लखनऊ साइबर सेल और इटौंजा पुलिस का बड़ा खुलासा
100 करोड़ से अधिक के फर्जीवाड़े की आशंका
मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी पुलिस
मजदूर के नाम पर फर्जी फर्म बनाकर 2.75 करोड़ की टैक्स चोरी, महिला समेत चार गिरफ्तार
~ शैली (newsdaily24)
लखनऊ। राजधानी की साइबर सेल, स्वाट और इटौंजा पुलिस की संयुक्त टीम ने जीएसटी चोरी करने वाले एक शातिर अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह ने एक साधारण मजदूर के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर फर्जी फर्म बनाई और करोड़ों रुपये का कागजी कारोबार दिखाकर सरकार को चूना लगाया। पुलिस ने इस मामले में एक महिला समेत चार आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि गिरोह का मुख्य मास्टरमाइंड अभी भी फरार है।

कागजों पर चलता था करोड़ों का कारोबार
डीसीपी (अपराध एवं साइबर अपराध) कमलेश दीक्षित के अनुसार, यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब राज्य कर विभाग के सहायक आयुक्त अभिमन्यु पाठक ने सितंबर 2025 में इटौंजा थाने में मुकदमा दर्ज कराया। जांच में सामने आया कि कानपुर निवासी मजदूर दौलतराम के नाम पर ‘स्वराज ट्रेडर्स’ नामक फर्म पंजीकृत की गई थी। इस फर्म के जरिए एल्युमिनियम वेस्ट, स्क्रैप और स्टील की फर्जी बिक्री दिखाई गई। हैरानी की बात यह है कि यह व्यापार केवल कागजों पर था, धरातल पर फर्म का कोई अस्तित्व नहीं मिला।
10-20 हजार के लालच में हड़पे दस्तावेज
पुलिस की विवेचना में गिरोह के काम करने के तरीके (Modus Operandi) का सनसनीखेज खुलासा हुआ है:
* दस्तावेजों की खरीद: गिरोह गरीब लोगों को 10 से 20 हजार रुपये का लालच देकर उनके आधार और पैन कार्ड ले लेता था।
* फर्जी पंजीकरण: इन दस्तावेजों के आधार पर मास्टरमाइंड अम्मार अंसारी की मदद से जीएसटी पोर्टल पर फर्जी फर्म रजिस्टर कराई जाती थीं।
* कमीशन का खेल: फर्जी फर्म बनाने के बदले बिचौलियों को 1 लाख रुपये तक मिलते थे। मजदूर दौलतराम को उसके दस्तावेजों के बदले मात्र 25 हजार रुपये दिए गए थे।

पुलिस ने इस फर्जीवाड़े में शामिल चार लोगों को गिरफ्तार किया है:
* तबस्सुम उर्फ जान्हवी सिंह: गिरोह की अहम सदस्य, जो पहचान बदलकर लोगों को फंसाती थी।
* प्रशांत बेंजवाल: कानपुर के एक मॉल का पूर्व कैशियर, जो तबस्सुम के साथ मिलकर नेटवर्क चला रहा था।
* सुमित सौरभ: ‘एसएस गैलक्सी’ और ‘एसएस इंटरप्राइजेज’ का मालिक, जिसने फर्जी इनवॉइस के जरिए 19 लाख की टैक्स चोरी की।
* दौलतराम: वह मजदूर जिसके नाम पर फर्जी फर्म ‘स्वराज ट्रेडर्स’ बनाई गई थी।
> “जांच में पता चला है कि इस गिरोह ने न केवल टैक्स चोरी की, बल्कि 52 लाख रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) भी अन्य कंपनियों को अवैध रूप से बेचा। आशंका है कि यह पूरा घोटाला 100 करोड़ रुपये से अधिक का हो सकता है।” — पुलिस उपायुक्त, लखनऊ
रडार पर कई अधिकारी और मास्टरमाइंड
पुलिस अब गिरोह के मास्टरमाइंड अम्मार अंसारी की सरगर्मी से तलाश कर रही है। जांच टीम को अंदेशा है कि इतने बड़े स्तर पर फर्जी फर्मों का पंजीकरण बिना किसी विभागीय मिलीभगत के संभव नहीं है, इसलिए कई सरकारी अधिकारी भी अब पुलिस की रडार पर हैं। पुलिस ने आरोपितों के पास से भारी मात्रा में फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए हैं।


























































































































































































































































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