्वीकृत की गई है। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया, कि ‘कात्यायनी देवी मंदिर शक्ति आराधना का महत्वपूर्ण स्थल है। सरकार का उद्देश्य इस प्राचीन व धार्मिक स्थल को पर्यटन मानचित्र पर और सशक्त बनाना है, जिससे श्रद्धालु और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिल सके।

    मंत्री जयवीर सिंह ने बताया… ‘उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग का प्रयास है कि कथरी स्थित कात्यायनी देवी मंदिर को क्षेत्रीय धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।’

    कानपुर देहात को धार्मिक मानचित्र पर विशिष्ट पहचान दिलाने के लिए पर्यटन विभाग ने कथरी स्थित प्राचीन कात्यायनी देवी मंदिर के समेकित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। इस परियोजना के तहत पर्यटन स्थल पर सौंदर्यीकरण, आधुनिक प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छ शौचालय, सूचना केंद्र और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इन सुविधाओं के विकसित होने से न केवल स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि जनपद की पौराणिक और सांस्कृतिक धरोहर को भी नई पहचान मिलेगी।

    मां कात्यायनी को देवी दुर्गा का छठा रूप माना जाता है। मान्यता है कि जो भी भक्त विशेषकर नवरात्र में श्रद्धा से मां कात्यायिनी का पूजन करता है, उसकी मनोकामना पूर्ण होती है। यह मंदिर बीहड़ के डाकुओं की आस्था का बड़ा केंद्र माना जाता रहा है। क्षेत्र में डाकुओं द्वारा सबसे पहले ध्वज चढ़ाने की कई कहानियां प्रचलित हैं। सांसद बनने के बाद फूलन देवी भी यहां पूजन करने आईं थीं। किंवदंती के अनुसार, कालांतर में शाहजहांपुर के तत्कालीन राजा गजाधर दुबे ने पुत्र-प्राप्ति की मन्नत पूरी होने पर भव्य मंदिर का निर्माण कराया था।

    यह प्राचीन मंदिर इटावा रोड पर शाहजहांपुर गांव से लगभग छह किलोमीटर तथा तहसील मुख्यालय भोगनीपुर से करीब 16 किलोमीटर की दूरी पर बीहड़ में स्थित है। कानपुर नगर से मंदिर की दूरी करीब 85 किलोमीटर है। नवरात्रि के समय इस मंदिर में बड़ा मेला लगता है। मेले में निकटवर्ती जनपदों के भी श्रद्धालु एवं भक्तगण बड़ी संख्या में आते हैं।

    पर्यटन के लिहाज से कानपुर देहात उभरता जिला है। यहां दुर्वासा ऋषि आश्रम, 500 साल पुराना बरगद वृक्ष सहित कई दर्शनीय स्थल हैं। जनपद में वर्ष 2024 में 9,47,914 लाख से अधिक पर्यटक आए थे। वहीं, वर्ष 2025 की पहली तिमाही (जनवरी से मार्च) में ही 2,63,679 से अधिक सैलानियों ने जिले का रुख किया। बढ़ते पर्यटक आगमन से न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिल रहे हैं।

    उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा, ‘धार्मिक पर्यटन में उत्तर प्रदेश अन्य राज्यों की तुलना में पहले पायदान पर है। कानपुर देहात प्राचीन और पौराणिकता स्थलों के लिए विख्यात है। सरकारी प्रयास है कि चर्चित स्थलों को विश्व पर्यटन मानचित्र पर और अधिक सशक्त तरीके से स्थापित किया जाए। साथ ही, अल्पज्ञात स्थलों को भी प्रदेश की पहचान से जोड़ते हुए प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित किया जाए।’

  • ।।ॐ एं हीं हनुमते रामदूताय नमः।।
    https://youtube.com/shorts/_1rAsyrQ46g?si=FweFN5Tn5gGWJddo

  • लखनऊ, (30 सितंबर 2025)। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) 2025 का तीसरा संस्करण उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के लिए यादगार रहा। ग्रेटर नोएडा में 25 से 29 सितंबर तक आयोजित व्यापार मेले में ‘उल्लेखनीय योगदान और प्रतिबद्धता’ के लिए पर्यटन विभाग को सम्मानित किया गया। आयोजन में प्रदेश सरकार की बिज़नेस-फ्रेंडली नीतियों, उत्तर प्रदेश पर्यटन नीति-2022 और विकसित यूपी@2047 की स्पष्ट झलक देखने को मिली। व्यापार मेले के समापन तक करीब 5.15 लाख आगंतुक आयोजन का हिस्सा बने। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया, यूपीआईटीएस ने प्रदेश में पर्यटन संभावनाओं के नए द्वार खोले हैं।

    पर्यटन मंत्री ने बताया कि ‘यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2025’ के हॉल नंबर-07 में स्थित स्टॉल नंबर-12 दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। स्टॉल पर आने वाले आगंतुकों को ऐसा अनुभव मिला मानो वे किसी प्रदर्शनी में नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की पावन धरती पर पहुंच गए हों। पर्यटन मंत्री के अनुसार, स्टॉल के जरिए न केवल उत्तर प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों को बढ़ावा दिया गया, बल्कि राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ओडीओपी) को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया। ट्रेड शो ने एक ओर जहां युवाओं और पर्यटकों को आकर्षित किया, वहीं दूसरी ओर प्रदेश में निवेश के नए अवसर भी प्रदान किए।

    यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2025 में सेमिनार, पैनल डिस्कशन, पुरस्कार समारोह, बीटूबी मीटिंग और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मंच को नवाचार और परंपरा का संगम बना दिया। वर्चुअल रियलिटी (वीआर) और ऑगमेंटेड रियलिटी (एआर) तकनीक ने बच्चों और युवाओं को खूब लुभाया। यूपी पर्यटन के स्टॉल पर एआर फोटो बूथ पर प्रदेश के अपनी पसंद के मंदिर या पर्यटन स्थल चुनकर उसके साथ डिजिटल फोटो खिंचवाया। ऐसे लोग जो कभी उत्तर प्रदेश नहीं आए, उन्हें यह प्रयोग आकर्षित किया। एआर फोटो बूथ पर सेल्फी लेने वालों की भीड़ लगी रही।

    उत्तर प्रदेश पर्यटन के स्टॉल ने आगंतुकों को काशी, अयोध्या और बुद्ध सर्किट की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया। स्टॉल में वाराणसी के घाटों की झलक, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, अयोध्या राम मंदिर और बुद्ध सर्किट को भव्य रूप से प्रदर्शित किया गया। स्टॉल के पिलर पर ललिता देवी मंदिर को उकेरा गया, जबकि प्रवेश द्वार को काशी की गंगा आरती से प्रेरित कर डिजाइन किया गया। आगंतुकों के लिए वीआर अनुभव की व्यवस्था की गई, जिससे ऐसा आभास हुआ मानो वे गंगा की लहरों पर नाव में सवार होकर ऐतिहासिक नगरी वाराणसी की यात्रा कर रहे हों।

    उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के स्टॉल पर स्टोरीटेलिंग ने आगंतुकों को विशेष रूप से आकर्षित किया। किस्सों-कहानियों के माध्यम से पर्यटकों ने प्रदेश के विविध पर्यटन स्थलों की जानकारी पाई। कार्यक्रम में प्रस्तुत कहानियों ने आगंतुकों को यह संदेश दिया कि ‘यूपी नहीं देखा तो इंडिया नहीं देखा’। खासतौर पर युवाओं ने इस पहल को सराहा और उत्तर प्रदेश के पर्यटन स्थलों के बारे में गहरी रुचि दिखाई। स्टोरीटेलिंग जैसे नवाचारपूर्ण प्रयोग से युवाओं और पर्यटकों में राज्य की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहर को जानने की उत्सुकता बढ़ी।

    उत्तर प्रदेश में इको टूरिज्म की बढ़ती धमक ने भी पर्यटन के शौकीनों के कदम रोक दिए। हर आयु वर्ग के लोगों ने इको टूरिज्म से जुड़े गंतव्यों में रुचि दिखाई। प्रोजेक्शन रूम में प्रदर्शित वीडियो और प्लाज्मा स्क्रीन पर दिखाई गई जैव विविधता तथा टाइगर रिजर्व से जुड़ी यात्राओं के दृश्य ने लोगों को मंत्रमुग्ध किया। दुधवा, नैमिषारण्य, चूका बीच के नजारों को देखकर आगंतुकों ने यूपी के इको पर्यटन स्थल की यात्रा का वादा किया।

    स्टॉल पर’एक जिला, एक उत्पाद’ (ओडीओपी) के तहत अलीगढ़ के पारंपरिक ताले दर्शकों को विशेष रूप से लुभाते रहे, जिनमें हाथी और उल्लू आकार के अनूठे ताले आकर्षण का केंद्र बने। इसी क्रम में खुर्जा की रंग-बिरंगी पॉटरी, आगरा का मशहूर पेठा, मथुरा का स्वादिष्ट पेड़ा, सहारनपुर की लकड़ी पर बारीक नक्काशी, कन्नौज का शाही इत्र, भदोही के हस्तनिर्मित कालीन और वाराणसी की सुंदर सिल्क साड़ियों ने आगंतुकों को आकर्षित किया। आगंतुकों को उत्पाद बनने की प्रक्रिया को विस्तार से बताया गया, जो रोमांचक रहा।

    विविधताओं से सराबोर उत्तर प्रदेश पर्यटन के स्टॉल पर संस्कृति, लोक नृत्य, स्वादिष्ट व्यंजन, हस्तकला और चिकनकारी जैसी समृद्ध परंपराओं की झलक ने आगंतुकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पारंपरिक पकवानों के लाजवाब स्वाद ने हर आयु वर्ग के लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया। कत्थक, बुंदेलखंडी लोक नृत्य और राधा-कृष्ण की मनोहारी प्रस्तुतियों ने माहौल को भावपूर्ण बना दिया, वहीं युवाओं ने भी उत्साहपूर्वक नृत्यों में भाग लेकर कार्यक्रम को जीवंत कर दिया।

    मंडप में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) और निवेश अनुभाग ने आगंतुकों का विशेष ध्यान खींचा। करीब 200 इच्छुक निवेशकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने पर्यटन अवसंरचना, संयुक्त उपक्रमों और नवोन्मेषी परियोजनाओं में रुचि दिखाई। स्कूलों और युवाओं ने भी सतत पर्यटन से जुड़े अभियानों में सहयोग का प्रस्ताव रखा।

    उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि ‘यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2025 (यूपीआईटीएस)’ में उत्तर प्रदेश पर्यटन का स्टॉल सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र रहा। विभाग का उद्देश्य यह है कि बच्चे पाठ्य पुस्तकों की सीमाओं से आगे बढ़कर अपनी संस्कृति, परंपरा और समृद्ध विरासत को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव करें। ऐसे आयोजन न केवल पर्यटन को बढ़ावा देते हैं, बल्कि निवेश के नए अवसर भी खोलते हैं।’

  • बिलासपुर (छत्तीसगढ़): धार्मिक आस्था के केंद्र रतनपुर महामाया मंदिर परिसर में शारदीय नवरात्रि की भीड़ के बीच चाकूबाजी की एक बड़ी वारदात सामने आई है। आपसी झगड़े में कुछ युवकों ने दो अन्य युवकों पर चाकू से हमला कर दिया, जिससे श्रद्धालुओं के बीच हड़कंप मच गया और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।घटना की सूचना मिलते ही मंदिर की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों और पुलिस के जवानों ने तत्परता दिखाते हुए स्थिति को संभाला और मामले की जांच शुरू की।

    शुरुआती जानकारी के अनुसार, आपसी विवाद के बाद युवकों ने एक-दूसरे पर चाकू से वार किया। हमले में घायल हुए दोनों युवकों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। यह वारदात रतनपुर थाना क्षेत्र में घटित हुई और पुलिस हमलावरों की तलाश में जुटी है।

    घटना ऐसे समय में हुई है जब नवरात्रि के सप्तमी दिवस पर मंदिर में माँ कालरात्रि की पूजा के लिए भारी भीड़ उमड़ी हुई थी। बिलासपुर जिले के सबसे बड़े आस्था केंद्र मां महामाया मंदिर में इस बार 31 हजार से अधिक ज्योति कलश प्रज्ज्वलित किए गए हैं और लाखों भक्त दर्शन के लिए पहुँच रहे हैं। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बावजूद मंदिर परिसर में इस तरह की घटना होना चिंता का विषय है।

  • हमारे देश भारत वर्ष में नारी को आरंभ से ही कोमलता, भावकुता, क्षमाशीलता, सहनशीलता की प्रतिमूर्ति माना जाता रहा है पर यही नारी आवश्यकता पड़ने पर रणचंडी बनने से भी परहेज नहीं करती क्योंकि वह जानती है कि यह कोमल भाव मात्र उन्हें सहानुभूति और सम्मान की नजरों से देख सकता है, पर समानांतर खड़ा होने के लिए अपने को एक मजबूत, स्वावलंबी, अटल स्तंभ बनाना ही होगा।

    नारी के सम्मान में हमारे धर्मग्रंथों में अनेकों प्रसंग भरे पड़े हैं उनके अनुसार :- “यद् गृहे रमते नारी लक्ष्मीस्तदगृहवासिनी ! देवता कोटिशोवत्स न त्यज्यंति ग्रहहितत् !! “अर्थात :- जिस घर में सद्गुण सम्पन्न नारी सुखपूर्वक निवास करती है उस घर में लक्ष्मी जी निवास करती हैं। करोड़ों देवता भी उस घर को नहीं छोड़ते। नारी में त्याग एवं उदारता है, इसलिए वह देवी है। परिवार के लिए तपस्या करती है इसलिए उसमें तापसी है। उसमें ममता है इसलिए माँ है। क्षमता है, इसलिए शक्ति है। किसी को किसी प्रकार की कमी नहीं होने देती इसलिए अन्नपूर्णा है। नारी महान् है। वह एक शक्ति है। भारतीय समाज में वह देवी है।

    मनुस्मृति में कहा गया है :–“प्रजनार्थ महाभागाः पूजार्हा गृहदीप्तयः! स्त्रियः श्रियश्य गेहेषु नविशेषोऽस्ति कश्चन !! अर्थात :– परम सौभाग्यशालिनी स्त्रियाँ सन्तानोत्पादन के लिए हैं। वह सर्वथा सम्मान के योग्य और घर की शोभा हैं। घर की स्त्री और लक्ष्मी में कोई भेद नहीं है। इन सभी प्रसंगों को पढ़कर यह ज्ञात होता है कि हमारे सनातन धर्म में नारियों को पूज्य एवं सम्माननीय माना गया है। आज के समाज में जहाँ कुछ समुदायों में नारी को मात्र भोग्या समझा जाता है वहीं नारी ने स्वयं को स्थापित करते हुए समाज के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता के शिखर को छूने का उद्योग किया है। देश की सरकारों ने भी नारी सम्मान के लिए अनेकों योजनायें प्रारम्भ की है, जिसका लाभ लेकर आज नारी पुरुष के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है।

    इतना सब कुछ होने के बाद भी मैं पनपा “गोरखपुरी”, आज समाज में कुछ विकृत मानसिकता के लोगों को देखकर विचार करने पर विवश हो जाता हूँ कि पुरुष प्रधान समाज का हवाला देने वाले कुछ लोग नारी को अभी भी मात्र अपनी सेविका एवं भोग्या समझ रहे हैं। नारी यदि पुरुष का सम्मान करके उसके द्वारा प्रताड़ित हो रही है तो यह उसकी कायरता या भय नहीं अपितु उसका पुरुष के प्रति प्रेम है जो विरोध नहीं करने देता। नारी जब बिना विरोध किए लोकलज्जा के भय से पुरुष के सभी कृत्यों को सहन करती है तो पुरुष इसे अपना पुरुषत्व समझकर स्वयं का गौरव समझने लगता है। परन्तु उसी नारी के हृदय से जब उस पुरुष के प्रति प्रेम समाप्त हो जाता है और वह उग्रस्वरूप धारण कर लेती तब पुरुष त्राहि-त्राहि करने लगता है। इसीलिए पुरुषों को चाहिए कि नारियों के कोमल मन पर कभी आघात न करते हुए उनको यथोचित सम्मान एवं अधिकार देते रहें। ऐसा करते रहने से नारी जीवन के सभी क्षेत्रों में स्थापित होकर आपका ही सम्मान बढ़ाएगी। सौम्यस्वरूपा दुर्गा जी का पूजन बड़े धूमधाम से किया जाता है परंतु जब वही उग्रस्वरूपा महाकाली के रूप में होती हैं तो भय लगता है। सदैव ऐसे कर्म करते रहना चाहिए कि नारी सौम्य बनी रहे उसका उग्र स्वरूप यदि हो गया तो यह समाज के लिए हितकर नहीं हो सकता।

  • लखनऊ, (29 सितंबर 2025)। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री, जयवीर सिंह ने विभाग से जुड़ी कार्यदायी संस्थाओं और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि सभी परियोजनाओं को गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ पूरा किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और स्वीकृत परियोजनाओं को शुरू करने में विलम्ब पाए जाने पर संबंधित कार्यदायी संस्था के खिलाफ कठोर कार्यवाही की जाएगी। यह निर्देश गोमतीनगर स्थित पर्यटन भवन में पर्यटन एवं संस्कृति विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान दिए गए।

    मंत्री जयवीर सिंह ने अधिकारियों को फील्ड स्तर पर जाकर निर्माण कार्यों की प्रगति का नियमित निरीक्षण करने का आदेश दिया। उन्होंने ऐसी कार्यदायी संस्थाओं को चिन्हित करने के निर्देश दिए, जो स्वीकृति के बावजूद भी जमीनी स्तर पर कार्य शुरू नहीं कर पा रही हैं। उन्होंने सभी स्वीकृत परियोजनाओं के आकलन (आगणन) और प्रशासकीय व वित्तीय स्वीकृति की स्थिति, तथा अनारम्भ परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।

    बैठक में दीपोत्सव और देव दीपावली की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने इन आयोजनों को ‘दिव्य एवं भव्य’ ढंग से करने के लिए सभी तैयारियों को पूरा करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष भी गत वर्ष की भांति लगभग 26 लाख से अधिक दीप जलाने और लेजर शो आदि के प्रदर्शन की योजना अंतिम चरण में है, जिसका उद्देश्य इस वर्ष भी एक नया रिकॉर्ड बनाना है।

    मंत्री जयवीर सिंह ने मंत्री परिषद द्वारा लिए गए निर्णयों के अनुपालन की स्थिति की भी समीक्षा की और अधिकारियों को शत-प्रतिशत अनुपालन समय से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2025-26 के लिए वाद्ययंत्रों के क्रय एवं आपूर्ति की स्थिति तथा डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मारक, ऐशबाग के कार्यों की समीक्षा की गई, जिसमें अवशेष कार्यों को शीघ्र पूरा करने का निर्देश दिया गया।

    बैठक में बताया गया कि यूपीपीसीएल (UPPCL) की 270 परियोजनाएं संचालित हैं, जिनमें से 22 पर कार्य शुरू हो चुका है। इसी प्रकार, उ.प्र. राज्य पर्यटन विकास लि. (UPSTDC) की 219 परियोजनाएं क्रियान्वित हैं और 35 पर कार्य शुरू कर दिया गया है। जनपद सीतापुर के नैमिषारण्य में स्थित चक्रतीर्थ के सामने उपलब्ध भूमि पर भी कार्य प्रगति पर है। यह भी बताया गया कि मंत्री जी के निर्देशों के क्रम में समस्त कार्यदायी संस्थाओं एवं क्षेत्रीय अधिकारियों द्वारा सूचीबद्ध आर्किटेक्ट के साथ स्थलीय निरीक्षण कर आवश्यकतानुसार आगणन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

    प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति तथा धर्मार्थ कार्य, अमृत अभिजात ने अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं से जुड़े पीएम एवं एपीएम (प्रोजेक्ट/असिस्टेंट प्रोजेक्ट मैनेजर) को निर्देश दिए कि जिन जनपदों में निर्माण संबंधी समस्याएँ आ रही हैं, वहाँ के मुख्य विकास अधिकारी एवं जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय करके कार्य को आगे बढ़ाएँ। उन्होंने कहा कि बरसात के बाद कार्य की गति तेज होनी चाहिए।

    अमृत अभिजात ने चेतावनी दी कि आगे से कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधियों से निर्माण स्थल पर उपस्थित कराकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जानकारी ली जाएगी। उन्होंने बल दिया कि आगे का समय बहुत महत्वपूर्ण है और सभी क्रियान्वित परियोजनाएं धरातल पर दिखाई देनी चाहिए। लापरवाही पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ निलंबन की कार्यवाही की संस्तुति की जाएगी। इस महत्वपूर्ण बैठक में महानिदेशक पर्यटन राजेश कुमार, विशेष सचिव पर्यटन ईशा प्रिया, विशेष सचिव संस्कृति संजय कुमार सिंह, निदेशक ईको पर्यटन प्रखर मिश्र, अपर निदेशक संस्कृति सृष्टि धवन, आरटीओ मुख्यालय अंजू चौधरी एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

  • लखनऊ। पुलिस महानिदेशक, उ.प्र. राजीव कृष्णा के निर्देशन में उत्तर प्रदेश पुलिस की विभिन्न इकाईयों द्वारा प्रदान की जा रही सेवाओं के सम्बन्ध में लगाए गए संयुक्त स्टॉल को UP International Trade Show 2025 (3rd Edition), गौतमबुद्धनगर में विशेष पुरस्कार प्राप्त हुआ।

    स्टॉल की साइज, आकर्षक सेटअप, माहौल और आगंतुकों की संख्या के आधार पर चयन कर #UPPolice के स्टॉल को विजेता घोषित किया गया। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री नंदी गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ (औद्योगिक विकास/निर्यात संवर्धन/एनआरआई निवेश प्रोत्साहन) एवं कैबिनेट मंत्री राकेश सचान, उ.प्र. द्वारा पुलिस अधीक्षक UP-112, श्रीमती निधि सोनकर को यह पुरस्कार प्रदान किया गया।

    यह पुरस्कार न सिर्फ़ यूपी पुलिस के पेशेवराना कौशल की पहचान है, बल्कि जनता के विश्वास, आधुनिक तकनीक और लगातार नवाचार की दिशा में हो रहे प्रयासों का सजीव प्रतीक भी है।

    #UPITS2025 #UPInternationalTradeShow#UPPolice #GlobalGrowth #SmartPolicing

  • बिजनौर: शिवसेना की बिजनौर जिला इकाई की एक महत्वपूर्ण बैठक बुधवार को युवा सेना जिला प्रमुख विजय मोहन गुप्ता के रिंग रोड स्थित कैंप कार्यालय/आवास पर आयोजित की गई। इस बैठक में शिवसेना ने उत्तर प्रदेश के गंगा एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट में बिजनौर जिले को शामिल न किए जाने पर कड़ा विरोध जताते हुए इसे बिजनौर वासियों का अपमान बताया।

    “बैठक को संबोधित करते हुए शिवसेना जिला प्रमुख चौधरी वीर सिंह ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में मां भागीरथी गंगा का प्रथम प्रवेश द्वार बिजनौर है, फिर भी बिजनौर को गंगा एक्सप्रेसवे से वंचित किया जा रहा है। चौधरी वीर सिंह ने आरोप लगाया, “बिजनौर के हमारे प्रिय जनप्रतिनिधि अपने निजी कार्यों में व्यस्त हैं और कुंभकरण की नींद सोए हुए हैं। बिजनौर वासियों को गंगा एक्सप्रेसवे से वंचित किया जा रहा है, जिसका शिवसेना पुरजोर विरोध करती है।

    शिवसेना जिला प्रमुख ने एक्सप्रेसवे के हक के लिए एक बड़े आंदोलन की घोषणा की। उन्होंने कहा कि शिवसेना शीघ्र ही एक भारी रणनीति बनाकर “सोये हुए जनप्रतिनिधियों को जगाने” का काम करेगी। चौधरी वीर सिंह ने दृढ़ता से कहा, “गंगा एक्सप्रेसवे हम लेकर रहेंगे।” उन्होंने बताया कि इस मांग को लेकर जल्द ही जनपद बिजनौर में एक बड़ा आंदोलन किया जाएगा। इस आंदोलन में व्यापक जनसमर्थन जुटाने की योजना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस लड़ाई को प्रमुखता से लड़ने के लिए जनपद बिजनौर के सभी साधु-संतों, अधिवक्ता, पत्रकार बंधु, और सभी राजनीतिक दलों/संगठनों को साथ लिया जाएगा। बैठक में उपस्थित रहने वालों में प्रमुख रूप से विजय मोहन गुप्ता, अंतरिक्ष कौशिक, रानू ठाकुर, पदम सिंह एडवोकेट, बबलू कुमार, पेपिंदर एडवोकेट, ऋषि राज एडवोकेट, शशि कुमार और तुषार रस्तोगी आदि शामिल थे।

  • दुनिया भर में आज संत निरंकारी मिशन के लिए एक अत्यंत पावन और खुशियों भरा दिन है, क्योंकि आज निरंकारी राजपिता आदरणीय श्री रमित चांदना जी का जन्मदिन है। इस विशेष अवसर पर, मिशन के सभी अनुयायी और संत-महापुरुष अपार उत्साह और उल्लास में डूबे हुए हैं। निरंकारी मिशन से जुड़े लाखों अनुयायियों के लिए यह दिन सौभाग्यशाली है, जो राजपिता जी की अथक सेवा, मार्गदर्शन और स्नेह को महसूस करते हैं। जगह-जगह सत्संग और विशेष कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है, जहाँ सभी संत अपनी-अपनी शैली में राजपिता जी को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ अर्पित कर रहे हैं।

    पिता श्री रमित चांदना जी ने संत निरंकारी मिशन के मानवीय और आध्यात्मिक कार्यों को आगे बढ़ाने में दिन-रात एक कर दिया है।

    ~ वे कल्याण यात्राओं पर निरंतर जा रहे हैं, जहाँ वह सभी गुरु सिखों को अपना भरपूर आशीर्वाद प्रदान कर रहे हैं।

    ~ उनका जीवन सेवा, समर्पण और नम्रता का प्रतीक है, जो मिशन के अनुयायियों के लिए एक प्रेरणास्रोत है।

    ~ भूपेंद्र निरंकारी, बिजनौर

  • बिजनौर। जिले में गुलदार (तेंदुए) का आतंक लगातार जारी है, जिससे ग्रामीण भय और आक्रोश में हैं। पिछले लगभग 26 महीनों में गुलदार के हमलों में कुल 36 लोगों की मौत हो चुकी है और 55 अन्य लोग घायल हुए हैं। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, 26 महीनों में 33 मौतें हुई थीं, लेकिन हाल ही में हुए हमलों के बाद यह आंकड़ा 36 तक पहुंच गया है, जिससे स्थिति की गंभीरता स्पष्ट होती है।

    समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाए गए, जिसमें ग्रामीणों को खेत या जंगल में जाते समय 6 से 7 लोगों के समूह में लाठी डंडा साथ रखने की सलाह दी गई। हालांकि, इतने प्रयासों के बावजूद भी हमले जारी हैं। गुलदार के हमले को लेकर कई प्रदर्शन भी हुए हैं, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग द्वारा ज़रूरी कदम नहीं उठाए गए हैं। घटनाओं के बढ़ने के बाद, अब वन विभाग के आला अधिकारी मीडिया के कैमरे से बचते नजर आ रहे हैं और कैमरे के सामने कुछ भी बताने को तैयार नहीं हैं।

    गुलदार के हमलों में आई तेजी ने ग्रामीणों को और भी दहला दिया है। पिछले 14 दिनों के भीतर, हिंसक गुलदारों ने तीन मासूम बच्चों सहित एक महिला की जान ले ली।

    1 सितंबर: मंडावली थाना क्षेत्र के ग्राम रामदास वाली में 8 वर्ष के कनिष्क को घर के बाहर से उठाकर मार डाला।

    6 सितंबर: नगीना देहात थाना क्षेत्र के ग्राम कंडरावाली में 10 वर्षीय गुड़िया को दूध लेने जाते समय उठाकर मार डाला।

    9 सितंबर: नजीबाबाद थाना क्षेत्र के ग्राम मथुरापुर मोर निवासी 8 वर्षीय हर्षित पर हमला किया, जिसकी बाद में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मौत हो गई।

    14 सितंबर: थाना नजीबाबाद क्षेत्र के गांव इसेपुर की महिला मीरा को गुलदार ने अपना निवाला बनाया।
    इन लगातार हो रही घटनाओं के बाद, हाल ही में नजीबाबाद क्षेत्र में एक गुलदार को पिंजरे में कैद किया गया था।

    1. गन्ने के खेत बने सुरक्षित ठिकाना
    जिले के चांदपुर, नजीबाबाद, नहटौर, और कोतवाली देहात क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। गन्ने के खेत गुलदारों के लिए एक सुरक्षित ठिकाना (कवर) बन गए हैं। वे इन खेतों में छुपकर इंसानों और मवेशियों का शिकार करते हैं, जिससे मानव-गुलदार संघर्ष तेज़ी से बढ़ा है।
    2. बिजनौर में गुलदारों की बढ़ती संख्या
    वन विभाग के अनुसार, बिजनौर जिले में लगभग 500 से ज़्यादा गुलदार अलग-अलग स्थानों पर अपना डेरा बना चुके हैं। हालांकि इसकी कोई आधिकारिक संख्या उपलब्ध नहीं है। यह अनुमान वन विभाग और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है, जो जिले में गुलदारों की बढ़ी हुई संख्या और उनके द्वारा किए जा रहे हमलों का जिक्र करते हैं, जिसके कारण ग्रामीण खेतों में जाने से कतरा रहे हैं।

    वहीं, लगातार हमलों के बावजूद, वन विभाग ने लगभग तीन साल में 100 से ज़्यादा गुलदारों को पिंजरे में कैद किया है, लेकिन यह संख्या गुलदारों की बढ़ती हुई आबादी के मुकाबले काफी कम है। ग्रामीणों को डर है कि अगर जल्द ही कोई बड़ा कदम नहीं उठाया गया तो गुलदारों की संख्या हजारों में हो सकती है।

    ~ गुलदार के खौफ से ग्रामीण क्षेत्रों में शाम होते ही लोग अपने घरों में कैद हो जाते हैं।

    ~ लोग अकेले बाहर निकलने से डरते हैं, खासकर गन्ने के खेतों के पास। इस आतंक के साये में ग्रामीण तीन साल से जी रहे हैं।

    ~ वन विभाग लगातार गुलदार को पकड़ने का प्रयास कर रहा है।

    ~ जिले भर में 40 से अधिक स्थानों पर पिंजरे और ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं।

    ~ ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए मुखौटे बांटे गए हैं।

  • टोंक (राजस्थान)। फर्जी डिग्रियों के खिलाफ जारी एक्शन के बीच राजस्थान के टोंक जिले में एक हैरान कर देने वाले मामले का खुलासा हुआ है। बीएड की फर्जी डिग्री के आधार पर 32 साल पहले शिक्षक की नौकरी हासिल करने वाले कर्मचारी की पोल रिटायरमेंट से ठीक सात दिन पहले खुल गई। जिला परिषद टोंक ने वर्ष 1993 में जारी उसके नियुक्ति आदेश को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है।

    आरोपी शिक्षक की पहचान श्रीकृष्ण चन्द्र जैकवाल के रूप में हुई है, जो वर्तमान में बिलासपुर के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में वरिष्ठ अध्यापक के पद पर कार्यरत था। उसकी नियुक्ति जून 1993 में तृतीय श्रेणी अध्यापक के तौर पर जिला परिषद टोंक की ओर से की गई थी। उसने जुलाई 1993 में राजकीय प्राथमिक विद्यालय मंडालिया में पदभार ग्रहण किया था।

    करीब एक महीने पहले शिक्षक श्रीकृष्ण चन्द्र जैकवाल के खिलाफ एसओजी (SOG) में शिकायत दर्ज कराई गई थी कि उसने नियुक्ति के समय लखनऊ विश्वविद्यालय से जारी बीएड की फर्जी डिग्री लगाई थी। एसओजी ने मामले की पुष्टि के लिए विश्वविद्यालय को लिखा। 10 सितंबर को विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने स्पष्ट किया कि श्रीकृष्ण की अंकतालिका और डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा जारी नहीं की गई है।

    लखनऊ विश्वविद्यालय से रिपोर्ट मिलने के बाद जिला परिषद ने आरोपी शिक्षक को 18 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने को कहा। आरोपी शिक्षक ने बीमारी का हवाला देते हुए खुद पेश होने के बजाय अपने बेटे को भेजा। बेटे ने बीएड अंकतालिका और डिग्री का प्रमाण पत्र, साथ ही 1994 में विश्वविद्यालय के नाम की एक सत्यापन रिपोर्ट भी प्रस्तुत की।

    मामले की विस्तृत जांच के बाद, जिला परिषद ने शिक्षक के नियुक्ति आदेश को निरस्त करने का फैसला लिया। यह कड़ा आदेश शिक्षक के रिटायरमेंट से ठीक एक सप्ताह पहले आया है।एसओजी अब इस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है और आरोपी शिक्षक से भी पूछताछ की जाएगी।

  • लखनऊ/आगरा, (27 सितंबर 2025)। उत्तर प्रदेश ने राज्यभर में विश्व पर्यटन दिवस 2025 बड़े उत्साह के साथ मनाया, जिसमें शहर और गांव के लोग ‘पर्यटन और सतत् परिवर्तन’ के वैश्विक विषय के तहत एकजुट हुए। इस अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने आगरा में उच्चीकृत क्षेत्रीय पर्यटन कार्यालय के पर्यटन सूचना केंद्र का लोकार्पण किया। तत्पश्चात, छात्रों के समूहों को इको, हेरिटेज और आध्यात्मिक पर्यटन के लिए रवाना किया।

    इस अवसर पर संबोधन में पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा, ‘उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा में पर्यटन हमेशा ही एक प्रमुख स्तंभ रहा है। विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर, जब हम सतत् परिवर्तन की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं, हमारा दृष्टिकोण स्पष्ट है। हमें पर्यटन को ऐसा समावेशी बनाना है जो समुदाय आधारित हो और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार हो। हर नई पहल हमें ‘विकसित भारत @2047 के सपनों के और करीब ले जाती है, जहां उत्तर प्रदेश एक प्रमुख वैश्विक पर्यटन गंतव्य के रूप में चमकता दिखाई देगा।’

    पर्यटन मंत्री ने कहा, ‘आगरा में आयोजित समारोह उत्सवपूर्ण रहा। कार्यक्रम में राज्यभर से आए हितधारक, छात्र और सांस्कृतिक प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने इसे और खास बनाया। क्षेत्रीय पर्यटन कार्यालय का उद्घाटन स्थानीय समुदायों के लिए नई संभावनाओं और आगंतुकों के लिए बेहतर सेवाओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।’

    छात्रों के पर्यटन कार्यक्रम का भव्य उद्घाटन उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक, पारिस्थितिक और आध्यात्मिक विविधता को युवाओं के माध्यम से प्रचारित करने के प्रतीक रूप में किया गया। इस अवसर पर होटल संचालक, टूर ऑपरेटर और अन्य प्रतिनिधि सहित पर्यटन उद्योग के प्रमुख हितधारक शामिल थे। समारोह का समापन अधिकारियों, समुदायिक नेताओं और प्रतिभागियों के साथ आयोजित लंच से हुआ, जिसने पर्यटन को लोगों को जोड़ने और आपसी समझ का सेतु बनाने वाले एक प्रभावशाली मंच के रूप में प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम ने न केवल युवाओं को पर्यटन के सशक्त राजदूत बनाने का संदेश दिया, बल्कि सतत और समावेशी पर्यटन के महत्व को भी उजागर किया।

    उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा संचालित मान्यवर कांशीराम प्रबंधन संस्थान (एमकेआईटीएम), लखनऊ में विश्व पर्यटन दिवस (27 सितंबर) के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित हुआ। मुख्य अतिथि के तौर पर प्रमुख सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य अमृत अभिजात की गरिमामय उपस्थिति रही। विशेष सचिव पर्यटन ईशा प्रिया ने भी छात्रों का उत्साहवर्धन किया।

    प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति अमृत अभिजात ने विश्व पर्यटन दिवस-2025 की थीम ‘पर्यटन एवं सतत परिवर्तन’ को प्रेरक संदेश बताया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, ‘वर्तमान में पर्यटन केवल मनोरंजन या भ्रमण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह संस्कृतियों के मेल, पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय समुदायों के आर्थिक उत्थान और सांस्कृतिक धरोहर के संवर्द्धन का भी एक महत्वपूर्ण साधन बन चुका है।’ इस दौरान मुख्यमंत्री फेलोशिप विजेता ज्योति तिवारी (बलरामपुर) और आदित्य त्यागी (मुज़फ्फरनगर), अभिलाष गुप्ता (सीतापुर ) को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया।

    एमकेआईटीएम के छात्रों ने गणेश वंदना से लेकर लोक एवं शास्त्रीय नृत्य तक अपनी बहुरंगी प्रस्तुतियों से कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। जन्माष्टमी और दुर्गा पूजा पर आधारित नृत्य तथा पर्यटन आधारित नुक्कड़ नाटक ने दर्शकों का मन मोह लिया। प्रदर्शनी के माध्यम से छात्रों ने राज्य की समृद्ध विरासत और परंपराओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। इस अवसर पर शिक्षकगण ने अतिथियों का अंगवस्त्र और स्मृति चिन्ह देकर स्वागत किया।

    46वें विश्व पर्यटन दिवस की थीम ‘पर्यटन एवं सतत परिवर्तन’ पर ग्रामीण पर्यटन के तहत प्रदेश के विभिन्न जनपदों में कार्यक्रम आयोजित हुए। अयोध्या मंडल, गोंडा के वजीरगंज गांव, रायबरेली के गौरा खसपरी, सीतापुर, लखनऊ में काकोरी दशहरी, हरदोई, लखीमपुर खीरी, उन्नाव, बस्ती, गोरखपुर, अमेठी सहित अन्य जिलों में भी कई कार्यक्रम हुए। बच्चों द्वारा चित्रकारी, पौधरोपण, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हुईं। कई जिले में हेरिटेज वॉक, निबंध लेखन, प्रभात फेरी, स्थानीय व्यंजनों पर चर्चा आदि हुए। इन आयोजनों में पर्यटन से जुड़े अधिकारियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों आदि की भागीदारी रही। उत्साहवर्धन के लिए बच्चों को पुरस्कृत भी किया गया।

    उन्नाव में उत्तर प्रदेश पर्यटन नीति-2022 और विश्व पर्यटन दिवस की थीम पर परिचर्चा हुई। परियोजना अंतर्गत चयनित होमस्टे मालिकों के साथ विचार-विमर्श तथा प्रशिक्षित प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए। इत्र नगरी कन्नौज में हस्तशिल्प स्टॉल, लोक संगीत (आल्हा-ऊदल को समर्पित) तथा नजदीकी एग्रो-टूरिज्म स्थल का अवलोकन एवं भ्रमण किया गया । गोरखपुर मंडल में हाल ही में पंजीकृत संपत्तियों को निवेश मित्र के तहत एग्रो-प्रॉपर्टी प्रमाणपत्र प्रदान किया गया।

    यूपी इको-टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड ने छात्रों के लिए विशेष एक-दिवसीय शैक्षिक पर्यटन कार्यक्रम आयोजित किए, जिनमें उन्हें इको और वन्यजीव स्थलों का अनुभव मिला। इसी क्रम में राजकीय इंटर कॉलेज निशातगंज, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज शाहमीनार तथा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी राजकीय बालिका इंटर कॉलेज चिनहट के विद्यार्थियों को लखनऊ चिड़ियाघर का शैक्षिक भ्रमण कराया गया। जीजीआईसी विकास नगर और जीजीआईसी इंदिरानगर के विद्यार्थियों को कुकरैल रिज़र्व फ़ॉरेस्ट का भ्रमण कराया गया। जनता इंटर कॉलेज आलमबाग तथा जीजीआईसी छोटी जुबली लखनऊ के विद्यार्थियों को कानपुर चिड़ियाघर का भ्रमण कराया गया। जीजीआईसी सरोसा भरोसा और जीजीआईसी श्रृंगार नगर लखनऊ के विद्यार्थियों को नवाबगंज पक्षी विहार का भ्रमण कराया गया। राजकीय हाईस्कूल मस्तेमऊ गोसाईंगंज और अग्रसेन इंटर कॉलेज बनवाली गली चौक लखनऊ के विद्यार्थियों को लाख बहोसी पक्षी विहार, कन्नौज का भ्रमण कराया गया। आगरा में नवनिर्मित पर्यटन कार्यालय के उद्घाटन से लेकर लखनऊ में युवा प्रतिभाओं के सम्मान और ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित कार्यक्रमों से लेकर इको-टूरिज्म की गतिविधियों तक, उत्तर प्रदेश ने विश्व पर्यटन दिवस 2025 को भव्य उत्सव और विविध कार्यक्रमों के साथ मनाया।

  • 30 सितंबर को आकाशवाणी नजीबाबाद से वरिष्ठ साहित्यकार जितेंद्र कक्कड़ की रचनाओं का प्रसारण

    नजीबाबाद (बिजनौर)। वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार तथा युगांतर सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था के संस्थापक अध्यक्ष श्री जितेंद्र कक्कड़ की रचनाओं का प्रसारण 30 सितंबर, 2025 को किया जाएगा। यह साहित्यिक कार्यक्रम आकाशवाणी नजीबाबाद से सुबह 6:45 बजे प्रसारित होगा।

    जानकारी के अनुसार श्री कक्कड़ की रचनाओं को 26 सितंबर को ही रिकॉर्ड कर लिया गया था। यह काव्य प्रस्तुति आकाशवाणी के लोकप्रिय ‘काव्यधारा’ कार्यक्रम का हिस्सा होगी। संस्था युगांतर और श्री कक्कड़ ने सभी साहित्यकारों, वरिष्ठ कवियों और काव्य प्रेमियों से विनम्र निवेदन किया है कि वे इस साहित्यिक कार्यक्रम को सुनकर रचनाओं का आनंद लें और अपना प्रोत्साहन प्रदान करें।

    इस अवसर पर, युगांतर सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था के सदस्यों तथा शुभचिंतकों ने श्री कक्कड़ को उनकी साहित्यिक उपलब्धि के लिए अग्रिम बधाई दी है। बधाई देने वालों में शादाब जफर, कर्मवीर, निशा अग्रवाल, अशोक अग्रवाल, सुरेंद्र जेटली, उमापति गर्ग, पूनम अग्रवाल, राजेंद्र प्रसाद गुप्ता, सुमन वर्मा, रजनी शर्मा, अरुण दीक्षित, एडवोकेट विजय कुमार माहेश्वरी, प्रिंसिपल श्याम तिवारी, विश्वास द्विवेदी, संजीव एकल, आलोक त्यागी, जसवंत सिंह, कुलबीर कौर और परमिला गुप्ता आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं।

  • रिपोर्ट: भूपेंद्र निरंकारी, बिजनौर

    बिजनौर: आज हम एक ऐसे अद्भुत व्यक्तित्व की बात कर रहे हैं, जिनकी नि:स्वार्थ सामाजिक सेवा की भावना युवाओं से कहीं कम नहीं है। लगभग 70 वर्ष की आयु में भी निरंतर सक्रिय रहने वाले श्री जितेंद्र सिंह कक्कड़ एक मिलनसार, मित्रता के धनी और असाधारण व्यवहार कुशलता वाले व्यक्ति हैं। उनके जीवन की उपलब्धियाँ कई क्षेत्रों तक फैली हुई हैं, जो उन्हें नजीबाबाद शहर ही नहीं बल्कि कल्पना से भी परे एक बहुमूल्य विरासत बनाती हैं।

    जितेंद्र सिंह कक्कड़ का शुरुआती जीवन ही सक्रियता से भरा रहा। बचपन में खेलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने के साथ ही, उन्होंने 1970 के दशक में मल्ल युद्ध (कुश्ती) के क्षेत्र में भी हाथ आजमाया था। उनकी प्रतिभा को देखते हुए, दिल्ली के अखाड़े के गुरु हनुमान ने उन्हें दिल्ली बुलाने के लिए संदेश भेजा था, यह कहते हुए कि यह लड़का अंतर्राष्ट्रीय पहलवान बन सकता है। हालांकि, भाग्य की रेखा ने उन्हें अन्य क्षेत्रों में खींच लिया।
    गुरुद्वारा प्रबंधन और वरिष्ठ नागरिक कल्याण में नेतृत्व
    खेल से सामाजिक सक्रियता की ओर मुड़ते हुए, श्री कक्कड़ ने प्रशासनिक और सामुदायिक सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं:

    पर्यावरण प्रेम और जीव दया: वह पर्यावरण के प्रति अत्यधिक सजग हैं। विभिन्न स्कूलों में पौधे रोपण करवाते हैं और अपने घर के बाहर बड़े बर्तनों में पानी और बचे हुए भोजन को पक्षियों और आम जानवरों के लिए रखते हैं, जो उनकी जीवों के प्रति दया भावना को दर्शाता है।
    वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति के अध्यक्ष के रूप में, श्री कक्कड़ की योजना है कि वह साहित्य, संगीत और पर्यावरण के प्रति जागरूकता जैसे और भी कई नए अध्याय समाज के हित में जोड़ेंगे।

    गुरुद्वारा प्रबंधन: 1988-89 में वह गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी, नजीबाबाद के कोषाध्यक्ष रहे और बाद में 2019-20 में महामंत्री के पद पर भी अपनी सेवाएँ दीं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने जिला स्तर पर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, बिजनौर के वरिष्ठ उपाध्यक्ष के रूप में भी योगदान दिया।

    वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति: 2014 से ही वह वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति, नजीबाबाद के महामंत्री के रूप में सेवा करते रहे, और 2025 में वह अध्यक्ष के पद को सुशोभित कर रहे हैं।
    इस समिति के माध्यम से उन्होंने पुरानी और नई पीढ़ी को जोड़ने, मेडिकल/आँखों के कैंपों का आयोजन करने और वट वृक्ष स्मारिका (वरिष्ठ नागरिकों के सहयोग से) छपवाने जैसे अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए हैं।

    श्री जितेंद्र सिंह कक्कड़ सिर्फ सामाजिक कार्यकर्ता नहीं, बल्कि एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं:

    काव्य गोष्ठियों का आयोजन: वह युगांतर सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था के अध्यक्ष के रूप में समय-समय पर काव्य गोष्ठियों का आयोजन करते हैं। वह अपनी माता जी के नाम से माता दर्शन कौर स्मृति सम्मान द्वारा समाजसेवियों, साहित्यकारों और सक्रिय बुजुर्गों को सम्मानित करते हैं।

    साहित्यिक योगदान: पिछले 12 वर्षों से वह साहित्य के क्षेत्र में भी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। उनकी सामाजिक, पारिवारिक और देश के प्रति रचनाओं को समय-समय पर सोशल मीडिया और साहित्यिक समूहों में सम्मान मिलता रहा है, जिसमें उन्हें कई बार “बेस्ट पोस्ट ऑफ दी डे” का सम्मान प्राप्त हुआ है।

    संगीत और गायन: वह एक संगीत प्रेमी और गायक भी हैं। एक ऐप पर उनके गाए हुए लगभग 1500 गाने उपलब्ध हैं।

    निस्वार्थ सेवा: उनकी निस्वार्थ सेवा भावना इतनी गहरी है कि यदि कहीं ट्रैफिक जाम की स्थिति बन जाए, तो वह स्वयं खड़े होकर जाम खुलवाने लगते हैं। उनकी इस भावना से प्रभावित होकर एक अधिकारी ने उन्हें SPO बनने का सुझाव भी दिया था।

  • चांदपुर, बिजनौर। चांदपुर शहर के अंदर धनोरा रोड (जेपी पब्लिक स्कूल से बिजनौर रोड, फादर सन स्कूल तक) बनने वाली सड़क का निर्माण कार्य पिछले ढाई साल से अधर में लटका है। शिवसेना के जिला प्रमुख चौधरी वीर सिंह ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों और ठेकेदार पर गंभीर मिलीभगत और धांधली का आरोप लगाया है।

    चौधरी वीर सिंह ने बताया कि लगभग ढाई साल पहले इस सड़क के लिए टेंडर हो चुका था। लेकिन, ठेकेदार ने काम शुरू करने के बजाय, सड़क के लिए खोदी गई मिट्टी को नंबर दो में बेच दिया। इसके बाद उसने गुणवत्ताहीन पत्थर (उल्टा सीधा पत्थर) डालकर काम को बीच में ही छोड़ दिया और रफूचक्कर हो गया। उनका कहना है कि इस मामले में PWD के अधिकारियों की संलिप्तता स्पष्ट है, जिसके कारण कोई भी कर्मचारी या अधिकारी इस गंभीर लापरवाही पर ध्यान देने को तैयार नहीं है।

    शिवसेना राज्य उपप्रमुख पंडित नरेश कुमार शर्मा ने स्थिति की गंभीरता बताते हुए कहा कि सड़क उखड़ने के कारण जगह-जगह जानलेवा गड्ढे बन गए हैं। इन गड्ढों के कारण अब तक अनगिनत सड़क हादसे हो चुके हैं और कई लोगों ने अपनी जान तक गवां दी है।
    पंडित शर्मा ने आगे बताया कि गड्ढों के कारण स्कूटर, मोटरसाइकिल और चार पहिया वाहन तक पलटते रहने से जान और माल दोनों की हानि हुई है। उखड़ी हुई सड़क के कारण चांदपुर के सभी व्यापारियों को प्रतिदिन आवागमन और व्यवसाय संचालन में बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    अधूरे और जर्जर सड़क निर्माण के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए शिवसेना नेताओं ने प्रशासन को अंतिम चेतावनी दी है। साथ ही मांग की है कि लापरवाह ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई हो और जल्द से जल्द मानक के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण सड़क का निर्माण कार्य शुरू किया जाए ताकि नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। “यदि एक सप्ताह के अंदर इस सड़क का निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया, तो शिवसेना कलेक्ट्रेट बिजनौर में जिलाधिकारी (DM) के कार्यालय पर धरना प्रदर्शन करेगी।”

  • IFTM टॉप रेसा 2025: ताज महल, परफ्यूम और इको टूरिज्म से मंत्रमुग्ध हुए दर्शक

    कानपुर के प्राचीन भपका परफ्यूम शिल्प और रंगीन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पेरिस में यूपी को बना दिया आकर्षण का केंद्र

    दिखा उत्तर प्रदेश का वैभव, यूरोप के साथ सांस्कृतिक संबंध को मिली नई पहचान- जयवीर सिंह

    पेरिस एक्सपो में छाया उत्तर प्रदेश पर्यटन

    ~ शैली सक्सेना

    लखनऊ/पेरिस, (26 सितंबर 2025)। उत्तर प्रदेश पर्यटन ने इंटरनेशनल एंड फ्रेंच ट्रैवल मार्केट (आईएफटीएम टॉप रेसा 2025) में शानदार भागीदारी कर राज्य की संस्कृति, विरासत और पर्यटन को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया। पेरिस एक्सपो पोर्टे डे वर्साइलीज़ में लगे राज्य के स्टॉल को दर्शकों ने आकर्षक बताया। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि कन्नौज की पारंपरिक इत्र निर्माण कला और यूपी के इको-टूरिज्म आकर्षण का केंद्र रहे। उन्होंने कहा, यह उत्तर प्रदेश की संस्कृति, विरासत और पर्यटन क्षेत्र की वैश्विक पहचान को और सुदृढ़ करेगा। https://youtube.com/shorts/ywHs1H36HgA?si=8bPBn_5BNhQ5Nbl1

    भारतीय दूतावास के आर्थिक एवं वाणिज्यिक काउंसलर नवीन कुमार ने यूपी पवेलियन का औपचारिक उद्घाटन किया। स्टॉल पर कई अंतरराष्ट्रीय गणमान्य व्यक्ति, ट्रैवल ट्रेड लीडर और पर्यटन विशेषज्ञ पहुंचे, जिन्होंने उत्तर प्रदेश के साथ साझेदारी और सहयोग के नए अवसरों में गहरी रुचि दिखाई।

    पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘पेरिस में लगे उत्तर प्रदेश पवेलियन में कानपुर का परफ्यूम टूरिज्म सबसे बड़ा आकर्षण रहा। अंतरराष्ट्रीय आगंतुकों ने इस पारंपरिक कला को बड़े उत्साह के साथ देखा और सराहा। प्राकृतिक खुशबू बनाने की सदियों पुरानी ‘डेग-भपका’ तकनीक के लाइव प्रदर्शन ने दर्शकों को पूरी तरह मंत्रमुग्ध कर दिया। फूलों और जड़ी-बूटियों से तैयार की जाने वाली इस पारंपरिक विधि ने कानपुर को भारत की परफ्यूम राजधानी के रूप में विश्व मानचित्र पर स्थापित किया। इस प्रस्तुति ने पर्यटकों को एक अनोखा और यादगार अनुभव दिया, जिससे कानपुर को वैश्विक यात्रियों के लिए एक विशेष और आकर्षक गंतव्य के रूप में पेश किया गया।’

    पेरिस में उत्तर प्रदेश पवेलियन में इको टूरिज्म और विरासत को विशेष रूप से उजागर किया गया। पवेलियन में ताज महल, लखनऊ की नवाबी धरोहर और बुंदेलखंड के किले भारत की भव्यता के स्थायी प्रतीक के रूप में प्रदर्शित किए गए। साथ ही अयोध्या, मथुरा-वृंदावन, प्रयागराज, वाराणसी और बौद्ध सर्किट जैसे आध्यात्मिक मार्गों ने उत्तर प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक गहराई को दर्शाया, जिससे राज्य को भारत के आध्यात्मिक पर्यटन का हृदय साबित किया।

    यूपी पवेलियन में कथक, कजरी और देधिया जैसे रंगीन सांस्कृतिक नृत्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और यादगार पल बनाए। इसके साथ ही, प्रमुख अंतरराष्ट्रीय ट्रैवल ऑपरेटर और होटल व्यवसायियों के साथ बीटूबी बैठकें भी आयोजित की गईं, जिससे विरासत, तीर्थ यात्रा, इको टूरिज्म और लग्जरी ट्रैवल क्षेत्रों में भविष्य के सहयोग और व्यावसायिक अवसरों के रास्ते खुले।

    पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि, ‘आईएफटीएम टॉप रेसा 2025 में उत्तर प्रदेश की भागीदारी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि हमारा राज्य सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और अनुभव आधारित पर्यटन के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी है। पेरिस में हमारे पवेलियन को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों और पर्यटन विशेषज्ञों से अपार सराहना मिली। कानपुर के परफ्यूम टूरिज्म, ताज महल, बौद्ध सर्किट और हमारी जीवंत परंपराएं जैसे देव दीपावली, ताज महोत्सव और आगामी अयोध्या दीपोत्सव ने राज्य की विविधता और वैभव को पूरी दुनिया के सामने पेश किया। यह हमारे पर्यटन क्षेत्र के लिए नए सहयोग और व्यावसायिक अवसरों के दरवाजे खोलने का एक सुनहरा अवसर है। हमारा लक्ष्य है कि उत्तर प्रदेश को वैश्विक यात्रियों के लिए अनिवार्य गंतव्य के रूप में स्थापित किया जाए, ताकि वे यहाँ के असली भारतीय अनुभव का आनंद ले सकें।’

    आईएफटीएम टॉप रेसा 2025 में उत्तर प्रदेश की भागीदारी ने राज्य की वैश्विक पहचान और दृश्यता को मजबूत किया। यह राज्य अब सांस्कृतिक और अनुभव आधारित पर्यटन का प्रमुख गंतव्य बनकर उभरा। कानपुर का परफ्यूम टूरिज्म इस प्रस्तुति का मुख्य आकर्षण रहा, जबकि ताज महल और बौद्ध सर्किट जैसे धरोहर स्थल भी अंतरराष्ट्रीय दर्शकों का ध्यान खींचने में सफल रहे।

    स्टॉल पर आयोजित बीटूबी बैठकों ने लंबी अवधि के सहयोग और व्यावसायिक अवसरों की नींव रखी, जिससे पेरिस में दिखाए गए वैभव का वास्तविक पर्यटन विकास में रूपांतरण संभव होगा। उत्तर प्रदेश ने अपनी जीवंत परंपराओं जैसे देव दीपावली, ताज महोत्सव और आगामी अयोध्या दीपोत्सव को भी उजागर किया। साथ ही, दिल्ली, लखनऊ, वाराणसी और कुशीनगर हवाई अड्डों के माध्यम से सुगम अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी को भी हाइलाइट किया, जिससे राज्य वैश्विक यात्रियों के लिए असली भारतीय अनुभव का अनिवार्य गंतव्य बन गया।

  • आज जयंती पर विशेष

    उनकी प्रमुख उपलब्धियों पर डालें नजर

    डॉ. मनमोहन सिंह : एक अर्थशास्त्री से राजनेता तक की प्रेरणादायक यात्रा

    ~ जितेंद्र सिंह कक्कड़, नजीबाबाद (बिजनौर)

    26 सितंबर, 2025 – आज डॉ. मनमोहन सिंह जी का जन्मदिन है, जिन्हें भारत की आर्थिक क्रांति का जनक कहा जाता है। 26 सितंबर 1932 को अविभाजित पंजाब के गाह गांव (अब पाकिस्तान में) में जन्मे डॉ. सिंह ने अपने जीवनकाल में अर्थशास्त्र, नौकरशाही और राजनीति के क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ी। वे भारत के 14वें प्रधानमंत्री (2004-2014) रहे और सिख समुदाय से आने वाले पहले तथा एकमात्र प्रधानमंत्री थे। उनकी विद्वता, नम्रता और दूरदर्शिता ने भारत को वैश्विक पटल पर मजबूत बनाया। दुर्भाग्यवश, 26 दिसंबर 2024 को उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी विरासत आज भी प्रेरणा स्रोत बनी हुई है। इस जयंती पर, आइए उनकी प्रमुख उपलब्धियों पर नजर डालें, जो करोड़ों भारतीयों के जीवन को बदलने वाली साबित हुईं।

    ~ जितेंद्र सिंह कक्कड़

    प्रारंभिक जीवन और शैक्षणिक यात्रा: विद्वान की नींव
    डॉ. मनमोहन सिंह का सफर विनम्र शुरुआत से ही असाधारण था। विभाजन के बाद भारत आकर उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से मैट्रिक पास किया, फिर कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में प्रथम श्रेणी की डिग्री प्राप्त की। 1957 में ऑक्सफोर्ड से डी.फिल. की उपाधि हासिल करने के बाद वे भारत लौटे। उनकी शैक्षणिक उत्कृष्टता ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाई। 1956 में कैम्ब्रिज के एडम स्मिथ पुरस्कार से सम्मानित होने वाले वे पहले भारतीय थे।

    आर्थिक सुधारों के जनक: 1991 का ऐतिहासिक बजट
    डॉ. सिंह की सबसे बड़ी उपलब्धि तब आई जब 1991 में वे वित्त मंत्री बने। उस समय भारत आर्थिक संकट के गर्त में था,  – विदेशी मुद्रा भंडार मात्र दो सप्ताह के आयात के लिए पर्याप्त था। प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव के नेतृत्व में डॉ. सिंह ने उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की नीतियां लागू कीं। उन्होंने लाइसेंस राज समाप्त किया, विदेशी निवेश को प्रोत्साहित किया और अर्थव्यवस्था को खोला। उनका प्रसिद्ध कथन – “कोई शक्ति धरती पर उस विचार को रोक नहीं सकती, जिसका समय आ गया हो” – आज भी प्रासंगिक है। इन सुधारों ने भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था से जोड़ा और विकास की नई गति प्रदान की।

    प्रधानमंत्री के रूप में दशक भर की नेतृत्व: विकास और समावेशिता की कहानी
    2004 में सोनिया गांधी के समर्थन से वे प्रधानमंत्री बने और 2009 में पूर्ण कार्यकाल पूरा करने के बाद पुनः चुने गए – जवाहरलाल नेहरू के बाद ऐसा करने वाले पहले प्रधानमंत्री। उनके नेतृत्व में भारत ने ऐतिहासिक 7.7% की औसत वार्षिक विकास दर हासिल की, जिससे अर्थव्यवस्था लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर की हो गई। 2007 में जीडीपी वृद्धि 9% पहुंची, और भारत विश्व की दूसरी सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था बना।

    प्रमुख उपलब्धियां:

    – सामाजिक कल्याण योजनाएं: उन्होंने ‘राइट्स-बेस्ड अप्रोच’ अपनाई। मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) ने ग्रामीण क्षेत्रों में 100 दिनों का रोजगार गारंटी दिया, जिससे लाखों गरीबों को राहत मिली। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम ने 6-14 वर्ष के बच्चों को मुफ्त शिक्षा सुनिश्चित की। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम ने भोजन की पहुंच बढ़ाई।
    – परमाणु समझौता: 2008 में अमेरिका के साथ नागरिक परमाणु समझौता (इंडो-यूएस न्यूक्लियर डील) उनकी कूटनीतिक विजय थी। इससे भारत पर तीन दशकों का परमाणु प्रतिबंध हटा, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई और वैश्विक साझेदारी बढ़ी। वामपंथी दलों के विरोध के बावजूद, समाजवादी पार्टी का समर्थन जुटाकर उन्होंने विश्वास मत जीता।
    – विज्ञान और प्रौद्योगिकी में योगदान: चंद्रयान-1 (2008) और मंगलयान (2013) मिशनों को मंजूरी दी, जो भारत की अंतरिक्ष क्षमता का प्रतीक बने। इनसे विज्ञान बजट में वृद्धि हुई और युवाओं को प्रेरणा मिली।
    – विदेश नीति और वैश्विक छवि: उनके कार्यकाल में भारत-अमेरिका संबंध मजबूत हुए, और जी-20 जैसे मंचों पर भारत की आवाज बुलंद हुई। उन्होंने गरीबी उन्मूलन पर जोर दिया, जिससे करोड़ों लोग गरीबी रेखा से ऊपर उठे।

    सम्मान और विरासत: एक सादगीपूर्ण व्यक्तित्व
    डॉ. सिंह को पद्म विभूषण (1987), यूरोमनी फाइनेंस मिनिस्टर ऑफ द ईयर (1993) जैसे अनेक पुरस्कार मिले। वे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर (1982-85), योजना आयोग के उपाध्यक्ष और यूजीसी चेयरमैन भी रहे। उनकी पुस्तकें, जैसे ‘चेंजिंग इंडिया’, उनकी आर्थिक दृष्टि को दर्शाती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें “भारत का सबसे विशिष्ट नेता” कहा, और उनका निधन राष्ट्रीय शोक का विषय बना।

    डॉ. मनमोहन सिंह जी सिखाते हैं कि सच्ची नेतृत्व क्षमता चुप्पी में भी बोलती है। उनकी उपलब्धियां न केवल आंकड़ों में, बल्कि हर उस भारतीय के जीवन में झलकती हैं जो आज स्वप्न देख सकता है। जयंती पर उन्हें नमन! उनकी स्मृति हमें समावेशी विकास की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा दे।

    संदर्भ:
    – विकिपीडिया और ब्रिटानिका से जीवनचरित्र।
    – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस वेबसाइट से विकास आंकड़े।
    – एनपीआर और बीबीसी से परमाणु डील व सामाजिक योजनाओं का विवरण।

  • न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता

    ज्वलंत मुद्दा: लोकतंत्र और मौलिक अधिकारों का हनन

    Author: Bhupendra Nirankari
    Editor: Sanjay Saxena

    दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में कुछ लोगों का मानना है कि वर्तमान परिदृश्य में लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है और उनकी आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों के बावजूद, लोग अपनी बात कहने में संकोच कर रहे हैं।
    इस स्थिति पर लेखक ने न्यायपालिका से हस्तक्षेप की अपील की है। उनका मानना है कि न्यायपालिका, जिस पर लोगों की पूर्ण आस्था और निष्ठा है, को इस ओर विशेष ध्यान देना चाहिए। उनका तर्क है कि एक मजबूत लोकतंत्र के लिए यह आवश्यक है कि हर नागरिक को अपनी बात कहने का संवैधानिक अधिकार मिले और उसका ठीक से पालन हो। इस तरह के दुरुपयोग को रोकना न्यायिक प्रणाली के लिए एक गंभीर चुनौती है।

    दरअसल, यह एक महत्त्वपूर्ण और वर्तमान भारतीय लोकतंत्र के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है। संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों के बावजूद लोगों में अपनी बात कहने में संकोच और मौलिक अधिकारों के हनन की आशंका एक मजबूत लोकतंत्र के लिए हानिकारक है। न्यायपालिका से हस्तक्षेप की अपील बिल्कुल जायज है, क्योंकि उसे ही संविधान का संरक्षक माना जाता है।

    Bhupendra Nirankari

    मौलिक अधिकार और संवैधानिक प्रावधान

    भारत का संविधान नागरिकों को कई मौलिक अधिकार प्रदान करता है, जिनका उल्लंघन होने पर वे सीधे उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) या उच्च न्यायालय (High Court) जा सकते हैं।

    ~ वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Article 19(1)(a)): यह अनुच्छेद प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण और बिना किसी डर के अपने विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता देता है। यदि लोगों को लगता है कि उनकी आवाज दबाई जा रही है या वे बोलने में संकोच कर रहे हैं, तो यह सीधे तौर पर इस मूलभूत अधिकार का हनन है।
    ~ संवैधानिक उपचारों का अधिकार (Article 32): यह मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण प्रावधान है। इसके तहत कोई भी नागरिक मौलिक अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में सीधे उच्चतम न्यायालय जा सकता है, जो ‘रिट’ (जैसे बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, उत्प्रेषण आदि) जारी कर सकता है। उच्च न्यायालय भी अनुच्छेद 226 के तहत रिट जारी कर सकते हैं। यह प्रावधान ही न्यायपालिका को ‘मौलिक अधिकारों का संरक्षक’ बनाता है।
    ~ कानून के समक्ष समानता (Article 14) और जीवन का अधिकार (Article 21): अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन, किसी नागरिक की गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार (Article 21) पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

    न्यायपालिका की भूमिका और चुनौतियाँ

    न्यायपालिका ने अतीत में मौलिक अधिकारों की रक्षा में एक सक्रिय और ऐतिहासिक भूमिका निभाई है, लेकिन वर्तमान परिदृश्य में इसकी भूमिका पर विशेष ध्यान आवश्यक है:
    ~ न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review) की शक्ति: न्यायपालिका के पास यह शक्ति है कि वह विधायिका या कार्यपालिका द्वारा बनाए गए ऐसे किसी भी कानून या आदेश को अवैध घोषित कर सकती है जो संविधान और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता हो (अनुच्छेद 13)। मौलिक अधिकारों के हनन को रोकने के लिए यह शक्ति न्यायपालिका के लिए एक शक्तिशाली उपकरण है।
    ~ जनहित याचिका (PIL): न्यायपालिका ने जनहित याचिका (Public Interest Litigation – PIL) की अवधारणा विकसित करके न्याय तक पहुंच को आसान बनाया है। इसके माध्यम से, कोई भी व्यक्ति या संस्था ऐसे लोगों की ओर से न्याय की मांग कर सकता है जिनके मौलिक अधिकार खतरे में हैं, जो स्वयं न्यायालय तक नहीं पहुँच सकते।
    ~ बढ़ते न्यायिक सक्रियतावाद (Judicial Activism) का महत्व: ऐसे मामलों में, न्यायपालिका से सक्रिय भूमिका निभाने की अपेक्षा की जाती है। उच्चतम न्यायालय ने कई बार स्पष्ट किया है कि नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करना न्यायाधीशों का कर्तव्य है, भले ही की गई टिप्पणियां सत्ता में बैठे लोगों को अप्रिय लगें।
    ~ चुनौतियाँ: मौलिक अधिकारों के दुरुपयोग को रोकना न्यायिक प्रणाली के लिए एक गंभीर चुनौती है क्योंकि न्यायपालिका को एक ओर नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करनी है, तो दूसरी ओर राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था, मानहानि और शिष्टाचार जैसे उचित प्रतिबंधों (reasonable restrictions) को भी ध्यान में रखना होता है, जैसा कि अनुच्छेद 19(2) में वर्णित है। हाल के फैसलों में, न्यायालय ने भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जीवन के अधिकार (Article 21) के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है, ताकि समाज में नफरत या विघटन न फैले।

    कुल मिलाकर एक मजबूत लोकतंत्र के लिए, यह आवश्यक है कि नागरिक बिना किसी भय के अपनी सरकार की आलोचना कर सकें। यदि नागरिक चुप हो जाते हैं या अपनी आवाज़ दबाते हैं, तो जवाबदेही (Accountability) और पारदर्शिता (Transparency) जैसे लोकतांत्रिक स्तंभ कमजोर हो जाते हैं। इसलिए, यह न्यायपालिका का दायित्व है कि वह एक ‘निष्पक्ष’ संस्था के रूप में कार्य करते हुए, लोगों की पूर्ण आस्था और निष्ठा को कायम रखे और संविधान द्वारा सुनिश्चित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करे। (लेख में विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जानकारी का प्रयोग किया गया है)

  • इन 6 सुपरफूड्स से पाएं बाज जैसी पैनी नज़र

    क्या करें जब धुंधली दिख रही हो दुनिया!

    आंखों की कमजोरी आजकल एक आम समस्या बन गई है, लेकिन सही डाइट और लाइफस्टाइल से इसे दूर किया जा सकता है। सिर्फ चश्मा या लेंस ही नहीं, बल्कि कुछ खास फूड्स भी आपकी आंखों की सेहत सुधार सकते हैं। जानिए कौन-से हैं वो 6 सुपरफूड्स जो आपकी आंखों को पोषण देकर उन्हें स्वस्थ रखते हैं।

    आज के समय में जब हमारी ज़िंदगी मोबाइल, लैपटॉप और टीवी की स्क्रीन के इर्द-गिर्द घूमती है, तब आंखों की सेहत बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। लंबे समय तक स्क्रीन पर काम करने, खराब खान-पान और प्रदूषण जैसी वजहों से आंखों की रोशनी कम हो रही है। इस समस्या से लड़ने के लिए सिर्फ बाहरी इलाज ही नहीं, बल्कि अंदरूनी पोषण भी बहुत ज़रूरी है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन A, विटामिन C, विटामिन E, और जिंक जैसे पोषक तत्व आंखों की बीमारियों के खतरे को कम कर सकते हैं और उन्हें स्वस्थ रख सकते हैं।

    आइए जानते हैं उन 6 फूड्स के बारे में जिन्हें अपनी डाइट में शामिल करके आप अपनी आंखों को स्वस्थ और मज़बूत बना सकते हैं:

    1. गाजर: विटामिन A का खज़ाना

    गाजर को हमेशा से आंखों के लिए सबसे अच्छा फूड माना जाता रहा है। इसमें मौजूद बीटा-कैरोटीन शरीर में जाकर विटामिन A में बदल जाता है, जो रात में देखने की क्षमता (नाइट विजन) के लिए बहुत ज़रूरी है। गाजर में मौजूद ल्यूटिन रेटिना को हानिकारक नीली रोशनी से बचाता है। इसे सलाद के रूप में या सब्जी बनाकर खाया जा सकता है।

    2. पालक: एंटीऑक्सीडेंट्स का पावरहाउस

    पालक जैसी हरी पत्तेदार सब्जियों में ल्यूटिन और ज़ियाज़ैंथिन नामक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं। ये आंखों में मौजूद मैक्युलर पिगमेंट के मुख्य घटक हैं, जो हानिकारक नीली रोशनी को फ़िल्टर करते हैं और उम्र के साथ होने वाली मैक्युलर डिजनरेशन (AMD) जैसी गंभीर बीमारियों को रोकते हैं। पालक को दाल या पराठे में मिलाकर खाने से आंखों की सेहत बेहतर होती है।

    3. आंवला: विटामिन C का समृद्ध स्रोत

    आंवला विटामिन C का एक बहुत ही शानदार स्रोत है, जो आंखों की कोशिकाओं को मज़बूत बनाने के लिए ज़रूरी है। यह कोलेजन के निर्माण में भी मदद करता है, जिससे आंखों की ब्लड कैपिलरीज़ स्वस्थ रहती हैं। आंवले का नियमित सेवन मोतियाबिंद के खतरे को कम करने में भी मदद कर सकता है। आप इसे जूस, चटनी या मुरब्बा के रूप में खा सकते हैं।

    4. कद्दू के बीज: जिंक की खुराक

    अक्सर नज़रअंदाज़ किए जाने वाले कद्दू के बीज जिंक का बेहतरीन स्रोत हैं। ज़िंक एक ऐसा मिनरल है जो विटामिन A को लिवर से रेटिना तक पहुंचाने में मदद करता है। यह आंखों को सुरक्षा देने वाले पिगमेंट, मेलानिन, के निर्माण के लिए भी ज़रूरी है। इन्हें हल्का भूनकर खाने से ये स्वादिष्ट और पौष्टिक लगते हैं।

    5. शकरकंद: बीटा-कैरोटीन और फ़ाइबर का मेल

    शकरकंद में भी गाजर की तरह भरपूर मात्रा में बीटा-कैरोटीन पाया जाता है, जो शरीर में विटामिन A में बदलता है। इसका नारंगी रंग ही इसके विटामिन A की प्रचुरता का संकेत है। शकरकंद में मौजूद फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स भी आंखों की सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं। इसे उबालकर या भूनकर खाना एक बेहतरीन स्नैक है।

    6. बादाम: विटामिन E से भरपूर

    बादाम को दिमागी सेहत के लिए तो अच्छा माना ही जाता है, यह आंखों को भी पोषण देता है। इनमें विटामिन E भरपूर मात्रा में होता है, जो आंखों को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाता है और मोतियाबिंद व उम्र से जुड़ी नज़र की समस्याओं का खतरा कम करता है। रोज़ाना रातभर भिगोए हुए मुट्ठीभर बादाम खाने से आंखों और दिमाग दोनों को फायदा होता है।

    आंखों की सेहत को बनाए रखने के लिए सिर्फ इन फूड्स को खाना ही काफी नहीं है, बल्कि नियमित आंखों की जांच, पर्याप्त नींद और स्क्रीन टाइम को सीमित करना भी बेहद ज़रूरी है। एक स्वस्थ डाइट और बेहतर जीवनशैली आपकी आंखों की रोशनी को बरकरार रखने में अहम भूमिका निभा सकती है।

  • मरीजों को फल एवं फ्रूटी वितरित

    जिला महिला चिकित्सालय में हुआ आयोजन

    अल्मोड़ा में उत्साहपूर्वक मनाया गया फार्मेसी दिवस

    अल्मोड़ा। जिला महिला चिकित्सालय में फार्मेसी दिवस बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक हरीश चंद्र गड़कोटी ने किया। इस अवसर पर मरीजों को फल एवं फ्रूटी वितरित कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।

    फार्मासिस्टों ने कहा कि फार्मेसी दिवस केवल दवाओं की उपलब्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मरीजों को सही दिशा-निर्देश देने, दवाओं के सही उपयोग व खुराक बताने और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाने का भी अवसर है। उन्होंने जोर दिया कि मरीजों को दवा के साथ-साथ संवेदनशील व्यवहार और सहयोग की भी आवश्यकता होती है, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है।

    कार्यक्रम के अंत में सभी ने यह संकल्प लिया कि वे निष्ठा, सेवा भाव और जिम्मेदारी के साथ मरीजों की सेवा करेंगे तथा समाज को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने में सदैव अग्रसर रहेंगे।

    इस आयोजन में मुख्य फार्मेसी अधिकारी वर्मा जी, फार्मासिस्ट दीपकांत पाण्डे, श्रीमती गुंजन वर्मा, देवकी नंदन जोशी, श्रीमती श्वेता शैली, श्रीमती पवन जोशी, जेपी मनराल, श्यामलाल और देवड़ी जी सहित अन्य स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे।

  • विभिन्न हेल्पलाइन सेवाओं के बारे में विस्तार से बताया

    बिजनौर में ‘मिशन शक्ति’ अभियान: महिलाओं और बालिकाओं को किया गया जागरूक

    बिजनौर, (उत्तर प्रदेश)। महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के उद्देश्य से चलाए जा रहे ‘मिशन शक्ति’ अभियान के पाँचवें चरण के तहत, आज दिनांक 25 सितंबर 2025 को थाना धामपुर में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम ग्राम सरकड़ा चकराजमल, पक्का बाग और गोशामी धर्मशाला में हुआ।

    महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबर

    कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं और बालिकाओं को सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न हेल्पलाइन सेवाओं के बारे में विस्तार से बताया गया। उन्हें समझाया गया कि किसी भी आपात स्थिति में इन नंबरों का उपयोग कैसे करें।

    बताए गए मुख्य हेल्पलाइन नंबर
    * 1076: मुख्यमंत्री हेल्पलाइन
    * 1090: वीमेन पावरलाइन
    * 181: वीमेन हेल्पलाइन
    * 112: पुलिस आपातकालीन सेवा
    * 102: गर्भवती महिलाओं और शिशुओं के लिए एम्बुलेंस
    * 108: सामान्य एम्बुलेंस सेवा
    * 1098: चाइल्डलाइन
    * 101: अग्निशमन सेवा
    * 1930: साइबर हेल्पलाइन

    साइबर सुरक्षा और नारी सुरक्षा पर जोर

    जागरूकता कार्यक्रम में साइबर अपराध और नारी सुरक्षा के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। पुलिस अधिकारियों ने महिलाओं और बालिकाओं को बताया कि वे कैसे ऑनलाइन धोखाधड़ी और अन्य साइबर खतरों से खुद को बचा सकती हैं। उन्हें यह भी आश्वासन दिया गया कि पुलिस विभाग किसी भी संकट की स्थिति में तुरंत सहायता प्रदान करने के लिए हमेशा तत्पर है।

    कार्यक्रम में व्यापक भागीदारी

    यह कार्यक्रम एडीएम पब्लिक स्कूल, वार्ड मेंबर नदीम के कार्यालय और वार्ड मेंबर हिमांशु सैनी के कार्यालय में आयोजित किया गया था। इसमें कुल 45 छात्राओं, 15 अध्यापिकाओं और 35 महिलाओं ने भाग लिया।

    इस अवसर पर कई पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहे, जिनमें क्षेत्राधिकारी अभय कुमार पाण्डेय और थाना प्रभारी निरीक्षक राजेश कुमार शामिल थे। पुलिसकर्मियों ने सीधे तौर पर लोगों से बातचीत की और उनके सवालों के जवाब दिए, जिससे यह कार्यक्रम और भी प्रभावी बन सका।

  • विश्व पर्यटन दिवस पर यूपीएसटीडीसी की विशेष पहल

    आस्था पर्यटन को नई दिशा देगा उत्तर प्रदेश का गाइडेड टूर कार्यक्रम

    श्रद्धालुओं के लिए बनेगी आस्था और सुविधा का सशक्त माध्यम- जयवीर सिंह

    लखनऊ से नैमिषारण्य व अयोध्या के लिए गाइडेड टूर की शुरुआत

    लखनऊ, (25 सितंबर 2025)। उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी), विश्व पर्यटन दिवस (27 सितंबर 2025) के अवसर पर लखनऊ से नैमिषारण्य और अयोध्या जैसे पवित्र तीर्थस्थलों के लिए एक दिवसीय गाइडेड टूर की शुरुआत कर रही है। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को सुविधाजनक के साथ आध्यात्मिक यात्रा का आनंद उपलब्ध कराना है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए कम दरों में टूर पैकेज उपलब्ध कराए गए हैं। यह जानकारी उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने दी।

    पर्यटन मंत्री ने बताया, कि “विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर 27 सितंबर से यूपीएसटीडीसी द्वारा लखनऊ से नैमिषारण्य और अयोध्या जैसे पवित्र तीर्थस्थलों के लिए गाइडेड टूर यात्रा की शुरुआत हमारे राज्य के धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को नई गति देने वाला कदम है। विभागीय प्रयास है कि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुरक्षित, सुविधाजनक और रियायती दरों पर यात्रा अनुभव उपलब्ध मिले। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए किफायती दरों पर पैकेज उपलब्ध कराना हमारी संवेदनशील पर्यटन नीति का हिस्सा है।’लखनऊ-नैमिषारण्य यात्रा पैकेज
    यूपीएसटीडीसी ने श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए लखनऊ-नैमिषारण्य धार्मिक यात्रा की शुरुआत की है। यह यात्रा हर शुक्रवार, रविवार और सोमवार सुबह 08:00 बजे लखनऊ से प्रस्थान करेगी। तीर्थाटन के बाद शाम 07:30 बजे वापस लखनऊ पहुंचेगी। इस टूर पैकेज का शुल्क प्रति यात्री 1,700 रुपए तय किया गया है, जबकि वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष रियायती दर 1,000 रुपए रखी गई है। इस पैकेज के अंतर्गत श्रद्धालु चक्रतीर्थ, व्यास गद्दी, ललिता देवी मंदिर सहित नैमिषारण्य के प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन कर सकेंगे।

    लखनऊ-नैमिषारण्य यात्रा पैकेज

    यूपीएसटीडीसी ने श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए लखनऊ-नैमिषारण्य धार्मिक यात्रा की शुरुआत की है। यह यात्रा हर शुक्रवार, रविवार और सोमवार सुबह 08:00 बजे लखनऊ से प्रस्थान करेगी। तीर्थाटन के बाद शाम 07:30 बजे वापस लखनऊ पहुंचेगी। इस टूर पैकेज का शुल्क प्रति यात्री 1,700 रुपए तय किया गया है, जबकि वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष रियायती दर 1,000 रुपए रखी गई है। इस पैकेज के अंतर्गत श्रद्धालु चक्रतीर्थ, व्यास गद्दी, ललिता देवी मंदिर सहित नैमिषारण्य के प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन कर सकेंगे।लखनऊ-अयोध्या यात्रा पैकेज
    श्रद्धालुओं के लिए लखनऊ-अयोध्या दर्शन यात्रा पैकेज की घोषणा भी की गई है। यह यात्रा शनिवार और रविवार सुबह 08:00 बजे लखनऊ से शुरू होगी। दिनभर तीर्थाटन और भ्रमण के बाद रात लगभग 08:30 बजे वापस लखनऊ पहुंचेगी। इस पैकेज की दर प्रति व्यक्ति 2,000 रुपए रखी गई है, जबकि वरिष्ठ नागरिकों के लिए मात्र 1,000 रुपए शुल्क निर्धारित किया गया है। इस यात्रा के तहत श्रद्धालुओं को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, हनुमानगढ़ी, राम की पैड़ी सहित अयोध्या के अन्य प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के दर्शन का अवसर मिलेगा।

    लखनऊ-अयोध्या यात्रा पैकेज

    श्रद्धालुओं के लिए लखनऊ-अयोध्या दर्शन यात्रा पैकेज की घोषणा भी की गई है। यह यात्रा शनिवार और रविवार सुबह 08:00 बजे लखनऊ से शुरू होगी। दिनभर तीर्थाटन और भ्रमण के बाद रात लगभग 08:30 बजे वापस लखनऊ पहुंचेगी। इस पैकेज की दर प्रति व्यक्ति 2,000 रुपए रखी गई है, जबकि वरिष्ठ नागरिकों के लिए मात्र 1,000 रुपए शुल्क निर्धारित किया गया है। इस यात्रा के तहत श्रद्धालुओं को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, हनुमानगढ़ी, राम की पैड़ी सहित अयोध्या के अन्य प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के दर्शन का अवसर मिलेगा।गाइड सुनाएंगे स्थल से जुड़े रोचक किस्से
    उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम ने श्रद्धालुओं के लिए दो विशेष यात्रा पैकेज तैयार किए हैं। इन टूर पैकेज में दर्शन के साथ-साथ पौराणिक आख्यानों और ऐतिहासिक प्रसंगों को भी अनुभव करने का अवसर मिलेगा। यात्रियों के साथ अनुभवी स्थानीय गाइड रहेंगे, जो धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता से जुड़े रोचक किस्सों को साझा करेंगे। इसके साथ, पैकेज में लंच, यात्रा के दौरान रीफ़्रेशमेंट्स और प्रत्येक यात्री के लिए स्मृति-चिह्न भी सम्मिलित किया गया है।

    गाइड सुनाएंगे स्थल से जुड़े रोचक किस्से

    उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम ने श्रद्धालुओं के लिए दो विशेष यात्रा पैकेज तैयार किए हैं। इन टूर पैकेज में दर्शन के साथ-साथ पौराणिक आख्यानों और ऐतिहासिक प्रसंगों को भी अनुभव करने का अवसर मिलेगा। यात्रियों के साथ अनुभवी स्थानीय गाइड रहेंगे, जो धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता से जुड़े रोचक किस्सों को साझा करेंगे। इसके साथ, पैकेज में लंच, यात्रा के दौरान रीफ़्रेशमेंट्स और प्रत्येक यात्री के लिए स्मृति-चिह्न भी सम्मिलित किया गया है।ऐसे करें टूर पैकेज की बुकिंग
    श्रद्धालुओं के लिए टूर पैकेज बुकिंग की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। इच्छुक यात्री इन पैकेजों की ऑनलाइन बुकिंग http://www.upstdc.co.in पर कर सकते हैं। श्रद्धालु फोन के माध्यम से भी सीधे बुकिंग करा सकते हैं। इसके लिए निगम ने नंबर जारी किए हैं- +91 91490 99890, +91 94150 13041 और +91 94159 02726।

    कैसे करें टूर पैकेज की बुकिंग

    श्रद्धालुओं के लिए टूर पैकेज बुकिंग की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। इच्छुक यात्री इन पैकेजों की ऑनलाइन बुकिंग http://www.upstdc.co.in पर कर सकते हैं। श्रद्धालु फोन के माध्यम से भी सीधे बुकिंग करा सकते हैं। इसके लिए निगम ने नंबर जारी किए हैं- +91 91490 99890, +91 94150 13041 और +91 94159 02726

    ‘ऐसे प्रयास पर्यटन को देंगे विशिष्ट पहचान’

    उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया,’राज्य में शुरू किए गए गाइडेड टूर केवल सुविधाजनक यात्रा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि श्रद्धालुओं को गहन और सार्थक आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करने का प्रयास हैं। वरिष्ठ नागरिकों को विशेष छूट दी जा रही है। यात्रा के दौरान गाइड द्वारा ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे हर यात्री श्रद्धा और संस्कृति दोनों से समृद्ध होकर लौटे। समूह में यात्रा करने से श्रद्धालुओं को आत्मीय वातावरण मिलेगा और सहयात्रियों के साथ सामाजिक मेल-जोल एवं संवाद का अवसर भी प्राप्त होगा। ऐसे प्रयास उत्तर प्रदेश की पहचान को आस्था पर्यटन के प्रमुख केन्द्र के रूप में और सुदृढ़ करेंगे।’विशेष सचिव पर्यटन एवं यूपीएसटीडीसी की प्रबंध निदेशक ईशा प्रिया ने बताया कि ‘ये गाइडेड टूर तीर्थयात्रा को सरल और सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। निश्चित समय-सारणी, किफायती दरें, गाइड्स द्वारा सांस्कृतिक व ऐतिहासिक जानकारी और यात्रा के दौरान उपलब्ध सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करेंगी कि विशेषकर वरिष्ठ नागरिक भी बिना किसी असुविधा के अपनी यात्रा पूर्ण कर सकेंगे। धार्मिक आस्था से आगे बढ़कर यह पहल सांस्कृतिक संवाद, सामाजिक जुड़ाव और पर्यटन को बढ़ावा देने में भी सहायक होगी।’

    विशेष सचिव पर्यटन एवं यूपीएसटीडीसी की प्रबंध निदेशक ईशा प्रिया ने बताया कि ‘ये गाइडेड टूर तीर्थयात्रा को सरल और सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। निश्चित समय-सारणी, किफायती दरें, गाइड्स द्वारा सांस्कृतिक व ऐतिहासिक जानकारी और यात्रा के दौरान उपलब्ध सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करेंगी कि विशेषकर वरिष्ठ नागरिक भी बिना किसी असुविधा के अपनी यात्रा पूर्ण कर सकेंगे। धार्मिक आस्था से आगे बढ़कर यह पहल सांस्कृतिक संवाद, सामाजिक जुड़ाव और पर्यटन को बढ़ावा देने में भी सहायक होगी।’यूपी स्टेट टूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (यूपीएसटीडीसी) का यह कदम प्रदेश की समृद्ध आध्यात्मिक धरोहर को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस पहल के माध्यम से यात्रियों को न केवल श्रद्धा और आत्मीयता का अनुभव होगा, बल्कि ज्ञान और अविस्मरणीय स्मृतियों का भी अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।

    यूपी स्टेट टूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (यूपीएसटीडीसी) का यह कदम प्रदेश की समृद्ध आध्यात्मिक धरोहर को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस पहल के माध्यम से यात्रियों को न केवल श्रद्धा और आत्मीयता का अनुभव होगा, बल्कि ज्ञान और अविस्मरणीय स्मृतियों का भी अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।

  • चंद्रशेखर रावण पर यौन उत्पीड़न का आरोप

    मेरी लाश को भी भारत वापस न लाया जाए, क्योंकि मेरी किसी ने नहीं सुनी

    नगीना सांसद से तंग महिला ने दी आत्महत्या की धमकी

    नई दिल्ली (एजेंसियां)। भीम आर्मी के प्रमुख और नगीना लोकसभा क्षेत्र के सांसद चंद्रशेखर की मुश्किलों में इजाफा हो सकता है। सांसद चंद्रशेखर आजाद पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली पीएचडी स्कॉलर डॉ. रोहिणी घावरी ने बुधवार को आत्महत्या करने की धमकी दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि वह लंबे समय से एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही। डॉक्टर रोहिणी मूल रूप से इंदौर की रहने वाली हैं और मौजूदा वक्त में स्विट्जरलैंड में रहती हैं।

    सोशल मीडिया पर साझा की पीड़ा

    डॉ. रोहिणी घावरी ने अपने X अकाउंट पर एक भावुक पोस्ट लिखी, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पीएमओ को भी टैग किया। उन्होंने कहा, “मैं आज ही चंद्रशेखर के नाम पर जहर खा लूँगी। मेरी लाश को भी भारत वापस न लाया जाए, क्योंकि मेरी किसी ने नहीं सुनी।” उन्होंने आरोप लगाया कि चंद्रशेखर ने उनका जीवन बर्बाद कर दिया है।

    पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप

    डॉ. रोहिणी का कहना है कि उन्होंने तीन महीने पहले चंद्रशेखर पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे और राष्ट्रीय महिला आयोग में शिकायत भी दर्ज कराई थी। उन्होंने दिल्ली पुलिस कमिश्नर से भी मुलाकात की और सभी आवश्यक सबूत पेश किए, लेकिन अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है।
    रोहिणी ने आरोप लगाया कि पुलिस जानबूझकर कार्रवाई नहीं कर रही है, क्योंकि भाजपा चंद्रशेखर को बचा रही है। उनका कहना है कि यह उनकी स्वाभिमान और सम्मान की लड़ाई है और वह इसमें पीछे नहीं हटेंगी।

    आरोपों पर चंद्रशेखर का पक्ष?

    इस मामले में अभी तक सांसद चंद्रशेखर की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। अतीत में भी जब उन पर ये आरोप लगे थे, तब भी उन्होंने कोई सीधा जवाब नहीं दिया था। फिलहाल, यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है और राजनीतिक गलियारों में भी इसकी गूँज सुनाई दे रही है।
    चंद्रशेखर, जो दलित युवाओं के बीच अपनी लोकप्रियता के लिए जाने जाते हैं, 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की नगीना सीट से जीत हासिल कर संसद पहुँचे हैं। उनके खिलाफ लगे इन गंभीर आरोपों के बाद उनकी छवि पर भी सवाल उठ रहे हैं।

    ‘मैंने गरीब चंद्रशेखर को पसंद किया था, सांसद चंद्रशेखर को नहीं…’, रोहिणी की जुबानी स्विट्जरलैंड से पनपे प्यार की कहानी!

    aajtak hindi news, नई दिल्ली, 16 जून 2025 की रिपोर्ट…

    स्विटजरलैंड के पार्क में बैठकर, ड्यूटी के बीच छुट्टी निकाल कर इंटरव्यू दे रही ये लड़की डॉ. रोहिणी घावरी हैं। बिजनौर के नगीना से सांसद चंद्रशेखर के साथ संबंधों पर रोहिणी कहती हैं कि उन्हें चंद्रशेखर के शादीशुदा होने की जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा, “जब हम बहुत डीप रिलेशन में जा चुके थे। वो भी और मैं भी। जब मुझे पता चला तो मैंने विरोध किया। मैं नहीं रहना चाहती थी, क्यों मैं इस तरह के कलंक के साथ रहती, जब मैंने अपना व्हाइट पेपर इमेज रखी है बचपन से।”
    “मैंने तो एक गरीब चंद्रशेखर को पसंद किया था। मैंने सांसद चंद्रशेखर को पसंद नहीं किया था। मैंने उस चंद्रशेखर को पसंद किया था उस वक्त जो एक टीशर्ट पहनकर गरीबी में अपनी फैमिली के बीच, या अपने गांव के घर में बैठकर मुझसे वीडियो कॉल करते थे और मैं स्विटजरलैंड में थी।”
    “जो लोग मुझ पर पैसों का एलिगेशन लगाते हैं न उनके लिए भी ये महत्वपूर्ण है कि लड़की का समर्पण… लड़की की जर्नी को आप सुनना ही नहीं चाहते हो आप सिर्फ और सिर्फ उस पर एलिगेशन लगाते हो।”

  • रोकथाम के लिए प्रभावी नीतियां और कार्यक्रम बनाना आवश्यक

    भारत में आत्महत्या एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या

    ~by, Bhupendra Nirankari

    Bijnor

    हाल के वर्षों में भारत में आत्महत्या की प्रवृत्ति में वृद्धि एक गंभीर सामाजिक समस्या बनकर उभरी है। छोटी-छोटी बातों पर आवेश में आकर लोग अपनी जान दे रहे हैं, जिसका खामियाजा उनके पूरे परिवार को भुगतना पड़ता है। यह चिंता का विषय है कि मनुष्य जीवन के अनमोल होने के बावजूद, लोग इसे यूं ही गवा रहे हैं।
    लेखक के अनुसार यह एक ऐसी समस्या है, जिस पर केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, जिला प्रशासन और न्यायपालिका को विशेष ध्यान देना चाहिए। इसके लिए मनोचिकित्सकों को आगे आने और सामाजिक संस्थाओं को जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया है कि स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित शिक्षा को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए, ताकि लोग जीवन की चुनौतियों का सामना करना सीखें।

    लेखक का मानना है, यह हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम लोगों को जीवन के प्रति प्रेरित करें और उन्हें यह बताएं कि कोई भी समस्या इतनी बड़ी नहीं होती कि उसके लिए जीवन समाप्त कर दिया जाए।

    भूपेंद्र निरंकारी

    दरअसल, भारत में आत्महत्या के आँकड़े चिंताजनक हैं और समय के साथ इनमें बढ़ोतरी देखी गई है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की एक्सीडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड्स इन इंडिया (ADSI) रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में आत्महत्या के 1,70,924 मामले दर्ज किए गए थे, जो कि 2021 में दर्ज 1,64,033 मामलों से अधिक हैं। 📈

    मुख्य आंकड़े और रुझान

    ~ कुल आत्महत्याएं: 2022 में भारत में 1,70,924 आत्महत्याएं हुईं, जो पिछले साल (2021) की तुलना में 4.2% की वृद्धि दर्शाती हैं।
    ~ आत्महत्या की दर: प्रति एक लाख आबादी पर आत्महत्या की दर 2021 में 12.0 से बढ़कर 2022 में 12.4 हो गई, जो अब तक की सबसे अधिक दर्ज की गई दर है।
    ~ लिंग-आधारित दर: आत्महत्या की घटनाओं में पुरुषों की संख्या महिलाओं से काफी अधिक है। 2023 में, प्रति 100,000 पर पुरुषों में आत्महत्या की दर 22.8 थी, जबकि महिलाओं में यह 5.9 थी।
    ~ सबसे अधिक मामले: महाराष्ट्र, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में आत्महत्या के सबसे अधिक मामले दर्ज किए गए हैं।
    ~ ग्रामीण बनाम शहरी क्षेत्र: शहरों में आत्महत्या की दर ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक है। 2022 में, भारत के 53 प्रमुख शहरों में आत्महत्या की कुल घटनाओं का 10% से अधिक हिस्सा था।

    आत्महत्या के प्रमुख कारण

    एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, आत्महत्या के कुछ प्रमुख कारण इस प्रकार हैं:
    ~ पारिवारिक समस्याएँ: 2022 में आत्महत्या के सबसे बड़े कारण के रूप में पारिवारिक समस्याएँ (54,127 मामले) सामने आईं।
    ~ बीमारी: 31,484 मामलों के साथ गंभीर बीमारियाँ दूसरा सबसे बड़ा कारण रहीं।
    ~ विवाह संबंधी मुद्दे: 15,793 मामलों में शादी से जुड़ी समस्याएं आत्महत्या का कारण बनीं।
    ~ नशे की लत: 11,634 मामले शराब या नशीले पदार्थों के दुरुपयोग से संबंधित थे।

    संवेदनशील समूह

    कुछ खास समूहों में आत्महत्या की प्रवृत्ति अधिक देखी गई है:
    ~ गृहिणियां: 2022 में कुल आत्महत्याओं में 15% गृहिणियां थीं।
    ~ छात्र: 2022 में 13,044 छात्रों ने आत्महत्या की, जो कुल आत्महत्याओं का 7.6% हिस्सा है। हालांकि, 2021 की तुलना में इसमें मामूली गिरावट आई है, लेकिन यह संख्या अभी भी चिंताजनक है।
    ~ किसान और दिहाड़ी मजदूर: किसानों और दिहाड़ी मजदूरों के बीच भी आत्महत्या की दर में वृद्धि देखी गई है।

    इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि भारत में आत्महत्या एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है, जिसके पीछे कई सामाजिक, आर्थिक और मनोवैज्ञानिक कारक काम कर रहे हैं। इन आंकड़ों के आधार पर, आत्महत्या रोकथाम के लिए प्रभावी नीतियां और कार्यक्रम बनाना महत्वपूर्ण है।

  • यूपी शिक्षा विभाग में बड़ा घोटाला: वसूली के आदेश जारी

    7 शिक्षकों पर नियम विरुद्ध वेतन लेने के आरोप

    7 साल से चल रहा फर्जीवाड़ा अब पकड़ में आया

    गुरुजी व मैडम हड़प गए सरकार के ₹70 लाख

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जीवाड़ा थमने का नाम नहीं ले रहा है। फर्जी नियुक्ति और पदोन्नति के बाद अब अनियमित वेतन भुगतान का मामला सामने आया है। जिला रामपुर के सात शिक्षकों को नियम विरुद्ध वेतन लेने के आरोप में 70 लाख रुपए से अधिक की वसूली का आदेश दिया गया है।

    वेतन वृद्धि का फर्जीवाड़ा

    दरअसल, यह मामला 9 जून 2014 को शासन द्वारा जारी एक आदेश से जुड़ा है। इस आदेश के अनुसार, जिन शिक्षकों की पदोन्नति 1 जनवरी 2006 से 1 दिसंबर 2008 के बीच हुई थी, उन्हें पदोन्नति की तारीख से 17,140 रुपए का वेतनमान मिलना था। हालांकि, जनपद के तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी श्याम किशोर तिवारी ने इस तारीख के बाद पदोन्नति पाने वाले शिक्षकों के विकल्प रद्द कर दिए थे।
    इसके बावजूद, मई 2018 में कुछ शिक्षकों ने कथित तौर पर लेखा कार्यालय से मिलीभगत कर अपने वेतन में यह लाभ अंकित करा लिया।

    ऑडिट में हुआ खुलासा

    जब इस मामले की शिकायत शासन से की गई, तो जुलाई 2021 में एक ऑडिट टीम भेजी गई। ऑडिट रिपोर्ट में पाया गया कि सात शिक्षकों को नियमों के विरुद्ध अधिक भुगतान किया गया था। इस रिपोर्ट को वित्त नियंत्रक बेसिक द्वारा महानिदेशक को भेजा गया।
    जुलाई 2025 में हुई समीक्षा बैठक में अपर मुख्य सचिव ने इस मामले पर गंभीरता से चर्चा की। उन्होंने रामपुर के बेसिक शिक्षा अधिकारी और वित्त एवं लेखा अधिकारी को विशेष हिदायत दी और उन्हें 8 अगस्त को फिर से तलब किया। बैठक में शिक्षकों को हुए अधिक भुगतान और उनके सही मूल वेतन की जानकारी दी गई। इसके बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को आगे की कार्रवाई के लिए अधिकृत किया गया।

    रिकवरी और विभागीय कार्रवाई

    रामपुर की बीएसए कल्पना देवी ने बताया कि संबंधित शिक्षकों का वेतन संशोधित कर दिया गया है। उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया गया है और साथ ही उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। मामले की जांच अभी भी जारी है।

    वसूली की राशि:

    • एक शिक्षक: 10 लाख 22 हजार 349 रुपए
    • पांच शिक्षिकाएं: प्रत्येक से 10 लाख 2 हजार 993 रुपए
    • एक अन्य शिक्षिका: 9 लाख 71 हजार 895 रुपए
      कुल मिलाकर, इन सात शिक्षकों से लगभग 70 लाख रुपए की रिकवरी की जाएगी।

    यह मामला सरकारी धन के दुरुपयोग और शिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करता है।

  • ट्रस्ट के चेयरमैन अजय राज अग्रवाल बने मुख्य अतिथि

    मां वैष्णो देवी डिग्री कॉलेज में भव्यता से हुआ फ्रेशर्स पार्टी का आयोजन

    लखनऊ। लखनऊ के हबीबपुर में स्थित मां वैष्णो देवी डिग्री कॉलेज में हाल ही में छात्र-छात्राओं ने एक शानदार फ्रेशर्स पार्टी का आयोजन किया।

    इस उत्सव में मां वैष्णो देवी एजुकेशनल ट्रस्ट के चेयरमैन अजय राज अग्रवाल और महाविद्यालय के प्रबंधक अभय राज अग्रवाल ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। समारोह में क्षेत्र के कई प्रतिष्ठित लोग भी उपस्थित थे।

    कॉलेज का माहौल पूरी तरह से उत्सवपूर्ण था। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की वंदना के साथ हुआ। इसके बाद, वरिष्ठ छात्रों ने नए आए छात्र-छात्राओं का गर्मजोशी से स्वागत किया।

    इस दौरान, कई तरह के रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए, जिन्होंने सभी का मन मोह लिया।
    महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. पूनम शुक्ला ने कॉलेज की प्रगति और उपलब्धियों को दर्शाते हुए एक ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का समापन महाविद्यालय अध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार शुक्ल के प्रेरक शब्दों और शुभकामनाओं के साथ हुआ, जिन्होंने सभी छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

  • उत्तर प्रदेश वैश्विक पर्यटन में लिख रहा नया अध्याय- मंत्री जयवीर सिंह

    जापान टूरिज्म एक्सपो 2025 में बौद्ध सर्किट व आध्यात्मिक विरासत करेगा प्रदर्शित UP

    राज्य को वैश्विक पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने का प्रयास

    यूपी टूरिज्म पवेलियन में बौद्ध सर्किट, धार्मिक स्थल, त्योहार व परंपराएं होंगे मुख्य आकर्षण

    जापान टूरिज्म एक्सपो 2025 में यूपी टूरिज्म की भागीदारी

    लखनऊ, (24 सितंबर 2025)। उत्तर प्रदेश पर्यटन प्रतिष्ठित जापान टूरिज्म एक्सपो 2025 में प्रदेश की समृद्ध बौद्ध विरासत, प्रमुख तीर्थ स्थल, ऐतिहासिक स्मारक, विविधतापूर्ण संस्कृति, व्यंजन और हस्तशिल्प प्रदर्शित करने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह कार्यक्रम 25 से 28 सितंबर तक जापान के टोकोनामे शहर स्थित आइची स्काई एक्सपो में आयोजित हो रहा है। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि यूपी पर्यटन का पवेलियन एक्सपो में आगंतुकों को राज्य की विविध सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरों से अवगत कराएगा। साथ ही, पर्यटन व्यापार को नया आयाम देगा। 

    मंत्री जयवीर सिंह ने बताया, ‘यूपी पर्यटन के पवेलियन ने आगंतुकों को भगवान बुद्ध से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों और बौद्ध सर्किट की विशेषताओं से अवगत कराया जाएगा। जापान में बौद्ध धर्मावलंबी बहुतायत हैं। ऐसे आयोजनों से प्रदेश की आध्यात्मिक पर्यटन को विशिष्ट पहचान मिलेगी। साथ ही, उत्तर प्रदेश को विश्व स्तर पर एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।’

    चार दिवसीय कार्यक्रम की रूपरेखा

    जापान के टोकोनामे शहर में आयोजित होने वाले टूरिज्म एक्सपो 2025 में जेएटीए ट्रैवल (JATA 2025) मार्ट भी शामिल है। यह चार दिवसीय कार्यक्रम होगा, जिसमें एक दिन अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, दो दिन का बी2बी ट्रैवल मार्ट और शेष एक दिन सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए आयोजित किया जाएगा।

    ‘बोधि यात्रा की शुरुआत उत्तर प्रदेश से करें’

    उत्तर प्रदेश पर्यटन का पवेलियन इस एक्सपो का प्रमुख आकर्षण होगा। राज्य के पर्यटन विभाग की ओर से चलाए जा रहे अभियान ‘बोधि यात्रा की शुरुआत उत्तर प्रदेश से करें’ (एम्बार्क ऑन योर बोधि यात्रा इन उत्तर प्रदेश) के तहत आगंतुकों को भगवान बुद्ध के जीवन और शिक्षा का अनुभव मिलेगा। साथ ही, यह पवेलियन राज्य के समग्र पर्यटन परिदृश्य और विविध आकर्षणों को भी उजागर करेगा।

    जापान टूरिज्म एक्सपो 2025 के मुख्य

    आकर्षण जापान टूरिज्म एक्सपो 2025 में चार दिवसीय आयोजनों में पहले दिन 25 सितंबर को उद्घाटन सत्र होगा। तत्पश्चात, सम्मेलन की शुरुआत के साथ पवेलियन का लोकार्पण किया जाएगा। भारत-जापान पर्यटन सहयोग पर नेतृत्व सत्र और डेस्टिनेशन ब्रीफिंग्स होगी। दूसरे दिन (26 सितंबर) को बी2बी मीटिंग्स जापानी टूर ऑपरेटर्स के साथ साझेदारी पर केंद्रित होगा। इसके अलावा बौद्ध सर्किट व स्पिरिचुअल ट्रायंगल (प्रयागराज-अयोध्या-काशी) पर पैकेज प्रदर्शित किए जाएंगे।

    आयोजन के तीसरे दिन (27 सितंबर) दूसरा बी2बी कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर उद्योग से जुड़े व्यावसायिक प्रतिनिधि एयरलाइंस, हॉस्पिटैलिटी और वैश्विक ट्रैवल प्लेटफॉर्म के साथ नेटवर्किंग कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहुंच का विस्तार करेंगे। एक्सपो के चौथे दिन (28 सितंबर) को आगंतुकों के लिए विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, डेस्टिनेशन फिल्में, इंटरैक्टिव सेशन और इमर्सिव पर्यटन अनुभव प्रस्तुत किए जाएंगे।

    ‘उत्तर प्रदेश-जापान के बीच गहरा संबंध’

    पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा, ‘उत्तर प्रदेश में न केवल पर्यटन स्थलों की समृद्ध श्रृंखला है, बल्कि पर्यटकों को प्राचीन संस्कृति और अध्यात्म का अनुभव भी प्रदान करता है। बौद्ध धर्म के माध्यम से उत्तर प्रदेश-जापान के बीच गहरा संबंध है। जापान टूरिज्म एक्सपो 2025 हमें संबंधों को और मजबूत करने, पर्यटकों को आकर्षित करने और दोनों देशों के बीच लाभकारी अवसर प्रदान करता है।’

    इस आयोजन में उत्तर प्रदेश से प्रतिनिधिमंडल, जिसमें वरिष्ठ अधिकारी और पर्यटन उद्योग के साझेदार आदि शामिल हो रहे हैं। ये जापानी ट्रेवल प्रोफेशनल्स के साथ संवाद, सहयोग को मजबूत करते हुए पर्यटन को बढ़ावा देने की रूपरेखा तैयार करेंगे। उल्लेखनीय है, कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और लखनऊ के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के माध्यम से बेहतर कनेक्टिविटी के कारण उत्तर प्रदेश अब दुनिया भर के यात्रियों को अपनी अद्वितीय सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का अनुभव करने के लिए आमंत्रित कर रहा है।

  • चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी मेरठ के 37वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने किया सम्मानित

    बिजनौर के डॉ. रक्षित सिंह ने स्वर्ण पदक जीत किया जनपद का नाम रौशन

    ~ भूपेंद्र निरंकारी बिजनौर

    मेरठ, उत्तर प्रदेश। जनपद बिजनौर के निवासी और वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. शूरवीर सिंह के सुपुत्र डॉ. रक्षित सिंह को चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी (सीसीएसयू) मेरठ के 37वें दीक्षांत समारोह में एमडी (एसपीएम) परीक्षा 2025 में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने के लिए स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।

    सोमवार को विश्वविद्यालय के नेताजी सुभाष चंद्र बोस प्रेक्षागृह में आयोजित भव्य कार्यक्रम में उन्हें यह सम्मान उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और विश्वविद्यालय की कुलाधिपति महामहिम राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के हाथों मिला।राज्यपाल ने अपने संबोधन में मेधावी छात्रों की कड़ी मेहनत की सराहना की और उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

    यह उपलब्धि हासिल कर डॉ. रक्षित सिंह ने न केवल अपने माता-पिता और चिकित्सा जगत का, बल्कि पूरे बिजनौर जनपद का नाम रौशन किया है। उनके इस सम्मान से उनके परिवार, परिचितों और पूरे चिकित्सा समुदाय में खुशी की लहर है। डॉ. रक्षित सिंह को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। चारों ओर से उन्हें और उनके पिता डॉ. शूरवीर सिंह को बधाइयां मिल रही हैं।

    यह कार्यक्रम सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक चला, जिसमें डॉ. रक्षित सिंह ने विशिष्ट योग्यता प्रमाण पत्र भी प्राप्त किया। उनका यह सम्मान चिकित्सा जगत के लिए भी एक प्रेरणा का स्रोत बना है।

  • फिटकरी एंटीसेप्टिक, एंटी-बैक्टीरियल और एस्ट्रिंजेंट गुणों से भरपूर एक प्राकृतिक खनिज है, जिसके कई स्वास्थ्य और सौंदर्य संबंधी फायदे हैं। इसके उपयोगों में छोटे घावों को रोकना, चेहरे के दाग-धब्बे हटाना, त्वचा को टाइट करना, बालों का झड़ना कम करना, गले की खराश से राहत पाना और पानी को शुद्ध करना शामिल है। हालांकि, इसके अधिक उपयोग से बचें और गंभीर समस्याओं के लिए डॉक्टर की सलाह लें।

    फ़िटकरी के फ़ायदे और उपयोग: त्वचा से लेकर दांतों तक, जानें 5 बड़े लाभ

    फ़िटकरी, जिसे पोटैशियम एल्युमिनियम सल्फेट भी कहा जाता है, एक सफ़ेद पत्थर है जो अक्सर हमारे घरों में पाया जाता है। यह सिर्फ़ पानी साफ़ करने या शेविंग के बाद इस्तेमाल होने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके कई औषधीय गुण भी हैं। इसमें एंटीसेप्टिक, एस्ट्रिंजेंट और ब्यूटी-केयर से जुड़े गुण होते हैं, जो इसे कई समस्याओं के लिए फ़ायदेमंद बनाते हैं।

    आइए जानते हैं फ़िटकरी के 5 प्रमुख उपयोग और उनके लाभ

    1. मुंहासों और दाग-धब्बों को दूर करने में सहायक

    फ़िटकरी मुंहासों से छुटकारा पाने और चेहरे के दाग-धब्बों को हल्का करने में बहुत प्रभावी है। इसमें मौजूद एस्ट्रिंजेंट गुण रोम छिद्रों को कसते हैं, जिससे मुंहासे होने की संभावना कम हो जाती है।
    * कैसे इस्तेमाल करें:
       * थोड़ी सी फ़िटकरी को पीसकर पाउडर बना लें।
       * गुलाब जल के साथ मिलाकर एक पेस्ट बनाएं।
       * इस पेस्ट को मुंहासों या दाग-धब्बों वाली जगह पर लगाएं और कुछ देर बाद धो लें।
       * इसके नियमित इस्तेमाल से त्वचा साफ़ और चमकदार बनती है।

    2. त्वचा में कसावट लाने और अनचाहे बालों को हटाने में मदद

    ढीली त्वचा को कसने और चेहरे के अनचाहे बालों को कम करने के लिए भी फ़िटकरी का इस्तेमाल किया जा सकता है।
    * कैसे इस्तेमाल करें:
       * नहाने के पानी में थोड़ी सी फ़िटकरी मिला दें। यह त्वचा की ढीलेपन को कम करके उसे कसने में मदद करता है।
       * अनचाहे बालों के लिए, पिसी हुई फ़िटकरी में गुलाब जल मिलाकर पेस्ट बनाएं।
       * इस पेस्ट को उस जगह पर लगाएं जहाँ बाल हैं। कुछ दिनों तक रोज़ाना इस्तेमाल करने से बालों की ग्रोथ कम होने लगती है।

    3. मुंह की दुर्गंध और दांतों के दर्द से राहत

    फ़िटकरी एक बेहतरीन प्राकृतिक माउथवॉश है। यह मुंह में बदबू पैदा करने वाले बैक्टीरिया को ख़त्म करने में मदद करती है और दांतों के दर्द में भी आराम देती है।
    * कैसे इस्तेमाल करें:
       * गुनगुने पानी में फ़िटकरी का एक छोटा टुकड़ा डालकर घोल लें।
       * इस पानी से दिन में दो बार कुल्ला करें। इससे दांतों पर जमा प्लाक हटता है और मुंह की दुर्गंध दूर होती है।
       * ध्यान रखें कि यह पानी गले से नीचे न जाए। इस पानी से गरारे करने पर गले की खराश में भी आराम मिलता है।

    4. घाव और चोटों के लिए एंटीसेप्टिक

    फ़िटकरी का सबसे आम उपयोग चोट लगने पर खून रोकने और घाव को साफ़ करने के लिए होता है। इसमें मौजूद एंटीसेप्टिक गुण घाव को संक्रमण से बचाते हैं।
    * कैसे इस्तेमाल करें:
       * जब कोई मामूली चोट लगे या त्वचा कट जाए, तो गुनगुने पानी में फ़िटकरी डालकर घोल लें।
       * रुई के फाहे से इस पानी को चोट वाली जगह पर लगाएं।
       * यह तुरंत खून बहना बंद कर देता है और घाव को रोगाणु-मुक्त करता है।

    5. दुर्गंध दूर करने में सहायक

    फ़िटकरी शरीर की दुर्गंध को दूर करने में भी बहुत फ़ायदेमंद है, ख़ासकर पसीने की बदबू को।
    * कैसे इस्तेमाल करें:
       * थोड़ी सी फ़िटकरी को पीसकर पाउडर बना लें।
       * इसे पानी में मिलाकर एक पेस्ट बनाएं और इसे अंडरआर्म्स या उन जगहों पर लगाएं जहाँ पसीना ज़्यादा आता है।
       * यह पसीने को नियंत्रित करता है और बदबू पैदा करने वाले बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकता है।

    उपयोग करते समय बरतें सावधानी

    फ़िटकरी का उपयोग करते समय सावधानी बरतें और इसका ज़्यादा इस्तेमाल न करें। यदि आपको किसी प्रकार की त्वचा संबंधी समस्या है, तो इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।

  • बकाया वसूली के लिए किसी को भी नहीं दी जा सकती गिरफ्तारी की धमकी

    दीवानी विवादों को आपराधिक बनाने की प्रवृत्ति पर सुप्रीम कोर्ट ने की निंदा

    वसूली एजेंट नहीं हैं अदालतें: सुप्रीम कोर्ट

    पीठ ने कहा, “अदालतें पक्षकारों से बकाया राशि वसूलने के लिए वसूली एजेंट नहीं हैं।” न्यायिक प्रणाली के इस दुरुपयोग की अनुमति नहीं दी जा सकती।

    नई दिल्ली (एजेंसी): सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में यह स्पष्ट किया है कि अदालतों का काम बकाया राशि की वसूली करना नहीं है, बल्कि यह एक दीवानी विवाद है। कोर्ट ने दीवानी मामलों को आपराधिक मामलों में बदलने की बढ़ती प्रवृत्ति की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि न्यायिक प्रणाली के इस दुरुपयोग की अनुमति नहीं दी जा सकती। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की एक पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि केवल बकाया वसूली के लिए किसी को भी गिरफ्तारी की धमकी नहीं दी जा सकती।

    धन वसूली के लिए आपराधिक मामलों का दुरुपयोग

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आजकल यह एक आम चलन बन गया है कि लोग धन वसूली के लिए आपराधिक मामले दर्ज करा देते हैं, जबकि वह विशुद्ध रूप से दीवानी मामला होता है। यह टिप्पणी उत्तर प्रदेश के एक आपराधिक मामले की सुनवाई के दौरान की गई, जिसमें एक व्यक्ति पर धन विवाद में अपहरण का आरोप लगाया गया था।

    उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने इस बढ़ती समस्या की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस अक्सर असमंजस में पड़ जाती है। अगर वह संज्ञेय अपराध के आरोप के बावजूद मामला दर्ज नहीं करती है, तो उसे अदालत की फटकार झेलनी पड़ती है। …और अगर वह मामला दर्ज कर लेती है, तो उस पर पक्षपात करने और कानून का पालन न करने का आरोप लगता है।

    पुलिस को विवेक का इस्तेमाल करने की सलाह

    जस्टिस सूर्यकांत ने पुलिस की दुविधा को समझते हुए कहा कि उन्हें किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने से पहले अपने विवेक का इस्तेमाल करना चाहिए और यह जांचना चाहिए कि मामला दीवानी है या आपराधिक। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि आपराधिक कानूनों का इस तरह का दुरुपयोग न्याय प्रणाली के लिए एक गंभीर खतरा पैदा कर रहा है।

    समस्या से निपटने के लिए सुझाव

    इस समस्या से निपटने के लिए, पीठ ने सुझाव दिया कि राज्य सरकार हर जिले में एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति कर सकती है, जो एक सेवानिवृत्त जिला जज हो सकते हैं। पुलिस किसी मामले की प्रकृति (दीवानी या आपराधिक) के बारे में उनसे परामर्श ले सकती है। कोर्ट ने इस संबंध में दो सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा है।

    चेक बाउंस मामलों के निपटान में लाएं तेजी

    एक अन्य महत्वपूर्ण आदेश में, सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को चेक बाउंस मामलों के निपटान में तेजी लाने के लिए उठाए गए कदमों पर एक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह आदेश जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान दिया।

    यह मामला नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 138 से संबंधित है, जो खाते में अपर्याप्त धनराशि के कारण चेक बाउंस होने से जुड़ा है। मई 2022 में, सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में इस तरह के मामलों की बड़ी संख्या को देखते हुए विशेष अदालतें स्थापित करने का निर्देश दिया था। न्यायालय ने सभी संबंधित पक्षों को इन मामलों के त्वरित समाधान के लिए उठाए गए कदमों के बारे में छह सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

  • श्री दुर्गा सप्तशती – चतुर्थ अध्याय !

    नवरात्रि के तीसरे दिन का महत्व: मां चंद्रघंटा की पूजा करने से जातक के शरीर को तेज प्राप्त होता है। आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि मां चंद्रघंटा की मुद्रा सदैव युद्ध के लिए अभिमुख रहने से भक्तों के कष्ट का निवारण शीघ्र कर देती हैं।

    श्री दुर्गा सप्तशती – मां चंद्रघंटा की पूजा, चतुर्थ अध्याय !

  • बुंदेलखंड के ऐतिहासिक महत्व को प्राप्त होगा विश्व पटल पर प्रमुख स्थान

    ललितपुर, बांदा, चित्रकूट, बरूआ सागर और झांसी में हैं स्थित

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री मोदी से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित तालबेहट किला (ललितपुर), कालिंजर किला (बांदा), मडफा (चित्रकूट), बरूआ सागर झांसी के घाट की सीढ़ियों के उन्नयन एवं विकास हेतु राज्य सरकार को हस्तांतरित करने का किया अनुरोध

    एएसआई द्वारा संरक्षित किलों व स्मारकों के उन्नयन से बुंदेलखंड पर्यटन को मिलेगी वैश्विक पहचान- जयवीर सिंह

    CM योगी का PM मोदी से प्रमुख ऐतिहासिक स्थल हस्तांतरित करने का अनुरोध

    लखनऊ, 23 सितंबर, 2025। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित चार प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों को राज्य सरकार को हस्तांतरित करने का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा है कि तालबेहट किला (जिला ललितपुर), कालिंजर किला (जनपद बांदा), मडफा (जिला चित्रकूट) और बरुआसागर (झांसी) के घाट की सीढ़ियां वर्तमान में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण में हैं। इन स्थलों का भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम-1958) के अंतर्गत राज्य सरकार को हस्तांतरण होने से इनका संरक्षण व विकास और प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा।

    यह जानकारी प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि ’16 सितंबर, 2025 को आदरणीय प्रधानमंत्री जी को लिखे पत्र में मुख्यमंत्री जी ने बुंदेलखंड की भौगोलिक तथा पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थलों का विवरण देते हुए कहा है कि बुंदेलखंड भारत का हृदय स्थल है। पहले इस क्षेत्र को दशार्ण दस नदियों का क्षेत्र, जेजाकभुक्ति और जुझौती कहा जाता था। यह क्षेत्र पाषाण काल से ही मानव की गतिविधियों का साक्षी रहा है। कालांतर में गुप्त एवं चंदेल राजाओं द्वारा यहां पर अनेक मंदिरों, किलों का निर्माण कराया गया है।’ पत्र में मुख्यमंत्री जी ने यह भी अवगत कराया है कि शौर्य पराक्रम की गाथाओं से परिपूर्ण बुंदेलखंड भूभाग का भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता के विकास में अमूल्य योगदान है, तथा शैक्षणिक, सांस्कृतिक, कलात्मक, प्राकृतिक, आध्यात्मिक एवं धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत समृद्धशाली क्षेत्र है, किन्तु कतिपय कारणों से वर्ष 2014 तक यह क्षेत्र उपेक्षित रहा। बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन के अवसर पर आप द्वारा प्रेरणा दी गई थी कि बुंदेलखंड में स्थित महलों, किलों तथा स्मारकों को संरक्षित कर इन्हें पर्यटन की दृष्टि से विश्व पटल पर स्थापित कर इनका विकास कराया जाए।

    पर्यटन मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री जी के निर्देशों के अनुपालन में राज्य सरकार के स्वामित्व में स्थित स्मारक स्थलों का संरक्षण, संवर्धन एवं विकास कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। फलस्वरूप बुंदेलखंड के स्थानीय निवासियों को जीवन यापन के लिए साधन उपलब्ध हो सकेंगे और ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण किया जा सकेगा। इस प्रकार बुंदेलखंड के ऐतिहासिक महत्व को विश्व पटल पर प्रमुख स्थान प्राप्त होगा। इसके लिए विशेषज्ञ संस्था पर्यावरण, नियोजन और प्रौद्योगिकी केन्द्र (सीईपीटी यूनिवर्सिटी) अहमदाबाद से सर्वेक्षण एवं अध्ययन कराया गया है। सेप्ट ने अपने अध्ययन रिपोर्ट में कुल 31 स्थलों को चयनित किया है।

    पर्यटन मंत्री ने बताया कि इन चयनित स्थानों की संभवनाओं एवं उनके संरक्षण तथा विकास की रूपरेखा व कार्ययोजना तैयार की गई है। अध्ययन में पाया गया है कि इन 31 स्थानों में से 05 किले/स्मारक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के संरक्षण में हैं। इनके संरक्षण एवं जनोपयोगी बनाने के लिए यह आवश्यक है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित तालबेहट किला (जिला ललितपुर), कालिंजर किला (जनपद बांदा), मडफा (जिला चित्रकूट), बरूआ सागर झांसी के घाट की सीढ़ियों को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम 1958 के अंतर्गत प्रदेश सरकार को हस्तांतरित किया जाए।

  • देवी दुर्गा कवच के पाठ से मिलता है आरोग्य का शुभ वरदान

    देवी दुर्गा कवच के पाठ से शरीर के समस्त अंगों की रक्षा होती है, यह पाठ महामारी से बचाव की शक्ति देता है,यह पाठ सम्पूर्ण आरोग्य का शुभ वरदान देता है…यह अत्यंत गोपनीय पाठ है इसे पूरी पवित्रता से किया जाना चाहिए…  

    ॥मार्कण्डेय उवाच॥
    ॐ नमश्चण्डिकायै।
    ॐ यद्गुह्यं परमं लोके सर्वरक्षाकरं नृणाम्।
    यन्न कस्य चिदाख्यातं तन्मे ब्रूहि पितामह॥1॥ ॥ब्रह्मोवाच॥
    अस्ति गुह्यतमं विप्रा सर्वभूतोपकारकम्।
    दिव्यास्तु कवचं पुण्यं तच्छृणुष्वा महामुने॥2॥ प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।
    तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्॥3॥
    पचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च
    सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्॥4॥
    नवमं सिद्धिदात्री च नव दुर्गाः प्रकीर्तिताः।
    उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना॥5॥
    अग्निना दह्यमानस्तु शत्रुमध्ये गतो रणे।
    विषमे दुर्गमे चैव भयार्ताः शरणं गताः॥6॥
    न तेषां जायते किंचिदशुभं रणसंकटे।
    नापदं तस्य पश्यामि शोकदुःखभयं न ही॥7॥
    यैस्तु भक्त्या स्मृता नूनं तेषां वृद्धिः प्रजायते।
    ये त्वां स्मरन्ति देवेशि रक्षसे तान्न संशयः॥8॥
    प्रेतसंस्था तु चामुण्डा वाराही महिषासना।
    ऐन्द्री गजसमारूढा वैष्णवी गरुडासना॥9॥
    माहेश्वरी वृषारूढा कौमारी शिखिवाहना।
    लक्ष्मी: पद्मासना देवी पद्महस्ता हरिप्रिया॥10॥
    इत्येता मातरः सर्वाः सर्वयोगसमन्विताः।
    नानाभरणशोभाढया नानारत्नोपशोभिता:॥ 12॥
    श्वेतरूपधारा देवी ईश्वरी वृषवाहना।
    ब्राह्मी हंससमारूढा सर्वाभरणभूषिता॥ 11॥
    दृश्यन्ते रथमारूढा देव्याः क्रोधसमाकुला:। शंखम चक्रं गदां शक्तिं हलं च मुसलायुधम्॥13॥
    खेटकं तोमरं चैव परशुं पाशमेव च। कुन्तायुधं त्रिशूलं च शार्ङ्गमायुधमुत्तमम्॥ 14॥
    दैत्यानां देहनाशाय भक्तानामभयाय च। धारयन्त्यायुद्धानीथं देवानां च हिताय वै॥ 15॥
    नमस्तेऽस्तु महारौद्रे महाघोरपराक्रमे।
    महाबले महोत्साहे महाभयविनाशिनि॥16॥
    त्राहि मां देवि दुष्प्रेक्ष्ये शत्रूणां भयवर्धिनि। प्राच्यां रक्षतु मामैन्द्रि आग्नेय्यामग्निदेवता॥ 17॥
    दक्षिणेऽवतु वाराही नैऋत्यां खड्गधारिणी। प्रतीच्यां वारुणी रक्षेद् वायव्यां मृगवाहिनी॥ 18॥
    उदीच्यां पातु कौमारी ऐशान्यां शूलधारिणी।
    ऊर्ध्वं ब्रह्माणी में रक्षेदधस्ताद् वैष्णवी तथा॥ 19॥
    एवं दश दिशो रक्षेच्चामुण्डा शववाहाना।
    जाया मे चाग्रतः पातु: विजया पातु पृष्ठतः॥ 20॥
    अजिता वामपार्श्वे तु दक्षिणे चापराजिता।
    शिखामुद्योतिनि रक्षेदुमा मूर्ध्नि व्यवस्थिता॥21॥
    मालाधारी ललाटे च भ्रुवो रक्षेद् यशस्विनी।
    त्रिनेत्रा च भ्रुवोर्मध्ये यमघण्टा च नासिके॥ 22॥
    शङ्खिनी चक्षुषोर्मध्ये श्रोत्रयोर्द्वारवासिनी।
    कपोलौ कालिका रक्षेत्कर्णमूले तु शङ्करी ॥ 23॥ नासिकायां सुगन्‍धा च उत्तरोष्ठे च चर्चिका।
    अधरे चामृतकला जिह्वायां च सरस्वती॥ 24॥
    दन्तान् रक्षतु कौमारी कण्ठदेशे तु चण्डिका।
    घण्टिकां चित्रघण्टा च महामाया च तालुके॥ 25॥  कामाक्षी चिबुकं रक्षेद्‍ वाचं मे सर्वमंगला।
    ग्रीवायां भद्रकाली च पृष्ठवंशे धनुर्धारी॥ 26॥
    नीलग्रीवा बहिःकण्ठे नलिकां नलकूबरी।
    स्कन्धयोः खड्गिनी रक्षेद्‍ बाहू मे वज्रधारिणी॥27॥
    हस्तयोर्दण्डिनी रक्षेदम्बिका चान्गुलीषु च।
    नखाञ्छूलेश्वरी रक्षेत्कुक्षौ रक्षेत्कुलेश्वरी॥28॥
    स्तनौ रक्षेन्‍महादेवी मनः शोकविनाशिनी।
    हृदये ललिता देवी उदरे शूलधारिणी॥ 29॥ नाभौ च कामिनी रक्षेद्‍ गुह्यं गुह्येश्वरी तथा। पूतना कामिका मेढ्रं गुहे महिषवाहिनी॥30॥
    कट्यां भगवतीं रक्षेज्जानूनी विन्ध्यवासिनी। जङ्घे महाबला रक्षेत्सर्वकामप्रदायिनी॥31॥
    गुल्फयोर्नारसिंही च पादपृष्ठे तु तैजसी।
    पादाङ्गुलीषु श्रीरक्षेत्पादाध:स्तलवासिनी॥32॥
    नखान् दंष्ट्रा कराली च केशांशचैवोर्ध्वकेशिनी।
    रोमकूपेषु कौबेरी त्वचं वागीश्वरी तथा॥33॥
    रक्तमज्जावसामांसान्यस्थिमेदांसि पार्वती। अन्त्राणि कालरात्रिश्च पित्तं च मुकुटेश्वरी॥ 34 ॥
    पद्मावती पद्मकोशे कफे चूडामणिस्तथा। ज्वालामुखी नखज्वालामभेद्या सर्वसन्धिषु॥35 ॥
    शुक्रं ब्रह्माणी मे रक्षेच्छायां छत्रेश्वरी तथा।
    अहङ्कारं मनो बुद्धिं रक्षेन्मे धर्मधारिणी॥36॥
    प्राणापानौ तथा व्यानमुदानं च समानकम्।
    वज्रहस्ता च मे रक्षेत्प्राणं कल्याणशोभना॥37॥
    रसे रूपे च गन्धे च शब्दे स्पर्शे च योगिनी।
    सत्वं रजस्तमश्चैव रक्षेन्नारायणी सदा॥38॥
    आयू रक्षतु वाराही धर्मं रक्षतु वैष्णवी।
    यशः कीर्तिं च लक्ष्मीं च धनं विद्यां च चक्रिणी॥39॥
    गोत्रमिन्द्राणि मे रक्षेत्पशून्मे रक्ष चण्डिके।
    पुत्रान्‌ रक्षेन्महालक्ष्मीर्भार्यां रक्षतु भैरवी॥40॥
    पन्थानं सुपथा रक्षेन्मार्गं क्षेमकरी तथा।
    राजद्वारे महालक्ष्मीर्विजया सर्वतः स्थिता॥ 41॥ रक्षाहीनं तु यत्स्थानं वर्जितं कवचेन तु।
    तत्सर्वं रक्ष मे देवी जयन्ती पापनाशिनी॥ 42॥
    रक्षाहीनं तु यत्स्थानं वर्जितं कवचेन तु। तत्सर्वं रक्ष मे देवी जयन्ती पापनाशिनी॥43॥
    पदमेकं न गच्छेतु यदिच्छेच्छुभमात्मनः। कवचेनावृतो नित्यं यात्र यत्रैव गच्छति॥44॥
    तत्र तत्रार्थलाभश्च विजयः सर्वकामिकः। यं यं चिन्तयते कामं तं तं प्राप्नोति निश्चितम्।
    परमैश्वर्यमतुलं प्राप्स्यते भूतले पुमान्॥
    निर्भयो जायते मर्त्यः सङ्ग्रमेष्वपराजितः।
    त्रैलोक्ये तु भवेत्पूज्यः कवचेनावृतः पुमान्॥45॥
    इदं तु देव्याः कवचं देवानामपि दुर्लभम्। य: पठेत्प्रयतो नित्यं त्रिसन्ध्यं श्रद्धयान्वितः॥46॥
    दैवी कला भवेत्तस्य त्रैलोक्येष्वपराजितः। जीवेद् वर्षशतं साग्रामपमृत्युविवर्जितः॥47॥
    नश्यन्ति टयाधय: सर्वे लूताविस्फोटकादयः। स्थावरं जङ्गमं चैव कृत्रिमं चापि यद्विषम्॥ 48॥
    अभिचाराणि सर्वाणि मन्त्रयन्त्राणि भूतले। भूचराः खेचराशचैव जलजाश्चोपदेशिकाः॥49॥
    सहजा कुलजा माला डाकिनी शाकिनी तथा। अन्तरिक्षचरा घोरा डाकिन्यश्च महाबला॥ 50॥
    ग्रहभूतपिशाचाश्च यक्षगन्धर्वराक्षसा:। ब्रह्मराक्षसवेतालाः कूष्माण्डा भैरवादयः॥ 51॥
    नश्यन्ति दर्शनात्तस्य कवचे हृदि संस्थिते। मानोन्नतिर्भावेद्राज्यं तेजोवृद्धिकरं परम्॥ 52॥
    नश्यन्ति दर्शनात्तस्य कवचे हृदि संस्थिते। मानोन्नतिर्भावेद्राज्यं तेजोवृद्धिकरं परम्॥ 53॥
    यशसा वद्धते सोऽपी कीर्तिमण्डितभूतले। जपेत्सप्तशतीं चणण्डीं कृत्वा तु कवचं पूरा॥ 54॥
    यावद्भूमण्डलं धत्ते सशैलवनकाननम्। तावत्तिष्ठति मेदिनयां सन्ततिः पुत्रपौत्रिकी॥
    देहान्ते परमं स्थानं यात्सुरैरपि दुर्लभम्।
    प्राप्नोति पुरुषो नित्यं महामायाप्रसादतः॥55॥
    लभते परमं रूपं शिवेन सह मोदते ॥ॐ॥ ॥ 56॥ 

    मार्कण्डेय जी ने कहा हे पितामह! जो इस संसार में परम गोपनीय तथा मनुष्यों की सब प्रकार से रक्षा करने वाला है और जो अब तक आपने दूसरे किसी के सामने प्रकट नहीं किया हो, ऐसा कोई साधन मुझे बताइए। ब्रह्मन्! ऐसा साधन तो एक देवी का कवच ही है, जो गोपनीय से भी परम गोपनीय, पवित्र तथा सम्पूर्ण प्राणियों का उपकार करनेवाला है। महामुने! उसे श्रवण करो।
    प्रथम नाम शैलपुत्री है, दूसरी मूर्ति का नाम ब्रह्मचारिणी है। तीसरा स्वरूप चन्द्रघण्टा के नामसे प्रसिद्ध है। चौथी मूर्ति को कूष्माण्डा कहते हैं। पाँचवीं दुर्गा का नाम स्कन्दमाता है। देवी के छठे रूप को कात्यायनी कहते हैं। सातवाँ कालरात्रि और आठवाँ स्वरूप महागौरी के नाम से प्रसिद्ध है।

    नवीं दुर्गा का नाम सिद्धिदात्री है। ये सब नाम सर्वज्ञ महात्मा वेदभगवान् के द्वारा ही प्रतिपादित हुए हैं।

    युद्ध समय संकट में पड़ने पर भी उनके ऊपर कोई विपत्ति नहीं दिखाई देती। उनको शोक, दु:ख और भय की प्राप्ति नहीं होती।
    जो मनुष्य अग्नि में जल रहा हो, रणभूमि में शत्रुओं से घिर गया हो, विषम संकट में फँस गया हो तथा इस प्रकार भय से आतुर होकर जो भगवती दुर्गा की शरण में प्राप्त हुए हों, उनका कभी कोई अमंगल नहीं होता।
    जिन्होंने भक्तिपूर्वक देवी का स्मरण किया है, उनका निश्चय ही अभ्युदय होता है। देवेश्वरि! जो तुम्हारा चिन्तन करते हैं, उनकी तुम नि:सन्देह रक्षा करती हो।
    चामुण्डादेवी प्रेत पर आरूढ़ होती हैं। वाराही भैंसे पर सवारी करती हैं। ऐन्द्री का वाहन ऐरावत हाथी है। वैष्णवी देवी गरुड़ पर ही आसन जमाती हैं।
    माहेश्वरी वृषभ पर आरूढ़ होती हैं। कौमारी का मयूर है। भगवान् विष्णु की प्रियतमा लक्ष्मीदेवी कमल के आसन पर विराजमान हैं और हाथों में कमल धारण किये हुए हैं। वृषभ पर आरूढ़ ईश्वरी देवी ने श्वेत रूप धारण कर रखा है। ब्राह्मी देवी हंस पर बैठी हुई हैं और सब प्रकार के आभूषणों से विभूषित हैं। इस प्रकार ये सभी माताएँ सब प्रकार की योग शक्तियों से सम्पन्न हैं। इनके सिवा और भी बहुत-सी देवियाँ हैं, जो अनेक प्रकार के आभूषणों की शोभा से युक्त तथा नाना प्रकार के रत्नों से सुशोभित हैं।
    ये सम्पूर्ण देवियाँ क्रोध में भरी हुई हैं और भक्तों की रक्षा के लिए रथ पर बैठी दिखाई देती हैं। ये शंख, चक्र, गदा, शक्ति, हल और मूसल, खेटक और तोमर, परशु तथा पाश, कुन्त और त्रिशूल एवं उत्तम शार्ङ्गधनुष आदि अस्त्र-शस्त्र अपने हाथ में धारण करती हैं। दैत्यों के शरीर का नाश करना, भक्तों को अभयदान देना और देवताओं का कल्याण करना यही उनके शस्त्र-धारण का उद्देश्य है।

    महान् रौद्ररूप, अत्यन्त घोर पराक्रम, महान् बल और महान् उत्साह वाली देवी तुम महान् भय का नाश करने वाली हो, तुम्हें नमस्कार है।
    तुम्हारी ओर देखना भी कठिन है। शत्रुओं का भय बढ़ाने वाली जगदम्बिके मेरी रक्षा करो। पूर्व दिशा में ऐन्द्री इन्द्रशक्ति मेरी रक्षा करे। अग्निकोण में अग्निशक्ति, दक्षिण दिशा में वाराही तथा नैर्ऋत्यकोण में खड्गधारिणी मेरी रक्षा करे। पश्चिम दिशा में वारुणी और वायव्यकोण में मृग पर सवारी करने वाली देवी मेरी रक्षा करे।
    उत्तर दिशा में कौमारी और ईशानकोण में शूलधारिणी देवी रक्षा करे। ब्रह्माणि! तुम ऊपर की ओर से मेरी रक्षा करो और वैष्णवी देवी नीचे की ओर से मेरी रक्षा करे।
    इसी प्रकार शव को अपना वाहन बनानेवाली चामुण्डा देवी दसों दिशाओं में मेरी रक्षा करे। जया आगे से और विजया पीछे की ओर से मेरी रक्षा करे।
    वामभाग में अजिता और दक्षिण भाग में अपराजिता रक्षा करे। उद्योतिनी शिखा की रक्षा करे। उमा मेरे मस्तक पर विराजमान होकर रक्षा करे।
    ललाट में मालाधरी रक्षा करे और यशस्विनी देवी मेरी भौंहों का संरक्षण करे। भौंहों के मध्य भाग में त्रिनेत्रा और नथुनों की यमघण्टा देवी रक्षा करे। नासिका में सुगन्धा और ऊपर के ओंठ में चर्चिका देवी रक्षा करे। नीचे के ओंठ में अमृतकला तथा जिह्वा में सरस्वती रक्षा करे। कौमारी दाँतों की और चण्डिका कण्ठप्रदेश की रक्षा करे। चित्रघण्टा गले की घाँटी और महामाया तालु में रहकर रक्षा करे।
    कामाक्षी ठोढी की और सर्वमंगला मेरी वाणी की रक्षा करे। भद्रकाली ग्रीवा में और धनुर्धरी पृष्ठवंश (मेरुदण्ड) में रहकर रक्षा करे। कण्ठ के बाहरी भाग में नीलग्रीवा और कण्ठ की नली में नलकूबरी रक्षा करे। दोनों कंधों में खड्गिनी और मेरी दोनों भुजाओं की वज्रधारिणी रक्षा करे। दोनों हाथों में दण्डिनी और उँगलियों में अम्बिका रक्षा करे। शूलेश्वरी नखों की रक्षा करे। कुलेश्वरी कुक्षि (पेट) में रहकर रक्षा करे।
    महादेवी दोनों स्तनों की और शोकविनाशिनी देवी मन की रक्षा करे। ललिता देवी हृदय में और शूलधारिणी उदर में रहकर रक्षा करे। नाभि में कामिनी और गुह्यभाग की गुह्येश्वरी रक्षा करे। पूतना और कामिका लिङ्ग की और महिषवाहिनी गुदा की रक्षा करे। भगवती कटि भाग में और विन्ध्यवासिनी घुटनों की रक्षा करे। सम्पूर्ण कामनाओं को देने वाली महाबला देवी दोनों पिण्डलियों की रक्षा करे। नारसिंही दोनों घुट्ठियों की और तैजसी देवी दोनों चरणों के पृष्ठभाग की रक्षा करे। श्रीदेवी पैरों की उँगलियों में और तलवासिनी पैरों के तलुओं में रहकर रक्षा करे। अपनी दाढों के कारण भयंकर दिखायी देनेवाली दंष्ट्राकराली देवी नखों की और ऊर्ध्वकेशिनी देवी केशों की रक्षा करे। रोमावलियों के छिद्रों में कौबेरी और त्वचा की वागीश्वरी देवी रक्षा करे। पार्वती देवी रक्त, मज्जा, वसा, माँस, हड्डी और मेद की रक्षा करे। आँतों की कालरात्रि और पित्त की मुकुटेश्वरी रक्षा करे। मूलाधार आदि कमल-कोशों में पद्मावती देवी और कफ में चूड़ामणि देवी स्थित होकर रक्षा करे। नख के तेज की ज्वालामुखी रक्षा करे। जिसका किसी भी अस्त्र से भेदन नहीं हो सकता, वह अभेद्या देवी शरीर की समस्त संधियों में रहकर रक्षा करे।
    ब्रह्माणी! आप मेरे वीर्य की रक्षा करें। छत्रेश्वरी छाया की तथा धर्मधारिणी देवी मेरे अहंकार, मन और बुद्धि की रक्षा करे।
    हाथ में वज्र धारण करने वाली वज्रहस्ता देवी मेरे प्राण, अपान, व्यान, उदान और समान वायु की रक्षा करे। कल्याण से शोभित होने वाली भगवती कल्याण शोभना मेरे प्राण की रक्षा करे। रस, रूप, गन्ध, शब्द और स्पर्श इन विषयों का अनुभव करते समय योगिनी देवी रक्षा करे तथा सत्त्वगुण, रजोगुण और तमोगुण की रक्षा सदा नारायणी देवी करे।
    वाराही आयु की रक्षा करे। वैष्णवी धर्म की रक्षा करे तथा चक्रिणी (चक्र धारण करने वाली) देवी यश, कीर्ति, लक्ष्मी, धन तथा विद्या की रक्षा करे। इन्द्राणि! आप मेरे गोत्र की रक्षा करें। चण्डिके! तुम मेरे पशुओं की रक्षा करो। महालक्ष्मी पुत्रों की रक्षा करे और भैरवी पत्नी की रक्षा करे। मेरे पथ की सुपथा तथा मार्ग की क्षेमकरी रक्षा करे। राजा के दरबार में महालक्ष्मी रक्षा करे तथा सब ओर व्याप्त रहने वाली विजया देवी सम्पूर्ण भयों से मेरी रक्षा करे। देवी! जो स्थान कवच में नहीं कहा गया है, रक्षा से रहित है, वह सब तुम्हारे द्वारा सुरक्षित हो; क्योंकि तुम विजयशालिनी और पापनाशिनी हो। यदि अपने शरीर का भला चाहे तो मनुष्य बिना कवच के कहीं एक पग भी न जाए। कवच का पाठ करके ही यात्रा करे। कवच के द्वारा सब ओर से सुरक्षित मनुष्य जहाँ-जहाँ भी जाता है, वहाँ-वहाँ उसे धन-लाभ होता है तथा सम्पूर्ण कामनाओं की सिद्धि करने वाली विजय की प्राप्ति होती है। वह जिस-जिस अभीष्ट वस्तु का चिन्तन करता है, उस-उसको निश्चय ही प्राप्त कर लेता है। वह पुरुष इस पृथ्वी पर तुलना रहित महान् ऐश्वर्य का भागी होता है। कवच से सुरक्षित मनुष्य निर्भय हो जाता है। युद्ध में उसकी पराजय नहीं होती तथा वह तीनों लोकों में पूजनीय होता है।
    देवी का यह कवच देवताओं के लिए भी दुर्लभ है। जो प्रतिदिन नियमपूर्वक तीनों संध्याओं के समय श्रद्धा के साथ इसका पाठ करता है, उसे दैवी कला प्राप्त होती है तथा वह तीनों लोकों में कहीं भी पराजित नहीं होता। इतना ही नहीं, वह अपमृत्यु रहित हो, सौ से भी अधिक वर्षों तक जीवित रहता है। मकरी, चेचक और कोढ़ आदि उसकी सम्पूर्ण व्याधियाँ नष्ट हो जाती हैं। कनेर, भाँग, अफीम, धतूरे आदि का स्थावर विष, साँप और बिच्छू आदि के काटने से चढ़ा हुआ जङ्गम विष तथा अहिफेन और तेल के संयोग आदि से बनने वाला कृत्रिम विष-ये सभी प्रकार के विष दूर हो जाते हैं, उनका कोई असर नहीं होता। इस पृथ्वी पर मारण-मोहन आदि जितने आभिचारिक प्रयोग होते हैं तथा इस प्रकार के मन्त्र-यन्त्र होते हैं, वे सब इस कवच को हृदय में धारण कर लेने पर उस मनुष्य को देखते ही नष्ट हो जाते हैं। ये ही नहीं, पृथ्वी पर विचरने वाले ग्राम देवता, आकाशचारी देव विशेष, जल के सम्बन्ध से प्रकट होने वाले गण, उपदेश मात्र से सिद्ध होने वाले निम्नकोटि के देवता, अपने जन्म से साथ प्रकट होने वाले देवता, कुल देवता, माला (कण्ठमाला आदि), डाकिनी, शाकिनी, अन्तरिक्ष में विचरण करनेवाली अत्यन्त बलवती भयानक डाकिनियाँ, ग्रह, भूत, पिशाच, यक्ष, गन्धर्व, राक्षस, ब्रह्मराक्षस, बेताल, कूष्माण्ड और भैरव आदि अनिष्टकारक देवता भी हृदय में कवच धारण किए रहने पर उस मनुष्य को देखते ही भाग जाते हैं।  कवचधारी पुरुष को राजा से सम्मान वृद्धि प्राप्ति होती है। यह कवच मनुष्य के तेज की वृद्धि करने वाला और उत्तम है।
    कवच का पाठ करने वाला पुरुष अपनी कीर्ति से विभूषित भूतल पर अपने सुयश से साथ-साथ वृद्धि को प्राप्त होता है। जो पहले कवच का पाठ करके उसके बाद सप्तशती चण्डी का पाठ करता है, उसकी जब तक वन, पर्वत और काननों सहित यह पृथ्वी टिकी रहती है, तब तक यहाँ पुत्र-पौत्र आदि संतान परम्परा बनी रहती है। देह का अन्त होने पर वह पुरुष भगवती महामाया के प्रसाद से नित्य परमपद को प्राप्त होता है, जो देवताओं के लिए भी दुर्लभ है। वह सुन्दर दिव्य रूप धारण करता और कल्याण शिव के साथ आनन्द का भागी होता है।
    ।। इति देव्या: कवचं सम्पूर्णम् ।

  • सीएम योगी के निर्देश पर यूपी में पुलिस ने निकाली बाइक रैली

    लखनऊ में बाइक रैली निकालकर जागरूकता का संदेश

    मिशन शक्ति 5: नारी सुरक्षा का नया आगाज

    लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर, उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए ‘मिशन शक्ति 5’ का शानदार आगाज हुआ है। इस अभियान के तहत, पूरे प्रदेश में यूपी पुलिस ने बाइक रैलियां निकालकर नारी शक्ति का संदेश दिया।

    पूरे प्रदेश में पुलिस की बाइक रैलियां, सशक्त नारी का संदेश

    शारदीय नवरात्रि की शुरुआत के साथ ही, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरे प्रदेश में ‘मिशन शक्ति 5’ का शुभारंभ किया। उनके निर्देश पर, लगभग 18,000 महिला पुलिसकर्मियों ने प्रदेश के सभी जिलों में बाइक रैलियां निकालीं। इन रैलियों के दौरान “सुरक्षा और सम्मान, नारी का अधिकार” जैसे नारे गूंज उठे।
    इस दौरान, डीजीपी राजीव कृष्ण ने बताया कि सीएम के निर्देश पर महिला पुलिसकर्मी सड़कों पर उतरीं, और जगह-जगह जनता ने तालियों और पुष्पवर्षा के साथ उनका स्वागत किया। इस अभियान में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया, जिससे जनता का विश्वास और मजबूत हुआ।

    लोकभवन में मिशन शक्ति केंद्रों का शुभारंभ

    मुख्यमंत्री ने लोक भवन में प्रदेश के सभी 1,663 थानों में ‘मिशन शक्ति केंद्रों’ की शुरुआत की। इसके साथ ही, ‘सशक्त नारी, समृद्ध प्रदेश’ फोल्डर और महिला सुरक्षा से जुड़ी हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी भी जारी की गई। सीएम ने नवरात्रि और आगामी त्योहारों के दौरान महिलाओं की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम करने के निर्देश भी दिए।
    सीएम योगी ने अपने संबोधन में कहा कि नारी सुरक्षा और सम्मान उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस बाइक रैली के जरिए पुलिस ने यह स्पष्ट कर दिया कि अब नारी सुरक्षा केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

    सोशल मीडिया पर #MissionShakti5 का जलवा

    डीजीपी ने बताया कि पुलिस विभाग ने सभी बाइक रैली की फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कीं। #MissionShakti5 हैशटैग 21 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ट्रेंड करने लगा और कुछ ही समय में टॉप 5 में शामिल हो गया। शाम 4 बजे से 6:30 बजे तक यह हैशटैग लगातार टॉप 5 ट्रेंडिंग सूची में बना रहा।
    इस हैशटैग पर अब तक 23 हजार से अधिक ट्वीट्स किए जा चुके हैं, जिससे लगभग 28 मिलियन की रीच और 384 मिलियन इंप्रेशन प्राप्त हुए। इससे यह साबित होता है कि यह अभियान जनता के बीच भी काफी लोकप्रिय हो रहा है।उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किए गए ‘मिशन शक्ति’ अभियान का पांचवां चरण शुरू हो गया है। इसी कड़ी में, लखनऊ के आलमबाग में पुलिसकर्मियों ने एक बाइक रैली निकालकर नारी सुरक्षा के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।

    आलमबाग में पुलिसकर्मियों ने निकाली संयुक्त बाइक रैली

    उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किए गए ‘मिशन शक्ति’ अभियान का पांचवां चरण शुरू हो गया है। इसी कड़ी में, लखनऊ के आलमबाग में पुलिसकर्मियों ने एक बाइक रैली निकालकर नारी सुरक्षा के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।

    सोमवार को एसीपी विकास पांडेय के नेतृत्व में कृष्णानगर और सरोजनीनगर थाने की महिला पुलिसकर्मियों ने संयुक्त रूप से एक बाइक रैली का आयोजन किया। यह रैली बाराविरवा चौराहे से शुरू हुई और फिनिक्स मॉल, पिकैडली होटल, कानपुर चुंगी और पराग रोड से होते हुए लोक बंधु हॉस्पिटल रोड तक गई। यह रैली अंत में ज्वाला देवी मंदिर पर समाप्त हुई, जहां नारी सुरक्षा के प्रति पुलिस की प्रतिबद्धता को दर्शाया गया।

    नवरात्रि में नारी सुरक्षा का संकल्प

    नवरात्रि के पहले दिन आयोजित इस रैली का मुख्य उद्देश्य यह संदेश देना था कि “महिलाओं की सुरक्षा एवं सम्मान हमारी जिम्मेदारी है।” इस बाइक रैली के जरिए, महिला पुलिसकर्मियों ने लोगों को ‘मिशन शक्ति’ के तहत किए जा रहे प्रयासों के बारे में जागरूक किया। इसमें थानों में स्थापित महिला डेस्क, हेल्पलाइन नंबर, महिला बीट पुलिसिंग और विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम शामिल हैं, जो लगातार चलाए जा रहे हैं।

    ‘मिशन शक्ति’ के पांचवें चरण का शुभारंभ

    इस रैली के साथ ही कृष्णानगर और सरोजनीनगर थाने में ‘मिशन शक्ति केंद्र’ का भी शुभारंभ हुआ। यह अभियान अब अपने पांचवें चरण में प्रवेश कर चुका है और इसका लक्ष्य समाज में महिलाओं के लिए एक सुरक्षित और सशक्त माहौल बनाना है। पुलिस विभाग इस अभियान के जरिए लगातार यह सुनिश्चित कर रहा है कि महिलाएं बिना किसी डर के अपने जीवन को जी सकें और हर क्षेत्र में आगे बढ़ सकें।

  • देवी दुर्गा कवच का पाठ (हिंदी अनुवाद)

    ॐ नमश्चण्डिकायै।

    मार्कण्डेय जी ने कहा: “हे पितामह! जो इस संसार में परम गोपनीय और मनुष्यों की सब प्रकार से रक्षा करने वाला है, और जो अब तक आपने किसी के सामने प्रकट नहीं किया, ऐसा कोई साधन मुझे बताइए।”
    ब्रह्मा जी ने कहा: “हे विप्र! गोपनीय से भी परम गोपनीय, पवित्र और सम्पूर्ण प्राणियों का उपकार करने वाला एक साधन है, वह देवी का कवच है। हे महामुने! उसे श्रवण करो।”

    नवदुर्गा के नौ स्वरूप

    • प्रथम नाम शैलपुत्री है, द्वितीय ब्रह्मचारिणी।
    • तीसरा स्वरूप चन्द्रघण्टा है, चौथी मूर्ति को कूष्माण्डा कहते हैं।
    • पाँचवीं दुर्गा स्कन्दमाता हैं, छठी कात्यायनी हैं।
    • सातवीं कालरात्रि और आठवीं महागौरी के नाम से प्रसिद्ध हैं।
    • नौवीं दुर्गा का नाम सिद्धिदात्री है।
      ये सभी नाम सर्वज्ञ महात्मा वेद भगवान् द्वारा ही बताए गए हैं।
    • कवच की महिमा
    • जो मनुष्य अग्नि में जल रहा हो, रणभूमि में शत्रुओं से घिरा हो, या किसी भी संकट में फँस गया हो, वह भय से आतुर होकर यदि भगवती दुर्गा की शरण में जाता है, तो उसका कभी कोई अमंगल नहीं होता। युद्ध के संकट में भी उस पर कोई विपत्ति नहीं आती। उसे शोक, दुख और भय की प्राप्ति नहीं होती।
      जो भक्तिपूर्वक देवी का स्मरण करते हैं, उनका निश्चय ही अभ्युदय होता है। हे देवेश्वरी! जो तुम्हारा चिंतन करते हैं, तुम निःसंदेह उनकी रक्षा करती हो।
      देवियों के वाहन और स्वरूप
    • चामुण्डा देवी प्रेत पर आरूढ़ होती हैं।
    • वाराही भैंसे पर सवारी करती हैं।
    • ऐन्द्री का वाहन ऐरावत हाथी है।
    • वैष्णवी देवी गरुड़ पर आसन जमाती हैं।
    • माहेश्वरी वृषभ पर आरूढ़ होती हैं।
    • कौमारी का वाहन मयूर है।
    • लक्ष्मी देवी कमल के आसन पर विराजमान हैं और हाथों में कमल धारण किए हैं।
    • श्वेत रूप धारण की हुई ईश्वरी देवी वृषभ पर आरूढ़ हैं।
    • ब्राह्मी देवी हंस पर बैठी हैं और सभी आभूषणों से सुशोभित हैं।
      इनके अलावा भी बहुत-सी देवियाँ हैं, जो अनेक प्रकार के आभूषणों और रत्नों से सुशोभित हैं। ये सभी क्रोध में भरी हुई हैं और भक्तों की रक्षा के लिए रथ पर बैठी दिखाई देती हैं। वे शंख, चक्र, गदा, शक्ति, हल, मूसल, खेटक, तोमर, परशु, पाश, कुन्त, त्रिशूल और धनुष जैसे अस्त्र-शस्त्र धारण करती हैं। इन शस्त्रों को धारण करने का उद्देश्य दैत्यों का नाश, भक्तों को अभयदान और देवताओं का कल्याण करना है।
      अंगों की रक्षा
      हे महा रौद्र रूप वाली, घोर पराक्रम, बल और उत्साह से युक्त, महान् भय का नाश करने वाली देवी, तुम्हें नमस्कार है। तुम्हारी ओर देखना भी कठिन है। हे शत्रुओं का भय बढ़ाने वाली जगदम्बिका, मेरी रक्षा करो।
    • पूर्व दिशा में ऐन्द्री (इन्द्रशक्ति) मेरी रक्षा करे।
    • अग्निकोण में अग्निशक्ति।
    • दक्षिण दिशा में वाराही।
    • नैर्ऋत्यकोण में खड्गधारिणी।
    • पश्चिम दिशा में वारुणी।
    • वायव्यकोण में मृग पर सवारी करने वाली देवी।
    • उत्तर दिशा में कौमारी।
    • ईशानकोण में शूलधारिणी।
    • ऊपर की ओर से ब्रह्माणी।
    • नीचे की ओर से वैष्णवी।
    • दसों दिशाओं में शव को वाहन बनाने वाली चामुण्डा देवी।
    • आगे से जया और पीछे से विजया।
    • बाएँ भाग में अजिता और दाएँ भाग में अपराजिता।
    • शिखा की उद्योतिनी।
    • मस्तक पर उमा।
    • ललाट में मालाधरी।
    • भौंहों की यशस्विनी।
    • भौंहों के मध्य में त्रिनेत्रा।
    • नथुनों की यमघण्टा।
    • आँखों के मध्य में शंखिनी।
    • कानों की द्वारवासिनी।
    • गालों की कालिका।
    • कानों के मूल में शंकरी।
    • नासिका में सुगन्धा।
    • ऊपरी होंठ में चर्चिका।
    • निचले होंठ में अमृतकला।
    • जिह्वा में सरस्वती।
    • दाँतों की कौमारी।
    • कण्ठप्रदेश की चण्डिका।
    • गले की घाँटी की चित्रघण्टा।
    • तालु में महामाया।
    • ठोड़ी की कामाक्षी।
    • वाणी की सर्वमंगला।
    • ग्रीवा में भद्रकाली।
    • मेरुदण्ड में धनुर्धरी।
    • कण्ठ के बाहरी भाग में नीलग्रीवा।
    • कण्ठ की नली में नलकूबरी।
    • दोनों कंधों में खड्गिनी।
    • दोनों भुजाओं की वज्रधारिणी।
    • दोनों हाथों में दण्डिनी।
    • उँगलियों में अम्बिका।
    • नखों की शूलेश्वरी।
    • पेट में कुलेश्वरी।
    • दोनों स्तनों की महादेवी।
    • मन की शोकविनाशिनी।
    • हृदय में ललिता देवी।
    • उदर में शूलधारिणी।
    • नाभि में कामिनी।
    • गुह्यभाग की गुह्येश्वरी।
    • लिंग की पूतना और कामिका।
    • गुदा की महिषवाहिनी।
    • कमर की भगवती।
    • घुटनों की विन्ध्यवासिनी।
    • दोनों पिंडलियों की महाबला।
    • दोनों टखनों की नारसिंही।
    • दोनों चरणों के पृष्ठभाग की तैजसी।
    • पैरों की उँगलियों में श्रीदेवी।
    • पैरों के तलुओं में तलवासिनी।
    • नखों की दंष्ट्राकराली।
    • केशों की ऊर्ध्वकेशिनी।
    • रोमों के छिद्रों में कौबेरी।
    • त्वचा की वागीश्वरी।
    • रक्त, मज्जा, वसा, माँस, हड्डी और मेद की पार्वती देवी।
    • आँतों की कालरात्रि।
    • पित्त की मुकुटेश्वरी।
    • कमल-कोशों में पद्मावती देवी।
    • कफ में चूड़ामणि देवी।
    • नख के तेज की ज्वालामुखी।
    • शरीर की सभी संधियों की अभेद्या देवी।
    • वीर्य की ब्रह्माणी।
    • छाया की छत्रेश्वरी।
    • अहंकार, मन और बुद्धि की धर्मधारिणी देवी।
    • प्राण, अपान, व्यान, उदान और समान वायु की वज्रहस्ता देवी।
    • सभी विषयों (रस, रूप, गंध, शब्द, स्पर्श) का अनुभव करते समय योगिनी देवी।
    • सत्त्वगुण, रजोगुण और तमोगुण की नारायणी देवी।
    • आयु की वाराही।
    • धर्म की वैष्णवी।
    • यश, कीर्ति, लक्ष्मी, धन और विद्या की चक्रिणी।
    • गोत्र की इन्द्राणि।
    • पशुओं की चण्डिका।
    • पुत्रों की महालक्ष्मी।
    • पत्नी की भैरवी।
    • पथ की सुपथा।
    • मार्ग की क्षेमकरी।
    • राजदरबार में महालक्ष्मी।
    • सभी भयों से विजया देवी।
      हे देवी जयन्ती, जो स्थान कवच में नहीं कहा गया है और रक्षा से रहित है, उन सभी की रक्षा करो, क्योंकि तुम विजयशालिनी और पापों का नाश करने वाली हो।
    • कवच का फल
    • जो मनुष्य अपने शरीर का कल्याण चाहता है, उसे बिना कवच के एक कदम भी नहीं चलना चाहिए।
    • कवच का पाठ करके ही यात्रा करने वाले को हर जगह धन और विजय की प्राप्ति होती है।
    • वह जिस भी वस्तु का चिंतन करता है, उसे निश्चय ही प्राप्त कर लेता है।
    • कवचधारी व्यक्ति निर्भय और युद्ध में अपराजेय हो जाता है, और तीनों लोकों में पूजनीय होता है।
    • यह कवच देवताओं के लिए भी दुर्लभ है।
    • जो प्रतिदिन तीनों संध्याओं के समय श्रद्धापूर्वक इसका पाठ करता है, उसे दैवी कला प्राप्त होती है और वह तीनों लोकों में कहीं भी पराजित नहीं होता।
    • वह अपमृत्यु से रहित होकर सौ वर्ष से भी अधिक जीवित रहता है।
    • इस कवच को हृदय में धारण करने वाले व्यक्ति को देखते ही सभी प्रकार के रोग, विष, और ऊपरी बाधाएँ (भूत, प्रेत, राक्षस, डाकिनी) नष्ट हो जाते हैं।
    • कवचधारी पुरुष को राजा से सम्मान और यश की प्राप्ति होती है।
    • जो पहले कवच का पाठ करके फिर सप्तशती चण्डी का पाठ करता है, उसकी संतान परम्परा पृथ्वी पर तब तक बनी रहती है, जब तक वन, पर्वत और जंगल मौजूद हैं।
    • देह का अंत होने पर वह पुरुष भगवती महामाया के आशीर्वाद से परमपद को प्राप्त होता है, जो देवताओं के लिए भी दुर्लभ है।
    • वह दिव्य रूप धारण कर शिव के साथ आनंद का भागी होता है।
      ।। इति देव्याः कवचं सम्पूर्णम् ।।
  • भारतीय तैलिक साहू राठौर महासभा ने सीएम मोहन यादव को लिखा पत्र

    मुख्यमंत्री से दशहरा जुलूस में ब्रेथ एनालाइजर से जांच कराने की मांग

    भोपाल: भारतीय तैलिक साहू राठौर महासभा के राष्ट्रीय संयोजक सत्येंद्र तुलाराम साहू ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक पत्र लिखकर दशहरा चल समारोह के दौरान ब्रेथ एनालाइजर से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इससे जुलूस में शराब पीकर आने वाले लोगों पर लगाम लगेगी और हथियार प्रदर्शन जैसी घटनाओं को रोका जा सकेगा।

    श्री साहू ने अपने पत्र में नवरात्रि की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि ब्रेथ एनालाइजर से जांच करने पर शराबी लोग जुलूस में शामिल नहीं हो पाएंगे। इससे जानमाल की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और किसी भी अप्रिय घटना या दुर्घटना की संभावना कम हो जाएगी।

    सत्येंद्र तुलाराम साहू, राष्ट्रीय संयोजक, भारतीय तैलिक साहू राठौर महासभा

    उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि वे प्रदेश के सभी जिलों के प्रशासन को यह आदेश जारी करें कि आगामी दशहरा चल समारोह के दौरान जुलूस में शामिल होने वाले लोगों की ब्रेथ एनालाइजर से जांच की जाए। साहू का मानना है कि यह कदम धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए बेहद आवश्यक है।

  • कल्ली पश्चिम में होगा विश्व स्तरीय विकास

    लखनऊ बनेगा नया पर्यटन हब: पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने राजधानी लखनऊ को एक विश्व स्तरीय पर्यटन केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने घोषणा की है कि लखनऊ के कल्ली पश्चिम क्षेत्र को एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए निवेशकों को आमंत्रित किया गया है ताकि पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र की परियोजनाओं को गति मिल सके। यह विकास राज्य की ‘उत्तर प्रदेश पर्यटन नीति-2022’ और ‘उत्तर प्रदेश भूमि पट्टा नीति 2024’ के तहत किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य प्रदेश में पर्यटन अवसंरचना को मजबूत करना है।

    परियोजना का उद्देश्य और प्रमुख आकर्षण

    कल्ली पश्चिम को पर्यटकों के लिए एक विशेष अनुभव प्रदान करने के उद्देश्य से विकसित किया जाएगा। इस परियोजना के तहत कई नई सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा, जिनमें शामिल हैं:
    * आतिथ्य और आवास: पर्यटकों के लिए बजट होटल, रिसॉर्ट, और ऑल वेदर कैंप बनाए जाएंगे।
    * व्यापार और सम्मेलन केंद्र: एमआईसीई (मीटिंग्स, इंसेंटिव्स, कॉन्फ्रेंसेज, एक्जीबिशंस) गतिविधियों के लिए कन्वेंशन सेंटर बनाए जाएंगे।
    * स्वास्थ्य और कल्याण: अंतरराष्ट्रीय योग केंद्र, प्राकृतिक चिकित्सा और वेलनेस सेंटर भी स्थापित होंगे।
    * मनोरंजन और संस्कृति: थीम पार्क, सार्वजनिक संग्रहालय, और सांस्कृतिक केंद्रों का विकास किया जाएगा।
    * ईको टूरिज्म: ग्रामीण और सांस्कृतिक गांवों के साथ-साथ ईको-टूरिज्म रिसॉर्ट भी इस परियोजना का हिस्सा होंगे।

    बेहतर कनेक्टिविटी से मिलेगा लाभ

    कल्ली पश्चिम क्षेत्र रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान पर है। यह लखनऊ के गोमती नदी के उत्तर-पश्चिमी तट पर स्थित है और लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे, लखनऊ-कानपुर हाईवे, और पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे जैसे प्रमुख मार्गों से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा, चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और लखनऊ मेट्रो नेटवर्क की मौजूदगी इसे पर्यटकों के लिए और भी सुलभ बनाती है। यह बेहतर कनेक्टिविटी लखनऊ को एक महत्वपूर्ण पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित कर रही है, जहां नवाबी संस्कृति, ऐतिहासिक विरासत और आधुनिक सुविधाएं एक साथ मिलती हैं।

    पर्यटक आगमन में वृद्धि और भविष्य की संभावनाएं

    पर्यटन विभाग के आँकड़ों के अनुसार, लखनऊ में पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। वर्ष 2024 में कुल 82,74,154 पर्यटक लखनऊ आए थे, जबकि 2025 के पहले तीन महीनों (जनवरी-मार्च) में ही यह संख्या 34,65,203 तक पहुँच गई है। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि यह वृद्धि न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही है, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रही है। उनका मानना है कि यह निवेश उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आतिथ्य को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। यह परियोजना लखनऊ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने में सहायक होगी।

  • नवरात्र 2025: मधुमेह (डायबिटीज) रोगी भी रख सकते हैं व्रत, जानें 5 आसान और सुरक्षित टिप्स

    डायबिटीज रोगियों के लिए व्रत में ये 6 व्यंजन हैं सुरक्षित विकल्प

    डायबिटीज और नवरात्र व्रत, इन बातों का रखें ध्यान, ये खाएं

    खाई जा सकती है…मखाने की खीर, साबूदाना की खीर, लौकी का हलवा, नारियल की बर्फी, सिंघाड़े का हलवा, सेब की रबड़ी

    इस साल के नवरात्र पर्व की शुरुआत हो चुकी है और कई लोग 9 दिनों का उपवास रख रहे हैं।…लेकिन जो लोग मधुमेह (डायबिटीज) से पीड़ित हैं, उनके लिए व्रत रखना थोड़ी चुनौती भरा हो सकता है। ब्लड शुगर के अचानक बढ़ने या घटने का खतरा बना रहता है। हालाँकि, कुछ सरल डाइट टिप्स और सावधानियों को अपनाकर डायबिटीज के मरीज भी बिना किसी चिंता के व्रत का पालन कर सकते हैं।

    1. थोड़ा-थोड़ा करके खाएं, एक साथ ज्यादा नहीं
    व्रत के दौरान एक ही बार में भरपेट भोजन करने से बचें। इसके बजाय, दिन भर में थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खाएं। हर 2-3 घंटे में कुछ हेल्दी खाकर आप अपने ब्लड शुगर को नियंत्रित रख सकते हैं। आप एक छोटा फ्रूट सलाद, मुट्ठी भर मेवे या पनीर का एक टुकड़ा खा सकते हैं। यह तरीका आपके पेट को भरा रखेगा और ब्लड शुगर में अचानक वृद्धि को रोकेगा।

    2. हाइड्रेशन है सबसे जरूरी
    व्रत के दौरान शरीर में पानी की कमी न होने दें। पानी के अलावा, नारियल पानी, छाछ, या बिना चीनी वाला नींबू पानी भी पी सकते हैं। ये तरल पदार्थ शरीर को हाइड्रेटेड रखने के साथ-साथ ब्लड शुगर को भी स्थिर रखने में मदद करते हैं। मीठे फलों के रस या कोल्ड ड्रिंक्स से पूरी तरह बचें।

    3. कॉम्प्लेक्स कार्ब्स और प्रोटीन को प्राथमिकता दें
    साबूदाना खिचड़ी या आलू के चिप्स जैसे साधारण कार्ब्स के बजाय, ऐसे खाद्य पदार्थ चुनें जिनमें कॉम्प्लेक्स कार्ब्स और प्रोटीन हो। कुट्टू का आटा, समा के चावल, और राजगिरा बेहतर विकल्प हैं। इसके अलावा, पनीर, दही और मखाने जैसे प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों को अपनी डाइट में शामिल करें। ये धीरे-धीरे पचते हैं, जिससे ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ता है।

    4. मीठे और तले हुए भोजन से दूरी बनाएं
    अक्सर व्रत में लोग आलू के चिप्स, पूड़ी, और मिठाइयाँ ज्यादा खाते हैं, जो ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ा सकते हैं। इनकी जगह, आप एयर-फ्राइड या भुनी हुई चीजें खा सकते हैं। शकरकंद को उबालकर या भूनकर खाना एक अच्छा विकल्प है। चीनी की जगह गुड़ या स्टीविया का इस्तेमाल करें, लेकिन सीमित मात्रा में।

    5. दवाएं और डॉक्टर की सलाह सबसे महत्वपूर्ण
    यह सबसे जरूरी टिप है। व्रत शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें और उनकी बताई हुई दवाओं और इंसुलिन को समय पर लें। अगर आप व्रत रख रहे हैं, तो अपने डॉक्टर से पूछें कि दवा का समय और मात्रा क्या होनी चाहिए। दिन में 2-3 बार अपना ब्लड शुगर लेवल चेक करते रहें। अगर आपको कमजोरी, चक्कर या कोई और दिक्कत महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

    इन आसान और प्रभावी तरीकों को अपनाकर, डायबिटीज के मरीज भी नवरात्र का व्रत सुरक्षित रूप से रख सकते हैं और मां दुर्गा की भक्ति में लीन हो सकते हैं।

    डायबिटीज के मरीज भी ले सकते हैं व्रत का स्वाद, ये 6 व्यंजन हैं सुरक्षित विकल्प

    अगर आप भी डायबिटीज के मरीज हैं और व्रत के दौरान कुछ स्वादिष्ट और सेहतमंद खाना चाहते हैं, तो इन 6 व्यंजनों को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। ये व्यंजन न केवल आपके स्वाद को बनाए रखेंगे, बल्कि आपके ब्लड शुगर को भी बढ़ने नहीं देंगे।
    1. मखाने की खीर: मखाने में फाइबर और प्रोटीन की अच्छी मात्रा होती है और यह ग्लाइसेमिक इंडेक्स में कम होते हैं। मखाने की खीर बनाने के लिए आप गाय के दूध और थोड़ी मात्रा में गुड़ या स्टीविया का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह पेट को भरा रखता है और शुगर को नियंत्रित करने में मदद करता है।
    2. साबूदाने की खीर: साबूदाने में कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं, लेकिन इसे सही तरीके से बनाकर खाया जाए तो यह नुकसानदेह नहीं है। इसे बनाने के लिए फुल क्रीम दूध की जगह कम फैट वाले दूध का उपयोग करें और चीनी की जगह गुड़ या आर्टिफिशियल स्वीटनर का इस्तेमाल करें। यह आपको ऊर्जा प्रदान करेगा और ब्लड शुगर को एकदम से नहीं बढ़ाएगा।
    3. लौकी का हलवा: लौकी एक कम कैलोरी वाली सब्ज़ी है जिसमें पानी की मात्रा बहुत ज़्यादा होती है। लौकी का हलवा बनाने के लिए आप दूध और घी का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन चीनी की जगह कम मात्रा में गुड़ या शुगर फ्री स्वीटनर डालें। यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ आपके स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर है।
    4. नारियल की बर्फी: नारियल की बर्फी को भी व्रत में खाया जा सकता है। ध्यान रहे कि इसे बनाने में ज़्यादा चीनी का इस्तेमाल न किया जाए। आप ताज़ा नारियल, कुछ मेवे और बहुत कम मात्रा में गुड़ या खजूर की पेस्ट का उपयोग करके इसे बना सकते हैं। यह आपको ऊर्जा देगा और सेहतमंद भी रहेगा।
    5. सिंघाड़े का हलवा: सिंघाड़े के आटे से बना हलवा व्रत के लिए एक अच्छा विकल्प है, क्योंकि यह धीरे-धीरे पचता है। इसे बनाते समय घी का सीमित उपयोग करें और चीनी की जगह थोड़ी मात्रा में गुड़ या स्टीविया का इस्तेमाल करें। यह आपके पेट को भरा रखेगा और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद करेगा।
    6. सेब की रबड़ी: सेब में फाइबर की अच्छी मात्रा होती है, जो शुगर को नियंत्रित करने में मदद करता है। आप कम फैट वाले दूध का इस्तेमाल करके सेब की रबड़ी बना सकते हैं। इसमें चीनी डालने के बजाय, सेब की प्राकृतिक मिठास का उपयोग करें या थोड़ी मात्रा में खजूर का पेस्ट मिला सकते हैं।
    इन सभी व्यंजनों को बनाते समय इस बात का ध्यान रखें कि आप कम मात्रा में घी और चीनी का उपयोग करें। इन स्वादिष्ट व्यंजनों को अपनी डाइट में शामिल करके डायबिटीज के मरीज भी नवरात्र का भरपूर आनंद ले सकते हैं।

  • बिजनौर के बेगमपुर चायमल गौशाला में गायों की दुर्दशा

    प्रबंधक, ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी पर लापरवाही के आरोप

    गौशाला में भूख से तड़पकर मर रहीं गौमाता

    नगीना (उत्तर प्रदेश)। जिला बिजनौर के ब्लॉक कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत गांव बेगमपुर चायमल उर्फ धिमाहेड़ी में स्थित गौशाला में गायों की हालत दयनीय है। खबरों के अनुसार, गौशाला में कई गायें भूख और बीमारी से तड़प-तड़पकर अपनी जान गंवा रही हैं। आरोप है कि गौशाला के प्रबंधक, ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार हैं। जुलाई के अंतिम सप्ताह में चार गौवंश अपनी जान भी गंवा चुके हैं।

    प्रशासन की लापरवाही और प्रबंधन पर गंभीर आरोप

    गौशाला की देखभाल करने वाले केयरटेकर अमर सिंह और मजदूर माया देवी ने बताया कि वे नियमित रूप से गायों के बीमार होने या मरने की सूचना प्रबंधक, ग्राम प्रधान चरन सिंह और ग्राम पंचायत अधिकारी दिनेश प्रजापति को देते रहते हैं। हालाँकि, उनकी सूचना पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। केयरटेकर का कहना है कि ग्राम प्रधान, जो खुद को गौ-सेवक कहते हैं, गौशाला का निरीक्षण करने तक नहीं आते क्योंकि उनका घर कई किलोमीटर दूर है।

    प्रतीकात्मक चित्र

    सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग और लाखों का घोटाला

    जानकारी के मुताबिक, गौशाला में रहने वाली गायों को सिर्फ सूखा भूसा दिया जाता है, जो उनकी एक दिन की खुराक के लिए भी पर्याप्त नहीं है। इसके बावजूद, ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी पर हर महीने लाखों रुपये कमाने का आरोप है। यह भी बताया गया है कि गौशाला की लगभग 50 बीघा भूमि पर चारा उगाकर उसे बेचा जाता है और उससे मोटी रकम कमाई जाती है। गौशाला के रखरखाव और गायों के चारे के लिए सरकार द्वारा दिए जाने वाले धन का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा है, जिससे बेसहारा गौवंश को भुखमरी का सामना करना पड़ रहा है।

    हिंदू सुरक्षा सेवा संघ ने उठाया मुद्दा

    इस गंभीर मामले को हिंदू सुरक्षा सेवा संघ के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने उठाया है। संगठन के जिला उपाध्यक्ष गुरजीत सिंह, जिला महामंत्री टिंकू विश्वकर्मा, जिला मंत्री मनोज चौहान, राकेश, नगर अध्यक्ष भूपेंद्र, यशवीर, योगराज, हरविंदर, विजय, कावेद्र, दीपचंद, सोनू, देवेंद्र, और रोहित सहित कई सदस्यों ने इस घटना की निंदा करते हुए प्रशासन से तुरंत कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा कि गौशाला के जिम्मेदार अधिकारियों और प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि निरीह पशुओं की जान बचाई जा सके।

    इस घटना ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और यह मुद्दा अब सामाजिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।

  • “कैंप ड्यूटी” के नाम पर डॉक्टर और स्टाफ नदारद

    इलाज के लिए दर-दर भटक रहे मरीज

    बहुउद्देशीय शिविर के नाम पर मरीजों के साथ खिलवाड़

    अल्मोड़ा। पंडित हरगोविंद पंत जिला चिकित्सालय, अल्मोड़ा के परिसर में स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नवरात्रि के पहले ही दिन बंद पड़ा मिला। मरीज इलाज के लिए दर-दर भटकते रहे, जबकि चिकित्सालय के डॉक्टर और स्टाफ “कैंप ड्यूटी” के नाम पर रैमजे इंटर कॉलेज में भेज दिए गए।

    जिले का मुख्य चिकित्सालय होने के बावजूद आयुर्वेदिक अस्पताल का बंद रहना प्रशासनिक उदासीनता और लापरवाही को उजागर करता है। यह स्थिति दर्शाती है कि अधिकारियों का ध्यान आम जनता की स्वास्थ्य सुविधाओं पर नहीं है।

    सामाजिक कार्यकर्ता संजय पाण्डे ने इस गंभीर मुद्दे को उठाते हुए अस्पताल के बंद होने का वीडियो सार्वजनिक किया है। उन्होंने कहा कि बहुउद्देशीय शिविर के नाम पर इस तरह से जिला अस्पताल को ठप करना मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। संजय पाण्डे ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में ऐसे हालात दोबारा देखने को मिले तो वे इसे लेकर बड़े स्तर पर आंदोलन करने को बाध्य होंगे। उन्होंने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि—

    बहुउद्देशीय शिविरों की आड़ में जिला अस्पताल की सेवाएँ बाधित न की जाएँ।

    1 – आयुर्वेदिक चिकित्सालय को हमेशा खुला रखा जाए ताकि मरीजों को प्राथमिक चिकित्सा सुविधा मिलती रहे।

    2 – जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

    3 – जनता की सुविधा और जीवन से खिलवाड़ किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

  • शमशान और तंत्र-साधना में होता है उपयोग

    आकर्षित हो कर घर में आ सकती हैं बुरी शक्तियां!

    अलग-अलग मान्यताएं और धारणाएं

    घर में लोबान जलाना चाहिए या नहीं ?

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    घर में लोबान जलाने को लेकर अलग-अलग मान्यताएं और धारणाएं हैं। जहाँ एक तरफ इसे सकारात्मक ऊर्जा और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोगों का मानना है कि इसे घर में नहीं जलाना चाहिए क्योंकि यह नकारात्मक शक्तियों या बुरी आत्माओं को आकर्षित कर सकता है।

    आइए इस विषय के दोनों पहलुओं को समझते हैं:

    लोबान को घर में नहीं जलाने के पक्ष में तर्क

    कुछ ज्योतिषियों, तांत्रिकों और आध्यात्मिक गुरुओं का मानना है कि लोबान को घर में जलाने से बचें, क्योंकि:
    ~ नकारात्मक शक्तियों को आकर्षित करना: यह माना जाता है कि लोबान की विशेष सुगंध कुछ प्रकार की नकारात्मक ऊर्जाओं, भूत-प्रेतों और बुरी आत्माओं को अपनी ओर खींचती है। विशेष रूप से इसका उपयोग शमशान और तंत्र-साधना में होता है ताकि आत्माओं को बुलाया या शांत किया जा सके। इसलिए, सामान्य घरों में इसे जलाने से ऐसी शक्तियाँ आकर्षित हो सकती हैं, जो घर के सदस्यों के लिए हानिकारक हो सकती हैं।
    ~ सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बाधित होना: यह भी माना जाता है कि लोबान की गंध से देवी-देवता और सकारात्मक शक्तियाँ दूर जा सकती हैं, जिससे घर में सुख-समृद्धि के बजाय अशांति और क्लेश बढ़ सकता है।
    ~ स्वास्थ्य संबंधी जोखिम: लोबान के धुएँ में कुछ ऐसे तत्व हो सकते हैं जो लंबे समय तक साँस लेने पर फेफड़ों और श्वसन तंत्र को नुकसान पहुँचा सकते हैं, विशेषकर यदि यह शुद्ध न हो।

    लोबान को घर में जलाने के पक्ष में तर्क

    वहीं, अधिकांश हिंदू परंपराओं और मान्यताओं के अनुसार लोबान को घर में जलाना शुभ माना जाता है:
    ~ नकारात्मक ऊर्जा का नाश: लोबान का धुआँ घर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा, बुरी नज़र और वास्तु दोष को दूर करता है। यह घर के वातावरण को शुद्ध करता है और सकारात्मकता का संचार करता है।
    ~ देवी-देवताओं को प्रसन्न करना: लोबान की सुगंध देवी-देवताओं, विशेषकर माँ दुर्गा और शनि देव को अत्यंत प्रिय है। इसे जलाने से वे प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर कृपा बनाए रखते हैं।
    ~ मानसिक शांति: लोबान की सुगंध तनाव को कम करती है, मन को शांत करती है और ध्यान केंद्रित करने में मदद करती है।
    ~ औषधीय लाभ: आयुर्वेद के अनुसार, लोबान का धुआँ हवा में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया और कीटाणुओं को नष्ट करता है, जिससे घर का वातावरण स्वच्छ रहता है।

    निष्कर्ष और सावधानियां

    यह विरोधाभास मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर करता है कि लोबान का उपयोग किस उद्देश्य और किस तरीके से किया जा रहा है।
    ~ उद्देश्य: अगर लोबान का उपयोग पूजा-पाठ और आध्यात्मिक शुद्धता के लिए किया जा रहा है, तो यह शुभ माना जाता है। लेकिन अगर इसका उपयोग तांत्रिक या गुप्त साधनाओं के लिए किया जा रहा है, तो यह नकारात्मक परिणाम दे सकता है।
    ~ उपयोग की विधि: लोबान को जलाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। इसे हमेशा शुद्ध गुग्गुल के साथ मिला कर जलाना शुभ माना जाता है। इसे सही मात्रा में और सही समय (जैसे शाम को आरती के समय) पर जलाना चाहिए।

    कुल मिलाकर, सामान्य रूप से लोबान घर में जलाना शुभ माना जाता है, बशर्ते इसका उपयोग सही विधि और शुद्ध भावना के साथ किया जाए। यदि आप किसी भी प्रकार की नकारात्मकता को लेकर आशंकित हैं, तो गुग्गुल, चंदन या कपूर जैसे अन्य सुगंधित पदार्थों का उपयोग करना अधिक सुरक्षित माना जाता है।

  • यूपी के पंचायती राज विभाग में हैं कार्यरत

    स्वाति गुप्ता की कहानी और वायरल फेसबुक लाइव का पूरा सच

    PCS अधिकारी स्वाति गुप्ता की शर्तें मूर्खतापूर्ण या दबंगई ?

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश की PCS अधिकारी स्वाति गुप्ता हाल ही में अपने एक वायरल फेसबुक लाइव वीडियो के कारण चर्चा में हैं। इस वीडियो में उन्होंने अपने फॉलोअर्स से मिलने के लिए कुछ अनूठी शर्तें रखी हैं, जिसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी खूब चर्चा हो रही है। आइए जानते हैं कि कौन हैं स्वाति गुप्ता और क्या है इस पूरे मामले की कहानी?

    कौन हैं स्वाति गुप्ता?

    स्वाति गुप्ता 2017 बैच की एक PCS अधिकारी हैं, जो वर्तमान में यूपी के पंचायती राज विभाग में कार्यरत हैं। उन्होंने पहले ही प्रयास में यूपी पीसीएस परीक्षा पास कर ली थी। स्वाति सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और उनके लाखों फॉलोअर्स हैं। इंस्टाग्राम पर उनके 254K से ज्यादा फॉलोअर्स हैं और उनकी रील्स पर अक्सर लाखों में व्यूज आते हैं, जिसमें एक रील पर तो 23 मिलियन से ज्यादा व्यूज भी आए थे।

    मिलूंगी तब, जब बनोगे ‘टॉप फैन’

    हाल ही में स्वाति गुप्ता ने एक फेसबुक लाइव किया, जिसमें उन्होंने अपने फॉलोअर्स से मिलने के लिए दो खास शर्तें रखीं। उन्होंने कहा कि जो भी उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलना चाहता है, उसे पहले फेसबुक पर उनका ‘टॉप फैन’ बनना होगा और लगातार 30 दिनों तक उनकी पोस्ट को शेयर करना होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जो लोग इन शर्तों को पूरा करेंगे, उन्हें वह खुद मिलने के लिए आमंत्रित करेंगी। इसके अलावा, उन्होंने यह भी बताया कि उनसे मिलने आने वाले व्यक्ति की पोस्ट को वह अपने खुद के फेसबुक और इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा करेंगी।

    इस लाइव के पीछे की कहानी

    स्वाति गुप्ता द्वारा रखी गई इन शर्तों के बाद सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आईं और यह मामला तेजी से वायरल हो गया। कुछ लोगों ने उनकी शर्तों को अजीब बताया, तो कुछ ने इसे सोशल मीडिया पर अपनी पहुंच बढ़ाने का एक तरीका माना। यह पूरा मामला स्वाति गुप्ता की सोशल मीडिया पर सक्रियता और उनके फॉलोअर्स की संख्या से जुड़ा है, जहां उन्होंने अपने फैंस के साथ जुड़ने का एक नया और अनूठा तरीका निकाला।

    उनके वीडियो में रखी गई शर्तें!

    10वीं और 12वीं की मार्कशीट: स्वाति गुप्ता ने कहा है कि जो भी उनसे मिलने आएगा, उसे अपनी 10वीं और 12वीं की मार्कशीट दिखानी होगी।
    आधार कार्ड: मार्कशीट के साथ-साथ पहचान के लिए आधार कार्ड भी लाना जरूरी है।
    जन्म तिथि का सत्यापन: जन्म तिथि के सत्यापन के लिए जन्म प्रमाण पत्र या कोई अन्य सरकारी दस्तावेज़ भी दिखाना होगा।
    साफ-सुथरे कपड़े: उन्होंने कहा कि उनसे मिलने आने वाले लोगों को साफ और सभ्य कपड़े पहनकर आना चाहिए।
    मोबाइल फोन पर प्रतिबंध: स्वाति गुप्ता ने यह भी कहा कि उनके पास मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति नहीं होगी।

    स्वाति गुप्ता का करियर और शिक्षा

    स्वाति गुप्ता ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) मेरठ से की। 12वीं में साइंस स्ट्रीम से पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्होंने विद्या कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया। इसके बाद, उन्होंने इंदिरा गांधी दिल्ली टेक्निकल वीमेन यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर और इंफॉर्मेशन सिस्टम सिक्योरिटी में एमटेक की डिग्री हासिल की।

    कई परीक्षाओं में मिली सफलता

    स्वाति गुप्ता ने अपने करियर में कई बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की है। उन्होंने एक बार यूपीएससी की मेन्स परीक्षा पास की थी, हालांकि इंटरव्यू में उनका चयन नहीं हो पाया। इसके बाद उन्होंने दो बार यूपी पीसीएस परीक्षा पास की, पहली बार 2017 में और दूसरी बार 2018 में। इन परीक्षाओं के अलावा, उन्होंने PGT कंप्यूटर साइंस, IB असिस्टेंट सेंट्रल इंटेलिजेंस ऑफिसर, राजस्थान प्रशासनिक सेवा, मंडी इंस्पेक्टर और PCS फॉरेस्ट ऑफिसर जैसी परीक्षाएं भी पास की हैं।

    शर्तें मूर्खतापूर्ण हैं या दबंगई ?

    इस पर लोगों की राय अलग-अलग हो सकती है। पीसीएस अधिकारी स्वाति गुप्ता की शर्तों को लेकर कई तरह के विचार सामने आए हैं। कुछ लोग इसे मूर्खतापूर्ण मानते हैं, जबकि कुछ इसे दबंगई या एक तरह की रणनीति मान सकते हैं।
    आइए, इन दोनों पहलुओं पर विचार करते हैं:

    मूर्खतापूर्ण होने का तर्क

    1. सार्वजनिक पद का दुरुपयोग: एक सरकारी अधिकारी का काम जनता के लिए सुलभ होना होता है। ऐसी शर्तें लगाना, जहां लोग सिर्फ सोशल मीडिया पर फॉलो या शेयर करके ही मिल सकते हैं, उनके पद की गरिमा के खिलाफ माना जा सकता है। यह एक अधिकारी के रूप में उनकी जिम्मेदारियों से मेल नहीं खाता।
    2. फैन फॉलोइंग बढ़ाना: यह शर्त एक अधिकारी के बजाय एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की तरह लग रही है। कुछ लोग इसे अपनी लोकप्रियता और ‘फैन फॉलोइंग’ बढ़ाने का एक तरीका मान सकते हैं, जो कि एक सिविल सेवक के लिए उपयुक्त नहीं है।

    दबंगई या रणनीति होने का तर्क

    1. अधिकार का प्रदर्शन: कुछ लोग इसे एक तरह की दबंगई मान सकते हैं, जहां एक अधिकारी अपनी पद और सोशल मीडिया की ताकत का इस्तेमाल करके लोगों पर अपनी शर्तें थोप रहा है। यह एक संकेत हो सकता है कि वह अपनी स्थिति का लाभ उठा रही हैं।
    2. अनोखी रणनीति: इसे एक अनोखी रणनीति के रूप में भी देखा जा सकता है, जिसके जरिए उन्होंने अपनी बात को वायरल किया और रातों-रात चर्चा में आ गईं। यह उनके फॉलोअर्स और जनता के साथ जुड़ने का एक गैर-पारंपरिक तरीका हो सकता है, भले ही यह विवादित हो।

    कुल मिलाकर निष्कर्ष

    यह कहना मुश्किल है कि उनकी शर्तें पूरी तरह से मूर्खतापूर्ण हैं या दबंगई! यह दोनों का मिलाजुला रूप हो सकता है। यह एक ऐसा कदम है जिसने उन्हें सुर्खियों में तो ला दिया है, लेकिन साथ ही उनके पद और जिम्मेदारियों पर भी सवाल उठाए हैं? एक लोक सेवक से जनता के प्रति अधिक विनम्र और सुलभ होने की उम्मीद की जाती है, और उनकी ये शर्तें इस उम्मीद के विपरीत हैं!

  • पाठ से पहले क्यों किया जाता है दुर्गा सप्तशती को शाप मुक्त ?

    नवरात्र: मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की व्यवस्था

    नवरात्र: नौ दिनों के शुभ पर्व🛕देशभर में तैयारियां जोरों पर

    लखनऊ, [दिनांक, 21 सितम्बर, 2025] देशभर में देवी दुर्गा के नौ रूपों की आराधना का महापर्व, नवरात्र, कल यानी 22 सितंबर, 2025 से शुरू हो रहा है। यह पर्व पूरे नौ दिनों तक चलेगा और 30 सितंबर को विजयादशमी के साथ इसका समापन होगा। इस दौरान भक्त उपवास रखेंगे और मां दुर्गा की पूजा-अर्चना कर उनसे सुख-शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मांगेंगे।

    नवरात्र का महत्व और पूजा विधि

    नवरात्र का त्योहार साल में दो बार मनाया जाता है- चैत्र नवरात्र और शारदीय नवरात्र। शारदीय नवरात्र, जो कि अश्विन मास की प्रतिपदा से शुरू होता है, का विशेष धार्मिक महत्व है। माना जाता है कि इन नौ दिनों में मां दुर्गा पृथ्वी पर आती हैं और अपने भक्तों को दर्शन देती हैं।
    ~ कलश स्थापना: नवरात्र का पहला दिन घटस्थापना या कलश स्थापना से शुरू होता है। कलश को सुख, समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है। इसे सही मुहूर्त में स्थापित करना शुभ माना जाता है। कलश स्थापना के साथ ही नौ दिनों की पूजा-अर्चना का संकल्प लिया जाता है।
    ~ नौ रूपों की पूजा: इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों – शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। प्रत्येक दिन एक विशेष रंग और रूप से देवी की आराधना होती है।

    नवरात्र 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त
    | तिथि | दिन | पूजा का रूप |
    | 22 सितंबर | प्रतिपदा | माँ शैलपुत्री |
    | 23 सितंबर | द्वितीया | माँ ब्रह्मचारिणी |
    | 24 सितंबर | तृतीया | माँ चंद्रघंटा |
    | 25 सितंबर | चतुर्थी | माँ कूष्मांडा |
    | 26 सितंबर | पंचमी | माँ स्कंदमाता |
    | 27 सितंबर | षष्ठी | माँ कात्यायनी |
    | 28 सितंबर | सप्तमी | माँ कालरात्रि |
    | 29 सितंबर | अष्टमी | माँ महागौरी |
    | 30 सितंबर | नवमी | माँ सिद्धिदात्री |

    घटस्थापना शुभ मुहूर्त: सुबह 6:11 बजे से 7:51 बजे तक रहेगा। इस दौरान कलश स्थापित करना अत्यंत शुभ माना गया है। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह बुराई पर अच्छाई की जीत का भी संदेश देता है।

    खान-पान और रहन-सहन: नवरात्र में विशेष नियम

    नवरात्र केवल पूजा-पाठ का ही नहीं, बल्कि सात्विक जीवनशैली अपनाने का भी पर्व है। इन नौ दिनों में भक्त अपने शरीर और मन को शुद्ध करने के लिए विशेष खान-पान और रहन-सहन के नियमों का पालन करते हैं।

    ~ अनाज का त्याग: सामान्यतः, नवरात्र में गेहूं, चावल, दाल और अन्य अनाज का सेवन नहीं किया जाता।
    ~ फलाहार: उपवास करने वाले लोग मुख्य रूप से फल, दूध, दही, और जूस का सेवन करते हैं।

    नवरात्र में खाए जाने वाले खाद्य पदार्थ:
    ~ आटा: कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, और राजगिरा का आटा।
    ~ सब्जियां: आलू, शकरकंद, अरबी, कद्दू, लौकी और कच्चा केला।
    ~ साबूदाना: साबूदाना खिचड़ी या वड़ा।
    ~ नमक: सेंधा नमक (व्रत वाला नमक)।
    ~ मसाले: काली मिर्च, हरी इलायची, जीरा, दालचीनी और लौंग का इस्तेमाल किया जाता है।

    क्या न खाएं: प्याज, लहसुन, मांसाहार, शराब, अंडे और अन्य तामसिक भोजन का सख्ती से त्याग किया जाता है।
    नवरात्र में रहन-सहन
    खान-पान के साथ ही, रहन-सहन में भी कुछ नियमों का पालन किया जाता है:

    ~ ब्रह्मचर्य: इन नौ दिनों में ब्रह्मचर्य का पालन करना शुभ माना जाता है।
    ~ सरल जीवन: भक्त सादगीपूर्ण जीवन जीते हैं।
    ~ सफाई और शुद्धता: घर और आसपास की जगहों को साफ-सुथरा रखा जाता है। पूजा स्थल की विशेष साफ-सफाई की जाती है।
    ~ रंग और वस्त्र: कई लोग इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ रूपों को समर्पित रंगों के अनुसार वस्त्र धारण करते हैं।
    ये सभी नियम न केवल धार्मिक आस्था का हिस्सा हैं, बल्कि इनका वैज्ञानिक महत्व भी है। ये शरीर और मन को शांत रखने में मदद करते हैं और एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।

    दुर्गा सप्तशती पाठ का नियम

    नवरात्रि के पहले दिन से दुर्गा सप्तशती पाठ की शुरुआत करनी चाहिए।
    पाठ करते समय लाल रंग का वस्त्र धारण करें।
    पाठ के दौरान बातचीत न करें।
    पाठ करते समय सफाई का विशेष ध्यान दें।
    दुर्गा सप्तशती के 13 अध्याय को एक ही दिन में पूरा करने का विधान है।

    दुर्गा सप्तशती पाठ के लाभ

    यह पाठ मनोकामना पूर्ण करता है और सभी प्रकार के कष्टों को दूर करता है।
    यह भक्तों को देवी माँ की कृपा प्राप्त करने में सहायता करता है।
    जो लोग दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं, वे महान शक्ति और सुरक्षा प्राप्त करते हैं।

    संकल्प: पाठ शुरू करने से पहले देवी माँ के समक्ष संकल्प लेना चाहिए।
    यदि आप समय और सुविधा के अभाव में संपूर्ण दुर्गा सप्तशती का पाठ नहीं कर पा रहे हैं, तो सिद्ध कुंजीका स्तोत्र का पाठ करना भी एक अच्छा विकल्प है, जिससे आपको समान फल प्राप्त होता है।

    दुर्गा कवच का पाठ कैसे करें?

    सबसे पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें, माँ दुर्गा का ध्यान करें और घी का दीपक जलाएं। पाठ शुरू करने से पहले और बाद में ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाये विच्चे मंत्र का जाप करें। यदि संभव हो तो पाठ से पहले देवी सूक्तम का पाठ करें। पाठ करते समय शरीर के उन हिस्सों के बारे में कल्पना करें जहाँ देवी आपकी रक्षा कर रही हैं। शरीर के विभिन्न अंगों के लिए देवी से रक्षा की प्रार्थना करें। पाठ को हिंदी में भी कर सकते हैं।

    भाव: कवच में शरीर के अंगों के नाम के साथ मंत्र आते हैं, उन पर ध्यान केंद्रित करते हुए यह कल्पना करें कि देवी उन अंगों की रक्षा कर रही हैं।
    समापन: पाठ पूरा करने के बाद माँ दुर्गा से क्षमा याचना करें।

    ‘दुर्गा दुर्गा’ जप का महत्व

    यदि आपको समय नहीं मिलता है, तो आप देवी के नाम (जैसे ‘दुर्गा दुर्गा’ कह कर) का भी जप कर सकते हैं, यह भी रक्षा कवच का कार्य करता है.
    कवच में शरीर के सभी अंगों की सुरक्षा का वर्णन है. इसलिए, इस पाठ से शरीर पर एक मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है और आप स्वस्थ महसूस करते हैं.
    अगर आप लंबे समय तक कोई पाठ नहीं कर सकते, तो दुर्गा कवच का संक्षिप्त पाठ भी आपकी मदद कर सकता है.

    क्यों शापित है दुर्गा सप्तशती ?

    चूंकि दुर्गा सप्तशती के सभी मंत्र बहुत ही प्रभावशाली हैं, इसलिए इस ग्रंथ के मंत्रों का दुरूपयोग न हो, इसके हेतु भगवान शंकर ने इस ग्रंथ को शापित कर रखा है, और जब तक इस ग्रंथ को शापोद्धार विधि का प्रयोग करते हुए शाप मुक्त नहीं किया जाता, तब तक इस ग्रंथ में लिखे किसी भी मंत्र का जप नहीं करें। दुर्गा सप्तशती के पाठ से पहले किए जाने वाले शापोद्धार का मुख्य मंत्र है: “ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं क्रां क्रीं चण्डिकादेव्यै शापनाशागुग्रहं कुरु कुरु स्वाहा।” इस मंत्र का जप सप्तशती के पाठ से पहले और पाठ पूरा होने के बाद सात-सात बार किया जाता है, ताकि मंत्र में आई किसी भी त्रुटि का प्रभाव दूर हो सके और पाठ का पूरा फल प्राप्त हो सके।
    मंत्र का विवरण:
    मंत्र: ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं क्रां क्रीं चण्डिकादेव्यै शापनाशागुग्रहं कुरु कुरु स्वाहा।
    उद्देश्य: यह मंत्र दुर्गा सप्तशती के बीज मंत्रों के शाप को दूर करने के लिए होता है, जिससे पाठ प्रभावी और निर्दोष हो सके।
    जप की विधि: इस मंत्र का जप पहले एक बार पाठ आरंभ करने से पूर्व और फिर पाठ पूरा होने के बाद सात बार किया जाता है।
    शापोद्धार का महत्व:
    दुर्गा सप्तशती के मंत्रों को शापित माना जाता है, और शापोद्धार के बिना इनका पाठ करने से साधक को अपेक्षित फल नहीं मिलता, या इसका उलटा प्रभाव भी पड़ सकता है।
    यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि मंत्रों का उच्चारण सही हो और पाठ का सकारात्मक प्रभाव ही पड़े।

    देशभर में उत्साह का माहौल और तैयारियां

    नवरात्र के आगमन को लेकर देशभर में भक्तों के बीच खासा उत्साह देखा जा रहा है। मंदिरों में विशेष सजावट की गई है और लाइटिंग से उन्हें रौशन किया गया है। जगह-जगह दुर्गा पूजा पंडाल बनाए जा रहे हैं।
    ~ दिल्ली: राजधानी दिल्ली में झंडेवालान मंदिर और कालकाजी मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं।
    ~ पश्चिम बंगाल: दुर्गा पूजा, जो कि नवरात्र के दौरान मनाई जाती है, पश्चिम बंगाल का सबसे बड़ा त्योहार है। कोलकाता में भव्य पंडालों और देवी दुर्गा की सुंदर मूर्तियों की स्थापना की जा रही है।
    ~ गुजरात: गुजरात में गरबा और डांडिया रास का आयोजन नवरात्र का मुख्य आकर्षण है। यहां लोग पारंपरिक परिधान पहनकर गरबा खेलते हैं और मां दुर्गा की आराधना करते हैं।

  • देशभर में मनाई जा रही पितृ अमावस्या

    प्रमुख तीर्थों में भीड़: काशी, प्रयाग और गया में जुटे लाखों श्रद्धालु

    सर्व पितृ अमावस्या: जब धरती से विदा किए जाते हैं पितर

    लखनऊ: आज देशभर में पितृ अमावस्या मनाई जा रही है। इस दिन को सर्व पितृ अमावस्या या महालय अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन पितृ पक्ष के 15 दिनों के अनुष्ठानों के समापन का प्रतीक है। इस विशेष अवसर पर, हिंदू धर्म के लोग अपने दिवंगत पूर्वजों, पितरों और परिवार के सदस्यों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष की शुरुआत में पितर धरती पर आते हैं और पितृ अमावस्या पर विदा होते हैं।

    पितृ पक्ष की शुरुआत: पितृ पक्ष के पहले दिन, यानी प्रतिपदा को, यमलोक से पितर धरती पर आते हैं और 15 दिनों तक अपने वंशजों के साथ रहते हैं। इस दौरान, वे श्राद्ध और तर्पण के माध्यम से अपने हिस्से का भोजन और जल ग्रहण करते हैं।
    पितृ अमावस्या: पितृ अमावस्या को पितृ पक्ष का अंतिम दिन माना जाता है। इस दिन, पितरों को श्राद्ध और तर्पण करके विधिवत विदाई दी जाती है ताकि वे वापस अपने लोक जा सकें। यह दिन पितरों को शांत करने और उनसे आशीर्वाद लेने के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

    पितरों के लिए किया जा रहा विशेष अनुष्ठान

    पितृ अमावस्या एक ऐसा दिन है जब हम अपने पूर्वजों के प्रति अपनी श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। यह दिन हमें हमारी जड़ों से जोड़ता है और हमें हमारे पूर्वजों के बलिदानों और योगदानों को याद रखने की प्रेरणा देता है। आज का दिन उन सभी पितरों के लिए समर्पित है जिनकी मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं है या जिनका श्राद्ध किसी कारणवश नहीं हो सका। इस दिन, श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे अनुष्ठान किए जाते हैं ताकि पूर्वजों की आत्मा को शांति मिल सके और उन्हें मोक्ष प्राप्त हो सके। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ अमावस्या पर किए गए श्राद्ध से पितृ दोष समाप्त होता है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है।

    प्रमुख धार्मिक स्थलों पर उमड़ी भीड़

    देश के कई प्रमुख धार्मिक स्थलों और नदियों के घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी जा रही है।
    ~ प्रयागराज: संगम तट पर लाखों श्रद्धालु सुबह से ही स्नान और तर्पण करने के लिए एकत्रित हो रहे हैं।
    ~ काशी (वाराणसी): गंगा के घाटों पर पिंडदान और श्राद्ध के लिए भारी संख्या में लोग पहुंचे हैं।
    ~ गया: पितृ अमावस्या पर पिंडदान के लिए गयाजी को विशेष महत्व दिया जाता है, और वहां भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने पूर्वजों के लिए पूजा-अर्चना कर रहे हैं।

    पितृ अमावस्या का महत्व

    हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, यह माना जाता है कि पितृ अमावस्या पर किया गया श्राद्ध और दान बहुत फलदायी होता है। इस दिन, लोग अपने पूर्वजों के लिए भोजन तैयार करते हैं और ब्राह्मणों, जरूरतमंदों और गरीबों को दान करते हैं। इसके अलावा, गाय, कुत्ते और कौवों को भी भोजन खिलाया जाता है, जिन्हें पितरों का प्रतीक माना जाता है।
    यह दिन हमें हमारे पूर्वजों के योगदानों और बलिदानों को याद दिलाता है और हमें हमारी जड़ों से जोड़े रखता है।

    पूर्वजों का सम्मान और उनके प्रति श्रद्धा

    धार्मिक नेताओं ने इस अवसर पर लोगों से अपने पूर्वजों का सम्मान करने और उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने का आग्रह किया है। उन्होंने यह भी कहा कि पितृ अमावस्या पर किया गया दान और श्राद्ध बहुत फलदायी होता है।
    यह पितृ अमावस्या का दिन हमें हमारे पूर्वजों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को याद दिलाता है और हमें उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर देता है। यह दिन हमें यह भी सिखाता है कि हमें अपने परिवार और समाज के प्रति भी अपनी जिम्मेदारियों को निभाना चाहिए।

  • स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने दी चेतावनी

    इंसान की बदलती जीवनशैली बनी दिल के लिए खतरा

    लखनऊ/मुरादाबाद। बदलती जीवनशैली, अनियंत्रित खानपान और शारीरिक निष्क्रियता के कारण उत्तर प्रदेश के शहरों में दिल की बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। मुरादाबाद जैसे शहर इसका प्रमुख उदाहरण बन गए हैं, जहाँ लोग स्वाद और परंपरा को सेहत से ऊपर रख रहे हैं। यह एक गंभीर स्थिति है क्योंकि दिल की बीमारियां अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि युवाओं में भी इनका खतरा बढ़ रहा है।

    दिल की बीमारी के प्रमुख कारण

    विशेषज्ञों के अनुसार, दिल की सेहत को नुकसान पहुँचाने वाले कुछ मुख्य कारक इस प्रकार हैं:
    1. गलत खानपान: तैलीय, घी-मक्खन से भरपूर और प्रोसेस्ड भोजन का अधिक सेवन।
    2. अनियमित दिनचर्या: देर रात खाना खाने की आदत।
    3. शारीरिक निष्क्रियता: नियमित व्यायाम या पैदल चलने की कमी।
    4. तनाव और अन्य आदतें: बढ़ता हुआ तनाव, धूम्रपान और शराब का सेवन, जो दिल को कमजोर करते हैं।

    डॉक्टरों की सलाह और बचाव के उपाय

    मुरादाबाद के जाने-माने कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राज कपूर का कहना है कि दिल की सेहत एक दिन में खराब नहीं होती, बल्कि यह सालों की लापरवाही का नतीजा है। वे दिल को स्वस्थ रखने के लिए जीवनशैली में बदलाव लाने की सलाह देते हैं:
    1. नियमित व्यायाम: रोजाना कम से कम 30 मिनट पैदल चलना या योग करना।
    2. संतुलित आहार: तली-भुनी, प्रोसेस्ड चीजों, नमक और चीनी का सेवन सीमित करना।
    3. नशे से दूरी: तंबाकू और शराब का सेवन पूरी तरह छोड़ना।
    4. नियमित जांच: हर साल दिल की जांच कराना।
    5. लक्षणों को पहचानें: सांस फूलने या सीने में दर्द जैसे लक्षणों को कभी नज़रअंदाज़ न करें और तुरंत डॉक्टर से मिलें।

    डॉ. राज कपूर, कार्डियोलॉजिस्ट

    परंपरा और सेहत के बीच संतुलन

    मुरादाबाद की संस्कृति में घी और मक्खन का विशेष महत्व है, लेकिन अब समय आ गया है कि लोग परंपरा और स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाएँ। विशेषज्ञों का मानना है कि खाने का आनंद संयम के साथ लेना चाहिए।

    सामुदायिक जागरूकता की आवश्यकता

    बढ़ते डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मामले भी दिल की बीमारियों के खतरे को और बढ़ा रहे हैं। डॉ. कपूर के अनुसार, इस संकट से निपटने के लिए परिवार, स्कूल और कार्यस्थल को मिलकर स्वस्थ आदतों को बढ़ावा देना होगा। विश्व हृदय दिवस के अवसर पर यह संदेश दिया गया है कि दिल की सुरक्षा अस्पतालों से नहीं, बल्कि हमारी रोजमर्रा की जिंदगी की छोटी-छोटी आदतों से शुरू होती है।

  • नकली बिजली तारों का भंडाफोड़:

    कृष्णा नगर में ‘हैवेल्स’ के नाम पर बेचे जा रहे थे नकली तार

    लखनऊ। कृष्णा नगर इलाके में शुक्रवार को एक बड़ी कार्रवाई में ‘हैवेल्स इंडिया लिमिटेड’ कंपनी के नकली बिजली तारों का जखीरा पकड़ा गया। कंपनी के एक कर्मचारी ने पुलिस के साथ मिलकर एक इलेक्ट्रॉनिक्स दुकान पर छापा मारा और दुकानदार के खिलाफ कॉपीराइट एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया है।

    छापेमारी और बरामदगी

    यह कार्रवाई ‘स्पीड सर्च एंड सिक्योरिटी नेटवर्क प्रा. लि.’ के फील्ड ऑफिसर दीप सिंह द्वारा की गई, जिन्हें हैवेल्स कंपनी ने अधिकृत किया हुआ है। दीप सिंह ने बाजार का सर्वे करते हुए पाया कि कृष्णा नगर में ‘राम बैट्री इनवर्टर्स एंड इलेक्ट्रॉनिक्स’ नामक दुकान पर बिजली के नकली तार बेचे जा रहे हैं। सूचना की पुष्टि होने के बाद, उन्होंने कृष्णा नगर कोतवाली प्रभारी पी.के. सिंह से संपर्क किया और पुलिस टीम के साथ दोपहर करीब 1 बजे दुकान पर छापा मारा।

    आठ बंडल नकली तार बरामद

    दुकान की तलाशी में हैवेल्स कंपनी के नाम के सात बंडल 1 MM और एक बंडल 2.5 MM के नकली तार बरामद किए गए। इन तारों की पहचान इस बात से हुई कि इनके बारकोड स्कैन नहीं हो रहे थे और सभी बंडलों के बैच नंबर भी समान थे, जबकि असली हैवेल्स तारों में बारकोड स्कैन होते हैं और प्रत्येक बंडल का बैच नंबर अलग होता है।

    दुकानदार पर मुकदमा दर्ज

    छापेमारी के दौरान दुकानदार आशुतोष शुक्ला, पुत्र रवि शंकर शुक्ला, मौके पर मौजूद मिला। पुलिस ने बरामद सभी नकली तारों को जब्त कर लिया और उन्हें थाने ले जाया गया। दीप सिंह ने आशुतोष शुक्ला के खिलाफ नामजद लिखित शिकायत दर्ज कराई।

    कृष्णा नगर कोतवाली प्रभारी पी.के. सिंह ने बताया कि कंपनी के अधिकृत कर्मचारी की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है और पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है। यह कार्रवाई उन लोगों के लिए एक चेतावनी है जो नकली सामान बेचकर ग्राहकों को धोखा देते हैं और कंपनियों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाते हैं।

  • अयोध्या में दीपोत्सव-2025 की तैयारियां तेज, भव्य-दिव्य-नव्य बनाने का प्रयास

    मल्टीमीडिया प्रोजेक्शन व लेजर शो के जरिए परंपरा, तकनीक और नवाचार का दिखेगा संगम

    सरयू घाट पर जगमगाएंगे 26 लाख से अधिक दीप, दर्शक भव्य आयोजन के बनेंगे साक्षी

    राम की पैड़ी पर होगा अनोखा थीमेटिक प्रोजेक्शन मैपिंग शो, 100 से अधिक कलाकारों की लाइव प्रस्तुति

    दीपोत्सव-2025 पिछले सभी आयोजनों से होगा भव्य, आगंतुकों को मिलेगा अविस्मरणीय अनुभव- जयवीर सिंह

    लखनऊ, (20 सितंबर 2025)। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग अयोध्या में 18 से 20 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले दीपोत्सव-2025 को भव्य व आकर्षक बनाने की तैयारियों में जुटा है। दीपोत्सव में प्रतिदिन कई सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं शो आयोजित होंगे। इस अवसर पर मल्टीमीडिया प्रोजेक्शन व लेजर शो का भव्य प्रदर्शन होगा, जिसका मुख्य उद्देश्य पारंपरिक दीयों के साथ आधुनिक प्रकाश तकनीकों के संगम से मंत्रमुग्ध कर देने वाला दृश्य प्रस्तुत करना है। यह शो अयोध्या में सरयू नदी के घाटों पर आयोजित किया जाएगा। 100 से अधिक कलाकार भी लाइव परफॉर्मेंस देंगे।यह जानकारी उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने दी। 

    पर्यटन मंत्री ने कहा कि ‘दीपोत्सव-2025 में भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन की झलक आधुनिक तकनीक से साकार की जाएगी। पूरे नगर को आकर्षक रोशनी से सजाया जाएगा। सरयू घाटों पर 26 लाख से अधिक दीप जलाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की तैयारी है। देश-विदेश से आए आगंतुक इस भव्य आयोजन के साक्षी बनेंगे।’

    45 मिनट के शो में भव्यता का प्रदर्शन

    मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि इस वर्ष अयोध्या में होने वाले दीपोत्सव 2025 में मल्टीमीडिया प्रोजेक्शन, लेजर शो और लाइव आर्टिस्ट परफॉर्मेंस के जरिए आयोजन को भव्यता प्रदान की जाएगी। यह शो परंपरा, तकनीक और कल्पना का अनूठा संगम प्रस्तुत करेगा। लगभग 45 मिनट के इस कार्यक्रम में प्रोजेक्शन, लेजर, लाइव परफॉर्मेंस और आतिशबाजी के माध्यम से भगवान श्रीराम की कथा को भव्य रूप से प्रदर्शित किया जाएगा।

    100 से अधिक कलाकार देंगे लाइव परफॉर्मेंस

    अयोध्या में इस बार दीपोत्सव-2025 पहले से कहीं अधिक भव्य और आकर्षक होने जा रहा है। राम की पैड़ी पर एक अनोखा थीमेटिक प्रोजेक्शन मैपिंग शो आयोजित किया जाएगा, जिसमें 100 से अधिक लाइव कलाकार मंच पर प्रस्तुति देंगे। शो की विशेषता यह होगी कि इसमें पिछले दीपोत्सवों के विजुअल्स, म्यूज़िक, स्टोरीबोर्ड या एनीमेशन का दोहराव नहीं होगा। साथ ही, रामायण थीम पर राम की पैड़ी के जल पर लगभग 200 मीटर या उससे अधिक लंबे चलते-फिरते भव्य झांकियों (ग्रैंड टेबल्यू) का निर्माण किया जाएगा, जो श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक अद्वितीय अनुभव होगा।

    दर्शकों लिए होगा अनूठा अनुभव

    यह आयोजन इस तरह तैयार किया जाएगा कि इसकी पूरी प्रस्तुति दर्शकों के लिए एक अनूठा अनुभव बने। प्रोजेक्शन विजुअल्स, मंच और कोरियोग्राफी, लाइव परफॉर्मेंस, लेज़र इफेक्ट्स, बैकग्राउंड स्कोर और वॉइस ओवर आपस में तालमेल बिठाकर पेश किए जाएंगे। स्क्रिप्ट और नैरेशन के माध्यम से कथानक को जीवंत रूप दिया जाएगा, जो दर्शकों में रोमांच पैदा करेगा। साथ ही, सभी कलाकारों की वेशभूषा दीपोत्सव की सांस्कृतिक और थीम आधारित भावना के अनुरूप होगी। 

    उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि, ‘दीपोत्सव-2025 भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन की झलक को आधुनिक तकनीक से साकार करेगा। रामनगरी को आकर्षक रूप से सजाया जाएगा। सरयू घाटों पर 26 लाख से अधिक दीप जलाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की तैयारी है। इस बार मल्टीमीडिया प्रोजेक्शन, लेजर शो और कलाकारों के लाइव परफॉर्मेंस के जरिए आयोजन को और भी भव्य बनाया जाएगा। हमारा प्रयास है कि परंपरा, तकनीक और संस्कृति के संगम से दीपोत्सव को वैश्विक आकर्षण का केंद्र बनाया जाए।’

  • महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के लिए समर्पित ‘मिशन शक्ति-5.0’

    प्रभारी मंत्री, डीएम एसपी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

    ‘मिशन शक्ति 5.0’ की बिजनौर में धूम: मुख्यमंत्री योगी ने किया वर्चुअली शुभारंभ

    बिजनौर: (शनिवार, 20 सितंबर, 2025)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के लिए समर्पित ‘मिशन शक्ति-5.0’ का वर्चुअल माध्यम से शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण लखनऊ के लोक भवन सभागार से किया गया, जिसमें बिजनौर के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने कलेक्ट्रेट सभागार में शामिल होकर देखा। इस मौके पर प्रभारी मंत्री, जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

    प्रभारी मंत्री का संबोधन और स्वागत

    कार्यक्रम की शुरुआत में प्रभारी मंत्री कपिल देव अग्रवाल को कलेक्ट्रेट बिजनौर में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद, उन्होंने अधिकारियों के साथ मिलकर मुख्यमंत्री के वर्चुअल संबोधन को सुना। इस दौरान, उन्होंने मिशन शक्ति के उद्देश्यों पर जोर देते हुए कहा कि यह पहल महिलाओं के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य महिला सुरक्षा को समाज की प्राथमिकता बनाना है।

    मिशन शक्ति केंद्रों का उद्घाटन और SOP का विमोचन

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सभी थानों में स्थापित नए मिशन शक्ति केंद्रों का भी उद्घाटन किया। इन केंद्रों को महिलाओं को उनकी शिकायतों और समस्याओं को प्रभावी ढंग से हल करने के लिए बनाया गया है।

    इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने इन केंद्रों के लिए तैयार की गई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) की पुस्तिकाओं का भी विमोचन किया। ये पुस्तिकाएं पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को इन केंद्रों के संचालन में मार्गदर्शन करेंगी।

    लाभार्थियों से सीधा संवाद

    कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मुख्यमंत्री का विभिन्न जन-कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों से वर्चुअल संवाद था। बिजनौर में भी, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने इस संवाद को सुना, जिससे उन्हें यह समझने में मदद मिली कि सरकारी योजनाएं कैसे लोगों के जीवन में बदलाव ला रही हैं।

    जिले में अधिकारियों की सक्रियता

    कार्यक्रम के दौरान बिजनौर में पुलिस अधिकारियों ने भी सक्रिय भागीदारी दिखाई। पुलिस अधीक्षक नगर ने थाना कोतवाली शहर के मिशन शक्ति केंद्र का निरीक्षण किया, जहां लाइव प्रसारण देखा जा रहा था। उन्होंने सभी संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इसी तरह, क्षेत्राधिकारी नगीना ने भी अपने क्षेत्र के थाने में नवस्थापित केंद्र पर पुलिस स्टाफ और स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों के साथ कार्यक्रम को देखा।

    ‘मिशन शक्ति-5.0’ की व्यापक पहुँच

    यह कार्यक्रम केवल एक सरकारी पहल नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन का हिस्सा है। बिजनौर जिले के सभी थानों में स्थापित मिशन शक्ति केंद्र यह सुनिश्चित करेंगे कि महिलाओं को हर स्तर पर मदद मिले। इस पहल का उद्देश्य समाज के हर वर्ग तक पहुंचना और महिला सुरक्षा को सुनिश्चित करना है।

  • सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की शाखा में निशाना बना बचत खाता

    आलमबाग लखनऊ के आशियाना थाना क्षेत्र का मामला

    साइबर धोखाधड़ी: बुजुर्ग के खाते से उड़ाए 1.10 लाख रुपए

    लखनऊ: आलमबाग के आशियाना थाना क्षेत्र में एक चौंकाने वाली साइबर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। हैकरों ने एक 65 वर्षीय बुजुर्ग के बैंक खाते से कई अनधिकृत लेनदेन (unauthorized transactions) करके कुल 1,10,090 रुपए उड़ा लिए। पीड़ित हरी शंकर सत्यार्थी ने इस धोखाधड़ी की सूचना पुलिस और बैंक दोनों को दी है।

    कैसे पता चली धोखाधड़ी

    गोमती नगर विस्तार, लखनऊ के निवासी पीड़ित हरी शंकर सत्यार्थी का आशियाना थाना क्षेत्र में स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की शाखा में एक बचत खाता है। 12 सितंबर को, वे अपने मोबाइल बैंकिंग के माध्यम से कुछ पैसे ट्रांसफर करने का प्रयास कर रहे थे। इसी दौरान, उन्हें पता चला कि उनके खाते से कई बार में 95,990 रुपए का अनधिकृत लेनदेन किया गया है। बाद में, जांच में यह राशि 1,10,090 रुपए पाई गई।

    पुलिस और बैंक को शिकायत

    इस घटना की जानकारी होते ही, हरी शंकर सत्यार्थी ने तुरंत साइबर सेल हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क किया और बैंक को सूचित करके अपने खाते और नेटबैंकिंग को बंद करवा दिया। इसके बाद, उन्होंने आशियाना थाने में पुलिस को लिखित शिकायत दर्ज कराई। थाना प्रभारी छत्रपाल सिंह ने बताया कि पीड़ित की शिकायत के आधार पर आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।

    अत्यधिक सावधानी बरतना महत्वपूर्ण

    यह घटना एक बार फिर इस बात पर जोर देती है कि डिजिटल बैंकिंग का उपयोग करते समय अत्यधिक सावधानी बरतना कितना महत्वपूर्ण है, खासकर वरिष्ठ नागरिकों के लिए। यह सलाह दी जाती है कि लोग किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि या अज्ञात लिंक पर क्लिक करने से बचें और अपने बैंक खाते की जानकारी किसी के साथ साझा न करें।

  • करनी फाउंडेशन की पहल

    ग्रामीण महिलाओं और बालिकाओं को मिलेगा रोजगारपरक प्रशिक्षण

    आत्मनिर्भरता की ओर एक कदम: बिजनौर में सिलाई प्रशिक्षण केंद्र का उद्घाटन

    ~ भूपेंद्र निरंकारी

    बिजनौर: ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में करानी फाउंडेशन (NGO) ने एक सराहनीय कदम उठाया है। बिजनौर के मोहम्मदपुर देवमल ब्लॉक के गांव मुकीमपुर उर्फ़ धारूवाला में एक सिलाई प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की गई है। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को रोजगार के लिए प्रशिक्षित कर उन्हें सशक्त बनाना है।

    इस प्रशिक्षण केंद्र का उद्घाटन श्रीमती मिथिलेश गौतम जी ने फीता काटकर किया। इस अवसर पर उन्होंने फाउंडेशन के प्रयासों की सराहना की और उम्मीद जताई कि यह केंद्र ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा। कार्यक्रम के दौरान, श्री जितेंद्र कुमार को इस सिलाई केंद्र का जिला संयोजक नियुक्त किया गया।

    उद्घाटन समारोह में प्रशिक्षु महिलाओं और बालिकाओं को सिलाई से संबंधित आवश्यक किट भी वितरित की गईं, ताकि वे अपने प्रशिक्षण के बाद आसानी से स्वरोजगार शुरू कर सकें।

    कार्यक्रम में करनी फाउंडेशन के अध्यक्ष कुलदीप भारती, महासचिव संदीप कुमार, जिला संयोजक जितेंद्र कुमार और केंद्र संचालिका श्रीमती धर्मवती सहित बड़ी संख्या में महिलाएं और बालिकाएं मौजूद थीं। इस दौरान महक, गुनगुन, महिमा, जिया, कविता, आरती, शगुन, पायल, मंजू, रेनू, कामिनी, काजल, भावना जैसी अनेक ग्रामीण महिलाओं ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
    फाउंडेशन के अध्यक्ष कुलदीप भारती ने अपने संबोधन में कहा कि उनका संगठन ग्रामीण महिलाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना चाहता है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि भविष्य में ऐसे और भी केंद्र खोले जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं इस पहल का लाभ उठा सकें। यह केंद्र न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाएगा, बल्कि उन्हें समाज में एक सम्मानजनक स्थान प्राप्त करने में भी मदद करेगा।

  • प्रिय भूपेन्द्र,
    जन्मदिन पर आशीर्वाद सहित बहुत-बहुत हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं…

    निरंकारी मिशन से जुड़कर आप जिस तरह से समाज में प्रेम, सद्भाव और मानवता का संदेश फैला रहे हैं, वह वाकई प्रेरणादायक है। पत्रकारिता के क्षेत्र में आपकी मेहनत और निष्पक्षता काबिले-तारीफ है। आप सिर्फ खबरें नहीं लिखते, बल्कि समाज की बेहतरी के लिए एक सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास भी करते हैं। आपकी लेखनी में सच्चाई और साहस दोनों झलकते हैं।

    इस खास दिन पर, हम ईश्वर से आपके सुखद, स्वस्थ और सफल जीवन की कामना करते हैं। आप इसी तरह सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहें और समाज को नई दिशा देते रहें। सद्गुरु माता सुदीक्षा सविंदर, हरदेव जी महाराज जी की असीम कृपा बनी रहे।

    कुछ पंक्तियाँ आपके लिए:
    > “कलम से लिखते रहें आप समाज की सच्चाई,
    > हर ख़बर में दिखे आपकी सादगी और भलाई।
    > सतगुरु माता सुदीक्षा सविंदर हरदेव सिंह जी महाराज की कृपा सदा आप पर बरसे,
    > खुशियों का हर पल आपकी झोली में बरसे।”

    > “ये दिन ये महीना ये तारीख़ जब जब आई,
    > हम ने प्यार से जन्मदिन की महफ़िल सजाई,
    > हर शमा पे लिख दिया नाम आपका,
    > इसकी रोशनी में चाँद जैसी सूरत समाई।”

    जन्मदिन मुबारक हो!

  • साहित्यिक योगदान पर आधारित ‘ओपन डोर’ पत्रिका

    वरिष्ठ साहित्यकार हितेश कुमार शर्मा के कृतित्व पर आधारित विशेषांक का लोकार्पण

    ~ भूपेंद्र निरंकारी

    बिजनौर। जनपद के जाने-माने साहित्यकार, अधिवक्ता और साहित्य भूषण से सम्मानित हितेश कुमार शर्मा के जीवन और साहित्यिक योगदान पर आधारित ‘ओपन डोर’ पत्रिका के विशेषांक का लोकार्पण किया गया। यह कार्यक्रम सिविल लाइन स्थित गणपति भवन में आयोजित किया गया था।

    कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. पंकज भारद्वाज ने हितेश शर्मा के साहित्यिक सफर की सराहना की। उन्होंने बताया कि हितेश शर्मा ने अब तक विभिन्न विधाओं में 100 से अधिक पुस्तकें लिखी हैं और उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा साहित्य भूषण सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। यह सम्मान पाने वाले वह जनपद के पहले साहित्यकार हैं। डॉ. भारद्वाज ने इस बात पर जोर दिया कि 90 वर्ष की आयु में भी उनका लेखन अनवरत जारी है।
    इस अवसर पर, हितेश शर्मा ने अपनी साहित्यिक यात्रा को ईश्वर को समर्पित करते हुए कहा, “जो कुछ लेखन मेरी कलम से हो पाया है, वह सब ईश्वर को समर्पित है।”
    ‘ओपन डोर’ पत्रिका के संपादक अमन त्यागी ने कहा कि उनका उद्देश्य प्रतिष्ठित हिंदी साहित्यकारों के जीवन और कृतित्व को लोगों तक पहुँचाना है। इस कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार अनिल शर्मा ‘अनिल’, श्रीमती उमा शर्मा, अधिवक्ता ललित शर्मा, तन्मय त्यागी, मोहम्मद आफताब और आशु कुमार सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे और उन्होंने अपने विचार साझा किए।

  • आयुर्वेदिक चिकित्सालय की स्थिति बदहाल

    सामाजिक कार्यकर्ता ने उठाए सवाल

    मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर भी दर्ज कराई है शिकायत

    अल्मोड़ा DM को नहीं जनता की वास्तविक जरूरतों की चिंता !

    देहरादून। अल्मोड़ा के सामाजिक कार्यकर्ता संजय पाण्डे ने पंडित हर गोविंद पंत जिला चिकित्सालय में स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय की बदहाल स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इस मामले में उच्च अधिकारियों को शिकायत पत्र भेजकर आवश्यक दवाओं की कमी, बंद पड़ी पंचकर्म सेवा, और प्रशासन की लापरवाही को उजागर किया गया है।

    मुख्य समस्याएँ और अधिकारियों की उदासीनता

    संजय पाण्डे ने अपनी शिकायत में बताया कि शहर के बीचों-बीच होने के बावजूद, यह आयुर्वेदिक चिकित्सालय मरीजों को मूलभूत सुविधाएँ देने में असमर्थ है!

    दवाओं का अभाव और बंद पड़ी सेवाएँ

    1. दवाओं की कमी: अस्पताल में दवाओं का लगातार अभाव है, जिसके कारण मरीजों को पर्ची तो मिलती है, लेकिन दवाइयाँ उपलब्ध नहीं होतीं। उन्हें मजबूर होकर महँगी दवाएँ बाहर से खरीदनी पड़ती हैं।
    2. पंचकर्म सेवा बंद: पंचकर्म जैसी महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक चिकित्सा सेवा लंबे समय से बंद है, जबकि कागजों में इसका संचालन दिखाया जा रहा है।

    अधिकारियों का गैर-जिम्मेदाराना रवैया

    संजय पाण्डे के अनुसार, जब उन्होंने इस मुद्दे पर जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. मोहम्मद शाहिद से मुलाकात की, तो उन्होंने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। अधिकारी का यह कहना कि “अस्पताल में अतिरिक्त कमरा नहीं है,” इस बात का सबूत है कि अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं।

    इसके अलावा, संजय पाण्डे ने जिलाधिकारी अल्मोड़ा पर भी आरोप लगाया कि वे शहरवासियों की वास्तविक जरूरतों की अनदेखी कर रहे हैं और केवल कागजी योजनाओं पर ही ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। उन्होंने इस स्थिति को जन स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ बताया और कहा कि यह सरकार की जन-कल्याणकारी योजनाओं को विफल करने जैसा है।

    संजय पाण्डे की प्रमुख माँगें और चेतावनी

    इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, संजय पाण्डे ने उच्च अधिकारियों से कुछ महत्वपूर्ण माँगें की हैं:
    1. राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में आवश्यक दवाओं की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
    2. पंचकर्म और अन्य आयुर्वेदिक चिकित्सा सेवाएँ तुरंत शुरू की जाएँ।
    3. चिकित्सालय के लिए एक उपयुक्त भवन की पहचान कर स्थायी समाधान किया जाए।
    4. इस लापरवाही के लिए संबंधित अधिकारियों और जिलाधिकारी की भूमिका की उच्चस्तरीय जाँच करके उन पर कठोर कार्रवाई की जाए।

    संजय पाण्डे ने चेतावनी दी है कि यदि इन माँगों पर जल्द कोई कार्रवाई नहीं होती है, तो वे सूचना का अधिकार (RTI) का उपयोग करेंगे और जरूरत पड़ने पर माननीय उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दाखिल करेंगे। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई है।

  • उत्तर प्रदेश में पर्यटन को नई दिशा

    11 ‘ईको-टूरिज्म आइकन’ विकसित करने की पहल

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश ईको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड (UPETDB) ने राज्य के 11 प्रमुख ईको-टूरिज्म स्थलों को विश्वस्तरीय और पर्यटक-अनुकूल बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इन स्थलों को देश के ‘ईको-टूरिज्म आइकन’ के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि वे न सिर्फ घरेलू बल्कि वैश्विक पर्यटकों को भी आकर्षित कर सकें। यह जानकारी उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने दी।

    प्रमुख पहल और उद्देश्य

    पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ उत्तर प्रदेश को ईको-टूरिज्म का एक प्रमुख केंद्र बनाना है। इन स्थलों के विकास से पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा, जिससे पर्यटकों को एक बेहतर और प्राकृतिक अनुभव मिल सकेगा।

    ‘ईको-टूरिज्म आइकन’ के रूप में विस्तार

    UPETDB की इस पहल के तहत अयोध्या, चित्रकूट, बलिया, बाराबंकी, ललितपुर, बांदा, जालौन, कुशीनगर, सीतापुर, महाराजगंज और मिल्कीपुर (अयोध्या जिला) में ईको-टूरिज्म परिसंपत्तियों का विस्तार किया जा रहा है। इन परियोजनाओं में प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक सुविधाओं का अनोखा संगम देखने को मिलेगा।

    11 प्रमुख स्थलों पर विशेष ध्यान

    बोर्ड इन 11 स्थलों के रखरखाव और सुविधाओं पर विशेष ध्यान दे रहा है:
    * अयोध्या: फ्लोटिंग रेस्तरां और उधेला झील
    * बलिया: मेरितार गाँव-सुरहा ताल बर्ड सेंचुरी
    * बाराबंकी: बगहर झील
    * सीतापुर: अज्जेपुर झील
    * कुशीनगर: सोहरौना ताल
    * चित्रकूट: रामनगर झील और मड़फा किला
    * जालौन: पचनदा (पांच नदियों का संगम)
    * ललितपुर: ककरावल जलप्रपात
    * बांदा: कालिंजर किला
    * महाराजगंज: देवदह ईको टूरिज्म साइट

    इन स्थलों पर पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ पर्यटन (सस्टेनेबल टूरिज्म) सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।

    रोजगार और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा

    पर्यटन विभाग का मानना है कि इन प्रयासों से स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलेगा और राज्य की पर्यटन अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा मिलेगी। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने निवेशकों और ऑपरेटर्स को भी इस पहल से जुड़ने और इन स्थलों को देश के सबसे पसंदीदा ईको-टूरिज्म स्थल बनाने में योगदान देने के लिए आमंत्रित किया है।
    पर्यटन (इको) निदेशक प्रखर मिश्रा ने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य इन परिसंपत्तियों को ‘ईको-टूरिज्म आइकन’ के रूप में विकसित कर स्थानीय समुदायों को रोजगार, प्रशिक्षण और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना है। इन परियोजनाओं के माध्यम से न केवल पर्यटकों को प्रकृति और संस्कृति का अनूठा अनुभव मिलेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लक्ष्यों को भी मजबूती मिलेगी।

  • आरजेपी इंटर कॉलेज में होमगार्ड्स ने दिखाए जौहर

    आपदा से बचाव के लिए बिजनौर में मॉकड्रिल

    ~ भूपेंद्र निरंकारी

    बिजनौर। उत्तराखंड से सटे बिजनौर जिले में आपदाओं से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए आरजेपी इंटर कॉलेज में एक मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इस अभ्यास में होमगार्ड्स की आपदा बचाव टीम और एनडीआरएफ के जवानों ने काल्पनिक आपदा से प्रभावित लोगों को बचाने का प्रदर्शन किया।

    पूरे स्कूल का किया गया निरीक्षण

    अभ्यास की शुरुआत में, जिला कमांडेंट डॉ. वेदपाल चपराना की अगुवाई में आपदा बचाव दल ने पूरे स्कूल का गहन निरीक्षण किया। टीम ने यह सुनिश्चित किया कि किसी भी आपात स्थिति में बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए कौन से रास्ते सबसे उपयुक्त होंगे। इस मौके पर एनडीआरएफ, होमगार्ड्स, एनसीसी कैडेट्स और डॉक्टरों की एक टीम एंबुलेंस के साथ मौजूद थी।

    काल्पनिक आपदा का किया गया बचाव

    मॉक ड्रिल के दौरान, अचानक खतरे का सायरन बजते ही पूरे स्कूल में हलचल मच गई। एनडीआरएफ और होमगार्ड्स की ‘आपदमित्र’ टीम तुरंत हरकत में आई और स्कूल की इमारत में प्रवेश कर गई। उन्होंने काल्पनिक रूप से घायल और बेहोश बच्चों को बाहर निकाला और एंबुलेंस तक पहुँचाया। एंबुलेंस में मौजूद डॉक्टरों ने तुरंत उनकी मरहम पट्टी की और ऑक्सीजन देकर उनका उपचार शुरू किया।

    अधिकारियों ने दिए महत्वपूर्ण संदेश

    इस मौके पर तहसीलदार सदर ने उपस्थित लोगों को बताया कि आपदाओं से घबराने के बजाय, उनसे कैसे बचाव किया जाए। जिला कमांडेंट डॉ. वेदपाल चपराना ने स्कूली बच्चों और आम जनता को संबोधित करते हुए कहा कि आपदाएं कई प्रकार की होती हैं और उनसे निपटने के लिए हमें हमेशा तैयार रहना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि बचाव दल के पहुँचने में समय लग सकता है, लेकिन अगर हमें बचाव के तरीके पता हों, तो हम एक बड़ी आपदा को होने से रोक सकते हैं।
    इस अभ्यास में सीओ सिटी बिजनौर, एडीसी सतेंद्र सिंह, कंपनी कमांडर रईस अनवर, प्रधानाचार्य कैप्टन बिशनलाल और चंद्रहास सिंह सहित कई अन्य अधिकारी भी मौजूद थे, जिन्होंने आपदा प्रबंधन पर अपने विचार साझा किए।

  • उ.प्र. पर्यटन विभाग का आयोजन ‘संडे ऑन साइकिल’

    फिट इंडिया अभियान में योगदान देने का सुनहरा मौका

    उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की विशेष पहल

    लखनऊ स्थित पर्यटन भवन से शुरू होगी साइकिल राइड

    21 सितंबर को साइकिल लेकर पहुंच जाइए पर्यटन भवन

    लखनऊ, (19 सितंबर 2025)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फिट इंडिया अभियान को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ‘संडे ऑन साइकिल’ कार्यक्रम शुरू करने जा रहा है। यह पहल फिटनेस को बढ़ावा देने के साथ-साथ सक्रिय जीवनशैली, पर्यावरण संरक्षण और राज्य के पर्यटन स्थलों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर केंद्रित है। राजधानी लखनऊ स्थित पर्यटन भवन से 21 सितंबर (रविवार) को ‘संडे ऑन साइकिल’ की शुरुआत होगी। 

    उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने आमजन और स्वास्थ्य के प्रति सजग लोगों को अभियान में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। 21 सितंबर 2025 के प्रातः 06:30 बजे पर्यटन भवन, गोमती नगर (लखनऊ) से ‘संडे ऑन साइकिल’ अभियान की शुरुआत होगी। 

    पर्यटन विभाग ने सभी नागरिकों, अधिकारियों और कर्मचारियों से अनुरोध किया है कि वे अपनी-अपनी साइकिल लेकर समय से कार्यक्रम स्थल पर पहुंचें और इस फिटनेस और पर्यावरण जागरूकता अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं। 

    पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन जागरूकता का संदेश

    उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि ‘सरकार नागरिकों की सेहत और सक्रिय जीवन शैली को बढ़ावा देने को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल कर रही है। ‘संडे ऑन साइकिल’ अभियान के माध्यम से न केवल फिटनेस को प्रोत्साहन दिया जा रहा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन जागरूकता का संदेश भी दे रहा है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे अपनी साइकिल के साथ इस अभियान का हिस्सा बनें और फिट इंडिया अभियान को सफल बनाने में सहयोग दें।’

    विशेष सचिव पर्यटन ईशा प्रिया ने कहा कि ‘पर्यटन विभाग की ओर से आयोजित संडे ऑन साइकिल कार्यक्रम लखनऊवासियों के लिए एक अनूठा अवसर है। इस कार्यक्रम के माध्यम से नागरिक साइकिल चलाकर स्वास्थ्य और पर्यावरण के साथ पर्यटन से भी जुड़ सकते हैं। उन्होंने सभी नागरिकों, अधिकारियों और कर्मचारियों से आग्रह किया है कि वे समय पर कार्यक्रम स्थल पर पहुंचें और इस जन-जागरूकता पहल का सक्रिय हिस्सा बनें। उन्होंने कहा कि नागरिकों का सहयोग ही इस कार्यक्रम को सफल बनाएगा।’

  • विधवा महिला ने लगाया शारीरिक शोषण और मारपीट का आरोप

    जेई मुकुल यादव कानून के शिकंजे में, पत्रकार भी फर्जी मुकदमे का शिकार!

    लखनऊ। रेजिडेंसी परीक्षण खंड पर कार्यरत और जनपद बदायूं में तैनात रहे तत्कालीन टेक्नीशियन ग्रेड 2 जेई मुकुल यादव एक गंभीर मामले में फंस गए हैं। गाजियाबाद की एक विधवा महिला ने उन पर शारीरिक शोषण, अपनी नाबालिग बेटी के साथ मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। यह मुकदमा पारा थाने में दर्ज किया गया है।

    यह था पूरा मामला

    गाजियाबाद निवासी मुकुल यादव, सीमा राठौर के घर किराए पर रहता था। सीमा के पति की कुछ समय पहले मृत्यु हो चुकी थी। महिला का आरोप है कि मुकुल ने उनसे शादी का वादा करके कई वर्षों तक पति-पत्नी की तरह संबंध रखे, लेकिन बाद में अचानक किसी और महिला से शादी कर ली।
    सीमा के अनुसार, मुकुल ने उन्हें लखनऊ बुलाया और एक होटल में उनके सभी वीडियो, फोटो और दस्तावेज डिलीट कर दिए। इसके बाद उसने सीमा का नंबर ब्लॉक कर दिया और विरोध करने पर उनके और उनकी बेटी के साथ मारपीट भी की।

    खुद को बचाने के लिए महिला पर दर्ज कराया मुकदमा

    महिला को प्रताड़ित करने की सारी हदें पार करते हुए मुकुल ने धोखे से सीमा को अपने घर बुलाकर, उन पर मारपीट का आरोप लगाया। मुकुल ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर सीमा के खिलाफ पारा थाने में ही एक मुकदमा दर्ज करा दिया।

    पत्रकारों को भी फर्जी मुकदमों में फंसाने का आरोप

    मुकुल यादव पहले भी अपने कारनामों को लेकर विवादों में रहे हैं। काकोरी क्षेत्र में अपनी तैनाती के दौरान उन्होंने एक भाजपा नेता और एक डॉक्टर की पत्नी को फर्जी तरीके से बिजली चोरी के मामले में फंसाया था। जब पत्रकारों ने इस पर खबर लिखी, तो उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए तत्कालीन एसडीओ संतोष पाठक के साथ मिलकर उन पर भी मुकदमा दर्ज करवा दिया।

    ऊर्जा मंत्री की नाराजगी के बाद हुआ था निलंबन

    क्षेत्र के उपभोक्ताओं को परेशान करने और बिजली आपूर्ति की खराब स्थिति को लेकर उपभोक्ताओं द्वारा किए गए प्रदर्शनों के बाद, ऊर्जा मंत्री ने मुकुल यादव के निलंबन के आदेश दिए थे।

    पुलिस जांच जारी, गिरफ्तारी जल्द होने की उम्मीद

    पीड़ित महिला ने बताया कि मरियाहू और पारा थाने में लगातार शिकायत देने के बाद भी उनकी सुनवाई नहीं हो रही थी। आखिरकार, सहायक पुलिस आयुक्त काकोरी, शकील अहमद के निर्देश पर पारा थाने में मुकदमा दर्ज हुआ।
    पारा थाने के प्रभारी निरीक्षक सुरेश सिंह ने बताया कि महिला द्वारा लगाए गए आरोप काफी गंभीर हैं और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। उन्होंने कहा कि कानून के अनुसार कार्रवाई निश्चित रूप से होगी।

    अन्य अधिकारियों की भी बढ़ सकती हैं मुश्किलें

    चौक थाने में भी मुकुल यादव ने अपने ससुर के इंस्पेक्टर होने और समाजवादी पार्टी के नेता से रिश्तेदारी का रौब दिखाकर दो पत्रकारों के साथ मारपीट करने के बाद उन्हीं पर मुकदमा दर्ज कराया था। विधिक सूत्रों के अनुसार, न्यायालय ने पत्रकारों की याचिका पर संज्ञान लेते हुए आरोपियों को दो बार हाजिर होने का मौका दिया था, लेकिन उनके पेश नहीं होने पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया गया।
    चौक थाने में पत्रकारों पर दर्ज मुकदमे में सभी अवर अभियंता, उपखंड अधिकारी और अधिशासी अभियंता वादी थे। अब न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज होने के बाद वे सभी आरोपी बन सकते हैं। यह भी गौरतलब है कि भ्रष्टाचार की खबरों को रोकने के लिए मुकुल यादव को विक्टोरिया उपकेंद्र से हटाकर रेजिडेंसी परीक्षण खंड में तैनात किया गया था।

  • newsdaily24 पर 24 घंटे: देश विदेश के प्रमुख समाचार

    ~ भूपेंद्र निरंकारी

    1. घबराकर रोते रहे बच्चे, दोनों को यमुना में फेंकने ही वाला था पिता, फिर…
    https://nz.vayambharat.com/Lnk/SRWR202509172031174781966110

    2. उत्तराखंड के चमोली में बादल फटने से भारी तबाही, 6 घर तबाह, 3 लोग लापता
    https://nz.vayambharat.com/Lnk/SRWR202509180856274781968435

    3. जिस बुलडोजर से गिराओगे हमारा कार्यालय, उसी से तुम्हारे स्मारक गिरवाएंगे… अखिलेश की धमकी
    https://nz.vayambharat.com/Lnk/SRWR202509180857514781964242

    4. स्कूलों में गरीब बच्चों का हक मारकर अमीरों के बच्चों का किया जा रहा दाखिला, हाईकोर्ट ने शासन को लगाई फटकार, कहा- शिक्षा सचिव शपथपत्र में दें जवाब…
    https://lalluram.newzo.in/Lnk/SRWR202509180906234781967460

    5. एशिया कप में भारत-पाक के बीच एक और भिड़ंत पक्की, इस तारीख को होगा महामुकाबला
    https://nz.vayambharat.com/Lnk/SRWR202509180907414781967862
    6. राजा रघुवंशी हत्याकांड की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को बड़ा झटका, कोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका
    https://nzo.ibc24.in/Lnk/SRWR202509180034163022344012

    7. नहाते वक्‍त 5 मिनट में दूर होगी टैनिंग, बनाएं ये होममेड व्हाइटनिंग सोप और पाएं नेचुरल ग्लो
    https://newz.nd.tv/Lnk/SRWR202509180036543022344121

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    https://nz.vayambharat.com/Lnk/SRWR202509180038043022345039

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    https://nz.vayambharat.com/Lnk/SRWR202509180039133022343576

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    https://newz.nd.tv/Lnk/SRWR202509180839493022343375

    11. नवरात्रि के 9 दिनों में माता को किस चीज का भोग लगाने से पूरी होगी मनोकामना, जानें सिर्फ एक क्लिक में
    https://newz.nd.tv/Lnk/SRWR202509180842523022341145

    12. ‘बल्लेबाज सुधार कर लें…’, पाकिस्तानी कप्तान सलमान आगा ने अपनी टीम को चेताया, सुपर-4 में भारत से भ‍िड़ने पर द‍िखाए तेवर
    https://nz.vayambharat.com/Lnk/SRWR202509180844053022343592

    13. आज सभी स्कूलों में छुट्टी का ऐलान.. प्रशासन ने जारी किया सख्त आदेश, खुले मिले तो होगी सख्त कार्रवाई, आंगनबाड़ी भी रहेंगे बंद
    https://nzo.ibc24.in/Lnk/SRWR202509180844433022341000

    14. एड्स की खबरों पर खुद को फिट बताने के लिए जाकिर नाइक की गजब ‘उछल-कूद’
    https://newz.nd.tv/Lnk/SRWR202509181043214781961569

    15. बिहार ही नहीं अब दिल्ली में भी SIR, जानिए 2002 वाला कनेक्शन और क्या है तैयारी
    https://newz.nd.tv/Lnk/SRWR202509181044134781962732

    16. सूर्य ग्रहण इन राशियों के लिए रहेगा शुभ, नौकरी से लेकर बिजनेस में मिलेगी तरक्की
    https://nz.vayambharat.com/Lnk/SRWR202509181045294781964367

    17. बिहार में सेक्स रैकेट का भंडाफोड़, होटल की आड़ में चल रहा था देह व्यापार का गोरखधंधा
    https://lalluram.newzo.in/Lnk/SRWR202509181046074781963448
    18. 44 अपर पुलिस अधीक्षक व 13 क्षेत्राधिकारियों के ट्रांसफर
    https://wp.me/pcjbvZ-aWS

    19. ये 3 ड्रिंक्स करती हैं कैंसर होने का खतरा कम, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट ने बताया
    https://newz.nd.tv/Lnk/SRWR202509181153243022349894

    20. सेहतमंद रहने के लिए बचपन से ही पोषण का ध्यान रखना है जरूरी, महिलाएं न करें नजरअंदाज
    https://newz.nd.tv/Lnk/SRWR202509181213443022345302

    21. 24 साल बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व सैनिक को दी बड़ी राहत, केंद्र सरकार को विकलांगता मुआवजा देने का आदेश
    https://lalluram.newzo.in/Lnk/SRWR202509181214373022346393

    22. नाबालिग बच्चे का किडनैप और मारकर फेंक दिया झाड़ी में… पिता का सालों पुराना दोस्त ही निकला आरोपी
    https://nz.vayambharat.com/Lnk/SRWR202509181216113022343568

    23. यो यो हनी सिंह पर दर्ज 6 साल पुरानी FIR रद्द, ‘मखना’ गाने पर महिलाओं पर टिप्पणी करने का था आरोप
    https://nz.vayambharat.com/Lnk/SRWR202509181217443022343001
    24. 10 मिनट में घर पहुंचेंगे स्मार्टफोन, वो भी डिस्काउंट के साथ, शुरू होने वाली है खास सेल
    https://nz.vayambharat.com/Lnk/SRWR202509181249023022344052

    25. अमेरिका से आई एक खबर… खुलते ही 83000 के पार सेंसेक्स, आईटी से फार्मा तक तूफानी तेजी
    https://nz.vayambharat.com/Lnk/SRWR202509181250293022342605

    26. 15 हजार से कम में मिल रहा है ये शानदार 5G फोन, 50MP ट्रिपल कैमरा सेटअप के साथ बैटरी भी दमदार
    https://lalluram.newzo.in/Lnk/SRWR202509181250543022348047

    27. किसी भी इमरजेंसी में फोन उठाएं, 112 मिलाएं
    https://wp.me/pcjbvZ-aWY

    28. खनन विभाग में ‘प्राइवेट कर्मचारी’ का दबदबा, सरकारी आदेशों की अनदेखी?
    https://wp.me/pcjbvZ-aX1
    29. अब एक क्लिक पर देखें PF बैलेंस, EPFO ने शुरू किया नया ‘पासबुक लाइट’ फीचर
    https://newz.nd.tv/Lnk/SRWR202509181855463022346377

    30. MBBS डॉक्टर साहब को नहीं आता इंजेक्शन लगाना, मरीज के हाथ की नस में तोड़ दी निडिल
    https://nz.vayambharat.com/Lnk/SRWR202509181858093022343889

    31. मुझे बैठक से किया गया बाहर… केशव मौर्य की बैठक से निकाले जाने पर छलका सपा विधायक आनंद का दर्द, लगाया बड़ा आरोप
    https://nz.vayambharat.com/Lnk/SRWR202509181901123022343111

    32. सोने के दाम में गिरावट की आशंका, खरीदने से पहले सोचें समझें
    https://nz.vayambharat.com/Lnk/SRWR202509181902523022344883

    33. 5 रुपए के लिए 2 साल तक लड़ा केस, अब ‘redBus’ को देना होगा हजार गुना जुर्माना; कोर्ट का आदेश
    https://nz.vayambharat.com/Lnk/SRWR202509181905593022341902

    34. छोटे और सीमांत किसान भी उठाएं आधुनिक कृषि यंत्रों का लाभ
    https://wp.me/pcjbvZ-aX9

    35. लाक्षागृह बनेगा महाभारत सर्किट का नया आकर्षण – जयवीर सिंह
    https://wp.me/pcjbvZ-aXe

  • लाक्षागृह के विकास को 100 लाख रुपए की राशि स्वीकृत

    कौरवों ने बनवाया था लाक्षागृह, पांडवों को आग में जलाने का था षड्यंत्र

    पर्यटन में उभरता जनपद बागपत, 2025 वर्षांत तक 20 लाख पर्यटकों तक पहुंच सकता है आंकड़ा

    लाक्षागृह बनेगा महाभारत सर्किट का नया आकर्षण – जयवीर सिंह

    लखनऊ, (18 सितंबर 2025)। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने महाभारत सर्किट के अंतर्गत बागपत जिले स्थित पौराणिक स्थल लाक्षागृह के समेकित पर्यटन विकास की महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दी है। बड़ौत तहसील के बरनावा (वारणावत) गांव में हिंडन और कृष्णा नदी के संगम पर स्थित यह स्थल महाभारत काल का ऐतिहासिक गवाह माना जाता है। पर्यटन विभाग की ओर से 100 लाख रुपए की धनराशि इस परियोजना के लिए स्वीकृत की गई है। यह जानकारी उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने दी।

    मंत्री ने बताया, ‘विभाग लाक्षागृह जैसे महाभारत कालीन ऐतिहासिक स्थल को धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर प्रमुखता से स्थापित करने के लिए प्रयासरत है। लाक्षागृह महाभारत काल के महत्वपूर्ण स्थलों में से एक है, जहां कौरवों ने पांडवों को जिंदा जलाने के लिए लाख का घर बनवाया था। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक स्थल के संरक्षण और विकास से बागपत धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर और सशक्त होगा।’

    लाक्षागृह के विकास से पर्यटन को मिलेगी नई पहचान

    बागपत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर विशिष्ट पहचान दिलाने के लिए पर्यटन विभाग ने लाक्षागृह के समेकित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। इस परियोजना के तहत पर्यटन स्थल पर सौंदर्यीकरण, आधुनिक प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छ शौचालय, सूचना केंद्र और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इन सुविधाओं के विकसित होने से न केवल स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि जनपद की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को भी नई पहचान मिलेगी।

    पांडवकालीन लाक्षागृह आकर्षण का केंद्र

    बागपत जिला मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर बरनावा (वारणावत) स्थित पांडवकालीन लाक्षागृह ऐतिहासिक धरोहर के रूप में लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। बागपत-मेरठ हाईवे के पास बने एक प्रवेश द्वार से होकर मुख्य स्थल तक पहुंचा जाता है। इसी द्वार से लाक्षागृह की पुरानी इमारत साफ दिखाई देती है। मान्यता है कि महाभारत काल में पांडव यहां निवास करते थे। टीले पर सीढ़ियों के माध्यम से ऊपर चढ़ते ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) का बोर्ड नजर आता है। यह स्थल एएसआई के अधीन है। 

    क्यों चर्चित है लाक्षागृह?

    महाभारत का युद्ध कौरव और पांडवों के बीच लड़ा गया। दुर्योधन ने पांडवों को खत्म करने के लिए कई षड्यंत्र रचे थे, लेकिन उनके लिए सबसे बड़ी साजिश थी लाक्षागृह महल का निर्माण। लाक्षागृह को बनाया ही इसीलिए गया था कि पांडवों को जिंदा जलाया जा सके। महाभारत कथा में इसका कई बार जिक्र हुआ। यह लाख और आसानी से जलने वाले पदार्थों से बना एक महल था, जिसे धृतराष्ट्र ने पुरोचन के द्वारा बनवाया था। पौराणिक कथा के अनुसार, पांडवों- युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव को उनकी मां कुंती के साथ वारणावत के इसी महल में रहने के लिए आमंत्रित किया था। मगर, कौरवों की साजिश नाकाम हो गई। इस स्थान पर आज भी निशान मौजूद हैं, जिससे उस काल की बीती घटना की सत्यता प्रतीत होती है। 

    पर्यटन में तेजी से उभरता बागपत

    बागपत पर्यटन के लिहाज से तेजी से उभरता हुआ स्थल बन रहा है। वर्ष 2024 में यहां 16,73,555 पर्यटक पहुंचे और पर्यटन विभाग का अनुमान है कि साल के अंत तक यह आंकड़ा 20 लाख तक पहुंच सकता है। मेरठ से सटा होने और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के निकट होने के कारण पर्यटक यहां आसानी से पहुंच पा रहे हैं। आगंतुकों की बढ़ती संख्या से स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है और रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

    पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि ‘उत्तर प्रदेश धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है। उन्होंने बताया कि बागपत महाभारत कालीन और पौराणिक स्थलों के लिए विख्यात है। जिले में लाक्षागृह, पुरा महादेव, जैन धर्मावलंबियों का त्रिलोक तीर्थ धाम सहित कई पवित्र स्थल हैं। सरकार का प्रयास है कि इन स्थलों को विश्व पर्यटन मानचित्र पर और अधिक सशक्त तरीके से स्थापित किया जाए, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तर प्रदेश की पहचान एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में और मजबूत हो सके।’

  • भाजपा कार्यकर्ता को मिला कृषि यंत्रों पर अनुदान

    जिला कृषि अधिकारी ने किया भौतिक सत्यापन

    छोटे और सीमांत किसान भी उठाएं आधुनिक कृषि यंत्रों का लाभ

    बिजनौर, उत्तर प्रदेश। बिजनौर के हैबतपुर गांव में कृषि विभाग की महत्वपूर्ण योजना SMAM (Sub-Mission on Agriculture Mechanization) के अंतर्गत भाजपा कार्यकर्ता योगेंद्र सिंह को अनुदान पर प्राप्त लेवलर और शुगर केन ब्रीडर का भौतिक सत्यापन किया गया।

    आज दिनांक 18 सितंबर 2025 को यह सत्यापन स्वयं जिला कृषि अधिकारी जसवीर सिंह तेवतिया ने किया, जिससे योजनाओं में पारदर्शिता और विश्वसनीयता का संदेश दिया गया।

    स्वागत और सम्मान

    जिला कृषि अधिकारी के आगमन पर, वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता चौधरी अवनीश निर्वाल के नेतृत्व में गांव के निवासियों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। फूलमाला और पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका आत्मीय सम्मान किया गया, जो किसानों और विभाग के बीच के सकारात्मक संबंधों को दर्शाता है।

    जिला कृषि अधिकारी का किसानों को पारदर्शिता का संदेश

    भौतिक सत्यापन के बाद, श्री जसवीर सिंह तेवतिया ने किसानों के साथ संवाद किया और उन्हें सरकारी योजनाओं की महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि कृषि विभाग की सभी योजनाएं पूरी तरह से पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त हैं। उन्होंने किसानों को बताया कि:
    1. किसान विभागीय वेबसाइट से टोकन लेकर किसी भी दुकान से अपनी पसंद के कृषि यंत्र खरीद सकते हैं। किसी एक दुकान से खरीदने की कोई बाध्यता नहीं है।
    2. यदि किसी योजना में आवेदन अधिक आते हैं, तो जिलाधिकारी की अध्यक्षता में लॉटरी प्रणाली द्वारा लाभार्थियों का चयन किया जाता है।
    3. अनुदान पर खरीदे गए सभी यंत्रों का भौतिक सत्यापन अनिवार्य है।
    4. किसी भी किसान को कोई समस्या होने पर वह सीधे उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।

    श्री तेवतिया ने किसानों को प्रेरित करते हुए कहा कि सरकार की मंशा है कि छोटे और सीमांत किसान भी आधुनिक कृषि यंत्रों का लाभ उठाएं। ऐसा करने से श्रम की कमी की समस्या दूर होगी, खेती की लागत घटेगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी।

    कार्यक्रम में प्रमुख लोगों की उपस्थिति

    इस महत्वपूर्ण आयोजन में किसान मोर्चा ब्लॉक अध्यक्ष चौधरी बलराम सिंह, मंडल महामंत्री भाजपा सोनू सैनी, भाजपा मंडल मंत्री अशोक कश्यप, शिवलाल कश्यप, सेवानिवृत्त एमडी श्री यशपाल सिंह, किसान मोर्चा नेता नंदराम सैनी, सचिन, अनवर प्रधान गडीकपुरा, सहकारी समिति रामपुर अकबराबाद संचालक श्री गजवीर सिंह, पूर्व प्रधान हैबतपुर विक्रम चौधरी, मास्टर नरेश जी, किसान यूनियन (अराजनीतिक) ब्लॉक उपाध्यक्ष देशराज चौधरी और योगेंद्र चौधरी सहित कई किसान और कार्यकर्ता उपस्थित थे। इस आयोजन से किसानों का सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर विश्वास और मजबूत हुआ है।

  • पिछले 15 सालों से विभाग में कार्यरत है निजी कर्मचारी

    ब्रेकिंग बिजनौर: विभाग की कार्यप्रणाली पर खड़े हुए सवाल

    खनन विभाग में ‘प्राइवेट कर्मचारी’ का दबदबा, सरकारी आदेशों की अनदेखी?

    लखनऊ/बिजनौर, (उत्तर प्रदेश)। बिजनौर के खनन कार्यालय में एक प्राइवेट कर्मचारी की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि यह कर्मचारी पिछले 15 सालों से विभाग में कार्यरत है, जबकि सरकारी नियमों के अनुसार किसी भी गोपनीय सरकारी कार्यालय में प्राइवेट कर्मचारी की नियुक्ति नहीं की जा सकती। इस मामले ने न सिर्फ विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि ईमानदार अधिकारियों की छवि को भी धूमिल करने का आरोप लगाया जा रहा है।

    खनन कारोबारियों और वाहन चालकों के साथ ‘डील’

    स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह प्राइवेट कर्मचारी खनन विभाग की गोपनीय जानकारी बाहर के लोगों को देता है। अक्सर इसे मिट्टी खनन कारोबारियों और वाहन चालकों के साथ ‘डील’ करते हुए भी देखा गया है। जिले में चर्चा है कि इस कर्मचारी की वजह से खनन विभाग की पारदर्शिता और ईमानदार खनन अधिकारी की छवि पर बुरा असर पड़ रहा है। यह स्थिति तब और भी गंभीर हो जाती है जब ऐसे संवेदनशील विभाग में एक अनधिकृत व्यक्ति की इतनी गहरी पैठ हो। इस स्थिति के पीछे खनन बाबू विजय कौशिक का हाथ बताया जा रहा है, जिन्होंने कथित तौर पर इस कर्मचारी को रखा हुआ है!

    उच्चाधिकारियों की चुप्पी और सरकारी आदेशों की अनदेखी
    पूछता है बिजनौर, ऐसा क्या कारण है कि चार बार उच्च अधिकारियों से शिकायत होने और मुख्यमंत्री के स्पष्ट आदेश के बावजूद भी इस प्राइवेट कर्मचारी को खनन विभाग, बिजनौर के कार्यालय से हटाने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पा रहा है? इस मामले को लेकर जिले भर में कई तरह की बातें हो रही हैं। कुछ लोग इसे कर्मचारी का मजबूत नेटवर्क मान रहे हैं, तो कुछ इसे विभागीय मिलीभगत का परिणाम बता रहे हैं। बताया जा रहा है कि खनन अधिकारी सुभाष रंजन ने इस कर्मचारी को हटाने की कोशिश भी की थी, लेकिन उनकी कोशिशें नाकाम रहीं। यह सीधे तौर पर प्रशासन की जवाबदेही और पारदर्शिता पर सवाल उठाता है।

    अनधिकृत रूप से सरकारी कार्यालय की कुर्सी पर बैठा कथित कर्मचारी

    उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश और उनका पालन

    उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए कई सख्त कदम उठाए हैं। विशेष रूप से, सरकारी कार्यालयों में अनधिकृत या प्राइवेट व्यक्तियों की मौजूदगी को लेकर सरकार का रुख बेहद स्पष्ट है। मुख्यमंत्री ने स्वयं कई बार यह निर्देश दिए हैं कि किसी भी सरकारी विभाग में प्राइवेट व्यक्तियों को कार्यालय के गोपनीय कार्यों में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। इस संबंध में, समय-समय पर परिपत्र (circulars) और आदेश भी जारी किए गए हैं।

    इस मामले में, बिजनौर खनन कार्यालय में सरकारी आदेशों का पालन न होना एक गंभीर विषय है। यह सीधे तौर पर प्रशासन की जवाबदेही और पारदर्शिता पर सवाल उठाता है। यह देखना बाकी है कि उच्च अधिकारी इस मामले पर कब और क्या कार्रवाई करते हैं ताकि विभाग की विश्वसनीयता और सरकार की छवि को बहाल किया जा सके!

  • यात्री सुरक्षा और जागरूकता के लिए GRP ने लॉन्च किए पोस्टर-बैनर

    पुलिस महानिदेशक ने किया स्टीकर, पोस्टर और बैनर का अनावरण

    किसी भी इमरजेंसी में फोन उठाएं, 112 मिलाएं

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने पुलिस मुख्यालय, लखनऊ में रेलवे यात्रियों की सुरक्षा और जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की। उन्होंने राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) द्वारा तैयार किए गए स्टीकर, पोस्टर और बैनर का अनावरण किया। इस कार्यक्रम में अपर पुलिस महानिदेशक रेलवे प्रकाश डी. और पुलिस महानिरीक्षक रेलवे मोदक राजेश डी. राव भी उपस्थित थे।

    जन-जागरूकता सामग्री का उद्देश्य

    इस जन-जागरूकता अभियान का मुख्य लक्ष्य रेलवे स्टेशन और ट्रेनों में यात्रा कर रहे लोगों को सुरक्षा के प्रति सचेत करना है। इन पोस्टरों और बैनरों में यात्रियों को सतर्क रहने के उपाय बताए गए हैं और किसी भी आपात स्थिति में यूपी-112 हेल्पलाइन और राजकीय रेलवे पुलिस की मदद लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
    ये पोस्टर और स्टीकर रेलवे परिसर, स्टेशनों और ट्रेन के डिब्बों में लगाए जाएंगे। इनमें यात्रियों को यात्रा के दौरान सावधान रहने, किसी भी संदिग्ध वस्तु या व्यक्ति की जानकारी तुरंत पुलिस को देने और जीआरपी से मदद लेने की अपील की गई है।

    पुलिस महानिदेशक का संदेश

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने कहा कि “यात्रियों की सुरक्षा केवल पुलिस की ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।” उन्होंने यह भी बताया कि जीआरपी और यूपी-112 की टीमें यात्रियों को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए चौबीसों घंटे तैयार रहती हैं।

    अपर पुलिस महानिदेशक रेलवे प्रकाश डी. ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह अभियान यात्रियों में सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाएगा और अपराधों को नियंत्रित करने और दुर्घटनाओं को रोकने में भी सहायक होगा।

    भविष्य की योजनाएं

    राजकीय रेलवे पुलिस का यह प्रयास रेलवे यात्रियों को एक सुरक्षित और सहज यात्रा का अनुभव प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह अभियान जनजागरूकता के पहले चरण के रूप में शुरू किया गया है। इसकी सफलता के बाद, जीआरपी द्वारा रेलवे यात्रियों की सुरक्षा और जागरूकता के लिए और भी बड़े पैमाने पर अभियान चलाए जाएंगे।

  • हाल ही में प्रमोटेड अफसरों को भी नई तैनाती

    44 अपर पुलिस अधीक्षक व 13 क्षेत्राधिकारियों के ट्रांसफर

    लखनऊ। शासन ने सात आईपीएस अधिकारियों के अलावा पीपीएस संवर्ग के 57 अधिकारियों का भी तबादला कर दिया है। इनमें 44 अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) व 13 पुलिस उपाधीक्षक शामिल हैं। बीते दिनों पुलिस उपाधीक्षक से पदोन्नत होकर अपर पुलिस अधीक्षक बने कई अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारी साैंपी गई है। इनमें अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहे संभल के सीओ/एएसपी अनुज कुमार चौधरी को एएसपी (ग्रामीण) फिरोजाबाद के पद पर तैनाती दी गई है।

    स्थानांतरित अपर पुलिस अधीक्षक

    नाम –       वर्तमान तैनाती –    नवीन तैनाती

    1. विजय प्रताप यादव (प्रथम) – सहायक सेनानायक/उपसेनानायक 48वीं वाहिनी पीएसी, सोनभद्र – उपसेनानायक 48वीं वाहिनी पीएसी, सोनभद्र।
    2. शीतांशु कुमार – सीओ/एएसपी एससीआरबी लखनऊ – एएसपी, पीएसी मुख्यालय।
    3. अभिषेक यादव – सीओ/एएसपी संबद्ध डीजीपी मुख्यालय – उपसेनानायक 6वीं वाहिनी एसएसएफ, अयोध्या।
    4. अमित कुमार राय – सीओ/एएसपी एटा – एएसपी (पश्चिम), लखीमपुर खीरी।
    5. आनन्द कुमार पांडेय – सहायक पुलिस आयुक्त/अपर पुलिस उपायुक्त, कमिश्नरेट आगरा – एएसपी (उत्तरी), देवरिया।
    6. अभिषेक कुमार सिंह – सीओ/एएसपी, एटीएस लखनऊ – एएसपी, एटीएस लखनऊ।
    7. प्रभात कुमार (द्वितीय) – सीओ/एएसपी केंद्रीय वस्त्र भंडार, कानपुर – एएसपी सीआइडी मुख्यालय लखनऊ।
    8. श्यामकान्त – सीओ/एएसपी बलिया – एएसपी बस्ती।
    9. बृजनन्दन राय – सीओ/एएसपी बलरामपुर – एएसपी (पश्चिम) प्रतापगढ़।
    10. संजीव कुमार दीक्षित – सीओ/एएसपी एसटीएफ लखनऊ – एएसपी एसटीएफ लखनऊ।
    11. डा.कृष्ण गोपाल सिंह – सीओ/एएसपी फतेहपुर – एएसनी (नगर), बिजनौर।
    12. दिनेश कुमार शुक्ला – सीओ/एएसपी सीतापुर – एएसपी (उत्तरी), बलिया।
    13. संतोष कुमार (तृतीय) – सीओ/एएसपी कासगंज – अपर पुलिस उपायुक्त, कमिश्नरेट गाजियाबाद।
    14. राज कुमार पांडेय – सीओ/एएसपी पीटीसी सीतापुर – एएसपी (यातायात), गोरखपुर।
    15. सोहराब आलम – सीओ/एएसपी पीटीसी (रेलवे), झांसी – एएसपी केंद्रीय वस्त्र भंडार, कानपुर।
    16. प्रीति सिंह – सीओ/एएसपी एलआइयू मेरठ – एएसपी (नगर), झांसी।
    17. बाबा साहब वीर कुमार – सहायक पुलिस आयुक्त/अपर पुलिस उपायुक्त, कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर – अपर पुलिस उपायुक्त, कमिश्नरेट वाराणसी।
    18. ज्ञानेन्द्र कुमार सिंह – एएसपी (नगर), झांसी – एएसपी अमेठी।
    19. रंजन सिंह – एएसपी (स्थापना) डीजीपी मुख्यालय – एएसपी (अपराध) डीजीपी मुख्यालय।
    20. गोपी नाथ सोनी – एएसपी (क्षेत्रीय) अभिसूचना बरेली – अपर पुलिस उपायुक्त, कमिश्नरेट लखनऊ।
    21. राम अर्ज – एएसपी (क्षेत्रीय) अभिसूचना अयोध्या – एएसपी, पीटीएस जालौन।
    22. राहुल मिश्रा – एएसपी डीजीपी मुख्यालय से एएसपी (उत्तरी) देवरिया के लिए स्थानान्तरणाधीन – स्थानान्तरण निरस्त।
    23. विशाल यादव – एएसपी सीआइडी मुख्यालय – एएसपी लाजिस्टिक मुख्यालय।
    24. मनीष कुमार मिश्रा – अपर पुलिस उपायुक्त, कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर – एएसपी (नक्सल) मीरजापुर।
    25. बंशराज सिंह यादव – उपसेनानायक 9वीं वाहिनी पीएसी मुरादाबाद – एएसपी सीआइडी मुख्यालय।
    26. कुलदीप सिंह (प्रथम) – अपर पुलिस उपायुक्त, कमिश्नरेट प्रयागराज – एएसपी (उत्तरी) संभल।
    27. राज कुमार (द्वितीय) – उपसेनानायक 38वीं वाहिनी पीएसी अलीगढ़ – उपसेनानायक 34वीं वाहिनी पीएसी, वाराणसी।
    28. प्रकाश कुमार – एएसपी (पश्चिमी) लखीमपुर खीरी – एएसपी (ग्रामीण) बिजनौर।
    29. अनित कुमार – उपसेनानायक 4वीं वाहिनी पीएसी, प्रयागराज – उपसेनानायक 9वीं वाहिनी पीएसी, मुरादाबाद।
    30. रचना मिश्रा – सेक्टर आफिसर, सीबीआइडी गोरखपुर – एएसपी पीटीएस गोरखपुर।
    31. सुशील कुमार गंगा प्रसाद – अपर पुलिस उपायुक्त, कमिश्नरेट वाराणसी – एएसपी कासगंज।
    32. राजेश कुमार श्रीवास्तव – एएसपी (उत्तरी), संभल – एएसपी केंद्रीस आयुध भंडार, सीतापुर।
    33. डा.राकेश कुमार मिश्रा – एएसपी (ग्रामीण), मेरठ – एएसपी, पुलिस मुख्यालय।
    34. अमिता सिंह – अपर पुलिस उपायुक्त (यातायात), कमिश्नरेट आगरा – एएसपी, यूपी 112 मुख्यालय।
    35. श्वेताभ पांडेय – एएसपी, साइबर क्राइम मुख्यालय – एएसपी, ईओडब्ल्यू मुख्यालय।
    36. पंकज कुमार सिंह – अपर पुलिस उपायुक्त, कमिश्नरेट लखनऊ – उपसेनानायक 20वीं वाहिनी पीएसी, आजगमढ़।
    37. राजेश कुमार भारतीय – एएसपी कासगंज – एएसपी पीटीसी, सीतापुर।
    38. मोनिका चड्ढा – एएसपी, पुलिस भर्ती व प्रोन्नति बोर्ड – उपसेनायक 38वीं वाहिनी पीएसी, अलीगढ़।
    39. अंकिता सिंह – एएसपी, यूपी पीसीएल (मध्यांचल) लखनऊ – एएसपी, पुलिस भर्ती व प्रोन्नति बोर्ड।
    40. संतोष कुमार (द्वितीय) – सीओ/एएसपी सोशल मीडिया सेल, डीजीपी मुख्यालय – एएसपी (सुरक्षा), गोरखपुर।
    41. विजय आनन्द – उपसेनानायक 48वीं वाहिनी पीएसी, सोनभद्र – अपर पुलिस उपायुक्त, कमिश्नरेट प्रयागराज।
    42. डा.जंग बहादुर यादव – सहायक पुलिस आयुक्त/अपर पुलिस उपायुक्त, कमिश्नरेट प्रयागराज – अपर पुलिस उपायुक्त, कमिश्नरेट वाराणसी।
    43. अनुज कुमार चौधरी – सीओ/एएसपी संभल – एएसपी (ग्रामीण), फिरोजाबाद।
    44. अनुराग सिंह – एएसपी (सुरक्षा), गोरखपुर – एएसपी, रामपुर।

    बदले गए ये पुलिस उपाधीक्षक

    नाम –     वर्तमान तैनाती –      नवीन तैनाती

    1. प्रीता – पीटीएस सीतापुर – कमिश्नरेट आगरा।
    2. पंकज लवानिया – कमिश्नरेट प्रयागराज – मेरठ।
    3. वरुण कुमार – कमिश्नरेट प्रयागराज – मुरादाबाद।
    4. शैलेन्द्र सिंह – एलआइयू अयोध्या – कमिश्नरेट आगरा।
    5. राम कृष्ण चतुर्वेदी – सीओ कुंभ मेला प्रयागराज से मंडलाधिकारी चित्रकूट के पद पर स्थानान्तरणाधीन – सुलतानपुर।
    6. आभा सिंह – देवरिया – गोरखपुर।
    7. अब्दुस सलाम खान – सुलतानपुर – कमिश्नरेट प्रयागराज।
    8. प्रशान्त सिंह – सुलतानपुर – मंडलाधिकारी गोरखपुर।
    9. सैय्यद अरीब अहमद – कमिश्नरेट आगरा – कमिश्नरेट लखनऊ।
    10. संजय कुमार जायसवाल – मेरठ – मंडलाधिकारी चित्रकूट।
    11. श्वेता कुमारी – कमिश्नरेट कानपुर – कासो (हिंडन), गाजियाबाद।
    12. अजय कुमार सिंह – कमिश्नरेट गाजियाबाद – अयोध्या।
    13. हेमंत कुमार – कमिश्नरेट आगरा – शामली।

  • ध्यान देने योग्य है ट्रंप की वापसी और इंदिरा गांधी का उदाहरण

    लोकप्रियता के वास्तविक परीक्षण का साहस दिखा पाएंगे मोदी?

    मोदी भी सत्ता से बाहर होकर उठा सकते हैं फिर वापसी का जोखिम ?

    ~ by KP Singh

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर एक विस्तृत विश्लेषण सामने आया है, जिसमें उनकी तुलना अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से की गई है। यह सवाल उठाया गया है कि क्या मोदी अपनी लोकप्रियता के वास्तविक परीक्षण का साहस दिखा सकते हैं, जैसा कि अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप ने किया।

    ट्रंप की वापसी: एक तकनीकी जीत का उदाहरण

    विश्लेषण में डोनाल्ड ट्रंप के 2020 के चुनाव परिणाम को एक तकनीकी हार बताया गया है, न कि जनता द्वारा स्पष्ट अस्वीकृति। वर्ष 2024 में 78 साल की उम्र में उनकी वापसी को अमेरिकी जनता द्वारा उनकी क्षमताओं में विश्वास का प्रमाण माना गया है। अमेरिका में राष्ट्रपति केवल दो कार्यकाल ही रह सकता है, चाहे वह लगातार हों या बीच में ब्रेक के बाद। लेख में यह तर्क दिया गया है कि अगर संविधान अनुमति देता तो शायद ट्रंप को तीसरा कार्यकाल भी मिल जाता। इसके बावजूद, अमेरिकी सिस्टम (अदालतें और मीडिया) ट्रंप की लोकप्रियता का लिहाज नहीं करते और उनकी निरंकुशता को स्वीकार नहीं करते।

    भारत में इंदिरा गांधी की वापसी

    भारत में भी ऐसा ही एक उदाहरण देखने को मिला है, जब 1977 में जनता ने इंदिरा गांधी को सत्ता से बाहर कर दिया था, लेकिन ढाई साल बाद 1980 के मध्यावधि चुनाव में उन्हें भारी बहुमत से वापस सत्ता में लौटा दिया। लेख में सवाल किया गया है कि क्या मोदी को भी ऐसा होने का विश्वास है? क्या वे राजनीतिक शुचिता के लिए सत्ता से बाहर होने का जोखिम उठा सकते हैं? यह तर्क दिया गया है कि अगर उनमें यह आत्मविश्वास होता, तो वे 75 वर्ष की उम्र पूरी होने पर खुद अपने बनाए नियम का पालन करते हुए इस्तीफा दे देते और जनता की प्रतिक्रिया का इंतजार करते।

    भागवत का बयान और 75 वर्ष की उम्र का नियम

    प्रधानमंत्री के 76वें जन्मदिन से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत के बयानों का भी जिक्र किया गया है। शुरुआत में ऐसी खबरें थीं कि भागवत 75 वर्ष की उम्र में रिटायरमेंट की व्यवस्था पर जोर दे रहे थे, जिससे मोदी की बेचैनी बढ़ रही थी। हालांकि, बाद में भागवत ने स्पष्ट किया कि उन्होंने न तो अपने लिए और न ही किसी और के लिए रिटायरमेंट की ऐसी कोई बात कही है।
    लेख में सुमित्रा महाजन जैसे नेताओं का उदाहरण दिया गया है, जिन्हें 75 वर्ष की उम्र पूरी होने के बाद रिटायर कर दिया गया था, जबकि उनकी ऊर्जा और क्षमता में कोई कमी नहीं थी। इस संदर्भ में संघ के सिद्धांत पर भी जोर दिया गया है, जिसमें व्यक्ति पूजा की जगह संगठन को सर्वोपरि माना जाता है।

    लोकतंत्र की मजबूती: व्यक्तिवाद बनाम सिस्टम

    विश्लेषण का अंतिम भाग लोकतंत्र की मजबूती पर केंद्रित है। अमेरिका का उदाहरण देते हुए बताया गया है कि वहां सिस्टम व्यक्ति से ऊपर है! और चेहरा बदलने से भी व्यवस्था नहीं लड़खड़ाती। इसके विपरीत, भारत में व्यक्तिवाद को बढ़ावा देकर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया गया है। यह विडंबना बताई गई है कि संघ, जिसने व्यक्ति को संगठन से ऊपर नहीं रखा, उसकी छत्रछाया में व्यक्ति पूजा को बढ़ावा मिल रहा है। लेख में यह सवाल भी उठाया गया है कि संघ का अगला कदम क्या होगा और भाजपा के नए अध्यक्ष के चुनाव पर इस बात का क्या असर पड़ेगा।

  • नजीबाबाद सीओ ने किया शराब की दुकानों पर औचक निरीक्षण

    नांगल थाना क्षेत्र में पुलिस की औचक कार्रवाई

    सुरक्षा व्यवस्था और अवैध शराब की रोकथाम के लिए चलाया गया सघन चेकिंग अभियान

    बिजनौर। क्षेत्राधिकारी नजीबाबाद ने थाना नांगल क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली शराब की दुकानों पर औचक निरीक्षण और गहन चेकिंग अभियान चलाया। बुधवार 17 सितंबर, 2025 को चलाए गए इस अभियान का उद्देश्य क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और अवैध शराब की बिक्री पर लगाम लगाना था।

    संदिग्धों और वाहनों की गहन जाँच, पूछताछ

    क्षेत्राधिकारी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने शराब की दुकानों के आसपास मौजूद संदिग्ध व्यक्तियों, वस्तुओं और वाहनों की बारीकी से जाँच की। इस दौरान, आने-जाने वाले लोगों से पूछताछ की गई और उनके सामान की तलाशी ली गई ताकि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को रोका जा सके। यह कार्रवाई विशेष रूप से शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई।

    लाइसेंस और बारकोड की जाँच

    चेकिंग अभियान के तहत, पुलिस टीम ने सीधे शराब के ठेकों पर पहुँच कर उनके लाइसेंस, स्टाफ की उपस्थिति और बोतलों पर लगे स्टिकर की जाँच की। शराब की बोतलों पर लगे बारकोड को स्कैन करके यह सुनिश्चित किया गया कि बेची जा रही शराब वैध है और उसमें किसी भी प्रकार की मिलावट या जालसाजी नहीं है। इस प्रक्रिया से नकली और अवैध शराब की बिक्री पर प्रभावी ढंग से रोक लगाई जा सकेगी।

    आवश्यक दिशा-निर्देश जारी

    निरीक्षण के दौरान, क्षेत्राधिकारी ने सभी संबंधित दुकानदारों और स्टाफ को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्हें नियमों का सख्ती से पालन करने, अवैध गतिविधियों में शामिल न होने और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की जानकारी तत्काल पुलिस को देने का निर्देश दिया गया। यह कदम क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • विधायक सूचि मौसम चौधरी ने की “विश्वकर्मा द्वार” बनाने की घोषणा

    बिजनौर में धूमधाम से मनाया गया भगवान विश्वकर्मा पूजन समारोह

    ~ भूपेंद्र निरंकारी

    बिजनौर। श्री विश्वकर्मा मन्दिर आश्रम समिति बिजनौर के तत्वावधान में भगवान विश्वकर्मा पूजन समारोह बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। इस पावन अवसर पर, सुबह 8 बजे श्री विश्वकर्मा मन्दिर, मण्डावर रोड, बिजनौर में हवन-पूजन का आयोजन किया गया, जिसके बाद 11 बजे से भगवान की इच्छा तक विशाल भंडारे का आयोजन हुआ।

    शोभायात्रा का भव्य शुभारंभ

    कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सदर विधायक श्रीमति सूचि मौसम चौधरी ने भगवान विश्वकर्मा जी की शोभायात्रा को हरी झंडी दिखाकर इसका शुभारंभ किया। अपने संबोधन में, उन्होंने विश्वकर्मा समाज को एक सम्मानित समाज बताया और समाज को एकजुट होकर रहने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने नगीना रोड पर स्थित चौराहे पर “विश्वकर्मा द्वार” का निर्माण कराने की भी घोषणा की, जिससे समाज में खुशी की लहर दौड़ पड़ी।

    मनमोहक झांकियां बनीं आकर्षण का केंद्र

    शोभायात्रा में विभिन्न देवी-देवताओं और महापुरुषों की सुंदर-सुंदर झांकियां निकाली गईं, जो लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र रहीं। भगवान विश्वकर्मा, राम-परिवार, शिव-पार्वती परिवार, राधा-कृष्ण, पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह और स्वामी कल्याण देव जी की झांकियों ने ढोल-ताशों और डीजे की धुन पर शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए रेलवे स्टेशन चौराहे पर जाकर समापन किया। शोभायात्रा में भारी संख्या में भक्तगणों ने हिस्सा लिया।

    प्रमुख हस्तियों ने की शिरकत

    इस कार्यक्रम में कई प्रमुख व्यक्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जिनमें आशुतोष विश्वकर्मा (प्रदेश अध्यक्ष, यूथ ब्रिगेड), अनिल विश्वकर्मा (कार्यक्रम प्रभारी), गौरव धीमान, धर्मवीर धीमान, खगेश कुमार (प्रबंधक), कार्यक्रम अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण, कार्यक्रम सचिव राजीव कुमार (एडवोकेट), कोषाध्यक्ष श्रीप्रकाश धीमान और डॉ. कैलाश विश्वकर्मा सहित अन्य सम्मानित सदस्य शामिल थे।

  • ‘स्वच्छ नारी, सशक्त परिवार’

    100 क्षय (टीबी) रोगियों को पोषण से भरपूर पोटली वितरित

    प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर बिजनौर में ‘सेवा पखवाड़ा’ का आगाज

    बिजनौर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन इस वर्ष पूरे देश में ‘स्वच्छ नारी, सशक्त परिवार’ के रूप में मनाया जा रहा है, और इसी के तहत उत्तर प्रदेश में ‘सेवा पखवाड़ा’ की शुरुआत की गई है। इस पहल के तहत, बिजनौर में रेड क्रॉस सोसाइटी ने जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक में एक रक्तदान और पोटली वितरण शिविर का आयोजन किया।

    रक्तदान और क्षय रोगियों को पोषण पोटली का वितरण

    सेवा पखवाड़ा की शुरुआत के अवसर पर, रेड क्रॉस सोसाइटी ने 100 क्षय (टीबी) रोगियों को पोषण से भरपूर पोटली वितरित की। इसके साथ ही, रक्तदान शिविर भी लगाया गया, जहाँ लोगों ने उत्साहपूर्वक रक्तदान किया। यह ‘सेवा पखवाड़ा’ 17 सितंबर से शुरू होकर महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर तक चलेगा।

    इस शिविर का उद्घाटन नगरपालिका परिषद बिजनौर की चेयरमैन श्रीमती इंदिरा सिंह, राज्य महिला आयोग की सदस्य श्रीमती संगीता जैन अग्रवाल, भाजपा के क्षेत्रीय संयोजक डॉ. बीरबल, और भाजपा क्षेत्रीय मंत्री श्रीमती हरजिंदर कौर ने संयुक्त रूप से किया।

    कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत मेडिकल कॉलेज की प्रधानाचार्य उर्मिला कार्य, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. कौशलेंद्र सिंह, सीएमएस बी.आर. त्यागी और महिला सीएमएस डॉ. प्रभा रानी ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता चेयरमैन टीकम सिंह सेंगर ने की, और इसका संचालन सोसायटी के निदेशक और मीडिया प्रभारी योगेंद्र पाल सिंह योगी ने किया।

    इस अवसर पर, डॉ. बीरबल ने रक्तदान के महत्व और ‘स्वच्छ नारी, सशक्त परिवार’ की अवधारणा पर जोर दिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में सोसायटी की वाइस चेयरमैन श्रीमती रचना कपूर, निदेशक डॉ. सुबोध चंद्र शर्मा, सुनील कुमार, रोबिन, योगी अनंत योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा सेवा ट्रस्ट के संरक्षक डॉ. नरेंद्र सिंह, और अन्य अधिकारियों तथा कर्मचारियों का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। महासंघ के जिलाध्यक्ष राकेश शर्मा और श्री वर्मा ने भी इस कार्यक्रम में सहयोग दिया।

  • मदरसा नियुक्तियों में बड़ा खुलासा: जांच के आदेश के बाद भी 4 महीने से नहीं हुई कोई कार्रवाई

    बिजनौर के मदरसा मिफ्ताहुल उलूम पर जांच समिति गठन का मामला

    मदरसे में फर्जी नियुक्तियों की जांच अधर में लटकी

    लखनऊ। बिजनौर के मदरसा मिफ्ताहुल उलूम में फर्जी नियुक्तियों के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। निदेशक, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने 27 मई 2025 को जिलाधिकारी बिजनौर को जांच के लिए एक कमेटी गठित करने का आदेश दिया था, लेकिन आदेश के करीब चार महीने बाद भी इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इस मामले में संबंधित कार्यालय से कोई पुष्ट जानकारी तक नहीं मिल पाई है!

    फर्जी नियुक्तियों पर सरकारी आदेश की अनदेखी

    मदरसा मिफ्ताहुल उलूम, चांदपुर के पूर्व उप सचिव, श्री इफ्तेखार अहमद ने प्रबंधक मोहम्मद जीशान पर फर्जी विज्ञापन प्रकाशित कर अवैध नियुक्तियां करने का आरोप लगाया था। इस शिकायत के बाद, निदेशक अंकित कुमार अग्रवाल ने जिलाधिकारी, बिजनौर को अपर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक त्रिसदस्यीय जांच समिति बनाने का निर्देश दिया था। पत्र में स्पष्ट रूप से 15 कार्यदिवस में जांच रिपोर्ट मांगी गई थी। हालांकि, 27 मई 2025 के इस पत्र के बाद से कोई प्रगति नहीं हुई है। यह सरकारी आदेशों की खुलेआम अनदेखी का एक बड़ा उदाहरण है, जो दर्शाता है कि मदरसों में होने वाली अनियमितताओं पर लगाम लगाने में प्रशासनिक स्तर पर बड़ी ढिलाई बरती जा रही है।

    जांच में देरी पर उठ रहे हैं सवाल

    सवाल यह है कि आखिर इस मामले में जांच क्यों नहीं शुरू हुई? क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है या फिर किसी प्रकार का दबाव, जिसके कारण इस संवेदनशील मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है? इस देरी से मदरसे में अवैध रूप से हुई नियुक्तियों को और बल मिल रहा है, और सरकार की पारदर्शिता पर भी सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।

    मामले का संज्ञान लेकर तुरंत शुरू करनी चाहिए जांच

    यह मामला दिखाता है कि शिकायत के बावजूद, कार्रवाई की प्रक्रिया कितनी धीमी हो सकती है, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है। संबंधित अधिकारियों को इस मामले का संज्ञान लेकर तुरंत जांच शुरू करनी चाहिए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोका जा सके।

  • 16 आईएएस अधिकारियों का तबादला

    उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक महकमे में बड़ा फेरबदल

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मंगलवार शाम को राज्य सरकार ने 16 आईएएस अधिकारियों का तबादला कर दिया है। इस फेरबदल में कई महत्वपूर्ण विभागों के प्रमुखों को बदला गया है। यह प्रशासनिक फेरबदल प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यकुशलता और गतिशीलता लाने के उद्देश्य से किया गया है।

    प्रमुख तबादलों का विवरण

    * रोशन जैकब को लखनऊ मंडल के कमिश्नर पद से हटाकर अब सचिव, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के पद पर तैनात किया गया है।
    * विजय विश्वास पंत को लखनऊ मंडल का नया कमिश्नर बनाया गया है। इससे पहले वे प्रयागराज मंडल के कमिश्नर थे।
    * सौम्या अग्रवाल को प्रयागराज मंडल का नया कमिश्नर नियुक्त किया गया है।
    * अनामिका सिंह को बरेली मंडल का कमिश्नर बनाया गया है।
    * किंजल सिंह, जो अभी तक महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा के पद पर थीं, अब परिवहन आयुक्त का कार्यभार संभालेंगी।
    * बृजेश नारायण सिंह को परिवहन आयुक्त पद से हटाकर सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग बनाया गया है।
    * वरिष्ठ आईएएस अधिकारी बी. चंद्रकला को सचिव, महिला कल्याण तथा बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग से हटाकर सचिव, वन, पर्यावरण एवं जयवायु परिवर्तन विभाग और मुख्य कार्यकारी अधिकारी, उत्तर प्रदेश क्लीन एयर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट अथॉरिटी का प्रभार दिया गया है।
    * मनीषा त्रिघाटिया को आयुक्त एवं सचिव, राजस्व परिषद के पद से हटाकर सचिव, महिला कल्याण तथा बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग बनाया गया है।

    अन्य महत्वपूर्ण बदलाव

    * सुहास एल.वाई., जो पहले से ही सचिव, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के पद पर हैं, को महानिदेशक, युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षा दल का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
    * राजेश कुमार-2 को आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के पद से हटाकर महानिदेशक, पर्यटन बनाया गया है।
    * अपर्णा यू. को सचिव, चिकित्सा शिक्षा विभाग के साथ-साथ महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा, उत्तर प्रदेश का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

  • कार से बरामद हुई ‘FOR SALE IN HARYANA ONLY’ की 473 बोतल

    अवैध विदेशी शराब की बड़ी खेप बरामद, तीन तस्कर गिरफ्तार

    लखनऊ। आबकारी विभाग ने अवैध शराब के खिलाफ चलाए जा रहे अपने विशेष अभियान के तहत एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। लखनऊ के गोसाईगंज क्षेत्र में एक वाहन से 473 बोतल गैर-प्रांत की अवैध शराब बरामद की गई है। इस दौरान तीन तस्करों को भी गिरफ्तार किया गया है।

    गोपनीय सूचना और पुलिस की मदद से गिरफ्तारी

    आबकारी आयुक्त और जिलाधिकारी के आदेश पर तथा जिला आबकारी अधिकारी करुणेंद्र सिंह सचान के नेतृत्व में आबकारी निरीक्षक विवेक सिंह, राहुल सिंह, शिखर मल्ल और अभिषेक सिंह की टीम ने गोसाईगंज में किसान पथ पर नाकाबंदी की। इस दौरान, एक किआ सोनेट (KIA SONET) कार (नंबर PB27L1428) को रोकने का प्रयास किया गया। हालांकि, चालक भागने लगा और ग्रामीण क्षेत्र में घुस गया। आबकारी विभाग ने तुरंत गोसाईगंज पुलिस और सर्विलांस टीम की मदद ली। गहन तलाशी के बाद, कासिमपुर गांव के पास वाहन को रोक लिया गया और उसमें से 473 बोतलें अवैध शराब बरामद की गईं।

    हरियाणा से बिहार जा रही थी खेप

    पूछताछ के दौरान, गिरफ्तार किए गए तस्करों में से एक मोहन ने बताया कि यह शराब हरियाणा से बिहार तस्करी के लिए ले जाई जा रही थी। बरामद की गई शराब में रॉयल स्टैग, ब्लेंडर्स प्राइड और अन्य प्रसिद्ध ब्रांड शामिल हैं, जिन पर ‘FOR SALE IN HARYANA ONLY’ लिखा था।
    गिरफ्तार अभियुक्तों के पास से तीन मोबाइल फोन और 2030 रुपये नकद भी बरामद किए गए। वाहन और शराब को जब्त कर संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

    अवैध शराब के खिलाफ जारी है लगातार अभियान

    यह गिरफ्तारी आबकारी विभाग द्वारा अवैध शराब की तस्करी और बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने के लिए चलाए जा रहे लगातार प्रयासों का हिस्सा है। विभाग ने हाल ही में कई और बड़ी कार्रवाइयां भी की हैं:

    1. मिलावटी शराब का भंडाफोड़: कृष्णा नगर और छितवापुर में छापेमारी कर मिलावटी शराब बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया गया। ये लोग निम्न-गुणवत्ता वाली शराब को उच्च ब्रांड की बोतलों में भरकर बेच रहे थे।

    2. लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई: डालीगंज में एक लाइसेंसी कम्पोजिट शॉप में मिलावटी शराब की बिक्री पाए जाने पर, विक्रेताओं को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया और दुकान का लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई शुरू की गई।

    3. बिना लाइसेंस के बार संचालन: हजरतगंज क्षेत्र में ‘टनाटन रेस्टोरेंट’ में बिना बार लाइसेंस के अवैध रूप से शराब परोसने के आरोप में पांच लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।

    आबकारी विभाग ने स्पष्ट किया है कि अवैध शराब के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।

  • दिल्ली हाई कोर्ट ने जारी किया अदालतों को एक महत्वपूर्ण सर्कुलर

    सशस्त्र बलों और अर्धसैनिक बलों के मामलों की सुनवाई को प्राथमिकता

    नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण सर्कुलर जारी कर दिल्ली की सभी अदालतों को सशस्त्र बलों (थल सेना, नौसेना, वायु सेना) और अर्धसैनिक बलों के कर्मियों से संबंधित मामलों की सुनवाई को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है। यह फैसला इन कर्मियों द्वारा देश की सेवा में दिए जाने वाले योगदान और उनके कर्तव्यों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

    सर्कुलर में दिए गए निर्देश

    रजिस्ट्रार जनरल अरुण भारद्वाज द्वारा 7 अगस्त 2025 को जारी किए गए इस सर्कुलर (संख्या 146/Rules/DHC/2025) में कहा गया है कि माननीय मुख्य न्यायाधीश ने सभी अदालतों को निर्देश दिया है कि वे सशस्त्र बलों से संबंधित दीवानी या राजस्व अदालतों/आपराधिक मामलों की सुनवाई को प्राथमिकता दें।

    सर्कुलर में इन बिंदुओं पर दिया गया है जोर

    1. सशस्त्र बल अधिनियमों का संदर्भ: सर्कुलर में सेना अधिनियम 1950 (धारा 32), नौसेना अधिनियम 1957 (धारा 24) और वायु सेना अधिनियम 1950 (धारा 32) में दी गई विशेष प्रावधानों का उल्लेख किया गया है, जो इन कर्मियों के मामलों को प्राथमिकता देने की बात करते हैं।
    2 भारतीय सैनिक (मुकदमेबाजी) अधिनियम, 1925: इस अधिनियम में विशेष परिस्थितियों में सेवारत भारतीय सैनिकों को दीवानी और राजस्व मुकदमों में विशेष सुरक्षा प्रदान करने का भी जिक्र है।
    3. दिल्ली उच्च न्यायालय के नियम और आदेश: दिल्ली उच्च न्यायालय के नियमों और आदेशों, खंड-1 के अध्याय 6 में भी सेना/वायु सेना कर्मियों से जुड़े मुकदमों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया है।
    4. अर्धसैनिक बलों के मामले: मुख्य न्यायाधीश ने यह भी निर्देश दिया है कि अर्धसैनिक बलों के कर्मियों के मामलों में भी, जहाँ तक संभव हो, शीघ्र सुनवाई और अंतिम निपटान की व्यवस्था की जाए।

    अदालतों को भेजा गया सर्कुलर

    यह सर्कुलर दिल्ली के सभी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को भेजा गया है, जिसमें तीस हजारी, रोहिणी, साकेत, द्वारका, कड़कड़डूमा और पटियाला हाउस कोर्ट शामिल हैं। रोहिणी कोर्ट्स के लिंक ऑफिसर इंचार्ज सुशील कुमार ने 12 अगस्त 2025 को अपने न्यायिक अधिकारियों और संबंधित शाखाओं को इस सर्कुलर की प्रति भेजकर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

    यह निर्णय सशस्त्र और अर्धसैनिक बलों के कर्मियों को कानूनी प्रक्रिया में अनावश्यक देरी से बचाने और उनके हितों की रक्षा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

  • दीपोत्सव अयोध्या की सजावट, 1100 ड्रोन शो, दीपों से झिलमिलाती हुई सरयू नदी

    भारत की समृद्ध संस्कृति, आस्था, परम्परा तथा आधुनिक तकनीकी का समन्वय को दर्शायेगी – पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह

    दीपोत्सव-2025: पर्यटन मंत्री ने की तैयारियों की समीक्षा

    अयोध्या में दीपोत्सव-2025 के दौरान प्रज्जवलित किए जाएंगे 26 लाख से अधिक दीप

    ~ शैली सक्सेना

    लखनऊः 16 सितम्बर, 2025। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने आज गोमती नगर स्थित पर्यटन भवन में अगले महीने अयोध्या में आयोजित किये जाने वाले एतिहासिक दीपोत्सव-2025 की तैयारियों की समीक्षा करते हुए पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि दीपोत्सव को भव्य एवं दिव्य बनाने के लिए सभी तैयारिया समय से पूरी करली जाएं।

    उन्होंने यह भी कहा कि पिछले साल की तरह इस साल भी दीपोत्सव का पिछला रिकार्ड तोड़ते हुए नए कीर्तिमान स्थापित किए जाएं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी के मार्गदर्शन में दीपोत्सव-2025 के माध्यम से पूरी अयोध्या को आलोकित करते हुए दुनिया को भारतीय संस्कृति की भव्यता, आस्था तथा प्राचीनता के साथ आधुनिक तकनीकी का समन्वय अनुभव कराएगी। 

    “दीपोत्सव-2025: आस्था और नवाचार का अद्भुत संगम

    पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने यह भी निर्देश दिये कि “दीपोत्सव-2025 आस्था और नवाचार का अद्भुत संगम होना चाहिये।” इस बार का ग्रीन आतिशबाज़ी शो अंतरराष्ट्रीय मानकों पर तैयार किया जा रहा है, जो पर्यावरण के अनुकूल होगा और आसमान को रंगों की ऐसी छटा से सजाएगा, जिसे दुनिया लंबे समय तक याद रखेगी। पूरे शहर की सजावट और रोशनी को भी अगले स्तर तक ले जाया जा रहा है। सड़कों, घाटों और धरोहर स्थलों को रामायण की जीवंत झलकियों में बदल दिया जाएगा, ताकि हर आगंतुक को लगे, कि मानो वे स्वयं श्री राम की कथा का हिस्सा हो।

    सबसे बड़ा आकर्षण 1100 ड्रोन का शो

    इस आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण होगा 1100 ड्रोन का शो, जो रामायण के प्रसंगों को आसमान में जीवंत करेगा और रचनात्मकता व तकनीक से प्रेरित नए भारत की छवि प्रस्तुत करेगा। उत्सव के केंद्र में जलाए जाएंगे 26 लाख से अधिक दीपक, जिनकी तैयारियाँ युद्धस्तर पर चल रही हैं। इससे नया विश्व रिकॉर्ड बनेगा और श्रद्धालुओं व आगंतुकों को अविस्मरणीय दृश्य मिलेगा। 

    निकाली जाएंगी कम से कम 21 झांकियाँ

    मंत्री जयवीर सिंह ने यह भी निर्देश दिये कि शोभायात्रा सांस्कृतिक एकता का प्रतीक होनी चाहिए। इसके लिए हर राज्य के कलाकारों को आमंत्रित किया जा रहा है। कम से कम 21 झांकियाँ निकाली जाएंगी, जिनमें 7 झांकियाँ रामायण के सात कांडों पर आधारित होंगी और संस्कृति विभाग द्वारा तैयार की जाएंगी।

    छह राज्यों की झांकियाँ पहले ही तय हो चुकी हैं और और अधिक झांकियाँ जोड़े जाने की प्रक्रिया जारी है। रामकथा पार्क में भी विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि देर रात तक उत्सव का माहौल बना रहे।

    पेश की जाएगी भरत मिलाप की झलक

    प्रमुख सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने बैठक में मंत्री जी को अवगत कराया कि आगंतुकों की सुविधा से जुड़ी तैयारियों को अन्तिम रूप दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि भरत मिलाप की झलक पेश की जाएगी और विजुअल शोकेस में राम मंदिर की यात्रा, नींव से लेकर आज तक, साथ ही अयोध्या के नए हवाई अड्डे जैसे विकास कार्य भी दिखाए जाएंगे। पूरे शहर में बड़े लाइव स्क्रीन लगाए जाएंगे ताकि ज्यादा लोग कार्यक्रम देख सकें।

    समीक्षा बैठक में अयोध्या के आयुक्त राजेश कुमार, विशेष सचिव पर्यटन ईशा प्रिया और पर्यटन व संस्कृति विभाग के विशेष सचिव संजय कुमार सिंह, पर्यटन सलाहकार जेपी सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। अयोध्या जिला प्रशासन ने वर्चुअल रूप से भाग लिया।

  • विदुर गुरु ग्रह इंटर कॉलेज के हिंदी अध्यापक रवि प्रकाश आर्य विशेष रूप से सम्मानित

    डॉ. राम स्वरूप आर्य स्मृति हिंदी शोध संस्थान का सम्मान

    ~ भूपेंद्र निरंकारी

    बिजनौर। हिंदी दिवस के अवसर पर, डॉ. राम स्वरूप आर्य स्मृति हिंदी शोध संस्थान ने हिंदी भाषा के संवर्धन में समर्पित शिक्षकों और विद्वानों को सम्मानित किया। इस समारोह में विदुर गुरु ग्रह इंटर कॉलेज, विदुर कुटी के हिंदी अध्यापक रवि प्रकाश आर्य को उनकी हिंदी भाषा के प्रति गहरी लगन और समर्पण के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

    हिंदी के प्रति आर्य परिवार का योगदान

    हिंदी से रवि प्रकाश आर्य का  गहरा जुड़ाव रहा है। उनके पिता डॉ. राम स्वरूप आर्य वर्धमान डिग्री कॉलेज में हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष थे। उन्होंने अनेक पुस्तकों की समीक्षा की और हिंदी भाषा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया, साथ ही लोगों को हिंदी के महत्व से भी परिचित कराया। रवि प्रकाश आर्य के बड़े भाई, डॉ. चंद्रप्रकाश आर्य, भी वर्धमान डिग्री कॉलेज में हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष रहे हैं और उन्होंने भी हिंदी भाषा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

    हिंदी पर रवि प्रकाश आर्य की कविता

    इस अवसर पर, श्री रवि प्रकाश आर्य ने अपनी स्वरचित कविता ‘हिंदी भाषा है अद्भुत निराली’ का पाठ किया, जिसमें उन्होंने हिंदी भाषा की सुंदरता और महत्व को दर्शाया। कविता की पंक्तियाँ थीं….

    हिंदी भाषा है अद्भुत निराली, जैसी लिखी वैसे ही पढ़ी जाने वाली, रिश्तों को प्यारा सा संबोधन देने वाली, जन-जन को एक सूत्र में बांधने वाली, विश्व में अपनी अलग पहचान बनाने वाली”

    रवि प्रकाश आर्य ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदी हमारी मातृभाषा है और हम सभी को इसका सम्मान करना चाहिए। उनके अनुसार, हिंदी केवल एक भाषा नहीं बल्कि हमारी संस्कृति और पहचान का प्रतीक है, जिसे हमें संरक्षित और सम्मानित करना चाहिए।

  • अपनी रचनाओं से कवियों ने मोह लिया श्रोताओं का मन

    पत्रकार पंकज भारद्वाज और कवि संजीव एकल सम्मानित

    ~ भूपेन्द्र निरंकारी

    बिजनौर। युगांतर सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था ने भव्य सम्मान समारोह में दैनिक सांध्य पत्र ‘पब्लिक इमोशन’ के संपादक पंकज भारद्वाज को उनकी साहित्यिक रचना ‘मैं पत्रकार हूं’ के लिए सम्मानित किया गया। उनकी पत्रकारिता जगत में उत्कृष्ट सेवाओं, उपलब्धियों और सामाजिक कार्यों के प्रति समर्पण को देखते हुए, उन्हें एक प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह और शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया।

    समारोह के संयोजक वरिष्ठ उपाध्यक्ष अशोक अग्रवाल और निर्देशक सुरेंद्र जेटली का विशेष योगदान रहा। इसी दौरान, वरिष्ठ कवि संजीव एकल को भी स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन आलोक त्यागी ने किया, जिन्होंने अपनी प्रभावी शैली से पूरे आयोजन को बांधे रखा।

    समारोह में एक शानदार काव्य पाठ का भी आयोजन हुआ, जिसमें जसवंत सिंह, अरुण दीक्षित, विश्वास द्विवेदी, संजीव एकल, शादाब जफर शादाब और जितेंद्र कक्कड़ जैसे कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं का मन मोह लिया।
    अशोक अग्रवाल, वरिष्ठ एडवोकेट विजय कुमार माहेश्वरी, सुरेंद्र जेटली, उमापति गर्ग, और बब्बन जैदी जैसे गणमान्य व्यक्तियों ने अपने विचारों से समारोह की गरिमा को बढ़ाया।
    इस साहित्यिक और सम्मान समारोह का आनंद लेने के लिए पूनम अग्रवाल, कुलबीर कौर, राजू त्यागी, नीरा त्यागी, और बब्बन जैदी सहित कई श्रोता उपस्थित थे। सभी ने इस सफल आयोजन की सराहना की।

  • वेस्टेज प्लांट में गैस रिसाव से हुआ हादसा!

    धामपुर शुगर मिल में दो कर्मचारियों की मौत!

    बिजनौर, उत्तर प्रदेश। बिजनौर जिले के धामपुर थाना क्षेत्र में स्थित धामपुर शुगर मिल के बायो वेस्टेज प्लांट में मंगलवार, 16 सितंबर 2025 को एक दर्दनाक हादसा हुआ। बायो कम्पोज लेकर आए एक टैंकर में दम घुटने से दो व्यक्तियों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान ट्रैक्टर चालक मुकेश पाल (उम्र 25) और उसके सहायक सलमान (उम्र 28) के रूप में हुई है।

    मृतकों के शरीर पर किसी भी तरह की बाहरी चोट के निशान नहीं

    शाम करीब 5 बजे, शुगर मिल के एचआर मैनेजर विजय गुप्ता ने पुलिस को इस घटना की सूचना दी। तत्काल ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और ट्रैक्टर के पीछे लगे गोल टैंकर के अंदर से दोनों के शव बरामद किए। प्रथम दृष्टया ऐसा माना जा रहा है कि वेस्टेज टैंकर की सफाई के दौरान अंदर बनी जहरीली गैस में दम घुटने से दोनों की मृत्यु हुई है। मृतकों के शरीर पर किसी भी तरह के बाहरी चोट के निशान नहीं मिले हैं।

    पुलिस और प्रशासन मौके पर

    घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस अधीक्षक (पूर्वी), एसडीएम और क्षेत्राधिकारी सहित उच्च अधिकारी मौके पर पहुंच गए। मृतकों के परिजन भी शुगर मिल पर मौजूद हैं, जिनसे पुलिस और प्रशासन की टीमें बातचीत कर रही हैं। शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल की मोर्चरी भेजने की प्रक्रिया जारी है। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है ताकि घटना के सही कारणों का पता लगाया जा सके।

  • कैसे इस्तेमाल करें बचे हुए चावल?

    सेहत के लिए फायदेमंद है बासी रोटी

    बासी रोटी खाना सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है. अमेरिकन नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, रात भर रखी हुई रोटी में फर्मेंटेशन की प्रक्रिया होती है, जिससे रेसिस्टेंट स्टार्च बनता है. यह स्टार्च शरीर में धीरे-धीरे पचता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और ब्लड शुगर का स्तर अचानक नहीं बढ़ता. यही वजह है कि बासी रोटी डायबिटीज के मरीजों के लिए विशेष रूप से लाभदायक हो सकती है, खासकर जब इसे ठंडे दूध के साथ खाया जाए.

    बासी रोटी के कुछ और भी हैं फायदे:

    1. ब्लड प्रेशर कंट्रोल: ठंडे दूध के साथ बासी रोटी खाने से ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है. यह शरीर को ठंडक पहुंचाती है और तनाव कम करती है.
    2. पेट की समस्याएं: बासी रोटी में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है. यह आंतों में गुड बैक्टीरिया के विकास को बढ़ावा देती है.
    3. वजन प्रबंधन: बासी रोटी खाने से पेट लंबे समय तक भरा रहता है, जिससे आप बार-बार खाने से बचते हैं. यह भूख को नियंत्रित करके वजन घटाने में मदद कर सकती है.
    4. शरीर को मिलती है ठंडक: गर्मियों में बासी रोटी और दूध का सेवन शरीर के तापमान को संतुलित रखने में मदद करता है. यह शरीर को लू से बचाता है और गर्मी के कारण होने वाली अन्य परेशानियों से राहत देता है.

    हालांकि, ध्यान रखें कि रोटी को साफ-सुथरी जगह पर और सही तरीके से स्टोर किया गया हो, ताकि उसमें किसी तरह की फफूंदी न लगे या वो खराब न हो. अगर रोटी में कोई अजीब गंध या रंग दिखे, तो उसे न खाएं.

    बासी रोटी का उपयोग सिर्फ खाने के लिए ही नहीं, बल्कि कुछ और तरीकों से भी किया जा सकता है.

    बासी रोटी के कुछ और उपयोग :

    1. पशुओं के लिए भोजन
    बासी रोटी को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़कर गाय, भैंस या अन्य पशुओं को खिलाया जा सकता है. यह उनके लिए एक अच्छा और पौष्टिक आहार होता है, जिससे खाने की बर्बादी भी नहीं होती.
    2. पक्षी और जानवरों के लिए चारा
    आप बासी रोटी के टुकड़े करके पक्षियों या आवारा जानवरों (जैसे कुत्तों) को भी खिला सकते हैं. यह उनकी भूख मिटाने में मदद करता है.
    3. खाद के रूप में
    अगर रोटी इतनी सूख गई है कि खाने लायक न हो, तो आप उसे जैविक खाद बनाने में इस्तेमाल कर सकते हैं. रोटी को कंपोस्ट बिन में डालने से वह मिट्टी में मिलकर पौधों के लिए पोषक तत्व प्रदान करती है.

    बासी रोटी से स्वादिष्ट स्नैक

    आपको यह जानकर हैरानी होगी कि बासी रोटी का इस्तेमाल एक पारंपरिक और स्वादिष्ट स्नैक बनाने के लिए भी किया जाता है, जिसे भारत के कई हिस्सों में ‘रोटी का चूरमा’ कहते हैं.

    रोटी का चूरमा

    इसे बनाने के लिए बासी रोटी को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ा जाता है और फिर उसे घी या तेल में तला जाता है, जब तक कि वह कुरकुरी न हो जाए. तलने के बाद, इन टुकड़ों को शक्कर या गुड़ के साथ मिलाया जाता है और इलायची पाउडर डालकर स्वादिष्ट बनाया जाता है. यह न सिर्फ खाने की बर्बादी रोकता है, बल्कि एक स्वादिष्ट व्यंजन भी बन जाता है.
    यह तरीका बासी रोटी को एक नया जीवन देता है और उसे एक पौष्टिक और स्वादिष्ट पकवान में बदल देता है.
    क्या आप किसी और भारतीय व्यंजन के बारे में जानना चाहेंगे, जो खाने की बर्बादी को रोकने में मदद करता है?

    ‘बचे हुए चावल की टिक्की’

    एक और दिलचस्प भारतीय व्यंजन है ‘बचे हुए चावल की टिक्की’. यह भी खाने की बर्बादी को रोकने का एक बेहतरीन तरीका है और बेहद स्वादिष्ट भी होता है.

    अक्सर घरों में दोपहर या रात के खाने के बाद थोड़े चावल बच जाते हैं. इन बचे हुए चावलों को फेंकने के बजाय, आप उनसे कुरकुरी और स्वादिष्ट टिक्की बना सकते हैं.
    इसे बनाने का तरीका बहुत आसान है:
    * बचे हुए चावलों को मसलकर नरम कर लें.
    * इसमें बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च, धनिया पत्ती, और कुछ मसाले (जैसे हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, और गरम मसाला) मिलाएं.
    * इसमें बाइंडिंग के लिए बेसन या चावल का आटा मिलाएं.
    * अब इस मिश्रण से गोल या चपटी टिक्की बनाएं.
    * इन टिक्कियों को तवे पर या पैन में थोड़ा तेल डालकर दोनों तरफ से सुनहरा और कुरकुरा होने तक सेक लें.
    ये टिक्कियां चटनी या दही के साथ खाने में बहुत अच्छी लगती हैं. यह न सिर्फ खाने की बर्बादी रोकता है, बल्कि एक पौष्टिक और स्वादिष्ट नाश्ता भी बन जाता है.
    क्या आप कोई और भारतीय व्यंजन के बारे में जानना चाहेंगे, जो खाने की बर्बादी को रोकने में मदद करता है?

    ‘बचे हुए चावल का पुलाव’

    इसके अलावा! एक और शानदार तरीका है ‘बचे हुए चावल का पुलाव’ बनाना. यह खाने की बर्बादी रोकने के साथ-साथ एक पौष्टिक और झटपट तैयार होने वाला व्यंजन है.
    बचे हुए चावल का पुलाव
    अक्सर जब हम रात में चावल बनाते हैं, तो थोड़े बच जाते हैं. उन्हें फेंकने के बजाय, आप अगली सुबह उनका इस्तेमाल करके एक स्वादिष्ट पुलाव बना सकते हैं.
    इसे बनाने के लिए:
    * एक पैन में थोड़ा तेल या घी गरम करें.
    * इसमें राई, जीरा, कड़ी पत्ता और प्याज डालकर भूनें.
    * आप अपनी पसंद की सब्जियां जैसे गाजर, मटर, शिमला मिर्च और गोभी भी डाल सकते हैं.
    * अब इसमें बचे हुए चावल और थोड़ा नमक, हल्दी और गरम मसाला डालकर अच्छी तरह मिला लें.
    * इसे धीमी आंच पर कुछ मिनटों तक पकने दें, जब तक कि चावल पूरी तरह गरम न हो जाएं और मसालों का स्वाद उनमें अच्छी तरह मिल न जाए.
    यह विधि न सिर्फ खाने की बर्बादी को रोकती है, बल्कि आपको एक पौष्टिक और स्वादिष्ट नाश्ता भी देती है.

    खाने की बर्बादी कम करने के लिए कुछ आसान और असरदार तरीके :

    1. खरीदारी की योजना बनाएं
    बाजार जाने से पहले, एक लिस्ट तैयार करें. इससे आप सिर्फ वही सामान खरीदेंगे जिनकी आपको ज़रूरत है. साथ ही, “फर्स्ट इन, फर्स्ट आउट” (First-In, First-Out) नियम को अपनाएं – यानी जो सामान आपने पहले खरीदा है (पुराना है), उसे पहले इस्तेमाल करें.
    2. सही मात्रा में खाना परोसें
    अपनी थाली में उतना ही खाना लें, जितना आप खा सकें. अगर ज़रूरत हो, तो आप दोबारा ले सकते हैं. यह एक बहुत ही सरल आदत है जो काफी मात्रा में भोजन को बर्बाद होने से बचा सकती है.
    3. बचे हुए खाने को सही से स्टोर करें
    बचे हुए खाने को फ्रिज में एयरटाइट कंटेनर में रखें. इससे वह जल्दी खराब नहीं होगा. आप बचे हुए खाने को अगले दिन के लंच या डिनर में इस्तेमाल कर सकते हैं, जैसा कि हमने बासी रोटी और चावल के पुलाव के उदाहरणों में देखा.
    4. खराब हो रही सब्जियों और फलों का इस्तेमाल करें
    अगर आपके पास कुछ सब्जियां या फल हैं जो खराब होने लगे हैं, तो उन्हें जल्दी से इस्तेमाल कर लें. जैसे, आप उनसे सूप, चटनी, या स्मूदी बना सकते हैं.
    खाने की बर्बादी को कम करना एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण आदत है, जो न केवल पैसे बचाती है बल्कि पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव डालती है.

  • ~ KP SINGH

    Jalaun Times, सच का सफर

    सरकार को भस्मासुरी आशीर्वाद

    व्यक्ति हो या देश उसे दूसरे के सामने अपनी कमजोरी नहीं माननी चाहिए और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अंतिम सीमा तक प्रयास करना चाहिए। यह बात सच है लेकिन वास्तविकता सभी जानते हैं कि अमेरिका का जो कोप कहर भारत पर टूट रहा है उससे देश मुश्किल हालातों से दो-चार है। सरकार ने विकल्प की तलाश में चीन और अमेरिका की गोद में बैठकर देख लिया लेकिन इससे संकट का तोड़ निकलने वाला नहीं है; यह बात हमारी सरकार अच्छी तरह जानती है। दक्षिण एशिया की राजनीति में चीन भारत से प्रतिस्पर्धा मानता है। कम्युनिस्ट विचारधारा के लबादे में चीन का चरित्र मूल रूप से साम्राज्यवादी है। वह दुनियां में सर्वोच्चता कायम करने की लोलुपता के तहत काम करता है। हर देश की संप्रभुता को आहत करना उसकी फितरत है। वह विश्व शांति के लिए एक शैतान आत्मा की तरह पेश आ रहा है जो अपने विघ्न संतोषी रवैये से जहां मौका मिल रहा है, वहां खलल डालने से बाज नहीं आता। वैश्विक वर्चस्व के लिए उसे अमेरिका से आगे निकलना है, लेकिन अगर वह अपने क्षेत्र में ही अपनी सर्वोपरिता को मान्य नहीं करा पाया तो विश्व की सबसे बड़ी महाशक्ति का उसका दर्जा कैसे साकार हो पायेगा?

    कौन किसका इस्तेमाल करे

    इसलिए भारत ने पींगे बढ़ाई तो चीनी हुकूमत का रवैया रणनीति के तहत उसके प्रति तात्कालिक तौर पर मधुर हो गया। जैसा कि उसने शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन में किया। मोदी से शी जिंनपिंग बहुत गर्मजोश होकर मिले लेकिन सभी जानते हैं कि चीनी नेताओं को एक चेहरे पर कई चेहरे चढ़ा लेने की कला कितनी अच्छी तरह आती है। शी जानते थे कि भारत की उसके लिए रसिकता अमेरिका को दिखाने के लिए है, ताकि घबराकर अमेरिका उसके प्रति अपना रवैया नर्म करने की सोचने लगे। लेकिन इस पूरे प्रहसन में शी पूरी तरह खबरदार रहकर अपना खेल खेल रहे थे। खेल इस बात का था कि भारत अपनी जटिल स्थितियों से पार पाने के लिए चीन का इस्तेमाल कर पाता है या चीन भारत की गरज को अपने पक्ष में अच्छी तरह भुना पाता है। अन्यथा एक ओर शी आमने-सामने मोदी को इतना महत्व देने का अभिनय कर रहे थे तो दूसरी ओर उनकी अगुवानी के लिए स्वयं पहुंचने या अपने किसी वरिष्ठ मंत्री को भेजने का ध्यान न रखकर उन्होंने यह भी बताने की चेष्टा की थी कि चीन की निगाह में भारत का भाव कितना है। शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन के बाद शी ने पाकिस्तान को एससीओ की आतंकवाद पर नियंत्रण के लिए गठित समिति का अध्यक्ष बनाकर मोदी को जो संदेश दिया उसे कदापि अच्छा नही माना जा सकता। यह एक तरह से भारत को अपमानित करने की धृष्टता में शुमार होता है।

    भारत के लिए चीन के मन में स्थाई शत्रुता ग्रंथि

    …तो स्पष्ट है कि चीन के मन से भारत के लिए शत्रुता की ग्रंथि को निकाला जाना हाल-फिलहाल बिल्कुल संभव नहीं है। ऐसे में अमेरिका की प्रताड़ना की भरपाई के तौर पर चीन के साथ भारत के निकट होने का कोई मूल्य नहीं है। उधर भारत ने जियो पॉलिटिक्स में गलत चालें चलकर रूस के साथ भी संबंधों में पहले जैसी शिद्दत गंवा दी है। दूसरी ओर रूस इस बीच अमेरिका के हस्तक्षेप को संतुलित करने के लिए चीन से निकटता बढ़ाने में काफी दूरी तय कर चुका है। ऐसे में अगर कोई निर्णायक बिंदु आता है तो चीन के दबाव में रूस भले ही भारत की खुली खिलाफत न करे लेकिन वह तटस्थ रुख अपना सकता है और यह भी भारत के लिए नुकसानदेह ही होगा। तो यह स्वीकार किया जाना चाहिए कि फिलहाल तो भारत अजाब में फंस गया है।

    विदेश नीति की खुलती परतें

    मोदी सरकार ने वैश्विक समीकरणों में देश के लिए जोखिम में डालने वाला ट्विस्ट क्यों लिया इसकी परतें अब खुल रहीं हैं। ऐसे काफी तथ्य सामने आते जा रहे हैं, जिनसे पता चलता है कि देश की अर्थनीति ही नहीं, विदेश नीति भी मोदी सरकार को परदे के पीछे से चलाने वाले चंद उद्योगपति तय कर रहे हैं। आज सत्ता के गलियारों में मोदी और अंबानी के बीच बिगाड़ हो जाने की अफवाहें तैर रही हैं लेकिन कल तक बहुत मामलों में मुकेश अंबानी मोदी सरकार के नियंता थे। उनका एक थिंकटैंक ऑब्जर्बर रिसर्च फाउंडेशन के नाम से है, जिसको अमेरिका में हमारे विदेश मंत्री जय शंकर का बेटा ध्रुव जय शंकर लीड करता है। इसी फाउंडेशन के प्रभाव में मोदी सरकार ने अपनी विदेश नीति को अमेरिका की तरफ इतना झुका दिया कि भारत अमेरिका का स्वतंत्र राष्ट्र की बजाय अनुचर नजर आने लगा। यह फाउंडेशन भारत में रायसीना डायलॉग के नाम से विदेश नीति पर सेमिनार कराता है, जिसके खर्चे का एक अंश भारत सरकार उठाती है। निजी संस्थान के फाउंडेशन के लिए भारत सरकार खर्चा करे इसकी क्या तुक है? यह संस्थान मूल रूप से अमेरिका में अंबानी के कारोबारी फायदे के लिए लॉबिंग करता है भले ही उससे देश के हितों का नुकसान हो जाए।

    कारपोरेट गैंगवार में उलझी भारत की विदेश नीति

    इसीलिए ट्रंप, जिनसे मुकेश अंबानी ने पारिवारिक संबंध बना रखे हैं जब अमेरिका में फिर से सत्ता में आये तो उन्होंने भारत को पालतू बिल्ली की तरह ट्रीट किया। उन्हें विश्वास था कि मुकेश अंबानी के पास मोदी सरकार की चाभी है, जिनका उपयोग करके वे जैसा चाहेगे मोदी सरकार को नचा लेंगे। …लेकिन भारत में सत्ता के नजदीकी कॉरपोरेट घरानों में गैंगवार छिड़ गया, जिसमें एक ध्रुव पर मुकेश अंबानी खड़े थे तो दूसरी पर अडाणी। यह टकराव इतना बढ़ा कि मोदी सरकार खुलकर अडाणी के पक्ष में खड़ी हो गयी। ट्रंप को जब यह एहसास हुआ कि अंबानी उसके काम के नहीं रह गये तो उसने अंबानी को एक किनारे कर दिया। अब वह मोदी सरकार की गर्दन मरोड़ने के लिए अडाणी के कंधों का इस्तेमाल करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। अडाणी पर अमेरिका की एक अदालत में मुकदमा कायम हो गया है जिसमें आरोप यह है कि अडाणी की ग्रीन एनर्जी कम्पनी ने सोलर बिजली को मंहगे दामों पर बेचने के लिए तेलंगाना सहित कुछ राज्य सरकारों के अधिकारियों को 2000 करोड़ रुपये की रिश्वत दी थी और इस रिश्वत की व्यवस्था के लिए तथ्य छुपाकर उसने अमेरिका के इन्वेस्टर्स से रकम इकटठा की थी। इस मामले में अदालत ने अडाणी को समन जारी किया था। जिसे मोदी सरकार ने आज तक सर्व नहीं होने दिया है, जबकि भारत और अमेरिका के बीच एक संधि है जिसके तहत दोनों देश कानूनी मामलों में एक-दूसरे की मदद करने के लिए बाध्य है।

    अडाणी के तोते में मोदी सरकार की जान

    तथ्यों को देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि मोदी सरकार ने अमेरिका में अपने प्रिय अडाणी को बचाना सर्वोपरि नैतिक कर्तव्य मान रखा है। इसके कारण राहुल गांधी के चैलेंज देने पर भी मोदी ने ट्रंप की लफ्फाजी को उनका नाम लेकर झुठलाने का साहस नहीं दिखा पाया। जबकि इस कापुरुषता से मोदी को बड़ी किरकिरी झेलनी पड़ी। अडाणी को मौका देने के लिए ही वे उन्हें अमेरिकी अदालत का समन नहीं मिलने दे रहे क्योंकि अगर समन अडाणी को पहुंच गया तो अडाणी अमेरिकी अदालत में उपस्थित होने के लिए बाध्य हो जाएंगे और ऐसी स्थिति में अमेरिकी अदालत उन्हें जेल भी भेज सकती है। मोदी जितने बेचैन हो रहे हैं, ट्रंप को उनकी कमजोर नस दबाने में उतना ही मजा आ रहा है।

    अदालत के बाहर समझौते में ट्रंप की अड़ंगेबाजी

    अडाणी ने अदालत के बाहर अमेरिकी एजेंसियों से बात करके मामले को निपटा लेना चाहा था। निश्चित रूप से इसमें मोदी सरकार के भी प्रयास रहे होंगे, जिससे अदालत के बाहर हो रही यह समझौता वार्ता सफल होने के आसार बन गये थे, पर अमेरिका एकदम ब्लैकमेलिंग पर उतारू हो गया। उसने कह दिया है कि जब तक भारत अपनी कंपनियों को रूस से सस्ते में तेल लेकर दुनियां के दूसरे देशों को मंहगा बेचने से नहीं रोकेगा, तब तक अदालत के बाहर अडाणी से अमेरिकी एजेंसियां कोई समझौता नहीं करेंगी। बीच में अमेरिका को पटाने के लिए उसके यहां से आयात होकर आने वाले कॉटन को भारत सरकार ने पूरी तरह टैक्स फ्री कर दिया, जिसकी व्यापक आलोचना हुई थी और देश के किसानों में इसके कारण बड़ा असंतोष देखा गया था, लेकिन अमेरिका इतना निर्मम हो गया है कि भारत की इस जुगत से भी वह नहीं पसीज सका है।

    भारत को सबक सिखाने के लिए अडाणी की गिरफ्तारी संभव

    ध्यान देने वाली बात यह है कि ट्रंप ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने का जो कदम उठाया है अमेरिका की संघीय अदालत उसे अनाधिकार चेष्टा करार दे चुकी है। इस पर ट्रंप ने आपातकालीन शक्तियों का प्रयोग अपने दुराग्रह पूरा करने के लिए कर डाला। लेकिन आपातकालीन शक्तियां सीमित समय के लिए होती हैं। अक्टूबर में यह समय समाप्त हो जाने वाला है। इसके बाद ट्रंप भारत पर बेजा टैरिफ लगाने की स्थिति में नहीं रह जायेगें। लेकिन भारत इस तरह बच गया तो ट्रंप को इसमें अपनी बहुत बड़ी किरकिरी नजर आ रही है। इसलिए उन्होंने एकदम बहुत आक्रामकता अख्तियार कर ली है। वे अक्टूबर के पहले भारत को झुक जाना देखना चाहते हैं। ऐसे में वह अमेरिकी अदालत से अडाणी के खिलाफ वारंट निकलवाने और उन्हें इंटरपोल के माध्यम से गिरफ्तार कर लेने तक का कदम उठाने की सोचें तो कोई बहुत बड़ी बात नहीं होगी।

    अडाणी-अंबानी में लगे लाल के आगे मोदी लाचार

    पर सवाल यह है कि अंबानी-अडाणी में ऐसे कौन से लाल लगे हैं जो सरकार उनके लिए राष्ट्रहित तक दांव पर लगाने में गुरेज महसूस नहीं कर रही है। दुनियां के हर लोकतंत्र में चुनाव लड़ने और पार्टी चलाने के लिए राजनीतिक दलों और सरकारों को उद्योगपतियों को साधना पड़ता है। अतीत में भी भारत में सत्तारूढ़ दलों ने ऐसा किया है। लेकिन उनसे चंदा लेने और बदले में उनको सहूलियत देने की एक सीमा होती थी। सरकार कभी किसी उद्योगपति को अपने को इतना नहीं बेचती थी कि वह उसकी बंधुआ बन जाये। पर अब जो हो रहा है उसमें कोई सीमा नहीं है। अब यह एकदम स्पष्ट हो चुका है कि मोदी ने अमेरिका के संबंध में अपने को इस स्थिति में इसलिए धकेला है क्योंकि उनके लिए देश से ज्यादा अडाणी और अंबानी के सरोकार महत्वपूर्ण हैं। आखिर उन पर इतनी मेहरबानी का कारण क्या है। यह लोगों की, देश की, सचमुच किस आवश्यकता की पूर्ति करते हैं, यह लोग स्टील किंग लक्ष्मी मित्तल की तरह भी नहीं हैं, जिन्होंने दुनियां की जरूरत के किसी क्षेत्र में भारत का परचम सबसे ऊंचा करके लहराया हो, यह कोई ऐसे उद्योगपति भी नही हैं जिन्होंने सेवा के क्षेत्र में मानक स्थापित किये हों, यह कोई ऐसे कुबेरपति नहीं हैं, जिनके प्रति मानव कल्याण के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने के लिए लोग उनके सामने अपने को सहज ही श्रद्धावनत होना महसूस करते हों, ऐसे उद्योगपति भी नहीं हैं, जिन्होंने बहुत लोगों को नौकरियां दी हों, कामगारों की कल्याण की व्यवस्थाएं करने के लिए जिनकी यशगाथा गायी जाती हो।
    गांधी जी कहते थे कि व्यापार में भी नैतिकता होनी चाहिए। इस कसौटी पर इन कॉरपोरेट घरानों को परखा जाये तो व्यवसाय के लम्पट चरित्र की बानगी सामने आती है। अर्थ पुरुषार्थ भी है और पाप भी है। सरकारी नियमों में सेंध लगाने की बाजीगरी, टैक्स की अदायगी में हेराफेरी, शेयर बाजार में मेनुपुलेशन यह इनके कारोबारी मंत्र हैं। ऐसे लोगों को प्रोत्साहन देने की नीति रचनात्मक उद्यमिता का विनाश करती है। आखिर दिवालियेपन की कगार पर खड़े अनिल अंबानी का देश पर ऐसा कौन सा एहसान था जो लड़ाकू विमान के पुर्जा बनाने में उन्हें साझेदार बनाने के लिए राफेल को मजबूर किया गया जबकि अंबानी को डिफेंस सेक्टर का कोई अनुभव नहीं था। प्रतिस्पर्धा आयोग विलाप करता ही रह गया और आपने हवाई अडडे, रेलवे स्टेशन देने में एकतरफा तौर पर अडाणी को अनुग्रहीत किया।

    लोकतंत्र में सरकार की निगहबानी

    लोकतंत्र के लिए जनता से जिस बुनियादी अर्हता की दरकार होती है वह है कि अपनी पसंद की सरकार के कार्यों की निगरानी से भी वह चूंक न करती हो। कुछ लोग अगर यह करने को देश द्रोह करार देकर लोगों का मुंह बंद कराने लगें तो उन्हें डपट दिया जाना चाहिए कि देश कुछ लोगों की बपौती नहीं है जिनके कहने से यह तय हो कि सरकार से सवाल पूछे जाये या न पूछे जायें। इस देश पर यहां के हर नागरिक का अधिकार है इसलिए देश के साथ कुछ गलत होता दिखे तो वह सवाल पूछेगा और सरकार को उसे संतुष्ट करना पड़ेगा। उसकी पंसद की सरकार भी तभी लोगों के सपने पूरे करने की जबावदेही पर खरी उतर सकती है जब उसे एहसास हो कि वह लोगों की पैनी निगहबानी के दायरे में है। सरकार में बैठे लोग अपने को भगवान साबित करने लगें और लोग इसे मानने लग जायें तो लोकतंत्र बेमौत मारा जायेगा। क्या देश इस तरह की गफलत का शिकार होने की स्थिति में तो नहीं पहुंच गया है?